Incest मजबूरी या जरूरत - Page 8 - SexBaba
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Incest मजबूरी या जरूरत

ठीक समय पर संजू मनीषा के घर पर पहुंच चुका था दरवाजे पर दस्तक देने पर मनीषा खुद दरवाजा खोलकर संजू का अभिवादन की थी और साथ में साधना भी थी जितनी खुशी मनीषा को संजू को देखने पर हो रही थी उतनी ही खुशी साधना को भी हो रही थी क्योंकि जब जब संजू घर पर आया था तब तब मौका निकाल कर उसके साथ चुदाई का सुख भोग कर चला जाता था और उसे भी पूरी तरह से तृप्त कर जाता था और इसी उम्मीद में आज भी साधना थी,,,,

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संजू के लिए दोनों मां बेटी बहुत खास थी साधना के साथ वह पहले ही संभोग सुख और संभोग का अध्याय सीख चुका था कहा जाए तो उचित ही रहेगा की साधना ही उसकी संभोग अध्याय पढ़ाने में शिक्षिका का ही पाठ कर रही थी,,,, मनीषा के साथ उसकी शुरुआत की और वो जानता था कि जितना मजा उसे सफर में आ रहा है मंजिल पर पहुंचने में उतना ही मजा आएगा,,,, मनीषा से नजर बचाकर व पहले ही साधना की गांड पर अपना हाथ पैर चुका था जो कि इस बात का साधना को दिलासा दे रहा था कि उसका जरूर कुछ ना कुछ वह करेगा मनीषा एक खूबसूरत फ्रॉक पहनी हुई थी जो उसके घुटनों से थोड़ी सी नीचे आ रही थी और इस फूलों वाली ड्रेस में वह आसमान से उतरी हुई परी नजर आ रही थी,,, संजू को अपने घर पर डिनर पर बुलाने का मनीषा का कोई इरादा नहीं था लेकिन जिस तरह की हरकत कोचिंग क्लास में संजू ने उसके साथ किया था उसे देखते हुए मनीषा पूरी तरह से संजू के प्रति आकर्षित हो गई थी उसका लगाव संजू की प्रति और ज्यादा बढ़ने लगा था वह इसी खुशी में संजू को अपने घर खाने पर बुलाई थी और एकाएक घर पर जाकर सारे इंतजाम भी कर दी थी,,,,,,,,,

संजू अपने मौसा जी से अपने होशो हवास में पहली बार मिल रहा था वह अपने मौसा जी को ठीक से जानता नहीं था इसलिए अपने मौसा जी को देखकर उनका पैर छूकर आशीर्वाद लिया और एक ही नजर में अपने मौसा जी के बदन के भूगोल के बारे में अच्छी तरह से जांच पड़ताल कर लिया था,,, मौसी की खूबसूरती और बदन के बनावट के मुकाबले में मौसा जी एकदम ढीले ढाले मोटे और बड़ी सी तोंद वाले थे उनके हालत को देखकर संजू को समझते देर नहीं लगी की मौसी क्यों उसके घर आकर चुदवा कर जाती है क्योंकि देखने पर ही पता चल रहा था कि उसके मौ‌सा इस हालात में बिल्कुल भी नहीं थे कि मौसी की गर्म जवानी पर काबू पा सके और यही असली वजह था की मौसी बार-बार संजू के पास आती थी,,,,,,,,

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बैठो संजू मैं चाय लेकर आती हूं,,,,

अब चाय क्यों अब तो खाने का समय हो गया है ना,,,

अरे हां मैं भी कितनी बुद्धू हूं खाने पर बुलाकर चाय को पूछ रही हूं,,,,

कोई बात नहीं मनीषा दीदी ऐसा हो जाता है,,,, वैसे तुम इस फ्रॉक में आसमान से उतरी हुई परी लग रही हो,,,

(मनीषा अपनी खूबसूरती की तारीफ संजू के मुंह से सुनकर एकदम गदगद हो गई उसके होठों पर मुस्कान तेरे लगी और वह मुस्कुराते हुए अपनी मां को आवाज देते हुए बोली)

मम्मी सब कुछ तैयार है तुम भी आ जाओ साथ में मिलकर खाते हैं,,,

अरे हां भाई साथ में खाने का मजा ही कुछ और होता है,,,(सामने सोफा पर बैठ कर न्यूज़पेपर पर नजर मारकर उसे बगल में रखते हुए मनीषा के पिताजी बोले और अपनी जगह से खड़े होकर डाइनिंग टेबल की तरफ जाने लगे,,,, जो हरकत घर में प्रवेश करते समय संजू ने साधना के साथ किया था वही हरकत संजू अपने मौसा जी से नजर बचाकर मनीषा की गांड पर अपने हाथ रख कर उसे हल्के से दबाते हुए किया और मनीषा एकदम से चौक गई और अपनी पिताजी की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए आंख निकाल कर संजू की तरफ देखने लगी,,,,)

कुछ तो ख्याल करो,,,(एकदम धीमे स्वर में मनीषा बोली)

तुम्हें देखकर बिल्कुल भी सब्र नहीं होता,,,

अरे भाई क्यों सब्र नहीं हो रहा है क्या बात है,,,(मनीषा के पिताजी डाइनिंग टेबल के आगे से एक कुर्सी को खींच कर उस पर बैठते हुए बोले तो संजू भी एकदम से हड़बड़ाहट भरे स्वर में बोला )

ककक कुछ नहीं मौसा जी,,,, खाने से इतनी खुशबू आ रही है कि सब्र नहीं हो रहा है,,,

तो आओ बेटा देर किस बात की है,,,

थैंक्यू मौसा जी,,,,(इतना कहने के साथ ही संजु। भी डाइनिंग टेबल के नीचे से एक कुर्सी खींच लिया और उस पर बैठ गया तब तक साधना भी आ गई और वह भी अपने पति के साथ बैठ गई और मनीषा सब को खाना निकाल कर देने लगी ,,, थोड़ी ही देर में सब लोग बैठ कर खाना खाने लगे मनीषा संजू के पास बैठी हुई थी इसलिए संजू इस तरह का मौका जाने नहीं देना चाहता था अपनी मौसी और मौसी की नजर बचाकर वो अपना एक आदमी से ले जाकर के मनीषा की जान पर रखकर उसकी गोरी गोरी चिकनी जांघों को सहलाने लगा मनीषा संजू की हथेली को अपनी जान पर महसूस करते ही एकदम उत्तेजना से गनगना गई लेकिन रो घुटनों तक होने की वजह से अभी तक संजू फ्रॉक के ऊपर से ही उसकी जान पर हाथ रखा था जिसे मनीषा हटाने की कोशिश कर रही थी लेकिन संजू मान नहीं रहा था और मनीषा ज्यादा कुछ करती तो हो सकता था कि उसके मम्मी पापा को शक हो जाता इसलिए वह ज्यादा कुछ करने नहीं देना चाहती थी,,, देखते ही देखते संजू अपनी हथेली को उसकी फ्रॉक के अंदर डालने लगा फ्रॉक धीरे-धीरे ऊपर की तरफ सरकने लगी,,,, अब संजू की हथेली मनीषा की नंगी चिकनी जागो पर थी गोरी गोरी मुलायम मक्खन जैसी चिकनी और सपाट जांघ पर एक मर्दाना हथेली को महसूस करते ही मनीषा के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी उसकी चूत अंदर ही अंदर पानी पानी होने लगी,,,,।

क्या कर रहे हो,,,(चम्मच से खीर को खाते हुए धीरे से संजू से मनीषा बोली,,, लेकिन जवाब में संजू कुछ बोला नहीं बस खाने का लुफ्त उठाते रहा संजू की हरकत से पूरी तरह से अनजान साधना और उसका पति स्वादिष्ट खाने का मजा ले रहे थे,,,, बीच-बीच में साधना बात भी कर रही थी जिसका जवाब संजू बड़े आराम से दे रहा था ऐसा लग ही नहीं रहा था कि टेबल के नीचे वह अपनी कामुक हरकत दिखा रहा है,,,,

मनीषा के बदन में उत्तेजना के साथ-साथ कसमस आहार बढ़ती जा रही थी जवानी की चिकोटि उसके बदन को अपनी आगोश में ले रही थी,,,, रह रहकर एकदम से चौंक जाती थी लेकिन पूरी तरह से अपने जज्बात पर काबू किए हुए वहां अपने मम्मी पापा को बिल्कुल भी शक होने देना नहीं चाहती थी,,,,

खीर के साथ-साथ संजू मनीषा की नमकीन जवानी का भी स्वाद ले रहा था,,, संजू की हरकत की वजह से मनीषा पूरी तरह से पानी पानी हो जा रही थी उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी वारे लेकर गहरी सांस लेने लगती थी लेकिन फिर अपने आप पर काबू करके अपने आप को दुरुस्त कर लेती थी लेकिन संजू की हरकतें पूरी तरह से जा रही थी उसकी चूत पानी छोड़ रही थी जिसकी वजह से उसकी पेंटी गीली होती चली जा रही थी और देखते ही देखते संजू अपना हाथ ऊपर की तरफ ले जाते हुए उसकी पेंटी तक पहुंच गया जैसे ही संजू ने अपनी हथेली पर मनीषा की पेंटी के बीचो बीच उसकी चूत के ऊपरी हिस्से पर रखा मनीषा के तन बदन में आग लग गई वह एकदम से कसमसा गई और पल भर के लिए एकदम से दोनों हाथों की कोहनी को डायनिंग टेबल पर रख कर गहरी सांस लेने लगी यह देखकर साधना बोली,,,।

क्या हुआ मनीषा,,,?

ककतक कुछ नहीं मम्मी,,,, जल्दी जल्दी खीर खाने लगी ना सांस अटक गई,,,,

तो पानी पी लो,,,(इतना कहने के साथ ही साधना खुद पानी का गिलास अपने हाथ में लेकर मनीषा की तरफ आगे बढ़ा दी जिसे मनीषा अपने हाथ में लेकर पीना शुरू कर दी और नीचे संजू की हरकत बढ़ने लगी,,,, मनीषा संजू पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पा रही थी उसे रोक नहीं पा रही थी ऐसे हालात में वह कुछ करने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं थी अपनी मम्मी पापा की नजरों के सामने ज्यों का त्यों बैठी हुई थी लेकिन उसके मम्मी पापा को इस बात का बिल्कुल भी आभास तक नहीं था कि टेबल के नीचे संजू उसकी लड़की की गर्म जवानी से खेल रहा है,,,,।

खाना कौन बनाया है मौसी,,,,

हम दोनों ने मिलकर ही बनाया है क्यों क्या हुआ,,,

बहुत स्वादिष्ट खाना है खास करके यह खीर,,,,(चम्मच से खीर को मुंह में डालते हुए संजू बोला तो साधना मुस्कुराते हुए बोली)

खीर तो मनीषा ने ही बनाई है,,,

वाह क्या बात है मनीषा दीदी के हाथों में तो जादू है,,,, मुझे थोड़ी खीर और चाहिए,,,,

हां बेटा क्यों नहीं,,,,,(इतना कहने के साथ ही साथ देना अपनी जगह से उठ कर खड़ी हो गई और खीर निकालकर संजू की कटोरी में डालने लगी है फिर वापस अपनी जगह पर बैठ गई दूसरी तरफ संजू की हरकतें जारी थी देखते देखते संजू अपनी हथेली पर है मनीषा की पेंटी के अंदर डाल दिया और उसकी नंगी चूत पर हाथ रखते ही उसकी गर्माहट महसूस करके संजू का लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया,, और दूसरी तरफ मनीषा के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी वह अपने आप पर काबू नहीं कर पा रही थी बड़ी मुश्किल से वह अपने मम्मी पापा के सामने अपने आप पर काबू किए हुए थी,,,, मनीषा को ऐसा लग रहा था कि जैसे संजू कोचिंग क्लास में उसको आगे न बढ़ने देने का बदला ले रहा है,,,, मनीषा की चूत के गीलापन को अपनी उंगली पर महसूस करते हुए संजू बोला)

गीली खीर मुझे बहुत अच्छी लगती है,,, मौसी,,,,

सच कहा तूने संजू जब तक हीर गीली ना हो तब तक खाने का मजा ही नहीं आता,,,, उसे जिस तरह से भी खाओ चम्मच से या मुंह लगाकर मजा बराबर देता है,,,,

सच कह रही हो मौसी जब तक मुंह लगाकर पिया ना जाए तब तक मजा नहीं आता,,,(और इतना कहने के साथ ही संजू ने खीर की कटोरी उठा लिया और अपने मुंह से लगाकर पीना शुरु किया और दूसरी तरफ अपनी ऊंगली को सीधे मनीषा की चूत में डाल दिया एकाएक हुए हमले से मनीषा एकदम से चौंक गई और उसके मुंह से हल्की सी चीख निकल गई,,,)

आहहह,,,,

क्या हुआ मनीषा,,,,

अरे मम्मी मच्छर गर्दन पर मच्छर ने काट लिया,,,(अपना हाथ गर्दन पर रखकर जानबूझकर खुजाने का नाटक करते हुए मनीषा बोली और संजू मन ही मन मुस्कुराने लगा और देखते ही देखते धीरे-धीरे अपनी बीच वाली उंगली को मनीषा की चुत मैं अंदर बाहर करना शुरू कर दिया मनीषा कुछ कर सकने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं थी अब देखते ही देखते वह संजू की उंगली का मजा लेने लगी जिंदगी में पहली बार किसी अनजान उंगली को अपनी पूर्व में प्रवेश कराने का उसने इजाजत दी थी जो कि वह संजू मनीषा से उसकी इजाजत मांगा नहीं था बल्कि मनमानी करता हुआ अपनी उंगली उसकी चूत में डाल दिया था चूत के अंदर पूरी तरह से गर्म माहौल था जिसमें उसकी उंगली पूरी तरह से तप रही थी लेकिन संजू को पूरी तरह से मजा आ रहा था संजू का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में,, आ चुका था,,,,, संजू को तो उंगली से ही बहुत मजा आ रहा था वह पूरी तरह से मनीषा को मजा दे रहा था एक तरफ स्वादिष्ट व्यंजन था दूसरी तरफ स्वादिष्ट रसीली चूत थी दोनों का मजा संजू बराबर ले रहा था,,,,।

संजू की हिम्मत देखकर खुद मनीषा आश्चर्यचकित हो गई थी वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसके मम्मी पापा के सामने बैठकर संजू इस तरह की हरकत करेगा और उसकी हरकत का ब खुद मजा ले रही थी,,, देखते ही देखते समझू अपनी-अपनी को मनीषा की चूत में जल्दी-जल्दी अंदर बाहर कर रहा था वह इस तरह से अपने हाथ को नीचे लेकर गया था कि साधना और उसके पति को बिल्कुल भी शक नहीं हो पा रहा था किस समय मनीषा के लिए संजू की वह पतली उंगली भी लंड के समान थी,,,, देखते ही देखते मनीषा के पिताजी ने खाना खा लिया और साधना भी अपना खाना खत्म करने वाली थी मनीषा की जानबूझकर बैठी हुई थी वरना वह भी खा चुकी थी क्योंकि वह संजू की उंगली का मजा ले रही थी और संजू जानता था कि अगर दोनों उसके मौसा और मौसी उठ गए तो वह मनीषा को फिर से अधूरा ही छोड़ देगा इसलिए वह जल्दी जल्दी अपनी उंगली को मनीषा की चूत के अंदर बाहर करने लगा और देखते ही देखते मनीषा अपने दोनों हाथों की कोहनी को टेबल पर टिका कर गहरी गहरी सांस लेते हुए पानी छोड़ दी वह पूरी तरह से झड़ चुकी थी जिसका एहसास संजू को भी अपनी हथेली और उंगली पर हो रहा था उसकी चूत से निकला हुआ मदन राज पूरी तरह से उसकी हथेली को भिगो दिया था,,,,,

झड़ जाने के बाद मनीषा को ऐसा ही लग रहा था कि संजू अब अपना हाथ ऊपर ले लेगा लेकिन संजय के मन में कुछ और चल रहा था संजू इस अद्भुत डिनर के लिए अपने पास मनीषा की निशानी रख लेना चाहता था इसलिए वह छत पर से अपना हाथ हटाकर उसकी पैंटी को पकड़कर नीचे की तरफ खींचने लगा हुआ उसकी पैंटी उतारना चाहता था यह अहसास होते ही संजू की तरफ मनीषा थोड़ा सा आंख निकाल कर देखी और संजू मुस्कुराते हुए बिना मनीषा की तरफ देखें बोला,,,,

आज की रात का डिनर मैं जिंदगी भर नहीं बोलूंगा इसीलिए यादगार के तौर पर कुछ तो चाहिए ही ना,,,

(मनीषा के मम्मी पापा संजू की बात को नहीं समझ पाए थे लेकिन मनीषा समझ गई थी संजू लगातार पेंटी को नीचे की तरफ खींच रहा था लेकिन मनीषा की गांड के नीचे दबा होने की वजह से वह निकल नहीं पा रही थी इसलिए मनीषा आई पानी लेने के बहाने थोड़ा सा ऊपर की तरफ उठी और हाथ आगे बढ़ाकर पानी का गिलास लेने लगी और इसी मौके का फायदा उठाते हुए संजू फुर्ती दिखाते हुए तुरंत मनीषा की पेंटिं को उसकी गोल-गोल गांड से अलग करते हुए नीचे की तरफ खींचने लगा और देखते ही देखते मनीषा की पेंटिं घुटनों तक आ गई जिसे मनीषा खुद अपने हाथ से नीचे की तरफ करके उसे अपने कदमों में गिरा दिया और धीरे से अपने दोनों पैरों को एक-एक करके पेंटिं के अंदर से बाहर निकाल ली और संजू भी एक बहाने से नीचे चम्मच गिरा दिया और चम्मच उठाने के बहाने नीचे झुक कर मनीषा की काम रस से भीगी हुई पेंटी को उठाकर अपनी जेब में भर लिया,,,, और हाथ में लगे काम रस को खीर के रस का बहाना बताते हुए वह अपनी मौसी और मौसी से बोला,,,,।

संजू इस तरह से मनीषा की पंतय निकाला

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आज का यह दिन मैं जिंदगी भर नहीं भूलूंगा और खास करके मनीषा की बनाई हुई खीर मेरा तो उंगली चाटने का मन कर रहा है,,,(और इतना कहने के साथ ही मनीषा की आंखों के साथ-साथ उसके मम्मी पापा की आंखों के सामने ही उसकी बेटी की चूत के काम रस से भीगी हुई उंगली को उन दोनों के सामने अपने मुंह में डालकर उसे एक-एक करके पांचों उंगली को चाटने लगा या देखकर मनीषा पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि सब क्या हो रहा है लेकिन संजू की यह हरकत उसे पूरी तरह से संजू का दीवाना बना दी थी,,, संजू को इस तरह से अपनी पांचवा ऊंगलीया चाटते हुए देखकर,, मनीषा के पापा बोले,,,।)

तुम्हें लगता है कि खीर कुछ ज्यादा ही पसंद आ गई है और चाहिए तो ले लो,,,,

नहीं नहीं मौसा जी आज पेट भर गया है किसी और दिन,,,

थोड़ी ही देर में डिनर खत्म हो गया मनीषा फ्रॉक के नीचे अब कुछ नहीं पहनी थी वह पूरी तरह से नंगी थी,,,,।

(वहां बिना पेंदी के ही फ्री जिसे आइसक्रीम देने के लिए गई और फ्रिज का दरवाजा खोलकर देखी तो अंदर आइसक्रीम नहीं थी इसलिए और किचन से बाहर आकर अपनी मम्मी से बोली,,)

क्या मम्मी तुमने आइसक्रीम नहीं बनाई थी,,,

अरे बेटी में तो पूरी तरह से भूल गई,,,,

अच्छा तुम लोग बैठो में,,, मैं लेकर आती हूं,,,

मैं भी चलूं मनीषा दीदी,,,

नहीं तुम यहीं बैठो मैं लेकर आ जाऊंगी,,,,(और इतना कहने के साथ ही मनीषा अपने कमरे में चली गई क्योंकि वह फ्रॉक के नीचे पेंट ही नहीं पहनी थी और अलमारी के ड्रावर में से जाकर एक पेंट निकाल कर उसे पहने ली और बाहर जाने लगी तभी साधना बोली,,,,

तू आइसक्रीम लेकर आ तब तक मैं छत पर से कपड़े उतार कर लाती हूं आज कपड़े उतारना भी भूल गई हूं,,,,

(इतना कहने के साथ ही अपनी जगह से उठते हुए साधना हाथ का इशारा करके संजू को अपने पीछे आने के लिए बोली संजू भी अपनी मौसी का इशारा समझ गया था और वह तुरंत उत्साहित होकर अपनी जगह से खड़ा हो गया क्योंकि अपनी हरकत की वजह से वह मनीषा का पानी तो निकाल दिया था लेकिन वह पूरी तरह से गर्म हो चुका था,, अपना गरम लावा निकालना उसके लिए भी जरूरी हो चुका था,,, साधना अच्छी तरह से जानती थी की मनीषा के पापा छत पर कभी नहीं आते और खास करके इस समय तो बिल्कुल भी नहीं आते इसलिए वह पूरी तरह से निश्चित ही थी और तुरंत दोनों सीढ़ियां चढ़कर ऊपर छत पर आ गए लेकिन संजू सेवा इशारे में ही सीढ़ी पर के दरवाजे को बंद करने को बोल दी थी,,, संजू ने भी ठीक वैसा ही किया था थोड़ी देर में दोनों छत पर आ गए थे छत पर तरह से अंधेरा छाया हुआ था अंधेरा इतना था कि किसी के भी देखे जाने की गुंजाइश बिल्कुल भी नहीं थी,,,,।

छत पर पहुंचते ही संजू ने तुरंत साधना को खींचकर अपनी बाहों में भर लिया और उसकी गर्दन पर चुंबनो की बारिश कर दिया,,,

ओहहहह संजू मेरे राजा जब पता चला कि तू आज खाने पर आने वाला है तो मैं खुशी से एकदम फूली नहीं समा रही थी कसम से मैंने मन में तय कर ली थी कि किसी ना किसी बहाने आज तुझसे चुदवा‌ कर ही रहुंगी इसीलिए तो मैं जानबूझकर आइसक्रीम नहीं लेकर आई थी मैं जानती थी कि आइसक्रीम लेने के लिए मनीषा जरूर जाएगी,,,

ओहहहह मौसी तुम कितनी चालाक हो,,,(इतना कहने के साथ ही संजू ब्लाउज के ऊपर से ही साधना की चूची को पकड़कर दबाना शुरू कर दिया तो साधना बोली,,,)

हाय मेरे राजा आज इतना समय बिल्कुल भी नहीं है आग तो नीचे लगी हुई है,,,(इतना कहते हुए साधना खुद संजू के कंधों को पकड़कर नीचे की तरफ झुक आने लगी संजू अपनी मौसी के मतलब को अच्छी तरह से समझ रहा था वह नीचे झुकते हुए अपने घुटनों के बल हो गया और बोला,,,)

मनीषा दीदी आ गई तो,,,

उसे आने में कम से कम 15 मिनट लगेगा और वह जब आएगी तो पता चल जाएगा क्योंकि गेट से ही तो आएगी और यहां से गेट नजर आ रहा है,,,(इतना कहते हुए साधना अपनी साड़ी को खुद ही अपने हाथों से उठाकर कमर तक उठा दी और अपनी दोनों टांगों को हल्के से फैलाते हुए बोली) देख इसलिए तो मैंने आज चड्डी भी नहीं पहनी हो ताकि सब कुछ जल्दी हो जाए,,,,(और इतना कहने के साथ ही साधना अपना हाथ संजू के सिर पर रखकर उसे अपनी तरफ खींच ली और उसके होंठ को अपनी चूत से लगा दी चूत से उठ रही मादक खुशबू से संजू पूरी तरह से मदहोश हो गया और तुरंत अपनी जीभ निकालकर अपनी मौसी की गुलाबी छेद में डाल दिया और चाटना शुरू कर दिया साधना पूरी तरह से खराब हो चुकी थी इसलिए उसकी चूत पानी पानी हो गई थी उसके गीले पन को अपनी जीत पर महसूस करते ही संजू भी मत वाला हो गया था और वह अपनी जीत के साथ-साथ अपनी दो उंगली भी अपनी मौसी की चूत में डालकर अंदर-बाहर करने लगा था मनीषा के साथ जिस तरह के अनुभव को महसूस करके वह पूरी तरह से उत्तेजित हुआ था उसके चलते वह अपनी मौसी को चोद कर पूरा कसर निकाल देना चाहता था इसलिए पागलों की तरह वह अपनी मौसी की चूत को चाट रहा था और उसमें उंगली अंदर बाहर कर रहा था,,,,।

ससस‌हहहह आहहहहह संजू मेरे बेटे और जोर-जोर से चाट आहहहहह आहहहहहहह ,,,, मेरे राजा,,,(इतना कहते हुए साधना खुद अपनी कमर को आगे पीछे करके हिलाना शुरू कर दी थी,,,, साधना की चूत का कसैला स्वाद और उसकी मादक खुशबू पूरी तरह से संजू को मदहोश कर रही थी,,, संजू का बस चलता तो साधना की चूत में घुस कर बैठ जाता,,,, कुछ देर तक संजू अपनी उंगली और अपनी जीभ से अपनी मौसी को मजा देता रहा समय की नजाकत को समझते हुए साधना तुरंत संजू का कंधा पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठाई हो खुद छत की दीवार पकड़कर सामने गेट की तरफ मुंह करके खड़ी हो गई वह अपने हाथों से ही अपनी साड़ी को कमर तक खींच कर उठाए हुए थे और अपनी बड़ी बड़ी गांड को तोप की तरह हवा में लहरा दी थी,,, छत पर अंधेरा इतना था कि कुछ ठीक से नजर नहीं आ रहा था लेकिन संजू अपनी मौसी के अंग से पूरी तरह से वाकिफ था इसलिए उसे ज्यादा मशक्कत उठाने नहीं पढ़े सुबह तुरंत अपने जींस का बटन खोल के उसे घुटनो तक नीचे खींच लिया और अपने खड़े लंड को जो कि मनीषा की वजह से पूरी तरह से तैयार हो चुका था उसके सुपाड़े से अपनी मौसी के गुलाबी छेद को टटोलकर वह एक झटके में ही पूरा का पूरा लंड अपनी मौसी की चूत में डाल दिया काफी दिनों बाद साधना अपने भतीजे के लंड को अपनी चूत की गहराई में महसूस कर रही थी इसलिए पूरी तरह से मदहोश हो‌ गई,,,, हल्की सी आहहह के साथ वह संजू से चुदवाने का मजा लेने लगी संजू अपनी कमर आगे पीछे करके अपनी मौसी को चोदना शुरू कर दिया और गेट पर नजर रखे हुए था,,,, मनीषा की जवानी की गर्मी से गर्म हो चुका संजू मनीषा की मम्मी से अपनी जवानी की गर्मी को शांत कर रहा था,,,, मनीषा की चूत को उंगली से चोदने में भी संजु को अद्भुत आनंद की प्राप्ति हुई थी,,, मनीषा की चूत में उंगली डालने पर ही संजू समझ गया था कि अब तक मनीषा है कम कुंवारी थी क्योंकि उसकी चूत एकदम कसी हुई थी,,,,,।

आहहहह आहहहह संजू और जोर से संजू आहहहह

मैं समझता हूं मौसी,,,(तेज तेज धक्के लगाते हुए) मौसा जी को देखकर मैं समझ गया कि तुम्हारी जवानी की गर्मी काबू कर पाना उनके बस में बिल्कुल भी नहीं है,,,

तभी तो मैं तेरे पास आती हूं तेरा मोटा तगड़ा लंड मेरी चूत की प्यास बुझाने में पूरी तरह से सक्षम है सच कहूं तो मनीषा के पिताजी का तो खड़ा ही नहीं होता खड़ा भी होता है तो 1 मिनट में पानी छोड़ देता है तू ही सोच ले मेरे उम्र की गर्म औरत पैसे पति का सहारा लेकर कब तक अपने गर्म जवानी को दबाती फिरेगी,,,,

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तुम सच कह रही हो मौसी,,,

(अपनी मौसी किस तरह की बातें सुनकर संजू फिर से पूरी तरह से गर्म हो चुका था और धक्के पर धक्के लगा रहा था साधना की बड़ी बड़ी गांड कि ठाप संजू की जांग टकराने से और ज्यादा बढ़ जा रही थी जिससे छत के ऊपर एक मधुर संगीत घूम रही थी जिसे सुनने वाला और देखने वाला कोई नहीं था,,,, देखते ही देखते साधना की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी और वहां उत्तेजना के चलते अपनी बड़ी बड़ी गांड को पीछे की तरफ ठेलने लगी संजू समझ गया कि उसका पानी निकलने वाला है इसलिए वह तुरंत अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर ब्लाउज के ऊपर से भी अपनी मौसी की चूची पकड़ कर जोर जोर से धक्का लगाने शुरू कर दिया और देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ गए और उन दोनों के झड़ने के बाद जैसे ही वह दोनों अपने कपड़ों को दुरुस्त कर रहे थे वैसे ही,,, मनीषा की स्कूटी की लाइट नजर आई और वह दोनों पूरी तरह से सचेत हो गए साधना पहले से ही छत के कपड़ों को इकट्ठा करके एक जगह रख ली थी और तुरंत संजू को वह कपड़े उठाकर लाने के लिए बोली और वह अपनी बड़ी बड़ी गांड मटकाते हुए सीढ़ी से नीचे उतरने लगी और पीछे पीछे संजू हाथ में कपड़ों का ढेर लिए नीचे उतर रहा था जैसे ही संजू ने कपड़ों के ढेर को कमरे में ले जाकर रखा जैसे ही दरवाजे पर दस्तक होने लगी हो खुद संजू जाकर दरवाजा खोला और सामने मनीषा को देख कर मुस्कुराने लगा और धीरे से बोला,,।

बिना पेंटी के चली गई थी क्या,,,

पागल थोड़ी हूं पहन कर गई थी,,,।

(और थोड़ी ही देर में चारों ने मिलकर आइसक्रीम का लुफ्त उठाया और मनीषा और साधना दोनों दरवाजे तक संजु को छोड़ने के लिए आई,,, संजू एक आदर्श पुरुष की व्याख्या प्रस्तुत करते हुए अपनी मौसी के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और साधना ने भी उसे जुग जुग जीने को आशीर्वाद दी,,,, तभी फोन की घंटी बजने लगी और साधना घर में चली गई मौका देखते ही समझू आगे बढ़ा और मनीषा को उसकी कमर पकड़कर अपनी तरफ खींचते हुए उसके लाल-लाल होठों पर अपने होठ रख दिया और उसके होठों का रस पीने लगा मनीषा उसी से छूटने का प्रयास करने लगे लेकिन संजू की भुजाओं में कुछ ज्यादा ही धंधा लेकिन चुंबन का मजा मनीषा को भी आ रहा था थोड़ी देर में संजू ने उसे मुस्कुराते हुए छोड़ दिया ,,,, तो मनीषा उससे बोली।

मेरी पैंटी तो मुझे वापस कर दो,,,

नहीं वह तो मैं नहीं करने वाला उसे में अपने साथ लेकर जाऊंगा

क्या करोगे मेरे पेंटिं का,,,

उसमें तुम्हारी चूत की खुशबू बसी हुई है तुम्हारा काम रस लगा हुआ है जब भी मन करेगा उसे अपने सीने से लगाकर अपनी नाक से लगाकर उसकी खुशबू अंदर लूंगा,,, और जब तुम्हारी चूत की खुशबू पाकर मेरा लंड खड़ा हो जाएगा तब तुम्हारी पेंटी को मेरे लंड पर लपेटकर हिला लूंगा,,,,

(संजू की इस तरह की गंदी बातें सुनकर और खास करके अपनी पेंटी के साथ संजू यह सब करेगा उसे सुनकर वह एकदम हैरान हो गई थी और आश्चर्य से बोली)

बाप रे तुम्हारा भोला चेहरा देखकर कोई कह नहीं सकता कि तुम अंदर से कितने शैतान हो,,,,

‌ कुछ नहीं पहले ऐसा मैं बिल्कुल भी नहीं था लेकिन तुम्हारी चूत की खुशबू पाकर में बावला हो गया हूं,,,

चलो अब जाओ यहां से देर हो रही है,,,

मनीषा की बात सुनकर संजू मुस्कुराने लगा और बाय कह कर अपने घर की तरफ निकल गया,,,,
 
मनीषा के घर डिनर करते समय जो कुछ भी हुआ था उससे संजू बहुत ज्यादा उत्साहित था वह इसलिए ज्यादा खुश और उत्साहित है कि अब मनीषा भी उसके नीचे कभी भी आ सकती थी क्योंकि संजू ने अपनी हरकतों से उसे भी पूरी तरह से गर्म कर दिया था और अपने हाथ से उसके मम्मी पापा के यहां आंखों के सामने ही उसकी पेंटिंग निकालकर अपनी जेब में रख लिया था जो कि उसे डिनर के यादगार की निशानी थी,,,,,, मनीषा के साथ इस तरह की हरकत करने वाला संजू पहला लड़का था इससे पहले उसके जीवन में कोई भी मर्द का प्रवेश नहीं हुआ था और मनीषा चाहती भी नहीं थी लेकिन संजू के व्यक्तित्व से वह पूरी तरह से प्रभावित हो चुकी थी और ना चाहते हुए भी वह संजू के प्रति आकर्षित हो चुकी थी जिसके चलते वह संजू की हरकतों को रोकने के बजाय उन हरकतों का पूरी तरह से आनंद ले रही थी,,,,।

आराधना और संजू

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दूसरी तरफ आराधना अपने ही बेटे के नौ से अपने पति की करतूत के बारे में सुनकर परेशान सी रहने लगी थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह अपने पति के लिए बेवफा नहीं बनना चाहती थी लेकिन उसका पति उसके साथ बेवफाई कर रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसके जीवन की राह उसे किस और ले जाएगी बार-बार उसके जेहन में उसकी बड़ी बहन की कही बात दोस्ती रहती थी कि औरतों को अपने लिए भी जीना चाहिए आराधना को अब उसके कहने के मतलब को अच्छी तरह से समझ में आने लगा था,,,, एक तरह से उसकी बड़ी बहन ने उसे इशारों में ही सब कुछ बता दी थी कि मर्दों का कोई भरोसा नहीं होता मर्द इधर उधर मुंह मारते फिरते रहते हैं और औरत उनके इंतजार में तिल तिल तड़पती रहती है आहे भर्ती रहती है और अपनी बेवफा पति के चरणों में उनकी सेवा में अपना जीवन तबाह कर लेती है,,,, और ऐसा ही तो आराधना के साथ भी हो रहा था वह इस इंतजार में थी कि उसका पति एक दिन जरूर उसके पास आएगा उसकी आंख खुलेगी और वह अपने परिवार पर फिर से बिखर जाएगा लेकिन ऐसा बिल्कुल भी हो नहीं रहा था,,, अपने पति की बेवफाई से आराधना के तन बदन में रह रहकर क्रोध की ज्वाला भड़क जा रही थी फिर अपने आप को ही मनाते हुए अपने आप को शांत करने की कोशिश करती थी वह अच्छी तरह से जानती थी कि वह कुछ भी कर ले अपने पति को समझा नहीं सकती,,,, ,,, अपने जीवन के बारे में और अपने पति के बारे में सोचते हुए तकरीबन 1 सप्ताह गुजर गया लेकिन वह‌ अपनी बेटी से गेस्ट हाउस वाली बात पूछ नहीं पाई थी,,,, ऐसे ही एक दिन खाना बनाते समय वह अपनी बेटी से बोली,,,।

अरे मोहिनी तूने अपने पापा को गेस्ट हाउस में जाते हुए देखा था क्या,,,?(आराधना जानबूझकर मोहिनी से एकदम औपचारिक ढंग से पूछ रही थी ताकि मोहिनी को बिल्कुल भी शक ना हो जबकि सच तो यह था कि मोहिनी सब कुछ जानती थी और उसके भाई ने उसे सब कुछ समझा दिया था कि उसे क्या कहना है)

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हां मम्मी उस दिन जब मैं और भैया किताब लेने गए थे तो एक रेस्टोरेंट में बैठ कर नाश्ता कर रहे थे तब मैंने पापा को देखी थी,,,,

तेरे पापा वहां क्या कर रहे थे,,,

पापा ऑटो में से एक लड़की के साथ उतरे और गेस्ट हाउस में चले गए,,,,,,,(मोहिनी अपनी मां के चेहरे पर साफ तौर पर देख पा रही थी कि यह सवाल पूछते समय वह अपने चेहरे पर जानबूझकर सहज भाव ला रही थी जो कि उसके चेहरे पर सहज भाव होने के बावजूद भी चिंता के बादल नजर आ रहे थे और यही तो मोहिनी भी चाहती थी कि गेस्ट हाउस वाली बात को उसकी मां गहराई से समझें और अपने जीवन में एक नया रास्ता चुने,,,)

कुछ काम से,,,,!

