Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 32 - SexBaba
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Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)

अपडेट :::: 146

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लास्ट अपडेट ऑफ़ थिस स्टोरी......... PART 2/3


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दन्न विमला की बात पर और भी आंसू बहाने लगा था.. क्या जवाब देता वो विमला को.

कोई भी तो नहीं दे सकता था विमला की बात का जवाब.. नागराज जो कभी खुद को ग़लत नहीं जाना था.. वो हमेशा hi खुद की अकड़ में रहा था.. दन्न के जवान होने से पहले वो बहुत नुकसान भी उठा चूका था.. लेकिन खुद को बदल नहीं पाया था..

दन्न के जवान होते hi वो और पॉवरफुल बन्न गया था.. फिर कभी कोई उसके सामने टिक नहीं पाया था.. मनजोत सिंह परिवार दन्न और नागराज से बढ़कर नहीं था तो कम् भी नहीं था.. बास उस परवर को छोड़ कर वो बाकी सबब पर hi भारी पड़ा था..

पारर वो भी खुद को बचा नहीं पाया था.. वो भी आंसू बहा रहा था.. वो भी पेशेंट बीएड पर एक ढेर की सूरत में पड़ा था..

सुमित्रा को आज एहसास हो रहा था क उसके रंडी पत्र की वजा से वो और उसका पूरा परिवार बदतर हालत का शिकार हो चूका है.. अगर वो लिमिट में रहते हुए चुदती तो ये सब नहीं देखना पड़ता..

रेखा बाई की हालत सबसे अलग थी.. वो जल्द hi खुद के किये गुनाहों को अच्छे से याद कर चुकी थी..... वो अपने आप पर जितना भी अफ़सोस कर पाती कम् था... उसके भी हाथ पेअर काट दिए गए थे, रेखा बाई को दर्द तो था, तकलीफ भी थी.. पर वो खुद क लिए इस सजा को सहन कर गई थी.. ड्रग्स के चलते वो भी चीखी चिल्लाई थी...

मनजोत सिंह से भीड़ कर एक गलती कर बैठी थी.. फिर बदले के चक्करो पर पद कर एक बेटे को गुणवा बैठी.. और अब सब hi वो गुणवा चुकी थी..... वो नहीं जानती थी उसके दूसरे बेटो का क्या हाल हुआ है... उसके दूसरे पोतों, बहुओं और पोतियों का क्या हाल हुआ है...

उन सब पर, दन्न फ्रैंड्स पर, पवन और उसके फ्रेंड्स पर महक का क़हर बरसा था...

महक ने दन्न फ्रेंड्स को एक एक करके चीयर दिया था... पवन और उसके दोस्तों को भी महक ने धीरे धीरे करके अपने हिसाब से, अपने अंदाज़ से चीयर पहाड़ डाला था..

शुरुआत सबके लुंड से की गई थी...... फिर धीर धीरे करके महक ने सब को इस दुन्या से मुक्त कर दिए था..... खतरनाक गैंगस्टर को ज़िंदा रखना रिस्की होता है... कभी भी पैसा पलट सकता है.. तो मैंने महक और जूली ने मुश्तर्का फैसला लेते हुए सबको hi मौत दे दी थी.........

महक के भाई और कजिन को महक ने नहीं मारा था.. उनके लुंड काट दिए थे महक ने.. फिर एक सीक्रेट छोटी सी जेल बना कर उम्र भर के लिए उन्हें कैद कर दिए हाय था............. उन सबब के कसूर कम् थे हमारे मामले में... लेकिन और कइयों के साथ वो सब बुरा कर चुके थे.. कइयों की इज़्ज़त उतर चुके थे.. इसलिए उन्हें ये सजा दी गई थी... वो बड़े गैंगस्टर भी नहीं थे.... उनसे कोई खतरा भी नहीं था........ लेकिन फिर भी चांस नहीं लिया गया... और उनके एक एक हाथ की उँगलियाँ छोड़ कर बाकी सबब काट दी गईइइइइइइइ......

महक की माँ बहन, चाचियां और कौसिन्स को भी टार्चर किया गया था... उन्हें ड्रग्स दे कर क़ैद कर दिए गया था.... वो सबब चुदाई की फैन थी.. चुदाई के बिना रहने वाली नहीं theeeeeeeeeee... उन सबब को सेक्स का अदि बना कर सेक्स की दुन्या से दूर कर दिए गया था..





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आफ्टर 2 मंथ

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पैलेस का माहौल अब्ब बदल चूका था.. शुष्मा दीदी के घर के मर्द भी अब सब जान गए थे.......... शुरू में वो सबब इस माहौल को और हमारे लाइफ स्टाइल को एक्सेप्ट नहीं कर पाए थे... लेकिन एक प्लान पर अमल करते हुए सबको भी खुद में शामिल कर लिया गया था........

शेखर, उसका भाई और पिता को पैलेस में रह रही कोठे वालियां के हवाले क्र दिए गया था.... उन कोठे वालियों को भी तो लुंड लेने की आदत पद चुकी थी.. वो कभी किसी नौकर से चुदती तो कभी किसी गॉर्डस से ... जो बिज़नेस में थी.. और जिओ खुद के लिए बहार कोई बॉयफ्रैंड्स कोई साथी ढूंढ़ना चाहती थी... वो खुद को बचाये हुए थी..

जो राज़ी थी वो सब मिलकर माँ के मौसा, शेखर और उसके भाई को अपने जाल में फंसा कर, छूट की दुन्या का बसी बना चुकी theeeeeeeeeee..........

मुझसे जुड़ा अब्ब कोई भी शर्म वाला नहीं रहा था.. शर्म वाला था कोई तो अजित भाई, हर्ष अंकल और पापा... वो पैलेस में किसी से चुदाई नहीं करते थे.. पर वो भी सबब को खुली छोट दे चुके थे...

अजित भाई को भी अब्ब अच्छे से अपने लुंड की पावर का अंदर हो चूका था.. तो वो भाभी को बोल गए थे.. क वो मुझसे कुछ भी कर सकती हाँ..... अजित भाई बच्चे नहीं थे जो समझ नहीं सकते थे.. सब कुछ hi तो उसके सामने हो रहा था..

जैसा माहौल था सबब उस रंग में रंगते चले गए थे.. अजित भाई को bhi"jab उनक मैं होता" भाभी की छूट मिल काया करती थी... अपनी बेटियों के रंग भी वो देख चुके थे... होने बेटे के रंग भी वो देख चुके थे.. पैलेस में रह रहे सभी एक रंग वो अच्छे से जानते थे.. वो भी किसी से दूर नहीं रह सकते थे...

पैलेस था hi बेशर्मो के रहने लायक............ अगर कोई पैलेस में रहेगा तो वो सबब जान जायेगा.. अगर फिर भी वो पैलेस में रहने का मैं बनाये रखेगा तो इसका एक hi मतलब था ........ क वो कुछ भी देखे या सुने उसे उसपर कोई ऐतराज़ नहीं होगा..

सबकी रज़ामंदी से मेरी शादी शुषा से तय करदी गई थी... उससे अगले दिन नताशा से..... हर्ष अंकल भी मान गए थे.. वो तो खुश थे.. दीक्षा आंटी भी खुश थीई.. शीतल सबके सामने hi बोल गईइइइइइ

"मेरा नंबर कब आएगा" सब शीतल की बात पर हस्सन लगे थे..

शादी तो सबकी एक साथ होने से रही.. पर शीतल शिका और रूपा पहले से hi नंबर लगवा लेने चाहती थी... उनके पेपर्स हो चुके थे .. व आज कल छुट्टियों पर थी.. और छुट्टियां वो चुदाई के रंग देखते हुए बिता देना चाहती थीईईई...

ऐसे hi एक दिन मौका देख कर तीनो ने मुझे धार लिया .. शाम का समय था. .. तीनो ने मुझे अपनी बहन पर भरा और कहते हुए पैलेस की छत पर ले गयी...

छत कर दूर बंद कर दिए गया.. वहां का सब देख कर मई तो शॉकेड hi हो गया था.. वहां पूरा पूरा इंतेज़ाम किया हुआ था तीनो.. नीली नीली लाइट लगी हुई थी. एक जगा.. कालीन बिछा हुआ था.. साइड्स में फूलों की लड़ियाँ लगी हुई थी... छत पर hi तीनो ने मिलकर सेज बनाई हुई थी..

तीनो मुझे घसीट कर वही ले गई. और देर किये बिना सबके पहले मुझे कपड़ों से आज़ाद किया.. फिर सब खुद भी पालक झपकते नंगी हो गई....

फिर तीनो मिलकर मुझसे अपना हक़ वसूल करने लगी.. लुंड लेने से पहले तीनो मिलकर मेरा पूरा पूरा मज़ा लेने लागींण.. शीतल तो किसी बिल्ली की तरह से मेरे लुंड पर टूट पड़ी थी........

हाहाहाहाहा........ लगता है बहुत पियास लगी है.... पूरा नल hi मोहन में लिया.. इतनी जल्दी पानी नहीं निकलने वाला, इतनी जल्दी पियास भी नहीं बजने वाली..

शीतल:- वो तुम छोडो, हम खुद से hi अपनी पियास बुझा लेंगी..... बहुत तड़पाया है तुमने हम तीनो को..

शिखा:- बहुत आग भड़काई है तुमने हमारी छूट में

रूपा:- आज सब वसूल करेंगी हम तीनो मिलकर... आज तो हम तेरा रपे करके hi दुम्म लेंगी....

फिर तीनो मिलकर मेरा रपे करने lagee..bari बरी मेरे लुंड को अपने मोहन में लेकर छोड़ने लगती.. बारी बारी मेरे मोहन पर अपनी छूट रख कर छुटवाने लगती... कभी वो अपने बूब्स मेरे मोहन में देकर ahhhhhhhhhhh पि लो भाई बहुत उबाल रहा है, सालों से अंदर hi अंदर.... आज इसे पि कर नया भर दो.. तब hi हमें सुकून मिलेगा.........

मैं भी बारी बारी सबकी छूट का पीने लगता तो कभी दूध..

