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लास्ट अपडेट ऑफ़ थिस स्टोरी......... PART 2/3
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दन्न विमला की बात पर और भी आंसू बहाने लगा था.. क्या जवाब देता वो विमला को.
कोई भी तो नहीं दे सकता था विमला की बात का जवाब.. नागराज जो कभी खुद को ग़लत नहीं जाना था.. वो हमेशा hi खुद की अकड़ में रहा था.. दन्न के जवान होने से पहले वो बहुत नुकसान भी उठा चूका था.. लेकिन खुद को बदल नहीं पाया था..
दन्न के जवान होते hi वो और पॉवरफुल बन्न गया था.. फिर कभी कोई उसके सामने टिक नहीं पाया था.. मनजोत सिंह परिवार दन्न और नागराज से बढ़कर नहीं था तो कम् भी नहीं था.. बास उस परवर को छोड़ कर वो बाकी सबब पर hi भारी पड़ा था..
पारर वो भी खुद को बचा नहीं पाया था.. वो भी आंसू बहा रहा था.. वो भी पेशेंट बीएड पर एक ढेर की सूरत में पड़ा था..
सुमित्रा को आज एहसास हो रहा था क उसके रंडी पत्र की वजा से वो और उसका पूरा परिवार बदतर हालत का शिकार हो चूका है.. अगर वो लिमिट में रहते हुए चुदती तो ये सब नहीं देखना पड़ता..
रेखा बाई की हालत सबसे अलग थी.. वो जल्द hi खुद के किये गुनाहों को अच्छे से याद कर चुकी थी..... वो अपने आप पर जितना भी अफ़सोस कर पाती कम् था... उसके भी हाथ पेअर काट दिए गए थे, रेखा बाई को दर्द तो था, तकलीफ भी थी.. पर वो खुद क लिए इस सजा को सहन कर गई थी.. ड्रग्स के चलते वो भी चीखी चिल्लाई थी...
मनजोत सिंह से भीड़ कर एक गलती कर बैठी थी.. फिर बदले के चक्करो पर पद कर एक बेटे को गुणवा बैठी.. और अब सब hi वो गुणवा चुकी थी..... वो नहीं जानती थी उसके दूसरे बेटो का क्या हाल हुआ है... उसके दूसरे पोतों, बहुओं और पोतियों का क्या हाल हुआ है...
उन सब पर, दन्न फ्रैंड्स पर, पवन और उसके फ्रेंड्स पर महक का क़हर बरसा था...
महक ने दन्न फ्रेंड्स को एक एक करके चीयर दिया था... पवन और उसके दोस्तों को भी महक ने धीरे धीरे करके अपने हिसाब से, अपने अंदाज़ से चीयर पहाड़ डाला था..
शुरुआत सबके लुंड से की गई थी...... फिर धीर धीरे करके महक ने सब को इस दुन्या से मुक्त कर दिए था..... खतरनाक गैंगस्टर को ज़िंदा रखना रिस्की होता है... कभी भी पैसा पलट सकता है.. तो मैंने महक और जूली ने मुश्तर्का फैसला लेते हुए सबको hi मौत दे दी थी.........
महक के भाई और कजिन को महक ने नहीं मारा था.. उनके लुंड काट दिए थे महक ने.. फिर एक सीक्रेट छोटी सी जेल बना कर उम्र भर के लिए उन्हें कैद कर दिए हाय था............. उन सबब के कसूर कम् थे हमारे मामले में... लेकिन और कइयों के साथ वो सब बुरा कर चुके थे.. कइयों की इज़्ज़त उतर चुके थे.. इसलिए उन्हें ये सजा दी गई थी... वो बड़े गैंगस्टर भी नहीं थे.... उनसे कोई खतरा भी नहीं था........ लेकिन फिर भी चांस नहीं लिया गया... और उनके एक एक हाथ की उँगलियाँ छोड़ कर बाकी सबब काट दी गईइइइइइइइ......
महक की माँ बहन, चाचियां और कौसिन्स को भी टार्चर किया गया था... उन्हें ड्रग्स दे कर क़ैद कर दिए गया था.... वो सबब चुदाई की फैन थी.. चुदाई के बिना रहने वाली नहीं theeeeeeeeeee... उन सबब को सेक्स का अदि बना कर सेक्स की दुन्या से दूर कर दिए गया था..
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आफ्टर 2 मंथ
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पैलेस का माहौल अब्ब बदल चूका था.. शुष्मा दीदी के घर के मर्द भी अब सब जान गए थे.......... शुरू में वो सबब इस माहौल को और हमारे लाइफ स्टाइल को एक्सेप्ट नहीं कर पाए थे... लेकिन एक प्लान पर अमल करते हुए सबको भी खुद में शामिल कर लिया गया था........
शेखर, उसका भाई और पिता को पैलेस में रह रही कोठे वालियां के हवाले क्र दिए गया था.... उन कोठे वालियों को भी तो लुंड लेने की आदत पद चुकी थी.. वो कभी किसी नौकर से चुदती तो कभी किसी गॉर्डस से ... जो बिज़नेस में थी.. और जिओ खुद के लिए बहार कोई बॉयफ्रैंड्स कोई साथी ढूंढ़ना चाहती थी... वो खुद को बचाये हुए थी..
जो राज़ी थी वो सब मिलकर माँ के मौसा, शेखर और उसके भाई को अपने जाल में फंसा कर, छूट की दुन्या का बसी बना चुकी theeeeeeeeeee..........
मुझसे जुड़ा अब्ब कोई भी शर्म वाला नहीं रहा था.. शर्म वाला था कोई तो अजित भाई, हर्ष अंकल और पापा... वो पैलेस में किसी से चुदाई नहीं करते थे.. पर वो भी सबब को खुली छोट दे चुके थे...
अजित भाई को भी अब्ब अच्छे से अपने लुंड की पावर का अंदर हो चूका था.. तो वो भाभी को बोल गए थे.. क वो मुझसे कुछ भी कर सकती हाँ..... अजित भाई बच्चे नहीं थे जो समझ नहीं सकते थे.. सब कुछ hi तो उसके सामने हो रहा था..
जैसा माहौल था सबब उस रंग में रंगते चले गए थे.. अजित भाई को bhi"jab उनक मैं होता" भाभी की छूट मिल काया करती थी... अपनी बेटियों के रंग भी वो देख चुके थे... होने बेटे के रंग भी वो देख चुके थे.. पैलेस में रह रहे सभी एक रंग वो अच्छे से जानते थे.. वो भी किसी से दूर नहीं रह सकते थे...
पैलेस था hi बेशर्मो के रहने लायक............ अगर कोई पैलेस में रहेगा तो वो सबब जान जायेगा.. अगर फिर भी वो पैलेस में रहने का मैं बनाये रखेगा तो इसका एक hi मतलब था ........ क वो कुछ भी देखे या सुने उसे उसपर कोई ऐतराज़ नहीं होगा..
सबकी रज़ामंदी से मेरी शादी शुषा से तय करदी गई थी... उससे अगले दिन नताशा से..... हर्ष अंकल भी मान गए थे.. वो तो खुश थे.. दीक्षा आंटी भी खुश थीई.. शीतल सबके सामने hi बोल गईइइइइइ
"मेरा नंबर कब आएगा" सब शीतल की बात पर हस्सन लगे थे..
शादी तो सबकी एक साथ होने से रही.. पर शीतल शिका और रूपा पहले से hi नंबर लगवा लेने चाहती थी... उनके पेपर्स हो चुके थे .. व आज कल छुट्टियों पर थी.. और छुट्टियां वो चुदाई के रंग देखते हुए बिता देना चाहती थीईईई...
ऐसे hi एक दिन मौका देख कर तीनो ने मुझे धार लिया .. शाम का समय था. .. तीनो ने मुझे अपनी बहन पर भरा और कहते हुए पैलेस की छत पर ले गयी...
छत कर दूर बंद कर दिए गया.. वहां का सब देख कर मई तो शॉकेड hi हो गया था.. वहां पूरा पूरा इंतेज़ाम किया हुआ था तीनो.. नीली नीली लाइट लगी हुई थी. एक जगा.. कालीन बिछा हुआ था.. साइड्स में फूलों की लड़ियाँ लगी हुई थी... छत पर hi तीनो ने मिलकर सेज बनाई हुई थी..
तीनो मुझे घसीट कर वही ले गई. और देर किये बिना सबके पहले मुझे कपड़ों से आज़ाद किया.. फिर सब खुद भी पालक झपकते नंगी हो गई....
फिर तीनो मिलकर मुझसे अपना हक़ वसूल करने लगी.. लुंड लेने से पहले तीनो मिलकर मेरा पूरा पूरा मज़ा लेने लागींण.. शीतल तो किसी बिल्ली की तरह से मेरे लुंड पर टूट पड़ी थी........
हाहाहाहाहा........ लगता है बहुत पियास लगी है.... पूरा नल hi मोहन में लिया.. इतनी जल्दी पानी नहीं निकलने वाला, इतनी जल्दी पियास भी नहीं बजने वाली..
शीतल:- वो तुम छोडो, हम खुद से hi अपनी पियास बुझा लेंगी..... बहुत तड़पाया है तुमने हम तीनो को..
शिखा:- बहुत आग भड़काई है तुमने हमारी छूट में
रूपा:- आज सब वसूल करेंगी हम तीनो मिलकर... आज तो हम तेरा रपे करके hi दुम्म लेंगी....
फिर तीनो मिलकर मेरा रपे करने lagee..bari बरी मेरे लुंड को अपने मोहन में लेकर छोड़ने लगती.. बारी बारी मेरे मोहन पर अपनी छूट रख कर छुटवाने लगती... कभी वो अपने बूब्स मेरे मोहन में देकर ahhhhhhhhhhh पि लो भाई बहुत उबाल रहा है, सालों से अंदर hi अंदर.... आज इसे पि कर नया भर दो.. तब hi हमें सुकून मिलेगा.........
मैं भी बारी बारी सबकी छूट का पीने लगता तो कभी दूध..