हां भैया बता रहे थे कि बिजनेस के सिलसिले में यही मीटिंग होती है,,,

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ओहहहह,,, यह बात है,,,।

(हर आदमी को अपने बेटे की कहीं-कहीं एक एक बात सच लगने लगी थी वह अच्छी तरह से समझ गई थी कि उसका पति उसके पीठ पीछे किस तरह की रंगरेलियां मनाते फिरता है और उसे खुद दुख के सागर में ढकेल दिया है,,,)

क्यों मम्मी कुछ काम था क्या,,,,

नहीं ऐसे ही अच्छा अब जल्दी से नाश्ता कर ले तेरा कॉलेज जाने का समय हो रहा है और संजू कहां है,,

भाई भी आ रहे हैं,,,

(थोड़ी देर में आराधना ने अपने दोनों बच्चों को नाश्ता करने के लिए दे दी और खुद चिंता की खाई में डूबने लगी वह अपने मन में सोचने लगी थी यह कैसा जीवन वजी रही है एक तरफ पतिव्रता होने का फर्ज निभाते हुए अपना जीवन किस तरह से गुजार रही है यह वही जानती है और एक तरफ उसका पति जो कि उसके साथ बेवफाई करते हुए दूसरी औरतों के साथ रंगरेलियां मना रहा है शायद यही फर्क होता है एक मर्द और औरत में मर्द अपनी मनमानी करता फिरता है औरत संस्कार और मर्यादा की चारदीवारी में कैद हो जाती है लेकिन मर्द ही क्यों तो औरत भी अपने लिए एक नया रास्ता चुन लेती है जैसा कि उसकी खुद की बड़ी दीदी शायद वह भी अपने पति से खुश नहीं है तभी तो अपने ही जवान भतीजे का सहारा लेकर अपने शारीरिक प्यास को बुझा रही थी,,, खाना बनाते समय आराधना के मन में ख्यालों का बवंडर उठ रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें कहां जाए किसी अपने मन की बात कहे शायद इसीलिए उसकी बड़ी दीदी अपने लिए एक नया रास्ता चुन ली थी जो कि उसके ही जवान बेटे से होकर गुजरती थी क्या वाकई में एक औरत को इस तरह से मर्यादा लगाकर अपनी खुशी के लिए कुछ पल निकालना चाहिए,,,, क्या नहीं है दीदी के पास सब कुछ तो है घर परिवार पैसा दौलत शायद तन का सुख नहीं मिल रहा है जैसा कि उसे खुद कुछ समय पहले पैसों की तकलीफ रहती थी लेकिन अब तो पैसे की तकलीफ बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन तन और मन की प्यास बढ़ती जा रही थी,,,,,,,, दोनों बच्चे नाश्ता करके कॉलेज के लिए निकल चुके थे और आराधना थे कि उसका कहीं मन नहीं लग रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसका बेटा जो उसके साथ करना चाहता है क्या वह उसे आगे बढ़ने की इजाजत दे दे या संस्कार और मर्यादा की दवाई देकर उसे रोक दें ,,,, अगर रोक भी दी तो क्या होगा इससे तो है खुद का ही गला घोट लेगी अपनी खूबसूरत जीवन को बर्बाद कर देगी अपनी प्यास अपनी इच्छा हा अपनी भावनाओं पर जिम्मेदारी का बोझ डालकर उसे दबा देगी और उसके बेटे का तो कुछ भी करने वाला नहीं है क्योंकि उसका जुगाड़ तो उसकी खुद की पड़ी थी थी थी और शायद और भी बाहर जुगाड़ हो लेकिन अपनी दीदी के साथ तो वह खुद उसे अपनी आंखों से देख चुकी थी आराधना को अब इस बात का डर लगने लगा कि अगर वह अपने बेटे को उसकी हरकत को देखते हुए उसे समझाने की कोशिश करेगी उसे अपने से दूर करेगी तो शायद हो सकता है कि उसकी बड़ी दीदी का साथ पाकर वह सच में उससे दूर हो जाए और उसके दीदी के करीब और करीब चला जाए अगर ऐसा हुआ तो वह फिर से टूट जाएगी अपने पति की बेवफाई को धीरे-धीरे अपना मुकद्दर समझ कर भूलने लगी थी लेकिन अपने बेटे की जुदाई उसे बर्दाश्त नहीं होगी और ऐसे हालात में जवानी के दौर में लड़के अकसर दिमाग से नहीं अपनी भावनाओं को देखते हुए कदम उठाते हैं और ऐसे में उसके बेटे का उसे से दूर होना निश्चित था क्योंकि एक जवान होते लड़के को क्या चाहिए था एक खूबसूरत औरत जो उसे अपना तन मन सब कुछ सौप कर उसे प्रसन्न कर दे जैसा कि वह नहीं कर पा रही थी,,,,, वह अपने मन में यही सोच रही थी कि क्या हो गया अगर उसकी दीदी अपना तन उसके बेटे को सौंप दी क्या इस बारे में किसी को पता चला शायद वह खुद अपनी आंखों से ना देखी होती तो उसे भी पता नहीं चलता और ऐसा चलता ही रहता दोनों खुश रहते दोनों एक दूसरे की जरूरत पूरा करते रहते चारदीवारी के अंदर क्या हो रहा है जमाने को क्या पता समाज को क्या मालूम वह तो उन्हें उसे रिश्ते से देखता है जैसा क्यों दोनों के बीच में है मौसी और भतीजे का समाज को लोगों को क्या पता कि मौसी अपने ही पति से से चुदवाती है और अपनी प्यास बुझाती है अगर ऐसा ही रिश्ता उन दोनों के बीच भी पनप गया तो क्या होगा,,,, कुछ नहीं सब कुछ सामान ही चलता रहेगा बस एक मां बेटे के बीच का रिश्ता पूरी तरह से चारदीवारी के अंदर खत्म हो जाएगा और एक मर्द और औरत का रिश्ता शुरू हो जाएगा लेकिन चारदीवारी के बाहर तो वह हमेशा ही मां बेटे ही रहेंगे दुनिया की नजर में और दोनों के बीच वही पवित्र रिश्ता रहेगा,,,, और ऐसे में उसे अपने पति की जरूरत भी पूरी होती हुई महसूस होगी अपने पति की कमी पूरी होती हूं महसूस होगी उसके द्वारा मिलने वाला सुख उसे प्राप्त होगा और वह अपने जीवन को एक नए सिरे से जी सकेगी जैसा कि इस समय वह तिल तिल घुट रही थी,,,,,

इस तरह के ख्यालों ने आराधना के दिलों दिमाग पर पूरी तरह से अपना कब्जा जमाया हुआ था और एक पल के लिए वह अपने बेटे के साथ रिश्तेदारी मान मर्यादा भूल कर अपनी बड़ी बहन की तरह अपने लिए जीवन जीने का सुख खोजते हुए ‌ खाना बनाते हुए कल्पना करने लगी थी कि कैसे उसका बेटा उसे अपनी गोद में उठाकर उसे अपनी कमरे तक ले जाता है और बिस्तर पर पटक करेगी करके उसके सारे कपड़े उतार कर उसे नंगी करने लगता है शर्म के मारे वह सिकुड़ती जाती है लेकिन,, उसका बेटा पूरी तरह से मनमानी करते हो उसके एक एक करके सारे कपड़े उतार कर उसे नंगी कर देता है और आराधना अपनी दोनों जांघों को आपस में सटाकर अपनी बेशकीमती खजाने को छुपाने की कोशिश करती है लेकिन अपने बेटे की आंखों में दिख रही उसकी जवानी की चमक उसे मदहोश करने लगती है और उसका बेटा खुद अपने हाथों से उसकी टांगों को खोल कर उसके बेशकीमती खजाने को नजर भर कर देखता है और मादक मुस्कान के साथ। धीरे-धीरे अपने पैसे होठों को आगे बढ़ाते हुए कब उसकी चूत पर रख कर उसके काम रस को चाटना शुरू कर देता है उसे पता ही नहीं चलता देखते ही देखते आराधना खुद मदहोशी के आलम में पूरी तरह से लिपटने रखती है संजू अपनी मां की मदमस्त कर देने वाली जवानी को पाकर पूरी तरह से मदहोश हुआ जाता है और जितना हो सकता था उसने अपनी जीभ उसकी चूत में डाल कर उसके काम रस को अपने गले के अंदर गटकना शुरू कर देता है,,,, कल्पना में आराधना पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी खाना बनाने मैं अब उसका मन बिल्कुल भी नहीं था वह पूरी तरह से अपनी अलग दुनिया में मस्त हुए जा रही थी देखते ही देखते संजू अपने मोटे तगड़े लंड को अपनी मां के मुंह में डालकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर देता है अपने बेटे की लंड के मोटा पन को देखकर उसकी चूत पानी फेंक रही थी और थोड़ी देर में राजू अपनी मां की दोनों टांगों को फैलाते हुए अपने लिए जगह बनाता है और जैसे ही अपने लंड के सुपाड़े को उसकी गरम चूत पर रखता है वैसे ही कुकर की सीटी की आवाज के साथ ही उसकी तंद्रा पूरी तरह से भंग हो जाती है और जैसे ही हुआ होश में आती हो पूरी तरह से पसीने से तरबतर अपने आपको पाकर शर्म से पानी पानी हो जाती है,,,,,।

आराधना की कल्पना

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आराधना के लिए दूसरी बार था जब वह कल्पना में पूरी तरह से अपने आप को लीन पाकर चरम सुख को प्राप्त की थी पहली मर्तबा वह सपने में अपने बेटे के साथ संभोग रतहोते हुए चरम सुख प्राप्त की थी और इस समय अपने बेटे के ख्यालों में वह अपनी चूत को गीली कर चुकी थी,,,,,

गैस पर से कुकर को नीचे उतारकर वह गहरी गहरी सांस लेने लगी और एक पल के लिए अपने बेटे के बारे में सोच कर उसके होंठों पर अनजाने में ही मादक मुस्कान नाचने लगी,,,

अरफना और संजू कल्पना में

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पल भर के लिए उसे ही सही लगने लगा कि अगर मां अपने बेटे के साथ अपनी दीदी की तरह ही संभोग सुख प्राप्त करेगी तो इसमें गलत कुछ भी नहीं है आखिरकार वह एक मर्द है और वह खुद एक औरत और दोनों की अपनी अपनी जरूरत है,,,,,, उसे इस बात का आभास अच्छी तरह से हो रहा था कि उसकी पेंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी,,, गीली पेंटी में उसे असहज महसूस हो रहा था,,वह नहाना चाहती थी लेकिन घड़ी की तरफ देखी तो उसके पास बिल्कुल भी समय नहीं था इसलिए अपना मन मसोसकर वह जल्दी से तैयार हुई और ऑफिस के लिए निकल गई,,,,,,,

आराधना और संजू कल्पना में चुदाई करते हुए

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दूसरी तरफ घर से बाहर निकलते ही संजू अपनी मां से पूछ रहा था कि उन दोनों में क्या बातें हो रही थी और मोहिनी ने सब कुछ बताती मोहिनी के चेहरे पर खुशी नजर आ रही थी जो कि बता रही थी कि जल्द ही उसकी मां और उसके भाई के बीच कुछ होने वाला है क्योंकि वह अपनी मां के चेहरे पर अपने पति की बेवफाई की चिंता की लकीरें साफ देख पा रही थी,,,, मोहिनी को भी ऐसा ही लग रहा था कि उसकी मां भी उसके ही पति की तरह अपने लिए एक रास्ता खोज लेगी जिसमें उसका भाई मदद करेगा और यह सोचकर बेहद उत्साहित है कि अगर ऐसा हो गया तो उन तीनों का जीवन एकदम बदल जाएगा वह तीनों जब चाहे तब घर में रंगरलिया मना सकते हैं तब किसी का डर नहीं होगा,,,, इस बात से संजू भी बेहद उत्साहित था,,,,

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कॉलेज छुटने के बाद दोनों घर पहुंचे तो देखे की उनकी मां घर पर ही है तो दोनों थोड़ा परेशान हूं घर में प्रवेश करते ही संजू अपनी मां से बोला,,,।

क्या हुआ मम्मी तबीयत तो ठीक है ना,,,,

मैं बिल्कुल ठीक हूं वो क्या है ना कि ऑफिस में बिजली नहीं थी तो छुट्टी हो गई,,,

ओहहहह मुझे तो लगा कि तबीयत खराब है,,,(मोहिनी चिंता करते हुए बोली,,)

मुझे कुछ नहीं हुआ है तुम दोनों जल्दी से खाना खा लो अभी अभी मैंने खाना गर्म की हु क्योंकि मुझे मालूम था कि तुम दोनों आने वाले हो,,,।

(इतना सुनते ही संजू खुशी के मारे अपनी मां को अपनी बाहों में भर लिया और उसके माथे को चुनते हुए बोला)

ओ मम्मी तुम कितनी अच्छी हो,,,, हम दोनों का कितना ख्याल रखती हो,,,,(इतना कहते हुए वह अपनी मां को अपनी बाहों में झगड़ा हुआ था क्योंकि वह यह हरकत जानबूझकर कर रहा था क्योंकि मोहिनी अपने कमरे में कपड़े बदलने के लिए चली गई थी और इसी मौके का फायदा उठाते हुए संजू अपनी मां को अपनी बाहों में भरकर उसे अपनी मर्दाना अंग का एहसास करा रहा था क्योंकि अपनी मां की खूबसूरत जवान जिसमें का स्पर्श पाते ही पल भर में उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था सीधे जाकर साड़ी के ऊपर से उसकी चूत पर दस्तक दे रहा था जिसका एहसास उस दस्तक की आवाज आराधना के बदन में हथौड़ा बरसा रहा था उसे अच्छी तरह से समझ में आ गया था कि उसकी दोनों टांगों के बीच संजू का लंड चुभ रहा है उसकी चूत पर दस्तक दे रहा है इस बात का एहसास होते ही उसके तन बदन में आग लगने लगी और वह मोहिनी की मौजूदगी के कारण संजू की बाहों से अपने आपको अलग करने की कोशिश करते हुए बोली,,,,,,।

चल अच्छा छोड़ मुझे मैं खाना निकाल देती हूं,,,,। तू जल्दी से हाथ मुंह धो ले,,,,,

(संजू को बहुत मजा आ रहा था अपनी मां को इस तरह से बाहों में जकडकर अपने लंड का टोपा उसकी चूत के द्वार पर खटखटा ना उसे बेहद आनंद की अनुभूति करा रहा था इस तरह की छेड़छाड़ जिस्मानी हरकत संजू को जुदाई से भी अधिक आनंद देती थी,,, ना चाहते हुए भी संजू को अपनी मां को अपनी बाहों की कैद से आजाद करना पड़ा और वह जाकर हाथ मुंह होने लगा और आराधना तुरंत रसोई घर में आ गई,,, उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी जो कुछ भी उसके बेटे ने उसे बाहों में लेकर हरकत किया था उसी से वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी अपनी बेटी के लंड के सुपाडे को अपनी चूत के द्वार पर एकदम अच्छी तरह से महसूस कर पाई थी,,, तन की प्यासी एक औरत के लिए इतना भी बहुत होता है उसकी चूत से काम रस ने लगा था अपने बेटे के मर्दाना अंग को वह पहले भी अपनी आंखों से नजर भर कर देख चुकी थी और उसकी ताकत को भी अपनी बड़ी दीदी पर असर करता हुआ देख चुकी थी,,,,,, इसलिए समय वह पूरी तरह से गदगद हो गई थी वह इस बात से और ज्यादा हैरान थी कि और साड़ी के अंदर होने के बावजूद भी कितने आराम से उसके बेटे का लंड उसकी चूत पर स्पर्श कर रहा था अपना एहसास करा रहा था यही एक असली मर्द की पहचान होती है जो औरत को अपने स्पर्श से ही पानी पानी कर दे,,,,,,

थोड़ी ही देर में आराधना मोहिनी और संजू के लिए खाना परोस कर रसोई घर के बाहर लेकर आए और वह दोनों बैठ कर खाना खाने लगे,,, संजू बार-बार अपनी मां की तरफ देख कर मुस्कुरा दे रहा था कि मानो कह रहा हो कि कुछ एहसास हुआ लंड का,, और शर्म के मारे आराधना अपने बेटे से नजर नहीं मिला पा रही थी,,, संजू, यह बात अच्छी तरह से जानता था कि वाह अपनी मां को अपनी बाहों में लेकर अपने लंड के टोपे का स्पर्श अपनी मां की चूत पर करा रहा है और इसीलिए तो उसका लंड भी टन टना कर लोहे का रोड हो गया था,,, आराधना पास में बैठे हुए अपने बेटे की आंखों में अपने लिए साफ हवस देख रही थी,, और इसी बात से उसके मन में एक डर का भाव भी पैदा हो रहा था कि अगर वह किसी भी तरह से अपने आप को अपने बेटे के हाथों में समर्पित कर देगी तो उसका बेटा उसकी चुत कचुंबर बना देगा,,,,,,,

मोहिनी को देर हो रहा था कोचिंग क्लास जाने के लिए इसलिए वह जल्दी जल्दी खाना खाकर वहां से चली गई,,,, अब घर में केवल संजू और उसकी मा ही थी संजू अभी भी खाना खा रहा था,,, एकांत पाकर संजू का मन बहकने लगा वह खाना खाते हुए अपनी मां से बोला,,,,।

देखो तो सही समय तुम कितनी खूबसूरत लग रही हो ऐसा लग रहा है कि जैसे चांद जमीन पर आ गया हो,,,।

(आराधना सोची नहीं थी किस तरह से उसका बेटा उसकी खूबसूरती की तारीफ करने लगेगा और अपने बेटे के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर वह अपने आप को असहाय महसूस करने लगी वह अपनी जगह पर बैठे-बैठे कसमस आने लगी और बोली,,,)

धत्,,, यह क्या कह रहा है तू,,,,(आराधना एकदम से शरमाते हुए बोली,,,, वैसे भी मोहिनी की हाजिरी में वह थोड़ा सहज महसूस कर रही थी लेकिन मोहिनी के जाते ही अपने बेटे की आंखों में वासना की चमक देखते ही वह अपने आप को असहज महसूस करने लगी)

मैं जो कुछ भी कह रहा हूं सच कह रहा हूं बाग का सबसे खूबसूरत फूल हो तुम,,,(संजू निवाला मुंह में डालते हुए बोला,, संजू कि ईस तरह की बातें सुनकर शर्म के मारे आराधना का गोरा मुखड़ा टमाटर की तरह लाल होने लगा,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अपने बेटे को चुप कैसे कराएं फिर भी वह बोली,,)

अपनी मां से इस तरह की बातें करते हुए तुझे शर्म नहीं आती,,,

मैंने कौन सी गंदी बात कह दी एकदम साफ लहजे में तो मैं तुम्हारी खूबसूरती की तारीफ कर रहा हूं जो कि तुम बहुत खूबसूरत हो मैं क्या यह तो पूरा जमाना जानता है,,,, इस उम्र में भी तुमने अपने बदन की बनावट को इस कदर संभाल कर संजोकर रखी हो कि तुम्हें देखकर तुम्हारी उम्र का पता ही नहीं चलता,,,

बस कर संजू तेरी बातें सुनकर मुझे शर्म आती है,,,

क्या मम्मी यह भी शर्माने की बात है,,,, और हां मुझे अभी याद आया मैंने तो तुमसे पूछना ही भूल गया था,,,,(संजू खाना खा चुका था और अपनी जगह से उठते हुए बोला,,,) उस दिन मैंने मॉल में से जो तुम्हें चड्डी और ब्रा दिलाया था वह पहने कि नहीं,,,,(इतना कहते हुए संजू अपने हाथ में लोटा ले लिया था लेकिन इस तरह से खड़े होने पर संजू के पेंट में बना हुआ तंबू आराधना को एकदम साफ नजर आने लगा और उसके तंबू को देखकर उसकी सांसे अटकने लगी,,, पल भर में आराधना के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी और वह अपने बेटे के पेंट से अपनी नजर को हटाते हुए बोली,,,)

नहीं तो मैं अभी नहीं पहनी हुं,,(इतना कहने में भी आराधना शर्म से पानी पानी हो जा रही थी क्योंकि वह उसकी चड्डी के बारे में बात कर रहा था और उसका ही जवाब आराधना देते हुए शर्मा रही थी,,,)

नहीं तुम झूठ बोल रही हो मुझे दिखाओ तुम जरूर पहनी होगी इतनी खूबसूरत चड्डी और ब्रा बिना पहने तो नहीं रह सकती तुम क्या दुनिया की कोई औरत भी नहीं रह सकती,,,,

नहीं पहनी हु संजू,,,,, यह तु कैसा सवाल पूछ रहा है,,,

अरे मम्मी एकदम सामान्य तो सवाल है अगर मैं तुम्हें चड्डी और बुरा दिन आ सकता हूं तो क्या हुआ पहनी हो कि नहीं पहनी हो पूछ नहीं सकता,,,, मुझे देखना है दिखाओ ना तुम मेरे दिल आई हुई चड्डी और ब्रा में कैसी दिखती हो,,(इतना कहने के साथ ही राजू आगे बढ़ा और कुर्सी पर बैठी अपनी मां के सामने घुटनों के बल बैठ गया और उसकी साड़ी को उठाने की कोशिश करते हुए बोला,,) मुझे देखना है वह चड्डी और ब्रा तुम पर कैसी लगती है,,,,( इतना कहने के साथ ही संजू पूर्ति दिखाता हूं अपनी मां की साड़ी पकड़कर उसकी गोरी गोरी पिंडलियों के ऊपर तक लेकर चला गया था लेकिन आराधना को अपनी स्थिति का एहसास होते हैं वह तुरंत संजू का हाथ पकड़ ली और बोली,,,)

यह क्या कर रहा है संजू कसम से मैं नहीं पहनी हुं,,,,
 
आराधना के लिए यह पल बेहद शर्मनाक होता जा रहा था वह अपने बेटे की हरकत से पूरी तरह से शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी उसे उम्मीद नहीं थी कि उसका बेटा इस कदर हरकत करेगा,,,,, आराधना अपने बेटे को रोकने की बहुत कोशिश कर रही थी लेकिन उसका बेटा बिल्कुल भी मानने को तैयार नहीं था संजू की आंखों में आराधना को अपने लिए वासना की चमक एकदम साफ नजर आ रही थी जिससे उसके बदन में सिहरन सी दौड़ में लगी थी,,,, माहौल पूरी तरह से मादक होता जा रहा था,,,, आराधना कुर्सी पर बैठी हुई थी और संजू घुटनों के बल उसके पास बैठा था,,, संजू की हरकत पर आराधना की सबसे बड़ी तेजी से चल रही थी वह नीचे की तरफ झुक कर अपने बेटे के हाथ seको पकड़े हुए थे लेकिन संजू जबरदस्ती करते हुए साड़ी को उसकी पिंडलियों के ऊपर तक उठा दिया था उसकी गोरी गोरी चिकनी पींडलिया भी संजू की उत्तेजना का कारण बन रही थी,,,,।

नहीं रहने दे संजू जी तो मत कर तुझे शर्म नहीं आ रही है ऐसी हरकत करते हुए,,,

इसमें कैसी शर्म मम्मी मैं भी तो देखूं कि मेरी दिलाई हुई पेंटी तुम्हारे बदन पर कैसी दिखती है ताकि मैं और खरीद सकूं,,,

लेकिन मैं पहनी नहीं हूं,,,,,

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नहीं नहीं मुझे दिखाओ तुम झूठ बोल रही हो,,,(ईतना कहने के साथ ही संजू ने अपनी मां की साड़ी को घुटनो तक उठा दिया उसकी नंगी चिकनी पिंडलियों को देखकर संजू की हालत खराब होती जा रही थी,,,,, और संजू की हरकत से आराधना के भी बदन में लहर उठने लगी थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था जिस तरह ‌से संजू उसकी साड़ी के ऊपर उठाने की कोशिश कर रहा था उसे देखते हुए आराधना को यही लग रहा था कि जिससे उसका बेटा खुद अपने हाथों से उसे नंगी करना चाह रहा हो,,,, आराधना की सांसे गहरी चलने लगी थी उसे लगने लगा था कि जो सेवा अपने बेटे से जीत नहीं पाई कि उसका बेटा उसके साथ मनमानी करके ही रहेगा पल भर में ही उसकी आंखों के सामने उस रात वाला दृश्य तैरने जब उसका जवाब ऐसा उसकी बड़ी दीदी की चुदाई कर रहा था,,, और उसकी बहन की कही गई बात उसके कानों में गूंजने लगी की औरत को अपने लिए भी अपनी खुशी के लिए जीना चाहिए अपने इच्छा को पूरी करनी चाहिए,,, संजू की हरकत को देखते हुए कुछ ही क्षण में आराधना को अपने बेटे के द्वारा किए गए मादक हरकतें किसी फिल्म की तरह आंखों से गुजरने लगी जब उसका बेटा अपने ही पापा की पिटाई से बचाने के लिए बिना कहे कमरे में घुस आया था और आराधना को नंगी देख लिया था उसे बचाने के चक्कर में अनजाने में ही या जानबूझकर उसकी चूची पर हाथ रख दिया ,,, सब कुछ फिल्म की रिल की तरह गुजर रहा था मार्केट से लौटने के बाद बारिश में भीगी आराधना को अपनी बाहों में लेकर उसके होठों का चुंबन और उसके नितंबों पर अपनी हथेली रखकर दबाना,,, रात को फिर से अपने होशो हवास खोकर चुंबन की मादकता में खो जाना और अभी कुछ देर पहले ही दुलार करने के बहाने अपनी बाहों में लेकर अपने मर्दाना अंध के कठोर पन का एहसास दिलाना यह सब याद करके आराधना कमजोर पड़ने लगी थी वह अच्छी तरह से समझ गई थी कि वह अपने बेटे के आगे घुटने टेक देगी,,, इन सब के बावजूद भी वह अपने आप को संभाल ले जाकर लेकिन तभी उसे अपने पति की बेवफाई याद आने लगी अपनी आंखों के सामने अपने पति की बेवफाई की कल्पना करने लगी कि कैसे उसका पति किसी भी औरत को गेस्ट हाउस में ले जाकर उसकी चुदाई करता है अपने पैसे बर्बाद करता है यह सब सोचकर उसका भी धैर्य जवाब देने लगा वह अपने ख्यालों में खोई हुई थी और संजू था कि धीरे-धीरे साड़ी को उसकी जांघों तक ला दिया था उसकी गोरी मोटी मोटी केले के तने के सामान चिकनी जांघों को देखकर संजू का ईमान फिसलने लगा ऐसा नहीं था कि संजू पहली बार अपनी मां को किस अवस्था में देख रहा था वह पहले भी अपनी मां को पूरी तरह से नंगी देख चुका था उसके हर एक अंग को अपनी आंखों से देख चुका था लेकिन फिर भी संजू के लिए उसकी मां का हर एक अन्य उत्तेजना से भरा हुआ था इसलिए तो उसकी मोटी मोटी जांघों को देखकर उसका लंड एकदम से कड़क हो गया था,,,,।

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आराधना जैसे ही अपनी भावनाओं के बवंडर से बाहर निकली वह देखी कि उसका बेटा उसकी साड़ी को उसकी जांघो तक उठा दिया है वह समझ गई कि किसी भी पल उसका बेटा उसकी साड़ी को उसकी कमर तक उठाकर उसकी नंगी जवानी को अपनी आंखों से देख लेगा और फिर उसे बर्दाश्त नहीं होगा लेकिन अब ना जाने क्यों आराधना को अपने बेटे की हरकत से आनंद प्राप्त होने लगा था शर्म के मारे वह अपने बेटे की इस हरकत को खोल कर देख नहीं पा रही थी लेकिन फिर भी अपने पति की बेवफाई के चलते उसका भी मन मचलने लगा था अपने तरीके से जीवन जीने के लिए वैसे भी उसकी बहन की नसीहत अब जाकर उसे समझ में आ रही थी,,,, फिर भी वह अपने बेटे को एक बार फिर से रोकते हुए बोली,,,।

रहने दे संजू तु मानता क्यों नहीं है,,, मैं पहनी नहीं हूं,,,

नहीं नहीं तुम झूठ बोल रही हो तुम पहनी हो इतनी खूबसूरत पेंटिं को तुम भुला ना पहनो ऐसा हो ही नहीं सकता क्योंकि तुम्हारी पेंटी तो फटी हुई थी,,,,

अरे पगली तु समझने की कोशिश क्यों नहीं करता,,,(संजू के हाथ को पकड़े हुए) अब मैं तुझे कैसे समझाऊं,,,

तुम मुझे कैसे भी समझाओगी मैं समझने वाला नहीं हूं,,,,

सच में तेरी हरकत की वजह से तो मुझे शर्म आ रही है लेकिन तो एकदम बेशरम बन कर बैठा है मैं तुझे कितनी बार कहीं हूं कि मैं नहीं पहनी हूं मतलब कि मैं आज पेंटी पहनी ही नहीं हूं,,,।

(इतना सुनते ही संज की आंखों में चमक आ गई अपने मन में सोचने लगा कि इसका मतलब की मम्मी साड़ी के अंदर कुछ भी नहीं पहनी है साड़ी के अंदर वो एकदम नंगी है अब तो उत्तेजना के मारे संजू का गला सूखने लगा अब तो वह और उतावला हो चुका था साड़ी को कमर तक उठाने के लिए वह अपनी मां की नंगी चूत को देखना चाहता था उसके पूरे भूगोल को अपनी आंखों से देख कर उसे पढ़ना चाहता था,,,, लेकिन अपनी मां की बात सुनकर वह पूरी तरह से आश्चर्यचकित होकर अपनी मां की आंखों में देखने लगा आराधना भी संजू की तरफ देख रही थी दोनों की नजरें आपस में टकराई और आराधना शर्म के मारे अपनी नजरों को नीचे झुका ली और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)

इसीलिए कह रही थी कि मैं नहीं पहनी हुं,,,

क्यों कह रही हो मम्मी इसका मतलब तुम ऑफिस में पेंटी पहन कर नहीं गई थी अंदर से एकदम नंगी थी,,,(संजु जानबूझकर अपनी मां के सामने नंगी शब्द का प्रयोग कर रहा था,,,, अपने बेटे की बात सुनकर आराधना शर्म से पानी पानी हो जा रही थी वह कुछ भी बोल नहीं पा रही थी संजू की हिम्मत बढ़ने लगी थी वह खुलने लगा था वो जानता था कि अभी नहीं तो कभी नहीं इसीलिए वह फिर से अपनी मां को बोला,,,,)

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नहीं नहीं तुम झूठ बोल रही हो मुझे बहकाना चाहती हो,,,

अरे बुद्धू में तुझसे झूठ नहीं कह रही हूं सच कह रही हूं,,

नहीं नहीं मैं कैसे मान लूं कि तुमने अंदर कुछ नहीं पहनी हो ऐसा हो ही नहीं सकता तुम ऑफिस गई थी और मैं मान लूंगा तो तुम अंदर कुछ पहनी ना हो जबकि तुम्हारे पास सब कुछ है,,,,

अब यह तो पागलों जैसी बात है मैंने आज तक किसी लड़के को अपनी मां से इस तरह से बात ना तो करते देखी हो ना ही इस तरह की जीद करते देखी हो,,,

आप सबके सामने एक बेटा अपनी मां से यह सवाल थोड़ी कर सकता है उसकी पेंटी देखने की चीज थोड़ी कर सकता है चारदीवारी के अंदर तो सब कोई ऐसा ही करते होंगे और सही बताऊ तो सब लोग तुम्हारे जैसा नखरा नहीं करते होंगे,,,

कैसा नखरा,,,

यही अपने बेटे की बात ना मानने का,,,

चल अब रहने दे,,,, तू कुछ और देखना चाहता है,,,(आराधना के मुंह से अनजाने में ही यह निकल गया था और वह अपने निकले गए शब्दों के अफसोस में अपने दांत से अपनी जीभ को दबा ली थी,,, लेकिन शब्द भी तीर की तरह होते हैं एक बार निकल गए तो निकल गए और अपनी मां के मुंह से यह बात सुनकर संजू की आंखों में चमक आ गई और वह तुरंत अपनी मां से बोला,,,)

क्या देखना चाहता हूं बोलो,,,,

कुछ नहीं तू अपना काम कर मुझे आराम करने दें परेशान कर रहा है,,,।(संजू के हाथ को अपनी जान से हटाने की कोशिश करते हुए बोली संजू अपनी मां की दोनों जनों को अपनी दोनों हथेली से पकड़ा हुआ था और संजू को अपनी मां की जांघों को अपनी हथेली में दबोचने में इतना आनंद मिल रहा था कि मानो जैसे कि वह किसी के साथ संभोग कर रहा हो ,,,)

चला जाऊंगा लेकिन मुझे एक बार दिखा तो दो मेरे मन को तसल्ली मिल जाएगी मैंने कितने अरमान से तुम्हें चड्डी दिलवाया था बुरा दिलवाया था लेकिन अगर उसे पहने हुए मै ही ना देख पाउ तो क्या मतलब,,,,

तेरी जीत मुझे अच्छी नहीं लग रही है संजू,,,

क्या मम्मी बस एक बार दिखा तो दो मुझे तसल्ली हो जाएगी कि तुम सच में पहनी हो कि नहीं पहनी हो,,,, तुम्हें मेरी कसम,,,

(पल पल आराधना के लिए यह पल मुश्किल होता जा रहा था वह धीरे-धीरे अपने बेटे की बात को मानने के लिए तैयार होने लगी थी उसके सामने घुटने टेकने के लिए तैयार हो चुकी थी औरत की भी शायद अपनी मजबूरी होती है तभी तो वह किसी गैर मर्द के पास जाना पसंद करती हैं वरना अगर वह पूरी तरह से संतुष्ट हो तो बाहर जाने की जरूरत ही नहीं होती ऐसा आराधना के किस्से में बिल्कुल भी नहीं था लेकिन अपने पति की बेवफाई को देखते हुए उसका भी मन धीरे-धीरे बदलने लगा था अपने बेटे की कसम देखकर वह धीरे से बोली,,,)

चल ठीक है मैं तुझे दिखा देती हूं कि मैं कुछ भी नहीं पहनी हूं लेकिन पूरा नहीं उठाऊंगी,,,,

कोई बात नहीं तुम जान से थोड़ा ऊपर की तरफ उठा देना मैं देख कर ही समझ जाऊंगा कि तुम पहनी हो या नहीं पहनी हो,,,,,

दरवाजे की कड़ी तो लगा दे,,,(अपनी जगह से उठते हुए आराधना बोली यह सुनकर संजू का दिल जोरो से धड़कने लगा वह समझ गया कि उसकी मां उसकी बात मान ली है अब उसे दुनिया का सबसे खूबसूरत नजारा देखने को मिलेगा और वह अपनी मां की बात मानते हुए तुरंत अपनी जगह से उठ कर खड़ा हुआ और जाकर जल्दी से दरवाजे की कड़ी लगा दिया,,,,, अपने मन में यह सोचने लगा कि एक औरत को अपनी इज्जत से कितना प्यार होता है वह बिल्कुल भी नहीं चाहती कि उसके अंग को क्यों नहीं और भी देखें इसीलिए तो उसे बिल्कुल भी ख्याल नहीं था कि दरवाजा की कड़ी लगी नहीं है और उसकी मां कैसे झट से बोल दी कि पहले दरवाजे की कड़ी बंद करके आ,,,

मां बेटे दोनों की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी एक दिखाने के लिए व्याकुल थी और दूसरा देखने के लिए पूरी तरह से मचल रहा था आराधना अपनी जगह पर खड़ी हो चुकी थी अपने बेटे को दिलासा देने के बावजूद भी उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी कि कैसे वह अपने बेटे की आंखों के सामने अपनी साड़ी को कमर तक उठाए उसके नंगे जिस्म को दिखाएं लेकिन फिर भी अपने पति की बेवफाई बार-बार याद आते ही वह भी कुछ अपने पति जैसा ही करना चाहती थी ताकि जैसे को तैसा का सबक मिल सके,,,, अपने पति से बदला लेने के चक्कर में वह यह भूल गई थी कि जो कुछ भी हो करने जा रही है वह समाज और रीति-रिवाजों से बिल्कुल पर है अपने संस्कारों का गला घोट कर अपनी मर्यादा की दीवार को गिरा कर वह अपने कामुक बेटे की लुभावनी बातों में आ चुकी थी,,,, आराधना का दिल जोरों से धड़क रहा था और संजू ठीक उसके सामने खड़ा होकर उसके साड़ी उठाने का इंतजार कर रहा था,,,,,, धीरे-धीरे कमरे का माहौल पूरी तरह से गर्म होता जा रहा था गर्मी का महीना था लेकिन वातावरण की गर्मी से ज्यादा आराधना की जवानी की गर्मी भभक रही थी,,, कुछ देर तक आराधना यूं ही खड़ी रही तो संजू बोला,,,।

