Incest बरसात की रात,,,(Completed) - Page 7 - SexBaba
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Incest बरसात की रात,,,(Completed)

रघु रामू के साथ अपनी मस्ती में मेले में घूम रहा था कि तभी उसे पीछे से आवाज सुनाई दी,,,,

ऐई,,,, सुनो,,,,ऐई,,,,,,,,

(इतना सुनते ही रघु अपने चारों तरफ नजर दौड़ा कर देखने लगा कि कौन आवाज दे रहा है,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आवाज कहां से आ रही है,, तभी अंदर से लाला की बहु बोली,,,)

अरे यहां देखो बग्गी के अंदर,,,

(यह सुनते ही रघु बग्गी की तरफ देखने लगा जिसमें से खूबसूरत औरत हाथ हीलाते हुए नजर आई,,, रघु उसके करीब जाने लगा,, रामू वहीं खड़ा का खड़ा रह गया,,, जैसे ही रघु बग्गी के बेहद करीब पहुंचा,, तो लाला की बहू बोली,,)

पहचाने,,,,

नहीं मैं आपको पहचाना नहीं,,,(रघु कुछ सोचते हुए बोला..)

अरे मैं वही हूं जिसकी पायल तुमने लौटाई थी,,,

(रघु कुछ सोचते हुए फिर एकदम से प्रसन्न होता हुआ बोला)

अरे हां याद आया छोटी मालकिन,,,,

चलो शुक्र है कि पहचाने तो सही,,,

वैसे भी आपको मैं कैसे पहचान पाता आप तो घूंघट में थी और आज भी घुंघट में हो,,,( रघु लाला की बहू के लाल लाल गुलाबी के पत्ते की तरह खूबसूरत होठों को देखते हुए बोला और अभी भी घूंघट में ही थी,,, केवल उसके खूबसूरत होठ भर दिखाई दे रहे थे और उसके होठों को देखकर ही उसकी सुंदरता का अंदाजा लगाया जा सकता था कि वह कितनी खूबसूरत होगी,,, तभी तो रघु लाला की बहू को बड़े गौर से देख रहा था,,)

तो लो चेहरा भी देख लो ताकि आईंदा मुझे पहचान सको,,,(इतना कहने के साथ ही अपने अगल-बगल नजर दौड़ाते हुए अपना घूंघट थोड़ा सा उठा कर अपने खूबसूरत चेहरे का दीदार करा कर वापस घूंघट डाल दी,,, रघु तो पूरी तरह से उस के आकर्षण में अपने आप को भीगोता चला गया,,,उसे इस बात का अंदाजा तो था कि लाला की बहू खूबसूरत होगी लेकिन इतनी ज्यादा खूबसूरत होगी यह आप जाकर उसे पता चला था वह उसे देखता ही रह गया था वह उसके खूबसूरत चेहरे को कुछ देर तक और देखना चाहता था लेकिन लाला की बहू अपने खूबसूरत चेहरे को घूंघट के पर्दे में छुपा ली थी,,,, रघु के दिल की धड़कन तेज होती जा रही थी क्योंकि आज तक उसने इतनी खूबसूरत औरत नहीं देखा था,,, उसके चेहरे और उसके बदन को देख कर रघु को इस बात का अहसास हो गया था कि अभी वह पूरी तरह से औरत नहीं बनी थी नई नई शादी हुई थी लेकिन शादी के बाद जिस तरह का बदलाव औरतों के बदन में आता है उस तरह का बदलाव उसके बदन में नहीं आया था,,,, रघु से कुछ बोला नहीं जा रहा था,,, तभी लाला की बहू अपनी बात आगे बढ़ाते हुए बोली,,)

अब तो तुम्हें याद रहेगा ना,,,

भला चांद को भी कोई भूल सकता है,,,

(रघु की बातों का मतलब समझ में आता है लाला की बहू के होठों पर मुस्कुराहट तैरने लगी,,, पहली बार कोई इस तरह से तारीफ किया था,।)

वैसे छोटी मालकिन आप यहां क्या कर रही हो,,,।

जो तुम कर रहे हो मैं भी मेला ही घूमने आई हूं,,, लेकिन अकेली हूं इसलिए मजा नहीं आ रहा है,,, यहां पर मैं सिर्फ तुमको ही थोड़ा बहुत पहचानती हूं इसलिए तुम्हें आवाज देकर बुलाई तुम्हें बुरा तो नहीं लगा ना,,,।

नहीं-नहीं छोटी मालकिन इसमें बुरा मानने वाली कौन सी बात है,,, यह तो मेरी खुशकिस्मती है कि आपने मुझे बुलाया मैं बहुत खुश हूं आप बड़े लोग हैं बड़े घर की बहू हो,, आप मुझे जानती हो अब इससे बड़ी बात क्या हो सकती है,,,।

तुम बहुत अच्छी बातें करते हो,,,,( लाला की बहू मुस्कुराते हुए बोली)

जी शुक्रिया,,,, वैसे आप मेले में घूमी कि नहीं,,,

नहीं मैं अकेली आई हूं,,, कोई साथ में होता तो जरूर घूमने का मजा लेती,,, चाट पकौड़ी समोसे सब कुछ खाती,,,,

तो अभी भी तो खा सकती हो,,,,

कैसे,,,, मैं किसी को जानती नहीं हूं और इस तरह से घूमना बड़ा अजीब लगता है,,,

मुझे तो जानती हो ना ,,, मैं तुम्हें मेला घुमा देता हूं,,,

तुम,,,, तुम सच में मुझे मेला घुमाओगे,,,

जी छोटी मालकिन मैं तुम्हें मेला घुमाऊंगा,,,

लेकिन गाड़ीवान,,,,

वह तों नहीं है वह भी मेला घूम रहा होगा,,,

ठीक है मैं तुम्हारे साथ चलती हूं,,, लेकिन मुझे चाट पकौड़ी और छोरे जरूर खिलाना और समोसे भी,,,

तुम चिंता मत करो छोटी मालकिन,,, मैं हूं ना ,,,,

लाला की बहू बहुत खुश थी रघु उसे मेला घूमाता रहा,,, जिंदगी में पहली बार रघु के साथ एक बेहद खूबसूरत है शादीशुदा लड़की मेला घूम रही थी,,, रघु की खुशी का ठिकाना ना था,,, रघु उसकी इच्छा का सब कुछ उसे खिलाया समोसे से लेकर के जलेबी तक,,, रघु लाला की छोटी बहू के आकर्षण में पूरी तरह से बंध चुका था,,, पूरे मेले में वह घूंघट में ही घूमती रही और रघु उसे पूरा मेला घूम आता रहा ऐसा लग रहा था कि जैसे रघु अपनी बीवी को मेला घुमाने लेकर आया हो,,, आखिरकार मेला घूमते घूमते शाम हो गई,,, अब घर जाने का समय आ गया था,,, रघु उसे बग्गी तक साथ लेकर आया पूरा मेला घूमने के दौरान रघु अपनी प्यासी नजरों से लाला की बहू के अंगों को देखने की कोशिश करता रहा लेकिन केवल उसे उसके गुलाबी लाल लाल होंठ और ब्लाउज के बीच दोनों चूचियों की मदमस्त लकीर के सिवा और कुछ नजर नहीं आया,,, और कसी हुई साड़ी में से झांकते हुए उसके ऊभार दार नितंब रघु के प्यासे मन पर पानी छिड़कने का काम कर रहे थे रघु बार-बार लाला की बहू को बिना कपड़ों में कैसी दिखती होगी इस तरह की कल्पना करने लगा था,,, और कल्पना करते करते हुए काफी उत्तेजित भी हो चुका था,,,

गाड़ीवानअभी भी नहीं आया था इसलिए लाला की बहू जल्दी से बग्घी में जाकर बैठ गई,,, और अंदर बैठकर पर्दे को हटाते हुए रघु की तरफ देख कर बोली,,,

तुम बहुत अच्छे हो,,,,,, मेला घुमाने के लिए शुक्रिया,,,

छोटी मालकिन आप भी बहुत अच्छी हो और खूबसूरत भी,,,(रघु की बात सुनकर वह हंसने लगी और हंसते हुए बोली,,,)

कोमल,,,,, कोमल नाम है हमारा,,,,,,

वाह जैसी कोमल हो वैसा ही खूबसूरत नाम भी है,,,

(अपनी तारीफ सुनकर वो फिर से हंसने लगी और हंसते हुए बोली,,)

हमारा नाम तो जान गए तुम्हारा नाम क्या है,,,।

रघु,,,,

अच्छा मुझे हमेशा याद रहेगा,,,

(तभी गाड़ीवान भी उधर आ गया और बग्गी पर बैठते हुए बोला,,,)

अब चलु छोटी मालकिन,,,

हां,,,, हां चलो,,,,,(इतना कहते ही उसके चेहरे पर उदासी छा गई,,, ऐसा लग रहा था कि मानो वह रघु से दूर होना नहीं चाहती थी,,, बग्गी गांव की तरफ जाने लगी और वह रघु को देखते ही रहेंगे तब वह भी उसे देखता रह गया जब तक कि दोनों एक दूसरे की आंखों से ओझल नहीं हो गए,,, तभी रामू पीछे से उसकी पीठ थपथपाते हुए बोला,,,,,,।

वाह बेटा कमाल कर दिया लाला की बहू को फसा लिए,,,

रामू ऐसा बिल्कुल भी नहीं है वह बहुत अच्छी है,,,

अच्छी तो है लेकिन उसकी कुछ ज्यादा ही अच्छी होगी,,,

तू चिंता मत कर सबसे पहले मैं तेरी दोनों बहनों की बुर में ही अपना लंड पेलुंगा,,, उसके बाद तेरी मां की चुदाई करूंगा तब जाकर के लाला की बहू का नंबर आएगा समझा,,,, साले मादरचोद,,,(रघु गुस्से से रामू की तरफ देख कर भी बोला,,,)

यार तू तो नाराज हो जाता हैं,,, जल्दी कर सब लोग तेरा इंतजार कर रहे हैं घर जाना है,,, देख नहीं रहा है आंधी आने वाली है,,,।

हां यार मौसम तो एकाएक गड़बड़ा गया चल जल्दी चलते हैं,,,

(इतना कहने के साथ ही दोनों कच्ची सड़क के पास आ गए जहां पर गांव की औरतें लड़कियां और शालु भी थी,,, रामू की बहने भी वहीं मौजूद थी लेकिन ललिया नहीं थी इसलिए रघु बोला,,,)

चाची चली गई क्या,,,?

नहीं वह तो वेद जी के पास दवा लेने गई थी,,, अभी तक नहीं लौटी,,,(चंदा चिंतित स्वर में बोली,,, मेला लगभग खाली हो चुका था सारे लोग अपने अपने घर के लिए निकल चुके थे,,, केवल रघु और उसके गांव के लोग वही खड़े थे,,, रघु जहां तक नजर जा रही थी वहां तक देखने की कोशिश कर रहा था लेकिन कहीं भी ललिया नजर नहीं आ रही थी इसलिए वह रामू से बोला,,,)

रामू तू एक काम कर तू सब को लेकर यहां से जल्दी निकल जा देख हवा चलना शुरू हो गई है अगर आंधी आ गई तो मुश्किल हो जाएगी,,,,

लेकिन मां,,,,,,(रामू चिंता दर्शाते हुए बोला)

तू चाची की चिंता मत कर मैं उन्हें लेकर आता हूं तु बस जल्दी से चला जा,,,, इस समय यही ठीक रहेगा मैं चाची को सही सलामत घर पर लेकर‌ आऊंगा,,,

ठीक है रघु मैं सबको लेकर जा रहा हूं लेकिन तू जल्दी से मां को लेकर आ जाना,,,

तू बिल्कुल भी चिंता मत कर रामु,,,,

(तेज हवा चलना शुरू हो गया था रामू सब को लेकर गांव की तरफ निकल गया था और रघु ललिया को लेने के लिए वेद जी के वहां,,,)
 
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आंधी की शुरुआत हो चुकी थी,,, पर अभी हवा ईतनी तेज नहीं थी,,, रघु वैद्य जी का घर जानता था इसलिए दोड़ता हुआ वहां पहुंच गया,,, ललिया रघु को देखते ही खुश हो गई क्योंकि आंधी की वजह से वह घबरा गई थी,,,।

अच्छा हुआ रघु तू इधर आ गया मैं तो घबरा गई थी,,।

मेरे होते हुए तुम्हें घबराने की जरूरत नहीं है चाची,,

(रघु वहां पर बैठे हुए 4 5 लोगों की तरफ देखते हुए बोला,,)

चाची तुम दवा ले ली हो ना,,।

हा में दवा ले चुकी हूं,,, लेकिन आंधी आने वाली थी इसलिए रूक गई,,,

कोई बात नहीं चाची में आ गया हूं ना,,,अब हमको निकलना होगा कहीं आधी तेज हो गई तो घर नहीं पहुंच पाएंगे अभी उतनी तेरे वाले चल रही है हम जल्दी जल्दी जाएंगे तो पहुंच जाएंगे,,,।

(रघु की बात सुनते ही वेद जी जो कि दूसरे मरीज को देख रहे थे वह बीच में बोले,,)

बेटा आधी बहुत तेज आने वाली है रास्ते में कहीं फस जाओगे तो मुश्किल हो जाएगा,,, कुछ देर यहीं रुक कर इंतजार करो,,,

नहीं वैध जी यहां रुकना ठीक नहीं होगा अगर रुक गए तो अंधेरा हो जाएगा और तब और ज्यादा मुश्किल हो जाएगी अगर अभी जल्दी जल्दी निकलेंगे तो शायद घर पर पहुंच जाएंगे,,,,

