Incest बरसात की रात,,,(Completed) - Page 9 - SexBaba
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Incest बरसात की रात,,,(Completed)

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एक दिन सुबह-सुबह रघु लकड़ी के बने अपने गुसल खाने में नहा रहा था,,,,उसकी आदत थी कि जब भी वह अपने लकड़ी के बने गुसलखाना में नहाता था तो अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगा हो जाता था और फिर नहाता था,,। गुसल खाने में जाने से पहले वह अपनी बहन के साथ मस्ती कर रहा था उसके अंगों से छेड़खानी कर रहा था इसमें सालु को भी मजा आ रहा था वह दोनों आगे बढ़ना चाहते थे,,, रघु एक बार फिर अपनी बहन को चोदना चाहता था वैसे तो दोनों की चुदाई रोज ही हो रही थी रोज रघु अपनी बहन को चोद रहा था लेकिन आज दोनों को मौका नहीं मिल पा रहा था क्योंकि कजरी घर पर ही थी,, इससे दोनों काफी उत्तेजित हो चुके थे और अपनी जवानी की गर्मी को ठंडा करने के लिए ही रखो आज जल्दी नहाने की सोच रहा था वह गुसल खाने में एकदम नंगा था उसका लंड अपनी बहन की मदहोश जवानी की खुशबू पाकर पूरी तरह से टन्ना गया था,,, गुशल खाने में पूरी तरह से नंगा होने के बाद रघु का लंड कुछ ज्यादा ही ताकतवर और लंबा लग रहा था,वह कुशल खाने में खड़े खड़े अपने खड़े लंड को देख रहा था और उसे देखकर अपने आप पर वह गर्व महसूस कर रहा था क्योंकि इस लंड के बदौलत वह अपनी जीवन की बेहतरीन पलको जी रहा था उसका पूरी तरह से मजा लूट रहा था,,, सबसे पहले हलवाई की बीवी और दूसरी रामू की मां जिसे बचपन से चाची चाची कहता आ रहा था और मौका मिलने परउसी चाची की बुर में अपना लंड डालने में उसे बिल्कुल भी शर्म का एहसास नहीं हुआ,,, और तीसरी उसकी बड़ी बहन जीसकी चुदाई करके वह धन्य हो चुका था,,, और जिसको रात दिन वह चोद रहा था,,, उसी की जवानी का नशा था कि जो गुसल खाने में भी उसका लंड बैठने का नाम नहीं ले रहा था और रघु उस पर ठंडा पानी डालकर उसे ठंडा करने की कोशिश कर रहा था,,,

दूसरी तरफ कजरी घर के बाहर अपने जानवर को चारा पानी दे रही थी कि तभी दो आदमी आए हट्टे कट्टे हाथ में लट्ठ लिए,,, जिन्हें अपने द्वार पर आया देखकर कजरी घबरा गई,,,, वो लोग आते ही कजरी से बोले,,,।

रघु कहां है,,,?

(कजरी एकदम से घबरा गई उसे लगा कि कुछ गड़बड़ हो गई है वह तुरंत खड़ी होकर बोली)

क्यों क्या हो गया मेरे बेटे से कोई गुस्ताखी हुई है क्या,,,,

नहीं नहीं बहन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है,,,तुम्हारे बेटे को प्रताप सिंह जी ने याद किया है किसी काम की वजह से,,, तो उसे हम लेने आए हैं,,,

मेरे बेटे से भला उन्हें क्या काम हो सकता है,,,।

यह तो वही जाने हमें तो सिर्फ आदेश मिला है,,, देखो हमें देर हो रही है अपने बेटे को बुला दो,,,।

ठीक है आप लोग यहीं बैठो में बुला कर लाती हूं,,,,(इतना कहकर कजरी घर में रघु को बुलाने के लिए चली गई,, तो सालों से पता चला कि वह तो नहाने गया है,,, और कजरी गुसल खाने की तरफ आगे बढ़ गई,,, वहगुसल खाने की तरफ पहुंचकर उसे आवाज देने ही वाली थी कि तभी,, दो बड़ी-बड़ी लकड़ियों के बीच की खाली जगह में से उसे जो नजर आया उस दृश्य पर उसे विश्वास नहीं हुआ,,, और वह एकदम करीब जाकर दोनों लकड़ियों के बीच की खाली जगह में से अपनी नजर को अंदर की तरफ दौड़ाने लगी,,।

उसकी आंखों ने जो दृश्य देखा उस दृश्य को देखकर वह एकदम दंग रह गई,,,उसकी दोनों टांगों के बीच हलचल सी मचने लगी,, अजीब सी थरथराहट उसके तन बदन को अपनी आगोश में लेने लगी,,,,, वह यह बात भी भूल गई कि वह यहां पर रघु को बुलाने के लिए आई थी,,,बस दोनों लकड़ियों के बीच की खाली जगह में से अपनी नजर गड़ाए अंदर के दृश्य को देखकर अपने आपको पूरी दुनिया से भुलाने लगी,,, कर भी क्या सकती थी उसकी जगह कोई और औरत होती तो वह भी इस दृश्य को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाती,,, रघु लकड़ी के बने गुशल खाने के अंदर संपूर्ण नग्ना वस्था में था और अपने बदन पर लोटे से पानी लेकर डाल रहा था,,,। यह बात कजरी के लिए हैरानी वाली बिल्कुल भी नहीं थी ,,, रघु उसका बेटा था और बचपन से वह उसको देखते आ रही थी,, उसके बदन से अच्छी तरह से वाकिफ थी अगर वाकिफ नहीं थी तो उसके दोनों टांगों के बीच लटकते हुए हथियार से वह अभी भी अपने बच्चे को बच्चा ही समझती थी और यही उसके लिए,हैरानी वाली बात थी,,, की रघु अभी बच्चा ही था लेकिन उसका लंड बड़े लोगों से भी कहीं ज्यादा तगड़ा था,,, इसी बात को लेकर कजरी हैरान थी,,,, अपने बेटे के खड़े लंड को देखकर उसका मुंह खुला का खुला रह गया था,,, उसे इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उसके बेटे पहले इतना तगड़ा मोटा और लंबा होगा,,,,, इसमें उसकी कोई गलती नहीं थी आज तक वह अपने पति के ही लंड देखी थी और अपने पति के लंड को ही दुनिया के सभी मर्दों के लंड से तुलना करके संतुष्ट थी,,, लेकिन आज अपने बेटे के लंड को देखकर वह हैरान थी लंड क्या ऐसा भी होता है वह अपने आप से ही यह सवाल कर रही थी,,,, कजरी की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,, रघु बार-बार बाल्टी में से लौटा भरकर अपने बदन पर पानी डाल रहा था और पानी की बूंदे उसके बदन से होती हुई उसके लंड पर से नीचे गिर रही थी,,, ऐसा लग रहा था कि मानो वो धीरे धीरे पेशाब कर रहा हो,,,, तभी अपने बेटे की हरकत को देखकर कजरी की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में हलचल होना शुरू हो गया,,, रघु लोटे के पानी की धार को अपनी खड़े लंड पर गिरा रहा था और पानी की धार के वजन से उसका लंड ऊपर नीचे हील रहा था, और अपने बेटे के हिलते हुए लंड को देखकर एक अजीब सी लहर कजरी अपने बदन में उठती हुई महसूस करने लगी,, रघु को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उसकी मां लकड़ी के पट्टी के आड़ में खड़ी होकर उसकी हरकत को देख रही है,, वह तो अपनी मस्ती में था,,,।

कजरी की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी वह वहां से चली जाना चाहती थी लेकिन आंखों के सामने जिस तरह का मादक दृश्य था उसे छोड़कर जाने की इच्छा उसकी बिल्कुल भी नहीं हो रही थी और यह भी वह भूल गई थी कि वह अपने बेटे को बुलाने आई थी,,,। वह तो अपने बेटे के नंगे बदन उसके खड़े लंड को और उसकी हरकत को देखकर मंत्रमुग्ध हुए जा रही थी,,,,,, तभी रघु अपने लंड को अपनी मुट्ठी में भर कर मुट्ठीयाने लगा,,, और अपने बेटे की इस हरकत को देखकर कजरी के बदन में आग लग गई वह अपना हाथ दोनों टांगों के बीच ले जाकर साड़ी के ऊपर से ही अपनी बुर को जो की कचोरी की तरह फुल चुकी थी उसे दबोच ली,,,अपने बेटे की इस तरह की हरकत देखने में कपिल को आनंद की अनुभूति होने लगी उसे आनंद आ रहा था एक अजीब सा सुख उसे प्राप्त हो रहा था लेकिन रघु यह क्रिया ज्यादा देर तक नहीं किया तीन चार बार अपने लंड को मुठीयाकर वापस नहाना शुरू कर दिया,,,, अपने बेटे के मोटे तगड़े और लंबे लंड को देखकर ना चाहते हुए भी उसके मन में एकाएक यह ख्याल आया कि अगर वह अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेगी तो उसके बेटे का लंड ईतना मोटा है कि उसकी बुर में घुस नहीं पाएगा और इस खयाल से कजरी पूरी तरह से उत्तेजना से सरोबोर हो गई,,,, उत्तेजना के मारे उसकी बुर से अमृत रूपी रस बुंद बनकर उसकी बुर की गुलाबी पत्तियों के बीच से निकलकर नीचे जमीन पर गिर गई,,,, अपने बदन में आए इस जबरदस्त बदलाव को महसूस करके कचरी एकदम से गदगद हो गई,,, उसकी आंखें अपने बेटे के लंड को देखकर यह साफ पता लगा ले रही थी कि उसके बेटे के लंड का सुपाड़ा कुछ ज्यादा ही मोटा था और उसकी बुर की गुलाबी छेद सुपाड़े से छोटी ही थी,,। अपने मन में आए इस ख्याल से साफ पता चल रहा था कि अपने बेटे के खड़े लंड को देखकर कजरी के मन में उस से चुदवाने की कामना जागने लगी थी,,,,,

कजरी,,,अपने बेटे के नंगे बदन उसके खड़े लंड के दर्शन और देर तक करना चाहती थी,,, लेकिन ऐसा मुमकिन नहीं हो पाया रघु तौलिया लेकर उसे अपने बदन से लपेट लिया,,, लेकिन तोलिया लपेटने के बावजूद भी उसके तौलिए में जबरदस्त तंबू बना हुआ था जिसे देखकर कजरी की हालत खराब होती जा रही थी,,,, लेकिन अब ज्यादा देर तक वहां खड़े रहना उसके लिए ठीक नहीं था,,, इसलिए वह वहां से सीधा घर में आ गई,,,,और वह भी इस इंतजार में कि घर में आने पर उसके तौलिए में बना तंबू उसे एक बार फिर से नजर आ जाएगा,,, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया रघु तब तक वही कुशल खाने में खड़ा रहा जब तक कि उसका लंड ढीला नहीं पड़ गया,,,, जब वह घर में आया तो उसे देखकर उसे नहीं बल्कि उसके तंबू को देखकर जो कि इस समय मैदान में से गायब हो चुका था निराश हो गई,,, और वह अपने बेटे से बोली,,,।

रघु तुझे प्रताप के आदमी बुलाने आए थे,,,

कौन प्रताप सिंह,,,,

हां हां वही,,,,,

लेकिन मुझ से उन्हें क्या काम हो सकता है,,,,

कोई काम होगा तभी तो तुझे बुलाया है और बाहर दो आदमी आए हैं तुझे लेने के लिए,,,,

मुझे लेने के लिए,,,,(इतना कहकर वह तसल्ली करने के लिए घर से बाहर आकर देखा तो दो आदमी वही खाट पर बैठे हुए उसका इंतजार कर रहे थे,,,रघु वापस कमरे में गया और जल्दी से तैयार होकर उन दोनों आदमी के पास पहुंच गया और बोला)

बोलो क्या काम है मुझसे,,,,

क्या काम है आप यह तो हम नहीं जानते लेकिन तुम्हें मालिक ने बुलाया है इसलिए तुम्हें लेने के लिए आए हैं,,,,

ठीक है चलो मैं चलने के लिए तैयार हूं,,,,(इतना कहकर रघु दोनों आदमी के साथ चलने लगा उसके मन में ढेर सारे सवाल चल रहे थे कि आखिरकार प्रताप सिंह को उससे क्या काम निकल आया जो उसे बुलाने के लिए अपने दो आदमी उसके घर भेज दिए थे रघु थोड़ा बहुत परेशान भी नजर आ रहा था,,,रघुयह बात अच्छी तरह से जानता था कि प्रताप सिंह गांव समाज का इज्जत दार इंसान था इसके लिए उसकी बात मानना भी जरूरी था,,,,इसलिए वह ज्यादा सवाल जवाब किए बिना ही उन दोनों के साथ चल दिया कि जो होगा वही देखा जाएगा।)
 
रघु प्रताप सिंह के दोनों आदमी के साथ थोड़ी देर में उनके घर पहुंच गया रघु के मन में ढेर सारे सवाल उठ रहे थे कि आखिरकार प्रताप सिंह उसे क्यों बुला रहा है थोड़ी घबराहट भी मन में थी,,,।थोड़ी देर में बात प्रताप सिंह के सामने खड़ा था उसके अगल-बगल उसके दोनों आदमी हाथ में लट्ठ लिए खड़े थे,,। प्रताप सिंह सामने अपनी कुर्सी पर बैठा हुआ था और हुक्का को मुंह से लगाए गुडगुडा रहा था,,,। रघु प्रताप सिंह को नमस्कार किया और बोला,,।

मालिक आप मुझे किस लिए बुलाए हैं,,,?

