Incest मजबूरी या जरूरत - Page 9 - SexBaba
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Incest मजबूरी या जरूरत

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केले वाली घटना आराधना को बेहद मदहोश कर गई थी अपने बेटे की हरकत पर एक तरफ जहां वहां मेरा नजर आ रही थी वहीं दूसरी तरफ केले की वजह से अपने बदन में मदहोशी का असर उसे साफ महसूस हो रहा था,,,, वह कभी सोची नहीं थी कि उसका बेटा इस तरह की हरकत करेगा चोदने तक तो ठीक था लेकिन एक औरत को खुश और मदहोश करने का उसके पास ना जाने ऐसे कितने तरीके थे जिससे वह औरत को अपने बस में कर सकता था और यही आराधना के साथ भी हो रहा था आराधना के तो होश उड़ गए थे जब वह एक हाथ से उसकी टांग को एकदम से उठा दिया था और पैंटी को अपनी उंगलियों से खींचकर खुली हुई चूत के किनारे कर दिया था और ऐसा लग रहा था कि जैसे चड्डी भी उसका पूरा साथ दे रही थी तभी तो फूली हुई चूत का सहारा लेकर एक तरफ टीकी रह गई,,, और आराधना की आंखों के सामने ही उसका बेटा एक मोटे तगड़े लंबे लंड की तरह मजबुत ,,,,,,

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केले को उसकी चूत के मुख्य द्वार पर रखकर उसे अंदर की तरह प्रवेश कराने लगा वैसे भी संजू की मौजूदगी में ही अब आराधना की चूत गीली हो जाती थी और इसीलिए चूत के जिला तुमको पाकर मोटा तगड़ा केला एक लंड की तरह उसकी चूत के अंदर धीरे-धीरे समा गया,,,, यह देखकर आराधना एकदम हैरान हो चुकी थी उसे तो अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था और संजू की हरकत से वह पहले ही चौक चुकी थी व्हाट इस तरह की हरकत कर रहा था मोहिनी के द्वारा पकड़े जाने का डर बना हुआ था लेकिन इस डर से पूरी तरह से निडर होकर संजू अपनी हरकत को अंजाम देने में लगा था और धीरे-धीरे इस खेल में आराधना को भी मजा आ रहा था और अपनी मां के खूबसूरत चेहरे के बदलते भाव को उसके चेहरे पर खेल रहे उत्तेजना के जाले को अच्छी तरह से समझ कर संजू भी चला कि दिखाते हुए अपनी मां को चरम सुख के बेहद करीब ले जाकर बीच मझधार में छोड़ दिया था और उसकी चूत से अकेला को बाहर निकाल दिया था क्योंकि इस बात को संजू अच्छी तरह से जानता था कि प्यासी औरत कुछ भी करने को तैयार हो जाती है और इस समय आराधना एकदम प्यासी ही थी और उसकी प्यास को उसके ही बेटे ने अपनी हरकतों से पूरी तरह से बढ़ा दिया था जिसके चलते केले को अंदर बाहर होता हुआ देखकर वह अपने मन में यही सोच रही थी कि काश संजू केला को बाहर निकाल कर अपने लंड को चूत में डाल‌ देता और मजा आ जाता,,,,, एक ही रात में संजू ने अपनी मां के सोचने समझने की शक्ति को पूरी तरह से छीन कर दिया था उसके सोचने में बदलाव ला दिया था अब तक वह संजू को एक बेटे के रूप में ही देखी थी लेकिन एक ही रात में आप संजू ने उसे एक मर्दाना जोश और ताकत से भरा हुआ मर्द नजर आ रहा था जिसके द्वारा वह अपने बदन की प्यास बुझा ना चाहती थी,,,,,,,,, संजू ने जिस तरह से उसे बीच मझधार में छोड़ते हुए उसकी चूत से केला निकाला था ऐसा लग रहा था कि जैसे नदी के बीचो-बीच ले जाकर उसके हाथों से कोई पतवार छीन कर नदी में फेंक दिया, हो,,,,,,, उसकी हालत बेहद खराब थी वह एकदम चरमसुख के करीब पहुंचकर स्थिर हो गई थी मन तो उसका कर रहा था कि अपनी उंगली डालकर अपनी गर्मी को शांत कर ले लेकिन ऐसा कर सकने में उसकी मर्यादा उसे रोक ले रही थी हालांकि मर्यादा की दीवार को अपने हाथों से पूरी तरह से ध्वस्त कर चुकी थी लेकिन फिर भी अभी तक वह पूरी तरह से एक बेशर्म औरत की तरह खुली नहीं थी,,,,

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अपनी चूत के रस में डूबे हुए केले को अपनी आंखों के सामने अपने बेटे के द्वारा खाने पर आराधना पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी बिकिनी अत्यधिक उत्तेजना कम हो रहा था कि उसके घुटने कांप रहे थे और चूत में आग लगी हुई थी वो कभी सपने में भी नहीं सोचा थी कि कोई इस तरह से चूत में केला डाल कर उससे खाता होगा लेकिन उसके बेटे ने उसे सोचने पर मजबूर कर दिया था कि वाकई में औरतों के अंगों में इतना रस होता है इतना स्वाद भरा होता है कि मर्द किसी भी हालत में उसे चखने के लिए तैयार हो जाते हैं,,,,, कसैली नमकीन काम रस से डूबे हुए केले को संजू बड़े चाव से धीरे-धीरे करके खा गया था,,,,, संजू चूत के काम रस में डूबे हुए केले को तो खा कर अपने पेट की आग को शांत कर लिया था लेकिन अपनी मां की प्यास को और ज्यादा बढ़ा दिया था अपना जाने क्यों वह खुद ही अपने बेटे से चुदवाने के लिए तड़प रही थी उसके मोटे तगड़े लंबे लंड को अपनी चूत में लेने के लिए तड़प रही थी लंड की रगड़ को अपनी चूत की अंदरूनी दीवारों में महसूस करने के लिए तड़प रही थी और एक ही चुदाई में तीन तीन बार अपना पानी झाड़ने के लिए मचल रही थी,,,,।

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जैसे तैसे करके वह भोजन तैयार कर ली संजू अपनी मां के साथ मस्ती करने के बाद तुरंत अपने कमरे में मोहिनी की करीब जाकर बैठ गया था मोहिनी को अभी भी इस बात की चिंता सता रही थी कि उसकी मां कहीं किसी गैर मर्द के साथ हम बिस्तर ना हो जाए क्योंकि एक औरत होने के नाते वह भी इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि अगर चूत में एक बार लंड घुस जाए तो औरत की प्यास और ज्यादा बढ़ जाती है और उसकी मां तो महीनों से चुदी नहीं थी इसलिए उसकी चूत में जरूर खुजली हो रही होगी ऐसा मोहिनी का मानना था क्योंकि वह इस बात से पूरी तरह से अनजान थी कि जैसा वह चाहती थी वैसा ही रिश्ता उसके भाई और उसकी मां के बीच पनप चुका था,,,, लेकिन इस बात से अनजान मोहिनी अपने मन की चिंता को अपने भाई से बताते हुए बोली,,,,।

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क्या भाई अभी तक तूने मम्मी के साथ कुछ किया नहीं,,,, कहीं ऐसा तो नहीं मम्मी के साथ कुछ करने में तुझे डर लगता है,,,

क्या मोहिनी तू भी पागलों जैसी बात करती है अगर मुझे ऐसा करने में डर लगता है तो मैं तेरी चूत में लंड डाला ना होता,,,, वह तो थोड़ा समय लगेगा मम्मी के साथ करने में,,,,

अरे कितना समय लगेगा ऐसा ना हो कि तू देखता रह जाए और दूसरा कोई मम्मी की टांगों के बीच आ जाए और अगर ऐसा हो गया ना तो सबसे बड़ा जिम्मेदार तू ही होगा भाई,,,,

तु मुझे क्यों दोश देती है,,,,, मम्मी को पटाने में टाइम लगेगा,,,,

अरे वही तो पूछ रही हूं कितना टाइम लगेगा मैंने अपनी आंखों से देखी हूं मम्मी अपने ऑफिस में काम करने वाले कर्मचारी के साथ हंस-हंसकर बातें कर रही थी मुझे तो सब कुछ साफ साफ नजर आ है कि वह खुद मम्मी को किसी गेस्ट हाउस में ले जा रहा है और मम्मी भी एकदम खुश होकर उसके साथ जा रही है,,,,

(इतना सुनते ही संजू जोर जोर से हंसने लगा और उसे हंसता हुआ देखकर मोहिनी गुस्सा दिखाते हुए बोली,,)

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ऐसे ही भाई तू हंसता रह जाएगा और जैसा मैं सोच रही हूं सच हो जाएगा और अगर ऐसा हो गया ना तो मम्मी देखना हम दोनों को छोड़कर किसी और के साथ चली जाएगी रहने,,,,

तो क्या हुआ तब हम दोनों साथ में रहेंगे और रोज रात को,,,,(आंख मारते हुए ईसारा किया,,,, इस पर मोहिनी थोड़ा और गुस्सा हो गई और बोली)

देख भाई तू मेरी बात को सीरियस नहीं ले रहा है और ना ही मम्मी के मामले में तो सीरियस है मुझे तो ऐसा ही लग रहा है या तो मुझे ऐसा लग रहा है कि तेरा लंड से मेरी चूत को ही ठंडा कर सकता है मम्मी की चूत के लिए तेरे लंड में दम नहीं है,,,,

ऐसा मत बोल मेरी जान मेरे लंड में इतना दम है कि मैं मम्मी को गोद में लेकर चूत में लंड डालकर चोद सकता हूं,,,, और देखना बहुत ही जल्द मैं तुझे ऐसा खूबसूरत नजारा दिखाऊंगा तब तो कहेगी कि वाकई में मेरे भाई के लंड में बहुत दम है,,,,,(कुर्ती के ऊपर से मोहिनी की चूची को दबाते हुए बोला,,,,, संजू की बात सुनकर मोहिनी के होठों पर मुस्कान करने लगे लेकिन वह अंदर ही अंदर चिंतित भी थी क्योंकि वह औरत के मनोदशा को अच्छी तरह से समझ चुकी थी उसे बार-बार यही डर सता रहा था कि अगर उसकी मां किसी दूसरे मर्द के साथ शारीरिक संबंध बना ली तो हो सकता है उसके साथ जिंदगी बिताने के लिए उसके घर चली जाए तो उन दोनों का क्या होगा,,,, इसीलिए वो बार-बार अपने भाई पर दबाव बनाती थी कि वह मम्मी के साथ शारीरिक संबंध बनाए उसे खुश करें उसे एक मर्द का सुख दे उसकी जरूरत को पूरी करें ताकि घर में तीनों खुशहाल रह सके जबकि मोहिनी को इस बात का आभास तक नहीं था कि जो काम वह अपने भाई से अपनी मां के साथ कराना चाहती थी वह काम हो चुका है और अब धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है,,,,,

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संजू चाहता तो अपनी बहन को सब कुछ खुलकर बता सकता था कि उसके और उसकी मां के बीच में शारीरिक संबंध स्थापित हो चुका है लेकिन वह अपनी बहन को दिखाना चाहता था कि कैसे वह अपनी मां को खुश करता है अपने लंड को उसकी चूत में डालकर उसकी चुदाई करता है,,,,,, संजू कुर्ती के ऊपर से ही अपनी बहन की चूची को दबा कर मजा ले रहा था कुछ देर पहले वह अपनी मां की चुदाई केला डालकर जो सुख उसे कहने से दे रहा था वही सुख वह अपने लंड को उसकी चूत में डाल कर देना चाहता था लेकिन इस खेल में वह धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहता था और अपनी मां को प्यासी छोड़कर वह केले को बाहर निकाल दिया था इस दौरान उसके लंड की टनटनाहट पूरी तरह से बढ़ चुकी थी और उसी गर्मी को शांत करने के लिए वह अपनी बहन मोहिनी की चूत में अपना लंड डालना चाहता था लेकिन,,, वह अपनी बहन की कुर्ती ऊपर उठाता उससे पहले ही उसकी मां ने खाना खाने के लिए आवाज दे दी और मोहिनी अपने भाई को सफल होता ना देखकर उसे चिढ़ाने के लिए मुस्कुराने लगी और यह दिखाकर संजू बोला,,,।

ज्यादा हंस मत कुछ देर के लिए ही बची है खाना खाने के बाद कमरे में आते ही देखना तेरी चूत फाड़ कर दूंगा,,,,

चल चल रहने दे मम्मी की चूत में डालने से डरता है,,,,,

(इतना कहकर मोहिनी अपनी जगह से उठी और कमरे से बाहर चली गई संजू उसे ज्यादा वह देख कर मुस्कुरा रहा था क्योंकि वह अपनी बहन और अपनी मां दोनों पर काबू पा चुका था,,,,, थोड़ी ही देर में आराधना संजू और मोहिनी तीनों बैठकर खाना खा रहे थे आराधना शर्म के मारे अपने बेटे से नजर तक नहीं मिला पा रही थी तभी मोहिनी बोली,,)

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मम्मी तुम केला लाई थी ना,,,,

(केले का जिक्र होते ही अनजाने में ही आराधना की नजरें संजू की तरफ चली गई संजू भी केले का जिक्र होते ही अपनी मां की तरफ देखने लगा था दोनों की नजरें आपस में टकरा ही हो शर्मा कर आराधना अपनी नजरों को नीचे झुका ली या देखकर संजू मंद मंद मुस्कुराने लगा और मोहिनी से बोला,,)

हां मम्मी ने बहुत मोटे और लंबे केले लेकर आइ है,,, अगर एक खा लो तो मन भर जाए,,,,(अपने बेटे की बातें आराधना को दो अर्थ वाली अश्लील लग रही थी,,, मोहिनी के सामने तेरा की बातें करते संजु को देखकर आराधना शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी वह अपने मन में यह सोच कर थोड़ा शांत थे कि अच्छा हुआ कि मोहिनी को इन सब बातों का दो अर्थ पता नहीं है लेकिन मोहिनी भी अपने भाई के कहने के मतलब को अच्छी तरह से समझ रही थी लेकिन फिर भी अपनी मां के सामने बेहद अनजान बनते हुए बोली,,,)

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सच भाई मोटा और लंबा केला हो तो खाने में बहुत मजा आता है,,,, एक में ही पेट भर जाता है,,,,

तेरे लिए किचन में रखा हुआ है मुझे तो मम्मी ने रस में डुबोकर खिलाई सच पूछो तो एक ही केला खाकर मेरा पेट भर गया,,,,

रस में डुबोकर,,,(मोहिनी आश्चर्य जताते हुए बोली और आराधना अपने बेटे की बातों पर शर्मिंदा हुए जा रहे थे उसके गाल शर्म से लाल हो जा रहे थे वह समझ नहीं पा रही थी कि क्या कहें अपने बेटे की दो अर्थ वाली बातें उसे पूरी तरह से अंदर ही अंदर मदहोश कर रही थी खासकर के रस में डूबो कर वाली बात तो उसकी चूत से काम रस टपकाने के लिए काफी थी,,,,, मोहिनी के आश्चर्य का खुलासा करते हुए आराधना बोली,,)

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अरे केला हाथ से छूट गया था और दाल में गिर गया था इसीलिए बोल रहा है रसमें डुबोकर,,,,

ओहहहह,,,,,

चल संजू अब जल्दी-जल्दी खाना खा ले बर्तन भी साफ करना है,,,

(इतना सुनकर संजू की खाना खाने में ध्यान देने लगा और थोड़ी ही देर में तीनों ने भोजन कर लिया इसके बाद मोहिनी कर साफ करने लगी और आराधना बर्तन साफ करने लगे और कुछ देर के लिए संजू घर के बाहर ताजी हवा लेने के लिए निकल गया थोड़ी देर में जब वापस आया तो देखा,,, उसकी मां का कमरा बंद था जो कि ऐसा नहीं होना चाहिए क्योंकि जो प्यास उसमें अपनी मां की चूत में चलाया था वह पूरी तरह से प्रज्वलित थी इस समय वह अपनी मां का कमरा खुलवा नहीं सकता था क्योंकि मोहिनी अभी जाग रही थी इसलिए वह अपने कमरे में चला गया और मोहिनी को अपनी बाहों में लेकर एक-एक करके उसके सारे कपड़े उतार दिया मोहिनी भी प्यासी थी अपने भाई के बदन से बेल की तरह लिपट गई और उसे चूमने चाटने लगी देखते ही देखते संजू का मोटा तगड़ा लंबा लंड मोहिनी की चूत में समा गया और मोहिनी की गर्म सांसों के साथ-साथ संजू की कमर आगे पीछे होने लगे अपनी बहन की जमकर चुदाई करने के बाद वह कुछ देर तक उसके बगल में लेटा रह गया जब तक की मोहिनी गहरी नींद में सो नहीं गई और जैसे ही वह गहरी नींद में सोने का एहसास उसे हुआ वह तुरंत अपने कमरे से बाहर निकल कर देखा तो अभी भी इसकी मां का कमरा बंद था और अंदर अंधेरा था संजू अपनी मां को चोदने के लिए तड़प रहा था इसलिए बिना चोदे उसका मन मानने वाला नहीं था वह धीरे से अपनी मां के कमरे के पास गया,,, कमरे के अंदर पूरी तरह से अंधेरा छाया हुआ था अगर अंदर ट्यूब लाइट जल रही होती तो दरवाजे की दरार से चली रोशनी नजर आती है उसे लग रहा था कि शायद उसकी मां सो गई होगी पता नहीं जगाना ठीक रहेगा या नहीं वैसे भी रात के 1:00 बज रहे थे इस समय तक उसकी मां का जागना नामुमकिन था

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क्योंकि वह जल्दी सो जाती है लेकिन पिछले 1 दिन में जो आग और प्यास संजू ने अपनी मां के बदन में जगाया था वह आग उसे सोने नहीं देगी इस तरह का उसे पूरा विश्वास था लेकिन फिर भी वह पूरी तरह से आत्मविश्वास से भरा हुआ नहीं था इसलिए वह सिर्फ देखना चाहता था कि उसकी मां जाग रही है या सो रही है इसलिए मन में दृढ़ निश्चय करके की दरवाजे पर सिर्फ दो ही बार दस्तक देगा उसके बाद अगर उसकी मां नहीं होती तो वह चला जाएगा इसलिए वह दरवाजे की कड़ी को पकड़कर उसे दो बार खटखटाया,,,,, यह पहला प्रयास था संजू कुछ देर तक वहीं रुक आ रहा की दरवाजे पर हो रही दस्तक की आवाज सुनकर उसकी मां जान जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ उसके मन में निराशा पहनने लगी अपने आप से किया हुआ वादा सिर्फ दो ही बाहर का था इसलिए वह दूसरी बार अपने मन में मना कर दरवाजे की कड़ी पकड़कर फिर से दरवाजे पर दो बार खटखटाया,,,,, और कुछ देर तक वहीं खड़ा रहा अंदर से किसी भी प्रकार की हलचल नहीं हो रही थी तो उसे पूरा विश्वास हो गया कि उसकी मां सो रही है और वह निराश होकर अपने कदम पीछे लेने वाला था कि उसे चूड़ियों की खनक में की आवाज सुनाई देने लगी और उसे ऐसा सांप महसूस हो रहा था कि उसकी मां बिस्तर से उठ रही है और उसके चूड़ियों की खन खन की आवाज पायल के चमकने की आवाज उसे पूरी तरह से मदहोश करने लगी और वह ज्यों का त्यों वही खड़ा रह गया ऐसा नहीं था कि आराधना सो गई थी वह अभी तक करवटें बदल बदल कर रात गुजार रही थी और अपने बेटे का इंतजार कर रही थी वह जानबूझकर दरवाजा खुला नहीं छोड़ी थी क्योंकि ऐसा करने से उसे ना जाने क्यों अब शर्म महसूस हो रही थी,,,, जितनी तड़प संजू ने थी उससे ज्यादा तड़प आराधना में थी अपने बेटे से मिलने के लिए उससे संभोग करने के लिए,,,।

आराधना के दिल की धड़कन बढ़ चुकी थी वह बिस्तर से उठ चुकी थी और धीरे-धीरे अपने कदम को दरवाजे की तरफ बढ़ा रही थी और दरवाजे की तरफ कदमों की आहट आती हुई साफ सुनाई दे रही थी जिसे सुनकर संजू का लंड खड़ा होने लगा था और वह दरवाजे के बाहर अपने लंड को पकड़ कर खड़ा था,,।

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संजू का दिल जोरों से धड़क रहा था वह अपनी मां के कमरे के सामने खड़ा था और दो बार दरवाजे पर दस्तक दे चुका था अंदर से आ रही चूड़ियों की खनक की आवाज को सुनकर संजू समझ गया था कि उसकी मां बिस्तर से उठ कर खड़ी हो गई है और उसके कदमों की आहट को दरवाजे की तरफ आता देखकर उसका दिल जोरों से धड़क रहा था उसके तन बदन में आग लग रही थी और लंड की कहानी कुछ और ही कह रही थी लंड पूरी तरह से तैयार मुद्रा में खड़ा था अभी-अभी वह अपनी बहन की गर्म जवानी का स्वाद चखकर आया था और अब वह अपनी खूबसूरत जवानी से लबालब भरी हुई मां की चुत के कामरस में अपने मोटे तगड़े लंबे लंड को डुबोना चाहता था,,, जिस तरह की उत्सुकता और तड़प संजू के अंदर थी अपनी मां से मिलन के लिए,,, वही तड़प और व्याकुलता आराधना में भी थी अपने बेटे से एक बार फिर से चुदाई का मजा लेने के लिए इसलिए तो आधी रात का समय हो जाने के बावजूद भी वह जाग रही थी और अपने बेटे के द्वारा दरवाजे पर दस्तक देने की वजह से वह अपनी जगह से उठ कर खड़ी हो गई थी और दरवाजा खोलने के लिए दरवाजे के करीब पहुंच चुकी उसके कदमों की आहट सुनकर संजू के जवानी का जोश जान चुका था उसका लंड अपनी अकड़ दिखा रहा था वह अपने आपे में बिल्कुल भी नहीं था,,, पेंट फाड़ कर बाहर आने की स्थिति में हो चुका था,,,,

संजू को अपनी मां की चूड़ियों की खनक ने की आवाज एकदम साफ सुनाई दे रही थी वह दरवाजे पर खड़ी थी आराधना के मन में भी हलचल मची हुई थी उसे थोड़ा अजीब लग रहा था दरवाजा खोलने में क्योंकि ऐसा लग रहा था कि जैसे आधी रात को उसका पति घर पर आया हो और वह उसके लिए दरवाजा खोल रही है यह सोचकर उसके तन बदन में आग लग गई थी,,,,, वह अपने बेटे के साथ इस तरह के रिश्ते बनाना नहीं चाहती थी लेकिन एक बार मर्यादा की दीवार टूटने के बाद वह अपने आप को रोक नहीं पा रही थी आखिरकार वह भी एक औरत थी और औरत के मन में भी एक मर्द की प्यास और आस दोनों होती है जो कि आराधना के मन की इस कमी को उसका बेटा पूरा कर रहा था और पूरा करने जा रहा था इसलिए आराधना भी दरवाजा खोले बिना नहीं रह सकती थी,,,,,,

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कुछ देर तक आराधना दरवाजे पर खड़ी होकर सोच रही थी कि दरवाजा खोले या ना खोलें,,,,, अपने मन में सोच रही थी कि दरवाजे पर उसका बेटा खड़ा है उसका सगा बेटा जिसके साथ शारीरिक संबंध बनाकर वह मर्यादा की दीवार को मां बेटे के बीच के रिश्ते को तार-तार कर चुकी हैं उसे यह समझ में नहीं आया था कि जो कुछ भी वह कह रही है सही कर रही है या गलत सामाजिक तौर पर देखा जाए तो वह गलत ही कर रही थी लेकिन एक औरत होने के नाते उसकी भी कुछ जरूरते थी जो कि ईस समय उसका बेटा ही पूरा कर रहा था,,,,,, और इस बात को ध्यान में रखते हुए उसका अपने बेटे के लिए दरवाजा खोलना लाजमी ही था बाहर खड़ा संजू बिल्कुल भी सब्र करने के मूड में नहीं था वह बेसबर होता जा रहा था बहुत जल्द से जल्द अपनी मां की गुलाबी चूत के दर्शन कर लेना चाहता था और उसकी इंतजार की घड़ियां खत्म होती हुई नजर आ रही थी क्योंकि उसे दरवाजे की घड़ी की खनक ने की आवाज आने लगी थी वह समझ गया कि उसकी मैं दरवाजा खोलने जा रही है और अगले ही क्षण कडी के गिरने से और दरवाजे पर टकराने की आवाज आई और वैसे ही संजू का लंड पूरी तरह से टनटना गया,,,, संजू का दिल जोरो से धड़कने लगा और कुछ ही क्षण में आराधना ने दरवाजे के दोनों पल्लो को खोल दी और अनजाने में ही उसकी नजर संजू के नजर से टकरा गई और आराधना एकदम से शर्म से पानी-पानी हो गई और अगले ही पल वह शरमा कर अपनी नजरों को नीचे झुका ली,,, संजू अपनी मां के शरमाते हुए खूबसूरत चेहरे को देखकर और ज्यादा उत्तेजित हो गया,,,, और कमरे में प्रवेश करते हुए बोला)

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मुझे तो लगा था कि तुम सो गई,,(और इतना कहने के साथ ही वो खुद ही दरवाजे के दोनों पल्लओ को बंद करके कड़ी लगा दिया आराधना के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी को और ज्यादा बढ़ कर रहा था अपने बेटे की इस हरकत पर आराधना शर्म से पानी पानी हो जा रहे थे क्योंकि उसे पूरी तरह से ज्ञात था कि ऐसा होगा किस लिए कर रहा है थोड़ी ही देर में उसे बिस्तर पर ले जाकर खूब चोदेगा,,, और इस एहसास से वह एकदम से शर्म से लाल हो गई उसके होठों से एक भी शब्द फूट नहीं रहे थे,,, एकदम खामोश थी दरवाजा बंद करते ही संजू अपनी मां की तरफ पलटा और पीछे से उसे अपनी बाहों में भर लिया उसकी उभरी हुई मदमस्त कर देने वाली गांड सीधा उसके तने हुए लंड से टकरा गई और यह एहसास दोनों को एकदम गरम करके दोनों जवानी के जोश से भरे हुए थे,,,, संजू इस खेल में नया-नया होने के बावजूद भी पूरी तरह से मजा हुआ था और आराधना खेली खाई होने के बावजूद भी इस खेल में अभी भी अनाड़ी थी और उसे अनाड़ी से खिलाड़ी बनाने का पूरा जिम्मा अब उसके बेटे का था,,,, अपनी मां की बड़ी-बड़ी और ऊभरी हुई गांड पर अपने लंड का दबाव बढ़ाते हुए संजू अपनी मां की गोरी गोरी गर्दन पर होठ लगाकर चुंबन करते हुए बोला,,,।

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ओहहहह मम्मी तुम्हारे बदन की खुशबू मुझे पागल कर देती है देखो तो सही तुम्हें बाहों में भरते ही मेरा लंड खड़ा हो गया,,,,।

(आराधना उत्तेजना और शर्म से कसमसा रही थी एक तरफ उसे अपने बेटे की बाहों में कैद होना बहुत ही ज्यादा ऊन्मादक लग रहा था वही दूसरी तरफ उसे शर्मिंदगी का एहसास हो रहा था क्योंकि चाहे कुछ भी हो संजू था तो उसका सगा बेटा और एक बेटे के साथ इस तरह का खेल खेलना आराधना को अच्छा तो नहीं लग रहा था लेकिन उसका बदन उसका साथ नहीं दे रहा था क्योंकि उसके बेटे की हरकत से उसके बदन में उत्तेजना का प्रसार बड़ी तेजी से हो रहा था उसे अपनी चूत पानी छोड़ दी हुई महसूस हो रही थी और देखते ही देखते संजू भी पूरी तरह से मदहोश होता हुआ अपनी मां को पीछे से अपनी बाहों में पकड़े हुए अपने लंड का दबा उसकी मदमस्त कर देने वाली गांड पर बढ़ाते हुए अपने दोनों हाथों को उसके ब्लाउज के ऊपर रख दिया और उसके दोनों खरबूजा को जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया,,,,,, संजू की इस हरकत से जहां आराधना शर्मिंदगी का अहसास कर रही थी वही पल भर में ही उसकी हरकत ने उसे पूरी तरह से गर्म कर दिया और उसके मुख से सिसकारी फूट पड़ी,,,,।

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सहहहहहह आहहहहहहह,,,,,

(अपनी मां के मुंह से इस तरह की आवाज सुनते ही समझो और ज्यादा मदहोश होने लगा और वह पागलों की तरह अपनी मां की चूची को पके हुए दशहरी आम की तरह दबाना शुरू कर दिया हालांकि आराधना की चुचियां ब्लाउज में कैद थी फिर भी संजू किसी भी प्रकार की रहम नहीं दिखा रहा था ऐसा लग रहा था कि संजू चूचीयों को दबा दबा कर ब्लाउज को भी फाड़ देगा,,,,, आराधना अपनी बड़ी बड़ी गांड पर अपने बेटे के कठोर दंड की रगड़ को महसूस करके मदहोश में जा रही थी अपने बेटे के लंड की मर्दाना ताकत से। ह अच्छी तरह से वाकिफ हो चुकी थी इसलिए वह जल्द से जल्द एक बार फिर से अपने बेटे के लंड को अपनी चूत की अंदरूनी दीवारों पर रगड़ता हुआ महसूस करना चाहती थी,,,, संजू की गरमा गरम सांसे आराधना की गर्दन से टकरा रही थी जो कि उसके बदन में जोश भर रही थी,,,, औरत और मर्द के बीच का यह पल बेहद नाजुक होने के साथ-साथ पतली सी भेद रेखा थी जिसका भेद आज तक कोई भी नहीं जान पाया था क्योंकि रिश्तो में चाहे कितनी भी घनिष्ठता हो पवित्रता हो जैसे कि भाई बहन मां बेटा फिर भी यह पल ऐसा होता है कि दोनों के बीच की पवित्र रिश्ते को बुलाकर केवल मर्द औरत के रिश्ते को ही उजागर करता है जिसके चलते दोनों आपस में शारीरिक संबंध बनाकर अपनी अपनी जरूरत की पूर्ति करते हैं और एक दूसरे को तृप्त कर देते हैं और यही आराधना की कमरे में भी हो रहा था जहां पर आराधना अपने बेटे के साथ पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी और उसका बेटा भी अपनी मां को तृप्त करने में किसी भी प्रकार की कसर नहीं छोड़ रहा था कुछ देर तक अपनी मां की चुचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने के बाद संजू अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलते हुए बोला,,,।)