क्या हुआ मम्मी उठाओ ना तुमसे नहीं हो रहा है तो मैं उठा दूं,,,।

(आराधना के लिए हर एक पल शर्मनाक था शर्मसार कर देने वाला था अपने बेटे की हरकत उसकी बातें पूरी तरह से आराधना के तन बदन में शर्मिंदगी का अहसास करा रही थी लेकिन शर्मिंदगी के पीछे ना जाने कैसी कसक थी कि उसे अपनी आगोश में लेकर तन बदन को अपने अंदर भिगो रही थी,,, आराधना अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा पूरी तरह से उतावला है उसके नंगे जिस्म को देखने के लिए जबकि यह जानते हुए भी कि वह साड़ी के अंदर कुछ नहीं पहनी है बस जानबूझकर नाटक कर रहा है अपनी तसल्ली के लिए ताकि उसके खूबसूरती से भरे हुए बेशकीमती खजाने को देख सकें,,,,, उत्सुकता और आनंद से भरा हुआ यह पल आराधना के लिए भी कुछ खास था क्योंकि आज वह अपने पति से बदला लेने ‌ की राह पर चल पड़ी थी,,,,, अपने बेटे की बात सुनकर आराधना उसकी तरफ देखते हुए बोली,,,)

उठा रही हूं तुझसे जरा भी सब्र नहीं होता एक तो ना जाने कैसी कैसी इच्छा रखता है मन में,,,,

तुमको देखकर ही इच्छा जागती हैं,,,

(अपने बेटे के कहने के मतलब को आराधना अच्छी तरह से समझ रही थी,,, इसलिए तो इस बात की खुशी और तसल्ली उसमें थी कि इस बात से कि अभी भी उसने बहुत कुछ बाकी है अभी भी वह जवान लड़कों को अपनी तरफ आकर्षित कर सकती है और यही आत्मविश्वास औरत की खूबसूरती में चार चांद लगा देता है,,,,।

चूड़ियों की खनक की आवाज के साथ ही उसके दोनों हाथ नीचे हुए और अपनी नाजुक उंगलियों का सहारा देकर वह अपनी साड़ी को दोनों सिरे से पकड़ ली आराधना का दिल जोरों से धड़क रहा था और संजू की हालत खराब होती जा रही थी आराधना चोर नजरों से अपने बेटे के पेंट में बनी तब्बू की तरफ देख भी ले रही थी जो कि लगातार खूंटा बनता चला जा रहा था,,,, इस बात की उत्सुकता आराधना के अंदर भी थी उसके बेटे के पेंट में कोई अद्भुत आकार का औजार छुपा हुआ है हालांकि वह अपने बेटे के औजार को देख भी चुकी थी लेकिन तसल्ली भरकर कभी नहीं देख पाई थी,,,, चूड़ियों की खनक ने की आवाज के साथ ही आराधना के दोनों हाथ नीचे हुए थे और संजू का लंड ऊपर की तरफ उठ गया था क्योंकि औरतों की कलाई में खनकती हुई चूड़ियां संजू की उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ा देती थी अपनी पतली नाजुक उंगलियों ‌का सहारा देकर आराधना धीरे-धीरे करके अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी और यह देखकर संजू का दिल जोरो से धड़कने लगा,,,,,,, इस तरह की हरकत आराधना ने अपने वैवाहिक जीवन में कभी अपने पति के साथ भी नहीं की थी लेकिन आज अपने बेटे की जीत के आगे दिवस होकर वह नहीं किए गए कार्य को कर रही थी जिसमें अंदर ही अंदर उसे भी आनंद की प्राप्ति हो रही थी देखते ही देखते आराधना अपनी साड़ी को उंगलियों का सहारा देकर घुटनों तक उठा दी थी नाजुक खूबसूरत गोरी गोरी पिंडली और घुटना देखकर संजू के लंड मे लावा उबलने लगा,,,, और वह अपनी मां की आंखों के सामने ही अपने पेंट में बने तंबू को हथेली में पकड़कर दबा दिया उसकी हरकत आराधना अपनी आंखों से देख रही थी और अंदर ही अंदर अपना काम रस छोड़ रही थी,,,, संजू की हरकत उसके तन बदन में उन्मादकता भर रही थी,,,,।

संजू अपनी मां को कई बार संपूर्ण नग्न अवस्था में देख चुका था लेकिन फिर भी इस पल जो कुछ भी हो रहा था उसे देखने मैं उसे बेहद मजा आ रहा था,,,,,,,,,,, शर्म और उत्सुकता से भरी हुई आराधना अपनी नजरों को नीचे झुका कर धीरे-धीरे अपनी साड़ी को और ऊपर ले रही थी जैसे-जैसे साड़ी ऊपर की तरफ जा रही थी वैसे वैसे संजू की हालत खराब होती जा रही थी संजू के लंड की अकड़ बढ़ती जा रही थी अपनी आंखों के सामने आज वह अपने सपनों की रानी की खूबसूरत चूत देखने जा रहा था,,,,,,,

आराधना का दिल जोरों से धड़क रहा था,,, वह जानती थी कि वह धीरे-धीरे साड़ी उठाकर अपनी चूत अपने बेटे को दिखा देगी इसलिए शर्म से भरी हुई आराधना अपने बेटे की आंखों के सामने शर्मसार होते हुए अपनी नजरों को झुका कर बंद कर ली थी और धीरे-धीरे संजू अपनी मां की तरफ आगे बढ़ रहा था,,,, वह अपनी मां के खूबसूरत बदन के प्रति आकर्षित होता चला जा रहा था देखते ही देखते आराधना अपनी साड़ी को थोड़ा और ऊपर उठाने लगी तो उसकी मोटी मोटी गदराई जांघ एकदम साफ नजर आने लगी,,,,। ऐसी गोरी गोरी खूबसूरत मोटी जांघ उसने पहले कभी नहीं देखा था,,, हालांकि उसने अपनी मौसी को कई बार चोद चुका था लेकिन उसकी भी गोरी गोरी मोटी जांघे होने के बावजूद भी इतनी खूबसूरत उसकी जांघ नहीं थी जितनी की आराधना की जांघ थी,,,,,, जांघों की खूबसूरती भी मर्दों के लंड को खड़ा करने में अपनी अहम भूमिका निभाती है जैसा की आराधना की जांघ कर रही थी,, दरवाजा बंद होने की वजह से संजू नहीं चलती से ट्यूब लाइट चालू कर दिया था जिसके चलते वह ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में अपनी मां की गोरी गोरी जांघो को साफ तौर पर देख पा रहा था,,,।

आराधना की सांसे भी बड़ी गहरी चल रही थी जिसके चलते उसकी भारी-भरकम दोनों चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी जिस पर संजू की नजर बार-बार चली जा रही थी अपनी मां की हालत को देखकर संजू भी समझ गया था कि उसकी मां के भी तन बदन में हलचल पैदा हो रही है आराधना थोड़ी हो रही मत करते हुए अपनी साड़ी को थोड़ा और ऊपर उठा दी जहां से उसकी चूत की दूरी केवल चार अंगुल तक रह जाती थी उतने पर ही आराधना अपनी साड़ी पकड़ कर खड़ी हो गई आंखें अभी भी उसकी बंद थी आंखें खोलने की हिम्मत उसने बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि वह अपने बेटे से नजर नहीं मिला ना चाहती थी,,,, कुछ सेकेंड तक आराधना उसी अवस्था में खड़ी रही तो संजू मदहोश भरी आवाज में बोला,,,,।

थोड़ा और ऊपर उठाओ मम्मी अभी पता नहीं चल रहा है,,,,

आराधना अपने बेटे के आदेश को सर आंखों पर रखकर उसकी हर एक बात मानने के लिए तैयार हो चुकी थी अपने बेटे की बात में उसकी आवाज में एक जादू भरा हुआ था जो आराधना को पूरी तरह से घुटने टेकने पर विवश कर रही थी,, पढ़ी-लिखी संस्कारी मर्यादा से भरी हुई होने के बावजूद भी आराधना अपने बेटे की हरकत और अपने पति से बदला लेने के चक्कर में मां बेटे के बीच के पवित्र रिश्ते को तार-तार करने जा रही थी जिसकी शुरुआत उसने कर चुकी थी,,,, अपने बेटे की बात मानते हैं आराधना थोड़ा सा और ऊपर अपनी साड़ी को उठा दी उसे इस बात का अहसास हो चुका था कि साड़ी को इतनी ऊपर उठाने पर उसका कौन सा अंग नजर आता होगा कमर के नीचे वह पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी,,,,,, अपनी मां के द्वारा साड़ी को चार अंगूर और ऊपर उठाने पर जो नजारा संजू की आंखों के सामने दिखाई दिया उसे देखकर वह पूरी तरह से अपना होश खो बैठा मदहोशी उसकी नसों में पूरी तरह से छाने लगी आंखों में खुमारी का दौर शुरू हो चुका था,,,,,, उत्तेजना के मारे संजू का लंड फटने पर उतारू हो चुका था इतनी अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव संजू ने आज तक नहीं किया था जितना कि आज सिर्फ अपनी मां की चूत के एक झलक को देखकर वह महसूस कर रहा था आराधना दे साड़ी को इतना ऊपर उठाई थी कि केवल उसकी चूत का आधा हिस्सा ही नजर आ रहा था नीचे से पतली दरार के सिरहाने साड़ी की चादर लगी हुई थी जिसके ऊपर देख पाना मुश्किल था लेकिन चूत का आधा भाग भी आसमान की खूबसूरती बढ़ाने वाला आधा चंद्रमा की तरह नजर आ रहा था यह नजारा देखकर समझ रहा नहीं गया और अपनी मां को बिना कुछ बोले आगे बढ़ा और तुरंत अपने हाथ के अंगूठे को अपनी उंगली से खींचकर शायद अगले पल के लिए तैयार कर रहा था वह अपनी मां के बेहद करीब पहुंच गया था वह नीचे की तरफ झुक कर अपनी मां की चूत को अपनी खुली आंखों से देख रहा था वह एकदम कचोरी की तरह फुली हुई थी एकदम मांसल गदराई हुई,,, संजू अपनी आंखों से देख रहा था कि उसकी मां एक खूबसूरत गदराई हुई मांसल और स्वस्थ चूत की मालकिन थी,,,, जिसे देखकर संजू के मुंह में पानी आने लगा था संजू का मन तो कर रहा था अपनी मां को बिना बताए अपने प्यासी होठों को उसकी चूत पर रख कर उसके काम रस को चाटना शुरू कर दे जो कि हल्का-हल्का उसमें से रिसाव हो रहा था,,,,,, संजू की हालत खराब होती जा रही थी वह अपनी नजरों को ऊपर की तरफ उठाकर अपनी मां की तरफ देखा तो उसकी गोल-गोल छातिया ऊपर नीचे हो रही थी आंखें अभी भी बंद थी और इसी पल का फायदा उठाते हुए संजू तुरंत अपने अंगूठे को चूत के निचले हिस्से पर रखकर जोर से दबा दिया मानो कि जैसे किसी कागजात पर अपना अंगूठा लगाकर उसे पूरी तरह से हासिल कर चुका हो,,,, अपनी चूत पर अपने बेटे के अंगूठे का स्पर्श होते ही वह अपनी आंखों को तुरंत खोल दी उसे लगा कि शायद उसका बेटा उत्तेजना तुम्हारे अपने लंड को उसकी चूत से सटा दिया है,,,, और वह तुरंत अपनी साड़ी को नीचे छोड़ दी और एक खूबसूरत नजारे पर पर्दा गिरा दी,,,

यह क्या कर रहा था संजू,,,

वाकई में मम्मी तुम साड़ी के अंदर पूरी तरह से नंगी हो,,,,(जिस अंगूठे को संजू अपनी मां की चूत पर रखकर दबाया वह चूत नुमा सरोवर खारे पानी से पूरा लबालब भरा हुआ था जिसकी बुंदो में डूब कर संजू ने अपने अंगूठे को गिरा कर लिया था और वही अपनी मां की आंखों के सामने इधर-उधर करके अपने अंगूठे को ही देख रहा था आराधना को समझते देर नहीं लगी थी कि संजू अपने अंगुठे को उसकी चूत पर रख दिया था जिस पर अभी भी उसका काम रस पूरी तरह से लगा हुआ था,,,, अपने बेटे के अंगूठे पर अपनी चूत का काम रस लगा हुआ देखकर आराधना एकदम से शर्म से पानी पानी होने लगे उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें और संजू अपनी मां की तरफ देखते हुए अपने अंगूठे को अपने होठों से लगाकर तुरंत उसे लॉलीपॉप की तरह अपने होठों के बीच भर लिया और उसे पूरी तरह से चाट कर बाहर निकाला यह नजारा आराधना के लिए पूरी तरह से उत्तेजना से भरा हुआ था इतनी अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव आराधना ने भी कभी नहीं की थी वह अपने बेटे की हरकत पर पूरी तरह से शर्मसार हो चुकी थी क्योंकि यह नजारा उसके लिए बेहद शर्म से भर देने वाला था लेकिन इस नजारे के पीछे भी आराधना के तन बदन में जो उत्तेजना की चिंगारी फूट रही थी उसे बयां करो पर पाना मुश्किल था ,,,,,, आराधना आंखें फाड़े अपने बेटे को देखती रहेगी और उसका बेटा उसकी चूत पर अपना अंगूठा लगाकर उसके काम रस को अपने मुंह में लेकर चाट गया था,,, और उसे अपने मुंह से बाहर निकाल कर अपनी आंखों को मदहोशी में बंद करके मदहोशी भरे स्वर में बोला,,)

आहहहह‌ कितना नमकीन स्वाद है,,,,

(आराधना अपने बेटे की हरकत उसकी इतनी गंदी बातें और उसका इस तरह से अंगूठा चूसना देखकर पूरी तरह से सिहर उठी,,, और पल भर के लिए उसके मन में यह ख्याल आया कि अगर वह अपने आप को पूरी तरह से अपने बेटे को सौंप दे तब तो वह अपनी जवानी से पूरी तरह से रगड़ डालेगा,,,,,)

छी यह क्या किया,,,(फिर भी अपने आप को संभालते हुए आराधना बोली)

वही जो एक मर्द औरत के इस खूबसूरत स्वादिष्ट काम रस के साथ करता है,,,, मैं तो सच में हैरान हो गया मम्मी कि तुम साड़ी के नीचे कुछ भी नहीं पहनी और ऐसे ही ऑफिस चली गई,,,,, मैंने किस लिए तुम्हें पेंटी लाकर दिया था इतनी खूबसूरत और महंगी पहनती है कि अगर करोगी तो स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा लगोगी,,,,

नहीं मुझे नहीं पहनना है वह बहुत महंगी है किसी खास मौके के लिए ही रखी हुं,,।

(अपनी मां की बात सुनकर संजू को थोड़ी राहत महसूस हो रही थी क्योंकि जिस तरह कि उसने हरकत किया था उसे लग रहा था कि उसकी मां उसे डांटेगी लेकिन अपनी मां के रवैया को देखकर संजू समझ गया था कि अगर वह अपनी मां के साथ कुछ भी करेगा तो वह कुछ नहीं बोलेगी क्योंकि उसे भी मजा आ रहा है,,,,,, फिर भी पेंटी वाली बात पर संजू बोला,,,,,)

ऐसा क्यों सोचती हो बाद में दूसरी ले लेना लेकिन अभी के लिए तो पहनो मैं भी देखना चाहता हूं कि मेरी मम्मी मेहंगी खूबसूरत पेंटी पहनकर और कितनी खूबसूरत लगती है,,,।

संजू तो पागल हो गया है अपने होश में बिल्कुल भी नहीं है तू जानता है कि तेरी जैसी बात कोई बेटा अपनी मां से नहीं कहता तुझे समझता में मुझे देखना चाहता है और अभी भी देख चुका है इस व्यवस्था में कोई बैठा अपनी मां को नहीं देखना चाहता,,, मैं तेरी मां हूं कोई अनजान औरत या तेरी प्रेमिका नहीं हुंं,,

मैं कुछ नहीं जानता मैं सिर्फ इतना जानता हूं कि तुम एक औरत हो और मैं एक मर्द हुंंंं पर एक औरत और मर्द के बीच केवल प्यार और आकर्षण ही होता है कोई रिश्तेदारी नहीं होती,,,,

हम दोनों के बीच तो है ना,,,, और किसी को कुछ भी पता चल गया तो कितनी बदनामी होगी तू जानता है

देखो मम्मी मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि तुम्हें भी मेरी जरूरत है और घर के चारदीवारी के अंदर क्या हो रहा है दूसरों को क्या पता,,,,, अभी-अभी तुमने मुझे अपनी साड़ी उठाकर अपनी चूत दिखाई ना अब दुनिया वालों को क्या पता कि घर के अंदर क्या हो रहा है क्या चल रहा है,,,, किस के इंतजार में बैठी हो पापा बाहर दूसरी औरतों के साथ ऐसा कर रहे हैं अपनी जरूरत पूरी कर रहे हैं और तुम उनके इंतजार में अपनी भरी हुई जवानी लुटा रही हो,,,,

(अपने बेटे की बात सुनकर आराधना फिर से कुर्सी पर बैठ गई थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें अपने बेटे की बाद में उसे सच्चाई भी नजर आ रही थी सच पूछा जाए तो इस समय आराधना को उसके बेटे की बहुत जरूरत थी और वह भी बेटे के तौर पर नहीं एक मर्द के तौर पर,,, अपनी मां को इस तरह से उदास बैठा देखकर संजू अपनी बात को आगे बढ़ाता हुआ बोला,,,)

तुम्हारी उदासी मुझसे देखी नहीं जाती तो मैं भी खुश होने का पूरा हक है अपने तरीके से जीने का पूरा हक है जिस तरह से पापाजी रहे तुम्हें भी उनकी तरह जीना होगा उन्हें दिखाना होगा कि तुम किसी से कम नहीं हो और ना तुम हमेशा पापा से डरती रहोगी और पापा तुम्हें डराते रहेंगे,,,, जरा यह तो सोचो कभी पूछने आए कि घर में क्या है क्या नहीं है तुम्हें पैसे की जरूरत है कि नहीं बस अपना रोज-रोज नहीं औरतों को लेकर घूम रहे हैं और तुम उनके इंतजार में बैठे हो शायद तुम नहीं जानती कि तुम कितनी खूबसूरत हो ,,,,,,, तुम्हें इस तरह से अपना जीवन खराब नहीं करना चाहिए अपने लिए जीना चाहिए मेरे लिए मोहिनी के लिए जीना चाहिए और वह भी अच्छी बनकर ,,,, अपने आस-पड़ोस की औरतों को देखो कैसे खुश मिजाज रहते हैं उन्हें भी कोई ना कोई दुख होगा लेकिन फिर भी वह लोग अपनी जिंदगी को अच्छे से जी रही है,,,।

(संजू की बातों को सुनकर आराधना के दिलो-दिमाग पर अजीब सा असर हो रहा था वह अपने बेटे की बात मानने के लिए पूरी तरह से तैयार हो रही थी खास करके उसकी अंगूठे वाली हरकत नहीं तो उसके तन बदन में आग लगा दिया था जिसके बारे में सोच कर अभी भी उसका काम रस टपक रहा था उसे भी अपने बेटे की बात में सच्चाई नजर आ रही थी उसे भी एक मर्द की जरूरत थी उसे भी संजू की जरूरत है वह अच्छी से जानती थी कि संजू की बाहों में उसे अद्भुत सुख मिलेगा,,,, क्योंकि वह अपनी आंखों से अपने बेटे की मर्दानगी की ताकत को देख चुकी थी और वह भी अपनी ही बड़ी दीदी पर आजमाते हुए और एक अनुभवी आंखों से आराधना को साफ पता चला था कि संजू से उसकी बड़ी दीदी पूरी तरह से तृप्त हो चुकी थी,,,, अगर ऐसा ना होता तो वह बार-बार किसी बहाने से उसके घर नहीं आती,,,, काफी सोच विचार करने के बाद वह अपने बेटे से बोली,,,।

तू चाहता क्या है,,,?

तुम्हें महंगी वाली पैंटी में देखना चाहता हूं खूबसूरत ब्रा में तुम्हारी खूबसूरती देखना चाहता हूं,,,,

ठीक है,,,(गहरी सांस लेते हुए) लेकिन सिर्फ देखने दूंगी इससे ज्यादा कुछ भी करने की सोचना भी नहीं,,,.

(अपनी मां की बात सुनकर संजू का दिल खुशी से झूम उठा इतना ही संजू के लिए काफी था वह एकदम से खुश होता हुआ बोला)

सिर्फ मैं देखूंगा और कुछ नहीं,,,,।

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(इतना सुनते ही आराधना कुर्सी पर से उठ कर खड़ी हो गई और अपने कमरे की तरफ जाने लगी कमरे में प्रवेश करने के बाद वह नहीं चाहती थी कि उसके पीछे किसका बेटा भी कमरे में आ जाए क्योंकि उसके सामने उसे कपड़े उतारने में चड्डी और ब्रा पहनने में शर्म महसूस होती है इसलिए वह दरवाजे को बंद कर दी,,,)
 
संजू की खुशी का ठिकाना ना था आखिरकार उसने अपनी बातों से बहला कर अपनी मां को अपनी बात मनवाने पर मना ही लिया था और उसकी मां की संजू की बात मानते हुए कमरे में चली गई थी लेकिन इस डर से कि कहीं संजू उसके पीछे पीछे ना जाए वह तुरंत दरवाजा को बंद कर ली थी,,,, बाहर खड़ा संजू पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था जिस तरह से उसने आज अपनी मां की चूत की फांकों के बीच अपना अंगूठा रखकर दबाया था वह पल संजू के लिए बेहद अविस्मरणीय और अतुलनीय था इस पल को वह कभी अपनी जिंदगी में नहीं पहुंच सकता था,,,, कुछ ही क्षण का यह दृश्य और उसकी हरकत पूरी तरह से संजू के तन बदन में आग लगा गई थी,,,, आज संजू बेहद करीब से अपनी मां की चूत के दर्शन किया था और वह भी आधी,,, आधी चूत की खूबसूरती से आज पहली बार वह वाकिफ हुआ था,,, अपनी मां की आधी चूत की खूबसूरती उसे आधे चांद की तरह लग रही थी,,,, जो कि हकीकत भी था मर्दों के लिए हमेशा से औरतों की चूत चांद से कम नहीं होती जितनी खूबसूरत मर्दों के औरत का चेहरा लगता था उससे कई ज्यादा खूबसूरत मर्द को औरत की चूत लगती थी,,,,

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अपनी मां की चूत के बारे में सोच कर संजू का लंड अभी भी पूरी तरह से टनटनाया हुआ था,,,, संजू की उंगली से अभी भी उसकी मां की चूत के काम रस की मादक खुशबू अभी भी आ रही थी जिसे बार-बार संजू अपने अंगूठे को अपने नाक से लगा उसकी मादकता भरी खुशबू को अपने नथुनों के द्वारा अपने पूरे वजूद में उतार रहा था,,,,, संजू का रोम-रोम पुलकित हुआ जा रहा था अपनी मां की गदराई चूत की तुलना में उसे और किसी की भी चूत उतनी रसभरी नहीं लग रही थी जितना कि उसकी मां की चूत लग रही थी,,, संजू कुर्सी पर बैठकर अपनी मां की चूत के बारे में सोच रहा था उसकी गुलाबी पत्तियां ऐसा लग रहा था कि जैसे मानो अभी-अभी ताजा खीले हो,,, चूत के होठ एकदम मोटे मोटे थे एकदम रस से भरे हुए जिसे संजू अपने होठों से लगाकर उसका रसपान करना चाहता था,,,,, चूत एकदम चिकनी थी जो कि अपनी चिकनाहट के कारण और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी संजू अपने मन में ही सोच रहा था कि उसकी मां एक-दो दिन के अंतराल में ही अपनी चूत पर क्रीम लगाकर साफ की है तभी तो चूत इतनी मक्खन की तरह चिकनी थी,,,, संजू अपने मन में सोच रहा था कि उसका बाप कितना किस्मत वाला है जो उसे इतनी खूबसूरत चूत चोदने को मिलती थी लेकिन साला एकदम गांडू निकला कितनी खूबसूरत औरत इतनी अच्छी माल को छोड़कर बाजारू औरतों के पीछे घूम रहा है,,,, अपनी मां को माल के रूप में सोचकर संजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी संजू अपने मन में यही सोच रहा था कि अगर उसकी मां किसी के प्रेम में पड़ जाए तो वह आदमी उसकी मां को माल कहकर ही संबोधित करेगा और अपने दोस्तों में इतनी खूबसूरत माल पाकर उसके बारे में गंदी गंदी बातें करके खुशी और गर्व से फूला नहीं समाएगा,,,,,, संजू अपने मन में यही सोच रहा था कि सही मायने में उसकी मां एक बेहतरीन किस्म की माल ही है जिसे पाकर दुनिया का कोई भी मर्द गर्व का अनुभव करेगा और यह अनुभव किसी और को लेने देना नहीं चाहता था संजू यही चाहता था कि उसकी मां किसी और के बस में हो जाए इससे पहले वह अपनी मां पर उसकी खूबसूरत रस से भरी जवानी पर काबू पा लेगा और फिर उसे किसी और के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी,,,,, यही सोचकर वह पेंट के ऊपर से कुर्सी पर बैठा बैठा अपने लंड को दबा रहा था और अंदर आराधना शर्म से पानी पानी में जा रही थी अपने बेटे की हरकत पर उसकी चूत कचोरी की तरफ फूल चुकी थी क्योंकि वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसका बेटा उसकी चूत को स्पर्श कर लेगा,,,, लेकिन इस बात से वह इनकार भी नहीं कर पा रही थी कि उसके बेटे को स्पर्श में एक जादू था एक आकर्षण था जिसका स्पर्श पाकर उसकी चूत मैं गरम लावा का उबाल पैदा हो रहा था अंदर ही अंदर चूत की दीवारें रिस रही थी,,,,,, जिसका मचा हुआ अभी ले रही थी उसके बदन में अभी भी सिहरन सी दौड़ रही थी उसका पूरा बदन कसमसा रहा था अपने बेटे की हरकत बार-बार उसकी आंखों के सामने नाच उठती थी जब वह अपना अंगूठा उसकी चूत पर रखकर कब आया था उस पल को याद करके अभी भी आराधना की चूत से काम रस की बूंद टपक रही थी,,,, अपने बेटे की जीत पर उसे गुस्सा भी आ रहा था और प्यार भी आ रहा था इस बात का एहसास उसे अच्छी तरह से हो रहा था कि उसका बेटा उसकी खूबसूरती है उसकी खूबसूरत बदन का दीवाना हो चुका था और एक नौजवान लड़के को इस तरह से अपने पीछे दीवाना होता देखकर वह मन ही मन अपने बदन की बनावट पर अपने स्वस्थ बदन पर गर्व कर रही थी,,,,, उसे इस बात का भी गर्व हो रहा था कि अभी भी वह किसी का भी लंड खड़ा करने में पूरी तरह से सक्षम है इस बात को सोचकर वह अपने बेटे के पेंट में बने तंबू के बारे में सोच रही थी और तब्बू के अंदर छिपे हथियार के बारे में सोचते ही उसकी आंखों के सामने वह रात वाला दृश्य घूमने लगा जब वह अनजाने में ही अपने बेटे को अपनी बड़ी दीदी की चुदाई करते हुए देखी थी उसका हर एक धक्का आराधना को अभी तक अंदर तक सिहरन पैदा कर दे रहा था,,,, आराधना कुछ देर तक अपने कमरे में खड़ी होकर अपने बेटे के बारे में सोच रही थी उसकी हरकत के बारे में सोच कर उत्तेजित हो जा रही थी फिर धीरे से अलमारी की तरफ गई और अलमारी खोलकर उस दिन मॉल में से खरीद कर लाई हूं चड्डी और ब्रा का पैकेट खोलने लगी,, थेली को खोलते समय आराधना अपने मन में यही सोच रही थी कि यह कैसी जिद है अपनी ही मां को पेंटी और ब्रा में देखना चाहता है,,, आखिरकार मुझे ब्रा और पेंटी में देखकर उसे क्या मिलेगा,,,, अपने मन में यही सोचते हुए मॉल में से लाई हुई पेंटी और ब्रा को निकालकर अपने हाथ में लेकर देखने लगी उसकी खूबसूरती उसकी मुलायम पन का अहसास खुद उसके तन बदन में अजीब सी हलचल पैदा कर रहा था अपनी ब्रा और पेंटी को देखकर आराधना अपने ही मन में कहने लगी,,,, नहीं औरतों को इस तरह के लिबास में देखकर मर्दों की हालत खराब हो जाती है,,,,,, इस बारे में सोच कर चाहा वह अपने बेटे की हरकत उसकी चाहत से हैरान और परेशान थी वहीं दूसरी तरफ अंदर ही अंदर ना जाने क्यों खुश भी हो रही थी,,, मॉल से लाई हुई वह पेंटी और ब्रा को अपने हाथों में लेकर देख रही थी तभी उसके हाथ में जालीदार पेंटी और ब्रा आ गई जिसको देखने पर ही उसकी आंखों में शर्म उतर आई थी अपने मन में सोचने लगी कि इसे पहनने के बाद भी छुपाने लायक कुछ भी नहीं रहता,,, चूत को छुपाने के लिए जो कपड़ा होता है वह पूरी तरह से जालीदार था जिसमें से उसकी गुलाबी चूत की गुलाबी पत्तियों सहित पूरा भूगोल साफ-साफ नजर आता अगर आराधना उसे पहन ले तो और पीछे केवल एक लेस थी जो कि गोल-गोल गांड की दरार में जीते हुए कमर के बीचोबीच आकर खत्म हो जाती थी इस तरह की पेंटी आज तक आराधना में नहीं पहनी थी और ना ही इसके बारे में कभी सोची ही थी लेकिन अपने बेटे के द्वारा खरीद कर लाने पर वह अनजाने में उसे पहनने के बाद की कल्पना करने लगी थी के इस पेंटी और ब्रा को पहनने के बाद वह कैसी लगेगी उसे इतना तो पूरी तरह से आत्मविश्वास ताकि वह बहुत खूबसूरत थी अगर खूबसूरत ना होती तो उसका जवान बेटा इस कदर उसके पीछे ना पडा होता और जालीदार पेंटी और ब्रा पहनने के बाद तो वह अपने बेटे पर पूरी तरह से कहर ढाएगी,,,,,, क्योंकि इसे पहन लेने के बाद भी उसके बेटे से उसके खूबसूरत बेशकीमती अंग छुप नहीं पाएंगे,,, उसे देखते ही जरूरत के बेटे के मुंह में पानी आ जाएगा इस बात का ख्याल उसके मन में आते ही उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी लेकिन इस समय वहां जालीदार ब्रा और पेंटी पहनने का जोखम बिल्कुल भी नहीं रह सकती थी इसलिए वह दूसरी ब्रा और पेंटी को लेकर बाकी की अलमारी में रखकर अलमारी को बंद कर दी,,,, और बेटी को अपने हाथ में लेकर इधर-उधर करके उसकी बनावट को उसके मुलायम कपड़े को देख कर उसे पहनने के बाद आरामदायक महसूस करने का एहसास उसके चेहरे पर हो रहा था वह साड़ी को अपने दोनों हाथों से पकड़कर थोड़ा सा ऊपर उठाई और नीचे झुक कर पेंटिं के एक हिस्से में अपने पैर को डालने लगी,,, और पैर को उस में डालते हुए यह सोचने लगी कि अब वह अपने बेटे को कैसे अपनी पहनी हुई ब्रा और पेंटी दिखाएगी क्या फिर से उसे अपनी साड़ी ऊपर उठा कर दिखाना पड़ेगा ऐसा किए बिना तो उसका बेटा देख नहीं पाएगा एक ख्याल मन में आते हैं उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी और यही सोचते हुए अपने दूसरे पर को भी उठा कर उस पेंटी के दूसरे हिस्से में डाल दिया और उसे धीरे से नाजुक उंगलियों का सहारा देकर ऊपर की तरफ खींचने लगी देखते ही देखते आराधना पेंटी को अपनी कमर तक खींचकर अपनी गुलाबी चूत को उस में छुपा ली,,,,,, पेंटी पहनने के बाद उसके आरामदायक पन का एहसास उसे हो रहा था नरम नरम मुलायम कपड़ा उसकी गुलाबी और मुलायम चूत को अपनी आगोश में लेकर उसे और ज्यादा आराम दे रही थी इसका अहसास होते ही उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी और वह अपनी पहनी हुई नई पेंटी को देखने के लिए आईने के सामने जाकर खड़ी हो गई वह उसी स्थिति में थी साड़ी को कमर तक उठाए हुए और वह अपनी पेंटी को देख रही थी गोल गोल घूम कर पीछे नजर करके वह अपने नितंबों पर पेंटिं के कसाव को देख रही थी और वाकई में उसकी गोल-गोल गांड चांद की तरह नजर आ रही थी,,,,

आराधना पंतय तरय करती हुयी

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अपनी गोल-गोल गांड को देख कर उसे अपने बेटे की कही बात याद आ गई वह उसकी आधी चूत को आधा चंद्रमा का उपमा दे रहा था और इसीलिए आराधना अपने मन में सोचने लगी कि उसकी गोल-गोल गांड को देखकर तब तो उसका बेटा उसे थोड़ा कक्षा में खिला हुआ चांद का उपमा उसकी गांड को देगा यह सोचकर उसके होठों पर मुस्कान आ जाए और वह तुरंत साड़ी को नीचे करके कंधे पर से अपनी साड़ी को हटा दी और ब्लाउज का बटन खोलने लगी अपने ब्लाउज के बटन को खोलते समय आईने में देखते हैं ना जाने क्यों उसके मन में यह ख्याल आने लगा कि काश अपने हाथों से उसका बेटा उसके ब्लाउज का बटन खोलता तो कितना अच्छा होता यह सोचकर उसके तन बदन में आग लगने लगी और वह देखते ही देखते अपने ब्लाउज के सारे बटन को खोलकर ब्लाउज को उतार कर एक तरफ रख दी और नई ब्रा को अपने हाथ में लेकर उलट-पुलट कर देखने लगी साथ ही आईने में अपनी गोल-गोल चुचियों को देखकर मन ही मन खुश हो रही थी वाकई में 2 जवान बच्चों की मां होने के बावजूद भी चुचियों का कसाव बरकरार था ,,चुचीया एकदम कसी हुई थी,,,, और अपनी कसी हुई चूची को देखकर अपने मन में सोचने लगी तभी तो उसका बेटा पागल हुआ जा रहा है,,,,,।

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थोड़ी ही देर में आराधना ब्रा को पहनकर अपनी लाजवाब चूची को उस में छुपा ली और ब्लाउज पहनकर साड़ी को दुरुस्त कर ले अब अपने बेटे को यह बताने में उसे शर्म महसूस हो रही थी कि वह ब्रा और पेंटी पहन चुकी है उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपने बेटे से कैसे बताएं की उसकी लाई हुई ब्रा और पेंटी वह पहन चुकी है आखिरकार ऐसी कौन सी मां होगी जो अपने ही बेटे को ऐसी कौन सी मां होगी जो बताएगी कि मैं तेरी लाई हुई ब्रा और पेंटी पहन ली हूं तुझे देखना है तो आजा,,,, यह सोचकर उसके बदन मे कसमसाहट बढ़ती जा रही थी,,, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था सांसों की गति तेज होती जा रही थी बाहर खड़ा संजू पूरी तरह से व्याकुल था अपनी मां को एक नए लिबास में देखने के लिए,,,,, आराधना दरवाजे की तरफ ही देख रही थी किसी भी वक्त उसका बेटा दरवाजे पर दस्तक दे सकता था बाहर खड़ा संजू व्याकुलता की सारी सीमाओं को पार कर चुका था उससे बिल्कुल भी सब्र नहीं हो रहा था तो वह एक हाथ से पैंट के ऊपर से ही अपने लंड को दबाए हुए वह आगे बढ़ा दरवाजे पर दस्तक देते हुए बोला,,,।

क्या हुआ मम्मी पहन ली कि नहीं,,,,

(दरवाजे की दस्तक और अपने बेटे की आवाज सुनते हैं आराधना का दिल धक से करके रह गया,,,, वह क्या जवाब दे उसे समझ में नहीं आ रहा था शर्म और उत्तेजना के मारे उसके बदन में कपकपी हो रही थी,,,, वह दरवाजे पर ही टकटकी लगाए देख रही थी,,,, अंदर से किसी भी प्रकार की हलचल होता ना देखकर संजू फिर से दरवाजे पर दस्तक देते हुए बोला,,,।)