बताता हूं पहले बैठ जाओ बड़ी दूर से चलकर आए हो थोड़ा हवा ले लो,,,

(इतना सुनकर वह वहीं पर बैठ गया और घर की नौकरानी तुरंत पानी का गिलास लेकर उसके पास आई और रघु पानी का गिलास लेकर एक सांस में पानी का गिलास खाली कर दिया वैसे भी इसे प्यास बड़ी तेज लगी थी,,, वह दोनों आदमी वही उसके पास ही खड़े थे,, तभी प्रताप सिंह रघु से बोला,,,)

लाला जी बता रहे थे कि तुम तांगा बहुत अच्छा चलाते हो,,,

जी मालिक थोड़ा बहुत ,,,,(रघु खुश होता हुआ बोला,,)

हम तो यह सुनकर एकदम खुश हो गए,,, तुम हमारे काम के आदमी हो,,,,

(प्रताप सिंह की बात सुन कर रखो इतना तो समझ ही गया था कि तांगा चलाने के सिलसिले में ही उसे यहां लाया गया है,,,तभी प्रताप सिंह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,)

हमारी पत्नी का कुछ दिनों से यहां मन नहीं लगता उसे अपने मायके जाना है मैं चाहता हूं कि तुम उसे अपने साथ थाना में लेकर उसके मायके लेकर जाओ और दो-तीन दिन वहां रुक कर वापस लेकर चले आना,,,।

(प्रताप सिंह की बात सुनकर रघु सोच में पड़ गया था उसे जाने का मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा था क्योंकि बिना चुदाई किए अब उसका मन नहीं मानता था पहले तो चल जाता था क्योंकि उसके पास जुगाड़ नहीं था लेकिन अब तो घर में ही खूबसूरत बड़ी बहन का जुगाड़ हो चुका था जिसकी बुर के अंदर वह अपने बदन की सारी गर्मी डाल देता था और उसकी बहन भी उसके बिना नहीं रह सकती थी वह भी उसी से चुदवाए बिना जल बिन मछली की तरह तड़पती रहती थी,,,, रघु यह सब छोड़कर जाने का बिल्कुल भी इच्छुक नहीं था,,, यही सब सोचकर वह हैरान था,,, कि वह प्रताप सिंह से ना कैसे कहे,, रघु यही सब सोच रहा था कि प्रताप सिंह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोले।)

देखो रघु मुझे पूरी उम्मीद है कि तुम इंकार नहीं करोगे,,,

लेकिन मेरी मां,,,,

तुम अपनी मां की चिंता बिल्कुल भी मत करो हम तुम्हारी मां से बात कर लेंगे और ऐसा नहीं है कि तुम्हें तांगा चलाने के बाद में कुछ नहीं मिलेगा तुम्हें तुम्हारी पूरी मजदूरी मिलेगी खाना-पीना और साथ ही कपड़े लत्ते भी,,,,

(प्रताप सिंह की बात सुन कर रघु का मन खुश हो गया,,, लेकिन अपनी बड़ी बहन की बुर चोदने की आदत से वह मजबूर था और प्रताप सिंह की बात को ना मानना उचित नहीं था,,,, इसलिए वह अपना मन मार कर बोला,,,)

ठीक है मालिक जैसा आप उचित समझे,,,, लेकिन निकलना कब है,,,

अभी थोड़ी देर बाद ही निकलना है,,,,तुम चाहो तो अपने घर पर जाकर यह बात बता सकते हो और किसी भी प्रकार की दिक्कत हो तो मुझे जरूर बताना,,,,

जी मालिक,,,,,

तुम जल्दी जाओ और अपने घर से होकर आ जाओ तब तक हम अपनी बीवी को तैयार होने के लिए कहते हैं,,,,(इतना कहने के साथ ही प्रताप कुर्सी पर से उठ कर कमरे में चले गए और रघु अपने घर की तरफ,,,,जब तक वह घर पर पहुंच नहीं गया तब तक उसके मन में अपनी बहन का ही ख्याल उठ रहा था,,, उसे अब अपनी बहन की आदत सी पड़ गई थी,,,, कजरी अंदर कमरे में बिस्तर पर लेटी हुई थी,,, उसकी आंखों के सामने उसके बेटे का खड़ा लंबा लंड नाच रहा था जब से उसने अपने बेटे के लंड का दीदार की थी तब से अपने होशो हवास में बिल्कुल नहीं थी,,, बरसों के बाद उसने शायद पहली बार अपनी आंखों से नंगे और बेहद जबरदस्त लंड देखी थीतभी तो उसका मन किसी काम में नहीं लग रहा था और खेतों में जाने के बजाय वह अंदर कमरे में बिस्तर पर लेटी हुई थी,,,,,, उसकी आंखों के सामने तो केवल उसके बेटे का बमपिलाट लंड ही नजर आ रहा था,,,जिंदगी में उसने कभी भी अपने बेटे जैसा लैंड नहीं देखी थी जिसमें बिल्कुल भी ढीलापन नहीं था एकदम खड़ा का खड़ा था ऐसा लग रहा था कि जैसे लंड ना होकर गाय भैंस को काबू में रखके बांधने वाला खूंटा हो,,, वह बेसुध होकर बिस्तर पर लेटी हुई थी उसके कपड़े अस्त-व्यस्त हो चुके थे यहां तक कि वह घुटनों को मोड़कर हल्का सा घुटनों को खोल कर लेटी हुई थी जिससे उसकी साड़ी एकदम ऊपर चढ़कर घुटनों से नीचे गिर गई थी और कजरी को इतना भी भान नहीं था कि जिस स्थिति में वह सोई हुई थी उसकी साड़ी एकदम जांघों तक आ गई थी और उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार नजर आने लगी थी,,,,, उसकी आंखें बंद थी वह अपने बेटे के ख्यालों में खोई हुई थी,,,, उसकी आंखों के सामने बार-बार वही दृश्य दोहराते हुए नजर आ रहा था जब वह लकड़ी के दोनों के बीच की जगह में से गुसल खाने के अंदर चोरी-छिपे देख रही थी और रघु लोटे का पानी की धार को अपनी खड़े लंड पर डाल रहा था और पानी के दबाव में उसका लंड ऊपर नीचे बेहद कामुक स्थिति में हील रहा था,,, कजरी एकदम से मदहोश हो चुकी थी उसके दोनों हाथ कब उसके ब्लाउज के ऊपर पहुंच गए उसे खुद नहीं पता चला और वह उसे हल्के हल्के दबा रही थी,,,कजरी के साथ ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था जैसा कि आज हो रहा था और वह भी अपने ही बेटे के कल्पना में जो कि वह खुद सपने में भी कभी नहीं चाहती थी लेकिन उसकी सोच के विरुद्ध सब कुछ वैसा ही हो रहा था जैसा कि एक कामुक काम भावना से ग्रस्त औरत के साथ होता है,,,

रघु इस बात से अनजान की कमरे में उसकी मां बिस्तर पर सो रही है सो नहीं रही थी बल्कि कल्पनाओं की दुनिया में अपने आप को लेकर उड़ रही थी,, रघु प्रताप सिंह से हुई बातचीत को अपनी मां से बताने के लिए उसे ढूंढता हुआ अंदर के कमरे तक आ गया और जैसे ही दरवाजे पर पहुंचा वह अपनी मां को बिस्तर पर लेटा हुआ देखकर एकदम से दंग रह गया उसके होश उड़ गए,,उसकी मां बेसुध होकर बिस्तर पर पीठ के बल लेटी हुई थी उसकी दोनों टांगें घुटनों से मुड़ी हुई थी,, जिससे उसकी साड़ी जांघों तक आ चुकी थी और जब रघु की नजर अपनी मां की दोनों टांगों के बीच पहुंची तो वह एकदम से मदहोश हो गया,,रघु को साफ-साफ अपनी मां की बुर नजर आ रही थी जिस पर हल्के हल्के घुंघराले रेशमी बाल थे,,। रघु अपनी मां की बुर देखकर एकदम मस्त हो गया रघु को तो ऐसा ही लग रहा था कि उसकी मां सो रही है ,,, लेकिन उसे क्या पता था कि उसकी मां उसके ख्यालों में मदहोश होकर कल्पना मैं खोई हुई है जिसकी वजह से उत्तेजित अवस्था में उसकी बुर गरम रोटी की तरफ फूल चुकी थी,,, और तभी रघु को अपनी मां की बुर फुली हुई नजर आ रही थी,,,,, इसलिए तो रघू जितनी भी वह बुर को देख चुका था,,ऊन सबमे सबसे खूबसूरत बुर उसे अपनी मां की लग रही थी,,, रघु तो अपनी मां की दोनों टांगों के बीच देखता ही रह गया,,, रघु के लिए तो उसकी मां की दोनों टांगों के बीच का वह अंग दुनिया का सबसे खूबसूरत अंग था,,, साड़ी के अंदर दोनों टांगों के बीच छुपा हुआ दुनिया का बेहतरीन खजाना जो कि आज अनजाने में ही बेपर्दा होकर अपनी चमक बिखेर रहा था,,।

अपनी मां की बुर पर नजर पड़ते ही रघू के लंड को खड़ा होने में पल भर की भी देरी नहीं लगी,,,, होश खो बैठा था रघु अपनी बहन की चुदाई करके जिस तरह के अद्भुत आनंद को महसूस किया था इससे उसे साफ पता चल गया था कि परिवार के सदस्य में किसी भी औरत की चुदाई करने का सुख दुनिया के हर एक सुख से सबसे बेहतरीन सुख है,,,इसके लिए उसके मन में यह ख्याल चल रहा था कि जब बहन को चोदने में इतना मजा आया तो जब वह अपनी मां को चोदेगा तो उसे कितना मजा आएगा,,,,,, यही सोच कर रघु को इस समय अपनी मां के ऊपर चढ़ने की इच्छा हो रही थी,,, लेकिन उसे डर भी लग रहा था,,,कजरी एकदम मदहोश होकर अपने बेटे के ख्याल में खोई हुई थी उसे तो इस बात का आभास तक नहीं था कि दरवाजे पर उसका बेटा खड़ा होकर उसकी दोनों टांगों के बीच उसकी बुर को झांक रहा है,,,,,,, रघु का दिल जोरों से धड़क रहा था रघू अपनी मां की बुर को अपने हाथ से छूना चाहता था स्पर्श करना चाहता था,,, उसे अपनी मुट्ठी में लेकर दबाना चाहता था उसके रस को पूरी तरह से नीचोड डालना चाहता था,, जैसा कि वह अपनी बहन की बुर के साथ करता था,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था उत्सुकता के साथ साथ डर की परत उसके मन पर चढ़ी हुई थी,,, उसे अपनी मां से डर लगता था क्योंकि एक बार वह उसका गुस्सा देख चुका था जब वह उसे पेशाब करते हुए प्यासी आंखों से देख रहा था,,,लेकिन आज उसकी मां नींद में थी ऐसा हुआ सोच रहा था जबकि उसकी मां पूरी तरह से मदहोशी के आलम में मस्त हो चुकी थी अगर इस समय रघु खटिया पर सोई हुई अपनी मां की दोनों टांगें फैला कर अपना लंड उसकी बुर में डाल भी देता तो शायद उसकी मां उसे मना नहीं कर पाती बल्कि गर्मजोशी के साथ अपने बेटे को अपनी बाहों में लेकर उसके लंड का अपनी बुर के अंदर स्वागत करती,,, लेकिन यह तो मन की बात थी भला मन की बात कौन समझ सकता था अगर रघू समझ पाता तो अब तक अपनी मां पर चढ़ गया होता,,, कजरी के दोनों हाथ अभी भी उसके दोनों दशहरी आम पर थे लेकिन इस समय वह अपनी चूचियों को दबा नहीं रही थी बल्कि वैसे ही अपनी हथेली उस पर रखे हुए थी,,,,बेहद मनमोहक मादक दृश्य देखकर रघु का पैजामा पूरी तरह से तनकर तंबू की शक्ल धारण कर चुका था,,,,,, इस समय निश्चित तौर पर अगर कजरी की आंख खुली होती तो अपनी दोनों बाहें फैलाकर अपने बेटे को अपने ऊपर बुला ली होती,,,,

रघु का दिल जोरों से धड़क रहा था वह अपनी मां के बेहद करीब जाना चाहता था अपनी खुली आंखों से अपनी मां की खुली बुर को देखना चाहता था उसके मनमोहक आकार को उसकी रचना को अपनी आंखों में बसा लेना चाहता था,,, लेकिन अपनी मां के पास जाने से उसे डर लग रहा था,,, फिर भी मादकता के एहसास तले वह अपने कदम आगे बढ़ाने से अपने आप को रोक नहीं सका वह अपनी मां के बेहद करीब पहुंच गया था लेकिन कजरी एकदम बेशुध थी मदहोश थी अपने बेटे के मदमस्त बलवंत मर्दाना ताकत से भरे हुए लंड के ख्याल में पूरी तरह से खोई हुई थी,,,इसलिए उसे इस बात का अहसास तक नहीं हुआ कि जिसके ख्याल में वह अपने आप को पूरी तरह से डूबो ली है वह रघु उसके बेहद करीब खड़ा होकर उसकी दोनों टांगों के बीच के छिपे हुए खजाने को देखकर मस्त हो रहा है,,, रघु के लिए यह पहला मौका था जब वह अपनी मां की बुर को बेहद करीब से देख रहा था हालांकि इससे पहले भी अपनी मां को पेशाब करते हुए देख चुका था लेकिन उस समय उसकी बुर ऊसे ठीक तरह से नजर नहीं आई थी,,,,,।उत्तेजना के मारे बार-बार उसका गला सूख रहा था और वह अपने थुक से अपने गले को गिला कर रहा था,,,। रघु के मन में उसी तरह की हलचल थी अपनी मां की बुर को देखकर जिस तरह की हलचल उसकी बहन सालु के मन में थी उसके खड़े लंड को नंगा देखकर,,,,,,लेकिन सालु की तरह वह हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था सालु तो हिम्मत करके उसके लंड को अपने हाथ में लेकरउसे छूकर उसकी गर्माहट को अपने अंदर मैसेज करके उसे हिलाने तक का सुख प्राप्त कर चुकी थी लेकिन तेरे को इतनी हिम्मत दिखा पाने में असमर्थ साबित हो रहा था हालांकि उसका दिल जोरोंसे धड़क रहा था मन मचल रहा था अपनी मां की बुर को अपनी उंगलियों से अपनी हथेली से स्पर्श करने के लिए उसकी गर्माहट को अपने अंदर महसूस करने के लिए,,,,, रघु गहरी गहरी सांसे ले रहा था और यही स्थिति कजरी की भी थी अपने अंदर अजीब सी हलचल को महसूस करके वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी,,,, रघु हैरान था इस बात से कि उसकी मां की बुर से पानी की बूंदें टपक रही थी जिससे उसकी बुर के नीचे वाला हिस्सा गीला होता जा रहा था रघु को यह समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार उसकी मां नींद में होने के बावजूद भी उसकी बुर गीली क्यों हो रही है,,,, बुर से निकल रही मदन रस बुंद की शक्ल में मोती की तरह चमक रही थी,,,, जो कि बेहद कीमती और अनमोल थी,,,

