Incest मजबूरी या जरूरत - Page 12 - SexBaba
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Incest मजबूरी या जरूरत

धीरे-धीरे बरसात का जोर बढ़ता जा रहा था तेज हवाएं अपना असर दिखा रही थी खंडहर नुमा घर में जवानी से लबालब दो बहने और एक जवान लड़का आसरा लेकर बारिश से बचने के लिए बैठे हुए थे,,,,, तीनों का बदन पानी से पूरी तरह से तरबतर होकर भीग चुका था ,,,, तीनों के मन में अजीब सा हलचल मचा हुआ था,,,,,, संजू दोनों औरतें मतलब कि अपनी मां और मौसी दोनों के चरित्र के बारे में अच्छी तरह से जानता था क्योंकि वह दोनों के साथ हमबिस्तर हो चुका था अपनी मां के साथ भी और अपनी मौसी के साथ भी लेकिन दोनों बहने आपस में एक दूसरे के चरित्र को ठीक तरह से नहीं जानती थी जिसमें आराधना अपवाद थी क्योंकि आराधना अपनी बड़ी बहन के बारे में अच्छी तरह से जानती थी,,,,। कि उसका चरित्र कैसा है क्योंकि वहां अपने ही बेटे के साथ अपनी बड़ी बहन को चुदवाते हुए देख चुकी थी लेकिन साधना आराधना के बारे में कुछ भी नहीं जानती थी आराधना को वह सीधी-सादी और सती सावित्री एक चरित्रवान औरत ही समझती थी जबकि वह खुद अपने ही बेटे के साथ संभोग सुख से पूरी तरह से तृप्त होकर अपनी जिंदगी बसर कर रही थी,,, इस समय भी इस खंडहर में ‌ तेज बारिश में वह अपनी बड़ी बहन के आगे बढ़ने का इंतजार कर रही थी क्योंकि आराधना की चूत में भी खुजली मची हुई थी और वह इस तेज बरसती बारिश में गांव के माहौल में और इस खंडहर में हाथ में इस मौके को गंवाना नहीं चाहती थी और ऐसे अद्भुत वातावरण में संभोग सुख प्राप्त करना चाहती थी,,,.

संजू का दमदार लुंड जिसकी दीवानी उसकी माँ और मौसी दोनों हे

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संजू दी अपनी मौसी और अपनी मां के चरित्र के बारे में अच्छी तरह से जान कर भी अपना कदम आगे बढ़ा रहा था क्योंकि वह भी एक साथ दोनों औरतों की चूत में अपना लंड डालकर दोनों को तृप्त करते हुए अद्भुत संतुष्टि का अहसास करना चाहता था वह पहली बार अपनी मां और अपनी मौसी को एक साथ चोदना चाहता था और इसीलिए वह अपने कपड़े उतार कर इस अद्भुत खेल की शुरुआत करते हुए आग तापते हुए बेठ चुका था,,,, साधना भी इस मौके को हाथ से गवाना नहीं चाहती थी क्योंकि वह बातों ही बातों में अपनी बहन से अपने मन की इच्छा जाहिर कर चुकी थी कि वह अगर मौका मिले तो संजू के साथ हमबिस्तर होने के लिए तैयार है और किसी के लिए वह अपनी छोटी बहन के सामने ही भीगे हुए कपड़ों का बहाना करके अपनी जगह पर खड़ी हो गई थी और अपने कपड़ों को उतारने की शुरुआत कर चुकी थी जिसे देखकर आराधना और संजू दोनों का दिल जोरों से धड़क रहा था,,,,।

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साधना संजू के लंड को देखकर जो कि उसके अंडरवियर में तंबू की तरह तना हुआ था उसका धीर भी जवाब दे गया था और इसीलिए वह भी अपने वस्त्र त्याग कर नंगी होना चाहती थी ताकि,,, काम क्रीड़ा को शुरू कर सकें साधना का सलवार कमीज दोनों पूरी तरह से पानी से भीगा हुआ था जिससे उसके बदन से उसके वस्त्र चिपक गए थे और ऐसे हालात में उसका बदन एकदम साफ झलक रहा था जिसे देखकर संजू का लंड गदर मचाने को तैयार हो रहा था

साधना अपनी जगह पर खड़ी हो गई थी और अपने कमीज को दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर की तरफ उठा रही थी और संजू धड़कते दिल के साथ अपनी मौसी को देख रहा था,,,,, वैसे तो उम्र के इस दौर पर पहुंचने के बावजूद भी साड़ी में उसकी मौसी बेहद खूबसूरत और सेक्सी नजर आती थी लेकिन इस समय अपनी मौसी को सलवार सूट में देखने का भी एक अलग मजा था,,,, इसलिए संजू पलक झपका ना भूल गया था और एक घटक अपनी मौसी की तरफ देख रहा था आराधना भी अपनी बहन को ही देख रही थी देखते ही देखते साधना अपनी कमीज को दोनों हाथों के सहारे ऊपर की तरफ उठाते हुए अपनी छातियों तक लेकर आई थी जिसमें से उसकी लाल रंग की ब्रा नजर आ रही थी और देखते ही देखते साधना अपनी कमीज को अपने बदन से अलग करते हुए एक तरफ रख दें और इस समय वह मां और बेटे की आंखों के सामने केवल सलवार और ब्रा में खड़ी थी पेट थोड़ा भारी होने की वजह से बाहर निकला हुआ था लेकिन चेहरे की बनावट इतनी जबरदस्त थी कि ऐसे सुगठित ढांचे में भी क़यामत लग रही थी,,,,,

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सलवार भी उतार दूं यह भी पूरी तरह से गीली हो चुकी है,,,,(साधना अपनी बहन की तरफ देख कर बोली थी लेकिन आराधना का जवाब सुनने से पहले ही संजू बोला)

तो क्या मौसी उतार दो यह भी तो गीली हो चुकी है सर्दी लग गई तो मुसीबत हो जाएगी,,,,

हां संजू तो ठीक कह रहा है वैसे भी इस वीरान जगह पर कोई इतनी तेज बारिश में आने वाला तो है नहीं सब अपने ही तो हैं ऐसे माहौल में शर्म कैसी,,,,(साधना को तो सिर्फ अपने कपड़े उतारने का बहाना चाहिए था वह किसी भी तरह से अपने भतीजे के सामने नंगी होना चाहती थी और अपने नंगे पन का सहारा लेकर अपने भतीजे को उकसाना चाहती थी ताकि उसके साथ संबंध बना सके और मजे ले सके जिसमें वह अपनी छोटी बहन आराधना को भी शामिल करना चाहती थी और मां बेटे के बीच भी शारीरिक संबंध स्थापित करना चाहती थी ताकि यह संबंध आगे भी इसी तरह से चलता है और आराधना भी जीवन का सुख भोगती रहे,,,, और फिर अपने दोनों हाथ को अपनी सलवार की दूरी पर लाकर अपनी उंगलियों का सहारा देकर उसे खोलना शुरू कर दी वह अपनी सलवार की डोरी को जरूर खोल रही थी लेकिन अपनी हरकत से 1 मां के अंदर की औरत को जगा रही थी जोकि अपनी और अपने बेटे के बीच के रिश्ते को भूल कर केवल एक मर्द और औरत बन जाना चाहती थी,,,,, अगर साधना को जरा भी एहसास होता कि दोनों मां बेटों के बीच पहले से ही शारीरिक संबंध स्थापित हो चुका है तो वह बिना झिझक के इसी समय संजू के ऊपर चढ़ जाती है और चुदाई का आनंद लुटती,,,, लेकिन समय उसे अपनी बहन के सामने शुन्य से शुरुआत करनी थी इसीलिए वह अंदर ही अंदर प्रसन्न होते हुए अपने सलवार की डोरी को खींचकर सलवार को अपनी कमर से ठीक कर ली और ढीली करने के बाद एक बार संजू की तरह देखी और आराधना की तरफ जो कि दोनों उसी को ही देख रहे थे और एकदम से बेशर्मी का नजारा पेश करते हुए साधना धीरे-धीरे अपनी सलवार को जो कि बेहद कसी हुई थी जांघो से एकदम चिपकी हुई थी उसे धीरे-धीरे नीचे की तरफ सरकार ने लगी कुछ थोड़ी सी सलवार कमर के भाग को छोड़ते ही उसकी लाल रंग की पैंटी को उजागर करने लगी चीज पर नजर पड़ते ही संजू की हालत खराब हो गई ऐसा नहीं था कि वह इस तरह के नजारे को पहली बार देख रहा था लेकिन इस समय तेज बारिश में माहौल पूरी तरह से बदल चुका था संजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी इसीलिए तो वह अपनी मौसी की लाल रंग की चड्डी को देखते ही एकदम से मदहोश हुआ जा रहा था,,,,,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था और साधना मंद मंद मुस्कुराते हुए अपनी सलवार को उतारते चली जा रही थी देखते देखते हो अपनी सलवार को नीचे घुटनों तक लेकर आ गई और फिर अपनी बहन और संजू की तरफ देख कर बोली,,,,।

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बाप रे पूरी तरह से भीग गई है ना इसलिए आराम से निकल नहीं रही है,, आराधना तू जरा मदद कर दे,,,,

(इतना सुनते ही आराधना अपनी जगह पर बैठी बैठी ही आगे की तरफ बढ़ी और अपनी बड़ी बहन की सलवार को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे नीचे की तरफ सरकार ने लगी जो कि घुटनों में गीली होने की वजह से फस गई थी,,,, संजू का लंड पूरी तरह से टनटना गया था उसकी हालत एकदम से खराब हुए जा रही थी और देखते ही देखते आराधना अपनी बड़ी बहन की सलवार को उसकी दोनों टांगों से बाहर निकालकर उसे नंगी होने में मदद करने लगी और जैसे ही सलवार उसके बदन से अलग हुई आराधना अपनी बहन की सलवार को उसके कमीज के पास धीरे से रख दी लेकिन अपनी बहन की मदद करते हुए उसकी साड़ी उसकी छाती से नीचे की तरफ सरक गई थी जिससे उसकी भारी-भरकम छाती एकदम से साफ नजर आने लगी थी और ब्लाउज पूरी तरह से गिला होने की वजह से उसकी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचियां एकदम साफ नजर आ रही थी और साथ ही चउचियों की शोभा बढ़ा रहे उसके दोनों खजूर ब्लाउज में भी उप से हुई नजर आ रहे थे जिसे देखकर संजू के मुंह में पानी आ रहा था,,,,, सलवार कमीज अपने बदन से उतर जाने के बाद राहत की सांस लेते हुए साधना बोली,,,)

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बाप रे अब जाकर एकदम आराम लग रहा है वरना ऐसा लग रहा था कि बदन जकड़ा हुआ है,,,,(और इतना कहने के साथ ही साधना तुरंत अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले गई और अपने ब्रा का हुक खोलने लगी यह देखकर आराधना की आंखें फटी की फटी रह गई क्योंकि वह अपनी बहन को अपनी ही आंखों के सामने एकदम से खुले तौर पर देख रही थी जिसमें इस समय बिल्कुल भी लाज शर्म नहीं था ऐसा नहीं था कि आराधना को अपनी बहन के बारे में कुछ भी पता ना हो क्योंकि वह पहले ही अपनी बहन को अपने ही बेटे के साथ चुदवाते हुए देख ली थी इसलिए वह जानती थी कि उसकी बहन का चरित्र क्या है लेकिन साधना तो यह बात नहीं जानती थी कि आराधना उसके बारे में सब कुछ आती है लेकिन फिर भी इस समय वह ऐसा बर्ताव कर रही थी मानो जैसे आराधना के सामने वह पहले से ही इतनी ज्यादा खुली हो लेकिन फिर भी इसमें आराधना का ही फायदा था आराधना एक तरफ जहां अपनी बहन के व्यवहार से पूरी तरह से आश्चर्यचकित हो गई थी वहीं दूसरी तरफ वह अपनी बहन के व्यवहार से खुश भी थी क्योंकि वह अपनी बहन के जरिए ही अपने बेटे के साथ चुदाई का आनंद लूट सकती थी,,,, कुछ देर तक साधना अपने हाथों की उंगलियों से अपनी ब्रा की होकर को खोलने की कोशिश करती रही जो की कोशिश नहीं बल्कि वह जानबूझकर अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर ब्रा को खोलने का नाटक कर रही थी,,, उसके मन में कुछ और चल रहा था इसीलिए वह कुछ देर तक इसी तरह से अपनी ब्रा खोलने का नाटक करते हुए वह अपनी बहन से नहीं बल्कि संजू से बोली,,,)

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संजू जरा मेरी ब्रा का हुक खोल देना तो,,,।

(इतना सुनते ही संजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी लेकिन आराधना के होश उड़ गए क्योंकि अपनी बहन की आवाज सुनकर आराधना समझ गई थी कि उसकी बहन अपनी मनमानी करने पर उतारू हो चुकी है जिसमें दोनों का भला होने वाला था संजू भी बेझिझक अपनी जगह से उठा और जैसे ही उठ कर खड़ा हुआ उसका लंड तो पहले से ही पूरी तरह से टनटनाकर खड़ा था जो कि अंडरवियर में तंबू बनाया हुआ था उस पर नजर पड़ते ही आराधना की चूत से काम रस टपकने लगा,,,, संजू के खड़े होते ही उसके खड़े लंड पर दोनों बहनों की नजर पड़ गई थी और दोनों की चूत,,, उत्तेजना के मारे फुलकर कचोरी हो गई थी,,,,,,,, जो हाल संजू का था वही हाल दोनों बहनों का भी था अपने बेटे के लंड को देखकर आराधना के तन बदन में आग लगने लगी,,,, आखिर क्यों ना लगती माहोल ही कुछ ऐसा हो गया था बरसात के मौसम में वैसे भी औरतों को पुरुष संसर्ग की कुछ ज्यादा ही इच्छा पबलित हो जाती है और यही इस समय दोनों औरतों के साथ हो रहा था,,,,,।

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संजू भी जेसे मन में ठान लिया था कि दोनों औरतों पर बिल्कुल भी रहम नहीं करना है इसलिए तो अपना टनटनाता हुआ लंड दिखा कर दोनों की चूत से काम रस की बरसात करना चाहता था,,,, और इसीलिए वह भी बेझिझक अपनी मौसी की एक आवाज पर तुरंत अपनी जगह पर खड़ा हो गया था यह जानते हुए भी कि जिस अवस्था में वह खड़ा होगा उस अवस्था में उसका लंड की अपनी औकात दिखा रहा होगा और यही तो वह भी चाहता था वह तुरंत अपनी मौसी के करीब पहुंच गया और अपनी मां की मौजूदगी का बिल्कुल भी लिहाज ना करते हुए अपने हाथों से अपनी मौसी की ब्रा का हुक खोलने लगा जिसमें वह बेहद माहिर और काबिले तारीफ हो चुका था औरतों के कपड़े उतारने में उसका कोई जोड़ नहीं था,,,,, इससे पहले भी वह अपनी मौसी के और अपनी मां के कपड़ों को बहुत बार अपने हाथों से उतारकर उन्हें नंगी कर चुका था और ऐसा करने में उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति होती थी और वह आनंद किस समय परम प्रकाष्ठा का रूप ले रहा था क्योंकि वह तीनों गांव के छोर पर एकदम एकांत में तेज बरसती बारिश में खंडहर नुमा घर में आसरा लेकर बैठे हुए थे और ऐसे में तीनों के मन में काम भावना जागरूक हो चुकी थी जो कि अपने अपने तरीके से बाहर आ रही थी,,,,।

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संजू अपनी उंगलियों का सहारा लेकर अपनी मौसी की ब्रा का हुक खोलने लगा अपनी मौसी की नंगी चिकनी पीठ पर अपने ऊंगलियो को छूआते ही उत्तेजना के मारे उसके लंड का कड़ापन और ज्यादा बढ़ने लगा,,,,, और देखते ही देखते संजू अपनी मौसी के ब्रा का हुक खोल दिया और दोनों चूचियों को अपने आगोश में लिए हुए छातियों पर कसी हुई ब्रा एकदम से ढीली पड़ गई,,,, जिसे खुद उत्तेजना के मारे गहरी होती सांसो के साथ साधना अपने दोनों हाथों से अपनी ब्रा को अपनी बाहों से उतार दी उसे इस बात का भी बिल्कुल भी डर या झिझक नहीं था कि अब उसकी चूचियां एकदम नंगी हो चुकी थी जिस पर संजू की नजर आराम से चली जा रही थी और आराधना भी यही देख रही थी वह बार-बार अपनी बड़ी बहन के नंगे बदन को देखकर अपने बेटे की नजरों को भांपने की कोशिश कर रही थी,,,जो की साधना के नंगे बदन पर ही घूम रही थी,,,,,, ब्रा के उतरते ही संजू औपचारिक रूप से बोला,,,,।

अब मौसी एकदम ठीक है,,,,, अब सर्दी होने का डर बिल्कुल भी नहीं है,,,,,

संजू और उसकी बहन मोहिनी

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हारे तू तो सही तो है मन तो कर रहा है कि चड्डी भी उतार दुं,,, क्योंकि चड्डी गीली होने की वजह से खुजली होने का डर है,,,,

हा मौसी बात तो सही है,,,, खुजली हो गई तो मुसीबत हो जाएगी फिर सबके सामने खुजाने में भी शर्म महसूस होगी,,,

हां बात तो सही है लेकिन सोच रही हु उतार दूं कि रहने दुं,,,(इतना कहते हुए व आराधना को देखने लगी वह शर्म के मारे अपनी नजरों को दूसरी तरफ घुमा दी थी हालांकि अपने मन में वही सोच रही थी कि उसकी बड़ी बहन बाकी बचे कपड़ों को भी उतार कर एकदम नंगी हो जाएगा कि उसके लिए भी रास्ता साफ हो जाए अपने कपड़े उतारने का इसलिए वह कुछ बोल नहीं रही थी लेकिन अपनी मौसी का जवाब सुनकर संजू बोला)

इसमें सोचने का क्या है मौसी अपना शरीर है खुद को ही ध्यान देना होगा ना परेशानी हो गई तो दूसरा कोई कोई परेशान होगा मैं तो कहता हूं उतार दो वैसे भी यहां कोई बैगाना तो है नहीं जिसके सामने शर्माना पड़े,,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर आराधना अंदर ही अंदर उत्साहित हो रही थी क्योंकि वह अपने बेटे और अपनी बड़ी बहन के बीच के रिश्ते को अच्छी तरह से समझ रही थी और अच्छी तरह समझ रही थी दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो जाने के बाद से दोनों एक दूसरे के सामने शर्म बिल्कुल भी नहीं कर रहे थे क्योंकि दोनों अपनई शर्मा मर्यादा की दीवार को गिरा चुके थे,,,, साधना जल्द से जल्द अपनी चड्डी उतार कर पूरी तरह से नंगी हो जाना चाहती थी,,,, क्योंकि अपनी नंगी जवानी दिखा कर वह अपनी बहन को उकसाना चाहती थी,,,,,, ताकि इस खेल में वह आराधना को भी शामिल कर सके,,,, संजू की बात सुनकर साधना बोली,,,,,,)

बात तो तू सही कह रहा है लेकिन आराधना को बुरा लगेगा वह तो पिछले कपड़ों में ही शायद रात गुजार देगी और बीमार भी पड़ जाएगी और शादी का मजा ले नहीं पाएगी,,,,

नहीं ऐसा नहीं है मौसी मम्मी को भी अपनी तबीयत का अच्छी तरह से ख्याल है अगर तुम पहल करोगी तो शायद मम्मी भी तुम्हारी बात मान ले,,,,

क्या कहती है आराधना इस जगह पर शर्मा ने जैसा कुछ भी नहीं है ऐसी तूफानी बारिश नहीं आ कोई आने वाला नहीं है और हम तीनों के सिवा यहां कोई और भी नहीं है जिससे शर्माना पड़े,,,,

लेकिन दीदी संजू,,,,

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तो संजू की फिक्र मत कर वह जवान हो गया है उसे अच्छे बुरे की पहचान है वह जानता है कि इस समय हम तीनों गिले हैं और ऐसे में हम तीनों को क्या करना चाहिए हम अपने घर पर तो है नहीं कि बीमार पड़ गए तो आराम करके दवा खा कर सही हो जाएंगे यहां पर शादी में आए हैं यहां पर हाथ बताना पड़ेगा अगर बीमार पड़ गए तो दो बातें और सुनाएंगे कि काम के ना काज के दुश्मन अनाज के,,,,

लेकिन दीदी,,,,

देख आराधना तुझे शर्माना है तो शर्मा मुझे बीमार नहीं पडना है,,,, अगर मैं बीमार पड़ गई तो मेरा सारा काम रुक जाएगा इसलिए मुझे तो अपनी तबीयत का ख्याल रखना ही होगा,,,,(और इतना कहने के साथ ही साधना अपने दोनों हाथों की उंगलियों को अपनी लाल रंग की पेंटी पर रख दी और उसे उतारने लगी कि तभी आराधना अपना हाथ आगे बढ़ाकर जानबूझकर साधना का हाथ पकड़ लिया और उसे जानबूझकर रोकने का नाटक करते हुए बोली,,,)

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क्या कर रही हो दीदी इस तरह से तो तुम एकदम नंगी हो जाएगी समझे एकदम जवान है उसके सामने कपड़े उतार कर नंगी होना क्या उचित है,,,,

तुम तो खामखा डर रही हो आराधना तुम्हें अपने बेटे के सामने कपड़े उतार कर नंगी होने में किस बात का डर लग रहा है कि कहीं तुम्हारा बेटा नंगी औरत को देखकर अपना लंड चूत में ना डाल दे,,,,

हाय दैया कैसी बातें कर रही हो दीदी,,,, कुछ तो शर्म करो,,,, संजू यहां मौजूद हैं,,,,

देख आराधना तुझे ऐसा लगता है कि अगर कपड़े उतार कर कोई बेशर्म बन जाता है तो यह तेरी गलतफहमी है मौके की नजाकत को समझने की कोशिश कर संजू के यहां होने से हम दोनों पूरी तरह से सुरक्षित है उसके होने से हम दोनों अपने कपड़े उतार सकते हैं और सर्दी-जुकाम से बच सकते हैं,,,,, देख तुझे शर्म आ रही है तो अपनी नजर घुमा ले,,,,(और इतना कहने के साथ ही साधना अपनी पेंटी को धीरे-धीरे उतारना शुरू कर दी ,,,, संजू और साधना तबीयत खराब होने का जो मामूली सा बहाना पेश कर के कपड़े उतार कर अपनी बेशर्मी का नमूना पेश कर रहे थे इस तरह की वाहियात बातों को अच्छी तरह से समझ रही थी और इसमें आराधना को अपना भी भला नजर आ रहा था इसलिए वह ज्यादा जोर देना ठीक नहीं समझी,,,, और साधना धीरे-धीरे करके बेशर्मी की सारी हदें पार करते हो अपनी बहन की आंखों के सामने ही अपनी चड्डी उतार कर एकदम नंगी हो गई और अपनी बहन के साथ साथ संजू की मदहोशी को बढ़ाते हुए वह दोनों की आंखों के सामने ही अपनी चड्डी को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे नीचोड़ते हुए उसमें से पानी गीराने लगी,,,,, पेंट में से टपकते हुए पानी को देखकर संजू के मुंह में पानी आ रहा था और आराधना इस तरह के दृश्य को देखकर उत्तेजना से पानी पानी हुई जा रही थी,,,,, पलक झपकते ही साधना मां बेटे दोनों की आंखों के सामने एकदम नंगी हो चुकी थी और अपनी मौसी को नंगी देखकर उसकी मदमस्त कर देने वाली जवानी को अपनी आंखों से देख कर संजू का लंड और ज्यादा कड़क हो गया था जो कि पूरी तरह से चड्डी में तंबू बनाया हुआ था,,,,, अपनी छोटी बहन को लाइन पर लाने की शुरुआत साधना ने कर चुकी थी इसलिए एकदम खुश होते हुए अपनी जगह पर बैठ गई और उसके बेटे के साथ ही संजू भी अपनी जगह पर ठीक उसके सामने बैठ गया और जिस तरह से साधना बेठी थी उसकी चूत एकदम खुली हुई नजर आ रही थी जिस पर संजू की नजर बराबर पड‌ रही थी और उसे देख कर उसके मुंह में पानी आ रहा था,,,,।

आराधना के मन में भी यही चल रहा था कि जिस तरह से उसकी बड़ी बहन बेठी हुई थी संजू को जरूर उसकी चूत नजर आती होगी और यही तसल्ली के लिए वह अपनी नजर को अपनी बहन की दोनों टांगों के बीच हल्कै से घुमाते हुए देख ली थी और उस नजारे को देखकर वह खुद भी एकदम मदहोश हो गई,,,,,, अपनी बहन की हरकत पर आराधना की खुद की हालत खराब हो रही थी वह भी जल्द से जल्द अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो जाना चाहती थी बस इशारे की ताक में लगी हुई थी,,,,।

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अब कैसा लग रहा है मौसी,,,(दोनों हाथ को जलती हुई आग की तपन में फैलाते हुए संजू बोला)

सच में अब बहुत सुकून मिल रहा है,,,,,, वरना गीले कपड़े में अजीब भी लग रहा था और ठंड भी लग रही थी,,,,

देख नहीं रही हो मम्मी को अभी भी ठंडी लग रही है,,,,

तो क्या करूं मैं भी दीदी की तरह नंगी हो जाऊं क्या,,,,,

तो क्या आराधना तू भी पागल हो रही है देख नहीं रही है तुझे ठंड लग रही है,,,, कपड़े उतार कर आग ताप ले सही हो जाएगा,,,,,,,,।

(तभी बादलों की गड़गड़ाहट एकदम तेज होगी जिससे आराधना एकदम से घबरा गई,,,, बरसात का जोर लगातार बढ़ता जा रहा था और ऐसे ना चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा छाया हुआ था तेज चलती हवाओं के साथ बरसात और भी ज्यादा भयानक नजर आ रही थी और ऊपर से बादलों की गड़गड़ाहट सब मिलाकर माहौल को पूरी तरह से डरावना बनाया हुआ था लेकिन खंडहर के अंदर का वातावरण ठंडक में भी गर्माहट दे रहा था क्योंकि एक खूबसूरत औरत अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी बैठी हुई थी जिसे देखकर संजू के तन बदन में आग लग रही थी,,,,, कुछ देर सोचने के बाद आराधना बोली,,,)

लेकिन संजू के सामने,,,,,,

तो क्या हुआ आराधना संजू कोई गैर तो है नहीं अपना ही बेटा है और उसके सामने कपड़े उतार कर नंगी होने में झिझक कैसी देख नहीं रही है मैं कैसे अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गई हुं,,,,,, और ऐसा भी तो नहीं है कि संजू बाहर सबको बता देगा कि हम दोनों ने उसके सामने कपड़े उतार कर नंगी हो गए,,,, संजू की जगह कोई और लड़का होता तो शायद इस बात का डर हम दोनों के मन में होता लेकिन संजू तो घर पर हैं इससे डरने की या शर्माने की जरूरत नहीं है,,,,

हां मम्मी जिस तरह से मौसी मेरे सामने कपड़े उतार कर नंगी हो गई तुम भी अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो जाओ तुम्हारे भले के लिए ही तो कह रहे हैं,,,,,,

मुझे शर्म आ रही है,,,,,

इसमें शर्माने की कौन सी बात है,,,,, शर्म तो मुझे भी आनी चाहिए मौसी को भी आनी चाहिए लेकिन जरूरत के मुताबिक कपड़े उतारना जरुरी है वरना तबीयत खराब हो जाएगी,,,,,

हां आराधना तू बेकार में जिद कर रही है,,,,,

अच्छा तुम दोनों कहते हो तो मैं भी उतार देती हूं लेकिन इस बात को किसी से कहना नहीं,,,,

तू पागल हो गई है क्या तू मेरी छोटी बहन है और संजू तेरा बेटा है भला हम दोनों इस बात को किसी को कैसे बता सकते हैं इसमें तो परिवार की ही बदनामी है ना,,,

हां बात तो ठीक है,,,,(इतना कहने के साथ ही आराधना भी अपनी जगह पर खड़ी हो गई थी वह भी अपने कपड़े उतारने के लिए तैयार हो चुकी थी जिसके लिए वह अंदर ही अंदर तड़प रही थी बस सिर्फ बाहर से दिखावा कर रही थी,,,, अपनी मां को खड़ी हुई देखते ही संजू की आंखों के सामने दोनों औरतों की चूत नजर आने लगी थी दोनों की बड़ी बड़ी गांड नाचते हुए उसे दिखाई देने लगी थी वह आने वाले पल के लिए एकदम उत्साहित हो गया था वह समझ गया था कि जब दोनों की चूत में एक साथ लंड डालने का समय आ गया है,,,,, आराधना भी अपनी बड़ी बहन की तरह नंगी हो जाना चाहती थी अपने बेटे के लंड को अपनी चूत में महसूस करना चाहती थी अपनी बहन के साथ इस खंडहर में मजा लेना चाहती थी इसलिए वह अपने साड़ी के पल्लू को अपने कंधे से शर्माते हुए नीचे गिरा दी और अपने दोनों हाथ को अपने ब्लाउज पर रखकर बटन खोलने की तैयारी करने लगी जिसे देखकर संजू के लंड की अकड़ बढ़ने लगी और साधना की चूत से काम रस टपकने लगा,,,,।
 
आराधना को जिस पल का इंतजार था वह पल आ चुका था अपने बेटे और अपनी बड़ी बहन को कपड़े उतार कर सहज होते हुए देखकर आराधना के तन बदन में भी अपनी इच्छा पूर्ति की कामना प्रबल होने लगी वह यही चाहती थी वह अपनी बहन को अपने बेटे को आपत्तिजनक स्थिति में पहले ही देख चुकी थी और उन्हें दोनों को देखकर ही वह जीवन के इस मोड़ पर अपने ही बेटे के साथ चुदाई का सुख भोग रही थी लेकिन इस बात का पता साधना को बिल्कुल भी नहीं था इसलिए वह अपनी बड़ी बहन की नजरों में अच्छी बनी रहना चाहती थी वह जानती थी कि उसकी बहन बहुत ज्यादा चुदवासी है और ऐसे माहौल में उसके बेटे के साथ संभोग सुख प्राप्त करने के लिए चल रही है,,,, संजू के साथ चुदाई का सुख रोकने के लिए वह उसे भी इस खेल में शामिल करने की पूरी कोशिश करेगी और उसकी कोशिश को कामयाब करने की जिम्मेदारी आराधना के कंधों पर थी जिसे वह बखूबी निभाना जानती थी और इसी मौके की तो उसे भी तलाश थी,,,,,

आराधना पहले अपने बेटे को अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा होता हुआ देख रही थी केवल उसके बदन पर उसका छोटा सा अंडरवियर रह गया था जो कि पूरी तरह से तंबू की शक्ल में आ चुका था उसे देखकर आराधना की चूत पानी छोड़ रही थी और यही हाल साधना का भी हो रहा था साधना से भी रहा नहीं जा रहा था इसलिए वह गीले कपड़ों में बीमार पड़ने का डर बता कर अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो चुकी थी,,,,,,, आराधना चोर नजरों से अपने बेटे और अपनी बड़ी बहन की ताका झांकी को अच्छी तरह से देख रही थी और समझ रही थी अपने सारे कपड़े उतार कर जब साधना नीचे बैठी थी तब उसे पूरा अहसास था कि ऐसे हालात में उसकी बहन की चूत एकदम साफ तौर पर संजू को दिखाई दे रही होगी और ऐसा ही हुआ संजू भी अपनी मौसी की दोनों टांगों के बीच ही उसकी गुलाबी चूत को ही देख रहा था जो कि एकदम खिली खिली नजर आ रही थी,,,,,

बीमार होने का बहाना देकर साधना और संजू ने आराधना को भी मना लिया था वैसे भी आराधना को मनाने की जरूरत नहीं थी वह तो पहले से ही अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी होने के लिए उत्सुक थी बस बहाना ढूंढ रही थी अपने कपड़ों को उतारकर नंगी होने की शुरुआत करने के लिए वह अपनी जगह पर खड़ी हो गई थी,,,,, माहौल पूरी तरह से बदल चुका था तूफानी बारिश और तेज चलती हवाओं के ठंडक में भी दोनों औरतों की जवानी गर्माहट पैदा कर रही थी वैसे भी औरत और मर्द दोनों को ऐसी बारिश का इंतजार रहता ही है क्योंकि बारिश के महीने में औरतों की चुदवाने की ललक कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है और यही इस समय साधना और आराधना के साथ भी हो रहा था,,,, आराधना को तो अपने बेटे के लंड पर पूरा भरोसा था कि अगर वह दोनों बहनों को चोदने की शुरुआत करेगा तो दोनों का पानी निकालने के बाद ही दम लेगा,,, साधना की संजू की मर्दाना ताकत से पूरी तरह से अवगत थी लेकिन इस बारे में पूरी तरह से निश्चिंत नहीं थी कि संजू दो औरतों की प्यास एक साथ बुझाने में सक्षम है,,,, लेकिन इस बर‌सती बारिश में वह भी डुबकी लगा लेना चाहती थी,,,,,

सर्वप्रथम आराधना बेशर्मी की शुरुआत करते हुए अपने कंधे पर से साड़ी का पल्लू हटाकर उसे नीचे गिरा दी जिससे उसकी भारी-भरकम छातिया एकदम से उजागर हो गई जो कि बरसात के पानी में पूरी तरह से गीली होने की वजह से ब्लाउज पूरी तरह से उसके दोनों खरबूजा से चिपका हुआ था जिसमें से उसकी रंग बिरंगी ब्रा नजर आ रही थी,,,,, जिसे देखकर संजू के मुंह में पानी आ रहा था संजू बार-बार कभी आराधना की तरफ तो कभी अपनी मौसी की दोनों टांगों की तरफ देख ले रहा था जिसमें से अभी भी उसकी गुलाबी चूत नजर आ रही थी और वह कचोरी की तरह फूल चुकी थी,,,,,, आराधना के पास अब बेशर्मी दिखाने के सिवा दूसरा कोई रास्ता नहीं था अगर वह इस मौके का फायदा उठाना चाहती है तो और भला आराधना यह सुनहरा मौका कैसे अपने हाथों से जाने देना चाहती थी इसलिए वह अपने हाथ की उंगलियों को हरकत देते हुए अपने ब्लाउज के बटन को खोलने लगी जैसे जैसे ब्लाउज के बटन खोल रही थी वैसे वैसे संजू की हालत खराब होती जा रही थी और साधना भी ऊपर नजर उठा कर अपनी छोटी बहन की तरफ भी देख रही थी जो कि इस समय उन दोनों की बात मानते हुए अपने कपड़े उतारने में व्यस्त हो चुकी थी,,,,

धीरे-धीरे आराधना ब्लाउज का पहला बटन खोल फिर दूसरा फिर तीसरा ऐसे करते-करते आखिरी बटन पर आ गए आखिरी बटन खोलते समय वह अपनी बड़ी बहन की तरफ और संजू की तरफ देख ले रही थी जो कि दोनों प्यासी नजरों से उसकी तरफ ही देख रहे थे,,,,, और कुछ ही क्षण में आराधना अपने बेटे की दिल की धड़कन बढ़ाते हुए और अपनी बहन की उत्सुकता को बढ़ाते हुए अपनी ब्लाउज के आखरी बटन को भी खोल दी और आखरी बटन खुलते ही ब्लाउज के दोनों मां के अलग हो गई और उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां,,,, रंग बिरंगी ब्रा में कैद नजर आने लगी,,,, संजू की सांसे ऊपर नीचे होने लगी तेज बरस रही बरसात में इस तरह का नजारा किस्मत वालों को ही देखने को मिलता है और इस समय संजू से बड़ा किस्मत वाला और कोई नहीं था क्योंकि तूफानी बारिश में खंडार के अंदर उसकी आंखों के सामने जवानी से लदी हुई 2 औरतें अपने कपड़े उतार कर अपने नंगे जिस्म की नुमाइश कर रही थी एक तो अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो चुकी थी और दूसरी धीरे-धीरे अपने कपड़ों को उतार रही थी,,,,

खंडहर के अंदर बिल्कुल खामोशी छा चुकी थी केवल बारिश और हवाओं का शोर सुनाई दे रहा था और चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा सिर्फ लकड़ी के जलने से हो रही रोशनी में देखने लायक बहुत कुछ था जिसे संजू देख रहा था आराधना अपनी ब्लाउज को अपनी बाहों में से निकाल कर अपने ब्लाउज को एक तरफ रख दी और फिर धीरे-धीरे अपनी साड़ी को खोलना शुरू कर दी ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे बरसात से बचने के लिए या अपने गीले वस्त्रों को उतारने के लिए नहीं बल्कि चुदवाने के लिए आराधना अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी होने जा रही है,,,,,,, साड़ी को खोलते समय आराधना बेहद खूबसूरत और छिनार नजर आ रही थी जिसे देख देख कर संजू के तन बदन में आग लग रही थी,,,,, अपनी मां को अपनी साड़ी खोलते हुए देखकर संजू बेहद उत्सुक हो गया था दोनों औरतों की चूत में लंड डालने के लिए,,,,,, आराधना जैसे ही साड़ी को उतार कर अपने हाथों में भी संजू तुरंत हाथ बढ़ा कर अपनी मां से बोला,,,,।

साड़ी लाओ में रख देता हूं,,,,,(और आराधना अपने बदन से उतरी हुई साड़ी को अपने बेटे के हाथ में थमा दी जिसे संजू लेकर एक तरफ रख दिया था,,,,, और अब आराधना अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जा करके अपनी ब्रा का हुक खोल रही थी,,,, अपनी बहन की तरह आराधना ने ब्रा का हुक खोलने में अपने बेटे की मदद लेना उचित नहीं समझी और वह खुद ही अपनी ब्रा का हुक खोल दी और ब्रा का हुक खुलते ही दोनों खरबूजा पर कसी हुई ब्रा की कटोरी एकदम से ढीली हो गई जिसे अपने दोनों हथेली का सहारा लेकर वह अपनी ब्रा उतार दी जिसे संजू ने फिर से अपना हाथ आगे बढ़ा कर उसकी ब्रा को भी अपने हाथों में ले लिया,,,,,, अपनी मां के अंतर्वस्त्र को अपने हाथों में लेने में एक अजीब सा ही मजा और नशा संजू के दिलो-दिमाग पर छा रहा था उसका लंड पूरी तरह से गदर मचाने के लिए तैयार था बस शुरुआत होना बाकी थी,,,,,,,,।

साड़ी और ब्लाऊज़ के साथ-साथ अपनी ब्रा उतार लेने के बाद आराधना की नंगी चूचियां एकदम तनी हुई दशहरी आम की तरह रस से भरी हुई नजर आ रही थी जिसे देखकर संजू की तरफ बढ़ती जा रही थी वह अपनी मां की चूची को दोनों हाथों में लेकर उसे मुंह में भर कर पीना चाहता था,,,,, आराधना अपनी नजर को ऊपर उठाकर अपनी बहन की चूची को देख रही थी जो कि बेहद लाजवाब नजर आ रही थी अपनी बहन की चूची की खूबसूरती देखकर साधना से रहा नहीं गया और वह बोली,,,,।

इस तरह से आराधना अपने कपडे उतरती हुयी

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बाप रे आराधना तेरे चूचियां तो एकदम जवान है इनमें जरा भी ढीलापन नहीं है,,,,, एकदम तनी हुई कसी हुई तेरी छातियों की शोभा बढ़ा रही,,,, मन तो कर रहा है कि तेरी चूची को दोनों हाथों में लेकर जोर जोर से दबा दूं,,,,

यह क्या कह रही हो दीदी,,,(शरमाते हुए आराधना बोली)

सही कह रही हूं रे तेरी जवान चूचियां देखकर तो किसी भी मर्द का लंड पानी फेंक दे मुझे तो डर है कि कहीं संजू की हालत खराब ना हो जाए,,,(संजू की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए साधना बोली तो संजू के तन बदन में भी आग लग गई और आराधना मंद मंद मुस्कुराने लगी,,,, संजू की तरफ देखकर,,) क्यों संजू बेटा किसी चुचियां तेरी मां की है ना मलाई वाली,,,,

धत् क्या मौसी तुम भी,,,(शर्मा कर संजू जानबूझकर नजर दूसरी तरफ घुमा लिया उसकी मौसी को कहां मालूम था कि जिस चूची को दिखाकर उसकी मौसी उसे बहलाने की कोशिश कर रही है उसी चूची के बदौलत संजू अपनी मां को चोदना शुरू किया था,,,,,)

अब जल्दी से अपना पेटीकोट भी उतार दे नहीं तो ठंडी लग जाएगी,,,,।

लेकिन दीदी,,,,

अब क्या है सब तो उतार दिया पेटीकोट भी उतार दे,,,,,

लेकिन दीदी मैंने,,,,,

इस तरह से पल पल आराधना उत्तेजित होती हुयी

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क्या आराधना तू भी बच्चों की तरह जिद करती है देख नहीं रही है तेरी चूची देखकर तेरे बेटे का खड़ा हो रहा है,,,,,

क्या दीदी तुम भी कुछ भी बोलती रहती हो,,,

अरे मैं सच कह रही हूं जवान लड़कों की फितरत को अच्छी तरह से जानती हूं तेरी नंगी चूची देख कर तेरे बेटे का लंड एकदम से खड़ा हो गया है,,,, मैं तो कहती हूं यही मौका है डलवा ले अपने अंदर और बुझा ले महीनों की प्यास को,,,,

