Incest कर्ज और फर्ज - एक कश्मकश - Page 10 - SexBaba
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Incest कर्ज और फर्ज - एक कश्मकश

बहुत बहुत शुक्रिया आभार अभिनंदन

कहानी लिखते समय लेखक अलग दुनिया में जीता है, उस समय उसे लिखी गई कहानी/इबारत सबसे खास लगती है जो की सत्य नही है। कहानी की खासियत तो आप और आप जैसे खास रीडर/पाठक ही बता सकते है, जो कहानी को पढ़ते ही नही बल्कि महसूस करते हैं। कहानी के पात्रों के साथ जीते हैं और उनकी की गयी गलतियों को अपने प्यारे से शब्दों में लेखक को लिख कर बताते/अवगत करते है। 🙏

(( अरुण मानसिक रूप से कमजोर और उसे समझ नहीं आ रहा है क्या करना है....... ऐसा आपको लगा))

ये दिल, दिमाग, उम्र, समझ, जिस्म से परिपक्व (mature) लोगों की त्रिकोणीय प्रेम कहानी है, इसमें रिंकी के किरदार को छोड़कर बांकी अरुण की मम्मी, कुसुम, खुद अरुण तीनों ही रिश्तों की अहमियत, मर्यादाए, भली भाँति समजते है, उनके एक गलत कदम, एक गलती, गलत फैसला उनकी और उनके परिवार की खुशियों का खतम कर देगा। एक ही परिवार में सगे रिश्तों में ऐसे रिश्ते आसानी से नही पनपते है। इन रिश्तों में हालातों, मजबूरियों, नादानियों, जरूरतों के चलते बहुत सी वजह होती है जिन्हे हर एक इंसान नही समझ सकता है। मेच्योर हीरों और कमसिन् जवान लड़की के ऊपर बनाई गयी यश चोपड़ा निर्देशित लम्हे फिल्म को यू ट्यूब पर देखिये। जिसमें अनिल कपूर को उसकी प्रेमिका की बेटी प्यार करने लगती है, और अपनी सारी हदें पार कर उसे seduce करती हैं। ऐसा नही है हीरो उसे पसंद नहीं करता या उत्तेजित नही होता, वो उसे चूमना चाहता है, लेकिन जब चूमने का ख्याल लाता है तो उस ख्याल के साथ उसे हीरोइन में अपनी बेटी नजर आती है, जिसे उसने पाला था पिता की तरह। ठीक ऐसी ही हालत अरुण की है । रिश्तों की मर्यादा तोड़ना एक मेच्योर समझदार इंसा के लिए कभी भी सहज नही होता है।

"" अरुण रिंकी को पाने की हिम्मत तो कर सकता है लेकिन कमीनापण कहा से लायेगा""" 😂😜

माँ बेटे के बीच आकृषण होना बहुत सहज होता है, ऊपर से जब परिवार छोटा/एकल (पति, पत्नी, बेटा/बेटी) हो । परिवार में इक्लोता लड़का/लड़की किन हालातों में होता है इस पर शायद किसी ने गौर नही किया हो। बच्चे का जनम दो जिस्मो के मिलन से होता है। कभी भी कोई भी स्त्री एक बच्चे से संतुष्ट नही होती है, उसको कम से कम तीन बच्चो को जनम देने की इच्छा आजीवन रहती है। लेकिन पति की लाचारी, मजबूरी, बुरी आदतें, असहमति, शारीरिक परेशानी, घरेलू कलह की वजह से दूरी, शादी में उम्र का अंतर, और भी अन्य परेशानियों की से वो एक बच्चे को जनम देकर संतोष कर लेती है। वही पति एक बच्चे को पैदा कर सामाजिक तौर पर मर्द होने का ठप्पा लगवा कर खुश हो जाता है।

((na to wo apni souteli beti ki taraf akarshit ho pa raha hai nahi apni ma ki taraf,))

अरुण अपनी माँ की तरफ कब से और कैसे आक्रषित हुआ है ये बात मै साफ करना चाहूंगा। इक्लोता होने की वजह से और पापा के दूसरे शहर में पोस्टिंग होने की वजह से वो छोटे से अपनी माँ के करीब रहा है। घर में ढेड़ आदमी के लिए खाना बनाने के अलावा उसकी मा के पास कोई काम नही था। कपड़े धोने, गेंहू पीसने, और अन्य कामों के लिए मशीनें लगी थी। इसलिए अरुण की माँ ज्यादतर अपना समय घर की साफ सफ़ाई, आँगन, छत, फर्श धोना, बाथरूम, आदि पर खर्च करती, इस दोरान अरुण भी मदद करता। साफ सफाई हमेशा महिलाएं ऐसे समय करती है जब उन्हे नहाना, कपड़े धोना होता है, चूंकि अरुण भी मदद करता तो वो भी गीला हो जाता तो उसकी माँ उसे खुद ही नहला देती। जब तक वो खुद नहाये और वापस आकर अरुण को कपड़े पेहनाये तब तक अरुण नँगा ही माँ को नहाते हुए देखता। उम्र के साथ साथ अरुण की समझ भी बढ़ रही थी। लेकिन माँ इससे अंजान थी। औरत भी मर्द की तरह नहाते हुए अपना गुप्तांगो को पानी से रगड़ कर साफ करती है। अरुण की माँ भी यही करती थी। उसकी माँ को अपने बेटे के बड़ा होने का अहसास जब हुआ जब एक पड़ोसन ने अरुण को नँगा देखा और उसकी माँ से कहा।

अकेले रहने वाले लोग या तो ठरकी होते है या सनकी होते है 😜😂

अरुण की फैमिली मे आय का स्रोत बहुत आसान है, पूर्वजों की कृपा से आलीशान बना हुआ मकान, सोना, गाँव में बेची गईं जमीं की राशि का ब्याज, पिता की पेंशन, उसकी तंखाह, छोटा सा परिवार सुखी जीवन। इक्लौते होने की वजह से अरुण शुरु से अपने माता पिता का लाडला पुत्र रहा है। ज्यादा दोस्ती यारी नही, नशा, जुवा कोई बुरी आदत नही।घर और ड्यूटी के मध्य उसकी जिंदगी बीती है। जो लड़के इस प्रवती के होते है वो अक्सर अपनी इच्चाये मन की मन में रखते है, किसी से कह नही पाते। अरुण भी अपने परिवार में एक्लोता है, ज्यादा दोस्ती यारी नही, नशे जुये की बुरी आदत नही पूरा समय जॉब और घर में ही गुजरता है। हर किसी की कुछ ना कुछ इच्चाये होती हैं,जिन्हे वो किसी के साथ share, करता है, राय लेता है, सेक्स भी उन्ही इच्छाओ में एक इच्छा होती हैं।

दस साल के बाद की यादे, घटना कभी नहीं मिटती हैं, अरुण की ठरकी, बनने या माँ की ओर आकर्षण की मुख्य वजह खुद उसकी माँ है। अरुण जब ठरकी पन की सीमाए लाँघ चुका है और अब उसकी बेटी ठरकपन पर उतारू है तो वो अपनी मेच्योरिटी की वजह से पहल नही कर पा रहा है।

((aur jan bibi ke karname sunne ko mile to nahi koi thos kadam utha pa raha))

मुझे आश्चर्य होता है आप आज के जमाने की खुले विचारों की महिला होकर कुसुम के नौकरी करने पर सवाल उठा रही है, कितनी महिलाएं नोकारिया कर रही है, आपको gov जॉब मिलेगी तो क्या नही करेगी????? आप अपनी राय छोड़िये । आप तो बस एक बार अपने पति से पूछीये मजाक में सही "" मुझे gov जॉब/ आगनबॉडी में जॉब मिल रही है। फिर उनकी राय सुनना। एक पति नौकरी को अहमियत देता है या पत्नी को.....!

Madam Gov. जॉब एक परमानेंट फ्यूचर है।

इस update में कुसुम के आखिर के शब्दों पर आपने ध्यान नही दिया शायद..... उसने सरकारी नौकरी के फायदे बताये। ऑफिस के लोगो के दुर्व्यवहार का तोड़ बताया।

उसने खुले शब्दों में हर बार अपने पति को बोला है मै बेहयाई नही करूँगी। जबकि अरुण हर प्रयास कर चुका है कुसुम के चरित्र में दाग ढूढने का।

((me uski halat aisi hoti dikh rahi hai jaise dhobi ka kuta ghar ka na ghat ka, Hath arun ke kuchh aana nahi aur jo hai pass me wo bhi koi aur le udega))

सजा तो सबकी निश्चित है, चाहे वो गुनाह जानबूजकर किया गया हो, या अंजाने में। मानसिक हो या शरीरिक सजा तो सजा ही है।

शब्दों शब्दों में कुछ गलत शब्द लिख दिये गये हो जो आपको गलत लगे हो तो उसके लिए माफी मांगता हूँ।

इसी तरह अपने प्यार भरे शब्दों से कहानी को प्यार देते रहिये..... 🙏🙏
 
बहुत बहुत आभार शुक्रिया

((जहां तक कुसुम की बात है तो भाई , नारी एक पर उसके रूप अनेक । वो अपना हित अच्छी तरह समझती है । उसने पैसों का अभाव देखा है , घर मे गरीबी देखी हैहै) )

ये बात आपने, 100 फीसदी सही कही है.... क्योकि कुसुम को लगता है कि, घर की आधी अर्थव्यवस्था अरुण के बाथरूम में लाइट चालू छोड़ देने से बिगड़ जाती है..... 😜😜😂😂

((और जहां तक अरूण सर की बात है , इनके दिल और दिमाग मे सेक्स को लेकर सब समय द्वंद चक्र चलते रहता है । कभी दिल की बातें हावी हो जाती है तो कभी दिमाग हावी हो जाता है। और इसी कारण से वह हर बार अवैध संबंध अपनाने से पीछे हट जाता है।

उसका दिल अवैध संबंध बनाने के लिए जोर दे रहा है लेकिन दिमाग तर्कसंगत सही गलत का आकलन कर उसे पीछे धकेल दे रहा है।))

अरुण जैसे लोग पाँव से नही दिमाग से चलते हैं, ये जूते भी तलाशते है, अपने दिमाग के नाप के..!

