Incest कर्ज और फर्ज - एक कश्मकश - Page 9 - SexBaba
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Incest कर्ज और फर्ज - एक कश्मकश

Dhanyavaad.

आप अपनी प्रॉफ़िल् id के नाम की तरह वाकई ek number है, हमेशा सबसे पहले मेरी कहानी पर अपने शब्दों की प्रतिक्रिया देकर दिल खुश कर देते है....

आपकी तारिफ में बस एक पुरानी फिल्म का डाइलोग याद आ रहा है.....

"" हम वो है जो कभी लाइन में नही लगते, बल्कि हम जहाँ खड़े हो जाते है लाइन वही से शुरु होती है ""

😂😂😂😜😜
 
शुक्रिया आभार बस एक वास्तविक घटना को शब्दों में पिरोने का प्रयास था......

इसे आप realistik के साथ साथ motivational update भी कह सकते है, जो रीडर इस update को पढ़े और motivate होकर अपने ट्रेन, बस के सफर में लेडी को अपने साथ वाली सीट पर जगह देकर/लेकर टिकट के पैसे की पूरी वसूली कर सके और अपने हाथो का जादू दिखा सके 😜😜😜😜😂😂😂😂

धन्यवाद
 
अध्याय - 16 --

दूरियाँ......नजदीकियां...... मजबूरिया

कोई सपने में भी नही सोच सकता है की मेरे और सुनीता के बीच इस आधे घण्टे के सफर में क्या हुआ। मेरी हालत थोड़ी अजीब सी थी. एक तरफ तो मैं घर नही जाना चाहता था क्योंकि जो आनंद मुझे सुनीता ने दिया था वो लफ़्ज़ों में भी बयान नही किया जा सकता था और मैं उस आनंद को एक सफर तक सिमट ना रखकर कयि दिनो बल्कि कयि हफ्तों तक खींचना चाहता था. मगर ऐसा संभव तो नही था.

"" ये रहस्य केवल रैलगाड़िया/मोटर गाड़िया ही जानती है... . . किस तन का टिकट कहाँ का था और कोनसा मन कोणसे स्टेशन पर उतर गया """

सुनीता के जाने के बाद मै दोबारा से बस की भीड़ में तन्हा हो गया था और तभी अचानक से बस वाले ने सफर में सुनने वाला एक बेहद कर्णप्रिय गाना बजा दिया।

साजन मेरा उस पार है

मिलने को दिल बेकरार है

जिनकी चाहत में आखियाँ तरसी है

जिनसे मिलने को बरसो बरसी है

होने वाला उनक दीदार है

उनको भी मेरा इन्तजार है

होने वाला उनक दीदार है

उनको भी मेरा इन्तजार है

घूँघट मेरा जब उठाएँगे

इक दूजे में हम खो जाएँगे

कदमों में उनके ही संसार है

ये तो जन्मों-जन्मों का प्यार है

साजन मेरा उस पार है

मिलने को दिल बेकरार है।

इस गाने के बोल सुनकर मै अपनी मृग तृष्णा की निद्रा से जाग गया और मुझे मेरी बेटी रिंकी के कुछ दिन पहले भेजे गए बेहद कामुक्, मैसेज के शब्द मेरे अंतर्मन मे सुनाई देने लगे।

((पापा आज शाम होने को आयी थी। आज ना जाने क्यों मुझे घर में अकेला-अकेला लग रहा था। वो मौसम होता है ना, आंधी के बाद वाला। खुला आसमान, ठंडी हवा, आसमान का रंग हल्का सा केसरी, और मेरी मदहोशी और पागलपन को बढ़ता हुआ। मैं अकेली हूँ, मेरा मन अकेला है, मेरा शरीर अकेला है, और मैं अकेला नहीं रहना चाहती।मुझे अपनी धड़कन का बढ़ना महसूस हो रहा है। मानो कोई ज़ोर-ज़ोर से मेरे शरीर के अंदर से मेरे दिल के दरवाज़े को बजा रहा हो और चीख रहा हो, “आज, आज, आज, आज!” अभी जिंदगी में बहुत मोड़ और पड़ाव बाकी हैं पर मुझे पता नहीं आपको ये अपनी नादान रिंकी की फीलिंग्स पसंद आएगी या नहीं।

"" इतनी देर भी मत करना वापस लौटने में, कि चाबिया भी बेअसर हो जाये तालों पर ""

मेरा कौमार्य मुझसे कहता है की उठती है कसक आ जा.... दिल करे धक धक आ जा.... कब होगा मिलन आ जा... आजा सजन आजा..... मेरा दिल अकेला है और मेरा शरीर कुंवारा। पापा जिस दिन आप वापस आयेंगे आप मेरे दिल का स्पर्श करेंगे। अपना ख्याल रखियेगा। - आपकी राह देखती "रिंकी".......,))

अब मुझे घर जाने की जल्दबाज़ी भी हो रही थी, मुझे ना जाने क्यों रिंकी की बहुत चिंता हो रही थी. वो कितने रात से अकेली थी. मै और कुसुम (पति पत्नी) जब जिस्मानी मिलन मे संलग्न होते थे तो वो बेचारी शायद मेरी यादों में जल रही होती थी.

हालाँकि मेरी बेटी और मेरे बीच इस समय असलियत में बाप बेटी के सिवा और कुछ भी नही था. तो मेरा दिल ना जाने क्यों बैचैन होता जा रहा था. जब भी मुझे ख़याल आता कि जब मैं कल रात कुसुम के साथ कितना आनंदमयी समय बिता रहा था और मेरी बेटी रिंकी बिल्कुल तन्हा बिल्कुल अकेली सूने घर में मेरे आने की राह देख रही थी तो मेरे दिल पर आरी सी चल जाती.

रिंकी का चेहरा रह रहकर मेरी आँखो के सामने आ जाता और मुझे ऐसा लगता है जैसे मैने जिंदगी का जो सुख पाया है उसके बदले मुझे कोई भारी कीमत देनी है.

"" जिस प्यार में आतुरता है, तेजी है, छटपटाहट और बेचैनी है, वह प्यार कयामत लाकर ही रहेगा""

जैसे जैसे घर नज़दीक आता जा रहा था मेरी धड़कन बढ़ती जा रही थी. मैं अपने मन को तस्सली दे रहा था कि मेरी बेटी के साथ मेरे रिश्ते में कुछ भी ग़लत नही था और जो ग़लती मेने उससे दूरी बनाकर की थी उसे मैं आज एक ही दिन में दूर कर दूँगा, कि आज दिन और पूरी रात मैं उसे इतना प्यार करूँगा कि वो पिछले दिनो की तन्हाई भूल जाएगी, मैं उसे इतना प्यार करूँगा कि मुझे उसे छोड़ने के लिए बोलेगी तो भी उसे नही छोड़ूँगा. उसे इतना प्यार करूँगा, इतना प्यार करूँगा........

तभी बस कंडेक्टर ने आवाज लगाई दर्पण कालोनी वाले बाहर निकल आये..... मै अपना बैग उठा कर बस से उतर गया। घर एकदम नजदीक था...... मैं तेज़ तेज़ कदम उठा रहा था. मेरी उस समय एक ही ख्वाहिश थी कि जल्द से जल्द अपनी प्यारी बेटी रिंकी का खूबसूरत चेहरा देख लूँ, तभी मेरे दिल को सकुन आने वाला था. मगर घर के दरवाजे पर पहुँचते ही मेरे पैर ठिठक गये. मुझे घबराहट होने लगी........

जब मै घर में दाखिल हुआ तो देखा रिंकी घर पर नही थी. मेरे पापा ने बताया वो स्कूल गयी है...... ये सुनकर मेरे मुह से तेज आवाज में निकल पड़ा मगर इतनी सुबह सुबह स्कूल कौन जाता है, और वो भी ऐसे मौसम में?

मेरी तेज आवाज सुनकर पापा थोड़े सहम गये और धीरे से बोले अरुण बेटा क्या हुआ है, इस तरह क्यों नाराज हो रहे हो.... रही बात मौसम की वो तो एकदम सही है मगर सफर की थकान या फिर भूख से तेरा मूड जरूर खराब हो गया है। चल एक काम कर जल्दी से हाथ मुह धो ले, मै खाना लगाता हूं।

मुझे नही पता मुझे क्या हो रहा था.... अपनी बेटी की जुदाई कहिये या उसके

मैसेज के जरिये भेजे दर्द और प्यार भरे शब्दों ने मेरे अंदर भूचाल मचा दिया था....

मैने पापा को सॉरी कहा और हाथ मुह धोकर वापस उनके पास बैठ गया।

बेटा अरुण अब तुम्हारा मूड ठीक है,पापा ने बात शुरु करते हुए मुझसे पूछा??? मैने सर हिला कर उन्हे हाँ का इशारा किया..... कुछ देर शांत रहने के बाद पापा ने बड़े प्यार से पूछा बेटा...........तेरी मम्मी खुश तो है ना???

हा पापा.....मम्मी खुश है, लेकिन आप इस तरह क्यो पूछ रहे हो......??? मैने भी कम शब्दों में सवाल कर दिया। फिर वो थोड़े शांत से हो गये। और मुस्कुरा कर बोले बेटा

आज मै तुझे बता रहा हूँ उसको एक बाप बेटे के रिश्ते से नही एक दोस्त के रिश्ते से समझने की कोशिश करना वैसे भी जब बाप का जूता बेटे के पैर में आने लगे तबसे उनको मित्रवत बातचीत करनी चाहिए । तेरी मम्मी के साथ हमारी उम्र के अंतर का फ़ासला हमेशा से हमारी खुशियों के आगे एक दीवार बन कर खड़ा रहा है। तेरी मम्मी के साथ जब मेरी शादी हुयी तो उस समय मेरी उम्र 35 तेरी उम्र के लगभग और तेरी मम्मी की उम्र रिंकी बेटी के बराबर थी।

शादी के बाद उम्र का ये अंतर शादीशुदा जोड़ो के बीच भावनाओ का, विचारों का, सोच, पसंद- नापंसंद, का एक सामंजस्य ठीक से स्थापित नही हो पाता है। मेरी हमेशा से एक परिपक्व मैच्योर स्त्री से शादी करने की इच्छा थी। जिसकी तलाश में मेरी उम्र बढ़ती गयी..... लेकिन मुझे मेरी पसंद की हमउम्र परिपक्व स्त्री नही मिली। शायद उस जमाने में घरों में अधिक उम्र तक लड़किया कुवारी बैठाने का रिवाज नही था। फिर एक वक्त ऐसा आया तेरे दादाजी के रुतबा, अमीरी, मेरी सरकारी नौकरी के लालच में और तेरे नाना ने गरीबी के आगे समर्पण करते हुए अपनी जवान बेटी को मुझ जैसे उम्र में दुगुने आदमी के साथ ब्याह दिया।

लेकिन वो ये भूल गए उम्र का ये अंतर हम दोनों को कभी भी खुश नही रख पायेगा.... तेरी मम्मी जैसे जैसे बड़ी, परिपक्व, होती जा रही थी और मै बूढा होता जा रहा था। आज तेरी मम्मी भविष्य के हँसी सपने देख कर खुश होने की कोशिश करती है और मै अपने अतीत को याद कर खुश होता हु। भविष्य की कल्पना सिर्फ मैच्योर और अतीत की कल्पना सिर्फ बूढ़ा ही करता है।

ये तो तुझे भी अच्छे से पता है तेरी मम्मी से तेरे विचार, सोच, पसंद ना पसंद मुझसे बेहतर मिलती है और जो मुझे पसंद है वो तुम दोनों ने कभी पसंद नही किया। इसीलिए शायद अपने मन में बसे किसी हँसी सपने को पूरा करने के लिए वो बहू के साथ गयी है।

अपनी मम्मी को खुश रखना तेरा फर्ज है। मेरी तो उम्र 68-70 के आंकड़े को छूने वाली है। और तेरी मम्मी पचास के पास पहुँच गयी है। पचास का आंकड़ा बड़ा जादुई होता है, एक अलग ख़ूबसूरती होती है इसकी तजुर्बे की लकीरें माथे पे होती है

पर गाल अब भी गुलाबी होते है, बच्चों से बेफ़िक्री का आलम होता है, खुद के लिए जीने का मन करता है, रंग भरने लगते है अपने सपनों में, रंगने लगते बालों को जिंदगी की तरह गुनगुनाने लगते,आईने में मुस्कुराने लगते, नीला,पीला,चटकीला सब पहनने लगते, ये उम्र बहुत कुछ कहती है, ये दीपक की वो लौ होती है जो बुझने से पहले पूरा ज़ोर लगाती है, पूरी ताकत से कमज़ोर पर फैलाती है, और फ़िर ख़ुशी, ख़ुशी बुझ जाती है।

कभी कान लगा सुनना तुम अपनी मम्मी के मन की आवाज......कहती है मरने से पहले जी लेना.......मौका मिला है इसे ना खो देना

मैने उनकी बात खतम होते ही कहा.... पापा आपने कुसुम की राजीखुशी के बारे में मुझसे नही पूछा..... क्यों....????

