Incest पहाडी मौसम - Page 8 - SexBaba
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Incest पहाडी मौसम

सूरज उन दोनों से 10 15 मीटर की दूरी पर झाड़ियों के बीच अपने आप को छुपाए खड़ा था,, और उसके पिताजी और कल्लू दोनों एक खंडहर जैसे गोदाम के सामने खड़े होकर उस गोदाम को ही देख रहे थे,,, यह जगह यह गोदाम सूरज के लिए बिल्कुल नया था इस जगह पर वह कभी आया नहीं था गांव से काफी दूर वह आ चुका था चारों तरफ रात का सन्नाटा छाया हुआ था उसे जगह पर उन तीनों के सिवा इस समय और कोई नहीं था रह रहा कर कुत्तों की आवाज आ रही थी और झींगुर का शोर कुछ ज्यादा ही डरावना लग रहा था,,,, अगर कोई और समय होता तो शायद सूरज इस जगह पर कभी नहीं आता लेकिन बात थी अपने पिताजी के बारे में पता लगाने की इसलिए सूरज बिल्कुल भी परवाह किए बिना ही इस जगह पर आ चुका था और यहां पर आने के बाद ही उसे कोई कमला नाम की औरत के बारे में पता चला था जिसके चक्कर में उसके पिताजी घर पर आना छोड़ दिए थे,,,।





मामला पूरी तरह से शराब और शबाब का था,,, यही दो चीजों में तो इंसान अपने आप को पूरी तरह से सबसे अलग कर लेता है अपने परिवार से अलग हो जाता है एक नशा और दूसरा जवानी का नशा यह दोनों नशा इंसान को पूरी तरह से बर्बाद कर देते हैं,,, जवानी का नशा ऐसा है कि घर में खूबसूरत बीवी होने के बावजूद भी इंसान बाहर मुंह करने से बिल्कुल भी बात नहीं आता और यही सूरज के पिताजी के साथ हो रहा था गांव में सबसे ज्यादा खूबसूरत और गदराए जिस्म की मालकिन थी भोला की बीवी लेकिन फिर भी किसी बाजारु कमला नाम की औरत के पीछे अपने घर के रास्ते को पूरी तरह से बिगाड़ने पर आतुर हो चुका था,,भोला ,, बीवी रात भर अकेले बिस्तर पर करोड़ बदलती थी और पति दूसरी औरतों के साथ मजा लुटता था,,, सूरज को आप अपने पिताजी की सच्चाई के बारे में पता चल गया था कि जहां पर एक तरफ उसे अपने पिता जी के लिए गुस्सा आ रहा था वहीं दूसरी तरफ उसकी ईस हरकत की वजह से वह मन ही मन खुश भी हो रहा था,, क्योंकि वह जानता था कि ऐसे में वह अपनी मां के साथ संभोग सुख प्राप्त कर सकता है औरतों की प्यास उनकी चाहत के बारे में उसे बहुत ज्यादा ज्ञान होने लगा था और वह जानता था कि अगर यह सब इसी तरह से चला रहा तो जिंदगी वह अपनी मां की जमकर चुदाई कर पाएगा,,,।





यार लगता है अभी तक कमला आई नहीं,,,,(शराब की बोतल को हाथ में लिए हुए कल्लू बोला,,,,)

यार यह कमला बहुत तड़पाती है,,,, यहां लंड का बुरा हाल हुआ जा रहा है और यह मादरचोद पता नहीं कहां गांड मरवा रही है,,,,(पजामे के ऊपर से अपने लंड को मसलते हुए सूरज के पिताजी बोले और उनके मुंह से इस तरह की गाली सुनकर सूरज हक्का-बक्का रह गया क्योंकि उसने आज तक घर में कभी अपने पिताजी के मुंह से गाली नहीं सुना था,, हां कभी कबार साला भोसड़ी वाला इस तरह की गाली सुन चुका था लेकिन,, इस तरह की गंदी गाली पहली बार सुन रहा था,,,, उसकी बात सुनकर कल्लु बोला,,,)

आ जाएगी दोस्त सबर कर सबर का फल मीठा होता है एक बार आ जाएगी तो देखना तेरे लंड पर कूद कुद कर बुर चुदवाएगी,,,,।

अरे यार तो चाहिए एक बार साली की बुर का भोसड़ा बना दूंगा,,,, आज बहुत चोदने का मन कर रहा है,,,।

तेरा मन तो रोज करता है,,,, याद है ना पिछली बार क्या हुआ था नशे की हालत में तू मेरी बीवी पर ही टूट पड़ा था वह तो अच्छा हुआ कि मैं आ गया वरना तु उस दिन तो मेरी बीवी को ही चोद देता,,,,।

(कल्लु की बात सुनकर सूरज एकदम हैरान रह गया,,, उसे समझ में आने लगा था कि उसके पिताजी कितने गंदे इंसान हैं लेकिन उनसे भी ज्यादा गंदा इंसान है कल्लू जो कि अपनी बीवी के बारे में इस तरह की बातें बोल रहा है और यही सूरज अपने मन में सोच रहा था कि यह कैसा आदमी है जो ऐसे इंसान के साथ घूम रहा है जो उसकी बीवी के साथ जबरदस्ती कर रहा था,,,, सूरज के लिए यह बात अचंभित कर देने वाली थी और कोई और सुनता तो शायद उसे भी यह बात कुछ अजीब ही लगती की भला ऐसा इंसान ऐसे दोस्त के साथ कैसे घूम सकता है जो अपने ही दोस्त की बीवी पर गंदी नजर रखता हो,,,, लेकिन सूरज इस बात को नहीं जानता था कि जिस तरह का जिक्र है उसने यहां पर छेड़ दिया था इसमें उसकी चालाकी छिपी हुई थी वह जानबूझकर अपनी बीवी का जिक्र यहां पर छेद था,,,,। इसके पीछे उसकी बहुत लंबी सोच थी,,,।





क्योंकि कल्लु की नजर पहले से ही भोला की बीवी पर थी अच्छी तरह से जानता था कि भोला की बीवी गांव की सबसे खूबसूरत औरत है वह पहले से ही उसके साथ चुदाई का सुख भोगना चाहता था लेकिन जानता था कि वह ऐसे हाथ आने वाली नहीं है और जब वह नदी में उसे संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था में नहाते हुए देखा था उसकी नंगी गांड और बड़ी-बड़ी चूची को अपनी आंखों से देखकर उसकी आंखों में वासना के डोरी नजर आने लगे थे और वहां इस समय उसके साथ जबरदस्ती करने की सोच रहा था लेकिन सुनैना उसकी एक नहीं चलने की और वह असफल हो गया,,, वह किसी भी हालत में सुनैना के साथ चुदाई का सुख प्राप्त करना चाहता था गांव की सबसे खूबसूरत औरत के साथ चुदाई करके मस्त होना चाहता था और वह जानता था कि सुनैना उसे हाथ भी नहीं लगाने देगी इसीलिए वह चला कि खेल रहा था सुनैना के पति के साथ दोस्ती करके,,,।





इसीलिए तो वह धीरे-धीरे सुनैना के पति को अपने बस में कर रहा था उसे शराब और शबाब लत धरा रहा था जिसमें वह पूरी तरह से कामयाब भी हो चुका था इसीलिए वह अपने घर पर ले गया था और जानबूझकर अपनी बीवी को वह,,, उसके सामने अपनी जवानी का जलवा दिखाने के लिए बोला था और उसकी बीवी भी एक नंबर की हरामि थी उसे पैसों से मतलब था,,, और वह भी धीरे-धीरे अपनी जवानी का जलवा सुनैना के पति पर चला रही थी,,, और उस दिन भी ऐसा ही कुछ हुआ था सब कुछ सोची समझी साजिश थी,,शराब पिलाकर वह भोला को अपने घर ले गया था जहां पहुंचने के बाद वह फिर से उसे शराब पिलाया था और जब उसे ज्यादा नशा हो गया था तो घर में ही सोने के लिए बोल दिया था लेकिन जब वह पूरी तरह से अपने होश में नहीं था तब इस समय वह अपनी बीवी को इशारा कर दिया था उसके कमरे में जाने के लिए,,,।





भोला इन सब बातों से बिल्कुल अनजान था उसे नहीं मालूम था कि गांव का बदमाश कल्लु उसका जीवन बर्बाद कर रहा है,,, अपने पति का इशारा पाकर उसकी बीवी कमरे में पहुंच गई और भोला के सामने ही अपने कपड़े उतार कर कपड़े बदलने का नाटक करने लगी लेकिन अपनी आंखों के सामने जब एक खूबसूरत औरत को कपड़े उतार कर नंगी होता हुआ देखा तो भोला से रहा नहीं गया और वह अपनी जगह से उठकर तुरंत उसे अपनी बाहों में भर लिया और खटिया पर पटक दिया,,, लेकिन इससे ज्यादा भोला कुछ कर पाता उससे पहले ही उसका पति कल्लु कमरे में आ गया और उसे रोक लिया,,, वह अपनी बीवी का उपयोग करके उसकी बीवी को अपने बिस्तर पर लाना चाहता था और उसे पूरा यकीन था कि एक न एक दिन ऐसा जरूर होगा इसीलिए तो आज वह जानबूझकर अपनी बीवी का जिक्र छेड़ दिया था और उसकी बात सुनकर भोला बोला,,,।





यार उसे दिन ज्यादा नशा हो गया था इसलिए कुछ समझ में नहीं आया और वैसे भी तेरी बीवी मेरी आंखों के सामने अपने कपड़े उतार कर नंगी हो गई थी,,,।

उसे नहीं मालूम था कि कमरे में तू है वह तो उसी का कमरा था और वह सोने के लिए गई थी और अपने कपड़े बदल रही थी उसे क्या मालूम था कि तो कमरे में पहले से मौजूद है और इसमें मेरी गलती थी मैंने उसे बताया नहीं था कि आज तु घर पर ही सोएगा,,, लेकिन एक बात है सही में मैं उसे दिन समय पर नहीं वहां मौजूद होता तो उसे दिन तो तू मेरी बीवी की चुदाई कर दिया होता ,,,।

यार तू नहीं समझ सकता मेरी जगह कोई और होता तो वह भी वही कर देता जैसा मैं करना चाह रहा था तो नहीं जानता तेरी बीवी कितनी खूबसूरत है कपड़े उतारने के बाद उसका नंगा बदन देखकर उसकी बड़ी-बड़ी गांड देखकर तो मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया क्या करता एक तो सर आपका नशा और ऊपर से तेरी बीवी की जवानी का नशा मैं तो पागल हो गया था,,,।

क्या सच में मेरी बीवी तुझे इतनी अच्छी लगी,,,!(कुटील मुस्कान अपने चेहरे पर लाकर कल्लू बोला ,,)

सच में मुझे बहुत अच्छी लगी तेरी बीवी,,,, मेरी जगह कोई भी होगा तो उसे भी तेरी बीवी अच्छी लगेगी,,, क्या तुझे नहीं अच्छी लगती तू तो जब चाहे तब अपनी बीवी की ले सकता है कितनी खूबसूरत है तेरी बीवी,,,।





चल रहने दे तुझे ऐसा लगता है वह कहावत तो तूने सुनी होगी घर की मुर्गी दाल बराबर,,,।

मतलब मैं कुछ समझा नहीं,,,!(आश्चर्य जताते हुए भोला बोला,,,)

मेरा मतलब है कि जिसे रोज खाने को मुर्गी मिली तो उसके लिए तो मुर्गी भी दाल बराबर हो जाती है मेरा मतलब है कि रोज-रोज बीवी की लेने के बाद बीवी भी सुंदर नहीं लगती सच कहूं तो मुझे तो तेरी बीवी बहुत खूबसूरत लगती है,,,।(अपने मन की बात कल्लु भोला के सामने बोल गया था,,, और इस बात को सुनकर सूरज के चेहरे पर क्रोध के भाव नजर आने लगे थे उसे समझ में आ गया था कि उसकी नजर उसकी मां पर है और वह देखना चाहता था कि उसकी बात सुनकर उसके पिताजी कैसा व्यवहार करते हैं लेकिन उसके आश्चर्य के बीच उसके पिताजी एकदम शांत बने रहे जैसे कुछ हुआ ही नहीं है ऐसा लग रहा था कि जैसे उन्हें कुछ सुनाई ही नहीं दिया हो,,,, वह उसकी ही तरह बेशर्म होते हुए बोले,,,)





तो इसमें क्या हुआ दोस्त मैं तेरी बीवी की ले लूंगा और तू मेरी बीवी की ले लेना,,,।

(इतना सुनकर तो जैसे कल को मुंह मांगी मुराद मिल गई वह एकदम से प्रसन्न होता हुआ बोला,,,)

यह हुई ना बात मेरे राजा इसे कहते हैं दोस्ती सच में जिस दिन ऐसा हुआ ना तुझे शराब से नहला दूंगा और साथ में अपनी बीवी भी तुझे हमेशा के लिए दे दूंगा जब चाहे मन तु उसे चोद सकता है,,,। अपने वादे पर कायम रहना मेरे दोस्त,,,,।

बिल्कुल मेरे यार तेरे लिए तो जान हाजिर है लेकिन इसमें जो मेरी जान ले रही है कमला अभी तक आई क्यो नहीं,,,, अभी तक,,, बोतल का ढक्कन भी बंद है और मेरी रानी कमला की बुर का उद्घाटन भी नहीं हुआ है,,,।

आ जाएगी सब्र कर वह अभी सबसे नजरे बचा कर आती है और सबसे अच्छी बात यह है कि हम दोनों के लिए खाना भी लेकर आती है,,,, इसमें उसे थोड़े बहुत पैसे मिल जाते हैं और मजा भी मिल जाता है और हम लोगों की तो मजा ही मजा है,,,।

(सूरज उन दोनों की बेशर्मी भरी बातें सुन रहा था उसे सबसे ज्यादा गुस्सा तो अपनी मां का जिक्र होने पर आ रहा था और इस बात से उसे और ज्यादा क्रोध आ रहा था कि उसके पिताजी बिल्कुल भी गुस्से में नहीं थे बल्कि उसकी बात सुनकर एकदम शांत थे अपने पिताजी का रवैया देखकर सूरज इतना तो समझ गया था कि उसके पिताजी से ही उसकी मां की इज्जत खतरे में है वह किसी भी दिन उसकी मां को कल्लु के हवाले करदेंगे,,, सूरज का मन तो कर रहा था इसी समय अपने पिताजी के साथ-साथ कल्लु का भी मुंह तोड़ दे,,,, क्योंकि उसी ने उसके पिताजी को इतना गंदा इंसान बनाया था वरना उसके पिताजी सीधे-साधे इंसान थे,,,, सूरज अपने मन में ही क्रोधित हुआ जा रहा था उसका तो बहुत कुछ करने का मन कर रहा था लेकिन फिर भी वह एकदम शांत पता क्योंकि वह जानता था कि इस तरह से बीच में कुद पडना अच्छा नहीं है,,,,,,।





उसके पिताजी और वह बदमाश बड़े बेसब्री से कमला के आने का इंतजार कर रहा था,,, एक तरफ जहां उन दोनों की बातों को सुनकर सूरज को गुस्सा आ रहा तुम्हारी दूसरी तरफ दोनों की बातों से उसके तन-बदन में उत्तेजना की लहर भी उठ रही थी,,, और वह भी बड़ी बेचैनी से कमला के आने का इंतजार कर रहा था,,, चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था गोदाम के बाहर भी अंधेरा ही था,,,, लेकिन फिर भी सूरज को सब कुछ साफ-साफ दिखाई दे रहा था क्योंकि वह दोनों के बेहद करीब ही था तभी उसके पिताजी बोले,,,।

चल गोदाम में चलकर इंतजार करते हैं,,,, और शराब पीना शुरू करते हैं,,,,,,।

हां तु ठीक कह रहा है उसके आते आते नशा भी होने लगेगा,,,,,,,,,।

ला बोतल मुझे दे और तू दरवाजा खोल,,,,,,(इतना कहकर भोला अपना हाथ आगे बढ़ा दिया और कल मुस्कुराता हुआ अपने हाथ में लाए हुए दो बोतल को भोला को थमा दिया,,,, और खुद दरवाजा खोलने के लिए आगे बढ़ गया गोदाम काफी बड़ा नजर आ रहा था और उसका दरवाजा भी काफी बड़ा था ऐसा लग रहा था कि अनाज का गोदाम है,,,, सूरज अपने मन में उसको धाम के बारे में सोच रहा था उसके मन में ढेर सारे सवाल उठ रहे थे उसे गोदाम को लेकर की यह गोदाम है किसका किसी आम इंसान का तो हो नहीं सकता इतना बड़ा गोदाम किसी रईस का ही है,,,,.

सूरज का अपने मन में इतना सोचा था कि कल आगे बड़ा और दरवाजे पर लगा ताला खोलने के लिए अपनी धोती में टटोलने लगा,,, और जल्द ही धोती में भरी हुई चाबी उसके हाथ में लग गई और उसे चाबी को धोती में से खोलकर उसे चाबी को अपने होठों से लगाकर उसे पर चुंबन करते हुए ताले के पास पहुंच गया और उसे खोलते हुए बोला,,,।

जय हो राजा साहब की,,,,, उनकी बदौलत ही हम यहां पर अैयाशी करते हैं,,,, और यह अनाज का गोदाम उनकी अय्याशी का अड्डा ही है जब उनका मन होता है तब वह यहां पर आते हैं और मुझे नहीं नहीं औरतें लाने के लिए बोलते हैं और उसके बदले में ढेर सारे पैसे भी देते हैं एक तरह से मैं राजा साहब का एकदम खास हूं तभी तो उन्होंने भेजी जाए कितने बड़े गोदाम की चाबी और उसकी रखवाली करने के लिए मुझे जिम्मेदारी दे दीए है,,,।(ताला खोलने हुए कल्लू बोला,,, और उसकी बात सूरज एकदम ध्यान से सुन रहा था वह समझ गया था कि किसी राजा साहब की ही गोदाम है,,,,, और धीरे-धीरे बड़े से दरवाजे को कल खोलने लगा पर देखते ही देखते दरवाजे को दोनों तरफ से खोल दिया,,,, गोदाम का दरवाजा खुलते ही भोला बोला,,,,)

यार तेरे राजा साहब तो सही में दिलदार हैं,,,, अब तो तुझे पैसे की कमी नहीं होती होगी,,,।

बिल्कुल भी नहीं जब मांगो तब पैसा मिल जाता है तभी तो तुझे इतना ऐश करा रहा हूं,,,,।

तब तो तु मुझे भी मिलाना अपने राजा साहब से,,,।

बिल्कुल तुझे तो मिलना ही पड़ेगा तू तो मेरा खास है,,,। चल अब अंदर चल कर बैठते हैं,,,,।

(उसका इतना कहना था कि सूरज के पिताजी भी उसके पीछे-पीछे गोदाम में प्रवेश करने लगे,, और देखते ही देखते दोनों गोदाम में प्रवेश कर चुके थे,,,, सूरज को बड़ी बेसब्री से इंतजार था अब कमला को देखने का,,,,,, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था उसकी आंखों के सामने उसके पिताजी और वह बदमाश कल गोदाम में प्रवेश कर चुके थे दरवाजा अभी भी खुला था जिसे वह दोनों कमला के आने के लिए ही खोल रखे थे,,,,,, और सूरज जानता था कि कमला के आते ही वजह से ही गोदाम में प्रवेश करेगी गोदाम का दरवाजा भी बंद हो जाएगा और वह कुछ देख नहीं पाएगा और इसलिए वह अपने मन में सोच रहा था कि उसके आने से पहले उसे भी गोदाम के अंदर चले जाना चाहिए ताकि वह सब कुछ देख सके,,, इसलिए वह चोरी चुपके धीरे-धीरे आगे बढ़ा और देखते ही देखते वह भी गोदाम के दरवाजे तक पहुंच गया वह चोरी से अंदर की तरफ देखा तो गोदाम काफी बड़ा था और अंदर जगह-जगह पर घास का ढेर पड़ा हुआ था कुछ अनाज की बोरियां भी थी और ढेर सारा कबाड़ भी था,,,।

पहले तो सूरज को इन सब के सिवा उसके पिताजी और कल्लु नजर नहीं आ रहे थे,,, सूरज चारों तरफ नजर घुमा कर देख रहा था तभी दोनों के हंसने की आवाज आई और सूरज कोने की तरफ देखने लगा तो वहां पर ढेर सारी घांस बिछी हुई थी,,, ढेर सारी घास को देखकर सूरज समझ गया कि इसी घास पर दोनों अय्याशी करते हैं,,, और मौका देखकर वह भी जल्दी से गोदाम में प्रवेश कर गया और एक जगह पर जाकर चुप किया जहां पर उन दोनों की नजर नहीं पहुंच सकती थी अंदर लालटेन चली हुई थी और चारों तरफ अंधेरा था लेकिन जहां लालटेन जली हुई थी वहीं पर दोनों बैठकर शराब पी रहे थे और वहां पर काफी रोशनी थी जिसे सूरज को भी वहां देखने में आसानी हो रही थी और जिस जगह पर वहां छिपा हुआ था वहां पर काफी अंधेरा था जहां पर किसी के भी द्वारा देखे जाने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी,,,,।

देखते ही देखते दोनों शराब की बोतल खाली करने लगे लेकिन अभी तक कमल का अता-पता नहीं था इसलिए शराब के नशे में सूरज के पिताजी बोले,,,।

यार कल्लु कहीं कमला किसी दूसरे को तो अपनी बुर नहीं दे रही है,,,।

यार मुझे भी अब चिंता हो रही है काफी देर हो गई है कमला मादरचोद आई नहीं,,,,(कल्लु भी शराब को एक साथ में गटकते हुए बोला,,, दोनों की बातों को सुनकर सूरज को भी चिंता होने लगी की कही सही में कमला आज की रात नहीं आई तो उसकी मेहनत पानी में फिर जाएगी,,, इसलिए उसे भी चिंता होने लगी लेकिन तभी दूर से पायल की छन-छन की आवाज आने लगी,,,,,,, जिसे सुनकर सूरज का दिल जोरो से धड़कने लगा उसे एहसास होने लगा था कि कमला आ रही है,,,, लेकिन दोनों इतनी शराब में मस्त हो चुके थे कि उन्हें किसी भी तरह की आवाज सुनाई नहीं दे रही थी इसलिए वह लोग आपस में बड़बड़ा रहे थे लेकिन तभी दरवाजे पर कमल पहुंच चुकी थी और उसको देखते ही सूरज का भी मुंह खुला का खुला रह गया था,,,,।)
 
सूरज के तन-बदन में आग लग रही थी,,, वह कभी सोचा नहीं था कि इस तरह से उसे अपने ही बाप की तहकीकात करनी पड़ेगी लेकिन अब तक उसकी आंखों के सामने जो कुछ भी हो रहा था वह बिल्कुल अलग था धीरे-धीरे करके उसकी आंखों के सामने उसके पिताजी की सच्चाई उजागर होती चली जा रही थी वरना वह अपने मन में अपने पिताजी के प्रति कभी गलत भावना नहीं लाया था वह यही जानता था कि उसके पिताजी एक अच्छे इंसान है संस्कारी और परिवार की देखरेख करने वाले लेकिन धीरे-धीरे उसकी यह सोच उसकी यह धारणा बदलती जा रही थी,,,। उसे लगने लगा था कि यह सब कल्लू की संगत का ही नतीजा है,,, वरना उसके पिताजी ऐसे कभी नहीं थे। सूरज भी इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि उसके पिताजी और वह कल्लू किसी औरत के इंतजार में शराब गट गटा रहे थे,,,,।





अब तो सूरज भी देखना चाहता था उसे औरत को जिसके लिए उसके पिताजी इतनी खूबसूरत बीवी को छोड़कर महीनो से मुंह मार रहे थे,,, रात पूरी तरह से छा चुकी थी चारों तरफ सन्नाटा ही सन्नाटा था और वैसे भी यह जगह बस्ती से काफी दूरी पर थी,, इसलिए किसी भी तरह की आवाज नहीं आ रही थी बस रह रहकर कुत्तों के भौंकने की आवाज आ रही थी,, गोदाम का दरवाजा खुला हुआ था,, जितनी बेसब्री से उसे कमला नाम की औरत का इंतजार उसके पिताजी और वह कल्लू कर रहे थे,, सबसे ज्यादा बेसब्री से उसे कमला नाम की औरत का इंतजार सूरज कर रहा था सूरज देखना चाहता था कि आखिरकार वह औरत देखने में है कैसी जिसके चलते एक हंसता खेलता घर बिखरने के कगार पर आ गया है,,,।





कुछ ही देर में तीनों की बेसब्री खत्म होने को आ गई थी क्योंकि दूर से ही पायल की आवाज आ रही थी जो की धीरे-धीरे नजदीक आती जा रही थी पायल की आवाज को सुनकर सूरज पूरी तरह से अपनी नजरों को गोदाम के दरवाजे पर टिकाए बैठा था,,,, सूरज के दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी क्योंकि वह धीरे-धीरे पायल की आवाज एकदम करीब आते जा रही थी और देखते ही देखते,, कमला एकदम गोदाम के दरवाजे पर पहुंच गई,, उसे पर नजर पड़ते ही सूरज उसे देखता ही रह गया,,, उसे देखकर उसका मुंह खुला का खुला रह गया,,,, उसके चेहरे पर मुस्कुराहट थी,,, और वह मुस्कुराते हुए गोदाम के अंदर प्रवेश कर गई,,, गोदाम के दरवाजे पर जैसे ही सूरज की नजर उसे पर पड़ी थी,,, सूरज पल भर के लिए सब कुछ भूल गया था,,, पल भर के लिए उसकी नजर उसके खूबसूरत चेहरे से हट ही नहीं रही थी,,।





सूरज की नजर उसके खूबसूरत चेहरे से होते हुए उसकी दोनों चूचियों पर गई जो की ब्लाउज में कसी होने के कारण उसका आकार एकदम खरबूजे की तरह गोल-गोल नजर आ रहा था,,, दरवाजे पर लालटेन की रोशनी पहुंच रही थी इसलिए सूरज सब कुछ साफ-साफ देख लिया था उसकी मदहोश कर देने वाली चूचियों को देखकर खूबसूरत के मुंह में पानी आने लगा था और वह जैसे-जैसे आगे बढ़कर उन दोनों के सामने जाकर खड़ी हुई तो ऐसे में सूरज की नजर उसके गोलाकार नितंबों पर पड़ी जो कि कई हुई साड़ी में गजब का कहर ढा रही थी,,,, कुछ पल के लिए सूरज अपने जीवन में आने वाली सारी औरतों को भूल चुका था इस समय उसकी आंखों के सामने केवल सबसे खूबसूरत और जवानी से भरी हुई कमला ही थी,,,, उसके हाथ में एक छोटी सी पोटली थी और उसे पोटली को देख कर सूरज समझ गया था कि उसमें बनी हुई मछली है,,,।





कमला को देखते ही सूरज के पिताजी बोले,,।

कहां रह गई थी कमल तेरे इंतजार में कितनी बार लंड खड़ा होकर के ढीला पड़ गया,,,(शराब की बोतल को मुंह से लगाए हुए सूरज के पिताजी बोले और उसकी बात सुनकर कल्लू बोला,,)

बात तो तू सही कह रहा है यार लेकिन अब आ तो गई है ना,,,, अब इसका नाश करेंगे,,,(हाथ मिली हुई बोतल को नीचे रखते हुए कल्लू बोला,,)

आप क्या करूं दो बच्चों को खाना बना कर खिला कर सुलाना पड़ता है अब उन्हें इस तरह से छोड़कर तो नहीं आ सकती ना,,,,(नीचे जमीन पर बैठते हुए कमला बोली)





चल कोई बात नहीं रानी तू आ गई यही बहुत है एक तो पेट में चूहा भी दौड़ रहे थे और टांगों के बीच का मुन्ना भी भूख से चिल्ला रहा था,,,(कमल के गलो पर हथेली से सहलाते हुए सूरज के पिताजी बोले,,,)

अब मैं आ गई हूं ना दोनों की भूख मिटा दूंगी,,,(कपड़े की पोटली को खोलते हुए कमला बोली,,, और कल पीछे दीवाल का सहारा लेकर एकदम आराम से बैठते हुए बोला,,,)

कमला मेरी जान बगल के गांव में तू रहती है चाहते तो तेरे गांव में आकर तेरे घर में घुसकर तेरी चुदाई करते,,, लेकिन मैं अच्छी तरह से जानता हूं इसमें तेरी बदनामी है गांव में तो बदनाम हो जाएगी गांव वालों को क्या फर्क पड़ता है और वैसे भी मेरे होते हुए तुझे,, तेरे पति की कमी कभी भी महसूस नहीं होने दिया हूं तेरा खर्चा मैं ही उठाता हूं,,, और जब से भोला मिला है तब से यह भी तेरा खर्चा उठाता है,, मुझे मालूम है कि बिना पति के जीवन गुजारना कितना मुश्किल हो जाता है,,,। भला हो राजा साहब का क्यों उनके चलते हम तीनों का काम चल रहा है,,, वैसे एक बात बता,,, राजा साहब के वहां जाती है कि नहीं,,,।





राजा साहब लगता है कि तुम्हें एक दिन की भी छुट्टी देंगे रोज बुलाते हैं रोज लेते हैं,,,।

(कमल की बात सुनकर एकदम से हंसते हुए भोला बोला,,,,)

तुम्हारा राजा साहब एकदम रंगीन मिजाज का है वैसे तो मेरी मुलाकात अभी तक हुई नहीं है लेकिन राजा साहब से मिलने का मेरा भी मन करता है मैं भी तो देखूं राजा साहब दिखने में कैसा है,,, जो इतने रंगीन मिजाज का है कि,, अययास करने के लिए,, मेरे दोस्त को इतना बड़ा गोदाम भेंट में दे दिया है,,,।

सच कह रहा है भोला तू,,,, यह गोदान राजा साहब के ऐश के लिए ही है,,, लेकिन कुछ दिनों से यहां पर उनका आना हो नहीं रहा है लगता है की मालकिन मायके गई है और वह अपने कोठी पर ही बुलाकर चुदाई का कार्यक्रम निपटा रहे हैं क्यों कमला सहीकह रहा हूं ना,,,।





बिल्कुल सही कह रहे हो,,,, रोज जाना पड़ता है सुबह को शाम को राजा साहब के लिए तो अब मैं किसी दवा की तरह हो गई हूं जो दोनों समय लेना जरूरी होता है,,,(अपने हाथों से मछली और रोटी परोसते हुए कमला बोली,,,

उन लोगों की बातचीत सुनकर सूरज इतना तो समझ ही गया था कि कमला का पति नहीं था और उसे गुजर बसर करने के लिए इस तरह का काम करना पड़ रहा है मजबूरी में ही सही वह किसी भी तरह से अपने परिवार का पालन पोषण कर रही है और यह देखकर पल भर के लिए उसे अपनी मां का ख्याल आ गया सूरज अपने मन में सोचने लगा कि अगर वाकई में उसके पिताजी घर पर कभी ना आए तो कहीं उसकी मां का भी हाल ऐसा ना हो जाए वह भी मजबूरी में किसी दूसरे के आगे अपनी टांगें ना खोल दे,,, अपने मन में ऐसा ख्याल आते ही अपने मन में उठ रही शंका को खुद ही दूर करते हुए अपने आप से ही बोला,,,।





नहीं नहीं ऐसा कभी नहीं हो सकता उसके होते हुए तो ऐसा कभी नहीं हो सकता घर को चलाने के लिए उसकी मां को कभी भी ऐसा काम नहीं करना पड़ेगा,,,, और अपने मन में ऐसा सोचते हुए वह फिर से अपनी आंखों को कमला और कमला के इर्द गिर्द टिका दिया,,,, तीनों बातें करते हुए मछली और रोटी का आनंद ले रहे थे यह नजारा देखकर के सूरज को भी भूख का एहसास होने लगा क्योंकि वह बिना कुछ खाए अपने पिताजी के पीछे-पीछे यहां तक आ गया था इसलिए उन तीनों को खाना खाते देखकर उसे भी भूख लगने लगी थी तीनों खाना खा रहे थे और एक दूसरे से मजाक मस्ती भी कर रहे थे सूरज अपने पिताजी की हरकत को देख रहा था जो की निवाला मुंह में डालकर बार-बार अपने हाथ से कमल की चूची को ब्लाउज के ऊपर से ही दबा दे रहा था,,,, और यही हरकत कल्लू भी कर रहा था,,, वह दोनों इतने जोर से चूची दबाते की कमला के मुंह से रह रहकर दर्द भरी शिसकारी फूट पड़ती,,,,।





अपने पिताजी और कल्लू की हरकत को देखकर सूरज का लंड खड़ा होने लगा था,,, उसके पिताजी अपने हरकत को जारी रखते हुए मछली और रोटी का आनंद लेते हुए उसके कंधे से साड़ी का पल्लू पकड़ कर नीचे गिरा दिए थे और उसकी छाती एकदम से उजागर हो गई थी वह जिस तरह से बैठी हुई थी सूरज को उसके एक तरफ का भाग दिख रहा था और साड़ी का पल्लू हटते हैं लालटेन की पीली रोशनी में उसकी बड़ी-बड़ी चूची एकदम से पके हुए पपाया की तरह ब्लाउज में कसी हुई नजर आने लगी जो कि एकदम नुकीली लग रही थी,,,। और वह बेझिझक खाने का आनंद ले रही थी उसे बिल्कुल भी परवाह नहीं थी कि कोई मर्द उसके साथ क्या कर रहा है,,, और ऐसा तभी हो सकता है जब एक औरत किसी मर्द को बड़ी अच्छी तरह से जानती हो और उसके साथ इस तरह की हरकत बार-बार कर चुकी हो इसीलिए तो उसकी आंखों में शर्म नजर नहीं आ रही थी वह एकदम बेशरम बनी हुई थी,,,।





भोला की हरकत को देखकर कल्लू बोला,,,।

तुझसे बिल्कुल भी सबर नहींहोता,,,अरे पहले आराम से खाना तो खा ले उसके बाद जी भर कर कमला की चुदाई करेंगे,,, क्यों कमला रानी सही कह रहा हूं ना,,,।

बिल्कुल सही कह रहे हो,,, भोला तो राजा साहब से भी एक कदम आगे है,,, राजा साहब तुम एकदम आराम से आनंद लेते हुए चुदाई का मजा लेते हैं,, लेकिन तुम्हारे मित्र हैं कि इधसे तो बर्दाश्त ही नहीं होता,,, इनका बस चले तो खाते-खाते चुदाई करें,,,,(निवाला मुंह में डालते हुए कमला बोली)

सही कह रही हो कमला रानी मुझसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होता,,, तुम क्या जानो कितनी बेसब्री से तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं,,, देखो तो सही मेरी हालत,,( बैठे-बैठे ही अपने पजामे में से अपने खड़े लंड को बाहर निकालते हुए,,,) इस पर तो तरस खाओ मेरा बस चले तो तुम्हें इस पर बिठाकर तुम्हें अपने हाथों से खाना खिलाउं,,,,।