फिर पैलेस की छत पर सबसे पहली चीख शीतल की hi गूंजी.........
aaaaaaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii
bhaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii आआह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह्हह bhaiiiiiiiiiiiiiiii रुक्खकककककक
मेरा लुंड शीतल की छूट को फाड़ता हुआ अंदर उतर चूका था.. शिखा और रूपा दोनों मिलकर शीतल का दूध पीने लगी..
कुछ देर रुक कर मैंने एक धक्का, फिर एक और धक्का मार कर सारा लुंड hi शीतल की छूट में दाल दिए था.......... बहुत शॉक था मेरा लुंड लेने का...
अब्ब पता चला........ लुंड लेना आसान नहीं होता.... वो भी मेरा लुंड..........
शीतल मेरा लुंड लिए बुरी तरह से तड़प रही थी...... दोनों मिलकर शीतल को सुकून पुहंचने में, शीतल के दर्द को कम् करने में लगी हुई थी.. मैंने दोनों के चुत्तड़ो पर एक एक थप्पड़ कास के मार दिए था.....
oiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaa bhaiiiiiiiiiiiiiiii ीत्नीईई जोरसे...
शीतल दर्द में होने के बावजूद भी हस्स पड़ी थी.... फिर शुरू हुई शीतल की चीखें और सुकुर में डूबी हुई सिसकियाँ....... शीतल भी अपनी बेहेन नताशा की तरह से हो गई थी..... शीतल भी वो रंग देख चुकी थी.. वो उसकी बेहेन ने देख लिए थे.......
शीतल के बाद शिखा फिर बाद में रूपा की चूर भी खोल दी मैंने..... दोनों छूट के खुलने पर, मेरे लुंड के दोनों की टाइट छूट में घुसने पर तड़प तड़प उठी थी..
तीनो को मुझसे वो प्यार मिल चूका था.. जिसके लिए तीनो सालों से मचल रही थी.. तीनसौ सालों से तड़प रही थी... तदपि तो आज भी थी... पर फिर वो सुख भी तीनो पा गई थी... जो उनके दिल की चाह थीईई.. वो भी बाकी सबकी लिस्ट में शामिल हो चुकी थी..
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मेरी शादी शुष्मा से हो चुकी थी.. वो मेरी मौसी और दीदी से पत्नी बन चुकी थी, वो भी अब्ब मुझे खुद का भांजा और भाई नहीं अपना पति अपना स्वामी बुलाती..
जो उनके नसीब में नहीं था.. शुशी वो पा चुकी थी...... 1सत शादी एक बाद वो भला कब ये जानती थी वो एक नामर्द से शादी एक बाद भी एक और उनकी शादी होगी. वो भी उससे जो उसके दिल के करीब हो..
मई खुश था, बहुत ज़यादा खुश था.. शुशी की ख़ुशी का तो कोई ठिकाना hi नहीं था......... आज पैलेस में सबब खुश थे.. पर मेरी शुशी की ख़ुशी से बढ़ की ख़ुशी किसी को नहीं हो सकती थी..... मेरे पास कोई कमी नहीं थी.. सब थे मेरे पास......... सब तो शुशी के पास भी थे..... पारर कोई एक खास नहीं था..
अब्ब से मैं पूरी तरह से शुशी क लिए ख़ास बन चूका था..
मैं दूर में पोहंचा तो शुशी संस्कारी पत्नी की तरह से घूंघट में थी.. सर्र झुका हुआ था.. लेकिन फिर भी उसके चेहरे की चमक मुझे यही से दिख रही थी..
उनकी खूबसूरती के कारन और ख़ुशी के कारन चमक रहा चेहरा मई दूर एक पास से देख रहा था..
मैं चलता हुआ शुशी के पास जा पोहंचा..........
उसके हाथो को थम कर पहले तो उसे बधाई दी.. फिर उसका घूंघट उठा कर कुछ भी कहे बिना उसे गले से लगा लिया..... शुशी अचानक से hi आंसू बहाने लग पड़ी थी.
ख़ुशी सहन कर आसान थोड़ी न होता है..
विजय:- मेरी शुशी से ख़ुशी सहन नहीं हो प् रही.....
शुशी:- हाँ विज्जू नहीं सहन हो पा रही है.. सहन शक्ति कहाँ से लाऊँ itni..main कब जानी थी क पैलेस में आने के बाद से मेरा सब कुछ hi बदल कर रह जाएगा.. शेखर ने कहा था क एक बार मैं पैलेस में चक्कर लगा लोन.. पारर मेरा दिल नहीं मान रहा था. शेखर ने तुम सबब की बहुत तारीफ की थी.. इसी लिए मैं पैलेस आने पर तैयार हुई थी.. मुझे जो मर्दों से नफरत रही है.
मैं जो रंगो के बिना hi जीने लगी थी.. मुझे कहाँ पता था क पैलेस में जाते hi मेरा सबब कुछ बदलने वाला है..
कहाँ मैं ये सबब सोच पाई थी.. कहाँ मई ये सबब डेसेर्वे करती थी.. विज्जू ये सब तुमने किया है.. विज्जू तुमने मुझे उस कुत्ते नामर्द से छीन कर अपनाया है.. कैसे मैं उस कुत्ते से छुटकारा पा कर एक नयी लाइफ जी सकती थी.. कुछ भी तो नहीं कर सकती थी..... कुछ भी तो नहीं चाह सकती थी मैं.....
तुमने मुझे सब कुछ दे दिए है विज्जू.. वो सब कुछ भी जो मैं कभी सोच भी नहीं पाई थीई.. कैसे ये सबब मिल पाने की ख़ुशी सहन कर पाऊँ विज्जउ..
कहाँ से लाऊँ इतनी हिम्मत........... मेरी शुशी बोलते बोलते फूट फूट कर रोने लगी..............
ख़ुशी भी यादों को वापिस ला कर दर्द दे जाती है.. लेकिन वो दर्द भी सुकून दे जाता है कभी कभी....... यहाँ होने वाला दर्द पढ़ा भी दे रहा था... तो अंदर मुनावर भी कर रहा था... शुशी की पीठ को सहलाते हुए उसे प्यार करते हुए शांत कर दिए.........
विजय:- मेरी शुशी अब्ब ठीक है ना .. मेरी शुशी को अब्ब तो कोई हम्म नहीं हां ना.. (शुशी ने ना में सर हिला दिए) तो फिर अब मिलने वाली खुशियों को और भी बढ़ा दिए जाए.. वो सारे दर्द एक hi बार में ख़तम कर दिए जाए..
बोलो मेरी शुशी वो सब दर्द आज ख़तम कर लेना चाहती हो ना.
शुशी:- हाँ विज्जू आज मेरे सरे दर्द ख़तम कार्डो.. आज मुझे साड़ी खुशीयाँ दे दो..
विजय:- दर्द ख़तम करने क लिए भी दर्द सहना पड़ता है.. खुशियां भी तो ऐसे hi नहीं मिल जाती........... शुशी का एक दूध कस के दबाते हुए मैं शरारत से बोलै..............
आआआईईई शुशी की आँखों में चमक बढ़ गई.. शर्म तो मैं उसकी कबकी ख़तम करवा शुका था.. अब तो शुशी भी सत्रपों खिलाडी थी..
शुशी:- तो दो न मुझे दर्द, इसी दर्द के लिए भी तो मैं पल पल तदपि हों..
विजय:- सोच लो.. सहन करना मुश्किल हो जाएगा.. बहुत खून निकलेगा.. छूट फट जाएगी............... शुशी को किश करते हुए
शुशी:- तो होने दो न दर्द.. मेरा दर्द बांटने क लिए तुम हो ना. मेरा दर्द तुम भी तो नहीं देख सकते . मुझे दर्द में देख कर कुछ तो करोगे hi ना तुम.. और छूट तो होती फटने क लिए है...
विजय:- और गांड बारे क्या ख्याल है तुम्हारा..
शुशी:- खुद hi तो कह रहे थे.. जितना दर्द मिलेगा, फिर बाद में उतनी hi खुशियां भी मिलेंगी.......... मुझे भी आज hi सारे दर्द और साड़ी खुशियां दे दो.. गांड का दर्द भी आज देख लूंगी.. जितना हुआ सहन न भी हुआ तो कुछ मिन्ट्स के लिए तड़प लुंगी.. फिर बाद में मज़ा भी तो आएगा नाआआआ...
विजय:- चलो तो फिर आगे की तैयारी शुरू करते हाँ.. अब्ब ये बताओ क मुझसे गिफ्ट क्या चाहिए तुम्हे....... मैं पॉकेट में हाथ डालता हुआ बोलै......
शुशी हस्सन लगी
शुशी:- वैसी गिफ्ट वाली रस्मे तो दुन्या क लिए बानी हाँ, और हम सबब दुन्या से अलग हाँ.. न तो किसी की इतनी शादियां होती है.. न hi किसी की माँ से शादी होती है.. न hi मौसी से होती है.. जहाँ नानी को माँ के सामने छोड़ा जाए वहां रस्मो की क्या ज़रूरत विजजूउउ... फिर भी अगर तुम मुझे कोई गिफ्ट देना hi चाहते हो तो मुझे भी एक hi महीने के प्रेग्नेंट कार्डो.... मैं भी जल्द से जल्द माँ बनना चाहती हों. बहुत साल बिना बच्चो क रह ली........ मेरी फ्रेंड्स के 6-6 बच्चे हो गए हाँ और मेरी सील आज टूटने वाली है........... शुशी हस्ते हुए बोली.. सालों बाद आज उसकी सील टूट रही थी तो वो दुखी नहीं थी. उसका कोई बच्चा नहीं था. हसरत तो थी पर दुःख नै था...
शुशी को भी माँ और पूजा के जैसे एक नेकलेस पहना दिए मैंने
फिर शुशी की ख़ुशी के लिए शुशी को दर्द फिर ख़ुशी देने का प्रोग्राम चालू हुआ... कुछ देर में मैं नंगा होकर शुशी को भी नंगा कर चूका था..