पापा मुस्कुरा कर बोले बेटा तू मेरी तरह इतना भी नालायक नही है जो अपनी पत्नी को दुखी करे। ये मै इसलिए बोल रहा हूँ क्योकि मै तेरी मम्मी को वो खुशी कभी नही दे पाया जिस पर उनका हक था। अपनी मम्मी को मुझसे ज्यादा तू जानता हूँ, उन्हें मुझसे ज्यादा तेरे साथ रहने से खुशी मिलती है,

पापा मुझे खाने की प्लेट देते हुए बोले बेटा आज अपने पापा के हाथ की बनी हुई दाल रोटी बाप बेटे एक साथ बैठ कर खाते है और मै तुझे अपनी पुरानी यादे बताता हूँ। जिससे तेरी आने वाले जीवन में कब और कैसे निर्णय लेना है, उन निर्णयो को लेने में बहुत मदद मिलेगी।

दरसल मै भी पापा से मम्मी के बारे में बात करना चाहता था तो मैने सोचा ये मौका अच्छा है और मै पापा की बातें बड़े ही ध्यान से सुनने लगा।

मैने खाने का एक निवाला खाया, तो मजा ही आ गया मैने कहा आप तो कमाल का खाना बनाते हो।

पापा बोले बेटा मेरे लिए नया नही है मै जब अलग अलग शहरों में तेरी मम्मी से दूर नौकरी करता था तो नयी जगह और नयी पोस्टिंग में ये शुरू के कुछ दिन अपने को adjust करने में निकल जाते ! .बीबी बच्चों की याद तो आती थी पर उसका कुछ खास असर नहीं होता था .. काम की मसरूफियत में सब कुछ भूल जाता था ! अकेलापन कभी कचोटता नहीं .. सुबह जल्दी निकल जाता था और घर वापस आते काफी रात हो जाती थी ...

और फिर जब धीरे धीरे मैंने वहां का काम संभाल लिया .. काम कम होता गया और मेरे पास समय की कमी या काम का बोझ नहीं रहा ! शाम को अब मैं घर जल्दी अ जाता था ..पर अकेलापन मानो पहाड़ जैसे लगता था .. बीबी और बच्चों की याद आती ... समय काटे नहीं कटता .. उन दिनों मोबाइल जैसी सुवुधाएं भी नहीं थीं I STD कॉल से बात करना भी अपने आप में भारी मुसीबत होती थी ...

मैं वहां का senior most ऑफिसर था इसलिए बाकि junior ओफ्फिसर्स से ज्यादा घूल मिल भी नहीं सकता .. शहर भी छोटा था , समय बीताने के कुछ और साधन भी नहीं थे ..बस ऑफिस , और घर और कभी कभी पिक्चर देख लेता था वहां के एक लौते हाल में !

एक दिन पड़ोस में एक नया परिवार आया था. एक औरत और तीसरी या चौथी में पढ़ने वाले 2 जुड़वां लड़के. मेरे ऑफिस में काम करने वाले रमेश बाबू उसी महल्ले में रहते थे. उन से ही पता चला था कि वह औरत विधवा है. हमारे ऑफिस में ही उस के पति काम करते थे. कुछ साल पहले बीमारी की वजह से उन का देहांत हो गया था. उन्हीं की जगह उस औरत को नौकरी मिली थी. पहले अपनी ससुराल में रहती थी, परंतु पिछले महीने ही उन के तानों से तंग आ कर यहां रहने आई थी.

‘‘बच कर रहना बड़े साहब, बड़ी चालू औरत है. हाथ भी नहीं रखने देती,’’ जातेजाते रमेश बाबू यह बताना नहीं भूले थे. शायद उन की कोशिश का परिणाम अच्छा नहीं रहा होगा. इसीलिए मुझे सावधान करना उन्होंने अपना परम कर्तव्य समझा.

सौजन्य हमें विरासत में मिला है और पड़ोसियों के प्रति स्नेह और सहयोग की भावना हमारी अपनी कमाई है. इन तीनों गुणों का हम पुरुषवर्ग पूरी ईमानदारी से जतन तब और भी करते हैं जब पड़ोस में एक सुंदर स्त्री रहती हो. इसलिए पहला मौका मिलते ही मैं ने उसे अपने सौजन्य से अभिभूत कर दिया.

औफिस से लौट कर मैं ने देखा वह सीढि़यों पर बैठी हुई थी.

‘‘आप यहां क्यों बैठी हैं?’’ मैं ने पूछा.

‘‘जी… सर… मेरी चाभी कहीं गिर कई है, बच्चे आने वाले हैं… समझ नहीं आ रहा

क्या करूं?’’

‘‘आप परेशान न हों, आओ मेरे घर में आ जाओ.’’

‘‘जी…?’’

‘‘मेरा मतलब है आप अंदर चल कर बैठिए. तब तक मैं चाभी बनाने वाले को ले कर आता हूं.’’

‘‘जी, मैं यहीं इंतजार कर लूंगी.’’

‘‘जैसी आप की मरजी.’’

थोड़ी देर बाद रचनाजी के घर की चाभी बन गई और मैं उन के घर में बैठ कर चाय पी रहा था. आधे घंटे बाद उन के बच्चे भी आ गए. पल भर में ही मैं ने उन का दिल जीत लिया.

रविवार को उन्हें ले कर मंडी की चाट खाने का तो जैसे नियम बन गया था. रचनाजी अब मेरी खूबसूरत रचना हो गई थीं. अब किसी भी फैसले में रचना के लिए मेरी अनुमति महत्त्वपूर्ण हो गई थी.

हमारे देश में आये दिन महापुरुषो की जनम जयंतिया तो होती ही रहती है. इन्ही जनम जयंती की वजह से हमारे ऑफिस में भी 2 दिन की छुट्टी थी, इसलिए उस दिन मैं घर पर ही था. अमूमन छुट्टी के दिन मैं रचना के घर ही खाना खाता था. परंतु उस रोज बात कुछ अलग थी. घर में दोनों बच्चे नहीं थे.

‘‘क्या मैं अंदर आ सकता हूं रचना?’’

‘‘अरे सर अब क्या आप को भी आने से पहले इजाजत लेनी पड़ेगी?’’

खाना खा कर दोनों टीवी देखने लगे. थोड़ी देर बाद मुझे लगा रचना कुछ असहज सी है.

‘‘क्या हुआ रचना, तबीयत ठीक नहीं है क्या?’’

‘‘कुछ नहीं, बस थोड़ा सिरदर्द है.’’

अपनी जगह से उठ कर मैं उस का सिर दबाने लगा. सिर दबातेदबाते मेरे हाथ उस के कंधे तक पहुंच गए. उस ने अपनी आंखें बंद कर लीं. हम किसी और ही दुनिया में खोने लगे. थोड़ी देर बाद रचना ने मना करने के लिए मुंह खोला तो मैं ने आगे बढ़ कर उस के होंठों पर अपने होंठ रख दिए.

उस के बाद रचना ने आंखें नहीं खोलीं. मैं धीरेधीरे उस के करीब आता चला गया. कहीं कोई संकोच नहीं था दोनों के बीच जैसे हमारे शरीर सालों से मिलना चाहते हों. दिल ने दिल की आवाज सुन ली थी, शरीर ने शरीर की भाषा पहचान ली थी.

उस के कानों के पास जा कर मैं धीरे से फुसफुसाया, ‘‘प्लीज, आंखें न खोलना तुम… आज बंद आंखों में मैं समाया हूं…’’

मै धीरे-धीरे रचना के ब्लाउज के बटन को खोलने लगा,,, और रचना भी अपने हाथों से मेरे पेंट के बटन को खोलकर उसके चेन को नीचे सरकाने लगी,, यही अदा रचना को मेरी नजर में तेरी मम्मी से अलग करती थी। क्योंकि रचना अच्छी तरह से जानती थी कि एक मर्द को खुश करने के लिए औरत को क्या करना चाहिए। मै रचना के ब्लाउज के सारे बटन खोल चुका था और ब्लाउज के ऊपर से ही उसके संतरों को दबा रहा था। रचना तो मेरी ईस हरकत की वजह से गरम हुए जा रही थी और उसके मुंह से लगातार सिसकारी की आवाज आ रही थी।

सससससहहहहहहह,,,,,,,,, आााहहहहहहहहह,,,,,,,, मेरे राजा ऐसे नहीं पहले मेरी ब्रा और ब्लाउज दोनों को निकाल दो और फिर मेरी चुचियों को मुंह में भर भर कर दबा-दबा कर पीअो,,,,,, रुको मै हीं निकाल देती हूं मेरे राजा,,,,,,( इतना कहने के साथ ही वह ब्लाउज को अपनी बाहों से निकाल सके और अपने दोनों हाथों की से ले जाकर ब्रा के हुक को खोल दी,,,,, और रचना ने ब्रा को भी निकाल फेंकी। ब्रा कोे बदन से दूर होते ही रचना की गोल-गोल नारंगीया मेरी आंखों में चमकने लगी,,, नंगी चूचियों को देख कर पागल सा हो गया और सीधे अपने मुंह को चुचियों के बीच डालते हुए बोला।।

ओह मेरी जान मेरी तो तुम्हारी यही अदा तो मुझे तुम्हारा दीवाना बना दि है। यही सब अदा तो मेरी बीवी में नहीं है तभी तो मुझे वह बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती।। क्योंकि खूबसूरती ही सब कुछ नहीं होती औरतों को अपने पति को कैसे खुश करना है यह भी आना चाहिए जो कि मेरी बीवी को बिल्कुल भी नहीं आता। मैं हूं ना मेरी जान मैं तुम्हें सारा सुख दूंगी,,,, (इतना कहने के साथ ही रचना अंडर वियर में तने हुए लंड को अंडरवियर के ऊपर से ही मसलने लगी,,,, और रचना की ईस हरकत पर मै गरम आहें भरने लगा।,,,)

रचना मस्त हुए जा रही थी,वो अपनी चूचियों को चुसवाते हुए धीरे से मेरी अंडर बीयर को नीचे सरकाई और हथियार को बाहर निकाल कर मुठीयाने लगी,,,, मैं भी एकदम से चुदवासा हुए जा रहा था।

धीरे-धीरे रचना ने मेरी शर्ट के सारे बटन को खोलते हुए घुटनों के बल बैठ गई मै कुछ समझ पाता इससे पहले ही रचना ने टनटनाए हुए लंड को अपने मुंह में भर कर चुसना शुरु कर दी।

आहहहहहह,,,,,, रचना,,,, ( मैं एकदम से उन्माद मैं भर चुका था आंखें सुख की अनुभूति करते हुए बंद होने लगी। रचना को तो जैसे कोई आइसक्रीम कौन मिल गई हो इस तरह से ऊसे मुंह में भर कर चुसे जा रहीे थी। रचना कि यह अदा मुझ को पागल किए जा रही थी । यही सब बातों की वजह से तेरी मम्मी दूसरी औरतों से बिल्कुल अलग थी और जिस प्रकार से रचना अपनी अदाओं से मुझ को संपूर्ण रूप से संतुष्टि प्रदान कर रही थी यही अदा मै तेरी मम्मी में देखना चाहता था।

हम दोनों कामातूर हो चुके थे रचना की सांसे ऊपर-नीचे हो रही थी मैने एक पल भी रुके बिना रचना की बाहों को पकड़कर उपर की तरफ उठाया और उसे बेड पर बिठा दिया,,,, बेड पर बैठते ही रचना को समझ में आ गया कि उसे क्या करना है इसलिए उसने झट से अपनी साड़ी को धीरे-धीरे सरकाते हुए अपने कमर तक चढ़ा ली और अपनी जांघों को फैला दी। यह नजारा देख कर एकदम कामातुर हो गया मुझसे रहा नहीं गया और घुटनों के बल बैठ कर. रस से भरी रसमलाई को देखकर अपना मुंह सीधे उस रसमालाई में डाल दिया,,, और जीभ से नमकीन रस को चाटना शुरू कर दिया। रचना तो पागल हुए जा रही थी उसके बदन में उन्माद का संचार बड़ी तेजी से हो रहा था। और साथ ही वह अपने दोनों हाथ से मेरा सिर पकड़कर उसका दबाव अपनी जांघों के बीच बढ़ा रही थी।

