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भाग 162
सोनी ने हिम्मत जुटा और बोली ला उसे दिन जो काम छूट गया था उसे पूरा कर देती हूं। सूरज ने कुछ बोला नहीं वह इस सुनहरे मौके को कतई नहीं खोना चाहता था। उसने अपने हाथ से अपनी चड्डी को झट से नीचे कर दिया सूरज का तना हुआ लंड उछाल कर बाहर आ गया और सोनी उसकी खूबसूरती में एक बार फिर से खो गई.. उसका दिल तेजी से धड़क रहा था जिसका असर उसकी चुचियों पर स्पष्ट दिखाई दे रहा था।
कांपते हाथों से सोनी ने एक बार फिर उस दिव्य पर प्रतिबंधित लंड को अपनी हथेलियों से छूने की कोशिश की और जब एक बार वह बना हुआ लंड सोनी की झाग से सनी हथेलियां के बीच आ गया मर्यादा की दीवार पिघल कर पानी पानी हो गई।
सूरज ने बिना कहे अपनी आंखें बंद कर ली पर वह सोनी की हथेली को अपने लंड पर आगे पीछे घूमते महसूस करने लगा।
अब आगे..
सोनी ने अपने हाथों से लंड की चमड़ी को नीचे किया और उसके फूले हुए सुपाड़े को अनावृत्त कर दिया लंड का सुपड़ा पहले ही फुल कर मशरूम की तरह लाल हो चुका था सोनी के हाथ लगाने से सूरज की उत्तेजना चरम पर पहुंचने लगी….वह बार-बार एक ही बात मन ही मन बोल रहा था
मौसी …आह….तनी धीरे से…
सोनी लंड में आ रहे उछाल को महसूस कर रही थी और उसकी हरकतों पर बारीकी से नजर रखे हुए थी..
तभी सूरज ने प्रश्न किया..
मौसी ऐसा क्यों होता है कि जब तुम अंगूठे को छूती हो तो यह तन जाता है पर जब मां ने अंगूठे को छुआ तो कुछ भी नहीं हुआ, कुछ तो बात है …
दरअसल सूरज बातचीत से इस असहज स्थिति को सहज करना चाह रहा था।
सोनी ने सहजता से मुस्कुराते हुए जवाब दिया
अब तू तो इससे ही पूछ …मुझे क्या पता तेरे मन में मुझे लेकर क्या चल रहा है ?
सूरज ने सोनी को अपने आलिंगन में भरने की कोशिश की और बोला
मौसी तुम तो मेरे लिए ईश्वर का वरदान हो। तुम्हारे कारण ही मुझे यह सुख देखने को मिला है वरना आज तक मैंने कभी इस सुख का अनुभव नहीं किया था।
सोनी ने सूरज के लंड को एक बार फिर अपने हाथों से मसलते हुए कहा
किस सुख की बात कर रहा है?
सूरज ने अपने हाथ से सोनी की हथेली पकड़ ली और स्वयं सोनी की हथेली को अपने लंड पर आगे पीछे करते हुए कहा ..
इसी सुख का मौसी..
सोनी मुस्कुराने लगी …वह स्वयं उसके आलिंगन में आ गई पर उसने सूरज के लंड को नहीं छोड़ा अपितु उसे धीरे-धीरे आगे पीछे करती रही।
मौसी एक बात बताओ इसका तनाव कम कैसे हो जाता है तुम क्या ऐसा करती हो…?
सोनी अब सूरज के साथ सहज हो चली थी उसने सूरज को छेड़ते हुए पूछा
अभी कर दूं ?
मौसी यह जादू तो तुम्हारे पास है जब चाहे कम कर दो जब चाहो इसमें ताकत भर दो तुम्हारी मर्जी .मैं तो तुम्हारा गुलाम हूं
सोनी हंसने लगी सूरज पूरी तरह सोनी पर समर्पित हो चुका था.
अच्छा ठीक है एक बार करके देखती हूं..फिर वापस ताकत भर दूंगी..
सोनी झुककर अपने घुटनों के बल आ गई और उसने अपनी नज़रें ऊपर उठा कर देखी.