शुशी मुझे मुस्कुराती आँखों से देख रही thiiiiiiiiiiii.. कोई शर्म नहीं थी.
कुछ था तो बास थोड़ा सा डर.. वो भी मेरे प्यार के कारन जल्दी hi जाने वाला था.. मेरा लुंड एक hi बार में उसे बेइंतेहा दर्द दे कर सुकून देने वाला था...
शुशी को जी भर कर किश करने के बाद उसके दोनों दूध पीने लगा मैं..
शुशी:- वीजजूउउ आज इन्हे सारा hi खली कार्डो... आअज मैं पुरे रणन मैं से तुम्हारी हों.. आज मुझे मज़े और सुकून का हर रंग दिखा दो..
शुशी के एक दूध को दबाते हुए मैं शुशी की दूसरे दूध को पीने लगा.. आज शुशी पुरे मैं से मुझे प्यार करने दे रही थी.. आज की शुशी पहले वाली शुशी से अलग थी...... आज की शुशी के सरे रंग अलग थे.... शुशी दोनों हाथो से मेरे सर्र को अपने दूध पर दबा रही थीइइइइइइ.. शुशी जो कभी किसी मर्द के पास भी नहीं फटकती थी..... आज पुरे चरम में सिसकियाँ लेती हुई मुझसे मज़े कर रही थी.......
दोनों दूध फूल गए तो मैं फिरसे शुशी को किश करते हुए शुशी की छूट पर आने लगा.. शुशी ने भी मस्ती में आते हुए खुद से hi अपने दोनों पेअर उठा दिए.. दोनों पेअर खुद से hi खोल दिए.. मैंने शुशी को देखा तो
शुशी:- विज्जउ आज तो मेरा पूरा मैं है.. आज मेरी छूट में घुस जाओ, जितनी जीब अंदर जा सके उतनी घुसा कर चूमो चाटो.. पहले पानी मेरा ऐसे hi निकलना है तुमने.. ाममममममममः बहुत मज़ा आता है विज्जू जब तुम मेरी छूट छत्ते हो.
शुशी बेशरम बन चुकी थी.. शुशी पुरे रंग में आ गई थी.. मैं भी झुका और शुशी की छूट में घुस गया....... शुशी की फिर वो सिसकियाँ वो आहें शुरू हुई क शुशी की खुशी का गवाह रूम का एक एक कोना बनने लगा..
मेरी जीब जितनी घुस सकती थी.. उतनी घुसी शुशी की छूट को चाटने लगी... शुशी की मस्ती बढ़ने lagi..shushi ने अपने दोनों हाथ फिरसे मेरे सर्र पर रख दिए और मेरे सर्र को अपनी छूट पर दबाने लगी.. छूट से बह रहा रस मेरे अंदर उतरने लगा.. मेरा नशा भी बढ़ने लगा.. मेरे अंदर भी कररनेट दौड़ने लगा..... मेरा लुंड सख्त और सख्त होने लगा..
ये खेल तब तक चला जब तक शुशी झटके कहते हुए झाड़ नहीं गई.....
फिर शुरू हुआ शुशी का ब्लोजॉब.. शुशी तो मेरे लुंड को चूमने, चाटने चूमने में माहिर हो hi चुकी थी......... कुछ मिंट शुशी मेरे लुंड को लोल्लिपोप की तरह इस्तेमाल करती रही... फिर साइड में लेट कर
शुशी:- विज्जू अब्ब सहन नहीं होता. अब्ब तो खोल दो मेरी छूट को अपने लुंड से .. पहले hi सालों गुज़र चुके हाँ.. अब्ब्ब देर मैट करो.. मुझे लड़की से औरत बना दो.. मुझे अपने बच्चे की माँ बना दोओओओ.. दे दो मुझे वो दर्द .. जिस दर्द के बाद खुशियां कभी ख़तम नहीं होंगी.. मज़ा कभी ख़तम नहीं होगा... मुझे भी दीदी वाली टीम भी पूरा पूरा शामिल कर दो..
अपनी शुशी की ख़ुशी क लिए मैंने अपने लुंड को पकड़ कर शुशी की छूट पर सेट कर दिए....... शुशी इस बार फिरसे खुद से hi अपने दोनों पेअर उठा कर खोल चुकी तह............ शुशी की गीली वर्जिन पुसी मेरे लुंड के बराबर मौजूद थी.. वो भी मेरे लुंड को ख़ुशी से देख रही थीईई. आज सब hi ख़ुशी मन रहे थे..
मेरा लुंड और शुशी की छूट भी बहुत खुश थे.... दोनों को भी अपनी मंज़िल मिलती दिख रही थी....... दोनों की भी तड़प आज ख़तम होने को thiiiiiiiiii..
मेरा लुंड शुशी की छूट के लिप्स को खोल कर शुशी की छूट के छेड़ पर सेट हो गया........ शुशी की आँखों में देखते हुए मैंने एक धक्का मार दिए.. शुशी की हलकी सी चीख निकल गई.. मेरे लुंड का सुपड शुशी की छूट के छेड़ में फस्स चूका था..
शुशी की आँखों में देखते हुए, शुशी की दोनों टांगों को पकड़ते हुए एक और कस के
ढककर मार दिए. मेरा लुंड शुशी की सील को तोड़ता हुआ 4" अंदर जा घुसाअअअअ
और शुशी की एक बड़ी चीख रूम में गूँज गई..... शुशी को दर्द तो मिलना hi था.. शुशी को कृषि ऐसे hi तो मिलने से रही... मेरी शुशी दर्द से तड़पने लगी.
लेकिन अभी मैं शुशी को और भी दर्द देना चाहता था.. शुशी की ख़ुशी उसके दर्द में थी....... शुशी की टांगों को कस के पकड़ते हुए, शुशी के रोने को नज़र अंदाज़ करते हुए एक पॉवरफुल धक्का और मैंने मार दिए........
aiiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaa marrrrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii
इस बार भी शुशी भयानक आवाज़ में चीख padi...mera पूरा लुंड शुशी की छूट में उतर चूका था.. शुशी की सील hi नहीं टूटी थी, शुशी की छूट की साड़ी दीवरें भी पूरी तरह से खुल चुकी theeeeeeeeeee...........
शुशी की सांस अटक गई थी.. शुशी की आँखों से गंगा जमना बहना शुरू हो गया था. शुशी के दर्द को कम् करने क लिए, शुशी के पैरों को छोड़ कर मैं शुशी के ऊपर झुक गया.. और शुशी के दूध दबाने और पीने लगा..
शुशी का दर्द इतनी जल्दी तो जाने से रहा कुछ टाइम तो लग्न hi था.. शुशी आंसू बहती रही और मैं शुशी के दूध से मैं बहलाता रहा.........
कुछ मिनट्स में शुशी शांत हुई.. तो फिर शुशी की ख़ुशी और मज़े का समय शुरू हो गया...
शुशी:- बहुत दर्द दे दिए विज्जू मुझे ...... अब्ब जितना दर्द दिया है.. उससे 1000 गुना बढ़ कर मज़ा भी दो.. सुकून भी दो......
तब फिर शुशी को ख़ुशी और नए रंग देने क लिए मेरे लुंड ने शुशी की छूट में इन् आउट होना शुरू कर दिए.... शुशी धीरे धीरे मज़े से सिसकियाँ लेने लगी..
शुशी उस रंग में आने लगी जिस रंग क लिए वो सालों से तड़प रही थी..
जल्द hi मेरी स्पीड और शुशी की छूट के पानी का बहाओ बढ़ गया.. फिर शुशी पुरे जोश से सिसकियाँ लेने लगी.......... शुशी अपना मज़ा अपना चरम रोक नहीं पाई..
शुशी:- ahhhhhhhhhh ोोोू सीईईईई hmmmmmmmmmm अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह उफ्फफ्फ्फ़ ो यस यस विजजूउउउउ I've गोटें तो वेयर ी वन्स थॉट I'd बे
विज्जू मुझे सबब रंग दिखने लगे हनन.. और स्पीड से छोड़ो विज्जु अपनी शुशी को.. अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह
मेरी स्पीड बढ़ी तो शुशी की छूट सहन नहीं कर पाई और भल भल पानी छोड़ने लगी.. लुंड की मार से शुशी पहली बार झड़ी थी...... खुसी और थकन से शुशी की सांस तेज़ चलने लगी...
एक एक बार और शुशी की छूट का पानी निकला फिर शुशी की गांड का उद्घाटन करने का सोच लिया........ शुशी ने मेरे लुंड पर लगा अपनी छूट प् पानी और खून चेतना शुरू कर दिए था.. दर्द तो अब्ब भी उसे था..
पारर आज वो दर्द को नहीं मज़े को जान लेना चाहती थी.. नयी दुन्या के नए रंग पा लेना चाहती थी....
अच्छे से लुंड चूस कर मुझे स्माइल देकर शुशी घोड़ी बन्न गई.. मेरा लुंड भी मुझे सीधा होने पर मजबूर कर गया था.. मैं भी अपने लुंड के साथ चलते हुए शुशी की गांड के छेड़ के बराबर आ गया.. शुशी की गांड को छाते बिना मेरा लुंड उसमे घुसना चाहता था.. मुझसे पहले वो शुशी की गांड के मज़े लेना चाहता था.. पर मई उसकी सुने बिना लुंड को साइड करके झुका और शुशी के चुत्तड़ खोल कर शुशी की गांड का मज़ा लेने लगा.......
shushi:-hmmmmmmmmha आआह्ह्ह सीईईई vijjjjjjuuuuuuuuuu hmmmmmmmmmmmm उफ्फ्फफ्फ्फ़
aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh वीजजजजज्जजूउउउउउउउ के मज़ा दे रहे हो अपनी शुशी को
मेरी जेब की नोक शुशी की टाइट गांड के छेड़ पर चलने लगी. शुशी की गांड की स्मेल और टास्ते मेरे अंदर हलचल सी मचने लगे.. मेरी जीब और भी अच्छे से शुशी की गांड के छेड़ पर चलने लगी.. शुशी की गांड टाइट थी, तो मेरी जीब सही से अंदर नहीं जा प् रही थी.. जितनी हो सटका था मई अंदर घुसाए चूसने चाटने लगा...
