Incest पहाडी मौसम - Page 13 - SexBaba
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Incest पहाडी मौसम

सुनैना खाना बना रही थी ठीक उसके सामने खटिया पर सूरज बैठा हुआ था सूरज तो अपनी मां को देख ले रहा था लेकिन सुनैना की हिम्मत नहीं हो रही थी अपने बेटे से नजर मिलाने की क्योंकि आज नहाते समय टंकी के अंदर जो कुछ भी हुआ था वह बेहद उत्तेजनात्मक और दोनों के जीवन को बदल देने वाला पल था,, टंकी के अंदर जो कुछ भी हुआ था उसके बारे में सोचकर सुनैना के तन बदन में अभी भी उत्तेजना की चिंगारी फूट रही थी, इस समय भी उसकी बुर पानी छोड़ रही थी। क्योंकि आज की हरकत से उसे पक्का यकीन हो गया था कि उसका बेटा सच में उसे चोदना चाहता है क्योंकि पानी के अंदर की हरकत कोई अनजाने में नहीं हुई थी अनजाने में सिर्फ पैजामे में बना हुआ तंबू ही उसके नितंबों पर रगड़ खा सकता था लेकिन नंगा लंड उसकी गांड की दरार में घुसकर उसके गुलाबी गली का रास्ता तय नहीं कर सकता था। मतलब साफ था कि जो कुछ भी हुआ था अनजाने में नहीं बल्कि सोची समझी साजिश थी। इसलिए तो इस समय भी रह रहा कर सुनैना की हालत एकदम खराब हो जा रही थी बदन कसमसा जा रहा था।





एक तरफ सुनैना टंकी में नहाने वाली बात के बारे में सोच कर मदहोश हो रही थी वहीं दूसरी तरफ सूरज भी अपनी तरफ से सारी धारणाएं अपने मन में बांध ले रहा था उसे पूरा यकीन था कि उसकी मां को सब कुछ मालूम था की टंकी के अंदर उसके बेटे का मोटा से बड़ा लंड उसकी बुर की गुलाबी द्वार पर दस्तक दे रहा था और हल्का सा प्रवेश भी कर चुका था लेकिन इतना सब होने के बावजूद भी उसने उसे रोकने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं की और ना ही अपनी गांड को हटाने की जिसका मतलब साफ था कि वह भी यही चाहती है कि उसका बेटा उसकी चुदाई करें। बस अपने मुंह से बोल नहीं पा रही है यह सब सोच कर सूरज मन ही मन में प्रसन्न हो रहा था,, क्योंकि उसके लिए तो रास्ता एकदम साफ होता दिखाई दे रहा था। सूरज को एहसास हो गया था उसकी मां को पति की कमी महसूस हो रही है अब इस कमी को हुआ खुद दूर करेगा लेकिन इत्मीनान से बिल्कुल भी जल्दबाजी नहीं दिखाएगा क्योंकि वह जानता था किसी दिन ऐसा कुछ होगा वह जी भर कर अपनी मां को मस्त कर देगा ताकि उसकी मां अपने बेटे की मर्दानगी की दीवानी हो जाए,,,, यही सोचकर सूरज मन ही मन प्रसन्न हो रहा था और अब वह यह भी जानता था कि अब यह सब हासिल करने में ज्यादा दिन दूर नहीं है।





रानी का भी यही हाल था वह भी अपने ख्यालों में खोई हुई थी क्योंकि वह पूरी तरह से कुंवर के प्यार में पड़ चुकी थी और आज ही वह अपने सपनों के सौदागर से मिलकर आ रही थी। वह कभी सोची नहीं थी कि इतने बड़े घर आने के लड़के से उसे प्यार हो जाएगा और हैरानी वाली बात यह थी कि उसे बड़े घराने के लड़के को भी उससे प्यार हो जाएगा। इसलिए तो इस समय वह मन ही मन बहुत खुश नजर आ रही थी और नाम की तरह कुंवर था भी बहुत सुंदर,,, इसलिए तो कुंवर को लेकर वह अपने भविष्य के सपने बुनने लगी थी। वह इस समय सब्जी काट रही थी और अपने ही ख्यालों में खोई हुई देखकर सुनैना बोली।

क्या हुआ रे तुझे नींद आ रही है क्या,,,,?

(अपनी मां की बात सुनते ही वह एकदम से अपनी मां की तरफ देखने लगी लेकिन कुछ समझ नहीं पाई कि उसकी मां क्या बोली है इसलिए सुनैना फिर से बोली)

नींद आ रही है क्या तुझे,,,,?

नननन,,, नहीं नहीं,,,, बस आज थोड़ा सा थकान महसूस हो रहा है।





थकान महसूस हो रहा है तो अभी खाना बन जाएगा और खाकर जाकर सो जाना,,,, और वैसे भी अब हम लोगों का काम खेतों में खत्म हो चुका है,,,।

(इतना सुनते ही रानी हैरानी से अपनी मां की तरफ देखते हुए बोली,,,)

क्या सच में खेत में काम खत्म हो गया,,,

हा रे आज सारे फसल की कटाई पूरी हो गई है,,,, अब तो मेरे पास कोई काम नहीं है घर पर ही रहूंगी।

(यह बात सुनकर रानी परेशान हो गई थी क्योंकि उसे अब तक पूरी छूट मिल जाती थी पूरे गांव में घूमने की लेकिन सुनैना के घर पर रहने पर अब उसे भी ज्यादा छुट नहीं मिल पाएगी,,,,, फिर वह अपने भाई की तरफ देखते हुए बोली,,,)

भैया है ना कोई ना कोई काम मिल ही जाएगा,,,, ।

अरे हां तुम लोगों को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है जब तक मैं हूं तब तक बेफिकर रहो,,,, कोई ना कोई काम मिल ही जाएगा,,,,, और जब तक कोई काम नहीं मिल जाता है तब तक अपने खेतों में ही जंगली झाड़ियों की सफाई कर देते हैं क्यों मां ठीक करो ना मैं,,,।





हां बिल्कुल ठीक कह रहा है तो खेतों की सफाई भी हो जाएगी ताकि उसमें कुछ सब्जियां बोई जा सके,,,,।

(सुनैना अपने बेटे की बात से सहमत थे थोड़ी देर में खाना बनाकर तैयार हो चुका था और तीनों खाना खाकर अपने-अपने कमरे में जा चुके थे,,, पानी की टंकी में आज नहाते समय जो कुछ भी हुआ था उसको लेकर सुनैना के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी,,, जवानी की आग उसे तड़पा रही थी पर देखते ही देखते उसके बदन से सारे वस्त्र नीचे जमीन पर गिर गए और वह अपनी उंगली का सहारा लेकर अपनी जवानी की प्यास को बुझाने की कोशिश करने लगी लेकिन जो मजा जो आनंद जो एहसास उसे अपने बेटे के लंड के सुपाड़े का हल्का सा प्रवेश में महसूस हो रहा था वह मजा अब खुद की उंगली में बिल्कुल भी नहीं था लेकिन फिर भी डूबते को तिनके का सहारा जैसे तैसे करके वह अपनी जवानी के रस को निकाल कर सो गई।





दूसरे दिन हिसाब करने के लिए सूरज को मुखिया के घर जाना था सुबह तो उसे समय नहीं मिला दोपहर में वह मुखिया के घर पहुंच गया,,,,,,,, लेकिन मुखिया जी को देखकर उसका मन उदास हो गया क्योंकि उसे लग रहा था कि अगर मुखिया की बीवी हुई तो मजा ले लेगा,,,, मुखिया जी को देखते ही वह प्रणाम करते हुए बोला,,,।

नमस्ते मुखिया जी,,,,।

अरे आओ सूरज,,,,, बहुत जल्दी तुमने खेत का काम खत्म कर दिया मुझे तुमसे यही उम्मीद थी,,,।

जी मालिक,,,,, काम तो खत्म हो गया है सोच रहा था थोड़ा हिसाब,,,,, (सूरज का इतना कहना था कि वह खुद आगे से बोल पड़ा)

अरे हां हां क्यों नहीं बैठो तो सही,,,,।

(बगल में यह कुर्सी खाली पड़ी थी उस कुर्सी की तरफ इशारा करते हुए सूरज को बैठने को बोला तो सूरज इनकार करते हुए बोला)

रहने दीजिए मालिक मैं ऐसे ही ठीक हूं,,,।





अरे बैठ जाओ सूरज,,,, तुम तो घर के ही बेटे जैसे हो,,,,।

(मुखिया जी के इतना कहने पर सूरज भी धीरे से कुर्सी पर बैठ गया,,,, अब यह सब बात हो ही रही थी कि तभी घर में से मुखिया की बीवी निकल कर चली आ रही थी मुखिया की बीवी को देखकर सूरज के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और वह भी सूरज को देखकर खुश नजर आ रही थी,,, वह भी सूरज के पास पहुंच गई और बोली)

क्या हुआ सूरज यहां कैसे,,,,,? (पास में पड़ी दूसरी कुर्सी पर बैठते हुए वह बोली अपनी बीवी की बात सुनकर सूरज कुछ बोल पाता है इससे पहले ही मुखिया जी बोल पड़े)

अरे खेतों का काम खत्म हो गया ना थोड़ा बहुत हिसाब किताब कर दो पैसे दे दो,,,।

अरे हां लेकिन सूरज ने काम बहुत जल्दी खत्मकर दिया,,,।

पर यही तो मैं इससे कह रहा था,,,,।

वही तो मैं भी कह रहा हूं मालकिन की अब तो काम खत्म हो गया है कुछ और काम हो तो बताइएगा,,,।

(सूरज की बात सुनकर मुखिया की बीवी थोड़ा सोचने लगी और तुरंत बोली)





अरे हां अभी काम तो बाकी है खरबूजे का,,,,

हां सूरज मैं भी बताना भूल गया खरबूजे के बगीचे में बहुत सारे खरबूजे हो गए हैं उन्हें शहर बेचने के लिए भेजना है,,,,

हो जाएगा मलिक मैं भी तो यही चाहता था कि आप लोग कोई काम दो तो दो पैसे हमें भी मिले,,,।

यह भी कोई कहने वाली बात है सूरज,,,, (मुखिया की बीवी बोली,,,,,) तुम्हारे लिए तो काम ही काम है बल्कि हम लोगों को तो तुम्हारे जैसा ही नौजवान लड़का चाहिए था जो हमारा सब काम देख सके बिल्कुल तुम्हारे पिताजी की तरह,,,,।

Pani ki tanki me Suraj or uski ma





मालकिन यह तो मेरा सौभाग्य है की आप लोग मुझे काम देते रहते हैं और हमें बदले में पैसे मिलते रहते हैं,,,।

तुम चिंता मत करो तुम्हें काम हमेशा मिलता रहेगा बस इसी तरह से ईमानदारी और लगन से काम करते रहना और वैसे भी कबड्डी के दंगल में जो तुमने गांव की इज्जत रखे हो,,,, कमाल का काम किया है तुमने,,, मुझे तो बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि हम लोग इस बार गांव में कबड्डी का दंगल जीत जाएंगे,,,।

हां सूरज कमाल कर दिया था तुमने उसे दिन राजा साहब की नाक एक बार फिर कट गई मुझे भी लग रहा था कि इस बार गांव की इज्जत चली जाएगी लेकिन तुमने बचा लिया,,,।

जी मालिक यह तो आप लोगों का आशीर्वाद है कि मैं गांव के लिए काम आ रहा हूं।

(अभी बातचीत हो ही रही थी कि तभी कोई जरूरी काम से मुखिया जी से मिलने आ गया और मुखिया जी उठकर दूसरी तरफ बात करने के लिए चले गए मौका देखकर सूरज एकदम से मुखिया की बीवी से बोला,,,)

कबड्डी के दंगल के लिए तो खुश हो,,, लेकिन जीतने के बाद जो तुमने वादा किया था उसके लिए तो तुम कुछ बोल नहीं रही हो,,,,।

(सूरज की बात सुनकर मुखिया की बीवी को याद आ गया कि सूरज ने दंगल जीतने के लिए कौन सा वादा लिया था और जैसे ही उसे याद आया उसके चेहरे पर शर्म की लाली जाने लगी वह दूसरी तरफ नजर घुमा ली और बोली)





कैसा वादा मैं तो कोई वादा नहीं किया तुमसे,।

मुझे बेवकूफ मत बनाओ, तुमने वादा की हो कि अगर मैं दंगल जीत गया तो तुम मुझे गांड मरवाओगी,,,,।

पागल हो गए हो क्या ऐसा कोई वादा करता है,।

कोई तो नहीं लेकिन तुम तो की हो और सच कहूं तो दंगल जीतने का इरादा मेरा भी बिल्कुल भी नहीं था लेकिन तुम्हारी गांड मारने की लालच की वजह से मुझे दंगल जितना पड़ा मेरी आंखों के सामने बार-बार तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड और तुम्हारी गांड का भूरे रंग का छेद नजर आ रहा था,,,, इसलिए मैं पूरा कर लगाकर दंगल जीत लिया वरना हम लोग हार गए होते हमारे गांव की नाक कट गई होती वह तो भला मानो तुम्हारी खूबसूरत गांड का की गांव की इज्जत बच गई,,,,।

तू है बड़ा शैतान लेकिन मैं ऐसा कोई वादा नहीं की थी यह सब तेरे मन की बनाई बात है,,,।

कोई मन की बनाई बात नहीं है जिस दिन से दंगल जीता हूं उस दिन से रात दिन तुम्हारी गांड मारने का ही सपना आ रहा है,





(सूरज की बात सुनकर मुखिया की बीवी का हाल बुरा हो रहा था शर्म से उसका चेहरा लाल हो चुका था वैसे उसने आज तक जितनी भी छीनरपन की थी लेकिन कभी गांड नहीं मरवाई थी इस समय भले ही वह सूरज को बहाने बना रही थी लेकिन अंदर से उसका मन भी यह सुख भोगने का कर रहा था,,,,,, लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रही थी बस अपनी नजर दूसरी तरफ घूमा कर बैठी हुई थी मुखिया जी को दूर खड़ा देखकर सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,,)

क्यों मालकिन मारने दो ना एक बार अपनी गांड,,,,।

धत् ,,,, पागल हो गया क्या मुखिया जी सुन लिए तो गजब हो जाएगा।

अरे वह ना थोड़ी सुन रहे हैं,,,।

(सूरज एकदम से इतना कहकर खामोश हो गया क्योंकि मुखिया जी उसके पास ही आ रहे थे,,,, मुखिया जी कुछ बोल पाते इससे पहले ही मुखिया की बीवी बोली।)

अच्छा तो मैं सूरज को खरबूजे का खेत दिखा देता हूं और कैसे क्या करना है सब बता देती हुं,।

ठीक है लेकिन शाम को चली जाना अब इतनी दोपहर में कहां जा रही हो,,।

अरे शाम को मुझे काम है शाम को नहीं जा पाऊंगी जितनी जल्दी हो सके खरबूजे का काम खत्म हो तो अपने भी सर से बोझ हटे क्योंकि अगर जरा सा भी देर हो गई तो खरबूजे सड़ने लगेंगे,,,।





ठीक है जाओ लेकिन जल्दी आना मैं जा रहा हूं आराम करने, (इतना कहकर मुखिया जी अपने कमरे की तरफ चल दिए और सूरज मन ही मन प्रसन्न होने लगा, मुखिया जी के जाते ही मुखिया की बीवी सूरज की तरफ मुस्कुराते हुए देखने लगी और बोली)

चल तुझे खरबूजे का बगीचा दिखा दुं।

मुझे तो तुम्हारे खरबूजे देखने है।

चल वो भी देख लेना,,,,,( मुखिया की बीवी मुस्कुराते हुए बोली और कुर्सी से उठकर खड़ी हो गई और दोनों खरबूजे के खेत की तरफ चल दिए,,,,, मुखिया की बीवी के साथ-साथ सूरज भी खुश नजर आ रहा था क्योंकि आज वह मुखिया की बीवी की गांड मारने के इरादे से यहां आया था और ऐसा लग रहा था कि उसका सोचा आज सच हो जाएगा। आगे आगे मुखिया की बीवी चल रही थी और पीछे-पीछे सूरज चल रहा था अनेक बार मुखिया की बीवी की जवानी का भोग लगा लेने के बाद भी सूरज उसे प्यासी नजरों से देख रहा था ज्यादातर उसकी नजर उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर ही टिकी हुई थी क्योंकि मुखिया की बीवी अपनी गांड को मटकाते हुए चल रही थी। चलते हुए वह सूरज से बोली,,,)





तू कभी खरबूजे के खेत में नहीं आया ना,,,,।

नहीं हां अंगूर के बगीचे में तुम ले गई थी और वहां क्या हुआ था यह तो तुम अच्छी तरह से जानती हो,,,।

जानती तो मैं बहुत कुछ हूं याद दिलाने की जरूरत नहीं है,,,,।

वैसे मालकिन खरबूजा का आकार तुम्हारी चूचियों से कम ही होगा,,,,

क्यों,,,,,? हमारे खेत के खरबूजे तो मेरी चूचियों से भी बड़े-बड़े हैं,,,

वह तो देख कर ही पता चलेगा अब तक तो मैं जितना खर्चा देखा हूं सब के सब तुम्हारी चूचियों से कम ही मिले हैं,,,,।

तब तूने हमारे खेतों के खरबूजे नहीं देखा,,,,।

कोई बात नहीं लेकिन मैं अपने आप को किस्मत वाला समझता हूं,,, क्योंकि गांव वाले तो सिर्फ तुम्हारे खेत के खरबूजे को देखेंगे लेकिन मैं तो तुम्हारे खरबूजे का मजा लिया हूं और इसके लिए किस्मत तेज होना चाहिए,,,।





अच्छा तो तेरी किस्मत बहुत तेज है,,,,

तो क्या तुम्हें नहीं लगता जो तुम्हारे ऊपर चढ़ाई कर ले उसकी किस्मत तो तेज ही होगी,,,,,।

बातें बनाना तो कोई तुझसे सीखे,,,,,।

सच में मालकिन तुम्हारी गांड जब भी देखता हूं मेरा लंड खड़ा हो जाता है।

तब इसमें मैं क्या कर सकती हूं,,, (सूरज की बातें सुनकर एकदम मस्त होते हुए वह आगे आगे गांड मटकाते हुए चल रही थी,,,,,)

जो कुछ भी कर सकती हो सिर्फ तुम ही कर सकती हो,,,,। तुम्हारे सिवा कोई नहीं कर सकता,,,,।

(मुखिया की बीवी सूरज की बातों से मदहोश हो रही थी वह जानती थी कि खरबूजे के खेत में क्या होने वाला है,, इसलिए उसके मन में भी उत्सुकता बनी हुई थी थोड़ी ही देर में वह दोनों खरबूजे के बगीचे में पहुंच चुके थे,,,, यहां पर पहली बार सूरज आ रहा था इसलिए खेत के किनारे खड़े होकर वहां खरबूजे को देख रहा था ,,,, वाकई में मुखिया के खेत में बड़े-बड़े खरबूजे थे मुखिया की बीवी भी सूरज के पास में ही खड़ी थी वह मुस्कुराते हुए सूरज से बोली,,)





क्यों राजा अब बोल,,,,,।

बोलना क्या है मैं तो अभी भी यही कहूंगा कि खेत के खरबूजे से ज्यादा बड़ी तुम्हारी छातिया के खरबूजे हैं,,,, यकीन नहीं आता तो ब्लाउज के बटन खोल दो,,,, अभी दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा।

यह बात है,,,, (इतना कहकर हुआ खेत के किनारे खड़ी होकर चारों तरफ नजर घुमा कर देखने लगी दूर-दूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा था,,, और वैसे भी चारों तरफ घनी झाड़ियां फैली हुई थी सूरज जिस तरह से उससे बात कर रहा था उसकी भी बुर पानी छोड़ रही थी उसका भी मन बहुत कर रहा था,,, खेतों के बीच में झोपड़ी बनी हुई थी उसे पर नजर पढ़ते ही मुखिया की बीवी के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और वह मुस्कुराते हुए बोली,,,)

चल दिखाती हूं,,,, (फिर क्या था इतना कहने के साथ ही वह खुद ही सूरज का हाथ पकड़ ली और उसे खेत के बीच में बने झोपड़ी की तरफ ले जाने लगी सूरज का लंड तो अभी से खड़ा होने लगा था देखते ही देखते दोनों झोपड़ी के अंदर पहुंच चुके थे,,,। झोपड़ी के अंदर पहुंचते ही मुखिया की बीवी सूरज के सामने खड़ी हो गई औरमुस्कुराते हुए बोली,,,)

ले अब इतनी नाम से देखे और बता खेत के खरबूजे ज्यादा बड़े हैं कि मेरी छाती के,,,।





ओहहहहह मालकिन तुम शर्त हार जाओगी,,,,, ( और इतना कहने के साथ ही सूरज अपने हाथों से मुखिया की बीवी के ब्लाउज का बटन खोलने लगा मुखिया के बीवी के बदन में सुरूर छा रहा था उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही है और सांसों की गति के साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां भी ऊपर नीचे हो रही थी सूरज जल्दबाजी दिख रहा था और देखते ही देखते वह मुखिया की बीवी के ब्लाउज के सारे बटन खोल दिया और अगले पर उसकी दोनों चूचियां एकदम से कबूतर की तरफ पंख फड़फड़ाने लगी सूरज से रहा नहीं गया और वह अपने दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियों को थाम लिया और उसे जोर-जोर से दबाने लगा जितना जोर से वह दोनों चुचियों का दबाता था उतना ही ज्यादा मजा मुखिया की बीवी को आता था,,,,, मुखिया की बीवी के साथ-साथ सूरज भी काफी उत्तेजित हो गया था और वह तुरंत अपने होठों को मुखिया की बीवी के लाल-लाल होठों पर रखकर उसका रसपान करने लगा और साथ ही लगातार उसकी चूचियों से खेलने लगा सूरज एक तरफ से दौहरा हमला कर रहा था। मुखिया की बीवी पागल होने लगी वह भी चुंबन में सूरज का पूरा साथ दे रही थी दोनों बिल्कुल भी पीछे हटने को तैयार नहीं थे मुखिया की बीवी एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर के पहचाने के ऊपर से ही सूरज के लंड को पकड़ ली थी और उसे जोर-जोर से दबा रही थी,,,, एक दूसरे की हरकतों से दोनों मस्त हो रहे थे मतवाले हो रहे थे दोनों के उत्तेजना बिल्कुल भी काबू में नहीं थी सूरज कभी चूचियों को दबा रहा था तो कभी उसकी गांड को पकड़ कर जोर-जोर से मसल रहा था तो कभी उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर अपने बदन से सटा ले रहा था,,, मुखिया की बीवी की मदहोश जवान देखकर उसे समझ में नहीं आ रहा था कि किस तरह से अपनी उत्तेजना को शांत करें।





खरबूजे के खेत में बनी टूटी हुई झोपड़ी में किसी के भी आने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि दोपहर का समय था और वैसे भी खरबूजे का खेत कुछ ज्यादा ही दुर था,,, सूरज साड़ी को कमर तक उठाकर उसकी नंगी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर जोर-जोर से दबा रहा था वह इतनी जोर-जोर से दबा रहा था कि मुखिया की बीवी के मुंह से हल्की सी कराहने की आवाज निकल जा रही थी और जब जब इस तरह की आवाज निकलती तब तब सूरज और भी ज्यादा उत्तेजित हो जा रहा था,,,,, सूरज जब जानता था कि अब इससे काम बनने वाला नहींहै इसलिए वह साड़ी को भी खोलना शुरू कर दिया और मुखिया की बीवी भी यही चाहती थी इसलिए वह बिल्कुल भी इनकार नहीं कर रही थी वह साड़ी का किनारा पड़कर उसे खींचने लगा और मुखिया की बीवी साड़ी निकालने के साथ-साथ गोल-गोल घूमने लगी यह नजारा बेहद अद्भुत और कामवासना से भरा हुआ था,,, साड़ी निकलने के साथ ही गोल-गोल घूमते हुए उसकी नंगी चूचियां बेहद आकर्षक लग रही थी जिसे देखकर बार-बार सूरज के मुंह में पानी आ रहा था,,,, और अगले पल जैसे ही साड़ी निकालने वाली थी सूरज जोर से साड़ी को अपनी तरफ खींचा जिसकी वजह से मुखिया की बीवी एकदम से उसके सीने से आ लगी,,, और सूरज फिर से उसे अपनी बाहों में कस के दबा लिया उसकी नंगी चूचियां और उसकी तनी हुई छुहारा उसकी छाती में धंसने लगी चूचियों की चुभन को अपनी छाती में महसूस करके सूरज मुस्कुराता हुआ बोला,,,)





देख लेना खेतों से ज्यादा बड़ी चूचीया तुम्हारी छाती की है,, ( मुखिया की बीवी कुछ जवाब देती इससे पहले ही सूरज उसकी दोनों चूचियों को मुंह में भरकर पीना शुरू कर दिया भारी-बड़ी से दोनों चुचियों का मजा लेते हुए वहां पेटिकोट के ऊपर से ही मुखिया की बीवी की गांड को जोर-जोर से दबा रहा था मसल रहा था,,,, मुखिया की बीवी पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी उसकी बुर बार-बार पानी छोड़ रही थी जिसकी वजह से पेटिकोट के आगे वाला भाग गीला हो चुका था जिस पर सूरज की भी नजर बार-बार चली जा रही थी,,,, सूरज से रहा नहीं गया और वह पेटिकोट की डोरी को एक हाथ से पकड़ कर जोर से उसे खींच दिया पेटिकोट की गिठान खुल गई और पेटीकोट अगले ही पल उसके कदमों में जा गिरा और वह पूरी तरह से नंगी हो गई खुले हुए ब्लाउज को मुखिया की बीवी खुद अपने हाथों से ही निकाल कर उसे अलग कर दी थी। मुखिया के बीवी को संपूर्ण रूप से निर्वस्त्रावस्था में देखकर सूरज की आंखों में वासना का तूफान उठ रहा था वह बार-बार उसे अपनी बाहों में कस ले रहा था और उसे छोड़ दे रहा था ऐसा कर करके वह मुखिया की बीवी को पूरी तरह से पानी पानी कर दिया था वह जल्द से जल्द चाहती थी कि सूरज अपना लंड उसकी बुर में डाल दे लेकिन सूरज का इरादा कुछ और था,,,, पास में ही घासो का ढेर पड़ा हुआ था जो की सूखा हुआ था सूरज ने मुखिया की बीवी को धक्का देकर उसे घास पर उसे गिरा दिया और उसकी टांगों के बीच अपने लिए जगह बनाकर दोनों हाथों को उसके नितंबों के नीचे ले गया और उसे हल्के से उठाकर उसके गुलाबी बुर को अपने होठों से सटा लिया और उसे चाटना शुरू कर दिया,,,, सूरज की हरकत से मुखिया की बीवी एकदम से गनगना गई उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी और वह अपना हाथ सूरज के सर पर रखकर अपनी कमर को नीचे से ऊपर की तरफ उठने लगी यह देखकर सूरज उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर पागलों की तरह लपालप जीभ लगाकर उसके मदन रस को चाटना शुरू कर दिया,,,,।





हालात दोनों के काबू में बिल्कुल भी नहीं था दोपहर का समय था गर्मी का महीना था इसलिए सब लोग अपने-अपने घरों में आराम कर रहे थे लेकिन मुखिया की बीवी और सूरज आराम बिल्कुल भी नहीं करना चाहते थे उन्हें तो काम में ही आराम मिल जाता था। देखते देखते सूरज अपनी दो उंगलियां मुखिया की बीवी की बुर में डालकर उसे अंदर बाहर करने लगा जिससे मुखिया की बीवी को उत्तेजना और ज्यादा पढ़ने लगी ऐसा करते हुए लगातार उसकी निगाह उसकी गुलाबी छेद के नीचे भूरे रंग के छेद पर बना हुआ था क्योंकि आज उसकी लालच इस केंद्र बिंदु पर टिका हुआ था वह इसके अंदर बिंदु में पूरी तरह से आज घुस जाना चाहता था इसका आनंद ले लेना चाहता था लेकिन वह जानता था की मुखिया की बीवी के गांड का छेद उसके लंड के सुपाड़े के मुकाबले छोटा था जिसकी वजह से उसे इस पर बहुत मेहनत करना था और आराम से काम लेना था,,, इतना तो उसे मालूम था की मुखिया की बीवी पूरी तरह से छिनार थी मजा लेने के लिए वह कुछ भी करवाने को तैयार हो जाएगी लेकिन फिर भी सूरज समझदारी से काम लेना चाहताथा,,,, धीरे-धीरे माहौल पूरी तरह से गर्म हो चुका था मुखिया की बीवी के चेहरे का बदलते रंग बता रहा था कि अब उसे क्या चाहिए इसीलिए सूरज अपनी कुर्ते को निकाल कर एक तरफ रख दिया था और खड़ा होकर अपने पजामे को भी निकाल रहा था पजामे के निकलने के बाद उसका लटकता हुआ लंड देखकर मुखिया की बीवी की बुर पानी छोड़ने लगी,,,,, मुखिया की बीवी की तरह सूरज भी पूरी तरह से नंगा हो चुका था टूटी हुई झोपड़ी के अंदर सूखी हुई बिछी हुई घास में दोनों को काफी आराम महसूस हो रहा था सूरज देखते ही देखते अपने लंड के सुपाड़े को उसको गुलाबी छेद में डालकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया उसकी चुदाई करना शुरू कर दिया,,,,।





सूरज की हरकतों से वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी इसलिए हर धक्के के साथ वह पूरी तरह से मस्त हो रही थी उसकी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह उसकी छातियों पर लौट रही थी,,,, जिसे देख कर सूरज अपना हाथ आगे बढ़कर उसके दोनों चूचियों को पकड़ कर जोर-जोर से दबाते हुए धक्के पर धक्का लगा रहा था कुछ देर इसी तरह से चुदाई करने के बाद सूरज अपने लंड को बाहर निकाल लिया और उसे घोड़ी बन जाने के लिए कहा,,,,,, क्योंकि असली खेल यहीं से शुरू होना था सूरज की बात मानते हुए मुखिया की बीवी को घोड़ी बनने में बिल्कुल भी समय नहीं लगा उसकी बड़ी-बड़ी गांड हवा में लहरा रही थी सूरज उसकी दोनों गांड की फांक को पकड़कर उसे पर जोर-जोर से चपत लग रहा था। देखते ही देखते मुखिया की बीवी की गोरी गोरी गांड टमाटर की तरह लाल हो गई और ऐसे हालात में उसकी लाल-लाल गांड देखकर सूरज की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ रही थी,,,,, उसे और ज्यादा मदहोश करने के उद्देश्य से वह एकदम से नीचे छूट गया और अपने होठों को उसकी गांड के छेद पर रखकर उसे चाटना शुरू कर दिया मुखिया की बीवी को सूरज से यह बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी लेकिन उसकी हरकत से‌ वह चारों खाने चित हो गई थी,,,, उत्तेजना के मारे उसकी गांड का छोटा सा छेद फूलने और सिकुड़ने लगा उसमें से उठ रही मादक खुशबू सूरज की हालत खराब कर रही थी सूरज का लंड पूरी तरह से टनटना कर खड़ा हो गया था जिसे सूरज बार-बार पकड़ कर हिलाता था और उसे शांत रहने के लिए शायद मना रहा था क्योंकि वह कुछ देर तक मुखिया की बीवी की गांड के छेद को चाट कर उसे मदहोश करना चाहता था लेकिन लंड की हालत ईतनी खराब थी की वह जल्द से जल्द उसकी बुर में या किसी छेद में घुसने के लिए तड़प रहा था,,,,,। मुखिया की बीवी मदहोशी में अपनी बड़ी-बड़ी गांड को गोल-गोल घूमा रही थी सूरज के चेहरे पर रगड़ रही थी,,, बुर से निकलने वाला मदन रस उसके गांड के छेद को भिगो रहा था,,,,।





कैसा लग रहा है मालकिन,,,,

पूछ मत बहुत मजा आ रहा है पहली बार कोई मेरी गांड चाट रहा है,,,,

पहली बार कोई तुम्हारी गांड भी मारने जा रहा है,,,,।

नहीं नहीं सूरज ऐसा बिल्कुल भी मत करना तू तो देख ही रहा है कि मेरी गांड का छेद तेरे लंड के सुपाड़े से कुछ ज्यादा ही छोटा है तु अगर डालने की कोशिश करेगा तो मेरी गांड फट जाएगी।(अपनी गांड को आगे की तरफ खींचते हुए बोली लेकिन सूरज उसकी कमर को पकड़ कर फिर से उसकी गांड को अपनी तरफ खींचते हुए बोला)

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मेरी जान ऐसा कुछ भी नहीं होगा अरे बहुत सी औरतें हैं जो गांड मरवाती है देखना तुम्हें इसमें इतना मजा आएगा कि पूछो मत,,,,

नहीं नहीं मेरे राजा ऐसा बिल्कुल भी मत करना तेरे लिए तो टांगे खोल दी हो बुर में जितना डालना है डाल ले,,,,।





वह तो तुम्हारे कहने की जरूरत नहीं है लेकिन आज मुझे तुम्हारी गांड चाहिए,,,, (और इतना कहने के साथ ही अपनी उंगली को अपने मुंह में डालकर गिला करके हुआ है धीरे से उसकी गांड के छेद में अपनी उंगली को डालना शुरू कर दिया पहले तो मुखिया की बीवी अपनी गांड को इधर-उधर करने की कोशिश करके बचाना चाहती थी लेकिन अगले ही पल सूरज ने उसे एकदम से दबोच लिया और अपनी एक उंगली को उसकी गांड के छेद में डाल दिया जैसे-जैसे उंगली अंदर की तरफ गई वैसे-वैसे मुखिया की बीवी को सुरूर छाने लगा और सूरज अपनी उंगली को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया वह मुखिया की बीवी की गांड में अपने लंड के लिए जगह बनाना चाहता था जिसमें वह कामयाब होता हुआ नजर आ रहा था क्योंकि थोड़ी देर बाद ही वह अपने दोस्त ने उंगली भी उसमें डाल दिया था जो कि आराम से चली गई थी और उसे अंदर बाहर करके गोल-गोल घूमकर अपने लंड के लिए बाकायदा उसने जगह बना रहा था। अपनी हरकत को जारी रखते हुए वह मुखिया की बीवी से बोला।





अब कैसा लग रहा है मेरी जान बताओ,,,।

उंगली से तो अच्छा ही लग रहा है लेकिन मैं जानती हूं कि तेरा लंड जाएगा तो मेरी हालत खराब कर देगा।

कुछ भी नहीं होगा तुम इत्मीनान रखो 1 दिन का थोड़ी ना है तुम ही तो हो मेरी रानी जिसकी चुदाई करके मैं अपनी गर्मी शांत करता हूं तुम्हारे अंग को नुकसान हो जाएगा तो भला मेरा फायदा कैसे होगा मेरा भी तो नुकसान ही रहेगा इसलिए तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो,,,,,, (इतना कहने के साथ ही वह अपनी उंगलियों को बाहर निकाल लिया और फिर से अपने होठों को सटकर चाटना शुरू कर दिया जब-जब सूरज इस तरह की हरकत करता था उसके बदन में सनसनाहट सी दौड़ने लगती थी वह अपने काबू में नहीं रहती थी और अपनी गांड को पीछे की तरफ ठेलना शुरू कर देती थी। कुछ देर तक सूरज इसी तरह से उसे पूरी तरह से मत करता रहा मदहोश करते रहा और उसे व्याकुल बनाता रहा और उसके बाद वह अपने घुटनों के बल बैठकर अपने लंड को अपने हाथ से पकड़ कर उसके सुपर पर ढेर सारा थूक लगाकर उसे गीला कर दिया और थूक से उसकी गांड का छेद भी गीला कर दिया ताकि आराम से सुपाड़ा अंदर प्रवेश कर सके। वैसे मुखिया की बीवी को डर तो लग रहा था लेकिन अंदर से उसकी इच्छा हो रही थी आज गांड मरवाने की क्योंकि वह जानती थी गांड मारने के लिए मर्दाना लंड की जरूरत होती है और सूरज से बेहतर मर्दाना लंदन भला किसके पास है पूरे गांव में,, इसलिए वह भी इस अवसर का पूरा लाभ ले लेना चाहती थी इस बात का एहसास तो उसे था ही कि जो वह करवाने जा रही है उससे उसे दर्द तो जरूर होगा लेकिन जिस तरह से सूरज बता रहा है मजा भी आता होगा इसलिए वह अपने आप को तैयार कर रही थी।





सूरज अपने लंड के सुपाड़े को मुखिया की बीवी की गांड के छोटे से छेद पर रगड़ना शुरू कर दिया,,,, जिसकी वजह से अपनी गांड के छेद पर लंड कैसे पड़े का स्पर्श महसूस करते ही वह मदहोश होने लगी उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी और बदन में अजीब सी उत्तेजना का संचार होने लगा जिसकी अनुभूति उसे मदहोश कर रही थी पागल बना रही थी,,,,, अपने आप को योग्य स्थिति में लाकर सूरज अपने लैंड के सपने का दबाव मुखिया की बीवी की गांड के छोटे से छेद पर बढ़ाना शुरू कर दिया और बार-बार उसे थूक से गिला करता रहा जब तक की सुपाड़ा अंदर की तरफ प्रवेश करने नहीं लग गया और जैसे-जैसे सुपाड़ा अंदर की तरफ सरकने लगा वैसे-वैसे सूरज का हौसला बुलंद होने लगा,,, लेकिन मुखिया की बीवी की हिम्मत जवाब देने लगी क्योंकि उसे दर्द महसूस हो रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अब सूरज को कैसे इंकार करें क्योंकि सूरज उसकी बात मानने वाला नहीं था इस बात को अच्छी तरह से जानती थी। सूरज की मेहनत रंग ला रही थी हालांकि इस समय दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे फिर भी दोनों पीछे हटने को तैयार नहीं थे,,,, वैसे तो मुखिया की बीवी का हौसला पस्त हो चुका था लेकिन वह जानती थी कि सूरज मानने वाला नहीं है इसलिए वह अंदर से अपने आप को मनाने की कोशिश कर रही थी दर्द से उसका हाल बुरा हो रहा था,,,, मुखिया की बीवी बार-बार उसे ऐसा न करने के लिए कह रही थी सूरज इस बात का अच्छी तरह से जानता था कि अगर आज नहीं तो कभी नहीं फिर मुखिया की बीवी गांड मरवाने के लिए कभी तैयार नहीं होगी। इसलिए सूरज भी पीछे नहीं हटना चाहता था वह लगातार कोशिश कर कोशिश कर रहा था और उसकी कोशिश करेंगे ला रही थी क्योंकि देखते ही देखते उसके लंड का आधा सुहाना उसकी गांड के छेद में प्रवेश कर चुका था।





जैसे ही आधा सुपाड़ा खाने में प्रवेश किया सूरज एकदम से रुक गया और गहरी गहरी सांस लेने लगा,, दूसरी तरफ मुखिया की बीवी की हालत खराब थी। वह लगातार मिन्नते कर रही थी।

सूरज हरामजादे निकाल ले बाहर ईसे,,, आहहहहह मैं इसे अंदर नहीं ले पाऊंगी,,,

ले लोगी मेरी रानी बस थोड़ा सा रह गया है,,,

नहीं मैं इसे नहीं ले पाऊंगी मुझे बहुत दर्द हो रहा है अभी तो थोड़ा सा गया है पूरा जाएगा तब तो मेरी हालत खराब हो जाएगी,,,,,।

कुछ नहीं होगा मेरी जान देखना कितना मजा आएगा,,,,,।

नहीं नहीं निकाल ले,,,,।

(उसका इतना कहना था कि सूरज थोड़ा सा हिम्मत दिखाकर और दम लगाकर अपनी कमर को आगे की तरफ ठेला,,, थुक की चिकनाहट पाकर लंड का सुपाड़ा गांड के छोटे से छेद में प्रवेश कर गया,,,,, मुखिया की बीवी उसे रोकने की पूरी कोशिश कर रही थी लेकिन सूरज करने को तैयार नहीं था क्योंकि ऐसा अवसर उसे मिलाने वाला नहीं था,,, आधा सफर सूरज ने तय कर लिया था बस आधा सफर और बाकी था मंजिल तक पहुंचाने के लिए अगर इधर से वह ऑफिस लौट जाता तो इस समय उससे बड़ा बुद्धू कोई नहीं था पीछे का नजारा भी क्या खूब लग रहा था मुखिया की बीवी का पिछवाड़ा गोलाकार आकार लिए हुए बेहद खूबसूरत दिखाई दे रहा था और उसकी गांड के बीचों बीच सूरज का लंड धंसा हुआ था,,, सूरज पसीने से तरबतर हो चुका था वह मुखिया की बीवी की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर अपने लंड को और अंदर की तरफ सरकाने लगा धीरे-धीरे ही सही मुखिया की बीवी की गांड के अंदर सूरज का लंड हरकत कर रहा था और धीरे-धीरे अंदर की तरफ सरक रहा था देखते ही देखते सूरज का आधा लंड मुखिया की बीवी की गांड में घुस गया था। मुखिया की बीवी को हौसला देते हुए सूरज बोला,,,)





बस बस मेरी रानी हो गया अभी देखना तुम्हें कितना मजा आएगा पूछो मत,,,

नहीं मुझे नहीं लेना है मजा मेरी हालत खराब हो रही है अंदर बहुत गर्म लग रहा है मुझे रहा नहीं जा रहा है बर्दाश्त नहीं हो रहा है निकाल ले बाहर अगर तूने ऐसा नहीं किया तो आज के बाद तेरा मेरा रिश्ता टूट जाएगा,,,,।

बिल्कुल भी नहीं टूटेगा मेरी रानी आज के बाद तो यह रिश्ता और ज्यादा मजबूत हो जाएगा ,,,(और इतना कहने के साथ ही सूरज एकदम से कचकचा कर धक्का मारा और उसका पूरा लंड सब कुछ चीरता हुआ उसकी गांड की गहराई में घुस गया,,, जोरदार चीख मुखिया की बीवी के मुंह से निकली,,,, वह एकदम से पस्त हो गई उसकी हालत खराब हो गई दर्द के मारे उसके बदन में कंपन होने लगा,,,,, वह अब सूरज को गाली देने लगी,,,,।

मादरचोद भोसड़ी वाले,,, यह तेरी मां की गांड नहीं है जिसमें तूने पूरा डाल दिया है। निकाल अब जल्दी मैं इसे एक पल भी बर्दाश्त नहीं कर सकती।

अब क्या है बस थोड़ी देर और पूरा घुस गया है,,,, (सूरज अच्छी तरह से जानता था कि बेलगाम घोड़ी को कैसे काबू में करना है इसलिए वह अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर उसकी चुची को पकड़कर उसे हल्के हल्के से दबाना शुरू कर दिया और झुक कर उसकी नंगी पीठ पर चुंबनों की बौछार करने लगा,,, मुखिया की बीवी को बहुत दर्द हो रहा था उसे इस बात का एहसास तो था की सूरज का लंड इतना मोटा तगड़ा है उसकी गांड में जाएगा तो दर्द तो करेगा ही लेकिन इतना ज्यादा दर्द करेगा इस बात का अंदाजा उसे बिल्कुल भी नहीं था इसलिए तो वह इस समय दर्द से कराह रही थी और गाली पर गाली दिए जा रही थी,,,, और वह अपने मन में सोच भी रही थी कि अगर एक बार सूरज अपने लंड को बाहर निकाल ले तो दोबारा उसे डालने नहीं दूंगी,,,, लेकिन सूरज ऐसा बिल्कुल भी करना नहीं चाहता था क्योंकि वह भी जानता था कि अगर एक बार उसने मुखिया की बीवी की गांड में से लंड बाहर निकाल लिया तो वह उसे डालने नहीं देगी,,,, इसलिए वह मौके की नजाकत को समझते हुए अपनी हरकतों से मुखिया की बीवी के तन बदन में एक बार फिर से उत्तेजना के संचार को बढ़ाना चाहता था इसलिए अपनी हरकतों से उसे मत करने लगा उसकी दोनों खरबूजे को दोनों हाथों से पकड़ कर हल्के-हल्के दबाने शुरू कर दिया था और साथ ही पीठ पर चुंबनों की बौछार कर दिया था,,, धीरे-धीरे उसकी यह मेहनत और करतब रंग लाने लगी,,, उसका दर्द कम होने लगा हालांकि अभी तक सूरज ने उसकी गांड मारना शुरू नहीं किया था बस अपने लंड को उसकी गांड में घुसाया भर था,,,, और इस स्थिति में एकदम स्थिर हो गया था यह सूरज की मर्दाना ताकत का नमूना ही था कि अब तक उसके लंड ने पानी नहीं फेंका था जबकि गांड का गोल छल्ला उसके लंड पर कसाव बराबर बनाया हुआ था अगर उसकी जगह कोई और होता तो इतने कसावपन को बर्दाश्त नहीं कर पाता और पानी फेंक देता। लेकिन सूरज ताकि बना हुआ था पीछे हटने का नाम नहीं ले रहा था।

धीरे-धीरे माहौल पूरी तरह से फिर से अपने रंग में आ गया मुखिया की बीवी का दर्द कम हो गया था लेकिन उसके बाद में बिल्कुल भी हरकत नहीं हो रही थी वह इस तरह से घोड़ी बनी गहरी गहरी सांस ले रही थी फिर सूरज मौका देखकर धीरे से अपनी कमर को पीछे की तरफ लेने लगा जिसकी वजह से गांड की गहराई में घुसा लंड रगड़ खाता हुआ बाहर की तरफ आने लगा,,, और जब सुपाड़ा भर अंदर रह गया, तब फिर से अपनी कमर को आगे की तरफ ठेलने लगा,,,, और सूरज का मोटा तगड़ा लंड फिर से रगड़ खाता हुआ अंदर की तरफ जाने लगा दर्द तो शांत हो चुका था लेकिन रगड़ बर्दाश्त नहीं हो रही थी उसका बदन का समाचार रहा था क्योंकि पूरी तरह से गांड के तार खुले नहीं थे,,,, सूरज काफी समझदार और ऐसे हालात से निपटना जानता था वह जानता था कि एक औरत को कैसे खुश किया जाता है कब क्या किया जाता है इसलिए वह बड़े आराम से मुखिया की बीवी की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर हौले हौले से अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया देखते ही देखते बड़े आराम से सूरज का लंड मुखिया की बीवी की गांड के अंदर बाहर होना शुरू हो गया था,,,, मुखिया की बीवी को आनंद की अनुभूति होने लगी थी। अब सही मायने में सूरज मुखिया की बीवी की गांड मार रहा था और वाकई में गांड मारने में जो मजा उसे प्राप्त हो रहा था वह कभी सोचा नहीं था कि इस क्रिया को करने में इतना मजा आता होगा और यही मजा मुखिया की बीवी को भी बराबर मिल रहा था वह भी मस्त होकर अब गरमा गरम सिसकारी की आवाज छोड़ रही थी,,,,।

अब कैसा लग रहा है मालकिन बोलो,,,, (कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी कमर को जोर-जोर से हीलाता हुआ सूरज बोला,,,)

हरामजादे उसे नहीं पता है ना की गांड मरवाने में कितना दर्द होता है अगर मेरे पास भी लंड होता तो इस समय तेरी गांड में डालकर बता देती की कैसा लग रहा है,,, मादरचोद,,,,,।

अभी कैसा लग रहा है मेरी रंडी,,,,, शुरू शुरू में तो दर्द होगा ही लेकिन उसके बाद जो मजा मिलेगा पूछो मत,,,,,,।

(सूरज की बात सुनकर मुखिया की बेटी बोली कुछ नहीं लेकिन अब यह बात सही थी कि उसे भी मजा आ रहा था लेकिन कुछ देर पहले जिस तरह से वह चिल्ला रही थी इसलिए इस समय उसे बताने में शर्म महसूस हो रही थी कि उसे भी मजा आ रहा है इसलिए को कुछ बोली नहीं खामोश घोड़ी बनी रही है और गांड मराई का मजा लूटती रही । खरबूजे के खेत में मुखिया की बीवी गांव के जवान लड़के से गांड मरवाएगी इस बारे में कभी सोची नहीं थी,,,, लेकिन आज इस खड़ी दुपहरी में सूरज उसे पूरी तरह से मत कर दे रहा था और मुखिया की बीवी भी अपने वादे के मुताबिक इस से गांड मरवा रही थी कबड्डी के दंगल की जीत को खुशी में,,,,

सूरज अब जोर जोर से धक्के लगा रहा था उसका लंड उसकी गांड की नसों को पूरी तरह से ढीला कर दिया था,,,,, बड़े आराम से सूरज का मोटा तगड़ा लंड उसकी गांड की गहराई नाप रहा था इससे पहले उसने कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि सूरज का मोटा सा बड़ा लंड इतने आराम से उसकी गांड को छेद के अंदर बाहर होगा,,,, कुछ देर तक ईसी तरह से घोड़ी बनाकर उसकी गांड मारने के बाद सूरज आसान बदलना चाहता था,,,, इसलिए धीरे से अपने लंड को उसकी गांड के छेड़ने से बाहर निकाल लिया यह देखकर मुखिया की बीवी पीछे की तरफ नजर घूमाकर देखी और बोली,,)

अब क्या हो गया मेरे सांड,,,,।

हुआ कुछ नहीं है मेरी रानी अब जरा आसन बदलने दो तुम भी घोड़ी बने बने थक गई होगी,,,।

ओहहह हो बड़ी दया आ रही है मुझ पर,,,

ऐसी बात नहीं है मेरी जान तुम्हें तो आराम मिलना चाहिए ना कि मेरी कमर दुखने लगी तो तुम्हारी कोई और भी ज्यादा हालत खराब हो गई होगी,,,।

हरामजादे तूने तो मेरी हालत एकदम से खराब कर दिया है।

लेकिन मजा भी तो दिया है मेरी जान,,,,, (इतना कहने के साथ ही सूरज बिछी हुई घास पर पीठ के बाल लड़कियां और अपने लंड को पकड़ कर हिलाते हुए बोला,,,,) अब आ जाओ मेरे ऊपर,,,,,

क्यों अब गांड से मन भर गया क्या,,,?

तुम्हारे तो किसी भी अंग से मेरा मन भर नहीं सकता जब कहो तब देख कर ही तैयार हो जाता हूं तुम ऊपर आओ तो सही,,,,,।

(मुखिया की बीवी को लग रहा था कि अब अपने ऊपर बुलाकर वह उसकी बुर में लंड डालने का लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था जैसे ही वह सूरज के कमर केइर्द-गिर घुटनो के बल बेठी सूरज तुरंत उसे अपनी बाहों में भरकर अपनी छाती से सटा लिया ताकि पीछे से उसकी गांड ऊपर की तरफ उठ जाए,,,, और ऐसा ही हुआ वह दूसरे हाथ से अपने लंड को पकड़ कर उसकी गांड के छेद पर फिर से सटाने लगा मुखिया की बीवी समझ गई और अपने मन में ही बोली की हरामजादे का मन अभी भरा नहीं है,,,, और वह भी सूरज का साथ देते हुए अपनी भारी भरकम गांड को उसके लंड पर व्यवस्थित करने लगी देखते-देखते एक बार फिर से सूरज का मोटा तगड़ा लंड उसकी गांड की गहराई में घुस गया और फिर नीचे से सूरज अपनी कमर को जोर-जोर से ऊपर की तरफ उठाना शुरू कर दिया इस स्थिति में मुखिया की बीवी को भी बहुत मजा आ रहा था और वह भी ऊपर से अपनी गांड को पटक रही थी,,,,, सूरज की सांसों पर नीचे हो रही थी गांड की नसों का कसाव उसके लंड पर इस कदर अपना दबाव बनाया हुआ था कि उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी बुर में डाल डाल कर बर के अंदर उसके लंड का सांचा बन चुका था जिसकी वजह से इस तरह का कसाव उसमें महसूस नहीं होता था। लेकिन मुखिया की बीवी की गांड में कसाव अद्भुत था जिससे सूरज का मजा दुगना हो जा रहा था।

सूरज नीचे से जोर लगा रहा था और मुखिया की बीवी ऊपर से दोनों अपनी अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे थे ,,,, थोड़ी देर बाद दोनों की सांसों पर नीचे होने लगी वैसे तो गांड की गहराई में मदन रस का बहाव बिल्कुल भी नहीं होता,, लेकिन गांड मरवाने की उतेजना उसे अपनी बुर में महसूस हो रही और वह दोनों एक साथ झड़ने लगे,,,,, सूरज ने एक नया सुख का अनुभव किया था और मुखिया की बीवी को एक अद्भुत सुख की अनुभूति करवाया था दोनों इस सुख से पूरी तरह से अनजान थे लेकिन आज दोनों को यह अनुभव भी प्राप्त हो चुका था। थोड़ी देर बाद दोनों फिर से घर पर वापस लौट आए थे और मुखिया की बीवी फसल की कटाई का हिसाब तो उसे दे दी लेकिन खुश होकर ऊपर से भी उसे पैसे दे दी थी देखते ही देखते शाम ढलने वाली थी और सूरज सोच रहा था कि आज जो अत्यधिक पैसे मिले हैं उनसे घर के लिए जलेबी और समोसे खरीद लेता है और यही सोचकर बात गांव के नुक्कड़ पर पहुंच गया,,,, लेकिन तभी उसे ख्याल आया कि दूसरे गांव के नुक्कड़ पर चला जाए और देखा जाए कि वहां के हालात क्या है क्योंकि वह जानता था कि वहां पर उसकी मुलाकात उसके पिताजी से हो गई तो पता चल जाएगा कि अभी भी उसके पिताजी कमल के पास जाते हैं या नहीं और यही सोचकर वह दूसरे गांव के नौकर पर चला गया और वहां पर जलेबी और समोसे खरीदने लगा उससे 10 कदम की दूरी पर ही शराब का ठेका था,,,,, समस्या और जलेबी लेने के बाद सूरज वहां पर पहुंचा तो जल्दी उसे उसके पिताजी और कल्लु शराब पीते हुए दिखाई दे दिए,,,, अपने पिताजी की ईस हालत को देखकर सूरज को बिल्कुल भी ताज्जुब नहीं हुआ था बल्कि वह तो मन ही मन खुश हो रहा था कि उसके पिताजी की हालत के बदौलत ही उसे उसकी मां की जवानी चखने का मौका प्राप्त होगा,,,, तभी कल्लु की बात सुनकर सूरज के कान खड़े हो गए क्योंकि कल कह रहा था कि आज पुराने ठिकाने पर कमला आने वाली है रात भर मजा करेंगे और यह बात सुनकर उसके पिताजी की आंखों की चमक एकदम से बढ़ गई थी।

सूरज आज अपनी मां को अपने पिताजी की रंगरेलियां उसकी मां को अपनी आंखों से दिखा देना चाहता था ताकि उसके मन में कोई शंका न रह जाए और उसके लिए रास्ता एकदम से साफ हो जाए इसलिए वह एकदम से खुश होता हुआ अपने घर पहुंच गया और अपनी मां को सारी बात बता दिया उसकी मां तो यह सुनकर हैरान हो गई वह जल्दी से जल्दी उसे जगह पर पहुंच जाना चाहती थी जहां पर उसकी जिंदगी की तबाही की शुरुआत हुई थी वह देखना चाहती थी आखिरकार उसे औरतों में ऐसा क्या है जो उसमें नहीं है,,,,, रानी को यह कहकर की मुखिया जी के घर कुछ काम है,,,, अगर रात को नहीं लौट पाई तो सुबह आ जाएगी,,,, और जो सूरज ने समोसे जलेबी लाया था वह रानी को देते हुए सुनैना बोली कि आज खाना मत बनाना मुखिया के घर पर ही हम लोग खाना खा लेंगे तुम यह खा लेना,,,,, क्योंकि सुनैना को यह नहीं मालूम था कि वहां पर कितनी देर लगेगी,,, घर से दोनों मां बेटे बाहर निकल चुके थे लेकिन थोड़ा सा मौसम खराब दिखाई दे रहा था हल्के हल्के काले बादल आसमान में छा रहे थे लेकिन दोनों इस बात की चिंता किए बिना निकल चुके थे।
 
मां बेटे दोनों घर से निकल चुके थे आसमान में हल्के हल्के काले बादल जाने लगे थे मौसम कुछ ठीक नहीं लग रहा था लेकिन इसकी परवाह किए बिना ही सुनैना और उसका बेटा घर से निकल चुके थे,,, सूरज कुछ ज्यादा ही उत्सुक था अपने आप की काली करतुतो को अपनी मां को दिखाने के लिए,, क्योंकि यह सब दिखा कर वह अपनी मां के सामने एक अच्छा और जिम्मेदार बेटा बनना चाहता था ताकि उसके प्रति उसके मां के मन में प्रभाव बनने लगे और सूरज अपनी मां के साथ अपनी प्यास बुझा सके जिसके लिए खुद उसकी मां भी मचल रही थी लेकिन एक मां होने की नाते अपने कदम आगे नहीं बढ़ा पा रही थी,,, देखते ही देखते दोनों गांव से बाहर आ चुके थे अंधेरा बढ़ने लगा था आज सुनैना को अपनी बेटी घर पर अकेली छोड़ने में बिल्कुल भी घबराहट महसूस नहीं हुई थी उसकी बिल्कुल भी चिंता नहीं हो रही थी क्योंकि आज वह अपनी आंखों से अपने पति की रंगरलिया को देखना चाहती थी, ताकि जितनी बची कुची इज्जत है आज उसके मन से वह भी निकल जाए,,,। जल्दी-जल्दी चलते हुए वह अपने बेटे से बोली,,,।





अभी कितना चलना है,,,,?