क्या हुआ मम्मी तुम कुछ बोल क्यों नहीं रही हो,,,

(बाहर खड़े संजू की भी व्याकुलता बढ़ती जा रही थी वह बेहद उत्सुक था अपनी मां को ब्रा और पेंटी में देखने के लिए और कमरे के अंदर आराधना का दिल जोरों से धड़क रहा था तो कुछ समझ नहीं पा रही थी लेकिन वह समझ गई थी कि उसका बेटा अपनी जिद पूरी करके ही रहेगा इसलिए मैं धीरे से आगे बढ़ी और दरवाजे की सीटकनी को खोल कर वापस आकर बिस्तर पर बैठ गई दरवाजे की सीटकनी की आवाज सुनकर संजू समझ गया कि उसकी मां दरवाजा खोल दिए और वह तुरंत दरवाजे को दोनों हाथ से धक्का मार कर खोल दिया तो देखा उसकी मां बिस्तर पर एक नवी नवेली दुल्हन की तरह शर्मा कर बैठी हुई थी,,,, अपनी मां को इस रूप में देखकर संजू का लंड उबाल मारने लगा जवानी जोर मारने लगी और वो धीरे से आगे बढ़े लेकिन आगे बढ़ने से पहले वह दरवाजा को अपने हाथों से बंद करके सीटकनी लगा दिया अपने बेटे के द्वारा दरवाजा बंद करना और सिटकिनी लगाना यह सब आराधना को शर्मसार कर रहा था वह शर्म से पानी पानी हो जा रही थी उसे ऐसा एहसास हो रहा था कि जैसे उसका प्रेमी या पति उसके साथ संभोग करने के लिए दरवाजा बंद कर रहा है,,,, इस अहसास से आराधना की चूत पानी छोड़ने लगी वह अपनी जगह पर बैठे-बैठे कसमसाने लगी,,,,,।

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संजू धीरे-धीरे चलती है ठीक है अपनी मां के सामने जाकर खड़ा हो गया और उसके कंधे पर अपने हाथ रखते हुए बोला,,,।

यह क्या मम्मी तुम तो साड़ी पहनी हो मैं ऐसा थोड़ी कहा था मैं सिर्फ ब्रा और पेंटी पहनने के लिए बोला था,,,,,,

(एक तो ऐसे माहौल में अपने बेटे की हथेली को अपने कंधों पर महसूस करके ही एकदम से सिकुड़ने लगी थी और ऊपर से उसकी फरमाइश को सुनकर उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी वह अपनी कंपकपाते होठो से बोली,,,,)

केवल ब्रा और पेंटी में मुझे शर्म आ रही थी,,,,

शर्माते हुए तो तुम और भी खूबसूरत लगती हो,,,,, लाओ मैं बताता हूं कैसे,,,।(इतना कहने के साथ ही संजु अपनी मां के कंधों को पकड़कर उसे ऊपर की तरफ उठाने लगा आराधना को समझ में नहीं आ रहा था कि उसका बेटा उसके साथ क्या करने वाला है लेकिन फिर भी एक अजीब से आकर्षण के तहत वह अपने बेटे की बात मानते हुए खड़ी हो गई,,,,,, और संजू अपनी मां को बिस्तर पर से खड़ी करके एक हाथ उसकी कमर में डाल दिया यह एहसास आराधना के लिए काटो तो खून नहीं इस तरह की स्थिति पैदा कर रहा था वह बर्फ की तरह जमने लगी थी अपने बेटे की हथेली को अपनी चिकनी कमर पर महसूस करते हैं उसके तन बदन में लहू का दौरा एकदम से रुक सा गया था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या हो रहा है उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी आज तो पूरी तरह से लगता था अपनी मनमानी करने पर उतर आया था वह अपनी मां के कमर में हाथ डाले हुए ही उसे ठीक आईने के सामने ले जा करके खड़ी कर दिया और अगले ही पल उसके पीछे एकदम से उससे सेट कर खड़ा हो गया पैंट में तंबू सीधे-सीधे आराधना की गांड पर रखा था अपने बेटे के लंड़ कों जो की पेंट के अंदर था फिर भी उसके इस पर से‌ वह पूरी तरह से गरमा चुकी थी,,, पल भर में ही आराधना की सबसे बड़ी तेजी से चलने लगी वह अपने आप को संभालने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं हुई संजू आईने में अपने आप को और अपनी मां को देखकर मंद मंद मुस्कुरा रहा था और आराधना आईने में अपने आप से नजर मिलाने में शर्म आ रही थी इसलिए अपनी नजरों को नीचे झुका ली थी,,,,,, बार-बार उसके मन में ख्याल आ रहा था कि अपने बेटे को यहीं रोक दे लेकिन अपने पति की बेवफाई के चलते वहां ऐसा करने में असमर्थ महसूस कर रही थी एक तरह से अपने पति से बदला लेना चाहती थी लेकिन यह नहीं जानती थी कि अपने पति से लिया गया बदला उसके और उसके बेटे के बीच के पवित्र रिश्ते को तार-तार कर देगा इस बात का ख्याल उसके दिलो-दिमाग पर बिल्कुल नहीं आ रहा था मां बेटे दोनों के सर पर मदहोशी छाई हुई थी,,,,, संजू अपनी मां के गर्दन पर अपनी थोड़ी रखते हुए मुस्कुराते हुए अपनी मां से बोला,,,)

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आंखें खोलो मम्मी देखो तो कितनी खूबसूरत लग रही हो आसमान से उतरी हुई परी लग रही हो,,,,

( आराधना अपनी आंखों को खोना नहीं चाहती थी वह शर्म से पानी पानी हो जा रही थी लेकिन अपने बेटे की आवाज में उसकी बातों में एक अजीब सा जादू था जिसके चलते वह अपनी आंखों को खोलने में मजबूर हो गई और आंखें खोलकर आईने में अपनी परछाई को देखने लगे जोकि वाकई में इस समय बहुत ही खूबसूरत लग रही थी उसका बेटा उसे बिल्कुल सटके खड़ा था आराधना की गांड पर संजू के लंड की ठोकर बार-बार लग रही थी जिससे वह अपने बदन में उत्तेजना का अनुभव कर रही थी,,,, संजू अपनी मां की उत्तेजना बढाते हुए उसके कान के नीचले पट्टे पर अपनी नाक रखकर जोर से अपनी मां के बदन से उठने माता खुशबू को अपने अंदर उतारने लगा और उसकी यह हरकत आराधना की चूत से उसके काम रस को बुंद बनाकर टपकाने लगी,,,, आराधना पूरी तरह से उत्तेजित हो जा रही थी संजू की हर एक हरकत उसके लिए असहनीय साबित हो रही थी,,,। आराधना इस तरह के मादकता भरे दौर से कभी नहीं गुजरी थी संजू की हरकतें धीरे-धीरे बढ़ रही थी और ना जाने क्यों उम्र के इस दौर पर पहुंचने के बावजूद भी आराधना अनाड़ी और संजू खिलाड़ी साबित होता जा रहा था,,,,, उसी तरह से गहरी सांस लेते हुए संजू आईने में देखते हुए बोला)

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देख रही हो मम्मी तुम कितनी खूबसूरत लग रही हो तुम्हारे सामने तो जवान लड़कियां भी पानी भरे इसीलिए तो मैं तुम्हारी खूबसूरती का दीवाना हूं,,,,(संजू समझ गया था कि उसकी चिकनी चुपड़ी बातों में उसकी मां पूरी तरह से आ चुकी थी वरना इस तरह से उसकी बात मानते हुए ब्रा और पैंटी पहने का साहस ना करती हो उसकी आंखों के सामने अपनी साड़ी उठाकर कुछ ना पहने होने का नहीं दिखाती संजू को इस बात का एहसास था कि उसके पिताजी की बेवफाई उसके लिए वरदान साबित होगी इसीलिए तो वह पूरी तरह से आत्मविश्वास के साथ धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था आराधना अपने बेटे की बातों को सुनकर आईने में अपने आप को देख रही थी वाकई में उसकी खूबसूरती इस उम्र में भी बरकरार थी संजू अपनी हरकत बढ़ाते हुए अपने दोनों हाथों को साड़ी के ऊपर से ही ब्लाउज पर रखकर हल्के से अपने दोनों हाथों को अपनी मां की चूची पर रखकर दबाते हुए बोला,,,)

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देख रही हो मम्मी कितनी उठी हुई है मैंने आज तक किसी भी औरत की इतनी खूबसूरत चूची नहीं देखा,,,(मर्दाना हाथों का स्पर्श अपने बदन पर महसूस करके और वहां पर अपने सबसे संवेदनशील अंग पर महसूस करते हैं उसके तन मन में आग लगने लगे वह अपने आप को संभालने में असमर्थ साबित हो रही थी उसके घुटने कांप रहे थे और उसके मुख से एक भी शब्द नहीं फुट रहे थे,,,, संजू की कामुक हरकतों का सिर्फ अपनी गहरी सांस लेकर उसका जवाब दे रही थी अपनी मां की तरफ से एक भी हरकत का प्रतिकार होता ना देखकर संजू की हरकतें पल-पल बढ़ती जा रही थी वह देखते ही देखते अपनी मां के कंधे पर से साड़ी का पल्लू हटाते हुए बोला,,,)

इस तरह से कैसे पता चलेगा कि तुम्हारे बदन पर ब्रा कैसी लग रही है,,,,

(जवाब में आराधना केवल गहरी गहरी सांस ले रही थी जो कि ना चाहते हुए भी उसकी संमंती दर्शा रहा था,,,, साड़ी का पल्लू हटने से आराधना की भारी-भरकम छातियां ब्लाउज की शक्ल में और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी और संजू ब्लाउज के ऊपर से एक बार फिर से अपने दोनों हथेली को अपनी मां की चूची पर रखते हुए उसे टेनिस के गेंद की तरह हल्कै से दबाते हुए बोला,,,)

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सहहहरह ,,,, कितनी बड़ी बड़ी है एकदम खरबूजे की तरह मुझे तो समझ में नहीं आ रहा है कि तुम्हारी इतनी बड़ी चूची झांकी खरबूजे की तरह है ब्रा‌, में कैसे समा पाई होगी,,,, यही तो मैं देखना चाहता हूं,,,,।

(आराधना अपने बेटे की हरकत को सहन नहीं कर पा रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,, ब्लाउज के ऊपर से अपनी चूची पर मर्दाना हाथों का स्पर्श पाकर वह पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी उसके मुंह से सिर्फ इतना ही निकला,,,)

सहहहरह संजू यह क्या कर रहा है,,,,

कुछ नहीं मम्मी ब्रा और पैंटी में तुम कैसी दिखती हो यह देखने की कोशिश कर रहा हूं,,,,,

(और इतना कहने के साथ ही संजू पूरी तरह से बेशर्मी की हद पार करते हुए आईने में देखते हुए अपनी मां के ब्लाउज के बटन को खोलना शुरू कर दिया आराधना आईने में अपने आपको अपने बेटे की हरकत को देखकर शर्म से पानी पानी हो जा रहे थे लेकिन वह अपने बेटे को रोक नहीं पा रही थी क्योंकि अंदर ही अंदर वह भी यही चाहती थी,,, उसका बेटा पूरी तरह से मर्द हो चुका था जिसका उदाहरण वह अपनी आंखों से देख चुकी थी अपनी ही बड़ी दीदी के साथ,,, और कहीं ना कहीं आराधना के मन के कोने में भी मर्दाना सुख की कामना पनप रही थी और इसीलिए ही आराधना अपने बेटे के सामने कमजोर पड़ती चली जा रही थी एक-एक करके संजू अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोल रहा था और साथ ही जिस तरह से और पीछे अपनी मां के बदन से सटकर खडा था उसका लंड आराधना की गांड के बीचो-बीच घुसने का प्रयास कर रहा था जिसका एहसास आराधना को एकदम साफ तौर पर हो रहा था बार-बार उसकी चूत से मदन रस की बूंद टपक जा रही थी जिससे उसकी पेंटी गीली हो रही थी,,,। एक-एक करके संजू ने अपनी मां के ब्लाउज के सारे बटन खोल दिए बटन के खुलते ही ब्लाउज की दोनों परते अलग हो गई जिससे,,, संजू के द्वारा खरीद कर लाई गई ब्रा नजर आने लगी जिसको देखते ही संजू की आंखों में चमक आ गई गोरे बदन पर लाल रंग की ब्रा बेहद खूबसूरत लग रही थी,,, आराधना की नजर बार-बार शर्म के मारे नीचे झुक जा रही थी लेकिन अपने आप पर अपने गोरे बदन पर अपनी चूचियों को लाल रंग की ब्रा में कैद देखकर खुद आराधना को अच्छा लग रहा था लाल रंग की ब्रा में उसकी कसी हुई चूचियां और भी ज्यादा अपना असर बिखेर रही थी,,,,,

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संजू की हालत पल-पल खराब होती जा रही थी उसके लंड का यह हाल था कि अगर उसकी मां उसके लंड को अपने हाथ से पकड़ ले तो शायद उसका लंड पानी फेंक दें इतना ज्यादा कड़क और उत्तेजित हो चुका था लेकिन फिर भी वह अपनी कमर को आगे किए हुए अपने लंड को पेंट के ऊपर से ही और अपनी मां की साड़ी के ऊपर से ही उसकी गांड के बीचों-बीच धंसाने की पूरी कोशिश कर रहा था,,,,, अपनी मां को बिल्कुल भी विरोध करते ना देख कर संजू कंधे की तरफ से दोनों तरफ से अपनी मां के ब्लाउज को पकड़कर उसे नीचे की तरफ खींचने लगा शायद आराधना अपने बेटे के मकसद को समझ गई थी और इसीलिए वह अपने दोनों हाथ को एकदम अकेला छोड़ दी थी और पीछे की तरफ हल्के से कर दी थी ताकि उसका बेटा बड़े आराम से उसके ब्लाउज को उतार सके और देखते ही देखते संजू अपनी मां के ब्लाउज को उसकी चिकनी मोटी बाहों में से अलग करके उतार दिया,,,,,,, अब आराधना आईने के सामने अपने बेटे के बदन से सटकर अर्धनग्न अवस्था में खड़ी थी कमर के नीचे अभी भी साड़ी लिपटी हुई थी लेकिन कमर के ऊपर वह सिर्फ एक ब्रा में थी जिसमें उसकी भारी-भरकम गोल-गोल खरबूजे जैसी छातियां ब्रा में से बाहर छलकने के लिए बेताब हुए जा रही थी,,, संजू के मुंह के साथ-साथ उसके लंड़‌ में भी पानी आ रहा था,,,, अपनी मां की खूबसूरती को आज बेहद करीब से अपने हाथों में लेकर वह महसूस कर रहा था देख रहा था लंड की ठोकर आराधना बार-बार अपनी गांड के बीचो बीच महसूस करके पानी पानी हुए जा रही थी,,, कुछ भी कर सकने की यह कहने की शक्ति आराधना में बिल्कुल भी नहीं थी ब्रा के ऊपर से ही अपनी मां की चूची पर हाथ रखते हुए संजू बोला,,,,,।

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आहहहहह इसे कहते हैं खूबसूरती एक खूबसूरत औरत की खूबसूरत चुची,,,(अपने बेटे के मुंह से बार-बार चूची शब्द सुनकर आराधना का चेहरा शर्म से लाल हुआ जा रहा था और संजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) कसम से मैंने आज तक कितनी खूबसूरत चूची नहीं देखा ब्रा में कितनी खूबसूरत लग रही है मम्मी देख रही हो कितनी बड़ी बड़ी है,,,(दोनों हथेली को ब्रा की कटोरी के नीचे रखकर उसे गेंद की तरह दोनों हाथों में लेकर ऊपर की तरफ उछालते हुए बोला,,,)

देख रही हो मम्मी कितनी बड़ी बड़ी है एकदम मक्खन मलाई की तरह,,, लाजवाब खूबसूरत सोचो जरा ब्रा में इतनी खूबसूरत लग रही है तो बिना ब्रा के कितनी खूबसूरत दिखेगी,,,।

(अपने बेटे के मुंह से यह बात सुनते ही उत्तेजना के मारे आराधना की चुचियां तन गई रीड की हड्डी में सिहरन सी दौड़ने लगी अपने बेटे के कहने के मतलब को आराधना अच्छी तरह से समझ गई थी वह समझ गई थी कि उसका बेटा एक बहाने से उसे नंगी करना चाहता है लेकिन वह कुछ भी कर सकने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं थी वह अपने बेटे के हाथों की कठपुतली बन चुकी थी,,, संजू एक बहाने से अपनी मां के खूबसूरत अंग से खेल रहा था ब्रा के ऊपर से ही सही उसका इस तरह से अपनी हथेली में लेकर चूचियों को दबाना आराधना के तन बदन में अजीब सी हलचल पैदा कर रहा था महीनों बाद किसी मर्द का स्पर्श चुचियों पर हो रहा था जिसका एहसास उसे पूरी तरह से गर्म किया जा रहा था सबसे ज्यादा हालत खराब थी उसकी चूत की जिसमें से लगातार काम रस टपक रहा था आराधना यह सोचकर परेशान हुए जा रही थी कि जब उसका बेटा उसकी पेंटी देखेगा और वह भी काम रस में एकदम भीगी हुई तब हो क्या सोचेगा उसे तो पता चल जाएगा कि उसकी हरकत उसे भी अच्छी लग रही है,,,,,

आदम कद आईने के सामने अपने अर्धनग्न बदन को अपने बेटे की बाहों में देखकर आराधना की आंखों में शर्म भर आया था चेहरा लाल गुलाबी हो चुका था पैरों में कंपन लगातार होता जा रहा था और संजू अपनी हरकतों से बिल्कुल भी बाज नहीं आ रहा था,,, संजू अपनी मां के खूबसूरत चेहरे के बदलते भाव को अच्छी तरह से देख रहा था उसके चेहरे की बदलती हुई रंगत साहब बयां कर रहे थे कि उसे भी उसकी हरकत अच्छी लग रही थी और वह धीरे-धीरे मदहोश हो जा रही थी क्योंकि बार-बार उसकी आंखें बंद हो जा रही थी संजू ब्रा के ऊपर से ही अपनी मां की दोनों गोलाईयो को अपनी हथेली में भरते हुए बोला,,,।)

ओहहहह मम्मी कसम से बहुत मजा आ रहा है मेरे हथेली में तुम्हारी चूचियां एकदम पके हुए आम की तरह है ऐसा लग रहा है कि जैसे मैं तुम्हारी चूची नहीं बल्कि स्वादिष्ट दशहरी आम को अपने हाथ में लेकर दबा रहा हूं,,,,

सहहह संजू तु जो कुछ भी कर रहा है गलत है यह ठीक नहीं है,,,

गलत सही क्या है यह ना मुझे पता है या ना तुम्हें पता है लेकिन इस समय जो कुछ भी हो रहा है वह अच्छा हो रहा है मैं तुम्हारी खूबसूरती को अपनी आंखों से देख रहा हूं तुम्हारे खूबसूरत अंगों को निहार रहा हूं कसम से मैंने आज तक इतनी खूबसूरत औरत नहीं देखा,,,,,(इतना कहने के साथ ही संजू अपनी मां की चूची पर से हाथ हटाकर नीचे की तरफ ले गया और साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगा,,, तो तुरंत आराधना संजू का हाथ पकड़ ली और कंपकपाते भरे स्वर में बोली,,,।

नहीं संजू ऐसा मत कर मुझे शर्म आ रही है,,,,

इसमें शर्म कैसी मम्मी साड़ी उठाएगी ना तो मैं देख नहीं पाऊंगा की पेंटी कैसी दिखती है तुम्हारे खूबसूरत बदन पर,,,

कोई बेटा ऐसा करता है क्या,,,?

तुम देखना चाहती हो क्या किसी के घर पर,,,, सबके सामने तो सब लोग अच्छे ही बने रहते हैं लेकिन चारदीवारी के अंदर इसी तरह का खेल होता है,,,, इसने तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो जो होता है हो जाने दो,,,,(इतना कहने के साथ संजू फिर से अपनी मां की साड़ी ऊपर की तरफ उठाने लगा तो आराधना फिर से उसका हाथ पकड़ते हुए बोली,,)

रहने दे सच में मुझे शर्म आ रही है किसी को इस बारे में पता चल गया तो क्या होगा,,,

कुछ नहीं होगा और किसी को भी पता नहीं चलेगा,,,, और हां साड़ी उठाकर नहीं बल्कि साड़ी खोलकर देखने का अलग मजा है,,,,(इतना कहने के साथ ही संजू साड़ी के गठन पर हाथ रख दिया और साड़ी को खोलना शुरू कर दिया आराधना की सांसे फिर से बड़ी तेजी से चलने लगी वह जानती थी कि उसकी एक चलने वाली नहीं है और जिस तरह का माहौल बना हुआ है और जैसे हालात में वह फंसी हुई है उसके बदन में भी मदहोशी जा रही थी क्योंकि लगातार संजू का लंड उसकी गांड पर ठोकर मार रहा था और इतने मोटे बड़े लंड का स्पर्श ही आराधना के तन बदन में उत्तेजना की लहर बढ़ा रहा था और वह ना चाहते हुए भी अपने बेटे के वश में होती चली जा रही थी,,,, आराधना अपने दोनों हाथों को खोल चुकी थी अब उसमें विरोध करने की क्षमता बिल्कुल भी नहीं रह गई थी क्योंकि संजू ने अपनी हरकतों से उसके मन पर पूरी तरह से काबू पा लिया था देखते ही देखते संजू अपनी मां की सारी हो आदम कद आईने के सामने खोल कर अलग कर दिया था और उसे बिस्तर पर फेंक दिया था इस समय उसकी मां केवल पेटीकोट और ब्रा में खड़ी थी,,,,, आईने में संजू को अपनी मां की पेटीकोट की डोरी साफ नजर आ रही थी,,, संजू को मालूम था कि अब उसे क्या करना है,,,।

दिन में आज घर पर आकर आराधना पछता रही थी,,, क्योंकि आप उसे डर लगने लगा था कि आज नहीं होने का हो जाएगा क्योंकि अब उसका बस अपने आप पर बिल्कुल भी नहीं चल रहा था अपने बेटे की हर हरकत पर वह पूरी तरह से मदहोश में जा रही थी इस तरह की मदहोशी आज तक वह कभी महसूस नहीं की थी,,,,, उत्तेजना के मारे आराधना का गला सूखता चला जा रहा था आईने में हल्की खुली आंखों से वह अपने पूरे वजूद को देख रही थी अर्धनग्न अवस्था में वह अपने बेटे की बाहों में खड़ी थी,,, लाल रंग की ब्रा में उसकी गोरी गोरी खरबूजे जैसी चूचियां खूब जंच रही थी ,,,इस बात का एहसास उसे भी अच्छी तरह से हो रहा था,, अपने मक्खन जैसे बदन पर अपने बेटे की मजबूत हथेलियों का स्पर्श पाकर वह पूरी तरह से पानी पानी हो जा रही थी उसकी चूत लगातार पानी बहा रही थी जिससे उसकी पेटीकोट पूरी तरह से गीली हो गई थी अब उसे इस बात का डर था कि किसी भी वक्त उसके बेटे की नजर उसकी गीली पेंटी पर पड़ जाएगी फिर उसके बाद वह अपने मन में क्या सोचेगा,,,, आज संजू बहुत खुश नजर आ रहा था वह अपनी मां की पेटीकोट की डोरी पर अपनी उंगलियों को रखते हुए बोला,,,।)

आज सच में मेरे लिए बहुत ही अच्छा दिन है मैं कभी सोचा नहीं था कि मेरी जिंदगी में ऐसा भी पल आएगा कि मैं एक खूबसूरत औरत के कपड़े अपने हाथ से उतारुंगा,,,।(अपने बेटे की बात को सुनकर उसकी सांसे गहरी गहरी चल रही थी उसके तन बदन में उत्तेजना अपना असर दिखा रही थी अपने बेटे की बातों के मतलब को अच्छी तरह से समझ रही थी अब उसके बेटे की नजर में वह उसकी मां नहीं बल्कि एक औरत थी और वह एक मर्द और एक मर्द और औरत के बीच के रिश्ते को हुआ अच्छी तरह से समझती थी जिसमें किसी भी प्रकार का रिश्ता नहीं होता केवल शारीरिक रिश्ते को छोड़कर और शायद उसका बेटा भी उसी रिश्ते के लिए तड़प रहा था,,,,, आराधना अपने बेटे को रोकना चाह रही थी लेकिन वह एकदम कमजोर पड़ चुकी थी,,,, अपने बेटे को रोक सकने की हिम्मत उसमें बिल्कुल भी नहीं थी,,,। और उसकी आंखों के सामने ही उसका बेटा उसकी पेटीकोट की डोरी को पकड़कर एक झटके से खींच दिया और तुरंत ही पेटिकोट का कसाव उसकी कमर पर एकदम ढीला पड़ गया,,,, आराधना की भारी भरकम गजराई गांड का आकार मटके जैसा था बीच से गोल और ऊपर से संकरा इसकी वजह से पेटीकोट अटक सा गया था जिससे संजू को ही अपने दोनों हाथों का सहारा लेकर अपनी मां के पेटीकोट को थोड़ा और ढीला करना पड़ा और ढीला करते ही संजू अपनी मां की पेटीकोट को उसी स्थिति में छोड़ दिया और पेटीकोट भर भराकर उसके कदमों में जा गिरा,,, आराधना आईने में अपनी स्थिति और हालात को देखकर एकदम पानी पानी हो गई वह अपनी आंखों को तुरंत बंद कर ली,,,, और संजू की खुशी का ठिकाना ना था संजू को इस बात की भी खुशी अत्यधिक थी कि उसकी मां जरा भी विरोध नहीं कर रही थी बल्कि उसका साथ दे रही शांत खड़ी होकर,,,,, आईने में अपनी मां के अर्धनग्न बदन को देख कर संजू बोला,,,,।

बाप रे कहीं में मर ना जाऊं इतनी खूबसूरत औरत तो मैंने आज तक नहीं देखा क्या मस्त चीज हो तुम मम्मी,,,, अब तो सच में मुझे पापा पर तरस आता है कि ईतनी खूबसूरत औरत छोड़कर वह बाजारु औरतों के पीछे घूम रहे हैं,,,, अगर मेरी इतनी खूबसूरत औरत होगी तो मैं उसे जिंदगी में कहीं छोड़कर नहीं जाऊंगा ,,,,

(अपने बेटे की बात सुनकर आराधना मन ही मन प्रसन्न होने लगी उसे अपनी खूबसूरत बदन पर गर्व होने लगा था,,,, लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रही थी क्योंकि संजू की बातें बेशर्मी भरी थी ऐसा आराधना कोई समय लग रहा था यही बात वह किसी और औरतों से कहां होता तो वह उस पर पूरी तरह से अपनी जान लुटा देती क्योंकि अभी भी आराधना अपने बेटे को एक मर्द के नजरिए से नहीं बल्कि एक बेटे के नजरिए से ही देख रही थी,,,,, संजू के लिए अभी भी वह एक मा ही थीअभी वह एक औरत नहीं बनी थी लेकिन उसे इस बात का डर भी लग रहा था कि,,,, अपने बेटे की हरकत देखते हुए वह आपकी मां से औरत बनने में देर नहीं लगाएगी,,,,)

कितनी खूबसूरत हो मम्मी तुम लाल कलर की ब्रा और पेंटी में तो तुम स्वर्ग से उतरी हुई है कोई परी लग रही हो,,,, तुम्हारा यह चिकना संगमरमरी बदन देख कर किसी की भी हालत खराब हो जाए मेरी खुद की हालत खराब होती जा रही है,,,,(साड़ी और पेटीकोट उतर जाने के बाद आराधना की गोरी गोरी गांड और उसके लंड के बीच केवल उसका पैंट का कपड़ा होर पेंटिं का कपड़ा बाधा बन रही थी लेकिन संजू अपने लंड की मर्दाना ताकत को पूरी तरह से यहां पर अपनी मां पर आजमा लेना चाहता था क्योंकि बार-बार वह अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर एकदम से सट जाता था जिससे उसका लंड पहनती सहित गांड की दरार के बीचो-बीच घुसता हुआ आगे बढ़ रहा था जिसका एहसास आराधना के तन बदन में आग लगा रहा था,,,,, अपनी मां की कदर आई जवानी को आईने में देखकर संजू बोला,,,)

अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है मम्मी अब मैं तुम्हारे बदन से तुम्हारी यह ब्रा और पेंटी दोनों उतार दूंगा क्योंकि मैं भी देखना चाहता हूं कि एक औरत के वजह से उसका आखिरी वस्त्र ब्रा और पेंटी उतारने में मर्दों को कैसा महसूस होता है,,,,

नहीं संजू ऐसा मत कर मैं कोई जरूरत नहीं बल्कि तेरी मां हूं,,,, ऐसा करना बिल्कुल भी ठीक नहीं है,,,

मैं ज्यादा कुछ नहीं करूंगा बस अपने हाथों से तुम्हारे यह कपड़े उतार लूंगा तुम्हें नंगी करूंगा मैं देखना चाहता हूं कि वह रात के बदन से कपड़े उतारने में मर्दों को कैसा लगता है,,,

उतार तो दिया है अब बाकी क्या रह गया,,, है,,,,(आराधना मदहोशी भरे स्वर में बोली)

अभी भी तुम्हारे बदन पर ब्रा और पेंटी बाकी है इसे तो उतार लेने दो मैं कुछ भी नहीं करूंगा कसम से,,,,

(अपने बेटे की यह बात सुनकर आराधना गहरी सांस लेने लगी क्योंकि अंदर ही अंदर हुआ भी यही चाहती थी कि उसका बेटा अपने हाथों से उसके आखिरी वस्त्र भी उतार दे वह अपने बेटे के हाथों से नंगी होना चाहती थी उसके बदन में सुरसुराहट बढती जा रही थी,,,, संजू अपनी मां की खामोशी को उसकी स्वीकृति समझकर अपने आगे का कार्यक्रम जारी रखते हुए अपनी मां की ब्रा का हुक वाला लगा अपने बेटे की उंगलियों का स्पर्श अपनी चिकनी पीठ पर महसूस करते ही आराधना के तन बदन में आग लग गई क्योंकि वह जानती थी कि किसी भी वक्त उसकी दोनों चूचियां एकदम आजाद हो जाएंगी उसके बेटे के सामने एकदम नंगी,,,, और उसकी नंगी चूची को देखकर पता नहीं वह क्या करेगा ऐसा मन में सोच कर उसकी चुत से पानी टपक रहा था,,,, ब्रा का हुक खोलने का अनुभव संजू को अच्छी तरह से था इसलिए वह बिल्कुल भी देर किए बिना अपनी मां की ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा को उसकी दोनों नारंगीयो से अलग करने लगा देखते ही देखते संजू ने अपनी मां के बदन पर से ब्रा उतार कर बिस्तर पर रख दिया आईने में अपनी मां की नंगी बड़ी बड़ी चूची यों को देखकर संजू के मुंह में पानी आ गया और आराधना की तो हालत खराब हो गई उसकी तो काटो तो खून नहीं ऐसी हालत हो गई थी वह ज्यों की त्यों खड़ी की खड़ी रह गई थी अपनी खरबूजे जैसी बड़ी बड़ी चूचियों को देखता खुद शर्म से पानी पानी में जा रही थी और अगले ही पल संजू ने अपना दोनों हाथों को अपनी मां की चूची पर रखते हुए उसे जोर से दबाते हुए बोला,,,।

सहहहरह इसे कहते हैं सूची इतनी लाजवाब चूची तो मैंने आज तक नहीं देखा जोकि ब्लाउज में कैद होने के बावजूद भी इतनी खूबसूरत लगती है और नंगी होने के बाद तो जानलेवा नजर आ रही है,,,,उफफफ,,,, यह तो मेरी जान ले लेगी,,,,( संजू इस मौके का फायदा उठाते हुए अपनी मां की बड़ी बड़ी चूची को जोर जोर से दबा रहा था और यह भी देख रहा था कि इस तन मन धन से उसकी मां के चेहरे के भाव बदल रहे थे उसे मजा आ रहा था आनंद की अनुभूति उसे भी हो रही थी और आईने में संजू साफ तौर पर देख रहा था कि उसकी मां की पेंट गीली हो चुकी थी इसका मतलब साफ था कि उसकी मां पानी छोड़ रही थी कुछ देर तक अपनी मां की चूची को दबाने के बाद वह आगे से अपना हाथ को अपनी मां की चूत पर पेंटी के ऊपर से ही रखते हुए बोला,,,)

बाप रे मम्मी तुम्हारी पेंटी तो गीली हो गई है तुम बहुत पानी छोड़ रही हो,,,,(संजू के मुंह से पानी छोड़ने वाली बात बेहद शर्मनाक थी यह आराधना के लिए शर्म से मर जाने जैसी बात थी लेकिन इस समय उसके बदन में भी खुमारी छाई हुई थी इसलिए ना जाने क्यों अपने बेटे की यह बात उसके तन बदन में और ज्यादा उत्तेजना की लहर भर रही थी वह पूरी तरह से मधु छुए जा रही थी अपने बेटे की बात और उसकी हरकतें उसके तन बदन में अजीब सी हलचल पैदा कर रही थी जिसमें वह पूरी तरह से डूबती चली जा रही थी ,,,,,, अपनी मां की खामोशी से संजू को उसका समर्थन मिल रहा था जिसके चलते हुए हिम्मत दिखाते हुए आगे बढ़ रहा था अब पेंटी के उतारने का समय आ चुका था,,,, वैसे भी संजू का लंड अपनी मां की गांड से रगड़ खा खा कर पूरी तरह से गर्म हो चुका था संजू का मन तो कर रहा था कि इसी समय झुका कर पीछे से अपनी मां की चूत में लंड डाल दें लेकिन फिर भी वह अपने आप को बहुत संभाले हुए था आईने में देखते हुए अपने दोनों हाथों को अपनी मां की पेंटी पर रखकर धीरे-धीरे उतारना शुरू कर दिया एक बार फिर से आराधना उसे रोकने की कोशिश करते हुए उसके हाथ पर अपना हाथ रख दी लेकिन संजू ने तुरंत अपनी मां की गर्दन पर अपने होंठ रख कर अपने चुंबन की गर्मी से उसे शांत कर दिया और संजू के हाथ पर उसके हाथ की पकड़ ढीली हो गई और संजू देखते ही देखते अपनी मां की चड्डी को नीचे की तरफ ले जाते हुए उतारना शुरू कर दिया,,,,०

संजू अपनी मां की चड्डी उतारते हुए धीरे-धीरे अपने घुटनों के बल पीछे की तरफ बैठ गया और उसकी गोल-गोल गांड पर से उस कपड़े के छोटे से टुकड़े को अलग करने लगा देखते ही देखते संजू अपनी मां की चड्डी को खींचते हुए उसके घुटनों तक ले आया और पल भर में ही उसे उसके कदमों में लाकर छोड़ दिया आराधना के बदन में मदहोशी पूरी तरह से अपना असर दिखा रही थी उसकी आंखों में खुमारी छा रही थी आईने में वहां हल्की खुली आंखों से अपने बेटे की हरकत को देखकर मस्त हुए जा रही थी ना चाहते हुए भी वह अपने बेटे के द्वारा अपने कपड़े उतारने का सुख भोग रही थी,,,, कदमों में जैसे ही उसकी पेंटी पहुंची आराधना ने अपने आप ही अपने पैरों का सहारा लेकर पेंटी को अलग कर दी यह देखकर संजू का लंड एकदम कड़क हो गया,,,, संजू समझ गया था कि उसकी मां उसका पूरा समर्थन कर रही है और संजू भी अपनी हरकत बढ़ाते हुए,,, अपनी मां की गोरी गोरी गदराई घर पर अपने होंठ रख कर चुंबन करने लगा अपने बेटे के द्वारा अपनी गांड पर चुंबन करने की वजह से आराधना एकदम से सिहर उठी और उसके मुख से गरमा गरम सिसकारी फूट पड़ी,,,,।

ससससहहहह यह क्या कर रहा है संजू,,,

तुम्हारी खूबसूरत जिस्म को इज्जत दे रहा हूं तुम्हारी खूबसूरत बदन को पापा से जितना सम्मान मिलना चाहिए था उतना कभी नहीं मिल पाया है इसलिए तुम्हारे बदन को अपने चुंबन से सम्मानित कर रहा हूं,,,

लेकिन यह गलत है,,,

गलत होता तो तुम्हारी,,,(तुरंत अपनी मां की चूत पर हथेली रखते हुए) चूत पानी ना छोड़ रही होती,,,,

(अपने बेटे की हथेली को अपनी चूत पर महसूस करते हैं आराधना की थोड़ी बहुत जो हिम्मत ही वह भी जवाब देगी वह पूरी तरह से अपने बेटे के आगे घुटने टेक दी,,)