फिर पैलेस की छत पर सबसे पहली चीख शीतल की hi गूंजी.........

aaaaaaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

bhaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii आआह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह्हह bhaiiiiiiiiiiiiiiii रुक्खकककककक

मेरा लुंड शीतल की छूट को फाड़ता हुआ अंदर उतर चूका था.. शिखा और रूपा दोनों मिलकर शीतल का दूध पीने लगी..

कुछ देर रुक कर मैंने एक धक्का, फिर एक और धक्का मार कर सारा लुंड hi शीतल की छूट में दाल दिए था.......... बहुत शॉक था मेरा लुंड लेने का...

अब्ब पता चला........ लुंड लेना आसान नहीं होता.... वो भी मेरा लुंड..........

शीतल मेरा लुंड लिए बुरी तरह से तड़प रही थी...... दोनों मिलकर शीतल को सुकून पुहंचने में, शीतल के दर्द को कम् करने में लगी हुई थी.. मैंने दोनों के चुत्तड़ो पर एक एक थप्पड़ कास के मार दिए था.....

oiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaa bhaiiiiiiiiiiiiiiii ीत्नीईई जोरसे...

शीतल दर्द में होने के बावजूद भी हस्स पड़ी थी.... फिर शुरू हुई शीतल की चीखें और सुकुर में डूबी हुई सिसकियाँ....... शीतल भी अपनी बेहेन नताशा की तरह से हो गई थी..... शीतल भी वो रंग देख चुकी थी.. वो उसकी बेहेन ने देख लिए थे.......

शीतल के बाद शिखा फिर बाद में रूपा की चूर भी खोल दी मैंने..... दोनों छूट के खुलने पर, मेरे लुंड के दोनों की टाइट छूट में घुसने पर तड़प तड़प उठी थी..

तीनो को मुझसे वो प्यार मिल चूका था.. जिसके लिए तीनो सालों से मचल रही थी.. तीनसौ सालों से तड़प रही थी... तदपि तो आज भी थी... पर फिर वो सुख भी तीनो पा गई थी... जो उनके दिल की चाह थीईई.. वो भी बाकी सबकी लिस्ट में शामिल हो चुकी थी..





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मेरी शादी शुष्मा से हो चुकी थी.. वो मेरी मौसी और दीदी से पत्नी बन चुकी थी, वो भी अब्ब मुझे खुद का भांजा और भाई नहीं अपना पति अपना स्वामी बुलाती..

जो उनके नसीब में नहीं था.. शुशी वो पा चुकी थी...... 1सत शादी एक बाद वो भला कब ये जानती थी वो एक नामर्द से शादी एक बाद भी एक और उनकी शादी होगी. वो भी उससे जो उसके दिल के करीब हो..

मई खुश था, बहुत ज़यादा खुश था.. शुशी की ख़ुशी का तो कोई ठिकाना hi नहीं था......... आज पैलेस में सबब खुश थे.. पर मेरी शुशी की ख़ुशी से बढ़ की ख़ुशी किसी को नहीं हो सकती थी..... मेरे पास कोई कमी नहीं थी.. सब थे मेरे पास......... सब तो शुशी के पास भी थे..... पारर कोई एक खास नहीं था..

अब्ब से मैं पूरी तरह से शुशी क लिए ख़ास बन चूका था..

मैं दूर में पोहंचा तो शुशी संस्कारी पत्नी की तरह से घूंघट में थी.. सर्र झुका हुआ था.. लेकिन फिर भी उसके चेहरे की चमक मुझे यही से दिख रही थी..

उनकी खूबसूरती के कारन और ख़ुशी के कारन चमक रहा चेहरा मई दूर एक पास से देख रहा था..

मैं चलता हुआ शुशी के पास जा पोहंचा..........

उसके हाथो को थम कर पहले तो उसे बधाई दी.. फिर उसका घूंघट उठा कर कुछ भी कहे बिना उसे गले से लगा लिया..... शुशी अचानक से hi आंसू बहाने लग पड़ी थी.

ख़ुशी सहन कर आसान थोड़ी न होता है..

विजय:- मेरी शुशी से ख़ुशी सहन नहीं हो प् रही.....

शुशी:- हाँ विज्जू नहीं सहन हो पा रही है.. सहन शक्ति कहाँ से लाऊँ itni..main कब जानी थी क पैलेस में आने के बाद से मेरा सब कुछ hi बदल कर रह जाएगा.. शेखर ने कहा था क एक बार मैं पैलेस में चक्कर लगा लोन.. पारर मेरा दिल नहीं मान रहा था. शेखर ने तुम सबब की बहुत तारीफ की थी.. इसी लिए मैं पैलेस आने पर तैयार हुई थी.. मुझे जो मर्दों से नफरत रही है.

मैं जो रंगो के बिना hi जीने लगी थी.. मुझे कहाँ पता था क पैलेस में जाते hi मेरा सबब कुछ बदलने वाला है..

कहाँ मैं ये सबब सोच पाई थी.. कहाँ मई ये सबब डेसेर्वे करती थी.. विज्जू ये सब तुमने किया है.. विज्जू तुमने मुझे उस कुत्ते नामर्द से छीन कर अपनाया है.. कैसे मैं उस कुत्ते से छुटकारा पा कर एक नयी लाइफ जी सकती थी.. कुछ भी तो नहीं कर सकती थी..... कुछ भी तो नहीं चाह सकती थी मैं.....

तुमने मुझे सब कुछ दे दिए है विज्जू.. वो सब कुछ भी जो मैं कभी सोच भी नहीं पाई थीई.. कैसे ये सबब मिल पाने की ख़ुशी सहन कर पाऊँ विज्जउ..

कहाँ से लाऊँ इतनी हिम्मत........... मेरी शुशी बोलते बोलते फूट फूट कर रोने लगी..............

ख़ुशी भी यादों को वापिस ला कर दर्द दे जाती है.. लेकिन वो दर्द भी सुकून दे जाता है कभी कभी....... यहाँ होने वाला दर्द पढ़ा भी दे रहा था... तो अंदर मुनावर भी कर रहा था... शुशी की पीठ को सहलाते हुए उसे प्यार करते हुए शांत कर दिए.........

विजय:- मेरी शुशी अब्ब ठीक है ना .. मेरी शुशी को अब्ब तो कोई हम्म नहीं हां ना.. (शुशी ने ना में सर हिला दिए) तो फिर अब मिलने वाली खुशियों को और भी बढ़ा दिए जाए.. वो सारे दर्द एक hi बार में ख़तम कर दिए जाए..

बोलो मेरी शुशी वो सब दर्द आज ख़तम कर लेना चाहती हो ना.

शुशी:- हाँ विज्जू आज मेरे सरे दर्द ख़तम कार्डो.. आज मुझे साड़ी खुशीयाँ दे दो..

विजय:- दर्द ख़तम करने क लिए भी दर्द सहना पड़ता है.. खुशियां भी तो ऐसे hi नहीं मिल जाती........... शुशी का एक दूध कस के दबाते हुए मैं शरारत से बोलै..............

आआआईईई शुशी की आँखों में चमक बढ़ गई.. शर्म तो मैं उसकी कबकी ख़तम करवा शुका था.. अब तो शुशी भी सत्रपों खिलाडी थी..

शुशी:- तो दो न मुझे दर्द, इसी दर्द के लिए भी तो मैं पल पल तदपि हों..

विजय:- सोच लो.. सहन करना मुश्किल हो जाएगा.. बहुत खून निकलेगा.. छूट फट जाएगी............... शुशी को किश करते हुए

शुशी:- तो होने दो न दर्द.. मेरा दर्द बांटने क लिए तुम हो ना. मेरा दर्द तुम भी तो नहीं देख सकते . मुझे दर्द में देख कर कुछ तो करोगे hi ना तुम.. और छूट तो होती फटने क लिए है...

विजय:- और गांड बारे क्या ख्याल है तुम्हारा..

शुशी:- खुद hi तो कह रहे थे.. जितना दर्द मिलेगा, फिर बाद में उतनी hi खुशियां भी मिलेंगी.......... मुझे भी आज hi सारे दर्द और साड़ी खुशियां दे दो.. गांड का दर्द भी आज देख लूंगी.. जितना हुआ सहन न भी हुआ तो कुछ मिन्ट्स के लिए तड़प लुंगी.. फिर बाद में मज़ा भी तो आएगा नाआआआ...

विजय:- चलो तो फिर आगे की तैयारी शुरू करते हाँ.. अब्ब ये बताओ क मुझसे गिफ्ट क्या चाहिए तुम्हे....... मैं पॉकेट में हाथ डालता हुआ बोलै......

शुशी हस्सन लगी

शुशी:- वैसी गिफ्ट वाली रस्मे तो दुन्या क लिए बानी हाँ, और हम सबब दुन्या से अलग हाँ.. न तो किसी की इतनी शादियां होती है.. न hi किसी की माँ से शादी होती है.. न hi मौसी से होती है.. जहाँ नानी को माँ के सामने छोड़ा जाए वहां रस्मो की क्या ज़रूरत विजजूउउ... फिर भी अगर तुम मुझे कोई गिफ्ट देना hi चाहते हो तो मुझे भी एक hi महीने के प्रेग्नेंट कार्डो.... मैं भी जल्द से जल्द माँ बनना चाहती हों. बहुत साल बिना बच्चो क रह ली........ मेरी फ्रेंड्स के 6-6 बच्चे हो गए हाँ और मेरी सील आज टूटने वाली है........... शुशी हस्ते हुए बोली.. सालों बाद आज उसकी सील टूट रही थी तो वो दुखी नहीं थी. उसका कोई बच्चा नहीं था. हसरत तो थी पर दुःख नै था...

शुशी को भी माँ और पूजा के जैसे एक नेकलेस पहना दिए मैंने

फिर शुशी की ख़ुशी के लिए शुशी को दर्द फिर ख़ुशी देने का प्रोग्राम चालू हुआ... कुछ देर में मैं नंगा होकर शुशी को भी नंगा कर चूका था..

शुशी मुझे मुस्कुराती आँखों से देख रही thiiiiiiiiiiii.. कोई शर्म नहीं थी.

