Incest मुझे प्यार करो,,, - Page 130 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest मुझे प्यार करो,,,

बहुत-बहुत shukriya dost ISI tarah ke comment kahani Ko aur bhi jyada behtar banate hain
 
ऐसा लगने लगा था कि अंकित जहां-जहां जाता था वहां वहां औरतें हाथ होकर उसके पीछे पड़ जाती थी उसकी किस्मत बड़ी तेज थी उसके दोनों हाथों में हमेशा लड्डू रहते थे वह कभी सोचा भी नहीं था कि हल्दी की रस्म में जाने पर दो-दो बुर उसे चोदने को मिल जाएगी,,,, सुमन की तो वह लेता ही रहता था लेकिन सुमन ने जिस तरह से हिम्मत दिखाई थी उसकी हिम्मत देखकर अंकित को वह अपने मुकाबले की लड़की लगने लगी थी लेकिन जब उसने शर्मा जी की बहू को देखा जो उन्हें रंगे हाथ पकड़ ली थी वह कभी सोचा भी नहीं था कि शर्मा जी की बहू उसे मौके का पूरा फायदा उठाएगी जो की पूरी सजी धजी थी और किसी दुल्हन से काम नहीं लग रही थी,, वह भी अंकित के मोटे तगड़े मुसल को देखकर अपना आपा खो दी थी अपने चरित्र को एक तरफ रखकर वह उसे पाल का पूरा आनंद ले लेना चाहती थी और उसने वैसा ही की,,,,।



तभी तो कहा जा रहा था कि जैसे अंकित की किस्मत को पंख लग गए हो, हल्दी की रस्म खत्म होने के बाद खाना खाने के बाद मां बेटे दोनों घर लौट आए थे,,,, घूम करने के बाद मां बेटे दोनों के लिए यह दूसरी रात थी पहली रात तो वैसे ही गुजर चुकी थी खाना दोनों खा चुके थे इसलिए खाना बनाने का झंझट बिल्कुल भी नहीं था इसलिए थोड़ी देर बैठकर आराम करने के बाद मां बेटे दोनों छत पर आ गए,,, गर्मी की वजह से सुगंधा साड़ी उतार कर गाउन पहन ली थी,,, गाउन भी पारदर्शक था जिसमें सब कुछ दिखाई दे रहा था दोनों के बीच इतनी बार संबंध बन चुके थे कि, आपस में दोनों इस तरह से रहते थे कि एक दूसरे के अंगों को देखने के बाद भी उन लोगों को असहज बिल्कुल भी महसूस नहीं होता था,,, दोनों हमेशा सामान्य बने रहते थे, अंकित छत पर चटाई बिछाने लगा, सुगंधा रात में अपने मोहल्ले का नजारा देखने लगी धीरे-धीरे सभी के घरों की लाइटें बंद हो रही थी किसी के घर में अंधकार छा गया था तो किसी के घर में जीरो का बल्ब जल रहा था,,, गहरी सांस लेते हुए सुगंधा अपने बेटे से बोली।

असली सुकून तो अपने घर पर ही आकर मिलता है,,,।



तुम सच कह रही हो मम्मी होटल का कमरा चाहे जितना महंगा हो चाहे जितना सुविधा से भरा हो लेकिन जो सुकून अपने घर पर चटाई पर सोने में मिलता है वैसा सुकुन गद्दे पर भी सोने में नहीं मिलता,,,,।

लेकिन यह सुकून अब कुछ दिनों का है,,, (मोहल्ले की तरफ देखते हुए सुगंधा बोली तो अपनी मां की बात सुनकर अंकित अपनी मां की तरफ देखने लगा और बोला)

कुछ दिनों का मतलब,,,!

अरे बुद्धू छुट्टियां खत्म होने वाली है तेरी बड़ी बहन भी तो आएगी फिर हम दोनों के बीच का यह रिश्ता पता नहीं कैसे आगे बढ़ेगा,,,,।

ओहहह यह बात है,,, मैं समझा कौन सी बात हो गई चिंता करने की कोई बात नहीं है आए दिन समय तो मिल ही जाएगा,,,,।

मिल तो जाएगा लेकिन रात को तेरी बाहों में जो सुकून मिलता है वह तब नहीं मिल पाएगी मुझे तो तेरी बाहों में ही नींद आने लगी है एक आदत सी पड़ गई है पता नहीं तृप्ति के आने के बाद यह सब कैसे चलेगा।

अरे बिल्कुल चलेगा तुम बिल्कुल भी चिंता मत करना,,, मैं हूं ना सब संभाल लूंगा,,,,, और हां आज शर्मा जी के घर बहुत मजा आया तुम्हारा डांस देख कर तो मैं आश्चर्यचकित हो गया तुम इतना अच्छा नाचती हो एक बार पहले भी देख चुका हूं लेकिन तब तुम्हारी तरफ देखने का नजरिया कुछ और था

और अब,,,,!(अपने बेटे की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए सुगंधा बोली)



अब तो तुम्हें नाचते हुए देखा तो ऐसा लग रहा था कि बस तुम्हें देखा ही रहो तुम्हारी बड़ी-बड़ी चूचियां ब्लाउज में कैद जब तुम हाथ हिला हिला कर नाच रही थी तो ऐसा लग रहा था कि किसी भी वक्त तुम्हारा ब्लाउज का बटन टूट जाएगा और तुम्हारे दोनों कबूतर हवा में लहराते लगेंगे,,,,।

धत् हरामी,,,,,,।

अरे सच कह रहा हूं मोहल्ले की औरतें तो तुम ही को देख रही थी कुछ औरतें तो तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड के बारे में बातें कर रही थी सच में उन्हें सुनकर तो मेरा इस समय खड़ा हो गया था,,,।

क्या बातें कर रही थी,,,?(उत्सुकता दिखाते हुए सुगंधा बोली)

बोल रही थी कि चाहे जो भी हो सुगंधा की गांड सच में इस उम्र में भी एकदम कसी हुई है,,,, हमारी तो ढीली होने लगी है,,,,।

यह कौन कह रहा था,,,,।

शर्मा जी के बगल में जो घर है ना,,,,।

ओहहह ,,,,, सच में वह ऐसा कह रही थी,,,।



बिल्कुल मम्मी तुम्हें नाचते हुए देख कर ना जाने कितनी औरतें की गांड जल गई होगी,,,,, लेकिन मजा बहुत आया मेहंदी की रस्म में,,,,।

हां यह बात तो है शर्मा जी ने अच्छा व्यवस्था किया था,,, कल तो बारात आएगी कल भी शादी में जाना होगा,,,,।

हां वह तो है,,,,, लेकिन न एक बात मुझे समझ में नहीं आई,,,।

क्या,,,?

शर्मा जी का बेटा हल्दी की रस्म में नहीं था सोचो उसकी खुद की बहन की शादी है और वह समय पर घर पर ही नहीं है ऐसे में शर्मा जी को कितनी दिक्कत सहनी पड़ी होगी सारा ताम-झाम व्यवस्था उन्ही को देखना पड़ा होगा,,,,।

हां बिल्कुल,,,,,, मैं और सुमन दीदी खुद लोगों को शरबत बांट रहे थे देखी तो थी तुम,,,,, शर्मा जी खुद बोले थे मदद करने के लिए।



अरे यह तो अच्छी बात है लड़की की शादी में मदद करना ही चाहिए,,,,।

(अंकित अभी भी चटाई पर बैठा हुआ था और उसकी मां दीवार पकड़ कर खड़ी होकर रात का नजारा देख रही थी तभी अंकित अपनी मां से बोला,,)

मैंने सुना की शर्मा जी का बेटा छः छः महीना घर पर नहीं आता,,,।

हां मैं भी कल ही सुनी और से बात कर रही थी क्योंकि हल्दी की रस्म के दिन भी वह नहीं आया था,,,।

तब तो बहुत बेकार है,,, मैं तो यह भी सुना की शर्मा जी का बेटा घर पर इतने दिनों तक नहीं आता जरूर उसकी बीवी का किसी के साथ चक्कर है तभी तो एकदम बनी ठनी रहती है।

नहीं नहीं ऐसा बिल्कुलभी नहीं है आते जाते खुद उससे कई बार मुलाकात हो चुकी है कितनी सीधी है ऐसा वह कर नहीं सकती,,।

सीधी तो तुम भी थी,,, और दुनिया की नजर में अभी भी सीधी हो लेकिन मैं ही जानता हूं की कितनी बड़ी छिनार हो,,,,।

तू भी तो दुनिया के नजर में सीधा-साधा हैलेकिन मैं भी जानती हूं कि तू कितना बड़ा मादरचोद है।

मादरचोद बनाया किसने मेरी रानी,,,,,(इतना कहकर अंकित अपनी जगह पर खड़ा हो गया क्योंकि बात करने के दरमियान सुगंधा अपनी गांड को हिला रहे थे यह एक तरह से उसका इशारा था अपने बेटे को अपने पास बुलाने का और अंकित अपनी मां के इशारे को अच्छी तरह से समझता था अंकित समझ गया था कि उसकी मां को क्या चाहिए,,, इसलिए तुरंत अपनी मां के पीछे पहुंच गया और उसे अपनी बाहों में भरकर गाउन के ऊपर से ही उसकी चूची को दबाने लगा,,,, और अपने बेटे की हरकत देखकर वह मदहोश होते हुए बोली,,,)



मैंने बनाई,,,, और मुझे करो है कि मैं तुझे मादरचोद बनाई हूं वरना मेरी यह जवानी कोई और भोग रहा होता,,,,,।

ऐसा मैं कभी नहीं होने देता मेरी जान,,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित अपनी मां के अकाउंट की पट्टी को दोनों हाथों से पकड़ कर नीचे की तरफ बांहों से सरकाने लगा,,, हैरानी की बात यह थी कि, गाउन के अंदर उसने ब्रा नहीं पहनी थी जिसकी वजह से अंकित को अपनी मां की चुचियों तक पहुंचने में बिल्कुल भी देर नहीं लगी थी और वह अपनी मां की नंगी चूची को दशहरी आम की तरह दबाना शुरू कर दिया था,,,,, तभी सुगंधा को एहसास हुआ कि वह जहां पर खड़ी थी वहां किसी की भी नजर पहुंच सकती थी इसलिए वह अपने बेटे से बोली रुक जा थोड़ा पीछे चल,,, कोई देख लेगा,,,।

कोई नहीं देखेगा मेरी रानी सब लोग सो गए हैं देखो,,, पूरा मोहल्ला शांत है,,,,।

अरे बुद्धू जैसे हम दोनों जग रहे हैं वैसे ओर भी लोग होंगे जो जाग कर यही खेल खेल रहे होंगे।



यह बात है,,,,, तो आ जाओ पीछे मेरी जान,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित पीछे से अपनी मां को पकड़ कर उठा दिया और थोड़ा पीछे लेकर आ गया जहां से वह लोग तो देख सकते थे लेकिन दूसरे लोग की नजर वहां नहीं पहुंच सकती थी मदहोशी सुगंधा के बदन में भी जाने लगे थे इसलिए वह बिल्कुल भी देर नहीं की और अपने हाथों से अपना गाउन निकालकर पूरी तरह से नंगी हो गई,,,,, इस बात का एहसास उसे अच्छी तरह से था कि कुछ दिनों बाद इस तरह से खुलकर वह मजा नहीं ले पाएगी भले चोरी छिपे अपने बेटे के साथ संभोग सुख प्राप्त कर ले लेकिन इस तरह से खुलकर आनंद लेना तब मुमकिन नहीं हो पाएगा इसलिए वह जितना हो सकता था उतना मजा ले लेना चाहती थी,,,,, अपनी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी को चांदनी रात में देखकर एक बार फिर से अंकित का मन बहकने लगा और वह भी अपनी मां की तरह अपने कपड़े उतारने में बिल्कुल भी देर नहीं किया और मैं भी अपनी मां की तरह एकदम नंगा हो गया,,,, अपनी मां के पिछवाड़े के स्पर्श से ही अंकित का लंड लोहे के रोड की तरह खड़ा हो चुका था जिसे देखकर सुगंध से रहा नहीं की और अपने घुटनों के बल बैठ गई और अपने बेटे के लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,, अपनी मां की हरकत से अंकित मदहोश होने लगा और वह अपने दोनों हाथों को उसके सर पर रखकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया उसकी मां भी इस खेल में उसका बराबर साथ दे रही थी उसके होठों का कसाव पूरा मुंह खोलने के बावजूद भी लंड के ऊपर बराबर बना हुआ था,,, सुगंधा की मदहोशी बढ़ते जा रही थी,,,,।



हल्दी की रस्म में जो जो हुआ था वह सब कुछ अंकित नमक मिर्च लगाकर अपनी मां को बताया था लेकिन यह बात बिल्कुल भी नहीं बताया था कि शर्मा जी के घर में सुमन और शर्मा जी की बहू के साथ उसने क्या किया था इस बात का एहसास अंकित को अच्छी तरह से था कि भले ही वह जब घूमने गया था तो पहाड़ी पर अपनी मां की आंखों के सामने गैर औरत के साथ उसने संबंध बनाकर उसे संतुष्टि प्रदान किया था तब उसकी मां कुछ नहीं बोली थी लेकिन वह जानता था कि ऐसा यहां पर चलने वाला नहीं है उसे समय उसकी मां मदहोश थी उत्तेजित थी और इसी बात को अच्छी तरह से जानती थी कि उसे औरत से अब दोबारा मुलाकात होने वाली नहीं है इसलिए वहां अपने बेटे द्वारा उसके साथ संबंध बनाने पर बिल्कुल भी ऐतराज नहीं जताई थी लेकिन यहां पर अगर वह किसी के साथ संबंध बनाता है और उसकी मां को इस बात की खबर पड़ जाती है तो वह कभी भी अपने बेटे को माफ नहीं करेगी क्योंकि एक औरत होने के नाते औरत कभी भी ऐसे मर्द को किसी और से बांटना नहीं चाहती जिसके साथ वह हम बिस्तर होती है जिसके साथ उसे संतुष्टि का एहसास मिलता है जिससे वह प्यार करने लगती है इस समय अंकित सुगंधा के लिए बहुत कुछ था,,,, इसलिए वह कभी नहीं चाहेगी कि उसका बेटा किसी गैर औरत के साथ संबंध बनाएं अपनी मां की भावनाओं को अंकित अच्छी तरह से जानता था इसलिए सुमन और शर्मा जी की बहू के बारे में अंकित ने कुछ बताया नहीं था।



कुछ देर तक अंकित और उसकी मां इसी तरह से मजा लेते रहे लेकिन इसके बाद अंकित अपनी मां को पीठ के बल लिटाकर उसकी दोनों टांगों के बीच मुंह डाल दिया और अपने लंड घुस के मुंह में डाल दिया दोनों इस तरह से एक दूसरे के अंगों को मजा दे रहे थे ऐसा करने में अंकित को भी बहुत मजा आता था वह अपनी मां की दोनों मोटी-मोटी जांघों को खोलकर उसकी गुलाबी छेद को अपनी जीभ से पागलों की तरह चाट रहा था,,, और सुगंधा भी अपने बेटे को पूरा मजा देने में लगी हुई थी,,,,, कुछ देर तक दोनों मजा लेने के बाद अंकित अपनी मां के ऊपर से उठकर बगल में बैठकर और अपनी मां को घोड़ी बनने के लिए बोला चटाई बिछी हुई थी चटाई के ऊपर अपनी दोनों घुटनों के नीचे तकिया लगाकर वह अपनी भारी भरकम गांड को हवा में उठा दे जिसे देखकर अंकित मुस्कुरा दिया और अपनी मां की गोरी गोरी गांड पर चांदनी रात में थप्पड़ लगाने लगा और उसकी गोरी गोरी गांड को पल भर में ही टमाटर की तरह लाल कर दिया,,,, और फिर अपने लिए जगह बनाकर उसके गुलाबी छेद में अपना लंड डाल दिया अंकित को अपनी मां की चुदाई पीछे से करने में कुछ ज्यादा ही मजा आता था। क्योंकि इस अवस्था में वह अपनी मां की बुर की गहराई तक बढ़िया आराम से पहुंच जाता था और उसकी मां को भी संतुष्टि का एहसास होता था अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से पकड़े हुए वह जोर-जोर से धक्के लगा रहा था । हर धक्के के साथ सुगंधा मदहोश हुए जा रही थी उसकी हालत एकदम मस्त हो चुकी थी,, छत के ऊपर खुले आसमान के नीचे वह अपनी बेटी से चुदाई का आनंद लूट रही थी।



