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- Dec 5, 2013
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धीरे-धीरे बरसात का जोर बढ़ता जा रहा था तेज हवाएं अपना असर दिखा रही थी खंडहर नुमा घर में जवानी से लबालब दो बहने और एक जवान लड़का आसरा लेकर बारिश से बचने के लिए बैठे हुए थे,,,,, तीनों का बदन पानी से पूरी तरह से तरबतर होकर भीग चुका था ,,,, तीनों के मन में अजीब सा हलचल मचा हुआ था,,,,,, संजू दोनों औरतें मतलब कि अपनी मां और मौसी दोनों के चरित्र के बारे में अच्छी तरह से जानता था क्योंकि वह दोनों के साथ हमबिस्तर हो चुका था अपनी मां के साथ भी और अपनी मौसी के साथ भी लेकिन दोनों बहने आपस में एक दूसरे के चरित्र को ठीक तरह से नहीं जानती थी जिसमें आराधना अपवाद थी क्योंकि आराधना अपनी बड़ी बहन के बारे में अच्छी तरह से जानती थी,,,,। कि उसका चरित्र कैसा है क्योंकि वहां अपने ही बेटे के साथ अपनी बड़ी बहन को चुदवाते हुए देख चुकी थी लेकिन साधना आराधना के बारे में कुछ भी नहीं जानती थी आराधना को वह सीधी-सादी और सती सावित्री एक चरित्रवान औरत ही समझती थी जबकि वह खुद अपने ही बेटे के साथ संभोग सुख से पूरी तरह से तृप्त होकर अपनी जिंदगी बसर कर रही थी,,, इस समय भी इस खंडहर में तेज बारिश में वह अपनी बड़ी बहन के आगे बढ़ने का इंतजार कर रही थी क्योंकि आराधना की चूत में भी खुजली मची हुई थी और वह इस तेज बरसती बारिश में गांव के माहौल में और इस खंडहर में हाथ में इस मौके को गंवाना नहीं चाहती थी और ऐसे अद्भुत वातावरण में संभोग सुख प्राप्त करना चाहती थी,,,.
संजू का दमदार लुंड जिसकी दीवानी उसकी माँ और मौसी दोनों हे
संजू दी अपनी मौसी और अपनी मां के चरित्र के बारे में अच्छी तरह से जान कर भी अपना कदम आगे बढ़ा रहा था क्योंकि वह भी एक साथ दोनों औरतों की चूत में अपना लंड डालकर दोनों को तृप्त करते हुए अद्भुत संतुष्टि का अहसास करना चाहता था वह पहली बार अपनी मां और अपनी मौसी को एक साथ चोदना चाहता था और इसीलिए वह अपने कपड़े उतार कर इस अद्भुत खेल की शुरुआत करते हुए आग तापते हुए बेठ चुका था,,,, साधना भी इस मौके को हाथ से गवाना नहीं चाहती थी क्योंकि वह बातों ही बातों में अपनी बहन से अपने मन की इच्छा जाहिर कर चुकी थी कि वह अगर मौका मिले तो संजू के साथ हमबिस्तर होने के लिए तैयार है और किसी के लिए वह अपनी छोटी बहन के सामने ही भीगे हुए कपड़ों का बहाना करके अपनी जगह पर खड़ी हो गई थी और अपने कपड़ों को उतारने की शुरुआत कर चुकी थी जिसे देखकर आराधना और संजू दोनों का दिल जोरों से धड़क रहा था,,,,।
साधना संजू के लंड को देखकर जो कि उसके अंडरवियर में तंबू की तरह तना हुआ था उसका धीर भी जवाब दे गया था और इसीलिए वह भी अपने वस्त्र त्याग कर नंगी होना चाहती थी ताकि,,, काम क्रीड़ा को शुरू कर सकें साधना का सलवार कमीज दोनों पूरी तरह से पानी से भीगा हुआ था जिससे उसके बदन से उसके वस्त्र चिपक गए थे और ऐसे हालात में उसका बदन एकदम साफ झलक रहा था जिसे देखकर संजू का लंड गदर मचाने को तैयार हो रहा था
साधना अपनी जगह पर खड़ी हो गई थी और अपने कमीज को दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर की तरफ उठा रही थी और संजू धड़कते दिल के साथ अपनी मौसी को देख रहा था,,,,, वैसे तो उम्र के इस दौर पर पहुंचने के बावजूद भी साड़ी में उसकी मौसी बेहद खूबसूरत और सेक्सी नजर आती थी लेकिन इस समय अपनी मौसी को सलवार सूट में देखने का भी एक अलग मजा था,,,, इसलिए संजू पलक झपका ना भूल गया था और एक घटक अपनी मौसी की तरफ देख रहा था आराधना भी अपनी बहन को ही देख रही थी देखते ही देखते साधना अपनी कमीज को दोनों हाथों के सहारे ऊपर की तरफ उठाते हुए अपनी छातियों तक लेकर आई थी जिसमें से उसकी लाल रंग की ब्रा नजर आ रही थी और देखते ही देखते साधना अपनी कमीज को अपने बदन से अलग करते हुए एक तरफ रख दें और इस समय वह मां और बेटे की आंखों के सामने केवल सलवार और ब्रा में खड़ी थी पेट थोड़ा भारी होने की वजह से बाहर निकला हुआ था लेकिन चेहरे की बनावट इतनी जबरदस्त थी कि ऐसे सुगठित ढांचे में भी क़यामत लग रही थी,,,,,
सलवार भी उतार दूं यह भी पूरी तरह से गीली हो चुकी है,,,,(साधना अपनी बहन की तरफ देख कर बोली थी लेकिन आराधना का जवाब सुनने से पहले ही संजू बोला)
तो क्या मौसी उतार दो यह भी तो गीली हो चुकी है सर्दी लग गई तो मुसीबत हो जाएगी,,,,
हां संजू तो ठीक कह रहा है वैसे भी इस वीरान जगह पर कोई इतनी तेज बारिश में आने वाला तो है नहीं सब अपने ही तो हैं ऐसे माहौल में शर्म कैसी,,,,(साधना को तो सिर्फ अपने कपड़े उतारने का बहाना चाहिए था वह किसी भी तरह से अपने भतीजे के सामने नंगी होना चाहती थी और अपने नंगे पन का सहारा लेकर अपने भतीजे को उकसाना चाहती थी ताकि उसके साथ संबंध बना सके और मजे ले सके जिसमें वह अपनी छोटी बहन आराधना को भी शामिल करना चाहती थी और मां बेटे के बीच भी शारीरिक संबंध स्थापित करना चाहती थी ताकि यह संबंध आगे भी इसी तरह से चलता है और आराधना भी जीवन का सुख भोगती रहे,,,, और फिर अपने दोनों हाथ को अपनी सलवार की दूरी पर लाकर अपनी उंगलियों का सहारा देकर उसे खोलना शुरू कर दी वह अपनी सलवार की डोरी को जरूर खोल रही थी लेकिन अपनी हरकत से 1 मां के अंदर की औरत को जगा रही थी जोकि अपनी और अपने बेटे के बीच के रिश्ते को भूल कर केवल एक मर्द और औरत बन जाना चाहती थी,,,,, अगर साधना को जरा भी एहसास होता कि दोनों मां बेटों