(हाथ में निवाला लिए हुए कमला सूरज के पिताजी के लंड की तरफ देखते हुए मुस्कुरा कर बोली ,)





हाय दइया तुम्हारे में तो सच में सबर नाम की कोई चीज नहीं है,,,, तुम कहते हो तो,,,(इतना कहने के साथ ही मुस्कुरा कर अपनी जगह से हल्के से अपनी बड़ी-बड़ी गांड को उठाई और सीधा जाकर बिना साड़ी उठाए हुए अपनी भारी भरकम गांड को सूरज के पिताजी के लंड पर रख दी और बैठ गई,,, यह देखकर कल्लू मुस्कुराते हुए बोला,,)

यह हुई ना बात,,, सच में जब से भोला मेरा मित्र बना है तब से हम दोनों मिलकर तेरी चुदाई करते हैं,,, अब तो आदत सी बन गई है अकेले तुझे चोदने में मजा ही नहीं आता,,,,।





अब मुझे भी अकेले मजा नहीं आता जब तक तुम दोनों साथ में नहीं होते हो तब तक मेरी बुर की खुजली मिटती नहीं है,,,(इतना सुनकर भोला अपने हाथ से निवाला बनाया और कमला को खिलाने लगा और कमल भी अपना मुंह खोलकर उसके हाथ से खाना खाने लगी,,, सूरज यह सब अपनी आंखों से देख रहा था उस कमला की बेशर्मी देख कर तो उसके भी पसीने छूट गए थे,,, वह कमला की बेशर्मी को देखता ही रह गया था,,, उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था और जिस तरह से कमला ने हरकत की थी उसे बारे में तो उसने कभी सोचा भी नहीं था लेकिन उसकी सोच के विपरीत कमला ने पूरी तरह से बेशर्मी भरी हरकत की थी जिसे साफ तरह से जाहिर हो रहा था कि वह कितनी बड़ी बेशर्म औरत थी एकदम रंडी,,,।





लेकिन उसकी हरकत को देखकर सूरज का लंड भी एकदम ताव में आ गया था,,, सूरज समझ गया था कि यह कितनी बेशर्म औरत है और ऐसे माहौल में चुदवाते समय वह एकदम रंडी बन जाती है तभी तो मर्द पूरी तरह से उसे पाने के लिए पागल हो जाता है जैसा कि उसके पिताजी,, अपने पिताजी की हरकत को देखकर सूरज को मन ही मां अपने पिताजी से नफरत हो रही थी,,, क्योंकि वह जानता था कि उसके पिताजी उसकी मां के साथ कभी भी इस तरह का बर्ताव नहीं किए होंगे भले ही चार दिवारी के अंदर लेकिन इस तरह की हरकत कभी भी उसकी मां नहीं कर सकती,,,, उसे पूरा यकीन था कि उसकी मां इतनी बेशर्म नहीं बन सकती तभी तो उसके पिताजी इस तरह का सुख ढूंढने के लिए बाहर घूम रहे हैं,,,।





सूरज अभी तक तीन औरतों के संपर्क में आ चुका था मुखिया की बीवी उसकी लड़की और सोनू की चाची और सोनू की चाची के साथ अभी तक उसका शारीरिक मिलन नहीं हुआ था लेकिन दो औरतों के बारे में अच्छी तरह से जानता था मुखिया की बीवी भी पूरी तरह से बेशर्म थी लेकिन कमल की बेशर्मी को देखकर मुखिया की बीवी की बेशर्मी फीकी लगने लगी थी वह तो चार दिवारी के अंदर किसी गैर मर्द की आंखों के सामने इस तरह की हरकत करने को कभी भी तैयार नहीं होती भले ही मुखिया की बीवी चुडक्कड़ थी लेकिन इस तरह की हरकत नहीं की थी,,,, और मुखिया की लड़की के साथ भी उसका दैहीक संबंध बन चुका था लेकिन उसकी शुरुआत का दौर था इसलिए उसकी बेशर्मी इस कदर अभी बड़ी नहीं थी जो कुछ भी करना होता था सूरज को ही करना पड़ता था,,।





लेकिन अभी का नजारा देखकर सूरज समझ गया था कि मर्द को तभी मजा आता है जब एक औरत पूरी तरह से रंडी बनकर मजा देती है। वह भी तो अपनी संपर्क में आई औरतों के साथ यही चाहता था और उन्हें खुलकर मजा भी देता था इसीलिए उसके पिताजी एक रंडी का सुख भोगने के लिए ही अपना घर परिवार छोड़कर दूसरी औरत के चक्कर में पड़े हैं और वह औरत भी तो उन्हें वही सुख दे रही थी जैसा कि उन्हें चाहिए था वैसे हालत में एक मर्द घर छोड़कर बाहर सुखना ढूंढे तो और क्या करें,,, सूरज अपने मन इस तरह का ख्याल आ रहा था और इस बारे में बड़ा गौर भी कर रहा था इसलिए कुछ पल के लिए उसे अपने पिताजी की हरकत नाजायज नहीं लग रही थी क्योंकि जिस तरह से कमला बेशरम बनकर उसके खड़े लंड पर बैठकर खाना खा रही थी वाकई में यह है बेशर्मी की सारी हदों को पार कर चुकी थी और इस नजारे को देखकर किसी का भी लंड अपनी औकात में आकर खड़ा हो जाए,,,।





इस नजारे को देख कर देखने वाले की हालत तो खराब हो ही जाएगी लेकिन जो यह पल महसूस कर रहा होगा जो यह सुख भोग रहा होगा उसकी क्या दशा होती होगी यह सोचकर ही सूरज की हालत खराब हो रही थी सूरज बड़ी गौर से उसे नजारे को देख रहा था कमला उसके पिताजी की गोद में बैठी हुई थी और खड़े लंड को अपनी गांड पर चुभता हुआ महसूस कर रही थी,,, उसके पिताजी बड़ी-भारी से निवाला अपने मुंह में डालते थे और फिर निवाला उसके मुंह में डालते थे,,, इस समय वह मादकता भरा सुख भोग रहे थे,,, पेट की भूख के साथ-साथ अपने तन की भी भूख मिटाने में लगे हुए थे जिसमें पूरा सहयोग कमला दे रही थी,,,। पल भर के लिए सूरज अपने मन में यही सोच रहा था कि काश उसके पिताजी की जगह वह होता तो कितना मजा आता अब तक तो उसका लंड साड़ी फाड़ कर उसकी बुर में घुस गया होता,,,।

कैसा लग रहा है मेरी रानी,,,,।





बहुत मजा आ रहा है मेरे राजा मैं इस तरह से कभी भी मछली रोटी खाने का सुख नहीं प्राप्त की थी जिस तरह का सुखी समय मुझे मिल रहा है,,, तुम्हारा लंड बहुत चुभ रहा है,,, मेरे राजा,,,( भोला के लंड पर बैठकर कसमसाते हुए कमला बोली,,,,,, सूरज को एकदम साफ दिखाई दे रहा था की कमला उसके पिताजी के लंड की चुभन को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी,,,। लेकिन फिर भी उसका पूरा आनंद ले रही थी,,, और कमला की हरकत को देखकर उसकी कसमसाहट को देखकर सूरज अपने मन में यही सोच रहा था कि अगर ऐसी औरत बिस्तर पर हो तो सच में मजा आ जाए,,, कमला को आनंदित होता हुआ देखकर सूरज के पिताजी,, ब्लाउज के ऊपर से उसकी चूची को दबाते हुए बोले,,,,)

तुम्हारी चूची बहुत बड़ी-बड़ी है,,,।

यह सब तुम्हारी हाथों का करामात है तुमने ही दबा दबा कर इसे ज्यादा बड़ा कर दिया है,,,,(कमला मुस्कुराते हुए बोली और उसे मुस्कुराता हुआ देख कर कल्लू बोला,,,)





सही कह रही हो कमला रानी यह मेरे दोस्त के हाथों का जादू है उसकी करामात है जो तुम्हारी चूची को सही आकार दिया है तुमसे प्यार करने लगा है मेरा दोस्त वरना इतनी बड़ी चूची तो इसकी बीवी की भी नहीं है,,, हमारी भाभी के भी तुमसे छोटी ही चूची होगी तो अंदाजा लगा लो कि मेरा दोस्त तुमसे कितना प्यार करता है क्योंकि यह प्यार का ही नतीजा है जो इतना आकार उसका बढ़ चुका है,,,,(कल्लू भोले के नशे और उसकी मदहोशी का पूरा फायदा उठाते हुए बीच में उसकी बीवी का जिक्र कर रहा था वह देखना चाहता था कि इस हालत में वह अपनी बीवी के बारे में इस तरह की बातों को सुन सकता है कि नहीं और यह सुनकर सूरज को भी गुस्सा आ रहा था कि एक बदमाश उसकी मां के बारे में इस तरह की बातें कर रहा है,,, उसकी बातों को सुनकर मुस्कुराते हुए भोला बोला,,,)

तू सही कह रहा है कल्लू ,, मेरी कमला रानी से मेरी बीवी की तुलना हुई नहीं सकती मेरी बीवी तो इसके पैर के बराबर भी नहीं है,,, तभी तो मैं पूरा सुख मेरी कमला रानी को देताहूं,,, क्यों मेरी जान मेरे साथ मजा तो आता है ना,,,(उसके गालों पर चुंबन करते हुए भोला बोला,,, तो मुस्कुराते हुए कमला बोली,,)





तुम दोनों के साथ मजा नहीं आता तो मैं यहां पर नहीं आती,,,, पति के जाने के बाद कल्लू और फिर तुम ही तो हो जिसके सहारे में,, जी रही हूं पेट की आज के साथ-साथ तन की भी आग को बुझाना बहुत जरूरी होता है,,, तुम दोनों का लंड से मेरी बुर में जाता है तो मैं सब कुछ भूल जाती हूं,,,,।

चिंता मत करो रानी आज सुबह तक तुम्हारी ऐसी चुदाई करेंगे कि लंगड़ा कर अपने घर जाओगी,,,(भोला फिर से जोर से उसकी चूची दबाते हुए बोला तो उसकी बात सुनकर कमला बोली,,)

नहीं नहीं मेरे राजा इतनी बेरहमी से मेरी चुदाई मत करना कि सुबह सबको पता चल जाए की रात भर चुदवा कर आई है।(सूरज के पिताजी के हाथ से निवाला अपने मुंह में लेकर खाते हुए बोली).





सूरज सब बातों को सुन रहा था उसकी भी हालत खराब हो रही थी लेकिन जिस तरह से उसके पिताजी ने कमला की चूचियों की तारीफ किए थे उस तारीफ को सुनकर सूरज को गुस्सा आ रहा था,,, क्योंकि सूरज अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां से ज्यादा खूबसूरत पूरे गांव में कोई नहीं थी और उसके जैसे बदन की बनावट भी किसी दूसरी औरत की नहीं थी भले ही कुछ पल के लिए सूरज कमल को देखकर मंत्र मुग्ध हो गया था,,, लेकिन उसे इस बात का एहसास था कि उसकी मां की जवानी के आगे कमल की जवानी पूरी तरह से फीकी थी भले ही कमला पूरी तरह से मजा देती हो लेकिन उसकी मां से ज्यादा खूबसूरत नहीं थी,,,, इसलिए अपने पिताजी के मुंह से किसी और औरत की खूबसूरती की तारीफ सुनकर उसे गुस्सा आ रहा था,,,,।

इस बात को वह अच्छी तरह से मानता था की जिस तरह से बिस्तर पर खुलकर कमला मजा देती है,, लेकिन उसकी मां शर्म के मारे और अपने संस्कारों के वजह से खुलकर एक रंडी की तरह अपने पति को सुख ना देती हो लेकिन खूबसूरती के मामले में वह कमला से एक कदम आगे ही थी,,,,,,,, सूरज का दिल जोरो से धड़क रहा था देखते ही देखते तीनों खाना खा चुके थे और अब चुदाई का कार्यक्रम शुरू होने वाला था,,,,, इससे पहले वह केवल अपनी मां की ही चुदाई देखा था अपने घर में,, वह उसके जीवन की पहली चुदाई थी जिसे वह अपनी आंखों से देखा था और वह भी अपनी मां की,, जोकि उसके पिताजी से ही चुदवा रही थी,,,, आज भी उसके पिताजी ही थे लेकिन उसके साथ उसकी मां नहीं थी बल्कि एक दूसरी औरत थी कमला,,,।
 
सूरज के लिए आज की रात बेहद अद्भुत थी क्योंकि आज वह किसी की औरत को अपने पिताजी से चुदते हुए देखने जा रहा था, जिसमें कल्लु सहभागी था। सूरज के लिए भी काफी मेहनत हो चुकी थी आधी रात से ज्यादा समय होने वाला था और अब तक केवल खाना खवाई हुई थी लेकिन अब चुदाई का समय हो रहा है अपनी आंखों के सामने के नजारे को देखकर सूरज के पजामे में भी तंबू बना हुआ था कमल की कामुक हरकतों को देखकर सूरज भी एकदम चुड़वासा हो चुका था,,, कमला की बेशर्मी को देखकर सूरज समझ गया था कि यह दोनों को बहुत ज्यादा मजा देने वाली है,,।





कमला सूरज के पिताजी की गोद में से उठ चुकी थी और वह,, खाने के बाद जो जूठन बचा था उसे इकट्ठा करके फेंकने के लिए गोदाम के दरवाजे तक पहुंच चुकी थी और वह जब गोदाम के दरवाजे की तरफ आगे बढ़ रही थी तो सूरज अच्छी तरह से देख रहा था कि उसके पिताजी उसके भारी भरकम नितंबों को देखकर अपने पजामे में से अपने लंड को बाहर निकाल कर उसे मुठीया रहे थे,, यह सब देखकर सूरज को अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि उसके पिताजी कितने बड़े चुडक्कड़ है जिसे वह सीधा-साधा इंसान समझता था वाकई में उसकी असलियत क्या है। सूरज की भी नजर कमला की बड़ी-बड़ी गांड पर ही टिकी हुई थी,, और वह अपने मन में सोच रहा था कि कई हुई साड़ी में जब इसकी गांड इतनी बवाल लग रही है तो बिना कपड़ों के तो इसकी गांड हाहाकार मचा देगी,,,।





तेरी हालत देखकर ही लग रहा है कि आज तु कमला की बुर का भोसड़ा बना देगा ,,(अंगड़ाई लेता हुआ कल्लु बोला,,)

तू सही कह रहा है यार मैं तो तड़प रहा हूं कि कब मेरा यह लंड कमला की बुर में समा जाए,,,।(लंड को मुठीयाते हुए सूरज के पिताजी बोले,,,)

चिंता मत कर वह भी तड़प रही है तेरा अंदर लेने के लिए लेकिन देखना पूरी कसर आज ही मत निकाल देना कि घर पर भाभी को तड़पना पड़ जाए,,,।

तू भी ना यार कहां उसका नाम ले रहा है तुझे नहीं मालूम वह कितनी ठंडी औरत है उसके साथ बिस्तर पर मजा ही नहीं आता।

क्यों क्या हो गया,,,!(एकदम से उत्साहित होता हुआ कल्लू बोला,,)





साली बिस्तर पर कुछ भी करती नहीं है,, बस टांग फैला कर पड़ी रहती है जो कुछ करना रहता है मुझे ही करना पड़ता है इसीलिए तो मजा नहीं आता इसलिए तो कमला रानी मेरे दिल की रानी बन गई है,,,।

(उसकी बात सुनकर कल्लु मन ही मन में मुस्कुराने लगा और बोला,,)

यार मुझे तो नहीं लगता की भाभी इतनी ठंडी है कितनी गर्म लगती है मुझे तो ऐसा ही लगता है कि बिस्तर पर तुझे बहुत मजा देती होगी,,।

साले वह तो मैं ही जानता हूं की कितना मजा देती है। साली अपने हाथ से लंड भी नहीं पकड़ती,,,।

(इतना सुनकर कल्लु जोर-जोर से हंसने लगा और अपने मन में सोच रहा था कि साला कितना हारामी है इतनी खूबसूरत बीवी होते हुए भी उसके बारे में ऐसा बोल रहा है मुझे मिल जाती तो राहत दिन उसकी बुर में लंड डालकर पड़ा रहता,,,, अपने पिताजी की बात को सुनकर सूरज को भी गुस्सा आ रहा था लेकिन वह कुछ कर सकते की स्थिति में नहीं था,, वह भी इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां बेहद खूबसूरत है और बिस्तर पर जबरदस्त मजा देती होगी बस मजा लेने वाला होना चाहिए,,, कल्लु की हंसी सुनकर कमला भी वहां पहुंच गई और अपनी साड़ी का पल्लू अपने कंधे पर से हटाते हुए बोली,,,)





क्या बात है बहुत हंसी आ रही है,,।

अरे कमला तू भी सुनेगी तो हसेगी,,, यह कहता है कि,, इसकी बीवी अपने हाथ से इसका लंड भी नहीं पकड़ती,,,

(इतना सुनते ही कमल भी जोर-जोर से हंसने लगी और हंसते हुए बोली)

क्या बात कर रहे हो राजा क्या सच में तुम्हारी बीवी अपने हाथ से तुम्हारा लंड भी नहीं पकड़ती,,,, तब तो वह तुम पर बहुत जुर्म करती है पता नहीं तुम्हें कैसा सुख देती होगी,,,।

अरे नहीं देती तभी तो यह तुम्हारा दीवाना है,,,।

यह बात है तब तो तुम एकदम सही जगह पर हो तुम्हें ऐसा मजा देती रहूंगी तुम जिंदगी भर याद रखोगे,,,(इतना कहने के साथ ही कमला तुरंत घुटनों के बल बैठ गई और सूरज के पिताजी के पजामी में से बाहर टनटना रहे लंड को अपने हाथ से पकड़ ली,,, और मुस्कुराते हुए अपने होठों को उसके लंड पर रख दी और जैसे ही उसके होठों का स्पर्श सूरज के पिताजी को अपने लंड पर हुआ मदहोशी में उसकी आंखें एकदम से बंद हो गई,,, और धीरे से वह अपना हाथ उठाकर कमला के सर पर रख दिया,, और कमल एकदम रंडी की तरह धीरे-धीरे करके उसके समुचे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,, कमल के रंडी पन पर सूरज की भी हालत खराब होने लगी वाकई में कमला गजब की औरत थी,,, धीरे-धीरे कमला उसके लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर कर कर चूसना शुरू कर दी और सूरज के पिताजी की हालत खराब होने लगी उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी और गहरी गहरी सांस लेने लगा,,,।





यह सब देखकर भला बदमाश कल्लु कैसे शांत रह सकता था वह जिस तरह से घुटनों के बाल झुकी हुई थी उसकी भारी भरकम गांड कल के ठीक मुंह के सामने थी और कल बैठे-बैठे ही उसकी साड़ी को ऊपर की तरफ उठने लगा और देखते ही देखते वह उसकी साड़ी को कमर तक उठा दिया उसकी नंगी गांड देखकर, कल्ल की भी हालत खराब होने लगी और देखते ही देखते वह अपना मुंह उसकी दोनों टांगों के बीच दे मारा,,, आगे से वहां सूरज के पिताजी को मजा दे रही थी और पीछे से कल्लु को,,,।

कल अच्छी तरह से देख रहा था कि दो बच्चों की भंवरी के बावजूद कि उसका वजन काफी भरा हुआ था उसमें जरा भी ढीलापन नहीं था बस कमी इस बात की थी कि वह भी उन दोनों के साथ जुड़ना चाहता था लेकिन ऐसा मुमकिन नहीं था,,, देखते ही देखते गोदाम में गरमा गरम शिसकारी गूंजने लगी जिसे सुनने वाला सूरज के सिवा वहां कोई नहीं था,,, जूठन फेंक कर आते समय इतिहास के तौर पर कमला गोदाम के दरवाजे को बंद कर दी थी,, वैसे तो उसे अच्छी तरह से मालूम था कि इतनी रात को यहां कोई आने वाला नहीं था लेकिन फिर भी औरतों को खुले से ज्यादा चार दिवारी के अंदर मजा लेने पर मजा देने में आनंद की प्राप्ति होती है और चार दीवारी के अंदर सुकून भी महसूस करती हैं,,,।





ओहहह कमला सच में तू कमाल औरत है मेरा बस चलता तो मैं तुझसे शादी कर लेता,,, इतना मजा मेरी औरत ने आज तक नहीं थी,,, साली सिर्फ देखने में खूबसूरत है लेकिन मर्दों को कैसे खुश किया जाता है उसका बिल्कुल भी ज्ञान नहीं है,,,,आहहहहह आआहहहह पूरा अंदर तक ले बहुत मजा आ रहा है,,,(उसकी बात सुनकर कमला भी उसकी आज्ञा का पालन करते हुए जितना हो सकता था उतना अपनी गले तक लेकर उसे मदहोश और मस्त करने की पूरी कोशिश कर रही थी और पीछे से कर लो उसकी गुलाबी छेद को चाट रहा था,,,। जितना मजा सूरज के पिताजी को मिल रहा था उतना ही मजाक कल्लु भी अपने आप से प्राप्त कर रहा था,,, कमला भी कल्लू के आनंद को बढ़ाते हुए अपनी भारी भरकम गोल-गोल कांड को गोल-गोल न चाहते हुए उसके मुंह पर ही रगड़ रही थी ऐसा करने में उसे भी बहुत मजा आ रहा था,,,)





कमला रानी,,,, क्या तुम मेरे साथ शादी करोगी मैं जिंदगी भर तुम्हारे साथ रहना चाहताहूं,,,(मदहोश होता हुआ भोला बोला,,, उसकी बात सुनकर सूरज को हैरानी हो रही थी,,, सूरज अच्छी तरह से जानता था उसके पिताजी के कहने के मतलब को,, शरीर सुख के लिए वह अपनी पत्नी का त्याग करके किसी विधवा के साथ शादी करना चाहता था ताकि उसके साथ जीवन भर शरीर सुख का आनंद ले सके जहां एक तरफ सूरज को अपने पिताजी की यह बात सुनकर गुस्सा आ रहा था वहीं दूसरी तरफ वह अपने मन में यही सोच रहा था कि अगर वाकई में ऐसा हो जाए तो फिर उसका रास्ता भी एकदम साफ हो जाएगा,,, उसके और उसकी मां के बीच तीसरा कोई नहीं होगा और वह अच्छी तरह से जानता था कि एक नई दिन उसके और उसकी मां के बीच इसी तरह से शारीरिक संबंध स्थापित हो जाएगा क्योंकि वह औरतो की चाहत के बारे में अच्छी तरह से समझने लगा था।





लेकिन सूरज के पिताजी की बात सुनकर कमला कुछ बोली नहीं बस अपना काम करती रही और दूसरी तरफ,,, कल्लू पागलों की तरह उसके गुलाबी छेद को चाटे जा रहा था,,,, लालटेन की पीली रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था,, सूरज की भी हालत पतली होती जा रही थी इतनी देर तक वह अपनी उत्तेजना पर काबू नहीं कर पाया था इसलिए पजामी में से अपने लंड को बाहर निकाल लिया था और उसे हल्के-हल्के दबाकर आनंद ले रहा था,,, अपनी आंखों के सामने बेहद रोमांचक और मदहोश कर देने वाले दृश्य को देखकर बड़ी मजबूरी में सूरज अपने आप को रोके हुए था अगर उसके पिताजी की जगह कोई और होता तो अब तक वह इस खेल में कब से शामिल हो चुका होता और अब तक अपना झंडा भी गाड दिया होता,, लेकिन अपने पिताजी के कारण वह मजबूर इतने बेहद मदहोश कर देने वाले दृश्य का सहभागी नहीं बन पा रहा था लेकिन इस बात की खुशी थी कि वह इतने रोमांचक दृश्य,, को अपनी आंखों से देख पा रहा था।





सूरज अपने पिताजी को बड़ी गौर से देख रहा था वह बड़ी बेशर्मी के साथ गैर औरत के साथ मदहोश हुआ जा रहा है यही कारण था कि वह महीनो से अपने घर नहीं आया था,,, देखते ही देखते वह कमला के कंधों को पकड़कर उठाते हुए बोला,,।

बस मेरी रानी तुमने अपने होठों से चुस चुस कर मेरे लंड की धार को बढ़ा दी हो,,। अब मेरी बारी है अब मैं तुम्हें इतना मजा दूंगा कि तुम हवा में उड़ने लगोगी,,,

मैं जानती हूं मेरे राजा तुम बहुत मजा देती हो आज की रात तुम्हारेनाम है,,,(गहरी सांस लेते हुए कमला बोली,,, कमला अपनी घुटनों के बल उठकर बैठ चुकी थी इसलिए उसके पीछे उसकी बुर चाट रहा कल्लु भी गहरी सांस लेता हुआ उसके पीछे बैठ गया और वह भी कमल की बड़ी-बड़ी गांड पर अपने दोनों हाथ रखकर उसे हल्के से सहलाते हुए बोला,,)





तुम बहुत पानी छोड़ती हो कमला,,,,।

पानी नहीं छोडुंगी तो तुम्हारा पानी कैसे छुड़ाऊंगी,,,,

बात तो तुम एकदम सही कह रही हो मेरी जान,,,, अब यह बता दो की सबसे पहले किसका लोगी,,,।

(उन दोनों की बातचीत हो रही थी तब तक सूरज के पिताजी अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगे हो गए और कमला उसके खड़े लंड को देखकर एकदम से मुस्कुराते हुए अपना हाथ आगे बढ़ाई और उसके लंड को पकड़ ली और बोली,,)

पहले तो मैं मेरे राजा का ही लूंगी देख नहीं रहे हो कितना तड़प रहा है मेरे बिना,,,,(कमला का इतना कहना था कि घुटनों के पर खड़े होकर सूरज के पिताजी उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचकर उसे अपनी बाहों में भर लिए और उसकी नंगी गांड को दोनों हाथों में लेकर दबोचने लगे दबाने लगे उसके लाल लाल होठों पर अपने होंठ रखकर चूसने लगे पीछे से कर लूंगी कमल के बदन से चिपक गया और उसके गर्दन पर चुंबन करने लगा सूरज यह सब देखकर मदहोश हुआ जा रहा था एक औरत दो दो आदमियों को सुख दे रही थी यह नजारा सूरज के लिए पहली बार का था और वह कभी सोचा भी नहीं था कि एक औरत एक साथ दो मर्दों को मजा देती होगी लेकिन आज अपनी आंखों से देख रहा था इसलिए वह बेहद अचंभित था और उत्साहितभी,,। सूरज के पिताजी जोर-जोर से कमला की बड़ी-बड़ी गांड को रगड़ रहे थे मसाला रहे थे,, और कल्लू आगे से जगह बनाकर अपने दोनों हाथों को कमला की चूची पर रखकर ब्लाउज के ऊपर से जोर-जोर से दबा रहा था। और कमला भी कम नहीं थी वह एक साथ अपने दोनों हाथों का प्रयोग करते हुए एक हाथ में सूरज के पिताजी का लंड पकड़े हुए थी और दूसरे हाथ को पीछे की तरफ लाकर पजामे के अंदर हाथ डालकर कल्लु के लंड को पकड़ी हुई थी,,, इस नजारे को देखकर ही कमला की बेशर्मी का अंदाजा लग रहा था,,,।





इस मदहोश कर देने वाले दृश्य को देखकर सूरज समझ नहीं पा रहा था कि पति के न होने पर यह कमल की मजबूरी थी उसकी मदहोशी और वासना थी जो एक मर्द से पूरी नहीं हो रही थी,,, सूरज इस बात को नहीं समझ पा रहा था कि वाकई में यह एक औरत की मजबूरी भी थी और उसकी जरूरत भीथी,, जिसका एक साथ कमला वहन कर रही थी,,, बात अगर पेट भरने की होती तो खेतों में मजदूरी करके उसके खुद के भी खेत थे उनमें ही खेती करके वह अपना और अपने बच्चों का पेट पाल सकती थी लेकिन जरूरत पेट की भूख के साथ जिस्मानी भूख की भी थी जिसे पूरा करने के लिए खेतों में अनाज नहीं बल्कि बिस्तर पर मर्द की जरूरत थी और इसीलिए तो एक साथ तो दो मर्दों के साथ मजा ले रही थी कमला,,,।

देखते ही देखते कल भी अपने कपड़े उतार कर एकदम नंगा हो गया था और सूरज के पिताजी अपने हाथों से कमल के वस्त्र को उतार कर उसे नंगी करने का सुख भोग रहे थे,,, सूरज अपने पिताजी के साथ-साथ कल के भी लंड को देख रहा था और फिर अपने लंड की तरफ देख रहा था उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि दोनों से दमखम लंबाई और मोटाई वाला लंड उसके पास था,,, इस बात का गर्व उसे हो रहा था,,, और इस बात से भी हुआ अच्छी तरह से परिचित था कि अगर उसे मौका मिले तो वह अकेले ही कमला की बुर का भोसड़ा बना दे,, अपनी मर्दाना ताकत को वह मुखिया की बीवी पर आजमा चुका था उसकी चुदाई करते समय बहुत पसीना पसीना हो जाती थी और चुदवाने के बाद लंगड़ा कर चलती थी,,।





वादे के मुताबिक कमला घोड़ी बन चुकी थी और घुड सवार था सूरज का बाप,,, वह पीछे से अपने लिए जगह बना रहा था और देखते-देखते उसकी भारी भर कम गोल-गोल गांड के बीचों बीच वह उसके गुलाबी छेद में अपने लंड को डालकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था,,,, और कल्लु आगे से कमला के मुंह में अपना लंड डालकर अपनी कमर हिला रहा था,,, यह सब देखकर सूरज से रहा नहीं जा रहा था और वह अपने लंड को मूठ मारना शुरू कर दिया था उसकी भी हालत पल-पल खराब होती जा रही थी बहुत मन कर रहा था कि इस खेल में शामिल हो जाए लेकिन अपने पिताजी की वजह से वह अपने कदम आगे नहीं बढ़ा पा रहा था,,, सूरज अच्छी तरह से देख रहा था उसके पिताजी की कमर बड़ी तेजी से मिल रही थी एक बात तो थी कि उसके पिताजी में भी बहुत दम था क्योंकि वह पहले भी अपने पिताजी को अपनी ही मन को चोदते हुए देख चुका था अपनी मां की चुदाई को पर अपनी आंखों से देख चुका था और जिस तरह से उसे दिन धक्के लगा रहे थे उससे तेज धक्का आज उसके पिताजी कमल की बुर में लगा रहा था,,,





हर धक्के के साथ कमला गिरने को हो जाती थी लेकिन आगे से कल उसके कंधों को पकड़कर सहारा दिए हुए था,,, और सूरज के पिताजी के जोश को बढ़ाते हुए बोल रहा था,,,।

वह मेरे दोस्त गजब की चुदाई करता है तु कमला की बुर का तो भोसड़ा बन जाएगा आज ,,(अपनी कमर को हिलता हुआ कल्लू बोला,,, और उसकी बात सुनकर मुस्कुराते हुए सूरज के पिताजी बोले,,)

संभाल कर देखना कहीं तेरा पानी न निकल जाए,,,

अरे नहीं अभी तो बहुत बाकी है मुझे भी बहुत मजा आ रहा है,,,, बस ऐसे ही चुदाई करता रहे,,,।

(तीनों आनंद के सागर में गोते लगा रहे थे,, लालटेन की पीली रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था वैसे तो बड़े से गोदाम में छोटे से लालटेन की कोई कीमत नहीं थी लेकिन फिर भी उसे लालटेन की रोशनी इतनी तो आ ही रही थी की सूखी हुई घास में तीनों को बराबर सूरज देख सके और उतना ही नजर भी आ रहा था,,, तीनों संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था में थे तीनों के बदन पर कपड़े का रेसा तक नहीं था,,, और यही नियम भी है संभोग करने का बिना वस्त्र के संभोग क्रीडा में जो आनंद प्राप्त होता है वह कपड़े पहनकर बिल्कुल भी नहीं औरत के नंगे बदन का मर्दों के नंगे बदन से स्पर्श होना,,, आग में घी का काम करती है,,, सूरज के पिताजी पूरा दमखम दिखा रहे थे और कल्लु अपने आप को बचाने की कोशिश में लगा हुआ था उसे इस बात का डर था कि बिना कमला की बुर में डाले कहीं उसका पानी ना निकल जाए,,,।





एक ही आसान में सूरज के पिताजी लगातार लगे हुए थे उनकी कमर और घुटना बिल्कुल भी दर्द नहीं कर रहा था,,, लेकिन तभी कमला के मुंह से आ रही गरमा गरम शिकारी की आवाज तेज होने लगी,,, वह अपने मुंह में से कल्लू के लंड को बाहर निकाल दी थी,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे वह झड़ने वाली है वह अपने चरम सुख के बेहद करीब हो चली थी और देखते ही देखते सूरज के पिताजी की हथेलियां की पकड़ उसकी कमर पर बढ़ने लगी थी और वह भी अपने चरण सुख के बेहद करीब थे इसलिए तो वह जोर-जोर से धक्के पर धक्के लगाते हुए मदहोश हुए जा रहे थे और देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ने लगे,,, कमला के पसीने छूट गए थे,,, सूरज के पिताजी तब तक अपने लंड को कमल की बुर में से बाहर नहीं निकाले जब तक उनके लंड में से पानी की आखिरी बुंद तक नहीं निकल गई,,,,।





कमला पीठ केबल लेट गई थी और सूरज के पिताजी दीवाल का सहारा लेकर गहरी गहरी सांस ले रहे थे लेकिन अभी कल्लु बाकी था,, उससे रहा नहीं गया और वह तुरंत वह कमला की दोनों टांगों के बीच आ गया और अपने लिए जगह बनाते हुए,,, अपने लंड को कमला की बुर में डाल दिया,,, कमला को बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ा कमला उसी तरह से लेटी रही और गहरी गहरी सांस लेते रही,,, और कल्लू अपना काम करता रहा,,,, लेकिन थोड़ी ही देर में वह अपना काम तमाम कर चुका था वह झड़ चुका था और उसके ऊपर ही पसर गया था,,,, पल भर में ही सूरज कल्लु की मर्दाना ताकत से वाकिफ हो चुका था,, वह ज्यादा देर तक टिक नहीं सकता था बस उसमें उपासना ज्यादा थी,,,।





तीनों लेटे हुए थे,, तीनों थक चुके थे कमला भी थक चुकी थी उसको थकने में सूरज के पिताजी का ज्यादा हाथ लेकिन फिर भी सूरज के पिताजी एक हाथ उसकी नंगी चूची पर रखकर उसे हल्के हल्के दबा रहे थे ऐसा लग रहा था कि वह फिर से तैयार हो रहे थे और कमला को भी तैयार कर रहे थे,, और ऐसा ही हुआ तकरीबन 20 मिनट के बाद बातचीत करने के बाद सूरज के पिताजी अपनी हरकतों से कमला को फिर से तैयार कर चुके थे सूरज भी देख रहा था उसके पिताजी का लंड एक बार फिर से खड़ा हो चुका था,, और इस बार कमला सूरज के पिताजी के लंड के ऊपर सवार हो चुकी थी और खुद ही बागडोर संभाल कर अपनी बड़ी-बड़ी गांड को उसके लंड पर पटक रही थी,, इसी बीच कल्लु भी अपनी जगह से उठकर कमला की चूची पीना शुरू कर दिया था,,।





सूरज अभी भी बरकरार था वह मुठ मार कर भी अभी नहीं झाड़ा था और फिर से मुठ मारना शुरू कर दिया इस बार उसकी मदहोशी बढ़ने लगी थी और जोर-जोर से अपने लंड को हिला रहा था और कमल भी फुर्ती दिखाते हुए गांड को उसके पिताजी के लंड पर पटक रही थी,,, और इस बार पूरी तरह से कमला उसके पिताजी पर छा गई थी वह आगे की तरफ झुक कर अपनी नजर को पीछे घूमा कर अपनी बड़ी-बड़ी गांड की तरफ देख रही थी जो की रबड़ के गेंद की तरह ऊपर नीचे हो रही थी,,,। थोड़ी ही देर में फिर से दोनों झड़ चुके थे और इस बार सूरज भी झड़ चुका था जैसे ही सूरज के पिताजी का लंड उसकी बुर में से बाहर निकला कल्लु अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया और कमला की गांड के पीछे जाकर अपने लिए जगह बनाने लगा,, कमला सूरज के पिताजी पर लेटी हुई थी और इस अवस्था में ही कल्लु अपने लिए जगह बनाकर पीछे से उसकी बुर में डाल दिया और चोदना शुरू कर दिया वह भी थोड़ी देर में झड़ गया,,, यह सिलसिला एक बार फिर चला लेकिन तब तक सुबह के 4:00 चुके थे,,,,।





कुछ देर तक कमला नग्न अवस्था में ही दोनों के बीच सो ही रही और फिर जब आंख खुली तो वह भी धीरे से उठकर खड़ी हो गई रोकने कपड़े पहने लगी तब तक दोनों गहरी नींद में सो रहे थे और वहां धीरे से गोदाम का दरवाजा खोलकर बाहर निकल गई और यही मौका देखकर सूरज भी धीरे से गोदाम के बाहर निकल गया,,,। सूरज के लिए आज की रात बेहद अद्भुत और मदहोश कर देने वाली थी लेकिन अपनी मदहोशी ऐसे में वह सोच रहा था कि अगर मौका मिलता तो वह भी कमला की जी भर कर चुदाई कर लेता,,,, यही सोचते हुए वह धीरे-धीरे अपने घर की तरफ निकल गया अभी भी अंधेरा था।



 
सूरज ने जो कुछ भी देखा था उसे देखकर उसे गुस्सा भी आ रहा था और अपनी किस्मत पर गर्व भी हो रहा था क्योंकि जो कुछ भी उसने अपनी आंखों से देखा था उसके दो पहलू थे एक तो यह कि उसके पिताजी उसकी मां के साथ इंसाफ नहीं कर रहे थे और , अपनी बीवी को छोड़कर वह किसी गैर औरत के साथ रंगरेलियां बना रहे थे इस बात से सूरज के मन में दुख का भी आभास हो रहा था और इसका दूसरा पहलू यह था कि अपने पिताजी की बेवफाई उसके लिए सुख का रास्ता खोल रही थी क्योंकि वह जानता था कि अगर इसी तरह से चला रहा तो एक न एक दिन उसका सपना सच हो जाएगा,,‌ इसलिए सूरज को अपने पिताजी से नाराज़गी भी थी और खुशी भी थी,.