अपनी मां की बुर से निकल रहे मदनरस को देखकर रघु का मन और ज्यादा तड़प उठा जिस तरह से वह हलवाई की बीवी रामू की मां और अपनी बड़ी बहन की बुर को अपने होठों से लगाकर अपनी जीभ से उसके मदन रस को चाट कर तृप्त हुआ था उसी तरह से वह अपनी मां की बुर को भी चाटना चाहता था,,,, लेकिन इतनी हिम्मत उसमें बिल्कुल भी नहीं थी तभी वह हिम्मत जुटाकर अपनी मां की पूर्व को अपने हाथों से अपनी उंगलियों से स्पर्श करने की सोच कर अपना हाथ धीरे-धीरे अपनी मां की दोनों टांगों के बीच बढ़ाने लगा लेकिन उसका हाथ बुरी तरह से कांप रहा था पूरा शरीर थरथर कांप रहा था,,, धीरे धीरे रघु कहा था अपनी मां की बुर के बेहद करीब पहुंच गया इतना करीब कि उसकी बुर और उसके हाथ के बीच केवल तीन चार अंगुल का ही फासला रह गया,, रघु की आंखें पूरी तरह से उत्तेजना से लाल हो चुकी थी सांस बड़ी तेजी से चल रही थी,,, रघु की नजर अपनी मां की ऊपर नीचे हो रही चूचियों पर भी बराबर टिकी हुई थी छाती के ऊपर से उसके साड़ी का पल्लू एक तरफ हो चुका था जिससे कजरी की बड़ी बड़ी चूची और उसके बीच की दरार रघू को साफ नजर आ रही थी,,। रघु को अपनी उंगलियों में कंपन साफ महसूस हो रही थी,,, रघु अपनी मां की बुर को उंगलियों से स्पर्श करने ही वाला था कि,, कजरी मदहोशी के आलम में ही कल्पना में सराबोर होकर,,, अपने हाथ को जरा सी हरकत दी की रघु एकदम से घबरा कर खड़ा हो गया और तुरंत,,, बिना रुके घर के बाहर निकल गया वह पीछे पलट कर देखा भी नहीं कि उसकी मां जाग गई है या नींद में अपना हाथ हीलाई थी,,,लेकिन जैसे ही रघु घर के बाहर निकलने लगा वैसे ही कजरी की आंख खुल गई और वह अपने बेटे रघु को घर से बाहर निकल कर जाते हुए देख ली,,, रघु को और अपनी स्थिति को देखते ही वह शर्म से पानी पानी हो गई उसे भी साफ पता चल रहा था किसकी दोनों टांगे फैली हुई थी और उसकी साड़ी जांघों तक चढ़ी हुई थी ,, जिससे दोनों टांगों के बीच की उसकी बुर साफ नजर आ रही थी,,, कजरी के तो होश उड़ गए उसे समझते देर नहीं लगी कि रघु ने उसे इस स्थिति में देख लिया,,, वो शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी वह नहीं चाहती थी कि उसका बेटा उसे इस हाल में देखें,,,, लेकिन जो नहीं होना था वह हो चुका था रघु अपनी आंखों से अपनी मां की रसीली कचोरी जैसी फूली हुई बुर को देख लिया था और अपनी मां की मद मस्त मोटी बुर को देखकर समझ गया था कि, उसकी मां की बुर हलवाई की बीवी रामू की मां और उसकी खुद की बड़ी बहन की बुर से कहीं ज्यादा खूबसूरत और रसीली थी,,,

कजरी के होश उड़े हुए थे उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसका बेटा उसे इस हाल में देखकर क्या सोच रहा होगा,,, वह एकदम से परेशान थी,,, कि तभी उसे अपने बेटे के खड़े लंड के बारे में यादआ गया जिसके बारे में कल्पना करके ही वह इतना मदहोश हो चुकी थी कि उसके बेटे के कमरे में आने की आहट भी ऊसे नहीं मिली,,, जो कुछ भी हुआ कुछ देर पहले उसे चिंतित किए जा रहा था लेकिन अब उसके होठों पर मुस्कुराहट आने लगी थी यह सोच कर कि उसके बेटे ने उसकी दोनों टांगों के बीच की छुपी हुई उसकी बुर को देख लिया होगा,,, और उसे देखने के बाद जरूर ऊतेजीत हो गया होगा,,,,,क्योंकि पहले भी वह अपने बेटे की प्यासी नजरों को भाग चुकी थी तभी तो उसे डांट फटकार लगाई थी जब वह उसे पेशाब करते हुए प्यासी नजरों से देखता हुआ पाई थी,,,उसे पक्का यकीन था कि आज जरूर उसके बेटे ने उसकी बुर को देखकर मस्त हो गया होगा पजामे में उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया होगा जो कि कुछ देर पहले गुसल खाने में अपनी पूरी औकात में एकदम नंगा था,,,,, यह सोचकर ही वह मस्त हुए जा रही थी,,,, ना जाने क्यों उसका दिल रघू के पास जाने को कर रहा था,,, लेकिन वह अपने मन पर काबू कर ले गई,,, क्योंकि अच्छी तरह से जानती थी कि इस समय कमरे से बाहर निकल कर रखो के पास जाना ठीक नहीं था क्योंकि उसका बेटा उसे गहरी नींद में सोया हुआ जानकर ही उसके पास आया था और अगर अभी वह बाहर चली गई तो उसके बेटे को शक हो जाएगा कि उसकी मां सो नहीं रही थी बल्कि सोने का नाटक कर रही थी जो कि वह नाटक नहीं बल्कि खुद अपने ही बेटे के मदमस्त खड़े लंड की कल्पना में पूरी तरह से मस्त होकर मदहोश हो चुकी थी,,,,,, कजरी फिर से अपनी आंखों को बंद करके रघु के ख्यालों में खो गई,,,,

दूसरी तरफ रघु एकदम उत्तेजित हो चुका था वह तो यह भी भूल चुका था कि वह क्या बताने के लिए घर पर आया था वह अपनी बहन को ढूंढता हुआ घर के पीछे गाय भैंस बकरी ओ को बांधने की जगह पर चला गया,,,, जहां पर उसकी बहन जानवरों को चारा पानी दे रही थी,,,,उसके बदन में पूरी तरह से वासना की गर्मी चढ़ चुकी थी उसे निकालना बेहद जरूरी था और इस समय सिर्फ उसकी बड़ी बहन ही ऊसकी गर्मी को शांत कर सकती थी,,,। रघु के पजामे में तंबू बना हुआ था,,,,अपनी मां की रसीली बुर को देखकर उसका लंड पूरी तरह से टनटनाकर खड़ा हो गया था,,,रघु अपने चारों तरफ नजर घुमाकर पूरी तसल्ली कर लिया कि कोई दूसरा वहां है तो नहीं और तसल्ली कर लेने के बाद अपनी बहन की तरफ आगे बढ़ा जोकि झुक झुक कर जानवरों को चारा दे रही थी और झुकने की वजह से उसकी मदमस्त बड़ी बड़ी गांड कुछ ज्यादा ही उभर कर बाहर को निकली हुई थी यह देख कर रघु के वासना का पारा और ज्यादा चढ गया और पीछे से जाकर अपनी बहन को अपनी बाहों में भर लिया,,,

आहहहहह,,,,,(अपनी गांड के बीचो बीच रघु के लंड की चुभन को महसूस करते हैं एकदम से चौक कर उछल पड़ी,,लेकिन रखो पूरी तरह से अपनी बहन को काबू करने में सक्षम था इसलिए वह तुरंत उसकी बाहों को पकड़कर अपनी तरफ दबोच लिया,,, जब सालु को पता चला कि उसे अपनी बाहों में भरने वाला उसका छोटा भाई है तो जाकर उसका मन शांत हुआ और वह थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,) पागल हो गया क्या माने अगर देख लिया तो,,,

मां नहीं देखेगी दीदी वह तो गहरी नींद में अपने कमरे में सो रही है,,,,(रघु अपनी बहन की गांड पर पजामे के ऊपर से अपने लंड को दबाता हुआ बोला)

आहहहह,,, छोडना चुभ रहा है,,,,,

क्या चुभ रहा है दीदी,,,,,(रघु अपनी बहन की दोनों बांहे पकड़ कर उसे अपने लंड से सटाए हुए बोला,,,)

छोड़ना रे तुझे मालूम है फिर भी तेरे शरीर में चुभने वाला अंग और क्या हो सकता है,,,,

मैं तुम्हारे मुंह से सुनना चाहता हूं दीदी,,,,

तेरा लंड,,,,(सालु एक पल की भी देर किए बिना फट से बोली,,)

आहहहह दीदी तुम्हारे मुंह से सुनने में कितना मजा आता है,,,(रघु सलवार के ऊपर से ही अपनी बहन को चोदना शुरू कर दिया अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया शालू के बदन में भी सुरूर चढने लगा था,,, वह चारों तरफ नजरें दौड़ा कर देख रही थी कि कहीं कोई वहां आ ना जाए उसे अपने भाई की हरकत बेहद रोमांचकारी लग रही थी उसे मजा आ रहा था पर अपने भाई के लंड को सलवार के ऊपर से अपनी गांड पर महसूस करते ही उसकी गुलाबी बुर पानी छोड़ना शुरू कर दी थी,,,)

तेरा तो आज दिन में ही खड़ा हो गया है रे,,,

क्या करूं तेरी तुम्हें देखता हूं तो खड़ा हो जाता है,,,

पहले भी ऐसे ही खड़ा होता था क्या,,,?

नहीं दीदी पहले तो नहीं होता था लेकिन जब से तुमने मेरे लिए अपनी दोनों टांगे खोली हो तब से तुम्हें देखते ही मेरा खड़ा हो जाता है,,,, बस इतना कर दो दीदी ,,,,,अपनी सलवार की डोरी खोल दो ताकि मैं अपने खड़े लंड को तुम्हारी बुर में डालकर तुम्हारी चुदाई कर सकूं,,,

पागल हो गया क्या यहां पर कोई देख लिया तो,,,,(शालू का भी मन करने लगा था इसलिए वह इधर उधर नजर घुमाकर कोई अच्छी सी जगह ढूंढ रही थी,,,)

कोई नहीं देखेगा दीदी मुझसे रहा नहीं जा रहा है बस अपनी सलवार खोल दो,,,(इतना कहते हुए रघु खुद अपने दोनों हाथ उसके सलवार के नाडे पर रखकर उसे खोलने की कोशिश करने लगा तो सालु ऊसे रोकते हुए बोली,,)

रुक रुक चल वहां चलते हैं,,,,(शालू छोटी सी घाश फुश की बनी झोपड़ी की तरफ इशारा करते हुए बोली,,, जिसमें भैंस बांधी जाती थी,,, रघु को भी वही जगह ठीक लगी,,,, और शालू रखो को लेकर एक छोटी सी झोपड़ी में घुस गई जिसके आगे लकड़ी का दरवाजा भी बना हुआ था उसे बंद करके दोनों झोपड़ी में घुस गए,,,,एक तरफ भेंस बंधी हुई थी और दूसरी तरफ सूखी हुई खास का ढेर पड़ा हुआ था,,, शालू घास के ढेर के पास खड़ी होकर अपनी सलवार के नाड़े को खोलने लगी,,,, रघु अपने पजामे को उतार करअपने लंड को पकड़ कर ही जा रहा था यह देखकर शालू का दिल जोर से धड़क रहा था वह जल्दी से अपनी सलवार उतार कर एक तरफ रख दी और सूखी हुई घास के ढेर पर पीठ के बल लेटते हुए अपनी दोनों टांगों को फैला दी,,,। वह भी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी वह अपनी हथेली से अपनी गुलाबी बुर को रगडते हुए बोली,,,।

सससहहहहहह७ ,,,,,, आजा मेरे प्यारे भैया अपनी दीदी की बुर में अपना लंड डाल दे,,,,,(शालू एकदम से मदहोश होते हुए बोली और रघु अपनी बहन की मादक अदा देख अगर हमसे उतावला हो गया अपनी बहन की बुर में लंड डालने के लिए,,, और अपने लंड को हाथ में पकड़ कर हिलाते हुए अपनी बहन के दोनों टांगों के बीच में आ गया और पहले झटके में ही अपना पूरा लंड अपनी बहन की बुर की गहराई में उतारता हुआ बोला,,,)

ले मेरी प्यारी दीदी अपने भैया का लंड,,(फिर क्या था दोनों एकदम मस्त हो गए कुछ ही देर में रघू की कमर पड़ी रफ्तार से ऊपर नीचे होने लगी,,, वह बड़ी तेजी से अपनी बहन को चोद रहा था और शालू एकदम मस्त हुए जा रही थी,,, उसके मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकल रही थी जिसको सुनकर उस झोपड़ी में बंधी भैंस भी उन दोनों की तरफ ही देख रही थी,,,, रघू के ऊपर तो वासना का भूत सवार था अपनी मां की बुर जो उसने देख लिया था इसलिए वह अपनी बहन को आज कुछ ज्यादा ही बेरहमी से चोद रहा था जिसका एहसास शालू को भी अच्छी तरह से हो रहा था लेकिन उसे तो और ज्यादा मजा आ रहा था क्योंकि औरतों को मजा तभी आता है जब मर्द बेरहम हो कर उसकी चुदाई करता है उसकी ओखली में मुसल डालकर जोर-जोर से कुटता है,, तकरीबन 15:20 मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद रघु अपनी बहन को अपनी बाहों में कस लिया और जोर जोर से अपना लंड उसकी बुर में डालना शुरू कर दिया,,, शालू भी मस्त होकर अपने छोटे भाई को अपनी बाहों में ले ली,,, झोपड़ी में बंधी भैंस बड़ी उत्सुकता से उन दोनों की क्रियाकलाप को देख रही थी,,, आखिरकार दोनों की जवानी का गरम लावा फूट पड़ा दोनों एक दूसरे को अपने काम रस में भिगोने लगे,,,, अपना पूरा गरम लावा अपनी बहन की बुर में डालने के बाद रघु हांफता हुआ उसके बगल में घास के ढेर पर ही ढेर हो गया,,, थोड़ी देर में अपनी सांसो को दुरुस्त करने के बाद वह अपनी बहन से बोला,,,।

दीदी मुझे दो-तीन दिन के लिए बाहर जाना होगा,,,।

बाहर कहां जाना होगा मैं कुछ समझी नहीं,,,,(शालू हैरान होते हुए बोली)

वह अपने प्रताप सिंह जी है ना जमीदार,,, उनकी बीवी को लेकर उनके मायके जाना है,,,,

लेकिन तू कैसे,,, जाएगा,,,,

तांगा लेकर और कैसे,,,,,,

तांगा लेकर मैं अभी भी नहीं समझ पा रही हूं तु क्या कह रहा है,,,(इतना कहते हुए शालू खड़ी हुई और अपनी सरकार को अपनी दोनों टांगों में बारी-बारी से डालकर उसे पहनने लगी,,,)

