Incest आह..तनी धीरे से.....दुखाता. - Page 11 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest आह..तनी धीरे से.....दुखाता.

कहानी को ध्यान से पढ़कर प्रतिकिया देने की आपकी अदा काबिले तारीफ है । सरयू और सुगना का संबंध incest नही है ये आपने बखूबी समझा है।
 
इतने पाठकों की प्रतिक्रियाओं का मुझे भी इंतजार है अपडेट तैयार किया जा रहा है।

नए पाठकों को भी प्रतिक्रिया देने के लिए धन्यवाद।

यही आपकी चन्द लाइने ये सब बकचोदी लिखने को प्रेरित करती है।

बाकी समय हो तो तो मेरी कहानी

एक सफ़ेदपोश की मौत। पढियेगा जो एक मर्डर मिस्ट्री है।
 
Dhanyavaad. आपकी पहली प्रतिक्रिया के लिए।

यू ही चंद लाइने सच्ची झूठी लिखकर लिखने वाले से अपने जुड़ाव का एहसास कराते रहे ताकि लेखनी को ऊर्जा और लेखक को साहस मिलता रहे।

पाठकों की प्रतिक्रियाएं आती रहेंगी तो निश्चय ही है कहानी आगे बढ़ती रहेगी।
 
लाली आज सुबह से ही बेहद प्रसन्न थी आज राजेश उसके लिए एक अनोखा उपहार लाने वाला था उसे उपहार क्या है उसे इसकी जानकारी तो नहीं थी परंतु राजेश के उत्साह को देखकर लगता था निश्चय ही वह उपहार महत्वपूर्ण होगा।

वह राजेश के साथ दो-तीन दिनों पहले बितायी गई रात को याद करने लगी जब उसे अपनी बाहों में लिए राजेश ने सोनू की बात छेड़ दी.

"तुम्हें सोनू की याद नहीं आती है?"

"क्यों नहीं आती, जब भी आता है दीदी दीदी की रहता है"

"तो उसे हर छुट्टी के दिन बुला क्यों नहीं लेती. घर का खाना पीना मिल जाएगा तो उसका भी मन चंगा हो जाएगा।"

"आप ही जाकर बोलिएगा मुझे तो शर्म आती है"

राजेश ने लाली की चूचियां सहलाते हुए कहा

"भाई से कैसी शर्म"

"और जो उसने पिछली बार जो करतूत की थी उसका क्या?"

" यह तो आप ही बता सकती हो कि उसने ऐसा क्यों किया होगा"

लाली की आंखों के सामने उस दिन का सारा घटनाक्रम घूम गया सच सोनू को इस कार्य के लिए उत्तेजित करने का श्रेय लाली को ही था जिसमें सोनू जैसे किशोर की आंखों के सामने अपने कामुक बदन को परोस दिया था। और उसे अपनी पेंटी में वीर्य भरने को प्रेरित कर दिया था।

राजेश और लाली एक दूसरे सटते चले जा रहे थे राजेश का लंड लाली की नाभि में चुभने लगा था।

अपने लंड पर ध्यान जाते ही राजेश ने लाली को एक बार फिर छेड़ा..

"सोनू का देखी थी क्या…"

"क्या?" लाली ने अपने चेहरे को राजेश से दूर करते हुए पूछा।

राजेश ने प्रत्युत्तर में लाली के चेहरे को वापस अपने समीप खींच लिया और अपने लंड का दबाव बढ़ाते हुए धीरे से बोला...

"ये "

लाली शर्म से सिमट गई और बोली

"छी"

अब तक उसकी कोमल चुचियाँ राजेश के हाथों में आ चुकी थीं। धीरे-धीरे राजेश लाली के ऊपर आ रहा और था और लाली की जाँघे फैल रही थीं।

बिस्तर पर हलचल बढ़ रही थी। राजेश अपने मन में सुगना की मदमस्त जवानी को याद करते हुए लाली को चोद रहा था उधर राजेश की बातों से उत्तेजित हो चुकी लाली अपने छोटे भाई सोनू को याद कर रही थी।

वासना उफान पर थी और लाली की जाघें तन रही थी वह अपनी भावनाओं पर काबू न रख पायी और स्खलित होते हुए बुदबुदाने लगी..

"सोनू बाबू...हां एसे ही …..हा और जोर से"

राजेश लाली के मुंह से यह उद्गार सुन राजेश बेचैन हो गया और पूरी गति से उसे चोदने लगा अंत में उसने लाली का साथ देते हुए खुला

" दीदी अब ठीक बानू"

लाली को अब जाकर हकीकत का एहसास हुआ उसने अपने दोनों हाथ से अपने चेहरे को ढक लिया परंतु अपनी जांघें फैला कर स्खलन का आनंद लेने लगी।

राजेश अपनी बीवी का यह रूप देख कर पूरी तरह उत्तेजित हो गया और उसकी बुर की मखमली गहराइयों को अपने वीर्य से सिंचित करने लगा।

वासना का उफान थमते ही राजेश ने लाली को चुमते हुए बोला

"एक बार सोनू को अपना लो वह भी अब तरस रहा होगा।"

लाली ने अपनी कजरारी आंखें तरेरते हुए बोला "ठीक है जब आप रहेंगे तभी" पर अपना वाक्य पूरा करते-करते शर्म को न छुपा पायी।

"अरे मेरी जान तब तो आनंद ही आ जाएगा…"

रीमा के रोने की आवाज सुनकर लाली और राजेश का प्रेम आलाप संपन्न हुआ।

और आज कुकर की सीटी बजने से लाली अपनी मीठी यादों से बाहर आयी और उसके होठों पर मुस्कुराहट दौड़ गई।

समय तेजी से बीत रहा था। राजेश के आने का वक्त हो रहा था लाली ने स्नान किया और अपने कमरे में आकर सजने संवरने लगी।

अपने नंगे जिस्म को शीशे में देखकर एक बार लाली फिर कामुक हो उठी वह कभी अपनी चुचियाँ आगे कर कभी नितंबों को पीछे कर खुद की खूबसूरती को निहारने लगी।

अलमारी से ब्रा और पेंटी निकालते समय उसे वही पेंटी दिखाई पड़ गई जिस पर उसके भाई सोनू ने अपना वीर्य भरा था। लाली के होठों पर मुस्कान आ गई।

क्या सच में वह सोनू को अपनाएगी।

क्या अपने नंगे जिस्म को को सोनू को छूने देगी क्या वह सोनू के साथ एक ही बिस्तर पर नग्न होकर…..आह…..और …… उसके आगे आप वह सोच भी नहीं पा रही थी। उसकी नंगी जांघों के बीच उस अद्भुत गुफा पर मदन रस झांकने लगा।

उसने ब्रा और पेंटी पहनने का निर्णय त्याग दिया वैसे भी राजेश के आने के पश्चात सबसे पहले उन्हें ही लाली का साथ छोड़ना था वह बेसब्री से राजेश का इंतजार करने लगी वह मन ही मन संभोग के लिए आतुर हो उठी थी।

तभी…

दरवाजे पर ठक ठक की आवाज हुयी। लाली बेहद खुश हो गई उसकी उसकी मखमली बुर में गीलापन अब भी कायम था। राजेश के आने की आहट से वह मुस्कुराती हुई अपनी फ्रंट ओपन नाइटी को लपेट कर दरवाजा खोलने लगी…

दरवाजे पर सोनू खड़ा था… …..

वह उसे देखकर अवाक रह गई।

"अरे सोनू बाबू अंदर आ जा"

सोनू ने घर की दहलीज पार की और तुरंत ही अपनी लाली दीदी के चरण छुए. चरण छूने के पश्चात जैसे-जैसे सोनू उठता गया लाली के खूबसूरत पैर गदराई जांघें आकर्षक कमर और भरी-भरी चूचियां उसकी निगाहों में अपने अस्तित्व का एहसास करातीं गई। लाली स्वयं भी उत्तेजित थी।

हमेशा की तरह लाली और सोनू एक दूसरे के गले लग गए। यह पहला अवसर था जब लाली कि लगभग नंगी चुचियों ने सोनू का स्वागत किया और उसके उभरे हुए निप्पलों के सोनू के सीने में चुभ कर अपने अस्तित्व का एहसास दिलाया।

सोनू ने लाली को अपनी बाहों में भर लिया आज का यह आलिंगन निश्चय ही अलग था। आज सोनू के हाथ लाली की पीठ पर घूम रहे थे। जब तक सोनू अपने हाथों को लाली की कमर तक ले जाता बाहर रिक्शा आने की आहट हुई।

लाली ने रिक्शे की आवाज को पहचान कर यह महसूस कर लिया कि वह रिक्शा उसके ही दरवाजे पर आकर रुका था। उसने ना चाहते हुए भी खुद को सोनू से अलग किया सोनू को लाली का यह व्यवहार थोड़ा अटपटा लगा। उसे उसके अरमानों पर थोड़ी चोट लगी। परंतु वह इशारा पाकर अलग हो गया। उसके लंड में भरपूर तनाव आ चुका था आज लाली दीदी का यह आलिंगन उसके जीवन का सबसे कामुक आलिंगन था परंतु लाली के इस तरह हटने से सोनू थोड़ा दुखी हो गया था।

लाली से अलग होने के पश्चात उसने अपने तने हुए लंड को अपने पैंट में सीधा किया परंतु वह अपनी इस क्रिया को लाली की नजरों से न बचा पाया लाली मुस्कुराते हुए दरवाजे के बाहर आ गई।

रिक्शे पर राजेश एक बड़ा सा कार्टून लिए नीचे उतर रहा था।

हॉल में खड़ा सोनू दरवाजे पर खड़ी लाली को देख रहा था बाहर से आ रही रोशनी लाली के पैरों के बीच से छन छन कर बाहर आ रही थी जिसकी वजह से लाली का पूरा बदन और उसके उभार स्पष्ट दिखाई पड़ रहे थे एक एक्सरे फिल्म की तरह। नाइटी और शरीर एक दूसरे से पूरी तरह अलग हो चुके थे। कायनात ने लाली के कामुक बदन को सोनू की आंखों के सामने परोस दिया था। सोनू अपनी उत्तेजना में खोया हुआ था तभी लाली ने पीछे मुड़कर कहा