सूरज अपने घर लौट चुका था लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह जो कुछ भी अपनी आंखों से देखा अपनी मां से बताएं या ना बताएं उसके मन में तो बहुत सारी बातें चल रही थी वह अपने मन में यह भी सोच रहा था कि उसे अपनी मां से कुछ भी नहीं छुपाना चाहिए अपने पिताजी के बारे में सब कुछ खोल कर बता देना चाहिए ताकि उसकी मां के दिल में उसके प्रति स्नेह जागने लगे. और इस बात से वह खुश भी था। वह जानता था कि एक औरत अपने पति से अगर संतुष्ट न हो तो वह दूसरी मर्द की तरफ आकर्षित हो ही जाती है फिर यहां तो मामला बेवफाई का था और एक औरत बेवफाई को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पाती और ऐसे में बदला लेने के आवेश में उसके बेहद करीब रह रहे मर्द के साथ संबंध बनाने में भी बिल्कुल भी नहीं कतराती,,। इसलिए सूरज जल्द से जल्द अपनी मां से सब कुछ बता देना चाहता था।





इसलिए वह बड़े सवेरे घर पर पहुंच चुका था घर पर पहुंचा तो देखा कि उसकी मां घर के आंगन में झाड़ू लगा रही थी और मन ही मन कुछ गुनगुना रही थी अपनी मां को इस तरह से खुश होता देखकर और कोई गीत गुनगुनाते देखकर सूरज की हिम्मत नहीं हुई कि वह अपनी मां से उसके पति के बेवफाई के बारे में बता सके यह बता सके की उसके पति का किसी गैर औरत के साथ जिस्मानी तालुका आते हैं और वह उसे औरत से शादी करना चाहता है और तुम्हें छोड़ना चाहता है सूरज अच्छी तरह से जानता था कि इस तरह की बात करके वह अपनी मां को दुखी कर देगा और इतना खूबसूरत चेहरा दुखी अवस्था में वह देखना नहीं चाहता था इसलिए वह इस समयअपनी मां से कुछ भी बताना जरूरी नहीं समझा और सही समय का इंतजार करने लगा।





अपनी मां के करीब पहुंचकर वह अपनी मां से बोला,,

क्या बात है मां आज बहुत खुश नजर आ रही हो,,,।

तु,,,(झाड़ू को हाथ में लिए हुए ही नजर ऊपर करके सूरज की तरफ देखते हुए थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली) पहले यह बात की रात भर था कहां तु,,,?

मैं तो यही था अपनी दोस्त के घर पर रुक गया था। (बहाना बनाते हुए सूरज बोला)

कौन से दोस्त के पास रुक गया था जरा मुझे भी तो बता रात भर तुझे ढूंढती रही,, रात को नींद भी नहीं आई,।

तुम्हें अगर इतनी चिंता थी तो अभी तो कुछ गुनगुना रही थी एकदम खुश नजर आ रही थी।





अरे बेवकूफ दूर से आता हुआ तुझे देख ली थी इसलिए एकदम से खुश हो गई थी समझा ,,,(झाड़ू लिए हुए ही खड़ी होते हुए बोली)

ओहहह यह बात है,, तभी मुझे लगा कि आज इतना खुश कैसे दिखाई दे रही हो ,,(इतना कहकर वह घर के अंदर प्रवेश करने लगा,,, उसकी बात सुनकर नाराज होते हुए सुनैना उसकी तरफ आगे बढ़ते हुए बोली)

क्यों तेरे बाप की तरह तू भी मुझे खुश होता हुआ नहीं देख सकता तुझे भी परेशानी हो रही है मुझसे,,,।

(तब तक घर के अंदर सूरज प्रवेश कर चुका था और उसके पीछे भी पीछे उसकी मां भी घर में प्रवेश कर चुकी थी सुनैना के चेहरे पर गुस्सा साफ नजर आ रहा था अपनी मां की बात सुनकर एक पल के लिए सूरज को लगा कि वह इसी समय अपनी मां से कह दे की पिताजी का ही पता लगाने के लिए रात भर भटक रहा था और उन्हें सब कुछ बता दे लेकिन फिर वह कुछ बोल नहीं पाया और एकदम से खामोश रह गया,,, तब तक सुनैना उसके करीब पहुंच चुकी थी और उसका हाथ पकड़ कर उसे रोकते हुए बोली,,,)





बता क्या तू भी मुझे खुश देखना नहीं चाहता तू भी तेरे बाप की तरह मुझे छोड़ कर जाना चाहता है अगर ऐसा है तो चले जा,,,।

क्या कह रही हो मां,,,, मैं भला ऐसा कैसे कर सकता हूं,,,।

नहीं तू भी कर सकता है तभी तो रात भर बिना बताए गायब रहा,,,।

अब कैसे कहूं दोस्त किधर रुक गया था ज्यादा रात हो गई थी इसलिए वापस नहीं आया,,, वैसे तो मैं आना चाहता था लेकिन उसने मुझे आने नहीं दिया,,,।

(हैरानी से अपनी मां की तरफ देखते हुए सूरज बोला उसकी मां की आंखों में आंसू था वह समझ सकता था अपनी मां का दर्द वह समझ सकता था कि उसकी मां के मन में क्या चल रहा है जिस तरह से बिना बताए उसके पिताजी घर छोड़कर किसी औरत के चक्कर में चले गए हैं इसी बात का डर उसकी मां की आंखों में दिखाई दे रहा था वह भी यही सोच रही थी कि कहीं उसका बेटा उसके पिताजी की तरह घर छोड़कर ना चला जाए,,,,.





सूरज से रहा नहीं गया,,, अपनी मां की परेशानी और उसका उदास चेहरा उसे देखा नहीं की और वह अनजाने मे हीं अपनी मां का हाथ पड़कर उसे अपनी तरफ खींच लिया और उसे एकदम से अपने सीने से लगा लिया,,, यह सूरज की तरफ से अपनी मां के लिए सहानुभूति था वह उसे अपने सीने से लगा लिया था उसकी मां भी उसके सीने से लग कर आंसू बहाने लगी थी औरबोली,,,।

कसम खा मेरी मुझे छोड़कर नहीं जाएगा ना,,,

किसी बातेंकर रही हो मां,,, मैं भला तुम लोगों को छोड़कर कहां जाऊंगा मैं कसम खाता हूं मैं पिताजी की तरह बिल्कुल भी नहीं करूंगा जिंदगी भर तुम लोग के साथ रहूंगा,,,,(ऐसा कहते हुए सूरज अपनी मां की पीठ पर हाथ रखकर उसे सहला रहा था सहानुभूति के तौर पर,, यह बिल्कुल औपचारिक था इसमें जरा भी वासना और आकर्षक बिल्कुल भी नहीं था लेकिन थोड़ी ही देर में सुनैना के कंधे पर से साड़ी का पल्लू हल्का सा नीचे सरक गया और सूरज की हथेली उसकी नंगी चिकनी पीठ पर सरगोशी करने लगी उसकी पीठ पर घूमने लगी और थोड़ी ही देर में सूरज के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी।

से





सुनैना भी एकदम सहज थी एकदम औपचारिक रूप से अपने बेटे के सीने से लगी हुई थी क्योंकि उसके मन में दर्द था एक डर था कि कहीं उसका बेटा भी उसे उसके पिताजी की तरह छोड़ करना चला जाए लेकिन जैसे ही सुनैना को एहसास हुआ कि उसके बेटे की हथेली उसकी नंगी पीठ पर,, जोकि ब्लाउज के बीच की जगह पर घूम रही है तो एक अलग ही एहसास उसे अपने बदन में महसूस होने लगा,,, सूरज कुछ पल के लिए समझ नहीं पाया कि वह क्या कर रहा है,,,, वह भी सहज रूप से अपनी मां के लगाव के कारण उसे अपने सीने से लगा लिया था लेकिन अब हालात धीरे-धीरे उसे कीसी और दिशा में मोड रहा था,,, सूरज के दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी क्योंकि उसे इस बात का एहसास अच्छी तरह से होने लगा था कि अनजाने में ही वह अपनी मां को अपने गले से लगा लिया था।।





नंगी चिकनी पीठ वैसे तो ब्लाउज पहनी हुई थी लेकिन फिर भी पीछे की ब्लाउज वाला हल्का सा हिस्सा उजागर ही रहता है और उसी पर सूरज की हथेली घूम रही थी इसका एहसास सुनैना को भी होने लगा था सुनैना भी भाव में आकर अपने बेटे की छाती से लग गई थी और उसे अब एहसास होने लगा था कि, भले ही वह अपने बेटे की छाती से लगी हुई है लेकिन है तो वह एक मर्द ही उसकी हरकत का एहसास सुनैना को होने लगा था लेकिन न जाने क्यों सुनैना उससे अलग नहीं हो पा रही थी और गहरी गहरी सांस ले रही थी उसके नथुनों से निकलने वाली गर्म-गर्म सांसे उसकी छाती पर गर्माहट दे रही थी जिसका एहसास सूरज को अच्छी तरह से हो रहा था और वह अपनी मां की स्थिति को समझने लगा था,,,।





कुछ जब सूरज ने देखा कि उसकी हरकत के बावजूद भी उसकी मां उससे अलग नहींहो रही है तो उसकी हिम्मत बढ़ने लगी और दूसरा हाथ तुरंत तो अपनी मां की चिकनी कमर पर रख दिया एकदम मांसल और मखमल जैसी चिकनी कमर पर हाथ रखते ही सूरज के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी और इसका एहसास उसे पल भर में अपनी दोनों टांगों के बीच होने लगा उसके दोनों टांगों के बीच की स्थिति बेकाबू होती जा रही थी। पल भर में उसकी आंखों के सामने उसके पिताजी का चेहरा घूमने लगा उसकी आंखों के सामने रात में देखे गए कामुक दृश्यों की झड़ी गुजरने लगी,,, वह अपने मन में सोचने लगा कि कैसे उसके पिताजी खूबसूरत बीवी के होने के बावजूद भी किसी गैर औरत के साथ जिस्मानी ताल्लुकात बनाकर मजा लूट रहे हैं,, और अपनी बीवी को तड़पने के लिए छोड़ दिए हैं।





सूरज की दूसरी हथेली अपनी मां की चिकनी कमर पर घूम रही थी उसे अपनी मां की चिकनी कमर पर अपनी हथेली घूमना बहुत अच्छा लग रहा था और उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी अपनी पत्नी चिकनी कमर पर अपने बेटे की हथेली की गरमाहट को मैसेज करते ही सुनैना पिघलने लगी उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार जवाब देने लगी उसके बदन में उठ रही उत्तेजना की लहर का केंद्र बिंदु उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार रही थी जो की पूरी तरह से उसे अपने बेटे के काबू में दे चुकी थी। दोनों की गरमा गरम सांसें एक दूसरे को गर्म कर रही थी। घर में इस वक्त रानी मौजूद नहीं थी सिर्फ दोनों मां बेटे ही थे ,, ओर इस बात को सूरज अच्छी तरह से जानता था





जिस तरह के हालात दोनों के बीच बना रहे थे उसे देखते हुए सूरज के मन में खुशी की लहर उठने लगी और उसे सोनू की चाची याद आ गई जब वह मशीन चालू करने के लिए टूटी हुई मडई में गया था सोनू की चाची के साथ और वहां पर जो कुछ भी हुआ था वह पूरी तरह से उसे मदहोश कर देने वाला था सोनू की चाची की खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी चूचियों को देखकर वह बेकाबू हो चुका था और उसे दोनों हाथों में लेकर जोर-जोर से दबा रहा था और उसका स्तनपान कर रहा था। उसे समय सूरज की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था सूरज को लगने लगा था कि सोनू की चाची मड़ई में ही अपना सर्वस्व उसके ऊपर निछावर कर देगी लेकिन एन समय पर सोनू के चाचा वहां पर आ गए थे और दोनों के बीच जो कुछ भी होने वाला था उस पर पुर्नविराम लग गया था। सूरज अपनी मां को बाहों में लिए हुए इस समय यही सोच रहा था कि जब एक औरत पति के होने के बावजूद भी उसे संतुष्ट न होकर उसके साथ मजा लूटने के लिए तैयार हो गई थी तब तो यहां उसकी मां जो अपने पति का प्यार कुछ महीने से बिल्कुल भी नहीं पाई थी ऐसे में उसका बहकना एकदम लाजमी था,,।





और इसीलिए सूरज की खुशी का ठिकाना नहीं था क्योंकि उसकी हरकत का उसकी मां बिल्कुल भी विरोध नहीं कर रही थी इसलिए तो उसकी हिम्मत बढ़ती जा रही थी वह पूरी तरह से अपनी मां को अपनी छाती से लगाए हुए उसके बदन से खेलने का अपने मन में ठंड लिया था इसलिए तो उसकी नंगी पीठ और उसकी चिकनी कमर पर अपनी हथेली को घूमते घूमते हैं वह अपनी दूसरी हथेली को भी नीचे की तरफ ले जाने लगा और अगले ही पल वह अपने दोनों हथेली को उसकी कमर पर रखकर पागल हुआ जा रहा था उसका मन तो कर रहा था कि इसी समय अपनी मां के लाल लाल होठों को अपने होठों में भरकर उसके होठों का रसपान करने लगे।





लेकिन न जाने क्यों ऐसा करने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी लेकिन जो कुछ भी हुआ कर रहा था जो कुछ भी हो रहा था उसमें ही उसे आनंद की पराकाष्ठा महसूस हो रही थी देखते-देखते पजामी ने उसका लंड कोई तरह से अपनी औकात में आ चुका था और देखते ही देखते पजामे में तंबू बन कर साड़ी के ऊपर से ही ना जाने का उसकी मां की दोनों टांगों के बीच ठोकर मारने लगा,,, इस ठोकर को सुनैना बड़ी अच्छी तरह से महसूस कर रही थी और मदहोश हुए जा रही थी वह इस समय भूल चुकी थी कि वह अपने बेटे की बाहों में है अपने बेटे की मर्दाना छाती की गर्मी उसे पूरी तरह से पिघलाने पर मजबूर कर रही थी। दोनों की सांस गहरी चलने लगी थी,,, वक्त के साथ दोनों मदहोश हुए जा रहे थे,, सूरज कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि घर पर पहुंचने पर इस तरह के हालात दोनों के बीच पैदा होंगे।





जिस के हालात दोनों के बीच पनप रहे थे वह बेहद मदहोशी और कामुकता से भरा हुआ था। यह बेहद पतली लकीर थी लेकिन इस पार करने में दोनों के पसीने छूट रहे थे सूरज मदहोशी के आलम में उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान हो चुका था और उसका लंड अपनी औकात में आकर अपनी मां की बुर पर ठोकर मार रहा था साड़ी के ऊपर से ही अपने बेटे के मजबूत तगड़े लंड को अपनी बर पर महसूस करके सुनैना की हालत खराब होने लगी थी। सुनैना को अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि अगर उसकी तरफ से उसके बेटे को छूट मिल जाए तो साड़ी सहित वह अपने लंड को उसकी बुर में उतार देगा और इस बात से सुनैना एकदम गदगद हुए जा रही थी।





सुनैना की बुर पानी छोड़ रही थी,, महीनो से वह पुरुष संसर्ग के लिए तड़प रही थी इसलिए तो अपने बेटे की बाहों में पिघलने लगी थी उसे इस बात का अहसास तक नहीं था कि वह क्या कर रही है। तभी सूरज को एहसास हुआ कि उसकी मां अपनी कमर को उसकी तरफ बढ़ा रही थी वह उसके लंड को अपनी बुर में अच्छी तरह से महसूस करना चाहती थी और इस बात का अहसास होते हैं सूरज पूरी तरह से मदहोश हो गया और तुरंत अपनी दोनों हथेलियां को साड़ी के ऊपर से अपनी मां के भारी भरकम नितंबों पर रखकर उसे एकदम से दबोच लिया और उसे अपनी तरफ खींच लिया ऐसा करने से तुरंत पजामे में तना हुआ उसका लंड साड़ी सहित उसके गुलाबी पर की पत्तियों को हल्के से खोलता हुआ अंदर की तरफ प्रवेश करने लगा यह एहसास सुनैना के लिए पूरी तरह से बेकाबू और मदहोश कर देने वाला था। वह एकदम से तड़प उठी और अपने बेटे के सीने से चिपक गई।

अपनी मां की हालत को देखकर सूरज की भी हालात पूरी तरह से खराब हो गई और वह समझ गया कि उसकी मां समर्पण के लिए पूरी तरह से तैयार है और वह अपनी मां की सारी उठाने के बारे में सोच रहा था वह अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठाकर अपने लंड को उसकी बुर में डाल देना चाहता था क्योंकि उसे लग रहा था कि यही सही मौका है अपना सपना पूरा करने का और इसके लिए वह अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर चुका था क्योंकि वह जानता था कि अब उसकी मां विरोध करने वाली नहीं है इसलिए वह जैसे ही दोनों हाथों से अपनी मां की साड़ी उठाने को हुआ वैसे ही घर के बाहर बर्तन के गिरने की आवाज आई और दोनों एकदम से होश में आ गए और एक दूसरे से अलग हो गए।

सुनैना जल्दी से रसोई में जाकर बैठ गई और सूरज अपने पजामे में बने तंबू को छुपाने के लिए एकदम से खटिया पर जाकर बैठ गया,,, दोनों सही समय पर एक दूसरे से अलग हुए थे क्योंकि रानी बाल्टी में पानी भरकर घर के अंदर प्रवेश कर चुकी थी अच्छा हुआ कि सही समय पर बर्तन गिर गया और दोनों एक दूसरे से अलग हो गए वरना यह नजारा रानी अपनी आंखों से देख लेती वैसे भी वह पहले से ही अपने भाई की हरकत से मदहोश हो चुकी थी और दिन रात अपने भाई के बारे में ही सोच रही थी।

सुनैना को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उसका चेहरा उत्तेजना से एकदम लाल हो चुका था पल भर पहले जो कुछ भी हुआ था वह पूरी तरह से उसकी जवानी को निचोड़ देने वाला था उसे अपनी बुर पानी पानी होती हुई महसूस हो रही थी। वह जानबूझकर चूल्हा जलाने लगी थी और सूरज बैठकर इधर-उधर देखने लगा था वह भी कुछ बोलने लायक नहीं था और सुनैना अपने बेटे से नजर तक नहीं मिल पा रही थी तभी रानी उन दोनों के करीब पहुंच गई और अपने भाई को खटिया पर बैठे हुए देखकर बोली।

अरे भाई तू कहां था रात भर हम दोनों कितना परेशान हुए थे तुझे मालूम है कहीं जाना था तो बात कर जाना था ना बिना पता इस तरह से रात भर गायब रहा।

अब तू भी शुरू हो गई,,, मां को मैंने सब कुछ बता दिया हुं दोस्त के वहां था ,,,,

लेकिन बता कर तो जाना था ना,,,,

अब आगे से बात कर जाऊंगा ठीक है मुझे क्या मालूम था कि तुम दोनों इतना परेशान हो जाओगे।

(अांवले वाले दिन से लेकर के आज वह दिन था जब रानी अपने भाई से इस तरह से बात की थी वरना उसे दिन से तो वह अपने भाई से नजर तक मिला नहीं पाती थी। और इस बात की खुशी सूरज के चेहरे पर नजर आ रही थी दोनों के बीच की स्थिति अब सामान्य हो रही थी,,, दोनों के बीच इतना बातचीत हो गया था लेकिन शर्म के मारे सुनैना कुछ बोल‌ नहीं पा रही थी।

स्थिति को देखते हुए सूरज भी कुछ बोला नहीं और पास में पड़ी दातुन को हाथ में लेकर घर के बाहर निकल गया।
 
जो कुछ भी हुआ था उसे सुनैना बेहदअचंभित थी,,, यह सब क्या हुआ कैसे हुआ उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह तो अपने बेटे के रात भर घर ना आने की वजह से चिंतित थी और इसीलिए सुबह-सुबह अपनी बेटी को घर आता देखकर वह अंदर ही अंदर बहुत खुश नजर आ रही थी एक तरफ से वह अपने बेटे से नाराज भी थी और उसे देखकर खुश भी थी यह नाराजगी और प्रसन्नता का मिला जुला असर था जो वह एकदम से भावुक हो गई थी,,। वैसे भी उसकी जगह कोई और मां होती तो शायद उसकी भी यही हालत होती जैसा कि उसकी हालत हुई थी अपने बेटे को देखकर,,,।





और इसीलिए भावुकता में वह पूरी तरह से बह गई थी वह अपने बेटे को भी अपने पति की तरह खोना नहीं चाहती थी जिस तरह से उसका पति बिना कहे छोड़कर ना जाने कहां चला गया था जिसका कोई अदा पता नहीं था इसलिए अपने बेटे को एक रात घर से गायब देखकर वह भी बेहद चिंतित हो गई थी और इसीलिए तो वह अपने बेटे को देखकर भावुकता में बहकर उसके सीने से लग गईथी,, लेकिन इसके बाद जो कुछ भी हुआ वह उसे पूरी तरह से चिंतित कर दिया था यह सब कैसे हो गया उसे समझ में नहीं आ रहा था लेकिन उसे इतना एहसास तो था कि उसका बेटा पूरी तरह से जवान हो गया था हट्टा कट्टा मर्द बन गया था शायद इसीलिए एक औरत को अपनी बाहों में देखकर वह अपने मन पर काबू नहीं कर पाया और उत्तेजित हो गया,,, उसे अपने बेटे से इस तरह की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन जैसा भी उसने अनुभव की थी वह बेहद चिंताजनक था।





एक मा होने के नाते उसे अपने बेटे की हरकत कुछ अच्छी नहीं लग रही थी वह समझ नहीं पा रही थी ऐसा कैसे हो गया था वह रसोई बनाते समय इसी बारे में सोच रही थी और काफी हैरान थी उसे अपने बेटे से इस तरह की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी,, आज पहली बार ऐसा हुआ था जब वह अपने बेटे के सीने से लग गई थी और उसका बेटा भी उसे अपनी छाती से लगाकर कुछ ही देर में उत्तेजना के सागर में बैठे हुए उसके अंगों पर अपने हथेली का कसाव देने लगा था यह सब भी सुनैना सह जाती है लेकिन जब उसे अपनी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार पर उसके बेटे का लंड ठोकर मारता हुआ महसूस हुआ तो वह एकदम से दंग रह गई थी।





एक औरत सोने के नाते वशीकरण से जानती थी कि एक मर्द का लंड किस अवस्था में खड़ा होता है किसलिए खड़ा होता है,,, सुनैना इस बात को अच्छी तरह से जानती थी की मर्द का लंड जब एक औरत उसके बेहद नजदीक होती है करीब होती है और जब वह चुदवासा महसूस करता है तभी उसका लंड खड़ा होता है यही सब सो कर वह परेशान हो जा रही थी कि क्या उसका बेटा अपनी मां की उपस्थिति में उत्तेजित हो रहा था क्या सच में उसे अपनी बाहों में भरकर उसका बेटा उसे चोदने का सोच रहा था अगर ऐसा नहीं होता तो उसका लंड खड़ा क्यों होता,,, और उत्तेजित अवस्था में उसने उसके नितंबों पर अपने दोनों हाथ रखकर जोर से दबाते हुए उसे अपनी तरफ खींच भी लिया था,,, इन्हीं सब हरकत के बारे में सोचकर सुनैना हैरान हुए जा रही थी।





इसमें सुनैना की गलती नहीं थी सुनैना एक मां के नजरिए से इन सब बातों को सोच रही थी,, अगर एक औरत बनकर ही सब बातों को सोचती तो शायद इसमें हैरान होने वाली कोई बात नहीं थी,,, सुनैना यह बात भूल गई थी कि उसका बेटा भले उसका बेटा था लेकिन सर्वप्रथम वह एक मर्द था और एक मर्द की खासियत को उसे समझना चाहिए उसका बेटा बच्चा नहीं रह गया था पूरा मर्द बन चुका था जिसकी दोनों टांगों के बीच उसका हथियार पूरी तरह से करीब का हो चुका था जो किसी भी औरत को संतुष्टि का एहसास कराने में सक्षम हो गया था,। तभी तो अपनी मां को अपनी बाहों में महसूस करके वह अपनी उत्तेजना को दबा नहीं पाया और उसकी उत्तेजना अपने आप ही उजागर होने लगी और अपनी मां की दोनों टांगों के बीच ही दस्तक देने लगी यह सब एहसास सुनैना के लिए बेहद अजीब जरूर था लेकिन उसे पल वह भी पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी इस बात से भी वह इनकार नहीं कर सकती थी।





रसोई बनाते समय सुनैना इसी बारे में सोच रही थी कि आखिरकार उसका बेटा बहक रहा था लेकिन वह कैसे बहक गई,, आज तक उसने किसी गैर मर्द की परछाई भी अपने बदन पर नहीं पड़ने दी थी,,, फिर आज ऐसा कैसे हो गया कि अपने बेटे की बाहों में ही वह अपने आप को खुद को पिघलती हुई महसूस करने लगी उसे इस बात से शर्म भी महसूस हो रही थी कि उस अवस्था में उसकी बुर पानी छोड़ रही थी जैसा कि वह अपने पति के साथ महसूस करती थी आज वैसा ही अपने बेटे के साथ महसूस करके वह दंग हो गई थी। शर्म के मारे उसके गाल पूरी तरह से लाल हो चुके थे अपने बेटे की हथेली को अपनी चिकनी पीठ के साथ-साथ अपनी चिकनी कमर पर महसूस करके वह वैसा ही महसूस कर रही थी कि जैसा कि अपनी पति की बाहों में महसूस करती थी।





सुनैना को कुछ समझ में नहीं आ रहा था लेकिन जिस पल में वह मदहोश हो रही थी वह पल के बारे में याद करके एक तरफ उसके मन में अपने आप से ही और अपने बेटे से शर्मिंदगी का एहसास हो रहा था वहीं दूसरी तरफ उसे उस पल आनंद भी आ रहा था,,, लेकिन वह इतनी सी पतली भेद रेखा को नहीं समझ पा रही थी कि एक मां होने के बावजूद भी वह एक औरत थी जिसकी कुछ ज़रूरतें थी कुछ चाहत थी,, और महीनो से अपने पति के संपर्क में नहीं आई थी इसलिए उसे एक मर्द की जरूरत पड़ रही थी अपने पति के साथ होने पर उसका पति उसके साथ संभोग करता ही था जिससे उसकी भी जरूरत पूरी हो जाती थी और उसे अपने बदन की भूख मिटाने का अवसर मिल जाता था,,, लेकिन पति के न होने की वजह से यह बदन की भूख अंदर ही अंदर भड़क रही थी सुलग रही थी और सूरज की बाहों में वह अपनी भूख को धड़कता हुआ महसूस करने लगी थी उसके बदन में दबी हुई चिंगारी ऊपर उठने लगी थी तभी तो वह उसे पाल सब कुछ भूल चुकी थी अगर उसका बेटा उसके साथ कुछ कामुक हरकत और ज्यादा बड़ा था तो शायद वह इनकार नहीं कर पाती और अपने बेटे की हरकतों का आनंद ले लेते लेकिन सही समय पर उसकी बेटी रानी आ गई थी जिससे दोनों की कामुक तंद्रा एकदम से भंग हो चुकी थी,,, और वह एकदम से होश में आ गए थे।





इस बात को चार-पांच दिन गुजर गए थे इस बीच सुनैना अपने बेटे से तरह से नजर नहीं मिल पा रही थी और नहीं उसे ठीक तरह से बात कर पा रही थी यही यार सूरज का भी था जबकि सूरज की तो दिली ख्वाहिश यही थी,, लेकिन फिर भी जब भी उसकी आंखों के सामने उसकी मां आ जाती थी तो उसकी नजर अपने आप झुक जाती थी वह अपनी मां से कुछ बोल नहीं पाता था,, और शायद इसलिए कि वह अपनी मां के व्यवहार को अच्छी तरह से जानता था उसके चरित्र को अच्छी तरह से समझता था इसीलिए पहल करने से डरता था,, सूरज के मन में अपनी गलती को आगे बढ़ाने की चाहत बढ़ती जा रही थी और वह अपनी ख्वाहिश को पूरी करना चाहता था लेकिन दूसरी तरफ उसकी मां अपनी गलती पर काफी शर्मिंदगी महसूस करती थी और ऐसी गलती दोबारा ना हो इसका ख्याल रखती थी और मौका ढुंढती थी इस बारे में अपने बेटे से बात करने के लिए लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अपने बेटे से अगर बात करें भी तो कैसे क्योंकि उसे अंदर ही अंदर इस तरह की बातें करने में भी शर्म महसूस हो रही थी और वह भी अपने बेटे के साथ तो इस तरह की बातें करने के बारे में सोच कर उसके बदन में गनगनी सी छा जाती थी।





ऐसे ही एक दिन घूमता फिरता हुआ वह सोनू की चाची के घर पहुंच गया लेकिन शायद उसकी किस्मत अच्छी नहीं थी घर पर सोनू की चाची तो मौजूद थी लेकिन उसके साथ सोनू भी मौजूद था,,, और सोनू को देखकर सूरज मन ही मन बहुत गुस्सा कर रहा था और यही हाल सोनू की चाची का भी था क्योंकि इस समय सोनू की चाची के साथ सिर्फ सोनू ही था अगर इस समय सोनू ना होता तो शायद सोनू की चाची इस समय अपनी मनसा पूरी कर लेती,,, फिर भी सोनू की चाची सूरज को देखकर खुश होते हुए बोली।

अरे आओ सूरज बेटा बहुत दिनों बाद घर पर आए हो। लगता है रास्ता भूल गए थे क्या,,,?

अरे नहीं चाची ऐसी कोई बात नहीं है,,, यहां से गुजर रहा था तो सोचा चलो सोनू से मिलने चलो बहुत दिनों से सोनू से मिला नहीं हुं,,,,





आजकल तबीयत थोड़ी सही नहीं थी इसलिए घर पर ही हूं,,,(सूरज की बात सुनकर सोनू बोला जो की खटिया पर लेटा हुआ था उसकी बात सुनकर सूरज हैरान होता हुआ बोला,,)

क्या हुआ तुझे तभी मैं सोचूं कि दिखता कीसलिए नहीं है,,,।

बुखार आ रहा है,,,।

कितने दिन से आ रहा है,,,?(उसके पास बैठता हुआ सूरज बोला तो उसकी बात सुनकर सोनू की चाची बोली,,)

पांच छः दिन हो गए हैं दवाई भी लाए थे लेकिन फिर वही हालत हो जाती है,,,।

मैं एक वेद जी को जानता हूं बड़ी अच्छी दवाई देते हैं एक बार में ही आराम हो जाएगा।

यह तो अच्छी बात है कहां रहते हैं वेद जी,,,?(एकदम उत्साहित होते हुए सोनू की चाची बोली)





यही अपने बाजार के आगे बहुत अच्छी दवा देते हैं।

(सूरज की बात सुनकर सोनू की चाची के मन में ढेर सारे ख्याल आने लगी और वह तुरंत बोली)

चल चल कर ले आते हैं,,,।

अभी चलोगी,,,

हां अभी चलते हैं बहुत परेशान हो गया है सोनु ,,

तब ठीक है चलो चलते हैं,,, लेकिन सोनू,,(ऐसा कहते हुए सूरज भी कुछ सोचने लगा और सोते हुए बोला) सिर्फ बुखार ही आता है ना..