प्रताप सिंह जी की बीवी अपने मायके जाना चाहती हैं और उन्हें लेकर मुझे जाना होगा,,,,(रघु भी खड़ा होकर अपना पजामा पहने लगा)

लेकिन तू कैसे जाएगा उनके साथ,,,

तांगा लेकर और कैसे,,,

(शालू एकदम हैरान थी वह रघु की बात को समझ नहीं पा रही थी इसलिए वह फिर से बोली,,,)

तो दूसरा कोई लेकर चला जाएगा तु क्यों जाएगा,,(चालू अपने सलवार के नाड़े को बांधते हुए बोली,,,)

दीदी तांगा तो मैं ही चलाऊंगा ना,,,,।

क्या तू तांगा चलाएगा तुझे चलाना आता है,,,

तभी तो प्रताप सिंह जी ने मुझे बुलाया है वरना मुझे क्यों बुलाते,,,,

(अपने भाई की यह बात सुनकर शालू खुश थी लेकिन परेशान की थी कि दो-तीन दिन के लिए वह बाहर जा रहा है तब तक उसका क्या होगा,,,)

लेकिन मैं कैसे रहूंगी तेरे बिना अब तो मेरी आदत पड़ गई है जब तक तेरा लंड अपनी बुर में नहीं लेती तब तक तो मुझे नींद भी नहीं आती,,,

मैं भी तो परेशान हूं लेकिन क्या करूं जाना पड़ेगा और वैसे प्रताप सिंह जी मुझे तांगा चलाने के एवज में पैसे भी देंगे,,, देखो दीदी मैं तो भूल ही गया समय बहुत गुजर गया हूं मुझे तो तुरंत जाना था मैं अभी जा रहा हूं तुम मां को सब बात बता देना मैं जल्द ही आ जाऊंगा,,,,(इतना कहने के साथ ही रघु चला गया,, और शालू उसे जाता हुआ देखती रह गई,,)
 
पूरी तैयारी हो चुकी थी,,,रघु का मन तो जाने को बिल्कुल भी नहीं हो रहा था,,,संभोग का अद्भुत सुख जो ऊसे रोज मिल रहा था और वह भी अपनी ही बड़ी जवान बहन से,,,भला ऐसा सुख छोड़कर जाने की किस की इच्छा करती लेकिन क्या करें मजबूर था प्रताप सिंह की बात जो काट नहीं सकता था,,,। प्रताप सिंह अपनी बीवी को तांगे में बैठने में मदद करके उन्हें ठीक से तांगे में बैठा दिया,,, और रघु को आराम से ले जाने की हिदायत देकर रुखसत कर दिया,,,। रघु बेमन से घोड़े को हांकते हुए तांगा आगे बढ़ा दिया,,

थोड़ी ही देर में तांगा गांव से बाहर निकल गया कच्ची कच्ची पगडंडियों से होती हुई उबड़ खाबड़ पथरीले रास्ते से गुजरते हुए तांगा आगे बढ़ता चला जा रहा था चारों तरफ हरियाली ही हरियाली थी मौसम बड़ा खुशनुमा था रघु का मन ऐसे में और ज्यादा मचल रहा था उसे बार-बार अपनी बहन याद आ रही थी और खास करके आज सुबह में ही जो अपनी मां की बुर के दर्शन किए थे उस दृश्य को याद करके वह पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा था,,,अपनी मां की बुर की फूली हुई गुलाबी पत्तियों को याद करके उसके तन बदन में उत्तेजना की आग सुलग रही थी,,,।वह मैंने यही सोच रहा था कि उसकी मां की पूरी जितनी भी पर देखा था या उन्हें चोद कर उसका सुख लिया था उससे कहीं गुना अत्यधिक लाजवाब और हसीन बुर थी उसकी मां की,,,।

उसी के ख्यालों में खोया हुआ रघू तांगा धीरे-धीरे आगे बढ़ा रहा था,,, प्रताप सिंह की बीवी अपना घूंघट हटा कर चारों तरफ फैली हसी वादियो में खोई हुई थी बहुत कम मौका मिलताथा उसे घर से बाहर निकलने का,,, इसलिए उसे यह पेड़ पौधे खेत खलियान ठंडी हवाएं बहुत अच्छी लग रही थी,,,। दूर दूर तक कोई नजर नहीं आ रहा था और आता भी कैसे गांव में किसी को इतना काम थोड़ी होता है कि काम से बाहर रोज निकलकर घूमने जाए,, तभी प्रताप सिंह की बीवी हसीन वादियों को देखते हुए खुश होते हुए बोली,,,।

कितना खूबसूरत नजारा है,,,, यह हसीन वादियां चारों तरफ हरियाली ही हरियाली और दूर-दूर बड़े बड़े पहाड़ कितना खूबसूरत नजर आ रहे हैं,,,,।

(रघु के कानों में प्रताप सिंह की बीवी की आवाज पडते ही रघु के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी एकदम मिश्री सी आवाज थी प्रताप सिंह की बीवी की और आवाज को सुनकर रघु एकदम से चौक दिया था क्योंकि आवाज कोई ज्यादा उम्र की औरत की नहीं बल्कि कम उम्र की औरत की थी,,,, उसकी आवाज रघू के कानों में शहद घोल रहा था,,,। उससे रहा नहीं गया और वह तुरंत पलट कर पीछे तांगे में देखा तो देखता ही रह गया,,, उसके सोचने के मुताबिक उससे उल्टा नजर आ रहा था स्वच्छता प्रताप सिंह जी की बीवी होगी तो कोई उम्रदराज औरत होगी लेकिन तांगे में तो चांद का टुकड़ा बैठा हुआ था,,, बेहद खूबसूरत बेहद हसीन नजर आ रही थी नजर क्या आ रही थी वह खूबसूरत थी ही उम्र भी कुछ 32 या 35 के करीब होगी,,, प्रताप सिंह की बीवी का ध्यान रखो पर बिल्कुल भी नहीं था वह तो अपने चारों तरफ फैली हुई हरियाली को देख रही थी,,, यह देख कर रघु मन ही मन एकदम खुश हो गया और खुश होता हुआ बोला,,,।

लगता है मालकिन बहुत दिनों बाद घर से बाहर निकल रही हैं,,,।

हां तुम ठीक कह रहे हो,,,, वैसे नाम क्या है तुम्हारा,,,,

रघु,,,, रघु नाम है मेरा,,,,

रघु,,,,, बड़ा प्यारा नाम है,,,,(वह नजरों को उसी तरह से चारों तरफ घुमाते हुए बोली,,,,)

वैसे रघू जब तुम्हें बुलाने के लिए आदमी गए हुए थे तो मुझे ऐसा ही लगा था कि कोई उम्र दराज आदमी होगा जो कि तांगा चलाता होगा लेकिन तुम्हें देखकर तो मैं एक दम हेरान हो गई,,,

ऐसा क्यों मालकिन,,,,(रघु घोड़े को हांकते हुए बोला)

अरे मैं तो यही सोच रही थी कि मुझे मेरे मायके ले जाने वाला कोई उम्र दराज आदमी होगा बूढ़ा सा बुजुर्ग लेकिन तुम तो एकदम जवान हो,,,, यह देख कर मुझे अच्छा लगा कि चलो कोई जवान लड़का तो साथ में है जिससे मैं तो बातें कर सकती हूं,,,,।

दो बातें क्यों मालकिन ढेर सारी बातें करो,,,

(जवाब में प्रताप सिंह की बीवी हंस दी,,, और हंसते हुए बोली)

तुम बातें बहुत अच्छी करते हो,, रघु,,,,

(उसके मुंह से अपना नाम सुनकर रघू के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी,,,, रघु को अब यह सफर अच्छा लगने लगा था धीरे धीरे प्रताप सिंह की बीवी के साथ बातें करते हुए उसे सब कुछ अच्छा लगने लगा था और अब ना तो उसे अपनी बहन याद आ रही थी और ना अपनी मां की दोनों टांगों के बीच की खूबसूरत जगह जिसके अंदर कुछ घंटे पहले वह समा जाने के लिए आतुर हुए जा रहा था,,,,)

एक बात कहूं मालकिन बुरा तो नहीं मानोगी,,,।

नहीं,,,,,, मै भला क्यों बुरा मानने लगी,,।

आपसे मिलने से पहले मुझे कुछ और लग रहा था,,,,।

(इतना कह कर रघु खामोश हो गया चौकी उसके मन में डर था कि आकर मालकिन बुरा मान गई तो लेकिन उसे फिर खामोश देखकर वह बोली।)

क्या लग रहा था तुम्हें,,,,,?

मुझे लग रहा था कि जिसे तांगे में बैठा कर ले जाना है और कोई उम्र वाली औरत होगी,,,‌‌

(वह रघु की बातें सुन कर मुस्कुरा रही थी क्योंकि वह जानती थी कि जो कुछ भी उसके मन में चल रहा है वह किसी के भी मन में शंका पैदा कर सकता था,,, इसलिए रघु की बात सुनते ही वह बोली,,,)

अभी क्या लग रहा है,,,,।

सच कहूं तो आपको देखकर मेरे तो होश उड़ गए,,,

भला ऐसा क्यों,,,,?

सच कहूं मालकीन,,,(रघु घोड़े को हांकते हुए बोला,,)

नहीं तो क्या झूठ कहोगे,,,

नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है मुझे आपसे डर लगता है,,,,

डर किस बात का,,,,

आप इतने बड़े जमीदार की बीवी है कहीं बुरा मान गई तो मेरी तो हड्डी पसली एक करवा देंगी,,,

(रघु की बात सुनते ही वह खिल खिलाकर जोर से हंस पड़ी रघु पीछे मुड़कर उसको मुस्कुराता हुआ देख रहा था,,, प्रताप सिंह की बीवी मुस्कुराते हुए बड़ी खूबसूरत लग रही थी और रघु उसकी खूबसूरती में पूरी तरह से खोता चला जा रहा था,,, औरतों की संगत पाकर रघू इतना तो समझ ही गया था कि औरतों का दिल कैसे जीता जाता है,,, और वही तिकड़म वह प्रताप सिंह की बीवी पर आजमा रहा था,,,क्योंकि जिस तरह का उसके साथ हो रहा था किस्मत पूरी तरह से उस पर मेहरबान थी एक के बाद एक खूबसूरत औरतें उसकी झोली में आकर गिर जा रही थी,, जिस किसी की भी चाहता था वह उसकी दोनों टांगें खोलकर ले ले रहा था वह चाहे हलवाई की बीवी हो या रामू की मां या फिर अपनी खुद की बड़ी बहन हो,,,, आकर्षण तो उसे अपनी मां के ऊपर भी हो रहा था लेकिन अभी ऐसा कोई मौका हाथ नहीं रखा था कि वह अपनी मां की दोनों टांगों को अपने हाथों से खेोल सके,,,, लेकिन ना जाने क्यों उसे पूरा विश्वास था कि प्रताप सिंह की बीवी को चोदने का सुख ऊसे जरूर प्राप्त होगा,,,, और अपनी तरफ से वह पूरी कोशिश कर रहा था,,, प्रताप सिंह की बीवी को हंसता हुआ देखकर वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

आप हंस क्यों रही हो,,,,

तुम बात ही कुछ ऐसी करते हो रघू कि मुझे हंसी आ गई,,,

अब लो मैं ऐसा क्या कह दिया कि जिस पर आप इतनी जोर जोर से हंसने लगी,,, लेकिन एक बात कहूं मालकिन आप हंसते हुए बहुत खूबसूरत लगती हो,,,,

(रघु की यह बात सुनते ही पल भर में ही प्रताप सिंह की बीवी के चेहरे से हंसी गायब हो गई एकदम सन्न रह गई क्योंकि रघु उसकी तारीफ कर रहा था उसकी खूबसूरती की तारीफ कर रहा था यह सुनकर उसको बेहद अच्छा लग रहा था लेकिन इस जमीदार की बीवी होने के नाते वह अजीब सा महसूस कर रही थी,,,, वह अपने मन में सोच रही थी कि वह भी इतनी खूबसूरत शब्दों के लायक थी लेकिन प्रताप सिंह की बीवी बनने के बाद उसके सारे सपने चकनाचूर हो गए एक तो सबसे पहले अपने से बेहद बड़े उम्र वाले आदमी से उसकी शादी हो गई मतलब की प्रताप सिंह से जो कि वह कभी नहीं चाहती थी एक औरत के जो अरमान होते हैं अपनी शादी को लेकर वैसे ही अरमान उसके भी थे लेकिन मां बाप की गरीबी और प्रताप सिंह के हट के कारण उसे अपने सपनों का गला बैठना पड़ा और ना चाहते हुए भी अपने मां-बाप की खुशी के खातिर प्रताप सिंह की बीवी बन कर उसके घर आना पड़ा जो कि उसे कभी मंजूर नहीं था,,,क्योंकि यह बात वह भी अच्छी तरह से जानती थी कि प्रताप सिंह की वह पहली नहीं बल्कि दूसरी बीवी बन कर घर पर आई थी पहली बीवी का देहांत हो चुका था जिससे उसे एक संतान थी जिसका विवाह लाला की लड़की के साथ हुआ था,,,,,, तभी जैसे किसी ने उसकी तंद्रा भंग की हो उसे नींद से जगाया हो इस तरह से रघु उसे होश में लाते हुए बोला,,,)

क्या हुआ मालकिन आप बुरा मान गई क्या इसीलिए मैं कुछ भी नहीं कह रहा था,,,

नहीं नहीं रघु मैं बुरा नहीं मानी हूं मुझे तुम्हारी किसी बात का बुरा नहीं लग रहा है,,,

तो आप इस तरह से खामोश क्यों हो गई हंसते-हंसते रुक क्यों गई,,,,

कुछ याद आ गया था,,,,

क्या याद आ गया था मालकिन,,,,

अरे कुछ नहीं यह बहुत लंबी कहानी है हां तो तू क्या कह रहा था,,,,? (प्रताप सिंह की बीवी मुख्य मुद्दे पर आते हुए बोली,, रघु भी अपनी बात कहने के लिए उतावला था बस थोड़ा सा नानू को कहकर प्रताप सिंह की बीवी के मन में उमड़ रहे भावनाओं को भांपना चाहता था,,,। और उसकी जिज्ञासा को देखकर रघू की भी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी अपने मन की बात कहने के लिए,,, इसलिए वह बोला,,,।)

अब देखो मार्केट बुरा मत मानना मेरे मन में जो कुछ भी था वह में बता रहा हूं,,,।

हां तो बताओ गोल-गोल क्यों घुमा रहे हो,,,(इतना कहने के साथ ही प्रताप सिंह की बीवी मोहक अदा से चारों तरफ नजरें घुमा कर खूबसूरत नजारे का लुफ्त उठाने लगी)