अरुण की कुंडली ही ऐसी है, जब भी कोई कर्म करता है, साला कांड बन जाता है 😜😜

((रिंकी -- रिंकी एक खुली किताब की तरह है । खासकर अरूण के साथ उसके संबंधो पर । उसका अरूण को भेजा गया ओपन सेक्सुअल मैसेज , उसकी मोबाइल फोन और उसकी नाॅन स्टाप हरकतें उसकी मंशा स्पष्ट जाहिर कर रही है। यहां भी गेंद अरूण के पाले मे है।))

कितने सारे रिश्ते बगैर सात फेरो के एक दूसरे के दिल में धड़कते है, अरुण तो बेफ़िकर था अपनी दाड़ी की सफ़ेदी देखकर, नींद उड़ा दी रिंकी ने अच्छे लगते हो केहकर... 😜

((लेकिन एक चीज समझ नही आया , जब रिंकी का फोन अरूण के पास है तो अरूण के मोबाइल पर किस का मैसेज आया ? ऐसा मैसेज जो सिर्फ रिंकी ही उसे भेज सकती थी।))

इस सवाल का जबाब अगले update में.....

इसी तरह आशीर्वाद देते रहिये...

धन्यवाद.....
 
अभिनंदन आभार शुक्रिया......

आ गया सावन झूम के,

इतने बड़े राइटर के शब्दों की बारिश से कहानी सरोबार हो गयी..... । आपने जो अपनी बेटी के प्रतिक्रिया दी है वो सत्य है, उस पर ज्यादा कुछ नहीं लिखूँगा।

आप भी दिल्ली से है, ये जानकर खुशी हुयी..... दिल्ली की कुड़ियों की ये खास बात है, तीन चार बॉय फ्रेंड ये तो आम बात है 😂😂😂😜😜😜

ये भी एक सत्य है....

बारिश करते रहिये..... धन्यवाद
 
""सबसे पहले उसकी नौकरी खाऊँगी, उसी दिन उस पर रेप का केस ठोक दूंगी और तुम्हे तो पता है ऐसे केसेज में कोर्ट भी औरत के पक्ष में फैसला सुनाता है,’" अगर मेरा और मेरी बेटी के साथ बन रहे नाजायज रिश्ते की भनक उसे लगी तो मेरा क्या हश्र होगा उसे सिर्फ खुदा जानता है।

क्यों क्या हुआ...... महाराज कहाँ खो गये, क्या सोच रहे हो...???? कुसुम मुझसे वीडियो काल से बात कर रही थी और मेरा शांत चेहरा देख कर बोली।

कुसुम मै तुमसे एक बात कहु उसका जबाब दोगी..... ये सिर्फ बस यू ही पूछ रहा हूँ ज्यादा सीरियस मत लेना।

ह्म्म्म पूछीये....

अभी हम दोनों ही अलग अलग शहरों में रह कर नोकारिया करेंगे...... वैसे अभी तक ऐसा हुआ नही है...... और शायद होगा भी नही.... लेकिन मान लो कल को मेरी जिंदगी में कोई और आ गया, और मै बहक गया तो तुम मेरे साथ क्या शर्मा जैसा सलूक (सबसे पहले उसकी नौकरी खाऊँगी, उसी दिन उस पर रेप का केस ठोक दूंगी)करोगी।

वो थोड़ी गंभीर हो गई थी। लेकिन इस बार वो भी चिंता में पड़ गई थी …

""अरुण सच तो यह है कि पति और पत्नी का रिश्ता बहुत ही निजी और कोमल होता है. मै तुम्हारे नाजायज संबंधों की हकीकत सड़क पर लाऊँगी तो तमाशा मेरा ही बनेगा. एक सच यह भी है कि एक पति जब पत्नी की कमी दूसरी औरतों से पूरा करने का प्रयास करता है तो दूसरी औरत के साथ बेशर्मी और नंगापन भी विरासत या दहेज़ के रूप में उस के जीवन में प्रवेश करते हैं. जब कोई पुरुष अपनी लक्ष्मण रेखा पार करता है तो एक तूफान आता है और हमेशा के लिए उस की जिंदगी में सन्नाटा पसर जाता है.""

मुझे किसी गैर के साथ तुम्हारे रिश्ते की बात अगर तुम खुद से मुझे बताओगे तो शायद मुझे उतना दुःख नही होगा। और चुपचाप अपनी बेटी रिंकी के साथ तुम्हारी खुशनुमा जिंदगी से कांटे की भाँति निकल जाऊंगी। लेकिन अगर मेने तुम्हे खुद रंगे हाथों पकड़ा, या तुम्हारे अफेयर की बात किसी और के माध्यम से पता चली तो.... तब मै उसी दिन तुमसे तलाक लूंगी ? इसके लिए दोबारा से मुझे लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौर से ही क्यों ना गुजरना पड़े ? लेकिन मै तुम्हारी बेफवाई की सजा जरूर दूँगी..... मै तुम्हे और तुम्हारी प्रेमिका दोनों को बर्बाद दूँगी.... ह्म्म्म......!!

माफी माफी माफी.... कुसुम देवी....“साला ये भी क्या बक दिया मैने मेरी ठरकी बात से मेरी बीबी की पूरी ठरक ही मिट गयी “ ह्म्म्म......... मेने हस्ते हुए कहा।

मेरे बोलने का अंदाज ही ऐसा था की उसके चहरे में एक मुस्कान उभर आयी, और उसने हल्के से मुस्कुरा दिया , उसे भी इस चीज का अहसास था की हम दोनों की नौकरी हमारे बीच के संबंधों पर भी असर डाल रही है और हम दोनों ही ऐसा होने नही देना चाहते थे…।

कुसुम कुछ पल सोचने के बाद मुझसे बोली अरुण हम अपने सोशल मीडिया एकाउंट के पासवर्ड आई डी एक दूसरे को बता दे, जिससे हम दोनों ही एक दूसरे पर नजर रख सके और भस्विश्य में आने वाले तूफान से सर्तरक् रहे........।

आईडिया बुरा नही है, और हम दोनों ने एक दूसरे के अपने सोशल मीडिया एकाउंट के पासवर्ड आई डी ट्रांसफर कर लिए और व्हाट्स अप का क्लोन बनाकर इंस्टाल कर लिया।

मेने उससे मजाकिया अंदाज में पूछा ये तो भविष्य की तैयारी हो गयी लेकिन जो हो चुका हो उसका क्या.....????

कुसुम -- मतलब

एकाएक मैंने उससे पूछा- अच्छा कुसुम सच सच बताना, तुम शादी से पहले कभी किसी को प्यार करती थीं?

मेरे सवाल पर वो एकाएक चौंकी और बोली- ये आप कैसा सवाल पूछ रहे हैं?

मैंने प्यार से बोला- तुम्हारे पूर्व के रिश्ते से मुझे कोई प्रोब्लम नहीं है, मैं सिर्फ जानना चाहता हूँ.

वो मेरे प्यार और विश्वास देखकर बड़ी मासूमियत से बोली- हां एक था, जिसे मैं पसंद करती थी और वो भी मुझे पसंद करते थे.

ये बोलकर वो थोड़ा शर्मा गई.

ओह माई गॉड तुमने भी किसी से प्यार किया है। मुझे विश्वास नही हो रहा है, मेने आश्चर्य से उससे पूछा....???

ओफ़ ओ तुम मर्दो की हमेशा से यही परेशानी रही है.. लड़की किसी को पसंद करती हैं उसका मतलब ये नही होता कि वो उससे प्यार करती है..... पसंद करना और प्यार करना दोनों में ही जमीं आसमा का अंतर होता है। पसंद बदलती रहती है, लेकिन प्यार हमेशा याद रहता है। कुसुम मुझे ज्ञान का पाठ पढ़ाते हुए बोली।

मैंने उससे प्यार से पूछा- अरे अपनी पसंद के बारे में ही बता दो.......कौन था?

वो बोली- छोड़िये ना, वो शादी के पहले की बात थी … अभी क्यों जानना है?

मैंने कहा- प्लीज बताओ ना … हम तुम जब जासूसी कर रहे है तो तुम्हारा कोई भी राज मुझे किसी गैर से पता चले उससे तो अच्छा तुम ही बता दो और छिपा कर रखने से क्या फायदा होना !

वो थोड़ा सकुचाती हुई बोली- वो मेरे चाचा का साला है, जिसका नाम दिनेश है.

ये बोल कर वो चुप हो गई.

मैंने कहा- अरे वही दिनेश ना … जिसे तुम मामा बोलती हो?

उसने हां में सर हिला दिया.

((यहां मैं थोड़ा दिनेश के बारे में बता देता हूँ. दिनेश मेरी बीवी के चाचा का साला है, उसकी उम्र लगभग मेरे ही जितनी है. उसकी कद-काठी भी मेरे जितनी ही है तथा गोरा चिट्टा 80 किलो वजन का युवक है.

उसकी भी शादी हो चुकी है तथा उसे बेटा भी है.))

मैंने कुसुम से पूछा- अरे ये तो बताओ कि वो तुम्हारी पसंद कैसे बन गया ?

वो बोली- वो मेरे यहां हमेशा आते थे. उस समय पर मुझ पर दुखो का पहाड़ टूटा हुआ था। घर में नमक तेल का हिसाब रखते रखते मै अपनी जिंदगी में नमक डालना लगभग भूल सी गयी थी। उन्होंने ने अपनी बातों से, मेरी स्वाद हीन जिंदगी में एक चुटकी नमक डाल कर हिम्मत दी। वो मुझे समझाते, होंसला देते,उन्ही ने मुझे दुखो के घर से बाहर निकल कर, सुखों की दुनिया दाखिल होने के लिए प्रेरित किया। उनकी नगर पालिका और सरकारी दफ्तरों में जान पहचान थी। जिसकी वजह से मेरी विधवा पेंशन् मिलनी शुरु हो गयी। मुझे उनसे बातें करना अच्छा लगता था, फिर धीरे धीरे हमारे बीच नैन मटक्का, होते होते हम एक दूसरे को लाईक करने लगे. उस समय मैं 19 साल की थी और वो 26 साल के थे.