आज वह जानबूझकर अपने घुटनों के नीचे दोनों तकिया लगा कर रखी थी क्योंकि उसके बेटे के थक्के इतनी तेज होते थे कि वह आगे की तरफ सड़क जाती थी जिसकी वजह से उसके घुटनों में दर्द के साथ-साथ जख्म भी हो जाता था लेकिन उस पल के आनंद के समय इस बात का इस दर्द का एहसास उसे नहीं होता था लेकिन दूसरे दिन जब वह घुटनों को देखी थी तो वह छिला हुआ दिखाई देता था,, इसलिए आज वहां नरम नरम तकिया लगाई थी और तकिया लगाने के बाद उसका जोश और उत्तेजना और ज्यादा पड़ गया था अंकित अपनी मां की दोनों चूचियों को पकड़ कर जोर-जोर से धक्के लगा रहा था,,, देखते ही देखते मां बेटे दोनों का बदन अकडने लगा और अंकित पीछे से अपनी मां को अपनी बाहों में कस के दबोचा हुए तब तक धक्का लगातार जब तक की उसके लंड से लावा की आखिरी बुंद तक उसकी मां की बुर में गिर नहीं गई,,,, दोनों काफी थक चुके थे, दूसरा राउंड लेने में दोनों की हिम्मत गवाही नहीं दे रही थी क्योंकि हल्दी की रस्म में सुगंधा नाच नाच कर थक गई थी तो अंकित अपनी कमर हिला हिला कर थक गया था,,, इसलिए दोनों एक दूसरे की बाहों में नग्न अवस्था में ही गहरी नींद में सो गए,,,।



आज शाम को विवाह था बरात आने वाली थी जिसकी तैयारी में सुगंधा सुबह से ही जुट गई थी,, क्योंकि हल्दी की रस्म में जो उसने अपनी जवानी के आकर्षण का समां बांध रखी थी उसे बरकरार रखना बेहद जरूरी हो चुका था। अपने बेटे के मुंह से दूसरी औरतों के द्वारा अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर वह पूरी तरह से सातवे आसमान पर पहुंच चुकी थी इसलिए आज वह कोई कमी रहने देना नहीं चाहती थी इसलिए अलमारी में से अपनी पसंदीदा साड़ी को ढूंढ रही थी और बहुत ही जल्द उसे अपनी आसमानी रंग की साड़ी भी मिल गई थी आसमानी रंग की साड़ी के साथ-साथ उसी के मैचिंग का पेटीकोट और ब्लाउज निकलकर वह अलमारी के दूसरे खाने में अपनी ब्रा और पैंटी ढूंढ रही थी,,,, लेकिन आसमानी रंग कि ना तो ब्रा थी और ना हीं पेंटी थी,,,, इसलिए वह थोड़ी उदास हो गई,, वह उदास होकर बिस्तर पर बैठी थी कि तभी अंकित वहां पर आकर और अपनी मां को उदास देखकर उसके पास में बैठ गया और बोला।

क्या हुआ मम्मी तुम्हारा मुंह उतरा हुआ क्यों है,,,?

आप क्या करूं शाम को बरात आने वाली है आज में अपने लिए आसमानी रंग की साड़ी पसंद की थी उसके मैचिंग का ब्लाउज और पेटीकोट तो मिल गया लेकिन आसमानी रंग की ना तो ब्रा है और ना हीं पेंटी है।



तो इसमें क्या हो गया लाल रंग की पहन लो,,,।

नहीं मेरा मन नहीं मान रहा है आसमानी रंग की ब्रा और पेटी होती तो मजा आ जाता पहनने में,,,।

तुम ऐसे कह रही हो जैसे तुम्हारा आशिक बारात में आने वाला है और तुम अपनी साड़ी उठाकर उसे अपनी पैंटी और ब्रा दिखाने वाली हो,।(अंकित चुटकी लेटा हुआ बोल तो अपने बेटे की बात सुनकर गुस्सा दिखाते हुए सुगंधा बोली,,,)

धत् हरामी अपनी मां के बारे में ऐसा बोलते हुए तुझे शर्म नहीं आती मेरा कौन सा आशिक है तेरे सिवा, जिसे मैं साड़ी उठाकर अपनी ब्रा और पेटी दिखाऊंगी,,,,।

अरे मम्मी मैं तो मजाक कर रहा था तुम बेवजह सीरियस हो जाती हो,,,।

तू बात ही ऐसा करता है कि दिमाग खराब हो जाता है एक तो ऐसे ही इसका मैचिंग नहीं मिल रहा है दिमाग घुमा हुआ है और तुम है कि इस तरह की बात करके और दिल जलाता है,,,,।

कोई बात नहीं लेकिन मैं तो ठीक ही कह रहा था साड़ी के अंदर कुछ भी पहनो कहां किसको दीखने वाला है,,,।

अरे बेवकूफ तू नहीं समझ रहा है एक ही रंग का सब कुछ होगा तो अपने मन को थोड़ा शांति मिलती है आत्म विश्वास बढ़ता है,,,,,।

ओहहह यह बात है तो चलो अभी खरीद देते हैं,,, जल्दी से तैयार हो जाओ अभी मार्केट चलते हैं,,,,,।

अभी,,,,(आश्चर्य से सुगंधा बोली)

हां तो क्या हुआ,,,?





धत् अगर गाड़ी होती तो कितना अच्छा होता है अभी जाकर जल्दी से लेकर चले आते,,,।

यह बात है अच्छा तुम रुको मैं अभी मोटरसाइकिल का बंदोबस्त करके आता हूं,,,(इतना कहते हुए अंकित कमरे से बाहर निकल गया उसकी मां उसे बुलाते रह गए लेकिन वह सुना नहीं और घर से निकल गया सुगंधा अपने मन में सोचने लगी कि यह कहां से मोटरसाइकिल का बंदोबस्त करके आएगा इसे चलाना आता भी है कि नहीं,,,, थोड़ी देर में अंकित शर्मा जी के घर पहुंच चुका था जहां पर शादी की तैयारी चल रही थी वहां पर पहुंचने पर वह शर्मा जी की बहू को ढूंढ रहा था क्योंकि शर्मा जी के घर पर मोटरसाइकिल थी और शर्मा जी की बहू ही उसे मोटरसाइकिल दे सकती थी,,, अंकित को मोटरसाइकिल चलाने आता है इस बात को ज्यादा लोग बिल्कुल भी नहीं जानते थे सिर्फ उसका एक दोस्त जानता था जिसका मोटरसाइकिल उसने चलाना सीखा था ज्यादा तो नहीं चलाया था लेकिन उसे पूरा विश्वास था कि वह चला लेगा,,, इधर-उधर देखते हुए थोड़ी देर में उसे शर्मा जी की बहू दिखाई थी जो कि खुले बालों में बहुत खूबसूरत लग रही थी और सही समय पर उसकी नजर भी अंकित पर पड़ गई तो अंकित को देखकर वह मुस्कुरा दी और अंकित के बुलाई बिना ही वह तुरंत उसके पास पहुंच गई और बोली,,,)

तु यहां क्या कर रहा है,,,,?

तुम्हारा इंतजार कर रहा था कल जो तुमने मजा दी हो रात भर में सो नहीं पाया,,,,।

(अंकित की बात सुनकर शर्मा जी की बहू शर्माने लगी और इधर-उधर देखने लगी कि कहीं कोई उसकी बात तो नहीं सुन रहा है लेकिन वहां पर कोई नहीं था इसलिए वह भी मुस्कुरा कर बोली)



एकदम सांड है तू अभी तक मेरी कमर दुख रही है।

मजा भी तो बहुत आया था ना भाभी,,,,,।

मैं भी रात भर सो नहीं पाई रात भर तेरी याद आती रही,,,,(शर्मा जी की बहू भी शरमाते हुए बोली)

तो क्या इरादा है भाभी फिर से,,,,(इतना ही कहा था कि शर्मा जी की बहू इधर-उधर देखते हुए बोली)

देख तो आए तो चारों तरफ मेहमानी मेहमानी ऐसे में मौका मिलना बहुत मुश्किल है,,,,, लेकिन चिंता मत कर मौका मिलते ही हम दोनों फिर से मजाकरेंगे,,,।

मुझे तुमसे यही उम्मीद थी बाकी सच में तुम इतनी खूबसूरत हो कि मैं तो पागल हो गया तुम्हें पागल तुम्हारे आगे सुमन तो कुछ भी नहीं है शादीशुदा होकर भी तुम्हारी बुर एकदम कसी हुई है,,,।

(अंकित के पूछे अपनी तारीफ सुनकर खास करके उसके मुंह से बुर शब्द सुनकर शर्मा जी की बहू एकदम से गनगना गई और इधर देखने लगी,,,, और शरमाते हुए बोली)

धत्,,, थोड़ा धीरे बोल कोई सुन लेगा तो गजब हो जाएगा ‌।

कोई सुनने वाला नहीं है तभी तो कह रहा हूं,,,,, सच कहूं तो तुम मुझे अपना दीवाना बना दि हो,,,,,।

बाद में मिलना मुझे अभी बहुत काम है,,, वैसे शाम को जल्दी आ जाना थोड़ा हाथ बंटा लेना,,,,।



यह भी कोई कहने की बात है भाभी,,,, जरूर आऊंगा,,,, वैसे आज थोड़ा मौसम ठंडा है,,,।

ठंड तो है मुझे डर है कि कहीं बारिश ना हो जाए देख रहे हो बादल भी है बारिश हो गई तो शादी का मजा किरकिरा हो जाएगा,,,,।

बारिश का महीना तो अभी आया नहीं है लेकिन कोई भरोसा भी नहीं है,,,,।

चलो अच्छा ठीक है मैं जा रही हूं,,,,(इतना कहकर शर्मा जी की बहू जाने वाली थी कि अंकित आवाज लगाते हुए बोला)

सुनो भाभी,,,,।

हां बोलो,,,(एकदम से रुक कर अंकित की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोली)

तुम्हारी मोटरसाइकिल मिलेगी बस बाजार जाकर वापस आना है,,,,।

हां जरूर रुको मैं चाबी लेकर आती हूं,,,(इतना कहने के साथ ही वह घर के अंदर की तरफ जाने लगी है अपनी गांड मटका कर अंकित की नजर उसके पिछवाड़े पर ही थी जो कई हुई साड़ी में कुछ ज्यादा ही ऊभरी हुई नजर आ रही थी उसके पिछवाड़े को देखकर अंकित अपने मन में ही बोला कपड़े के अंदर जितनी खूबसूरत लगती है कपड़े के बिना उससे भी ज्यादा खूबसूरत दिखती है,,,,,, शर्मा जी की बहू जैसे गई थी वैसे ही वापस आ गई और मुस्कुराते हुए मोटरसाइकिल की चाभी अंकित के हाथ में थमा दी,,,,, और बोली,,,)





मोटरसाइकिल की चाबी सीधे मुझे ही देना,,,।

क्यों भाभी चाचा जी बोलेंगे क्या,,,?

नहीं नहीं कोई बोलेगा नहीं बस ऐसे ही कह रही हूं चाबी मुझे ही देना किसी और को मत दे देना,,(इतना कहते हुए शर्मा जी की बहू मुस्कुराने लगी और घर के अंदर चली गई अंकित तुरंत मोटरसाइकिल के अंदर चाबी लगाया और पहले ही की में मोटरसाइकिल स्टार्ट हो चुकी थी यह देखकर अंकित एकदम खुश हो गया था,,,,,, और जैसे-जैसे उसके दोस्त ने उसे चलाना सिखाया था ठीक वैसे-वैसे ही वह कलच दबाकर एक्सीलेटर को धीरे-धीरे देने लगा और मोटरसाइकिल धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी यह देखकर अंकित बहुत खुश हो रहा था और सीधा जाकर अपने घर के सामने खड़ी कर दिया और मोटरसाइकिल का होरन दबाने लगा होरन की आवाज सुनकर तुरंत सुगंधा दरवाजे पर आकर खड़ी हो गई और अपने बेटे को मोटरसाइकिल पर बैठा देखकर खुशी से समा नहीं रही थी, और उत्साहित होते हुए बोली,,,)

बाप रे मुझे तो अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा है तुझे मोटरसाइकिल चलाने आती है।

तो क्या मम्मी क्या समझती हो मुझको,,,।

लेकिन यह तूने सीखा कब,,,,?



सब यही पूछ लगी जल्दी से आओ रास्ते में सब बताता हूं,,,,,।

(इतना सुनकर सुगंधा तुरंत अपने कमरे में गई और पर्स और थैला लेकर बाहर आ गई दरवाजे को बंद करके उसे पर ताला लगाकर वह सीधा मोटरसाइकिल पर अपने बेटे के पीछे बैठ गई भारी भरकम गांड रखकर बैठते हुए उसे बेहद उत्तेजना का अनुभव हो रहा था अपने बेटे के कंधे पर हाथ रखकर वह बोली,,,)

अब चल,,,,।

(अगले ही पल मोटरसाइकिल सड़क पर दौड़ रही थी,,, रास्ते में उसने अपनी मां को सब कुछ पता है कि उसने कैसे मोटरसाइकिल सीख लिया था,,,, सुगंधा को अपने बेटे पर बहुत गर्व हो रहा था लड़की इस बात का दुख भी था कि वह अपने बेटे को मोटरसाइकिल खरीद कर नहीं दे सकती थी,,,, कपड़े की दुकान पर पहुंचकर, सुगंधा जल्दी से कपड़े की दुकान में गई और थोड़ी ही देर में अपनी पसंदीदा ब्रा और पेंटी खरीद कर वापस आ गई,,, अपनी मां को 15:20 मिनट में ही आता देखकर अंकित खुश होता हुआ बोला,,,)

क्या हुआ इतनी जल्दी मिल गया,,,!

अरे अच्छा हुआ जल्दी मिल गया करना दो-चार दुकान ढूंढना पड़ता,,,,।

फैशन तो सिर्फ तुम्हारा ही है मम्मी,,,, वरना भला कौन औरत परेशान होती है की साड़ी के अंदर कौन से कलर का पैंटी पहनना है,,,,।



अच्छा यह बात है,,,(मोटरसाइकिल के पीछे बैठते हुए) अब आना मेरे पास साड़ी के नीचे कुछ पहनी नहीं रहूंगी तब पता चलेगा तुझे,,,,।

नहीं नहीं मम्मी ऐसा बिल्कुल मत करना साड़ी के अंदर कुछ पहनी रहती हो तभी जोश बढ़ जाता है,,,,(मोटरसाइकिल में कीक मारते हुए अंकित बोला,,, मोटरसाइकिल स्टार्ट हो चुकी थी और उसे आगे बढ़ाते हुए बोला,,) इसे पहनने के बाद सबसे पहले मुझे ही दिखाना की कैसी लग रही हो..