चाहता क्या है तु,,,

मैं भी वही चाहता हूं जो एक मर्द एक औरत से चाहता है,,,,।(इतना कहने के साथ ही राजू अपनी जगह से खड़ा हुआ और अपनी मां का हाथ पकड़कर उसे कुर्सी के करीब लेकर आया और कुर्सी पर बैठा दिया आराधना पूरी तरह से अपने बेटे की आंखों के सामने नंगी थी गोरा बदन ट्यूबलाइट की रोशनी में चमक रहा था,,,, आराधना को समझ में नहीं आ रहा था कि उसका बेटा करने क्या वाला है लेकिन शर्म के मारे वह कुछ बोल नहीं पा रही थी वह नजर झुका है कुर्सी पर बैठ गई थी और संजू तुरंत अपनी मां की टांग को पकड़कर कुर्सी के ऊपरी हत्थे पर चढ़ा कर छोड़ दिया और दूसरी टांग को भी उसी तरह से पकड़कर कुर्सी के दूसरे हफ्ते पर चढ़ा दिया जिससे आराधना की चूत एकदम खुलकर नजर आने लगी अपनी स्थिति पर आराधना पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी क्योंकि जिस तरह से उसके बेटे ने कुर्सी पर उसे बिठाया था उसकी गुलाबी चूत अपनी संपूर्ण अवस्था में उसके बेटे की आंखों के सामने अपना कहर बरसा रही थी आराधना को समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें वह अपने बेटे की तरफ देख ले रही थी जो कि प्यासी नजरों से उसकी चूत को ही देख रहा था मानो कि उसके बदन में केवल उसकी चूत ही हो और वैसे भी मर्द को औरत के बदन में सबसे ज्यादा प्रिय और आकर्षक उसकी चूत ही लगती है,,,,।

करने क्या वाला है संजू तु,,(आराधना उत्तेजना भरे कांपते पतेश्वर में बोली,,,)

कुछ नहीं बस तुम्हारी खूबसूरत चूत को नजर भर कर देखना चाहता हूं,,,(इतना कहने के साथ ही संजू अपने घुटनों के बल कुर्सी के सामने बैठ गया उसके दोनों हाथ कुर्सी को पकड़े हुए थे और उसकी निगाहें आराधना की दोनों टांगों के बीच के उस गुलाबी क्षेत्र पर टिकी हुई थी जिसमें से काम रस मोती की बुंद बनकर बाहर निकल रही थी,,,, कुछ देर तक संजू अपनी मां की गुलाबी चूत को देखता रहा और यह देखकर आराधना की हालत खराब होती जा रही थी ना चाहते हुए भी उत्तेजना के मारे उसकी चूत से काम रस टपकता जा रहा था,,,, अब संजू से सब्र कर पाना मुश्किल हुआ जा रहा था,,, वह एक नजर अपनी मां की तरफ देखा दोनों की नजरें आपस में टकराई और आराधना शर्म के मारे अपनी आंखों को बंद कर दे और इसी मौके का फायदा उठाते हैं वह संजू धीरे से अपने पैसे होठों को अपनी मां की दोनों टांगों के बीच के उस गुलाबी क्षेत्र की तरफ ले जाने लगा जहां से उत्तेजना का उत्सर्जन होता है और देखते ही देखते संजू अपने प्यासे होठों को अपनी मां की चूत पर रख दिया,,, और जैसे ही संजू के होठ आराधना की चूत से स्पर्श हुए उत्तेजना के मारे आराधना एकदम से बिलबिला उठी,,,, और और ना चाहते हुए भी तुरंत ही अपने आप ही आराधना की कमर हल्के से ऊपर की तरफ उठी और आराधना तुरंत अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपने बेटे के सर पर रख दिया और अपने हाथ का दबाव उस पर बढ़ाते हुए उसके होठों को अपने चुत पर दबाने लगी,,,, अपनी मां की हालत को देखते हुए संजू पूरी तरह से मगन हो गया था वह पूरी तरह से मस्त हो चुका था और अगले ही पल वह अपनी जीभ को जितना हो सकता था अपनी मां की चूत के अंदर प्रवेश करा दिया लेकिन तभी वह अपनी मां की चूत को चाटने का मजा ले पाता दरवाजे पर दस्तक होने लगी,,,

मोहिनी घर पर आ चुकी थी दरवाजे पर हो रही दस्तक की आवाज को सुनते ही आराधना के होश उड़ गए वह पूरी तरह से आसमान से जमीन पर आकर गिर गई थी अपनी बेटी को अपनी दोनों टांगों के बीच देखकर और अपने आप को पूरी तरह से नंगी अवस्था में देखकर वह शर्म से पानी पानी हो गई,,,, वह तुरंत अपनी टांगों को कुर्सी के हत्थे पर से उतार कर नीचे रखते हुए,,,, उठ कर खड़ी हो गई और बोल,,,।

मोहिनी आ गई अब क्या होगा,,,

तू बिल्कुल की चिंता मत करो मम्मी,,,(इतना कहते हुए संजू दीवार पर टंगी घड़ी की तरफ देखा तो वाकई में 3 घंटे का गुजर गए थे पता ही नहीं चला था वह अपनी मां से बोला) तुम जल्दी-जल्दी अपने कपड़े पहन लो,,,, और हां अंदर से दरवाजा बंद कर लेना मैं सब कुछ संभाल लूंगा,,,,

(इतना कहने के बाद संजू तब तक अपनी मां के कमरे में खड़ा रहा जब तक कि वह अपने कपड़े पहने नहीं ली और अपने बेटे के सामने ही डर और हड़बड़ाहट के मारे वह जल्दी-जल्दी अपने पेटीकोट ब्लाउज को पहनकर साड़ी लपेट में लगी जल्दबाजी में उसने अपनी पेंटी और ब्रा को ना पहन कर उसे वापस अलमारी में डाल दी थी,, जब वह साड़ी पहन ली तो संजु बोला,,,,

तुम जल्दी से दरवाजा बंद करके चादर ओढ़ कर सो जाना बाकी सब मैं देख लूंगा,,,(इतना कहने के साथ है कि संजू कमरे से बाहर निकल गया और आराधना जल्दी से दरवाजा बंद करके चादर ओढ़ कर सो गई ,, दरवाजे पर लगातार दस्तक हो रही थी संजू तुरंत दरवाजे के पास गया और कड़ी खोलने लगा और ऐसा एक्टिंग कर रहा था कि मामा जी से अभी अभी सो कर उठा हो,,, दरवाजे खुलते ही,,,

अरे मोहिनी तु‌ आ गई कितना बज रहा है,,

घड़ी तो देखो भैया,,,(कमरे में प्रवेश करते हुए) तुम सो रहे थे क्या,,,?

हां वो मम्मी का सर दर्द कर रहा था तो उन्हें दवाई देकर मै भी लेट गया तो आंख लग गई,,,

अब मम्मी का सर का दर्द कैसा है,,,

पता नहीं कब से तो सो रही है,,,

(संजू ने तुरंत ऐसा माहौल खड़ा कर दिया था कि मोहिनी को बिल्कुल भी शक नहीं हुआ कि कमरे के अंदर क्या चल रहा था चाहता तो संजू मोहिनी को सब कुछ बता सकता था क्योंकि मोहिनी भी यही चाहती थी लेकिन वह अभी कुछ भी बताना नहीं चाहता था,,,)
 
मोहिनी के आ जाने की वजह से संजू का काम बिगड़ चुका था रंग में भंग पड़ चुका था और यही एहसास आराधना को भी हो रहा था वह भले ही एक मदहोशी भरे पल से एकाएक वापस आई थी लेकिन उसे भी अपनी बेटी का इस तरह से आ जाना खल रहा था,,,, आखिरकार दोनों मां-बेटे एक दूसरे को सुख देने के कारण पर पहुंच चुके थे दोनों अपनी मदहोशी के चरम सीमा पर आगे बढ़ते चले जा रहे थे आराधना की खूबसूरत रस से भरी हुई गद्देदार चूत संजू की आंखों के सामने थी संजू के प्यासे होठ तड़प रहे थे अपनी मां की चूत के स्पर्श के लिए वह एक अनूठे सुख को प्राप्त करने के लिए अपनी मां की चूत पर अपने प्यासे होठों को लगाने ही वाला था कि ऐन मौके पर,,, मोहिनी का आगमन हो गया था पूरी तरह से दोनों आसमान से नीचे जमीन पर आ गिरे थे,,,, संजू अभी भी उस पल के बारे में सोच कर पूरी तरह से मदहोशी का एहसास अपने तन बदन में कर रहा था अब तक उसने अपनी बड़ी मौसी अपनी बहन काव्या की चूत को अपनी आंखों से देखा था लेकिन जो एहसास मदहोशी उसे अपनी मां की चूत में नजर आई थी वैसी उन तीनों की चूत में बिल्कुल भी नजर नहीं आई‌ थी,,,

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अपनी मां के बदन पर से एक एक करके सारे कपड़े उतार कर उसे नंगी करने का जो सुख संजू को प्राप्त हुआ था वह जिंदगी भर उसके लिए यादगार बन चुका था वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि अपने हाथों से अपनी मां के सारे कपड़े उतार कर उसे नंगी करेगा उसके नंगे बदन को अपनी आगोश में लेकर उससे प्यार करेगा,,,, संजू अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां एक मर्द के साथ के लिए तड़प रही थी तभी तो उसकी चूची दबाने पर भी उसे बिल्कुल भी ऐतराज नहीं हो रहा था बल्कि वह तो उस पल के सुख में पूरी तरह से मदहोश हो जा रही थी जो कि उसके चेहरे पर के बदलते भाव उसके अंदर के एहसास को बाहर निकाल रहे थे,,,,,,, और उसकी चूत जो कि अपने बेटे की हरकत की वजह से पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी और उसकी गुलाबी फांकें फुदक रही थी और साथ ही उत्तेजना के चरम तक पहुंच कर कचोरी की तरह फुल चुकी थी और साथ ही उसमें से काम रस का लगातार रीसाव हो रहा था,,।

संजू मोहिनी‌ से एकदम साफ झूठ बोल गया था अगर उसे जो कुछ भी हुआ था सब बता भी देता तो कोई फर्क पड़ने वाला नहीं था यह बात संजू अच्छी तरह से जानता था क्योंकि इसमें मोहिनी की भी रजामंदी थी लेकिन वह अभी आधी अधूरी खबर बताना नहीं चाहता था और आराधना ने भी ठीक वैसा ही की थी जैसा कि संजू ने उसे करने को कहा था,,,, आराधना अंदर से दरवाजा बंद करके सो गई थी और मोहिनी दरवाजे पर दस्तक देने लगी थोड़ी देर बाद आराधना इस तरह से अपने बिस्तर से उठ कर दरवाजा खोली की आराधना को देखकर मोहिनी को बिल्कुल भी शक नहीं हुआ कि कुछ देर पहले यहां पर कामलीला शुरू हो गई थी,,,,,,, मोहिनी के पूछे जाने पर आराधना ने सब कुछ अब ठीक है ऐसा जवाब दी जो कि कुछ बिगड़ा ही नहीं था सब कुछ ठीक ही था,,,,, खैर जैसे-तैसे संजू अपने बदन की गर्मी शांत करने के लिए बाथरूम में जाकर अपने हाथ का सहारा लेना फिर कोचिंग क्लास चला गया लेकिन आज कोचिंग क्लास में उसका भी मन नहीं लग रहा था बारात होने के इंतजार में था क्योंकि उसे विश्वास हो चुका था जो कुछ भी घर में हुआ था उसे देखते हुए रात में उसका कार्यक्रम बढ़ने की आशंका पूरी तरह से नजर आ रही थी,,,, बस इस बात का डर था कि उसकी मां का मूड कभी भी बदल जाता था ऐसा एक दो बार पहले भी हो चुका था,,,,

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रात के 10:00 बज रहे थे तीनों ने मिलकर खाना खा चुका था और आराधना घर की साफ सफाई कर रही थी और मोहिनी बर्तन साफ कर रही थी,,,, आराधना संजू से नजर मिलाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी दिन में जो कुछ भी हुआ था आराधना के लिए बेहद उत्तेजनात्मक और शर्मनाक था,,, मजा उसे भी बहुत आया था लेकिन एक बेटा होने के नाते वह अभी भी शर्मिंदगी का अहसास कर रही थी अगर शायद उसके बेटे की जगह कोई और होता तो वहां कब का अपना सब्र खो दी होती है और अपनी चूत में लंड डलवा ली होती,,,,।

संजू बार-बार अपनी मां से बात करने की कोशिश कर रहा था लेकिन आराधना उसकी तरफ देख ही नहीं रही थी,,,,, आराधना को इस बात का एहसास था कि उसका बेटा उसे कुछ कहना चाहता है लेकिन वह शर्म के मारे उसकी तरफ देख नहीं रही थी,,,, थोड़ी देर में आराधना उसकी आंखों के सामने ही अपने कमरे में गई और दरवाजा बंद करके कड़ी लगा दी कड़ी लगाने की आवाज संजू के कानों में गूंजने लगी दरवाजे पर कड़ी लगाने का मतलब था कि आराधना इस रिश्ते को आगे नहीं बढ़ाना चाहती,,, दोपहर में जिस तरह से उसकी मां संजू का साथ दे रही थी उसे देखने के संजू को लगने लगा था कि रात को जरूर दिन वाला कार्यक्रम आगे बढ़ेगा लेकिन दरवाजे पर पड़ी लगाने का मतलब साफ था संजू मायूस हो गया,,,,वह एकदम से दुखी हो गया था,,,, वह भी मायूस होकर अपने कमरे में आ गया और सोचने लगा कि अच्छा हुआ कि मोहिनी से उसने दिन वाली बात बताया नहीं,,,,,।

मोहिनी को इस बारे में कुछ भी पता नहीं था कि उसका भाई उदास है या परेशान है जवानी उसमें भी कूट-कूट कर भरी हुई थी इसीलिए तो वह अपने आप से ही अपने भाई के पेंट की चैन खोलने लगी और देखते ही देखते अपने भाई के लंड को हाथ में लेकर उसे हिलाते हुए उसे पूरी तरह से अपनी औकात मे ला दी और उसे मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दी,,,, अपनी मां की आशा से वह निराश हो चुका था इसलिए अपनी बहन की हरकत से वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था और अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपनी बहन के सिर पर रख कर अपनी कमर को ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया था और अपने मन में सोचने लगा कि एक ना एक दिन जरूर वहां अपनी मां से भी इसी तरह की हरकत कराएगा,,,,, संजू को मज़ा आने लगा था मोहिनी इस खेल में पूरी तरह से माहिर हो चुकी थी इसलिए वो जानती थी कि अपने भाई को कैसे खुश करना है वह लोग के सुपाड़े पर अपनी जीभ को गोल गोल घुमा कर उसे और ज्यादा उकसा रही थी,,, रह-रह कर संजू अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठा देना था कुछ देर तक मोहिनी इसी तरह से अपने भाई को मजा देती रही और खुद भी मजा लेती रही,,, मोहिनी की चूत बहुत पानी छोड़ रही थी,,, उससे अपनी चूत की गर्मी संभाले नहीं संभल रही थी इसलिए वह अपनी स्कर्ट को ऊपर उठा कर सीधे अपने भाई के लंड के सुपाड़े पर रख दी वह रात के कार्यक्रम के बारे में जानती थी इसलिए वह पेंटी पहनाना ठीक नहीं समझती थी,,,, देखते ही देखते संजू का मोटा तगड़ा लंबे मोहिनी की चूत के अंदर पूरी तरह से समा गया और मोहिनी अपने भाई के कंधे का सहारा लेकर अपनी गांड को ऊपर नीचे करके मजा लेने लगी संजू भी अपनी मां को भूलकर मोहिनी की कमर पकड़ लिया और नीचे से जितना हो सकता था आपने कमर ऊपर की तरफ उठाने लगा देखते ही देखते मोहिनी अपनी गति को तेज करते हुए अपनी गांड को अपने भाई के लंड पर पटकने लगी,,, कुछ ही देर में दोनों की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी,,,, संजू अपनी मां को चोदने का ख्वाब देख रहा था इसलिए अपने बदन की गर्मी उसे बर्दाश्त नहीं हुई और वह अपने लंड को अपनी बहन की चूत से निकाले बिना ही उसकी कमर पकड़ कर उसे नीचे कर दिया और खुद ऊपर आ गया इस तरह से संजु अपनी बहन पर अपनी मां की कसम उतारता हुआ धक्के पर धक्का लगाना शुरू कर दिया और देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ गए और संजू अपनी बहन के ऊपर ढेर हो गया,,,,,।

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कुछ ही देर में मोहिनी गहरी नींद में सो चुकी थी क्योंकि एक तृप्ति दायक संभोग गहरी नींद का कारण होता है,,,,,, संजू को पेशाब लगी हुई थी इसलिए अपनी बहन के ऊपर से उठ कर कमरे से बाहर आया और पेशाब करने के लिए बाथरूम में चला गया अपनी मां के कमरे की कड़ी बंद होने की आवाज अभी तक उसके कानों में गूंज रही थी इसलिए वह अपनी मां के कमरे की तरफ देखा ही नहीं लेकिन बाथरूम करके जैसे ही वह बाथरूम से बाहर निकला तो बगल वाले कमरे पर उसकी नजर गई तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था उसे समझ में नहीं आया कि यह क्या हुआ उसकी मानें तो दरवाजा बंद कर दी थी तो इस समय खुला क्यों है,,, घड़ी पर नजर डाला तो रात के 12:00 बज रहे थे,,,,,, संजू का दिल जोरो से धड़कने लगा था दरवाजा खोलने का संकेत उसे व्याकुल कर रहा था वह धीरे से अपने कमरे की तरफ गया और बाहर से दरवाजा बंद करके कड़ी लगा दिया ताकि मोहिनी रात को बाहर ना निकल सके और वह खुद अपनी मां के कमरे के पास गया और दरवाजे पर खड़ा होकर अंदर देखने लगा तो अंदर डिम लाइट जल रही थी जिसकी लाल रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था लेकिन संजू को यह नहीं पता चल रहा था उसकी मां जाग रही है या सो गई,,,,,।

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संजू का दिल जोरों से धड़क रहा था वह इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पा रहा था कि उसकी मां ने जानबूझकर दरवाजा खोल दी है या रात को बाथरूम करने के लिए उठी हो और नींद में दरवाजा खुला छोड़ दिया जो कुछ भी हो पलभर में ही दिन में जो कुछ भी उसने अपनी मां के साथ हरकत किया था वह सब कुछ किसी फिल्म की तरह उसकी आंखों से गुजरने लगा और वह अपने आप को कमरे में दाखिल होने से रोक नहीं पाया,,,,, धीरे से वह कमरे में दाखिल हुआ और दरवाजे को उसी तरह से बंद करके कड़ी लगा दिया,,,, संजू को ऐसा लग रहा था कि उसकी मां सो रही है लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था आराधना भी दिन में जो कुछ भी हुआ था उसे लेकर बेहद व्याकुल और उत्तेजित थी उसे इस बात का विश्वास था कि रात को उसका बेटा उसके कमरे में जरूर आएगा इसलिए उसने मोहिनी के सामने दरवाजे की कड़ी बंद कर दी थी लेकिन थोड़ी ही देर में दरवाजा खोल दी थी ताकि उसका बेटा आराम से उसके कमरे में दाखिल हो सके,,,,, कमरे का दरवाजा खोलने में वह हजारों बार समाज की दुनियादारी की परिवार के बारे में सोच रही थी लेकिन बार-बार अपने पति की बेवफाई याद आते ही वह अपने आप को रोक नहीं पाई और इस खेल में अपने बेटे के साथ आगे बढ़ने का फैसला करके वह दरवाजा खोलकर बिस्तर पर आ कर लेट गई थी लेकिन जैसे ही उसे इस बात का अहसास हुआ कि उसका बेटा दरवाजे पर पहुंच गया है उसका दिल जोरो से धड़कने लगा उसके दिल की धड़कन और तेज होने लगी जब संजू कमरे में दाखिल होकर दरवाजा बंद करके कड़ी लगाने लगा यह एहसास उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर को और ज्यादा बढ़ा रहा था उसे ऐसा एहसास हो रहा था कि जैसे आज की रात उसकी सुहागरात की और उसके कमरे में उसका पति पहली रात को पूरी तरह से रंगीन करने के लिए उसके कमरे में दाखिल हुआ है और दरवाजा बंद कर रहा है आराधना बिस्तर पर कसमसा रही थी लेकिन वह एकदम स्थिर लेटी हुई थी वह अपने बेटे को इस बात का एहसास नहीं होने देना चाह रही थी कि वह जाग रही है,,,,, अपने बेटे के कदमों की आहट उसे साफ सुनाई दे रही थी वह आंखों को बंद की हुई थी लेकिन उसे पता चल गया था कि उसका बेटा ठीक बिस्तर के सामने आकर खड़ा हो गया है यह एहसास आराधना की चूत की हालत खराब कर रहा था वह समझ गई थी कि रात को घर उसका बेटा उसके कमरे में आया है तो जरूर उसकी चुदाई करके ही जाएगा,,,,,,,,

उत्तेजना को किसी भी हालत में आराधना दबा नहीं पा रही थी इसलिए उसकी सांसे गहरी चल रही थी आराधना जानबूझकर दीवाल की तरफ अपना मुंह करके लेटी हुई थी और संजू उसकी पीठ की तरफ खड़ा था अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड जो कि डिम लाइट में भी एकदम साफ नजर आ रही थी उसे देखकर संजू का लैंड फिर से खड़ा होने लगा जो कि कुछ देर पहले ही अपनी बहन की चुदाई करके शांत हुआ था,,,,, संजीव को इतना विश्वास था कि वह अपनी मां के साथ कुछ भी करेगा उसकी मां उसे कुछ नहीं बोलेगी क्योंकि इसका अंदाजा बाद दोपहर में ही लगा लिया था जब वह अपनी मां को पूरी तरह से नंगी करके कुर्सी पर उसकी दोनों टांगों को कुर्सी के हत्थे पर चढ़ा कर बैठा दिया था और उसकी गुलाबी चूत पर अपने होंठ रखकर उसके काम रस को पीना शुरू कर दिया था इस हरकत से उसकी मां भी पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी तभी तो वह उसे बिल्कुल भी रोकने की कोशिश नहीं कर रही थी,,,,।

इसलिए दोपहर की हरकत से उसका आत्मविश्वास एकदम से बढ़ गया था और संजू बिस्तर पर धीरे से बैठ गया वह अपनी मां की गांड की तरह बैठा हुआ था उसकी मां दूसरी तरफ मुंह करके लेटी हुई थी लेकिन उसके तन बदन में हलचल हो रही थी,,,,, संजू का मन कर रहा था कि ट्यूबलाइट चालू कर दें और ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में अपनी मां की संपूर्ण वजूद को अपनी आंखों से देखें लेकिन वह अभी लाइट चालू नहीं करना चाहता था डिम लाइट की लार रोशनी में भी सब कुछ ठीक ही था संजू का लंड पलभर में ही टनटनाकर खड़ा हो गया था संजू आगे की तरफ छुपकर अपनी मां के खूबसूरत चेहरे की तरफ देखा आंखें बंद थी इसलिए संजू को लगा कि उसकी मां सो रही है,,, सोते समय भी आराधना एकदम कामदेवी की तरह लग रही थी एकदम खूबसूरत इसलिए संजु से अपनी मां की खूबसूरती बर्दाश्त नहीं हुई और वह उत्तेजना के मारो अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां की गांड पर साड़ी के ऊपर से ही रख दिया,,,, आराधना जाग रही थी इसलिए अपने बेटे की हथेली को अपनी गांड पर महसूस करते हुए उसके बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी लेकिन वहां बड़ी मुश्किल से अपने आप को संभाले हुए थे अपनी उत्तेजना को दबाए हुए थे वह अपने बेटे की हर एक हरकत का आनंद लेना चाहती थी और जानती थी कि उसका बेटा बेहद कामुक हरकत करता है जो कि पूरे बदन में मदहोशी ला देता है,,,,।

अपनी मां की गांड पर हाथ रखकर संजू गहरी गहरी सांस ले रहा था उसकी सांसो की आवाज आराधना को एकदम साफ सुनाई दे रही थी अपने बेटे की गर्म सांस की आवाज को सुनकर उसके बदन में गर्मी छा रही थी संजू साड़ी के ऊपर से ही अपनी मां की गांड को सहला रहा था मानो कि जैसे वह साड़ी के ऊपर से नहीं बल्कि उसकी नंगी गांड पर अपनी हथेली फिरा रहा हो,,,, संजू को अपनी मां की नरम नरम गद्देदार गांड सहलाने में बहुत मजा आ रहा था,,,, कुछ देर तक वह अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड सहलाने का मजा लेता रहा,,,, आराधना के बदन में जरा भी हलचल नहीं हो रही थी वह बड़ी मुश्किल से अपनी उत्तेजना को दबाए हुए थी,,,, कुछ पल के लिए तो संजु को भी ऐसा लग रहा था कि उसकी मां गहरी नींद में सो रही है लेकिन आज की रात भर कमाना नहीं चाहता था इसलिए अपनी मां की नींद में होने के बावजूद भी हो उसके बदन से आनंद लेना चाहता था इसलिए धीरे-धीरे साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगा उसकी खूबसूरत चिकनी मानसर पिंडलियों को अपनी हथेली में लेकर उसे दबाने लगा,,,,,, संजू के दिलों दिमाग पर वासना पूरी तरह से सवार हो चुका था उसकी आंखों में अपनी मां की मदमस्त कर देने वाली जवानी का नशा छाया हुआ था और वह अपनी मां के मदहोशी में पूरी तरह से डूब चुका था वह धीरे से अपनी मां के पैरों की तरफ गया अपनी मां की गोरी चिकनी पिंडलियों पर अपने होंठ रख कर चूमने लगा,,,,, आराधना की हालत पल-पल खराब होती जा रही थी अपने बेटे की हरकत देखते हुए उसे एहसास हो गया था कि वह ज्यादा देर तक नींद में होने का नाटक नहीं कर पाएगी क्योंकि उसके बेटे की हरकत पूरी तरह से मदहोश कर देने वाली थी संजू ,,, अपनी मां की घुटनों के नीचे चुंबन ओ की बारिश कर दिया था दोनों टांगो की पिंडलियों उसके लिए इस समय उत्तेजित कर देने वाला अंग बन चुका था गोरी गोरी मांसल पिंडलियां उसके लंड के कड़क पन को और ज्यादा बढ़ा रही थी,,, देखते ही देखते समझो अपनी मां के पैर को हल्का सा उठाकर उसके अंगूठे पर अपने होठों को रगड़ना शुरु कर दिया संजू के लिए यह पहला मौका था जब वह किसी औरत के पैरों के तरफ इस तरह से आकर्षित हुआ था इस समय संजू को अपनी मां के पैर बहुत ही ज्यादा उत्तेजनात्मक लग रहे थे और देखते ही देखते संजू अपनी मां के पैर के अंगूठे को पूरी तरह से मुंह में लेकर चूसने शुरू कर दिया मानो कि जैसे लॉलीपॉप जूस रहा हो आराधना हैरान थी अपने बेटे की हरकत पर आराधना कभी सोची नहीं थी कि कोई इस तरह से उसके पैर के अंगूठे को मुंह में लेकर चूसेगा,,,,, लेकिन आराधना अपने बेटे की ही सरकार पर पूरी तरह से निहाल हो चुकी थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें धीरे-धीरे उसकी सांसे बाहरी होने लगी थी और संजू की हरकत बढ़ने लगी थी संजू बिस्तर के किनारे घुटनों के बल बैठा हुआ था कभी दाएं पैर को तो कभी बाएं पैर को अपने हाथ में लेकर अपने होठों से नहला दे रहा था,,,,, देखते ही देखते आराधना अपनी उत्तेजना पर काबू नहीं कर पाई और उसके मुख से गहरी गहरी सांसो के साथ-साथ सिसकारी की आवाज निकलने लगी,,,,।

सहहहहहह आहहहहहहह,,,,,ऊममममममम,,,

अपनी मां के मुंह से इस तरह की आवाज सुनकर संजू की खुशी का ठिकाना ना था वह समझ गया था कि उसकी मां जाग गई है जबकि उसकी मां सोई नहीं थी और उसकी गरमा-गरम सिसकारी की आवाज से पता चल रहा था कि उसकी मां को भी उसकी हरकत अच्छी लग रही है,,,, आराधना जाग चुकी थी इसलिए संजू अपनी मां के जागने का पूरा मजा लेना चाहता था इसलिए अपनी मां के पैर को अपने हाथ में पकड़े हुए हैं बोला ,,,

आराधना

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मम्मी,,,

ऊहहह,,,,(अपनी आंखों को बंद किए हुए सिर्फ आराधना इतना ही अपने मुंह से निकाल पाई,,)

जाग रही हो,,,,,

(आराधना शर्म के मारे बोल नहीं पाई कि वह जाग गई है और इसी मौके का फायदा उठाते हुए संजू बिस्तर से धीरे से उठते हुए बोला,,,)

रुको ट्यूब लाइट चालू कर दुं,,,(अपने बेटे की यह बात सुनते ही आराधना एकदम से बोल उठी)

नहीं नहीं संजु लाइट मत चालू कर मुझे शर्म आ रही है,,,,

नहीं बिना लाइट के मजा नहीं आएगी,,,,,(संजू जानता था कि ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में जितना वह अपनी मां के खूबसूरत मेरे बदन को देख कर आनंद ले पाएगा उस तरह से डिम लाइट की लाल रोशनी में उतना मजा नहीं मिल पाएगा इसलिए वह अपनी मां की बात माने बिना ही वह बिस्तर पर से उठा और तुरंत जाकर के ट्यूबलाइट का स्विच ऑन कर दिया और क्षण मात्र में ही पूरे कमरे में ट्यूबलाइट की दूरियां रोशनी फैल गई,,,,,, अभी भी आराधना दीवाल की तरह मुंह करके लेटी हुई थी ट्यूबलाइट के चालू हो जाने की वजह से वह शर्म आ रही थी उसकी गदराई गांड अपनी अलग आभा बिखेर रही थी घुटनों तक संजू ने अपनी मां की साड़ी को उठा दिया था इसलिए उसकी नंगी गोरी गोरी पिंडलिया देखते ही संजु फिर से खुश होता हुआ बिस्तर पर जाकर बैठ गया और अपनी मां की चिकनी पिंडलियों को फिर से सहलाने लगा संजू की हरकत से आराधना के बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी क्योंकि अब संजू को भी पता चल गया था कि वह जाग गई है इसलिए आराधना के बदन में भी हरकत होने लगी थी,,,,, संजू बिना कुछ बोले अपनी मां के पैरों पर झुक गया और अपने होंठ उस पर रखकर अपने होठों को रगड़ता हुआ ऊपर की तरफ बढ़ने लगा संजू की हरकत से आराधना के बदन में उत्तेजना की चिंगारी फूट रही थी उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही है और देखते ही देखते संजू अपने होठों को रगड़ता हुआ घुटने तक पहुंच गया था,,,,,,, अब जैसे-जैसे संजू ऊपर की तरफ बढ़ रहा था वैसे वैसे आराधना कि साड़ी ऊपर की तरफ सरक रही थी ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में साड़ी के ऊपर उठने से उसका गोरा रंग गोरा बदन उजागर होता जा रहा था जिससे आराधना के बदन में कसमसाहट बढ़ती जा रही थी,,,।

ओहहह संजू यह क्या कर रहा है,,,

कुछ नहीं तुम्हारी खूबसूरत बदन का मजा ले रहा हूं,,,

यह गलत है,,,,

कुछ भी गलत नहीं है,,,,, सिर्फ मजा ही मजा है,,,,(इतना कहते हुए संजू अपनी मां की साड़ी को घुटनों से ऊपर की तरफ ले जाने लगा आराधना उसे बिल्कुल भी रोक नहीं पा रही थी क्योंकि उसकी हरकत आराधना के तन बदन में आग लगा रही थी उसे भी मदहोशी छा रही थी,,, देखते ही देखते संजू ने अपनी मां की साड़ी को उसकी जांघों तक चढ़ा दिया था आधी जांघ साफ नजर आ रही थी और आधी जान अभी भी साड़ी के अंदर रखी हुई थी लेकिन अपनी मां की आधी जांघ देखकर ही संजू के लंड का उबाल बढ़ने लगा आराधना की जांघ भी बेहद खूबसूरत थी,, मोटी मोटी केले के तने के समान एकदम चिकनी हल्के से उंगली दबा दो तो भी लाल निशान पड़ जाए इतनी गोरी,,,, अपनी मां की मोटी मोटी जांग देखते ही संजू की आंखों में 4 बोतलों का नशा छाने लगा,,,, आराधना अभी की दीवाल की तरफ मुंह करके लेटी हुई थी और गहरी गहरी सांस ले रही थी आंखों को बंद करके वह अपने बेटे की हर एक हरकत का मजा ले रही थी,,,, संजू अपनी मां की मोटी मोटी जांघों को अपनी हथेली में कस के दबाते हुए बोला,,,,।

ओहहह मम्मी लाजवाब तुम्हारी जांगे कितनी खूबसूरत और चिकनी एकदम मक्खन की तरह मन करता है इसे अपनी जीभ से चाट जाऊं,,,,(और इतना कहने के साथ ही संजू फिर से अपने होठों को अपनी मां की गोरी जांग पर रखकर उस पर चुंबन के साथ-साथ उसे चाटना शुरू कर दिया आराधना के बदन में सुरसुरा हट बढ़ती जा रही थी उत्तेजना के मारे रह रहे कर अकड़ जाती थी,,,, संजू अपनी मां की जांघों पर चुंबनों की बारिश करते हुए उसे सीधा पीठ के बल करने लगा और आराधना बड़े आराम से एकदम सीधे पीठ के बल लेट गई,,,, संजू अपनी मां की जनों को हथेली में भरकर जोर-जोर से दबाते हुए साड़ी के अंदर की तरफ हाथ ले जाने लगा और देखते ही देखते संजू अपनी मां की जांघों के एकदम छोर तक पहुंच गया,,, आराधना को अपने बेटे की उंगलियां अपनी चड्डी पर साफ महसूस हो रही थी उसे ऐसा लग रहा था कि उसका बेटा उसकी चड्डी निकाल देगा लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं हुआ वह तुरंत अपना हाथ अपनी मां की साड़ी से निकालकर अपनी मां के ऊपर ही लेट गया और उसके होठों पर अपने होंठ रख दिया,,,,,

अपने बेटे को अपने ऊपर महसूस करके और उसके होंठों को अपने होंठों पर स्पर्श होते ही आराधना का बदन उत्तेजना से गनगना गया,,,, संजू का लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था और पैंट में तंबू बनाए हुए वह सीधे ही आराधना की दोनों टांगों के बीच उसकी चूत पर दस्तक दे रहा था आराधना अपने बेटे के लंड को अपनी चूत पर महसूस करते ही पानी पानी होने लगी और संजू था कि उसके लाल-लाल होठों को अपने मुंह में भर कर उसका राजस्थान कर रहा था और साथ ही ब्लाउज के ऊपर से उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया था संजू अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां के साथ अब क्या करना है,,,,, संजू के मन में यही बात बार-बार घूम रही थी कि उसकी मां बेहद प्यासी है उसे एक असली मर्द की जरूरत है और उसकी यह कमी वह पूरा करने में पूरी तरह से सक्षम है इसीलिए अपनी मां को खुश और तृप्त करने का बेड़ा अपने सिर पर लेकर वह धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था,,,

संजू पागलों की तरह अपनी मां के लाल लाल होठों को चूस रहा था साथ ही ब्लाउज के ऊपर से बड़े-बड़े खरबूजो को पकड़कर दबा रहा था देखते ही देखते संजू अपनी मां के लाल लाल होठों के साथ-साथ उसके गोरे गोरे गाल उसकी गर्दन पर चूमना शुरू कर दिया और साथ ही उसके ऊपर लेटे हुए अपने दोनों हाथों की उंगलियों का सहारा देकर अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलने लगा,,,, आराधना चित्र से जानती थी कि अब उसकी बेटी का विरोध करने में कुछ भी फायदा नहीं है बल्कि फायदा तो उसे उसकी मनमानी करने देने में है,,,,, आराधना तो केवल अपने बेटे की हरकत का आनंद ले रही थी वह पूरी तरह से मर्द बन कर उसे खुश करने की कोशिश कर रहा था,,,, राजना कभी-कभी यह सोच कर हैरान हो जाती थी कि उसका बेटा आखिरकार औरतों को खुश करने का हुनर सीखा कहां से तभी उसे रात में देखे गए अपने बेटे और उसकी बड़ी दीदी के बीच के उस चुदाई के दृश्य के बारे में ख्याल आ जाता था तब उसे समझते देने लगती थी कि संजु को सिखाने वाली उसकी टीचर उसकी बड़ी दीदी ही है,,,,,।

