तवे पर रखी हुई रोटी जल चुकी थी लेकिन मां बेटे दोनों की जवानी की तपन संभोग की शीतलता से बुझ चुकी थी,,,यह मायने नहीं रखता कि संभोग किस जगह पर हो रहा है किस तरीके से हो रहा है यह मायने रखता है जगह कोई भी हो आनंद की जो सीमा होती है वह कम नहीं होनी चाहिए और यही मां बेटे दोनों के साथ हो रही थी,,, लेकिन सुगंधा के लिएजगह बहुत मायने रखती थी क्योंकि अब तक वह अपने ही स्वयं कक्षा में अपने पति के साथ संभोग का सुख प्राप्त कर चुकी थी और कोई दूसरी जगह नहीं थी जहां पर वह चुदाई का मजा ले चुकी हो लेकिन अपने बेटे के साथ हम बिस्तर होने के बाद अंकित जगह बदल रहा था अपनी मां की चुदाई करने के लिए,,,,, रात भर वह जमकर अपनी मां के कमरे में उसके ही बिस्तर पर उसकी चुदाई कर चुका था लेकिन सुबह-सुबह रसोई घर में वह अपनी मां के उभरे हुए नितम्बों को देखकर उत्तेजित हो गया था नतीजन यह हुआ किरसोई घर में ही वह अपनी मां की साड़ी उठाकर उसकी जमकर चुदाई कर चुका था और इस चुदाई के दौरान तवे पर रखी हुई रोटी पूरी तरह से चल चुकी थी जिसका एहसास सुगंधा को तब हुआ जब उसके सर से वासना का तूफान गुजर चुका था।वह एकदम से अपनी साड़ी नीचे किए हुए ही तवे पर रखी हुई रोटी को चिमटी से उठाने की कोशिश करते हुए बोली।
हाय दइया यह क्या हो गया तेरी वजह से देख रोटी जल गई,,,,,,।
अब इसमें मैं क्या कर सकता हूं,,,(अपनी मां की साड़ी से अपने लंड को साफ करते हुए) तुम्हारी गरम भट्टीमैं वैसे ही मेरा लंड पिघल चुका है तो तवे पर रोटी जल गई इसमें कौन सी बड़ी बात है।
तू सच में बहुत हारामी है,,,(तवे पर से जली हुई रोटी को चिमटी से पकड़कर उतारते हुए) मैं कभी सोचा नहीं थी की रसोई घर में तु इस तरह की हरकत कर देगा,,,,।
तुम चीज ही ऐसी हो कि कहीं भी तुम्हारे साथ यह सब करने का मन करेगा,,,,।
एक ही रात में तुझे मैं ऐसी चीज लगने लगी,,,(दूसरी रोटी को तवे पर रखते हुए हालांकि अभी भी उसकी साड़ी कमर तक उठी हुई थी और वह रोटी पकाने में लग गई थीउसे इस बात का आवाज तक नहीं हुआ था कि उसकी साड़ी कमर तक उठी हुई और उसकी बड़ी-बड़ी गांड एकदम से उजागर है उसके बेटे की आंखों के सामने जिसे देखकर ही वह रसोई घर में उसे चोदने के लिए आया था और चुदाई कर चुका था,,, अपनी मां की बात सुनकर मुस्कुराते हुएअंकित अपनी पैंट और अंडरवियर दोनों को एक साथ ऊपर की तरफ खींचते हुए,,,)
तुम हमेशा से ऐसे ही चीज थी लेकिन हिम्मत नहीं होती थी आगे बढ़ने की,,,,
और अब,,,,(मुस्कुराते हुए अंकित की तरफ देखते हुए)
अब तो जब चाहे तब तुम्हारे साथ कुछ भी कर सकता हूं,,,(पेंट की बटन बंद करके चैन को ऊपर की तरफ खींचते हुए अंकित बोला,,,,)
लेकिन अब यह नहीं चलेगा तूने मेरी कमर तोड़ दिया है चलने में भी दिक्कत होने लगी है,,,,।
अब इसमें मैं क्या कर सकता हूं तुम हो ही इतनी खूबसूरत कि तुम्हें देखकर ही लंड खड़ा हो जाता है,,,,।
चल अब रहने देना यह,, कुछ ज्यादा ही ,(अपने बेटे की पेंट की तरफ जो कि अभी भी उसमें तंबू बना हुआ था देखते हुए) खड़ा हो रहा है इसे बैठे रहने को बोल जब यह खड़ा हो जाता है तो मुझे दिक्कत आ जाती है।
मजा भी तो तुम्हें ज्यादा देता है,,,।
नहीं चाहिए मुझे मजा तुझे पता है सुबह से मेरी दर्द कर रही है,,,,.