अरे मादरचोद मैं सिर्फ तुझे ही दिखाऊंगी तुझे दिखाने के बाद क्या लगता है किसी और को दिखाऊंगी क्या,,,,?

तुम्हारे मुंह से गाली बहुत अच्छी लगती है,,,,।

तु मुझे मजबूर कर देता है गाली देने के लिए,,,।

अच्छा ही तो है गाली सुनने को मिलती है,,,, अच्छा मम्मी अपने पास भी इस तरह की मोटरसाइकिल हो तो कितना मजा आ जाए ना मार्केट जाने में बिल्कुल भी समय ना लगे,,,।

बात तो तु ठीक कह रहा है लेकिन इतने पैसे अभी है नहीं,,,,।

अरे मैं लेने के लिए नहीं कह रहा हूं मैं तो सिर्फ बता रहा हूं कि अपने पास मोटरसाइकिल हो तो मजा आ जाए मैं कमाने लगूंगा तो खुद ही खरीद लूंगा,,,,।

तू कमाने लगेगा तो मुझे भी सहारा मिल जाएगा,,,,।



चिंता मत करो,,,,,,, जल्द ही कमाने लगूंगा,,,,,।

(थोड़ी देर में अंकित अपने घर के सामने पहुंच चुका था सुगंधा मोटरसाइकिल से नीचे उतर चुकी थी और दरवाजे का ताला खोल रही थी यह देखकर अंकित अपनी मां से बोला,,,)

तुम चलो मैं अभी थोड़ी देर में आता हूं मोटरसाइकिल देकर,,,,।

ठीक है जल्दी आना,,,,।

अरे अगर वहां कोई काम निकल गया तो आने में देर हो जाएगी वैसे भी शादी वाला घर है कोई ना कोई काम तो निकलता ही रहता है इसलिए चिंता मत करना,,,,।

ठीक है जा,,,(इतना कहकर सुगंधा दरवाजा खोल दी और घर में प्रवेश कर गई और अंकित मोटरसाइकिल आगे बढ़कर शर्मा जी के घर पहुंच गया,,,,, दिन के 12:00 बज रहे थे और यह वही समय था जो शादी वाले घर में भी कुछ देर के लिए सन्नाटा छा जाता है लोग आराम कर रहे होते हैं क्योंकि थोड़ी देर आराम करने के बाद ही इतना काम रहता है कि सुबह तक समय ही नहीं मिलता मोटरसाइकिल खड़ी करके हाथ में चाबी लिए हुए अंकित इधर-उधर देख रहा था लेकिन शर्मा जी की बहू कहीं नजर नहीं आ रही थी,,,, तो अंकित धीरे से घर में प्रवेश करने लगा सामने ही शर्मा जी की बीवी कुछ काम कर रही थी अंकित को देखते ही बोली,,,,)

आओ,, बेटा,,,,,, क्या ढूंढ रहे हो,,,,?

अरे कुछ नहीं चाची भाभी जी को ढूंढ रहा था,,,,,।

बहु तो ऊपर वाले कमरे में है,,,,,।



कुछ काम था क्या,,,?

नहीं उनका सामान देना था इसलिए जा जाकर ऊपर ही दे दे और हां शाम को सुगंधा को बोलना पूरी तैयारी के साथ आएगी,,, तेरी मां तो एकदम हीरोइन की तरह नाचती है और दिखती भी हीरोइन की तरह वह शादी में आती है तो चार चांद लग जाते हैं कह देना जल्दी आएगी,,, ऐसा ना हो की बारात आ जाए तब आए,,,,।

जी नहीं चाची मम्मी जल्दी आएगी मुझसे कह रही थी कि जल्दी जाना होगा क्योंकि शादी में तो वैसे ही ढेर सारे काम आते हैं थोड़ा बहुत हाथ भी बंटाना होगा,,,।

तेरी मम्मी बहुत समझदार है जा जाकर मिलने में भी चलती हूं थोड़ा देर सो लेती हूं फिर उसके बाद सोने का समय नहीं मिलेगा,,,,,।

ठीक है चाची,,,,,।

(शादी वाला घर होने के बावजूद भी घर में कुछ देर के लिए सन्नाटा छाया हुआ था क्योंकि मेहमान भी अपनी कमरे में आराम कर रहे थे और अंकित अपने मन में यही सोच रहा था कि शर्मा जी की बहू इस कमरे में हो जहां पर दोनों की मुलाकात हुई थी तो मजा आ जाए,,,, यही सोचता हुआ वह सीढ़ियां चढ़ने लगा,,, और उसी कमरे के पास गया तो देखा कमरे का दरवाजा बंद था और उसे पर ताला लगा हुआ था यह देखकर अंकित को थोड़ी निराशा हुई और वह शर्मा जी की बहू को दूसरे कमरे में ढूंढने लगा तो दूसरी तरफ के कमरे के पास पहुंच कर देखा तो कमरे का दरवाजा थोड़ा खुला हुआ था,,,, सभ्यता दिखाते हुए अंकित सीधे दरवाजा खोलने के बजाय दरवाजे पर दस्तक देना ठीक समझा,,,,, दस्तक देते ही अंदर से शर्मा जी की बहू की ही आवाज आई जिसे सुनकर अंकित एकदम से खुश हो गया,,,,।

कौन है,,,,?

मैं हूं भाभी अंकित,,,,,,,।



अरे तु है,,,,(इतना कहने के साथ ही बिस्तर पर से वह उठने लगी वैसे तो दरवाजा बंद था लेकिन चूड़ियों के झांकने की आवाज से अंकित को एहसास हो गया था कि वह बिस्तर से खड़ी हो रही थी और उसके पायल की खनक बता रही थी कि वह दरवाजे के करीब आ रही थी अगले हीरे से दरवाजा खोली और मुस्कुराते हुए उनकी तरफ देखने लगी और बोली)

बहुत जल्दी आ गया मुझे तो लगा कि शाम को आएगा,,,।

जी नहीं भाभी काम जल्दी खत्म हो गया तो आ गया लीजिए आपकी चाबी,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित कमरे के अंदर नजर घुमाई तो देखा बिस्तर पर एक खूबसूरत लड़की बैठी हुई थी जिसके चेहरे पर थोड़ी निराशा थी लेकिन दिखने में वह बहुत खूबसूरत थी उसके चेहरे पर बदन पर हल्दी लगी हुई थी अंकित को समझते देर नहीं लगी की इसी की शादी है शादी से बात को शर्मा जी की बहू भी भांप गई थी इसलिए मुस्कुराते हुए बोली)

यह रजनी है मेरी ननद आज इसी की शादी है,,,,।

वह तो दिखाई दे रहा है लेकिन दीदी उदास क्यों है,,,?

(दीदी शब्द सुनकर रजनी दरवाजे की तरफ देखने लगी और शर्मा जी की बहू बोली)



किसी भी लड़की के लिए अपना घर छोड़कर दूसरे के घर जाना बड़ा दुखदाई होता है,,,, रजनी इसीलिए चिंतित हैं कि अब वह पराया हो जाएगी,,,,,।

अब कर भी क्या सकते हैं भाभी यह तो दुनिया का रिवाज है कुछ दिन पहले मैं भी यही सोच रहा था कि मेरी बड़ी दीदी भी शादी करके कुछ ही साल में दूसरे के घर चली जाएगी तब हम लोग कैसे रहेंगे,,,,।

चल कोई बात नहीं यह तो होना ही है,,,,,।

ठीक है भाभी अब मैं चलु शाम को आऊंगा,,,,।

अरे कहां जा रहे हो थोड़ा काम है शाम के लिए थोड़ा रसोई का सामान इकट्ठा करना है चलो मेरे साथ,,,, रजनी को तो ले नहीं जा सकती एक तो वैसे ही यह परेशान है,,,,,।

ठीक है भाभी चलो मुझे भी घर जाना है जल्दी काम खत्म करके,,,,,।

घर क्यों जाओगे,,,,?

अरे भाभी मुझे भी तो थोड़ा बहुत आराम करना होगा शाम को ही वापस आ जाना है।

चल अच्छा ठीक है रसोई वाला काम खत्म कर दे फिर चले जाना,,,,, अच्छा रजनी तुम आराम करो,,,,।

ठीक है भाभी,,,,,।

दरवाजा बंद कर लो,,,(कमरे से बाहर निकलते हुए शर्मा जी की बहू बोली और फिर जल्दी से रसोई वाले कमरे में आ गई अंकित और शर्मा जी की बहू दोनों कमरे के अंदर थी , शर्मा जी की बहू जल्दी से उत्साहित होते हुए कमरे का दरवाजा बंद कर दी,,, यह देखकर अंकित मुस्कुराता हुआ बोला,,,)



मैं सोचा नहीं था कि दोबारा इतनी जल्दी मौका मिलेगा,,,।

सोची तो मैं भी नहीं थी तो सही समय पर चाबी वापस देने के लिए आया है,,,।

भैया अभी तक नहीं है क्या,,,?

मरने दे हरामजादे को ना बीवी की फिक्र है ना अपनी बहन की शाम को आएगा,,,, मैं तो गुस्से में बोल दी की आना ही मत,,,।

यह तो अच्छा हुआ मुझे बार-बार मौका मिल जाएगा,,,।

हां हरामजादे तुझे तो मौका ही चाहिए,,,,,(इतना कहकर शर्मा जी की बहू खुद ही उसे अपनी तरफ पकड़ कर खींच ली और अपनी बाहों में भर ली और तुरंत अपने होठों को अंकित के होठों से सटा दी अंकित एकदम से मदहोश हो गया और तुरंत ही उसके दोनों हाथ शर्मा जी की बहू की भारी भरकम गांड पर पहुंच गई जिसे साड़ी के ऊपर से ही अंकित जोर-जोर से दबाने लगा मसलने लगा,,,)

कोई आएगा तो नहीं ना भाभी,,,,।

कुछ देर के लिए तो कोई नहीं आएगा सब लोग अपने-अपने कमरे में आराम कर रहे हैं,,,,,।



ओहहहहह भाभी तुमसे अच्छा कौन है,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित फिर से उसके होठों पर अपनी हॉट रखकर फिर से उसके लाल-लाल होठों का मधुर रस पीने लगा इसी के साथ उसकी गांड को बराबर से दबाता हुआ मसलने लगा,,, बच्चे ना होने की वजह से और अपनी जवानी के दौर में होने की वजह से शर्मा जी की बहू की गांड एकदम खुशी हुई थी जिसे दबाने में अंकित को बेहद आनंद की अनुमति हो रही थी कदकाठी में भी वहां अंकित से थोड़ा सा छोटी थी इसलिए अंकित का मजा दुगना होता जा रहा था,,,,, अंकित शर्मा जी की बहू की हिम्मत की दाद दे रहा था क्योंकि जिस तरह से शादी वाले घर में वह बड़ी बहू होने के बावजूद भी कमरे के अंदर उसके साथ संभोग सुख प्राप्त की थी आज भी उसी तरह से ही अपनी ननद को बेवकूफ बना कर उसे लेकर कमरे में घुस गई थी। वह कभी सोचा नहीं था कि उसके मोहल्ले में एक औरत इतनी हिम्मत वाली होगी लेकिन इस बात का उसे अब एहसास हो गया था कि हर घर में अनैतिकता पनपता ही है चाहे जिस रूप में इससे कोई बच नहीं सकता,,,, शर्मा जी की बहू के पीछे सबसे बड़ा प्रमुख कारण था उसके पति की बेरुखी,,, जो पालन पोषण में तो अपनी जिम्मेदारी निभा रहा था लेकिन अपनी पत्नी के शारीरिक संतुष्टि के लिए उसकी जिम्मेदारी शून्य थी उसमें वह बिल्कुल भी खरा नहीं उतर रहा था जबकि शादी के तीन ही वर्ष हुए थे शर्मा जी की बहू खूबसूरत थी कद काठी में आकर्षक थे अंगों का उठाव और उभार काम भावना जगाने के लिए पर्याप्त थी लेकिन फिर भी उसका पति उससे अलग था अपने काम में व्यस्त था इसलिए उसके काम में व्यस्त होने की वजह से शर्मा जी की बहु कामग्रस्त हो चुकी थी।



शर्मा जी की बहू की बड़ी-बड़ी गांड को अपने दोनों हाथों से दबाते हुए अंकित अपने मन में यही सोच रहा था कि कितना बेवकूफ पति है इतनी खूबसूरत बीवी को घर में अकेला छोड़कर बाहर काम रहा है अगर मैं इसकी जगह होता तो अपनी बीवी को बिल्कुल भी अकेला नहीं छोड़ता बल्कि जब मौका मिलता तब इसकी बुर में लंड डाल देता,,,,, यही सब सोचता हुआ अंकित धीरे-धीरे शर्मा जी की बहू की साड़ी को ऊपर की तरफ उठने लगा और शर्मा जी की बहुत तेज होते हुए अपने हाथ को सीधा उसके पेंट के उभरे हुए भाग पर रखकर जोर-जोर से लंड को पकड़कर मसलने लगी,,,,, दोनों मदहोश हुए जा रहे थे दोनों तैयार हो चुके थे,,,, दोनों में से कोई किसी से कम नहीं था लगातार दोनों के होंठो का चुंबन प्रगाढ़ होता जा रहा था। देखते ही देखते शर्मा जी की बहू के होठों का रस पीने में तल्लीन हुआ अंकित शर्मा जी की बहू की साड़ी को उसकी कमर तक उठा दिया था और उसकी बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों में लेकर जोर जोर से दबा रहा था,,, अंकित इतना अत्यधिक उत्तेजित हो जा रहा था कि उसकी पेंटिं में दोनों हथेलियां को डालकर उसकी नंगी गांड को दबाने की कोशिश कर रहा था,,,,,, अंकित की हरकतों से उत्तेजित हुई शर्मा जी की बहू अपने होठों को उसके होठों से अलग करके गहरी सांस लेते हुए बोली।

जो भी करना जल्दी करना,,,,,,।



तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो भाभी,,,,, जो भी होगा मजेदार होगा,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित एक बार फिर से उसे अपनी गोद में उठा लिया और चलता हुआ बिस्तर पर लाकर पटक दिया अंकित की भुजाओं का बल वह पहले भी देख चुकी थी,,,, वह अंकित की ईस हरकत से आनंदित हो जाती थी,,, बिल्कुल भी देर करना उचित न समझते हुए अंकित में अपने दोनों हाथों को उसकी चड्डी पर रखकर नीचे की तरफ खींचने लगा शर्मा जी की बहू भी उसका सहयोग करते हुए अपनी भारी भरकम गांड को कुछ पल के लिए हवा में ऊपर उठा दी जिससे अंकित उसकी चड्डी को उतार सके और अगले ही पल शर्मा जी की बहू का सहयोग पाकर अंकित एक झटके में उसकी चड्डी उसके बदन से अलग कर दिया,,,, और उसकी भरी हुई जवान को नंगी देखकर अंकित मुस्कुराता हुआ बोला।)