जैसी तुम्हारी मर्जी बेटा,,,

(ललिया दवा की पुड़िया को प्लास्टिक की पन्नी में अच्छे से लपेट कर उसे अपने ब्लाउज के अंदर खोंस ली,, यह देख कर रघु कैमन का मयूर नाच उठा क्योंकि जीस अदा से वह वहां बैठे लोगों की नजरों से बचकर अपनी ब्लाउज में दवा की पूडीया, डाली थी,,, लेकिन वह इस हरकत को रघु की आंखों के सामने की थी,,, इसलिए तो रघु के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ ऊठी,,,, अब दोनों गांव की तरफ चलने के लिए तैयार थे,,, और दोनों निकल गए अभी हवा कितनी तेज नहीं थी लेकिन फिर भी तेज ही चल रही थी लेकिन इस हवा ने अभी आधी की शक्ल नहीं ली थी,,, रघु जल्दी जल्दी चल रहा था क्योंकि वह जानता था कभी एक बार भी तेज हो गई तो यहां से निकल पाना मुश्किल हो जाएगा लेकिन ललिया एक औरत होने के नाते ज्यादा तेज नहीं चल पा रही थी,, इसलिए रघु थोड़ी दूर जाकर रुक जाता था ताकि ललिया उसके करीब आ सके,,, हवा के विरुद्ध उन्हें जाना था इसलिए अच्छी खासी मेहनत लग रही थी,,,।

,,

रघु मुझ से तो नहीं चला जाता,,,( ललिया अपना पेट पकड़कर हांफते हुए बोली,,,)

चाची अगर मुमकिन होता तो मैं तुम्हें अपनी गोद में उठा कर ले चलता,,,(ललिया के चेहरे की तरफ देखते हूए बोला और साथ ही उसकी नजर गहरी सांस के साथ ऊपर नीचे हो रही है उसकी चुचीयो पर भी जा रही थी,,, ललिया भी तिरछी नजर से रघु की नजरों के निशान को भांप चुकी थी,,, और रघु की प्यासी नजरों के निशाने को समझते ही उसके तन बदन में हलचल मच गई,,,)

मुझसे तो चला नहीं जा रहा है अपनी गोद में ही उठाकर ले चल,,,

(ललिया की बात सुनते ही रघु हंसने लगा,,, और हंसते हुए बोला,)

मुझे कोई दिक्कत नहीं है चाची लेकिन अगर कोई देख लिया तो क्या समझेगा,,, (रघु का इतना कहना था कि बारिश की बूंदे गिरने लगी और बारिश की बूंदों को गिरता हुआ देख कर रखो चिंता दर्शाता हुआ बोला,,)

जल्दी करो चाची अभी बहुत दूर जाना है अगर आंधी के साथ साथ बारिश शुरू हो गई तो बहुत मुश्किल हो जाएगा,,,

तू ठीक कह रहा है,,,,

(इतना कहने के साथ ही दोनों फिर से चलने लगे हवा तेज हो रही थी चारों तरफ खेत के फसल हवा के झोंकों से इधर उधर हो रहे थे बड़े-बड़े पेड़ झुकने लगे थे,,,, मेले में इकट्ठी हुई भीड़ एकदम से गायब हो चुकी थी मैदान के हालत को देखकर कोई कह नहीं सकता था कि कुछ देर पहले यहां लोगों की भीड़ इकट्ठा हई थी,,,। मेला लगा हुआ था अभी सब कुछ एकदम शांत था सिर्फ आधा ही आंधी नजर आ रही थी,,, हवा इतनी तेज थी कि इस बार रघु को ललिया का हाथ पकड़ना पड़ा रघु ललिया का हाथ पकड़कर आगे आगे चलता चला जा रहा था और हवा के झोंकों से टकराते हुए ललिया अपने आप को संभालते हुए रघु का सहारा लेकर आगे बढ़ रही थी ,,पानी की बूंदे अब दोनों के बदन को भीगोना शुरू कर दी थी,,,,,, रघु कस के ललिया का हाथ पकड़े हुए था,,, ऐसे माहौल में भी ना जाने क्यों ललिया के तन बदन में हलचल मच रही थी,,,,ललिया लगभग भागते हुए चारों तरफ नजर दौड़ा रही थी लेकिन कोई भी वहां नजर नहीं आ रहा था सब के सब गांव की तरफ निकल चुके थे बस वही दोनों रह गए थे,,, हवा का दबाव तेज होने लगा पानी की बूंदों की रफ्तार भी बढ़ने लगी अब अपने आप को पानी की पौधों से बचा पाना दोनों के लिए नामुमकिन था,,, रघु ललिया का हाथ थामे बार-बार पीछे की तरफ देख ले रहा था,,, और अपनी इस लालच पर रोक नहीं पा रहा था क्योंकि ललिया के दोनों चूचियां भागने की वजह से जोर-जोर से उछल रहे थे रघु को इस बात का डर था कि कहीं इतनी जोर से उछलती हुई चुचियों के वजन से उसके ब्लाउज का बटन ना टूट जाए,,,अगर ऐसा हो भी जाता है तो रघु के लिए यह सौभाग्य की बात थी,,, रघु जिसको बचपन से अपनी चाची कहता आ रहा था उसके मन में उसके दोनों चुचियों को देखने की ललक जाग रही थी,,, भागते हुए वह अपने मन में सोच भी रहा था कि मौका और हालात दोनों उसके ही पक्ष में है,,,, लेकिन उसे इस बात का डर भी था कि कहीं ललिया इंकार कर दी तो और कहिए वाली बात ना उसकी मां को बता दी तो क्या होगा इसलिए अपने आप को रोके हुए था,,, ललिया को भी इस बात का आभास था कि भागते हुए उसकी दोनों चूचियां कुछ ज्यादा ही उछाल मार रही थी,,,, लेकिन ना जाने कि उसे अच्छा भी लग रहा था,,,, तभी बारिश की बौछार तेज हो गई बड़ी बड़ी बूंदे आसमान से गिरने लगी,,, बरसात का मौसम बिल्कुल भी नहीं था लेकिन मौसम में एकाएक बदलाव आया था,,,आसमान से गिर रहे ठंडे पानी की बूंदों में दोनों का तनबदन भीग रहा था,,,,

चाची इस तरह से बरसात में भागना ठीक नहीं है,,, अब हमें कहीं रुकना पड़ेगा,,,

नहीं रघु हम इस तरह से रोक नहीं सकते कहीं आंधी तूफान थमने का नाम ही नहीं लिया तो यह रात गुजारने का कोई जुगाड़ भी नजर नहीं आ रहा है,,,,

तुम सच कह रही हो चाची लेकिन करा भी क्या जा सकता है,,,। (दोनों लगातार लगभग भागते हुए एक दूसरे से बातें किए जा रहे थे दोनों अब पूरी तरह से भीग चुके थे आंधी तूफान और बरसात की वजह से समय से पहले ही अंधेरा छाने लगा था,,, कच्ची सड़क पूरी तरह से पानी से डूबने लगी थी जगह जगह पर कीचड़ होने लगा था जिसमें दोनों के पाव जम जा रहे थे,,, बादलों की गड़गड़ाहट और ज्यादा शोर मचा रही थी जिससे माहौल पूरी तरह से भयानक होता जा रहा था ललिया को डर लगने लगा था क्योंकि अब अंधेरा हो रहा था और अभी भी उन लोगों का घर काफी दूर था,,,ललिया मन ही मन में भगवान का धन्यवाद कर रही थी कि अच्छा हुआ कि रघु उसके साथ था वरना आज पता नहीं क्या होता,,,।

रघु समझ गया था कि इतनी तेज बारिश और आंधी तूफान में आगे बढ़ पाना बहुत मुश्किल था,,,, वह कही अच्छी जगह देखकर रुकने की सोच रहा था कि तभी उसे थोड़ी ही दूर पर,,, खंडहर जैसा मकान नजर आने लगा,,,वह थोड़ा प्रसन्न नजर आने लगा वह अपनी बात ललिया को बोल पाता इससे पहले ही,,,कीचड़ की वजह से ललिया का पैर फिसला और बाकी रह गई इतनी तेज बारिश की वजह से घुटनों के नीचे तक पानी भरा हुआ था इसलिए ललिया पानी में गिरी थी जिससे वह पूरी तरह से निढाल हो गई थी,,, ललिया के गिरने की वजह से रघु भी गिरते गिरते बचा था,,, रघु जल्दी से उसे अपने दोनों हाथों का सहारा देकर ऊठाने लगा,,,, वह मुंह के बल गिरी थी इसलिए रघु उसे उठाने लगा तो उसका पूरा बदन पानी के अंदर था और वह जल्दबाजी में उसे उठाने की कोशिश करते हुए उतना दोनों हाथ उसके आगे की तरफ ले आया और अफरातफरी में उठाते समय उसकी दोनों हाथों की हथेली में ललिया की मदमस्त चूचियां आ गई,,, और वह उन्हें पकड़ कर उसे उठाने लगा अब तक रघु को इस बात का आभास तक नहीं था कि वह अपने दोनों हाथों की हथेली में ललिया की मदमस्त चुचियों को पकड़े हुए हैं लेकिन जैसे ही से इस बात का एहसास हुआ वहां ललिया कि दोनों चुचियों को छोड़ने की जगह उसे और जोर से पकड़ कर उठाने लगा,,, ललिया को गिरने की वजह से थोड़ी सी बदहवासी सी छा गई थी,,,इसलिए उसे इस बात का अंदाजा नही था कि रघु उठाते समय उसकी दोनों चूचियों को पकड़े हुए है,,, लेकिन जैसे उसे इस बात का एहसास हुआ एकदम से शर्म से पानी पानी हो गई और ना जाने क्यों उसके तन बदन में हलचल सी मचने लगी,,,रघु जानबूझकर ललिया की चूची को तब तक नहीं छोड़ा जब तक कि वह ठीक से खड़ी होकर अपने आप को संभाल नहीं ली,,, लेकिन रघु के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फूटने लगी थी,,,ललिया की मदमस्त बड़ी बड़ी चूचीयो के एहसास से वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था,,,, पजामे में उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था जिस पर अंधेरा होने की वजह से ललिया की नजर पहुंच नहीं पा रही थी,,,,,

तुम्हें चोट तो नहीं लगी चाची,,,,( उसका हाल पूछने के बहाने एक बार फिर से रघु ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी एक चूची को स्पर्श कर लिया,,, रघु की इस हरकत की वजह से ललिया के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,, रघु के द्वारा इस तरह की छूट लेने की वजह से ललिया के मन में घबराहट हो रही थी कि कहीं रघु उसके साथ उल्टा सीधा ना कर ले,,, क्योंकि एक औरत होने के नाते कब तक वह उसका विरोध कर पाएगी। ताकत और शरीर दोनों में रघु उससे आगे ही था,,,)

नहीं नहीं मैं ठीक हूं,, लेकिन थोड़ा घुटने में दर्द हो रहा है,, मुझे लगता नहीं है कि मैं अब आगे जल्दी जल्दी चल पाऊंगी,,,

चाची अब जब तक बरसात और तूफान थम नहीं जाता तब तक यहां से निकलना ठीक नहीं है क्योंकि पानी भरना शुरू हो गया है,,, और हमें नहर पार करके जाना है,,, ऐसे में न हार का बहाव तेज होता है कहीं लेने के देने पड़ गए तो इसलिए हमें थोड़ा रुकना पड़ेगा,,,

(रघु की बात में सच्चाई थी इस बात से लगी आपको बिल्कुल भी इनकार नहीं था,,लेकिन उसके मन में यह सवाल उठ रहा था कि ऐसी तूफानी बारिश में रुकेंगे कहां,,,वह दोनों पूरी तरह से गिर चुके थे और अभी भी बारिश जा रही थी हवा बहुत तेज चल रही थी जगह-जगह कमजोर पेड गिरकर ढेर हो चुके थे,,,, ठंडे पानी और तेज हवा के कारण ललिया के बदन में कपकपी हो रही थी और वह कांपते हुए बोली,,,।)

रघु तेरी बात ठीक है लेकिन रुकेंगे कहां चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा है और सर छुपाने की जगह नहीं है,,,,

तूम चिंता मत करो चाची वो सामने खंडहर देख रही हो,,, हमें वही चलना पड़ेगा और जब तक बारिश और तूफान रुक नहीं जाता उसी खंडहर के अंदर रहकर बारिश और तूफान दोनों से अपना बचाव करना होगा,,,

खंडहर,,,, में,,, ना बाबा ना मैं खंडहर में नहीं जाऊंगी मुझे तो डर लगता है ऐसे खंडहर में भूत रहते हैं,,,(ललिया घबराते हुए बोली,,,।)

क्या पागलों जैसी बात कर रही हो चाची भूत ऊत कुछ नहीं होते,,,, सब बेकार की बातें हैं मैं रात रात भर ना जाने कैसी कैसी जगह पर रुका हूं सोया हूं मुझे तो कहीं भूत नजर नहीं आता,,,तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मैं हूं ना डरने की कोई जरूरत नहीं है,,,

तू है तभी तो थोड़ा हिम्मत कर रही हूं वरना वही वेद के घर रुक गई होती,,,

वेद के घर तुम जानती हो वेद को वह कितना हरामी आदमी है रात भर रुकने का मतलब है कि,,,,(इतना कहकर रघु रुक गया,,)

क्या मतलब है रात भर रोकने का,,,

कुछ नहीं चाची जल्दी से चलो देख रही हो पानी भरता चला जा रहा है,,, ओर तुम्हें ठंड भी लग रही है,,,,।