क्या दर्द कर रही है,,(अपनी मम्मी के कहने के मतलब को अंकित समझ गया था इसलिए मुस्कुराते हुए शरारत भरी नजर से अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला तो उसकी मां के भी चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई और वह शर्मा कर तवे की तरफ देखने लगी) बताओ क्या दर्द कर रही है,,,,
तू अच्छी तरह से जानता है कि क्या दर्द कर रही है,, इसलिए मैं नहीं बोलने वाली ,,, लेकिन मैं साफ-साफ बता दूं कि अभी दोबारा कुछ भी नहीं होने दूंगी,,,(तवे पर फूली हुई रोटी को फिर से चिमटी से पकड़ कर उसे थाली में रखते हुए,,,)
चलो अच्छा मैं तुम्हारी बात मान रहा हूं लेकिन बता दो जो की क्या दर्द कर रही है,,,।
अब तू जाता है कि,,,(हाथ में लिया हुआ बैलन अपने बेटे की तरफ दिखाते हुए,,)
उससे भी अच्छा मेरे पास है और यह बात तुम अच्छी तरह से जानती हो,,,(बेलन की तरफ देखते हुए अंकित अपनी मां से बोल तो उसकी मां शर्म से अपनी नजर को नीचे झुका ली और उसकी बात सुनकर बोली,,,)
मैं जानती हूं तु कितना बड़ा मर्द है,,,।
रात भर अच्छी तरह एहसास जो कराया हूं पता तो चल ही गया होगा।
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा फिर से शर्मा गई,,, इन सब बातों नहीं पर फिर से उसकी बुर को गीली करना शुरू कर दिया था,,, और इसीलिए वह चाहती थी कि उसका बेटा वहां से चला जाएक्योंकि वह जानती थी कि अगर ऐसी हालत में फिर से उसके बेटे ने हरकत करना शुरू किया तो वह फिर से इनकार नहीं कर पाएगी इसलिए थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)
अच्छा यहां से जाता है कि नहीं की मार खा कर ही जाएगा मुझे खाना बनाने दे, वैसे भी देर हो गई है।
जाता हूं जाता हूंलेकिन एक बार बात तो दो अपने मुंह से की क्या दर्द कर रही है और जब तक नहीं बताओगी तब तक मैं नहीं जाऊंगा इसी तरह से परेशान करता रहूंगा।
सच में तु बहुत शैतान हो गया है,,,,(गुस्से से बेलन को पटकते हुए वह अंकित की तरफ देखते हुए बोली लेकिन इसका अंकित पर बिल्कुल भी प्रभाव नहीं पड़ा हुआ मुस्कुराता हुआ अपनी मां से फिर से बोला)
जब तक नहीं बताओगी तब तक मैं यहीं खड़ा रहूंगा,,,,।
(सुगंधा समझ गई थी कि वह मानने वाला नहीं हैऔर वैसे भी उसके और उसके बेटे के बीच में कोई भी पर्दा बाकी नहीं रह गया था इसलिए वह थोड़ी हिम्मत दिखाते हुए बोली,,,)
तू सुने बिना नहीं जाएगा ना,,,,।
बिल्कुल भी नहीं।
तो सुन,,,, रात भर जो तूने किया है उसकी वजह से मेरी,,,बबबबबुर दर्द कर रही है,,,(इतना कहते ही वह गर्म तवे की तरफ देखते हुए गहरी गहरी सांसें लेने लगी वह शर्म से पानी पानी हो गई थी।क्योंकि औरत होने के नाते उसे इस तरह के शब्दों का प्रयोग खुले तौर पर करना शोभा नहीं देता था और ना ही उसने इस तरह के शब्दों का प्रयोग कभी की थी लेकिन एक हीं रात में, सब कुछ बदल गया था मां बेटे के बीच की दूरियां पूरी तरह से कम हो चुकी थी एक ही रात में मां बेटे के बोलने का ढंग पूरी तरह से बदल चुका था लेकिन एक औरत होने के नाते वाकई में सुगंधा के मुंह से इस तरह के शब्दों का प्रयोग खुद सुगंधा के लिए शर्म जनक महसूस करा रहा था,,,, इसीलिए तो सुगंधा शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी।उसे इस बात का एहसास था कि रात को अपने बेटे के साथ चुदवाते समय वह इस तरह के शब्दों का प्रयोग खुलकर की थी,,,अपने बेटे के मर्दाना अंग का भी नाम उसने खुलकर ली थी और अपने भी खूबसूरत अंग का नाम उसने बेखुदी बेशर्मी की हद पार करते हुए ली थी लेकिन इस समय की बात कुछ और थी इसलिए उसके चेहरे पर अपने ही अंग का नाम लेने पर उत्तेजना और शर्म के भाव साफ दिखाई दे रहे थे। वह फिर से अपने बेटे से नजर नहीं मिला पा रही थी,,, वह किचन के प्लेटफार्म को पकड़कर गहरी गहरी सांस ले रही थी इस बात से अनजान की उसकीसाड़ी अभी भी कमर तक कुछ हुई है उसकी नंगी गांड अभी भी पूरी तरह से उजागर है अंकित धीरे से अपनी मां की तरफ आगे बढ़ा इस एहसास से सुगंधा का दिल फिर से जोरों से धड़कने लगा। उसे लगने लगा कि फिर से उसका बेटा उसके साथ शरारत करेगा। और ऐसा ही हुआ अगले ही पर सुगंधा को अपने बेटे की हथेली अपनी गांड पर महसूस हुई और उसका दिल धक्क से करके रह गया,,, उसे एहसास हुआ कि उसकी गांड नंगी है,,,, वह कुछ समझ पाती या कुछ कह पाती इससे पहले ही,,अंकित उत्तेजना से भरते हुए अपनी मां की नंगी गांड को अपनी हथेली में जोर से दबाते हुए बोला,,,)
इस तरह से नंगी गांड दिखाओगी तो भला मुझसे सब्र कैसे होगा,,,,(और इतना कह कर अंकित मुस्कुराता हुआ रसोई घर से बाहर निकल गया लेकिन उसने अपनी मां की साड़ी को कमर से नीचे गिराने की बिल्कुल भी तस्दी नहीं लिया,,,,,गहरी सांस लेते हुए सुगंधा अंकित को रसोई घर से बाहर जाते हुए देखती रही और अपनी हरकत पर अपने ही आप वह थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए अपने आप से ही बोलीयह कैसी बेशर्मी है की गांड पीछे से खुली हुई है और खुद को पता नहीं चल रहा है।इतना अपने आप से कहते हुए वह खुद से अपनी साड़ी को दोनों हाथों से पकड़ी और उसे व्यवस्थित करते हुए अपने कदमों में नीचे गिरा दी और एक खूबसूरत दृश्य पर पर्दा पड़ गया,,,, सुगंधा पूरी तरह से बदल चुकी थी उसके चेहरे का रंग बेशर्मी से लाल हो चुका था। उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि जिंदगी का असली सुख किसमे है,,, अपने बदलाव पर उसे जरा भी पछतावा नहीं हो रहा था बल्कि इस बदलाव से वह बेहद खुश नजर आ रही थी।
अंकित अपने कमरे में लेटा हुआ था वह अपनी मां के बारे में सोच रहा थाएक ही रात में उसकी मां ने उसे कितना मजा दी थी उसकी बड़ी-बड़ी गांड बड़ी बड़ी चुचीया वाकई में सबसे अलग थी इस उम्र में भी उसे अपनी मां की बुर का कसाव अच्छी तरह से महसूस हुआ था इतना कसाव तो उसे अपनी नानी और सुमन की मां की बुर में बिल्कुल भी महसूस नहीं हुआ था,,,, अंकित समझ गया था कि अब वह अपनी मां को चोदे बिना बिल्कुल भी नहीं रह सकता। वह भी अपनी मां की तड़प देखना चाहता थावह देखना चाहता था कि उसके बिना उसकी मां रह सकती है कि नहीं एक औरत के मन को अच्छी तरह से समझ चुका था वह जानता था कि एक रात में इतनी जबरदस्त चुदाई करवाने के बाद उसकी मां की बुर बिना लंड लिए शांत रहने वाली नहीं है इसलिए वह अपने मन में निश्चय किया कि वह अभी कुछ नहीं करेगा और वह देखेगा कि उसकी मां उसका लंड लेने के लिए कितना तड़पती है । ऐसा निश्चय करके वह मन ही मन खुश होने लगा,,,, खुशी इस बात की थी कि वह अच्छी तरह से जानता था किअभी बहुत दिन तक उन दोनों को घर में अकेला ही रहना था किसी तीसरे की मौजूदगी की आशंका भी नहीं थी और एक ही रात में अपनी मां की जबरदस्त चुदाई करने के बाद वह जानता था कि उसकी मां बिना चुदवाए नहीं रह सकती है इसलिए निश्चित हो चुका था इस बात से की उसकी मां की बुर उसे मिलना ही है।
थोड़ी ही देर में खाना बन चुका था,,, लेकिन अभी खाने का समय नहीं हुआ था इसलिए सुगंधा कुछ देर तक बाहर टहल लेना चाहती थी इसलिए वह खाना बना कर,, अंकित के कमरे पर आई और दरवाजे पर खड़ी होकर बोलि।
अभी मैं थोड़ी देर में आती हूं तब हम दोनों साथ में मिलकर खाना खाएंगे।
कहां जा रही हो?