भाभी आज से तुम्हारी बुर कचोरी जैसी फुली है।

तेरे लिए ही फुली है खुश हो गई है तुझे देख कर,,,।

तब तो इसकी खुशी बढ़ानी पड़ेगी,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित उसकी दोनों टांगों के बीच अपने लिए जगह बनाकर उसकी मोटी मोटी जांघों के बीच से अपने दोनों हाथ को ले जाकर के उसकी कमर को पकड़ लिया और उसे थोड़ा सा ऊपर उठाते हुए उसकी कचोरी जैसी फुली हुई गुलाबी बुर पर अपने होंठ सटा दिया,,,,, अंकित के हरकत से शर्मा जी की बहू एकदम से मदहोश हो गई। और मचलते हुए उसकी गांड अपने आप ही थोड़ी ऊपर की तरफ उठ गई और अंकित पूरी तरह से उसकी मदहोश कर देने वाली जवानी पर छाने लगा पागलों की तरह उसकी बुर की चटाई करना शुरू कर दिया था,,,, बिस्तर पर शर्मा जी की बहुत तड़प रही थी मचल रही थी और हल्की-हल्की से शिसकारी की आवाज निकल रही थी। इसी तरह के प्रेम के लिए वह तड़प रही थी जिस तरह की उसकी गदराई जवानी थी उसे बिस्तर पर अंकित जैसा ही मर्द चाहिए था,,, जोश की जवानी को अपनी बाहों में लेकर निचोड़ सके,,,, शर्मा जी की बहू दोनों पैरों को अंकित के कंधों पर रखकर उसे अपनी बुर की तरफ दबाव बना रही थी यह एक अद्भुत काम कल था औरत की तरफ से मर्द को मदहोश करने का जिसमें अंकित भी चारों खाने चित्त हुआ जा रहा था। रह रहकर शर्मा जी की बहू अपने पैर का दबाव बराबर बनाकर उसे अपनी बुर से अलग होने नहीं दे रही थी क्योंकि उसकी जांघें मोटी मोटी थी जिससे वह अंकित पर बराबर का अंकुश कसी हुई थी।



अंकित भी कम नहीं था वह उसकी उत्तेजना को और ज्यादा बढाते हुए दोनों हाथ को उसके ब्लाउज के ऊपर लेकर और ब्लाउज के ऊपर से उसकी चूचियों को जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया और नीचे अपनी जीभ से लपालप उसकी बुर की मलाई चाट रहा था,,,, अंकित की हरकतों से शर्मा जी की बहू कंहर रही थी मदहोश हो रही थी अंकित हर तरफ से उसे खुश करने की कोशिश कर रहा था वह बिस्तर पर जल बिन मछली की तरह तड़प रही थी,,,,, और फिर देखते ही देखते वह ब्लाउज का बटन खोलने लगा अपनी क्रिया को जारी रखते हुए वह एक साथ ढेर सारी क्रियाओ को अंजाम दे रहा था,,,, अगले ही पाल वहां शर्मा जी की बहू के ब्लाउज के सारे बटन खोल चुका था और ब्रा के ऊपर से उसकी चूची को दबा रहा था शायद इससे शर्मा जी की बहू को कम आनंद की प्राप्ति हो रही थी इसलिए वह खुद ही अपने दोनों हाथों से अपनी ब्रा को ऊपर की तरफ खींच दी और अपने दोनों दशहरी आम को खुला छोड़ दी,,,, नंगी चूची को अपने हाथ में लेकर अंकित पागल हो जा रहा था वैसे भी शर्मा जी की बहू की चूचियां बड़ी-बड़ी थी। जिस पर ज्यादा मेहनत हुआ नहीं था फिर भी वह पूरे आकार में खीली हुई थी अगर पर्याप्त मात्रा में इस पर मेहनत किया जाए तो शर्मा जी की बहू की छाती पर दो-दो चांद नजर आने लगे।



साड़ी कमर तक उठी हुई थी ब्लाउज का बटन खुला हुआ था नंगी चूचियां अपना खेल खेल रही थी,,,, शर्मा जी की बहू अपनी मोटी मोटी जांघों से अंकित को दबाए हुए थी और अपने दोनों हथेलियां को उसकी पीठ पर उसके सर पर रखकर सहला रही थी दबा रही थी। कुल मिलाकर दोनों अपनी अपनी तरफ से पूरी कोशिश में लगे हुए थे क्योंकि बिस्तर पर संभोग कैसे पहले और संभोग के साथ मर्द और औरत का दोनों का समान अधिकार होता है कि दोनों एक दूसरे को अपनी तरफ से संपूर्ण रूप से आनंदित करें तभी जाकर संभोग का असली सुख प्राप्त होता है और इस समय शर्मा जी की बहू भी वही क्रिया कर रही थी जो अंकित कर रहा था इसलिए दोनों अत्यधिक आनंद को महसूस कर रहे थे लगातार शर्मा जी की बहू की बुर से मदन रस का बहाव हो रहा था जिसे अंकित अपनी जीभ से बार-बार चाट कर अपने गले के अंदर उतार ले रहा था,,,,, दोनों हाथ से उसकी चूचियों को दबाते हुए उनकी धीरे से अपने हाथ को नीचे की तरफ ले आया और शर्मा जी की बहू की गुलाबी छेंद में अपनी दो ऊंगलियो को एक साथ डालकर उसे गोल-गोल घूमाने लगा जिससे शर्मा जी की बहू के बर्दाश्त के बाहर होने लगा और वह बार-बार अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठने लगी जिसे अंकित नीचे दबाने की कोशिश करते हुए उसे लगातार आनंदित कर रहा था,,,,।



अंकित तीन तरफ से शर्मा जी की बहू पर छाया हुआ था एक हाथ से उसकी दोनों चूचियों को बारी-बारी से दबा रहा था दूसरे हाथ की दो उंगलियों को उसके गुलाबी छेद में डालकर उसे अंदर बाहर करते हुए उसे मजा दे रहा था और जब और होठों से तो लगातार उसके गुलाबी बुर की चटाई कर रहा था,,,, शर्मा जी की बहू कभी सोची भी नहीं थी किस तरह से भी मर्द औरत को मजा देते हैं एक ही साथ तीनों तरफ से बचाया हुआ था शर्मा जी की बहू का गोरा मुखड़ा टमाटर की तरह लाल हो चुका था,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसकी सांसों की गति के साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां भी ऊपर नीचे हो रही थी जिसे अंकित काबू में रखने की पूरी कोशिश कर रहा था,,,, थोड़ी देर में दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे,,, पंखा फुल स्पीड में चल रहा था लेकिन पंखे की हवा दोनों की जवानी की गर्मी को शांत करने में सक्षम बिल्कुल भी नहीं थी। देखते ही देखते शर्मा जी की बहू का बदन अकड़ने लगा उसके चेहरे के हाव-भाव बदलने लगे वह दोनों हाथ से अंकित का सर पकड़कर उसे अपनी बुर पर जोर-जोर से दबाने लगी,,,, अंकित समझ गया था कि अभी झड़ने वाली है इसलिए वह जितना हो सकता था उतनी जीभ को अंतर डालकर उसकी मलाई को चाटते हुए अपनी दोनों उंगलियों को बड़ी तेजी से अंदर बाहर कर रहा था और फिर देखते ही देखते वह झड़ने लगी उसकी बुर से मदन रस का फव्वारा फूट पड़ा लेकिन अंकित उसकी पर से निकलने वाले मदन रस की एक बुंद को भी नीचे गिरने नहीं दिया अपनी जीभ से उसे चट कर गया।



शर्मा जी की बहू झड़ चुकी थी और यह चुदाई से नहीं बल्कि अंकित की कामुक हरकतों से झड़ी थी,,, इसलिए शर्मा जी की बहू कुछ ज्यादा ही प्रसन्न नजर आ रही थी वह अंकित पर पूरी तरह से निछावर हो चुकी थी वह कभी सोचा भी नहीं थी कि एक जवान लड़का एक शादीशुदा औरत को इतना मजा देता होगा,,,, अंकित धीरे से अपने मुंह को शर्मा जी की बहू की बुर से हटकर गहरी गहरी सांस ले रहा था उसके होठों से शर्मा जी की बहू के बुर का मदन रस टपक रहा था जिसे देखकर शर्मा जी की बहू शर्म से पानी पानी हो गई,, धीरे से उठकर बिस्तर पर बैठते हुए शर्मा जी की बहू अपने साड़ी को एक तरफ करके अपनी पेटीकोट से उसके मुंह पर लगा अपने मदन रस को साफ करने लगी। खेल अभी खत्म नहीं हुआ था खेल तो अब शुरू हुआ था अंकित अंकित धीरे से बिस्तर पर से नीचे उतर गया और बिस्तर के नीचे खड़ा होकर अपने पेंट की चेन को खोलने लगा,,,, यह देखकर शर्मा जी की बहू घुटनों के बाल आगे बड़ी और उसका हाथ पकड़ कर पेंट पर से उसका हाथ हटा दी और खुद उसके पेंट की बटन खोलने लगी,,, झड़ने के बावजूद भी वह काफी उत्तेजित दिख रही थी पेंट में बना तंबू की तरफ वह आकर्षित हुए जा रही थी देखते ही देखते वह अंकित के पेट की बटन खोलकर अंडरवियर सहित उसे घुटनों तक नीचे खींच दी उसका लहराता हुआ लंड देखकर उसकी आंखों की चमक बढ़ने लगी,,,, वह कुछ बोली नहीं बस अंकित की तरफ देखकर एकदम से अपने लाल-लाल होठों को खोली और अगले ही पल मोटे सुपाड़े को अपने होठों के बीच रखकर चूसना शुरू कर दी,,,, एकदम से अंकित मत हो गया अपनी आंखों को बंद करके इस पल में वह खोने लगा। देखते ही देखते शर्मा जी की बहू अंकित के पूरे लंड को अपने गले तक उतार कर चूसना शुरू कर दी, शर्मा जी की बहू की यही अदा तो अंकित को घायल कर देती थी उसे शर्मा जी की बहू का गुलाम बनने के लिए मजबूर कर देती थी।



सहहहहहह आहहहहहहहह,,,,, गजब भाभी,,,,, तुम बहुत मस्त हो,,,, मैं कभी सोचा भी नहीं था कि तुम इतना अच्छा चुसाई करती हो,,,,ऊमममममममम,,,,,,,(अंकित की बात सुनकर शर्मा जी की बहू का जोश पढ़ने लगा और वह सुपाड़े पर अपनी जीभ को गोल-गोल घूमाने लगी जिससे अंकित का मजा बढ़ने लगा था,,,, अंकित शर्मा जी के बहू के सर पर दोनों हाथ रखकर अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया था देखते ही देखते धीरे-धीरे वह शर्मा जी की बहू के मुंह को ही चोदना शुरू कर दिया,,,,, वह कभी सोचा भी नहीं था कि मोहल्ले में ही उसे इतना मजा मिलेगा पहले सुषमा आंटी फिर सुषमा की लड़की और अब शर्मा जी की बहू उसके हाथों में तो चारों तरफ से लड्डू ही लड्डू आ रहे थे,,,, अपनी किस्मत पर अंकित को बहुत गर्व होने लगा था जहां लोग मोहल्ले की खूबसूरत औरतों को देखकर केवल आंहे भरा करते थे और बेकाबू होकर अपने हाथ से ही काम चलाया करते थे वही अंकित को सामने से औरतें अपने पास बुलाती थी हम बिस्तर होने के लिए।

शादी वाले घर में उसे इतनी खुली छूट मिलेगी वह



कभी सोचा भी नहीं था मेहमान हर कमरे में मौजूद थे आराम कर रहे थे और ऐसे में घर की बड़ी बहू मोहल्ले के जवान लड़के के साथ हम बिस्तर होकर मजा लूट रही थी,,,, शर्मा जी की बहू भी इस बात से हैरान हो जाती थी कि इतनी देर पीटने के बाद भी अंकित के लंड का पानी नहीं छुटता था,,,, और यही उसकी सबसे बड़ी खुशनसीबी भी थी जितनी कमी उसके पति ने उसके जीवन में महसूस कराया था उतना ही मजा अंकित उसे दे रहा था उसके सोच के विपरीत और कभी सोची नहीं थी कि जीवन में उसे इतना सुख प्राप्त होगा,,,, अंकित का लंड इतना मोटा और लंबा था कि बड़े आराम से उसके गले तक पहुंच रहा था और उसके होठों का छल्ला बना हुआ था,,,, कुछ देर तक शर्मा जी की बहू इसी तरह से अंकित को मजा देती रही और फिर अंकित धीरे से अपने लंड को उसके मुंह से बाहर निकाल दिया क्योंकि अब उसका मन उसे चोदने को कर रहा था,,,, इसलिए शर्मा जी की बहू के मुंह में से लंड को बाहर निकाल कर वहां अपने हाथ में लेकर उसे हिला रहा था चेहरे पर उत्तेजना के भाव एकदम साफ दिखाई दे रहे थे उत्तेजना से अंकित का चेहरा तमतमा रहा था,,,, वह शर्मा जी की बहू को आदेश देते हुए बोला।



अब घोड़ी बन जाओ मेरी जान समय आ गया है तुम्हारी सवारी करने का,,,,।

बहुत मन कर रहा है मैं तुम्हारा मेरी सवारी करने का,,,।

तो क्या भाभी तुम जब घोड़ी बन जाती हो तो मुझे घोड़ा बनना ही पड़ता है,,,।

यह बात है तो ले तेरी घोड़ी तैयार हो गई है,,,(इतना कहने के साथ ही शर्मा जी की बहू पलंग के किनारे हाथ की कोहनी को नीचे रखकर और घुटनों के पर बैठकर घोड़ी बन गई अपनी भारीभरकम गांड को हवा में उठाते हुए अंकित के सामने परोसती यह देखकर अंकित की उत्तेजना सातवें आसमान पर पहुंच गई और वह गोरी गोरी गांड पर चपत लगाए बिना नहीं रह पाया,,,, फिर उसके बाद अंकित को शर्मा जी की बहू का गुलाबी गली एकदम साफ दिखाई दे रही थी बिल्कुल भी देर ना करते हुए अंकित अपने मोटे तगड़े लंड को उसकी बुर से सटा दिया और एक ही धक्के में पूरा का पूरा उसके अंदर डाल दिया,,, अंकित के इस हरकत से उसकी चीख निकलते निकलते रह गई थी वह तो वह अपने आप पर काबू कर ले गई थी वरना उसकी चीज सुनकर सभी लोग कमरे के बाहर इकट्ठा हो गए होते। शर्मा जी की बहू की चुदाई शुरू हो चुकी थी। बड़ी बड़ी गांड लड़के के साथ पानी भरे गुब्बारे की तरह लहरा रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे शांत तालाब में कोई पत्थर फेंक दिया हो। और वैसे भी चोदते समय लहराती हुई गांड देखकर अंकित की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ जाती थी इसलिए अंकित लगातार उसकी गांड पर चपत लगाते हुए धक्के लगा रहा था शर्मा जी की बहू चादर को दोनों हाथों से जोर से पकड़े हुए अपनी उत्तेजना को काबू में करने की कोशिश कर रही थी लेकिन नाकाम हो जा रही थी। अंकित की हर धक्के के साथ शर्मा जी की बहू को परम आनंद प्राप्त हो रहा था।