सूरज ने अपनी पलके बंद की हुई थी आज सोनी को सूरज को दिशा निर्देश देने की जरूरत नहीं हुई और उसने एक बार फिर अपनी हथेली से लंड को आगे पीछे कर दिया ऐसा लगा जैसे सोनू की तड़प मुकाम तक पहुंच चुकी है।
सोनी ने अपने होठों को गोल किया और एक बार फिर अपने गोल होठों से सूरज के लंड को छू लिया। हमेशा की तरह गुब्बारे से हवा निकल गई और सूरज का तना हुआ लंड सामान्य स्थिति में आ गया।
सूरज ने अपनी पलके खोली उसके आश्चर्य का ठिकाना न रहा सोनी के होठों और अपने लंड पर लगे समान झाग को देखकर सूरज को अंदाज हो गया कि उसकी मौसी ने क्या किया था…
सूरज ने कुछ भी ना कहा और एक बार फिर अपना अंगूठा सोनी के समक्ष ला दिया। आग्रह स्पष्ट था सोनी ने उसी स्थिति में सूरज के अंगूठे को वापस सहलाकर लंड को पूर्व की तनी हुई अवस्था में ला दिया…और एक बार फिर अपने होठों को गोलकर उसे छूने की कोशिश की। इससे पूर्व उसने सूरज की तरफ देखा और सूरज ने बिना कुछ कहे अपनी आंखें बंद कर ली।
सोनी ने एक बार फिर अपने होंठ से सूरज के लंड को छुआ पर इस बार सोनू का लंड तना ही रहा …सोनी के लिए यह घटनाक्रमअनोखा था।
वह मन ही मन घबरा गई कि आखिर ऐसा क्या हुआ? उसने अपने होठों से लंड को और भी ज्यादा छूने की कोशिश की यहां तक कि उसने अपने होठों से उसके लंड को लगभग पकड़ भी लिया फिर भी तनाव जस का तस था।
सोनी को पसीना छूटने लगा उसे इस बात का इल्म न था कि उसने सूरज का अंगूठा पकड़ रखा है सोनी लंड के सुपारे को अपने होठों के बीच लेकर दबाती रही कभी इधर से कभी उधर से पर लंड का तनाव न सिर्फ कायम रहा अपितु सूरज की उत्तेजना की वजह से लंड और तेजी से उछलने लगा।
सोनी को इस बात का आभास था कि यदि सूरज के लंड का तनाव कम नहीं हुआ तो यह किसी और तरीके से भी कम नहीं होगा और यदि ऐसा हुआ तो निश्चित ही यह बात सुग़ना तक पहुंच जाएगी। हे भगवान .. वह सुगना को क्या मुंह दिखाएगी ? जितना ही वह इस बारे में सोचती उतनी तेजी से ही सूरज के लंड को छोटा करने के लिए अपने होठों को अनेकों अनेक प्रकार से उसके लंड के सुपाड़े के ऊपर घूमाती उसने अपनी जीभ का भी प्रयोग करने से परहेज न किया और सूरज के लंड के सुपाड़े को अपने होठों के बीच दबाए हुए अपनी जीभ से उसे छूती रही।
सूरज ने भी अपनी आंखें खोल ली और नीचे की तरफ देखा उसके आश्चर्य का ठिकाना ना रहा उसकी मौसी उसके लंड के सुपाड़े को अपने होठों से दबाते हुए तरह-तरह के प्रयास कर रही थी।
हे भगवान क्या सोनी मौसी उसका लंड चूस रही है.. यह सूरज की कल्पना से परे था परंतु उसकी आंखें हकीकत देख रही थी।
सूरज आनंद के सागर में डूबा हुआ था उसने सोनी को उसी स्थिति में छोड़ दिया और अपनी पलके बंद कर ली…और इस अद्भुत सुख का आनंद लेने लगा। इसे मुखमैथुन की संज्ञा तो नहीं दी जा सकती परंतु यह एक अनाड़ी महिला द्वारा दिए जा रहे मुख मैथुन से कम भी नहीं था।
परंतु सोनी की स्थिति बुरी थी। यदि सूरज का लंड का तनाव कम नहीं हुआ तो वह क्या करेगी। यह बात जग जाहिर हो जाएगी और उसे शर्मिंदगी का सामना करना पड़ेगा।
उसने सूरज को कुछ पलों के लिए छोड़ दिया…होठों के बीच फसा लंड भी और उंगली के पकड़ा सूरज का अंगूठा भी। सोनी अपनी सांसों पर काबू पाने का प्रयास करने लगी। अब भी वह अपने घुटनों के बल ही बैठी थी। चेहरे पर तनाव स्पष्ट था.. जिसे वह अपनी दोनों हथेलियां से छुपाए हुए थी।
क्या हुआ मौसी सूरज ने सोनी के चेहरे पर तनाव महसूस कर लिया..
सूरज स्वयं डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहा था सोनी ने उसे कुछ भी छुपाना उचित नहीं समझा आखिर सोनी ने सूरज को लंड का तनाव कम करने की अपनी तरकीब बता दी जो आज उसके अनुसार काम नहीं कर रही थी एक पल के लिए सूरज भी घबरा गया और बोला
मौसी एक बार फिर ट्राई करते हैं..
सोनी ने हिम्मत जुटाई उसने सूरज की तरफ देखा पर इस बार सूरज ने अपनी पलके बंद नहीं की बल्कि मुस्कुरा कर सोनी को देखा जैसे उसे प्रोत्साहित कर रहा हो
सोनी ने एक बार फिर अपने होंठ गोल किए और सूरज के तने हुए लंड के सुपाड़े को होठों के बीच भरने की कोशिश की..