के बीच पहले से ही शारीरिक संबंध स्थापित हो चुका है तो वह बिना झिझक के इसी समय संजू के ऊपर चढ़ जाती है और चुदाई का आनंद लुटती,,,, लेकिन समय उसे अपनी बहन के सामने शुन्य से शुरुआत करनी थी इसीलिए वह अंदर ही अंदर प्रसन्न होते हुए अपने सलवार की डोरी को खींचकर सलवार को अपनी कमर से ठीक कर ली और ढीली करने के बाद एक बार संजू की तरह देखी और आराधना की तरफ जो कि दोनों उसी को ही देख रहे थे और एकदम से बेशर्मी का नजारा पेश करते हुए साधना धीरे-धीरे अपनी सलवार को जो कि बेहद कसी हुई थी जांघो से एकदम चिपकी हुई थी उसे धीरे-धीरे नीचे की तरफ सरकार ने लगी कुछ थोड़ी सी सलवार कमर के भाग को छोड़ते ही उसकी लाल रंग की पैंटी को उजागर करने लगी चीज पर नजर पड़ते ही संजू की हालत खराब हो गई ऐसा नहीं था कि वह इस तरह के नजारे को पहली बार देख रहा था लेकिन इस समय तेज बारिश में माहौल पूरी तरह से बदल चुका था संजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी इसीलिए तो वह अपनी मौसी की लाल रंग की चड्डी को देखते ही एकदम से मदहोश हुआ जा रहा था,,,,,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था और साधना मंद मंद मुस्कुराते हुए अपनी सलवार को उतारते चली जा रही थी देखते देखते हो अपनी सलवार को नीचे घुटनों तक लेकर आ गई और फिर अपनी बहन और संजू की तरफ देख कर बोली,,,,।
बाप रे पूरी तरह से भीग गई है ना इसलिए आराम से निकल नहीं रही है,, आराधना तू जरा मदद कर दे,,,,
(इतना सुनते ही आराधना अपनी जगह पर बैठी बैठी ही आगे की तरफ बढ़ी और अपनी बड़ी बहन की सलवार को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे नीचे की तरफ सरकार ने लगी जो कि घुटनों में गीली होने की वजह से फस गई थी,,,, संजू का लंड पूरी तरह से टनटना गया था उसकी हालत एकदम से खराब हुए जा रही थी और देखते ही देखते आराधना अपनी बड़ी बहन की सलवार को उसकी दोनों टांगों से बाहर निकालकर उसे नंगी होने में मदद करने लगी और जैसे ही सलवार उसके बदन से अलग हुई आराधना अपनी बहन की सलवार को उसके कमीज के पास धीरे से रख दी लेकिन अपनी बहन की मदद करते हुए उसकी साड़ी उसकी छाती से नीचे की तरफ सरक गई थी जिससे उसकी भारी-भरकम छाती एकदम से साफ नजर आने लगी थी और ब्लाउज पूरी तरह से गिला होने की वजह से उसकी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचियां एकदम साफ नजर आ रही थी और साथ ही चउचियों की शोभा बढ़ा रहे उसके दोनों खजूर ब्लाउज में भी उप से हुई नजर आ रहे थे जिसे देखकर संजू के मुंह में पानी आ रहा था,,,,, सलवार कमीज अपने बदन से उतर जाने के बाद राहत की सांस लेते हुए साधना बोली,,,)
बाप रे अब जाकर एकदम आराम लग रहा है वरना ऐसा लग रहा था कि बदन जकड़ा हुआ है,,,,(और इतना कहने के साथ ही साधना तुरंत अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले गई और अपने ब्रा का हुक खोलने लगी यह देखकर आराधना की आंखें फटी की फटी रह गई क्योंकि वह अपनी बहन को अपनी ही आंखों के सामने एकदम से खुले तौर पर देख रही थी जिसमें इस समय बिल्कुल भी लाज शर्म नहीं था ऐसा नहीं था कि आराधना को अपनी बहन के बारे में कुछ भी पता ना हो क्योंकि वह पहले ही अपनी बहन को अपने ही बेटे के साथ चुदवाते हुए देख ली थी इसलिए वह जानती थी कि उसकी बहन का चरित्र क्या है लेकिन साधना तो यह बात नहीं जानती थी कि आराधना उसके बारे में सब कुछ आती है लेकिन फिर भी इस समय वह ऐसा बर्ताव कर रही थी मानो जैसे आराधना के सामने वह पहले से ही इतनी ज्यादा खुली हो लेकिन फिर भी इसमें आराधना का ही फायदा था आराधना एक तरफ जहां अपनी बहन के व्यवहार से पूरी तरह से आश्चर्यचकित हो गई थी वहीं दूसरी तरफ वह अपनी बहन के व्यवहार से खुश भी थी क्योंकि वह अपनी बहन के जरिए ही अपने बेटे के साथ चुदाई का आनंद लूट सकती थी,,,, कुछ देर तक साधना अपने हाथों की उंगलियों से अपनी ब्रा की होकर को खोलने की कोशिश करती रही जो की कोशिश नहीं बल्कि वह जानबूझकर अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर ब्रा को खोलने का नाटक कर रही थी,,, उसके मन में कुछ और चल रहा था इसीलिए वह कुछ देर तक इसी तरह से अपनी ब्रा खोलने का नाटक करते हुए वह अपनी बहन से नहीं बल्कि संजू से बोली,,,)
संजू जरा मेरी ब्रा का हुक खोल देना तो,,,।
(इतना सुनते ही संजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी लेकिन आराधना के होश उड़ गए क्योंकि अपनी बहन की आवाज सुनकर आराधना समझ गई थी कि उसकी बहन अपनी मनमानी करने पर उतारू हो चुकी है जिसमें दोनों का भला होने वाला था संजू भी बेझिझक अपनी जगह से उठा और जैसे ही उठ कर खड़ा हुआ उसका लंड तो पहले से ही पूरी तरह से टनटनाकर खड़ा था जो कि अंडरवियर में तंबू बनाया हुआ था उस पर नजर पड़ते ही आराधना की चूत से काम रस टपकने लगा,,,, संजू के खड़े होते ही उसके खड़े लंड पर दोनों बहनों की नजर पड़ गई थी और दोनों की चूत,,, उत्तेजना के मारे फुलकर कचोरी हो गई थी,,,,,,,, जो हाल संजू का था वही हाल दोनों बहनों का भी था अपने बेटे के लंड को देखकर आराधना के तन बदन में आग लगने लगी,,,, आखिर क्यों ना लगती माहोल ही कुछ ऐसा हो गया था बरसात के मौसम में वैसे भी औरतों को पुरुष संसर्ग की कुछ ज्यादा ही इच्छा पबलित हो जाती है और यही इस समय दोनों औरतों के साथ हो रहा था,,,,,।