देखते ही देखते अंकित उसकी दोनों चूचियों को दोनों हाथ में पड़कर लगाम की तरह कसके अपनी कमर हिला रहा था ऐसा लग रहा था कि सच में वह घोड़ी की सवारी कर रहा हूं शर्मा जी की बहू पसीने से तरबतर हो चुकी थी लेकिन थमने का नाम नहीं ले रही थी वह अंकित का बराबर सामना कर रही थी। वैसे भी यह खेल ऐसा था जिसमें एक का भी थक जाना दूसरे के हौसले को पस्त कर देता था,,, लेकिन यहां पर दोनों खिलाड़ी टक्कर के थे दोनों किसी से हार मानने को तैयार नहीं थे ना पीछे हटने को तैयार थे कुछ देर तक ईसी तरह से पीछे से ही शर्मा जी की बहू की लेता रहा। अंकित तो नहीं देखा था लेकिन शर्मा जी की बहुत थक गई थी घुटनों के बल घोड़ी बने हुए उसका घुटना दर्द कर रहा था क्योंकि हर धक्के के साथ हुआ आगे की तरफ पत्थर जा रही थी जिसे सहारा देकर अंकित ही उसे फिर से व्यवस्थित कर रहा था लेकिन इस तरह से अंकित का मजा किरकिरा हो जा रहा था इसलिए वह पीछे से शर्मा जी की बहू की गुलाबी छेद से अपने लंड को बाहर निकाल दिया और फिर उसे पीठ के बल लेटा दिया उसकी दोनों टांगों को खोल दिया,,, उसकी गुलाबी बुर छल्ले नुमा खुली हुई थी जिसे अंकित नहीं अपने लंड से बनाया था और एक बार फिर से उसमें घुसा कर उसे चोदना शुरू कर दिया था,,,, अंकित और शर्मा जी की बहू कमरे के अंदर मजा लूट रहे थे घर के सभी सदस्य कुछ देर के लिए आराम फरमा रहे थे लेकिन काफी देर होने की वजह से जब उसकी भाभी वापस नहीं लौटी तो रजनी अपने कमरे से बाहर निकल आई और धीरे-धीरे चलते हुए उसे कमरे में जाने लगी जहां शादी के रसोई का सारा सामान रखा हुआ था और जब वहां पहुंची तो अच्छी दरवाजा बंद था और वह अभी अंदर से और हल्की-हल्की अजीब सी अंदर से आवाज आ रही थी रजनी को तो पहले को समझ में नहीं आया लेकिन एक जवान लड़का और जवान भाभी को कमरे के अंदर होने की शंका से ही रजनी के अजीब से लहार उठने लगी वह अंदर देखने की कोशिश करने लगी लेकिन वहां खिड़की नहीं था इसलिए वह दरवाजे के की होल से अंदर देखने की कोशिश करने लगी।



उसे अंदर का सब कुछ दिखाने लगा था लेकिन अभी कुछ समझ में नहीं आ रहा था चित्र स्पष्ट नहीं था लेकिन जैसे ही धीरे-धीरे चित्र स्पष्ट होने लगा उसकी आंखें फटी की फटी रह गई अपनी आंखों के सामने का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए उसे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था उसे साफ दिखाई दे रहा था कि बिस्तर पर उसकी भाभी लेटी हुई थी उसकी दोनों टांगें हवा में खुली हुई थी और उसकी टांगों के बीच अंकित झुका हुआ था और अपनी कमर को जोर-जोर से हिला रहा था अभी तक सिर्फ यही नजारा दिखाई दे रहा था रजनी के तो होश उड़ गए थे उसके बदन में अजीब सी झुनझुनी छाने लगी थी,,,, लेकिन अगले ही पल उसे अंकित का लंड दिखाई दिया जिसे देखकर उसकी हालत और भी ज्यादा खराब हो गई,,, इतना मोटा और तगड़ा लंड हुआ भी जिंदगी में पहली बार देख रही थी,,, रजनी के कॉलेज में उसका एक बॉयफ्रेंड था जिसके साथ वह दो-तीन बार मजे ले चुकी थी लेकिन जो नजर वह अपनी आंखों से देख रही थी उसे देखकर उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था क्योंकि उसे अच्छी तरह से मालूम था कि उसके बॉयफ्रेंड का लंड इससे आधा ही था। रजनी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें सामने का दृश्य इतना मादकता से भरा हुआ था कि वह अपने आप को रोक भी नहीं पा रही थी अंदर के नजारे को देखने से,,,, इसलिए वह बार-बार उसे छोटे से छेद से अपनी आंख को सटा दे रही थी। जिस बेरहमी से अंकित उसकी भाभी की चुदाई कर रहा था उसे देखकर रजनी के रोंगटे खड़े हो गए थे लेकिन यह भी उसे साथ दिखाई दे रहा था कि उसकी भाभी कितना मजा ले रही थी वह बराबर उसे अपनी बाहों में जकड़े हुए थी,,,,।



रजनी ज्यादा देर तक वहां खड़ी नहीं रह पाई और अपने कमरे में आ गई वह अपनी भाभी के बारे में सोचने लगी वह कभी सोचा नहीं थी कि उसकी भाभी इस तरह का गंदा काम करेगी लेकिन एक औरत होने के नाते वह इसके पीछे के कारण को जानने की कोशिश करने लगी और उसे एहसास होने लगा कि इसमें उसके भाई की ही गलती है जो साल में बड़ी मुश्किल से एक महीना जैसा ही उसके साथ रहता था ऐसे में भला एक जवान औरत क्या कर सकती है थोड़ी देर तक अपनी बिस्तर पर बैठे रहने के बाद उसे दरवाजा खोलने की आवाज आई वह अपनी भाभी को बिल्कुल भी दोष देना नहीं चाहती थी,,,, लेकिन वह अपने कमरे के बाहर आकर खड़ी हो गई वह अपनी भाभी की तरफ देखी तो अपनी साड़ी को व्यवस्थित कर रही थी,,,, उसे दरवाजे पर खड़ी देखकर उसकी भाभी को किसी प्रकार की शंका हो इससे पहले ही वह अपनी भाभी को आवाज लगाते हुए बोली।
 
भाभी एक जरूरी काम था,,,।

हां बोलो क्या हुआ,,,?

लहंगा ढीला है उसे टाइट करना है अभी अभी मैं पहन कर देखी तो लहंगा ढीला है,,,।

ओहहह यह तो दिक्कत वाली बात हो गई,,,,, तुम दुकान तो देखी हो ना जहां से लहंगा सिलवाई थी।

हां देखी हूं,,,,,।



अच्छा एक काम करो,,,,,(इतना कहकर वह अंकित की तरफ देखने लगी जो सीढीयो से नीचे की तरफ जा रहा था उसे आवाज लगाते हुए बोली,,,) अंकित,,,,,(अपना नाम सुनकर अंकित रुक गया और पीछे की तरफ नजर घुमा कर देखने लगा) इधर आना तो बहुत जरूरी काम है,,,,,

(शर्मा जी की बहू की बात सुनकर अंकित उसके पास पहुंच गया और बोला)

क्या हो गया भाभी,,,,?

देख अंकित जो लहंगा शादी में पहनना है वह ढीला है उसे टाइट करना है तो एक काम कर रजनी को मोटरसाइकिल पर बैठ कर दरजी के वहां चला जा वह जल्दी से टाइट करके दे देगा,,,,,।

ठीक है मैं चला जाता हूं,,,।

अरे अकेले नहीं जाना है रजनी को साथ में लेकर जाना है,,,,।

ठीक है दीदी चलो,,,,,।

रुको मैं लहंगा लेकर आती हूं,,,(इतना कहकर रजनी कमरे के अंदर गई और लहंगे वाला तेरा अपने हाथ में ले ली वैसे तो अंकित के साथ जाने का उसका बिल्कुल भी मन नहीं था क्योंकि कुछ देर पहले उसने अंकित के उत्तेजित रूप को देखी थी और उसकी आंखों के सामने अंकित की हिलती हुई कमर बार-बार दिखाई दे रही थी लेकिन फिर भी उसे जाना जरूरी था क्योंकि शाम को यही पहनना भी था अगर ढीला रह जाएगा तो पहनने में उसे ही दिक्कत होगी,,,,, थोड़ी देर में अंकित मोटरसाइकिल पर बैठ कर रजनी को दर्जी के वहां ले जा रहा था दर्जी की दुकान अंकित ने देखा नहीं था इसलिए मोटरसाइकिल चलाते हुए वह बोला,,,,)



कहां पर जाना है दीदी,,,,?

थोड़ा दूर है सीधा चलते रहो,,,,,(बहुत धीरे-धीरे रजनी बोल रही थी वैसे तो अंकित रजनी को दीदी बोल रहा था लेकिन जिस तरह से वह बैठी हुई थी उसके बदन का स्पर्श अंकित को मदहोश कर रहा था मौसम थोड़ा बादल छाया हुआ था ऐसा लग रहा था कि किसी भी वक्त बारिश गिरने लगेगी और इसी बारे में वह रजनी से बोला,,)

कहीं बारिश ना गिरने लगे नहीं तो शादी में दिक्कत हो जाएगी।

मैं भी यही देख रही हूं कल तक बदल नहीं था लेकिन आज देखो,,,,,।

बारिश पड़ेगी भी तो इतना नहीं पड़ेगी थोड़ा बहुत पडकर बंद हो जाएगी सीजन नहीं है ना अभी,,,।

हां यह तो है,,(बातचीत के दौरान रजनी का मन कर रहा था कि वह उसे उसकी भाभी और उसके बीच के संबंध के बारे में पूछे लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी,,,, अभी वह यह सोच रही थी कि तभी अंकित बोल पड़ा)

भैया नहीं आया अभी तक उन्हें तो पहले ही आ जाना चाहिए शादी वाला दिन है बहन की शादी है लेकिन फिर भी देखो,,,,।(अंकित की बात सुनकर रजनी समझ गई थी कि यह सब भाभी नहीं इसे बताया है और शायद इसी दुख का वह अपने पति से बदला भी ले रही है और यह वास्तविक भी है जवानी से भरी हुई औरत कब तक मर्द से दूर रह सकती है रजनी अपने मन में ही अपने भाई को बुद्धू कहने लगी थी अंकित की बात सुनकर वह बोली)



काम में बिजी है ना इसलिए शाम तक पहुंच जाएंगे,,,।

फिर भी दीदी घर में बड़ा भाई हो तो शादी वाले दिन कितनी मदद मिलती है मैं देख रहा हूं कि चाचा जी अकेले ही दौड़ रहे हैं अगर भैया होते तो शायद उन्हें आराम मिल जाता,,,,।

(रजनी को इस बात का अच्छी तरह से एहसास था की शादी वाले घर में एक बहन की शादी होने पर भी उसका बड़ा भाई घर में हाजिर नहीं था कामकाज नहीं देख रहा था अरे ऐसा कौन सा काम होता है की छुट्टी नहीं मिलती इस बात का दुख रोशनी को भी था लेकिन वह कुछ बोल नहीं पाई तकरीबन आधा घंटा मोटरसाइकिल चलाने के बाद दरर्जी की दुकान आई थी यह काफी दूर ही था,,,, शहर से थोड़ा बाहर,,,, बीच रास्ते में गांव जैसा था सड़क के दोनों तरफ खेत ही खेत थे इस जगह पर अंकित पहली बार आ रहा था रजनी के द्वारा बताए गए जगह पर मोटरसाइकिल को रोकते हुए अंकित बोला,,,)

बाप रे दीदी तुम्हें कोई और जगह नहीं मिली इतनी दूर आकर लहंगा सिलवाई हो,,,।

यह अच्छा सिलते हैं इसलिए यहां आई थी,,,।



चलो कोई बात नहीं जल्दी से इसे टाइट करवा लो,,,,।

(इतना कहकर दोनों दर्जी की दुकान पर चले गए,,, दर्जी आराम कर रहा था वैसे तो कोई और समय होता तो शायद इस समय वह लहंगा बिल्कुल भी टाइट नहीं करता लेकिन शादी वाला मामला था इसलिए वह भी जल्दी से उठकर अपना काम करने लगा तकरीबन 15 20 मिनट के बाद वह लहंगा को दुरुस्त कर दिया था लेकिन फिर भी एक बार उसे पहन कर देखना जरूरी था इसलिए रजनी अंदर वाले कमरे में चली गई और थोड़ी देर में उसे पहन कर देख ली और बाहर आकर बोली,,,)

अब ठीक है,,,,।

क्या करते हो चाचा यह जानते हुई भी की दुल्हन का लहंगा है फिर भी इतना ढीला सिल दिए,,,।

अब क्या करें बेटा कभी इधर-उधर हो जाता है लेकिन अब एकदम सही हो गया है बिल्कुल भी चिंता मत करो,,,।

ठीक है चाचा अब चलते हैं,,,,,,।

(अंकित से बातचीत के दौरान अंकित के प्रति रजनी का भी आकर्षण बढ़ने लगा था उसे लगने लगा था कि अंकित बेहद आकर्षक लड़का है उसे बातचीत करने में कितना अच्छा लग रहा था कुछ देर पहले उसने कमरे में भाभी की चुदाई देखी थी जिसे देखकर अभी तक उसके बाद में अजीब सी हलचल हो रही थी क्योंकि उसकी भाभी को चोदने वाला उसके साथ था और उसके पास इतना मोटा तगड़ा लंड था कि जिसके बारे में वह कभी सपने भी नहीं सोची थी। अब अंकित को लेकर उसके बदन में अजीब सी हलचल होने लगी अंकित मोटरसाइकिल पर रजनी को बैठक आगे बढ़ गया था लेकिन देखते ही देखते बरसात की बूंदें गिरने लगी वह जिस जगह से गुजर रहा था दोनों तरफ खेत थे एक तरफ टूटी हुई झोपड़ी थी,,,, वैसे तो दोनों भी चुके थे लेकिन फिर भी इतनी तेज बारिश में मोटरसाइकिल लेकर जाना उचित नहीं था इसलिए जल्दी से मोटरसाइकिल खड़ी करके वह दोनों झोपड़ी के अंदर घुस गए,,,,, दोनों ने कभी सोचा नहीं था कि इतनी तेज बारिश शुरू हो जाएगी।



अच्छा हुआ तुम्हारा लहंगा प्लास्टिक के थैले में ही वरना भीग जाता तो शाम तक सूखने में दिक्कत आती,,,।

बादल देखकर ही में प्लास्टिक की थैली लेकर आई थी।

यह तो तुमने बहुत अच्छा की दीदी,,, लेकिन अब यहां रुकना पड़ेगा देख रही हो कितनी तेज बारिश है कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है हवा भी तेज है,,,,।

सच में कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है अच्छा हुआ कि यह झोपड़ी दिख गई वरना इतनी तेज बारिश में मोटरसाइकिल चलाना भी तुम्हारे लिए मुश्किल हो जाता।

हां तुम सही कह रही हो और एक तो शादी भी आज तुम्हारी है दुल्हन को सही सलामत घर तक पहुंचाना मेरी जिम्मेदारी है,,,,(इतना कहकर अंकित मुस्कुराने लगा और उसे मुस्कुराता हुआ देखकर रजनी भी मुस्कुरा दी तभी आसमान में जोरदार बिजली कड़की और रजनी एकदम घबराकर अंकित के सीने से लग गई पल भर के लिए अंकित को कुछ समझ में नहीं आया लेकिन जैसे उसे एहसास होने लगा कि उसकी बाहों में एक जवान खूबसूरत लड़की है जो पूरी तरह से पानी में भीगी हुई है जिनके अंग से मादक खुशबू उठ रही थी उस मादक को खुशबू में धीरे-धीरे अंकित खोने लगा,,,, और अनजाने में उसे सहारा देते हुए उसकी पीठ पर अपने दोनों हाथ रख दिया अंकित के बदन की गर्माहट रजनी के तन बदन में आग लगाने लगी अनजाने में ही वह उत्तेजित होने लगी थी,,,, लेकिन जल्दी ही उसे एहसास हुआ कि वह गलत कर रही है आज उसकी शादी है आज वह दुल्हन बनने वाली है ऐसे में उसका इस तरह से देखना उचित नहीं है इसलिए वह धीरे से अंकित के बदन से अलग हुई वह शर्मा रही थी,,,, अंकित भी अच्छी तरह से उसके मन की दशा को समझ पा रहा था इसलिए वह बोला,,,।



भले तेज बारिश है लेकिन कितनी अच्छी बारिश है कोई और समय होता तो ऐसी बारिश में भीगने का मजा ही कुछ और होता,,,, तुम्हें बारिश में भीगना अच्छा लगता है।

बहुत अच्छा लगता है ,,,,(वह नजर झुकाए हुए ही जवाब दी,,,,) कॉलेज जाते समय अक्सर बारिश पड़ने लगती थी लेकिन मैं कभी घर से छाता नहीं ले जाती थी ताकि मैं भीग सकुं,,,।

तुम बिल्कुल मेरी तरह हो मुझे भी भेजना बहुत अच्छा लगता है खास करके स्कूल जाते समय,,,,।

(दोनों में इसी तरह से बातें होती रही,,,,, लेकिन अब रजनी को बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी लेकिन वह शर्मा के मारे कुछ बोल नहीं पा रही थी लेकिन जब बर्दाश्त नहीं हुआ तो वह धीरे से अंकित से बोली,,,,)

तुम जरा अपनी नजर दूसरी तरफ घूमाना तो,,,।

क्यों क्या हुआ,,,?