शुशी झटके पर झटके खा रही थी.. उसके चुत्तड़ बहुत तेज़ी से हिल रहे थे. जो उसकी बेचैनी को बयां कर रहे थे..
शुशी को मज़ा दे और खुद लेकर मैं शुशी की गैस से हट गया.. फिर मेरा लुंड सीधा शुशी की गांड के छेड़ पर जा पोहंचा.......
लुंड का सुपड भी आज झूम झूम रहा था.. उसका बस नहीं चल रहा था वर्ण वो मेरी कोशिश के बिना hi अंदर जा घुसे.......
अच्छे से शुशी की गांड के छेड़ पर लुंड के सुपड को एडजस्ट किया, शुशी की कमर को कस के पकड़ा और फिर एक धक्का पार दिए.....
marrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii
vijjjjjjjjjjjuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuu teriiiiiiiiiiiii shushiiiiiiiiiiiiiiiiiii,
maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa
अभी थोड़ा सा hi लुंड शुशी की गांड में गया था.. शुशी भयंकर चीख पड़ी थी. शुशी की छूट में दो उँगलियाँ घुसा कर मैं अंदर बहार करने लगा.. शुशी के दर्द को कम् करने क लिए मैं स्पीड से अपनी उँगलियों को हरकत दे रहा था..
ये गांड थी छूट से कही बढ़ कर दर्द देती थी खुलते समय.. शुशी झटका खा गई थी.. कुछ देर शुशी की छूट को फिंगर्स से छोड़ता रहा.. फिर दोनों उँगलियाँ निकल कर, फिरसे शुशी की कमर को कस के पकड़ लिया;..
अब्ब शुशी के दर्द को भूल कर hi शुशी की गांड खोल सकता था.. शुशी तड़प रही थी.. मैंने एक और धक्का मार दिए..... शुशी फिरसे तड़प उठी .. बाकी बचे लुंड का मैं क्या करता.. मार दिए एक और कस के धक्का और बचा सारा लुंड शुसि की गांड में,............ शुशी की तो माँ भी चुद गई थी........
गांड का दर्द सहन कर आसान थोड़ी न होता है.. शुशी तड़पने लगी. मैं फिरसे शुआहि की छूट में उँगलियाँ दाल कर अंदर बहार करने लगा.....
इस बार मैं तब तक नहीं रुका जब तक शुशी का दर्द मज़े में नहीं बदल गया...
शुशी:- haaaaaaayeeeeeeeeeeee मेरी गांड भी खोल दी........... uffffffffff बता नहीं सकती मैं मुझे कितना दर्द हुआ था......
पारर अब्ब मैं मज़े में हों...... अब तुम जैसे चाहे मुझे छोड़ सकते हो........
फिर क्या था.. शुशी की छूट की तरह गांड भी मैं पूरी तरह से खोलने लगा... शुशी को कभी दर्द होता तो कभी वो मज़े से सिसकियाँ लेने लगती........ शुशी के तो मज़े hi हो गए थे.. मज़े तो मेरे भी थे.. मुझे तो आज एक सील पैक छूट और गांड मिल गयी थी
शुशी की गांड को पूरी तरह से खोल कर फिरसे शुशी की छूट ठंडी करने में लग गया.. मेरे स्ट्रोक जारी रहे.. शुशी हर कुछ मिनट्स के बाद झड़ने लगती..
जब मेरी बारी तो मई भी शुशी की छूट को अंदर तक अपने लुंड के पानी से भरने लगा..........
फिर पूरी रात भी शुशी पानी छोड़ती रही.. जब मेरा निकलने वाला होता तो मैं शुशी की छूट में अपने वीर्य को भरने लगता..
अगले दिन मेरी नताशा से भी शादी हो गई..... उसे भी पूरी रत भरपूर मज़ा देता रहा. वो भी करवट करवट मचल जाती थी.... उसकी शर्म भी सबने मिलकर ख़तम कर दी थीइइइइइ अब्ब वो बदली हुई नताशा थी..
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आफ्टर 4 मोनथस
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गैंग बहुत ज़बरदस्त बन गई थी... संदीप सिंह निर्वाण और गुरनाम सिंह जैसे जब गैंग में शामिल हों तो गैंग का स्ट्रक्चर कमज़ोर कैसे हो सकता था..
दोनों ने राजा पार्टी के साथ मिलकर गैंग को बहुत ज़यादा पॉवरफुल बना दिए था..
इतना क पोइ भी गैंग हो या कोई बड़े से बड़ा पॉवरफुल पॉलिटिशियन .. गैंग के आगे सब hi कमज़ोर थे... गैंग के सामने टिक पाने की हिम्मत कोई खुद में पा hi नहीं सका था.. स के कारनामे और महक के जो करणमामे सबके सामने आये थे.. सब उसी को अभी तक भूले नहीं थे..
1000+ लोग गैंग में शामिल हो चुके थे.. और अभी भी भर्ती जारी थी.. 250+ लड़ने वाले थे...... बाकि हर एक फील्ड से जुड़े हुए लोग थे...... कई लड़कियां और औरतें भी दर पर्दा गैंग का काम कर रही थी.. कोई उनके बारे में नहीं जानता था....
गुज़रे कुछ महीनो में गैंग के पास पैसा इतना बढ़ गया था, क ख़तम होना पॉसिबल नहीं था...
गैंग ने दिल्ली मौजूद बेहिसाब गुंडों को मार दिए था...... कम और कम की पूरी पूरी सपोर्ट थी.. गुंडों को मार कर पुलिस का नाम रोशन किया जाने लगा.. कही कही स का नाम भी गुंडों को मारने क बाद लिया जाता था.. ऐसा तब होता था..
जब मामला किसी लड़की या औरत की इज़्ज़त से जुड़ा हुआ होता था....... इज़्ज़त के मामले में गैंग बहुत नाम बना चुकी थी.... पिछले 2 महीनो में शायद hi कही कोई ऐसे घटना घाटी हो.. जहाँ किसी लड़की की इज़्ज़त लूट ली गई हो..........
कई गुंडे दिल्ली में घुँडो की कमी को पूरा करने क लिए दिल्ली में आटे थे.. और छुप कर धंदे करने की कोशिश करने लगते थे.... लेकिन हमारा नेटवर्क कमज़ोर नहीं था.... ऐसा लुच्चे और दो कोड़ी के घुँडो को मौका पर hi मार दिए जाता था..
कई बड़े बड़े गुंडे जिनको मारा नहीं जा सकता था.. उन्हें बनाई गई गैंग की एक सीक्रेट जेल में ट्रांसफर कर दिए जाता..
वहां उसका अंजार बंजर ढीला करके उसमे सारे अकाउंट उससे जाने जाते.. फिर उन्ही अकाउंट से पैसा निकल कर अकाउंट खली कर दिए जाते......
गैंग के ऐसा करने से शहर में अफरा तफरी भी फेल जाती थी.. पर फिर जब देखा जाता क गैंग की वजा से क्राइम रेट कितना गिर गया है...... शहर में अम्नो अमन कितना बढ़ गया है.... तो सबब चुप भी कर जाते थे..
गैंग ने एक काम और भी किया था........ वो था दिल्ली में मौजूद कोठो पर रह रही मजबूर लड़कियों को वहां से निकलने का काम........ उसके लिए गैंग कोठे पर मौजूद सभी लोगों को बेहोश करके, एक साथ सबको उठा कर अपने ख़ुफ़िया थकने पर ले गई थी..
वही एक एक लड़की और औरत से पुछा जाता, उससे उसकी मर्ज़ी जानी जाती.. उसे आगे लाइफ में फुल सपोर्ट भी देने का बोल दिए जाता... अगर वो दिल्ली में रह कर कही भी कोई भी काम करना चाहती हाँ.... काम और सिक्योरिटी गैंग उन्हें प्रोवाइड करेगा..
चुद चुद के वो भी सेक्स की आदि हो गई थी... तो आज़ाद रहते हुए वो अपनी मर्ज़ी से किसी से भी चुद सकती थी... कोठे पर तो उनकी मर्ज़ी क बिना hi वो चुदती रहती थी...... लेकिन एक आज़ाद लाइफ की खुशखबरी सबको hi सुना दी गई थी.......'
हर कोठे की मालकिन को लड़कियों के सामने hi मारा पता जाता.. जिसके कारन लड़कियों का डर ख़तम हो जाता था.. और वो खुल कर अपने दिल की बात बोल दिए करती थी....
जिन कोठे वालियों के हाथों कइयों की इज़्ज़त गई थी.. मतलब जो कोठे वालियां रेखा बाई के जैसी थेईईईई.. उन सब को मार दिए गया...
97% लड़कियां कोठे पर रहना नहीं चाहती थीईई.. ऐसी लड़कियों को रहने क लिए एक बड़ी बिल्डिंग दे दी गई थी......
प्रेस कांफ्रेंस बुलाई गई और लड़कियों के बारे में सबब बता दिए गया...... कोठे की साड़ी लड़कियां मीडिया के सामने अपने विचार पेश करने लगी...... ेय सब लाइव टेलीकास्ट भी किया गया था........... फिर तो स गैंग का नाम पुरे देश में hi फैलना शुरू हो गया था........ कोठे की लड़कियों को एक आज़ाद और मन पसंद लाइफ देने पर गैंग को सम्मान भी दिया जाने लगे.. सोशल मीडिया तो कोई छोटी सी बात को ले कर हंगामा मचा देती है......
ये तो फिर भी बहुत बड़ी बात थी...... कई दिन तक ये सबब सोशल मीडिया पर पर दिखाया जाता रहा... आज तक कभी भी किसी ने भी कुछ ऐसा नहीं किया था..
ऐसी लड़कियों को एक नयी लाइफ देने के बारे में कभी किसी ने नहीं सोचा था.. हमारी गैंग ने ये कर दिखाया था.....
