Incest कर्ज और फर्ज - एक कश्मकश - Page 12 - SexBaba
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Incest कर्ज और फर्ज - एक कश्मकश

नेहेले पर देहला..... 😍🤔👌

इस वैधानिक चेतावनी का वरन आपने जिस वजह से किया है उसका आशय मै अच्छे से जानता हूँ। क्योकि हम दोनों ही same नाम, और राशि वाले है। नमक से नमक नही खाया जाता है 😍😂 आपके सिनेमा हाल में जो फिल्म मैंने देखी थी, और जो cigrete के छल्ले उड़ाए थे, उसका जबाब था ये... 👌

मैंने ये कहानी यहाँ पोस्ट की तो शुरुआती update में बमुश्किल एक या दो रीडर ने ही response दिया था। लेकिन उन रीडर के छोटे छोटे सराहना भरे शब्दों से भी मुझे शक्ति मिली...... जिसका परिणाम आप है, आपने शुरुआती update पर एक पेज का कॉमेंट लिख जो खुशी दी है उसके लिए मै निशब्द हू।

हा भाई सुहाग रात के सीन में कमी तो रह गयी, लेकिन वो पति पत्नी के राज की बात थी, उसको सार्वजनिक तब इसलिए नही किया क्योकि अरुण और कुसुम दोनों ही दूसरी सुहागरात मना रहे थे, लेकिन आप जैसे कुँवारे दोस्त को सुहागरात के किस्से को सुनाना लाजमी है, अरुण डरा हुआ था उसने अपनी सुहागरात पर जब कुसुम का घूघट उठाया तो सबसे पहले गाना गाया...

"" सुहागरात है घूघट उठा रहा हूँ मै "" 😂😍 बांकी रात मस्त रही जिसका प्रमाण सुबह का ये फोटो है

👇👇👇

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इसी तरह मेरे हमनाम प्यार से नवाजते रहिये।

धन्यवाद
 
"ये सोचना गलत है कि तुम पर नजर नहीं, मसरूफ मै बहुत हूं मगर बेखबर नहीं. ..?????

रात गहरी हो गयी थी, हम दोनों ने वीडियो काल disconnet करने की जेहमत नही की, कुसुम एक सिराने तकिये से टिकाए अपना फोन चालू किये नींद की आगोश में चली गई..... मैं विडिओ काल में मोबाइल की बैटरी खतम होने तक उसे देखना चाहता था....... ' मैं पागल हु या उसका दीवाना या महा बेवकूफ, उसकी वही प्यार भरी बाते वही प्यार वही चहरा,इतना प्यार लुटाना की लगे किस्मत ने सब दे दिया है,पर कुसुम के प्यार में झूट नहीं था जो मुझे अंदर से झकझोर रही थी मैं मान ही नहीं पा रहा था की वो मुझे प्यार नही करती है, पर क्या करू कितना भी बुरा सोच कर भी मैं कुसुम के प्यार को झुठला नहीं पा रहा था,वो प्यार तो असली ही था,पूरा खालिस असली मन की गहराई से निकला हुआ, फिर क्यों ये धोखा...वही उसका सज धज के ऑफिस जाना, मेरे अरमानो को उजाड़ कर वापस आना, रात रात भर गैरो से बतियाना. ....... अपने पति की मोहबत भरी शायरियों, गजलो, बातों को गैरो की गंदी बातों के बीच बेआबरू करना। उसका सोते हुए भी मुस्कुराहट बिखेरता हसता चहरा देखकर दिल से आह एक निकली "क्या बेवफा भी इतनी प्यारी, इतनी निर्भीक इतनी मासूम होती है......"". ?????

सुबह जब मेरी नींद खुली तब मैं ये सोचकर खुश तो था, कि कुसुम ने मुझसे अब किसी गैर से रातों को बात ना करने का वादा किया था लेकिन मन में एक कोने में कश्मकश तो था। मैं फ्रेश वगेरा होकर बाथरूम से बाहर आया देखा तो मेरा मोबाइल पूरा चार्ज हो चुका था ,मुझे बहुत ही खुशी हुई और मैं जल्दी से उसे उठा लिया,

आज रविवार का दिन कॉलेज की छुट्टी और मुझे घर में कुछ काम तो वैसे भी नही था सबसे पहले मैने अपने मोबाइल स्क्रीन पर चमक रहे कुसुम के मेसेज को पढ़ा......

कुसुम जी का गुड मॉर्निंग मेसेज मेरे लिए ग्लूकोन डी से कम नही था। फिर अपने मोबाइल में उस एप्प को खोलकर देखने लगा और उसके वाट्सअप मेसेज पड़ने की सोची........!

शर्मा जी के कुछ मेसेज थे , शर्मा जी से तो पता नही क्यो मुझे चिड़ सी होने लगी थी पर साले की किश्मत बहुत ही बुलंद थी कि कुसुम जैसी हसीन परी उसे लाइन दे चुकी थी।

शर्मा कुसुम को मनाने की कोसिस कर रहा था पर कुसुम कोई भी जवाब उसे नही दे रही थी,आख़िरकार उसने अपना ऑफिस के काम का दुखड़ा रोना सुरु कर दिया और कुसुम भी थोड़ी पिघल गयी । कुसुम आज दूसरी तहसील में अन्य कर्मचारियों के साथ पर्यवेछ्न के लिए जाने वाली थी, इसकी मा का साली कुसुम भी क्या चुतिया वाले काम कर रही है, इसे आज संडे को भी शर्मा की ड्यूटी बजानी है, मेरे दिमाग ने कहा...!!

दूसरा msg था संजय भाईसाहब का जो कल रात तक unread दिख रहे थे, उसे कुसुम ने आज सुबह ही पढ़ा था । संजय ने पर ये msg उसने रात में और आज सुबह किये थे ,कोई प्रॉब्लम वाली बात तो कही दिखाई नही दी पर कुसुम की तारीफों के पुल उसने बांधे थे, जैसे आप बहुत सुंदर हो, आपका काम करने का तरीका बहुत अच्छा है वगैरह , मतलब साफ था उसने कुसुम को लाइन मारना शुरू कर दिया है बस बात थी कुसुम के हा की , कुसुम रिप्लाई में बस ऑफिस में मिलते है और कुछ स्माइल लिखकर भेज दिया था,,....

आखिर कार मुझे समझ आ गया एक पत्नी कभी उस पति की कद्र नही करती जो पति उसके सामने हर बात पर झुक जाता हो ?????? अब आगे क्या होगा ये तो मुझे नही पता था बस आज रात का इंतजार जरूर था….

माथा तो खनक गया था पर शायद कुसुम इतनी भी जल्दी पटने वाली लड़की नही थी, शायद वो कुसुम को तब से पटा रहा हो जब से मैं उसे नही जानता…...ह्म्म्म हो तो सकता है ,या नही भी चलो जो भी हो मेरी बीवी ने तो अपने कारनामे दिखा ही दिए और अब डर काहे का, साला अब काहे की शर्म हाय ,वो मस्ती करे तो मैं पीछे क्यो रहू, तो क्या उसे दुसरो से चुदते हुए देखना ही मेरी नियति है,..............? ?? मेरे दिमाग में एक लहर सी उठी नही यार क्यो न मैं भी किसी को ट्राय करू.पर किसे…. ????

मैं जिनको जानता था उनमे से कोई भी ऐसा नही था जिसे मैं ट्राय कर सकू... और आसानी से हासिल कर सकूँ। सभी शादीशुदा औरते (प्रीति, सुनीता) थी या तो बहुत ही छोटी (शशि कॉलेज की छात्रा) थी जिन्हें पटाना मेरे दिल को गवाही नही दे रहा था, तो फिर किसे मैंने अपना मीटर घुमाया, एक लड़की ही मेरे लायक थी, और जिसे मैं आसानी से हासिल कर सकता था..

मेरी बेटी रिंकी …………..

नही यार……….

हा ना यार…………

अरे नही यार इतना भी चरित्र मत गिरा………..

अबे मादरचोद जब तेरी बीवी गैर मर्दों के साथ मस्ती कर सकती है तो तू अपने बीवी की बेटी को क्यो नही चोद सकता..

हम्म्म्म……..

मैं मन ही मन अपने अवचेतन मन से बातें करने लगा..........!

तो क्या मैं सच में ऐसा कर सकता हु……..

क्यो नही…….

लेकिन मैं तो कुसुम से प्यार करता हु ना……..

पर साले रिंकी भी तो तुझसे प्यार करती है, कल रात को ही उसने साफ साफ बोल तो दिया वो तेरी मम्मी की कमी दूर करने को तैयार है....! कोनसी वो तेरी सगी बेटी है,

न पर वो पापा को पता चला तो …………..

देख भाई हम सब इन्सान है और इन्सान होने की सबसे बड़ी जो खासियत है वो है हमारी भावनाए ,पर ये समाज,धर्म , रिश्ते और नैतिक बन्धनों से भी हम बंधे हुए है।जो हमें सिखलाते है की ये करो ये मत करो , हम है तो मूलतः जानवर ही ना ,पर यही बंधन हमें जानवरों से अलग करते है ,लेकिन इन्ही बन्धनों के कारन हम अपनी भावनाओ को दबाते है ,और उसका परिणाम होता है,विकृति .....हमारी असली भावना कही छुप जाती है और वो विकृत होकर प्रगट होती है ,इसलिए लोग हत्या करते है चोरी करते है ,और सबसे बड़ी और मूल भावना है सेक्स की भावना लेकिन हमें बचपन से ही इसे दबाना सिखाया जाता है ,इसका परिणाम होता है की हम ना तो प्यार कर पाते है और ना ही इससे पूरी तरह से छुट पाते है ।

मुझे मन ही मन कुछ कुछ चीजे समझ आने लगी थी।

तेरी बीवी बेवफ़ाई पर उतारू है और तू यहां शराफत दिखा रहा है, रिश्तों की बात कर रहा है, रिंकी खुद सामने से बोल चुकी हैं, देने के लिए तैयार है,सोच साले साली के क्या बड़े बड़े चूची है……….सोच….

मेरी अंदर की एक शैतानी सी आवाज ने मुझे झकझोर सा दिया और जब मुझे होश आया तो मैंने अपने नीचे के भाग में गौर किया वहाँ एक बड़ा सा तंबू बना था…..मैंने अपने तंबू को मसला और मेरे मुह से अनायास ही निकल गया…

“हाय रे रिंकी …….”

पर साला चड्डी के नीचे से कुछ और ही आवाज आई एक जोरदार झटका मेरे लिंग ने मारा और मेरे होठो में एक मुस्कुराहट सी आ गयी…

अब मेरी बेटी के लिए भी मेरी फीलिंग्स अब बदल चुकी थी अगर उस समय मैं कुछ सोच सकता था तो सिर्फ़ अपनी जवान बेटी की हसरतों के बारे में, और उस के लिए मेरे दिल में पैदा हो रही हसरतें. क्या वाकाई वो मेरी खावहिश बन गयी थी? मेरे पास किसी सवाल का जवाब नही था.

सुबह के आठ बज चुके थे।

उधर रिंकी उठी ब्रश किया और सबको गुड मोर्निंग कहा और मुझे भी हमेशा की तरह गले लगा के विश किया आज उस के गले लगने पर मुझे एक अजीब सा एहसास हुआ उसकी कोमल स्किन उसके बालो की खुशबु उसके बदन के स्पर्श से आज मुझे बहुत मजा आ रहा था मैं डाइनिंग टेबल पे बैठा था जब रिंकी ने मुझे झुक के गुड मोर्निंग विश किया.