"सोनू बाबू अपना जीजा जी के मदद करो"

सोनू अपनी कामुक सोच (जो लाली के नितंबों का आकार नाप रही थी) से निकला और दरवाजे पर खड़ी लाली से सटते हुए बाहर आ गया।

सोनू को देख कर राजेश आश्चर्यचकित था। सोनू भाग कर राजेश के पास पहुंचा उसके चरण छूने की कोशिश की परंतु राजेश ने उसके कंधे पकड़ लिए और अपने आलिंगन में ले लिया यह आलिंगन सोनू को राजेश के दोस्त होने का एहसास दिला रहा था।

"इसमें क्या है जीजा जी"

"पहले उठाओ तो, घर चल कर दिखाते हैं"

राजेश और सोनू उस बड़े से डिब्बे को उठाए हुए कमरे की तरफ आ रहे थे लाली के मन में कौतूहल कायम था वह खुशी से उछल रही थी। इस गहमा गहमी को सुनकर लाली का पुत्र राजू और पुत्री रीमा भी हाल में आकर उस अनजानी चीज का इंतजार कर रहे थे।

कार्टून के डिब्बे का आकार लाली के आश्चर्य को कायम किये हुए था।

कार्टून के डिब्बे को चौकी पर रखकर राजेश उसे खोलने लगा उसके व्यग्र हाथों ने पैकिंग टेप को उसी प्रकार चीरते हुए अलग कर दिया जैसे वह कभी कभी संभोग के लिए आतुर होकर लाली के वस्त्र हटाया करता था।

डिब्बे के अंदर टीवी देख कर लाली खुशी से उछलने लगी उसने आनन-फानन में राजेश को गले से लगा लिया एक पल के लिए वह या भूल गयी थी कि सोनू उसी हाल में उसके पीछे ही खड़ा है।

एक साथ आई खुशियां इंसान को बेसुध कर देती हैं उसे आसपास का एहसास कुछ समय के लिए खत्म हो जाता है यही हाल लाली का था वह राजेश से पूरी तरह लिपट गई। यह आलिंगन पति पत्नी के कामुक आलिंगन की भांति था। परंतु राजेश सोनू को देख रहा था उसने लाली को खुद से अलग न किया अपितु उसे आलिंगन में लिए हुए उसकी पीठ सहलाने लगा। जाने राजेश ने अपने मन में इतनी हिम्मत कहां से लाई, उसके हाथ लाली के नितंबों तक पहुंचे और उसने सोनू के सामने ही लाली के नितंबों को अपनी हथेलियों से दबा दिया। लाली को अब जाकर एहसास हुआ और वह राजेश से अलग हो गई। परंतु लाली और राजेश की यह कामुक क्रिया सोनू के मन पर एक अमिट छाप छोड़ गयी।

सिर्फ एक नाइटी का आवरण लिए लाली की गदराई जवानी सोनू की आंखों के सामने घूम रही थी। राजेश द्वारा उसके नितंबों को इस प्रकार दबाना सोनू को उत्तेजक और कामुक लगा उसके लंड में एक बार फिर तनाव आ गया।

"अच्छा हटो पहले टीवी निकाल लेने तो दो" राजेश ने लाली को अलग करते हुए कहा।

टीवी कार्टून से बाहर आ चुका था। लाली को अब अपनी नग्नता का एहसास हो रहा था वह अब राजेश और सोनू की उपस्थिति में बिना ब्रा और पेंटी के नहीं रहना चाह रही थी। वह अपने कमरे में जाकर पहनने के लिए ब्रा और पेंटी निकालने लगी तभी राजेश ने आवाज दी एक गिलास पानी तो पिलाओ।

लाली उल्टे पैर वापस आ गई और राजेश के लिए पानी निकालने लगी। पानी पीकर राजेश टीवी लगाने के लिए अंदर कमरे में आ गया और पीछे पीछे सोनू भी कुछ ही देर में टीवी लगाने की प्रक्रिया चालू हो गई। लाली को ब्रा और पैंटी पहने का कोई मौका ही नहीं प्राप्त हो रहा था।

यह टीवी एक ब्लैक एंड व्हाइट टीवी था जिसका एंटीना छत पर लगाया जाना था राजेश ने टीवी का एंटीना लिया और लोहे की सीढ़ियां चढ़ता हुआ छत पर जा पहुंचा। उसने छत पर निकली हुई सरियों की मदद से उस एंटीने को बांधा और तार नीचे गिराया जिसे सोनू ने खिड़की के अंदर लेते हुए टीवी के पास ला दिया।

राजेश छत से नीचे आया और उसने टीवी का तार जोड़ कर उसे ऑन किया दोनों ही बच्चे बिस्तर पर बैठे टीवी को जादू का पिटारा समझ कर देख रहे थे। टीवी ऑन होते ही स्क्रीन पर काले और सफेद बिंदुआने लगे राजेश खुश हो गया और सोनू से कहा

"मैं ऊपर जा रहा हूं जब स्क्रीन पर कुछ आएगा तो बताना"

राजेश के ऊपर जाने के बाद लाली सोनू के बगल में खड़े होकर टीवी को बड़े ध्यान से देख रही थी। जब तक राजेश टीवी की ट्यूनिंग करता लाली थाली में सिंदूर और दीया लेकर आ गई और टीवी पर स्वास्तिक का निशान बनाने लगी। इस दौरान लाली झुकी हुई थी और उसके उभरे हुए नितम्ब सोनू की आंखों के ठीक सामने थे। वह उसके नितंबों की गोलाईयों में खो गया। लाली ने आज सोनू को बेहद उत्तेजित कर दिया था। एक पल के लिए सोनू के मन में आया कि वह लाली के नितंबों को उसी प्रकार अपनी हथेलियों से मसल दे जिस प्रकार राजेश ने अब से कुछ देर पहले मसला था।

जैसे ही लाली ने टीवी को दिया दिखाना शुरू किया टीवी पर फिल्म आने लगी यह एक संयोग ही था की स्क्रीन पर एकदंत विनायक की फोटो आ रही थी।

सोनू के कहने से पहले ही राजू ने चिल्लाया पापा आ गया सोनू ने भी लाली के नितंबों से अपना ध्यान हटाया और जोर से बोलो

"जीजा जी आ गया"

राजेश ने ऊपर से ही पूछा

"एकदम साफ है कि अभी भी बिंदी बिंदी आ रहा है"

"नहीं जीजा जी एकदम साफ है आप नीचे आ जाइए"

यह एक संयोग ही था कि राजेश ने एक ही बार में टीवी एंटीना की दिशा बिल्कुल सही कर दी थी वह भागता हुआ कमरे में आया और टीवी स्क्रीन पर चल रहे गणेश वंदना को सुनकर अभीभूत होने लगा।

एक पल के लिए उसके मन में यह गुमान आया जैसे उसने ही उस टीवी का आविष्कार किया था। घर में उपस्थित सभी सदस्यों का ध्यान टीवी की तरफ ही था परंतु सोनू का ध्यान रह-रहकर लाली की तरफ ही जा रहा था। सोनू अपने हॉस्टल में कई बार टीवी देख चुका था वह साक्षात अपनी नायिका लाली दीदी और उसकी कामुकता का आनंद ले रहा था।

टीवी पर फिल्म एक फूल दो माली शुरू हो चुकी शुरू हो चुकी थी।

राजेश ने कहा खाना यहीं बिस्तर पर खा लेते हैं।

ठीक है मैं लेकर आती हूं।

लाली का ध्यान अब भी टीवी पर ही लगा था वह अपनी नग्नता भूल कर रसोई से जाकर खाना और बर्तन लाने लगी सोनू भी उसकी मदद करने रसोई में आ गया इधर राजेश बिस्तर पर चादर बिछा कर खाने का इंतजार करने लगा। लाली बिना ब्रा और पेंटी पहने कमरे में इधर से उधर आ जा रही थी और सोनू का ध्यान बार बार उसकी चुचियों और नितंबों पर जा रहा था कभी रोशनी से उसकी जाँघे स्पष्ट दिखाई पड़ती परंतु लाली अपने ही उन्माद में खोई हुई थी।

खानपान खत्म होते ही लाली लाली ने बर्तन वापस पहुंचाया और वापस कमरे में आ गई।

कमरे में रोशनी कम थी। खिड़कियों को भी राजेश ने बंद करा दिया था शायद उसे अंधेरे में टीवी देखना ज्यादा आनंददायक लग रहा था।

राजेश और सोनू दोनों दीवाल पर अपनी पीठ टिकाए बिस्तर पर बैठकर टीवी देख रहे थे दोनों बच्चे भी कौतूहल बस टीवी पर चल रहे फिल्म को देखकर कभी अचंभित होते हैं कभी उन्हें वह सब बेमानी लगता। रीमा तो बिल्कुल छोटी थी वह सब की खुशियों में शामिल हो रही थी पर शायद उसे इस टीवी की अहमियत बहुत ज्यादा समझ में नहीं आ रही थी।

लाली के कमरे का बिस्तर पीछे और साइड से दीवार से सटा हुआ था सबसे कोने में राजू की जगह थी उसके पश्चात रीमा फिर लाली और आखिरी में राजेश सोया करता था परंतु आज टीवी देखते समय राजेश लाली की जगह पर लेटा हुआ था और राजेश की जगह पर सोनू अपनी पीठ दीवार में सटाए टीवी देख रहा था।

लाली की आने के पश्चात सोनू अकस्मात ही उठ खड़ा हुआ और लाली से कहा

"दीदी आ जाइए बहुत अच्छी पिक्चर है।"

"तू कहां जा रहा है उधर खिसक"

"मैं बाथरूम से आता हूं"

"ठीक है" लाली बिस्तर पर आ चुकी थी वह स्वाभाविक रूप से सरकती हुई राजेश के बिल्कुल करीब आ चुकी थी. जब तक सोनू बाथरूम से लौटकर आता उसने राजेश के गालों पर चुंबन देकर अपनी खुशी और धन्यवाद दोनों ही प्रदान कर दिए थे. जब तक कि उसकी हथेलियां राजेश के लंड को सहला पातीं सोनू कमरे में दाखिल हो चुका था। लाली ने उसके लिए जगह बनाते हुए कहा...