(इतना कहने के साथ ही रघु ललिया का हाथ थाम कर जैसे ही आगे बढ़ा,,, ललिया फिर से गिरते-गिरते बची क्योंकि उसके घुटनों में चोट लग गई थी,,, वह ठीक से चल पाने में असमर्थ थीं,,,)

आहहहहहह,,,, रघु मैं नहीं चल पाऊंगी मेरे घुटनों में दर्द हो रहा है,,,,,

(ललिया की बात सुनते ही रघु का दिल जोरो से धड़कने लगा,,, क्योंकि मेले में आते समय गोद में ले चलने का जिक्र हुआ था और भगवान की कृपा देखो की शाम ढलने के बाद ही उसकी ये इच्छा पूरी होने वाली थी,,, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा ललिया को गोद में उठाने की उसकी इच्छा पहले से ही थी,,, अपनी तेज चलती सांसो को संभालते हुए रघु बोला,,)

देख ली ना चाची तुम्हारी इच्छा थी कि मैं तुम्हें गोद में उठा कर ले जाऊं,, और भगवान ने तुम्हारी बहुत ही जल्दी सुन ली,,,।

अरे मुझे क्या मालूम था भगवान इतनी जल्दी सुन लेंगे और इस सूरत में सुनेंगे,,,

कैसे भी हाल में सुनो तो सही,,,

ऐसा लग रहा है जैसे मुझे गोद में उठाने के लिए तू उतावला हो रहा था,,,

कुछ ऐसा ही समझ लो,,,,(इतना कहने के साथ ही रघु लड़कियों को अपनी गोद में उठाने के लिए उसकेएक हाथ नितंबों के नीचे की तरफ ले जाकर दूसरी पीठ की तरफ लाकर उसे अपनी गोद में उठा लिया,,,।

संभाल कर रघु गिरा मत देना,,,।

मेरे हाथों में हो चाची गिरने नहीं दूंगा,,,।

( इतना कहने के साथ ही रघु ललिया को गोद में उठाए हुए लगभग घुटनों तक पानी में आराम से चलने लगा घुटनों तक पानी के साथ-साथ कीचड़ होने की वजह से रघु को चलने में दिक्कत आ रही थी लेकिन ललिया को अपनी गोद में उठाए हुए उसका जोश दुगुना होता जा रहा था,,, शरीर में बढ़ रही हूं तेज ना की वजह से उसमें काफी ताकत और हिम्मत महसूस हो रही थी बादलों की गड़गड़ाहट लगातार जारी थी जिसकी वजह से ललिया को डर भी लग रहा था,,। तेज बारिश होने की वजह से पानी की बूंदे ललिया की आंखों में गिर रही थी जिसकी वजह से अपनी आंखों को बंद किए हुए थी,,, रघु ललिया की तरफ देख रहा था यूं तो चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था लेकिन बिजली की चमक हो जाने की वजह से रह रहे कर ललिया का बदन उसे नजर आ जा रहा था,,,अपराध टीवी में अपने आप ही ले लिया के ब्लाउज का पहला बटन खुल चुका था जिसकी वजह से उसके दोनों खरबूजे आपस में एकदम सटे हुए थे और दोनों खरबूजा के बीज की पतली लकीर बेहद लुभावनी लग रही थी,, पूरा ब्लाउज पानी में भीगने की वजह से ललिया की निप्पल ब्लाउज के अंदर से भी बाहर झलक रही थी,, रघु को ललिया के निप्पल का नूकीलापन बेहद आकर्षक लग रहा था,,, रघु इच्छा हो रही थी कि ललिया की चूची को मुंह में भर कर जी भर कर पीए,,, उत्तेजना के मारे रघु का लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था,,, जो कि पानी मैं चलने की वजह से उसका लंड आसमान की तरफ मुंह करके खड़ा था और अब धीरे-धीरे ललिया की चिकनी पीठ पर स्पर्श होने लगा था कुछ देर तक तो ललीया को समझ में नहीं आया कि उसकी पीठ पर रगड़ खा रही और चुभन दे रही चीज क्या है,,,लेकिन जैसे ही उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसकी पीठ पर चुभ रही और रगड़ खा रही चीज कुछ और नहीं बल्कि रघु का मोटा तगड़ा लंबा लंड है तो इस बात के एहसास से ही पल भर में ही उसकी बुर ऊतेजना के मारे गरम रोटी की तरह फूलने पिचकने लगी,,।
 
Aaj aayega dhamakedaar update ..jise pdhna aap sabhi readers ko bahot hi acca lagega..

Laliya ki madmast gaand

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ललिया के तन बदन में जैसी आग लग गई हो उत्तेजना कि वह प्रकाष्ठा महसूस करने लगी जो वह कभी महसूस नहीं की थी,,, पल भर में उसके सांसो की गति तेज हो गई रघु को तो मजा आ रहा था उसे आज अपने लंबे लंड पर गर्व हो रहा था क्योंकि अगर उसका लंड लंबा ना होता तो शायद इस समय उसकी पीठ से रगड़ नहीं खा रहा होता,, उसकी जी मैं तुम्हारा था की गोद में उठाए हुए ललिया की बुर में अपना लंड पेल दे,,, लेकिन वह अपने आप को संभाले हुए थे,,, बारिश कितनी जोरों पर थी बादलों की गड़गड़ाहट लगातार जारी अंधेरा चारों तरफ छा चुका था और तेज बारिश और आंधी तूफान की वजह से ज्यादा दूर तक दिखाई नहीं दे रहा था,,,इसलिए रघु संभाल संभाल कर घुटनों तक पानी में आगे बढ़ रहा था,,, क्योंकि उसका पैर फिसल था तो वह दोनों पानी में जा गिरते और रघु ऐसा नहीं चाहता था,, क्योंकि ऊसके दोनों हाथों में जिम्मेदारी थी,,, खूबसूरत मदमस्त औरत को संभालने की,,, और दुनिया का कोई भी मर्द अगर इस जिम्मेदारी को अच्छे से संभाल ले तो जिंदगी भर के लिए वह औरत उसके गुलाम हो जाती है,,, और रघु अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभा रहा था,,, उसके बदन में उत्तेजना की वो आग सुलग रही थी जो शायद ललिया के मदनरस से ही शांत होने वाली थी,,,, जब जब आसमान में बिजली चमकती थी तब तक वह ललिया के खूबसूरत बदन के दोनों खरबुजो की तरफ देखने लग जाता था,,, क्योंकि उसका एक बटन खुला होने की वजह से आधे से ज्यादा चूचियां बाहर को छलकी हुई थी,,, रघु का लंड लगातार ललिया की पीठ पर ठोकर मार रहा था और यह ठोकर ललिया को और भी ज्यादा उत्तेजित कर रहा था,,,, ऐसे तूफान में भी ललिया के मन में हो रहा था कि यह सफर कभी खत्म ही ना हो क्योंकि आज ना जाने क्यों रघु के आगोश में अपने आपको पाकर उसे अद्भुत सुख का अहसास हो रहा था,,,

रघु खंडहर के करीब पहुंच चुका था,,, खंडहर को देखकर रघु को इतना तो एहसास हो गया था कि इस तूफान और तेज बारिश से इस खंडहर में अपने आप को बचाया जा सकता है,,,।

बस चाची खंडहर आ गया,,, अब कोई दिक्कत नहीं है,, बस थोड़ा सा और,,,,(इतना कहकर रघु सीढ़ियां चढ़ने के लिए अपना पैर उठाया ही था कि उसका मोटा तगड़ा लंड और तेज ललिया की चिकनी कमर पर रगड़ खाते हुए फिसल गया,,, ललिया की तो जैसे सांसे बंद हो गई उसकी रगड़ और उसकी फिसलन को महसूस करके ललिया को ऐसा आभास हो रहा था कि जैसे रघु अपना लंड उसकी बुर में डालने की तैयारी कर रहा है,,, ललिया की सांसे ऊपर नीचे हो गई संभोग से वह एक कदम की दूरी पर थी,,, उसे भी अच्छी तरह से मालूम था कि जो वह महसूस कर रही है वही रघु भी महसूस कर रहा होगा उसे भी इस बात का एहसास हो रहा होगा कि उसका लंड उसकी चिकनी कमर पर बार बार ठोकर मार रहा है,,,,,,

आहहहहह,,, ललिया एक अद्भुत अहसास से भरी जा रही थी,,, धीरे धीरे रघु अपने लंड की ठोकर ललिया की चिकनी कमर पर मारते हुए सीढ़ियां चढ़ गया,,,,, और खंडहर के अंदर दाखिल हो गया,,,, अब बरसात का पानी उन लोगों के ऊपर गिर नहीं रहा था क्योंकि उनके सर पर छत आ गई थी लेकिन फिर भी रघु ललिया को अपनी गोद से नीचे नहीं उतार रहा था,,, क्योंकि उसे भी ललिया की चिकनी कमर पर अपने लंड की ठोकर मारने में मजा आ रहा था,,,।ललिया भी शायद रघु के गोद से उतरना नहीं चाहती थी क्योंकि जिंदगी में पहली बार किसी जवान मर्द ने उसे अपनी गोद में जो उठाया था,,,

अभी भी बारिश अपनी जोरों पर थी बादलों की गड़गड़ाहट से पूरा माहौल थोड़ा डरावना हो जा रहा था,,, आंधी थी कि थमने का नाम ही नहीं ले रही थी,,, रघु ललिया को गोद में उठाए हुए ही उसकी तरफ देखते हुए बोला,,,।

अब कैसा लग रहा है चाचा,,,,

अब थोड़ा आराम महसूस हो रहा है,,, तेरे हाथों में बहुत ताकत है,, मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है कि तू अपनी गोद में मुझे उठा लेगा लेकिन कितनी देर से तो मुझे अपनी गोद में उठाकर यहां तक लेकर आया,,,(इतना कहकर ललीया मुस्कुरा रही थी,,,)

कुछ नहीं चाची यह तो मेरा फर्ज था,,,मुझे जैसे ही पता चला कि तुम वेद जी के यहां दवा लेने गई हो तो मैं बिल्कुल भी नहीं रुका और तुरंत वेद जी के वहां दौड़ता हुआ गया,,,

तु घर जा सकता था आराम से तो गया क्यों नहीं,,,? (ललिया रघु की आंखों में झांकते हुए बोली,,)

चला जाता तो तुम्हारी बात कैसे सच साबित होती,,,

कौन सी बात,,,?

गोद में उठाकर ले चलने वाली बात,,,।

(इतना सुनते ही ललिया शर्म से अपनी आंखों को दूसरी तरफ फैर ली,,, और शरमाते हुए बोली,,)

नीचे नहीं ऊतारेगा क्या,,,?

अब आराम जैसा महसूस हो रहा है क्या,,,?

तू थक गया होगा,,,।

चाची यह रघु कि गोद है कहो तो इसी तरह से उठाए हुए घर तक ले जा सकता हूं,,,,

(रघु की बातें सुनने में लगी आग खुशी हो रही थी उसकी इस तरह की बातें उसे अच्छी लग रही थी,,, वह मुस्कुराते हुए बोली,,)

मैं जानती हूं तेरे में बड़ा दम है लेकिन अब मैं ठीक हूं मुझे उतार दे,,

ठीक है चाची जैसा तुम कहो,,,

(इतना कहने के साथ ही रघु धीरे-धीरे उसे गोद में से नीचे उतारने लगा और जैसे ही वह अपने दोनों पैरों को जमीन पर रखकर अपना एक पैर आगे बढ़ाई ही थी कि लड़खड़ा कर सीधे रघ6 के ऊपर ही आ गीरि सीधे उसके सीने पर रघु फिर से उसे थाम लिया लेकिन इस बार वह इस तरह से गिरी थी कि सीधे रघु की बाहों में आ गई थी,,, रघु कस के ऊसे अपनी बाहों में जकड़ लिया,,, जो कि एक तरह से अनजाने में ही हुआ था और वह भी ललिया को संभालने में,,, जैसे ही ललिया रघु की बाहों में आई रघु का दिल जोरो से धड़कने लगा साथ ही ललिया की भी हालत खराब होने लगी क्योंकि जिस तरह से वह उसकी बाहों में थी रघु का खड़ा लैंड जोकि पजामे में पूरी तरह से गदर मचा आया हुआ था वह सीधे ललिया की टांगों के बीच ऊसकी नरम नरम मखमली बुर के ऊपर दस्तक देने लगा,,,,, और इस दस्तक की वजह से ललिया के मुंह से आह निकल गई,,, प्रभु इस मौके का पूरा फायदा उठाते हुए एक बार फिर से अपने हथेली को उसकी कमर पर रखते हुए उसकी गोलाकार उभार लिए हुए नितंबों पर रख दिया और हल्के से दबा दिया,,,, ललिया के तन बदन में हलचल मच गई,, रघु अपनी हथेली को उसकी मदमस्त गांड पर से हटाने का नाम नहीं ले रहा था उसे तो ऐसा लग रहा था कि जैसे स्वर्ग का कोई खजाना उसके हाथ लग गया हो,,, ललिया भी रघु की इस हरकत की वजह से पूरी तरह से रोमांचित हो उठी थी,, उसकी सांसे संभाले नहीं समझ रही थी वह काफी गहरी चल रही थी,,।