जेसे ही रिंकी झुकी तो मेरी नजरे रिंकी के कुर्ते के अंदर गयी क्या नजारा था रिंकी ने कुर्ते के अंदर ब्लैक शमीज पेहेन रखी थी और शमीज के अंदर ब्रा पेहेन रखी थी उसकी ब्रा का शेप तो मुझे दिखा लेकिन कलर नही दिखा क्योंकि उसकी शमीज का कलर ब्लैक था लेकिन अंदर क्या शेप बन रहा था उसके झुकने के कारन उसके चूचे थोड़े से लटक भी गए थे आह क्या चूचे थे।

मुझे हग करके वो भी टेबल पर बैठ गयी नाश्ता करने के लिए । उसके दादाजी (मेरे पिता श्री) न्यूज़ पेपर पढ़ रहे थे। मेरी नजर तो बार बार रिंकी ही जा रही थी वो कुछ भी लेने के लिए हाथ इधर उधर करती तो उसके कुर्ते के गैप मे से मुझे उसकी शमीज और ब्रा की स्ट्रैप्स दिखाई देती जिसे देखने मे मुझे बहुत मजा आ रहा था।

मैं बार बार उस की शमीज और ब्रा के स्ट्रैप्स उसके कुर्ते की साइड के गले मे से देख रहा था अंदर के शरीर की गोरी गोरी कोमल skin देखने मे मुझे बड़ा मजा आ रहा था नाश्ता करते हुए मै किसी न किसी बहाने से रिंकी का हाथ टच कर रहा था। मैंने सोचा की अब और कैसे रिझाउ तभी मै "अरे रिंकी sandwitch तो अच्छे बने है, सॉस की बोतल किचन मे से लाके उसे देते हुए बोला......... "क्या हुआ अरुण आज बड़ा प्यार आ रहा है तुजे अपनी बेटी पे " मेरे पापा अखबार को लपेटते हुए बीच में बोल पड़े....

मैंने कहा नहीं पापा वो तो एसे ही" और पापा के बाहर जाते ही रिंकी के पीछे से उसके गले मै हाथ डाल के खड़ा हो गया और उसके कुर्ते के गले मे झाँकने लगा । और उसकी ब्रा स्ट्रैप्स को महसुस करने लगा । मेरे साथ एसा कुछ होगा मैंने कभी नहीं सोचा था। यह बिल्कुल बेतुकी बात थी. शायद अब मेरी नजरे भी रिंकी को कुछ कहना चाहती थी या उसे कुछ समझाना चाहती थी.

रिंकी की मदमस्त जवानी इस वक्त मेरे दिल पर छुरी चला रही थी. मै भला खुद को काबू में रखने की कोशिश भी करता तो कब तक? रिंकी की जवानी मेरे धैर्य और संयम की परीक्षा ले रही थी. मै पूरी कोशिश कर रहा था कि इन सब बातों को इगनोर कर दू लेकिन मेरा मन बार बार विचलित हो रहा था.

मै इस बात से बिल्कुल अन्जान नही था कि रिंकी भी कुछ इसी तरह के ख्यालों से घिरी हुई थी. उसके मन में भी वही हालात चल रहे थे जिनसे मै गुजर रहा था. ये लड़कियों की 18-19 की उम्र होती ही ऐसी है कि सब संयम हाथों से छूटता सा नजर आता है. कई बार कदम लडखड़ा जाते हैं.

वहाँ उस समय उस नास्ते की टेबल पर हम दोनों के बीच जो कुछ घटित हो रहा था, इतना मैं ज़रूर जानता था. मगर हमारे बीच रिश्ते का अवरोध था, एक बहुत बड़ी बाधा थी जो किसी असाधारण अनोखे तरीके से ही दूर हो सकती थी. मगर वो अवरोध वो बाधा जितनी बड़ी थी उतनी ही आसानी से दूर नही हो सकती थी.

इतने में ही मेरे फोन का रिंगटोन बजने लगा- "दूरी ना रहे बाकी, तुम इतने करीब आओ कि तुम मुझ में समा जाओ, मैं तुम में समा जाऊं." मोबाइल की स्क्रीन पर जब मैने कुसुम का फोटो के साथ नाम देखा...

तो मन ही बोला अब इसकी सेजवानी में क्या परेशानी हो गयी......

हैलो -- जी कहिये, सुबह सुबह इतनी जोर से याद आ गयी मैडम जी को कि फोन लगाना पड़ा ...??? ह्म्म्म

पत्नी हू तुम्हारी जब जी चाहेगा तब फोन लगा सकती हु..... ह्म्म्म.... अब ये सब बातें छोड़ो मै जो कह रही हूँ वो सुनो।

जी फरमाइये क्या आदेश है...???

जूली की शादी है....परसो ..! कल महिला संगीत है, उसमें शामिल होने के लिए प्रीति दीदी रेलवे स्टेशन पर आने वाली है, उनको जरा पिक कर घर पर छोड़ सकते हो....? उनके साथ बहुत ज्यादा सामान है, रिंकू और पापा बाहर गये है.....???

मै क्या ऑटो रिक्शा वाला हू... ह्म्म्म जो मुझसे कह रही हो।

एक ही शहर (लोकल) में शादी करी है तो इतना तो करना पड़ेगा, दोनों घरों के फर्ज निभाने होंगे।

कुसुम के मुह से फर्ज की बात सुनकर मेरे पिछवाडे में सी आग लग गयी।

कभी अपना फर्ज भी याद कर लिया करो, कुसुम मैडम....

ओफ्फो तुमसे बात करना ही बेकार है।

तो ठीक है ना, मत करो बात...... खुद आ जाओ और ले आओ अपनी बहन को.....

मै और मम्मी आज दोपहर तक आ चुकी होती, लेकिन आज सन्डे को भी उस शर्मा ने तेहसिल में पर्यवछ्न करने के लिए बुला लिया है।

क्या चूतिया आदमी है.... शर्मा

मुझे पता है.... यार.... लेकिन ये इंपोर्टेंट नही है कि वो चूतिया है, ये इंपोर्टेंट है, वो शर्मा ऑफिस का हेड है...... मै इसलिए आज देर रात तक आ जाऊंगी। pls आप अभी चले जाओ आपकी चहेती साली ने खुद बोला था, इसलिए मै बोल रही हूँ। अब ज्यादा टाइम बर्बाद ना करो, और जाओ।

ठीक है.... और कोई सेवा.... ह्म्म्म

एक बात बताओ रिंकी का फोन क्यों नही लग रहा है, दो तीन दिन से, वो ठीक तो है......??

उसका फोन ठीक होने गया है, अपनी बेटी से बात करनी है क्या अभी....????

मै बस ऑफिस पहुँचने वाली हू, रात को घर आ कर फेस टू फेस बात करती हूँ, ओके बाय.....

मैंने घड़ी देखी ट्रेन के आने का समय 10 बजे का था और साढ़े 9 बज चुके थे, मैंने समय ना गंवाते हुए गाड़ी की चाबी उठाई और मोबाइल उठा कर 139 डायल किया ताकि गाड़ी की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया जा सके। इंक्वायरी से पता चला कि ट्रेन आधे घंटे में पहुँचने वाली है।

कुछ समझ में नहीं आ रहा था। मैंने मोबाइल से प्रीति का नम्बर डायल किया तो उधर से प्रीति की मीठी चाशनी जैसी आवाज आई, “हैल्लो जीजाजी, मेरी गाड़ी बस 15-20 मिनट में स्टेशन पहुँचने वाली है, बताओ कहाँ मिलोगे?”

“तुम जहाँ बोलो, वहाँ मिल लेंगे !” दिल तो बहुत कुछ कहना चाह रहा था पर मैंने खुद पर काबू करने की कोशिश की और प्रीति से कोच नम्बर और सीट नम्बर पूछ कर उसको बता दिया कि मैं उसके कोच पर ही उसको लेने आ रहा हूँ। इतनी बात करके मैंने फोन काट दिया। मेरी तो जैसे लाटरी ही लग गई। आज बहुत दिनों के बाद मैं प्रीति को देखने वाला था और 4 किलोमीटर का सफर मुझे उसके साथ अकेले तय करना था बाइक पर।

यही सोचते सोचते मैं बाहर आ गया बाइक निकाली और स्टेशन की ओर चल दिया।

जब तक मैं स्टेशन पर पहुँचा तो उसकी गाड़ी के पहुंचने की घोषणा हो चुकी थी। मेरे प्लेटफार्म पर पहुँचने से पहले प्रीति की गाड़ी वहाँ खड़ी थी। मैंने तेजी से कोच नम्बर बी-2 के दरवाजे की तरफ अपने कदम बढ़ाये और अन्दर जाकर उसकी सीट नम्बर 16 को प्यार से निहारा।

प्रीति वहाँ नहीं थी, मुझे उस सीट से जलन हो रही थी जिस पर 7 घंटे का सफर तय करके प्रीति आ रही थी, सोचा कि काश इस सीट की जगह मेरी गोदी होती तो कितना अच्छा होता। सोचते सोचते मैं गाड़ी से बाहर आया और प्रीति को फोन मिलाया।

तभी किसी ने मेरी पीठ पर हाथ मारा, मैंने मुड़ कर देखा तो चुस्त पंजाबी सूट में मेरे पीछे प्रीति खड़ी मुस्कुरा रही थी। मैं उसके गुलाब की पंखुड़ी जैसे होंठों को देखकर वहीं जड़वत हो गया।

तभी प्रीति बोली, “जीजा जी, आपके साथ घर ही जाऊँगी स्टेशन पर ऐसे मत घूरो, घर जा कर घूर लेना।”

मैंने एक बार फिर से खुद को नियंत्रित करने की कोशिश की और बिना कुछ भी बोले उसके हाथ से अटैचीकेस लिया और वापस बाहर की तरफ चल दिया।

प्रीति भी मेरे पीछे-पीछे चलती हुई बोली, “लगता है जीजाजी नाराज हैं मुझसे कोई बात भी नहीं कर रहे।”

अब मैं उस को क्या बताता कि इतने दिनों बाद उसको दोबारा देखकर मैं अपने होशोहवास खो चुका हूँ, फिर भी मैंने बात को सम्भालने की कोशिश करते हुए बोला, “ऐसा नहीं है यार, दरअसल कुसुम ने अचानक से फोन कर बताया, तुम आने वाली हो तो सरप्राइज सा हो गया।

प्रीति बोली, “जीजाजी, इसीलिये तो मैं आपकी फैन हूँ क्योंकि आप कुसुम का बहुत ध्यान रखते हैं, उसकी हर बात मानते है.......मेरे हिसाब से आप नम्बर 1 पति हो इस दुनिया के।” मैं उसकी तरफ देखकर मुस्कुराया और बाहर खड़े ई रिक्शा वाले के साथ मिलकर सारा सामान जमा दिया और उसको पता बता कर चलने को कहा।

मैंने बाइक के हैंडल को संभाला और उसको बैठाया। अब मेरी खूबसूरत साली मुझसे बस कुछ इन्च की दूरी पर बैठी थी और मैं उसकी खुशबू को अपने नथुनों में महसूस कर पा रहा था। मैंने धीरे धीरे बाइक को आगे बढ़ाना शुरू किया। कोशिश कर रहा था कि ई रिक्शा वाला ज्यादा आगे ना निकल जाये, सामान लेकर।

तभी प्रीति सीट पर मेरी तरफ तिरछी हो गई और अपना दांया पांव बाये पाव पर रखके बैठ गई जिससे उसके उन्नत सुडॉल् चूचे मेरी पीठ में धस् गये अब मैं थोड़ी सी नजर घुमाकर उसको बाइक के साइड ग्लास में देख रहा था, मेरी निगाह उसके गले में पड़ी गोल्डन चेन पर गई। उसके गले के नीचे दूधिया बदन पर वो गोल्डन चेन चमक रही थी। मेरी निगाह उस चैन के साथ सरकती हुई उसके लॉकेट पर गई। लाकेट का ऊपरी हिस्सा जो चेन में फंसा हुआ था वो ही दिखाई दे रहा था बाकी का लॉकेट नीचे उसकी दोनों पहा‍डि़यों के बीच की दूधिया घाटी में कहीं खो गया था। मेरी निगाहें उस लाकेट के बहाने उस दूधिया घाटी का निरीक्षण करने लगी।

तभी शायद उसने मेरी निगाहों को पकड़ लिया और बोली, “जीजाजी, काबू में रहिये, सीधे घर ही चल रहे हो ! ऐसा ना हो कि ये बाइक बेहक जाये और कुसुम आपकी क्लास लगा दे।”

इतना बोलकर वो हंसने लगी। मैं एकदम सकपका गया और निगाह सीधी करके गाड़ी चलाने लगा। उसने जो लाइन अभी एक सैकेण्ड पहले बोली, मैं मन ही मन उस को समझने की कोशिश करने लगा कि वो मुझे निमंत्रण दे रही थी या चेतावनी। जो भी था, पर मुझे उसका साथ अच्छा लग रहा था और मैं चाह रहा था कि काश समय कुछ वक्त के लिये यहीं रुक जाये।

जारी है.......
 