संजू भी जेसे मन में ठान लिया था कि दोनों औरतों पर बिल्कुल भी रहम नहीं करना है इसलिए तो अपना टनटनाता हुआ लंड दिखा कर दोनों की चूत से काम रस की बरसात करना चाहता था,,,, और इसीलिए वह भी बेझिझक अपनी मौसी की एक आवाज पर तुरंत अपनी जगह पर खड़ा हो गया था यह जानते हुए भी कि जिस अवस्था में वह खड़ा होगा उस अवस्था में उसका लंड की अपनी औकात दिखा रहा होगा और यही तो वह भी चाहता था वह तुरंत अपनी मौसी के करीब पहुंच गया और अपनी मां की मौजूदगी का बिल्कुल भी लिहाज ना करते हुए अपने हाथों से अपनी मौसी की ब्रा का हुक खोलने लगा जिसमें वह बेहद माहिर और काबिले तारीफ हो चुका था औरतों के कपड़े उतारने में उसका कोई जोड़ नहीं था,,,,, इससे पहले भी वह अपनी मौसी के और अपनी मां के कपड़ों को बहुत बार अपने हाथों से उतारकर उन्हें नंगी कर चुका था और ऐसा करने में उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति होती थी और वह आनंद किस समय परम प्रकाष्ठा का रूप ले रहा था क्योंकि वह तीनों गांव के छोर पर एकदम एकांत में तेज बरसती बारिश में खंडहर नुमा घर में आसरा लेकर बैठे हुए थे और ऐसे में तीनों के मन में काम भावना जागरूक हो चुकी थी जो कि अपने अपने तरीके से बाहर आ रही थी,,,,।
संजू अपनी उंगलियों का सहारा लेकर अपनी मौसी की ब्रा का हुक खोलने लगा अपनी मौसी की नंगी चिकनी पीठ पर अपने ऊंगलियो को छूआते ही उत्तेजना के मारे उसके लंड का कड़ापन और ज्यादा बढ़ने लगा,,,,, और देखते ही देखते संजू अपनी मौसी के ब्रा का हुक खोल दिया और दोनों चूचियों को अपने आगोश में लिए हुए छातियों पर कसी हुई ब्रा एकदम से ढीली पड़ गई,,,, जिसे खुद उत्तेजना के मारे गहरी होती सांसो के साथ साधना अपने दोनों हाथों से अपनी ब्रा को अपनी बाहों से उतार दी उसे इस बात का भी बिल्कुल भी डर या झिझक नहीं था कि अब उसकी चूचियां एकदम नंगी हो चुकी थी जिस पर संजू की नजर आराम से चली जा रही थी और आराधना भी यही देख रही थी वह बार-बार अपनी बड़ी बहन के नंगे बदन को देखकर अपने बेटे की नजरों को भांपने की कोशिश कर रही थी,,,जो की साधना के नंगे बदन पर ही घूम रही थी,,,,,, ब्रा के उतरते ही संजू औपचारिक रूप से बोला,,,,।
अब मौसी एकदम ठीक है,,,,, अब सर्दी होने का डर बिल्कुल भी नहीं है,,,,,
संजू और उसकी बहन मोहिनी
हारे तू तो सही तो है मन तो कर रहा है कि चड्डी भी उतार दुं,,, क्योंकि चड्डी गीली होने की वजह से खुजली होने का डर है,,,,
हा मौसी बात तो सही है,,,, खुजली हो गई तो मुसीबत हो जाएगी फिर सबके सामने खुजाने में भी शर्म महसूस होगी,,,
हां बात तो सही है लेकिन सोच रही हु उतार दूं कि रहने दुं,,,(इतना कहते हुए व आराधना को देखने लगी वह शर्म के मारे अपनी नजरों को दूसरी तरफ घुमा दी थी हालांकि अपने मन में वही सोच रही थी कि उसकी बड़ी बहन बाकी बचे कपड़ों को भी उतार कर एकदम नंगी हो जाएगा कि उसके लिए भी रास्ता साफ हो जाए अपने कपड़े उतारने का इसलिए वह कुछ बोल नहीं रही थी लेकिन अपनी मौसी का जवाब सुनकर संजू बोला)
इसमें सोचने का क्या है मौसी अपना शरीर है खुद को ही ध्यान देना होगा ना परेशानी हो गई तो दूसरा कोई कोई परेशान होगा मैं तो कहता हूं उतार दो वैसे भी यहां कोई बैगाना तो है नहीं जिसके सामने शर्माना पड़े,,,,।
(अपने बेटे की बात सुनकर आराधना अंदर ही अंदर उत्साहित हो रही थी क्योंकि वह अपने बेटे और अपनी बड़ी बहन के बीच के रिश्ते को अच्छी तरह से समझ रही थी और अच्छी तरह समझ रही थी दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो जाने के बाद से दोनों एक दूसरे के सामने शर्म बिल्कुल भी नहीं कर रहे थे क्योंकि दोनों अपनई शर्मा मर्यादा की दीवार को गिरा चुके थे,,,, साधना जल्द से जल्द अपनी चड्डी उतार कर पूरी तरह से नंगी हो जाना चाहती थी,,,, क्योंकि अपनी नंगी जवानी दिखा कर वह अपनी बहन को उकसाना चाहती थी,,,,,, ताकि इस खेल में वह आराधना को भी शामिल कर सके,,,, संजू की बात सुनकर साधना बोली,,,,,,)
बात तो तू सही कह रहा है लेकिन आराधना को बुरा लगेगा वह तो पिछले कपड़ों में ही शायद रात गुजार देगी और बीमार भी पड़ जाएगी और शादी का मजा ले नहीं पाएगी,,,,
नहीं ऐसा नहीं है मौसी मम्मी को भी अपनी तबीयत का अच्छी तरह से ख्याल है अगर तुम पहल करोगी तो शायद मम्मी भी तुम्हारी बात मान ले,,,,
क्या कहती है आराधना इस जगह पर शर्मा ने जैसा कुछ भी नहीं है ऐसी तूफानी बारिश नहीं आ कोई आने वाला नहीं है और हम तीनों के सिवा यहां कोई और भी नहीं है जिससे शर्माना पड़े,,,,
लेकिन दीदी संजू,,,,
तो संजू की फिक्र मत कर वह जवान हो गया है उसे अच्छे बुरे की पहचान है वह जानता है कि इस समय हम तीनों गिले हैं और ऐसे में हम तीनों को क्या करना चाहिए हम अपने घर पर तो है नहीं कि बीमार पड़ गए तो आराम करके दवा खा कर सही हो जाएंगे यहां पर शादी में आए हैं यहां पर हाथ बताना पड़ेगा अगर बीमार पड़ गए तो दो बातें और सुनाएंगे कि काम के ना काज के दुश्मन अनाज के,,,,
लेकिन दीदी,,,,
देख आराधना तुझे शर्माना है तो शर्मा मुझे बीमार नहीं पडना है,,,, अगर मैं बीमार पड़ गई तो मेरा सारा काम रुक जाएगा इसलिए मुझे तो अपनी तबीयत का ख्याल रखना ही होगा,,,,(और इतना कहने के साथ ही साधना अपने दोनों हाथों की उंगलियों को अपनी लाल रंग की पेंटी पर रख दी और उसे उतारने लगी कि तभी आराधना अपना हाथ आगे बढ़ाकर जानबूझकर साधना का हाथ पकड़ लिया और उसे जानबूझकर रोकने का नाटक करते हुए बोली,,,)
क्या कर रही हो दीदी इस तरह से तो तुम एकदम नंगी हो जाएगी समझे एकदम जवान है उसके सामने कपड़े उतार कर नंगी होना क्या उचित है,,,,