हां सिर्फ बुखार हीआता है,,,।(सोनू की चाची तपाक से बोली,,)

तब तो ठीक है बात कर ही दवा मिल जाएगी वेद जी से सोनू का जाना जरूरी नहीं है,,,।

(सूरज की बात सुनकर मन ही मन सोनू की चाची प्रसन्न होने लगी क्योंकि दोनों को अकेले वहां जाना था,,, लेकिन सोनू को शंका न हो इसलिए वह बोली)





बाजार से थोड़ा सामान भी लाना है इसी समय दोनों काम भी हो जाएगा रुक में तैयार होकर आती हुं,,,।

ठीक है चाची,,,, मैं यहीं बैठा हूं,,।

(सोनू की चाची अंदर कमरे में जा चुकी थी तैयार होने के लिए और सूरज सोनू के पास बैठा हुआ था और सोनू की हालत को देखकर मुस्कुराता हुआ बोला,,)

साले तू तो अपनी चाची की लेना चाहता था,,, लेकिन तेरी हालत देखकर लगता है कि खाली हिला हिला कर बीमार हो गया है ऐसी हालत में तो तू अपनी चाची की ले भी नहीं सकता,,,।

तुझे यही मौका मिला है मेरा मजाक उड़ाने का एक तो पैसे ही में तकलीफ में हूं और तू जले पर नमक छिड़क रहा है,,,।

नमक नहीं छिड़क रहा है तेरी हालत के बारे में बता रहा हूं अच्छा सा चीज बताना तूने कभी अपनी चाची को बिना कपड़ों के एकदम नंगी देखा है।





क्या बात कर रहा है तु ,,(एकदम से गुस्से में सूरज की तरफ देखते हुए सोनू बोला,,)

अरे मैं सिर्फ पूछ रहा हूं बात तो सही क्या कभी ऐसा मौका मिला कि अपनी चाची बिना कपड़ों के देखा हो।

नहीं यार ऐसा मौका कभी नहीं मिला बस एक बार नहाते हुए देखा था और वह भी पेटिकोट पहन कर अपना पेटिकोट उतार रही थी इसलिए ज्यादा कुछ दिख नहीं बस नंगी नंगी,, टांगे ही दिखी।

बस नंगी टांगे देखकर ही तू अपनी चाची को चोदना चाहता है अगर पूरी नंगी देख लेता तो मुझे लगता है कि तू जबरदस्ती कर लेता,,, वैसे सच कहूं तो तेरी चाची है मजेदार,,,,।

चल ज्यादा कुछ करने की सोचना भी नहीं,,, वह ऐसी वैसी नहीं है।

इसलिए मैं तो तुझसे पूछ रहा था क्या तेरा मामला आगे बड़ा कि नहीं क्योंकि मैं जानता हूं तेरी चाची बहुत गुस्से वाली है अगर दिमाग सटक गया तो बहुत मारेगी इसलिए तो कोई कुछ करने के बारे में सोच भी नहीं सकता,,,।

(सूरज के मुंह से इतना सुनकर सोनू को तसल्ली होने लगी और उसके चेहरे पर मुस्कुराहट तैरने लगी उसे इस बात की खुशी थी कि सूरज उसकी चाची के साथ ऐसा वैसा कुछ भी करना नहीं चाहता है,,, इसलिए बोला)

इसलिए तो कहता हूं चाची बहुत खड़ूस है अगर कुछ करने की कोशिश किया या कुछ ऐसी वैसी हरकत किया तो सीधा तेरी मां से बता देगी बिल्कुल भी शर्माएगी नहीं,,,।

ना बाबा ना,,, तेरी चाची के साथ कुछ ऐसा वैसा करने की मैं सोच भी नहीं सकता मुझे मार नहीं खाना है और वैसे भी तेरी चाची कि मैं बहुत इज्जत करता हूं इस बारे में सोच भी नहीं सकता समझा ना ,, तू आराम कर में पानी पीकर आता हूं,, ,(इतना कहकर सूरज खटिया पर से उठ कर खड़ा हो गया और कमरे की तरफ अंदर जाने लगा सोनू को इस बात की तसल्ली थी कि सूरज उसकी चाची के साथ ऐसी वैसी कोई हरकत नहीं करेगा जैसा कि वह खुद अपनी चाची के साथ करना चाहता है इसलिए उसके मन में तसल्ली थी और उसे बिल्कुल भी शक नहीं हुआ था कि उन दोनों के बीच भी कुछ पड़ा है देखते देखते सूरज कमरे में प्रवेश कर गया,,,,

कमरे में प्रवेश करते ही देखा तो सोनू की चाची कपड़े बदल रही थी कमर के नीचे पेटिकोट तो था लेकिन ऊपर कुछ भी नहीं था और वह ब्लाउज हाथ में लेकर उसे पहनने वाली थी कि सूरज को अपनी आंखों के सामने देख कर एक पल के लिए तो वह घबरा गई और ब्लाउज से ही अपनी चूची को ढकने की कोशिश करने लगी लेकिन जैसे ही उसे एहसास हुआ कि दरवाजे पर सूरज है तो वह निश्चित हो गई और मुस्कुराते हुए बोली,,,

यहां क्या करने आया है आ तो रही थी,,,,।

उस दिन की मुलाकात शायद अधूरी रह गई थी,,,(दरवाजे पर खड़े होकर बाहर की तरफ देखते हुए सूरज बोल तो उसकी बात को सोनू की चाची समझ गई और मुस्कुराने लगे और उसकी बात का मतलब समझते ही अपनी छाती पर से अपने ब्लाउस को हटा दी जो कि उसके हाथ में ही थी उससे पहले नहीं थी और एक बार फिर से सूरज की आंखों के सामने सोनू की चाची की खरबूजे जैसी गोल गोल चूचियां एकदम से उजागर हो गई जिसे देखकर सूरज की आंखों में चमक बढ़ने लगी और वह एकदम से मुस्कुराते हुए आगे बढ़ते हुए बोला)

सच में चाची उसने तुम्हारी च को हाथ में लेकर मुझे तो ऐसा ही लग रहा था जैसे पूरी दुनिया मेरे हाथ में आ गई हो बहुत मजा आ रहा था लेकिन चाचा जी के यहां जाने पर सारी हसरत खत्म हो गई,,,(ऐसा कहते हुए वह सोनू की चाची के एकदम करीब पहुंच गया,,,, और प्यासी नजरों से उसकी दोनों चूचियों को घूरने लगा तो मुस्कुराते हुए सोने की चाची उसकी तरफ देखकर बिना कुछ बोले अपनी दाईं छाती पर आगे की तरफ कर दी और उसका इशारा बातें ही सूरज की आंखों में वासना की चमक नजर आने लगी और वह तुरंत,,, बिना कुछ सोचे समझे अपने प्यास होठों को उसकी चूची पर रख दिया और उसकी गुलाबी हो चली खजूर को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया सोनू की चाची सूरज की हरकत से एकदम से गन गना गई,,, और उत्तेजना के मारे उसके हाथ में से ब्लाउज छूकर नीचे जमीन पर गिर गया।

सूरज पागलों की तरह एक हाथ उसकी कमर में डालकर उसे अपनी तरफ खींच कर उसकी चूची का रसपान करने लगा और सोनू की चाची भी मदहोश होते हुए उसके कंधे पर हाथ रखकर उसका हौसला बढ़ाने लगी और देखते ही देखते कुछ देर बाद अपनी दूसरी चूची को भी अपने हाथ से पकड़ कर उसके मुंह की तरफ आगे बढ़ा दिया और सूरज पहले वाली चुची पर से मुंह हटाकर दूसरी वाली चुची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया,,, सूरज पागल हुआ जा रहा था उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ गया था जिसका एहसास सोनू की चाची को हो रहा था और वह अपना हाथ उसके पजामे पर रखकर पजामे के ऊपर से ही उसके लंड को दबोचने लगी और सोनू की चाची की ईस हरकत से वह पूरी तरह से मदहोश हो गया मन तो उसका कर रहा था कि इसी समय उसे दीवार से सटाकर अपने लंड को उसकी बुर में डाल दे लेकिन जल्दबाजी करना ठीक नहीं समझ रहा था इसलिए अपने मां पर काबू किए हुए था।

सूरज पागलों की तरह बारी-बारी से उसकी दोनों चूचियों को पीने का मजा ले रहा था लेकिन जानता था कि समय बहुत कम है इसलिए हाथों से अलग करते हुए बोला,,।

चाची सोनू से तो मैं यह कह कर आया था कि पानी पीकर आता हूं लेकिन तुमने अपना दूध पिला कर मुझे मस्त कर दि हो,,,,।

तूने भी मुझे मस्त कर दिया है,,,(गहरी सांस लेते हुए ब्लाउज को अपने हाथ में डालते हुए बोली,,,,,)

तुम सच में बहुत खूबसूरत हो चाची,,, तुम्हें देखे बिना रहा नहीं जाता इसलिए तो एक बहाने से तुमसे मिलने आया था आजकल तुम खेत में भी नहीं मिल रही हो,,, खेत में भी रोज जाता हूं लेकिन वहां तो सोनू की मां होती है इसलिए वहां से चला जाता हूं आज रहा नहीं गया तो तुमसे मिलने यहां चला आया,, ,।





अच्छा किया जो तु यहां आ गया,,,(अपने ब्लाउज का बटन बंद करते हुए बोली ,,,,) मेरा भी मन तुझसे मिलने के लिए बहुत तड़प रहा था,,, लेकिन सोनू के कारण में खेत में भी नहीं जा सकती लेकिन अब तेरे साथ बाजार तक चलकर मुझे बहुत अच्छा लगेगा।

मुझे भी बहुत अच्छा लगेगा,,,।

वैसे तेरा लंड बहुत जल्दी खड़ा हो जाता है,,,(ब्लाउज का आखिरी बटन बंद करते हुए अपनी नजर नीचे करके सूरज के पजामे की तरफ देखते हुए बोली,,, उसकी बात सुनकर सूरज थोड़ा सा शर्मा गया और अपने हथेली को अपने पजामी पर रखकर अपने तंबू को छुपाने की कोशिश करते हुए बोला,,,)

यह सब तुम्हारी चुचियों का नतीजा है इसीलिए खड़ा हो जाता है,,,।

(उसकी बात सुनकर सोनू की चाची मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली)

जा पीछे जाकर पानी पी ले देर हो रही है वरना सोनू की मां आ गई तो कहीं बाजार जाना मुश्किल ना हो जाए और मेरी जगह वह खुद चल दे ,,





हां चाची तुम सही कह रही हो मैं अभी पानी पीकर आता हूं ,,,(और इतना कहकर सूरज घर के पीछे की तरफ चल दिया जहां पर वह पहली बार सोनू की चाची के पीछे-पीछे आया था और उसे पेशाब करते हुए देखकर मत हो गया था जल्दी से सूरज पानी पीकर वापस सोनू के पास आ गया जहां पर तैयार होकर पहले से ही सोनू की चाची खड़ी थी और जाने से पहले सोनू को हिदायत देते हुए बोली।)

सोनू मैं जा रही हूं दवा लेने दीदी आए तो बता देना कि मैं वेद जी के वहां दवा लेने गई हूं और घर का थोड़ा सामान भी लेकर आ जाऊंगी।

ठीक है चाची जाओ,,,,

(और दोनों निकल गए बाजार की तरफ)
 
सोनू की चाची और सूरज दोनों वेद जी के वहां दवा लेने के लिए निकल गए थे, सोनू को इस बात का अहसास तक नहीं था कि उसकी खुद की चाची सूरज के आकर्षण में पूरी तरह से बंध चुकी है , और अगर उसे दिन खेत में मड़ई के अंदर उसके चाचा नहाते तो शायद उसी दिन उसकी चाची सूरज के लंड को अपनी बुर में ले ली होती,,, इसीलिए तो सोनू की चाची झट से उसके साथ चलने के लिए तैयार हो गई थी इस सफर के दौरान उसे इस बात की उम्मीद थी कि उन दोनों का काम आगे बढ़ सकेगा। सोनू तो बीमार होकर खटिया पर पड़ा था लेकिन उसकी चाची सूरज के साथ मिलकर घमासान चुदाई करवा कर खटिया तोड़ देना चाहती थी।





सूरज और सोनू की चाची दोनों घर से बाहर निकल चुके थे दोपहर का समय था और शाम से पहले दोनों ए भी जाते क्योंकि बाजार को ज्यादा दूर नहीं था। दोपहर का समय होने की वजह से लोग अपनी-अपने घरों में आराम कर रहे थे और सोनू की चाची सूरज के साथ धीरे-धीरे कच्ची सड़क से होते हुए गांव से बाहर निकल चुकी थी वैसे भी सूरज के साथ चलते हुए वह इधर-उधर देख ले रही थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है लेकिन जेठ की गर्मी में लोग अपने-अपने घरों में आराम कर रहे थे इसलिए उन्हें कोई भी देखने वाला नहीं था। दोनों के बीच अभी किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं हो रही थी दोनों खामोश ही थे सूरज जो कि सोनू की चाची के पीछे-पीछे चल रहा था वह बात की शुरुआत करना चाहता था लेकिन कैसे करें उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था लेकिन इस दौरान भी उसकी नज़रें सोनू की चाची की मटकती हुई गांड पर ही टिकी हुई थी,,,। कसी हुई साड़ी में उसके नितंबों का उपाय कुछ ज्यादा ही अपना आकर्षण बिखेर रहा था,,,। वैसे भी सूरज की सबसे बड़ी कमजोरी बन गई थी औरतों की बड़ी-बड़ी गांड।





जिसे देखकर वह हमेशा मस्त हो जाता था और पल भर में ही उत्तेजना उसके दिलों दिमाग पर छा जाती थी ऐसा अक्सर अब होने लगा था घर में भी अपनी मां और अपनी बहन दोनों की गांड को देखकर वह कई बार पजामे के ऊपर से ही अपने खड़े लंड को दबा दिया था,,, वैसे तो उसकी मां की तुलना में उसकी बहन की गांड ज्यादा बड़ी और भरावदार बिल्कुल भी नहीं थी,, लेकिन फिर भी आकर्षक बहुत थी क्योंकि वह अपनी दो मर्तबा तो पेशाब करते हुए देख चुका था और बैठने के बाद जो उसकी गांड का उभार बाहर की तरफ नदी के पत्थर की चिकनाहट लिए हुए नजर आती थी उसे देखकर तो किसी का भी लंड खड़ा हो जाए,, और पूरी तरह से मगन अवस्था में तो वहां पूरी तरह से स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा ही की तरह दिखती थी। और सूरज के लिए यह तय कर पाना मुश्किल हो जाता था कि उसकी मां की गांड ज्यादा खूबसूरत है या उसकी बहन की लेकिन वह इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि दोनों की गांड का एक लगाकर सुन जिसे देखकर वह एकदम मस्त हो जाता था।





और इस समय ऐसी हालत में वही नशा वही मादकता सोनू की चाची की मदमस्त कर देने वाली गांड में नजर आ रही थी कई हुई साड़ी में उसकी गांड मटकती थी तो ऐसा लगता था कि जैसे दो बड़े-बड़े तरबूज उसके पीछे बांध दिए गए हो क्योंकि आपस में उसकी गांड की रगड़ कसी हुई साड़ी में एकदम साफ नजर आती थी और ऐसा लग रहा था कि जैसे सोनू की चाची ने जान बूझ कर साड़ी को कस के बांधी हो ताकि वह उसे देख सके और मस्त हो सके,,, बात की शुरुआत तो करनी ही थी क्योंकि बिना बात चीत किए बिना मजा नहीं आने वाला था , क्योंकि सूरज मौका भी तो ऐसा ही ढूंढ रहा था कि सोनू की चाची के साथ वक्त बिताया जा सके इसलिए वह आगे आगे चल रही सोनू की चाची से मुखातिब होता हुआ बोला,,,।





क्या बात है चाचा बड़ी जल्दी-जल्दी भागी चली जा रही हो कुछ ज्यादा जल्दी है क्या,,,?

(सूरज की है बात सुनकर सोनू की चाची मंद मंद मुस्कुराने लगी,,, क्योंकि वह भी यही चाहती थी कि दोनों के बीच बातचीत की शुरुआत हो ताकि बात कुछ आगे बढ़ सके वैसे भी सोनू की चाची ने सूरज के लिए काफी इशारा दे दिया था जिसे सूरज को तो खुद ही आगे बढ़ जाना चाहिए था लेकिन मड़ई वाले वाक्ये से सोनु की चाची को इतना एहसास हो गया था कि सूरज को औरतों के अंगों के भूगोल के बारे में ज्यादा कुछ मालूम नहीं है क्योंकि सोनू की चाची को ऐसा ही लग रहा था कि उसने जिंदगी में पहली बार किसी औरत की नंगी चूची को देखा था और अपने हाथों में पकड़ कर दबाया था जो कि यह बिल्कुल गलत था सूरज जानबूझकर सोनू के चाचा से ज्यादा ना चाहता था कि इससे पहले उसने कभी भी औरत को नंगी नहीं देखा था ना ही उनके अंगों को।





और उसकी बात में सोनू की चाची पूरी तरह से आ चुकी थी इसीलिए वह ऐसा ही समझ कर सूरज को अपनी चूची दिख रही थी मानो पहली बार किसी लड़के को दिखा रही हो और सूरज भी अनजान बनता हुआ पहली मर्तबा का अनुभव दिखाते हुए जैसा-जैसा सोनू की चाची बोल रही थी वैसा वैसा हुआ कर रहा था ताकि उसे बिल्कुल भी सपना हो कि सूरज औरतों के मामले में उसकी सोच से 10 कदम आगे निकल चुका है इसी में तो उसे मजा आ रहा था। सोनू की चाची का दिल जोरो से धड़क रहा था क्योंकि वह देखते ही देखते गांव से बाहर और घनी झाड़ियां के बीच चल रहे थे छोटी-छोटी ऊंची नीची पगडंडी और अगल-बगल घनी झाड़ियां बड़े-बड़े पेड़ दोनों तरफ से सड़क को ढके हुए थे जिससे गर्मी का एहसास नहीं हो रहा था और शीतल हवा चल रही थी।





अभी कुछ देर पहले ही सोने की चाची भी अपनी बड़ी-बड़ी चूचीयो को एक बार फिर से सूरज के हाथों में सौंप दी थी और सूरज भी सोनू की चाची का आज्ञा पाकर दोनों बड़ी-बड़ी चूचियों को बारी-बारी से अपने हाथों में लेकर उसे मुंह में भरकर चूस रहा था पी रहा था और यह एहसास सोनू की चाची की बुर गीली करने के लिए काफी थी,,,,, और इसीलिए तो सोनू की चाची इस खेल में आगे बढ़ना चाहती थी अपनी जवानी का जलवा दिखा कर सूरज को अपनी जवानी का दीवाना बनाकर उसे गुलाम बनाना चाहती थी ताकि जब चाहे तब वह अपनी जवानी की प्यास उसे के साथ बुझा सकती थी और अपनी मां बनने की ख्वाहिश भी पूरी कर सकती थी वरना सूरज का साथ और उसका सहकार लिए बिना उसका ख्वाब कभी पूरा होने वाला नहीं था।





जल्दी नहीं है लेकिन देख रही हूं कि तू कुछ बोल ही नहीं रहा है इसलिए मैं जल्दी चली जा रही हूं नहीं तो देख तो सही कितना सुहाना मौसम है जेठ की गर्मी होने के बावजूद भी यहां कितनी ठंडक है,,,।(एकदम से रुक कर सूरज की तरफ घूम कर मुस्कुराते हुए बोली उसकी बात सुनकर सूरज भी मुस्कुराते हुए बोला)

बात तो सही कह रही हो चाची लेकिन मैं तुमसे बात क्या करूं मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है।

अरे कुछ भी बात कर मैं तुझे कुछ कहने वाली थोड़ी हूं और वैसे भी तुझे कह दूंगी तो मुझे बहुत अच्छा लगते हैं इसलिए तो तेरे साथ यहां आने के लिए तैयार हो गई वरना मैं किसी के भी साथ बाजार नहीं जाती।

सोनू के साथ भी नहीं,,,।





सोनू भी उसके चाचा की तरह ही एकदम निकम्मा है। लेकिन तू बहुत काम का है,,,। आज उसे बड़े पेड़ के नीचे थोड़ी देर बैठते हैं और पास में ही कितना अच्छा तालाब है ठंडी ठंडी हवा आ रही है चल कुछ बातें करते हैं।

ठीक है चाची जैसा तुम ठीक समझो,,, तुम्हारा यह सुझाव मुझे भी अच्छा लग रहा है क्योंकि थोड़ी देर बाद यह बड़े-बड़े पेड़ खत्म हो जाएंगे और फिर धूप में चलना पड़ेगा तब मजा नहीं आएगा।

तभी तो कह रही हूं अाजा,,,(इतना कहते हुए सोनू की चाची यहां के आगे चलते हुए कच्ची सड़क से नीचे उतरकर एक बड़े से पेड़ के नीचे पहुंच गई उसके पास में ही एक बड़ा सा तालाब भी था वाकई में जगह बहुत खूबसूरत थी और ऐसी जगह थी जहां पर खूबसूरत औरत और एक जवान लड़का हो तो दोनों के बीच कुछ भी हो सकने की संभावना बढ़ जाती है,,, सूरज भी उसके पीछे-पीछे बड़े से पेड़ के पास पहुंच गया,,,, सोनू की चाची नीचे जमीन पर इधर-उधर देख रही थी सूरज समझ गया कि यह बैठने के लिए जगह निश्चित कर रही है इसलिए वह बैठती इससे पहले ही बोला,,,)





रुको चाची ऐसे नहीं,,,,(और इतना कहकर इधर-उधर अपनी नजर घूमाने लगा सोनु की चाची को भी समझ में नहीं आया कि यह क्या कर रहा है,,,, लेकिन थोड़ी ही देर में इधर-उधर से सूरज जल्दी-जल्दी सूखी हुई घास और टूटे हुए पत्तों को इकट्ठा करके बड़े से पेड़ के नीचे रख दिया और बोला,,,)

अब बैठ जाओ,,,,

(उसकी हरकत और उसकी बात सुनकर सोनू की चाची मुस्कुराने लगी और उसे मुस्कुराता हुआ देखकर सूरज भी मुस्कुराते हुए बोला,,,)

मैं समझ गया था कि तुम बैठने के लिए जगह ढूंढ रही हो और मुझे पूरा यकीन नहीं की तुम्हारी खूबसूरत नरम नरम चूचियों की तरह तुम्हारी गांड भी एकदम नरम होगी,,,,,,, इसलिए तुम्हें बैठने में किसी प्रकार की चुभन ना हो इसलिए नरम नरम बिछोना भी लगा दिया,,,।





हाय दइया तू तो कितना सोचता है मेरे बारे में,,,(एकदम से मुस्कुराते हुए सोनू की चाची बोली सूरज की यह हरकत उसे बहुत अच्छी लगी थी इसलिए वह भी मुस्कुराते हुए सोई हुई घास पर अपनी बड़ी-बड़ी गांड रखकर बैठ गई.. और अपने पास में ही इशारा करते हुए बोली)

तू भी बैठ जा,,,।

(औरतों की संगत में सूरज औरतों को अच्छी तरह से समझने लगा था और वह भी तो सोनू की चाचा जैसी औरतें की संगत पाने के लिए हमेशा मचलता रहता है इसलिए उसका सारा पाते हैं एकदम से उसके पास में बैठ गया और इस तरह से बैठा कि उसका बदन उसके बदन से एकदम से स्पर्श होने लगा,,,, सोनू की चाची अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)





क्या तुझे सच में मेरी चूचियां नरम नरम लगती है,,,!(एकदम से अपनी चूचियों की तरफ देखते हुए सोनू की चाची बोली और वह इस तरह से सूरज का भी ध्यान अपनी चूचियों पर लाना चाहती थी और सूरज का ध्यान भी एकदम से उसकी छाती की तरफ चला गया था जिसे वह तिरछी नजर से देखते हुए बोला)

सच में चाचा देख कर तो बिल्कुल भी नहीं लगता था की चूचीया इतनी नर्म होती है,,, वह तो तुम्हारी चूची को हाथ में लेकर दबाने पर ही पता चला कि सच में एकदम कठोर दिखाने वाली चूंचियां कितनी नरम होती है,,,,(एकदम से उत्साहित होता हुआ सूरज बोला ,, उसकी बात सुनकर मुस्कुराते हुए सोनू की चाची बोली,,)

सच कहूं तो औरतों का बदन किसी रहस्य से कम नहीं होता है,,,जब तक उसे अपनी आंखों से देख ना लो, उसे छूकर स्पर्श करके महसूस कर ना लो तब तक एक औरत मर्द के लिए हमेशा रहस्य बनी रहती है ,,,।





तब तो तुम भी मेरे लिए एक रहस्य हो,,।

क्यों तूने तो मेरी चूची दबाया भी है और मुंह में लेकर पिया भी है,,,।

सिर्फ चुची ही,,, और तो सारे अंग अभी भी मेरे लिए किसी रहस्य से कम नहीं है,,,।

इसका मतलब तुम मेरे सारे अंगों को देखना चाहता है मेरे बदन का हिस्सा मेरे बदन का कोना-कोना देखना चाहता है,,,।

सच कहूं तो चाची तुम्हारी खूबसूरती मेरी आंखों को भाग गई है तो मुझे अच्छी लगती हो और इसीलिए ना जाने क्यों तुम्हें बिना कपड़ों के देखने का मन करता है।

(सूरज की बात सुनकर सोनू की चाची मुस्कुराने लगी क्योंकि सूरज उसके मन की ही बात कर रहा था ऐसा लग रहा था कि धीरे-धीरे दोनों की गाड़ी पटरी पर आ रही थी और सोनू की चाची भी यही चाहती थी क्योंकि पटरी पर गाड़ी के आने से ही वह अपनी मंजिल तक पहुंच सकती थी वरना राग भटकने का डर पूरी तरह से बना हुआ था,,,, सूरज की बातें उसके बदन में उत्तेजना की लहर पैदा कर रही थी खास करके इसकी दोनों टांगों की पतली दरार में तो तूफ़ान उठता हुआ महसूस हो रहा था क्योंकि सूरज पूरी तरह से एक जवान लड़का था जवानी की दहलीज पर अभी-अभी कदम रखा था और सोनू की चाची अच्छी तरह से जानती थी कि इस उम्र में एक जवान लड़का कितना मजा देता होगा इस बात को सिर्फ और सोच ही सकती थी इसका अनुभव अभी उसे बिल्कुल भी नहीं था लेकिन जवान लंड कितना कड़क और दमदार होगा इसका एहसास उसे अच्छी तरह से था भले ही इसका आनंद कभी भी ना ले सकी हो। सूरज की बात सुनकर मुस्कुराते हुए बोली।)





हाय भैया तू तो बहुत चालू है मैं तो तुझे सीधा-साधा समझती थी।

सीधा-साधा हूं तभी तो मुझे नहीं मालूम की औरतों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए किस तरह से पेश आना चाहिए उनसे कैसे प्यार करना चाहिए लेकिन जो कुछ भी तुमने मड़ई में की और अपने घर पर अपनी चूची पिलाई यह सब महसूस करके मुझे विश्वास है कि तुम मुझे इसके आगे का भी सुख दोगी जो मुझे पूरी तरह से तुम्हारा दीवाना बना देगा और तुम्हारा गुलाम भी,,,(सोनू की चाची सूरज की बातों को बड़ी गौर से सुन रही थी सूरज की आंखों में उसे सच्चाई और मासूमियत नजर आ रही थी जबकि वह नहीं जानती थी कि सूरज उसकी सोच से 10 कदम आगे था वह औरतों के साथ मजे ले चुका था और औरतों को समझने लगा था वह समझ गया था कि सोनू की चाची एकदम चुदवाती है और किसी भी तरीके से उससे चुदवाना चाहती है,,, वरना वह सोनू की चाची से इस तरह की बातें कभी ना करता,,,, सोनू की चाची उसे बड़े गौर से देखते हुए बोली,,,)

मतलब साफ है कि तू मुझे बिना कपड़ों के देखना चाहता है,,,।

बिल्कुल सही चाचा अगर तुम चाहो तो।





अच्छा यह बताओ बिना कपड़ों के देखने के बाद तु क्या करेगा,,,.?(मुस्कुराते हुए सोनू की चाची बोली वह अपने सवाल से सूरज के जवाब को सुनना चाहती थी वह देखना चाहती थी कि सूरज को औरतों के बारे में उनके बीच के रिश्ते के बारे में वाकई में कुछ खबर है या जानबूझकर नादान बनने की कोशिश कर रहा है सूरज भी खेल खाया मर्द हो चुका था इसलिए उसकी इस तरह की बात का जवाब देते हुए वह बोला)

मैं तुम्हें बिना कपड़ों की देखूंगा तुम्हारा बदन के हर एक अंक को देखूंगा क्योंकि मुझे मालूम है कि तुम्हारे बदन का हर एक अंग बेहद आकर्षक और खूबसूरत होगा क्योंकि अभी तक मैंने सिर्फ तुम्हारी खूबसूरत चेहरे को और तुम्हारी खूबसूरत चूचियों को देखा हूं जोकि बेहद खूबसूरत और बेहद आकर्षक है सच कहूं तो पूरे गांव में मैं तुम्हारी जैसी खूबसूरत औरत नहीं देखा तुम्हारा चेहरा कितना खूबसूरत एकदम भरा हुआ गोल-गोल चेहरा लंबी तीखी नाक ,,, लाल-लाल होठ ,,,, सच में बहुत खूबसूरत लगती है तभी तो तुम्हें देखता हूं तो देखते ही रह जाता हूं,,,,।





(सोनू की चाची को सूरज के मुंह से अपनी जवानी अपनी खूबसूरती के तारीफ सुनना बहुत अच्छा लग रहा था और ऐसा उसके साथ पहली बार हो रहा था कि कोई जवान लड़का उसकी खूबसूरती की तारीफ कर रहा था इसलिए तो वह अंदर ही अंदर से गदगद हुए जा रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि सूरज की बातों का वह क्या जवाब दें वह केवल शर्म से अपनी आंखें नीचे झुका दी थी वैसे तो वह सूरज पर अपना लगाम अपने हाथों में ली हुई थी लेकिन इस मामले में वह सूरज से शर्मा गई थी,,,, और उसे शरमाता हुआ देखकर सूरज अपनी बात को आगे बढ़ता हुआ बोला,,,)

देखो शर्माने पर भी कितनी ज्यादा खूबसूरत लगती है सच में तुम बहुत खूबसूरत हो चाची मैं तो तुम्हारा दीवाना हो गया हुं,,,,।

हाय दइया धीरे बोल कोई सुन लेगा तो गजब हो जाएगा ना इधर के रह जाऊंगी ना उधर की,,,(सोनू की चाची इधर-उधर देखते हुए बोली तो सूरज उसे निश्चिंत होने का इशारा करते हुए बोला)

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो यहां पर जल्दी कोई नहीं आता क्योंकि हम लोग दूसरे रास्ते से बाजार की तरफ जा रहे हैं यहां कोई आने वाला नहीं है इसलिए बिल्कुल भी मत करना और मेरे बात की सच्चाई को समझो,,,(सूरज बात ही बात में इस बात का इशारा दे रहा था कि इस जगह पर वह दोनों एकदम अकेले हैं और उन दोनों के सिवा वहां पर कोई आने वाला नहीं है ताकि ऐसे माहौल में सोनू की चाची कोई कामुक हरकत कर सके जिससे दोनों को मजा आ जाए,,, और ऐसा हो भी रहा था सूरज की बात सुनकर सोनू की चाची फिर से इधर-उधर देखने लगी और आश्चर्य जताते हुए बोली,,)





क्या सच में इधर कोई नहीं आता मेरे को तो बरसों गुजर गए हैं बाजार कभी गई नहीं तभी मैं सोचूं इतनी खूबसूरत जगह पर आखिरकार कोई है कि नहीं और वैसे भी यह गांव से ज्यादा दूर भी नहीं है,,,

सच कह रही हो चाची,,,,,।

(दोनों की बातें अत्यधिक उन्मादक थी,,, जहां पर इस तरह की बातें करके सूरज का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था वहीं दूसरी तरफ इस तरह की बातों का असर सोनू की चाची की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में हो रहा था,,,और उसे अपनी बुर से मदन रस बहता हुआ महसूस हो रहा था,,, सोनू की चाची को यही मौका सही लग रहा था अपनी इच्छा की पूर्ति के लिए हो जानती थी कि अगर एक बार दोनों के बीच की सारी सीमाएं टूट जाएंगे तो बार-बार दोनों का मिलन होता रहेगा और वह अपने बदन की प्यास भी पूजा पाएगी और अपनी मां की इच्छा को भी पूरी कर लेगी इसलिए उसके मन में कुछ और चल रहा था वह अपनी जवानी का जलवा पूरी तरह से दिखा देना चाहती थी इसलिए वह बोली ,,,)

तू यहीं बैठ में पेशाब करके आती हूं,,,,,।

(इतना सुनते ही सूरज के बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी,,, लेकिन इतना कहकर वह सूरज की तरफ अच्छी नहीं और अपनी जगह से उठकर खड़ी होने लगी,,,)
 
सूरज बहुत खुश था कि उसे सोनू की चाची के साथ बाजार जाने का मौका मिला था भले ही सोनू की बीमारी का कारण था लेकिन फिर भी यह बीमारी आज उसके लिए आशीर्वाद का काम कर रहे थे क्योंकि सूरज ने कभी सोचा भी नहीं था कि इस तरह से सोनू की चाची के साथ अकेले ही सफर करना होगा और इस सफर के दौरान उसे उसके साथ बातचीत करने का अवसर प्राप्त होगा वैसे तो सोनू की चाची ने जिस तरह का अवसर सूरज को दी थी उसे तरह का अवसर पाकर सूरज अपनी किस्मत पर फुल नहीं समा रहा था लेकिन उसे अवसर का सूरज पूरी तरह से लाभ नहीं ले पाया था इस बात का मलाल उसे बहुत था और इसी अवसर को वह अपनी किस्मत बना देना चाहता था।





जिस तरह की खुशी सूरज के चेहरे पर दिखाई दे रही थी उसी तरह की खुशी सोनू की चाची के चेहरे पर भी दिखाई दे रही थी,,, सोनू की चाची के मन में उत्तेजना का भाव जागरूक हो रहा था वह किसी भी तरह से अपनी मां की इच्छा को पूरी कर लेना चाहती थी और आज से अच्छा मौका उसे पहले कभी नहीं मिला था आज मौका भी था और दस्तूर भी था और जिस जगह पर दोनों बैठकर आराम कर रहे थे उस जगह पर भी किसी का आना जाना नहीं था,, इसलिए सोनू की चाची इस मौके का फायदा उठा लेना चाहती थी,,, वैसे भी यह ख्याल उसके मन में अभी-अभी नहीं आया था बहुत पहले से उसके मन में सूरज के साथ संभोग सुख प्राप्त करने की इच्छा जाग चुकी थी और उसी के साथ संभोग करके अपनी मां बनने की इच्छा भी पूरी करना चाहती थी सोनू की चाची ,,,। वैसे भी सोनू की चाची इस खेल में कदम आगे बढ़ा चुकी थी सूरज के साथ वह अपनी चुचीयों का स्तन मर्दन करवा चुकी थी,,,।