कुछ था तो बास थोड़ा सा डर.. वो भी मेरे प्यार के कारन जल्दी hi जाने वाला था.. मेरा लुंड एक hi बार में उसे बेइंतेहा दर्द दे कर सुकून देने वाला था...

शुशी को जी भर कर किश करने के बाद उसके दोनों दूध पीने लगा मैं..

शुशी:- वीजजूउउ आज इन्हे सारा hi खली कार्डो... आअज मैं पुरे रणन मैं से तुम्हारी हों.. आज मुझे मज़े और सुकून का हर रंग दिखा दो..

शुशी के एक दूध को दबाते हुए मैं शुशी की दूसरे दूध को पीने लगा.. आज शुशी पुरे मैं से मुझे प्यार करने दे रही थी.. आज की शुशी पहले वाली शुशी से अलग थी...... आज की शुशी के सरे रंग अलग थे.... शुशी दोनों हाथो से मेरे सर्र को अपने दूध पर दबा रही थीइइइइइइ.. शुशी जो कभी किसी मर्द के पास भी नहीं फटकती थी..... आज पुरे चरम में सिसकियाँ लेती हुई मुझसे मज़े कर रही थी.......

दोनों दूध फूल गए तो मैं फिरसे शुशी को किश करते हुए शुशी की छूट पर आने लगा.. शुशी ने भी मस्ती में आते हुए खुद से hi अपने दोनों पेअर उठा दिए.. दोनों पेअर खुद से hi खोल दिए.. मैंने शुशी को देखा तो

शुशी:- विज्जउ आज तो मेरा पूरा मैं है.. आज मेरी छूट में घुस जाओ, जितनी जीब अंदर जा सके उतनी घुसा कर चूमो चाटो.. पहले पानी मेरा ऐसे hi निकलना है तुमने.. ाममममममममः बहुत मज़ा आता है विज्जू जब तुम मेरी छूट छत्ते हो.

शुशी बेशरम बन चुकी थी.. शुशी पुरे रंग में आ गई थी.. मैं भी झुका और शुशी की छूट में घुस गया....... शुशी की फिर वो सिसकियाँ वो आहें शुरू हुई क शुशी की खुशी का गवाह रूम का एक एक कोना बनने लगा..

मेरी जीब जितनी घुस सकती थी.. उतनी घुसी शुशी की छूट को चाटने लगी... शुशी की मस्ती बढ़ने lagi..shushi ने अपने दोनों हाथ फिरसे मेरे सर्र पर रख दिए और मेरे सर्र को अपनी छूट पर दबाने लगी.. छूट से बह रहा रस मेरे अंदर उतरने लगा.. मेरा नशा भी बढ़ने लगा.. मेरे अंदर भी कररनेट दौड़ने लगा..... मेरा लुंड सख्त और सख्त होने लगा..

ये खेल तब तक चला जब तक शुशी झटके कहते हुए झाड़ नहीं गई.....

फिर शुरू हुआ शुशी का ब्लोजॉब.. शुशी तो मेरे लुंड को चूमने, चाटने चूमने में माहिर हो hi चुकी थी......... कुछ मिंट शुशी मेरे लुंड को लोल्लिपोप की तरह इस्तेमाल करती रही... फिर साइड में लेट कर

शुशी:- विज्जू अब्ब सहन नहीं होता. अब्ब तो खोल दो मेरी छूट को अपने लुंड से .. पहले hi सालों गुज़र चुके हाँ.. अब्ब्ब देर मैट करो.. मुझे लड़की से औरत बना दो.. मुझे अपने बच्चे की माँ बना दोओओओ.. दे दो मुझे वो दर्द .. जिस दर्द के बाद खुशियां कभी ख़तम नहीं होंगी.. मज़ा कभी ख़तम नहीं होगा... मुझे भी दीदी वाली टीम भी पूरा पूरा शामिल कर दो..

अपनी शुशी की ख़ुशी क लिए मैंने अपने लुंड को पकड़ कर शुशी की छूट पर सेट कर दिए....... शुशी इस बार फिरसे खुद से hi अपने दोनों पेअर उठा कर खोल चुकी तह............ शुशी की गीली वर्जिन पुसी मेरे लुंड के बराबर मौजूद थी.. वो भी मेरे लुंड को ख़ुशी से देख रही थीईई. आज सब hi ख़ुशी मन रहे थे..

मेरा लुंड और शुशी की छूट भी बहुत खुश थे.... दोनों को भी अपनी मंज़िल मिलती दिख रही थी....... दोनों की भी तड़प आज ख़तम होने को thiiiiiiiiii..

मेरा लुंड शुशी की छूट के लिप्स को खोल कर शुशी की छूट के छेड़ पर सेट हो गया........ शुशी की आँखों में देखते हुए मैंने एक धक्का मार दिए.. शुशी की हलकी सी चीख निकल गई.. मेरे लुंड का सुपड शुशी की छूट के छेड़ में फस्स चूका था..

शुशी की आँखों में देखते हुए, शुशी की दोनों टांगों को पकड़ते हुए एक और कस के

ढककर मार दिए. मेरा लुंड शुशी की सील को तोड़ता हुआ 4" अंदर जा घुसाअअअअ

और शुशी की एक बड़ी चीख रूम में गूँज गई..... शुशी को दर्द तो मिलना hi था.. शुशी को कृषि ऐसे hi तो मिलने से रही... मेरी शुशी दर्द से तड़पने लगी.

लेकिन अभी मैं शुशी को और भी दर्द देना चाहता था.. शुशी की ख़ुशी उसके दर्द में थी....... शुशी की टांगों को कस के पकड़ते हुए, शुशी के रोने को नज़र अंदाज़ करते हुए एक पॉवरफुल धक्का और मैंने मार दिए........

aiiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaa marrrrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

इस बार भी शुशी भयानक आवाज़ में चीख padi...mera पूरा लुंड शुशी की छूट में उतर चूका था.. शुशी की सील hi नहीं टूटी थी, शुशी की छूट की साड़ी दीवरें भी पूरी तरह से खुल चुकी theeeeeeeeeee...........

शुशी की सांस अटक गई थी.. शुशी की आँखों से गंगा जमना बहना शुरू हो गया था. शुशी के दर्द को कम् करने क लिए, शुशी के पैरों को छोड़ कर मैं शुशी के ऊपर झुक गया.. और शुशी के दूध दबाने और पीने लगा..

शुशी का दर्द इतनी जल्दी तो जाने से रहा कुछ टाइम तो लग्न hi था.. शुशी आंसू बहती रही और मैं शुशी के दूध से मैं बहलाता रहा.........

कुछ मिनट्स में शुशी शांत हुई.. तो फिर शुशी की ख़ुशी और मज़े का समय शुरू हो गया...

शुशी:- बहुत दर्द दे दिए विज्जू मुझे ...... अब्ब जितना दर्द दिया है.. उससे 1000 गुना बढ़ कर मज़ा भी दो.. सुकून भी दो......

तब फिर शुशी को ख़ुशी और नए रंग देने क लिए मेरे लुंड ने शुशी की छूट में इन् आउट होना शुरू कर दिए.... शुशी धीरे धीरे मज़े से सिसकियाँ लेने लगी..

शुशी उस रंग में आने लगी जिस रंग क लिए वो सालों से तड़प रही थी..

जल्द hi मेरी स्पीड और शुशी की छूट के पानी का बहाओ बढ़ गया.. फिर शुशी पुरे जोश से सिसकियाँ लेने लगी.......... शुशी अपना मज़ा अपना चरम रोक नहीं पाई..

शुशी:- ahhhhhhhhhh ोोोू सीईईईई hmmmmmmmmmm अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह उफ्फफ्फ्फ़ ो यस यस विजजूउउउउ I've गोटें तो वेयर ी वन्स थॉट I'd बे

विज्जू मुझे सबब रंग दिखने लगे हनन.. और स्पीड से छोड़ो विज्जु अपनी शुशी को.. अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह

मेरी स्पीड बढ़ी तो शुशी की छूट सहन नहीं कर पाई और भल भल पानी छोड़ने लगी.. लुंड की मार से शुशी पहली बार झड़ी थी...... खुसी और थकन से शुशी की सांस तेज़ चलने लगी...

एक एक बार और शुशी की छूट का पानी निकला फिर शुशी की गांड का उद्घाटन करने का सोच लिया........ शुशी ने मेरे लुंड पर लगा अपनी छूट प् पानी और खून चेतना शुरू कर दिए था.. दर्द तो अब्ब भी उसे था..

पारर आज वो दर्द को नहीं मज़े को जान लेना चाहती थी.. नयी दुन्या के नए रंग पा लेना चाहती थी....

अच्छे से लुंड चूस कर मुझे स्माइल देकर शुशी घोड़ी बन्न गई.. मेरा लुंड भी मुझे सीधा होने पर मजबूर कर गया था.. मैं भी अपने लुंड के साथ चलते हुए शुशी की गांड के छेड़ के बराबर आ गया.. शुशी की गांड को छाते बिना मेरा लुंड उसमे घुसना चाहता था.. मुझसे पहले वो शुशी की गांड के मज़े लेना चाहता था.. पर मई उसकी सुने बिना लुंड को साइड करके झुका और शुशी के चुत्तड़ खोल कर शुशी की गांड का मज़ा लेने लगा.......

shushi:-hmmmmmmmmha आआह्ह्ह सीईईई vijjjjjjuuuuuuuuuu hmmmmmmmmmmmm उफ्फ्फफ्फ्फ़

aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh वीजजजजज्जजूउउउउउउउ के मज़ा दे रहे हो अपनी शुशी को

मेरी जेब की नोक शुशी की टाइट गांड के छेड़ पर चलने लगी. शुशी की गांड की स्मेल और टास्ते मेरे अंदर हलचल सी मचने लगे.. मेरी जीब और भी अच्छे से शुशी की गांड के छेड़ पर चलने लगी.. शुशी की गांड टाइट थी, तो मेरी जीब सही से अंदर नहीं जा प् रही थी.. जितनी हो सटका था मई अंदर घुसाए चूसने चाटने लगा...