अरे समझा करो इमरजेंसी है,,,,।

(इतना सुनकर अंकित समझ गया और हल्की सी मुस्कुराहट के साथ बोला)

ओहहह यह बात है कोई बात नहीं लेकिन तुम पूरी तरह से भीग चुकी हो ऐसे में अगर कर भी लोगी तो पता नहीं चलेगा,,,।



धत्,,,(अंकित की बात सुनकर रजनी शर्मा से पानी पानी हो गई अंकित ने नजर को दूसरी तरफ घुमा दिया था रजनी से बर्दाश्त करना मुश्किल था इसलिए वह धीरे से अपनी सलवार की डोरी खोलने लगी और सलवार की डोरी खोलने के साथ ही अपनी पैंटी सहित वह सलवार को घुटनों तक खींच कर वहीं पास में ही झोपड़ी के अंदर ही पेशाब करने के लिए बैठ गई और भला ऐसा कैसे हो सकता है कि इतने करीब एक जवान खूबसूरत लड़की पेशाब करने बैठी हो और अंकित उसे देखे बिना रह सका हो,,,, बार-बार कर नजरों से अंकित रजनी की तरफ देख ले रहा था उसकी गोरी गोरी गांड एकदम सुडौल थी,,, पूरी तरह से जवान हो चुकी थी , जवानी से उसका हरेक अंग भर चुका था,,, अंकित अपने मन में सोचने लगा कि आज की रात शादी करने के बाद अपने पति को जी भर कर मजा देगी,,, बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज अंकित को मदहोश कर रही थी, रजनी लाख कोशिश कर रही थी कि उसकी दूर से सीट की आवाज ना निकले लेकिन वह इस प्राकृतिक प्रक्रिया को रोक नहीं पा रही थी उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि उसकी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज अंकित के कानों तक एकदम साफ सुनाई दे रही थी,,,,थोड़ी ही देर में रजनी पेशाब कर चुकी थी वह धीरे से उठकर खड़ी हो गई लेकिन अनजाने में ही वह नजर घूमाकर देखी तो अंकित को अपनी ओर ही देखता हुआ पाकर वह शर्म से पानी पानी हो गई,,, और थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,,)



तुम्हें शर्म नहीं आती एक लड़की को पेशाब करते हुए देखने में,,,,,,(इतना कहकर वह अपनी सलवार ऊपर उठा पाती और अंकित कुछ बोल पाता इससे पहले ही फिर से जोरदार बिजली चमकी और इस बार वह अपनी सलवार ऊपर उठाए बिना ही एकदम से अंकित की तरफ भागी और फिर से उसके सीने से लग गई इस बार मामला कुछ अलग था,, इस बार रजनी की सलवार उसके घुटनों में फंसी हुई थी घुटनों के ऊपर वह पूरी तरह से नंगी थी और इस मौके को अंकित अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था और अगले ही पर मौका देखकर अंकित अपने दोनों हाथों को उसकी पीठ पर रखने के बजाय उसके नितंबों पर रख दिया और उसे दबाना शुरू कर दिया वह जानता था कि इस समय रजनी के मन में क्या चल रहा होगा,,,,, वह धीरे-धीरे रजनी की गांड को दोनों हाथों से दबाना शुरू कर दिया रजनी एकदम से सन्न रह गई उसे यकीन नहीं हो रहा था कि अंकित उसके साथ इस तरह की हरकत कर देगा,,,, उसकी सांसे गहरी चलने लगी थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था लेकिन उसकी बात का जवाब अंकित देते हुए बोला,,,)



तुम्हारी जैसी खूबसूरत लड़की अगर इतने पास में बैठकर पेशाब कर रही हो तो देखने में कोई हर्ज नहीं है,,,,।

(अंकित की हरकत और उसका जवाब सुनकर रजनी एकदम से गनगना गई उसका काबू खुद पर नहीं था वह बेकाबू हो जा रही थी अंकित की हरकतें उसे पागल बना रही थी वह कभी सोच ही नहीं थी कि इस तरह से वह किसी मर्द के हाथ का खिलौना बन जाएगी कठपुतली बन जाएगी क्योंकि इस समय रजनी उसके हाथों से छूटने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रही थी वह अपने हालात को अच्छी तरह से समझ रही थी इस समय वह अजीब सी दुविधा में थी उसकी सलवार और उसकी पेंटि उसकी घुटनों में फंसी हुई थी उसकी नंगी गांड पर अंकित की मजबूत हथेलियां थी,,,,, जिसकी वजह से वह बेकाबू हुए जा रही थी,,, फिर भी हिम्मत करके वह बोली।)

तुम मुझे दीदी कहते हो,,,,।

लेकिन तुम मुझे भैया का कर नहीं बुलाई,,,।



यह गलत है अंकित किसी को पता चल गया तो गजब हो जाएगा आज मेरी शादी है,,,,,(वह अपनी तरफ से आखिरी कोशिश कर रही थी इन सब से बाहर निकालने के लिए लेकिन इस दौरान अंकित के पेंट में बना हुआ तंबू सीधे उसकी नंगी बुर पर ठोकर लगा रहा था जिससे वह बदहवास हुए जा रही थी वह जानती थी कि अंकित अब उसे छोड़ने वाला नहीं है क्योंकि कुछ देर पहले वह अंकित की चुदाई देख चुकी थी उसकी भाभी को बड़ी बेरहमी से वह पेल रहा था,,,, अंकित अपने पेट में बना तंबू बराबर उसकी बुर पर रगड़ते हुए बोला,,,)

आज तुम्हारी शादी है तभी तो तुम्हें एक मुख्य अध्याय पढ़ना चाहता हूं जिसकी जरूरत तुम्हें कल रात को महसूस होगी मैं तुम्हें खिलाड़ी बना देना चाहता हूं एक ही बार में ताकि तुम अपने पति को अपना गुलाम बना सको,,,,।



नहीं अंकित यह गलत है किसी को पता चल गया तो मेरी बदनामी हो जाएगी,,,,(रजनी का मन बराबर बना हुआ था लेकिन फिर भी वह जानबूझकर अपने आप को बहकाने की कोशिश कर रही थी लेकिन इस दौरान अंकित धीरे से अपनी पैंट की बटन खोल दिया था और अपने खड़े लंड पर रजनी की हथेली रख दिया था जिसकी गर्माहट पाकर रजनी एकदम से मदहोश हो गई थी और तुरंत अपना हाथ पीछे खींच ली थी लेकिन अंकित पीछे हटने वाला नहीं था वह तुरंत फिर से उसका हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रखकर उसे पर अपनी हथेली रख दिया और उसे पर दबाव बनाने लगा थोड़ी देर में रजनी पिघलने लगी और दूसरे हाथ को उसकी गांड पर से हटकर सीधा उसकी बुर पर रख दिया जो की पानी छोड़ रही थी गीली हो रही थी उसकी चिपचिपाहट अंकित को अपनी उंगलियों पर साफ महसूस हो रही थी,,,,,।

ओहहहहह रजनी तुम बहुत खूबसूरत हो तुम्हारा पति बहुत खुशकिस्मत है जो तुम्हें पाया है लेकिन मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि जो मजा में तुम्हें आज दूंगा वह तुम्हें जिंदगी भर याद रहेगा ऐसा मजा तुम्हारा पति तुम्हें कभी नहीं दे पाएगा और कल रात के लिए मैं तुम्हारा रास्ता खोल देना चाहता हूं ताकि तुम्हें दर्द ना हो अगर मेरे जैसा मोटा और लंबा होगा तो अगर इससे छोटा हुआ तो तुम बड़े आराम से हंसते-हंसते ले लोगी,,,,, बताओ मेरा मोटा लंबा है ना,,,,।





(रजनी को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या बोले लेकिन फिर भी अंकित की बात सुनकर वह हां मैं सर हिला दि,,उसके चेहरे पर शर्म की रेखा एकदम साफ दिखाई दे रही थी,,,,, देखते ही देखते अंकित अपनी हथेली को इसकी दर पर जोर-जोर से रगड़ने लगा मसलने लगा उसे मदहोश करने लगा बाहर बारिश बड़े जोरों से हो रही थी अंकित अपने मन में सोच रहा था कि अच्छा हुआ कि रुकने के लिए उसने यह झोपड़ी पसंद किया वरना ऐसा सुनहरा मौका उसके जीवन में दोबारा कभी नहीं आता,,,, अंकित यह तो जानता था कि रजनी पूरी तरह से तैयार हो चुकी है लेकिन फिर भी उसे और ज्यादा खोलने के लिए उसका आगे बढ़ाना बेहद जरूरी है इसलिए वह धीरे से नीचे घुटनों के बल बैठ गया और बड़े गौर से रजनी की गुलाबी बुर को देखने लगा,,, जो की पूरी तरह से एकदम चिकनी थी ऐसा लग रहा था कि आज ही क्रीम लगाकर साफ की हो इसलिए वह मुस्कुराते हुए रजनी की तरफ देखा और बोला ,,,,



आज ही लगता है क्रीम लगाकर साफ की हो अपने पति के लिए है ना ,,,,

(यह सुनकर रजनी एकदम शर्म से अपनी आंखों को बंद कर ली क्योंकि अंकित की बात में सच्चाई थी और यह सच्चाई उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी,,,, रजनी कुछ समझ पाती इससे पहले ही अंकित अपने प्यास होठों को उसके गुलाबी पर पर रख दिया उसे चार्ट में लगा यह देखकर करते हो रजनी का पर एकदम साथी आसमान पर पहुंच गया वह एकदम से मदहोश हो गई और उसके बाद में एकदम से अकड़न बढ़ गई और वह अपने पैर के अंगूठे के बल खड़ी हो गई,,,, उसकी उत्तेजना और उत्साह देखकर अंकित समझ गया था किस तरह की हरकत आज तक उसके साथ किसी ने नहीं किया था और यह बात सच थी भले ही वह तीन-चार बार अपने बॉयफ्रेंड के साथ मजा ले चुकी थी लेकिन इस तरह की हरकत उसके बॉयफ्रेंड ने उसके साथ कभी नहीं किया था इसलिए वह इस समय अत्यधिक आनंद महसूस कर रही थी। अंकित अपनी हरकतों से उसे काम बिह्वल बना दे रहा था। पागलों की तरह अंकित उसे मजा दे रहा था उसकी बुर को चाट रहा था वैसे भी उसकी चिकनी बुर को चाटने में अंकित को बहुत मजा आ रहा था अंकित की जीभ लपालप चल रही थी रजनी उत्तेजना से पागल हुए जा रही थी। उसका पूरा बदन कसमसा रहा था उसके पैरों में कंपन हो रहा था,,,, वह ठीक से खड़ी नहीं हो पा रही थी लेकिन अंकित उसके नितंबों को पड़कर उसे सहारा दिए हुए था देखते देखते रजनी झड़ने लगी और इस तरह से झड़ने में उसे बहुत मजा आ रहा था,,,,,,,,।



बाहर तेज बारिश हो रही थी कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था तेज हवा चल रही थी यहां पर किसी के भी आने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी ,,,, क्योंकि यह जगह शहर से थोड़ा बाहर थी और इतनी तेज बारिश में यहां कोई आने वाला नहीं था इसलिए अंकित पूरी तरह से निश्चिंत था। रजनी झड़ चुकी थी उसका पानी निकल चुका था झड़ते समय जिस तरह के आनंद की अनुभूति उसे हो गई थी वह पूरी तरह से मदहोश हो गई थी उसके बदन में अभी भी कंपन हो रहा था,,,, मौके की नजाकत को देखते हुए अंकित धीरे से उठकर खड़ा हुआ और रजनी की आंखों में देखने लगा रजनी शर्मा के मारे मेरी जा रही थी अपनी आंखों को नीचे झुका कर वह अपने आप को व्यवस्थित करने की कोशिश कर रही थी कि तभी अंकित उसे बिल्कुल भी मौका ना देते हुए अपने होठों को उसके होंठ पर रख दिया उसकी कमसिन गुलाबी होंठ दहक रहे थे और अंकित होठों को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया था,,,, रजनी फिर से मदहोश होने लगी एक बार छोड़ने के बाद अंकित किसी भी तरह से रजनी को सहज होने देना नहीं चाहता था क्योंकि वह जो कुछ भी करना चाहता था वह उसकी मदहोशी की हालत नहीं कर सकता था इसलिए उसके होठों का रसपान करते हुए अंकित फिर से अपने दोनों हथेलियां को उसकी नाजुक गांड पर रख दिया और उसे पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया और इस दौरान वह अपने पेंट में बने तंबू को बराबर उसकी नंगी बुर पर रगड़ रहा था,,, रजनी के बदन में कसमाशाहट बढ़ती जा रही थी वह अपने काबू में बिल्कुल भी नहीं थी कुछ देर पहले जो नजर उसने अपनी आंखों से देखी थी उसे महसूस होने लगा था कि वही नजारा अब उसके साथ होने वाला है,,, आने वाले पाल के बारे में सोच कर ही रजनी घबरा गई थी।



क्योंकि दरवाजे के की होल से उसने अंकित के लंड की झलक देखी थी मोटा तगड़ा लंबा ऐसा उसने आज तक नहीं देखी थी इसलिए उसकी लंबाई और जाकर को देखते हुए उसके मन में शंका थी कि अगर अंकित उसके साथ भी उसकी भाभी की तरह करने लगा तो क्या हुआ उसके मोटे तगड़े लंड को अपनी नाजुक बुर में ले पाएगी कि नहीं यह सवाल उसके लिए अहम था,,, वैसे भी आज की रात बीतने के बाद कल की रात उसके लिए सुहाग वाली रात थी कल की रात को उसका पति उसके साथ अपनी मनमानी करने वाला था जिसके लिए वह अपने आप को तैयार कर चुकी थी लेकिन इस तैयारी के बीच में कभी सोची नहीं थी कि उसका पाला ऐसे जवान लड़के से पड़ेगा जिसके पास मोटा तगड़ा और लंबा लंड होगा। उसकी पूरी तैयारी गड़बड़ा चुकी थी लेकिन मोटे तगड़े लंबे लंड को अपनी बुर में महसूस करने का एहसास उसे गदगद किए हुए था। अपनी इस लालच को वह रोक भी नहीं पा रही थी। इसीलिए तो एक बार फिर से अंकित की बाहों में वह पूरी तरह से मचलने लगी थी। कल रात की सुहागरात औपचारिकता बस थी लेकिन असली सुहागरात ऐसा लग रहा था कि आज शाम को ही हो जाने वाली थी। तेज बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी। ऐसा लग रहा था कि यह तेज बारिश इन दोनों के लिए ही हो रही थी इन दोनों को पर्याप्त समय देने की कोई साजिश रच रही हो लेकिन इस साजिश में भी अपना अलग मजा था। और इस मजे को दोनों भरपूर ले रहे थे।