इसीलिए तो उसके मन में एक अद्भुत ख्याल आया था जिसके चलते वह अपनी इच्छा पूरी करना चाहती थी इसीलिए तो वह सूरज के सामने एकदम खुलकर पेशाब करने वाली बात की थी क्योंकि इस बात का एहसास उसे भी अच्छी तरह से था कि सारे मर्द किसी न किसी बहाने औरत को बिना कपड़ों के देखने की कोशिश करते हैं और खास करके उन्हें पेशाब करते हुए देख कर तो वह और भी ज्यादा मस्त हो जाते हैं और सोनू की चाची को पक्का यकीन था कि मर्दों की फितरत में सूरज भी शामिल था उसे भी यह सब अच्छा लगता होगा और हो सकता है कि उसे पेशाब करता हुआ देखकर उसकी बड़ी-बड़ी कहां देखकर उसका मन भी उसे चोदने के लिए मचल उठे और उसकी इच्छा पूरी हो जाए।





इसीलिए तो पूरी तरह से बेशर्मी दिखाते हुए सोनू की चाची सूरज से पेशाब करने वाली बात की थी और अपनी जगह से उठ खड़ी हुई थी। सूरज तो उसके मुंह से पेशाब करने वाली बात सुनकर ही उत्तेजित हुआ जा रहा था ऐसा नहीं था कि वह पहली बार किसी औरत को पेशाब करते हुए देखने जा रहा था इससे पहले भी वह मुखिया की बीवी और मुखिया की लड़की के साथ-साथ अपनी बहन रानी को भी पेशाब करते हुए देख चुका था मुखिया की बीवी की तो बड़ी-बड़ी गांड देखकर ही उसके मन में उत्तेजना के पैर तोड़ने लगी थी और वह मुखिया की बीवी को छोड़ने का ख्वाब देखने लगा था और उसकी इच्छा पूरी भी हुई थी और उसके मन में यही चल रहा था कि काश उसे दिन की तरह आज भी उसे वह सौभाग्य प्राप्त हो जाए तो कितना मजा आ जाए इसलिए सूरज कुछ बोला नहीं और सोनू की चाची को देखने लगा,,।

सोनू की चाची अपनी जगह पर उठकर खड़ी हो गई थी और चारों तरफ नजर घुमा कर देख रही थी उसे इस तरह से देखता हुआ देख कर सूरज बोला।





चिंता मत करो चाचा यहां पर हम दोनों के सिवा कोई नहीं है कि तुम्हें इस अवस्था में देख सके देख नहीं रही हो चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ है यहां कोई नहीं आता और इस तरह की जेठ की गर्मी में तो यहां आने की कोई सोच भी नहीं सकता और वैसे भी यह रास्ता ना तो बाजार की तरफ जाता है और ना ही यहां किसी का कोई काम है,,,।

क्या सच में यह रास्ता बाजार की तरफ नहीं जाता!(आश्चर्यजताते हुए सोनू की चाची बोली तो उसका जवाब देते हुए सूरज बोला ,,,)

हां बिल्कुल सही यह रास्ता बाजार की तरफ नहीं जाता लेकिन मैं यहां से बाजार जाने का रास्ता जानता हूं इसलिए तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो और जो करना है कर लो,,,,,(अपनी जगह पर बैठे हुए ही सूरज ने बोला)

अच्छा हुआ तूने बता दिया नहीं तो मैं घबरा ही गई थी कि अगर यह रास्ता बाजार की तरफ नहीं जाता तो हम लोग बेवजह इस रास्ते पर क्यों जा रहे हैं,,,(ऐसा कहते हुए सोनू की चाची धीरे-धीरे अपनी कदम आगे बढ़ने लगी और इधर तसल्ली करने के लिए देख भी ले रही थी क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि वाकई में कोई इस अवस्था में उसे देखें देखते ही देखते दश पन्द्रह कदम चलने के बाद वह,, रुक गई और इधर-उधर देखने लगी सूरज जानबूझकर उसके सीधी नजर उसे नहीं देख रहा था बल्कि तिरछी नजर से देख ले रहा था क्योंकि वह चाहता था कि उसे ऐसा ना लगे कि वह उसे देख रहा है लेकिन जिस जगह पर वह खड़ी थी वहां पर वह एकदम साफ दिखाई दे रही थी। औरतों की फितरत से सूरज अच्छी तरह से बाकी हो चुका था इसलिए समझ गया था की सोनू की चाची के मन में भी वही चल रहा है जो मुखिया की बीवी के मन में चल रहा था सोनू की चाची भी बहुत प्यासी है वरना वहां पेशाब करने के लिए ऐसी जगह का चयन न करती जहां से उसे एकदम आराम से देखा जा सके बल्कि झाड़ियां के बीच जाती जहां पर वह दिखाई ना दे,,,।





मेरी तरफ देखना मत सूरज,,,(दोनों हाथों से साड़ी थाम कर वह बोली,,, इतना तो अच्छी तरह से जानती थी किसके कहने के बावजूद भी भला एक जवान लड़का एक खूबसूरत औरत को पेशाब करते हुए कैसे ना देखें,,, लेकिन फिर भी सोनू की चाची की तसल्ली के लिए सूरज दूसरी तरफ नजर घूमाता हुआ बोला,,)

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो चाची आराम से कर लो,,, मैं नहीं देखूंगा,,,।

(सूरज की बात सुनकर सोनू की चाची अपने मन में ही बोली हरामजादी तुझे देखने के लिए क्या तेरे सामने पेशाब कर रही हूं ताकि जो मेरी नंगी गांड को देख सके और कह रहा है कि मैं नहीं देखूंगा फिर भी अपने मन में इस तरह से बात करते हुए वह अपने आप से ही बोली देखती हूं कैसे नहीं देखता है भला एक जवान औरत की नंगी गांड को देखने से एक मर्द कैसे इंकार कर सकता है,,, और इतना अपने मन में सोचते हुए वह धीरे-धीरे अपनी साड़ी को कमर की तरफ उठाने लगी अभी तक सोनू की चाची नजर पीछे घूमाकर सूरज की तरफ नहीं देखी थी लेकिन सूरज तिरछी नजरों से सोनू की चाची को ही देख रहा था और उसका इस तरह से अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाना उसे उत्तेजित कर रहा था वह मदहोश हुआ जा रहा था,,,,।)





देखना नहीं सूरज मुझे बहुत शर्म आती है,,,।(सूरज की तरफ बिना देखे ही अपनी साड़ी को अपने घुटनों तक उठाते हुए वह बोली,,, बार-बार वह ऐसा कहकर सूरज का ध्यान अपनी तरफ ही करना चाहती थी और सूरज कोई सीधा-साधा लड़का तो था नहीं औरतों की संगत में वह पूरा मर्द बन चुका था और ऐसे हालात में उसे क्या करना है वह अच्छी तरह से जानता था इसलिए उसके कहने के बावजूद भी हुआ है उसकी नंगी गांड को देखना चाहता था उसके रस को अपनी आंखों से पीना चाहता था वह देखना चाहता था की सोनू की चाची की नंगी गांड कैसी दिखाई देती है इसलिए उसकी बात का मान रखते हुए वह बोला,,,)

बिल्कुल भी नहीं चाची तुम बेफिकर रहो,,,।

(ईतना कहकर वह अपने मन मे हीं बोला साली एक बार साड़ी कमर तक उठाकर अपनी गांड तो दिखा मैं भी तो देखूं कितनी जवानी भरी है तेरे में,,,,, सूरज का दिल जोरों से धड़क रहा था,,, उसकी आंखों के सामने जवानी से भरी हुई औरत अपनी साड़ी कमर तक उठाकर पेशाब करने के लिए बैठने वाली थी,,, ऐसे हालात मर्दों के सामने बहुत कम बार ही आते हैं लेकिन सूरज की आंखों के सामने इस तरह का नजारा बार-बार समय दर समय पर दिखाई दे ही जाता था और इस तरह का नजारा देकर उसकी उत्तेजना परम शिखर पर पहुंच जाती थी आज एक बार फिर से जवानी से भरी हुई औरत उसकी आंखों के सामने थी जो की पेशाब करने जा रही थी इसलिए वह बेशब्र होता जा रहा था,,,,





सोनू की चाची का दिल भी जोरों से धड़क रहा था क्योंकि अपने जीवन में पहली बार वह किसी जवान लड़के की आंखों के सामने जानबूझकर पेशाब करने के लिए बैठने जा रही थी और वह भी अपनी नंगी गांड दिखाते हुए वरना अक्सर वह पेशाब करने जब भी बैठी थी तब वह अपनी साड़ी से अपनी नंगी गांड को ढके रहती थी लेकिन आज वह पहले से ही अपने मन में निश्चय कर ली थी कि ऐसा हुआ नहीं करेगी अपनी साड़ी को पूरी तरह से कमर तक उठाकर अपनी नंगी गांड दिखाते हुए पेशाब करेंगे ताकि उसकी बात बन सके इसलिए तो उसका दिल जोरो से धड़क रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अब कैसे आगे बढा जाए और आगे बढ़ने का यही बस एक रास्ता उसे नजर आ रहा था,,, और उसे पर वह अग्रसर थी।





घुटनों तक ऊठी हुई साड़ी धीरे-धीरे ऊपर की तरफ जा रही थी और उसकी मोटी तगड़ी जांघ नजर आने लगी थी जो कि एकदम मक्खन की तरह चिकनी दिखाई दे रही थी उसकी मोटी तगड़ी जांघ को देखकर उसे पर सूरज का इनाम फिसल रहा था। सोनू की चाची अपने तन बदन में उत्तेजना की लहर उठती हुई महसूस कर रही थी और वही लहर सूरज के भी बदन में उठ रही थी देखते ही देखते सोनू की चाची का नितंबों का निचला स्तर लकीर दिखाई देने लगा जिसे देखते ही सूरज से रहा नहीं गया और पजामे में तने हुए अपने लंड को अपने हाथ से दबाने लगा,,,, एक खूबसूरत औरत को इस तरह से अपने कपड़े ऊपर उठाते हुए उसके अर्धनग्न बदन को देखकर अपने लंड को दबाने में भी एक अद्भुत आनंद की प्राप्ति होती है और इस सुख को सूरज भली भांति अपने अंदर महसूस कर रहा था,,,।





जेठ की दुपहरी में इस खूबसूरत मनोरम्य दृश्य को सूरज के शिवा देखने वाला दूसरा वहां कोई भी नहीं था सूरज अच्छी तरह से जानता था किस जगह पर कोई आता जाता नहीं है इसलिए वह पूरी तरह से निश्चित था बेहद खूबसूरत नजारा था बड़े-बड़े पेड़ एक छोटा सा तालाब जिसमें पानी भरा हुआ था और उसके किनारे ही सोनू की चाची अपनी साड़ी को धीरे-धीरे उठा रही थी और पेशाब करने की तैयारी कर रही थी भला ऐसा नजारा कहां देखने को मिलता है पड़ेगी भाग्य से इस तरह का नजारा देखने को मिलता है और सूरज इस समय भाग्य का धनी था इसलिए तो वहां अपनी आंखों के सामने जवानी से भरी हुई औरत को पेशाब करते हुए देखने जा रहा था।





सोनू की चाची से भी रहा नहीं जा रहा था पेशाब करने का नाटक करते-करते वास्तव में उसे बड़े जोरों की पेशाब लगने लगी थी,,, जिसका असर उसके बदन पर अच्छी तरह से दिखाई दे रहा था तीव्रता से पेशाब के असर को वह अपने अंदर दबाने की कोशिश करते हुए अपने एड़ी को ऊपर नीचे कर रही थी,,,, अब उससे भी रहा नहीं जा रहा था लेकिन अपनी साड़ी को पूरी तरह से अपने नितम्बों को उजागर करने से पहले वह नजर घूमाकर सूरज की तरफ देख लेना चाहती थी इसलिए जल्दी से नजर पीछे की तरफ घुमाई तो सूरज को अपनी तरफ ही देखता हुआ पाकर वह अंदर ही अंदर एकदम प्रसन्न हो गई लेकिन सूरज की चोरी पकड़ी गई थी इसलिए वह अपनी साड़ी को कमर से ऊपर तक उठाने से पहले एक बार फिर से बोली,,,





क्या सुरज तु तो मेरी तरफ ही देख रहा है भला ऐसे में मैं कैसे पैसाब कर पाऊंगी,,,,।

ओहहह ओ,,,,, चाची अनजाने में तुम्हारी तरफ नजर चली गई मुझे लगा कि तुम पेशाब कर ली होगी लेकिन तुम तोअभी तक खड़ी हो जल्दी करो,,,।

क्यों क्या हुआ सीधे बड़ी है क्या आप भी तो बहुत समय है इतनी धूप में जाने जैसा नहीं है,,,।

बात तो तुम सच कह रही हो चाचा मैं भी यही सोच रहा था कि इतनी धूप में निकलना ठीक नहीं है यहां पर आराम हीं करना पड़ेगा जब तक की धूप थोड़ी कम ना हो जाए,,,।

चल ठीक है नजर दूसरी तरफ घूमा ले मुझे बड़ी जोरों की लगी है,,,।





ठीक है चाची,,,,(ऐसा कहते हुए सूरज अपने मन में ही बोला साली रंडी अपनी चूची को कैसे दबवा रही थी और अभी कह रही है कि शर्म आ रही है,,, कसम से एक बार मौका मिल गया ना तो अपना लंड डालकर इसकी बुर का भोसड़ा बना दूंगा,,,, सूरज दूसरी तरफ नजर घुमा लिया था यह देखकर सोनू की चाची मन ही मन मुस्कुराने लगी क्योंकि वह जानती थी कि पहले ही वह इस समय अपनी नजर घुमा लिया है लेकिन उसे पेशाब करता हुआ जरुर देखेगा उसकी नंगी गांड को देखकर उसका लंड जरूर खड़ा होगा और तब शायद बात बन पाए ,।

और ऐसा सोचते हुए वहां साड़ी को पूरी तरह से अपनी कमर तक उठा ली और उसकी नंगी गांड एकदम से उजागर हो गई छत की दुपहरी में धूप की वजह से उसकी नंगी गांड सुनहरी नजर आ रही थी पूरी तरह से उसकी नंगी गांड सोने से मढी हुई नजर आ रही थी,,,, सूरज भी तिरछी नजर से देख रहा था और उसकी सुनहरी गांड देखकर मन ही मन सोचने लगा कि इसीलिए तो औरत को सबसे अनमोल खजाना कहा जाता है,,, सोनू की चाची की जवानी से भरपूर गांड को देखकर सूरज का लंड अकड़ने लगा था मन तो कर रहा था किसी समय उसके पास पहुंच जाए और पीछे से उसे अपनी बाहों में भर ले और खड़े-खड़े उसकी चुदाई करते लेकिन ऐसा करना उचित होता है क्योंकि सोनू की चाची की नजर में वहां इन सब बातों से बिल्कुल अनजान था वह इस खेल में धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहता था और मजा भी तो आ रहा था धीरे-धीरे आगे बढ़ाने में इस बात से वह इनकार नहीं कर पा रहा था।





सोनू की चाची को भी बड़ी जोरों से पेशाब लगी हुई थी वह इसलिए एकदम से नीचे बैठ गई और पेशाब करना शुरू कर दी उसकी गुलाबी छेद से पेशाब की धार बड़ी तेजी से निकल रही थी और और उसमें से आ रही सिटी की आवाज कैसे सुनसान जगह पर अपनी मधुर ध्वनि छोड़ रही थी जो पल भर में ही सूरज के कानों तक पहुंच गई थी और सिटी की आवाज को सुनते ही सूरज समझ गया कि, सोनू की चाची पेशाब करना शुरू कर दी है और उसे आवाज को सुनकर सूरज से रहा नहीं गया,,, सूरज ने तुरंत नजर घुमा कर सोनु की चाची को देखने लगा,,, और उस नजारे को देखकर सूरज की तो हालत एकदम से खराब हो गई।

हालत खराब कैसे न होती आखिरकार नजारा ही कुछ ऐसा था,,,, उसकी जगह कोई और होता तो उसकी भी हालत खराब हो जाती वैसे तो सूरज ने इस तरह के नजारे को बहुत बार देख चुका था लेकिन आज के नजारे में कुछ अद्भुत प्रकार का नशा था जिसे देखने के बाद ही सूरज की आंखों में जाने लगा था वैसे तो वह मुखिया की बेटी को भी पेशाब करते हुए देख चुका था जो कि सोनू की चाची की हम उम्र थी,,, लेकिन दोनों के बदन की बनावट में जमीन आसमान का फर्क था मुखिया की बीवी से सोनु की चाची मजबूत बदन की मालकिन थी,,, इसलिए मुखिया की बीवी के बदन की तुलना सोनू की चाची का बदन कुछ ज्यादा ही भरा हुआ था और उसकी गांड मुखिया की बीवी की गांड से ज्यादा बड़ी थी इसलिए तो सूरज की हालत खराब होती जा रही थी,,, मुखिया की बीवी की खाना खा तो पूरा मजा सूरज ले चुका था और उसे पर पूरी तरह से काबू भी कर चुका था लेकिन सोनू की चाची की गांड को ज्यादा ही बड़ी थी जिसे देखकर सूरज अपने मन में सोचने लगा बाप रे अगर मिल जाए तो मजा ही आ जाए इस पर कुछ ज्यादा ही मेहनत करनी पड़ेगी।





ऐसा अपने मन में सोचते हुए पाई जाने के ऊपर से ही सूरज अपने लंड को दबाने लगा,,,, बुर से निकल रही सिटी की आवाज लगातार उसके कानों में रस घोल रही थी जिसे सुनकर सूरज मन ही मन पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डूबने लगा था,, सूरज बेकरार साथ तड़प रहा था कि कब उसकी नंगी गांड को स्पर्श करने का मौका मिलेगा तब उसकी जवानी से खेलने का मौका मिलेगा वैसे तो सोनू की चाची की हालत को देखकर उसे पूरा यकीन हो गया था कि जल्द ही वह शुभ अवसर उसे मिलाने वाला है लेकिन फिर भी सूरज के लिए अब सब्र करना नामुमकिन हुआ जा रहा था,,,।

जेठ की दुपहरी में तालाब के किनारे सोनू की चाची बैठकर पेशाब कर रही थी और सुनहरी धूप में उसकी नंगी गांड सोने की तरह चमक रही थी और उसके ईर्द-गिर्द उगी हुई घास उसकी नंगी गांड की शोभा और ज्यादा बढ़ा रही थी,,, इसलिए तो सूरज से बर्दाश्त के बाहर हुआ जा रहा था,,,, सूरज अब अपने आप पर काबू नहीं कर पा रहा था इसलिए अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया और धीरे-धीरे कर कदमों से सीधे जाकर उसके पास खड़ा हो गया नजदीक से उसकी गांड देखकर करे ऐसा लग रहा था कि आसमान का चांद जमीन पर उतर आया हो उसे जी भरकर सूरज देखा ही रहा था कि इस बात से अनजान की सूरज ठीक उसके पास भी आकर खड़ा हो गया है वह नजर घुमा कर देखी तो सूरज को अपने पीछे खड़ा देखकर उसके एकदम से होश उड़ गए और वह एकदम से अपनी नंगी गांड को जानबूझकर साड़ी की ओट में छुपाने की कोशिश करते हुए बोली।

सूरज तू इधर आ गया,,,!
 
हालात पूरी तरह से बेकाबू होता चला जा रहा था,,जिस तरह का नजारा सूरज की आंखों के सामने दिखाई दे रहा था उसकी जगह कोई और होता है तो शायद उसकी भी हालत होतीक्योंकि मर्दों की हमेशा फिट रहती है यही रही है कि वह किसी ने किसी बहाने से औरत को नग्न अवस्था में या अर्धनग्न अवस्था मेंदेख पाए और यहां तो एक खूबसूरत औरत अपनी साड़ी कमर तक उठाकर पेशाब करने देती हुई थी भला इस तरह के मदहोश कर देने वाले नजारे को देखने से कौन इनकार कर पाएगा,,, इसलिए सोनू की चाची ऊपरी मन सेसूरज को मना कर रही थी कि उसकी तरफ मत देखना और अंदर से यही चाहती थी कि सूरज उसकी भरपूर जवानी को अपनी आंखों से देखें और ऐसा ही हुआ था सूरज जो औरतों के मामले में धीरे-धीरे पूरा खिलाड़ी बनता चला जा रहा था भला इस तरह के नजारे को देखने से कैसे अपने मन को रोक पाता,,,।





और वही हुआ जैसा कि सोनू की चाची चाहते थे और वैसे भी सोनू की चाची सूरज को अपनी भरपूर जवानी के दर्शन करना ही चाहती थी वरना,,, भला ऐसी कौन सी औरत होगी जो जानबूझकर एक जवान लड़के के सामने पेशाब करने बैठ जाती है वह संस्कारी तो बिल्कुल भी नहीं होगी और इस समय सोनू की चाची भी पूरी तरह से बेशर्म बन चुकी थी।अपने बरसों के विवाहित जीवन से वह इतना तो सीख ही चुकी थी कि श्रम करने में अब कोई फायदा नहीं है अगर शर्म करती रह गई तो वह ना तो शरीर सुख पाएगी और ना ही मां बनने का शुभ प्राप्त कर पाएंगे इसीलिए उसका भी प्रेशर में बनना जरूरी होता जा रहा था और वह पूरी बेशर्मी सूरज के सामने ही दिखा रही थी। वह जानती थी किसूरज उसे पेशाब करते हुए देखेगा उसकी बड़ी-बड़ी गांड को देखेगा तो जरूर उत्तेजित हो जाएगा और उसके साथ शरीर संबंध स्थापित करेगा,,,।





सोनू की चाची को पेशाब करते हुए देखकर ऐसा नहीं था कि सिर्फ सूरज की ही हालत खराब थी सूरज की उत्तेजित हुआ जा रहा था बल्कि जिंदगी में पहली बार इस तरह का नजाराऔर वह भी जान पूछ कर एक जवान लड़के को दिखाने में सोनू की चाची की भी हालत खराब होती जा रही थी उसके बाद में भी मदहोशी जा रही थी जवानी का नशा सर चढ़कर बोल रही थी भले ही उसकी बुर से पेशाब की धार फूट रही हो लेकिन मदहोशी के मारे उसके मदन रस की बौछार भी हो रही थी,,, जेठ की कड़कती धूप में एक खूबसूरत जवान से भरी हुई औरत को बड़ी-बड़ी खास के बीच में बैठकर पेशाब करता हुआ देखकर सूरज की रोशनी में चमकती हुई उसकी मदहोश कर देने वाली गांड को देखकर सूरज की हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी सूरज ने अब तक सोनू की चाची के सामने ऐसा ही जाते था की औरतों के बारे में उसे कुछ ज्ञात नहीं है इसीलिए तो सोनू की चाची उसे अपनी जवानी का जलवा दिखा रही थी और उसकी मदद कर देने वाली गांड को देखकर सूरज के बेसब्री का बांध टूटने लगा था और वह धीरे-धीरे उसके करीब पहुंच गया था।





सोनू की चाची को इसका अंदेशा बिल्कुल भी नहीं था कि सूरज उसके करीब पहुंच जाएगा इसलिए सूरज को अपने पास देखकर वह जानबूझकर शर्माने का नाटक करते हुए साड़ी की ओट में अपनी नंगी बड़ी-बड़ी गांड को छुपाने की कोशिश करते हुए बोली।

अरे सूरज तो इधर क्यों आ गया तुझे तो मैं देखने के लिए मन की थी,,,।

क्या करूं चाची तुम्हें पेशाब करता हुआ देखकर मुझे भी बड़ी जोरों की पेशाब लग गई,,(सोनू की चाची के एकदम बगल में खड़ा होकर वहां पजामे में तने हुए अपने तंबू को दबाते हुए बोला और उसकी हरकत को सोनू की चाची तिरछी नजर से देख रही थी और उसकी हरकत को देखकर मन ही मन उत्तेजित हो जा रही थी सोनू की चाची सूरज की बात को सुनकर बोली,,,)

अरे तो तुझे पेशाब लगी थी तो वहीं कहीं कर लेता मेरे पास आने की क्या जरूरत थी,,,।





पता नहीं चाचा लेकिन मुझे रहने की और मैं यहां आ गया तुम कहो तो मैं दूसरी जगह चला जाता हूं पेशाब करने के लिए,,,।

नहीं नहीं अब तु आ ही गया है तो यही कर ले,,, यहां पर पेड़ की छाव भी है,,, दूसरी जगह जाएगा तो बड़ी तेज धूप है,,,,(तिरछी नजर से सुरज के तंबू की तरफदेखते हुए बोली वैसे तो अब वह पेशाब कर चुकी थी उसकी बुर से पेशाब की धार निकलना बंद हो चुकी थी लेकिन वह जान पूछ कर बैठी हुई थी क्योंकि वह भी सुरज के मोटे-फटे लंड को देखना चाहती थी,,, और यही मौका थासोनू की चाची के लिए सूरज के मोटे कपड़े लैंड के दर्शन करने के लिए इसलिए वह इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहती थी क्योंकि जिस तरह से सूरज उसके करीब खड़ा था निश्चित तौर पर उसके सामने ही वह भी पेशाब करने वाला था,,, और सूरज भी तो यही चाहता था,वह जल्द से जल्द सोनू की चाची को अपने लैंड के दर्शन करना चाहता था अपने मर्दाना अंग के दर्शन करा कर वह जल्द से जल्द उसकी दोनों टांगों के बीच जगह बनाना चाहता था वह अच्छी तरह से जानता था की प्यासी औरत मर्द के मोटे तगड़े लंड को देखकर सबर नहीं कर पाती उससे रहा नही जाता और वह मर्द के साथ एकाकार हो जाती है।





सोनू की चाची की इजाजत ताकतसूरज का दिल जोरो से धड़कने लगा था क्योंकि उसे पूरा मौका मिल गया था सोनू की चाची को अपना लंड दिखाने के लिए,, और इससे सुनहरा मौका अब उसके हाथ में आने वाला नहीं था इसलिए वह भी इस मौके का पूरी तरह से फायदा उठा लेना चाहता था,,, सूरज तो पहले से लालायित था,,इस खेल में आगे बढ़ाने के लिए और अब तो उसे रास्ता भी मिल गया था अपने मंजिल तक पहुंचाने के लिए इसलिए वह सोनू की चाची की बात को काट भी नहीं सकता थाइसलिए वह भी नीचे कर लिया था कि सोनू की चाची की आंखों के सामने ही भाभी पेशाब करेगा ताकि वह उसके लंड को देख सके,,,।

जेठ की दुपहरी की गर्मीउतनी आज नहीं बरसा रही थी जितनी की सोनू की चाची की जवानी आग बरसा रही थी,,,सोनू की चाची पेशाब कर चुकी थी लेकिन अभी भी कमर के नीचे वह पूरी तरह से नंगी होकर बैठी हुई,,, और इसीलिए इस मौके का फायदा उठाते हुए बार-बार सूरज उसकी नंगी गांड की तरफ देख ले रहा था सूरज समझ गया था कि अब यह उठने वाली नहीं है,,, जब तक की पूरा मामला साफ नहीं हो जाता तब तक यह अपनी जवानी का जलवा दिखाई रहेगीऔर वैसे भी सोनू की चाची की बड़ी-बड़ी गांड को देखने में सूरज की उत्तेजना निरंतर बढ़ती जा रही थी,,दोनों की सांसों की गति बड़ी तेजी से चल रही थी दोनों की हालत खराब थी दोनों आगे बढ़ना चाहते थे लेकिन बस इसी ताक में थे कि कौन शुरुआत करता है,,,सोनू की चाची के लिए तो यह पहला मौका था लेकिन सूरज इस खेल में पूरी तरह से पक्का खिलाड़ी होता जा रहा था इसलिए कैसे आगे बढ़ाना है उसे अच्छी तरह से मालूम था और सोनू की चाची की आंखों के सामने पेशाब करने की युक्ति भी सूरज की ही थी जिस पर अब अमल करने की देरी थी।





सोनू की चाची की इजाजत पाते हैं सूरज से रहा नहीं जा रहा था वैसे भी उत्तेजना उसके सर पर चढ़कर बोल रही थी और सोनू की चाची को पैसाब करते हुए देखकर जहां एक तरफ वह उत्तेजित हुआ जा रहा था वहीं दूसरी तरफ उसे भी पेशाब बड़ी जोरों की लगने लगी थी,,, पजामे बना हुआ तंबू सोनू की चाची के होश उड़ा रहा था वह तिरछी नजर से बार-बारसूरज के तंबू की तरफ देख ले रही थी और उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि वाकई में उसके पजामे के अंदर उसके लायक ही हथियार है,,,सोनू की चाची इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि जब लक्ष्य अभेद हो तो उसे भेंदने के लिए हथियार भी मजबूत होना चाहिए,, और उसे अपना हथियार मिल चुका था,,,।सूरज सोनू की चाची को तड़पाना चाहता था इसलिए अपने पजामी का हाथ रखकर वह उसे नीचे की तरफ सरकार नहीं रहा था बल्कि बार-बार सोनू की चाची की तरफ देख रहा था कभी उसके खूबसूरत चेहरे की तरफ देखा तो कभी उसकी उभरी हुई बड़ी-बड़ी गांड की तरफ देखा दोनों चमक रही थी,,,शर्म और उत्तेजना में सोनू की चाची का चेहरा टमाटर की तरह लाल हो चुका था।





लेकिन अब ज्यादा तड़पना उचित नहीं था इसलिएसूरज अपने पजामे को दोनों हाथों से पकड़कर उसे धीरे-धीरे नीचे की तरफ सरकाने लगा,, लेकिन नीचे की तरफ सरक नहीं रहा था क्योंकि उसमें उसका खूंटा अड़ जा रहा था,, वह बार-बार उसे नीचे की तरफ सरकने की कोशिश करता है लेकिन उसके लंड की लंबाई उसकी कड़कपन उसका उत्थान, पजामे को नीचे सरकने से रोक रहा था,,, यह देखकर सोनू की चाची अपने मन में सोच रही थी कि काश उसके पजामे को उतारने का मौका उसे मिलता तो कितना मजा आता,,,, लेकिन वह मुक प्रेछक बनकर सिर्फ देख रही थी,,,, वैसे तो सूरज बड़े आराम से अपना पैजामा उतार देता लेकिनसोनू की चाची की आंखों के सामने वह जानबूझकर इस तरह की हरकत कर रहा था मैं सोनू की चाची को तड़पाना चाहता था। और वह तड़प भी रही थी।





लेकिन फिर सूरज पजामे को आगे की तरफ खींचकर उसे धीरे सेअपने लंड से बाहर कर दिया और पजामा के उतरते ही जो नजर सोनू की चाची की आंखों के सामने दिखाई दिया उसे देखकर तो सोनू की चाची के दिल की धड़कन एकदम से पढ़ने लगी उत्तेजना और आश्चर्य से उसकी आंखें फटी की फटी रह गई और लाल लाल होठ अपने आप खुल गए,,, लाल-लाल होठों का हाल तो बुरा था ही उसके दोनों टांगों के बीच के गुलाबी होठ भी उत्तेजना के मारे फूलने पिचकने लगे थे। वास्तविकता यही थीकी सोनू की चाची ने इस तरह के मर्दन अंगों को कभी अपनी आंखों से देखी ही नहीं थी और ना ही उसे बात का यकीन था कि किसी के पास इस तरह का मर्दाना अंग हो भी सकता है। अब तक उसने अपने पति के ही लंड को देखी थी जोकी इसके सामने वो पूरी तरह से बच्चा ही था,,, इसलिए उसके आश्चर्य का ठिकाना न था,,।





सूरज सोनू की चाची की हालत को समझ सकता था वह अच्छी तरह से जाता था कि सोनू की चाची के मन में क्या चल रहा होगा क्योंकि वह तिरछी नजरों से देख रही थी और काफी देर हो चुकी थी उन्हें पेशाब करने की मुद्रा में बैठे हुए और वह यह भी जानता था कि सोनू की चाची जानबूझकर बैठी हुई है वरना वह उठकर चली जाती वह भी वही सब चाहती है जैसा कि वह जा रहा है तो इसमें हर्ज ही क्या है सूरज अपने मन में ऐसा सोचते हुए धीरे से अपने लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया और पेशाब करना शुरू कर दिया,,, लंड की नसों में लहू पूरी तरह से दौड़ रहा था उसका उत्थान परम शिखर पर था उसे रोक पाना नामुमकिन नजर आ रहा था और पेशाब की धार एकदम तेजी से लगभग लगभग 2 मीटर की दूरी तक जा रही थी,,, यह सब देखकर सोनू की चाची मदहोश हुए जा रही थी उसके लिए यह सब असहनीय होता जा रहा था,,,।





सूरज अच्छी तरह से जानता था कि उसे क्या करना है वह पूरी तरह से सोनू की चाची को मदहोश कर देना चाहता था इसलिए जानबूझकर,,अपने हाथ से अपने लंड को ऊपर नीचे करके हिलना शुरू कर दिया यह नजारा सब सोनू की चाची के लिए और भी ज्यादा उत्तेजित कर देने वाला था वह पूरी तरह से पागल हुए जा रही थी तिरछी नजरों से देखते-देखते वह अब सीधे-सीधे सूरज के खड़े लंड को देख रही थी उसकी आंखों में वासना और प्यास दोनों साफ नजर आ रही थीयही तो सूरज चाहता था सूरज के तन बदन में भी उत्तेजना की लहर उठ रही थी जिसका असर उसके लंड पर पड़ रहा था और वह पूरी तरह से लोहे के रोड की तरह एकदम कड़क हो गया था,,,, और वह जिस तरह से हिला रहा था,,, सोनू की चाची की बुर पानी छोड़ रही थी,,,वह अपने मन में सोचने लगी की यही सही मौका है अपने मन की मुराद पूरी करने के लिए और वह इस तरह का मौका अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहती थी इसलिए वह अपने मन में पूरी तरह से निश्चय कर ली थी और तुरंत अपना हाथ आगे बढ़ाकर सूरज का लंड को पकड़ ली थी।





सूरज एकदम मदहोश हो गया जब सोनू की चाची की नरम नरम हथेलियां उसके लंड के इर्द गिर्द कसती चली गई,,, हालांकि अभी भी उसमें से पेशाब की धार निकल रही थी और इस अवस्था में उसे पकड़ने का मजा ही कुछ और था जिसे सोनू की चाची अंदर ही अंदर महसूस कर रही थी लेकिन सोनू की चाची की ही हरकत पर सूरज मासूम बनता हुआ बोला,,,।

यह क्या कर रही हो चाची,,,?(ऐसा कहते हुए सूरज अपने लंड कोपीछे करने के लिए अपनी कमर को पीछे खींचने लगा लेकिन उसको ऐसा करता हुआ देखकर सोनू की चाची उसके लंड पर अपनी मुट्ठी का कसाव उस पर एकदम से बढ़ा दी थी और उसे दबोच ली थी,,,, जिससे सूरज चाह कर भी अपने लंड को उसकी पकड़ से निकाल नहीं पाया था,,, सोनू की चाची की इस हरकत सेसूरज मदहोश हो गया था उसकी उत्तेजना परम शिखर पर पहुंच चुकी थी वह कुछ बोल नहीं पाया था लेकिन सोनू की चाची बोली,,,)





हाय दइया इतना मोटा और लंबा क्या है रे,,,,!(आश्चर्य जतातें हुए सोनू की चाची बोली,,,)

ककककक,,, क्या चाची,,,?(जानबूझकर हैरानी का नाटक करते हुए सूरज बोला)

तेरा यह लंड और क्या,,,,(मट्ठी में कसते हुए)कितना गजब का है मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है कि किसी का इतना बड़ा और मोटा हो सकता है मैंने तो आज तक ऐसा कभी नहीं देखी,,,,.