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ओहहहह मम्मी ,,,, तुम मेरा इंतजार कर रही थी ना तुम जाग रही थी ना,,,,

नहीं तो,,,(आराधना एकदम से शरमाते हुए जवाब दें क्योंकि वह अपने बेटे से हकीकत बोलने में शर्म महसूस कर रही थी आखिरकार वह अपने बेटे से क्या बोलती कि हां मैं तेरा इंतजार कर रही थी मेरी ‌चूत में आग लगी हुई मेरी चूत में लंड डालकर मेरी आग को बुझा दे,,,,, ऐसा तो वाकई नहीं सकती थी आखिरकार एक मर्द को एक औरत के भावनाओं को समझ जाना चाहिए और शायद इस समय संजू समझ भी रहा था,,,)

इतनी रात तक क्यों जाग रही हो,,,,

मुझे नींद नहीं आ रही थी,,,,

मुझसे मिलने की तड़प में तुम्हारी नींद भी हराम हो गई है मम्मी,,,(संजू अपनी मां के ब्लाउज के आखिरी बटन को खोलते हुए बोला,,, अपने बेटे की यह बात सुनकर उसकी हरकत से गर्म होते हुए आराधना बोली,,,)

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धत्,,,, तू जो कुछ भी कह रहा है गलत है यह तो ऐसे ही नींद नहीं लग रही थी,,,,,।

(अपनी मां की बात सुनकर वहां फुर्ती दिखाता हुआ अपनी मां के चिकने पेट पर अपनी हथेली रखकर उसे धीरे से साड़ी के अंदर सरका दिया पेटिकोट कसके बंधी हुई थी लेकिन फिर भी संजू जैसे तैसे करके अपनी हथेली को अपनी मां की साड़ी में डालकर उसकी दोनों टांगों के बीच की फूली हुई जगह पर हथेली रख दिया और चूत के पीलेपन को अपनी हथेली में महसूस करते हैं वह अपनी मां की चूत को अपनी मुट्ठी में कसते हुए बोला,,,)

लेकिन तुम्हारी चूत तो कुछ और कह रही है,,,(मदहोशी में चूत को अपनी मुट्ठी में करने की वजह से आराधना को थोड़ा सा दर्द महसूस हुआ)

आहहहह यह क्या कर रहा है संजू,,,

कुछ नहीं मैं सिर्फ हकीकत को अपनी हथेली में महसूस कर रहा था तुम्हारे ऊपर के होंठ कुछ और कह रहे हैं लेकिन नीचे के होंठ कुछ और ही बयां कर रहे हैं,,,,

(अपने बेटे के मुंह से ऐसी मादकता भरी बातें सुनकर आराधना की बोलती बंद हो गई थी और तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ में लगी थी वाकई में उसका बेटा पूरी तरह से बड़ा हो चुका था जो कि उसकी हरकत और उसके बात करने के तरीके से सांप महसूस हो रहा था उसके शब्दों में भी मर्दाना जोश आ गया था,,, फिर भी शरमाते हुए आराधना अपनी हकीकत को छुपाते हुए बोली)

ककक कुछ नहीं ये तो ऐसे ही,,,,(अभी भी संजू की हथेली उसकी चूत को मसल रही थी इसलिए वह अपनी उत्तेजना को दबाने के लिए अपने लाल-लाल होठों को अपने दांत से काट रही थी और यह देखकर संजू की भी हालत खराब हो रही थी वह भी पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था अपनी मां की बातें सुनकर वह अपनी बीच वाली उंगली को अपनी मां की चूत की दरार के ऊपरी हिस्से पर रगडते हुए बोला,,)

कोई बात नहीं मम्मी ऐसा तो होना ही चाहिए तुम्हारा भी मन करना चाहिए तुम्हारी भी चूत से पानी टपकना चाहिए तभी तो जिंदगी का असली मजा लेने का मन करता है अगर यह सब ना हो तो भला एक औरत को मर्द की जरूरत है क्यों पड़े तुम्हारी चूत टपक रही है कामरस अमृत की धार बनकर तुम्हारी चूत के गुलाबी छेद से टपक रहा है जो कि यह साफ दर्शा रहा है कि तुम्हारी चूत भी मेरे लंड के लिए तड़प रही है जैसा कि मेरा लंड तुम्हारी चूत में जाने के लिए उसकी गर्माहट को अपने अंदर महसूस करने के लिए लप-लपा रही है,,,,(संजू साड़ी में डाले अपने हाथ की हरकत और अपने लंड का दबाव बराबर अपनी मां की गांड पर बढ़ाता हुआ बोल रहा था जिससे आराधना पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी उसकी सांसे भारी हो चली थी,,,,, आराधना भी इस खेल में पूरी तरह से शामिल हो चुकी थी लेकिन फिर भी वह अपने मन को तसल्ली देने के लिए बोली लेकिन यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि उसके कहे बातों का उसके बेटे पर कोई प्रभाव पड़ने वाला नहीं है और ना तो वह खुद अपने कदमों को पीछे लेने वाली है फिर भी औपचारिक रूप से वह अपने बेटे से बोली)

संजू जो कुछ भी तो कर रहा है गलत है एक बेटे को अपनी मां के साथ ऐसा कभी नहीं करना चाहिए,,,

क्यों नहीं करना चाहिए मां बेटे के रिश्ते से निकलकर आकर देखोगी तो यह रिश्ता तुम्हें और भी ज्यादा खूबसूरत लगेगा तुम्हारी जरूरत भी यही है मेरी भी जरूरत नहीं है हम दोनों एक दूसरे की जरूरत को पूरा कर रहे हैं और सोचो इस उम्र में अगर बाहर कहीं तुम्हारे कदम डगमगा गए तो उसकी कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ जाएगी हमारे परिवार को बदनामी भी होगी इज्जत भी जाएगी और ऊपर से हो सकता है जिस इंसान के साथ तुम्हारे संबंध स्थापित हो जाए वह तुम्हें बार-बार इस काम को करने के लिए प्रेरित करें तुम पर दबाव बनाएं तब क्या होगा,,,,(ऐसा कहते हैं संजीव अपनी मां की साड़ी में से अपना हाथ बाहर निकाल दिया और अपनी मां के लाल ने ब्रा के कप को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे नीचे की तरफ खींच दिया जिससे उसके खरबूजे जैसी चूची उछल कर बाहर आ गई और तुरंत अपनी मां की दोनों चुचियों को हथेली में लेकर दबाते हुए बोला,,,)

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देखो मम्मी लाल रंग की ब्रा में तुम्हारी गोरी गोरी चूचियां कितनी खूबसूरत लगती है एकदम खरबूजे की तरह गोल बड़ी-बड़ी एकदम तनी हुई जरा भी लचक नहीं है एकदम जवानी से भरी हुई है अब बोलो भला ऐसी चूची को देखकर एक बेटे का मन बहकेगा नहीं तो क्या होगा,,, और ऐसी खूबसूरत मां की जवानी किस काम की जिस पर जवान बेटी की नजर ना जाए,,,,(संजू की मदहोश कर देने वाली मादक बातें आराधना के तन बदन में पूरी तरह से उतर जा रही थी खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में संजू की बातें हलचल मचा रही थी आराधना की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी जिसकी वजह से उसकी चूचियां भी ऊपर नीचे हो रही थी और इस तरह की ऊपर नीचे होती चूचियों को अपने हाथ में लेकर दबाने में संजू को और ज्यादा मजा आ रहा था,,,,,, आराधना को अपनी गांड के बीचो बीच अपने बेटे का लंड एकदम साफ महसूस हो रहा था,,,, आराधना को भी इस बात का एहसास हो रहा था किसके बेटे का लंड एकदम लोहे की तरह कड़क है इतनी देर तक उसके पति का भी ना तो खड़ा रहता था ना ही कड़क रहता था उसमें भी फर्क आ जाता था या तो अब तक उसके पति का लंड पानी फेंक दिया होता या तो ढीला हो गया होता,,,, आराधना का मन कर रहा था कि अपने हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर अपने बेटे के लंड को पकड़ ले जो कि अभी भी पैंट के अंदर कैद था,,,, लेकिन ऐसा करने में आराधना को शर्म महसूस हो रही थी,,, आराधना अपनी नजरों को नीचे करके अपनी चूचियों की दशा को देख रही थी जो कि उसके बेटे ने अपनी हथेली से दबा दबा कर लाल टमाटर की तरह कर दिया था हालांकि चूचियां खरबूजे जितनी बड़ी बड़ी गोल-गोल थी जिससे संजू के दोनों हथेली में दोनों चूचियां ठीक तरह से समा नहीं पा रही थी लेकिन जितना भी उसकी हथेली में आती थी संजू उतना दबा दबा कर मजा ले रहा था,,,, आराधना के मन में नहीं हो रहा था कि जल्दी से जल्दी संजू उसके बदन से सारे कपड़े उतार कर उसे नंगी कर दें और उसे बिस्तर पर ले जाकर पटक दे लेकिन संजू ऐसे खेल में जल्दबाजी दिखाने वाला खिलाड़ी बिल्कुल भी नहीं था वह मौके की नजाकत को समझते हुए ही अपनी हरकत को बढ़ाता था और इस समय मौका और दस्तूर दोनों थे इसलिए अपनी मां की नशीली जवानी का नशा वह धीरे-धीरे ले रहा था,,, वैसे भी शराब का नशा हो गया खूबसूरत जवानी का दोनों ही आहिस्ता आहिस्ता ही लेना चाहिए वरना इंसान से अधिक नशा पचता नहीं है और वह उल्टी कर देता है और ऐसा संजू बिल्कुल भी नहीं चाहता था वह इतने जल्दी झाड़ने वाला नहीं था वरना उसकी जगह कोई और होता तो जिस तरह से उसका लंड एक खूबसूरत वह भरी हुई कांड पर बार-बार रगड़ खा रहा था उससे उसका पानी निकल गया होता,,,।

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संजू अपनी मां की गर्म जवानी से खेलते खेलते पूरी तरह से मदहोश हो चुका था मस्ती उसके पूरे बदन में छा चुकी थी वह अपनी मां की नशीली जवानी से खेल रहा था इसलिए उसके पूरे बदन में नशा का संचार हो रहा था वह‌ मस्त होता हुआ अपनी मां की दोनों बाहों को पकड़कर उसे घुमा दिया ऐसा करने से उसकी मां ठीक उसके सामने हो गई और वह अपनी मां की चूची को अपनी मां की आंखों के सामने ही दोनों हथेली में लेकर दबाते हुए बोला,,,।

सहहहहहह ऊममममम मम्मी क्या मस्त चुची है तुम्हारी,,,उहरहह मुझसे तो बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है,,,(अपनी मां की दोनों चूची को अपने दोनों हथेली को चूची के नीचे लगाकर तराजू की तरह ऊपर नीचे करते हुए) मे तो तुम्हारी चूची देख देख कर पागल हो जाऊंगा,,,,ऊममममम(और इतना कहने के साथ ही संजू अपनी मां की चूची के ऊपर झुका हुआ एक चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया और दूसरी को कस कस के दबाने लगा अपने बेटे के मुंह में अपनी चूची की निप्पल आते ही आराधना एकदम से मदहोश हो गई और अपना हाथ उठाकर अपने बेटे के सर पर रख दी मानो कि जैसे उसे आगे बढ़ने का आशीर्वाद दे रही हो संजू अपनी हरकत से अपनी मां के तन बदन में आग लगा चुका था और पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी उसके बदन में रक्त का भ्रमण बड़ी तेजी से हो रहा था खास करके उसकी दोनों जंघाओं के बीच रक्त बड़ी तेजी से भ्रमण कर रहा था जिसकी वजह से उसकी चूत कचोरी की तरफ फूल गई थी,,,।

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उत्तेजना के मारे आराधना का गला सूख रहा था और वह अपने स्तर से अपने गले को गिला करते हुए अपने बेटे की हरकत को अपनी आंखों से देख रही थी इस तरह का नजारा देखना उसके लिए शर्मसार कर देने वाला था लेकिन इस शर्मसार कर देने वाले नजारे में भी बेहद आनंद प्रमोद छुपा हुआ था जिसका वह पूरी तरह से मजा ले रही थी,,, वह कभी सोच नहीं सकती थी कि उसके जीवन में ऐसा भी पल आएगा जब अपने ही बेटे से अपनी जवानी की गर्मी शांत कराएगी,,,,, संजू पूरी तरह से अपनी मां की चूची में मजबूर हो चुका था तभी दाईं चूची जो कभी पानी चूची दोनों को बारी-बारी से लेकर अपने मुंह में पी रहा था,,,, संजू सूचियों से खेलने पर कुछ ज्यादा ही जोड़ दे रहा था,,, इसलिए आराधना की मदहोशी और ज्यादा बढ़ती जा रही थी,,,।

आधी रात से ज्यादा का समय हो चुका था मोहिनी अपने कमरे में अपने भाई से चुदवा कर गहरी नींद में सो रही थी,,, उसकी मदहोश गर्म जवानी से खेलने के बाद उसका भाई अपनी मां की जवानी से कह रहा है इस बात का उसे अंदाजा तक नहीं था वह इन सब बातों से बेखबर अपनी मस्ती में टांग फैला कर सो रही थी और बगल वाले कमरे में उसका जवान भाई अपनी मां की दोनों टांग खोलने में लगा हुआ था,,,,,,, आराधना अपने कमरे में अपने ही बेटे के साथ रंगरलिया मना रही थी अपनी मां से खुलकर प्यार करने में उसके कपड़े बाधा रूपबन रहे थे इसलिए वह अपनी मां के ब्लाउज को उसकी मोटी गुदाज बाहों से निकालने लगा और देखते ही देखते संजू अपनी मां के बदन पर से उसका ब्लाउज निकालकर नीचे फेंक दिया और फिर खुद अपनी मां के पीछे जाने की जगह व उसकी बांहों को पकड़कर घुमा दिया और उसके पेट को अपनी तरफ कर दिया जिससे वह उसकी ब्रा का हुक खोलने में कामयाब होता नजर आने लगा वह एक झटके में ही अपनी मां के ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा का हुक खोलने से ब्रा पूरी तरह से ढीली हो गई और अगले ही पल वह अपनी मां के बदन पर शराबी उतार कर फेंक दिया कमर के ऊपर उसकी मां पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी उसकी गोल-गोल चुचियां ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी,,,,, वैसे तो आराधना को अपनी शर्मीली आदत की वजह से बत्ती बुझा कर ही प्यार करने में मजा आता था लेकिन ना जाने क्यों अपने बेटे के साथ ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में मस्ती करने में आनंद आ रहा था ,,,,,, कमर से ऊपर अपनी मां को नंगी करने के बाद उसके गर्दन पर एक बार फिर से अपने होठों को सटाकर उसकी कमर में हाथ डाल कर उसे अपनी तरफ खींचते हुए बोला,,,।

ओहहह मम्मी कपड़े उतर जाने के बाद तुम और ज्यादा खूबसूरत लगती हो,,,(इतना कहने के साथ ही संजु अपनी मां की साड़ी की गींठान जोकि नाभि के नीचे खोंशी हुई थी उसे खोलने लगा,,, आराधना अपने बेटे के द्वारा अपनी साड़ी की गिठान खोले जाने पर कसम‌ाने लगी उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,, क्योंकि वह इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि कुछ भी देर में उसका बेटा उसकी साड़ी निकालकर उसे पूरी तरह से नंगी कर‌ देगा,,,, इसलिए शर्म के मारे आराधना अपने बेटे के हाथ पर अपना हाथ रख दी लेकिन संजू अब कहां रुकने वाला था वह अपनी मनमानी करते हुए अपनी मां की साड़ी की गिठान का खोल दिया और उसकी कमर पर बंधी साड़ी को खोलना शुरू कर दिया,,, अब आराधना की सांसे और भी तेज चलने लगी और देखते ही देखते संजू ने अपनी मां की साड़ी खोलकर साड़ी भी नीचे जमीन पर फेंक दिया और इस समय केवल वह पेटीकोट पर ही थी पेटीकोट के ऊपरी सिरे पर थोड़ी सी कटिंग ‌ बनी हुई थी जिसमें से आराधना की लाल रंग की चड्डी एकदम साफ नजर आ रही थी और संजू पेटिकोट के उस छोटे से छेद में अपनी हाथ डालकर चड्डी के ऊपर से ही आराधना की चूत को दबाना शुरू कर दिया आराधना पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी वह उत्तेजना से पागल हो जा रही थी उसकी आंखें बंद थी उसको गहरी गहरी सांस ले रही थी उसकी दोनों चूचियां रबड़ के गेंद की तरह उछल रही थी,,,।

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चड्डी के ऊपर सही अपनी मां की चूत को हथेली में लेकर जोर-जोर से दबाते हुए संजू मदहोश हुआ जा रहा था और अपने लंड का दबाव अपनी मां की गांड पर बराबर बनाया हुआ था वह पूरी तरह से संजू की गिरफ्त में थी वह मदहोशी के चरम शिखर पर पहुंच चुकी थी और ऐसा लग रहा था कि किसी भी वक्त उसका पानी निकल जाएगा,,,,, और संजू था की अपनी हरकत और अपनी बातों से अपनी मां को और ज्यादा मदहोश करते हुए बोला,,,

ओहहह मम्मी तुम्हारी चूत तो कचोरी की तरफ फूल गई है कसम से मन कर रहा है कि इसे खा जाऊ,,,ओहहहह मम्मी तुम बहुत सेक्सी हो,,,,,,

‌ससहहहहह आहहहहह,,,, संजू मेरे बेटे यह क्या कर रहा है मुझसे रहा नहीं जा रहा है मैं तो पागल हो जाऊंगी तेरी हरकत ने मेरी हालत खराब कर दी है,,,,(आराधना अपनी आंखों को बंद किए हुए मदहोशी के आलम में अंगड़ाई लेते हुए बोले जा रही थी दोनों तरफ आग बराबर लगी हुई थी संजू जल्द से जल्द अपनी मां के सारे कपड़े उतार कर नंगी करना चाहता था आधा नंगी तो वह कर ही चुका था,,, इसलिए बोला तुरंत अपनी मर्दाना ताकत का दम दिखाते हुए अपनी मां को अपनी गोद में उठा लिया उसकी मां एकदम से चौक गई उसे डर था कि कहीं संजू उसे गिराना दे क्योंकि उसका शरीर थोड़ा भारी-भरकम था लेकिन समझो मैं भी दमखम कुछ ज्यादा ही था वह अपनी मां को बड़े आराम से अपनी गोद में उठा लिया था उसकी नंगी चूचियां आपस में रगड़ खा रहे थे और वह संजू की तरफ देखने से शर्म आ रही थी वह अपनी आंखों को बंद किए हुए ही बोली,,,,।

ओहहहह संजू यह क्या कर रहा है नीचे उतार मुझे मै गिर जाऊंगी,,,,

मम्मी मैं क्या तुम्हें गिरने दूंगा तुम्हें मेरे ऊपर विश्वास नहीं है तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो तुम देखने में थोड़ा सा वजनदार होने की मेरे हाथों में एकदम रूही की तरह नरम नरम हो बिल्कुल भी वजन नहीं है मैं चाहूं तो तुम्हें गोद में उठाकर चोद सकता हूं वह भी बड़े आराम से,,,,(इतना सुनते ही आराधना एकदम से शर्मा गई उसके गाल एकदम लाल हो गए,,,, और संजू अपनी मां के खूबसूरत शर्माते हुए चेहरे को देखकर उसी तरह से गोद में उठाए हुए हैं उसे बिस्तर तक ले गया और नरम नरम गद्दे पर ले जाकर पटक दिया गद्दा और बेड दोनों नरम नरम और स्प्रिंग वाले थे इसलिए गधे पर गिरते ही आराधना का बदन हल्का सा हौसला और फिर नरम नरम गद्दे पर जाकर एकदम स्थिर हो गया जिस तरह से संजू उसे अपनी गोद में उठाया हुआ था वह एकदम से शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी,,,,।

आराधना बिस्तर पर पीठ के बल लेटी हुई थी उसकी आंखें बंद थी कमर के नीचे वह पूरी तरह से नंगी थी उसकी खूबसूरत छूट उसकी दोनों टांगों के बीच छुपी हुई थी उसकी मोटी मोटी जाने ट्यूबलाइट की रोशनी में और भी ज्यादा चमक रही थी जिसे देखकर संजू का दिल डोल रहा था,,,,

आंखें क्यों बंद की हो,,,, आंखें खोलो मम्मी इस खेल में बिना आंख खुले मजा नहीं आने वाला जब तक तुम मेरे नंगे बदन को और मैं तुम्हारे नंगे बदन को देखूंगा नहीं तब तक मजा कैसे आएगा तुम्हें मेरी कसम है अपनी आंखें खोल दो,,,,(आराधना भी इस खेल को आंखें खोलकर खेलना चाहती थी लेकिन शर्म के मारे अपनी आंखों को बंद कर ली थी लेकिन अपने बेटे की कसम पाकर वह अपनी आंखों को बंद नहीं कर पाई और आंखें खोल दी बिस्तर के दूसरे छोर पर संजू खड़ा था उसके पैंट में तंबू बना हुआ था जो की आराधना एकदम साफ तौर पर देख पा रही थी,,,,, और संजू भी अपनी मां की तरफ देखते हुए अपने पेंट में बने तंबू को पेंट के ऊपर से ही पकड़ कर जोर से दबोच लिया था,,, यह देखकर आराधना अंदर ही अंदर सिहर उठी,,,, और राजू अपनी मां के बदन में उत्तेजना की लहर को और ज्यादा बढ़ाता हुआ बोला,,,,,,।

अब देखना मम्मी मेरे लंड को कैसा तुम्हारी चूत में जाने के लिए मचल रहा है,,,(ऐसा कहते हुए संजू अपने पेंट की बटन खोलने लगा और देखते-देखते पेंट की बटन खोल कर पेंट को नीचे की तरफ उतारने लगा,,, वह अपनी टीशर्ट को कब से उतार कर फेंक दिया था आराधना अपने बेटे की चौड़ी छाती को देख कर पानी पानी हुए जा रही थी,,, इस तरह का गठीला और कसरती बदन अशोक का बिल्कुल भी नहीं था इसलिए अपने बेटे के बदन को देखकर आराधना के तन बदन में भी कुछ कुछ होने लगता था,,,, देखते ही देखते संजू अपनी पेंट का उतार फेंका और अब केवल वह अंडरवियर में ही था जिसमें खूंटा जेसा तंबू बना हुआ था,,,, अपने बेटे के खूटे को देखकर आराधना की चूत पिघलने लगी,,,, आराधना को ऐसे लग रहा था कि उसका बेटा उसकी आंखों के सामने अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो जाएगा और उसे उसके बेटे का लंबा मोटा लैंड देखने को मिल जाएगा लेकिन संजू के मन में कुछ और चल रहा था वह अपनी मां की तड़प को और ज्यादा बढ़ाना चाहता था इसलिए बिना कुछ बोले घुटनों के बल बिस्तर पर चढ़कर वह अपनी मां की तरफ आगे बढ़ने लगा,,,, कमर के नीचे अभी-अभी पेटीकोट और पेंटी के अंदर आराधना की खूबसूरत चुत छुपी हुई थी लेकिन संजू को साफ पता चल रहा था कि उसकी नजरों से उसकी मां शर्म के मारे अपनी चूत को छुपाने की भरपूर कोशिश कर रही है और पेटीकोट के ऊपर से ही आराधना की मोटी मोटी जाने साफ उभर कर नजर आ रही थी,,, जो कि इस हालात में भी ट्यूबलाइट की रोशनी में उसकी मोटी मोटी जांगो का अहसास साफ तौर पर हो रहा था,,,,।

घुटनों के बल चलता हुआ संजू अपनी मां की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए उसके करीब पहुंच गया और पेटीकोट को भी ना होता रे अपनी मां की दोनों टांगों को पकड़कर अपनी हथेली को उसकी चिकनी टांगों पर रगडते हुए ऊपर की तरफ बढ़ने लगा जैसे-जैसे हथेली ऊपर की तरफ जा रही थी वैसे वैसे आराधना नंगी होती चली जा रही थी और देखते ही देखते संजू ने अपनी मां की पेटीकोट को उसकी कमर तक उठा दिया था उसकी लाल रंग की चड्डी एकदम साफ नजर आ रहे थे जिसकी चूत वाले भाग पर उसका काम रस लगा हुआ था जिससे उसके आगे वाला भाग पूरी तरह से गिला हो चुका था,,,, अपनी मां की पेंटी के गीले पन पर अपनी हथेली रखकर संजू बोला,,,।

ऊहहहहह मम्मी तुम्हारी चूत बहुत पानी छोड़ रही है जल्दी इसका कुछ करना होगा वरना तुम ऐसे ही झड़ जाओगी,,,,

(अपने बेटे की मदमस्त कर देने वाली बात सुनकर लंबी आहें भरते हुए संजू की तरफ देखी और संजू अपनी मां की चड्डी के दोनों छोर को पकड़ कर उसे उतारने के लिए नीचे की तरफ खींचने लगा छोटी सी चड्डी भारी-भरकम गांड के नीचे दबी होने की वजह से आराधना को मालूम था कि उसे किस तरह से सहकार करना है इसलिए वह अपनी गांड को थोड़ा सा ऊपर की तरफ उठा ली ताकि उसका बेटा आराम से उसकी चड्डी को निकाल सके और उसे नंगी कर सके,,,, जैसे ही आराधना की गांड हल्की सी हवा में उठी संजू ने तुरंत फुर्ती दिखाता वह अपनी मां की चड्डी को नीचे की तरफ खींच लिया,,,, आराधना चाहती तो साड़ी के नीचे वह चड्डी ना भी पहनती लेकिन ना जाने क्यों उसे अपने बेटे के हाथों से अपनी चड्डी उतरवाने में कुछ ज्यादा ही आनंद आ रहा था,,,,

देखते ही देखते संजू अपनी मां की चड्डी को उसकी मोटी मोटी चिकनी नंगी टांगों से खींच कर बाहर कर दिया और उसकी चूत को नंगी कर दिया,,,, चड्डी के ऊपर जाने के बाद कमर के नीचे आराधना पूरी तरह से नंगी हो गई सिर्फ उसका पेटीकोट कमर से लिपटा हुआ था आराधना चित्र से जानती थी कि अब उसकी चूत उसके बेटे को साफ साफ नजर आ रही होगी और ऐसा हो भी रहा था संजू प्यासी नजरों से अपनी मां की चूत की तरफ देख रहा था जो की कचोरी की तरह एकदम फुल चुकी थी और एकदम लाल हो चुकी थी,,,, संजू से अब बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था देखते ही देखते संजू अपनी मां की दोनों टांगों के बीच आ गया और अपने होठों पर जीभ फिराते हुए बोला,,,,।

ओहहह मम्मी तुम्हारी चूत तो कचोरी जैसी भूल गई है आज इसकी सारी रसमलाई चाट जाऊंगा,,,।

(और इतना सुनते ही आराधना का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि उसे भी अपनी चूत चटवाने में मजा आने लगा था जब जब उसके बेटे की चीज उसकी चूत की गहराई में जाती थी तब तक वह अंदर ही अंदर सिहर उठती थी मदमस्त हो जाती थी मदहोश हो उठती थी,,,, इसलिए आराधना उस पल को फिर से महसूस करना चाहती थी उसका आनंद उठाना चाहती थी और अनजाने में ही अपने आप ही उसकी दोनों टांगे खुल गई जिसे वह ना चाहते हुए भी खोल दी थी यह देखकर संजू का जोश और ज्यादा बढ़ गया और वह अपनी मां की तरफ देख कर मुस्कुराया उसकी मां समझ गई थी कि संजू संजू क्यों मुस्कुरा रहा है और शर्म के मारे अपनी नजरों को दूसरी तरफ घुमा ली,,,,

अगले ही क्षण संजू की लप-लप आती हुई जीभ आराधना की चूत के ऊपरी किनारी पर हरकत करने लगी,,, जैसे ही संजू की‌‌ जीभ आराधना की चूत पर स्पर्श हुई वो एकदम से मचल उठी और अपने आप ही उसकी कमर हवा में उठ गई

और उसकी चूत की गुलाबी छेद से मदन रस का फव्वारा फूट पड़ा और बिल्कुल भी देर किए बिना संजू अपनी जीभ को उसकी चूत की गहराई में डाल कर उसके मदन रस को जीप के द्वारा अपने गले में गटकने लगा आराधना अपनी जवानी के जोश को संभाल नहीं पाई थी और अपने बेटे के हाथों मजबूर होकर झड़ चुकी थी बिना चुदवाए,,,,

आराधना के लिए यह पल बेहद अद्भुत था विस्मयकारी अचरज भरे इस पल में वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी अपने बेटे की मर्दाना ताकत को अच्छी तरह से समझ चुकी थी बिना उसकी चूत में लंड डाले ह अपनी जीभ और अपने हरकत के सहारे उसने उसका पानी निकाल दिया था,,, चूत से निकला मदन रसीला और नमकीन स्वाद का होने के बावजूद भी संजू के लिए तो क्या दुनिया के हर एक मर्द के लिए अमृत की धार की तरह थी,,, इसलिए तो संजु अपनी मां की चूत से निकले काम रस को अमृत की बूंद समझकर चाट रहा था,,,,, जैसी आराधना की चूत से उसका काम रस का फव्वारा फोटो वह अपनी नजरों को सीधा अपनी दोनों टांगों के बीच बढ़ा दी और अपने बेटे की हरकत को देखने लगी उसका बेटा बिना विचलित हुए उसके काम रस को मजे लेकर चाट रहा था यह देखकर उसके तन बदन में आग लग गई वह पूरी तरह से मदहोश हो गई और अपना एक हाथ ले जाकर अपने बेटे के सर पर रख दी और उसे अपनी चूत पर दबाने लगी,,,,।