बस थोड़ा और गांव से बाहर तो आई गए हैं,,,,।

सच में तेरे बाबुजी ऊधर आएंगे,,,।

बिल्कुल आएंगे तभी तो मैं तुम्हें लेकर चल रहा हूं बाबूजी भी आएंगे साथ में उनका बदमाश दोस्त जो उन्हें पूरी तरह से बिगाड़ दिया है कल्लू वह भी आएगा और तुम्हारी सौतन भी आएगी कमला रानी आज तुम अपनी आंखों से देख लेना उसकी जवानी,,,, तब कहना की बाबुजी ने उसमें ऐसा क्या देख लिया,,,,।

क्या वह सच में मुझसे ज्यादा सुंदर है,,,।

अब चल रही हो तो देख ही लेना अपनी आंखों से तुम्हें भी तो पता चल जाए कि बाबुजी की पसंद कैसी है,,,।

वह तो मैं देख ही लुंगी,,,, लेकिन बता दे है कैसी वह जो तेरे पिताजी उसके लिए मुझे छोड़ दिए,,,,।

(सूरज आगे आगे चल रहा था और पीछे-पीछे उसकी मां चल रही थी दोनों के बीच वार्तालाप जारी था चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था काले काले बादल से मौसम थोड़ा डरावना लग रहा था लेकिन इस समय इस बात की मां बेटे दोनों को बिल्कुल भी चिंता नहीं थी वह दोनों जल्द से जल्द उसे स्थान पर पहुंचाना चाहते थे जहां पर कामलीला होने वाली थी,,, सूरज कमल को ज्यादा ही उत्सुक था सूरज के मन में बहुत कुछ चल रहा था,, आज वह किसी भी तरह से अपनी मां को अपने पिताजी की काम लीला दिखाना चाहता था वह यह सोचकर और भी ज्यादा उत्साहित हो रहा था कि वह अपनी मां को अपने पिता जी को दिखाना चाहता था जो एक औरत को चोदने वाले थे और यह सोचकर उसके तन-बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी कि जब वह एक औरत को चोदते हुए अपनी मां को अपने पिताजी की कमला दिखाएगा तो उसके चेहरे पर कैसे भाव दिखाई देंगे,,, एक तरह से एक बेटे के लिए यह बेहद शर्मनाक बात है कि वह अपनी मां को चुदाई के दृश्य दिखाएं और एक मां के लिए भी बेहद शर्मनाक स्थिति थी जब देखना खुद ही अपने बेटे के साथ मिलकर अपने पति की कामलीला को देखें उसे समय मां बेटे के मन में किस तरह की भावना जाग रही होगी यह भी देखने वाली बात थी। सूरज अपनी मां की बात का जवाब देते हुए बोला,)





danish o

सच कहूं तो मां मैं भी एक मर्द हूं,, औरत की खूबसूरती भला एक मर्द से ज्यादा कोई नहीं समझ सकता इसलिए मुझे इतना तो पता है कि वह औरत तुम्हारे पैर के भी बराबर नहीं है खूबसूरती के मामले में।।

(अपने बेटे के मुंह से यह बात सुनकर सुनैना मन ही मन में गदगद होने लगी,,, अपने बेटे के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर सुनैना की आंखों में चमक बढ़ गई थी हालांकि इस समय जो वह देखने जा रही है वह उसके लिए किसी पहाड़ टूटने जैसे दुख के बराबर था लेकिन धीरे-धीरे जिस तरह से पहले से ही उसके बेटे ने अपने बाबूजी की काम लीला के बारे में बताया था उसे सुन सुनकर सुनैना अपने मन को कठोर बना ली थी और वैसे भी पति से मिले उसे महीनों गुजर चुके थे,,, इसलिए अकेली रहने की धीरे-धीरे उसे आदत सी हो गई थी हालांकि मर्द की जरूरत उसे महसूस तो होती थी लेकिन अपने पति की बेवफाई को याद करके उसका मन कठोर हो गया था,,, अपने बेटे की बात सुनकर वह सहज होते हुए बोली,,,)

वह तो वह चलकर ही पता चलेगा कि कैसी दिखती है वो,,,।





मैं भी तो वही कह रहा हूं और वैसे भी बाजार में तुम्हारी उससे मुलाकात हो चुकी है लेकिन शायद तुम्हें याद नहीं है।

तू सच कह रहा है बाजार में जिस औरत से मेरी मुलाकात हुई थी उसके बारे में मुझे जरा भी याद नहीं है उसका चेहरा कैसा है कैसा नहीं इस बारे में भी मुझे कुछ पता नहीं है अगर पता होता तो वहीं पर उसकी चोटी पकड़ कर बहुत मारती,,,।

(अपनी मां की बात सुनकर सूरज अपने मन में ही बोला तब तो अच्छा हुआ कि उसे नहीं मालूम था कि बाजार में जिससे मुलाकात हुई थी वही उसकी सौतन थी वरना आज इतनी रात को वहां अपनी मां को चुदाई दिखने ना ले जा रहा होता इसलिए खाने वाले ने क्या खूब कहा है कि जो भी होता है अच्छे के लिए होता है,,,,, कुछ देर तक दोनों के बीच सन्नाटा छाया रहा,,, मां बेटे दोनों जंगली झाड़ियां के बीच से होकर गुजर रहे थे रात का समय था , सांप बिच्छू के काटने का डर था,,,,, इसलिए वह अपने बेटे से बोली,,)

सूरज कहां से तू ले जा रहा है जंगली झाड़ियां में से कहीं सांप बिच्छू ने काट लिया तो लेने के देने पड़ जाएंगे,,,।

कुछ नहीं होगा यहां से जल्दी पहुंच जाएंगे इसलिए तो मैं आगे आगे चल रहा हूं।

बड़ी फिक्र करता है तू मेरी,,,।





क्यों ना करूं तुम्हारे सिवा हमारा है कौन जिसकी फिक्र करु,,,,,।

सच में फिक्र करता है कि सिर्फ दिखावा कर रहा है,,,।

यह कैसी बातें कर रही हो मां,,,, जरा तुम ही सोचो पिताजी तो सारी जिम्मेदारी छोड़कर उस कमला रानी के साथ मस्तियां लूट रहे हैं,,,, अगर जरा सोचो तुम भी कहीं पिताजी की तरह होती तो हम लोगों का क्या होता लेकिन है तो भगवान का शुक्र है कि तुम बहुत अच्छी हो इसलिए तुम्हारे सहारे हम लोग भी हैं,,,।

(अपने बेटे की यह बात सुनकर सुनैना भावुक हो गई,,,,और वह कुछ बोल नहीं पाई,,, वह दोनों गांव से काफी दूर आ चुके थे चारों तरफ अंधेरा ही दे रहा था यहां पर बस्ती का नामोनिशान नहीं था इसलिए जहां देखो तन्हा जंगली झाड़ियां बड़े-बड़े पेड़ और रहने कर कुत्ते के भौंकने की आवाज और साथ ही काले काले बादल माहौल पूरी तरह से डरावना था वैसे अगर सुनैना अकेली होती तो शायद इस समय इतनी दूर आने की हिम्मत बिना करती लेकिन उसे अपने बेटे का सहारा था उसे अपने सूरज पर पूरा विश्वास था इसलिए वह निडर होकर उसके पीछे-पीछे चल रही थी और इस बात से उसे खुशी भी मिल रही थी कि उसके बेटे के मन में डर बिल्कुल नहीं था वह नीडर होकर आगे बढ़ता चला जा रहा था,,,, सुनैना उसके पीछे-पीछे चलते हुए बोली,,,)

उसे दिन तो तू अकेला ही इधर आया होगा ना,,।





हां बिल्कुल अकेला ऐसी जगह पर किसी दूसरे को साथ लेकर जाना ठीक नहीं है आखिरकार घर की इज्जत की बात है ।

तब तो तू बहादुर के साथ-साथ बड़ा होशियार भी है।

वो तो हुं,,,,।

तुझे डर नहीं लगता रात को घर से बाहर इतनी दूर रहते हैं वह देख रहा है चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा है,,,।

पहले लगता था लेकिन जब से पिताजी गए हैं तो सारी जिम्मेदारी मेरे सर पर आ गई है इसलिए जिम्मेदारी ने मुझे मजबूत और बहादुर बना दिया है।

(अपने बेटे की ईस तरह की समझदारी वाली बात सुनकर सुनैना मन ही मन प्रसन्न हो रही थी,,,, उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि वाकई में वह एक जिम्मेदार व्यक्ति बन चुका था साथ ही इस बात से इनकार नहीं था कि वह पूरी तरह से मर्द भी बन चुका था और इस मरदानापन का एहसास भी उसे अच्छी तरह से था,,,, चलते चलते वह दोनों काफी दूर निकल आए थे थोड़ी सी थकान महसूस होने लगी थी इसलिए सुनैना बोली,,,)

सूरज तू तो मुझे बहुत दूर ले आया,,,, अभी कितना दूर है मुझसे तो चला नहीं जा रहा है,,,,।

बस वह देखो सामने गोदाम दिख रहा है ना वही,,,।

(गौदाम इतना बड़ा था कि इतनी अंधेरे में भी बस आप दिखाई दे रहा था जो कि अब थोड़ी ही दूर पर था गोदाम को देखकर सुनैना को राहत महसूस हुई और वह धीरे से बोली ,,,)





चलो आ तो गया वरना मुझे तो लग रहा था कि सुबह तक चलते ही रहना पड़ेगा,,,,,।

(अपनी मां किस तरह की बातों को सुनकर सूरज को महसूस हो रहा था कि उसकी मां को बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ रहा था कि वह कुछ ही देर में अपने पति की कम लीला अपनी आंखों से देखने वाली है अपने पति को किसी दूसरी औरत के साथ रंगरेलियां मनाते हुए देखने वाली है,,,, ना तो उसके चेहरे पर इस बात की पीड़ा दिखाई दे रही थी ना ही उसकी बातों में दर्द अच्छा लग रहा था और इस बात से सूरज का मन प्रसन्न हो रहा था क्योंकि वह यही तो चाहता था वह नहीं चाहता था कि यह सब देखकर उसकी मां एकदम से उदास हो जाए और दुखी होकर अपने आप में ही गम में डूबती चली जाए बल्कि वह चाहता था कि यह सब देखकर वह भी अपने पति की तरह मजा लेने के बारे में सोचें मस्ती करने के बारे में सोचे,, वह भी अपने पति की तरह बेशर्म हो जाए क्योंकि वह जानता था कि उसकी मां का बेशर्म होना उसके लिए उसकी दोनों टांगों के बीच का द्वार खोल देगा,,,,।

दोनों बड़े से गोदाम के पास पहुंच चुके थे,,, सूरज ने देखा तो गोदाम का मुख्य द्वार बंद था,,, और कड़ी बाहर से खुली हुई थी जिसका मतलब साफ था कि वह तीनों गोदाम के अंदर थे सुनैना गोदाम का बड़ा सा दरवाजा देखकर बोली,,,)





दरवाजा तो बंद है,,, लगता है तेरे पिताजी इधरआए ही नहीं,,,।

धीरे बोलो वह लोग अंदर ही है देखो दरवाजे की कड़ी बाहर से खुली हुई है जिसका मतलब साफ है कि वह लोग अंदर है,,,, बिल्कुल भी शोर मत करना,,,,।

लेकिन कैसे पता चलेगा कि वह लोग अंदर ही है कुछ तो दिखाई नहीं दे रहा है,,,,।

तुमको मैं जुगाड़ बनाता हूं अंदर देखने का जरूर कोई जरिया होगा ही,,,,।(इतना कहकर वह गोदाम के दीवार की तरफ पहुंच गया जहां पर पहुंचकर वह अंदर देखने के लिए कोई अच्छी सी जगह ढूंढने लगा और जल्द ही उसे एक ऐसी जगह मिल गई जहां से दो चार ईंटे गायब थी,,,,, पहले सूरज वहां से अंदर की तरफ देखने लगा उसकी किस्मत बहुत अच्छी थी कि वहां से गोदाम के अंदर का सब कुछ नजर आ रहा था जल्द ही सूरज की नजरे उन तीनों को भी ढूंढ ली जो कि उस दिन की तरह वह तीनों उसी जगह पर ही थे,,, सबसे पहले अंदर का नजारा देखकर सूरज की आंखें फटी की फटी रह गई क्योंकि जो नजर उसकी आंखों ने देखा था अगर उसके साथ-साथ उसकी मां भी उसके साथ देख ले तो सूरज का आधा काम तो ऐसे ही बन जाएगा,,,,,, वह जल्दी से ईसारे से अपनी मां को अपने पास बुलाया,,,, इशारा पाकर सुनैना भी बिल्कुल देर किए बिना अपने बेटे के पास आगे और बोली,,,)





क्या हुआ जुगाड़ हुआ कि नहीं,,,।

यह देखो जुगाड़ हो गया है,,,,,(अपने बेटे की बात सुनकर सुनैना की नजर दीवार के उसे जगह पर पड़ी जहां पर उसका बेटा खड़ा था और वहां से दो चार ईंटे गायब थी,,,,, वह सूरज को आश्चार्य से देखने लगी तो सूरज बोला,,,)

अंदर तो देखो तुम्हें सब समझ में आ जाएगा,,,,।

(इतना कहकर सूरज अपनी मां का हाथ पकड़ कर उस अपनी जगह पर खड़ा कर दिया और खुद उसके पीछे खड़ा हो गया इसमें भी सूरज का अपना ही लालच था,,,सूरज की बात सुनकर सुनैना अंदर की तरफ देखने लगी पहले तो उसे कुछ समझ में नहीं आया लेकिन धीरे-धीरे अंदर का दृश्य साफ होने लगा उसकी नजर उसे जगह पर पड़ी जहां पर लालटेन चल रही थी और लालटेन की पीली रोशनी में उसे तीन परछाइयां नजर आने लगी धीरे-धीरे परछाइयां भी स्पष्ट होने लगी और जब परेशानियां स्पष्ट हुई तो सच में आश्चर्य से उसका मुंह खुला का खुला रह गया,,,, अंदर लालटेन के उजाले में तीनों कामलीला में लगे हुए थे,,, सुनैना कोई तुम साथ दिखाई दे रहा था कि उसका पति दिवार के सहारे बैठा हुआ था दोनों टांगें फैलाए उसके बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था कपड़ा तो इस समय तीनों के बदन पर भी नहीं था तीनों पूरी तरह से नंगे ही थे और वह औरत जिसका नाम कमल रानी था वह उसकी दोनों टांगों के बीच झुकी हुई थी और उसके पति के लंड को मुंह में लेकर पागलों की तरह चूस रही थी,,,, वह घुटनों के बाल थोड़ी बनी हुई थी और पीछे कल्लू बदमाश उसकी बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से पकड़े अपना मुंह उसकी गांड में घुसाया हुआ था,,, वह पीछे से उस औरत की गांड चाट रहा था,,,,, यह सब देखकर पल भर में ही सुनैना की हालत खराब हो गई एक तरफ गुस्से से उसकी आंखें लाल हो रही थी तो दूसरी तरफ अंदर का नजारा देखकर उत्तेजना से उसका चेहरे का रंग सुर्ख लाल हो रहा था। सूरज ठीक अपनी मां के पीछे खड़ा था वह अभी पीछे से अंदर की तरफ झांक रहा था वह जानता था कि जिस तरह का दृश्य वह मां बेटे देख रहे थे वह नजर देख कर किसी के मन में भी काम भावना जाग जाए,,, और सूरज यही चाहता भी था। अपनी मां की उखड़ती हुई सांसों को देखकर और उसके चेहरे पर उत्तेजना और क्रोध की जो भावना साफ दिखाई दे रही थी उसे देखते हुए वह बोला,,,,)





देख रही हो ना क्या हो रहा है अंदर,,,,,,।

देख रही हूं,,,,(बड़ी मुश्किल से सुनैना के मुंह से यह शब्द निकले अंदर तीनों पागल हो रहे थे,,,, कल्लु तो पागलों की तरह उसकी बड़ी-बड़ी गांड को चाट रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे उसने कभी औरत की गांड ही ना देखी हो और सुनैना का पति उसके बालों में उंगलियां फिराते हुए कमला रानी के मुंह में लंड डालकर चटवाते हुए बोल रहा था,,,)

सच में कमला रानी तुम बहुत मजा देती हो,,,,आहहहह असली सुख तो तुम्हारे पास है,,,आहहहहहआहहहहह पूरा अंदर लेकर चूसो गले तक उतार लो,,,,,ऊमममममम आहहहहहह तुम तो मेरी जान ही ले लोगी,,,।

(अपने पति की इस तरह की बातों को सुनकर और उसके मुंह से निकलने वाली शिसकारी की आवाज सुनकर सुनैना के तन-बदन में आग लगने लगी वह अपने मन में सोचने लगी कि वह भी तो यह सब करती थी तब क्या कमी रह गई उसके प्यार में,,,,, अपने मन में ही यह सब कहते हुए, सुनैना गहरी सांस लेते हुए बड़े गौर से अंदर के नजारे को देख रही थी,,,,, तभी उसका पति फिर से बोला,,,)

ओहह कल्लु घुस मत जाना कमला रानी की गांड में,,,,।





मेरा बस चले तो पूरा का पूरा घुस जाओ इसकी कहानी देख नहीं रही इसकी गांड कितनी खूबसूरत है,,,

वह तो है मेरे दोस्त कभी तो देख मैं सब कुछ छोड़-छाड़ कर इसके पीछे दीवाना हूं,,, देख नहीं रहा कितना अच्छा चुसती है ऐसा लग रहा है कि जैसे गन्ना चूस रही है,, आहहहहह बहुत मजा आ रहा है,,, (अपने दोनों हाथ आगे बढ़कर कमला की गांड को सहलाते हुए वह बोला,,,)

देख रही हो मां पिताजी को कितने हरामि हो गए हैं,,,,।

देख रही हूं और सुन भी रही तेरे पिताजी ऐसे पहले बिल्कुल भी नहीं थे,,,।

लेकिन अब तो हो गए ना देख तो रही हो कैसे उस औरत के साथ मस्त हो रहे हैं,,,,,।

साली रंडी ने मेरे पति को बिल्कुल बदल दिया,,,।

अब वह तुम्हारे पति बिल्कुल भी नहीं रह गए,,,, वह अब उसे औरत के हो गए हैं,, लेकिन मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि वह औरत तुमसे ज्यादा खूबसूरत तो है भी नहीं फिर भी पिताजी तुम्हारी जैसी औरत को छोड़कर उसके पीछे दीवानद हो गए यह हो कैसे गया,,,,।

यह तो मुझे भी नहीं पता चल रहा है,,, मुझे भी वह औरत दिखाई दे रही है ऐसा कुछ भी उसके पास नहीं है जो मेरे पास है लेकिन फिर भी तेरे पिताजी,,,,, मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,,।

(अपनी मां की बात सुनकर मौका देखकर सूरज बोला)

मैं एक बात कहूं बुरा मत मानना,,,,।

बोल,,,,।





कहीं ऐसा तो नहीं कि जिस तरह से वह औरत पिताजी को खुश कर रही है,,, मेरा मतलब है कि देखो वह औरत इस समय पिताजी के साथ क्या कर रही है क्या ऐसा तो नहीं कि तुम यह सब नहीं करती थी। और शायद इसीलिए पिताजी तुम्हें छोड़कर उसके पास चले गए क्योंकि वह सब कुछ करती है मैंने अपनी आंखों से देखा है।

(सूरज की बात सुनकर सुनैना को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या जवाब दे क्योंकि अपने बेटे के साथ इस तरह की बात करना एक मां के लिए बड़ी शर्म की बात थी, लेकिन इस समय हालात बिल्कुल भी अनुकूल नहीं था इस समय जिस तरह के हालात दिखाई दे रहे थे सही गलत अश्लील सब कुछ कोई मायने नहीं रखता था इसलिए अपने मन को मजबूत करके सुनैना धीरे से बोली,,,)

तुझे लगता है कि तेरे पिताजी यह सब करवाए बिना मानते होंगे,,,,।

मतलब तुम भी यह सब करती थी,,,, (अंदर ही अंदर खुश होता हुआ सूरज बोला)





बिल्कुल सब कुछ,, ,, (सुनैना शर्माते हुए बोली,,, और अपनी मां की बात सुनकर सूरज अंदर ही अंदर उत्तेजित हो रहा था,,,,, अंदर का नजारा और भी गर्म होता जा रहा था,,,,, क्योंकि सबसे पहले कल्लु ने उसे औरत को चोदने का फैसला कर लिया था,,,, इसलिए वह कमला रानी की गांड पर से अपना मुंह हटा लिया और उसके पीछे घुटनों के बल बैठकर अपने लंड को हिलाने लगा,,, यह देखकर सूरज बोल पड़ा,,,)

देखो मां अब कल्लु उसे चोदने जा रहा है,,,, (सूरज जानबूझकर इस तरह की भाषा का प्रयोग कर रहा था वह पूरी तरह से बेशर्म बन जाना चाहता था और उसकी बात सुनकर उसकी मां कुछ बोल नहीं पाई बस अंदर देखती रह गई लेकिन इस दौरान उसे अच्छी तरह से महसूस हो रहा था कि उसकी गांड पर उसके बेटे का लंड रगड़ खा रहा था जो कि उसके पाजामा में तंबू बनाया हुआ था, उसके तंबू की रगड़ से सुनैना के तन-बाद में अजीब सी लहर उठ रही थी एक तो गोदाम के अंदर का गरमा गरम दृश्य भले ही उसे दृश्य में उसका पति शामिल था लेकिन फिर भी देख कर मन मदहोश हुआ जा रहा था और पीछे से अपने बेटे के लंड की रगड़ तो उसे और भी ज्यादा बावली बना रहा था,,।





कल अपने लंड को उसकी गांड के बीचों बीच उसकी गुलाबी छेद से सटाया और एकदम से उसकी कमर पकड़कर आगे को अपनी कमर ठेल दिया,,,,, शायद इतनी जल्दी प्रहार के लिए कमला पूरी तरह से तैयार नहीं थी इसलिए उसके धक्के से वह आगे को एकदम से लुढ़क गई और उसके मुंह से लंड बाहर निकल गया यह देखकर थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए सूरज के पिताजी बोले,,,)

आराम से कल्लू यह भागी नहीं जा रही है रात भर चुदवाएगी,,,,।

मालूम है मेरे दोस्त लेकिन रहा नहीं जा रहा था,,,,,।

चल मेरी कमला रानी फिर से मुंह में लेकर चुस,,,,।

अरे मेरे राजा क्या मेरे मुंह में ही पानी निकाल दोगे क्या,,,?

तू चुसती ऐसा है कि ना चाहते हुए भी पानी निकल ही जाए,,, और वैसे भी तेरे मुंह में झड़ने का मजा ही कुछ और है,,,,।

(उसकी बातें सूरज और सुनैना दोनों सुन रहे थे अपने पिताजी की इस तरह की गंदी बातें सुनकर वह जानबूझकर अपनी मां से बोला)

सुन रही हो मां क्या पिताजी यह भी करते थे तुम्हारे साथ,,,,,।





धत्,,,,,, मैं ऐसा बिल्कुल भी नहीं करती थी,,,।

तभी तो पिताजी उस औरत के साथ मजे ले रहे हैं,,, (सूरज जानबूझकर अपनी मां से यह बोला वह देखना चाहता था कि उसकी मां क्या बोलती है अपने बेटे की बात सुनकर सुनैना गुस्सा दिखाते हुए बोली)

पागल हो गया क्या कोई औरत भला ऐसे कैसे कर सकती है,,।

पिताजी की बात सुनकर तो ऐसा ही लग रहा है कि वह औरत ऐसा ही करती है,,,

छी मैं तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं कर सकती,,,, सुनकर ही कितना गंदा लग रहा है,,,।

शायद पिताजी को इसमें ज्यादा मजा आता हो क्या पहले पिताजी ने इस तरह से करने की कोशिश किया था क्या तुम्हारे साथ,,,,।

नहीं बिल्कुल भी नहीं ना जाने यह शौक कैसे चढ़ गया।

यही रंडी ने शोक लगाया होगा,,,,।(सूरज जानबूझकर सूरज को गाली देते हुए बोला क्योंकि वह अपनी मां के सामने पूरी तरह से बेशर्म बन जाना चाहता था खुल जाना चाहता था ताकि अपनी मां के साथ वह खुलकर मजा ले सके जिस तरह से वह बात कर रहा था उसकी बातों को सुनकर सुनैना भी हैरान थी लेकिन हालात ही कुछ ऐसे थे कि यहां पर सज्जन बनकर बातचीत करने का बिल्कुल भी अवकाश नहीं था। दोनों फिर से अंदर का दृश्य देखने लगे,, इस दौरान बार-बार सूरज जानबूझकर अपने पजामे बने तंबू को अपनी मां की गांड से सताते रहा था अंदर की गर्माहट भरी दृष्टि को देखकर बाहर से वह अपनी हरकत से अपनी मां को गर्म करना चाहता था और उसकी यह हरकत रंग ला रही थी क्योंकि पहले तो वह अपने बेटे के तंबू को अपनी गांड पर महसूस करके थोड़ा सा आगे हो जाती थी लेकिन अब एक ही जगह पर स्थिर हो गई थी और अपने बेटे के तंबू के रगड का मजा ले रही थी,,,,।

Kamla rani ki nangi jawani





बाहर का माहौल पूरी तरह से ठंडक भरा था क्योंकि आसमान में बादल छा चुके थे चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा था और अंदर गोदाम में लालटेन की पीली रोशनी में तीनों कामलीला में मत हो चुके थे उन्हें इस बात का अहसास तक नहीं था कि उन दिनों की काम लीला को कोई दो लोग चोरी छुपे देख रहे हैं,,,, वह तीनों तो अपनी काम लीला में मस्त हो चुके थे कल्लू कमला रानी की गुलाबी बुर में अपना लंड डालकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था लेकिन ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके धक्के का प्रभाव सूरज पर कुछ खास नहीं पड़ रहा था वह बड़े आराम से सूरज के पिताजी का लंड मुंह में लेकर चूस रही थी। उसे औरत को भी काफी देर हो चुके थे लंड को मुंह में लेकर चूसते चूसते,,, इस बात से सुनैना भी हैरान थी क्योंकि इतनी देर तक वह भी नहीं चुसती थी,,,, और यह सब देखकर उसे न जाने क्यों इस बात का एहसास होने लगा था कि शायद वह अपने पति को ठीक तरह से खुश नहीं कर पाई थी वह खुशी नहीं दे पाई थी जो इस समय कमला रानी पूरी तरह से रंडी बनकर कर दे रही थी। उसे साफ दिखाई दे रहा था कि वह उसके पति के लंड को एक ही बार में गले के अंदर तक ले लेती थी और कुछ देर तक इस स्थिति में रोके रह जाती थी जब तक की उसकी सांस नहीं अटकने लगती थी,,,, और थोड़ी देर में उसे बाहर निकाल कर उसके दोनों गोटी को भी चूस रही थी और ऐसा सुनैना आज तक नहीं की थी उस पल का अद्भुत सुख का एहसास वह अपने पति के चेहरे पर साफ तौर पर देख पा रही थी उसे समय उसके पति को इतना आनंद आ रहा था कि पूछो मत,,,,,।





कल्लु जोर-जोर से अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था और सूरज के पिताजी अपने दोनों हाथ को उसके सर पर रखकर नीचे से अपनी कमर को ऊपर उठा रहे थे उछाल रहे थे और कमला रानी पागलों की तरह लंड को मुंह में लेकर चूसे जा रही थी देखते ही देखते कल और सूरज के पिताजी का बदन अकडने लगा कल्ल तो झढ़ने लगा,, लेकिन सूरज के पिताजी अब झड़ने के कगार पर थे इसलिए वह एकदम से घुटनों के बाल हो गए और अपनी कमर हिला हिला कर कमल रानी के मुंह को ही चोदने लगे कमला रानी भी कहां पीछे हटने वाली थी वह तो दोनों की संगत में पूरी रंडी हो चुकी थी वह भी जोर-जोर से अपने मुंह को आगे पीछे करके मजा ले रही थी और अपने लाल-लाल होठों का छल्ला बना ली थी जिसे उसके होठों का दबाव लंड पर बराबर बना हुआ था और देखते ही देखते,,,, सूरज के पिताजी झड़ने लगे उनके लंड से गर्म लावा का फव्वारा फुट पड़ा,, कुछ पल में ही कमला रानी का मुंह भरने लगा और लावा उसके होठों से बाहर निकालने लगा मां बेटे दोनों यह बेशर्मी भरे दृश्य को देख रहे थे सुनैना तो हैरान थी ही सूरज भी पूरी तरह से हैरान हो चुका था क्योंकि उसने भी गांव में कई औरतों की चुदाई कर चुका था लेकिन इस तरह की हरकत अभी तक नहीं किया था। कमला रानी तब तक लंड को चुसती रही जब तक की मलाई पूरी तरह से अपने गले के अंदर गटक नहीं गई,,, कामलीला का पहला अध्याय समाप्त हो चुका था,,, तीनों झड़ चुके थे,,,,, लेकिन अभी भी खेल बाकी था सूरज इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि अभी इन तीनों की वासना शांत नहीं हुई थी लेकिन फिर भी वह अपनी मां के मन को जानने की कोशिश कर रहा था और इसीलिए वह अपनी मां से बोला।)





चलो अब घर चलते हैं देख ली ना तुमने अपने पति की करतुत ,,,, कितने बेशर्म हो चुके हैं उस कमला के साथ यह सब तो सुबह तक चलता रहेगा लेकिन हमें चलना होगा क्योंकि किसी भी वक्त बारिश पड़ने लगेगी।

अभी नहीं कुछ देर और रुक जाते हैं देखो तो सही अभी यह तीनों क्या गुल खिलाते हैं,,,।

अरे यह लोग मानने वाले नहीं है अभी तो पूरी रात बाकी है मुझे मालूम है मैंने अपनी आंखों से इन तीनों की काम लीला देख चुका हूं और तुम्हें लगता है कि यह सब समाप्त हो जाएगा यह सुबह तक चलता रहेगा।

फिर भी मैं भी देखना चाहती हूं कि मेरा पति इतना हरामी कैसे हो गया।

(अपनी मां की बात सुनकर सूरज समझ गया कि उसकी मां सब कुछ देखना चाहती है और यही तो वह चाहता था वह यह सब दिखा कर अपनी मां के बदन में काम भावना जगाना चाहता था जो की धीरे-धीरे जाग भी रही थी,,, सूरज का लंड पजामे में खड़ा था, जो की बार-बार उसकी मां की गांड से रगड़ खा जा रहा था और ऐसा अनजाने में नहीं हो रहा था बल्कि वह जानबूझकर कर रहा था,,,,,,

एक बार फिर से मां बेटे दोनों गोदाम के अंदर बड़ी गौर से देखने लगे पहला अध्याय समाप्त हो चुका था कुछ देर के लिए तीनों उसी तरह से बैठे रह गए कल्लू दीवार का सहारा लेकर गहरी गहरी सांस ले रहा था क्योंकि अभी-अभी वह कमला रानी की बुर में अपना लावा गिराया था,,, सूरज के पिताजी झड़ तो चुके थे लेकिन झड़ने के बाद कमला रानी को अपनी गोद में बैठा दिए थे और उसकी दोनों खरबूजा को अपने हाथ में लेकर दबा रहे थे और बातें कर रहे थे,,, सुनैना अपनी आंखों के सामने अपने पति की बेशर्मी को देखकर क्रोधित तो हो ही रही थी , लेकिन यह सब देखकर उसके तन-बदन में भी उत्तेजना की चिंगारी फुट रही थी साथ ही सूरज की हरकत उसे और भी ज्यादा मदहोश बना रही थी,,, तभी सूरज के पिताजी बोले,,,।)





कमला रानी मैं तो सोचता हूं कि तुम्हारे घर पर ही रख कर यह सब किया जाए तो और ज्यादा मजा आए,,,।(बड़ी-बड़ी चूचियों को अपने हाथ में लेकर मसलते हुए सूरज के पिताजी बोले और यह बात सुनकर कमला एकदम से बोल पड़ी)

नहीं नहीं ऐसा बिल्कुल भी मत करना गजब हो जाएगा तुम तो गांव वालों को जानते ही हो मेरा जीना दुश्वार हो जाएगा,,,, और सबको पता भी चल जाएगा कि मेरा और तुम दोनों का मेरे साथ क्या चल रहा है क्या तुम यह चाहोगे कि मेरी बदनामी हो जाए,,,।

नहीं मेरी रानी ऐसा में कभी नहीं चाहूंगा,,,(ऐसा कहते हुए सूरज के पिताजी कमला रानी के गाल पर चुंबन कर लिए और पीछे दीवार का सहारा लेकर बैठा कल्लू हंसते हुए बोला,,,)

अगर हम दोनों इसके घर जाकर इसकी चुदाई करेंगे तो सबको पता चल जाएगा और फिर हम दोनों के बाद न जाने कितने लोग इसके ऊपर चढ़ जाएंगे सब तो मौका की तलाश में है,,,, फिर उसके बाद इसकी बर का भोसड़ा बन जाएगा और फिर हम दोनों का मजा भी चला जाएगा,,,।

बात तो तो सही कह रहा है कल्लु,,, दो दो बच्चे की मां होने के बावजूद भी कमला रानी की बुर एकदम कसी हुई है,,,(कमल की बुर पर हथेली रखकर मसलते हुए सूरज के पिताजी बोले तो कमला रानी के मुंह से आह निकल गई और वह बोली,,,)

बात तो तुम सही कह रहे हो कल्लु यह सारा खेल मेरी कई हुई बुर का ही है जिसमें तुम दोनों अपना लंड डालकर अपनी जवानी की गर्मी शांत करते हो जिस दिन यह ढीली पड़ गई तो तुम लोग मेरे घर का रास्ता भी भूल जाओगे,,,,।





अरे अरे यह कैसी बातें कर रही हो कमला रानी,,,, भला ये कैसे हो सकता है और वह भी मेरे रहते हुए,,,।

क्यों तुम मेरे पास चले आओगे क्या,,,?

क्यों नहीं अभी भी तो मैं तुम्हारे पास ही हूं,,,,।

इस तरह से नहीं मेरे राजा अभी तो हम दोनों का रिश्ता केवल हवस का ही है,,,, प्यार का नहीं है मेरी तरफ से तो प्यार कहे लेकिन तुम्हारी तरफ से केवल हवस ही है जिसे मिटाने के लिए तुम मेरे पास यहां आते हो,,,।

ये क्या कह रही हो कमला रानी मैं तो तुमसे प्यार करता हूं और यहां मैं सिर्फ तुमसे प्यार करने के लिए आता हूं,,,,।

झूठ कह रहे हो,,, प्यार व्यार तो सिर्फ एक बहाना है तुम्हारा असली परिवार गांव में है वहां तुम्हारी बीवी है बच्चे हैं,,,।

(उसकी बात सुनकर सूरज के पिताजी जोर-जोर से हंसने लगे और उसकी इस तरह हंसता हुआ देखकर बाहर खड़ी सुनैना के साथ-साथ सूरज भी देख कर हैरान हो गया,,,,, उसे हंसता हुआ देखकर कमला रानी आश्चर्य से उसकी तरफ देखते हुए बोली,,,)

हंस क्यों रहे हो,,,, क्या गांव तुम्हारा परिवार नहीं है,,,।

उसे तुम परिवार कहती हो कमला रानी उसे तो मैं कब का छोड़ चुका हूं,,, कितने महीने गुजर गए मैं तुम्हारे साथ तो हूं उन लोगों की तो शक्ल भी नहीं देखा हूं मैं सिर्फ तुम्हारे लिए तुम्हारे लिए मैं उन लोगों को छोड़ दिया अगर मुझ पर भरोसा नहीं है तो कल्लु से पूछ लो,,,,।

(इतना सुनकर कमला रानी कल्लु की तरफदेखने लगी और कल्लू भी कमला से बोला,,,)





ये बिल्कुल सही कह रहा है,,, अब हो इसका परिवार नहीं है इसका परिवार सिर्फ तुम हो चुकी हो,,,, तुम्हारे बच्चे भी अब इसकी जिम्मेदारी है क्योंकि मैं एक दिन इससे कह रहा था कि तू अपना परिवार छोड़कर यहां मौज मस्ती करता है अगर किसी दिन वह लोग को पता चल गया तो क्या होगा,,,, तो उसने बोला कि वह मेरा परिवार नहीं पता चल गया तो मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता मेरे लिए तो मेरी कमला रानी ही सब कुछ है।

सुन ली मेरी जान और तुम कह रही हो कि मैं सिर्फ यहां पर अपनी हवस मिटाने आता हूं,,,, तुमको ही याद होना चाहिए मैं कितने महीनों से तुम्हारे हाथ का खाना खा रहा हूं,,,,,।

फिर तुम मुझसे शादी क्यों नहीं कर लेते शादी कर लोगे तो मेरे साथ मेरे घर पर रहोगे,,,,।

(यह सब सुन कर दो सुनैना की होश उड़ रहे थे सूरज भी हैरान था सूरज के मन में तो कुछ और ही चल रहा था अपने आप की बात सुनकर उसे इस बात की राहत हो रही थी कि अब वह उन लोगों को अपना परिवार नहीं मानता जिसका मतलब साफ था कि अब सूरज का रास्ता एकदम साफ हो चुका था,,,, फिर भी वह हैरान होने का नाटक करते हुए अपनी मां से बोला,,,)





सुन रही हो मां अगर मैं अपने मुंह से बताता तो शायद

तुम्हे यकीन ना होता,,,, अच्छा हुआ कि मैं आज तुम्हें अपने साथ ले आया,,,,,।

(सुनैना अपनी आंखों से देख कर अपनी कानों से सुनकर पूरी तरह से हैरान हो चुकी थी उसी तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उसका पति इतना हरामि हो गया है की एक बाजार औरत के लिए अपना परिवार छोड़ दिया है एक ऐसी औरत के साथ शादी करने का सपना देख रहा है जो उसे भी चुदवाती है और उसके दोस्त से भी चुदवाती है। सुनैना अपने बेटे से कुछ बोल पाती इससे पहले ही अंदर से आवाज आई,,,,)

तुम तो मेरे मुंह की बात छीन ली कमला रानी मैं भी तुमसे यही कहना चाहता था मैं भी तुमसे शादी करना चाहता हूं तुम्हारे बच्चों का बाप करना चाहता हूं तुम्हारे परिवार को अपना परिवार बनाना चाहता हूं,,,, ताकि जीवन भर के लिए तुम मेरी बीवी बनकर मेरे पास रहो,,,,(उसके दोनों खरबुजो को अपने हाथ में लेकर मसलते हुए वह बोला)

लेकिन कब मेरे राजा,,,,

बस सही समय का इंतजार करो मेरी रानी थोड़े पैसे इकट्ठे हो जाएं तो हम लोग यह गांव छोड़कर किसी दूसरे गांव चले जाएंगे नए सिरे से जीवन गुजर बसर शुरू करेंगे ताकि हर रात को हम दोनों एक ही घर में मजा ले सके जहां और कोई ना हो यह कल्लु भी ना हो,,





(कल्लु की तरफ देखते हुए सूरज के पिताजी बोले तो उसकी बात सुनकर कल्लु एकदम से बोल पड़ा)

नहीं ऐसा गजब मत करना वरना मेरा क्या होगा कमला रानी के बिना,,,,,।

बेवकूफ इसीलिए कहता हूं जितना मजा लूटना है अभी लूटने अगर मेरी बीवी जिसके लिए बन गई उसे दिन तुझे हाथ भी लगाने नहीं दूंगा यह तो अभी तेरे ऊपर ऐहसान ही कर रहा हूं जो अपने साथ तुझे चोदने के लिए आ रहा हूं,,,,,, क्योंकि तूने ही मुझे कमला रानी से मिलवाया था यह उसी के बदले का एहसान है।

(उन दोनों की बात सुनकर कमला मुस्कुराने लगी उसे यह सब बातें अच्छी लग रही थी और बाहर खड़े सुनैना यह सब सुनकर आग बबुली हो रही थी और अपने बेटे से बोली,,,)

तेरा बाप इतना हरामजादा कमीना हो जाएगा मैं कभी सोचा नहीं थी एकदम मादरचोद हो गया है भोसड़ी वाला,,,,(सूरज पहली बार अपनी मां के मुंह से इस तरह की गाली सुन रहा था और अपनी आंखों से जो उसने देखा था और कानों से सुना था वह सब देखकर उसे सुकून ही मिल रहा था क्योंकि वह जानता था कि अगर यह सब हो गया तो उसका रास्ता एकदम साफ हो जाएगा उसकी मां अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली) देख रहा है छिनार के लिए अपना परिवार छोड़ दिया तेरे बाप ने,,,





मुझे क्या दिखा रही हो तुम खुद ही देख लो अपने पति की करतूत मुझे तो पहले से ही सकता अपनी आंखों से देखा तो मुझे तो उसे दिन से ही इसे अपना बाप कहने में शर्म आने लगी लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि अगर यह वापस आना चाहेगा तो तुम अपनी बांहें फैलाए इसका स्वागत करोगी,,,,,।

यह अब बिल्कुल भी नहीं होगा लेकिन तू ही बता मुझे क्या करना चाहिए,,,,।

मैं तो कहता हूं कि तुम्हें भी इसकी तरह ही जीना चाहिए एकदम खुलकर किसी के फिक्र नहीं होना चाहिए बेफिक्र हो जाना चाहिए,,,।

लेकिन मैं ऐसा करने के लिए कहां जाऊं,,,।

(अपनी मां की बात सुनकर सूरज समझ गया था कि वह क्या कहना चाहती है लेकिन फिर भी नादान बना रहा वह जानता था कि उसकी मां के बारे में बात कर रही थी जिस तरह से उसका पति दूसरी औरत के साथ मजा लूट रही थी उसके कहने का मतलब यही था कि वह किसके साथ इस तरह का मजा लेगी लेकिन सूरज बात को घुमाते हुए बोला)

तुम्हें बिल्कुल भी फर्क नहीं पडना चाहिए अपने पति के चले जाने का बल्कि ऐसा रहना चाहिए कि जैसे बिंदास हो,,,, मजा लेना चाहिए खुलकर जीना चाहिए ताकि वह कभी तुम्हें देखें तो तुम्हारा जीवन देखकर वह खुद अंदर से जल जाए बल्कि उसकी याद में अपनी जवानी को आंसुओं में डुबोने की कोई जरूरत नहीं है इस तरह से रहो खाओ पियो मस्त रहो कि तुम्हारी जवानी एकदम बरकरार रहे,,,,

(सूरज बातों ही बातों में अपने मन की बात अपनी मां से बता दे रहा था और इस दौरान उसके पजामे में बना तंबू लगातार उसकी मां के लिए तंबू पर रगड़ खा रहा था इससे आगे सूरज अभी पढ़ना नहीं चाहता था वह अपने आप को संभाले हुए था क्योंकि वह जानता था कि उसकी मां अपनी जवानी को अपने सब्र को ज्यादा देर तक नहीं रोक पाएगी तभी तो वह यहां खड़ी थी गोदाम में आगे का नजारा देखने के लिए क्योंकि भले ही वह अंदर से दुखी हो रही हो या अपने पति को दूसरी औरत के साथ देखकर जलन हो रही हो लेकिन फिर भी जो कुछ भी अंदर हो रहा था वह काफी उत्तेजनात्मक था जिससे सुनहरा के बदन में उत्तेजना की चिंगारी फूट रही थी और यही तो सूरज चाहता था और सूरज को पक्का यकीन था कि उसके पजामे में लंड की रगड़ उसकी मां को अपनी गांड पर साफ महसूस हो रही थी तभी तो वह अपनी गांड को आगे पीछे नहीं कर रही थी बल्कि एक ही जगह स्थिर किए हुए थी। सूरज और कुछ बोलता इससे पहले उसके बाप की गोद में बैठी हुई कमला धीरे से उठकर खड़ी हो गई वह पूरी तरह से नंगी थी खड़ी होने पर उसकी मधुमक्खी जवानी एकदम साफ झलक रही है कुछ पल के लिए तो अपनी आंखों के सामने एक नंगी औरत को देखकर सूरज का भी इनाम उसे पर डोलने लगा था क्योंकि एक मर्द को आकर्षित करने लायक हर एक अंग उसका आकार लिया हुआ था उसकी चूचियां पतली कमर मोटी मोटी जांघें ,,जांघों के बीच की पतली दरार हल्के हल्के बाल ऐसा क्या नहीं था जिसे देखकर एक मर्द का लंड खड़ा ना हो जाए,,,,, और यह सब सुनैना भी देख रही थी और सूरज को पूरा यकीन था कि कमला की जवानी देखकर सुनैना भी जरूर उसके बारे में कुछ ना कुछ सोच रही होगी यह बात निश्चित था कि कमला रानी भी खूबसूरत थी जवानी से भरी हुई थी लेकिन सुनैना के आगे वह अभी भी पानी भरने लायक ही थी,,,,।

Kamla ki nangi jawani





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अगर अनजान मर्दों के सामने औरत को पसंद करने की होने लग जाए तो कमला रानी और सुनैना में अधिकतर लोग सुनैना को ही पसंद करेंगे इस बात का पूरा यकीन था सूरज को वह तो उसका बाप था जो अपनी बीवी को भोग भोगकर घर की मुर्गी दाल बराबर समझने लगा था,,,, कमला रानी सूरज के पिताजी की खोज से उठकर खड़ी हो गई थी और अंगड़ाई ले रही थी यह देखकर सूरज के पिताजी बोले,,,)

कहां चली मेरी रानी नंगी ही घर पर जाने का इरादा है क्या,,,?