तुम तो खामखा डर रही हो आराधना तुम्हें अपने बेटे के सामने कपड़े उतार कर नंगी होने में किस बात का डर लग रहा है कि कहीं तुम्हारा बेटा नंगी औरत को देखकर अपना लंड चूत में ना डाल दे,,,,
हाय दैया कैसी बातें कर रही हो दीदी,,,, कुछ तो शर्म करो,,,, संजू यहां मौजूद हैं,,,,
देख आराधना तुझे ऐसा लगता है कि अगर कपड़े उतार कर कोई बेशर्म बन जाता है तो यह तेरी गलतफहमी है मौके की नजाकत को समझने की कोशिश कर संजू के यहां होने से हम दोनों पूरी तरह से सुरक्षित है उसके होने से हम दोनों अपने कपड़े उतार सकते हैं और सर्दी-जुकाम से बच सकते हैं,,,,, देख तुझे शर्म आ रही है तो अपनी नजर घुमा ले,,,,(और इतना कहने के साथ ही साधना अपनी पेंटी को धीरे-धीरे उतारना शुरू कर दी ,,,, संजू और साधना तबीयत खराब होने का जो मामूली सा बहाना पेश कर के कपड़े उतार कर अपनी बेशर्मी का नमूना पेश कर रहे थे इस तरह की वाहियात बातों को अच्छी तरह से समझ रही थी और इसमें आराधना को अपना भी भला नजर आ रहा था इसलिए वह ज्यादा जोर देना ठीक नहीं समझी,,,, और साधना धीरे-धीरे करके बेशर्मी की सारी हदें पार करते हो अपनी बहन की आंखों के सामने ही अपनी चड्डी उतार कर एकदम नंगी हो गई और अपनी बहन के साथ साथ संजू की मदहोशी को बढ़ाते हुए वह दोनों की आंखों के सामने ही अपनी चड्डी को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे नीचोड़ते हुए उसमें से पानी गीराने लगी,,,,, पेंट में से टपकते हुए पानी को देखकर संजू के मुंह में पानी आ रहा था और आराधना इस तरह के दृश्य को देखकर उत्तेजना से पानी पानी हुई जा रही थी,,,,, पलक झपकते ही साधना मां बेटे दोनों की आंखों के सामने एकदम नंगी हो चुकी थी और अपनी मौसी को नंगी देखकर उसकी मदमस्त कर देने वाली जवानी को अपनी आंखों से देख कर संजू का लंड और ज्यादा कड़क हो गया था जो कि पूरी तरह से चड्डी में तंबू बनाया हुआ था,,,,, अपनी छोटी बहन को लाइन पर लाने की शुरुआत साधना ने कर चुकी थी इसलिए एकदम खुश होते हुए अपनी जगह पर बैठ गई और उसके बेटे के साथ ही संजू भी अपनी जगह पर ठीक उसके सामने बैठ गया और जिस तरह से साधना बेठी थी उसकी चूत एकदम खुली हुई नजर आ रही थी जिस पर संजू की नजर बराबर पड रही थी और उसे देख कर उसके मुंह में पानी आ रहा था,,,,।
आराधना के मन में भी यही चल रहा था कि जिस तरह से उसकी बड़ी बहन बेठी हुई थी संजू को जरूर उसकी चूत नजर आती होगी और यही तसल्ली के लिए वह अपनी नजर को अपनी बहन की दोनों टांगों के बीच हल्कै से घुमाते हुए देख ली थी और उस नजारे को देखकर वह खुद भी एकदम मदहोश हो गई,,,,,, अपनी बहन की हरकत पर आराधना की खुद की हालत खराब हो रही थी वह भी जल्द से जल्द अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो जाना चाहती थी बस इशारे की ताक में लगी हुई थी,,,,।
अब कैसा लग रहा है मौसी,,,(दोनों हाथ को जलती हुई आग की तपन में फैलाते हुए संजू बोला)
सच में अब बहुत सुकून मिल रहा है,,,,,, वरना गीले कपड़े में अजीब भी लग रहा था और ठंड भी लग रही थी,,,,
देख नहीं रही हो मम्मी को अभी भी ठंडी लग रही है,,,,
तो क्या करूं मैं भी दीदी की तरह नंगी हो जाऊं क्या,,,,,
तो क्या आराधना तू भी पागल हो रही है देख नहीं रही है तुझे ठंड लग रही है,,,, कपड़े उतार कर आग ताप ले सही हो जाएगा,,,,,,,,।
(तभी बादलों की गड़गड़ाहट एकदम तेज होगी जिससे आराधना एकदम से घबरा गई,,,, बरसात का जोर लगातार बढ़ता जा रहा था और ऐसे ना चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा छाया हुआ था तेज चलती हवाओं के साथ बरसात और भी ज्यादा भयानक नजर आ रही थी और ऊपर से बादलों की गड़गड़ाहट सब मिलाकर माहौल को पूरी तरह से डरावना बनाया हुआ था लेकिन खंडहर के अंदर का वातावरण ठंडक में भी गर्माहट दे रहा था क्योंकि एक खूबसूरत औरत अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी बैठी हुई थी जिसे देखकर संजू के तन बदन में आग लग रही थी,,,,, कुछ देर सोचने के बाद आराधना बोली,,,)
लेकिन संजू के सामने,,,,,,
तो क्या हुआ आराधना संजू कोई गैर तो है नहीं अपना ही बेटा है और उसके सामने कपड़े उतार कर नंगी होने में झिझक कैसी देख नहीं रही है मैं कैसे अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गई हुं,,,,,, और ऐसा भी तो नहीं है कि संजू बाहर सबको बता देगा कि हम दोनों ने उसके सामने कपड़े उतार कर नंगी हो गए,,,, संजू की जगह कोई और लड़का होता तो शायद इस बात का डर हम दोनों के मन में होता लेकिन संजू तो घर पर हैं इससे डरने की या शर्माने की जरूरत नहीं है,,,,
हां मम्मी जिस तरह से मौसी मेरे सामने कपड़े उतार कर नंगी हो गई तुम भी अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो जाओ तुम्हारे भले के लिए ही तो कह रहे हैं,,,,,,
मुझे शर्म आ रही है,,,,,
इसमें शर्माने की कौन सी बात है,,,,, शर्म तो मुझे भी आनी चाहिए मौसी को भी आनी चाहिए लेकिन जरूरत के मुताबिक कपड़े उतारना जरुरी है वरना तबीयत खराब हो जाएगी,,,,,
हां आराधना तू बेकार में जिद कर रही है,,,,,
अच्छा तुम दोनों कहते हो तो मैं भी उतार देती हूं लेकिन इस बात को किसी से कहना नहीं,,,,
तू पागल हो गई है क्या तू मेरी छोटी बहन है और संजू तेरा बेटा है भला हम दोनों इस बात को किसी को कैसे बता सकते हैं इसमें तो परिवार की ही बदनामी है ना,,,