देखते ही देखते संजू अपनी मां के ब्लाउज के सारे बटन खोल दिया और अपनी मां के कमर के इर्द-गिर्द अपने पैर के दोनों घुटनों को रखकर घुटनों के बल बैठ गया ब्लाउज का बटन खुल जाने की वजह से लाल रंग की ब्रा एकदम साफ नजर आ रही थी और ट्यूबलाइट की दूरियां रोशनी में उसकी गोरी गोरी चूचियां लाल रंग के परदे में अपने आप को शर्मा कर छुपाने की बहुत कोशिश करती हुई नजर आ रही थी लेकिन संजू उन दोनों चूचियों की कोशिश को नाकाम करते हुए ब्रा को उतारे बिना ही अपने हथेली का सहारा लेकर एक-एक करके उसकी दोनों चूचियों को ब्रा के कप से आजाद कर दिया था,,,,, अगर ब्रा ना होती तो पानी भरे गुब्बारे की तरह आराधना की दोनों चूचियां छाती पर लोटने लगती लेकिन चुचियों काबरा का सहारा अभी भी था इसलिए वह दोनों चूचियां एक जगह पर स्थित होकर छातीत आने खड़ी थी जिस पर संजू की नजर पड़ते ही उसके मुंह में पानी आ गया और संजू अपने आपको अपनी मां की दोनों चुचियों को पकड़कर दबाने से रोक नहीं पाया और वह जोर-जोर से चूची की निप्पल को दोनों हाथों की उंगलियों में भरकर मसलते हुए दबाना शुरू कर दिया,,,,,

संजू की यह हरकत बेहद कामुकता भरी थी आराधना अपने आप को अपने बेटे की हरकत की वजह से हो रही उत्तेजना और मदहोशी को रोक नहीं पाई और उसके मुख से गरमा गरम सिसकारी की आवाज फूटने लगी हालांकि वह अपनी आंखों को बंद किए हुए थे अपने बेटे से नजर मिलाने में उसे शर्म महसूस हो रही थी,,,।

सहहहहहह आहहहहहहह,,,,,ऊहहहहह,,,,, धीरे संजू,,,,,आहहहहह ।

(संजू अच्छी तरह से जानता था कि पहले उसकी मां धीरे से लगाने के लिए बोल रही है लेकिन उसे इसी तरह से मजा आ रही है क्योंकि उसके चेहरे के भाव पूरी तरह से बदल चुके थे उसका गोरा मुखड़ा है लाल टमाटर की तरह हो गया था संजू धीरे से नीचे की तरफ झुका हो अपनी मां की चूची को मुंह में भर लिया यह पहला अवसर था जब संजू अपनी मां की चूची को मुंह में भर लिया था और ऐसा करने पर आराधना सूखे हुए पत्ते की तरह फड़फड़ा उठी,,, उसे समझ में नहीं आया कि वह क्या करें वह एकदम से अपनी आंखों को खोल दी और अपने बेटे की हरकत को देखने लगी संजू पूरी तरह से मस्ती में आकर अपनी मां की चूची को मुंह में लेकर जितना हो सकता था उतना पी रहा था,,,, आराधना से अपनी उत्तेजना दबाए नहीं दब रही थी,,,, संजू अनुभव से भरे हुए मर्द की तरह उसकी चूची से खेल रहा था तभी अदाएं पूछिए तो कभी बाई चूची दोनों को बारी-बारी से मुंह में लेकर पी रहा था,,,,,,,, अपने बेटे की हरकत पर उसे अपनी सुहागरात याद आ गई जब पहली बार उसके पति ने उसकी छुईमुई से चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू किया था दबाना शुरू किया था उस पल के एहसास की तुलना इस पल के हिसाब से करना बिल्कुल भी मुमकिन नहीं था क्योंकि इस समय जिस तरह का अनुभव और उत्तेजना आराधना अपने बदन में महसूस कर रही थी इस तरह की उत्तेजना वह अपने जीवन की सुहागरात वाली रात पर भी नहीं कर पाई थी क्योंकि पूरा मर्द होने के बावजूद भी उसका पति शायद औरत को खुश करने की कला अच्छी तरह से नहीं जानता था लेकिन संजू औरतों को खुश करने की कला में पूरी तरह से माहिर था,,,,,,,, संजू अपनी मां की चूची को मुंह में लेकर पीते हुए बोला,,,।

‌सहहहहह मम्मी तुम्हारी चूची कितनी बड़ी बड़ी है एकदम खरबूजे की तरह,,, लगता है पापा बहुत मेहनत की है तुम्हारी चूची पर,,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर उत्तेजना के मारे आराधना का गला सूख रहा था वह अपने बेटे का सवाल का जवाब देने में असमर्थ महसूस कर रही थी,,, अब वहां अपने बेटे से कैसे बताएं कि जिस तरह से वह इतनी देर तक उसकी चूची पर जमा हुआ है ,,, इस तरह से तो उसके पति ने भी कभी उसकी चूची को इतना प्यार नहीं किया था,,,, संजू से रहा नहीं जा रहा था समझो अपनी मां को जल्द से जल्द एकदम नंगी कर देना चाहता था क्योंकि नंगे बदन से खेलने का मजा ही कुछ और होता है,,,,, पिछले संजू अपने दोनों हाथों को नीचे की तरफ ले जा करके अपनी मां को अपनी बाहों में भर लिया और उसे एक झटके से अपनी बाहों में भरे हुए हैं उठा दिया आराधना एकदम से बिस्तर पर बैठ गई थी अभी भी संजू का मुंह आराधना की चूची पर था और संजू खुले हुए ब्लाउज को अपनी मां की चिकनी बाहों में से निकाल कर अलग कर दिया और दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर उसकी ब्रा का हुक खोलने लगा दोपहर में भी वह अपनी मां के ब्रा खोल चुका था जिसका मजा संजू के साथ-साथ आराधना भी अच्छी तरह से ली थी,,,, रात को क्या करना है आराधना ने अपने मन में पहले से ही ठान ली थी वह चाहती तो ब्लाउज के अंदर ना तो प्राप्ति और ना ही साड़ी के अंदर चड्डी लेकिन अपने बेटे के हाथों से अपनी ब्रा और पेंटी उतरवाने का जो सुख उसे प्राप्त हुआ था वह फिर से उसी सुख को भोगना चाहती थी और वाकई में संजू भी अपनी मां का विश्वास ना तोड़ते हुए अपनी मां के बदन पर से एक एक कर के कपड़े उतारकर उसे अद्भुत सुख दे रहा था,,,, देखते ही देखते आराधना के बदन से ब्रा भी निकल गई और वह कमर के ऊपर पूरी तरह से नंगी हो गई नंगी चूचियों को अपने हाथ में लेकर संजू उत्तेजना के मारे जोर जोर से दबाने लगा,,,,, और आराधना के मुंह से गरमा गरम सिसकारी निकलने लगी,,,।

सहहहह आहहहहह राजू ऊममममम,,,,,आहहहहहहह,,,

(संजू का लंड फटने की कगार पर आ चुका था उसकी नशे पूरी तरह से फूल चुकी थी अगर ऐसे हालात में अगर वह अपनी मां की चूत में अपना लंड डालता तो उसकी मां पल भर में ही पानी पानी हो जाती हो तृप्त होकर पानी छोड़ देती लेकिन इतनी जल्दी वह अपनी मां की चुदाई नहीं करना चाहता था उसे पूरी तरह से काम विवस कर देना चाहता था,,,,, संजू कुछ देर तक अपनी मां की चूची को पीता रहा उसे दबा दबा कर मुंह में भर भर कर एकदम लाल कर दिया था,,,,,, फिर इसके बाद समझो फिर से अपनी मां के कदमों को पकड़कर उसे वापस धीरे-धीरे पीठ के बल लेटा दिया उसकी साड़ी अफरा तफरी भरे इस काम क्रीड़ा में एकदम कमर तक आकर इकट्ठा हो गई थी,,,,, अपनी मां के बदन पर दोपहर वाली ही पेंटी को देखकर एक बार फिर से संजू की आंखों में चमक आ गई वह धीरे से साड़ी को खोलना शुरू कर दिया और अपनी मां की लाल रंग की पैंटी की तरफ देखते हुए बोला,,,।)

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देखो मम्मी तुम्हारे गोरे बदन पर लाल रंग की पैंटी कितनी खूबसूरत लग रही है,,,,,, मेरा तो मन करता है कि पेंटी सहित अपना लंड तुम्हारी चूत में डाल दुंं,,,,।

(अपने बेटे के मुंह से सीधे-सीधे उसकी मन की बात सुनते ही आराधना की बुर की गुलाबी फांकें फुदकने लगी,,,, आराधना समझ गई कि उसका बेटा चोदने के ईरादे से ही कमरे में आया है,,,,,,, अपने बेटे के इरादे को जानने के बाद भी आराधना कुछ बोल नहीं पाए बोलती भी क्या वह तो शर्म से पानी पानी में जा रही थी अपने बेटे की आंखों के सामने है धीरे-धीरे नंगी हो रही थी उसका खूबसूरत बेशकीमती अंग धीरे-धीरे उसके बेटे की आंखों के सामने उजागर होता जा रहा था,,,,,

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संजू अपनी मां के उस हिस्से को ललचाए आंखों से देख रहा था जो कि लाल रंग के कपड़े के अंदर छिपा हुआ था उसे देखते हुए वह अपनी मां की साड़ी खोलने लगा था और देखते ही देखते संजू,,, अपनी मां के साड़ी को खोलकर बिस्तर पर से नीचे फेंक दिया था,,,, अपने बदन से साड़ी के उतरते ही अराधना की आंखों में शर्म उतर आया वह आंखों को बंद कर ली थी वह कभी जिंदगी में नहीं सोची थी कि इस तरह से वह अपने ही कमरे में,,, अपने बेटे के द्वारा अपने कपड़े उतरवाकर नंगी होगी,,,, अगर आराधना का पति उससे प्यार करता है उसके साथ होता तो शायद आराधना इस तरह के कदम कभी नहीं हो पाती लेकिन कुछ महीने से वह अकेले ही बिस्तर पर करवट बदल कर अपनी जिंदगी गुजार रही थी और जब से उसे इस बात का पता चला है कि उसका पति बाजारू औरतों के साथ अपना समय बताकर गुलछर्रे उड़ाता है तब से वह भी मर्द के लिए तड़प रही थी और अपने ही बेटे के साथ अपने कमरे में काम कीड़ा की ओर अग्रसर होती जा रही थी,,,,, आराधना शर्म से पानी पानी हो जा रही थी वहीं दूसरी तरफ संजू अपनी मां की खूबसूरत बदन को देखकर खुशी से फूला नहीं समा रहा था उसके बदन में मस्ती की लहर उठ रही थी वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में अपनी मां का पूरा बदन देख कर उसके लंड की अकड़ बढ़ती जा रही थी और वह धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ा कर पेटीकोट की डोरी कोई झटके से ही खींचकर खोल दिया और पेटीकोट को दोनों छोर से पकड़ कर उसे उतारने की कोशिश करने लगा लेकिन आराधना की भारी-भरकम गांड के नीचे दबी हुई पेटीकोट का कपड़ा नीचे सरक नहीं पा रहा था इस बात का एहसास होते ही आराधना अपने बेटे का सहकार करते हुए अपनी भारी-भरकम गदराई गांड को हल्के से ऊपर की तरफ उठा दी,,, आराधना केवल दो अंगूल जितना ही अपनी गांड को बिस्तर से ऊपर की तरफ उठाई थी और इतना तो समझो के लिए काफी था वह तुरंत अपनी मां की पेटीकोट को एक झटके से नीचे की तरफ खींच लिया और अगले ही पल आराधना अपने बेटे की आंखों के सामने केवल एक छोटी सी पेंटी में लेटी हुई थी यह पल आराधना के लिए बेहद कठिन और उत्तेजक हुआ जा रहा था उसकी चूत लगातार काम रस बाहर आई थी जिसकी वजह से लाल रंग की पैंटी आगे से पूरी तरह से गीली हो चुकी थी,,,, संजू के लिए अब सब्र कर पाना बहुत मुश्किल हुआ जा रहा था,,, देखते ही देखते वह अपनी मां की दोनों टांगों के बीच आ गया और अपने होठों को लाल रंग की पेंटी के बेहद करीब में जाकर अपनी नाक से उसके काम रस से डूबी हुई पेंटिं की मादक खुशबू को अपने अंदर खींचते हुए बोला,,,,।

ऊममममम ,,,, इसे बोलते हैं खूबसूरत औरत का स्वादिष्ट काम रस,,, देखो तो सही कितनी खुशबू आ रही है,,,,।

(आराधना कभी सोची नहीं थी कि कोई चूत से निकली काम रस की भी इतनी प्रशंसा करता होगा,,, इसलिए तो अपने बेटे के द्वारा अपने चूत के पानी की प्रशंसा करने पर वह खुद शर्म से पानी पानी होने लगे वह कुछ बोल नहीं रही थी बस कसमसा रही थी उसके बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी देखते ही देखते समझो पैंटी के ऊपर से ही अपनी मां के काम रस को जीभ लगा कर चाटना शुरू कर दिया,,,, आराधना एकदम से मचल उठी दोपहर में जिस तरह से संजू ने उसकी चूत पर अपनी जीभ लगाकर चाटना शुरू किया था वह पल एक बार फिर से उसकी जिंदगी में आ चुका था संजू पागलों की तरह अपनी मां की पेंटी को सुंघ रहा था और उस पर जीभ हमारा है जिसका एहसास आराधना को अपनी चूत तक हो रहा था,,, आराधना की हालत खराब होने लगी उसके जिसमें में हलचल बढ़ने लगी वह मचलने लगी,,,, अपने आप ही उसकी कमर ऊपर की तरफ उठने लगी संजू समझ गया था कि उसकी मां बावली हुए जा रही है,,,, इसलिए वह कुछ देर तक पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत का मजा लेते हुए दोनों हाथों से पेंटी को पकड़कर अपनी मां की तरफ देख कर बोला,,,।

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दिन में काम अधूरा रह गया था उसे पूरा भी तो करना है,,,

(इतना कहने के साथ ही जैसे ही संजू में पेंटी को खींचा वैसे ही तुरंत आराधना ने अपनी गांड को फिर से ऊपर की तरफ उठा दी और देखते ही देखते संजू अपनी मां की खूबसूरत पैंटी को उतार कर उसे एकदम नंगी कर दिया,,,, आराधना अपने बेटे की आंखों के सामने संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था में बिस्तर पर पीठ के बल लेटी हुई थी वह शर्म के मारे अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपनी चूत पर हथेली रखकर और छोटे से खूबसूरत बेशकीमती खजाने को छुपाने की कोशिश कर रही थी,,,,, संजू को अपनी मां की हरकत बहुत खूबसूरत लग रही थी और उसकी हरकत की वजह से उसकी खूबसूरती में चार चांद लग गया था अपनी मां की हरकत को देखते हुए संजू मुस्कुराते हुए बोला,,,।

मम्मी तुम अपनी चूत को छुपाते हुए कितनी खूबसूरत लग रही हो सच में ऐसा लग रहा है कि स्वर्ग की कोई अप्सरा अपने नंगे बदन को ढकने की नाकाम कोशिश कर रही है,,,,।

(आराधना कुछ नहीं बोल रही थी वह केवल खामोश थे और अपने होठों को खोलकर गहरी गहरी सांस ले रही थी शायद इस तरह का अद्भुत उत्तेजना वह कभी महसूस नहीं की थी वरना उम्र के इस दौर में पहुंचकर औरतें खुद इतनी गरम हो जाती है कि मर्दों को पलभर में ही जला कर देती हैं लेकिन यहां तो वो खुद गीली होती जा रही थी,,,,, संजू अपनी मां के खूबसूरत चेहरे की तरफ देखते हुए जो कि वह अपनी आंखों को बंद करके लेटी हुई थी वह अपना हाथ आगे बढ़ाया और अपनी मां की कलाई को पकड़कर उसके हाथ को उसकी चूत पर से हटाने लगा आराधना अपने बेटे का विरोध बिल्कुल भी नहीं कर पाई और तुरंत अपनी हथेली को अपनी चूत पर से हटा ली,,,, ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में अपनी मां की खूबसूरत चूत को देखकर संजू के मुंह में पानी आ रहा था,,,, वह धीरे से अपनी हथेली को अपनी मां की कचोरी जैसी खुली हुई चूत पर रखकर हल्के से रगड़ते हुए बोला,,,)

ओहहह मम्मी सच में तुम्हारी चूत कितनी खूबसूरत है एकदम चिकनी ऐसा लग रहा है कि कल ही क्रीम लगाकर साफ की हो,,,,

(अपने बेटे के मुंह से चूत साफ करने वाली बातें सुनकर वह फिर से शर्म से पानी पानी होने लगी संजू जो कुछ भी कह रहा था उसमें सच्चाई थी,,,, इसलिए चाहते हुए भी आराधना कुछ बोल नहीं पाई,,,,, संजू एकटक अपनी मां की चूत के गुलाबी क्षेत्र को देख रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी आंखों के सामने खूबसूरत दुनिया नजर आ रही हो,,,,,, संजू के सब्र का बांध टूटता चला जा रहा था और आराधना पल-पल उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंचती जा रही थी उत्तेजना के मारे उसकी नाभी मैं कंपन हो रही थी जिसे देखकर संजू की उत्तेजना और बढ़ने लगी और वह तुरंत अपने प्यासे होठों को एक बार फिर से अपनी मां की चूत पर रख दिया इस बार भी दोपहर की तरह आराधना से बर्दाश्त नहीं हुआ और वह तुरंत अपनी कमर को हल्के से ऊपर की तरफ उठा दी और अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपने बेटे के सर पर रख दी,,, अपनी मां की इस हरकत पर संजू पूरी तरह से बावला हो गया और वह जितना हो सकता था अपनी जीभ को अपने अंदर तक डालकर अपनी मां की चूत की मलाई को चाटना शुरू कर दिया,,,, पल भर में ही आराधना के मुख से गरमा गरम संस्कारी की आवाज निकलने लगी,,,

सहहहहहह आहहहहहहह ऊहहहहह,,,,ऊममममममम संजू,,,,,,,ऊहहहहहममममम,,,,,,

(अपनी मां की गरमा गरम सिसकारियां की आवाज को सुनकर संजू का हौसला और भी ज्यादा बुलंद होने लगा और वह दोनों जांघों को अपनी हथेली में दबाकर अपनी मां की चूत चाटना शुरू कर दिया उसमें से उठ रही मादक खुशबू उसकी उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ा रही थी,,,, थोड़ी देर में आराधना बिस्तर पर मचलने लगी और उत्तेजना के मारे अपना सर इधर उधर पटकना शुरू कर दी,,, अशोक ने कभी उसे इस तरह का सुख नहीं दिया था शुरू शुरू में हुआ है उसकी चूत को चाटता था और इसमें आराधना को आनंद भी मिलता था लेकिन बरसो गुजर गए थे अशोक ने अपनी हरकत को दोबारा नहीं हो रहा था और शर्म के मारे आराधना कभी अपने पति से अपने मन की इच्छा कह नहीं पाती थी और एक अद्भुत सुख से वंचित रह जाती थी,,, लेकिन अब उसके पति का जगह उसका बेटा आ चुका था जो कि अपने नव युवा तरीके से उसे पूरी तरह से सुख और तृप्ति देने की पूरी कोशिश कर रहा था संजू अपनी जीत के साथ-साथ अपनी नाक की नोक को भी अपनी मां की चूत पर रगड़ रहा था जिससे उसकी आनंद मैं और ज्यादा वृद्धि होती जा रही थी,,,,।

आरररह आहहहहह संजू मेरे बेटे यह क्या कर रहा है तू,,,,, तू तो मुझे पागल कर देगा,,ऊममममममम,ऊममममम,ऊहहहहहह ऊईईईईई मां,,,,,,,,(अपने बेटे की हरकत की वजह से आराधना पूरी तरह से मदहोश होकर अपने निचले होंठ को दांत से दबा रही थी और गरमा गरम सिसकारी ले रही थी,,,, और अपनी मां की गरमा गरम सिसकारी की आवाज सुनकर संजू पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था,,,, कुछ देर तक वह अपनी मां की चूत को इसी तरह से चाटता रहा और धीरे से अपनी एक उंगली अपनी मां की चूत में डाल कर उसे अंदर बाहर करते हुए जीभ से चाटना शुरू कर दिया अपने बेटे की उंगली को अपनी चूत में अंदर बाहर करता हुआ देखकर आराधना पूरी तरह से मस्त हो गई और वह अपनी कमर को ऊपर की तरफ उछालने लगी और देखते ही देखते उसके बदन में अकड़न पड़ने लगी है और वह काम रस की पिचकारी मारना शुरू कर दी,,,, यह पल आराधना के साथ-साथ संजू के लिए भी अद्भुत था वह जीभ से ही अपनी मां का पानी निकाल दिया था अभी तो लंड डालना बाकी था,,,,, पानी निकल जाने के बावजूद भी संजू तब तक अपनी मां की चूत चाटता रहा जब तक कि उसकी से नमकीन रस पूरी तरह से वह अपने जीभ से अपने गले में उतार नहीं ले गया,,,,, थोड़ी ही देर में आराधना शांत हो गई और समझो बिस्तर पर से नीचे उतरा और अपनी मां की आंखों के सामने अपने कपड़े उतारना शुरू कर दिया टी-शर्ट उतारते ही आराधना तिरछी नजरों से अपनी बेटी की तरफ देखी तो उसकी नंगी चौड़ी छाती को देखकर एकदम शर्मा गई पेंट में अभी भी तंबू बना हुआ था और अपने बेटे के तंबू को देख कर उसकी चूत फुदक रही थी वह अपने मन में सोच रही थी कि उसके बेटे ने जब अपनी उंगली से ही उसका पानी निकाल दिया तो जब वह लंड डालेगा तब क्या होगा,,,, आराधना अपने मन में यही सोच रही थी कि संजू अपनी पेंट की बटन खोलने लगा और यह देखकर आराधना दूसरी तरफ मुंह करके अपनी आंखों को बंद कर दी वह शर्मा रही थी,,,, और कुछ ही पल में संजू ने अपनी पेंट उतार कर एकदम नंगा हो गया उसका लंड पूरी तरह से टनटनाकर खड़ा था संजू अपने हाथ में लेकर उसे हिलाने लगा और अपनी मां से बोला,,,।

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यह क्या मम्मी तुम दूसरी तरफ मुंह क्यों घुमा ली तुम्हें दिखाने के लिए तो मैं नंगा हुआ हु देखो तो सही मेरे लंड को तुम्हारी चूत में जाने के लिए कैसे तड़प रहा है,,,(संजू अपनी मां के साथ पूरी तरह से बेशर्म हो चुका था अपने बेटे की बात सुनकर जहां आराधना एक तरफ लज्जा से मरी जा रही थी वहीं दूसरी तरफ उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में हलचल बढ़ती जा रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें ऐसे तो अभी अपने बेटे के टन टनाए खड़े लंड को बेहद करीब से देखना चाहती थी उसे अपने हाथ से छूना चाहती थी लेकिन इस समय वह पूरी तरह से शर्मसार हो चुकी थी,,,,,, आराधना का दिल जोरों से धड़क रहा था,,, संजू अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां बेहद शर्मीले किस्म की है और संस्कारों वाली है इसलिए अपनी खुली आंखों से उसके लंड को देखनी है उसे शर्म आ रही है इसलिए संजू आगे बढ़ा और बिस्तर के करीब पहुंच गया आराधना दूसरी तरफ मुंह करके लेटी हुई थी संजू उसकी बांह पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचा अभी भी आराधना की आंखें बंद थी संजू अपनी मां की खूबसूरत चेहरे को देखकर उत्तेजित हो जा रहा था अपने लंड को हाथ में पकड़ कर हिलाता हुआ वह धीरे से एकदम को मोड़ कर बिस्तर पर दिया और अपने लंड को उसके गरम सुपाड़े को अपनी मां के होंठ पर रगड़ना शुरु कर दिया,,,, अपने होठों पर अपने बेटे के लंड का स्पर्श पाते ही आराधना एकदम से चौंक उठी और वह ना चाहते हुए भी अपनी आंखों को खोल दी,,,, ,,, लेकिन संजू अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां अपने होठों को पीछे की तरफ खींचने की इसलिए वह अपना एक हाथ अपनी मां के सिर पर रखकर उसे एकदम से अपने काबू में रखे हुए था चाह कर भी आराधना अपने होठों को पीछे नहीं ले पा रही थी और संजू अपनी मनमानी करते हुए अपने घर में लंड को अपनी मां के वोट पर बराबर रगड़ रहा था,,, आखिरकार आराधना एक औरत थी प्यासी औरत जो बरसों से सही मायने में एक मर्द के प्यार के लिए तड़प रही थी अपने पति से वह पूरी तरह से मायूस थी अपने पति की बेवफाई सेवा पूरी तरह से वाकिफ थी इसलिए अपने बेटे की हरकत उसके बदन में आग लगा रही थी और ना चाहते हुए भी कुछ ही देर में उसके लाल लाल होंठ अपने आप खुल गए और मौके की नजाकत को समझते हुए संजू ने अपने लंड के गरम सुपारी को धीरे से अपनी मां के लाल लाल होठों के बीच प्रवेश करा दिया,,,,, यह पल आराधना के लिए बेहद अद्भुत और अविस्मरणीय था जिसे वह कभी अपनी जिंदगी में भूलने वाली नहीं थी वह आप अपनी जिंदगी में कभी सोची भी नहीं थी कि इस तरह से अपने ही बेटे के लंड को वह अपने मुंह में लेगी लेकिन कल्पना से भी परे सोच से विपरीत आज सब कुछ उसके साथ हो रहा था अपनी मांग के लाल-लाल होठों के बीच अपने लंड को प्रवेश कराते समय जो सुख संजू को इस समय प्राप्त हो रहा था उसके बारे में बयां कर पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था,,,, संजू देखते ही देखते अपने आधे लंड को अपनी मां के मुंह में डाल दिया आखिर कब तक आराधना बर्दाश्त कर पाती वह अपने हाथ का टेका लेकर उठने की कोशिश करने लगी तो संजू भी उसे उठने में मदद करने लगा और देखते ही देखते वह बिस्तर पर घुटनों के बल बैठ चुकी थी और संजू बिस्तर के नीचे खड़ा था अपनी आंखों को शर्म से बंद किए हुए अपने बेटे के आधे लंड को मुंह में लेकर हल्के हल्के जीभ घुमा रही थी,,,,।

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सहहहह आहहहहह ओहहहह मम्मी,,, एकदम गजब मैं कभी सपने में नहीं सोचा था कि तुम इतने अच्छे से लंड की चुसाई करती हो मैं तो पागल हो जाऊंगा,,,,(इतना कहने के साथ ही समझो अपने दोनों हाथों अपनी मां के सर पर रख दिया और हल्के से अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया देखते ही देखते आराधना भी थोड़ा शर्म से बाहर आते हुए अपने हाथ से अपने बेटे के लंड को पकड़ दी और उसके द्वारा अपने लंड का पकड़े जाना संजू के लिए बेहद उत्तेजनात्मक था अपनी मां की नरम नरम उंगलियों का स्पर्श पाते ही संजू का लंड और ज्यादा कड़क हो गया अपने हाथ में और अपने मुंह में अपने बेटे के लंड को महसूस करके आराधना समझ गई थी कि उसके बेटे का लंड कुछ ज्यादा ही दमदार है,,,,,,,, आराधना को लंड चूसाई का कुछ ज्यादा अनुभव नहीं था लेकिन अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड की वजह से वह अपनी हरकत पर काबू नहीं कर पा रही थी और धीरे-धीरे अपने मुंह में अंदर बाहर करते हुए अपने बेटे को लंड चूसाई का आनंद दे रही थी संजू का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा था इसलिए आराधना का मुंह कुछ ज्यादा ही खुल चुका था और 0 की शक्ल में आ चुका था,,,,,।

धीरे-धीरे करके आराधना खुद अपने बेटे के लंड को पूरी तरह से अपने गले तक लेना शुरू कर दी यह पहला मौका था जब आराधना अपनी शर्म को त्याग कर मजा ले रही थी लेकिन अभी भी उसकी आंखें बंद ही थी,,,, शायद इस हालत में वह अपने बेटे से नजर नहीं मिलाना चाहती थी,,,,,

आराधना के गाने रेशमी बालों का जुड़ा बना हुआ था उसमें एक बकल लगा हुआ था जिसे संजू अपने हाथों से खींचकर उसके रेशमी बालों को एकदम आजाद कर दिया था और खुले बालों में नंगे बदन में आराधना क़यामत लग रही थी संजू पागलों की तरह धीरे-धीरे धक्के लगा रहा था लेकिन अब उसकी रफ्तार बढ़ने लगी थी वह अपनी मां के लाल लाल होठों को अपनी मां की चूत समझ कर उसे चोद रहा था और आराधना को भी मजा आ रहा था,,,,, कुछ ही देर में आराधना के मुंह से,,,गुं गुं की आवाजें आने लगी संजू समझ गया था कि वह अपने लंड को कुछ ज्यादा ही मुंह के अंदर डाल रहा है,,,,,, कुछ देर तक यह खेल ऐसा ही चलता रहा,,,, लेकिन अब चुदाई का समय आ चुका था अपनी मां की गुलाबी चूत में प्रवेश कराने का समय आ गया था,,, क्योंकि संजू अपनी मां की हालत को समझ गया था वह पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी और गर्म लोहे पर ही हथोड़ा मारने का हुनर संजू अच्छी तरह से जानता था,,,। इसलिए संजु अपनी मां के मुंह में से अपने लंड को बाहर निकाल लिया,,,, लंड के बाहर निकलते ही आराधना गहरी गहरी सांस लेने लगी उसकी सांस फूल रही थी लेकिन फिर भी वह अपने बेटे के मोटे तगड़े लंबे लंड को छोड़ने की इच्छा नहीं रखती थी,,,,।

अब लेट जाओ मम्मी तुम्हारी खूबसूरत चूत में लंड डालने का समय आ गया है,,,,

(आराधना का दिल जोरों से धड़क रहा था वह जानती थी कि अगले पल संजू उसकी चूत में बड़ा लंड डालकर उसे चोदने का अद्भुत सुख देगा लेकिन फिर भी वह एक माथे और से चोदने के लिए उसका बेटा पूरी तरह से तैयार था इसलिए एक बार फिर से अपने बेटे को समझाने की कोशिश करते हुए बोली,,,)

संजू तुझे नहीं लगता कि हम दोनों जो करने जा रहे हैं गलत है तेरी जीद के आगे मैं हार चुकी हूं लेकिन फिर भी एक बार सोचने और समझने की कोशिश कर मैं तेरी मां हूं और तू मेरा बेटा है तू अगर मुझे चोदेगा तो यह पाप होगा,,,(अनजाने में ही आराधना के मुंह से चोदेगा शब्द बाहर,, निकल गया था और अपनी मां के मुंह से इस शब्द को सुनकर संजू एकदम से खुश होता हुआ बोला,,,)

आय हाय देखी मम्मी तुम्हारे मुंह से यह शब्द कितना अच्छा लग रहा है मेरा तो सुनकर ही लंड खड़ा हो गया और हां तुम्हारी जानकारी के लिए बता दूं कि तुम्हें चोदने में कोई पाप नहीं है इस समय तो मेरी मम्मी नहीं बल्कि एक औरत हो और मैं तुम्हारा बेटा नहीं है एक मर्द हूं तुम्हें छोड़कर में तुम्हारी खुशी वापस दे रहा हूं तुम्हारी जरूरत पूरी कर रहा हूं और किसी की जरूरत पूरी करना पाप नहीं पुण्य होता है सोचो अगर तुम्हारे साथ में अगर ऐसा ना करु तो एक ना एक दिन तुम्हें जरूर एक मर्द की जरूरत पड़ेगी और तुम किसी और के साथ यही काम करोगी और सोचो तब वह इंसान तुम्हें ब्लैकमेल कर सकता है तुम्हें बदनाम कर सकता है चुदाई की तुम्हें कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ जाएगी और यहां तो केवल हम और तुम हो एक दूसरे की राजदार एक मां और एक बेटा भला इन चारदीवारी के बीच की यह बात बाहर कैसे जाएगी,,,,,(संजू ऐसा कहते हुए अपनी मां की दोनों टांगों के बीच जगह बनाने लगा आराधना अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा मानने वाला बिल्कुल भी नहीं है,,, इसलिए इस पल का मजा लेने में ही भलाई है,,, ऐसा अपने मन में सोच कर आराधना भी पूरी तरह से अपने आप को अपने बेटे के आगे समर्पित कर दी और संजू भी ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में अपनी मां के नंगे बदन को देखकर उत्तेजित होता हुआ उसकी कमर को पकड़ा और अपनी तरफ खींच लिया ऐसा करने से आराधना की आधी गांड संजू की मांसल जांघों पर चढ गई,,,, और आराधना की गुलाबी चूत ठीक संजू के लंड के सामने आ गई आराधना इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि अब तक उसकी चूत में उसके पति का छोटा और पतला लंड ही अंदर बाहर हुआ है लेकिन उसके बेटे का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था इसकी वजह से आराधना के मन में थोड़ी घबराहट भी थी इसलिए वह ना चाहते हुए भी बोली,,,।

संजू धीरे से तेरा कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा है,,,

(इतना कहने के साथ ही आराधना एकदम से शरमा गई और संजू अपनी मां की बात सुनकर एकदम से खुश होता हुआ बोला)

हां अब हुई ना यह बात तू बिल्कुल भी चिंता मत करो मम्मी इतनी आराम से करूंगा कि तुम देखती रह जाओगी,,,

(और इतना कहने के साथ ही संजु अपने गरम सुपाड़े को अपनी मां की दहकती हुई चूत पर रख दिया आराधना पूरी तरह से मचल उठी क्योंकि महीनों बाद उसकी चूत पर लंड का स्पर्श जो हो रहा था एक औरत के लिए यह पल बेहद खास होता है ना चाहते हुए भी इतनी सही आराधना के मुंह से गरमा गरम सिसकारी फूट पड़ी,,, यह सुनकर संजू बोला,,)

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वाह मम्मी अभी से अभी तो डालना बाकी है,,( और इतना कहने के साथ ही वह अपने लंड के सुपाड़े को अपनी मां की पनियाई चूत में प्रवेश कराने लगा देखते ही देखते काम रस का गीलापन पाकर संजउ के लंड का सुपारा चूत के अंदर प्रवेश करने लगा,,,, इतने से फिर से हल्के से दर्द की आवाज के साथ आराधना के मुंह से निकला,,,।

आहह संभाल के बेटा,,,

तुम चिंता मत करो मम्मी दो दो जवान बच्चों की मां हो आराम से ले लोगी,,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर आराधना अपने मन में सोचने लगी कि उसका बेटा पूरी तरह से बेशर्म हो चुका है और शायद बेशर्म बनने के बाद ही एक औरत और एक मर्द को असली मजा का अनुभव मिलता है और ऐसा ही आज उन दोनों के साथ भी हो रहा था देते देते संजू प्रयास जारी रखते हुए अपना आधा लंड अपनी मां की चूत में डाल दिया यह देख कर आराधना की भी हिम्मत बढ़ने लगी,,, ना चाहते हुए भी वह अपनी गर्दन उठाकर अपनी दोनों टांगों के बीच देख ले रही थी उसे भी अपनी चूत कचोरी की तरह फूली हुई लग रही थी जो कि सच भी था संजू अपनी मां की कमर था में हुए था धीरे-धीरे करके वह आगे बढ़ता चला जा रहा था,,,,, लेकिन इस बात से संजू भी हैरान था कि दो दो बच्चों की मां होने के बावजूद भी उसकी मां की चूत अंदर से एकदम कसी हुई थी तभी तो उसे लंड अंदर तक डालने में कठिनाई महसूस हो रही थी ,,,, इसी से संजू को इस बात का एहसास हो रहा था कि उसकी मां कितनी खूबसूरत और गठीले बदन की मालकिन,,,,

संजू अब देर नहीं करना चाहता था वह अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से पकड़कर एक करारा धक्का लगाया और एक ही बार में अपना आधा बचा लंड भी अपनी मां की चूत में डाल दिया,,,, संजू की इस हरकत पर आराधना के मुंह से हल्की सी चीख निकल गई लेकिन वह अपने दर्द को दबा ले गई क्योंकि उसे डर था कि बगल वाले कमरे में सो रही मोहिनी के कानों में उसकी आवाज ना पहुंच जाए,,,, आराधना कुछ पल के लिए दर्द से बिलबिला उठी थी स्तर पर बिछी चादर को अपने दोनों हाथों की हथेली में कस के पकड़ कर वह अपने दर्द को पी रही थी और संजू भी उसी स्थिति में रुक चुका था और तुरंत अपनी मां के ऊपर छूकर उसके लाल-लाल होठों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया था अपनी मां के दर्द को अपनी हरकत से शांत करना चाहता था धीरे-धीरे उसकी हरकत असर भी कर रही थी संजू का लंड पूरी तरह से अपनी मां की चूत में कहीं खो गया था और संजू अपनी मां की चूची को पीकर उसके दर्द को कम कर रहा था,,,,