तुम सच कह रहे हो मेरे राजा मेरा बस चले तो बिना कपड़ों के ही अपने घर चली जाऊं वैसे भी बिना कपड़ों के घूमने में कुछ ज्यादा ही मजा आता है। लेकिन अभी तो मुझे जोरों की पेशाब लगी है,,, पहले पेशाब कर लुं,,

अच्छा है कर लो नहीं तो मेरा लंड घुसेगा तो अपने आप तुम्हारी पेशाब छुट जाएगी,,,,।

तभी तो करने जा रही हूं,,,,,(कमला एकदम बेशर्मी दिखाते हुए बोली,,, दोनों की बात बाहर खड़े मां बेटे सुन रहे थे सूरज को यह सब सुनने में मजा आ रहा था क्योंकि वह जानता था किस तरह की बात सुनकर उसकी मां की बुर से भी पानी टपक रहा होगा ,, वह एकदम से अपनी मां की गांड से सटा जा रहा था और उसकी बात है कि उसे हटाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रही थी क्योंकि उसके बदन में भी गर्माहट छा रही थी। और यह सब सूरज के लिए अनुकूल होता जा रहा था। कमला दीवार के कोने की तरफ जा रही थी लालटेन की पीली रोशनी में सबको साफ नजर आ रहा था कमला उन दोनों से ज्यादा दूर नहीं गई बल्कि दो कदम पर ही जाकर वहीं पर उनकी आंखों के सामने ही बैठ गई लेकिन उसकी गांड मां बेटे के सामने थी मां बेटे दोनों ने उसे पेशाब करते हुए देख रहे थे,,,, उसकी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज दोनों के कानों में पड़ रही थी यह सब देखकर सूरज का लंड एकदम से टनटना गया था,,, वह जानबूझकर अपनी मां से बोला,,,)





देख रही हो मां कितनी बेसरम है दो मर्दों के सामने ही कितनी बेशर्मी से बैठकर मुत रही है इसे तो बिल्कुल भी शर्म नहीं आ रही है,,,,।

ऐसी औरतों को शर्म नहीं होती,,,,।

सही कह रही हो न जाने कैसे दूसरे मर्द के सामने इस तरह से बैठकर मुत रही है मुझे नहीं लगता कि तुमने कभी पिताजी के सामने इस तरह से कोई हरकत की होगी,,,।

(अपने बेटे के मुंह से इस तरह की बात सुनकर सुनैना एकदम से गनगना गई,,,, लेकिन कुछ बोल नहीं पाई थोड़ी देर में वह कमला पेशाब कर चुकी थी और उठकर खड़ी हो गई जहां बैठी थी वहां की मिट्टी पूरी तरह से उसके पेशाब से गीली हो चुकी थी और सूरज के पिताजी उसे देखकर मुस्कुराते हुए अपनी लंड को हिला रहे थे,,,,,, अब समय आ गया था चुदाई का मां बेटे दोनों जानते थे कि अब क्या होने वाला है,,,, इसलिए दोनों की उत्सुकता बनी हुई थी दोनों की आंखों में मदहोशी छाने लगी थी सूरज के लंड का दबाव सुनैना के नितंब पर बढ़ता जा रहा था। और यह दबाव सुनेना को उत्तेजित कर रहा था,,, वह मदहोश हो सो रही थी हो जाती थी कि सूरज के लंड की रगड़ उसका दबाव उसकी गांड की दरार के बीचो-बीच पहुंच जाए लेकिन नितंबों के ऊपरी सतह पर लंड का दबाव बना हुआ था,,,,, गोदाम के अंदर का दृश्य पूरी तरह से मदहोशी से भरा हुआ था जिसे देखकर मां बेटे किसी भी वक्त बहक सकते थे,,,,।





आसमान में पूरी तरह से बादल छाया हुआ था,,, रह रहकर बिजली चमक रही थी सूरज और उसकी मां दोनों जानते थे कि किसी भी वक्त बारिश होने वाली थी लेकिन फिर भी गोदाम के अंदर का दृश्य देखकर दोनों मदहोशी में जिस तरह से डूबता जा रहे थे वह अपनी आंखों से अंदर का नजारा ओझल होने देना नहीं चाहते थे,,,, लेकिन एक बार सूरज अपनी मां को आगाह करते हुए बोला,,,,।

बारिश होने वाली है हम दोनों भीग जाएंगे,,,।

थोड़ा रुक जा फिर चलते हैं,,,,।

(सुनैना का इतना कहना था कि कमला अपने दोनों टांगे सूरज के पिताजी के जांघों के इर्द-गिर्द रखकर अपनी गुलाबी बुर एक बार फिर से उसके मुंह से सटा दी और सूरज के पिताजी अपने दोनों हाथों को इसकी भारी भरकम गांड पर रखकर एकदम से उसकी बुर चाटने लगे यह सब देखकर सुनैना मदहोश होने लगी,,,, उसे एहसास हो रहा था कि उसके पति ने उसके साथ कभी इस तरह की हरकत नहीं किया था,,,, इस तरह से मस्ती भरे बातें नहीं की थी इतनी देर तक रात को जागकर उसके साथ प्यार नहीं किए थे,,,, और इस समय रंडी औरत की बुर चाट रहे थे। गोदाम में वासना की बारिश हो रही थी और गोदाम के बाहर बरसात की शुरुआत हो चुकी थी,,, लेकिन सूरज भी अपनी मां को पूरी तरह से मदहोश करके ही वहा से जाना जाता था और तो और सुनैना भी वहां से जाने की इच्छुक नहीं थी,,,, सूरज के पिताजी पागलों की तरह उसकी बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर उसकी बुर की चटाई कर रहे थे। और सूरज धीरे से अपनी मां की कमर पर हाथ रख दिया उसकी कमर पर हाथ रखते हुए एकदम से मत हो गई उसके बदन में लहर उठने लगी और वह अपनी गांड को पीछे की तरफ लहर दी जिससे सूरज का लंड उसकी गांड पर एकदम से ज्यादा दबाव बनाने लगा,,,, सूरज बातचीत का दौर चालू रखते हुए बोला।)





देख रही हो पिताजी को कैसे एक रंडी की बुर चाट रहे हैं,,,,,(सूरज जानबूझकर इस तरह के शब्दों का प्रयोग करते हुए बोल रहा था क्योंकि वह अपनी मां के बदन में मदहोशी का रस घोलना चाहता था,,, सूरज की बात सुनकर उसकी मां कुछ बोली नहीं बस उसकी हरकतों का आनंद लेते हुए गहरी सांस ले रही थी। सूरज अपनी हरकत को बढ़ाता हुआ एकदम उसके गर्दन के करीब अपना चेहरा लेकर और गहरी मेरी सांस लेने लगा उसके नाक से निकलने वाली गर्म सांसे उसके चेहरे पर अपनी तपन छोड़ रही थी जिसे सुनैना की बुर कचोरी की तरह फूलने लगी थी,,,,, तभी देखते ही देखते कमला एकदम से घुटनों के बल बैठ गई और अपनी बुर में बैठे-बैठे ही सूरज के पिताजी के लंड को अपनी बुर में लेने लगी,,,, यह नजारा काफी मदहोश कर देने वाला था जिस पर मां बेटे की नजर बराबर बनी हुई थी सुनैना की हालत खराब हो रही थी उसकी गहरी चलती सांसे उसके हाल को बयां कर रही थी सूरज अच्छी तरह से समझ रहा था कि उसकी मां उत्तेजित हो रही थी और इसी पल का फायदा उठाते हुए वहां उसकी कमर को जोर-जोर से हल्के हल्के से दबाना शुरू कर दिया था जिससे उसकी मां की उत्तेजना और बढ़ती जा रही थी और लगातार अपने लंड की रगड़ उसकी गांड पर बनाया हुआ था,,,,, तब तक बारिश तेज हो गई दोनों पानी में भीगने लगे लेकिन दोनों अंदर का दृश्य देखकर मदहोश हो चुके थे,,,,, अंकित अपने लंड को व्यवस्थित करता हुआ अपनी मां की गांड की दरार में उसे धंसाने लगा जो की साड़ी सहित अंदर की तरफ घुसता चला जा रहा था। इसका एहसास सुनैना को बड़ी अच्छी तरह से हो रहा था वह अपने बेटे को बिल्कुल भी रोकने की कोशिश नहीं कर रही थी,,,,,





दूसरी तरफ कमल जोर-जोर से अपनी गांड को सूरज के पिताजी के लंड पर पटक रही थी और सूरज के पिताजी उसे अपनी बाहों में भरकर नीचे से अपनी कमर उछाल रहे थे,,,,, माहौल पूरी तरह से गर्म हो चुका था अपनी मां की हालत को देखकर सूरज का हौसला बढ़ने लगा वह धीरे से अपनी मां की कमर पर से अपना हाथ फैसला कर ऊपर से ही अपनी हथेली को अपनी मां की साड़ी के अंदर डालने की कोशिश करने लगा यह सब सुनैना को एहसास हो रहा था लेकिन वह अपने बेटे को रोकने की कोशिश नहीं कर रही थी क्योंकि वह मदहोश हो चुकी थी मस्त हो चुकी थी,,,,, लेकिन तभी गोदाम के अंदर ही बड़ा सा डब्बा गिरने की आवाज आई और वालों को एकदम से चौंक गए और सामने की तरफ देखने लगे जहां से मां बेटे दोनों गोदाम के अंदर देख रहे थे,,,,।

क्या हुआ क्या गिरा,,,,?(कल्लू दीवार से सटकर बैठे हुए ही जोर से आवाज लगाते हुए बोला,,,)

पता नहीं देख तो सही कोई है तो नहीं बाहर बड़े जोरों की बारिश हो रही है,,,,।(कमला रानी की कमर को पकड़े हुए सूरज के पिताजी बोले तो मां बेटे दोनों एकदम से चौकन्ने हो गए क्योंकि डब्बा गिरने की आवाज उन दोनों की ही तरफ से आई थी लेकिन गोदाम के अंदर से,,, फिर भी उन दोनों पर किसी की भी नजर पड़ सकती थी इसलिए सूरज अपनी मां से बोला,,)

पिताजी की कर दो तो तुम अपनी आंखों से देख ही चुकी हो और अपने कानों से सुन चुकी होगी वह क्या चाहते हैं इसलिए अब यहां पर खड़े रहना ठीक नहीं है हम लोगों को वह लोग देख सकते हैं अगर देख लिए तो गजब हो जाएगा,,,।

लेकिन बारिश भी बहुत तेज हो चुकी है जाएंगे कहां,,,,(सुनैना अपने बेटे से अलग होते हुए बोली वह दोनों पानी में पूरी तरह से भीग चुके थे और बारिश भी बड़े जोरों की पड़ रही थी रह रहकर बादल की गड़गड़ाहट की आवाज सुनाई दे रही थी,,, जो कि ईस समय कुछ ज्यादा ही भयानक लग रही थी अपनी मां की बात सुनकर सूरज बोला,,,)





तुम चिंता मत करो मैं जानता हूं थोड़ी दूर पर एक टूटा हुआ घर है जब तक बारिश नहीं रुक जाती वहीं पर रुकना पड़ेगा चलो मैं लेकर चलता हूं,,,,(और इतना कहकर सूरज अपनी मां का हाथ पकड़ कर तेज बारिश में उसे टूटे हुए घर की तरफ जाने लगा जो कि उसे गोदाम से थोड़ी ही दूर पर था।)
 
सूरज अपनी मां का हाथ पकड़ कर आगे आगे बढ़ता चला जा रहा था क्योंकि बारिश जोर पकड़ ली थी तेज हवा भी चल रही थी,,,, मां बेटे ने जो अपनी आंखों से देखा था वह पूरी तरह से उन दोनों की सोच समझ को बदल कर रख दिया था सुनैना के मन में जो अपने पति के लिए थोड़ा बहुत प्यार बचा था वह भी खत्म हो चुका था सुनैना कभी सोचा नहीं थी कि उसका पति इतनी बड़ी बेवफाई करेगी किसी औरत के चक्कर में उसे छोड़ने को तैयार हो जाएगा यहां तक कि अब वह उसके साथ शादी भी करने को तैयार हो गया है,,,,, सुनैना अपने मन में यह सोचकर हैरान हो रही थी कि आज तक वह किसी मर्द के सामने होते हैं जाने नहीं दिया था बिना घुंघट के और आज एक ऐसी औरत के साथ शादी कर रहे हैं जो उसके ही दोस्त के साथ रोज हम बिस्तर होती थी और उसके साथ ही मिलकर उसे औरत की चुदाई करता था जिसके साथ वह शादी करने जा रहा है। यह सब सुनैना की सोच के बिल्कुल परे था,, उसे तो समझ में नहीं आ रहा था कि उसके पति को हो क्या क्या है लेकिन आज के बाद से उसे अपने पति को अपना पति कहने में शर्म महसूस हो रही थी।





बादलों की गड़गड़ाहट बड़ी तेजी से हो रही थी बिजली की चमक से रह रहकर पूरा खेत खलियान मैं कुछ देर के लिए उजाला हो जा रहा था लेकिन यह सब सुनैना को डरा दे रहा था सुनैना घबराई हुई थी एक तो अपनी आंखों के सामने अपने पति की बेवफाई देख कर उसका दिल पहले से ही बैठ जा रहा था और इस तरह का वातावरण उसके अंदर डर का माहौल पैदा कर रहा था,,, सूरज अपनी मां का हाथ पकड़े आगे आगे चला जा रहा था दोनों पूरी तरह से भीग चुके थे,,,।

अभी कितनी दूर है सूरज,,,,

बस बस आ गया यही तो मैंने देखा था हां वह देखो सामने ही है,,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर सामने की तरफ देखी तो बिजली चमकने के उजाले में व खंडहर दिखाई दे रहा था जिसे देखकर उसके मन में डर के भाव पैदा होने लगे और वह बोली)

बाप रे यह तो भूतिया हवेली लग रही है इसके अंदर हम लोग रुकेंगे,,,।

अरे कोई भूतिया हवेली नहीं है डरो मत मैं हूं ना जब तक बारिश बंद नहीं हो जाती तब तक तो हमें यही रुकना होगा,,,,।

मुझे तो बहुत डर लग रहा है,,,,।

डरो मत मेरे होते हुए तुम्हें डरने की जरूरत नहीं है,,,।





(थोड़ी देर में दोनों खंडहर जैसे टूटे घर में पहुंच गए,,, यह खंडहर जैसा घर कब बना किसका है कब इसकी स्थिति ऐसी हो गई यह दोनों को नहीं मालूम था लेकिन इस समय बारिश से बचने के लिए यही सही जगह थी। खंडहर में प्रवेश करते ही सुनैना तो इधर-उधर देखने लगी क्योंकि चारों तरफ अंधेरा ही था,,,, उसके मन में डर के भाव पैदा हो रहे थे और यह लाजमी भी था इसलिए वह अपने बेटे से बोली।)

अगर इसी में तीनों बदमाश रहते हो तो जो उस दिन हमें रास्ते में मिले थे,,,।

यह जगह उस जगह से काफी दूर है यहां पर वालों नहीं होंगे और यहां पर वैसे भी कोई नहीं रहता,,,,,।

बाप रे मुझे तो ठंड लग रही है मैं तो पूरी तरह से भीग गई,,,,

भीग तो मैं भी गया हूं,,,, मेरे कहने पर थोड़ी देर पहले चली होती तो शायद भीगते नहीं,,,।

अब इसमें मैं क्या कर सकती हूं तेरे पिताजी को देख कितने बेशर्म हो चुकेहैं,,,।





देख चुका हूं मैं तुमसे पहले बताया नहीं था मुझे तुम्हारा दिल दुखाना नहीं था इसलिए बताता नहीं था लेकिन यह कब तक छुपाते रहता तुम्हारा इस तरह से उसके इंतजार में दुखी रहना मुझे अच्छा नहीं लग रहा था,,, अपने कान से सुन लेना कि वह किसी औरत के साथ शादी करने जा रहा है अब तो तुम मुझे बिल्कुल भी मत कहना उसकी इज्जत करने के लिए।

मालूम है,,,, (इतना कहकर सुनैना खामोश हो गई लेकिन सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला)

अब वह एक रंडी से शादी करना चाहता हैं ऐसी औरत के साथ शादी करना चाहता है जिसके साथ कल्लु भी मजा ले रहा था मुझे तो यह समझ में नहीं आता था कि ऐसी औरत के साथ शादी करने के बारे में कोई इंसान सोच भी कैसे सकता है अगर खुद का अनैतिक संबंध उसे औरत के साथ हो तो बात समझ सकते हैं लेकिन खुद उनके ही दोस्त का भी उसे औरत के साथ गलत संबंध है फिर भी शादी करने के लिए तैयार है।

वही तो मैं भी सोच कर हैरान हूं और उस औरत को देखो अभी शादी करने के लिए मरी जा रही है यह नहीं देख रही है कि किसी का परिवार उजड़ रहा है,,,।





किसी के परिवार से उसे क्या भला मतलब हो सकता है उसका तो परिवार बस जाएगा ना उसके बच्चों को आप का सहारा मिल जाएगा कमाने वाला मिल जाएगा और रात को मजा देने वाला भी मिल जाएगा।

(मजा देने वाली बात पर सूरज जानबूझकर कर देकर बोला था और यह बात सुनैना सुनकर शर्मा गई थी क्योंकि वह अपने बेटे के कहने का मतलब को अच्छी तरह से समझ रही थी एक औरत के लिए मजे का मतलब एक मर्द के साथ हम बिस्तर होना ही होता है,,, जो सूरज अच्छी तरह से समझ रहा था क्योंकि अब वह बड़ा हो चुका था जवान हो चुका था घर की जिम्मेदारी संभालने लगा था,,,, कुछ देर दोनों के बीच खामोशी छाई रही तो सूरज ही बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,,)

रुक जाओ में लकडियां ढुंढ कर आग जला देता हूं,,,,।

लेकिन दिया सलाई,,,,? (सूरज की तरफ आश्चर्य से देखते हुए बोली)

तुम चिंता मत करो मैं घर से निकलते समय ले लिया था क्योंकि मैं जानता था कि रात का समय है इसकी जरूरत कभी भी पड़ सकती है,,,।

लेकिन बारिश में भीग गई होगी,,,

इसे मैं अपने पजामे में संभाल कर रखा था थोड़ी बहुत तो अकेली हो गई होगी लेकिन काम चल जाएगा,,,, रुको मैं जब तक लकडियां ढूंढ लुं,,,,,

लेकिन इतने अंधेरे में कुछ दिखाई भी तो नहीं दे रहा है लकड़ी कहां से दिखाई देगी,,,।





तुम रुको तो सही यह सब मेरे पर छोड़ दो आग जल जाएगी तो सही रहेगा वरना सुबह तक तबीयत भी खराब हो जाएगी,,,,।

(सुनैना अपने बेटे को गौर से देखती रही वह देखना चाहती थी कितने अंधेरे में वह लकड़ी ढूंढेगा कैसे क्योंकि कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन उसकी चालाकी देखकर वह अंदर ही अंदर प्रसन्न होने लगी क्योंकि जब-जब बिजली आसमान में चमक रही थी तब उसके उजाले में सूरज जल्दी से इधर उधर नजर घुमा कर सुखी सुखी लड़कियां इकट्ठा कर रहा था उसके लिए चलाकि को देखकर सुनैना बोली,,,)

क्या बात है तू तो जवान होने के साथ-साथ चालाक भी है,,,।

चालाक तो बनना पड़ता है नहीं तो दुनिया बुद्धू समझ कर एक तरफ कर देती है,,,,,।(देखते ही देखते वह ढेर सारी लड़कियां इकट्ठा कर लिया और उसे बीच में लाकर रखने लगा,,,,, पजामा में छुपा के रखे हुए दिया सिलाई को उसमें धीरे से निकला जो की गली तो हो चुकी थी लेकिन इतनी गली नहीं हुई थी कि जल ना सके,,, थोड़ी ही देर में सूरज ने सूखे हुए लकड़ी में आग लगा दिया और लकड़ी जलने लगी उसकी रोशनी में खंडहर का हर एक कोना साफ दिखाई देने लगा जैसे ही रोशनी हुई सुनैना तो इधर देखने लगी कि कहीं कोई सांप बिच्छू तो नहीं है,,,, लेकिन वहां पर ऐसा कुछ भी नहीं था जगह-जगह टूटी हुई दीवारें मकड़ी का जाला लगा हुआ था और दीवारें एकदम गंदी हो चुकी थी,,, वैसे तो सबकुछ डरावना ही था लेकिन अब उसे भी अपने बेटे के साथ होने से डर का एहसास नहीं हो रहा था,,, सूरज अच्छे से लकड़ी को इधर-उधर पलट कर लकडियों को जलाते हुए बोला,,)





लो जल गई ना लकड़ी अब अच्छा है उजाला भी हो गया और ठंड भी नहीं लगेगी,,,,, (सूरज अपने कुर्ते को निकालता हुआ बोला जैसे ही उसके बदन से कुर्ता अलग हुआ उसकी नंगी चोडी छाती पर सुनैना की नजर गई तो वह उसे देखते ही रह गई एकदम माहौल इस समय कुछ अलग ही कहानी लिख रहा था अपने पति को दूसरी औरत के साथ मस्ती करता हुआ देखकर क्रोध के साथ उसके बदन में भी उत्तेजना की लहर उठा रही थी जो कि उसे समय उसकी बुर पूरी तरह से पानी छोड़ रही थी न जाने क्यों उसका भी मन पुरुष संसर्ग के लिए तड़प रहा था,,, और इस समय अपने बेटे की नंगी छाती देखकर उसके मन में फिर से भावनाएं उमड़ने लगी ,,, अभी भी खड़ी थी और सूरज आग के सामने बैठ गया था,,,, वह अपनी मां की तरह देखा बरसात के पानी में भीग उसका बदन बेहद खूबसूरत और उत्तेजक लग रहा था कपड़े शरीर पर पूरी तरह से चिपक गए थे ब्लाउज में से उसकी दोनों जवान एकदम साफ दिखाई दे रही थी और उसके खजूर एकदम कड़क हो चुके थे जो ब्लाउज में अपने होने का आभास दिला रहे थे,,,, चिकनापेट उस पर गहरी नाभि जिसमें से अभी भी पानी की बूंदें टपक रही थी यह देखकर सूरज के तन बदन में आग लगने लगी उसका मन कर रहा था कि अपना जीभ उसकी नाभि में घुस कर पानी के बूंद को चाट ले जाएं और अपनी प्यास बुझा ले,,,, सूरज प्यासी नजरों से अपनी मां का भीगा बदन देख रहा था सुनैना की नजर अपने बेटे पर पड़ी तो दोनों की नजरे आपस में टकरा गई सूरज एकदम से अपनी बात को बदलते हुए बोला,,,,)

खड़ी क्यों हो बैठ जाओ नहीं तो ठंड लग जाएगी,,,,





(सुनैना जानती थी कि उसका बेटा क्या देख रहा है,,,, वह शर्म से पानी पानी हो रही थी और अपने बेटे की बात मानकर आग के सामने बैठ गई थी,,, आग से थोड़ी बहुत राहत तो उसे मिल रही थी लेकिन गीले कपड़े होने की वजह से उसे ठंड भी लग रही थी उसके बदन में हल्की-हल्की कंपन हो रही थी,,,,, न जाने क्यों इस समय अपने पति की बेवफाई देखकर उसकी आंखों से आंसू निकलने लगे वह रोने लगी और सूरज तुरंत अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया और अपनी मां के पास पहुंच गया उसे पकड़ कर उसे चुप कराने लगा,,,,, सूरज ठीक उसके पीछे बैठा था और पीछे से अपनी मां को पकड़ कर उसे चुप कराने की कोशिश करता हुआ बोला,,,)

चुप हो जो रोने की जरूरत नहीं है ऐसे इंसान के लिए क्या रोना जो कभी कदर ही नहीं किया यह तो अच्छा हुआ कि जल्द ही उसकी हकीकत तुम्हारी आंखों के सामने आ गई वरना तुम तो जिंदगी भर उसका इंतजार करते ही रह जाती और क्या पता वह दूसरी शादी करने के बावजूद भी तुम्हारे पास आता और सिर्फ मजा लेकर चला जाता,,,,, (मजा लेने वाली बात सूरज जानबूझकर बोला था वह देखना चाहता था कि उसकी मां क्या बोलती है लेकिन वह कुछ बोली नहीं लेकिन अपने बेटे की मतलब को समझ रही थी कि वह क्या कहना चाहते हैं सूरज की नंगी चौड़ी छाती से सुनैना की पीठ सटी हुई थी उसके बदन की गर्माहट सुनैना को राहत पहुंचा रही थी,,,, सुनैना को यह अच्छा लग रहा था कि उसका बेटा उसके दर्द को समझ रहा था उसे समझा रहा था और अपने मन में यह सोच रही थी कि उसका कहना सही भी है कि क्या पता उसका पति उस औरत से शादी कर लेता और कभी कभार उससे मिलने आता और उसके साथ भी मजा लेकर फिर चला जाता क्योंकि मर्द का कोई भरोसा नहीं एक औरत से उसका मन नहीं भरता यह तो वह अपनी आंखों से देख चुकी थी,,,, सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)





मेरे मन से अब वह इंसान एकदम से उतर चुका है,,, अगर उसकी हकीकत कम वालों को पता चल जाए तो हम लोगों का भी जीना मुश्किल हो जाए लोग 10 बातें बनेंगे 10 सवाल पूछेंगे किस-किस को जवाब देते फिरेंगे,,,, मैं तो कहता हूं कि अच्छा ही है अगर वह वापस ना आए तो भी हम अपना जीवन आराम से जी लेंगे। तुम्हें मुझ पर तो भरोसा है ना,,,।

एक तू ही तो है जिस पर मुझे पूरा भरोसा है,,,, दूसरा कोई भरोसा करने के लायक है ही नहीं अच्छा हुआ कि यह सब रानी को नहीं पता है वरना उसका क्या होता उसे जब पता चला कि उसका बाप किसी और औरत के चक्कर में उन सब को छोड़कर चला गया है तो वह तो रो-रो कर पागल हो जाती,,,।

यह सब तुम बताना भी नहीं,,,,,, (ऐसा कहते हुए सूरज पीछे से अपनी दोनों तनी फैला कर बैठ गया था जिससे उसकी दोनों टांगों के बीच उसकी मां उसके पेट से सटी हुई थी लेकिन इस दौरान सुनैना को अपने बेटे का लंड पीठ पर चुभता हुआ महसूस होने लगा,,, वह एकदम से सिहर उठी क्योंकि अपनी आंखों से जो कुछ भी उसने देखी थी उसकी खुमारी अभी तक उसकी आंखों से ओझल नहीं हुई थी अभी तक उसकी आंखों में मदहोशी का नशा छाया हुआ था और ऊपर से उसके बेटे का टनटनाया हुआ लंड उसकी पीठ पर रगड़ खाकर उसकी भावनाओं को भड़काने लगा था,,, लेकिन सुनैना अपने आप को अपने बेटे की पीठ से बिल्कुल भी अलग करने की कोशिश नहीं कर रही थी क्योंकि इस समय उसे उसकी गर्माहट आनंदित और उत्तेजित कर रही थी,,,, अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए सूरज बोला,,,) अगर रानी को पिताजी के बारे में यह सब पता चलेगा तो वह टूट जाएगी उसे तो मर्द जाती पर से ही भरोसा उठ जाएगा ऐसा भी हो सकता है कि आगे चलकर वह शादी करने से इनकार कर दे,,,,।





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नहीं नहीं इन सब के बारे में मैं रानी को कभी पता लगने नहीं दूंगी और ना ही तू भी कभी बताना,,,, क्योंकि इन सब बातों का बच्चों पर कुछ ज्यादा ही प्रभाव पड़ता है दूसरे लोग गलत नजर से देखने लगते हैं होने लगता है कि मां-बाप ऐसे हैं तो बच्चे भी ऐसे ही होंगे,,,,।

तुम सही कह रही हो मां,,,,, ।

(एक तरफ से सूरज अपनी मां को पीछे से अपनी बाहों में लेकर बैठा हुआ था आज बराबर चल रही थी अरे लेकर बिजली के तड़कने की आवाज आ रही थी जब-जब बिजली की आवाज आती तब त सुनेना चौक जाती थी,,,, और सूरज अपनी मां को कस के पकड़ ले रहा था,,,, और सूरज की ईस हरकत पर सुनैना की बुर र पानी छोड़ दे रही थी,,,, अपने बेटे की हरकत सुनैना को अच्छी लग रही थी सुनैना अपने मन में सोच रही थी और सही मायने में देखा जाए तो सोचने पर मजबूर हो चुकी थी अपने पति की बेवफाई तो वह देख ही चुकी थी और वह जान गई थी कि अब उसका पति लौटने वाला नहीं है दूसरी औरत में उसका मन लग गया है और ऐसे में उसके तन बदन में खुद पुरुष संसर्ग के लिए भावनाएं जाग रही है,,,, और मजे की बात यह है कि उसका बेटा खुद से चोदना चाहता है जिसका प्रयास हुआ बहुत बार कर चुका था बस उसकी तरफ से इशारा नहीं मिला था वरना दोनों के बीच न जाने कब से शारीरिक संबंध स्थापित हो जाता। सुनैना इस समय कस मकस थी,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें लेकिन इतना एहसास उसे हो गया था कि वह ज्यादा देर तक पुरुष के संसर्ग के बिना आप नहीं रह सकती,,, वैसे भी औरत का मन बहुत कोमल होता है उसके कोमल मन का आज नहीं तो कल कोई ना कोई दूसरा मर्द फायदा उठा ही लगा यह ऐसा भी हो सकता है कि वह खुद बैठ जाए अपने बेटे के साथ नहीं तो किसी गैर मर्द के साथ,,,, लेकिन गैर मर्द के साथ शारीरिक संबंध बनाने में इस बात का डर भी हमेशा बना रहेगा कि कहीं वह बदनाम ना हो जाए क्योंकि ऐसी बातें अक्सर समाज से छुपती नहीं है और एक बार समझ में इस तरह की बात उजागर हो गई तो जिंदगी भर का कलंक बन जाता है,,,,,





फिर अचानक ही उसके मन में यह ख्याल आया कि अगर वह अपने बेटे से ही सारी संबंध बनाकर अपनी प्यास बुझा ली तो कैसा रहेगा घर की बात है घर में ही रहेगी चार दिवारी के अंदर मां बेटे क्या करते हैं इस बारे में किसी को कैसे क्या पता चलेगा,,, और वह दोनों तो किसी को कुछ बताने वाले नहीं है मजा का मजा भी मिल जाएगा और बदनाम होने का डर भी नहीं रहेगा,,, यह सब सोच कर सुनैना की भावनाएं भड़कने लगी और इस समय साहस भी हो रहा था कि उसका बेटा अंदर ही अंदर मचल रहा था उसे पाने के लिए उसके लंड का कड़कपन उसके मन की दशा को बयां कर रहा था,,, सुनैना यह सोचकर वह भी पागल हो जा रही थी कि इतना कड़क जब पीठ पर चुभ रहा है अगर उसकी बुर में जाएगा तो क्या हाल करेगा,,,,, कुछ देर तक दोनों के बीच इसी तरह से खामोशी छाई रही लेकिन वातावरण खामोश नहीं था वह पूरी तरह से शोर मचा रहा था तेज बारिश तेज हवाएं बिजली की कड़कडाहट सब कुछ डरावना सा माहौल बन चुका था,,, यह तो अच्छा था कि सूरज ने जुगाड़ लगाकर लकड़ी जला लिया था जिसके उजाले में औरतपन में थोड़ी बहुत राहत महसूस हो रही थी सुनैना अपने मन में आगे बढ़ाने के बारे में मनो मंथन कर रही थी वह अपने आप को अपने मन को तैयार कर रही थी,,, क्योंकि वह जानती थी कि जो कुछ भी वह करने जा रही है वह एक मां के लिए और बेटे के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है एक तरह का यह पाप ही है लेकिन उसे इस बात का एहसास था कि इस पाप में ही सुकून है और आखिरकार अपने पति को उसे जवाब भी तो देना था उसे तो ऐसे ही लग रहा था कि उसके बिना उसकी पत्नी का जीवन बेकार हो जाएगा वह निरश हो जाएगी,,, लेकिन सुनैना अपने मन में सोच रही थी कि उसे अपने पति को दिखाना है कि उसके बगैर भी वह जीवन जी सकती है अपने बेरंग ज़िंदगी में रंग भर सकती है अगर वह किसी गैर औरत का सहारा लेकर अपनी प्यास बुझा सकता है तो वह भी गैर मर्द का सहारा लेकर अपनी प्यास बुझाने में सक्षम है यही सब सोच कर वह अपने मन को तैयार कर चुकी थी।





लेकिन पहल करने में अभी भी उसके मन में उथल-पथल चल रही थी वह अपने मन में यही सोच रही थी कि पहले उसका बेटा ही करें जो कि उसका बेटा पूरी तरह से तैयार है बस इशारे की जरूरत है इसी के लिए वह अपने आप को तैयार करके धीरे से उठकर खड़ी होने लगी तो उसका बेटा बोला।

क्या हुआ,,,,?

कुछ नहीं मैं अभी आती हूं,,,,।

कहां जा रही हो,,,।

मुझे बड़े जोरों की पेशाब लगी है,,,, (जानबूझकर खंडहर में इधर-उधर देखते हुए बोली अपनी मां के मुंह से पेशाब लगने वाली बात सुनकर सूरज का लंड मचल उठा था वह गहरी सांस लेता हुआ बोला,,,)

वही दीवार के पास बैठ जाओ अंधेरे में मत जाना देख रही हो नहीं इतनी जोर की बारिश हो रही है अंधेरे में कहीं सांप बिच्छू बैठा होगा तो गड़बड़ हो जाएगा,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुनैना कुछ बोली नहीं लेकिन मन ही मन में खुश होने लगी और अपने बेटे के ठीक सामने दीवार के मोटे से खंबे के पास जाकर खड़ी हो गई जो की जगह-जगह से टूटा हुआ था उसकी ईंटे निकली हुई थी,,, ,,, इस तरह की सलाह सूरज की लालच से भरी हुई थी लेकिन इसमें अपनी मां के लिए चिंता भी थी क्योंकि वाकई में बरसात के माहौल में इधर-उधर जंगली जानवर के होने का खतरा बढ़ जाता है वैसे तो जिस जगह पर वह खड़ी थी वहां पर लकड़ी के जलने से रोशनी बराबर पहुंच रही थी और सुनैना एकदम साफ दिखाई दे रही थी और वैसे भी सुनैना खुद अपने बेटे की नजर से दूर नहीं जाना चाहती थी क्योंकि इस समय उसके मन में भी काम भावना जागरूक हो चुकी थी,,, अपने बेटे की बात सुनकर वह कुछ बोली नहीं लेकिन कुछ देर खड़ी होकर बाहर की तरफ देखने लगी बाहर कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था एकदम अंधेरा तेज बारिश तेज हवाएं बादलों की गड़गड़ाहट रहने कर बिजली के चमक नहीं की वजह से कुछ देर के लिए बाहर का नजारा दिखाई देता था जो कि एकदम डरावना लग रहा था,,,, सुनैना खंबे के पास खड़ी होकर अपने पति के बारे में सोचने लगी कि इस समय उसका पति उस औरत के साथ मजा लूट रहा होगा और यह सिलसिला रात भर चलेगा क्योंकि ऐसे भी अब तूफानी बारिश में वह घर वापस जाने वाली थी नहीं,,, सूरज के मन में आशा की किरण नजर आ रही थी उसे लग रहा था कि उसके जीवन में यह रात एक बदलाव लेकर आएगी जिससे उसका जीवन बदल जाएगा और इसके लिए वह काफी उत्सुक भी था,, उसकी मां को इस बात का सपना हो कि वह उसे ही देख रहा है इसलिए वह बार-बार जलती हुई लकडीयों को इधर-उधर करके उन्हें अच्छे से जलाने का दिखावा कर रहा था लेकिन उसकी नजर अपनी मां पर बराबर बनी हुई थी। कुछ देर तक और सुनैना कोई इसी तरह से खड़ा देख कर सूरज बोला,,,)





क्या हुआ,,,?

कुछ नहीं मैं तेरे पिताजी के बारे में सोच रही हूं,,,।

ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है उस इंसान के बारे में,,, अब तो तुम्हें यह सोचना है कि कैसे अपनी जिंदगी को हंसी-खुशी से आगे बढ़ाया जाए क्योंकि वह इंसान नहीं चाहता कि तुम खुश रहो और तुम्हें उसके विपरीत करना है और ज्यादा खुश रहना है अपना परिवार देखना है रानी की शादी करना है अपने लिए जीना है इसलिए ज्यादा मत सोचो देख तो रही थी इस समय वह उसे औरत के साथ मजे लूट रहा होगा और तुम यहां पर उदास खड़ी हो,,,, इंसान को ऐसा रहना चाहिए कि उसके साथ जो जैसा करें उसे भी वैसा ही करना चाहिए जैसे को तैसा तभी इंसान खुश रह सकता है वरना दुखी रह कर वह अपना जीवन खराब कर लेगा,,,, (सूरज का इतना कहना था कि तभी कर से बिजली की आवाज भी और सुनैना एकदम से घबराकर एक कदम पीछे हो गई यह देखकर सूरज बोला,,,)

जो करना है जल्दी कर लो वहां मत खड़ी रहो इधर आ जाओ वैसे भी तेज हवा चल रही है सर्दी लग गई तो बुखार आ जाएगा,,,,।

(सुनैना को अपने बेटे की बात उचित लग रही थी क्योंकि उसका पूरा बदन भीगा हुआ था उसके कपड़े गीले हो चुके थे और बाहर तेज हवाए चल रही थी। ऐसे में उसका बीमार हो जाना निश्चित था इसलिए वह अभी मौके की नजाकत को समझते हुए और अपनी काम भावना को जागरूक होता देखकर अपने बेटे की आंखों के सामने ही पेशाब करने का मन बना ली और बिजली के खड़कने की आवाज से जो उसने कदम पीछे ली थी उसे आगे नहीं बढ़ाई बल्कि इसी जगह पर खड़ी होकर अपनी गीली साड़ी को ऊपर की तरफ उठने लगी इस बात की परवाह किए बिना की उसका बेटा उसे देख रहा है कि नहीं ,,, लेकिन उसे पूरा विश्वास था कि उसका बेटा इस खूबसूरत नजारे को देखे बिना रह ही नहीं सकता,,, साड़ी गीली होने की वजह से उसकी टांगों से एकदम से चिपक गई थी,, जिसे ऊपर उठाने में थोड़ी तकलीफ हो रही थी लेकिन एक अजीब सी हलचल मन को बहका रही थी,,, धीरे-धीरे साड़ी ऊपर हो रही थी और सुनैना की मांसल गोरी पिंडलियां दिखाई देने लगी थी जो की आग के उजाले में एकदम साफ दिखाई दे रही थी,,, सूरज की काम भावना प्रज्वलित होने के लिए इतना काफी था अपनी मां की गोरी गोरी टांग देखकर सूरज का लंड बवाल मचाने को तैयार हो चुका था। सूरज चोर नजरों से देख रहा था,,, सुनैना भी अपनी साड़ी को धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठा रही थी मानो के जैसे अपने बेटे पर जानबूझकर अपनी जवानी की बिजलियां गिरा रही हो,,, अपनी मां की हरकत से सूरज पल पल घायल हो रहा था,,,।





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देखते ही देखते सुनैना ने अपनी साड़ी को अपनी जांघों तक उठा ली थी भीगा बदन भीगी साड़ी में और भी ज्यादा खूबसूरत और मादक लग रहा था, सुनैना की जवानी की खुशबू सूरज के तन बदन में फैल रही थी। और उसे मदहोश बना रही थी ऐसा बिल्कुल भी नहीं था कि इससे पहले उसने अपनी मां को नग्न अवस्था में कभी ना देखा हो उसने बहुत बार अपनी मां को पूरी तरह से नंगी देखा था उसकी नंगी जवानी की रस को अपनी आंखों से बार-बार पिया था यहां तक की उसे चुदवाते हुए भी देखा था उसके खूबसूरत मखमली जैसे कचोरी की तरह फुली हुई बुर में लंड को अंदर बाहर होते हुए भी देखा था,,, उसे हर एक रूप में देख चुका था यहां तक की पेशाब करते हुए भी उसने कई बार देखा था और अपने लंड को उसके बुरे के मुख्य द्वार तक स्पर्श कर कर भी वापस लौट आया था लेकिन फिर भी यह प्यास थी कि हर बार बढ़ जाती थी हर बार ऐसा लग रहा था कि जैसे वह पहली बार अपनी मां को कपड़े उतारते हुए देख रहा हो उसके नंगे बदन को देख रहा हो और यह शायद जरूरी भी था आकर्षण के चरम के लिए क्योंकि अगर अपनी मां की तरफ से उसका आकर्षण ही खत्म हो जाता तो उसके मन में काम भावना नहीं जागती, उसे पाने की लालसा न जागती,,, और फिर अगर ऐसा ना होता तो सब कुछ खत्म हो जाता मां बेटे के बीच केवल मां बेटे का ही रिश्ता रह जाता लेकिन इस समय जिस तरह की काम भावना सूरज के मन में उमड़ रही थी उसी तरह की काम भावना उसकी मां के बदन में भी तूफान का रूप ले रही थी। और मां बेटे के लिए इस समय बेहद जरूरी दिखा भले ही समाज के लिए यह उचित नहीं था एक पाप था लेकिन एक दूसरे की जरूरत को देखते हुए इस समय दोनों के लिए यही सही समय भी था और उचित भी था।





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कुल मिलाकर मां बेटे दोनों कामग्रस्त हो चुके थे,,, साड़ी जांघों के ऊपर की तरफ जा रही थी। जांघों से अभी भी पानी की बूंदें टपक रही थी जो कि किसी मोती के दाने से कम नहीं लग रही थी,,, यह देखकर सूरज की प्यास बढ़ती जा रही थी वह अपनी मां की जांघों से टपकती हुए पानी की बुंदो को जीभ लगाकर चाटना चाहता था,,, अपनी प्यास बुझाना चाहता था लेकिन इस समय देख कर ही काम चलाना उचित था,,, धीरे-धीरे सुनैना ने अपनी साड़ी को थोड़ा और ऊपर उठा ली जिससे उसके नितंबों के नीचे की लकीर दिखाई देने लगी जो कि दोनों फांको को आपस में जोड़ने का काम करती थी जहां से नितंबों का उभार शुरू होता था यह नजारा देखकर तो सूरज से रहने की और वह पजामी में अपने कड़कड़ाते हुए लंड को अपने हाथ से व्यवस्थित करने लगा क्योंकि उसकी हालत खराब हो रही थी,,, धीरे-धीरे साड़ी उठा रही सुनैना को इस बात का आभास था कि इस समय उसके बेटे की नजर उसे पर ही होगी और उस पर क्या गुजर रही होगी,,, यह सोचकर उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आ रहे थे,,,, लेकिन अभी तक वह अपनी नजर घुमा कर अपने बेटे की तरफ नहीं देखी थी उसे इस बात का डर था कि अगर वह उसे देख लेगी तो शायद वह अपनी नजर को दूसरी तरफ घुमा लेगा,,,, और फिर ऐसा भी हो सकता है कि उसके मन से इस समय काम भावना शांत हो जाए और ऐसा वह बिल्कुल भी नहीं चाहती थी,,, इसलिए वह अपने बेटे की तरफ से निश्चिंत हो गई थी।





बारिश का जोर लगातार बढ़ता ही जा रहा था कम होने का नाम नहीं ले रहा था और जैसे बारिश भी मां बेटे को मिलाना चाह रही हो वह बंद होने का नाम ही नहीं दे रही थी क्योंकि बारिश का बंद होने का मतलब था कि दोनों अपने घर की तरफ वापस लौट जाते लेकिन जिस तरह से बारिश हो रही थी इस समय दूर-दूर तक घुटनों तक पानी भर चुका था अगर बारिश बंद भी हो जाती तो ऐसे में जाना ठीक नहीं था और इस बात की खुशी मां बेटे दोनों के मन में थी,,,, नितंबों के निचले स्तर तक साड़ी उठाकर अपने हाथ से पकड़े हुए सुनैना कसमसा रही थी इस समय वाकई में उसे बड़े जोरों की पेशाब लग चुकी थी अगर वह ईस समय खड़े-खड़े मुत भी देती तो भी उसके बेटे को बिल्कुल भी पता नहीं चलता कि वह पेशाब कर रही है,,,, सुनैना का भी दिल जोरो से धड़क रहआ था उसकी भी सांसे भारी हो रही थी। क्योंकि इस समय जो कुछ भी वह कर रही थी वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी क्योंकि आज जानबूझकर वह अपने बेटे को अपनी नंगी जवान दिखने की कोशिश कर रही थी उसके सामने पेशाब करने वाली थी और वह जानती थी कि ऐसे हालात में एक खूबसूरत औरत को देखकर किसी भी मर्द की हालत खराब हो जाए और उसका बेटा तो पहले से ही उसकी जवानी पर लट्टू हो चुका था,,,, वह जानती थी कि उसे इस हालत में देखकर उसका बेटा उसे पाने के लिए मचल उठेगा और जरूर ऐसी वैसी हरकत करेगा जो एक मर्द को औरत के साथ हम बिस्तर होने के लिए करना पड़ता है और इसी मौके की तलाश उसे खुद भी थी। देखते ही देखते हो उसने अपनी साड़ी को एकदम से अपनी कमर तक उठा दी और पल भर में ही उसकी नंगी जवानी से भरी हुई गदराई गांड एकदम से उजागर हो गई,,,,, जलती हुई आज की रोशनी में सुनैना की गर्म जवानी का केंद्र बिंदु उसकी गांड एकदम आकर्षण से भरा हुआ था उसकी बनावट इतनी गोलाकार और ऊपरी हुई थी ऐसा लगता था कि जैसे किसी कलाकार ने अपने हाथों से गढ़ कर उसे बनाया हो,,,, सूरज देखा तो देखा ही रह गया उसकी आंखों में अपनी मां की मदद कर देने वाली जवानी की चमक दिखाई दे रही थी और पजामे में उसका लंड गदर मचाने को तैयार हो चुका था,,,,, और सुनैना उत्तेजना के मारे गहरी गहरी सांस ले रही थी क्योंकि वह जानती थी कि समय वह अपनी जवानी से भरे हुए खजाने को उजागर कर दी थी उसके ऊपर से पर्दा हटा दी थी और वह भी किसी गैर के लिए नहीं बल्कि अपने ही सगे बेटे के लिए जो उसकी जवानी का दीवाना हो चुका था।





इस समय मां बेटे दोनों की हालत खराब थी कुछ पल के लिए सुनैना उसी अवस्था में खड़ी रह गई ताकि उसका बेटा इत्मीनान से उसकी जवानी का रस अपनी आंखों से पी सके,,,, बारिश अपनी लय में अपना जलवा बिखेर रही थी और सुनैना की जवानी की बारिश भी दो जिस्म के बीच तूफान लाने को तैयार हो चुकी थी। अपने बेटे की तरफ देखे बिना ही सुनैना पेशाब करने के लिए नीचे बैठ गई और अगले ही पर उसकी बुर से पेशाब की धार बड़ी तेजी से निकलकर भरे हुए पानी में गिरने लगी,,, तेज चल रही हवाएं और शोर मचाती हुई बरसात के बीच भी निश्चित तौर पर उसकी पर से निकलने वाली सिटी की आवाज पूरे खंडहर में खोजने लगी थी और वह आवाज बड़े आराम से सूरज के कानों तक पहुंच रही थी और इस मधुर मादकता भरी ध्वनि को सुनकर सूरज की हालत खराब हो रही थी उसका मन मचल रहा था उसकी आंखों के सामने उसके सपनों की रानी बैठकर पेशाब कर रही थी और वह देखने के सिवा अभी कुछ कर नहीं सकता है वह नजर भर कर अपनी मां को देख रहा था गीले बदन में उसकी साड़ी उसके बदन से चिपकी हुई थी कमर के ऊपर का पूरा बदन थका हुआ था लेकिन कमर के नीचे से वह पूरी तरह से नंगी थी और यह कमर के नीचे की नंगी जवानी दर्शा रही थी की मर्द के होश उड़ाने के लिए औरत का पूरी तरह से नंगी होना जरूरी नहीं है बल्कि अच्छे तरीके से उसके किसी भी अंक का उजागर होना बेहद जरूरी है जिसे देखने भर से ही मर्द उसके कदमों में गिर जाता है उसका गुलाम बन जाता है ,,, और इस समय सूरज अपनी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी का गुलाम बन चुका था,,,, अपनी मां को पेशाब करता हुआ देखकर वह अपने मन में ही बोला।





बाप रे इसे कहते हैं औरत क्या जवानी है शाली की,,, देख कर ही लंड की हालत खराब हो रही है अगर इसकी बुर में जाएगा तो मुझे तो लगता है एक दो झटके में ही पानी फेंक देगा,,,, निश्चित तौर पर इसकी बुर की गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पाएगा मेरा लंड,,,, आहहहहह औरत हो तो ऐसी जिसकी जवान देखकर मर्द अपने आप पानी पानी हो जाए न जाने कितनी बार इसे पेशाब करते हुए देखा हूं कितनी बार नंगी देखा हुं लेकिन हर बार मन नहीं भरता,,,, सहहहहहह आज तो मजा ही आ जाएगा बस काम बन जाए,,,,,

सुनैना की बुर से बड़ी तेजी से सिटी की आवाज निकल रही थी जो कि यह दर्शा रही थी कि वाकई में उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी,,, सिटी की आवाज सुनकर तो सूरज की हालत खराब हो रही थी ,,,, वापस आंखें फाडे अपनी मां को पेशाब करता हुआ देख रहा था,,,,,, जवानी से भरी हुई गोलाकार गांड बैठने से और भी ज्यादा बाहर की तरफ निकल गई थी सूरज का मन तो कर रहा था किसी समय ठीक अपनी मां के पीछे जाकर बैठ जाए और अपने लंड को बैठे-बैठे ही उसकी गुलाबी बुर में डाल दे,,,, लेकिन यह सिर्फ उसकी सोच थी न जाने कब उसकी सोच पूरी होगी इसी इंतजार में वह पागल हुआ जा रहा था,,,, सुनैना की बुर से सिटी की आवाज कम ही नहीं हो रही थी जिसकी वजह से सूरज को उसकी खूबसूरत गांड देखने का मौका और ज्यादा मिल रहा था,, लेकिन धीरे-धीरे पेशाब की गति थमने लगी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज धीमी होने लगी,,,, जो किस बात का एहसास दिला रहा था कि अब वह पेशाब कर चुकी है,,, थोड़ी देर में उठकर खड़ी हो गई लेकिन खड़ी होने पर भी उसके हाथ में उसकी साड़ी थी और वह कमर तक अभी भी उठी हुई थी,,,, पेशाब करके खड़ी होने में उसकी खूबसूरती और आकर्षण और भी ज्यादा बढ़ गई थी,,, सुनैना अभी भी अपने बेटे की तरफ नहीं देखी थी उसे इस बात का पूरा विश्वास था कि उसका बेटा उसे देखने से एक पल भी नहीं चुका होगा और उसके विश्वास में सच्चाई थी पल भर के लिए भी सूरज ने अपनी नजर को दूसरी तरफ नहीं घुमाया था उसे इस बात का डर बिल्कुल भी नहीं था कि अगर उसकी मां उसे देख लेगी उसे पेशाब करता होगा तो अपने मन में क्या सोचेगी,,, शायद वह इस तरह के हालात के लिए पूरी तरह से तैयार था उसे मालूम था कि जैसे हालात में उसे क्या जवाब देना है। सुनैना अपनी साड़ी को नीचे करने की कोशिश करने लगी जो की पूरी तरह से गीली होने पर ठीक से नीचे की तरफ सड़क नहीं रही थी बल्कि उसकी मोटी-मोटी जांघों से चिपक जा रही थी,,,, अपनी साड़ी को नीचे करने के लिए वह अपने बेटे की तरह पीठ करके खड़ी हो गई थी जिससे उसकी गांड ठीक सूरज की आंखों के सामने थी और आगे की रोशनी में चमक रही थी वह आगे से साड़ी को नीचे करने की कोशिश करते हुए थोड़ा सा झुक गई जिससे उसकी भरी हुई गांड और भी ज्यादा आकर्षक और उभार लेकर दिखने लगी।





ऐसा वह जानबूझकर कर रही थी वह अपने बेटे को अपनी नंगी गांड के जी भरकर दर्शन कराना चाहती थी जिस तरह से हो चुकी हुई थी गौर से देखने पर सूरज को उसकी गुलाबी बुर भी दिखाई देने लगी थी जो की कचोरी की तरह फूल गई थी यह देखकर तो सूरज की हालत और ज्यादा खराब हो गई और वह पजामे के ऊपर से ही अपने लंड को मसल दिया,,, हल्की सी आह सूरज के मुंह से निकल गई ,,,,, जैसे तैसे करके सुनैना अपनी साड़ी को व्यवस्थित कर दी,,,, और सूरज की तरफ घूम कर खड़ी हो गई सूरज के पास बोलने के लिए कुछ नहीं था इसलिए वह एकदम से बोल पड़ा।

ठंड लग रही है ना,,,,।

अब गीले कपड़ों में तो ठंड लगेगी ही,,,,

मुझे भी लग रही है,,,,, आओ मेरे पास बैठ जाओ,,, तुम्हें थोड़ी गर्माहट मिल जाएगी,,,।

(सुनैना अपने बेटे की चालाकी को अच्छी तरह से समझती थी और वह भी यही चाहती भी थी इसलिए बिना कुछ बोले वह फिर से उसी स्थिति में आकर बैठ गई जैसे कि पहले बैठी थी,,, थोड़ी बहुत गर्माहट दोनों के बदन में महसूस होने लगी यह देखकर सूरज बोला,,)

अब देखो कितना सही लग रहा है वरना तो बहुत ठंड लग रही थी तुम्हारा बदन काफी गर्म है,,,।

मुझे तो तेरा बदन गर्म लग रहा है,,,,।

हो सकता है लेकिन तुम्हारा बदन कुछ ज्यादा ही गर्म है,,,, और ऐसे ठंडा मौसम के लिए तो तुम बिल्कुल ठीक हो,,,।

अच्छा तो क्या मैं तुझे गर्माहट देने के लिए हूं,,,

ऐसा नहीं कह रहा हूं लेकिन इस तरह का माहौल है तुम्हारे इस तरह से बैठने से हम दोनों की तबीयत खराब नहीं होगी,,,, और बाकी का काम तो यह जलती हुई आग कर दे रही है,,,।





तु ठीक कह रहा है लेकिन लकडियां कम हो रही है इसमें और लकडियां डाल नहीं तो बुझ जाएगी,,,,।

तुम ठीक कह रही हो रुको मैं अभी और लकड़ी डालता हूं,,,(इतना कहकर सूरज अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया यह जानते हुए भी की उसके पजामे में तम्बू बना हुआ है,,,, क्योंकि उसका इरादा अपनी उत्तेजना को दिखाना था वह अपनी मां को यह दिखाना चाहता था कि वह कितना पागल है उसे पाने के लिए,,,,, और जैसे ही उठकर वह खड़ा हुआ जलती हुई आज की दूसरी तरफ चला गया उसकी मां की नजर उसके तंबू पर पड़ी तो उसके होश उड़ गए क्योंकि पजामा पूरी तरह से गीला था,,, लंड का अक्स पूरी तरह से उजागर हो रहा था जिसे देखकर उत्तेजना के मारे सुनैना की बुर फूलने पिचकने लगी वह तो देखते ही रह गई और सूरज अनजान बनकर इधर-उधर से लकड़ी इकट्ठा करने लगा वह जानता था कि उसकी मां उसके लंड को देख रही है और उसे देखकर उसके मन में भी काम भावना पूरी तरह से जागरूक हो रही है तभी तो वह शर्मा नहीं रही थी बस देखे जा रही थी,,,, देखते ही देखते सूरज और ढेर सारी लड़कियां इकट्ठा कर लिया अच्छा हुआ कि इस खंडहर जैसे घर में सूखी हुई लड़कियां थी वरना दोनों को सर्दी लग जाती और दोनों बीमार पड़ सकते थे,,,। सुनैना का दिल जोरो से धड़क रहा था उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि अगर वाकई में उसके बेटे का लंड उसकी बुर में गया तो उसकी हालत खराब कर देगा क्योंकि सुनैना एक लंड की ताकत से अच्छी तरह से बाकी थी अब तक तो उसने केवल अपने पति से ही चुदवाई थी इसलिए उसे लंड की ताकत का अंदाजा था लेकिन इस बात से वह अब अनजान नहीं थी कि उसके बेटे का लंड उसके पति से कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था इसलिए वह सोचने पर मजबूर हो गई थी कि अगर वाकई में दोनों के बीच कुछ हुआ तो सूरज पूरी तरह से उस पर छा जाएगा,,,, अपने मन में इस तरह की बातें सोच कर सुनैना के तन बदन में गुदगुदी हो रही थी।





सूरज सूखी लकड़ियां लेकर ठीक अपनी मां के सामने घुटनों के बल बैठकर जलती हुई आग में सूखी लकड़ियों को डालकर आग को और ज्यादा सुलगाने लगा,,,,, लेकिन जिस तरह से वह बैठा था उसके पजामे में बना तंबू ठीक उसकी मां के सामने उजागर हो रहा था और उसकी मां फटी आंखों से अपने बेटे की जवानी को देख रही थी कमर के ऊपर तो वैसे ही वह पूरी तरह से नंगा था लेकिन भीगे पजामे में, उसकी मर्दानगी से भरी जवानी पूरी तरह से खीली हुई थी। सुनैना के मुंह में पानी तो आई रहा था साथ में उसकी बुर में भी पानी आना शुरू हो गया था उसे हिसाब सो रहा था कि वाकई में उसका बेटा पूरी तरह से जवान हो चुका है मर्द बन चुका है,,,, फिर वह अपने मन में सोचने लगी उसका बेटा इतना तो नादान नहीं है कि जिस अवस्था में बैठा है उसे ना पता चलता हो कि उसकी मां भी है सब कुछ देख रही होगी या फिर ऐसा भी हो सकता है कि वह जानबूझकर अपनी भावनाओं को दिखाना चाह रहा है,,, क्योंकि वैसे भी वह उसके साथ कई बार गलत हरकत कर चुका है बस आगे नहीं बढ़ पाया और आज तो मौका भी है दस्तूर भी है, फिर उसे पक्का यकीन हो गया कि उसका बेटा यह सब कुछ जानबूझकर कर रहा है और यह सोचकर वह मन ही मन मुस्कुराने लगी।

देख रही हो मां हम लोग की किस्मत कितनी तेज है कि यहां सुखी लड़कियां मिल गई वरना हम दोनों को सर्दी लग जाती है और हम दोनों बीमार पड़ जाते,,,(जलती हुई आग में सुखी लकडियां डालते हुए सूरज बोला,,)

तू सही कह रहा है मैं तो कभी सोच भी नहीं सकती थी कि हमें इस तरह से किसी खंडहर में रात गुजारना पड़ेगा और देख तो सही मौसम का एकाएक बदल गया,,,,।

घर से निकल रहे थे तभी थोड़ा बहुत बदल तो दिख ही रहा था लेकिन मालूम नहीं था कि इतनी तेज बारिश आ जाएगी अभी तो बारिश का मौसम शुरू होने में भी महीना जितना समय है।





तू बिल्कुल सही कह रहा है अच्छा हुआ समय पर फसल की कटाई हो गई वरना आज तो फसल बर्बाद हो जाती,,,,।

अरे हां मैं तो यह तो बताना भूल ही गया की मालकिन ने मुझे नया काम दी है खरबूजे के बगीचे से खरबूजे को शहर ले जाना है,,,,,।

चलो तब तो यह सही हुआ कुछ काम तो मिला वैसे तु सच में अब बड़ा हो गया है,,,(अपने बेटे के लंड की तरफ देखते हुए वह बोली जो की पजामी में और भी ज्यादा बलशाली नजर आ रहा था सूरज को अपनी मां की नजर का निशान समझ में आ रहा था और वह अंदर ही अंदर उत्तेजित हो रहा था,,, अपनी मां की बात सुनकर सूरज के मन में शरारत सूझी और वह अपनी मां की आंखों के सामने ही एक हाथ से आग में लकड़ी डालते हुए दूसरे हाथ से, अपने लंड को खुजलाने लगा ऐसा वह जानबूझकर कर रहा था,,,, क्योंकि वह जब खुजला रहा था तब उसका डंडे जैसा लंड पजामे में इधर-उधर डाल रहा था जिसे देखकर सुनैना की आंखें फटी की फटी रह जा रही थी और उसकी बुर की हालत खराब हो रही थी। अपनी हरकत को जारी रखते हुए सूरज जानबूझकर सहज बनने का नाटक करते हुए बोला,,,)





गीले कपड़े में बड़ा अजीब लग रहा है ना,,,।

हां वह तो है,,,,, खुजली जैसा होने लगा है,,,,।

तुम तो उतार भी सकती हो,,,।

पागल हो गया है क्या मैं कपड़े उतार दूंगी तो नंगी नहीं हो जाऊंगी,,,,।

(अपनी मां के मुंह से नंगी शब्द सुनकर सूरज का लंड टनटना गया लेकिन फिर भी जानबूझकर सहज होता हुआ हंसते हुए बोला,,,)

अरे सारे कपड़े उतारने के लिए थोड़ी ना कह रहा हूं साड़ी उतार दूंगी तो भी तो ब्लाउज और पेटीकोट रहेगा ही तुम्हारे बदन पर लेकिन मैं अपना पजामा भी उतार दिया तो नंगा हो जाऊंगा,,,,।

(अपने बेटे की कही इस बात पर एकदम से मौके का फायदा उठाते हुए सुनैना बोली,,,)

तो इसमें क्या हो गया अभी-अभी तो तू बड़ा हुआ है इससे पहले तो नंगा ही घूमता था तुझे नहलाती थी सारे कपड़े उतार कर याद है कि नहीं,,,,।

क्या मां तुम भी तब मैं छोटा था लेकिन अब बड़ा हो गया हूं,,,,,।(शरमाते हुए सूरज बोल तो उसकी बात सुनकर सुनैना मुस्कुराते हुए बोली,,,)

सीधे-सीधे यह क्यों नहीं कहता कि तू तो बड़ा हो गया लेकिन तेरे साथ साथ तेरा वह भी,,,(निगाहों से ही पजामे की तरफ इशारा करते हुए) बड़ा हो गया है,,,

(अपनी मां की यह बात सुनकर सूरज एकदम से झेंप गया उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी मां यह बात का जाएगी फिर भी बात को संभालते हुए सूरज बोला,,,,)





यह क्या कह रही हो मां,,,।

ठीक तो कह रही हूं इसीलिए तू शर्मा रहा है ना मेरे सामने पजामा उतारने में,,,,(सुनैना अपने मन में पक्का निर्धन कर चुकी थी कि अब वह पूरी तरह से बेशर्म बन जाएगी क्योंकि अपने बेटे के खुंटे को देखकर उसकी बुर बावली हो रही थी,,,, उसे इस बात का एहसास हो गया था कि आज की रात अगर कुछ नहीं हो पाया तो कभी कुछ नहीं हो पाएगा क्योंकि आज मौसम पूरी तरह से बहकने वाला ही था,,,, अपनी मां कि ईस तरह की बात सुनकर सूरज के तन बदन में गुदगुदी हो रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी मैं इतना खुलकर बातें कर रही थी लेकिन एहसास हो रहा था कि उसकी मां बेशर्मी दिख रही थी शायद वह भी मजा लेना चाहती थी अपनी प्यास को बुझाया चाहती थी क्योंकि सूरज इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि अगर मर्द के मोटे लंबे हथियार को औरत अपनी आंखों से देख ले तो उसे लेने के लिए तड़प होती है शायद इस समय उसकी मां के मन में यही चल रहा है और सूरज भी अपने मन में निर्धार कर लेता है कि वह भी पीछे हटने वाला नहीं है,,,,, इसलिए अपनी मां की बात सुनकर वह बोला,,,)