गोल गोल कहां घुमा रहा हूं वहां के मैं तो बस यह कह रहा हूं कि आपको देख कर मुझे यकीन ही नहीं होता कि मालिक की बीवी है,,,

(रघु की यह बात सुनकर फिर से उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी लेकिन वहां अपनी मुस्कुराहट को काबू में करके जानबूझकर रघु की तरफ गुस्से से देखने लगी क्योंकि अपनी बातें कहते हुए उसकी तरफ ही देख रहा था रघु प्रताप सिंह की बीवी को गुस्से में देख कर एकदम से घबरा गया और वह माफी मांगते हुए बोला,,,)

मैं माफी चाहता हूं मैं लेकिन मैं आपसे पहले भी कह रहा था कि बुरा मत मानना,,, आपका गुस्सा देखकर मुझे डर लग रहा है,,,,।

तुम्हें ऐसा क्यों लगता है कि मैं मालिक की बीवी नहीं लगती,,,

उम्र से मालकिन,,,, मालिक तो उम्र दराज लेकिन आप तो एकदम जवान है,,, मेरा मतलब है कि एकदम खूबसूरत,,,,

चलो मैं इतनी भी खूबसूरत नहीं हूं,,, जो मेरी इस तरह से तारीफ कर रहे हो,,,,

नहीं नहीं मैं सच कह रहा हूं मालकिन,,, आपको देखकर तो आईना भी शर्मा जाए,,,

(रघु की बातें उसके सीधे दिल में उतर रही थी उसे बेहद आनंद की प्राप्ति करा रही थी रघु की बातें जिंदगी में पहली बार किसी ने उसकी खूबसूरती की तारीफ किया था हालांकि वह बला की खूबसूरत थी यह बात वही अच्छी तरह से जानती थी लेकिन किस्मत के आगे वह एकदम मजबूर हो चुकी थी बस सारा दिन घर में ही अपनी जिंदगी का हर एक खुशनुमा पल जो कि अब उसके लिए किसी सजा की तरह हो चुका था वह गुजार रही थी लेकिन आज खुली हवा में सांस लेकर उसे आजादी का अनुभव हो रहा था उसे लगने लगा था कि असली जिंदगी इसी तरह की होनी चाहिए ना जाने क्यों रखो की तरफ उसका आकर्षण बढ़ने लगा था उसकी चिकनी चुपड़ी बातें बेहद मोहक लग रही थी,,,)

क्या तुम्हें में इतनी ज्यादा खूबसूरत लग रही हो,,,।

मुझे क्या मालूम तुम तो इस पृथ्वी के हर एक इंसान को खूबसूरत लगोगी पंछी को जानवर को पेड़ पौधों को इस हरे-भरे जंगल को ठंडी हवाओं को इस खुशनुमा मौसम को,, वह पागल ही होगा मालकिन जिसे आप खूबसूरत नहीं लगोगी,,,,

बाप रे तुम तो एकदम कवि की तरह बातें करते हो,,,

( रघु की बातें प्रताप सिंह की बीवी को बहुत अच्छी लग रही थी उसने आज तक इस तरह की मीठी बातें करने वाला लड़का नहीं देखी थी उसे भी रघु से बातें करने में मजा आ रहा था धीरे-धीरे सफर कट रहा था सूरज सर पर पहुंच चुका था,,, धूप एकदम तिलमिला रही थी,,,, तभी रघु को सामने नदी बहती हुई नजर आई जिसमें पानी तो बहुत कम था लेकिन उस पार जाने के लिए नदी में से ही जाना था,,, एक पल के लिए रघू घबरा गया उसे समझ में नहीं आ रहा था कि नदी पार कैसे किया जाएगा क्योंकि आज तक वह इस जगह पर कभी नहीं आया था,,,।

क्रमशः,,,,,
 
रघु हैरान था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार नदी पार होगी कैसे वह तांगे को वही रोक कर तांगे से नीचे उतर गया,,, और अपनी कमर पर दोनों हाथ रख कर विचार मग्न हो गया,,,,वह अपने मन में यही सोच रहा था कि यह तो बड़ी मुसीबत आ गई है इस बारे में तो प्रताप सिंह जी ने कुछ भी नहीं बताया था कि रास्ते में नदी पड़ेगी और वैसे भी रघु के लिए यह रास्ता यह गांव यह नदी बिल्कुल अनजान थी वह पहली बार अपने गांव से बाहर निकला था,,,। वह नदी के पानी को उसकी लंबाई उसकी चौड़ाई और उसकी गहराई को अपने मन में ही नाप रहा था लेकिन कहते हैं ना कि नदी में उतरे बिना उसकी गहराई का पता नहीं चलता वैसे ही मन में लाख विचार आने पर भी पानी की गहराई का सही अंदाजा अपने मन में नहीं लगा पा रहा था,,, प्रताप सिंह की बीवी तांगे में बैठे-बैठे रघु की हरकत को देख रही थी उसे समझ में आ गया था कि वह नदी देखकर परेशान हो चुका है लेकिन वह देखना चाहती थी कि वह करता क्या है,,,। धीरे-धीरे रघु के प्रति आकर्षित होने लगी थी रघु बेहद जवान हट्टा कट्टा और कसरती बदन का लड़का था,,,,,, उसकी बातें उसे अच्छी लगने लगी थी उसका मासूम सा मुखड़ा उसे प्यारा लगने लगा था,,, रघु उसके बेटे की उम्र का था लेकिन ना जाने क्यों रघू के प्रति उसके मन में बेटे वाली चाहत महसूस नहीं हो रही थी इस सफर के दौरान वह रघू को अपना हमदर्द समझने लगी थी,,, जिससे वह अपने मन की बात कह सकती थी,,, वह रघु को बड़े गौर से देख रही थी,,,, जब उसे इस बात का एहसास हो गया कि रघू कुछ समझ नहीं पा रहा है तो वह खुद,,, तांगे पर से नीचे उतर गई,,, और धीरे धीरे चलते हुए रघु के बेहद करीब पहुंच गई,,, जैसे ही रघु की नजर प्रताप सिंह की बीवी पर पड़ी तो वह उसकी खूबसूरती से एकदम हैरान हो गया था,,, पहले तो वह प्रताप सिंह की बीवी को तांगे में बैठी हुई ही देखा था,,, लेकिन उसे उसके आदम कद वजूद को देखकर रघु पूरी तरह से उसके ऊपर मोहित हो गया। साड़ी के ऊपर से ही उसकी मदमस्त गोलाईया उसे साफ नजर आ रही थी,,,। जो कि उसकी खूबसूरती में चार चांद लगा रहा था एक पल के लिए प्रताप सिंह की बीवी रघु की नजरों को अपने गोल गोल गोलाईयों पर धंसती हुई महसूस करके एकदम से गनगना गई,,, और मैं तुरंत अपने एक हाथ से अपनी चुचियों के नीचे वाले साड़ी के पल्लू को पकड़कर मुट्ठी में भींच ली,,,, उसके इस हरकत पर नजर पड़ते ही रघु को इस बात का एहसास हुआ कि वह अपनी नजरों को उसकी चूचियों पर गड़ाए हुए है इसलिए घबराकर हडबडाते हुए बोला,,,।

अअअअअ,,,आप,,,, तांगे से उतरकर यहां क्यों आई है,,। जाईए आप बैठ जाईए,,,,

तुम परेशान नजर आ रहे थे इसलिए मैं तांगे से उतरकर तुम्हारे पास आई हूं,,,, अच्छी तरह से समझ रही हूं कि तुम्हें समझ में नहीं आ रहा है कि नदी पार कैसे करेंगे,,,।

आप सच कह रही हैं मालकिन,,,,(इतना कहते हुए रघु नीचे झुक कर कंकड़ उठाया और उसे जोर से नदी के पानी में फेंक दिया यह उसका गुस्सा दिखाने का तरीका था जो कि वह नदी पर दिखा रहा था रघु की परेशानी को प्रताप सिंह की बीवी अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए मुस्कुराते हुए बोली,,,।)

लगता है रघु तुम यहां पहली बार आए हो,,,,।

आप ठीक कह रही है मालकिन,, मैं आज पहली बार अपने गांव से बाहर निकला हूं इसलिए किसी बात का किसी स्थान का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं है,,,

मतलब कि बिल्कुल अनजान तांगे वाले हो,,,,(इतना कहकर वह खिलखिला कर हंसने लगी उसकी हंसी देखकर रघु के होंठों पर मुस्कुराहट आ गई,,, और वह बोला।)

आप हंसते हुए कितनी खूबसूरत लगती हैं,,,।

अब एक ही बात कितनी बार कहोगे रघू,,,,(वह शरमाते हुए बोली)

जितनी बार आप हसेंगी,,,,

मैं तो सारा दिन हंसते रहूंगी तो क्या तुम इसी तरह से मेरी तारीफ करते रहोगे,,,।

जी हां मालकिन मैं आपकी तारीफ करता रहूंगा सारा दिन क्या सारी जिंदगी क्योंकि आप सच में हंसते हुए बहुत खूबसूरत लगती हो,,,,

(रघु की बात सुनकर वह फिर से खिलखिला कर हंसने लगी,,, रघू की बातें उसे बहुत अच्छी लग रही थी,,,, और वह हंसते-हंसते एकटक रघु के मासूम चेहरे को देखने लगी,,, और उसकी आंखों में आंखें डाल कर देखते हुए बोली,,,)

तुम बहुत अच्छे हो रघू,,, एकदम मासूम एकदम निश्चल जिसके मन में बिल्कुल भी कपट नहीं है,,,, सच कहूं तो तुम मुझे अच्छे लगने लगे हो,,,,,(वह भावना मैं बहकर बोलने को तो बोल गई लेकिन अपने कहे कहे बातों का मतलब समझते ही वह शर्मा कर एकदम से बात को बदलते हुए बोली,,)

अच्छा रघु मैं तुम्हें बताती हूं नदी पार करने का अच्छा और बहुत ही सरल रास्ता,,,(इतना कहकर वह दो चार कदम आगे चलकर रुक गई और अपने हाथों की उंगली का इशारा नदी की तरफ करके बोलने लगी रघु उसके पीछे खड़ा था तेज हवा चल रही थी जिसकी वजह से उसकी साड़ी एकदम से लगाकर उसके नितंबों से चिपक जा रही थी पहली बार रघु की नजर उसकी गोलाकार और घेरावदार नितंबों पर पड़ी,,, और सुबह प्रताप सिंह की बीवी की चूतड़ों को देखता ही रहेगा,,, एकदम गोलाकार एकदम सटीक ऐसा लग रहा था कि जैसे भगवान ने अपने हाथों से उसके नितंबों को आकार दिए हो,,, एक औरत को खूबसूरत बनाने में उसके नितंबों का बहुत ही बड़ा योगदान होता है और इस समय प्रताप सिंह की बीवी के नितंब उसकी खूबसूरती को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे थे,,, रघु के मुंह में पानी आ गया था प्रताप सिंह की बीवी की गांड को देखकर,,,,,, वह उसके नितंबों को जी भर कर देख लेना चाहता था तभी प्रताप सिंह की बीपी पीछे की तरफ नजर करके रघू को अपने पास बुलाने के लिए जैसे ही अपनी नजर पीछे घूमाई तो रखो कि नजर को अपने नितंबों के नीचे के घेराव पर टिकी हुई देखकर एकदम से सन्न रह गई,,,,रघु की नजर को अपनी गांड के ऊपर महसूस करते ही उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी,,, लेकिन फिर भी वह अपने इस हलचल को अपने चेहरे पर नहीं आने दी और बड़े ही स्वाभाविक और औपचारिक ढंग से,, रघु को अपने पास बुलाते हुए बोली,,,।

इधर आओ रघु मैं तुम्हें बताती हूं,,,,

(उसकी आवाज कानों में पडते ही रघु कि जैसे संतरा टूटी हो और वह तुरंत लगभग भागते हुए उसके करीब पहुंच गया,, और हडबडाते हुए बोला,,,)

जजजज,,जी ,,,, मालकीन,,,,

देखो रघु तुम पहली बार आए हो लेकिन मैं यहां बहुत बार आ चुकी हूं मुझे अच्छी तरह से मालूम है कि तांगा कौन सी जगह से बड़े आराम से गुजर जाता है,,,, अगर हम यहां से सामने से जाएंगे तो बहुत लंबा जाना होगा और पानी भी गहरा मिलेगा जिसमें से तांगा आसानी से नहीं निकल पाएगा,,,।

तो क्या करना होगा मालकिन,,,,

अरे यही तो बता रही हूं,,,, वह जगह देख रहे हो,,,(बाएं हाथ को उठाकर उंगली से इशारा करते हुए वह थोड़ी दूर की जगह दिखाने लगी और ऐसा करने से रघु को उसके ब्लाउज के आकार का सही नाम पता चल रहा था क्योंकि वह उसके बाएं खड़ा था जैसे ही वह हाथ उठा करउंगली से इशारा करने लगी वैसे ही रघू की नजर उसके ब्लाउज पर गई जो कि बेहद कसी हुई थी और काफी बड़ी थी,,, कसी हुई ब्लाउज में कैद उसकी चूचियों को देख कर उसे उसके आकार का अंदाजा लग गया था,,,, पर उसके सही आकार का पता चलते ही रघु के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,,, तभी प्रताप सिंह की बीवी की आवाज उसके कानों में पड़ी,,,)

अगर रघु हम वहां से नदी पार करेंगे तो बड़े आराम से और कम पानी से तांगा गुजर जाएगा और हम आराम से उस पार पहुंच जाएंगे,,,,

(उसकी बात सुनते ही रघु खुश होता हुआ बोला,,,)

क्या बात है मालकिन,,, आप तो हमारा दिशा-निर्देश कर दी,,,, अब आप जल्दी से चलिए और तांगे पर बैठ जाईए,,,