मैंने बोला- क्या तुम दोनों ने सेक्स भी किया था?

इस सवाल पर वो काफी गम्भीर हो गई और लगभग गिड़गिड़ाती हुई बोलने लगी- देखिए मैंने आपको बाल की खाल निकालने की नियत से नही ये सब बता रही हूँ … लेकिन मैं सच कहती हूँ मैंने उसके साथ तो छोड़ो कभी भी अपने पहले पति के अलावा किसी के साथ कुछ भी नहीं किया .

इधर मेरे मन में तो सब जानने का कीड़ा कुलबुलाने लगा था तो मैंने उसे अपनी कसम देते हुए सब कुछ सच सच बताने का बोला.

वो सोच में पड़ गई और बोली- देखिए मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ एवं आपके सिवाय और किसी के बारे में सोचती भी नहीं हूँ.

मैंने उससे कहा- मैं भी तुमसे बहुत प्यार करता हूँ, इससे हमारे बीच कोई दूरी नहीं होगी. मैं सिर्फ सब जानना चाहता हूँ.

वो बोली- आपने अपनी कसम दे दी है और आप मेरे लिए जिंदगी में सबसे बढ़ कर हैं. मैं अपने मम्मी-पापा की कसम खाकर बोलती हूँ कि मैंने उनके साथ सेक्स नहीं किया है.

"कोई भी स्त्री अपनी माँ बाप की कभी भी झूठी कसम नहीं खाती है."

वो फिर आगे थोड़ा शर्मा कर बोली- दिनेश मामा ने एक बार मेरे साथ सेक्स करने का प्रयास किया था और मैं भी तैयार थी. उस समय मेरी उम्र 20 वर्ष थी अर्थात पहले पति के मौत के दो वर्ष बाद. उस दिन वो मेरे घर आए थे और घर के सभी लोग बाहर गए थे. उन्होंने मुझे अपनी बांहों में भर लिया था और मेरे गाल पर किस किया था. मुझे बहुत अच्छा लगा था इसलिए मैंने उन्हें मना नहीं किया. फिर उन्होंने मेरे होंठों पर अपने होंठ रखकर मुझे किस करने लगे. मेरे तो पूरे तन बदन में आग लग गई थी. मुझे बहुत मजा आ रहा था, मैं भी उन्हें बेतहाशा चूम रही थी. अभी हम लोगों को पांच मिनट ही हुए होंगे कि घर पर मम्मी और पापा आ गए. उसके बाद हम दोनों अलग हो गए. इसके बाद हमें कभी भी मौका नहीं मिला और हमने सेक्स तो दूर की बात, किस भी नहीं किया.

मैंने उससे पूछा- क्या तुम उसे अब भी पसंद करती हो?

वो बोली- तुमसे शादी के पहले करती थी परंतु मैं कसम खाकर बोलती हूँ कि मैं अभी सिर्फ आपसे प्यार करती हूँ. हां वो मुझे पागलों की तरह प्यार करते थे और मुझसे शादी भी करना चाहते थे पर हमारे बीच मामा भांजी का रिश्ता होने के कारण बात आगे नहीं बढ़ पाई.

यह सब बातें सुन कर मेरा दिमाग अस्थिर हो गया और मुझे समझ आया कि कई सारे मजाक सिर्फ मजाक नही होते बल्कि चतुराई से कहे गये सच होते है। तभी मेरे दिमाग में एक बहुत ही खुराफाती आईडिया ने जन्म ले लिया जो कोई भी आम पति नहीं सोच सकता है. उस रात में चैन से सो ना सका।

उधर दूसरे कमरे में बिस्तर पर करवटे बदलती हुयी रिंकी रात भर कल्पना करती रही कैसे मेरी मम्मी मेरे पापा के नीचे उनके लंड को अपनी चूत में लेती होगी। जो उसने अभी तक अपनी कमसिन् जवानी से भरे जिस्म में महसूस भी नही किया था. उसने यह सब फितूर अपने दिमाग़ से निकालने की बहुत कोशिश की मगर घूम फिर कर वो बातें फिर से उसके दिमाग़ में आ जाती. रिंकी का ध्यान मेरी चड्डी के मूतने वाले उस कट वाले हिस्से की ओर चला जाता और वो कल्पना में अपने पापा के लंड को उस गॅप में से बाहर निकलता हुआ देखती.

मेरे ख़याल रिंकी को बैचैन कर रहे थे और मैं ठीक से लिख नही सकता कि उसे किस बात से ज़यादा परेशानी हो रही थी, इस बात से कि उसकी की प्यासी चूत बार बार उसकी आँखो के सामने गीली हो रही थी या फिर इस ख़याल से कि मेरे पापा उसे कब चोद रहे होंगे???

अगले दिन सुबह मेरा मूड बहुत उखड़ा हुया था. मेरे हाव भाव मेरी हालत बता रहे थे, खुद रिंकी ने भी पूछा कि मैं ठीक तो हूँ. वो अभी स्कूल की ड्रेस में थी, और मेहरून शॉर्ट स्कर्ट पहने हुए थी मगर उसके साथ आज एक फॉर्म फिटिंग टी-शर्ट डाली हुई थी. आज जिंदगी में पहली बार उसके खूबसूरत चेहरे से हट कर मेरा ध्यान रिंकी के मम्मों की ओर गया. एक बारगी तो मुझे यकीन ही नही हुआ कि उसके मम्मे इतने बड़े और इतने सुंदर थे. उसके भारी मम्मो के एहसास ने मेरी हालत और भी पतली कर दी थी.

मैने उसके व्यवहार मे कोई तब्दीली कोई बदलाव ढूँढने की कोशिस की. मगर उसका आचरण वो ही पहले वाला था अगर कोई बदलाव था तो वो उसे बड़े अच्छे से छुपा रही थी. मगर मैं जानता था कि वो जानती है कि अब हम दोनो बाप बेटी के बीच एक सूक्षम, एक रहस्यमयी राज का पर्दाफ़ाश हो चुका था। अब इसका मतलब क्या था ये मेरी समझ से बाहर था और ये हमे किस दिशा मे ले जा रहा था ये भी मेरी समझ से बाहर था.

मेरे अंदर आगे बढ़ कर अपनी बेटी के जिस्म को छू लेने की ख्वाइश भी ज़ोर पकड़ रही थी. मैं अपनी बेटी के जिस्म के कुछ खास अंगो को छू कर उस एहसास को महसूस करना चाहता था ताकि उसी एहसास को उसके सपनो में इस्तेमाल कर उनमे थोड़ी वास्तविकता डाल सकूँ.

उधर रिंकी भी अब अपने पापा को अलग नज़रों से देखने लगी थी। बाप से सेक्स करने की चाहत शायद थी, नहीं थी लेकिन ये बात उसे बहुत रोमांचित कर रही थी कि उसका बाप उसके साथ सेक्स करना चाहता था। रिंकी इस ख्याल से घृणित नहीं थी, न ही डर रही थी। वो इस सब के बारे और जानना चाहती थी। आज सुबह के नाश्ते के समय एक अजीब सी शांति थी, कोई किसी से बात नहीं कर रहा था।

मै चोरी छुपे रिंकी की छाती पर नज़र फिरा कर टी शर्ट के अंदर तक झांक लेना चाहता था। वहीं रिंकी भी जानती थी कि पापा क्या देख रहे हैं। आज वो ज्यादा तन कर बैठी थी। पापा देख रहे हैं इसलिए वो शेप खराब नही होने देना चाहती।

जब मैने अपनी बेटी को अपनी कामाग्नी में जलती आँखो से देखा तो मैने पाया मेरे सामने यौवन से लबरेज एक ऐसी कमसिन् जवान लड़की बैठी है जिसका हर अंग बड़ी शिद्दत से तराषा गया था, जिसके हुश्न को पाने के कोई भी लड़ाई लड़ी जा सकती थी, जिसके लिए मरा और मारा जा सकता था. मैं उसे छूना चाहता था, उसे चूमना चाहता था, उसके अंग अंग को मसलना चाहता था और उसे चोदना चाहता था, उसके दहकते जिसम की आग में खुद को जलाकर उसे भोगना चाहता था.

नाश्ते के पूरे वक़्त मेरा लंड तना रहा। मगर अत्यधिक इच्छा होने पर भी मैं हस्तमैथुन से बच रहा था, मैं अपने अंदर दहक रही उस आग को, उस जोश को हस्तमैथुन से कम नही करना चाहता था.