"आजा सोनू"

मौसम थोड़ा सर्द था शुरुआती ठंड पड़ रही थी बिस्तर पर पड़ा हुआ पतला लिहाफ राजेश ने बच्चों को ओढादिया था और एक दूसरा लिहाफ खुद के और लाली के शरीर पर डाल लिया था। लाली ने लिहाफ खींचकर अपनी तरफ किया और उसे सोनू के पैरों पर भी डाल दिया।

कुछ ही देर में सोनू लाली के परिवार का अंग हो चुका था। लाली का पूरा परिवार उस बिस्तर पर बड़ी आसानी से समा जाता था और आज उस पर सोनू के लिए भी जगह बन गई थी। राजेश और सोनू अपनी पीठ दीवाल से सटाये टीवी देख रहे थे। लाली ने भी अपनी पीठ दीवाल से सटा ली थी परंतु उसने तकिया का सहारा लिया हुआ था।

टीवी पर चल रही फिल्म एक फूल दो माली धीरे-धीरे अपनी कहानी पकड़ रही थी जैसे जैसे किरदारों के बीच नजदीकियां बढ़ रही थी वैसे वैसे लाली का मन एकाग्र होता गया । वह मन मैन ही मन खुद को उस नायिका से जोड़ रही थी जिसके अगल बगल दो युवक लेटे हुए थे तथा उसके कामुक और भरे हुए शरीर का आनंद लेना चाहते थे।

लाली एक बार फिर उत्तेजना के आगोश में आ रही थी। लाली ही क्या राजेश और सोनू की स्थिति भी कमोवेश वही थी कमरे में अंधेरा होने की वजह से और टीवी पर ध्यान लगाए रहने की वजह से राजेश और सोनू दोनों को कभी-कभी एक दूसरे की उपस्थिति का एहसास नहीं हो रहा था।

अचानक राजेश ने लाली की नाइटी को ऊपर खींचना शुरू कर दिया जो धीरे-धीरे उसकी जांघों तक आ गयी। उत्तेजना बस लाली ने राजेश को मना नहीं किया परंतु नाइटी के अपनी जांघों के जोड़ पर आते ही उसे अपनी नंगी बुर का एहसास हुआ और उसने राजेश के हाथ वहीं पर रोक दिए।

कुछ देर यथास्थिति कायम रही पर राजेश कहां मानने वाला था वह तो आज टीवी दिखा दिखा कर अपनी प्यारी बीवी लाली को खूब चोदना चाहता था परंतु सोनू की अकस्मात उपस्थिति ने उसके अरमानों पर पानी डाल दिया था। राजेश ने लाली का हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिया और लाली अपने हाथों से उसे हल्का-हल्का सहलाने लगी।

वर्तमान स्थिति में लाली का यह स्पर्श भी राजेश के लिए काफी था। उधर सोनू अपने बगल में सोई हुई अपनी ख्वाबों की मलिका के बारे में सोच सोच कर उत्तेजित हुए चले जा रहा था। टीवी पर थिरक रही नायिका उसे अपनी वाली दीदी ही दिखाई पड़ रही थी

 
कहानी के पाठक जालिम महबूबाओं की तरह होते है

जो कहानी को प्रेमपत्र की तरह पढ़ते तो है पर जबाब देते समय आँचल में मुह छूपा लेते है।

कठोर पर सत्यवचन...
 
अचानक राजेश ने लाली की नाइटी को ऊपर खींचना शुरू कर दिया जो धीरे-धीरे उसकी जांघों तक आ गयी। उत्तेजना बस लाली ने राजेश को मना नहीं किया परंतु नाइटी के अपनी जांघों के जोड़ पर आते ही उसे अपनी नंगी बुर का एहसास हुआ और उसने राजेश के हाथ वहीं पर रोक दिए।



कुछ देर यथास्थिति कायम रही पर राजेश कहां मानने वाला था वह तो आज टीवी दिखा दिखा कर अपनी प्यारी बीवी लाली को खूब चोदना चाहता था परंतु सोनू की अकस्मात उपस्थिति ने उसके अरमानों पर पानी डाल दिया था। राजेश ने लाली का हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिया और लाली अपने हाथों से उसे हल्का-हल्का सहलाने लगी।

वर्तमान स्थिति में लाली का यह स्पर्श भी राजेश के लिए काफी था। उधर सोनू अपने बगल में सोई हुई अपनी ख्वाबों की मलिका के बारे में सोच सोच कर उत्तेजित हुए चले जा रहा था। टीवी पर थिरक रही नायिका उसे अपनी लाली दीदी ही दिखाई पड़ रही थी

अब आगे….

अपने तने हुए लंड को व्यवस्थित करने के लिए सोनू ने अपना दाहिना हाथ लिहाफ के अंदर किया और अपने लंड की तरफ ले गया पर इसी दौरान उसकी हथेलियों का पिछला भाग लाली की नग्न जांघों से छू गया सोनू को जैसे करंट सा लगा।

उसे यकीन ही नहीं हुआ कि उसने नारी शरीर का वह अनोखा भाग अपनी हथेलियों के पिछले भाग से छू लिया है। उसने अपने लंड को व्यवस्थित किया और वापस अपनी हथेलियां ऊपर करते समय एक बार फिर लाली की जांघों को छूने की कोशिश की। वह यह तसल्ली करना चाहता था कि क्या उसने सच लाली की नंगी जांघों को छुआ है या नाइटी के ऊपर से।

इस बार सोनू ने अपनी हथेलियों की दिशा मोड़ दी थी सोनू की हथेलियां एक बार फिर लाली की जांघों पर सट रही थी जब तक कि सोनू अपने हाथ हटा पाता लाली ने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे अपनी जांघों से सटाये रखा।

लाली ने सोनू की चोरी पकड़ ली थी परंतु अब वह खुद उहाफोह में थी कि वह उसका हाथ हटाए या उसी जगह रखें रहे? लाली मन ही मन दुविधा में थी और उसी दुविधा में कुछ सेकेंड तक सोनू की हथेलियां लाली की नंगी जांघों से छू रहीं थी। धीरे-धीरे लाली का हाथ सोनू के हाथ से हट गया पर सोनू की हथेलियों ने लाली की जांघों को ना छोड़ा।

सोनू की सांसें तेज चल रही थीं। उसे यह समझ नहीं आ रहा था कि लाली दीदी ने उसका हाथ क्यों पकड़ा और अब उन्होंने उसका हाथ क्यों छोड़ दिया था। जबकि वह अपने हाथ अभी भी उनकी जांघों से सटाये हुए था। सोनू ने अपनी हथेलियां थोड़ी ऊपर की परंतु उसने लाली की जांघों को न छोड़ा। 5कुछ ही देर में सोनू ने हिम्मत जुटाई और लाली की नंगी जांघों पर अपने हाथ फिराने लगा।

उधर लाली उत्तेजना में कॉप रही थी। उसने अकस्मात ही सोनू का हाथ अपनी जांघ पर महसूस कर न सिर्फ उसे पकड़ लिया था अपितु उसे उसी अवस्था में कुछ देर रखे रहा था। अब वह यह जान चुकी थी कि सोनू उसकी नंगी जांघों को सहलाना चाह रहा है उसने अपने हाथ हटा लिए परंतु सोनू की हथेलियों का स्पर्श उसे अब भी प्राप्त हो रहा था। लाली अपनी उत्तेजना को कायम रखते हुए सोनू के स्पर्श का आनंद लेने लगी ।

तभी लाली को अपनी दूसरी जांघ पर राजेश की हथेलियों का स्पर्श प्राप्त हुआ। राजेश अपने लंड को सहलाने से उत्तेजित हो चुका था और वह लाली की मखमली जाँघों और उसके बीच छुपी हुई बूर को अपनी उंगलियों से सहलाना चाह रहा था। लाली मन ही मन इस उत्तेजक घड़ी का आनंद लेने लगी परंतु उसे पता था यह ज्यादा देर नहीं चल पाएगा। सोनू भी धीरे-धीरे व्यग्र हो रहा था उसकी हथेलियां उसके वस्ति प्रदेश की तरफ बढ़ रहीं थीं। हर कुछ पलों के बाद सोनू की हथेलियां अपने लक्ष्य के बिल्कुल करीब थीं।

जीजा और साले के बीच लक्ष्य तक पहुंचने की होड़ सी लग गई थी। कमरे में पूरी तरह शांति थी सिर्फ टीवी की आवाज ही कमरे में गूंज रही थी। सभी की आंखें टीवी पर लगी हुई थीं और हाथ अपने-अपने हरकतों में व्यस्त थे। लाली अपने हाथ से राजेश का लंड सहला रही थी परंतु सोनू का लंड छुने की उसकी हिम्मत नहीं थी। वह खुद से अपनी व्यग्रता और इच्छा को सोनू पर हावी नहीं करना चाहती थी। धीरे धीरे राजेश और सोनू की हथेलियों उसकी मखमली बुर की तरफ बढ़ रहीं थीं।