मैं कह रहा था ना चाची संभाल के,,,,(इतना कहने के साथ ही रघु अपनी कमर को थोड़ा सा आगे की तरफ ठेल दिया जिससे पजामे में होने के बावजूद भी रघु का मोटा तगड़ा लंड,,, ललिया की मखमली बुर जो कि अभी भी साड़ी और पेटीकोट के अंदर थी सब कुछ दबाता हुआ बड़ी तेजी से ललिया की बुर के बीचो बीच जाकर चिपक गया ललिया को साफ महसूस हुआ कि रघु की ईस हरकत की वजह से उसकी बुर का मुख्य द्वार हल्का सा खुल गया था,,,यह पल ललिया के लिए इतना अद्भुत और सुखद एहसास से भरा हुआ था कि वह मन ही मन में यह चाहती थी कि रघु उसकी साडी और पेटिकोट कमर तक उठाकर अपना मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में पेल दे,,, लेकिन मन में आई बात जुबां पर आने से कतरा रही थी,,,, रघु मस्त हो चुका था उसकी यही इच्छा कर रही थी कि बिना इजाजत ललिया की चुदाई कर दे फिर बाद में जो होगा देखा जाएगा,,, लेकिन ना जाने क्यों रघु इससे ज्यादा आगे बढ़ नहीं सका,,, ललियाही इस सुखद अहसास के पल को तोड़ते हुए बोली,,,।

अच्छा हुआ कि एक बार फिर से मुझे संभाल लिया वरना फिर से गिर जाती,,,(इतना कहते ही ललिया उससे अलग होने लगी,,,रखो का तो मन नहीं हो रहा था उसे अपनी बाहों से आजाद करने के लिए लेकिन फिर भी वह मजबूर था,,, इसलिए ना चाहते हुए भी वह ललिया को अपनी बाहों से अलग कर दिया ललिया धीरे-धीरे अपने आप को संभालने लगी,,, रघु उसे देखता ही रह गया,,, उसके मदमस्त नितंबों के उभार की गर्मी उसे अभी भी अपनी हथेली में महसूस हो रही थी,,, रघु किसी भी प्रकार की जबरदस्ती नहीं करना चाहता था,,वह चाहता था कि उन दोनों में संबंध बने तो पारस्परिक सहमति से बनी कोई जोर जबरदस्ती से नहीं क्योंकि वह हलवाई की बीवी के साथ अपने शारीरिक संबंध को लेकर काफी उत्साहित था और उन दोनों में सारी संबंध आपस की सहमति से ही बना था तभी दोनों को चुदाई का भरपूर आनंद मिल रहा था,,और, रघु यह भी जानता था कि अगर उसके और ललिया के बीच में शारीरिक संबंध स्थापित हो गया तो हलवाई की बीवी से ज्यादा मजा छरहरे बदन वाली ललिया देगी,,, इसलिए रघु अपने आप को संभालते हुए अपनी भीगी हुई कमीज को निकालते हुए बोला,,,।)

चाची बरसात थमने का नाम ही नहीं ले रही है,,, लगता है कहीं हमें आज की रात यही रुकना ना पड़ जाए,,,

मुझे तो कोई दिक्कत नहीं लग रही है लेकिन इस खंडहर में मुझे बस भूत का ही डर लग रहा है,,,।

क्या चाची फिर तुम शुरू हो गई,,, मैं कहा ना यहां कुछ भी नहीं है सिर्फ मैं हूं और तुम हो,,,,(इतना कहकर वह अपनी की भी कमी जो दोनों हाथों से पकड़ कर उसका पानी नीचोड़ने लगा,,,, ललिया उसे ही देख रही थी और वह ललिया की तरफ देखते हुए बोला,,,)

चाची तुम्हारे कपड़े भी पूरे गिले हो चुके हैं,,, अगर कोई एतराज ना हो तो तुम भी अपनी साड़ी निकाल कर उसका पानी नीचोड़ दो और इतनी तेज हवा चल रही है सुख ही जाएगा वरना गीले कपड़ों में सर्दी लग गई तो बुखार आ जाएगा,,,,

(ललिया अपने मन में सोच रही थी कि रघु ठीक ही कह रहा था उसके कपड़े पूरी तरह से गीले हो चुके थे,,, अगर बाकी ले कपड़े में बैठी रह गई तो सच में उसे बुखार आ जाएगा,,, इसलिए वह भी धीरे-धीरे अपनी साड़ी को खोलना शुरू कर दी,,, रघु तिरछी नजरों से बार-बार ललिया की तरफ देख ले रहा था उसका इस तरह से अपनी गीली साड़ी उतारना रघु को बेहद कामुक लग रहा था। रघु अपनी गीली कमीज को जोर जोर से दबा कर उसका पानी नीचोड़ रहा था,,, और तिरछी नजरों से ललिया की तरफ देख भी ले रहा था,,, देखते ही देखते ललिया ने भी अपनी साड़ी अपने बदन पर से अलग करके उसका पानी निकालने लगी,,, अब वह केवल ब्लाउज और पेटीकोट में थी,,, वह भी तिरछी नजरों से रघु की तरफ देख ले रही थी,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था रघु की नंगी छाती बिजली की चमक में चमक रही थी,,, कुछ देर पहले ही वह रघु की चोड़ी छातियों के बीच थी,, और उस पल का एहसास उसे अब तक अपने अंदर गर्माहट दे रहा था,,,अभी भी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में हलचल मची हुई थी क्योंकि कुछ देर पहले ही उसके लंड ने वस्त्र के ऊपर से ही अंदर तक दस्तक दे दिया था,,

रघु अपनी कमीज का पानी पूरी तरह से ली छोड़कर अपने बदन को उस कमीज से साफ करने लगा,,, थोड़ी देर में उसे गिलेपन से राहत महसूस होने लगी,, तो वह ललिया की तरफ देखते हुए बोला,,)

चाची तुम भी साड़ी से अपने गीले बदन को पोछ लो तो राहत मिलेगी,,,,

(और वह रघु की बात मानते हुए साड़ी से अपने गीले बदन को पोंछने लगी,,, उसे भी राहत महसूस हो रही थी,,,लेकिन ब्लाउज पेटीकोट जो पूरी तरह से पानी में भीग चुका था इस समय बेहद ठंडक दे रहा था,,, और गीले कपड़ों में उसे अजीब सा महसूस हो रहा था,,, रघु अगर उधर नहीं होता तो वह अब तक अपने सारे कपड़े उतार कर डीजे कपड़ों को अपनी पत्नी से अलग कर दि होती,,, लेकिन जब वो की उपस्थिति में वह ऐसा करने में शर्मा रही थी,,, लेकिन यह बात भी जानती थी कि चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा था केवल जब जब आसमान में बिजली चमकती थी तब उसके उजाले में ही दिखाई देता था और वह भी पल भर के लिए यही सोचकर वह अपने ब्लाउज के बटन खुले लगे वह अपने ब्लाउज को भी अपने बदन से अलग कर देना चाहती थी क्योंकि ब्लाउज का गीलापन उसे अजीब सा महसूस करा रहा था,,,

और दूसरी तरफ रघु को भी अपने पजामे का गीला पन अच्छा नहीं लग रहा था,,, इसलिए वह बिना कुछ सोचे-समझे धीरे से अपने पजामे को उतार दिया और थोड़ा सा कौन है मैं चला गया जहां पर बिजली की चमक की रोशनी में भी वह ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था,,,

लेकिन ललिया को इस बात का एहसास हो रहा था कि वह कहां खड़ा है,,, ललिया धीरे-धीरे करके अपने सारे बटन खोल दी जब आखरी बटन खोल ले जा रहे थे कि तभी रघु बोला,,।

चाची मुझे बहुत जोरों की पेशाब न कि अगर तुम बुरा ना मानो तो यहां पर कर लु,,, अगर बाहर जाऊंगा तो फिर गीला हो जाऊंगा,,,

कोई बात नहीं,,,, कर ले,,,

(इतना कहने के साथ ही उसकी दिल की धड़कन तेजी से बढ़ने लगी क्योंकि जिस मजबूत हथौड़े की तरह जबरदस्त ठोकर को अपनी बुर के उपर महसूस की थी,, वह अपनी आंखों से उसके तगड़े हथियार को देखना चाहती थी,,,। इसलिए वह अपने ब्लाउज के आखिरी बटन को खोलकर ब्लाउज ऊतारे बिना ही चोर नजरों से रघु की तरफ देख ले रही थी,,, रघु चाहता तो ललिया की नजर में आए बिना ही वापस आ कर सकता था और ललिया को पता भी नहीं चलता लेकिन उसके मन में कुछ और चल रहा था,,, हलवाई की बीवी के साथ रात को पेशाब करने की बात से ही बात आगे बढ़ी थी,,, और आज भी वह यही चाहता था इसलिए ना चाहते हुए भी वह किसी भी हाल में अपने मोटे तगड़े लंबे लंड के दर्शन ललिया को करा देना चाहता था,, क्योंकि अब तक वह औरत के मन को समझ चुका था,,,इसलिए मैं ऐसी जगह पर खड़े होकर पेशाब करने लगा जहां पर ललिया की नजर ठीक से पहुंच जाती,,, ललिया को इस बात का अंदाजा बिल्कुल भी नहीं था कि रघु इस समय खंडहर में पूरी तरह से नंगा हो चुका था,,, ललिया का दिल जोरों से धड़क रहा था,,। अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल चुकी थी उसकी चूचियां एकदम तनी हुई थी क्योंकि उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी,,,रघु जानबूझकर ऊसकी आंखों के सामने खड़ा होकर के इस तरह से पेशाब करने लगा कि जहां से ललिया को उसके मोटे तगड़े लंड के दर्शन बराबर हो सके,,,,, और रघु की मंशा पूरी होने लगी,,,आसमान में बिजली की चमक के साथ-साथ नीचे जमीन पर भी कुछ पल के लिए रोशनी फैल जा रही थी,,, पल पल भर के उस रोशनी के उजाले में ललिया को पहली बार रघु के मोटे तगड़े लंबे लंड के दर्शन हो गए,,, जोकि रघु अपने खड़े लंड को हिला हिला कर पेशाब कर रहा था यह देख कर ललिया की दोनों टांगों के बीच कपकंपी सी दौड़ने लगी,, वो कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि रघु का लंड ईतना दमदार होगा वह बस देखती ही रह गई,,, अब ललिया की हालत खराब होने लगी थी वह अपने मन में यही सोच रही थी कि इतना मोटा तगड़ा लंड जब बुर के अंदर जाएगा तो कितना मजा देगा,,

, रघु भी यह बात अच्छी तरह से जानता था,,, के मोटे तगड़े लंड को देखने के बाद औरत के मन की स्थिति क्या हो जाती है क्योंकि इसी तरह से अपना लंड दिखाकर हलवाई की बीवी को पूरी तरह से अपने आकर्षण के जादु में बांध लिया था,, जिसके बाद वह जब चाहे तब हलवाई की बीवी की चुदाई करके अपनी प्यास बुझा लेता था,,, अब वह ललिया के साथ भी वही करना चाहता था,,, रघु यह बात अच्छी तरह से जानता था कि अब तक ललिया ने उसके लंड के दर्शन जरूर कर लिए होंगे तभी आसमान में एक बार फिर से बिजली चमकी और रघु तुरंत ललिया की तरफ देखने लगा जो कि ललिया भी उसके इंग्लैंड की तरफ देख रही थी दोनों की नजरें आपस में टकराई और ललिया एकदम शर्म से पानी-पानी हो गई,,,। वह जल्दी से अपनी नजरों को दूसरी तरफ फेर ली लेकिन कब तक वह अपनी नजरों को दूसरी तरफ करके अपने मन को शांत करने की कोशिश करती क्योंकि ऐसा करना उसके लिए अब नामुमकिन सा हो गया था वह फिर से रघु की तरफ नजर घुमा ली और उसके खड़े लंड को देखने लगी जो कि रघु अपने हाथ में लेकर उसे हिलाता हुआ मुत रहा था,,, लेकिन तभी उसे जोर सा झटका लगा,,, क्योंकि वह अभी तक इस बात पर ध्यान नहीं दी थी कि रघु पैजामा पहना है कि नहीं लेकिन अब उसे इस बात का एहसास हुआ कि रघु पूरी तरह से नंगा था,, पर इस बात का अहसास होते ही ललिया के तन बदन में हलचल सी मच ने लगी,,,, उसकी सांसे तेज चलने लगी,,,एक अद्भुत एहसास उसके तन बदन को झकझोर के रख दे रहा था,,,

बारिश थी कि थमने का नाम नहीं ले रही थी तेज हवाओं का झोंका रह रहकर उसे भी हिला दे रहा था,,, और ऐसे में रघु का इस तरह से अपना लंड दिखा कर मुतना,,, ललिया के सब्र का इम्तिहान ले रहा था,,,,,, रघु पेशाब कर चुका था और वह वापस अपनी जगह से अंदर की तरफ कदम बढ़ाते हुए बोला,,,।

माफ करना चाहती क्या है कि पैजामा पूरी तरह से गिला हो गया था इसलिए मैंने उसे भी निकाल दिया ताकि सूख जाए,, और वैसे भी अब हम दोनों को शर्म करने की जरूरत नहीं है क्योंकि हम लोग इस तूफान में फस चुके हैं और जब तक यह तूफान शांत नहीं होता तब तक हमें यही रुकना होगा,,,