झड़ जाने के बाद आराधना के बदन में थोड़ी सी शिथिलता आ गई लेकिन थोड़ी ही देर में संजू की मादक हरकत की वजह से एक बार फिर उसके उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी और संजू अपने दोनों हाथों को ऊपर की तरफ लाकर अपनी मां के दोनों खरबूजा को पकड़ लिया और उसे जोर से दबाना शुरू कर दिया उसे चारों तरफ से मजा देने की कोशिश में लग गया और आराधना को अपने बेटे के द्वारा आनंद ही आनंद प्राप्त हो रहा था,,,, संजू पागलों की तरह अपनी मां की चूची दबा रहा था और आराधना भी उत्तेजना बस अपने दोनों हथेली को अपने बेटे की हथेली पर रखकर उस का साथ देते हुए उसकी हथेली को दबाने लगी,,, अपनी मां की हरकत को देखकर संजू के तन बदन में जोश का लहर उठने लगा हुआ पूरी तरह से मदहोश होने लगा और जितना हो सकता था उतनी अपनी जीभ को अपनी मां की चूत की गहराई में डालकर उसकी मलाई को चाटने की कोशिश करने लगा था देखते ही देखते आराधना भी अपने बेटे का साथ देते हो अपनी दोनों टांगों को ऊपर की तरफ उठा ली थी और संजू भी लगातार अपनी मां की चूची को दबा दबा कर उसकी चूत का रस निकाल रहा था आराधना अपने हाथों का सहारा लेकर अपने पैर को पकड़कर थोड़ा सा और ऊपर उठा दी जिससे उसकी गांड की गोलाई बिस्तर से थोड़ा सा ऊपर उठ गई इस हालात में संजू को अपनी मां की चूत चाटने में और मजा आ रहा था बिस्तर पर बिछी चादर पर आराधना की चूत से निकले काम रस की बूंदें टपक रही थी जिससे चादर गीली हो रही थी,,,,, कुछ देर तक संजू अपनी मां की चूत को चाटता रहा और उसे गर्म करता रहा,,,, अब आराधना की बारी थी संजू को खुश करने की वैसे तो संजू अपनी मां से बेहद खुश था लेकिन संजू अपनी मां से भी मेहनत करवाना चाहता था और वह भी अपने लंड के लिए जिस तरह से उसने अपनी मां की चूत की सेवा की थी उसी तरह से संजू चाहता था कि उसकी मां भी उसके लंड से प्यार करें,,,, इसलिए वह अपनी मां की चूत पर से अपना मुंह हटा लिया और घुटनों के बल बैठ गया गहरी गहरी सांस लेते हुए अपनी मां की तरफ देख रहा था आराधना भी गहरी गहरी सांस ले रही थी और उसकी नजर संजू के खूंटी पर ही टिकी हुई थी यह देखकर संजू अंडरवियर के ऊपर से ही अपने लंड को पकड़ कर अपनी मां की तरफ दिखाते हुए बोला,,,

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अब मम्मी तुम्हारी बारी है,,,,

(उम्र के इस मोड़ पर पहुंच चुकी आराधना अच्छी तरह से जानती थी कि उसके बेटे का इशारा किस तरफ है वह भी अपनी बेटी को पूरी तरह से खुश कर देना चाहती थी जिस तरह की खुशी उसके बेटे ने उसे दिया था वैसे ही खुशी अपने बेटे को देना चाहती थी वैसे भी उसका भी बहुत मन कर रहा था अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड को अपने मुंह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने को,,,, इसलिए वह भी बिना देर किए उठी और घुटनों के बल बैठ गए अब थोड़ा-थोड़ा शर्म उसमें से दूर होने लगी थी क्योंकि वह भी जानती थी कि शर्म करने से मजा नहीं आएगा लेकिन थोड़ा बेशर्म बनना पड़ेगा अपने घुटनों के बल बैठकर वह धीरे से अपने बेटे के लंड की तरफ झुकी और अगले ही पल उसे अपनी लगन धर्म हथेली में दबोच ली एक गर्म है सांस संजू के तन बदन को झकझोर कर रख दिया और अगले ही पल आराधना के लाल लाल होठों से जैसे ही संजू का लंड इस पर सुबह संजू मानो हवा में उड़ने लगा हो और पूरी तरह से मस्त हो गया,,,, आराधना अपने बेटे के मोटे सुपाड़े को लॉलीपॉप की तरह चाट रही थी,,,, अभी वह केवल सुपाड़े वाले हिस्से को जीप सही चल रही थी अभी तक उसने अपने मुंह में ली नहीं थी इसलिए मदहोश होता हुआ संजू बोला,,,।

संजू अपनी मम्मी की चुदाई करता हुआ

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पूरा मुंह में लो मम्मी बहुत मजा आएगा,,,

(और अपने बेटे की बात मानते हुए आराधना धीरे-धीरे करके अपने बेटे के लंड को पूरी तरह से मुंह में भर लिया और उसे चूसना शुरू कर दी इस तरह का एहसास आराधना को पूरी तरह से मदहोश कर गया वह पूरी तरह से तृप्ति का एहसास लिए अपने बेटे के लंड को चाटना शुरू कर दी और संजू की धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया वह अपनी मां की नंगी चिकनी पीठ पर अपनी हथेली से सहलाता हुआ मजा ले रहा था,,, देखते ही देखते आराधना लंड चु‌साई में अपनी माहिरता दिखाते हुए उसे अपने गले तक उतार ली ऐसा करने पर संजू को भी बहुत मजा आ रहा था संजू धीरे-धीरे अपनी कमर हिला रहा था वह अपनी मां के मुंह को ही चोद रहा था,,,, कुछ देर तक यह सिलसिला चलता रहा संजू बार-बार आगे की तरफ झुक कर अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को दोनों हथेली में दबाकर उस पर चपत लगा दे रहा था,,, जिससे आराधना थोड़ा सा उछल जा रही थी,,, आराधना की चूत में आग लगी हुई थी वह जल्द से जल्द अपने बेटे का लंड को अपनी चूत में लेना चाहती थी लेकिन उसका बेटा था कि अभी उसकी चूत में डालने के मूड में शायद नहीं था इसलिए उसके मुंह को ही उसकी चूत समझ कर उसमें अंदर बाहर कर रहा था,,,,

लेकिन वह मौके की नजाकत को अच्छी तरह से समझता था वह जानता था कि अब समय आ गया था अपनी मां की चुदाई करने का इसलिए मैं धीरे से अपने लंड को अपनी मां के मुंह में से बाहर निकाल लिया और उसके कंधे को पकड़कर उसे धक्का देकर पीठ के बल लेटा दिया,,, आराधना अपनी सांसो को नियंत्रण कर रही थी और खुद ही अपनी दोनों टांगों को फैला दी वह जानती थी कि उसका बेटा उसकी चूत में लंड डालने वाला है आराधना को इस तरह से खुलता हुआ देखकर संजू का जोश बढ़ने लगा और वह अपने लंड को हाथ में लेकर हिलाता हुआ अपने लिए जगह बनाने लगा,,,,, संजू अपनी मां की दोनों टांगों के बीच आ गया और उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच कर उसकी आधी गांड को अपनी जांघों पर चढ़ा लिया और अपने लंड को उसकी गुलाबी चूत पर सटाते हुए बोला,,,।

अब देखना मम्मी कैसे तुम्हारी चूत में मेरा लंड सटासट जाता है,,,,।

और इतना कहने के साथ ही संजु अपनी मां की पनीयाई चूत में लंड डालना शुरू कर दिया चूत पूरी तरह से गिली थी इसलिए पहले ही धक्के में पूरा का पूरा लंड आराधना की चूत में समा गया और वैसे भी संजू ने अपनी मां की तीन चार बार चुदाई कर चुका था इसलिए उसकी चूत में संजू के लंड का सांचा बन चुका था इसलिए उसे अंदर लेने में आराधना को बिल्कुल भी दिक्कत नहीं हुई,,, देखते ही देखते संजू का पूरा लंड आराधना की चूत के अंदर समा गया,,,,, उत्तेजना के मारे आराधना का गला सूख रहा था वह हाथ की कोहनी के सहारे अपनी गर्दन को उठकर अपने बेटे के लंड को अपनी चूत के अंदर बाहर होता हुआ देख रही थी यह बेहद ही मनोहर दृश्य था जिसे देखकर आराधना मदहोश हुए जा रही थी ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था मां बेटे दोनों संपूर्ण रुप से नग्न अवस्था में थे केवल आराधना की कमर पर अभी भी उसका पेटीकोट बना हुआ था लेकिन जिसका कोई मतलब नहीं था क्योंकि औरत के खूबसूरत अंग जो कि परदो के अंदर होते हैं वह पूरी तरह से उजागर थे,,,,, देखते ही देखते संजू अपनी कमर हीलाता था वह अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया आराधना के जीवन की यह दूसरी रात थी जब वह अपने बेटे के साथ मर्यादा की दीवार गिरा कर उसके लंड को अपनी चूत में लेकर चुदवा रही थी,,, मान मर्यादा प्रतिष्ठा संस्कार रिश्ते नाते सब कुछ कमरे के बिस्तर पर तार-तार हो रहे थे,,,। संजू अपनी मां को चोदते हुए उसके खूबसूरत चेहरे को देख रहा था और यह देखकर आराधना शर्मा जा रही थी लेकिन बार-बार अपने बेटे की तरफ देख ले रही थी चुदवाते समय अपने बेटे की तरफ देखने में भी एक अजीब सा सुख मिलता है इस बात का एहसास उसे अब हो रहा था वह पूरी तरह से मदहोश हो गई थी उसका चेहरा उत्तेजना से लाल हो चुका था उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह छतिया पर इधर-उधर लोट रही थी,,,,,।

टांग उठा क आराधना की चुदाई

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दीवार में टंकी घड़ी आर में 3:00 बज रहे थे,,, 12:00 बजे के करीब संजीव कमरे में आया था और आराधना की चूत में लंड डालते डालते तीन बन चुका था यह 3 घंटे कैसे गुजर गए पता ही नहीं चला था और अभी भी दोनों की प्यास बुझी नहीं थी संजू कभी अपनी मां की कमर दोनों हाथों से पकड़ लेता तो कभी अपनी मां की छातियों को जोर से दबा देता तो कभी उसके ऊपर लेट कर उसके होंठों को अपने फोटो में भरकर चूसना शुरु कर देता लेकिन इस दौरान भी उसकी कमर लगातार हिल रही थी,,,,फच‌ फच की आवाज से पूरा कमरा गूंज रहा था और उस आवाज में दोनों मां-बेटे पूरी तरह से डूब चुके थे,,,, आराधना की चौड़ी टांगों को संजू दोनों हाथों से पकड़कर उसे आपस में सटा दिया और उसे अपने कंधों पर रख दिया इस तरह से चोदने पर उसकी मां की चूत थोड़ा और ज्यादा कसी हुई महसूस हो रही थी और ऐसा चोदने में उसे भी मजा आ रहा था और चुदवाने में आराधना को भी अपने बेटे के लैंड की ताकत को अच्छी तरह से समझ चुकी थी बिना थके बिना हारे वह उसका पानी निकाल चुका था लेकिन अभी तक खड़ा का खड़ा था,,,,, आराधना को इस बात का अहसास हो रहा था इतने वर्षों में उसने कभी इस बारे में सोचे नहीं थे की चुदाई कितनी लंबी चलनी चाहिए वह अपने पति से जब शुरुआती थी तो ज्यादा से ज्यादा 5 मिनट में ही व ढेरों जाता था और आराधना को यही लगता था कि शायद इसी तरह से चुदाई होती है लेकिन संजू से रिश्ता बनाने के बाद उसे इस बात का अच्छी तरह से एहसास हुआ कि वाकई में चुदाई किसे कहते हैं जो कि एक 1 घंटे तक बिना थके चूत में अंदर बाहर करके उसका खुद का दिन भर पानी निकालकर अपना एक बार झड़े उसे ही असली में चुदाई कहते हैं जो कि उसका बेटा बराबर उसे यह सुख दे रहा,,,,5 मिनट की चुदाई में आराधना कभी भी तृप्ति का एहसास नहीं कर पाई थी वहां अक्सर बिस्तर पर प्यासी ही रह जाती थी लेकिन अपनी व्यथा को शायद अपनी किस्मत समझ कर वह अपने पति से अपने मन की बात कभी कह नहीं पाई थी लेकिन इस समय उसे कहने की कोई जरूरत नहीं थी क्योंकि अब वह पूरी तरह से एक मर्दाना हाथों में थी जो कि अपने मर्दाना ताकत से उसकी चूत का रस निचोड़ रहा था,,,

चररमरर की आवाज पलंग से आने लगी थी संजू के धक्के इतनी तेज थी कि पलंग चरमरा रही थी,,, लेकिन फिर भी समझो रुकने का नाम नहीं ले रहा था अपने वैवाहिक जीवन में अपने पति के द्वारा इस तरह की हिम्मत बिस्तर पर आराधना ने कभी देखी नहीं थी जिस तरह की हिम्मत संजू दिखा रहा था आराधना अपनी चूत को बड़े गौर से देख रही थी इतना मोटा तगड़ा लंड अपनी चूत में बड़े आराम से अंदर तक ले ले रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कितना लंबा लंड उसकी चूत की गहराई में खो जा रहा था और उसका हर तक का आराधना को अपने बच्चेदानी पर ठोकर मारता हुआ महसूस हो रहा था इससे वहां और ज्यादा मदहोश हो जा रहे थे कुछ देर तक संजू इसी तरह से अपनी मां को चोदता रहा लेकिन अभी भी उसका पानी निकलने का नाम नहीं ले रहा था,,,, इसलिए संजू आसन बदलना चाहता था और वह अपने लंड को अपनी मां की चूत से बाहर खींचकर अपनी मां को घोड़ी बनने के लिए बोला उसकी मां जानती थी कि अब उसे क्या करना है इसलिए अपने बेटे की आज्ञा का पालन करते हो वह तुरंत अपने घुटनों के बल और हाथ की कोनी केबल अपनी गांड हवा में उठाकर झुक गई अपनी मां की गोरी गोरी बड़ी बड़ी गांड को देखकर संजू के लंड का कड़क पन और ज्यादा बढ़ने लगा संजू से अपनी मां की गोरी गोरी गांड देखकर रहा नहीं गया और वह दो चार चपत अपनी मां की गोरी गोरी गाल पर लगा दिया जिससे उसकी गोरी गांड एकदम टमाटर कि तरह लाल हो गई,,,,।

अपनी मां के पिछवाड़े को देखकर संजू का जूस और ज्यादा बढ़ गया और वह अपनी मां की कमर पकड़कर उसकी गुलाबी छेद में फिर से लंड को डाल दिया और चोदना शुरू कर दिया पीछे से चोदने में संजू को कुछ ज्यादा ही मजा आता था और आराधना भी अपने बेटे के लंड को अपनी चूत की गहराई तक महसूस कर रही थी वैसे तो वह चाहे जिस आसन में चुदवाती थी उसके बेटे का लंड उसकी बच्चेदानी तक जरूर पहुंचता है क्योंकि बड़ा कुछ ज्यादा ही था उसका लंड,,,,, झुकने की वजह से आराधना के दोनों दशहरी आम नीचे लटकने लगे और संजू तुरंत अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां के दशहरी आम को थाम लिया और उसे दबाना शुरू कर दिया मोटी मोटी जांघों से संजू की जाने टकराने से एक अजीब सी ‌ठाप की आवाज आ रही थी जिससे पूरा कमरा मधुर संगीत में गूंज रहा था,,,,,

आहहहह आआआहहह हर धक्के के साथ आराधना के मुंह से इस तरह की आवाजें आ रही थी दोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप होने दी थी लेकिन दोनों अपने मैं पूरी तरह से मदहोश हो चुके थे,,,, संजू का लंड मुसल कि‌ तरह था जो कि ओखली में जाने के बाद पूरी तरह से टूटने के बाद एक ही बाहर निकलने वाला था,,,,, लेकिन अब लगता था दोनों चरमसुख की तरफ आगे बढ़ चुके थे क्योंकि दोनों की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी आराधना गहरी गहरी सांस ले रही थी और संजू भी जोर जोर से धक्का लगाना शुरू कर दिया था संजू अपनी मां के दोनों कंधों को पकड़कर अपनी कमर का सहारा दे रहा था वह अपनी कमर को बड़ी तेजी से आगे की तरफ ले जाता था जिससे संजू का मोटा तगड़ा लंबा लंड सब कुछ चीरता हुआ बच्चेदानी से जा टकराता था ,,,,, तभी आराधना मदहोश होते हुए बोली,,,,।

आहहह आहहहह संजू मुझे कुछ हो रहा है,,,आहहह आहहहह ऐसा लग रहा है कि मैं हवा में उड़ रही हूं,,ओहहहह संजू,,,,

(संजू अच्छी तरह से समझ गया था कि उसकी मां का पानी निकलने वाला है और वह भी झड़ने वाला था इसलिए बिना कुछ बोले अपनी मां की कंधों को जोर से पकड़ कर अपनी कमर जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया था और देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ना शुरू हो गए संजू अपनी मां की पीठ के ऊपर ढेर हो गया और आराधना अपनी गहरी गहरी सांस लेने लगी,,,, आराधना की चूत उसके खुद के और संजू के काम रस में पूरी तरह से डूब गई और बाहर की तरफ छलकने लगी,,,, कुछ देर बाद शांत होने के बाद संजू अपने लंड को अपनी मां की चूत से बाहर निकाला और उसके बगल में ही पीठ के बल खेर हो गया और आराधना भी गहरी सांस लेते हुए पीठ के बल लेट गई,,,,।
 
संजू और आराधना का अब रोज का हो चुका था आराधना को अब अपने बेटे के बगैर रात गुजरती नहीं की और ना ही संजू का मन अपनी मां को छोड़कर कहीं और लग रहा था रोज रात को दोनों वासना का नंगा नाच खेलते थे मां बेटे के बीच की सारी दीवारें टूट कर बिखर चुकी थी दोनों के बीच के पवित्र रिश्ते तार-तार हो चुके थे दोनों मां बेटे से औरत और मर्द बन चुके थे जो कि एक दूसरे के बदन से अपने लिए सुख खोज रहे थे,,,, रोज रात को समझो अपनी बहन की मदहोश कर देने वाली जवानी से खेलने के बाद उसके गहरी नींद में होते ही अपने कमरे से निकलकर अपनी मां के कमरे में चला जाता था और रोज रात को उसकी मां अपने दरवाजे पर कुंडी ना लगाकर अपने बेटे को आमंत्रण देती थी और अपनी दोनों टांगे खोल कर उसका स्वागत करती थी संजू पूरी तरह से अपनी मां की रसीली चूत में डूब चुका था,,,, उसकी नजरों में उसकी मां से ज्यादा खूबसूरत और सेक्सी औरत इस धरती पर और कोई नहीं थी,,,,,,, धीरे-धीरे अनुराधा भी अपने बेटे के साथ खुलने लगी थी और इस खेल का पूरा मजा ले रही थी,,,,, वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसके जीवन में ऐसा समय भी आएगा जब उसके लिए उसका बेटा ही उसके लिए एक पति प्रेमी और मर्द की जरूरत पूरी करेगा,,,,, अब उसे अपने बेटे से संपूर्ण संतुष्टि प्राप्त होती थी वरना चुदाई के असली सुख को वह जानती ही नहीं थी,,,,

संजू अपने काम क्रीड़ा का असर अपनी पढ़ाई और कोचिंग क्लास पर बिल्कुल भी पडने नहीं देता था,,,, वह रोज समय से अपने कॉलेज जाता था और शाम को कोचिंग क्लास ज्यादा था,,,, जब से वह मनीषा के साथ थोड़ा बहुत शारीरिक रूप से खुला शुरू किया था तब से वह रोज किसी न किसी बहाने मनीषा के अंगों से छेड़खानी कर लेता था और मनीषा को भी संजू किए छेड़खानी बहुत अच्छी लगती थी मनीष अच्छी तरह से जानते थे कि एक न एक दिन जरूर वह अपना तन भी संजू को सौंप देगी और उस पल का मनीषा को बेसब्री से इंतजार था वह इतनी आसानी से अपना कौमार्य संजू के हाथों चुदवाना नहीं चाहती थी वह अपने कौमार्य भंग को भी यादगार बनाना चाहते थे जैसा कि एक औरत के लिए उसकी शादी की पहली रात मतलब की सुहागरात होती है इसी तरह से वह संजू के साथ अपने जीवन का सर्वप्रथम संभोग सुख यादगार बनाना चाहती थी,,,,।

रोज रात को संजू अपनी मां की चुदाई करने उसके कमरे में चाहता था लेकिन इस बात की भनक अभी तक मोहिनी को बिल्कुल भी नहीं हुई थी अगर मोहिनी को इस बात का पता भी चल जाता तो वह बहुत खुश होती लेकिन अभी वह किस राज से बिल्कुल अनजान थी संजू खुद उसे इस राज से अनजान किए हुए था क्योंकि उसके दिमाग में कुछ और चल रहा था और वह जानता था कि इसका अभी ठीक समय आया नहीं है,,,,

समय अपनी गति से गुजर रहा था,,, और मां बेटे दोनों की कामलीला परवान चढ़ रही थी,,, ऐसे ही एक दिन दोपहर के समय दोनों मां बेटे कमरे में बैठे हुए थे,,, आराधना आज ऑफिस से जल्दी घर वापस आ गई थी इसलिए घर पर उसे संजू मिल गया था और संजू को देखते ही वह खुश हो गई थी,,,, और आराधना हाथ मुंह धो कर फ्रेश होकर अपने कमरे में मुस्कुराते हुए चली गई और पीछे पीछे संजू भी अपनी मां के कमरे में पहुंच गया,,, जहां पर वह अपनी बाहों में अपनी मां को लेकर बिस्तर पर बैठ गया था और उसके खूबसूरत रेशमी बाल को अपनी उंगलियों से से लाते हुए उससे गुफ्तगू कर रहा था इस समय आराधना अपने आप को दुनिया की सबसे खुद किस्मत औरत समझ रही थी,,,, बेटे के रूप में उसे एक प्रेमी और एक पति दोनों का सुख प्राप्त हो रहा था,,,, बातों की शुरुआत करते हुए अपने नाखूनों को नाखून से ही कुरेदेते हुए आराधना बोली,,,।

संजू में कभी सोची नहीं थी कि तेरे और मेरे बीच इस तरह का रिश्ता बन जाएगा,,,

तो तुम इस रिश्ते से खुश नहीं हो,,,

नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है,,, पहले पहले मुझे बहुत ही अजीब लग रहा था एक बेटा अपनी मां के साथ ऐसा कैसे कर सकता है और एक मां अपने बेटे के साथ इस तरह का गंदा रिश्ता कैसे स्थापित कर सकती है लेकिन धीरे-धीरे ना जाने क्यों इस खेल में मुझे भी अच्छा लगने लगा पता नहीं यह मेरी जरूरत थी या मजबूरी कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,,,।

तुम्हें ज्यादा सोचने समझने की जरूरत नहीं है जैसा चल रहा है वैसा चलने दो और इसी में मजा है,,,, जो कुछ भी हुआ इसमें हम दोनों की मजबूरी और जरूरत दोनों ही थी,,,, तुम शायद नहीं जानती बातों ही बातों में मोहिनी ने आशंका जता दी थी कि तुम किसी और मर्द के साथ घूमती हो,,,

क्या,,,?

मतलब की जो भी हो उसके मन में इस बात का डर था कि कहीं दूसरी औरतों की तरह तुम भी कहीं सुख खोजने के चक्कर में दूसरे मर्दों का सहारा ना ले लो और ऐसे में बदनामी होने का डर तो बना ही रहता है और यह डर मोहिनी के मन में था उसने आखिर कार खुलकर तो नहीं बोली लेकिन जो कुछ भी उसने कहीं उससे मैं समझ गया था कि वह क्या कहना चाह रही थी और यह बात मैंने तुम्हें बताया भी था मैं भी पहले ही नहीं चाहता था कि मैं तुम्हारे साथ यह सब करु लेकिन तुम्हारे हालात देखते हुए मैं मजबूर हो गया था ऐसा करने के लिए,,,, सच कहूं तो मुझे भी डर था कि कहीं तुम अपना खूबसूरत जिसमें किसी दूसरे मर्दों को ना सौंप दो क्योंकि यह तो हर एक औरत की जरूरत होती है,,,,

अच्छा तो तुम यह सोचे कि दूसरे लोग मजा ले इससे अच्छा तुम क्यों ना इस मौके का फायदा उठाओ,,,(आराधना मुस्कुराते हुए बोली)

मौका नहीं,,,, मौका नहीं तुम समझ नहीं रही हो जब मैंने अपने परिवार और खास करके तुम्हारी हालात पर गौर किया तो ना जाने क्यों तुम्हें देखने पर मेरे बदन में कुछ कुछ होने लगा था इससे पहले मुझे कुछ होता नहीं था लेकिन पापा के जाने के बाद कुछ महीनों तक वह घर पर नहीं आए तब मेरे मन में यह सब ख्याल आने लगा और मैं तुम्हें जब भी देखने लगा तब तक एक बेटे की नजर से नहीं बल्कि एक मर्द की नजर से देखना शुरू कर दिया और सच पूछो तो तुम बला की खूबसूरत हो,,,

अच्छा,,,!(अपने बेटे की तरफ मुस्कुराकर देखते हुए और फिर वापस अपनी नजरें नीचे झुका कर नाखून से नाखून को कुरेदने लगी,,,)

हां मम्मी ने सच कह रहा हूं तुम बहुत खूबसूरत हो मुझे तो पापा की किस्मत पर उनकी सोच पर तरस आता है कितनी खूबसूरत स्वर्ग की अप्सरा जैसी औरतों को छोड़कर बाजारू औरतों के पीछे अपना समय अपना पैसा और अपना इज्जत के साथ साथ जीवन भी बर्बाद कर रहे हैं लेकिन सच कहूं तो एक तरह से अच्छा ही होगा अगर पापा होती तो शायद मैं तुम्हारे पास ना होता हां होता लेकिन इस तरह से नहीं जैसा कि अभी,,,(ब्लाउज के ऊपर से चूची को दबाते हुए)

आहहह क्या कर रहा है,,,,?

कुछ नहीं,,,, अच्छा एक बात बताओ मम्मी,,, पापा का लंड से तुम बहुत बार अपनी चूत में ली होगी लेकिन क्या मेरे जितना मजा पापा दे पाते थे,,,

बिल्कुल भी नहीं रे,,,,, सच कहूं तो मुझे दो पता ही नहीं था कि कोई इस तरह से भी औरत को चोदता है,,,,

मतलब,,,,(ब्लाउज का बटन खोलते हुए)

मतलब की तेरे पापा बस साड़ी उठाकर मेरे दोनों कानों के बीच आ जाते हैं और ज्यादा से ज्यादा दो-तीन मिनट बस फिर हांफने लगते थे और मुझे भी ऐसा ही लगता था कि इसे ही चुदाई कहते हैं सच कहूं तो मुझे जरा भी मजा नहीं आता था या मजा आना शुरु होता था तभी खेल ही खत्म हो जाता था,,,,

मतलब यही कि मम्मी तुमने अब तक पापा से चुदाई का असली सुख प्राप्त ही नहीं कर पाई अच्छा ही हुआ कि मैं पापा की जगह ले लिया और तुम्हें अपने मोटे और लंबे लंड से चुदाई का जबरदस्त मजा देने लगा वरना तुम भी जिंदगी ऐसे ही गुजार देती,,,

ऐसा क्यों सोच रहा है तू नहीं आता तो कोई और आ जाता,,, वैसे भी मर्दों की कमी है क्या,,,,

अच्छा मेरी जान तो तुम दूसरे से चुदवाना चाहती हो,,(ब्लाउज का आखरी बटन खोलते हुए संजू बोला)

हां तो इसमें क्या हो गया तूने ही तो मेरे बताने में चुदाई का आग लगा है तेरे लंड से ना सही दूसरे के लंड से,,,,।

हाय मेरी जान तुम्हारी मुंह से लंड शब्द सुनकर मेरा लंड खड़ा हो जाता है,,,, सच कहूं तो तुम्हारी चूत में किसी और का लंड जाए यह मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता,,,

अगर किसी और का चला गया तो,,,

तो मैं उसका लंड ही काट दूंगा,,,,(ब्लाउज के बटन को खोलकर ब्रा के ऊपर से ही अपनी मां की बड़ी बड़ी चूची को दबाते हुए,,,,,,, और अपने बेटे के मुंह से लंड काटने वाली बात सुनकर बहुत जोर जोर से हंसने लगी और बोली,,)

बाप रे मेरी चुदाई का ऐसा बदला लेगा तु,,,

तो क्या मैं उसकी ऐसी हालत कर दूंगा कि वह अपनी बीवी को भी चोद नहीं पाएगा,,,,,,,

(दोनों मां-बेटे आपस में बहुत ज्यादा ही खुल चुके थे दोनों आपस में चुदाई के बारे में खुलकर बातें करते थे आराधना शुरू शुरू में शर्म महसूस करती थी लेकिन धीरे-धीरे वह भी एकदम बेशर्म बन चुकी थी और अपने बेटे के साथ चुदाई की बातें करके भरपूर मजा लेती थी संजू की हरकत से आराधना के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी,,,, अभी मोहिनी के आने में समय था और संजू अपने हाथों से अपनी मां का ब्लाउज खोल कर ब्रा में से उसकी दोनों चूचियों को बाहर निकाल लिया था,,, और उसे अपनी हथेली में लेकर जोर जोर से दबा रहा था संजू की हथेली में आराधना की चुचियां खरबूजे से कम नहीं लग रही थी जिसे दबाने में संजू को बहुत ज्यादा मजा आ रहा था,,,, कुछ ही देर में आराधना की हंसी गायब हो गई और उसके होठों पर मदहोशी का असर नजर आने लगा,,,,,, उसकी आंखें बंद होने लगी और वह उतेजना मैं डूबने लगी,,,, और गहरी सांस लेते हुए बोली,,,।)

संजू मेरे मन में एक बात आ रही है,,,

क्या,,,?(अपनी मां की गोरी गोरी गर्दन पर अपनी होठ रख कर उसे चुंबन करते हुए और चूचियों को जोर-जोर से दबाते हुए संजू बोला)

यही कि अगर तू मेरे साथ एक बेटे की तरह होता और जिस हालात में में जी रही हूं मतलब की रात को बिस्तर पर अकेले ही तो मेरा झुकाव किसी दूसरे की तरफ हो जाता है और वह मुझे खुश करने के लिए ना जाने कहां कहां ले जाता घुमाने ले जाता पार्क में ले जाता मूवी दिखाने ले जाता और यहां तक कि मुझे गेस्ट हाउस में भी ले जाता,,,।

(अपनी मां की बात सुनकर संजू समझ गया था कि वह क्या कहना चाह रही है इसलिए वह उत्तेजना के मारे अपनी मां की चूची को जोर से दबाते हुए बोला,,,)

वह तो मैं भी कर सकता हूं,,,

क्या कर सकता है,,,?(गहरी सांस लेते हुए आराधना बोली)

तुम्हें घुमा सकता हूं शॉपिंग करा सकता हूं,,,

और,,,!