ऐसी बात नहीं है लेकिन फिर भी अब बड़ा हो गया हूं तो थोड़ा अजीब लगता है,,,,, लेकिन फिर भी अगर मैं ऐसा कर देता हूं तो शायद तुम्हें बड़ा अजीब लगे तुम सोचोगी की कितना बेशर्म है मेरे सामने अपने कपड़े उतार कर खड़ा हो गया,,,।

मैं भला क्यों कहूंगी ऐसा,,, तू तो मेरा बेटा है अंजान थोड़ी ना है कि मेरे सामने इस तरह की हरकत करेगा तो मैं तुझे भला बुरा कहूंगी,,,,।

(बातचीत के दौरान भी सुनैना की नजर बराबर अपने बेटे के लंड पर बनी हुई थी जो कि कुछ ज्यादा ही उत्तेजित होकर पजामा में ही हिल डुल रहा था,, और अपने बेटे के लंड को हिलता डुलता देखकर सुनैना का इनाम पूरी तरह से डगमगाने लगा था, अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए सुनैना बोली,,,) तू अपने कपड़े उतार सकता है और वैसे भी यहां कोई तो है नहीं जो देख सके कि तू मेरे सामने कपड़े उतार रहा है,,,

लेकिन सर्दी तो तुम्हें भी लग जाएगी तुम भी अपने कपड़े उतार दो,,,,।

पर मुझे तो शर्म आ रही है,,।

शर्म कैसी हम दोनों के सिवा यहां कोई है भी नहीं और कोई आने वाला भी नहीं है देख रही हो कितनी तेज तूफानी बारिश हो रही है,,,,।

लेकिन फिर भी तू मेरा बेटा है तेरे सामने कपड़े उतारूंगी तो नंगी हो जाऊंगी,,, आज तक ऐसा कभी कि नहीं हूं,,,।

जब मैं छोटा होऊंगा तब तो मेरे सामने कपड़े उतार कर नहाई होगी कपड़े बदली होगी,,,

तब की बात कुछ और थी,, लेकिन अब तो बड़ा हो गया है तेरे सामने ऐसा करने में मुझे शर्म आती है तब तू बच्चा था अब तु पूरा मर्द बन चुका है,,,‌।

(सूरज इस तरह की बातों में वक्त गंवाना नहीं चाहता था कपड़े उतारने में नानकुर करने का मतलब था कि हाथ में आया मौका गंवा देना और ऐसा सूरज बिल्कुल भी नहीं चाहता था इसलिए वह बात के रुख को फिर से पटरी पर लाते हुए बोला,,)





सच में उतार दूं मैं अपना पजामा,,,, खुजली तो ज्यादा हो रही है,,,,।

तू उतार दे रोका किसने मैं तो पहले से कह रही हूं कपड़े उतार दे,,,,।

(सूरज को अपनी मां की आंखों में वासना की चमक एकदम साफ दिखाई दे रही थी,,, वह जानता था कि उसकी मां उसके मोटे तगड़े खड़े लंड को देखना चाहती है और अगर ऐसा हो गया तो आज वह अपनी बुर में दिए बिना मन की भी नहीं क्योंकि औरत को सूरज अच्छी तरह से समझता था और वह जानते थे कि समय उसकी मां के मन में प्यास पूरी तरह से जगने लगी है,,,,,मौके की नजाकत को सुरज अच्छी तरह से समझता था,,, इसलिए तो वह ज्यादा ना नूकर नहीं कीया और उठकर खड़ा हो गया,,,,वह अपनी स्थिति को जानता था, अंजान नहीं था, उसे मालूम था कि उसका लंड खड़ा है और पजामे में तम्बू बनाया हुआ है,,,, लेकिन वह अपनी मां के सामने अपनी मनोदशा को स्पष्ट कर देना चाहता था,और ऐसा बिल्कुल भी नहीं था कि उसकी मनोदशा को उसकी मां ना समझती हो,,एक मर्द का लंड कब खड़ा होता है इस बात को वह अच्छी तरह से जानती थी,,, इसलिए तो सुरज का काम आसान होता जा रहा था,वह खुद अपनी मां के सामने नंगा हो जाना चाहता था लेकिन बहाना नहीं बना पा रहा था,,,पर उसके मन की बात को उसकी मां ही बोल दी थी इसलिए अब सुरज बिल्कुल भी देर नहीं करना चाहता था,,,, वह अपनी जगह पर उठकर खड़ा हो गया था और अपनी मां की तरफ देखे बिना ही अपने पजामा को नीचे सरकाने लगा था,,, यह देख कर सुनैना का दिल जोरो से धड़क रहा था क्योंकि आप उसकी आंखों के सामने उसके बेटे का नंगा खड़ा लंड दिखाई देने वाला था ऐसा नहीं था कि पहले वह कभी अपने बेटे के लंड को देखी नहीं थी,,,, एक बार उसे अवसर मिला था चुप कर देखने का और इस अवसर का फायदा उठाते हुए उसने अपने बेटे के मर्दाना अंग का दीदार भी की थी और उसे अपनी गांड के बीचों बीच रगड़ता हुआ महसूस भी की थी लेकिन अच्छे से कभी देखा नहीं पाई थी और ना ही कभी उसे हाथ से पकड़ पाई थी लेकिन आज ऐसा लग रहा था कि उसकी इच्छा पूरी हो जाएगी।





बरसात का जोर घटने का नाम नहीं ले रहा था अरे रहकर बादल की गड़गड़ाहट से वातावरण थोड़ा डरावना हो जा रहा था लेकिन इस समय खंडहर में मां बेटे दोनों अपनी ही धुन में खोए हुए थे,, वह दोनों बिल्कुल भी भूल चुके थे कुछ देर पहले वह लोग गोदाम में अपने घर के मुखिया को किसी और औरत के साथ रंगरलियां मनाते हुए देखे थे,,, सुनैना के तन बदन में भी काम भावना जाग गई थी जिसके चलते वह अपने पति की बेवफाई को भूल चुकी थी और इस समय उसका पूरा ध्यान अपने बेटे पर था,,,, वह बड़ी गौर से अपने बेटे को पजामा उतारता हुआ देख रही थी,,, इस बात से वह अचंभित थी कि उसके बेटे का पजामा सीधे-सीधे नीचे की तरफ नहीं सरक रहा था बल्कि ऊपर ही अटक गया था जैसे किसी खुंटे में अटक गया हो,,, क्योंकि सूरज का लंड सीधे-सीधा खंडहर की छत की तरफ मुंह उठाए खड़ा था जिससे पैजामा नीचे की तरफ सरक नहीं रहा था,,, इसलिए सूरज पजामा को आगे की तरफ से पकड़ कर उसे आगे की तरफ थोड़ा सा खींचा ताकि उसका मोटा तगड़ा लंड आराम से पजामा के बाहर हो सके लेकिन ऐसा करते समय सूरज की हालत खराब हो रही थी क्योंकि उसकी हरकत को उसकी मां देख रही थी अपनी आंखों से वह भी तकरीबन 1 फीट की दूरी पर बैठकर दोनों के बीच केवल मात्र जलती हुई आग ही थी,,,, सुनैना के लिए यह बेहद मदहोश कर देने वाला पल था,,,,, आश्चर्य से उसकी आंखें फटी की फटी रह जा रही थी उसकी दोनों टांगों के बीच झूलता हुआ उसका मोटा तगड़ा लंड सामान्य बिल्कुल भी नहीं था ऐसा लग रहा था कि जैसे गधे का लंड झूल रहा हो यह देखकर तो सुनैना की बुर पानी छोड़ने लगी। और धीरे-धीरे सूरज अपने पजामा को अपने बदन से अलग कर दिया और अपनी मां की आंखों के सामने पूरी तरह से नंगा हो गया,,,, अपनी मां की तरफ देखने लगा उसकी मां उसकी दोनों टांगों के बीच उसके हथियार को देख रही थी यह देखकर सूरज का दिल खुशी से झूम रहा था क्योंकि वह औरत के मन को अच्छी तरह से समझता था वह जानता था कि उसकी मां इस समय क्या सोच रही है क्योंकि इतना मोटा तगड़ा लंड उसने अपनी जिंदगी में कभी अपनी बुर में नहीं ली थी,,, वह अपनी मां की मनोदशा को अच्छी तरह से समझ रहा था वह जानता था कि उसकी मां यही सोच रही कि जब उसे अपने पति के लंड से इतना मजा आता था तो उसके बेटे का लंड उसके पति से और भी ज्यादा लंबा और मोटा है अगर वह अपनी बुर मे लेगी तो उसे कितना मजा आएगा,,,, और यही सच भी था। बातचीत को तो आगे बढ़ाना ही था ऐसे हालत में सूरज को कुछ सुझ नहीं रहा था कि वह क्या बोले और सुनैना तो अपने बेटे के मर्दाना हमको देखकर बावली हो गई थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या बोलना चाहिए इसलिए वह अपने बेटे से बोल पड़ी।





हाय दैया यह क्या है रे,,,,,।

क्या-क्या है,,,?

अरे यह क्या है तेरे पास जब तू छोटा था तब तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं था,,,,।

लेकिन मैं अब बड़ा हो गया हूं ना मां,,,।

तू तो बड़ा हो गया है लेकिन तेरे साथ-साथ यह भी कुछ ज्यादा ही बड़ा हो गया है,,,,।

(अपनी मां की बातें सूरज को मदहोश कर रही थी एक औरत के मुंह से एक मर्दाना लंड के बारे में तारीफ सुनना भला कौन से मर्द को पसंद नहीं होगा और जब औरत अपने मुंह से लंड की तारीफ कर दे तो मर्द के लिए, इससे बड़ी बात क्या हो सकती है वह तो साथ ही आसमान पर पहुंच जाता है औरत के मुझे अपनी मर्दाना अंग की तारीफ सुनकर और इस समय सूरज का भी यही हाल था वह अपनी मां की बात सुनकर शर्मा रहा था लेकिन उसकी मां की आंखों में वासना भर चुकी थी अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेने की तड़प बढ़ चुकी थी,,,, माहौल भी कुछ ऐसा ही था दस्तूर भी था मां बेटे कभी सोचा नहीं थी कि उन दोनों को कभी इस तरह से खंडहर में रुकना पड़ेगा,,, तूफानी बारिश बालों की गड़गड़ाहट रात का अंधेरा पूरी तरह से सन्नाटा और वह भी गांव के बहुत दूर ऐसे माहौल में भला एक जवान औरत और एक जवान लड़का कैसे ना बहक जाए,,,, अपनी मां की बात सुनकर सूरज सिर्फ इतना ही बोला।)





मुझे क्या मालूम मेरे पास तो ऐसा ही है मुझे भी बड़े जोरों की पेशाब लगी है रुको पेशाब करके आता हूं,,,,,(सूरज अब बिल्कुल भी अपनी मां के सामने शर्मा नहीं रहा था वह पूरी तरह से नंगा था वह नंगा ही उसी जगह पर गया जहां पर उसकी मां बैठकर पेशाब कर रही थी और वहीं पर खड़ा होकर पेशाब करने लगा साथ ही लंड को अपने हाथ में पकड़ कर हिला रहा था पेशाब करने के लिए,,,, मर्द की तरफ से पेशाब करने का यह औपचारिक और सहज तरीका होता है लेकिन एक औरत के लिए मर्द का यही तरीका बेहद उन्मादित कर देने वाला हो जाता है,,, और इस समय सुनैना के लिए यह पल बेहद उत्तेजना से भरा हुआ था अपने आप को वह बिल्कुल भी काबू में नहीं कर पा रही थी सूरज भी ऐसी जगह खड़ा होकर पेशाब कर रहा था जहां से उसकी हर हर उसकी मां की आंखों के सामने दिखाई दे रही थी ऊपर नीचे हिलता हुआ उसका लंड बेहद भयानक लग रहा था वह सोचकर ही शहर जा रही थी कि वाकई में जब उसकी बुर में जाएगा तो उसकी बुर को तो ककड़ी की तरह चीरता चला जाएगा,,,, यह सोचकर ही उसकी बुर फूल रही थी पिचक रही थी,,,। यह देखने के लिए कि उसकी मां उसकी तरफ देख रही है कि नहीं इसलिए सूरज अपनी मां की तरफ देखने लगा तो देखा कि वह उसकी तरफ ही देख रही थी दोनों की नजर आपस में टकराई और शर्म के मारे सुनेना अपनी नजरों को नीचे झुका ली,,,, लेकिन वह पूरी तरह से वासना ग्रस्त हो चुकी थी मदहोश हो चुकी थी वह अपने आप में बिल्कुल भी नहीं थी,,,, कुछ देर पहले ही बहुत अपने पति के द्वारा संभोग का दृश्य देख चुकी थी अपनी पति की बेवफाई देख चुकी थी और एक औरत का रंडीपन देख चुकी थी,,,, उसकी मदहोशी अभी पूरी तरह से उसके जेहन से गई नहीं थी,,, वह खुद पुरुष संसर्ग के लिए तड़प रही थी कि उसके बेटे का मोटा तगड़ा हथियार देखकर उसकी रही सही मर्यादा की डोर उसे टूटती हुई नजर आने लगी,,,, उसका बेटा पेशाब कर रहा था इस दौरान उठ कर खड़ी हो गई और अपने बेटे की तरफ देखे बिना ही बोली,,।)





मुझे भी साड़ी उतार देना चाहिए क्योंकि मुझे भी खुजली जैसा महसूस हो रहा है,,(ऐसा कहते हुए वह अपनी साड़ी को अपने बदन से अलग कर ली और उसे सूखने के लिए एक अच्छी सी जगह ढूंढने लगी,,,,, इसलिए वह अपने बेटे की तरफ आ गई और वही पड़ी दो लकड़ी को उठा ली,,,, उसका बेटा अभी भी हाथ में लंड पकड़े पेशाब कर रहा था और अपनी मां को देख रहा था,,,,,, सामने की दीवार में छोटे-छोटे बहुत सारी दरें थी और सुनैना दोनों लड़कियों को अलग-अलग दरार में डालकर साड़ी को उसे पर फैला दी ताकि सुबह तक साड़ी आराम से सुख सके यह देखकर सूरज बोल पड़ा,,,)

यह तुमने बहुत अच्छा की जरा मेरा भी कुर्ता और पैजामा उसे पर डाल देना तो ताकि सुबह तक कपड़े सूख जाए तो यहां से जाने में आराम रहेगा,,,,,,।

ठीक है,,,(एक नजर अपने बेटे पर डालकर वह जमीन पर गिरे हुए अपने बेटे के कपड़े को हाथ से उठा ली और उस पर लगी धूल मिट्टी को झटकने लगी इस दौरान सूरज की नजर अपनी मां की भरी हुई जवानी पर थी जो की भीग जाने पर और भी ज्यादा खिल उठी थी,,,, बरसात के पानी में भीगा हुआ उसका पेटिकोट उसकी गदराई गांड से चिपका हुआ था जिसे देखकर सूरज की हालत खराब हो रही थी,,,, सूरज अपनी मां की भारी भरकम गोलाकार गांड को देख कर अपने लंड को उत्तेजना में हिला रहा था। और सुनैना कपड़े को सूखने के लिए अपनी साड़ी पर डाल रही थी,,,, खंडहर के अंदर का माहौल तूफानी बारिश में जितना भयानक होता था आज पैसा बिल्कुल भी नहीं था मां बेटे की जुगलबंदी के कारण खंडहर का माहौल पूरी तरह से मादकता से भर चुका था,,, सुनैना की गर्म जवानी वातावरण की ठंडक को गर्माहट में बदल दे रही थी। सुनैना सूखने के लिए कपड़े डाल रही थी और सूरज अपनी मां की भरी हुई जवानी को देखकर पेशाब करते हुए अपने लंड को हिला रहा था,, यह सब सुनैना चोर नजरों से देख रही थी अपने बेटे की हरकत देखकर उसके टांगों के बीच की पतली दरार में हलचल मचने लगी थी,,, हालांकि अभी भी बहुत बाहर की तरफ मुंह करके खड़ा था लेकिन उसकी नजर अपनी मां पर थी ऐसे में इस समय सुनैना को उसके बेटे का लंड तो नहीं दिख रहा था लेकिन उसके हाथ के हरकत से पता चल रहा था कि वह क्या कर रहा है,,, यह सब सुनैना के लिए असहनीय होता जा रहा था, इस समय वह अपने तनबदन में उत्तेजना का चरम अनुभव कर रहीं थीं ।तब तक सुरज पेशाब कर चुका था,, और सुनैना भी कपड़े सूखने के लिए डाल दी थी,, पेशाब करने के बाद सूरज अपनी मां की तरफ घूम गया उसका लंड अभी भी पूरी तरह से अपनी औकात में खड़ा था सुनैना भी कपड़े डालने के बाद अपने बेटे की तरफ घूम गई थी और उसकी नजर सूरज के मोटे तगड़े लंड पर चली गई थी,,, सुनैना की हालत खराब होती चली जा रही थी उसका धैर्य जवाब दे रहा था उसे एहसास हो गया था कि किसी भी वक्त मां बेटे का पवित्र रिश्ता तार तार हो सकता है। क्योंकि अगर किसी और जगह पर होते तो शायद सुनैना वहां से हटकर अपने आप को संभाल सकती थी। लेकिन इस तूफानी बारिश में और इस खंडहर में अभी पूरी रात गुजर रहा था अभी तो आधी रात का समय भी नहीं गुजरा था इसलिए सुनैना को एहसास हो रहा था कि आज की रात उन दोनों के बीच जरूर कुछ ना कुछ होने वाला है अपने बेटे के लंड की तरफ देखते हुए वह बोली।)
 
हाय दइया यह अभी तक खड़ा है,,,,, ऐसा क्यों हो रहा है रे,,,।

मैं क्या जानू यह तो ऐसा ही रहता है भीगने के बाद इसी तरह से खड़ा हो जाता है,,,,।

लेकिन इसे देख कर तो किसी की भी हालत खराब हो जाए,,,।

मैं यह सब दिखाता थोड़ी ना हुं।

दिखता नहीं है लेकिन इस समय तो दिखा ही रहा है ना,,,।

तो क्या तुम्हारी हालत खराब हो रही है,,,।





हो तो रही है,,,(अपने बेटे के लंड की तरफ देखते हुए गहरी सांस लेते हुए वह बोली)

ऐसा क्यों,,,?

अब मुझे क्या पता लेकिन न जाने क्या हो रहा है,,,। यह शांत कैसे होगा,,,?(सुनैना का मन बहक रहा था जानबूझकर वह अपने बेटे से इस तरह की बातें कर रही थी और सूरज भी अपनी मां की इस तरह की बातें सुनकर मदहोश हो रहा था वह समझ सकता था अपनी मां की हालत को,,, क्योंकि वह औरत के मन को समझने लगा था ऐसी हालत में औरत के मन में क्या चल रहा है वह क्या सोच रही है वह क्या चाहती है यह सब कुछ सूरज को एहसास होने लगता था और इस समय वह अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां को क्या चाहिए था इसलिए तो अपनी मां के इस सवाल पर एकदम से बेशर्म होता हुआ वह बोला,,,)

अब तो मुझे बताने में भी शर्म आ रही है लेकिन बताना भी जरूरी है,,, मैं बहुत कोशिश करता हूं लेकिन यह शांत नहीं होता इसे शांत करने के लिए जोर-जोर से हिलाना पड़ता है,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुनैना मुस्कुराने लगी उसकी मुस्कुराहट उसके मन की भावना को प्रकट कर रहे थे उसकी मुस्कुराहट इस बात को जता रही थी कि वह क्या चाहती है उसे इस बात से बिल्कुल भी ऐतराज नहीं था कि उसका बेटा उसकी आंखों के सामने किस अवस्था में खड़ा है और किस तरह की बातें कर रहा है क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा जरूर जो कुछ भी कह रहा है वह करता ही होगा उसकी हरकत से उसे अंदाजा लग ही गया था इसलिए वह अपने बेटे की बात सुनकर एकदम सहज होते हुए बोली)





इसका मतलब है कि तू बड़ा होगया है,,,(ऐसा कहते हुए वह अपने बेटे के करीब आने लगी सूरज का दिल जोरों से धड़कने लगा मौके की नजाकत को सूरज अच्छी तरह से समझ रहा था और अगले ही पल उसकी मां ने जो किया उसके बारे में उसने सोचा तो बिल्कुल भी नहीं था लेकिन उसे उम्मीद थी कि एक ना एक दिन ऐसा जरूर होगा। वह एकदम से मस्त हो गया,, वह एकदम से अपनी सांस को अंदर की तरफ खींचा और मदहोश होता हुआ उसे बाहर छोड़ने लगा क्योंकि इस समय उसकी मां ने उसके टनटनाए हुए लंड को अपने हाथ से पकड़ ली थी,,,, उसकी गर्माहट सुनैना को मदहोश कर रही थी। इसकी मोटाई उसकी बुर के पानी को पिघला रही थी। वह कभी सोची भी नहीं थी कि किसी का लंड इतना मोटा और तगड़ा हो सकता है,,,, सुनैना की मुस्कुराहट लंड की गर्म हाथ पकड़ मदहोशी में बदल रही थी उसके होठों का रंग बदल रहा था चेहरे का रंग सुर्ख हो रहा था,,,, उत्तेजना से सोते हुए गले को अपने थूक से गिला करते हुए वाहन धीरे-धीरे अपने हाथ को लंड पर चला रही थी, धीरे-धीरे अपने ही बेटे के लंठ को मुठिया रही थी अब उसका दिमाग सुनन पड़ता चला जा रहा था अच्छे बुरे की पहचान दिमाग से मिटती चली जा रही थी क्या सही है क्या गलत इसका फैसला अब उसका दिमाग नहीं कर पा रहा था क्योंकि वासना पूरी तरह से उसके दिमाग पर कब्जा जमा चुकी थी अपनी मां की हरकत से मस्त होकर सूरज अपनी आंखों को बंद करके गहरी गहरी सांस ले रहा था। ऐसा नहीं था कि यह सब उसके साथ पहली बार हो रहा था कहीं और तो के साथ वह मजा ले चुका था लेकिन आज जो मजा उसे अपनी मां के हाथ से मिल रहा था ऐसा मजा उसे पहले कभी नहीं मिला था इसलिए तो वह मदहोशी के चरम पर था।

सुनैना इस माहौल में पूरी तरह से खो चुकी थी उसके बदन





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में उत्तेजना की चिंगारी फूट रही थी तेजा ना और वासना से उसकी संपूर्ण बदन तप रहा था,,,, अपने बेटे की नग्नता देख कर और उसके मर्दाना अंग को अपने हाथ में लेकर वह बावली होती चली जा रही थी इस समय अपने बेटे के नंगे बदन के सामने वह पेटिकोट और ब्लाउज में थी एक संस्कारी औरत का एक मर्द के सामने ब्लाउज और पेटीकोट में खड़े होना भी नग्नता से कम नहीं था,,, इस समय वह अपने बेटे के सामने पूरी तरह से बेशर्म औरत बन चुकी थी,,,, गहरी सांस लेता हुआ मादक स्वर में सूरज बोला।

यह क्या कर रही हो मां,,,,,।

मुझे खुद समझ में नहीं आ रहा है कि मैं क्या कर रही हूं मैं तो तेरे पिताजी के बारे में सोच रही हूं कि मेरे होते हुए वह दूसरी औरत के साथ मजा लूट रहे हैं ऐसे में मुझे क्या करना चाहिए,,,,?(अपने बेटे के लंड को धीरे-धीरे मुठीयाते हुए वह बोली,,,)

तुम्हें भी वही करना चाहिए जो पिताजी कर रहे हैं क्योंकि अगर तुम ऐसा नहीं करोगी तो बाकी का जीवन दुख में गुजरने वाला है पछतावा में गुजरने वाला है उम्र से पहले तुम बूढी हो जाओगी लेकिन इस बात का फर्क पिताजी को बिल्कुल भी नहीं पड़ेगा क्योंकि वह तो दूसरी औरत के साथ मजा ले रहे हैं,,, और अगर तुम ऐसा नहीं करोगी तो तुम्हारा जीवन दुख में गुजरने वाला है बार-बार यही सोचोगी की मेरा पति मेरे साथ ऐसा क्यों किया बल्कि अगर तुम भी अपने पति की तरह ही जिंदगी का मजा लोगी तो उसे भी एक सबक मिलेगा,,, की उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था,,, तुम्हारी जवानी भी बरकरार रहेगी तुम अभी पूरी तरह से जवान हो बल्कि इस उम्र में तो और भी ज्यादा निखर जाओगी,,,,,,(आंखों को बंद करके सूरज अपनी मां की हरकत का मजा ले रहा था और अपने बेटे किस तरह की बातें को सुनकर सुनैना मन ही मन प्रसन्न हो रही थी क्योंकि उसका बेटा उसे राह दिखा रहा था उसे जवान रहने का तरीका बता रहा था और यह बता रहा था कि अगर वह अपने पति की तरह मजा लेगी तो जीवन का हर सुख प्राप्त कर पाएगी और अगर ऐसा नहीं करती है तो जिंदगी भर दुखी रहेगी और ऐसा हुआ बिल्कुल भी नहीं चाहती थी वह भी खुश रहना चाहती थी जवान रहना चाहती थी जिंदगी का हर मजा लेना चाहती थी क्योंकि उसके अरमान अभी भी जगे हुए थे भावनाएं जागरूक थे एक जवान लड़की की तरह उसके मन में भी बहुत सारे ख्वाब थे जिसे वह पूरा करना चाहती थी अपने पति से दूर रहकर जब उसे नहीं मालूम था कि उसका पति उस बेवफा कर रहा है तब भी उसके तन बदन में एक अजीब सी हलचल होती थी और वह पुरुष संसर्ग के लिए तड़प उठती थी,,,, अपने बेटे की बातें सुनकर उसे एहसास हो रहा था कि अभी भी उसकी भावनाएं उसके सपने उड़ान भरने के लिए तैयार थे,, अगर वह सच में अपने पति की करतुतो से दुखी होने लगेगी तो उसके भी पंख कट जाएंगे और वह जीवन के किसी कोने में सिर्फ सुबकती रह जाएगी,,, सुनैना की सांस ऊपर नीचे हो रही थी ठंडा मौसम में भी उसके माथे से पसीना टपक रहा था जल्दी लकड़ी में तपन उतनी नहीं थी जितना उसकी जवानी तप रही थी,,,, उत्तेजित और मादकता भरे स्वर में वह अपने बेटे से बोली,,,)





लेकिन क्या यह सही होगा,,,?

(अपनी मां के सवाल पर सूरज अपनी आंखों को खोल दिया था क्योंकि उसका यह पूछना ही उसका समर्पण होने के लिए तैयारी दर्शा रहा था अंदर ही अंदर सूरज बहुत खुश हो रहा था और अपनी मां से बोला)

क्यों सही नहीं होगा यह सब किसी को पता चलने वाला थोड़ी ना है ना तो मैं किसी को बताने वाला हूं ना तुम किसी को बताओगी इस तूफानी बारिश में खंडहर के अंदर हम दोनों के बीच क्या हुआ यह भला किसी को कैसे पता चल पाएगा,,,, तुम्हें मेरी जरूरत है मुझे तुम्हारी जरूरत है हम दोनों एक दूसरे की जरूरत को पूरा करेंगे तुम औरत और मैं एक मर्द औरत को हमेशा मर्द की जरूरत पड़ती है और मर्द को हमेशा औरत के साथ की जरूरत पड़ती है अपनी ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए,,,, तुम्हारे चेहरे का भाव बता रहा है कि इस समय तुम्हें मेरी कितनी जरूरत है और मेरी हालत को तो तुम समझ सकती हो मेरी हालत तुमसे छुपी नहीं है हम दोनों को एक होना ही पड़ेगा पिताजी को करारा जवाब देने के लिए हम दोनों का एक होना बेहद जरूरी है,, मेरे से अपनी जरूरत पूरी करके तुम्हें पिताजी की जरूरत की कमी महसूस नहीं होगी बल्कि पिताजी को भुलने में तुम्हें और भी ज्यादा मदद मिलेगी,,, मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर तुम इस बात का एहसास हो गया होगा कि मेरे में और पिताजी में जमीन आसमान का फर्क है तो अच्छी तरह से जानती होगी कि पिताजी का लंड कैसा है क्योंकि तुम ही अपने मुंह से बोली कि ऐसा किसी का भला कैसे हो सकता है,,, मेरे लंड की मोटाई देखो लंबाई देखो तुम्हारे हाथ में ठीक तरह से आ भी नहीं रहा है तुम ही सोचो मेरा जवान लंड जब तुम्हारी बुर में जाएगा तो तुम्हें कितना मजा देगा तुम पिताजी को एकदम से भूल जाओगी,,,(सूरज पूरी तरह से बेशरम बनाकर अपनी मां से अश्लील बातें कर रहा था अपने लंड के बारे में बातें कर रहा था उसकी बुर के बारे में बातें कर रहा था क्योंकि वह जानता था कि बेशर्म बनने में ही मजा है क्योंकि इस समय माहौल के हिसाब से चरित्रवान बनने से अच्छा है की बेशरम बनाकर जीवन का मजा लिया जाए मौके की नजाकत को सूरज अच्छी तरह से समझता था और उसकी इस तरह की बातें सुनैना की तरह बदल में आग लग रही थी उसके मुट्ठी का कसाव सूरज के लंड पर बढ़ता जा रहा था,,, जो इस बात को दर्शा रहा था कि उसकी मां कितनी मदहोश हो रही थी उत्तेजित हो रही थी उसे यह सब अच्छा लग रहा था अपने बेटे की बात सुनकर मन ही मन में प्रसन्न हो रही थी लेकिन फिर भी शंका जताते हुए वह अपने बेटे से बोली,,)





अगर किसी को पता चल गया तो,,,,

किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा,,, इस बारे में सिर्फ मैं जानता हूं और तुम जानती हो हम दोनों एक दूसरे की राजदार है और सबसे बड़ी बात यह है कि हम दोनों मां बेटे हैं इसलिए इस तरह की बातें किसी को कहेंगे भी नहीं और जिंदगी भर इसी तरह से मजा लेते रहेंगे,,,(सूरज अपनी बातों से अपनी मां को बहकाने में पूरी तरह से कामयाब हो गया था,,, सुनैना का चेहरा बता रहा था कि वह समर्पण के लिए पूरी तरह से तैयार थी सूरज अपनी मां के कोमल हाथों को अपने कड़क लंड पर महसूस करके उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच चुका था अब वह बातों में अपना वक्त जाया नहीं करना चाहता था इसलिए वह धीरे-धीरे अपने होठो को अपनी मां के रसीले होठों के करीब ले जाने लगा अपने बेटे की हरकत पर सुनैना का बदन कसमसा रहा था उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,,, सुनैना को समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपने होठों को पीछे खींच लिया इस पल का मजा ले वह अपने मन में यही सोच रही थी कि तब तक सूरज अपनी प्यास होठों को अपनी मां की तपते हुए लाल-लाल होठों पर रख दिया,,, सुनैना का बदन एकदम से चरमरा गया वह एकदम से मदहोश हो गई,,, सूरज उसके लाल लाल होठों को अपने मुंह में लेकर चूसना चाहता था कि तब तक शर्मा के मारे सुनील अपनी होठों को पीछे खींचकर और बड़ी-बड़ी आंखों से अपने बेटे की तरफ देखने लगी सूरज भी गहरी सांस लेता हुआ अपनी मां के खूबसूरत चेहरे को देख रहा था,,,, हालांकि इस समय सुनैना का हाथ सूरज के लंड पर टिका हुआ था,,, सूरज एक बार फिर से कोशिश किया इस बार उसकी कोशिश को देखकर सुनैना के बदन में मदहोशी का रस पूरी तरह से घुलने लगा और वह खुद ही अपने होठों को थोड़ा सा आगे बढ़ा दे और सूरज अगले ही पल फिर से अपनी मां के लाल लाल होठों पर अपने होंठ रख दिया,,,, पल भर के लिए फिर से सुनैना शर्म के मारे अपने होठों को वापस पीछे खींच ली लेकिन सूरज को समझ पाता इससे पहले ही वह खुद अपने होठों को फिर से अपने बेटे के होठों से सटा दी वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी मस्त हो चुकी थी सूरज भी पागलों की तरह अपनी मां के लाल लाल होठों पर रस पीना शुरू कर दिया इस बार सुनैना अपने होठों को बिल्कुल भी पीछे करने की कोशिश नहीं की बल्कि वह तो अपने बेटे के साथ देते हुए अपने होठों को खोलकर एक दूसरे की जुबान को एक दूसरे के मुंह में अंदर बाहर करते हुए मजा लेने लगे चुंबन का आनंद लेते हुए सूरज अपना एक हाथ आगे बढ़कर ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की चूची को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया अपने बेटे की हरकत से सुनैना के बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी,,,,।





सूरज बिल्कुल भी पीछे नहीं हटना चाहता था क्योंकि इसी मौके की तो वह तलाश में था। वह लगातार अपने हाथ से अपनी मां की चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से दबा रहा था उसकी गोलाकार चुचीया अपने आकार से थोड़ा और ज्यादा बढ़ चुकी थी,,,, आखिरकार सूरज का सपना सच हो रहा था अपनी मां की चूचियों को वह देखकर उत्तेजित होना सीखा था उसके नंगे बदन को देखकर अपने मर्दाना अंग में कड़कपन का एहसास महसूस किया था और आज वह दिन आ गया था जब अपने सपने को पूरा करने जा रहा था ब्लाउज के ऊपर से भी अपनी मां की चूची दबाने में उसे इतना आनंद आ रहा था कि पूछो मत सुनैना मदहोश हो रही थी अपने बेटे की हरकत से मदहोशी उसकी आंखों में छा रही थी इस दौरान लगातार चुंबन का आनंद लेते हुए अपने बेटे का लंड को मुठिया रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके बेटे का लंड कुछ और ज्यादा मोटा और कड़क हो गया था,,,, इस समय सुनैना तीनों तरफ से मजा ले रही थी चुंबन का स्तन मर्दन का और लंडमर्दन का तीनों हरकत एक साथ जारी था इस बीच उसकी बुर से लगातार मदन रस का बहाव हो रहा था वह अपनी कामुक भावनाओं पर बिल्कुल भी काु नहीं कर पा रही थी,,, सूरज की सांसों पर नीचे हो रही थी ब्लाउज के ऊपर से भी उसे अपनी मां की चूची दबाने में इतना मजा आ रहा था कि पूछो मत हालांकि आज तक वह न जाने कितनी चूचियों से पूरा मजा ले चुका था लेकिन अपनी मां की चूची से उसका मजा बढ़ता ही जा रहा था,,, धीरे से अपने होठों को अपनी मां के लाल लाल होठों से अलग करता हुआ वह बोला,,,,।

मुझे लगता है कि अब तुम्हें ब्लाउज उतार देना चाहिए क्योंकि मुझे बहुत मजा आ रहा है तुम्हारी चूची दबाकर मैं तुम्हारी नंगी चूचियों को देखना चाहता हूं इसकी खूबसूरती को देखना चाहता हूं,,,,।





(जवाब में सुनैना एकदम खामोशी एकदम शांत गहरी गहरी सांस ले रही थी शर्म के मारे अपनी आंखों को बंद कर ली थी,,,, लेकिन इस दौरान भी उसका हाथ सूरज के लंड पर बराबर टिका हुआ था वह सुबह बात से हैरान भी थी कि अभी तक उसके बेटे के लंड से पानी नहीं निकला था वरना उसके पति का होता तो अब तक निकल गया होता,,,, अपने मन की दशा बताते हुए सूरज अपनी मां की तरफ से जवाब का इंतजार किए बिना ही एकदम से उसके कंधों को पकड़ कर दूसरी तरफ घुमा दिया सुन ना एकदम हैरान हो गई लेकिन जब तक वह कुछ समझ पाते हैं इससे पहले ही वह अपने बेटे की छाती से एकदम से चिपक गई थी,,,, सुनैना की पीठ सूरज की छाती से सटा चुकी थी,,,, और बड़ी फुर्ती से सूरज अपने दोनों हाथों को अपनी मां की चूची पर रखकर फिर से ब्लाउज के ऊपर से उसे दबाना शुरू कर दिया लेकिन आप सुनैना की हालत एकदम खराब होने लगी थी क्योंकि पेटिकोट के ऊपर से सूरज का मोटा तगड़ा लंड उसकी गांड की गहराई नापने के लिए मचल रहा था उसके नितंबों से रगड़ खा रहा था एक तरह से जूझ रहा था दरार के अंदर प्रवेश करने के लिए,,, उसका बस चलता तो पेटिकोट फाड़ कर अंदर घुस जाता लेकिन सुनैना की गांड की दरार और उसके लंड के बीच सुनैना की पेटी कोट ही थी जो उसे रोके हुई थी,,, सूरज लगातार ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की चूची का मर्दन कर रहा था दबा रहा था मसल रहा था उत्तेजना के मारे सूरज बड़ी जोर-जोर से अपनी मां की चूची को दबा रहा था जिससे सुनैना के मुंह से सिसकारी की आवाज फूट रही थी,,,, सुनैना की मदहोशी सूरज के जोश को और ज्यादा पढ़ा रही थी सूरज पागलों की तरह अपनी मां के गर्दन पर अपने होंठ से चुंबन करते हुए आगे बढ़ता चला जा रहा था,,,,,, इस बीच वहां अपनी कमर घुमा घुमा कर अपनी मां की गांड पर अपने लंड के होने का एहसास दिला रहा था सुनैना की पूरी तरह से मत हो चुकी थी वह भी अपने हाथ को पीछे की तरफ लाकर अपने बेटे के लंड को पकड़कर मुठिया रही थी।





रात का सन्नाटा तूफानी बारिश में खो गया था तेज हवाएं लगातार शोर मचा रही थी बादलों की गड़गड़ाहट से मौसम पूरी तरह से भयानक हो गया था लेकिन खंडहर के अंदर मां बेटे पूरी तरह से एक दूसरे में खो चुके थे उन्हें अब इस माहौल का डर बिल्कुल भी नहीं लग रहा था खंडहर जैसे पुराने मकान में मां बेटे दोनों एक दूसरे के नंगे बदन को देख सकते थे हालांकि इस समय संपूर्ण रूप से नंगा केवल सूरज ही था और सुनैना अर्धनग्न अवस्था में थी फिर भी क़यामत लग रही थी,,,,,।

ओहह मां मुझे तो विश्वास नहीं हो रहा है कि तुम मेरी बाहों में हो,,,,सहह क्या मैं कोई सपना देख रहा हूं कि यह सब हकीकत है,,,,,।

सब कुछ हकीकत है मेरे बेटे,,,,सहहह आहहहहहह बड़ा जोर-जोर से दबा रहा है तु,,,

क्यों अच्छा नहीं लग रहा है क्या,,?

अच्छा तो बहुत लग रहा है लेकिन तू इतनी जोर से दबाता है कि दर्द भी होने लगता है,,,।

इस तरह के दर्द में ही तो असली मजा है,,, मां,,,,,ओहहहहह मुझे इतना मजा आ रहा है कि पूछो मत,,,,सहहहहह आहहहहहहहह ,,,,, तुम भी तो मेरे लंड को जोर जोर से दबा रही हो क्या सच में पिताजी का इतना बड़ा और मोटा नहीं था,,,।





बिल्कुल नहीं था तभी तो न जाने क्या हो रहा है मुझे कि तेरे लंड को पकड़े बिना मुझे चैन नहीं मिल रहा है,,,,(सुनैना इस तरह के सवाल जवाब से शर्म से लाल हो चुकी थी इसलिए अपनी आंखों को बंद करके अपने बेटे के हर सवाल का जवाब दे रही थी उसे भी सवाल जवाब से मजा आ रहा था लेकिन शर्म से उसकी हालत पूरी तरह से खराब थी,,, अपनी मां की बात सुनकर सूरज बोला,)

अभी तो यह मजा और भी ज्यादा बढ़ने वाला है जब भी तुम्हारी बुर में जाएगा तब तुम्हें कितना मजा आएगा,,,।

(अपने बेटे की यह बात सुनकर वह शर्म से पानी पानी हो गई उसे उम्मीद नहीं थी कि उसका बेटा इतना बेशर्मी भरी बातें उसे करने लगेगा खुले शब्दों में उसके सामने लंड और बुर जैसे शब्दों का प्रयोग करेगा वैसे भी इसमें आश्चार्य की कोई बात नहीं थी क्योंकि दोनों के बीच अब मां बेटे का रिश्ता धीरे-धीरे खत्म हो रहा था और एक मर्द और औरत के रिस्ते की शुरुआत हो रही थी जिसमें यह सब आम बात थी और भले ही सुनैना को इस समय थोड़ा अजीब लग रहा था लेकिन अपने बेटे के मुंह से इस तरह के शब्दों को सुनकर उसे आनंद भी आ रहा था,,,,, सूरज लगातार अपनी मां के गले पर चुंबनों की बौछार करते हुए उसकी उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ा रहा था और अब धीरे-धीरे अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलने शुरू कर दिया था आने वाले पाल के बारे में सोचकर सुनैना की बुर पानी पानी हो रही थी उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी सूरज अपनी कमर को अपनी मां की कमर से पूरी तरह से सटाया हुआ था पीछे से वह लगातार अपनी मां को चुदासपन का एहसास दिला रहा था,,,, देखते देखते सूरज अपनी मां के ब्लाउज के सारे बटन को खोल दिया और ब्लाउज के दोनों पट को पकड़ कर पीछे की तरफ खींचते हुए उसके हाथ से ब्लाउज को अलग कर दिया और नीचे जमीन पर फेंक दिया कमर के ऊपर वह नंगी हो चुकी थी उसकी खरबूजा जैसी नंगी चूचियां सूरज की उत्तेजना को ज्यादा बढ़ा रही थी सूरज ज्यादा देर नहीं सह पाया और अपनी मां की नंगी चूचियों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया और मदहोश होता हुआ बोला,,,)

बाप रे मैं तो सोचा भी नहीं था की चूची दबाने में इतना मजा आता होगा,,,,सहहह मैं तो पागल हो रहा हूं सच में तुम्हारी चूचियां बहुत खूबसूरत है खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी चूचियां हाथ में लेते हैं मुझे इतना मजा आ रहा है कि पूछो मत,,,, पिताजी सच में पागल इंसान है जो इतनी खूबसूरत औरत को छोड़कर बाजारु औरत के पीछे पड़े हैं,,,,,आहहहहहहहह कसम से तुम जैसी औरत अगर मिल जाए तो जिंदगी एकदम स्वर्ग बन जाए,,,,,ओहहहहह मैं तो पागल हो जाऊंगा,,,,(सूरज किस तरह की बातों को सुनकर सुनैना उत्तेजित हो रही थी लेकिन मन ही मनपसंद अभी हो रही थी क्योंकि उसका बेटा उसकी चूचियों की तारीफ कर रहा था और करता भी कैसे नहीं इस उम्र में भी उसकी चूची एकदम कसी हुई और कड़क थी बिल्कुल भी ढीलापन नहीं था,,,,,, ऐसा नहीं था कि इससे पहले सूरज चुचियों का मजा नहीं दिया था बहुत मजा ले चुका था लेकिन जो आज एहसास उसे हो रहा था अपनी मां की चूची से खेलने में ऐसा एहसास से पहले कभी नहीं हुआ था ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके दोनों हाथों में पूरा जहां सिमट आया हो,,,, सूरज की हरकत से सुनैना के मुंह से भी शिसकारी की आवाज निकालना शुरू हो गई थी।)

सहहहहह आहहहहहहहह ऊमममममममम,,,,ओहहहहह सूरज तू तो मुझे पागल कर देगा,,,,,,आहहहहहहहह ,,,,,।

(अपनी मां की मदहोशी भरी आवाज सुनकर सूरज एकदम से उसे फिर से कंधों से पकड़ कर दूसरी तरफ घुमा दिया और मां बेटे दोनों आमने-सामने हो गए सूरज प्यासी नजरों से अपनी मां की दोनों चूचियों की तरफ देखा और अपनी मां की आंखों में देखा तो वासना का तूफान नजर आ रहा था सूरज से सहन नहीं हो रहा था और वह एकदम से अपनी मां की कमर में हाथ डालकर उसे एकदम से अपनी तरफ खींच लिया और उसके खरबूजे जैसी चूचियों पर मुंह रखकर पीना शुरू कर दिया,,,,,, अपने बेटे की हरकत से सुनैना एकदम से मदहोश हो गई उसका बदन कसमसा रहा था सूरज अपनी मां की कमर में एक हाथ डालकर उसे अपने बदन से सटा दिया था उसका खड़ा लंड पेटिकोट के ऊपर से ही उसकी बुर पर दस्तक दे रहा था,,,, सूरज अपनी मां को संभालने का बिल्कुल भी मौका नहीं दे रहा था वह लगातार अपनी क्रिया को बढ़ाता चला जा रहा था, दाईं चूची को मुंह से निकालता तो बाईं चूची को मुंह में भरकर पीना शुरू कर देता,,,, सुनैना एकदम से समझ नहीं पा रही थी लेकिन जो मजा उसे उसका बेटा दे रहा था वह एकदम हैरान थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसका बेटा वाकई में इतना बड़ा हो गया था औरत को खुश करने का तरीका वह अच्छी तरह से जानता था। सूरज पागलों की तरह अपनी मां की चूचियों पर टूट पड़ा था कमर में हाथ डाले उसे अपने बदन से सटाकर छटपटाने का भी मौका नहीं दे रहा था,,, सूरज का लंड पेटिकोट के ऊपर इधर-उधर भाग रहा था और सूरज अपनी मां की बुर के मुख्य द्वार पर अपने लैंड का एहसास बराबर दीलाना चाहता था इसलिए अपने हाथ से पकड़ कर अपने लंड के सुपाडे को अपनी मां की बुर के मुहाने पर पेटिकोट के ऊपर से ही सटा कर उसे बराबर का एहसास दिला रहा था। अपने बेटे की हरकत से सुनैना मचल जा रही थी। सुनैना एहसास हो रहा था कि आज की रात उसके लिए बेहद हसीन और यादगार होने वाली है।)

सहहहहह ऊमममममममम ऊमममममममम अपनी मां की चूचियों को पीते हुए लगातार सूरज के मुंह से इस तरह की आवाज आ रही थी जिसे सुनकर सुनैना मस्त हो रही थी,,, लेकिन अब उसकी बुर में आग लगी हुई थी वह चाहती थी कि उसका बेटा आप उसकी बुर पर ध्यान दे जिसके लिए यह सब पाप उसे करना पड़ रहा था,,,, लेकिन वह सूरज को अपने मुंह से बोल नहीं सकती थी और जिस तरह से सूरज उसके बदन से खेल रहा था उसे आनंदित कर रहा था उसे पूरा यकीन था कि सूरज अच्छी तरह से जानता है कि कब क्या करना है लेकिन यह सब उसे कैसे पता चला कहां सीखा इस बारे में अभी उसके मन में ख्याल नहीं आ रहा था वह तो इस समय मस्ती के सागर में डूब चुकी थी,,, कुछ देर तक सूरज इसी तरह से अपनी मां की दोनों चूचियों से जी भर कर मजा लेता रहा,,,, और फिर चूचियों से मुंह हटाकर गहरी गहरी सांस लेता हुआ अपनी मां के खूबसूरत चेहरे की तरफ देखने लगा जो की जलती हुई आज की रोशनी में और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी सूरज से रहा नहीं किया और वह तुरंत अपनी मां के लाल लाल होठों पर अपने हाथ रखकर चुंबन करने लगा उसके होठों का रस पीने लगा सूरज की हर एक हरकत का सुनैना जी भर कर मजा ले रही थी और से इस बात से हैरानी भी हो रही थी कि अभी तक उसके बेटे का लंड बना हुआ था उसमें से पानी के पिचकारी नहीं निकली थी वरना दूसरा कोई होता तो न जाने कितनी बार झड़ चुका होता। चुंबन का आनंद लेने के बाद वह अपने होठों को अपनी मां के होठों से अलग किया और गहरी सांस लेता हुआ अपनी मां की तरफ देख कर बोला।

बताओ मां कैसा लग रहा है,,, मजा आ रहा है ना,,,(वह जानता था कि उसकी मां इस समय इस तरह के सवाल का जवाब देने से शर्मा रही है इसलिए खुद ही जवाब दे रहा था और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) तुम्हें इतना मजा दूंगा इतना सुख दूंगा कि तुम पिताजी को एकदम से भूल जाओगी अगर वह कभी तुम्हारे सामने आ भी गए तो तुम उन्हें पहचानने से इनकार कर दोगी इतनी ताकत तुममे में आ जाएगी और रही बात,,(अपने लंड को पकड़ कर हिलाते हुए) चुदाई की तो देखना पिताजी और मैं साथ में एक कमरे में रहेंगे तो तुम पिताजी के पास नहीं बल्कि मेरे पास आओगी मेरे बिस्तर पर आओगी मजा लेने के लिए,,,,,,(ऐसा कहते हुए सूरज अपनी मां को एकदम मदहोश करता हुआ धीरे से अपनी हथेली को अपनी मां की पेटिकोट के अंदर सरकाना शुरू कर दिया,,,, वैसे तो जिस तरह की बात वह कर रहा था एक मां के लिए अपने बेटे के मुंह से इस तरह की बात सुनना बेहद शर्मनाक था लेकिन इस समय हालात ही कुछ ऐसे बने हुए थे कि सुनैना को अपने बेटे के मुंह से यह सब सुनना बेहद अच्छा और रोचक लग रहा था,,,, और इस तरह की बात करते हुए उसकी हरकतें भी उसे मदहोश बना रही थी देखते ही देखते सूरज की हथेली सुनैना की कचोरी जैसी खुली हुई बुर पर पहुंच गई सूरज से एकदम मस्त हो गया उसकी बुर से लगातार मदन रस निकल रहा था जो कि एकदम चिपचिपा रस से भरा हुआ था,,,, उसे अपनी मां के मुंह से अपने सवाल का जवाब सुनना नहीं था क्योंकि वह जानता था कि एक बार उसके साथ हम बिस्तर होने के बाद उसकी मां उसकी मर्दाना ताकत की दीवानी हो जाएगी और फिर बिना कहे ही उसके कमरे के अंदर आकर अपनी प्यास बुझाएगी,,,, सूरज के हाथ तो ऐसा लग रहा था कि जैसे खजाना लग गया हो अपनी मां की कचोरी जैसी फुली हुई बुर पर अपनी हथेली रखकर वह जोर से अपनी हथेली में अपनी मां के खजाने को दबा लिया दबोच लिया सुनैना एकदम से सिहर उठी ,मदहोश हो गई मस्त हो गई उसकी आंखें अपने आप बंद हो गई और उसके चेहरे का रंग बदलने लगा,,,,, वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसका बेटा उसकी बुर को अपने हाथ में लेकर तब आएगा मसाले का उसके साथ खेलेगा लेकिन आज उसके सोच के विपरीत हो रहा था लेकिन जो कुछ भी हो रहा था इसमें उसकी भी रजामंदी थी,,,, सूरज खुद अपनी मां की बुर को अपनी हथेली में लेकर मस्त हो चुका था अपनी उत्तेजना को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था और अपनी उत्तेजना को काबू में करने के लिए वह तुरंत फिर से अपनी मां की चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया और बुरे को हथेली से मसलना शुरू कर दिया सुनैना के लिए तो संभलने का मौका भी नहीं था वह एकदम से मदहोश होकर निहाल हो गई थी उसके पैरों में कंपन हो रहा था वह गिरने वाली थी उसे अपनी उत्तेजना बर्दाश्त नहीं हो रही थी इसलिए वह अपने बेटे के कंधे का सहारा लेकर अपने आप को स्थिर करने की कोशिश करने लगी सूरज अपनी मां की स्थिति को समझ चुका था इसलिए तुरंत अपना एक हाथ उसकी कमर में डालकर अपने बदन से सता लिया और उसे संभालते हुए अपनी बीच वाली उंगली को अपनी मां की गुलाबी छेद में डाल दिया वह एकदम से उछल पड़ी वह कुछ बोल पाती से पहले ही सूरज अपनी मां की चूची पर से अपने मुंह को हटाकर उसके होठों पर अपना होंठ रख दिया और फिर से उसके होठों का रसपान करने लगा।

सूरज कामकला में माहिर था लेकिन उसकी कला का परिचय अभी तक उसकी मां को नहीं हुआ था लेकिन आज उसे ऐसा लग रहा था कि उसका बेटा एक औरत को खुश करने के सारे हुनर को जानता है,,, अभी तक उसे ऐसा ही लग रहा था कि शायद औरत की खूबसूरत बदन को देखकर अपने आप को समान नहीं पता और अश्लील हरकत कर देता है लेकिन आज उसे एहसास हो रहा था कि वाकई में उसका बेटा पूरी तरह से मर्द बन चुका था। वह किसी भी वक्त उत्तेजना की वजह से गिर सकती थी लेकिन सही मौके पर उसका बेटा उसकी कमर में हाथ डालकर उसे सहारा दे दिया था यह सब देखकर सुनैना की आंखें वासना से चमक उठ रही थी उसे अपने बेटे की हरकत आनंदित कर रही थी उसके द्वारा उसे संभालना उसे खुश करना आनंदित करना अच्छा लग रहा था अपनी हरकत को अंजाम देते हुए सूरज मदहोशी भरे स्वर में अपनी मां से बोला,,,)

तुम्हारी बुर तो कचोरी की तरह फुल गई है मां बहुत पानी छोड़ रही है,,,,।

मेरी बुर तेरी हरकत से पागल हो रही है,,,,सहहहहहहहह पता नहीं मुझे क्या हो रहा है तो मुझे पागल कर देगा ऊमममममममम,सहहहहहहहह आहहहहहहहह ,,(अपने बेटे के कंधे को दोनों हाथों से पकड़ कर सहारा लिए हुए वह अपने इच्छा को जाहिर करते हुए शिसकारी लेते हुए बोली,,,, सूरज अच्छी तरह से समझ रहा था कि अब उसकी मां को क्या चाहिए,,,,,, इसलिए वह अपनी मां की आंख में देखते हुए अपनी हथेली को अपनी मां की पेटीकोट से बाहर निकाला और बिना कुछ बोले पेटिकोट की डोरी को अपने हाथ से पकड़ लिया और उसे झट से खींच लिया उसके खींचते ही पेटिकोट की गिंठान एकदम से खुल गई और यह देखकर सुनैना की सांस भारी होने लगी उसकी नंगी चूचियां ऊपर नीचे होने लगी क्योंकि अगले ही पल वह पूरी तरह से नंगी होने वाली थी अपने बेटे की तरह और वह इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि जिंदगी का मजा लेने के लिए औरत को भी अपनी सारे कपड़े उतारने पड़ते हैं,,,, लेकिन कभी सोचा नहीं थी कि जिंदगी का मजा लेने के लिए उसके कपड़े को उसका बेटा ही अपने हाथों से उतरेगी उसे अपने हाथों से नंगी करेगा यह सुख शायद उसके किस्मत में लिखा था इसीलिए तो सुनैना आनंदीत हो रही थी,,,, पेटिकोट का गिंठान खुलने के बावजूद भी पेटिकोट जो कि त्यों कमर पर टिकी हुई थी क्योंकि वह बारिश में भीख कर गीली हो चुकी थी उसके बदन से चिपकी हुई थी,,,,, सूरज जानता था कि पेटिकोट गिरी ना होती तो पेटिकोट उसके कदमों में जाकर गिर जाती लेकिन उसे अपने हाथों से उसे उतारना पड़ेगा,,,, इसलिए वह अपनी मां के सामने घुटनों के बल बैठ गया और अपने दोनों हाथों का सहारा लेकर पेटीकोट को नीचे की तरफ सरकाने लगा शर्म के मारे उसकी मां कुछ भी नहीं कर रही थी बस खड़ी थी उसके कंधे का सहारा लेकर क्योंकि अभी भी उत्तेजना के मारे उसके घुटनों में कंपन हो रहा था देखते ही देखते सूरज अपनी मां की पेटीकोट को उसके घुटनों के नीचे तक ले आया और उसकी मां अपने बेटे का साथ देते हुए अपने पैरों को बारी-बारी से उठाकर पेटिकोट को उतारने में मदद की ,,।