आखिरकार वही हुआ जो हमेशा से होता आया है सूरज के लंड का तनाव एक बार फिर कम हो गया। सोनी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने सूरज की तरफ देखा सूरज ने भी अपनी प्यारी मौसी की तरफ देखा और उनके चेहरे पर सुकून देखकर सूरज ने अपनी बाहें खोल दी.. सोनी उठी और बिना कुछ कहे सूरज और सोनी एक दूसरे के आलिंगन में आ गए…
पहली बार सोनी सूरज के के आलिंगन में पूरी आत्मीयता से आई थी। सूरज ने भी आज सोनी को अपने आलिंगन में कस लिया सोनी का सर सूरज के कंधे पर था और दोनों के गाल सटे हुए थे तभी सूरज ने सोनीकी पीठ को अपने हाथों से सहलाते हुए उसके कान में धीरे से कहा
मौसी सब कुछ तो पहले जैसा ही है क्यों घबरा गई थी।
सूरज की आवाज सोनी के कानों में बड़ी दूर से आतीहुई सुनाई पड़ रही थी…वह अब भी उसी बारे में सोच रही थी।
सोनी का दिल अभी तेजी से धड़क रहा था और यह धड़कन सूरज भी महसूस कर पा रहा था।
अचानक सोनी को ध्यान आया कि उसने पिछली बार सूरज का अंगूठा उस समय अपने उंगलियों से पकड़ रखा था…सोनीकी आंखों में चमक आ गई वह अचानक ही सूरज के आलिंगन से बाहर आ गई और एक बार फिर घुटने के बाल नीचे बैठ गई…
क्या हुआ मौसी.. सूरज ने आश्चर्य से पूछा..
सोनी ने कुछ कहा नहीं बल्कि सूरज का वह जादूई अंगूठा अपनी उंगलियों के बीच लेकर एक बार फिर सहलाने लगी।
लंड एक बार फिर पूरी तरह तन कर तैयार था। सोनी ने अपने होंठ गोल करके अंगूठे को अपनी उंगलियों से आजाद किया और अपने होठों से एक बार फिर सूरज के लंड सुपाड़े को छुआ परिणाम आशा अनुरूप ही रहा।
सोनी के चेहरे पर आत्मविश्वास जाग उठा यह विश्वास कुछ वैसा ही था जैसे किसी वैज्ञानिक का प्रयोग सफल रहा हो।
दोबारा सोनी ने वही काम किया फिर सूरज के जादूई अंगूठे को रगड़ा और एक बार फिर लंड वापस तन गया इस बार सोनी ने उसे अंगूठे को अपनी उंगलियों में दाबे ही रखा और होंठो को गोलकर सुपाड़े को छूने की कोशिश की लंड का तनाव कम नहीं हुआ। सोनी ने उत्साह में सूरज के लगभग एक चौथाई लंड को अपने मुंह में भर लिया और लगभग चूसने की कोशिश की परंतु तनाव जस का तस कायम रहा।
सोनी को यह विश्वास हो गया कि जब तक वह अंगूठे को अपने उंगलियों में दाबे रखेगी तब तक वह चाहे लंड को जितना चूमे चाटे उसका तनाव कम नहीं होगा।
सोनी मन ही मन सहज हो गई। जब दिमाग का तनाव खत्म हुआ सोनीकी वासना सर उठाने लगी । सूरज का खूबसूरत लंड उसके होठों के बीच था लंड से आ रही मर्दाना खुशबू उसके नथुनों में भर रही थी लंड से निकल रही वीर्य की पतली लार उसके होठों के लार से मिल रही थी जिसका एहसास सोनी को बखूबी हो रहा था। जैसे-जैसे वासना जवान होती गई सूरज का लंड सोनीके मुख में और गहरे तक प्रवेश करता गया एक पल के लिए सोनी भूल गई कि वह अपने पुत्र समान सूरज का लंड चूस रही है।
उधर सूरज की उत्तेजना चरम पर थी। उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि उसकी मौसी इस समय लगभग उसका लंड चूस रही है उसने सोनी को नहीं रोका अपितु अपनी उत्तेजना को रोकने की कोशिश की ताकि वह अपने स्खलन को कुछ देर और खींच सके और इस अद्भुत सुख का आनंद ले सके…
कुछ पल के लिए शांति कायम थी सिर्फ सोनी के होठों की चप- चाप की आवाजआ रही थी सोनी सब कुछ भूल कर अपनी वासना के अधीन सूरज के लंड को बेतहाशा चूम रही थी चाट रही थी।
आज सोनी को पहली बार सूरज की बड़े लंड को करीब से देखने चूमने और महसूस करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था इस लंड की कल्पना सोनी न जाने कब से करती आई थी। वह इस आज अवसर पर अपनी सारी मर्यादाएं भूल कर अपनी वासना में डूबी इस सुख काआनंद ले रही थी।