और तुम्हें पार्क में ले जा सकता हूं आइसक्रीम खिला सकता हूं मुवी दिखा सकता हूं,,,,

और क्या कर सकता है,,,?

गेस्ट हाउस,,,(गर्दन के ऊपरी सतह पर अपने होंठ रखते हुए जिससे आराधना एकदम से मचल उठी,,) तुम्हें गेस्टहाउस देख ले जा सकता हूं जैसे रंडी को ले जाते हैं चोदने के लिए वैसे मैं तुम्हें भी गेस्ट हाउस में ले जाकर के गेस्ट हाउस के कमरे में पूरी तरह से नंगी करके तुम्हें चोद सकता हूं,,,

तो ले चल संजू मुझे गेस्ट हाउस,,,(एकदम से मदहोश होते हुए आराधना बोली) गेस्ट हाउस में ले जाकर मुझे चोद मैं भी गेस्ट हाउस में तुझे से चुदवाना चाहती हूं एक अनजान औरतों की तरह एक रंडी की तरह मानव की तो मुझे पैसे चुरा कर ले जा रहा हो,,, मैं भी गेस्ट हाउस का मजा लेना चाहती हूं,,,,

क्या सच में मम्मी,,,

हां संजू मैं तेरे साथ गेस्ट हाउस में चलना चाहती हूं मैं देखना चाहती हूं कि इस टॉवर्स में औरतें किस तरह से चुदवाती है अनजान नजरों के बीच अनजान कमरे में और वहां के लोगों को इस बारे में पता होगी तो मुझे वहां पर चोदने के लिए लाया, है,,,।

ओहहहहह मम्मी तुमने तो यह कहकर मेरे लंड पर कहर बरसा रही हो,,,,(इतना कहने के साथ ही संजू अपनी मां के कदमों को पकड़कर अपनी तरफ घुमा दिया और उसके लाल-लाल होठों पर अपने होंठ रखते हुए बोला,,) सच में बहुत मजा आएगा जब भी तुम्हें देखता उसने जाऊंगा तुम्हें वहां से जाकर चोदुंगा,,,,,(और इतना कहने के साथ ही संजू पूरी तरह से मदहोश हो गया हो अपनी मां के लाल लाल होठों का रसपान करते हुए उसे बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उसके ऊपर पसर गया अब वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था गेस्ट हाउस वाली बात से दोनों मां बेटी पूरी तरह से मदहोश हो चुके थे दोनों के पास कपड़े उतारने का समय बिल्कुल भी नहीं था और इसीलिए संजू अपनी मां की साड़ी को बिना उतारे उसे ऊपर की तरफ खींच कर उसकी कमर तक उठा दिया और आराधना भी अपनी भारी-भरकम कांड के नीचे दबी साड़ी को ऊपर करने के लिए अपनी गांड को पर की तरफ उठा दी और संजू भी पूरी तरह से साड़ी को कमर के इर्द-गिर्द इकट्ठा कर दिया कमर के नीचे पूरी तरह से आराधना नंगी हो चुकी थी केवल उसकी चूत को छुपाने के लिए उसकी लाल रंग की पैंटी थी जिसे संजू ने बिना उतारे उसके नीचे वाली किनारी को खींचकर बगल में कर दिया और आराधना की कचोरी जैसी फूली हुई चूत का सहारा लेकर उसकी पैंटी की किनारी उस जगह पर एकदम स्थिर हो गई और अपनी मां की पनियाई हुई चूत में,,, वह अपने लंड को घुसाने के लिए अपनी पेंट को भी नहीं उतारा बल्कि चैन खोलकर उसमें से बड़ी मशक्कत करने के बाद अपने मोटे तगड़े लंड को बाहर निकाल लिया और उसी तरह से अपने लंड को अपनी मां की बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया दोनों पूरी तरह से मदहोश हो चुके थे और संजू पहले धक्के से पूरी तरह का जोर लगा था वह अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया साथ ही बुरा के बाहर निकली हुई चूची को दोनों हाथों में दशहरी आम की तरह पकड़ कर जोर जोर से दबाता हुआ वह अपनी कमर हिला रहा था आराधना भी अच्छी तरह से समझ रही थी कि गेस्ट हाउस का जिक्र होते ही उसके बेटे में दोगुना जोश आ गया था और उसी जोश का मजा वह पूरी तरह से ले रही थी आराधना के कमरे में गर्म सिसकारियां गूंज रही थी जिस का मजा लेते हुए संजू अपनी मां की चूत में लंड पेल रहा था,,,,।

आहहह आहहहह संजू मेरे बेटे मेरे राजा मुझे ले चलेगा ना गेस्ट हाउस में,,,,

हां मेरी रानी तुझे रंडी बनाकर गेस्टहाउस ले जाऊंगा और वहां पर तुझे पैसे देकर चोदूंगा,,,,

आहहह बहुत मजा आएगा मेरे राजा,,,

हां मेरी रानी बहुत मजा आएगा तुझे रंडी बनाकर तेरे मुंह में अपना लंड डालूंगा तेरी गांड के छेद को चाटुंगा और तुझे घोड़ी बनाकर चोदुंगा,,,

हाय मेरे राजा तूने यह कहकर मेरे बदन में आग लगा दिया है अब जल्दी-जल्दी अपने लंड को मेरी चूत में डालकर जोर-जोर से अंदर बाहर कर तेज धक्कों के साथ ही मुझे चुदवाने में मजा आता है,,,,आहहहह आहहहह हां ऐसे ही मेरे राजा,,,,

मेरी रंडी तब तैयार रहना रविवार को तुझे तो चलूंगा गेस्ट हाउस पहले तुझे मूवी दिखाऊंगा और मूवी दिखाने के बाद तुझे गेस्ट हाउस ले जाकर चोदूंगा,,,

ऊमममम आहहहह मेरा निकलने वाला है और जोर जोर से धक्के लगा,,,,आहहहह आहहहरह

तू चिंता मत कर मेरी रानी तुझे किनारे पर पहुंचाने के बाद एक ही मैं सांस लूंगा देख अब मैं तेरी कैसी चुदाई करता हूं,,,

(संजू समझ गया था कि उसकी मां का पानी निकलने वाला है इसलिए वह बिल्कुल भी देर किए बिना अपने दुखों को रफ्तार दे दिया था और अपनी मां की जबरदस्त चुदाई कर रहा था जांघों से जांघे टकरा रही थी और उसकी आवाज से पूरा कमरा गूंज रहा था,,,, आराधना अपने कमरे में अपनी ही बिस्तर पर अपने बेटे के साथ चुदवा रही थी अपने बेटे के तेज धक्कों को वह सहन नहीं कर पा रही थी और मस्ती में उसके मुंह से जोर जोर से चीख निकल रही थी जिसको सुनने वाला इस समय वहां कोई नहीं था पूरी पलंग चरमरा रही थी,,, इस तरह की पलंगतोड़ चुदाई उसे अपने बेटे से ही प्राप्त होती थी और थोड़ी ही देर में अपने बेटे के तेज झटकों के साथ ही दोनों एक साथ भला भला कर झड़ने लगे,,,,

वासना का तूफान पूरी तरह से थम गया था पूरा गर्म लावा अपनी मां की चूत में गिरा लेने के बाद राजू अपने लंड को अपनी मां की चूत से बाहर निकलता हुआ उसके बगल में ही पसर गया,,,,,, कुछ देर तक गहरी सांस लेते हुए आराधना भी वहीं पर चारों खाने चित लेटी रह गई थोड़ी देर बाद वह बिस्तर पर से उठ कर बैठ गई और धीरे से पलंग के नीचे रखकर खड़ी हो गई साड़ी उसके बदन से उतर कर नीचे गिर चुकी थी उसकी चुदाई करते समय ही संजू ने उसका ब्लाउज भी उतार फेंका था और इस समय वह केवल ब्रा और पेटीकोट में ही थी,,,,, और उसी हाल में वह कमरे से बाहर निकल गई और कुछ ही क्षण में संजू के कान में औरत के मूतने की आवाज उसकी मधुर सिटी साफ सुनाई देने लगी वह तुरंत बिस्तर पर उठ कर बैठ गया पर वह भी कमरे से बाहर आने के लिए जैसे कमरे के दरवाजे पर पहुंचा तो उसकी नजर सामने पड़ गई और उसकी मां बाथरूम में ना जाकर बाथरूम के बाहर ही बैठकर पेशाब कर रही थी उसकी गोरी गोरी नंगी गाड़ी एकदम साफ नजर आ रही थी एक बार फिर से यह नजारा देखकर संजू कैलेंडर में हरकत होने लगी और वह बिना कुछ बोले अपनी मां के पीछे जाकर बैठ गया जैसे वह बैठी थी वैसे वह भी मिल गया लेकिन जाने से पहले वह अपनी पेंट को उतारकर एकदम नंगा हो गया था और जैसे ही आराधना को अपने पीछे संजू के बैठने का एहसास हुआ तब तक बहुत देर हो चुकी थी संजू का मोटा तगड़ा लंबा लंड उसके पीछे से एकदम आगे की तरह पाकर उसकी बुर की छेद पर सुपाड़ा स्पर्श होने लगा था जिस पर आराधना के पेशाब की धार पढ़ रही थी वह एक तरह से अपने बेटे के लंड पर मुंह रही थी और यह एहसास संजू के बदन में एक बार फिर से उत्तेजना की चिंगारी को भड़का दिया,,, संजू इस मौके का फायदा उठाते हुए अपने लंड को हाथ से पकड़ कर उसके सुपाड़े को अपनी पेशाब करती हुई मां की चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया और साथ ही वह भी पेशाब करने लगा एक अद्भुत दृश्य नजारा कमरे के अंदर बाथरूम के पास में नजर आ रहा था जिसे देखने वाला कोई नहीं था लेकिन इसे महसूस करने के लिए दोनों मां बेटे पूरी तरह से फिर से उत्तेजित होने लगे,,,, संजू बैठे-बैठे ही अपनी मां की चूत में लंड डालने की कोशिश करने लगा और उसकी कोशिश कामयाबी होने लगी देखते ही देखते संजू के लंड का सुपाड़ा आराधना की चूत में प्रवेश कर गया लेकिन इससे ज्यादा आगे घुसाना मुश्किल हो रहा था तो उत्तेजना और मदहोशी के आलम में संजू उसी जगह पर थोड़ा पीछे की तरफ हो गया और अपने हाथ की कोहनी का सहारा लेकर एकदम से पीछे की तरफ लेट गया और आराधना भी जानती थी कि उसे क्या करना है वह तुरंत अपने घुटनों को मोड़ कर बैठ गई और अपने हाथ को नीचे की तरफ लाकर अपनी बेटी के लंड को पकड़ कर उसे वापस अपनी गुलाबी छेद में सटा दी और फिर अपनी भारी-भरकम गोल-गोल गांड को अपने बेटे के खड़े लंड पर रखना शुरू कर दिया और देखते ही देखते अपने बेटे के लंबे लंड को अपनी चूत की गहराई में छुपा लिया और फिर उसके ऊपर कूदना शुरू कर दी संजू अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां की भारी-भरकम गांड को दोनों हाथों में पकड़ लिया और उसे पकड़ कर अपने लंड पर ऊपर नीचे करने लगा दोनों पूरी तरह से मदहोश हो चुके थे देखते ही देखते आराधना बड़े जोरों से अपनी गांड को अपने बेटे के लंड के ऊपर पटक रही थी,,,, इस खेल में दोनों पूरी तरह से मदहोश और आनंदित हुए जा रहे थे इस समय इस खेल का पूरा कमाए आराधना के हाथों में था इसलिए वह जैसा चाहे वैसे अपनी गांड को हिला रही थी तभी जोर-जोर से तो कभी एकदम होले होले से अपनी गांड को हिलाते हुए अपने बेटे के लंड अपनी चूत में ले रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था मोटा तगड़ा लंड उसकी चूत की अंदरूनी दीवारों में रगड़ रगड़ कर अंदर बाहर हो रहा था,,,, इस एहसास से वह पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी एक बार फिर से आराधना की गरम सिसकारियां गुंजने लगी और कुछ ही देर में दोनों एक बार फिर से झड़ गए,,,

दोनों जिस हाल में थे दोनों को नहाना जरूरी था इसलिए दोनों बाथरूम में एक साथ घुस गए और अपने सारे कपड़े उतार कर नहाना शुरू कर दिए,,,

थोड़ी ही देर में दोनों नहा कर बाहर आ गए और अपने अपने कपड़े पहन कर एकदम दुरुस्त हो गए आराधना बहुत खुश थी क्योंकि रविवार को उसका बेटा उसे गेस्ट हाउस ले जाने वाला था एक नए अनुभव के लिए इसलिए वह चाय बनाने लगी,,,, चाय बन कर तैयार होती तब तक मोहिनी भी घर पर आ गई थी और तीनों एक साथ मिलकर चाय पिए और संजू कोचिंग क्लास के लिए निकल गया,,,।
 
संजीव को जितना इंतजार था रविवार का उससे कहीं ज्यादा व्याकुल और उत्सुक आराधना थी रविवार के लिए,,,वह अपने मन में,,, गेस्ट हाउस वाली बात को सोचकर कल्पना किया करती थी कि गेस्ट हाउस में वह कैसे अपने बेटे के साथ एक रंडी की तरह बर्ताव करेंगी वहां के लोग वहां के कर्मचारी उसके बारे में कैसी कैसी बातें सोचेंगे,,,, गेस्ट हाउस में साफ तौर पर गेस्ट हाउस के कर्मचारी उसे एक रंडी की समझेंगे जो पैसों के लिए किसी के भी सामने अपनी दोनों टांगे खोल देती है यही सोचकर उसके बारे में गलत गलत बातें सोच कर मजा लेंगे इन सब बातों को सोच कर आराधना कि तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फूट रही थी उसे एक अजीब सा नशा छा रहा था,,,,,,

मोहिनी अपने भाई क सामने गांड परोसिए हुए

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दोनों मां बेटों के बीच छेड़खानी लगातार जारी रहती थी मोहिनी की नजर से बच कर दोनों एक दूसरे के अंगों को पकड़ लेते थे दबा देते थे दबोच लेते थे और ऐसा करने में दोनों को अत्यधिक आनंद की प्राप्ति हो रही थी संजू चाहता तो अपनी बहन को सब कुछ बता सकता था लेकिन वह सही मौके के इंतजार में था वह जानता था कि जिस दिन मोहिनी को इस बात का पता चल जाएगा वह एक साथ अपनी बहन और अपनी मां दोनों की लेगा और वह भी एक ही बिस्तर पर एकदम नंगी करके एक साथ दो दो औरतों को चोदने का अनुभव लेने के लिए वह भी तड़प रहा था वह अपने मन नहीं करता ना करता था कि कैसे वह अपने मोटे तगड़े लंबे लंड को अपनी मां की बुर से बाहर निकाल कर अपनी मां की आंखों के सामने ही अपनी बहन की बुर में डालकर चोदेगा,,,,,,,, जैसे जैसे दिन करीब आ रहे थे वैसे-वैसे दोनों मां बेटों की तड़प बढ़ती जा रही थी,,, हालांकि संजू रोज अपनी मां के कमरे में जाकर रात भर उस की चुदाई करता था रोज उसकी चूत की सेवा करता था रोज से होठों से लगाकर उसके काम रस को चाटता था,,, और उसकी मां की पूरी तरह से बेशर्म बनकर अपने बेटे को एक औरत का भरपूर सुख देती थी उसके लंड को अपने मुंह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चुसती थी और कभी कभी पूरे काम क्रीड़ा की कमान अपने हाथों में लेकर अपने बेटे के लंड पर सवार हो जाती थी और अपनी भारी-भरकम गोलाकार गांड का जोर जोर से अपने बेटे के लंड पर ही पटकती थी,,,,, मोहिनी को बिल्कुल भी भनक तक नहीं थी कि उसके पीठ पीछे मां बेटे के बीच क्या चल रहा है कौन सी खिचड़ी पक रही है वह तो अपनी ही दुनिया में पूरी तरह से मस्त थी अपने भाई के साथ,,,,,,,

मोहिनी अपने भाई को खुस करते हुए

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ऐसे ही एक दिन आराधना रसोई घर में खाना बना रही थी और संजू रसोई घर में चला गया और जाते ही एक चपत अपनी मां की गांड पर लगा दिया,,, जिससे वो एकदम से चौक कर उछल गई,,,

ऊई मां,,,,, संजू,,,,,

क्या हुआ रानी गांड तो बहुत मस्त है तेरी,,,,

संजू,,,, क्या कह रहा है मोहिनी घर पर ही है वह सुन लेगी तो गजब हो जाएगा,,,

कुछ गजब नहीं होगा रानी,,,, चलती है क्या,,,?(एक बार फिर से अपनी मां की गांड पर चपत लगाते हुए)

हाय संजू पागल हो गया है क्या तू,,,,

तेरे हुस्न को देख कर तो कोई भी पागल हो जाए यह बड़ी बड़ी गांड,,,(दोनों हाथों से अपनी मां की गांड को पकड़ते हुए) देख कर ही लंड खड़ा हो जाता है और तेरी बड़ी बड़ी चूची,,,(पीछे से अपनी मां के बदन से एकदम से सटकर उसके ब्लाउज के ऊपर से ही चूची को पकड़कर दबाते हुए,,) एकदम खरबूजे की तरह मन करता है इसे मुंह में लेकर पीते रहुं,,,,,

(संजू की बाहों में आराधना छटपटाने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि रांची है किस तरह से बातें कर रहा है,,,)

क्या हुआ मेरी रानी दोगी नहीं क्या,,, तुम्हारी लेने के लिए मैं कितनी भी कीमत चुका सकता हूं,,,, बोल मेरी रानी चली कि क्या गेस्ट हाउस,,,

(गेस्ट हाउस का नाम सुनते ही आराधना के तन बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी और बना पीछे मुड़कर संजू की आंखों में देखने लगी तो संजू से आंख मारते हुए बोला,,,)

संजू अपनी बहन को छोड़ता हुआ

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बोलना मेरी रानी चलेगी क्या तेरी जैसी खूबसूरत औरत मैंने आज तक देखा नहीं इसलिए मैं तेरी लेना चाहता हूं बोल देगी मुझे,,,,,,

(आराधना को सब कुछ समझ में आ गया था उसका बेटा उसके साथ एक रंडी की तरह बात कर रहा था इसलिए वह भी पूरी तरह से एक रंडी के चरित्र को अपने अंदर उतार कर अपने बेटे को धक्का देते हुए बोली,,)

चल‌ ऐ हरामि,,,, मुफ्त का माल समझा है क्या जो हाथ लगा रहा है ,,,, मुझे सिर्फ हाथ लगाने के लिए ही कितने लोग तड़पते रहते हैं पता है तुझे और तू सीधा आकर मेरी गांड पर चपत लगा दिया,,,,, वह तो आज मेरा मूड थोड़ा अच्छा है वरना तेरा हाथ तोड़ कर तेरे पिछवाड़े में डाल देती,,,,

अरे अरे एक धंधे वाली होकर इस तरह की बातें कर रही है,, मुफ्त में नहीं पैसे देकर लूंगा तेरी,,,,,,

(अपने बेटे की बात सुनकर आराधना मन ही मन मुस्कुरा रही थी,,,। और साथ में खाना भी बना रही थी संजीव ठीक उसके पीछे खड़ा था,, अपने बेटे की पैसे वाली बात सुनकर आराधना बोली)

संजू और मोहिनी

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पैसे का रोब किसको झाडता है रे,,, मेरी टांगों के बीच नोट छापने की मशीन है समझा तेरे जैसे कितने आए और कितने गए,,,,

कितने भी आए हो लेकिन मेरे जैसा तूने आज तक नहीं देखी होगी,,, तेरी चूत में इतना दम नहीं है कि मेरे लंड को झेल सके,,, एक ही धक्के में तेरा पूरा पानी निकाल दूंगा,,,

अच्छा बड़ा नाज है तुझे अपने लंड पर तो मेरी भी चूत किसी से कम नहीं है समझा जाते ही अपनी चूत की गर्मी से तेरे लंड को पिघलाकर तेरा पानी निकाल दूंगी,,,,

ऐसी चूत वाली आज तक हुई नहीं जो मेरा लंड अपनी चूत में लेते ही मेरा पानी निकाल दो समझी जब तक मैं दो बार पानी में निकाल दूं तब तक मेरा खुद का पानी नहीं निकलता,,,

अच्छा यह बात है कितना बड़ा है तेरा,,,

देख कर लेगी क्या,,,, चल मेरे साथ तुझे पता चल जाएगा,,,

मोहिनी एकदम छुडवासी होकर

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कितना देगा,,,(अब आराधना पूरी तरह से मूड में आ चुकी थी इसलिए वह किचन के फ्लोर को पकड़कर उस पत्थर पर अपनी गांड दिखाकर संजू की तरफ मुंह करके खड़ी हो गई थी और हल्के हल्के अपनी कमर को हिला रही थी संजू तू अपनी मां का यह रूप देखकर पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था और अपनी मां के सवाल का जवाब देते हुए बोला)

कितना लेगी बोलना तुझे चोदने के लिए मुंह मांगी कीमत दूंगा,,,

5000,,,,(कुछ सोचकर आराधना बोली तो संजू मुस्कुराता हुआ बोला)

तुझे मैं 10000 दूंगा लेकिन जब तक मेरा मन नहीं भरेगा तब तक तुझे जाने नहीं दूंगा,,,,

चल मंजूर है राजा,,,, मैं भी तो देखूं अपने लंड पर इतना घमंड करने वाले मैं कितना दम है,,,

बोल तो अभी दम दिखा दुंंं

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अभी नहीं मौका आने दे तब दिखा देना,,,,

(ईस तरह के वार्तालाप से मां बेटे दोनों पूरी तरह से उत्तेजित हो चुके थे आराधना तो सचमुच पर अपने आप को अपने बेटे के सामने रंडी समझने लगी थी,,, जो एक ग्राहक से मोलभाव कर रही थी,,, संजू मौके का फायदा उठाते हुए पूरी तरह से अपनी मां से एक ग्राहक की तरह ही बात कर रहा था मानो कि सचमुच में उसकी माय कर दिया जो अपना बदन बेच कर पैसे कम आती है इसलिए वह बोला,,)

अच्छा एक बात बता तेरी चूत पर बाल है कि नहीं,,,

(अपने बेटे की यह बात सुनकर आराधना का दिल जोरों से धड़क रहा था,,, फिर भी वह अपने बेटे को एक रंडी की तरह ही जवाब दी,,)

तुझे कैसी पसंद है,,,राजा,,,

एकदम चिकनी बाल का नाम तक ना हो क्रीम लगाकर साफ करके ही आना,,,

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तू चिंता मत कर मेरे राजा क्रीम लगाकर एकदम चिकनी कर लूंगी और खुशबू वाला सेंट भी मार लूंगी ताकि तुझे चाटने में मजा आए,,,

हाय मेरी रानी मेरा तो मन अभी कर रहा है कि जीभ लगाकर चाट जाऊं,,,,

अभी तो हल्के हल्के बाल है तुझे मजा नहीं आएगा,,,,

(आराधना मुस्कुराते हुए बोली)

लंड डालकर देखु क्या,,,,

चल हरामी बिना पैसे का तुझे देखने भी नहीं दूंगी,,,

पैसे हैं मेरे पास मेरी जान,,,,,(अपनी मां की रंडी जैसी बातों को सुनकर संजू पूरी तरह से गर्म हो चुका था और उसे अपनी मां को चोदने का मन कर रहा था लेकिन वह जानता था कि मोहिनी किसी भी वक्त किचन में आ सकती थी इसीलिए वह अपने मन को काबू में रखा हुआ था इसलिए वह बोला) अच्छा एक बात बता,,, गेस्ट हाउस में तू चड्डी पहनकर चलेगी या बिना चड्डी के,,,

तुझे कैसा पसंद है मैं तो कहती हूं कि चड्डी पहन कर चलूंगी क्योंकि मैं जानती हूं तुम जैसे लड़कों को औरत की चड्डी उतारने में ज्यादा मजा आता है,,,

हाय मेरी जान कुछ ज्यादा ही अनुभव है तुझे तू तो मुझे मस्त कर देगी,,,, अच्छा तुझे कंडोम लगाकर पसंद है या बिना कंडोम के,,,

(अपने बेटे की इस बात पर आराधना एकदम से शर्म से पानी-पानी हो गई क्योंकि वह अपने बेटे से रोज चुदवाती थी लेकिन कंडोम का जिक्र बिल्कुल भी नहीं होता था दोनों के बीच लेकिन आज कंडोम का जिक्र होते ही आराधना के चेहरे पर शर्म की लालिमा छा गई थी लेकिन फिर भी वह हिम्मत जुटाकर अपने बेटे को जवाब दी,,)

नहीं रे कंडोम लगाकर ही करना तेरा क्या भरोसा तू तो मजा लेकर चला जाएगा लेकिन मुझे कुछ हो गया तो,,,

कुछ नहीं होगा मेरी जान,,,

अगर मैं पेट से हो गई तो,,,,(शर्म से पानी पानी होते हुए आराधना बोली)

कुछ नहीं होगा,,,, मुझ पर भरोसा रख लेकिन तुझे इतना मजा दूंगा कि तू मुझसे ही चुदवाएगी और वह भी बिना पैसे लिए,,,,,

चल वह तो देखा जाएगा,,,,(इतना कहकर आराधना फिर से खाना बनाने में लग गई लेकिन इस तरह की बातें करके उसकी चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी उसकी पेंटी में उसका काम रस टपक रहा था जिससे उसकी पेंटी पूरी तरह से उसके काम रस से गीली हो चुकी थी और संजू की भी हालत खराब हो चुकी थी उसका बस चलता तो इसी समय आराधना की चुदाई कर दिया होता लेकिन इस समय वह मोहिनी के कारण कुछ कर नहीं पा रहा था,,,,,

आखिरकार दोनों की तड़प और उत्सुकता खत्म होने का समय आ चुका था दोनों जिस दिन का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे वह दिन मतलब कि रविवार आ चुका था और रविवार के दिन इत्तेफाक से आराधना का जन्मदिन भी था,,.।
 
आखिरकार मां बेटे के लिए रविवार की शुभ घड़ी आ ही गई थी और किस्मत से आज आराधना का जन्मदिन भी था जिसके बारे में रात को ही खाना खाते समय आराधना ने मोहिनी और संजु को बताई थी,,, जन्मदिन की बात सुनकर संजू और मोहिनी दोनों बहुत खुश हो गए थे मोहिनी की खुशी से ज्यादा संजू की खुशी कुछ ज्यादा ही थी आखिरकार उसे रविवार का दिन अपनी जिंदगी का यादगार दिन बनाने का अवसर मिल ही गया था,,,,,,,

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दूसरे दिन सुबह मोहिनी उठकर सबसे पहले संजू को चिंतित स्वर में बोली,,,।

भाई तो लगता है कि मम्मी के प्रति ध्यान नहीं दे रहा है अभी तक तूने कुछ किया नहीं कहीं ऐसा ना हो जाए कि तू हाथ मलता रह जाए और मलाई कोई और चट कर जाए,,,,

मोहिनी तू चिंता मत कर मैं इसी ताक में लगा हुआ हूं और देखना आज का दिन हम तीनों की जिंदगी का बहुत ही खूबसूरत दिन होगा आज के दिन में जरूर तेरी कहीं बात को सच कर दिखलाऊंगा,,,,,,

मम्मी को तु पटा तो लेगा ना,,,,(मोहिनी चिंता दर्शाते हुए बोली,,,)

तू चिंता मत कर मैंने मैं पूरी कोशिश में लगा हूं और आज तो झंडा गाड़ कर ही रहूंगा इसलिए मैं आज मम्मी को बाहर घुमाने का प्रोग्राम बनाया है तो कोई बहाना करके इनकार कर देना केवल मैं और मम्मी और हां शाम को देर से लौटेंगे और तू खाना मत बनाना मैं होटल से ही लेते आऊंगा केक और खाना दोनो,,,,,

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भाई अगर तू सच में आज झंडा गाड़ लिया ना,,,, तो मैं मान जाऊंगी कि तू असली मर्द है,,,

अच्छा अभी तक तुझे क्या मुझ पर शक हो रहा है रोज रात को तेरी चूत में लंड डालता हूं तो भी,,,

मम्मी के डाल के दिखा,,,,,

यह बात है तब देखना आज मैं तुझे ऐसा नजारा दिखाऊंगा की तु जिंदगी भर याद रखेगी,,,,।

(आज रविवार था और उसका जन्मदिन भी था इसलिए आराधना बेहद खुश नजर आ रही थी क्योंकि आज के दिन उसे गेस्ट हाउस का अनुभव देना था और आज उसका जन्मदिन होने के नाते आज वहां अपने बेटे को अपने जन्मदिन के शुभ अवसर पर अपना खूबसूरत बदन उसे भेंट करना चाहती थी इसलिए जल्द से जल्द गेस्ट हाउस पहुंचने के लिए वह व्याकुल हुए जा रही थी इसलिए जल्दी-जल्दी वह नाश्ता तैयार कर चुकी थी,,,, मोहिनी को बिल्कुल भी शक ना हो इसलिए संजू मोहिनी को लेकर रसोई घर में गया और वहां मोहिनी के सामने ही बोला,,,,)

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मम्मी मैं सोच रहा हूं कि आज तुम्हारे जन्मदिन के शुभ अवसर पर तुम्हें बाहर घुमाने ले चलूंगा और इस जन्मदिन को एकदम यादगार बना दु,,,

(आराधना अच्छी तरह से जानती थी कि आज उसे गेस्ट हाउस जाना है लेकिन वह संजू की बात सुनकर समझ गई थी कि वह मोहिनी के सामने जानबूझकर ऐसा बोल रहा है ताकि उसे पता ना चले कि हम दोनों के बीच पहले ही सब कुछ तय हो चुका है इसलिए वह भी एकदम खुश होते हुए बोली,,,)

क्या सच में तुम उसे घुमाने ले चलेगा तब तो बहुत अच्छा रहेगा मैं तु मोहिनी,,,।

(मोहिनी का जिक्र आते ही मोहिनी पहले से ही तय की हुई बात बोली,,,)

नहीं नहीं मम्मी भैया और तुम दोनों जन जाओ मेरा आज टेस्ट है इसलिए मैं नहीं जा पाऊंगी लेकिन शाम को आते समय केक और होटल से खाना जरूर लेते आना,,,।