सुनैना अब पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी,,,, सूरज की तरह सूरज अपनी मां की नंगी जवान को देख रहा था सूरज इससे पहले भी अपनी मां को नंगी देख चुका था लेकिन इतने करीब से आज पहली बार देख रहा था वाकई में उसका जिस्म ऐसा लग रहा था कि जैसे किसी कलाकार ने अपने हाथों से तराशा हो हर एक अंग आकर्षण लिए हुए था सूरज तो देखता ही रह गया,,,,, सूरज का मुंह खुला का खुला था सूरज प्यासी नजरों से अपनी मां के बदन को ऊपर से नीचे की तरफ देख रहा था यह देखकर सुनैना शर्म के मारे अपनी आंखों को बंद कर ली थी सूरज की नजर अपनी मां की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार पर आकर रुक गई हल्के-हल्के बालों से सजी हुई उसकी मां की गुलाबी बुर बेहद खूबसूरत लग रही थी,,,, सूरज कुछ पल के लिए अपनी मां की खूबसूरती को देखता ही रह गया उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अब वह क्या करें,,,,, सुनैना शर्म के मारे सिमटी जा रही थी, आंखों को खोलकर जब उसकी मां अपने बेटे को अच्छी तो वह शर्म से पानी पानी हो गई क्योंकि सूरज उसकी बुर को ही देख रहा था यह देखकर सुनैना शर्मसार हो रही थी शर्मिंदा हो रही थी क्योंकि वह बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी कि उसका बेटा उसकी बुर को प्यासी नजरों से देख रहा था इसलिए वह अपनी हथेली से अपनी बर को छुपाने की कोशिश करने लगी यह देखकर सूरज मुस्कुराने लगा और अपने हाथ को आगे बढ़कर अपनी मां की कलाई को पकड़ लिया और बुर पर से उसके हथेली को हटाते हुए बोला,,,,।

इसे छुपाने से कोई फायदा नहीं है यही तो है जो हम दोनों को और भी ज्यादा करीब लाएगी पिताजी को भूलने में मदद करेगी,,,,(ऐसा कहते हुए धीरे-धीरे सूरज अपने प्यासे होठों को अपनी मां की बुर की तरफ आगे बढ़ा रहा था,,,, सुनैना को क्या मालूम था कि उसका बेटा क्या करने वाला है , वह अपने बेटे को ही देख रही थी। लेकिन अगले ही पर उसने जो हरकत किया उसे बारे में उसने कभी सोचा नहीं थी अपने बेटे के होठों को अपनी बर पर महसूस करके वह पूरी तरह से मचल उठी उसके बदन में थरथराहट होने लगी घुटनों में कंपन बढ़ने लगी वह अपने आप को संभाल नहीं पा रही थी वह गिरने ही वाली थी कि तुरंत फिर से अपने बेटे के कंधों का सहारा लेकर अपने आप को स्थिति करने की कोशिश करने लगी लेकिन इस दौरान सूरज पूरी तरह से अपनी मां की जवानी के केंद्रीय बिंदु पर छा चुका था वह पागलों की तरह अपनी जीभ निकाल कर अपनी मां की बुर की मलाई को चाट रहा था,,,,, यह सुनैना कभी सोची नहीं थी इसलिए तो एकदम से मदहोश हो गई थी उसके बेटे के इस गुण को देखकर वह चारों खाने चित हो चुकी थी,,,, वह कभी चाहती नहीं थी कि कभी इस तरह के हालात पैदा हूं क्योंकि वह सपने में भी नहीं सोची थी कि उसके और उसके बेटे के बीच इस तरह के हालात पैदा हो जाएंगे और यह तो कभी नहीं सोची होगी कि उसकी बुर उसका बेटा चाटे,,,, क्योंकि उसकी नजर में यह गंदा कार्य था क्योंकि यहां से पेशाब किया जाता है इसलिए वह अपनी बुर को पीछे की तरफ खींच रही थी लेकिन उसका बेटा तुरंत अपने दोनों हाथों को उसके नितंबों पर रखकर अपनी तरफ खींच लिया, अपने बेटे की लालसा को वह समझ चुकी थी वह जानती थी कि उसका बेटा उसे ऐसे छोड़ने वाला नहीं है लेकिन वह दोबारा प्रयास नहीं कर पाई,,, क्योंकि तब तक सूरज अपनी जीभ को उसकी बुर के अंदर प्रवेश कर चुका था और यह एहसास सुनैना को ले डूब रहा था,,,,, अपने बेटे की हरकत से सुनैना चारो खाने चित्त हो चुकी थी,,, संभलने का उसके पास मौका नहीं है बस आनंद लेने का अवसर था। और सुनैना इस अवसर को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहती वह अपने बेटे के मजबूत कंधे को पकड़ कर धीरे से अपनी टांगों को खोलना शुरू कर दी क्योंकि इस तरह से उसका बेटा बड़े आराम से उसकी बुर की गहराई तक पहुंच सकता था,,, अपनी मां को इस तरह से अपना साथ देता हुआ देखकर सूरज भी पागलों की तरह अपनी मां की बुर की चटाई करना शुरू कर दिया था क्योंकि वह ऐसा कोई मौका नहीं खोना चाहता था जिसमे उसकी मां मस्त ना हो संतुष्ट न हो उत्तेजित न हो,,,,, मां बेटे दोनों पागल हुए जा रहे थे,,,, सूरज अपने मन की अभिलाषा को पूरी कर रहा था क्योंकि वह बहुत बार अपनी मां की नंगी जवान को देख चुका था अपने पिता की गहराई में अपनी मां को बिस्तर पर करवटें बदलते हुए देख चुका था अपने हाथों से अपनी बर से खेलते हुए देख चुका था और तब से अपने मन में सपना बुनकर रखा था कि एक ना एक दिन जरुर वह अपनी मां की बुर में अपना लंड डालेगा और आज उसका यह सपना पूरा होने के कगार पर था इस समय वह अपनी मां की जवानी पर छा चुका था। लगातार सुनैना की बुर से मदन रस बह रहा था जिसे सूरज अपनी जीभ से चाट कर अपने गले के अंदर उतार रहा था,,,।

खंडहर के बाहर बारिश पूरी तरह से छाई हुई थी और खंडहर के अंदर सूरज अपनी मां की जवानी पर छाया हुआ था सुनैना को इतना मजा मिल रहा था कि पूछो मत वह पागल हो जा रही थी और अब तो वह अपने बेटे का साथ भी दे रही थी अपने बेटे के कंधों का सहारा लेकर वह अपनी कमर को गोल-गोल घूमा रही थी अपनी अपनी बुर को एक तरह से अपने बेटे के चेहरे पर रगड़ रही थी यह देखकर सूरज बहुत खुश था कि उसकी मां की शर्म दूर हो चुकी थी वह बेशर्म बन चुकी थी और इस तरह के खेल में बेशर्म बनने में ही ज्यादा मजा है,,,, अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर सूरज पागलों की तरह अपनी मां की बुर चाट रहा था उसका पूरा चेहरा उसके मदन रस से भीग चुका था,,, मटन रस का खारापन इस समय सूरज को अमृत की धार लग रही थी,,,, सूरज जितना हो सकता था उतना अपनी मां की बुर की गहराई में अपनी जीभ डालकर उसकी मलाई को चाटने की कोशिश कर रहा था और सुनैना भी अपने बेटे का साथ देते हुए अपनी बर को उसके चेहरे पर दबा दे रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे जहां से सूरज निकला था फिर से वहीं से वह सूरज को अंदर ले लेना चाह रही थी। सुनैना कभी सोची भी नहीं थी की जिसपर से सूरज बाहर निकाला था उसी बुर को चाट कर उसका बेटा आनंदित करेगा,,, कहने वाले ने सच ही कहा है कि हालात बदलते देर नहीं लगता,,,, नहीं तो मां बेटे में से कौन सोचा था कि एक दिन ऐसा भी आएगा कि मां बेटे के बीच का पवित्र रिश्ता औरत और मर्द में तब्दील हो जाएगा और दोनों एक दूसरे में पूरी तरह से को जाएंगे एक दूसरे के अंगों से जी भर कर खेलेंगे।

सुनैना की शिसकारी की आवाज खंडहर में गूंज रही थी,,, लेकिन इस तूफानी बारिश में उसकी मादकता भारी शिसकारी की आवाज उसके बेटे के सिवा और कोई सुनने वाला नहीं था,, खंडहर में जी भरकर जोर-जोर से सरकारी लेने का मजा ही कुछ और सुनैना जानती थी कि उसकी इस तरह की आवाज को यहां कोई नहीं सुन सकता है इसलिए वह ची भर कर अपने मुंह से शिसकारी की आवाज निकाल रही थी और आनंदित हो रही थी। धीरे-धीरे सुनैना के बदन में अकड़न बढ़ने लगी सुनैना अपने परम स्खलन की तरफ आगे बढ़ रही थी,,,,,, वह कस के अपने बेटे की कंधों को दोनों हाथों से पकड़ ली थी उसका बदन पूरी तरह से एेंठ रहा था मोटी मोटी जांघो की नसें उपसने लगी थी,,,,, सूरज समझ गया था कि उसकी मां झड़ने वाली है इसलिए अपनी एक उंगली को अपनी मां की बुर में डालकर उसे अंदर बाहर करते हुए लगातार अपनी मां की बुर चाट रहा था और सुनैना भी अपने आप पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पा रही थी और वह अपने बेटे के कंधों को पकड़कर अपनी कमर को जोर-जोर से आगे पीछे करना शुरू कर दी थी एक तरह से वह अपने बेटे के मुंह को अपनी बुर से चोद रही थी सूरज अपनी मां की इस क्रियाकलाप से पूरी तरह से मस्त हो गया और अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हथेलियां में जोर से दबोच कर पागलों की तरह उसकी बुर को चाटना शुरू कर दिया वह अपनी ऊंगली को अपनी मां की बुर से बाहर निकाल दिया था क्योंकि इस समय उसकी मां पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी,,,,,, और देखते ही देखते सुनैना की बुर से मदन रस की पिचकारी फुट पड़ी जो सीधा सूरज के मुंह को भर रही थी सूरज अमृत की धार समझकर अपनी मां की कुर्सी निकलने वाले मदन रस की पिचकारी को गले के अंदर गटक रहा था। सूरज के लिए यह पूरी तरह से जीत का प्रदर्शन था क्योंकि वह अपनी हरकतों से ही अपनी मां का पानी निकाल चुका था। सुनैना पूरी तरह से संतोष हो चुकी थी सूरज तब तक अपने मुंह को अपनी मां की बुर से नहीं हटाया जब तक की उसकी बुर से निकलने वाली मदन रस की आखिरी बूंद को वह अपने गले के अंदर गटक नहीं गया,,,,, सुनैना गहरी-गहरी सांस ले रही थी वह झड़ चुकी थी और अपनी सांसों को दुरुस्त करने में लगी थी। कुछ देर बाद सूरज अपनी मां की बुर से अपने होठों को अलग किया उसका पूरा चेहरा मदन रस में सना हुआ था।

झड़ने के बाद धीरे से सुनैना अपने बेटे के कंधे पर से अपने दोनों हाथ को हटाई वह शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी क्योंकि उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसके बेटे का चेहरा उसके मदन रस से पूरा भीग चुका था आज तक उसने अपने पति के चेहरे पर इस तरह से अपने मदन रस को नहीं देखी थी। सूरज भी धीरे से अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया वह मुस्कुरा रहा था अपनी मां की नंगी जवानी देखकर कर,,,, दोनों गहरी गहरी सांस ले रहे थे सुनैना चोर नजरों से अपने बेटे के लंड की तरफ देख रही थी जो कि अभी भी बरकरार था यह देखकर वह हैरान दी थी वैसे सूरज की हर हरकत उसे हैरान कर देने वाली लग रही थी आज तक उसके पति ने उसकी बुर को इस कदर से पागलों की तरह चाटा नहीं था बल्कि हल्का सा चुंबन लेकर हट जाता था लेकिन आज उसके बेटे ने उसे बावला बना दिया था,,,, बात क़ी शुरुआत करते हुए सूरज अपनी मां से बोला,,,।

कैसा लगा मां मजा आया कि नहीं,,,,।

तुझे आया,,,(सुनैना शर्माते हुए अपने बेटे से नजर मिलाए बिना ही बोली,,,,,)
 
यह भी कोई कहने वाली बात है,,, मैं बात नहीं सकता कि मैं आज कितना खुश हूं मुझे तो बहुत मजा आया तुम देख ही सकती हो मेरे चेहरे को किस कदर से तुम्हारे रस में डूबा हुआ है,,,,(अपने बेटे की बात सुनकर सुनैना धीरे से अपनी नजर उठाई और अपने बेटे के चेहरे की तरफ देखने लगी अपने बेटे के चेहरे का हाल देखकर वह मुस्कुराने लगी और फिर से शर्मा कर अपनी नजर को नीचे झुका दी यही मौका देखकर सूरज अपना हाथ आगे बढ़ाया और अपनी मां का हाथ पकड़ कर एकदम से अपनी तरफ खींच लिया एक बार फिर से सुनैना उसकी बाहों में थी और इस बार उसकी नंगी गांड की दरार में सूरज का टनटनाया हुआ लंड अठखेलिया करने लगा, अपनी नंगी गांड पर अपने बेटे का नंगा लंड का स्पर्श और रगड़ एक बार फिर से सुनैना के तन बदन में उत्तेजना की लहर को बढ़ाने लगा,,,, सूरत किसी भी तरह से अपनी मां की उत्तेजना को कम होने देना नहीं चाहता था इसलिए फिर से अपने दोनों हाथों में उसके दोनों खरबुजो को पकड़कर फिर से दबाना शुरू कर दिया,,, सुनैना का मैन फिर से मचलने लगा वह मदहोश होने लगी अभी-अभी तो वह झड़ी थी लेकिन फिर से उसके बेटे ने अपनी हरकतों से उसे तैयार कर दिया था। सूरज अपनी कमर को गोल-गोल घूमाकर अपने लंड की रगड़ अपनी मां की गांड पर बढ़ा रहा था,,,, सुनैना मदहोश हो रही थी वह मस्त हो रही थी काम कला में निपुण अपने बेटे के हाथों से वह उत्तेजना के परम शिखर पर फिर से पहुंचने की तैयारी में थी। सूरज का लंड एकदम गरम था जवानी से भरा हुआ उसकी गर्माहट अपनी गांड पर महसूस करके सुनैना मदहोश हो रही थी,,, सूरज उसे आराम करने का मौका नहीं दे रहा था। बाहर बारिश थमने का नाम नहीं ले रही थी और अंदर सूरज रुकने का नाम नहीं ले रहा था,,,, अपनी मां की दोनों चूचियों को दबा दबा कर वह टमाटर की तरह लाल कर दिया था, अभी सुनैना को एहसास हुआ कि आग में लकडियां कम पड़ रही थी अगर आग बुझ जाती तो खंडहर में फिर से अंधेरा छा जाता इसलिए वह अपने बेटे से बोली।





सूरज आग बुझने वाली है फिर से लकड़ी डालना पड़ेगा।

(अपनी मां की बात सुनकर सूरज का ध्यान भी आपकी तरफ गया वाकई में आज पूछने वाली थी और वह नहीं चाहता था कि इस खंडहर में ऐसे मदहोश कर देने वाले मौसम में अंधेरा हो जाए क्योंकि अपनी मां की जवानी को देखकर अभी उसका मन भरा नहीं था। इसलिए वह अभी तुरंत कुछ देर के लिए अपनी मां को अपनी बाहों की कैद से आजाद कर दिया,,,, और तुरंत सूखी हुई लकड़ी को इधर-उधर से ढूंढने लगा जल्दी ही उसे ढेर सारी लकडियां भी मिल गई वाकई में खंडहर में सूखी हुई लकडियों की कमी नहीं थी ऐसा लग रहा था किसी ने यहां पर संभाल कर रखा था और आज उन दोनों के काम आ रहा था जल्दी सुखी लड़कियों को पूछते हुए आज में डालकर उन्हें फिर से प्रज्वलित कर दिया और खंडहर में पूरी तरह से उजाला फैल गया वैसे बरसात का तूफान इतना ज्यादा था कि अगर कोई दूर से इस जगह पर देखने की कोशिश भी करता तो भी उसे कुछ दिखाई नहीं देता और यही तो मां बेटे दोनों के लिए लाभदायक था दोनों निश्चिंत होकर मजा लूट रहे थे। फिर से आग जलने के बाद सूरज ने अपनी मां को फिर से अपनी बाहों की कैद में भर लिया और उसके होठों का रसपान करते हुए उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर दोनों हाथ रखकर जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया और उस पर चपत लगना शुरू कर दिया हालांकि सुनैना को अपने बेटे की हरकत से थोड़ा दर्द महसूस हो रहा था लेकिन आनंद भी अत्यधिक मिल रहा था,,,





सूरज लगातार अपनी मां के नितंबों से खेल रहा था उसके अंगों को जोर-जोर से दबा रहा था उसकी बड़ी-बड़ी गोरी गांड पर अपने हाथ से सहला रहा था और लगातार उसे पर चपत भी लग रहा था अपनी हरकतों से अपनी मां को मदहोश करने में सूरज बिल्कुल भी कसर बाकी नहीं रख रहा था और उसकी हरकतों से उसकी मां मस्त भी हो रही थी और जिस तरह से वह अपनी बाहों में भरा हुआ था सूरज का लंड बार-बार उसकी मां की बुर के गुलाबी पत्तियों के बीच रगड़ खा रहा था अंदर जाने के लिए तड़प रहा था,, सुनैना से आप बर्दाश्त नहीं हो रहा था वह अपना एक हाथ नीचे की तरफ लाकर के अपने बेटे के लंड को पकड़ कर उसके सुपाड़े को अपनी गुलाबी पत्तियों के बीच रगड़ रगड़ कर अपने बेटे को मजबूर कर रही थी कि वहां उसे अंदर डाल दे,,, सूरज की जगह कोई और होता तो शायद सुनैना की हरकत पर डाल भी दिया होता लेकिन सूरज अभी अपनी मां को और भी ज्यादा मदहोश कर देना चाहता था वह देखना चाहता था कि उसकी मां उसकी इच्छा को पूरी करती है कि नहीं इसलिए उसके कंधे पर हाथ रखकर वह उसे नीचे की तरफ बिठाने लगा उसकी मां भी धीरे-धीरे अपनी घुटनों के बाल नीचे बैठ गई उसकी आंखों के सामने उसके बेटे का टनटनाया हुआ लंड था जो उसकी बुर में जाने के लिए खुद तड़प रहा था लेकिन सूरज था कि उसे पर ध्यान ही नहीं दे रहा था। घुटनों के बल बैठकर सुनैना कभी अपने बेटे की तरफ देखती तो कभी उसके लंड की तरह देखते हैं सूरज अच्छी तरह से समझ रहा था कि उसके मन में क्या चल रहा है सूरज अपने लंड को पकड़ कर हथौड़े की तरह सुपाड़े को अपनी मां के गाल पर पटकने शुरू कर दिया,,, सुपाड़े की चोट तो जबरदस्त थी,, लेकिन उसे इस बात का भी एहसास हो रहा था कि वाकई में उसके बेटे के लैंड में कुछ ज्यादा ही दम है सूरज कुछ देर तक इसी तरह से अपनी मां के साथ हरकत करता रहा और उसकी मां को मजा भी आ रहा था लेकिन अभी तक वह नहीं जान पाई थी कि उसका बेटा उससे क्या चाहता है वह सिर्फ अपने बेटे की हरकत का मजा ले रही थी। कुछ देर तक इसी तरह से अपनी मां की गाल पर लंड पटकते रहने के बाद सूरज से रहा नहीं गया और वह अपने लंड के सुपाड़े को अपनी मां के लाल लाल होंठों पर रगड़ना शुरू कर दिया, अपने बेटे की इस हरकत पर सुनैना मदहोश होने लगी उसकी सांसे गहरी होने लगी और उसे एहसास होने लगा कि उसका बेटा उससे क्या चाहता है वह भी अपने बेटे को हर खुशी देना चाहती थी इसलिए अपनी लाल-लाल होठों को हल्का सा खोल दे अब तक वह अपने बेटे के लैंड को अपनी बुर में लेना चाहती थी लेकिन अपने बेटे की हरकत को देखा करो अपनी लाल-लाल होठों को खोले बिना रह नहीं पाई क्योंकि उसकी भी इच्छा थी कि ईतने मोटे लंड को अपने गले तक उतार कर उसकी चुसाई करें, अपनी मां के होठों को हल्का सा खुला देखकर सूरज अपने हाथ में पकड़े हुए लंड को अंदर सरकाने से जरा भी नहीं चुका और अगले ही पल सूरज का आधा लंड उसकी मां के मुंह के अंदर था और वहां चूसना शुरू कर दी थी सूरज ने आधा ही काम किया था बाकी का बचा काम सुनैना ने पूरा कर दी वह धीरे-धीरे अपने बेटे के लंड को अपने गले तक उतार कर चूसना शुरू कर दी थी उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि वाकई में उसके बेटे का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था क्योंकि उसके होठों का छल्ला बन चुका था और वह भी ठीक से अपने होठों को खोल नहीं पा रही थी क्योंकि लंड की मोटाई कुछ ज्यादा ही थी।





आज सूरज के मन की इच्छा पूरी हो रही थी वह मस्त हो चुका था आज वह अपने आप को किस्मत का धनी समझ रहा था वाकई में वह किस्मत का धनी था क्योंकि अब तक न जाने उसके नीचे कितनी औरतें आ चुकी थी और उसके सबसे बड़ी ख्वाहिश यही थी कि वह अपनी मां को भी अपने नीचे लेकर आए और आज उसकी ख्वाहिश पूरी हो रही थी आज वह अपने मोटे तगड़े लंड को अपनी मां के मुंह में डालकर जी भर कर चूसा रहा था। इससे बड़ी सूरज के लिए और कौन सी बात हो सकती थी उसके सपनों की रानी उसके मोटे तगड़े लंड को अपने हाथ से पकड़ कर अपने मुंह में लेकर चूस रही थी,, इस बात की खुशी सुनैना के मन में भी हो रही थी क्योंकि उसने तो अब तक केवल अपने पति के लंड से ही मजा लेते आई थी क्योंकि उसके बेटे के लंड के मुकाबले एकदम आधा ही था,,, इसलिए तो सुनैना जी भर कर मेहनत कर रही थी उसके माथे पर पसीने की बूंदे ऊपस आई थी। बरसात आज उन दोनों के लिए एक नया युग लेकर आया था एक नया जीवन लेकर आया था मां बेटे के बीच की सारी दूरियां खत्म हो चुकी थी मर्यादा की दीवार गिर चुकी थी दोनों के बीच का पवित्र रिश्ता तारतार हो चुका था लेकिन इस बात से दोनों को बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ रहा था क्योंकि दोनों की जरूरत ही यही थी सूरज तो फिर भी अपनी जरूरत को दूसरों के द्वारा पूरी कर ले रहा था लेकिन सुनैना का क्या सुनैना एक पतिव्रता औरत थी जो अपने पति के सिवा किसी दूसरे मर्द के बारे में सोचती भी नहीं थी लेकिन अपने पति की बेवफाई अपनी आंखों से देख कर उसे एहसास होने लगा था कि जीने के लिए उसे भी एक मर्द का सहारा चाहिए। उसका पति तो अपने जीवन में खुश था दूसरी बार जरूर औरत के साथ अपनी जरूरत को पूरी कर रहा था जबकि उसके पास इतनी खूबसूरत औरत थी इसके बावजूद भी वह अपनी अय्याशी को बिल्कुल भी काम नहीं कर रहा था तो वह क्यों पीछे रह जाए उसे भी तो सहारे की जरूरत थी वह कोई बुढी तो हो नहीं गई थी इस उम्र में तो उसकी जवानी पूरी तरह से खेलने लगी थी उसकी भावनाएं भड़कने लगी थी इस उम्र में उसे कुछ ज्यादा ही मर्द की जरूरत पड़ रही थी और ऐसे में पति की बेवफाई उसके जीवन को नीरस बना देती लेकिन अपने बेटे की बात सुनकर उसे भी एहसास होने लगा कि उसे भी वही करना चाहिए जो उसका पति कर रहा है ऐसे में उसे एक मर्द की जरूरत थी और उसके बेटे से अच्छा विकल्प कोई था भी नहीं इसमें उसकी भी जरूरत पूरी हो जाती है और बदनामी भी नहीं होती इसलिए सुनैना पूरी तरह से निर्लज बनकर मां बेटे के पवित्र रिश्ता को खत्म करके एक औरत बन चुकी थी और अपने घुटनों के ऊपर बैठकर अपने बेटे के लंड को गले तक लेकर आनंद के सागर में गोते लगा रही थी। मदहोश होता हुआ सूरज बोल।





सहहहह आहहहहह तुमने तो मेरी हालत खराब कर दी,,,,ऊममममम बहुत अच्छे से चूस रही हो आहहहहह ऐसे ही पूरा गले तक लेकर चूसो,,,,ऊमममममम बहुत मजा आ रहा है। ऐसी तूफानी बारिश में इतनी खूबसूरत औरत के साथ रात गुजारना ही सबसे बड़ी किस्मत की बात है। पिताजी से बड़ा बेवकूफ इंसान इस दुनिया में कोई नहीं होगा स्वर्ग की अप्सरा जैसी खूबसूरत बीवी को छोड़कर बाजरो औरत के साथ मजा लूट रहे हैं मैं अगर उनकी जगह होता तो कभी जिंदगी में सपने में भी किसी गैर औरत के साथ रात गुजारने के बारे में सोच भी नहीं सकता था,,,,,सहहहहह इतना आनंद में कभी सोचा भी नहीं था कि मुझे इतना मजा मिलेगा,,,,(सूरज अपनी मां को और भी ज्यादा मत करने के लिए यह सब बातें कर रहा था और बीच-बीच में अपने पिता की बेवफाई के बारे में भी अपनी मां को याद दिला रहा था ताकि उसकी मां को यह सब याद रहेगी उसका पति कितना बेवफा है किसी गैर औरत के साथ मजा लूट रहा है उसे भी यही सब करना चाहिए सूरज औरत के संगत में बेहद शातिर हो चुका था वह जानता था कि एक औरत से कब कैसे काम निकालना है,,,, और इस समय सूरज वही कर रहा था अपनी दोनों कमर पर हाथ रखकर वह धीरे-धीरे अपनी कमर को आगे पीछे करके अपनी मां के लाल लाल होठों के बीच अपने लंड को अंदर बाहर कर रहा था और अपने बेटे की इस तरह की बातों को सुनकर वह भी पूरी तरह से जोश में अपने मुंह को जोर-जोर से आगे पीछे करके हिला रही थी सूरज को इस समय उसकी मां एकदम रंडी की तरह लग रही थी जो एक मर्द को पूरी तरह से खुश करने का हुनर जानती थी। सूरज का लंड और भी ज्यादा कठोर हो चुका था शायद यह सुनैना की जीभ और होठों का ही कमाल था। वह भी आज जी भरकर सूरज के लंड पर टूट पड़ी थी,, एक औरत होने के नाते वह समझ सकती थी इतने मोटे और तगड़े लंड की अहमियत को,,, एक औरत अच्छी तरह से जानती है कि एक मोटा और तगड़ा लंड ही उसकी जवानी की प्यास को निचोड़ कर उसे शांत कर सकता है। और वह मन ही मन इस बारे में सोच भी रही थी कि उसके बेटे का लंबा मोटा लंड बड़े आराम से उसके बच्चेदानी तक पहुंच जाएगा जो कि आज तक उसके पति का नहीं पहुंच पाया था आने वाले पाल के बारे में सोचकर उसका मन प्रफुल्लित हुआ जा रहा था वह उत्साहित थी आने वाले पाल के लिए क्योंकि वह जानती थी कि आप क्या होने वाला है बहुत ही जल्द उसकी बुर में उसके बेटे का मोटा तगड़ा लंड घुसने वाला है।





लंड को चूसते-सुनते काफी देर हो चुकी थी ना तो सूरज थमने का नाम ले रहा था और ना ही सुनैना दोनों तरफ से पूरा जोर लगा हुआ था,,,, सुनैना इस बात से भी हैरान थी कि अभी तक उसके बेटे के लंड से पिचकारी नहीं निकली थी वरना इतनी देर में तो न जाने कितनी बार लंड पानी फेंक देता लेकिन उसके बेटे का लंड ज्यों का त्यों बना हुआ था,,,, सुनैना को ऐसा था कि अभी तक भले उसके बेटे के लंड से पानी नहीं निकला था लेकिन जिस तरह से वह चूस रही थी जल्द से जल्द उसके बेटे का लंड पानी फेंक देगा इस बात की उम्मीद सुनैना को बनी हुई थी लेकिन वह नहीं जानती थी कि औरतों की बुर की तपिस में तप कर उसका लंड लोहा बन चुका था इतनी जल्दी झाड़ने वाला नहीं था जब तक औरत की जवानी को पूरी तरह से निचोड़ ना दे तब तक सूरज बना ही रहता था। सुनैना तो अभी इस बात से अनजान थी उसकी मर्दानगी के किस्से मुखिया की बीवी सोनू की चाची सोनू की मां और खुद सुनैना की बेटी ही सुना सकती थी कि कितना मर्दानगी से भरा हुआ है सूरज। सूरज का मन जब तक नहीं भर गया तब तक वह अपने लंड को अपनी मां की बुर से बाहर नहीं निकला लेकिन जब उसने देखा कि उसकी मां घुटनों के बल बैठी हुई थी और उसके लंड की चुसाई कर रही थी शायद उससे भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था क्योंकि सूरज ने देखा कि अब वह अपना एक हाथ अपनी बुर पर रखकर खुद ही अपनी उंगली अपनी बुर में डालकर अंदर बाहर कर रही थी अब सूरज समझ गया था कि लोहा गरम हो चुका है हथोड़ा मारना बेहद जरूरी हो चुका है। इसलिए वह धीरे से अपने लंड को पकड़कर अपनी मां के मुंह में से उसे बाहर निकाला,,, जैसे ही मुंह में से लंड बाहर आया सुनैना नजर उठाकर सूरज की तरफ देखने लगी अभी भी उसके होठों का छल्ला बना हुआ था,,,,, उसके चेहरे से पता चल रहा था कि उसे कितना अच्छा लग रहा था अपनी मां की तरफ देखते हुए सूरज मुस्कुराता हुआ बोला।





तुमने इसे कस कर और भी ज्यादा मजबूत कर दी हो अब समय आ गया है इसका सही उपयोग करने का,,, अब देखना मैं कैसे तुम्हारी बुर में डालकर तुम्हारी चुदाई करता हूं चुदवाना है ना अब,,,,(अपने बेटे कि ईस तरह की बात सुनकर सुनैना बोली कुछ नहीं बस शर्म के मारे अपनी नजर नीचे झुका ली,,, सूरज भी अब मचल रहा था अपनी मां की बुर में अपने लंड को डालने के लिए,,, इसलिए वह नीचे जमीन की तरफ देखने लगा खंडहर होने की वजह से धूल मिट्टी कुछ ज्यादा ही थी इसलिए सूरज नीचे बिछाने के लिए अपने कुर्ते का उपयोग कीया वह नीचे जमीन पर अपनी कुर्ते को बढ़ा दिया सुनैना ने इस बारे में कुछ बोली नहीं क्योंकि वह जानती थी कि सूरज ऐसा क्यों कर रहा है सूरज अपनी मां की तरफ मुस्कुराते हुए देखा जो की शर्म के मारे अपनी नजर को नीचे झुकाए हुए थे क्योंकि वह जानती थी कि अब क्या होने वाला है वह कुछ बोल नहीं पा रही थी अपनी मां की हालत को देखकर सूरज बोला,,)





अब इस पर लेट जाओ अब असली खेल शुरू होने वाला है,,,।

(अपने बेटे की ईस तरह की बातें सुनकर सुनैना शर्म से गड़ी जा रही थी लेकिन वह भी यही चाहती थी उसे भी बेशर्म बना था उसे भी मजा लेना था कोई और समय होता तो शायद वह अपने बेटे की इस बात पर उसके गाल पर थप्पड़ लगा दी होती लेकिन इस समय वह मन नहीं बल्कि एक औरत थी जिसे मर्द की जरूरत थी और वह मर्द उसका ही बेटा था जो इस समय एक बेटा नहीं पूरी तरह से मर्द बन चुका था जो औरत की जरूरत को पूरा करना जानता था उसे संतुष्ट करने की कला में माहीर था। सुनैना भी बिना कुछ बोले अपने बेटे की बात मानते हुए पीठ के बल उसे कुर्ते पर लेट गई हालांकि शर्म के मारे हो अपनी आंखों को बंद किए हुए थी। टांगे अभी भी आपस में सटी हुई थी टांगों को खोलने में उसे शर्म महसूस हो रही थी तो क्यों जानती थी कि अपने बेटे के सामने टांगों के खोलने का क्या मतलब होता है। उसे इस बात का एहसास था कि वह टांगों को खोले या ना खोले उसका बेटा अपनी राह खुद बना लेगा इस बात को जानते हुए भी वह इस कार्य को अपने बेटे को ही सौंप दी थी अपनी आंखों के सामने लेटी हुई अपनी मां की नंगी जवान को देखकर सूरज बोला,,,)





बाप रे इस रूप में तुम और ज्यादा खूबसूरत लग रही हो तुम्हारी खूबसूरती इस समय कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है बरसात का तूफानी मौसम तेज चलती हवाएं चारों तरफ अंधेरा या अंधेरा और ऐसे में तुम्हारा खंडहर में नंगी होकर पीठ के बल लेटना ही सारी कहानी कह देता है मैं सच कह रहा हूं इतना मजा घर के अंदर खटिया पर नहीं आता जितना मजा आज इस खंडहर में नीचे जमीन पर लेटकर आने वाला है। इस खंडहर के अंदर जो कुछ भी तुम आज मुझे देने जा रही हो मैं वादा करता हूं कि तुम्हें निराश नहीं होने दूंगा,,,, तुम्हें इतना प्यार करूंगा कि तुम पिताजी को एक ही रात में भूल जाओगी,,,,।

(अपने बेटे कि ईस तरह की बातों को सुनकर सुनैना शर्म से पानी पानी हो रही थी और वह शर्म का पानी उसके गुलाबी छेद से बाहर निकल रहा था जिसे देखकर सूरज के मुंह में पानी आ रहा था वह अपने लंड को पकड़ कर हिला भी रहा था जो कि उसकी मां के थूक और लार से सना हुआ था। कुछ पल के लिए सूरज इस तरह से अपनी मां के टांगों के पास बैठकर अपने लंड को हिलाता रहा जब कुछ देर तक कोई हलचल नहीं हुई तो सुनैना अपनी आंखों को धीरे से खोली और अच्छी तो उसका बेटा उसके पैरों के पास घुटनों के बल बैठकर अपने लंड को हिला रहा था जो की पूरी तरह से बुर में घुसने के लिए तैयार था यह देखकर उसके तन बदन में आग लगने लगी और सूरज अपनी मां की आंखें खुली देखकर और ज्यादा जोश में आ गया और धीरे से अपने दोनों हाथों को अपनी मां की टांगों पर रखते हुए बोला,,,)





अब ईसे खोल दो, मुझे मंजिल एकदम सामने दिखाई दे रही है,,,( अपनी मां की बुर की तरफ देखते हुए सूरज बोला तो सुनैना फिर से शर्म से पानी पानी हो गई लेकिन इस बार वह अपनी आंखों को बंद नहीं की बल्कि अपने बेटे की हरकत को ही देखती रही और यह देखकर वह और ज्यादा उत्तेजित होने लगी कि उसका बेटा अपने हाथों से उसके दोनों टांगों को खोल रहा था उसको चोदने के लिए मां बेटे के रिश्ते को खत्म करके औरत और मर्द के रिश्ते को जायज करने के लिए। देखते ही देखते वह अपनी मां की टांगों को खोल दिया और खुद अपनी मां की टांगों के बीच घुटनों के बल बैठ गया,,, लेकिन इस बीच लगातार वह अपने लंड को मुठिया रहा था अपनी मां को अपनी मनोदशा दिखा रहा था। सुनैना का दिल जोरो से धड़क रहा था उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी और सांसों की गति के साथ उसकी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचियां भी ऊपर नीचे हो रही थी। सूरज का धैर्य जवाब दे जा रहा था अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियों को ऊपर नीचे होता हुआ देखकर उसके सब्र का बांध टूट रहा था,,, वह एकदम से अपने दोनों हाथों को नीचे की तरफ ले जाकर के अपनी मां की कमर पर हाथ रख दिया और उसकी कमर को पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया,,,, ऐसा उसने जोर लगाकर किया था क्योंकि वह जानता था कि उसकी मां का वजन थोड़ा ज्यादा है और सुनैना भी अपने बेटे की ईस हरकत के लिए पूरी तरह से तैयार थी और जैसे ही वह उसे अपनी तरफ खींचा था वह अपने सर को ऊपर उठा ली थी ताकि उसके सर पर चोट ना लग जाए,,,, अब स्थिति कुछ ज्यादा ही शर्मनाक हो चुकी थी क्योंकि सुनैना को महसूस हो रहा था कि वह उसके बेटे की जांघों पर टिकी हुई थी उसकी आधी गांड सूरज की मोटी मोटी जांघों पर थी,,,, अब औरत और मर्द के बीच का असली खेल शुरू होने वाला था इसलिए सुनैना का दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था वह अपने बेटे की तरफ ही देख रही थी हालांकि जिस तरह से वह लेटी हुई थी उसे कुछ ज्यादा खास तो दिखाई नहीं दे रहा था और वह शर्म के मारे ज्यादा कुछ देखने की कोशिश भी नहीं कर रही थी। सूरज एक बार फिर से मुस्कुराता हुआ अपने लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया और सुपाड़े को अपनी मां के गुलाबी छेद पर रगड़ना शुरू कर दिया उसकी ईस हरकत से सुनैना एकदम से सिहर उठी और उसके बदन में कसमसाहट बढ़ने लगी,,,,,।





अपनी हरकत से सूरज अपनी मां को तड़पा रहा था ललाईत कर रहा था और सुनैना मन ही मैंने अपने बेटे को गाली देते हुए बोल रही थी।

अरे हरामजादे अब कितना तड़पाएगा डाल दे अंदर,,,,,,, तभी सूरज बोल पड़ा।

तुम्हारी बुर कितना पानी छोड़ता है कसम से यह देखकर तो मजा नहीं आ जा रहा है देखो तो सही मेरा सुपाड़ा पूरा तुम्हारे मदन रस से गिला हो गया है अब बड़े आराम से तुम्हारी बुर में जाएगा,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुनैना बोली कुछ नहीं बस गहरी गहरी सांस लेते हुए अपनी दोनों टांगों के बीच देखने की कोशिश करती रही,,,, लेकिन अब सूरज अपनी मां को ज्यादा नहीं तड़पना चाहता था क्योंकि वह देख रहा था कि उसका चेहरा उत्तेजना से तमतमा गया था उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी वह जानता था कि इस समय वह उसके लंड के लिए कितनी मचल रही है कितना तड़प रही है इसलिए सूरज अपनी मां पर रहम करते हुए अपने लंड के सुपाड़े को उसके गुलाबी बुर के गुलाबी छेद में प्रवेश कराने लगा जैसे-जैसे सूरज सुपाड़े को अंदर की तरफ डालने की कोशिश कर रहा था वैसे-वैसे सुनैना के चेहरे के भाव बदलते जा रहे थे सुनैना को इस बात का एहसास हो रहा था कि वाकई में उसके बेटे के लंड का सुपाड़ा कुछ ज्यादा ही मोटा था वरना दो बच्चों की मां की बुर में बड़े आराम से लंड प्रवेश कर जाता था। सूरज भी इस बात से काफी उत्साहित और प्रसन्न नजर आ रहा था कि उसकी मां की बुर बेहद कसी हुई थी भले ही थोड़ी मस्सक्कत करनी पड़ रही थी लेकिन जो आनंद उसे प्राप्त हो रहा था वह उसके सोच के बिल्कुल विपरीत था उसे अंदाजा नहीं था कि उसकी मां की बुर इतनी कसी हुई होगी,,, वह शायद इसलिए की महीनों गुजर गए थे उसकी मां की बुर में लंड नहीं गया था शायद इसीलिए उसका कसाव बढ़ चुका था इसलिए तो सूरज को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी बुर की चिकनाहट और सूरज की सूझबूझ और धैर्य के साथ सपने का आधे से ज्यादा भाग बुर के अंदर प्रवेश कर चुका था,,, जिससे सुनैना को हल्का सा दर्द भी महसूस हो रहा था लेकिन जो सुखों से मिलने वाला था उसके आगे यह दर्द कुछ भी नहीं था सूरज भी अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला।





बाप रे में तो सोचा भी नहीं था कि तुम्हारी बुर इतनी कसी हुई होगी सच में तुम तो अपनी जवानी को एकदम बरकरार रखी हो आज की रात तो मजा ही आ जाएगा,,,।(अपने बेटे के मुंह से अपनी बुर की तारीफ सुनकर सुनैना बोली कुछ नहीं बस शर्म के मारे अपनी आंखों को फिर से बंद कर ली बार-बार यह सिलसिला चल रहा था कि वह शर्म के मारे अपनी आंखों को बंद कर ले रही थी और उसकी यही नजाकत सूरज को और भी ज्यादा मदहोश कर दे रही थी,,,, देखते ही देखते सुपाड़ा अतिथि कक्ष में प्रवेश कर गया इस बात की खुशी सूरज के चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी और मदहोशी उसकी मां के चेहरे पर पूरी तरह से छा चुकी थी,,, मां बेटे के बीच का रिश्ता खत्म हो चुका था अब दोनों के बीच औरत और मर्द का रिश्ता शुरू हो गया था। उन दोनों के चेहरे पर इसका मलाल बिल्कुल भी नहीं था की मां बेटे के पवित्र रिश्ते को दोनों तार तार कर चुके थे बल्कि इस बात की खुशी थी कि दोनों एक दूसरे में अपना सुख ढूंढ़ लिए थे एक दूसरे की जरूरत पूरी करने का साधन ढूंढ लिए थे। सूरज एक बार फिर से अपनी मां को शर्मिंदा करते हुए बोला।)





बाप रे बड़ी मुश्किल से लंड का सुपाड़ा घुसा है तुम्हारी बुर में,,,, मुझे तो लग रहा था कि घुसेगा ही नहीं पिताजी का छोटा था इसलिए आराम से घुस जाता होगा है ना,,,,(यह बेशर्मी भरे सवाल सूरज अपनी मां से पूछ रहा था लेकिन जवाब में सुनैना शर्मा गई थी वह कुछ बोल नहीं पा रही थी क्योंकि सवाल पूछने वाला ही जवाब खुद ही दे रहा था तो वह क्या बोलती यह बात सच था कि उसके पति का लंड उसके बेटे की अपेक्षा आधा ही था और पतला भी लेकिन सूरज के मर्दाना अंग के बारे में जानने से पहले सुनैना को अपने पति का ही लंड ज्यादा मोटा और लंबा लगता था क्योंकि जवानी के दिनों से वह अपने पति के साथ हम बिस्तर होती आ रही थी लेकिन अब उसका यह भ्रम पुरी तरह से टूट चुका था,,, उसे इस बात का एहसास हो गया था कि उसके पति का लंड तो उसके बेटे के लंड के आगे कुछ भी नहीं था,,, इसलिए तो आज वह अपने बेटे के सामने नंगी लेटी पड़ी थी ताकि उसका बेटा उसे वह सुख दे सके जो उसके पति ने आज तक नहीं दिया था जिसे वह अधूरा सुख पाकर भी संपूर्ण रूप से सुख की परिभाषा समझती थी। वैसे भी आज की रात सूरज के लिए अपनी मां की संतुष्टि की परिभाषा बदलने वाली रात थी आज वह पूरा एहसास दिलाना चाहता था की असली मर्द के साथ चुदाई का एहसास क्या होता है और यही सोचता होगा सूरज आगे की तरफ बढ़ रहा था वह अपने लंड को अपनी मां की बुर के अंदर डालता चला जा रहा था धीरे-धीरे सूरज का आधा लंड सुनैना की बुर में घुस चुका था। सुनैना का मुंह देखने लायक था मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में आधा घुसा हुआ था और उसका हाल बुरा था उसके माथे पर पसीने की बूंदें टपक रही थी उसके लाल-लाल होठ खुले हुए थे और वह अपने मुंह से सांस ले रही थी सांसों की गति के साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां भी ऊपर नीचे हो रही थी यह देखकर सूरज का जोश और उत्तेजना बढता जा रहा था। सूरज अब एक ही बार में अपने पूरे लंड को अपनी मां की बुर में डाल देना चाहता था इसलिए अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर चुका था लेकिन शायद सुनैना तैयार नहीं थी सुनैना को लग रहा था कि उसके साथ उसका बेटा नरमी से पैसा आएगा इसलिए वह निश्चिंत थी और सूरज पूरी तरह से तैयार,,, अपनी मां की चिकनी कमर को दोनों हाथों से थाम लिया था और फिर कचकचा के प्रहार किया एक ही बार में आधा बचा लंड बुर के अंदर सब कुछ चीरता हुआ एकदम से उसके बच्चेदानी से जा टकराया सुनैना इस प्रहार के लिए तैयार नहीं थी इसलिए एकदम से चीख पड़ी,,,,।





ऊईईईईईई, मां मर गई रे हाय दइया यह क्या कर दिया,,,,,ऊईईईईईई मां तू तो बड़ा बेरहम है रे,,,,,ओहहहहह मां,,,,,ऊफफ यह क्या कर दिया,,,,, निकल इसे जल्दी से,,,,

(अपनी मां को दर्द से तड़पता हुआ देखकर वह अपनी मां को समझाते हुए बोला)

कुछ नहीं हुआ है मां दो बच्चों को निकल चुकी हो फिर भी इस तरह से चीख रही हो जैसे आज की रात तुम्हारी सुहागरात हो और पहली बार अपनी बुर में लंड ले रही हो बस बस आराम से कुछ नहीं हुआ है,,,,।





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नहीं तु निकाल हरामजादे,,,, ऐसा लग रहा है जैसे लोहे का रोड गर्म करके डाल दिया हो,,, मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रही निकाल ले,।

(सूरज अपनी मां की स्थिति को समझ सकता था वह जानता था कि कई महीनो से उसकी बुर में लंड नहीं किया था इसलिए उसकी बुर का कसाव बढ़ चुका था और इस समय एकदम से मोटा लंड उसकी बुर में घुस गया है जिसकी वजह से उसे दर्द महसूस हो रहा है,,,, और इस बात को भी वह अच्छी तरह से जानता था की अगर ईस समय वह अपनी मां की बुर में से अपने लंड को बाहर निकाल दिया तो दोबारा वह डालने नहीं देगी और ऐसा मौका फिर उसे मिले ना मिले इसलिए वह इस मौके को गवाना नहीं चाहता था अपनी मां के दर्द को कम करने के लिए अपने दोनों हाथ को अपनी मां की चूची पर रख दिया जो की छाती पर पानी भरे गुब्बारे की तरह लहरा रहे थे। और उन्हें मसलना शुरू कर दिया इसी बीच वह अपनी मां को समझाते हुए लगातार उसका हौसला बढ़ाते हुए बोल भी रहा था।





बस बस हो गया अभी देखना कितना मजा आएगा तुम खुद कमर उछाल-उछाल कर मेरे लंड को अंदर लोगी,,,,,(और ईतना कहते हुए वह अपनी मां पर एकदम से झुक गया और उसके लाल-लाल होठों को मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया और लगातार उसकी चूची को दबाने लगा ऐसा करते हुए उसकी मेहनत रंग लाने लगी और उसकी मां के मुंह से निकलने वाली दर्द की कराहने की आवाज गरमा गरम सिसकारी में बदलने लगी,,,,, अपनी मां की स्थिति को देखकर सूरज मैन ही मन प्रसन्न होने लगा और अपने होठों को उसके होठों से अलग करते हुए मुस्कुरा कर बोला।)





मैं बोला था ना अब मजा आने लगाना,,,(ऐसा कहते हुए मैं धीरे से अपने लंड को बाहर की तरफ खींचा और हल्के से उसे अंदर की तरफ डाल दिया ऐसा वह बार-बार करने लगा सुनैना को मजा आने लगा सूरज अपनी सुझ-भुज और धैर्य के साथ अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया था सुनैना को अपनी बुर के अंदरूनी दीवारों पर अपने बेटे का लंड रगड़ता हुआ अंदर बाहर महसूस हो रहा था उसे इतना मजा आ रहा था कि पूछो मत उसके चेहरे का रंग एकदम से बदलने लगा था,,,, आंखों में मदहोशी छाने लगी थी,,, सुनैना की बड़ी-बड़ी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी जिसे सूरज छोड़ दिया था और उसकी कमर थाम लिया था अपनी जांघों पर अपनी मां की गांड चढ़ाया हुआ वह अपनी कमर हिला रहा था। धीरे-धीरे सूरज का लंड बड़े आराम से उसकी मां की बुर में अंदर बाहर होने लगा यह देखकर सूरज मुस्कुराता हुआ अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला।)

देखो अब कितने आराम से अंदर बाहर हो रहा है,,, तुम्हारी बुर सच में कसी हुई है,,,,, मुझे भी बहुत मजा आ रहा है,,,।





(अपने बेटे की बात सुनकर सुनैना से रहा नहीं गया और वह अपने दोनों हाथ की कहानियों का सहारा लेकर अपनी गर्दन ऊपर उठे और अपनी आंखों को अपनी दोनों टांगों के बीच स्थित कर दी उसे भी सबको साफ दिखाई दे रहा था जलती हुई लकड़ी की आग में खंडहर के अंदर का नजारा एकदम साफ था वह देख पा रही थी कि उसके बेटे का मोटा तगड़ा लंड बड़े आराम से उसके गुलाबी पर के छेद में अंदर बाहर हो रहा था,,, यह देख कर सुनैना की आश्चर्य का ठिकाना न था क्योंकि उसके मन में शंका थी कि उसकी छोटी सी बुर के छेद में उसके बेटे का मोटा तगड़ा लंबा लंड ठीक से घुस पाएगा कि नहीं लेकिन आप उसे अपनी बर पर गर्व होने लगा था क्योंकि वह बड़ी आराम से उसे अंदर ले ली थी गहराई तक। देखते ही देखते सूरज की कमर रफ्तार पकड़ रही थी सूरज का लंड बड़ी तेजी से सुनैना की बुर के अंदर बाहर हो रहा था। न जाने कितने दिनों से सूरज है सपना देखता आ रहा था अपने मन में एक ख्वाब सजाया हुआ था कि वह अपनी मां को चोदेगा लेकिन उसका यह ख्वाब कब पूरा होगा इस बारे में वह नहीं जानता था लेकिन उसे मालूम नहीं था कि आज की रात उसके ख्वाब के पूरा होने की रात है,,,, वह अपने मन में सोच रहा था कि अच्छा हुआ कि आज की रात वह अपनी मां को अपने बाप की करतुतो को दिखाने के लिए साथ में ले आया था और अच्छा हुआ कि तेज तूफानी बारिश शुरू हो गई थी वरना यह रात उसके जीवन में न जाने कब आती । बुजुर्गों के द्वारा कही गई कहावत आज उसे सच साबित होती मालूम हो रही थी कि जो भी होता है अच्छे के लिए होता है।





अब बोलो कैसा लग रहा है मां मुझे तो तुम्हें चोदने में बहुत मजा आ रहा है तुमको पता नहीं चुदवाने में कैसा लग रहा है,,,,,,।

(अपनी कमर को जोर-जोर हिलाता हुआ सूरज अपनी मां से बोला,,,,, सुनैना को भी बहुत मजा आ रहा था इस बात से वह इनकार नहीं कर सकती थी इसलिए वह मदहोश होते हुए अपने बेटे से बोली)

आहहहह आहहहहह (अपने बेटे के धक्के का मजा लेते हुए) बहुत मजा आ रहा है सच में मैं कभी सोचा नहीं थी कि इतना मोटा और लंबा लंड होता है मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है कि तेरा मोटा और लंबा लंड मेरी बुर में आराम से चला गया है,,,,,।

देख तो रही हो अपनी आंखों से कितने आराम से तुम्हारी बुर में अंदर बाहर हो रहा है। कसम से ऐसा लग ही नहीं रहा है कि मैं तो बच्चों की मां को चोद रहा हूं तुम आज भी अपनी जवानी के दिनों वाली सुनैना हो,,,,,,।





(अपने बेटे के मुंह से अपना नाम सुनकर सुनैना एकदम से मदहोश हो गई और उसे न जाने क्या हुआ वह अपना हाथ आगे बढ़कर अपने बेटे के हाथ को पकड़ ली और दोनों हाथों को अपनी दोनों चूचियों पर रख दी अपनी मां की अदा को देखकर सूरज चारों खाने चित हो गया उसे इतना आनंदित कर देने वाला यह पर लगा कि वह एकदम से अपनी मां की दोनों चूचियों को जोर से दबाता हुआ अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया ऐसा लग रहा था कि जैसे वह किसी घोड़ी की सवारी करता हुआ उसकी लगाम अपने हाथों से पकड़ा हो। सूरज को बहुत मजा आ रहा था अपनी मां की बात को सुनकर और उसकी हरकत को देखकर वह समझ गया था कि उसकी मां को बहुत मजा आ रहा है लेकिन फिर भी वह वह अपनी मां के मदहोशपन की परीक्षा लेना चाहता था,,, इसलिए वह जोर-जोर से धक्के लगाता हुआ अपनी मां के ऊपर पूरी तरह से झुक गया था और उसे अपनी बाहों में कस लिया था धक्का लगाते समय वह अपने लंड को जानबूझकर अपनी मां की बुर से बाहर निकाल दिया था और उसे दोबारा ना डालते हुए सिर्फ डालने का नाटक कर रहा था ऐसा वह बार-बार कर रहा था लंड को अपनी बुर के इर्द-गिर से फिसलता हुआ महसूस करके सुनैना की तड़प बढ़ती जा रही थी उसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था इसलिए वह खुद ही अपने हाथ को नीचे की तरफ लाई और अपने बेटे के लंड को पकड़कर फिर से अपनी गुलाबी गली का रास्ता दिखा दी,,,, अपनी मां की सर्कस से सूरज पूरी तरह से मस्त हो गया और एक बार फिर से उसके दोनों कंधों को अपने हाथ से पकड़ कर जोर-जोर से अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया सुनैना इस बात से हैरान थी कि उसका बेटा बहुत देर से घुटनों के बाल बैठ करके चुदाई कर रहा था लेकिन बिल्कुल भी थका नहीं था।





लेकिन इस बीच सुनैना की सांस फिर से ऊपर नीचे होने लगी वह फिर से अपने चरम सुख के करीब पहुंचने लगी इस बात का अंदाजा सूरज को लग चुका था इसलिए वह जोर-जोर से धक्का लगना शुरू कर दिया था क्योंकि वह जानता था कि औरत झड़ते समय तेज धकको का मजा लेकर और ज्यादा मस्त हो जाती है,,,,,,, पूरे खंडहर में सूरज की मां की सिसकारियां गुंज रही थी।

सहहहहहह आहहहहहहहह,,,,,, मैं फिर से झड़ने वाली हूं मेरे बेटे मेरा फिर से निकलने वाला है,,,आहहहहह आहहहहहहहह मुझे कुछ हो रहा है कश के मुझे अपनी बाहों में भर ले,,,(सूरज भी अपनी मां की बात मानता हुआ फिर से उसे अपनी बाहों में भर लिया और जोर-जोर से धक्के लगाना शुरू कर दिया,,,,,, और कुछ देर बाद सूरज अपनी मां की दोनों चूचियों को पकड़ कर जोर-जोर से धक्का लगता होगा वह भी अपनी मां की बुर में झड़ना शुरू कर दिया इतने घंटे की तपस्या का फल उसे मिल रहा था वह अपनी मां की बुर में झड़ रहा था सुनैना को अपने बेटे के लंड से निकलने वाली पिचकारी का एहसास अपने बच्चेदानी पर एकदम साफ हो रहा था वह पूरी तरह से तृप्त हो गई थी मदहोश हो चुकी थी। सूरज धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाता हुआ अपनी मां के ऊपर ही लेट गया कुछ देर में दोनों एकदम शांत हो गए सूरज अपनी मां की छाती पर सिर रखकर गहरी गहरी सांस ले रहा था बाहर बरसात लगातार हो रही थी लगातार तेज हवाएं चल रही थी बादलों की गड़गड़ाहट रुकने का नाम नहीं ले रही थी ऐसी तूफानी बारिश में डरावने मौसम में मां बेटे दोनों एक हो चुके थे दोनों के बीच का पवित्र रिश्ता तार तार हो चुका था मर्यादा की दीवार टूटकर गिर चुकी थी दोनों के बीच अब मां बेटे का नहीं मर्द और औरत का रिश्ता कायम हो चुका था,,,, लेकिन दोनों इस रिश्ते से बहुत खुश नजर आ रहे थे सूरज धीरे-धीरे अपनी मां की चूची के छुहारे को अपनी दोनों उंगलियों के बीच लेकर हल्के हल्के से दबा रहा था सुनैना को अपने बेटे की हरकत अच्छी लग रही थी इस समय झड़ने के बावजूद भी सूरज का लंड उसकी मां की बुर में घुसा हुआ था जिसका एहसास सुनैना को अपनी बुर के अंदर हो रहा था,,, बातचीत की शुरुआत करते हुए सूरज अपनी मां से बोला)





मैं कभी सोचा नहीं था कि मैं तुम्हें चोदूंगा,,,,।

मैं भी कभी नहीं सोची थी कि मैं तुझसे चुदवाऊंगी,,,,,(सुनैना भी अपने बेटे को जवाब देते हुए शर्माते हुए बोली,,,, सूरज फिर से अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

किसी गैर औरत को चोदूं तो इतना मजा नहीं आता जितना मजा अपनी मां को चोदने में आता है,,, कसम से तुम्हारी कसी हुई बुर कमाल की है,, कोई तुम्हारी बुर देखकर यह नहीं कह सकता कि इसमें से दो बच्चे बाहर निकले हैं,,,।

(बच्चों वाली बात सुनकर सुनैना एकदम से शर्मा गई और उसे शरमाता हुआ देखकर सूरज उसकी आंखों में देखते हुए बोला)

अब शर्माने से कोई फायदा नहीं है हम दोनों के बीच शर्म की दीवार एकदम से गिर गई है और अच्छा हुआ कि यह शर्म की दीवार गिर गई वरना मुझे पता ही नहीं चलता कि एक औरत कपड़े उतारने के बाद इतनी सुंदर दिखती है,,,(सूरज जानबूझकर अपनी मां से इस तरह की बातें कर रहा था ताकि जो कुछ भी हुआ इसके बारे में सोच कर कहीं उसके अंदर की मा ना जाए और फिर दोबारा उसे हाथ भी ना लगाने दे इसलिए वह अपनी मां की खूबसूरती के तारीफ भी कर रहा था सुनैना भी अपने बेटे के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर गदगद हुए जा रही थी,,,,, सुनैना के मन में बहुत देर से एक सवाल घूम रहा था,,,, हिम्मत करके वह बोली।)

अच्छा एक बात बता इतनी देर से तेरा लंड खड़ा था और इतनी देर से चुदाई करने के बाद जाकर तेरा पानी निकला क्या यह सच में इतनी देर तक हमेशा रहता है।

खड़ा तो यह बहुत देर तक रहता है,,,,।





सच में कमाल है,,,,।(सुनैना खुश होते हुए बोली)

कमल तो तुम हो तुम्हारी जवानी कमाल है तुम्हारी बुर कमाल तुम जिसे मिल जाओ उससे बड़ा खुशकिस्मत इंसान इस दुनिया में कोई हो नहीं सकता,,,।

तेरे पिताजी तो छोड़ गए,,,।

उससे बड़ा बेवकूफ इंसान इस दुनिया में कोई भी नहीं है,,,, उस बाजारु औरत को देखी थी ना क्या था उसे सूरत में कुछ भी तो नहीं था ना तुम्हारे जैसी गोरी थी नाहीं तुम्हारे जैसा कद काठी था, नंगी होने के बाद भी इतना आकर्षक उसका बदन नहीं लग रहा था और तुम्हारा देखो नंगी होने के बाद तो तुम कयामत लगती हो,,,,,(अपने बेटे की बात सुनकर सुनैना खुशी से मदहोश हो रही थी इस उम्र में उसका जवान बेटा उसकी जवानी की तारीफ कर रहा था इससे भला उसके लिए बड़ी बात क्या हो सकती थी,,,, तुम्हें देखकर ही किसी का भी लंड खड़ा हो जाए नंगी होने के बाद तो बिना कुछ किए ही उसके लंड से पानी निकल जाए ऐसी तुम्हारी जवानी है,,,,, पिताजी तो बेवकूफ थे जो तुम्हें छोड़ दे और अच्छा हुआ कि छोड़ गए वरना मुझे ऐसा सुख कभी नहीं मिलता और तुम्हें इतना मोटा तगड़ा जवान लंड भी नहीं मिल पाता।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुनैना बोली कुछ नहीं बस मुस्कुरा दी क्योंकि उसे अपने बेटे की बात में सच्चाई नजर आ रही वह जानती थी कि अगर उसका पति उसके साथ रहता तो शायद वह अपने बेटे के लंड के बारे में कभी समझ ही नहीं पाती क्योंकि पति के होने पर उसका बेटा उसके इतना करीब कभी नहीं आ पाता और उसे जो आज सुख दिया है ऐसा सुख वह कभी अनुभव नहीं कर पाती। मां बेटे के पीछे इसी तरह से बातचीत आगे बढ़ती रही लेकिन इस दौरान सुनैना को बड़े जोरों की पेशाब लगी थी वह अपने ऊपर से अपने बेटे को उठाना चाहती थी इसलिए वह नीचे से कसमसा रही थी अपनी मां की कसमसाहट देखकर सूरज बोला,,,)

क्या हुआ,,,?