अचानक लाली में राजेश का हाथ पकड़ कर उसे वापस अपनी जांघों पर रख दिया। जो अब ठीक उसकी बुर के ऊपर पहुंचने वाला था। राजेश लाली के इस व्यवहार से हतप्रभ था। आज पहली बार लाली ने उसे अपनी बुर छूने से रोक दिया था। उसने अपनी गर्दन घुमाई और लाली की तरफ देखा। परंतु लाली ने बड़े प्यार से अपनी आंखें बंद कर उसे प्यार से शांत कर दिया। राजेश को यह बात समझ में ना आयी परंतु वह अपने लंड को सहलाये जाने का आनंद लेने लगा जिसमें लाली में अपनी हथेलियों की गति बढ़ाकर नई ऊर्जा डाल दी थी।

सोनू की उंगलियां तेजी से लाली की बुर की तरफ बढ़ रही थीं। उस सुनहरी गुफा तक पहुंचने से पहले वह लाली की बुर के मखमली और मुलायम बालों से खेलने लगा। सोनू बेहद आनंदित हो रहा था। यह पहला अवसर था जब उसने किसी लड़की या युवती की बुर को इतने करीब से छुआ था। वह वासना में डूबा हुआ अपनी लाली दीदी की बुर के बिल्कुल समीप आ चुका था।

लाली से कोई प्रतिरोध न मिलने से उसका उत्साह बढ़ गया और अंततः उसकी उंगलियों में लाली की बुर् के होठों पर आए मदन रस को छू लिया। उस चिपचिपे द्रव्य को अपनी उंगलियों पर महसूस कर सोनू खुशी से पागल हो गया उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अब वह आगे क्या करें। यह उसका पहला अनुभव था वह चाह रहा था कि अपनी उंगलियों को बाहर खींचे और जाकर अपनी इस खुशी का आनंद एकांत में उठाए उसने अपने हाथ बाहर खींचने की कोशिश की।

यही वह अवसर था जब लाली ने एक बार फिर उसकी कलाई पकड़ ली सोनू एक पल के लिए डर गया परंतु लाली ने उसका हाथ उसी अवस्था में कुछ देर तक पकड़े रहा। सोनू की खुशी का ठिकाना ना रहा। उसकी तर्जनी ने लाली के बुर् के दोनों होठों के बीच अपनी जगह बनानी शुरू कर दी। ऐसा लग रहा था जैसे सोनू लाली के मक्खन भरे मुंह में अपनी उंगलियां घुमा रहा हो। जैसे-जैसे सोनू की उंगलियां लाली के बुर के अंदर जाने लगी बुर की मखमली दीवारों में अपना प्रतिरोध दिखाना शुरू किया। मदन रस की फिसलन बुर की दीवारों के प्रतिरोध को कम कर रही थी परंतु सोनू की उंगलियों को उनका सुखद स्पर्श बेहद उत्तेजक लग रहा था। उसने अपनी उंगलियों को वापस निकाला और उंगलियों पर लगे मदन रस को दूसरी उंगलियों पर रगड़ कर उसकी चिकनाहट को महसूस किया।

अचानक उसे स्त्रियों की भग्नासा का ध्यान आया परंतु सोनू जैसे नौसिखिया के लिए लाली का भग्नासा खोज पाना इतना आसान न था वह अपनी उंगलियों को लाली की बुर के होठों पर इधर घुमाने लगा। उंगलियों का स्पर्श अपनी भग्नासा पर पढ़ते ही लाली ने अपनी हथेली से उसके हाथ को दबा दिया। लाली के इशारे से सोनू ने वह खूबसूरत जगह खोज ली। जब जब उसकी उंगलियां भगनासे से छूतीं लाली उसके हाथों को पकड़ लेती । कुछ ही देर में लाली की बुर की दोस्ती सोनू की उंगलियों से हो गयी। दोनों ही एक दूसरे का मर्म समझने लगे।

सोनू की उंगलियां लाली की बुर में जाते समय प्रेम रस चुराती और उसके भगनासा पर अर्पित कर देतीं। लाली अपनी दोनों जाँघे सिकोड़ रही थी और प्रेम रस को बाहर की तरफ धक्का देकर निकालने का प्रयास कर रही थी।

उधर वह राजेश के लंड को सहलाए जा रही थी। अब भी उसे सोनू के लंड को छूने की हिम्मत न थी परंतु वह इस उत्तेजना का आनंद ले रहे थी। जितनी उत्तेजना वह सोनू के स्पर्श से प्राप्त कर रही थी वह अपने पति राजेश के लंड को उसी तत्परता से सह लाए जा रही थी। राजेश भी अब पूरी तरह उत्तेजित हो चुका था।

लाली ने अचानक अपने दोनों पैर ऊपर की तरफ मोड़े और सोनू की उंगलियां छटक कर बाहर आ गयीं। सोनू के लिए शायद यह एक इशारा था और उसकी उंगलियों को लाली की बुर से बिछड़ने का इशारा मिल चुका था। सोनू का लंड खुद भी अब वीर्य स्खलन के लिए तैयार था।

अचानक ही सोनू बिस्तर से उठा और बोला

" मैं जा रहा हूं सोने मुझे नींद आ रही है "

राजेश ने कहा

"ठीक है सोनू आराम कर लो रात को फिर टीवी देखा जाएगा "

लाली की भी इच्छा यही थी वह राजेश से चुदना चाहती थी। उसने भी सोनू को न रोका और सोनू हॉल की तरफ बढ़ गया। परंतु जाते जाते उसने अपनी उंगलियां अपनी नाक की तरफ ले गया जिस पर लाली की बुर का प्रेम रस लिपटा हुआ था। वह अपनी अधीरता न छूपा पाया और इसे लाली ने बखूबी देख लिया वह सोनू की इस हरकत से बेहद उत्तेजित हो गयी। अपने ही भाई को अपनी बुर का रस सूंघते देख लाली सिहर गई।

राजेश बिस्तर से उठा और अपने कमरे का दरवाजा ताकत लगाकर बंद कर दिया उसे दरवाजा बंद करने की प्रैक्टिस थी अन्यथा उसे बंद करना लाली के बस का न था। दरवाजा बंद होने की स्पष्ट आहट से सोनू जान चुका कि आगे कमरे में क्या होने वाला है। वह दरवाजे के पास खड़ा होकर अंदर के दृश्यों की कल्पना करने लगा और अपने कानों को दरवाजे से सटाकर सुनने का प्रयास करने लगा।

राजू और रीमा सो चुके थे। कमरे में ठंड अब कम हो चुकी थी कई लोगों की उपस्थिति से कमरा वैसे भी कुछ गर्म हो चुका था और ऊपर से लाली और राजेश दोनों ही बेहद उत्तेजित थे। एक ही झटके में राजेश ने लिहाफ हटाया और लाली की नंगी जांघों को देखकर उस पर टूट पड़ा। बाहर खड़ा सोनू अंदर के दृश्य तो नहीं देख पा रहा था परंतु उसे उसका एहसास बखूबी था।

लाली की जाँघों और बुर के आसपास इतना ढेर सारा चिपचिपा पन देखकर राजेश से रहा न गया और उसने बोला

"अरे आज तक पूरा गर्म बाड़ू सोनू के देख कर गरमाइल बाडू का?"

राजेश ने लाली को छेड़ते हुए कहा।

"आप आइए अपना काम कीजिए" लाली ने अपनी दोनों जाँघे फैला दीं।

"अच्छा एक बात तो बताओ उस समय तुमने मेरा हाथ क्यों रोका था?"

लाली मुस्कुराई और बोली

"एक ही ट्रैक पर दो रेलगाड़ी गाड़ी कैसे चलती?"

राजेश यह बात सुनकर उतावला हो गया। जो लाली ने कहा था वह उसकी सोच से परे था। वह लाली को बेतहाशा चूमने लगा और बोला

"बताओ ना किसका हाथ था?"

"आपके साले का" जब तक लाली यह बात बोलती राजेश का लंड लाली की गर्म और चिपचिपी बुर में प्रवेश कर चुका था। और लाली अपनी आंखें बंद की संभोग का आनंद लेने लगी।

जैसे-जैसे राजेश का आवेग बढ़ता गया टीवी की आवाज पर बिस्तर की धमाचौकडी की आवाज भारी होती गयी जो सोनू के सतर्क कानों को बखूबी सुनाई पड़ रही थी। उस पर से लाली की कामुक आहे सोनू को और भी स्पष्ट सुनाई पड़ रही थीं।

जाने सोनू और लाली में कोई टेलीपैथी थी या कुछ और परंतु सोनू को लाली बेहद करीब नजर आ रही थी। वह अपने ख्यालों में हैं उसे चूम रहा था और अपनी हथेलियों से अपने लंड को लगातार आगे पीछे किये जा रहा था। अचानक लाइट चली गई और टीवी एकाएक बंद हो गया। कमरे में अचानक पूरी शांति हो गई परंतु राजेश और लाली अपनी चुदाई में पूरी तरह मस्त थे उन्हें सोनू का ध्यान ना आया।

कमरे में चल रही और जांघों के टकराने की थाप स्पष्ट सुनाई पड़ रही थी। सोनू से अब और न देखा गया उसकी हथेलियों की गति अचानक बढ़ गई और वीर्य की धारा फूट पड़ी।

स्खलित होते समय उसके कानों ने अचानक ही लाली की आवाज सुनी। सोनू ….आ…...ईई आह…. हां बाबू ऐसे हीं…….…...आ आ आ ए ….……….आईईईई "

सोनू ने जो सुना वह खुद पर यकीन न कर पाया। पर उसने अपनी हथेलियों से अपने लंड को मसलना जारी रखा वह वीर्य की अंतिम बूंद को भी अपनी वाली दीदी को समर्पित करता रहा जो उसकी लाली दीदी तक तो न पहुंच पायीं परंतु उसके दरवाजे पर गिरकर एक अनुपम कलाकृति बनाती रहीं।

सोनू थके हुए कदमों से हॉल में पड़ी चौकी पर जाकर लेट गया। अब वह कमरे के अंदर चल रही धमाचौकड़ी को और सुनना नहीं चाहता था। उसकी उत्तेजना चरम को प्राप्त हो चुकी थी वह कम से कम कुछ घंटों के लिए अपनी सांसो को नियंत्रित करते हुए बिस्तर पर लेट कर इस सुखद अहसास को आत्मसात कर रहा था।

उधर लाली की कामुक कराहें थम गई थीं। परंतु राजेश उसे अभी भी चोदे जा रहा था। लाली ने उसे उत्तेजित करते हुए कहा

"आप खुश हो ना?