(सोनू की चाची किस तरह की बातें सुनकर सूरज अंदर ही अंदर प्रसन्न हो रहा था और अपने लंड पर गर्व महसूस कर रहा था,,,, सोनू की चाची की बातें उसे अच्छी लग रही फिर भी उसकी बातों को सुनकर अनजान बनता हुआ बोला,,,)





क्या कह रही हो चाची सबके पास तो ऐसा ही होता है और चाचा जी के पास भी ऐसा ही होगा,,,,(गहरी सांस लेता हुआ सूरज बोला)

झूठ तेरे जैसा किसी के पास नहीं है और चाचा जी के पास तो सिर्फ उंगली के बराबर है तभी तो मैं तेरा देख कर एकदम हैरान हूं,,,, कसम से बहुत गजब का है,,,(ऐसा कहते हुए सोनू की चाची हल्के हल्के उसे मुठियाना शुरू कर दी थी जिससे सूरज के बदन में सुरूर चढ़ता जा रहा था,,, सोनू की चाची की हरकत से उसे आनंद की प्राप्ति हो रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था,,,, फिर भी सोनू की चाची की बात को सुनकर वह बोला,,,)

ऐसा कैसे हो सकता है चाची,,,,मेरे जैसा अंग तो हर जवान लड़की के पास होता है हर मर्द के पास होता है फिर अलग-अलग कैसे हो सकता है,,,।

यही तो दिक्कत है,,, तुझे कुछ पता ही नहीं है तुझे पता होता तो शायद यह बात ना करता और खुद ही मुझे दिखाते हुए बोलना कि देखो मेरा कितना बड़ा और लंबा है,,,,।(सोनू की चाची उसी तरह से मदहोशी में उसे पकड़े हुए बोली,,, ईस अभी भी उसमें से पेशाब की धार निकल रही थी,,,,।





जेठ की गर्मी में माहौल पूरी तरह से गर्म होता जा रहा था जिस तरह का नजारा था वह बेहद मदहोश कर देने वाला था सोनू की चाची को भी और सूरज को भी सोनू की चाची तो अभी तक पेशाब करने वाली मुद्रा में बैठी हुई थी अभी तक उसकी नंगी गांड सुनहरी धूप में चमक रही थीऔर उसके पास में ही खड़ा होकर सूरज इस तरह से पेशाब कर रहा था उसके मर्दाना अंग पर किसी भी औरत की नजर जाती तो ऐसेहालत में वह उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने से बिल्कुल भी नहीं कतराती,,,,सूरज की सांस ऊपर नीचे हो रही थी और यही हाल सोनू की चाची का भी थाजिंदगी में पहली बार उसने इतना मोटा तगड़ा लंड देखी थी और उसे अपने हाथ में पड़ी हुई थी उसकी कर्माहट उसे अपने बदन में अच्छी तरह से महसूस हो रही थी और इस तरह की गरमाहट को महसूस करके वह पूरी तरह से पानी पानी हुई जा रही थी,,,गहरी सांस लेते हुए सोनू की चाची की बात को सुनकर सूरज फिर से अपनी मासूमियत दिखाने का नाटक करते हुए बोला,,,)





तो क्या हुआ चाचा मोटा लंबा चाहे जैसा भी होचाहे पतला हो मोटा हो लंबा हो आखिरकार पेशाब ही तो करना है,,,,।

(सूरज की बातों को सुनकर सोनू की चाची मन ही मन प्रसन्न होने लगी उसे इस बात का एहसास होने लगा कि सूरज पूरी तरह सेऔरत और मर्द के बीच के खेल से अनजान है उसे बिल्कुल भी नहीं पता की मर्द और औरत के बीच होता क्या है और इस अंग से किया क्या जाता है इसलिए वह मुस्कुराते हुए बोली,,)

तू सच में एकदम नादान है तो सच में इसके और भी क्या काम होते हैं उसके बारे में नहीं जानता,,,!(सूरज के लंड को मुठीयआते हुए सोनू की चाची बोली,,,)

भला ईससे और क्या काम होता होगा चाची,,, मैंने तो आज तक सिर्फ इससे पैसाब ही किया है,,, इससे और क्या काम होता है यह तो मैं नहीं जानता,, और ना ही किसी ने मुझे बताया है क्या सच में इससे कोई और भी काम किया जाता है,,,।

(सूरज की बात सुनकर सोनू की चाची के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और वह उसके सवाल पर एक सवाल और दागते हुए बोली,,,)

अच्छा चल यह बता,,, जिस तरह से तू बोल रहा है कि पैसाब ही किया जाता है,,,,(ऐसा कहकर वह सूरज के चेहरे की तरफ देखने लगी वह देखना चाहती थी कि उसके मुंह लंड जैसे खुले शब्दसुनकर उसके चेहरे का हाव-भाव कैसे बदलता है और ऐसा ही हुआ सोनू की चाची के मुंह से लंड शब्द सुनकरसूरज के चेहरे का हाफ पूरी तरह से बदलने लगा था उसे यकीन नहीं था कि सोनू की चाची इस तरह से एकदम से उसका खुल के नाम ले लेगी और उसके इस तरह से नाम लेने पर वह पूरी तरह से मदहोश होने लगा था और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)

तो क्या तू जानता है कि हम औरतों की बुर से,,,(एक बार फिर से सोनू की चाची के मुंह से बुर शब्द सुनकर सूरज के दीलों दिमाग पर उत्तेजना का धमाका होने लगा,,,उसका मुंह आश्चर्य और उतेजना से खुला का खुला रह गया और सोनू की चाची अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,) सिर्फ पेशाब करने का ही काम किया जाता है और कोई काम नहीं होता इससे,,,,।

(सोनू की चाची के मुंह सेइस तरह की बात सुनकर और खास करके बुर शब्द सुनकर सूरज पूरी तरह से मदहोश हो चुका था वह वैसे तो सोनू की चाची के सवाल का जवाब अच्छी तरह से दे सकता थाक्योंकि उसके साथ क्या किया जाना चाहिए वह अच्छी तरह से जानता था और इस तरह का सुख भोग भी चुका थालेकिन फिर भी सोनू की चाची के आगे उसे अनजान बना था मासूम बना था इसलिए वहां कुछ बोला नहीं बस आश्चर्य से अपना मुंह खुला रखकर उसकी बात को सुनता रहा अभी भी उसका लंड सोनू की चाची के हाथ में था और पूरे उफान पर था,,,सूरज की हालत को देखकर वह मन ही मन मुस्कुराने लगी क्योंकि वह किसी भी तरह का जवाब नहीं दे रहा था समझ गई की ईसने अभी तक बुर को देखा ही नहीं है इसलिए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)

अच्छा यह बता गांड तो तूने देख लिया लेकिन क्या कभी औरत की बुर देखा है,,,,।

(सोनू की चाची के मुंह से इस तरह के अश्लील शब्दों को सुनकर जहां सूरज का उत्तेजना का ठिकाना नहीं था वहीं दूसरी तरफ वहां जानबूझकर अपने चेहरे परहैरानी के भाव ला रहा था ताकि सोनू की चाची को यही लगे कि उसने आज तक औरत के अंगों के भूगोल के बारे में कुछ ज्यादा जानता ही नहीं है और ऐसा ही हो रहा था जिस तरह सेहैरानी वाले भाव सूरज ने अपने चेहरे पर बना कर रखे तो उसे देखते हुए सोनू की चाची के चेहरे की मुस्कान बढ़ने लगी थी वह समझ गई थी कि उसने आज तक औरत के खूबसूरत अंगों को कभी देखा ही नहीं है इसलिए मुस्कुराती हुई बोली,,,)

हाय दइया तु तो एकदम नादान है,,,,(सूरज के लंड को ऊपर नीचे करके हिलाते हुए वह बोली,,,, सोनू की चाची की हरकत से सूरज एकदम से गनगना गया,,,, पर्वत धीरे से अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई उसकी साड़ी उसके उठते हीउसकी कमर से नीचे गिर गई और एक खूबसूरत नजारे पर पर्दा पड़ गया और वह इधर-उधर देख रही थी शायद कोई जगह ढूंढ रही थी सूरज समझ गया कि अभी यह कुछ करना चाहती हैऔर फिर उसकी एक जगह नजर गई जहां पर एक टूटी हुई मड़ई थी,,,, और जगह पर नजर पड़ते ही उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और वह मुस्कुराते हुए बोली,,,)

लगता है तुझे वह भी दिखाना पड़ेगा,,,,, चल मेरे साथ,,,,(ऐसा कहते हुए वहां सूरज के लंड को पकड़े हुए ही उस मड़ई की तरफ आगे बढ़ने लगी,,,,सूरज के पास बोलने के लिए कोई शब्द नहीं बचे थे वह आप सोनू की चाची के हाथों की कठपुतली बनने के लिए तैयार था क्योंकि वह जानता था कि उसके हाथों की कठपुतली बनने में ही आनंद ही आनंद हैऔर वह इस आनंद को अंदर महसूस करना चाहता था जिसकी शुरुआत हो चुकी थी उसका मोटा तगड़ा लंड सोनू की चाची के हाथों में था जिसे वह पकड़ कर मडई की तरफ बढ़ रही थी।
 
सूरज ने जो कुछ भी अपनी आंखों से देखा थावह पूरी तरह से उसे उत्तेजना से भर दिया था और वैसे भी उसकी जगह कोई और भी होता तो शायद उसकी भी हालत होती क्योंकि एक जवान मर्द की आंखों के सामने एक जवानी से भरी हुई खूबसूरत औरत अगर अपनी गांड दिखाकर पेशाब करती हो तो शायद ही कोई मर्द होगा जो उत्तेजित न हो जाए, और सूरज की आंखों के सामने तो जवानी की पूरी परिभाषा जो प्यासी भी थी शादीशुदा भी थी और साथ में उसकी गोद भी सुनी थी और वह खुद इस इंतजार में थी कि कब उसकी गोद हरि हो कब एक जवान पुरुष का सॉन्ग उसे प्राप्त हो जिसके चलते वह अपनी काम अभिलाष को पूर्ण कर सके,,। और दोनों के लिए ऐसा लग रहा था कि जैसे वह समय आ चुका था।





सोनू की चाची को पेशाब करते हुए देखकर सूरज अपनी भेजना पर काबू नहीं कर पाया था और पेशाब करने के बहाने ठीक सोनू की चाची के बगल में खड़ा होकर पेशाब कर रहा था उसके मोटे तगड़े लंड को देखकर सोनू की चाची की हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी वह अपने आप पर काबू नहीं कर पा रही थी और ऐसे हालात में वह पूरी तरह से मस्ताई घोड़ी बन चुकी थी,, जो किसी भी तरह से इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहती थी। इसी लिए तो वह पूरी तरह से बेशर्मी दिखाते हुए अपना हाथ आगे बढ़ाकर सूरज के लंड को पकड़ ली थी और सूरज पूरी तरह से मस्त हो चुका था।सोनू की चाची सूरज को पूरी तरह से नादान लड़का ही समझ रही थी क्योंकि जिस तरह से उसने उससे पूछी थी कि क्या कभी औरत की बुर देखा है तो उसने ना में ही सिर हिलाया था,,और सूरज भी पूरी तरह से अपने आप को नादान साबित करते हुए सोनू की चाची से यह कहा था कि मर्दों का लंड केवल पेशाब करने के ही काम आता है,,, और उसकी लंबाई और मोटाई से कुछ खास फर्क नहीं पड़ता।





सूरज की बातों को सुनकर सोनू की चाची मन ही मन बहुत प्रसन्न हो रही थीक्योंकि उसे ऐसा लग रहा था कि सूरज पूरी तरह से नादान है औरतों के बारे में कुछ नहीं जानता और चुदाई के बारे में तो इसे कुछ भी नहीं पता होगा यही जानकर वह उसे सब कुछ सीखना चाहती थी और अपना उल्लू सीधा करना चाहती थी जिसके चलते उसने उत्तेजना में उसके लंड को पकड़ लेती हो अपने कपड़ों को व्यवस्थित करके उसे मड़ई की तरफ ले जा रही थी यह कहते हुए की चल तुझे सब कुछ दिखाती हुं।सूरज भला क्यों इंकार करता हुआ तो खुद यही सब चाहता था और वैसे भी दोनों के पास समय भी पर्याप्त था सही समय पर दोनों घर से बाहर निकले थे अभी कड़ी धूप थी वातावरण में ठंडक फैलने में अभी काफी समय था और इसी मौके का फायदा दोनों उठा लेना चाहते थे।





सोनू की चाची सूरज के लंड को हाथ में पकड़े हुए मड़ई की तरफ चली जा रही थी,, सूरज का पायजामा उसकी जांघों तक था जिसे वह पकड़े हुए था,,,, फिर भी सूरज नादानी का नाटक करते हुए बोला,,,।

अरे चाची पजामा तो पहन लेने दो,,,।

कोई जरूरत नहीं है पहनने की,,,(मुस्कुराते हुए) मड़ई में चलकर कपड़े उतारना ही पड़ेगा,,!

ऐसा क्यों चाची,,,(नादानी भरे स्वर में सूरज बोला)

तुझे बहुत कुछ दिखाना है तुझे औरतों के बारे में कुछ नहीं मालूम ना तो तू खुद को पहचान पाया है नहीं अपनी मर्दाना ताकत कोकभी इस्तेमाल कर पाया है इसीलिए मैं तुझे सब कुछ सीखाना चाहती हूं ताकि तुझे आगे कोई तकलीफ ना हो,,।

तुम क्या कर रही हो चाची मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,।

अंदर चल सब समझ जाएगा,,,।

अंदर क्यों यही समझाओ ना,,,





अरे बेवकूफ भले ही यह एकांत जगह लग रही है लेकिन यहां से कोई भी कभी भी आ जा सकता है यहां पर अगर किसी ने हम दोनों को ईस अवस्था में देख लिया तो गजब हो जाएगा।

ऐसा क्या हो जाएगा चाची जो तुम इतना डर रही हो,,,,।

सब तुझे समझ में आ जाएगा थोड़ा सब्र रख वैसे भी तेरा लंड कुछ ज्यादा ही बड़ा है,,, पता नहीं कौन सी तेल से मालिश करता है गधा जैसा बना लिया है।

मैं किसी भी तेल से मालिश नहीं करता यह ऐसा ही है,,,।(नादानी भरे स्वर में सूरज बोला)

लगता तो बिल्कुल भी नहीं है ऐसा लगता है कि रोज सरसों का तेल पिलाता है तभी इतना खा पीकर मोटा और लंबा बना है।(सोनू की चाची लंड की गर्मी को अपनी हथेली में महसूस करके पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी इसका असर उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में पड़ रहा था,,, उसमें से मदन रस टपक रहा था जिसके चलते वह पूरी तरह से चुदवासी हुए जा रही थी। और जल्द से जल्द अपनी इच्छा को पूरी करना चाहती थी सोनू की चाची की बात सुनकर सूरज बोला,,,)





नहीं नहीं चाचा बिल्कुल भी नहीं मैंने तो आज तक इसे ठीक से देखा भी नहीं हो और वैसे भी से देख कर करना क्या है पेशाब करते समय ही सिर्फ हाथ में आता है,,।

तू सच में सबसे बड़ा बेवकूफ हैपूरी तरह से जवान हो गया लेकिन अपने लंड की सही उपयोग करना नहीं आता आज मैं तुझे बताती हूं कि इसका सही उपयोग क्या है पागल तो नहीं जानता कि तेरे पास जो हथियार है औरतों को तेरा गुलाम बनाने के लिए काफी है,,।

औरतों को गुलाम,,, में कुछ समझा नहीं चाची,,,(एकदम अनजान बनता हुआ सूरज बोला,,,वह जानता था कि सोनू की चाची जो कुछ भी बोल रही है उसमें पूरी तरह से सच्चाई है इसका उपयोग जिसके साथ भी उसने किया था वह सच में उसकी गुलाम बन चुकी थी,,, और वह अपने मन में सोच रहा था कि अब सोनू की चाची की बारी है,,)





सब समझ जाएगा बस थोड़ा सब्र रख,,,,(ऐसा कहते हुए सोनू की चाची मड़ई के पास पहुंच चुकी थी,,, अभी भी उसके हाथ में सूरज का लड था जो की पूरी अपनी औकात में खड़ा था,,,सोनू की चाची यह सोचकर ही पानी पानी में जा रही थी कि थोड़ी देर में वह उसे अपनी गुलाबी बुर में ले लेगी तब कितना मजा आएगा,,,। वहां पर खड़ी होकर एक बार फिर से तसल्ली कर लेने के लिए सोनू की चाची इधर-उधर देखकर ईत्मिनान कर लेना चाहती थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है,,,, लेकिन कहीं कोई दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रहा था और वह निश्चिंत होकर मड़ई में प्रवेश कर गई,,, वैसे तोउसे टूटी हुई झोपड़ी में कोई टूट सा दरवाजा भी नहीं था लेकिन फिर भी खुले से अच्छा था कि और दोनों अपने आप को चार दीवारी के अंदर तो महसूस कर सकते थे।सूरज का दिल जोरो से धड़क रहा था क्योंकि अब उसकी भी इच्छा पूरी होने वाली थी वह समझ गया था कि सोनू की चाची भी आज से बेइंतहा आनंद देने वाली है जिसका उसे बड़ी बेसब्री से इंतजार भी था,,,।





सूरज इस बात को अच्छी तरह से जानता था की मुखिया की बीवी के मुकाबले सोनू की चाची का बदन कुछ ज्यादा ही कसा हुआ और गठीला है और सबसे सोने पर सुहागा यह था कि सोनू की चाची की गांड कुछ ज्यादा ही बड़ी थी जिसे देखकर वह हमेशा चुड़वासा हो जाता था,, आज मौका मिला था उसे रोंदने का,,,, दोनों टूटी हुई झोपड़ी के अंदर प्रवेश कर चुके थे वैसे तो इस एकांत जगह पर यह झोपड़ी बनाया किसने यही सबसे बड़ा प्रश्न था लेकिन या कोई बड़ी बात नहीं थीहो सकता था कि कोई पहले यहां खेतों की रखवाली करने के लिए रहता हूं या कुछ दिन के लिए ऐसे ही रहने लगा हो और इधर-उधर से घास फूस इकट्ठा करके झोपड़ी बना लिया हो। खैर जिसने भी बनाया हो इस समय वह ज्यादा जरूरी नहीं थाबल्कि यह ज्यादा जरूरी था कि आप करना क्या है और वैसे भी जिसने भी बनाया था ऐसा लग रहा था कि इस दिन के लिए ही बनाया था तभी तो आज सोनू की चाची और सूरज के लिए काम आने वाला था। टूटी हुई झोपड़ी के अंदर कोई खास सामान तो बिल्कुल भी नहीं थाबस ढेर सारा घास का ढेर था जो कि उन दोनों के लिए बिस्तर का काम करने वाला था जिस पर नजर पडते ही सोनू की चाची की आंखों में चमक उतर आई थी।





सोनू की चाचीसूरज के लंड पर से अपना हाथ हटाकर मुस्कुराते हुए उसकी तरफ देखते हुए बोली,,,।

उसे दिन खेत में मजा आया था ना मशीन चालू करते समय,,,।

हां चाची बहुत अच्छा लग रहा था,,,,।

आज भी वैसा ही करना है उसे दिन तो अधूरा रह गया था लेकिन आज अधूरा काम पूरा करना है,,,(ऐसा कहते हुए सोनू की चाची अपने ब्लाउज का बटन खोलने लगी और ब्लाउज का बटन खोलते खोलते अपनी बात आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) मालूम है ना क्या करना है,,,.

बिल्कुल चाची तुम ही तो बताई थी क्या करना है,,, कितने नरम नरम हैमैं तो सोच भी नहीं सकता था कि कठोर दिखाने वाली चीज इतनी नरम होगी,,।





औरत के पास बहुत कुछ है जिसके बारे में तु अभी सो भी नहीं सकता लेकिन आज सारे राज पर से पर्दा हट जाएगा आज तु सबकुछ सीख जाएगा,,।(ऐसा कहते हुए सोनू की चाचीब्लाउज के सारे बटन खोल दी और कंधे पर से साड़ी का पल्लू हटाकर उसे नीचे गिरा दी, पल भर में हीसोनू की चाची की छाती पूरी तरह से उजागर हो चुकी थी जिसे देखकर सूरज की आंखों की चमक बढ़ने लगी थीसूरज पति आंखों से सोनू की चाची की जवानी को देख रहा था और सोनू की चाची अपने ब्लाउज के दोनों पट को दोनों हाथों में लेकर उसे खोल दी थी जिससे उसकी खरबूजे जैसी चूचियां एकदम से अपनी आभा बिखैर रही थी,,,, सोनू की चाची खुद उत्तेजना से अपने होठों को दांत से काटते हुए अपने दोनों हाथों में दोनों चूचियों को लेकर उसे दबाते हुए बोली,,,)

देख क्या रहा है मेरे पास आ,,,, तुझे जिंदगी का असली सुख देता हूं,,,।





(असली सुख के मतलब को सूरज अच्छी तरह से समझता था वह जानता था कि वाकई में मर्द के लिए यही जीवन का असली सुख है वह धीरे से आगे बढ़ने लगा हालांकि अभी भी पजामा उसकी जांघों में अटका हुआ था और उसका लंड अपनी औकात में आकर खड़ा था,,,,देखते ही देखते सूरज सोनू की चाची के करीब पहुंच गया और अपने हाथ को उसकी चूचियों की तरफ आगे बढ़ने लगा उत्तेजना के मारे उसके हाथ में कंपन साफ दिखाई दे रहा था और यह देखकर सोनू की चाची मन ही मन प्रसन्न हो रही थी देखते ही देखतेसूरज अपने दोनों हाथों को उसकी दोनों चूचियों पर रख दिया था लेकिन हल्के से और यह देखकर सोनू की चाची उसका हौसला बढ़ाते हुए बोली,,,)





अरे बुद्धु ईसे सहलाना नहीं है बल्की जोर-जोर से दबाना है,,,,।

ओहहह चाची मुझे कुछ कुछ हो रहा है,,,।

पगले अभी बहुत कुछ होना बाकी है,,,,, बस इस जोर-जोर से दबा,,,,।

(सोनू की चाची की इजाजत पातें हीसूरज समझ गया था कि अब उसे क्या करना है वैसे भी उसे दिन सोनू की चाची ने उसे इतना तो सीखा ही दी थी और उसी पर सूरज को अमल भी करना थावैसे तो अगर सोनू की चाची के नजरों में सूरज नादान ना होता तो इस समय बहुत कुछ कर देता लेकिन नादानी के नाते उसे उतना ही करना था जितना कि उसे दिन सोनू की चाची ने करने को कही थी और इसकी इजाजत पाते हीसूरज सोनू की चाची की बड़ी-बड़ी चूचियों को दशहरी आम की तरह दबाना शुरू कर दिया था और इस क्रिया में सूरज को भी अत्यधिक आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,।





स्तन मर्दन का आनंदसोनू की चाची के चेहरे पर भी साफ दिखाई दे रहा था वह पूरी तरह से उत्तेजना और कामुकता के सागर में डुबती चली जा रही थी,,,, सूरज जोर-जोर से उसकी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया था हालांकि उसकी दोनों हथेलियां में उसकी दोनों चूचियां ठीक तरह से समा नहीं पा रही थी लेकिन फिर भी सूरज पूरी कोशिश कर रहा था इस तरह से सोनू की चाची को आनंद प्रदान करने के लिए और उसे मजा भी आ रहा था,,,। टूटी हुई झोपड़ीएक मर्द और एक औरत का काम क्रीड़ा शुरू हो चुका था,,, सोनू की चाचीइस सुख से पूरी तरह से वंचित थी लेकिन आज उसे लग रहा था कि उसकी इच्छा पूरी हो जाएगी,,, बरसों बाद वह अपनी अभिलाषा को पूरी होते हुए देख रही थी सूरज उत्तेजना औरमदहोशी में पड़े जोर-जोर से उसकी चूचियों को दबा रहा था दबोच रहा था मचल रहा था,,, थोड़ा-थोड़ा अपना अनुभव भी हुआ दिख रहा था जिसके चलते इसकी कड़ी हो चली छुहारा जैसी निप्पलको वह उंगली के बीच लेकर दबा दे रहा था जिससे सोनू की चाची की उत्तेजना और आनंद में बढ़ोतरी होती जा रही थी,,,,।





कुछ देर तक इसी तरह से स्तन मर्दन का खेल चलता रहा और अपनी आंखों को बंद करके सोनू की चाची इस आनंद को पूरी तरह से अपने अंदर उतारने लगी लेकिन अब आगे बढ़ने का समय था,,,इसलिए सोनू की चाची तुमसे हाथ उसके लंड पर रखकर उसे कस के ढाबा चली और उसे एकदम से अपनी तरफ खींचकर उसे अपनी बाहों में भर ले इस तरह से करने से सूरज का चेहरा उसकी दोनों चूचियों के बीच समा गया यह देखकर सोनू की चाची की सांस ऊपर नीचे होने लगी उसकी सांसे गहरी चलने लगी और वह मदहोशी भरे स्वर में बोली,,,।

कभी जवान औरत की चूची को मुंह में लेकर पिया है,,

उत्तेजना के मारे सूरज कुछ बोल नहीं पाया बस ना सिर हिला दिया,,,,‌





तो ले इसे मुंह में लेकर पी,,,,(इतना कहने के साथ ही सोनू की चाचीउसकी हां सुने बिना ही अपनी चूची को हाथ में लेकर उसकी तनी हुई निप्पल को सीधा उसके फोटो के बीच रगड़ने लगी उसकी यह हरकत सूरज की तन बदन में आग लग रही थीऔर वह तुरंत अपने होठों को खोलकर सोनू की चाची की छुहारे जैसी निप्पल को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया और दूसरे हाथ से उसकी दुसरी चुची को लगातार दबा रहा था,,,,, सूरज की हरकतसोनू की चाची की तन बदन में मदहोशी का रस खोल रही थी वह पूरी तरह से पल में जा रही थी नतीजन उसके मुंह से सिसकारी की आवाज निकलना शुरू हो गई थी,,, और इस आवाज को सुनकर सूरज की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी,,,,।फिर भी अपनी नादानी का प्रदर्शन करते हुए वहां सोनू की चाची की चूची को अपने मुंह से बाहर निकाल कर उसकी आंखों में देखते हुए बोला।

क्या हुआ चाची इस तरह की आवाज क्यों निकाल रही हो,,,,।





कुछ नहीं रे पगले जब औरत को मजा आता है जब वह पूरी तरह से मस्त हो जाती है तब इसी तरह की आवाज निकलती है उसके मुंह से तु चिंता मत कर तू अपना काम जारी रख,,,,(ऐसा कहते हुए फिर से उसके चेहरे को अपने दोनों हाथों में लेकर उसे अपनी चूची से सताती और सूरज अपना मुंह खोलकर फिर से उसके छुहारे को मुंह लेकर पीना शुरू कर दिया,,, थोड़ी देर बादअपनी दूसरी चूची को हाथ में लेकर वह उसे उसके मुंह में डाल कर चूसाना शुरू कर दी,, और सूरज बारी-बारी से उसके दोनों चुचियों का स्तनपान करने लगा,,सूरज को बहुत मजा आ रहा था हालांकि वह इस तरह का खेल बहुत बार खेल चुका था लेकिन आज सोनू की चाची के साथ उसे बहुत मजा मिल रहा था,,,,उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर साड़ी के ऊपर से ही उसकी बुर में घुसने की कोशिश कर रहा था,, इसका एहसास सोनू की चाची को बड़े अच्छे से हो रहा था इसलिए वह अपना हाथ तुरंत नीचे की तरफ लाकर उसका लंड को अपनी हथेली में दबोचते हुए बोली,,,।





हाय दइया तेरा लंड कितना टन्नाया हुआ है रे साड़ी सहित बुर में घुसना चाहता है,,,।

(सोनू की चाची के मुंह से यह सुनकर सूरज की उत्तेजना और बढ़ने लगी वह पागलों की तरह उसकी दोनों सूचियां को दोनों हाथों में पकड़ कर दबाते हुए बारी-बारी से पीना शुरू कर दिया था और सोनू चाचा उसके लंड को पकड़कर हल्के हल्के मुठीया रही थी,,,सोनू की चाची इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि सूरज के पास जिस तरह का मर्दाना अंग है उसके जरिए सूरज किसी भी औरत को अपनागुलाम बन सकता है लेकिन सोनू की चाची भी एक जवानी से भरी हुई औरत थी और वह एक मर्द को अपना गुलाम बनाना अच्छी तरह से जानती थी वह तो उसका पति ही निकम्मा था वरना उसकी जगह कोई और होता तो जिंदगी भर उसके तलवे चाटता।





अब खेल में आगे बढ़ने का समय आ रहा था सोनू के चाचा इस बात को अच्छी तरह से जानती थीऔर सोनू की चाची इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसे ही पहल करना है उसे ही आगे बढ़ाना है क्योंकि उसके नजर में सूरज पूरी तरह से नादान लड़का था उसे औरत के अंगों के बारे में और उनसे खेलने के बारे में कुछ नहीं मालूम उसे ही सूरज को दिशा निर्देश करना था कि अब क्या करना है कैसे करना हैइसीलिए वह कुछ देर तक इस तरह से आनंद लेने के बाद गहरी सांस लेते हुए सूरज की खूबसूरत मासूम चेहरे को अपनी हथेली में लेकर उसे अपनी चूची से दूर करते हुए गहरी सांस लेते हुए बोली,,,।

वाह रे पगले,,,तूने तो मुझे मस्त कर दिया आज तक ऐसा प्यार इन चूचियों से किसी ने भी नहीं किया था,,,,,





चाची मुझे भी बहुत मजा आया मुझे नहीं मालूम था कि औरत की चूचियों से इतना आनंद आता है मैं तो यही समझता था कि बच्चे जब पैदा होते हैं तो बस इसे दूध पिया जाता है,,,(सूरज गहरी सांस लेते हुए बोले तो उसकी बात सुनकर मुस्कुराते हुए सोनू की चाची बोली)

तुझे कैसा लगा दूध पीकर,,,।

मत पूछो चाची बहुत मजा आया,,,, मैं बात नहीं सकता,,,।

इस मजा को थोड़ा और बढ़ाया जाए,,,, अभी बहुत कुछ बाकी है मजा लेने के लिए,,,।

कैसे चाची,,,, चुची से तो मजा ले लिए,,,।

(सूरज की नादानी भरी बातें सुनकर मुस्कुराते हुए सोनू की चाची अपनी नजरों को नीचे करके उसके लंड की तरफ देखते हुए बोली,,,)

अभी बताती हूं,,,,(और इतना कहने के साथ हीवह अपने ब्लाउस को पूरी तरह से उतर कर घास के देर में फेंक दी कमर के ऊपर सेवा पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी उसका गदराया जिस्म देखकर सूरज के मुंह में पानी आ रहा था और उसके लंड कि अकड़ और ज्यादा बढ़ती जा रही थी,,,, ब्लाउज उतार देने के बादसोनू की चाची एकदम से घुटनों के बल बैठ गई ठीक उसकी आंखों के सामने सूरज का पायजामा अभी भी उसके घुटनों में फंसा हुआ था जिसे वह अपने दोनों हाथों से पकड़ कर उसे निकालने लगी और सूरज भी इसमें उसकी मदद करने लगा देखते ही देखते वह कमर के नीचे से नंगा हो गया उसके लंड किया कर बहुत देर से बरकरार थी यह देखकर ही सोनू की चाची की बुर कचोरी की तरह फूल रही थी और पिचक रही थी क्योंकि उसे अंदाजा था कि यह कितना मजा देने वाला है।





सूरज का पैजामा उतार देने के बादसोनू की चाची अपना हाथ आगे बढ़कर सूरज के लंड को पकड़ ली और उसे हल्के से मुठीयाते हुए सोनू की आंखों में आंखें डाल कर बोली,,,,।

सूरज आज तो सोच भी नहीं सकता तुझे ऐसा मजा दूंगी की तू जिंदगी भर याद रखेगा बस इस बात को किसी को बताना नहीं अगर नहीं बताया तो ऐसा मजा जिंदगी भर मिलता रहेगा,,,, बोल यह बात किसी को बताया तो नहीं,,, और अपनी मां से तो बिल्कुल भी नहीं बोल नहीं बताएगा ना,,,।

किसी बातें करती हो चाची भला ऐसी बात किसी को बताई जाती है इसमें तो अपनी खुद की बदनामी हो जाएगी तुम भरोसा रखो इस तरह की बात तो मैं किसी को नहीं बताऊंगा,,,,(सूरज की बात सुनकर सोनू की चाची के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और वह मुस्कुराते हुए बोली)

अरे वाह चलो इतनी तो समझदारी है तुझ में मुझे तो लगा बिल्कुल नादान है,,,,।

लेकिन चाची अब तुम करने क्या वाली हो,,,,!