अध्याय - 17 --- " शादी का घर ""

उसने जो लाइन अभी एक सैकेण्ड पहले बोली, मैं मन ही मन उस को समझने की कोशिश करने लगा कि वो मुझे निमंत्रण दे रही थी या चेतावनी। जो भी था, पर मुझे उसका साथ अच्छा लग रहा था और मैं चाह रहा था कि काश समय कुछ वक्त के लिये यहीं रुक जाये।

प्रीति तुम अकेली आई हो डॉक्टर साहब और तेरी बेटी साथ में क्यो नही आये.... मैने अपनी तंद्रा भंग कर उससे पूछा??

जीजू आपको तो पता ही है, जूली का होने वाला पति मेरा कजिन देवर है, जब मैने डॉक्टर साहब को साथ चलने की बात कही तो डॉक्टर साहब बोले तुम अकेली जाओ और अपनी बहन की शादी में घाराती बन मेरा स्वागत करना तुम अपनी बहन होने का फर्ज निभाओ मै अपने भाई होने का फर्ज निभाता हू।

यही सोचते सोचते पता ही नहीं चला कि कब हम घर (ससुराल) पहुँच गये। जूली दरवाजे पर ही खड़ी हम लोगों का इंतजार कर रही थी। जैसे ही मैंने गाड़ी रोकी, प्रीति कूद कर बाइक पर से उतरी और जूली को गले से लगाकर मिली। मैं भी बाइक साइड में लगाकर प्रीति का सामान ई रिक्शा में से लेकर घर के दरवाजे की चोखट पर रख दिया। उस वक्त मेरी माणोशथिथि बदल चुकी थी कि मुझे अपनी साली प्रीति में अपनी पत्नी कुसुम की झलक दिख रही थी मुझे लग रहा था ससुराल में, मै साली के साथ नही पत्नी के साथ आया हू।

"लोकल शहर में ससुराल होने का एक फायदा मुझे अब समझ आया हर बार ससुराल जाने पर मिठाई का डिब्बा लेकर जाने की प्रथा खतम हो जाती है, और दामाद के कुछ पैसे की बचत हो जाती है.... ह्म्म्म।"

मै दरवाजे से ही वापस जाने लगा।

चलो अब मै चलता हूँ.... ये सुनकर जूली तपाक से बोली.... क्या जीजा जी मै आपका इतने दिनों से इंतजार कर रही थी और मुझे सामने देखकर वो सीधी मेरे सीने से चिपक गयी। मै जूली के इस तरह reaction को देखकर हैरान हो गया। मै और जूली आधे मिनिट तक एक दूसरे की बाहों में आलिगंन में जकड़े हुए खड़े रहे।

आचानक से प्रीति हल्की आवाज देकर हमें चोंकाया तब हम अलग अलग होकर मुसुकुराते हुए खड़े गये।

खैर, घर के अंदर सब इंतजार कर ही रहे थे. खास कर जूली की शादी में मेहमानी करने आई वो औरत जिन्हें सब ताईजी कह रह थे, उनकी खुशी देखते नहीं बनती थी. जूली और कुसुम की कजिन भाभी मीनल जो पास ही में रहती है और ताई जी का छोटा बेटा शौर्य भी बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, क्योंकि दरवाजे पर हमारी आवाज सुनते ही वे दौड़ कर बाहर आ गये थे. बस मेरा सगा साला और सास ससुर नहीं थे, शायद किसी काम से या शादी के कार्ड बाँटने बाहर गये थे.

अंदर जाकर हम बैठे, ताईजी ने चाय बनाई. शुरुआत जरा फ़ॉर्मल बातों से हुई. आखिर मैं भले ही आठ दस दिन बाद आया था लेकिन ताईजी के लिए तो पहली बार आया था. मैं नजर बचाकर जितना हो सकता है, जूली और प्रीति के उन घरवालों को देख रहा था. "" मेरी कुसुम के साथ दूसरी शादी काफी अधिक उम्र में बिना किसी शोर शराबे, मेहमानों की उपस्थिति और तैयारियों से हुई थी इसलिये हम दोनों के ही रिश्तेदार ना के बराबर आये थे यहाँ तक ताई जी भी नही आई थी और मीनल भाभी थी जरूर पर तब किसी से ज्यादा मिलने जुलने का मौका नहीं मिला था.. . . . . .. ""

मीनल दिखने में बड़ी आकर्षक थी, याने कोई ब्यूटी क्वीन नहीं थी जूली, प्रीति और कुसुम की तरह, पर फिर भी उसको देखते ही मन में और दूसरे अंगों में भी गुदगुदी सी हो रही थी. इस समय सलवार कमीज पहने थी, बिना ओढनी, के जिसमें से उसका सुडौल मांसल बदन खिल कर दिख रहा था. टाइट कमीज में उसके जवान उरोज मचल मचल कर बाहर आने को कर रहे थे. फिर याद आया कि अभी एक साल पहले ही वो मां बनी थी तो उसका भी एफ़ेक्ट पड़ा होगा उसकी ब्रा साइज़ पर......... वो थी भी अच्छी, भरी पूरी, मेरी सालियों और कुसुम से एकाध इंच लंबी ही होगी, कम नहीं.....

ताईजी ने तो मुझे मंत्रमुग्ध कर डाला. वैसे भी मुझे उमर में बड़ी औरतों से खास लगाव है, ज्यादा पके फ़लों जैसी वे ज्यादा ही मीठी लगती हैं. और ताईजी तो एकदम माल थीं. जूली और कुसुम की ताई - मेरी सास के बारे में वैसे मुझे ऐसा सोचना नहीं चाहिये ऐसा मेरे मन में आया पर मन पर काबू करना बड़ा मुश्किल था. चेहरा बड़ा खूबसूरत था,

मेरी सगी सास से थोड़ा अलग था पर एकदम स्वीट. बदन भरा पूरा था, मोटा नहीं था, पर कद में छोटी थीं, करीब पांच फुट की होंगी और इस वजह से बदन थोड़ा खाया पिया दिखता था पर उनके बदन में मांसलपन भले हो, सिठानी जैसा मुटापा नहीं था. और एकदम गोरी चिट्टी थीं, उनका पेट और बाहें जो दिख रही थीं, उससे उनकी स्किन कितनी चिकनी है ये दिख रहा था. बाकी तो ज्यादा कुछ दिखा नहीं क्योंकि वे अपना आंचल अपने बदन में लपेटी हुई थीं. मेरे मन में आया कि इनको सिर और पैरों से पकड़कर छह इंच खींच दिया जाये और कमर के नीचे के याने चौड़े भरे हुए भारी भरकम कूल्हों को दो हाथों के बीच रखकर थोड़ा पिचका दिया जाये तो एकदम मॉडल लगेंगी.

उनके छोटे बेटे शौर्य को देखते ही कोई भी कह देता है कि वो उन पर ही गया है, एकदम हू बहू वही चेहरा है उसका. लेकिन अब तक दाढ़ी मूंछे आने के भी कोई निशान नहीं है इसीलिये जूनियर कॉलेज में होने के बावजूद किसी सातवीं आठवीं के लड़के जैसा चिकना दिखता है. लगता है मेरी तैया सास के ज्यादा अंश आये होंगे उसके जीन में. शौर्य जरा शर्मीला सा है. मेरी ओर देख रहा था पर कुछ बोल नहीं रहा था.

शायद मीनल भाभी का मूड था गप्पों का पर चाय खतम होते ही ताईजी ने सब को जबरदस्ती उठा दिया "चलो सब, अब खाना बना दो, . बाकी गप्पें अब खाना खाने के बाद"

मीनल भाभी मुस्करा कर बोली "जीजाजी, सिर्फ़ गप्पों से मन नहीं भरेगा हमारा. दो दिन को तो आये है हम, अब आप पूरे जूली की शादी बाद ही जायेंगे। हमने तो घंटे घंटे का टाइम टेबल बनाया है आप के लिये, और वो तो असल में अभी से बनाया था, आपके यहां पहुंचने के टाइम से, है ना ताईजी" फिर वो जूली और कुसुम की ताई की ओर देखकर मुंह छुपा कर हंसने लगी. मीनल भाभी के चेहरे पर भी बड़ी शैतानी झलक रही थी, जैसे उसे सब मालूम हो कि क्या प्लान बन रहे हैं.

ताईजी ने मीठी फटकार लगाई "अब वो सब रहने दो, देखा नहीं कितने भूखे हैं , उनको खाना खाने दो पहले, नहीं तो सब गप्पों का मजा ही किरकिरा कर दोगी तुम लोग. और मीनल, जीजाजी जीजाजी क्या कर रही है तू, अरुण तुझसे बड़े हैं, तेरी ननद के पति हैं, तेरे ननदोई हुए ना!"

"ताईजी, मैं तो जीजाजी ही कहूंगी. अच्छा लगता है, साली जीजा का रिश्ता आखिर कौन निभायेगा." मीनल भाभी ने शैतानी भरी नजरों से मेरी ओर देखते हुए कहा. "या फिर सीधे " अरुण " कहूंगी"

ताईजी बोलीं "तू मानेगी थोड़े! जूली बेटी जा, जीजा जी के हाथ पैर धुलवा दे, और छत पर ले जा मैं खाना वहीं भिजवाती हूं"

मै बोला " ताईजी, अब खाना वाना रहने दो, भूख नहीं है, बस अब घर निकलता हूं सुबह आ जाऊंगा"

ताईजी बोली नही अरुण बेटा अब तुम कही नही जा रहे हो आज यहाँ ही रुको वरना तेरी सगी सास, जूली और कुसुम की मम्मी मुझे ताने मारेगी मेरे दामाद की खातिर नही की और भूखा ही भगा दिया।

मीनल भाभी बीच में ही बोली " खाना खाने के बाद दूध कैसा पियेगे जीजाजी गरम या ठंडा ?"

मीनल भाभी जूली की ओर देखकर मुस्कराने लगी. ताईजी थोड़ी चिढ़ सी गयीं "तुम दोनों नहीं मानोगी. मीनल तू भी जा, दूध मैं गरम कर लूंगी"

मै जूली के साथ हाथ पैर धोने के लिए छत पर चला गया.....

मैने जूली से पूछा कैसी हो??

ये सुनकर उसकी आँखों में पानी भर आया और मेरा हाथ पकड़कर जूली एक लंबी सांस लेते हुए बोली जीजू मुझे ये शादी नही करनी है,

क्यो??? परसो शादी है, और अब तुम मना कर रही हो?? हुआ क्या है?? लड़का तो तुम्हे पसंद था?? तुम्हारे बीच काफी फोन पर बातें भी हो रही थी?? लेकिन अब ऐसा क्या हुआ कि तुम उससे शादी करने को मना कर रही हो?? मैने एक सांस में ही जूली से सवालों की लाइन लगा दी।

जूली बोली जीजू अब मै आपको कैसे और क्या बोलू मुझे तो बोलने में भी शर्म आ रही है।

मै--- अरे पागल बोलेगी नही तो मुझे पता कैसे चलेगा जो भी तुम दोनों के बीच हुआ है वो मुझे सच सच बताओ???

जूली--- जीजू मै उससे फोन पर कुछ ज्यादा बात करने लगी थी और मिड नाइट को कुछ ज्यादा ही हम ओपन होकर वीडियो काल पर बात करते हुए फोन सेक्स करने लगे। ऐसे ही कुछ दिन तक चलता रहा पर मुझे ऐसा लगता है कि उसका वो ठीक नही है और छोटे बच्चो की नुनिया की तरह दिखता है।

मै समझ तो गया था जूली क्या बोल रही है पर मै उसके मजे लेना चाहता था आखिर साली है मेरी, मजाक का हक तो बनता है। मै बोला "वो" क्या जूली???

जूली ऑफ ओ. ... वो....वो... डिक यार।

मै हँस पड़ा। हाहाहा हाहाहा

और हस्ते हुए बोला रिमोट के साइज से कोई फर्क नही पड़ता बस tv सही से चलानी आनी चाहिए....... साली जी।

जूली बोली डियर जीजू अगर रिमोट के सेल ही खराब हो तो tv on ही नही होगी। चैनेल तो बदलना दूर की बात है।

मै--- मतलब???