शुशी झटके पर झटके खा रही थी.. उसके चुत्तड़ बहुत तेज़ी से हिल रहे थे. जो उसकी बेचैनी को बयां कर रहे थे..

शुशी को मज़ा दे और खुद लेकर मैं शुशी की गैस से हट गया.. फिर मेरा लुंड सीधा शुशी की गांड के छेड़ पर जा पोहंचा.......

लुंड का सुपड भी आज झूम झूम रहा था.. उसका बस नहीं चल रहा था वर्ण वो मेरी कोशिश के बिना hi अंदर जा घुसे.......

अच्छे से शुशी की गांड के छेड़ पर लुंड के सुपड को एडजस्ट किया, शुशी की कमर को कस के पकड़ा और फिर एक धक्का पार दिए.....

marrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

vijjjjjjjjjjjuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuu teriiiiiiiiiiiii shushiiiiiiiiiiiiiiiiiii,

maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

अभी थोड़ा सा hi लुंड शुशी की गांड में गया था.. शुशी भयंकर चीख पड़ी थी. शुशी की छूट में दो उँगलियाँ घुसा कर मैं अंदर बहार करने लगा.. शुशी के दर्द को कम् करने क लिए मैं स्पीड से अपनी उँगलियों को हरकत दे रहा था..

ये गांड थी छूट से कही बढ़ कर दर्द देती थी खुलते समय.. शुशी झटका खा गई थी.. कुछ देर शुशी की छूट को फिंगर्स से छोड़ता रहा.. फिर दोनों उँगलियाँ निकल कर, फिरसे शुशी की कमर को कस के पकड़ लिया;..

अब्ब शुशी के दर्द को भूल कर hi शुशी की गांड खोल सकता था.. शुशी तड़प रही थी.. मैंने एक और धक्का मार दिए..... शुशी फिरसे तड़प उठी .. बाकी बचे लुंड का मैं क्या करता.. मार दिए एक और कस के धक्का और बचा सारा लुंड शुसि की गांड में,............ शुशी की तो माँ भी चुद गई थी........

गांड का दर्द सहन कर आसान थोड़ी न होता है.. शुशी तड़पने लगी. मैं फिरसे शुआहि की छूट में उँगलियाँ दाल कर अंदर बहार करने लगा.....

इस बार मैं तब तक नहीं रुका जब तक शुशी का दर्द मज़े में नहीं बदल गया...

शुशी:- haaaaaaayeeeeeeeeeeee मेरी गांड भी खोल दी........... uffffffffff बता नहीं सकती मैं मुझे कितना दर्द हुआ था......

पारर अब्ब मैं मज़े में हों...... अब तुम जैसे चाहे मुझे छोड़ सकते हो........

फिर क्या था.. शुशी की छूट की तरह गांड भी मैं पूरी तरह से खोलने लगा... शुशी को कभी दर्द होता तो कभी वो मज़े से सिसकियाँ लेने लगती........ शुशी के तो मज़े hi हो गए थे.. मज़े तो मेरे भी थे.. मुझे तो आज एक सील पैक छूट और गांड मिल गयी थी

शुशी की गांड को पूरी तरह से खोल कर फिरसे शुशी की छूट ठंडी करने में लग गया.. मेरे स्ट्रोक जारी रहे.. शुशी हर कुछ मिनट्स के बाद झड़ने लगती..

जब मेरी बारी तो मई भी शुशी की छूट को अंदर तक अपने लुंड के पानी से भरने लगा..........

फिर पूरी रात भी शुशी पानी छोड़ती रही.. जब मेरा निकलने वाला होता तो मैं शुशी की छूट में अपने वीर्य को भरने लगता..

अगले दिन मेरी नताशा से भी शादी हो गई..... उसे भी पूरी रत भरपूर मज़ा देता रहा. वो भी करवट करवट मचल जाती थी.... उसकी शर्म भी सबने मिलकर ख़तम कर दी थीइइइइइ अब्ब वो बदली हुई नताशा थी..





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आफ्टर 4 मोनथस


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गैंग बहुत ज़बरदस्त बन गई थी... संदीप सिंह निर्वाण और गुरनाम सिंह जैसे जब गैंग में शामिल हों तो गैंग का स्ट्रक्चर कमज़ोर कैसे हो सकता था..

दोनों ने राजा पार्टी के साथ मिलकर गैंग को बहुत ज़यादा पॉवरफुल बना दिए था..

इतना क पोइ भी गैंग हो या कोई बड़े से बड़ा पॉवरफुल पॉलिटिशियन .. गैंग के आगे सब hi कमज़ोर थे... गैंग के सामने टिक पाने की हिम्मत कोई खुद में पा hi नहीं सका था.. स के कारनामे और महक के जो करणमामे सबके सामने आये थे.. सब उसी को अभी तक भूले नहीं थे..

1000+ लोग गैंग में शामिल हो चुके थे.. और अभी भी भर्ती जारी थी.. 250+ लड़ने वाले थे...... बाकि हर एक फील्ड से जुड़े हुए लोग थे...... कई लड़कियां और औरतें भी दर पर्दा गैंग का काम कर रही थी.. कोई उनके बारे में नहीं जानता था....

गुज़रे कुछ महीनो में गैंग के पास पैसा इतना बढ़ गया था, क ख़तम होना पॉसिबल नहीं था...

गैंग ने दिल्ली मौजूद बेहिसाब गुंडों को मार दिए था...... कम और कम की पूरी पूरी सपोर्ट थी.. गुंडों को मार कर पुलिस का नाम रोशन किया जाने लगा.. कही कही स का नाम भी गुंडों को मारने क बाद लिया जाता था.. ऐसा तब होता था..

जब मामला किसी लड़की या औरत की इज़्ज़त से जुड़ा हुआ होता था....... इज़्ज़त के मामले में गैंग बहुत नाम बना चुकी थी.... पिछले 2 महीनो में शायद hi कही कोई ऐसे घटना घाटी हो.. जहाँ किसी लड़की की इज़्ज़त लूट ली गई हो..........

कई गुंडे दिल्ली में घुँडो की कमी को पूरा करने क लिए दिल्ली में आटे थे.. और छुप कर धंदे करने की कोशिश करने लगते थे.... लेकिन हमारा नेटवर्क कमज़ोर नहीं था.... ऐसा लुच्चे और दो कोड़ी के घुँडो को मौका पर hi मार दिए जाता था..

कई बड़े बड़े गुंडे जिनको मारा नहीं जा सकता था.. उन्हें बनाई गई गैंग की एक सीक्रेट जेल में ट्रांसफर कर दिए जाता..

वहां उसका अंजार बंजर ढीला करके उसमे सारे अकाउंट उससे जाने जाते.. फिर उन्ही अकाउंट से पैसा निकल कर अकाउंट खली कर दिए जाते......

गैंग के ऐसा करने से शहर में अफरा तफरी भी फेल जाती थी.. पर फिर जब देखा जाता क गैंग की वजा से क्राइम रेट कितना गिर गया है...... शहर में अम्नो अमन कितना बढ़ गया है.... तो सबब चुप भी कर जाते थे..

गैंग ने एक काम और भी किया था........ वो था दिल्ली में मौजूद कोठो पर रह रही मजबूर लड़कियों को वहां से निकलने का काम........ उसके लिए गैंग कोठे पर मौजूद सभी लोगों को बेहोश करके, एक साथ सबको उठा कर अपने ख़ुफ़िया थकने पर ले गई थी..

वही एक एक लड़की और औरत से पुछा जाता, उससे उसकी मर्ज़ी जानी जाती.. उसे आगे लाइफ में फुल सपोर्ट भी देने का बोल दिए जाता... अगर वो दिल्ली में रह कर कही भी कोई भी काम करना चाहती हाँ.... काम और सिक्योरिटी गैंग उन्हें प्रोवाइड करेगा..

चुद चुद के वो भी सेक्स की आदि हो गई थी... तो आज़ाद रहते हुए वो अपनी मर्ज़ी से किसी से भी चुद सकती थी... कोठे पर तो उनकी मर्ज़ी क बिना hi वो चुदती रहती थी...... लेकिन एक आज़ाद लाइफ की खुशखबरी सबको hi सुना दी गई थी.......'

हर कोठे की मालकिन को लड़कियों के सामने hi मारा पता जाता.. जिसके कारन लड़कियों का डर ख़तम हो जाता था.. और वो खुल कर अपने दिल की बात बोल दिए करती थी....

जिन कोठे वालियों के हाथों कइयों की इज़्ज़त गई थी.. मतलब जो कोठे वालियां रेखा बाई के जैसी थेईईईई.. उन सब को मार दिए गया...

97% लड़कियां कोठे पर रहना नहीं चाहती थीईई.. ऐसी लड़कियों को रहने क लिए एक बड़ी बिल्डिंग दे दी गई थी......

प्रेस कांफ्रेंस बुलाई गई और लड़कियों के बारे में सबब बता दिए गया...... कोठे की साड़ी लड़कियां मीडिया के सामने अपने विचार पेश करने लगी...... ेय सब लाइव टेलीकास्ट भी किया गया था........... फिर तो स गैंग का नाम पुरे देश में hi फैलना शुरू हो गया था........ कोठे की लड़कियों को एक आज़ाद और मन पसंद लाइफ देने पर गैंग को सम्मान भी दिया जाने लगे.. सोशल मीडिया तो कोई छोटी सी बात को ले कर हंगामा मचा देती है......

ये तो फिर भी बहुत बड़ी बात थी...... कई दिन तक ये सबब सोशल मीडिया पर पर दिखाया जाता रहा... आज तक कभी भी किसी ने भी कुछ ऐसा नहीं किया था..

ऐसी लड़कियों को एक नयी लाइफ देने के बारे में कभी किसी ने नहीं सोचा था.. हमारी गैंग ने ये कर दिखाया था.....

 
अपडेट ::: 147

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लास्ट अपडेट ऑफ़ थिस स्टोरी......... PART 3/3


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जेल से भगाये गए क़ैदिओं में से जो बुसिनेस्स्में थे.. उनकी फैमिलीज़ उन्हें पा कर बहुत खुश थीई... वो क़ैदी और उनकी फैमिलीज़ अब हमारे बिज़नेस में बहुत साथ दे रही थी.......