मेरे ऊपर से उठ मुझे बड़ी जोर की पेशाब लगी है,,,,।

यह बात है पेशाब तो मुझे भी बड़े जोरों की लगी है कहो तो तुम्हारी बुर में ही मुत दुं।

धत् बेशर्म कहीं का अब उठ जा मेरे ऊपर से अभी भी अपना लंड मेरी बुर में डाला हुआ है,,,।

क्या करु यह निकलने का नाम ही नहीं ले रहा है।

वह निकालने का नाम नहीं ले रहा है कि तू निकालना ही नहीं चाहता,,,।

जैसा तुम समझो,,,।

अब हट जा,,,,।

(इस बार सूरज धीरे से अपनी मां के ऊपर से उठा और अपने लंड को अपनी मां की बुर से बाहर निकलने लगा जो कि अभी भी पहले की तरह ही बना हुआ था यह देखकर तो सुनैना के भी होश उड़ गए वह आश्चर्य से अपने बेटे के लंड की तरफ देखते हुए बोली,,,)

बाप रे यह तो अभी भी खड़ा है तु इंसान है कि जानवर,,,।

यह सब तुम्हारी जवानी का कमाल है जब तक तुम मेरे सामने इस तरह से नंगी घूमती रहोगी तब तक यह शांत होने का नाम नहीं लेगा,,,(अपनी मां के ऊपर से उठकर दूसरी तरफ बैठते हुए वह बोला,,,)

तब तो मुझे कपड़े पहनने पड़ेंगे,,,।





कपड़े पहनने के लिए अभी कपड़े सुखा भी नहीं है इसलिए तुम्हें नंगी ही रहना पड़ेगा और मेरे खड़े लंड को देखना ही पड़ेगा।

धत् तेरे से तो भगवान बचाए,,,,,( इतना कहकर सुनै अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और उसी जगह पर गांड मटकाते हुए जाने लगी जहां पर वह पहले बैठकर पेशाब की थी,,,,, और वहीं पर जाकर बैठ गई पेशाब करने के लिए सूरज को भी बड़े जोरों की पेशाब लगी थी इसलिए वह भी ठीक अपनी मां के पास खड़ा होकर पेशाब करने लगा मां बेटे दोनों एक दूसरे को देखते हुए पेशाब कर रहे थे दोनों के बाद में फिर से उत्तेजना के चिंगारी फूटने लगी थी बारिश हवा के जोर से उन दोनों के बदन को भिगो रही थी लेकिन अब बारिश की ठंडी बूंदे उन दोनों की जवानी के जोश को शांत करने में सक्षम नहीं था,,,,, सूरज फिर से उत्तेजित होने लगा था पेशाब करते हुए उसके दिमाग में कुछ और चल रहा था और जैसे ही उसकी मां पेशाब करके खड़ी होने को हुई सूरज एकदम से उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके होठों का रसपान करने लगा इस बीच एक कदम हुआ थोड़ा सा आगे निकल गया था जिससे बारिश की बूंदे दोनों के बदन को भिगोने लगी थी लेकिन अब सूरज को इस बात की चिंता बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि गर्माहट देने के लिए उसकी मां की जवानी से भरा हुआ बदन उसकी बाहों में था। अपने बेटे की हरकत को देखकर सुनैना भी मस्त हो चुकी थी और वह भी भीगती बारिश में अपने बेटे का पूरा साथ दे रही थी,,,, अपनी टांगों के बीच रगड़ते हुए टकराते हुए अपने बेटे के लंड को महसूस करके सुनैना हैरान थी क्योंकि बहुत ही जल्द उसका बेटा फिर से उसे चोदने के लिए तैयार हो चुका था,,, हैरानी के बीच इससे बड़ी खुशी की बात उसके लिए और क्या हो सकती थी,,,,, देखते ही देखते दोनों बारिश के साथ-साथ एक दूसरे की जवानी का भी मजा ले रहे थे आधी रात से ज्यादा समय गुजर चुका था और दोनों इस समय खंडहर के किनारे खड़े होकर के भीगने का मजा लेते हुए एक दूसरे में खोने की पूरी कोशिश कर रहे थे अब दोनों के पास बोलने के लिए शब्द नहीं थे क्योंकि अब बातचीत करने के लिए दोनों के पास कुछ भी नहीं था अब मुंह से बात नहीं की जा सकती थी अब बातचीत करने की जिम्मेदारी सुनैना की बुर और सूरज का लंड अपने कंधों पर ले लिए थे बार-बार सूरज का लंड सुनैना की बुर से टकरा जा रहा था रगड़ खा जा रहा था जिससे दोनों की उत्तेजना बढ़ जा रही थी।





सूरज अपनी मां की कमर पकड़ कर उसे एकदम से खंडहर के टूटे हुए दीवार के खंभे से सटा दिया और उसकी एक टांग को उठाकर अपनी कमर पर लपेट लिया और एक हाथ से अपने लंड को उसके गुलाबी छेद में डाल दिया लंड पुरा का पूरा एक ही बार में उसकी बुर में घुस चुका था,,, और बिना देरी किए अपनी मां के लाल लाल होठों को अपने मुंह में भरकर उसका रस चूसते हुए अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया था मां बेटे दोनों के लिए यह एक अद्भुत अनुभव था जो जिंदगी भर याद रहने वाला था सुनैना अपनी जिंदगी में कभी इस तरह का अनुभव नहीं प्राप्त की थी जब भी उसने चुदाई का सुख भोगी थी तो अपने घर पर बंद कमरे के अंदर ही चुदाई का सुख प्राप्त की थी,,,, लेकिन आज उसके बेटे ने आधी रात के समय भीगती बारिश में उसे चुदाई का सुख दे रहा था,,,, बड़े जोरों से सूरज अपनी कमर हिला रहा था और सुनैना भी अपने बेटे का साथ देते हुए उसके कंधे पर हाथ रखकर मदहोश हो रही थी। इस समय सुनैना की गर्म जवानी का ही असर था कि पानी की ठंडी बुंदे भी उनकी गर्मी को शांत नहीं कर पा रहे थे। दोनों बरसात के पानी में पूरी तरह से भीग चुके थे चुदाई का असीम सुख भोगते हुए सुनैना के मुंह से लगातार सिसकारी की आवाज निकल रही थी लेकिन तेज चलती हवाएं और बारिश के शोरगुल में उसकी शिसकारी की आवाज दब जा रही थी लेकिन उसे मजा बहुत आ रहा था एक टांग अपनी कमर पर लपेटे हुए सूरज अपनी कमर को जोर-जोर से हिला रहा था उसी से अपनी उत्तेजना बर्दाश्त नहीं हो रही थी तो वह अपनी मां की दूसरी टांग को भी उठाकर अपनी कमर से लपेट लिया था और एकदम से उसके नितंबों के नीचे अपने दोनों हथेलियों को रखकर उसे गोद में उठाए हुए ही अपनी कमर जोर-जोर से हिलाता हुआ उसकी चुदाई कर रहा था,,,,, पहले तो सुनैना घबरा गई अपने बेटे की हरकत पर की कहानी वह उसे गिरा ना दे लेकिन कुछ देर तक इसी तरह से तेज धक्के लगाने के बाद उसे विश्वास हो गया कि उसका बेटा उसे कभी नहीं गिराएगा अपने बेटे की मर्दाना ताकत उसकी भुजाओं का बल देखकर वह पानी पानी हो रही थी,,,,,।





इस अवस्था में बरसात के पानी में वह तब तक अपनी मां की चुदाई करता रहा जब तक कि वह अपनी मां को पूरी तरह से संतुष्ट नहीं कर लिया सुनैना के झड़ने के बाद वह भी झड़ गया और झड़ने के बाद अपनी मां को गोद में लिए हुए ही वह खंडहर के अंदर आ गया और धीरे से अपने लंड को बाहर निकाल कर अपनी गोद से अपनी मां को नीचे उतार दिया,,,, गहरी सांस लेती हुई सुनैना अपने आप को संभालना सकने की स्थिति में अपने बेटे का सहारा लेकर कुछ देर तक खड़ी होकर गहरी गहरी सांस लेने लगी जब स्थिति सामान्य हुई तो अपने बेटे की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए बोली।

बाप रे तू तो पूरा सांड है रे कहां से आई तुझ में इतनी ताकत मुझे तो लग रहा था कि तू गिरा देगा।

मेरे हाथों में तुम्हें उठाने की पूरी ताकत है तो मेरे हाथों से कभी गिर नहीं सकती,,,,(ऐसा कहते हुए वहां अपनी मां के साड़ी के पास गया जहां पर कपड़े सूख रहे थे और वहां से अपनी मां का पेटीकोट ले लिया,,,, और जल्दी से सुखी लड़कियों को बुझती हुई आग में डाल दिया ताकि वह फिर से जलने लगे क्योंकि अब ज्यादा जरूरी हो गई थी आग जलाना क्योंकि दोनों का बदन पानी से भीगा हुआ था और पानी बहुत ठंडा था इसका एहसास दोनों के दिमाग से वासना का तूफान शांत होने के बाद महसूस होने लगा,,,,, सूरज खुद अपनी मां की पेटीकोट से ही अपनी मां के बदन को पोछने लगा,,,, यह देखकर सुनैना को बहुत अच्छा लग रहा था कि उसका बेटा उसका कितना ख्याल रख रहा था देखते ही देखते पेटीकोट से सूरज अपनी मां को और अपने आप को पेटीकोट से पोछकर साफ कर लिया,,,, और अपनी मां से मुस्कुराता हुआ बोला,,)





आज तो मजा ही आ गया,,,, अब जल्दी से आओ बैठ जाओ आग जल रही है थोड़ा गर्म हो जाओ नहीं तो सर्दी लग जाएगी,,,।

तू है ना मेरी सर्दी दूर करने के लिए।

(अपनी मां की बात सुनकर सूरज मुस्कुराता हुआ आपके सामने बैठ गया और अपनी मां का हाथ पकड़ कर उसे अपनी गोद में बैठा दिया दोनों इधर-उधर की बात करने लगे इस दौरान सूरज का लंड सुनैना की गांड से रगड़ खाकर फिर से ठोकर मारना शुरू कर दिया था अपने बेटे की इरादे को देखकर सुनैना बोली,,,)

नहीं नहीं अब नहीं तूने मुझे एकदम से थका दिया है देख रहा है मेरी बुर की हालत ऐसी हालत तो तेरे पिताजी इतने वर्षों में नहीं कर पाए जो तूने एक ही रात में कर डाला,,,,, अब मुझे थोड़ा आराम करना है बारिश तो रुकने से रहीं देख रहा है अभी तक तेज बारिश हो रही है,,,,,।

वह तो हो ही रही है शायद हम दोनों को और ज्यादा देर तक रुकने का इशारा कर रही है,,,।





यही ईसारा तू अपने पास रख मुझे सोने दे,,,(सुनैना भी अपने बेटे की नंगी छाती का सहारा लेकर अपनी टांगें फैला कर लेट गई थी और सूरज भी अपनी मां को अपनी गोद में लिए हुए उसे सहलाता हुआ उसे सोने में मदद कर रहा था,,, थोड़ी देर में दोनों को नींद आ गई दोनों का नंगा बदन बरसात की ठंडक जलती हुई आग की तपन में राहत प्रदान कर रहा था जिसके चलते उन दोनों को नींद आ गई सुबह पंछियों के आवाज के साथ सूरज की नींद खुल गई बादल छंट चुके थे बारिश बंद हो गई थी,,, अभी पूरी तरह से सुबह नहीं हुई थी क्योंकि अभी भी अंधेरा था थोड़ी देर में उजाला होने वाला था चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था। सूरज अपनी मां की तरफ देखा तो वह एकदम मासूम सा चेहरा लिए हुए गहरी नींद में सो रही थी उसकी दोनों चुचिया तनी हुई थी और उसका छुहारा अभी भी उत्तेजित अवस्था में नजर आ रहा था,,,, सूरज से रहा नहीं गया और वह अपने दोनों हाथ को अपनी मां की चूची पर रखकर हल्के हल्के से दबाने लगा उसकी हरकत से सुनैना की भी आंख खुल गई,,,, खंडहर के बाहर की तरफ देखी तो बारिश रुक चुकी थी लेकिन अभी भी अंधेरा था अपनी मां को जगा हुआ देखकर सूरज मुस्कुराते हुए बोला,,,)

सुबह होने वाली है बारिश बंद हो चुकी है,,,,।





वह तो मैं देख ही रही हूं लेकिन यह तु क्या कर रहा है,,,?

वही मुझे जो करना चाहिए,,,,,।

(सूरज एक हाथ से अपनी मां की चूची को दबाते हुए दूसरे हाथ को चुची से हटाकर अपनी मां की बुर पर रख दिया और उसे सहलाने लगा सूरज की हरकत से सुनैना के बदन में भी फिर से उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी वह मचलने लगी,,,, उसका भी मन फिर से कर रहा था लेकिन वह अपने बेटे के सामने अपने मन की इच्छा जाहिर नहीं होने देना चाहती थी इसलिए वह अपने बेटे की गोद से उठकर खड़ी होने लगी तो उसका बेटा एकदम से उसे अपनी तरफ खींच लिया और अपनी गोदी में इस तरह से बैठा लिया कि दोनों का मुंह आमने-सामने हो गया इस दौरान सूरज का लंड उसकी बुर पर फिर से होकर करने लगा सुन ना अपने बेटे की हरकत से मचलने लगी लेकिन वह उठने की कोशिश करते हुए बोली,,,)

बरसात बंद हो गई अब हमें चलना चाहिए यहां से कोई भी आ जा सकता है,,,।





बहाना मत करो कोई भी आने वाला नहीं है देख रही हो अभी अंधेरा ही है और यह जगह गांव से बहुत दूर है इसलिए तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो,,,(ऐसा कहते हुए अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और उसे हल्का सा उठाकर अपने लंड के सुपाड़े को अपने आप ही अपनी मां की बुर से सटाने लगा,,,, लेकिन उसकी यह कोशिश नाकाम हो जा रही थी क्योंकि वह दोनों हाथों से अपनी मां की कमर पकड़े हुए था लंड को पकड़कर सहारा देना जरूरी था,,,, और अपने बेटे की हरकत से सुनैना के तन-बदन में फिर से आग लगने लगी। उसे रहने जा रहा था और वह धीरे से अपने हाथ को नीचे की तरफ ले जाकर के अपने बेटे की आंख में आंख डालकर उसके सुपाड़े को फिर से अपनी गुलाबी गली का रास्ता दिखा दी अपनी मां की हरकत से सूरज मुस्कुरा दिया और सुनैना अपने बेटे के कंधों को पकड़ कर अपनी बारी भर काम गांड का दबाव अपने बेटे के लंड पर बढ़ाने लगी और देखते ही देखते वह एकदम से अपने बेटे की गोद में बैठ गई क्योंकि सूरज का लंड उसकी बुर की गहराई में घुस चुका था,,,,, और इस बार लग रहा था कि सुनैना ने मोर्चा अपने हाथों से संभाल लिया था और खुद ही अपनी गांड को अपने बेटे के लंड पर पटक रही थी सूरज पागल हुआ जा रहा था अपनी मां की दोनों चूचियों को पकड़ कर वह जोर जोर से दबाता हुआ अपनी मां के धक्को का मजा ले रहा था। वातावरण पूरी तरह से ठंडा हो चुका था किसी भी वक्त उजाला हो सकता था सुबह होने वाली थी और ऐसी सुबह की शुरुआत में ही मां बेटे दोनों फिर से एक होने में लगे थे सुनैना अपनी गांड को तब तक अपने बेटे के लंड पर पटकती रही जब तक की दोनों का पानी नहीं निकल गया।

कपड़े सूख चुके थे दोनों अपने-अपने कपड़े पहन लिए थे एक ही रात में मां बेटे के बीच का रिश्ता बदल चुका था जो सुख सूरज ने एक ही रात में सुनैना को दिया था सुनैना आज की रात बोलने वाली नहीं थी यह रात उसके जीवन के बदलाव की रात आज के बाद से वह अपने लिए जीने वाली थी अपने पति की चिंता किए बिना वह अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहती थी और इसलिए उसकी यह रात उसकी मदद करने वाला था। थोड़ी देर में उजला होने लगा था और मां बेटे दोनों खंडहर से बाहर निकल कर अपने गांव की तरफ आगे बढ़ चुके थे।
 
महीनो की मेहनत चाहत रंग लाई थी,, सूरज के मन की इच्छा पूरी हो चुकी थी,, तूफानी रात में सूरज अपनी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी का रसपान जी भरकर किया था रात भर अपनी मां की जमकर चुदाई किया था जिसका मजा उसकी मां भी बराबर ली थी। सूरज कभी सोचा नहीं था कि जीवन में ऐसा पल आएगा की वह अपनी मां की चुदाई करेगा वैसे तो उसने इस दिन के लिए बहुत पहले से ही सपना देखना शुरू कर दिया था और दिन-रात पूरी कोशिश में लगा रहता था और उसकी कोशिश रंग लाई थी। लेकिन वह यह नहीं जानता था कि उसकी इस कोशिश में उसकी मां भी उसका पूरा साथ देगी,, लेकिन आज की रात तूफानी बारिश की रात में उसका सपना पूरी तरह से सच हो चुका था जो वह हासिल करना चाहता था वह हासिल कर चुका था। लेकिन इसके लिए उसे बहुत मेहनत करनी पड़ी थी।





उसके पिताजी का इसतरह से घर को छोड़कर चले जाना सूरज को छोड़कर उसकी मां और रानी को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा था लेकिन सूरज ही जानता था कि जब तक उसके पिताजी घर पर रहेंगे तब तक वह अपनी मां को कभी भी हासिल नहीं कर पाएगा उसकी जवानी का रस कभी भी चख नहीं पाएगा,,, लेकिन उसके पिताजी के इस तरह से दूर जाने पर और दूसरी औरत के साथ संबंध के कारण सूरज का काम आसान हो चुका था सूरज अच्छी तरह से जानता था कि एक औरत अपने पति का किसी गैर औरत के साथ संबंध कभी भी बर्दाश्त नहीं कर पाएगी ऐसे में औरत या तो टूट जाती है या तो फिर अपने पति को दिखाने के लिए किसी गैर मर्द का सहारा देती है और इस बात को सूरज अच्छी तरह से जानता था और इसी मौके का फायदा उठाते हुए वह अपनी मां को अपने पिताजी की रंगरेलियां दिखा दिया था जिसे देखकर सुनैना के तन बदन में आग लग गई थी वह क्रोधित हो चुकी थी गुस्से में वह कुछ भी कर सकती थी लेकिन सूरज बहुत समझदार था वह अपनी मां के दिमाग को दूसरी तरफ मोड़ते हुए उसके बदन में उत्तेजना और मदहोशी कैसा तूफान खड़ा किया कि वह वासना के भंवर में फंसती चली गई नतीजा यह हुआ कि ना चाहते हुए भी वह अपना सब कुछ अपने बेटे को समर्पित कर दी और ऐसा नहीं था कि सुनैना को ऐसा करने में मजा नहीं आया इस तरह का सुख उसने कभी भी अपने जीवन में प्राप्त नहीं की थी भले ही उसका पति उसे पूरी तरह से संतुष्ट कर देता था लेकिन उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि उसके बेटे में जो दम है जो बात है वह उसके पति में बिल्कुल भी नहीं था। इसीलिए तो अपने बेटे की मर्दानगी की वह पूरी तरह से कायल हो चुकी थी। गुजरी बीती रात मां बेटे दोनों के लिए एक नए जीवन की शुरुआत थी जिसमें सुनैना अपनी शारीरिक जरूरतों को जब चाहे तब पूरी कर सकती थी,, और वह भी जवान लड़के के साथ,, मां बेटे दोनों बहुत खुश नजर आ रहे थे रात भर मस्ती करने के बाद सुबह जल्दी वह दोनों खंडहर में से निकल चुके थे।





अपने पति की बेवफाई का दुख सुनैना को बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि अपने पति से बदला लेने का रास्ता उसने रात को ही खोज निकाला था जो की उसके पति के लिए बेहद असरदार था सुनैना अपने मन में यही सोच रही थी कि किसी दिन अगर उसका पति घर पर वापस आएगा तो वह अपने पति को बताएगी कि वह भी कुछ कम नहीं है अगर वह बेशर्म बन सकता है तो उसे भी छिनार बनने से कोई ताकत नहीं रोक सकती। सुनैना अपने मन में यही सोच रही थी कि अच्छा हुआ कि उसका बेटा उसे अपनी आंखों से उसके पति की अय्याशी दिखा दिया वरना अगर वह किसी के मुंह से सुनती तो कभी यकीन नहीं करती किसी के मुंह से क्या अगर खुद उसका बेटा सब कुछ अपने मुंह से बताता तो भी वह यकीन नहीं कर पाती और ऐसा पहले भी हो चुका था वह अपने बेटे के मुंह से अपने पति की अय्याशी की कहानी सुनी तो जरूर थी लेकिन उसका मन मानने को तैयार नहीं था। इसलिए अपने मन में सोच रही थी की रात को जो कुछ भी हुआ वह अच्छा ही हुआ।

मां बेटे दोनों बड़े सवेरे ही घर पर पहुंच चुके थे। दरवाजा अंदर से बंद था इसलिए वह दरवाजा खटखटाने लगी,,,,। यह देखकर सूरज मुस्कुराता हुआ बोला।

रात भर घोड़े बेचकर सो रही होगी,,,,।

नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है घर पर कोई नहीं था वह जरूर डर के मारा रात भर जाग रही होगी ,,, मैं तो भुल ही गई थी,,,।





रात भर टांग उठा उठा कर ले रही थी तो कहां याद आएगा कि घर पर कौन है,,!

(अपने बेटे की बात सुनकर सुनैना शर्म से पानी पानी हो गई क्योंकि अपने बेटे के कहने के साथ ही उसकी आंखों के सामने रात वाला दृश्य घूमने लगा जो कुछ भी रात को खंडहर के अंदर हुआ था वह सुनहरे पल उसके जेहन में बस गया था,,,, अपने बेटे की बात का जवाब वह दे नहीं पाई बस शर्म से अपनी नजर को नीचे झुका ली,,,, कोई जवाब ना आता देखकर वह फिर से दरवाजे पर दस्तक देते हुए बोली,,)

रानी,,,ओ ,,,,रानी,,,, अभी तक सो रही है क्या,,?

लगता तो ऐसा ही है,,,, रानी,,,ओ रानी,,,,,(सूरज भी दरवाजे पर जोर-जोर से दस्तक देते हुए बोला थोड़ी देर में पायल के करने की आवाज आने लगी इतने से ही मां बेटे समझ गई कि वह आ रही है सुनैना बोली)

अब उठी है लगता है,,,,।

(उसका इतना कहना था कि दरवाजा धीरे से खुला रानी अपने सामने अपनी मां और अपने भाई को देखकर थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली)

अब आए हो तुम दोनों,,,,, अच्छी नहीं रात को कितनी तेज बारिश हो रही थी इतनी तेज हवा चल रही थी मुझे तो डर के मारे नींद ही नहीं आ रही थी,,,.





लेकिन तू क्यों डर रही थी तुझे तो सो जाना चाहिए था ना,,,,(घर में प्रवेश करते हुए सुनैना बोली उसके पीछे-पीछे सूरज भी घर में घुस गया और अपनी मां की बात के साथ वह भी अपनी बात जोड़ते हुए बोला)

तुझे तो बारिश अच्छी लगती है ना।

लगती है लेकिन ऐसी बारिश नहीं कि घर में अकेली पड़ी रहो और तेज बारिश हो रही हो तब तो डर ही लगता है,,,

तब तो तुझे भी हम लोगों के साथ चलना चाहिए था क्यों मा सच कह रहा हूं ना,,,, इसे भी बहुत मजा आता,,,,।(सूरज अपनी मां की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए बोला तो उसकी मुस्कुराहट देखकर और उसकी बात सुनकर सुनैना उसके कहने का मतलब कोई अच्छी तरह से समझ गई थी इसलिए गुस्सा दिखाते हुए बोली)

चल रहने दे,,,, अच्छा यह बता झाड़ू तो लगा नहीं होगा आंगन में,,,,, अरे मैं भी कैसी बुद्धू हूं अभी तो तु उठकर आ रही है।

और आज लगेगा भी नहीं देखा नहीं रही हो चारों तरफ कीचड़ ही कीचड़ हो गया है ऐसे में झाड़ू कहां लगेगा थोड़ा सुखेगा तब जाकर झाडू लगेगा,,,।

हां तु ठीक कह रही है चल कोई बात नहीं, बर्तन तो साफ की है कि नहीं,,।

बर्तन झूठे ही कहां थे कुछ बना ही नहीं है,,,। मैं तो समोसे और जलेबी खाकर सो गई थी फिर आधी रात को इतनी तेज बारिश और इतनी तेज हवा चलना शुरू हुआ कि तो मेरी नींद ही उड़ गई रात भर जागती रही अभी कुछ देर पहले ही आंख लगी थी,, और तुम दोनों क्या तुम दोनों भी जाग रहे थे।





हमें तो जागना ही था,,,, क्यों मा,,,, जो काम हम दोनों को करना था उसके लिए जागना ही पड़ता।

हां हां,,,,, सोने का तो सवाल ही नहीं उठाता रात भर में काम जो पूरा करना था।

वैसे काम कौन सा था मां जो रात भर करना पड़ा।

ख,,,ख,, खरबूजे को लकड़ी की पेटी में रखकर तैयार करना था।

वह किस लिए,,,।

अरे बेवकूफ शहर भेजने के लिए एक-दो दिन की देरी हो जाती तो सारे खरबूजे खराब हो जाते,,,

ओहहह यह बात है,,,, तभी मैं सोचूं कि रात को खेत में कौन सा काम होता है,,,,,।





खेत में नहीं उनके घर पर काम था और हम तो नहीं थे दो-तीन लोगों से वरना काम पूरा ही नहीं होता,,,,(सुनैना रानी को समझाते हुए बोली सूरज अपनी मां की बात सुनकर अपने मन में खुश होते हुए बोल रहा था कि उसकी मां एक रात में कितनी चालाक हो गई है अपनी जवानी के किस्से छुपाने के लिए बहाना बना रही है चिंता मत करो अब वह दिन दूर नहीं है जब दोनों को एक ही बिस्तर पर नंगी करके चोदुंगा,,,, सुनैना अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली)

चल अब थोड़ा घर का काम करले,,,,।

अभी नहीं तुम काम कर लो मैं अभी थोड़ा घूम कर आता हूं थोड़ा मौसम तो देख लो बारिश के बाद कैसा लग रहा है गांव,,,,।

गांव अच्छा ही लग रहा है,,,।

फिर भी मैं देखूंगी तुम काम कर लो। (इतना कहकर रानी घर के बाहर निकल गई और इस समय सूरज यही चाहता भी था उसके जाते ही सूरज तुरंत दरवाजा बंद किया और अपनी मां का हाथ पकड़ कर अपनी बाहों में खींच लिया अपने बेटे की हरकत पर सुनैना शर्मा से पानी पानी होने लगी क्योंकि यह रात का अंधेरा नहीं था दिन का उजाला था अभी वह पूरे होशो हवास में थी,,,, शर्म के मारे सुनैना की हालत खराब थी अपने बेटे की बाहों में वह पिघल रही थी लेकिन वह अपने बेटे को इस समय कुछ भी करने देना नहीं चाहती थी,,,, इसलिए वह अपने बेटे की बाहों की कैद से छूटने की कोशिश कर रही थी लेकिन वह नहीं जानती थी कि वह ऐसे मर्द की बाहों में कैद है जिनकी बाहों में आने के लिए औरतें मचल उठती थी तड़पती थी सूरज अच्छी तरह से समझ रहा था कि उसकी मां इस समय ऐसा कुछ भी नहीं चाहती थी लेकिन वह चाहता था रात को अपनी मां की जवानी का रस चने के बाद वह पूरी तरह से अपनी मां की जवानी का गुलाम बन चुका था,,, अपनी मां की कोशिश को नाकाम करते हुए वह अपने हाथ की दोनों हथेलियां को अपनी मां के उभरे हुए नितंबों पर रखकर उसे दबाते हुए अपने बदन से सता लिया और बोला।)

सुनैना और उसका बेटा





कहां जा रही हो मेरी रानी रात भर तो मेरे लंड पर कूद कूद कर मजे ले रही थी,,, और इस समय भाग रही हो।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुनैना शर्म से गड़ी जा रही थी,,,, क्योंकि उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि उसने रात को क्या कि थी,,,, रात को अपने पति की हरकतों को देखकर वह आग बबूला हो चली थी,,, अपने पति के करतूत का बदला लेने के लिए वह अपने बेटे के ही साथ शारीरिक संबंध स्थापित कर ली थी जिसका एहसास उसे समय हो रहा था कि उसने जो कुछ भी की थी वह गलत था,,,, उसे इस बात का भी एहसास हो रहा था कि उसे उसके बेटे ने बहकाने में कोई कसर बाकी नहीं रखा था इस बात को वह पहले से ही जानते कि उसका बेटा उसकी तरफ आकर्षित है उसे पाना चाहता है भोगना चाहता है। और बड़ी चालाकी से वह अपनी मनमानी कर भी चुका था लेकिन अब वह चाहती थी कि ऐसा दोबारा ना हो वह आगे नहीं बढ़ना चाहती थी इसलिए वह अपने बेटे से बोली,,,)

रहने दो सूरज कल रात को जो कुछ भी हुआ उसमें हम दोनों की गलती थी लेकिन अब ऐसा नहीं होना चाहिए,,,।

सुनैना और उसका बेटा





यह क्या कह रही हो,,, ऐसे कैसे नहीं होना चाहिए,,,।

बस नहीं होना चाहिए क्योंकि मैं तेरी मां हूं और तू मेरा बेटा है हम दोनों के बीच मां बेटे का रिश्ता है ना ही पति-पत्नी या प्रेमी प्रेमिका का,,,।

औरत और मर्द का रिश्ता तो है,,,,,(सूरज अपनी मां की बात सुनकर थोड़ा हैरान हो गया था इसलिए उसे अपनी बाहों की कैद से बिल्कुल भी आजाद नहीं कर रहा था क्योंकि वह जानता था कि इस समय अगर वह भी अपनी मां की बात सुन लेता है तो आगे यह सब होना मुश्किल हो जाएगा और वह ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहता था इसलिए अपनी मां को समझाते हुए वह अपनी हरकतों को जारी रखे हुए था वह अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को साड़ी के ऊपर से ही मसल रहा था वह जानता था कि इस तरह की हरकत से औरत फिर से मदहोश होने लगती है पानी पानी होने लगती है और वह फिर से मर्द के आगे समर्पित हो जाती है इसलिए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) सभी रिश्तों से आगे यही एक रिश्ता होता है मर्द और औरत का जिसमें मर्द और औरत अपनी-अपनी जरूरतो को पूरा करते हैं। तुम सब कुछ भूल जाओ कि मैं तुम्हारा बेटा हूं तो मेरी मां हो तुम सिर्फ इतना याद रखो कि तुम एक औरत हो और मैं एक मर्द हूं औरत को मर्द की जरूरत हर कदम पर महसूस होती है और इस समय तुम्हें मर्द की जरूरत है।





नहीं सूरज मुझे यह नहीं होगा रात को मैं बहक गई थी,,,।

रात को क्यों बहक गई थी रात के अंधेरे में क्या तुम्हें समझ में नहीं आ रहा था कि हम दोनों क्या है,,? बिल्कुल समझ में आ रहा था मां लेकिन उसे समय तुम्हें मर्द की जरूरत थी और इस कमी को मैं पूरा कर सकता था इसलिए तुम बहक गई,,, लेकिन इस समय अभी तुम्हारे बदन में कामवासना नहीं है इसलिए तुम्हें मेरी जरूरत नहीं पड़ रही है और इसीलिए तुम रिश्तो की दुहाई दे रही हो लेकिन जब बिस्तर पर तुम्हें मर्द की जरूरत पड़ेगी तो तुम खुद मेरे पास चली आओगी तब तुम यह नहीं सोचोगी कि मैं कौन हूं तुम कौन हो,,,,।

लेकिन यह गलत है सूरज किसी को इस बारे में पता चल गया तो क्या होगा,,,?

किसको पता चलेगा मां,,,(सूरज इस तरह से अपनी मां की गांड को अपनी बाहों में भरकर उसे अपनी हथेलियां से मसलते हुए बोला और उसकी हरकत सुनैना के बदन में काम रस घोल रही थी,,,, धीरे-धीरे ही सही वह उत्तेजित हो रही थी,,,, सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,) क्या तुम बताओगी, नहीं ना और ना ही मैं बताऊंगा कर दीवारी के अंदर हम दोनों के इस राज को हम दोनों ही राज रख सकते हैं,,, ना मैं किसी को कुछ कहूंगा ना तुम किसी को कुछ कहोगी,,, तो कैसे पता चलेगा कि हम दोनों के बीच किस तरह का रिश्ता है,,,,, तुम इस बात से बिल्कुल भी इनकार नहीं कर सकती कि तुम्हें मेरी जरूरत है कल रात को ही तुम मेरे साथ जिस तरह से अपनी जरूरत को पूरी कर रही थी मैं समझ गया था कि आगे भी तुम्हें मेरी जरूरत पड़ती रहेगी वरना कहानी कम भाई गए तो तुम भी बदनाम हो जाओगी कहीं किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रह जाओगी,,,,।





लेकिन मुझे डर लग रहा है,,,!

कैसा डर,,,,, किस तरह का डर ऐसा कुछ भी नहीं है तुम बस घबरा रही हो यह सोचकर कि अगर किसी को पता चल गया तो क्या होगा किसी को कुछ भी पता चलने वाला नहीं है जरा कल रात के बारे में सोचो कल तुम अपनी जिंदगी में पहली बार खुलकर जी थी खुलकर मजा ली थी,,,, कल तुम्हें एक औरत होने का सुख अच्छे से प्राप्त हुआ था कल मैं तुम्हें देखा था, तुम सच में एक आजाद पंछी की तरह कर रात को खंडहर के अंदर तुम बिल्कुल आजाद पंछी की तरह इधर से उधर घूम रही थी बिना वस्त्र के देख कर ऐसा लग रहा था कि तुम इस धरती की हो ही नहीं ऐसा लग रहा था कि आसमान से कोई परी उतर आई हो। तुम्हें नंगी देखने के बाद में सब कुछ भूल गया था, सच कहूं तो ऐसा लगता है कि तुम मेरे लिए बनी हो,,, तुम्हारा नंगा बदन आम औरतों की तरह बिल्कुल भी नहीं था ऐसा लग रहा था कि जैसे किसी मूर्तिकार ने अपनी कलाकारी से तराशा हो,,,, तुम्हारा खूबसूरत चेहरा लाल-लाल होठ,,, तुम्हारी खरबूज जैसी गोल-गोल चूचियां,,,(ऐसा कहते हुए सूरज एकदम से एक हाथ अपनी मां की चूची पर रख दिया और ब्लाउज के ऊपर से उसे दबाते हुए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) ऐसा लगता था कि जैसे आसमान के दोनों चंद तुम्हारी छाती पर लटक रहे हो,,, और फिर तुम्हारी गोलाकार भरावदार बड़ी-बड़ी गांड कसम से इतनी खूबसूरत गांड पूरे गांव में किसी औरत की नहीं है,,,, मैं तो तुम्हारे रूप को देखकर पागल ही हो गया,,,,,,(पैसा कहते हुए सूरज एकदम से अपनी मां के लाल-लाल होठों पर अपने होंठ रखकर उसके होठों का रसपान करने लगा,,,,,, अब सूरज के पास कहने के लिए कोई शब्द नहीं थी और सुनैना के पास देखने के लिए अब और कोई मौका नहीं था वह अपने बेटे की बातों को सुनकर पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी उसकी हरकतों से उसके बदन में उत्तेजना का तूफान उठ रहा था उसके दोनों टांगों के बीच से मदन रस किसी झरने की तरह बह रहा था।





सुनैना भी अपने आप पर काबू नहीं कर पा रही थी कुछ देर पहले वह इस तरह के रिश्ते को आगे न बढ़ने के लिए अपने बेटे को दुहाई दे रही थी लेकिन अब उसे भी एहसास होने लगा था कि उसका भी गुजारा मर्द के बिना नहीं हो सकता कल रात से तो वह और भी ज्यादा मर्द के लिए तड़प रही थी जो सुख रात को उसके बेटे ने उसे दिया था वैसे सुख की तो उसने कभी कामना भी नहीं की थी वह कभी सोची भी नहीं थी कि इस तरह की भी चुदाई होती है हालांकि वह अपने पति के चुदाई से पूरी तरह से संतुष्ट थी लेकिन रात को उसे इस बात का एहसास हुआ था कि उसका बेटा उसके पति से भी एक कदम आगे था औरत को सुख प्रदान करने में जो भूमिका उसका बेटा निभा रहा था शायद उसका पति उस भूमिका में असफल होता हुआ नजर आ रहा था,,,, इसलिए इस समय वह अपने बेटे की बाहों में कमजोर हो चुकी थी वह अपने बेटे को अब आगे बढ़ने से नहीं रोक रही थी इस बात का एहसास सुरज को अच्छी तरह से हो रहा था इसलिए वह अपनी हरकतों को तेज कर दिया था अपनी मां के लाल-लाल होठों पर रस पान करते हुए एक हाथ से अपनी मां की गांड दबा रहा था और दूसरे हाथ से ब्लाउज के ऊपर से उसकी चूची दबा रहा था देखते ही देखते सुनैना के मुख से गरमा गरम सिसकारी की आवाज फूटने लगी,,, सूरज इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था वह जानता था कि कुछ देर पहले मामला पूरी तरह से कमजोर पडने लगा था लेकिन उसकी सूझबूझ और उसकी हरकतों ने एक बार फिर से राख में चिंगारी भड़का दिया था,,,, सूरज जब अपनी मां की जवानी पर एक बार फिर से पूरी तरह से छा जाना चाहता था,,,, वह जानता था कि अपनी मां को यौन सुख देने में जरा सी भी चूक नहीं होनी चाहिए वरना उसके अंदर की औरत जाग गई तो वह उसके लिए अपनी टांगों को कभी नहीं खोलेगी।





इसलिए सूरज एक पल की भी तेरी ना करते हुए अपनी मां को बाहों से पकड़ कर एकदम से दूसरी तरफ घुमा दिया जिसे उसकी पीठ सूरज की तरफ हो गई सूरज एकदम से दोनों हाथ आगे की तरफ लाकर उसकी छाती पर अपनी हथेली रखते हुए एकदम से अपने बदन से सटा लिया,, पजामे में पहले से ही अंकित का लंड खड़ा हो चुका था जो इस अवस्था में सीधे सुनेना की गांड में ठोकर लगाने लगा,,, सूरज पागलों की तरह अपनी मां की चूची को फिर से ब्लाउज के ऊपर से दबाना शुरू कर दिया था और पीछे से अपने लंड को उसकी गांड पर लगातार रगड़ रहा था भले ही वह साड़ी के ऊपर से रगड़ रहा था लेकिन उसकी चुभन सुगंधा को अपनी बुर के अंदरूनी हिस्से तक महसूस हो रही थी। रात की वह अपने बेटे के लंड की रगड़ को भूली नहीं थी उसका एहसास उसे अभी अपनी बर के अंदरूनी दीवारों पर महसूस हो रही थी इस तरह का रगड़ उसने अपने पति के साथ भी कभी महसूस नहीं की थी उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि वाकई में उसके बेटे का लंड उसके पति से कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था। इसलिए तो वह फिर से बहकने लगी थी,,,, सूरज पागलों की तरह अपनी मां की खूबसूरत अंगों को रौंद रहा था,,,, और गर्दन पर चुंबनों की बौछार लगा दिया था। कान के पास उसकी गहरी सांस को महसूस करके सुनैना की बुर बार-बार पिघल रही थी।





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दरवाजा बंद करके सूरज ने पहले से ही उसे पर कड़ी लगा दिया था ताकि अगर उसकी बहन वापस आ जाए तो उन दोनों को इस अवस्था से अलग होने में आसानी हो क्योंकि वह शुरू-शुरू में इस तरह के रिश्ते को अपनी बहन के सामने उजागर नहीं होने देना चाहता था वह ईस रिश्ते का पहला भरपूर मजा ले लेना चाहता था,,, वैसे तो उसे रानी की तरफ से किसी प्रकार का खतरा नहीं था क्योंकि पहले ही हुआ अपनी बहन के सामने अपने मन की मनसा को जाहिर कर चुका था जिसमें उसकी बहन की भी रजा मंदि थी वह चाहता तो वह अपनी बहन को रात वाली घटना के बारे में बता सकता था लेकिन वह इस राज को अभी राज ही रखना चाहता था। क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि एक औरत के साथ चोरी छिपे चुदाई का मजा लेने में जो सुख मिलता है वह खुले तौर पर बिस्तर पर भी नहीं मिल पाता इसलिए वह इस सुख को पूरी तरह से भोग लेना चाहता था इसलिए वह अपनी बहन को बताना नहीं चाहता था। इस समय वह अपनी मां को फिर से विवस कर दिया था उसके साथ चुदाई का सुख भोगने के लिए। और देखते ही देखते एक हाथ से उसकी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाना शुरू कर दिया था। इस बीच वह लगातार अपनी मां की गर्दन पर चुंबन कर रहा था जिससे उसकी मां मदहोश और कामातुर हुए जा रही थी। देखते ही देखते सूरज अपनी मां की साड़ी को आगे से कमर तक उठा दिया था दोनों टांगों के बीच की पतली तरह एकदम साफ नजर आ रही थी जिस पर सूरज अपनी हथेली रखकर उसे मसलना शुरू कर दिया था वह पूरी तरह से गीली थी उसका काम रास उसकी हथेली को पूरी तरह से भी हो रहा था और सुनैना की हालत खराब हो रही थी वह इस समय अपने मुंह से निकलने वाली शिसकारी की आवाज को काबू में करने की कोशिश कर रही थी लेकिन सूरज इस तरह से उसके बदन में उत्तेजना की चिंगारी को भड़का रहा था उसकी वजह से वह अपने आप पर अपने गरमा गरम शिसकारी की आवाज पर काबू नहीं कर पा रही थी और वह आवाज थोड़ी जोर से निकल रही थी जो कि अगर कोई दरवाजे के पास खड़ा हो तो उसे आराम से सुनाई दे सकती थी।





लेकिन सूरज अच्छी तरह से जानता था कि इस समय उसकी मां के मुंह से निकलने वाली गरमा गरम सीसकारी की आवाज को उसके सिवा कोई और सुनने वाला वहां नहीं था,,,, सूरज पागलों की तरह अपनी हथेली से अपनी मां की बुर को रगड़ रहा था मसल रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अपनी हथेली से अपनी मां की बुर से निकलने वाली मदन रस से उसकी बुर की मालिश कर रहा हो,,,,, उत्तेजना के मारे सुनैना का चेहरा तमतमा गया था। उसका गला सूखने लगा था अभी रात भर जी भरकर वह अपने बेटे से चुदाई का मजा लूट कर आई थी और सुबह-सुबह अपने किए पर पछता भी रही थी लेकिन एक बार फिर से सूरज उसे अपनी रंगीन बातों में मदहोश कर दिया था अपनी हरकतों से उसके बदन में फिर से जवानी की आग को भड़का दिया था जिसके चलते वह अब मदहोश हो चुकी थी और मजा लूट रही थी। गहरी चलती सांसों की गति के साथ ब्लाउज में कैद उसके दोनों कबूतर फड़फड़ा रहे थे और सूरज था कि उसके गुलाबी कटोरे पर टूट पड़ा था। सूरज अपनी हरकतों को जारी रखते हुए अपनी मां के मन की दशा को जानना चाहता था इसलिए वह एक हाथ से ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चूची को दबाते हुए और दूसरे हाथ से उसके गुलाबी बुर से खेलते हुए बोला,,,)

अब कैसा लग रहा है मां,,,,, बताओ ना क्या तुम्हें नहीं लगता कि तुम्हें मेरी जरूरत है और मुझे तुम्हारी जरूरत है,,,,,, बताओ मां,,,,,सहहहह (एकदम मदहोश होता हुआ सूरज बोल तो उसकी बात सुनकर सुनैना अपने मन की दशा को छुपा नहीं पाई और बोली)





सहहहहहहहह ,,,,,, मैं तो पागल हुए जा रही हूं,,,,, यह तूने कौन सी हाथ मेरे बदन में लगा दिया है,,,,,आहहहहहहहह मुझे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है मुझे अब लगने लगा है कि सच में मुझे तेरी ही जरूरत है मेरे अंदर की कमी को सिर्फ तू ही पूरा कर सकता है,,,,,आहहहहहहहह तू तो मेरी हालत खराब कर रहा है,,,,।

यह तो कुछ भी नहीं है अभी तो बहुत कुछ बाकी है मेरी रानी,,,,,,,।

(एक बार फिर से अपने लिए अपने बेटे के मुंह से रानी शब्द सुनकर वह शर्म से पानी पानी हो गई थी लेकिन तभी उसे अपनी बेटी रानी का ख्याल आ गया था इसलिए वह बोली)

कहीं रानी आ गई तो,,,,,।

इतनी जल्दी वह नहीं आने वाली तुम्हें तो मालूम है जब वह गांव घूमने के लिए जाती है तो दो-तीन घंटे बाद ही वापस लौटती है,,,,,। हम दोनों के पास बहुत समय है,,,,,,(और इतना कहने के साथ ही सूरज अपने दूसरे हाथ को भी जोकी सुनैना की बुर की सेवा में व्यस्त था उसे भी ऊपर उठा लिया और उसे भी चुची पर रखकर कुछ देर तक उसे ब्लाउज के ऊपर से ही दबाते रहा,,,,, और फिर अपने हाथों से अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलने लगा,,,, सूरज को औरत के तन पर से वस्त्र को अपने हाथ से उतारने में जो सुख मिलता था वह उसके लिए अद्भुत आनंद था जो और किसी क्रिया में मिलने वाली नहीं थी इसीलिए वह इस समय अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलते हुए पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था और पजामे में बने तंबू को बराबर अपनी मां की गांड पर रगड़ रहा था जिससे सुनैना की हालत और ज्यादा खराब हो रही थी सुनैना से भी रहा नहीं जा रहा था इसलिए वह अपने हाथ को पिछे लाकर पजाम के ऊपर से ही अपने बेटे के लंड को पकड़ ली थी और उसे ऊपर से ही जोर-जोर से दबा रही थी मसल रही थी,,,, सूरज की हरकतों से सुनैना की हालत खराब हो रही थी और सुनैना की हरकत से सूरज मदहोश हुआ जा रहा था उसकी उत्तेजना बढ़ती चली जा रही थी देखते-देखते वह अपनी मां के ब्लाउज के सारे बटन खोल चुका था और ब्लाउज को बिना उतरे उसकी नंगी खरबूजे जैसी चूचियों को दोनों हथेलियां में दबाकर जोर-जोर से मसल रहा था दबा रहा था जिससे सुनैना का आनंद और भी ज्यादा बढ़ता चला जा रहा था सुन ना अब खुद ही उत्तेजना के मारे अपनी गांड को गोल-गोल घुमा कर अपने हाथ में पड़े हुए तंबू को खुद ही अपनी गांड पर रगड़ रही थी। कुछ देर तक मां बेटे इसी तरह से मजा लेते रहे।





सुनैना पानी पानी हो रही थी उसकी बुर से लगातार मदन रस का झरना बह रहा था जो उसकी जांघों से होता हुआ उसके पैरों को भिगो रहा था सुनैना को इस बात का एहसास अच्छी तरह से हो रहा था कि जितना पानी वह अपने बेटे के संगत में निकाल रही थी इतना पानी वह अपने पति के साथ कभी नहीं निकाली थी,,,, देखते ही देखते सूरज एकदम से फिर से उसकी बाहों को पकड़ कर घुमा दिया और एकदम से उसे अपने सामने खड़ी कर दिया उसकी कमर में एक हाथ डालकर वह अपनी मां की चूची को पड़े बिना ही अपने मुंह को उसके ऊपर रखकर जल्दी से उसे मुंह में भर लिया और पीना शुरू कर दिया,,,,, अपने बेटे की हरकत से सुनैना काम विभोर हुए जा रही थी,,, सुबह-सुबह सूरज ने अपनी हरकतों से उसके बदन में चुदास उसकी लहर भर दिया था सुनैना पूरी तरह से चुदवासी हो चुकी थी अगर इस समय सूरज उसे चोदने से इनकार कर दे तो सुनैना खुद ही उसे पटक कर उसके ऊपर चढ़ जाए,,,,, बारी-बारी से सूरज अपनी मां की दोनों चुचियों का रसपान कर रहा था रात भर जी भर कर अपनी मां की जवानी से खेलने के बाद भी उसका मन बिल्कुल भी भर नहीं था और इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि पसंदीदा औरत के साथ चाहे जितना भी जिस्मानी ताल्लुकात बना लो प्यास उतनी की उतनी ही रहती है कभी बुझती नहीं है,,, और इस बात से सूरज संतुष्ट था कि उसकी मां अपनी मां की जवानी से कभी भरने वाला नहीं था और वह अपनी मां की जवानी का जी भर कर मजा लूटना चाहता था ‌।