(इतना कहकर रघु वहीं खड़ा होकर हाथ से इशारा करके उसे आगे बढ़ने के लिए बोला तो वह मुस्कुरा कर धीरे से अपने कदम आगे बढ़ा दी उसके गोरे गोरे पैर देखकर रघु के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,, वह धीरे-धीरे बड़े संभाल कर अपने कदम रख रही थी,,,नदी का किनारा होने से वहां बड़े-बड़े पत्थर पड़े हुए थे जिस पर से वह इधर-उधर बड़े संभाल कर पर रखते हुए आगे बढ़ रही थी और उसकी हर एक चाल हर एक कदम के साथ-साथ उसकी गोल गोल गांड मैं बेहतरीन लचक आ रही थी जिसे देखकर रघु अपनी आंखें सेंक रहा था,,, बेहद कसा हुआ बदन होने के साथ-साथ उसने अपनी साड़ी को कसके अपनी कमर से बात रखी थी जिसकी वजह से उसके नितंबों की रूपरेखा बेहद सटीक नजर आ रही थी,,, उसकी हर एक चाल रघु के दिल पर छुरियां चला रही थी,,। देखते ही देखते वह तांगे के पास पहुंच गई,,, और तांगे पर चढ़कर बैठने के लिए अपना एक पैर उठाकर लकड़ी पर रखी तो उसका पिछवाड़ा कुछ ज्यादा ही उभर कर बाहर नजर आने लगा यह देख कर रघु के पजामे में हरकत होने लगी मन तो उसका कर रहा था कि तांगे पर चढ़ते समय ही उसको पीछे से पकड़ कर उसकी साड़ी को कमर तक उठाकर उसकी गुलाबी बुर के अंदर अपना मोटा लंड डालकर उसकी चुदाई कर दे लेकिन ऐसा करना रघु के लिए उचित नहीं था,,, छोटू के तन बदन में उत्तेजना की गर्मी फैलाकर वह तांगे पर आराम से बैठ गई थी,,, रघु भी अपना मन मसोस कर तांगे पर बैठ गया और घोड़े को हांक दिया,, घोड़ा धीरे-धीरे अपनी दिशा में आगे बढ़ने लगा प्रताप सिंह की बीवी के तन बदन में भी हलचल होना शुरू हो गई थी क्योंकि वह रघु की नजरों को थोड़ा बहुत समझ में लगी थी जो कि उसके ही बदन के उन अंगों पर घूम रहा था जिसे देखकर अक्सर मर्द अपने होशो हवास खो देते हैं और औरतों का वही अंग ऊनकी उत्तेजना का केंद्र बिंदु भी रहता है,,,,

थोड़ी ही देर में रघु का तांगा उस जगह पर आकर खड़ा हो गया था जिस जगह का निर्देश वह दूर से खड़ी होकर कर रही थी रघु पहली बार नदी पार करने जा रहा था मन में थोड़ा डर भी था पैसा नहीं था कि उसे तैरना नहीं आता था उसे करना भी आता था लेकिन उसके मन में यह डर था कि तांगा को वह सही सलामत नदी के उस पार ले जा पाएगा कि नहीं ,,,सारा दामोदार उसकी सूझबूझ और घोड़े के दम पर था,,, प्रताप सिंह की बीवी बड़े आराम से आने पर बैठी हुई थी दूर दूर तक कोई नजर नहीं आ रहा था एकदम वीरान जगह थी,,, हवा बड़ी तेज चल रही थी,,,। नदी के पानी को अच्छी तरह से भापकर रघु घोड़े को पानी में हांक दिया,,, घोड़ा अपने पैर आगे बढ़ाकर पानी में उतरने लगा,,,, गर्मी का समय था इसलिए ठंडे पानी में पैर पडते ही घोड़े को राहत महसूस होने लगी,,, घोड़ा धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा,,,

निकल तो जाएगा ना मालकिन,,,

बिल्कुल रघु आराम से निकल जाएगा,,, मैं पहले भी इधर से आई गई हूं इसलिए मुझे मालूम है,,,,

कहीं बीच में पानी तो ज्यादा नहीं होगा,,,

नहीं नहीं बिल्कुल नहीं अगर होगा भी तो घुटनों तक होगा इससे ज्यादा नहीं है,,,

तो ठीक है मालकिन,,,, वैसे मालकिन यह जगह बेहद खूबसूरत है,,,। मुझे तो यह जगह बेहद खूबसूरत और पसंद भी आ रही है,,,।

मुझे भी रघू,,, नदी का किनारा ठंडी हवाएं चारों तरफ घने घने वृक्ष पेड़ पौधे,,,, इंसान को इससे ज्यादा और क्या चाहिए,,,,।

सच कह रही हो मालकिन,,, मैं तो आपका शुक्रगुजार हूं कि आपकी वजह से मुझे भी एक खूबसूरत हसीन नजारा देखने को मिल रहा है,,,,(घोड़ा धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था घोड़े को भी मालूम था कि नदी में कैसे चला जाता है इसलिए बड़े आराम से बचाकर चल रहा था,,, देखते ही देखते नदी में आधा रास्ता तय हो चुका था,,, रघु अपनी बात आगे बढ़ाते हुए बोला,,,,)

वैसे मालकिन एक बात पूछूं,,,,,

इसमें पूछने वाली क्या बात है तुम मुझसे कुछ भी पूछ सकते हो,,,,

ठीक है मालकिन मैं यह पूछना चाह रहा था कि आप इतनी खूबसूरत है मुझे तो ऐसा लगता है कि जैसे सर कैसे उतरी हुई कोई अप्सरा ईस तांगे में आकर बैठ गई हो,,,,

स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा,,,,,(इतना कहकर बा जोर-जोर से हंसने लगी,,,,)

देखी ना मालकिन आप हंसते हुए कितनी खूबसूरत लगती हैं,,,,।

फिर वही,,,,(रघु की तरफ शरारत भरी निगाहों से देखते हुए बोली,,,)

कहा था ना मालकिन जब जब आप हंसोगी तब तब मैं आपकी तारीफ करूंगा,,,,,

ठीक है रघू तारीफ करो मुझे भी अच्छा लगता है जब तुम मेरी तारीफ करते हो लेकिन सीधे स्वर्ग की अप्सरा क्या मैं तुम्हें स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा लगती हूं क्या मैं इतनी खूबसूरत हुंं,,,।

हां मालकिन तुम बहुत खूबसूरत हो,, स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा ही लगती हो,,,

तो क्या तुम अप्सराओं को देखे हो,,,,

देखा तो नहीं हूं मालकीन लेकिन दावे के साथ कह सकता हूं कि आपसे ज्यादा खूबसूरत नहीं होगी,,,

(रघु की बातें प्रताप सिंह की बीवी के मन को प्रसन्न किए जा रहे थे जिंदगी में पहली बार किसी ने उसकी इतनी तारीफ किया था,,,) अच्छा मालकिनआप इतनी खूबसूरत है तो आपके माता पिता ने आपका नाम भी बहुत खूबसूरत ही रखा होगा क्या मैं आपका नाम जान सकता हूं,,,,।

हां यह बात तो है मेरे माता पिता ने मेरा नाम बहुत खूबसूरत रखा था,,,,

क्या नाम है आपका,,,,

मेरा नाम,,,,( वह अपना नाम बताती ईससे पहले ही तांगे का पहिया बड़े से पत्थर से टकरा गया और तांगा वहीं का वहीं रुक गया,,,, प्रताप सिंह की बीवी गिरते-गिरते बची,,,।)

बाप रे अभी तो मैं पानी में गिरी होती,,,।

लगता है मालकिन पहिया के नीचे बड़ा पत्थर आ गया है,,,,

हां लगता तो ऐसा ही है,,,,।

आप बैठी रहिए में धक्का देकर निकालने की कोशिश करता हूं,,,,(इतना कह कर रघु तांगे से नीचे पानी में उतर गया,,,, पानी घुटनों से लगभग लगभग ज्यादा ही था उसका पूरा पैजामा घुटना तक भीग गया,,,, प्रताप सिंह की बीवी की नजर उसके पजामे पर पड़ी तो वह बोली,,,)

रघु तुम्हारा तो पजामा गीला हो गया,,,।

तो क्या हुआ मालकिन सूख जाएगा,,,,(इतना कहकर वो टांगे को पीछे से धक्का लगाने लगा,,, प्रताप सिंह की बीवी वही पीछे ही बैठी हुई थी और बड़े गौर से रघु को देख रही थी,,, रघु पूरा दम लगा दे रहा था,,,,प्रताप सिंह की बीवी बड़े गौर से उसके चेहरे को देख रही थी बड़ा ही मासूम चेहरा था रघू का,,,, रघु के ताकत लगाने पर तांगे का पहिया थोड़ा सा आगे को सर का,,, आगे से घोड़ा भी बाहर निकलने की सोच रहा था,,, इसलिए वह भी पूरी ताकत लगा कर आगे की तरफ बढ़ रहा था लेकिन पत्थर को ज्यादा ही बड़ा था इसलिए पहीया थोड़ा सा ऊपर की तरफ खसकने के साथ ही नीचे आ जा रहा था,,, रघु भी समझ गया कि उसके अकेले से यह काम होने वाला नहीं है,,, लेकिन प्रताप सिंह की बीवी से यह कहने में उसे शर्म महसूस हो रही थी कि वह क्या सोचेगी उससे एक पहिया नहीं सरक रहा था,,,,लेकिन प्रताप सिंह की बीवी तांगे पर बैठे-बैठे रघु की हालत को देखकर वह भी समझ गई थी कि रघु से यह काम अकेले होने वाला नहीं है क्योंकि पहिया बुरी तरह फस गया था इसलिए वह रघु से बोली,,,।

रघु मैं भी आकर तुम्हारी मदद करती हूं तभी तांगा बाहर निकल पाएगा,,,

नहीं नहीं मालकिन,,, यह गजब मत करो,,, मालिक को पता चल गया तो मेरी खैर नहीं कि मैंने आपसे तांगे को धक्का लगवाया है,,,,

अरे ऐसा क्यों कहते हो रघु मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि यह काम तुम्हारी जगह अगर कोई दूसरा भी होता तो उस से अकेले नहीं हो पाता,,,, तुम चिंता मत करो किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा,,,, लो मेरा हाथ पकड़ो और मुझे उतरने में मदद करो,,,(इतना कहकर अपना हाथ आगे बढ़ा दी रघु को शायद इसी पल का इंतजार था वो झट से प्रताप सिंह की बीवी का हाथ पकड़ लिया नरम नरम हथेलियों का एहसास अपनी हथेली पर होते ही उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी पहली बार वह बेहद खूबसूरत औरत का हाथ अपने हाथ मे ले रहा था,, और वह भी इतने जमीदार की बीवी का पजामे में हलचल हो रही थी,,, प्रताप सिंह की बीवी तांगे से नीचे उतरने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी एक बार फिर से रघू उसे सचेत करते हुए बोला,,,।

मालकिन पानी में आपकी साड़ी भीग जाएगी,,,

तुम चिंता मत करो मैं संभाल लूंगी,,,(इतना कहकर वह तांगे पर से नीचे उतरने लगी)
 
तुम चिंता मत करो मैं संभाल लूंगी,,,(इतना कहकर वह तांगे पर से नीचे उतरने लगी,,यह बात वो भी अच्छी तरह से जानती थी कि नीचे उतरने पर उसकी साड़ी पानी में भीग जाएगी इसलिए वह एक हाथ से अपनी साड़ी को पकड़ कर नीचे उतरने लगी साड़ी को थोड़ा सा उठा रखी थी जिससे घुटनों के नीचे की टांगें दिखाई देने लगी एकदम गोरी गोरी मखमली टांगों को देखकर रघु की आंखों में चमक आने लगी,,,, रघु के हाथों में प्रताप सिंह की बीवी का हाथ था एकदम नरम नरम एकदम मुलायम ऐसा लग रहा था कि जैसे हाथ नहीं बल्कि रुई के ढेर को अपनी हथेली में दबा रखा हो,, धीरे धीरे वह एक एक करके अपने दोनों पैर को पानी में उतार दी देखते ही देखते पानी उसके घुटनों तक आ गया और वह अपनी साड़ी को घुटनों के ऊपर तक उठा दी,,, उसकी साड़ी घुटनों के ऊपर तक थी जिससे उसकी गोरी गोरी पिंडलिया नजर आ रही थी,, रघु के होश खोने लगे वह मदहोश होने लगा,,, जी मैं आ रहा था कि वह उसकी साड़ी को कमर तक उठाकर उसकी मदमस्त गोरी गोरी गांड के दर्शन करके अपने आप को धन्य कर ले,,, लेकिन यह ख्याल बस था हकीकत की शक्ल देने में शायद अभी बहुत वक्त था,,, प्रताप सिंह की बीवी तांगे के दूसरे छोर पर खड़े होकर एक हाथ से साड़ी पकड़ कर तांगे को धक्का लगाने लगी,, यह देख कर रघू भी जोर लगाने लगा,,,

दम लगा के हईशा ,,,,,,,दम लगा के हईशा,,,,,,(प्रताप सिंह की बीवी हंसते हुए यह बोलकर रघु की तरफ देख रही थी रघु भी उस के सुर में सुर मिलाता हुआ दम लगा के हईशा बोलने लगा,,, दोनों को मजा आ रहा था प्रताप सिंह की बीवी में ऐसा लग रहा था कि अभी भी बचपना बाकी था या तो वह अपने बचपन को ठीक तरह से बीता नहीं पाई थी,,,प्रताप सिंह की बीवी का इस तरह से दम लगा कर हईशा बोल बोल के तांगे को धक्का लगा ना बहुत अच्छा लग रहा था,,,,टांगे को धक्का लगाते हुए वह थोड़ा सा झुकी हुई थी जिसकी वजह से घुटनों के ऊपर तक उठी हुई साड़ी और बाहर की तरफ निकला हुआ उभार दार मदमस्त कर देने वाला अद्भुत नितंब रघु के होश उड़ा रहा था बार-बार उसकी नजर उसकी उठी हुई गांड पर चली जा रही थी और रघु जिस तरह से वो झुकी हुई थी,,,रघु टांगे को धक्का लगाते लगाते कल्पना कर रहा था कि वह उसी स्थिति में प्रताप सिंह की बीवी की चुदाई कर रहा है और उसके मुख से दम लगा के हईशा की जगह गरमा गरम सिसकारियों की आवाज गूंज रही है,,,, रघु कल्पना करके ही एकदम मस्त हो जा रहा था,,,, प्रताप सिंह की बीवी एक हाथ से अभी भी साड़ी को पकड़े हुए थी,,, कभी कभी जोर लगाने की अफरातफरी में उसकी साड़ी जांघों तक ऊपर उठ जाती थी जिसकी वजह से रघु को मोटी मोटी इतनी मांसल गोरी जांघें देख कर अपनी आंखें सेंकने का मौका मिल जा रहा था,,, रघु मन ही मन भगवान से प्रार्थना कर रहा था कि जमीदार की बीवी अपनी साड़ी को कमर तक उठा दे ताकि वह उसकी गोलाकार सुडोल अद्भुत गांड के दर्शन कर सकें,,,।

