Hindi Porn Stories हाय रे ज़ालिम - Page 23 - SexBaba
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Hindi Porn Stories हाय रे ज़ालिम

[size=large][size=large][size=large][size=large][size=large][size=large][size=large][size=large][size=large][size=large][size=large][size=large][size=large][size=large][size=large][size=large][size=large][size=large][size=large][size=large][size=large][size=large][size=large][size=large]रश्मी;पुरी तरह नंगी हो जाती है।
शरम के मारे वो एक हाथ अपनी चूत पे और दुसरा हाथ अपने ऑखों पे रख देती है।

थोड़ी देर बाद उसे अपने हाथ पे जो उसने छूट पे रखी थी देवा की चिपचिपी ज़ुबान महसूस होती है।

देवा;उसके हाथ को चाट रहा था।

रश्मी से भी बर्दश्त नहीं होता और वो भी पहली मर्तबा अपनी चुत को चटवाने के लालच में अपना हाथ चूत के ऊपर से हटा देती है।

हाथ हटते ही देवा की ज़ुबान रश्मि की चूत से चिपक जाती है।



रश्मी;ज़ोर ज़ोर से सिसकारियां भरने लगती है उसकी आँखें बंद थी और उसकी आवाज़ से ऑगन में लेटा हुआ पप्पू उठके घर के अंदर चला जाता है।

सामने का नज़ारा देख उसके हाथ पैर काम करना बंद कर देते है।

देवा रश्मि की कमर को दोनों हाथों से पकड़ के अपने ज़ुबान को जीतनी अंदर जा सकती थी उतनी अंदर डाल के उसकी बहन की कुँवारी चूत चुसे जा रहा था।

चूत का पर्दा होने के कारन देवा ज़्यादा अंदर नहीं जा पा रहा था।

देवा इशारे से पप्पू को कपडे उतारने के लिए कहता है
और पप्पू अपने सारे कपडे उतार के रश्मि के चेहरे के पास जाके बैठ जाता है।

उसका लंड रश्मि के गाल को छुता है और रश्मि ऑंखें खोल देती है।
पहले तो वो बुरी तरह डर जाती है मगर अपने भाई को भी नंगा देख उसका डर थोड़ा कम हो जाता है।

मगर उसे दुसरा डर सताने लगता है कही ये दोनों मिलके तो ।

देवा इतने बुरी तरह रश्मि की चूत को चाट रहा था की रश्मि न बोल सकती थी न हिल सकती थी वो ऑखें फाड़े पप्पू को देखती रहती है।

अचानक पप्पू अपना लंड रश्मि के होठो के सामने करता है।

और रश्मि ऑखें बंद करके मुँह खोल देती है।
उसे भी अपने भाई का लंड स्वीकार था।
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आज भाई बहन का रिश्ता बदल रहा था आज एक कली फूल बनने जा रही थी वो भी अपने भाई के सामने।

देवा और रश्मि को रोक पाना अब नामुमकिन था।

रशमी की चूत चाट चाट के लाल कर देने के बाद देवा उसे उठा के बैठा देता है और दोनों उसके पास खड़े होके अपने लंड को उसके गाल पे मारने लगते है।

रश्मी की ऑखों में उस वक़्त सिर्फ वासना भरी हुई थी न कोई भाई और ना चूत का क़ीमती पर्दा फ़टने का डर।

वो दोनों के लौडों को अपने मुंह में बारी बारी ले के चुसने लगती है। गलप्प गलप्प गलप्प गलप्प गलप्प गलप्प।गप्प।




देवा;रश्मि को लिटा देता है और उसकी चूत को फिर से चाटने लगता है ताकि वो इस कदर गरम हो जाये के चूत फ़टने से उसे दर्द का एहसास भी न हो।

पप्पू देवा के झुलते हुए लंड को अपने हाथ में पकड़ लेता है और निचे लेट के उसे अपने मुंह में ले लेता है और गलप्प गलप्प चूसने लगता है।

देवा रश्मि के चूत चाटने लगता है और पप्पू देवा का लंड तीनो चुदाई के लिए पूरी तरह तैयार थे।

रश्मी;अपने भाई पप्पू को देवा का लंड चुसते देख पूरी तरह संतुष्ट हो जाती है की पप्पू ये बात किसी को भी नहीं बतायेगा और उसे ये देख के थोड़ा अजीब भी लग रहा था की पप्पू लंड के साथ साथ देवा की गाण्ड को भी चाट रहा था। तीनो अजीब आवाज़ें निकाल रहें थे।