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लास्ट अपडेट ऑफ़ थिस स्टोरी......... PART 2/3
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दन्न विमला की बात पर और भी आंसू बहाने लगा था.. क्या जवाब देता वो विमला को.
कोई भी तो नहीं दे सकता था विमला की बात का जवाब.. नागराज जो कभी खुद को ग़लत नहीं जाना था.. वो हमेशा hi खुद की अकड़ में रहा था.. दन्न के जवान होने से पहले वो बहुत नुकसान भी उठा चूका था.. लेकिन खुद को बदल नहीं पाया था..
दन्न के जवान होते hi वो और पॉवरफुल बन्न गया था.. फिर कभी कोई उसके सामने टिक नहीं पाया था.. मनजोत सिंह परिवार दन्न और नागराज से बढ़कर नहीं था तो कम् भी नहीं था.. बास उस परवर को छोड़ कर वो बाकी सबब पर hi भारी पड़ा था..
पारर वो भी खुद को बचा नहीं पाया था.. वो भी आंसू बहा रहा था.. वो भी पेशेंट बीएड पर एक ढेर की सूरत में पड़ा था..
सुमित्रा को आज एहसास हो रहा था क उसके रंडी पत्र की वजा से वो और उसका पूरा परिवार बदतर हालत का शिकार हो चूका है.. अगर वो लिमिट में रहते हुए चुदती तो ये सब नहीं देखना पड़ता..
रेखा बाई की हालत सबसे अलग थी.. वो जल्द hi खुद के किये गुनाहों को अच्छे से याद कर चुकी थी..... वो अपने आप पर जितना भी अफ़सोस कर पाती कम् था... उसके भी हाथ पेअर काट दिए गए थे, रेखा बाई को दर्द तो था, तकलीफ भी थी.. पर वो खुद क लिए इस सजा को सहन कर गई थी.. ड्रग्स के चलते वो भी चीखी चिल्लाई थी...
मनजोत सिंह से भीड़ कर एक गलती कर बैठी थी.. फिर बदले के चक्करो पर पद कर एक बेटे को गुणवा बैठी.. और अब सब hi वो गुणवा चुकी थी..... वो नहीं जानती थी उसके दूसरे बेटो का क्या हाल हुआ है... उसके दूसरे पोतों, बहुओं और पोतियों का क्या हाल हुआ है...
उन सब पर, दन्न फ्रैंड्स पर, पवन और उसके फ्रेंड्स पर महक का क़हर बरसा था...
महक ने दन्न फ्रेंड्स को एक एक करके चीयर दिया था... पवन और उसके दोस्तों को भी महक ने धीरे धीरे करके अपने हिसाब से, अपने अंदाज़ से चीयर पहाड़ डाला था..
शुरुआत सबके लुंड से की गई थी...... फिर धीर धीरे करके महक ने सब को इस दुन्या से मुक्त कर दिए था..... खतरनाक गैंगस्टर को ज़िंदा रखना रिस्की होता है... कभी भी पैसा पलट सकता है.. तो मैंने महक और जूली ने मुश्तर्का फैसला लेते हुए सबको hi मौत दे दी थी.........
महक के भाई और कजिन को महक ने नहीं मारा था.. उनके लुंड काट दिए थे महक ने.. फिर एक सीक्रेट छोटी सी जेल बना कर उम्र भर के लिए उन्हें कैद कर दिए हाय था............. उन सबब के कसूर कम् थे हमारे मामले में... लेकिन और कइयों के साथ वो सब बुरा कर चुके थे.. कइयों की इज़्ज़त उतर चुके थे.. इसलिए उन्हें ये सजा दी गई थी... वो बड़े गैंगस्टर भी नहीं थे.... उनसे कोई खतरा भी नहीं था........ लेकिन फिर भी चांस नहीं लिया गया... और उनके एक एक हाथ की उँगलियाँ छोड़ कर बाकी सबब काट दी गईइइइइइइइ......
महक की माँ बहन, चाचियां और कौसिन्स को भी टार्चर किया गया था... उन्हें ड्रग्स दे कर क़ैद कर दिए गया था.... वो सबब चुदाई की फैन थी.. चुदाई के बिना रहने वाली नहीं theeeeeeeeeee... उन सबब को सेक्स का अदि बना कर सेक्स की दुन्या से दूर कर दिए गया था..
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आफ्टर 2 मंथ
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पैलेस का माहौल अब्ब बदल चूका था.. शुष्मा दीदी के घर के मर्द भी अब सब जान गए थे.......... शुरू में वो सबब इस माहौल को और हमारे लाइफ स्टाइल को एक्सेप्ट नहीं कर पाए थे... लेकिन एक प्लान पर अमल करते हुए सबको भी खुद में शामिल कर लिया गया था........
शेखर, उसका भाई और पिता को पैलेस में रह रही कोठे वालियां के हवाले क्र दिए गया था.... उन कोठे वालियों को भी तो लुंड लेने की आदत पद चुकी थी.. वो कभी किसी नौकर से चुदती तो कभी किसी गॉर्डस से ... जो बिज़नेस में थी.. और जिओ खुद के लिए बहार कोई बॉयफ्रैंड्स कोई साथी ढूंढ़ना चाहती थी... वो खुद को बचाये हुए थी..
जो राज़ी थी वो सब मिलकर माँ के मौसा, शेखर और उसके भाई को अपने जाल में फंसा कर, छूट की दुन्या का बसी बना चुकी theeeeeeeeeee..........
मुझसे जुड़ा अब्ब कोई भी शर्म वाला नहीं रहा था.. शर्म वाला था कोई तो अजित भाई, हर्ष अंकल और पापा... वो पैलेस में किसी से चुदाई नहीं करते थे.. पर वो भी सबब को खुली छोट दे चुके थे...
अजित भाई को भी अब्ब अच्छे से अपने लुंड की पावर का अंदर हो चूका था.. तो वो भाभी को बोल गए थे.. क वो मुझसे कुछ भी कर सकती हाँ..... अजित भाई बच्चे नहीं थे जो समझ नहीं सकते थे.. सब कुछ hi तो उसके सामने हो रहा था..
जैसा माहौल था सबब उस रंग में रंगते चले गए थे.. अजित भाई को bhi"jab उनक मैं होता" भाभी की छूट मिल काया करती थी... अपनी बेटियों के रंग भी वो देख चुके थे... होने बेटे के रंग भी वो देख चुके थे.. पैलेस में रह रहे सभी एक रंग वो अच्छे से जानते थे.. वो भी किसी से दूर नहीं रह सकते थे...
पैलेस था hi बेशर्मो के रहने लायक............ अगर कोई पैलेस में रहेगा तो वो सबब जान जायेगा.. अगर फिर भी वो पैलेस में रहने का मैं बनाये रखेगा तो इसका एक hi मतलब था ........ क वो कुछ भी देखे या सुने उसे उसपर कोई ऐतराज़ नहीं होगा..
सबकी रज़ामंदी से मेरी शादी शुषा से तय करदी गई थी... उससे अगले दिन नताशा से..... हर्ष अंकल भी मान गए थे.. वो तो खुश थे.. दीक्षा आंटी भी खुश थीई.. शीतल सबके सामने hi बोल गईइइइइइ
"मेरा नंबर कब आएगा" सब शीतल की बात पर हस्सन लगे थे..
शादी तो सबकी एक साथ होने से रही.. पर शीतल शिका और रूपा पहले से hi नंबर लगवा लेने चाहती थी... उनके पेपर्स हो चुके थे .. व आज कल छुट्टियों पर थी.. और छुट्टियां वो चुदाई के रंग देखते हुए बिता देना चाहती थीईईई...
ऐसे hi एक दिन मौका देख कर तीनो ने मुझे धार लिया .. शाम का समय था. .. तीनो ने मुझे अपनी बहन पर भरा और कहते हुए पैलेस की छत पर ले गयी...
छत कर दूर बंद कर दिए गया.. वहां का सब देख कर मई तो शॉकेड hi हो गया था.. वहां पूरा पूरा इंतेज़ाम किया हुआ था तीनो.. नीली नीली लाइट लगी हुई थी. एक जगा.. कालीन बिछा हुआ था.. साइड्स में फूलों की लड़ियाँ लगी हुई थी... छत पर hi तीनो ने मिलकर सेज बनाई हुई थी..
तीनो मुझे घसीट कर वही ले गई. और देर किये बिना सबके पहले मुझे कपड़ों से आज़ाद किया.. फिर सब खुद भी पालक झपकते नंगी हो गई....
फिर तीनो मिलकर मुझसे अपना हक़ वसूल करने लगी.. लुंड लेने से पहले तीनो मिलकर मेरा पूरा पूरा मज़ा लेने लागींण.. शीतल तो किसी बिल्ली की तरह से मेरे लुंड पर टूट पड़ी थी........
हाहाहाहाहा........ लगता है बहुत पियास लगी है.... पूरा नल hi मोहन में लिया.. इतनी जल्दी पानी नहीं निकलने वाला, इतनी जल्दी पियास भी नहीं बजने वाली..
शीतल:- वो तुम छोडो, हम खुद से hi अपनी पियास बुझा लेंगी..... बहुत तड़पाया है तुमने हम तीनो को..
शिखा:- बहुत आग भड़काई है तुमने हमारी छूट में
रूपा:- आज सब वसूल करेंगी हम तीनो मिलकर... आज तो हम तेरा रपे करके hi दुम्म लेंगी....
फिर तीनो मिलकर मेरा रपे करने lagee..bari बरी मेरे लुंड को अपने मोहन में लेकर छोड़ने लगती.. बारी बारी मेरे मोहन पर अपनी छूट रख कर छुटवाने लगती... कभी वो अपने बूब्स मेरे मोहन में देकर ahhhhhhhhhhh पि लो भाई बहुत उबाल रहा है, सालों से अंदर hi अंदर.... आज इसे पि कर नया भर दो.. तब hi हमें सुकून मिलेगा.........
मैं भी बारी बारी सबकी छूट का पीने लगता तो कभी दूध..
