Incest बैलगाड़ी,,,,, - Page 25 - SexBaba
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Incest बैलगाड़ी,,,,,

सगाई की रस्म हंसी खुशी से निपट चुकी थी,,,, राजू बहुत खुश था क्योंकि उसके सपनों की रानी है उसकी बीवी बनने वाली थी,,,,, और अपनी सगाई पर राजू ने जिस तरह से गांव वालों को जश्न कराया था उसे देखकर पूरे गांव वाले दंग रह गए थे,,,, गांव वाले इस बात से वाकिफ थे कि राजू लाला का एकदम खास बन चुका है और व्यापार और जमीदारी की डोर भी उसके ही हाथों में है इसलिए लोग खुशी-खुशी उसका साथ भी देते थे और उसके सामने जी हुजूर भी करते थे क्योंकि ऐसा करने से सबका फायदा था,,,,,,

Raju ki ma ki madhoshi



गुलाबी अपनी सगाई से बिल्कुल भी खुश नहीं थी क्योंकि वह इस घर को छोड़कर जाना ही नहीं चाहती थी क्योंकि विवाह के बाद जो सुख उसे अपने ससुराल में मिलता उससे भी बेहतर और संतुष्टि भरोसा उसे किसी घर में मिल रहा था और अभी अपने भतीजे से राजू रोज रात को उसकी जबरदस्त चुदाई करता था यहां तक कि उसकी हड्डियां तक बजा देता था इस तरह से कसके अपनी बाहों में जकड़ते हुए धक्के लगाता था,,,, इसलिए जिस दिन से सगाई हुई थी उस दिन से वह अपना मुंह लटकाए रहती थी उदास रहती थी,,,,

ऐसे ही सगाई के सिर्फ दो दिन बाद ही मधु खाना बना रही थी और गुलाबी उदास बैठी हुई थी और राजू गरमा गरम रोटियां तोड़ रहा था और उसे स्वादिष्ट सब्जी के साथ खा रहा था गुलाबी की हालत देखकर मधु बोली,,,।

क्या हुआ गुलाबी रानी जब से तेरी सगाई हुई है तब से इतनी उदास रहती है क्या बात है,,,

भाभी मुझे यह शादी नहीं करनी,,,,

तो क्या करना है तुझे जिंदगी भर इसी घर में बैठे रहना है ताकि गांव समाज के लोग तेरे भैया को ताना मारते फिरे कि जवान बहन घर में है लेकिन विवाह के बिल्कुल भी चिंता नहीं है,,,,,

Raju or madhu kuch is tarah se



अरे बुआ चिंता क्यों करती हो यहां जो काम चोरी-छिपे कर रही हो अपने ससुराल में छाती ठोक कर करना फूफा जी का हाथ पकड़ कर कमरे में ले जाना और फिर उनके लंड पर चढ़ जाना,,,,(राजू बिल्कुल भी शर्म नहीं करता था और इस तरह की बातें एकदम खुलकर बोल देता था क्योंकि उसका संबंध ही अपनी बुआ और अपनी मां के साथ इस तरह का था कि इसमें शर्म की बिल्कुल भी गुंजाइश नहीं थी अगर शर्म होती तो शायद इस तरह का रिश्ता ही दोनों के बीच ना पनपता,,,,, कभी-कभी तो मधु अपने बेटे की बात सुनकर एकदम से शर्मा जाती थी लेकिन इस समय वह भी अपने बेटे के सुर में सुर मिलाते हुए बोली,,,)

हां सही बात है तेरा जब भी मन करे तब अपने आदमी से छुड़वा लिया कर दिन रात तेरी बुर में लंड डालकर पड़ा रहेगा,,,,,

हां तुम दोनों तो यही चाहते ही हो,,,, ताकि मैं विवाह करके अपने घर चली जाऊं और तुम दोनों को खुला दौर मिल जाए जब चाहे तब तुम अपनी बुर में लंड डलवा कर पड़ी रहोगी,,,,,

चल अच्छा कोई बात नहीं मैं मानती हूं कि तेरी बात सही है लेकिन तेरे भैया भी तो तेरी शादी जल्द से जल्द कराने के लिए उतारू हो चुके हैं आखिरकार उन्हें भी तो तेरी बुर से तैयार है तेरी बुर से मजा ले रही कि नहीं,,,, उन्हें भी तो तेरी कसी हुई बुर मजा दे रही है,,,, लेकिन समय के साथ सब कुछ होना चाहिए तू भी अच्छी तरह से जानती है कि तेरे विवाह में थोड़ा देर हो चुकी है,,,, तेरा विवाह राजू की बहन के साथ ही हो जाना चाहिए था लेकिन कीसी कारणवश देर हो गया लेकिन अब तेरे विवाह में देर करना बेवकूफी होगी तेरे भैया भी यह बात अच्छी तरह से जानते हैं इसीलिए उनका मन ना होने के बावजूद भी तेरा विवाह कर रहे हैं और अच्छा खासा रिश्ता भी तो मिला है,,,,

Raju apni m ki chudai karta hua



लेकिन बुआ को लंड नहीं मिल पाएगा ना मेरे जैसा,,,,

राजु,,,,,, जले पर नमक मत छिड़क,,,

देखी ना मां मैं कहता था ना दुआ मेरे लंड की वजह से इस घर को छोड़कर नहीं जाना चाहती तुम चिंता मत करो दुआ मैं तुम्हारे घर पर आता जाता रहूंगा और फिर तुम्हारे ससुराल में तुम्हारी ऐसी चुदाई करूंगा कि पहले साल में ही तुम भी दीदी की तरह दो तो बच्चे पैदा करोगी,,,,,

अरे हां संजू दो बच्चों से याद आया तेरी दीदी के दोनों बच्चों की शक्ल तेरे से हूबहू मिलती है,,,,

मिलेगी क्यों नहीं भाभी बच्चा भी तो इसी का है,,,,

क्या,,,?(यह बात जानते हुए भी कि जुड़वा बच्चों का बाप उसका ही बेटा है मधु जानबूझकर आंचल जताते हुए बोल रही थी क्योंकि सब कुछ मालूम था लेकिन राजू का यह राज राजू की नजर में उसकी मां को बिल्कुल भी नहीं मालूम था)

हां भाभी यह बात एक दम सच है,,,

Piche se leta raju



नहीं बुआ झूठ बोल रही है जानबूझकर मेरा नाम ले रही है,,,,,(रोटी के टुकड़े को मुंह में डालते हुए राजू बोला)