"क्यों किस बात पर?"

अपनी मुनिया ( राजेश कभी-कभी लाली की बुर को मुनिया कहता था) को अपने साले से साझा कर...

राजेश को लाली की यह बात आग में घी जैसी प्रतीत हुयी। वह स्वयं भी उन्ही खयालों में डूबा हुआ था और लाली कि इस बात से उससे रहा न गया और उसने अपने लंड को लाली की बुर में पूरी गहराई तक डाल कर इस स्खलित होने लगा।

उत्तेजना का ज्वार जब शांत हुआ तब एक बार फिर राजेश ने पूछा।

"सोनू के भी छुवले रहलु हा"

"अब एक ही दिन में सब कुछ लुटा दी?"

राजेश ने लाली को आगोश में ले लिया और उसके होंठों को चूमते हुए बोला

"वह तुम्हारा भाई है तुम ही जानो उसका ख्याल कैसे रखोगे मुझे कुछ नहीं कहना है"

"और यदि उसने भी अपनी मलाई मेरे ऊपर गिरा दी तब तो मेरी मुनिया और चूँची आपके लिए पवित्र ना रहेगी और आपके होठों का स्पर्श उसे कैसे मिलेगा"

जब तुम और तुम्हारी मुनिया उसे अपना लेंगी तो फिर मैं भी अपना लूंगा आखिर तब वह अपने परिवार का ही हिस्सा हो जाएगा।

लाली ने राजेश की बात सुन तो ली परंतु उसने कोई प्रतिक्रिया ना दी। वह अपनी आंखें बंद कर राजेश को अपने नींद में होने का एहसास दिला रही थी राजेश भी पूरी तरह थक चुका था वह उसे आगोश में ले कर सो गया। परंतु राजेश ने लाली को सोनू के वीर्य को अपनाने के लिए अपनी रजामंदी दे दी थी।

लाली की अंतरात्मा मुस्कुरा रही थी। वह सोनू को अपनाने का मन बना चुकी थी…

आइए बहुत दिन हो गया सुगना के पति रतन का हालचाल ले लेते हैं आखिर इस कहानी में उसकी भूमिका भी अहम होगी।

सुगना के साथ होली मनाने के पश्चात रतन मुंबई पहुंच चुका था। हालांकि सुगना ने रतन को अब भी अपने शरीर पर हाथ लगाने नहीं दिया था परंतु फिर भी वह उससे बातें करने लगी थी। जितना प्यार वह सूरज से करता था सुगना उतनी ही आत्मीयता से उससे बातें करती थी ।

मुंबई पहुंचने के बाद रतन का मन नहीं लग रहा था अपनी पत्नी सुगना और उसके बच्चे सूरज का चेहरा उसके जेहन में बस गया था। कभी-कभी उसके मन में आता कि वह सब कुछ छोड़ कर वापस अपने गांव चला जाए परंतु यह इतना आसान नहीं था मुंबई में उसने अपनी गृहस्थी जमा ली थी।

बबीता से उसके संबंध धीरे-धीरे खराब हो रहे थे उसकी बड़ी बेटी मिंकी उसे बहुत प्यारी थी उसे ऐसा लगता था जैसे वह उसके और बबीता के प्रेम की निशानी थी परंतु छोटी बेटी चिंकी का जन्म अनायास ही हो गया था रतन और बबीता ने यह निर्धारित किया था कि वह परिवार नियोजन के साधनों का समुचित उपयोग करेंगे। वह दोनों ही दूसरी संतान के पक्षधर नहीं थे परंतु रतन के सावधानी बरतने के बावजूद बबीता गर्भवती हो गई अब राजेश को यकीन हो चला था कि निश्चय ही उसकी छोटी बेटी चिंकी बबीता और उसके मैनेजर के संबंधों की देन है। वह स्वाभाविक रूप से चिंकी को अपना पाने में असमर्थ था।

दो-तीन महीनों बाद दीपावली आने वाली थी इसी बीच सुगना का जन्मदिन आ रहा था रतन ने सुगना के लिए सुंदर साड़ियां लहंगा और चुन्नी तथा सूरज के लिए कपड़े और ढेर सारे खिलौने खरीदें और बड़े अरमानों के साथ उन्हें गत्ते के डिब्बे में बंद करने लगा। वह दीपावली से पहले सुगना को प्रभावित करना चाहता था उसने मन ही मन मुंबई छोड़ने का मन बना लिया था उसने सुगना को एक प्रेम पत्र भी लिखा जिसका मजमून इस प्रकार था।

मेरी प्यारी सुगना,

मैंने जो गलतियां की है वह क्षमा करने योग्य नहीं है फिर भी मैं तुमसे किए गए व्यवहार के प्रति दिल से क्षमा मांगता हूं तुम मेरी ब्याहता पत्नी हो यह बात समाज और गांव के सभी लोग जानते हैं मुझे यह भी पता है कि मुझसे नाराज होकर और अपने एकांकी जीवन को खुशहाल बनाने के लिए तुमने किसी अपरिचित से संभोग कर सूरज को जन्म दिया है मुझे इस बात से कोई आपत्ति नहीं है मैं सूरज को सहर्ष अपनाने के लिए तैयार हूं वैसे भी उसकी कोमल छवि मेरे दिलो दिमाग में बस गई है पिछले कुछ ही दिनों में वह मेरे बेहद करीब आ गया और मुझे अक्सर उसकी याद आती है।

मुझे पूरा विश्वास है की तुम मुझे माफ कर दोगी मैं तुम्हें पत्नी धर्म निभाने के लिए कभी नहीं कहूंगा पर तुम मुझे अपना दोस्त और साथी तो मान ही सकती हो।

मैंने मुंबई छोड़ने का मन बना लिया है बबीता से मेरे रिश्ते अब खात्मे की कगार पर है मैं उसे हमेशा के लिए छोड़कर गांव वापस आना चाहता हूं यदि तुम मुझे माफ कर दोगी तो निश्चय ही आने वाली दीपावली के बाद का जीवन हम साथ साथ बिताएंगे।

तुम्हारे उत्तर की प्रतीक्षा में।

रतन ने खत को लिफाफे में भरा और सुगना तथा सूरज के लिए लाई गई सामग्रियों के साथ उसको भी पार्सल कर दिया वह बेहद खुश था उसने आखिरकार अपने दिल की बात सुगना तक पहुंचा दी थी वह खुशी खुशी और उम्मीदें लिए सुगना के जवाब की प्रतीक्षा करने लगा।

उधर लाली के घर में शाम को चुकी थी।

दोपहर में लाली को कसकर चोदने के बाद राजेश उठ चुका था। उधर अपनी दीदी की बुर को सहला कर सोनू भी अद्भुत आनंद को प्राप्त कर चुका था । तृप्ति का अहसास तीनों युवा दिलों में था सब ने अपनी अपनी आकांक्षाएं कुछ हद तक पूरी कर ली थी। शाम को लाली ने अपने पति राजेश और प्यारे भाई सोनू को पकोड़े खिलाए और घुल मिलकर बातें करने लगी। उन तीनों के ऐसे व्यवहार से ऐसा लग ही नहीं रहा था जैसे दोपहर में उनके बीच की दूरियां अचानक ही घट गई थीं। सिर्फ सोनू अब भी अपनी आंखें झुकाये हुए था वह अभी भी शर्मा रहा था जबकि लाली उससे खुलकर बात कर रही थी लाली ने सोनू को छेड़ते हुए कहा..

"का सोनू बाबू मन नईखे लागत का?"

"नहीं दीदी आप लोगों के यहां अच्छा नहीं लगेगा तो फिर कहां लगेगा?" सोनू ने अपना जवाब सटीक तरीके से दे दिया था.

राजेश ने कहा

"भाई मुझे तो अब ड्यूटी पर जाना पड़ेगा तुम दोनों एक दूसरे का ख्याल रखो" राजेश ने एक बार फिर सोनू को दोस्त जैसा संबोधित किया था।

"अरे आज ड्यूटी छोड़ दीजिए ना इतना अच्छा टीवी लाए हैं रात में एक साथ देखा जाएगा. क्यों बाबू सोनू अपने जीजा जी को रोको ना।"

सोनू ने भी लाली की हां में हां मिलाई परंतु राजेश को ड्यूटी पर जाना जरूरी था वैसे भी वह दोपहर में वह अपनी काम पिपासा शांत कर चुका था। उसके मन में रह रहकर यह भी ख्याल आ रहा था की आज रात लाली और सोनू एक साथ रहेंगे हो सकता है लाली अपने हुस्न के जादू से सोनू को अपने और करीब ले आए।

राजेश ने कहा

"सोनू आज तो नहीं पर कल मैं जरूर छुट्टी लूंगा और तुम्हारे साथ रहूंगा"

राजेश ड्यूटी पर जाने की तैयारी करने लगा उसने निकलते वक्त लाली को चुमते हुए कहा

"सोनू को भी अंदर ही सुला लेना"

"लाली में भी अपनी आंखें तरेरते हुए और चेहरे पर मुस्कुराहट लिए हुए कहा

" कहां ?अपने ऊपर" लाली ने राजेश के पास पहुंच कर धीरे से कहा..

राजेश मुस्कुराने लगा उसमें लाली को अपने आलिंगन में कसकर दबोचा और उसके नितंबों को पकड़ते हुए बोला

" नहीं ..नहीं... वह तो मेरे सामने ही.."