(रघु की बात सुनकर ललिया बोली कुछ नहीं,,, बस उसके दिमाग में रघु का खड़ा लंड घूम रहा था,,, अपनी दोनों टांगों के बीच महसूस हो रही हलचल को अच्छी तरह से समझ रही थी,,, रघु के लंड को देखकर उसकी बुर अपने आप ही घुटने टेकते हुए गीली हो चुकी थी लेकिन अभी ललिया के दिमाग नअ आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी थी वरना कामोत्तेजना के तूफान में कामुकता का रुख जिस तरफ मोड दे रहा था उस तरफ ललिया का चंचल मन मुड जा रहा था,,, रघु एक बार फिर से अपनी कमीज से अपने बदन को साफ करने लगा उसे थोड़ी राहत महसूस हो रही थी क्योंकि अब उसका बदन पूरी तरह से साफ हो चुका था,,, अब ललिया की बारी थी उसके तन बदन में मदहोशी का आलम खुलने लगा था खुमारी छाने लगी थी,, लगभग चार-पांच महीने बीत चुका था ललिया संभोग सुख का मजा नहीं ली थी क्योंकि उसका पति शराबी था और शराब के नशे में डूबा रहता था और वैसे भी उसके पति में अब इतना दम नहीं था कि उसे शरीर सुख दे सके इसलिए तो ललिया के कदम लड़खड़ा रहे थे,,। ललिया को भी जोरो की पिशाब लगी हुई थी,,, लेकिन वह अपनी गांड रघु को दिखाना नहीं चाहती थी,,, क्योंकि उसे शर्म महसूस हो रही थी हालांकि भले ही वह कामोत्तेजना के जोश में मदहोशी की मिठास की तरह पिघल रही थी लेकिन फिर भी वह अपने आप को बचाए हुए थी,,। लेकिन अपनी पैसाब को रोक पाने में सक्षम नहीं थी,,, इसलिए ना चाहते हुए भी उसे पेशाब करने के लिए मजबूर होना पड़ा,, और वह धीरे-धीरे उसी जगह पर पहुंच गई जहां पर रघु खड़े होकर पेशाब कर रहा था,,

बिजली की चमक की रोशनी में रघु को साफ नजर आ रहा था कि ललिया उसी स्थान पर पहुंच गई थी जहां पर वह पेशाब कर रहा था उसका दिल जोरो से धड़कने लगा उसके मन में ढेर सारे सवाल ऊठने लगे,,, क्या ललिया भी वहीं बैठ कर के पेशाब करने वाली है,,आहहहह,,, तब तो आज फिर से उसकी मदमस्त गोलाकार गांड के दर्शन करने को मिलेंगे,,,, यह सोचते ही उत्तेजना के मारे उसका लंड ऊपर की तरफ तान गया, मानो कि लगे कि मदहोश कर देने वाली जवानी को सलामी भर रहा हो,,,।

अद्भुत अतुल्य मादकता से भरा हुआ दृश्य खंडहर के अंदर बनता चला जा रहा था,,, ललिया अपने आप को रोके भी तो कैसे रोके पेशाब बड़ी जोरों की लगी हुई थी,, वह अपनी नंगी गांड रघु को दिखाना नहीं चाहती थी लेकिन कर भी क्या सकती थी,,

उसका दिल भी जोरों से धड़क रहा था वह जानती थी कि रघु की आंखों के सामने वह खड़ी है,,,वह उसे ही देख रहा होगा,,, वैसे भी अच्छी तरह से जानते थे कि रघु जवान लड़का है और ऐसी उम्र में औरतों को ताकत ना आम बात होती है और वह तो हमेशा से उसे प्यासी नजरों से देखता रहा था और इस समय उसके मन में ना जाने क्या चल रहा है इस बात को थोड़ा बहुत तो ले लिया समझ गई थी ,,,।

अंधेरा घना था आंधी तूफान अपनी पूरी औकात दिखा रही थी लेकिन धनिया देशों के बीच में भी कुछ पल के लिए उजाला हो जाता था बस उसी से थोड़ा ललिया घबरा रही थी क्योंकि वह जानते थे कि बिजली की चमक के उजाले में रघु जरूरत के नंगे पन का दर्शन कर लेगा और फिर कही अपना होश ना खोदे,,, लगी अपने मन में कुछ भी सोचे लेकिन अपने पेशाब की तेजी को रोक नहीं पा रही थी इसलिए ना चाहते हुए भी वह अपनी पेटीकोट को कमर तक उठा दी अब तक अंधेरा ही था लेकिन जैसे ही वह बैठ कर मुतना शुरू की,,, वैसे ही बिजली की चमक के उजाले में ललिया की मदमस्त गोलाकार गांड रघु की आंखों के सामने चमक उठी,,,पल भर में ही रखो कि तन बदन में उत्तेजना की लहर बड़ी तेजी से दौड़ने लगी वह फटी आंखों से ललिया की मदमस्त गोलाकार नितंबों को देखता ही रह गया,,, और वह अपने मन ही मन में बोला कि भगवान ने बड़ी फुर्सत से उसकी गांड बनाई है,,, ललिया मारे शर्म के अपनी नजरें नीचे झुकाए पेशाब की धार को बरसात के पानी के बहाव में मार रही थी,,, हवा इतनी तेज थी कि बाहर से आ रही बौछार उसके तन को फिर से भिगोना शुरू कर दी थी वह जल्द से जल्द उठना चाहती थी लेकिन पैसा आप अभी भी बड़ी तेजी से उसकी गुलाबी बुर से बाहर निकल रही थी,,, तभी अचानक उसकी नजर पानी में से आ रहे मोटे चूहे पर पड़ी जो कि उसकी तरफ ही बढा आ रहा था और वह एकदम से घबरा गई,,,,रघु धीरे-धीरे अपने कदम आगे बढ़ा कर नजदीक से उसकी बड़ी-बड़ी गांड के दर्शन करने की लालच को रोक नहीं पा रहा था और आगे बढ़ता जा रहा था,,, मोटे चूहे को अपनी तरफ आता देख कर ललिया बड़े जोर से चीखती हुई उठी और खंडहर के अंदर भागने लगी ही थी कि सामने खड़े रघु से जाकर एकदम से चिपक गई,,, रघु तुरंत उसे अपनी बाहों में ले लिया,,,, ललिया का दील घबराहट के मारे बड़े जोरों से धड़क रहा था,,, ब्लाउज के सारे बटन खुले हुए थे उसकी दोनों चूचियां एकदम नंगी थी जो कि इस समय सीधे जाकर रघु की चौड़ी छातीयो से एकदम से सट गई,,,उत्तेजित ललिया भी थी इसलिए उसकी दोनों चूचियों के निप्पल एकदम कड़ी हो चुकी थी जो कि किसी भाले की नोक की तरह रघु के सीने में चुभ रही थी,,, रघु एकदम बेहाल हो गया मदहोश हो गया,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे भगवान ने कोई वरदान उसकी झोली में गिरा दिया हो,, रघु और कसके उसे अपनी बाहों में भर लिया,,, तभी उसे अपने कमर के नीचे वाला भाग पानी से भीगता हुआ महसूस होने लगा,,, वह ललिया को अपने बदन से हटा कर देखना चाहता था कि क्या हो रहा है लेकिन वह अपनी बाहों में आई हुई खूबसूरत औरत को आराम से जाने नहीं देना चाहता था,,, इसलिए वह उसे अपनी बाहों में ही थामें रहा,,, लेकिन अपने बदन के ऊपर की रहे पानी की गर्माहट को महसूस करके उसे समझते देर नहीं लगी कि कमर के नीचे भिगो रहा पानी क्या है और कहां से आ रहा है,,, वह पानी कुछ और नहीं बल्कि ललिया की गुलाबी बपर से निकल रही पेशाब की धार थी,, जोकी ललियापेशाब ठीक से कर नहीं पाई थी और मोटे चूहे को अपनी तरफ आता देख कर जल्दी से उठ गई थी लेकिन इस दौरान उसकी बुर से पेशाब निकल रही थी,, जो कि रघु की बाहों में आने के बाद भी जारी था,,, इस बात का एहसास ललिया को होते ही वह मारे शर्म के पानी पानी हो गई,,, वह शर्म के मारे अपना चेहरा रघु की चौड़ी छाती में छीपा ली,,रघु को उसकी बुर से निकल रही पेशाब की तेज धार अपने बदन पर पढ़ते हुए बहुत ही लुभावनी लग रही थी। रघु के तन बदन में उत्तेजना एकदम परम शिखर पर विराजमान हो चुकी थी वह उत्तेजना की सीमाओं को लांघ चुका था उसकी सांसे तेज चल रही थी,,, ललिया का पेटीकोट कमर तक उठा हुआ था कमर के नीचे से वह पूरी तरह से नंगी थी,,,, और रघु ललिया के अद्भुत अतुल्य नंगेपन के एहसास में पूरी तरह से अपने आप को डुबो देना चाहता था,,,

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ललिया की भी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी ईतनी जोरो की पेशाब और डर की वजह से ललिया अपने आप और अपनी पेशाब पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पाए जो कि अभी भी रह रहे कर रघु के ऊपर धार मार रही थी जो किसी के उसके खड़े लंड पर गिर रही थी जिससे रघु का लंड और ज्यादा टनटना गया था,,, रघु इस मोके का पूरी तरह से फायदा उठाते हुए अपना हाथ की नंगी चिकनी पीठ पर घुमाने लगा ललिया को अच्छा लग रहा था वह कुछ बोल नहीं रही थी,,,और वैसे भी अपनी गलती की वजह से वह बेहद शर्मिंदगी महसूस कर रही थी रघु अपनी हरकत को और ज्यादा बढ़ाते हुए अपने दोनों हाथों को नीचे कमर तक लाकर उसकी कमर को दोनों हाथों से कस के दबा दिया,,,, रघु की इस हरकत पर ललिया के मुंह से आह निकल गई,,,

रघु भी कुछ भी बोल सकने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं था उसके तन बदन में खुमारी छाई हुई थी,,, ललिया की मदमस्त जवानी की मदहोशी छाई हुई थी,,,। ललिया की कमर को दोनों हाथों से थाने में रघु को बेहद उत्तेजना महसूस हो रहा था अपनी हरकत को बढ़ाते हुए रघु रे दोनों हाथों को और नीचे की तरफ लाकर उसके नितंबों के उभार को,,, कसके अपनी दोनों हथेली में जितना हो सकता था उतना भरकर एकदम से दबा दिया,,, ललिया की गांड पूरी तरह से नंगी थी एकदम गोलाकार,,,ऊफफ,,, एकदम मलाई,,, रघु की इस हरकत की वजह से ललिया के तन बदन में आग लग गई,,, और उसके मुंह से सिसकारी की आवाज फूट पड़ी,,,।

सससहहहह,,,आहहहहहह,,, रघु यह क्या कर रहा है,,,(नदिया अभी भी रघु की छाती में अपना चेहरा छुपाए हुए बोली,,)

तुम तो मुझे एकदम गीला कर दी चाची,,, मेरे ऊपर ही मुत दी,,,(इतना सुनना था कि ललिया तो एकदम शर्म से पानी-पानी हो गई जिंदगी में उसे इस तरह की शर्मिंदगी का अहसास कभी नहीं हुआ था जितना कि अब हो रहा था.. वह अच्छी तरह से जानती थी कि इससे शर्मनाक हरकत भी हो गई थी,,, उसने कभी सोची नहीं थी जब भी पेशाब करने बैठती थी तो चारों तरफ देख लेती थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है लेकिन आज अनजाने में और डर के मारे हालात इस तरह के हो गए थे कि ना चाहते हुए भी वह रघु के ऊपर मुत दी थी,,,वह कुछ भी बोल सकने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं थी,, शर्मिंदगी के एहसास से भरी हुई थी लेकिन रघु की हरकत की वजह से उसके तन बदन में गर्माहट फैलती जा रही थी,, रघु की हरकत ऊसे अच्छी लग रही थी,,, रघु लगातार उसकी गोलाकार गांड से खेल रहा था,, ललिया की हालत खराब होती जा रही थी उसकी सांसो की गति तेज हो रही थी वह अपनी कमर को थोड़ा सा आगे की तरफ की तो तुरंत रघु का लंड लंड उसकी टांगों के बीच उसकी बुर के मुहाने से रगड़ खाने लगा,,, इस अद्भुत स्पर्श के एहसास से दोनों एकदम मदहोश होने लगे,,, रघु लगातार ललिया की भारी-भरकम गांड से खेल रहा था और ललिया उसे खेलने दे रही थी रघु को समझते देर नहीं लगी कि ललिया को भी उसकी हरकत अच्छी लग रही है,, इसलिए रघु,, अपना एक हाथ ललिया की गांड से हटाकर अपने लंड को थाम लिया और उसे बिना देखे ही ललिया की टांगों के बीच के उस पतली दरार पर रगडना शुरू कर दिया,,,,।