नहीं भाभी मां कसम मैं सच कह रही हूं,,(अपने गले पर हाथ रखते हुए कसम खाते हुए गुलाबी बोली और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) जानती हो ना भाभी जब तुमने मुझे भैया के साथ पकड़ ली थी तब मैंने तुम्हें राजू की सच्चाई बताई थी और वह भी जब यहां आई थी तो हम दोनों के साथ ही सो रही थी ना तभी राजू ने जमकर उसकी चुदाई किया था और उसे गर्भवती बना दिया था,,,

हाय दैया राजू तूने तभी मैं कहूं कि बच्चों की शक्ल तुझसे हूबहू मिलती कैसे हैं,,,,

क्या मां,,,, चलो मैं मानता हूं कि दीदी के दोनों बच्चों का बाप नहीं हूं लेकिन इस राज को सिर्फ दीदी बुआ और अब तुम जानती हो लेकिन इस तरह से मैंने दीदी पर‌ एहसान ही किया हूं दीदी पर ही क्यों सब एहसान किया हूं,,,, तुम तो जानती हो मां दीदी मां नहीं बन पा रही थी जिसमें जीजा क्या ही कसूर था और जीजा का कसूर दीदी को भुगतना पड़ रहा था दीदी ने मुझे बोली थी कि अगर बच्चे नहीं हुए तो मुझे मेरे ससुराल वाले घर से निकाल देंगे और उनकी दूसरी शादी कर देंगे तुम ही सोचो भला अगर ऐसा हो जाता तो कितना बड़ा दुख इस परिवार पर आ जाता दीदी का घर संसार उजड़ जाता और फिर दूसरी शादी करने में भी दिक्कत आ जाती और इसीलिए मैं दीदी की बात मानते हुए उनके साथ चुदाई किया और मेरी चुदाई रंग लाई और दीदी का घर फिर से बस गया,,,,,

लेकिन राजू तूने इस बारे में मुझे कुछ बताया नहीं उसकी चिंता तो मुझे भी थी क्योंकि वह‌भी मां नहीं बन पा रही थी जिसकी वजह से तेरे पिताजी और मैं भी परेशान थी और इसका कोई हल ढूंढ रही थी लेकिन सब कुछ भगवान के ही हाथ में था मुझे क्या मालूम था कि तेरे ही लंड से तेरी दीदी का उद्धार होना लिखा था,,,,

लगता है मां बुआ का भी उद्धार मेरा ही लंड से लिखा है शादी के बाद देखना मैं ही बुआ के बच्चों का बाप बन जाऊंगा,,,

नहीं नहीं बिल्कुल भी नहीं है ऐसा होने नहीं दूंगी तेरी जैसी अगर औलाद मैंने पैदा कर ली और अगर तेरे ही बच्चों की मां बन गई तो बड़ा होकर वह भी मुझे चोदेगा,,,,

इसमें हर्ज ही क्या है गुलाबी रानी उम्र के इस दौर में भी तेरा जवान बेटा तुझे मजा देगा,,,,

हां बिल्कुल ठीक कह रही है,,,, बेटे को भी थोड़ा बेशर्म बन जाना चाहिए ताकि जीवन का मजा ले सकें,,,,(इतना कहने के साथ ही राजू खाना खा चुका था और जैसे ही उठकर खड़ा हुआ वह अपनी कमर को आगे की तरफ बढ़ाकर ठीक है अपनी मां के सामने अपने तने हुए तंबू को दिखाते हुए बोला)

तुम दोनों की बातें सुनकर मेरा लंड तो खड़ा हो गया है अब इसे शांत करना तुम दोनों की ही जिम्मेदारी है,,,,

(अपने बेटे की हालत और हरकत देखकर मधु हंसने लगी और हाथ से उसे धक्का देते हुए बोली)

जा अपनी बुआ के पास अपनी जवानी की गर्मी शांत कर मुझे खाना बनाने दे,,,,

आ देख मैं तुझे हाथ लगाने देती हूं कि नहीं आज मैं तेरे लंड को ही काट लूंगी तुझे बड़ा घमंड है ना अपने लंड पर,,,(गुलाबी एकदम से गुस्सा दिखाते हुए बोली लेकिन उसके गुस्सा पर राजू और मधु दोनों मुस्कुरा रहे थे राजू तुरंत अपने पैजामा को खींचकर नीचे करते हुए अपने खड़े लंड को अपनी मां की तरफ आगे बढ़ाते हुए बोला)

कबूतर फड़फड़ा रहा है मां उसे काबू में करना होगा,,, लो पहले मुंह में लेकर इसकी धार बढ़ा दो,,,,।

(ठीक अपनी आंखों के सामने अपने बेटे के खड़े लंड को देखकर और गंदी गंदी बातें करने के कारण मधु की भी बुर पानी छोड़ रही थी इसलिए वह तुरंत अपने लाल-लाल होठों को अपने बेटे की तरफ आगे बढ़ाई वह अपने बेटे के लंड को हाथ से पकड़ नहीं सकती थी क्योंकि दोनों हाथ में आटा लगा हुआ था,,,, लेकिन मधु भी एकदम छिनार हो चुकी थी अपने बेटे के लंड को बिना हाथ से पकड़े ही वह अपने लाल-लाल होठों को खोल कर तुरंत उसे अपने होठों के बीच ले ली,,, और उसे चूसना शुरु कर दी पलभर में ही राजू एकदम से मस्त हो गया और अपनी कमर को धीरे धीरे हिलाना शुरू कर दिया तो वह बड़ी बेशर्मी भरी नजरों से अपनी बुआ की तरफ देख रहा था मानो कि आज बुआ की बुर का भोसड़ा बना देगा,,,,, उसकी बुआ भी खटिया पर बैठकर,,,, गुस्से से राजू और मधु की तरफ देख रही थी उसके मन में यही चल रहा था कि उसके विवाह करने के बाद घर को छोड़कर जाने के बाद यह मां बेटे इसी तरह से मजा लेंगे,,,,,।

मधु पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड को मुंह में लेकर चूसने का मजा ही कुछ और था,,,, वह भी अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए मचल रही थी,,,, मधु अपने लाल-लाल होठों के साथ-साथ अपनी जीभ का कमाल दिखाते हुए अपने बेटे के लंड को ज्यादा मजबूती प्रदान करने लगी,,,, कुछ दूर तक राजू इसी तरह से मजा लेता रहा और फिर अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां के सिर पर हाथ रखकर उसे रोकने हुए बोला,,,

बस मा हो गया अब देखो मेरा कमाल,,, अभी देखना कैसे बुआ की बुर का भोसड़ा बनाता हुं,,,,

नहीं बेटा ऐसा गजब मत करना अभी उसका विवाह होना बाकी है अगर तू भोसड़ा बना देगा तो पहली रात में ही इसके पति को पता चल जाएगा,,,,