यही पड़ोस में होकर आती हुं,,,।
ठीक है लेकिन जल्दी आ जाना,,,,
एहहह है,,,, लगता है कि रहा नहीं जा रहा है,,,।(सुगंधा इतराते हुए बोली)
बात तो बिल्कुल सही है तुम जिसको भी मिल जाओ उसे तुम्हें चोदे बिना कैसे चैन मिलेगा।
जब देखो तब एक ही बात दिमाग में घूमती रहती है,,(इतना कहकर मुस्कुराते हुए वह घर से बाहर निकल गई,,,,,, एक घंटा बीता होगा सुगंधा घर पर वापस आ चुकी थी अच्छी तो दरवाजा इस तरह से खुला हुआ था और वह अंदर आईऔर अंकित के कमरे के पास पहुंची तो देखी वह गहरी नींद में सो रहा था,,,, अंकित की तरफ देखते ही सुगंधा के चेहरे पर संतुष्टि भरा एहसास जगमगाने लगाअपने बेटे की मासूम चेहरे को देखकर उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह रात वाला अंकित है इसके भोले चेहरे को देखकर कोई बोल ही नहीं सकता कि इसके अंदर इतना बड़ा शैतान छुपा हुआ है ईसके पास इतना मोटा और लंबा लंड है कि किसी भी औरत की चीख निकाल दे,,,,अपने बेटे के कमरे के पास खड़ी होकर एक बार फिर से उसका मन बहकने लगा,, फिर से उसकी बुर में पानी की बाढ़ आने लगीऔर वह चाहती थी कि इस समय उसका बेटा नींद से उठकर उसे पूरी तरह से अपनी बाहों में लेकर बिस्तर पर पटक पटक कर उसकी चुदाई करें और इसलिए वह अपने बेटे के कमरे में प्रवेश की और उसे जगाने की कोशिश करने लगी एक मर्द कोअपनी तरफ आकर्षित करने की कला एक औरत होने के नाते उसे अच्छी तरह से मालूम थी इसलिए वह तुरंत अपने ब्लाउज के ऊपर के दोनों बटन को खोल दे ताकि उसकी चूची का अच्छा खासा हिस्सा उसके बेटे को नजर आए, और गहरी सांस लेते हुए अपने बेटे के बिस्तर के करीब पहुंच गई,,,।
बाहर का दरवाजा बंद कर चुकी थी लेकिन कैमरे का दरवाजा खुला था क्योंकि किसी तीसरे के आने की आशंका तब तक बिल्कुल भी नहीं थी जब तक की घर का मुख्य द्वार खुला ना हो जो कि उसे वह अपने हाथों से बंद कर चुकी थी,,,, वह धीरे से अपने बेटे की तरह तो बिस्तर पर झुकी और धीरे से बोली,,।
अंकित,,,, क्या हुआ इतनी जल्दी सो गया क्या,,,? अंकित,,,(इतना कहते हुए वह उसका हाथ पकड़ कर उसे झक्कोर कर जगाने लगी,,, और तुरंत ही अंकित की आंख खुल गई और वह अंगड़ाई लेता हुआ अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला,,,)
तुम आ गई मम्मी बहुत देर लगा दी,,,(अपनी आंखों को मिंजते हुए वह अपनी मां की तरफ देखते हुए खुला और उसके ब्लाउज का दो-दो खुला बटन देखकर अगले ही पल अंकित की टांगों के बीच सुरसुराहट होने लगी,,,)
देर कहां लगा दी एक ही घंटा तो हुआ है जल्दी आ गई,,, क्योंकि मुझे मालूम था कि तुझे भूख लगी है,,,।
वह तो लगी है,,,(इतना कहकर वह अपनी मां की चूचियों की तरह देखने लगाउसका मन कर रहा था कितनी मां की चूची हो को दोनों हाथों से पकड़ कर जोर-जोर से दबाए और उसे अपने मुंह में लेकर उसका सारा दूध पी जाए लेकिन वह देखना चाहता था कि उसकी मां कीस हद तक तड़पती है,,, और उसके सोचने के मुताबिक ही सुगंधा अपनी साड़ी का पल्लू भीजानबूझकर अपने कंधे से नीचे गिरा दी ताकि उसकी चुचियों का नजारा उसके बेटे को भरपूर दिखाई दे अंकित समझ रहा था कि उसकी मां ही जानबूझकर शाडी के पल्लू को भी नीचे गिराई है लेकिन वह इस बात से अनजान बनना चाहता थाक्योंकि वह अपनी मां को तड़पाना चाहता था उसकी तरफ देखना चाहता था पर एक औरत को तड़पने के बाद जब उसकी चुदाई की जाती है तब उसे चोदने का मजा ही कुछ और होता है,,, इस बात को अंकीत-अच्छी तरह से जानता था इसलिए वह अपनी मां से बोला,,,)