सोनी इस कला में माहिर थी और सूरज का यह पहला अनुभव था। जैसे कोई बालक किसी पहलवान के साथ दंगल में उतर आया हो। आखिरकार सूरज के अंडकोश लगातार रिसते हुए वीर्य को और संभाल पाने में नाकाम रहे और उन्होंने अपना मुख खोल दिया।
वीर्य की पहली धार सोनी के हलक में उतर गई । सोनी ने अपना मुंह पीछे हटने की कोशिश की परंतु सूरज को न जाने क्या सूझा उसने सोनी के सर को अपने अपने एक हाथ से पकड़ लिया और अपने लंड की तरफ खींचे रखा।
सोनी को यह थोड़ा नागवार गुजरा उसने अपनी आंखें ऊपर करके सूरज को देखा एक पल के लिए सूरज और सोनी की नजरे मिली भी। सूरज थोड़ा शर्मसार भी हुआ परंतु उसने अपनी आंखें बंद कर ली पर सोनी के सर को अपने लंड की तरफ खींचे ही रखा।
सूरज इस हवेली की मालकिन और इस घर की दूसरी सम्मानित महिला जो उम्र में उसे 15 17 साल बड़ी थी के साथ जिस तरह बर्ताव कर रहा था इसकी उम्मीद सोनी को कतई नहीं थी।
बहरहाल सोनी के पास इस वक्त कोई और चारा नहीं था। सूरज का लंड लावा उगलता रहा और सोनी के हलक और मुंह में भरता रहा। सोनी ने यह अनुभव पहले भी किया था पर इतना सारा वीर्य….. उसने पहली बार महसूस किया था। सोनी के होठों से अब वीर्य छलक छलक कर बाहर आ रहा था। शायद वह उसे मुंह में रख पाने की स्थिति में नहीं थी और अब वह तृप्त हो चुकी थी।
सूरज जब पूरी तरह बरस चुका था उसने सोनीके सर पर पकड़ ढीली की और तभी सोनी ने अपना सर पीछे कर लिया और सूरज से अलग हो गई। अलग होने के पश्चात सोनी ने सूरज का वह जादूई अंगूठा भी छोड़ दिया जो अब तक उसने पकड़ा हुआ था।
परंतु सूरज का लंड अब भी तना हुआ था शायद सोनी ने उसके अंगूठे को अपना सर हटाने के बाद ही छोड़ा था।
सोनी हाफ रही थी उसके मुंह में सूरज का वीर्य अब भी रिस रहा था होठों पर वीर्य की लकीरें अब भी चमक रही थी।
सूरज को अपनी गलती का एहसास हो चुका था वह घुटनों के बल सोनी के समक्ष नीचे बैठ गया…
और सोनी के दोनों गालों को अपने हाथों से पकड़ कर अपना चेहरा सोनी के समक्ष ले आया और बेहद भावुकता और प्यार से बोला
मौसी मुझे माफ कर दीजिए मैं खुद पर कंट्रोल नहीं रख पाया…
सोनी अभी अपनी पलकें बंद की हुई थी शायद वह सूरज से नजरे मिला पाने में शर्मिंदगी महसूस कर रही थी।
सोनी से कोई उत्तर न पाकर सूरज अधीर हो गया.. मौसी मुझे माफ कर दीजिए बार-बार यही बात कहते हुए उसने सोनी के माथे को चूम लिया।
सोनी धीरे धीरे अब सहज हो चली थी। आखिरकार सूरज ने उसे कोई जबरदस्ती तो नहीं की थी लंड चूसने का फैसला उसका खुद का था। उसने सूरज को वासना के अभिभूत होकर की गई उसे गलती के लिए माफ कर दिया।
उसने एक पल के लिए अपनी पलके खोली और चुंबन की मुद्रा में अपने होठों को गोल किया …सूरज ने यह समझा जैसे उसकी मौसी उसे चुंबन लेना चाह रही हो।
अगले ही पल सूरज ने अपने होंठ सोनी के होठों से सटा दिए । सोनी के होठों पर अब भी सूरज का वीर्य लिपटा हुआ था। परंतु सूरज पूरी तरह से भावुक था उसने सोनी के होठों को अपने होठों के बीच लेकर चुंबन शुरू कर दिया। चुंबन में सूरज पहले भी एक्सपर्ट था उसने अपनी कॉलेज की दोस्त रोजी के साथ यह कला सीख ली थी परंतु अपनी मौसी के खुद की वीर्य से सने होठों चूमने का अनुभव अलग था।
सूरज सोनी को बेतहाशा चूमने लगा सोनी आश्चर्यचकित थी। उसने तो अपने होठों को उसके माथे को चूमने के लिए गोल किया था परंतु यहां चुंबन का प्रारूप बदल चुका था। सोनी को सूरज का बचपन याद आ रहा था जब वह अक्सर उसके होठों पर चुंबन ले लिया करता था। अब जब एक बार सोनी ने सूरज के चुंबन में एक अलग आकर्षण महसूस किया वह स्वयं भी न जाने कब इस चुंबन में अपना योगदान देने लगी।
नियति मुस्कुरा रही थी सूरज और सोनी दोनों अन्य प्रेमी की भांति एक दूसरे को चुंबन ले रहे थे..