दीदी बस करिए मुझे शर्म आ रही है,,,,(आराधना भी जानबूझकर शर्माने का नाटक करते हुए बोली,, और अपनी मौसी की बातों को सुनकर तो संजू के सब्र का बांध टूटा हुआ नजर आ रहा था वह पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में गोते लगाने लगा था अपनी मां के बारे में अपनी मौसी की गंदी बातों को सुनकर संजू का लंड अपनी औकात में आ चुका था,,,,,)

शुरू शुरू में ऐसा ही होता है देखना एक बार तू अपने बेटे का डलवा लेगी तो पागल हो जाएगी और फिर दिन-रात अपने बेटे के सामने अपनी दोनों टांगे फैला लेगी,,,, अब चल बिल्कुल भी देर मत कर और पेटीकोट उतार दे,,,

लेकिन दीदी मै चड्डी नहीं पहनी हूं,,,,

(अपनी मां के मुंह से इतना सुनते ही संजू का‌ लंड ठुनकी मारने लगा उसे याद आ गया कि अपनी सहूलियत के लिए ही उसकी मां ने पेशाब करते समय अपनी चड्डी भी उतार कर पर्स में रख ली थी ताकि वह उसके लंड पर आराम से चढ सके,,,)

इस समय नहीं पहनी है कि हमेशा से नहीं पहनती है,,,,

सफर के दौरान नहीं पहनती मुझे बड़ा अजीब लगता है,,,,

चल ठीक है कोई बात नहीं पेटीकोट तो उतार दे नंगी होने में शर्म कैसी देख मै नहीं नंगी हो गई हूं,,,,

दीदी,,,(संजू की तरफ देखते हुए)

अरे उससे क्या शर्म आ रही है नहीं तेरे ऊपर चढ़ जाएगा तेरी इजाजत के बिना व तेरी चूत में लंड डालने वाला नहीं है समझ लेना इसलिए डरने की जरूरत नहीं है जब तू कहेगी तभी वह तेरी चूत मारेगा,,,,,,,

क्या दीदी थोड़ा तो शर्म करो,,,,

अरे बुद्धू शर्म और संस्कार की वजह से ही तो बिस्तर पर करवट बदल कर जिंदगी गुजार रही है वरना शर्म के पर्दे को हटा देती तो आज तेरी चूत भी हरी भरी होती,,,,,,

क्या दीदी संजू का तो ख्याल करो,,,

संजू का क्या ख्याल करना संजू तो पूरी तरह से जवान है इस तरह की बातों में उसे भी बहुत मजा आता है तुझे यकीन नहीं होगा लेकिन इस तरह की बातें सुनकर हम दोनों को इस अवस्था में देखकर तेरे बेटे का भी लैंड खड़ा हो गया होगा देखना चाहती है,,,,,,

नहीं नहीं मैं देखना नहीं चाहती,,,,,

(अपनी मौसी की बेशर्मी भरी बातों को सुनकर समझूंगा दिल जोरों से धड़क रहा था उसे यकीन हो चला था कि आज की रात उसकी मौसी अपनी आंखों के सामने ही उसकी मां की चूत दिला कर ही रहेगी)

तो चल जल्दी से उतार दे वरना ठंड लग जाएगी देख मेरी यह बारिश कितनी जोरो से हो रही है मुझे लगता नहीं है कि सुबह तक बारिश कम हो पाएगी और अच्छा ही है इस तनहा खंडहर में इस तरह से रहने में एक अलग ही मजा है तुझे पता है मेरा बरसों का सपना था कि मैं कभी ऐसे ही जगह पर बिना कपड़ों के रहूं और ऐसा लग रहा है कि मेरा सपना आज सच होने वाला है,,,,,

उतार दूं,,,,

आप क्या पंडित से पूछ कर तेरे लिए मुहूर्त निकलवाऊ कपड़े उतारने के लिए,,,,

(आराधना समझ गई थी कि ज्यादा नानुकुर करने में मजा नहीं है और वैसे भी अपनी बड़ी दीदी की बातों को सुनकर उसकी चूत पानी छोड़ रही थी उसे अपनी बहन की बातें बहुत ही मदहोश कर देने वाली लग रही थी और बेहद अच्छी भी लग रही थी भले ही वह अच्छी ना लगने का बहाना कर रही थी लेकिन अपनी बड़ी दीदी के कहे गए एक एक शब्द उसके अंतर्मन में मदहोशी भर रहे थे,,,, इसलिए वह उत्तेजना के मारे अपने सूखे गले को थुक से गिला करते हुए अपने पेटीकोट की डोरी खोलने लगी और देखते ही देखते अपनी उंगलियों का सहारा देते हुए अपनी पेटीकोट की डोरी को व खींचकर पेटिकोट के कसाव को अपनी कमर से एकदम ढीला कर ली अगर कोई और समय होता तो शायद पेटीकोट अपने आप ही भरभरा कर उसके कदमों में जा गिरता लेकिन पानी में भीगे होने की वजह से पेटीकोट पूरी तरह से बदन से चिपका हुआ था जिसे आराधना धीरे-धीरे अपने बदन से अलग करते हुए उसे नीचे की तरफ ला रही थी,,, लेकिन जैसे ही उसकी चूत नजर आती वैसे ही वह तुरंत जानबूझकर नीचे की तरफ झुका कर अपने पेटिकोट को उतारने लगी ताकि उसकी चूत को समझो देखना भाई ऐसा वह जानबूझकर कर रही थी वह अपनी बड़ी बहन को दिखाना चाहती थी कि ऐसा करने में उसे कितना शर्म महसूस हो रहा है,,,, और आराधना की इस चला कि को साधना अच्छी तरह से समझ गई थी इसलिए बोली,,,)

अरे झुक क्यों गई देख तो लेने दी होती अपने बेटे को अपनी चूत बेचारा कब से तड़प रहा था अपनी मां की चूत देखने के लिए क्यों संजू सही कह रही हु ना,,,,,

क्या मौसी तुम भी,,,,(संजू भी जो अभी तक टकटकी बांधे अपनी मां की तरफ भी देख रहा था अपनी मौसी की बात सुनकर शर्मा ने का नाटक करते हुए अपना मुंह दूसरी तरफ घुमा लिया था)

बेटे में खूब समझती हूं तुम जवान लड़कों की हरकत को मौका मिले तो अपनी मां के ऊपर भी चढ जाओ,,,, तुम लोगों को तो सिर्फ लंड की गर्मी निकालने से मतलब है फिर भले ही चूत मां की हो या बहन की या मौसी या बुआ की कोई फर्क नहीं पड़ता क्यों सच कह रही हुं ना,,,,

साधना और अरफना

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क्या दीदी थोड़ा तो शर्म करो जवान बेटा है,,,,(आराधना अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी बहन जानबूझकर इस तरह के रिश्तेदारी की बातें करके उसका मन बहलाने की कोशिश कर रही थी ताकि आज की रात वह अपनी मनमानी कर सके जिसमें आराधना भी उसका बराबर साथ दे रही थी बस थोड़ा सा दुरी बनाए हुए नाटक कर रही थी,,)

अरे जवान बेटा है तभी तो बता रही हूं घर में ही अगर बेटे को चुदाई की शिक्षा मिल जाए तो बाहर कभी असफल नहीं होगा पहली बार में ही लड़की औरतों की चुत फाड़ देगा अगर घर में ही शिक्षा ना मिले तो पहली बार में ही किसी जवान खूबसूरत औरत की चुत देखते ही पानी फेंक देगा,,,,,

दीदी तुम्हारी बातें ना,,,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपने पेटिकोट को अपने बदन से अलग करते हुए खड़ी नहीं हुई बल्कि तुरंत उसी से अवस्था में बैठ गई लेकिन जिस तरह से बैठी थी उसे भी अच्छी तरह से मालूम था कि ऐसी अवस्था में उसकी चूत एकदम साफ नजर आ रही होगी और यही मौके का फायदा उठाते हुए आग की दूसरी ओर बैठा हुआ संजू अपनी मां की दोनों टांगों के बीच की गुलाबी चूत को देखने लगा जिसे देखने के लिए वही समय तड़प रहा था ऐसा नहीं था कि वह अपनी मां की चूत को पहली बार देख रहा था बाहों में ऐसा पहली बार बना हुआ था कि अपनी मां की चूत देखने की ललक उसमें एकदम से बढ़ गई थी,,,,,)

देख अब जाकर आराम हुआ ना,,,,,, यह बारिश भी ना जाने क्या क्या करवाएगी मैं कभी सोच ही नहीं थी कि परिवार के साथ इस तरह से किसी खंडहर में रात गुजारनी पड़ेगी और वह भी बिना कपड़ों के,,,

तुम्हारे मन की ही हुआ ना मासी तुम भी तो यही सोचती थी ना कि बिना कपड़ों के कहीं रात गुजारु,,,,

संजू यह क्या कह रहा है,,,

अरे बोलने दे आराधना जवान बेटा है,,, यह नहीं बोलेगा तो कौन बोलेगा,,,,,, अच्छा काम कर इन सभी गीले कपड़ों को एक अच्छी सी जगह पर टांग दें ताकि सुबह तक एकदम सूख जाए,,,,,

जी मौसी,,,,(और इतना कहने के साथ ही संजू अपनी जगह से उठ कर खड़ा हो गया और उसके खड़ा होते हैं उसका खड़ा लंड एकदम से नजर आने लगा जो की अंडरवियर में भी भयानक लग रहा था संजू जानबूझकर बेझिझक उसी अवस्था में उठा था वह जानबूझकर अपने लंड के दर्शन दोनों औरतों को कराना चाहता था और ऐसा ही हुआ,,,, वह अपनी मां और अपनी मौसी के कपड़ों को लेकर,,,, सूखी हुई लकड़ी को खंडहर की दीवार के छेद में डालकर उसका खुदा बनाकर उसके ऊपर अपनी मां की साड़ी और अपनी मौसी की सलवार कमीज को टांगने लगा तभी उसके हाथ में अपनी मौसी की पिंटिया गई जिसे वह उत्तेजना के मारे कसके अपनी हथेली में दबा लिया था आराधना और साधना दोनों को संजू के हाथ में पेंटी नजर आ रही थी जिसे देखकर साधना धीरे से अपनी बहन को बोली,,,,।

साधना और आराधना

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देख रही है साधना तेरा बेटा मेरी पैंटी को कितनी जोर से दबा रहा है ऐसा लग रहा है कि जैसे मेरी चूत को अपनी हथेली में ले लिया हो सच कहूं तो अगर इसे मौका मिल जाए ना तो हम दोनों की हालत खराब कर देगा,,,,

क्या दीदी थोड़ा तो शर्म करो,,,

अगर शर्म करेंगे तो इतने सुनहरा मौका हाथ से जाता रहेगा,,,, और तेरा बेटा कोई दूध का धुला नहीं है,,,, अगर तेरा बेटा सीधा-साधा लड़का होता तो हम दोनों को नंगी देखकर उसका लंड खड़ा ना हो गया होता,,,

क्या कह रही हो दीदी संजु वैसा लड़का नहीं है वह तो बहुत संस्कारी और सीधा है,,,

अरे पगली सीधा-साधा होता तो उसका लंड खड़ा थोड़ी होता देखना चाहती है उसके लंड को,,,

नहीं दीदी मुझे शर्म आ रही है,,,

अरे शर्माना कैसा रुक अभी तुझे बताती हूं,,,, हो गया संजू,,,

हां मौसी हो गया,,,,

चल अब इधर आ जा,,,,

(संजू के मन में लड्डू फूट रहे थे उसे पूरा यकीन था कि आज की रात इस खंडहर में अपनी मां और मौसी को एक साथ वह चोदेगा,,,, वह तुरंत अपनी मौसी के सामने आकर खड़ा हो गया और उसका खून था एकदम से नजर आने लगा और आराधना की तरफ देखकर साधना बोली,,,)

संजू हम दोनों के कपड़े तो तूने उतरवा दिया ताकि हम दोनों बीमार ना पड़े लेकिन तूने तो अभी भी चड्डी पहना हुआ है तू अगर बीमार पड़ गया तो फिर हम दोनों को कौन संभालेगा,,,

मतलब,,,,

मतलब यही कि तू भी अपनी चड्डी उतार कर नंगा हो जा वरना खुजली हो जाएगी और फिर सबके सामने खुजलाने में शर्म भी आएगी,,,,

सच में उतार दूं,,,

तो क्या तुझे क्या लग रहा है मैं मजाक कर रही हूं,,,

लेकिन मम्मी,,,,

अरे तू अपनी मम्मी की चिंता बिल्कुल मत कर वह तो तड़प रही है तेरे को देखने के लिए उसके दर्शन करने के लिए वह भी देखना चाहती है कि दूसरे मर्दों का लंड कैसा होता है अभी तक तो यह केवल तेरे बाप का ही लंड देखती आ रही थी जो कि वह भी नसीब नहीं है,,,,

(अपनी बड़ी बहन की बातों को सुनकर आराधना की चूत पानी छोड़ रही थी अच्छी तरह से समझ रही थी कि अगर उसके बेटे के साथ उसका संबंध पहले से ही ना होता तो शायद उसकी बहन इस समय जरूर अपने बेटे के साथ संबंध बनवा दी होती क्योंकि उसकी बातें और हरकत बेहद मदहोश कर देने वाली थी,,,,,,,, धीरे-धीरे यह तूफानी बारिश की रात और भी ज्यादा नशीली होती जा रही थी अपनी मौसी की बात मानते हुए राजू अपने चड्डी को उतारने के लिए पुरी तरह से तैयार हो चुका था,,, वह जानता था कि वह ना जाने कितनी बार अपनी मां के सामने कपड़े उतार कर नंगा हो चुका था उसकी मां उसके नंगे लंड के दर्शन बहुत बार खरबूज की थी और अपनी चूत मिलेगी चुकी थी लेकिन उसकी मौसी इस बात से अनजान थी इसलिए उसकी मां भी नाटक कर रही थी और खुद संजू भी नाटक कर रहा था,,,, अपनी मां की तरफ देखते हुए धीरे से अपनी चड्डी को उतारने लगा लेकिन लंड पूरी तरह से खड़ा होने की वजह से चड्डी ठीक तरह से नीचे सड़क नहीं रही थी इसलिए वहां अपनी चड्डी को आगे से दोनों हाथों से पकड़ कर उसे आगे की तरफ उसके रबड़ को खींचा जिससे उसके अंदर की लंबाई के अनुसार चड्डी आगे खींच गई और फिर उसे नीचे की तरफ करते हुए अपने लंड को एक हाथ से पकड़ कर ऊपर कर लिया ताकि चड्डी आराम से उतर सकें,,,, शर्म का नाटक करने के बावजूद भी आराधना तिरछी नजरों से अपने बेटे की हरकत को देख रही थी और उसकी यह हरकत लंड पकड़ कर चड्डी उतारने वाली उसकी चूत में आग लगा दी वह मदहोश हुए जा रही थी और देखते ही देखते संजू भी अपनी चड्डी उतार कर नंगा हो गया,,,, जैसे ही संजू चड्डी उतार कर नंगा हुआ वैसे ही उसका मोटा तगड़ा लंबा लंड हवा में लहराने लगा जिसे देखकर साधना की तो हालत खराब हो गई और वह आराधना को दिखाते हुए बोली,,,)

देख रही आराधना तेरे बेटे का लंड ऐसा लग रहा है कि जैसे किसी गधे का लंड हो देख कितना मोटा और लंबा है कसम से इसे देखकर तो मेरे मुंह पर साथ-साथ मेरी चूत में भी पानी आने लगा,,,,,(अपनी बहन के कहने पर आराधना नजर उठाकर अपने बेटे की लंड की तरफ देखी तो उसकी भी हालत खराब हो रही थी,,,, और संजू दोनों की हालत बहुत ज्यादा खराब करते हुए अपने लंड को हाथ में लेकर उसे ऊपर नीचे करके हिलाने लगा संजू एकदम बेशर्म बन गया था ,,, वह जानता था कि बेशर्म बनने में ही जिंदगी का असली मजा है,,,,, और उसी बेशर्मी को देखते हुए साधना बोली ,,,)

अरे अच्छे से दिखा तेरी मां को महीनों गुजर गए होंगे लंड देखें और मुझे लगता नहीं कि तेरे बाप का इतना मोटा तगड़ा और लंबा होगा,,,,,,(इतना सुनते ही बेशर्मी की हद पार करते हुए संजू अपनी मौसी की बात मानते हुए अपने लंड को हाथ में पकड़े अपनी मां की तरफ आगे बढ़ने लगा यह देखकर आराधना भी शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी उसके तन बदन में आग लग रही थी,,,, अपनी दीदी की बात और अपने बेटे की हरकत को देखकर आराधना शर्मा ने का नाटक करते हुए बोली,,)

क्या कर रही हो दीदी थोड़ा तो शर्म करो,,,,

पागल है तू आराधना इतना अच्छा मौका मिला है अपनी आंख से नजर भर कर अपने बेटे की मर्दानगी को देख ले,,,,,(उसका इतना कहना था कि संजू ठीक अपनी मां की आंखों के सामने जाकर खड़ा हो गया उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में खड़ा था ऐसा लग रहा था कि एक बार चूत में घुस जाए तो गांड से बाहर निकाल ले,,, अपने बेहद करीब अपने बेटे के लंड को अपनी बहन की उपस्थिति में देखकर शर्म के मारे जो कि जानबूझकर नाटक कर रही थी आराधना की आंखें नीचे झुक गई तो साधना अपने हाथों से अपनी बहन की टोढी को पकड़कर ऊपर की तरफ उठाते हुए बोली,,,)

हरि शर्मा मत मेरी रानी देख तो ले तेरे बेटे का लंड देखकर तो मेरी चूत से पानी निकल रहा है,,,,,

(साधना की हरकत आराधना शर्माने का नाटक करते हुए धीरे से अपनी आंखों को ऊपर की तरफ उठाकर अपने बेटे के लंड को देखने लगी इस नजारे को देखकर उसकी चोट भी पानी फेंक रही थी लेकिन वह कुछ कर नहीं रही थी वह केवल अपनी बहन के सामने शर्म आ रही थी बाहर वातावरण पूरी तरह से तूफानी बनता जा रहा था तेज हवाओं के साथ बरसात पड़ रही थी हवा का झोंका तीनों के नंगे बदन को झकझोर कर रख दे रहा था वह तो भला था कि तीनों की गर्म जवानी वातावरण की ठंडक से पूरी तरह से लडकर तीनों के बदन में गर्मी बनाई हुई थी,,,, साधना संजू की उपस्थिति में ही आराधना से बोली,,,)

अच्छा सच सच बताना आराधना बिल्कुल भी शर्माने की जरूरत नहीं है कितने महीने हो गए तुझे चुदवाए,,,(अपनी बहन के मुंह से इस तरह की बात सुनते ही आश्चर्य से आराधना साधना की तरफ देखने लगी तो साधना बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,) शर्मा मत तेरे बेटे को कोई एतराज नहीं है,,,,,

यह क्या पूछ रही हो दीदी,,,,

अरे शर्मा मत संजू के सामने शर्माने की जरूरत नहीं है क्यों संजू तुझे ऐतराज है क्या मैं तेरी मां से इस तरह के सवाल कर रही हूं तो,,,,,

मुझे कोई एतराज नहीं है तुम औरतों की बात है तुम औरते ही जानो,,,,,

अब तो ठीक है ना आराधना हम बता भी दे कितने महीने हो गए चुदवाए,,,,

(आराधना कुछ बोली नहीं खामोश रही तो साधना संजू से बोली ,,,,)

अच्छा तू बता तेरे पापा कितने दिनों से घर पर नहीं आए हैं,,,

सात 8 महीने तो हो गए हैं,,,,(संजु अपनी मां की तरफ देखकर बोला जोकि कल ही घर से निकलने से पहले ही उसके पापा घर पर आए थे और संजू बेशर्मी की सारी हदें पार करता हुआ अपने पिताजी के सामने ही अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया था और दोनों मां बेटे अपने पति की मौजूदगी में चुदाई का आनंद लेकर मस्त हो गई थी,,,, संजू की बात सुनते ही अपने होठों पर मुस्कुराहट लाते हुए साधना बोली,,,)

बाप रे साथ 8 महीने मतलब मेरी रानी साथ 8 महीने से चुदवाई नहीं है,,,, मतलब की चूत एकदम कसी हुई होगी वह तो होगी ही जब इस उमर में चूची इतनी कड़क है तो चूत का तो जवाब ही नहीं,,,,,(साधना अपनी बेशर्मी भरी बातों से शब्दों में रंग भर रही थी,,,, जिसे सुनकर मां बेटे पूरी तरह से चुदवासे हुए जा रहे थे,,,,)

दीदीईईईई,,,,,, कुछ तो लिहाज करो संजू के सामने एकदम बेशर्म हो गई हो,,,

अरे पगली देख नहीं रही है तेरे बेटे का जवान लंड इसके सामने तो बेशर्म बनने में ही मजा है,,, अच्छा एक बात बता संजू तू जवान है समझदार है औरतों और मर्दों के बीच के रिश्ते को तो आप समझता ही होगा अच्छा सही सही बताना क्या तुझे लगता है कि साथ 8 महीने हो गए हैं तेरे पापा से दूर रहे तेरी मां को तो क्या तेरी मां चुदवाने के लिए तड़पती नहीं होगी,,,,,

(इस सवाल को सुनते ही संजू अपनी मां की तरफ देखने लगा आराधना भी संजू की तरफ देखने लगी दोनों की नजरें आपस में टकराई और आराधना शर्म के मारे अपनी नजरों को नीचे झुका ली क्योंकि वह चित्र से जानती थी कि संजू इस सवाल का जवाब देने में पूरी तरह से सक्षम है और संजू अपनी मौसी के सवाल का जवाब देते हुए धीरे से बोला)

जरूर तड़पती होगी,,,,

देख लिया आराधना तेरा बेटा भी पूरी तरह से जवान हो गया है औरतों के जज्बात को चित्र से समझता है 8 महीना तो अपने पति से दूर है तो क्या तेरा मन नहीं करता होगा अपनी चूत में लंड लेने के लिए,,,,, अच्छा संजू एक बात बता,,,, तेरी मां तुझे कैसी लगती है,,,

मतलब,,,,

सेक्सी लगती है खूबसूरत लगती है कैसी लगती है,,,,(साधना अपने सवालों के जरिए संजू के बदन में आग लगा रही थी,,,)

मुझे तो मम्मी खूबसूरत और सेक्सी दोनों लगती है,,,

सुन ले आराधना और तू कहती है कि मेरा बेटा अभी नादान है वह चित्र से जानता है कि औरत कैसी दिखती है कैसी दिखनी चाहिए और उसकी नजर में तो एकदम सेक्सी और खूबसूरत है,,,, अच्छा सच सच बताना संजू तेरा लंड हमेशा ही खड़ा रहता है कि अपनी मां को नंगी देखने के बाद तेरा लंड खड़ा हुआ,,,,

(इस बार फिर से वहा अपनी मां की तरफ देखने लगा और बोला,,,)

मम्मी को नंगी देखने के बाद खड़ा हुआ है,,,,(संजू अच्छी तरह से जानता था कि आप शर्मा ने से कोई फायदा नहीं है इतना कुछ हो गया है वह अपनी मौसी के खेल में पूरी तरह से शामिल हो चुका था वह जानता था कि उसकी मौसी चुदवाना चाहती है और वह भी अपनी बहन के साथ तो वह क्यों पीछे हटे,,,)

सुन मेरी बहना तेरे बेटे का लंड तुझे नंगी देखने के बाद खड़ा हुआ है,,,, तुझे तो गर्व करना चाहिए कि इस उम्र में भी तेरा खूबसूरत बदन किसी भी जवान लड़की का लंड खड़ा कर सकता है और किसी के भी लंड का पानी निकाल सकता है,,,,

दीदी यह सब कुछ ज्यादा नहीं हो रहा है,,

कुछ भी ज्यादा नहीं हो रहा है बल्कि इसकी तो जरूरत है तू 8 8 महिना अपने पति से दूर रहती है अशोक तो निठल्ला निकल गया एक औरत होने के नाते मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि इस उमर में औरत को मर्द की बहुत जरूरत पड़ती है मैं खुद महसूस करती हूं इसीलिए कह रही हूं अच्छा तू तो आप मुझे ठीक तरह से जवाब नहीं देगी लेकिन तेरा बेटा मुझे सही जवाब देगा तब तो तुझे समझ में आएगा ना कि तुझे क्या जरूरत है,,,,

क्या दीदी तुम भी,,,,

बस तू कुछ मत कह,,, अच्छा संजू एक बात बता औरतों के जज्बात को तो अच्छी तरह से समझता है जिस औरत को साथ 8 महीना हो जाए मर्द के बगैर ऐसी औरत अपने बदन की प्यास बुझाने के लिए दूसरे मर्दों का सहारा लेती है कि नहीं,,,,

जरूर लेती है,,,, मैं जानता हूं मौसी मेरे कॉलेज में मेरा दोस्त है उसकी मां दूसरे मर्दों का सहारा लेते हैं क्योंकि उसके पापा 6 से महिला विदेश में रहते हैं बिजनेस के सिलसिले में और इस बात को उसका बेटा भी जानता है लेकिन कुछ बोलता नहीं है उसे अपनी मां से कोई भी गिला शिकवा नहीं है मुझे तो इस बात का डर है कि कहीं वह खुद अपनी मां के साथ,,,,, मेरा मतलब है कि,,,,,

अरे बोल शर्मा मत यहां शर्माने की जरूरत नहीं है,,,,

मौसी मुझे पूरा शक है कि वह खुद अपनी मां को चोदता है,,,(इतना सुनते ही साधना के साथ-साथ आराधना का भी दिल जोरो से धड़कने लगा आराधना अपने बेटे की चलाकी को अच्छी तरह से समझ रही थी वह समझ रही थी कि उसका बेटा कितनी चालाकी से गाड़ी को पटरी पर ला रहा था,,)

लेकिन तुझे ऐसा क्यों लगता है,,,,

क्योंकि मैं 1 दिन उसके घर गया था तो उसका दरवाजा खुला हुआ था और मैं घर में प्रवेश कर गया और जैसे ही मैं अपने दोस्त के कमरे के पास पहुंचा तो अंदर से उसकी मां की भी आवाज आ रही थी और उसकी भी आवाज आ रही थी,,,,

लेकिन ऐसा भी हो सकता है कि दोनों बात कर रहे हो,,,

मुझे भी ऐसा ही लगा मुझे लेकिन अंदर कुछ अजीब सी आवाजें आ रही थी जिसे सुनकर मैं एकदम से चौंक गया और मैं समझ गया कि दोनों के बीच कुछ चल रहा है,,,

कैसी आवाजें बता जरा तेरी मां को भी पता चले कि दुनिया में वही एक सती सावित्री बंद कर बैठी हुई है और दूसरी औरतें अपना जीवन अपने तरीके से जी रही है,,,,

मौसी अंदर से उसकी मां की आवाज आ रही थी जो कि जोर-जोर से बोल रही थी और जोर से देखा और जोर से धक्के लगा फाड दे मेरी चूत को मेरी चूची को मुंह में लेकर 3 और जोर जोर से धक्के लगा कर चोद मुझे,,,, इतना सुनते ही मुंह से मेरी तो हालत खराब हो गई कसम से मुझे समझ में नहीं आया कि मैं क्या करूं लेकिन उस समय मेरे लंड की हालत बिल्कुल ऐसी थी अपने आप ही खड़ा हो गया था और थोड़ी देर में हो दोनों बाहर आए तो उसकी मां केवल ब्रा और पैंटी में ही थी क्योंकि वह दोनों जानते नहीं थी कि मैं घर पर हूं मुझे देखते ही दोनों एकदम से चौक गए,,,, और उसकी मां बहाना बनाने लगी की कमर में दर्द था ना इसलिए मालिश करवा रही थी मैं भी कुछ बोला नहीं और थोड़ी देर में उसके घर से निकल गया,,,,

सुन आराधना और तुझे पता है संजु ऐसा क्यों हुआ,,,?

क्यों हुआ,,?

तू औरतों के जज्बात को तो अच्छी तरह से समझता है लेकिन उनके मन की इच्छा को नहीं समझ पाता और ना ही समझ पाएगा यह सिर्फ एक औरत ही औरत के मन को समझ सकती है छे छे महीना अपने पति से दूर रहने के बाद किसी भी औरत का मन मर्द के साथ के लिए तड़प उठता है जिसे पेट की भूख होती है उसी तरह से तन की भी भूख होती है और उसे मिटाने के लिए औरतें कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाते हैं सोच‌ अगर तेरे दोस्त की मां अपने बेटे से ही चुदवाना शुरू कर दी और अपनी जरूरत को अपने घर में ही पूरा करने लगे तो अब बाहर किसी दूसरे मर्द का सहारा नहीं लेगी ऐसा करने से उसके घर की इज्जत भी बची रहेगी और दोनों की बातें घर की चारदीवारी में ही राज बनकर रह जाएगी वह तो दो अनजाने में पहुंच गया वरना तुझे पता ही नहीं चलता,,,,

हां तुम सच कह रही हो मौसी,,,,,

संजू अगर तू सोच तेरी मां का मन करने लगा चुदवाने को और वह बाहर किसी गैर मर्द से चुदवाना शुरू कर दे तो तुझे कैसा लगेगा,,,,

दीदी ऐसा बिल्कुल भी नहीं होगा,,,,

होगा ऐसा जरूर होगा क्योंकि औरत की प्यास भी एक हद तक बर्दाश्त तक रहती है फिर बर्दाश्त के बाहर हो जाने पर औरत खुद नहीं समझ पाती थी वह सही कर रही है या गलत मैं तुझसे पूछ रही हूं संजू तेरी मां पर किसी दूसरे से चुदवाने लगे तो तुझे कैसा लगेगा,,,,

मुझसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होगा,,,,

और अगर तुझे मौका मिले अपनी मां की जरूरत पूरी करने को तू तो क्या अपनी मां को चोद पाएगा,,,।

(इतना सुनते ही संजू एकदम से खामोश हो गया वह कुछ बोल नहीं रहा था बस अपनी मां की तरफ देखकर जा रहा था और उसकी मां भी एकदम खामोश हो चुकी थी क्योंकि जो कुछ भी हो रहा था उसमें उसकी ही भलाई थी वह किसी भी तरह से अपनी बहन की आंखों के सामने संबंध बनाना चाहती थी और अपनी बहन की रजामंदी से ताकि आगे के लिए उसका रास्ता पूरी तरह से साफ हो जाए,,,,)

अपनी मां की तरफ मत देख बिल्कुल भी डरने की जरूरत नहीं है तू सिर्फ बता एक बेटे को क्या करना चाहिए ,,, अगर मैं खुद रजामंदी दिखाएं तो और ऐसे हालात में तू क्या करेगा,,,,

(कुछ देर खामोश रहने के बाद संजू बेशर्मी दिखाते हुए एक बार फिर से अपने लंड को अपने हाथ से पकड़ कर उसे धीरे-धीरे मुठीयाते हुए बोला,,,)

अगर मम्मी तैयार होगी तो मैं जरूर मम्मी की चूत में लंड डालने के लिए तैयार हुं,,,

(इतना सुनते ही साधना के होठों पर मुस्कान तैरने लगी और वह आराधना की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए बोली)

देख रही आराधना तेरा बेटा तेरे बारे में कितना सोचता है वह नहीं चाहता कि तू बाहर किसी गैर मर्द के साथ संबंध बनाए इसीलिए वह घर में ही तुझे खुश करना चाहता है अच्छा आराधना सही-सही बताना तेरे बेटे का लंड कितना मोटा तगड़ा लंबा है मैं तो सच सच बता रही हूं तेरे जीजा का लंड ऐसा बिल्कुल भी नहीं है संजू से आधा ही होगा और पतला सा तू सच सच बता अशोक का लंड कैसा है शर्माना मत सच-सच बताना,,,,।

संजू की तरह बिल्कुल भी नहीं है संजू से छोटा और पतला है लगभग लगभग संजू से आधा भी नहीं होगा,,,(थोड़ी देर खामोश रहने के बाद अपनी बेशर्मी को झाड़ते हुए आराधना बोली)

अगर तेरी चूत में जाएगा तो क्या तुझे मजा नहीं आएगा तुझे बहुत मजा आएगा मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि तेरा बेटा बरसों की प्यास को पहली चुदाई में ही बुझा देगा,,,, क्या तैयारी अपने बेटे के लंड को लेने के लिए,,,,

क्या कह रही हो दीदी संजू मेरा बेटा है मैंने उसे जन्म दिया है और तुम चाहती हो कि जहां से संजू जन्म लिया है उसी में उसके लंड को ही ले लुंं,,,,।

(आराधना के मुंह से लंड शब्द सुनते ही साधना एकदम से उसकी बात को पकड़ते हुए बोली,,)

देखी ना आराधना माहौल पूरी तरह से गर्म हो चुका है तभी तो तेरे मुंह से लंड शब्द निकला है,,,,

यह तो ऐसे ही दीदी,,,,

ऐसे ही नहीं मेरी रानी तेरी चूत में भी खुजली हो रही है अपने बेटे का लंड को लेने के लिए सच कहूं तो अगर तेरी जगह में होती तो रोज संजू को अपने ऊपर चढ़ा कर चुदवाती,,,,,।

(संजू पूरी तरह से गर्म हो रहा था दोनों नंगी औरतों की नंगी जवानी को देखकर उसकी हालत खराब हो रही थी और वह धीरे-धीरे अपने लंड को हिला रहा था जिसे देखकर साधना के सब्र का बांध टूटने लगा और वह अपना हाथ आगे बढ़ा कर संजू के लंड को पकड़ते हुए बोली,,,)

सहहहह आहहहहहह बाप रे आराधना तेरे बेटे का लंड कितना मोटा और गर्म है मेरी तो चूत पानी छोड़ रही है,,,, पकड़ कर देख जरा शर्मा मत पकड़ ले एक बार,,,

(अपनी बहन की हरकत पर आराधना शर्मा ने का नाटक कर रहे थे अपनी नजरों को नीचे झुका ली थी लेकिन वह जानती थी कि उसकी बहन आज अपनी मनमानी करके ही रहेगी इसलिए वह निश्चिंत सिर्फ वह नाटक कर रही थी इसलिए आराधना के हाथ को साधना अपने हाथ में पकड़ते हुए जबरदस्ती उसके हाथ को अपने बेटे के लंड पर रखते हुए बोली) शर्मा मत कस के पकड़ देख कितना मजा आता है पकड़ने में,,,,,,,,आहहहह कितना गर्म है ना ठीक से पकड़,,(अपनी बहन की हथेली पर अपनी हथेली रख कर उसे कस के दबाते हुए बोली,,,, आराधना का धैर्य जवाब देने लगा उसके बदन में मदहोशी अपना असर दिखाने लगी माहौल पूरी तरह से गर्म आ चुका था वातावरण में भले ही तूफानी बारिश की ठंडक थी लेकिन दो-दो जवान औरतों की गर्मी पूरे खंडहर में अपनी जवानी की तपन बिखेर रहे थे देखते ही देखते आराधना भी अपने शर्म के चादर को अपने ऊपर से उतारते हुए अपने बेटे के लंड को कस के अपनी मुट्ठी में दबा दी यह देखकर साधना मुस्कुराते हुए बोली,,,)

यह हुई ना बात,,,,, अब धीरे-धीरे अपने बेटे के लंड को मुठिया,,,(इतना सुनते ही आराधना शर्म के मारे साधना की तरफ देखने लगी तो साधना आगे बढ़ने का इशारा करते हुए बोली)

शर्मा मत जब बेटे का लंड पकड़ ही लिया है तो शर्माना कैसा,,,,।

(और फिर इतना सुनते ही आराधना धीरे-धीरे अपनी मुट्ठी में कस के अपने बेटे के लंड को आगे पीछे करके मुट्ठीयाना शुरू कर दी जिससे संजू की हालत खराब होने लगी,,,,,, उत्तेजना और मदहोशी में संजू की आंखें बंद होने लगी जिसे देखकर आराधना और भी मस्त होने लगी,,,, और साधना अपनी बहन की मदहोशी को ज्यादा बढ़ाते हुए ठीक उसके पीछे जाकर बैठ कर दी और अपने बदन से उसके बदन को हटाते हुए अपने दोनों हाथ को आगे की तरफ लाकर अपनी बहन की चूची को पकड़ ली दोनों हाथों से दबाना शुरू कर दी वैसे भी जैसे ही आराधना ने अपना ब्लाउज उतारकर चूची के दर्शन कराए थे तब से साधना के दिलों दिमाग पर अपनी बहन की गदराई चूची बस गई थी,,,, और साधना एक मर्द की तरह अपनी बहन की चूची दबा रही थी और आराधना अपनी बहन की हथेली को अपनी चूची पर महसूस करते हैं कि एकदम से मदहोश हो गई और अपनी इस मदहोशी को वह अपने बेटे के लंड पर उतारते हुए उसे कस के अपनी हथेली में दबा ली,,,, और एकदम से सिहर उठी,,,, जिस तरह से कस के आराधना ने अपने बेटे को अपनी मुट्ठी में दबा दी थी और जिस तरह से साधना उत्तेजित अवस्था में आराधना की चूची को अपने दोनों हाथों से कब आई थी ऐसे हालात में दोनों मां-बेटे के मुंह से गरमा गरम सिसकारी फूट पड़ी थी,,,।

सहहहह आहहहहहहहह,,,,, मम्मी,,,,,,,ऊमममममम

मजा आ रहा है ना संजू अपनी मां के हाथ में लंड देने में,,,

बहुत मजा आ रहा है मौसी,,,,,आहहहहहह,,,

(अपने बेटे के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर आराधना और भी ज्यादा गर्मजोशी से अपने बेटे का ध्यान रखो अपनी हथेली में दबाते हुए मुठियाने लगी और पीछे बेठी साधना और जोर-जोर से अपनी बहन की चूची को दबा दबा कर लाल करने लगी,,,, खंडहर का माहौल तूफानी बारिश में एकदम गरम होता जा रहा था,,,,,, इस तरह की तूफानी बारिश है एक जवान लड़का और एक दो मदहोश जवानी से लदी हुई औरतें अपनी जवानी का जलवा बिखेर रही थी दोनों की जवानी का बोझ एक जवान लड़के के कंधों पर आ चुका था,,, और ऐसे हालात में संजू जिम्मेदारी उठाना अच्छी तरह से जानता था इसीलिए तो वह अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर चुका था जो 2 जवान औरतों के लिए अभी तो रात की शुरुआत थी अभी तो पूरी रात बाकी थी खेल की शुरुआत ही कितनी गरमा गरम थी कि तूफानी बारिश के ठंडक में भी तीनों के माथे से पसीना टपक रहा था,,,)
 
तीनों में से किसी ने नहीं सोचा था कि गांव जाते समय इतनी तेज बारिश पड़ने लगेगी और उन्हें सर छुपाने के लिए गांव के ही छोर पर एक खंडहर में रात गुजारनी पड़ेगी लेकिन यह रात तीनों के जीवन की रोमांचकारी रात होने वाली थी जिसकी शुरुआत हो चुकी थी,,,,, सफर के दौरान तीनों में से किसी ने इसकी कल्पना भी नहीं किया था कि खंडहर के अंदर तीनों को इस अवस्था में रहना होगा,,,, लेकिन जो कुछ भी हो रहा था उसमें तीनों की भलाई थी तीनों का अपना अपना मजा था तीनों गहरे रिश्ते के बंधन में बंधे होने के बावजूद भी उन रिश्तो से उठकर केवल मर्द और औरत ही थे जिसका वह तीनों पूरा फायदा उठा रहे थे,,,,,

आराधना इस तरह से अपने बेटे का मुँह में लेते हुए

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खंडहर के अंदर मां बेटा और मौसी तीनों संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था में थे बदन को ढकने के लिए तीनों के बदन पर कपड़े का एक रेशा तक नहीं था,,,, तीनों ने कभी सोचा नहीं था कि इस तरह से एक दूसरे के सामने अपने कपड़े उतार कर ग्न अवस्था में रहना पड़ेगा लेकिन इस नग्न अवस्था का अपने-अपने नंगे पन का तीनों भरपूर फायदा उठा रहे थे और इसी के फायदे के रूप में इस समय खंडहर के अंदर जलती हुई लकड़ी के करीब,,,,,, संजू एकदम नंगा खड़ा था और उसके ठीक सामने घुटनों के बल उसकी मां बैठी हुई थी और उसके पीछे साधना,,,, जोकि अपनी छोटी बहन आराधना को अपनी बाहों में लेकर उसकी खरबूजे जैसी चूची को जोर जोर से दबा रही थी और इस का आनंद लेते हुए आराधना अपने बेटे के लंड को अपने हथेली में पकड़कर जोर जोर से दबा रही थी और ऐसा करने में आराधना के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी वह पूरी तरह से उत्तेजना में डूबी चली जा रही थी ऐसा लग रहा था कि मानो पहली बार वह किसी जवान लंड को अपने हाथ में ली हो,,,, इससे पहले भी वह अपने बेटे के लंड से जी भर कर खेल चुकी थी लेकिन आज वह पहली बार अपनी बहन की आंखों के सामने बेशर्मी की हद पार करते हुए अपने ही बेटे के लंड को पकड़ कर उससे खेल रही थी उसे जोर जोर से दबा रही थी उसे हिला रही थी मुठिया रही थी जैसा कर सकती थी वह सब कुछ कर रही थी,,,, यह देखकर साधना भी मदहोश में जा रही थी साधना इस बात से कुछ ज्यादा ही खुश और उत्साहित थी कि जैसा वह चाहती थी ठीक वैसा ही हो रहा था,,,,,।