रुक जा अभी बताती हूं,,,(इतना कहने के साथ ही सोनू की चाची अपने लाल लाल होठों को एकदम से सूरज के लंड की गरमा गरम सूखने पर रख दी और उसके होठों को अपने लंड के सुपर पर महसूस करते हैं सूरज की तो सिट्टी पिटी गुम हो गई,,,, मैं एकदम से गहरी सांस लेता हूं अपनी कमर को पीछे की तरफ लेने लगा लेकिन सोनू की चाची तुरंत अपने दोनों हाथों कोउसके नितंबों पर रखकर उसे जकड़ी ली यह देखकर सूरज की हालत और ज्यादा खराब होने लगी लेकिन फिर भी वह अपनी नादानी को जानबूझकर दिखाते हुए बोला,,,)

यह क्या कर रही हो चाची इस पर कोई चुम्मा लेता है क्या इससे तो पेशाब किया जाता है,,।





अरे पगले तू नहीं जानता तेरा यह लंड कितना प्यार करने के लिए बना है,,,(ऐसा कहते हुए सोनू की चाची अपने मतलब को समझाते हुए तुरंत उसके लंड के सुपाडे पर चुंबनों की बारिश कर दी,,, और यह सिर्फ उसके सुपाडे तक नहीं था बल्कि उसकी जड़ तक था,सोनू की चाची की हरकत सूरज को पूरी तरह से उत्तेजना से गदगद किया जा रही थी वह पागल हुआ जा रहा था उसका भजन पूरी तरह से करमा जा रहा था क्योंकि इस तरह से तोमुखिया की बीवी और मुखिया की लड़की ने भी उसके लंड से प्यार नहीं की थी हालांकि मुंह में लेकर चूसी जरूर थी,,, इसीलिए सूरज अपने मन में सोच रहा था किसोनू की चाची अगर इसे पूरी तरह से अपने मुंह में लेकर चूस तो कितना मजा आ जाएगा अगर कोई और होता तो शायद सूरजपहल करते हुए खुद ही अपने लंड को उसके मुंह में डाल देता लेकिन सोनू की चाची के आगे वह पूरी तरह से नादान था इसलिएऐसी कोई भी हरकत नहीं करना चाहता था जिससे उसे जरा भी शक हो कि इस तरह से वह पहले भी कई औरतों के साथ सुख भोग चुका है।)





ओहहहहह चाची,,,,सहहहहहह,,, तुम तो मुझे पागल कर दोगी मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,,,ओहहहहह चाची,,,,,,।

(सूरज का इतना कहना था कि उसकी मदहोशी को देखकर सोनू की चाची भी मदहोश होने लगी और तुरंत अपने लाल-लाल होठों को खोलकर उसके लंड के सुपाड़े को पूरा अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,, अद्भुत अविस्मरणीय आनंद के सागर मेंसोनू की चाची पूरी तरह से डुबकी लगा रही थी वह इस पल को बयां नहीं कर सकती थी इससे पहले वह कभी सोची भी नहीं थी कि किसी मर्द का लंड इतना मोटा और लंबा होता है इस समय सूरज का लंड उसके मुंह में पूरी तरह से भरा हुआ था और उसके होंठों का आकार मुर्गी के अंडे की तरह गोलाकार और थोड़ा लंब हो चुका था,,,, सूरज की तो हालत खराब हो गई थी,,, वह कभी सोचा भी नहीं था कि सोनू की चाची इस तरह की हरकत कर सकती है,,, वैसे तो जिस तरह से सब कुछ हो रहा था उसे देखते हुए सूरज की सोच के पड़े तो बिल्कुल भी नहीं था लेकिन इस तरह की हरकत की उसे उम्मीद नहीं थी,,,। एकदम मदहोश होता हुआ सूरज बोला,,,)





यह क्या कर रही है चाची ऐसा कोई करता है क्या इससे तो पेशाब किया जाता है,,।

अरे पगले इससे पेशाब तो किया जाता है लेकिन औरतों को इस तरह से मजा भी दिया जाता है,,,(अपने मुंह में से सूरज कीटे लंड को कुछ पल के लिए बाहर निकाल कर इतना बोलकर वह वापस उसे मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी मानो के जैसे उसे छोड़ना ही न चाहती हो,,,,टूटी हुई झोपड़ी में माहौल पूरी तरह से गर्म चुका था जेठ की दुपहरी में दोनों की गर्मी लग वातावरण को गर्माहट दे रही थी गांव से दूर सुनसान जगह पर टूटी हुई झोपड़ी मेंदोनों एक दूसरे में आनंद ढूंढ रहे थे दोनों को बहुत मजा आ रहा था ं,,, कोई सोच भी नहीं सकता की गांव का एक जवान लड़का और एक गांव की जवान औरत और वह भी शादीशुदा इस तरह से एकांत पाकर जवानी के जोश में पागल हो जाएंगे,,,।





सोनू की चाची के लिए तो यह सब कुछ सपने जैसा ही था वह कभी सोची भी नहीं थी कि इस तरह से उसे सुख प्राप्त होगा क्योंकि आज तक उसने अपने पति के अलावा किसी के बारे में सोची भी नहीं थी,,, लेकिन अपनी किस्मत पर रोती भी थीएक तो उसे शरीर सुख नहीं मिल रहा था और ऊपर से उसकी गोद भी सुनी थी बरसों गुजर गए थे ना तो शरीर सुख ना हीं मां बनने का सुख दोनों तरफ से उसे तड़प ही मिल रही थी वह तो एक दिन मजाक में मजाक में गांव की ही औरतों से दूसरे के साथ संबंध बनाने के लिए बोली थी,,,तब उसका मन थोड़ा इधर-उधर होने लगा था और जब सूरज की मैन खुद उसे बाजार में एक पंडित जो की ज्योतिष थे उन्हें सोनू की चाची का हाथ दिखाई थी तोवहीं पर इस बात का खुलासा हुआ था कि उसकी गोद तो हरी होगी लेकिन उसके मर्द से नहीं बल्कि किसी गैर मर्द से और तब से उसका मन किसी गैर मर्द के साथ संबंध बनाने के लिए तड़प रहा था,,,।





और वह गैर मर्द कोई और नहीं था बल्कि सूरज ही था सूरज के साथ वह हम बिस्तर होने के लिए तड़प रही थी सूरज के साथउसकी बात अच्छी तो और मुलाकात भी होती थी जिसके चलते उसकी इच्छा और ज्यादा प्रबलित होने लगी थी और आज ऐसा मौका मिल गया था कि आज वह अपनी इच्छा को पूरी कर सकती थी तब वह अपने कदम को पीछे लेना नहीं चाहती थी बस की इस खेल में आगे बढ़ जाना चाहती थी क्योंकि ज्योतिष को हाथ दिखाने के बाद उसे लगने लगा था कि शायद इसमें कुदरत की ही मंजूरी है,,,।

सूरज को वह पूरी तरह से पागल बना रही थी इतना मोटा तगड़ा लैंड उसने कभी अपने जीवन में अच्छी नहीं थी और उसे वह अपने मुंह में लेकर पूरी तरह से तृप्ति का एहसास कर रही थी,,, सूरज भी अब पूरी तरह से मत हुआ जा रहा था वह अपने दोनों हाथों को अपनी कमर पर रखकर धीरे-धीरे अपनी कमर को भी आगे पीछे कर रहा था,,,, उत्तेजना और मदहोशी में दोनों के चेहरे टमाटर की तरह लाल हो चुके थे सूरज के लिए तो यह खेल पहले भी हो चुका था और यह उसके लिए कोई बड़ी बात नहीं लेकिन सोनू की चाची के साथ उसे ज्यादा ही आनंद प्राप्त हो रहा था और सोनू की चाची के लिए तो यह खेल पहली बार का था क्योंकिउसका पति कभी इस तरह की हरकत किया नहीं था और नहीं उसे करने दिया था और वैसे भी उसका खुद से आधा भी नहीं था एकदम पतलाऔर छोटा जिससे वह कभी भी संतुष्ट नहीं हुई थी और इसलिए ऐसे सूरज के लंड को पाकर वह पूरी तरह से सातवें आसमान में उड़ रही थी।





सूरज के लंड को मुंह में लेकर चूसते हुए काफी देर हो चुका थाऔर इसलिए सोनू की चाची को इस बात का डर था कि कहीं उसका लंड पानी न छोड़ दे लेकिन अभी तक ऐसा हुआ नहीं था क्योंकि काफी देर से सूरज का लंड खड़ा का खड़ा था उसमें जरा भी ढीलापन नहीं आया था,,, इस बात की खुशी सोनू की चाची के चेहरे पर भी साफ नजर आ रही थी लेकिन अब समय इस खेल को आगे बढ़ने का हो गया था इसलिए कुछ देर तक ईसी तरह से अपने गले तक सूरज के लंड को लेकर चूसते हुए,,, वह धीरे से अपने मुंह में से उसे बाहर निकाल दी वैसे तो वह सूरज के लंड को अपने मुंह से बाहर नहीं निकालना चाहती थी,,,,लेकिन निकालना जरूरी था क्योंकि उसकी बर पानी पर पानी छोड़ रही थी और पूरी तरह से अकेली हो चुकी थी जिसका मतलब साफ था कि वह अब लंड के लिए तड़प रही थी,,,, फिर भी सूरज मदहोशी भरे स्वर में बोला,,,।

क्या हुआ चाची बाहर क्यों निकाल दी बहुत मजा आ रहा था,,,,।





क्योंकि अब ईससे भी ज्यादा मजा आने वाला है,,,।

इससे भी ज्यादा मजा लेकिन कैसे चाची,,,!(आश्चर्य भरे स्वर में जानबूझकर नादानी का नाटक करते हुए बोला उसकी बात सुनकर सोनू की चाची गहरी सांस लेते हुए बोली)

अभी बताती हूंतूने अब तक मेरी बड़ी-बड़ी गांड और मेरी चूची के दर्शन तो कर लिए हैं लेकिन तूने अभी मेरी बुर नहीं देखा है सच बता देखा है कि नहीं,,,।

(सोनू की चाची की यह बात सुनते ही सूरज के दिन की धड़कन एकदम से बढ़ने लगी,,,, वह समझ गया था कि अब और ज्यादा मजा आने वाला है इसलिए वह धीरे से बोला,,,)

नहीं चाची तुम सच कह रही हो,,,जो कुछ भी देखा हूं सिर्फ तुम्हारी ही देखा हूं और इसके बारे में तुम बात कर रही हो उसे तो मैं कभी देखा ही नहीं हूं ना ही कभी सपने में भी देखा हूं कि वह कैसी होती है,,,।

सच कह रहा है ना तभी दिखाऊंगी,,,।

मैं सच कह रहा हूं चाची में बिल्कुल नहीं देखा हुं,,,।

(सूरज की बातों पर सोनू की चाची का विश्वास करना लाजमी था क्योंकि अभी तक सूरज ने अपने आप को उसके सामने ऐसा ही पेश किया था कि जैसे वह कुछ भी नहीं जानता हूं वह बिलकुल नादान हो इसलिए सूरज की बातों पर सोनू की चाची को भरोसा हो गया था और वह मुस्कुराते हुए बोली,,,)





तो ठीक है आज मैं तुझे औरत का सबसे खूबसूरत अंग दिखाती हूं जिसे देखने के लिए दुनिया का हर मर्द तड़पता है और उसे पाने के लिए हमेशा मचलता रहता है,,,,(इतना कहने के साथ ही सोनू की चाची अपनी साड़ी खोलने लगी,,, कमर के ऊपर तो वह पहले से ही नंगी हो चुकी थी बस कमर के नीचे का कपड़ा उसे उतरना था ,फिर वह सूरज के सामने पूरी तरह से नंगी हो जाती और यही कार्य को करने के लिए वह कमर पर बंधी अपनी साड़ी को खोलने लगी थी,,, सूरज का दिल जोरो से धड़कता है कमर के नीचे वह पूरी तरह से नंगा थाऔर उसकी आंखों के सामने जवानी से भरी हुई सोनू की चाची अपने कपड़े उतार कर पूरी तरह से नंगी होने जा रही थी एक औरत को नग्न अवस्था में देखने में एक मर्दों को अत्यधिक आनंद की प्राप्ति होती है और उत्तेजना का एहसास होता है और जब औरत खुद ही अपने कपड़े उतार कर मर्द के सामने नंगी होने लगे तो ऐसे में तो मर्द के लिए मुंह मांगी मुराद मिल जाती है।





जेठ की दुपहरी में पूरा गांव अपने घर में आराम कर रहा था,,, कड़क धूप के चलते कोई घर से बाहर निकलने को तैयार नहीं होता लेकिन ऐसे कड़ी धूप में सोनू की चाची और सूरज गांव से दूर जंगल जैसे जगह में एक टूटी हुई झोपड़ी में जवानी का खेल खेल रहेबाहर की गर्मी लग और सोनू की चाची की जवानी की गर्मी लग एक अलग ही मौसम का आभास करा रही थी,,, सूरज की हालत खराब हो रही थी उसकी आंखों के सामने एक जवानी से भरी हुई कदराई बेलगाम घोड़ी में वस्त्र हो रही थी वैसे तो सूरज अच्छी तरह से जानता था कि साड़ी के अंदर कौन सा खजाना छुपा होता है लेकिन फिर भी वह उसे अंग को देखने के लिए तड़प रहा था वह देखना चाहता था कि सोनू की चाची की बुर कैसी दिखाई देती है,,, और यही चाहत उसके पसीने छुड़ा रही थीइसी चाहत में उसका हाथ कब उसके लंड पर पहुंच गया उसे खुद समझ में नहीं आया और वह उसे पकड़कर ऊपर नीचे करके हिलना शुरू कर दिया था,,उसकी हालत को देखकर सोनू की चाची एकदम गदगद हो गई उन्हें इस बात की खुशी थी कि उसकी जवानी का असर सूरज के ऊपर बहुत भारी पड़ रहा है तभी तो वह अपने लंड को हिला रहा है नहीं तो इस तरह की हरकत वह कभी कर ही नहीं सकता था।





जैसे-जैसे सोनू की चाची अपने हाथों से साड़ी को खोल रही थी वैसे-वैसे सूरज की हालत पाल-पाल खराब होती जा रही थी और देखते ही देखते हो अपनी साड़ी को उतार कर सूखी हुई घास में फेंक दी,,ईस समय वह केवल सूरज की आंखों के सामने केवल पेटीकोट में खड़ी थी,,,,,,, उसकी मुस्कुराहट सूरज के दिल पर छुरिया चल रही थी सूरज जल्दी से जल्दी उसके खूबसूरत अंगों को देखना चाहता थाउसका मन तो कर रहा था कि आगे बढ़कर खुद ही उसके पेटिकोट का नाड़ा अपने हाथों से खोल दे और उसे नंगी कर दे,, लेकिन इस समय ऐसा करना उचित नहीं था क्योंकि सब कुछ वह खुद अपने हाथों से कर रही थीइस बात को अच्छी तरह से जानता था कि आज का दिन गुजर जाने के बाद आगे से जो कुछ भी करना है उसे ही करना होगा,,,।

पेटिकोट की डोरी पर हाथ रखते हुएसोनू की चाची सूरज की तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी मानो कि इतरा रही हो जैसे कोई बच्चे को खिलौना दिखाकर लग जाता है इस तरह से इस समय सोनू की चाची अपनी बुर पर से पर्दा हटाने के लिए सूरज को ललचा रही थी। और सूरज ललच भी रहा था,,,,सोनू की चाची अभी भी पेटिकोट की डोरी पर हाथ रखी हुई थी और मुस्कुराते हुए सूरज की तरफ देखते हुए बोली,,,।





बोल सूरज खोल दो पेटिकोट दिखा दु तुझे औरत का सबसे खूबसूरत अंग,,,,।

(उसकी बात सुनकर सूरज को तो समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें क्योंकि इस समय वह सोनू की चाची की नजरों में पूरी तरह से नादान थाफिर भी वह अच्छी से जानता था कि उसके न करने के बावजूद भी वह उसे अपनी बर दिखा कर ही रहेगी इसलिए वह हिम्मत दिखा कर बोला,,,)

चाची मैं बात नहीं सकता कि इस समय मुझे कैसा लग रहा है,,, मैं सच में तुम्हारे खूबसूरत अंग को देखना चाहता हूं,,,,(अभी भी सूरज का हाथ उसके लंड पर था जो की दर्शा रहा था कि वह कितना ज्यादा उत्तेजित था,, और उसकी यही अदा सोनू की चाची को भी अच्छी लग रही थी इसलिए वह मुस्कुराते हुए बिना कुछ बोले अपने पेटिकोट की डोरी को हल्के से खींच दी और पेटिकोट का नाड़ा एकदम से ढीला पड़ गया,,,, यह देखकर सूरज के दिल की धड़कन बढ़ने लगी,,,, और सोनू की चाची अपने दोनों हाथों की उंगलियों का करामत दिखाते हुए उसे पेटिकोट के दोनों तरफ डालकर पेटीकोट को कमर पर से ढीली करने लगी,,,,,और देखते ही देखते पेटिकोट ढीली होने के साथ ही वह अपनी पेटीकोट को कमर पर से इस तरह से छोड़ दी मनु जैसे कि किसी खूबसूरतनाटक को शुरू करने के लिए पर्दा ऊपर उठाया जाता हो लेकिन यहां पर खूबसूरत नाटक को शुरू करने के लिए पर्दे को नीचे गिराया जा रहा था और पेटीकोट हाथों से छोड़ते ही सीधे जाकर उसकी कदमों में गिर गई,,,और अगले ही पर सोनू की चाची सूरज की आंखों के सामने संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था में खड़ी हो गई,,,।





यह खूबसूरत नजारा इस समय सूरज को अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहा था गांव से दूर विरान जगह में और टूटी हुई मड़ई में वह कभी सोचा नहीं था कि उसे इस तरह का दृश्य देखने को मिलेगा,,,उसके दिल की धड़कन एकदम से बढ़ने लगी थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वैसे तो उसे मालूम ही था कि उसे क्या करना है लेकिन यह समय में कुछ कर नहीं सकता था बस देखने के सिवा,,,,सोनू की चाची मुस्कुरा रही थी उसकी आंखों में शर्म बिल्कुल भी नहीं थी वह पूरी तरह से बेशर्म हो चुकी थी,,, क्योंकि वह भीसमझ चुकी थी कि बेशर्म बनने के बाद ही जिंदगी का असली सुख प्राप्त होता है,,,।





सोनू की चाची का गदराया जिस्म सूरज के होश उड़ा रहा था,,, क्या नहीं था सोनू की चाची के पासकिसी भी मर्द को आकर्षित करने के लिए उसके पास सब कुछ था,जो एक औरत के पास होना चाहिए था,,, खूबसूरत चेहरा बड़ी-बड़ी चूचियां एकदम खरबूजे की तरह गोल,,,, सुडौल काया,, मांसल कमर,,, खूबसूरत बड़ी-बड़ी उभरी हुई गांड,,,, और अब उसकी मोती मोती केले कितने की तरह चिकनी जाएंगे और उसके बीच में उसकी खूबसूरत पतली गुलाबी दरार जिस पर हल्के हल्के रेशमी बालों के हुए थे,,, बालों की जरूरत के बीच की हो पतली दरारे ऐसा लग रहा है कि मानो जैसे जंगल में से कोई खूबसूरत नहर बह रही हो,,, उसके गुलाबी छेद में से निकले मदन रस की बंदे उसके बालों की जरूरत पर मोती के दाने की तरह चमक रहे थे जिसे देखकर सूरज के मुंह में पानी आ रहा था वह पागल हुआ जा रहा थाऔर उसकी तरफ को और ज्यादा बढ़ाते हुए सोनू की चाची खुद अपनी हथेली को अपनी खूबसूरत बुर पर रखकर मसलते हुए बोली,,,।





देख ले सूरज यही है औरत का खूबसूरत अंग जिसे देखने के लिए तु तड़प रहा था,,,,।

सच कह रही हो चाची,,,,,(ऐसा कहते हुए हाथ में लंड पड़े हुए सूरज एक कदम आगे बढ़ गया उसकी नजर सोनू की चाची की दोनों टांगों के बीच ही टिकी हुई थी और वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) मैंने आज तक इतना खूबसूरत है तेरे से नहीं देखा और इससे ज्यादा खूबसूरत अंग कोई हो ही नहीं सकता सच में मैं पहली बार देख रहा हूं मैं तो पागल हो जाऊंगा ईसे देखकर,,,।

(सूरज की बातों को सुनकर सोनू की चाची मुस्कुरा रही थी और मुस्कुराते हुए बोली)

तूने सच में नहीं देखा था ना इस अंग को,,,,।

बिल्कुल नहीं चाची इसी में से तुम्हारी पेशाब निकलती है ना,,,,।





हा रे इसी छेद में से निकलती है और तो इसके दूसरे उपयोग को नहीं जानता,,,।

इसका दूसरा उपयोग,,,(जानबूझकर आश्चर्य जताने का नाटक करते हुए बोला हालांकि अभी भी उसका हाथ उसके लंड पर ही था)

हां इसका दूसरा उपयोग और तेरे लंड का भी दूसरा उपयोग आज मैं तुझे सबको सिखाऊंगी बस इस बात को किसी को भी मत बताना,,,, सीखना चाहता है ना दूसरा उपयोग,,,।

बिल्कुल चाची मैं सब कुछ सीखना चाहता हूं,,,,।

तो इस बात को किसी को मत बताना,,,,।

बिल्कुल भी नहीं बताऊंगा,,,,।

(सोनू की चाची मुस्कुराते हुए लगातार अपनी गुलाबी बुर को अपनी हथेली से मसलकर गर्म कर रही थी उसमें से लगातार उसका मदन रस निकाल रहा था जो उसकी हथेली को भिगो रहा था,,,,, ऐसा करते हुए वहां सूरज का हाथ पकड़ कर उसे अपने करीब लेकर आई और उसे,,,बोली,,,)





अब जैसा भी मैं कहूं वैसे करते जाना,,,,। बोल करेगा ना,,,,।

(इस बार सूरज कुछ बोला नहीं बस हा में सिर हीला दिया,,,,)

तो शुरू करते हैं आगे के खेल को जिसने बहुत बचाने वाला है अब तुझे वही करना है जो मैं तेरे साथ कर रही थी,,,,(और ऐसा कहते हुएसोनू की चाची उसके कंधे पर हाथ रखकर उसे पर दबाव देते हुए उसे नीचे बैठने का इशारा कर रही थी सूरज अच्छी तरह से जानता था कि सोनू की चाची क्या करवाना चाहती है इसलिए उसके आजा के अधीन होकर वह धीरे-धीरे अपने घुटनों के बाल हो गया और इस स्थिति में आने के बादसोनू की चाची की खूबसूरत बड़ा ठीक उसकी आंखों के सामने थी और उसमें से मदन रस लगातार बह रहा था जिसे पीकर चाट कर सूरज अपनी जवानी की प्यास बुझाना चाहता था,, देखते ही देखते सोनू की चाची की हालत खराब होने लगी,,, क्योंकि अब वह ऐसा कुछ करने जा रही थी जिसके बारे में वह पहले कभी सोचा नहीं थी आज वह पूरी तरह से एक अलग औरत बनाकर सूरज की आंखों के सामने आ चुकी थी उसका चरित्रउसके संस्कार आज धरे के धरे रह गए थे क्योंकि उसके बदन की जरूरत उसे मजबूर कर रही थी उसकी जिस्म की प्यास उसे ऐसा करने के लिए प्रेरित कर रही थी।





देखते ही देखते सोनू की चाचीदोनों हाथों से उसके सर पर हाथ रखकर उसे पकड़ ली और सूरज ऊपर नजर करके सोनू की चाची की आंखों में देखने लगा सोनू की चाची और सूरज दोनों की नजर आपस में टकराई,, अब सोनू की चाची से सबर करना मुश्किल हो जा रहा था और वहां तुरंत सूरज के चेहरे को अपनी बुर पर दबा दी,,,,सूरज को तो मालूम था क्या करना है लेकिन यहां पर ऐसा जताना था कि जैसे उसे कुछ मालूम ही नाऔर सोनू की चाची उसके चेहरे को पकड़ कर उसके चेहरे पर अपनी बुर को गोल-गोल घूमाकर रगड़ना शुरू कर दी उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,,, उसमें से उठ रही मादक खुशबू सूरज के नसों में मदहोशी भर रही थी वह उसमें अपनी जब डालकर उसकी मलाई को चाटना चाहता था लेकिन बड़ी मुश्किल से अपने आप पर काबू किए हुए था और वह घुटते हुए स्वर में बोला,,,)

यह क्या कर रही हो चाची,,,,।





सूरज अब तुझे भी वही करना है जो मैं तेरे लंड के साथ की थी,,,,इसे सिर्फ पैसाब ही नहीं किया जाता है बल्कि और भी बहुत कुछ काम लिया जाता है इनमें से एक काम यह भी है,,,,उफ्फ,,,, अब ज्यादा बातें मत कर कम पर लग जा,,,।

(फिर क्या था सोनू की चाची का की दिशा निर्देश मिल गया था,,, सूरजउसकी उपयोगिता को अच्छी तरह से जानता था कैसे क्या करना है कब करना है सब कुछ जानता था इसलिए तुरंत अपनी जीभ निकालकर उसके गुलाबी छेद में डाल दिया और उसका रस पान करना शुरू कर दिया सूरज पागलों की तरह उसकी बुर को चाटना शुरू कर दिया था यह देखकर सोनू की चाची मदहोश हो जा रही थी क्योंकिऐसा हुआ पहली बार कर रही थी ऐसा सिर्फ उसने गांव की औरतों से सुन रखी थी की मर्द औरत की बुर चाहते हैं लेकिन कभी भी उसका मर्द उसके साथ कभी भीनहीं इस क्रिया को किया था और जब भी सोनू की चाची ऐसा करने को कहती थी तो वह इनकार कर देता थाइसलिए तो आज सोनू की चाची को बहुत मजा आ रहा था वह पागल हुए जा रही थी उसके चेहरे का हाव-भाव एकदम मदहोशी में डूबता चला जा रहा था,,,,।





सूरज भी अपना पूरा अनुभव दिखाते हुए दोनों हाथों को उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर रखकर उसे दोनों हथेली से दबाते हुए उसकी बुर का रस पी रहा था उसे चाट रहा था उसमें से उठ रही मादक खुशबू उसकी उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ा रही थी,,,,, टूटी हुई झोपड़ी में गांव से दूंगा एक शादीशुदा औरत पूरी तरह से बेशर्म होकर एक जवान लड़के के साथ हम बिस्तर होने के लिए तड़प रही थी और अपनी मंजिल पर पहुंचने की पहली सीढ़ी को चढ़ चुकी थी,,,,।

सहहहहलआहहहहह,,,,, सूरज बहुत मजा आ रहा है रे,,,,बस ऐसे ही चाट,,,,जैसे मैं तुझे खुश की थी वैसे तू भी मुझे खुश कर दे पागल कर दे मुझे बहुत मजा आ रहा है,,,,आहहहहहहह,,,,, जीभ को अंदर तक डाल,,,,, आहहहहहहह,,,,,,,ऊममममममम,,,,,,ऊईईईईईईईई,,,,, सहहहहलआहहहहह,,,,,पागल कर देगा रे तू तो मुझे पहली बार में ही तू तो सीख गया औरत की बुर कैसे चाटी जाती है,,, तुझे भी बहुत मजा आ रहा है,,,,ओहहहहहबबब,,,,,,, ऐसे ही हां जोर-जोर से,,,,





सोनू की चाची का दिशा निर्देश पातें ही सूरज अपने काम पर लग गया थाजितना हो सकता था उतने अंदर तक वह अपनी जीभ डालकर उसकी मलाई को चाटने की कोशिश कर रहा था उसकी बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर जो आनंद से मिल रहा था वह बयान करने के लिए शब्द नहीं थेवाकई में उसे एहसास हो रहा था कि सोनू की चाची की गांड को ज्यादा ही पड़ी थी और उसे पड़कर उसकी बुर चाटने में जो आनंद मिल रहा था उससे वह पूरी तरह से गदगद हुआ जा रहा था,,,,लंड की अकड़ बढ़ती जा रही थी उसकी नसें फूल चुकी थी ऐसा लग रहा था कि किसी भी वक्त उसकी नसें फट जाएगी,,, रह-रह कर सूरज अपने लंड को जोर-जोर से दबा दे रहा था। ऐसा करके वह अपनी उत्तेजना को काबू में लाने की कोशिश कर रहा था,,,,।





कुछ देर तक इसी तरह से खड़े-खड़े अपनी बुर की चटाई करवाने के बाद,,,, वह सूरज के चेहरे को अपने हाथों से पकड़ कर उसे अपनी बुर से हटाने लगी और बोली,,,।

रुक जा मेरे पैर दर्द करने लगे हैं,,,(और ऐसा कहने के साथ ही टूटी हुई झोपड़ी में पड़ी हुई घास के ढेर को एक तरफ करके उसे बिस्तर की तरह बना दी ताकी लेटने में आराम रहे,,,, और घास के ढेर पर पीठ के बाल लेट गई और अपनी दोनों टांगों को खोल दी,,, और सूरज से बोली,,,)

अब आज इस तरह से चाटने में तुझे भी मजा आएगा,,,,,।

(फिर क्या था सूरज अपने हाथों से है अपनी कमीज को उतार कर एक तरफ कर दिया और टूटी हुई झोपड़ी में वह भी सोनू की चाची की तरह पूरी तरह से नंगा हो गया,,,, अपनी तरफ से की हुई इस हरकत को देखकर सोनू की चाची मन ही मन प्रसन्न होने लगेक्योंकि वह जानते थे कि इतना तो कोई भी मर्द कर सकता है बल्कि उसकी जगह कोई और होता तो शायद उसे कुछ भी बताने की जरूरत नहीं पड़ती वह खुद ही सब कुछ कर लेता लेकिन फिर भी एक अनजान मर्द को अनाड़ी खिलाड़ी को खिलाड़ी बनने का जो मजा है वह मजा किसी और में नहीं है इस बात का एहसास सोनू की चाची को अच्छी तरह से हो रहा था,,, और देखते ही देखते सूरज सोनू की चाची की दोनों टांगों के बीचघुटनों के बाल आगे और अपने प्यासे हो तो कोई एक बार फिर से उसके गुलाबी छेंद पर लगाकर उसकी मलाई को चाटना शुरू कर दिया,,,इस दौरान सूरज को इस बात का एहसास हो रहा था कि वाकई में सोनू की चाची अपनी जवानी का खुलकर मजा नहीं ले पाई थी क्योंकि उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि सोनू की चाची का गुलाबी छेद ज्यादा बड़ा नहीं था इससे अंदाजा लग जा रहा था कि सोनू के चाचा का लंड कितना मोटा होगा,,, इस समय सोनू के चाचा के एवज में सूरज को यही लग रहा था कि अंधे के हाथ बटेर लग गया।





सोनू की चाची की हालत खराब हो रही थी एक तो जिंदगी में पहली बार उसकी बुर की चटाई हो रही थी और वह एकदम चरम सुख के करीब पहुंच गई थी इसलिए उसकी सांसों की गति बड़ी तेजी से चल रही थी और उसके मुंह से गरमा गरम शिसकारी की आवाज बड़ी जोरों से निकल रही थी लेकिन उसके सिसकारी की आवाज ईस सुनसान जगह में सुनने वाला केवल सूरज ही था,,, और सूरज ईस तरह की आवाज सुनकर और ज्यादा उत्तेजित हो रहा था।सूरज जानता था कि उसका पानी निकलने वाला है लेकिन वह उसके ऊपर से अपने होठों को नहीं जाता रहा था क्योंकि वह जानता था कि उसकी मदद का स्वाद और भी आनंद दायक और इस उत्तेजित कर देने वाला होगा इसलिए वह पागलों की तरह अपनी जीत जोर-जोर से अंदर बाहर करता हुआ उसकी बुर को चाट रहा था।





और फिर देखते ही देखते सोनू की चाची पूरी तरह से मदहोश होने लगी उसका बदन एकदम से अकड़ने लगा,,,, और वह एकदम से अपने हाथ की कोहनी के सहारेबैठ गई और अपनी दोनों टांगों के बीच की स्थिति को देखने लगी जो की पूरी तरह से बिगड़ चुकी थी उसे साफ दिखाई दे रहा था कि सूरज पागलों की तरह उसकी बुर की चटाई कर रहा था,,, सोनू की चाची को इस बात की खुशी थी की पहली बार में ही सूरज इतना कुछ सीख गया था,,,।लेकिन अब इसकी उत्तेजना परम शिखर पर थी वह झड़ने वाली थी उसकी बुर से पानी निकलने वाला था और वह तुरंत अपना ही खाता आगे बढ़कर सूरज के बाल को जोरों से पकड़ ली औरउसे एकदम से अपनी दोनों टांगों के बीच अपनी गुलाबी छेद पर दबा दी और फिर अगले ही पल उसकी बुर से भल भला कर मदन रस की बौछार होने लगी,,, और उसे बौछार में सूरज पूरी तरह से नहाने लगा,,, उसके मदन रस में उसका पूरा चेहरा गीला हो चुका था और उसकी नमकीन बुंदे उसके गले के नीचे उतर चुकी थी।





थोड़ी देर मेंसूरज उसके पास में ही उसकी दोनों टांगों के बीच बैठा हुआ था वह जानता था कि सोनू की चाची का काम तमाम हो चुका था लेकिन अभी भी बहुत कुछ बाकी था सोनू की चाची गहरी गहरी सांस ले रही थी जिसके साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी जिसे देखकर सूरज की हालत खराब हो रही थी जब हालात शांत हुए तो सोनू की चाची सूरज की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोली,,।

कैसा लगा सूरज,,,?

पूछो मत चाची आज तो मजा ही आ गया मैं कभी सोचा नहीं था कि औरत के इस अंग में इतना मजा आता होगा,,,,।(सूरज एकदम से गहरी सांस लेता हुआ बोला,,,)

तभी तो कहती थी की औरत की बुर सिर्फ पेशाब करने के लिए नहीं होती बहुत कुछ काम करने के लिए होती है जिसमें से एक काम तूने कर चुका है लेकिन अभी महत्वपूर्ण काम बाकी रह गया है,,,।





महत्वपूर्ण काम बाकी रह गया है,,, मैं कुछ समझा नहीं,,,(सूरज फिर से अपनी नादानी दिखाते हुए बोला,,,)

अरे बुद्धू यह तो मेरी बुर का काम था लेकिन अभी तेरे लंड का काम बाकी है,,,,और अब तो जो काम तुझे बताने जा रही हूं उसमें इतना मजा आएगा कि तो ऐसा महसूस करेगा की हवा में उड़ रहा है,,,।

हवा में उड़ रहा हूंऐसा कौन सा काम बाकी है चाची मैं भी मजा लेना चाहता हूं मैं भी देखना चाहता हूं की हवा में कैसे उड़ा जाता है,,,।

(सूरज के मासूमियत को देख कर सोनू की चाची मन ही मन प्रसन्न हो रही थी और वह मुस्कुराते हुए बोली)

हवा में उड़ना है तो जैसा मैं कहती हूं वैसा ही करना बहुत मजा आएगा,,,,।

लेकिन करना क्या होगा,,,?

अभी बताती हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही एक बार फिर से वह अपनी दोनों टांगों को खोल दी और अपनी गुलाबी छेद पर अपनी हथेली को फिर से रगडते हुए बोली,,,)





ज्यादा कुछ करना नहीं है बस इसके अंदर तुझे अपने लंड को डालकर अंदर बाहर करना है,,,।

(सोनू की चाची की बेशर्मी मेरी बातें सुनकर सूरज का दिल जोरो से धड़क रहा था उसे अच्छी तरह से मालूम था कि क्या करना है लेकिन फिर भी अनजान बनने का नाटक करते हुए वह बोला)

अंदर बाहर में कुछ समझा नहीं,,,,

तु इधर आ में तुझे सब कुछ बताती हूं,,,,।

( इतना सुनते ही सूरज घुटने के बाद उसकी दोनों टांगों के बीच आ गया था और सोनू की चाची मुस्कुराते हुए बोली,,,,)

अब तुझे दोनों हाथ मेरी गांड के नीचे की तरफ लाकर अपनी जांघो के ऊपर खींचना है,,, मेरा भार उठा तो लेगा ना,,,

क्यों नहीं चाचा देखती हो ना कितना बड़ा-बड़ा बोझ में उठा लेता हूं,,,,.