तुम जल्दी से खाना लगाओ मैं हाथ मुंह धोकर आता हूं,,,(इतना कह कर वह धीरे से उठा और अपने बिस्तर से नीचे उतर गया और अपने कमरे से बाहर निकल गया उसकी मां अभी भी कमरे के अंदर थी सुगंधा उसे देखते ही रह गई,,, फिर उसे लगा के शायद नींद से उठने की वजह सेवह ठीक से ध्यान नहीं दे पाया इसलिए वह भी अपन बेटे के कमरे से बाहर निकल गई और खाना लगाने लगी,,,,थोड़ी देर में मां बेटे दोनों खाना खा रहे थे और सुगंध अपने बेटे का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए अपनी साड़ी को घुटनों तक उठाकर उसे मोड कर बैठी थी और खाना खा रही थी उसकी गोरी गोरी मांसल पिंडलियां एकदम साफ दिखाई दे रही थी,,,। सुगंधा अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने की भरपूर कोशिश कर रही थी। और ऐसा नहीं था कि उसका काम रूपउसके बेटे पर असर नहीं कर रहा था अंकित तो पागल हुआ जा रहा था अपनी मां को चोदने के लिए लेकिन वह थोड़ा सा अपने आप पर काबू किया हुआ था। सुगंधा हर एक कोशिश करके हार गई थीफिर उसे लगने लगा कि शायद रात भर की चुदाई और सुबह-सुबह जिस तरह से उसने दो बार उसकी चुदाई किया था हो सकता है कि वह थक गया हो वह थोड़ी निराश हुई।
दिन पूरी तरह से गुजर चुका था सुगंधा को बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था उसकी बुर में आग लगी हुई थी,,,वैसे तो वह अपने बेटे से पूरी तरह से खुल चुकी थी वह चाहती तो खुद ही उसके लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर सकती थी लेकिन सुबह रसोई घर में वह अपने बेटे से पहले ही कह चुकी थी कि थोड़ा दूर रहना क्योंकि उसकी वजह से उसकी बुर में दर्द हो रहा हैऔर अभी इस समय अगर वह अपने बेटे से इस तरह की हरकत करेगी तो उसका बेटा यही समझेगा कि उसकी मां ही एकदम चुडक्कड़ हैभले ही वह रात भर अपने बेटे के साथ बेशर्मी की सारी हदें पार करती थी लेकिन फिर भी उसे एक सीमा में रहना था इसलिए वह मजबूर हो चुकी थी और यही उधेड़बुन में दिन का भी समय निकल चुका था शाम होने वाली थी और उससे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था इसलिए वह अपने मन में एक तरकीब सोचने लगी,,,, वह अपने कमरे से बाहर निकली और अपने बेटे के कमरे के पास दरवाजे पर खड़ी हो गई वह देखी तो अंकित जाग रहा था सिर्फ बिस्तर पर लेटा हुआ था वह अंकित से बोली,,,।
जल्दी से तैयार हो जा बाजार चलना है,,,।
ठीक है मैं अभी तैयार हो जाता हूं,,,,,(इतना कहकर वह अपने बिस्तर पर उठकर बैठ गया, और गहरी सांस लेता हुआ वह अपनी मां के बारे में सोचने लगा कि किस तरह से खाना खाते समय उसे उठते समय उसकी मां पूरी तरह से उस पर अपना काम बाण चला रही थी और वह अपनी मां के कामबाण से घायल भी हुआ था लेकिन अपने आप पर काबू किए हुए था। उसे एहसास हो रहा था कि उसकी मां एक ही रात में कितनी बड़ी चुडक्कड़ हो चुकी थी,बरसों से मर्यादा में रहकर पूरी तरह से संस्कारी जीवन गुजर रही थी और कहां एक ही रात में वह पूरी तरह से बेशर्म बन चुकी थी,,,, यह सब सोचते हुए उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगीएक तो अभी कुछ देर पहले ही भर नींद से ज्यादा था और नींद में होने की वजह से उसका लंड खड़ा था लेकिन अब उसे अपने लंड पर तरस नहीं आता था क्योंकि उसका जुगाड़ हो चुका था और घर में ही हो चुका था उसे शांत करने का रास्ता उसे मिल चुका था,,, पेंट के ऊपर से अपने लंड को सहलाते हुए वह धीरे से बिस्तर से उठकर खड़ा हो गया और अपने कमरे से बाहर आया,,, कमरे से बाहर आते हीवह पेशाब करने के लिए बाथरूम की तरफ जाने लगा लेकिन जैसे ही बाथरूम के पास पहुंचा और बाथरूम के अंदर का नजारा देखा तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई।