जोर लगाओ रघु मेरी तरफ क्या देख रहे हो,,,,, तांगे को पानी से निकालना है कि नहीं,,,,

जजजज,,जी,,, मालकिन,,,,,( रघु एकदम से हडबडाते हुए बोला,,,प्रताप सिंह की बीवी को इतना तो समझ में आ ही गया था कि रघु उसे अपनी प्यासी नजरों से देख रहा है और उसका इस तरह से उसे देखना उसे अच्छा भी लग रहा था,,, वह इतना तो अच्छी तरह से जानती थी कि जिस तरह से अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाई हुई है उसकी मांसल सुडौल जांघें रघु को साफ दिखाई दे रही है,, और वही अंग रघु चोर नजरों से देख भी रहा था,,,। बार-बार वह भगवान से एक ही प्रार्थना कर रहा था कि काश ऊसकी साड़ी कमर तक उठ जाए और उसे वह दृश्य नजर आ जाए जिसके देखने की कामना वह अपने मन में बसाकर रखा है,,,, धीरे धीरे रघू के पजामे में तंबू बनना शुरू हो गया था,,,, प्रताप सिंह की बीवी की मादकता भरी जवानी उसके होश उड़ा रही थी,,, घोड़ा अपनी पूरी ताकत लगा रहा था साथ ही रखो और प्रताप सिंह की बीवी भी अपना-अपना जोर दिखा रहे थे,,, एकाएक घोड़े की ताकत और दोनों की कोशिश रंग लाई हो तांगे का पहिया पत्थर सुपर से ऊपर की तरफ होता हुआ आगे निकल गया,,,, घोड़ा बड़ी तेजी से आगे की तरफ निकला था इसलिए प्रताप सिंह की बीवी अपने आप को संभाल नहीं पाई और आगे की तरफ एकदम से झुक गई जिसकी वजह से अपने आप को संभालने के चक्कर में उसके हाथ में फंसी साड़ी ऊपर की तरफ उठ गई और ऐसा लग रहा था कि भगवान मेरा को की प्रार्थना सुन ली और उसकी आंखों के सामने वही तेरे से नजर आने लगा जिसकी काम लावा कर रहा था साड़ी के ऊपर उठ जाने की वजह से प्रताप सिंह की बीवी की नंगी गांड रघु की आंखों के सामने उजागर हो गई,, रघू तो देखता ही रह गया,,, रघु की आंखों के सामने प्रताप सिंह की बीवी की नंगी गांड थी जिसकी शायद वह कल्पना भी नहीं कर सकता था वह इतनी ज्यादा खूबसूरत है एकदम गोरी ,,, ऐसा लग रहा था कि गोरी गांड की शक्ल में चांद नीचे जमीन पर उतर आया हो,,,,प्रताप सिंह की बीवी की गांड देखते ही रघू के मुंह में पानी आ गया पजामे में हरकत होना शुरू हो गई,,,,, रघु से ज्यादा दृश्य अपनी आंखों से देख पाता इससे पहले ही अपने आप को ना संभाल पाने की स्थिति में प्रताप सिंह की बीवी पानी में गिर गई,,,, और एकदम से घबरा गया और जल्दी से आगे बढ़ा,,,प्रताप सिंह की बीवी को उठाने के लिए जैसे ही अपना हाथ आगे बढ़ाया प्रताप सिंह की बीवी पानी में पूरी तरह से भीग चुकी थी पानी ज्यादा नहीं था घुटनों जितना ही था इसलिए वह एक तरह से पानी में एकदम से बैठ गई थी,,, वह रघू को देखकर जोर-जोर से हंसने लगी,, रघू भी हंसने लगा प्रताप सिंह की बीवी का पूरा बदन पानी में डूबा हुआ था कि बलवा अपना चेहरा बाहर निकाल कर हंस रही थी और बड़ी खूबसूरत लग रही थी रघु तो उसे देखता ही रह गया,,,,।

आप हंस क्यों रही है मालकिन,,,,

बचपन का दिन याद आ गया रे रघू,,,,, इसी तरह से हम लोग नदी में खूब मजे किया करते थे कोई पाबंदी नहीं थी कोई रोक-टोक नहीं था,,,, लेकिन जैसे जैसे बड़े होने लगे वैसे कैसे मर्यादा की दीवार समाज के बंधन में बंधते चले गए,,, सब कुछ उम्र के साथ पीछे छूट गया रघू,,,,।

लेकिन मालकिन आज यहां पर किसी भी प्रकार का बंधन नहीं है कोई मर्यादा की दीवार में न समाज है ना लोग हैं कुछ नहीं है,,,, आप हंसती हो तो बहुत खूबसूरत लगती हो आज एक बार फिर से बचपन लौट आया है,,, क्यों ना आज जिस तरह से बचपन में मजे करती थी उसी तरह से जवानी में मजे कर लो,,,,

(रघु जानबूझकर जवानी शब्द पर जोर देते हुए बोला था और प्रताप सिंह की बीवी भी अपने लिए जवानी शब्द सुनकर एक पल के लिए रघु को एकटक देखने लगी थी क्योंकि यह बात वही अच्छी तरह से जानती थी कि,, भले ही वह एक उम्र दराज जमीदार के साथ ब्याही गई थी तो इसका मतलब यह नहीं था कि उसकी भी उम्र हो गई है वह अभी भी जवान थी और एकदम जवान जिसे देखकर गांव के बड़े बूढ़े सब लोग आहें भरते थे,,,, प्रताप सिंह की बीवी कुछ सोचने के बाद मुस्कुराते हुए खड़ी हुई,,,, और जैसे ही खड़ी हुई रघु के होश उड़ गए क्योंकि पानी में गिरने की वजह से अपने आप ही उसके ब्लाउज का ऊपर ही बटन खोल चुका था और उसकी मदमस्त लाजवाब चूचियां आधे से ज्यादा नजर आने लगी थी,,, एकदम गोरी और एकदम गोल मानो उसके ब्लाउज में चुचियों की जगह अलग से खरबूजा रख दिया गया हो,,,। और साड़ी की हालत भी अस्त व्यस्त थी पानी में भीग कर उसकी साड़ी एकदम बदन से चिपक गई थी और साड़ी का एक चोर उसके घुटनों के ऊपर चिपका हुआ था जिससे घुटनों के नीचे वह पूरी तरह से अपनी लाजवाब बेहतरीन नंगी टांगों को अपना आकार बक्स रहा था,, रघु का आश्चर्य से मुंह खुला का खुला रह गया था रघु को इस तरह से अपने आप को देखता हुआ पाकर उसके तन बदन में भी अजीब सी हलचल हो रही थी लेकिन वह अपने कपड़ों को यहां अपनी स्थिति को सुधारने के बजाय मुस्कुराकर एकाएक घूम गई और आगे पांव बढ़ाकर पानी में जाते हुए बोली,,,,

तुम ठीक कह रहे हो रघु,,, मुझे यहां पर खुल कर जी लेना चाहिए एक बार फिर से अपने बचपन को अपनी मस्ती के साथ जी लेना चाहिए,,,,(और ऐसा कहते हुए वह नदी में चलने लगी रघु उसके पीछे खड़ा उसे देख रहा था पानी में पूरी तरह से भीग जाने की वजह से उसकी साड़ी पूरी तरह से उसकी भारी-भरकम बड़ी बड़ी गांड से चिपक गई थी जिसकी वजह से उसकी गांड का हर एक कटाव और उसका उठाव बेहतरीन आकार लिए अपने आप को प्रदर्शित कर रहा था,,,। यह जबरदस्त अद्भुत और अतुल्य नजारे को देखकर रघु के मुंह के साथ-साथ उसके लंड में भी पानी आ रहा था,,,। जिस तरह से वह पानी में अपने पैरों को जोर देकर चल रही थी उससे उसके नितंबों में अजीब सी हलचल अद्भुत थिरकन हो रही थी,,, यह देख कर रघू के तन बदन में जवानी का शोला भड़कने लगा था,,। उसकी बड़ी-बड़ी मटकती हुई गांड को देखकर रघु यही सोच रहा था कि प्रताप सिंह ऐसी जवान बीवी से कितना मजा लेता होगा,,, लेकिन फिर उसके मन में ख्याल आया कि,, क्या प्रताप सिंह उम्र दराज होने के बावजूद अपनी जवानी से लबालब बीवी को संतुष्ट कर पाता होगा क्या उसकी बेलगाम जमाने को अपने लगाम से काबू में कर पाता होगा,,,, रघु का अपने सवाल का जवाब अच्छी तरह से मालूम था की प्रताप सिंह अपनी जवानी से भरपूर कम उम्र की बीवी को संतुष्ट नहीं कर पाता होगा,,,, क्योंकि उसके सामने दो औरतों के उदाहरण पहले से मौजूद थे एक हलवाई की बीवी और दूसरी रामू की मां दोनों के पति मौजूद है अगर वह लोग अपने पति से संतुष्ट होती तो उसके साथ कभी भी शारीरिक संबंध नहीं बनाती,,, गैर मर्द के साथ शारीरिक संबंध बनाने का सबसे अहम कारण नहीं होता है कि औरत अपने पति से संतुष्ट नहीं होती उनका पति उन्हें जुदाई का भरपूर साथ नहीं दे पाता तब जाकर मजबूर होकर औरत किसी गैर मर्द से संबंध बनाती है ताकि वह उसे संतुष्ट कर सके और रघु इस मामले में दोनों औरतों को उनकी सोच के मुताबिक ज्यादा ही संतुष्टि का एहसास करा चुका था इसलिए तो वह दोनों औरते रघू की दीवानी हो चुकी थी,,,,और प्रताप सिंह की बीवी को देखकर रघु को यही लग रहा था कि फल पूरी तरह से पक चुका है बस उसकी झोली में गिरने का इंतजार है,,, और यही देखना था कि कब उसकी झोली में गिरता है,,,। इसलिए तो रघु प्यासी नजरों से प्रताप सिंह की बीवी की मटकती हुई गांड देख रहा था जो कि बेहद मादक अदा से ईठलाती हुई पानी में आगे बढ़ रही थी,,, रघु कुछ बोल पाता इससे पहले ही वह फिर से पानी में पूरी तरह से जानबूझकर गिर गई और थोड़े से पानी में तैरने का आनंद लेने लगी चिलचिलाती गर्मी में नदी का पानी ठंडक दे रहा था।,,, पानी इतना ज्यादा नहीं था कि उसके पूरे बदन को अपनी आगोश में ले सके,,, इसलिए जब बहुत ही करने की कोशिश करती थी तो उसकी भारी-भरकम मदमस्त गांड पानी से भीगी हुई नदी के पानी से बाहर नजर आ जा रही थी,,,, यह देखकर रघु पजामे के ऊपर से ही अपने खड़े लंड को हाथ से मसल दे रहा था,। प्रताप सिंह की बीवी रघू की इस हरकत से अनजान नदी के पानी में नहाने का मजा लूट रही थी,,,, पानी में लेटे लेटे ही वह रघु की तरफ देख कर बोली,,।

रघु तुम भी पानी में नहाने का मजा ले लो इस चिलचिलाती धूप में नदी के पानी से नहाने का मजा ही कुछ और है,,,(वह इतना बोल ही रही थी कि तभी उसकी नजर रघु के पजामे की तरफ गई और पजामे में बने तंबू को देखकर हैरान रह गई,,, वह रघु के तंबू को देखती ही रह गई,,, इतना तो अंदाजा लगा ली थी कि जिस तरह का तंबू उसके पहचानोगे दिख रहा है पजामे के अंदर का हथियार उतना ही दमदार होगा,,,, वह अपने चेहरे पर आए हैंरानी के भाव को जल्द ही दूर करते हुए एकदम सहज भाव से बोली,,।)

तुम भी नहा लो रघु गर्मी बहुत है,,,,।

(रघु उसकी बात को टाल नहीं सका और जहां खड़ा था वहीं पानी में बैठकर ठंडे पानी का आनंद लेने लगा वह नहा रहा था प्रताप सिंह की बीवी भी नहा रही थी लेकिन अब उसका नहाने में मन नहीं लग रहा था क्योंकि जिस तरह का तंबू उसने रघु के पजामे में देखी थी,,वह कोई मामूली तंबू नहीं था यह इस बात का अंदाजा उसे लग चुका था इसलिए बार-बार उसका ध्यान रघु के तने हुए तंबू पर चला जा रहा था जो कि अब वह पानी में नहा रहा था,, प्रताप सिंह की बीवी के तन बदन में हलचला होना शुरु हो गई थी,,,,,, रघु बार-बार उसके तन बदन को प्यासी नजरों से देख ले रहा था और वह उसी तरह से पानी में तैरने की कोशिश कर रही थी उसकी भारी-भरकम नितंब पानी में डूबी हुई बहुत ही खूबसूरत लग रही थी,,, रघु का लंड शांत बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था,,, तकरीबन आधा घंटे तक नदी के पानी में नहाने के बाद प्रताप सिंह की बीवी खड़ी हुई और रघु की तरफ देख कर बोली,,,।

रघु बहुत हो गया अब चलो चलते हैं,,,,(इतना कहकर वो नदी के पानी से बाहर जाने लगी लेकिन रघु उसके ब्लाउज की तरफ देख चुका था जिसका दो बटन खोल चुका था अब आधे से भी ज्यादा चूचियां उसे निर्वस्त्र हालत में नजर आ रही थी उसकी कलाइयां साफ-साफ ब्लाउज के अंदर अपनी आभा बिखेर रहा था,,, रघु प्रताप सिंह की बीवी की दोनों गोलाइयो को पानी से एकदम गीला देखकर एकदम मस्त हो गया और यह बात उसे भी पता थी कि उसके ब्लाउज के दो बटन खुल चुके हैं लेकिन वहां उसे बंद करने की जरा भी सुध नहीं ले रही थी वह उसी तरह से नदी के पानी में चलती चली जा रही थी उसकी मटकती गांड रघु की हालत पतली किए जा रही थी,,,। वह भी पानी में से खड़ा हो गया था,,,,और साथ ही उसका लंड भी जो कि पैजामा पूरी तरह से पानी में भीग गया था और पानी में गीला होने की वजह से उसका पैजामा पूरी तरह से उसके लंड के आकार पर चिपक गया था,,, और पानी में भीगने की वजह से उसके लंड की त्वचा एकदम साफ नजर आ रही थी जो कि अब तक प्रताप सिंह की बीवी की नजर में नहीं आई थी लेकिन उसका मन उसे देखने का बहुत कर रहा था,,,, रघु भी पीछे-पीछे जाने लगा शायद अब साड़ी को पानी में भीगने से बचाने की जरूरत नहीं थी इसलिए प्रताप सिंह की बीवी बड़े आराम से पानी में चल रही थी उसकी साड़ी पानी की सतह पर गुब्बारे की तरह दे रहा था लेकिन नितंबों पर अभी भी उसका वस्त्र गीला होकर चिपका हुआ था जिससे उसके आकार में अद्भुत उठाव नजर आ रहा था,,,, यह नजारा देखकर रघु को डर लग रहा था कि उसका लंड कहीं बगावत पर ना उतर आए,,,, उसकी जगह कोई और औरत होती तो अब तक रघु उसे अपने नीचे ले लिया होता लेकिन इतने बड़े जमींदार की औरत होने के नाते रघु को थोड़ा डर भी लग रहा था उसके साथ कुछ ऐसा वैसा करने में क्योंकि उसकी कोई भी गलत हरकत उसकी जान ले सकती थी इसलिए अपने आप को संभाले हुए था वह चाहता था कि उसकी बीवी खुद अपने आप ही उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए,,, इसलिए तो वह अब उसकी आंखों के सामने से अपने तंबू को छिपाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रहा था क्योंकि वह जानता था अगर प्रताप सिंह की बीवी उसके पजामे में बने तंबू को देख ली तो जरूर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए लालायित हो जाएगी।