(मोहिनी की बात सुनकर आ रहा था ना मन ही मन बहुत खुश हो गई क्योंकि वह औपचारिक रूप से ही मोहिनी को साथ में चलने के लिए कही थी जबकि मन में वह यही चाहती थी कि मोहिनी ना चले तो अच्छा होगा और मोहिनी उसके सोचने के अनुसार ही इनकार कर चुकी थी इसलिए आराधना बहुत खुश थी लेकिन जानबूझकर दुखी होने का नाटक करते हुए बोली,,)

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मोहिनी कई वर्षों बाद तो मैं अपना जन्मदिन मनाने जा रही हूं और तू है कि चलने से इंकार कर रही है,,,

क्या मम्मी समझा करो मेरा टेस्ट है और वैसे भी तो केक शाम को कटना है ना,,,, तुम दोनों चले जाओ और हम आज अच्छी सी साड़ी पहनना और थोड़ा सज संवर कर ऐसा लगना चाहिए कि अभी-अभी विवाह करके आई हो,,,

(मोहिनी की बात सुनते ही आराधना शर्म से लाल हो गई और वह मुस्कुराते हुए मोहिनी को डांटने का नाटक करते हुए बोली)

धत् पगली तू भी ना कुछ भी बोलती रहती है,,,

कुछ भी नहीं मम्मी तुम सच में बहुत खूबसूरत हो अगर आज एकदम सज-धज कर निकलोगी तो ऐसा ही लगेगा कि जैसे कोई नई नवेली दुल्हन बाजार में घूमने के लिए निकली है,,,,,

और हां नई नवेली दुल्हन अपने बेटे के साथ घूमने निकली है ना,,,(अपनी आंखों को घुमाते हुए बोली)

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भैया के साथ तुम्हारी जोड़ी मां बेटे वाली बिल्कुल भी नहीं लगती,,,

क्या,,,?(एकदम आश्चर्य जताते हुए आराधना बोली)

हां मम्मी सच कह रही हूं,,, ऐसा लगता ही नहीं है कि तुम दो बच्चों की मां हो तुम तो अभी भी एकदम नई नवेली लगती हो,,,,,,, मुझे तो इस बात का डर है कि कहीं तुम दोनों को पति पत्नी ना समझ ले,,,।

बाप रे,,,, मोहिनी चुप हो जा,,, तुझे बिल्कुल भी शर्म नहीं आती,,,,(मोहिनी जानबूझकर इस तरह की बातें अपनी मां से कर रही थी ताकि उसकी मां अपने बेटे की तरफ आकर्षित हो जाए जबकि मोहिनी इस बात से बिल्कुल अनजान थी कि दोनों मां बेटों के बीच मां बेटे का रिश्ता सिर्फ समाज के सामने देखने के लिए रह गया दुनिया के बीच पति पत्नी वाला ही संबंध स्थापित हो चुका था और आराधना मोहिनी की इस तरह की बातों को सुनकर एकदम से शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी,,, खासकर के मोहिनी की बातों को सुनकर आराधना की चूत फुदकने लगी थी,,,,। अपनी मां की बात को सुनकर मोहिनी मुस्कुराते हुए अपनी बात के रुख को मोड़ते हुए बोली,,,)

खाना तो नहीं बनाई हो ना मम्मी,,,

नहीं सिर्फ नाश्ता तैयार की हुं,,,,

अच्छा कि क्योंकि मैं अब शाम को ही लौटुंगी इसलिए अभी नाश्ता कर लेती हूं,,,,।

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(आराधना मोहिनी के सामने शर्म से पानी पानी हो जा रही थी इसलिए अपनी नजरों को झुका कर वह मोहिनी और संजू के लिए नाश्ता निकालने लगी और खुद के लिए भी क्योंकि वह जानती थी कि अभी खा लेगी तो उसके लिए भी अच्छा होगा संजू को नाश्ते की प्लेट पकड़ाते समय आराधना मंद मंद मुस्कुरा रही थी और उसके मुस्कुराने का कारण संजू अच्छी तरह से समझ रहा था थोड़ी देर में नाश्ता करके मोहिनी अपना बैग लेकर घर से बाहर निकल गई और आराधना उसके जाते ही संजू से बोली,,,)

बाप रे ये लड़की समझ में नहीं आ रहा है कैसी कैसी बातें कर रही है,,,,

ठीक ही तो कह रही है सोचो जब मोहिनी,,, हम दोनों को मां बेटा के रूप में नहीं देख रही है तो गेस्ट हाउस में हम दोनों को लोग क्या समझेंगे,,,

क्या समझेंगे,,,(धड़कते दिल के साथ आराधना बोली)

मुझे खरीददार और तुम्हें धंधे वाली समझेंगे,,,,, तब तो ठीक ही रहेगा ना किसी को बिल्कुल भी शक नहीं होगा,,,,

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हां तो सच कह रहा है मोहिनी के कहे अनुसार कहीं हम दोनों को पति पत्नी समझ लिए तो,,,

तब तो और भी अच्छा होगा पति पत्नी के बीच तो कुछ भी हो सकता है,,,,

(अपने बेटे की बात सुनकर आराधना का दिल जोर जोर से धड़क रहा था उसकी चुत फुदक रही थी,,,,,वह संजू से बोली,,,)

मैं जल्दी से तैयार हो जाती हुं,,,,

हां जल्दी करो मम्मी हमें जल्दी निकलना होगा तभी तो मजा आएगा और हां चूत के बाल साफ करना मत भुलना,,आज के दीन मुझे तुम्हारी चूत का बाल का नामोनिशान नहीं देखना है एकदम चिकनी कर देना,,,।

(इतना सुनते ही आराधना एकदम से शर्मा गई जल्दी से अपने कमरे में गई और वहां से वीट क्रीम बिल्कुल सीधे बाथरूम में घुस गई तो बाहर से संजू आवाज लगाते हुए बोला,,,)

मैं साफ कर दूं क्या मम्मी,,,

नहीं तु रहने दे मैं कर लूंगी,,, सब कुछ यहीं कर लेगा तो गेस्ट हाउस में क्या करेगा,,,,,,

करने के लिए तो बहुत कुछ है,,,

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लेकिन अभी के लिए रहने दे,,,(इतना कहने के साथ ही आराधना अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो गई और बीट से क्रीम निकाल कर अपनी चूत के उपसे हुए भाग पर ढेर सारा क्रीम चुपड़ दी ,,,, अपने बेटे के साथ एक धंदेवाली के रूप में बात करते हुए वह अपने बेटे के मुंह से सुनी थी कि उसे चिकनी चूत पसंद है और उसके चूत पर हल्के हल्के बाल थे और इसीलिए वह ऑफिस से लौटते समय एक मेडिकल पर जाकर अपने लिए वीट क्रीम खरीद कर लाई थी जिसका उपयोग वह इस समय बाथरूम में कर रही थी वह भी अपने बाल को साफ करना भूल चुकी थी अच्छा हुआ कि एन मौके पर चूत के बाल की बात को संजू ने कह दिया था,,, वरना आज वह अपनी चूत के बाल साफ किए बिना ही बाप ने बेटी के साथ गेस्ट हाउस में चली जाती पर जब उसका बेटा अपने हाथों से उसके कपड़े उतार कर पूरी तरह से नंगी करता तो शायद अपनी मां की चूत पर बाल देखकर वह निराश हो जाता और वह आज के दिन खास करके अपने जन्मदिन के दिन वह अपने बेटे को बिल्कुल भी निराश नहीं करना चाहती थी वह अपने बेटे को पूरी तरह से खुश और संतुष्ट कर देना चाहती थी इसलिए उसकी बात मानते हुए वह कुछ देर तक अपनी चूत के खुले हुए हिस्से पर क्रीम लगाकर छोड़ दी थी और बाकी के हिस्से पर साबुन लगाना शुरू कर दी थी अपनी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी लेकिन तनी हुई चुचियों को देखकर वह खुद अपनी चुचियों पर गर्व कर रही थी क्योंकि यह हकीकत ही था कि 2 बच्चों की मां होने के बावजूद भी उसकी चुचियों का तनाव बिल्कुल भी कम नहीं हुआ था वह एकदम तली हुई अवस्था में इस समय भी उसकी जवानी में चार चांद लगा रहे थे जिस पर खुद उसका बेटा पूरी तरह से मर मिटा था,,,,,

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आज का दिन उसके लिए बेहद खास था आज के दिन वह अपने बेटे के सामने एक माह एक औरत नहीं बल्कि एक धंधे वाली औरत की तरह पॅश होने जा रही थी गेस्ट हाउस में क्या होगा कैसे होगा उसे बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था,,, लेकिन अपने बदन में हो रही हलचल को देखकर इतना तो वह समझ ही गई थी कि गेस्ट हाउस में उसे परम आनंद प्राप्त होने वाला है,,,,,, अपनी चूत पर क्रीम लगाए हुए पांच 7 मिनट हो चुके थे इसलिए वह टावल का उपयोग ना करके अपनी चड्डी उठाकर उससे अपनी चूत पर लगी हुई क्रीम को साफ करने लगी और कुछ ही देर में उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था उसकी चूत एकदम मक्खन की तरह मलाईदार लग रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे दो बच्चों की मां की चूत नहीं बल्कि एक नौजवान लड़की की खूबसूरत चूत हो और वह भी कचोरी की तरह एकदम खुली हुई अपनी चूत को देखकर खुद आराधना से रहा नहीं गया और अब अपनी हथेली से पूरी तरह से अपनी चूत को ढक लि और उसे हल्के से मसल दी ऐसा करने से उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी और उसके मुंह से गरमा गरम सिसकारी फुट पड़ी,,,, अपनी चूत की खूबसूरती को देखकर उसे पूरा विश्वास था कि जब उसका बेटा अपनी आंखों से आज उसकी चूत को देखेगा तो चारों खाने चित हो जाएगा और उसे चाटे बिना बिल्कुल भी रह नहीं पाएगा,,,,

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वह बड़े अच्छे से पूरे बदन पर साबुन लगा लगाकर मलमल करना हो रही थी वह चाहती थी कि उसके बदन से खुशबू आए जहां भी उसका बेटा अपनी जीभ लगाए वहां से उसकी खुशबू पाकर वह पूरी तरह से मस्त हो जाए वह ढेर सारा साबुन का झाग अपनी चूत पर मल रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी सारी खूबसूरती उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार के इर्द-गिर्द ही छुपी हुई है और एक मर्द के लिए एक खूबसूरत औरत के खूबसूरत चेहरे के बाद उस खूबसूरत औरत की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार की खूबसूरती ही सबसे ज्यादा मायने रखती है,,, और इसीलिए आराधना कोई भी कसर छोड़ना नहीं चाहती थी अपनी चूत की खूबसूरती को बरकरार रखने में,,,,।

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आखिरकार अपने बदन को घिस घिसकर नहाने के बाद वह बाथरूम से बाहर निकली लेकिन अपने नंगे बदन पर टावल लपेट ली और टावल भी कुछ खास ज्यादा बड़ी नहीं थी वह टावर को अपनी आधी चुचियों पर बांधी थी और उसकी लंबाई नीचे उसकी जांघों तक भी नहीं आती थी इस अवस्था में बाथरूम से निकलने के बाद जैसे ही संजू की नजर,,, अपनी मां पर पड़ी उसे देखकर संजू के तो होश ही उड़ गए नहाने के बाद इस अवस्था में उसकी मां और भी ज्यादा खूबसूरत और सेक्सी लग रही थी,,, इस अवस्था में अपनी मां को देखते ही संजु का लंड एकदम से खड़ा हो गया और वह अपनी जगह पर बैठा नहीं रह सका आराधना अपने बेटे के एकदम पास से उसकी तरफ देख कर मुस्कुराते हुए जा रही थी या देखकर संजू का मन एकदम से लग जा गया और वह अपनी मां के बजन पर से टावल को पकड़ कर खींच लिया अगले ही पल टुवाल के निकलते ही आराधना एकदम नंगी हो गई और नहाने के बाद उसके बदन पर टपक रही पानी की बूंदे मोती के दाने की तरह चमक रही थी,,, इसे देखकर संजू की हालत खराब हो रही थी टावर जैसे ही संजू ने आराधना के बदन पर से खींचा वैसे ही आराधना के मुंह से निकला,,।

हाय दैया यह क्या कर रहा है,,,(इतना कहने के साथ ही वह संजय के हाथ से दोबारा टूवाल को खींचने की कोशिश की तो नाकामयाब हो गई वह अपने नंगे बदन को छुपाते हुए अपने कमरे की तरफ लगभग भागते हुए जाने लगे और इस अवस्था में भागते हुए उसकी गोर गोर गाल तरबूज की तरह बाहर निकली हुई नजर आ रही थी और उस पर पानी की बूंदें टपक रही थी जिसे देख कर संजू के मुंह में पानी आ रहा था संजू अपनी जगह से खड़ा होकर अपनी मां की तरफ आगे बढ़ने ही वाला था कि आराधना अपने कमरे में घुसकर दरवाजे को बंद कर दी,,,,, और बोलो,,,.

नालायक तुझसे बिल्कुल भी सब्र नहीं होता,,,,

अब तुम्हारा रूप ही ऐसा है तो सब्र भला कैसे होगा,,,

गेस्ट हाउस तक पहुंचने तक तो सब्र कर ले,,,,

चलो ठीक है,,,,

(इसके बाद आराधना मुस्कुराते हुए अलमारी में से अपने पसंदीदा सबसे खूबसूरत ब्लू रंग की साड़ी निकाली जो की ट्रांसपेरेंट थी जिसमें सब कुछ नजर आता था उसे निकालकर मॉल में से खरीदी हुई अपने बेटे के द्वारा चड्डी और ब्रा निकाल और उसे पहनने लगी थोड़ी ही देर में आराधना आईने में अपने आप को देखते हुए कपड़े पहन चुकी थी लेकिन ब्लाउज की डोरी उससे बात ही नहीं जा रही थी इसलिए वह धीरे से दरवाजे के पास गई और दरवाजे को खोलकर संजू की तरफ देखकर धीरे से बोली,,,)

संजू जरा मेरे ब्लाउज की डोरी तो बांध दें,,,,

यह हुई ना बात,,,,(इतना कहने के साथ ही संजू अपनी जगह से खड़ा हो गया और सीधे अपनी मां के कमरे में पहुंच गया जहां पर उसकी मां वापस आईने के सामने जाकर खड़ी हो गई थी और संजू ठीक है अपनी मां के पीछे आकर खड़ा हो गया पीछे से ब्लाउज की खुली भी बुरी नजर आ रही थी जिसकी वजह से उसकी नंगी चिकनी पीठ पर ब्रा की हल्की सी पट्टी चिपकी हुई थी और गोरे बदन पर काले रंग की ब्रा की पट्टी और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी संजू से रहा नहीं गया और संजू तुरंत ब्लाउज की डोरी बांधने की जगह तुरंत अपनी मां को पीछे से बाहों में भर लिया और उसकी गर्दन पर चुंबन करने लगा,,,, और यह देखकर आराधना बोली,,,।

ऊममम ,,,, छोड़ मुझे संजू और जो काम करने के लिए तुझे बुलाई हो वह कर,,, कभी भी शुरू हो जाता है,,(आराधना के इतने कहते-कहते संजू उसे अपनी बाहों में पूरी तरह से भर लिया था जिससे पेंट में संजू का टन टन आया हुआ लंड सीधे साड़ी के ऊपर से ही आराधना की गांड पर ठोकर मार रहा था जिसको अपनी गांड पर महसूस करके आराधना का मन भी बैठने लगा था लेकिन वह इस समय कुछ भी करने के मूड में नहीं थी,,, क्योंकि आज वह सारा मजा गेस्ट हाउस में ही लेना चाहते थे इसलिए उसे हाथ की कोहनी से दूर करने लगे मौके की नजाकत को समझते हुए संजू भी अपना मन मार कर अपनी मां के ब्लाउज की डोरी को बांधने लगा,,,,.

आराधना तैयार हो चुकी थी और बला की खूबसूरत लग रही थी,,, अपनी मां की खूबसूरती को देखकर संजू बोला,,,

मोहिनी सच कह रही थी मम्मी तुम दो बच्चों की मां लगती ही नहीं हो तुम नवी नवेली दुल्हन लग रही हो,,,

किसकी,,,?(तपाक से आराधना बोली)

मेरी,,,(संजू भी एकदम झट से उत्तर देता हुआ बोला और यह सुनकर आराधना मुस्कुराने लगी और शर्मा भी गई और शरमाते हुए बोली,,,)

अब चल जल्दी बहुत देर हो गई है,,,,

चलो वैसे भी आज का दिन तो बहुत खास है,,,,(इतना कहने के साथ ही दोनों मां-बेटे घर से बाहर निकल गए और आराधना घर बंद करके ताला लगा दी और संजू के साथ स्कूटी पर बैठकर लंबे सफर के लिए निकल गई)
 
संजू अपनी मां को स्कूटी पर बैठा कर निकल चुका था,,,, आसमानी रंग की पारदर्शी साड़ी में आराधना स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा लग रही थी जो कि अपने ही बेटे के पीछे स्कूटी पर बैठकर अपने आप को रंडी समझ रही थी क्योंकि आज वह जो कुछ करने जा रही थी वह एक रंडी ही कर सकती आज वह अपने बेटे के साथ गेस्ट हाउस में जा रही थी,,, जब से उसने अपने बेटे के मुंह से अपने पति के बारे में गेस्ट हाउस वाली बात सुनी है तब से ना जाने क्यों नाराजगी होने के बावजूद भी गेस्ट हाउस का मजा लेने के लिए उसका मन मचल रहा था और आज वह अपनी इच्छा को पूरी करने जा रही थी,,,, अपने बेटे के साथ चुदाई का सुख प्राप्त करके वह मां बेटे के बीच की सारी सीमाओं को पार कर चुकी थी सारी मर्यादा की दीवारों को गिरा चुकी थी इसलिए वह अपने बेटे से अब बिल्कुल भी शर्म और लिहाज नहीं रखती थी और ना ही आप इस बारे में सोचती थी दोनों मां बेटे के रिश्ते से बेहद दूर निकल चुके थे,,,, जहां से वापस लौट रहा आप दोनों के बस में नहीं था और वैसे भी जिस तरह का सुख हुआ दोनों भोग रहे थे उस सुख को छोड़ कर वापस आना वह दोनों चाहते भी नहीं थे दोनों एक दूसरे की बाहों में पूरी तरह से लीन हो चुके थे अपने आपको भुला चुके थे,,,,

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आज का दिन आराधना के लिए भी बेहद खास था और इस खास दिन को वह और भी ज्यादा बेहतर बनाना चाहती थी आज उसका जन्मदिन था इस बात का पता जैसे ही संजू को चला था संजू के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी क्योंकि आज के दिन ही वह अपनी मां को गेस्ट हाउस में ले जाने वाला था और उसके जन्मदिन के चलते वह इस दिन को एकदम से यादगार बना देना चाहता था,,,, आराधना भी पूरी तैयारी के साथ घर से निकली थी आज वह गेस्ट हाउस के कमरे में अपने बेटे को चारों खाने चित कर देना चाहती थी उसे अपनी जवानी का जलवा दिखा कर उसे घुटने टेकने पर मजबूर कर देना चाहती थी इसलिए वह आसमानी रंग की ट्रांसपेरेंट साड़ी पहन कर आई थी जिसमें से उसका पूरा वजूद झलकता था और अपनी बड़ी बड़ी चूचियों को काबू में करने के लिए अपने बेटे के द्वारा खरीदी गई ब्रा पहन कर आई थी जो कि उसके पूरे आकार को अपने काबू में करके रखती थी और उस पर से भी वह ब्लाउज भी अपनी चूची से कम साइज का पहनी थी जिसका बटन लगाने के बावजूद भी खींचा हुआ लग रहा था और ऐसा महसूस हो रहा था कि अगर जोर जोर से सांस लेना शुरू कर दे तो आराधना के ब्लाउज का बटन अपने आप ही टूट जाए,,,, अपने बेटे की फरमाइश और उसकी ख्वाहिश का ख्याल रखते हुए वह अपनी चूत पर के बाल को वीट क्रीम से साफ कर कर आई थी और तो और उस पर हल्का सा परफ्यूम भी मार दी थी ताकि उसमें से खुशबू आ सके वैसे तो दुनिया का हर एक मर्द केंद्रीय सबसे ज्यादा मादक खुशबू वाला परफ्यूम औरत की दोनों टांगों के बीच की चूत से निकलता है और खुशबू को सुंघ कर‌ ही दुनिया का हर एक मर्द अत्यधिक उत्तेजना और तरोताजा महसूस करता है,,,,,,,

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,, और यह बात आराधना भी अच्छी तरह से जानती थी,,,, वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा उसकी चूत की खुशबू को बेहद पसंद करता है और उसे अपने अंदर महसूस करते ही पूरी तरह से उत्तेजित हो जाता है,, और एक बार उत्तेजित हो जाने के बाद तो उसे स्वर्ग का सुख देता है इसीलिए अपनी चूत पर परफ्यूम मारने की उसे जरूरत नहीं थी लेकिन फिर भी औपचारिक रूप से वह कुछ अलग करना चाहती थी इसलिए अपनी चूत को चिकनी करके उस पर परफ्यूम मार दी थी,,,।

अपने बेटे के साथ शारीरिक संबंध बनाने से पहले वह साड़ी के नीचे चड्डी नहीं पहनती थी चड्डी पहनने की जरूरत ही नहीं पड़ती थी ना कि अपने बेटे के साथ रिश्ता बना देने के बाद उसे इस बात का एहसास हुआ कि वाकई में मर्दों के द्वारा चड्डी उतारने में कितना आनंद और उत्तेजना का एहसास होता है और इसी एहसास के चलते वह साड़ी के अंदर चड्डी पहनने लगी थी और वह भी सिर्फ इसलिए कि उसका बेटा उसे अपने हाथों से उतारकर उसे नहीं कर सके और इसीलिए उसने अपनी बेटी के द्वारा दिलाई गई चड्डी पहन कर अपनी चूत की शोभा बढ़ा रही थी,,,,

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स्कूटी [l] रफ्तार में आगे बढ़ी चली जा रही थी अपनी मां के खूबसूरत देंह सए आ रही मादक खुशबू को अपने अंदर लेकर संजू पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था वैसे तो उसका लंड अपनी मां की उपस्थिति में ही खड़ा हो चुका था अगर उसका बस चलता तो सड़क पर ही स्कूटी रोक कर किसी कोने में ले जाकर अपनी मां की साड़ी उठाकर उसकी चूत में अपना लंड डालकर उसकी चुदाई करके शांत हो गया होता लेकिन वह अपनी उत्तेजना पर काबू करना अच्छी तरह से जानता था संयम का अभ्यास वह अच्छी तरह से कर चुका था इसीलिए तो आज इस मुकाम पर पहुंच चुका था कि इस उम्र में वह अपनी बहन अपनी मौसी के साथ-साथ अपनी मां की चुदाई कर रहा था और अपनी चचेरी बहन की सहेली को भी चोद चुका था वह दिन प्रतिदिन चुदाई के मामले में अपनी संभोग गाथा के झंडे गाड़ता चला जा रहा था,,,,, बातों के दौर को शुरू करता हुआ वह संजू बोला,,,।

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मम्मी आज सच में मुझे बहुत अच्छा लग रहा है तुम स्कूटी पर मेरे पीछे बैठी हो लेकिन मुझे लगी नहीं रहे कि मेरे पीछे मेरी मम्मी बैठी है ऐसा लग रहा है कि मैं किसी जगह से एक खूबसूरत रंडी को अपनी स्कूटी पर बैठाकर गेस्ट हाउस की तरफ ले जा रहा हूं और वह भी उसे चोदने के लिए,,,।

(अपने बेटे की इस बात को उसके एहसास को सुनकर आया देना पूरी तरह से उत्तेजना से गदगद हुए जा रही थी वह मंद मंद मुस्कुरा रही थी और मुस्कुराते हुए बोली)

सच संजू मुझे भी ऐसा ही लग रहा है कि जैसे मैं तेरे साथ नहीं बल्कि अपने किसी कस्टमर के साथ बैठकर उसके साथ गेस्ट हाउस जा रही हूं जहां पर उसके सामने अपने सारे कपड़े उतार कर अपनी चूत उसके आगे परोस दूंगी और वह उसकी मर्जी के अनुसार मेरी चूत के साथ मेरे खूबसूरत दिल के साथ जो करना ही करेगा,,,,,

हाय तुम तो सच में एकदम रंडी का एहसास दिला रही हो,,,

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क्या तू भी तेरे बाप की तरह रंडी को गेस्ट हाउस लेकर गया है क्या,,,?

नहीं मम्मी,,,, इस तरह की हरकत करने की कभी मेरी हिम्मत ही नहीं हुई,,,, लेकिन जब से पापा को किसी औरत के साथ गेस्ट हाउस में देखा था था तब से ना जाने क्यों मेरे तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी मुझे भी ना जाने क्यों किसी औरत को चोदने का मन करता था पापा की ही तरह किसी औरत को किसी लड़की को गेस्ट हाउस में ले जाने का मन करता था लेकिन ऐसा कुछ हो ही नहीं पाया क्योंकि पैसे भी नहीं थे,,,, और जब पैसे आ गए तो मुझे उसकी जरूरत ही नहीं पड़ी क्योंकि तुम मिल चुकी थी,,,,

(अपने बेटे की यह बात सुनते ही आराधना की आंखों के सामने उसकी बड़ी बहन वाला दृश्य याद आने लगा जब वहां कमरे से बाहर बाथरूम की दीवार को पकड़े अपनी गांड पीछे की तरफ हवा में उठाए हुए संजू से चुदवा रही थी आराधना यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि संजू के जिंदगी में उसके आने से पहले ही उसकी बड़ी बहन आ चुकी थी,,,, वह अपनी बड़ी बहन का जिक्र छेड़ना चाहती थी लेकिन वह मजे को किरकिरा नहीं करना चाहती थी इसलिए वह किसी भी तरह से अपने बेटे का मूड खराब नहीं करना चाहती थी इसलिए वह अपनी बड़ी बहन का जिक्र नहीं की,,,, और अपने बेटे की बात सुनकर वह बोली,,)

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अच्छा ही हुआ कि मैं तेरी जिंदगी में आ गई तू मेरी जवानी का रस पीने लगा वरना अगर किसी और औरत के चक्कर में पड़ जाता तो शायद तू भी तेरे बाप की तरह निकल जाता और जो सुख मुझे इस समय मिल रहा है मैं उससे भी वंचित रह जाती,,,,

नहीं मम्मी ऐसा कभी नहीं हो सकता तुम्हारी जैसी खूबसूरत औरत तो मैंने आज तक नहीं देखा और सच बताऊं तो तुम्हें चोदने का मजा ही कुछ और है मुझे नहीं लगता कि किसी लड़की को चोदने में भी इतना ज्यादा मजा आएगा जितना कि मुझे तुम्हें चोदने में आता है क्योंकि उम्र के इस दौर में भी तुम्हारी चूत एकदम कसी हुई है मानो कि अभी-अभी चुदवाना शुरू की हो,,,,,,

(अपने बेटे की बात सुनकर खास करके उसके मुंह से अपनी जवानी की तारीफ और तकलीफ में भी अपनी चूत की तारीफ सुनकर वह पूरी तरह से मदहोश और गदगद हुए जा रही थी उसे अपने बेटे पर बहुत प्यार आ रहा था इस बात का एहसास भी उसे अच्छी तरह से था कि वह उम्र के किस दौर पर है और ऐसे दौर में एक जवान लड़का उसका इस कदर दीवाना हो चुका है इस बात का एहसास उसे और भी ज्यादा जवानी का जोश भर देता था उसे और भी ज्यादा जवान कर देता था,,,,,)

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मतलब कि तुझे कसी हुई चूत अच्छी लगती है,,,,

हां इसमें कोई शक नहीं है कितना मजा आता है जब तुम्हारी कश्मीरी चूत में मेरा लंड जाता है तो ऐसा लगता है कि तुम्हारी चूत ने अपने गुलाबी होठों के बीच मेरे लंड को दबा कर रखा हुआ है और तो और तुम्हारी चूत भी कितनी मस्त फूली हुई होती है एकदम कचोरी की तरह,,,, सच कहूं तो मम्मी मुझे पहले झूठ के आकार के बारे में उसके भूगोल के बारे में कुछ भी पता नहीं था जिंदगी में पहली बार तुम्हारी चूत देखकर मैं सोचकर भूगोल को अच्छी तरह से समझ पाया हूं,,,,,

पहली बार जब देखा था तो तुझे कैसा लगा था,,,

पूछो मत मम्मी मन तो कर रहा था कि खुद ही उसमें घुस जाऊं चूत की खूबसूरती तो दुनिया की किसी भी चीज की खूबसूरती के मुकाबले बेहद अतुलनीय है जिसकी तुलना किसी भी खूबसूरती से करना मुश्किल है और यह सच ही है मर्दों को दुनिया में सबसे ज्यादा खूबसूरत और प्रिय औरत की चूत ही लगती है,,,,, और तुम्हें क्या पसंद है,,,,।

(खुली सड़क पर दोपहर के समय यातायात कम ही चल रहे थे और ठंडी हवा बह रही थी हालांकि धूप ज्यादा थी लेकिन ठंडी हवा में धूप का एहसास नहीं हो रहा था देखते ही देखते संजू की स्कूटी कुछ ज्यादा ही दूर पहुंच चुकी थी और जानबूझकर संजू अपनी मां को स्कूटी पर बैठाकर शहर से दूर ले जा रहा था ताकि वहां पर कोई उसे पहचान ना सके संजू बड़े आराम से स्कूटी चला रहा था,,,, वैसे उसे जल्दी भी थी लेकिन कहीं और पहुंचने की अपने बेटे की बात सुनकर आराधना शरमा गई क्योंकि वह जानती थी कि उसे क्या कहना है आप उसे अपने बेटे के सामने शर्म महसूस होती नहीं थी लेकिन फिर भी औपचारिक रूप से वह एक औरत थी और संजू उसका बेटा होने के बावजूद भी एक मर्द था और उसके सामने इस तरह की बात करने में थोड़ा बहुत झिझक तो होती ही थी लेकिन इस समय वह जिस कार्य को करने के लिए उसकी स्कूटी के पीछे बैठी थी उस चरित्र में उसे बेशर्म बनना लाजमी था इसलिए वह अपने बेटे की सवाल का जवाब देते हुए बोली ,,,।)