देवा;अपना लंड पप्पू के मुंह से निकाल देता है।
पप्पू ने उसे काफी गीला कर दिया था और रश्मि की चूत भी चाटने से बहुत गीली हो चुकी थी।

देवा पप्पू से रश्मि के दोनों ब्रैस्ट मसलने के लिए कहता है और खुद रश्मि के जांघ के पास आ जाता है यही वो पल था जब रश्मि देवा को मना कर सकती थी मगर वो तो जल्द से जल्द उसे अपने अंदर लेना चाहती थी।

रशमी; खुद देवा के लंड को अपने चूत के उस सुराख़ पे लगा देती है जहाँ से अब तक कोई भी लंड अंदर नहीं गया था।
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रश्मि ;उईईईईईईई माँ आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आअह्हह्हह्हहहह आहह देवा भैया ओह्ह्ह्ह्ह।

एक ही झटके में देवा का आधे से ज्यादा लंड अंदर जाकर रश्मि की चूत की झिल्ली को फाड़ देता है।

खून से सना हुआ देवा का लंड रश्मि की चूत में अंदर बाहर होने लगता है रश्मि ज़ोर ज़ोर से चीखने लगती है और पप्पू अपने मुंह से उसकी आवाज़ बंद करने की कोशिश करता है मगर दर्द के मारे रश्मि पप्पू के होठो को ही काट लेती है।

रश्मी;आहह इसे बाहर निकाल दो देवा आहह मुझ पे कुछ तो तरस खाओ ना आह्ह्ह नही।

मगर देवा अगर रुक जाता तो रश्मि की चूत अंदर तक नहीं खुल पाती
वो भी खून देख के थोड़ा डर सा गया था मगर पदमा और रानी को कई बार चोदने से उसकी हिम्मत बँधी हुई थी।

वो धीरे धीरे अपने लंड को रश्मि की चूत के अंदर बाहर करते रहता है और रश्मि रोते रोते सिसकने लगती है। उसका दर्द बहुत कम हो चुका था और चूत की जलन भी अब सता नहीं रही थी।

देवा;उसे बड़े प्यार से चुमते हुए चोदने लगता है अपने पहले प्यार को अपने पहले लंड को कोई भी लड़की भुला नहीं सकती।

पप्पू पास में बैठा रश्मि को चुदते देख रहा था वो उठके एक गीला कपडा ले आता है और देवा को अपना लंड बाहर निकालने के लिए कहता है।

मगर रश्मि उसे बाहर निकालने नहीं देती।

पप्पू ऐसे ही चूत में लंड आते जाते दोनों को देवा के लंड को और अपनी बहन की चूत को साफ़ करने लगता है।

अब देवा रश्मि को घोड़ी बना देता है और पीछे से उसकी कमर पकड़ के अपने लंड को अंदर पेल देता है।

कफी देर चुप रहने के बाद रश्मि देवा को धीरे धीरे करने के लिए कहती है।

पप्पू अपने बहन के मुंह के सामने जाके बैठ जाता है और रश्मि बड़े प्यार से अपने भाई के लंड को अपने मुंह में ले लेती है।पीछे से पडते हुए देवा के धक्को से वो हिलने लगती है और पप्पू का लंड उसकी मुँह में अंदर बाहर होने लगता हैं।
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देवा;अभी तो पप्पू का ठप्पा बाकी है रश्मि आहह इतने छोटी चूत मुझे आज तक नहीं मिली आअह्हह्हह्हह।

रश्मी;उन्हह जानवर नहीं हूँ मै धीरे से कर ना आह्ह्ह्ह्ह्।

देवा;अबे साले देख क्या रहा है चल आजा चढ़ जा अपनी बहन पे।

रश्मी;अपने भाई को देखती है और पप्पू रश्मि को।

पप्पू रश्मि के पीछे जहाँ देवा था वहां चला जाता है और देवा अपने लंड को बाहर निकाल लेता है।

रश्मी सीधे लट जाती है वो अपने भाई को देखना चाहती थी चुदते हुए।

पप्पू थोड़ा घबरा रहा था। देवा उसकी गाण्ड पे थप्पड मारता है।

देवा अब सामने खाना पड़ा है और तू सोच रहा है जब रश्मि को कोई दिक्कत नहीं तो तू क्यों डर रहा है ।

पप्पू;अपनी बहन की टाँगें खोल के अपने छोटे से लंड को उसकी चूत पे टीकाता है। देवा तो पहले ही सुरँग खोद चुका था बचा खुचा काम पप्पू करने लगता है।

वो हमेशा से अपने घर वालों को चोदने के इच्छा रखता था ।आज देवा की वजह से उसके दिल की तमन्ना पूरी हो रही थी।