रचना एकदम से चुदवासी हो चुकी थी ।

मेरी प्यासी बुर तड़प रही है तुम्हारे लंड के लिए, उसकी काम ज्वाला और ज्यादा भड़क चुकी थी। एेसे मादक माहौल में रचना की गंदी बातें माहौल को और ज्यादा गर्म कर देती थी और यही बात मुझ को बेहद प्यारी लग रही थी जो कि एसी ही उम्मीद मै तेरी मम्मी से करता था लेकिन तेरी मम्मी नें कभी भी ऐसे उत्तेजक मौके पर गंदी बातें कभी भी नहीं की।

रचना को तड़पती देखकर मै उतावला हो चुका था अपने लंड को दहकती हुई बुर में डालने के लिए इसलिए वह अपना मुंह उसकी रसीली बुर पर से हटा लिया और खड़ा हो गया। एक हाथ से अपना लंड पकड़ कर सीधे रचना के बुर पर टिका दिया,,,,, रचना की हालत खराब होने लगी और देखते ही देखते ही रचना कि बुर ने पूरे समुचे लंड को अपने अंदर उतार अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। रचना की तो हालत खराब होने लगी उसके मुंह से तो सिसकारीयो की जैसे की फुहार छूटने लगी हो,,,,,

ससससससहहहहहह,,,,, आााहहहहहह,,,,,, आहहहहहहह,,,,, मेरे राजा ,,,,, और जोर जोर से चोदो मुझे,,,,, आहहहह जोर से,,,,,, अपने लंड को मेरी बुर में पेलो,,,, मेरी बुर को पानी पानी कर दो,,, बस एेसे ही,,,,, आहहहहहहह,,,,,,,,,,,,

रचना की ऐसी गंदी बातें सुनकर मै जोर-जोर से रचना की चुदाई कर रहा था।

ओह रचना जैसा तुम खुल कर चुदवा रही हो वैसा मेरी बीबी कभी भी नही चुदवाती इसलिए तो मुझे मेरी बीवी से ज्यादा मजा तुमसे मिल रहा है इसलिए तो मैं तुम्हारा दीवाना हो चुका हूं। आाााहहहहहह मेरी रचना,,,, आहहहहहहह,,,,,,

दोनों की सांसे तेज गति से चल रही थी दोनों मस्त हो चुके थे धक्के पर धक्का लगाए जा रहा था,,,, और रचना भी धक्के का जवाब मुझ को अपनी बाहों में भींच कर दे रही थी। करीब 10 मिनट ही बीता होगा कि मेरी और रचना दोनों की साँसे तेज होने लगी और एक साथ दोनों का बदन अकड़ने लगा। और दोनों एक साथ झड़ गए,,,,,

न जाने कितनी देर हम दोनों एकदूसरे की बांहों में बंधे चुपचाप लेटे रहे दोनों के बीच की खामोशी को मैं ने ही तोड़ा, ‘‘मुझ से नाराज तो नहीं हो तुम?’’

‘‘नहीं, परंतु अपनेआप से हूं… आप शादीशुदा हैं और… मै विधवा’’

""यह सच है, कितने रिश्ते बिना फेरों के भी होते हैं,

कुछ चोरी छुपे होते हैं ,और कुछ खुलेआम होते हैं।""

‘‘रचना, मेरी शादी महज एक समझौता है जो हमारे परिवारों के बीच हुआ था. बस उसे ही निभा रहा हूं… प्रेम क्या होता है यह मैं ने तुम से मिलने के बाद ही जाना.’’

‘‘परंतु… विवाह…’’

‘‘रचना… क्या 7 फेरे प्रेम को जन्म दे सकते हैं? 7 फेरों के बाद पतिपत्नी के बीच सैक्स का होना तो तय है, परंतु प्रेम का नहीं. क्या तुम्हें पछतावा हो रहा है रचना?’’

शायद आज मैं समाज के अनुसार चरित्रहीन हो गई.’’ रचना गंभीर मुद्रा में बोली।

फिर कई दिन बीत गए, हम दोनों के संबंध और प्रगाढ़ होते जा रहे थे. मौका मिलते

ही हम काफी समय साथ बिताते. एकसाथ घूमनाफिरना, शौपिंग करना, फिल्म देखना और फिर घर आ कर उसके बच्चो के सोने के बाद एकदूसरे की बांहों में खो जाना दिनचर्या में शामिल हो गया था. औफिस में भी दोनों के बीच आंखों ही आंखों में प्रेम की बातें होती रहती थीं.

बीचबीच में मैं अपने घर आ जाता और तेरी मम्मी के लिए और तेरे लिए ढेर सारे उपहार भी ले जाता. देखते ही देखते 2 साल बीत गए. अब तेरी मम्मी मुझ पर तबादला करवा लेने का दबाव डालने लगी थी. इधर रचना भी हमारे रिश्ते का नाम तलाशने लगी थी. मैं अब इन दोनों औरतों को नहीं संभाल पा रहा था. 2 नावों की सवारी में डूबने का खतरा लगातार बना रहता है. अब समय आ गया था किसी एक नाव में उतर जाने का.

रचना से मुझे वह मिला जो मुझे तेरी मम्मी से कभी नहीं मिल पाया था, परंतु यह भी सत्य था कि जो मुझे तेरी मम्मी के साथ रहने में मिलता वह मुझे रचना के साथ कभी नहीं मिल पाता और वह था सामाजिक सम्मान. यह सब कुछ सोच कर मैं ने तबादले के लिए आवेदन कर दिया.

‘‘तुम वापस जा रहे हो?’’

रचना को पता चल गया था, हालांकि मैं ने पूरी कोशिश की थी उस से यह बात छिपाने की. बोला, ‘‘हां. वह जाना तो था ही…’’

‘‘और मुझे बताने की जरूरत भी नहीं समझी…’’

‘‘देखो रचना मैं इस रिश्ते को खत्म करना चाहता हूं.’’

‘‘पर तुम तो कहते थे कि तुम मुझ से प्रेम करते हो?’’

‘‘हां करता था, परंतु अब…’’

‘‘अब नहीं करते?’’

‘‘तब मैं होश में नहीं था, अब हूं.’’

‘‘तुम कहते थे तुमहारी पत्नी मान जाएगी… तुम मुझ से भी शादी करोगे… अब क्या हो गया?’’

‘‘तुम पागल हो गई हो क्या? एक पत्नी के रहते क्या मैं दूसरी शादी कर सकता हूं?’’

‘‘मैं तुम्हारे बिना कैसे रहूंगी? क्या जो हमारे बीच था वह महज.’’

‘‘रचना… देखो मैं ने तुम्हारे साथ कोई जबरदस्ती नहीं की, जो भी हुआ उस में तुम्हारी भी मरजी शामिल थी.’’

‘‘तुम मुझे छोड़ने का निर्णय ले रहे हो… ठीक है मैं समझ सकती हूं… तुम्हारी पत्नी है, बच्चे हैं. दुख मुझे इस बात का है कि तुम ने मुझे एक बार भी बताना जरूरी नहीं समझा. अगर मुझे पता नहीं चलता तो तुम शायद मुझे बिना बताए ही चले जाते. क्या मेरे प्रेम को इतने सम्मान की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए थी?’’

तुम्हें मुझ से किसी तरह की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए थी.’’

‘‘मतलब तुम ने मेरा इस्तेमाल किया और अब मन भर जाने पर मुझे…’’

‘‘हां किया जाओ क्या कर लोगी… मैं ने मजा किया तो क्या तुम ने नहीं किया? पूरी कीमत चुकाई है मैं ने. बताऊं तुम्हें कितना खर्चा किया है मैं ने तुम्हारे ऊपर?’’

कितना नीचे गिर गया था मैं… कैसे बोल गया था मैं वह सब. यह मैं भी जानता था कि रचना ने कभी खुद पर या अपने बच्चों पर ज्यादा खर्च नहीं करने दिया था. उस के अकेलेपन को भरने का दिखावा करते करते मैं ने उसी का फायदा उठा लिया था.

‘‘मैं तुम्हें बताऊंगी कि मैं क्या कर सकती हूं… आज जो तुम ने मेरे साथ किया है वह किसी और लड़की के साथ न करो, इस के लिए तुम्हें सजा मिलनी जरूरी है… तुम जैसा इनसान कभी नहीं सुधरेगा… मुझे शर्म आ रही है कि मैं ने तुम से प्यार किया.’’

उस के बाद रचना ने मुझ पर मेरे सीनियर को एक हरेशमेंट का शिकायती आवेदन दिया.

पूरा महल्ला / ऑफिस रचना पर थूथू कर रहा था. वैसे भी हमारा समाज कमजोर को हमेशा दबाता रहा है… फिर एक अकेली, जवान विधवा के चरित्र पर उंगली उठाना बहुत आसान था. उन सभी लोगों ने रचना के खिलाफ सीनियर को शिकायते दी जिन के प्रस्ताव को उस ने कभी न कभी ठुकराया था.

बेहस् में रचना हार गई थी. सीनियर ने उस पर मुझे बदनाम करने का इलजाम लगाया. अपने शरीर को स्वयं परपुरुष को सौंपने वाली स्त्री सही कैसे हो सकती थी और वह भी तब जब वह गरीब हो?

रचना के पास न शक्ति बची थी और न पैसे, जो वह केस पुलिस थाने या कोर्ट ले जाती. उस शहर में भी उस का कुछ नहीं बचा था. अपने बेटों को ले कर वह शहर छोड़ कर चली गई. जिस दिन वह जा रही थी मुझ से मिलने आई थी.

‘‘आज जो भी मेरे साथ हुआ है वह एक मृगतृष्णा के पीछे भागने की सजा है. मुझे तो मेरी मूर्खता की सजा मिल गई है और मैं जा रही हूं, परंतु तुम से एक ही प्रार्थना है कि अपने इस फरेब की विरासत अपने बेटे में मत बांटना.’’

मैने भविष्य को ध्यान में रखते हुए अपने दिल पर पथतर रख कर एक सही निर्णय लिया जिसका नतीजा आज तुम देख ही रहे हो। बेटा अरुण मै तेरी मम्मी को ये सब खुल कर बता तो नही सकता था लेकिन उनसे माफी तो मांग सकता था और मैने उनसे माफी मांगी और उन्होंने मुझे माफ कर दिया और आज हम सब कितने खुश है।

पापा अपनी आँखों में आँसू भर कर बोले बेटा पत्नी की दूरियाँ कभी कभी मजबूरी में किस के साथ कब नजदीकियां बन जाये पता नही चलता है..... इसलिए तुम अब बहू की गैर मौजूदगी में जो भी निर्णय लेना बहुत सोच समझ कर लेना मै सिर्फ अपनी जिंदगी की पुरानी कहानी बता कर यही समझाने की कोशिश कर रहा हूँ.... .अंततः पापा खामोश हो गये।

पापा की कहानी सुनकर मै मन ही मन सोच रहा था पापा कह तो सही रहे है लेकिन एक सच रचना ने कहा था कि ""अपने फरेब की विरासत अपने बेटे में मत बांटना… लेकिन पापा फरेब की विरासत आपकी पत्नी और बेटे में बंट चुकी है.""

""पापा ने मम्मी से माफी मांग कर अपना पल्ला झाड़ लिया था और खुश है, उसका दूसरा रूप मैने अभी कुछ दिनों में देखा है, मम्मी की वो इच्छा, काम वासना, उनके जिस्म की गर्मी, हवस की भूख को मैने महसूस किया है। ""

""मै पापा की खुश फेहमी कि मम्मी बहुत खुश है, पापा के चेहरे की ख़ुशी को देखकर कुछ नही बोला और ना ही मै उन्हें शर्मिंदा करना चाहता था।""

अरुण बेटा क्या सोच रहे हो जो भी कहना सुनना है बेझिझक बोल सकते हो। तुम भी शादीशुदा एक बेटी के बाप हो तो फिर अपने बाप से इतना क्यों शर्मा रहे हो...?????

मैने आखिर अपने दिल की बात कहने का फैसला लिया और पापा से बोला अगर आप समझ पाये तो एक बात पूछना चाहता हू। हालांकि ये बात एक बेटे के लिए अपनी माँ के बारे में अपने बाप से पूछना कितनी सही है या गलत ये मै नही जानता लेकिन आप इजाजत दे तो पूछूँ.....????

पापा-- पूछो बिना झिझके बेटा।

पापा अगर आप मम्मी को किसी के साथ....... आप समझ रहे है ना मै क्या कहना चाहता हूँ।

पापा समझ गये एक लंबी सांस लेते हुए बोले.........