कुछ देर बाद राजेश चला गया. लाली और सोनू के लिए यह रात अलग थी. सोनू ने अपने मन में ढेर सारे सपने सजों लिए थे उसकी प्रेमिका और उसके ख्वाबों की मलिका लाली दीदी आज रात उसके साथ गुजारने वाली थी वह भी एक ही बिस्तर। पर क्या वह अपनी लाली दीदी की जांघों के बीच एक बार फिर अपनी हथेलियों को ले जा पाएगा? क्या वह उस अद्भुत द्वार को देख पाएगा ? वह मन ही मन उसे चूमने और चाटने की कल्पनाएं करने लगा जिसका सीधा असर उसके लंड पर हो रहा था।

लाली ने सोनू की पसंद का खाना बनाया और अब अपने बच्चों के साथ मिलकर खाना खाया। सोनू वास्तव में उसे अब अपने परिवार का ही हिस्सा लगने लगा था। दोनों बच्चे भी उससे घुल मिल गए थे वह बार-बार उसे मामा मामा कहते और उसकी गोद में खेलते।

सोनू दोनों बच्चों को लेकर बिस्तर पर आ गया और उनके साथ खेलने लगा। लाली का बेटा राजू कभी सोनू के ऊपर कूदता कभी उसे पटकने का प्रयास करता उस मासूम के छोटे हाँथ सोनु जैसे बलिष्ठ युवा को आसानी से गिरा देते वह बेहद खुश होता और उसकी खुशियां ही सोनू की खुशियां थीं।

लाली सोनू का यह रूप देखकर बेहद खुश थी। कुछ ही देर में लाली दूध का गिलास हुए हुए कमरे में प्रवेश की । सोनू को एक पल के लिए ऐसा लगा जैसे उसकी प्रेमिका नववधू के रूप में दूध का गिलास लेकर संभोग के लिए प्रस्तुत है सोनू का दिल बल्लियों उछलने लगा। उसने गटागट दूध पी लिया परंतु अपनी लाली दीदी की कलाई पकड़ने की उसकी हिम्मत ना हुई।

इधर सोनू अपने मन में ढेर सारे अरमान पाले हुए था उधर लाली को आज की रात से कोई उम्मीद न थी वह राजेश की अनुपस्थिति में अपना अगला कदम बढ़ाने की इच्छुक न थी। उसने अपनी रसोई का कार्य निपटाया और वापस आकर रीमा को अपनी चुचियां पकड़ा दीं। रीमा लाली की एक चूची से दूध पीती रही तथा दूसरी से खेलती रही सोनू यह दृश्य देखता रहा और तरसता रहा काश वह रीमा की जगह होता।

रीमा को दूध पिलाते पिलाते लाली खुद भी निद्रा देवी की आगोश में चली गई सोनू अपने अरमान लिए अकेला बिस्तर पर लेटा टीवी देख कर दादी की कल्पनाओं का आनंद ले रहा था परंतु असली आनंद उसे तभी प्राप्त हुआ जब उसकी रूखी हथेलियों ने तने हुए कोमल लंड को अपने हाथों में लेकर उसका वीर्य स्खलन कराया। एक सपनों भरी रात अचानक खत्म हो गई थी पर सोनू ना उम्मीद नहीं था उसे लाली दीदी पर और अपनी तकदीर पर भरोसा था उसने अगले दिन लाली को खुश करने की ठान ली थी.
 
राजेश हमेशा से ही समझता था की सुगना गांव पर अकेली रहती है और उसका पति साल में सिर्फ कुछ दिनों के लिए ही घर आता है इसीलिए वह सुगना के करीब आना चाहता था सुगना भी राजेश की खुशमिजाजी और उसकी सहेली के पति होने के कारण उसके साथ कुछ न कुछ समय बिताती थी।

सुगना को जबरदस्त तरीके से चोदने के कारण उसके बाबूजी सरयू सिंह हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे उन्हें कोई विशेष बीमारी न थी। इसी दौरान लाली के घर पर सुगना और राजेश कुछ करीब आ गए।

रतन तो बेचारा अभी सुगना से बातचीत ही करना शुरू किया है । आगे वह सुगना के कितने करीब आ पाता है इसका मुझे भी इंतजार है...

जुड़े रहिये।।
 
इधर लाली और सोनू करीब आ रहे थे उधर सुगना की जांघों के बीच उदासी छाई हुई थी पिछले कई दिनों से सुगना को संभोग का आनंद प्राप्त नहीं हुआ था। सरयू सिंह कभी कभी उसकी चुचियों और बुर को को चूम चाट कर सुगना को स्खलित कर देते परंतु जो आनंद संभोग में था वह मुखमैथुन से प्राप्त होना असंभव था।



सुगना की बुर तरस रही थी। उधर उसकी सास कजरी ने सरयू सिंह के स्वास्थ्य का हवाला देकर सुगना को चुदने के लिए स्पष्ट रूप से मना कर दिया था सुगना स्वयं भी सरयू सिंह को किसी मुसीबत में नहीं डालना चाहती थी। उसने मन मसोसकर कजरी की बात मान ली थी।

बेचारी सुगना की जो पिछले 3- 4 वर्षों से सरयू सिह की लाडली थी और वो उसे तन मन से खुश रखते थे आज उसकी जाँघों में बीच उदासी छायी हुयी थी। सुगना अपनी चुदाई की मीठी यादों के साथ सो जाती।

बीती रात उसने बेहद कामुक कामुक स्वप्न देखा सरयू सिंह अपना तना हुआ लंड लेकर जैसे ही उसे चोदने जा रहे थे कई सारे लोग अचानक ही उसके कमरे में आ गए उसने आनन-फानन में चादर से अपने बदन को ढका और सर झुकाए अनजान लोगों को देखने लगी।

कभी उन अनजान लोगों में कभी गांव वाले दिखाई पड़ते कभी कजरी कभी राजेश कभी लाली। सुगना अपनी चोरी पकड़े जाने से परेशान थी। स्वप्न में ही उसके पसीने छूटने लगे तभी कजरी की आवाज आई.

"राउर तबीयत ठीक नईखे सुगना के छोड़ दी। जितना खुशी सुगना के देवे के रहे रहुआ दे लेनी अब उ सूरज के साथ खुशि बिया"

सुगना कजरी को रोकना चाहती थी। सुगना को चुदे हुए कई दिन बीत चुके थे वो अपने बाबू जी सरयू सिह से जी भरकर चुदना चाहती थी। उसकी जांघों के बीच अजब सी मरोड़ उत्पन्न ही रही थी इसी उहापोह में उसकी आंख खुल गई । और वह उठ कर बैठ गई।

बगल में सूरज सो रहा था वह अपने स्वप्न को याद कर मुस्कुराने लगी अपनी बुर पर ध्यान जाते ही उसने महसूस किया की उस स्वप्न ने बुर को पनिया दिया था।

सुगना को अपने बाबू जी से किया हुआ वादा भी याद आ रहा था वह उनकी इस अनूठी इच्छा को पूरा अवश्य करना चाहती थी परंतु उनके विशाल लंड को अपनी गुदाद्वार में ले पाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी।

अचानक सुगना को राजेश की याद आई वही उसके जीवन में आया दूसरा मर्द था जो उसके इतने करीब आया था। सुगना के दिमाग में उस रात का वृतांत घूमने लगा जब राजेश में उसकी नंगी जांघों को जी भर कर देखा था वह स्वयं भी उत्तेजना के आवेश में उसे ऐसा करने दे रही थी सुगना मुस्कुरा रही थी और ऊपर वाले से प्रार्थना कर रही थी की काश राजेश स्वयं आगे बढ़ कर उसे अपनी बाहों में ले ले।

सुगना ने नींद में जो स्वप्न देखा था वह तो जब सुगना चाहती साकार हो जाता परंतु राजेश के साथ अंतरंग होने का जो दिवास्वप्न सुगना खुली आंखों से देख रही थी वह इतना आसान नहीं था. इन दूरियों को सिर्फ और सिर्फ नियति मिटा सकती थी जो अब तक सुगना का साथ दे रही थी सुगना अपने मन में वासना की मिठास और जांघों के बीच कशिश लिए हुए एक बार फिर सो गई.

सुबह घरेलू कार्य निपटाने के पश्चात सुगना और कजरी बाहर दालान में बैठे सरसों पीट रहे थे. दूर से डुगडुगी बजने की आवाज आ रही थी जो धीरे-धीरे तीव्र होती जा रही थी कुछ ही देर में वह आवाज बिल्कुल करीब आ गई. डुगडुगी वाला मुनादी करते घूम रहा था साथ चल रहे कुछ व्यक्ति जगह-जगह पोस्टर चिपका रहे थे.

हरिद्वार से आए कुछ साधु भी उस मंडली के साथ थे सुगना भागकर दालान से बाहर निकली और गली में आ रहे झुंड को देखने लगी.

उन साधुओं ने एक पोस्टर सुगना के घर के सामने भी चिपका दिया सुगना ने ध्यान से देखा यह बनारस में कोई महोत्सव आयोजित किया जा रहा था जिसमें सभी को आमंत्रण दिया जा रहा था। ऐसा प्रतीत होता था जैसे वह एक दिव्य आयोजन था . साधुओं ने हाथ जोड़कर सुगना और कजरी ( जो अब सुगना के पास आकर खड़ी हो गई थी ) तथा परिवार के बाकी सदस्यों को इस उत्सव में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया.

कजरी ने हाथ जोड़कर साधुओं का अभिवादन किया और अपनी सहमति देकर उन्हें आगे के लिए विदा किया कुछ ही देर के लिए सही इस डुगडुगी और उस भीड़ भाड़ ने सुगना के जीवन में नयापन ला दिया था।

सुगना ने कजरी से पूछा

"मां बाबू जी से बात करीना शहर घुमला ढेर दिन भईल बा यज्ञ भी देख लीहल जाई और शहर भी घूम लिहल जायीं।"

कजरी को भी सुनना की बात रास आ गई उसे भी शहर गए कई दिन हो गए थे। सुगना का जन्मदिन भी करीब आने वाला था। उसने मुस्कुराते हुए कहा..