जूली--- जब मै उसके साथ फोन सेक्स पर बात करते हुए अपना ऊपर का टॉप भी नही निकाल पाती इतने में उसका छोटा सा डिक पानी छोड़ देता है, और वो फोन कट कर सो जाता। अब आप ही बताओ अगर अभी फोन पर ये हाल है तो बिस्तर पर क्या होगा??? मुझे उसके साथ शादी कर के अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती नही करनी है। मै ये बात प्रीति दीदी और कुसुम दी को भी बताई वो दोनों उल्टा मुझे ही सुनाने लगे कि शादी से पहले ही रंग रेलिया चालू हो गयी तेरी। उन दोनों को अभी तक मेरा होटल वाला कांड को लेकर कही ना कही नाराजगी है।

आखिर में दोनों दिदियो ने हमारी गरीबी का वास्ता देकर और एक melo ड्रामा के साथ

ऑर्डर सा दिया है, कि अगर मैने शादी के लिए मना किया तो मेरी शामत आ जायेगी। अब आप ही बताओ मै क्या करू????

जीजू आपको तो पता ही समाज वाले कभी लड़को की कमी पर कुछ नही बोलते और लड़की का ढिंढोरा पीट पीट कर उसे बदनाम कर देते है।

मै--- जूली कि बात सुनकर चिंतिंत हो गया पर मन ही मन सोचने लगा समस्या गंभीर जो थी। मै भी कुछ समझ नही पा रहा था क्योकि शादी के दो दिन पहले शादी तोड़ने की बात करना वो भी ये बोलकर कि लड़के का लंड छोटा या जल्दी पानी छोड़ देता है, बड़ी शर्मनाक बात होगी।

और इसका उल्टा असर जूली की लाइफ पर ही पड़ेगा क्योकि वो सच कह रही है समाज के लोग उसे ही बुरा भला कहेंगे, यहाँ तक ये बोलेंगे की लड़की क्या अब लड़को का लंड देखकर, हिलाकर, नाप तौल कर, और तो और चुदवा कर चेक करने के बाद शादी करेगी।

"" मुझे समझ आने लगा था आजकल अक्सर बहुत सारे शादी के रिश्ते ठीक शादी के पहले क्यो टूट जाते है, क्योकि जूली की तराह वो लड़किया जो ज्यादातर वर्जिन, बिना आशिक और affair, और arrange marrige करने वाली लड़किया शादी से पहले होने वाले पति के साथ रात रात भर नंगी होकर मिड नाइट शो चलाती है और पसंद ना आने पर शादी तोड़ देती है ""

""मेरे हिसाब से लड़को की भी गलती होती है जो गिफ्ट शादी के बाद surprise के साथ first नाइट को दिया जाता है वो गिफ्ट लड़के शादी से पहले ही खोल कर दिखा देते है और फिर जब लड़की को गिफ्ट पसंद नहीं आता है या उसकी फैंटेसी के हिसाब से मैच नही खाता है तो फिर रिजेक्ट कर देती है """

मुझे सोचते हुए देख जूली बोली अब आप ऐसे क्यो चुप हो कुछ तो बोलो??

मै भी कुछ समझ नही पा रहा था क्या बोलू मैने जूली के चेहरे की तरफ देखा उसकी आँखों में एक आस, उम्मीद, आशा, बेचैनी थी जैसे कोई बीच रास्ते में भीख मांगने वाला आदमी हर आने जाने वाले को शक्स देखता है कि ये कुछ मदद करेगा।

जूली को भी अपनी जिंदगी के सफर की शुरुआत से पहले ही बीच रास्ते पर ठीक मंजिल के करीब खड़ी थी। और तो और जूली अपनी जिंदगी के इस फैसले सबसे बड़ी उम्मीद मुझसे इसलिए भी लगाए बैठी थी। होटल के कांड के बाद मैने ही उसे हिम्मत देकर नयी जिंदगी थी।

मै जूली से बोला तुम शादी कैंसल करने की अब सोचो भी मत। ना ही तुमहारे परिवार और उसके परिवार के लिए, ये अच्छा dicision नही होगा, ऊपर से सामाजिक तौर पर भी बड़ी बदनामी होगी। उल्टा लोग तुम्हे ही दोष देंगे।

मेरा जबाब सुनकर जूली की आँखों में आँसू भर आये, उसका चेहरा एक दम से उदास हो गया। मुझसे उसकी उदासी देखी नही जा रही थी।

मैने जूली के हाथ पर हाथ रखकर कहा

जूली तुम शादी कर लो लड़को को अक्सर ज्यादा exitment के करना जल्दी स्खलन हो जाता है, शादी के बाद जब एक दो बार तुम लोगो के बीच शारीरिक संबद्ध बनने लगेगे तो सब ठीक हो जायेगा, और नही तो उसका खुद का मेडिकल स्टोर है दवाई खा कर कर लेगा पर तुम्हे खुश रखेगा। Infact तुम्हे तो खुश होना चाहिए तुम्हे आज के जमाने में एक वर्जिन लड़का पति के रूप में मिल रहा है। क्योकि ऐसा अक्सर वर्जिन लड़को के साथ समस्या होती है, जिनका कभी कोई affair या लड़की के साथ सेक्स नही हुआ होता है।

जूली अभी भी खामोश थी और मेरी बात बड़े ही ध्यान से सुन रही थी। मैने माहौल को मजाकिया बनाते हुए कहा!!!!

फिर भी मन ना भरे या मजा कम लगे तो शादी के बाद की बात तो किसी के साथ affiar कर लेना... मैने ये बात उसे आँख मारते हुई बोला। हाहा हाहा

जूली थोड़ी भड़क गई और बोली जीजू मै आपको ऐसी लड़की लगती हू।

मै जूली का reaction देख कर डर गया और बोला वो वो जूली मेरा मतलब वो नही था।

जूली-- मेरी फटी हुई गांड देख कर जोर से हँसी हाहाहा हाहाहा

और बोलि किसी और के साथ affair करने की तो मै सोच ही नही सकती, अगर affair करना ही पड़ा तो आपसे बेहतर मेरे लिए कोई चॉइस नहीं है। हाहाहा हाहाहा

मै ये सुनकर ख़ुशी से फूल कर कुपा हो गया और सोचने लगा मेरी प्यारी साली साहिबा तुम तो बस लाइसेंस ले लो, गाड़ी में चला दूंगा।

हम दोनों ही हँसने लगे तभी मेरे फोन की रिंग बजने लगी मेरे पापा का फोन था। वो किसी काम से हायवे के पास खाली हमारे प्लॉट के मुआयाने के लिए जा रहे थे और मुझसे वापस कब तक आओगे..... ये जानना चाहता थे ।

मैने वास्तविक स्थिति के बारे में बता कर एक घंटे में वापस घर आने की कह कर फोन काट दिया।

फिर मैंने जूली का हाथ पकड़कर कहा "अब तो खुश हैं ना साली साहिबा?"

जूली मुस्कराई "हां मेरे प्यारे जीजू. और अब देखना कल महिला संगीत में आप कितने खुश हो जाओगे. पता है, यहां अपने दामाद के स्वागत की, खातिरदारी की जम के तैयारी की गयी होगी"

"देखते हैं. वैसे तुम्हारे मम्मी पापा ने पहले ही मुझे जन्नत की परी जैसी तुम्हारी दीदी कुसुम और साथ ही तुम्हारी जैसी प्यारी साली ..." उसकी कमर में चूंटी काट कर मैं बोला. " ... गिफ़्ट में दी है, अब उससे अच्छी और क्या खातिर करेंगे मेरी?"

जूली बस मुस्करा दी जैसे कह रही हो कि देखते जाओ अभी तो! इतना कह कर वो नीचे सीढ़ियों की तरफ जाने लगी।

"मेरी ठरक भरी जिंदगी की सबसे बड़ी बीमारी ये है कि जब कोई लड़की मेरे इतने करीब होती है तो उसके चूचे बिना दबाये या बिना सेहलाये मेरे हाथों की खुजली नहीं मिटती है! " तो मैं जब मेरी दिल की रानी मेरी साली साहिबा जूली को पास खींचने लगा तो उसने कस के मुझे चूंटी काटी और धकेल दिया "अब मुझे तंग मत करो, अब जो करना है वो कल" फिर मेरे मुंह को देखकर तरस खाकर बोली "कल से आपका एकदम टाइट प्रोग्राम है, उसके लिये जरा तैयार रहना, आज सब्र कर लो, मैने कहा तो कल कुछ अच्छा होने वाला है क्या!"

वो हस्ती हुई नीचे चली गई, उसके पीछे पीछे मै भी नीचे पहुँच गया।

खाना खाकर मै बैठ गया, वाह ताई जी मजा आ गया। बहुत स्वादिष्ट भोजन था.... पता ही नही चला कितनी रोटी खा गया मै।

इतना सुनते ही मीनल भाभी बोली सालियों के हाथ से खिलायी गयी रोटी और दिये गये चुंबन कभी गिने नही जाते.... ये बात सुनकर पूरा हाल हँसी से गूँज उठा।

इधर शाम के 5:00 बजने वाले थे पर मै अभी भी अपने ससुराल में सालियों के साथ बिज़ी था, आखिर एक लंबी हँसी ठिठोली और स्वादिष्ट भोजन के बाद मै फ्री हुआ, मै उनके साथ अब छत पर जा बैठा था कि अचानक आसमान में काले बादल छा गए, ओर बदलो की गड़गड़ाहट के साथ ही हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई, पर मौसम को देखकर लग रहा था कि आज तो पूरी रात ही बारिश होने वाली है। मैने मौसम के बिगड़ते हालातों को देखते हुए अपनी ससुराल से विदा लेना ही मुनासिब समझा।

मै तुरंत बाइक पर बैठा और फर्राटे से गाड़ी को दौड़ाने लगा, घर तक पहुंचने में मुझे एक लंबा सफर तय करना था, मैने सोचा कि रात का खाना बाहर से ही खरीद कर ले चलते है ताकि रिंकी को इस मौसम में परेशानी न उठानी पड़ी, यही सोचकर मैने पिज़्ज़ा हट के सामने अपनी गाड़ी रोकी और जल्दी ही 3 पिज़्ज़ा और ठेले से कुछ गरमा गरम भुने भुट्टे पैक करवा लिया, मैने रिंकी को फ़ोन करके भी बता दिया कि वो आज खाना ना बनाये।

मै सारा सामान पैक करके निकला ही था कि अब मूसलाधार बरसात शुरू हो गई, देखते ही देखते पुरी सड़के पानी से तरबदतर हो गई, और तुरंत गाड़ी को घर की तरफ दौड़ा दिया, रास्ते भर में चारो तरफ पानी ही पानी था, आषाढ के मौसम में कभी कभी जो बारिश होती है उसमें तेज तेज ठंडी हवा भी चलती है, थोड़ा भीगने की वजह से मुझ को हल्की हल्की ठंड भी लग रही थी, पर मै लगातार गाड़ी चलाते हुए घर पहुंचने की जल्दी में था।

लगभग 1 घण्टे के सफर के बाद मै घर पहुंच गया, मैने तुरंत गाड़ी साइड में खड़ी की और भागकर दरवाज़े की बेल बजाई, जल्दी ही रिंकी ने दरवाज़ा खोला तो देखा पापा हाथ मे कुछ पैकेट लिए भीग रहे है, उसने तुरन्त मुझ से अंदर आने को कहा

मैने अंदर आकर पैकेट रिंकी को पकड़ाया ही था की रिंकी की ड्रेस देखकर मै लगभग गिरते गिरते बचा था , रिंकी ने आज एक छोटी सी ब्लू कलर की स्कर्ट पहनी थी जो उसके घुटने से भी काफी ऊपर थी, उसकी सुडौल गदरायी जाँघे बिल्कुल नंगी मेरी आंखों के सामने चमक रही थी, ऊपर जो उसने टॉप पहना था वो बमुश्किल उसके खूबसूरत मम्मों को छिपाए था, उसके कसे हुए मम्मे उसकी टीशर्ट में कैद होकर भी अपनी शेप को बखूबी बता रहे थे, मेरी पारखी नज़रों ने तुरंत ताड लिया क़ि आज रिंकी ने अंदर ब्रा नही पहनी है,