पहली बात तो ऐसा होना संभव नहीं है। लेकिन फिर भी यदि ऐसा कभी हो जाए तो पहले तो यह जानने की कोशिश करूँगा कहीं उसके साथ बलात्कार तो नहीं हो रहा? यदि ऐसा कुछ समझ आता है तो ऐसा करने वाले पर हमला कर सकता हूँ बिना परवाह किए कि वह मरे या बचे।

और यदि यह स्पष्टतयः समझ आ रहा हो कि वह स्वेच्छा से यह काम कर रही है, तो उसे उस वक्त डिस्टर्ब नहीं करूँगा। केवल दूर से देखूँगा। उसके आनंद को, उसके सुख को, महसूस करने का प्रयास करूँगा। सामने अपनी पत्नी को इस तरह देखकर मन में शायद कुछ जलन भी हो, लेकिन उस पर क्रोध नहीं आएगा, प्रेम ही आएगा।

मेरी पत्नी क्या खाए यह उसकी स्वतंत्रता है, क्या पहने यह भी उसकी स्वतंत्रता है, कहाँ जाए, किससे मिले, किसके साथ क्या करे यह भी उसकी स्वतंत्रता है। मेरी पत्नी मेरी सम्पत्ति तो नहीं है, मेरी गुलाम भी नहीं कि केवल वही करे जो मैं चाहूँ।

हाँ मेरी पत्नी इस स्वतंत्रता के साथ वह मुझसे बहुत प्रेम करती है। एक बार उसके मन में किसी के साथ ऐसा करने की इच्छा जताई थी, मैंने उसी क्षण उसे गले लगा, लिया बहुत प्यार से उसे कहा कि वह उसकी आजादी है, यदि कोई उसे बहुत अच्छा लगा और उसके साथ कुछ करने की इच्छा जागी तो मैं उसे नहीं रोकूँगा। उसने कुछ दिन उससे बातचीत जरूर की लेकिन बातचीत से आगे नहीं बढ़ी। कहीं मिलने का प्लान बन रहा था लेकिन वह नहीं गई।

आखिर पुरुष अपनी पत्नी को सम्पत्ति क्यों समझता है, इंसान क्यों नहीं? जिसकी अपनी इच्छाएँ भी हो सकती हैं। उसने कोई एक इच्छा पूरी कर ली तो क्या बिगड़ गया? उसका आनंद पति क्यों नहीं महसूस कर पाता? उसके आनंद में भयानक पीड़ा क्यों हो जाती है?

अरुण बेटा तुझे पता है बहू कुसुम ने दूसरे शहर में नौकरी की बात बताई थी तो मैने तुरंत उसको इजाजत दे दी थी इसका कारण मै तुम्हे बताता हूँ अक्सर जिन मर्दों के खुद के चरित्र खराब होते है वो हमेशा से अपनी पत्नी के चरित्र पर शक करते है और यही शक करने की वजह से वो अपनी पत्नी को नौकरी करने से, आगे बढ़ने से, उन्हें खुल कर जीने से रोकते है या जलते हैं। मेरी बात हमेशा याद रखना कुछ पाने के लिए बहुत कुछ खोना पड़ता है, तेरी बीवी कुसुम और मेरी बहू बहुत होनहार है उसकी तरक्की में कभी रोड़ा या टांग मत अड़ाना। उसे अपने सपने पूरे कर लेने दो।

जारी है.........
 
शुक्रिया धन्यवाद आभार

फुल पेज के update पर दो शब्दों का चयन कर लिख देना, बहुत ज्यादा हो जाता है, लेखक सोच में पड़ जाता है आप रीडर के इन प्यारे से दो शब्दों को किस लोकर में सहेज कर रखे 😂😂😂😂😜😜😜😜

आप रीडर अपना बेशकीमती वक्त निकालकर कहानी पढ़ने के लिए आते है, इसके लिए तहे दिल से आपका इस्तकबाल करता हूँ।

आप रीडर भी इस देश के अच्छे नागरिक बनिये... जितनी तेजी से देश की जनसंख्या बढ़ रही है, आप भी अपने प्यारे शब्दों की संख्या बढाइये 🙏🙏

तारीफ कर्ता ना सही तो कम से कम उंगली कर्ता बनिये... 😜 लेखक के पिछवाडे में उंगली कर उसको सोचने के लिए मजबूर करिये वो इससे बेहतर क्यो नही लिखा ✍️ उसको शिखाइये कि वो और अच्छा लिखे।

आप लोग सिर्फ दो शब्दों से ही लेखक को धन्यवाद प्रकट करेंगे तो वो अपनी लेखन कला को कभी नहीं सुधार पायेगा उसके मन में नेगेटिव/पॉजिटिव दोनों भाव आ जाते है वो ये ही सोचता रहेगा कि "" जब पादे पादे कम चल रहा है तो.. हगने की क्या जरूरत है "😂😂😂😂😂😂

आप रीडर से हाथ जोड़ कर 🙏🙏 कर बध् प्राथना है कि अपने कॉमेंट के शब्दों को थोड़ा सा विस्तार करे जिससे लेखक और भी अच्छा लिख सके भले लेखक की गाँड़ फट कर हाथ में आ जाये... 😜✍️😂

बांकी जैसा आपको ठीक लगे... लेखक के लिए आपके दो बोल ही बहुत बड़ा सम्मान है.... 🙏🙏🙏

अंत में खूबसूरत गाने की दो लाइन लिखकर अपने शब्दों को विराम देता हूँ....

"" बोल तेरे दो मीठे मीठे... बात तेरी साची लागे... ""
 
शुक्रिया....... इस बार का update एक बाप द्वारा की गलतियों को उसका बेटा दोबारा ना दोहराए उस विषय में एक सीख लेने/देने वाला था, उम्र के अंतर से भावों, विचारों में फर्क होना लाजमी है, ये अनुभव उम्र के हिसाब से ही समझ आते है।

जिसे आपके अलावा अन्य रीयडर ठीक से नही समझ पाये।

अरुण जब घर वापस आया और बेटी को ना पाकर जिस तरह अपने बाप से जिस तरह पेश आया उसी समय उसके पिता ने अपने अनुभव से समझ लिया.... अब अरुण की जिंदगी में एक बड़ा तूफां आने वाला है। जिस वजह से पिता ने अपना अतीत अपने बेटे से साँझा किया और भविष्य में सही निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया।

मर्द की फितरत के बारे में मेरी जो निजी राय है वो सत्य है किंतु कडवि है " मर्द मांग ले तो जिस्म की भूख, औरत खुद दे तो मोहब्बत " ये कहा का न्याय है।

मर्द हमेशा से औरत से कमजोर रहा है, जिसकी प्रमाण है मर्दाना कमजोरी के इश्तहार से रंगी दीवारें, लोग कहते है कि औरत कमजोर होती है 🤔😜🙏

हर बार की तरह आफरीन रिव्यू के धन्यवाद, आभार शुक्रिया.......
 
बहुत बहुत शुक्रिया

Incest रिलेशन बनाना कोई सहज नही होता है, फीलिंग्स कपलना हर कोई कर सकता हैं, लेकिन ऐसे रिश्ते का अंत क्या होगा इसका जबाब किसी के पास नही होता है, अन्य राइटर सिर्फ रीडर की पसंद के हिसाब से सेक्स कूट कूट कर भर देते है, जो कभी कभी इरीटेट करता है मुझे..... यही वजह है अभी तक कहानी में मैने बेवजह सेक्स को वरीयता नही दी है।

जहा तक हो सकेगा मै अपने रीडर को निराश नही करूँगा, कहानी में सेक्स के साथ सीख भी लिखने का प्रयास कर रहा हूँ।

आप इसी तरह जुड़े रहे धन्यवाद!
 
तेरी बीवी कुसुम और मेरी बहू बहुत होनहार है उसकी तरक्की में कभी रोड़ा या टांग मत अड़ाना। उसे अपने सपने पूरे कर लेने दो।

पापा की अतीत की कहानी और नसीहतो के साथ साथ हमारा खाना भी खतम हो गया और मै पापा की नसीहत को शायद ठीक से समझ नही पाया, और नजर अंदाज कर अपने रूम में चला गया। उस वक्त दोपहर के 2 बज रहे थे, रिंकी को स्कूल से वापस आने में एक घंटा बाकी था। पापा बिजली घर के लिए निकल गये, घर में सिर्फ में ही अकेला था, मैने सोचा नहा धोकर फिर आराम से बाहर मॉल घूम कर आता हूँ। और जब तक वो स्कूल से आयेगी तब तक अपनी बेटी के लिए उसके पंसदीदा पनीर पिज़्ज़ा लाया जाये। मै सारे कपड़े उतार कर शावर खोल कर मजे से नहाने लगा।

थोड़ी देर बाद मै नहा कर वापस अपने कपाट (कपबोर्ड) में पेहनने के लिए चड्डी देखी तो अलमारी में नही थी, मै शोकड हो गया मेरे पास आधा दर्जन चड्डिया है लेकिन अभी एक भी नही मिल रही है, आखिर मेरी सारी चड्डिया गायब कहाँ हो गयी.....????

मै बिना कपड़ो के नँगा ही बिस्तर पर बैठ गया...... मेरे नजरिये से घर में नँगा होकर, रहना, घरेलू कार्य करना कोई शर्मिंदगी की बात नही है, हमारे पूर्वज जंगलो में ही नंगे घूमा करते थे, आज विकसित पशिचिम देशों में अक्सर घर के अंदर सभी सदस्य नंगे ही रहते है।

""क्योकि जिस उम्र में गुप्तांगो में कोई समस्या नही होती उस उम्र में हम मां, बहनो, और अन्य सदस्यों के सामने नंगे घूमते, खेलते रहते है और जब गुप्तांगो से जुड़ी समस्याओं की उम्र आती है तो हम उन्हें मां, बहनो, और अन्य सदस्यों के सामने अंडरवेयर से छुपाना शुरू कर देते हैं।""

तभी मुझे अपनी बेटी रिंकी के मैसेज का ध्यान आया उसने लिखा था ............

(अब मेरी वासना भी चरम पर थी.. पलंग पर पापा का लाल रंग का अंडरवियर था जिस पर हल्के सफेद रंग का चमकीला सा पदार्थ लगा हुआ था.. ..मैंने अंडरवियर को उल्टा किया और मेरी वासना उस अंडरवियर को मेरे होठों तक ले गई और मूतने वाले कट के पास लगे सफेद सूख चुके पदार्थ को मैंने जीभ से चाट लिया..आह ..क्या स्वाद था उसका.. हल्का नमकीन.. और उसमें से आ रही पापा के लंड की खुशबू.. आह.. नाक में लगाकर सूघती रही और चाटती रही..)

मै समझ गया रिंकी मेरे अंडरवियर को चूम कर अपनी प्यासे होंठो की प्यास बुझाती है। रिकी और मेरी मम्मी का एक ही कमरा है, मेरी मम्मी की अनुपस्थि में रिंकी ही पूरे कमरे की मालकिन है। मै कमरे के अंदर दाखिल हुआ और कपबोर्ड को खोल कर देखा तो मेरी सारी चड्डिया मेरी बेटी ने बहुत प्यार से सहेज कर रखी थी।

हाय मेरी बेटी रिंकी तू अपने पापा से इतना प्यार करती हैं.... मै मन ही मन बोला, मुझे अपनी बेटी पर बहुत प्यार आ रहा था। मैने सारी चड्डिया ना उठाते हुए सिर्फ अभी पहनने के लिए एक चड्डी कपबोर्ड में से ले ली। और वापस अपने कमरे में कपड़े पहनकर तैयार होकर मॉल घूमने चला गया।

हाथों से पिज़्ज़ा के डिब्बे को पकड़े हुए मै कब लेडीज अंडरगारमेंट के सेक्शन में पहुँच गया, मुझे पता ही नहीं चला। मैने सोचा मेरी बेटी मेरी चड्डियो को इतना सहेज कर रखे हुए है तो मै भी उसके लिए नई चडी बनियां खरीद कर उसको बिना बताये कपबोर्ड में रख दूंगा, और जब वो उन्हें देखेगी तो उसके लिए इससे भला सरप्राइज गिफ्ट क्या होगा।

सामने काउंटर पर सेल्स गर्ल बोली "" मे आई हेल्प यू सर"....... मै घबराता हुआ जी मुझे चड्डी बनियां लेना है....????

कितना नम्बर सर....????

मै सोचते हुए नम्बर का तो पता नही.....!

वो थोड़ी हँसी...... सौरी सर आपको अपनी चड्डी बनियां का नम्बर नहीं पता.....!

मुझे अपने लिए नही लेना है...!

ओह्ह तो फिर किसके लिए... लेना है..???

मै झिझकता हुआ अपनी बेटी के लिए.....।

बुरा मत मानिये सर लेडी अंडर गारमेंट को ब्रा और पैंटी कहते है..... वैसे आपकी बेटी का ब्रा साइज क्या है ????

मुझे ठीक से नही पता....!

कोई बात नही सर....... उसकी उम्र क्या है, मतलब टीनेजर है अभी, शरीर में कैसी है स्लिम या हेल्थी शरीर की है.....??