कुछ देर तक अंकित इसी तरह से रजनी के नितंबों के मर्दन के साथ साथ रजनी के लाल लाल होठो का रसपान करता रहा,,,, लेकिन अब समय आ गया था आगे बढ़ने का, अपने होठों को उसके होठों से अलग करके गहरी सांस लेता हुआ वह रजनी के खूबसूरत चेहरे को देखता रह गया रजनी शरम के मारे अपनी नजरों को नीचे झुकाए इस पल का आनंद ले रही थी,,,, लेकिन अब अंकित रजनी से कुछ और करवाना चाहता था वह सुख प्राप्त करना चाहता था जो कल उसका पति उसे करवाने वाला था उसे देने वाला था रजनी के कंधों पर दोनों हाथ रखकर उसे पर दबाव बनाता हुआ बिना कुछ बोले अंकित उसे नीचे झुकने का इशारा करने लगा जवानी से भरी हुई रजनी को भी मालूम था कि अंकित क्या करवाना चाहते हैं और सही मायने में देखा जाए तो वह अपने आप को रोक भी नहीं पा रही थी क्योंकि कंधे पर दबाव पढ़ते ही वह बिना कुछ बोले बिना कोई सवाल जवाब के नीचे की तरफ झुकती चली गई और अगले ही पल वह अपने घुटनों के पल बैठी हुई थी ठीक उसकी आंखों के सामने अंकित का मोटा तगड़ा लंड लहरा रहा था जिसे देखकर रजनी की आंखों की चमक बढ़ती जा रही थी। रजनी खुद अंकित के मोटे से बड़े लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना चाहती थी उससे प्यार करना चाहती थी वह देखना चाहती थी कितना मोटा तगड़ा लंड मुंह में जाता है तो कैसा लगता है उसे चूसने में कितना आनंद आता है,,,, लेकिन फिर भी अपने संस्कारों का आखिरी बार बचाव करते हुए वह अंकित से बोली।



अब हमें चलना चाहिए,,,,!

ऐसी तेज बारिश में कहां जाओगी रजनी रुकना ही पड़ेगा तो क्यों ना मजा लिया जाए वैसे भी कल की रात तुम्हारी सुहागरात है कल तुम्हारा पति तुम्हारे साथ यही सब करेगा इसलिए कल की रात के लिए तुम आज से ही अपनी तैयारी कर सकती हो ताकि कल रात को तुम्हें घबराहट ना हो झिझक ना हो,,,(अपने लंड को हाथ में लेकर हिलाते हुए उसके सुपाड़े को धीरे-धीरे रजनी के खूबसूरत गानों पर रगड़ते हुए अंकित अपनी बात रख रहा था वह अच्छी तरह से जानता था कि रजनी बिल्कुल भी इनकार नहीं कर पाएगी लेकिन यह सब कुछ औपचारिक भर था। अंकित की हरकत से रजनी गरम हो रही थी वह बार-बार जानबूझकर अपने लाल-लाल होठों को खोल दे रही थी ताकि अंकित खुद अपने हाथों से अपने लंड को उसके मुंह में डाल सके लेकिन अंकित उसे तड़प रहा था मदहोश बना रहा था क्योंकि संपूर्ण रूप से मदहोशी में डूबी हुई औरत ही असली सुख देती है। और इस समय धीरे-धीरे रजनी डूबती चली जा रही थी उसकी आंखों में खुमारी का नशा छा रहा था। रजनी को तड़पाने में अंकित को मजा आ रहा था बार-बार अंकित अपने मोटे सुपाड़े को उसके होठों से रगड़कर हटा ले रही थी और जब-जब सुपाड़ा होठों से स्पर्श होता था तब तब रजनी के होशो हवास उड़ जाते थे,,,,, वह मचल उठती थी उसे अपने मुंह में लेने के लिए कुछ देर तक अंकित उसे इसी तरह से तड़पता है और फिर अपने मोटे तगड़े सुपाडे को उसके लाल-लाल होठों के बीच रख दिया जिसे रजनी बड़ी ही शालीनता से अपने होठों को बीच रखकर हल्के-हल्के उसे चूसना शुरू करती है उसके ऊपर अपने होंठ फीराना शुरू कर दी यह सब अंकित को मदहोश बना रहा था एक तो तूफानी बारिश ऊपर से एक जवान लड़की का साथ उसे अत्यधिक उत्तेजना का एहसास करा रहा था।



रजनी मदहोश हो चुकी थी। लंड ईतना मोटा था की पूरा होंठ खोलने के बावजूद भी वह ठीक तरह से उसे अपने मुंह के अंदर नहीं ले पा रही थी इसी बात से वह और भी ज्यादा उत्तेजित और मदहोश हो चुकी थी लेकिन इस बात का डर उसके मन में बराबर बना हुआ था कि उसकी बुर के अंदर इतना मोटा तगड़ा लंड घुस पाएगा कि नहीं,,,, लंड चूसते हुए रजनी अपनी भाभी के बारे में सोच रही थी किसकी भाभी कितने आराम से इतना मोटा तगड़ा लंड अपनी बुर में लेकर मजा लूट रही थी,, थोड़ा धीरे रखेगी तो वह भी बढ़िया आराम से इसे अंदर ले पाएगी ऐसा कहकर वह अपने आप को ही मना रही थी धीरे-धीरे अंकित की कमर हिलना शुरू हो चुका था। दोनों मदहोश हुए जा रहे थे,,,, अभी तक रजनी को अपनी भाभी के चरित्र को लेकर थोड़ी बहुत शंका जाग रही थी लेकिन अब यह शंका धीरे-धीरे खत्म होने लगी थी क्योंकि वह खुद अपनी भाभी के रास्ते पर थी और इस बात से वह इनकार नहीं कर सकती थी कि एक औरत को मर्द की कितनी जरूरत होती है। देखते देखते रजनी बड़े आराम से अंकित के लंड को अपने गले के नीचे उतारने लगी थी,,,, इस झोपड़ी में आसरा लिए दोनों को आधा घंटा से ज्यादा समय गुजर चुका था लेकिन अभी बारिश ना रख रही थी ना थम रही थी और बारिश के साथ-साथ अंकित भी रुकने का नाम नहीं ले रहा था,,,, ऐसा लग रहा था कि बे मौसम की है बारिश इन दोनों के लिए ही आई थी ताकि यह दोनों एक हो सके मजा ले सके रजनी सुहागरात से पहले सुहागरात का आनंद ले सके और वह भी अपने पति से नहीं गैर मर्द से,,,। कुछ देर तक अंकित इसी तरह से मजा लेता रहा आनंद लेता रहा,,,, और फिर धीरे से अपने लंड को रजनी के मुंह में से बाहर निकाल लिया रजनी की सांस ऊपर नीचे हो रही थी इतना मोटा लंड गले तक उतार लेने की वजह से उसकी आंखें बाहर को निकल आई थी,,,, वह गहरी गहरी सांस लेते हुए ललचाई नजरों से अंकित के लंड को भी देख रही थी जिसके ऊपर से उसके मुंह का लार टपक रहा था। रजनी की बांह पकड़कर अंकित रजनी को खड़ी किया उसकी सलवार और पेंटी अभी भी उसके घुटनों में फंसी हुई थी।



पल भर के लिए अंकित रजनी को नंगी कर देना चाहता था इसलिए उसकी सलवार को अपने पैर से नीचे की तरफ सरकाते हुए अपने हाथों का प्रयोग करके वह रजनी की कुर्ती को पकड़ लिया और उसे ऊपर की तरफ उठाने लगा,, रजनी को एहसास हो गया था कि अंकित क्या करने वाला है अनजान जगह पर नंगी होने में रजनी को भी झिझक महसूस हो रही थी,, लेकिन आने वाले पल की मदहोशी के एहसास में वह पूरी तरह से डूब चुकी थी और ना चाहते हुए भी अपने दोनों हाथों को ऊपर उठकर अंकित का सहयोग करने लगी,,,, और रजनी का सहयोग प्रकार अंकित को बिल्कुल भी देर नहीं लगी उसकी कुर्ती उतारने में, कुर्ती उतर जाने के बाद उसकी लाल रंग की ब्रा में कैद उसके दोनों अमरूद और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहे थे जिसे अंकित उसकी ब्रा पड़कर ऊपर उठकर दोनों अमरुद को अपने हाथों में भर लिया था और उसे दबाते हुए अगले ही पल तुरंत उसे मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया था रजनी मदहोश होने लगी बदहवास होने लगी,,, और उत्तेजित अवस्था में वह खुद अपने पैर का सहारा लेकर अपनी सलवार और पेटी दोनों को अपने पैरों से बाहर निकाल दी थी और एकदम नंगी हो चुकी थी,,, मदहोशी के आलम में वह पूरी तरह से भुल चुकी थी कि वह किस जगह पर है,,,, यह एक चालू सड़क थी जिस पर हमेशा वहां आते जाते थे लेकिन तेज बारिश के चलते अभी यहां से एक भी ना तो वाहन गुजरा था ना ही कोई इंसान गुजरा था,,, इसलिए रजनी की हिम्मत बढ़ चुकी थी,,, अंकित जी जान से उसकी दोनों चूचियों को मुंह में लेकर जी भर कर पी रहा था अभी रजनी की चुचियों का आकार सुगठित नहीं था अभी वह अमरुद जैसे ही छोटे-छोटे थे लेकिन इन्हें दबाने में और मुंह में लेकर पीने में बहुत मजा आ रहा था,,,, अंकित को साफ पता चल रहा था कि रजनी की चूचियों पर मेहनत नहीं हुई थी इसलिए वह पूरे शबाब में खेली नहीं थी लेकिन खूबसूरती के मामले में वह बेहद हसीन दिखाई दे रही थी। कुछ देर तक अंकित रजनी की चूचियों से अपना मन बहलाता रहा और रजनी अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर हिम्मत दिखाकर अंकित के लंड को पकड़ कर हीला रही थी मुठिया रही थी। उसे बहुत अच्छा लग रहा था उसकी गर्माहट उसे उत्तेजित कर रही थी और उसकी बुर को पगला रही थी।



लेकिन अब समय आ गया था रजनी को असली सुख देने का,,,,, रजनी संपूर्ण रूप से नंगी थी वस्त्र के नाम पर उसके बदन पर केवल एक छोटी सी ब्रा थी, और उसमें से भी उसकी चुचिया बाहर थी। जल्दबाजी दिखाते हुए अपनी पेंट उतार कर अंकित की कमर के नीचे से नंगा हो गया और फिर रजनी को पकडकर दूसरी तरफ घुमा दिया और उसकी कमर में हाथ डालकर उसकी गांड को अपनी तरफ खींच लिया,,, और रजनी से बोला।

थोड़ा सा अपनी गांड पर उठाओ,,,,।

(अंकित की यह बात सुनकर रजनी शर्म से गड़ी जा रही थी लेकिन इस समय अंकित की बात मानना बेहद जरूरी था क्योंकि अंकित उसे अद्भुत सुख की प्राप्ति करवाने वाला था इसलिए वह भी अंकित की बात मानते हुए अपनी नंगी गांड को थोड़ा ऊपर उठा दे और झोपड़ी के मोटे लकड़ी को पकड़ कर वह सहारा ले ली अब इस हालत में रजनी की खूबसूरत गांड और भी ज्यादा खूबसूरत नजर आ रही है अंकित तो उसे देखते ही रह गया और दोनों हथेलियां को गांड पर रखकर उसे हल्के हल्के से सहलाने लगा,,, रजनी का गुलाबी छेद एकदम साफ दिखाई दे रहा था जिसे देख कर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था अपने लंड को उसमें घुसाने से पहले अंकित धीरे से अपनी एक उंगली को उसकी बुर में डालकर गोल-गोल घुमा कर अपने लिए जगह बनाने लगा लेकिन उंगली डालने पर भी रजनी एकदम कसमसा जा रही थी। इसलिए वहां रजनी का हौसला बढ़ाते हुए बोला।



बहुत अच्छे रजनी तुम कल की रात के लिए तैयार होने जा रही हो आधी तैयार हो गई हो बस आधी बाकी है कल देखना तुम अपने पति पर जो जलवा दिखाओगी कि वह जिंदगी भर तुम्हारा गुलाम बन जाएगा,,,,,,,।

(अंकित के समझाने के बावजूद भी रजनी अच्छी तरह से जानती थी इसलिए वह शरमाते हुए बोली)

आराम से डालना तुम्हारा बहुत मोटा और लंबा है,,,।

(यह सुनकर अंकित मुस्कुरा दिया और बोला)

चिंता मत करो एकदम आराम से करूंगा क्योंकि कल तुम्हारी सुहागरात है और अपने पति के सामने फटी बुर लेकर जाओगी तो क्या सोचेगा इसलिए बिल्कुल भी चिंता मत करो,,,, जैसी तुम मुझे दे रही हो वैसा ही मैं तुम्हें लौटा दूंगा,,, चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है एक खरोंच तक नहीं आएगी,, एकदम मक्खन मलाई की तरह ही रहेगी।(अंकित रजनी को पूरा आश्वासन दे रहा था,,,, रजनी को अंकित पर विश्वास तो था लेकिन हालात विपरीत थे, रजनी अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी गुलाबी बुर का छेद छोटा था और अंकित के लंड की मोटाई और लंबाई उस छेंद से काफी बड़ी थी,,, रजनी का दिल जोरो से तड़प रहा था क्योंकि अब महा मुकाबला शुरू होने वाला था वह झोपड़ी के अंदर की बड़े से लकड़ी को पकड़ कर झुकी हुई थी उसकी गांड हवा में लहरा रही थी और अंकित उसकी गुलाबी छेद को देखकर अपने लंड के सुपाड़े पर ढेर सारा थूक लगा रहा था और फिर उसकी गुलाबी बुर पर भी ढेर सारा थूक लगाकर उसे चिकनाहट देने लगा,,, और इस तरह की हरकत पर भी रजनी की हालत खराब हो रही थी क्योंकि वह अपनी उंगलियों से उसकी बुर को कुरेद रहा था। दोनों के अंगों को बराबर चिकना कर लेने के बाद अंकित धीरे से अपने लंड को पकड़ कर, उसके मोटे सुपाड़े को रजनी के गुलाबी बुर पर सटा दिया,,, दहकता हुआ लंड का सुपाड़ा इस समय रजनी को ऐसा महसूस हो रहा था कि मानो जैसे गर्म लोहे का रोड उसकी बुर से सटा दिया हो। वह एकदम से गनगना गई उसकी गांड हल्की सी ऊपर उठ गई थी जिसे अंकित अपनी हथेली का दबाव उसे पर बना कर फिर से उसे व्यवस्थित कर दिया और फिर धीरे-धीरे उसे अंदर की तरफ ठेलने लगा,,,,।



वाकई में रजनी की बुर एकदम कसी हुई थी,,, इसका एहसास अंकित को हो गया था इसलिए वह रजनी से बोला।

पहले कभी चुदवाई नहीं हो क्या,,,?