नियति बड़ी आत्मीयता और अनोखे प्रेम में डूबे दो युवा दिलों को करीब आते देख रही थी और आने वाले समय की पटकथा लिख रही थी।
सोनी ने हिम्मत जुटा और बोली ला उसे दिन जो काम छूट गया था उसे पूरा कर देती हूं। सूरज ने कुछ बोला नहीं वह इस सुनहरे मौके को कतई नहीं खोना चाहता था। उसने अपने हाथ से अपनी चड्डी को झट से नीचे कर दिया सूरज का तना हुआ लंड उछाल कर बाहर आ गया और सोनी उसकी खूबसूरती में एक बार फिर से खो गई.. उसका दिल तेजी से धड़क रहा था जिसका असर उसकी चुचियों पर स्पष्ट दिखाई दे रहा था।
कांपते हाथों से सोनी ने एक बार फिर उस दिव्य पर प्रतिबंधित लंड को अपनी हथेलियों से छूने की कोशिश की और जब एक बार वह बना हुआ लंड सोनी की झाग से सनी हथेलियां के बीच आ गया मर्यादा की दीवार पिघल कर पानी पानी हो गई।
सूरज ने बिना कहे अपनी आंखें बंद कर ली पर वह सोनी की हथेली को अपने लंड पर आगे पीछे घूमते महसूस करने लगा।
अब आगे..
सोनी ने अपने हाथों से लंड की चमड़ी को नीचे किया और उसके फूले हुए सुपाड़े को अनावृत्त कर दिया लंड का सुपड़ा पहले ही फुल कर मशरूम की तरह लाल हो चुका था सोनी के हाथ लगाने से सूरज की उत्तेजना चरम पर पहुंचने लगी….वह बार-बार एक ही बात मन ही मन बोल रहा था
मौसी …आह….तनी धीरे से…
सोनी लंड में आ रहे उछाल को महसूस कर रही थी और उसकी हरकतों पर बारीकी से नजर रखे हुए थी..
तभी सूरज ने प्रश्न किया..
मौसी ऐसा क्यों होता है कि जब तुम अंगूठे को छूती हो तो यह तन जाता है पर जब मां ने अंगूठे को छुआ तो कुछ भी नहीं हुआ, कुछ तो बात है …
दरअसल सूरज बातचीत से इस असहज स्थिति को सहज करना चाह रहा था।
सोनी ने सहजता से मुस्कुराते हुए जवाब दिया
अब तू तो इससे ही पूछ …मुझे क्या पता तेरे मन में मुझे लेकर क्या चल रहा है ?
सूरज ने सोनी को अपने आलिंगन में भरने की कोशिश की और बोला
मौसी तुम तो मेरे लिए ईश्वर का वरदान हो। तुम्हारे कारण ही मुझे यह सुख देखने को मिला है वरना आज तक मैंने कभी इस सुख का अनुभव नहीं किया था।
सोनी ने सूरज के लंड को एक बार फिर अपने हाथों से मसलते हुए कहा
किस सुख की बात कर रहा है?
सूरज ने अपने हाथ से सोनी की हथेली पकड़ ली और स्वयं सोनी की हथेली को अपने लंड पर आगे पीछे करते हुए कहा ..
इसी सुख का मौसी..
सोनी मुस्कुराने लगी …वह स्वयं उसके आलिंगन में आ गई पर उसने सूरज के लंड को नहीं छोड़ा अपितु उसे धीरे-धीरे आगे पीछे करती रही।
मौसी एक बात बताओ इसका तनाव कम कैसे हो जाता है तुम क्या ऐसा करती हो…?
सोनी अब सूरज के साथ सहज हो चली थी उसने सूरज को छेड़ते हुए पूछा
अभी कर दूं ?
मौसी यह जादू तो तुम्हारे पास है जब चाहे कम कर दो जब चाहो इसमें ताकत भर दो तुम्हारी मर्जी .मैं तो तुम्हारा गुलाम हूं
सोनी हंसने लगी सूरज पूरी तरह सोनी पर समर्पित हो चुका था.
अच्छा ठीक है एक बार करके देखती हूं..फिर वापस ताकत भर दूंगी..
सोनी झुककर अपने घुटनों के बल आ गई और उसने अपनी नज़रें ऊपर उठा कर देखी.