कुछ देर बाद जब आराधना शांत भी तो संजू धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया आराधना के लिए एप्पल बेहद शर्म से डूब मरने वाली थी लेकिन वह इस पल का मजा भी ले रही थी अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड को अपनी चूत के अंदर बाहर होता हुआ महसूस कर के वह पानी पानी हो जा रही थी उसी अद्भुत सुख मिल रहा था,,, इतने मोटे और लंबे लंड से चुदने का यह आराधना का पहला अनुभव था आराधना को साफ महसूस हो रहा था कि उसके बेटे का लंड उसकी चूत की दीवारों में रगड़ रगड़ कर अंदर बाहर हो रहा है जिससे उसका आनंद बढ़ता ही जा रहा था,,,,,

अब कैसा लग रहा है मम्मी,,,

दर्द कम हो गया है,,,(बहुत मजा आ रहा है ऐसा कहने की जगह शर्म के मारे आराधना दर्द का नाम ले रही थी और इस बात को संजू अच्छी तरह से जानता था क्योंकि जो बात उसकी मां अपने होठों से नहीं कह पा रही थी उसका चेहरा बता रहा था संजू धीरे-धीरे अपने धक्कों को बढ़ाने लगा,,,, संजू फिर से अपनी मां की कमर थाम लिया था और जल्दी-जल्दी अपनी कमर आगे पीछे कर रहा था,,,,,

ओहहह मम्मी,,,, तुम्हें चोदने का बहुत मजा आ रहा है मम्मी तुम्हारी चूत एकदम कसी हुई है मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है कि इस उमर में भी तुम्हारी चूत एकदम जवान लड़कियों की तरह है,,,,

(आराधना मदहोश में जा रही थी अपने बेटे की बात सुनकर खास करके अपनी चूत की प्रशंसा अपने बेटे के मुंह से सुनकर वह फुली नहीं समा रही थी लेकिन फिर भी वह जानबूझकर बोली,,,)

तुझे आ रहा है लेकिन मुझे तो नहीं आ रहा है तू मेरा बेटा है और तू अपनी मां को चोद रहा है ऐसे में कैसे मुझे मजा आएगा,,,,

लेकिन तुम्हारा चेहरा तो कुछ और बता रहा है,,,(लगातार दो धक्के मारते हुए जिससे आराधना के मुंह से आह निकल गई) मेरे लंड को अपने चूत में लेकर तुम भी मस्त हो गई हो,,,,,,(संजू इस तरह की अतिशय गंदी बातें जानबूझकर कर रहा था संजू अपनी हरकतों से अपनी मां को शारीरिक रूप से तो खोल चुका था लेकिन उसे मानसिक रूप से भी खोलना चाहता था वह जिस तरह की बातें कर रहा था वह चाहता था कि उसकी मां भी उसी तरह से गंदी गंदी बातें करें क्योंकि इस बात का उसे अनुभव था की चुदाई करते समय अगर गंदी बातें की जाए तो मजा दोगुना हो जाता है,,,, संजू की बात को सुनकर आराधना शर्मा गई थी और अपने नजरों को दूसरी तरफ घुमा ली थी,,, यह देख कर संजू बोला,,,)

नजर घुमा लेने से हकीकत तो नहीं बदलेगी,,,,

(अपने बेटे की बात सुनकर आराधना ना चाहते हुए भी मुस्कुरा दी उसके होठों की मुस्कुराहट संजु को बहुत अच्छी लग रही थी इसलिए वह अपने जबरदस्त धक्को को विराम देते हुए अपनी मां के होंठ पर अपनी उंगली रखकर बोला,,,)

वाह इसे कहते हैं मुस्कान तुम्हारे चेहरे की खूबसूरती को कितना बढा देती है,,,,(इतना कहने के साथ ही संजू अपनी हथेली की चार उंगली को उसके निचले गाल पर रखकर उसके चेहरे को अपनी तरफ घुमाते हुए बोला) शरमाओ मत मम्मी शर्माने से काम नहीं चलने वाला है,,, वैसे भी अब शर्मा कर कोई फायदा नहीं है क्योंकि मेरा लंड तुम्हारी चूत में घुस चुका है,,,,(अपने बेटे की इस तरह की गंदी बातें सुनकर आराधना किसान से बड़ी तेजी से चल रही थी उत्तेजना के मारे उसके होंठ‌ सूख रहे थे जिसे वह अपनी जीभ से गिला करने की कोशिश कर रही थी और ऐसा करने पर वह और भी ज्यादा सेक्सी लग रही थी,,, शर्म के मारे आराधना अपनी आंखों को बंद कर ले रही थी और संजू चाहता था कि उसकी मां अपनी आंखों को खोल कर अपनी दोनों टांगों के बीच उसके मोटे तगड़े लंड को उसकी चूत के अंदर और बाहर होता हुआ देखें इसलिए संजू अपने लंड को उसी तरह से चूत में डाले हुए स्थिर हो गया और अपनी मां को बोला,,,)

क्या मम्मी तुम भी अपनी आंखों को बंद की हो ऐसे कैसे मजा आएगा तुम कैसे देख पाओगे कि तुम्हारा बेटा कैसे तुम्हारी चूत में अपना मोटा लंड डालकर तुम्हें चोद रहा है,,,, ऐसे बिल्कुल भी नहीं चलेगा तुम्हें अपनी आंखें खोलना होगा,,,।
 
नहीं संजू मुझसे नहीं होगा मुझे बहुत शर्म आ रही है,,

क्या मम्मी अभी भी शर्म आ रही है तुम्हारे कपड़े में अपने हाथ से उतार कर तुम्हें नंगी किया तुम्हारे कमरे में तुम्हारे बिस्तर पर तुम्हें चोद रहा हूं और तुम चुदवा रही हो,,,, और कह रही हो कि शर्म आ रही है जाओ अगर तुम आंखें नहीं खेलोगी तो मैं तुम्हें नहीं चोदुंगा,,,,, इसी तरह से तुम्हारी चूत में लंड डालकर बैठे रहूंगा,,,,।

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(अपने बेटे की यह बात सुनकर आराधना एकदम से सकते में आ गई क्योंकि उसे भी मजा आ रहा था उसके बेटे के लिंग की मोटाई और लंबाई सीधे उसके बच्चेदानी तक पहुंच रही थी और,,, लंड मोटा होने के नाते आराधना अपनी बेटी के लंड को अपनी चूत में एकदम कसा हुआ महसूस कर रही थी और उसे अपने बेटे का लंड इतना ज्यादा कड़क लग रहा था कि उससे उसके लंड की नसें सांप अपनी चूत की अंदरूनी दीवारों पर रगडती हुई महसूस हो रही थी और अगर तेरे अंदर बाहर होने की वजह से उसका मजा अत्यधिक बढ़ता जा रहा था और लगातार उसकी चूत से काम रस टपक रहा था,,,, ऐसे में आराधना को अपने बेटे से चुदवाने में बहुत मजा आ रहा था पहले ही दोनों के बीच मां बेटी का रिश्ता था और आराधना इसे रिश्ते में जिस्मानी ताल्लुकात नहीं रखना चाहती थी लेकिन अपने बेटे की मनमानी को देखते हुए और अपनी जरूरत के आगे वह घुटने टेक चुकी थी और अब उसे इस खेल में बहुत मजा आ रहा था लेकिन एक जिद के कारण उसका बेटा उसी तरह से उसकी चूत में लंड डाले बैठा था और जैसा आराधना को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था रंग में भंग पड़ गया था इसलिए ना चाहते हुए भी आराधना अपनी आंखों को खोल दी लेकिन उसकी आंखों में शर्म भरा हुआ था वह पूरी तरह से शर्मिंदगी महसूस कर रही थी साथ ही उत्तेजना का असर उसके चेहरे पर साफ नजर आ रहा था,,, अपनी मां को आकर खोला हुआ देखकर संजू के होठों पर मुस्कान तैरने लगी और वह खुश होते हुए बोला,,,)

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वाह यह हुई ना बात मम्मी अब देखना कितना मजा देता हूं तुम एक नजर अपनी दोनों टांगों के बीच तो डालो मेरे लंड को देखकर मजा आ जाएगा,,, कि कैसे तुम्हारे छोटे से गुलाबी छेद में मेरा मोटा लंड आराम से अंदर बाहर हो रहा है,,,,

(आराधना को अपने बेटे की बातें इतनी अत्यधिक गंदी लग रही थी कि उसकी बातों को सुनकर वह पानी पानी हुए जा रही थी इस तरह से उसके पति ने भी कभी इतनी अधिक गंदी बातें उसके साथ नहीं किया था लेकिन संजू बिल्कुल बेशर्म बन चुका था लेकिन उसकी बेशर्मी आराधना को अच्छी लग रही थी उसका भी मन अपनी दोनों टांगों के बीच देखने का मन कर रहा था लेकिन वह शर्म के मारे देख नहीं पा रही थी लेकिन अपने बेटे की बात सुनकर वह हिम्मत जुटाकर अपने दोनों हाथों की कोहनी का सहारा लेकर थोड़ा सा ऊपर की तरफ उठी और अपनी दोनों टांगों के बीच अपनी नजरों को स्थिर कर दी उसके बाद जो नजारा उसकी आंखों के सामने आया उसे देखकर वह खुद हैरान हो गई,,,, उसे अपनी दोनों टांगों के बीच का नजारा एकदम साफ नजर आ रहा था उसकी चूत कचोरी की तरह एकदम खुली हुई थी जो की पूरी तरह से रस से लबालब थी,,,, आराधना यह देखकर हैरान थी कि राजू का इतना मोटा और लंबा लंड बड़े आराम से उसकी चूत के अंदर तक चला जा रहा था और चूत में कहीं खो जा रहा था यह देखकर आराधना की उत्तेजना बढ़ने लगी ,,,, संजू अपनी मां को यह नजारा दिखाने की उद्देश्य से बड़े आराम से अपनी कमर को पानी की तरह लहराता हुआ आगे पीछे कर रहा था और अपने होठों को दांत से काटकर अपनी उत्तेजना दर्शा रहा था यह देख कर,,,, आराधना पूरी तरह से मस्त हुई जा रही थी,,,,, वह कभी सोचे नहीं थे कि इतनी जल्दी अपने बेटे के सामने घुटने टेक दिल की लेकिन हालात पूरी तरह से उसे मजबूर कर चुके थे बदन की जरूरत उसका साथ देने से इंकार कर रही थी पति की बेवफाई के चलते उसका दिमाग

सही गलत के फैसले के बीच परख करना भूल गया था रिश्तों और मर्यादा के संबंध को भूल चुका था मां बेटे के बीच के पवित्र रिश्ते को भूल चुका था इसलिए तो आज आराधना अपने ही कमरे में अपने ही बिस्तर पर अपने बेटे की हाथों की कठपुतली बनकर उसके लंड को अपनी चूत में लेकर मस्त हुए जा रही थी,,,,, धीरे-धीरे संजू अपनी कमर को रफ्तार देने लगा आराधना को अपने बेटे का लंड बड़ी तेजी से अपनी चूत के अंदर बाहर होता हुआ महसूस हो रहा था उसकी और अगर से बार-बार उसका काम रस बाहर निकल जा रहा था जिससे कामरेज की चिकनाहट पाकर लंड बड़े आराम से बिना किसी रूकावट के चूत के अंदर तक पहुंच रहा था,,,,,,,।

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तुम्हारी चूत इतनी कसी हुई क्यों है मम्मी,,,,, और वह भी इस उमर में,,,,

ऐसे सवाल मत पूछा कर समझो मैं जवाब दे नहीं पाऊंगी,,

मैं जानता हूं मम्मी तुम बहुत अच्छी हो रहा था लेकिन संस्कारी लेकिन वक्त की मारी हो पति की बेवफाई सहन करके जी रही हो एक औरत होने का सुख खो चुकी हो और इसीलिए तो मैं तुम्हें एक औरत की जरूरत क्या होती है कैसे पूरी की जाती है यही बताने के लिए तुम्हारे साथ हूं तुम बिल्कुल भी चिंता मत करना मैं जिंदगी भर तुम्हारे साथ रहूंगा,,,,,

चोदने के लिए,,,,(अपने बेटे की बात सुनकर एकाएक आराधना बोली)

चोदने के लिए भी और तुम्हारा साथ देने के लिए भी सच कहूं तो एक मर्द औरत का साथ किस लिए चाहता है उसकी मदद करने के लिए उसका साथ देने के लिए परछाई की तरह उसके साथ घूमने के लिए और फिर रात को उसे चोदने के लिए और मर्द को कुछ नहीं चाहिए उसकी पसंदीदा औरत की चूत उसे मिल गई समझ लो दुनिया मिल गई,,,, जैसा कि मैं इस समय दुनिया का सबसे खुशनसीब लड़का हूं जो अपनी मां की जरूरत पूरी करते हुए उसे चोद रहा हूं,,,

बातें बनाना तो कोई तुझसे सीखे,,,,ओर हा मेरी टांगे दुखने लगी है,,,,,, तू तो एकदम कसाई हो गया है,,,,

मेरा इतनी जल्दी छूटने वाला नहीं है मम्मी मुझे लगता है पापा का तो 2 मिनट में ही निकल जाता होगा तभी तो तुम्हें पता नहीं है कि औरत कितनी देर तक टांग उठा कर चुदवा सकती है,,,,

ऐसा ज्ञान मुझे नहीं लेना,,,,,

ज्ञान ना सही लंड तो लेना है ना,,,

(संजू की बात सुनकर आराधना कुछ बोल नहीं पाए संजू धीरे से अपने लंड को अपनी मां की चूत से बाहर निकाला जो की पूरी तरह से उसके काम रस में नहाया हुआ था संजू अपने लंड को हाथ में पकड़ कर उसे हिलाता हुआ उसके गरम सुपाड़े को अपनी मां की चूत पर पटकने लगा और अपनी मां की तरफ देख कर बोला,,)

संजू और उसकी मम्मी

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देखो मम्मी क्या पापा का इतना बड़ा और मोटा है,,,(इतना कहने के साथ ही संजु ने अपने लंड को जड़ से पकड़ कर उसके संपूर्ण वजूद को अपनी मां की चूत पर रख दिया एक तरह से हुआ गुलाबी चूत के क्षेत्र के साथ-साथ अपने लैंड की लंबाई को भी नाप रहा था जो कि सीधे-सीधे उसकी नाभि तक पहुंच रही थी यह देखकर आराधना भी एकदम दंग रह गई थी कितना मोटा और लंबा लंड बड़े आराम से चूत के अंदर कैसे ले ले रही है,,,,, आराधना गर्दन उठाकर अपनी आंखों से सब कुछ देख रही थी कुछ देर के लिए संजू ने चुदाई को रोकता था और अपने लंड को बार-बार उसकी चूत पर पटक रहा था जिससे उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी अपनी मां को खामोश अपने लंड की तरफ देखता हुआ पाकर संजू बोला,,,)

कैसा लगा मम्मी तुम बता नहीं रही हो क्या पापा का ऐसा ही है या इससे छोटा या इससे बड़ा,,,,

तू जान कर क्या करेगा समझो जो तू चाहता है वह तो तुझे मिल गया है,,,

हां बात तो सही है जो मैं चाहता था उसे प्राप्त कर लिया है लेकिन यह भी जानना जरूरी है कि तुम्हारी चूत पर जिसका हक पहले ही उसका लंड कैसा है,,,,।

तेरे से आधा ही है लंबाई में भी और मोटाई में भी,,,

ओहहह मम्मी तब तो तुम्हारी गदर आई जवानी पर काबू कर पाना पापा के बस में बिल्कुल भी नहीं था तभी तो ए जिम्मेदारी मुझे उठानी पड़ रही है अब देखना मैं तुम्हारी मचलती उफान मारती जवानी पर कैसे काबू लाता हूं,,,,

(अपने बेटे का आत्मविश्वास देखकर आराधना को भी अच्छा लग रहा था उसे गर्व हो रहा था कि उसका बेटा एक पूरी तरह से मर्दाना ताकत से भरा हुआ असली मर्द है लेकिन फिर भी वह जानबूझकर अपने बेटे से बोली)

चल रहने दे संजू औरत की जवानी को मर्द कभी भी काबू में नहीं ले सकते,,,,

यह तो दूसरों के लिए होगा मेरी चुदाई तुमने असली तरीके से देखी कहां है जब मैं चोदना शुरू करूंगा ना तो तुम पानी नहीं मानोगे और तुम्हारा पानी छूटता ही रहेगा,,,,

चल रहने दे संजू अभी तेरा पानी निकल जाएगा और तू ढेर‌ होकर सो जाएगा,,,, और तुझ पर पानी डालकर जगाना पड़ेगा,,,,

तो तुम मुझ को चैलेंज कर रही हो,,,

चैलेंज नहीं बच्चों मर्दों की औकात बता रही हो औरत अपनी दोनों टांगों के बीच मर्द को पूरी तरह से कमजोर कर देती है,,,,

तो यह बात है अभी बताता हूं,,,

क्या बताता है,,,, जल्दी खत्म कर‌ और जाकर सो जा,,,

तुम्हें क्या लगता है आराधना रानी,,, मेरा पानी जल्दी निकल जाएगा जब तक तुम्हें मस्त ना कर दो दो बार तुम्हारा पानी ना निकाल दो तब तक मेरा निकलने वाला नहीं है देखना चाहती हो,,,,

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बताकर दिखाएगा क्या,,,,,(आराधना इस तरह की बातें अपने बेटे से करना नहीं चाहती थी लेकिन हालात के आगे वह भी मजबूर हो चुकी थी इस तरह की बातें करने में उसे आनंद की प्राप्ति हो रही थी उसे मजा आ रहा था और वह भी अपने बेटे की मर्दाना ताकत को और भी ज्यादा उच्च शिखर पर देखना चाहती थी इसलिए उसए उक‌साते हुए वह इस तरह की बातें कर रही थी,,,,)

अभी रुको तब तो तुम्हें घोड़ी बनाकर चोदना पड़ेगा,,,,, चल अब जल्दी से उठ जा मेरी जान,,,,(संजू पूरी तरह से लय में आ चुका था अभी तक वह मम्मी मम्मी कह रहा था लेकिन अब अपनी मम्मी को जान कहकर संबोधन करना शुरू कर दिया था और उसका इस तरह से जान कहना आराधना के तन बदन में आग लगा रहा था उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे कि वह अपने बेटे के साथ नहीं बल्कि अपने प्रेमी के साथ हैं,,,,, वह भी अपने बेटे की बात मानते हुए पीठ के बल लेटी थी उठ कर बैठ गई और धीरे से अपना आसन बदलने लगे अपनी मां को अपनी आंखों के सामने घोड़ी बनता देखकर संजू की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी थी समझो अपनी आंखों से देख रहा था कि उसकी मां अपने घुटनों के बल बैठ गई थी और धीरे से आगे की तरफ झुकने लगी थी देखते ही देखते वह बिस्तर पर झुक गई थी और अपनी गोरी गोरी भारी-भरकम गांड को ऊपर की तरफ उठाकर हवा में लहराने लगी थी,,,, यह वह स्थिति थी जिस पर राजू को अपनी मर्दाना ताकत के बलबूते पर विजई पताका लहरा ना था पूरी तरह से इस स्थिति पर काबू पाना था और वैसे भी घोड़ी बनाकर चोदने में संजू को कुछ ज्यादा ही मजा आता था इसलिए अपनी मां की गदराई हुई गांड को देख कर उसके मुंह में पानी आ गया था और वह अपनी मां की गुलाबी छेद में लंड डालने से पहले एक बार दोनों हाथों से उसकी गांड की बड़ी-बड़ी आंखों को पकड़ लिया और अपने प्यासे होठों को एक बार फिर से उसकी चूत पर लगाकर उसके काम रस को चाटना शुरू कर दिया,,,,,, एक बार फिर से आराधना के बदन में सिहरन सी दौड़ गई आराधना नहीं कभी भी अपने पति को इस तरह की हरकत करते नहीं देखा था कि एक बार लंड डालने के बाद दोबारा उसकी चूत पर अपना होंठ लगाया हो लेकिन संजू कुछ अलग ही था संजू ने अपनी इस हरकत से आराधना के बदन में जोश भर दिया था आराधना पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी संजू एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर मुठिया रहा था और दूसरी तरफ अपने होंठ से उसकी चूत से निकल रहे काम रस को चाट रहा था,,,,, आराधना इस बात से भी पूरी तरह से हैरान थी कि घंटो गुजर गए थे लेकिन उसके बेटे के लंड ने पानी का एक बूंद तक नहीं फेंका था और अभी तक उसी तरह से टनटनाकर खड़ा था,,,, आराधना की चूत टप टप चू रही थी और उससे काम रस को संजू अपना जीभ लगा कर चल रहा था खूबसूरत औरत की चूत से निकला काम रस कसैला और नमकीन स्वाद होने के बावजूद भी एक आदमी के लिए अमृत कीबोर्ड के समान होता है जिसे वह नीचे जमीन पर गिरने नहीं देना चाहता और उसे जीभ लगा लगाकर चाट जाता है,,, और यही काम ही समय संजू भाई अपनी मां के साथ कर रहा था घड़ी में तकरीबन 2:00 बज चुके थे लेकिन अभी तक चुदाई का सिर्फ प्रारंभ हुआ था,,,, और इसी से तो आराधना और भी ज्यादा हैरान थे क्योंकि इतनी देर रात तक वह संभोग क्रिया को करते हुए जागी नहीं थी या यूं समझ लो कि उसे रात भर जगा कर चोदने वाला अभी तक असली मर्द मिला ही नहीं था लेकिन आज की रात कुछ और थी आराधना का साथ ही बदल चुका था अशोक की जगह संजू ने ले लिया था इसलिए बिस्तर पर का पूरा खेल बदल चुका था सारे समीकरण धरे के धरे रह गए थे एक मजे हुए खिलाड़ी की तरह संजू धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था और इस खेल को और भी ज्यादा दिलचस्प बनाता जा रहा था संजू की ही वजह से आराधना भी थोड़ी बहुत बेशर्मी का प्रदर्शन करना शुरू कर दी थी क्योंकि उसे भी इस बात का एहसास हो गया था कि बेशर्मी दिखाए बिना इस खेल में मजा नहीं आने वाला इसीलिए तो वह घोड़ी बनकर अपनी बड़ी बड़ी गांड को हवा में उठाए हुए लेटी थी और अपनी नजर को पीछे घुमा कर अपने बेटे की हरकत को देख रही थी जहां से केवल उसका कान और बाल दिख रहे थे बाकी का मुंह वाला हिस्सा उसकी भारी-भरकम गांड के बीचो बीच छिपा हुआ था,,,, यह देख कर आराधना के गाल शर्म से लाल हो गए उसे इस बात का एहसास होने लगा कि उसकी गांड कुछ ज्यादा ही बड़ी-बड़ी और एकदम खोल है तभी तो उसके बेटे का पूरा वजूद उसकी गांड के पीछे छुपा हुआ था आराधना थोड़ा सा नीचे नजर की तो उसके होश उड़ गए उसके बेटे का लंड उसके ही चूत के काम रस में डूबा हुआ ठुनकी मार रहा था,,,, अपनी बेटी की टनटनाए लंड को देखकर आराधना का मन उसे पकड़ने को कर रहा था,,,, लेकिन पीछे तक हाथ जाना इस समय नामुमकिन था वह सिर्फ अपने बेटे की खड़े लंड को देखकर ही खुश हो रही थी,,, आराधना को अपने बेटे का लंड इस‌ समय गधे के लंड की तरह लग रहा था,,,,, उसकी चूत लगातार काम रस छोड़ रही थी संजू कुछ देर तक अपनी मां की चूत को चाट कर उसे फिर से गर्म कर दिया था और फिर बिस्तर के नीचे खड़े होकर ही वह अपनी मां की गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे अपने लंड के एकदम सामने लेकर आया और फिर आलूबुखारा के सामान अपने सुपाडे को फिर से अपनी मां के गुलाबी छेद में डाल दिया इस बार संजू को ज्यादा मशक्कत उठाने नहीं पड़ी क्योंकि धीरे-धीरे आराधना की चूत में संजू के लंड का सांचा बन चुका था और आराम से गप्प करके वह अंदर ले ली,,, संजू ने फिर से अपनी मां की चूत में पूरा लंड डाल दिया था और उसकी गांड को दोनों हाथों से पकड़कर बोला,,,।

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अब देखना मेरी जान कैसे मैं तुम्हें छोड़ देता हूं तुम्हारी चूत से पानी ना निकाल दिया तो बोलना अब तक तुम पापा की छोटे लंड से मजा ले रही थी लेकिन आज असली मर्द से पाला पड़ा है,,,,,(अपने बेटे की बात सुनकर आराधना मारे उत्तेजना से गदगद हुए जा रही थी और उत्सुक भी किया उसका बेटा किस तरह से उस की चुदाई करेगा अपने कहे गए शब्दों की लाज रखते हुए पल भर में ही संजू ने रफ्तार पकड़ लिया और अपनी मां की चूत को चोदना शुरू कर दिया हर धक्के के साथ आराधना के मुंह से आह निकल जा रही थी और हर धक्के के साथ आगे की तरफ लुढक जा रही थी वह तो संजू ने अपने दोनों हाथों से बड़ी मजबूती से उसकी कमर को पकड़ रखा था वरना वह पहले धक्के में ही बिस्तर पर पसर जाती,,,,।)

आहहह आहहह आहहहह बाप रे,,,ऊफफ,,,,

क्या हुआ मेरी जान अभी से चिल्लाने लगी,,,,,

थोड़ा धीरे इतनी तेज अंदर लेने का मुझे अनुभव नहीं है,,,

यह शिकायत तो तुम्हें पापा से करनी चाहिए थी कि तुम्हारी चुदाई असली मर्द की तरह की ही नहीं,,,,,

आरररह आहहहहह ,,,,,,

देखो मम्मी कैसे तुम्हारी चूत में लंड अंदर बाहर हो रहा है,,,आहहह पीछे से चोदने का मजा ही कुछ और है,,,ऊममममममम,,(इतना कहने के साथ ही थोड़ा सा नीचे झुक कर अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर अपने होंठ रख कर चुंबन करने लगा,,,, संजू की यह हरकत दर्शा रहा था कि वह अपनी मां की खूबसूरत बदन से कितना प्यार करता है,,,,, संजू रुकने का नाम नहीं ले रहा था और आराधना की सबसे बड़ी तेजी से चलने लगी देखते ही देखते उसके बदन की अकड़ बढ़ने लगी थी और अगले ही पल हल्की सी चीख के आवाज के साथ उसका काम रस की पिचकारी छूट पड़ी और संजू अपनी चुदाई जारी रखते हुए अपनी मां का पानी निकाल चुका था,,,,,)

कैसा लगा मेरी जान छुट गया ना पानी,,,,,

(संजू जोर जोर से धक्के लगाते हुए बोला,,, अपने बेटे के मुंह से अपने लिए इस तरह की बात सुनकर अगर कोई और मौका होता तो शायद वह डूब कर मर जाती लेकिन इस समय अपने बेटे की यह बात उसे और भी ज्यादा मदहोश कर रही थी,,, लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रही थी उसे तो अपने बेटे की मर्दानगी पर धीरे-धीरे गर्व होना शुरू हो गया था क्योंकि बिना पानी छोड़े वह लगातार उसे चोद रहा था और वह भी तेज धक्कों के साथ,,, आराधना को ऐसा लग रहा था कि उसका बेटा आज उसकी चूत मार-मार कर सुजा देगा,,,,, कमरे में ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था बिस्तर पर दोनों मां-बेटे धमाचौकड़ी मचा रहे थे दोनों संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था में आराधना भी नंगी और उसका बेटा भी नंगा आराधना की गुलाबी छेद में उसके बेटे का मोटा लंड अंदर बाहर हो रहा था जिसका सुख बड़े मदहोशी से आराधना ले रही थी पानी झर जाने के कुछ पल में वह फिर से गर्म होने लगी लेकिन अभी तक संजू का कुछ भी बिगड़ा नहीं था वह चुदाई का आनंद ले रहा था परमसुख प्राप्त कर रहा था एसा संभोग सुख जिसके बारे में उसने आज तक कल्पना भी नहीं किया था,,,,,,, अपने बेटे से चुदवाते समय आराधना यही सोच रही थी कि उसके कमरे में जो कुछ भी हो रहा है इस बारे में दुनिया वालों को क्या पता चलेगा यह राज तो उसके और उसके बेटे के बीच का है और दोनों में से कोई भी किसी को नहीं बताएगा तो फिर हर्ज ही क्या है इस तरह के रिश्ते को आगे ले जाने मे,,, ऐसा ख्याल मन में आते ही आराधना के चेहरे की चमक बढ़ने लगी,,,,, वह फिर से उत्तेजित होने लगी लेकिन इस तरह से घोड़ी बनकर चुदवाने से उसका बदन दर्द करने लगा था आराधना के जीवन में यह पहला मौका था जब आते समय उसका बदन दर्द कर रहा था,,,, उसकी कमर की हड्डियां चटक रही थी पलंग में से भी चरण चरण की आवाज आ रही थी शायद इसी को पलंग तोड़ चुदाई करते हैं इस बारे में आज जाकर आराधना को एहसास हुआ था,,,,,, जब कमर का दर्द सहन नहीं हुआ तो मदहोशी भरे स्वर में आराधना बोली,,,)

संजू अब बसकर मेरी कमर दुख रही है,,,

ऐसे कैसे मम्मी तुम्हारा तो निकल गया है मुझे बीच मझधार में छोड़ कर जाने के लिए कर रही हो,,,,

अरे सच में मेरी कमर बहुत तेज दुख रही है तेरा हर एक धक्का बहुत तेज लग रहा है,,,

इसे ही तो जबरदस्त चुदाई कहते हैं,,,

कुछ भी कहते हो लेकिन पोजीशन तो बदल दे मुझे लेट जाने दे फिर कर लेना,,,।

(आराधना अपने बेटे के साथ सहज हो रही थी वह अब आराम से अपने बेटे से इस बारे में बात कर रही थी इस बात की खुशी संजू को भी थी इसलिए अपनी मां की बात मानते हुए वह अपने लंड को अपनी मां की चूत से बाहर निकाल लिया,,,, और गांड पर थपथपाते हुए उसे लेट जाने का इशारा करने लगा,,,, आराधना गरम आह भरते हुए वापस पीठ के बल लेट गई लेकिन इस बार अपने पैर को बिस्तर के पीछे लटका दी और संजू भी तुरंत दोनों टांगों के बीच आ गया और कमर पकड़कर उसे थोड़ा और आगे की तरफ खींच लिया,,,, संजू एक बार फिर से अपने लंड को हिलाते हुए अपनी मां की चूत के छेद में अपना लंड डाल दिया और चोदना शुरू कर दिया इस बार वह बड़ी तेजी से अपनी मां को चोद रहा था क्योंकि वह भी चरम सुख के करीब पहुंच रहा था लेकिन बार-बार वह अपने को बाहर निकाल कर अपने हाथ से पकड़ कर लंड को वापस चूत में डाल रहा था ऐसा करने से आराधना की तरफ बढ़ जा रही थी उसे बड़े जोरों की पेशाब लगने का आभास होने लगा वह अपने बेटे से कुछ कह पाती इससे पहले ही अपने बेटे के तेज धक्के के साथ ही उसकी चूत के छोटे छेद से पेशाब का फव्वारा फूट पड़ा और यह देख कर संजू की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ गई वह अपनी मां को चोदते चोदते उसे पेशाब करा दिया था इसलिए वह बोला,,,,

संजू की चुदाई से पेशाब का फव्वारा फुट पड़ा

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हाय मेरी रानी देखो मैंने बोला था ना मैंने तुम्हारा पै‍शाब निकाल दिया तुम चुदवाते चुदवाते मुत दी हो,,,।

(यह पल आराधना के लिए बेहद शर्मनाक था क्योंकि वाकई में वह मुत रही थी संजू के हर धक्के के साथ उसके चुत से पेशाब की धार फूट पड़ रही थी आराधना को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह इस समय शर्म से गाड़ी जा रही थी ऐसा उसके साथ पहले कभी नहीं हुआ था शायद इस तरह की चुदाई भी उसकी पहले कभी नहीं हुई थी इसीलिए लेकिन यह नया अनुभव बेहद मदहोश कर रहा था आराधना शर्मसार होने के बावजूद भी आनंद के सागर में गोते लगा रही थी और अपने बेटे के हर धक्के के साथ पेशाब की धार छोड़ रही थी चुदवाते चुदवाते मुतने का यह पहला अनुभव था,,,, संजू तुम्हारी खुशी और उत्तेजना से फूला नहीं समा रहा था वह अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा चुका था वह अपनी मां की कंधों को पकड़कर जोर-जोर से अपनी कमर हिला रहा था अपनी मां की मोटी मोटी जांघो के साथ उसकी खुद की जांघ टकराने से ठाप ठापकी आवाज आ रही थी,,,, जिसे सुनकर आराधना को इस बात का डर लग रहा था कि कहीं बगल वाले कमरे में सो रहे हैं मोहिनी जागना जाए लेकिन वह किसी भी तरह से अपने बेटे को रोकना नहीं चाहती थी क्योंकि उसको बहुत मजा आ रहा था,,,,,

संजू और उसकी मम्मी

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संजू जानता था कि किसी भी वक्त उसका पानी निकल जाएगा इसलिए वह अपनी मां के ऊपर चुप कर दोनों हाथों को उसकी पीठ के नीचे ले जाकर उसे कस के अपनी बाहों में जकड़ लिया और अपनी कमर जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया देखते ही देखते आराधना के साथ-साथ संजू की भी सांसे तेज चलने लगी और कुछ ही धक्कों के बाद दोनों के बदन की अकड़न बड़ी और संजू ने अपना गर्म लावा अपनी मां की चूत में डालना शुरू कर दिया,,,,, दोनों का पानी निकल गया था दोनों पूरी तरह से तृप्त हो चुके थे आराधना इस खेल के दौरान तीन बार अपना पानी निकाल चुकी थी और संजू एक ही बार में अपनी मां को तीन बार झाड़ कर उसे ढेर कर चुका था,,,,, संजू अपनी मां के ऊपर ढेर हो चुका था थोड़ी देर बाद जब शांत होगा तो संजू अपनी मां के होठों पर अपने होंठ रख कर चुंबन करने लगा और बोला,,,।

आज तुमने मुझे मस्त कर दि हो कसम से ऐसा मजाक कभी नहीं आया था मैं कभी सोचा नहीं था कि तुम्हें चोदने में इतना ज्यादा मजा आएगा,,,।(संजू अपनी मां के ऊपर लेटे हुए हैं उससे गंदी गंदी बातें कर रहा था अभी भी उसका लंड उसकी मां की चूत में समाया हुआ था और उसकी अकड़ अभी भी बरकरार थी,,,, आराधना को अपने बेटे के साथ चुदवाने में एक अद्भुत सुख की प्राप्ति हुई थी जिसकी कभी उसने कल्पना भी नहीं की थी इसलिए उसे अपने बेटे पर बहुत प्यार आ रहा था और वह उसी तरह से उसकी पीठ पर अपनी हथेली रखकर सहला रही थी मानो कि जैसे उसे शाबाशी दे रही हो,,,,,

संजू अपनी मस को हुमच हुमच क छोड़ रहा था

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वासना का तूफान थम जाने के बाद संजू अपनी मां की चूत में से अपने लंड को बाहर निकाला और उसके बगल में पीठ के बल ढेर हो गया,,,,, आराधना भी पीठ के बल लेटी हुई थी अपने बेटे की तरफ करवट लेकर सोने में उसे शर्मिंदगी महसूस हो रही थी,,,,,,, दोनों के बीच खामोशी छाई हुई थी आराधना घड़ी में टंकी दीवार की तरफ देखी तो उसके होश उड़ गए घड़ी में 3:30 का समय हो रहा था इतनी देर तक भला कोई कैसे चोद सकता है और वह भी बिना पानी निकाले वह हैरान थी अपने बेटे की मर्दाना ताकत पर उसे अपने बेटे के लंड पर गर्व होने लगा था,,,,, सुबह होने में

कुछ घंटों का समय रह गया था इतनी देर तक तो वह सुहागरात के रात को भी नहीं जागी थी जैसा कि आज उसके बेटे ने जगाया था वह बात की शुरुआत करते हुए बोली,,,।

बाप रे 3:30 बज गया है,,,,,

तो क्या हुआ,,,, मैं तो रात भर तुम्हारी चूत में लंड डालकर पड़ा रहुं,,,,

(अपने बेटे की बात सुनकर आराधना मुस्कुराते हुए तिरछी नजर से अपने बेटे के लंड की तरफ देखते हुए बोली जो कि अभी भी हल्का सा सिर्फ ढीला पड़ा था बाकी अपनी अकड़ दिखा रहा था,,)

वह तो मैं देख ही रही हूं,,,,

क्या देख रही हो मम्मी,,,(संजू जानता था लेकिन फिर भी जानबूझकर बोला वह अपनी मां के मुंह से सुनना चाहता था,,,)