मै चुपचाप इधर उधर रिंकी की तरह दिखने जैसी लड़की को अपनी नजर घुमा कर ढूँढने लगा ।

सेल्स गर्ल मन ही मन मुझे शायद चूतिया समझ कर दूसरे ग्राहक के साथ बात करने लगी।

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था सामने की रैक में ब्रा के डिब्बे पर छपी सेक्सी टीन गर्ल के उठे हुए चूचों पर मेरी नज़र जैसे चिपक सी गयी। मैने हाथ बढ़ा कर 2 डिब्बे उठा लिए और आंखों से मॉडल की खूबसूरती का शर्बत पीने लगा।

डिब्बे पर छपी मॉडल का फिगर लगभग मेरी बेटी रिंकी जैसा था । लाल जालीदार ब्रा में सफेद खूबसूरत चूचे तो मॉडल के थे लेकिन मुझ को वहाँ चेहरा रिंकी का दिख रहा था।

पैंट में कड़कपन का अहसास होते ही मैने एक हाथ से लौड़ा एडजस्ट किया और दूसरे हाथ से डिब्बों का सीधा प्रसारण जारी रखा।

अपने ख्यालों में मै इतना खोया था कि कब वहाँ 4 औरतें आ गई मुझे पता ही न चला।

पतली और मधुर आवाज़ में ‘एक्सक्यूज़ मी’ सुनते ही मै हडबड़ा गया और हाथ के डिब्बों को सीने से छिपाते हुए आगे बढ़ गया।

“जाने क्या सोच रही होंगी वो औरत मेरे बारे में?” जैसे खयाल मन में लेकर मै कैश काउंटर पर पहुँच गया। वहाँ भी औरतों की भारी भीड़ होने के कारण मै ब्रा के डिब्बे बाहर निकाल नहीं पाया और न चाहते हुए भी उनका बिल कटवा कर मॉल से बाहर आकर अपनी डिस्कवर बाइक पर बैठ गया।

बाइक पर बैठ कर वापस मैने वो डिब्बे हाथ मे लिए और पैंट के ऊपर से लौड़ा सहलाते हुए उन्हें देखने लगा। ख्यालों में रिंकी को इस ब्रा में सोचते हुए मैने जब अपनी कलाई पर बधी घडी पर नजर डाली तो ब्रा पैंटी के डिब्बे को डिक्की में रख जल्द से जल्द घर जाने का फैसला लिया।

खड़ी दोपहरी का समय था और पार्किंग लॉट खाली था। गाड़ी स्टार्ट कर हॉर्न बजाते हुए जैसे ही मैने बाइक घुमाई, मेरी नजर सीधी सामने वाली कार के आधे खुले शीशे पर पड़ी। अंदर एक लड़का और लड़की एक दूसरे के होंठों को चूसने में लगे थे. लड़की की गुलाबी टॉप छाती से ऊपर थी जिससे लड़की के दोनों चूचे लड़के के हाथों में थे। हॉर्न की आवाज सुनते ही दोनों हड़बड़ाए और लड़की तुरंत नीचे लेट गयी।

उस लड़की को मै जानता था वो मेरी बेटी रिंकी की सहेली रितु (इस कहानी की एक विलेन) थी वो अक्सर रिंकी के साथ कभी कभी घर आया जाया करती थी। सेक्सी टीन गर्ल रितु अभी जवानी में कदम रख रही है। मॉडर्न है, तो वैसा ही पहनावा है। मिनी स्कर्ट और शॉर्ट्स में आधे झांकते चूतड़ हर किसी का ध्यान खींच ही लेते हैं।

उसके जिस्म की बनावट मेरी बेटी रिंकी से इतनी मेल खाती है कि मै भी तिरछी नज़रों से रितु के जिस्म की बारीकियों को हमेशा नाप लेता हूँ।

इसलिए ये नज़ारा देख कर भी मै वहा रुका नहीं, आराम से गाड़ी निकाल कर वहाँ से निकल गया।

घर के बाहर खड़ी स्कूटी देख मै समझ गया मेरी बेटी रिंकी स्कूल से वापस आ गयी है, मै दबे पाँव उसको सरप्राइज करने के लिए धीरे धीरे से उसके कमरे की तरफ जाने लगा....... जैसे जैसे मै दरवाजे के करीब जा रहा था कमरे में से गाने की तेज आवाज आ रही थी......

उठती है कसक आजा,

दिल करे धक धक आजा,

कब होगा मिलन आजा,

आजा सजन आजा..... आजा सजन आजा

मेरे प्यारे सजन, मेरे भोले सजन, अच्छे सजन आजा............

गाने के बोल सुनकर मेरे अंदर संजय दत्त घुस गया.....😂 मै मुंडी (सिर) हिलाते हुए जल्दी से दरवाजे पर पहुँच गया।

दरवाजे के पास पहुँच कर मैने अंदर झाँका तो मेरी आँखे फटी रह गयी...!

रिंकी स्कूल की ड्रेस को धीरे धीरे उतारते हुए बदन को हिला कर निचे ऊपर से हिलाते हुए इंस्टा पर डांस वीडियो बना रही रही थी। उसने शर्ट के ऊपर बंधी टाई खोल दी।

फिर उसने शर्ट के बटन खोल दिये एक अंदर बनियान/समीज जो कंधे के ऊपर डोरी वाला था वही पहनी थी, चूचियां उसमे बड़ी बड़ी और आधा बाहर की तरफ आती हुई दिखाई दे रही थी। और शर्ट निकाल दी मैं चुपचाप खड़ा रहा कुछ ना बोल सका फिर उसने शर्ट को दूधों पर से हटाया और अपने हाथों से अपने सीने को ढक लिया अब वो सिर्फ स्कूल ड्रेस की स्कर्ट और रेड ब्रा में थी

अपनी बेटी का गोरा जिश्म और सीना देख कर मेरी नजरों में चमक सी आ गयी उसके स्तन किसी गोल बॉल की तरह थे उसने ब्रा को थोड़ा सा खिंच दिया जिससे उसके दूध थोड़े दिखने लगे और वह फिर रील बनाने लगी।

रिंकी लाल कलर के ब्रा और स्कूल ड्रेस की स्कर्ट में बहुत ही ज्यादा हॉट लग रही थी ऊपर से अपने बाल खुले रखे थे और होंठ को लाल लिपिस्टक से रंग लिया था जिससे और भी ज्यादा सेक्सी लग रही थी।

(("" आजकल इन्ही इंस्टा वीडियो बना कर फेमस होने और पैसा कमाने के लिए अपने हाथों से दबा दबा कर वैसे भी छोटी छोटी लड़कियों की चूचियां उम्र से पहले ही बड़ी बड़ी हो गई है, कमर हिला हिला कर उन की गांड का उभार बाहर की तरफ निकल आता है इस वजह से उनके भाई, बाप मर्यादा में बंधे होने के कारण ज्यादा कुछ कह तो नही पाते लेकिन मन ही मन मजे लेते रहते है, ये ही वजह आज के दौर में इंसेक्ट् सेक्स रिलेशन मध्यम वर्गीय हर दूसरे घर में कुछ ज्यादा ही पनप रहे है ।"") )

जैसे ही मेरी बेटी ने स्कूल ड्रेस की स्कर्ट उतारी अब उसकी गोल गोल गांड और गोरी गोरी जांघें दिखाई दे रही थी ऊपर से गोल गोल बड़ी बड़ी चूचियां बाहर की तरफ आती हुई और सेक्सी कमर कोई भी पागल हो जाये। ऐसा लग रहा था मेरे मुँह से लार टपक रहा था अपनी बेटी के जिस्म को देखकर।

अगले गाने पर शुरुआत हो गयी डांस की।

आयेगा मजा अब बरसात का,

तेरी मेरी दिलकश मुलाकात का,

मैने तो संभाले रखा है,

सब्र का बांध दिल का टूट गया,

यो अँखियाँ मिला के अखियों से...........

वो सेक्सी अंदाज में डांस करने लगी कभी चूचियां हिलाती तो कभी गांड, कभी गांड गोल गोल घुमाती तो झुक कर चूचियां हिलाती। उसके बाद तो मै पूरा पागल हो गया रिंकी जवानी को देखकर। मै चुपचाप खड़ा रहा और मेरी साँसे तेज तेज चलने लगी। अचानक से डांस करते करते जब वो घूमी तो मुझे अपने अर्ध नग्न जिस्म को देखते हुए रूक गयी। और जल्दी जल्दी में घबराहट से उसका मोबाइल हाथ से छूट कर जमीन पर गिर गया।

मुझे समझ नहीं आया उसे हो क्या गया। और मै वापस उल्टे पाँव अपने कमरे में आकर बेड पर बैठ गया....... रिंकी के ब्रा मे कैद चूचे मैने पहली बार देखे थे वो भी सेकंड के सौ वे हिस्से के बराबर समय के लिये। और शायद देखने की ललक ही मुझ को ब्रा के डिब्बों तक ले गयी थी, मॉडल के चूचों में मै अपनी बेटी के चूचे ढूंढ रहा था।

उधर मेरे कमरे से निकलते ही हड़बड़ाई हुई रिंकी अपनी रेगुलर ड्रेस (जीन्स टी शर्ट) हाथो में लेकर सीधा बाथरूम में घुस गई।

घबराहट में वह सोच रही थी कि ‘पापा ने देख लिया होगा या नहीं। देखा भी है तो बोला तो कुछ नहीं है। नहीं बोला तो क्या सोच रहे होंगे।’ शायद कुछ देखा ही न हो। इतनी जल्दी नज़र कहाँ ही पड़ी होगी।’ ऐसा सोच कर रिंकी ने राहत की सांस ली ।

रिंकी अपने कपड़े पहनते हुयी ख्यालों में खोई हुई थी ......... ओह्ह पापा अचानक से मेरे कमरे में आएँगे. मुझे तो अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा है. आज तक वो मेरे कमरे में, कभी अकेले में आए भी तो नहीं थे हमेशा मम्मी/दादी के साथ ही आये है। मुझे तो अब तक कि जिंदगी का एक दिन भी या यह कहूं कि एक लमहा भी याद नहीं, जब उन्होंने मुझे इस तरह देखा भी हो. आंखों ही आंखों में उन्होंने बहुत कुछ कह दिया और बहुत कुछ मैंने सुन लिया.

कपड़े पहनकर सोचती हुयी पापा कहाँ गए हैं.......??? मुझे ढूँढती हुयी मेरे कमरे में आ गयी। और खामोशी से मेरे बेड पर बैठ गयी...... रिंकी के अंतर्मन में सवालातो का द्वंद चल रहा था जिसकी चमक उसकी आँखों में, आवाज उसके कपकपाते हुए होंठो से बाहर आने को बेचैन हो रही थी।

आज वो मेरे करीब, बिलकुल मेरे करीब. मेरे बैड पर बैठी थी. मैंने उस की तरफ देखा. वो उदासी भरी, दर्दभरी, आंसुओं भरी आंखों से मुझे देख रही थी. मैं भी देखता ही रहा उन्हें... अपने बेटी को.

उसे लगा कि अगर एक शब्द भी उसने जबानी बोला तो अपने आंसुओं के वेग को न मैं थाम सकूंगी और शायद न पापा.

भरभरा कर बस गिर ही पड़ूंगी अपने पापा की गोद में, जिस के लिए मैं अतृप्त सी न जाने कब से तरस रही थी.

फड़फड़ाए ही थे मेरे होंठ कुछ कहने को कि तड़प कर मेरे हाथ पर उसने अपना हाथ रख दिया और. बोली ‘‘न पापा न, कुछ मत कहना. मैं ने कोई गलत काम नहीं किया है. बस अपने पापा के लिए अपना छोटा सा फर्ज निभाया है.’’

अंतत: रोक ही नहीं सकी खुद को, रो ही पड़ी फूटफूट कर. मै भी रो पड़ा जोर से. मैने उसे अपने से लिपटा लिया, ‘‘मुझे माफ कर दे मेरी बेटी... माफ कर दे रिंकी अपने इस बुरे से पापा को... जो अपनी बेटी के जज्बातो को ना समझ सका, बेटी है मेरी तू तो, दुनिया की सब से अच्छी बेटी है तू तो.’’

कुछ पल कि खामोशी के बाद मैंने पूछा अब क्या हुआ ? वो फिर से कुछ नहीं बोली। मैं बोला बताओ तो सही क्या बात है ? पापा अब मुझे अकेला छोड़ कर फिर मत जाना.......।

नही जाऊंगा कभी नहीं जाऊंगा..... बस अब एक बार मुस्कुरा दे।

मुस्कुराहट के साथ कमरे का माहौल सामान्य हो गया..... तेरे मोबाइल फोन का क्या हुआ...???? ठीक है या खराब हो गया?? मैने मुस्करा कर पूछा..??