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मां ंं,,,(इतना कहते हुए राजू अपने पजामे को पैर के सहारे से निकाल कर फेंक दिया,,,, और फिर अपने लंड को हाथ में पकड़ कर हिलाते हुए अपनी बुआ की तरफ आगे बढ़ने लगा और उसकी बुआ गुस्से से एकदम तिलमिला रही थी,,, वह बड़े जोर जोर से सांस ले रही थी मानो कि जैसे राजु की आंखों के सामने शेरनी हो,,,, राजू को अपने बुआ के गुस्से की चिंता बिल्कुल भी नहीं थे क्योंकि वह जानता था कि अपनी बुआ को कैसे काबू में करना है जैसे ही राजू अपनी बुआ के पास पहुंचा गुलाबी ने तुरंत नीचे पड़ा डंडा हाथ में ले ली और उसे तुरंत राजू के ऊपर फटकार दी लेकिन राजू भी बहुत चालाक था और फुर्तीला भी वह तुरंत डंडे को अपने हाथ से पकड़ लिया और उसे एक झटके से छीन कर फेंक दिया,,, और गुलाबी गुस्से में बोली,,,)

देख राजू आज तो मेरे साथ कुछ भी मत करना वरना आज मैं बहुत गुस्से में हूं कहीं ऐसा ना हो जाए कि तेरा लंड फिर दोबारा खड़ा ना हो,,,,

खड़ा होगा बार बार खड़ा होगा जब जब इसके सामने तुम्हारी बुरा आएगी यह तुरंत खड़ा हो जाएगा,,,,(ऐसा कहते हुए राजू अपनी बुआ के ऊपर झुकता चला जा रहा था और उसकी बुआ दोनों हाथ से उसे रोकने की पूरी कोशिश कर रही थी लेकिन उसकी बुआ भी जानती थी कि राजू दमखम में कुछ ज्यादा ही मजबूत है और वह गुलाब की पंखुड़ी की तरह नाजुक उसकी एक नहीं चलने वाली थी लेकिन फिर भी वह पूरी कोशिश कर रही थी,,,, लेकिन जैसे ही राजू अपनी बुआ को अपनी बाहों में लेना चाहिए वह तुरंत जोर से धक्का दे और राजू एकदम से नीचे गिर गया इस बार तो राजू भी एकदम गुस्से में आ गया खाना बना रही मधु भी उन दोनों की हरकत को देख रही थी और मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,,, और दोनों को सहज ते हुए बोल रही थी)

देखना तुम दोनों की प्रेम लीला में कहीं खटिया ना टूट जाए,,,,।

राजू का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था और इस समय वह बुर में घुसने के लिए बेताब था,,,,, राजू तुरंत उठ कर खड़ा हो गया और गुलाबी के दोनों हाथों को पकड़कर उसे अपनी बाहों में भरने की कोशिश करने लगा लेकिन गुलाबी छटपटा रही थी राजू की बाहों से छूटने की कोशिश कर रही थी ऐसा लग रहा था कि वाकई में राजू गुलाबी के साथ जबरदस्ती कर रहा था,,,,,, लेकिन राजू की भुजाओं में बहुत दम था वो एकदम से गुलाबी को अपनी बाहों में भर लिया और एकदम से उसे स्थिर कर दिया वह इतनी कसके उसे अपनी बाहों में भर लिया था कि गुलाबी चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रही थी और देखते ही देखते राजू उसके ऊपर एकदम से लेट गया हुआ है पेट के बल लेटी हुई थी और उसके ठीक ऊपर राजू उसके ऊपर लेटा हुआ था उसका खड़ा लंड सलवार के ऊपर से ही उसकी गांड पर ठोकर मार रहा था,,,,

छोड़ मादरचोद राजू आज मैं तुझे कुछ भी नहीं करने दुंगी,,,

ऐसे कैसे नहीं करने देगी छिनार मादरचोद के साथ-साथ तूने मुझे बुआ चोद भी बना दि है,,, इसलिए आज तेरी बुर में लंड डाल कर ही रहूंगा,,,(राजू ने गुलाबी के ऊपर पूरी तरह से काबू पा लिया जब नीचे लेटी गुलाबी बिल्कुल भी हिलडुल नहीं सकती थी तो राजू तुरंत अपने दोनों हाथ को नीचे की तरफ ले जा कर के उसकी सलवार की दूरी पर एक झटके से खींच लिया और फिर धीरे से उठकर खड़ा हुआ और उसकी दोनों जांघों पर अपनी जान गिरा कर उसे 1 दिन से दबा दिया ताकि गुलाबी उठना पाए और ऐसा ही हुआ जिस तरह से राजू ने उसकी जांघों को अपनी जांघों से दबाया हुआ था गुलाबी उठने में नाकामयाब हो रही थी उठने की कोशिश तो कर रही थी लेकिन उठ नहीं पा रही थी और इसी मौके का फायदा उठाते हुए राजू ने तूने दोनों हाथों से उसकी सलवार पकड़कर एकदम से खींच दिया जिससे उसकी गांड एकदम से नंगी हो गई और फिर एक बार फिर से उसके ऊपर एक दम से लेट कर उसे काबू में करते हुए पेर के सहारे से ही उसकी सलवार को उसके पैरों से बाहर निकाल कर नीचे जमीन पर गिरा दिया कमर के नीचे गुलाबी एकदम से नंगी हो गई इस नजारे को देखकर खाना बना रही मधु भी एकदम उत्तेजित हुए जा रही थी उसकी भी बुर से पानी झर रहा था,,,,

दूसरी तरफ राजू अपनी बुआ के साथ मनमानी करने पर उतारू हो चुका था गुलाबी उसका साथ बिल्कुल भी नहीं दे रही थी लेकिन फिर भी राजू उसे काबू में करके अपनी मनमानी करने पर उतारू था कमर के नीचे वह पूरी तरह से नंगी हो गई थी और खटिया पर उसकी गोल-गोल नंगी गांड को देखकर राजू के लंड में और भी ज्यादा कड़क पन आ गया था,,,,, राजू अपनी बुआ की जांघों पर अपनी जांघों का दबाव बनाते हुए उसे धीरे से चौड़ा करने लगा ताकि उसका गुलाबी छेद ठीक से नजर आने लगे,,,, और राजू की मेहनत रंग लाने लगी वह अपनी बुआ की टांग को इतना तो फैला ही दिया कि उसकी गुलाबी छेद नजर आने लगी थी गुलाबी अभी भी उसकी कैद में छटपटा रही थी और उसे गंदी गंदी गाली दे रही थी,,,।