बादलों की गड़गड़ाहट से पूरा वातावरण डरावना हो जा रहा था लेकिन खंडहर के अंदर का वातावरण पूरी तरह से मदहोशी से भरा हुआ था अपनी छोटी बहन को अपने बेटे के लंड से मजा लेते देखकर साधना बोली,,,,।

वाह रे आराधना तूने तो कमाल कर दिया देख तेरे बेटे का लंड तेरे हाथ में आकर और भी ज्यादा मोटा लंबा हो गया है कितना भयानक लग रहा है कसम से अगर किसी की भी चुत में जाएगा ना उसका पूरा पानी नीचोड़कर ही बाहर आएगा,,,,।

सहहहह दीदी,,,,(उत्तेजना के मारे लंड को मुट्ठी में और कस के पकड़ते हुए) ऐसा मत बोलो मुझे कुछ-कुछ हो रहा है,,,,

मैं जानती हूं रे तेरे बेटे का लंड ही ऐसा है कि कुछ कुछ नहीं बहुत कुछ हो जाएगा,,,,,

आराधना और साधना

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कसम से दीदी मैंने आज तक ऐसा लंड नहीं देखी,,,,

देखी मेरी आराधना रानी आ गई ना लाइन पे तेरे मुंह से लंड शब्द कितना मदहोश कर देने वाला लग रहा है,,,, कसम से तेरे हाथ में संजू का लंड देखकर मेरा मन कर रहा है कि इसे जल्द से जल्द अपनी चूत में ले लूं,,,,

ओहहहह दीदी क्या कर रही हो संजू तुम्हारा भतीजा है और मेरा बेटा है,,,

अरे पगली आप कौन सा बेटा कौन सी मां कौन सी मौसी अब हम तीनों एक औरत और एक मर्द हैं जो कि दुनिया से बेखबर औरत और मर्द के बीच के रिश्ते का आनंद लेना चाहते हैं अब तू अपने दिमाग से निकाल दे की जिसका लंड तूने पकड़ी है वह तेरा सगा बेटा है,,,, बस अपने दिमाग में यह सोच के सामने जो खड़ा है वह मर्दाना ताकत से भरा हुआ है कि जवान मर्द हैं जो अपने लंड के बलबूते से बरसों की प्यास को बुझा सकता है,,,,

ओहह दीदी क्या यह सही होगा,,,,

बिल्कुल सही होगा मेरी रानी इस बात को भला और कोई कैसे जान पाएगा और जब तक किसी राज को कोई जान ना पाए वह सब कुछ सही ही रहता है वैसे भी इस खंडहर में मेरे और तेरे सिवा दूसरी कोई औरत चाहिए या दूसरा कोई मर्द तो है नहीं की इस तरह की बातों को बाहर बता सके इसलिए निश्चिंत रहें,,,,

नहीं दीदी ऐसा कुछ भी नहीं करना है मुझे तो बहुत शर्म आती है,,,,(आराधना जानबूझकर नाटक करते हुए बोली)

अरे पगली तुझे शर्म आ रही है ना लेकिन अपने बेटे को देख,,,(संजू की तरफ नजर उठाकर देखते हुए) देखो से कितना मजा आ रहा है आखिरकार वह भी तो तेरा ही बेटा है ना तेरी ही चूत से निकला है लेकिन देख कैसे लंड खड़ा कर लिया है तेरी चूत में डालने के लिए,,,, पगली तू दुनिया की हकीकत को नहीं जानती मर्द जी से चूत से बाहर निकलता है उसकी चूत में लंड डालने के लिए तड़पता भी है जैसा कि समय तेरा बेटा कसम से बोल रही हूं अगर तू अपनी बेटी के लिए अपनी टांग खोल देगी ना तो तेरा बेटा बिल्कुल भी नहीं सोचेगा की टांग फैलाए लेटी हुई औरत मेरी मां है बस उसे एक नंगी औरत और उसकी चूत ही नजर आएगी जिसमें अपना लंड डालकर अपनी जवानी की प्यास बुझा सकता है,,,,,,,,

आराधना और साधना

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दीदी तर्क तो तुम बहुत ही अच्छा देती हो लेकिन फिर भी संजू मेरा बेटा है,,,,

हां तभी तो उसके लंड को पकड़ कर मस्त हो रही है देख,,,(आंखें मुंह करके आराधना की दोनों टांगों के बीच उसकी गुलाबी चूत की तरफ देखते हुए) तेरी चूत कितना पानी छोड़ रही है,,,।

हाय दीदी,,,,(एकदम से चौक कर हथेली से अपनी चूत को ढंकते हुए) तुम भी पता नहीं कहां-कहां देखती रहती हो,,,

मैं एकदम काम की जगह क‌ो ही देखती हूं,,,,,(अपना हाथ आराधना की दोनों टांगों के बीच लाते हो और उसका हाथ पकड़ कर उसे हटाते हुए बोली) अरे पगली हटा तो सही देखो तो सही कि तेरी छूट कितनी गर्म है तेरे बेटे के लंड को पूरा ले पाएगी कि नहीं,,,,(इतना कहने के साथ ही आराधना के हाथ को हटाकर उसकी गुलाबी चूत को अपनी हथेली से ढक कर उसे ज़ोर से हथेली में दबोचते हुए बोली,)

हाय दैया कितनी गर्म है इसमें तो लगता है कि गरम लावा भरा हुआ है जिसे निकालना बहुत जरूरी है,,,,(ऐसा कहते हुए साधना अपनी बहन की चूत को अपनी हथेली से रगड़ने लगी जिससे आराधना की मदहोशी और ज्यादा बढ़ने लगी और संजू धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाने लगा अपनी मां की हथेली में ही उसे सा लग रहा था कि वह अपनी मां की चूत में लंड डालकर अंदर बाहर कर रहा हो और अपनी बहन की हरकत पर एकदम से गर्म सिसकारी लेते हुए आराधना बोली,,,)

आराधना और साधना

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सहहहरह आहहहहह दीदी का क्या कर रही हो,,,,(इतना कहते हुए अपनी आंखों को मूंद ली क्योंकि अपनी बहन की हरकत से उसे बहुत मजा आ रहा था और साधना जोर-जोर से अपनी हथेली को अपनी बहन की चूत पर रगड़ते हुए बोली,,)

प्यार कर रही हूं रे अपनी बहन की चूत से मुझे यकीन नहीं हो रहा कि इस उमर में भी तेरी चूत इतनी खूबसूरत लगती है,,,,सहहहह आहहहहह ऊममममम आराधना तू एकदम गरम माल है देख तेरे बेटे का क्या हाल किया है तूने अभी तो सिर्फ हाथ में ली है जब चुत मे लेगी तो कितना मस्त कर देगी अपने बेटे को,,,,,,।

ओहहहह दीदी,,,,,, तुम्हारी बातें और तुम्हारी हरकत मुझे पागल कर रही है,,,,,

पागल तो तेरा बेटा हो रहा है देख उसकी आदत को थोड़ा रहम कर लंड को अपने मुंह में लेकर थोड़ा सा प्यार कर दे तेरे बेटे की निकल पड़ेगी,,,,

नहीं नहीं मुझसे यह नहीं होगा,,,,(जानबूझकर घबराने का नाटक करते हुए आराधना बोली तो साधना उसे समझाते हुए बोली)

अरे पगली बहुत मजा आएगा तुझे अशोक का तो लेती होगी ना,,,,

नहीं मैंने कभी उनका मुंह में नहीं ली मुझे बहुत घिन्न आता है,,,,।

अरे बुद्धू यही तो औरत का सबसे बड़ा काम बाण होता है मर्दो पर चलाने का अगर यह क्रिया औरत कर दी तो मर्द उसका दीवाना हो जाता है पागल हो जाता है गुलाम बन जाता है इससे दोनों को मजा मिलता है औरत को भी मर्द को भी एक बार मुंह में ले देख कितना मजा आता है,,,

आराधना अपनी बड़ी बहन क साथ

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नहीं दीदी मुझसे नहीं होगा भला मैं अपने बेटे का कैसे,,,

धत् रंडी शर्म आ रही है अगर ऐसा ही करेगी तो फिर अपने बेटे का लंड चूत में कैसे लगी,,,,

नहीं मैं नहीं लूंगी,,,,

पागल मत बनो अपने बेटे पर तो रहम कर देख के सब पागल हुआ जा रहा है तेरी चूत में डालने के लिए,,, क्यों संजू बेटा तुझे कोई दिक्कत है अपनी मां की चूत में डालने के लिए,,,,।

(इतना सुनते ही संजू अपनी आंखों को खुलकर अपनी मां और अपनी मौसी की तरफ देखने लगा जो कि मदहोशी में अपनी आंखों को बंद कर लिया था वह अपनी मौसी का सवाल सुनकर अपने होठों पर मदहोशी भरी मुस्कान लाते हुए बोला)

अगर मम्मी को कोई दिक्कत नहीं होगी तो मुझे भी कोई दिक्कत नहीं होगी,,,

देख तेरेसे समझदार तो तेरा बेटा है वह तेरी खुशी चाहता है यह नहीं चाहता कि तू किसी और मर्द के पास जाकर अपनी चूत की प्यास बुझाए और वैसे भी मेरी रानी संजू से अच्छा मर्द और साथी तुझे नहीं मिलेगा जो बिस्तर पर पलंग तोड़ चुदाई करता हूं इसका लंड देखकर ही मैं समझ गई हूं तेरी बड़ी बड़ी गांड के लिए तेरे बेटे का लंड ही उचित हथियार है जो तेरी मचलती जवानी पर काबू कर पाएगा,,,,।

लेकिन दीदी,,,,(इतना कहते हुए उत्तेजित अवस्था में बाप ने बेटे के लंड पर जोर जोर से दबा रही थी,,,)

लेकिन लेकिन कुछ नहीं तुझे नहीं आता तो रुक मैं बताती हूं कैसे करना है,,,,(और फिर इतना कहने के साथ ही,,, अपनी बहन की चूत पर से और चूची पर से अपने दोनों हाथ को हटाकर अपना मुंह एकदम आगे की तरफ ले आई हो आराधना का हाथ संजू के लंड पर से हटा कर उसे अपने हाथ में पकड़ ली अपने प्यासे होठों को तुरंत संजू के मोटे तगड़े गरमा गरम लंड की आलू बुखारा की तरह गोल गोल सुपाड़े पर रख दी और उसे धीरे से अपने होठों के अंदर लेकर चूसना शुरु कर दी यह देखकर आराधना एकदम हैरान हो गई थी इस बात से नहीं कि उसकी बहन संजू के लंड को मुंह में लेकर चूस रही है क्योंकि आराधना तो अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी बड़ी बहन और उसके बेटे के बीच शारीरिक संबंध का रिश्ता है और ऐसे में वह दोनों बहुत कुछ करते थे,,,,,बल्कि इस बात से कि उसकी बड़ी बहन बिल्कुल भी शर्म आ नहीं रही थी वो एकदम बेशर्मी बन चुकी थी एक रंडी की तरह और एक मां की आंखों के सामने ही उसके ही बेटे के लंड को मुंह में लेकर चूस रही थी,,,,, आराधना अपनी पलकों को झुकाना भूल गई थी वह अपनी बहन को देख लेती तो कभी संजू को जो कि संजू अपनी आंखों को बंद करके एकदम मजा लेते हुए अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया था और अपनी मौसी के मुंह में लंड डालकर उसके मुंह को ही चोद रहा था,,,, इस तरह की गरमा गरम नजारे को देखकर आखिरकार की आराधना कब तक शांत रहती वह भी अपनी बहन की तरह एकदम रंडी बन जाना चाहती थी एकदम छिनार की तरह व्यवहार करना चाहती थी इसीलिए कुछ देर तक अपनी बहन को अपने बेटे के लंड से मजा लेता देखकर,,,, वह तुरंत अपनी बहन को,,,, अपने बेटे के लंड को मुंह में से निकालने के लिए बोली,,,,।

आराधना और साधना

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दीदी अब मेरी बारी देखु तो सही क्या सच में मजा आता है,,,,,(और फिर गहरी सांस लेते हैं उन्हें साधना संजू के लंड को अपने मुंह में से अलग कर दी और फिर गहरी सांस लेते हुए आराधना की तरफ देखने लगी जो कि अपने बेटे के लंड को पकड़ कर साधना की तरफ देख रही थी साधना उसे आगे बढ़ने का इशारा कर रही थी आराधना जानबूझकर शर्माने का नाटक कर रही थी जबकि वह तो बेहद उत्सुक थी अपने बेटे के लंड को मुंह में लेने के लिए,,,, और फिर अपनी बहन की तरफ से हरी झंडी मिलते ही वह अपनी प्यासे लाल-लाल होठों को अपने बेटे के लंड के सुपाड़े की तरफ बढ़ाने लगी और जैसे ही आराधना के होठ संजू के लंड के सुपाड़े से स्पर्श हुआ आराधना एकदम से मचल उठी और बिल्कुल भी देर ना करते हुए अपने बेटे के सुपाडे को पूरी तरह से मुंह में भर ली और तुरंत नजर घुमाकर अपनी बहन की तरफ देखने लगी और यह देखकर साधना एकदम से प्रसन्न हो गई,,,,, और आराधना का उत्साह बढ़ाते हुए बोली,,,,।

ऐसे ही मेरी रानी अपनी जीभ को गोल गोल घुमा लंड के सुपाड़े को जैसे कि आइसक्रीम पर घुमा रही हो,,,,,।

(अपनी बहन के बताए अनुसार आराधना वैसे ही कर रही थी अपनी तरफ से कुछ ज्यादा करने की कोशिश नहीं कर रही थी ताकि उसकी बहन को यह ना लगेगी आराधना पहले से ही खेली खाई है,,,,,) बहुत अच्छे बातें तो बहुत मजा दे रही है अपने बेटे को देख इसकी हालत खराब हो रही है,,,, बस अब धीरे-धीरे से मुंह के अंदर ले पूरा का पूरा अंदर ले लेना गले तक देख तक कितना मजा आता है,,,,

(जैसा साधना निर्देश दे रही थी वैसा ही आराधना कर रही थी तीनों को बहुत मजा आ रहा था तीनों अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहे थे बरसात पूरा अपना असर दिखा रही थी ,,, अपनी असर में तीनों को भिगो चुकी थी,,,,, धुआंदार बारिश में दोनों औरतें और एक नौजवान मर्द पूरी तरह से इस मौके का फायदा उठाते हुए एक दूसरे के अंगों से मजा ले रहे थे आराधना धीरे-धीरे अपने बेटे के लंड को पूरी तरह से अपने गले में लेकर चूसना शुरू कर दी थी यह देखकर साधना उत्साहित हो जा रही थी साधना और आराधना दोनों अपने अपने तरीके से बेहद खुश नजर आ रहे थे क्योंकि आराधना इसी मौके की तलाश में थी और साधना यही सोच रही थी कि जैसा वह सोच रही थी वैसा ही करके दिखा दी,,,, अब वह जब चाहे तब आराधना के बेटे के साथ चुदवा सकती थी खुलेआम उसके घर पर आकर भी,,,, और आराधना इसलिए खुश थी की उसकी करनी पर पर्दा पड़ चुका था अब उसके लिए काम कीड़ा की यही शुरुआत थी जो कि उसकी बहन की वजह से ही आगे बढ़ रही थी अब इस खेल में आराधना अपना दोष बिल्कुल भी नहीं समझ रही थी इसीलिए तो खुलकर मजा ले रही थी और संजू तो एकदम खुश नसीब था क्योंकि उसके दोनों हाथों में लड्डू था और मुंह में गुलाब जामुन क्योंकि मां के साथ-साथ दोनों की बेटियां भी हाथ लग चुकी थी,,,,,।

साधना और संजू

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संजू पूरी तरह से मस्ती के सागर में गोते लगाता हुआ अपनी आंखों को बंद करके धीरे-धीरे अपनी कमर को आगे पीछे करके हिला रहा था और आराधना शर्मो हया के परदे को उतार कर एक रंडी की तरह अपनी बड़ी बहन की आंखों के सामने यह अपने बेटे के लंड को मुंह में लेकर चूस‌ रही थी,,,, अपनी छोटी बहन को मस्ती करते हुए देखकर साधना के तन बदन में आग लग रही थी और वह धीरे से अपनी जगह से उठाई और खड़ी होकर तुरंत संजू के पास जाकर उसके होठों पर अपने होंठ रखकर चुंबन करना शुरू कर दी उत्तेजित अवस्था में संजू पागलों की तरह अपना हाथ अपनी मौसी की चूची पर रख कर दिया और उसे दबाना शुरू कर दिया देखते ही देखते संजू अपनी मौसी को मस्त करने लगा आराधना अपनी नजरों को ऊपर करके अपने बेटे की हरकत को देखकर और ज्यादा उत्तेजित हो रही थी,,,,,, साधना की चूचियां कुछ ज्यादा ही बड़ी थी लेकिन कसी हुई नहीं जितना कसाव आराधना की चुचियों में थी उतना कसाव साधना की सूचियों में बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन फिर भी पपाया की तरह गोल गोल और थोड़ा सा लंबी थी लेकिन लाजवाब थी जिसे संजू अपने दोनों हाथों में लेकर जोर जोर से दबा रहा था,,,, साधना की आंखों में खुमारी छा रही थी एक मां अपने बेटे को अपनी ही बड़ी बहन से एक बार फिर से मस्ती करते हुए आनंद लेते हुए देख रहा था और यह देखकर खुद वह एकदम मदहोश हुए जा रही थी और पागलों की तरह अपने बेटे के लंड को अपने मुंह में अंदर बाहर कर रही थी और देखते-देखते संजू पागलों की तरह चुंबन का आनंद लेते हुए अपने एक हाथ को सीधा अपनी मौसी की चूत पर रख दिया और उसे जोर जोर से मसल ना शुरू कर दिया आराधना यह देखकर हैरान थी कि उसका बेटा पूरी तरह से एक मर्द बन चुका था जो किसी भी औरत को संतुष्ट करने के लिए पर्याप्त था वह अपनी हरकत से अपनी हथेली से अपनी मौसी की चूत को मसल मसल कर उसे कचोरी की तरह फुला दिया था,,,,

दोनों बहनों की हालत खराब थी दोनों बहनों की गर्म जवानी का पानी निकालने का जिम्मा संजू के कंधों पर था उसके नौजवान मर्दाना ताकत से भरे हुए लंड पर था जिसकी बदौलत वह दोनों औरतों की जवानी की गर्मी को पिघलाने के लिए तैयार था और इसीलिए आराधना भी अपने बेटे का साथ देते हुए उसके लंड को मुंह में लेकर उसके लंड को धार दे रही थी,,, ताकि गज गचाकर चूत में जा सके,,,,, कुछ देर तक दोनों इसी तरह से मजा लेते रही,,,, लेकिन अब साधना का मन कर रहा था संजू के लंड को मुंह में लेकर चूसने के लिए क्योंकि वह इस तरह के अनुभव को इस सुहानी और तूफानी रात में जाने नहीं देना चाहती थी,,,,

इसलिए वह आराधना से बोली,,,,।

अरे तू तो इसी तरह से संजू के लंड का पानी निकाल देगी,,,, अब हट मुझे भी तो मजा लेने दे कि सारा मजा खुद ही ले लेगी,,,,।

(इतना सुनते ही आराधना धीरे से अपने बेटे का लंड को अपने होंठ को दबाते हुए उसे अपने लाल-लाल होठों के पीछे से बाहर निकालने लगी ऐसा लग रहा था कि जैसे संजू का लंड आराधना के मुंह में से नहीं बल्कि उसकी चूत में से बाहर निकल रहा हो,,,, और फिर मैं धीरे से पीछे हो गई और तुरंत साधना अपने घुटनों के बल बैठकर संजू के नंबर को बिना अपने हाथ में लिए ही उसे मुंह के अंदर लेना शुरू कर दी और देखते ही देखते बिना लंड को पकड़े हो अपने गले तक उतार नहीं हो उसी अवस्था में अंदर-बाहर करने लगी संजू की मोटी मोटी जांघों को पकड़कर वह इस क्रिया को करके एकदम मस्त हुए जा रही थी,,,,। अब इस खेल की शुरुआत करने के बाद आराधना को यूं बैठे रहना अच्छा नहीं लगा था इसलिए वह अपनी जगह से खड़ी हुई और,,,, संजू के पास जाकर उसके होठों को चुंबन करने लगी,,, और फिर संजू अपनी कमर हिलाता हुआ अपनी मां को कसके अपनी बाहों में भर लिया और उसकी एक टांग उठा कर अपनी कमर से लापता हुआ अपने हथेली को अपनी मां की चूत पर रख दिया और उसे जोर जोर से मसल ना शुरू कर दिया यह देखकर साधना एकदम से उत्तेजित हो गई वह समझ गए कि संजू आप किसी के भी मां चोदने के लिए सक्षम है क्योंकि पहली बार में ही वह अपनी मां के साथ ही कल से खुल गया था ऐसा साधना को लग रहा था और वह या नहीं जानती थी दोनों मां-बेटे पहले से ही खेले खाए हैं,,,,, साधना खुश होते हुए कुछ पल के लिए संजू के लंड को अपने मुंह में से बाहर निकाल कर उत्साहित स्वर में बोली,,,।

आराधना और संजू

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वाह मेरे बच्चे यह हुई ना बात देख आराधना तेरा बेटा कितनी जल्दी लाइन पर आ गया और तू कहती थी कि तेरा बेटा ऐसा कुछ भी नहीं करेगा देख तेरी चूत को कैसे मसल रहा है एकदम लाल कर दिया है बस बेटे ऐसे ही लगे रहे,,,,(और इतना कहने के साथ ही साधना फिर से संजू के लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी आराधना की हालत खराब हो जा रही थी क्योंकि संजू ने अपनी बीच वाली उंगली को सीधे-सीधे उसकी चूत में डालकर अंदर बाहर करना शुरू कर दिया था और इस क्रिया से आराधना पूरी तरह से मचल उठी थी और एकदम से संजू के बदन से चिपक गई थी,,,, साथ ही दोनों के होंठ आपस में भिड़े हुए थे जिससे आराधना के मुंह से घुटी घुटी सी सिसकारी की आवाज आ रही थी,,,,,

निश्चित तौर पर इस तूफानी बारिश में इस तूफानी बारिश का पूरी तरह से फायदा उठाते हुए तीनों इस खंडहर में दंगल खेलने की तैयारी में थे,,,,, मां मौसी दोनों को बराबर का मजा दे रहा था संजू,,,, संजू का लंड एकदम बमपिलाट था दोनों बहने काफी देर से संजू के लंड को मुंह में लेकर चूस रही थी लेकिन अभी तक उसके लंड ने पानी नहीं फेंका था,,,,। और यही तो खासियत थी संजू के लंड की जोकि बिना औरतों को संतुष्ट कीए पानी नहीं छोड़ता था,,,

संजू जोर जोर से धक्के लगा रहा था जिससे साधना की सांस अटक जा रही थी लेकिन साधना तो बहुत मजा आ रहा था लेकिन ज्यादा देर तक वह संजू के लंड के आगे टिक नहीं पाई वह जानती थी कि लगातार संजू की हरकत की वजह से उसकी सांस घुट रही थी ‌ इसीलिए वो धीरे से संजु के लंड को बाहर निकाल ली और जोर जोर से हांफने लगी,,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे संजू इसी मौके की तलाश में था जैसे ही साधना के मुंह में से उसका लंड बाहर निकला हुआ तुरंत जगह बदलते हुए अपनी मां की तरफ घुमा और उसे अपनी बाहों में लेकर कस के दबा लिया मानव के जैसे बरसों के बाद उसे मिल रहा हो और ऐसा करते हुए उसके गोल गोल नितंबों पर अपनी हथेली रखकर जोर से दबाते हुए उसे चुंबन करने लगा यह देखकर साधना के तन बदन में चिंगारी फुटने लगी वह भी पूरी तरह से उत्तेजित हो गए क्योंकि जिस तरह से संजू अपनी मां के साथ खुल चुका था उसे आशा नहीं थी कि संजू इतनी जल्दी अपनी मां के साथ एकदम से खुल जाएगा,,,, उत्तेजना के मारे साधना की सांसे ऊपर नीचे होने लगी वो मदहोश होने लगी है कि मां बेटे का मिलन देखकर,,,,,,।

लालटेन की रोशनी में सब कुछ साफ दिख रहा था साधना बहुत खुश थी क्योंकि उसका रास्ता एकदम साफ होता नजर आ रहा था आज वह एक मां अपने बेटे से बिता दी थी उसके साथ चुदवाने के लिए तैयार कर चुकी थी और 1 मा भी तैयार हो चुकी थी अपने बेटे के लंड को लेने के लिए आखिरकार एक औरत कब तक,,, अपनी प्यास को दबाए रखती एक ना एक दिन तो उसे उभरना ही था और वह मौका आ जा चुका था तूफानी बारिश है मौके की नजाकत को समझते हुए एन मौके पर एक मां की वासना जागी थी एक बेटे के लंड को अपने अंदर लेने के लिए,,,,।

अपनी मौसी की आंखों के सामने संजू अपनी मां को अपनी बाहों में लेकर उससे प्यार कर रहा था उसकी चूची को दबा रहा था उसकी गांड को सहलाते हुए दबा रहा था,,,,, आराधना अपने बेटे की बाहों में इस तूफानी रात को अपनी बहन की आंखों के सामने मचलता हुआ महसूस कर रही थी उसका बदन पूरी तरह से कसमसा रहा था वह चाहती थी कि उसका बेटा एकदम खुलकर उसके बदन के साथ खेले मजा ले,,,,, और संजू भी ऐसा ही चाह रहा था आज उसे मौका मिला था अपनी मौसी के सामने अपनी मां और अपने बीच की दूरी को पूरी तरह से खत्म करने के लिए और संजू आज सारे दीवार को गिरा देना चाहता था आज अपनी मौसी की आंखों के सामने अपनी मां को चोदना चाहता था ताकि हमेशा के लिए उसका रास्ता साफ हो जाए,,,,, संजू के तन बदन में उत्तेजना परम शिखर पर पहुंच चुकी थी वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था ऐसे हालात में वह कुछ भी कर सकने में सक्षम था इसीलिए वह तुरंत अपनी मां के बदन को अपनी हथेली में जोर से दबाते हुए नीचे की तरफ आने लगा और देखते-देखते वह अपने घुटनों के बल बैठ गया वह ठीक अपनी मां की दोनों टांगों के बीच के उसके गुलाबी छेद को देख रहा था उसकी चूत को देखा था उसे देखा कर उसका लंड पूरी तरह से लोहे के रोड की तरह एकदम खड़ा हो चुका था,,,,

आराधना और संजू

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साधना ठीक है संजू के पीछे खड़ी थी और संजू और अपनी बहन को ही देख रही थी दोनों मां-बेटे के मिलन को देख रही थी संजू पूरी तरह से मदहोश हो चुका था उसे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था सीवाए अपनी मां की चूत के अपनी मां की चूत को देखकर पागल हुआ जा रहा था,,, आराधना का दिल जोरों से धड़क रहा था वह संजू की तरफ प्यासी नजरों से देख रही थी,,,,, तभी तेज बादलों की गड़गड़ाहट हुई और संजू तुरंत अपनी मां की तरह देखा और जैसे ही उसकी नजरें अपनी मां से टकराई वह तुरंत अपनी प्यासी होठों को अपनी मां की चूत पर रख दिया और आराधना इस पल के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी वह नहीं जानती थी कि संजू एकदम से उसकी चूत पर अपना होठ रख देगा क्योंकि उसे अपनी मौसी की मौजूदगी का थोड़ा बहुत लिहाज करना था लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं हुआ,,,,, लेकिन वह हो गया जो आराधना ने इस समय सोची भी नहीं थी जैसे ही संजू के प्यासे होंठ आराधना की चूत के गुलाबी होठों से टकराई आराधना एकदम से मचल कर कसमसा गई हो उसकी चूत से पेशाब की धार फूट पड़ी और इतने जोर से फूटी की फिर आराधना अपनी पैसाब पर काबू नहीं कर पाई और अपनी पेशाब की धार को अपने बेटे के होठों के बीच मारने लगी लेकिन यहां पर ऐसा उत्तेजना से भरा हुआ था कि संजू भी अपनी मां की चूत से निकले पेशाब की दरकार किए बिना वह अपनी मां की चूत से हटा रहा अपने होठों को बिल्कुल भी नहीं हटाया ऐसा लग रहा था कि मानो अपनी मां की चूत से निकलने वाले पेशाब की धार से‌ वह और ज्यादा उत्तेजित और मदहोश हो गया था और अपने होठों को खोल कर अपनी मां की पेशाब की धार को अपने अंदर उतारना शुरू कर दिया यह देखकर साधना एकदम से दंग रह गई संजू के साथ वह भी खुलकर मजे की थी हर एक गंदी हरकत को आनंद की नजर से देख कर मजे लेते लेकिन आज तक उसकी चूत से पेशाब की धार इस कदर फूटी नहीं थी कि वह अपनी पेशाब को संजू को पिला सके और यह देखकर वह अंदर ही अंदर से लगने लगी थी उत्तेजना उसके दिमाग पर चढ़ चुकी क्योंकि इस तरह के नजारे की साधना ने कभी कल्पना भी नहीं की थी,,,,

आराधना पूरी तरह से मजबूर थी वह इतनी अत्यधिक उत्तेजित हो चुकी थी कि पेशाब की तीव्रता को पहचान ही नहीं पाए और अपने बेटे की मदहोश कर देने वाली हरकत से इतनी ज्यादा कसमसा गई इतनी ज्यादा मचल उठी कि उसकी चूत से पेशाब की धार कब फूट पड़ी उसे पता ही नहीं चला,,,, लेकिन जब तक उसे एहसास होता सब कुछ देर हो चुका था वह अपने बेटे के चेहरे को पूरी तरह से अपने पेशाब में डूबे चुकी थी भी हो चुकी थी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह किसी पाइप के द्वारा अपने बेटे के चेहरे पर पानी की बौछार कर रही हो,,,,

लेकिन अनजाने में ही अपने आप पर काबू न कर सकने की स्थिति में जैसे ही उसकी चूत से पेशाब की धार फूटी थी वैसे ही उसके मुख से एक तेज सीट पर निकल गई थी जिससे पूरा खंडगर गूंजने लगा था,,,।

ऊहहहहहह ,,मममममममममआ,,,,आहहहहह आहहहहहह हाय दैया,,,,,आहहहहहहह यह क्या हो गया,,,,,ऊममममम ऊममममममममम,ओहहहहहहह संजू बेटा,,,,,ऊममममममममम मैं पागल हो जाऊंगी,,,,,ओहहहहहहह ओहहहहहह आहहहहहहहह ,,,,,,,(अपने बेटे के मुंह में पेशाब की धार मारने का अफसोस है उसे जरूर था लेकिन वहां किसी भी तरह से अपनी चूत को अपने बेटे के मुंह से हटाने की कोशिश बिल्कुल भी नहीं कर रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह चाहती भी यही थी लेकिन जो कुछ भी हो रहा था ना जाने का हो रहा था लेकिन इस अनजाने में भी इतना अत्यधिक मदहोश कर देने वाला आनंद मिल रहा था कि पूछो मत आराधना पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी उसकी उसकी पेशाब की धार जैसे जैसे निकल रही थी वैसे वैसे आराधना के मुख से अजीब अजीब सी सिसकारी की आवाज में कर रही थी और संजू भी अपनी मां की गांड को दोनों हाथों से पकड़कर कसकर उसकी चूत को अपने होठों से लगा लिया था मानो कि जैसे उसकी चूत से पेशाब की धार नहीं बल्कि अमृत की बौछार हो रही हो,,,,,, आराधना के साथ यह दूसरी बार ऐसा हुआ था पहली बार अपने ही कमरे में जब वह अपने बेटे को अपनी चूत चटवां रही थी तभी कमरे में मोहिनी आ गई थी और उसके आते ही आराधना की चूत से इसी तरह से पेशाब की धार फूट पड़ी थी लेकिन दोनों बार इतना अत्यधिक मजा मिला था कि उसका वर्णन करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है,,,,,,

आराधना की चूत से पेशाब की धार एकदम से ही रूक चुकी थी वह पेशाब कर चुकी थी लेकिन फिर भी संजू अपनी मां की चूत को चाटने जा रहा था उसके पैसा आपको जीप से चाट चाट कर आनंद ले रहा था यह देखकर साधना एकदम से प्रसन्न होते हुए बोली,,,,।

बाप रे आराधना तूने तो कमाल कर दी मैं तो कभी सोची भी नहीं थी कि आप हिसाब की है तूने अपने ही बेटे के मुंह में मेरा तो देखकर ही पानी निकल गया,,,, देख मेरी चूत कैसे पानी छोड़ रही है,,,(और अपनी नजरों को अपनी दोनों टांगों के बीच करके संजू और आराधना को भी दिखाने लगी दोनों साधना की चूत की तरफ देखकर मंद मंद मुस्कुरा रहे थे,,,,, दोनों अलग हुए और संजू अपनी जगह पर खड़ा हो गया और मुस्कुराने लगा अपनी मां की तरफ देखकर वह अपने लंड को पकड़ कर हिलाना शुरू कर दिया था यह देखकर साधना आराधना से बोली,,,)

तुझे कुछ भी बोलने की जरूरत नहीं है तेरा चेहरा बता रहा है कि तुझे कितना मजा आया अगर मजा ना आया होता तो इस तरह से अपने बेटे के मुंह पर पेशाब ना कर दी होती,,,,

दीदी वो तो,,,(अपने चेहरे पर शर्मिंदगी का अहसास लिए) अनजाने में हो गया मैं ऐसा करना नहीं चाहती थी,,,

मैं समझ सकती हूं आराधना यह सब उत्तेजना में हो गया मदहोशी में हो गया,,,,,

संजू बेटा तू अपने चेहरे को पानी से धो लें,,,,(आराधना अपनी बहन के सामने जानबूझकर शर्मिंदगी का अहसास करते हुए बोली जबकि उसे बिल्कुल भी शर्मिंदगी का अहसास नहीं हो रहा था उसे तो इतना मजा आ रहा था कि पूछो मत वह तो सोच रही थी कुछ देर तक और उसकी चूत से पेशाब की धार निकली होती तो और मजा आता,, अपनी मां की बात सुनते ही संजु खंडहर के किनारे गया,,, जहां से ढेर सारा पानी गिर रहा था वहीं पर अपना हाथ आगे बढ़ाकर पानी लेकर अपने चेहरे को धोना शुरू कर दिया और इस मदमस्त कर देने वाले दृश्य को देखकर साधना को भी जोरों की पेशाब लग चुकी थी वह अपनी बहन के सामने संजू के मुंह में पेशाब करना नहीं चाहती थी हालांकि उसकी भी इच्छा एकदम प्रबल हो चुकी थी कि वह भी आराधना की तरह संजू के होठों से अपनी चूत लगाकर पेशाब करें,,,, उसे जोरों की पेशाब लग गई थी इसलिए वह नहर के किनारे जहां पर संजू खड़ा होकर अपना मुंह धो रहा था वहीं पर नीचे बैठकर पेशाब करना शुरू कर दी,,,, संजू अपना मुंह धोते हुए अपनी मौसी की गोल-गोल गांड की तरफ देखते हुए बोला,,,।

वाह मौसी तुम्हारी गांड तो मारने लायक है,,,,

मार लेना आज इस खंडहर में अपनी इच्छा पूरी कर लेना आज तुझे कोई रोकने वाला नहीं है,,,(इतना कहने के साथ ही कुछ ही देर में पेशाब करके खड़ी हो गई,,,, और फिर आपस जलती हुई लकड़ी के पास आ गई जहां पर लकड़ी कम पड़ चुकी थी और खंडहर में रोशनी कम होने लगी थी इसलिए वह पास में पड़ी लकड़ी को डालकर फुक मारने लगी और थोड़ी देर में फिर से रोशनी फैल गई,,,,, और फिर साधना आराधना से बोली,,,)

आराधना मेरी जान अब तैयार हैं अपने बेटे के लंड को अपनी चूत में लेने के लिए,,,,

दददद दीदी,,,, मुझे शर्म आ रही है दीदी,,,

पागल मत बन,,, इतना मजा ले चुकी है अब जब किनारे पर पहुंच गई तो वापस लौटने की बात कर रही हैं अगर आज तू अपने बेटे से नहीं चुदवाई तो निश्चित तौर पर किसी और को तू अपनी चूत दे बैठेगी तब परिवार की बदनामी हो जाएगी क्या तू यही चाहती है,,,,, तू क्या चाहता है मेरे लाल तू अपनी मां को चोदना चाहता है ना,,,,

हां बिल्कुल अब तो बिल्कुल भी रहा नहीं जाता,,,(अपने लंड को हाथ में पकड़ कर हिलाते हुए संजू बोला तो साधना एकदम से खुश हो गई,,,, और बोली,,,)

तो फिर देर किस बात की है अपने मोटे तगड़े लंड को अपनी मां की चूत में डाल कर उसे एक बार फिर से हरी कर दे बरसों से सूख रही है,,,,

मम्मी तैयार है,,,(वह अपनी मां की तरफ देखते हुए अपनी मौसी से पूछा तो उसकी मौसी बोली)

बिल्कुल तैयार है तु चिंता मत कर बस अपने लंड पर ढेर सारा थूक लगा ले,,,,,

(और इतना कहने के साथ ही वह आराधना कहां पकड़ कर अपनी तरफ खींची और उसे अपनी बाहों में भर कर एक बार फिर से उसे गर्म करने लगी उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर उसका चुंबन करने लगी और उसकी बड़ी बड़ी गांड को अपने दोनों हथेली में लेकर दबाना शुरू कर दी औरत से औरत का मजा पहली बार साधना ले रही थी इसलिए उसे बहुत मजा आ रहा था पैसा सुख आराधना अपनी बेटी मोहिनी के साथ ले चुकी थी इसलिए उसे अनुभव था वो एकदम से अपनी बहन के बदन से चिपक गई और उसके चुंबन में साथ देने लगी,,,,, कुछ देर तक साधना इसी तरह से अपनी बहन को गर्म करते हुए और उसकी चूत पर अपनी चुत र गडते हुए उसे पूरी तरह से पानी पानी कर दी और फिर उसे अपने बदन से अलग करते हुए बोली,,,,)

बस आराधना अब लेट जा,,,,,

लेकिन दीदी,,,

लेकिन लेकिन कुछ नहीं तेरी चूत में लंड जाएगा फिर मेरी चूत में जाएगा हम दोनों बहने आज संजू से चुदवाएगी एक दम मस्त हो जाएंगी,,,,(इतना कहने के साथ ही है साधना पेड़ का सहारा लेकर पेड़ से ही नीचे जमीन को थोड़ा साफ करने का कि ताकि आराम से आराधना लेट सके तो फिर थोड़ी ही देर में आराधना भी अपने शर्म को दूर करते हुए जो कि जानबूझकर दिखा रही थी वह सीधे आकर पीठ के बल नीचे जमीन पर लेट गई और फिर संजू अपने लंड को पकड़ कर हिला था वह अपनी मां के पास जाने लगा यह देखकर साधना मंद मंद मुस्कुराने लगी यह नजारा साधना को भी बेहद उत्तेजित कर देने वाला लग रहा था क्योंकि वह पहली बार एक बेटे को अपनी मां को चोदने के लिए आगे बढ़ते हुए देख रही थी एक मां को अपने ही बेटे का लंड अपनी चूत में लेने के लिए उत्साहित होते हुए देख रही थी,,,, देखते-देखते संजू अपनी मां के दोनों टांगों के बीच जगह बना लिया और फिर एक मजे हुए खिलाड़ी की तरह अपनी मां की कमर को पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच लिया और उसकी आधी गांड को अपने जांघों पर चढ़ा लिया ऐसा करने से आराधना की चूत एकदम से संजू के लंड के सामने आ गई और संजू यह देखकर एकदम उत्साहित हो गया,,,,, संजू की सांसे गहरी गहरी चल रही थी और यही हाल आराधना का भी था वह कभी अपनी बहन की तरफ तो कभी संजू की तरफ देख रही थी वह पहले भी संजू के लंड को अपनी चूत में ले चुकी थी इसलिए वह अगले पल के इंतजार में मचल रही थी और देखते ही देखते संजू अपनी मां की चूत को अपनी हथेली में कस के दबाते हुए उत्तेजित होते हुए बोला,,,)

सहहहहह मम्मी तुम्हारी चूत एकदम कचोरी की तरह फुल गई है,,,,

पहली बार है बेटा अपनी मां की चूत में आराम से लंड डालना कहीं फाड़ मत देना वरना दोबारा यह डालने नहीं देगी,,,।