"कुँवर जी के रानी त हु ही हउ बतिया लीह"

सुगना मुस्कुराने लगी….

उधर लाली के घर पर

सोनू कल की यादें लिए आज सुबह से ही लाली के आगे पीछे घूम रहा था वह कभी रसोई में जाकर उसकी मदद करता कभी राजू और रीमा के साथ खेलता। लाली घरेलू कार्यों में व्यस्त थी। दोपहर बाद लाली घर के कार्यों से निवृत्त होकर हॉल में पड़ी चौकी पर बैठकर अपने बाल बना रही थी. सोनू उसे हसरत भरी निगाहों से देखे जा रहा था अचानक लाली ने पूछा

"सोनू बाबू हॉस्टल कब खुली?"

"क्यों दीदी मेरे रहने से दिक्कत हो रही है. कर्फ्यू खुलते ही मैं हॉस्टल वापस लौट जाऊंगा?"

लाली ने तो सोनू से वह प्रश्न यूं ही पूछ लिया था परंतु सोनू की आवाज में उदासी थी. लाली ने वह तुरंत ही भांप लिया और सोनू के सिर को अपनी तरफ खींच लिया सोनू उसके बगल में ही बैठा था वह झुकता चला गया और उसका सिर लाली की गोद में आ गया।

लाली उसकी बालों पर उंगलियां फिराने लगी और बेहद ही आत्मीयता से बोली

"अरे मेरा सोनू बाबू मैं तुझे जाने के लिए थोड़ी कह रही हूं मैं तो यूं ही पूछ रही थी"

सोनू के गाल अपनी लाली दीदी की मोटी और गदराई जांघों से सटने लगे। लाली ने अब से कुछ देर पहले ही स्नान किया था उसके शरीर से लक्स साबुन की खुशबू आ रही थी और लाली के जिस्म की मादक खुशबू भी उसमें शामिल हो गई थी। सोनू उस भीनी भीनी खुशबू में खो रहा था उसके खुले होंठ लाली की जांघों से सट रहे थे। सोनू का लंड सोनू के मन को पूरी तरह समझता वह लाली की बुर को सलामी देने के लिए उठ खड़ा हुआ।

अपनी मां की गोद में सोनू को देखकर रीमा ईर्ष्या से सोनू को हटाने लगी और वह स्वयं उसकी गोद में आने लगी। सोनू को मजबूरन हटना पड़ा वह मन ही मन लाली की जांघों को चूमना चाहता था परंतु रीमा के बाल हठ ने उसे ऐसा करने से रोक दिया।

तभी दरवाजे पर टन टन टन की आवाज सुनाई पड़ी यह आवाज उस गली से गुजर रहे कुल्फी वाले की थी। ऐसा लग रहा था जैसे रेलवे कॉलोनी में कर्फ्यू का कोई असर नहीं था। राजू उस आवाज को भलीभांति पहचानता था उसने कहा

"मामा चलिए कुल्फी लाते हैं"

सोनू मासूम बच्चों का आग्रह न टाल पाया और राजू को लेकर बाहर आ गया उसने राजू की पसंद की कई आइसक्रीम लीं और अपने और लाली के लिए सबसे बड़ी साइज की कुल्फी ली। यह कुल्फी बांस से पतले स्टिक पर लिपटी हुई थी और आकार में बेहद बड़ी थी एक पल के लिए सोनू को वह अपने लंड जैसी प्रतीत हुई।

सोनू उन बड़ी-बड़ी कुल्फीयों को लेकर घर में प्रवेश किया। लाली को भी उन कुल्फियों को देखकर वही एहसास हुआ जो सोनू को हुआ था सच में उनका आकार एक खड़े लंड जैसा ही दिखाई पड़ रहा था। लाली को अपनी सोच पर शर्म आयी पर उसने कुल्फी को शहर अपने हाथों में ले लिया और तुरंत ही अपने होठों को गोलकर उसका रसास्वादन करने लगी।

कुल्फी का ऊपरी आवरण तेजी से पिघल रहा था और बह कर वह निचले भाग की तरफ आ रहा था लाली अपनी जीभ निकालकर उस रस को नीचे गिरने से रोक रही थी तथा उस कुल्फी को जड़ से लेकर ऊपर तक अपनी जीभ से चाट रही थी। सोनू को यह दृश्य बेहद उत्तेजक लग रहा था वह एकटक लाली को घूरे जा रहा था। लाली को वह कुल्फी बेहद पसंद आ रही थी।

अचानक लाली को सोनू की निगाहों का अर्थ समझ आया वह शर्म से पानी पानी हो गई। उसने झेंपते हुए सोनू से कहा

"यह कुल्फी जल्दी पिघल जाती है"

"हां दीदी इसे चूस चूस कर थाने में ही मजा आता है" और सोनू ने कुल्फी का आधे से ज्यादा भाग अपनी बड़े से मुंह में ले लिया.

उसने लाली से कहां

"दीदी ऐसे खाइए"

लाली ने भी सोनू की नकल की और उसने कुल्फी का अधिकतर भाग अपने मुंह से में लेने की कोशिश की जो की उसके गले से छू गई परंतु लाली ने हार न मानी और अंततः कुल्फी का उतना ही भाग अपने मुंह में ले लिया जितना सोनू ले रहा था।

सोनू को एक पल के लिए ऐसा लगा जैसे लाली ने उसके ही लंड को अपने मुंह में ले लिया हो लाली भी अब थोड़ा बेशर्म हो चली थी वह जानबूझकर कुल्फी को उसी तरह खा रही थी और सोनू को उत्तेजित कर रही थी.

लाली सोनू को हाल में छोड़ कर अपने कमरे में गई और रीमा को सुलाते सुलाते खुद भी सो गई उसने आज सोनू को खुश करने की ठान ली थी परंतु सोनू को अभी रात का इंतजार करना था.

शाम को राजेश ड्यूटी से घर आ चुका था। आते समय उसने ढाबे से खाना बनवा लिया था।

घर में प्रवेश करते ही राजेश में बड़े उत्साह से कहा

"आज टीवी पर जानी दुश्मन फिल्म आने वाली है हम सब लोग फिल्म देखेंगे मैं खाना पैक करा कर ले आया हूं"

लाली और राजू वह खाना देखकर बेहद प्रसन्न हो गए लाली को तो दोहरा फायदा था एक तो आज शाम उसे काम नहीं करना था दूसरा ढाबे का चटक खाना उसे हमेशा से पसंद था खानपान खत्म करने के बाद एक बार फिर लाली का बिस्तर सज गया. कोने में राजू था उसके पश्चात रीमा और उसके बगल में राजेश लेटा हुआ था राजेश के ठीक बगल में सोनू लेटा हुआ था और अपनी लाली दीदी का इंतजार कर रहा था। बच्चों ने अपनी रजाई ओढ़ रखी थी और सोनू राजेश और लाली की रजाई अपने पैर ढके हुए था।

टीवी पर जानी दुश्मन फिल्म शुरू हो रही थी राजेश ने आवाज दी

लाली जल्दी आओ फिल्म शुरू हो रही है।

"हां आ रही हूं"

कुछ ही देर में मदमस्त लाली नाइटी पहने हुए कमरे में आ चुकी थी सोनू ने उठ कर लाली के लिए जगह बनाई और लाली राजेश के पास जाकर सट गई सोनू लाली से कुछ दूरी बनाकर वापस बिस्तर पर बैठ गया उसने अपनी पीठ पीछे दीवार पर सटा ली थी परंतु उसके पैर उसी रजाई में थे जिसने लाली और राजेश को ढक रखा था।

कुछ ही देर में कहानी की पटकथा रंग पकड़ने लगी राजेश को इस फिल्म का कई दिनों से इंतजार था वह मन लगाकर इस फिल्म को देख रहा था उधर सोनु के दिमाग में सिर्फ और सिर्फ लाली घूम रही थी कल लाली की बुर सहलाने के पश्चात वह मस्त और निर्भीक हो गया था और आज भी वह उसी सुख की तलाश में था। उसके पैर स्वतः ही लाली के पैरों को छूने लगे। लाली सोनू की मंशा भली-भांति जानती थी परंतु आज उसने कुछ और ही सोच रखा था।

लाली ने अंगड़ाई ली और बोली

"मुझे डर लग रहा है आप दोनों फिल्म देखीये मैं चली सोने"

लाली धीरे-धीरे रजाई के अंदर सरकती गई उसने अपना सर भी रजाई से ढक लिया था।

लाली करवट लेकर लेटी हुई थी उसकी पीठ सोनू की तरफ थी। लाली अपने हाथ राजेश की जांघों पर ले गई और उसके लंड को सहलाने लगी। राजेश अपनी फिल्म देखने में व्यस्त था उसने लाली का हाथ पकड़ लिया और अपने लंड से दूर कर दिया।

लाली मन ही मन मुस्कुरा रही थी उसने राजेश को अपना गुस्सा दिखाते हुए करवट ली और अपनी पीठ राजेश की तरफ कर दी। राजेश ने उसकी पीठ सहला कर अपनी गलती के लिए अफसोस जाहिर किया परंतु उसकी आंखें टीवी पर टिकी रहीं।

लाली के करवट लेने से सोनू सतर्क हो गया रजाई के अंदर लाली के हाथ हिल रहे थे ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे वह अपने वस्त्र ठीक कर रही हो।

लाली के शरीर की हलचल शांत होते ही उसने अपने पैर एक बार फिर लाली के पैरों से हटाने की कोशिश की जो सीधा लाली की नंगी जांघों से छू गए । सोनू ने अपने पैर वापस खींचने की कोशिश की परंतु लाली ने अपने हाथ से उसका पैर पकड़ लिया और वापस अपनी जांघों से सटा लिया। कुछ देर यथास्थिति कायम रहे धीरे-धीरे लाली के हाथ सोनू की जांघों की तरफ बढ़ चले। लाली ने समय व्यर्थ न करते हुए अपने सोनू का लंड पजामे ऊपर से भी पकड़ लिया जो अब तक पूरी तरह तन चुका था। सोनू शहर उठा उसके शरीर का सारा लहू जैसे उस लंड में आ गया था। उन्होंने स्वयं ही अपना पजामा नीचे खिसकाने की कोशिश की वह लाली की कोमल उंगलियों को अपने लंड पर महसूस करना चाहता था।