नाश्ता खाकर दोनों उठे और हमेशा की तरह रिंकी ने मुझ को किस (छोटी किस, माँ बाप वाली किस) करके गुड बाय बोला। और घर से बाहर अपने स्कूल के लिए चली गई। आज किस करते वक़्त रिंकी ने मेरे गाल पर हाथ भी फिरा दिया। किस करने के लिए नजदीक आते समय रिंकी ने मेरे पैंट का उभार भांप लिया था। रिंकी नादान नहीं वह सेक्सी टीन गर्ल थी, जवानी में कदम रख चुकी थी और सेक्स के बारे में भी जानती थी।

उसके जाने के बाद मै भी एक लंबी छुट्टी के बाद अपने कॉलेज में अपनी ड्यूटी जॉइन करने के लिए समय से दस मिनिट पहले कॉलेज पहुँच गया। चूंकि अभी क्लास में पढ़ाना शुरु तो नही कर सकता था इसलिए कॉलेज कैंपस में कॉलेज में पढ़ने वाले लड़के लड़कियों का खूबसूरत नजारा देख कर अपनी आँखे सेंकने लगा।

यहाँ मैं आप सभी को बता दूँ कि पूर्वी भारत की लड़कियाँ बहुत ही आज़ाद ख्यालों वाली होती हैं। उनके कपड़े काफ़ी भड़कीले होते हैं … टाइट जींस … जिसमें उनका सुडौल पिछवाड़ा बहुत ही आकर्षक दिखाई देता है। लो कट टी-शर्ट जिसमें से उनके वक्ष का आधा भाग और उनके बीच का दरार काफ़ी उत्तेजक लगता है। ऊपर से वो कुछ ऐसा पर्फ़्यूम छिड़क के आती थीं जो मदमस्त कर देने वाला होता था।

मैं एक अच्छा लेखक हु इसका तो मुझे पता नही..... लेकिन मै एक अच्छा ओरेटर (वक्ता) हूँ इसलिये मेरे बात करने का अन्दाज़ लड़कियों को बहुत भाता है इसलिये मेरी क्लास की बहुत सी लड़कियाँ (छात्राएं) किसी ना किसी तरह से मुझे लाइन मारने की कोशिश करती रहती थीं। मैं उनका लाइन मारना, क्लास में द्विअर्थी भाषा के मस्ती में पूछे गए सवाल जबाब, कैंटीन में घूमना, कॉलेज टूर में झरनो में उनके भीगे बदन में, उन्हें देखना इत्यादि तो इन्जॉय करता था पर उससे आगे बढ़ने की ना तो मेरी हिम्मत थी ना ही इच्छा।

मगर आज किस्मत को तो कुछ और ही मंज़ूर था। पांच मिनिट के बाद कॉलेज का चपरासी मेरी तंद्रा को भंग करते हुए बोला अरुण सर आपको प्रिंसिपल सर अपने कैबिन में बुला रहे है। मै थोड़ा सा डर गया और चपरासी के साथ कदम से कदम मिलाते हुए प्रिंसिपल के कैबिन में दाखिल हो गया।

अहो भाग्य हमारे........ जो आप पधारे..! प्रिंसिपल मुझे देखते हुए व्यंग भरा शब्दो का बाण मुझ पर चलाते हुए बोले।

मै -- क्या हुआ सर....???

अरुण जी पिछले एक महीने में चार इतवार हटा दिये जाये तो बचे 26 दिन और इन 26 दिनों में आपकी उपस्थिति केवल छे दिन की है बांकी बीस दिन तो आप छुट्टी मना रहे थे। प्रिंसिपल गुर्रता हुआ मुझसे बोला।

सर मैने आपको लीव एप्लिकेशन दी थी, उसमे लिखा भी था मेरी वाइफ की तबियत ठीक नही है। मै अपनी सफाई देते हुए बोला।

अरुण जी मेरे माथे पर क्या " सी " लिखा है....... कितना झूठ बोलोगे मुझसे.... तुम्हारी वाइफ दिमापुर में मजे से क्लर्क की नौकरी कर रही है और ये बात खुद मुझे तुम्हारे पिता ने बताई हैं।

मेरा झूठ पकड़ा गया था..... मै नजरे झुका कर शांत खड़े होकर प्रिंसिपल की गालियों को सुनने का इंतजार करने लगा।

देखो अरुण तुम्हारे पिता मेरे एक अच्छे मित्र है, इसलिए मै तुम्हे इतने दिनों से झेल रहा हूँ। लेकिन अब नही.... तुम्हारी गैर मौजूदगी मैने एक नयी प्रोफेसर रख ली है..... ये कोई बनिया की दुकान तो है नही, ये प्राइवेट कॉलेज है, स्टूडेंट क्लास में प्रोफेसर नही आने पर कंप्लेंट कर हंगामा करते है। अच्छा होगा तुम कोई और जॉब कर लो, जिसमें तुम मनचाहा अवकाश ले सकते हो।

लेकिन सर ........... एक मौका दे देते। मुझे कोई और काम नही आता है, मै क्या करूँगा......???? आप मुझे यही कोई और डिपार्टमेंट में शिफ्ट कर दे प्लीज.... Its humble request.

प्रिंसिपल कुछ देर सोचने के बाद..... ठीक है ये लास्ट चांस है...... तुम्हे कंप्यूटर आता है....????

हा सर,

ठीक है फिर अभी कॉलेज में प्रोजेक्ट चल रहे है और तुम प्रोजेक्ट गाइड बन कर स्टूडेंट की प्रोजेक्ट बनाने में मदद करो.....!!

थैंक्स यू वेरी मच सर....!

मै कंप्यूटर लैब में स्टूडेंट को प्रोजेक्ट बनाने में मदद करने लगा मेरे पास कॉलेज के बहुत सारे स्टूडेंट प्रोजेक्ट करने के लिये बैठे थे और मैं बहुत सिंसियरली उनको प्रोजेक्ट करा रहा था। जिसमें ज्यादातर लड़कियाँ थीं।

लंच टाइम में मैं अपने सहयोगियों के साथ कैन्टीन में लन्च कर रहा था, कि अचानक एक कलिग ने कहा “अबे देख … कितने बड़े-बड़े हैं इसके …”

मैंने सर उठाकर देखा … एक बीस-इक्कीस साल की लड़की अपनी दो सहेलियों के साथ लंच लेने आई थी, और जिसके बारे में कलिग ने कमेंट किया था उसके स्तन वाकई बहुत बड़े थे … आम लड़कियों से काफ़ी बड़े … उसकी दोनों सहिलियाँ भी ठीक ठाक थीं।

मैंने कहा,”देखते हैं किसकी झोली में गिरती हैं … !”

कलिग ने कहा,”तू ही तो है प्रोजेक्ट गाइड सभी लड़कियों का … तेरे पास ही आयेंगी … और कहाँ जायेंगी..”

मैंने कहा,”काश …!” ह्म्म्म ह्म्म्म

दोपहर में जब मैं लंच के बाद जाकर वापस कंप्यूटर लैब में बैठा, यह एक प्रोजेक्ट गाइड बनना मेरे लिए नया काम था. मैं लैब में स्टूडेंट के साथ ज़यादा समय तक ना रह सका, इसलिए जल्दी जल्दी काम ख़तम करके मैं घर लौट आया. घर पहुँचते पहुँचते मैं पसीने से तर बतर हो चुका था. मैं जल्दी से नाहया और घर के उस एकलौते कोने में चला गया जहाँ पर बड़ा वाला कूलर लगा था.

मेरी बेटी रिंकी वहाँ पर पहले से ही मोजूद थी, नंगे फर्श पर टाँगे घुटनो से मोड़ कर एक दूसरे के उपर रख वो पालती मार कर बैठी थी. गर्मी की वजह से वो सिर्फ़ टॉप और स्कर्ट में थी. उसका टॉप पतला और झीना सा था. उसने अपनी स्कर्ट घुटनो के उपर तक खींची हुई थी ताकि उसके बदन के ज़्यादा से ज़्यादा हिस्से को हवा लग सके.

बालों मैं धीरे धीरे कंघी करते वो अपना समय बिता रही थी. वो उन्हे संवारने के लिए कंघी नही कर रही थी बल्कि सिर्फ़ समय बिताने के लिए खुद को व्यस्त रखे हुए थी. कंघी चलाते हुए जब उसकी बाहें उपर उठती या सर के पीछे जाती तो उसकी छाती आगे को हो जाती जैसे सीना ताने कोई सिपाही सावधान मुद्रा मे खड़ा हो.

मैने महसूस किया कि उसने टॉप के नीचे कोई ब्रा नही पहनी है शायद इतनी गर्मी में ब्रा जैसे संकीर्ण कपड़े से बचने के लिए. उसके निपल टॉप के उपर से बाहर को निकले हुए थे और उसके मम्मे झीने कपड़े में हल्के हल्के से दूधिया रंगत लिए झाँक रहे थे. पंखे की हवा में टॉप हिल डुल कर उसके भारी मम्मों का साइज़ बता रहा था साथ ही साथ पतली कमर के पास थोड़ी सी नंगी पीठ भी दिखा रहा था. मुझे नही मालूम मुझे अचानक क्या हो गया या किस कारणवश मैने यह किया.

मैने एक कुर्सी उठाई और बिल्कुल उसके पीछे रख दी. कुर्सी पर बैठ मैने उसके हाथों से कंघी ले ली. पंखे की हवा लेते हुए मैं उसके बालों में कंघी करने लगा. मैं उसके बालों में कंघी कर रहा था और वो मुझे एसा करने दे रही थी.

जब मैं उसके बालों में कंघी फेर रहा था तो मुझे अपने घुटनो पर उसकी पीठ का दवाब महसूस हुआ. यह स्पर्श रोमांचित कर देने वाला था. जब मैने उसके बालों को कंघी करने की सोची थी तो यह बात मेरे दिल में नही आई थी मगर मुझे उसका स्पर्श अत्यंत सुखद लग रहा था. थोड़े समय बाद उसने अपना बदन ढीला छोड़ दिया, आँखे बंद कर ली और मैं इतमीनान से उसके बालों में कंघी करने लगा. ऐसे ही टाँगे पसार कर और बदन पीछे की ओर झुका कर मेरी टाँगो से टेक लगाए वो आराम से बैठी थी और मैं उसकी ज़ुल्फो से खेल रहा था, कुछ समय बीता होगा जब अचानक हम ने मेरे पापा (उसके दादा जी) के घर आने की आवाज़ सुनी. वो एकदम से उछल पड़ी जैसे कोई अपराध करते हुए अपराधी रंगे हाथों पकड़ा जाए, मेरे हाथों से कंघी छीन वो दूसरे कमरे में भाग गयी इससे पहले कि पापा (उसके दादा जी) वहाँ आकर हम दोनो को देख लेते.

मुझे नही लगता था कि उसे इस तरह वहाँ से भागने की कोई ज़रूरत थी. चाहे मेरे पापा (उसके दादा जी) मुझे उसके बालों में कंघी करते देख भी लेते , क्योकि इसमे कोई ग़लत बात या बुराई नही थी. मेरे द्वारा अपनी बेटी के बालों में कंघी करना नादानी या मूर्खता कहा जा सकता था मगर एसा करना वर्जित या निषिद्ध हरगिज़ नही था. जिस तरह वो उछली थी, जिस तरह उसे अपराध बोध हुआ था और जिस तरह वो वहाँ से दूसरे रूम में भागी थी इससे मुझे एहसास हो गया था कि उसके दिमाग़ में क्या चल रहा है.