हरामजादे मादरचोद भोसड़ी वाले देखना जिस लंड पर तुझे घमंड है ना एक दिन खड़ा होना बंद हो जाएगा तब तुझे पता चलेगा,,,,

ऐसा कभी नहीं होगा मेरी जान मेरी बुआ जब तक तुम्हारी जैसी गुलाबी बुर मुझे मिलती रहेगी तब तक मेरे लंड में जान बनी रहेगी,,,(और इतना कहने के साथ ही ढेर सारा थोक वह अपने लंड पर लगाया और बाकी अपनी बुआ की बुर पर लगाकर उसे चिकना करने लगा गुलाबी समझ गई थी कि अब उसकी एक चलने वाली नहीं है,,,,, और फिर राजू अपने लंड को अपनी बुआ की बुर में डाल कर उसके ऊपर एकदम से ले लिया और अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया राजू का लंड ईतना मोटा और लंबा था कि बड़े आराम से इस अवस्था में भी गुलाबी की बुर में घुसकर उसके बच्चेदानी तक पहुंच रहा था,,,, राजू अपनी कमर हिला तब अपनी बुआ को चोदना शुरू कर दिया था आखिरकार गुलाबी कब तक मजे लेने से इनकार करती जिसके लिए वह मरी जा रही थी वही उसकी बुर में घुसा हुआ था इसलिए उसके पीछे हीरे की रंगत बदलने लगी उसके भी तन बदन में उमंग खेलने लगी और उसके चेहरे पर उत्तेजना की ललाश भरने लगी,,,,।

राजू के लंड से गुलाबी को मजा आने लगा था इसलिए वह अपने बदन को एकदम ढीला छोड़ दी थी गुलाबी की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी पहली बार गुलाबी अपने भतीजे से ना चाहते हुए भी उसके जबरदस्ती पन का भोग बन रही थी और इस जबरदस्ती की चुदाई में उसे इतना मजा आ रहा था कि पूछो मत बार-बार उसके बुर पानी छोड़ रही थी,,,,।

राजू के धक्के इतनी तेज थी कि खटिया से चरर चरर की आवाज आ रही थी और मधु अपने बेटे की जबरदस्त चुदाई और खटिया की आवाज सुनकर एकदम से मदहोश होने लगी और वह अपनी जगह से खड़ी होते हुए बोली,,,।

छिनार कहीं तेरी वजह से खटिया ना टूट जाए,,,,(और फिर इतना कहने के साथ ही बहुत ही रसोई में से बाहर आ गई और ठीक अपने बेटे की आंखों के सामने जाकर अपनी टांगें फैलाकर खाली हो गई थी रे तेरे अपनी साड़ी को अपने बेटे की आंखों के सामने उठाने लगी राजू अपनी बुआ को चोदते हुए अपनी मां की मदहोश कर देने वाली हरकत को देख रहा था और उसकी मदहोश कर देने वाली हरकत राजू के तन बदन में आग लगा रही थी वह भी ज्यादा उत्तेजना का अनुभव कर रहा,,,, था,,,, मधु गहरी गहरी सांस लेते अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठा रही थी एकदम इस अवस्था में रंडी लग रहे थे और गहरी सांस चलने के कारण उसकी बड़ी बड़ी छातियों ऊपर नीचे हो रही थी जिससे उसकी दोनों चूचियां एक अलग मदहोशी का आलम बना रही थी देखते देखते अपने बेटे की आंखों के सामने ही मधु अपनी साड़ी को अपनी कमर तक उठा दिया और राजू को तुरंत उसकी मां की रसीली बुर नजर आने लगी जिसमें से मदन रस का रिसाव हो रहा था और बुंद बनकर नीचे जमीन पर गिर रही थी,,,,।

अपनी मां की हालत को देखकर राजू समझ गया था कि उसकी मां को क्या चाहिए इसलिए बिना कुछ बोले वह अपनी जीभ को बाहर निकाल कर ही सारे सही अपनी मां को अपने करीब बुलाने लगा उसकी मां भी पूरी तरह से छिनार बन चुकी थी उसे मालूम था कि उसे क्या करना है और वह धीरे से आगे बढ़ी और अपनी बुर को ठीक अपने बेटे के मुंह पर लगाकर एकदम से मदहोश हो गई और अपनी आंखों को बंद कर ले क्योंकि जैसे ही मधु ने अपनी बुर को अपने बेटे के होठों से लगाई थी राजू ने तुरंत अपनी जीभ बाहर निकाल कर अपनी मां की बुर में डालकर उसके मदन रस को चाटना शुरू कर दिया था,,,,।

मदहोश कर देने वाला दृश्य घर के बीचो बीच नजर आ रहा था खटिया पर बुआ अपने भतीजे से चुदवा रही थी और भतीजा अपनी बुआ के ऊपर लेट कर उसकी बुर में धक्के पर धक्के लगा रहा था और ठीक है सामने अपनी मां की गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर उसकी बुर को भी जा रहा था इस तरह से राजू के तन बदन में अद्भुत उत्तेजना का संचार हो रहा था वह पागलों की तरह धक्के पर धक्के लगा रहा था और गुलाबी मदहोश भरी आवाज निकल रही थी जिसे सुनकर मधु के तन बदन में आग लग रही थी,,,,

राजू इतनी जोर जोर से अपनी कमर हिला रहा था कि देखते ही देखते गुलाबी पानी छोड़ना शुरू कर दी और एकदम से झड़ गई लेकिन राजू अभी भी बरकरार था लेकिन उसकी जवानी की प्यास बुझाने के लिए ठीक उसकी आंखों के सामने दुनिया की सबसे खूबसूरत फूल इंतजार कर रही थी उसकी मां की दोनों टांगों के बीच इसीलिए राजू ने तुरंत अपनी बुआ की बुर में से अपने लंड को बाहर निकाला और तुरंत खटिया से उतर गया और अपनी मां को एकदम से खटिया पर झुका दिया और पीछे से अपनी मां की बिल्कुल भी रुकने का नाम नहीं ले रहा था पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी ,,,, इसलिए शुरू से ही अपने बेटे के तेज धक्कों को अपनी बुर में लेकर मस्त हुए जा रही थी राजू इतनी जल्दबाजी में था कि दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां के ब्लाउज के बटन को खोलने की जगह खींचकर एकदम से बटन को तोड़ते हुए अपनी मां के ब्लाउज को खोल दिया और उसकी पपाया जैसी चूची एकदम से पके हुए फल की तरह लटक गई और राजू दोनों हाथों से उसे पकड़ कर जोर जोर से दबा देंगे धक्के पर धक्का लगाना शुरू कर दिया था आज गुलाबी के साथ-साथ मधु भी अपने बेटे की मर्दाना ताकत को देखकर एकदम दंग रह गई थी वह रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था,,,,, जिस तरह का सुख वह खुद ले रहा था उससे भी जबरदस्त संतुष्टि वह अपनी मां को दे रहा था अपनी बुआ को तो दे ही चुका था,,,,,,,,