बुसिनेस की बात करें तो ...... एक बात जो अक्सर लोग धयान नहीं देते..

वो मैंने और मुझे जुड़े गैंग के लिए काम कर रहे सबब लोगों ने अपने पल्ले से बांध ली थी.. और उसी बात को सामने रखते हुए हम बिज़नेस कर रहे थे..

दुन्या बनाने वाले ने एक से बढ़ कर एक इंसान को ज़हानत से नवाज़ा है.. जगा जगा टैलेंट बिखरा पड़ा है.... पर उनपर कोई धयान नहीं देता...

अक्सर लोग जॉब न मिल पाने की वजा से किसी और धंदे में पद जाते हाँ..

कई लोग ऐसे भी होते हाँ, जिनके पास साल दो दो साल जॉब ढूंढ़ने का टाइम भी नहीं होता.. उनके घर उन्हें इसकी इजाज़त भी नहीं देते.. कुछ लोग जीनियस तो होते होते, पर वो खुल कर अपनी ज़हानत का मज़ाहिरा भी नहीं कर सकते.. अक्सर ऐसे लोगों की हौसला शिकनी भी की जाती है.. वो कुछ करके दिखने की सोचते भी हाँ तो उनको दबा दिए जाता है..

अक्सर ऐसे भी होते हाँ, जो दूसरे टलेंडेट स्टूडेंट्स को जॉब न मिल पाने की वजा से 2-4 बार तरय करने के बाद जॉब की सोच अपने अंदर से निकल देते हाँ.. फिर पैसा कमाने क लिए किसी और धंदे में पद जाते हाँ........

अक्सर गरीब स्टूरडेंट जिनके पास पैसा नहीं होता जॉब हासिल करने क लिए.. सिफारिश भी नहीं होती.. वो भी खुद को स्टडी कम्पलीट करने क बाद दूसरों धन्दों में मगन कर लेते हाँ..... घर भी तो चलना होता है ना..

ज़हानत अक्सर ग़ुरबत के अंधेरों में छुप कर रह जाती है.. पेट भरने क लिए जीनियस स्टूडेंट्स म्हणत मज़दूरी करने लगते हाँ.. ऐसे नाजुवां जो देश का नाम रोशन करने की एबिलिटी खुद में रखते हाँ.. वो कहीं गुम्म हो जाते हाँ.....

ऐसे hi और भी कई किसम के स्टूडेंट थे.... जिन्हे मेरी गैंग ढूंढ रही थी.. उन्हें जॉब दी जा रही थी.. वो भी भरपूर सपोर्ट के साथ...

मेरी शुशी जूली और महक ने मिलकर कर कई ऐसे जीनियस स्टूडेंट खोज लिए थे.. जो शायद hi इंडिया में किसी कंपनी में हों......... इस सबब के होते हुए बिज़नेस तरक्की न करे ऐसा होना मुमकिन नहीं था..

गैंग और बिज़नेस का काम बहुत ज़बरदस्त चल रहा था ..... 4 दिनों का एक चक्कर मैं मुंबई का भी लगा आया था.... वो भी अपने गैंग के बेस्ट फाइटर के साथ.. गैंग अब्ब फुल्ली HI-TECH बन चुकी थीइइइइइइइ... लेटेस्ट और ज़रूरी किसम की टेंच्लोग्य हमारे पास मौजूद थी......

मुंबई जा कर मैंने अपनी गैंग के साथ रेखा बाई से जुड़े हुए सभी माले काम करने वळून को मार गिराया था........ दन्न के बिना महराष्ट्र कम की कोई वैल्यू नहीं रह गई थी....... दन्न के मेरे कब्ज़े में आने के बाद वो एक महीना hi कम रह सका था..

दन्न के बाद और भी कई बड़े बड़े सूरमा थे महाराष्ट्र में.. दन्न गया तो और कई उठ खड़े हुए..

कम हमारे लिए कोई मुश्किल शिकार सबत नहीं हुआ था.. उसे ख़ामोशी से उठा लिया गया था.. और मार कर उसकी लाश का कीमा बना कर नालियों में बहा दिए गया था..

वो अब कम नहीं रहा था.. उसके ग़ायब हो जाने के बाद सब यही समझे क वो कही खामोश लाइफ जीने क लिए निकल लिया होगा....

कम और रेखा बाई से जुड़े हुए बड़े बड़े काले धंदे करने वाले गैंगस्टर कुछ hi दिनों में मार दिए गए थे... रेखा बाई के बाद लड़कियों को किडनैप करने वाला और कोई नहीं रहा था..... कुछ लड़कियां पहले से वही मिलें. जिन्हे दिल्ली शिफ्ट कर दिए गया था....

बग्गा के बारे में भी साडी इन्फो मुझे और मेरे गैंग को शुरू से hi थी.. मेरा दुश्मन मरे या न मरे.. पर मेरे परिवार का कोई भी दुश्मन मई ज़िंदा नहीं देखना चाहता था... एक जेल को तोड़ कर क़ैदी निकले जा सकते थे... तो बग्गा का मटर सोल्वे करना कौनसा मुश्किल काम था...

बग्गा को भी जेल में hi मार दिए गया था... एक गैंग के होते हुए ये एक छोटा सा काम था...... पल भर में hi इसे भी निपटा दिए गया था...

जिन लड़कियों और औरतों को रेखा बाई वाले कोठे से निकला गया था.. अक्सर उनमे से बिज़नेस में बिजी हो गई थेईईई.. दिल्ली के कोठों से मिलने वाली लड़कियों को भी इनकी मन पसंद लाइफ दे दी गई थी.....

राजा पार्टी भी फुल मज़े में थी.... गैंग के काम को सँभालने के साथ साथ वो अपनी पसंद की लाइफ भी जी रहे थे.....





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एक दिन मई, माँ, पूजा और शुशी गाडी पर शहर का चक्कर लगा रहे थे.. आज नताशा हमारे साथ नहीं थी... उस की बाबियत कुछ सही नहीं थी..

शहर का hi एक इलाका जो क भिखारियों का इलाका था.. मैं सबको लेकर वहां जा पोहंचा.... सब मुझे देख हैरत में पद गयी थीई..

वो मुझसे पूछने लगी.. वो यहाँ किस लिए आये हो.. तो मैंने किसी को नहीं बताया.. बस यही कहा क वही चल कर देख लेना...

जब मेरी गाडी उन भिखारियों के इलाके में पोहंची तो मुझे पहचान लिया गया... हम सब के फेस आरज़ी तौर पर चांस थे.. अब्ब तो मैं फेस चेंज करने में और भी एक्सपर्ट हो गया था.... यहाँ के भिकारी मुझे इस भेस में पहचानते थे....

दो बड़ी आगे के भिकारी भाग कर मेरी तरफ आ गए .. मैं सब को लेकर गाडी से उतर गया.. दोनों आदमियों ने मुझे सलाम किया...... मैं दोनों को कुछ इशारा करके दोनों के साथ हो लिया.. मेरी पत्नियां भी साथ hi थी...

सब हैरान थीईई... पर बोली कुछ नहीं ... कुछ देर में हम एक जगा पोहंचे..

वहां का सब देख कर तीनो शॉकेड हो गयी..

माँ:- विजजूउ ये सबब क्या है.... तूने तो मुझे बताया hi नहीं था...

पूजा:- मुझे भी हवा तक नहीं लगने दी......

शुशी:- और मुझे कौनसा इसने बताया था... सब सामने देख कर हैरान थी शॉकेड थी...

सामने 7 रेहड़ियां कड़ी थी.. सब रेहड़ियों पर रेखा बाई, दन्न, नागराज, सुमित्रा, विमला, दन्न के दोनों भाई थे......... आधे अधूरे अब्ब वो किसी काम के नहीं थे...

भिखारियों के बहुत सही से काम आ रहे थे.. सब अलग अलग जागों पर एक एक रेहड़ी ले जाते थे, और भीक मांगते थे......

दन्न और उसके परिवार वाले भिखारियों के बहुत काम आ रहे थे... 7 धड़ भिखारियों को अच्छी कमाई करवा देते थे... दन्न के लिए मैंने ये सजा मुंतखिब की थी............ बहुत कुछ पहले भी किया जा चूका था..........

लेकिन दन्न और उसके परिवार को उनकी औकात दिखानी थी..... जिस पैसे के लिए वो एक घटिया तरीन लाइफ जी रहे थे.. पैसा और पावर के चलते अनगिनत लोगों को बर्बाद कर चुके थे....... अब्ब बाकि रहती साँसों तक सब भीक मांगने का जरिया बन्न कर रह गए थे... जिस पैसे के लिए वो सबब किया करते थे.. अब्ब वो पैसा तो इन सबब के किसी काम नहीं आने वाला था.. वो तो मेरी गैंग ने अपने कब्ज़े मेर कर लिया था........

उल्टा अब्ब जप पैसे भी भीक के मिलते थे.. वो भी इनके किसी काम नहीं आने वाले थे... खुद से खाने के काबिल भी नहीं रहे थे.. टट्टी पेशाब के लिए भी सबब किसी के मोहताज हो कर रह गए थे......

सब के फेस प्लास्टिक सर्जरी के ज़रिये थोड़े से चेंज कर दिए गए थे.. सबकी ज़ुबान का ऑपरेशन करके उन्हें बोलने के झंझट से भी बचा लिया था... वर्ण खुद की मौत मांगते फिरते... अब तो सब खुद क लिए मौत भी नहीं मांग सकते थे..

इस समय मेरे पास मेरी पत्नियों के शिव कोई नहीं था.............. सब वहां से चले गए the.....dnn समेत सबब हमे hi देख रहे थे.... घुसा किसी की आँखों में भी नहीं था..... आंसू थे सबकी आँखों में....... सबकी ऑंखें हमसे बातें कर रही थेईईई..

विजय:- माँ क्या आप कुछ बात करना चाहेगी इनमे से किसी से......