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ये सोचकर तो मेरा दिमाग भन्ना ही गया, जहाँ खड़ा था वही जड़वत खड़ा रह गया, मेरे माथे पर पसीने की कुछ बूंदे उभर आई जो बारिश के पानी मे मिलकर मुझे गर्म और ठंडे दोनों का अहसास एक साथ दे रही थी, मेरी उत्तेजना धीरे धीरे बढ़ने लगी, शरीर गरम होने लगा, आंखे एकटक रिंकी के अधखुले बदन को निहारे जा रही थी, मेरे लिए तो मानो दुनिया ठहर सी गयी, मै तो इस पल को सदा सदा के लिए अपनी आंखों में कैद कर लेना चाहता था, मेरे होठ सूखने लगे, बड़ी मुश्किल से थूक निगलते बना, सांसे भारी भारी सी होने लगी, ऐसा लग रहा था कि अगर मै थोड़ी देर और इस नवयौवन को निहारता रहा तो कहीं अपना आपा न खो बैठू, कहीं कोई भूल न हो जाये।

इसलिए उसने अपनी पूरी हिम्मत समिति और लगभग भागते हुए अपने रूम में घुस गया, भीगे कपड़े पर गरम शरीर , मेरे मन मे अजीब से ख्याल आया रहे थे, मैने तुरन्त अपने भीगे कपड़े निकाले और अपनी बेकाबू सांसो को समेटकर टॉवल से अपने शरीर को पोंछने लगा, बिल्कुल नंगा अपने कमरे के बीचों बीच खड़ा खुद को सुखा रहा था, मेरा लोडा अभी के नजारे को देखकर बुरी तरह फनफना रहा था, लंड की नसें तनकर बिल्कुल चमक रही थी

इधर रिंकी की आंखों से मेरी ये हालत छुप नही पायी, दरअसल ये उसी की खुराफात थी , उसने पहले से ही मुझ पर कहर ढाने की तैयारी कर ली थी,

मैने अपने शरीर को अच्छे तरह से पोंछने के बाद एक पतले कपड़े का वाइट टॉवल लिया, और उसे अपनी कमर के इर्द गिर्द लपेट लिया, मेरी वासना अभी भी शांत नही हुई थी, रिंकी की कातिल अदाओं को देखकर मै इतना ज्यादा उत्तेजित हो चुका था कि डर था कि कहीं लंड का लावा फूट ना पड़े। लंड की नसों में खून का दौरा दुगनी गति से दौड़ रहा था। लंड इतना ज्यादा टाइट हो चुका था कि टॉवल के दोनों छोर को जहां से बांधा हुआ था, लंड के तगड़ेपन की वजह से टॉवल का वह छोर हट गया था या युं कह सकते हैं कि लंड टॉवल फाड़कर बाहर आ गया था,

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बड़ी मुश्किल से मैने अपने लंड को थोड़ा शांत किया, और फिर अपना पजामा और टीशर्ट पहनने के लिए अलमारी खोली,

अलमारी खोलते ही मेरे आश्चर्य का ठिकाना ही ना रहा, अलमारी में कपड़े का नामो निशान ही नहीं था, वो इस तरह खाली थी जैसे उसमे कभी कपड़े थे ही नही, मुझे समझ नही आ रहा था कि मेरे सारे कपड़े गए कहाँ, अब मुझे लगा कि शायद मुझे रिंकी से ही पूछ लेना चाहिए, पर समस्या ये थी कि इस हालत में मै उसके सामने कैसे जाऊ।

थोड़ी देर इसी उलझन में रहने के बाद मेरी ये समस्या अपने आप ही सुलझ गयी, दरअसल भारी बारिश के चलते पूरे कस्बे की बत्ती गुल हो गयी थी, चारों तरफ घुप्प अंधेरा छा चुका था, बारिश के बाद का ये अंधेरा इतना गहरा था कि मेरी आंखे अपने हाथों को भी नही देख पा रही थी, पर मुझे इस बात की खुशी थी कि मै अब आसानी से रिंकी के सामने जा सकता था,

मै दबे पांव अपने कमरे से बाहर निकला, पर अंधेरे में मुझे रिंकी कहीं नज़र नहीं आ रही थी, हारकर मैने रिंकी को आवाज़ लगाई

" रिंकी... बेटी, कहाँ हो तुम?" मैने हल्की आवाज़ में उसे पुकारा

"मैं यही हूँ पापा, सोफे पे बैठी हूँ" रिंकी ने जवाब दिया

" रिंकी, वो....वो...मैं पूछ रहा था कि मेरे कपड़े कहा गए अलमारी से , वहां पर एक भी कपड़ा नही है" मैने पूछा

"सॉरी पापा, मैन सुबह सारे कपड़े धोने को डाल दिए थे, मैन सोच आपके आने तक सभी कपड़े धोकर सूखा दूंगी, पर मुझे क्या पता था कि इतनी जोर की बारिश आ जायेगी, इसीलिए कपड़े नही सुख पाये, और कुछ कपड़े तो अभी भी छत पर ही है क्योंकि बारिश इतनी तेज हो गई थी कि मुझे उन्हें उतारने का मौका ही नही मिला, एम रियली सॉरी पापा" रिंकी ने शातिर तरीके से जवाब दिया

"पर अब मैं पहनूं क्या, मेरे कपड़े तो बरिस में आते टाइम गीले हो गए" मैने परेशान होकर कहा

"अरे पापा, अब आप कोनसा बाहर जा रहे है, कोई तौलिया लपेट लीजिये न" रिंकी बोली

"अरे वो तो अभी लपेट ही है मैंने वरना कोई नंगा....मेरा मतलब ऐसे ही थोड़े खड़ा हूँ" मै बोला

"वैसे बिना कपड़े के होंगे तो भी मुझे दिखाई नही देगा, अंधेरा कितना है" रिंकी ने अब अपने पूरे हथियार इस्तेमाल करने का फैसला कर लिया था

"क्या........" मै, रिंकी के इस बेबाक अंदाज़ से थोड़ा ठिठक गया पर मेरे लंड ने एक जोरदार तुनकी ली

"कुछ नही पापा, वो मैं कह रही थी कि मैं पानी गर्म कर देती हूं, आप थोड़ी देर बाद नह लीजिये , वरना बारिश के पानी से सर्दी लग जायेगी" रिंकी ने बात बदलते हुए कहा।

थोड़ी देर शांति के बाद अब रिंकी अपना तुरुप का पत्ता फेंकने वाली थी,

"पापाआआआ....." रिंकी ने कहा

"हां, रिंकी" मैने थोड़े दुलार से कहा

"पापा मुझे आपसे एक बात कहनी है" . ......

जारी है. ....
 
बहुत बहुत आभार शुक्रिया....

आपके लिखे हर शब्द हमेशा की तरह मेरे लिए अनमोल है, लेकिन इस बार आपकी और आपके ही नाम राशि Sanju@ जी की एक सोच या कहानी के अनुकूल लिखी गई बात ने मुझे सोचने के लिए विवश कर दिया.... आपने जो जूली के होने वाले पति के गुप्त रोग के बारे में लिखा है कि जूली को शादी तोड़ देनी चाहिए..... ये इस तरह के रोग से ग्रसित लड़को के साथ अन्याय नही होगा। क्योकि जहा तक मैने सुना है बहुत से केसेज में शादी के बाद बीमारी ठीक हो जाती है, या फिर इन रोगों का इलाज भी soltuion हो सकता है। ऐसे में शादी तोड़ना क्रूरता नही होगी।

कुछ लड़किया शादी के बाद माँ नही बन पाती हैं तो क्या उनसे तलाक़ लेना चाहिए या फिर शादी से पहले लड़की को माँ बना कर टेस्ट कर लेना चाहिए।

मेरा ये कुतर्क ना समझे बस बात पढ़ी और अपनी मन की लिखी....

इसी तरह मनोबल बढ़ाते रहिये।

धन्यवाद
 
भाई आपकी शिकायत लाजमी है, लेकिन अब तक आपने चूपी क्यो साधे रखी थी.... उसी वक्त बता दिया होता तो अब तक अरुण अपनी सास को पेलकर अपनी बीवी का भाई बन गया होता 😜😂

आप इतने समय तक साथ रहे है तो आगे भी रहिये... लेकिन मूक दर्शक बनकर नही.... जहा भी स्टोरी बेहकती लगे तुरंत बताइये..... 🙏✍️

बांकी आपको जैसा ठीक लगे.....!

धन्यवाद
 
थोड़ी देर शांति के बाद अब रिंकी अपना तुरुप का पत्ता फेंकने वाली थी,

"पापाआआआ....." रिंकी ने कहा

"हां, रिंकी" मैने थोड़े दुलार से कहा

"पापा मुझे आपसे एक बात कहनी है" . ......

"अरे पापा, वो मैं छत पर से कपड़े लाना तो भूल ही गयी, अब तो बारिश भी कम हो गयी है, मैं अभी जाकर कपड़े लाती हूं" रिंकी ने थोड़ा चिंतित होने का नाटक करते हुए कहा

"पर रिंकी, तुम भीग जाओगी, अभी भी हल्की हल्की बारिश हो रही है, सीढियां भी गीली हो रखी है, अगर कहीं पैर फिसल गया तो, तुम रुको मैं भी तुम्हारे साथ चलता हूँ" मैने जवाब दिया।

मेरा जवाब सुनकर रिंकी के चेहरे पर कुटिल मुस्कान उभर आई, उसे अपने मकसद में कामयाबी मिलते दिख रही थी।

पर अचानक बारिश का जोर दोबारा बढ़ता ही जा रहा था, रिंकी जानती थी की छत पर जाकर कपड़े समेटने का कोई मतलब नहीं था क्योंकि सारे के सारे कपड़े गीले हो चुके ही होंगे, पर उसका मकसद तो कुछ और ही था, इसलिए वो छत की तरफ जाने लगी, मै भी उसके पीछे पीछे सीढ़ियों पर चढ़ने लगा, इस तरह सीढ़ियों पर चढ़ते हुए अपनी बेटी को देखकर मेरा मन डोलने लगा था, क्योंकि मेरी प्यासी आँखे अपनी बेटी की गोल गोल बड़ी गांड पर ही टीकी हुई थी,

"वैसे भी मन जब चुदवासा हुआ होता है तब औरत का हर एक अंग मादक लगने लगता है "

लेकिन यहां तो रिंकी सर से लेकर पांव तक मादकता का खजाना थी, सीढ़ियों पर चढ़ते समय जब वो एक कदम ऊपर की तरफ रखती, तब उसकी भरावदार गांड और भी ज्यादा उभरकर बाहर की तरफ निकल जाती, जिसे देखकर मेरे लंड में एेंठन होना शुरू हो गई थी, बस यह नजारा दो-तीन सेकंड का ही था और रिंकी आगे की तरफ बढ़ गई लेकिन यह दो-तीन सेकेंड के नजारे ने ही मेरे बदन को कामुकता से भर दिया।

मै भी अपनी बेटी के पीछे पीछे सीढ़ियों से धीरे धीरे ऊपर चढ़ा जा रहा था, बारिश तेज हो रही थी, रिंकी जानती थी की छत पर जाने पर वो भी भीग जाएगी लेकिन ना जाने क्यों आज उसका मन भीगने को ही कर रहा था, वो छत पर पहुंच चुकी थी, और बारिश की बूंदे उसके बदन को भिगोते हुए ठंडक पहुंचाने लगी , बारिश की बूंदे जब उसके बदन पर पड़ती तो रिंकी के पूरे बदन में सिरहन सी दौड़ने लगती, और ऊपर से यह बारिश का पानी उसे और ज्यादा चुदवासा बना रहा था, रिंकी की पीठ मेरी तरफ थी, रिंकी पूरी तरह से भीग गयी थी और उसके बाल खुले हुए थे, जो कि पानी में भीगते हुए बिखर कर एक दूसरे में उलझ गए थे, रिंकी के कपड़े पूरी तरह से गीले हो कर बदन से ऐसे चिपके थे कि बदन का हर भाग हर कटाव और उसका उभार साफ साफ नजर आ रहा था, मै तो यह देख कर एकदम दीवाना हो गया , मेरी टॉवल भी तंबू की वजह से उठने लगी थी, मुझे अपनी बेटी के खूबसूरत बदन का आकर्षण इस कदर बढ़ गया था कि मेरे बदन में मदहोशी सी छाने लगी थी ।

मुझे अब यह डर भी नहीं था कि कहीं मेरी बेटी मेरी जांघों के बीच बने हुए तंबू को ना देख ले, और शायद मै भी अब यही चाहता था कि मेरी बेटी की नजर मेरे खड़े लंड पर जाए।

मै भी बारिश के पानी का मजा ले रहा था लेकिन बारिश का यह ठंडा पानी मेरे बदन की तपन को बुझाने की बजाय और भी ज्यादा भड़का रहीे थी, रिंकी अब कपड़े समेटने की बजाय भीगने का मजा ले रही थी ,पहली बार यूँ शायद बारिश के ठंडे पानी से अपने बदन की तपन को बुझाना चाहतीे थी लेकिन इस बारिश के पानी से उसके मन की प्यास और भी ज्यादा भड़क रही थी, उसे पता था कि उसके पापा उसके भीगे बदन को देखकर उत्तेजित हो रहे होंगे और शायद वो भी यही चाहती थी, उत्तेजना के मारे भीगती बारिश में उसके दोनों हाथ खुद-ब-खुद उसकी चूचियों पर चले गए। और किसी फिल्मी हीरोइन की तरह नाचने लगी.....