तुम चिंता मत करो मौसी मेरी मम्मी की चूत एकदम मखमल की तरह दिख रही है एकदम नरम नरम मैं एकदम आराम से अंदर डालूंगा,,,,(इतना कहने के साथ ही संजू ढेर सारा थूक अपने मुंह में से अपनी हथेली पर गिराया और हथेली का थूक अपने लंड पर लगाकर उसे पूरी तरह से चिकना कर लिया आराधना का दिल जोरों से धड़क रहा था आज वह पहली बार अपनी बहन की आंखों के सामने चुदवाने जा रही थी और वह भी अपने ही बेटे से,,,, ऐसा करने में उसे अत्यधिक उत्तेजना का एहसास हो रहा था जिसमें वह पूरी तरह से डूबती चली जा रही थी देखते ही देखते संजू ने अपने लंड का सुपाड़ा को अपनी मां की गुलाबी चूत से सटा दिया और संजू कै ऐसा करते ही आराधना एकदम से सिहर उठी,,, और फिर संजू अपने लंड को अपने हाथ से पकड़ कर सुपाड़े को धीरे-धीरे चूत के अंदर प्रवेश कराने लगा,,, आराधना की चूत में पहले से ही संजू के लंड के मोटाई और लंबाई का सांचा बन चुका था इसलिए बड़े आराम से संजू अपनी मां की चूत में डाल सकता था लेकिन समझो वैसा करना नहीं चाहता था क्योंकि वह जानता था कि वह अपनी मौसी के सामने अपनी मां को चोदने जा रहा है जिसकी नजर में उसकी मां एकदम से सात आठ महीनों से बिल्कुल भी लंड अपनी चूत मिली नहीं थी और फिर अपने पति के लंड का वर्णन हो पहले ही कर चुकी थी इसलिए पहली बार मोटा तगड़ा लंड जाने पर जिस तरह से औरत की प्रतिक्रिया होती है वैसा ही संजू चाहता था कि उसकी मां वैसी ही प्रतिक्रिया दिखाए लेकिन वह अपनी मौसी के सामने ऐसा बोल नहीं सकता था लेकिन आराधना अच्छी तरह से जानती थी क्योंकि वह भी बहुत समझदार थी वह भी जानती थी कि पहली बार हुआ अपनी बहन की आंखों के सामने मोटे तगड़े लंबे लंड को अपनी चूत में लेने जा रही थी और ऐसा पहली बार होने पर औरत की जो दशा होती है ठीक उसी दशा का हाल आराधना को दिखाना था और उसी के लिए वह अपने आप को तैयार कर चुकी थी,,,।

जैसे ही संजु के लंड का सुपाड़ा हल्का सा चूत के अंदर प्रवेश किया वैसे ही आराधना दर्द से बिलबिला ने वाला चेहरा बना ली,,,, लेकिन संजू भी एकदम समझदारी दिखाते हुए अपने लंड को उसी तरह से रोक दिया और फिर थोड़ी देर गुजरने के बाद फिर से अपने लंड को अपनी मां की चूत में डालने लगा इस बार संजू के लंड का सुपाड़ा आधा आराधना की चूत में प्रवेश कर चुका था,,,, और ऐसा होने पर आराधना अपने दांत को जानबूझकर भींचते हुए,,, अपनी आंखों को बंद कर ली,,,,,,

आराधना अपनी बड़ी बहन के सामने केवल नाटक कर रही थी क्योंकि महीनों गुजर गए थे उसकी चूत में लंड घुसा नहीं था और उसके पहले घुसा भी था तो उसके पति का पतला सा मरियल सा लंड जिससे एक गदराई जवान औरत को कोई आभास होने वाला नहीं था लेकिन इस समय आराधना की चूत में एक जवान मर्द का बमपिलाट लंड घुस रहा था और जाहिर था कि पहली बार इतने मोटे तगड़े लंड को अपनी चूत में लेने से किसी भी औरत को दर्द तो महसूस होगा ही और इसीलिए ही आराधना अपनी बहन के सामने दर्द का नाटक कर रही थी क्योंकि उसकी बहन यही सोचती थी कि महीनों बाद आराधना की चूत में कोई लंड प्रवेश कर रहा है और वह भी एक दम मोटा तगड़ा इसलिए आराधना का नाटक एकदम सहज नजर आ रहा था जिससे साधना को बिल्कुल भी शक नहीं हो रहा था और यही काम संजू की कर रहा था संजू बड़े संभाल कर अपने लंड को अपनी मां की चूत में डालने की कोशिश कर रहा था वह इतना अत्यधिक उत्तेजना से भरा हुआ था कि पहले धक्के में ही वह अपनी मां की चूत की जड़ तक अपने लंड को पहुंचाने में सक्षम था लेकिन वह ऐसा करना नहीं चाह रहा था बस एक बार लंड घुस जाता उसके बाद हुआ अपनी सारी कसर उतार लेता,,,,,,,,

बस बस हो गया चिंता मत करो थोड़ा सा और,,,,

(अपनी मौसी के सामने अपनी मां को दिलासा देते हुए उसकी चूत के ऊपर ही भूले हुए हिस्से को अपनी हथेली से सहलाता हुआ बोला,,,, आराधना की सांसे उत्तेजना के मारे बहुत गहरी चल रही थी वह भले ही नाटक कर रही थी लेकिन इस समय उत्तेजना से वह एकदम तड़प रही थी वह अपने बेटे के लंड को अपनी चूत में पहली बार नहीं दे रही थी लेकिन वक्त के साथ माहौल और हालात के साथ साथ मर्द और औरत की उत्तेजना भी बदल जाती है इस समय माहौल पूरी तरह से बदला हुआ था पहली बार इस तरह के माहौल में मां बेटे चुदाई का आनंद ले रहे थे और वह भी साधना की आंखों के सामने तेज बारिश खंडहर नुमा मकान तेज चलती हवाएं बादलों की गड़गड़ाहट यह सब मिलाकर वातावरण को रोमांटिक बना रहा था और ऊपर से एक साथ दो दो जवान औरतें बिना कपड़ों के एकदम नंगी उनके अंगों को देखकर किसी भी मर्द का लंड बिना चूत में प्रवेश किए ही पानी छोड़ दे इस तरह के हालात पैदा हो चुके थे,,,, और इसीलिए ऐसे माहौल में मां बेटे और मौसी तीनों की उत्तेजना परम शिखर पर थी,,,,,)

आराम से डालना संजू तेरा बहुत मोटा है कहीं मेरी चूत फट ना जाए,,,,।

(उत्तेजना के मारे आराधना भी मदहोशी के रंग में रंगते हुए बोली,,,, आराधना की बात सुनकर साधना बोली)

तू बिल्कुल भी चिंता मत कर आराधना,,,(और इतना कहने के साथ ही वह घुटनों के बल आराधना के सिरहाने बैठ गई और उसके माथे पर हथेली रखकर सहलाने लगी ,,, और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) धीरे-धीरे अपनी मां की चूत में डाल देख तेरी मां की चूत कितना पानी छोड़ रही है आराम से चला जाएगा,,,,,

डालने को तो मैं एक झटके में मां की चूत में डाल दु लेकिन मेरा मोटा लंड कहीं मां की चूत को फाड़ ना दे,,,,

नहीं बेटा ऐसा बिल्कुल भी मत करना मैं दर्द से मर जाऊंगी,,,(अपने बेटे की बात सुनते ही आराधना डरने का नाटक करते हुए बोली)

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मम्मी ऐसा मैं होने नहीं दूंगा क्योंकि अब तो हमेशा तुम्हारी चूत से प्यार जो करना है,,,

हां यह हुई ना बात,,,(साधना संजू की बात सुनते ही बोली) अब आराधना तुझे अपने पति की बिल्कुल भी जरूरत नहीं पड़ेगी एक बार तो ने अपने बेटे का लंड अपनी चूत में ले लूंगा फिर देखना तू दिन रात अपने बेटे के लंड पर कुदती रहेगी,,,,

ओहहह दीदी तुम तो मुझे सपना दिखा रही हो,,,

सपना नहीं दिखा रही हूं हकीकत बता रही हूं एक बार तुम दोनों के बीच यह रिश्ता कायम हो गया तो देखना हमेशा के लिए मजा ही मजा देगा और वैसे भी तु एकदम कड़क माल है तुझे चोदने के बाद तेरा बेटा तेरी चूत का इतना आशिक हो जाएगा कि जमाल लड़कियों की तरफ देखेगा भी नहीं,,,,, क्यों रे हमेशा अपनी मां को खुश करेगा ना,,,,

अगर मम्मी चाहेगी तो रोज इस तरह का सुख दूंगा,,,,,

(तभी एकदम से बादल के गड़गड़ाहट की आवाज आई और संजू एकदम से उत्तेजित होता हुआ अपने लंड को कस के पकड़े हुए अपनी मां की चूत में बाकी बचे सुपाडे को डालने की कोशिश करते हुए बोला,,,)

सहहहहह आहहहहह मम्मी इस तूफानी बारिश में तुम दोनों की चूत ने मेरी हालत खराब कर दिया है कसम से एक बार यह लंड घुस जाए ना उसके बाद ऐसा चोदूंगा कि जिंदगी भर याद रखोगी,,,,

पहले डाल तो सही,,,(एकदम से मदहोशी भरे स्वर में आराधना बोली)

सहहहहह आहहहहह मम्मी तुम्हारी चूत बहुत गर्म है,,,,आहहहह अगर इस पर घी रख दो तो एकदम पिघल जाए,,,,

चिंता मत कर संजू तेरे मामा के वहां बहुत घी है,,,, जब भी रोटी पर लगाना होना तो पहले अपनी मां की चूत पर घी को गिरा देना और एक दम पिघल जाए तो फिर उस पर रोटी रखकर लगा लेना,,,,

मौसी इससे तो अच्छा है कि नहीं मम्मी की चूत के रस में रोटी डूबा डूबा कर खा लुं,,,,

अरे रोटी बाद में डूबा ना पहले अपना लंड डुबा,,,,

सहहहहह मम्मी तुम्हारी तरफ देख कर मेरा लंड पागल हुआ जा रहा है रुको मैं अभी डाल देता हूं,,,,(और फिर इतना कहने के साथ ही संजू अपने लंड को कसके अपनी मां की चूत के अंदर प्रवेश करने लगा और अगले ही पल चूत की चिकनाहट पाकर बाकी बचा लंड का सुपाड़ा भी चूत के अंदर प्रवेश कर गया और जैसे ही सुपाड़ा चूत के अंदर प्रवेश किया वैसे ही साधना एकदम से खुश होते हुए बोली,,,,)

बस मेरी रानी घुस गया है एक बार मुंह घुस जाए तो फिर पूरा का पूरा इंसान चूत में समा जाए,,,(ऐसा कहते हुए साधना अपना दोनों हाथ आगे बढ़ाकर आराधना की दोनों चूची पर रख दिया उसे अपनी हथेली में पकड़कर दबाना शुरू कर दी,,,, आराधना को दुगना आनंद प्राप्त होने लगा दोनों टांगों के बीच उसका बेटा उसे पूरी तरह से आनंदित कर रहा था और ऊपर से उसकी बड़ी बहन उसके दोनों दशहरी आम को पकड़कर अपने हाथों से दबा रही थी देखते ही देखते संजू मौके का फायदा उठाते हुए एक धक्का मारा और अपना आधार कार्ड अपनी मां की चूत में डाल दिया और इस बार आराधना ऐसा जताने लगे कि जैसे गधा का लंड उसकी चूत में घुस गया है इसलिए वह जोर से चिल्ला उठी,,,,।)

ऊईईईईईई मां,,,,,, मर गई रे हाय दैया क्या डाल दिया रे तूने अंदर,,,,,आहहहहहहहह,,,,,,,,,(आराधना जानबूझकर छटपटाने लगी वह अपनी बहन को दिखा रही थी कि पहली बार उसकी चूत में इतना मोटा लंड जा रहा है,,,,, जो की आराधना का यह नाटक बेहद जरूरी भी था वरना साधना को शक हो सकता था कि बाहर जरूर उसका चक्कर चल रहा है तभी इतना मोटा लंड जाने पर उसे बिल्कुल भी तकलीफ नहीं हुआ और यही देखकर साधना मन ही मन खुश हो रही थी उसे पूरा यकीन हो गया था कि उसकी बहन पहली बार किसी दूसरे मर्द का लंड अपनी चूत में ले रही है,,,,,, और इसमें अपनी मां का बराबर साथ दे रहा था संजू,,,, वह भी एक औरत के जज्बात को अच्छी तरह से समझ रहा था इसीलिए तो अपनी आंखें बंद को अपनी मां की चूत में डालकर उसी तरह से एकदम से ठहर गया,,,, और अपनी मां की चिकनी कमर को दोनों हाथों से पकड़कर उसे मसलते हुए बोला,,,,।

बस बस मम्मी बस हो गया मेरा लंड को ज्यादा ही मोटा है और तुम्हारी चूत का छेद बहुत छोटा है,,,,, इसलिए बड़ी मेहनत से अंदर घुस रहा है,,,,,(संजू की अपनी मां से बेशर्मी भरी बातें करते हुए बोला और संजू की बात सुनकर साधना बोली,,,)

अरे अरे संजू संभाल कर पहली बार में ही अपनी मां की चूत फाड़ डालेगा क्या,,,,, आराम से कर पहली बार चुत मिली है तो एकदम से पागल हो गया है,,,, तुझे शायद पता नहीं है कि औरत की चूत कितने मुलायम होते हैं एकदम गुलाब की पत्ती की तरह इसलिए एकदम प्यार से धीरे-धीरे आहिस्ता आहिस्ता अंदर डाल,,,,,

हां संजू दीदी ठीक कह रही है,,,,आहहहहहह ,,,, कुछ देर के लिए निकाल ले अपने लंड को,,
 
नहीं नहीं संजु ऐसा बिल्कुल भी मत करना नहीं तो तेरी मां फिर से डालने नहीं देगी,,,, बस थोड़ी देर रुके रे दर्द कम हो जाए तो फिर से धक्का लगाना,,,,,, तब तक मैं भी तेरी मां के दर्द को कम करने की कोशिश करती हूं,,,,(और इतना कहने के साथ ही नहीं साधना आराधना की दोनों चुचियों पर झुक गई और एक चूची को हाथ में पकड़ कर दूसरी चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दी साधना पहली बार औरत के मजा ले रही थी इसलिए उसका यह अनुभव बेहद रोमांचकारी और मदहोश कर देने वाला था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि एक औरत को औरत के साथ ही इतना मजा आ सकता है वह पागलों की तरह अपनी बहन की चूची को मुंह में लेकर पी रही थी और उसे पहली बार इस बात का एहसास हो रहा था कि वाकई में मर्दों को औरत की चूची मुंह में लेकर पीने में कितना मजा आता है उसे दबाने में कितना मजा आता है जिसका असर आराधना पर भी हो रहा था साधना के द्वारा जोर-जोर से चूची दबाने पर आराधना के मुंह से धीरे-धीरे गरमा-गरम सिसकारी की आवाज आ रही थी,,,,

जब से बारिश गिरना शुरू हुआ था तब से लगातार बारिश गीर ही रही थी,,, पल भर के लिए बारिश का जोर कम नहीं हुआ था बल्कि बारिश का जोर बढ़ता जा रहा था साथ में तेज हवाएं पूरा अपना असर दिखा रही थी चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा दिख रहा था वह तो अच्छा हुआ कि सर छुपाने के लिए खंडहर मिल गया था वरना आज तो पूरी तरह से मुसीबत में फंस जाते ,,,,,,, लेकिन अब तीनों को ऐसा लग रहा था कि तूफानी तेज बारिश में फंसने का मलाल बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि किस तरह की तूफानी बारिश में खंडहर में सर छुपाने के बाद जिस तरह के काम क्रीड़ा की शुरुआत हुई थी उसे देखकर तीनों संतुष्ट थे तीनों इसका बहुत ही आनंद ले रहे थे,,,,,,।

रह-रहकर तेज हवाओं के साथ बारिश की बूंदे अंदर तक आ रही थी जिससे तीनों के बदन पर पानी का फव्वारा पड रहा था लेकिन अब तीनों को बिल्कुल भी ठंडा का एहसास नहीं हो रहा था तीनों के बदन पर कपड़े का रेशा तक नहीं था तीनों संपूर्ण रूप से लग्न अवस्था में थे लेकिन जवानी की गर्मी वातावरण की ठंडक पर भारी पड़ रही थी यहां तक की आराधना और संजू दोनों के माथे पर पसीने की बूंदें उपस आई थी,,,,,, आराधना और संजू दोनों की सांसे गहरी चल रही थी संजू तो आनंद के सागर में गोते लगा रहा था उसका आधा लंड उसकी मां की चूत में घुसा हुआ था और साधना आराधना की दोनों चूचियों को दशहरी आम समझकर जोर जोर से दबा रही थी थोड़ी ही देर में आराधना के मुंह से गरमा-गरम सिसकारी की आवाज आने लगी अपनी चूत में अपने बेटे का आधा लंड फंसा होने की वजह से वह अंदर ही अंदर कसमसा रही थी उसे बहुत ही उत्सुकता थी कि जल्द से जल्द उसका बेटा उसके लंड को उसकी चूत की गहराई में पहुंचा दे,,,,, और फिर ऐसा ही हुआ संजू अपने दोनों हथेलियों का कसाव उसकी चिकनी कमर पर बढ़ाता हुआ बोला,,,,।

बस मम्मी अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है हमने तुम्हारी चूत में पूरा का पूरा डाल दूंगा बस थोड़ा सा अपने आप को संभाल लेना,,,,

देखना संजू चूत को संभाल कर कहीं फट ना जाए,,,,

इतनी जल्दी फटने वाली नहीं है मौसी मम्मी को देखो मम्मी का चेहरा कैसा तमतमा गया है अगर इस समय गधा का भी लंड हो तो भी मम्मी अपनी चूत में ले ले,,,,,

धत्,,,, हरामी,,,,,, जल्दी कर अब ,,,,(अपने बेटे की निर्लज्ज जता भरी बातों को सुनकर आराधना बोली)

बस मम्मी ने अपने आपको तैयार रखो मेरा लंड अब तुम्हारी चूत की गहराई नापने वाला है ,,,(और इतना कहने के साथ ही संजू अपने आप को पूरी तरह से तैयार किया और फिर कैसा गजब का धक्का मारा कि पूरा का पूरा अंदर कभी बाहर में आराधना की चूत में खो गया आराधना की गहराई में पूरी तरह से डूब गया और आराधना जानबूझकर जोर से चीख निकाल दी,,,,, लेकिन इस बार साधना पूरी तरह से तैयार थी और तुरंत अपने होठों को अपनी बहन के होठों पर रखकर उसे बंद करने की कोशिश करते हुए से चुंबन की बौछार कर दी संजू उसी तरह से अपनी मां की चूत में लंड डाले हुए अपने आपको स्थिर रखे हुए था,,,,,,, साधना का चुंबन आराधना के बदन में गर्माहट भर रहा था अपनी बहन के साथ साधना को बहुत मजा आ रहा था और इसका आनंद आराधना भी ले रही थी दोनों बहने आपस में मजे ले रही थी थोड़ी ही देर में आराधना भी अपने नाटक को खत्म करती अपना दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी बहन की चूची को पकड़ ली जो कि पपिया की तरह लटक रही थी और उसे दबाना शुरू कर दी दोनों का चुंबन लगातार जारी था दोनों के हाथ एक दूसरे की चूचियों को दबाने में लगे हुए थे और फिर संजू ही देर करना मुनासिब नहीं सोचा और फिर धीरे से अपने लंड को बाहर की तरफ खींच कर फिर से उसे अंदर डाल दिया और इस तरह से अपनी कमर हिला कर अपनी मां को चोदना शुरु कर दिया,,,,,

जिस तरह से दोनों बहने संजू के साथ मजा ले रही थी आपस में मजा नहीं रही थी इस नजारे को देखकर किसी को यकीन नहीं होता कि यह तीनों एक ही परिवार से हैं मां बेटे और मौसी हैं ऐसा लगता कि एक जवान लड़का जो रंडी औरतों को लाकर एक साथ उसकी चुदाई करने जा रहा है दोनों के साथ मस्ती करने जा रहा है,,,,,,

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थोड़ी ही देर में संजू का घोड़ा पूरी तरह से गीले मैदान में दौड़ना शुरू कर दिया हर धक्के के साथ आराधना का पूरा बदन लहर मार रहा था जिससे उसकी दोनों चूचियां पानी भरे गुब्बारों की तरह छातियों पर डोल रही थी जिसे देखकर खुद संजू का दिमाग काम करना बंद कर दिया था वह तुरंत अपनी मौसी का हाथ अपनी मां की चुची से हटा कर उसे खुद पकड़ लिया और उसे दबाते हुए अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया,,,, दूसरी तरफ गरमा गरम सिसकारी लेते हुए आराधना अपनी हथेली को अपनी बहन की चूत पर रख कर उसे जोर जोर से मसलने लगी,,,,।

सहहहहह आहहहहहहह दीदी तुम्हारी चूत कितनी गर्म है,,,,आहहहहहह बहुत पानी छोड़ रही है दीदी,,,,

आराधना आज समय आ गया है कि मैं भी तेरे बेटे का लंड अपनी चूत में लेकर एक दम मस्त हो जाऊं,,, तेरे बेटे का लंड जब से देखी हूं तब से मेरे मुंह में पानी भरा रहा है और मेरी चूत तो पानी छोड़ रही है,,,,

दीदी मेरी तरफ से बिल्कुल भी इंकार नहीं है तुम मेरे बेटे का लंड अपनी चूत में लेकर मस्त हो सकती हो मुझे तो फक्र होगा कि मेरा बेटा मेरी बड़ी दीदी की जवानी की प्यास बुझाने में उसकी मदद कर रहा है,,,,सहहहह आहहहहह दीदी लेकिन तुम्हारी चूत तो आग लगा रही है,,,,।

ओहहहहहह मेरी प्यारी बहन मेरी चूत की प्यास तब तक तू बुझा,,,,(और फिर इतना कहने के साथ ही साधना अपने घुटनों के बल अपनी बहन के दोनों कंधों के इर्द-गिर्द अपना घुटना रख कर अपनी चूत को अपनी बहन के चेहरे पर रगड़ना शुरु कर दी ,,, साधना के लिए यह पहला मौका था जब एक औरत के साथ खेल रही थी लेकिन आराधना के लिए यह दूसरी मर्तबा था पहली मर्तबा अपनी बेटी के साथ इस तरह का सुख प्राप्त कर चुकी थी लेकिन अब अपनी बड़ी बहन के साथ व्यस्तता खेल खेल रही थी अपनी बहन की गरमा गरम चूत को अपने चेहरे पर रगड़ता हुआ महसूस करते ही आराधना से रहा नहीं गया और वह अपने दोनों हाथ अपनी बहन की मोटी मोटी जांघों पर रखकर उसे अपनी तरफ खींचने लगी और देखते ही देखते अपनी बहन की चूत पर अपना होठ लगाकर चाटना शुरू कर दी,,, अपनी बहन की हरकत पर साधना पूरी तरह से पानी पानी हो रही थी वह यह सोच कर प्रसन्न हो रही थी कि उसकी बदौलत उसकी बहन पूरी तरह से खुल चुकी है जबकि वह यह नहीं जानती थी कि उसकी बहन पहले से ही एकदम खुली हुई औरत हो चुकी है बस आज वह अपनी बड़ी बहन के सामने खुलने का नाटक कर रही थी,,,,, आराधना एकदम रंडी की तरह अपनी जीभ बाहर निकाल कर अपनी बहन की चूत को चाट रही थी और साधना की चूत से लगातार काम रस की बौछार हो रही थी जो कि उसके चेहरे को भिगो रही थी अपनी बहन की जीभ को अपनी चूत पर महसूस करते ही साधना के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फूटने लगी वह पागल होने लगी और वह अपने हाथों से अपनी चूची को दोनों हाथों से दबाते हुए अपनी गांड को गोल गोल घुमाने लगी वह एक तरह से अपनी बहन के चेहरे पर अपनी गांड लग रही थी,,,,, जिसे अब खुद आराधना अपने हाथों से पकड़ कर जोर जोर से दबा रही थी और अपनी बहन की चूत चटाई का आनंद ले रही थी,,,,,,,,

आराधना और संजू



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संजू अच्छी तरह से समझ गया था कि आप यहां पर शर्म का अवकाश बिल्कुल भी नहीं है अब सब कुछ बहुत आगे निकल चुका है,,,,,,, साधना संजू की तरफ मुंह करके अपनी बहन के चेहरे पर अपनी चूत को रगड़ रही है यह देखकर संजू की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी वह हुगली के सारे से अपनी मौसी को अपनी तरफ आने के लिए बोला और उसकी मौसी भी संजू की आज्ञा का पालन करते हुए अपनी बहन के चेहरे पर अपनी चूत को रखते हुए आगे की तरफ झुकने लगी और देखते ही देखते संजू की अपनी मौसी की तरफ झुकने लगा लगातार अपनी कमर हिला रहा था और आगे की तरफ बढ़ रहा था देखते ही देखते वह दोनों इतने करीब आ गए दोनों के होंठ आपस में भिड़ गए और अपनी मौसी के लाल-लाल होठों का रसपान करते हुए अपनी मां की चूत में धक्के पर धक्का लगा रहा था और साधना लगातार अपनी गांड को गोल-गोल घुमाते हुए अपनी बहन को मस्त कर रही थी,,,,,।

तीनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी क्योंकि तीनों के होंठ आपस में एक दूसरे के अंगों पर व्यस्त थे केवल,,,,ऊमममम ऊममममम की आवाजें आ रही थी संजू बड़ी बेरहमी से अपनी मां की चूत में धक्का लगा रहा था क्योंकि वह अपने अंदर काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहा था और वह अपनी उत्तेजना को अपने लंड के जरिए अपनी मां की चूत में दिखा रहा था और इस समय आराधना को इतना मजा आ रहा था कि इतना मजा उसे पहले कभी नहीं आया था,,,, हर धक्के के साथ आराधना की चूत में से फच्च फुच्च की आवाज आ रही थी,,,, दोनों मां बेटे की मोटी मोटी जांघें आपस में टकरा रही थी,,,,

संजू इतना अत्यधिक उत्तेजित हो चुका था कि वह लगातार एक ही लय में मां की चूत में का लगा रहा था अपनी मौसी के लाल लाल होठों का रस पी रहा था उसकी लटकती हुई दोनों पपैया को अपने दोनों हाथों में पकड़ कर लगातार उसे मसल रहा था,,,,,, तीनों एकदम आनंद की पराकाष्ठा में डूबते चले जा रहे थे,,,,,,,,, अभी तक संजू ने अपनी मौसी की चूत तो नहीं चाटा था,,,,, इसलिए अपने होठों को अपनी मौसी के होठों से अलग करते हुए वह गहरी सांस लेते हुए बोला,,,,,।

मौसी मुझे मालूम है कि तेरी चूत में भी खुजली हो रही है लेकिन मुझसे भी रहा नहीं जा रहा है जल्दी से अपनी चूत को मेरे होठों से लगाकर मेरी प्यास बुझा दे मौसी,,,,,,

(संजू की बातों को सुनकर साधना एकदम से मचल उठी और तुरंत अपनी बहन के चेहरे पर से अपनी चूत को अलग करते हुए बोली,,,)

ओहहहह मेरे राजा मैं भी तड़प रही हूं तेरे से अपनी चूत चटवाने के लिए,,,आ,, पागल कर दे मुझे,,,,ओहहहहह मेरे राजा,,,(और इतना कहने के साथ ही अपनी जगह से खड़ी हो गई और धीरे से संजू की तरफ आगे बढ़ी और संजू के चेहरे को अपने हाथों से पकड़ कर उसके बालों को अपनी मुट्ठी में भींचते हुए उसके होठों को अपनी चूत से सटा दी और हल्के से अपनी कमर को आगे की तरफ धक्का दे दी,,,, यह नजारा आराधना अपनी आंखों से देख रही थी और इस नजारे में बेहद उत्तेजना और मदहोशी भरी हुई थी उत्सुकता भरी हुई थी किसी को पाने की चाहत भरी हुई थी और संजू भी दोनों हाथों से अपनी मौसी की बड़ी-बड़ी गांड को पकड़कर अपनी जीभ को अपनी मौसी की चूत में डाल कर चाटना शुरू कर दिया आराधना के लिए अब कोई राज राज ना रह गया था सब कुछ उजागर हो चुका था आराधना को इस बात का भी मलाल नहीं था कि उसके बेटे का संबंध उसकी भी बड़ी बहन के साथ है और इस समय भी वह अपनी मौसी को मस्त करने की पूरी कोशिश कर रहा है ,,,, आराधना अपने हाथ की कोनी का सहारा लेकर अपनी नजरों को अपनी दोनों टांगों के बीच स्थिर करके अपने बेटे की हरकत को देखने लगी वह अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड को देखने लगी जो कि बड़े आराम से उसके गुलाबी चूत के छोटे से छेद में अंदर बाहर हो रहा था यह नजारा बेहद मादकता भरा हुआ था जिसका नशा 4 बोतलों से भी कहीं बढ़कर को और यह नशा इस समय तीनों के बदन में वासना का रूप ले कर दौड़ रहा था,,,,,

संजू लगातार धक्के पर धक्के लगा रहा था लेकिन अभी तक उसके लंड से पानी निकला था और ना ही आराधना तृप्त हुई थी वह भी पूरी तरह से मस्ती के सागर में गोते लगा रही थी वह भी अपने बेटे के हर एक धक्के का मजा ले रही थी,,,,,, बादलों की गड़गड़ाहट के बीच वह बड़े आराम से अपने बेटे के लंड को अपनी चूत में लेकर मस्त हो रही थी,,,, वो कभी सपने में नहीं सोची थी कि ईस तरह से अपने मायके में आकर अपने बेटे के साथ चुदाई का आनंद लूटेगी इस समय सही गलत क्या है यह सोचने का समय तीनों में से किसी के पास नहीं था तूफानी बारिश का मजा लेते हुए वह तीनों इस खंडहर में संभोग के अद्भुत अध्याय का पठन कर रहे थे गहरा पठन जिसके एक एक शब्द में मादकता भरी हुई थी और इसी मादकता में तीनों पूरी तरह से खो चुके थे,,,,, साधना से रहा नहीं जा रहा था संजू की जीभ अनियंत्रित होकर ,,,, साधना की चूत में धमाल मचाए हुए थी जिसके चलते उसकी चूत में बहुत खुजली हो रही थी वह जल्द से जल्द संजू के लंड को अपनी चूत में लेकर अपनी खुजली को शांत करना चाहती थी इसलिए बिना कुछ बोले वह अपनी चूत को संजू के चेहरे से अलग किया और फिर बिना कुछ बोले ठीक आराधना के ऊपर ही घोड़ी बन गई वह अपनी बड़ी बड़ी गांड हवा में लहराते हुए संजू को दिखाने लगी हो संजू के सामने अपनी गोरी गोरी बड़ी-बड़ी गांड को लहरा रही थी उसकी गांड को अपनी आंखों के सामने लहराते हुए देख कर संजू के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फुटने लगी,,,,, आराधना अच्छी तरह से समझ गई थी कि उसकी बड़ी बहन को अब बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा है,,,,,, संजू जानता था कि अब ऐसे उलझे हुए हालात से कैसे निपटना है वैसे भी उसे अपने लंड पर पूरा विश्वास था एक तरह से गर्व था वह जानता था कि अब उसे क्या करना है,,,,,।

एक साथ दो दो गुलाबी चूत को देखकर संजू की लालच बढ़ती जा रही थी एक से एक बढ़कर अपनी आंखों के सामने लप-लपाती हुई चूत को देख संजू के मुंह में पानी आ रहा था एक चूत को तो वह पहले से ही चोद रहा था लेकिन अपनी आंखों के सामने अपनी मौसी की भी चूत देखकर उसके लंड में बगावत करने पर उतारू हो गया,,,,, और फिर वह एक झटके से अपने लंड को अपनी मां की चूत में से गप्प से बाहर निकाल लिया,,,,, और फिर अपनी आंखों के सामने दिख रही अपनी मौसी के गुलाबी छेद में लगाकर एक झटके में उसे अंदर डाल दिया ओर फिर अपनी मौसी को चोदना शुरू कर दिया,,,,,।

सहहहहह आहहहहहहह साली दोनों की दोनों बहने एकदम रंडी है,,,,आहहहह बहुत मजा देती हो तुम दोनों,,,,ऊममममममम, मैं कभी सोचा नहीं था कि चोदने में कितना मजा आएगा,,,,,

हरामजादे कुत्ते तू भी तो पागल कर दिया हम दोनों को देख कैसे मोटा लंड हम दोनों की चूत में तु भर दे‌ रहा है,,,,आहहहह और जोर से धक्के लगा,,,,आहहहरह मादरचोद,,,,,

साली रंडी भोसडाचोदी मौसी मादरचोद भी तो तूने बना दी,,,,,आहहहह

लेकिन सही बताना मादरचोद बनने में तुझे मजा आया कि नहीं तेरी मां की चुत कितनी कसी हुई है,,,,

बात तो तू सही कह रही है छिनार मम्मी की चूत बहुत मस्त है एकदम कसी हुई तभी तो लंड डालने में मजा आ रहा था,,,,,,,

(बड़ी बहन और अपने बेटे के बीच की गंदी गंदी गालियां को सुनकर आराधना को बहुत मजा आ रहा था उसका मन भी गाली देने को कर रहा था लेकिन किसी तरह से अपने आप पर नियंत्रण रखे हुए थी,,,,,, आज साधना की नजरों में वह खुद संजू को मादरचोद बना दी थी जबकि आराधना पहले से ही अपनी जवानी का जलवा दिखा कर अपने बेटे को मादरचोद बनने पर मजबूर कर दी थी,,,,,,,

एक तूफान खंडरर के बाहर अपना कहर बरसा रहा था और दूसरा तोहफा खंडहर के अंदर दो दो जवानी से भरी हुई औरतों पर अपना कहर गिरा रहा था लेकिन खंडहर के अंदर गिरने वाला कहर नुकसान नहीं बल्कि मजे दे रहा था और इतना मजा कि कभी दोनों सपने में सोच भी नहीं सकती थी,,,,। संजू बारी-बारी से दोनों औरतों की चूत में लंड डाल रहा था कभी अपनी मौसी को तो कभी अपनी मां की चूत में बराबर पेल रहा था,,,,, आराधना के मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज बड़ी जोरों से निकलने लगी थी उसका बदन अकड़ने लगा था और संजू के अद्भुत तेज दुखों के साथ उसका पानी निकल चुका था वह अपने चरम सुख पर पहुंच चुकी थी लेकिन फिर भी संजू अपनी मां की चूत में लंड पेले जा रहा था,,,,

अपनी मां को चरम सुख प्राप्त करता हुआ देखकर वह अपने लंड को अपनी मां की चूत में से बाहर निकाला और अपनी मौसी की चूत में डाल दिया और अपनी मौसी को घसर घसर चोदना शुरू कर दिया,,,, हर धक्के के साथ साधना आगे की तरफ लुढ़क जा रही थी और संजू अपने दोनों हाथों को उसके कंधों पर रखकर उसे पूरी तरह खींचकर था में हुए था वरना साधना उसके धक्कों से गिर जाती और आराधना चरम सुख प्राप्त करने के बाद अपने दोनों हाथों को उठाकर अपनी बहन के दोनों पपैया को पकड़ ली और उसे जोर-जोर से दबाना शुरू कर दी,,,, आराधना अभी तक अपनी बेटी मोहिनी की संतरे जैसे चूचियों को दबा दी थी जो कि उसकी हथेली में पूरी तरह से समा जाते थे लेकिन आज अपनी बड़ी बहन की पपैया जैसी चूची को वह अपनी हथेली में बराबर पकड़ भी नहीं पाती थी लेकिन उसे जैसे तैसे करके दबा रही थी और उसे दबाने में मजा भी आ रहा था और यही क्रिया साधना भी आराधना की सूचियों के साथ करने लगी थी वह अपनी बहन की चूची को पकड़कर उसका सहारा लेकर घुटनों के बल अपनी गांड उठाए हुए अपने भतीजे से चुदवा रही थी,,,,

संजू अपनी मां को अपनी मौसी से मस्ती करते हुए देखा तो उसे रहने की और अपना लंड अपनी मौसी की चूत में से बाहर निकाल कर वापस अपनी मां की चूत में डाल दिया और उसे चोदना शुरू कर दिया तब तक आराधना फिर से तैयार हो चुकी थी फिर से उत्तेजित हो चुकी थी,,, एक बार फिर से अपने बेटे के लंड को अपनी चूत की गहराई में लेकर उसके धक्के महसूस करने के लिए तड़प रही थी और अपनी मां की इसी तडप को दूर करते हुए संजु जोर जोर से धक्के लगाना शुरू कर दिया,,, आराधना के मुंह से एक बार फिर से गरमा गरम सिसकारी फुट पड़ी वह अपनी मौसी की बड़ी बड़ी गांड पकड़कर अपनी मां की चूत में धक्के लगा रहा था एक अद्भुत काम कीड़ा का नजारा पेश करते हुए एक साथ दोनों औरतों को चोद रहा था बादलों की गड़गड़ाहट के साथ ही दोनों की गर्मागर्म सिसकारी की आवाज और तेज होने लगी संजय समझ क्योंकि दोनों का पानी निकलने वाला है इसलिए अपने धक्कों को भी तेज कर दिया क्योंकि उसका भी निकलने वाला था,,,,

और 10 15 तेज धक्कों के साथ संजू ने अपनी मर्दानगी को साबित करते हुए दोनों औरतों का पानी निकालने के साथ ही अपना भी कर्म लावा अपनी ही मां की चूत में गिराना शुरू कर दिया जैसे ही उसकी मौसी की चूत से काम रस का फव्वारा फूटा था वैसे ही वह तुरंत अपने लंड को बाहर निकाल कर अपनी मां की चूत में डाल कर जोर जोर से धक्के लगाना शुरू कर दिया था और दोनों एक साथ झड़ना शुरू हो गए थे और फिर वहां अपना कर्म लावा अपनी मां की चूत में गिर आती होगी अपनी मौसी की बड़ी बड़ी गांड पर सर रखकर हांफने लगा,,,,, तीनों उसी अवस्था में गहरी गहरी सांस ले रहे थे जैसे ही वासना का तूफान शांत हुआ संजू ने अपनी मां की चूत में चूत लंड को बाहर निकाला और फिर वहीं पास में बैठ कर दोनों औरतों के नंगे बदन को देख कर मुस्कुराने लगा साधना भी अपनी बहन के ऊपर से उठकर बगल में बैठ गई और फिर धीरे से आराधना अपनी कमर पकड़ते हुए उठी और बोली,,,,।

बाप रे इतनी तेज धक्के लगा लगा कर मेरी कमर की हालत खराब कर दिया है,,,

अरे मेरी बहना आज तुझे तेरे बेटे ने वह सब दिया है कि जिसके बारे में तो कभी सोच नहीं सकती थी अब देखना रोज तुझे यह मस्त करेगा सही बोलना मजा आया कि नहीं,,,

(अपनी बहन की बात सुनकर आराधना कुछ बोली नहीं बस शर्मा कर मुस्कुरा दी और अपनी नजर को दूसरी तरफ घुमा ली यह देखकर साधना बोली)

हमें शर्माने का कोई मतलब नहीं है अब जो होना था हो गया अब तो मैं चाहती हूं कि तू इसी तरह से अपने बेटे से ही खुश रहे और कभी कभी मुझे भी यह मजा मिल जाएगा सोच कितना मजा आएगा जब मैं तेरे घर आऊंगी तो हम तीनों मिलकर एक ही कमरे में धमाल मचाएंगे,,,,

हां मौसी तुम सच कह रही हो आज तुम्हारी बदौलत मैंने जो सुख प्राप्त किया हूं मैं कभी सपने में भी सोच नहीं सकता था कि चोदने में इतना मजा आता है और मां की चूत तो ईत६ कसी हुई थी कि मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि दो दो बच्चों की मां होने के बावजूद भी इस उम्र में भी मां की चूत एकदम कसी हुई है,,,

सही कहूं तो संजू मेरी तेरी मां की चूत और चूची दोनों को देखकर दंग रह गई है इस उम्र में तो तेरी मां दम कड़क माल है कसम से तेरी तो निकल पड़ी है अब दिन रात अपनी मां की चूत में लंड डालकर पड़े रहना,,,,।

(आराधना कुछ बोल नहीं रही थी बस वह अपनी बड़ी बहन और अपने बेटे की बात को सुनकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,,,, कुछ देर तक तीनों इसी तरह से बातें करते रहे रात अभी भी बाकी थी लेकिन रात गुजारने का सहारा तीनों को मिल चुका था,,,,, खंडहर के बाहर नजर दौड़ आते हुए संजू दोनों से बोला,,,/

देख रही हो बारिश रुकने का नाम ही नहीं ले रही है अच्छा हुआ कि हम तीनों एक खंडहर में आगे बढ़ना पानी इतना ज्यादा बढ़ गया है कि हम तीनों अभी तक ना जाने कहां से कहां पहुंच गए होते देख रही हो पानी खंडहर तक पहुंच चुका है,,,,

तू चिंता मत कर संजू खंडहर के अंदर तक पानी नहीं घुस पाएगा,,,,,(साधना संजू को दिलासा देते हुए बोली) क्योंकि बगल में ही एक बड़ी सी नहर गुजरती है सारा पानी उसी में से होकर निकल जाता है,,,,

तब तो ठीक है मौसी वरना मैं तो घबरा गया था,,,,

अब जल्दी से इसमें लकड़ी डाल दे वरना आग बुझ जाएगी,,,(इतना सुनते ही संजू अपनी जगह से खड़ा हुआ और चुकी है लकड़ी को फिर से आग में डालने लगा और थोड़ी देर में फिर से आगे तेज हो गई साधना को बड़े जोर उसकी पिशाब लगी हुई थी उसको अपनी जगह से उठी और बोली)