हां बात तो ठीक है,,,,(इतना कहने के साथ ही आराधना भी अपनी जगह पर खड़ी हो गई थी वह भी अपने कपड़े उतारने के लिए तैयार हो चुकी थी जिसके लिए वह अंदर ही अंदर तड़प रही थी बस सिर्फ बाहर से दिखावा कर रही थी,,,, अपनी मां को खड़ी हुई देखते ही संजू की आंखों के सामने दोनों औरतों की चूत नजर आने लगी थी दोनों की बड़ी बड़ी गांड नाचते हुए उसे दिखाई देने लगी थी वह आने वाले पल के लिए एकदम उत्साहित हो गया था वह समझ गया था कि जब दोनों की चूत में एक साथ लंड डालने का समय आ गया है,,,,, आराधना भी अपनी बड़ी बहन की तरह नंगी हो जाना चाहती थी अपने बेटे के लंड को अपनी चूत में महसूस करना चाहती थी अपनी बहन के साथ इस खंडहर में मजा लेना चाहती थी इसलिए वह अपने साड़ी के पल्लू को अपने कंधे से शर्माते हुए नीचे गिरा दी और अपने दोनों हाथ को अपने ब्लाउज पर रखकर बटन खोलने की तैयारी करने लगी जिसे देखकर संजू के लंड की अकड़ बढ़ने लगी और साधना की चूत से काम रस टपकने लगा,,,,।
संजू का दमदार लुंड जिसकी दीवानी उसकी माँ और मौसी दोनों हे
संजू दी अपनी मौसी और अपनी मां के चरित्र के बारे में अच्छी तरह से जान कर भी अपना कदम आगे बढ़ा रहा था क्योंकि वह भी एक साथ दोनों औरतों की चूत में अपना लंड डालकर दोनों को तृप्त करते हुए अद्भुत संतुष्टि का अहसास करना चाहता था वह पहली बार अपनी मां और अपनी मौसी को एक साथ चोदना चाहता था और इसीलिए वह अपने कपड़े उतार कर इस अद्भुत खेल की शुरुआत करते हुए आग तापते हुए बेठ चुका था,,,, साधना भी इस मौके को हाथ से गवाना नहीं चाहती थी क्योंकि वह बातों ही बातों में अपनी बहन से अपने मन की इच्छा जाहिर कर चुकी थी कि वह अगर मौका मिले तो संजू के साथ हमबिस्तर होने के लिए तैयार है और किसी के लिए वह अपनी छोटी बहन के सामने ही भीगे हुए कपड़ों का बहाना करके अपनी जगह पर खड़ी हो गई थी और अपने कपड़ों को उतारने की शुरुआत कर चुकी थी जिसे देखकर आराधना और संजू दोनों का दिल जोरों से धड़क रहा था,,,,।
साधना संजू के लंड को देखकर जो कि उसके अंडरवियर में तंबू की तरह तना हुआ था उसका धीर भी जवाब दे गया था और इसीलिए वह भी अपने वस्त्र त्याग कर नंगी होना चाहती थी ताकि,,, काम क्रीड़ा को शुरू कर सकें साधना का सलवार कमीज दोनों पूरी तरह से पानी से भीगा हुआ था जिससे उसके बदन से उसके वस्त्र चिपक गए थे और ऐसे हालात में उसका बदन एकदम साफ झलक रहा था जिसे देखकर संजू का लंड गदर मचाने को तैयार हो रहा था
साधना अपनी जगह पर खड़ी हो गई थी और अपने कमीज को दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर की तरफ उठा रही थी और संजू धड़कते दिल के साथ अपनी मौसी को देख रहा था,,,,, वैसे तो उम्र के इस दौर पर पहुंचने के बावजूद भी साड़ी में उसकी मौसी बेहद खूबसूरत और सेक्सी नजर आती थी लेकिन इस समय अपनी मौसी को सलवार सूट में देखने का भी एक अलग मजा था,,,, इसलिए संजू पलक झपका ना भूल गया था और एक घटक अपनी मौसी की तरफ देख रहा था आराधना भी अपनी बहन को ही देख रही थी देखते ही देखते साधना अपनी कमीज को दोनों हाथों के सहारे ऊपर की तरफ उठाते हुए अपनी छातियों तक लेकर आई थी जिसमें से उसकी लाल रंग की ब्रा नजर आ रही थी और देखते ही देखते साधना अपनी कमीज को अपने बदन से अलग करते हुए एक तरफ रख दें और इस समय वह मां और बेटे की आंखों के सामने केवल सलवार और ब्रा में खड़ी थी पेट थोड़ा भारी होने की वजह से बाहर निकला हुआ था लेकिन चेहरे की बनावट इतनी जबरदस्त थी कि ऐसे सुगठित ढांचे में भी क़यामत लग रही थी,,,,,
सलवार भी उतार दूं यह भी पूरी तरह से गीली हो चुकी है,,,,(साधना अपनी बहन की तरफ देख कर बोली थी लेकिन आराधना का जवाब सुनने से पहले ही संजू बोला)
तो क्या मौसी उतार दो यह भी तो गीली हो चुकी है सर्दी लग गई तो मुसीबत हो जाएगी,,,,
हां संजू तो ठीक कह रहा है वैसे भी इस वीरान जगह पर कोई इतनी तेज बारिश में आने वाला तो है नहीं सब अपने ही तो हैं ऐसे माहौल में शर्म कैसी,,,,(साधना को तो सिर्फ अपने कपड़े उतारने का बहाना चाहिए था वह किसी भी तरह से अपने भतीजे के सामने नंगी होना चाहती थी और अपने नंगे पन का सहारा लेकर अपने भतीजे को उकसाना चाहती थी ताकि उसके साथ संबंध बना सके और मजे ले सके जिसमें वह अपनी छोटी बहन आराधना को भी शामिल करना चाहती थी और मां बेटे के बीच भी शारीरिक संबंध स्थापित करना चाहती थी ताकि यह संबंध आगे भी इसी तरह से चलता है और आराधना भी जीवन का सुख भोगती रहे,,,, और फिर अपने दोनों हाथ को अपनी सलवार की दूरी पर लाकर अपनी उंगलियों का सहारा देकर उसे खोलना शुरू कर दी वह अपनी सलवार की डोरी को जरूर खोल रही थी लेकिन अपनी हरकत से 1 मां के अंदर की औरत को जगा रही थी जोकि अपनी और अपने बेटे के बीच के रिश्ते को भूल कर केवल एक मर्द और औरत बन जाना चाहती थी,,,,, अगर साधना को जरा भी एहसास होता कि दोनों मां बेटों के बीच पहले से ही शारीरिक संबंध स्थापित हो चुका है तो वह बिना झिझक के इसी समय संजू के ऊपर चढ़ जाती है और चुदाई का आनंद लुटती,,,, लेकिन समय उसे अपनी बहन के सामने शुन्य से शुरुआत करनी थी इसीलिए वह अंदर ही अंदर प्रसन्न होते हुए अपने सलवार की डोरी को खींचकर सलवार को अपनी कमर से ठीक कर ली और ढीली करने के बाद एक बार संजू की तरह देखी और आराधना की तरफ जो कि दोनों उसी को ही देख रहे थे और एकदम से बेशर्मी का नजारा पेश करते हुए साधना धीरे-धीरे अपनी सलवार को जो कि बेहद कसी हुई थी जांघो से एकदम चिपकी हुई थी उसे धीरे-धीरे नीचे की तरफ सरकार ने लगी कुछ थोड़ी सी सलवार कमर के भाग को छोड़ते ही उसकी लाल रंग की पैंटी को उजागर करने लगी चीज पर नजर पड़ते ही संजू की हालत खराब हो गई ऐसा नहीं था कि वह इस तरह के नजारे को पहली बार देख रहा था लेकिन इस समय तेज बारिश में माहौल पूरी तरह से बदल चुका था संजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी इसीलिए तो वह अपनी मौसी की लाल रंग की चड्डी को देखते ही एकदम से मदहोश हुआ जा रहा था,,,,,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था और साधना मंद मंद मुस्कुराते हुए अपनी सलवार को उतारते चली जा रही थी देखते देखते हो अपनी सलवार को नीचे घुटनों तक लेकर आ गई और फिर अपनी बहन और संजू की तरफ देख कर बोली,,,,।