Ankit or uski ma
बाथरूम के अंदर उसकी मां पूरी तरह से निर्वस्त्र थी और नहा रही थी उसने बाथरूम का दरवाजा भी बंद नहीं की थी और वह शायद इसलिए कि अब दोनों के बीच किसी भी तरह का पर्दा नहीं था दोनों बेपर्दा हो चुके थे दोनों बेशर्म हो चुके थे इसलिए जहां पर बेशर्मी की सारी है तो पर कर चुकी हो वहां पर शर्म का पर्दा लगाने से कोई फायदा नहीं था अपनी मां का यह रूप देखकर वह पूरी तरह से पागल हो गया औरवह अपने आप पर काबू नहीं कर पाया उसकी मां अपने ऊपर पानी डालते हुए अंकित की तरफ ही देख रही थी और बेहद नशीली आंखों से उसे देख रही थी उसके होंठों में वासना का रस भरा हुआ था और वह उत्तेजना से अपने होंठ को अपने दांत से काट रही थी यह देखकर अंकित से बिल्कुल भी रहा नहीं गया और वह बेकाबू होने लगा।अंकित अच्छी तरह से जानता था की अपनी मां को इतना ज्यादा तड़पना उचित नहीं था उसे उसकी प्यास बुझाना ही था और यह उसका फर्ज भी था।इसलिए वह अपनी मां की आंखों के सामने ही अपने सारे वस्त्र उतार कर एकदम से नंगा हो गया उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा था अंदर नहा रही सुगंधा अपने बेटे के खड़े लंड को देखकर मन ही मन प्रसन्न होने लगी। और अपने मन में सोचने लगी कि उसकी यह युक्ति काम कर गई है।
दिन भर जो भी उसने अपने बेटे को अपनी तरफ लुभाने की पूरी कोशिश की थी वह पूरी तरह से नाकामयाब हो चुकी थी जिसके चलते उसके मन में लगने लगा था कि शायद रात भर की चुदाई से बात थक चुका हैऔर इसीलिए इस समय दिन भर की थकान उतारने के बाद उसका यह रूप देखकर एक बार फिर से उसका बेटा उसे चोदने के लिए तैयार हो चुका है। अपने बेटे की तरफ देखते हुए सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली।
तू भी नहाएगा क्या,,,,
तुम्हें इस तरह से नहाते हुए देख कर मेरा मन भी तुम्हारे साथ नहाने को करने लगा है,,,,।
तो देर किस बात की है आज रोका किसने है,,,।
(अपनी मां का आमंत्रण पाते ही,,, अंकित बाथरूम में घुस गया और बाथरूम में घुसते ही अपनी मां को अपनी बाहों में जकड़ लिया,,,,,)
आहहहह यह क्या कर रहा है तू तो नहाने के लिए आया था ना,,,।
जब बाथरूम में तुम्हारी जैसी खूबसूरत जवानी से भरी हुई औरत नहा रही हो और वह भी नंगी होकर तो भला एक मर्द सिर्फ बाथरूम में नहाने के लिए तो आएगा नहीं,,,,।
मतलब,,,,(सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली)
मेरा मतलब है मेरी रानी,,,(इतना कहने के साथ हीअंकित अपनी मां को अपनी बाहों में एकदम कस के झगड़ा लिया जिसकी वजह से उसका खड़ा लंड उसकी दोनों टांगों के बीच सीधा उसकी बुर पर ठोकर मारने लगा,,,, सुगंधा एकदम से मदहोश हो गईऔर अंकित अपनी मां के लाल लाल होठों को अपने होठों में भरकर चूसना शुरू कर दिया और साथ ही उसकी तुने चूचियों को दबाना शुरू कर दिया नीचे से तो उसका लंड अपना काम कर ही रहा था,,,वैसे वह चाहता तो खड़े-खड़े ही अपनी मां की बुर में लंड डाल देता लेकिन वह थोड़ा मजा लेना चाहता था। उसकी मां भी दिन भर चुदवाने के लिए तड़प रही थी।इसलिए मौका मिलते ही वह तुरंत अपना हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने बेटे के लंड को पकड़ लिया और उसके गरम सुपाड़ा को अपनी गुलाबी बुर की दरार में रगड़ना शुरू कर दी यह एहसास अंकित को पागल कर रही थी और साथ ही उसकी मां को भी मदहोश बना रही थी।मां बेटे दोनों पागल हुए जा रहे थे अंकित लगातार अपनी मां के लाल-लाल होठों का रस चूस रहा था और उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को दबा रहा था उसकी मां भी पीछे हटने को बिल्कुल भी तैयार नहीं थी।