पिछले एक घंटे से मै पूरी तरह से खाली था, खाली बैठे बैठे मेरा घर में रहना मुश्किल हो रहा था, बैठे बैठे मैं अपना फोन देख रहा था,जो फेंटेसी मेरी बेटी के साथ शुरु होने वाली थी वो दब कर रह गई थी रिंकी किचिन मै खाना बना रही थी।

मैं अपने मोबाइल में कुसुम का व्हाट्स अप क्लोन देख रहा था, कुसुम अभी ऑनलाइन नही थी और मैने वाट्सप के मेसेज से ही शुरू किया उसके पुराने मैसेज वो सब डिलीट हो चुके थे लेकिन आज के ही मेसेज बचे थे, मुझे ये बात थोड़ी खटक गई....???

मैं आज के ही मेसेज को देखने लगा …

अचानक ही वाट्सप के मेसेज में मेरा ध्यान खिंचा , संजय के नाम से मेसेज आया था,उसकी dp में वो खुले बदन अपने 6 पैक दिखाते हुए फ़ोटो डाल कर रखा था,मैंने देखा की उन दोनो में बहुत सारी बाते हुई है ,सुबह 11 से साढ़े 11 का मेसेज था..

‘आज तुम गुलाबी सूट में कमाल की लग रही हो …’

कुसुम -- ‘थैंक्स ..’और एक स्माइली

‘आजकल ज्यादा बात क्यो नही करती कटी कटी सी रहती हो ‘

कुसुम -- ‘नही ऐसी कोई बात नही है ‘

‘ऐसे तुम्हारे पति की क्या किस्मत है, तुम्हारी जैसी हसीं खूबसूरत बीबी मिली.. मुझे जलन होती है उनसे’

कुसुम -- ने बस एक स्माइली ही भेजी ,

मुझे लग रहा था की उसे तुम में उतना मजा नही आ आता है.. नही भला इतनी खूबसूरत बीबी को कोई अकेला छोड़ता है क्या......??????

कुसुम -- एक स्माइल के साथ गलतफेहमी है तुम्हारी...

‘वो अगर ये जानेगा की मैं तुमसे बात करता हु तो गुस्सा हो जाएगा है ना,ऐसे भी दूसरे की बीबी से मुझे बात करते डर लगने लगा है ..’

उसकी ये बात पढ़कर कुसुम ने एक खिलखिलाने वाली स्माइल डाल दी .. और अगला मैसेज

कुसुम -- ‘सिर्फ बात से क्यो गुस्सा होंगे ,वो बहुत ही अंडरस्टैंडिंग है ..’

‘ओह तो क्या हम सिर्फ बात बस करेंगे ..’ ???

कुसुम -- ‘तो और क्या चाहते हो तुम ,आगे बढ़ने की उम्मीद भी मत रखना..’

‘ओके सॉरी ,आज लंच साथ में करे,या फिर शर्मा के साथ ही जाने वाली हो ..’

इस बार फिर से कुसुम ने एक हँसने वाली स्माइल डाली

कुसुम -- ‘ओके साथ चलेंगे ‘

चैट खतम.....

मेरा मूड थोड़ा खराब हो गया इसलिए मैंने चुपचाप ही मोबाइल रख दिया और बाकी के मेसेज को पढ़ने की भी जहमत नही उठाई, इतना तो पता चल चुका था की इन मैसेज में वो दोनो काफी पास आ चुके थे,उनके बीच रोज बात भी होती थी लेकिन वो कहा तक पहुचे थे ये मुझे नही पता था ना ही जानने का ही मन हुआ,

लेकिन फिर भी कुसुम के व्यव्हार मुझे थोड़ा बदला हुआ लगा वरना वो फ्लर्ट करना पसंद करती है , तो उसने खुद मुझे क्यो बोला था कि हम एक दूसरे के सोशल मीडिया एकाउंट आई डी, पासवर्ड, व्हाट्स अप क्लोन इंस्टाल कर ताकि अपने मोबाइल में उस मोबाइल की गतिविधियों को देख सकू, अब मैं समझ नहीं पा रहा था की मेरी बीवी इतनी शरीफ क्यो बन रही है ,

मैं कुसुम को आजादी तो देना चाहता था और मेरी तमन्ना भी थी की उसके पीछे लड़के आशिकों की तरह घूमे लेकिन मैं उससे इस वफ़ा की आशा जरूर करता था की वो मेरे प्रति पारदर्शी रहे ….

जारी है.......
 
बहुत बहुत आभार अभिनंदन....... सर जी मै आपके वास्तविक जीवन के प्रोफेशन के बारे में तो नही जानता लेकिन अगर आप टीचिंग के प्रोफेशन से है/होते तो कोई भी स्टूडेंट कभी फैल नही होता.... आपके पढ़ने और समझाने के तरीका अपने जीवन काल में अभी तक नहीं देखा 🙏 मै धन्य हो गया आपसे इस आभाषि दुनिया में मिलकर.....!

जिस समय मैने ये पैरा लिखा था उस समय में कुसुम के नजरिये से आपकी शंका दूर करने का प्रयास करता हूँ....... कुसुम कहना चाहती थी कि अगर शर्मा ने कुछ गलत करने की सोची/कोशिश की , लिमिट क्रॉस की तो उसे उसकी गलती पर धमका कर, डरा कर अपना प्रोफेशनालि फायदा कर लूंगी। वो धमकी से ही सरेंडर कर देगा और मामला उछला तो भी इन केसो में महिला की तारीफ ही होती हैं, उसे शेरनी का तमगा इनाम स्वरूप दिया जाता है।

वही अरुण बेवफाई करता है वहा उसकी निजी जिंदगी प्रभावित होगी जिसमे उसके साथ साथ बेटी और परिवार, की भी बदनामी होगी और वो खुद पहले से इस दंश को झेल चुकी है।

मेरा ऐसा मानना है कि

शादीशुदा जिंदगी में पति और पत्नी जैसे शब्द अनुचित है, वे केवल एक दूसरे के साथी और सहयोगी है, गुलाम नही दोनों का दर्जा समान है। कुसुम के भी अरुण के भाँति मित्र, कलिग है और आज के दौर में जॉब करने वाली शादी शुदा स्त्री अपने आप को कुंवारी ही समझती है और वो ऑफिस को कॉलेज समझकर मस्ती करती है। अरुण ने जो मेसेज पढ़े उनमे अभी तक ऐसी कोई बात नही थी जिससे शंका के भाव पैदा हो। Flirt और फ्रैंक ये दोनों शब्द ही अलग अलग अर्थ देते हैं, कुसुम जो कर रही हैं उसे मै समझता हूँ फ्रैंक की श्रेणि में समझा जाना चाहिए।

हाहा हाहा हाहा ये सही कहा, अरुण पढ़े लिखे मूर्ख है, छोकरी के चक्कर में नौकरी दांव पर लगा रहे है। किसी ने सच ही कहा है जो चुडेल लड़को की जवानी खा गयी उसे ही private जॉब कहते है।

मेरे लिखे शब्दो को कुसुम के फेवर भरे भाव से नही एक आधुनिक युग के खुले विचारों वाले लेखक के भाव समझकर ही पढ़िये 🙏✍️🙏

अंत में एक प्राथना पूर्ण निवेदन 🙏✍️🙏

पिछले कॉमेंट पर जो मुझसे भूल/गलती हुयी थी उसके लिए मैने लिखित रूप से माफी नामा भी दिया था। जिसे आपने स्वीकार कर लिया था। लेकिन रेखा राणी जी ने अभी तक माफी स्वीकृत नहीं की है। जिसका प्रमाण है उनका इस update पर साइलेट रीडर बनकर खामोश रहना। हो सके तो आप उन्हे मेरा दोबारा से माफी स्वीकृत कराने में सहयोग प्रदान करे यही विनय है।

इसी तरह अपना आशीष देते रहिये....

धन्यवाद
 
बहुत बहुत अभिनंदन शुक्रिया रेखा राणी जी.... आपने मेरे माफी नामा को स्वीकार कर मेरी पिछले update के दौरान अमर्यादित शब्दों को भूल कर अपने स्नेह भरे शब्दों के साथ अपनी प्रतिक्रिया लिखी इसके लिए तहेदिल से आभार.....!

स्त्रियों का ह्रदय बहुत कोमल होता है, मर्दो की भाँति उनकी मित्रता पान गुटखा बीड़ी सीगरेट तक समाप्त नही होती 😜😜🙏🙏

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कुसुम ने अरुण को आश्वाशन दिया है 👇

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🙏🙏😜😜

आपकी प्रतिक्रिया की आखिरी लाइन ""अरुण कुसुम को छूट देकर अपना रास्ता साफ कर रहा है"" का विश्लेषण एक पाठक के नजरिये से करना चाहता हूँ, उम्मीद है शायद आप अरुण के चरित्र, सोच, मनोस्थिति को ठीक से परख सके...... अक्सर लोग मजाक में कहते है कि शादी एक ऐसा लड्डू है जो खाये सो पछताए जो ना खाये वो पछताए 😜 अरुण की अधिक उम्र में वो भी दूसरी शादी होना उसके लिए किसी अभिशाप से कम नही है।

वाजिब उम्र में शादी होना अच्छा लगता है, परन्तु अधिक उम्र में वो भी दूसरी बार हुयी शादी महत्वपूर्ण होती है क्युकी वाजिब उम्र में शादी होना सिखाता है आपको प्यार और परवाह करना और अधिक उम्र में वो भी दूसरी बार हुयी शादी सिखाती है आपको शांति से जीना। ये रिश्ता औपचारिकता /समझौता मात्र का बन जाता है। दोनों कपल परिपक्व होते है दुनिया दारी देख चुके होते है, सही गलत का फैसला लेने की काबिलियत रखते है और एक दूसरे के फैसलो मे ज्यादा हस्तक्षेप करना दोनों के लिए बड़ी बहस बन जाती है।

अरुण ने कुसुम से शादी इसलिए की थी क्योकि जिम्मेदार स्त्री खूबसूरत स्त्री से बेहतर होती है। कुसुम वो जिम्मेदारी निभाने की पूर्ण काबिलियत रखती है। लेकिन तरक्की के साथ साथ जो दुष्परिणाम सामने आ रहे है उनको वो चाह कर भी नही रोक सकता। क्योकि खुद अरुण लंगोट का कच्चा है, उसे हर लड़की/स्त्री में सिर्फ सेक्स ही दिखता है, जिसकी वजह है उसकी कुंडली में लगन भाव में बैठा शुक्र ग्रह, जो कहानी के शुरु में उल्लेखित किया जा चुका है। अब तो जो हो रहा है उस सत्य को स्वीकार करने के अलावा कोई और रास्ता नही दिख रहा है..... ना ही कोई उसके पास दिखाने वाला इंसान है...... सिवाय 36 इंच की tv को भूल कर 21 इंच की tv (रिंकी) के अलावा 🙏🙏😜😜😜
 
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दोस्त बस दो दिन और दीजिये.... ✍️🙏
 
मैं कुसुम को आजादी तो देना चाहता था और मेरी तमन्ना भी थी की उसके पीछे लड़के आशिकों की तरह घूमे लेकिन मैं उससे इस वफ़ा की आशा जरूर करता था की वो मेरे प्रति पारदर्शी रहे ….