अपनी मां को चोदते चोदते ही वह अपनी मां की साड़ी को खोल कर उसे निकाल कर फेंक दिया था ब्लाउज को तो पहले ही पढ़ चुका था और देखते ही देखते राजू अपनी मां की पेटी कोट की डोरी को एकदम से खींच कर उसे ढीला कर दिया और फिर उसे अपनी मां की बुर में धक्का लगाते हुए ही उसे ऊपर की तरफ ले जा कर के अपनी मां के सर के ऊपर से ले जाकर के पेटीकोट को उतार कर अपनी मां को एकदम से नंगी कर दिया यह देखकर गुलाबी भी दंग रह गई थी और अपने बेटे की हरकत पर खुद मधु भी एकदम से मस्त हो चुकी थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि इस तरह से चोदते हुए वह उसे पूरी तरह से नंगी कर देगा,,,, लेकिन मजा भी जबरदस्त दे रहा था अपने तेज धक्को को जारी रखते हुए वह अपनी मां का पानी निकालते हुए खुद भी झड़ गया,,,।

जब हौसला का तूफान शांत हुआ तो गुलाबी खटिया पर से धीरे से नीचे उतरी और अपनी सलवार लेकर उसे पहनते हुए बोली,,,।

इसीलिए मैं इस घर को छोड़कर नहीं जाना चाहती,,,।

(और इतना सुनते ही मां बेटे दोनों जोर जोर से हंसने लगे ब्लाउज के बटन टूटने का गम मधु को बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि राजू ने अद्भुत तरीके से उसकी चुदाई किया था,,,)

दूसरी तरफ रंजीत सिंह के भड़काने पर विक्रम सिंह एकदम से भड़क चुका था वह एकदम से आगबबूला हो गया था वह लाला को सबक सिखाना चाहता था,,,,, उसकी धमकी का लाला पर बिल्कुल भी असर नहीं पड़ रहा था इसलिए वह और भी ज्यादा क्रोध में आ गया था इसलिए अपने 10 आदमियों को लेकर रंजीत सिंह के साथ वह लाला की हवेली की तरफ निकल गया,,,,
 
Thanks bro for your comments n support mujhe yakin hai ki is kahani Ko padhakar bahut se logon ki moot nikal gai hogi

 
राजू और गुलाबी दोनों की सगाई हो चुकी थी सगाई में राजू ने दिल खोलकर खर्चा किया था और पूरे गांव वालों के साथ साथ गांव के जमींदार और उसकी बहन को भी आमंत्रित किया था जो की खुशी खुशी राजू और गुलाबी की सगाई में शामिल भी हुए थे,,,, नाच गाना भोजन सब का प्रबंध राजू ने बड़े अच्छे से किया था,,,,,,,, झुमरी की सगाई राजू के साथ रंजीत से देखी नहीं जा रही थी रंजीत उस दिन से ही चुनरी के पीछे अपने आदमी को लगा दिया था जिस दिन से उसकी नजर झुमरी पर पड़ी थी और झुमरी के चलते राजू ने उसकी जमकर पिटाई की थी,,,,, राजू और झुमरी की सगाई रंजीत ने अपनी आंखों से देखा था और एकदम आग बबूला हो गया था झुमरी की खूबसूरती को वह पाना चाहता था उसे भोगना चाहता था लेकिन राजू के चलते ऐसा मुमकिन नहीं था इसीलिए दोनों की सगाई की बात वहां विक्रम सिंह से कर दिया था और यह भी कह दिया था कि,,, लाला पर दिए गए धमकी का असर बिल्कुल भी नहीं हो रहा है और वह तो निश्चिंत होकर पूरे गांव में घूम रहा है सगाई में शामिल होकर आनंदित हो रहा है नाच गाने का मजा ले रहा है इतना सुनकर विक्रम सिंह एकदम क्रोध से भर गया था उसे लगा था कि उसकी दी गई धमकी से लाला डर जाएगा और अपने आप ही सब कुछ उसके नाम कर देगा लेकिन राजू का साथ पाकर लाला में जाना गई थी और वह विक्रम सिंह के दिए गए धमकी पर बिना गौर किए अपना जिंदगी जी रहा था,,,,

इसलिए विक्रम सिंह आगबबूला होकर अपने आदमियों को लेकर हवेली की तरफ निकल गया था,,,,,, जहां पर निश्चिंत होकर लाला अपनी हवेली में बैठकर हुक्का गुड़गुड़ा रहा था,,,,,,,, विक्रम सिंह जैसे ही हवेली के मुख्य द्वार पर पहुंचा उसके आदमी पहरेदार को मारना शुरू कर दिए और एकाएक हुए हमले से वह दोनों को समझ नहीं पाए और तुरंत वहां से भाग लिए,,,,, लाला को इस बात का आभास तक नहीं था कि जिसके सहारे वह हवेली में निश्चिंत होकर रह रहा था वही दोनों मुसीबत की घड़ी में हवेली छोड़कर भाग खड़े हुए थे,,,, विक्रम सिंह मुख्य द्वार को पार करके हवेली के बड़े दरवाजे के लक पहुंचा और जोर से आवाज लगाता हुआ दरवाजा खोलने लगा,,,।

लाला कहां है निकल बाहर,,,(इतना कहने के साथ ही विक्रम सिंह दरवाजा खोल कर हवेली में प्रवेश कर गया,,, सामने ही गद्दी पर बैठ कर लाला हुक्का गुड़गुड़ा रहा था विक्रम सिंह को देखते ही उसकी आंखें एकदम से फटी की फटी रह गई उसके बदन में खून जमने लगा वह सोचा नहीं था कि विक्रम सिंह इस तरह से उसकी हवेली में आ जाएगा वह तो निश्चिंत था कि दरवाजे पर पहरेदार खड़ा कर रखा है लेकिन उसे क्या मालूम था कि पहरेदार मुसीबत की घड़ी में उसे छोड़कर भाग खड़े होंगे,,,,)

विक्रम सिंह तुम यहां,,,(विक्रम सिंह को गुस्से में देख कर लाना अपने मुंह में से हुक्के की पाइप को बाहर निकालते हुए बोला,,,)