देवा;अपने लंड को रश्मि के मुंह में अटका देता है और पप्पू धीरे धीरे रश्मि को चोदने लगता है।



देवा;हंसने लगता है।

रश्मी; उन्हह बहुत बूरे हो तुम देवा आहह एक बहन के चूत में भाई का लंड डलवा के हँस रहे हो आहह ।

पप्पू भी जोश में आके दना दन अपने लंड को रश्मि की चूत में अंदर बाहर करने लगता है।

रश्मी तो आज पहली बार चूदी थी। उसे तो हर धक्का बहुत आनन्द दे रहा था। वो नहीं जानती थी की असली चुदाई क्या होती है।
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देवा को पता था कुछ दिन बाद रश्मि खुद चूत और गाण्ड में लेने उसके पास आयेंगी और उस दिन वो अपनी सारी भडास उसकी चूत और गाण्ड पे निकालेगा।

मगर इस वक़्त उसके लंड में ना चोदने की वजह से दर्द सा हो रहा था ।

सामने पप्पू अपने बहन को चुमते हुए अपने लंड को ठण्डक देने में लगा हुआ था उसके चमकती हुई गाण्ड देवा के मुँह के सामने थी।

देवा पप्पू के गाण्ड पे थूक देता है और उसी थूक में लंड को गीला करके दोनों हाथों से पप्पू के कमर को चौडी कर देता है।

दोनो भाई बहन दोनों चिपके हुए थे। पप्पू को पता था की देवा क्या करने वाला है मगर रश्मि अन्जान थी।

वो होश में तब आते है जब पप्पू दर्द से चिल्ला उठता है क्यूंकि देवा का लंड पप्पू के गाण्ड में पहुँच चुका था और वो रश्मि को चोद भी नहीं पा रहा था।

देवा अपने दोनों हाथों से पप्पू की कमर पकड़ लेता है और अपने लंड को अंदर तक घूसाने लगता है

उसके झटके रश्मि को अपनी चूत में महसूस हो रहे थे।

वो मुस्कुराते हुए देवा को देखने लगती है और पप्पू दर्द और ख़ुशी के मारे अपनी कमर को भी आगे पीछे करने लगता है।

देवा;आहह साले दोनों भाई बहन एक जैसे हैं आहह मेरा लंड फँसा जा रहा है।

पप्पू पानी छोड देता है और उसे तरह रश्मि की चूत में लंड डाले पड़ा रहता है उसे अब गाण्ड मरवाने में जो सुख प्राप्त हो रहा था वो तो रश्मि को चोदने में भी नहीं मिला था।

कुछ देर बाद देवा अपना लंड पप्पू के गाण्ड से निकल लेता है और प्यासी रश्मि को अपनी गोद में बैठा लेता है।

वो रश्मि को अपने लंड की आदत डाल देना चाहता था।

रश्मी भी दोनों टाँगें खोल के देवा के लंड पे उछलने लगती है।
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देवा;रश्मि को लिटा देता है।
उससे ऐसे चुदाई नहीं हो पा रही थी रोज़ रोज़ हिरन का शिकार करने वाला शेर आज घाँस फूस नहीं खा सकता था।

देवा रश्मि के दोनों पैरों को अपने काँधे पे रख देता है और इस बार पूरा का पूरा लंड रश्मि की चूत में एक झटके में उतार देता है।

रश्मी की ऑंखें बाहर की तरफ निकल आती है ये लंड जो पहले आधा ही उसके चूत में जा रहा था अचानक से इतना बड़ा हो के उसकी चूत को चिरता फाड़ता हुआ अंदर चला गया था।

देवा आहह रश्मि मेरी जान आहह देख तेरा देवा कैसे तुझे चोदता है अब।

रश्मी; आह्ह माँ नहीं नहीं मुझे नहीं लेना निकाल ले इसे। आहह मेरी चूत फ़ट जायेगी वहां से उईई आहः


असली खून अब रश्मि की चूत से निकल रहा था । चूत के किनारे लंड से चिरे जा रहे थे और उनसे खून बाहर ज़मीन पे गिरने लगता है।

देवा रश्मि को अपने नीचे पूरी तरह दबा के अपने लंड को उसकी चूत की गहराइयों में उतारता चला जाता है।

रश्मी बुरी तरह रोनी लगती है और उसका रोना देख देवा को उस पे तरस आ जाता है और वो अपना लंड बाहर निकाल लेता है।