बाप रे पूरी तरह से भीग गई है ना इसलिए आराम से निकल नहीं रही है,, आराधना तू जरा मदद कर दे,,,,
(इतना सुनते ही आराधना अपनी जगह पर बैठी बैठी ही आगे की तरफ बढ़ी और अपनी बड़ी बहन की सलवार को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे नीचे की तरफ सरकार ने लगी जो कि घुटनों में गीली होने की वजह से फस गई थी,,,, संजू का लंड पूरी तरह से टनटना गया था उसकी हालत एकदम से खराब हुए जा रही थी और देखते ही देखते आराधना अपनी बड़ी बहन की सलवार को उसकी दोनों टांगों से बाहर निकालकर उसे नंगी होने में मदद करने लगी और जैसे ही सलवार उसके बदन से अलग हुई आराधना अपनी बहन की सलवार को उसके कमीज के पास धीरे से रख दी लेकिन अपनी बहन की मदद करते हुए उसकी साड़ी उसकी छाती से नीचे की तरफ सरक गई थी जिससे उसकी भारी-भरकम छाती एकदम से साफ नजर आने लगी थी और ब्लाउज पूरी तरह से गिला होने की वजह से उसकी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचियां एकदम साफ नजर आ रही थी और साथ ही चउचियों की शोभा बढ़ा रहे उसके दोनों खजूर ब्लाउज में भी उप से हुई नजर आ रहे थे जिसे देखकर संजू के मुंह में पानी आ रहा था,,,,, सलवार कमीज अपने बदन से उतर जाने के बाद राहत की सांस लेते हुए साधना बोली,,,)
बाप रे अब जाकर एकदम आराम लग रहा है वरना ऐसा लग रहा था कि बदन जकड़ा हुआ है,,,,(और इतना कहने के साथ ही साधना तुरंत अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले गई और अपने ब्रा का हुक खोलने लगी यह देखकर आराधना की आंखें फटी की फटी रह गई क्योंकि वह अपनी बहन को अपनी ही आंखों के सामने एकदम से खुले तौर पर देख रही थी जिसमें इस समय बिल्कुल भी लाज शर्म नहीं था ऐसा नहीं था कि आराधना को अपनी बहन के बारे में कुछ भी पता ना हो क्योंकि वह पहले ही अपनी बहन को अपने ही बेटे के साथ चुदवाते हुए देख ली थी इसलिए वह जानती थी कि उसकी बहन का चरित्र क्या है लेकिन साधना तो यह बात नहीं जानती थी कि आराधना उसके बारे में सब कुछ आती है लेकिन फिर भी इस समय वह ऐसा बर्ताव कर रही थी मानो जैसे आराधना के सामने वह पहले से ही इतनी ज्यादा खुली हो लेकिन फिर भी इसमें आराधना का ही फायदा था आराधना एक तरफ जहां अपनी बहन के व्यवहार से पूरी तरह से आश्चर्यचकित हो गई थी वहीं दूसरी तरफ वह अपनी बहन के व्यवहार से खुश भी थी क्योंकि वह अपनी बहन के जरिए ही अपने बेटे के साथ चुदाई का आनंद लूट सकती थी,,,, कुछ देर तक साधना अपने हाथों की उंगलियों से अपनी ब्रा की होकर को खोलने की कोशिश करती रही जो की कोशिश नहीं बल्कि वह जानबूझकर अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर ब्रा को खोलने का नाटक कर रही थी,,, उसके मन में कुछ और चल रहा था इसीलिए वह कुछ देर तक इसी तरह से अपनी ब्रा खोलने का नाटक करते हुए वह अपनी बहन से नहीं बल्कि संजू से बोली,,,)
संजू जरा मेरी ब्रा का हुक खोल देना तो,,,।
(इतना सुनते ही संजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी लेकिन आराधना के होश उड़ गए क्योंकि अपनी बहन की आवाज सुनकर आराधना समझ गई थी कि उसकी बहन अपनी मनमानी करने पर उतारू हो चुकी है जिसमें दोनों का भला होने वाला था संजू भी बेझिझक अपनी जगह से उठा और जैसे ही उठ कर खड़ा हुआ उसका लंड तो पहले से ही पूरी तरह से टनटनाकर खड़ा था जो कि अंडरवियर में तंबू बनाया हुआ था उस पर नजर पड़ते ही आराधना की चूत से काम रस टपकने लगा,,,, संजू के खड़े होते ही उसके खड़े लंड पर दोनों बहनों की नजर पड़ गई थी और दोनों की चूत,,, उत्तेजना के मारे फुलकर कचोरी हो गई थी,,,,,,,, जो हाल संजू का था वही हाल दोनों बहनों का भी था अपने बेटे के लंड को देखकर आराधना के तन बदन में आग लगने लगी,,,, आखिर क्यों ना लगती माहोल ही कुछ ऐसा हो गया था बरसात के मौसम में वैसे भी औरतों को पुरुष संसर्ग की कुछ ज्यादा ही इच्छा पबलित हो जाती है और यही इस समय दोनों औरतों के साथ हो रहा था,,,,,।
संजू भी जेसे मन में ठान लिया था कि दोनों औरतों पर बिल्कुल भी रहम नहीं करना है इसलिए तो अपना टनटनाता हुआ लंड दिखा कर दोनों की चूत से काम रस की बरसात करना चाहता था,,,, और इसीलिए वह भी बेझिझक अपनी मौसी की एक आवाज पर तुरंत अपनी जगह पर खड़ा हो गया था यह जानते हुए भी कि जिस अवस्था में वह खड़ा होगा उस अवस्था में उसका लंड की अपनी औकात दिखा रहा होगा और यही तो वह भी चाहता था वह तुरंत अपनी मौसी के करीब पहुंच गया और अपनी मां की मौजूदगी का बिल्कुल भी लिहाज ना करते हुए अपने हाथों से अपनी मौसी की ब्रा का हुक खोलने लगा जिसमें वह बेहद माहिर और काबिले तारीफ हो चुका था औरतों के कपड़े उतारने में उसका कोई जोड़ नहीं था,,,,, इससे पहले भी वह अपनी मौसी के और अपनी मां के कपड़ों को बहुत बार अपने हाथों से उतारकर उन्हें नंगी कर चुका था और ऐसा करने में उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति होती थी और वह आनंद किस समय परम प्रकाष्ठा का रूप ले रहा था क्योंकि वह तीनों गांव के छोर पर एकदम एकांत में तेज बरसती बारिश में खंडहर नुमा घर में आसरा लेकर बैठे हुए थे और ऐसे में तीनों के मन में काम भावना जागरूक हो चुकी थी जो कि अपने अपने तरीके से बाहर आ रही थी,,,,।