आहहहहह,,सहहहहहहह,,, रघु,,, ऐसा मत कर रहने दे,,,।

( ललिया रघु को रोक तो रही थी लेकिन उसका तन बदन उसका साथ नहीं दे रहा,,, उसके बदन में मस्ती की खुमारी छाने लगी थी,, रघु की हरकत की वजह से वह पूरी तरह से बावली होती जा रही थी,, रघु जानता था कि अगर ललिया उसे आगे बढ़ने से रोक दि ,,तो वह आगे नहीं बढ़ पाएगा और इतना अच्छा मौका हाथ से ज्यादा रहेगा इसलिए वह इस मौके को जाने देना नहीं चाहता था इसलिए वह ललिया की बात को अनसुना करते हुए,,, अपने मोटे तगड़े लंड के मोटे सुपाड़े को ललिया की मखमली बुर के दरार पर रगडता रहा,,,, ललिया तड़प रही थी जल बीन मछली की तरह उसका हाल था,,, महीनों बाद उसके तन बदन में उत्तेजना का तूफान उठा था,,, रघु एक हाथ से ललिया की गांड को दबाता हुआ दूसरे हाथ से अपने मोटे लंड के मोटे सुपाड़े को उसकी बुर पर रगड़ रहा था,,,। ललिया उसे रोकना चाहती थी लेकिन रोक नहीं पा रही थी अद्भुत सुख का एहसास उसके तन बदन को पूरी तरह से कमजोर कर रहा था रघु के सामने उसके संस्कार उसका शर्म घुटने टेक रहा था,,, रघु जोर-जोर से सांसे ले रहा था,, वह अपने आपे में बिल्कुल भी नहीं था,,,। ललिया को साफ महसूस हो रहा था कि रघु का मोटा लंड उसकी बुर की गुलाबी पत्तियों को इधर उधर फैलाने लगा था,,,ललिया की हालत खराब होती जा रही थी वह अपनी सिसकारियों को बड़ी मुश्किल से दबाए हुए थी,,,,। लेकिन सबसे बड़ी तेजी से चल रही थी और उसकी दोनों मदमस्त खरबूजे रघु के सीने से एकदम दबे हुए थे उसकी निप्पल इतनी नुकीली महसूस हो रही थी कि ऐसा लग रहा था कि जैसे सीना चीर के अंदर घुस जाएगी,,, रघु को ललिया की मदमस्त चुचियों का दबाव अपने सीने पर बेहतरीन एहसास करा रहा था,,,। ललिया अपने अंदर चल रहे कशमकश से जूझ रही थी वह समझ नहीं पा रही थी कि आगे बढ़ा जाएगा पीछे कदम फिर लिया जाए,,,,। आनंद उसे भी चाहिए था लेकिन आनंद को प्राप्त करने में संयम और मर्यादा की डोर टूट जाती,,, वह बड़ी परेशान लग रही थी अब रे मन में यही सोच रही थी कि अगर इस बारे में उसकी मां कजरी को पता चल गया तो वह क्या सोचेंगी,,, यही सब सोचकर उसका मन घबराने लगा और वह रघु की बाहों से छूटने की कोशिश करने लगी,,, लेकिन रघु ललिया को छोड़ने के मूड में बिल्कुल भी नहीं था,,, वह जिस तरह से कसमसा रही थी,,, उसे देखते हुए रघु समझ गया कि यह उसकी बांहों से आजाद होना चाहती है,,,इसलिए एक बार फिर से एक हाथ से उसकी गांड को पकड़े पकड़े हैं उसे अपनी तरफ खींच लिया जिससे इस बार रघु के लंड का मोटा सुपाड़ा हल्के से ललिया की बुर की गुलाबी पत्तियों को फैलाती हुई थोड़ा अंदर की तरफ प्रवेश करने लगा,,,, ललिया की तो जैसे सांसे बंद हो गई ललिया को लगने लगा कि रघु उसकी बुर में लंड डाल देगा,,,, और यह सोचकर वह उसकी पकड़ से छूटने के बारे में सोच ही रही थी कि तभी,,, रघु अपना हाथ ऊपर की तरफ लाया और उसकी एक चूची को पकड़कर हल्के हल्के दबाते हुए बोला,,,।

ऐसा क्या देख ली थी चाची कि ईतनी जोर से चिल्लाकर भागी,,,

चचच,,,चुहा,,,,(लगभग घबराते हुए बोली,)

चूहा,,, अरे ऐसा कैसा चुहा था जो इतनी जोर से चिल्ला कर भागी,,,,,(रघु ललिया की चूची को दबाते हुए बोला,,)

बहुत लंबा और मोटा चुहा था,,,,

(रघु ललिया की यह बात सुनकर धीरे से उसका हाथ पकड़ा और नीचे की तरफ लाकर अपने खड़े लंड पर रखकर अपने हाथ से ही अपने लंड पर उसकी मुट्ठी बंधवाते हुए बोला,,,)

इससे भी लंबा और मोटा था क्या चाची,,,? (रघु एकदम मदहोश होता हुआ बोला,,, ललियी की तो हालत खराब हो गई ललिया कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि,,, वह कभी किसी के लंड को अपने हाथ से पकड़ेंगी,, ललिया को रघु के मोटे तगड़े लंड की गर्माहट अपनी हथेली में साफ महसूस हो रही थी वो एकदम से घबरा गई थी अपना हाथ वापस खींचना चाहती थी लेकिन रघु कसके उसकी मुट्ठी को अपनी मुट्ठी में दबाए हुए था,,,, रघु उसकी मुट्ठी को अपनी मुट्ठी में दबाए हुए ही अपने लंड को मुठियाते हुए बोला,,,।

बोलो ना चाची कैसा था वह चूहा इसकी तरह था,,,,,,,

यह क्या कर रहा है रघु,,, यह गलत है भगवान के लिए ऐसा मत कर,,,,,,,(ललिया रघु ऐसा ना करने की दुहाई दे रही थी लेकिन,,,रघु को बिल्कुल भी ऐसा नहीं लग रहा था कि लग जा अब उसके लंड पर से अपने हाथ हटाने की कोशिश कर रही है ,, रघु मदहोश हुआ जा रहा था,,,,उसके ऊपर मदहोशी और वासना दोनों सवार हो चुके थे,,,, ललिया कीमत मस्त जवानी उसके होश उड़ा रहे थे,,, ललिया को भी रघु की यह हरकत,,, एकदम सुहावनी लग रही थी लेकिन एक औरत होने के नाते पहल करने से डर रही थी अपने बेटे के उम्र के लड़के से शर्मा रही थी,,,, उसके अंदर झिझक थी,,, होती थी कि नहीं आखिर रघु उसे चाची कहता था,, बचपन में वह उसे खिला चुकी थी और आज यह समय आ गया था कि वह खुद उसके खूबसूरत नाजुक पंखों से खेल रहा था,,, रघु लगातार ललिया की मुट्ठी को दबाए हुए अपने लंड को हिला रहा था,,, ललिया की बुर पानी पानी हो गई थी उसके मन में दहशत हो चुकी थी कि इतना मोटा लंड उसकी बुर में जाएगा कैसे,,,, यही सोचकर वह घबरा रही थी,,,, इसलिए ललिया अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,।)

रहने दे रघु ऐसा मत कर,,,तू मेरे बेटे की उम्र का है मेरे बेटे कैसा है और तू मुझे चाची कहता है ऐसा करना ठीक नहीं है,,, तेरी मां को पता चल गया तो वह क्या समझेगी,,,

(बस यही बात ललिया के मुंह से सुनते ही रघु समझ गया कि वह पूरी तरह से तैयार है बस शर्म और झिझक उसे रोक रही है,,, रघु मदहोश हो चुका था एक हाथ से वह ललिया की भारी-भरकम गांड से खेल रहा था और दूसरे हाथ से उसकी मुट्ठी को पकड़कर अपना लंड मुठीया रहा था,, ललिया की बात सुनकर वह उसकी आंखों में आंखें डाल कर बोला,,,।)

जब से पता चलेगा तब ना बोलेगी उसे कुछ भी नहीं पता चलेगा उसे क्या किसी को भी पता नहीं चलेगा,,,(इतना कहने के साथ ही रघु अपने प्यार से होठों को ललिया कीमत मस्त गोलाकार तनी हुई चूची पर रख कर उसके निप्पल को मुंह में भर कर पीना शुरू कर दिया,,,।

सससहहहह आहहहहहह,,,,, रघु,,,,,,,

( ललिया के पास ईससे ज्यादा कहने के लिए शब्द नहीं थे वह पूरी तरह से कामातुर हो गई,,, उत्तेजना के मारे उसका गला सूखने लगा महीनों बाद उसकी चूची किसी मर्द के मुंह में जा रही थी वह पूरी तरह से काम विह्वल हो गई,,,, वैसे भी ललिया को अब कुछ भी कहने की जरूरत नहीं थी,,, उसकी गर्म सांसे उसके मन के शब्दों को खोल रही थी,,, बरसात अभी भी जोरों पर थी रह-रहकर हवा का झोंका दोनों के तन बदन को झकझोर दे रहा था,,, बरसात की बूंदों से अब उनका तन गिला नहीं था लेकिन उन्माद की बौछार वासना की छींटे,, अब उन दोनों को पूरी तरह से भीगो रही थी,,, ना तो रघु और ना ही ललिया मैं कभी सपने में यह सोचा था कि दोनों की जिंदगी में इस तरह से यह वाक्या भी आएगा,, हालात ने ललिया के मन अंतर को पूरी तरह से बदल दिया था,,,, इसलिए तो रघु अपना हाथ ललिया के हाथ पर से हटा दिया था वह देखना चाहता था कि ललियां अपने हाथ से क्या करती है,,,और इसमें रघु के लिए कोई आश्चर्य वाली बात नहीं थी उसे अपने ऊपर और अपने लंड पर इतना तो पूरा विश्वास था,,, ललिया स्तन मर्दन और स्तन चूसन का भरपूर आनंद लेते हुए खुद अपने हाथ से रघु के लंड को मुठीयाना शुरू कर दी थी,, रघु के तन बदन में ललिया की हरकत की वजह से आग लग रही थी, ।

रघु मुझे ना जाने क्या हो रहा है,,,, मेरे तन बदन में तूने आग लगा दिया है,,,,सहहहहहह आहहहहहह,,,,ररररघु,,,

(ललिया मदहोश हुए जा रही थी उत्तेजना के मारे उसके दोनों घुटने कांप रहे थे,,,, उत्तेजना के मारे उसका गला सूखता जा रहा था,,,, वह भी पूरी तरह से आनंद विभोर हो चुकी थी,,,रघु लगातार उसके दोनों खर्चों का स्वाद ले रहा था कभी दाएं खरबूजे को मुंह में डालकर दबाता और उसके निप्पल को पीता तो कभी बा्ए खरबूजे से खेलता,,,, मजा दोनों को आ रहा था,,, ललिया रघु के लंड को जोर-जोर से दबाते हुए मुठिया रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके हाथ में लंड नहीं बल्कि जानवर को बांधने वाला खूंटा आ गया हो,,,,,। लंड की गर्माहट उसके तन बदन को पिघला रही थी उसकी बुर लगातार पानी फेंक रही थी,,, रघु जोर-जोर से उसकी दोनों चूचियों को दबाता हुआ स्तनपान का मजा ले रहा था वह रहे रहकर उत्तेजना के मारे उसकी नरम नरम चुचियों में अपना दांत गड़ा दे रहा था जिससे ललिया के मुंह से सिसकारी के साथ-साथ दर्द से कराहने की आवाज भी निकल जा रही थी,,,।

अब दोनों पीछे हटने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थे और ना ही उन लोगों के लिए यह संभव था। रघु के लिए पीछे हटने का मतलब था काले लंड पर हथोड़ा चलानाऔर ललिया के लिए अपने अरमानों पर एक बार फिर से ठंडा पानी फेंक देना,,,और दोनों ही इस हालात से समझौता करने के मूड में बिल्कुल भी नहीं थे,,, इसलिए तो रघु अपना मुंह उसकी चूची पर से हटा कर लगाके खूबसूरत चेहरे को अपने दोनों हाथों से पकड़कर उसके लाल-लाल देखते होठों पर अपने होंठ रख कर उसका चुंबन करने लगा,,, चुंबन में ललिया उसका साथ बिल्कुल भी नहीं दे रही थी,,, बल्कि रघु की इस हरकत की वजह से वह पूरी तरह से शर्म से गड़ी जा रही थी,,,, क्योंकि आज तक उसने कभी भी चुंबन नहीं किया था,, और ना ही उसके पति ने कभी उसके होठों को होठ लगाकर चूमा था,,, लेकिन फिर भी ललिया को ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे वह हवा में उड़ रही हो वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी,,,

चारों तरफ घना अंधेरा छाया हुआ था बस बिजली की चमक का ही सहारा था उसी की रोशनी में रह-रहकर ललिया का खूबसूरत नंगा बदन दिखाई दे रहा था,,, ललिया भी बेफिक्र हो चुकी थी इस तूफानी बारिश में यहां इंसान तो क्या जानवर भी आने वाला नहीं था,, दोनों का दिल जोरों से धड़क रहा था रघु के हाथ आज एक और खूबसूरत औरत हाथ लगी थी,, जिसके साथ संभोग करके वहां अपने आपको धन्य समझने वाला था,,, वैसे भी ललिया के बदन में वह सब कुछ सप्रामाण में ही था जो कि एक औरत को बेहद खूबसूरत बनाता है ललिया के बदन का उठाव और कटाव बेहतरीन था,,।

रघु अब आगे बढ़ना चाहता था बादलों की गड़गड़ाहट माहौल को और भी ज्यादा उन्मादक बना रही थी,,, रघु देखते ही देखते ललिया के सामने घुटनों के बल बैठ गया और अपने दोनों हाथों से उसकी नंगी चिकनी मोटी मोटी जांघों को पकड़ लिया,,, जांघों पर हाथ रखते ही उसके तन बदन में कंपन होने लगा,,,, गहरी सांस लेते हुए रघु को भी देख रही थी और रघु भी बेशर्मो की तरह ललिया की आंखों में झांकते हुए धीरे-धीरे अपने प्यासे होठों को ललिया की टांगों के बीच ले जा रहा था,,,, ललिया को समझ में नहीं आ रहा था कि रघु क्या करने वाला है,,, और जैसे ही रघु के प्यासे होठों का स्पर्श उसने अपनी बुर के ऊपर महसूस की वैसे ही उसके तन बदन में अंगारे उठने रखें उसका पूरा बदन अद्भुत अहसास से कांप उठा,,,, और उसके मुख से गर्म सिसकारी की आवाज फूट पड़ी,,,।