तुझे क्या लगा मैं यहां नहीं आ सकता दरवाजे पर दो पहरेदार खड़ा कर दिया तो क्या तू निश्चिंत हो गया वह दोनों तो कब से भाग खड़े हुए हैं,,,,,

(इतना सुनते ही लाला के पसीने छूटने लगे उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें फिर भी स्थिति को संभालने हेतु वह बोला)

हुआ क्या है विक्रम सिंह मुझे कुछ तो बताओ,,,,

देख रहे हो चाचा इसके तेवर बदले बदले से लग रहे हैं जैसे इसे कुछ मालूम ही नहीं है,,,,

देख रहा हूं रंजीत पहली बार ऐसा हुआ है कि मेरी दी गई धमकी का किसी पर बिल्कुल भी असर नहीं हुआ है,,,,, वरना आज तक किसी की हिम्मत नहीं हुई की मेरी बात को काट सकें वह तो पिताजी की दोस्ती के खातिर मैंने इसे 1 महीने का समय दे दिया था लेकिन मुझे नहीं लगता कि इसे जरा भी फर्क पड़ा होगा,,,,,

यह कैसी बातें कर रहे हो विक्रम सिंह हमारे पिताजी और तुम्हारे पिताजी के बीच गहरी दोस्ती थी,,,, थोड़ा तो लिहाज करो तुम तो तू तड़ाका वाली बातें कर रहे हो,,,,

क्योंकि तू मान सम्मान के लायक नहीं है,,,,, मैं बात को इधर उधर ना घुमा कर सीधे मुद्दे पर आता हूं,,,, देख मैंने तुझे 1 महीने का समय दिया था,,,,, इस बीच तुझे हमारे पिताजी के द्वारा दिया गया उधार पैसा चुकाना था या फिर अपनी मर्जी से अपनी हवेली खेत खलियान और गोदाम सब कुछ हमारे नाम करना था,,,,, लेकिन मुझे नहीं लगता कि तूने इस बारे में थोड़ा भी विचार किया होगा,,,,।

विचार कैसा करना विक्रम सिंह,,,, हमारे पिताजी ने तुम्हारे पिताजी से जितनी भी रकम उधार मिली थी एक-एक पाई सूत समेत चुका दिए हैं कुछ दिन पहले ही हमें रकम चुकाई का कागजात मिला है,,,,,,।

(इतना सुनते ही विक्रम सिंह के चेहरे पर हे रानी के भाव नजर आने लगे,,,,, वह रंजीत सिंह की तरफ देखने लगा रंजीत सिंह भी थोड़ा सा चौक गया था लाला की बात को सुनकर लेकिन फिर वह बोला)

ऐसा है तो दिखाओ कागजात,,,,

हां हां मैं अभी लेकर आता हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही लाला अपने कमरे में गया और थोड़ी देर बाद एक पुरानी सी डायरी लेकर आया,,,,,, और उसके पन्ने पलट कर उसे अपने पिताजी की लिखावट दिखाने लगा जिसमें साफ-साफ उसके पिताजी ने लिख रखा था कि अब उसके ऊपर कोई भी कर्जा नहीं है उसने एक-एक पाई चुका दिया है,, जोकि देने वाले के नाम सहित लिखा हुआ था लाला जैसे ही डायरी का पन्ना खोल कर रंजीत और उसके चाचा विक्रम सिंह की तरफ आगे बढ़ा कर दिखाने लगा और विक्रम सिंह डायरी पर लिखे हुए उस उधार नामा को पढ़ते ही जोर जोर से हंसने लगा उसे हंसता हुआ देखकर लाला समझ गया था कि उसके दिमाग में क्या चल रहा है लेकिन फिर भी बोला)

क्या हुआ विक्रम सिंह तुम ऐसे ‌ क्यों हंस रहे हो,,,

अरे बेवकूफ आदमी हंसु नहीं तो और क्या करूं,,,,

(विक्रम सिंह के साथ-साथ उसके आदमी लोग भी है जोर जोर से हंस रहे थे मानो कि लाला की खिल्ली उड़ा रहे हो,,,,,) तुम मुझे क्या दिखा रहा है डायरी पर लिखा हुआ लिखावट क्या यह मान्य है ये कोई दस्तावेज है,,,,

लेकिन विक्रम सिंह मेरे पिताजी ने जो रकम तुम्हारे पिताजी से उधार लिया था वह भी तो कोई दस्तावेज में लिखा हुआ नहीं था बस दोस्ती के खातिर ले लिए थे ना कोई दस्तावेज ना कोई लिखावट ना कुछ गिरवी रखना ऐसा तो कुछ बात नहीं हुआ था,,,,

अभी तो लाला वह पिताजी का जमाना था लेकिन यह जमाना मेरा है मेरे लिखावट को नहीं मानता और मुझे तुम्हारी जमीन जायदाद गोदाम खेत खलियान सब कुछ चाहिए अगर यह सब बचाना चाहते हो तो रकम मुझे वापस लौटा दो मैं चला जाऊंगा,,,,

नहीं नहीं विक्रम सिंह ऐसा क्यों कर रहे हो थोड़ा तो अपनी जमीदारी की लाज रखो अपने पिताजी और मेरे पिताजी के रिश्ते के बारे में तो सोचो,,,,, यह हवेली खेत खलियान गोदाम यह सब कुछ बाप दादा की कमाई हुई है हमारी इज्जत है सब कुछ है मैं ऐसे कैसे तुम्हें दे दुं,,,,

(इतना सुनते ही विक्रम सिंह एकदम से क्रोधित हो गया और दोनों हाथ को आगे बढ़ा कर लाला की छाती पर जोर से पीटते हुए उसके गिरेबान को पकड़ लिया और उसे अपनी तरफ खींच लिया और गुस्से में बोला)

हरामजादे अब तक मैंने तुझे प्यार से समझाया लेकिन अब तू मेरा गुस्सा देखेगा,,,,, कल तक अपनी मर्जी से तुझे सब कुछ मेरे नाम करना होगा अगर ऐसा नहीं किया तो तेरी लाश आम के बगीचे पर लटकी मिलेगी याद रखना तू अभी भी मेरा कुछ नहीं कर पाएगा और कल भी कुछ भी उखाड़ नहीं पाएगा याद रख लेना अब फैसला तुझे करना है कि जमीन जायदाद हवेली से चिपके रहना है ,,,इसके लिए जान देना है या फिर जिंदा रहना है,,,,,