संजू अपनी मौसी को दिवार से सरकार छोड़ता हुआ

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मुझे तो बड़ी जोरों की पेशाब लगी है,,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपनी जगह से खड़ी हुई और खंडहर के कोने में जाकर पेशाब करने लगी जहां पर जलती हुई आग की रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था अपनी मौसी को इस हाल में देखकर उसकी बड़ी बड़ी गांड देखकर एक बार फिर से संजू का लंड अपनी औकात बताने लगा और संजू बिना कुछ बोले अपनी जगह से खड़ा हुआ,,,, अपनी मौसी के पीछे जाकर खड़ा होकर उसके खड़े होने का इंतजार करने लगा और जैसे ही उसकी मौसी पेशाब करने के बाद खड़ी हुई संजू इतनी जल्दबाजी में था कि अपनी मौसी को सोचने का अवसर ही नहीं दिया और तुरंत उसे घुमा कर अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसके होंठों को अपने होंठों में फंसा कर तुरंत उसे पागलों की तरह चुंबन करता हुआ दीवार में सटा दिया और फिर उसकी एक टांग उठा कर अपने कमर में लपेटकर सीधे अपने लंड को उसकी चूत में डालकर चोदना शुरू कर दिया यह सब इतनी जल्दबाजी में हुआ था कि साधना को समझ नहीं पाई थी लेकिन संजू की हरकत से वह पूरी तरह से पल भर में उत्तेजित हो गई थी और उसका बराबर साथ देने लगी थी संजू अपनी मौसी को दीवार से सटाकर जबरदस्त धक्के पर धक्के लगा रहा था यह देखकर आराधना से भी और अपनी जगह से उठ कर खड़ी हो गई और के पास जाकर खड़ी हो गई,,,,, संजू अपनी मौसी को चोदते हुए उसकी चूत में से अपने लंड को बाहर निकाला और उसकी जगह अपनी मां को खड़ी कर दिया और उसे दीवाल के सहारे खड़ी करके उसकी गांड को दोनों हाथों से पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और पीछे से उसकी चूत में लंड डालकर चोदना शुरु कर दिया,,,,।

संजू दिवार क सहारे अपनी मौसी की चुदाई करता हुआ

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इसलिए तो आराधना और साधना दोनों को संजू पर गर्व होता था क्योंकि संजू बिना थके उन दोनों को पूरी तरह से मस्त कर देता था और इस समय भी वही कर रहा था थोड़ी ही देर में आराधना के मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकलने लगेगा और किसी हाल में वह अपनी मां को छोड़कर उसकी चूत में से अपने लंड को बाहर निकाल कर अपनी मौसी की चूत में डाल दिया और तब तक उसे पेलता रहा जब तक कि उसका पानी नहीं निकल गया अपनी मौसी को एक बार फिर से झाड़ लेने के बाद वह तुरंत अपनी मां को अपनी बाहों में खींचा और उसे अपनी गोद में उठा लिया और दीवार के सहारे लगाकर उसकी चूत में लंड डाल दिया और उसे गोद में उठाए हुए उसे चोदना शुरू कर दिया आराधना भी अपने बेटे से एकदम से चिपक गई और उसका पानी निकालने के बाद है और खुद झड़ने के बाद ही संजू अपनी मां को अपनी गोद में से नीचे उतारा,,,,

तीनों ने इतनी मेहनत किए थे कि तीनों एकदम से थक गए थे और दोबारा आग के करीब आते ही कब एक दूसरे को बाहों में ले लिए नींद की आगोश में चले गए उन्हें पता ही नहीं चला सुबह जब पंछियों के चाटने की आवाज आने लगी तो सबसे पहले संजू की नींद खुली और वह देखा कि तीनों एकदम नंगे ही एक दूसरे की बाहों में सोए हुए हैं वह तुरंत अपनी मां और अपनी मौसी को जगाने लगा क्योंकि बाहर हल्का-हल्का उजाला हो रहा था लेकिन अभी भी अंधेरा ही था लेकिन फिर भी गांव में इस समय सब लोग उठने लगते हैं जल्दी से तीनों अपने सूखे हुए कपड़ों को पहने लगे लेकिन साधना अपने बैग में से साड़ी निकाली और साड़ी पहने लगी क्योंकि वह सलवार कमीज में अपने घर पर नहीं जाना चाहती थी क्योंकि उसका शरीर कुछ ज्यादा ही भारी हो गया था और वह अच्छी तरह से जानती थी कि साड़ी में ही उसकी खूबसूरती और ज्यादा निखर कर सामने आती है,,,,,

संजू और उसकी मौसी कुछ इस तरह से

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वासना और तूफानी बारिश से भरी हुई रात गुजर चुकी थी लेकिन यह रात दोनों के जीवन की नई शुरुआत थी दोनों बहने ही नहीं बल्कि संजू के लिए भी एक नई शुरुआत थी तीनों एक-दूसरे के राजदार जो बन गए थे,,,, साधना यही सोच रही थी कि वह अपनी चालाकी से आज आराधना की आंखों के सामने ही उसके बेटे के साथ शारीरिक संबंध बनाकर अपने जीवन की एक नई शुरुआत की है जबकि वह यह बात नहीं जानती थी कि उसकी और संजू के बीच की कामलीला को आराधना खुद अपनी आंखों से देख चुकी है लेकिन आराधना भी अब उस बात को उखेडना नहीं चाहती थी क्योंकि,,,, इसी बहाने आराधना भी अपनी बहन की आंखों के सामने पहली बार अपनी बेटी के साथ शारीरिक संबंध बनाकर अपने सुखे जीवन में पहली बार बहार ले आई थी,,,,,,,,

बरसात बंद हो चुकी थी,,, पंछियों के शोर के साथ ही सबसे पहले संजू की नींद खुली और फिर वह मौके की नजाकत को समझते हुए अपनी मारो अपनी मौसी को भी जगा दिया हालांकि इस समय भी तीनों संपूर्ण रूप से लगना वस्था में थे उन दोनों की मदमस्त कर देने वाली नंगी जवानी को देखकर और खास करके उनकी बड़ी-बड़ी कारण को देखकर एक बार फिर से संजू के लंड ने अंगड़ाई लेना शुरू कर दिया था लेकिन,, लेकिन वह इस समय उचित जगह पर नहीं था रात की बात कुछ और थी लेकिन सुबह हो रही थी धीरे-धीरे अंधेरा दूर हो रहा था और गांव जवार में अक्सर लोग इसी समय पर उठकर खेतों की तरफ चल देते हैं इसलिए इस स्थिति में यहां पर दोनों औरतों की चुदाई करना बिल्कुल भी ठीक नहीं था अगर दोनों कमरे में होती तो बात कुछ और होती इसलिए अपना मन मार कर राजू ने जल्दी से दोनों को जगाया और दोनों एकदम से उठ कर बैठ गए,,,,, उठते ही साधना और आराधना खंडहर के बाहर देखने लगी धीरे-धीरे उजाला हो रहा था इसलिए वह दोनों की छत से खड़ी हो गई क्योंकि गांव की भौगोलिक प्रक्रिया से वह लोग भली-भांति अवगत थे,,,,,

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जल्दी-जल्दी आराधना और साधना दोनों ने कपड़े पहनना शुरू कर दिया आराधना तो रात को उतारे हुए कपड़े पहन रही थी जो कि समय तेज हवा के कारण सूख चुके थे लेकिन साधना सलवार और कुर्ती नहीं पहनना चाहती थी वह गांव में साड़ी पहन कर जाना चाहती थी क्योंकि वो जानती थी कि उसका बदन थोड़ा भारी हो चुका था जोकि सलवार कमीज में गांव वाले उचित नहीं समझते थे वैसे भी शादीशुदा हो चुकी थी जवान लड़की की मां थी इसलिए इस उमर में गांव में सलवार कमीज पहनना लोग उचित नहीं समझते थे वह भी बैग में से साड़ी निकाल कर पहनती वैसे भी उसका भी यही मानना था कि औरत की असली सुंदरता केवल साड़ी में ही उभर कर सामने आती है और वाकई में ऐसा ही था साड़ी पहनने के बाद साधना की खूबसूरती में चार चांद लग जाते थे और आराधना तो वैसे ही पूनम का चांद थी,,,,

तीनों एक एक बैग लेकर खंडहर से बाहर निकल गए रात को इतनी तूफानी बारिश थी लेकिन कहीं पानी का नामोनिशान नहीं था संजू अपने मन में सोचने लगा कि साधना मौसी सही कह रही थी कि बगल के नहर में सारा पानी चला जाता है और ऐसा ही था हां थोड़ा बहुत कीचड़ हो चुका था जिस पर संभाल संभाल कर तीनों पर रखते हुए आगे बढ़ रहे थे,,,,, वातावरण में पूरी तरह से ठंड खा चुकी थी वैसे भी सुबह का समय होने की वजह से और गांव में चारों तरफ हरियाली ही हरियाली नजर आ रही थी इसकी बदौलत वातावरण में कुदरती ठंडक फैली हुई थी जिसका आनंद तीनों ले रहे थे,,,, आराधना थोड़ा कीचड़ में बचकर चल रही थी जिसकी वजह से ऐसा लग रहा था कि जैसे वह हल्का-हल्का लंगड़ा रही है,,, इसलिए साधना चुटकी लेते हुए बोली,,,।

बहुत दिनों बाद और बहुत ज्यादा मोटा और लंबा चूत में गया है ना इसके लिए आराधना को चलने में तकलीफ हो रही है,,,,

(अपनी बड़ी बहन की बात सुनते ही आराधना शर्म से पानी पानी होने लगी वह कुछ बोल पाती इससे पहले ही संजू बोला)

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क्या सच में मम्मी चलने में तकलीफ हो रही है,,,

नहीं रे ऐसा कुछ भी नहीं है दीदी तो बस बातें बनाने में माहिर है,,,,

नहीं नहीं मैं बातें नहीं बना रही हूं मैं सच कह रही हूं रात को संजू इतनी जोर जोर से तेरी चूत में धक्का लगा रहा था कि मुझे तो लग रहा था कि तु ठीक से खड़ी नहीं हो पाएगी लेकिन तेरे में भी बहुत कम है अच्छा ही है संजू को अपने लंड के टक्कर की चूत मिली है,,,,

क्या दीदी तुम भी अभी कोई सुन लेगा तो गजब हो जाएगा,,,

अरे कोई सुन कैसे लेगा कोई दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रहा है,,,,,

मौसी अभी गांव कितनी दूर है,,,,

बस बस आ गया 10 मिनट और,,,,, बहुत सालों बाद गांव आई हूं लेकिन पूरा रास्ता पता है,,,

हां दीदी सच कह रही हो इन रास्तों को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे कल ही की बात हो हम दोनों इसी रास्ते से होकर स्कूल जाया करते थे खेला करते थे वक्त भी कितनी तेजी से गुजर जाता है ना दीदी,,,

सच कह रही आराधना ऐसा लगता है कि बचपन का ही दिन सबसे खूबसूरत था,,,,

नहीं मौसी ऐसा नहीं है सबसे खूबसूरत दिन तो जवानी का है तभी तो रात भर मेरे लंड पर कूद रही थी तुम दोनों ऐसा मजा ले रही थी कि पूछो मत क्या ऐसा मजा बचपन में आता है क्या,,,,

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हां यह बात तो तू सच कह रहा है संजू बचपन का भी अलग मजा था लेकिन जवानी का भी कुछ अलग ही मजा है और तेरे जैसा लंड मिल जाए तो फिर जवानी कि किस्मत खुल जाए,,,,

कोई बात नहीं मौसी अब तो मुझे तुम दोनों की जवानी की किस्मत खोलने में बहुत मजा आएगा,,,

बाप रे यह लड़का तो एक ही रात में एकदम बेशर्म हो गया है इसकी जगह कोई और होता तो कब से ढेर हो गया होता लेकिन यह था कि घोड़े की तरह दौड़ रहा था जब तक हम दोनों का पानी निकाल नहीं लिया तब तक इसका खुदका नहीं निकला,,,,, वैसे सच सच बताना संजू अपने लंड पर कौन से तेल की मालिश करता है,,,

क्या दीदी तुम भी,,,,

अरे नहीं यार इतना पूछना तो बनता है ना ताकि मैं भी तेरे जीजा के लंड पर उसी तेल की मालिश कर सकूं और मुझे भी तेरे जीजा इसी तरह का मजा दे सके,,,,

मौसा जी का छोटा है क्या मौसी,,,

छोटा और मोटा तो छोड़ संजू अब तो तेरे मौसा जी का खड़ा ही नहीं होता बड़ी मुश्किल से खड़ा करती हु लेकिन फिर ढेर हो जाते हैं,,,,

कोई बात नहीं अब मेरे से काम चला लेना वैसे तुम्हारी जानकारी के लिए बता दो मैं अपने लंड पर किसी भी तेल की मालिश नहीं करता इसीलिए तो एकदम दमदार है,,,,

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बस कर संजू एकदम बेशर्म हो गया है तू,,,,, देख गांव दिखाई दे रहा है अब इस तरह की बात मत कर,,,,

थोड़ी ही देर में तीनों गांव के अंदर प्रवेश कर गए और गांव के छोर पर संजू के मामा जी का घर था,,,,, थोड़ी ही देर में तीनों घर पर पहुंच चुके थे घर काफी बड़ा था तीन मंजिलें का घर का गांव में होने के बावजूद भी घर काफी खूबसूरत बना हुआ था जिसकी उम्मीद संजू को बिल्कुल भी नहीं थी इसलिए तो अपने मामा का घर देखते ही वह खुशी से झूम उठा,,,,

बाबरी मम्मी मौसी क्या सच में तुम लोगों का मायका इतना खूबसूरत है मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है कितना बड़ा घर होगा,,,

अरे बुद्धू हम लोग खानदानी है समझा,,,,,(साधना मुस्कुराते हुए बोली,,,,, तीनों घर के सामने अपना बैग नीचे जमीन पर रखते हैं इधर-उधर देखने लगे कि तभी घर के पीछे से संजू के मामा निकलते हुए नजर आए और साधना जोर से चिल्लाई,,,,

भैया,,,,

(इतना सुनते ही वह इंसान एकदम से खुश हो गया और वह तीनों की तरफ आगे बढ़ता हुआ ,, वही से आवाज लगाता हुआ चिल्लाया,,,)

अरे लल्ली की मां,,,,, देखो कौन आया है,,,,,,

(इतना कहते हुए बड़ा एकदम से वह तीनों के करीब पहुंच गया और तीनों बारी-बारी से पैर छूकर आशीर्वाद लेने लगे,,, संजू भी अपने मामा जी का पैर छूते हुए प्रणाम किया तो,,,, संजू के बावजूद को पकड़कर वह एकदम खुशी जताते हुए उसे खड़ा किए और बोले,,,)

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जुग जुग जियो बेटा,,,, तुम तो एकदम जवान हो गए हो शादी करने के लायक,,,,(अपने मामा की बात सुनकर संजू शर्मा गया और मुस्कुराने लगा,,, तब तक दरवाजा खोल कर अंदर से खूबसूरत औरत बाहर आई उसके चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी जिसे देखते हैं साथ में और आराधना उसे भाभी करके संबोधन किया और वह दोनों खुद उस औरत की तरफ आगे बढ़ गई और उस औरत के पैर छूकर उसके भी आशीर्वाद लिए,,,,,)

आने में कोई तकलीफ तो नहीं हुई,,,

भाभी पूछो मत,,,, अरे संजू वहा खड़ा क्या कर रहा है तेरी बड़ी मामी है पैर छू,,,,(आराधना संजू को समझाते हुए बोली तो संजू मुस्कुराता हुआ अपनी मम्मी की तरफ आगे बढ़ गया और पैर छूकर आशीर्वाद लेने लगा तो उसकी मम्मी एकदम खुशी जताते हुए उसे अपने गले से लगा ले क्योंकि वह अपने भांजे को बचपन में देखी थी और अब तक देख रही थी तो को एकदम से जवान हो गया था इसीलिए उसे गले लगाते हुए बोली,,,)

मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है आराधना कि अपना संजू है कितना छोटा सा था जब तक यहां से लेकर गई थी उसके बाद अब आ रहा है,,,, शैतान अपनी मामी की याद नहीं आती तुझे,,,

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आती है मामी लेकिन क्या करें यह आने का कुछ बहाना ही नहीं मिल रहा था और अब दीदी की शादी है तो आप सब से मिलने का मौका भी मिल गया,,,,

बहुत बड़ा हो गया,,,,

(अपनी मामी को देखकर संजू के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी वह पल भर में ही अपनी मामी के बदन के भूगोल को अपनी नजरों से नापने की कोशिश कर रहा था जिस तरह से वह अपने गले लगा ली थी उसकी दोनों छातियां पपाया की तरह उसकी छाती से जाकर एकदम से रगड़ खाई थी और उस रगड़ को महसूस करके संजू का केला अकड़ने लगा था,,,,, संजू इतना तो अंदाजा लगा लिया था कि ब्लाउज के अंदर के उसकी मामी के दोनों खरबूजे बहुत ही बेहतरीन होंगे और अपनी मामी की गदराई जवानी देख कर संजू के मुंह में पानी आ रहा था,,,,,)

चलो चलो पहले घर में चलकर थोड़ा फ्रेश हो जाओ तब बातें करते हैं,,,,(इतना कहने के साथ ही संजू की मामी दरवाजे की तरफ घूम गई हो घर के अंदर जाने लगी पीछे से अपनी मामी की गदराई जवानी को देखकर संजू की हालत खराब होने लगी,,, उसकी बड़ी बड़ी गांड और वह भी उभरी हुई देख कर ही संजू की हालत पतली हो रही थी संजू ने अंदाजा लगा लिया था कि उसकी मम्मी 40 के करीब की थी और इस उम्र में औरतों की जवानी कुछ ज्यादा ही उफान मारती है जैसा कि खुद उसकी मां और मौसी की,,,, घर में प्रवेश करते करते संजू की मामी आवाज लगाते हुए बोली,,,)

मोहन अरे वो मोहन देख तो कौन आया है,,,,, जा जा कर जल्दी सामान घर में लेकर आ जा,,,,(संजू की मामी के इतना कहने के साथ ही अंदर से हाथ में बाल्टी लेकर आ रहे शख्स ने तुरंत घर के बाहर आकर आराधना और साधना दोनों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और फिर साधना संजू से बोली,,,)

संजू है तेरे बीच वाले मामा हैं मोहन मामा,,,

(इतना सुनते ही संजू आगे बढ़कर अपने मामा के पैर छुए और उसके मोहन मामा भी एकदम खुश होते हुए बोले)

मुन्ना अब कितना बड़ा हो गया है,,, अगर दीदी लल्ली बिटिया की शादी ना पड़ती तो शायद तुम लोग गांव में आते ही नहीं,,

नहीं रे मोहन ऐसी कोई बात नहीं है तू तो जानता है कि शहर में किसी के पास समय नहीं रहता मैं दूसरों के लिए ना खुद अपनों के लिए इतनी भागा थोड़ी होती है कि दो वक्त की रोटी पढ़ाई बस इसी में जिंदगी गुजर जाती है,,,,

ठीक है दीदी तुम सब अंदर चलो मैं सामान लेकर आता हूं,,,,,

अरे सुहानी कहां है,,,,

वह अपने कमरे में है दीदी,,,,,

(सुहानी का नाम सुनते ही संजू आश्चर्य से अपनी मां की तरफ देखने लगा तो आराधना मुस्कुराते हुए बोली)

तेरी बीच वाली मामी ,,,,

मम्मी तुम्हारे इतने रिश्तेदार हैं कितने भाई हैं लेकिन तुमने कभी बताई ही नहीं,,,,

अरे पगले तेरे एक और मामा और मामी ने सबसे छोटे वीर तेरे मामा का नाम है और रितु तेरी छोटी मामी का नाम है,,,, हां मोहन वह दोनों कहां है,,,,

क्या बताऊं दीदी वह दोनों हम लोगों के साथ नहीं रहते वह दोनों खेतों में घर बनवाए हैं वहीं पर रहते हैं,,,

क्या कह रहे हो मोहन,,,

मैं सच कह रहा हूं दीदी,,,,,,, वीर की बीवी झगड़ालू किसंम की है उसकी किसी की नहीं बनती थी इसलिए वह वीर को लेकर अलग हो गई हो खेत वाली जमीन पर घर बनाकर रहती है,,,,,,,

यह कैसे हो गया दीदी,,,(आराधना साधना से बोली तो वह भी आश्चर्य जताते हुए बोली)

पता नहीं कैसे मुझे भी तो अभी पता चल रहा है,,,,

चलो दीदी यह सब छोड़ो चल कर नहा लो सफर में थक गए होगे,,,,,

(थोड़ी ही देर में सभी लोग घर के मेहमान कच्छ में एकत्रित हो गए वहीं पर बैग रखकर कुछ देर तक वहीं पर बैठ गए,,,, संजू के बड़े मामा बोले,,,)

अच्छा तुम लोग को तकलीफ तो नहीं हुई ना सफर के दौरान अगर बता दिए होते तो मुख्य सड़क तक गाड़ी भेज दिए होते लेकिन तुम लोगों ने कुछ बताया ही नहीं,,,

क्या बताते भैया हम लोग तो कल शाम को ही गांव पहुंच गए थे,,,, बस से उतरे तभी बारिश शुरू हो गई थी,,,, आपको इतना फोन लगाएं लेकिन फोन बंद बता रहा था,,,, और फिर इतनी तेज बारिश शुरू हो गई,,, हम तीनों भी में लगे करे तो क्या करें कुछ समझ में नहीं आ रहा था फिर भी देख ले कर हम लोग मुख्य सड़क से गांव की तरफ जाने लगे और बारिश और हवा इतनी तेज हो गई कि अब चलना मुश्किल हो जा रहा था अच्छा हुआ कि तभी हमें वह सड़क के किनारे वाला खंडहर नजर आया और हम लोग खंडहर में चले गए,,,, और फिर रात भर वही जागकर समय बिताए हैं,,,,

क्या कह रही हो साधना खंडहर में,,,

हां भैया और क्या करते ,,,, इतनी तेज बारिश हो रही थी इतनी तेज हवा चल रही थी कि चलना मुश्किल हो रहा था इतना अंधेरा था कि कुछ दिखाई नहीं दे रहा था तो करते क्या,,,,

संजू क मां की लड़की लल्ली g8shalkhane में

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साधना तुम तीनों यहां आने पर इतनी मुसीबत सही हो मुझे बिल्कुल भी एहसास होता तो मैं गाड़ी भेज दी होती लेकिन 2 दिन से इधर भी लाइन कट है इसलिए मोबाइल चार्ज नहीं हो पाया,,,,,,,,,(संजू की बड़ी मामी अपनी तरफ से माफी मांगने की मुद्रा में ही बोली उसे इस बात का खेद था कि उन लोगों की वजह से ही उन तीनों को इतनी मुसीबत सहना पड़ा,,,,, और संजू की मम्मी और मामा दोनों उन तीनों से माफी मांग कर बात को आईगई कर दी और वैसे भी खंडहर में रुकने वाली बात को लेकर साधना और आराधना को किसी बात का खेत नहीं था क्योंकि दोनों जिंदगी का सबसे बेहतरीन पल खंडहर में गुजार चुके थे,,,, कुछ देर और बातें करने के बाद संजू की बड़ी मामी खाना बनाने चली गई थी और साथ में सुहानी मामी जो कि थोड़ी देर बाद सब से मिलने के लिए आई थी और वह भी बहुत खुश नजर आ रही थी सुभानी की खूबसूरती देखकर संजू भी उत्साहित था,,,,,, संजू अपनी दोनों मामी से मिलकर बहुत खुश था क्योंकि जिस तरह से वह औरतों के प्रति आकर्षित होता जा रहा था अपनी दोनों मामी को देखकर वह पहली नजर में ही दोनों के प्रति आकर्षित हो गया था और अपने मन में यह सोचने लगा था कि काश उसकी दोनों मामी अपनी जवानी का मजा चखा देती तो आनंद ही आनंद हो जाता,,,,,,

थोड़ी ही देर में सब लोग नहाने के लिए चले गए,,,,, अभी तक संजू ने लल्ली को नहीं देखा था जिसके विवाह में वह शहर से गांव आया था इतना तो उसे एहसास हो ही गया था कि जब बड़ी मामी इतनी जवानी से भरी हुई है तो उनकी लड़की भी ठीक उसी की तरह ही होगी,,,,,,

बड़ा घर होने के साथ-साथ नहाने के लिए भी अलग-अलग व्यवस्था थी घर के पीछे भी नहाने की व्यवस्था थी,,,,, संजू भी जल्द से जल्द नहा लेना चाहता था और आराम करना चाहता था क्योंकि रात भर की मेहनत और जागने के बाद उसका बदन दर्द कर रहा था और इसीलिए वह घर के पीछे नहाने के लिए आगे बढ़ गया जहां पर जाने के लिए खुद उसके बड़े वाले मामा बोले थे,,,,,

संजू अपने बैग में से अपने कपड़े निकाल कर और ब्रस और ट्यूब निकालकर दांत साफ करते हुए घर के पीछे पहुंच गया,,,,,, गांव में होने की वजह से पीछे वाला भाग चारों तरफ मोटे मोटे लकड़ी का घेराव बनाकर गिरा हुआ था और चारों तरफ घनी झाड़ियां लगाई हुई थी जिससे एक दीवार की तरह ही नजर आती थी घर के पीछे की खूबसूरती देखकर संजू बहुत ज्यादा परेशान हो रहा था गांव का पूरा वातावरण उसे बहुत अच्छा लग रहा था,,,,, धीरे-धीरे संजू हैंडपंप की तरफ आगे बढ़ने लगा जो कि तीनों तरफ से दीवार थी और एक तरफ से पर्दा लगा हुआ था और वह परदा बंद था,,,,, संजू छोटे से गुसल खाने के करीब पहुंच गया और जैसे ही पर्दे को हटाया और पर्दे को हटाते ही जो नजारा उसकी आंखों के सामने दिखाई दिया उसे देखकर उसके होश उड़ गए,,,,,,

संजू की जगह और कोई होता तो उसका भी यही हाल होता जो संजू का था संजू ले जैसे पर्दा हटाया सामने ही गुसल खाने के अंदर एक खूबसूरत लड़की नहाते हुए नजर आई जिसके बदन पर केवल कमीज थी सलवार उतार कर वह पानी में भिगो दी थी और गीली तमीज होने की वजह से उसके बदन से एकदम से चिपक ही गई थी उसकी गोल-गोल मादकता भरी कांड पर कमीज चिपकने की वजह से उसकी गोलाकार गांड का आकार पूरी तरह से गीले कपड़े में उभर कर सामने आ रहा था जिसे देखकर संजू का लंड एकदम बगावत पर उतर आया था,,,,,

इस नजारे को देखकर तो संजू की हालत खराब हो गई वह लड़की बार-बार बाल्टी में से लोटा भर भर कर पानी अपने ऊपर डाल रही थी और खड़ी होकर हेडपंप भी चला रहे थे ऐसे हालात में उसकी गोल-गोल गांड में अजीब सी थिरकन हो रही थी,,,, संजू की नजर हट नहीं रही थी वह पर्दे को हटाकर गुसल खाने में थे रखती हुई जवानी को देख रहा था गीली कमीज में उस खूबसूरत लड़की की गोलाकार नितंब उसकी जवानी की कहानी कह रहे थे जिसके हर एक शब्द को पढ़ने के लिए संजू मचल रहा था तभी वह लड़की एकदम से पलटी और संजू को देखते ही एकदम से चूक गई और उसके हाथ से लौटा नीचे गिर गया और वह अपने हाथ से ही अपनी हथेली से ही अपनी छाती की शोभा बढ़ा रही दोनों जवानी को छुपाने की कोशिश करते हुए बोली,,,,)

हाय तू कौन है रे और तू इधर कैसे आ गया,,,,

ममममम ,,,,, मेरा नाम संजु है,,, और मैं अपने मामा के घर अपनी बहन की शादी में आया हूं,,,,।

(इतना सुनते ही उसे समझ में आ गया और वह एकदम से शर्मा गई और बोली)

मेरी ही शादी में तुम आए हो मेरा नाम लल्ली है,,,

दददद,,,दीदी ,,,,, सॉरी दीदी मैं गलती से इधर आ गया मुझे मालूम नहीं था,,,,,तततत तुम नहा लो फिर मैं नहाता हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही संजु गुसल खाने से थोड़ा दूर जाकर खड़ा हो गया और जानबूझकर ब्रश करने का नाटक करने लगा,,,, अंदर गुसल खाने में लल्ली पहले तो थोड़ा गुस्सा कर रही थी लेकिन जब भी समझ गई कि अनजाने में सब कुछ हुआ है तो उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई,,,, वह एक नजर अपने आप पर डाली तो खुद उसे अपनी हालत को देखकर सरवन महसूस होने लगी वह समझ सकती थी कि उससे पर क्या गुजरी होगी इस हालत में उसे देखकर,,,,, मैं थोड़ी देर में जल्दी से नहा कर वह अपने कपड़े जो साथ में लाई थी उसे पहनकर बाहर निकल आई और संजू की तरफ एक नजर डाल कर मुस्कुराते हुए घर की ओर चली गई संजू उसे जाता हुआ देखता रहा उसकी मटकती हुई गांड देखकर उसका लंड टनटना गया था और फिर वह भी गुसल खाने में नहाने के लिए घुस गया,,,,)
 
साधना,,, आराधना और संजू के साथ साथ घर के सभी सदस्य नहा चुके थे,,,, सुहानी और संजू की बड़ी मम्मी मिलकर खाना तैयार कर ली थी और जल्दी-जल्दी खाना परोस रही थी वह जानती थी कि जिस हालात में वह तीनों गांव में आए हैं उससे वह तीनों एकदम थक चुके होंगे,,, और भूख भी बड़ी जोरों की लगी होगी और यह सच ही था तीनों को बड़े जोरों की भूख लगी हुई थी क्योंकि शाम को ही वह लोग गांव पहुंच चुके थे लेकिन तूफानी बारिश के चलते रात भर होने खंडहर में बिताना पड़ा था,,,, ऐसा नहीं था कि तूफानी बारिश में तीनों एकदम परेशान हो गए थे यह तूफानी बारिश तीनों की जिंदगी में एक नया सुकून लेकर आई थी जिसका आनंद तीनों ने भरपूर लिया था अगर तूफानी तेज बारिश ना होती और वह गांव की छोर पर खंडहर ना होता तो शायद तीनों के रिश्ते अभी भी मर्यादा में रहते हैं लेकिन तूफानी बारिश ने उस खंडहर ने तीनों के बीच की मर्यादा की दीवार को पानी में बाहर ले गया था जिससे तीनों खुश भी थे क्योंकि तीनों यही चाहते भी थे कि उन तीनों के बीच किसी भी प्रकार की दीवार ना रहे,,,,

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संजू खाना खा रहा था लेकिन उसके दिमाग में अजीब सी हलचल हो रही थी क्योंकि कुछ देर पहले ही उसने एक जवान खूबसूरत लड़की को नहाते हुए देखा था उसके नितंबों का आकार गीले कपड़ों में और भी ज्यादा उभार दार नजर आ रहा था,,,,,,, संजू औरतों के चक्कर में खासकर के घरेलू औरतों की सौगात में पूरी तरह से जवान मर्द बन चुका था और ऐसा मर्द जो अपनी आंख से ही खूबसूरत औरतों की जवानी के पन्नों को पलट पलट कर पढ़ लेता था,,,, और संजू अपनी मामा की लड़की लल्ली के खूबसूरत बदन के खूबसूरत पन्ना को अपनी आंखों से पढ़ने की भरपूर कोशिश किया था जिसमें वह सफल भी हो गया था उसे इस बात का अंदाजा लग गया था कि लल्ली के रूप में एक खूबसूरत लड़की उसके इर्द-गिर्द है,,, उसे कैसे हासिल करना है संजू अच्छी तरह से जानता था भले ही वह अपने मामा के घर विवाह में आया था एक मेहमान के तौर पर ,,,, लेकिन सबसे पहले वह एक मर्द था और उसके मामा की लड़की एक जवान खूबसूरत औरत जिसकी खूबसूरती का रसपान करना संजू की फितरत में था संजू किसी भी तरह से अपनी मामा की लड़की को अपने काबू में करना चाहता था और उसे पूरा विश्वास था कि वह जरूर अपनी मामा की लड़की पर काबू कर लेगा,,,,, संजू के लिए अब मां बहन मौसी मामी कोई भी रिश्ता किसी भी तरह से खास ना होकर बिस्तर तक सीमित रह गया था,,,, आते जाते खाना परोस ते हुए वह केवल लल्ली को ही देख रहा था लल्ली का खूबसूरत गुलाबी चेहरा उसकी आंखों में बस गया था छातीयो का आकार की शोभा बढ़ा रहे दोनों संतरे के आकार में ही थे जिससे संजू को समझते देर नहीं लगी की लल्ली खेली खाई हुई लड़की बिल्कुल भी नहीं है और ऐसी लड़की के साथ चुदाई करने में अद्भुत शांति और सुख प्राप्त होता है,,,,,,,,,

अरे और लो बेटा तुम तो कुछ खा ही नहीं रहे हो हट्टा कट्टा जवान शरीर है लेकिन खाने के नाम पर,,,,, लो लो दो पूरी और ले लो

नहीं नहीं बस करिए मामी,,,,, बहुत हो गया है,,,,

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अरे अभी तो कुछ भी नहीं हुआ है इतना तो हमारे घर के बच्चे खा लेते हैं,,,(संजू के नानकुर करने के बावजूद भी संजू की बड़ी मम्मी दो पुरिया उसकी थाली में डाल ही थी थाली में डालते समय वह थोड़ा सा नीचे की तरफ झुक गई थी जिससे संजू की नजर उसकी मदमस्त कर देने वाली गोल गोल छाती पर गई थी जो कि ब्लाउज में से बाहर आने के लिए तड़प रही थी कुछ पल के लिए संजू की नजर अपनी बड़ी मामी की भरी हुई छातियों पर ही टिकी रह गई और वह तुरंत मौके की नजाकत को समझते हुए नीचे नजर झुका कर पूरी लेकर सब्जी से खाना शुरु कर दिया लेकिन अब उसकी भूख एकदम से बढ़ गई थी अपने मामा के घर में चोदने लायक एक से एक औरत उसे नजर आ रही थी,,,,, बड़ी मम्मी आराधना और साधना को भी जबरदस्ती खिला रही थी कि तभी बाहर से किसी के बुलाने की आवाज आई और वह भोजन कराने की जिम्मेदारी मंझली मामी मतलब की सुहानी को सौंप कर घर के बाहर चली गई,,,,,

अरे दीदी तुम तो कुछ लो,,,, तुम भी कुछ नहीं खा रही हो,,,, शहर में लगता है कि तुम लोग केवल पिज़्ज़ा बर्गर और नूडल्स खा खा कर पेट भरते हुए इसीलिए पौष्टिक आहार खा नहीं पाते,,,,

अरे नहीं नहीं सुहानी ऐसा बिल्कुल भी नहीं है सिर्फ इतना ज्यादा खाने की आदत नहीं है ना,,,

लेकिन यहां तो खाना होगा,,,,(इतना कहने के साथ ही सुहानी नीचे की तरफ झुक कर खीर के पतीले को उठाने लगी और ऐसा करते हुए उसकी मदमस्त कर देने वाली गांड ठीक संजू की आंखों के सामने थी और उसकी गांड से संजू के चेहरे की दूरी महज 1 फीट की थी,,, और वह झुकी हुई थी शादीशुदा होने के नाते उसकी गांड का घेराव मदमस्त कर देने वाला था संजू पल भर के लिए अपनी मंझली मामी की गांड को देखता ही रह गया और अपने मन में सोचने लगा कि काश उसकी मामी बिना कपड़ों के उसके सामने इस तरह से झुकी हुई होती तो अब तक वह पीछे से अपने मोटे लंड को उसकी चूत में डालकर उद्घाटन कर दिया होता,,,,, पल भर के लिए ही वह खीर के पति लोग को उठाने के लिए चुकी थी और तुरंत खड़ी हो गई लेकिन इतने में ही ‌ संजू एकदम मस्त हो गया था,,,, बड़े बड़े चम्मच से वह सब की थाली में खीर खिला रही थी और सिर्फ संजू के सामने झुक कर वह बड़े चम्मच से खीर को उसकी थाली में गिराते हुए बोली,,,,)

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तुम्हें खीर कैसी लगी,,,,

(वह भी ठीक संजू की मामी की तरह झुकी हुई थी उसकी भी मत मत कर देने वाली चूचियां ब्लाउज फाड़ कर बाहर निकलने के लिए आतुर थी और औपचारिक रूप से संजू की नजर सुहानी की मदमस्त कर देने वाली चुचियों पर चली गई उसकी बड़ी मम्मी ने तो इस पर ध्यान नहीं देती लेकिन सुहानी ने संजू की नजरों को अपनी और तुरंत अपनी साड़ी को ठीक करने लगी संजू भी मौके की नजाकत को समझते हुए खीर को चम्मच से मुंह में डालते हुए बोला,,,)

फिर किसने बनाया है मामी,,,,

मैंने बनाया है,,,,,

कसम से आज तक मैंने इतनी स्वादिष्ट खीर कभी नहीं खाया तुम्हारे हाथों में तो जादू है मामी,,,,,,

(अपनी तारीफ सुनकर सुहानी एकदम से खुश हो गई और मंद मंद मुस्कुराने लगी और पल भर में ही वह संजू की तरफ आकर्षित होने लगी संजू भी बार-बार उसके खाने की तारीफ कर रहा था जिसे सुन सुनकर सुहानी मन ही मन प्रसन्न हुए जा रही थी,,,, खाना खा लेने के बाद एक बार फिर से संजू सुहानी के हाथों की तारीफ करते हुए अपनी मां से बोला)

मम्मी एक बात कहूं बुरा मत मानना मैं चाहता हूं कि जब शादी के बाद हम लोग अपने घर चलें तो सुहानी मामी से खीर बनाने की रेसिपी जरूर सीख लेना क्योंकि वहां तो सुहानी मामी के हाथों की खीर खाने को मिलेगी नहीं,,,,

अरे तू ऐसा करना बेटा सुहानी को भी अपने साथ ले जाना शहर रोज बनाकर खिलाएगी,,,,(साधना एकदम से चुटकी लेते हुए बोली तो संजू भी तपाक से बोला)

काश मामी हम लोगों के साथ चल पाती तो मजा आ जाता चलोगी मामी,,,,

ना बाबा ना मैं तो यही ठीक हूं तुम्हें खाने का मन करे तो साल 6 महीना में आ जाया करो,,,,

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अब तो आना ही पड़ेगा मामी तुम्हारे हाथों की खीर खाने के लिए,,,,,,,,,,,

मैं तो बहुत थक गई हूं और मीठी खीर खाकर तो मुझे नींद आ रही है,,,(आराधना अंगड़ाई लेते हुए बोली तो उसके सुर में सुर मिलाते हुए साधना भी बोली)

हारे आराधना मेरा भी बदन बहुत दर्द कर रहा है,,,,

(दोनों की बातें सुनकर संजू अपने मन में बोला शाली दोनों रात भर पेलवाओगी तो बदन तो दर्द करेगा ही,,,, और सुहानी उन दोनों की बातों को सुनकर तपाक से बोली,,)

कोई बात नहीं दीदी आप लोगों के रहने का इंतजाम ऊपर वाले कमरे में कर दिया गया है क्योंकि ऊपर वाला कमरा काफी बड़ा है और उसमें दो बेड है संजू और आप दोनों के लिए बेहतर होगा,,,,।

(एक ही कमरे में तीनों के रहने का इंतजाम के बारे में सुनकर ही संजू के साथ-साथ आराधना और साधना की भी आंखों में चमक आ गई वह तीनों मन ही मन प्रसन्न होने लगे और संजू तो एकदम खुश होते हुए बोला)

अच्छा की मामी तुमने कि हम लोगों का रहने का इंतजाम एक ही कमरे में कर दी वरना दिक्कत हो जाती है सामान इधर,,, हम लोग उधर,,, हम कहां कहां ढूंढते फिरते,,,

इसीलिए तो चलो मैं तीनों को आपका कमरा दिखा दुं,,,

(इतना कहने के साथ ही सुहानी आगे आगे चलने लगी सामान पहले से ही कमरे में पहुंचा दिया गया था,,,, देखते-देखते सुहानी सीढ़ियां चढ़ने लगी और सीढ़ियां चढ़ते समय उसकी गांड इतनी मादकता भरी चाल चल रही थी कि जिसे देखकर संजू के लंड में ऐठन हो रही थी,,,, संजू की निगाहें अपनी मामी की गदराई गांड पर ही टिकी हुई थी,,,, वहां पागलों की तरह प्यासी नजरों से अपनी मामी की गांड देख रहा था जो कि साड़ी में कैद होने के बावजूद भी और साड़ी उसकी मामी ने इतनी कसी हुई पहनी थी कि गांड का पोर पोर उभरकर नजर आ रहा था,,,,, जिसे देखते हुए बहुत अपने पेंट के आगे वाले भाग को हाथ से दबाकर शांत करने की कोशिश कर रहा था,,,,,

देखते ही देखते सुहानी उन तीनों को उनके कमरे तक ले आई और कमरे का दरवाजा खोल कर अंदर प्रवेश करते हुए बोली,,,,

आप लोग आने वाले हो इसलिए भैया ने पहले से ही इस कमरे को साफ करवा दिया है,,,,(इतना सुनकर तीनों भी कमरे में प्रवेश किया कमरा काफी बड़ा था और दोनों कोने पर दो बिस्तर लगे हुए थे जिसे देखते ही संजू अपनी मां और मौसी को देखकर अपनी सुहानी मौसी से नजर बचाकर आंख मार दिया जिसका मतलब दोनों बहने अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए दोनों का चेहरा शर्म से शुर्ख लाल हो गया,,,,)