फिर पैलेस की छत पर सबसे पहली चीख शीतल की hi गूंजी.........
aaaaaaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii
bhaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii आआह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह्हह bhaiiiiiiiiiiiiiiii रुक्खकककककक
मेरा लुंड शीतल की छूट को फाड़ता हुआ अंदर उतर चूका था.. शिखा और रूपा दोनों मिलकर शीतल का दूध पीने लगी..
कुछ देर रुक कर मैंने एक धक्का, फिर एक और धक्का मार कर सारा लुंड hi शीतल की छूट में दाल दिए था.......... बहुत शॉक था मेरा लुंड लेने का...
अब्ब पता चला........ लुंड लेना आसान नहीं होता.... वो भी मेरा लुंड..........
शीतल मेरा लुंड लिए बुरी तरह से तड़प रही थी...... दोनों मिलकर शीतल को सुकून पुहंचने में, शीतल के दर्द को कम् करने में लगी हुई थी.. मैंने दोनों के चुत्तड़ो पर एक एक थप्पड़ कास के मार दिए था.....
oiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaa bhaiiiiiiiiiiiiiiii ीत्नीईई जोरसे...
शीतल दर्द में होने के बावजूद भी हस्स पड़ी थी.... फिर शुरू हुई शीतल की चीखें और सुकुर में डूबी हुई सिसकियाँ....... शीतल भी अपनी बेहेन नताशा की तरह से हो गई थी..... शीतल भी वो रंग देख चुकी थी.. वो उसकी बेहेन ने देख लिए थे.......
शीतल के बाद शिखा फिर बाद में रूपा की चूर भी खोल दी मैंने..... दोनों छूट के खुलने पर, मेरे लुंड के दोनों की टाइट छूट में घुसने पर तड़प तड़प उठी थी..
तीनो को मुझसे वो प्यार मिल चूका था.. जिसके लिए तीनो सालों से मचल रही थी.. तीनसौ सालों से तड़प रही थी... तदपि तो आज भी थी... पर फिर वो सुख भी तीनो पा गई थी... जो उनके दिल की चाह थीईई.. वो भी बाकी सबकी लिस्ट में शामिल हो चुकी थी..
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मेरी शादी शुष्मा से हो चुकी थी.. वो मेरी मौसी और दीदी से पत्नी बन चुकी थी, वो भी अब्ब मुझे खुद का भांजा और भाई नहीं अपना पति अपना स्वामी बुलाती..
जो उनके नसीब में नहीं था.. शुशी वो पा चुकी थी...... 1सत शादी एक बाद वो भला कब ये जानती थी वो एक नामर्द से शादी एक बाद भी एक और उनकी शादी होगी. वो भी उससे जो उसके दिल के करीब हो..
मई खुश था, बहुत ज़यादा खुश था.. शुशी की ख़ुशी का तो कोई ठिकाना hi नहीं था......... आज पैलेस में सबब खुश थे.. पर मेरी शुशी की ख़ुशी से बढ़ की ख़ुशी किसी को नहीं हो सकती थी..... मेरे पास कोई कमी नहीं थी.. सब थे मेरे पास......... सब तो शुशी के पास भी थे..... पारर कोई एक खास नहीं था..
अब्ब से मैं पूरी तरह से शुशी क लिए ख़ास बन चूका था..
मैं दूर में पोहंचा तो शुशी संस्कारी पत्नी की तरह से घूंघट में थी.. सर्र झुका हुआ था.. लेकिन फिर भी उसके चेहरे की चमक मुझे यही से दिख रही थी..
उनकी खूबसूरती के कारन और ख़ुशी के कारन चमक रहा चेहरा मई दूर एक पास से देख रहा था..
मैं चलता हुआ शुशी के पास जा पोहंचा..........
उसके हाथो को थम कर पहले तो उसे बधाई दी.. फिर उसका घूंघट उठा कर कुछ भी कहे बिना उसे गले से लगा लिया..... शुशी अचानक से hi आंसू बहाने लग पड़ी थी.
ख़ुशी सहन कर आसान थोड़ी न होता है..
विजय:- मेरी शुशी से ख़ुशी सहन नहीं हो प् रही.....
शुशी:- हाँ विज्जू नहीं सहन हो पा रही है.. सहन शक्ति कहाँ से लाऊँ itni..main कब जानी थी क पैलेस में आने के बाद से मेरा सब कुछ hi बदल कर रह जाएगा.. शेखर ने कहा था क एक बार मैं पैलेस में चक्कर लगा लोन.. पारर मेरा दिल नहीं मान रहा था. शेखर ने तुम सबब की बहुत तारीफ की थी.. इसी लिए मैं पैलेस आने पर तैयार हुई थी.. मुझे जो मर्दों से नफरत रही है.
मैं जो रंगो के बिना hi जीने लगी थी.. मुझे कहाँ पता था क पैलेस में जाते hi मेरा सबब कुछ बदलने वाला है..
कहाँ मैं ये सबब सोच पाई थी.. कहाँ मई ये सबब डेसेर्वे करती थी.. विज्जू ये सब तुमने किया है.. विज्जू तुमने मुझे उस कुत्ते नामर्द से छीन कर अपनाया है.. कैसे मैं उस कुत्ते से छुटकारा पा कर एक नयी लाइफ जी सकती थी.. कुछ भी तो नहीं कर सकती थी..... कुछ भी तो नहीं चाह सकती थी मैं.....
तुमने मुझे सब कुछ दे दिए है विज्जू.. वो सब कुछ भी जो मैं कभी सोच भी नहीं पाई थीई.. कैसे ये सबब मिल पाने की ख़ुशी सहन कर पाऊँ विज्जउ..
कहाँ से लाऊँ इतनी हिम्मत........... मेरी शुशी बोलते बोलते फूट फूट कर रोने लगी..............
ख़ुशी भी यादों को वापिस ला कर दर्द दे जाती है.. लेकिन वो दर्द भी सुकून दे जाता है कभी कभी....... यहाँ होने वाला दर्द पढ़ा भी दे रहा था... तो अंदर मुनावर भी कर रहा था... शुशी की पीठ को सहलाते हुए उसे प्यार करते हुए शांत कर दिए.........
विजय:- मेरी शुशी अब्ब ठीक है ना .. मेरी शुशी को अब्ब तो कोई हम्म नहीं हां ना.. (शुशी ने ना में सर हिला दिए) तो फिर अब मिलने वाली खुशियों को और भी बढ़ा दिए जाए.. वो सारे दर्द एक hi बार में ख़तम कर दिए जाए..
बोलो मेरी शुशी वो सब दर्द आज ख़तम कर लेना चाहती हो ना.
शुशी:- हाँ विज्जू आज मेरे सरे दर्द ख़तम कार्डो.. आज मुझे साड़ी खुशीयाँ दे दो..
विजय:- दर्द ख़तम करने क लिए भी दर्द सहना पड़ता है.. खुशियां भी तो ऐसे hi नहीं मिल जाती........... शुशी का एक दूध कस के दबाते हुए मैं शरारत से बोलै..............
आआआईईई शुशी की आँखों में चमक बढ़ गई.. शर्म तो मैं उसकी कबकी ख़तम करवा शुका था.. अब तो शुशी भी सत्रपों खिलाडी थी..
शुशी:- तो दो न मुझे दर्द, इसी दर्द के लिए भी तो मैं पल पल तदपि हों..
विजय:- सोच लो.. सहन करना मुश्किल हो जाएगा.. बहुत खून निकलेगा.. छूट फट जाएगी............... शुशी को किश करते हुए
शुशी:- तो होने दो न दर्द.. मेरा दर्द बांटने क लिए तुम हो ना. मेरा दर्द तुम भी तो नहीं देख सकते . मुझे दर्द में देख कर कुछ तो करोगे hi ना तुम.. और छूट तो होती फटने क लिए है...
विजय:- और गांड बारे क्या ख्याल है तुम्हारा..
शुशी:- खुद hi तो कह रहे थे.. जितना दर्द मिलेगा, फिर बाद में उतनी hi खुशियां भी मिलेंगी.......... मुझे भी आज hi सारे दर्द और साड़ी खुशियां दे दो.. गांड का दर्द भी आज देख लूंगी.. जितना हुआ सहन न भी हुआ तो कुछ मिन्ट्स के लिए तड़प लुंगी.. फिर बाद में मज़ा भी तो आएगा नाआआआ...
विजय:- चलो तो फिर आगे की तैयारी शुरू करते हाँ.. अब्ब ये बताओ क मुझसे गिफ्ट क्या चाहिए तुम्हे....... मैं पॉकेट में हाथ डालता हुआ बोलै......
शुशी हस्सन लगी
शुशी:- वैसी गिफ्ट वाली रस्मे तो दुन्या क लिए बानी हाँ, और हम सबब दुन्या से अलग हाँ.. न तो किसी की इतनी शादियां होती है.. न hi किसी की माँ से शादी होती है.. न hi मौसी से होती है.. जहाँ नानी को माँ के सामने छोड़ा जाए वहां रस्मो की क्या ज़रूरत विजजूउउ... फिर भी अगर तुम मुझे कोई गिफ्ट देना hi चाहते हो तो मुझे भी एक hi महीने के प्रेग्नेंट कार्डो.... मैं भी जल्द से जल्द माँ बनना चाहती हों. बहुत साल बिना बच्चो क रह ली........ मेरी फ्रेंड्स के 6-6 बच्चे हो गए हाँ और मेरी सील आज टूटने वाली है........... शुशी हस्ते हुए बोली.. सालों बाद आज उसकी सील टूट रही थी तो वो दुखी नहीं थी. उसका कोई बच्चा नहीं था. हसरत तो थी पर दुःख नै था...
शुशी को भी माँ और पूजा के जैसे एक नेकलेस पहना दिए मैंने
फिर शुशी की ख़ुशी के लिए शुशी को दर्द फिर ख़ुशी देने का प्रोग्राम चालू हुआ... कुछ देर में मैं नंगा होकर शुशी को भी नंगा कर चूका था..