एक बार फिर से अपनी मां की चूची को मुंह में लेकर पीते हुए वह एक हाथ से अपनी मां की साड़ी को ऊपर की तरफ उठा रहा था और कमर तक उठ जाने के बाद सूरज अपनी मां की बुर को अपनी हथेली में दबोच लिया था मानो के जैसे कोई खजाना हो और वह अपने हाथ से उसे छोड़ना ना चाहता हो अपने बेटे के ही सहकत से सुनैना एकदम से कसमसा गई थी,,,, अपने प्रति अपने बेटे की दीवानगी देखकर सुनैना मन ही मन बहुत प्रसन्न हो रही थी अपने पति की बेरुखी की बात वह कभी सोची भी नहीं थी कि उसे मर्द का सुख कभी मिल पाएगा लेकिन वह क्या जानते थे कि इसका जुगाड़ घर में ही हो जाएगा और ऐसा जुगाड़ इसके बारे में उसने कभी सोची भी नहीं थी। बेटे का लंड इतना मोटा और तगड़ा होगा वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी रात भर उसे अपनी बुर में लेने के बाद अभी तक उसे ऐसा एहसास होता था कि जैसे उसकी बुर में उसके बेटे का लंड भरा हुआ है,,, उम्र के इस पड़ाव पर जवान लड़के को पाकर वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी,,, अब तो उसके मन में भी इसका एहसास होता है कि अच्छा हुआ कि उसका पति उसे छोड़कर चला गया वरना चुदाई का ऐसा अद्भुत सुख वह कभी भोग नहीं पाती। सूरज अपनी हरकतों से अपनी मां को मदहोश किए हुए था उसकी जवानी को पल-पल तड़प रहा था अपनी मां की बुर को हथेली में लेकर दबोचते हुए वह धीरे से अपनी एक उंगली को अपनी मां की बुर में उतार दिया था और उसे अंदर बाहर करता हुआ उसकी दोनों चूचियों को पी रहा था। तकरीबन आधा घंटे जितना समय गुजर चुका था और मां बेटे घर के दरवाजे के पास ही खड़े थे और मजा लूट रहे थे दोनों को इतना भी समय नहीं था कि दोनों चलकर कमरे में चले जांए,, शायद इसलिए की चुदाई करते समय स्थान बदलने का जो आनंद होता है और शायद एक ही जगह पर कभी नहीं मिलता और इसीलिए मां बेटे खड़े-खड़े ही मजा लूट रहे थे।





सहहहहहह आहहहहहहहह,,,,,ऊमममममममम,,,ऊईईईईईई मां,,,,,,आहहहहहह सुरज आहहहहहहहह तू तो मुझे पागलकर दिया है,,,ऊमममममममम खुशी से कहीं में मर ना जाऊं,,,,,आहहहहहह यह क्या कर दिया तूने मेरे बेटे,,,,,,आहहहहहहहह ।

(इस तरह की आवाज अपने मुंह में से निकालते हुए,,, सुनैना मचल रही थी तड़प रही थी। और अपने बेटे की उंगली पर अपनी बुर को भी गोल-गोल घूम रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह खुद ही उसे अंदर लेने की भरपूर कोशिश कर रही थी,,, अपनी मां की स्थिति को देखकर सूरज समझ गया था कि इस समय उसकी मां को क्या चाहिए लेकिन वह अपनी मां की तड़प को और ज्यादा बढ़ाना चाहता था उसे पूरी तरह से चुदवासी बना देना चाहता था इसलिए सूरज अपनी मां की तड़प बढ़ाते हुए उसकी चूची पर से अपने मुंह को हटा लिया और धीरे से घुटनों के बाल नीचे बैठ गया सुनैना गहरी सांस लेते हुए अपने बेटे को देख रही थी उसका चेहरा टमाटर की तरह लाल हो गया था उसकी आंखें बड़ी-बड़ी हो गई थी क्योंकि वह पूरी तरह से मदहोशी के सागर में डुबकी लगा रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी सांस उखड़ रही हैं,,,,, सुनैना जानती थी कि अब उसका बेटा क्या करने वाला है इसलिए वह पूरी तरह से मस्त होते हुए अपने बालों के जुड़े को खोल दी और उसके रेशमी बाल एकदम से खुलकर उसके कंधे के नीचे तक आने लगे जो उसकी दोनों चूचियों को हल्का-हल्का छुपाने में कामयाब हो रहे थे , यह नजारा देखकर सूरज और भी ज्यादा उत्तेजित हो गया और तुरंत अपनी मां की मोटी मोटी जांघों को दोनों हाथों से पकड़ कर एकदम से अपनी मां की रशीली बुर पर अपने प्यासे होठों पर रख दिया और से चाटना शुरू कर दिया अपने बेटे की हरकत से सुनैना एकदम से गनगना गई वह एकदम से गिरने से बचने के लिए अपने बेटे के कंधे का सहारा लेकर खड़ी हो गई उत्तेजना के मारे उसके घुटने कांप रहे थे,,,, सूरज पूरी तरह से अपनी मां की जवानी पर छाता चला जा रहा था।





अब सुनैना के मुंह से शिसकारी की आवाज तेज होने लगी क्योंकि वह अपने आप पर काबू नहीं कर पा रही थी सूरज पागलों की तरह अपनी मां की बुर की चटाई कर रहा था उसके नमकीन पानी को जीभ से अपने गले के नीचे उतार रहा था,,,, सुनैना आश्चर्य चकित हुए जा रही थी क्योंकि इस तरह से उसके पति ने भी कभी उसके साथ प्यार नहीं किया था भले उसे संतुष्ट कर देता था लेकिन इस तरह की बुर की चटाई कभी नहीं किया था चाटता जरूर था लेकिन इतनी शिद्दत से मजा लेकर शायद ही कभी चाटा हो,,,,, सुनैना की सांस ऊपर नीचे हो रही थी वह निर्वस्त्र बिल्कुल भी नहीं थे लेकिन निर्वस्त्र से कम भी नहीं थी क्योंकि उसके जरूरत का अंग पूरी तरह से उजागर था। जोकि एक मर्द मजा लेने के लिए उजागर करता है। सुनैना मदहोशी में डूबते हुए अपनी मोटी जांघो को उठाकर अपने बेटे के कंधे पर रख ले और सूरज भी अपनी मां का हौसला बढ़ता हुआ अपने दोनों हाथों को उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर रखकर उसे मसलते हुए उसकी बुर की चटाई करना शुरू कर दिया था,,,, देखते ही देखते सूरज अपनी हरकतों से अपनी मां को चरम सुख के बेहद करीब लेकर आ गया था वह जोर-जोर से मदहोशी में डूबते हुए शिसकारी की आवाज ले रही थी अब थोड़ा सा लेकिन सुबह का समय था लोग अपने-अपने काम में व्यस्त थे इसलिए थोड़ा निश्चिंत होकर अपनी हरकतों को सूरत जारी रखा और देखते ही देखते उसकी मां मदहोश होते हुए अपने बेटे के मुंह पर अपनी बर को रगड़ना शुरू कर दी और हल्के हल्के अपनी कमर को भी आगे पीछे करके हिलना शुरू कर दिए एक तरह से वह इस तरह की हरकत करते हुए अपने बेटे के मुंह की चुदाई कर रही थी,,,, और फिर एकाएक उसका बदन करने लगा और वह झड़ने लगी लेकिन सूरज अपनी मां की बुर से निकलने वाली मदन रस की एक भी बुंद को जमीन पर गिरने नहीं दिया और उसे चाटता चला गया,,,,।





सुनैना झड़ चुकी थी लेकिन अंकित अभी झड़ना बाकी था,,,,, सुनैना मस्त हो चुकी थी वह गहरी सांस लेते हुए कमर तक साड़ी उठाए हुए दरवाजे की दरार से बाहर की तरफ देख रही थी कि कहीं कोई खड़ा तो नहीं है कोई उसकी इस तरह की आवाज को सुन तो नहीं रहा है,,,, राहत की बात यह थी कि बाहर कोई खड़ा नहीं था लेकिन वह जिस तरह से झुक कर दरवाजे की दरार से बाहर देख रही थी यह अवस्था बेहद मदहोश कर देने वाली थी क्योंकि कमर तक साड़ी उठी हुई थी और वह हल्की सी घोड़ी बनी हुई थी जो कि उसकी साड़ी उसके नितंबों के उभार पर टिकी हुई थी और उसका पिछवाड़ा पूरी तरह से उजागर था अपनी मां को इस अवस्था में देखकर सूरज की मनोदशा खराब होने लगी एक तो पहले से ही वह उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच चुका था वह अपनी मां को चोदने की तैयारी में था, लेकिन अब एक बार फिर से वह अपनी मां की बुर को चाटना चाहता था और वह भी पीछे से इसलिए उसकी मां इस अवस्था को बदल पाती ईससे पहले ही वह फिर से अपने घुटनों के बल बैठकर अपनी मां की दोनों टांगों को खोल दिया और फिर से उसकी बुर पर अपना मुंह लगा दिया,,, इस बार सुनैना को अंदाजा नहीं था इसलिए अपने बेटे की हरकत से जैसे ही वह उसके मुंह को अपनी बुर पर महसूस करके एकदम से उछल पड़ी लेकिन अगले ही पल फिर से मदहोश होने लगी वह दरवाजे को पकड़ कर अपने बेटे की हरकत का मजा लेने लगी दरार में से वह सब कुछ बाहर देख रही थी रह रहकर लोग उसके घर के आगे से गुजर रहे थे उन लोगों को इस बात का एहसास ही नहीं था कि बंद दरवाजे के पीछे मां बेटे क्या गुल खिला रहे हैं।





अब सूरज से रहा नहीं जा रहा था चोदने के लिए यह अवस्था बिल्कुल उचित थी। इसलिए वह धीरे से उठकर खड़ा हो गया और अपनी मां की गोरी गोरी बड़ी बड़ी गांड पर दो चार चपत लगता हुआ अपने पजामा को उतार कर कमर से नीचे नंगा हो गया,,, उसका लंड तैयार था सुनैना के बारे में जाने के लिए सुनैना अरे रहकर पीछे नजर घुमा कर अपने बेटे की हरकत को देख ले रही थी क्योंकि वह जानती थी कि आप उसका बेटा क्या करने वाला है इसलिए वह अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर चुकी थी कोई आना जाए इसलिए दरवाजे की दरार से बाहर देख भी रही थी उसे सब को साफ दिखाई दे रहा था रह रहकर ईक्का दुक्का लोग उसके घर के द्वारा से गुजर रहे थे,,, सुनैना को अत्यधिक उत्तेजना का एहसास हो रहा था क्योंकि इस समय वह बाहर भी देख रही थी और अपने बेटे से चुदवाने जा रही थी शायद इसीलिए उसकी मदहोशी बढ़ती जा रही थी। सूरज ढेर सारा थुक अपने लंड पर लगाया और उसे हाथ में पकड़ कर हिलाते हुए अपनी मां की दोनों टांगों के बीच उसके गुलाबी छेद की तरफ ले जाते हुए बोला।





ओहहह मेरी छिनार अब देखना कैसी चुदाई करता हूं,,,।

(अपने बेटे के मुंह से अपने लिए छिनार शब्द सुनकर वह उत्तेजना से गदगद हो गई वह अपने बेटे को कुछ बोल नहीं पाई बस नजर पीछे की तरफ घूमकर अपने बेटे की हरकत को देखने लगी देखते ही देखते सूरज अपने मोटे तगड़े लंड को एक बार फिर से अपनी मां की बुर में डाल चुका था,,, और सुनैना उत्तेजना से सिहर उठी थी वह दरवाजे को दोनों हाथों से पड़कर एक बार फिर से अपनी नजरों को दरवाजे की दरार से बाहर स्थित कर दी थी,,,, गांव की दो औरतें ठीक उसके घर के सामने खड़ी होकर बातें कर रही थी,,,, दोनों को सुनैना जानती थी उसे इस बात का डर था कि कहीं वह दोनों उसे बुलाने के लिए घर पर न जाए लेकिन वह लोग अपनी ही बात में लगी हुई थी और सूरज उसकी चुदाई करना शुरू कर दिया था,,,, उसे दोनों औरतों के और उसके बीच में केवल एक दरवाजा ही था बाकी सब कुछ एकदम साफ था अगर दरवाजा ना होता तो वह एक तरह से उन दोनों औरतों के सामने खड़ी खड़ी चुदवा रही थी। यह बेहद उत्तेजना से भरा हुआ पल था सूरज धक्के पर धक्का लगा रहा था।





हर धक्के के साथ सुनैना की भारी भरकम गांड पानी भरे गुब्बारे की तरह लहर उठ रही थी जिसे देखकर सूरज की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती चली जा रही थी ब्लाउज खुला होने की वजह से उसके दोनों दशहरी आम आजाद थे इसलिए अंकित धक्के लगाता हुआ अपने दोनों हाथों को आगे की तरफ बढ़ाकर उसके दोनों दशहरी आम को पकड़ कर उन्हें दबाता हुआ धक्के लगा रहा था सुनैना को एक बार फिर से अपने बेटे के लंड की रगड़ एकदम साफ महसूस हो रही थी और इस रगड़ के साथ उसकी बुर पानी पानी हो रही थी उसे यह रगड़ बेहद आनंदीत और उत्तेजित कर रही थी,,,। सुबह-सुबह ही सूरज पसीने से तरबतर हो चुका था आखिरकार मेहनत जो इतना कर रहा था यही हाल सुनैना का भी था सुनैना का चेहरा टमाटर की तरह लाल हो चुका था उसका मुंह खुला का खुला था और वह नाक से कम अपने मुंह से ज्यादा सांस ले रही थी वह बेहद मदहोशी के सागर में डुबकी लगाते हुए मजा लूट रही थी वह कभी सोची भी नहीं थी कि उसे इस तरह का मजा मिलेगा और अपने ही बेटे के द्वारा। गजब घमासान चुदाई के बाद मां बेटे दोनों की सांस ऊपर नीचे होने लगी थी दोनों का बदन अकड़ने लगा था और अगले ही पल सुनैना के साथ-साथ सूरज भी झड़ने लगा लेकिन वह तब तक धक्के लगाता रहा जब तक की उसके लंड से पूरा पानी उसकी मां की बुर में निकल नहीं गया।





वासना का तूफान शांत हो चुका था सुनैना अपने कपड़ों को व्यस्त करने में लगी हुई थी और सूरज भी अपने पजामा को पहनते हुए अपनी मां की तरफ देखकर मुस्कुरा रहा था लेकिन सुनैना की हालत खराब थी वह एक बार फिर से शर्म से पानी पानी हो जा रही थी अपनी मां के मन की हालत को सूरज अच्छी तरह से समझ रहा था इसलिए वह अपनी मां से बोला।

तुमने रानी के सामने खरबूजे का जिक्र करके अच्छा हुआ मुझे याद दिला दे मुखिया के खरबूजे के बगीचे में भी मुझे जाना था काम करने के लिए,,,, अब तुम्हें तो कहीं जाना नहीं है इसलिए घर पर रहकर आराम करो रात भर मेहनत बहुत करी हो,,,(अपने बेटे की आवाज सुनकर सुनैना फिर से शर्मा गई और सूरज मुस्कुराता हुआ घर से बाहर निकल गया )
 
रात भर जमकर चुदाई करने के बाद सुबह-सुबह भी सूरज अपनी मां की जवानी का मजा ले चुका था जिसमें उसकी मां ने उसका पूरा सहयोग दी थी पहले तो सूरज को ऐसा ही लग रहा था कि जैसे उसकी मां का मन बदल गया हो क्योंकि वह इस तरह की बात ही कर रही थी सीधे-सीधे यह कह रही थी कि अब से आगे यह सब नहीं होगा जो कुछ भी होगा इसमें दोनों की गलती है सूरज मौके की नजाकत को अच्छी तरह से समझता था वह जानता था कि अगर वह आज वह अपनी मां की हां में हां मिला दिया तो दोबारा उसे ऐसा सुख कभी भी मिलने वाला नहीं है इसलिए वह अपनी हरकतों से एक बार फिर से अपनी मां के बदन में मदहोशी की लहर भर दिया था जिसके चलते सूरज की मां आंगन में दरवाजा पकड़कर जमकर चुदाई का मजा लूट रही थी,,, ‌।





सुबह-सुबह कोई काम नहीं था तो खरबूजे का जिक्र आते ही सूरज को ख्याल आ गया की मुखिया जी खरबूजे के खेत में उसे कम सौंपते थे और वह अपनी मां की चुदाई करने के बाद खरबूजे के खेत की तरफ ही चला जा रहा था वह बहुत खुश नजर आ रहा था क्योंकि जिंदगी में वह बहुत कुछ हासिल कर चुका था। औरतों के मामले में जिसको चाहता था उसको बिस्तर पर लाकर जमकर उसकी चुदाई करता था। जिसमें अब उसकी मां भी शामिल हो चुकी थी अपनी मां को हम बिस्तर बनाने का गर्व उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था,, अपनी मां के तरफ वह पहले से ही आकर्षित था लेकिन वह यह नहीं जानता था कि इतनी जल्दी उसकी मां घुटने टेक देगी लेकिन जो कुछ भी हुआ था उसमें मां बेटे दोनों को फायदा था सूरज की भी इच्छा पूरी हो रही थी और उसकी मां की भी जरूरत पूरी हो रही थी। अपने मन में ढेर सारी बातें सोचता हुआ सूरज खरबूजे के खेत पर आ चुका था,,, बरसात के कारण खरबूजे के खेत में भी पानी भरा हुआ था खरबुजे एकदम बड़े हो चुके थे लेकिन अभी पके नहीं थे बस पकने की तैयारी में थे और यही सही मौका था इन्हें तोड़कर बाजार ले जाने का क्योंकि अगर 2 दिन की भी देरी हो जाए तो खरबूजा अपने आप पक जाता और धीरे-धीरे खराब होने लगता, सूरज धीरे-धीरे खरबूजे को तोड़कर एक तरफ रख रहा था। खरबूजे की खुशबू पूरे खेत में फैली हुई थी। अभी वह खरबूजा तोड ही रहा था कि तभी उसे पायल की आवाज सुनाई दी और पीछे मुड़कर देखा तो नीलू चली आ रही थी,,, नीलू को देखकर सूरज के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे। वह नीलू को देखता हुआ खड़ा हो गया,,, इतने सुबह-सुबह नीलू के दर्शन करके वह काफी खुश नजर आ रहा था। लेकिन जैसे-जैसे नीलू करीब आ रही थी उसके चेहरे पर फैली हुई चिंता और गुस्से की लकीर एकदम साफ दिखाई दे रही थी सूरज को कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह एक टक उसे ही देख रहा था।





तभी वह सूरज के एकदम करीब आ गई और बिना कुछ बोले उसके सीने पर दोनों हाथ से धक्का देने लगी और सूरज अपने आप को संभाल नहीं पाया और एक खरबुजे के ऊपर गिर गया और वह खरबुजा फट गया। उसे नीलू का व्यवहार को समझ में नहीं आ रहा था फिर भी खरबूजे का नुकसान होता हुआ देखकर वह बोला।

अरे यह क्या हो गया है तुमको देख रही हो खरबूजा खराब हो गया तुम्हारे पिताजी देखेंगे तो बिगड़ेंगे।

हरामजादे तुझे खरबूजे की पड़ी है और यहां तो मेरे घर में ही रासलीला खेल रहा है चारों तरफ से हमारा ही नुकसान कर रहा है।

(नीलू की बात सुनकर सूरज को इतना तो समझ में आ गया था कि नीलू को जरूर कुछ ना कुछ ऐसा मालूम हुआ है जो उसे नहीं मालूम होना चाहिए था तभी वह इतना नाराज है लेकिन फिर भी अपने आप को शांत रखते हुए धीरे से उठकर इस जगह पर बैठते हुए सूरज बोला)

अरे आखिर हुआ क्या है यह तो बताओ बस आते ही मारना शुरू कर दी।

हरामजादे मादरचोद तुझे नहीं मालूम कि क्या हुआ है,,,?

अरे मैं सच कह रहा हूं मुझे कुछ भी नहीं मालूम तुम बताओगी तब ना पता चलेगा।





मैं तुझे कितना अच्छा लड़का समझती थी तुझे मैं पसंद करती थी तेरे साथ मैंने सब कुछ की जो मुझे नहीं करना चाहिए था क्योंकि मैं तुझे पसंद करती हूं लेकिन तू है कि मेरी मां को,,,,(इतना कहकर नीलू चुप हो गई और एकदम परेशान नजर आने लगी सूरज को समझते देर नहीं लगी कि आखिर मामला क्या है लेकिन फिर भी वह अनजान बनने का नाटक करते हुए बोला)

क्या हुआ मालकिन को,,,!

मालकिन को कुछ भी नहीं हुआ मादरचोद,,,,(नीलू के मुंह से पहली बार की गाली सुन रहा था और उसे नीलू के मुंह से इस तरह की गालियां अच्छी लग रही थी,,, मुस्कुराता हुआ सूरज बोला)

तू इतना गुस्सा क्यों हो,,,?

तेरी वजह से सिर्फ तेरी वजह से मैंने सब कुछ अपनी आंखों से देख ली जो तू मेरी मां के साथ कर रहा था,,,,।

ओहहहहह यह बात है,,,,।(सूरज एकदम सहज होते हुए मुस्कुरा कर बोला और धीरे से अपनी जगह पर खड़ा हो गया यह देखकर नीलू और भी ज्यादा क्रोधित हो गई और वह बोली)

तुझे यह सब एकदम आम बात लगती है कितनी आराम से कह रहा है यह बात है,,,।

हां तो नीलू यह आम बात ही है औरत होती ही है चुदवाने के लिए,,, इसलिए मैंने तुम्हारी मां को भी चोद दिया,,, (सूरज फिर से एकदम शांत लहजे में बोला जिसकी वजह से नीलू का गुस्सा साथी हुए आसमान पर पहुंच गया और वह चिल्ला कर बोली)





कितनी आसानी से कह रहा है मादरचोद तुझे पता है कि तेरा क्या हसर होगा अगर यह बात पिताजी को पता चल गई तो।

पिताजी को पता चल गई तो क्या हो जाएगा शर्मिंदा हो जाएंगे उन्हें किस बात का एहसास होगा कि वह अपनी बीवी के साथ कुछ कर नहीं सकते इसलिए उनकी बीवी दूसरों से चुदवा रही है।

हरामजादे कुत्ते हरामी फिर तो यही अपनी मां के बारे में भी सोचता होगा हरामजादे मैं तुझे नहीं छोडूंगी,,,, (सूरज की बात सुनकर एकदम से गुस्सा होते हुए नीलू दम दम उसके सीने पर मुक्का मारने लगी लेकिन सूरज को बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ रहा था वह मुस्कुरा रहा था सूरज जितना मुस्कुरा रहा था नीलू को उतना ज्यादा गुस्सा आ रहा था,,, वह एकदम से रोने लगी और रोते-रोते नीचे बैठ गई उसे रोता हुआ देखकर सूरज एकदम से परेशान हो गया और वह भी उसके पास ही बैठ गया और बोला।)

तुम रो क्यों रही हो नीलू इसमें रोने वाली कौन सी बात है यह तो दुनिया की रित है यह तो सभी घरों में होता है।





मैं मां को कितनी अच्छी औरत समझते थे भले ही वहां पर गुस्सा करती थी लेकिन मैं मां की बहुत इज्जत करती थी मेरी बहन भी मन की बहुत इज्जत करती है जब उसे पता चलेगा कि उसकी मां तुम्हारे साथ चुदवाती है अपनी जवानी की प्यास बुझाती है गांव की मुखिया की बीवी होकर अपने पति को धोखा देती है तो सोचो उसके दिल पर क्या गुजरेगी और अगर यही बात गांव में किसी को पता चल गया तब तो हम लोगों के इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी। (ऐसा कहकर जोर-जोर से रोने लगी वैसे भी यहां कोई उसे देखने वाला नहीं था क्योंकि दूर-दूर तक मुखिया का ही खेत था और चारों तरफ झाड़ियां की हुई थी जिस किसी के देखे जाने का सवाल ही नहीं पैदा होता था,,,,,, कुछ देर तक सूरज नीलू को इसी तरह से रोने दिया और फिर धीरे से बोला।)





नीलू मालकिन मां ,बीवी बहन ओर मालकिन से पहले एक औरत है। एक औरत होने के नाते तुम्हें भी एक औरत के बारे में सोचना चाहिए था मैं जानता हूं कि अपनी मां को उसे अवस्था में देखकर तुम्हारी जगह कोई भी होता तो वह गुस्से से आग बबूला हो जाता लेकिन फिर भी तुमने आज तक अपने आप को संभाल कर रखी यही बहुत बड़ी बात है।

लेकिन तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था सूरज तुम नहीं जानते मैं तुमसे प्यार करने लगी हूं।

(नीलू के मुंह से अपने प्यार का इजहार सुनकर सूरज गदगद हुए जा रहा था वह कभी सोचा भी नहीं था कि नीलू उससे प्यार करने लगेगी क्योंकि उन दोनों के बीच जो कुछ भी हो रहा था वह सिर्फ एक वासना का खेल था लेकिन नीलू के इजहार से सूरज को एहसास होने लगा था कि नीलू सच में उससे प्यार करती है नीलू की बात सुनकर सूरज के पास कहने के लिए कोई शब्द नहीं बचे थे,,,, और नीलू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) भले ही हम दोनों का प्यार जिस्मानी तोर से शुरू हुआ लेकिन मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं मुझे उम्मीद नहीं थी कि तुम मेरे घर में ही मेरी मां के साथ इतना गंदा काम करोगे।

लेकिन इसके लिए भी तुम्हारी मां ने मुझे मजबूर किया था , नीलु,,,,! (कुछ सोचने के बाद सूरज धीरे से बोला)





मां ने मजबूर किया था,,,, तुम झूठ बोल रहे हो।

तो कौन सच कह रहा है कभी अपनी मां से पूछी हो नहीं तो तुमसे सच कह रहा हूं लेकिन क्या तुम्हारी मां बोल पाएगी नहीं बोल पाएगी तुमने सिर्फ एक मां के तौर पर मालकिन को देख रही हो एक पति के पत्नी के रूप में उसे देख रही है लेकिन एक औरत का रूप तुम्हें दिखाई नहीं दे रहा है औरत की जरूरत क्या होती है एक औरत होने के बावजूद भी तुम समझ नहीं पा रही हो बल्कि खुद अपनी जरूरत तुम मुझसे पूरी कर रही थी। (सूरज की बात सुनकर नीलू सूरज की तरफ देखने लगी तो सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हो बोला,,,) तुम अपने पिताजी की हालत तो अच्छी रही हो क्या तुम्हें लगता है कि तुम्हारे पिताजी तुम्हारी मां को शारीरिक तौर पर संतुष्ट कर पाते होंगे,,,, तुम्हारी मां अभी भी पूरी तरह से जवान है गठीला बदन है ऐसे में उन्हें भी एक मर्द की जरूरत पड़ती है इस बात को कैसे तुम भूल जाती हो,,,,।

एसी भी क्या जरूरत की अपने पति को धोखा देना पड़े। तुम नहीं जानते सूरज अगर इस बारे में पिताजी को पता चल गया तो उनका दिल टूट जाएगा भरोसा टूट जाएगा क्योंकि बरसों से उन्होंने नाम कमाया है इज्जत कमाई है।





तुम खामखा चिंता करती हो ऐसा कुछ भी नहीं है मालिक की इज्जत बनी रहेगी मैं भला किसी को बताने वाला थोड़ी ना हूं क्योंकि तुम्हारे घर से ही तो हम लोग कभी खर्चा पानी चलता है। और जरा तुम ही सोचो नीलू,,, क्या औरत को अपने लिए नहीं जीना चाहिए तुम्हारी मां दिन भर इधर-उधर दौड़कर खेत का काम घर का काम मजदूरों को संभालना फसल को शहर में ले जाकर बिचवाना यह सब किसके लिए करती है तुम लोगों के लिए ताकि तुम लोगों को किसी बात की कमी ना हो और इज्जत बनी की बनी रहे वरना अगर मैं सच कह रहा हूं मालकिन यह सब काम देखना छोड़ दे तो तुम्हारे घर पर भी कोई पूछने वाला नहीं होगा इज्जत की तो बात जाने दो कोई एक पैसे की भी इज्जत नहीं करेगा तुम सबकी यह तो तुम्हारी मां है कि उसकी वजह से पूरा गांव क्या अगल-बगल के 20 30 गांव मुखिया जी को जानते हैं पहचानते हैं।

(सूरज पूरी कोशिश कर रहा था नीलू को समझने की सूरज का बड़प्पन इसी बात से नजर आ रहा था कि वह मुखिया की बीवी की इज्जत पर बिल्कुल भी दाग लगे नहीं देना चाहता था वह किसी भी तरह से मुखिया की बीवी का बचाव कर रहा था और वह भी उसकी खुद की बेटी से सूरज की बात सुनकर नीलू बोली)

मां ने ऐसा क्यों किया उन्हें तो ऐसा नहीं करना चाहिए।

इसमें तुम्हारी मां की गलती बिल्कुल भी नहीं है एक सामान्य औरत की तरह तुम्हारी मां भी बहक गई थी जैसा कि तुम बहक गई थी।

बहक गई थी मेरी तरह मैं कुछ समझी नहीं ,,,,,।

याद है तुमने मुझे कब देखी थी।

(सूरज की बात सुनकर नीलू को समझ नहीं पा रही थी वह सावड़िया नजरों से सूरज की तरफ ही देख रही थी सूरज उसकी आंखों में देखकर समझ गया था कि उसे याद नहीं है इसलिए वह उसे याद कराते हुए बोला,,)

याद है तुम्हें आम का बगीचा जहां पर मैं पेशाब कर रहा था और तुम चोरी छुपे मुझे देख रही थी और तुमने मेरा मोटा तगड़ा लंबा लंड देखकर ही मेरे साथ जिस्मानी ताल्लुकात बनाने का फैसला की थी,,, (सूरज की बात सुनते ही नीलू को सब कुछ याद आ गया था और उसके चेहरे पर शर्म की लाली छाने लगी थी और सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) और तुम्हारी मां के साथ भी वही हुआ जो तुम्हारे साथ हुआ खेत में काम करते समय जब मुझे बड़ी जरूरत है पेशाब लगी थी तो मैं ट्यूबवेल के पीछे चला गया था पेशाब करने के लिए लेकिन न जाने कहां से तुम्हारी मां ठीक मेरे सामने झाड़ी के पास आ गई थी वह भी पेशाब करने के लिए आई थी वह साड़ी कमर तक उठाए बैठने वाली थी कि तभी उनके ठीक सामने में पेशाब कर रहा था और पेशाब करने की आवाज उनके कानों में पड़ी थी उनकी नजर मेरे पर पड़ गई और उन्होंने मुझे पेशाब करते हुए देख लिया मैं तो एकदम घबरा गया था लेकिन तुम्हारी मां की नजर सीधा मेरे लंड पर पड़ी थी जो कि उसे समय न जाने क्यों एकदम खड़ा था,,, अपने सामने मालकिन को देखकर मैं तुमसे घबरा गया था मैं वहां से जाता हूं इससे पहले तुम्हारी मां वहां से चली गई मुझे लगा कि मुझे मालकिन डांटेगी, लेकिन उसे समय ऐसा कुछ भी नहीं हुआ जब शाम ढलने लगी और बाकी के मजदूर घर जाने लगे तो मैं भी उनके साथ घर की तरफ निकलने को हुआ लेकिन मालकिन मुझे रोक ली मैं एकदम से घबरा गया मुझे लगा के वही बात को लेकर मालकिन मुझे जरूर कुछ ना कुछ कहेंगी।

(सूरज की बात को नीलू बड़े ध्यान से सुन रही थी वह नहीं जानती थी कि सूरज बनी बनाई बात बता रहा था ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था वह जानबूझकर नमक मिर्च लगाकर बनी बनाई बात को नीलू के सामने परोस रहा था ताकि नीलू एक औरत के मन को अच्छी तरह से समझ सके औरत की जरूरत को समझ सके तभी वह अपनी मां को सहज रूप से ले सकेगी वरना अपनी मां के प्रति उसके मन में नफरत भर जाएगी सूरज की बात सुनकर नीलू धीरे-से बोली,,,)

क्या हुआ इसके बाद,,,,? (नीलू की आंखों में उत्सुकता दिखाई दे रही थी नीलू जानना चाहते थे कि आगे ऐसा क्या हुआ जो उसकी मां अपने ही नौकर के साथ हम बिस्तर होने पर मजबूर हो गई, यह ख्याल नीलू के मन में पहली बार आया था कि सूरज एक नौकर ही था, वरना अब तक वह सूरज को एक नौकर की हैसियत से कभी नहीं देखी थी लेकिन जब बात अपनी मां पर आ गई तो उसे एहसास होने लगा कि उसकी मां तो गांव की मुखिया की बीवी है बड़े घर की औरत है और ऐसे में उसका एक नौकर के साथ खेत में काम करने वाले लड़के के साथ शारीरिक संबंध यह बड़े शर्म की बात है जबकि वह खुद सूरज के साथ शारिरिक संबंध बना चुकी थी लेकिन वह इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि सूरज उसका हम उम्र ही था उसका और उसे सूरज के बीच लगाव होना स्वाभाविक था, लेकिन उसकी मां एक उम्र दराज औरत थी जिसे अपनी भावनाओं पर काबू होना जरूरी था । समाज में गांव में एक इज्जत थी एक उच्च पद था जिसकी गरिमा बनाए रखना उसका फर्ज था। नीलू की बात और उसकी उत्सुकता देखकर सूरज बोला,,,,)

तुम्हारी मां मुझे इशारे से ट्यबवेल की झोपड़ी के अंदर बुलाई।

वहां कोई और भी था।

नहीं,,, वहां हम दोनों किसी और कोई नहीं था सब लोग जा चुके थे और अंधेरा हो रहा था मुझे तो समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं क्योंकि मालकिन से दूसरी ही मुलाकात थी मालकिन का गुस्सा मैं जानता था क्योंकि लोग उनके गुस्से के बारे में बात करते थे इसलिए मैं घबरा रहा था लेकिन जैसे ही मैं उनके पास पहुंचा हुआ मेरा हाथ पकड़ कर झोपड़ी के अंदर ले गई और बिना कुछ सोचे समझे सीधा सवाल दाग दी।

क्या बोली मां,,,।

वह सीधे बोली अपना पजामा खोल।

क्या,,,?

हां मालकिन मुझे यही बोली पहले तो मुझे लगा कि शायद मेरे कान बज रहे हैं लेकिन फिर वह दोबारा मुझे पजामा खोलने के लिए बोली मैं घबरा गया था मैं मालकिन के सामने हाथ जोड़कर बोला।

मुझे माफ कर दो मालकिन मुझे जाने दो मुझे नहीं मालूम था कि तुम वहां खड़ी हो वरना मैं वहां कभी जाता ही नहीं।

फिर मा ने क्या कहा,,,?

फिर क्या मालकिन पुरी मैं तुझे डांट नहीं रही हूं कुछ बोलेगी भी नहीं लेकिन अगर तू मेरी बात नहीं मानेगा तो समझ ले तेरा जीना हराम हो जाएगा मालकिन की बात सुनकर मैं एकदम से घबरा गया था वह बार-बार मुझे पजामा उतारने के लिए कह रही थी मेरे पास उनकी बात करने किसी और कोई रास्ता नहीं था इसलिए मैं मजबूर होकर अपने पजामा को खींचकर घुटनों तक कर दिया।

फिर,,,(अपने सूखने हुए गले को अपने थूक से गिला करने की कोशिश करते हुए नीलू बोली)

फिर क्या था मालकिन की तो जैसे आंखें फटी गई थी वह मेरे लंड की तरफ आश्चर्य से देख रही थी उसे समय तो मेरा खड़ा भी नहीं था बस लटक रहा था लेकिन खड़ा होने के बावजूद भी इतना भयानक लग रहा था की मालकिन को अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था उनका मुंह खुला का खुला रह गया था। मुझे शर्म आ रही थी मालकिन की नजर में एक अजीब सी खिंचाव था मालकिन गहरी गहरी सांस ले रही थी और सच बताओ नीलू उसे समय जब मालकिन गहरी सांस ले रही थी उनके साड़ी का पल्लू उनके कंधे से नीचे गिर गया था और उनकी भरी हुई छाती एकदम से मेरी आंखों के सामने थी जो ऊपर नीचे हो रही थी और ब्लाउज के ऊपर का बटन भी खुला हुआ था पल भर के लिए मुझे ना जाने क्यों मालकिन के प्रति अजीब सा लगने लगा।

फिर क्या हुआ,,,,?

फिर मैं मालकिन से बोला कि अब मैं पैजामा ऊपर कर लूं तो वह बोली नहीं अभी रहने दे मुझे जी भर कर देख लेने दे क्योंकि मैं आज तक जिंदगी में ऐसा लंड नहीं देखी,,,,।

क्या मा ने ऐसा कहा,,,?

बिल्कुल नीलू मैं हैरान था हैरान इस बात पर था की मालकिन कह रही थी कि मैं आज तक ऐसा लंड कभी नहीं देखी जब की वह तो तुम दो बच्चों की मां थी चुदाई का सुख प्राप्त कर चुकी थी मलिक के साथ शारीरिक संबंध बन चुकी थी फिर भी वह ऐसा क्यों कह रही है मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था क्योंकि जहां तक तब मुझे ऐसा ही लगता था कि जैसा मेरा है वैसा सभी लड़कों का होता होगा लेकिन मालकिन की बात सुनकर में हैरान हो गया था और इसीलिए मैं मालकिन से पूछ बेठा।

यह क्या कह रही हो मालकीन मालिक का भी तो ऐसा ही होगा,,,,,।

यह क्या कह रहे हो सूरज मलिक का अगर ऐसा होता तो क्या मैं तुम्हारा इस तरह से हैरानी के साथ देखती।

क्या मालकिन ने मेरा मतलब है कि मा ने ऐसा कहीं।

मेरे मुंह से निकला एक-एक शब्द सच है मैं झूठ नहीं कह रहा हूं मालकिन ने ऐसा ही कही और उस दिन मालकिन की बात सुनकर मुझे पता चला कि सभी मर्दों का एक जैसा नहीं होता अलग-अलग ही होता है मुझे मालकिन की बात में सच्चाई नजर आ रही थी मैं उनसे दोबारा कुछ पूछता इससे पहले ही मालकिन हाथ बढ़ाकर मेरे लंड को पकड़ ली,,,,,।

क्या,,,,,? मा ने ऐसा की,,, लेकिन क्यों,,,?

यह तो मैं नहीं जानता लेकिन मालकिन की हरकत में पल भर में ही मेरे बेजान पड़े लंड में जान भर दी और मेरा लंड खड़ा होने लगा मैं हैरानी से अपने लंड की तरफ देख रहा था,,, जितना हैरान में था उससे कई ज्यादा हैरान मालकिन थी मुझे यकीन होने लगा था की मालकिन सच में ऐसा लंड पहली बार देख रही थी,,,, मैं शर्म के मारे पानी पानी हो रहा था मैं अपने हाथ से पजामा पकड़ कर उसे ऊपर उठाना चाहा लेकिन मालकिन हाथ बढ़ाकर मेरा हाथ पकड़ लिया और रोक ली और बिना कुछ कहे बिना ही अपना हाथ आगे बढ़कर मेरे लंड को पकड़ ली और हिलाना चालू कर दी मैं क्या करता मुझे तो ना चाहते हुए भी मजा आने लगा था आनंद आने लगा था मेरी आंखें अपने आप बंद होने लगी थी और जब मेरी आंखें बंद हो गई तो ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं हवा में उड़ रहा हूं तुम्हारी मां के नरम नरम हाथ उसकी नरम नरम ऊंगलियां मेरे जिस्म में जादू चला रही थी,,,,(सूरज इस तरह की मदहोशी भरी बातें करते हुए नीलू की तरफ देख रहा था उसे एहसास हो रहा था कि नीलू को उसकी बातें सुनकर मजा आ रहा था उसके बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी उसके चेहरे का रंग सुर्ख लाल हो रहा था और यह देखकर सूरज मन ही मन प्रसन्न हो रहा था और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) मैं आंखों को बंद किया हुआ था लेकिन जैसे ही मुझे कुछ अजीब सा एहसास हुआ तो मैं अपनी आंखों को खोल दिया और जो मैंने अपनी आंखों से देखा उसे देखकर में दंग रह गया मैं घबरा गया मेरे बदन में कंपकंपी फैल गई।

ऐसा क्या देख लिया तुमने,,,,।

बुरा मत मानना नीलु,,,, मैंने जो देखा उसे सुनकर शायद तू हैरान हो जाओ तुम्हें अपनी मां पर गुस्सा भी आएगा लेकिन एक औरत की तरह अगर सोचो कि तो तुम्हें तुम्हारी मां की गलती बिल्कुल भी नजर नहीं आएगी।

पहले यह तो बताओ हुआ क्या बस गोल-गोल बात घूमा रहे हो।

आंख खुली तो मैंने देखा तुम्हारी मां मेरे लंड को मुंह में भर ली थी और उसे पागलों की तरह चूस रही थी मैं हैरान था नीलु,,,,, मैं कभी सपने में सोच भी नहीं सकता था कि कोई औरत ऐसा कर सकती है और मालकिन के बारे में तो मैं कभी सपने में भी सोच नहीं सकता था लेकिन वह सपना नहीं हकीकत था मालकिन मेरे लंड को मुंह में लेकर चूस रही थी मैं पागल हुआ जा रहा था मेरे बदन में खुमारी छा रही थी मदहोशी छा रही थी मैं अपने आप को रोक नहीं पा रहा था और अपने आप ही मेरी कमर आगे पीछे होना शुरू हो गई,,,, सच कहूं तो नीलू तुम्हारी मां मेरे लंड को देखकर बहन गई थी इसके बाद तो वह एकदम से खड़ी हुई और अपने सारे कपड़े उतार करें मेरे सामने नंगी हो गई।

क्या,,,?(एकदम हैरान होते हुए नीलू बोली)

हां नीलू तेरी आंखों के सामने तुम्हारी मां अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गई पहली बार में किसी नंगी औरत को देख रहा था उसके जिस्म को देख रहा था उसकी खरबूज जैसे चुचियों को देख रहा था और तुम्हारी मां की बुर को मैं पहली बार देखा तो मुझे एहसास हुआ की औरत की बुर कितनी खूबसूरत होती है वरना उसके बारे में मैं सिर्फ सुना करता था देखा नहीं था उसका आकार कैसा होता है कैसी दिखती है यह सब मुझे पहली बार तुम्हारी मां की वजह से पता चला मैं तो तुम्हारी मां को देखा ही रह गया सच में नीलू तुम्हारी मां बहुत खूबसूरत है पूरे गांव में क्या अगल-बगल के 40 50 गांव में भी तुम्हारी मां की तरह खूबसूरत औरत कोई नहीं होगा। पहली बार मुझे एहसास हुआ की औरत कितनी खूबसूरत होती है तुम्हारी मां मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी क्योंकि वह जानती थी कि मेरे मन में क्या चल रहा है और समझ गई थी कि यह सब मेरे लिए पहली बार है मैंने आज से पहले कभी एक नंगी औरत को नहीं देखा था।

(इस तरह की मदहोशी वाली बातें सुनकर नीलू के बदन में हलचल मचाना शुरू हो गया था ना चाहते हुए भी उसकी बुर से मदन रस बहना शुरू हो गया था यह जानते हुए भी की सूरज उसकी मां की गंदी बात बता रहा है फिर भी वह अपने आप को काबू में नहीं कर पा रही थी और वह उत्तेजित हुए जा रही थी और उत्तेजित होते हुए वह धीरे से बोली)

फिर,,,,,?

फिर क्या नीलू,,, देख रही हो उसे दिन की बात बात कर इस समय मेरा लंड खड़ा हो गया है (एकदम से घुटनों के बाल बैठते हुए अपने पजामा को नीचे करके अपने खड़े लंड को बाहर निकलकर नीलू को दिखाते हुए वह बोला और अगले ही पल फिर से उसे पजामे में डाल दिया वह जानबूझकर ऐसा हरकत नीलू को उत्तेजित करने के लिए कर रहा था ताकि इस समय वह नीलू को चोद सके उसके गुस्से को पूरी तरह से शांत कर सके,,,, नीलु भी मस्त हो गई सूरज के खड़े लंड को देखकर ,, नीलू की बुर भी कचोरी की तरह फूलने लगी थी,,,, सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था मैं तो तुम्हारी मां की खूबसूरती देखकर पागल हुआ जा रहा था तभी तुम्हारी मां बोली। सूरज मेरी बात मानेगा तो हमेशा खुश रहेगी तुझे हमेशा काम मिलता रहेगा और अगर तूने मेरी बात नहीं मानी तो मैं तुझे बदनाम कर दूंगी और कोई तुझे काम भी नहीं देगा,,,,, मैं क्या करता नीलू मेरे पास तुम्हारी मां की बात मानने के सिवा और कोई दूसरा रास्ता नहीं था लेकिन मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि तुम्हारी मां क्या मनवाना चाहती है,,,,।

क्या बोली मेरी मां,,,,।

तुम्हारी मां बोली थी मेरी इच्छा पूरी कर

कैसी इच्छा,,,?

पहले तो मैं भी नहीं समझ पाया लेकिन अगले ही पर तुम्हारी मां एकदम से मेरी तरफ आगे पड़ी और मेरे सर पर हाथ रखकर मेरे बाल को कस के पकड़ ली और धीरे से मेरे मुंह को नीचे की तरफ ले जाने लगी जैसे ही मेरा मुंह तुम्हारी मां की दोनों टांगों के बीच आया वह एकदम से अपनी कमर को आगे की तरफ उचका कर अपनी बुर को मेरे मुंह से सटा दी और बोली चाट ईसे,,,, मैं क्या करता तुम्हारी मां की बुर से इतनी खूबसूरत इतनी मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी कि मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और अपने आप ही मेरी जीत बाहर निकल गई और मैं तुम्हारी मां की बुर को चाटना शुरू कर दिया।

(सूरज को साफ दिखाई दे रहा था कि नीलू उसकी बातों को सुनकर उत्तेजित हो रही थी क्योंकि वह धीरे से अपने थूक को गले के अंदर निगल रही थी यह उत्तेजना की निशानी थी,,,,, सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए फिर बोला,,) मुझे पागलों की तरह चाटने पर तुम्हारी मां मजबूर कर दे,,,,, मैं कर भी क्या सकता था मैं पहली बार इतनी खूबसूरत औरत को देख रहा था और भी बिना कपड़ों के तो एक जवान लड़का होने के नाते में भी अपने हाथ से यह मौका जाने नहीं देना चाहता था मैं भी पागलों की तरह तुम्हारी मां की बुर चाट रहा था तुम्हारी मां पागल हो जा रही थी जोर-जोर से चीख रही थी चिल्ला रही थी ।

और नीलू उस दिन पहली बार में जान पाया की चुदाई किसे कहते हैं।

मतलब कि उसे दिन मन नहीं तुम्हारे साथ,,,,,

हां तुम्हारी मां मेरे से चुदवाई और यह सिलसिला उसे दिन से शुरू हो गया और न जाने तुम कहां से देख ली।

घर पर देखी थी सुबह-सुबह जब घर के पीछे मां टांग उठा कर करवा रही थी।

ओहहहहह उस दिन,,,,,(एकदम से जैसे सूरज को याद आया हो वह हैरान होता हुआ बोला फिर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वह बोला,,,) लेकिन नीलू एक तरह से यह अच्छा ही हुआ कि तुम अपनी आंखों से सब कुछ देख ली,,,,।

क्यों अच्छा हुआ,,,?