धड़ाम ..... छन...... शिट ....... रसोई में से तेज बर्तन की गिरने की आवाज से मेरी तंद्रा भंग हुयी। और मेरी नजर लबरेज यौवन से भरपूर हाथों में सने विम बार से अपनी चेहरों पर बार बार तंग करती हुयी एक हाथ से लट को कान में लपेटते हुए बर्तन धोती हुयी अपनी बेटी रिंकी पर पड़ी।

रिंकी के मादक जिस्म को देखकर मेरे मन में ख्याल आया जिन्दगी में आप कितनी भी चाहत कर ले मिलता वो है जो मिलना है.लेकिन जीवन का हिसाब ये है की जो मिले उसका मजा लो, जिसने ये सिख लिया उसकी जिन्दगी जन्नत हो जाती है वरना यहाँ दुखो का अंबार ही है. इसलिए गलतफहमी जिनसे है उन्ही से बात करो, जिस पर शक है उससे बातें करोगे तो बातें बेवजह बढ़ सकती हैँ....

तभी मेरे पापा किचिन में रिंकी के पास जाकर खड़े हो गये। मैं अंदर न जाकर बाहर से ही उनकी बाते सुनने लगा,"" क्या करू वो तो पागल ही है, रिंकी की आवाज गूंजी,ये उसने लगभग खिलखिलाते हुए कहा था लेकिन रिंकी बेटा लगता नही की तेरे पापा तुझे ज्यादा प्यार करते है, तुम तो उन्हें कितना चाहती हो,

मैं सकते में आ चूका था,आखिर ये हो क्या रहा है,

नहीं दादाजी वो मुझ पर अपनी जान लुटाते है,उनकी आँखों में मैंने हमेशा अपने लिए सिर्फ प्यार ही देखा है,प्यार को देखने के लिए भी आँखे चाहिए....... मेरे पापा और रिंकी के बातो में एक गंभीरता थी,

रिंकी ने थोड़ी देर कुछ न कहा फिर अच्छा दादाजी चाय पियेंगे,आपके लिए क़ाली चाय बनाऊ ऐसे भी आपको नींद तो आएगी नहीं,

हा रिंकी बेटा बना दो ना,क्या करू बुढापे की बीमारी है, रात भर नींद नहीं आती,और खामखाह मेरी वजह से सभी को परेशान होना पड़ता है,

आप भी कैसी बाते कर रहे है दादाजी...??

रिंकी बेटा तू और बहु कुसुम जब से आई है मुझे भी लगता है इस दुनिया में मेरा कोई अपना है,वरना....मेरे पापा की बातो में एक दर्द था।

आप भी ना, बस हो गया आज से आप ऐसी बाते नही करेंगे, मेरे हिस्से की आप मुझसे दो बाते कर लिया करो.... मैं हु ना,आपके दर्द बाटने के लिए, मैं आपकी हर सेवा करुँगी, रिंकी फिर हस पड़ी और मेरे पापा भी।

सच कहु तो रिंकी बेटा ऐसे मुझे तेरे पापा की किस्मत पर जलन होती है,असल में हर इन्सान को हो.........., कुसुम जैसी होनहार पत्नी, तुझ जैसी फूल सी कोमल प्यार करने वाली बेटी हर किसी के नसीब में नहीं होती :

मैं वहा खड़ा हुआ खुद अपने नसीब पर फक्र करने लगा,की ऐसी होनहार बीबी और प्यारी बेटी है मेरी जो मेरे पापा तक का दिल जीत ली है,

""कुसुम का व्हाट्स अप चैट मैसेज वैसे तो शक पैदा करता है पर मेरा शक चला गया, मैं सामान्य हो गया और वहा से अपने कमरे में चला गया।""

लेटे लेटे यही सोचता रहा की रिंकी इतना प्यार करने वाली है,सबको सम्मान देती है,अपने नानी के घर में भी सबकी लाडली है, यहाँ भी, पूरी तरह अपनी मम्मी कुसुम की कॉपी है, किस तरह घर की जिम्मेदारियों को उठाने के लिए खुशी खुशी पढ़ाई के साथ साथ घर के सारे काम कर रही है। इतनी समझदार बेटी है कि अपने दादाजी के साथ चाय पी रही है,सिर्फ इसलिए की वो अकेले है, उनका दुख दर्द बाँट रही है, लगभग आधे घंटे की बेचैनी ने मुझे सोने न दिया ओर नींद भी नहीं आयी मैंने सोचा क्यों न मै भी रिंकी के हाथ से बनी चाय मैं भी पी लू, मैं बहार जाने लगा बेड से उठा एक उत्सुकता लिए, पर जैसे ही कानो में रिंकी की आवाज गूंजी मेरे पैरो की जमीन ही खिसक गयी..... पापा मुझे आपका मोबाइल देना....... । उसके हाथ में दूध का ग्लास था. वो रूम में अंदर मेरे पास आ गयी। .

"पापा मैं आपके मोबाइल में अपनी फेवरेट मूवी देखूँगी?" मुझे दूध का ग्लास देते हुए बोली..... और छोटे सोफे पर बैठ गयी जो बेड से नब्बे डिग्री के कोने पर था जिस पे मैं बैठा हुआ था. उसने पारदर्शी नाइट सूट पहनी हुई थी जिसका मतलब था वो सोने गयी थी मगर मुझे दूध पिलाने के ख्याल से सोई नही थी. और उठ कर मेरे रूम में आई थी।

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"नींद नही आ रही" मैने पूछा. मेरे दिमाग़ में उसकी मैसेज वाली बात गूँज उठी जिसमे उसने लिखा था कि कभी कभी उसे चुदवाने की इतनी जबरदस्त इच्छा होती थी कि उसे नींद नही आती. मैं सोचने लगा क्या उस समय भी उसकी वो ही हालत है, कि शायद वो काम की आग यानी कामाग्नी में जल रही है और उसे नींद नही आ रही है, इसीलिए वो मोबाइल के बहाने से मुझे देखने आई है. इस बात का एहसास होने पर कि मैं अती कामोत्तेजित नवयोवना के साथ हूँ मेरा बदन सिहर उठा.

वो वहाँ बैठकर आराम से मेरा मोबाइल देखने लगी , उसे देखकर लगता था जैसे उसे कोई जल्दबाज़ी नही थी, वापस अपने बेडरूम में जाने की. जब उसका ध्यान मोबाइल में था तो मेरी नज़रें चोरी चोरी उसके बदन का मुआइना कर रही थी. उसके स्तन् कुसुम से छोटे जरूर लेकिन ठोस मम्मों की ओर मेरा ध्यान पहले ही जा चुका था मगर इस बार मैने गौर किया उसकी टाँगे भी बेहद खूबसूरत थी. और उसके घुटनो से थोड़ा उपर तक उसकी जाँघो को चमका रही थी.

शायद रात बहुत गुज़र चुकी थी, या आधी रात को अपनी जवान बेटी के दिलकश जलवे देखने का असर था, मगर मुझे रिंकी की जांघे बहुत प्यारी लग रहीं थी. बल्कि सही लफ़्ज़ों में बहुत सेक्सी लग रही थी. सेक्सी, यही वो लफ़्ज था जो मेरे दिमाग़ में गूंजा था जब हम दोनो सुबह नाश्ता कर रहे थे या मेरे केस में मैं, नाश्ता करने का नाटक कर रहा था. असलियत में अगर मुझे कुछ दिखाई दे रहा था तो वो उसकी सेक्सी जांघे थी और यह ख़याल मेरे दिमाग़ में घूम रहा था कि वो इस समय शायद वो बहुत कामोत्तेजित है.

वो काफ़ी समय वहाँ बैठी रही, अंत में बोलते हुए उठ खड़ी हुई "ओफफ्फ़! रात बहुत गुज़र गयी है. लगता है पापा आपको नींद आ रही है, मैं आपका मोबाइल लेकर अपने कमरे में जा रही हूँ"

मैं कुछ नही बोला. वो उठ कर मेरे पास बिस्तर पर रखे मोबाइल चार्जर को उठाते हुए गुडनाइट बोलने को आई. मगर आज रात इस गुड नाईट के अर्थ बदल गये थे, क्योंकि मेरे दिमाग़ में उसके कामुक अंगो की धुंधली सी तस्वीरें उभर रही थीं. वो एक हल्का सा अच्छी महक वाला पर्फ्यूम लगाए हुए थी जिसने मेरी दशा और दिशा भी खराब कर दी. मैं उत्तेजित होने लगा था.