प्रताप सिंह की बीवी आगे आगे चल रही थी और रघु पीछे पीछे,,,, एक नारी होने के नाते इस तरह से एकांत में एक जवान लड़के की उपस्थिति में गीले बदन उसे अद्भुत और उत्तेजना का अनुभव रहा था उसका रोम रोम उत्तेजित हुए जा रहा था,,, वैसे भी उसे ही इस बात का आभास था कि उसे शारीरिक संतुष्टि नहीं प्राप्त हो पा रही है क्योंकि प्रताप सिंह की उम्र और ताकत इतनी नहीं थी कि वह एक जवान औरत को अपने मर्दाना ताकत से संपूर्ण संतुष्टि का अहसास करा सकें,,,, इसलिए तो रघु के आकर्षण में वह बंधती चली जा रही थी,,,, वह पानी में चलते हुए पीछे मुड़ कर रघू की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी,,,,लेकिन जैसे ही उसकी नजर एक बार फिर से उसके तंबू पर पड़ी तो वह हक्की बक्की रह गई क्योंकि इस बार पानी में भीग जाने की वजह से उसके पेजामे का कपड़ा पूरी तरह से उसके लंड से चिपक गया था जिससे लगभग लगभग पजामे के अंदर होने के बावजूद भी,,, रघू का लंड पुरी औकात में नजर आ रहा था,,, यह नजारा देखते ही प्रताप सिंह की बीवी की दोनों टांगों के बीच हलचल होना शुरू हो गई और मन ही मन रघु कै लंड के आकार की कल्पना करने लगी थी,,,। रघु जिस तरह से बड़ी मुश्किल से पानी में अपने पैरों को आगे बढ़ाते हुए आ रहा था और उसी कशमकश में पजामे के अंदर अपना जलवा बिखेर रहा उसका लंड ऊपर नीचे हो रहा था जिसे देख देख कर प्रताप सिंह की बीवी की हालत खराब हो रही थी,,,, अजीब सी हलचल उसके तन बदन को झकझोर कर रख दे रही थी वह बार-बार उसके तंबू पर से अपनी नजर हटा ले रही थी लेकिन उसे बार-बार देखने की लानत उसे मजबूर कर दे रही थी,,,,

देखते ही देखते दोनों नदी से बाहर आ गए,,,, गर्मी के महीने में चिलचिलाती धूप,,,, पूरे वातावरण को अपनी आगोश में ले लिया था गंगा नदी के बाहर हरी हरी घास में खड़ा था और घोड़ा उसी हरी हरी घास का मजा ले रहा था,,,, उसे भूख लगी हुई थी इसलिए वह हरी हरी घास खा रहा था,,,, जहां पर तांगा खड़ा था वहां पर विशाल वृक्ष था जिसकी छाया में तांगा खड़ा था और वह दोनों की उसी पेड के नीचे जाकर खड़े हो गए,,, दोनों के वस्त्र पूरी तरह से पानी से किले हो चुके थे जिन्हें बदलना आवश्यक था,,,, रघु जानबूझकर प्रताप सिंह की बीवी की आंखों के सामने ही अपना कुर्ता निकालने लगा और जैसे ही कुर्ता निकाल कर बताएंगे पर रखकर उसे सुखाने के लिए रख दिया उसकी नंगी चौड़ी छाती देख कर प्रताप सिंह की बीवी एक दम काम विह्वल हो गई,,,। रघु एकदम जवान था उसका गठीला और कसरती बदन किसी भी औरत के लिए आकर्षण बन जाता है इसलिए तो प्रताप सिंह की बीवी एकदम से उसकी तरफ आकर्षित हो गई उसका जवान पत्नी देखकर ना जाने क्यों उसके तन बदन में हलचल होने लगी खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में अजीब सी हलचल हो रही थी,,,अपने बदन में इस तरह की हलचल का मतलब वह अच्छी तरह से समझ रही थी वह हैरान थी कि उसे यह क्या हो रहा है कि वह अनजान लड़के के आकर्षण में खींचती चली जा रही है,,, वह अभी भी गीले कपड़ों में थी इसलिए रघू ही उसे बोला,,,

मालकिन कपड़े बदल लो वरना सर्दी लग जाएगी,,,

हुं,,,,,,(इतना कहकर वह टांगे में रखी हुई अपनी अटैची खोलने लगी,,, जिसमें वह अपने काम का सामान और कपड़े रखी हुई थी,,,, देखते ही देखते वह उसमें से अपनी साड़ी ब्लाउज और पेटीकोट निकालकर तांगे के दूसरे छोर पर चली गई,,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था रघू तांगे के ईस ओर खड़ा था और प्रताप सिंह की बीवी दूसरी ओर,,, रघु का भी दिल जोरों से धड़क रहा था,,, पहली बार कोई औरत उसके इतने करीब अपने सारे कपड़े उतार कर कपड़े बदल रही थी हालांकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं था कि रखो किसी औरत को कपड़े बदलते देखा नहीं हो वह अपनी मां और अपनी बहन दोनों को कपड़े उतारते हुए बदलते हुए और उन्हें एकदम नग्न अवस्था में देख चुका है हालांकि वह अपनी बड़ी बहन की चुदाई भी करता आ रहा है,,,लेकिन आज पहली बार किसी बड़े घराने की औरत उसके बेहद समकक्ष खड़ी होकर अपने सारे कपड़े उतार कर कपड़े बदलने वाली थी,,, इसलिए उसके तन बदन में हलचल मची हुई थी,,,,

दूसरी तरफ प्रताप सिंह की बीवी एक-एक करके अपने सारे कपड़े उतारने लगी ब्लाउज के बटन ऊपर के दो तो पहले से ही खुल चुके थे बाकी के बटन को खोल कर अपना ब्लाउज उतारकर वही तांगे पर आगे रख दी,,, ठंडे पानी में भीग कर ऐसा लग रहा था कि उसकी दोनों चूचियां कुछ और ज्यादा बड़ी और कठोर हो गई है क्योंकि दोनों की हालत को देखकर ऐसा ही लग रहा था कि दोनों चूचियां बगावत पर उतर आई है,,, अपनी चुचियों पर नजर डालकर वह अपने पेटीकोट की डोरी के साथ-साथ अपनी गीली साड़ी भी खोलने लगी,,,उसे इतना तो पता था कि 1 मीटर जैसी दूरी पर पीछे खड़ा होकर रघु भीअपने कपड़े बदल रहा होगा जिस तरह की हलचल रघू अपने तन बदन में महसूस कर रहा था ठीक उसी तरह की हलचल प्रताप सिंह की बीवी अपने तन बदन में महसूस कर रही थी,,, एक अनजान जवान लड़के के बेहद करीब खड़ी होकर अपने सारे वस्त्र उतार कर,, नंगी हो रही थी,,, यह अनुभव यह एहसास उसके लिए बिल्कुल नया था जिंदगी में पहली बार किसी जवान लड़के के सामने,,, भले ही वह उसके सामने खड़ी होकर ना सही लेकिन उसके समकक्ष अपने सारे कपड़े उतार रही थी देखते ही देखते वह अपनी साड़ी को भी उतार फेंकी,,,, पेटिकोट की डोरी को खोलते हुए वह पेटीकोट को उतारने ही वाली थी कि दूसरे छोर पर खड़े रघू के हाथ से उसका गिला कपड़ा नीचे गिर गया और वह जैसे ही नीचे झुक कर उसे उठाने को चला वैसे ही प्रताप सिंह की बीवी दूसरे छोर पर अपने पेटीकोट की डोरी को खोल कर उसे अपनी कमर से आजाद कर दी और उसका पेटीकोट भरभरा कर उसके कदमों में जा गिरा,,, पर जैसे ही उसका पेटीकोट उसके कदमों में गिरा दूसरे छोर पर रघु नीचे झुक कर अपना कपड़ा उठाते हुए उसकी नजर दूसरे छोर पर खड़ी प्रताप सिंह की बीवी पर पड़ी जिसका पेटीकोट उसके कदमों में गिर गया था,,,,, दूसरे छोर के नजारे को देखते ही रघु का दिल जोरो से धड़कने लगा वह एकदम से मदहोश होने लगा क्योंकि उसे प्रताप सिंह की बीवी की मोटी चिकनी जांघों से लेकर के उसके पैर के अंगूठे तक साफ नजर आ रहा था एकदम गोरी,,, रघु की तो आंखें फटी की फटी रह गई एकदम से बावला हो गया था प्रताप सिंह की बीवी को चोदने की इच्छा उसके मन में एकदम प्रबलित हो रही थी,,, रघू उसके गोरे बदन को अपनी बाहों में लेना चाहता था,,,लेकिन एक बार उसके मन में था कि कहीं यह बात प्रताप सिंह को पता चल गई तो उसकी खैर नहीं,,,, उसकी मदमस्त मोटी मोटी गोरी टांगों से पानी की बूंदे मोती के दाने की तरह उसके बदन पर फिसल रही थी,,, प्रताप सिंह की बीवी को इस बात का अहसास तक नहीं था कि वह उसे नीचे झुककर उसकी नंगी चिकनी टांगों को देख रहा है,,,, कमर के नीचे का संपूर्ण बदन रघु की आंखों से नजर आ रहा था बस उसे इंतजार था कि वह उसकी तरफ मुंह करके खड़ी हो जाए ताकि उसकी दोनों टांगों के बीच की वो पतली दरार मद मस्त रसीली फूली हुई बुर ऊसे नजर आ जाए,,,, वह धड़कते दिल के साथ अपने लंड को अपने हाथ से पकड़ कर सामने के नजारे को देख रहा था,,, उसके लंड की नसों में खुन का दौरा इतनी तेज गति से हो रहा था कि मानो अभी उसके लंड की नसें फट जाएंगी,,,, प्रताप सिंह की बीवी अपनी मस्ती में इस बात से अनजान की कमर के नीचे का संपूर्ण नग्न बदन रखो अपनी आंखों से देख कर मस्त हो रहा है वह अपनी ही धुन मे अपने कपड़े बदल रही थी,,,, देखते ही देखते सबसे पहले वह अपना ब्लाउज उठाई और उसे पहनने लगी,,,,पर एक-एक करके अपने ब्लाउज के सारे बटन को बंद करके अपनी मदमस्त चूचियों को ब्लाउज की कैद में रख दी,,,, और जैसे ही अपनी अटैची में से पेटिकोट निकालने को हुई तो उसका पेटिकोट उसके हाथों से छुट कर नीचे गिर गया और वह तुरंत अपना पेटीकोट उठाने के लिए नीचे झुकी तो उसकी नजर सीधे जाकर रघु की नजरों से टकरा गई,,, रघु को अपनी तरफ देखता हुआ पाकर वह ऊतेजना के मारे एकदम से गनगना गई,,,,उसके तो होश उड़ गए जब उसे इस बात का एहसास हुआ कि रघु नीचे झुककर उसकी नंगे बदन को देख रहा है,,, वो झट से अपनी पेटीकोट उठाकरतुरंत अपना एक-एक करके दोनों पांव डालकर पेटिकोट को कमर तक उठा दी और जल्दी से उसकी डोरी को कस दी,,,, देखते ही देखते बेहद उत्तेजना से भरपूर मादक नजारे पर पर्दा पड़ गया और प्रताप सिंह की बीवी अपनी साड़ी पहन कर एक बार फिर से तैयार हो गई नहाने के बाद वह और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी,,,, रघू एकदम शर्मिंदा हो गया था वह प्रताप सिंह की बीवी से नजर नहीं मिला पा रहा था और प्रताप सिंह की बीवी ना जाने किस एहसास में पूरी तरह से मस्त होकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी रघु का इस तरह से चोरी छिपे उसके नंगे बदन को देखना उसे अच्छा लग रहा था,,, रघु इधर-उधर देख रहा था वह प्रताप सिंह की बीवी से नजर नहीं मिला पा रहा था,,,

धूप बड़ी जोरों की लग रही थी साथ ही प्रताप सिंह की बीवी को भूख भी लगी हुई थी,,,, वह अच्छी सी जगह देखकर घास के ढेर में घर से लाया हुआ भोजन लेकर बैठ गई,,,, वह अकेले खाने वाली नहीं थी वह जानती थी कि रघू भी भूखा होगा,,, और रघु उससे नजरे चुरा रहा था,, प्रताप सिंह की बीवी उसे आवाज देकर बोली,,,।

अरे रघु सुन तो,,, आकर खाना खा ले मुझे मालूम है तुझे भी भूख लगी होगी,,,, जल्दी आ,,,

(रघु जो कि थोड़ी दूर जाकर ,,, नदी की तरफ मुंह करके खड़ा था प्रताप सिंह की बीवी की आवाज कानों में पड़ते ही,,, उसे एहसास हुआ कि उसे भी बड़े जोरों की भूख लगी है इसलिए वह सब कुछ भूल कर प्रताप सिंह की बीवी के पास आकर बैठ गया,,,हालांकि वह पजामा पहना हुआ था और पैजामा अभी भी गिला था और कमर के ऊपर कुर्ता नहीं पहना था जैसे उसकी नंगी चौड़ी छाती एकदम साफ नजर आ रही थी,,, और प्रताप सिंह की बीवी को रघु की नंगी चौड़ी छाती देखकर कुछ-कुछ हो रहा था,,,।)
 
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