सूरज ने अपनी पलके बंद की हुई थी आज सोनी को सूरज को दिशा निर्देश देने की जरूरत नहीं हुई और उसने एक बार फिर अपनी हथेली से लंड को आगे पीछे कर दिया ऐसा लगा जैसे सोनू की तड़प मुकाम तक पहुंच चुकी है।
सोनी ने अपने होठों को गोल किया और एक बार फिर अपने गोल होठों से सूरज के लंड को छू लिया। हमेशा की तरह गुब्बारे से हवा निकल गई और सूरज का तना हुआ लंड सामान्य स्थिति में आ गया।
सूरज ने अपनी पलके खोली उसके आश्चर्य का ठिकाना न रहा सोनी के होठों और अपने लंड पर लगे समान झाग को देखकर सूरज को अंदाज हो गया कि उसकी मौसी ने क्या किया था…
सूरज ने कुछ भी ना कहा और एक बार फिर अपना अंगूठा सोनी के समक्ष ला दिया। आग्रह स्पष्ट था सोनी ने उसी स्थिति में सूरज के अंगूठे को वापस सहलाकर लंड को पूर्व की तनी हुई अवस्था में ला दिया…और एक बार फिर अपने होठों को गोलकर उसे छूने की कोशिश की। इससे पूर्व उसने सूरज की तरफ देखा और सूरज ने बिना कुछ कहे अपनी आंखें बंद कर ली।
सोनी ने एक बार फिर अपने होंठ से सूरज के लंड को छुआ पर इस बार सोनू का लंड तना ही रहा …सोनी के लिए यह घटनाक्रमअनोखा था।
वह मन ही मन घबरा गई कि आखिर ऐसा क्या हुआ? उसने अपने होठों से लंड को और भी ज्यादा छूने की कोशिश की यहां तक कि उसने अपने होठों से उसके लंड को लगभग पकड़ भी लिया फिर भी तनाव जस का तस था।
सोनी को पसीना छूटने लगा उसे इस बात का इल्म न था कि उसने सूरज का अंगूठा पकड़ रखा है सोनी लंड के सुपारे को अपने होठों के बीच लेकर दबाती रही कभी इधर से कभी उधर से पर लंड का तनाव न सिर्फ कायम रहा अपितु सूरज की उत्तेजना की वजह से लंड और तेजी से उछलने लगा।
सोनी को इस बात का आभास था कि यदि सूरज के लंड का तनाव कम नहीं हुआ तो यह किसी और तरीके से भी कम नहीं होगा और यदि ऐसा हुआ तो निश्चित ही यह बात सुग़ना तक पहुंच जाएगी। हे भगवान .. वह सुगना को क्या मुंह दिखाएगी ? जितना ही वह इस बारे में सोचती उतनी तेजी से ही सूरज के लंड को छोटा करने के लिए अपने होठों को अनेकों अनेक प्रकार से उसके लंड के सुपाड़े के ऊपर घूमाती उसने अपनी जीभ का भी प्रयोग करने से परहेज न किया और सूरज के लंड के सुपाड़े को अपने होठों के बीच दबाए हुए अपनी जीभ से उसे छूती रही।
सूरज ने भी अपनी आंखें खोल ली और नीचे की तरफ देखा उसके आश्चर्य का ठिकाना ना रहा उसकी मौसी उसके लंड के सुपाड़े को अपने होठों से दबाते हुए तरह-तरह के प्रयास कर रही थी।
हे भगवान क्या सोनी मौसी उसका लंड चूस रही है.. यह सूरज की कल्पना से परे था परंतु उसकी आंखें हकीकत देख रही थी।
सूरज आनंद के सागर में डूबा हुआ था उसने सोनी को उसी स्थिति में छोड़ दिया और अपनी पलके बंद कर ली…और इस अद्भुत सुख का आनंद लेने लगा। इसे मुखमैथुन की संज्ञा तो नहीं दी जा सकती परंतु यह एक अनाड़ी महिला द्वारा दिए जा रहे मुख मैथुन से कम भी नहीं था।
परंतु सोनी की स्थिति बुरी थी। यदि सूरज का लंड का तनाव कम नहीं हुआ तो वह क्या करेगी। यह बात जग जाहिर हो जाएगी और उसे शर्मिंदगी का सामना करना पड़ेगा।
उसने सूरज को कुछ पलों के लिए छोड़ दिया…होठों के बीच फसा लंड भी और उंगली के पकड़ा सूरज का अंगूठा भी। सोनी अपनी सांसों पर काबू पाने का प्रयास करने लगी। अब भी वह अपने घुटनों के बल ही बैठी थी। चेहरे पर तनाव स्पष्ट था.. जिसे वह अपनी दोनों हथेलियां से छुपाए हुए थी।
क्या हुआ मौसी सूरज ने सोनी के चेहरे पर तनाव महसूस कर लिया..
सूरज स्वयं डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहा था सोनी ने उसे कुछ भी छुपाना उचित नहीं समझा आखिर सोनी ने सूरज को लंड का तनाव कम करने की अपनी तरकीब बता दी जो आज उसके अनुसार काम नहीं कर रही थी एक पल के लिए सूरज भी घबरा गया और बोला
मौसी एक बार फिर ट्राई करते हैं..
सोनी ने हिम्मत जुटाई उसने सूरज की तरफ देखा पर इस बार सूरज ने अपनी पलके बंद नहीं की बल्कि मुस्कुरा कर सोनी को देखा जैसे उसे प्रोत्साहित कर रहा हो
सोनी ने एक बार फिर अपने होंठ गोल किए और सूरज के तने हुए लंड के सुपाड़े को होठों के बीच भरने की कोशिश की..