"" हाय हाय ये मजबूरी,मौसम और ये दूरी ""

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मै साफ साफ तो देख पा रहा था , बीच बीच मे बिजलियाँ चमकने से मेरी नज़र अपनी बेटी की इस हरकत पर इशारे दे रही थी, उत्तेजना के मारे मेरे लंड में अब मीठा मीठा दर्द होने लगा था, लंड की ऐंठन और दर्द और भी ज्यादा बढ़ गया जब मैने देखा कि रिंकी की दोनों हथेलियां चूचियों पर से हटकर बारिश के पानी के साथ सरकते सरकते उसकी भारी भरकम भरावदार गांड पर चली गई और गांड पर हथेली रखते ही वो उसे जोर जोर से दबाने लगी।

अपनी बेटी की पानी में भीगी हुई मदमस्त भरावदार गांड को दबाते हुए देखकर मुझसे से रहा नहीं गया , मै मदहोश होने लगा मेरी आंखों में खुमारी सी छाने लगी, एक बार तो मेरे जी में आया कि पीछे से जाकर अपनी बेटी के बदन से लिपट जाए और तने हुए लंड कोें उसकी बड़ी बड़ी गांड की फांकों के बीच धंसा दे, लेकिन बड़ी मुश्किल से अपने आपको रोके रखा, अपनी बेटी की कामुक अदा को देखकर मेरी बर्दाश्त करने की शक्ति क्षीण होती जा रही थी, लंड में इतनी ज्यादा ऐठन होने लगी थी कि किसी भी वक्त उसका लावा फूट सकता था, अभी भी मेरी बेटी के दोनों हाथ उसकी भरावदार नितंबों पर ही टिके हुए थे।

मै वहीं उसके सामने खड़े खड़े अपनी बेटी की इस हरकत को देख देख कर पागल हुए जा रहा था , रिंकी की हर एक अदा पर मेरा लंड तुनकी मारने लगा था, मेरी कामुक नजरें अपनी बेटी के मदमस्त बदन, चिकनी पीठ, गहरी कमर और उभरे हुए नितम्ब पर टिकी हुई थी, पर मुझे हल्का हल्का डर भी लग रहा था कि कहीं वो कहीं गुस्सा ना हो जाए।

मेरी नजर अपनी बेटी के बदन के हर एक कोने तक पहुंच रही थी, पानी में भीगकर रिंकी की टीशर्ट उसकी चूचियों से इस कदर चिपक गई थी कि उसके बिना ब्रा के मम्मे अब साफ साफ दिखाई पड़ रहे थे, मै ललचाई आंखों से पानी में भीगी हुई अपनी बेटी की चुचियों को देख रहा था ,तभी अचानक रिंकी पलट गई, और उसने तुरंत अपने पापा की नजरों को भांप लिया, अपने पापा की कामुक नजरो को अपनी चूची पर घूमती हुई देखकर उसकी बुर में सुरसुराहट होने लगी, उसे मदहोशी सी छाने लगी, रिंकी की नजरें एकाएक उसके पापा की नंगी छातियों पर पड़ी, जो कि अच्छी खासी चौड़ी और गठीली थी , अल्हड़ मस्त जवानी में ऐसे गठीले बदन को देखकर रिंकी बुरी तरह उत्तेजित होने लगी ।

"बारिश का जोर अब और ज्यादा बढ़ने लगा था, बिजली की चमक और बादलों की गड़गड़ाहट बढ़ने लगी थी, एक तरफ यह तूफानी बारिश थी, और दूसरी तरफ इतनी तूफानी बारिश में भी दोनों बाप बेटी एक दूसरे को अपनी ओर आकर्षित करने में लगे हुए थे"

तेज बारिश में अपनी बेटी की ऊपर नीचे हो रही छातियों को मै साफ-साफ देख पा रहा था, रिंकी की छोटी सी टीशर्ट में से उसका गोरा चिकना पेट और पेट पर नीचे की तरफ उसकी मदमस्त गहरी नाभि एकदम साफ दिखाई दे रही थी, जिस पर रह रहकर मेरी नजरे चली जाती, रिंकी ने जब अपने पापा की नजरों को अपने बदन पर नीचे की तरफ जाता देखा तो उसकी नजर भी अपने पापा की कमर से नीचे चली गई, पर जैसे ही उसने वहां का नज़ारा देखा उसका दिल धक्क से रह गया, उसकी भीगी बुर मे से भी मदन रस चू गया,

रिंकी और कर भी क्या सकती थी, उसके पापा के कमर के नीचे का नजारा ही कुछ ऐसा था कि उसकी बुर पर उसका कंट्रोल ही नहीं रहा, रिंकी आंख फाड़े अपने पापा को देख रही थी, बारिश के पानी मे मेरा टॉवल एकदम गीला हो चुका था, टॉवल का कपड़ा भीगने की वजह से गीला होकर और ज्यादा वजनदार हो गया, लेकिन टॉवल के अंदर मेरा लंड एकदम टाइट हो कर आसमान की तरफ देख रहा था, जिससे टॉवल में एक बड़ा सा तंबू बन गया था, इस नजारे को देखकर रिंकी समझ गई थी कि उसके पापा का लंड उसकी अदाओं से ही खड़ा हुआ है, ये सोचकर ही उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ गई,

वो अच्छी तरह से जान गई थी की उसके कामुक भीगे हुए बदन को देखकर ही उसके पापा का लंड खड़ा हो गया है, ऐसी तूफानी बारिश में भी रिंकी अब पुरी तरह से गर्म हो चुकी थी।

इधर अब मै भी जान गया था कि मेरी बेटी की नजर मेरे खड़े हुए लंड पर पड़ चुकी है, इस पल एक दूसरे को देख कर दोनों बाप बेटी बिल्कुल चुदवासे हो चुके थे, बादलों की गड़गड़ाहट की आवाज माहौल को और गर्म कर रही थी, अब ना तो रिंकी से रहा जा रहा था और ना ही मुझ से , दोनों बाप बेटी अपने आप को संभाल पाने में असमर्थ साबित हो रहे थे, दोनों तैयार थे लेकिन दोनों अपनी अपनी तरफ से यह देख रहे थे कि पहल कौन करता है......????

जारी है........
 
आभार.... Dady whore मेरी पंसदिदा कहानी में से एक है, इस फोरम पर incest स्टोरी के नाम पर माँ बेटे की कहानिया हर दूसरा राइटर लिख रहा है, लेकिन पिता पुत्री के रिश्तों पर लिखने का साहस बहुत ही कम लोग करते हैं.... मणिका जी के तरह ठीक उसी क्रम में मैने ये जिम्मा लिया है..... ।

काफी दिनों के gafe हो जाने पर मै अपनी स्क्रिप्ट से ही भटक गया हू जिसकी वजह कही ना कही रीडर भी है, वो जो डिमांड कर रहे है, मै उस पर फोकस करने की कोशिस में स्टार्ट भूल गया.... जिस वजह से मुझे फिर से मणिका जी के शब्दों में अपने शब्दों से मिलन समारोह करना पड़ा 😜🙏

आगे भी इसी तरह मार्ग दर्शन देते रहिये...

धन्यवाद
 
अक्सर लिखने वाले तो बस लिख देते है...... लेकिन आप जैसे रीडर उन शब्दों में लिखे गए पात्रों को महसूस करते है, उसे लिखने वाले से बेहतर समझते है। इसका प्रमाण आपके लिखे गए शब्दों में पाकर मैं धन्य हो गया..... मुझे ऐसा लगने लगा है, आप माइंड रीडर है जिसने लेखक के माइंड मची भगदड़ को एक सही मुकाम पर लेने जाने तक प्रोत्साहित कर सही रास्ता दिखाया है..... और आगामी update में भटकने/बेहकने से बचाया है.....।

इसी तरह साथ देते रहिये...

धन्यवाद
 
दोनों बाप बेटी अपने आप को संभाल पाने में असमर्थ साबित हो रहे थे, दोनों तैयार थे लेकिन दोनों अपनी अपनी तरफ से यह देख रहे थे कि पहल कौन करता है......????

रिंकी अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए सब कुछ कर रही थी लेकिन वो भी असली पहल करने में थोड़ी शर्मा रही थी ,

"ऐसे क्या देख रही हो रिंकी? " मैने अंजान बनते हुए रिंकी की तरफ देखकर बोला

"कुछ नहीं पापा, मैं बस यह देख रही हूं कि मेरा साथ देने के लिए आप इतनी बारिश में दोबारा से छत पर भीगने चले आए , आप कितने अच्छे है पापा" रिंकी चहकते हुए बोली

"अरे बेटी ये तो मेरा फ़र्ज़ है कि मेरी सबसे प्यारी बेटी की हमेशा देखभाल करूँ" मेरी नजरें अब भी रिंकी की भीगी हुई चुचियों पर गड़ी थी.........!

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मै भी एक मर्द था. इस समय, इस लम्हे ने मेरी सोच को एक दोराहे पर लाकर खड़ा कर दिया था. मुझे असमंजस और दुविधा ने ऐसा जकड़ लिया था कि मुझको कोई रास्ता दिखाई ही नहीं दे रहा था. मुझको समझ नहीं आ रहा था कि आखिर करू तो क्या करू ????.

मै जानता था कि इस तरह की बातें सोचना मेरे लिये पाप था लेकिन दिल पर भला किसका जोर चलता है. आखिर में..... मै अपने आप से ही हार गया. जब से मुझको रिंकी की चूची का दर्शन हुआ था तब से ही मै अपनी बेटी की चुदाई के लिये बेताब था.

मुझ को ये भी मालूम था कि इस उम्र में, खासकर कि बरसात के दिनों में लड़कियां सेक्स के लिए काफी एक्साइटेड हो जाती हैं. ऐसे में अगर मै रिंकी की सेक्स की ख्वाहिश को अंजाम देने में कामयाब हो जाता हू तो मेरी पांचों उंगली घी में होंगी.

मेरे कदम बहकते हुए अपनी जवान लड़की के नजदीक जाने के लिए खुद ब खुद चल पड़े....... और इससे पहले हमारी बारिश के ठंडे पानी में जिस्म में लगी आग शांत हो... मैने आसपास की छतो पर नजर दौड़ाई तब मुझे पिता होने की अहमियत समझ आई... जब मैने अपने पड़ोस की छतो पर लौंडो को बारिश में मस्ती से भीगते हुए और .... मेरी बेटी रिंकी के अर्ध नग्न बदन को गिद्ध की तरह घूरते और ताड़ते हुए चच्छु चोदन करते हुए देखा...!

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उन लौंडो की कमीनी नजरों से बचाने के लिए मैने रिंकी से कहा.... बेटी चल अब नीचे बहुत भीग लिया, खतम कर अब नाचना. .... नही तो सर्दी झुखाम हो जायेगा।

मेरे इस तरह अचानक से बदले हुए स्वर को सुनकर रिंकी को जैसे बारिश की बूंदों से जोरदार करंट सा लगा... और उसने गुस्से में अपनी नजरे इधर उधर की तो पड़ोस की छतो पर उसका अर्ध नग्न जिस्म घूरते हुए लौंडो को देखा। जिस कारण उसे पापा के कहे शब्दों की अहमियत समझ आ गयी और उसने मन ही मन पापा के प्यार और समर्पण की भावना ने रिंकी के दिल में एक अलग ही जगह बना ली. वो भी मेरी आंखों में अपने लिये प्यार और चाहत के भावों को साफ साफ देख सकती थी.