अब आप लोग आराम करो मुझे बहुत काम है,,,,

ठीक है सुभानी तुम जाओ अभी तो हम लोग थके हुए हैं बाद में काम में हाथ जरूर बटाएंगे,,,,

लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही है मामी और वैसे भी मेरी जानकारी के मुताबिक में पहली बार गांव आया हूं इसलिए मुझे गांव के रहन सहन के बारे में अच्छी तरह से जानना है और इस तरह से मैं तुम्हारी थोड़ी मदद भी कर सकूंगा,,,।

सच्ची,,,(सुहानी मुस्कुराते हुए बोली)

तो क्या मैं मजाक थोड़ी कर रहा हूं है ना मम्मी थोड़ा-बहुत गांव के बारे में भी तो जानना जरूरी है,,,,

हां संजू तू ठीक कह रहा है अगर तुझे आराम नहीं करना है तो जा अपनी मम्मी के साथ थोड़ा बहुत काम करा ले वैसे भी विवाह वाला घर है ढेर सारे काम होते हैं अगर तू काम में हाथ बटाएगा तो अच्छा ही रहेगा,,,,

तो चलो संजू अब तो दीदी ने भी इजाजत दे दिया है,,,,,

(इतना कहने के साथ ही सुहानी और संजू दोनों कमरे से बाहर आ गए,,,, सुहानी रह रह कर संजू के कद काठी की तरफ देख रही थी जो कि बेहद गठीला और कसरती बदन था ना चाहते हुए भी सुहानी अपने पति के कद काठी की तुलना अपने भांजे के साथ कर रही थी जिसमें उसका पति बिल्कुल भी फिट नहीं बैठ रहा था क्योंकि उसका पति संजू से कम लंबाई और गठीला बदन का बिल्कुल भी नहीं था जैसा कि सुहानी अपने मन में अपने पति को लेकर कल्पना किया करती थी,,,,, ना जाने क्यों वह संजू की तरफ उसके व्यक्तित्व की तरफ आकर्षित हुए जा रही थी इसीलिए तो संजू को आराम करने के लिए रोकने की जगह वह उसकी बात मान कर अपने साथ लेकर आई थी लेकिन इसमें संजू की ही चला की थी वह किसी ना किसी बहाने अपनी मामी के समीप रहना चाहता था,,,, क्योंकि संजू औरतों के बारे में अच्छी तरह से जानता था वह जानता था कि अगर औरत का प्यार पाना है अगर उनकी दोनों टांगों के बीच जगह बनानी है तो उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चलना होगा उन्हें अपनी बातों से कुछ लाना होगा उनकी तारीफ करना होगा यह सब तिकड़म संजू अच्छी तरह से जानता था और वही अपनी मामी पर आजमा भी रहा था,,,,)

संजू तुम यहीं रुको मैं छत पर कपड़े डाल कर आती हूं,,,,

अरे मामी यह क्या मैं तो तुम्हारी मदद करने के लिए आया हूं ना फिर मुझे यहां क्यों रोक रही हो चलो मैं भी चलता हूं,,,, कपड़े कहां है,,,,

अरे वह रहे ना दो बाल्टी में,,,

ठीक है मामी,,,(इतना कहने के साथ ही संजू दोनों बाल्टी को बड़े आराम से उठा लिया जो कि गीले कपड़ों के ढेर से बहुत भारी थी लेकिन संजू बड़े आराम से उसे दोनों हाथों में उठा लिया था जिसे देखकर सुहानी हैरान भी थी क्योंकि उसका पति एक बाल्टी करके छत पर ले जाता था लेकिन संजू था कि दोनों बाल्टी को एक साथ उठा लिया था शायद सुहानी इस बात को नहीं जानती थी कि बाल्टी क्या वह तो भारी-भरकम खूबसूरत औरतों को अपनी गोद में उठाकर बिना थके बिना डगमगाए उनकी चूत में लंड डालकर उनकी चुदाई भी कर सकता था,,, और उसकी इस मर्दानगी का उदाहरण खुद उसकी मां और उसकी मौसी थी,,,,)

बाप रे संजू तुम तो दोनों हाथ में बाल्टी उठा लिए,,, थक जाओगे एक एक बाल्टी ले चलते हैं एक‌ तुम पकड़ो एक में पकड़ती हूं,,,,

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क्या मामी तुम भी भांजे के होते हुए तुम बाल्टी उठाओगी ऐसा कभी हो सकता है क्या,,,, मुझे कोई तकलीफ नहीं हो रही है तुम चलो मैं पीछे पीछे चलता हूं,,,,,(संजू जानबूझकर अपनी मामी को आगे आगे चलने के लिए बोल रहा था क्योंकि वह जानता था कि छत पर जाने के लिए सीढ़ियां चढ़ना होगा और सीढ़ियां चढ़ते समय उसकी मामी की मदमस्त गदराई गांड और भी ज्यादा जानलेवा नजर आने लगती थी,,,, और ऐसा ही हुआ सुहानी तो संजू की बात सुनकर एकदम गद गद हुए जा रही थी क्योंकि इस तरह से तो उसकी मदद आज तक किसी ने नहीं किया था उसके पति ने भी नहीं लेकिन संजू के बोलने का तरीका उसकी मदद करने की चाहत देखकर सुहानी बहुत खुश हो रही थी और उसकी बात मानते हुए आगे आगे चलते हुए वह सीढीया चढ़ने लगी और एक बार फिर से अनजाने में ही सुहानी अपनी गोल गोल भारी भरकम गदर आई गांड के दर्शन अपने भांजे को कराने लगी भले ही साड़ी के ऊपर से ही सही लेकिन संजू अपनी नजरों से ही अपनी मामी की साड़ी को भेदता हुआ उसकी गांड में उतर जा रहा था,,,, संजू का मन तो कर रहा था कि वह पीछे से अपनी मामी को पकड़ ले और उसकी साड़ी कमर तक उठाकर उसकी गोल-गोल कहां पर अपना लंड रगड़ रगड़ कर अपनी प्यास को बुझा ले,,,,, लेकिन इतनी जल्दबाजी दीखाना ठीक नहीं था,,,, देखते ही देखते दोनों छत पर पहुंच चुके थे,,,, छत काफी बड़ा था और घर काफी ऊंचा इसलिए यहां से सारा गांव नजर आ रहा था दूर दूर तक लहराते खेत बड़े-बड़े पेड़ और वह नहर जिसमें बरसात का सारा पानी बह रहा था और अभी भी साफ नजर आ रहा था,,,, दोनों बाल्टी को नीचे रखकर संजू चारों तरफ देखने लगा गांव काफी खूबसूरत था जिसे देखकर संजू एकदम खुश हुआ जा रहा था वह अपनी मामी से बोला,,,,।

सच में मामी गांव कितना खूबसूरत है,,,,, कितनी हरियाली कितनी शांति है चारों तरफ पंछियों की आवाज सुनाई दे रही है और शहर में तो केवल गाड़ियों का शोर ही सुनाई देता है,,,,

तभी तो गांव में पहुंचकर सब लोग सारी चिंता भूल जाते हैं और एकदम मगन हो जाते हैं,,,,(इतना कहते हुए सुहानी बाल्टी में से कपड़े लेकर रस्सी पर डालने लगी और संजू भी मदद करने लगा,,,, देखते ही देखते काफी कपड़े रस्सी पर दोनों मिलकर डाल दिए थे लेकिन अभी भी बाल्टी में कपड़े थे संजू ने बाल्टी में हाथ डाला और उसमें से कपड़ा निकालना लेकिन वह गिला कपड़ा पेंटी थी संजू से हाथ में लेकर गोल गोल इधर-उधर घुमा कर उसे देखने की कोशिश कर रहा था पेंटी के हाथ में आते ही संजू के लंड में अकड़न सी बढ़ने लगी थी,,,वह पेंटिं इतना तो वह जानता ही था कि ना तो उसकी मम्मी की थी और ना ही उसकी मौसी की तो इतना तेज था कि वहां पेंटी उसकी दोनों मामी में से किसी एक की थी इसीलिए संजू उसकी चौड़ाई को देखकर गांड के आकार के बारे में सोच रहा था और पल भर में उसे इस बात का एहसास हो गया था कि वह पेंटी उसकी बड़ी मामी की भी नहीं थी क्योंकि बड़ी मामी की गांड को ज्यादा बड़ी-बड़ी थी और इस पेंटी का आकार उसका घेराव संजू की मंझली मामी की गांड के आकार से मिलता-जुलता था संजू ने इतना तो अंदाजा लगा लिया था कि उसके हाथ में आई पेंटी किसी और की नहीं बल्कि सुहानी मामी की थी,,,, संजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी वह पेंटी को रस्सी पर डाल पाता इससे पहले ही सुहानी की नजर संजू के हाथों में आई पेंटी पर पड़ गई और वह एकदम से संजू की तरह लगती हो लगभग लगभग झपटते हुए संजू के हाथ में से अपनी पैंटी को ले ली,,,, और अपने हाथ में लेकर छुपाते हुए धड़कते दिल के साथ बोली,,,)

हाय दैया यह क्या कर रहे हो,,,,,,

मैंने क्या किया मामी,,,,(संजू जानबूझकर अनजान बनता हुआ बोला)

तुम इस तरह के कपड़े मत लिया करो अपने हाथ में,,,(गहरी सांस लेते हुए सुहानी बोली ,,)

इसमें क्या हो गया मामी,,,,

अरे बुद्धू इस तरह के कपड़े लड़के अपने हाथ में नहीं लेते,,,,

वही तो मैं पूछ रहा हूं इसमें क्या हो गया,,,, बाकी के भी तो औरतों के ही कपड़े थे मैंने उसे भी तो राशिफल डाला ना,,,

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समझने की कोशिश करो संजू इस तरह के कपड़े औरतें किसी को दिखाती नहीं है,,,,

(संजू सब कुछ जान रहा था लेकिन फिर भी अनजान बनता हुआ बोला)

क्या मामी इन कपड़ों में क्या खास है जो औरतें दिखाती नहीं है,,,,

(वाकई में सुहानी संजू के हाथों में अपनी पेंटी आ जाने की वजह से शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी,,,, वह एकदम सहज रुप से शर्मा रही थी और संजू जानबूझकर अनजान बनने का नाटक कर रहा था,,,)

खास है शहर में चलता होगा लेकिन यहां नहीं चलता संजू ,,,,

सच कह रही हो मामी शहर में तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं चलता,,,,, मैं खुद कभी कपड़े डालते समय इस तरह के कपड़े भी रस्सी पर सुखाने के लिए डाल देता हूं,,,,

हाय दैया सच में,,,,

हां क्यों क्या हुआ,,,?(संजू जानबूझकर अपनी मामी से इस तरह की बातें कर रहा था जबकि वह कभी भी इस तरह के कपड़ों को शहर में भी रस्सी कर सुखाने के लिए डाला ही नहीं था,,,, संजू के मुंह से इतना सुनते ही सुहानी हंसने लगी लेकिन उसकी हंसी में भी शर्म की झलक साफ नजर आ रही थी,,, सुहानी को इस तरह से हंसता हुआ देखकर संजू भी मुस्कुराते हुए बोला)

अच्छा बताओ मामी क्या कहते हैं इसे,,,,

धत् मुझे शर्म आती है इस तरह से कोई नाम भी लेता है क्या,,,,?

क्यों इसका नाम नहीं है क्या अच्छा यह बात बताओ जब दुकान पर जाती हो तो इसे खरीदने के लिए क्या कहकर मांगती हो,,,,

हम इसे खरीदने के लिए जाते ही नहीं है इसे तो तुम्हारे मामा ही खरीद कर लाते हैं दुकान पर जाकर इस तरह से मांगने में हमें शर्म आती है,,,,

चलो कोई बात नहीं यह तो बता दो इसे कहती क्या हो,,,,।

(संजू के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी सुहानी मामी की उपस्थिति में इस तरह की बातें करते हुए संजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी खास करके उसके लंड की हालत खराब होती जा रही थी क्योंकि सुहानी का मुस्कुराना भी बेहद उत्तेजित कर दे रहा था संजू की बात सुनकर सुहानी बोली,,,)

धत् मुझे बहुत शर्म आती है,,,

क्या मामी गांव की बोली भाषा रहन-सहन सीखने के लिए ही तो मैं आराम करने की जगह तुम्हारी मदद करने के लिए आया हूं और तुम हो कि मुझे कुछ भी सीखा नहीं रही हो,,,

अरे यह भी कोई सीखने की बात है,,,

क्यों नहीं मानी अगर मान लो कि मेरी शादी गांव की किसी लड़की से हो गई और मैं उसकी बात को समझ नहीं पाया तो दिक्कत हो जाएगी ना,,,

अरे तो क्या हुआ वह तुम्हें अच्छी तरह से समझा देगी आखिर बीवी है और एक बीवी को अपने पति से कुछ भी कहने में शर्म महसूस नहीं होती समझे,,,,,

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लेकिन मुझे तो बता दो मामी,,,

तुम बहुत जिद करते हो,,,,, अच्छा मैं तुम्हें बता देती हूं लेकिन इस बारे में किसी को कहना नहीं कि मैंने तुम्हें इस तरह का कुछ बताई हुं,,

मां कसम किसी को नहीं कहूंगा,,,।

(संजू के भोलेपन को उसके व्यक्तित्व को और उसके खूबसूरत चेहरे को देखकर सुहानी कहीं ना कहीं उसकी तरफ आकर्षित हुए जा रही थी इसीलिए तो इस तरह की बातें करने में ना जाने क्यों उसे भी आनंद की अनुभूति हो रही थी और वह संजू की बात मानते हुए बोली)

इसे हम लोग कच्छी कहते हैं,,,,

ककककक,कच्छी,,,,,, क्या बात है,,,,(संजू एकदम से आश्चर्य जताते हुए बोला और वैसे भी इस शब्द को सुनकर ना जाने इस शब्द में कैसा एहसास था कि इस शब्द को सुनकर ही संजू के लंड की अकड़ कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगी)

हां इसे हम लोग कच्छी कहते हैं,,,

लेकिन हमारे यहां तो इसे पेंटी कहते हैं,,,,

कहते होंगे शहर वाले गांव वाले तो इसे कच्छी ही कहते हैं,,,, तुम्हें अच्छा नहीं लगा क्या,,, देसी भाषा,,,

नहीं नहीं मम्मी ऐसा बिल्कुल भी नहीं है इस शब्द को तो सुनकर बदन में अजीब सी हलचल होने लगी,,,,

तुम्हारी मम्मी नहीं बताई क्या,,,?

यह भी कोई बताने वाली बात है क्या,,,,

चलो कोई बात नहीं अब तो पता चल गया ना तुम्हें,,,(इतना कहने के साथ ही सुहानी संजू की नजर से बचा कर अपनी पेंटी को अपनी साड़ी के नीचे दाल भी सूखने के लिए यह देखकर संजू बोला)

क्या मामी अपनी कच्छी को साड़ी के नीचे सूखने के लिए रख दी हो ऐसे सुख पाएगी क्या,,,,

सूख जाएगी हम लोग तो इसी तरह से सुखाते हैं,,,,

(तभी संजू बाल्टी में हाथ डालने के लिए नीचे झुका ही था कि सुहानी जोर से बोली)

रुक जाओ संजू,,,,(इतना सुनते ही संजु एकदम से रुक गया,,, उसे समझ में नहीं आया कि ऐसा वह क्यों बोली कि तभी वह जल्दी से आइ और बाल्टी में से तुरंत अपनी ब्रा निकाली और बोली,,,)

अभी तो तुम इसे भी हाथ में ले लेते,,,

तो इसमें कौन सा भूचाल आ जाने वाला था,,, अच्छा यह बताओ इसे क्या कहते हैं,,,

इसे ब्रा ही कहते हैं,,,,(इतना कहते हुए सुहानी अपनी ब्रा को भी अपनी साड़ी के नीचे सूखने के लिए डाल दी और संजू बोला)

चलो अच्छा ही हुआ कि इसे ब्रा ही कहते हैं नहीं तो मुझे लगा कि ईसे कुछ और कहते होंगे,,,,,,

क्या लगा तुम्हें क्या कहते होंगे,,,,

जाने दो मामी,,,,

नहीं नहीं बोलो क्या लगा तुम्हें,,,,

(सुहानी को भी इस तरह की बातें नहीं आनंद आने लगा था इसलिए संजू भी बेझिझक, बोला,,,)

मुझे लगा कि इसे गांव में चूची छुपा वन वस्त्र कहते होंगे,,,,

क्या कहा तुमने,,,,

चूची छुपा वन वस्त्र,,,,,

हाय दइया,,,(अपने चेहरे पर शर्म से हाथ रखते हुए) बड़े बेशर्म हो तुम,,,,

बेशर्मी की क्या बात है मैं तो सिर्फ बता रहा हूं,,,,, अच्छा मामी क्या दिन भर तुम इसी तरह से काम करती रहती हो,,,,(जानबूझकर संजू बात की दिशा को मोड़ते हुए बोला क्योंकि वह जो बोलना चाहता था वह बोल दिया था और उसका प्रभाव वह अपनी मामी के चेहरे पर देख रहा था जो कि शर्म से लाल हो चुका था)

तो क्या इस घर में आराम कहां मिलता है दिन भर सुबह से उठ जाओ बस काम काम काम जब तक सो नहीं जाते तब तक काम करना ही पड़ता है,,,,,, खेत खलियान गाय भैंस का तबेला फिर दूध निकालना उसे एक बर्तन में इकट्ठा करना कपड़े धोना सब्जियों को तोड़कर लाना उसे बाजार में ले जाकर तुम्हारे मामा बेचते हैं लेकिन करना मुझे ही सब कुछ पड़ता है,,,,

और बड़ी मामी,,,,

वह भी बहुत काम करती है लेकिन मैं उन्हें करने नहीं देती अच्छा नहीं लगता ना कि मेरे होते हुए उन्हें काम करना पड़े,,,

क्या बात है मामी तुम्हारी जैसी सोच अगर सब औरतों की हो जाए तो घर में झगड़ा ही खत्म हो जाए मैं तो भगवान से दुआ करूंगा कि,,, मुझे भी भले गांव की लड़की से शादी करना पड़े लेकिन तुम्हारी जैसी बीवी हो तो जिंदगी सुधर जाए,,,,।

(इतना सुनते ही सुहानी के गाल शर्म से लाल हो गए और वह बात का रुख बदलते हुए हाथ के इशारे से दूर खेतों के बीच बड़े मकान को दिखाते हुए बोली,,,)

वह दूर बड़ा मकान देख रहे हो,,,

हां बहुत खूबसूरत लग रहा है हरे हरे खेतों के बीच,,,,

वह घर तुम्हारे छोटे मामा और मामी का है,,,,

क्या कह रही हो मामी,,,, लेकिन ऐसा कैसे हो गया,,,

तेरे छोटे मामा की संगत खराब हो गई थी शराब जुआ यही सब दिनचर्या हो गई थी,,,,, एक दिन अपना खुद का धंधा करने के लिए बड़े भैया से पैसे मांगने लगे लेकिन भैया उनकी हरकत से वाकिफ थे इसलिए पैसा देने से इंकार कर दिया और तुम्हारी छोटी मामी थोड़ी झगड़ालू किस्म की है लड़ झगड़ कर अपना हिस्सा लेकर वह खेत में घर बनाकर रहने लगे तब से बोलने का का संबंध खत्म हो चुका है तेरे छोटे मामा बहुत अच्छे हैं लेकिन तेरी मामी की वजह से वह कुछ बोल नहीं पाते,,,,, विवाह को 5 साल हो गए हैं लेकिन अभी तक बच्चे नहीं है इसलिए तेरे छोटे मामा को और भी ज्यादा दिक्कत होती है,,,,,

तुम्हें अच्छा लगा था मामी जब छोटे मामा अलग हुए थे,,,,

मैं 2 दिन तक रोती रही गई थी कुछ खाई ना पी,,, ऋतु के हाथ जोड़े पांव पकड़ो लेकिन वह नहीं मानी मैं तो भगवान से प्रार्थना करती हूं कि ऐसा कौन सा दिन होता कि सब लोग एक होकर साथ में रहते,,,,

तुम्हारी इच्छा जरूर पूरी होगी मामी,,,,,, चलो अब धूप ज्यादा है नीचे चलते हैं,,,,(इतना कहने के साथ ही संजू सीढीओ की तरफ चलने लगा और सुहानी भी जैसे उस तरफ कदम बढ़ाई,,,,, उसका पैर नीचे पड़ी रस्सी में फस गया और वह एकदम से लड़खड़ा गई,,,, वह गिरने ही वाली थी कि ऐन मौके पर संजू की नजर पड़ गई और मैं फुर्ती दिखाता हुआ अपना दोनों हाथ आगे बढ़ाकर अपनी मामी को थाम लिया और उसे गिरने से बचा रहे हैं लेकिन ऐसा करते हुए उसके दोनों हाथ उसकी मदमस्त कर देने वाली चूची ऊपर आ गई थी जिसे संजू संभालते संभालते उसे पकड़ने की कोशिश में उसकी चूची को पकड़ लिया था जिसका एहसास सुहानी को संभालने पर हो गया था और वह इस स्थिति में पूरी तरह से शर्मसार हो चुकी थी वह एकदम शर्म से पानी-पानी हो गई थी अपनी दोनों चुचियों को वह अपने भांजे के हाथों में महसूस कर चुकी थी और ऐसा पहली बार था कि जब उसकी दोनों चूचियां किसी अनजान मर्द की हाथों में आ चुकी थी इस पल को महसूस करके सुहानी के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी वह शर्म से पानी पानी में जा रही थी और वह शर्म का पानी उसकी चूत से टपकने लगा था क्योंकि इस तरह सेवा एकदम उत्तेजित भी हो चुकी थी,,, और इस बात का एहसास संजू को भी अच्छी तरह से था वह जानता था कि अपनी मामी को गिरने से बचाने में उसकी दोनों हथेली उसकी मदमस्त कर देने वाली चुचियों पर चली गई थी जिसे वह संभालते हुए अनजाने में ही अपनी हथेलियों का दबाव चुचियों पर कुछ ज्यादा बढ़ा दिया था इस बात का एहसास होते ही उसके लंड में भी हरकत होने लगी थी लेकिन वह तुरंत अनजान बनता हुआ बोला ,,,,।

क्या मामी तुम भी संभाल कर चला करो ,,, मैं ना होता तो अभी तो गिर गई होती,,,,

यह पता नहीं किसने रस्सी बीच में रख दिया है,,,,

रुको मैं इसे एक जगह रख देता हूं,,,,(और इतना कहने के साथ ही संजू मोटी रस्सी को इकट्ठा करके छत के कोने में रख दिया और फिर दोनों छत से नीचे उतर गए अपनी छोटी मामी को लाइन में लाने का प्रयास संजू ने शुरू कर दिया था और किसी हद तक वह कामयाब होता नजर आ रहा था)
 
औरतों से बात करने की कला संजू में गजब की थी और पहली मुलाकात में हो अपनी सुहानी मामी को लगभग लगभग अपनी तरफ आकर्षित करने में कामयाब हो चुका था संजू जानबूझकर बाल्टी में से अपने हाथ में पेंटिं को ले लिया था वह देखना चाहता था कि उसके हाथ में पेंटी देखकर उसकी मामी के चेहरे का भाव कैसा होता है वह क्या कहती है,,, उसके सोचने के मुताबिक ही सुहानी संजू के हाथ में अपनी पेंटी देखकर एकदम से क्यों गई थी और उसे झट से उसके हाथ से छीन ली थी,,,,, एक गैर मर्द के हाथों में अपने अंतर्वस्त्र को देखकर सुहानी शर्म से पानी-पानी हो गई थी उसके बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी,,,,,, अभी तक सुहानी अपनी पेंटिं पर किसी गैर मर्द के साए को भी नहीं पड़ने दी थी लेकिन यहां तो संजू ने उसे अपने हाथ में ले लिया था इसलिए संस्कारों में पाली होने के साथ-साथ गांव के माहौल में ढली हुई सुहानी संजू की हरकत से एकदम से असहज हो गई थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें और ऐसे हालात में जो करना चाहिए था उसने वही किया वह तुरंत संजू के हाथों से अपनी पेंटिं लेकर साड़ी के नीचे सूखने के लिए छुपा दी,,,, संजू को पहली बार इस बात का पता चला था कि गांव में पेंटी को कच्छी कहते हैं,,,, और संजू को इस शब्द में कुछ भी बुरा नहीं लगा बल्कि इस शब्द के उच्चारण से उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी,,,,,, और छत से नीचे उतरते उतरते मोटी सी रस्सी ने अपना काम कर दिया था,,, जिसमें सुहानी के पैर उलझ गए थे और वह गिरते-गिरते बची थी इन मौके पर संजू ने अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसे गिरने से तो रोक दिया था लेकिन उसकी दोनों छातियों को अपनी हथेली में ले लिया था जिसे अपनी मामी को बचाने के चक्कर में वह दोनों चुचियों को हल्के से दबा भी दिया था जिसका एहसास सुहानी को अच्छी तरह से हुआ था और यह एहसास उसके तन बदन में अजीब सी हलचल पैदा कर दिया था जिसके चलते उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में से मदन रस का रिसाव होने लगा था,,,,

संजू उसकी माँ और मौसी

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पहली मर्तबा सुहानी किसी गैर मर्द की तरफ आकर्षित हुई थी अपने भांजे के गठीला बदन को देख कर उसके व्यक्तित्व और उसके बोलने के ढंग को देखकर सुहानी उसकी तरफ आकर्षित हुए जा रही थी,,,, देखते ही देखते दोपहर हो चुकी थी संजू की कुछ थका थका महसूस कर रहा था इसलिए वह खुद ही अपने कमरे में आ गया वैसे तो उसका मन अपनी मामी को छोड़कर जाने का नहीं कर रहा था लेकिन पहली बार में ही वहां अपने इरादे को अपनी मामी के सामने रख नहीं देना चाहता था,,,, इसलिए वह अपने कमरे में आ गया जहां पर दोनों बिस्तर पर उसकी मां और मौसी आराम कर रहे थे,,,, संजू वैसे तो अपनी मामी के साथ रहकर उत्तेजना का अनुभव कर रहा था लेकिन इस समय वह ना तो अपनी मां को परेशान करना चाहता था और ना ही अपनी मौसी को क्योंकि उसके मामा ने उन तीनों के लिए अलग कमरा हो जो मुहैया करा रखा था जिसमें वह जब चाहे तब दोनों जवानी का रस चख सकता था सफर की थकान के चलते संजू भी अपनी मां के ही बिस्तर पर सो गया,,,,,

संजू की माँ और मौसी संजू क साथ

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और दूसरी तरफ सुहानी के तन बदन में अजीब सी हलचल मची हुई थी,,,, जिस तरह से संजू के हाथों में उसने अपनी पेंटी को देखी थी उसके चलते उसकी चूत एकदम गीली हो चुकी थी बार-बार उसकी आंखों के सामने वही तेरे से नजर आ रहा था जब संजू बाल्टी में से उसकी पैंटी को निकालकर अपने हाथों में ले लिया था और उसे गोल गोल घुमा रहा था सुहानी को समझ में नहीं आ रहा था कि वह जानबूझकर ऐसा कर रहा था अनजाने में तभी उसे ख्याल आया कि संजू ने खुद बताया था कि शहर में तो यह आम बात है वह खुद ही कभी कबार अपनी मां की पेंटी को सूखने के लिए रस्सी पर डाल देता था इसलिए सुहानी समझने लगी कि वाकई में शहर वाले लोगों के लिए यह सब एकदम सहज होता है लेकिन तभी उसे याद आया कि जब वह छत से नीचे उतरने को थी तभी रस्सी से फंस कर नीचे गिरने ही वाली थी कि संजू ने उसे सहारा देकर बचा लिया था लेकिन सहारा देते देते उसके दोनों हाथ उसकी मद भरी सूचियों पर आ गई थी जिसे वह बचाने के चक्कर में अपनी हथेली का दवा उस पर बना दिया था और दबाव को उसने अच्छी तरह से महसूस की थी यह पहली बार था जब वह अपनी दोनों चुचियों को किसी दूसरे मर्द की हथेली में महसूस की थी और इसके चलते उसकी चूत एकदम कचोरी की तरफ फूल गई थी,,,,, सुहानी के साथ ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था वह विवाह कर के जब से इस घर में आई थी तब से वह अपने पति की ही सेवा में लगी हुई थी इस घर की देखरेख में लगी हुई थी उसने ना ही कभी किसी दूसरे मर्द के तरफ आकर्षित हुई और ना ही किसी दूसरे मर्द को अपनी तरफ अपने करीब आने थी वह बेहद संस्कारी औरत थी,,,, लेकिन आज पहली बार वह ना जाने क्यों संजू की तरफ आकर्षित हुए जा रही थी,,,,, शायद इसलिए कि पहली बार कोई उसकी सच में मदद कर रहा था उससे प्यार से बातें कर रहा था उसके काम की सराहना कर रहा था,,,,, खैर जैसे-तैसे करके वह घर का काम निपटा कर अपने कमरे में आराम करने के लिए चली गई,,,, जहां पर मोहन पहले से ही कमरे में मौजूद था और वह बिस्तर पर लेटा हुआ था लेकिन जाग रहा था,,,, सुहानी की एक आदत थी कि वह कमरे में आते ही गर्मी की वजह से अपनी साड़ी उतार देती थी और फिर आराम करती थी इसीलिए वो कमरे में दाखिल होते ही दरवाजा बंद करके सीटकनी लगा दी और अपनी साड़ी को कंधे से उतारते हुए अपने पति की तरफ देख कर बोली,,,,,।

अभी सोए नहीं,,,,

संजू दोनों क साथ मजे करता हुआ

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नींद नहीं आ रही थी बरसों बाद दीदी आई है इसलिए थोड़ी खुशी है,,,

थोड़ी खुशी है कि ज्यादा,,,(साड़ी को अपनी कमर पर से खोलते हुए वह बोली)

सच कहूं तो बहुत खुशी है विवाह वाला घर है ऐसे में घर में मेहमानों और रिश्तेदारों आना जाना पड़ जाता है कितना अच्छा लगता है घर-घर लगने लगता है,,,,

सही कह रहे हैं,,,,, दोनों दीदी शहर में रहती हैं इसलिए बरसो बाद यहां पर आई हैं बच्चों की पढ़ाई लिखाई खर्चा सब देखना पड़ता है ना ,,,,,हां लेकिन एक बात तो,,,, मैं पूछना ही भूल गई,,,,(साड़ी को उतारकर एक तरफ रखते हुए,,)

क्या,,,?

दोनों दीदी तो आई है लेकिन दोनों जीजा नहीं आए ऐसा क्यों,,,?

अरे काम में अटक गए होंगे उनके साथ साथ दोनों भांजी की कहानी हैं मोहिनी और मनीषा दीदी ने बताई तो थी दोनों की एग्जाम है इसलिए रुक गए होंगे दोनों,,,,

हां यह हो सकता है,,,,,

संजू भी काफी बड़ा हो गया है ना एकदम शादी के लायक हो गया है,,,,

दोनों क साथ मस्ती करता हुआ

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हां कितना हट्टा कट्टा लंबे कद काठी का है,,,(संजू का जिक्र होते ही उसे अपनी दोनों चुचियों पर संजू की हथेली महसूस होने लगी और वह तुरंत अपनी छातियों की तरफ देखने लगी एक मर्द को आकर्षित करने के लिए उसकी छातियां पूरी तरह से सक्षम थी एकदम गोल-गोल खरबूजे की तरह ब्लाउज में कैद होने के बाद तो उसके बीच की गहरी लकीर अच्छे अच्छों को अपने अंदर डूबा ले जाने में सक्षम थी,,,,,,, जिस पर सुहानी को गर्व भी होता था लेकिन एक बात का मलाल उसे अब तक था कि उसके पति ने उसकी चुचियों के साथ उस कदर से प्यार नहीं किया था जैसा कि एक मर्द अपनी बीवी को प्यार करते समय चुचियों के साथ खेलता है,,,, और वह सिलसिला आज तक जारी था अपनी साड़ी को अपने बदन से अलग करने के बाद वहां अपने कसी हुई ब्लाउज को थोड़ा सा ढीला करने के लिए नीचे से 2 बटन को खोल दी थी जिससे उसकी चुचियों की गोलाई नीचे से झलक रही थी लेकिन इसका भी असर उसके पति पर निस प्रभाव था,,,,,,, वह धीरे से बिस्तर के करीब आगे बढ़ी और बिस्तर पर बैठ गई,,,,, और उसके पति ने अपना हाथ आगे बढ़ा कर उसकी कमर पर रहती है एक औरत को इस हालत में देखकर थोड़ी बहुत उत्तेजना उसमे भी होती थी लेकिन अपने पति का रवैया सुहानी को पसंद नहीं आता था और सुहानी धीरे से उसका हाथ पकड़कर हटाते हुए बोली,,,)

मैं थक गई हूं,,,,(और इतना कहने के साथ ही सुहानी पीठ के बल लेट गई लेकिन उसका पति मोहन उत्तेजित हो चुका था और धीरे से उठा और बोला,,,)

सुहानी का पति मनमानी करता हुआ

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तुम्हें कुछ करना नहीं है बस लेटे रहो,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह पेटीकोट को धीरे-धीरे उपर की तरफ उठाने लगा सुहानी का मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा था लेकिन वह,,, एक संस्कारी पतिव्रता स्त्री थी इसलिए अपने पति के खुशी के लिए अपने मन को मानकर वह निश्चल भावना से लेटी रही और उसका पति धीरे-धीरे करके उसकी पेटीकोट को एकदम कमर तक उठा दिया,,,, दोनों टांगों के बीच हल्के हल्के रेशमी घुंघराले बालों के बीच की गुलाबी चूत अपने आप ही आमंत्रण दे रही थी क्योंकि भले ही ऊपर से सुहानी का मन बिल्कुल भी ना करता हो लेकिन चूत तो आखिर चूत होती है तुम्हारा मन ना होने के बावजूद भी कहीं ना कहीं उसका मन न चलता रहता है इसीलिए तो उसकी चूत एकदम से अपने साथी को पुकार रही थी जिसमें सुहानी का मन बिल्कुल भी साथ नहीं दे रहा था क्योंकि वह जानती थी कि क्या होने वाला है,,,,,,।

सुहानी को इस तरह क प्यार की जरुरत थी

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सुहानी की गुलाबी चूत काले काले घुंघराले बालों से गिरी हुई थी कामकाज में इतने दिन हो जाती थी कि अपने बदन की सफाई का भी ध्यान नहीं रखती थी हालांकि नहाती वह रोज थी लेकिन अंदरूनी हिस्सों की सफाई करना वह ना जाने क्यों उचित नहीं समझती थी शायद अपने पति की बदौलत क्योंकि उसका पति उससे उस तरीके का प्यार ही नहीं करता था जैसा कि एक स्त्री चाहती थी,,,, इसलिए सुहानी भी यही समझती थी कि पति का प्यार तो उस तरह का मिलने वाला है नहीं तो उस अंग को साफ करके क्या फायदा जिसकी दरकार खुद उसका पति ना रखता हो,,,,

लेकिन उसका पति सिर्फ यही करता था

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अपनी बीवी की गुलाबी चूत को देखकर सुहानी के पति के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव न जाना जाने लगी शायद इसलिए कि वासना की भूख मिटाने के लिए उसके सामने ही चूत परोसी हुई रखी हुई थी,,,, लेकिन स्वादिष्ट व्यंजन से भरी हुई थाली की कदर करना उसे बिल्कुल भी नहीं आता था जिस तरह से जाए काले लेकर धीरे-धीरे निवाला बना कर मुंह में डालकर स्वाद लेकर धीरे-धीरे कुछ कर गले के नीचे उतार कर अपनी भूख शांत की जाती है इस तरह की रीति उसे बिल्कुल भी नहीं आती थी और वह एकदम भेड़िए की तरह तुरंत अपने पहचाने को उतारकर उसे घुटनो तक खींच दिया और फिर अपनी बीवी के दोनों टांगों के बीच आकर एक बेहतरीन खूबसूरत गुलाबी छेद में अपने पको रंगों को डालकर कमर हिलाना शुरू कर दिया ना उसे सहेला या ना स्पर्श किया ना पिचकारी ना किसी भी प्रकार का दुलार बस अपनी वासना की आग बुझाने के लिए वह अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया और कितना हिलाया 1012 धक्के में ही एकदम से ढेर हो गया इतने में तो सुहानी की चूत भी गीली नहीं हुई थी और वह खुद गीला हो गया था,,,, और फिर लंबी सांसे लेता हुआ वह अपने मुरझाए लंड को अपनी बीवी की चूत से बाहर निकाला और बगल में ढेर हो गया उसने इस बात की भी परवाह नहीं किया की जिस तरह से उसने उसके पेटीकोट को कमर तक उठाकर उसे नंगी किया था वही पेटीकोट को वापस नीचे तक खींचकर उसके नंगे अंग को ढक दें वह गहरी गहरी सांस लेने लगा और पल भर में ही गहरी नींद में सो गया अपने पति के रवैए से सुहानी की आंखों में आंसू के मोती चमकने लगी और वह धीरे से उठी और अपने पति की तरफ देखकर अपने कपड़ों को ठीक करने लगी एक संस्कारी औरत होने के नाते वह अपनी मर्जी को बता भी नहीं सकती थी ना ही अपने पति की गलती को जाहिर कर सकती थी उसे इस बात का डर था कि अगर वह इस बारे में कुछ भी अपने पति से कहेगी तो उसका पति उसे गलत चरित्र वाली औरत समझेगा और इसी के चलते वह आज तक इस दुख को झेलते आ रही थी,,,,, थकान की वजह से थोड़ी ही देर में उसे भी नींद आ गई,,,,,

अपने कमरे में कपडे बदलती हुयी सुहानी

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शाम को दरवाजे पर हो रही दस्तक के साथ ही उसकी नींद खुली तो वह एकदम से हड़बड़ाहट में उठी और जल्दी आती है अपनी साड़ी को उठाकर पहनने लगी,,,,

चाची और चाचा अभी तक सो रही हो दरवाजा खोलो,,,, मैं चाय लेकर आई हूं,,,,,

हां लल्ली रुको मैं आई,,,,,,(इतना कहने के साथ ही वजह दी अपनी साड़ी को पहनकर अपने आप को व्यवस्थित करने लगे और जैसे ही दरवाजा खोली लल्ली चाय का ट्रे अपने हाथ में लेकर खड़ी थी,,,,)

अरे बिटिया रानी तुम क्यों यह सब काम करती हो कुछ ही दिन में तुम्हारी शादी हो जाएगी अपने घर चली जाओगी आराम तो कर लो यहां पर पता नहीं कैसा ससुराल होगा,,,

अरे चाची इसीलिए तो काम करने की आदत बना रही हूं,,,,,,

बड़ी प्यारी है तू,,,,

(इतना कहने के साथ ही लल्ली चाय लेकर कमरे में आ गई और सुहानी अपने पति को जगाने लगी,,,, और लल्ली दो कप टेबल पर रखते हुए अपने चाचा से बोली,,,)

क्या चाचा तुम अभी तक सो रहे हो,,,, पापा नाराज हो रहे थे,,,,

भैया नाराज हो रहे थे क्यों क्या हुआ,,,(एकदम से अपनी जगह पर उठ कर बैठते हुए वह बोला)

गेहूं पिसवाना था,,,,, कह रहे थे कि अब मेहमान का आना-जाना शुरू हो जाएगा किसी चीज की कमी नहीं होनी चाहिए,,,,,

अरे बाप रे मैं तो भूल ही गया,,,,

तुम तो सब काम भूल जाते हो,,,(इतना कहने के साथ ही सुहानी टेबल पर पड़ा एक कप चाय उठाकर पीने लगी और लल्ली से बोली)

बाप रे में तो भूल ही गई दोनों दीदी को भी चाय नाश्ता देना था,,,,

तुम चिंता मत करो चाची मैं ले जा कर दे देती हुं,,,,

सच में तू कितनी प्यारी है भगवान करे सबको तेरी जैसी बिटिया मिले,,,, तुझे पाकर तो तेरे ससुराल वाले एकदम धन्य हो जाएंगे,,,,

(इतना सुनकर लल्ली शर्मा गई और बोली,,,)

मैं जा रही हूं बुआ लोग को चाय देने,,,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपनी चाची के कमरे से बाहर निकली और अपनी बुआ के कमरे की तरफ जाने लगी जो कि ऊपर के मंजिलें पर था लेकिन तभी उसे ख्याल आया कि कमरे में तो संजू भी होगा और जिस तरह से संजू से उसकी मुलाकात हुई थी उस पल को याद करके उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी संजू ने उसे लगभग अर्धनग्न अवस्था में देख लिया था लगभग लगभग उसके बदन के कमर के निचले हिस्से को बड़ी आसानी से देख लिया था पानी में भीगा हुआ उसका कमीज उसके बदन से पूरी तरह से सटा हुआ था जिससे उसके बदन का पोर पोर सब कुछ उभरकर सामने नजर आ रहा था,,,,,।