शुशी मुझे मुस्कुराती आँखों से देख रही thiiiiiiiiiiii.. कोई शर्म नहीं थी.
कुछ था तो बास थोड़ा सा डर.. वो भी मेरे प्यार के कारन जल्दी hi जाने वाला था.. मेरा लुंड एक hi बार में उसे बेइंतेहा दर्द दे कर सुकून देने वाला था...
शुशी को जी भर कर किश करने के बाद उसके दोनों दूध पीने लगा मैं..
शुशी:- वीजजूउउ आज इन्हे सारा hi खली कार्डो... आअज मैं पुरे रणन मैं से तुम्हारी हों.. आज मुझे मज़े और सुकून का हर रंग दिखा दो..
शुशी के एक दूध को दबाते हुए मैं शुशी की दूसरे दूध को पीने लगा.. आज शुशी पुरे मैं से मुझे प्यार करने दे रही थी.. आज की शुशी पहले वाली शुशी से अलग थी...... आज की शुशी के सरे रंग अलग थे.... शुशी दोनों हाथो से मेरे सर्र को अपने दूध पर दबा रही थीइइइइइइ.. शुशी जो कभी किसी मर्द के पास भी नहीं फटकती थी..... आज पुरे चरम में सिसकियाँ लेती हुई मुझसे मज़े कर रही थी.......
दोनों दूध फूल गए तो मैं फिरसे शुशी को किश करते हुए शुशी की छूट पर आने लगा.. शुशी ने भी मस्ती में आते हुए खुद से hi अपने दोनों पेअर उठा दिए.. दोनों पेअर खुद से hi खोल दिए.. मैंने शुशी को देखा तो
शुशी:- विज्जउ आज तो मेरा पूरा मैं है.. आज मेरी छूट में घुस जाओ, जितनी जीब अंदर जा सके उतनी घुसा कर चूमो चाटो.. पहले पानी मेरा ऐसे hi निकलना है तुमने.. ाममममममममः बहुत मज़ा आता है विज्जू जब तुम मेरी छूट छत्ते हो.
शुशी बेशरम बन चुकी थी.. शुशी पुरे रंग में आ गई थी.. मैं भी झुका और शुशी की छूट में घुस गया....... शुशी की फिर वो सिसकियाँ वो आहें शुरू हुई क शुशी की खुशी का गवाह रूम का एक एक कोना बनने लगा..
मेरी जीब जितनी घुस सकती थी.. उतनी घुसी शुशी की छूट को चाटने लगी... शुशी की मस्ती बढ़ने lagi..shushi ने अपने दोनों हाथ फिरसे मेरे सर्र पर रख दिए और मेरे सर्र को अपनी छूट पर दबाने लगी.. छूट से बह रहा रस मेरे अंदर उतरने लगा.. मेरा नशा भी बढ़ने लगा.. मेरे अंदर भी कररनेट दौड़ने लगा..... मेरा लुंड सख्त और सख्त होने लगा..
ये खेल तब तक चला जब तक शुशी झटके कहते हुए झाड़ नहीं गई.....
फिर शुरू हुआ शुशी का ब्लोजॉब.. शुशी तो मेरे लुंड को चूमने, चाटने चूमने में माहिर हो hi चुकी थी......... कुछ मिंट शुशी मेरे लुंड को लोल्लिपोप की तरह इस्तेमाल करती रही... फिर साइड में लेट कर
शुशी:- विज्जू अब्ब सहन नहीं होता. अब्ब तो खोल दो मेरी छूट को अपने लुंड से .. पहले hi सालों गुज़र चुके हाँ.. अब्ब्ब देर मैट करो.. मुझे लड़की से औरत बना दो.. मुझे अपने बच्चे की माँ बना दोओओओ.. दे दो मुझे वो दर्द .. जिस दर्द के बाद खुशियां कभी ख़तम नहीं होंगी.. मज़ा कभी ख़तम नहीं होगा... मुझे भी दीदी वाली टीम भी पूरा पूरा शामिल कर दो..
अपनी शुशी की ख़ुशी क लिए मैंने अपने लुंड को पकड़ कर शुशी की छूट पर सेट कर दिए....... शुशी इस बार फिरसे खुद से hi अपने दोनों पेअर उठा कर खोल चुकी तह............ शुशी की गीली वर्जिन पुसी मेरे लुंड के बराबर मौजूद थी.. वो भी मेरे लुंड को ख़ुशी से देख रही थीईई. आज सब hi ख़ुशी मन रहे थे..
मेरा लुंड और शुशी की छूट भी बहुत खुश थे.... दोनों को भी अपनी मंज़िल मिलती दिख रही थी....... दोनों की भी तड़प आज ख़तम होने को thiiiiiiiiii..
मेरा लुंड शुशी की छूट के लिप्स को खोल कर शुशी की छूट के छेड़ पर सेट हो गया........ शुशी की आँखों में देखते हुए मैंने एक धक्का मार दिए.. शुशी की हलकी सी चीख निकल गई.. मेरे लुंड का सुपड शुशी की छूट के छेड़ में फस्स चूका था..
शुशी की आँखों में देखते हुए, शुशी की दोनों टांगों को पकड़ते हुए एक और कस के
ढककर मार दिए. मेरा लुंड शुशी की सील को तोड़ता हुआ 4" अंदर जा घुसाअअअअ
और शुशी की एक बड़ी चीख रूम में गूँज गई..... शुशी को दर्द तो मिलना hi था.. शुशी को कृषि ऐसे hi तो मिलने से रही... मेरी शुशी दर्द से तड़पने लगी.
लेकिन अभी मैं शुशी को और भी दर्द देना चाहता था.. शुशी की ख़ुशी उसके दर्द में थी....... शुशी की टांगों को कस के पकड़ते हुए, शुशी के रोने को नज़र अंदाज़ करते हुए एक पॉवरफुल धक्का और मैंने मार दिए........
aiiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaa marrrrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii
इस बार भी शुशी भयानक आवाज़ में चीख padi...mera पूरा लुंड शुशी की छूट में उतर चूका था.. शुशी की सील hi नहीं टूटी थी, शुशी की छूट की साड़ी दीवरें भी पूरी तरह से खुल चुकी theeeeeeeeeee...........
शुशी की सांस अटक गई थी.. शुशी की आँखों से गंगा जमना बहना शुरू हो गया था. शुशी के दर्द को कम् करने क लिए, शुशी के पैरों को छोड़ कर मैं शुशी के ऊपर झुक गया.. और शुशी के दूध दबाने और पीने लगा..
शुशी का दर्द इतनी जल्दी तो जाने से रहा कुछ टाइम तो लग्न hi था.. शुशी आंसू बहती रही और मैं शुशी के दूध से मैं बहलाता रहा.........
कुछ मिनट्स में शुशी शांत हुई.. तो फिर शुशी की ख़ुशी और मज़े का समय शुरू हो गया...
शुशी:- बहुत दर्द दे दिए विज्जू मुझे ...... अब्ब जितना दर्द दिया है.. उससे 1000 गुना बढ़ कर मज़ा भी दो.. सुकून भी दो......
तब फिर शुशी को ख़ुशी और नए रंग देने क लिए मेरे लुंड ने शुशी की छूट में इन् आउट होना शुरू कर दिए.... शुशी धीरे धीरे मज़े से सिसकियाँ लेने लगी..
शुशी उस रंग में आने लगी जिस रंग क लिए वो सालों से तड़प रही थी..
जल्द hi मेरी स्पीड और शुशी की छूट के पानी का बहाओ बढ़ गया.. फिर शुशी पुरे जोश से सिसकियाँ लेने लगी.......... शुशी अपना मज़ा अपना चरम रोक नहीं पाई..
शुशी:- ahhhhhhhhhh ोोोू सीईईईई hmmmmmmmmmm अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह उफ्फफ्फ्फ़ ो यस यस विजजूउउउउ I've गोटें तो वेयर ी वन्स थॉट I'd बे
विज्जू मुझे सबब रंग दिखने लगे हनन.. और स्पीड से छोड़ो विज्जु अपनी शुशी को.. अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह
मेरी स्पीड बढ़ी तो शुशी की छूट सहन नहीं कर पाई और भल भल पानी छोड़ने लगी.. लुंड की मार से शुशी पहली बार झड़ी थी...... खुसी और थकन से शुशी की सांस तेज़ चलने लगी...
एक एक बार और शुशी की छूट का पानी निकला फिर शुशी की गांड का उद्घाटन करने का सोच लिया........ शुशी ने मेरे लुंड पर लगा अपनी छूट प् पानी और खून चेतना शुरू कर दिए था.. दर्द तो अब्ब भी उसे था..
पारर आज वो दर्द को नहीं मज़े को जान लेना चाहती थी.. नयी दुन्या के नए रंग पा लेना चाहती थी....
अच्छे से लुंड चूस कर मुझे स्माइल देकर शुशी घोड़ी बन्न गई.. मेरा लुंड भी मुझे सीधा होने पर मजबूर कर गया था.. मैं भी अपने लुंड के साथ चलते हुए शुशी की गांड के छेड़ के बराबर आ गया.. शुशी की गांड को छाते बिना मेरा लुंड उसमे घुसना चाहता था.. मुझसे पहले वो शुशी की गांड के मज़े लेना चाहता था.. पर मई उसकी सुने बिना लुंड को साइड करके झुका और शुशी के चुत्तड़ खोल कर शुशी की गांड का मज़ा लेने लगा.......
shushi:-hmmmmmmmmha आआह्ह्ह सीईईई vijjjjjjuuuuuuuuuu hmmmmmmmmmmmm उफ्फ्फफ्फ्फ़
aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh वीजजजजज्जजूउउउउउउउ के मज़ा दे रहे हो अपनी शुशी को
मेरी जेब की नोक शुशी की टाइट गांड के छेड़ पर चलने लगी. शुशी की गांड की स्मेल और टास्ते मेरे अंदर हलचल सी मचने लगे.. मेरी जीब और भी अच्छे से शुशी की गांड के छेड़ पर चलने लगी.. शुशी की गांड टाइट थी, तो मेरी जीब सही से अंदर नहीं जा प् रही थी.. जितनी हो सटका था मई अंदर घुसाए चूसने चाटने लगा...