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तुझे हम औरतों का जो चीज पसंद है वैसे मुझे भी जैसा कि सभी औरतों को मर्दों का पसंद होता है मुझे भी तेरा लंड पसंद है सच में जब तक मैंने तेरे लंड को अपनी आंखों से देखी नहीं थी तब तक मैं तेरे पापा के लंड के हीं आकार की कल्पना क्या करती थी मुझे ऐसा ही लगता था कि दुनिया में सभी मर्दों का लंड तेरे पापा की तरह ही होगा लेकिन मेरा अनुमान मेरी धारणा मेरा सोचना सब कुछ गलत साबित हुआ जब मैं पहली बार तेरे लंड को अपनी आंखों से देखी,,, मेरे तो होश ही उड़ गए थे मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि किसी का लंड ईतना मोटा लंबा और तगड़ा हो सकता है,,,,, और तेरी लंड को अपनी चूत में लेकर मैं तो पूरी तरह से निहाल हो गई थी,,,,,

सच मम्मी तुम्हें मेरा लंड बहुत अच्छा लगा था,,,

क्यों अच्छा नहीं लगेगा एक औरत को क्या चाहिए पेट की भूख के साथ-साथ टंकी भी भूख होती है उसे मिटाने के लिए एक साथी की जरूरत पड़ती है एक मर्द की जरूरत पड़ती है अभी तक तेरे पापा के साथ रहकर मुझे यही लग रहा था कि मैं एक आदमी के साथ में लेकिन तेरे से मिलने के बाद मुझे पता चला कि असली मर्द क्या होता है तेरे लंड को अपनी चूत में लेकर मुझे एहसास हुआ कि असली चुदाई क्या होती है जो कि तेरे ही द्वारा मुझे प्राप्त हो रही है,,,,

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हाय मम्मी तुम्हारी यह बातें तो मुझे पागल कर देंगे मुझे इस बात की खुशी हुई कि मेरा साथ पाकर तुम भी खुश हो और इसी खुशी को दुगुनी करने के लिए ही मैं तुम्हें गेस्ट हाउस लेकर जा रहा हूं,,,,।

(दोनों मां बेटों के बीच हो रही गरमा-गरम वार्तालाप के चलते संजू के लंड के साथ-साथ आराधना की चूत भी गीली हो चुकी थी,,, वैसे भी जिस राह पर दोनों मां-बेटे चल रहे थे उस राह पर एक दूसरे के अंगों में कठोरपन आना लाजमी था,,,,)

हम लोग काफी दूर आ चुके हैं संजु,,,(सड़क के दोनों ओर नजर घुमाते हुए आराधना को दी तो संजू भी बोला)

जिस काम को करने जा रहे हैं उस काम के लिए हमेशा हर से बाहर ही आना जरूरी है क्योंकि यहां कोई पहचानने वाला नहीं है और शहर के अंदर अगर कोई हमें गेस्ट हाउस में जाते हुए देख लेगा तो गजब हो जाएगा,,

तू सच कह रहा है संजू वैसे भी अब तू औरतों के मामले में बहुत ज्यादा चलाक होता जा रहा है औरतों को किस तरह से संभालना है तुझे अच्छी तरह से आता है,,,,

कोई काम में माहिर हो चाहे ना हो लेकिन औरतों के मामले में मर्दों को हमेशा चालाक होना चाहिए वरना उसके हाथ से निकलकर औरत किसी और के हाथ में जाने में देर नहीं लगाती,,,,

यह बात तो तु सच कह रहा है,,,,,,।

(अपनी मां की बात सुनते ही संजू हाईवे के सड़क के किनारे से अपनी स्कूटी को दूसरी और संभाल कर लेते हुए जाने लगा तो आराधना बोली,,,)

आ गया क्या गेस्ट हाउस,,,,

गेस्ट हाउस को बाद में चलेंगे उससे पहले मैं तुम्हें फिल्म दिखाने ले चलता हूं,,,,(और इतना कहने के साथ ही संजू अपनी स्कूटी को एक बड़े से थिएटर के अंदर ले जाने लगा बरसों बाद आराधना आज किसी थिएटर में आई थी इसलिए वह बहुत खुश नजर आ रही थी थिएटर को पार्किंग मैं खड़ी करके संजू आराधना को एक पेड़ के नीचे खड़ा करके टिकट लेने लगा और जल्द ही वह दो टिकट लेकर आ गया और उत्सुकता बस आराधना बोली,,,)

क्या संजू तू मुझे थिएटर लेकर आ गया,,,

तो क्या मम्मी तुम्हें मैं आज फिल्म दिखाने ले कर आया हूं उसके बाद हम दोनों गेस्ट हाउस चलेंगे,,,,

लेकिन फिल्म कौन सी है,,,,

अरे बहुत अच्छी मूवी है चलो तो सही अंदर पता चलेगा,,,,

(इतना कहकर संजू अपनी मां का हाथ पकड़े हुए उसे थिएटर के अंदर ले जाने लगा ,,,, टिकट चेकर से टिकट चेक करा कर वह एक कोने की सीट पर जाकर बैठ गया,,,, थिएटर में भीड़ बहुत कम थी और यही तो संजू चाहता भी था,,,,
 
आखिरकार संजू अपनी मां के तन बदन में चुदाई की अद्भुत काम भावना को जागरूक करके अपनी मां के जन्मदिन पर ही उसे गेस्ट हाउस में उसे जमकर चोदने के लिए ले जा चुका था लेकिन गेस्ट हाउस से पहले वह किसी और प्रोग्राम को निपटाने के लिए थिएटर में लेकर चला गया जहां पर वह कोने वाली सीट लेकर बैठ गया था थिएटर में भीड़भाड़ ज्यादा बिल्कुल भी नहीं थी गिनती के ही लोग थे और संजू भी यही चाहता था,,,,, आराधना बहुत खुश थी अपने बेटे के साथ हुआ जिंदगी का अद्भुत आनंद लूट रही थी जिसके बारे में उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी,,, उसे तो याद भी नहीं था कि वह कब थिएटर में कोई फिल्म देखने के लिए गई थी और अशोक ने कभी उसे फिल्म दिखाने के लिए थिएटर में लेकर नहीं आया था लेकिन संजू अपनी मां की इच्छा पूर्ति के लिए उसे थिएटर में फिल्म दिखाने के लिए लेकर आया था,,,,,

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थिएटर के सीट पर बैठकर आराधना,,, बहुत खुश हो रही थी वह बार-बार अपने चारों तरफ चकर पकर देख रही थी,,, उसके लिए थिएटर बिल्कुल अनजान और अद्भुत जगह थी बड़ी-बड़ी सीट नरम नरम गद्दे वाली जिस पर अपनी भारी-भरकम गांड रखकर बैठने पर उसे बेहद आरामदायक महसूस हो रहा था,,,,, आराधना आश्चर्य जताते हुए संजू से बोली,,,।

तुम मुझे थिएटर तो ले आए हैं लेकिन फिल्म कौन सी है यह तो बताया ही नहीं,,,

मम्मी तुम फिल्म नहीं देखती ना इसलिए तुम्हें पता नहीं है इसलिए देखो तुम्हें खुद पता चल जाएगा,,,,

(और आराधना की उत्सुकता खत्म करते हुए सफेद बड़े पर्दे पर चलचित्र उभरने लगा पर्दे पर उभरते हुए चलचित्र को देख कर आराधना की खुशी का ठिकाना ना था वह खुशी के मारे समझ नहीं पा रही थी कि वह करे क्या वह कसके अपने बेटे के हाथ को पकड़कर मुस्कुराते हुए पर्दे की तरफ देख रही थी,,, संजू भी अपनी मां की खुशी देखकर खुश हो रहा था,,,, थिएटर में पूरी तरह से अंधेरा हो चुका था सभी लाइटें बंद हो चुकी थी चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा सिर्फ पर्दे का उजाला थोड़ा बहुत नजर आ रहा था,,,,,,, संजू अपने लफंगा दोस्तों के मुंह से यह सुन चुका था कि वह लोग अपनी गर्लफ्रेंड को थिएटर में ले जाकर के कोने वाली सीट पर बैठ कर उनके साथ मस्ती किया करते थे उनके होठों का चुंबन किया करते थे उनकी चूची दबाते थे और साथ ही उनकी चूत से खेलते थे यह सब सुनकर संजू को थोड़ा अजीब लगता था कि सबके बीच में बैठकर यह सब कैसे हो सकता है लेकिन थिएटर में आने के बाद उसे पूरा विश्वास हो चुका था कि सब की मौजूदगी में भी सबसे नजर बचा कर यह क्रिया की जा सकती है और इसी क्रिया को करने के लिए ही वह अपनी मां को बिना बताए थिएटर में लेकर आया था क्योंकि सब लोग अपने ही अपने में मस्त थे,,,,,।

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और अपने दोस्तों की बातों से प्रेरणा लेकर संजू अपना एक हाथ अपनी मां के ब्लाउज पर रखकर उसकी चूची को दबा रहा था पहले तो आराधना एकदम से हैरान हो गई क्योंकि वह कई लोगों के बीच में बैठी हुई थी लेकिन वह लोग भी थोड़ा दूर पर ही बैठे हुए थे एक दो बार आराधना संजू के हाथ को अपनी चूची पर से हटाने लगी लेकिन तभी पर्दे पर फिल्म के हीरो का वह दृश्य नजर आने लगा जिसमें वह हीरोइन को जबरदस्ती पकड़कर उनके लाल-लाल होठों पर अपने होंठ रख कर किस कर रहा था और यह दृश्य को देखकर आराधना के बदन में भी अजीब सी हलचल होने लगी है और इस बार भाई संजू के हाथ को अपने ब्लाउज पर से बिल्कुल भी नहीं हटाई,,,।

संजू ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की चूची को दबाना शुरू कर दिया था जो कि खरबूजे की आकार की थी ,,,, थिएटर में औरत के साथ मस्ती करने का यह उसका पहला मौका था इसलिए उसके बदन में अजीब सी लहर उठ रही थी चारों तरफ अंधेरा होने का फायदा हुआ अच्छी तरह से उठा रहा था आराधना भी अपने बेटे की हरकत से पूरी तरह से उत्तेजित हुए जा रही थी और अपने चारों तरफ नजर घुमाकर देख ले रही थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है लेकिन उसे इस बात की तसल्ली थी कि सब लोग उसकी तरफ ना देख कर केवल पर्दे की तरफ देख रहे थे और परदे पर गरमा-गरम दृश्य भी पेश हो रहा था,,,,,।

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ओहहहह संजू यहां पर क्यों ऐसा कर रहा है कोई देख लिया तो,,,(अपने चारों तरफ नजर घुमाकर देखते हुए आराधना बोली)

यहां कोई नहीं देखने वाला मम्मी सब लोग फिल्म देखने में लगे हुए हैं,,,,,

लेकिन तेरा यहां करना जरूरी है क्या,,,?

हां बहुत जरूरी है क्योंकि मैं भी थिएटर के अंदर औरत के साथ कैसे मस्ती की जाती है यह देखना चाहता हूं,,,,

क्यों गेस्ट हाउस की तरह यहां भी लोग मस्ती करते हैं क्या,,,!( आराधना आश्चर्य जताते हुए बोली,,,)

तो क्या मम्मी यहां पर हम जैसे जोड़े पिक्चर देखने थोड़ी आते हैं एक दूसरे से मस्ती करने के लिए आते हैं और तुम भी मजा लो फिल्म का भी और मेरी हरकत का भी,,,,(ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की चूची को कस के दबा दें हुए बोला तो आराधना के मुंह से आह निकल गई और वह बोली)

तो थोड़ा धीरे तो दबा,,,,,

क्या करूं मम्मी तुम्हारी चूची इतनी बड़ी बड़ी है कि सब्र नहीं होता,,,,,(और इतना कहने के साथ ही संजू थिएटर में कोने वाली सीट पर बैठकर अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलने लगा तो आराधना उसे रोकते हुए बोली,,)

पागल हो गया क्या मुझे शर्म आ रही है यहां पर ऐसा नहीं करने दूंगी,,,,

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अरे मम्मी तुम भी क्या बुद्धू जैसी बात कर रही हो यहां पर कोई देखने वाला थोड़ी है और फिर देखना तुम्हें कितना मजा आता है,,,,,

(वैसे तो आराधना के भी तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी बाकी अपने बेटे की हरकत का मजा लेते हुए उसका सहकार करना चाहती थी लेकिन फिर भी उसे थोड़ी बहुत घबराहट हो रही थी और फिर अपने बेटे की बात सुनकर अपनी घबराहट को दूर करते हुए वह अपने हाथ को अपने बेटे के हाथ पर से हटा ली और संजू अपनी मां की इस हरकत को उसकी अनुमति समझ कर उसके ब्लाउज के बटन खोलने लगा वाह ब्लाउज का आखरी बटन छोड़कर सारे बटन को खोल चुका था क्योंकि मैं जानता था कि ऐसे हालात में सारे बटन खोल ना ठीक नहीं है और फिर वह अपनी मां के ब्लाउज के बटन को खोल कर उसकी ब्रा को ऊपर की तरफ करने लगा,,,,)

आहहहह क्या कर रहा है,,,,, मेरा सारा मेकअप खराब कर देगा तु,,,

वैसे भी मम्मी तुम्हें मेकअप की कोई जरूरत नहीं है तुम जैसी हो वैसे ही स्वर्ग की अप्सरा लगती हो,,,,

चल रहने दे बाते बनाने को तेरे को सिर्फ अपना काम निकालना है,,,,।

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ऐसा कुछ भी नहीं है मम्मी जो सच है वही बोल रहा हूं,,,(इतना कहने के साथ ही बड़ी मशक्कत करते हुए वह अपनी मां की ब्रा को ऊपर की तरफ उठा दिया और अपनी मां की दोनों खरबूजे जैसे चुचियों को ब्रा से बाहर निकाल लिया अपनी मां की बड़ी-बड़ी नंगी चूचियों को ब्रा से बाहर देख कर उसके तन बदन में आग लग गई और वहां तुरंत अपना मुंह अपनी मां की चूची पर रख कर उसके निप्पल को छुहारे का दाना समझकर चाटना और पीना शुरू कर दिया,,,,, ना नूकुर करते हुए आराधना भी अपने बेटे की हरकत का मजा लेने लगी अपनी बेटी की इस हरकत पर वह पूरी तरह से बाग बाग हो गई थी क्योंकि उसका बेटा हिम्मत दिखाते हुए से थिएटर में लाकर उसके साथ मस्ती कर रहा था जैसा कि आज तक अशोक ने ना तो कभी किया था और ना ही कभी ऐसा करने की सोचा था,,,,, अपने बेटे के द्वारा अपनी चूची को मुंह में लेकर पीने से आराधना के तन बदन में उत्तेजना की लहर की लगेगी समझो पूरी तरह से मस्त हो चुका था वह बारी-बारी से अपनी मां की चूची को दशहरी आम की तरह मुंह में लेकर चूसा था और एक हाथ से अपने पेंट की चेन को खोलकर अपने मोटे तगड़े लंड को बाहर निकाल दिया था और अपनी मां का हाथ पकड़ कर तुरंत उसके अपने लंड पर दिया था,,,,,,

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अपने बेटे की यह हरकत आराधना को ऐसी लग रही थी कि जैसे उसकी अद्भुत क्रिया के लिए उसके इस तरह के अद्भुत कार्य के लिए उसे ट्रॉफी पकड़ा दी गई हो और वह भी अपने बेटे के लंड को ट्रॉफी समझकर बड़े जोश के साथ उसे अपनी हथेली में दबा ली थी,,,, अपने बेटे की संगत पाकर उसे अच्छी तरह से मालूम था कि अपने बेटे के लंड के साथ उसे क्या करना है और वह अपने बेटे का लंड को धीरे-धीरे मसाला शुरू कर दी थी जिससे संजू के बदन में भी जोश की लहर उठ रही थी,,,,,।

संजू दुनिया से बेखबर होकर अपनी मां की दोनों चुचियों पर जुट चुका था,,, वह अपना सारा ध्यान अपनी मां की चूचियों पर केंद्रित किया हुआ था जो कि इस समय उसे दशहरी आम की तरह मिठास से भरी हुई लग रही थी वह दोनों चुचियों को बारी-बारी से मुंह में लेकर पी रहा था और आराधना अपने बेटे के लंड को पकड़े उसे खिलाते हुए पर्दे की तरफ देख रही थी तो कभी अपने चारों तरफ नजर घुमाकर तसल्ली कर ले रही थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है,,,, आराधना कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि वह इस तरह से थिएटर में आकर मस्ती करेगी लेकिन थिएटर का मजा उसे भी बेहद अद्भुत प्रतीत हो रहा था क्योंकि एक अजीब सा माहौल बना हुआ था चारों तरफ दर्शक बैठकर फिल्म देख रहे थे और वह जवानी का मजा लूट रही थी,,,,। बेशक यहां पर किसी के देखे जाने का डर बना हुआ था लेकिन संजू अपनी मां को शहर से बहुत दूर लेकर आया था इसलिए देखे जाने का भले लेकिन पहचाने जाने का डर बिल्कुल भी नहीं था,,,।,,,,

संजू इस तरह से अपनी माँ की चूचिय दबा रहा था

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थिएटर के अंदर अंधेरे का फायदा उठाते हुए दोनों मां-बेटे एक दूसरे के अंगों को सहला रहे थे,,, वैसे भी अपनी मां की चूचियां संजू को बेहद लाजवाब और खूबसूरत लगती थी और इस समय वह अपनी मां की चूची का रस दशहरी आम की तरह निकाल रहा था,,,,, संजू औरत के मामले में बहुत चालाक हो चुका था अगर कोई और जगह होती तो शायद वहां अपनी मां का पूरा ब्लाउज उतारकर उसे नंगी करके मजा लेता लेकिन इस‌ समय वह थिएटर के अंदर था इसलिए कपड़ों को सिर्फ थोड़ा सा खोल कर या ऊपर करके ही मजा लिया जा सकता था,,,, आराधना के हाथ में अपने बेटे का लंड बेहद गर्म लग रहा था जिसकी गर्मी उसे अपनी चूत तक महसूस हो रही थी और वह धीरे-धीरे पिघल रही थी,,,, वह अपने बेटे के लंड को बड़े ही जोर से कस के पकड़े हुए थी और उसे ऊपर नीचे करके मुठिया रही थी और इस क्रिया में उसे बहुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,, और संजू के द्वारा स्तन मर्दन और स्तनपान की वजह से उसके मुख्य से हल्की-हल्की सिसकारी भी नहीं कर रही थी जो कि केवल संजू को ही सुनाई दे रही थी और वह अपनी मां की गरमा गरम सिसकारियो की आवाज को सुनकर और भी ज्यादा उत्तेजना ग्रस्त हुआ जा रहा था,,,,, कुछ देर तक अपनी मां की चुचियों से जी भर कर खेलने के बाद संजू गहरी सांस लेते हुए अपनी मां की चूची पर से अपना मुंह हटा लिया और अपनी मां की तरफ देखने लगा आराधना भी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी वह भी मदहोश हो चुकी थी संजू चाहता तो अपनी मां को इसी समय अपने लंड पर बैठाकर कुर्सी पर ही उसकी चुदाई कर देता लेकिन इस समय वह चुदाई नहीं करना चाहता था क्योंकि वह अपनी मां को गेस्ट हाउस में ही जमकर चोदना चाहता था इसलिए अपनी मां की तरफ एकटक देखते हुए वह पूरी तरह से मदहोश हो गया और एक हाथ अपनी मां के गर्दन के पीछे ले जा कर के उसे अपनी तरफ खींचा और उसके लाल लाल होंठों पर अपने होंठ रख कर चुंबन करने लगा इस क्रिया से आराधना पूरी तरह से मदहोश हो गई और वह अपनी हथेली का कसम अपने बेटे के लंड पर बढ़ाने लगी और संजू एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपनी मां की साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगे और देखते ही देखते वह अपनी हथेली को अपनी मां की साड़ी के अंदर उसकी मोटी मोटी जांघों के ऊपर रखकर उसे जोर जोर से मसलने लगा दबाने लगा,,,,

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इस तरह से अपनी जांघों को मत ले जाने पर आराधना को थोड़ा दर्द महसूस होता था लेकिन उत्तेजना के आगे यह दर्द कुछ भी नहीं था,,,, और देखते ही देखते संजू अपनी हथेली को अपनी मां की पैंटी के ऊपर लाकर उसे कसके दबोचने लगा,,, अपनी चूत को अपने बेटे की मुट्ठी में मसलते हुए महसूस करते ही आराधना के मुंह से हल्की-हल्की आह निकलने लगी जिसकी परवाह किए बिना संजू अपनी मां की चूत को बुरी तरह से दबा रहा था मसल रहा था जो की चूत भी पूरी तरह से अपना रस छोड़ रही थी,,,, इस दौरान भी संजू अपनी मां के लाल लाल होठों को अपने होंठों के बीच लेकर उसका रसपान कर रहा था,,,, मौके का फायदा किस तरह से उठाया जाता है और औरत के अंगों से किस तरह से खेला जाता था इस खेल को इस अनुभव को संजू अच्छी तरह से जानता था और समझता था इसीलिए वह हर तरह से अपनी मां को संपूर्ण सुख देना चाहता था जिससे वह आज तक वंचित रह गई थी,,,,।

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आराधना अपने बेटे के हाथों पूरी तरह से मदहोशी के आलम में डूबने लगी थी जवानी का नशा परवान चढ़कर बोल रहा था आंखों में खुमारी छाई हुई थी,,, इस तरह का एहसास तो उसे अपनी जवानी के दिनों में नहीं होता था लेकिन उम्र के इस दौर में पहुंचकर उसकी जवानी पूरबहार में खिल चुकी थी,,,,, अपने बेटे के हाथ का स्पर्श पाते ही उसकी चूत पानी छोड़ने लगती थी थोड़ी यही इस समय भी उसके साथ हो रहा था वह अपनी बेटी के लंड को एक पल के लिए भी अपनी हथेली से अलग नहीं कर पाई थी अपने बेटे के लंड को देखते ही उसके बदन में ना जाने कैसी हलचल होने लगती थी,,,, आराधना मदहोश और उत्तेजित होकर अपने बेटे के चुंबन का आनंद ले रही थी वह भी इस समय पूरी तरह से भूल चुकी थी कि वह थिएटर में बैठी हुई है लोगों के बीच में उसे अब केवल अपना बेटा और उसकी हरकत ही नजर आ रही थी सामने पर्दे पर कौन सी फिल्म चल रही है इससे अब उसे कोई मतलब नहीं था,,,,,।

चड्डी के ऊपर से अपनी मां की चूत को दबोचते दबोचते संजू अपनी हथेली को अपनी मां की चड्डी के अंदर डाल दिया और फिर उसकी पनीयाई चूत को मसलना शुरू कर दिया और साथ ही अपनी एक उंगली को उसकी चूत के अंदर डाल दिया और उसे अंदर बाहर करने लगा जिस अवस्था में आराधना थिएटर की सीट पर बैठी हुई थी उस अवस्था में वह अपने बेटे की उंगली को अपनी चूत की गहराई में महसूस नहीं कर पा रही थी इसलिए अपने बेटे का साथ देते हुए वह हल्के से अपनी गांड को सीट के ऊपर उठा ली थी और अपनी दोनों टांगों को खोल दी थी जिससे उसका बेटा आराम से उसकी चूत में उंगली कर सकें,,,,।

संजू साफ तौर पर देख पा रहा था कि उसकी मां उसके कामखेड़ा में पूरी तरह से उसका साथ दे रही है इसलिए मदहोश और प्रसन्न होते हुए वह अपनी एक उंगली की जगह अपनी तो उंगली अपनी मां की चूत में डाल कर अंदर बाहर करना यह एहसास से वह पूरी तरह से गर्म हो चुका था और अपनी मां को भी गर्म कर रहा था आराधना से रहा नहीं जा रहा था और वहां जोर-जोर से अपने बेटे के लंड को मुठिया रही थी,,,,, पहले जब कभी भी वह अपने दोस्तों के मुंह से यह सुनता था कि वह अपनी गर्लफ्रेंड को थिएटर में ले जाकर के उसके साथ मस्ती किया है तो उसे विश्वास नहीं होता था लेकिन आज जब वह अपनी मां के साथ वही क्रिया कर रहा है तो उसे पूरा विश्वास हो गया था कि थिएटर के अंदर भी चुदाई संपूर्ण रूप से सफलतापूर्वक कर सकते हैं,,,, लेकिन वह मन बना लिया था कि गेस्ट हाउस में ले जाकर ही अपनी मां को चोदेगा लेकिन इस समय थिएटर के अंदर उसके तन बदन में आग लगी हुई थी और वह किसी भी तरह से अपनी आग को शांत करना चाहता था,, इसलिए अपनी चारों तरफ नजर दौड़ा कर देखा तो कोई भी उसकी तरफ देख नहीं रहा था सब लोग फिल्म देखने में मशगूल हो चुके थे जो कि पर्दे पर बेहद रोमांटिक दृश्य चल रहा था और इसी का फायदा उठाते हुए संजू धीरे से अपनी सीट से बिना खड़े हुए भी उसी तरह से सीट से नीचे उतर गया और तुरंत अपनी मां की सीट के सामने आकर घुटनों के बल बैठ गए अपने बेटे की हरकत को देखते हुए आराधना समझ गई थी कि उसका बेटा क्या करना चाहता है इसलिए आराधना भी चारों तरफ देखकर अपनी भारी-भरकम गांड को एकदम आगे की तरफ लाकर सीट के किनारे पर रख दिया और अपने साथी को कमल तक उठा दी इस अवस्था में हुआ अपनी पेंटी को उतारा नहीं चाहती थी और संजू भी अच्छी तरह से समझता था इसलिए वह धीरे से अपनी मां की बेटी को एक तरफ से पकड़कर दूसरी तरफ खींच कर कर दिया और कचोरी की तरह फूली भी चुप होने की वजह से पेंटी का एक हिस्सा दूसरे हिस्से पर जाकर एकदम से अटक गया और पूरी तरह से नंगी हो गई जो की पूरी तरह से काम रस से भीगी हुई थी अब संजू को खुला दौर मिल चुका था थिएटर के अंदर अपने दोस्तों की बताई बात पर वह अपनी मां के साथ अमल कर रहा था,,,,

अगले ही पल संजू के प्यासे होठ अपनी मां की चूत पर रख कर उसके काम रस को चाटना शुरू कर दिया और अपने बेटे की हरकत से आराधना पूरी तरह से मदहोश हो गई उसके बदन में सुरसुरी सी दौड़ गई वह जैसे ही अपने बेटे के होठों को अपनी चूत पर महसूस की उसी से यह उत्तेजना कपल बर्दाश्त नहीं हुआ और अपने आप ही हुआ अपनी गांड को आगे की तरफ ठेल दी और एक हाथ अपने बेटे के सर पर रख कर उसे अपनी चूत पर दबाना शुरू कर दी देखते ही देखते संजू अपनी जीभ को अपनी मां की चूत की गहराई तक डालकर उसकी मलाई को चाटने शुरू कर दिया और आराधना पूरी तरह से मस्ती के सागर में गोते लगाने लगी वह अपनी गर्मागर्म शिसकारियों पर पूरी तरह से काबू किए हुए थी,,,, क्योंकि वह जानती थी कि अगर वह जरा भी अपनी लय में शोर मचाने लगी तो सारे दर्शक फिल्म छोड़कर उन दोनों की फिल्म देखने लगेंगे इसीलिए वह अपनी भावनाओं पर अपनी उत्तेजना पर जहां तक हो सकता था काबू किए हुए थी,,,,।

अपने बेटे की जीभ को वह साफ तौर पर अपनी बुर की गहराई में महसूस कर पा रही थी जिसमें वह गोल गोल घुमा रहा था जिससे उसकी उत्तेजना और आनंद दोनों बढ़ते जा रहे थे सामने वाली सीट पूरी तरह से खाली थी इसलिए वह अपने दोनों पैरों को फैला कर उस सीट पर रख दी थी जिससे संजू को और भी ज्यादा आनंद प्राप्त हो रहा था संजू पागलों की तरह अपनी मां की चूत चाट रहा था,,,,,,,, देखते ही देखते आराधना की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी और वह अपने बेटे का सर दोनों हाथों से जोर से पकड़ कर अपनी चूत पर दबाए हुए थे संजू समझ गया था कि उसकी मां का पानी निकलने वाला है इसलिए वह भी पागलों की तरह अपनी मां की चूत को चाट ना शुरू कर दिया था और देखते ही देखते हल्की सी आशा के साथ आराधना की कमर थोड़ी सी ऊपर की तरफ उठी और वह भल भला कर अपना काम रस की पिचकारी अपने बेटे के मुंह में मारने लगी,,,,, अपने बेटे की मदद से आराधना झड़ चुकी थी थिएटर के अंदर उसके बेटे ने उसका पानी निकाल दिया था आराधना कभी सोची भी नहीं थी कि थिएटर के अंदर सीट के ऊपर बैठे हुए ही उसका बेटा उसे चरम सुख की प्राप्ति कराएगा,,,,,,,

संजू ने अपना काम कर दिया था लेकिन अब बारी आराधना की थी इसलिए वो धीरे से उठा और अपनी सीट पर बैठ गया लेकिन अपने लंड को उसी तरह से पेंट के बाहर निकाले रह गया और अपनी मां का हाथ पकड़ कर फिर से अपने लंड पर रख दिया,,,, इस बार संजू ने उसे बिल्कुल भी ईशारा नहीं दिया था लेकिन आराधना को अच्छी तरह से मालूम था कि उसे क्या करना है इसलिए वह अपने आप धीरे से अपनी जगह से नीचे की तरफ बैठ गई और अपने बेटे के ठीक सामने आकर अपने बेटे का लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी और जैसे ही आराधना ने अपने बेटे के लंड को मुंह में भरकर चूसना शुरू की वैसे ही संजू के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी पकने लगी उसकी आंखें अपने आप ही बंद हो गई और गहरी सांस लेते हुए वह अपनी मां की खुरदरी जीभ के स्पर्श का आनंद लेने लगा,,,, आराधना अपने बेटे के प्रति अपने फर्ज को अच्छी तरह से समझती थी जिस तरह से उसके बेटे ने उसकी सेवा की थी उसी तरह सेवा भी अपने बेटे को निहाल कर देना चाहती थी देखते ही देखते आराधना पूरी तरह से अपने गले के अंदर तक उतार कर अपने बेटे के गधे जैसे लंड को चूस रही थी,,, और संजू धीरे-धीरे अपनी कमर को आगे पीछे सीट पर बैठे हुए ही कर रहा था कुछ देर तक आराधना इसी तरह से अपने बेटे के लंड को चुस्ती रही,,,, संजू अपनी मां की हरकत को देखकर यही सोच रहा था कि उसके दोस्त भी इसी तरह से मजे लेते होंगे,,,, और यह भी सोच रहा था कि वह अपने दोस्तों से कहीं आगे बढ़कर और भी ज्यादा मजा दे सकता है और ले सकता है क्योंकि इतनी देर से और दोनों की काम क्रीड़ा की तरफ किसी का भी ध्यान नहीं गया था अंधेरे का फायदा उठाते हैं वह इसी समय अपनी मां की चुदाई भी कर सकता था लेकिन वह अपना मजा किरकिरा नहीं करना चाहता था वह इसी तरह से अपना पानी निकाल देना चाहता था और उसी कार्य को सफल बनाने में उसकी मां पूरी तरह से अपना सहयोग कर रही थी,,,