माँ;- क्या बात करों मैं विज्जू इनसे... माँ ने अपने पेट पर हाथ फेरते हुए कहा.. माँ का पेट बहुत बहार निकला हुआ था...... माँ नेक्स्ट मंथ मेरे बच्चे को जनम देने वाली थी....

पूजा;- विज्जू ये बोल क्यों नहीं रहे....

शुशी:- मुझे तो लगता है. विज्जू ने ज़रूर इनकी बोलती बंद कर दी होगी... वर्ण अब्ब तक चिल्ला न रहे होते..

विजय:- सही कहा आप ने शुशी... सब की ज़ुबान को ऑपरेशन के ज़रिये बिगड़ दिया गया है...... अब ये बोल नहीं सकते..

माँ चलती हुई दन्न के पास गई..

माँ:- कैसा लग रहा है दन्न.. यकीनन बहुत मज़े में होंगे तुम.. अब्ब तू तुम्हे टार्चर भी नहीं किया जा रहा... अब्ब तो तुम सबब को बैठे बिठाये खाने को मिल रहा है.... सब साफ़ सफाई फ्री में hi तुम सब की हो रही hai.......hahahahahaha

कैसे मज़े की लाइफ दी नहीं मेरे विज्जू ने तुम सबब को. पूरी लाइफ hi तो तुम सबब ऐश करते रहे हो..... अब्ब भी तुम सबब के ऐश hi ऐश हाँ....... दन्न बोलती आँखों से माँ से बात करने लगा..

माँ;- विज्जू ये तो मौत की भीक मांग रहा है मुझसे.. मुझे ऐसा लग रहा है.. इसकी ऑंखें बहुत कुछ बयां कर रहे हाँ.......

विजय:- हाँ श्वेता अब्ब तो ये मौत की भीक मांगेगा hi.... अब्ब रह hi क्या गया है इसकी ज़िन्दगी में....

पूजा:- दन्न बड़ी जल्दी हिम्मत हार गए हो तुममम..... तुम मर नहीं सकते.. देख नहीं रहे तुम्हारी वजा से कितनो का चूल्हा जल रहा है.. अच्छी कमाई हो रही है सबकी तुम्हारी वजा से....

शुशी ने अपने पास से कुछ पैसे निकले और थोड़े थोड़े करके सबके सीने पर रखने लगी....... दन्न के जैसी हालत नागराज और बाकी सबकी thiiiiiiiiii..

सब रो रहे थे.. सबब कुछ बोलने की कोशिश में थे.. सब के मोहन से थूककक बह बह कर उनकी गर्दन पर गिर रहा था... बेचारे बोल भी नहीं सकते थे...

रेखा बाई सबसे शांत थी.. वो बास हम सबब को देख रही थी.. उसकी आँखों में दर्द था.. वो अपनी इस सजा को भी सहन कर रही थी.. उसकी आँखों में पछतावे के आंसू थे.. रेखा बाई अंदर से बदल गई थीईईई.. पारर कोई और नहीं बदला था..

ऐसे hi आधा घंटा वहां और बिताया सबने फिर मैं सबको लेकर और दन्न को bye बोल कर निकल गया..........

मेरा इनमे से किसी को भी ऐसी सजा देने का मैं नहीं था...... पर जैसी लाइफ ये सब जी रहे थे..... वो बहुत गलत थी.. इतनी लाइफ बर्बाद कर चुके थे सबके सब क हिसाब hi नहीं था...... माँ को कोठे की लाइफ जीने पर मजबूर कर दिए गया था............. अगर इतना hi ग़ुस्सा था दन्न और सबको तो जान से मार देते पारर इज़्ज़त को मेला न करते...... मनजोत सिंह के सरे परिवार को मार देते पर इज़्ज़त न उतारते..........

सालों को कौन बताये क इज़्ज़त जान से बढ़कर होती है...... यही तो एक चीज़ होती है एक औरत के पास ज़िंदा रहने क लिए...... अगर ये hi न रहे तो ज़िंदा रहना किश काम का........... माँ की कोख में मई आ गया था.. वर्ण तो माँ मर्डर चुकी hotiiiiiiiiiii...............

यही सब सोचते हुए मैंने दन्न समेत सब को ये सजा सुनाई थी..... वर्ण सबको मार देता या दूसरों की तरह से हमेशा क लिए क़ैद कर लेता.......





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पैलेस के hi एक बहुत बड़े रूम में वो सब लकड़ियां और औरतें थी.. जो मुझसे चुद चुकी theeeeeeeeee.. अगर कोई और थी तो वो थी एक कृति और दूसरी अपर्णा.

कृति की आगे अभी छोड़ने वाली नहीं थी.... पर वो पूरी माल बन चुकी थी... कोठे पर रहते हुए वो सब जान गई थी.. लेस्बियन वो रेगुलर hi कर रही थी.. पारर उसकी छूट खुलने का अभी समय नहीं था.... वो भी आज सबब में मौजूद थी......

आज यहाँ पर एक स्पेशल शो चलने वाला था..

रूम में सबकी सब नंगी थी, मैं भी नंगा था...... मई सबको देखने लगा.. और काउंट करने लगा....... मेला लगा हुआ था.. पुरे रूम में... क्या मस्त नज़ारा था..

uffffffffffffffffffffffffffffffff सबकी सब नागि थी. सबकी सब मस्त थी.. दोनों नानियाँ भी आज क़यामत लग रही थीइइइइइ... कोठे पर रहते सब hi तो एक्सपर्ट थी.. दोनों नानियों का पिछले कई महीनो से मस्सगे चल रहा था.. मेकअप चल रहा था. दोनों मुझसे रेगुलर चुद रही थी. तो खुद को जवान बनाने में लग गई थी..

नानी 1 .. नानी 2 .. माँ .. पूजा .. शुशी .. प्रिय .. जहान्वी .. षुरूति .. रानी ..

नताशा .. शीतल .. शिखा .. रूपा .. भाभी .. सोना .. कृति .. मालिकान ..

पद्मा .. लाली .. अपर्णा .. जूली .. महक ..

हाय मेरी kisssssssmatttttttttttttttttttttttttttt...... ummmmmmmmmmmmm मैं जीब होंटो पर फेरने लगा.. मेरा लुंड तो बहुत देर से खड़ा था... मई भी खड़ा था.. और पास में hi एक मैट्रेस्स फोम फर्श पारर बिछा हुआ था... जिसपर अपर्णा लेती हुई थी...

अपर्णा के दोनों पेअर उठे हुए थे.. दोनों पैरों को अपर्णा ने अपने हहतों से पकड़ा हुआ था.. अपर्णा अपनी छूट सब को दिखा रही थीइइइइइइ.. एक अपर्णा hi रह गई थी जिसकी सील अभी नहीं टूटी थी.. कृति की अभी देर थी.. बाकी सबब की सबब मेरे लुंड से चुद चुकी थी...

आज अपर्णा की बारी थी...... ये पैलेस बेशर्मो का पैलेस था.. अपर्णा को यहाँ इतना मज़ा आ रहा था क उसने घर जाने से अपने घर वळून से कांटेक्ट करने से मन कर दिए था.... वो सब को छोड़ कर नहीं जाना चाहती थी.. सबसे दूर नहीं रह सकती थी वो.. जैसी लाइफ उसे मिल चुकी थी.. वो बुरी थी.. पारर वो उसकी आदि भी हो गई थी.. और फिर इस पैलेस की लाइफ वो बहुत एन्जॉय कर रही थिई.. वो अब ऐसी hi लाइफ जीना चाहती थी....... घरवळून से मिलान फ्यूचर में देखा जायेगा..

अपर्णा अकेले चूड़े या सबके सामने.. बार बार तो उसे सबके सामने मुझसे छोड़ना hi था.. तो उसने खुद से hi कह दिए था. क वो सबके सामने चुद के अपनी बची खुची शर्म को भी ख़तम कर देना चाहती है..

नानी 2 :- तो सबब से पहले कौन शो शरू करेगा..

नानी;- कौन शुरू करेगा मतलब..... शो की शरुआत महारानी से की जायेगी.... चलो महारानी जी शो शुरू करो....... महारानी थी मेरी माँ, मेरी पत्नी, मेरी श्वेता डार्लिंग

माँ नंगी फूले पेट के साथ मौजूद थी.. पेट सिर्फ माँ का hi नहीं फूला हुआ था..

लाली और पद्मा आंटी का भी पेट फूला हुआ था.. बी चांस पद्मा भी प्रेग्नेंट हो गई थी तो उसने बचा जनम देने का फैसला कर लिए था.. उसे प्रेग्नेंट हुए 5 महीने हो चुके थे .. इतना hi टाइम लाली को भी हो चूका था..

नताशा पूजा और शुशी भी प्रेग्नेंट हो चुकी थी.. पूजा 4 महीने से, नताशा 3 महीने से, शुशी भी 3रद मंथ प्रेग्नेंट थी........

मतलब मेरे इस साल 6 बच्चे आने वाले थे....... जूली ने गैंग और बिज़नेस की वजा से लेट का कह दिए था.. महक और जूली से भी मैं जल्द hi शादी करने वाला था.. बात सब में फाइनल हो चुकी थी..... बास बिज़नेस और गैंग की वजा से पहले बहुत मसरूफियत रही थी......

नानी की बात सुनकर माँ आगे बढ़ी और नीचे झुक कर मेर आँखों में देखते हुए मेरे लुंड को थाम कर मसलने लगी.. कुछ सेकंड में hi माँ ने मेरे लुंड को अपने मोहन में लिया और चूसने लगी... माँ ने 1 मिंट टककक मेरे लुंड को चूसा, फिर अपने मोहन से मेरे लुंड को निकल कर अपर्णा के पास पोहंची, झुकी और अपर्णा की छूट को चाटने लगी..... ये सब का एक मनोरंझण के लिए तरतीब दिया गया पालन था..