आखिरकार वही हुआ जो हमेशा से होता आया है सूरज के लंड का तनाव एक बार फिर कम हो गया। सोनी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने सूरज की तरफ देखा सूरज ने भी अपनी प्यारी मौसी की तरफ देखा और उनके चेहरे पर सुकून देखकर सूरज ने अपनी बाहें खोल दी.. सोनी उठी और बिना कुछ कहे सूरज और सोनी एक दूसरे के आलिंगन में आ गए…
पहली बार सोनी सूरज के के आलिंगन में पूरी आत्मीयता से आई थी। सूरज ने भी आज सोनी को अपने आलिंगन में कस लिया सोनी का सर सूरज के कंधे पर था और दोनों के गाल सटे हुए थे तभी सूरज ने सोनीकी पीठ को अपने हाथों से सहलाते हुए उसके कान में धीरे से कहा
मौसी सब कुछ तो पहले जैसा ही है क्यों घबरा गई थी।
सूरज की आवाज सोनी के कानों में बड़ी दूर से आतीहुई सुनाई पड़ रही थी…वह अब भी उसी बारे में सोच रही थी।
सोनी का दिल अभी तेजी से धड़क रहा था और यह धड़कन सूरज भी महसूस कर पा रहा था।
अचानक सोनी को ध्यान आया कि उसने पिछली बार सूरज का अंगूठा उस समय अपने उंगलियों से पकड़ रखा था…सोनीकी आंखों में चमक आ गई वह अचानक ही सूरज के आलिंगन से बाहर आ गई और एक बार फिर घुटने के बाल नीचे बैठ गई…
क्या हुआ मौसी.. सूरज ने आश्चर्य से पूछा..
सोनी ने कुछ कहा नहीं बल्कि सूरज का वह जादूई अंगूठा अपनी उंगलियों के बीच लेकर एक बार फिर सहलाने लगी।
लंड एक बार फिर पूरी तरह तन कर तैयार था। सोनी ने अपने होंठ गोल करके अंगूठे को अपनी उंगलियों से आजाद किया और अपने होठों से एक बार फिर सूरज के लंड सुपाड़े को छुआ परिणाम आशा अनुरूप ही रहा।
सोनी के चेहरे पर आत्मविश्वास जाग उठा यह विश्वास कुछ वैसा ही था जैसे किसी वैज्ञानिक का प्रयोग सफल रहा हो।
दोबारा सोनी ने वही काम किया फिर सूरज के जादूई अंगूठे को रगड़ा और एक बार फिर लंड वापस तन गया इस बार सोनी ने उसे अंगूठे को अपनी उंगलियों में दाबे ही रखा और होंठो को गोलकर सुपाड़े को छूने की कोशिश की लंड का तनाव कम नहीं हुआ। सोनी ने उत्साह में सूरज के लगभग एक चौथाई लंड को अपने मुंह में भर लिया और लगभग चूसने की कोशिश की परंतु तनाव जस का तस कायम रहा।
सोनी को यह विश्वास हो गया कि जब तक वह अंगूठे को अपने उंगलियों में दाबे रखेगी तब तक वह चाहे लंड को जितना चूमे चाटे उसका तनाव कम नहीं होगा।
सोनी मन ही मन सहज हो गई। जब दिमाग का तनाव खत्म हुआ सोनीकी वासना सर उठाने लगी । सूरज का खूबसूरत लंड उसके होठों के बीच था लंड से आ रही मर्दाना खुशबू उसके नथुनों में भर रही थी लंड से निकल रही वीर्य की पतली लार उसके होठों के लार से मिल रही थी जिसका एहसास सोनी को बखूबी हो रहा था। जैसे-जैसे वासना जवान होती गई सूरज का लंड सोनीके मुख में और गहरे तक प्रवेश करता गया एक पल के लिए सोनी भूल गई कि वह अपने पुत्र समान सूरज का लंड चूस रही है।
उधर सूरज की उत्तेजना चरम पर थी। उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि उसकी मौसी इस समय लगभग उसका लंड चूस रही है उसने सोनी को नहीं रोका अपितु अपनी उत्तेजना को रोकने की कोशिश की ताकि वह अपने स्खलन को कुछ देर और खींच सके और इस अद्भुत सुख का आनंद ले सके…
कुछ पल के लिए शांति कायम थी सिर्फ सोनी के होठों की चप- चाप की आवाजआ रही थी सोनी सब कुछ भूल कर अपनी वासना के अधीन सूरज के लंड को बेतहाशा चूम रही थी चाट रही थी।
आज सोनी को पहली बार सूरज की बड़े लंड को करीब से देखने चूमने और महसूस करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था इस लंड की कल्पना सोनी न जाने कब से करती आई थी। वह इस आज अवसर पर अपनी सारी मर्यादाएं भूल कर अपनी वासना में डूबी इस सुख काआनंद ले रही थी।