देखते ही देखते संजू के बदन में अकड़न बढ़ने लगी लंड की मोटाई फूलने पिचकने लगी और अगले ही पल लंड से जोरदार पिचकारी निकली और सीधा आराधना के गले के अंदर उतरने लगी आराधना अच्छी तरह से जानती थी कि उसके बेटे का पानी निकलने वाला है लेकिन वह उत्तेजना में पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी वह अपने बेटे के पानी को अपने मुंह में निकालना चाहती थी इसीलिए उसके लंड को एक पल के लिए भी अपने मुंह से बाहर नहीं निकाली और उसके गरमा गरम माल का मजा लेने लगी और तब तक अपने मुंह में से बाहर नहीं निकाली जब तक कि लंड में से आखिरी बूंद तक निकल नहीं गया,,, अपने बेटे को झाड़ देने के बाद आराधना तुरंत अपनी सीट पर बैठ गई और अपनी पेंटिंग को सही करके साड़ी को नीचे करके अपनी ब्रा को वापस अपनी स्थिति में ला कर,,,, अपने ब्लाउज के बटन को बंद करने लगी और ब्लाउज के बटन को बंद करने के बाद अपने आप को पूरी तरह से दुरुस्त करके अपने होठों पर लगे अपने बेटे के रस को रुमाल से साफ करके एकदम दुरुस्त कर ले और संजू भी अपने पेंट की चैन को बंद करके एकदम जेंटलमैन की तरह बैठ गया और थोड़ी ही देर में इंटरवल पड़ गया और थिएटर की सारी लाइटें जल उठी सही समय पर दोनों ने अपने आप को दुरुस्त कर लिया था फिल्म की कहानी से दोनों का कोई लेना-देना नहीं था दोनों को कुछ भी पता नहीं था कि फिल्म कहां से शुरू होकर कहां जा रही है दोनों अपने आप में पूरी तरह से लिखते थे अब फिल्म देखने का कोई मतलब नहीं था इसलिए संजू इंटरवल में अपनी मां को थिएटर से लेकर बाहर निकल गया लेकिन बाहर निकलने से पहले वह लोग थिएटर के बाथरूम में जाकर पेशाब करके अपने चेहरे को अच्छे से पानी से धोकर साथ कर लिए थे और फिर संजू थिएटर के बाहर आया और पार्किंग में खड़ी किया हुआ अपनी स्कूटी लेकर अपनी मां को बिठाकर थिएटर से निकल गया गेस्ट हाउस की ओर,,,,।
 
संजू थिएटर में अपना और अपनी मां का पानी निकालने के बाद इंटरवल में ही अपनी मां को लेकर वह गेस्ट हाउस की ओर चल पड़ा था,,,, आराधना मन ही मन में अपने बेटे की हिम्मत की दाद दे रही थी कि थिएटर के अंदर दर्शकों के बीच वह खुद भी झड़ गया और उसे भी झाड़ दिया अपने बेटे की हिम्मत को देखते हुए वह सोच रही थी कि इतनी हिम्मत उसमें हाई कैसे पहले तो वह ऐसा ना था,,,, फिर तुरंत उसे अपनी बड़ी बहन साधना का ख्याल आ गया और उसके साथ ही वह दृश्य उसकी आंखों के सामने किसी फिल्म की दृश्य की तरह घूमने लगे जब वह आधी रात को अपनी आंखों से देखी थी कि किस तरह से उसका बेटा अपने मोटे तगड़े लंड को उसकी बड़ी बहन की चूत में डाल कर उसे चोद रहा था,,,,, उस दृश्यम के बारे में जब भी आराधना सोचती थी तब तब उसकी चूत खुद अपने रहती थी और उसमें से मदन रस टपकने लगता था,,,, वह नजारा आराधना कभी भूल नहीं सकती थी अपनी बड़ी बहन को अपने ही जवान बेटे के साथ चुदवाते हुए देखकर उस समय आराधना पर क्या बीती थी उसका बयां कर पाना मुश्किल है,,,, आराधना कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसे इस तरह का दृश्य देखने को मिलेगा और वह भी अपने ही बेटे और अपनी ही बड़ी बहन के द्वारा आराधना अपनी बड़ी बहन पर बहुत विश्वास करती थी एक तरह से वह बड़ी बहन कम उसे मां का दर्जा देती थी लेकिन आराधना अपनी बड़ी बहन की ऐसी कौन सी मजबूरी थी जिससे उसे अपनी प्यास बुझाने के लिए अपने ही भतीजे का सहारा लेना पड़ रहा था इस बारे में कभी समझ नहीं पा रही थी लेकिन आप उसे अच्छी तरह से समझ में आ रहा था कि एक औरत की प्यास जब उभरकर उसके दिलो-दिमाग पर छाती है तो उस पर कैसा असर करती है तब वह ना तो किसी भी रिश्ते की परवाह करती है और ना ही ,,,, उस रिश्ते के द्वारा होने वाली बदनामी के बारे में सोचती है,,,, अब जाकर आराधना को समझ में आ रहा था कि उसकी बड़ी बहन क्यों उसके घर आती थी कि उन लोगों की मदद करती थी जिसके पीछे का राज वह आप समझ चुकी थी जो कि उसके बड़े बेटे के इर्द-गिर्द घूमती थी और आराधना समझ गई थी कि उसके बेटे को पूरी तरह से मर्द बनाने में उसकी बड़ी बहन का यहां थे और यह भी सोच कर मन ही मन प्रसन्न होती थी कि एक तरह से उसकी बड़ी बहन ने उसके बेटे को मर्द बनाकर अच्छा ही काम की है वरना जो सुख इस समय बाघ हो रही है उस सुख के बारे में तो वह कभी कल्पना भी नहीं की थी,,,,,,

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जब उसका बेटा उसे थिएटर में ले जा रहा था तो आराधना यही सोच रही थी कि आज उसे बरसो बाद कोई फिल्म देखने का मौका मिलेगा और वह फिल्म देखने का लुफ्त उठा भी रही थी लेकिन उसके बेटे के मन में कुछ और चल रहा था और इसी के चलते वह उसकी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया और ना चाहते हुए भी आराधना अपने बेटे की मदहोशी में पूरी तरह से डूबने लगी और देखते ही देखते फिल्म देखने का दोनों को होश ही नहीं रहा और वह दोनों अपनी अलग ही फिल्म बनाने लगे आराधना अच्छी तरह से समझ रही थी कि अब वह अपने कदम पीछे नहीं ले सकती थी यह सारे अनैतिक रिश्ते पूरी तरह से एक तूफान की तरह थी जो कि अपने तूफान की चपेट में उसे लेकर अपने साथ उड़ाए लिए चले जा रहे थे,,,,, लेकिन इस बात से वह इंकार भी नहीं कर सकती थी कि इस तूफान का अपना एक अलग ही मजा था जिसका वह पूरी तरह से आनंद लूट रही थी,,,,

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देखते ही देखते संजू अपनी स्कूटी को एक अच्छे से गेस्ट हाउस की पार्किंग में लेकर चला गया जोकि हाईवे के किनारे ही बनी हुई थी,,,, संजू अपनी स्कूटी को पार्क में पार्क कर रहा था तब तक आराधना स्कूटी से उतरकर चारों तरफ नजर दौड़ा कर उसे स्थल का जायजा ले रही थी,,,,, उसकी नजर गेस्ट हाउस के बाहर कोने में खड़ी कुछ लड़कियों पर गई तो उनका सज धज कर खड़ा रहना और आने जाने वालों से नैन मटक्का करना यह देखकर आराधना समझ गई कि यह लड़कियां साधारण लड़कियां नहीं की धंधे वाली थी और उन लड़कियों को देखकर आराधना मन ही मन मुस्कुराते हुए अपने आप से ही बात करते हुए बोली,,,

तुम्हें कौन सी साधारण औरत हूं आज के दिन मेरी एक धंधे वाली है जो कि अपने ही बेटे को ग्राहक बनाकर उसके साथ गेस्ट हाउस में जाकर मजे करने जा रही हैं,,,,,

अपने मन में यह ख्याल आते ही आराधना के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी ,,, संजू स्कूटी को पार कर चुका था और उसकी चाबी को उंगली में डालकर घूमाते हुए अपनी मां का हाथ पकड़ कर बोला,,,।

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चल मेरी जान अंदर चल कर मजा करते हैं क्या यही खड़े रहकर चुदवाने का इरादा है क्या,,,,

संजू धीरे बोल यह क्या बोल रहा है,,,(आराधना चारों तरफ नजर दौड़ाते हुए बोली,,,,)

अरे भूल गई क्या मेरी जान इस समय तो मेरी मम्मी नहीं बल्कि धंधे वाली औरत है और मैं तेरा ग्राहक हूं समझी,,,

ओहहह,,,(अपने बेटे के कहने का मतलब को समझते हैं उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी,,,,, और दोनों गेस्ट हाउस की तरफ जाने लगे तो संजू उसे उस बिल्डिंग के पिलर के पास खड़ी करके बोला)

तुम यहीं रुको मैं काउंटर पर बात करके आता हूं,,,,

(इतना क्यों नहीं क्या चाहता ही संजू गेस्ट हाउस के काउंटर की तरफ चला गया और आराधना वहीं पिलर के पास खड़ी हो गई,,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था मन में अजीब अजीब ख्याल आ रहे थे उसे इस बात का डर भी था कि कहीं कोई जान पहचान का उसे देख ना ले इसलिए साड़ी की किनारी को पकड़कर वाहन अपने चेहरे को ढकने की नाकाम कोशिश कर रही थी और इस अदा में वह और भी ज्यादा खूबसूरत और सेक्सी लग‌ रही थी,,, संजू अभी काउंटर पर बात ही कर रहा था कि तभी एक कॉलेज का लड़का आराधना को देखकर उसके पास आया और उससे बोला,,,)

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हाय सेक्सी,, क्या मस्त माल है तू,,,(आराधना के चारों तरफ घुमकर उसके खूबसूरत बदन का जायजा लेते हुए वह बोला,,, उसकी हरकत और उसकी बात सुनकर आ रहा था ना घबरा रही थी,,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि यह लड़का क्या कर रहा है तभी वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) गांड मस्त है तेरी गोल-गोल बड़ी बड़ी चूचियों का साइज भी खरबूजे जैसा है तू तो बहुत मजा देगी बोल कितना लेगी,,,,,

क्या कह रहे हो,,,?(आराधना घबराते हुए बोली)

अरे बोलना कितना लेगी बहुत मस्त माल है तू इस उम्र में भी तु एकदम कड़क है,,,,

(आराधना एकदम घबरा गई थी उस लड़के की बात को वह समझ गई थी वह काउंटर की तरफ देख रही थी कि जल्दी उसका बेटा आ जाए उसकी हरकत को देखकर वह जवान कॉलेज का लड़का बोला)

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तू घबरा क्यों रही है नई-नई है क्या इस धंधे में,,,, तू चिंता मत कर जैसा बोलेगी वैसा ही डालूंगा,,,, अच्छा एक बात बता कंडोम लगाकर करूं या बिना कंडोम के क्योंकि मुझे कंडोम लगाकर मजा नहीं आता लेकिन तुम लोग के धंधे में तुम लोग बिना कंडोम के करने नहीं देते ,,,, चल कोई बात नहीं तेरे लिए कंडोम लगाके कर लूंगा,,,,

(उस लड़के की बात सुनकर आराधना की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी क्योंकि पहली बार कोई लड़का उसे इस तरह की बदतमीजी कर रहा था डायरेक्ट उससे गंदी गंदी बात कर रहा था लेकिन आराधना पूरी तरह से मजबूर थे वह अनजान जगह पर एक अनजान लड़के की बात सुनकर पूरी तरह से घबरा गई थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या कहें और उसकी घबराहट का फायदा उठाते हुए वह लड़का मौका देखकर उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर हाथ फेरते हुए बोला,,,)

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हाय मेरी जान तेरी गांड पर हाथ लगाते ही मेरा लंड खड़ा हो गया मुंह में लेती है या नहीं,,,,

क्या बदतमीजी है तुझे शर्म नहीं आती इस तरह की बातें करते हुए,,,,

लगता है तो इस धंधे में नई आई है इसलिए घबरा रही हैं डर मत मैं तुझे कहीं और नहीं ले जाऊंगा इसी गेस्ट हाउस में लेकर जाऊंगा और तेरी जैसी खूबसूरत माल के लिए मैं आधे घंटे का 5000 देने को तैयार हूं जल्दी है क्या,,,,,।

(उस लड़के की बात सुनकर आराधना अब तक यह तो समझ गई थी कि वह लड़का उसे धंधेवाली समझ रहा है लेकिन इस बात से हैरान थी कि,,, वह लड़का उसके ही बेटे की उम्र का था पर एक जवान होने के नाते वह जवान लड़की की तरफ जाने की जगह उसके पास आया था और उससे गंदी गंदी बात कर रहा था और उसे आधे घंटे का ₹5000 देने को तैयार था इस उमर में भी आराधना 1 जवान लड़के को अपनी तरफ आकर्षित कर चुकी थी यह देखकर आराधना खुद हैरान थी उसे इतना तो समझ में आएगी आया था कि वाकई में उसमें अभी भी बहुत कुछ बात की है बल्कि बहुत कुछ भरा हुआ है तभी तो एक जवान लड़का लड़की को के झुंड के पास ना जा करके उसके पास आया था उसे गेस्ट हाउस में ले जाने के लिए उससे भाव तोड़ कर रहा था उसकी बात को सुनकर आराधना को गुस्सा तो आ रहा था लेकिन वह समझ रही थी कि वह लड़का उसे धंदेवाली ही समझ रहा है इसलिए इस तरह की बातें कर रहा है और उसकी बात को सुनकर उसकी चूत से पानी टपक रहा था,,,, आराधना चक्र पकड़ देख रही थी और उसे इधर उधर देखता हुआ देखकर वह लड़का फिर से अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

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क्या हुआ रानी खामोश क्यों है ऐसा तो नहीं किसी और का इंतजार कर रही है अगर ऐसा हो तो मुझे अपना नंबर दे दे उसका काम खत्म होते ही मैं आ जाऊंगा तेरे पर मेरा दिल आ गया है तुझे चोदने का बहुत मन कर रहा है,,,, तेरी चूचियां कितनी जानलेवा है,,,(आराधना की चूचियों की तरफ देखते हुए और यह देखकर आराधना साड़ी का पल्लू ठीक करने लगी और यह देखकर वह लड़का अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) लगता है किसी मजबूरी में इस धंधे में आई है तभी इतना शर्मा रही है मुझे बता पैसे की जरूरत है तो मैं तुझे दे दूंगा लेकिन रोज मुझसे चुद वाना पड़ेगा,,,,,

(आराधना को तो जैसे सांप सुंग गया था वह पूरी तरह से खामोश हो गई थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें काउंटर पर अभी भी संजू बातें कर रहा था यह देखकर उस लड़के से पीछा छुड़ाने के लिए आराधना भी काउंटर की तरफ जाने लगी तो वह लड़का पीछे पीछे आया और सीधा काउंटर तक आ गया,,,, और बोल)

संजू जल्द से जल्द अपनी मम्मी को अपने लुंड पर बिठाना चाहता था

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बोलना कितना लेगी,,,,

(इतना सुनते ही संजु उस लड़के की तरफ देखने लगा जो कि उसकी मां से ही मुखातिब था और वह बोला)

क्या बात है भाई,,,,?

अरे यार यह रंडी कितना भाव खा रही है इसको मैं आधे घंटे का 5000 देने को तैयार हूं लेकिन यह है कि कुछ बोल ही नहीं रही है अरे कम है तो बोलना मैं और दूंगा,,,,

(उस लड़के के मुंह से अपनी मां के लिए रंडी शब्द सुनकर संजू का खून खोलने लगा उसका मन कर रहा था कि एक ही मुक्के में उसका मुंह तोड़ दें लेकिन वह जानता था कि वह जिस जगह पर खड़ा है वहां पर इसी तरह से मोलभाव होते हैं और इस समय वह अपनी मां को एक धंधे वाली औरत बनाकर ही सजा पर लाया है इसलिए वह बोला कुछ नहीं और मुस्कुरा कर सिर्फ इतना बोला,,,)

गेस्ट हाउस क बहार मिला अनजान लड़का इस तरह से अरफना को छोड़ने की चाहता रखता था

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भाई यह मेरे साथ है,,,

(इतना सुनकर उसका मन एकदम से उदास हो गया और वह बोला)

चल कोई बात नहीं आधे घंटे में ही तो तू बाहर आ जाएगा उसके बाद मेरा सौदा पक्का,,,

आधे घंटे में मैं नहीं आऊंगा,,,,

तो एक घंटा,,,

(उस लड़के की बात सुनकर संजू मुस्कुराता हुआ ना में सिर हिला दिया,,,, तो हैरान होता हुआ वह लड़का बोला,,,)

क्या तो कब लेकर आएगा मेरे भाई कभी मेरा नंबर लगेगा,,,,

तेरा नंबर बिल्कुल भी नहीं लगने वाला मेरे दोस्त मैं 1:00 से 5:00 तक का बुकिंग कर आया हूं और उसके बाद इसे घर ले जाकर जमकर चोदूंगा आज के दिन यह मेरे साथ ही रहेगी,,,,

(इतना सुनकर वह लड़का एकदम से हैरानहो गया और संजू की किस्मत से थोड़ा बहुत जलन करते हुए वह बोला,,,)

वह अनजान लड़का अरफना को छोड़ना चाहता था

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1:00 से 5:00 बजे तक करेगा क्या तू भाई एक बार पानी निकलता है तो काम तो खत्म हो जाता है,,,,

मैं इसे बार-बार चोदूंगा ऐसी खूबसूरत औरत बार-बार नहीं मिलती,,,, आज तेरी किस्मत बहुत तेज है लेकिन जाते समय,,,(आराधना की तरफ देखते हुए) मुझे अपना नंबर देते जाना मैं भी तुझे पूरी रात के लिए ले जाऊंगा और जी भर कर तुझे चोदूंगा,,,,,,,

(आराधना की हालत एकदम खराब होती जा रही थी उस लड़के की गंदी गंदी बातें सुनकर वह पूरी तरह से हैरान हो चुकी थी उस लड़के की बात जहां उसे उत्तेजित भी कर रही थी वहां उसे अपने आप पर शर्म महसूस हो रही थी और इस बात से गर्व भी हो रहा था कि जवान लड़का उसकी तरह पूरी तरह से आकर्षित हो गया है,,,,, अपने ही बेटे के सामने उस लड़के के द्वारा उसे खुले तौर पर चोदने वाली बात कहकर वाह अपनी मनसा बता रहा था लेकिन इस समय उसका लड़का उसका जवाब दे सकने में असमर्थ था क्योंकि हालात ही कुछ ऐसे थे वह आराधना के लिए उस लड़के से इस जगह पर लड़ भी नहीं सकता था,,, उस लड़के की बात सुनकर संजू को गुस्सा तो बहुत आया था लेकिन फिर भी ना जाने क्यों इस समय जिस तरह की अदाकारी उसकी मां निभा रही थी उसे देखते हुए उस लड़के की बात में दम भी था इसलिए वहां उस लड़के की बात सुनकर उत्साहित होते हुए बोला,,,)

तब की तब देखेंगे,,, अभी तो मैं जा रहा हूं मौज करने,,,,

(इतना कहने के साथ ही वह काउंटर पर बैठे कर्मचारी से कमरे की चाबी लिया और उसे हिदायत देते हुए बोला)

1:30 बजे के करीब लंच मेरे कमरे में पहुंचा देना,,,)

जी सर,,,(संजू के हाथ में चाबी देते हुए उस कर्मचारी की नजर आराधना पर ही टिकी हुई थी उसकी खूबसूरत जवानी उसे पूरी तरह से मदमस्त कर रही थी खास करके उस कर्मचारी की नजर आराधना की बड़ी-बड़ी चूचियों पर टिकी हुई थी और वहां आराधना की चुचियों पर नजर गड़ाए हुए बोला) आपके कहे अनुसार में लंच आपके कमरे में भेज दूंगा,,,, वैसे सर कहां से लाए इतना बढ़िया माल इस इलाके में तो मैंने कभी इतनी खूबसूरत माल नहीं देखा,,,

(उस कर्मचारी की बात सुनकर संजू खुश होता हुआ धीरे से बोला)

बहुत खास और निजी माल है,,,,,(इतना कहकर मुस्कुराते हुए आराधना का हाथ पकड़ कर वह कमरे की तरफ जाने लगा)

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संजू अपनी मां का हाथ पकड़कर गेस्ट हाउस के कर्मचारी की आंखों के सामने ही निडर होकर उसे गेस्ट हाउस के कमरे में ले जाने लगा,,,, आराधना उस अनजान लड़के की नजर और उसकी बातों को सुनकर और साथ ही गेस्ट हाउस के काउंटर वाले कर्मचारी की निगाहों को देखकर बुरी तरह सहम गई थी,,, उसे देखकर दूसरे लोग क्या सोचते हैं उसके बारे में आज जाकर उसे पता चला था कि उसके बारे में लोग कितनी गलत सोच रखते हैं औरत के मन में क्या चलता है यह सब जाने बिना दुनिया का हर एक मर्द शायद यही सोचता है जैसा कि वह अनजान लड़का और वह कर्मचारी की प्यासी आंखों में झलक रहा था उस अनजान लड़के की बात सुन कर तो आराधना एकदम घबरा सी गई थी क्योंकि वह लड़का किसी भी सूरत में किसी भी कीमत पर उसे बिस्तर पर ले जाना चाहता था,,,, जिसके लिए आराधना बिल्कुल भी तैयार नहीं थी अगर कोई और जगह होती तो शायद आराधना उसके गाल पर थप्पड़ रसीद कर दी होती लेकिन जिस जगह पर वह खड़ी थी उस जगह पर संस्कारी औरतों का लड़कियों का कोई काम नहीं था यहां पर वही औरतें आती थी जो जिस्म का सौदा करती थी जो पैसे लेकर दूसरे मर्दों की प्यास बुझा दी थी और ऐसी आराधना बिल्कुल भी नहीं थी वह तो एक अलग अनुभव के लिए अपने बेटे के साथ धंधे वाली बनकर इस गेस्ट हाउस में आई थी जो कि अभी तक का सफर बिल्कुल एक धंधे वाली औरत की तरह ही लग रहा था क्योंकि सभी लोगों से एक धंधे वाली औरत समझ रहे थे और,,,, गेस्ट हाउस के कर्मचारी ने तो धंधे वाली औरत के रूप में ही उसकी तारीफ के पुल बांध दिया था,,, उसके मुंह से यह सुनकर कि आज तक ऐसी खूबसूरत औरत नहीं देखा इस बात को सुनकर आराधना को अंदर ही अंदर गर्व महसूस हो रहा था और ना जाने क्यों उसे ऐसा आभास हो रहा था कि अगर वहां वाकई में इस धंधे में होती तो वह दूसरी औरतों से ज्यादा पैसे कमाते इस बात का ख्याल उसके मन में आते ही उसके तन बदन में एक अजीब सी ऊर्जा पैदा होने लगी,,,,

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पल भर में ही संजू अपनी मां को लेकर कर्मचारी के बताए अनुसार कमरे के बाहर आकर खड़ा हो गया था और चाबी से कमरे का लॉक खोल रहा था और आराधना वहीं खड़े होकर इधर-उधर देखते हुए थिरक रही थी उसकी गांड की थिरकन चाल बेहद मदहोश कर देने वाली थी,,, देखने वालों के होश उड़ा देती थी आराधना इस समय तो खुद संजू भी अपनी मां के रूप लावण्य को देखकर पूरी तरह से मदहोश हो चुका था वह अपने मन में ही सोच रहा था कि अगर वह अपनी मां की चुदाई ना किया होता अगर वह कोई गैर औरत होती तो सच में उसे किसी भी कीमत में चोदने के लिए तैयार हो जाता,,,,,,,, पल भर में ही कमरे का दरवाजा खुल गया और संजू मुस्कुराता हुआ अपनी मां का हाथ पकड़े हुए उसे कमरे के अंदर लेकर दाखिल हो गया,,,,, कमरे के दरवाजे को बंद करते ही आराधना की खुशी का ठिकाना ना था और उसके तन बदन में तेज ना की लहर दौड़ रही थी और पहली बार किसी गेस्ट हाउस के कमरे में आई थी जो कि बेहद सजा धजा हुआ था शायद संजु ने उसे महंगे गेस्ट हाउस में लेकर आया था,,,, आराधना चारों तरफ घूम घूम कर उस कमरे को देख रही थी,,,, हर चीज जो की सजावट के लिए कमरे में रखी हुई थी वह अपनी जगह पर बरकरार और अच्छे तरीके से रखी हुई थी कमरे की सफाई देखकर आराधना हैरान थी कमरे के बीचो बीच डबल साइज का बेड लगा हुआ था जिस पर नरम नरम गद्दे के साथ बेहद खूबसूरत फूल वाला चादर बिछी हुई थी,,,, और शायद गेस्ट हाउस के मालिक ने बेड पर फूलों वाली चादर को जानबूझकर बिछाया हुआ था क्योंकि मर्द फूल जैसी नाजुक औरत को और लड़कियों को इसी बिस्तर पर लाकर रौंद कर उनका रस चूस लेते हैं,,,,, आराधना के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आ रहे थे क्योंकि यहां तक पहुंचते हुए उसे किसी ने देखा नहीं था और गेस्ट हाउस में प्रवेश करते समय भी कोई जान पहचान का इंसान उन दोनों को देखा नहीं था इसलिए वह निश्चिंत होकर अपनी भारी-भरकम गोल-गोल गांड को धम्म से नरम नरम गद्दे पर रखते हुए पेट के बल एकदम से लेट गई और अपने पैर को घुटनों से मोड़ ली और ऐसा करने पर तुरंत उसकी साली उसके घुटनों से होती हुई उसकी जांघों तक पहुंच गई और कमर के नीचे का हिस्सा पूरी तरह से पर्दा विहीन हो गया और उसकी नंगी गोरी गोरी टांग मतलबी जैसी मोटी चीकनी जांगे नजर आने लगी जिस पर नजर पड़ते ही संजू का लंड एकदम से खड़ा हो गया और वह अपनी मां के करीब जाकर उसके पास में बैठते हुए और उसकी मोटी मोटी जांघों पर अपना हाथ घुमाते हुए बोला,,,,।

हाय मेरी रानी तू तो एकदम रंडी की तरह जलवा दिखा रही है,,,,

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मेरे राजा तुझे खुश करने का जिम्मा जो मैंने अपने सर पर ले लिया है,,,,,,,,

है मेरी रानी गेस्ट हाउस में आते एकदम रंडी बन गई,,,,(इतना कहने के साथ ही संजू अपनी मां के ऊपर लेट गया और उसकी खूबसूरत मदहोश कर देने वाली काली काली आंखों में देखते हुए बोला,,,)

कसम से रानी आज तुझे इतना मजा दूंगा,,, तुझे ऐसी लाजवाब छिनार बनाकर चोदूंगा कि तू जिंदगी भर आज की चुदाई को याद रखेगी,,,,

देखना कहीं तेरा लंड ढीला ना पड़ जाए मेरी चूत एकदम कसी हुई है तेरे लंड को अपने अंदर लेकर उसका सारा रस निकाल लेगी,,,,

यह तो मुझे मालूम है रंडी कि तू एक नंबर की छीनार है और तेरी चूत एक नंबर की है लेकिन मेरा लंड तेरी चूत में जाते ही तेरी चूत का कचुंबर बना देगा,,,,।

(इतना सुनकर आराधना मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली)

यह तो वक्त ही बताएगा मेरे राजा किसमें कितना दम है,,,,

मेरा दम देखेगी रंडी,,,,

हां रे मादरचोद,,,,, मैं भी देखना चाहती हूं कि तेरे में कितना दम है,,,,,

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हाय एकदम छीनार की तरह बोलती है रे तू,,,,

बोलूंगी ही ना मुझे तुने यहां रंडी बनाकर जो लाया है,,,

बात तो तूने सही कहीं देखी नहीं नीचे वह लड़का किस तरह पगलाया था तुझे चोदने के लिए,,,, अगर मैं ना होता तो शायद वहीं पर वह तुझे पटक कर चोद दिया होता,,,,

सच कह रहा है तू वह लड़का तो मेरे पीछे ही पड़ गया था,,,

अरे वह लड़का क्या गेस्ट हाउस के सारे कर्मचारी देखी नहीं आंख फाड़े तुम्हें ही देख रहे थे सच कह रहा हूं मम्मी सब लोगों का लंड तुम्हें देख कर खड़ा हो गया था सब लोग तुम्हारी चूत मारने के लिए तैयार थे और देखना सब के सब तुम्हारे बारे में सोच कर अपना लंड हीलाकर पानी निकाल लेंगे,,,, सच में तुम बहुत खूबसूरत लगती हो,,,,

चल रहने दे अब तो मुझे ऐसा लगता है कि अकेले कहीं चले जाओ तो अपनी इज्जत बचा पाना मुश्किल हो जाएगा,,,,

हां यह तो सच कह रही हो मौका मिलते ही तुम्हारी साड़ी उठाकर कोई भी तुम्हारी चूत में लंड डाल देगा,,,,

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धत्,,,, मुझे सिर्फ तेरा चाहिए और किसी का नहीं,,,,,

(और इतना कहने के साथ ही आराधना खुद अपने होंठ आगे बढ़ा कर अपने बेटे के होंठ पर रख दी और मौके की नजाकत को समझते हुए संजू अपनी मां के लाल लाल होठों को अपने होंठों के बीच रखकर उसके मधुर रस को चूसना शुरू कर दिया,,,,, नरम नरम गद्दे में आराधना को अपना बदन एकदम आरामदायक लग रहा था,,, और उसे अपने बेटे का लैंड अपनी दोनों टांगों के बीच चूत पर ठोकर मारता हुआ साफ महसूस हो रहा था इसीलिए तो अपने बेटे की दीवानी हो चुकी थी क्योंकि कैसे भी हालात में वह अपने लंड का स्पर्श उसकी चूत पर करा ही देता था पहले चाहे साड़ी और पेटीकोट और पेंटी के पर्दे में क्यों ना छुपी हो,,,, संजू को भी अपनी मां की चूत की गर्मी अपने लंड पर साफ महसूस हो रही थी संजू हल्के हल्के अपनी कमर हिलाता हुआ यूं ही अपनी मां को चोदने का आनंद ले रहा था और उसके लाल-लाल होठों का रसपान कर रहा था साथ ही अपना एक हाथ अपनी मां के ब्लाउज पर रखकर उसके भारी-भरकम चूचियों को ऊपर से ही दबा रहा था यह सब आराधना के होश उड़ा रहे थे,,,, उसकी चूत कामुक हरकतों से और लंड की ठोकर को अपने ऊपर महसूस करके मदन रस टपका रही थी,,,,, गेस्ट हाउस में गेस्ट हाउस के कमरे के अंदर नरम नरम गद्दे दार बिस्तर पर आराधना अपने बेटे को ऊपर लेकर उसकी कामुक हरकतों का मजा ले रही थी,,, संजू पूरी तरह से पागल हुआ जा रहा था गेस्ट हाउस में अपनी मां को लाकर वह रंडी की तरह चोदना चाहता था वहां एक अद्भुत अनुभव लेना चाहता था कि कैसे लोग पैसे देकर औरत को गेस्ट हाउस में ले जाकर उसके साथ मजाक करते हैं यह काम संजू घर पर भी रहकर अपनी मां की चुदाई कर सकता था आनंद ले सकता था लेकिन गेस्ट हाउस का मजा ही कुछ और था,,,,,।

आराधना और संजू दोनों मां बेटी के बदन में उत्तेजना की लहर कुछ ज्यादा ही असर दिखा रही थी संजू उत्तेजित बताओ अपने मां के ब्लाउज का बटन खोलने लगा था कि तभी उसे रोकते हुए आराधना बोली,,,।

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रुक जा थोड़ा सब्र कर वैसे भी तुम्हें अर्धे या 1 घंटे के लिए नहीं बल्कि 4 घंटे के लिए कमरा बुक कराया है मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि तो 4 घंटे के लिए कमरा क्यों बुक करा दिया आधे घंटे में या 1 घंटे में सीताराम दोनों का काम हो सकता था,,,,

क्या मम्मी तुम भी जिंदगी में पहली बार गेस्ट हाउस का मजा लेने आई हो और इतने कम समय के लिए यह भला कैसे हो सकता है मैं आज तुम्हें जन्नत का मज़ा देना चाहता हूं रंडी बनाकर तुम्हारी चूत को रगड़ रगड़ कर चोदना चाहता हूं हर एक आसन आजमाना चाहता हूं जिसके लिए 4 घंटे पर्याप्त हैं एक घंटा नहीं,,,,,

(अपने बेटे की बात सुनकर आराधना शर्मा गई उसके गाल सुर्ख लाल हो गए और वह शर्मा कर मुस्कुराते हुए बोली)

चल बड़ा आया 4 घंटे तक चोदने वाला,,,,(इतना कहकर वह संजू को अपने ऊपर से हटाने लगी और बेड पर से नीचे उतरने लगी तो संजू बोला)

क्या हुआ,,,?