धत्,,,,,,, बिल्कुल भी नहीं,,,,,(अंकित की बात को रजनी एकदम से जानकारी दी थी और इस बात की खुशी उसके चेहरे पर एकदम साफ दिखाई दे रही थी कि अंकित को लग रहा था कि उसकी बुर में उसका लंड पहली बार घुसने जा रहा है जबकि सब चाहिए थी कि वह दो-तीन बार मजे ले चुकी थी लेकिन अंकित जैसा लंड नहीं ली थी,,,, रजनी का जवाब सुनकर अंकित अपना प्रयास जारी रखते हुए बोला।)

बाप रे तभी तो एकदम कसी हुई है,,,, अच्छा हुआ कि तुम सुहागरात के पहले मुझे मिल गई वरना तुम्हारा पति तो बिल्कुल भी रहम नहीं करता और तुम्हें बहुत दर्द होता लेकिन देखना मैं तुम्हें ऐसे करूंगा कि दर्द का मजा ज्यादा आएगा,,,,,(अपनी चिकनी चुपड़ी बातों में रजनी को उलझाते हुए अंकित आगे बढ़ रहा था,,, गुलाबी बुर की गुलाबी पत्तियों को खोलता हुआ अंकित के लंड का सुपाड़ा धीरे-धीरे आगे की तरफ चिकनाहट पाकर सरक रहा था,,,, जैसे-जैसे सुपाड़ा अंदर की तरफ सरक रहा था वैसे-वैसे रजनी की हालत खराब होती जा रही थी उसे दर्द का एहसास हो रहा था,,,, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था,,, अंकित आज बिना मजा लिए उसे छोड़ने वाला नहीं था बारिश भी उसका पूरा साथ दे रही थी,,, देखते देखते वह अपने संपूर्ण सुपाड़े को बुर के अंदर सरकाने में सफल हो गया,,, रजनी की सांस ऊपर नीचे हो रही थी वह कस के लकड़े को पकड़े हुए खड़ी थी,,,, उसने कभी सपने में भी नहीं सोची थी की शादी वाले दिन ही वह मोहल्ले के ही लड़के से चुदवाएगी,,,, सुपाड़ा घुस चुका था रजनी काफी हिम्मत वाली थी क्योंकि वह दर्द को बर्दाश्त कर ले गई थी,,,, अंकित लंड पर से अपने हाथ को हटाकर दोनों हाथों से उसकी चिकनी कमर को थाम लिया था। और फिर धीरे-धीरे थोड़ा बहुत प्रयास करके लंड के सुपाड़े को और अंदर डालने की कोशिश कर रहा था,,, थोड़ा-थोड़ा लंड अंदर की तरफ जा रहा था। अंकित चालाकी दिखाते हुए जितना घुसा था उतना ही थोड़ा सा बाहर निकाल कर उतना ही अंदर डालकर अपनी कमर धीरे-धीरे हीला रहा था। इतने से ही रजनी को मजा आ रहा था उसके चेहरे के हाव-भाव बदलते जा रहे थे गोरा मुखड़ा टमाटर की तरह लाल हो चुका था।



सामाजिक तौर पर देखा जाए तो रजनी अपनी वैवाहिक जीवन की शुरुआत के दिन ही गैर मर्द के साथ संबंध बना रही थी जो कि यह पूरी तरह से अपने पति के प्रति समर्पण नहीं बल्कि, छिनर पन था क्योंकि शादी वाले दिन ही वह मजा ले रही थी,,,, लगातार रजनी की बुर अंदर से पसीज रही थी जो की चिकनाहट का काम कर रही थी और चिकनाहट पाकर अंकित का मोटा लंड धीरे-धीरे अंदर की तरफ सरक रहा था। अंकित का हौसला बढ़ रहा था और फिर अंकित ने थोड़ा दम लगाया और इस बार उसका आधा लंड घुस गया लेकिन आधा लंड घुसने से रजनी के मुंह से हल्की सी कराने की आवाज निकल गई,,,।

आहहहहह धीरे से,,,,,,,

कोई बात नहीं रजनी बस थोड़ा सा और बाकी तुम हो बहुत खूबसूरत तुम्हारा नंगा बदन तो और भी ज्यादा खूबसूरत है देखना कल रात को जब तुम्हारा पति तुम्हारे कपड़े उतार कर नंगी करेगा तो वह तुम्हें देखता ही रह जाएगा पहली रात से ही वह तुम्हारा गुलाम बन जाएगा,,,,,,(इस तरह की बातें करके अंकित रजनी को बहला रहा था,,,, अंकित के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर दर्द में भी रजनी के चेहरे पर उत्तेजना के साथ-साथ प्रसन्नता के भाव नजर आ रहे थे उसे अच्छा लग रहा था इस तरह से अंकित के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनना इस बार अंकित ने ज्यादा देर नहीं लगाया और रजनी की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर जोरदार धक्का लगाया और उसका लंड कचकचा कर बुर के अंदरूनी गलियारे में सारी अडचनो को दूर करता हुआ एकदम से जाकर उसके बच्चेदानी से टकरा गया इस पर रजनी के मुंह से जोरदार चीख निकल गई लेकिन अच्छा हुआ की बारिश का शोर होने की वजह से उसकी आवाज कोई सुन नहीं सकता था इसीलिए तो अंकित भी निश्चिंत था लेकिन वह जानता था कि उसकी हरकत से रजनी को दर्द हो रहा है इसलिए वह एकदम से रुक गया और रजनी की नंगी चिकनी पीठ को सहलाने लगा और बोला,,,,।

रजनी की चुदाई



बस बस हो गया रजनी चिंता मत करो पूरा घुस गया है तुम तो कमाल की लड़की हो,,,,।

आहहहहह मुस्कुराने जाना है जल्दी से इसे निकालो,,, तुम तो मेरी फाड़ डालें मैं अपने पति को क्या मुंह दिखाऊंगी अगर वह मेरी फटी हुई बुर देखेगा तो,,,,,आहहहहहह मुझसे रहा नहीं जा रहा है जल्दी से निकालो इसे,,,।

अरे कुछ भी नहीं हुआ है चिंता मत करो तुम्हारी बुर सलामत है एकदम मखमल की तरह,,,, कुछ भी नहीं हुआ है अभी यह दर्द खत्म हो जाएगा रुको,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित दोनों हाथों को आगे की तरफ ले आया और रजनी के दोनों अमरुद को पकड़ कर दबाते हुए उसकी पीठ पर चुंबनों की बारिश करने लगा अंकित औरत को संभालना अच्छी तरह से जानता था वह इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि अगर इस बार वह रजनी की बुर से अपने लंड को बाहर निकाल दिया तो रजनी उसे दोबारा कभी डालने नहीं देगी,,,,,, इसलिए जल्दबाजी से नहीं बल्कि अंकित समझदारी से काम लेना चाहता था लगातार रजनी के मुंह से दर्द से करने की आवाज निकल रही थी लेकिन इस बीच अंकित उसके दर्द को कम करने की कोशिश करते हुए उसकी चूचियों को हल्के हल्के दबा रहा था मसल रहा था और पीठ पर चुंबनों की बारिश किए हुए था। अब वह रजनी के बुर में घुसे हुए अपने लंड में किसी प्रकार की हरकत नहीं कर रहा था,,,, धीरे-धीरे अंकित की मेहनत रंग लाने लगी और रजनी के मुंह से आ रही दर्द से कराहने की आवाज कम होने लगी। मौका देखकर अंकित अपने लंड को धीरे-धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया वह रजनी को चोदना शुरू कर दिया था देखते ही देखते रजनी का दर्द पूरी तरह से गायब हो गया और उसके मुख से गरमा गरम शिकारी की आवाज फूटने लगी जिसे वह खुद दबाने की कोशिश नहीं कर रही थी क्योंकि वह जानती थी कि यहां पर उसकी मदहोशी भरी आवाज को सुनने वाला कोई नहीं था,,,, देखते ही देखते अंकित के धक्के तेज होने लगे हर धक्के के साथ रजनी के मुंह से मदहोश कर देने वाली आवाज निकल रही थी जिसे सुनकर अंकित का जोश बढ़ता जा रहा था अंकीत लगातार उसकी दोनों चूचियों को पकड़ कर लगाम की तरह कस रहा था और पीछे से उसे पेल रहा था,,,, रजनी भी हैरान थी क्योंकि इतना मोटा तगड़ा लंबा लंड बड़े आराम से उसकी बुर के अंदर बाहर हो रहा था,,,,,।

अब कैसा लग रहा है रजनी,,,?

पूछो मत बहुत अच्छा लग रहा है मैं तो डर रही थी कि आज तो मेरी फाड़ ही डालोगी फिर मैं अपने पति को क्या मुंह दिखाऊंगी।

तुम खामखा डर रही थी देखो वैसा कुछ भी नहीं हुआ है तुम जैसी मुझे दी हो वैसे ही एकदम मक्खन की तरह अब देखो कितने आराम से तुम मेरे मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर में ले रही हो,,, (अंकित रजनी की कमर में अपनी कमर को हिलता हुआ बोला)

सहहहह आहहहहह,,,,,,,,,ऊमममममममम,,,,,, कुछ ज्यादा ही मोटा है तुम्हारा।

तभी तो तुम इतना मजा आ रहा है सच कहूं तो मर्द के पास इतना मोटा और लंबा लंड हो तो औरत गुलाम बन जाती है,,,,, तभी तो मुझे भी मजा आ रहा है तुम्हें चोदने में,,,, तुम्हारी शादी तो मेरे साथ होनी चाहिए थी दिन रात तुम्हें मजा देता,,,,,।

(अंकित किस बात पर रजनी कुछ बोल नहीं पाई बस मजा लेती रही वाकई में उसे बहुत मजा मिल रहा था अंकित का मोटा तगड़ा लंड रगड़ रगड़ कर अंदर बाहर हो रहा था,,,,, अंकित जोर-जोर से अपनी कमर हिला रहा था,,, हर धक्के के साथ रजनी पस्त हो जा रही थी अगर वह उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़े ना होता तो रजनी उसके एक धक्के को भी सहने लायक नहीं थी,,,,,, कुछ देर तक अंकित इसी तरह से खड़े-खड़े ही उसकी चुदाई करता रहा लेकिन अब आसन बदलना चाहता था,,, इसलिए वह धीरे से रजनी की बुर में से अपने लंड को बाहर निकाल लिया,,,,, रजनी को इतना मजा आ रहा था कि अंकित की हरकत पर वह थोड़ा सा अंदर ही अंदर गुस्सा होने लगी क्योंकि उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह बाहर क्यों निकाल दिया लेकिन अगले ही पल जब वह देखी कि वह अंदर बिछी हुई घास में पीठ के बल लेट गया था और अपने लंड को हिला रहा था तो उसके इशारे को वह समझ गई थी,,,।

लेकिन इस क्रिया को करने में वह शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी वह कुछ देर तक इसी तरह से खड़ी रही तो अंकित खुद हाथ आगे बढ़ाकर उसका हाथ थाम लिया और उसे अपनी तरफ खींचने लगा,,,, रजनी भी जानती थी कि अब शर्म करने से कोई फायदा नहीं है इसलिए वह भी व्यवस्थित जगह बनाकर अंकित के लंड के ऊपर अपनी गुलाबी बर को रखकर अपनी गांड का दबाव उसे पर बनाने लगी और देखते ही देखते अंकित का मोटा तगड़ा है उसकी बुर की गहराई में खो गया और अंकित उसकी दोनों चूचियों को पकड़ कर नीचे से धक्का लगने लगा इसके जवाब में रजनी जोर-जोर से अपनी गांड को उसके लंड पर पटकना शुरू कर दी दोनों आनंदित हो उठे दोनों को बहुत मजा आ रहा था। रजनी संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था में इस क्रिया को करते हुए एकदम छिनार लग रही थी,,,, अंकित को ऐसी ही लड़कियां ज्यादा पसंद करती लेकिन इस बात से वह इनकार नहीं कर पा रहा था कि सुमन से ज्यादा मजा रजनी दे रही थी,,,,,, धीरे-धीरे बारिश का जोर काटने लगा था और झोपड़ी के अंदर अंकित और रजनी अपने चरम सुख की तरफ बढ़ते चले जा रहे थे जब ऐसा लगने लगा कि आप अंकित का पानी निकल जाएगा वह धीरे से रजनी की जगह को पड़कर उसे एकदम से रोक दिया और अपने लंड को बाहर की तरफ खींचकर सुखी घास में उसे पीठ के बल लेटा दिया,,,, उसकी दोनों टांगों को खोलकर वह एकदम से उसके ऊपर छा गया और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा बिल्कुल इस तरह जैसा कि रजनी ने कमरे के अंदर अपनी भाभी को अंकित के साथ देखी थी रजनी मदहोश में जा रही थी मस्त हो जा रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था और देखते ही देखते दोनों एक दूसरे की बाहों में बाहें डालकर झड़ना शुरू कर दिए,,,,।

रजनी एकदम मस्त हो चुकी थी सुहागरात से पहले वह सुहागरात के टेस्ट में पास हो चुकी थी। बारिश का जोर घटने लगा था वासना का तूफान शांत होने लगा था और वह दोनों अपने-अपने कपड़े पहनने लगे थे,,,,, बारिश पूरी तरह से शांत नहीं हुई थी झिलमिल झिलमिल बरस रही थी लेकिन उनकी जानता था कि अब उसे निकलना पड़ेगा इसलिए वह रजनी से बोला।

अब हमें चलना चाहिए काफी देर हो गई है,,,।

तुम ठीक कह रहे हो लेकिन जो कुछ भी यहां हुआ इस बारे में किसी को मत बताना वरना मैं बदनाम हो जाऊंगी,,,,

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मैं भी एक टीचर का लड़का हूं अगर इस तरह की बातें समझ में फैलने लगी तो मैं भी तो बदनाम हो जाऊंगा इसलिए तुम फिकर मत करो यह राज राज ही रहेगा,,,,।

(दोनों मोटरसाइकिल पर बैठकर घर की तरफ निकल गए थे लेकिन जैसे-जैसे आगे बढ़ रहे थे आगे बारिश का जोर एकदम कम था जितनी बारिश उन दोनों जहां रुके थे वहां हो रही थी इतनी बारिश यहां बिल्कुल भी नहीं थी यह देखकर अंकित और रजनी दोनों राहत के साथ लेने लगे क्योंकि शादी का माहौल है ऐसे में इतनी तेज बारिश मुसीबत खड़ा कर सकती थी थोड़ी देर में दोनों घर पर पहुंच चुके थे यहां पर भी बारिश हुई थी लेकिन हल्की-फुल्की कोई ज्यादा दिक्कत नहीं आई थी इसके बाद मोटरसाइकिल रखकर अंकित अपने घर पर चला गया और शाम को सही समय पर अपनी मां के साथ शादी में हाजिर हो गया जैसा उसकी मां चाह रही थी वैसा ही हुआ वाकई में सभी क्या आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी सुगंधा अंकित का तो काम हो चुका था शर्मा जी के घर की बहू और उसकी बेटी दोनों की जमकर चुदाई कर चुका था दोनों की जवानी का मजा चक चुका था इस शादी का सबसे बड़ा फायदा इस को हुआ था इसके बाद बरात आने से लेकर के बारात की विदाई तक अंकित वहीं रुक रहा और सभी रस्मों में वह बराबर का मदद करता रहा,,,,,।
 
Back
Top