सोनी इस कला में माहिर थी और सूरज का यह पहला अनुभव था। जैसे कोई बालक किसी पहलवान के साथ दंगल में उतर आया हो। आखिरकार सूरज के अंडकोश लगातार रिसते हुए वीर्य को और संभाल पाने में नाकाम रहे और उन्होंने अपना मुख खोल दिया।
वीर्य की पहली धार सोनी के हलक में उतर गई । सोनी ने अपना मुंह पीछे हटने की कोशिश की परंतु सूरज को न जाने क्या सूझा उसने सोनी के सर को अपने अपने एक हाथ से पकड़ लिया और अपने लंड की तरफ खींचे रखा।
सोनी को यह थोड़ा नागवार गुजरा उसने अपनी आंखें ऊपर करके सूरज को देखा एक पल के लिए सूरज और सोनी की नजरे मिली भी। सूरज थोड़ा शर्मसार भी हुआ परंतु उसने अपनी आंखें बंद कर ली पर सोनी के सर को अपने लंड की तरफ खींचे ही रखा।
सूरज इस हवेली की मालकिन और इस घर की दूसरी सम्मानित महिला जो उम्र में उसे 15 17 साल बड़ी थी के साथ जिस तरह बर्ताव कर रहा था इसकी उम्मीद सोनी को कतई नहीं थी।
बहरहाल सोनी के पास इस वक्त कोई और चारा नहीं था। सूरज का लंड लावा उगलता रहा और सोनी के हलक और मुंह में भरता रहा। सोनी ने यह अनुभव पहले भी किया था पर इतना सारा वीर्य….. उसने पहली बार महसूस किया था। सोनी के होठों से अब वीर्य छलक छलक कर बाहर आ रहा था। शायद वह उसे मुंह में रख पाने की स्थिति में नहीं थी और अब वह तृप्त हो चुकी थी।
सूरज जब पूरी तरह बरस चुका था उसने सोनीके सर पर पकड़ ढीली की और तभी सोनी ने अपना सर पीछे कर लिया और सूरज से अलग हो गई। अलग होने के पश्चात सोनी ने सूरज का वह जादूई अंगूठा भी छोड़ दिया जो अब तक उसने पकड़ा हुआ था।
परंतु सूरज का लंड अब भी तना हुआ था शायद सोनी ने उसके अंगूठे को अपना सर हटाने के बाद ही छोड़ा था।
सोनी हाफ रही थी उसके मुंह में सूरज का वीर्य अब भी रिस रहा था होठों पर वीर्य की लकीरें अब भी चमक रही थी।
सूरज को अपनी गलती का एहसास हो चुका था वह घुटनों के बल सोनी के समक्ष नीचे बैठ गया…
और सोनी के दोनों गालों को अपने हाथों से पकड़ कर अपना चेहरा सोनी के समक्ष ले आया और बेहद भावुकता और प्यार से बोला
मौसी मुझे माफ कर दीजिए मैं खुद पर कंट्रोल नहीं रख पाया…
सोनी अभी अपनी पलकें बंद की हुई थी शायद वह सूरज से नजरे मिला पाने में शर्मिंदगी महसूस कर रही थी।
सोनी से कोई उत्तर न पाकर सूरज अधीर हो गया.. मौसी मुझे माफ कर दीजिए बार-बार यही बात कहते हुए उसने सोनी के माथे को चूम लिया।
सोनी धीरे धीरे अब सहज हो चली थी। आखिरकार सूरज ने उसे कोई जबरदस्ती तो नहीं की थी लंड चूसने का फैसला उसका खुद का था। उसने सूरज को वासना के अभिभूत होकर की गई उसे गलती के लिए माफ कर दिया।
उसने एक पल के लिए अपनी पलके खोली और चुंबन की मुद्रा में अपने होठों को गोल किया …सूरज ने यह समझा जैसे उसकी मौसी उसे चुंबन लेना चाह रही हो।
अगले ही पल सूरज ने अपने होंठ सोनी के होठों से सटा दिए । सोनी के होठों पर अब भी सूरज का वीर्य लिपटा हुआ था। परंतु सूरज पूरी तरह से भावुक था उसने सोनी के होठों को अपने होठों के बीच लेकर चुंबन शुरू कर दिया। चुंबन में सूरज पहले भी एक्सपर्ट था उसने अपनी कॉलेज की दोस्त रोजी के साथ यह कला सीख ली थी परंतु अपनी मौसी के खुद की वीर्य से सने होठों चूमने का अनुभव अलग था।
सूरज सोनी को बेतहाशा चूमने लगा सोनी आश्चर्यचकित थी। उसने तो अपने होठों को उसके माथे को चूमने के लिए गोल किया था परंतु यहां चुंबन का प्रारूप बदल चुका था। सोनी को सूरज का बचपन याद आ रहा था जब वह अक्सर उसके होठों पर चुंबन ले लिया करता था। अब जब एक बार सोनी ने सूरज के चुंबन में एक अलग आकर्षण महसूस किया वह स्वयं भी न जाने कब इस चुंबन में अपना योगदान देने लगी।
नियति मुस्कुरा रही थी सूरज और सोनी दोनों अन्य प्रेमी की भांति एक दूसरे को चुंबन ले रहे थे..
नियति बड़ी आत्मीयता और अनोखे प्रेम में डूबे दो युवा दिलों को करीब आते देख रही थी और आने वाले समय की पटकथा लिख रही थी।