सब कुछ हट के करने का सोच रही थी.. तो फिर सब hi इसपर एग्री भी हो गई थी....... माँ के बाद मेरी बहनो का नंबर आया, फिर पूजा का नंबर आया.. पूजा भी माँ की तरह से आई और मेरे लुंड को चूम चाट और चूस कर अपर्णा की तरफ बढ़ गई.. फिर शुशी, फिर नताशा... फिर एक के बाद एक आती गई, एक मिंट तक मेरे लुंड को चूसती और फिर आगे बढ़ कर अपर्णा की छूट चाटने लगती.....

इतना मस्त माहौल था.. सब एक दूसरे से बढ़ कर मेरा लुंड चूस रही थी.. कैसे कण्ट्रोल करता मैं खुद पर.. अपर्णा का भी बुरा हाल था.. हम दोनों की hi सिसकियाँ रूम में गूंजने लगी..

जब सब ने बारी बारी मेरा लुंड चूस लिया तो माँ, मेरी पत्नियां और बहने सबब मुझे आगे बढ़ने लगी.. महक भी ऐसा मज़ा कब ले पाई थी.. वो तो सबसे बढ़ कर बेशरम थी.. वो भी मेरे लुंड को चूस चुकी थी.. अब्ब मेरे लुंड को पकड़ कर मरोर्डी हुई स्माइल देती हुई मुझे खेंच कर अपर्णा की तरफ मुझे धकेलने वळून की लिस्ट में शामिल थी.....

मुझे अपर्णा के पास पोहंचा दिए गया.. अपर्णा भी आँखों में चमक लिए मुझे देख रही थी.. आज उसके दिल की आरज़ू भी पूरी हो रही थी... आज वो भी पूरी तरह से मेरी टीम में शामिल होने जा रही थी... कृति अपर्णा को कॉंग्रट्स करने लगी.. मेरा लुंड आज कृति ने भी चूसा था.. साली कृति अनिल का लुंड चूस चूस कर एक्सपर्ट हो चुकी थी........

मैं झुका अपने लुंड को पकड़ कर अपर्णा की छूट पर सेट किया........ अपर्णा के चेहरे पर घबराहट नहीं थी.. इतनी सबब वहां मौजूद थी, सब की सब नंगी थी.. मतलब सब मुझसे चुद चुकी थी.. जब सब मेरा लुंड ले चुकी थी.. तो दर्द तो सब को भी हुआ hi था.. यहॉ सोच कर अपर्णा कुछ नार्मल भी थी.. सब मिलकर अपर्णा के दर्द को बाँट भी लेती...

महक:- चलो अब्ब धक्का मारो विजजूउउउ पैलेस की इस साल की आखरी सील भी तोड़ दो. अब जल्दी तुम्हे फिरसे कोई सील तोड़ने को नहीं मिलने वाली..

प्रिय:- हाँ विज्जु महक ने सही कहा.. अब्ब जल्दी तुम्हे कोई नयी सील नहीं मिलने वाली.....

फिर सब hi कुछ न कुछ कहने लगी.. अपर्णा सबको देख कर मुस्कान देने लगी.. सबकी बातों से अपर्णा को बहुत हौसला भी मिल रहा था..

फिर मैंने अपने लुंड को अपर्णा की छूट के लिप्स में छुपे छेड़ पर दबा दिए.. सबको एक नज़र देख कर अपर्णा को देखा और फिर एक करारा शॉट मार दिए....

सबकी तरह अपर्णा भी गाला फॉर कर चीखने लगी... उसकी नन्ही सी छूट मेरे मोठे लुंड के आगे कुछ भी नहीं थी..... उसकी छूट टाइट थी, मेरा लुंड उसकी छूट में फस्स गया था... पर अब यहाँ टुकङे का कोई मतलब नहीं था, अपर्णा के दर्द को कम् करने क लिए यहाँ एक फ़ौज मौजूद थी...

एक धक्का, फिर दूसरा धक्का, फिर तीसरा धक्का और मेरा सारा लुंड अपर्णा की छूट में उतरता चला गया.......... अपर्णा की चीखों को किसी ने भी नहीं रुका.. कृति और रानी शीतल मिलकर अपर्णा का दूध पीने लगी........

अपर्णा की ऑंखें गंगा जमुना बन चुकी थेईईई.. और सबब उसे बधाई दे रही थी.. अपर्णा रोटी हुई सब को देखने लगी...

अपर्णा की टांगों को पकडे मैं कुछ रेस्ट करने लगा....

आज कम साब पैलेस में आये थे....... छुपते छुपाते.. सबसे वो मिले थे...

माँ से भी वो मिले थे.. वो भी जान गए थे क माँ मेरी पत्नी भी हाँ... कम साब हमारे फॅमिली मेंबर चुके थे.....

कम साब ने एक बात कही थी.. जिसे सुनकर सब तो एक बार शॉकेड हो गए थे....

अब मैं अपर्णा की छूट में सारा लुंड घुसा कर रेस्ट ले रहा था तो माँ मुझसे बोली.

माँ;- विज्जू बीटा मुझे बौह्त ख़ुशी है क तुम अब्ब देश सेवा में लग जाओगे.. देश और समाज की सेवा तो तुम पहले से hi कर रहे हो.. पर इस बार की सेवा असली सेवा है विज्जउ बीटा.. मैं इस टाइम तुम्हारी पत्नी और माँ दोनों hi हों... अगर एक माँ के हिसाब से बोलों तो अपने बेटे को खुद को दूर कभी भी न जाने डॉन.. एक पत्नी भी कुछ ऐसा hi सोचती है...

पारर एक माँ के दर्द और तड़प एक आगे एक पत्नी की तड़प की ज़यादा अहमियत नहीं है मेरे विज्जू बेटे... जैसी लाइफ मैं जी चुकी हों, जितने ज़ख़्म, जितने दर्द मुझे मिल चुके हाँ.. एक तुम hi हो जिसके कारन मेरे सरे ज़ख़्म, मेरे सरे दर्द ख़तम हो गए हाँ.. इसी हिसाब से तुम हमेशा hi मेरे नज़रों के सामने रहो... यही मेरा दिल चाहता है.....

विज्जू बीटा देश सेवा के चलते अगर तुम शईद भी हो जाओ तो मुझे दर्द तो होगा पर कोई ग़म नहीं... इतनी खुशियां तुमने मुझे दे दी हाँ. भूक और भी बढ़ गई है.. पारर बात देश की है.. मेरी hi तरह से और भी कई मैं रोटी बिलक्ति जिदनागि गुज़र रही हाँ.. उनके दर्द को भी तो कम् करना होगा ना मेरे बेटे....

फिर अब तो एक और विज्जू भी मेरे पेट में आ गया है.. इस बार का विज्जू तो और भी स्पेशल है मेरे लिए.. और भी तो 5 पेट से हाँ.. भगवन ने चाहा तो सब के पेट से hi एक एक विज्जू निकलेगा........ हम सबब मिलकर खुद को संभल लेंगी.. तुम देश के लिए कुछ भी कर गुज़रो और हमारी चिंता छोड़ दो....

शुशी;- हाँ विज्जू मेरा भी वही फैसला है जो दीदी का है... के पत्नी की भावनाएं एक पत्नी की खुशियां देश से बढ़ कर नहीं हो सकती..

पूजा;- मुझे दिल में भी विज्जउ तुम hi तुम हो.. मेरा भी यही फैसला है..... शीतल और रानी अपर्णा के दर्द को कम् कर रही थी... और सब बातों में लग गए थे.

नताशा ने भी कुछ ऐसा hi बोलै था... मेरी प्रिय, जहान्वी श्रुति वो भी चुप न रही...

तीनो:- विज्जउ अभी हमारी शादी तुमसे नहीं हुई है. तुम तीनो अभी तुम्हारे बच्चे भी नहीं जनम देने वाली.. इतनी खुशियों को पाए बिना हम नहीं रह सकती.. सालों दर्द सही हाँ, सालों तक तेरी आस की है विजू हमने .. पारर जैसे माँ और बाकी सब कह रही हाँ, हमारा भी फैसला वही है.... तुम देश के लिए वो सबब करो जो देश की मिटटी तुमसे डिमांड करती है... जितनी खुशियां हमे तुमसे मिल चुकी है.. अगर भगवन न करे, तुम्हे कुछ हो जाए तो हम गुज़रे ख़ुशी के पलों को याद कर लिया करेंगी.. पारर देश की बात सबब से पहले हाँ विजऊ.. पहले देश फिर हम सब.

फिर सब hi कुछ न कुछ बोलने लगी.... मैं जूली और महक सब को देख रहे थे. सबकी बातें सुन रहे थे... हम तीनो की आँखों में आंसू आ गए थे..

कौन कह सकता था, क ये चुदाई का माहौल था.. कौन कह सकता था क ये बेशर्मो का पैलेस था... चुदाई का सिसलिया भी आम था पैलेस में .. पर प्यार असल चीज़ थी......

यहाँ किसी किसम की कोई सेक्स आग नहीं थी.. यहाँ सिर्फ और सिर्फ प्यार बोल रहा था..

कम साब ने मुझे देश में चल रही कुछ गड़बड़ के बारे में बताया था.. वो मटर बहुत hi डेंजरस और रिस्की था... देश की इरादे भी कुछ नहीं कर प् रहे थे.. कुछ अपने hi ज़यादा गड़बड़ कर रहे थे .. रॉ हो या कोई और एजेंसी .. सब एजेंसीज में ग़द्दार छुपे हुए थे.. तो कम साब ने मुझे ये काम करने को बोल दिए था.. मुझे ये मिशन ख़ुफ़िया तौर पर सर अंजाम देना था... बस 2-3 बड़ी पर्सनालिटीज hi इस बारे में जानती थी...

जैसी मेरी परफॉरमेंस जा रही thi..usi के चलते कम साब ने मुझपर भरोसा कर लिया था.. कम साब को लग रहा था क मेरे और महक के शिव वो काम कोई और नहीं कर सकता..

बात देश की थी........ जिसके बिना हम कुछ भी नहीं थे.. मेरे लिए खतरा hi खतरा था....... किसी भी समय जान जा सकती थी... इसी के चलते सब टेंशन में भी थे.....

पर सबने टाइम तो लिया था.. पारर फिर कम को ok भी बोल दिए था..