(विक्रम सिंह लाला को धमका ही रहा था कि तभी नहा कर तरोताजा होकर सोनी उस कक्ष में प्रवेश की उसे नहीं मालूम था कि उस कक्ष में विक्रम सिंह अपने आदमियों के साथ खड़ा है उसे तो लगा था कि उसका समय सिर्फ उसका भाई ही है इसलिए वह केवल साड़ी पहनी थी और अपनी चुचियों को छुपाने के लिए ब्लाउज नहीं पहनी थी उस पर सिर्फ अपनी साड़ी कंधे पर डालकर अपनी दोनों चुचियों को साड़ी के पल्लू से छुपाई हुई थी जो कि नहा कर आने की वजह से अभी भी उसके बदन पर गीलापन था जिसकी वजह से साड़ी भी गीली हो चुकी थी और उसकी दमदार जानलेवा चुचियों से चिपक कर मदमस्त कर देने वाली चूचियों को उजागर कर रही थी,,,,,,

जैसे ही सोनी उस कच्छ में आई इतने सारे आदमियों को देखकर,,, वह जिस हालत में थी अच्छी तरह से जानती थी वह जानती थी कि उसकी दोनों चूचियां एकदम साफ नजर आ रही थी और उसे ऐसा ही लगा था कि कच्छ में सिर्फ उसका बड़ा भाई ही है इसलिए वह पूरी तरह से निश्चिंत थी लेकिन वह एकदम से घबरा गई थी और अपनी दोनों जवानी को छुपाने की कोशिश कर रही थी लेकिन वह ऐसा कर पाती इससे पहले ही विक्रम सिंह के साथ-साथ रंजीत सिंह और उसके साथियों की भी नजर सोनी की मदमस्त कर देने वाली दोनों जवानी पर पड़ चुकी थी विक्रम सिंह तो सोनी को इस हालात में देखकर एकदम से उत्तेजित हो गया और लाला को छोड़कर तुरंत सोनी की तरफ गया और उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच कर उसे अपनी बाहों में भर लिया जिस तरह से विक्रम सिंह ने सोनी को अपनी तरफ खींचा था उसकी पीठ विक्रम सिंह की छाती से एकदम से चिपक गई थी और विक्रम सिंह अपनी मजबूत भुजाओं में बड़ी मजबूती से सोनी को भर लिया था जिससे उसकी गोल-गोल उभरी हुई गांड सीधे विक्रम सिंह के लंड से टकरा रही थी जो कि पल भर में उत्तेजित होकर खड़ा हो चुका था अपनी नरम नरम गांड पर विक्रम सिंह के कठोर लंड का स्पर्श पाते ही सोनी एकदम से घबरा गई और विक्रम सिंह की मौके का फायदा उठाते हुए अपने दोनों हाथ को उसके खरबूजे जैसी चूची पर रख दिया जो की पूरी तरह से नंगी थी और बोला,,,।

वाह मेरी रानी तू खामखा इस हवेली में अपनी जवानी को पानी पानी कर रही है चल मेरे साथ तुझे अपनी रखेल बनाकर रखूंगा और रोज रात को तुझे चांद की सैर कराऊंगा,,,

छोड़ हरामजादे,,,, छोड़‌ मुझे,,,,(सोनी अपने आपको विक्रम सिंह की पकड़ से छुड़ाने की कोशिश करने लगी लेकिन यह मुमकिन बिल्कुल भी नहीं था और यह देखकर लाला भी एकदम आग बबूला हो गया और विक्रम सिंह की तरफ आगे बढ़ते हुए जोर से चिल्लाया)

हरामजादे विक्रम सिंह आज मैं तुझे नहीं छोडूंगा,,,,(उसका इतना कहकर विक्रम सिंह की तरफ आगे बढ़ना था कि विक्रम सिंह का आदमी तुरंत उसे दबोच लिया उसके गले पर चाकू रख दिया और बोला)

जरा सी भी चला कर दिखाया तो यही तेरी गर्दन धड़ से अलग कर दूंगा,,,,

(लाला एकदम से घबरा गया उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करेगा एकदम से फंस चुका था विक्रम सिंह की ताकत को अच्छी तरह से जानता था और साथ ही उसके आदमियों को भी जोकि कही गई बात को पूरा करने में बिल्कुल भी वक्त नहीं लगाते हो बस इशारा मिलने के लिए दी थी लेकिन विक्रम सिंह मुस्कुराकर फिर से सोने के ऊपर अपना पूरा ध्यान बटोर लिया और उसके कंधे पर से साड़ी का पल्लू हटाते हुए उसकी चुचियों को एकदम नंगी कर दिया और उसकी नंगी चूची को अपने दोनों हाथों में भरकर जोर जोर से दबाते हुए बोला,,,)

मेरी रानी छटपटाती हुई औरतें मुझे बहुत पसंद है औरत जितना छटपटाती है उसे चोदने के उतना ही मजा आता है कितना मजा आएगा जब लाला की आंखों के सामने उसकी बहन की बुर में मेरा लंड जाएगा और मैं जी भर कर इसे चोदूंगा,,,,।

(विक्रम सिंह की अश्लील हरकत और अपनी बहन के बारे में इतनी गंदी बात सुनकर लाला एकदम से क्रोध में भरकर भले ही अपनी बहन के साथ उसका संबंध शारीरिक तौर पर था लेकिन फिर भी थी तो उसकी बहन ही इसलिए वह दूसरे के मुंह से अपनी बहन के लिए इस तरह की गंदी बातें कैसे सुन सकता था इसलिए वह जोर से चिल्लाया ही था)

विक्रम,,,(और इतने में ही उसके आदमी का चाकू गर्दन पर दबाव बढ़ाने लगा और लाला एकदम से घबरा गया,,,, एकदम से वह खामोश हो गया विक्रम सिंह एक नजर लाला के ऊपर डाला और फिर अपनी हथेली को जोर-जोर से सोने की चूची पर रखकर जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया उसे इस समय इतना गजब कहानी प्राप्त हो रहा था कि पूछो मत लेकिन सोनी एकदम घबराई हुई थी उसे इस बात का डर था कि कहीं विक्रम सिंह उसके साथ अपनी मनमानी ना कर बैठे,,,,, सोनी इतनी खूबसूरत है कि उसका खूबसूरत बदल और उसकी चूची देखकर रंजीत सिंह के मुंह में पानी आ रहा था और उसके आदमियों की भी हालत खराब थी वह लोग एकदम गौर से सोने की हालत को देख रहे थे और उसकी चूची को अपनी मालिक विक्रम सिंह की हथेली में देखकर मस्त हुए जा रहे थे,,,,, अपने होठों को सोने के गर्दन पर रख उसे चुंबन करने के साथ-साथ उसकी चूची को दबाते हुए विक्रम सिंह बोला,,,)