बोझ की बात अलग है लेकिन एक औरत की बात अलग है,,,, बोझ उठाने के लिए ताकत चाहिए लेकिन एक औरत को उठाने के लिए कलेजा चाहिए,,,,(ऐसा कहकर वह सूरज को उकसा रही थी सूरज भी एकदम से तेस में आ गया था और बोला,,)

यह बात है तो लो अभी बताता हूं,,,(सूरज को अच्छी तरह से मालूम था कि अब उसे क्या करना है क्योंकि ऐसा वह मुखिया की बीवी के साथ कर चुका था,,तुरंत अपने दोनों हाथों को नीचे से सोने की चाची की कहानी की तरफ लगी और उसकी कमर को पकड़कर सीधा अपनी जांघों पर उठाकर खींच लिया,,,, यह देख कर सोनू की चाची मुस्कुराते हुए बोली,,,)





हाय दइया सच में तेरे में बहुत ताकत है रे,,,,,।

(अभी स्थिति पूरी तरह से समांतर बन चुकी थी सोने की चाची की गुलाबी पर ठीक सूरज के लंड के पास में थी,,,,, यह देख कर सोनू की चाची बोली,,,)

बस अब ठीक है अब तुझे अपना लंड मेरी बुर के अंदर डालना है,,,।

(इस तरह की बातों को सुनकर सूरज का रोम रोम पुलकित हुआ जा रहा था लेकिन इस समय सुबह एकदम नादानी भरे स्वर में आश्चर्य जताते हुए बोला,,)

क्या बात कर रही हो चाची इतने छोटे से छेद में यह कैसे घुसेगा,,,,।

अरे पगले यही तो करामात है मेरी बुर की और तेरे लंड की,,,, एक बार पकड़ कर डाल तो सही आराम से चला जाएगा,,,,।





(सूरज की सांस ऊपर नीचे हो रही थी उसके माथे से पसीना टपक रहा था जवानी से भरी हुई नंगी औरत उसे छोड़ने के लिए बोल रही थी और इस समय वह सिर्फ नादानी के कारण रुका हुआ था,,, वरना अब तक तो सोनू की चाची की बुर के तार खोल दिया होताफिर भी जैसा सोनू की चाची कह रही थी वैसे तो उसे करना ही था इसलिए अपने लंड को पकड़कर उसकी बुर के गुलाबी छेद में डालने की जगह वह ऊपर नीचे बस रगड रहा था वह जानबूझकर यह दिखाना चाहता था कि उसे नहीं मालूम है कि कौन सी जगह डालना है,,,, यह देखकरसोनू की चाची से रहने जा रहा था क्योंकि गरमा गरम लंड का सुपाड़ा उसकी बुर पर रगड़ खा रहा था और यह बरसों बाद उसके साथ ऐसा हो रहा था इसलिए वह पूरी तरह से व्याकुल और उत्साहित हुई जा रही थी,,,उसे रानी जा रहा था इसलिए वह खुद अपना हाथ आगे बढ़कर सूरज के लंड को पकड़ लिया और उसे ठीक जगह पर अपनी बुर के छेद पर रख दी और बोली,,,)

बस सूरज अब धक्का मार और इसे अंदर जाने दे,,,।





(सोनू की चाची इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि सूरज का लंड कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा हैजिससे उसकी बुर की छोटे से छेद में जाने में थोड़ी सी तकलीफ ज़रूर होगी लेकिन आराम से चला जाएगा इतना भी वह जानती थी और सोनू की चाची की बात सुनते ही सूरज अपनी कमर को आगे की तरफ धक्का लगने लगा और ऐसा करने पर उसके लंड का सपना बुर की चिकनाहट पाकर अंदर की तरफ से सरकने लगा,,,,सूरज को भी मजा आ रहा था वह एक झटके में अपने लंड को उसकी बुर की जड़ तक घुसेड देना चाहता था,,, लेकिन अपने उत्तेजना पर और अपने आप पर पूरी तरह से काबू किए हुए था,,,। उत्तेजना की आग पूरी तरह से सूरज के बदन में लग चुकी थी,, इस समय उसे दुनिया का अनमोल खजाना मिल गया था और धीरे-धीरे वह अपने अस्तित्व को उसके अंदर उतर रहा था,,,वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि इतनी जल्दी उसे सोनू की चाची चोदने के लिए मिल जाएगी,,, लेकिन यह सपना नहीं हकीकत था उम्मीद से दुगना मिल रहा था उसे,,, वह तो केवल यूं ही घूमने के लिए उसके घर पहुंच गया थाऔर जब देखा कि सोनू की तबीयत खराब है तो वहां बात हुई बातों में उसकी दवा के लिए एक वेद जी का नाम ले लिया और नतीजा देखो सोनू की चाची की चुदाई वह करने जा रहा था,,,।)

चाची क्या यह पूरा घुस जाएगा,,,!

बड़े आराम से रे बस तू धक्का लगाकर इसे अंदर तक डाल दे,,।

लेकिन तुम्हारी बुर बहुत कसी हुई है इसका छेद बहुत छोटा लग रहा है,,,, कैसे घुसेगा यह,,,।

आराम से घुस जाएगा,,, यही सब तो नहीं जानता औरत का यह अंग कितना कारामती है,,, बस तु अंदर डालने की सोच,,।

तुम कहती हो चाची तो सच ही होगा,,, मैं पूरा प्रयास करता हूंलेकिन ऐसा लग रहा है कि मेरा लंड कुछ ज्यादा ही मोटा ही छोटे से छेद के लिए,,,,(सूरज जानबूझकर इस तरह की बातें कर रहा था इस तरह की बातें करके वह अपनी मां की बात भी सोनू की चाची को बता दे रहा था और उसकी इस तरह की बातें सुनकर सोनू की चाची मन ही मन प्रसन्न हो रही थी क्योंकि उसे ऐसा लग रहा था कि उसकी जवानी का जलवा पूरी तरह से उसके ऊपर बिखर चुका था जिसके चलते वह इस तरह की बातें कर रहा था.. सूरज की बात सुनकर सोनु की चाची बोली,,)

हां यह बात तो सच है मैं कहती थी ना तेरा लंड कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा है लेकिन मैं जानती हूं कि बड़े आराम से चला जाएगा,,, बस तू डाल,,,।

ठीक है चाची मैं पूरी कोशिश करता हूं,,,(और इस बार थोड़ा जोर दिखा कर अपनी कमर को आगे की तरफ ठेलने लगा,, सूरज को भी इस बात का एहसास हो रहा था कि सोनू की चाची की बुर को ज्यादा ही कसी हुई है एक शादीशुदा औरत की पूरी इतनी कसी हुई होगी वह कभी सोच नहीं सकता था क्योंकि उसने मुखिया की बीवी के साथ-साथ मुखिया की लड़की की चुदाई किया था और जैसा एहसास सूरज को मुखिया की लड़की को चोदने में हो रहा था वही ऐसा इस समय सोनू की चाची को चोदने नहीं हो रहा था,,, और इस बात की खुशी सूरज को थी,,,,, सूरज अच्छी तरह से जानता था कि उसे क्या करना है,,,, सूरज का कामउसकी बुर से निकलने वाला मदन रस की चिकनाहट आसान करते रही थी थोड़ी बहुत दिक्कत है सूरज को महसूस हो रही थी लेकिन वह जानता था कि उसका लंड बुर के अंदर पूरा का पूरा घुस जरूर जाएगा,,,,।

टूटी हुई मडई में सोनू की चाची की जवानी पूरे तूफान पर थी बरसों की दबी हुई प्यास आज पूरी तरह से ऊपर आई थी और उसे बुझाने का पूरा मौका उसे मिल रहा था और अच्छी तरह से जानते थे कि उसकी जवानी की प्यास सिर्फ सूरज के मोटे तगड़े लंड से ही बुझ सकती है,,,, उसकी मोटी मोटी जांघें सूरज की जांघों पर चढ़ी हुई थी,,, और उसका लंड उसके गुलाबी छेद में धीरे-धीरे अंदर की तरफ घुस रहा था,,, इस तरह का कड़क और कसा हुआ एहसास उसे कभी नहीं हुआ था अपने पति के छोटे लंड से वह आज तक इस एहसास को कभी महसूस ही नहीं कर पाई थी,,, लेकिन आज उसकी औरत होना पूरी तरह से सफल होता नजर आ रहा था सूरज के लंड कीगर्मी और उसका घर्षण हुआ अपनी बुर की अंदरूनी दीवारों में बड़े अच्छे से महसूस कर पा रही थी,,,, और यही घर्षण और रगड़ उसे बेहद आनंदित कर रही थी,,,सोनू की चाची सूरज के मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर में घुसता हुआ देखना चाहती थी इसलिए वह अपने हाथ की कोहनी का सहारा लेकर अपनी गर्दन को उठाकर अपनी नजरों को अपनी दोनों टांगों के बीच टिका दी थी,,, उसे सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था,,,,।

इस समय सूरज का लंड उसे मोटा तगड़ा सांप नजर आ रहा था और उसकी गुलाबी बुर कोई छेद नजर आ रही थी जिसमें वह प्रवेश कर रहा था,,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी अपने भतीजे की दवाई लानेके लिए वह निकली जरूरत थी लेकिन रास्ते में वह सूरज के साथ ऐसा ही कुछ करना चाहती थी और सब कुछ ऐसा हो रहा था,, सूरज के साथ चुदाई की वह बहुत बार कल्पना कर चुकी थी लेकिन उसकी यह कल्पना आज हकीकत में बदल चुकी थी सूरज भी काफी मेहनत कर रहा था जेठ की दुपहरी में जवानी की गर्मी को सहन करके वह पूरी तरह से पागल हो जा रहा था इसलिए तो उसके माथे से पसीना टपक रहा थाऔर यही हाल सोनू की चाची का भी था वह भी पसीने से तरबतर हो चुकी थी उसकी मोटी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचियां एकदम पपाया के पेड़ पर पपिया की तरह लटकी हुई थी,,, देखते ही देखते सूरज धीरे-धीरे करके अपनी पूरे समुचे लंड को सोनू की चाची की गुलाबी बुर में उतार दिया था।जैसे ही सोनू की चाची को एहसास हुआ कि सूरज का लंड पूरी तरह से उसकी बुर में समा गया है वह यह देखकरखुश हो गई और यह खुशी और उत्तेजना उसके चेहरे पर साथ दिखाई दे रही थी और यही हाल सूरज का भी था सूरज भी एकदम से खुश होता हुआ बोला,,,)

देखो चाचा तुम सच कह रही थी सच में यह तो पूरा घुस गया हमने तो कभी सोच भी नहीं सकता था कि इतने छोटे से छेद में इतना मोटा और लंबा लंड कैसे घुस पाएगा।

है ना अद्भुत,,,!

बिल्कुल चाची,,,, लेकिन अब मुझे क्या करना है,,,?

बस अब तुझे अपनी कमर को आगे पीछे करना है और इस लंड को अंदर बाहर करना है इतना जरूर देखना की पूरा का पूरा निकल ना जाए उसका सुपाड़ा अंदर ही रहना चाहिए ताकि दोबारा डालने में तकलीफ ना हो,,, बस अब शुरू हो जा बेटा,,,।

(सूरज को अच्छी तरह से मालूम था कि आप उसे क्या करना है वह तो सिर्फ जानबूझकर अपनी नादानी दिख रहा था और वह जैसा बोल रही थी वैसा ही करना शुरू कर दिया था सूरज अपनी कमर को आगे पीछे करके ही लाना शुरू कर दिया था और ऐसा करने पर उसका मोटा तगड़ा लड़की सोनू की चाची की बुर के अंदर बाहर होना शुरू हो गया था इसकी रगड़ उसे पूरी तरह से मस्त कर रही थी और यही हाल सोनू की चाची का भी था,,,सूरज के मोटे तगड़े लंड की रगड़ सोनू की चाची बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी इसलिए उसका पूरा बदन कसमसा रहा था,,,, उसके चेहरे के हाव-भाव बड़ी तेजी से बदल रहे थे,,,इस बात को सूरज अच्छी तरह से जानता था कि इस तरह का सुख सोनू की चाची पहली बार भोग रही थी लेकिन वह तो इस तरह के सुख को कई बार पहुंच चुका था इसलिए वह पूरी तरह से मजा हुआ खिलाड़ी था,,,, अगर वह अपनी पर उतरा था तो उसके सामने सोनू की चाची ही पूरी तरह से अनाड़ी नजर आने लगती,, क्योंकि इस खेल में सोनू पूरी तरह से माहिर था और एक पक्का खिलाड़ी था।

कैसा लग रहा है सोनू,,,(उत्तेजित स्वर में सोनू की चाची बोली)

पूछो मत चाची बहुत मजा आ रहा है,,,तुम सच कहती थी कि लंड और बुर का पेशाब करने के अलावा दूसरा भी बहुत सा काम है,,, तुम अगर नहीं बताती तो मैं तो अब तक अनजान ही रहता कितना मजा आ रहा है मैं बात नहीं सकता,,,(एकदम मदहोश होकर अपनी आंखों को बंद करता हुआ सूरज बोला उसकी हालत देखकर सोनू की चाची मन ही मन बेहद प्रसन्न हो रही थी उसकी भी हालत कुछ ठीक नहीं थी वह भी पूरी तरह से उत्तेजना के घोड़े पर सवार हो चुकी थी और यह घोड़ा उसे कहां ले जा रहा था उसे खुद समझ में नहीं आ रहा थाजवानी से लेकर के इस उम्र के दौर तक उसने इस तरह का सुख कभी भोगी ही नहीं थी और ना हीं कभी कल्पना की थी,,, वह भी अपनी आंखों को बंद करके इस अपन को पूरी तरह से जी लेना चाहती थी,,,, धीरे-धीरे सूरज अपनी कमर हिला रहा थालेकिन उसके धीरे-धीरे में सोनू की चाची को अत्यधिक आनंद की प्राप्ति हो रही थी उसे पूरा अहसास हो रहा था कि सूरज का लंड काफी देर से एकदम खड़ा का खड़ा था उसमें बिल्कुल भी ढीलापन नहीं आया था यही उसकी मर्दानगी का सबुत था। लेकिन अब समय आ गया था जब वह सुरज से कहे कि अब जोर-जोर से अपनी कमर हिला कर जोर-जोर से धक्के लगा,,, इसलिए वह गरम आहे भरते हुए बोली,,,)

ओहहहहह सूरज बहुत मजा आ रहा है इससे भी ज्यादा मजा तब आएगा जब तू अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाएगा और अपने लंड को बड़ी तेजी से मेरी बुर के अंदर बाहर करेगा तब तुझे भी मजा आएगा और मुझे भी,,,,।

एकदम जोर से चाची,,,,

हां एकदम जोर से,,,,

तुम्हें चोट लग गई तो,,,

नहीं मुझे चोट नहीं लगेगी बल्कि बहुत मजा आएगा,,,,।

तो फिर मैं जोर-जोर से धक्के मारु,,,,

हां एकदम जोर-जोर से बिल्कुल भी रहम मत करना,,,।

ठीक है चाची जैसा तुम कहो,,,,(सूरज अच्छी तरह से समझ गया था कि अब असली खेल खेलने का समय आ चुका था अब सोनू की चाची को असली सूरज से मिलना था अभी तक तो वह एक नादान सूरत से मिल रही थी जो उसके दिशा निर्देश से ही आगे बढ़ रहा था लेकिन अब वह सोनू की चाची को दिखाएगा की एक असली मर्द से चुदवाने का क्या नतीजा होता है,,सूरज सोनू की चाची की कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया था क्योंकि वह जानता था उसका हर एक धक्का उसे स्वर्ग की शेर कराएगा,,,, और फिर अपने आप को व्यवस्थित करके वह एक जोरदार करारा धक्का मारा और एकदम से सोनू की चाची की चीख निकल गई क्योंकि,,,उसके लंड की ठोकर सीधे उसके बच्चेदानी से झक रही थी और यह एहसास उसे पूरी तरह से पानी पानी करती थी लेकिन उसकी चीज की आवाज को सुनकर सूरज एकदम से रुक गया था और बोला,,,)

क्या हुआ चाचा दर्द तो नहीं हुआ ना,,,,।

बिल्कुल भी नहीं सूरज तू तो मुझे पागल कर देगा बस ऐसे ही धक्के लगा बहुत मजा आ रहा है,,,,।

(फिर क्या था सोनू की चाची की इजाजत बातें ही सूरज शुरू पड़ गया उसका हर एक तक का सोनू की चाची को स्वर्ग की राह ले जा रहा था वह हवा में उड़ रही थी,,,, वह पागल हो जा रही थी वाकई में उसका हर एक धक्का उसे मदहोश कर रहा था,,,,, सोनू की चाची और सूरज दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे बीछी हुई घास में दोनों काम क्रीड़ा का सुख भोग रहे थे,,,, सूरज पागलों की तरह ढके पर धक्का लगा रहा था सोनू की चाची काफी मजबूत और गदराए जिस्म की मालकिन थी,,, और वह जानता था कि उसका हर एक धक्का सोनू की चाची बड़ी आराम से जेल जाएगी उसकी बड़ी-बड़ी गांड एकदम से उसकी जांघों से टकराकर एक अद्भुत आवाज पैदा कर रही थी उसके हर एक धक्के के साथ,,ठाप ठाप की आवाज आ रही थी यह आवाज दोनों की जांघों के टकराने से आ रही थी,,,,।

सोनू की चाची मदहोशी के सागर में गोते लगा रही थी वह पागल हुए जा रही थी वह अपना दोनों हाथ आगे बढ़कर सूरज के हाथ को पकड़ लिया और उसकी दोनों हथेलियां को अपनी लहराती हुई चुचियों पर रखते हुए बोली,,,।

इसे जोर-जोर से मसलते हुए धक्के लगा,,,,।

फिर क्या था सूरज के हाथों में तो दसहरी आम लग चुके थे वह दोनों हाथों से उसे जोर-जोर से दबाता हुआ छक्के पर धक्का लगा रहा था,,,,सूरज के आगे सोनू की चाची जवाब दे गई थी वह चरमसुख पर पहुंचने वाली थी वह पागल हुए जा रही थी और वह तुरंतसूरज को अपनी बाहों में दबा चली थी सूरज भी समझ गया था कि वह झड़ने वाली है उसका काम तमाम होने वाला है इसलिए वह भी एकदम कस के उसे अपनी बाहों में जकड लिया था और अपनी कमर को बड़ी तेजी से ही लाना शुरू कर दिया था,,,सूरज अच्छी तरह से जानता था कि इस तरह से चरम सुख के करीब पहुंची हुई औरत की चुदाई करने पर हो वह और ज्यादा आनंद और मस्ती महसूस करती है और ऐसा ही हो रहा था सूरज की यह हरकत सोनू की चाची को और भी ज्यादा उत्तेजित और मदहोश बना रहा था,,,,।

सोनू की चाची के मुंह से बड़ी जोरों की सिसकारी की आवाज निकल रही थीऔर वह जानबूझकर अपनी आवाज पर काबू नहीं कर पा रही थी क्योंकि वह जानते थे कि वह किस जगह पर है,,, वह जानती थी कि उसकी गरमा गरम सिसकारी की आवाज इस समय सुनने वाला वहां पर कोई नहीं था,,,, और फिर देखते ही देखते वह एकदम से झड़ने लगी वह पागल होने लगी,,,लेकिन फिर भी सूरज उसे अपनी बाहों में दबोचे हुए धक्के पर धक्का लगा रहा था उसकी बुर से मदन रस की फुहार फूट रही थी जो की उसके लंड को पूरी तरह से भीगो रही थी,,,, थोड़ी ही देर वह पूरी तरह से शांत हो गई लेकिन सूरजशांत नहीं हो रहा था और यह देखकर सोनू की चाची भी हैरान थी कि उसका पानी अभी तक नहीं निकला था लेकिन अब एक ही स्थिति में उसका बदन दर्द करने लगा था और अब उसका मन घोड़ी बनने को कर रहा था,,, जो कि आज तक उसके पति ने उसे नहीं बनाया था,,,,और इस बात को सोनू की चाची भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी गांड कुछ ज्यादा ही बड़ी-बड़ी है और घोड़ी बनाकर पीछे से चुदवाने में मजा तो आता है लेकिन घोड़ी बनकर चुदवाने के लिए एक मजबूत घोड़ा भी चाहिए जो कि उसका पति बिल्कुल भी नहीं था,,, वह सूरजका खूबसूरत मासूम चेहरा अपने हाथ में पकड़ कर उसकी आंखों में देखते हुए बोली,,,।

दैया रे दैया बहुत दम है रे तेरे में मेरा तो तूने पानी निकाल दिया लेकिन अभी तक तेरा पानी नहीं निकला,,,,,।

पानी कैसा पानी चाची,,,,(नादान बनते हुए और जोर-जोर से धक्का लगाते हुए वह बोला)

अभी पता चल जाएगा रुक जा मेरे ऊपर से उतर तो,,,।

लेकिन चाची मुझे तो मजा आ रहा है,,,।

अरे बुद्धु ईससे भी ज्यादा मजा आएगा बस मेरे ऊपर से थोड़ा हट जा,,,।

(ऐसे तो सूरज अपना नहीं चाहता था क्योंकि उसे बहुत मजा आ रहा था लेकिन इस समय सोने की चाची की बात माने ना उसके लिएबेहद जरूरी था इसलिए वह धीरे से सोनू की चाची के ऊपर से हट गया उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में खड़ा था और वह पूरी तरह से उसके मदन रस में डूबा हुआ था और बुर से निकला हुआ मदन रस उसके लंड से टपक रहा था,,,,सूरज गहरी गहरी सांस ले रहा था सोनू की चाची एक बार झड़ चुकी थी इसलिए वह धीरे से अपनी जगह से उठकर बैठ गई और सूरज के लंड की तरफ देखते हुए बोली,,)

बिल्कुल गधे के लंड की तरह है,,,,।

(इतना कहने के साथ ही सोनू की चाची अपनी बड़ी-बड़ी गांड को सूरज की आंखों के सामने लहराते हुए घोड़ी बन गई वह हाथ की कोहनी और घुटनों के बाल झुक गई थी और अपनी बड़ी-बड़ी गांड को हवा में एकदम तोप की तरह उठा दी थी,,,उसकी यह अदा देखकर सूरज समझ गया था कि वह क्या करवाना चाहती है और इस समय वाकई में उसकी बड़ी-बड़ी गांड बहुत ही ज्यादा खूबसूरत और आकर्षक लग रही थी,,,, यह देखकर सूरज से रहा नहीं किया और वह अपना हाथ आगे बढ़ाकर अपनी हथेली को उसकी गांड पर रखकर सहलाने लगा और नादानी पन दिखाते हुए बोला,,,)

अब क्या करना होगा चाची इस तरह तो तुम बहुत ज्यादा खूबसूरत लग रही हो,,,।

(उसकी बात सुनकरसोनू की चाची मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए पीछे की तरफ देखते हुए बोली)

तुझे वही करना है जो अभी कर रहा था लेकिन तू मेरे ऊपर चढ़कर कर रहा था लेकिन अब पीछे से करना होगा,,,,।

पीछे,,, से,,,,,।

हां पीछे से,,,(अपनी दोनों टांगों को धीरे से खोलते हुए अपना हाथ अपने दोनों टांगों के बीच से लाते हुए अपनी गुलाबी छेद पर रखते हुए बोली)

तुझे मेरी बुर दिखाई दे रही है ना,,,।

हां चाची एकदम साफ दिखाई दे रही है,,,।

बस अभी इसी में अपना लंड डाल दे और मेरी गांड पकड़ कर जोर जोर से धक्के लगा देखना इस तरह से चोदने में तुझे भी बहुत मजा आएगा,,,,,।

(फिर क्या था सूरज को अच्छी तरह से मालूम था उसे क्या करना है और वह अपने घुटनों के पर बैठा नहीं बल्कि खड़े होकर अपनी दोनों टांगों कोफैला दिया और एक हाथ से सोनू की चाची की बड़ी-बड़ी गांड को पकड़कर अपने लंड को उसके गुलाबी छेद से टिका दिया और दोनों गांड को पकड़ कर अपनी कमर पर जोरदार धक्का लगाया और ऐसा करने से तुरंत उसका लंड एक ही धक्के में सीधा उसके बच्चेदानी से टकरा गया,,, औरसोनू की चाची सोची नहीं थी कितनी तेज सेवा धक्का मारेगा और पहली बार में ही इसलिए अपने आप को संभाल नहीं पाई थी और एकदम से आगे की तरफ लुढ़क गई थीलेकिन सूरज पूरी तरह से चौक करना था वह अच्छी तरह से जानता था किस तरह से धक्का मारने पर वह आगे की तरफ लुढ़क जाएगी इसलिए दोनों हाथों से उसकी कमर को थाम लिया था और एकदम से उसे संभाल भी लिया था उसकी हरकत पर सोनू की चाची एकदम से मत हो गई थीइस तरह से चोदने में तो सूरज को भी बहुत मजा आता था और थोड़ी ही देर में सोनू की चाची भी फिर से एकदम से चुदवासी हो गई,,,

सूरज पागलों की तरह धक्के पर धक्का लगा रहा था,,,सोनू की चाची पागल हो जा रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था क्योंकि एक बार उसका पानी निकल गया था और वहदोबारा तैयार हो चुकी थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि इतनी देर तक कोई मर्द चुदाई भी कर सकता है क्योंकि उसके पति का तो अंदर प्रवेश करते ही निकल जाता था लेकिन सूरज किसी और माटी का बना था,, वह ना तो झड़ा था और ना ही वह थकने का नाम ले रहा था,,, सोनू की चाची की सिसकारियां एक बार फिर से गूंजने लगी,,,,और थोड़ी ही देर बाद वह फिर से अपने चरम सुख के करीब पहुंच गई उसकी तेज चलती सांस और उसकी जोर-जोर से शिसकारी की आवाज को सुनकर सूरज समझ गया था कि वह फिर से झड़ने के करीब है,,,,इसलिए वह भी अपने धक्के तेज कर दिया और देखते ही देखते उसके मुंह से भी जोर-जोर से आवाज आने लगी और जानबूझकर इस तरह की आवाज निकल रहा था ताकि उसका नादानी पन जारी रहे,,,।

ओहहह चाची मुझे कुछ हो रहा है,,, बहुत अजीब हो रहा है लेकिन बहुत मजा आ रहा है,,,।

अब तेरा भी पानी निकलने वाला है जोर-जोर से धक्के लगा,,,।

और इतना सुनते ही उसके धक्को की गति और भी ज्यादा तेज हो गई,,, और फिर दोनों एक साथ झड़ने लगे,,,, सूरज एकदम से उसकी कमर को अपनी बाहों में लेकर उसके ऊपर पसर गया थाऔर सोने की चाची एक बार फिर से चरम सुख को प्राप्त कर ली थी वह मदहोश हो चुकी थी,,, वह भी एकदम से घास पर लेट गई थी और उसके ऊपर सूरज था,, सूरज गहरी गहरी सांस ले रहा था आज पहली बार सोनू की चाची चुदाई की असली सुख को प्राप्त की थी और पूरी तरह से तृप्ति के एहसास को महसूस की थी वह कभी सोची नहीं थी कि इस तरह का सुख उसे भी प्राप्त होगा इसलिए वह गहरी सांस लेते हुए बोली,,,।

बाप रे तू तो पूरा घोड़ा निकला,,, अपनी घोड़ी की क्या हालत कीया है,,,, मेरी कमर दुखने लगी अब उठ मेरे ऊपर से,,,,।

बाप रे में तो सोचा भी नहीं था कि इस तरह से मजा लिया जाता है,,,(सूरज सोनू की चाची के ऊपर से उठता हुआ बोला,,,, सोनू की चाची भी उठकर बैठ गई दोनों पूरी तरह से तृप्त हो चुकी है वह मुस्कुराते हुए बोली,,,)

अब यकीन हुआ ना,,,,,(ऐसा कहते हुए वह टूटे हुए झोपड़ी से बाहर नजर डाली तो देखेंगे शाम होने में थोड़ी देर रह गई है वह एकदम से चोंकते हुए बोली,,)

हाय दैया कितना समय हो गया,,,, हम दोनों को बहुत ज्यादा समय हो गया है,,,, बाप रे समय का पता ही नहीं चला,,,(ऐसा कहते हुए सोनू की चाची एकदम से उठकर खड़ी हो गई और अपने कपड़ों को समेटने लगी उन दोनों को चुदाई का खेल खेलते हुए 2 घंटे से ज्यादा का समय बीत चुका था लेकिन उन दोनों को समय का पता ही नहीं चला था उन दोनों को बाजार भी पहुंचना थाइसलिए सूरज की जल्दी से उठकर खड़ा होकर और अपने कपड़े पहनने लगा थोड़ी देर में दोनों कपड़े पहनकर टूटी हुई झोपड़ी से बाहर आ गई दोनों के चेहरे पर संतुष्टि एकदम साफ झलक रही थी,,,)

अब तो शाम हो जाएगीकहीं अंधेरा हो गया तो गजब हो जाएगा जल्दी-जल्दी चल सूरज,,,(सोनू की चाची जल्दी-जल्दी चलते हुए बोल रहे थे लेकिन जिस तरह की चुदाई उसकी हुई थी वहां थोड़ा-थोड़ा लंगड़ा रही थी यह देखकर सूरज बोला,)

क्या हुआ चाची तुम लंगड़ा कर क्यों चल रही है,,?

अरे हरामि ईस तरह की चुदाई करेगा तो कोई भी औरत लंगड़ा कर चलेगी,,,।

(शाम होते होते दोनों बाजार में पहुंच चुके थे लेकिन बाजार घूमने का समय उन दोनों के पास नहीं था सूरज सीधा उसे वेद के पास है क्या जहां पर वह सोने के लिए दवाई ले ली थीऔर दवाई लेकर दोनों वापस लौटने लगे थे लेकिन तब तक शाम भी ढलने लगी थी हल्का-हल्का अंधेरा होने लगा था,,, यह देखकर सोनु की चाची बोली,,)

बाप रे बहुत देर हो गई है दीदी गुस्सा करेंगी क्योंकि इतनी देर तो नहीं लगना चाहिए,,,।

तो क्या हुआ चाचा बोल देना कि वेद जी दूसरे गांव गए हुए थे और वहां पर बैठना पड़ गया था इसलिए देर हो गई,,,।

(सूरज की बात सुनते ही सोनू की चाची के चेहरे की चमक बढ़ने लगी और वह मुस्कुराते हुए बोली)

वह सूरज तू तो बहुत चालाक है के मैं तो तुझे बुद्धु समझती थी,,,।

तुमने ही चालाक बना दि हो,,,,।

(यह सुनकर सोनू की चाची मुस्कुराने लगी,,, और बोली,,,)

अच्छा हम दोनों के बीच जो कुछ भी हुआ है इस बारे में किसी को भी मत बताना तो आगे से भी तुझे ऐसा मजा देती रहूंगी,,,।

सच कह रही हो चाची,,,।

एकदम सच कह रही हूं लेकिन किसी को बताना नहीं,,,।

बिल्कुल भी नहीं बताऊंगा चाची भला यह सब बातें बताने की होती है क्या,,,!

सच में तु बहुत समझदार है।

(धीरे-धीरे अंधेरा होने लगा था अभी भी गांव से हुआ दोनों काफी दूर थे चलते-चलते अंधेरा पूरी तरह से छा चुका था और अब गांव की शुरुआत हो चुकी थी लेकिन दोपहर से सोनू की चाची पेशाब नहीं करी थी और चुदवाने के बाद तो वह पेशाबबिल्कुल भी नहीं थी इसलिए उसे बड़े जोरों की पेशाब लगने लगी थी और उसकी बुर में कुलबुलाहट भी होने लगी थी वह अपने मन में सोच रही थी कि अपना जाने का मौका मिलेगा,,, इसलिए वह सूरज से बोली,,,।

मुझे फिर से बड़ी जोरों की पेशाब लगी है रुक जा मै पेशाब कर लेती हूं,,,।

(ऐसा कहते हुए सोनू की चाची एक बड़े से पेड़ के नीचे खड़ी हो गई और इधर-उधर देखने लगीअंधेरा हो चुका था इसलिए किसी के भी देखे जाने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी और वह दोनों अभी भी गांव से दूर थे गांव में प्रवेश करना बाकी था और वह देखना चाहती थी कि जो कुछ भी हुआ उससेसूरज की हिम्मत बड़ी है कि नहीं इसलिए वह सूरज की आंखों के सामने अपनी सारी कमर तक उठाकर खड़ी हो गई उसकी नंगी गांड सूरज की आंखों के सामने थी और वह पलट कर सूरज की तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी अब सूरज के लिए नादानी पन दिखाना सबसे बड़ी मूर्खता थी,,,सोनू की चाची की बड़ी-बड़ी गांड देखकर पल भर में उसका लंड फिर से खड़ा हो गया और वह तुरंत सोने की चाची के पीछे आ गया और उसे अपनी बाहों में भर लिया,,,, यह देख कर सोनू की चाची बहुत खुश हुई लेकिन फिर भी अपनी खुशी जाहिर नहीं होने दी और बोली,,,)

यह क्या सूरज मुझे पेशाब तो करने दे,,,।

नहीं चाची पता नहीं क्यों मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,(और ऐसा कहते हुए सूरज खुद उसकी एक टांग पड़करवहीं पास में ही एक बड़ा सा पत्थर था उसे पर रख दिया था कि वह अपने लिए जगह बना सके और जगह बनते ही तुरंत अपना पैजामा नीचे किया और अपने लंड को बाहर निकाल कर उसके गुलाबी छेद में फिर से डाल दिया और फिर से उसकी चुदाई करना शुरू कर दियासूरज की हरकत से वह पूरी तरह से उत्तेजना से गदगद हो गई और चुदाई का मजा लेने लगी,,,, थोड़ी देर में दोनों फिर से झड़ चुके थे और सोनू की चाची मुस्कुराते हुए नीचे बैठकर पेशाब करने लगी,,।

घर पहुंच कर सोनू की चाची ने वही बहन बताइए जो सूरज में उसे बताया था सूरज अपने घर चला गया था और उसकी बातों पर भरोसा करने के सिवासोनू की मां के पास कोई रास्ता भी नहीं था क्योंकि वह उसके ही बेटे के लिए दवा लाई थी और वाकई में वह दवा काम कर गई थी तीन-चार दिनों में सोनू एकदम ठीक हो गया था,,,,।
 
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