संजू अपनी उंगलियों का सहारा लेकर अपनी मौसी की ब्रा का हुक खोलने लगा अपनी मौसी की नंगी चिकनी पीठ पर अपने ऊंगलियो को छूआते ही उत्तेजना के मारे उसके लंड का कड़ापन और ज्यादा बढ़ने लगा,,,,, और देखते ही देखते संजू अपनी मौसी के ब्रा का हुक खोल दिया और दोनों चूचियों को अपने आगोश में लिए हुए छातियों पर कसी हुई ब्रा एकदम से ढीली पड़ गई,,,, जिसे खुद उत्तेजना के मारे गहरी होती सांसो के साथ साधना अपने दोनों हाथों से अपनी ब्रा को अपनी बाहों से उतार दी उसे इस बात का भी बिल्कुल भी डर या झिझक नहीं था कि अब उसकी चूचियां एकदम नंगी हो चुकी थी जिस पर संजू की नजर आराम से चली जा रही थी और आराधना भी यही देख रही थी वह बार-बार अपनी बड़ी बहन के नंगे बदन को देखकर अपने बेटे की नजरों को भांपने की कोशिश कर रही थी,,,जो की साधना के नंगे बदन पर ही घूम रही थी,,,,,, ब्रा के उतरते ही संजू औपचारिक रूप से बोला,,,,।
अब मौसी एकदम ठीक है,,,,, अब सर्दी होने का डर बिल्कुल भी नहीं है,,,,,
संजू और उसकी बहन मोहिनी
हारे तू तो सही तो है मन तो कर रहा है कि चड्डी भी उतार दुं,,, क्योंकि चड्डी गीली होने की वजह से खुजली होने का डर है,,,,
हा मौसी बात तो सही है,,,, खुजली हो गई तो मुसीबत हो जाएगी फिर सबके सामने खुजाने में भी शर्म महसूस होगी,,,
हां बात तो सही है लेकिन सोच रही हु उतार दूं कि रहने दुं,,,(इतना कहते हुए व आराधना को देखने लगी वह शर्म के मारे अपनी नजरों को दूसरी तरफ घुमा दी थी हालांकि अपने मन में वही सोच रही थी कि उसकी बड़ी बहन बाकी बचे कपड़ों को भी उतार कर एकदम नंगी हो जाएगा कि उसके लिए भी रास्ता साफ हो जाए अपने कपड़े उतारने का इसलिए वह कुछ बोल नहीं रही थी लेकिन अपनी मौसी का जवाब सुनकर संजू बोला)
इसमें सोचने का क्या है मौसी अपना शरीर है खुद को ही ध्यान देना होगा ना परेशानी हो गई तो दूसरा कोई कोई परेशान होगा मैं तो कहता हूं उतार दो वैसे भी यहां कोई बैगाना तो है नहीं जिसके सामने शर्माना पड़े,,,,।
(अपने बेटे की बात सुनकर आराधना अंदर ही अंदर उत्साहित हो रही थी क्योंकि वह अपने बेटे और अपनी बड़ी बहन के बीच के रिश्ते को अच्छी तरह से समझ रही थी और अच्छी तरह समझ रही थी दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो जाने के बाद से दोनों एक दूसरे के सामने शर्म बिल्कुल भी नहीं कर रहे थे क्योंकि दोनों अपनई शर्मा मर्यादा की दीवार को गिरा चुके थे,,,, साधना जल्द से जल्द अपनी चड्डी उतार कर पूरी तरह से नंगी हो जाना चाहती थी,,,, क्योंकि अपनी नंगी जवानी दिखा कर वह अपनी बहन को उकसाना चाहती थी,,,,,, ताकि इस खेल में वह आराधना को भी शामिल कर सके,,,, संजू की बात सुनकर साधना बोली,,,,,,)
बात तो तू सही कह रहा है लेकिन आराधना को बुरा लगेगा वह तो पिछले कपड़ों में ही शायद रात गुजार देगी और बीमार भी पड़ जाएगी और शादी का मजा ले नहीं पाएगी,,,,
नहीं ऐसा नहीं है मौसी मम्मी को भी अपनी तबीयत का अच्छी तरह से ख्याल है अगर तुम पहल करोगी तो शायद मम्मी भी तुम्हारी बात मान ले,,,,
क्या कहती है आराधना इस जगह पर शर्मा ने जैसा कुछ भी नहीं है ऐसी तूफानी बारिश नहीं आ कोई आने वाला नहीं है और हम तीनों के सिवा यहां कोई और भी नहीं है जिससे शर्माना पड़े,,,,
लेकिन दीदी संजू,,,,
तो संजू की फिक्र मत कर वह जवान हो गया है उसे अच्छे बुरे की पहचान है वह जानता है कि इस समय हम तीनों गिले हैं और ऐसे में हम तीनों को क्या करना चाहिए हम अपने घर पर तो है नहीं कि बीमार पड़ गए तो आराम करके दवा खा कर सही हो जाएंगे यहां पर शादी में आए हैं यहां पर हाथ बताना पड़ेगा अगर बीमार पड़ गए तो दो बातें और सुनाएंगे कि काम के ना काज के दुश्मन अनाज के,,,,
लेकिन दीदी,,,,
देख आराधना तुझे शर्माना है तो शर्मा मुझे बीमार नहीं पडना है,,,, अगर मैं बीमार पड़ गई तो मेरा सारा काम रुक जाएगा इसलिए मुझे तो अपनी तबीयत का ख्याल रखना ही होगा,,,,(और इतना कहने के साथ ही साधना अपने दोनों हाथों की उंगलियों को अपनी लाल रंग की पेंटी पर रख दी और उसे उतारने लगी कि तभी आराधना अपना हाथ आगे बढ़ाकर जानबूझकर साधना का हाथ पकड़ लिया और उसे जानबूझकर रोकने का नाटक करते हुए बोली,,,)
क्या कर रही हो दीदी इस तरह से तो तुम एकदम नंगी हो जाएगी समझे एकदम जवान है उसके सामने कपड़े उतार कर नंगी होना क्या उचित है,,,,
तुम तो खामखा डर रही हो आराधना तुम्हें अपने बेटे के सामने कपड़े उतार कर नंगी होने में किस बात का डर लग रहा है कि कहीं तुम्हारा बेटा नंगी औरत को देखकर अपना लंड चूत में ना डाल दे,,,,
हाय दैया कैसी बातें कर रही हो दीदी,,,, कुछ तो शर्म करो,,,, संजू यहां मौजूद हैं,,,,