""एक पिता, भाई, पति, प्रेमी, के देखने के तरीके और एक भूखे जानवर जैसे मर्द के देखने के तरीके में बहुत ज्यादा फर्क होता है. औरतों को कुदरत ने एक कमाल की चीज दी है जिसको छठी इंद्री कहा जाता है.

इतना ही नहीं. लड़कियों/ महिलाओं को लड़को/ पुरूषों के देखने के नजरिये से भी पता लग जाता है कि सामने वाला उसके बारे में क्या सोच रहा है या उसके मन में किस तरह के विचार चल रहे हैं. जिस तरह से मै.... अपनी बेटी के बदन को देख रहा था तो मेरी नजर सीधे रिंकी के जिस्म में अंदर तक उतर रही थी.

इस समय रिंकी भी अपने पापा की आंखों में एक बाप को नहीं बल्कि एक प्रेमी को ही देख रही थी. वह जानती थी कि पापा के मन में उसके लिए प्यार और गैरो के देखने और घूरने पर जलन की भावना काफी बढ़ चुकी है.....

"ठीक है पापा,अगर आप यही चाहते है तो फिर चलिए नीचे चलते हैं " रिंकी ने मुस्कुरा कर कहा।

रिंकी की चेहरे की कामुक् मुस्कान देखते हुए मैने नीचे की ओर जाती हुयी सीढ़ियों पर कदम बढ़ा दिये...... अभी आखिरी सीढ़ी उतरना बांकी ही था कि रिंकी भागकर अपने पापा की बाहों में समा गई, हम दोनों बाप बेटी काफी देर तक एक दूसरे की बाहों में बाहें डाले चिपके रहे, दोनों के मन का अंतर्द्वंद बारिश में पसीने के रूप में बाहर निकल रहा था।

इसी तरह खड़े जब काफी देर हो गई तो मैने रिंकी को अपनी बाहों में से निकालने की कोशिश की, पर रिंकी तो जैसे बेल की तरह मेरे अधनंगे शरीर से लिपटी हुई थी, वो तो जैसे कभी मुझ से दूर ही नही होना चाहती थी , उसने तुरंत दोबारा मुझ को खींचकर अपने से जोर से चिपक लिया, इसका सीधा असर ये हुआ कि रिंकी के गोल गोल संतरो जैसे खूबसूरत मम्मे मेरी छाती में धंसते चले गए, रिंकी के नरम मखमली मम्मों के स्पर्श से ही मेरे बदन में एक लहर सी दौड़ गयी,

मै रिंकी के नुकीले हो चुके निप्पल्स को अपनी नंगी छाती में साफ साफ महसूस कर पा रहा था, मेरी सांसे अब भारी होने लगी, और लंड दोबारा औकात में आने लगा, मैने लाख कोशिश की मेरा ध्यान भटक जाए पर लंड तो पूरी बगावत पर उतर आया, और लंड तोलिये की दरारों से होता हुआ सीधा रिंकी की स्कर्ट से जा टकराया, मैने अपनी कमर को थोड़ा पीछे करने की कोशिश की ताकि खड़ा लंड रिंकी की नज़रों से बच सके, पर तभी अचानक रिंकी और ज्यादा आगे होकर मुझ से चिपट गयी , इस तरह अचानक आगे बढ़ने से लंड सीधा रिंकी की छोटी सी स्कर्ट के अंदर घुसकर इसकी सुडौल जांघो से जा टकराया, रिंकी तो इस आभास से रोमांचित हो उठी, अपनी नंगी जांघो पर अपने पापा के नंगे लंड का स्पर्श पाकर उसकी मदमस्त चुत से पानी की एक बूंद टपक कर बह निकली, हम दोनों के जिस्म भट्टी की तरह सुलग रहे थे, अब मुझ से बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था, इससे पहले की कुछ और अनहोनी होती , मै तुरंत पीछे हट गया,

"क्या हुआ पापाआआआ....." रिंकी ने मेरे इस तरह पीछे हटने की वजह से हैरान होकर पूछा

"वो ....रिंकी... वो ....मैं....अब मैं क्या कहूँ तुमसे" मुझ से बोलते नही बन रहा था, मुझे ये तो पक्का भरोसा हो गया था कि रिंकी ने मेरे लंड को अपनी जांघो पर महसूस कर लिया है

"क्या हुआ पापा, आप पीछे क्यों हट गए, क्या मैं इतनी बुरी हूँ कि आप मुझे गले से भी नही लगा सकते" रिंकी ने कहा

"नही रिंकी, वो बात नही है, वो मैं...अब मैं तुम्हे कैसे बताऊ" मै थोड़ा सा परेशान होकर बोला।

"आप मुझे क्या बताना चाहते है वो मैं जानती हूं" रिंकी ने कहा। और छत की सीढ़ियों के नीचे लगे वाश वेशिन पर वो मुँह पर पानी मार कर मुँह धोने लगी और मैं उसके चेहरे पर पड़ने के बाद गिरने वाली पानी की बूंदों को देख रहा था एक एक बूंद मोती की तरह चमक रही थी मुँह और हाथ धोने के बाद तौलिये से पोंछकर वो वहा से हट गई और मैं वहा जाकर हाथ मुँह धोने लगा। मुह धोने के बाद मैंने भी उसी तौलिये से मुँह पौंछा जिससे रिंकी की खुशबू उस तौलिये पर मैं महसूस कर रहा था।

"आप थोड़ी देर बैठो पापा जब तक मैं आपके नहाने के लिए पानी गर्म कर देती हूं"

ये कहकर रिंकी किचन में चली गयी और गैस पर एक बर्तन पे पानी चढ़ा दिया क्योंकि बिजली न होने की वजह से गीजर नही चला सकते थे।

रिंकी अभी पानी का बर्तन गैस पर रखकर खड़ी हुई ही थी। और पानी गरम करने पर अपना ध्यान लगाने लगी बाहर मै अभी हुई घटना के बारे में सोच सोच कर परेशान हो रहा था , समझ ही नही आ रहा था मै इस पर कैसे रियेक्ट करू,

"रिंकी का इस तरह मुझसे बेबाकी से चिपट जाना, बिना ब्रा के ही टीशर्ट पहन लेना, मुझे पड़ोस की छतो पर उसे घूरते हुए लड़को से जलन या बुरा महसूस होना। और तो और मेरे लंड के उससे टच होने पर भी गुस्सा न होना" मै इन्ही बातो को समझने की कोशिश कर रहा था, पर साथ ही साथ ये आनंद भी आ रहा था कि आज अपनी बेटी के मुलायम मम्मों को महसूस किया, उसकी गोरी चिट्टी भरावदर जांघो से अपने लंड को रगड़ा,ये सोच सोच कर ही मेरा लंड फूलकर कुप्पा हुआ जा रहा था, ऐसा लग रहा कि लंड में खून दुगुनी गति से दौड़ रहा हो, मैने जब काफी देर मशक्कत की तो मुझे भी अब हल्का हल्का शक से होने लगा कि

"शायद रिंकी का कोई आशिक या बॉय फ्रेंड है...... हो सकता है वो सेक्स के बारे में सिख गयी हो.......हो सकता है कि उसकी दोस्तो ने उसे चुदाई के बारे में बता दिया हो और शायद उनकी बातों से गरम होकर ये खुद भी सेक्स की आग में जल रही हो.....वैसे भी इसकी उम्र की लड़कियां तो चुदाई में पारंगत हो जाती है..... लगता है इसके मन मे भी चुदाई की जिज्ञासा जाग गयी और शायद बाहर किसी अंजान के डर से ये मेरे साथ ही........नहीं नहीं ये मैं क्या सोच रहा हूँ......वो मेरी बेटी है......पर वो तो खुद ही मुझे ढील दिए जा रही है......पर ये मेरी गलतवहमी भी तो हो सकती है......।

शायद वो बस मुझसे अपनी मम्मी के सारे गिले शिकवे दूर कर दोबारा बाप बेटी के रिश्ते को पति पत्नी के रूप में परिवर्तित करना चाह रही हो....पर अगर उसे करना होता तो .....क्यों वो मेरे लंड के टच होने पे भी बिल्कुल शांत रही.....इन सब बातों का कुछ न कुछ मतलब तो जरूर होगा"

मै इसी उधेड़बुन में लगा था पर कुछ नही सूझ रहा था,पर साथ ही साथ अभी रिंकी के संग गुजारे गए पल को याद करके मस्त हुआ जा रहा था, और जब भी रिंकी की भरावदार गांड के बारे में ख्याल आता तो उत्तेजना दुगनी हो जाती, अपने बदन की गर्मी को कैसे शांत करें इसका कोई जुगाड मुझे समझ नही आ रहा था, बार बार आंखों के सामने रिंकी की कसी हुई चुंचिया और भरावदार गांड की तस्वीर नाच पड़ती, हारकर मैने सोचा कि चलकर एक गिलास ठंडा पानी ही पी लिया जाए ताकि मन कुछ हद तक शांत हो।

मै पानी पीने के लिए किचन की तरफ जा रहा था और जैसे ही किचन के दरवाजे पर पहुंचा तो सामने अपनी बेटी को झुकी हुई अवस्था में देखकर लंड एक बार फिर से टनटना कर खड़ा हो गया, झुकने की वजह से उसकी छोटी सी स्कर्ट में से उसकी गुलाबी कच्छी की हल्की सी झलक उस गैस की जलने वाली आग में धुँधली सी दिखाई पड़ रही थी...... ..

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जिसे देखते ही अब मुझ से और बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया था, रिंकी अब दोबारा खड़ी हो चुकी थी, उसे बिल्कुल भी आभास नही था कि उसके पापा उसके पीछे आकर उसका चक्षुचोदन करने में लगे हुए है, इधर मैने अपने होठों पर जुबान फेरी और प्यासे होठो पर जीभ फेरते बिना पानी पिये किचन से बाहर निकल पड़ा।

दूसरी तरफ रिंकी अपने मन ही मन कुछ सोच रही थी तभी उसके दिमाग मे एक ख्याल आया और वो गैस को कम करके बाहर हॉल की तरफ चल पड़ी, जहां उसके पापा बैठे हुए थे।

बारिश अपने जोरों पर थी दूसरी ओर वासना भरे घर के माहौल से अंजान मेरे पापा हाईवे के किनारे की घनी झाड़ियों के बीच अपनी स्कूटी को खड़ी कर घने पेड़ के नीचे,,,, वह बारिश थमने तक आसरा लिए हुए वहीं रूके थे। अपने पापा का ख्याल आते ही मैने उन्हें फोन लगाया...... और उन्होंने पूरी स्थिति से मुझे अवगत कराते हुए कहा कि बारिश के रुकते ही वह रेलवे स्टेशन मेरी मम्मी और कुसुम को लेने चले जायेंगे लेकिन बारिश का मिजाज देखते हुए ट्रेन का सही समय पर आ पाना मुश्किल ही लग रहा था। फिर भी पापा ने मुझे आश्वाशन दिया कि वो बारिश रुकते ही कुसुम और मम्मी के साथ ही रात 8-9 बजे तक वापस आयेंगे और मै घर पर रहकर अपना और अपनी बेटी रिंकी का ख्याल रखू।

शाम के सात बज कर सात मिनिट हो चुके थे बरसात की वजह से मौसम में ठंडक का अनुभव होने लगा था। मैने हाल फिलहाल नहाने का प्लान कैंसल कर पापा के रखे हुए पेंट शर्ट पहन लिए...... रिंकी ठीक मुझसे 90 डिग्री पर सोफे पर बैठ कर मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी। मै भी अपनी बेटी को बड़े गौर से देखने लगा जो कि इस समय मुस्कुराते हुए और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी।

कुछ पलो बाद...... ऐसे क्या देख रही हैं रिंकी.....?