पता नही पापा शायद खराब हो गया होगा, स्मार्ट फोन जरा सा गिरने पर तुरंत डैमेज हो जाते है.... रिंकी प्यार से मुझसे शिकायती भाव से बोली।

कोई नहीं रिंकी बेटी मै तेरा पंसदीदा पिज़्ज़ा पनीर लाया हू ठंडा हो जाये इससे पहले तू खा ले। और जब तक मै तेरा मोबाइल repair करवा कर लाता हूँ।

ठीक है पापा.. हम दोनों बातें करते हुए कमरे में से बाहर निकल आये.... रिंकी ने पिज़्ज़ा बॉक्स खोल कर खाना शुरु कर दिया । रिंकी तेरा फोन मै ठीक करा कर लाता हूँ..... कहते हुए मै रिंकी के कमरे में से फोन लेकर बाहर जाने वाला ही था कि वो पिज़्ज़ा छोड़ एकदम से मेरे हाथ से मोबाइल लेकर बोली........ कोई नही पापा मै खुद अपना मोबाइल ठीक करवा लूंगी...! आप परेशां मत होइये।

अरे बेटी परेशानी कैसी मेरा एक दोस्त है जो मोबाइल रिपेयर का अच्छा काम करता है, वो अच्छे से ठीक कर देगा।

लेकिन पापा......

लेकिन... वेकिन कुछ नही मै अभी गया और अभि आया.....!

रिंकी मुझे जाते हुए देख रही थी, लेकिन उसकी नजर मोबाइल पर थी..... उसकी नजरे बता रही थी...... कि उसके मोबाइल फोन में कोई गहरा राज छिपा हुआ है...???

जारी है.............
 
बहुत बहुत आभार शुक्रिया

जब तक स्त्री के हृदय में कोमलता है, अर्थात मर्द के पाप माफ करने की व्यवस्था है, अरुण जैसे मर्द पाप धो धो कर पाप करते रहेंगे.....!

कहावत है " पति फौज में, पड़ोसी मौज में " लेकिन यहाँ ये है.... " मम्मी फौज में और बेटी मौज में"😜😂

जल्द ही ट्विस्ट आने वाला है, आप इसी तरह साथ देते रहिये।

धन्यवाद
 
बहुत बहुत आभारआभार

आपने 100 प्रतिशत सही कहा कि सोशल मीडिया पर बच्चो के किये गए कांड का परिणाम माता पिता को भुगतना पड़ता है..... लेकिन आजकल माता पिता भी लगे पड़े है, "" कुछ हुनर चाहिए बाजार में रहने के लिए, आजकल पॉपुलर्टी का दौर है, लोग नंगे तक हो जाते है, अखबार में रहने के लिए ""

ये किसी शायर ने लिखा है मुझे ठीक से याद तो नही, लेकिन लिख दिया है।

रिंकी की सहेली की इस कहानी में अहम भूमिका है, वक्त आने पर सारे भेद खुलते जायेंगे।

मोबाइल फोन का राज........आज नही 😜🙏

धन्यवाद.... इसी तरह अपना आशीर्वाद देते रहिये।
 
रिंकी मुझे जाते हुए देख रही थी, लेकिन उसकी नजर मोबाइल पर थी..... उसकी नजरे बता रही थी...... कि उसके मोबाइल फोन में कोई गहरा राज छिपा हुआ है...???

मै अपनी बाइक पर सवार सीधा अपने दोस्त की मोबाइल शॉप पर पहुँच गया। उसकी छोटी सी दुकान है, बेचारा खाली बैठा था। उमर में वो मुझसे छोटा है बेचारे की शादी भी नही हुयी है। मुझे देखकर एकदम खुश हो कर बोला और भैया बड़े दिनों के बाद दर्शन हुए......???? बस एक बार भाभी के दर्शन और करा दो, तो जीवन सफल हो जाए, वैसे "भाभी मजे में तो है"....???

"भाभी मजे में तो है" दोस्तो के मुह से ये शब्द अक्सर हम सुनते हैं, दोस्त बड़े हरामी होते है, वो जानबूजकर ऐसा पूछते है, अगर सामने वाला जरा सा इस बात को सीरियस ले, और अपनी पत्नी की कथा शुरु कर दे। तो ये हरामी दोस्त सलाह कम सामने वाले की लुगाई को फँसाने की जुगाड़ में लग जाते है।

भैया - भाभी सब मजे में है, तू बता भोसड़ी के तू क्यों परेशान सा दिख रहा है....! मैने जबाब दिया।

नौकरी मिल नही रही, लड़की पट नही रही, शादी हो नही रही, घरवाले दारू पीने नही देते। परेशान नही दिखूँ तो क्या करू??

हाहा हाहाहा सही कह रहा है यार... एक समय मेरी भी हालत तेरी जैसी थी... लेकिन होप मत छोड़.... किनारे पर बैठे रहो एक ना एक दिन लहर आयेगी..... मैने हस्ते हुए जबाब दिया।

जब तक लहर तो आयेगी तब तक मेरी गांड फट जायेगी... हाहा हाहाहा पहले औरत नसीब लेकर आती थी, अब औरत नसीब देखकर आती है। उसने भी हस्ते हुए कहा।

सच कह रहा है यार "" समाज में बदलाव उस दिन होगा, जब नौकरी करती लड़कियों की शादी होगी बेरोजगार लड़को से "" अचानक से मेरे अंदर का प्रोफेसर बोला।

बस करो प्रोफेसर साहब, ये अपने सामाजिक उपदेश अपनी क्लास के बच्चो को सुनाना... अगर मेरा भला करना चाहते हो तो अपने कॉलेज की कोई कन्या या मास्टरनी का नंबर दे दो। हाहा हाहाहा हाहा हाहाहा

खैर छोड़ो आज मेरी याद कैसे आ गयी भैया....???

सुन जरा ये मोबाइल फोन देखो अचानक से हाथ से छूट गया और बंद हो गया है, इसे ठीक कर.....!

वो मोबाइल हाथ में लेकर बोला डिस्प्ले चली गई है, बदल देता हूँ..... थोड़ी देर बाद उसने मोबाइल ठीक कर दिया.... जैसे ही फोन ऑन हुआ और उसकी स्क्रीन पर चमक रहे वालपपेर को देखकर उच्छल कर गाना गाते हुए नाचने लगा....!

देख ली भैया आज आखिरकार मैने भाभी के दर्शन कर ही लिए........ ह्म्म्म

मै भी मुस्कुरा रहा था, लेकिन जब मैने उसके गाने की शब्द पर गौर किया तो अचानक से चोंक पड़ा।

मैने उसके हाथ से मोबाइल लिया और उसकी स्क्रीन पर छपे फोटो को देखा तो मेरी आँखे खुली रह गयी....... रिंकी ने मेरी और कुसुम की शादी की स्टेज पर खींची गयी फोटो जिसमें...... मै बीच में और कुसुम, रिंकी अगल बगल खड़ी थी उसको क्रॉप कर के कुसुम को हटा दिया था और अब फोटो में मै, रिंकी के साथ इस तरह खड़ा हुआ नजर आ रहा था कि मेरी बेटी ही मेरी दुल्हन है, मजे की बात ये है उस समय रिंकी भी लहंगा चोली पहने हुए थी।

मैने माथे का पसीना पोछते हुए दोस्त से कहा.... चल अब चलता हूँ और उसके बताए हुए पैसें देकर घर की ओर वापस चल दिया। मेरे मन में बहुत जिग्यसा हो रही थी कि आखिर रिंकी के फोन में और कौन कौन से राज छिपे हुए है, जिनको मै नही जानता। मैने सड़क किनारे बने एक छोटी सी चाय की दुकान पर बाइक खड़ी कर चाय की चुस्की लेते हुए रिंकी के फोन का पोस्ट मार्टम कर उसके छिपे गहरे राज को मोबाइल में खांगालने लगा।

आखिरकार मैने मोबाइल में अपनी बेटी के गुपत राज को ढूँढ लिया था. इस छोटे से फोन मे मेरी बेटी अपना इतना बड़ा राज़ छिपा कर रखती थी. ये मोबाइल बेहद व्यक्तिगत चीज़ों का ख़ज़ाना था. इनमे कुछ सस्ती ज्वेलरी जैसे नोज रिंग, ईयर् रिंग, मॉडर्न ड्रेस, शूज़, साड़ी, घड़ी, आदि की फोटो थी जिनकी कीमत बाज़ारु कीमत से ज़्यादा शायद जज़्बाती तौर पर थी.

रिंकी के इंस्टा पर पोस्ट होने की राह देख रहे बेहद भड़कीले, सेक्सी, उत्तेजक शॉर्ट वीडियो देखकर मै तो हिल गया। लेकिन एक बात नोटिस करने वाली ये थी कि उसने सारे वीडियो बनाकर सिर्फ सेव किये हुए थे, पोस्ट नही किये थे। यानी कि वो ऐसे वीडियो सिर्फ खुद की खुशी के लिए बनाती है।

कुछ उसकी स्कूल के ग्रुप टूर में एक साथ सहेलियों के फोटोग्रॅफ्स थे, कुछ कभी नज़दीकी लोगो जैसे जूली मौसी, प्रीति मौसी, उसकी मौसी की लड़की के द्वारा लिखी गयी शयरिया, जोक्स, बर्थ डे, त्यौहार, बेस्ट विशेज, मैसेज थी. कुछ स्कूल की नोटस, गैस पेपर, प्रोजेक्ट के स्क्रीन शॉट थे जो शायद उसके मतलब के थे. एक खास किसम का मार्का लिए दो शहर के फोटो थे, इस मार्क को मैं जानता नही था. ये शहर मॉरिशस या लंदन के फोटो है ऐसा मुझे लग रहा था। जहाँ जाने के लिए मै सपने में भी नही सोच सकता था.

उसके बाद कुछ ख़ास चीज़ें सामने आई. तीन बड़े बड़े मैसेज प्रेम पत्र टाइप के जो उसके आशिको ने उसको लिखे थे. दो बड़े बड़े मैसेज किसी एक लड़के के लिखे हुए थे जिसने नीचे, मैसेज के अंत में अपने नाम के सुरुआती अक्षर "र" से साइन किए हुए थे मै अपने बेटी के आशिको के बारे में अभी तक यकीनी तौर पर नही जानता था.

तीसरा मैसेज किसी ऐसे लड़के का था जिसका दिल मेरी बेटी ने किसी मामूली सी बात को लेकर तोड़ दिया था और वो मेरी बेटी रिंकी से वापस दोस्ती करने की भीख माँग रहा था.

""बहुत मोहब्बत है तुझसे,

बस जताना नहीं आया !

इतनी मेहनत से 30 से 34 के बना दिये,

और तुम कहती हो दबाना नहीं आया !""

😜😂

इसके अलावा मुझे अलग अलग सेक्सी पोज में, मॉडर्न ड्रेस में, तीन फोटो या यूँ कहे कि तीन सेक्सी लड़कियों की फोटो मिली. सभी एक से एक सुंदर और जवान, उनमे से एक फोटो को देख कर मैने फ़ौरन पहचान लिया, वो वही लड़की थी जो दोपहर में पार्किंग लॉट में एक लड़के के साथ अपने चूचे चुसवा रही थी, लेकिन फोटो में उसके चूचे देखकर मैं यह कह सकता था कि फोटो उसकी लड़के से चूचे चुसवाने के पहले की थी क्योकि तस्वीर में उसके चूची का साइज काफी छोटा नींबू का जैसा दिख रहा था और आज हकीकत में उसके चूचे का साइज संतरो से भी बड़ा था।

इन सबको देखना कुछ कुछ दिलचस्प तो था मगर उतना नही जितना मैने मोबाइल के स्क्रीन पर लगे वालपपेर फोटो को देखने के वक्त सोचा था. मुझे अपनी बेटी की निजी जिंदगी से कुछ लेना देना नही था मगर मुझे ताज्जुब था कि यह सब मेरी पत्नी कुसुम और उसकी मम्मी की नज़रों से कैसे बचा रह गया और अगर उसे पता है तो उसने मुझको अभी तक बताया क्यों नही. या तो कुसुम को अपनी बेटी की कोई परवाह नही है, क्योंकि कुसुम के लिए उसकी सरकारी अफसर बनने का सपना उसकी जिंदगी का सबसे जरूरी हिस्सा बन चुका है या शायद अपनी बेटी का यह मोबाइल फोन का राज अभी तक उसकी निगाह से छिपा हुआ है.. .. ... .