मैं उसे मूड कर रूम से बाहर की ओर जाते देखता रहा. उसका सिल्की, सॉफ्ट नाइट ड्रेस उसके बदन के हर कटाव हर मोड़ हर गोलाई का अनुसरण कर रहा था. वो उसकी गान्ड के उभार और ढलान से चिपका हुआ उसके चुतड़ों के बीच की खाई में हल्का सा धंसा हुआ था. उस दृश्य से अपनी बेटी को एक सुंदर, कामनीय नवयोवना के रूप में देखने के मेरे बदलाव को पूर्ण कर दिया था." रिंकी कितनी सुंदर है, कितनी सेक्सी है" मैं खुद से दोहराता जा रहा था.

बेटी के कमरे से जाते ही मैंने झटपट अपना लोअर नीचे खींच कर लंड बाहर निकाला और खाल पीछे खींच कर टोपे को हवा खिलाई (लगाई) । मै हाथ फैला कर लंड को मुट्ठी में भर कर धीरे धीरे सहलाने लगा। अपनी आंख बंद कर ली और अपनी फेवरिट कहानी की नायिका के रूप में रिंकी को सोच कर मुझे इस बात पर भी ताज्जुब हो रहा था कि मेरी बेटी अचानक से मुझे इतनी सुंदर और आकर्षक क्यों लगने लगी थी.

वैसे ये इतना भी अचानक से नही था मगर यकायक रिंकी मेरे लिए इतनी खूबसूरत, इतनी कामनीय हो गयी थी इस बात का कुछ मतलब तो निकलता था. क्यों मुझे वो इतनी आकर्षक और सेक्सी लगने लगी थी? मुझे एहसास था कि इस सबकी शुरुआत मुझे उसकी जिस्मानी ख्वाहिशों की जानकारी होने के बाद हुई थी, लेकिन फिर भी वो मेरी बेटी थी और मैं उसका पिता और एक पिता होने के नाते मेरे लिए उन बातों का ज़्यादा मतलब नही होना चाहिए था.

"मेरी हसरतें अपनी पत्नी यानी कि उसकी मम्मी कुसुम के लिए होनी चाहिए थीं, रिंकी लिए नही, रिंकी लिए बिल्कुल भी नही. "

उस रात अपने अपने बिस्तर पर लेट कर हम दोनों बाप बेटी एक दूसरे का ख्याल अपने दिल से निकालने की ना काम कोशिश कर रहे थे। मगर हक़ीकत ये थी। कि कल से लेकर आज तक होने वाले सारे वक्त ने हम दोनों बाप बेटी के जिस्मो में एक दूसरे के लिए वो आग भड़का दी थी। जिस को ठंडा किये बगैर अब दोनो का गुज़ारा बहुत मुश्किल होने लगा था। इस के बावजूद हम दोनों बाप बेटी के जिस्म अब एक दूसरे को हासिल करने के लिए मचलने लग गये थे।

लेकिन हम दोनों बाप बेटी के रिश्ते के दरमियाँ होने वाली क़ुदरती शर्मो-हया की वजह से दोनो को ही ये समझ नही आ रही थी। कि हम कैसे और किस तरह एक दूसरे को अपने दिल का हाल बताएँ और अपने अपने प्यासे जिस्मो की प्यास को एक दूसरे से बुझाएँ ।

मेरी ख्वाइश थी कि जिस तरह मैंने खुद पहल करते हुए अपनी साली जूली के साथ अपने जिस्म में भड़कती कामवासना का आगाज़ किया था। इसी तरह अब मुझे ही आगे बढ़ कर अपनी बेटी के प्यासे जिस्म को अपनी बाहों में भर कर रिंकी की प्यासी चूत को अपने मोटे लंड के पानी से शांत करना चाहिए।

जब कि दूसरी तरफ ये भी ख्याल मुझे बार बार परेशान कर रहा था एक तो अपनी बीवी कुसुम से किए हुए शादी के फेरो के समय पतिधर्म के वादे को तोड़ना नही चाहता था। अपनी पत्नी की सगी बेटी को ही उसकी सौतन नही बनाना चाहता था। और कुसुम के साथ बेवफ़ाई कर खुद रुस्वाइयो की आग में जलना नही चाहता था।

दूसरा मुझ को ये भी डर था कि कहीं मै अपनी बेटी के जज़्बात को सही तरह से समझने में ग़लती तो नही कर रहा।

और अगर अपने जज़्बात में आ कर मैंने अंजाने में अपनी बेटी से कोई ग़लत हरकत कर दी। जिस को मेरी बेटी रिंकी ने पसंद नही किया। तो फिर मेरे लिए अपनी बेटी और पत्नी कुसुम का सामना करने की हिम्मत नही रहेगी। इसीलिए एक ही छत के नीचे रहने के बावजूद अब ना चाहते हुए भी दो प्यासे बदन एक दूसरे से अलग रहने पर मजबूर हो रहे थे।

रात भर अपनी बेटी के जिस्म को भोगने की लालसा में अपना लंड का माल निकालकर मै कब सो गया पता नहीं चला। अगली सुबह मेरी जल्दी आँख खुल गई। रात भर मेरी बेटी ने मोबाइल कौन कौन सी फिल्म देखी होगी ये जानने की लालसा से अपने मोबाइल को रिंकी के पास से वापस लेने के उद्देश्य से मैंने अपनी सांसें काबू की और कमरे से निकल कर हॉल में आ गया।

धीरे धीरे मेरे कदम रिंकी के कमरे की तरफ बढ़े। दरवाज़े को हौले से धकेलते हुए जैसे ही मेरी नज़र पड़ी कि रिंकी के बेड के नीचे कोई कपड़ा गिरा है। मैंने हाथ बढ़ा कर खींचा तो पाया ये रिंकी की पैंटी थी।

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मै सोच पड़ गया कि आखिर पैंटी यहाँ क्यों पड़ी है. तभी मैंने महसूस किया कि पैंटी में नमी थी।

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“हो सकता है मेरे मोबाइल में गंदी फिल्म देखने के बाद रिंकी ने अपने हाथों से अपनी प्यास बुझाई हो !” ऐसा सोचते हुए मैंने हाथ बढ़ा कर पैंटी अपनी नाक पर रख दी।

एक लंबा सांस खींचते ही मेरे फेफड़े अपनी बेटी की चूत की महक से भर गए।

“क्या रिंकी चुदने के काबिल हो गयी है?”

“नहीं अरुण … यार अभी तो वो छोटी है!

मैंने हर सांस के साथ पैंटी को सूंघते हुए पैंटी को वापस उसी जगह डालते हुए मैंने कमरे के अंदर दो कदम और आगे उसके बेड की तरफ बढ़ा दिए.

जब मेरी नज़र रिंकी पर पड़ी मेरे होश उड़ गए। मेरी बेटी का टॉप के ऊपर का हुक खुला हुआ था जिसमें से एक चूचा पूरी तरह बाहर था।

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यह नज़ारा देख मुझ को जैसे सांप सूंघ गया। मै बुत बना खड़ा एकटक सो रही अपनी बेटी के अधनंगे बदन को निहारे जा रहा था।

मेरा ध्यान जब टूटा जब लंड ने अकड़ कर लोअर का टेंट बना दिया। ध्यान टूटते ही तुरंत मैंने यू टर्न लिया और कमरे से बाहर आ गया।

मै वहीं दीवार से लगा सोचने लगा कि आखिर करू तो क्या करू। इस हालत में बेटी को देखना भी गलत लग रहा था और साथ ही अपने कमरे में लौट जाने को भी कदम नहीं पड़ रहे थे।

रिंकी के अर्ध नग्न जिस्म ने मेरे अंदर कुछ एहसास जगा दिए थे. मेरे दिमाग़ में यह विचार आने लगा कि शायद इस हालात में मै उसकी कुछ मदद कर सकता था. मगर हमारा रिश्ता रास्ते में एक बहुत बड़ी बाधा थी, इसलिए वास्तव या हकीकत में जागते हुए उसके साथ कुछ कर पाने की संभावना मेरे लिए ना के बराबर ही थी. मगर मेरे दिमाग़ के किसी कोने में यह विचार ज़रूर जनम ले चुका था कि कोशिस करने में कोई हर्ज नही है. उस संभावना ने एक मर्द होने के नाते अपनी बेटी रिंकी के लिए मेरे जज़्बातों को और भी मज़बूत कर दिया था चाहे वो संभावना ना के बराबर थी.

बहुत देर सोच विचार करने के बाद मेरे विवेक और मर्यादा ने लंड के कड़कपन के आगे घुटने टेक दिए।

मै वापस कमरे में घुसा और रिंकी के नज़दीक जाकर खड़ा हो गया। मैंने हौले से रिंकी को पुकारा। बहुत धीरे … सिर्फ इतना तेज की अगर सो रही हो तो नींद न टूटे और जग रही हो तो पता चल जाये।

लगातार 3 आवाज़ देते हुए मै बेड पर बैठ गया। चौथी बार आवाज़ देने के साथ मैंने रिंकी के सिर पर हाथ फिरा दिया। इतने पर भी रिंकी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया न देखकर मेरी हिम्मत बढ़ गयी।

खुली हथेली से उंगलियां फिराकर पूरा पेट नापते हुए मेरा हाथ ऊपर बढ़ने लगा।

अपनी कामवासना की आग में आगे बढ़ते हुए रिंकी के पेट पर हाथ रखते हुए उसकी टॉप के बटन ठीक से बंद करने लगा ।

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गर्म मखमली नर्म चूचे को छूते ही मेरे जिस्म में जैसे करंट दौड़ गया। धड़कन जैसे रुक सी गयी।

मेरा पूरा ध्यान रिंकी की छाती पर था।

मै इस पल को कभी भूलना नहीं चाहता था। ऐसा मौका कभी दोबारा मिले या न मिले इसलिए मै इस हर पल को अपने ज़ेहन में कैद कर लेना चाहता था। कपड़े ठीक करना तो शायद बहाना था, मै तो पूरा हाथ भर के अपनी बेटी का जिस्म सहलाना चाहता था।

दोनों हाथ बढ़ा कर रिंकी के एक चूचे को बहुत हल्के से पकड़ा, अंगूठे से उसके निप्पल को सहलाया। दूसरे हाथ से उसका टॉप का दूसरा सिरा हल्का सा उठाया तो उसके दूसरे चूचे की झलक देख कर घबराहट में टॉप का दूसरा हुक भी खुल गया और दूसरा चूचा भी बाहर निकल आया।