अंकित सहने जा रहा था अंकित अपनी मां के कंधों पर दोनों हाथ रखकर उसे नीचे की तरफ दबाने लगाउसके कंधों पर दबाव बनाते हुए वह उसे इशारा कर रहा था और शायद उसकी मां उसके इशारे को समझ गई थी इसलिए वह धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी थी और घुटनों के बाल बैठते ही अपने बेटे के खड़े लंड को अपने हाथ में पकड़ कर सीधा उसे अपने लाल-लाल होठों के बीच भरकर उसे चूसना शुरू कर दी थी,,, एकदम से अंकित मदहोश हो गया पागल हो गया वह बाथरूम की दीवार को दोनों तरफ से अपना हाथ फैला करअपने आप को स्थिर कर लिया था और अपनी आंखों को बंद करके धीरे-धीरे अपनी कमर को आगे पीछे करना शुरू कर दिया था उसकी मां भी एक ही रात में मानो जैसे पूरी पक्की खिलाड़ी बन चुकी थी वह अपने बेटे के लंड को पूरा का पूरा अपने गले तक उतार कर उसकी चुसाई कर रही थी। अपनी मां के इस कला से अंकित पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा थाइसलिए अपनी कमर हिलता हुआ कभी दीवार का सहारा ले ले रहा था तो कभी अपनी मां के साथ पर हाथ रख दे रहा था ऐसा करते हुए वह पूरी तरह से इस पल का आनंद ले रहा था,,,,,अंकित मदहोशी में अपनी आंखों को खोलकर अपनी मां के इस कामकला को देख रहा था वह देख रहा था कि उसकी मां कीतनी चुडक्कड़ और मस्तानी औरत बन चुकी है एक ही रात में उसने अपनी मां को क्या से क्या बना दिया और यही शायद उसकी जरूरत भी थी। घर को संभालने के साथ-साथ यह भी उसकी कला में शामिल थी बस वह अपनी ईस कला का प्रदर्शन नहीं कर पा रही थी,,शायद उसका कोई साथी ना होने की वजह से उसकी यह कल उसके अंदर ही विलुप्त होती चली जा रही थी लेकिन अब उसे एक साथी मिल चुका है अपने ही बेटे के रूप में जिसके साथ वह अपने काम कला को अच्छी तरीके से प्रदर्शित कर सकती थी और कर भी रही थी।
अंकित मदहोश हो चुका था बाथरूम के अंदर मां बेटे दोनों पूरी तरह से नंगे दोनों के बदन पर एक भी कपड़ा नहीं थाबाथरूम के दरवाजे को सुगंधा पहले से ही खुला छोड़ रखी थी ताकि उसकी नंगी जवानी उसका बेटा देख सके,,,वैसे भी अब घर के अंदर कमरे का दरवाजा हो या फिर बाथरूम का दरवाजा दोनों को बंद करने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं थी। सुगंधा का गला अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड से भर चुका था,,, जिससे उसे सांस लेने में थोड़ी तकलीफ भी हो रही थी लेकिन फिर भी वह अपने बेटे के लंड को अपने मुंह से निकालना नहीं चाहती थी। सुगंधा को भी बहुत मजा आ रहा थावह पागलों की तरह अपने बेटे के लंड को चूस रही थी, ऐसा लग रहा था कि जैसे आज के बाद उसे अपने बेटे का लंड मिलने वाला नहीं है। कुछ देर तक मां बेटे इसी तरह से मज़ा लेते रहे,, सुगंधा तो अपने बेटे के लंड को छोड़ना नहीं चाहती थी, लेकिन अंकित को इस बात का डर था कि कहीं उसका पानी न छूट जाए वह अपनी मां को छोड़ना चाहता था इसलिए वह धीरे से अपनी कमर को पीछे की तरफ खींचा और उसकी मां के मुंह में से उसका लंड बाहर निकल गया अंकित की ईस हरकत पर सुगंधा सवालिया नजर से उसकी तरफ देखने लगी,,,, वह कुछ समझ पाती इससे पहले ही अंकित उसका हाथ पकड़ कर उठने लगा सुगंधा का भी दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि उसे समझ में आ गया था कि अब कौन सा फपल आने वाला है,,,,।
Ankit or uski maa