जरा तुम ही सोचो तुम्हारा और मेरे बीच भी वही रिश्ता है जो मेरे और तुम्हारी मां के बीच है अगर भुले भटके हम दोनों को चुदाई करते समय तुम्हारी मां देख ले तो तुम्हारी मां का मुंह बंद करने के लिए तो मुंह का सकती हो कि वह मेरे और तुम्हारी मां के बीच क्या चल रहा है यह जानती हो तो तुम्हारी मां कुछ कह नहीं पाएगी शांत हो जाएगी तुम्हारा भी रास्ता बन जाएगा और उसका खुद का रास्ता बन जाएगा तो मां बेटी मेरे साथ मजा ले सकोगी।

हरामजादे में तुझसे प्यार करती हूं।

मैं भी तुमसे प्यार करता हूं लेकिन क्या करूं जिंदगी में ऐसे भी पल आते हैं जब हमें दूसरों के बारे में भी सोचना पड़ता है तुम ही अगर सोचो मैं तो कुछ नहीं कहूंगा अगर भावनाओं में भाकर तुम्हारी मां किसी गैर मर्द के साथ जिस्मानी ताल्लुकात तो बना ली और वह सारे गांव में बता दिया तो क्या होगा। बदनामी हो जाएगी ना ना तो मुखिया जी किसी को मुंह दिखाने के काबिल रह जाएंगे ना तो मालकिन और ना तुम दोनों जन और सब लोग पूरे परिवार को रंडी की तरह ही समझेंगे आते-जाते लोग तुम्हें तुम्हारी मां का नाम देखकर चिढ़ाएंगे क्या तुम्हें यह सब बर्दाश्त होगा मैं तो तुम्हारे परिवार को अपना परिवार समझता हूं इसलिए मर जाऊंगा लेकिन यह सब किसी को नहीं बताऊंगा।

(सूरज की बात में सच्चाई थी इस बात की नीतू अच्छी तरह से समझती थी इसलिए ना चाहते हो कि उसके होठों पर मुस्कान आ गई और वह मुस्कुराते हुए बोली,,)

अब मुझे जाना चाहिए,,,,(नीलू को मुस्कुराता हुआ देखकर सूरज समझ गया था की बात बन गई है लेकिन वह जाति से पहले उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और उसे अपने सीने से लगा लिया और उसके खूबसूरत चेहरे को अपने हाथ में लेकर बोला)

इतनी जल्दी चली जाओगी इतने दिन बाद मिली हो और जाने को कह रही हो,,,,।

तो क्या करूं,,, तुम्हारे साथ यहां रुक कर खरबुजे तोडुं,,,,,,।

खरबूजे नहीं मेरी जान,,,(इतना कहकर वहां नीलू को एकदम से अपनी गोद में उठा दिया नीलू घबरा गई लेकिन वह नहीं माना और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) इतने दिन बाद मिली हो ऐसे थोड़ी ना जाने दूंगा (और ऐसा कहते हुए उसे गोद में उठाए हुए ही झोपड़ी की तरफ जाने लगा नीलू यह देखकर सिहर उठी लेकिन अपनी मां की कामलीला के बारे में सुनकर उसकी बुर भी पानी छोड़ रही थी वह भी सूरज की मोटे तगड़े लोगों को अपनी बुर में लेना चाहते थे क्योंकि बात ही बात में उसने अपनी लंड की की झलक भी दिखा दिया था,,,,, नीलू उसे इनकार नहीं कर पाई और सूरज उसे झोपड़ी में लेकर चला गया यहां पर किसी के भी आने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी उसके कपड़े उतार कर पूरी तरह से नंगी कर दिया और खुद भी नंगा हो गया। नीलू अच्छी तरह से जानती थी उसे क्या करना है अपनी मां की लंड की चुसाई की कहानी सुनकर उसका भी मन कर रहा था सूरज के लंड को चूसने के लिए इसलिए वह तुरंत घुटनों के बल बैठ गई और सूरज के मोटे तगड़े लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी और तब तक चुस्ती रही जब तक कि वह पूरी तरह से तृप्त नहीं हो गई क्योंकि वह भी सूरज के साथ बहुत दिनों बाद इस तरह का मजा लूट रही थी। सूरज पूरी तरह से तैयार हो चुका था नीलू की चुदाई करने के लिए।

देखते ही देखते सूरज उसे घोड़ी बना दिया और पीछे से उसकी गुलाबी छेद में अपना लंड डालकर उसकी कमर को दोनों हाथों से थाम दिया और अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया नीलू को उसकी मां की रंगीन कहानियां सुना कर सूरज भी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था वैसे तो उसकी सारी कहानियां मनगढ़ंत थी लेकिन फिर भी किसी को भी उत्तेजित कर दे इस तरह की रसभरी कहानी थी और वही कसर सूरज नीलू के ऊपर उतार रहा था। सूरज का मोटा तगड़ा लंड बड़े आराम से उसकी बुर के अंदर बाहर हो रहा था और उसकी चुदाई करता हुआ सूरज उसे भविष्य के सपने भी दिख रहा था वह धक्के लगाते हुए बोला।

देखना नहीं तो मेरी जान सब कुछ सही रहा था तो मेरी बीवी बनोगी और तुम्हारी मां मेरी सास फिर देखना एक ही पलंग पर मां बेटी दोनों की चुदाई करूंगा।

हरामजादे शादी के बाद मैं यह सब बिल्कुल भी नहीं करने दूंगी।

अपनी मां के बारे में सोचो नीलू सासू मां बुढी नहीं है अभी पूरी तरह से जवान है। घर की बात घर में ही रह जाएगी तुम भी खुश सासू मां भी खुश।

नहीं बिल्कुल भी नहीं मैं अपने पति को किसी दूसरी औरत के साथ नहीं बांटूंगी,,,।

दूसरे के साथ कहां तुम्हारी मां के साथ मेरी सासू मां के साथ,,,,, सोचो कितना मजा आएगा।

नहीं लेना मुझे ऐसा मजा,,,,।(सूरज की बातें सुनकर नीलू को मजा आ रहा था वह भी भविष्य के सपने देख रही थी वह बार-बार उसकी मां को सासू मां और उसे बीवी कर कह कर संबोधन कर रहा था इस बात की खुशी नीलु के चेहरे पर एकदम साफ दिखाई दे रही थी और इस बात को लेकर सूरज काफी उत्तेजित हुआ जा रहा था थोड़ा जोर-जोर से धक्के लगा रहा था और तब तक धक्का लगाता रहा जब तक की नीलु का पानी निकालने के बाद खुद झड़ नहीं गया।

नीलू घर जा चुकी थी। सूरज भी शाम को ढेर सारा खरबूजा लेकर मुखिया के घर पहुंच चुका था। सूरज को खरबूजे के खेत के सारे खरबूजे लाया हुआ देखना मुखिया और मुखिया की बीवी खुश नजर आ रही थी क्योंकि उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि सूरज आज ही खरबूजा लेकर पहुंच जाएगा और खरबुजे को बाजार में पहुंचाना भी बहुत जरूरी था,,,, मुखिया सूरज से बोले,,)

यह तुमने बहुत अच्छा किया अब सही समय पर खरबूजा शहर पहुंच जाएगा लेकिन क्या तुम्हें बैलगाड़ी चलानी आती है।

जी मालीक,,,,

तब तो यह और भी अच्छा हुआ सुबह ही शहर के लिए निकलना है क्या तुम जा सकोगे इसके लिए अलग से पैसे भी मिलेंगे,,,,।

बिल्कुल मालिक मैं चला जाऊंगा,,,,,।

(शहर जाने की बात सुनते हैं नीलू और शालू दोनों जो अपनी मां की बगल में खड़े थे एग्जाम से खुश होते हुए अपने पिताजी की तरफ देखने लगी और बोली)

बाबूजी हम भी शहर जाएंगे हमें भी नए कपड़े लेने हैं शहर से,,,,।

नहीं नहीं बाद में कभी चली जाना।

बाद में कब हम दोनों को अभी जाना है सूरज के साथ वहां से कपड़े भी खरीद लेंगे और शहर भी घूम लेंगे,,,,।

तुम क्या कहती हो नीलू की मां,,,,।

सूरज साथ में है तो कोई दिक्कत नहीं है,,,,(इतना सुनते ही नीलु एकदम से खुश हो गई और अपनी मां को गले लगा ली,,,, लेकिन मुखिया की बीवी सख्त हिदायत देते हुए बोली)

लेकिन याद रखना सूरज के साथ ही रहना इधर-उधर कहीं चली मत जाना सूरज जैसा कहता है वैसा ही करना,,,,,।

ठीक है मां हम दोनों वैसा ही करेंगे जैसा सूरज कहेगा,,,(नीलु सूरज की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोली,,,, सूरज भी दोनों लड़कियों को साथ ले जाने की बात से मन ही मन खुश हो रहा था,,,,,,, दूसरे दिन वह बड़े सवेरे ही मुखिया के घर पहुंच चुका था )
 
अपनी मां को बता कर बड़े सवेरे ही सूरज मुखिया के घर पहुंच चुका था। वहां पहुंच कर देखा तो घर के आंगन में ही लकड़ी के बक्से में खरबूजा भरा हुआ था ऐसे तकरीबन 20-25 बॉक्स बन चुके थे। पास में ही बैलगाड़ी खड़ी थी जो की काफी अच्छी खासी थी। लेकिन अभी वहां पर कोई था नहीं इसलिए सूरज वहीं पर बैठ गया और मुखिया का इंतजार करने लगा वह जानता था कि इस समय ऐसा कोई मौका मिलने वाला नहीं है जिससे उसकी गर्मी शांत हो सके इसलिए वह आराम से बैठकर मुखिया का इंतजार करने लगा कि तभी थोड़ी देर बाद ही मुखिया वहां सूरज को देखकर मुस्कुराता हुआ आया और बोला।

आ गए बेटा सूरज,,,,।

(मुखिया की आवाज सुनकर सूरज एकदम उठकर बैठ गया और हाथ जोड़कर नमस्ते करते हुए बोला)

नमस्कार मालिक,,,, शहर का मामला था इसलिए जल्दी आ गया वैसे भी मैं कभी शहर तो गया नहीं हूं लेकिन इतना जरुर जानता हूं कि आने-जाने में समय लग जाएगा।

मुझे मालूम है, तुम मेरे सबसे वफादार बनते जा रहे हो इससे पहले तुम्हारे पिताजी काम करते थे लेकिन तुमने अपने पिताजी की कमी बिल्कुल भी महसूस होने नहीं दिया है हम लोगों को तुमसे यही उम्मीद है कि तुम अपना काम ईमानदारी और वफादारी से करोगे। सच कहूं तो मैं तुम्हें मजदूर या नौकर नहीं समझता बल्कि मैं अपने बेटे जैसा ही समझता हूं,,, मैं कभी-कभी सोचता हूं कि काश तुम मेरे बेटे होते तो मेरा कितना काम आसान हो जाता।

(मुखिया की बात सुनकर सूरज अपने मन में ही बोला इस घर का होने वाला दामाद हूं आगे चलकर सब कुछ मेरा ही हो जाएगा तब इसकी अच्छे से देखरेख करूंगा,,, सूरज अपने मन में ख्याली पुलाव पका रहा था कि तभी मुखिया अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोले) खैर कोई बात नहीं तुम भी तो मेरे बेटे जैसे ही हो तभी तो यह काम तुम्हें सौंपा है अगली बार यह काम हमने किसी और को दिया था तो वह तो खरबूजे बेचा ही बेचा बैलगाड़ी भी लेकर गायब हो गया,,,।

(यह सुनकर सूरज हंसने लगा और हंसते हुए बोला)

मैं गायब नहीं होऊंगा मलिक,,,।

अरे बेटा मैं जानता हूं तुम भोला के लड़के हो धोखा नहीं दे सकते इसलिए तो तुम्हारे साथ अपनी दोनों बेटियों को भेजने के लिए तैयार हो गया हूं वरना मैं किसी के साथ अपनी बेटी को आने जाने नहीं देता,,, लेकिन यह अभी तक आई क्यों नहीं समय हो रहा है तुम खाना खाए हो कि नहीं,,,।

नहीं मालिक इतनी सुबह-सुबह,,, मैं जल्दी ही निकल आया अभी घर पर खाना बना ही नहीं था।

ओहहह अच्छा हुआ कि तुम मुझे बता दिए वरना खाली पेट ही चले जाते एक काम करो लगता है नीलू और शालू अभी तैयार हो रही है तुम घर के पीछे चले जाओ मालकिन खाना बना रही होगी वही जाकर खा लो,,,,।

(घर के पीछे के बारे में सुनकर सूरज एकदम से उत्साहित हो गया और वह बिल्कुल भी देर किए बिना अपनी जगह से उठकर खड़े हो गया और बोला)

बहुत अच्छा मालिक सफर लंबा है पेट में कुछ चार रहेगा तभी दिमाग काम करेगा और मालकिन को कहकर थोड़ा खाना भी बंघवा देना रास्ते में काम आएगा,,,।

अरे बिल्कुल मैं पहले ही तुम्हारी मालकिन को कह चुका हूं वह इसीलिए तो इतनी सुबह-सुबह खाना बना रही है,,,,,।

ठीक है मालिक में जाकर खाना खा लेता हूं,,,,,।

ठीक है जाओ,,, तब तक यह खरबूज की पेटीयां बैलगाड़ी में लदवा देता हूं।

ठीक है मालिक,,, (और इतना कहकर सूरज एकदम उत्साहित होता हुआ जल्दी-जल्दी कदम आगे बढ़ने लगा क्योंकि वह जल्द से जल्द घर के पीछे पहुंचाना चाहता था क्योंकि घर के पीछे एक बार वह मुखिया की बीवी से मजा ले चुका था और आज भी उसकी आस बंधी हुई थी,,,, घर के पीछे पहुंचकर वह देखा तो मुखिया की बीवी सच में खाना बना रही थी उलझे हुए बाल साड़ी का पल्लू कंधे से नीचे गिरा हुआ इस रूप में वह एकदम काम देवी लग रही थी जिसे देखते ही सूरज का लंड खड़ा होने लगा था,,,,, सूरज कुछ कहता इससे पहले ही मुखिया की बीवी की नजर सूरज पर पड़ गई और वह मुस्कुराते हुए सूरज की तरफ अच्छी और बोली।)

अच्छा हुआ तू आ गया ले जल्दी से गरमा गरम खाना खा ले फिर तुम लोगों के लिए मैं खाना भी बांध देती हूं,,,।

(मुखिया की बीवी का इतना कहना था कि सूरज एकदम से उत्साहित होता हुआ उसके करीब पहुंच गया और बोला)

पागल हो गई हो मेरी रानी सुबह-सुबह में दूध पीता हूं उसे दिन की तरह आज भी अपनी चूची पिला दो मुझे सफर अच्छा हो जाएगा,,,।

धत् हरामी जगह भी तू देखा नहीं है बस शुरू कर जाता है मुझे लगी रहा था तुझे देख कर की तेरे दिमाग में यही सब चल रहा होगा।

क्या करूं मालकिन तुमको देखते ही मेरा दिमाग पागल हो जाता है,,,।

अपना यह पागलपन संभाल कर रख किसी और दिन काम आएगा अभी मुझे काम करने दे और वैसे भी सालों और नीलू दोनों जाग चुकी है और तैयार हो रही है,,,, उन दोनों को संभाल कर ले जाना तेरे भरोसे छोड़ रही हूं,,,।

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मालकिन मैं तो कहता हूं तुम भी हमारे साथ चलो रास्ते भर मजा करेंगे।

सच कहूं तो मेरा खुद चलने का मन था लेकिन शालू और नीलू ने पूरा काम बिगाड दी,,, ।

क्या बात कर रही हो मालकिन क्या सच में तुम्हारा चलने का मन था।

हां रे बिल्कुल,,, (दाल में चमची डालकर उसे चलाते हुए बोली,,)

धत् तेरी कि सारा मजा करके रहोगे तुम साथ में होती तो कितना मजा आता,,,,।

(सूरज की बात सुनकर मुखिया की बीवी मन ही मन मुस्कुरा रही थी यह सोचकर उसे अच्छा लग रहा था कि सूरज को उसका साथ अच्छा लगता है,,,, फिर सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

चलो कोई बात नहीं फिर कभी मौका मिलेगा तो हम दोनों साथ शहर चलेंगे लेकिन अभी जो तुमने मेरी हालत की हो,,, (इतना कहने के साथ ही पजामी को एकदम से नीचे खींच कर अपनी खड़े लंड को दिखाते हुए) इसका तो कोई इलाज करो,,,, (सूरज के लंड की तरफ देखकर मुखिया की बीवी उत्तेजना से गदगद हो गई क्योंकि सुबह-सुबह अपनी आंखों से सूरज के टनटनाए हुए लंड को देख ली थी और उसे उस दिन वाली बात याद आ गई थी जब इसी तरह से हुआ घर के पीछे दूध पका रही थी और सूरज उसकी जमकर चुदाई किया था,,,, पल भर के लिए अपने लंड को दिखाकर वापस अपना पजामा ऊपर कर लिया था और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) कुछ तो करो मालकिन मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,,।

(सूरज की बात सुनकर वह एकदम से अपनी कमर पर हाथ रखकर सूरज की तरफ घूम गई लेकिन सामान्य अवस्था में भी वह अपनी जवानी की मादकता के छीटे सूरज पर गिरने के लिए वह अपनी छाती को आगे की तरफ उचका दी थी और बड़े ही मादक स्वर में बोली,,,)

अब मैं इसमें भला क्या कर सकती हूं,,,,।

(उसका इस तरह से खड़ी होना सूरज के लिए आमंत्रण था क्योंकि उससे भी रहा नहीं जा रहा था सूरज के लंड को देखकर उसकी बुर पानी पानी हो रही थी,,,,, लेकिन अपने मुंह से सूरज को आगे बढ़ने के लिए बोल नहीं पा रही थी लेकिन वह जानती थी कि सूरज मौका देखकर उसकी चुदाई किए बिना यहां से जाने वाला नहीं है,,,, और जैसा वह सोच रही थी ठीक वैसा ही हुआ सूरज मुखिया की बीवी की उन्नत छातियों को देखकर अपने आप को रोक नहीं पाया और एकदम से आगे बढ़ गया और मुखिया की बीवी की कमर में ही कहां डालकर उसे अपनी तरफ खींचकर अपनी बाहों में कस लिया वैसे तो मुखिया की बीवी पूरी तरह से देखने को तैयार थी लेकिन फिर भी एहतियात के तौर पर वह सूरज से बोली)

अरे पागल हो गया है क्या तुझे कहीं ना नीलु और शालू दोनों जग गई है,,।

तुम दोनों की चिंता बिल्कुल भी मत करो मालकिन,,,, वह दोनों तैयार होने में मस्त होंगे वैसे भी लड़कियां जब तैयार होती है तो कुछ ज्यादा ही समय लेती हैं इतना समय हम दोनों के लिए काफी है।

नहीं हरामी छोड़ मुझे कोई आ गया तो गजब हो जाएगा,,, (वैसे तो मुखिया की बीवी का भी मन सूरज के साथ चुदाई का कर रहा था लेकिन फिर भी वह थोड़ा सा डर दिखा रही थी ताकि सूरज चौकन्ना रहे,,, सूरज कहां मानने वाला था मुखिया की बीवी की बात सुनकर भी वह उसकी बात को अनसुना करते हुए एकदम से ब्लाउज के ऊपर से उसकी चूची को दबाना शुरू कर दिया,,,, और उसके लाल लाल होठों को अपने मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया,,,,, सूरज की हरकत से मुखियाकी बीवी मदहोश होने लगी उसकी टांगों के बीच की पतली दरार से मदन रस बहने लगा,,,,, वह गहरी गहरी सांस लेने लगी थी,,,,, सूरज भी मौके की नजाकत को अच्छी तरह से समझता था वह एकदम से मुखिया की बीवी को कंधे से पड़कर दूसरी तरफ घुमा दिया और दीवार पकड़ा कर खड़ी कर दिया,,, क्योंकि सूरज को ज्यादा कुछ करना नहीं था इस समय खाली उसकी साड़ी को कमर तक उठाना भर था इसके बाद अपना काम शुरू कर देना था। लेकिन फिर भी मुखिया की बीवी की जवानी के साथ खेलने का आदी हो चुका था सूरज इसलिए बिना कपड़ा ऊपर उठे ही वह पीछे से उसे अपनी बाहों में भरकर एक बार फिर से उसकी चूची को ब्लाउज के ऊपर से दबाना शुरू कर दिया और इस दौरान धीरे-धीरे उसके ब्लाउज का बटन खोलने शुरू कर दिया हालांकि अभी भी मुखिया की बीवी के दोनों हाथ दीवार से सटे हुए थे वह एक तरह से दीवार का सहारा दी हुई थी क्योंकि सूरज की हरकतों से वह उत्तेजना से गनगना जा रही थी। सूरज को इस तरह से मदहोश होता हुआ देखकर मुखिया की बीवी बोली।

जो भी करना है जल्दी कर कोई आ गया तो लेने के देने पड़ जाएंगे तु ना तो समय देखता है ना जगह देखता है बस शुरू पड़ जाता है,,,।

मैं सिर्फ मौका देखता हूं मालकिन इससे अच्छा मौका कहां मिलने वाला है,,,, वैसे भी मलिक मुझसे कह रहे थे कि वह मुझे मजदूर या नौकर नहीं समझते बल्कि अपने बेटे जैसा समझते हैं।

हां तो इसमें क्या हो गया हम लोग तुझे बेटे जैसा ही समझते हैं।

बेटे जैसा समझती हो लेकिन तुम तो मुझसे आदमी वाला काम करवाती हो।

अरे बेवकूफ बेटा भी तो आदमी ही होता है एक औरत को खुश करना मर्द का काम होता है और एक तू मर्द है,,,,,,।

और हां मालिक को इस बात का अफसोस है कि उन्हें कोई बेटा नहीं है वह सोच रहे थे कि अगर मैं उनका बेटा होता तो उनका कितना काम आसान हो जाता। (नंगी चूची को अपने दोनों हाथ में लेकर जोर-जोर से दबाते हुए सूरज बोला उसकी हरकत से मदहोश होते हुए क्योंकि बीवी के मुंह से शिसकारी की आवाज निकल रही थी)

सहहहहह आहहहहह ऊमममममममम,,,, यह तो तेरे मलिक की गलती है वही मुझे खुश नहीं कर पाए तो बेटा कहां से होगा।

क्या तुम्हें भी बेटा चाहिए मालकिन,,,,।

क्यों नहीं लेकिन अब उम्मीद नहीं है,,,।

क्यों उम्मीद नहीं है मैं तो हूं ना कहो तो मैं तुम्हें बेटा दे सकता हूं,,,।

धत् हरामी अब मुझे नहीं चाहिए बेटा तो जल्दी से अपना काम खत्म कर मेरी हालत खराब कर दे रहा है,,,, वैसे भी देर हो रही है।

(सूरज मौके की नजाकत को अच्छी तरह से समझता था उसे यहां पर आए काफी देर हो चुकी थी और वह जानता था कि यहां पर कोई भी आ सकता था मुखिया भी आ सकते थे उनकी दोनों बेटियां भी आ सकती थी वैसे तो एक बेटी को सब कुछ पता चल गया था वह देख लेती तो कोई बात नहीं थी लेकिन दूसरा कोई देखा तो मामला गड़बड़ हो सकता था इसलिए सूरज बिल्कुल भी देर ना करते हुए एकदम से मुखिया की बीवी की साड़ी को पकड़ कर कमर तक उठा दिया और दोनों हाथ से कमर पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और उसे अपने लंड के सिधान पर व्यवस्थित करने लगा,,,, जब सुरज को मुखिया की बीवी की गुलाबी बर दिखाई देने लगी उसका रसीला छेद दिखाई देने लगा तब एकदम से अपने पजामे को नीचे किया और ढेर सारा थुक अपने लंड के सुपाड़े पर लगा लिया,,,, और फिर बिना कुछ बोले अपने गरमा गरम मोटे आलू बुखारे जैसे सुपाडे को मुखिया की बीवी की बुर पर रखकर अपनी कमर को आगे की तरफ ठेलने लगा,,, थूक और बुर की चिकनाहट पाकर सूरज का लंड अंदर की तरफ सरकने लगा,, धीरे-धीरे करके वह अपना पूरा लंड मुखिया की बीवी की बुर में डाल चुका था,,, अपनी आंखों को बंद करके मुखिया की बीवी इस पल का मजा लूट रही थी जैसे-जैसे मोटा तगड़ा लंड अंदर की तरफ घुस रहा था वैसे-वैसे उसके चेहरे के हाव-भाव बदलते जा रहे थे,,,,।

सूरज बिना देर किए मुखिया की बीवी की चिकनी कमर को दोनों हाथों से थाम लिया और अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया सुबह-सुबह बिना खाए यह सूरज के लिए स्वादिष्ट व्यंजन था वह अच्छी तरह से जानता था कि सुबह-सुबह खूबसूरत औरत को चोदने को मिल जाए बस इससे ज्यादा भला और क्या हो सकता है,,,, सूरज बिना रुके अपनी कमर को जोर जोर से हिला रहा था,, मुखिया की बीवी अपनी सिसकारी की आवाज को काबू में किए हुए थी लेकिन फिर भी उसके मुंह से रह रहकर आहह आहह की आवाज निकल जा रही थी। मुखिया की बीवी जब भी चुदवाती थी एकदम खुलकर चुदवाती थी और इस तरह से चुदवाने वाली औरत ही सूरज को मदहोश और मत कर देती थी। मुखिया की बीवी का पिछवाड़ा सूरज का बेहद को भावना लगता था इसलिए वह ज्यादातर मुखिया की बीवी की पीछे से लेता था। सूरज बिना रुके धक्के पर धक्के लगा रहा था और हर एक धक्का उसके बच्चेदानी से टकरा रहा था। सूरज की बात सुनकर कुछ पल के लिए उसका भी मन बहकने लगा बैठे के लिए। उसकी भी ख्वाहिश थी कि उसका एक बेटा होता तो कितना अच्छा होता क्योंकि मुखिया होने की वजह से उसकी रियासत थोड़ी बड़ी थी। वह जानती थी की बेटियां तो शादी के बाद अपने घर चली जाएंगी तो यह सब कौन संभालेगा। यह चिंता हमेशा से उसे रहती थी लेकिन जब उसे एहसास हो गया कि अब उसे बेटा होने वाला नहीं है तो अपना मन मार कर वह खुद ही काम में छूट गई थी और सारा काम संभाल ली थी।

लेकिन आज सूरज के मुंह से यह बात सुनकर कि अगर वह कह तो उसे बेटा दे सकता है एक बार फिर से उसकी भावनाएं जागरूक होने लगी थी एक बार फिर से उसे एहसास होने लगा था कि वह फिर से मां बन सकती है लेकिन फिर इस बारे में सोच कर उसे शर्म महसूस होने लगी थी कि दोनों बेटियां जवान हो चुकी थी दोनों का विवाह करने का समय हो चुका था और ऐसे में उसका खुद का मां बनना कितना लज्जित कर देता है,,,, इसलिए एक बार फिर से अपनी भावनाओं को काबू में कर ली थी और इस समय सूरज से चुदवाने का मजा लूट रही थी,,, थोड़ी देर बाद दोनों के सांसे उखड़ने लगी,,, मुखिया की बीवी गहरी गहरी सांस ले रही थी क्योंकि वह चरम सुख के करीब पहुंच चुकी थी और इसका अहसास होते ही सूरज भी जोर-जोर से तक के लग रहा था क्योंकि उसका भी पानी निकलने वाला था और अगले ही पल वह अपने दोनों हाथों को मुखिया की बीवी की कमर से हटाकर उसकी दोनों बड़ी-बड़ी चूचियों पर रख दिया और उन्हें जोर-जोर से दबाता हुआ अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया और देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ने लगे,, दोनों की किस्मत बहुत तेज थी कि इतनी देर होने के बावजूद भी अभी तक वहां कोई नहीं आया था। जल्दी-जल्दी दोनों अपने कपड़ों को दुरुस्त कर लिए और मुखिया की बीवी थाली में दाल चावल रोटी सब्जी निकालकर उसे परोस दिखाने के लिए और वह खाना खाने लगा।

सूरज खाना खाने के बाद वहां से निकल गया था बैलगाड़ी के पास और उसके जाने के बाद ही नीलू और शालू दोनों जाकर खाना खाने लगे थे। खाना खाते समय मुखिया की बीवी अपनी दोनों बेटियों को सख्त हिदायत दे रही थी।

तुम दोनों ज्यादा शरारत मत करना क्योंकि अब तुम दोनों बाहर जा रहे हो सूरज के साथ ही रहना इधर-उधर बिल्कुल भी मत जाना।

तुम चिंता मत करो मां हम दोनों सूरज के ही साथ रहेंगे,,,,।

अपना ख्याल रखना पहली बार मैं तुम दोनों को बाहर भेज रही हूं कोई और होता तो शायद में तुम दोनों को नहीं भेजती लेकिन सूरज ईमानदार और विश्वास वाला लड़का है इसलिए तुम दोनों को भेज रही हूं।

(थोड़ी देर में मुखिया की बीवी अपने दोनों बेटियों के साथ बैलगाड़ी के पास आ गई थी वहां पर पहले से ही मुखिया खड़ा था और वह सूरज को कुछ समझा रहा था,,,, बैलगाड़ी में सारे खरबूजे की पेटीया रखी जा चुकी थी सूरज बार-बार दोनों बहनों को ही देख रहा था नीलू की जवानी का मजा तो वह चख चुका था लेकिन शालु अभी तक उसके नीचे नहीं आई थी कसी हुई सलवार में शालु की गांड जानलेवा लग रही थी उसकी दोनों गोलाइयां तरबूज के फांक की तरह लग रही थी ऐसा लग रहा था उसकी सलवार में गोल-गोल तरबूज लगे हो। कुल मिलाकर दोनों बहने उसका पानी निकालने के लिए तैयार थी,,,, शालू और नीलू को बैठने के लिए पीछे जगह थी दोनों पीछे बैठ चुकी थी और सूरज बैलगाड़ी चलाने के लिए आगे बैठ गया था मुखिया की बीवी ने रास्ते में खाने के लिए रोटी सब्जी और आचार बांध कर दे दी थी,,,, सूरज निकल चुका था एक नई सफर के लिए,,,,, जाते-जाते मुखिया की बीवी और मुखिया दोनों एक साथ बोल पड़े)

संभाल कर जाना,,,।
 
सूरज बैलगाड़ी लेकर निकल चुका था एक नई सफर के लिए लेकिन वह अकेला नहीं था उसके साथ जवानी से भरी हुई दो लड़कियां थी शालू और नीलू नीलू की जवानी का मजा तो वह चख चुका था लेकिन शालू अभी भी बाकी थी,, उसे पूरी उम्मीद थी कि जिस तरह से नीलू उसके नीचे आ गई शालू भी जरूर आएगी लेकिन फिलहाल अभी तो इस सफर का मजा लेना था मौसम भी बहुत खुशनुमा था,,, सुबह-सुबह का समय था आसमान बिल्कुल साफ और ठंडी हवा बह रही थी धीरे-धीरे बैलगाड़ी आगे बढ़ रही थी,, बैलगाड़ी के पहिए में लोहे के घुनघुनए लगे हुए थे जिससे जैसे जैसे भैया घूम रहा था वैसे-वैसे उसमें से एक मधुर संगीत बज रही थी और यही हाल बैलों का भी था बैलों के पैर में भी घुंघरू बने हुए थे कुल मिलाकर शांत वातावरण में एक अद्भुत संगीत बज रहा था।

सालु और नीलू भी काफी खुश थे क्योंकि यह पहला मौका था जब वह दोनों शहर जा रहे थे और वह भी सूरज के साथ उन्हें इस बात पर यकीन ही नहीं हो रहा था कि उनके पिताजी और उनकी मां शहर जाने के लिए राजी हो गई थी। इसीलिए शालू नीलू से बोली।

नीलू मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है कि हम लोग शहर जा रहे हैं।

तो सही कह रही है मुझे भी यकीन नहीं हो रहा है मैं तो पहली बार शहर जा रही हूं।

अरे बुद्धू तुम्हें कौन सा दो-तीन बार जा चुकी हूं मैं भी तो पहली बार जा रही हूं।

अरे तुम दोनों क्या मैं भी पहली बार ही शहर जा रहा हूं। सच कहूं तो मैं भी अपने मन में सोचता था कि मैं शहर जाऊं देखो तो सही वहां के लोग कैसे होते हैं वहां का बाजार कैसा होता है। और आज देखो तुम्हारे मां बाबूजी की वजह से मुझे भी शहर जाने का मौका मिल रहा है।

मां बाबूजी तुम्हारी ईमानदारी देखकर भेज रहे हैं। (सूरज की बात सुनकर शालू बोली)

वह तो है लेकिन फिर भी अगर तुम्हारे मां बाबूजी नहीं भेजते तो शायद मेरी जिंदगी में कभी शहर नहीं जा पाता।

वैसे सूरज तुमने क्या शहर का रास्ता देखे हो,, (नीलू थोड़ी सी शंका जताते हुए सूरज से बोली)

सच कहूं तो मैं तो देखा नहीं हूं क्योंकि कभी जाने का मौका ही नहीं मिला लेकिन इतना जानता हूं कि कौन सी सड़क शहर की तरफ जाती है इसलिए तो तुम्हारे बाबूजी मुझे भेजने के लिए तैयार हो गए वैसे सच कहूं तो तुम्हारे बाबूजी और तुम्हारी मां मुझ पर बहुत भरोसा करती हैं,,,,।

(सूरज की बात सुनकर शालू मुस्कुराते हुए बोली)

हां यह बात तो है मां और बाबूजी अक्सर तुम्हारी बात करते रहते हैं तो बड़ी ईमानदारी से काम करते हो और हम लोगों का काम भी संभाल लिए हो,,,।

(अपनी बहन शालू की बात सुनकर नीलू अपने मन में ही बोली पिताजी ऐसा कहते हैं यह तो समझ में आता है लेकिन मन ऐसा कहते हैं इसके पीछे का राज तो नहीं जानती सिर्फ मैं जानती हूं,,, मां को सूरज का लंड बहुत पसंद है,,,,, ऐसा वह अपने मन में अपने आप से कह रही थी शालू के सामने ऐसी बात कहने की उसकी हिम्मत नहीं थी,,,,, शालू की बात सुनकर सूरज बोला)

क्या सच में मालिक और मालकिन मेरे बारे में बात करती रहती है या तुम यूं ही बात बना रही हो‌।

हां हां क्यों नहीं मैं झूठ थोड़ी ना कह रही हूं,,, काफी दिनों से तो मैं खुद तुम्हें देखते आ रही हूं हम लोगों का काम करते हुए अभी-अभी गेहूं की कटाई तुम ही ने करवाए थे ना,,,।

हां,,, मैं और मेरी मां,,,।

सिर्फ दो जन,,,!(आश्चर्य से शालू बोली)

हां तो क्या हो गया वैसे भी तो हम लोग अपने खेत में काम करते ही हैं,,,, मलिक के खेत में काम कर दिए तो कौन सी बड़ी बात है हम लोगों के लिए यह कोई बड़ी बात नहीं है हां लेकिन तुम लोग अगर खेत में काम करने लगोगे तुम्हारे पसीने छूट जाएंगे।

(सूरज की बात सुनकर नीलू मुस्कुराते हुए बोली)

नहीं नहीं हम लोग खेत में काम नहीं कर सकते वैसे भी तुम पसीना छुड़वा देते हो,,,।

(नीलू यह बात मुस्कुरा कर बोली थी सूरज नीलू के खाने के मतलब को अच्छी तरह से समझ रहा था इसलिए तपाक से बोल पड़ा)

तुम्हें भी पसीना छुड़वाना है शालू,,,,?

ना बाबा ना मुझे तो माफ करो मुझे पसीना नहीं छुड़वाना है,,,,।

अरे मजा भी बहुत आता है पूछो नीलू से,,,,।

(सूरज की बात सुनकर नीलू एकदम से चौंक गई सूरज की बात सुनकर शालू नीलू की तरफ आश्चर्य से देख रही थी तब वह एकदम से बात बनाते हुए बोली)

नहीं नहीं मजा तो बिल्कुल नहीं आता हालत खराब हो जाती है वह क्या है ना शालू एक दिन में घूमते घूमते खेत पर पहुंच गई तो ऐसे ही मैं भी काम करने लगी सच में मेरी हालत खराब हो गई मैं तो यह सोचकर हैरान हूं कि सूरज और चाची मिलकर पूरे खेत की फसल की कटाई कैसे कर लिए,,,,,।

(नीलू एकदम से बात को घुमा दी थी नीलू की बात सुनकर शालू मुस्कुरा रही थी और मुस्कुराते हुए बोली)

तभी तो मैं खेत पर नहीं जाती वरना अगर कोई काम करने को बोल देगा तो मुझसे तो काम ही नहीं होगा,,,।

अरे लेकिन तुम्हें भी थोड़ा बहुत काम करना चाहिए ऐसा जरूरी नहीं कि सिर्फ खेत में ही पसीना निकल जाए औरतों का पसीना और भी काम में निकल जाता है क्यों नीलु,,,,।

(इस तरह के सवाल के आगे अपना नाम सुनकर नीलू सूरज पर मन ही मन गुस्सा कर रही थी लेकिन शालु सूरज के कहने के मतलब को नहीं समझ पा रही थी,,,, इसलिए वह एकदम से सूरज की बात सुनकर बोली।)

झाड़ू लगाना बर्तन मांजना यह सब तो मैं कर ही लेते हैं यह सब इतना कठिन काम नहीं है।

हां वह तो है लेकिन जब इसे आगे बढ़ोगी तब धीरे-धीरे काम में कठिनाई भी बढ़ती जाएगी लेकिन मजा भी बढ़ता जाएगा।

काम करने में कौन सा मजा,,!

अरे तुम समझ नहीं रही हो औरतों के लिए बहुत से कम है जिसमें मजा भी आता है पसीना भी निकलता है।

सूरज पागल हो गया है नीलू ऐसा कोई काम है औरत के लिए जिसमें औरत को मजा आता हो और पसीना भी निकल जाता हो,,।

(हरामजादा यह नहीं सुधरने वाला नीलू अपने मन में ही बोली फिर धीरे से शालू को समझाते हुए बोली)

मुझे तो नहीं लगता कि ऐसा कोई काम है पता नहीं यह कैसे जानता है औरतों के बारे में,,,।

चाची को देखता होगा काम करते,,,, उन्हें अच्छा लगता होगा काम करने में तभी यह कह रहा है,,,( शालु की बात सुनकर सूरज मन ही मन मुस्कुरा रहा था वैसे वह अनजाने में ही सूरज की मां के बारे में सच बात ही बता रही थी वह कुछ और समझ रही थी लेकिन सूरज कुछ और पूछ रहा था,,,, धीरे-धीरे घुंघरू की आवाज का शोर मचाते हुए बैलगाड़ी गांव से बाहर निकल गई थी,, शालू और नीलू को तो अच्छा लग ही रहा था सूरज को और भी ज्यादा अच्छा लग रहा था बैलगाड़ी के ऊपर बैठने से पहले वह दोनों बहनों को देख चुका था दोनों कई हुई सलवार पहनी हुई थी और कई हुई सलवार में दोनों की जवानी भर भर कर दिखाई दे रही थी जिसे देखकर उसी समय सूरज का लंड अंगड़ाई लेने लगा था,,,, धीरे-धीरे बैलगाड़ी आगे बढ़ती चली जा रही थी और जैसे-जैसे आगे बढ़ती चली जा रही थी वैसे-वैसे गांव के लोग दिखाई देना बंद हो गए थे,,,, कच्ची सड़क एकदम सुनसान थी दोनों तरफ बड़े-बड़े पेड़ और उनकी छांव कच्ची सड़क को और भी ज्यादा खूबसूरत बना रही थी और इस कच्ची सड़क के बीच से सूरज बैल गाड़ी हांक रहा था,,,,, तभी नीलू सूरज से पूछ बैठी,,,)

तुम्हें तो मैंने कभी बैलगाड़ी चलते अच्छी नहीं तो तुम यह बैलगाड़ी चलाना कहां से सीख गए,,,,।

अरे बैलगाड़ी चलाने में कोई बड़ी बात नहीं है बस इस पर बैठता है और रस्सी को जरूरत के मुताबिक छोड़ना है और खींचता है बेैल अपने आप समझ जाता है कि उसे क्या करना है,,,,,,।

(सूरज की बात सुनते ही शालू बोल उठी)

तब तो मुझे भी बैल गाड़ी चलाना है,,,,,।(उसकी बात सुनकर नीलू बोली)

पागल हो गई है क्या रहने दे यह जिसका काम है उसी को शोभा देता है तुझसे नहीं हो पाएगा,।

(बैलगाड़ी चलाने की बात से सूरज के मन में तूफान मचने लगा था,,,, वह बिल्कुल भी देर किए बिना बोल उठा।)

हां हां इसमें कोई बड़ी बात नहीं है शालु आ जाओ मैं तुम्हें बैलगाड़ी चलाना सिखाता हूं,,,।

(सूरज की बात सुनकर शालू एकदम से खुश हो गई,,,, तब नीलू बोली,,,)

लेकिन कहां बैठकर चलाएगी बैलगाड़ी, आगे बैठने के लिए जगह ही नहीं है,,,।

(सूरज इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था वह किसी भी तरह से शालू के तनबदन में उतेजना की लहर उठाना चाहता था,,, यह एहसास दिलाना चाहता था कि अब वह पूरी तरह से जवान हो चुकी है उसका हर एक अंग उसे आनंद देने के लिए बना है इसलिए वह तपाक से बोला,,,)

अरे कोई बात नहीं मेरे आगे बैठ जाओ तभी तो तुम सिख पाओगी वरना कहीं अकेले बैठी रही और बैल भड़क गया तो लेने के देने पड़ जाएंगे तब रोकना मुश्किल हो जाएगा,,,,।

हां नीलु सुरज सही कह रहा है,,,,, अरे थोड़ा बैल को तो रोको ताकि मैं उतर सकूं,,,,,।

(उसकी बात सुनकर सूरज बैल की रस्सी खींचकर बैल को खड़ा कर दिया और शालू बैलगाड़ी से नीचे उतर गई,,,, रास्ता पूरी तरह से सुनसान था केवल पंछियों की आवाज आ रही थी और दूर-दूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा था और वैसे भी इस सड़क से कोई आता जाता नहीं था क्योंकि गांव का बाजार दूसरी तरफ था यह रास्ता अक्सर सुनसान ही रहता था जो दूसरे गांव से मिलाता था और यह रास्ता दूसरे गांव के पीछे नहीं बल्कि दूसरे गांव के किनारे की सड़क से होकर गुजरता था इसलिए किसी के देखे जाने का डर नहीं था सूरज का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि शालू उसके आगे बैठने वाली थी एक तरह से उसकी गोद में ही बैठने वाली थी क्योंकि जगह बहुत कम थी,,,, शालू जल्दी से नीचे उतर कर आगे की तरफ आ गई और सूरज हाथ बढ़ाकर शालू का हाथ पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ चढाने लगा,,, शालू लकड़ी की पाटी को एक हाथ से पकड़ कर सूरज के हाथ का सहारा लेकर धीरे से बैलगाड़ी के ऊपर चढ़ गई लेकिन अभी वह बैठी नहीं थी वह सिर्फ जगह देख रही थी सूरत धीरे से थोड़ा सा पीछे की तरफ सड़क गया जिससे उसकी दोनों टांगों के बीच चौड़ी पाटी नजर आने लगी वह मुस्कुरा रही थी,,,, सूरज भी मुस्कुराते हुए बोला।)

आ जाओ बैठ जाओ,,, तुम्हारे लिए जगह बना दिया हूं,,,,।(यह सब सुनकर नीलू से रहा नहीं जा रहा था क्योंकि उसे अपने आप पर गुस्सा आ रहा था,,, अब उसे लग रहा था कि उसे बैलगाड़ी चलाने के लिए आगे जाना चाहिए था ताकि वह किसी बहाने से सूरज के करीब तो रहती लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा अब उसके करीब शालू है,,,, वह कुछ कर भी नहीं सकती थी,शालु धीरे से सूरज की टांगों के बीच बैठ गई थी सूरज को एहसास हो रहा था कि नीलू से बड़ी गांड चालू की थी और वह थोड़ा नीलू से तंदुरुस्त थी, उसके गदराए बदन की खुशबू से सूरज मदहोश हो रहा था,,, शालू अच्छी तरह से बैठ गई थी,, फिर भी सूरज पूछा।)

अच्छे से तो बैठ गई हो ना,,,,।

हां अब मैं बराबर बैठ गई हूं,,,,,,।

(सूरज की मदहोशी बढ़ती जा रही थी क्योंकि जिस तरह से वह बेठी थी उसका पूरा बदन सूरज के बदन से सटा हुआ था,,,,, सूरज का मन कर रहा था कि इसी समय वह उसे अपनी बाहों में भरकर उसकी चूचियों को दबाना शुरू कर दे लेकिन फिर भी अपनी भावनाओं पर काबू किए हुए वहां अपने आप को संभाले हुए था तभी शालू बोली,,)

अब क्या करना है सूरज,,,?

ज्यादा कुछ करना नहीं है जब बैल खड़ा रहे और उसे आगे बढ़ने का इशारा करना हो,,, तो रस्सी को थोड़ा सा ढीला छोड़कर उसे हिलाओ जिस रस्सी के हलनचलन से बेल को लगने लगे कि अब उसे क्या करना है और साथ में मुंह से आवाज निकालो,,आहहह टटटट,,,,टटटटटट,,,,, अब ऐसे करो,,,,,।

(सूरज जैसा बता रहा था,, वैसा ही शालू करने लगी लेकिन जिस तरह से आवाज निकालने को कह रहा था उस तरह से आवाज निकालने में उसे हंसी आ जा रही थी और जब वह हंसती थी तो उसके नितंब एकदम से सूरज की टांगों के बीच सट जा रहे थे,,, सूरज तो ऐसा लग रहा था कि जैसे हवा में उड़ रहा हूं उसे शालु के नितंबों का स्पर्श और वह भी अपने आगे वाले भाग पर कुछ ज्यादा ही अच्छे तरीके से महसूस हो रहा था और वह मदहोश हो रहा था,,,,, फिर भी जैसा सूरज ने बताया था वैसा करने पर बल आगे की तरफ बढ़ने लगा यह देखकर नीलू को भी अच्छा लग रहा था की बैलगाड़ी चलाना कितना आसान है,,,,, देखते ही देखते बैलगाड़ी कुछ दूरी तक पहुंच गई चालू बहुत खुश नजर आ रही थी उसके हाथों में बैलो की लगाम जो थी,,,सूरज,,, बता रहा था कि जब बैलगाड़ी को रोकना हो तो रस्सी को थोड़ा सा अपनी तरफ खींच लेना तो वह रुक जाएगा सूरज का इतना कहना था कि शालु उसी समय रस्सी को खींच दी और बैलगाड़ी रुक गई यह देखकर सूरज मुस्कुराने लगा और बोला,,,,,।)

अरे इतना जोर से नहीं खींचना था,,,,, धीरे से रुको मैं बताता हूं,,,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज अपने दोनों हाथों को उसके दोनों बाजू के नीचे से आगे की तरफ लाया जिसकी वजह से दोनों तरफ से उसकी नंगी सूरज की हथेली पर स्पर्श होने लगी जिसका एहसास शालू को भी हो रहा था लेकिन वह उसे सहज ले रही थी वह नहीं जानती थी कि इतने से ही सूरज पूरी तरह से आनंदित हो गया था रस्सी को धीरे से खींचने के लिए वहां अपने दोनों हथेलियों को शालू की हथेली पर रख दिया था और अपनी हथेली में रखकर उसकी हथेली को दबाते हुए धीरे से खींचा तो बेल की रफ्तार कम होने लगी वह धीरे-धीरे चलने लगा यह देखकर सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

देखो बैल कैसे धीरे-धीरे चलने लगा,,,, और इन्हें रोकना हो तो थोड़ा सा जोर लगाकर खींच लो वह एकदम से रुक जाएंगे लेकिन एक मत खींचना क्योंकि इससे उन्हें चोट लग सकती है क्योंकि रस्सी उनकी नाक के छेद में से भरी जाती है समझ रही हो ना,,,,।

हां समझ रही हूं,,,,।

(इतना सुनकर सूरज एकदम सहज होते हुए अपनी हथेलियां को शालु की हथेलियो के ऊपर से हटा लिया,,,, ताकि शालू को उस पर बिल्कुल भी शक ना हो कि वह ऐसा जानबूझकर कर रहा है,,,, लेकिन इस दौरान उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो चुका था और वह एकदम सीधा होकर ऊपर की तरफ मुंह उठाए शालू की पीठ से सटा हुआ था,,,, जिसका एहसास शालू को अच्छी तरह से हो रहा था शालू को उसकी चुभन नहीं हो रही थी लेकिन उसकी गर्माहट का एहसास हो रहा था और वह अपने मन में सोच भी रही थी कि उसकी पीठ पर इतनी गरम कौन सी चीज सटी हुई है,,,, लेकिन वह समझ नहीं पा रही थी क्योंकि उसके दिमाग में बैलगाड़ी चलाने की धुन जो सवार थी वह बड़े अच्छे से बैलगाड़ी को आगे की तरफ लेकर चली जा रही थी लेकिन जैसे-जैसे खड़े आते और उसमें से बैलगाड़ी का पहिया गुजरता तो बैलगाड़ी हीचकोले खाने लगती थी,, जिसकी वजह से शालू और सूरज थोड़ा आगे पीछे हो जा रहे थे अपने आप ही और इस वजह से रह रहकर सूरज का लंड उसकी पीठ पर चुभने लगता था।

जवानी से भरी हुई शालु की पीठ और नितंबों पर अपने लंड की रगड़ को महसूस करके सूरज एकदम मस्त हो जा रहा था वह उत्तेजना के परम शिखर पर था उसे इस बात का डर था कि कहीं उसके लंड से पानी न निकल जाए क्योंकि शालु की जवानी का स्पर्श उसे दीवाना बना रहा था,,,,, सूरज उसका हौसला बनाते हुए बोला।

बहुत अच्छे शालु तुम बहुत जल्दी बैलगाड़ी चलाना सीख गई हो,,,, अब तो तुम अकेले ही शहर बैलगाड़ी लेकर जा सकती हो। तुमको भी सिखाना है नीलु,,,।

(दोनों को खुश होता देखकर नीलू गुस्सा हो रही थी और गुस्से में बोली)

नहीं सीखना तुम ही दोनों जिंदगी भर करो मजदूरी,,।

लेकिन नीलू इस मजदूरी में तो मजा आ रहा है,,,।

हां मेरी रानी पहली बार है ना इसलिए मजा आ रहा है जब करना पड़ जाएगा तब तुझे यह सजा लगने लगेगा।

वह तो मैं नहीं जानती लेकिन इस समय तो मुझे बहुत मजा आ रहा है,,,,।

(शालू को खुश होता देखकर सूरज उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़कर सहज होता हुआ बोला ताकि उसे बिल्कुल भी शक ना हो,,,)

बैलगाड़ी चलाने में बहुत मजा आता है शालु मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि तुम इतनी जल्दी बैलगाड़ी चलाना सीख गई हो,,,, सच में तुम्हें बैलगाड़ी चलाता देखकर मुझे बहुत खुशी हो रही है,,,।

(सूरज के इस तरह से अपनी कमर पर हाथ रखकर पकड़ने की वजह से पल भर के लिए शालू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी थी वह एकदम से गनगना गई थी लेकिन जिस तरह से सूरज उसका हौसला बढ़ा रहा था खुश हो रहा था यह देखकर वह एकदम से सहज होने का दिखावा कर रही थी जबकि उसके बदन में अजीब सी हलचल मची हुई थी वह कुछ बोल बाकी उससे पहले ही सूरज फिर से उसकी कमर को अपने दोनों हाथों की पकड़ से आजाद कर दिया वह गहरी गहरी सांस ले रही थी,,,, इस दौरान उसे अपनी पीठ पर गर्माहट बराबर महसूस हो रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि इतनी गर्म कौन सी चीज है जो उसकी पीठ से उसके नितंबों के ऊपरी हिस्से पर सटी हुई है,,,,, यही सब सोते हुए बैलगाड़ी आगे चली जा रही थी दूसरा गांव आने वाला था,,,, तभी जब उसे रहा नहीं गया तो वह सूरज से बोल पड़ी,,,,,,,,।)

यह क्या चीज है सूरज एकदम गरम लग रही है,,,,(शालू यह बात एकदम धीरे से बोलते हुए अपने हाथ को एकदम से पीछे की तरफ ले गई और उसे गर्म चीज पर जैसे ही हाथ रखी तो पहले तो उसे कुछ समझ में नहीं आया लेकिन वह उसका भूगोल उसका आकार जानने के लिए जैसे ही उसे अपनी हथेली में लेकर दबाई तो एकदम से चौंक गई उसे एहसास हो गया कि उसकी हथेली के अंदर गर्म चीज क्या है वह घबरा गई और अपनी हथेली को वापस खींच ले उसकी सांस ऊपर नीचे हो गई वह कुछ बोल नहीं पाई और सूरज मन ही मन में मुस्कुराने लगा खुश होने लगा,, लेकिन शालु की हालत खराब थी भले ही वह सीधी शादी और भोली भाली थी लेकिन इतना तो वह जानती थी कि उसकी हथेली में गर्म सी चीज कुछ और नहीं बल्कि सूरज का लंड था इस बात के एहसास से ही वह सिहर उठी थी,,,,, सूरज भी कुछ बोल नहीं पाया ना तो इसके बाद शालू ही कुछ बोल पाई उसकी आंखों में शर्म और मदहोशी भरी हुई थी उसका चेहरा शर्म से लाल हो चुका था उस बैलगाड़ी की रस्सी तक संभाली नहीं जा रही थी बार-बार उसके हाथों से छूट जा रही थी क्योंकि जिंदगी में पहली बार उसके हाथ में एक जवान लड़के का लंड जो आ गया था,,,,, सूरज शालु की मनोस्थिति से अच्छी तरह से बाकी हो चुका था वह जानता था कि शालु को सहज बनाना बहुत जरूरी है और वैसे भी दूसरे गांव की सीमा शुरू हो चुकी थी इसलिए वह शालु से बोला,,,)

अब तुम उतर जाओ शालू क्योंकि दूसरा गांव शुरू होने वाला है इस हाल में अगर कोई देखेगा तो क्या सोचेगा वैसे भी तुम्हारे पिताजी को दूर-दूर तक गांव में बहुत लोग जानते हैं,,,,।

(सूरज के कहने का मतलब को शालू अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए वह बिना कुछ बोले उतरने को तैयार हो गई और सूरज भी बैलगाड़ी रोक कर उसे उतरने में मदद किया,,, लेकिन वह नीचे उतरते समय सूरज से नजर नहीं मिल पा रही थी उसकी आंखों में शर्म भरी हुई थी चेहरा और का लाल हो चुका था जो कि सूरज को एकदम साफ दिखाई दे रहा था। सूरज शालू के चेहरे को देखकर मन ही मन बहुत खुश हो रहा था शालू बिना कुछ बोले पीछे चली गई और बैलगाड़ी पर बैठने लगी तो नीलू चुटकी लेते हुए बोली,,,)

बहुत मजा आ गया ना तुझे बैलगाड़ी चलाने में जब सही में चलाना पड़ेगा ना तो पसीने छूट जाएंगे,,,।

( नीलू की बात सुनकर वह कुछ बोली नहीं बस मुस्कुरा दी और बैलगाड़ी के ऊपर बैठ गई,,,,, और बैलगाड़ी सूरज आगे बढ़ा दिया कुछ देर तक किसी के मुंह से आवाज तक नहीं निकल रही थी तीनों खामोश है,,, सूरज और शालू एक दूसरे की खामोशी को अच्छी तरह से समझ रहे थे लेकिन इस बीच नीलु भी शांत थी,,,,, तभी थोड़ी दूर बैलगाड़ी आगे गई होगी कि तभी सूरज ने उसे रोक दिया,,,,, और बोला,,,)

कहां जा रही हो चाची,,,,?(सूरज की सूरत को पहचान लिया था वह औरत कोई और नहीं बल्कि कमला थी कमला रानी जिसके नंगे बदन को वह देख चुका था जिसे चुदवाते हुए वह देख चुका था जिसकी प्यास अभी भी सूरज की आंखों में बसी हुई थी,,,, यह वही औरत थी जिसके बदौलत, शुरू शुरू में लगता था कि सूरज का परिवार बिखर गया है क्योंकि इस औरत की वजह से ही सूरज के पिताजी घर छोड़कर चले गए थे लेकिन धीरे-धीरे एहसास हुआ कि इसी औरत की बदौलत आज वह एक बहुत ही खूबसूरत औरत की जवानी का मजा ले रहा था और वह औरत थी उसकी मां, इसीलिए वह भले अपनी मां के सामने कमला को भला बुरा कहता था लेकिन दिल ही दिल में हुआ कमल की इज्जत भी करता था लेकिन इस इज्जत के बीच उसके मन में कमला की जवानी का मजा चखने का भी इरादा था। सूरज की बात सुनकर वह औरत जो की पैदल चल रही थी अपने दो बच्चों को साथ में लेकर वह एकदम से रुक गई और बोली,,,)

कहीं नहीं बबुआ बस आगे वाले गांव तक जाना था,,,।

साथ में दो बच्चों को लेकर जा रही हो धूप बढ़ती जा रही है,,,।

तो अब कर भी क्या सकते हैं बबुआ,,,,,,!

(बैलगाड़ी रुक जाने की वजह से और सूरज की बात सुनकर शालू और नीलू दोनों अपने मन में सोच रहे थे कि अब यह कौन मिल गया जिसे सूरज चाची कह रहा है कहीं पहचान वाली तो नहीं है,,,,, लेकिन वह दोनों रेलगाड़ी से नीचे नहीं उतरे बस बैठे रहे,,,, सूरज कुछ सोच रहा था तभी वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,)

तुम कहां जा रहे हो बबुआ,,,,?

मैं तो शहर जा रहा था चाची खरबूजे बेचने के लिए,,,, और हां शहर का रास्ता यही आगे से होकर जाता है ना,,,!

हां हां,,,, तुम सही रास्ता पकड़े हो बबुआ,,,, यह सिद्ध शहर जाता है लेकिन शहर तो अभी बहुत दुर है,,,।

हां मैं जानता हूं,,,,, अगर कोई तकलीफ ना हो तो बैलगाड़ी पर बैठ जाओ मैं तुम्हें आगे छोड़ दूंगा,,,,,।

मुझे कौन सी तकलीफ होगी बबुआ बल्कि मुझे तो आराम हो जाएगा इतनी धूप में बच्चों को लेकर जा रही हूं,,,,।

(उसकी बात सुनते ही सूरज एकदम से बैलगाड़ी से नीचे उतर गया और कुछ सोचने के बाद बोला)

बच्चों को पीछे बिठा दो क्योंकि,, तुम पीछे बैठ नहीं पाओगी,,,।

पीछे क्यों नहीं बैठ पाऊंगी,,,,!

क्योंकि पीछे हमारी मालकिन है,,,।

मालकिन,,,?(कमला एकदम से हैरान होते हुए बोली और बैलगाड़ी के पीछे जाकर देखी तो दो खूबसूरत लड़कियों को देखकर वह हैरान रह गई और बोली,,,)

हाय दैया दोनों कितनी सुंदर है,,, एकदम गुलाब की पंखुड़ी की तरह।

(उसके मुंह से अपनी तारीफ सुनकर दोनों बहने एकदम खुश हो गई और नीलू बोल पड़ी)

लाओ बच्चों को पीछे बैठा दो,,,,(इतना कहकर दोनों बहने उसके दोनों बच्चों को अपनी गोद में बिठा दी क्योंकि दोनों की उम्र 6 साल और ८ साल थी,,, बच्चे तो बैठ गए थे लेकिन अभी भी कमला बाकी थी इसलिए वह हैरान होते हुए बोली,,,)

बच्चे तो बैठ गए हैं लेकिन मैं कहां बैठुंगी,,,,,।

तुम आगे बैठ जाओ सूरज के पास,,।

(नीलू ने सूरज के मन की बात बोल दी थी लेकिन यह बात सुनकर शालू एकदम से सिहर उठी थी क्योंकि आगे बैठने का उसे अच्छा खासा अनुभव हो गया था,,,, नीलू की बात सुनकर कमला आगे की तरफ आ गई सूरज भी साथ में आ गया,,, कमला बैठने की जगह को देख रही थी जो की काफी छोटी थी यह देखकर सूरज समझ गया कि वह क्या सोच रही है और वह अच्छी तरह से जानता था कि यह औरत एकदम चुदक्कड़ है इसलिए वह बोला,,,।)

कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है हम दोनों साथ में बैठ जाएंगे आराम से पहुंच जाओगी,,,।

लेकिन,,,?(कमला के मन में शंका हो रही थी कि वह कैसे बैठ पाएगी और वह भी जिस तरह से बैठने को बोल रहा है वह एक तरह से उसकी गोद में बैठने वाली थी,,, लेकिन ज्यादा सोच विचार ना करते हुए सूरज एकदम से बैलगाड़ी पर चढ़ गया और,, अपना हाथ कमला की तरफ बढ़ाकर बोला,,)

ज्यादा सोचो मत जल्दी से बैठ जाओ हमें बहुत दूर तक जाना है,,,, यह तो तुम्हें एक औरत हो और बच्चे के साथ थी इसलिए बैठा रहा हूं वरना किसी को बैठता नहीं अभी तक तो मैं कहां से कहां पहुंच गया होता,,,,

(सूरज की बात सुनकर अभी कुछ बोल नहीं पाई हो अपना हाथ आगे बढ़ा दे सूरज उसका हाथ पकड़ कर ऊपर की तरफ खींचते हुए कमला भी सहारा लेकर ऊपर चढ़ गई और सूरज की दोनों टांगों के बीच बैठ गई यह पल कमल के लिए भी अद्भुत था उसके बदन में अजीब सी लहर उठने लगी थी, शालु तो भोली थी नादान थी वह सूरज की चालाकी को समझ नहीं पाई थी लेकिन इस समय कमला को सूरज की चालाकी नहीं लग रही थी बल्कि उसकी मजबूरी थी और वह जानती थी कि बैलगाड़ी मैं बैठ कर वह थोड़ा जल्दी पहुंच जाएगी और धूप भी नहीं लगेगी,,, और यह सड़क जो शहर की तरफ जाती थी वह गांव के बगल से होकर गुजरती थी यहां पर किसी का आना जाना ना क ेहीं बराबर था इसलिए दोनों को इस अवस्था में देखने वाला कोई नहीं था।
 
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