लाला तुझे अपने बाप दादा की कमाई हुई धन दौलत शोहरत से इतना प्यार है लेकिन क्या तुझे अपने घर की इज्जत से भी उतना ही प्यार है जितना हवेली के लिए जान देने को तैयार हो गया है सोच अगर तेरी बहन की इज्जत लूट गई तो पूरे गांव में पूरे गांव में क्या पास पड़ोस के तेरी थु थु हो जाएगी,,,, और जब सबको पता चलेगा कि तेरी बहन मेरी रखैल बन कर मेरे हवेली में रहती है तब क्या होगा तेरी इज्जत एक कौड़ी की नहीं रह जाएगी तब क्या करेगा इस हवेली को इस जायदाद को इस व्यापार को,,,, विक्रम सिंह अपनी बातों से लाला को डराने की कोशिश भी कर रहा था और सोनी की गरम जवानी के चलते वह पूरी तरह से गर्म भी हो चुका था उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर सोनी की गांड में घुसा चला जा रहा था और सोनी अपनी गांड के बीचो बीच विक्रम सिंह के लंड को महसूस करके कसमसा रही थी वह किसी भी तरह से विक्रम सिंह की कैद से छूटना चाहती थी लेकिन वह अपने आप को छुड़ा नहीं पा रही थी,,,,, लाला की हालत खराब हो चुकी थी उसकी आंखों के सामने ही विक्रम सिंह उसकी बहन की इज्जत पर हाथ डाल रहा था विक्रम सिंह ऐसा कर सकता था इस बात को लाला अच्छी तरह से जानता था क्योंकि वह एक नंबर का गिरा हुआ इंसान था,,,,)

लाला जरा सोच तेरी आंखों के सामने इसी समय अगर मैं तेरी बहन की साड़ी उतार कर उसे पूरी तरह से नंगी कर दूं तो भी तो कुछ नहीं कर पाएगा और सोच मैं अपने लंड को तेरी बहन के मुंह में डाल भी दूं तो भी उसके पास भी उसे चूसने के सिवा और कोई रास्ता नहीं बचेगा तेरी बहन तेरी आंखों के सामने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसेगी ना तू कुछ कर पाएगा वरना तेरी बहन और फिर यही अपने हाथों के सामने ही मैं तेरी बहन की बुर में लंड डालकर उसे चोदूंगा और फिर पीछे से भी तेरी बहन की गांड मारूंगा निश्चित तौर पर तेरी बहन को शुरू शुरू में अच्छा तो नहीं लगेगा लेकिन मेरा बलशाली लंड पाकर तेरी बहन धन्य हो जाएगी और फिर खुद ही मेरी रखैल बनने के लिए तैयार हो जाएगी क्योंकि औरतों को खुश करने में मैं माहिर हूं एक बार तेरी बहन मेरे लंड की सवारी करने की फिर इसे सवारी पर से उतरने का नाम ही नहीं लेगी तब तू सोच तेरी क्या हालत होगी जब तेरी बहन भी तुझे छोड़कर मेरे पास आ जाएंगे और अगर इतने से भी तेरा दिल ना भरे तो मेरे बाद मेरा भतीजा और मेरे आदमी लोग भी तेरी बहन पर चढ़ेंगे तब तु क्या कर लेगा,,,,,।

(विक्रम सिंह की धमकी को सुनकर और उसकी हरकत को देखकर लाला रोने लगा वह घबरा चुका था क्योंकि वह जानता था कि वह विक्रम सिंह का कुछ भी बिगाड़ नहीं सकता और रोते हुए बोला)

मेरी बहन को छोड़ दो उसका क्या कसूर है उसके साथ ऐसा गलत व्यवहार मत करो,,,,

मैं भी तो यही चाहता हूं लाला लेकिन तू शायद अपनी बहन की इज्जत की परवाह नहीं करता तुझे तो सिर्फ हवेली से प्यार है जमीन जायदाद जमीदारी से प्यार है लेकिन अपनी बहन से जरा भी प्यार नहीं है इसीलिए तुझे आखरी मौका देता हूं कल शाम तक तू अपनी जमीन जायदाद हवेली खेत खलियान गोदाम सब कुछ मेरे नाम पर कर देना अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर दूसरे तरीके से तो मैं हासिल करना जानता ही हूं और लेकिन तब तेरा और भी ज्यादा बिगड़ जाएगा तेरी बहन मेरे हवेली की रखैल बन कर रह जाएगी जिस पर रोज न जाने कितने लोग चढ़ेंगे मेरा भतीजा तो अभी से तैयार है क्यों रंजीत,,,,।

चाचा जी आप के इशारे की देरी है वरना मेरा लंड तो कब से तैयार है इसकी बुर में जाने के लिए,,,,

नहीं नहीं विक्रम सिंह ऐसा बिल्कुल भी मत करना,,,,,, मैं कहीं का नहीं रह जाऊंगा किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रह जाऊंगा,,,

इसीलिए तो प्यार से काम ले रहा हूं अभी तो मैं जा रहा हूं लेकिन कल शाम तक अगर तू मेरी बात नहीं मानी तो जो कुछ भी होगा उसका जिम्मेदार तु खुद होगा,,,,,

चलो,,,,,।

(इतना कहकर विक्रम सिंह हवेली के बाहर जाने लगा और पीछे पीछे उसके आदमी और उसका भतीजा रंजीत सिंह जाने लगा रंजीत सिंह धीरे से अपने चाचा से बोला,,,)

क्या चाचा जी यही मौका था उसकी जमीन जायदाद अपने नाम करने का,,,,

अरे बुद्धू मैं जानता हूं इसी समय में सब कुछ अपने नाम करवा सकता था लेकिन यह भी जानता हूं कि लाला के पास अब कोई रास्ता नहीं लाला मेरी ताकत से अब अच्छी तरह से वाकिफ हो गया है देख नहीं रहा था कि से रो रहा है मुझे पूरा यकीन है कि ये खुद ही कल सब कुछ मेरे नाम पर कर देगा,,,,,

अगर ऐसा नहीं हुआ तो चाचा,,,,

अगर ऐसा नहीं हुआ तो कल बहुत कुछ हो जाएगा,,,,,,

(हवेली के अंदर विक्रम सिंह के जाते ही सोनी रोते हुए अपने भाई के सीने से लग गई और लाला भी रोने लगा वह दोनों अच्छी तरह से जानते थे कि वह दोनों की ताकत एकदम से खत्म हो चुकी है अब क्या होने वाला है इस बात का एहसास दोनों को नहीं था लेकिन दोनों इतना जरूर जानते थे कि अगर विक्रम सिंह की कही बात सच हो गई तो बरसों की पुरखों की बनी बनाई इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी,,,,)
 
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