रश्मी;उन्हह माँ वो।
उसकी चूत चिर गई थी और खून बंद नहीं हो रहा था।

देवा अपने लंड को रश्मि के मुंह में डाल देता है।

और रश्मि उसे चुसते हुए खाली कर देती है।

देवा तो शांत हो गया था मगर रश्मि से खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था।

देवा और पप्पू उसे खड़ा करके कपडे पहनाते है और उसे उसके कमरे में लिटा देते है।

रश्मी; रोते रोते थकान के मारे सो जाती है।

पप्पू वो किसी को बतायेगी तो नहीं न । वरना माँ हम दोनों को मार देगी देवा।

देवा कुछ नहीं होंगा तू बस घबरा मत।

मै घर जा रहा हूँ मुझे रात में आके मिल जब तेरी माँ घर आ जाएगी।

और रश्मि को हल्दी वाला दूध पीने को दे देना।

पप्पू;ठीक है।

देवा अपने घर चला जाता है।
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देवा अपने घर चला जाता है।

देवा जब घर पहुँचता है तो उसे घर के ऑगन में ममता और नूतन बातें करती दिखाई देती है वो भी उनके पास बैठ जाता है।

ममता; भाई आप कहाँ थे। माँ कबसे आपके बारे में पूछ रही थी।

देवा;क्यूँ कुछ काम था क्या।

ममता; मुझे क्या पता शायद दुकान से कुछ सामान लाना था।

नुतन ; चुपके चुपके देवा को ही देख रही थी।

देवा की नज़र जब उसपे जाती है तो नूतन घबरा के अपनी नज़रें चुरा लेती है।

नुतन ; देवा भैया तो अपनी धुन में लगे रहते है । न हमे कही घुमाने ले जाते है और न हमसे बातें करते है।

देवा; अच्छा तो ये बात है।

ममता; हाँ देखो न नूतन को यहाँ आये कितने दिन हो गये है ।
बेचारी घर में बैठे बैठे सुख के कांटा हो गई है।

नुतन; ममता को चुमटी काट लेती है।

देवा;सुख के काँटा। मुझे तो हट्टी कट्टी दिखाई दे रही है।

ममता; बड़े गौर से देखा है भाई ने तुझे। लगता है।

दोनो लड़कियाँ खिलखिलाके हंसने लगती है।

देवा;नूतन तू इसके सोहबत में रहेगी ना तो तू भी बहकी बहकी बाते करने लग जाएगी।।ये तो पूरी पागल है।

ममता; क्या मै आपको पागल दिखाई देती हूँ भइया।

देवा; ममता के चोटी (हेयर) खीचता है।

ममता; तिलमिला के रह जाती है और नूतन हंसने लगती है।
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जबसे देवा ने उसे उस हालत में देखा था तब से नूतन जब भी देवा के सामने आती या उसे देखती उसके जिस्म पे चीटियाँ रेंगने लगती।

पत्थर पे पत्थर घीसने से उस में चिंगारी पैदा हो जाती है
यहाँ तो ममता और नूतन रोज़ चूत पे चूत घिस रहीं थी।

देवा; ममता को पानी लाने के लिए कहता है और ममता घर के अंदर पानी लेने चली जाती है।

नुतन देवा को ही देख रही थी।

देवा;नूतन को अपने तरफ देखते हुए उसे अचानक बोल बैठता है।
वैसे नूतन अब तू भी जवान हो गई है।
मामी से बोल के तेरे लिए लड़का ढूँढ़ना पडेंगा।

नुतन ; आपको कैसे पता मै जवान हो गई हूँ।।

देवा; मैंने देखा है न तुझे।
वो बोल तो बैठा मगर फिर चुप सा हो गया।

नुतन से वहां बैठना मूहाल हो जाता है और वो भाग के घर के अंदर चली जाती है।

ममता पानी का गिलास लेके देवा को देती है।
ये नूतन क्यों भाग गई।

देवा; (धीरे से)उसे शायद सुसु आई थी।

ममत; क्या आई थी।

देवा;कुछ नहीं माँ कहाँ है।

ममता'; वो नहा रही है।
ये बोल के ममता नूतन के पास चली जाती है।

और देवा घर के अंदर चला जाता है वो जैसे ही अपनी माँ रत्ना के कमरे में जाता है उसी वक़्त रत्ना के कमरे में बने बाथरूम का दरवाज़ा खुलता है और रत्ना बाहर आ जाती है।



देवा की नज़र और रत्ना की नज़र एक हो जाती है और देवा अपनी खूबसूरत माँ को देखता ही रह जाता है।
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इतना गदराया हुआ जिस्म उसकी ऑखों में जैसे नूर भर देता है।