कुछ नहीं पापा मैं तो यह देख रही हूं कि आप दादाजी के कपड़ो मे भी आप मुस्कुराते हुए कितने खूबसूरत लग रहे है।

अच्छा मैं तुझे खूबसूरत लगता हूं,,,, मै अपनी बेटी की बात पर मुस्कुराते हुए बोला।

हां पापा आप मुझे बहुत खूबसूरत लगते हो।

अब बे वजह तू बातें मत बना,,,,,

नहीं पापा सच में अपनी कसम आप मुझे बहुत खूबसूरत लगते हो खूबसूरत लगते क्या हो,,,, आप हो ही बहुत खूबसूरत।

मुझ को अपनी बेटी के मुंह से अपनी तारीफ सुन कर बहुत अच्छा लग रहा था मै मन ही मन मुस्कुरा भीे रहा था। मै अपनी बेटी की नजर को अच्छे से पहचान रहा था खूबसूरती के पीछे वासना का आकर्षण भी था जो कि मुझे अपनी बेटी की आंखों में साफ नजर आ रहा था।

( ये बात भी सही है कि मै भी उसके बदन के प्रति आकर्षित हू। लेकिन अभी भी मेरे अंदर झिझक भरी हुई थी।)

मुझ को तभी कुछ याद आया हो इस तरह से बोला....?

अच्छा मैंने तुझसे एक सवाल पूछा था लेकिन तूने उसका जवाब नहीं दिया,,,,,

कैसा सवाल पापा ?

यही कि तेरी सहेलिया भी तो बॉय फ्रेंड और लड़को की बातें करती होगी तुझसे उन लोगों ने तो तुझे कुछ बताया ही होगा कि प्यार व्यार क्या होता है।

नहीं पापा ऐसा कुछ भी नहीं है मेरी सहेलिया मुझसे ऐसी बातें नहीं करती।

नहीं तू झूठ बोल रही है ऐसा हो ही नहीं सकता लड़किया अक्सर आपस में सहेलियों से यह सब बातें जरूर शेयर करती हैं।

( मै अपनी बात पर जोर देते हुए बोला मै अपनी बेटी के मुंह से जानना चाहता था कि प्यार व्यार और चूत चुदाई के बारे में उसकी सहेलिया क्या बोलती हैं।)

नहीं पापा सच कह रही हूं ऐसी कोई बात नहीं है।

नहीं तू जरुर झूठ बोल रही है। देख बारिश को देखते हुए मुझ को लगता है कि तेरी मम्मी, दादा दादी को आने में दो तीन घंटे लगेगे और हम दोनों एक दूसरे से बातें किए बिना ये वक्त कटने वाला नहीं है। इसलिए हम दोनों को टाइम पास के लिए बातचीत तो करनी ही होगी अब मैं तुझ से पढाई के बारे में बातचीत तो कर नहीं रहा हूँ इसलिए ऐसे टॉपिक पर बात करना चाहता हूं जिसमे तुझे भी इंटरेस्ट हो क्योंकि तेरी उम्र भी अब जवान हो रही है ऐसे में तेरा आकर्षण लड़को के प्रति जरूर होता होगा।

अपने पापा की बात सुनकर रिंकी हैरान होते हुए मुझ को ही देखे जा रही थी और मै उस के चेहरे के भाव को पढ़ते हुए बड़े प्यार से बोला।.......

देख रिंकी मैं जानता हूं कि ऐसी बातें करना ठीक नहीं है लेकिन मैं तेरा पापा हूं और तुझे सही उम्र में सही बातों की जानकारी देना मेरा फर्ज बनता है और साथ ही में तो एक टीचर भी हूं इसके लिए तेरे हर सवालों का सही जवाब देना मेरा फर्ज बनता है और मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि तेरी उम्र के लड़की अक्सर अपनी सहेलियों से लड़कों के बारे में अपने बॉयफ्रेंड के बारे में जरूर बात करती हैं इसलिए मुझसे तू झूठ मत बोल,,,,।

देख तू घबरा मत आज तू दिल खोल कर जो तेरे मन में है सब कुछ मुझे बोल डाल क्योंकि जिस माहौल में हम दोनों हैं ऐसे माहौल में अगर एक प्रेमी और प्रेमिका होते हैं और उन्हें इस तरह का एकांत मिल जाता है तो उनके लिए तो यह जन्नत के बराबर हो जाता है। और वह अक्सर ऐसे ही एकांत माहौल को ढूंढते रहते हैं।

अच्छा तो मुझे एक बात सच सच बताना क्या तूने कभी किसी लड़के से प्यार किया है या तुझे किसी से प्यार हुआ है।

नहीं पापा ऐसा कुछ भी नहीं है।

देख तू सच सच बताओ झूठ मत बोल पूरे स्कूल में तुझे कौन लड़का सबसे अच्छा लगता है .....?????

नहीं पापा इन सब बातों पर मेरा कभी ध्यान ही नहीं गया।

( रिंकी को अपने पापा की बातें और बात करने का अंदाज कुछ अलग लग रहा था लेकिन तभी उसे अपनी सहेली ऋतु की बात याद आ गई उसे भी लगने लगा कि आज उसके पापा उसकी सहेली के जीजा की तरह ही बात कर रहे है । जब ऐसी बातें करते हुए उसकी सहेली के जीजा ने अपनी ही साली को ऊकसा कर उसके साथ चुदाई का सुख प्राप्त किया था।)

रिंकी के लिए ये मौका बड़ा खास था वह मन ही मन सोचने लगी कि जिस तरह से पापा पूछ रहे हैं, शायद वो जानना चाहते है कि उनकी बेटी की चूत कुंवारी है कि नही, उनकी बेटी की सील किसी मादरजात ने तोड़ तो नही दी...... या फिर उनकी बेटी खेली खायी छिनार तो नही है। हो सकता है पापा मम्मी की फटी हुई या खुली हुयी चूत मिलने से खुश नही हो.... और अभी भी एक कुंवारी चूत की तलाश में हो,, वरना इस तरह की बातें ना करते।

शायद पापा पुरानी फिल्म डॉन के हीरो अमिताभ बच्चन के उस डाइलोग दिल से लगाए बैठे हैं.... जो अमिताभ बच्चन ने बोला था " उन्हें दो टाइप की लड़किया बिल्कुल भी पसंद नहीं है... एक जो बिस्तर पर आसानी से आ जाये, और दूसरी जो बिस्तर पर आने में ज्यादा देर लगाए "

इसलिए आज पापा अपनी बातों से मुझे उकसा रहे है हो सकता है कि आज पापा का भी मन मेरी लेने को कर रहा है लेकिन लेने से पहले बातें बनाकर मेरी चूत का कोमार्य परीक्षण करना चाहते है...... यही सब सोचकर रिंकी इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहती थी वह अपने पापा की बातों का मतलब धीरे-धीरे समझ रही थी वरना अपनी बेटी से ऐसी बातें करते हुए किसी भी बाप के चेहरे पर मुस्कुराहट नहीं आती लेकिन जिस तरह से पापा मुस्कुरा रहे है रिंकी को अब लगने लगा था कि इस मुस्कुराहट के पीछे कोई वजह जरुर है। ओर यह वजह शारीरिक सुख से ही संबंधित है। इस बात की शंका रिंकी के मन में होते ही उसके बदन में गुदगुदी सी होने लगी और उसकी चूत रिसने लगी। अब वह भी अपने पापा से दूसरी तरह से ही बातें करना चाहती थी क्योंकि उसके पापा ने ही बोला है कि आज जो भी उसके मन में हो सब बोल डाले,,,,

हे भगवान...... तेरे जैसी लड़की तो मैंने आज तक नहीं देखी...... क्या हुआ क्या सोच रही है बता ना तुझे कौन अच्छा लगता है ।

(अपने पापा की बात सुनते ही जैसे उसकी तंद्रा भंग हुई हो इस तरह सेकपकाते हुए बोली)

कककक,,, कुछ तो नही,,,,

अच्छा ठीक है कुछ मत बताओ मैं तुझसे अब कुछ पूछूँगा भी नहीं,,,( मै बनावटी गुस्सा बताते हुए बोला।)

लो अब आप नाराज हो गये पापा मैं कह रही हूं फिर..... बताने जैसा नहीं है क्योंकि हम लोग प्यार व्यार की बातें नहीं करते हम लोग कुछ और ही बतियाते है।

क्या बतियाते हो तुम लोग कैसी बातें करते हो ?

क्या बताऊं पापा बताने लायक नहीं है।

( रिंकी की यह बात सुनकर मेरे मन में उत्सुकता जागने लगी मुझे लगने लगा कि रिंकी कुछ गंदी बातें छुपा रही है और यही मौका भी अच्छा है उसके मुंह से गंदी बातें उगलवा कर आज की शाम हसीन करने का,, मेरे मन में ढेर सारी भावनाएं उमड़ने लगी मै रिंकी से बोला।)

देख तू मुझसे शर्मा मत सब कुछ बोल डाल,,,,,

पापा मुझे बहुत शर्म आती है मैं कैसे बोलूं,,,,,,,

,,,,,, देख शर्मा मत,,,,

( अपने पापा की ऐसी बातें सुनकर रिंकी को लगने लगा कि अब जरुर उसके साथ कुछ ना कुछ अच्छा होने वाला है,,, वह भी मन ही मन सोचने लगी की जब पापा खुद ही सब कुछ सुनने के लिए तैयार है तो उसे बोलने में क्या हर्ज है इसलिए वह बोली।)

पापा हम लोग गंदी बातें करते है।,,,,

कैसी गंदी बातें किसके बारे में,,,,( इतना कहने के साथ ही मै हाथ हटाकर एक हाथ को पीछे की सोफे पर रखकर आराम से बैठ गया ,,,,)

सससस,,, सेक्स के बारे में,,,,,,( मुझ को भी अपनी बेटी के मुंह से सेक्स शब्द सुनकर गर्माहट सी होने लगी। )

सेक्स के बारे में किस तरह के कैसी बातें जरा खुलकर तो बता मैं पहले ही तुझे बता चुका हूं कि तू आज मत शर्मा,,,

( रिंकी के मन में पूरी तरह से वासना सवार हो चुकी थी उसे अपनी सहेली ऋतु वाली बात उसे अच्छी तरह से याद थी,,,, और ऐसे माहौल में तो उसके बदन में एक अजीब सी उत्सुकता सीे फैलती जा रही थी। )

चचचच,, चुदाई,,,,, वाली बातें,,,,( रिंकी फिर से शर्माते हुए बोली।,, अपनी बेटी से इस तरह की बातें करने में मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था जिसे मै बार-बार पैंट के ऊपर से एडजस्ट कर रहा था और रिंकी की नजर मेरी इस हरकत को ध्यान से देख रही थी। )

चुदाई वाली बातें तेरी सहेली यह सब बातें करती है लेकिन किस की चुदाई के बारे में बातें करती हैं........ मैं तो यह बातें सुनकर ही हैरान था कि आखिर स्कूल में पढ़ने वाली छोटी छोटी लड़किया चुदाई वाली इस तरह की बातें कर कैसे लेती हैं।

मेरे बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी अपनी बेटी के मुंह से यह सब सुनकर मेरा अंग अंग उन्माद से भरने लगा था। बाहर बारिश अपने जोरों पर अपना जलवा बिखेर रहीेे थी साथ ही बादलों की गड़गड़ाहट मौसम को और भी ज्यादा भयानक बना रहीे थी,,, लेकिन यह बारिश यह एकांत और बादलों की गड़गड़ाहट घर के अंदर के माहौल को गर्मी प्रदान कर रही थी,,,,)

जारी है.......
 
बहुत बहुत आभार...... जिस कहानी को लिखने मे लेखक को लगभग 300 दिन लगे और आपने तीन दिन में पढ़ कर बहुत ही प्रशनिया रीडर होने का फर्ज निभाया है। मै भी बहुत हैरान हूँ जब नोटिफिकेशं मे 100-125 बीप आपकी देखी। मुझे बहुत बहुत अच्छा लगा है, आप इसी तरह कहानी के साथ जुड़े रहिये।🙏✍️

कुसुम रात तक वापस आ जायेगी..... फिर आपकी जिग्यसा का समाधान खुद बताएगी....😜😂 रिंकी तो नादान है, बेचारी को फ्यूचर बिल्कुल नहीं दिख रहा है और अरुण सर फ्यूचर देख कर प्लान बना रहे है।🤔

धन्यवाद
 
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