सससहहहहहह ं,,,,, आहहहहहह,,,,, रघु,,,,(इतना कहने के साथ ही वह उत्तेजना के मारे एकदम से सिहर उठी और वह अपने दोनों हाथ नीचे की तरफ ले जाकर के रघु के बाल को कस के अपनी हथेली में पकड़ ली,,, रखो पागलों की तरह उसकी रसीली बुर को चाटना शुरू कर दिया,,, जितना हो सकता था उतना जीभ अंदर तक डालकर उसकी मलाई को गपक रहा था,,, लगातार उस खंडहर में आंधी तूफान और बारिशों के शोर के बीच ललिया की मद भरी सिसकारियां गूंजती रही,,,,हल्के हल्के रेशमी बाल भी रघु के मुंह में आ जा रहे थे जिसे वह बड़े चाव से अपनी जीभ से चाट रहा था,,, ललिया ने अपने जीवन में इस तरह के सुख की कभी कल्पना भी नहीं की थी,,,उसके पति ने आज तक उसकी बुर को कभी अपने होठों से लगाया ही नहीं था और ना ही कभी उसने इस बारे में सोची थी,, लेकिन आज समय बदल चुका था रघु उसकी जिंदगी में बहार लेकर आया था,,,, ललिया अपने से बाहर होते जा रही थी लगातार उसके मुख से गर्म सिसकारी की आवाज फूट रही थी रघु समझ गया था कि अब ललिया को क्या चाहिए,,, इसलिए रघु खड़ा हुआ और एक बार उसके नंगे बदन को अपनी बाहों में भर कर जी भर कर उससे प्यार करने लगा और देखते ही देखते उसकी दोनों टांगों को हल्के से फैला कर अपने लंड के लिए जगह बनाया और अपने लंड के सुपाड़े को उसकी बुर के मुहाने पर रखकर हल्के से अपनी कमर को आगे की तरफ ठेला और देखते ही देखते उत्तेजित हुई बुर के गीले पन का साथ पाकर रघु का लंड धीरे धीरे अंदर प्रवेश करने लगा,,,, ललिया की बुर कसी हुई थी लेकिन उत्तेजना के मारे उसकी बुर बार-बार पानी फेंक रही थी जिससे उसकी बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी थी,, और देखते ही देखते रघु की मेहनत रंग लाई और उसका आधे से ज्यादा लंड उसकी बुर में समा गया,,,, ललिया की तो जैसे सांस ही रुक गई थी उसे बहुत दर्द हो रहा था लेकिन एक अनुभवी औरत होने के नाते उसे इतना पता था कि दर्द के बाद मजा भी बहुत आएगा इसलिए वह अपनी बातों को जोर से दबा कर इस दर्द को झेल रही थी।

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बड़ा ही मादक कामोत्तेजना से भरा हुआ नजारा था रघु ललिया को दीवार से सटाए हुए था,,, दोनों का मुंह एक दूसरे के आमने सामने था ललिया की टांगे चौड़ी थी और उन टांगों के बीच रघु अपने लिए बेहतरीन जगह बनाकर कामदेव के आसन का भरपूर फायदा उठाते हुए अपने लंड को पूरी तरह से ललिया की बुर में उतार दिया था,,,, तभी रघु ललिया की कमर को थाम कर एक आखरी झटका लगाया और इस बार रघु का लंड पूरा का पूरा ललीया की बुर में खो गया,,,,ललिया एकदम से बदहवास हो गई उसे यकीन नहीं हो रहा था कि रघु का मोटा तगड़ा लंबा लैंड उसकी छोटी सी बुर के अंदर पूरी तरह से समा गया होगा इसलिए वह अपनी नजर नीचे करके अपनी दोनों टांगों के बीच देखने लगी जो कि वास्तव में रघु के समूचे लंड को अपनी गहराई में निगल गई थी,,, यह देखकर ललिया के होठों पर कामुक मुस्कान तैरने लगी,,,,, रघु को अपनी मंजिल मिल चुकी थी,,, रघु धीरे-धीरे अपनी कमर आगे पीछे हिलाता हुआ ललिया को चोदना शुरू कर दिया,,,,

आहहहह ,,,,,आहहहहहह,, रघु,,,,,ओहहहहहहह,,,, बहुत गर्म लंड है तेरा,,,,आहहहहहह,,मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है कि तेरा मोटा तगड़ा और लंबा लंड मेरी बुर में घुस गया है,,,

यह किसी चमत्कार से कम नहीं है चाची,,,मुझे भी ऐसा ही लगता था कि मेरा मोटा तगड़ा और लंबा लंड तुम्हारी बुर के छेद को भेंद नहीं पाएगा,,, लेकिन तुमने यह कर दिखाई मैं बहुत खुश हूं चाची तुम बहुत खूबसूरत हो,,,,

तू भी बहुत अच्छा है रे रघु मैं तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि तुम इतना तेज होगा मुझे बहुत मजा आ रहा है रखो बस अब कुछ मत बोल मेरी चुदाई कर चोद मेरी बुर को,,,आहहहहह,,, रघु तेरे लंड में बहुत दम है मेरी बुर को फाड़ दे,,, मस्त कर दे मुझे रघु,,,

फिर क्या था रघु के लिए पूरी तरह से रास्ता साफ हो चुका था ललिया की बुर में उसके लंड के नाप का सांचा बन चुका था,,, उसे बस अंदर बाहर करके चोदना ही था,,, और इस काम को करने में वह पूरी तरह से माहिर हो चुका था रघु की कमर आगे पीछे हिलना शुरू हो गई ललिया के लिए यह चुदाई वाली स्थिति पहली बार थी इस स्थिति में उसने कभी भी चुदाई नहीं करवाई थी,,, और उसे मजा भी आ रहा था रघु चाहता तो उसे नीचे जमीन पर लिटा कर उसको चोद सकता था लेकिन नीचे पानी की वजह से जमीन गीली हो गई थी कीचड़ जैसा हो गया था इसलिए नीचे लेट कर चुदाई करना सही नहीं था,,, रघु पागलों की तरह अपनी कमर हिला रहा था ललिया उसके कंधे को दोनों हाथों से पकड़कर सहारा लेकर खड़ी थी,,, रघु एक साथ ललिया की चिकनी बुर और चूची दोनों का मजा ले रहा थावह दोनों चुचियों को बारी-बारी से अपने मुंह में लेकर चूसने था जिससे ललिया का आनंद भी दोगुना हो रहा था,,,

बरसात अपने जोरों पर थी हवाओं का जोर कम नहीं हो रहा था दोनों ने कभी सपने में भी नहीं सोचे थे इस तरह की तूफानी रात में खंडहर में दोनों चुदाई का आनंद लेंगे,, लेकिन दोनों को भरपूर मजा आ रहा था अब किसी बात का डर दोनों के मन में बिल्कुल भी नहीं था अब दोनों यही चाहते थे कि सुबह तक इसी खंडहर में रहकर चुदाई के इस खेल को और ज्यादा आनंददायक बनाया जाए,,,

रघु का लंड बड़ी तेजी से ललिया की बुर के अंदर बाहर हो रहा था,,,ना जाने क्यों रघु को ऐसा लग रहा था कि हलवाई की बीवी से ज्यादा मजा ललिया को चोदने में आ रहा था,,,,, रघु का पानी निकलने का नाम नहीं ले रहा था लेकिन ललिया एक बार झड़ चुकी थी,,,,। रघु संभोग के आसन में बदलाव लाते हुए ललिया को दीवार के सहारे दीवार की तरफ मुंह करके खड़ा कर दिया और उसकी कमर को पीछे की तरफ खींचकर उसकी मदमस्त बड़ी बड़ी गांड को थोड़ा ऊपर की तरफ उठा दिया,,, ललिया अपनी तरफ से कुछ भी करने का प्रयास नहीं कर रही थी वह मानो रघु के हाथों की कठपुतली हो गई थी जहां घुमा रहा था वहां वह घुम जा रही थी,,,, एक बार फिर से रघु का लंड ललिया की गीली बुर के अंदर प्रवेश कर गया,,, रघु एक बार फिर से ललिया की कमर को थामकर उसे चोदना शुरु कर दिया,,, एक बार फिर से ललिया की सिसकारी की आवाज गूंजने लगी लगी अच्छी तरह से जानती थी कि यहां पर उसकी गरम सिसकारी की आवाज सुनने वाला कोई नहीं है इसलिए वह मस्ती में मदहोश होकर और जोर-जोर से सिसकारी की आवाज ले रही थी,,, दोनों मस्त हो गए थे,,, और इस बार दोनों एक साथ झड़ गए लेकिन यह सिलसिला सुबह तक चलता रहा जब तक कि आंधी तूफान एकदम शांत नहीं हो गया,,, सुबह की पहली किरण के साथ ही ललिया और रघु के लिए एक नए रिश्ते की शुरुआत हो चुकी थी,,, दोनों काफी खुश थे और दोनों एक दूसरे को मुस्कुराकर देखते हुए गांव की तरफ चल दीए,,।

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सुबह जब ललिया और रघु दोनों घर पर पहुंचे तो सब लोग इन दोनों को सही सलामत देखकर एकदम खुश हो गए,,,,

तुम दोनों कि मुझे कितनी फिक्र हो रही थी रात को इतनी तेज बारिश हो इतनी तेज हवा चल रही थी कि देख ही रही हो सारे पेड़ पौधे ऊखड़ गए हैं,,, तुम दोनों सारी रात थे कहां,,,?(ललिया परेशान होते हुए दोनों से पूछी तो रघु जवाब देते हुए बोला)

मां हम दोनों गांव में ही रुक गए थे,,, अगर हम लोग वहां ना रुक कर निकल गए होते तो रास्ते में फंस गए होते,,,,

यह तुम दोनों ने बिल्कुल ठीक किया,,,,,तुम दोनों को सही सलामत देखकर मेरी तो जान में जान आ गई,,।

(ललिया कुछ भी बोल नहीं रही हो,,, रात वाली बात को लेकर वह काफी शर्मिंदगी महसूस कर रही थी,,।

और करती भी कैसे नहीं,, रात भर रघु से चुदवाई जो थी, एक तरह से वह उसका भतीजा लगता था लेकिन अपनी प्यासी जवानी के आगे घुटने टेकते हुए वह अपनी उम्र की परवाह ना करते हुए अपने बेटे की उम्र के लड़के के साथ उसके मोटे तगड़े लंड का मजा लूटते हुए रात भर चुदाई का आनंद ली,,, और अब रघु से नजरें मिलाने से कतरा रही थी,,, लेकिन रघु काफी खुश था और संतुष्ट,,, क्योंकि रात भर उसे ललिया की बेहतरीन रसमलाई दार बुर चोदने को जो मिली थी,,,,

इसके बाद ललिया अपने घर चली गई और रघु अपने घर,,,,। कुछ दिन ऐसे ही बीत गया रघु को ना तो दोबारा ललिया को चोदने का मौका मिला और ना ही हलवाई की बीवी को,,,,।

दूसरी तरफ शालू जवानी की आग में सुलगने लगी थी,,बार-बार उसकी आंखों के सामने उसके छोटे भाई का मर्दाना ताकत से भरा हुआ लंड नजर आ जाता था वह उसकी ही कल्पना में खोई रहती थी,,, उसे अपने भाई के मोटे तगड़े लंड पर गर्व होने लगा था,,,,, जिस तरह से उसके सोच में एकाएक बदलाव आया था उसे देखते हुए वह खुद हैरान थी इस तरह की कल्पना वह कभी नहीं करती थी लेकिन उसके भाई के मोटे तगड़े लंड ने उसके सोचने समझने की शक्ति पूरी तरह से छीण कर दिया था,,,,,,, उसका मन अपने ही भाई के साथ संभोग सुख लेने के लिए व्याकुल था लेकिन दिमाग इनकार करता था,,, और इसीलिए वह अपने मन और दिमाग के बीच उलझ रही गुत्थी में खुद को पूरी तरह से उलझा लेती थी,,,उसका दिमाग काम करना बंद कर दिया था लेकिन एक बात का एहसास उसे अच्छी तरह से होता था कि जब जब अपने भाई के साथ संभोग करने का ख्याल आता था तब तक उसके तन बदन में एक अद्भुत अजीब सी हलचल होने लगती थी लेकिन जब उसका दिमाग ऐसे ख्याल से इनकार करता था तो वह एकदम परेशान हो जाती थी।

क्या करना है यह उसे समझ में नहीं आता था,,, कभी-कभी उसे अपने भाई से बेहद नाराजगी का एहसास भी होता था वह इस बात से नाराज रहती थी कि वह भी जवान हो गया था लेकिन उसकी हरकत को वह समझ नहीं पाता था वरना दूसरा कोई लड़का होता तो उसकी पहली बार की हरकत के बाद वह अपना लंड उसकी बुर में डाल दिया होता,,,,

यही सब सोचते हुए वह चूल्हे के पास बैठी हुई थी कि तभी जलती हुई रोटी को देखकर कजरी उसके माथे पर धीरे से हाथ मारते हुए बोली,,,।

कहां खो गई है तू तुझे कुछ भान है कि नहीं रोटी चल रही है और तू ना जाने किस ख्याल में खोई है,,,।

(इतना सुनते ही जैसे वह नींद से जागी हो और वह इस तरह से हड़बड़ा कर अपनी मां की तरफ देखते हूए बोली)

वववव,,वो ,,, क्या है ना मां की आज थोड़ा तबीयत सही नहीं लग रही है इसलिए,,,

तेरी तबीयत खराब है,,,(इतना कहने के साथ ही कजरी शालू के माथे पर हाथ रख कर देखने लगी माथा एकदम ठंडा था,,,) बुखार तो तुझे बिल्कुल भी नहीं है तो क्या हुआ है तुझे,,,,