शुशी झटके पर झटके खा रही थी.. उसके चुत्तड़ बहुत तेज़ी से हिल रहे थे. जो उसकी बेचैनी को बयां कर रहे थे..
शुशी को मज़ा दे और खुद लेकर मैं शुशी की गैस से हट गया.. फिर मेरा लुंड सीधा शुशी की गांड के छेड़ पर जा पोहंचा.......
लुंड का सुपड भी आज झूम झूम रहा था.. उसका बस नहीं चल रहा था वर्ण वो मेरी कोशिश के बिना hi अंदर जा घुसे.......
अच्छे से शुशी की गांड के छेड़ पर लुंड के सुपड को एडजस्ट किया, शुशी की कमर को कस के पकड़ा और फिर एक धक्का पार दिए.....
marrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii
vijjjjjjjjjjjuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuu teriiiiiiiiiiiii shushiiiiiiiiiiiiiiiiiii,
maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa
अभी थोड़ा सा hi लुंड शुशी की गांड में गया था.. शुशी भयंकर चीख पड़ी थी. शुशी की छूट में दो उँगलियाँ घुसा कर मैं अंदर बहार करने लगा.. शुशी के दर्द को कम् करने क लिए मैं स्पीड से अपनी उँगलियों को हरकत दे रहा था..
ये गांड थी छूट से कही बढ़ कर दर्द देती थी खुलते समय.. शुशी झटका खा गई थी.. कुछ देर शुशी की छूट को फिंगर्स से छोड़ता रहा.. फिर दोनों उँगलियाँ निकल कर, फिरसे शुशी की कमर को कस के पकड़ लिया;..
अब्ब शुशी के दर्द को भूल कर hi शुशी की गांड खोल सकता था.. शुशी तड़प रही थी.. मैंने एक और धक्का मार दिए..... शुशी फिरसे तड़प उठी .. बाकी बचे लुंड का मैं क्या करता.. मार दिए एक और कस के धक्का और बचा सारा लुंड शुसि की गांड में,............ शुशी की तो माँ भी चुद गई थी........
गांड का दर्द सहन कर आसान थोड़ी न होता है.. शुशी तड़पने लगी. मैं फिरसे शुआहि की छूट में उँगलियाँ दाल कर अंदर बहार करने लगा.....
इस बार मैं तब तक नहीं रुका जब तक शुशी का दर्द मज़े में नहीं बदल गया...
शुशी:- haaaaaaayeeeeeeeeeeee मेरी गांड भी खोल दी........... uffffffffff बता नहीं सकती मैं मुझे कितना दर्द हुआ था......
पारर अब्ब मैं मज़े में हों...... अब तुम जैसे चाहे मुझे छोड़ सकते हो........
फिर क्या था.. शुशी की छूट की तरह गांड भी मैं पूरी तरह से खोलने लगा... शुशी को कभी दर्द होता तो कभी वो मज़े से सिसकियाँ लेने लगती........ शुशी के तो मज़े hi हो गए थे.. मज़े तो मेरे भी थे.. मुझे तो आज एक सील पैक छूट और गांड मिल गयी थी
शुशी की गांड को पूरी तरह से खोल कर फिरसे शुशी की छूट ठंडी करने में लग गया.. मेरे स्ट्रोक जारी रहे.. शुशी हर कुछ मिनट्स के बाद झड़ने लगती..
जब मेरी बारी तो मई भी शुशी की छूट को अंदर तक अपने लुंड के पानी से भरने लगा..........
फिर पूरी रात भी शुशी पानी छोड़ती रही.. जब मेरा निकलने वाला होता तो मैं शुशी की छूट में अपने वीर्य को भरने लगता..
अगले दिन मेरी नताशा से भी शादी हो गई..... उसे भी पूरी रत भरपूर मज़ा देता रहा. वो भी करवट करवट मचल जाती थी.... उसकी शर्म भी सबने मिलकर ख़तम कर दी थीइइइइइ अब्ब वो बदली हुई नताशा थी..
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आफ्टर 4 मोनथस
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गैंग बहुत ज़बरदस्त बन गई थी... संदीप सिंह निर्वाण और गुरनाम सिंह जैसे जब गैंग में शामिल हों तो गैंग का स्ट्रक्चर कमज़ोर कैसे हो सकता था..
दोनों ने राजा पार्टी के साथ मिलकर गैंग को बहुत ज़यादा पॉवरफुल बना दिए था..
इतना क पोइ भी गैंग हो या कोई बड़े से बड़ा पॉवरफुल पॉलिटिशियन .. गैंग के आगे सब hi कमज़ोर थे... गैंग के सामने टिक पाने की हिम्मत कोई खुद में पा hi नहीं सका था.. स के कारनामे और महक के जो करणमामे सबके सामने आये थे.. सब उसी को अभी तक भूले नहीं थे..
1000+ लोग गैंग में शामिल हो चुके थे.. और अभी भी भर्ती जारी थी.. 250+ लड़ने वाले थे...... बाकि हर एक फील्ड से जुड़े हुए लोग थे...... कई लड़कियां और औरतें भी दर पर्दा गैंग का काम कर रही थी.. कोई उनके बारे में नहीं जानता था....
गुज़रे कुछ महीनो में गैंग के पास पैसा इतना बढ़ गया था, क ख़तम होना पॉसिबल नहीं था...
गैंग ने दिल्ली मौजूद बेहिसाब गुंडों को मार दिए था...... कम और कम की पूरी पूरी सपोर्ट थी.. गुंडों को मार कर पुलिस का नाम रोशन किया जाने लगा.. कही कही स का नाम भी गुंडों को मारने क बाद लिया जाता था.. ऐसा तब होता था..
जब मामला किसी लड़की या औरत की इज़्ज़त से जुड़ा हुआ होता था....... इज़्ज़त के मामले में गैंग बहुत नाम बना चुकी थी.... पिछले 2 महीनो में शायद hi कही कोई ऐसे घटना घाटी हो.. जहाँ किसी लड़की की इज़्ज़त लूट ली गई हो..........
कई गुंडे दिल्ली में घुँडो की कमी को पूरा करने क लिए दिल्ली में आटे थे.. और छुप कर धंदे करने की कोशिश करने लगते थे.... लेकिन हमारा नेटवर्क कमज़ोर नहीं था.... ऐसा लुच्चे और दो कोड़ी के घुँडो को मौका पर hi मार दिए जाता था..
कई बड़े बड़े गुंडे जिनको मारा नहीं जा सकता था.. उन्हें बनाई गई गैंग की एक सीक्रेट जेल में ट्रांसफर कर दिए जाता..
वहां उसका अंजार बंजर ढीला करके उसमे सारे अकाउंट उससे जाने जाते.. फिर उन्ही अकाउंट से पैसा निकल कर अकाउंट खली कर दिए जाते......
गैंग के ऐसा करने से शहर में अफरा तफरी भी फेल जाती थी.. पर फिर जब देखा जाता क गैंग की वजा से क्राइम रेट कितना गिर गया है...... शहर में अम्नो अमन कितना बढ़ गया है.... तो सबब चुप भी कर जाते थे..
गैंग ने एक काम और भी किया था........ वो था दिल्ली में मौजूद कोठो पर रह रही मजबूर लड़कियों को वहां से निकलने का काम........ उसके लिए गैंग कोठे पर मौजूद सभी लोगों को बेहोश करके, एक साथ सबको उठा कर अपने ख़ुफ़िया थकने पर ले गई थी..
वही एक एक लड़की और औरत से पुछा जाता, उससे उसकी मर्ज़ी जानी जाती.. उसे आगे लाइफ में फुल सपोर्ट भी देने का बोल दिए जाता... अगर वो दिल्ली में रह कर कही भी कोई भी काम करना चाहती हाँ.... काम और सिक्योरिटी गैंग उन्हें प्रोवाइड करेगा..
चुद चुद के वो भी सेक्स की आदि हो गई थी... तो आज़ाद रहते हुए वो अपनी मर्ज़ी से किसी से भी चुद सकती थी... कोठे पर तो उनकी मर्ज़ी क बिना hi वो चुदती रहती थी...... लेकिन एक आज़ाद लाइफ की खुशखबरी सबको hi सुना दी गई थी.......'
हर कोठे की मालकिन को लड़कियों के सामने hi मारा पता जाता.. जिसके कारन लड़कियों का डर ख़तम हो जाता था.. और वो खुल कर अपने दिल की बात बोल दिए करती थी....
जिन कोठे वालियों के हाथों कइयों की इज़्ज़त गई थी.. मतलब जो कोठे वालियां रेखा बाई के जैसी थेईईईई.. उन सब को मार दिए गया...
97% लड़कियां कोठे पर रहना नहीं चाहती थीईई.. ऐसी लड़कियों को रहने क लिए एक बड़ी बिल्डिंग दे दी गई थी......
प्रेस कांफ्रेंस बुलाई गई और लड़कियों के बारे में सबब बता दिए गया...... कोठे की साड़ी लड़कियां मीडिया के सामने अपने विचार पेश करने लगी...... ेय सब लाइव टेलीकास्ट भी किया गया था........... फिर तो स गैंग का नाम पुरे देश में hi फैलना शुरू हो गया था........ कोठे की लड़कियों को एक आज़ाद और मन पसंद लाइफ देने पर गैंग को सम्मान भी दिया जाने लगे.. सोशल मीडिया तो कोई छोटी सी बात को ले कर हंगामा मचा देती है......
ये तो फिर भी बहुत बड़ी बात थी...... कई दिन तक ये सबब सोशल मीडिया पर पर दिखाया जाता रहा... आज तक कभी भी किसी ने भी कुछ ऐसा नहीं किया था..
ऐसी लड़कियों को एक नयी लाइफ देने के बारे में कभी किसी ने नहीं सोचा था.. हमारी गैंग ने ये कर दिखाया था.....