उस पल को याद करते ही उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी उसकी सांसे भारी होने लगी पहली बार वह किसी जवान लड़के के सामने ऐसी अवस्था में अपने आपको पाई थी इसलिए उसे संजू से नजर मिलाने में शर्म महसूस हो रही थी और संजू की बड़ी बेशर्मी से उसके अंगों को देख रहा था,,,,,, लेकिन फिर भी चाय पहुंचाने का जिम्मा उसने अपने सर पर ले ली थी इसलिए अब नानूकुर नहीं कर सकती थी,,,, फिर अपने मन में यह सोच कर कि जो होगा देखा जाएगा वह अपनी बुआ के कमरे की तरफ आगे बढ़ गई,,,,,, देखते ही देखते वह अपने बुआ के कमरे के ठीक सामने पहुंच गई और एक हाथ में चाय की ट्रे लेकर वह दूसरे हाथ से दरवाजे पर दस्तक देने लगी,,,,, दरवाजे पर हो रही दस्तक की आवाज सुनते ही कमरे के अंदर आराम से सो रहे तीनों के लिए एकदम से खुल गई तो संजू ने पाया कि वह अपनी मां को अपनी बाहों में भर कर सोया हुआ था उसकी मां की भारी-भरकम गांड उसके लंड से एकदम रगड़ खा रही थी,,,, सोते समय तो वह अपनी मां से दूरी बनाकर ही बिस्तर पर सोया था लेकिन नींद में ना जाने कब कैसे उसकी मां ठीक उसकी बाहों में आ गई और अपनी भारी-भरकम गांड को उसके लंड से हटा दी इस बारे में राजू को पता ही नहीं चला,,,, जो कि इस समय अपनी मां की बहन की गर्माहट को पाकर उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो चुका था,,,,,, अपनी मां को इस अवस्था में अपनी बाहों में पाकर वह बिस्तर से उठने नहीं चाहता था बल्कि अपनी मां की साड़ी उठाकर वह अपने लंड को अपनी मां की चूत में डाल देना चाहता था लेकिन दरवाजे पर हो रही दस्तक के कारण वह एकदम से मजबूर हो गया था,,,,,,

साधना की नींद भी दरवाजे पर हो रही दस्तक की वजह से खुल चुकी थी और वह अस्त-व्यस्त हालत में बिल्कुल भी नहीं थी इसलिए आराम से उठकर बिस्तर पर बैठ गई थी वह दूसरी बिस्तर पर आराधना और उसके बेटे संजू को देखकर वह एकदम से मुस्कुराते हुए बोली,,,,।

देखी ना मैं कहती थी एक बार अपने बेटे का ले लेने के बाद तू भी एकदम मस्त हो जाएगी,,,,,।

(साधना का इतना कहना था कि तभी बाहर से आवाज आई)

बुआ में चाय लेकर आई हूं,,,,,

अरे हां रुक मैं दरवाजा खोलती हूं,,,,,(साधना का इतना कहकर उठना था कि आराधना तुरंत अपनी जगह से उठ कर खड़ी हो गई और संजू ने चादर को अपने ऊपर डाल लिया क्योंकि उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा था और वह नहीं चाहता था कि अपनी मां और मौसी की हाजरी में लल्ली की नजर उसके लंड पर पड़े हालांकि बगैर इस कमरे में उसकी मां और मौसी मौजूद ना होती तो वह किसी ना किसी तरह से जुड़ा लगाकर लल्ली की नजरों को अपने लंड पर जरूर आकर्षित करने में कामयाब हो जाता लेकिन इस समय ऐसा करना बिल्कुल भी उचित नहीं था इसलिए वह चादर को अपनी कमर के ऊपर तक डाल दिया था ताकि उसका खड़ा लंड उस में छुपा रह सके और आराधना तुरंत संजू वाले बिस्तर से उठ कर खड़ी हुई और साधना के बिस्तर पर जाकर बैठ गई ताकि लल्ली को कमरे के माहौल के बारे में कुछ भी एहसास ना हो,,,,, और वह कुछ गलत सोचने पर मजबूर ना हो जाए,,,,,

संजू और आराधना अपने आपको व्यवस्थित कर चुके थे और साधना उन दोनों की तरफ देख कर ही दरवाजे को खोली थी क्योंकि वह भी नहीं चाहती थी कि अंदर के अस्तव्यस्त हालत को लल्ली अपनी आंखों से देखकर संख्या करें,,,, सब कुछ व्यवस्थित हो जाने पर साधना ने जैसे ही दरवाजा खोलिए सामने लल्ली हाथ में चाय का ट्रेलर कर खड़ी थी जिसे देखकर साधना मुस्कुराते हुए बोली,,,,।

इसकी क्या जरूरत थी बिटिया,,,,

अरे कैसे नहीं बुआ आखिरकार आप हमारी बुआ है तो आप की सेवा करना तो हमारा फर्ज बनता है ना,,,,(इतना कहने के साथ ही बंद कमरे में दाखिल हो गई और अंदर दाखिल होते हैं सबसे पहले उसने नजर संजू के ऊपर डाल दी जो कि संजू लेटा हुआ भी उसी को देख रहा था संजू से नजर मिलते ही उसकी आंखों में शर्म के भाव नजर आने लगे और वह अपनी नजरों को दूसरी तरफ घुमा ली,,,, चाय का एक कप साधना को और दूसरा कप आराधना को थमाने के बाद वह,,,, तीसरे कप को टेबल पर ही रखती और फिर मुस्कुराते हुए कमरे से बाहर आ गई,,,, संजू लल्ली की सादगी के साथ-साथ कमरे से बाहर निकलते समय उसके सुगठित नितंबों की लचक को भी देख रहा था जिसे देख कर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ उठी थी,,,,,,।

चाय पीने के बाद थोड़ी देर में तीनों कमरे से बाहर आ गए शाम ढलने वाली थी,,,,, वह अपनी बड़ी मामी से अपनी सबसे छोटी मामी और मामा के बारे में जानकारी लेकर वह बिना कुछ कहे किसी को बताए खेतों की तरफ निकल गया अपने छोटे मामा मामी के घर उनसे मुलाकात करने के लिए अपनी मामी से उसे पता चला कि वह लोग भी अब उन लोगों से कोई रिश्ता रखना नहीं चाहते लेकिन उसकी बीच वाली सुहानी मामी ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहती थी और वह अपनी सुहानी मामी को दुखी नहीं देख सकता था वह किसी भी तरह से उन लोगों को भी इस घर से दोबारा जोड़ना चाहता था शादी के साथ-साथ अब उसका मकसद भी यही रह गया था,,,,,,,,

देखते ही देखते वह खेतों में से गुजर रही उची नीची मेड से चलते हुए अपने आप को गिरने से बचाते हुए वह अपने छोटे मामा और मामी के घर के बेहद करीब पहुंच गया था,,,,, तभी उसे घर के पास थोड़ी ही दूरी पर एक खूबसूरत औरत घास काटती हुई नजर आई,,,,, संजू की नजर उस पर पढ़ते ही संजू की आंखों में अजीब सी चमक नजर आने लगे क्योंकि पीछे से ही वह औरत एकदम खूबसूरत और मादकता से भरी हुई नजर आ रही थी वह जिस तरह से बैठकर घास काट रही थी उसके नितंबों का घेराव कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था और वह घेराव संजू के दिल की धड़कन बढ़ा रहा था देखते ही देखते संजू एकदम से उस औरत के बेहद करीब उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया यहां से उस औरत को देखने में संजू की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी क्योंकि उसने जो ब्लाउज पहन रखी थी वह पीछे से केवल डोरी नुमा थी और साड़ी कमर के नीचे कसी हुई थी जिससे उसकी नंगी चिकनी पीठ एकदम साफ नजर आ रही थी कल्पना करने पर अगर वह पतली सी रस्सी ‌ जो ब्लाउज से बंधी हुई थी उसे हटा दी जाती तो संजू आराम से उसके नंगे पन की कल्पना करके मस्त हो सकता था और ऐसा हुआ वह भी रहा था और साड़ी कमर के नीचे बनी होने की वजह से नितंबों के ऊपरी हिस्से की पतली लकीर जहां से गांड की शुरुआत होती है वह भी एक दम साफ नजर आ रही थी जिसे देखते ही संजू के लंड की अकड़ बढ़ने लगी,,,,, संजू काफी देर से उस औरत के पीछे खड़ा होकर उसकी मदहोश कर देने वाली जवानी को और उसके पिछवाड़े को देखकर मस्त हुआ जा रहा था,,,,, और अपने मन में यह कल्पना कर रहा था कि कि काश वह औरत इसी तरह से बैठी हुई ही अपनी साड़ी को बैठे-बैठे ही ऊपर की तरफ उठाकर अपनी गोल-गोल गांड को दिखा देती तो कितना मजा आता,,,, इस बारे में सोचकर ही संजू का लंड एकदम से खड़ा हुआ जा रहा था,,,,, लेकिन जैसे ही उस औरत को इस बात का एहसास हुआ कि उसके पीछे कोई खड़ा है तो एकदम से पीछे मुड़ कर देखी और एकदम से चौक गई,,,,,।

घास काट रही औरत क पिछवाड़े की खूबसूरती देखकर संजू मस्त हो रहा था

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संजू बिना कुछ बताए देखते ही देखते धीरे-धीरे खेतों के बीच से होते हुए अपनी सबसे छोटी मामी ऋतु के घर के करीब पहुंच गया था करीब में ही एक खूबसूरत औरत है घास काट रही थी संजू उसे देखते ही मन में धारणा बना लिया था कि यही उसकी छोटी वाली मामी है क्योंकि खेतों के बीच और कोई रहता भी नहीं था एक उसके छोटे मामा मामी ही रहते थे इसलिए उसे समझते देर नहीं लगी कि जो इस खूबसूरत घर के पास घास काट रही है वह उसकी मामी है और धीरे-धीरे संजू जाकर अपनी मामी के ठीक पीछे खड़ा हो गया,,,, जहां से उसकी मम्मी का पिछवाड़ा नजर आ रहा था ब्लाउज पीछे से एक पत्नी डोरी से भरी हुई थी जिसके चलते उसकी चिकनी मक्खन जैसी पीठ एकदम साफ नजर आ रही थी और पेटीकोट बैठने की वजह से थोड़ा नीचे की तरफ सरका हुआ था जिससे नितंबों के शुरुआती छोर की लकीर नजर आ रही थी जिसे देखते ही संजू के लंड में कुलबुलाहट होना शुरू हो गया था,,,,

ऋतू मामी

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संजू के मुंह में तो पानी आ रहा था इस खूबसूरत मनोरम दृश्य को देखकर उस औरत के ठीक पीछे खड़ा समझो मन ही मन में उस औरत के प्रति नग्न अवस्था में वह कैसी दिखती होगी इस बात की धारणा बांधने लगा था उसका मन तो कर रहा था कि पीछे से उसकी साड़ी उठाकर उसकी नंगी गांड के दर्शन कर ले क्योंकि जिस तरह का उस औरत के बदन का वजूद नजर आ रहा था उससे समझते देर नहीं लगी थी कि इमारत बहुत मजबूत है,,,,,,,, संजू की तो हालत उस औरत का पिछवाड़ा देखकर ही खराब हुए जा रहा था,,,,,, संजू उस औरत के पीछे खड़ा खड़ा कुछ और कल्पना के बाण चला पाता इससे पहले ही उस औरत को जैसे कुछ आभास हो गया और वह पीछे मुड़कर जैसे ही देखी तो एकदम से चौक गई,,,,।

तततततत ,,,, तुम कौन हो,,,(इतना कहने के साथ ही वह हाशिया लेकर एकदम से खड़ी हो गई उसको देख कर संजू थोड़ा घबरा गया और एक कदम पीछे लेते हुए बोला)

अरे अरे यह क्या कर रही हो,,,,, तुम रितु मामी होना,,,,।

(इतना सुनते ही वह एकदम से कुछ सोचने लगी हो और फिर कुछ देर रुकने के बाद बोली)

हां मेरा नाम रितु है लेकिन तुम कौन हो,,,,

अरे मामी में संजू तुम्हारा भांजा,,,, वीर मामा कहां है,,,

(संजू की बात सुनकर उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह उसी तरह से खामोश एकटक संजू की तरफ देखे जा रही थी क्योंकि इससे पहले उसने संजू को कभी देखी नहीं थी,,,, उसको इस तरह से आश्चर्य से अपनी तरफ देखता हुआ पाकर संजू फिर से बोला,,,)

अरे मामी तुम मुझे नहीं पहचानती मैं भी तुम्हें नहीं पहचानता लेकिन अंदाजे से मैं लेकिन सही पकड़ लिया कि तुम ही मेरी सबसे छोटी वाली मामी हो आराधना को जानती हो,,,,

(आराधना का नाम सुनते ही जैसे उसे धीरे-धीरे सब कुछ याद आ रहा होगा एकदम से खुश होते हुए बोली)

अरे अपनी आराधना दीदी,,,,

हां अब जाकर पहचानी मुझे तो लगा था कि कहीं यह हसिया मुझ पर चलाना दो,,,,

अरे नहीं वो क्या है ना कि मैं पहली बार तुम्हें देख रही हूं इसलिए समझी कि कोई और है,,,, लेकिन तुम्हें मेरे बारे में किसने बताया,,,,

(रितु जानती थी कि उससे और बाकी सभी लोगों के बीच बोलने तक का संबंध नहीं रह गया है इसलिए मुझे आश्चर्य हो रहा था कि उसके बारे में किसने बताया होगा इसीलिए वह संजू से पूछ रही थी तो संजू जवाब देते हुए बोला,,)

और किसने मामी सुहानी मामी ने,,,,

सुहानी ने,,,,

हां मामी सुहानी मामी ने,,,,,

क्या कहीं दीदी ने,,,,

वह क्या है ना मामी,,,, मेरी जानकारी में मैं पहली बार गांव आया हूं इसलिए कौन क्या है मैं नहीं जानता,,,, इसलिए वह मामी ही मुझे सब के बारे में बता रही थी और उन्होंने ही छत के ऊपर से,,, मुझे तुम्हारा घर दिखाते हुए बोली,,, कि वही तुम्हारी छोटी मामी का घर है,,,, लेकिन मामी इतना बताते हुए ना जाने क्यों उनकी आंखों में आंसू आ गए मैंने जब इस बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि आप लोग अलग हो गए हैं,,,,,

हां हम लोग अलग हो गए,,,,,(रितु थोड़ा मुंह बनाते हुए बोली)

लेकिन सुहानी मामी तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहती थी,,,

अब जो हुआ सो हुआ तो मेरे घर पर ही बार आए हो चलो तुम्हारे लिए चाय बना देती हूं लेकिन हां घर पर बता कर तो आए हो ना,,,,

हां जरूर बल्कि मुझे तो बड़ी वाली मामी नहीं भेजी है कि जाकर अपनी छोटी वाली मामी से भी मिल लो,,,

क्या दीदी ने ऐसा कहीं,,,

क्यों नहीं मामी तभी तो मैं यहां आया हूं,,,,

(इतना सुनते ही ऋतु के चेहरे पर एक अजीब सी हलचल होने लगी और वह अपने चेहरे के भाव को छुपाते हुए आगे आगे चलने लगी और बोली,,,)

संजू और उसकी बड़ी मामी कुछ इस तरह से

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अच्छा अंदर आओ मैं चाय बना देती हूं,,,,(इतना कहते हुए आगे आगे चलने लगी और संजू पीछे पीछे लेकिन संजू की नजर अपनी छोटी वाली मामी के गजब के पिछवाड़े पर थी जो कि चलते समय एक अजीब सी थीरकन लिए दिल पर छुरियां चला रहे थे उसके गोल-गोल दोनों नितंब के फांक ऐसा लग रहे थे कि मानो बड़े-बड़े दो तरबूज साड़ी के अंदर भर दिए गए हो संजू का लंड तो पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था वह मन ही मन सोच रहा था कि अगर रितु मामी उसके नीचे आ गई तो जन्नत का मज़ा मिलेगा,,,,, प्रभा इसी कोशिश में लगा हुआ भी था एक तो वह किसी भी तरह से अपनी छोटी वाली मामी को वापस सबसे मिलाना चाहता था और छोटी वाली मामी के साथ-साथ घर में जितनी भी चूत की रानी थी सबको अपने नीचे लेने की इच्छा रखता था और वह जानता था कि उसकी इच्छा जरुर पूरी होगी लेकिन किस हालात में होगी वह यह नहीं जानता था देखते देखते वह भी कमरे में प्रवेश कर गया,,,,,,,

पहली बार उसके घर में परिवार का कोई सदस्य आया था इसलिए उसके चेहरे पर भी खुशी साफ झलक रही थी,,, संजू के छोटे वाले मामा घर पर नहीं थे बाद कहीं पर किसी काम से गए हुए थे रितु घर में अकेले ही थी संजू के आ जाने से वह खुशी-खुशी उसका स्वागत करना चाहती थी क्योंकि जिस तरह से उसने बताया था कि उसकी बड़ी मामी ने ही उसे यहां पर भेजी है और सुहानी चाहती है कि वह लोग फिर से एक होकर रहे,,, इसलिए कहीं ना कहीं उसके मन में इस बात की तसल्ली थी कि चलो परिवार वाले इतना तो चाहते हैं वरना जब से वह अलग हुई थी तब से उसे देखने कोई नहीं आया था,,,,,

तुम बैठो संजू में चाय बना देती हूं,,,,

अरे मामी इसकी क्या जरूरत है मैं तो सिर्फ तुमसे मिलने के लिए आया था मिल लिया बस हो गया,,,,

तू भी सिर्फ औपचारिकता निभाने ही आया था है ना,,,

नहीं नहीं मामी ऐसा बिल्कुल भी नहीं है

ऐसा क्यों नहीं है तभी तो मेरे घर का पानी पिए बिना तो जाने की बात कर रहा है,,,

लल्ली नहाते हुए

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अच्छा ठीक है तुमको अगर ऐसा लग रहा है तो एक अच्छी सी कड़क चाय बना दो मैं बैठता हूं,,,, वैसे भी मैं किसी पराए के घर में तो हूं नहीं अपनी मामी के घर में हूं इसलिए निश्चिंत हूं,,,

(पहली बार अपने लिए मामी संबोधन रितु को बहुत अच्छा लग रहा था वह मन ही मन बहुत खुश हो रही थी और मुस्कुराते हुए रसोई घर में चली गई चाय बनाने के लिए,,,, अभी गांव में रसोई बनाने के लिए गैस उपलब्ध नहीं हुआ था इसलिए वह घर के पीछे वाले हिस्से में चाय बनाने के लिए चली गई थी जहां पर चूल्हा रखा हुआ था,,,, रितु जल्दी-जल्दी चूल्हा जलाकर चाय बनाने लगी और संजू इधर उधर देख कर कमरे का मुयायना करने लगा,,, कमरा एकदम ठीक-ठाक सजाया हुआ था सफाई की दरकार की जाती थी कमरे में जो कि देखने से ही समझ में आ रहा था संजू को मामी का घर बहुत अच्छा लगा था,,,, वैसे भी संजू को अपनी मामी के घर से कहीं ज्यादा अच्छा अपनी मामी का खूबसूरत बदन लग रहा था जो कि बेहद गदराया हुआ था,,,, जिसके मक्खन जैसे बदन को और उसकी बेहतरीन खूबसूरती को देखकर संजू के मुंह के साथ-साथ उसके लंड में भी पानी आना शुरू हो गया था,,,,,,,

गांव आने का मकसद संजू के लिए बदल चुका था वह आया था अपने मामा की लड़की के शादी में था लेकिन अब उसे लगने लगा था कि 2 परिवारों को मिलाना भी उसका मकसद बन चुका है और साथ ही तीनों मामीयों की जवानी पर काबू करना भी अब उसका मकसद बन चुका था,,,, एक ही परिवार में इतनी सारी चूत की रानी को उसने अभी तक नहीं देखा लेकिन अपने ही घर में इतनी सारी चूत देखकर उसके मुंह में पानी आ रहा था,,,,, घर में एक से एक खूबसूरत औरतें थी जिनके पास मर्दों की प्यास बुझाने के लिए वह सब कुछ था जो एक खूबसूरत औरत के पास होता है बेहतरीन गोलाई दार चूचियां मदमस्त कर देने वाली उभारदार गांड और निश्चित तौर पर बेशकीमती मादक रस से भरी हुई चूत भी थी जिसका अंदाजा वह इस घर में मौजूद खूबसूरत चेहरे को देखकर ही लगा लिया था हालांकि अभी तक उसे अपने मामा के घर में किसी की भी चूत के दर्शन हुआ नहीं था हां लेकिन लगभग लगभग वह अर्धनग्न अवस्था में अपने मामा की लड़की को देखा था जिसे देखते ही उसकी आंखों में चार बोतल का नशा छा गया था,,,,,

संजू अपनी सुहानी मामी क साथ

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एक तरफ संजू अपनी मामीयों के ख्यालों में खोया हुआ था दूसरी तरफ रितु ने चाय बनाकर तैयार कर ली थी बस पानी देने के लिए वह अपनी जगह से उठी और घर के पीछे ही बने हेडपंप को चलाने लगी,,,,, खेत में घर बनाते समय पानी की भी बहुत जरूरत पड़ती थी इसलिए घर के पीछे ही हेडपंप को लगाकर पानी की जरूरत को भी पूरी कर लिए थे जिससे रितु को आसानी भी होती थी वरना कुछ दिन तक तो झगड़ा करके खेत में घर बनाते समय पानी की जरूरत पड़ने पर उसे अपने ही घर पर जाना पड़ता था और वहां जाने मुझे शर्म महसूस होती थी लेकिन अब ऋतु के मुताबिक सब कुछ ठीक हो चुका था वह अपने घर में ही अपनी जरूरत के सारे साधन उपलब्ध कर चुकी थी,,,,

वह पानी की बाल्टी भरने के लिए हेडपंप चलाना शुरु की ही थी कि तभी एक छोटा सा चूहा घूमता हुआ आया और उसकी साड़ी को पकड़कर धीरे से उसकी पेटीकोट के अंदर घुसने लगा पहले तो उसे बिल्कुल भी अहसास तक नहीं हुआ लेकिन जैसे ही वह चूहा उसके घुटनों पर चढ़कर जांघों के ऊपर की तरफ जाने लगा वह एकदम से घबरा गई और एकदम से स्थिर हो गई उसे इस बात का डर था कि कहीं उसकी साड़ी के अंदर बिच्छू तो नहीं घुस रहा है इस बात का एहसास होते ही वह एकदम से घबरा गई थी और तुरंत उछलना शुरू कर दी,,,।

संजू और ऋतू मामी

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हाय दैया में मर गई,,,, हाय मर गई रे कोई तो बचा लो यह क्या है,,,,हाय,,,,,(इतना कहते हुए वह जोर-जोर से उछल कूद मचाने लगी आवाज सुनते ही संजू तुरंत अपनी जगह से दौड़ता हुआ है और घर के पीछे देखा तो उसकी मामी जोर-जोर से साड़ी को घुटने तक उठाए उछल रही थी हालांकि थोड़ी मुसीबत वाली बात जरूर थी लेकिन इस समय जिस हालात में वह अपनी मामी को देख रहा था उसे देखा कर सुन चुके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी क्योंकि वह घुटने तो साड़ी उठाकर जोर जोर से कूद रही थी और कूदते हुए उसके बड़े-बड़े खरबूजे जैसी चूचियां रबड़ के गेंद की तरह उछल रही थी जिसे देख कर संजू के मुंह में पानी आ रहा था,,,,,,, रितु चाहती थी कि संजू उसकी कुछ मदद करें इसलिए मैं संजू की तरफ देखकर जोर-जोर से उछल रही थी और चिल्ला रही थी,,,)

अरे हुआ क्या है मामी बताओ तो सही,,,

अरे मुझे बचा ले संजू लगता है कि मेरी साड़ी में बिच्छू घुस गया है,,,

बिच्छू,,,,,, नहीं नहीं ऐसा कैसे हो सकता है,,,,

अरे पागल मेरी मदद भी करेगा की ऐसे ही खड़े होकर देखते रहेगा,,,(जोर जोर से उछलते हुए और अपनी साड़ी को झटकते हुए वह बोली,,,,,,,, संजू की अपने मन में सोचने लगा कि अगर वाकई में साड़ी में बिच्छू घुसा होगा तो मुसीबत हो जाएगी इसलिए वह तुरंत आगे बढ़ा और अपनी मामी से बोला,,,)

कहां है बिच्छू,,,,?

संजू और ऋतू मामी

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अरे मेरी साड़ी में घुसा हुआ है,,,,

लेकिन मैं कैसे मदद कर सकता हूं,,,,

अरे संजू जैसे भी कर सकता है कर नहीं तो मैं मर जाऊंगी,,,,

अच्छा रुको थोड़ा शांत रहो उछलना बंद करो,,,,

नहीं यह कैसे हो सकता है मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,,,

(एक तरफ रितु परेशान होकर जोर-जोर से कूद रही थी और दूसरी तरफ को देती हुई अपनी मामी को देखकर संजू का लंड अपनी औकात में आ रहा था,,,, अपनी मामी की तरफ से उसे खुली छूट मिल गई थी कि जैसे भी वह कर सकता है उसकी मदद करें,,,, उसके पास यही मौका था अपनी मामी के करीब आने का हो रही इसी बहाने अपनी मामी को खूबसूरत बदन को स्पर्श करने का,,,,, और भला संजू मौके की ताक में रहने वाला जवान लड़का इस सुनहरे मौके को कैसे अपने हाथ से जाने देना चाहता था वह तुरंत अपनी मम्मी के पीछे आकर खड़ा हो गया और उसे तुरंत अपनी बाहों में भर लिया और एकदम से उसे जकड़ लिया उसकी मामी को समझ पाती कुछ बोल पाती इससे पहले ही वह अपनी मामी को समझाते हुए बोला,,,)

बस बस मामी,,,, तुम इसी तरह से बिल्कुल भी मत हिलना वरना गड़बड़ हो जाएगी,,,,।

संजू और ऋतू

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ठठठ ठीक है संजू लेकिन जल्दी कर,,,,,

(रितु भी अपने आप पर संयम रखते हुए बोली लेकिन जिस मजबूती से संजू ने उसे अपनी बाहों में जकड़ कर पकड़े हुए था अगर रितु चाहती तो भी वह हील नहीं सकती थी और संजू की तरफ से उसकी मुसीबत को दूर करने का इंतजार करने लगी संजू जिस तरह से अपनी मामी को पीछे से अपनी बाहों में कस के पकड़ा हुआ था ऐसे हालात में संजू का लंड पेंट में होने के बावजूद भी पूरी तरह से तंबू बनाया हुआ था और सीधे-सीधे ऋतु के गांड के बीचो-बीच धंसता चला जा रहा था,,,, पहले तो रितु को डर की वजह से जरा भी एहसास नहीं हुआ लेकिन जैसे ही संजू अपनी कमर का दबाव आगे की तरफ किया वैसे ही संजू का लंड साड़ी सहित गांड की दरार के बीचो बीच घुसता हुआ सीधे जाकर उसकी चूत के मुहाने पर दस्तक देने लगा तब जाकर रितु को इस बात का एहसास हुआ कि उसकी चूत पर संजू का मोटा तगड़ा लंड ठोकर मार रहा है और इस बात का एहसास उसके तन बदन में अजीब सी हलचल पैदा करने लगा वह एकदम से स्थिर हो गई पहले तो वह अपने डर को दूर करना चाहती थी अभी भी उसकी साड़ी के अंदर चूहा हलचल मच आया हुआ था लेकिन फिर भी वजह से तैसे करके कसमसा रही थी लेकिन संजू की पकड़ से आजाद नहीं हो पा रही थी और संजू इस मौके का पूरा फायदा उठाता हुआ इस बात को जानते हुए कि उसका लंड सीधे-सीधे उसकी मामी की गांड के बीचों बीच फंसा हुआ है वह उसे बिल्कुल भी बाहर निकालने की कोशिश नहीं कर रहा था बल्कि अपनी कमर को आगे बढ़ाकर और अंदर तक ले जाने की कोशिश में लगा हुआ था,,,,, और वह अपनी मामी को यह बताना चाहता था कि उसे इस बात का बिल्कुल भी पता नहीं है इसलिए वह बोला,,,,।

बस मामी बस ऐसे ही बिल्कुल भी मत हिलना नहीं तो काम बिगड़ जाएगा बताओ मुझे कि अब वह कहां पर है,,,।

सससंजु जांघों के ऊपर चढ़ता जा रहा है,,,

ठीक है हिलना नहीं मामी वरना काट लेगा,,,,

संजू अपनी सुहानी मामी क साथ

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कैसे भी कर संजू लेकिन बाहर निकाल उसे,,,,

(अपनी मामी की तरफ से रजामंदी मिलते ही संजू मन ही मन बहुत खुश हो रहा था आज उसे अपनी मामी की साड़ी ऊपर उठाने का मौका जो मिल गया था वह धीरे से अपने दोनों हाथों से अपनी मामी की साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगा ऐसा करने में उसे इतना आनंद और उत्तेजना का अनुभव हो रहा था कि पूछो मत जैसे-जैसे वह अपनी मम्मी की साड़ी ऊपर उठा रहा था वैसे वैसे उसका नंगा बदन नीचे से उजागर होता जा रहा था इस बात का एहसास रितु को भी हो रहा था और ऋतु के भी तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी,,,,, देखते ही देखते संजू अपनी मामी की साड़ी को उसके घुटने तक उठा दिया था और ऐसा करते वक्त वह इतना ज्यादा चुदवासा हो गया था कि उसके लंड का कड़क पन बढ़ता ही जा रहा था और वह बराबर साड़ी के ऊपर से ही रितु की चूत के ऊपर ठोकर मार रहा था जिसका एहसास उसे पानी पानी कर रहा था,,,,

इस तरह से रितु दो तरह से परेशान हो रही थी एक तो साड़ी में कुछ घुस गया था और दूसरी तरफ संजू अपने मुसल से उसकी चूत को कूटने की तैयारी कर रहा था,,,,, घुटनों तक साड़ी को उठाते ही संजू बोला,,,।

अब कहां है मामी,,,,,?

संजू की बड़ी मामी लुंड पर ु हालति हुयी

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जांघों के ऊपर जा रहा है संजू,,,

क्या कह रही हो मामी तब तो दिक्कत हो जाएगी,,,, तुम्हारी साड़ी को मुझे कमर तक उठानी पड़ेगी,,,,

जो भी हो संजू तू जल्दी से जल्दी मुझे इस मुसीबत से निजात दिला,,,(रितु एकदम से जवाब देते हुए बोली वह किसी भी तरह से अपनी साड़ी में घुसी मुसीबत को अपने से दूर करना चाहती थी,,,, फिर क्या था संजु को तो खुला दौर मिल गया था पहली मुलाकात में ही वह अपनी छोटी मामी को अपनी बाहों में भर लिया था और सीधे-सीधे साड़ी के ऊपर से ही अपने लंड की ठोकर उसकी चूत पर मार रहा था और ऐसा वह जानबूझकर कर रहा था क्योंकि अपनी मामी को संभालने में वह अपनी कमर को धीरे-धीरे हिला दे रहा था मानो कि जैसे धीरे-धीरे उसकी चुदाई कर रहा हो और इस बात का एहसास रितु को भी बहुत अच्छी तरह से हो रहा था रितु सब कुछ जानते हुए भी अपनी साड़ी में खुशी मुसीबत को दूर करने के चक्कर में अपने भांजे से साड़ी के ऊपर से भी अपनी चूत में धक्के ले रही थी और ऐसा करने में उसे मदहोशी छा रही थी उसकी चूत पानी पानी हो रही थी,,,,

संजू अपनी हरकत को जारी रखते हुए अपनी मामी की साड़ी को धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठाने लगा और देखते-देखते ऋतु की साड़ी उसकी मोटी मोटी जागो तक आ गई थी उसकी गोरी गोरी जांघें एकदम दूध की तरह चमक रही थी जिसे बात संजू अपनी आंखों को आगे की तरफ करके उसे अपनी मामी की दोनों टांगों की तरफ झुकाया हुआ था जिससे संजू अपनी मामी के खूबसूरत अमृत बिंदु को अपनी आंखों से पी रहा था अपनी मामी की मोटी मोटी गोरी गोरी जांघों को देख कर उसके लंड की हालत और ज्यादा खराब होने लगी,,,,,,, संजू की सांसे अटक सी गई थी,,,, जांघों तक उठी हुई साड़ी में से संजू अपनी मामी की गदराई जवानी को देख रहा था और पागल हुआ जा रहा था इस बात का एहसास धीरे-धीरे रितु को भी होने लगा था जिस तरह से फटी आंखों से वह आकर की तरफ झुक कर उसकी मोटी मोटी जांघों को देखकर मस्त हो रहा था रितु इस बात से पूरी तरह से शर्म से पानी-पानी हुए जा रही थी,,,, अब तो रीतू के भी तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी थी,,,, उसे बिल्कुल भी यकीन नहीं हो रहा था कि इस तरह से खड़े खड़े किसी का लंड इस अवस्था में चुत तक बड़े आराम से पहुंच सकता है लेकिन इस बात से कोई इनकार भी नहीं कर सकती थी क्योंकि जिस मोटी तगड़ी चीज को अपनी चूत के मुहाने पर ठोकर मारते हुए महसूस कर रही थी वह अच्छी तरह से जानती थी कि वह संजू का लंड़ रही है जोकि साड़ी सहित उसकी चूत में घुसने का पूरा प्रयास कर रहा था इस बात से ही रितु ने अंदाजा लगा लिया था कि संजू पूरी तरह से जवान हो चुका है और उसकी मर्दाना अंग में गजब की ताकत है,,,,।

संजू अपनी बड़ी मामी क साथ चुपके से

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संजू औरतों को अपने काबू में करने का हुनर जानता था इसलिए धीरे से और ऊपर की तरफ साड़ी उठाते हुए वह अपनी मामी से बोला,,,

मामी पूरी कमर तक उठा दुं,,,

इसमें पूछने वाली कौन सी बात है जल्दी से मुसीबत को दूर कर,,,

ऐसा करने से तुम्हारा सब कुछ दिखने लगेगा,,,,

अरे बुद्धू हो मुझे काट ले इससे अच्छा है कि तू जल्दी से ऊपर उठा कर सब कुछ सही कर दे,,,,

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मामी अगर आज उसने तुम्हें काटने की हिम्मत किया तो मैं उसे काट कर खा जाऊंगा,,,,।

(और इतना कहने के साथ ही संजू एक झटके में अपनी मामी की साड़ी को कमर से ऊपर उठा दिया पल भर में ही मदहोश कर देने वाली जवानी आंखों के सामने उजागर हो चुकी थी जिसमें से मादकरस टपक रहा था,,, संजू के तो दिल की धड़कन एकदम से बढ़ गई वह अपनी मामी की चूत को देख रहा था जिसके किनारे पर वह छोटा सा चूहा लटका हुआ था और जिसके सहारे वह लटका हुआ था वह उसकी मामी की झांट के घूंघराले बाल थे,,,, झांटों के झुरमुट को देखकर संजू का लंड पूरी तरह से बगावत पर उतर आया था और संजू ने मौके का फायदा उठाते हो अपनी कमर को दो-तीन बार झटका देकर चोदने की मुद्रा बना दिया था और रितु को भी यही लग रहा था कि जैसे उस का भांजा उसे चोद रहा हूं इस बात का एहसास उसे पानी पानी कर रहा था,,,, संजू पहले से ही एकदम बेशर्म था नजर भर कर अपनी मामी की चूत देखने के बाद वह मदहोशी भरे स्वर में अपनी मामी की तरफ नजर उठाकर बोला,,,,)

ममममम मामू यह तो तुम्हारी चूत के ऊपर तुम्हारे झांट के बाल पकड़कर चोटा हुआ है,,,,

(संजू के मुंह से इस तरह के शब्द सुनते ही रितु एकदम से मदहोश हो गई पल भर में उसकी आंखों में खुमारी छाने लगी,,,, अपनी मामी के चेहरे के बदलते भाव को संजू अच्छी तरह से समझ रहा था इसलिए अपनी कमर को हल्के से आगे की तरफ धक्का देते हुए बोला,,,,,)

क्या करूं मामी,,,,(इतना कहते हुए वह अपनी मामी की दोनों टांगों के बीच की उस पतली दरार को देख रहा था जो कि उसके लंड की ठोकर को साड़ी सहित अपने मुहाने पर झेल रहे थे संजू को अपनी मामी की साड़ी में बना खूंटा एकदम साफ नजर आ रहा था मन तो उसका कर रहा था कि साड़ी को पीछे से भी ऊपर की तरफ उठाकर अपनी मामी की चूत में पूरा का पूरा लंड डाल दे लेकिन इस तरह की जल्दबाजी करना उसे ठीक नहीं लग रहा था और वह अपनी मम्मी की तरफ देखने लगा तो उसकी मामी मदहोश होते हुए बोली,,,)

संजू की बड़ी मामी संजू क साथ कुछ इस तरह से

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जल्दी से उसे उस जगह से दूर कर,,,,

(फिर क्या था संजू ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और पूरी तरह से अपनी हथेली को अपनी मामी की चूत पर रख उसे ढंकते हुए उत्तेजना के मारे अपनी मामी की चूत को अपनी हथेली में दबोच लिया जिससे रितु के मुंह से हल्की सी सिसकारी फूट पड़ी संजू की पूरी तरह से मदहोश हो चुका था वह उत्तेजना के मारे तड़प रहा था अपनी मम्मी की गरमा गरम चूत को अपनी हथेली में लेकर उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि उसकी मामी भी उत्तेजित हो चुकी थी जिसकी वजह से उसकी चूत से मदन रस टपक रहा था और उसके चलते उसकी हथेली गीली हो चुकी थी,,,,, अपनी मामी की चूत को अपनी हथेली में हल्के से मसलते हुए वह धीरे से उस चूहे के बच्चे को अपने हाथ से पकड़ा और उसे पकड़ कर अपनी मामी के झांट के झुरमुट में से खींचते हो उसे बाहर निकाला और उसे जोर से कोने में फेंक दिया और वह चुरा तुरंत नीचे गिरा और भागने लगा,,,,, चूहे को दूर करने के बाद नजर भर के अपनी मामी की चूत को देखते हुए संजू बोला,,,)

रुको मामी से थोड़ा धोना पड़ेगा,,, नहीं तो इंफेक्शन लग सकता है और यह कितनी नाजुक जगह है यह तो तुम जानती ही होगी और चूहे तो दिन भर गंदगी में घूमते रहते हैं अगर इंफेक्शन लग गया तो बहुत दिक्कत हो जाएगी,,,,,(संजू की बात सुनकर रितु कुछ बोल नहीं रही थी बल्कि उसके हरकत का पूरी तरह से मजा ले रही थी और पूरी तरह से मस्त भी हो चुकी थी बरसों बाद उसे इस तरह का उत्तेजना का अनुभव हुआ था पहली बार वह किसी के सामने अपनी चूत को खोलकर खड़ी थी वरना आज तक उसकी जिंदगी में ऐसा कभी भी पल नहीं आया था कि वह किसी अनजान लड़के के सामने इस तरह से बेशर्म बनकर खड़ी रहे लेकिन संजू में ना जाने ऐसी कौन सी कशिश थी कौन सा आकर्षण था कि वह अपने आप को बिल्कुल भी रोक नहीं पा रही थी उसकी तरफ आकर्षित हुए चली जा रही थी संजू धीरे से हेडपंप को एक हाथ से पकड़ कर रेखा से साड़ी को उठाए हुए ही उसे चलाया और थोड़े से पानी को अपने हाथ में लेकर उसके छिलके को अपनी मामी की गरम चूत पर मारने लगा मानो कि वह पानी के छींटे मारकर उसकी चूत की गर्मी को शांत करने की कोशिश कर रहा हो,,,, अपने भांजे की हरकत पर रितु एकदम से मदहोश हो गई और अपने मन में सोचने लगी कि बेवकूफ चूत की गर्मी पानी के छींटे से नहीं बल्कि लंड के फव्वारे से ठंडी होती है,,,,,और अपने इस ख्याल पर ही हुआ एकदम से शर्म आ गई क्योंकि पहली बार किसी दूसरे मर्द को लेकर उसके मन में इस तरह के गंदे ख्याल आए थे,,,,

ऋतू और संजू जल्द hi ऐसे नजर आएंगे

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अभी भी उसकी साड़ी कमर तक उठी हुई थी और संजू बार-बार पानी चलाकर अपने हाथ में पानी लेकर अपनी मम्मी की चूत पर मार रहा था वह अपनी मम्मी की चूत को उसके झांठ के बालो सहीत पूरी तरह से गिला कर लिया था और फिर अपनी जेब में से धीरे से रुमाल निकाला और उसे अपनी मामी की आंखों के सामने ही रुमाल से साफ करने लगा और चूत वाली जगह को वह जोर-जोर से रुमाल के ऊपर से ही मचल रहा था और अपनी मामी के चेहरे के हाव-भाव को देख रहा था उसके हरकत पर रितु पूरी तरह से मदहोशी के आलम में डूबती चली जा रही थी वह एक तरह से चुदवाती हुए जा रहे थे पल भर में उसकी गुलाबी चूत एकदम लाल हो गई थी और कचोरी की तरह भूल गई थी जिसका यही मतलब था कि वह पूरी तरह से मस्त हो रही थी और इसका एहसास संजू को भी हो रहा था देखते ही देखते संजू ने मौके का फायदा उठाते हुए अपनी मामी की चूत को अपनी हथेली से मसलकर दबाकर पूरी तरह से उसकी जवानी को अपनी मुट्ठी में ले लिया था और धीरे से अपनी मामी की चूत को साफ करने के बाद वह साड़ी को नीचे गिरा दिया और फिर रुमाल को अपनी जेब में रखते हुए बोला,,,,)