रत्ना अपने आप को उस गीली साडी से छूपाने की कोशिश करती है और देवा अपने सर को खुजाता हुआ जल्दी से रत्ना के कमरे से बाहर निकल जाता है।

रत्ना;देवा के कमरे से जाने के बाद आइने के सामने खड़ी होके अपने जिस्म को पोंछने लगती है।



रत्ना को महसूस होता है की कोई उसे खिडकी से देख रहा है वो जैसे ही मुड के खिडकी की तरफ देखती है कोई वहां से भागता हुआ उसे दिखाई देता है।

वो सोच में पड़ जाती है की कौन हो सकता है।
अचानक ही उसके चेहरे पे हलकी सी मुस्कान आ जाती है।

थोड़ी देर बाद जब रत्ना साडी पहन के देवा के पास जाके बैठती है तो उसे आज पहली बार अपने बेटे के पास बैठते हुए शर्म सी आ रही थी।

देवा; माँ ममता बता रही थी तुम मुझे ढूंढ रही थी कुछ सामान लाना था क्या।

रत्ना; कहाँ ग़ायब रहने लगे हो तुम बस अभी आता हूँ बोल के गए तो अब आ रहे हो इतनी देर से । खेत में भी पास के मुन्ना को भीजवाई थी मैंने । उसने कहा देवा भैया तो खेत में है ही नही।

देवा;अरे माँ तुम्हे पता है रश्मि की एक हफ्ते बाद शादी होने वाली है।

रत्ना; हाय दैया इतनी जल्दी तुझे कैसे पता।

देवा;वो रास्ते में शालु काकी मिली थी मुझे। उन्होने ही बताया की रश्मि के होने वाले ससुर की तबियत बहुत ख़राब है इसलिए वो रश्मि को मरने से पहले बहु के रूप में देखना चाहते है।

रत्ना;शुभ शुभ बोल बेटा ऐसा नहीं कहते।
भगवान ना करे रश्मि के ससुर को कुछ हो।
पर तू कहाँ था सुबह से।

देवा;वही तो बता रहा हूँ मै चला गया था काकी के घर पप्पू से मिलने । अरे माँ शादी का घर है काकी का। कितने काम करने है इतने कम वक़्त में।।
तूम इतनी खोज बीन क्यों कर रही हो मेरी।

रत्ना;तेरे पांव ज़मीन पे नहीं टिकते है ना इसलिये।

देवा; खुद के पांव को देखने लगता है।
ज़मीन पे ही तो है।
माँ तुम भी ना।
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[size=large]देवा;अपनी माँ रत्ना के गले में बाहें डालके उसे अपने से चिपका लेता है।

रत्ना के बिना ब्रा वाली चूचियाँ देवा की छाती में धँस सी जाती है।

रत्ना;आहह क्या करता है बच्चा नहीं है तु।
रात में क्या खायेगा बता दे अभी।

देवा;अरे हाँ माँ। रात से याद आया वो कल से मुझे रात में हवेली जाना पड़ेगा।
मै वही सो जाऊँगा।

रत्ना;क्यूँ ऐसी क्या मुसीबत आ गई की तुझे वहां सोना पडेगा।

देवा;वो मालिक शहर जाने वाले है कल एक हफ्ते के लिए। तो मुझे बोले की हवेली में कोई आदमी चाहिए। आस पड़ोस के गांव में चोरियॉँ हो रही है।

रत्ना;बेटा तू क्यों जाता है उस मुये सुनसान हवेली में मुझे तो वो जागिरदार और उसकी हवेली से बड़ा डर लगता है।
तूने देखा नहीं कितनी वीरान है वो जगह।

देवा;माँ जागिरदार गांव के सरपंच है।
और क्या बुराई है वहां सोने में ।

रत्ना;और यहाँ कौन रहेगा घर में।

देवा; मैं मुन्ना से बोल दूंगा वो आ जाएगा यहाँ सोने।

रत्ना;देख देवा आखिरी बार बोल रही हूँ तो दूर रह उन हवेली वालो से अरे गांव का कोई भी वहां नहीं जाता।

देवा;ठीक है माँ नहीं कह दिया करुँगा आगे से कोई भी काम देंगे तो वो मुझे।
अब जल्दी से खाना खिला दो बहुत भूख लगी है।

रत्ना;तू बैठ मै अभी खाना लगाती हूँ।

देवा;खाना खाके थोडी देर सो जाता है शाम ढले उसकी आँख खुलती है।

पप्पू उसे बुलाने आया था ।
पप्पू को देख देवा की गाण्ड फट जाती है।
उसे लगने लगता है की शालु को रश्मि के बारे में पता चल गया है।
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