देख आराधना तुझे ऐसा लगता है कि अगर कपड़े उतार कर कोई बेशर्म बन जाता है तो यह तेरी गलतफहमी है मौके की नजाकत को समझने की कोशिश कर संजू के यहां होने से हम दोनों पूरी तरह से सुरक्षित है उसके होने से हम दोनों अपने कपड़े उतार सकते हैं और सर्दी-जुकाम से बच सकते हैं,,,,, देख तुझे शर्म आ रही है तो अपनी नजर घुमा ले,,,,(और इतना कहने के साथ ही साधना अपनी पेंटी को धीरे-धीरे उतारना शुरू कर दी ,,,, संजू और साधना तबीयत खराब होने का जो मामूली सा बहाना पेश कर के कपड़े उतार कर अपनी बेशर्मी का नमूना पेश कर रहे थे इस तरह की वाहियात बातों को अच्छी तरह से समझ रही थी और इसमें आराधना को अपना भी भला नजर आ रहा था इसलिए वह ज्यादा जोर देना ठीक नहीं समझी,,,, और साधना धीरे-धीरे करके बेशर्मी की सारी हदें पार करते हो अपनी बहन की आंखों के सामने ही अपनी चड्डी उतार कर एकदम नंगी हो गई और अपनी बहन के साथ साथ संजू की मदहोशी को बढ़ाते हुए वह दोनों की आंखों के सामने ही अपनी चड्डी को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे नीचोड़ते हुए उसमें से पानी गीराने लगी,,,,, पेंट में से टपकते हुए पानी को देखकर संजू के मुंह में पानी आ रहा था और आराधना इस तरह के दृश्य को देखकर उत्तेजना से पानी पानी हुई जा रही थी,,,,, पलक झपकते ही साधना मां बेटे दोनों की आंखों के सामने एकदम नंगी हो चुकी थी और अपनी मौसी को नंगी देखकर उसकी मदमस्त कर देने वाली जवानी को अपनी आंखों से देख कर संजू का लंड और ज्यादा कड़क हो गया था जो कि पूरी तरह से चड्डी में तंबू बनाया हुआ था,,,,, अपनी छोटी बहन को लाइन पर लाने की शुरुआत साधना ने कर चुकी थी इसलिए एकदम खुश होते हुए अपनी जगह पर बैठ गई और उसके बेटे के साथ ही संजू भी अपनी जगह पर ठीक उसके सामने बैठ गया और जिस तरह से साधना बेठी थी उसकी चूत एकदम खुली हुई नजर आ रही थी जिस पर संजू की नजर बराबर पड रही थी और उसे देख कर उसके मुंह में पानी आ रहा था,,,,।
आराधना के मन में भी यही चल रहा था कि जिस तरह से उसकी बड़ी बहन बेठी हुई थी संजू को जरूर उसकी चूत नजर आती होगी और यही तसल्ली के लिए वह अपनी नजर को अपनी बहन की दोनों टांगों के बीच हल्कै से घुमाते हुए देख ली थी और उस नजारे को देखकर वह खुद भी एकदम मदहोश हो गई,,,,,, अपनी बहन की हरकत पर आराधना की खुद की हालत खराब हो रही थी वह भी जल्द से जल्द अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो जाना चाहती थी बस इशारे की ताक में लगी हुई थी,,,,।
अब कैसा लग रहा है मौसी,,,(दोनों हाथ को जलती हुई आग की तपन में फैलाते हुए संजू बोला)
सच में अब बहुत सुकून मिल रहा है,,,,,, वरना गीले कपड़े में अजीब भी लग रहा था और ठंड भी लग रही थी,,,,
देख नहीं रही हो मम्मी को अभी भी ठंडी लग रही है,,,,
तो क्या करूं मैं भी दीदी की तरह नंगी हो जाऊं क्या,,,,,
तो क्या आराधना तू भी पागल हो रही है देख नहीं रही है तुझे ठंड लग रही है,,,, कपड़े उतार कर आग ताप ले सही हो जाएगा,,,,,,,,।
(तभी बादलों की गड़गड़ाहट एकदम तेज होगी जिससे आराधना एकदम से घबरा गई,,,, बरसात का जोर लगातार बढ़ता जा रहा था और ऐसे ना चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा छाया हुआ था तेज चलती हवाओं के साथ बरसात और भी ज्यादा भयानक नजर आ रही थी और ऊपर से बादलों की गड़गड़ाहट सब मिलाकर माहौल को पूरी तरह से डरावना बनाया हुआ था लेकिन खंडहर के अंदर का वातावरण ठंडक में भी गर्माहट दे रहा था क्योंकि एक खूबसूरत औरत अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी बैठी हुई थी जिसे देखकर संजू के तन बदन में आग लग रही थी,,,,, कुछ देर सोचने के बाद आराधना बोली,,,)
लेकिन संजू के सामने,,,,,,
तो क्या हुआ आराधना संजू कोई गैर तो है नहीं अपना ही बेटा है और उसके सामने कपड़े उतार कर नंगी होने में झिझक कैसी देख नहीं रही है मैं कैसे अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गई हुं,,,,,, और ऐसा भी तो नहीं है कि संजू बाहर सबको बता देगा कि हम दोनों ने उसके सामने कपड़े उतार कर नंगी हो गए,,,, संजू की जगह कोई और लड़का होता तो शायद इस बात का डर हम दोनों के मन में होता लेकिन संजू तो घर पर हैं इससे डरने की या शर्माने की जरूरत नहीं है,,,,
हां मम्मी जिस तरह से मौसी मेरे सामने कपड़े उतार कर नंगी हो गई तुम भी अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो जाओ तुम्हारे भले के लिए ही तो कह रहे हैं,,,,,,
मुझे शर्म आ रही है,,,,,
इसमें शर्माने की कौन सी बात है,,,,, शर्म तो मुझे भी आनी चाहिए मौसी को भी आनी चाहिए लेकिन जरूरत के मुताबिक कपड़े उतारना जरुरी है वरना तबीयत खराब हो जाएगी,,,,,
हां आराधना तू बेकार में जिद कर रही है,,,,,
अच्छा तुम दोनों कहते हो तो मैं भी उतार देती हूं लेकिन इस बात को किसी से कहना नहीं,,,,
तू पागल हो गई है क्या तू मेरी छोटी बहन है और संजू तेरा बेटा है भला हम दोनों इस बात को किसी को कैसे बता सकते हैं इसमें तो परिवार की ही बदनामी है ना,,,
हां बात तो ठीक है,,,,(इतना कहने के साथ ही आराधना भी अपनी जगह पर खड़ी हो गई थी वह भी अपने कपड़े उतारने के लिए तैयार हो चुकी थी जिसके लिए वह अंदर ही अंदर तड़प रही थी बस सिर्फ बाहर से दिखावा कर रही थी,,,, अपनी मां को खड़ी हुई देखते ही संजू की आंखों के सामने दोनों औरतों की चूत नजर आने लगी थी दोनों की बड़ी बड़ी गांड नाचते हुए उसे दिखाई देने लगी थी वह आने वाले पल के लिए एकदम उत्साहित हो गया था वह समझ गया था कि जब दोनों की चूत में एक साथ लंड डालने का समय आ गया है,,,,, आराधना भी अपनी बड़ी बहन की तरह नंगी हो जाना चाहती थी अपने बेटे के लंड को अपनी चूत में महसूस करना चाहती थी अपनी बहन के साथ इस खंडहर में मजा लेना चाहती थी इसलिए वह अपने साड़ी के पल्लू को अपने कंधे से शर्माते हुए नीचे गिरा दी और अपने दोनों हाथ को अपने ब्लाउज पर रखकर बटन खोलने की तैयारी करने लगी जिसे देखकर संजू के लंड की अकड़ बढ़ने लगी और साधना की चूत से काम रस टपकने लगा,,,,।