मैंने दोनों हाथों में एक एक चूचे को पकड़ कर आंखें बंद कर ली। मुझे अहसास हुआ जैसे रिंकी की मम्मी कुसुम के चूचे पकड़े हों। रिंकी के चूचे उसकी उम्र से बड़े थे। पतली कमर पर 34 इंची चूचे पाकर मै जैसे पागल हो गया था। शरीर का भराव उसकी मम्मी कुसुम पर गया था। ऐसा लग रहा था जैसे कुसुम लौट आयी हो और आँख बंद किये हुए सो रही हो।

एक पल के लिए मै भूल गया और झुक कर मैंने अपना मुंह दोनों चूचों के बीच रख दिया। कभी दरार के बीच नाक फंसा कर उसके जिस्म की खुशबू लेता तो कभी दोनों निप्पल को सहलाता।

मै बाप बेटी की रिश्तों की मर्यादा को पूरी तरह से भूल चुका था और आज अपनी सारी हसरतें पूरी कर लेना चाहता हो।

उस के निप्पल थूक में भीग जाने के बाद कूलर की हवा से सिकुड़ कर तन गए थे

चूचों पर लगा थूक और कूलर की हवा की वजह से रिंकी को ठंड लगने लगी थी और उधर मै दीवानों की तरह रिंकी को खा जाना चाहता था।

मैंने एक लंबी सांस खींची और बड़े ही आनंद भरी आवाज़ में बोला- कुसुम मेरी जान, आई लव यू। तेरी बेटी में तेरी हर खूबी भरी हुई है। वही चूचे, वही खशबू … आह!

इस सब जद्दोजहद के बीच रिंकी की गहरी नींद टूट गयी। अपने ऊपर अचानक से किसी को इस तरह से झुका देख वो बहुत डर गई और अचानक से पलटी।

साथ ही उसे अहसास हुआ कि ये कोई और नहीं उसके पापा हैं। उसे समझ नहीं आ रहा था वो कैसे रियेक्ट करे। रिंकी को जैसे सांप सूंघ गया; वो लाश की तरह ऐसे ही पड़ी रही। वो अब तक भी फैसला नहीं कर पाई थी कि इस परिस्तिथि में कैसे पेश आया जाए।

जब उसे कुछ नहीं सूझा तो उसने अचानक खांसने की एक्टिंग चालू कर दी जैसे सोते सोते खांसी उठी हो।

रिंकी की इस हरकत से मुझ को होश आया। उसे लगातार खांसती देख कर मुझे लगा अब पकड़ा गया तो बहुत गड़बड़ हो जाएगी। और सारा भंडा फूट जाएगा। रिंकी के अचानक इस तरह खासने से मै बहुत डर गया था, माथे पर पसीना साफ नजर आ रहा था। मैंने अपने माथे से पसीना पोंछा

अपना मोबाइल उठाया और कमरे से बाहर निकल गया।

मुझे भागता देख रिंकी को पता चल चुका था कि पापा ही थे ! रिंकी जानती थी कि उसका बाप उसके जिस्म के उभारों को कपड़ों के ऊपर से निहारता है। लेकिन आज वही बाप कपड़ों की दीवार हटा कर उसके उभारों से खेल रहा था।

यह ख्याल रिंकी के जिस्म को रोमांच से भर गया, उसके चूचे तन गए और निप्पल कड़क हो गए। यह ख्याल उसको पागल कर रहा था। अपने पापा की ये हरकतें रिंकी को पागल कर रही थी साथ ही कहीं न कहीं सामाजिक बंदिशें उसे याद भी दिला रहीं थी कि कोई बाप अपनी बेटी का सोते हुए फायदा कैसे उठा सकता है ????

साथ ही उसके मन में कौतूहल चल रहा था ‘पापा मेरी चूची सहलाते समय मम्मी का नाम ले रहे थे। ’‘पापा मम्मी से बहुत प्यार करते हैं। ’‘मम्मी के बिना पापा अकेले हो गए हैं। शायद ’‘मैं मम्मी जैसी लगती हूँ । क्या इसीलिए पापा मेरे करीब आये थे????

अब उस को अपने बाप पर दया आने लगी थी। उसकी नज़र में जो 2 – 4% गलत था अब उसकी कोई गुंजाइश नहीं थी। वो दांत भींचे चुपचाप अपने पापा के हाथो से, की गयी हरकतों का मजा लेती हुई पड़ी रही जैसे अभी अभी कोई खूबसूरत खब्वाब देखा हो । इन्ही सब ख्यालों में रिंकी को दोबारा नींद आ गयी।

उधर मै भी अपने तने लन्ड को ठंडा कर ओर अपनी आज सुबह की बेवकूफी के लिए खुद को कोस कर अपने मोबाइल में रात भर रिंकी ने क्या क्या सर्च किया था उसको खोजने में लग गया।

गूगल क्रोमो, ओपेरा मिनी, यू शी ब्रवस्वेर, सारे सर्च इंजन की हिस्टरी खंगाल डाली लेकिन कुछ हाथ ना लगा। काफी मशक्कत के बाद थक हार कर वापस मै अपने व्हाट्स अप के मैसेज बॉक्स में अपनी पत्नी कुसुम का रात 11 बजे का प्यार भरा हार्ट शेप गुड नाईट मैसेज पढ़कर सुकून महसूस कर मुस्कुरा गया।

तभी मुझे ख्याल आया कि क्यो ना एक बार अपने मोबाइल में कुसुम का व्हाट्स अप क्लोन खोल कर देखू किस किस ने उसको क्या क्या भेजा होगा। मैंने डरते हुए कुसुम का व्हाट्स अप क्लोन खोला तो मेरी आँखे फटी रह गयी जितने wishes मैसेज मुझे एक साल में कभी नहीं आये थे। उससे ज्यादा मैसेज उसके एक रात में आये हुए थे। लेकिन ज्यादा चिंता की बात नही थी कुसुम ने किसी भी मैसेज पर जबाब नही दिया था। सिवाय एक शक्स के मैसेज पर उसके सवाल जबाब से भरी ग्रीन टिक नजर आ रही थी।

मेरे अवचेतन ने मुझे जगा दिया क्योकि मैं जानता था कुछ ठीक नहीं हुआ है,लगभग रात के 1 बजे का वक्त मैसेज सीन हो रहा था, कुसुम जैसे पूरी रात तक जग ही रही थी उसके msg पढ़े मैं हैरान था की वो दो घंटे से ज्यादा समय से जग रही थी....... जबकि उसने मुझे रात 11 बजे ही गुड नाईट मैसेज किया था।

मैंने msg चेक किये, प्यारे संजय जी का msg था,

संजय -'कितना तड़पायेगी जबाब दो न,'

कुसुम -'आज से आपके पास मेरे कोई जबाब नहीं आ पाएंगे , मैंने इन्हें वचन दिया है,आप भी मैसेज करना बंद कर दो,'

संजय -- क्या ??? अब ये नया चूतियापा क्या है, छोड़ भी दो उस ढीले बलम को.... 😜 और भूल जाओ बेफिजूल के वचन को 😂

कुसुम - मैं जान दे सकती हु पर इनसे किया कोई वचन नहीं तोड़ सकती जानते हो न, अपनी औकात में रहो वरना मैं दिखा दूंगी,

""'मैं और भी सदमे में था की ये क्या है,जो औरत किसी दुसरे मर्द को रात के 1 बजे मैसेज करती है वो पति की इतनी इज्जत कर रही है की अपने यार को धमका रही है,""

संजय --'अरे कुसुम जी आप तो गुस्सा हो गयी मुझे माफ़ कर दीजिये ।

कुसुम - 'पहली गलती है संजय माफ़ करती हु,लेकिन आज के बाद इनके बारे में कुछ कहा तो सोच लेना अंजाम क्या होगा,

मैं भी दबंगो के खानदान की बहू हु।

संजय -- माफ़ी कुसुम जी

कुसुम ने जवाब में स्माइल भेजा

संजय - - तो अब आगे क्या करना है

कुसुम - पता नहीं क्या...?? क्या करना है, आप सो जाइये। ऑफिस में, मैं आपसे बात करती हु, लेकिन अब ज्यादा नहीं बस कुछ कुछ... .. ..

इसके बाद कोई बात नहीं हुई ........ पर मेरे मन में विचारो की रेल चल पड़ी ये क्या है ?????? वो मुझसे प्यार करती है तो उसके साथ क्यों है ?????? और नहीं करती तो इतना प्यार मेरे लिए क्यों है ?????? और अब क्या वो मेरे सामने ही मेरे मोबाइल के अंदर ये सब करेंगे, मैं क्या करु मुझे समझ नहीं आ रहा था, और मैं चाह कर भी कुछ कर नही पा रहा था या शायद कुछ करना भी नहीं चाहता था न जाने कौन सी शक्ति ने मुझे रोका हुआ था ??????

मैं बेचैन था ,पर बेकाबू नहीं मैं कुछ करना तो चाहता था पर क्या करू ये मुझे भी पता नहीं था, अब तो कॉलेज भी जाने का मन नहीं कर रहा था ,साला मैं यहाँ होऊंगा और वहा पर मेरी बीवी ,...............मैं जलकर भूंज गया , मैं कब तक अपनी पत्नी की रखवाली करता रहूँगा ,जब उसने ही मन बना लिया है और वो भी इसका मजा ले रही है तो मैं कब तक उसे रोक पाऊंगा,.......मैं क्या करू तलाक ......

तलाक का नाम दिमाग में आते ही मेरे तन बदन में एक झुनझुनाहट सी दौड़ गयी ,नहीं मैं कुसुम से दूर नहीं रह सकता था , तो उसका ट्रान्सफर करा लू...ताकि इस संजय से छुटकारा मिल जाय , इसमें भी तो समय लगेगा , मुझे सोचने को समय चाहिए था , ताकि मैं कुछ अच्छा सा फैसला कर पाऊ,

जारी है............
 
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