अंकित उत्तेजित अवस्था में एक बार फिर से उसे अपनी बाहों में लेकर जकड़ दिया और उसकी नंगी गांड पर अपने दोनों हाथ रखकर जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया किस तरह से अंकित की उत्तेजना पूरी तरह से बढ़ती चली जा रही थी उसका लंड इतना कड़क हो चुका था मानों जैसे लोहे का रोड हो और वह सीधा उसकी मां की बुर पर दस्तक दे रहा था सुगंधा पागल हुए जा रही थी वह जल्द से जल्द अपने बेटे के लंड को अपनी बुर की गहराई में ले लेना चाहती थी,,,, इसलिए वह अपनी बुर को अपने बेटे के लंड पर गोल-गोल नचाकर उसे अंदर लेने की कोशिश कर रही थी,,, लेकिन जब उसका यह प्रयास सफल नहीं हुआतो वह अपना हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने बेटे के लंड को पकड़ कर उसे अपनी बुर का रास्ता दिखाने लगी,,,, अपनी मां की हरकत को देखकर अंकित उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच चुका था ।अंकीत समझ गया था कि उसकी मां कितनी बड़ी चुदक्कड़ हो चुकी है और यही तो वह चाहता था,,,, अपनी मां की उत्तेजना और उसकी विवशता को देखकर अंकित और ज्यादा मदहोश होने लगा,,, वह तुरंत अपनी मां को घूमाकर दीवार के सहारे खड़ी कर दिया ऐसे में उसकी मां की गांड ठीक उसके सामने थी,,,मां बेटे दोनों उत्तेजना से लाल हुए जा रहे थे । सुगंधा को मालूम था कि अब उसे क्या करना है इसलिए वह अपनी बड़ी-बड़ी गांड को अपने बेटे के आगे परोस दी थी ताकि उसका बेटा आराम से उसकी बुर में पीछे से लंड डाल सके।
Ankit aur uski ma kuchh is tarah se
अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड देखकर अंकित उत्तेजना से लाल हो गया और अपने लंड को पकड़कर उसके गुलाबी छेद में भिडा दिया तीन चार बार की चुदाई के बादअपने आप ही सुगंधा की बुर में अंकित के लंड का सांचा बन चुका था जिसकी बदौलत बड़े आराम सेअंकित का लंड उसकी मां की बुर में घुस गया और वह अपनी मां की कमर पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया सुगंधा एकदम गहरी सांस ली और फिर एकदम मस्त हो गईअंकित अपनी मां की चुदाई कर रहा था बाथरूम में एकदम नंगा होकरउसकी मां भी पूरी तरह से निर्वस्त्र थी उसकी बड़ी-बड़ी गांड उसकी उत्तेजना का कारण बनती जा रही थी,,,, अंकित अधिकतर अपनी मां की बड़ी गांड देखकर कहीं उत्तेजित हो जाता था। थोड़ी ही देर में सुगंध की गरमा गरम शिसकारी बाथरूम के साथ-साथ पूरे घर में गुंजने लगी,,,अंकित को बड़ा मजा आ रहा था अंकित बार-बार अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूची को दोनों हाथों से थाम ले रहा था और उसे दबाते हुए धक्के पे धक्का लगा रहा था।सुगंधा बेकाबू हो जा रही थी वह अपने बेटे के धक्के का जवाब धक्के से दे रही थीदोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी क्योंकि अब होठों का काम लंड और बुर ने अपने सर पर ले लिया था वही दोनों आपस में बातें कर रहे थे वही दोनों आपस में भिड़ रहे थे वही दोनों एक दूसरे को जवाब दे रहे थे। अंकित बड़े जोरों से धक्का लगा रहा था हर बार हर धक्के के साथ सुगंधा की चीख निकल जा रही थी,,, अंकित का लंड इतना गम और मोटा था किसुगंध को लगता कि कोई उसकी बुर में गर्म गर्म लोहे का रोड डाल रहा हो।
सहहहहह आहहहहह आहहहह ओहहहह मां,,,,,बडा दमदार लंड है तेरा।आहहहहह
Ankit or uski ma
तेरी बुर भी तो बहुत गर्म है,,,,आहहहह बहुत मजा आ रहा है मुझे,,,,आहहहहह मैरी रानी,,,,ऊमममममम,,,,,,सहहहहहहह ,,,,,।
दोनों का नशा और मजा दोनों चरम सीमा पर थादेखते ही देखते दोनों के सांसे तेज होने लगी और फिर अगले ही पल दोनों एक साथ झड़ने लगे लेकिन फिर भी अंकित का धक्का जारी था वह झडते हुए भी अपनी मां को पेल रहा था। दोनों एकदम मस्त हो चुके थे देखते ही देखते दोनों का वासना का तूफान शांत हो चुका था।