मां,,,, कुछ नहीं बस सर में थोड़ा दर्द हो रहा था,,,

अच्छा ला मैं रोटी बना देती हुं,,,,

नहीं नहीं मां मैं बना लेती हूं तुम जाओ,,,,

अच्छा ठीक है मैं खेतों में जा रही हूं तू थोड़ा आराम कर लेना,,,

(इतना कहकर कजरी खेतों की तरफ चली गई,,,और शालू मन में यह सोचने लगी कि अगर इस समय उसका भाई घर में होता तो जरूर कुछ ऐसी हरकत करती कि आज उसके न्यारे न्यारे हो जाते.. लेकिन हाय रे फूटी किस्मत की घर पर रघु भी नहीं था,,, शालू जल्दी जल्दी खाना बना कर,,, बिरजू के आम के बगीचे में जाने के लिए तैयार होने लगी,,, वैसे तो कोई नक्की नहीं था कि बिरजू भाई मिलेगा लेकिन उसे विश्वास था कि बिरजू वही होगा इसलिए वह जल्दी से तैयार होकर आम के बगीचे की तरफ निकल गई,,,

थोड़ी ही देर में आम के बगीचे मैं पहुंच गई चारों तरफ सन्नाटा था केवल पंछियों का शोर सुनाई देता था,,,यहां पर फैली हुई शांति शालू को भी बेहद पसंद थी और बिरजू से मिलने का इससे अच्छा जगह उसे और कोई नजर नहीं आता था,,,, तभी उसे बिरजू वहीं बैठा नजर आया जहां पर वह हमेशा बैठा रहता था और एक एक कंकड़ को तालाब में फेंका करता था,,,। वह खुश होकर बिरजू के पास जाने लगी बिरजू अपने ख्यालों में खोया हुआ था लेकिन शालू के पैरों की पायल की आवाज से उसका ध्यान भंग हुआ और वह पीछे देखा तो सालों उसकी तरफ आ रही थी और यह देखकर उसके चेहरे पर खुशी के भाव नजर आने लगे और वह वहीं पर बैठा हुआ ही खुश होता हुआ बोला,,,।

अरे वाह मेरी रानी,,, तुम यहां आओगी मुझे इस बात की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी,,,

क्यों तुमसे मिलने के लिए नहीं आ सकती क्या,,? (शालू उसके पास बैठते हुए बोली,,,)

नहींनहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है तुम मुझसे जब चाहो तब मिल सकती हो मुझ पर तुम्हारा पूरा हक है,,,।

पूरा हक है ,,,,सिर्फ बातें बनाते हो,,,, कभी अपने माता-पिता से मेरे बारे में कुछ बताया नहीं ना तब कैसे में विश्वास कर लूं कि तुम मुझसे ही शादी करोगे,,,

(शालू बिरजू से यह सब बातें कर ही रही थी कि रघु उनके पीछे की घनी झाड़ियों के बीच से निकलने लगा जिसकी भनक तक उन दोनों के कानों में नहीं पड़ी क्योंकि वह चोरी छिपे आम के बगीचे में आम तोड़ने के लिए आया था,,,लेकिन खुश रहो शेर की आवाज उसके कानों में पड़ते ही वह एकदम से चौकन्ना हो गया और वह झाड़ियों में से ना निकल कर उन्हें झाड़ियों में छुपकर देखने लगा कि आखिर आवाज किसकी आ रही है,,, और थोड़ी ही देर में उसे पत्थर पर बैठे हुए बिरजू और उसकी बहन नजर आ गई,,,वह उनके पीछे से देख रहा था लेकिन वह अपनी बहन और बिरजु दोनों को अच्छी तरह से पहचानता था,,,,अपनी बहन को बिरजू के साथ बैठा हुआ देखकर वह एकदम दंग रह गया उसे गुस्सा आने लगा,,, वह इसी समय बाहर निकल करबिरजू को धर दबोचा ना चाहता था और उसे पीटकर बराबर कर देना चाहता था लेकिन तभी उसके मन में ख्याल आया कि वह थोड़ी देर रुक कर वहां का माहौल तो देख ले कि आखिर दोनों में क्या खिचड़ी पक रही है,,, तभी उसके कानों में शालू की आवाज पड़ी,,,)

बिरजू मैं तुमसे प्यार करती हूं आखिर कब तक इस तरह से छुप छुप कर हम दोनों मिलेंगे,,,

(इतना सुनते ही रघु के जेहन में अजीत हलचल होने लगी उसे उस दिन वाला दृश्य याद आने लगा जब वह और रामू दोनों गांव से दूर झरने के पास गए थे और वहां पर रघु ने अपनी आंखों से साफ देखा था कि एक लड़की तालाब से निकलकर एकदम नंगी होकर झाड़ियों के बीच भागकर अदृश्य हो गई थी और वहां पर बिरजू भी खड़ा था कहीं ऐसा तो नहीं कि वह अपनी आंखों से अपनी ही उनकी बहन को देखा था जो कि बिरजू के साथ तालाब में एकदम नंगी होकर नहाने का मजा लूट रही थी या कुछ और भी कर रही थी,, यह सब ख्याल मन में आते ही रघु का दिमाग एकदम सन्न हो गया,,,, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा उसके मन में ढेर सारे सवाल उठने लगे उसे लगने लगा कि उसकी बहन बिरजू के साथ चुदवा चुकी है,,,और इसीलिए उसके बदन में बार-बार चुदवाने की गर्मी उठ रही है जिसकी वजह से वह उसके लंड को अपने हाथ में पकड़ कर उसे उकसाने की कोशिश करती है रघु को चालू की तरफ से हो रहे सारे हरकत का मामला समझ में आ गया वह हैरान था गुस्से में था लेकिन फिर भी ना जाने क्यों इन सब बातों को याद करके उसका लंड खड़ा होने लगा था,,, वह बराबर अपना कान खोल कर उन दोनों की बातें सुन रहा था,,,।

मैं ,,,,मैं सचकह रही हूं बिरजू अगर मेरी शादी तुम्हारे साथ नहीं हुई तो मैं अपने आप को खत्म कर लूंगी,,,।

(इतना सुनते ही बिरजू उसके होठों पर अपना हाथ रखकर उसे चुप कराते हुए बोला,)

तुम पागल हो गई हो साले अगर तुम्हें कुछ हो गया तो मेरा क्या होगा इस बारे में कभी सोची हो,,, तुम नहीं रहोगी तो मैं भी अपने आप को खत्म कर लूंगा,, तुम शायद नहीं जानती कि मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं,,,,

तो हम दोनों की शादी के बारे में अपने माता-पिता से बोलते क्यों नहीं,,,

शालूमैं सही समय देखकर हम दोनों के बारे में पिता जी से बात करूंगा और मुझे पूरा यकीन है कि पिताजी मेरी बात का इनकार बिल्कुल भी नहीं कर पाएंगे बस थोड़ा सा सब्र करो,,,।

कितना सब्र करु बिरजू अगर मां ने कहीं और लड़का ढूंढ कर मेरी शादी करा दी तो मैं जीते जी मर जाऊंगी,,,।

ऐसा कुछ भी नहीं होगा मेरी जान बस मुझ पर भरोसा रखो,,,,(इतना कहने के साथ ही फिर जो हिम्मत दिखाते हुए अपने होंठ को सालु के होंठों के करीब लाकर उसके होठों को चूमने लगा,,, यह देखकर बिरजू को गुस्सा आने लगा,,,, लेकिन फिर भी वह खामोश रहा सिर्फ इसलिए किशालू उससे बेहद प्यार करती थी और वह भी सालों से प्यार करता था अगर सच में इन दोनों की शादी हो जाती है तो उसकी बहन अच्छे से अपनी जिंदगी काट सकती थी इसलिए वह मन में यही चाहता था कि यह दोनों का रिश्ता हो जाए लेकिन उसकी आंखों के सामने वह दोनों जो कुछ भी कर रहे थे उससे उसे गुस्सा तो आ रहा था लेकिन उत्तेजना भी मिल रही थी,,,, तभी शालू अपने आपको उसे से छुड़ाते हुए बोली,,,।

रहने दो यह सब जब अपने पिताजी से मेरे बारे में बात कर लोगे तब यह चुम्मा चाटी करना,,,,।

तुम तो यार नाराज हो जाती हो चुम्मा भी ठीक से लेने नहीं देती,,,,

अगर यह सब करना है तो पहले शादी फिर उसके बाद जो कुछ भी तुम कहोगे सब कुछ होगा,,,,।

अच्छा एक बार अपनी बुर तो दिखा दो,,,, शादी तक थोड़ी बहुत तसल्ली तो रहेगी,,,।

नहीं बिल्कुल भी नहीं ,,,, सब कुछ शादी के बाद अगर एक बार शादी हो गई तो इत्मीनान से तुम्हें दे दूंगी,,, लेकिन अभी कुछ भी नहीं एक झलक तक नहीं मिलेगी,,,(अपनी बहन के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर रघु के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी वह काफी कामोत्तेजना से भर गया था,,)

यार झरने के नीचे तो अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गई थी और यह नखरा कर रही हो,,,

एक मौका दी थी तुम्हें लेकिन तुमसे कुछ हुआ नहीं इसलिए अब शादी के बाद,,,,

(अपनी बहन के मुंह से यह बात सुनते हीयह बात तय हो गई कि उस दिन रघु ने जो अपनी आंखों से भागती हुई नंगी लड़की को देखा था का कोई और नहीं उसकी बहन थी यह बात की पुष्टि होते ही रघु के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फूटने लगी उसकी आंखों के सामने वही दृश्य नजर आने लगा जब वह उस भागती हुई लड़की को बल्कि उसकी खुद की बहन को तालाब में से निकलते हुए और भागते हुए देखा था उसके गोलाकार गांड को याद करके उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया,,,उसके मन में क्या चल रहा था कि अनजाने में ही सही वह अपनी बहन को पूरी तरह से निर्वस्त्र हालत में देख चुका है और निर्वस्त्र होने के बाद उसकी बहन बला की खूबसूरत लगती थी इस बात से कोई इनकार नहीं था,,,,अपनी बहन की बात सुनकर उसे लगने लगा था कि उसे देना उसकी बहन अपने कपड़े उतारकर बिरजू को एक मौका देना चाहती थी लेकिन बिरजू उस मौके का फायदा नहीं उठा पाया था,, जिसका मलाल शायद उसकी बहन के साथ-साथ बिरजू को भी था,,,, शालू की बात सुनकर बिरजू बोला,,,)

शालू मेरी जान यहां पर मुझे एक मौका दो ,,, बस एक मौका,,,,

नहीं नहीं अब बिल्कुल भी नहीं जो भी मौका मिलेगा शादी के बाद,,,,(इतना कहकर शालू चलती बनी)

अरे अरे थोड़ी देर और तो रुक जाओ,,,

नहीं मुझे घर जल्दी पहुंचना है,,,,

(बिरजु वहीं खड़ा शालू को जाता हुआ देखता रहा उसके चेहरे पर मुस्कुराहट थी,,, कुटिल मुस्कान नहीं यह देखकर रघु प्रसन्न हो गया क्योंकि बिरजू की खुशी देखकर रघु को लगने लगा कि बिरजू के मन में चोर बिल्कुल भी नहीं है वह सच्चे दिल से प्यार करता है,,, और वह वहां से दबे पांव पीछे आ गया,,, लेकिन उसकी बहन की बातों ने उसके तन बदन में वासना की लहर को और ज्यादा भड़का दिया था,,,, वह गांव की तरफ आ ही रहा था कि रास्ते में बग्गी खड़ी हुई मिली वह तुरंत दौड़कर बग्घी के करीब गया उसे लगा की बग्गी के अंदर लाला की बहू होगी,,,, लेकिन बग्गी के बाहर लाला खड़ा था,,, उसे देखते ही रघु उसे नमस्कार किया और बोला,,,।

क्या हुआ लाला सेठ इस तरह से आप बग्गी के बाहर क्यों खड़े हैं,,,,।

अरे बेटा इसके चालक को चक्कर आने लगा तो बग्गी यहीं पर रोकना पड़ा,,,,

(लाला की बात सुनते ही रघु पास में ही बैठे चालक की तरफ देखने लगा,,,)

हां हां तबीयत तो ठीक नहीं लग रही है,,, लेकिन अब आप घर कैसे जाओगे लाला सेठ,,,

अरे यही तो बात है रघु बेटा,,,,(लाला कुछ सोचते हुए) रघु क्या तू बग्गी चला लेगा,,,,

मैं,, हां हां,,, इसमें कौन सी बड़ी बात है घोड़ा ही तो दौड़ाना है,,,,।

तब तो ठीक है बेटा तू ही ईस बग्घी को चला ले,,,,

ठीक हे लाला सेठ जैसी आपकी मर्जी,,,,( इतना कहने के साथ ही रहो बग्गी के आगे बैठ गया और लाला अपने चालक को आराम हो जाने के बाद घर चले जाने की हिदायत देकर बग्गी के अंदर बैठ गया रघु बहुत खुश नजर आ रहा था लाला के बैठते ही वह घोड़े को हांकने लगा और घोड़ा आराम से आगे बढ़ने लगा,,,अंदर बैठे बैठे ही लाला ने उसे घर पर बग्गी ले जाने के लिए बोला और रघु बग्गी को लाला के घर की तरफ ले जाने लगा उसके मन में हलचल सी मच ने लगी क्योंकि वह जानता था कि लाला के घर पर जाकर वह उसकी बहू के दर्शन कर सकेगा,,,, लाला की खूबसूरत बहू और अपनी बहन की बातों को याद करके पजामे के अंदर उसका लंड खड़ा होने लगा,,।
 
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