बस हो गया मामी चूहा भाग गया,,,,।

हां,,,हं ,,,,, मैं तो डर ही गई थी,,,,, चूहे के चक्कर में चाय भी ठंडी हो गई होगी,,,,(शर्म से अपनी नजरों को इधर-उधर घुमाते हुए वह बोली तो संजू बोला)))

कोई बात नहीं मामी मैं ठंडी चाय पी लूंगा वैसे भी मैं पूरी तरह से गर्म हो चुका हूं,,,,ममममम, मेरा मतलब है कि गर्मी कितनी है,,,।

(संजू के कहने का मतलब को रितु अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए ना जाने क्यों मन ही मन में उसकी बात सुनकर प्रसन्न हो रही थी और वह चाय निकालने लगी संजू वापस उसी कमरे में आकर बैठ गया था और रितु पानी का ग्लास और चाय लेकर आई और उसे पहले पानी पीने के लिए दी और संजू अपनी मामी के हाथ से पानी लेकर पीने लगा और फिर चाय के प्याले को लेकर जैसे ही होठों से लगाया तो वह अपनी बेशर्मी दिखाते हुए अपनी मामी से बोला,,,)

ऋतू और संजू

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मम्मी तुम पेंटिं,,,, मेरा मतलब है कि कच्छी क्यों नहीं पहनती,,,,,,, यहां तो पेंटी को कच्छी ही बोलते हैं ना,,,।

(संजू के मुंह से कच्छी शब्द सुनकर रितु एकदम शर्म से पानी पानी हो गई और शर्म के मारे अपनी नजरों को दूसरी तरफ घुमा ली मौके की नजाकत को समझते हुए संजू बोला,,,)

अगर आज तुम अपनी कच्छी पहनी होती तो छुआ वहां तक कभी नहीं पहुंच पाता अगर पहुंच भी जाता तो नुकसान नहीं कर पाता,,,,,,,

(रितु कुछ बोल नहीं पा रही थी बस शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी और संजू भी इससे ज्यादा कुछ बोला नहीं और चाय पी कर उठ कर खड़ा हो गया अंधेरा हो चुका था इसलिए वह अपनी मामी से बोला,,,)

अच्छा तो मामी मैं चलता हूं,,,,

तुम्हारे मामा आने वाले हैं रुक जाते तो मुलाकात हो जाती,,,,

अब तो रोज आना जाना रहेगा मामी वैसे भी पराया घर थोड़ी है अपना ही घर है आज चाय पी कर जा रहा हूं कल खाना खाने आऊंगा,,,,,

कब आओगे,,,

जब समय मिलेगा तो चला लूंगा वैसे भी तुम्हारे हाथ की गरम चाय पीना बाकी है,,,, लेकिन मामी कच्छी पहना करो चूहा अगर तुम्हारी चूत पर काट लेता तो मुसीबत हो जाती,,,(संजू मौके का फायदा उठाते हुए एकदम बेशर्मी की हद पार करते हुए खुले शब्दों में अपनी मामी से चूत वाली बात कह दिया था जिसे सुनकर रितु एकदम से शर्मा गई थी और हल्के से मुस्कुराते हुए बोली)

धत् कैसी बातें कर रहा है,,,

मैं ठीक कह रहा हूं मामी,,,, अगर चूहा चूत पर दाग लगा दिया होता तो मामा का काम कैसे चलता ,,,,

बड़ा बेशर्म है रे तू,,,,

ऐसा ही हूं,,,(इतना कहकर हंसते हुए वह वहां से चला गया और रितु उसे तब तक देखती रही जब तक कि वह घर पर नहीं पहुंच गया,,,,

खाना खाने के बाद संजू अपने कमरे में आ गया जहां पर तीनों की व्यवस्था की गई थी आज पहला दिन था घर में इसलिए गाना बजाना ज्यादा देर तक नहीं हुआ था जल्द ही संजू की बड़ी मामी ने कार्यक्रम समाप्त करके सोने के लिए संजू और आराधना और साधना को कमरे में भेज दी थी संजू कमरे के अंदर पहुंचते ही कमरे का दरवाजा बंद करके अपनी मां और अपनी मौसी दोनों के बदन सेऔर अपने बदन से कपड़ों को उतारकर एकदम नंगा हो गया और फिर उसके बाद चुदाई का खेल शुरू हो गया,,,,,

दूसरी तरफ दो रातें ऐसे ही गुजर चुकी थी मोहिनी की चूत में खुजली मची हुई थी उसे अपने भाई के लंड को अपनी चूत में लेने का आदत जो पड़ गया था लेकिन यहां पर वह कुछ कर नहीं सकती थी मोहिनी और साधना दोनों एक ही कमरे में सोती थी दोनों आपस में घर के सारे काम करके और खाना खाने के बाद काम निपटा कर कमरे में आ जाती थी और गपशप करते हुए थोड़ी पढ़ाई कर लेती थी और बाद में सो जाते थे लेकिन आज साधना सोते समय एक छोटा सा फ्रॉक पहनी थी और फ्रॉक के नीचे कुछ भी नहीं पहनी थी,,,, मोहिनी पहले से ही बिस्तर पर लेटी हुई थी और एक किताब लेकर पढ़ रही थी लेकिन साधना की तरफ देखी तो दंग रह गई थी छोटे से फ्रॉक में वह बहुत खूबसूरत लग रही थी और जब वह घुटनों के बल बिस्तर पर चढ़ने लगी तो मोहिनी की नजर में उसकी चिकनी चूत आ गई और वह उसकी चिकनी चूत देखकर एकदम मस्त हो गई और वह साधना से बोली,,,,।

दीदी तुम पेंटिं नहीं पहनी हो,,,,

हां वह क्या है ना कि आज कुछ कसा कसा सा लग रहा था इसलिए मैंने पेंटी नहीं पहनी हुं,,

लेकिन दीदी तुम्हारी चूत एकदम चिकनी है कौन सी क्रीम लगाकर साफ करती हो,,,,

(मोहिनी की बात सुनकर मनीषा मोहिनी की तरफ देखकर मुस्कुराने लगी,,)
 
मोहिनी के सवाल पर पहले तो मनीषा एकदम से चौक गई क्योंकि उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि मोहिनी को इस बात का पता चलेगा कि वह फ्रॉक के नीचे कुछ नहीं पहनी है लेकिन तुरंत ही उसके भोलेपन पर वह मुस्कुराने लगी क्योंकि एक लड़की होने के बावजूद भी उसने सवाल ही इतना मासूम सा पूछी थी कि मनीषा मुस्कुरा कर उसकी तरफ देखती रह गई थी,,,,, मोहिनी का सवाल भी बहुत ही मासूम सा था वह मनीषा से पूछ बैठी थी कि वह अपनी चूत का कौन सा क्रीम लगाती है कि उसकी चूत इतनी चिकनी और साफ नजर आ रही है,,,,, इस बात पर मुस्कुराते हुए और बिस्तर पर पड़े दोनों पैर को फैलाते हुए मनीषा बोली,,,

क्यों तुम नहीं लगाती क्या,,,,,

नहीं दीदी मैं नहीं लगाती क्योंकि मुझे पता ही नहीं कि कौन सी क्रीम लगाई जाती है,,,,,,

सच में तू नहीं लगाती,,,,

नहीं दीदी,,,, मैं सच कह रही हूं वैसे भी इसे खरीदने में मुझे बहुत शर्म आती है मैं क्या कह कर खरीदती सोचकर ही मुझे बहुत शर्म महसूस होती है,,,,

अरे इसमें क्या है किसी भी दुकान पर या मेडिकल पर जाकर वीट क्रीम मांगने का,,,, बस हो गया इससे ज्यादा थोड़ी कुछ करना है,,,,,,,

लेकिन दीदी मुझे तो इतने से भी शर्म आती है इसलिए आज तक मांगी नहीं,,,

मतलब कि तूने आज तक अपने बाल साफ ही नहीं की,,,,

एक बार की थी जब बाथरूम में क्रीम पड़ा था तब,,,,

क्या बात कर रही है किसकी थी क्रीम किसने लाया था,,,

अब यह तो पता नहीं दीदी मैं पूछ भी नहीं सकती थी ना लेकिन थोड़ा सा यूज कर ली थी और फिर उसके बाद कभी मौका नहीं मिला,,,,,,

कहीं मौसी का तो नहीं,,,,(थोड़ा सा मुस्कुराते थे मनीषा बोली अब उसके बदन में भी थोड़ी मस्ती छा रही थी)

अब यह तो नहीं मालूम दीदी,,,,

हो सकता है संजू का भी हो,,,,(मनीषा आंखों को नचाते हुए बोली,,, अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) नहीं समझे का नहीं हो सकता क्योंकि लड़के इतनी सफाई नहीं रखते,,,,,

तुम्हें कैसे मालूम दीदी तुमने देखी हो क्या,,,,(मोहिनी शरारत भरे अंदाज में बोली)

धत् देखी नहीं हूं लेकिन मेरी एक फ्रेंड है वह मुझे बता रही थी क्योंकि उसका बॉयफ्रेंड है इसलिए देखी थी,,,

क्या बात कर रही हो दीदी इसका मतलब तुम्हारी फ्रेंड अपने बॉयफ्रेंड के साथ सब कुछ कर चुकी है,,,

तो क्या,,,,(मनीषा बात को घुमा फिरा कर बता रही थी जबकि ऐसी कोई बात नहीं थी लेकिन उसने संजू के लंड के इर्द-गिर्द ढेर सारे घुंघराले बाल देखी थी इसलिए बता रही थी अब सीधे-सीधे वह संजू की बहन को तो नहीं बता सकती थी ना कि संजू को ही मैंने देखी थी,,,,)

तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है दीदी होगा ही तुम इतनी खूबसूरत जो हो,,,,

नहीं मोहिनी ऐसा कुछ भी नहीं है जिंदगी में कुछ बनना है कुछ करना है अगर बॉयफ्रेंड के चक्कर में पड़ गए तो कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है,,,

हा दीदी बात तो सही कह रही हो,,,,(अपनी नजरों को मनीषा की दोनों टांगों के बीच स्थिर करते हुए बोली तो यह देख कर मनीषा बोली,,,)

तुझे कुछ ज्यादा ही देखने की तड़प बढ़ रही है,,,,

ऐसी बात नहीं है दीदी लेकिन मुझे तुम्हारी बहुत खूबसूरत लग रही है,,,

तेरी नहीं है क्या तेरी भी तो खूबसूरत होगी इतनी खूबसूरत गोरी चिट्टी है तो जरूर तेरी चूत भी गजब की होगी,,,,(मनीषा को एकदम खुले शब्दों में मोहिनी से बोली तो मोहिनी बिना शर्माए जवाब देते हुए बोली)

मुझे मालूम है तेरी लेकिन पक्के तौर पर मैं कह सकती हूं कि तुम्हारी मुझसे भी ज्यादा खूबसूरत है,,,,,

नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है सब के पास एक जैसी ही होती है,,,

जानती हूं दीदी लेकिन कुछ लोगों की बहुत खास होती है जैसे कि तुम्हारी,,,,

धत्,,,पागल जैसी बात कर रही है,,,, सबके पास डेढ़ इंच की होती है समझ गई,,,,,

यह तो मुझे मालूम है दीदी,,,, लेकिन तुम्हारी बहुत खूबसूरत है,,,,(मोहिनी की बातों को सुनकर मनीषा के बदन में सुरूर छाने लगा था मोहिनी वैसे भी औरत के साथ भी मस्ती कर चुकी थी उनसे आनंद ले चुकी थी ,,,,क्योंकि उसका रिश्ता अपनी मां के साथ बराबर था वह अपनी मां के खूबसूरत अंगों से बराबर का मजा लेती थी और अपनी अंगो से अपनी मां को मजा देती भी थी,,, मोहिनी की बातें मनीषा के तन बदन में आग लगा रही थी क्योंकि वहां पर संजू के साथ मजे ले चुकी थी इसलिए अपने अंगों के बारे में बातें सुनकर उसके बदन में सुरसुराहट होने लगी और फिर उसे ना जाने क्या सुझा वह मोहिनी की तरफ देखते हुए अपने फ्रॉक को पकड़कर दम से अपनी चूत से हटा दी और मादक स्वर में बोली,,,)

ले देख ले नहीं तो तू पागल हो जाएगी और देख कर बता क्या सबसे अलग है क्या,,,,,।

(मनीषा के इस मादक अदा पर मोहिनी एकदम से मदहोश हो गई और वह आंखें फाड़े मनीषा की चूत की तरफ देखती रहेगी जोकि मोहिनी की गरमा गरम बातें सुनकर कचोरी की तरह फुल चुकी थीऔर मनीषा ने वीट क्रीम लगाकर जिस तरह से अपनी चूत की सफाई की थी इस समय उसकी चूत के इर्द गिर्द बाल का रेशा तक दिखाई नहीं दे रहा था एकदम सफाचट मैदान थी मोहिनी तो देखती ही रह गई दोनों टांगों के बीच से छोटी सी झील नजर आ रही थी जिसमें डूबने का उसका मन कर रहा था मनीषा की चूत को देख कर उसे अपनी मां की चूत याद आ गई ,,, और मनीषा की जबरदस्त मदहोश कर देने वाली खूबसूरत छूट होने के बावजूद भी उसे अपनी मां की चूत में और अपनी चचेरी बहन मनीषा की चूत में फर्क साफ दिखाई दे रहा था उसे अपनी मां की चूत कुछ ज्यादा ही खूबसूरत और कचोरी की तरह फूली हुई नजर आती थी मोटी मोटी गुलाब की पंखुड़ियों की तरह लेकिन मनीषा की चूत किसी से कम नहीं थी मोहिनी तो देखती ही रह गई थी मनीषा की दोनों टांगों के बीच की उस चीज में एक अजीब सा आकर्षण था जिसमें मोहिनी खींची हुई चली जा रही थी,,,,, दोनों की नजरें सिर्फ दोनों टांगों के बीच की उस पतली दरार पर ही टिकी हुई थी जिसमें से मदन रस अमृत की बूंद बनकर धीरे-धीरे टपक रहा था मोहिनी से रहा नहीं किया और अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपनी हथेली को मनीषा की चिकनी मोटी गुदाज जांघ पर रख दी मनीषा इससे एकदम से सिहर उठी उसके बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी और वह नजर उठाकर मोहिनी की तरफ देखने लगी मोहिनी अभी भी मनीषा की दोनों टांगों के बीच ही देख रही थी उसे ना जाने क्या हो रहा था वह पागल हुए जा रही थी अपनी मां के साथ जिस्मानी ताल्लुकात बना देने के बाद वह लड़कियों की तरफ भी आकर्षित होने लगी थी,,,,,, मोहिनी की आंखों में मदहोशी देखकर मनीषा भी मस्त हुए जा रही थी और वह धीरे से बोली,,,,।

मेरी तो देख लिया अपना भी दिखा देखो तो सही मेरी चूत की तारीफ कर रही है तेरी चूत कैसी है,,,,,।

(मोहीनी तो जैसे तैयारी ही थी अपने कपड़े उतार कर नंगी होने के लिए,,, वह मनीषा की बात सुनते ही बिस्तर पर ही घुटनों के बल खड़ी हो गई और अपनी पजामी की डोरी खोलने लगी वह मनीषा के वहां सोने के लिए पजामा और कुर्ता पहनती थी देखते ही देखते मनीषा की आंखों के सामने ही मोहिनी अपने पजामा की डोरी खोल कर पैजामा को ढीला कर ली,,, और धीरे-धीरे पैजामा को नीचे की तरफ सरकाने लगी देखते ही देखते घुटनों के बल बैठे हुए ही वह अपने दोनों पैरों में से पजामे को निकालकर बिस्तर पर फेंक दिया और फिर अपनी ग्रीन कलर की पेंटी को उतारने लगी जो की उत्तेजना के मारे उसकी चूत वाला हिस्सा कचोरी की तरफ फूल चुका था जो कि मनीषा की नजरों में आए बिना बच नहीं पाई और मनीषा मोहिनी की चूत वाले हिस्से को देखकर बोली,,,)

मोहिनी तेरी चुच तो कचोरी की तरफ फूल गई है,,,,,

हां दीदी ऐसी ही है थोड़ी सी इधर-उधर की बातें कर लो तो ना जाने इसे क्या हो जाता है,,,,

जवान हो गई है तु इसके लिए तेरी ऐसी हालत हो जाती है,,,,

धत् दीदी,,,,(और इतना कहने के साथ ही मोहिनी अपनी पेंटी को नीचे की तरफ सरकाने लगी और देखते ही देखते

मोहिनी अपनी पेंटिं को घुटनों से नीचे तक कर दी उसकी दोनों टांगों के बीच की कली एकदम साफ नजर आने लगी,,, मनीषा की नजरें जैसे ही मोहिनी की कोमल चूत पर पड़ी तो वह देखती ही रह गई क्योंकि मनीषा पहली बार किसी अपनी हमउम्र लड़की की चूत को अपनी आंखों से देख रही थी वह मदहोशी भरी नजरों से देखती ही रह गई,,,,

और मोहिनी तो पहले से ही अपनी चूत दिखाने के लिए तड़प रही थी क्योंकि आज वह इस बिस्तर पर मजे लेने की फिराक में थी,,,,, और वह भी मदहोशी भरे स्वर में बोली,,)

देखो दीदी,,,,,,

नहीं रे तेरी भी तो बहुत खूबसूरत है,,,,,(नजरों को थोड़ा आगे करके मनीषा बोली,,, इतना सुनकर मोहिनी से रहा नहीं गया और वह अपना हाथ आगे बढ़ाकर अपनी हथेली को सीधे सीधे,,,, मनीषा की चूत पर रखते हुए बोली,,)

नहीं दीदी तुम्हारी बहुत खूबसूरत है,,,,,।

(एक हमउम्र जवान खूबसूरत लड़की की हथेली अपनी चूत पर महसूस करते ही मनीषा पूरी तरह से सिहर उठी,,,, उसके बदन में सुरसुरा हट फैल गई,,,, उसके बदन में हल्का सा कंपन हुआ और वह एकदम से मोहिनी की आंखों में देखने लगी मोहिनी थी मनीषा की तरफ देखने लगी उसकी हथेली अभी की मनीषा की चूत के ऊपर थी जो कि अपनी हथेली में मोहिनी पूरी तरह से चूत की गरमाहट को महसूस कर रही थी वह पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी,,,,,, दोनों के तन बदन में वासना और उत्तेजना अपना जोड़ दिखा रही थी,,,, मनीषा भी पुरुष संसर्ग का आनंद ले चुकी थी इसलिए इस समय मोहिनी की हरकत की वजह से उसकी चूत से मदन रस का रिश्ता होना शुरू हो गया था जिसके चलते उसके बदन मैं उन्मादक स्थिति पैदा हो चुकी थी और अपने आप ही उसके होंठ आगे की तरफ बढ़े ही थे कि मोहिनी मौके का फायदा उठाते हुए तुरंत अपने होठों को आगे बढ़ाकर मनीषा के लाल-लाल होठों पर स्पर्श करा दी और फिर क्या था बदन की गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू किया और देखते ही देखते दोनों पागलों की तरह एक दूसरे के होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसना शुरू कर दिया साथ ही मोहिनी चला कि दिखाते हुए अपनी हथेली को जोर-जोर से मनीषा की चूत पर रगड़ना शुरू कर दी वह मनीषा की चिकनी चूत को गर्माहट दे रही थी,,,, देखते ही देखते मनीषा पूरी तरह से उत्तेजित होने लगी और उससे भी रहा नहीं किया और वह अपना हाथ आगे बढ़ा कर मोहिनी की दोनों टांगों के बीच उसकी पतली दरार पर रखकर एक खूबसूरत हसीन लड़की की चूत का जायजा लेने लगी देखते ही देखते मनीषा के तन बदन में अजीब सी हालत होने लगी और वह जो हरकत मोहिनी उसके साथ कर रही थी वही हरकत वह मोहिनी के साथ करने लगी देखते ही देखते दोनों जवान लड़कियां बिस्तर पर गर्म होने लगी उन दोनों का चुंबन बेहद प्रगाढ़ होता जा रहा था,,,,,,,,,,।

मोहिनी और मनीषा

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खड़ी में तकरीबन 11:30 का समय हो रहा था और ऐसे में एकांत पाकर दोनों जवान लड़कियां अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पाई और एक दूसरे के अंगों से खेलना शुरू कर दी मनीषा को तो औरत के अंगों से खेलने का अनुभव बिल्कुल भी नहीं था लेकिन मोहिनी इस खेल में माहिर इसलिए तो मनीषा की चूत को रगड़ते रगडते वह अपना एक हाथ ऊपर की तरफ लाकर मनीषा के लाजवाब कश्मीरी सेव पर रख दिया और फ्रॉक के ऊपर से ही उसे दबाना शुरू कर दी,,,, मोहिनी को तुरंत इस बात का अहसास हुआ कि मनीषा ने फूंक के नीचे भी कुछ नहीं पहनी है उसकी नंगी चूचियां उसकी हथेली में थी,,, इस बात से जहां एक तरफ मोहिनी चौक गई थी वहीं दूसरी तरफ वह पूरी तरह से आनंदित हो चुकी थी और वह अपने एक हाथ से ही बारी बारी से वह मनीषा की दोनों चूचियों को दबा रही थी यहां पर उसे तुरंत अपनी मां की चुचियों के बारे में याद आ गया क्योंकि उसकी मां की चूचियां खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी थी और दोनों हाथ में भी ठीक से नहीं आती थी लेकिन मनीषा की चूची बड़े आराम से उसकी हथेली में एक खूबसूरत सेव की तरह आ जा रही थी,,,,, मोहिनी की हरकत की वजह से मनीषा के मुंह से गरमा गरम संस्कारी की आवाज आने लगी थी और वह अपनी ही सिसकारी की आवाज सुनकर पल भर में एक दम मस्त हो गई थी क्योंकि इस तरह की सिसकारी की आवाज संजू के साथ चुदवाने पर ही आ रही थी लेकिन इस समय जिस तरह की मस्ती छाई हुई थी उसे ऐसा ही लग रहा था कि जैसे उसके साथ संजू है,,,,,,,

मनीषा की गरमा गरम सिसकारी और उसको आनंदित होता देखकर मोहिनी समझ गई थी कि अगले पीछे हटने वाली नहीं है इसलिए वह अपनी हरकत को जारी रखते हुए मनीषा की चूत को जोर-जोर से हथेली से रगड़ कर गर्म करते हुए अपनी बीच वाली उंगली को उसकी मदमस्त गुलाबी क्षेंद में प्रवेश कराने लगी चूत पहले से ही पानी छोड़ रही थी इसलिए वह पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और ऐसे हालात में मोहिनी को अपनी बीच वाली उंगली मनीषा की चूत में प्रवेश कराने में जरा भी दिक्कत पेश नहीं आई और जैसे ही आधी उंगली चूत में प्रवेश की वैसे ही मनीषा एकदम से चौक गई,,,,, और अपने होठों को मोहिनी के होठों से अलग करते हुए तुरंत अपनी दोनों टांगों के बीच देखने लगी जहां पर वह साफ तौर पर देख पा रही थी कि मोहिनी की आधी उंगली उसकी चूत में घुसी हुई थी,,,,,, और यह देखकर मनीषा मदहोशी भरे स्वर में बोली,,,।

मनीषा और मोहिनी

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यह क्या कर रही है मोहिनी,,,,,

ककककक कुछ नहीं दीदी तुम्हारी चूत इतनी चिकनी थी कि अपने आप ही उंगली प्रवेश कर गई,,,,,

लेकिन जो तू यह कर रही है ठीक नहीं है,,,,

मुझे नहीं मालूम यह सब क्या हो रहा है दीदी लेकिन इतना मालूम है कि ना जाने क्यों मुझे अच्छा लगा है और मुझे पूरा यकीन है कि तुम्हें भी बहुत अच्छा लग रहा है,,,,,

अच्छा तो मुझे भी लग रहा है मोहिनी लेकिन एक लड़की लड़की के साथ ऐसा कैसे,,,,

मैं भी तो यही सोच रही हूं दीदी लेकिन ना जाने क्यों शरीर में अजीब सी हलचल होने लगी और मैं अपने आप को रोक नहीं पा रही हूं,,,,

किसी को पता चल गया तो गजब हो जाएगा,,,

किसी को कैसे पता चलेगा दी थी तुम हो मैं हूं बस और कोई नहीं है,,,,

क्या तुमने कभी ऐसा पहले की है,,,

कभी नहीं,,,,

फिर मजा कैसे आएगा,,,,(मनीषा की पूरी तरह से लाइन पर आते हुए बोली)

आएगा जरूर आएगा,,,,,,

मोहिनी और मनीषा

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नहीं आएगा मोहिनी तुझे भी पता होगा कि मजा लेने के लिए लंड का होना बहुत जरूरी है जोकि चूत में घुसकर मजा देता है लेकिन यहां पर कैसे संभव है,,,,

भले ही लंड नहीं है लेकिन मजा तो ले ही सकते हैं दीदी,,,

(दोनों चचेरी बहनें पूरी तरह से मस्ती के सागर में गोते लगाने को तैयार थी और इतना कहकर मोहिनी फ्रॉक को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठाने लगी मनीषा समझ गई कि मोहिनी क्या करना चाहती इसलिए तुरंत अपने दोनों हाथों को ऊपर की तरफ उठाती और देखते ही देखते मोहिनी ने मनीषा के बदन से उसका फ्रॉक उतार कर नीचे फेंक दिया और अगले ही पल मनीषा पूरी तरह से बिस्तर पर नंगी हो गई और बिना कहे मोहिनी भी अपने कुर्ते को उतारकर अपनी पीठ को मनीषा की तरफ घुमा दी मनीषा की मोहिनी के सारे को अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर वह ब्रा का हुक खोलने लगी और अगले ही पल मनीषा मोहिनी की ब्रा का हुक खोल कर उसकी पूरा को उतार कर नीचे फर्श पर फेंक दी और अब बिस्तर पर दोनों बहने एकदम नंगी हो चुकी थी दोनों जवानी से लबालब भरी हुई दोनों की चुचियों में जरा सा भी फर्क नजर नहीं आ रहा था दोनों की चुचियों का आकार एकदम कश्मीरी सेव की तरह था जिस पर मनीषा की नजर पड़ते ही वहां फटी आंखों से मोहिनी की छाती की सुंदरता को देखने लगी और अगले ही पल दोनों हाथ आगे बढ़ाकर एक साथ दोनों चुचियों को अपनी हथेली में पकड़ ली और हल्के से दबा दी,,, पहली बार मनीषा किसी लड़की की चूची को अपने दोनों हाथों से पकड़ रही थी और उसी दबाने में इतना मजा आया कि वह दबाना शुरू कर दी और मदहोश होने लगी एक बार फिर से दोनों के होंठ आपस में भीड़ गए और दोनों एक दूसरे के होठों का रसपान करने लगे साथ ही अपनी हाथों की हरकत को जारी रखते हुए एक दूसरे को मजा देने लगे,,,,,

मोहिनी की हरकत से मनीषा गरम हो गयी थी और उससे संजू की जरुरत पद रही थी

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औरतों से औरतों का सुख पहली बार मनीषा ले रही थी और इसमें उसे इतना आनंद आने लगा था कि पूछो मत वह पागलों की तरह मदहोश में जा रही थी,,,, मनीषा को तो नहीं लेकिन मोहिनी को मालूम था कि अब क्या करना है इसलिए मैं मनीषा के कंधों को दोनों हाथों से पकड़कर उसे नीचे बिस्तर की तरफ झुकाने लगी,,, और अगले ही पल नरम नरम गद्दे पर मनीषा पीठ के बल लेट गई,,, और मोहिनी उसकी दोनों टांगों के बीच जगह बनाते हुए और अपने दोनों हाथों को उसकी जांघों पर रखकर ऊपर की तरफ बढ़ते हुए मनीषा के ऊपर छाने लगी और अगले ही पल अपने प्यासे होठों को मनीषा की चूची पर रख दी और उसके खजूर को मुंह में लेकर चाटना शुरू कर दी मोहिनी की इस हरकत पर मनीषा के तन बदन में ज्वाला फुटरी लगे वह मदहोशी के चरम शिखर पर पहुंचने लगी वह पागलों की तरह खुद अपनी छाती को ऊपर की तरफ उठाकर मोहिनी को पीने के लिए उकसाने लगी और मोहिनी पागलों की तरह दोनों चूची को दोनों हाथों में पकड़ कर बारी-बारी से मर्द की तरह से मुंह में लेकर पीना शुरू कर दी यह सब वह अपनी मां से ही सीखी थी जिसका पूरा अनुभव वह अपनी चचेरी बहन मनीषा पर दिखा रही थी और मनीषा को पूरी तरह से पागल किए जा रही थी,,,,।

मनीषा ने अब तक केवल संजू को ही अपना स्तनपान कराई थी स्तन मर्दन का आनंद दी थी लेकिन इस समय वह वही मज़ा संजू की बहन को दे रही थी,,,। लगातार गरमा गरम सिसकारी की आवाज मनीषा के मुंह से आ रही थी आज मोहिनी अपनी हरकत और सूझबूझ की वजह से मनीषा को एक नया सुख दे रही थी,,,,, और देखते ही देखते मोहिनी मनीषा की चुचियों से मजा ले लेने के बाद जीभ से चाटते हुए नीचे की तरफ आ रही थी और जिस जिस अंग से उसकी चिकनी जीभ गुजर रही थी,,,, मनीषा पूरी तरह से पागल हुए जा रही थी,,,,, और जैसे ही मोहिनी मनीषा की दोनों टांगों के बीच पहुंची उसकी गुलाबी पंखुड़ियों से सुशोभित उसकी रसीली चूत के करीब अपने होंठ ले गई मानो मनीषा के बदन में उत्तेजना की चिंगारी फूटने लगी हो वह पूरी तरह से मदहोश होने लगी,,,, वह इतनी ज्यादा उत्तेजित हुए जा रही थी खुद ही अपनी कमर ऊपर उठाकर अपनी चूत को मोहिनी के होठों से स्पर्श कराना चाहती थी,,,,,

मोहिनी मनीषा की उत्तेजना को अच्छी तरह से समझ गई थी वह समझ गई थी कि मनीषा मजा लेना चाहती है और वह भी बेइंतहा,,,,, इसलिए मनीषा भी देर ना करते हुए तुरंत अपने प्यासे होठों को अपनी बहन की चूत पर रख कर चाटने शुरू कर दी,,,,।

आहहहह आहहहहह अद्भुत अतुलनीय आनंद की पराकाष्ठा को प्राप्त करते हुए मनीषा मदहोश में जा रही थी वह कभी सोची नहीं थी कि एक जवान लड़की के साथ उसे इतना मजा आएगा वह पागल हो जा रही थी उसकी चूत से रह-रहकर मदन रस की पिचकारी फूट रही थी वह झड़ रही थी और इस दौरान मोहिनी वासना में लिप्त होकर अपनी बहन की चूत से निकली काम रस की पिचकारी को अमृत की धार समझकर अपने गले के नीचे गटक रही थी,,,, झड़ते समय मनीषा अपने काबू में बिल्कुल भी नहीं थी उसकी कमर ऊपर की तरफ झटके खा रही थी जिसे दोनों हाथों से पकड़ कर मोहिनी उसे काबू करने की कोशिश कर रही थी लेकिन सब कुछ नाकाम साबित हो रहा था,,,,

आखिरकार एक जवान खूबसूरत लड़की के साथ अपना पहला चरम सुख प्राप्त करने के बाद मनीषा धीरे-धीरे शांत होने लगी लेकिन कितनी देर तक वह शांत रह सकती थी क्योंकि मोहिनी ने तो पूरी तरह से उसके ऊपर काबू पा ली थी और लगातार उसकी चूत को चाटते हुए और उस में उंगली डालकर अंदर बाहर करते हुए उसे एक बार फिर से उत्तेजना के सागर में डुबकी लगाने के लिए तैयार कर चुकी थी लेकिन इस बार उसके मन में कुछ और चल रहा था वह अपनी चूत पर भी मजा लेना चाहती थी इसलिए धीरे से अपनी जगह से उठी और मनीषा की कमर के इर्द-गिर्द अपना घुटना रखकर अपनी गोल गोल गांड मनीषा को दिखाने लगी,,,,, मनीषा इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि औरत बहुत खूबसूरत होती है लेकिन पहली बार अपनी आंखों के सामने एक जवान खूबसूरत लड़की को एकदम नंगी अवस्था में देखकर उसकी गोल-गोल गांड देखकर मनीषा खुद पर काबू नहीं कर पा रही थी और अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर मोहिनी की गांड को दोनों हाथों में पकड़ कर दबाना शुरू कर दी और इसी मौके की तलाश में मोहिनी धीरे-धीरे अपने घुटनों के बल पीछे की तरफ आने लगी और देखते ही देखते वह अपने घुटनों को मनीषा के गर्दन के इर्द-गिर्द रखकर ही उसके होंठों के ऊपर अपनी चूत को स्थिर कर दी और फिर मनीषा की दोनों टांगों को थोड़ा सा फैलाकर अपने प्यासे होठों को एक बार फिर से मनीषा की चूत पर रख कर उसे चाटना शुरू कर दी दोनों पागल हुए जा रहे थे,,,, अब मनीषा का भी मन कर रहा था कि एक खूबसूरत लड़की की चूत को चाट कर एक नए अनुभव का स्वाद लिया जाए और इसीलिए वह अपने दोनों हाथों को ऊपर की तरफ उठाकर मोहिनी की गोल गोल गांव को अपने दोनों हथेली में पकड़ कर उसकी चूत पर अपने होठों को थोड़ा ऊपर उठाकर उसे चाटने का प्रयास करने लगी और जैसे ही उसके इस प्रयास का एहसास मोहिनी को हुआ वह तुरंत अपने दोनों पैरों को थोड़ा सा फैला कर अपनी प्यासी चूत को तुरंत मनीषा के होठों पर रख दे और मनीषा पागलों की तरह अपनी जीभ बाहर निकालकर उसे चाटना शुरू कर दी,,,,,, दोनों आनंद के सागर में गोते लगाना शुरु कर दी दोनों मदहोश हो जा रहे थे दोनों अपनी-अपनी जीभ का कमाल दिखा रहे थे,,,।

मनीषा के कमरे में मनीषा के बिस्तर पर गरमा गरम खेल शुरू हो गया था दोनों बहने आपस में पूरी तरह से भिड़ चुकी थी दोनों एक दूसरे के कोमल अंगों से आनंद के सागर का रस लूट रहे थे पहली बार मनीषा को इस बात का एहसास हुआ कि औरत की चूत के रस का स्वाद कैसा होता है जिसे चार्ट करवा खुद मदहोश में जा रही थी,,,,, लेकिन इस बात को मोहिनी अच्छी तरह से जानती थी कि चाहे जितना भी वह दोनों एक दूसरे के अंगों से खेल‌ ले लेकिन बिना मोटे तगड़े लंड को चूत में लिए यह खेल पूरा होने वाला नहीं था,,,, मोहिनी अच्छी तरह से जानती थी कि उसे क्या करना है क्योंकि दोनों एकदम मस्त है जा रहे थे और अब दोनों की चूत में मोटे कपड़े लंड की जरूरत है इसीलिए वो धीरे से उठने लगी तो मनीषा बोली,,,।

क्या हुआ आप क्या कर रही है अब तो मजा आ रहा है,,,

दीदी इसी मजा को तो बढ़ाने के लिए मैं,,,,, रुको अभी आती हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही वह बिस्तर पर से नीचे उतरी और अपने बदन पर बिना कोई भी वस्त्र डाले वह नग्न अवस्था में ही कमरे में से बाहर निकल गई,,, और मनीषा उसकी गोरी गोरी गांड को मटकते हुए देखती रहेगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अब वह क्या करने वाली है,,,, पर थोड़ी ही देर में नंगी ही वह वापस कमरे में दाखिल हुई और कमरे का दरवाजा बंद करके सिटकनी लगा दी,,, मोहिनी के दोनों हाथों में एक मोटी तगड़ी खीरे को देखकर मनीषा हैरान रह गए उसी तरह तो समझ में आ गया था कि मोहिनी कितने मोटे और लंबे कीड़े को क्या करने के लिए आई थी लेकिन वह हैरानी से मोहिनी की तरफ देख रही थी तो मनीषा की उत्सुकता को खत्म करते हुए वह बोली,,,।

दीदी हम दोनों चाहे जितना भी एक दूसरे की चूत चाटने या उंगली कर ले लेकिन बिना लंड चूत में गए मजा नहीं आने वाला है इसीलिए मैं यह लेकर आई हूं,,,,।

अरे पगली फिर कल सुबह सालाद के लिए क्या काटेगी,,,

दीदी क्या तुम भी इसमें चूत में आग लगी हुई है उसे ठंडा करना जरूरी है और तुम हो कि कल की सोच कर परेशान हो रही हो,,,, अब इतना तो तुम्हें मालूम ही होगा कि इसका क्या करना है,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह एक खीरे को मनीषा के हाथों में थमा दी मनीषा भी बड़ी उत्सुकता से खीरे को अपने हाथ में ले ली और दूसरे खीरा मोहिनी खुद अपने हाथों में लेकर पहले जिस अवस्था में थी उसी अवस्था में फिर से हो गई वह जानती थी कि इसी तरह से दोनों एक दूसरे की चूत में एक साथ खीरा को अंदर बाहर करके लंड का मजा दे सकते हैं,,,,, और फिर मोहिनी इस खेल की शुरुआत करते हुए थोड़ा सा थूक खीरे के आगे वाले भाग पर लगा ली मानो के जैसे लंड पर लगाते हो,,,,

धीरे-धीरे मोहिनी मनीषा की चूत में उस खीरे को डालना शुरू कर दी वैसे भी वह खीरे की साइज संजू के लंड से मिलती जुलती थी और दोनों की चूत में संजू के लंड का सांचा बना हुआ था इसलिए बड़े आराम से महीने उस मोटे खीरे को देखते ही देखते मनीषा की चूत के अंदर प्रवेश करा दी और जैसे-जैसे कीड़ा अंदर की तरफ जा रहा था वैसे वैसे मनीषा के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी उसके चेहरे का हाव भाव बदलता जा रहा था,,, मनीषा ने अभी तक मोहिनी की चूत में डालने की शुरुआत भी नहीं की थी और मोहिनी ने मनीषा की चूत के अंदर तक खीरे को पहुंचा दी थी लेकिन अपनी चूत को तड़पता हुआ देखकर मोहिनी बोली,,,।

मेरी भी चूत में डालो दीदी,,,।

(मोहिनी का यह कहना उसकी तड़प को दर्शा रहा था वह कितनी मचल रही थी अपनी चूत में लेने के लिए इस बात को जाहिर कर रहा था उसकी तड़प को दूर करते हुए मनीषा भी खीरे के आगे वाले भाग पर थोड़ा सा थूक लगाई और उसके चिकनाहट वाले भाग को मोहिनी की चूत में प्रवेश कराना शुरू कर दी और देखते ही देखते मनीषा के हाथ का खीरा भी मम्मी की चूत में प्रवेश कर गया और दोनों एक दूसरे की चूत में खीरे को अंदर बाहर करके लंड का मजा देने लगे दोनों एक साथ दोनों की चूत को मजा दे रहे थे या खेल बेहद उन्माद से भरा हुआ था जिसमें दोनों सफलतापूर्वक प्रवेश कर चुके थे और इसका आनंद लूट रहे थे,,,,,

दोनों की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी दोनों के मुंह से गर्मागर्म सिसकारी की आवाज निकल रही थी दोनों को इस बात का अहसास तक नहीं था कि दोनों कभी इस तरह से एक दूसरे को मजा देंगे लेकिन अपने आप ही हालात इस तरह के बनते चले गए कि दोनों को पीछे कदम लेने का मौका ही नहीं मिला और दोनों एक दूसरे की चूत को आनंद से भरने लगी देखते ही देखते दोनों कहार बड़ी तेजी से अंदर बाहर की तरफ चलने लगा और दोनों एक साथ झड़ना शुरू कर दिए मनीषा तो दूसरी बार पानी फेंक रही थी लेकिन मोहिनी पहली बार झड़ रही थी लेकिन दोनों को अद्भुत आनंद की प्राप्ति हुई थी,,,,,।

दोनों पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी खीरे को अपनी अपनी चूत में से बाहर निकाल कर दोनों गहरी सांस लेते हुए बिस्तर पर पीठ के बल लेट कर आनंद की पराकाष्ठा का अनुभव ले रही थी तभी मनीषा हाथ में पकड़े हुए खीरे को लेकर बोली,,,,।

अब यह तो बेकार हो गई है ना,,,,

ऐसे कैसे बेकार हो गई थी लाओ मुझे दो,,,(इतना कहने के साथ ही वह मनीषा के हाथ में से खीरे को ले ली और बोली,,,) खराबी कहां हुई है कौन सी गंदी जगह पर चली गई है इस में घुसने से,,(चूत की तरफ इशारा करके) और भी ज्यादा स्वादिष्ट हो गई होगी ना उसे में धोकर फिर से फ्रीज में रख देती हूं फिर कल इसको ही काटकर सलाद बनाएंगे,,,,

क्या मोहिनी तू भी,,,

तो क्या दीदी,,,(इतना कहकर वहां बिस्तर पर से उठी और कमरे से बाहर निकल गई खीरे को धोने के लिए और उसे धो करके वापस फ्रीज में रख कर कमरे में आ गई और फिर दोनों नग्न अवस्था में ही एक दूसरे को बाहों में लिए हुए सो गए,,,।
 
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