मेरी माँ को मेरी सबसे ज़यादा ज़रूरत थी.... वही मुझे आगे बढ़ने को बोल रही थी... तो फिर मैं पीछे कैसे रह सकता था.. मेरा दिल hi क्या

मेरा तो एक एक अंग देश के लिए मिट जाना चाहता था.........

अपर्णा का दर्द ख़तम हुआ तो.... रानी और शीतल साइड हट गयी.. मई भी अब्ब पुरे मूड में था..

अपर्णा के दोनों पैरों को उठा कर अपने कंधे पर रखा.. अपर्णा पर मैं पूरा hi झुक गया.. अपने लुंड को सुपड तक बहार निकला.......

एक बार फिरसे सब को देखा, अपर्णा को भी देखा..

विजय:- अपर्णा फिरसे दर्द होगा.. तुम सहन करलो गई ना..

अपर्णा:- नहीं करुँगी तो मज़ा फिर कैसे लुंगी.. विज्जू भाई आप अपनी पूरी परफॉरमेंस देते हुए मुझे छोड़ें.. जितना दर्द होगा. मज़ा भी तो उतना hi आएगा न

फिर क्या था..... मैंने अपनी पूरी ताक़त लगा कर एक ज़ोर का धक्का दे मारा.. और फिरसे सारा लुंड अपर्णा की छूट में उतर गया............

आगे तो अब सबब भी जानते होंगे अपर्णा का क्या हाल हुआ होगा........


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...............................................................THE..END...............................................................

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::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::तो बे कॉन्टिनोएड:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::

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डरेस्ट रीडर्स:

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ये स्टोरी विज्जू की हिम्मत को ले के लिखी गई थी.. विजजू का अपनी माँ और बहनो के लिए खुद को स्टोरंग बना, और फिर सबको उस कोठे की दलदल से निकल कर एक आज़ाद अरु खुशियों भरी ज़िन्दगी dena...isi बीच विज्जू को मालूम पड़ा के उसकी माँ के सेहत असल में हुआ क्या था.. दन्न परिवार और अपनी माँ के परिवार से बदला लेना था..

जो के विज्जू ले चूका है.. स्टोरी का जो मक़सद था वो पूरा हुआ... एक इंसान की लाइफ अंतिम साँसों तक नए नए रंग लिए हुए होती है.. विज्जू की लाइफ में आगे चल के बहुत कुछ हुआ. वो सब भी आपको बताया जायेगा.. पर वो एक अलग टॉपिक होगा.

स्टोरी का अलग नाम होगा.. स्टोरी में बहुत कुछ चेंज भी होगा.. चरक्टेर्स को भी छांटा जायेगा..... विज्जू की नई लाइफ अडवेंचरउस से भरपूर एक लाइफ होगी.. जिसमे वो देश के लिए मिशन सर अंजाम देगा.. पैलेस की लाइफ बहुत कम् मिलेगी विज्जू को जीने क लिए.. नेक्स्ट part में ज़यादा टर्र काम विज्जू महक, जूली और गैंग का काम होगा.... विज्जू और महक के.. विज्जू और जूली के नए नए रंग देखने को मिलेंगे.. रमने भी होगा, सेक्स भी होगा.. थ्रिल एक्शन तो फिर लाज़मी चीज़ है..



इसी हिसाब से मैं इस स्टोरी के PART 1 को एन्ड कर रहा हों.. उम्मीद है आप सबको ये स्टोरी और इस स्टोरी का एन्ड बहुत पसंद आया होगा..................

स्टोरी में मनजोत सिंह परिवार की डिटेल नहीं बताई गई.. उनका अंजाम क्या हुआ, दन्न के बाद.. विज्जू की ममियों और बहनो का क्या हुआ वो सबब नेक्स्ट part में बताया जायेगा.......

थैंक यू सो मच तो आल माय लवली रीडर्स.... जिस क़दर मेरी स्टोरी को और मुझे सराहा गया.. मुझे भरपूर सपोर्ट और प्यार मिला.. मैं इतना खुश हों, क लफ़्ज़ों में बयां कर पाना मुमकिन नहीं है......





अगेन थैंक यू सो MUCH..............AND.................GOOD..BYE...............................





 
शुक्रिया अलोक भाई...!!

ये सब आप सब के प्यार की वजा से मुमकिन हो पाया है, वर्ण ये सब इतना भी आसान नहीं था.. आप सब की पूरी पूरी सपोर्ट, पूरा पूरा प्यार मिला है मुझे, सेरों खून बढ़ गया था मुझमे.......... स्टोरी फिर स्पीड से चली, ज़बरदस्त चली.. मुझे लिखने में मज़ा आया तो अब सब को पचने में...

सेकंड part भी इसका लिखा जायेगा.. पारर अभी नहीं भाई.. अभी आप सब के लिए मेरे पास कुछ और ख़ास है,. पहले वो आप सब के सामने पेश करूँगा.. फिर हिम्मतवाला का नेक्स्ट part लिखना शुरू करूँगा....... अगेन थैंक्स भाई
 
थैंक यू सो मच भाई..!!

स्टोरी मैंने ज़बरदस्त लिखी है भाई तो ये सब आपके सब क प्यार और भरपूर सपोर्ट से hi हो पाया है. नेक्स्ट part से पहले आप सब क लिए कुछ और भी स्पेशल है मेरे पास, पहले वो आप के सामने लाया जायेगा, फिर इसके नेक्स्ट part को लिखा जायेगा..

जो स्टोरीज रनिंग में हाँ, वो जारी रहेंगी.. जो पेंडिंग में हाँ, वो अभी पेंडिंग hi रहेंगी भाई.. मैंने कहा कुछ खास है आप सब क लिए तो खास के बाद पेंडिंग स्टोरीज पर धयान दिया जायेगा........

थैंक्स फॉर थे कमैंट्स
 
थैंक्स भाई........ i'm सो हैप्पी...... मेरे रीडर्स हैप्पी हाँ तो मैं भी आज बहुत खुश हों.. आप सबब के लिए एक अच्छी स्टोरी को लिख पाया, स्टोरी को अंत तक ले कर जा सका.

आप सब ने मुझे बहुत हिम्मत और प्यार दिए है भाई.. तभी ये मुमकिन हो पाया hai..aur बहुत बहुत शुक्रिया भाई मेरी स्टोरी को और स्टोरी के एन्ड को बेहद सरहाने क लिए..

थैंक्स फॉर थे बेस्ट कमेंट भाई...... एंड थैंक्स पूरी स्टोरी तक मेरा साथ देते रहने की
 
थैंक्स भाई....!!

आपको भी प्रणाम भाई.. आप सब ने भी तो मुझे अच्छी सोतीर लिखने में बहुत मदद दी है .. आपने भी तो मेरा साथ नहीं छोड़ा.. आप सब का साथ पा कर मुझमे हिम्मत बढ़ी.. तो वही हिम्मत मैंने विज्जू को भी दे दी.. मैं और विज्जू सोत्री और आपके साथ चलते रहे... थैंक्स स्टोरी के करैक्टर और रंगों को सराहने क लिए भाई.. मैं बी आपके जैसा hi एक रीडर था.. आप सब के प्यार और सुप्परत ने मुझे अच्छा लिखना सीखा दिए.. वर्ण ये सब इतना आसान भी नहीं था..

थैंक्स नेक्ट part का इंतज़ार करने क लिए.. जल्द hi उसके बारे में भी सोचा जायेगा...

थैंक्स फॉर थे कमैंट्स
 
बहुत बहुत शुक्रिया ताबिश भाई.. ये सब आपके प्यार और सपोर्ट की बदौलत hi मुमकिन हो पाया है.. शुरू से लेकर अंत तक आप सब ने भी तो मेरा साथ नहीं छोड़ा था..

फिर मैं कैसे आप सब का साथ छोड़ देता.. मेरी एक लॉन्ग स्टोरी का अंत हुआ.. आप सबब भी खुश हुए, मैं भी ये जान कर बहुत खुश हुआ क मेरी स्टोरी को सबने बहुत सराहा ..

थैंक्स फॉर थे कमैंट्स
 
थैंक्स शेक भाई..!!

ये सब आपका प्यार था भाई.. जो मई इतना अच्छा लिखा पाया.. आप सब की सपोर्ट और प्यार प् कर न मैं रुका और न hi मेरी उँगलियाँ.. आप सब मेरा ख्याल करते रहे और मैं और आपका.. स्टोरी अंतिम तक जा पोहंची..... आपको स्टोरी पंसद आई..... स्टोरी ान एन्ड पसंद आया.. उसके लिए मेरा दिल बहुत खुश है भाई.

नेक्स्ट के लिए भी जल्द hi कोशिश करूंगा भाई.. आप सब की पूरी पूरी सुपप्रोत मेरे साथ है तो नेक्स्ट परत को भी मैं आप सब क लिए स्पेशल बनने की पूरी पूरी कोशिश करूँगा..

थैंक्स फॉर थे कमैंट्स
 
थैंक यू सो मच भाई...... स्टोरी जल्द कम्पलीट की गई है भाई... वर्ण इतनी लॉन्ग स्टोरी इतनी जल्दी कम्पलीट नहीं होती..

स्टोरी 550163 वर्ड्स पर मुश्तमिल थी.. इतना आसान नहीं था.. आप सबके प्यार और भरपूर सपोर्ट से ऐसा मुमकिन हो पाया है..



जल्द hi आपके मनोरंजहांजन क लिए कुछ और भी कुछ नया और स्पेशल सामने लाया जाने वाला है......
 
थैंक्स भाई ......... जल्द hi वो ख़ास आपने के सामने लाया जायेगा,........ अब्ब तब्ब मैंने जितनी भी स्टोरीज लिखी है .. मेरी यूए आने वाली स्टोरी सबसे खास होगी..... और इसे लिखने क लिए मैं बहुत समय से बेचैन भी हों..... ये भी स्फोरम पर सबसे हट कर एक कहानी होगी..... ऐसा कुछ उसमे दिखाया जायेगा जो आप सबब को बहुत ज़यादा इंटरनैन करेगा..
 
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