अरे मुतने जा रही हुं कबसे बड़ी जोरों की लगी हुई है,,,,

(इतना कहते हुए वह बेड पर से नीचे उतर गई जिससे उसकी कमर तक उठी हुई साड़ी अपने आप आएंगे उसके कदमों पर आ गिरी जिससे एक बेहद खूबसूरत नजारे पर पड़ता पड़ गया बेड के ठीक सामने ही बाथरूम का दरवाजा था जिसके पास जाकर बाहर बाथरूम का दरवाजा खोलने से पहले बाथरूम के हत्थे को पकड़कर अपनी नजर पीछे की तरफ घुमा कर अपने बेटे की तरफ देख कर मुस्कुराने लगी,,,, यह देखकर संजू से रहा नहीं गया और वह बोला,,)

दरवाजा खुला रखना,,,

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क्यों,,,?

मैं तुम्हें पेशाब करते हुए देखना चाहता हूं,,,,।

(अपने बेटे की बातें सुनकर आराधना अपनी नजरों को गोल-गोल घुमा कर अपने बेटे की तरफ आश्चर्य से देखने लगी आराधना को इस बात का एहसास हो चुका था कि दुनिया के हर एक मर्द औरत को चाहे जितनी बार नंगी देख ले या उनकी चुदाई करके तृप्त हो जाए लेकिन उनकी हर एक अदा का मर्दो पर एक गहरा प्रभाव पड़ता है वह हर एक रुप में औरत को देखना चाहते हैं और शायद इसीलिए उसका बेटा भी इस समय उसे पेशाब करते हुए देखने की ख्वाहिश रख रहा था,,,, आज हुआ है जिस तरह की अदाकारी निभाने के लिए गेस्ट हाउस में आई थी उसे देखते हुए अपने बेटे की ख्वाहिश को नजरअंदाज कर पाना उसके लिए मुश्किल था क्योंकि आज वह एक रंडी बन कर उसके साथ आई थी और इस समय उसका काम नहीं था कि वह अपनी ग्राहक को पूरी खुशी दे उसे पूरी तरह से तृप्त कर दे और इसीलिए वह मुस्कुराते हुए बाथरूम का दरवाजा खोला और अंदर प्रवेश कर गई लेकिन दरवाजे को बंद नहीं कि वह पूरी तरह से दरवाजे को खोल दी,,,,, बाथरूम में प्रवेश करते ही उसके होश उड़ गए इतना खूबसूरत बाथरूम उसने आज तक नहीं देखी थी पूरे बाथरूम में टाइल्स लगी हुई थी और वह भी एकदम चमकती हुई जिसमें उसका खुद का अक्स नजर आ रहा था और बाथरूम के अंदर इंग्लिश टॉयलेट था जिसका उसने आज तक उपयोग नहीं की थी,,,,

कुछ देर तक वह इंग्लिश टॉयलेट को ही देखते रह गई,,,, देखकर संजू बिस्तर पर बैठा बैठा ही बोला,,,।

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क्या हुआ रानी पेशाब नहीं करोगी क्या पेशाब कहीं अटक गई हो तो बोलो लंड डालकर रास्ता साफ कर दूं ं,,,

(अपने बेटे की बातें सुनकर पीछे की तरफ देखते हुए बोली)

चल रहने दे इसके लिए तेरी जरूरत नहीं है,,,

तो करो ना मेरी जान मुझे भी कुछ दिखाओ मैं भी देखना चाहता हूं कि तुम्हारी गुलाबी छेद से पेशाब की धार कैसे फुटती है,,,,,,,

(अपने बेटे की मद भरी बातें सुनकर आराधना के तन बदन में सिहरन सी दौड़ रही थी उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि बिस्तर पर बैठा हुआ लड़का उसका बेटा नहीं बल्कि कोई अनजान मर्द है और वह वाकई में धंधे वाली औरत है जिसके साथ वह इस तरह की गंदी बातें कर रहा है और इस समय उसकी यह बातें बेहद लुभावनी और मदहोश कर देने वाली लग रही थी,,,, अपने बेटे की बात का जवाब दिए बिना ही वह अपने क्रियाकलाप को आगे बढ़ाने में जुट गई अब तक वह अपने बेटे की संगत में बहुत ज्यादा खुल चुकी थी,,, इसलिए अपने बेटे के सामने एकदम रंडी पन पर उधर आने में उसे कोई झिझक नहीं हो रही थी बल्कि उसे तो किस तरह की हरकत करने में अजीब सा सुख प्राप्त हो रहा था एक अद्भुत सुख जिसके बारे में उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी कल्पना से परे वह आज अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए ही गेस्ट हाउस में आई थी,,,,, अपने बेटे की बात को सुनकर सिर्फ हुआ इतना ही बोली,,,)

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देखा नहीं है क्या पहले,,,,,

देखा तो बहुत बार हूं लेकिन हर एक बार कुछ नया सा लगता है जिससे पूरे बदन में सनसनी फैल जाती है,,,।

(आराधना अपने बेटे की बात सुनकर मुस्कुराने लगी और वह दीवार की तरफ मुंह करके खड़ी हो गई बाथरूम का दरवाजा पूरी तरह से खुला हुआ था ताकि उसका बेटा उसके हर एक नजारे को अपनी आंखों से एकदम साफ साफ देख सकें,,,,, अपनी मां की क्रियाकलाप को देखने के लिए संजू पूरी तरह से तैयार हो चुका था,,, आराधना अपने बेटे के सामने अद्भुत दृश्य पेश करने जा रही थी,,,,, आराधना को बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी लेकिन वह अपने बेटे को अपनी तरफ से पूरी तरह से आकर्षित करते हुए एक रंडी पन दिखाने का पूरा क्रियाकलाप करने जा रही थी,,,, देखते ही देखते आराधना अपनी साड़ी को दोनों तरफ से पकड़ ली थी और उसे उंगलियों के सहारे से ऊपर की तरफ उठाना शुरू कर दी थी बाथरूम में भी ट्यूब लाइट जल रही थी जिसकी रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था,,,, वैसे तो दोपहर का ही समय था लेकिन फिर भी बाथरूम के अंदर अंधेरा ही होता है लेकिन ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में सब कुछ पर्दे पर चल रही फिल्म की तरह नजर आ रहा था देखते ही देखते आराधना अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी और पैरों से आराधना के नंगे पन का सफर शुरू हो गया और यह देखने के लिए उसका बेटा पूरी तरह से आंखें फाड़े बेड पर पैर नीचे लटकाए बैठ गया,,,,,,,

धीरे-धीरे आराधना मंजिल के करीब पहुंचने के लिए इस सफर को थोड़ा सा लंबा कर रही थी वह चाहती तो एक झटके से ही अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी नंगी गांड के दर्शन अपने बेटे को करा सकती थी लेकिन इस तरह से अपने बेटे को मंजिल तक ले जाने में मजा नहीं आ रहा था वैसे भी मंडी से ज्यादा आनंद सफर देता है और इसी के नक्शे कदम पर चलते हुए आराधना धीरे-धीरे अपनी साड़ी को उठाते हुए अपने घुटनों से पिला दी थी जिससे उसकी गोरी गोरी नंगी मांसल पींडलिया साफ नजर आ रही थी,,,, संजू को अपनी मां की गोरी गोरी पिंडलिया भी बेहद आकर्षित करती थी संजू तो बेहद खुशनसीब का जो कि अपनी मां की चूत तक आराम से पहुंच चुका था लेकिन जिसे अगर आराधना की चूत नसीब ना हो अगर उसे उसकी गोरी गोरी मांसल पिंडलिया भी मिल जाए तो वह उसी पर ही अपना लंड रगड़ रगड़ कर पानी निकाल दे,,,,,

धीरे-धीरे साड़ी ऊपर की तरफ उठा रही थी और वैसे वैसे संजू की हालत खराब हो रही थी देखते ही देखते आराधना अपनी साड़ी को अपनी मोटी चिकनी जांघों तक ला दी,,, अपनी मां को जी भर कर भाग चुका संजू भी इस मनमोहक दृश्य को देखकर बेहद उत्तेजना का अनुभव कर रहा था,,,,, मोटी मोटी चिकनी जांघें के लेके मोटे तने की समान दिखाई दे रही थी,,,,, एकदम मांसल जिस पर जीभ फिराने का मन करें,,, और वह भी एकदम मक्खन जैसा चिकना बदन आखिरकार ऐसा कौन होगा जो ऐसी खूबसूरती पर ना मर मिट जाए,,,, देखते ही देखते साड़ी दोनों नितंबों के ऊपरी छोर तक पहुंच गए जहां से उसकी लाल रंग की चड्डी साफ नजर आने लगी थी यह देखकर संजू का लंड एकदम कड़क हो गया,,,,,,, गोरे गोरे बदन पर लाल रंग की चड्डी उत्तेजना का केंद्र बिंदु बन जाता है और यह केंद्रबिंदु संजू की उत्तेजना का कारण बन रहा था वह पूरी तरह से अपने आप पर काबू करने की कोशिश कर रहा था लेकिन उसका मन और तन दोनों बेकाबू हुआ जा रहा था उसका मन कर रहा था किसी समय बाथरूम में घुस जाए और अपनी मां की चुदाई करना शुरू कर दें,,,,, लेकिन जल्दबाजी और जबरदस्ती करना बिल्कुल भी ठीक नहीं था क्योंकि वह तो गेस्ट हाउस में मजा लेने आया था उसके पास समय भी बेहद पर्याप्त था इसलिए वह निश्चिंत होकर पेंट के ऊपर सही अपने खड़े होते को दबाता हुआ अपनी मां की खूबसूरत दृश्य का आनंद लेता रहा और उसकी मां,,, धीरे-धीरे अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी जिससे उसकी भारी-भरकम गोलाकार गांड लाल रंग की चड्डी में कैद नजर आने लगी गोरे गोरे गाल पर लाल रंग की चड्डी बेहद खूबसूरत लग रही थी,,,,, ऐसा लग रहा था कि दूधिया आसमान में नारंगी रंग का सूरज खिल गया हो,,,,,, जिसे देखकर संजू का दिल बागबान हो रहा था,,,,।

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आराधना की मस्ती बढ़ती जा रही थी उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी उसके अंग अंग में मीठी फुहार अपना असर दिखा रही थी,,, उसे भी मालूम था कि उसके बेटे की नजर उसकी गोलाकार गांड पर टिकी होगी जो कि इस समय चड्डी के अंदर केद थी,,,,,, आराधना भी पूरी तरह से मस्ती के सागर में डूबती चली जा रही थी अपने बेटे की आंखों के सामने अपने खूबसूरत बदन का इस तरह से नुमाइश करना उसे भी अच्छा लगने लगा था उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी लेकिन अपने बेटे को अपने हुस्न का जलवा दिखाने के चक्कर में वह अपने पेशाब की तीव्रता पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रही थी लेकिन अब उसी से बर्दाश्त कर पाना मुश्किल हो जा रहा था तो वह अपनी कमर पर साड़ी को थोड़ा सा लपेट ते हुए अपनी लाल रंग की चड्डी को दोनों हाथों की उंगलियों में फंसा कर उसे नीचे की तरफ सरकाने लगी,,,,, यह देखकर संजू का दिल जोरों से धड़क रहा था एक खूबसूरत औरत को अपनी आंखों के सामने अपने कपड़े उतार कर अपने नंगे जिस्म की नुमाइश करते हुए देखने में जो आनंद जो मजा है वह शायद एक वही मर्द जान सकता है जिसकी आंखों के सामने कोई औरत इस तरह की प्रतिक्रिया क्रियाकलाप करें,,,, और इस समय किस्मत का धनी संजू ऐसे खूबसूरत नजारों को अपनी आंखों के सामने देख रहा था और वह भी उसकी आंख के सामने कोई गैर औरत नहीं थी बल्कि उसकी सगी मां थी जो कि बेहद खूबसूरत और हसीन थी,, कुछ ही पल में आराधना की गोलाकार गांड पर से उसका चड्डी नुमा पर्दा हटने वाला था,,, यह सोचकर ही दोनों मां-बेटे के बदन में उत्साह की लहर दौड़ उठ रही थी,,,,,

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संजू की आंखों की पलकें झपकना भूल गई थी,,, वह एकटक बाथरूम के अंदर अपनी जवानी का जलवा बिखेर रही अपनी मां को ही देख रहा था ,,,,, आराधना धीरे-धीरे अपनी चड्डी को दोनों हाथों की उंगलियों से पकड़कर नीचे की तरफ सरकार ने लगी और लाल रंग की चड्डी तरबूज नुमा गांड से सरकते ही गोरा रंग उभार लिए हुए नजर आने लगा संजू से बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था उसकी आंखों के सामने गेस्ट हाउस के कमरे में उसकी मां अपने कपड़े उतार रही थी या देखकर उसका लंड पूरी तरह से टनटना कर खड़ा हो गया था,,,, लंड की नसें पूरी तरह से कड़क हो चुकी थी,,,,, और देखते ही देखते आराधना अपनी लाल रंग की चड्डी को अपनी गोल-गोल तरबूज जैसी गांड के नीचे तक उतार दी,,,,जिससे उसकी गोरी गोरी गांड उभार लिए हुए एकदम साफ नजर आने लगी,,,, और कुछ देर तक आराधना भी अपने बेटे की तड़प को और ज्यादा बढ़ाते हुए अपनी लाल रंग की चड्डी को अपने नितंबों के नीचे ले उभरे हुए स्तर पर लाकर खड़ी हो गई जिससे कमर और चड्डी के बीच का वह मदमस्त कर देने वाला नजारा उभरी हुई गांड एकदम साफ केंद्रित हो रही थी जिस पर संजू की नजर बराबर लगी हुई थी और कुछ नजारे को देखकर संजू से रहा नहीं गया और वह तुरंत अपने पेंट की चैन खोलकर अपने लंड को बाहर निकाल दिया जो की पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो चुका था,,,,

आराधना बेहद उत्तेजना का अनुभव कर रही थी उसके बदन में मदहोशी शराब की तरह बह रही थी जिससे उसका पूरा वजूद महक रहा था अपने बेटे की आंखों के सामने अपनी चड्डी उतारने में किस तरह का सुख से महसूस हो रहा था उसे बयां कर पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था आराधना अपने बेटे पर अपनी जवानी का जलवा बिखेर रही थी और अपनी अदाओं की छुरियां उसके दिल पर चला रही थी,,,,, आराधना उसी स्थिति में खड़ी होकर अपनी नजर को पीछे घुमा कर अपने बेटे की तरफ देखी और मुस्कुराने लगी यह देखकर संजू के तन बदन में आग लग गई और देखते ही देखते आराधना अपने बेटे की आंखों के सामने ही बैठ गई और अपनी भारी-भरकम गोल-गोल गांड को हवा में लहराते हुए अपनी गुलाबी छेद में से पेशाब की धारा छोड़ दी,,,,,

आराधना मुतना शुरू कर दी थी और उसकी चूत में से निकल रही पेशाब की धार के साथ सीटी की आवाज एकदम साफ संजू के कानों में पहुंचने लगी और उस आवाज को सुनकर संजू पूरी तरह से मदहोश हो गया उसका मन एकदम से अपनी मां की चूत की सीटी में खो गया और वह अपनी जगह पर खड़ा हो गया उससे बर्दाश्त कर पाना मुश्किल था आखिरकार विश्व सुंदरी मदहोश कर देने वाली जवानी से भरपूर एक औरत उसके सामने बैठकर के सामने करें और वैसे भी मर्दों की सबसे बड़ी ख्वाहिश ही होती है कि वह किसी खूबसूरत औरत को पेशाब करते हुए देख भरले लेकिन ऐसा नजारा देखने को कम ही मिल पाता है लेकिन संजू किस्मत का बड़ा तेज था जो कि अपनी आंखों के सामने इतना खूबसूरत दृश्य को देखकर उत्तेजना का अनुभव कर रहा था,,,,,, संजू से रहा नहीं गया और वह तुरंत चलते हुए बाथरूम में प्रवेश कर गया पीछे नजर घुमा कर आराधना अपने बेटे को ही देख रही थी उसका इस तरह से बाथरूम में आना उसके तन बदन में आग लगा रहा था उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान आराधना अपने बेटे की उपस्थिति को बाथरूम में महसूस करते ही पानी पानी हुई जा रही थी एक तरफ उसकी गुलाबी छेद से पेशाब की धार फूट रही थी तो दूसरे छेद से उसका काम रस टपक रहा था,,,, संजू अपनी मां के इस अदा का बिल्कुल भी सामना नहीं कर पा रहा था वह अपनी मां की इस कामुक अदा पर चारों खाने चित हो गया था वहां अपनी मां की मदमस्त कर देने वाली जवानी के आगे घुटने टेक दिया था,,, और तुरंत वहां अपनी लालच को रोक नहीं पाया और घुटने के बल बैठ गया और दोनों हाथों को आगे बढ़ा कर अपनी मां की मदमस्त कर देने वाली गोरी गोरी तरबूज जैसी गांड को दोनों हाथों में भर लिया और दबाते हुए उसे पेशाब करने में मदद करने लगा,,,,,, अपनी गोरी गोरी नंगी गांड पर अपने बेटे की हथेली का मजबूत स्पर्श पाते ही आराधना अपनी भावनाओं को बिल्कुल भी संभाल नहीं पाई और उसके मुख से गरमा गरम आह निकल गईंं,,,,।

अपनी मां की गोरी गोरी बड़ी बड़ी गांड को अपने दोनों हाथों में भरकर दबाते हुए संजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें ,,,,, एक तरफ उसकी मां अपनी गुलाबी छेद से धार पर धार मार रही थी और दूसरी तरफ संजू उसकी मस्त गांड को मसल रहा था,,,,,

ओहहह मम्मी क्या मस्त गांड है तुम्हारी,,,, मन करता है ऐसे ही तुम्हारी गांड को दबाते दबाते मसलते मसलते पूरी उम्र गुजार दूं,,,,

सहहह आहहहह रे कमीने,,,,(लगातार पेशाब की धार मारते हुए) तेरा काम तो ऐसे ही चल जाएगा लेकिन मेरा क्या होगा जब तक मेरी चूत में तेरा जाएगा नहीं तब तक मुझे मजा नहीं आएगा,,,,

हाय मेरी रानी अपनी चूत के लिए मेरे लंड की तड़प देखकर मेरा मन तुझे चोदने को कर रहा है,,,,

तो क्या भोसड़ी वाले तू मुझे यहां गेस्ट हाउस में सिर्फ हाथ से हिलाने के लिए लाया है,,,,

मेरी भोसड़ा चोदी तेरी चूत में लंड डालकर तुझे चोदने के लिए लाया हूं मादरचोद,,,,, और जब तक तेरी चूत में लंड डालकर तेरा पानी ने निकाली तब तक मैं रुकने वाला नहीं हूं,,,,,

इतना भी बड़ा नहीं हो गया रे तू कि मेरी प्यास बुझा सके,,,, अभी भी तु बच्चा है,,,,,(आराधना की पेशाब की धार कमजोर पड़ रही थी अब रह रह कर उसकी गुलाबी छेद में से पेशाब की धार फूट रही थी,,,, और अपनी मां की गरमा गरम रंडी वाली बातें सुनकर संजू पूरी तरह से उत्तेजना से लाल हो गया था और तुरंत अपनी हथेली को अपनी मां की चूत पर रख कर उसे पूरी तरह से अपनी हथेली की आगोश में लेते हुए बोला,,,)

हरामजादी रंडी तुझे क्या मैं बच्चा दिख रहा हूं तुझे चोद कर तुझे बच्चा दे सकता हूं इतना दम है मेरे लंड में,,,,

बातों से नहीं मुझे तो तेरे लंड से ही विश्वास होगा कि तू सच कह रहा है,,,,,

यह बात है,,,,(इतना कहने के साथ ही अपनी मां की चूत की पेशाब में गीले हो चुके अपनी हथेली को अपनी मां की चूत से हटाते हुए अपनी मां की आंखों के सामने ही अपनी उंगलियों को मुंह में डालकर चाटते हुए,,,) तो आज तू मेरी मर्दानगी देखेगी आज देखना मैं तुझे कैसे रंडी की तरह चोदकर तेरी चूत का भोसड़ा बनाता हूं,,,,।

(अपने बेटे को अपने पेशाब में डूबी हुई उंगली को मुंह में डालकर चाटते हुए देख कर,, आराधना एकदम से सन्न रह गई थी आंखें फाडे अपने बेटे की हरकत को देखती रह गई थी अभी भी वह पेशाब करने की मुद्रा में बैठी हुई थी,,,, संजू पूरी तरह से उत्तेजना से भर गया था वह जल्द से जल्द,,,, अपनी मां की चूत में लंड डालकर उसे चोद देना चाहता था लेकिन उसे भी बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी इसलिए वह तुरंत खड़ा हो गया और टॉयलेट पोट‌ के सामने खड़े होकर अपने खड़े लंड को पकड़ कर पेशाब करने लगा लेकिन लंड खड़ा होने की वजह से उसके पेशाब की धार टॉयलेट पोट की जगह उसके ऊपर की तरफ जा रही थी आराधना अभी भी उसी तरह से बैठी हुई थी अपने बेटे के लंड को देखकर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दोड़ने लगी,,,, वह तुरंत खड़े होते हुए बोली,,,।

रुक मैं तेरी मदद कर दुं,,,(और इतना कहने के साथ ही वह अपनी लाल रंग की चड्डी को वापस ऊपर चढ़ा दिया और साड़ी को नीचे गिरा दी और अपने बेटे के खड़े लंड को अपनी हथेली में दबोच ली अपने बेटे के लंड की गर्मी उसे अपनी हथेली में साफ महसूस हो रही थी और उस गर्मी की तपन को आराधना अपनी चूत पर महसूस कर रही थी वह अपने बेटे के लंड को कस के पकड़ लिया और उसे थोड़ा सा नीचे करते हुए उसकी धार को टॉयलेट पोट में गिराने लगी यह देखकर संजू के तन बदन में मदहोशी छाने लगी और वह उत्तेजित होता होगा ब्लाउज के ऊपर से ही अपनी मां की चूची को दबाना शुरू कर दिया,,,,, संजू इतना ज्यादा उत्तेजित हो चुका था कि वह अपनी मां की चूची को हथेली में लेकर दशहरी आम की तरह जोर जोर से दबा रहा था जिससे उसका रस पिचकारी मार दे रहा था और ब्लाउज का आगे वाला भाग हल्का गीला होने लगा था,,,,, हालांकि इस उमर में आराधना को दूध होना नामुमकिन था लेकिन फिर भी जिस तरह से वह दबा रहा था उसे से उसमें रीसाव हो रहा था,,,, यह देखकर संजू उत्तेजित अवस्था में बोला,,,

हाय मम्मी तेरे चूची में से तो अभी भी दूध निकल रहा है,,,

तो पी लेना रोका किसने है,,,,

चली पर बिस्तर पर चल मेरी रानी वही तेरी सारी गर्मी निकालूंगा,,,,

तो ले चल इंतजार किसका है,,,

बस पेशाब निकलने का एक बार कर लो उसके बाद देख क्या करता हूं,,,,

पेशाब करते हुए तेरा लंड और भी ज्यादा मोटा और लंबा लगता है,,,,(लंड को थोड़ा सा हिलाते हुए आराधना बोली)

मोटा तगड़ा लंड लेने में ही तो तुझे मजा आता है,,,,

वह तो आएगा ही ना मेरी चुत जो थोड़ी गहरी है तो उसमें मोटा लंड और लंबा लंड ही चाहिए,,,,

और ऐसा लंड सिर्फ मेरे पास है मेरी जान,,,,

सो तो है,,,,,

(आराधना अपने बेटे को पेशाब करते हुए बड़े गौर से देख रही थी उसका सारा ध्यान सिर्फ अपने बेटे के लंबे लंड पर केंद्रित था जिसमें से पेशाब की धार निकलते समय उसका लंड और भी ज्यादा तगड़ा और मोटा लग रहा था यह देखकर आराधना की चूत फुदक रही थी और तो और उसका मन पेशाब करते हुए,,, अपने बेटे के लंड को मुंह में लेना चाहती थी ताकि उसकी पेशाब की धार को अपने गले तक उतार सके लेकिन ऐसा करने में उसे घिन्न भी महसूस हो रही थी,,, लेकिन जिस तरह से उसके बेटे ने पेशाब लगी है अपनी उंगली को मुंह में लेकर चाटा था उसे देखकर आराधना के रोंगटे खड़े हो गए थे उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसके बेटे ने ऐसा कैसे कर दिया शायद ही उत्तेजना और मदहोशी का असर था जो कि शराब की बोतल के नशे से भी कहीं ज्यादा नशीला था,,,,, आराधना अपने बेटे के लंड को मुट्ठी में लेकर दबा रही थी ताकि वह अपने बेटे के लंड से पकने वाली आखरी बूंद को भी उस में से निकाल सके ताकि चोदते समय उसे पेशाब ना लगे और वह जमकर उसकी चूत की सेवा कर सके,,,,,)

अब हो गया,,,,,

(और इतना कहने के साथ ही अपने लंड को पेंट में वापस डाले बिना ही वह आगे बढ़ा और फुर्ती दिखाते हुए तुरंत अपनी मां को अपनी गोद में उठा लिया,,,)

अरे अरे यह क्या कर रहा है रहने दे मैं गिर जाऊंगी,,,

अरे मेरी रानी मैंने आज तक गिरने दिया है क्या जो आज गिरा दूंगा,,,(और इतना कहने के साथ ही वह अपनी मां को पूरी तरह से गोद में उठा लिया और बाथरूम से बाहर निकलने लगा पेंट के बाहर उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में खड़ा था जिस पर आराधना की गांड साड़ी सहित स्पर्श हो रही थी और आराधना को अपने बेटे के लंड का स्पर्श अपनी गांड पर साफ तौर पर महसूस हो रहा था जिसकी गर्मी उसके तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी को और ज्यादा भड़का रही थी,,, संजू के लंड से बिल्कुल भी सब्र नहीं हो रहा था वह बार-बार ठुनकी लेता हुआ अपनी मां की गांड पर दबाव बना रहा था और देखते ही देखते संजू अपनी मां को गोद में उठाए हुए ही बिस्तर के करीब लेकर आ गया और उसी तरह से उसे बिस्तर पर गिरा दिया और धम्म करके आराधना बिस्तर पर जा गिरी लेकिन बेड पर भी छाया हुआ गद्दा इतना नर्म था कि उसे बिल्कुल भी एहसास नहीं हुआ कि उसके बेटे ने उसे बेझिझक बिस्तर पर फेंक दिया है शायद गद्दे के मुलायम पन‌ से संजू पूरी तरह से वाकिफ था इसलिए उसने अपनी मां को बेफिक्र होकर बिस्तर पर फेंक दिया था वरना वह अपनी मां को फूलों की तरह रखता था उसे जरा भी चोट लगने नहीं देता था,,,,,

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बिस्तर पर गिरते ही आराधना अपने बेटे की तरफ देखकर कामुक मुस्कान बिखेरने लगी तो संजु अपने शर्ट की बटन को खोलते हुए बोला,,,)

अब आएगा असली मजा जब मेरा लंड तेरी चूत में जाएगा,,,
 
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