थोड़े ही प्रयासों से सोनू का कुंवारा लंड बाहर आ गया से बाहर आ गया और लाली उसे अपने कोमल हाथों से सहलाने लगी। यह कहना मुश्किल था कि लाली के साथ ज्यादा कोमल थे या सोनू का लंड।

सोनू बीच-बीच में राजेश की तरफ देख रहा था जो पूरी तरह टीवी देखने में मगन था। उधर लाली उसके लैंड के सुपारे को खोल चुकी थी। लंड की भीनी खुशबू लाली के नथुनों से टकराई लाली अपने भाई के लंड की भीनी खुशबू में खो गयी।

उसके होंठ फड़कने लगे। उसका कोमल चेहरा स्वता ही आगे बढ़ता गया और उसके होंठ सोनू के लंड से जा टकराए। सोनू को यह उम्मीद कतई न थी वह व्यग्र हो गया उसने अपने शरीर की अवस्था बदली वह लाली की तरफ थोड़ा मुड़ गया। लाली के होठों ने सोनू के लंड के सुपाड़े को अपने आगोश में ले लिया और उसकी जीभ चमड़ी के पीछे छुपे लंड के मुखड़े को सहलाने लगी

लाली एक अलग ही अनुभव ले रही थी रजाई के भीतर वह शर्म और हया त्याग कर अपने भाई सोनू का लंड चूसने लगी। जाने सोनू के बारे लंड में क्या खूबी थी लाली मदमस्त होती जा रही थी। उधर सोनू के पैर लाली की नंगी जांघों को छूते छूते जांघों के जोड़ पर आ उसकी बुर की तरफ आ गए । लाली में अपनी जाघें फैला दीं और सोनू के पंजे को अपने बुर पर आ जाने दिया। पंजों का संपर्क बुर से होते हो लाली ने अपनी जांघें सटा ली और पंजों को उसी अवस्था में लॉक कर दिया। सोनू जब भी अपने पैर हिलाता लाली की बुर सिहर उठती लाली की बुर से रिस रहा प्रेम रस सोनू के पंजों को गीला कर रहा था। कुछ ही देर में सोनू के पंजों और लाली के निचले होंठों के चिपचिपा पन आ चुका था जो सोनू और लाली दोनों को ही सुखद एहसास दे रहा था।

लाली सोनू के लंड को लगातार चूस रही थी। सोनू आनंद के सागर में गोते लगा रहा था। अचानक उसने अपने हाथ रजाई के अंदर किये और अपनी हथेलियों से बेहद प्यार के अपनी लाली दीदी के गालों को सहलाने लगा। वह अपने लंड को लाली के मुंह के अंदर हिलाने की कोशिश कर रहा था। सोनू को एक पल के लिए ख्याल आया कि वह रजाई हटा कर अपनी लाली दीदी की आज ही पटक कर चोद दे पर …..

लाली के दांतों ने सोनी के लंड पर संवेदना बढ़ दी। सोनू ने अपने हाथ थोड़े और नीचे किये और उलाली की चुचियों को सहला दिया। लाली ने अपनी नाइटी को पूरी तरह ऊपर कर लिया था वह उसकी चूचियों और गर्दन के बीच सिमट कर रह गई थी।

कितनी कोमल थी लाली की चूचियां वह उन्हें धीरे-धीरे सहलाने लगा। निप्पलों पर उंगलियां लगते ही हाली सिहर उठती। सोनू ने उत्सुकता वश लाली के निप्पल को अपनी उंगलियों के बीच लेकर थोड़ा दबा दिया सोनू को अंदाजा ना रहा यह दबाव जरूरत से ज्यादा था लाली चिहुँक उठी।

राजेश ने पूछा

"क्या हुआ"

लाली ने सोनू का लंड छोड़ दिया और अपने शरीर को थोड़ा हिला डूला कर अपने नींद में होने का एहसास दिलाया।

सोनू को बेहद अफसोस हो रहा था परंतु लाली ने उसे निराश ना किया कुछ ही देर में वह दोनों फिर उसी अवस्था में आ गए।

उधर सोनू के पंजे लाली की बुर को उत्तेजित किए हुए थे इधर उसकी हथेलियां चुचियों को सहला रही थीं। लाली की बुर भी स्खलन को तैयार थी कुछ ही देर में लाली अपने पैर सीधे करने लगी। वह सोनू से पहले नहीं झड़ना चाहती थी।

उसने अपने हाथों का उपयोग सोनू के अंडकोष ऊपर किया। लाली के मुलायम हाथों को अपने अंडकोष के ऊपर पाकर सोनू स्खलन के लिए तैयार हो गया।

सोनू का सब्र जवाब दे गया उसके लंड से वीर्य धार फूट पड़ी उधर लाली की बुर भी पानी छोड़ना रही थी। एक तो रजाई की गर्मी ऊपर से वासना की गर्मी लाली पसीने से भीग चुकी थी।

सोनू ने अपने वीर्य की पहली बार लाली के मुंह में ही छोड़ दी आनन-फानन में लाली ने सोनू के लंड को बाहर निकाला और उसे नीचे की दिशा दिखाई वीर्य की धारा लाली की चुचियों पर गिर गई थी वह उसे अपनी नाइटी से रोकना चाहती थी परंतु अंधेरे में कुछ समझ नहीं आ रहा था।

सोनू की हथेलियां भी उसके वीर्य से भीग रही थी वह अभी भी लाली की चुचियों को मसल रहा था वीर्य का लेप चुचियों पर स्वता ही लग रहा था ।

उधर लाली की जांघों को उत्तेजित करते-करते सोनू के पैर का अंगूठा लाली की बुर में प्रवेश कर रहा था लाली को वह छोटे और मजबूत खूटे की तरह प्रतीत हो रहा था लाली अपनी बुर को उस अंगूठे पर रगड़ रही थी और पूरी तन्मयता से झड़ रही थी...

सोनू स्खलन की उत्तेजना से कांप रहा था. जैसे ही टीवी पर विज्ञापन आया राजेश को सोनु की सुध आई उसने सोनू की तरफ देखा। सोनू के माथे पर पसीना था राजेश ने कहा

"अरे तुमको तो इतना सारा पसीना आ रहा है तबीयत ठीक है ना"

सोनू को लगा उसकी चोरी पकड़ी गई है उसने अपने हाथों से पसीना पोछा और बोला यह रजाई बहुत गर्म है।

उसने लाली को भी आवाज दी पर लाली चुपचाप बिना सांस लिए पड़ी रही।

सोनू को अब चरम सुख प्राप्त हो चुका थाउसने कहा "मुझे नींद आ रही है मैं जा रहा हूँ सोने"

राजेश आज अपनी फिल्म में कोई व्यवधान नहीं चाहता था उसने सोनू और लाली को करीब लाने की अपनी चाहत आज के लिए टाल दी थी आज वह पूरे ध्यान से अपनी पसंदीदा फिल्म देख रहा था परंतु नियत सोनू और लाली को स्वाभाविक रूप से करीब ला रही थी इस बात का इल्म उसे न था।

फिल्म की हीरोइन नीतू सिंह की बड़ी-बड़ी चूचियां राजेश के लंड में उत्साह भर रही थी पर पर्दे का भूत तुरंत ही लंड को मुरझाने पर मजबूर कर देता इसी कशमकश में एक बार फिर फिल्म शुरू हो गयी परंतु बनारस शहर ने बिजली कि अपनी समस्याएं थी। अचानक बत्ती गुल हो गई राजेश मन मसोस कर रह गया।

सोनू कमरे से बाहर जा चुका उसे बुलाने का कोई औचित्य न था राजेश उदास हो गया और रजाई में घुस कर लाली को पकड़ने लगा लाली अब तक अपनी नाइटी नीचे कर चुकी थी परंतु उसकी जांघें अभी भी नग्न थी राजेश ने अपनी जान है लाली की जांघों पर रखी और उसे अपने करीब खींचता गया लाली के चेहरे पर अभी भी पसीने की बूंदे थी।

उसने लाली के गालों पर हाथ फिराया और बोला

अरे कितना पसीना हुआ है रजाई क्यों नहीं हटा देती

"आप तो अपनी फिल्म देखिए अब लाइट गई तो मेरी याद आ रही है।" राजेश अपनी झेंप मिटाते हुए लाली के माथे को पोछने लगा। उसके हाथ लाली की चुचियों पर गए जो नाइटी के अंदर आ चुकी थीं।

"नीतू सिंह की चूचियां टीवी पर ही मिलेंगी घर पर तो मैं ही हूं"

नीतू सिंह का नाम सुनकर राजेश के लंड में एक बार फिर तनाव आ गया वह लाली को चोदना चाहता था । धीरे-धीरे वह लाली के ऊपर आने लगा। लाली प्रतिरोध कर रही थी उसकी चुचियों और होंठो पर उसके छोटे भाई सोनू का वीर्य लगा हुआ था।

जब तक वह राजेश को रोक पाती राजेश ने लाली की नाइटी को ऊपर किया और गप्प से उसकी चूची को मुंह में भर लिया…..

शेष अगले भाग में।

 
प्रतिक्रियाएं और अपडेट साथ साथ चलते हैं जितनी तत्परता से पाठकों की प्रतिक्रियाएं आती हैं उसी तत्परता से अपडेट भी आते रहेंगे जो पाठक कहानी पढ़कर भी अपनी प्रतिक्रिया नहीं देते उनकी प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा में..
 
Back
Top