ये,,,(अपना हाथ आगे बढ़ाकर उंगली से लंड का स्पर्श करते हुए बोली,,, संजू को अपनी मां की यह हरकत बहुत ही अच्छी लगी इसलिए वह मुस्कुराते हुए बोला,,)

कमजोर नहीं हुआ है यह अभी फिर से तुम्हारी चूत में जाकर धमाल मचा सकता है,,,,

चल अब रहने दे इस से कुछ होने वाला नहीं है,,,,(आराधना का मन फिर से चुदवाने को करने लगा था आखिरकार महीने बाद जुदाई का असली सुख जो प्राप्त की थी महीने बाद तो वह लंड को चूत में ली थी लेकिन चुदाई का असली सुख तो उसे जिंदगी में पहली बार ही मिल रहा था इसलिए उससे रहा नहीं जा रहा था,,, संजू जानता था कि उसकी मां का भी मन फिर से कर रहा है इसलिए वह बोला,,,)

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आ जाओ चढ जाओ मेरे लंड पर फिर दिखाता हूं कि अभी इसमें कितना दम है,,,,,(अपने लंड को हाथ में पकड़ कर हीलाते हुए बोला,,,)

नहीं अब सुबह होने वाली है तुझे अपने कमरे में कहीं मोहिनी की नींद खुल गई और तुझे कमरे में नहीं देखेगी तो इधर तक आ जाएगी,,,

पहले आओ मेरे ऊपर फिर मैं चला जाऊंगा,,,

देखा फिर तू जिद कर रहा है आखिर कर तो लिया अपनी मनमानी,,,

एक बार फिर से करने दो,,,

तू मानेगा नहीं ना,,,

एक बार में तो मैं बिल्कुल भी मानने वाला नहीं हूं,,,,(अपने लंड को हिलाते हुए जोकि फिर से धीरे-धीरे अपनी औकात में आ चुका था अपने बेटे के खड़े लंड को देखकर आराधना की चूत फिर से फुदकने लगी अपने बेटे की बात को मारने के सिवा उसके पास और कोई चारा नहीं था क्योंकि इसमें उसकी भी खुशी दे इसलिए वह अपने बेटे को आंख दिखाते हुए बोली,,,)

तू सच में कमरे से बाहर नहीं जाएगा,,,

एक बार फिर से दे दो फिर चला जाऊंगा,,,

बाप रे कितना शैतान है तू,,,(इतना कहने के साथ ही वह उठने लगी और अपने बेटे की तरफ देख कर उसकी कमर के इर्द-गिर्द अपने पैर के घुटने रखकर अपनी जगह बनाने लगी एक बार फिर से संजू के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ में लगी थी उसकी मां उसके लंड पर चढ़ने वाली थी धीरे-धीरे आराधना की भी शर्म खत्म हो रही थी जो कि संजू को साफ दिखाई दे रही थी और यही तो संजू देखना चाहता था कि उसकी मां अभी भी शर्म आती है या मजा लेने के लिए उत्सुक हैं देखते ही देखते आराधना अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर अपने बेटे के खडे लंड को पकड़ ली और उसे अपनी गुलाबी चूत के छेद पर रखने लगी देखते ही देखते आराधना अपना अनुभव दिखाते हुए अपनी भारी-भरकम कांड को अपने बेटे के लंड पर रखना शुरू कर दी और देखते ही देखते उसकी चूत की गहराई में संजू का लंड खो गया और सीधा जाकर आराधना के बच्चेदानी से टकरा गया आराधना पूरी तरह से मस्त हो गई और धीरे-धीरे अपनी गांड को अपने बेटे के लंड पर पटकना शुरू कर दी,,, संजू अपने दोनों हाथों को अपनी मां की गांड पर रखकर उसे थाम लिया और बोला,,,।

क्या मम्मी पापा के साथ ऐसा की हो क्या,,,

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तेरे पापा जबरदस्ती मुझसे ऐसा करवाए थे लेकिन उनके छोटे से लंड में इतना मजा नहीं आया था जिसकी तेरे साथ आ रहा है,,,,,आहहहहह,,,,,(तब तक वह खुद ही जोर से अपनी गांड को अपने बेटे के लंड पर पटक दिया और लंड सीधे जाकर उसके बच्चेदानी से टकराया और उसके मुंह से आह निकल गई आराधना बड़े आराम से अपने बेटे के लंड पर गांड पटक रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था,,,,, लेकिन संजू नीचे से धक्का लगाना चाहता था इसलिए अपनी मां की चूची पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचा उसकी मां उसकी तरफ झुकने लगी और वह तुरंत अपनी बाहों का घेरा उसके गले में डाल कर उसे अपने बदन से सटा लिया जिससे उसकी गांड हवा में ऊपर की तरफ उठ गई और संजू नीचे से अपनी कमर उछाल उछाल कर अपनी मां को चोदना शुरु कर दिया,,,, यह चुदाई भी लगभग 25 से 30 मिनट तक चली और दोनों फिर से झड़ गए,,,, एक ही रात में संजू ने अपनी मां को चोद चोद कर एकदम थका डाला था इसलिए पानी निकलने के बाद तुरंत वह अपने ब्यूटी के लंड पर से उठी और तुरंत बगल में धमम से पीठ के बल पसर गई,,,, संजू भी वही सो गया सुबह जब 5:30 का अलार्म बजा तो संजू की नींद खुली,,,, तो अपने बगल में अपनी मां को एकदम नंगी देखकर उसका लंड फिर से खड़ा होने लगा अपनी मां की नंगी गांड पर हाथ घुमा ने लगा जिससे आराधना की भी नींद खुल गई लेकिन घड़ी की तरफ देखकर उसके होश उड़ गए हो तुरंत बिस्तर पर से उठी और अपने कपड़े पहने लगी संजू उसे रोकने की कोशिश करने लगा लेकिन आराधना बिल्कुल भी नहीं मानी

वह तुरंत कमरे के बाहर आ गई और संजू भी बाहर आ गया वह संजू को कमरे में चले जाने के लिए बोली क्योंकि अभी मोहिनी सो रही थी एक ही रात में आराधना ने अपने बेटे को अद्भुत सुख दी थी इसलिए उसकी बात मानते हुए संजू कमरे में जाकर कुछ देर के लिए सो गया,,,।

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क्ष
 
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अपने हाथ से अच्छा हे की इसका सहारा ले लो
 
संजू इस तरह से आरफना की चुदाई करते हुए

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एक ही दिन में संजू अपनी मां के साथ बेहद आक्रमक ता दिखाया था जिससे आराधना एकदम से हैरान हो गई थी रात में 3 दिन बाद चोदने के बाद भी सुबह उसी तरह से चुदाई किया मानो कि जैसे पहली बार हो,,,,,, आराधना की चूत बार-बार पानी छोड़ रही थी ऐसा उसके साथ पहले कभी नहीं हुआ था लेकिन संजू ने उसके तन बदन में उत्तेजना की आग लगा कर रख दिया था आलम ऐसा हो गया था कि ऑफिस में भी हरा देने का मन नहीं लग रहा था यह सब जानते हुए भी कि जो कुछ भी वह कर रही है बेहद गलत है धर्म के विरुद्ध है अगर इस बारे में किसी को जरा सी भनक भी लग गई तो समाज में मुंह दिखाने के लायक नहीं रह जाएगी लेकिन एक औरत होने के नाते उसकी चूत में भी लंड की प्यास थी जो कि उसके बेटे ने पूरी तरह से उस दबी हुई प्यास को जगा दिया था और अब तो ना जाने क्यों बार-बार आराधना की चूत संजू के लंड की प्यासी हुए जा रही थी,,,,, ऑफिस में भी अपने बेटे के हर एक धक्के को उसकी मर्दाना ताकत को और उसकी हर एक हरकत के बारे में सोच कर उसकी पेंटी गीली हो रही थी जिससे वह अपने आप को असहज महसूस कर रही थी,,,,,, जैसे तैसे करके ऑफिस का समय गुजर गया और वह ठीक समय पर घर पर आ गई और अपने मन में यही सोच रही थी कि काश संजू घर पर मौजूद हो तो कितना मजा आ जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ समय के मुताबिक संजू कोचिंग क्लास के लिए निकल गया था,,,, और आराधना अपने कमरे में आकर अपने बिस्तर की चादर पर पड़ी सिलवटो को देख रही थी,,, और चादर की सीलवटो को देखकर उसका चेहरा सुर्ख गुलाबी हो गया,,, बिस्तर की हालत रात में दोनों की संभोग गाथा की कहानी कह रही थी ध्यान से देखने पर चादर पर जगह-जगह पर धब्बे नजर आ रहे थे जिसे देखकर आराधना को समझते देर नहीं लगी कि वह धब्बे उन दोनों के प्रेम के रस की निशानी है जिसे रात भर संजू ने अपने लंड के साथ-साथ उसकी चूत से टपकाया था,,,, चादर पर पड़े धब्बे को देखकर आराधना सोचने लगी कि अगर मोहिनी चादर पर पड़े धब्बे को देखेगी तो क्या सोचेगी तभी उसे यह ख्याल आया कि मोहिनी को कहां पता चलने वाला है कि चादर पर के धब्बे किस चीज के हैं वह तो अभी छोटी है उसे औरत और मर्द के रिश्ते के बारे में क्या पता,,,, आराधना अपने मन में यह सोचकर सहज वह जा रही थी लेकिन इस बात से वह बिल्कुल अनजान थी कि मोहिनी बड़ी हो चुकी थी और उससे पहले वही अपने भाई के लंड को लेकर अपनी चूत से अपनी जवानी का रस टपका रही थी औरत और संजू को अपनी मां को चोदने की प्रेरणा भी मोहिनी ने हीं दी थी,,,

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आराधना निश्चिंत होकर आकर अपने बिस्तर पर बैठ गई उसे यकीन नहीं हो रहा था कि यह कमरा वही कमरा है जहां पर वह रात में अपने ही बेटे के साथ धर्म के विरुद्ध आचरण करते हुए अपने बेटे से संभोग सुख प्राप्त की थी उसके लंड को अपनी चूत में लेकर मां बेटे के बीच के पवित्र रिश्ते को तार-तार की थी,,,, उसके बेटे ने भी आराधना को एक मा से एक औरत बनाने में बिल्कुल भी कसर बाकी नहीं रखा था,,,,, लेकिन एक बात से वह भी बेहद खुश थी कि अपने ही बेटे के साथ मां से औरत बनने का सुख बेहद अद्भुत और अविस्मरणीय था अपने बेटे की हरकत को देखते हुए वह भी एक मां से औरत बनकर अपने बेटे से मजे ले रही थी वरना एक मां होने के नाते अपने बेटे के साथ ऐसा करना उसके लिए पाप ही था,,,, इन सब बातों को सोचते हुए उसकी नजर ट्यूबलाइट पर गई तो उसे याद आया कि ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में उसका नंगा बदन और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था जब वह अपने आपको देखकर इतना शर्म और गर्व महसूस कर रही थी तो संजू तो अभी अभी जवान हुआ था उसमें उसकी नसों में जवानी का जोश भरा हुआ था ऐसे में एक खूबसूरत औरत के नंगे बदन को देख कर उस पर क्या गुजरती होगी इसका अंदाजा आराधना अपने बेटे के लंड के कड़क पन को देखकर ही लगा ली थी,,, एकदम लोहे के रोड की तरह ही नजर आ रहा था बिल्कुल भी लचक नहीं थी इतना कड़क लंड उसने कभी अपने पति का भी नहीं देखी थी,,,,,,

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अपने बेटे के मर्दाना ताकत से भरे हुए लंड पर आराधना को भी गर्व होने लगा था क्योंकि आराधना अपने बेटे के लंड की ताकत को एक ही दिन में अच्छी तरह से समझ गई थी उसके लंड ने एक ही दिन में पूरी तरह से उसकी चूत को रौंदकर रख दिया था,,,,,,, अपने बेटे के बारे में सोचते सोचते आराधना कब सो गए उसे पता ही नहीं चला दूसरी तरफ संजू कोचिंग के छूटने के बाद,,,, कुछ देर के लिए वहीं बैठ गया था और मनीषा क्लास में बने बाथरूम में चली गई थी क्लास में पूरी तरह से सन्नाटा होने के नाते मनीषा के पेशाब की धार की आवाज उसकी चूत से आ रही सीटी की आवाज एकदम साफ सुनाई दे रही थी जिसे सुनकर संजू मदहोश हो जा रहा था वह अपने मन में कल्पना कर रहा था कि कैसे मनीषा बाथरूम में जाकर अपने सलवार की डोरी खोलती होगी और सलवार के साथ-साथ अपनी खूबसूरत पेंटी को भी नीचे घुटनों तक सरकाती होगी और नीचे बैठकर अपने खूबसूरत गुलाबी छेद में से पेशाब की धार मारती होगी,,,,,, यह सोच कर और कल्पना करके उसका लंड खड़ा हो गया था और कुछ ही देर में मनीषा भी बाथरूम से बाहर आ गई और अपने कपड़ों को दुरुस्त करके अपना पर्स उठा ली और संजू को वहां बैठा देख कर मुस्कुराते हुए बोली,,,।

अरे चलना नहीं है क्या,,,,

चलना तो है,,,, लेकिन तुमसे बात करने का मन कर रहा है,,,

ऐसा क्यों,,,?

क्यों मैं तुमसे बात नहीं कर सकता क्या,,,,

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कर सकते हो,,,,(इतना कहने के साथ ही मनीषा उसके बगल में जाकर बैठ गई,,,, मनीषा भी संजू से इसी तरह से बैठकर बातें करना चाहती थी संजू उसे बहुत अच्छा लगने लगा था इसलिए वह मुस्कुराते हुए बोली)

अच्छा एक बात बताओ काव्या से,,, तुम्हारी बात तो नहीं होती ना

कौन काव्या,,,?(सब कुछ जानते हुए भी एकदम से अनजान बनता हुआ संजू बोला तो मनीषा को भी थोड़ा हैरत हुई लेकिन उसके मुंह से ऐसा सुनकर उसे अंदर ही अंदर राहत भी हो रही थी इसलिए वह मुस्कुराते हुए बोली)

अरे भाई मेरी सहेली जो उस दिन कोचिंग पर आई थी और तुम्हें ट्यूशन देने के लिए बोल रही थी उसके घर आकर,,,

अच्छा-अच्छा वो,,,, नहीं नहीं ऐसा कुछ भी नहीं हुआ,,,, और वैसे भी अपने कोचिंग क्लास का रुल थोड़ी तोड़ना किसी के घर जाकर पढ़ाने लगा तो फिर कोचिंग क्लास बंद करना पड़ेगा,,,

काफी समझदार हो,,,,,

तुम्हारे साथ रहकर समझदार हो गया हूं दीदी,,,,

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इस तरह अकेले में मुझे दीदी मत बोला करो सिर्फ मेरा नाम लेकर बोला करो और दीदी कहने से पहले थोड़ा तो शर्म किया करो दीदी भी कहोगे और पेंटी में हाथ डालकर चुत भी रगडोगे,,,,।

(मनीषा के मुंह से यह बात सुनकर खास करके चुत शब्द सुनकर संजू का लंड एकदम से खड़ा होने लगा,,, संजू की आंखों में मनीषा को पाने की प्यास एकदम साफ नजर आने लगी मनीषा की संजू की आंखों में देखने लगी दोनों एक-दूसरे की आंखों में डूबते चले जा रहे थे,,,, संजू की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी संजू हथेली में अभी भी मनीषा की चूत की गर्मी साफ महसूस हो रही थी जब उसकी पेंटी में हाथ डालकर उसकी चूत को मसला था,,,,, संजू से रहा नहीं जा रहा था उसकी आंखों के सामने केवल आप मनीषा के लाल लाल होंठ नजर आ रहे थे जो कि पूरी तरह से रस से भरे हुए थे मनीषा में उत्तेजित में जा रही थी संजू धीरे-धीरे अपने होठों को मनीषा के होठों के करीब ला रहा था इस बात का एहसास होते ही मनीषा के तन बदन में आग लग रही थी धीरे-धीरे वह भी अपने होठों को आगे ले जा रही थी और देखते ही देखते संजू ने अपने प्यासे होठों को मनीषा के रस भरे होठों पर रखकर उसके होठों को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया इस तरह के चुंबन से मनीषा पूरी तरह से मदहोश हो गई और वह भी संजू का साथ देते हुए अपने होठों को खोल दें और देखते ही देखते दोनों की जीभ एक दूसरे के मुंह में आवागमन करना शुरू कर दी दोनों एक दूसरे के लाल को चाट रहे थे संजू पूरी तरह से बेंच पर बैठकर मदहोश हुआ जा रहा था वह देखते ही देखते मनीषा को चुंबन करते हुए उसे अपनी बाहों में भर लिया और तुरंत कुर्ती के ऊपर से ही एक हाथ उसकी चूची पर रखकर दबाना शुरू कर दिया मनीषा के चूची बेहद नरम और मुलायम थे जिस पर संजू का हाथ पडते ही उत्तेजना के मारे उसका आकार बढ़ने लगा,,,, संजू और मनीषा के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठाई थी मनीषा का यह सर्वप्रथम अनुभव था हालांकि एक बार पहले भी संजू ने अपनी हरकत से उसे उत्तेजित कर दिया था लेकिन आज मनीषा के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फुट रही थी,,, संजू मदहोश हुआ जा रहा था और देखते ही देखते संजू मनीषा को उसी बेंच पर धीरे-धीरे लेट आना शुरू कर दिया और देखते ही देखते वह पूरी तरह से मनीषा के ऊपर आ गया मनीषा बेंच के टेबल पर लेटी हुई थी उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी और सांसो के साथ-साथ उसकी नारंगीया भी ऊपर नीचे हो रही थी जिसे बार-बार संजू दबा रहा था,,,उसके ऊपर लेटने के बावजूद भी संजू लगातार उसके होठों का रस पी रहा था मनीषा की चूत गीली होने लगी अपने आप उसकी दोनों टांगें खुल चुकी थी,,, और संजू उसकी दोनों टांगों के बीच आ गया था और जानबूझकर,,,, उसके ऊपर लेट कर पेंट में टन टन आए लंड को सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत पर दबाव दे रहा था जिसका एहसास मनीषा को बराबर हो रहा था अपनी चूत के ऊपर चुभती हुई चीज के बारे में मनीषा को आभास हो गया था और यह जानकर कि वह चीज कुछ और नहीं बल्कि संजू का लंड है इस एहसास से ही उसकी चूत पानी छोड़ रही थी,,,,, संजू जानता था कि मनीषा इन मौके पर उसे रोक देगी इसलिए वह ज्यादा कुछ करना नहीं चाहता था लेकिन धीरे-धीरे अपनी कमर को हिलाते हुए मनीषा को ऐसा एहसास करा रहा था कि जैसे वहां उसे चोद रहा हो और यह एहसास मनीषा को पानी-पानी कर रहा था वह पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी वह जानती थी कि यहां पर इस तरह की हरकत करना गलत है लेकिन फिर भी संजू की हरकत की वजह से वह अपने आप को रोक नहीं पा रही थी,,,, संजू को इस बात का अंदाजा एकदम अच्छी तरह से था की सलवार के ऊपर कौन सी जगह पर उसकी चूत है इसीलिए ठीक उसी जगह पर अपने पेंट में बना तंबू धंसा रहा था अगर उसका बस चलता तो सलवार सहित अपने लंड को उसकी चूत में डाल दिया होता,,,,,, संजू मनीषा को और ज्यादा मदहोश करने के हेतु उसके कानों में धीरे से बोला,,,।

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मनीषा,,,(एकदम गहरी सांस लेते हुए) जब तूम बाथरूम में जाकर मुत रही थी तो तुम्हारी मौत ने की आवाज तुम्हारी चूत से आ रही सीटी की आवाज मुझे साफ सुनाई दे रही थी और उस आवाज को सुनकर मेरा लंड खड़ा हो गया था,,,

(संजू की यह बात सुनते ही मनीषा उसकी आंखों में देखने लगी और उसे इस बात का एहसास हुआ कि वाकई में उसके पेशाब करने की आवाज संजू को जरूर सुनाई देती होगी लेकिन इस बारे में उसने कभी सोची नहीं थी लेकिन आज संजू के मुंह से इस बारे में खुलासा सुनकर उसकी चूत पानी छोड़ रही थी और मैं शर्म से गड़ी जा रही थी,,,, मनीषा को इस तरह से आश्चर्यचकित होकर देखने की वजह से संजू की हिम्मत बढ़ने लगी और वह धीरे से सलवार के अंदर अपना हाथ डालना शुरू कर दिया लेकिन तभी मनीषा अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसे रोक दी और अपने आप को संभालते हुए बोली,,,)

अब हमें चलना चाहिए बहुत देर हो रही है,,,

क्यों क्या हुआ,,,?

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नहीं कुछ नहीं,,,,(इतना कहकर मनीषा उठने लगी ,,,,,, संजू मनीषा के साथ जबरदस्ती बिल्कुल भी नहीं करना चाहता था क्योंकि मनीषा बहुत खूबसूरत लड़की थी और वह उसे प्यार से हासिल करना चाहता था अगर वो चाहता तो इसी समय उसे फिर से नीचे पटक कर उसकी सलवार उतार कर अपने लंड को चूत में डाल देता और उसे चोदना शुरु कर देते और मनीषा उसे कुछ कह भी नहीं पाते क्योंकि उसकी हालत ही बता रही थी कि उसे भी मजा आ रहा था लेकिन मनीषा का सम्मान करते हुए वह उसके ऊपर से उठ गया,,, मनीषा भी बेंच पर से उठ कर खड़ी हो गई लेकिन तिरछी नजर से संजू के पेंट की तरफ देखी तो उसके होश उड़ गए वह पूरी तरह से तंबू तना हुआ था जिसे देखकर उसकी चूत में पानी भर गया था,,,,,,,, संजू अपने आप को ठीक करते हुए बोला,,)

आई लव यू मनीषा मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं,,,

(इतना सुनकर मनीषा भी संजू की तरफ देखने लगी,,, मनीषा की भी आंखों में संजू के लिए बेहद प्यार नजर आ रहा था एक बार फिर से संजू के गले लग गई और संजू भी इस बार उसे कसके अपनी बाहों में भर लिया और मौके की नजाकत को देखते हुए तुरंत अपने दोनों हथेली को उसकी नरम नरम कांड पर रखकर दबा दिया,,, जिसकी वजह से तुरंत मनीषा अपनी गांड को पीछे लेते हुए बोली,,,)

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आहआ,,, अभी बिल्कुल भी नहीं तुम बहुत शैतान हो,,,,,

(इतना कहकर अलग हो गई और दोनों मुस्कुराते हुए कोचिंग क्लास से बाहर आ गए संजू अपने रास्ते और मनीषा अपने रास्ते चली गई संजू जाते-जाते अपनी मम्मी भी सोच रहा था कि एक ना एक दिन जरूर मनीषा की चूत में अपना लंड डालकर रहेगा,,,, रास्ते भरोसे घर पहुंचने की जल्दी थी क्योंकि बीती रात को घर अपनी मां के साथ जमकर चुदाई करके एक अद्भुत सुख प्राप्त किया था जो कि संजू वही सुख फिर पाना चाहता था,,,, अब उसे किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं थी जब चाहे तब वह अपनी मां की चुदाई कर सकता था यह वह सुबह ही किचन में अपनी मां की चुदाई करके देख चुका था,,, अपनी मां को चोदते समय उसे इस बात का आभास हो गया था कि जितना ज्यादा उत्सुक है अपनी मां को चोदने के लिए उससे कहीं ज्यादा व्याकुल,, उसकी मां उसके लंड को लेने के लिए नजर आ रही थी,,,,।,,,

थोड़ी देर में संजू घर पर पहुंच गया घर के बाहर स्कूटी खड़ी थी अब तो ना जाने क्यों स्कूटी को देखकर ही उसका लंड खड़ा हो जाता था मानो की स्कूटी का पिछवाड़ा उसकी मां की भारी-भरकम पिछवाड़ा हो यही सोच कर दरवाजे तक जाते-जाते संजू स्कूटी के पिछवाड़े को भी अपनी मां का पिछवाड़ा समझ कर हाथ लगा दिया,,,,, दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था जिसका मतलब साफ है कि अंदर मोहिनी और उसकी मां मौजूद थे वह घर में प्रवेश किया और दरवाजा बंद कर दिया,,, घर में घुसते ही पहले उसने अपने कमरे में नजर डालें तो मोहिनी पढ़ रही थी और यह बात समझो अच्छी तरह से जानता था कि इस समय मोहिनी घर में रहती है तो पढ़ती रहती है और यह देख कर उसका मन बड़ा व्याकुल होने लगा और थोड़ा बाथरुम में गया हो बाथरूम से निपटकर हाथ मुंह धोकर एकदम से फ्रेश हो गया,,,, और किचन के दरवाजे पर जाकर खाना हो गया जहां से वह अपनी मां को देख रहा था आराधना को भी इस बात का आभास हो गया था कि संजू घर पर आ गया है और उसे दरवाजे पर खड़ा देखकर उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी दोनों टांगों के बीच कंपन सी होने लगी थी क्योंकि वह जानती थी कि अकेला पाकर संजू जरूर कुछ ना कुछ हरकत करेगा क्योंकि सुबह ही उसकी हरकत की चरम सीमा को वहां देख चुकी थी मोहिनी की मौजूदगी में भी वह उसकी साड़ी उठाकर उसकी चुदाई किया था और उसने अद्भुत सुख प्रदान किया था,,,,, संजू दरवाजे पर खड़े होकर अपनी मां की खेलती हुई गांड को ही देख रहा था जो कि बेहद खूबसूरत लग रही थी,,,,, आराधना तिरछी नजरों से संजु को देख रही थी और उसकी नजर को देखा कर शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी,,,, सब कुछ जानते हुए भी आराधना संजू से बोली,,,।

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दरवाजे पर खड़ा खड़ा क्या देख रहा है,,,,

तुम्हारी गांड साड़ी में लिपटी होने के बावजूद भी कितनी खूबसूरत लग रही है,,,(संजू बेझिझक शर्माए बिना ही बोला तो आराधना एकदम से झेंप गई,,,, इसलिए वह संजू को आंख दिखाते हुए बोली,,,)

बेशर्म कुछ तो शर्म कर मोहिनी कमरे में है,,,

क्या मम्मी,,,(रसोई घर में प्रवेश करते हुए) मोहिनी का डर अगर मुझे रहता तो सुबह-सुबह तुम्हारी चुदाई ना कर दिया होता,,,,,,,,,

तू सच में बेशर्म हो गया है,,,

(आराधना कितने कहने के साथ ही संजू एकदम बीमा के करीब पहुंच गया और उसकी गांड को अपनी हथेली में लेकर दबाते हुए बोला)

साली ये गांड मुझे शांति से रहने नहीं देती इसे देखता हूं तो मेरा तुरंत खड़ा हो जाता है,,,

(अपनी गांड पर अपने बेटे की हथेली महसूस करके रोज के मुंह से गंदी गंदी बात सुनकर वह पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी और गहरी सांस लेते हुए बोली,,)

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रात भर सोने नहीं दिया फिर भी तेरा मन नहीं भर रहा है,,,

सच कहूं तो मम्मी मेरा मन तो कभी नहीं भरने वाला जिंदगी भर में तुम्हारे बदन से तुमसे प्यार करता रहूंगा आज तो कुछ होगा ना मम्मी रात को,,,

(रात के बारे में पूछे जाने पर आराधना के गाल शर्म से लाल हो गए उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या जवाब दें लेकिन फिर भी वह अपनी नजर नीचे झुका कर सब्जी काटते हुए बोली)

नहीं आज कुछ नहीं होगा मैं एकदम थक गई हूं मुझे सोना है,,,

क्या मम्मी एकदम जवानी से भरी हुई हो फिर भी एक ही रात में थक गई अभी तो ना जाने कितनी रातें बाकी है,,,

चल यए सब बातें छोड़ थैले में तेरे लिए अकेला रखी हूं जाकर खा ले हमें चाय नहीं बनाने वाली क्योंकि थोड़ी देर में खाने का समय हो गया है,,,

वाह मम्मी तुम्हारा भी जवाब नहीं मुझे केले खिला कर रात को अपने लिए मेरा केला तैयार कर रही हो,,,।

(इतना सुनते ही आराधना एकदम से चौक गई और शर्म के मारे अपने मुंह पर हाथ रखते हुए बेलन हाथ में उठा लिया और संजू की तरफ तानते हुए बोली,,)

भाग बेशरम तुझे बिल्कुल भी शर्म नहीं आती,,,,,

हां नहीं आती,,,(और इतना कहने के साथ ही संजू एक केला ले लिया और तुम्हें तो अपनी मां के पास आ गया और उसकी आंखों के सामने ही केले को एक मादक अदा से अच्छी लगने लगा जिसे देखकर आराधना को शर्म महसूस हो रही थी केले का साइज भी संजू ने अपने लंड के बराबर ही लिया था और उसे छीलते हुए अपनी मां से बोला,,)

इसे देखकर कुछ याद आ रहा है मम्मी,,,

(आराधना चित्र से जानती थी कि उसका बेटा किस बारे में बात कर रहा था इसलिए उसके चेहरे पर शर्म के भाव साफ नजर आ रहे थे और वह मुस्कुराते हुए बोली)

तु सच में बहुत बेशर्म हो गया है अब जल्दी-जल्दी केला खा ,,,

मैं ऐसे ,केला नहीं खाऊंगा,,,(ऐसा कहते हुए संजू केले के छिलके को पूरी तरह से उतार लिया अपने बेटे की बात सुनकर आश्चर्य से आराधना बोली)

फिर कैसे खाएगा,,,।

(इतना सुनते ही संजू एक कदम और आगे बढ़ा और अपनी मां को कमर से पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया उसकी मां एकदम से घबरा गई लेकिन संजू की बाजुओं में कुछ ज्यादा ही दम था इसलिए उसकी मां छठ पटाने के अलावा और कुछ नहीं कर पाई,,,, और वह कुछ समझ पाती इससे पहले ही संजु अपनी मां की एकदम पकड़ा और उसे ऊपर की तरफ उठाकर अपने हाथ की कोहनी के बीच में फंसा दिया जिससे उसकी एकता हो पर हो गई और दूसरे हाथ से साड़ी को तुरंत कमर तक उठा दिया अपने बेटे की हरकत से पूरी तरह से आराधना शर्मिंदा होने लगी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह शर्म के मारे और घबराते हुए बोली,,,)

छोड़ मुझे बदतमीज,,,, रहने दे यह क्या कर रहा है,,,

तुम्हें बताने जा रहा हूं कि कैसे केला खाऊंगा,,,(आराधना की एक टांग ऊपर थी और साड़ी कमर तक उठी हुई थी जिससे उसकी मुलायम पहनती साफ नजर आ रही थी और अपने बेटे की हरकत की वजह से पेंटी आगे से गीली हो चुकी थी जो कि उसकी चूत से निकले काम रस की वजह से हो रही थी संजू तुरंत अपनी मां की पैंटी को नीचे की ओर से पकड़ कर उसे फुली हुई चूत के एक छोर पर अटका दिया जिसे उसकी गुलाबी चूत एकदम साफ नजर आने लगी और केले को हाथ में लेकर अपनी मां की आंखों में आंखें डाल कर बोला,,,)

मैं केले को तुम्हारी चूत के रस में डूबा कर खाऊंगा,,,

(इतना सुनते ही आराधना शर्म और उत्तेजना के मारे अपनी आंखों को बंद कर ली उसके पैरों में कंपन होने लगी थी घुटने जवाब दे रहे थे वह पूरी तरह से अपने आपको अपने बेटे की बाहों में छोड़ दी थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या होगा अगर मोहिनी आ गई तो क्या होगा यह सब विचारों को अपने दिमाग से निकाल कर वह अपने बेटे की हरकत का मजा लेने लगी और देखते ही देखते संजू उसे छिले हुए केले को धीरे-धीरे करके अपनी मां की चूत में डालना शुरू कर दिया जिसमें आज तक उसने अपनी उंगली डालकर अपने पानी को नहीं निकाली थी आज संजू बेशर्मी की सारी हदें पार करते हुए उसकी चूत में केला डाल रहा था देखते ही देखते अकेला पूरी तरह से उसकी चूत में खो गया उसकी गहराई में डूब,,, गया,,,, संजू कि भी हालत पूरी तरह से खराब हो रही थी उसका मन कर रहा था कि केले को निकालकर अपना लंड उसकी चूत में डाल दे लेकिन संजू पूरी तरह से जानता था कि उसे पूरा विश्वास था कि आप उसकी मां के खूबसूरत बदन पर सिर्फ उसका ही आके जब चाहे वह अपनी मां की चुदाई कर सकता है लेकिन वह अपनी हरकत से अपनी मां के तन बदन में उत्तेजना की लहर को बढ़ाना चाहता था उसके चुदास पन को और ज्यादा बढ़ाना चाहता था ताकि उसकी मां के मन में उसके बदन में उसके लंड को लेने की जहां बढ़ती जाए और ऐसा हो भी रहा था संजू अपने लंड के साइज के मोटे तगड़े केले को अपनी मां की चूत की गहराई में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया था आराधना पूरी तरह से मस्त हुए जा रही है,,, वह केले की साईज चूत के अंदर डालने से पहले ही देख चुकी थी इसलिए आंख बंद करके वह मजा ले रही थी लेकिन संजू चाहता था कि उसकी मां अपनी आंखों को खोल कर अपनी दोनों टांगों के बीच देखें इसलिए वह अपनी मां से बोला,,,।

आंखें खोलो मम्मी और देखो अपनी आंखों से कि तुम्हारा बेटा कैसे तुम्हारी चूत के रस में डूबे हुए केले को खाता है,,,

(संजू की आवाज में एक सम्मोहन था अपनी तरफ आकर्षित करने की एक कला थी जिसके चलते आराधना अपनी आंखों को खोल दी और अपनी दोनों टांगों के बीच देखने लगी जहां पर उसका बेटा बड़ी बेशर्मी से केले को उसकी चूत के अंदर बाहर कर रहा था कुछ उनके लिए तो हर आदमी को ऐसे ही लगा की काश उसका बेटा केले को बाहर निकालकर अपना लंड उसकी चूत में डालकर उसे चोद देता तो मजा आ जाती,,,,,, संजू अपनी मां के चेहरे पर बदलते भाव को देख रहा था वह जानता था कि उसकी मां मस्त हुए जा रही है पूरी तरह से मदहोश हो जा रही थी और इसी पल संजू का इंतजार भी था संजू अपनी मां का पानी निकालना नहीं चाहता था ताकि रात को उसकी मां बिस्तर पर तड़पते हुए उसे खुद अपने ऊपर ले ले इसलिए तुरंत संजू ने अपनी मां की चूत में से अकेला को निकाल दिया जो कि पूरी तरह से उसके काम रस में डूबा हुआ था संजू उसके ला को हाथ में लेकर ठीक अपनी मां की आंखों के सामने लेकर घुमाने लगा जिस पर नजर पड़ते ही आराधना शर्म से पानी-पानी होने लगी संजू उसी तरह से खड़ा हो गया वह अपने हाथों से अपनी मां की साड़ी को और उसकी टांग को नीचे छोड़ चुका था लेकिन पैंटी को उसी स्थिति में छोड़ा था जिसे आराधना खुद अपने हाथों से सही कर चुकी थी लेकिन अब उसकी हिम्मत बिल्कुल भी नहीं थी अपने बेटे से नजर मिलाने की,,,,

इधर तो देखो कैसे मैं तुम्हारी चूत में डूबे हुए इस केले को खाता हूं,,,,

(और इतना सुनकर आराधना अपने आप को रोक नहीं पाई और अपने बेटे की तरफ देखने लगी संजू तुरंत उसके लिए पर अपनी जीभ को घुमाता हुआ उसे धीरे-धीरे अपने मुंह के अंदर लेना शुरू कर दिया मानो कि जैसे आराधना खुद अपने बेटे के लंड को धीरे-धीरे अपने मुंह में डाल रही हो आराधना शर्म से पानी-पानी हो रही थी शर्म से गाड़ी जा रही थी क्योंकि उसकी चूत में डूबा हुआ केला उसका बेटा उसकी आंखों के सामने बेझिझक खा रहा था आराधना से देखा नहीं जा रहा था उसे बहुत शर्म आ रही थी वह बार-बार अपनी नजरों को नीचे कर ले रही थी लेकिन एक आकर्षण एक सम्मोहन के चलते आराधना की नजर बार-बार उस केले पर चली जा रही थी,,, देखते ही देखते बेझिझक संजु काम रस में डूबे हुए केले को खा गया और अपने हाथों को झाड़ते हुए,,, बोला,,,।

तुम्हारा दिया हुआ यह केला मुझ पर उधार रहा मम्मी रात को इसके लिए के बदले में तुम्हें इससे भी बेहतरीन केला खिलाऊंगा,,,

(अपने बेटे की आवाज सुनकर आराधना के गाल शर्म से लाल हो गए और संजू मुस्कुराता हुआ रसोई घर से बाहर चला गया)
 
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