इस सब मे जिस चीज़ ने मेरा ध्यान खींचा वो था माई ब्यूटीफ्युल् ड्रीम के नाम वाला एक फोल्डर में चमकता हुआ दिल का शेप वाला इमोजी. वो फोल्डर जब मैने खोलकर देखा तो मालूम चला कि उसमें कोरियन लड़के लड़कियों की सेक्स करती हुयी फोटो थी . इन फोटो में लड़की और लड़का अलग अलग आसनों/मुद्राओं मे संभोग करते हुए नजर आ रहे थे। अधिकांश फोटो में कैप्शन (जैसे किसी के नाम) लिखे हुए थे और लड़की लड़के की उमर में अंतर साफ साफ नजर आ रहा था। उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था जैसे एक बाप अपनी बेटी के साथ संभोग कर रहा हो तब ये फोटो खीची गयी है.

पहले पहल तो मुझे अपनी आँखों पर यकीन ही नही हुआ कि शायद मैने सही से देखा ही नही है, मैं अपनी आँखे फाड़ कर टकटकी लगाकर पूरे ध्यान से देखने लगा.

मैने आज से पहले कभी भी अपनी बेटी रिंकी को संभोग के साथ जोड़ कर नही देखा था. वो मेरे लिए सिर्फ सेक्सी, सिडक्टिव थी कि मैं जानता भी नही था कि उसकी भी शारीरिक ज़रूरतें थीं उसकी उम्र की अन्य लड़कियों ही तरह. अब तक तो रिंकी मेरे लिए सिर्फ़ बेटी थी सिर्फ़ बेटी, एक संभोग सुख देने वाली लड़की कभी नही..... और यही मेरी बेटी का असली राज़ था जिसे उसने अपनी मम्मी से, मुझसे, दुनिया से छिपाया हुआ था. अपनी मम्मी के पति यानी कि अपने पापा के साथ संभोग करना उसका खूबसूरत सपना है.

अब यह मेरी बेटी के मोबाइल में कैद खूबसूरत सपने का राज उसका अकेला का राज नही रहा था। ना जाने कितने दिनों से

वो ना सिरफ़ अपने राज़ की हिफ़ाज़त कर रही थी बल्कि उसे कब अपनी कल्पनाओ में सच करती होगी इस बात का भी पूरी शिद्दत से ध्यान रख रही थी.

लेकिन नियति या होनी से यह बात मुझसे छिपी ना रह सकी कि उसके खूबसूरत सपने का राज की मुझे भी जानकारी हो गयी थी। मेरे अंदर का प्रोफेसर मुझसे ही सवाल कर रहा था..... क्या एक पिता अपनी कमसिन् जवान बेटी से संभोग कर सकता है ????? उसकी वासना की पूर्ति कर सकता है ??!?? उसकी शारीरिक जरूरतों का ख्याल रख सकता है?????

क्या ऐसा कभी हुआ है????? होता है???? किसी किताब मे ??? किसी धर्म में पिता और पुत्री के शारीरिक सम्बधो को जायज बताया गया है????? ऐसे अनगिनत सवाल प्रोफेसर अरुण के मन आज अचानक से खड़े हो गए।

ठरकी अरुण तो कब से बेटी के प्यार में पागल है, वो तो खुश है, कि घर में उसके और बेटी के अलावा कोई नही है मौका अच्छा है उठा लो फायदा.....!!!

लेकिन प्रोफेसर अरुण का जमीर गँवारा नही कर रहा था उसे बस एक प्रमाण की आवश्यकता थी जो पिता पुत्री के बीच बने सम्बधो को जायज ठेहरा दे।

तभी अपने खुद के सवालों की उलझनों में उलझे प्रोफेसर अरुण के निजी फोन पर अज्ञात नंबर से एक व्हाट्स अप में मैसेज आया..... उसे पढ़कर प्रोफेसर साहब के चेहरे पर चमक आ गयी मेरे जवान जिस्म में हलचल सी हुई, मुझे लगा मेरे हाथ में दुनिया का कोई अजूबा लग गया था. प्रोफेसर साहब को लिखित में प्रमाण मिल गया था।

इस मैसेज को पढ़कर मेरे तन बदन में आग लग गयी। लेकिन जो शब्द लिखे थे वो सत्यता की कसोटी पर खरे थे। खुद के लगाए पेड़ के फल खाने में कैसा पाप????? खुद की मेहनत से तैयार की गयी फसल का भोग करने में कैसा दोष???? अपनी पाली गयी भैस का दूध पीना कैसा अधर्म ????? मेरे अंदर कामवासना का संचार होने लगा। मारे खुशी के मैने बाइक स्टार्ट कर तेज रफ्तार से घर की ओर चल पड़ा।

सोचने और करने में बहुत फर्क होता है, मै अपनी तरफ से पहल नही करना चाहता था। मुझे बस उसकी पहल करने का इंतजार करना था इसलिए मैने रिंकी से मोबाइल फोन सही होने में दो दिन लगेगे ऐसा बहाना बनाने का फैसला लिया। और इन दो दिनों में अपना मोबाइल उसे उपयोग में लाने का विचार किया। इस उम्मीद से कि वो मेरे मोबाइल में क्या क्या देखेगी???

शाम के साढ़े सात बजे मै घर पहुँचा, जब मैने उसे रसोई में देखा तो मुझे उसकी उपस्थिती में बेचैनी सी महसूस होने लगी. मुझे थोड़ा अपराध बोध भी महसूस हो रहा था के मैं उसके मोबाइल फोन में छिपे राज को और उसकी अंतरंग दूबिधा को जान गया था और उसे इस बात की कोई जानकारी नही थी. उस अपराधबोध ने अपनी बेटी के लिए मेरी सोच को थोड़ा बदल दिया था. उसके हसी सपने की जानकारी ने उसके प्रति मेरे नज़रिए में भी तब्दीली ला दी थी. मैं शायद इसे सही ढंग से बता तो नही सकता मगर मेरे अंदर कुछ अहसास जनम लेने लग थे.

जब वो किचिन से बाहर हॉल में आई तो बरबस मेरा ध्यान उसकी टाँगो की ओर गया. मैं चाहता नही था मगर फिर भी खुद को रोक नही पाया. सिर्फ़ इतना ही नही, मेरी नज़र उसकी टाँगो से सीधे उस स्थान पर पहुँच गयी जहाँ उसकी टाँगे आपस में मिल रही थीं, उपर से वो टाइट जीन्स पहने हुए थी और उसने अपनी टीशर्ट जीन्स के अंदर दबा रखी थी जिस से उसकी टाँगो का वो मध्य भाग मुझे बहुत अच्छे से दिखाई दे रहा था बल्कि थोड़ा उभरा हुआ नज़र आ रहा था. मैं उसकी जाँघो को घूर रहा था.

वो अपनी फॅवुरेट जीन्स पहने हुए थी और वो स्थान जहाँ उसकी जांघे आपस में मिल रही थी वहाँ थोड़ा गॅप था जो उसकी चूत को हाइलाइट कर रहा था........खूब उभर कर. मैने अपनी बेटी को पहले भी उस जीन्स में देखा था मगर टाँगो के बीच का वो गॅप मुझे कभी नज़र नही आया था ना ही वो तिकोने आकर का भाग. असलियत में, शायद मैने वो उभरा हुआ हिस्सा देखा ही नही था, शायद वो मेरी कल्पना मात्र थी. उसकी जीन्स काफ़ी मोटे कपड़े की बनी हुई थी इसलिए उस हिस्से को देखना बहुत मुश्किल था मगर आज मैं उसे एक अलग ही रूप में देख रहा था..उसकी चूत की ओर बार बार ध्यान जाने से मुझे कुछ बेचिनी महसूस होने लगी थी. मै जल्दी से खाना खा कर सीधे अपने कमरे में चला गया।

समय अपनी रफ्तार से भाग रहा था, रात के दस बजने वाले थे लेकिन अभी तक रिंकी की तरफ से कोई पहल नही हुयी थी। ना ही उसने अभी तक अपने मोबाइल फोन के बारे में कुछ पूछा था। घर में अजीब सी खामोशी छाई हुई थी। पापा हाल में, मै अपने कमरे में, और रिंकी अपने कमरे में करवटे बदल रहे थे।

नींद मेरी आँखों से कोसों दूर थी, रह रह कर रिंकी के मोबाइल में संभोगरत फोटो मेरे जिस्म में वासना का स्तर बढ़ा रहे थे। मेरे शरीर में आग लगी हुई थी, मैने अपने सारे कपड़े उतारे और एक हाथ से अपने लंड को सहलाने लगा।

तभी खट से मेरा मोबाइल फोन बजने लगा, मेरी मम्मी का वीडियो काल था। उन्होंने मेरी सलामती की खैरियत पूछने के लिए बात करने के लिए काल किया था।

बेटा अरुण ऐसे बिना कपड़ो के क्यो लेटा है, गर्मी ज्यादा पड़ रही है क्या ???

मैं मम्मी से बात करने में कतरा रहा था, मै उन फोटो को देखकर पहले से ही बहुत उत्तेजित हो गया था, और मेरी हिम्मत नही हो रही थी कि मैं मम्मी की तरफ देखूं,

"""क्योकि ऐसी तस्वीरें देखकर नीयत घर की औरतों के प्रति बदल जाती है, देखने वाला वो ही सोचता है और बहुत उत्तेजित हो जाता है पर अगले ही पल ग्लानि से भर भी जाता है। पर मन नही मानता है वो तो कभी कभी ग्लानि से ऊपर उठकर सोचने लगता है कि घर में ही मिल जाए तो कितना मजा आ जाए, पर ये असंभव चीज़ होती है, इसलिए बस ये सिर्फ कल्पना में ही होता है ""

एक बार मैंने चुपके से फोन में मम्मी को देखा तो वो झुककर मुझसे वीडियो काल में बातें कर रही थी जिससे उनके भारी भरकम स्तन मेरी ओर थे ।

"" पत्नी के साथ नाता जुड़ने के बाद जब मेरे दिल में माँ के बारे में ख़याल आता है तो मुझे लगता की मैं पत्नी के साथ दगा कर रहा हूँ. जब माँ से मेरी नज़दीकियाँ बढ़ती है तो मुझे बेटी का ख़याल आने से लगता कि मैं माँ से दगा कर रहा हूँ, ""

आज पहली बार मम्मी को इस नज़र से देखकर आत्मग्लानि के साथ साथ जो उत्तेजना हुई उसका कहीं कोई मेल नहीं, शर्म के मारे मैं इधर उधर देखने लगा। अभी कुछ ही पल बीते थे कि एकाएक मम्मी की आवाज सुनकर मैं चौंक गया।

बेटा आज बहू के साथ मेरी कहासुनी हो गयी, तुम जरा उससे बात कर थोड़ा समझाओ.....??

मै : अरे.... क्या हुआ...???

बेटा बहू को नौकरी की इजाजत देकर में पछता रही हू, उसका ऑफिस में चाल चलन मुझे ठीक नहीं लग रहा है, बेटा बड़ा डर सा लग रहा है, पता नही क्या अनर्थ होने वाला है ?????

मै : क्यों क्या हो गया, पूरी बात विस्तार से बताओ मम्मी।

बेटा कुसुम मुझसे बोली मम्मी आज मेरे साथ ऑफिस में चलने के लिए तैयार हो जाओ.... मैने पूछा क्यों..???? तो बहू बताने लगी आज उस के ऑफिस में ESIC का कैंप लगा हुआ है जिसमें सब कर्मचारियों का स्वास्थ्य बीमा किया जाने वाला है.

सबने अपना और अपने परिवार का नाम दर्ज कराया है कि जिस दिन बैंक वाला आएगा, उस दिन जिन जिन का नाम दिया गया है, उसे हस्ताक्षर करने ऑफिस बुलाया जाएगा.

उस दिन उसी हिसाब से सबके घर वाले रोजाना आ रहे है, माँ-बाप, बीवी-बच्चे सबको हस्ताछर करना अनिवार्य है.

उसने मुझसे कहा कि मम्मी बस दस मिनट के लिए एक हस्ताक्षर वास्ते चलना है.

मैने कहा ठीक है और हम दोनों तैयार होने लगे...!!

वो अपनी लाल साड़ी, डीप कट ब्लाउज के ऊपर जिस्से उसकी आधे से ज्यादा चूचीया ब्लाऊज से बाहर झॉंक रही थी। बदन पे अधखुला ब्लाऊज और चीकना सपाट पेट चरबी का नामो निशान नही। जवान बेटी की मां होने के बावजुद भी उसका कसा और गठीला बदन देखकर कोई ये नही कह सकता था की ये जवान बेटी की मां होगी।

आदि पहनकर एकदम रांड बनकर मुझे भी अपने साथ ले गयी थी।

अगले चौराहे से ही ऑटो पकड़ के ऑफीस जाना था । चौराहे पर पहुंच कर हम ऑटो का ईन्तजार करने लगे की पीछे से एक बुजगॅ टकरा गया । और माफ करना बेटी कहकर चला गया। मेरे जी मे तो आ रहा था की उसे जोर से थप्पड़ लगा दे। क्योकी उसने टकराते समय बहू गांड पर चुटकी काट लिया था। लेकीन मै बात को बिगाड़ना नही चाहती थी। ईसलिए कुछ बोली नही।

कुछ ही देर मे ऑटो आ गई और हम उसमे बेठकर उसके ऑफीस चले गए।

ऑफीस मे पहुंचते ही सबसे पहले शर्मा जी ने गुड मानिॅग कहा।

शर्मा जी; गुड मानिॅंग कुसुम जी ।

वो भी मुस्कुरा के गुड मानिॅंग बोली।

(बहू का जवाब सुनते ही शर्मा ने तुरन्त बोल दीया।)

कुसुम जी; आज बहुत खूबसूरत लग रही हो।

बहू मुस्कुरा गई। और उसने औपचारीकता वश मेरा परिचय शर्मा जी से करवाया.

इतने में बहू का एक चेला (ऑफिस बॉय) तो मेरे लिए और कुसुम के लिए चाय तक लेकर आया.

बहू बातूनी भी बड़ी है। उसे काफी बात करने की आदत है ये मुझे पता है। लेकिन उसे मेरे सामने हँस हँस कर परपुरुषों से बात करने में कोई झिझक नहीं हो रही थी।

शर्मा जी: (गंदी हंसी चेहरे पर लाते हुए)अरे कुसुम मेडम जी। आज सच मे आप बहोत खुबसुरत लग रही हो।

मै गुस्से से आंख तरॉते हुए : ताने मार कर बसंती (शोले पिक्चर वाली हेमामालिनी) अगर बातें हो गयी हो तो जिस काम के लिए मुझे साथ लाई हो वो कर ले। और ईतना सुन के कुसुम मुझे अपनी केबीन की लेकर तरफ चल दी।

मैं अन्दर बहु के साथ कैबिन में कुर्सी पर जाकर बैठ गयी, थोड़ी देर बाद शर्मा ऑफिस का एक संजय नाम के लड़के के साथ ESIC रजिस्टर को लेकर आ गया, और पेन देते हुए मुझसे बोला बहन जी इस पर हस्ताछर कर दीजिये,

मैने जैसे ही पेन लेने के लिए हाथ बढ़ाया तो उसने जानबूजकर पेन नीचे गिरा दिया, गिरे हुए पेन को उठाने लिए बहू (रांड की तरह) ने शर्मा को झुककर अपनी दौलत (अपने बड़े बोबे निप्पल के साथ) दिखा दी.

मैंने ये सब अपनी नंगी आँखों से चुपके से देखा. शर्मा का खड़ा लंड हो गया था और उसने अपनी पैंट के ऊपर से मसला भी था.

तभी कुसुम इठला कर बोली- सर अगर पैंट पर कुछ फंसा है, तो थोड़ा हल्का कर लो ना!

ये सुनकर मुझे ग़ुस्सा आया मुझे ये बात खटकी, तो शर्मा के जाने के बाद मौका मिलते ही मैंने बहू को ऑफिस में मर्दो से दूर रहने का बोल दिया. इस बात पर कुसुम भड़क उठी और फिर मै वहां से गुस्से में घर निकल गयी.

नहीं मैं कुसुम के साथ ऐसा नहीं होने दूंगा. उस से बात करूंगा, उसे समझाऊंगा. वह मेरी पत्नी है समझ जाएगी. नहीं मानी तो उस शर्मा से मिलूंगा, उस के परिवार से मिलूंगा, परंतु मुझे पूरा यकीन है ऐसी नौबत नहीं आएगी… कुसुम समझदार है मेरी बात समझ जाएगी......... । इतना कहकर मैने मम्मी से पूछा वैसे कुसुम अभी कहाँ है??

छत पर....

ठीक है मै उससे बात करता हूँ ।

और कुसुम से बात करने के लिए उसे फोन लगाया तो उसका फोन बिजी आ रहा था।

शायद वह अपने किसी सहेली से बात कर रही थी. लेकिन मम्मी की बातों को सुनकर मै खुद को ठगा सा महसूस कर रहा था.

तभी कुसुम का काल आ गया....

हैलो

कुसुम : आ गयी बीवी की याद, मिल गयी फुर्सत, माँ ने अपने लाडले से अपनी बहू की शिकायत जो जरूर कर दी है। ह्म्म्म

मै : शिकवा शिकायते तो होती रहती है जानेमन..... रही बात याद करने की तो

याद उन्हे किया जाता है, जिन्हे भूला जाये... तुम्हे तो मै अपनी हर आती जाती सांस के साथ याद करता हूँ.....

" साँसों की माला पर मै सिमरू तेरा नाम "

कुसुम : ह्म्म्म ठीक ठीक है वैसे बताओ फोन क्यो किया था.....???

मै : फोन जब किया था, तब तुम किसी के साथ बिजी थी.... जो कहना था वो अब याद नही ह्म्म्म.......

कुसुम : ओह्ह्ह् ...... अरे यार वो ऑफिस का शर्मा मुझे काल करता है। शर्मा जी बड़े रंगीन मिजाज के है, पचास के करीब होने को आ गए हैं लेकीन औरतो को देखकर लार टपकाना आज तक नही छोड़े। जब से ऑफीस मैने जॉइन किया है उस दीन से शर्मा जी लार टपकाए पीछे पडे़ है। लेकीन आज तक यहां ईनकी दाल नही गली। बस आहें भरकर रह जाते है। ऑफीस मे शर्मा जी जेसे और भी कई लोग है ।

कुसुम के मुह से गैर मर्द की बातें सुनकर मेरे शरीर में सनसनी होने लगी।

मै :: ह्म्म्म कैसी कैसी बातें करता है डार्लिंग....??

कुसुम :: तुम्हे तो पता ही है, शर्मा जी की वजह से मुझे ये नौकरी मिली है, ऊपर से वो सीनियर है। जब कोई काम नहीं होता, तो वो मेरे कैबिन में आते हम बातें करते है। धीरे-धीरे हम एक-दूसरे से काफ़ी घुल-मिल गए। धीरे-धीरे हम एक-दूसरे की शादीशुदा जिन्दगी के बारे में बातें करने लगे। हम एक-दूसरे से अपने पति-पत्नी की बातें करने लगे। उसने बताया कि वो अपनी पत्नी से खुश नहीं है फिर अपनी सम्भोग क्रिया के बारे में बातें करने लगे। मैंने भी अपने पति (तुम्हारे) के बारे में बता दिया। मै तो अपने पति के साथ अपनी सम्भोग क्रिया में बहुत खुश हू।

" मै अपनी पत्नी कुसुम के मुह से अपनी मर्दांगी की तारिफ, कसीन्दे वो भी गैर मर्द को तीखा व्यंग/ताने के रूप सुनाने की बात सुनकर खुशी से झूम गया "

मै :: कुसुम वो सब छोड़ो ये बताओ अभी वो ठरकी बुड्ढा फोन पर क्या कह रहा था???

कुसुम :: अभी जब उस का फ़ोन आया। हम पहले तो इधर-उधर की बातें करते रहे। फिर शर्मा ने वो बात कह दी, जिसका मुझे डर था। उसने मुझसे कहा- कुसुम, मुझे एक साथी की जरूरत है, जो मेरा साथ दें और मेरी इच्छाओं को पूरा कर दे? उसके लिए मै अपनी सारी दौलत खर्च करने के लिए तैयार हू। मेरे दिलो-दिमाग में बिजली सी सनसनी आ गई। मैं उससे बातें तो करती थी, पर कभी सोचा नहीं था कि ऐसा हो सकता है क्योंकि वो मुझसे उमर में काफ़ी बड़े थे। मैंने फ़ोन बिना कुछ कहे रख दिया। कुछ देर बाद उनका दोबारा फ़ोन आया, पर मैंने नहीं उठाया। करीब 4 बार के बाद मैंने फ़ोन सुना तो वो मुझसे माफ़ी मांगने लगे।

" जिस स्त्री से मुझे नफरत होनी चाहिए थी. मुझे उस पर प्यार आ रहा था और गर्व भी हो रहा था, क्योंकि इस पुरुष दंभी समाज को चुनौती देने की कोशिश उसने की थी.’’

अपनी पत्नी का यह वचन सुनकर मै बड़ा उत्साहित हो गया। आखिर कुसुम एक शादीशुदा औरत जिसकी एक जवान बेटी है और उसकी चूत बल्कि उसका पूरा बदन अपने पति के भोग के लिए ही है यह कुसुम के मन में भलीभाँती वृक्ष की जड़ की तरह स्थापित हो चुका है। भला वह कैसे कोई साधारण छिनाल औरत की तरह पति के अलावा किसी दूसरे लण्ड के बारे में सोच भी सकती है? और मै यह जानता भी था की कुसुम की यही प्रतिक्रया होगी। अब मुझे धीरे धीरे कुसुम के मन के अंदर जा कर हर औरत के मन के छोटे से कोने में जो एक छिनालपन होता है उसे उजागर करना था।

अपनी खुशी पर काबू रख कर मैने बड़ा ही उत्साह दिखाते हुए कुसुम को छेड़ते हुए बोला, “ यह सब तो मैं जानता हूँ, पर देखो ना तुमने बेचारे शर्मा के साथ बड़ी नाइंसाफी की है....... बेचारे के साथ KLPD हो गया..

हाहा हाहाहा

कुसुम ने अपने सुर में कठोरता लाते हुए कहा, “ अरुण, तुम यह सोचना भी मत की मैं किसी और मर्द को अपना यह बदन सौपूंगी। सेक्स करने की बात तो दूर, मैं कभी किसी और मर्द को मेरा बदन छूने तक नहीं दूंगी। मैं सिर्फ तुम्हारी शादीशुदा पत्नी हूँ और हमेशा तुम्हारी ही रहूंगी।”

अरुण जब जब मै तुम्हारे मुह से इस तरह की बेफिजूल की बातें सुनती हू तो मेरे मन में रह रह कर यही सवाल उठता है की

“मैने तेरे बिस्तर में सारी दुनिया को पाया, तुम कहते हो गैरों को उस पर ले आओ।”

मै :: जब इतना प्यार करती हो मुझसे तो फिर छोड़ क्यों नही देती ऐसी नौकरी जहाँ हर मर्द तुम्हारे जिस्म को गंदी नजर से देखता है। उनके द्बारा कसी गई गंदी गंदी फब्तीयो को सुनकर भी अनसुना कर देना क्यो रोज का काम बना लिया है????

कुसुम :: क्योकी मुझे पता है सरकारी नौकरी की अहमियत, बड़ी मुस्कील आज के समय मे ये सरकारी जॉब मिलती है । और मै इस जॉब को खोना नही चाहती। पत्नी के बुढा होने पर पति, बच्चे धोख़ा दे सकते है, लेकिन सरकारी नौकरी नही, मेरे मरते दम तक पेशन रूपी मदद करती रहेगी।

मै :: तो फिर शर्मा जैसे हरामियो से हँसी मजाक, फोन पर बातें क्यों करती हो...?? अपने काम को बखुबी बेहद ईमानदारी से क्यों नही करती हो....??

कुसुम ::: ‘‘ माय डियर पतिदेव अब वह मुरगा खुद कटने को तैयार बैठा है तो फिर मेरी क्या गलती? उसको लगता है मै उसे पसंद करती हू? उसे यह नहीं पता कि वह सिर्फ मेरे लिए एक सीढ़ी है, जिस का इस्तेमाल कर के मुझे आगे बढ़ना है. जिस दिन उस ने मेरे और मेरे सपने के बीच आने की सोची सबसे पहले उसकी नौकरी खाऊँगी फिर उसी दिन उस पर रेप का केस ठोक दूंगी और तुम्हे तो पता है ऐसे केसेज में कोर्ट भी औरत के पक्ष में फैसला सुनाता है,’" हाहा हाहाहा हाहा हाहाहा

कुसुम के हँसी भरे ठहको के बीच मै सोच में पड़ गया....! उसकी बातों ने जैसे आईना सा दिखा दिया था कि.... जैसे उसने ये बात

मेरी लिए कही हो......

""सबसे पहले उसकी नौकरी खाऊँगी, उसी दिन उस पर रेप का केस ठोक दूंगी और तुम्हे तो पता है ऐसे केसेज में कोर्ट भी औरत के पक्ष में फैसला सुनाता है,’"

अगर मेरा और मेरी बेटी के साथ बन रहे नाजायज रिश्ते की भनक उसे लगी तो मेरा क्या हश्र होगा उसे सिर्फ खुदा जानता है।
 
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