अपडेट :::144
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बेसमेंट के हाल में सब का hi बुरा हाल था.. जैसा सबको दिखाना था. वो मैं दिखा चूका था.. अब्ब बेसमेंट का सबका काम ख़तम हो गया था..
जूली ने भी लाइट ों कर दी थी... सबके चेहरे आंसुओं से टर्र थे... दोनों नानियाँ उनकी तो हालत देखने वाली थी.. वो माँ थी और एक माँ से बढ़ किसे दर्द हो सकता था..
वीडियो में मैंने माँ की पूरी लाइफ शॉर्टकट में दिखा दी थी...... 1 घंटे की बनाई गई एक फिल्म थी.. जिसमे कोठे की कुछ लड़कियों ने, मेरी बहनो ने, मैंने, कुछ दूसरे पैलेस के ख़ास आदमियों ने किरदार ऐडा किया था...
माँ की कहानी में पापा का किरदार, घर में मनजोत सिंह का किरदार ऐडा किया था.. प्रिय माँ के बहुत करीब रही थी.. प्रिय ने माँ के किरदार को बहुत अच्छे से ऐडा किया था.. माँ की पूरी कहानी खुल कर सबके सामने आ गई थी..
मनजोत सिंह जो औरतों को जुटे की नोक पर रखता था.. उसका किस्सा भी दिखाया गया था.. कैसे उसने सुमित्रा को नंगा करके बस्ती में घुमाया था.. फिर उसके बाद पीयूष ने कैसे माँ को तंग किया. कैसे माँ पापा के करीब हुई.. कैसे माँ के प्रेग्नंट होने के बाद मनजोत सिंह और उसके बेटो ने माँ को पीटा था.. फिर वहां दन्न की एंट्री हुई..
वहां से माँ के निकले जाने के बाद दन्न और उसके घरवळून ने माँ के साथ क्या कुछ किया वो भी दिखाया गया.. उसके बाद कोठे की ज़िन्दगी को भी दिखाया गया.. यही से सब पूरी तरह से टूट गए थे..
मनजोत सिंह और उसके बेटे कभी सोच भी नहीं सकते थे.. क उनके घर की इज़्ज़त को ऐसे मिटटी में भी मिलाया जा सकता है.. वो भी दन्न और नागराज द्वारा..
यही से उन सबब को एहसास हुआ क वो अपने अहंकार और औरत विचारों के चलते कितना गलत कर चुके हाँ..
नानियाँ कैसे ये सबब सहन कर सकती थीईईई.. जूतों से पीट पीट के अपने अंदर की भड़ास निकलने लगी.. लेकिन ऐसी भड़ास भला कभी निकल भी सकती है.. एक शरीफ इज़्ज़तदार घर की बेटी को अपणु ने hi कोठे की ज़ीनत बनने पर मजबूर कर दिए था..
शुशी दीदी के दोनों भाई और पिता भी बहुत रो रहे थे... मनजोत सिंह ने उनके साथ जो किया था.. उसी के चलते वो दुखी तो बहुत थे... पारर माँ की कहानी जान कर वो अपना सबब भूल कर माँ के दर्द में डूब गए थे...
मैं चलता हुआ माँ के पास पोहंचा और माँ को उठा कर अपने गले से लगा लिया.. माँ मेरे गले लग कर फिरसे पूत फूट कर रोने लगी... माँ को दर्द मिले hi इतने थे.. जिसे सहन कर पाना आसान नहीं था..
बेगानो ने तो दिए hi थे.. पारर अपणु ने जो ज़ख़्म जो दर्द दिए थे.. माँ कैसे वो सहन कर पाती..
माँ को सिर्फ मेरा प्यार hi इस दर्द से बहार निकल सकता था.. मेरे होने से माँ को कुछ चैन मिलने लगा.. और माँ का रोना कम् होने लगा... मुझे माँ के पास देख कर सबब मेरे पास इकठे होने लगे... कुछ देर मई माँ को गले से लगाए रहा.. फिर माँ को अपनी गॉड में उठा कर सबके सामने मैं बेसमेंट से बहार जाने लगा..
मेरे पीछे बाकी भी सबब आने लगे.. पीछे कौन रह गया था बेसमेंट में ये मैंने नहीं देखा था... दोनों नानियों को अब्ब अच्छे से एहसास हो गया था...
क उनकी नाराज़गी जायज़ नहीं है.. लेकिन उनके कुछ बोलने से पहले hi मैं माँ को लेकर बेसमेंट से बहार जा चूका था..
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रात के 12 बजे का समय था.. और हम अपने रूम में थे... हमने अपना खाना भी रूम में hi खाया था.. कोई भी हमें डिस्टर्ब नहीं करना चाहता था..
अपर्णा भी हमारे साथ hi थी.. आज वो भी हमारे पास hi रहने वाली थी.. शुष्मा didi,puja माँ और मेरी बहने सबब मौजूद थी.. माँ अब्ब बहुत हद्द तक्क रिलैक्स थी.. माँ को दर्द मिले थे.. तो कई लोगों का प्यार भी मिला था.. मई था मेरी बहने थी.. दिल्ली वाली फॅमिली थी... माँ की दुलारो शुशी दीदी थी.. माँ को दर्द कम् तो होना hi था.. लेकिन पूरी तरह से ख़तम नहीं हो पाया था.. आज माँ के साथ साथ अपर्णा भी मुझसे लिपटी हुई थी.. वो कभी माँ से मस्ती करती तो कभी मुझसे..
अपर्णा माँ को हसना चाहती थी.. माँ भी कैसे अपनी अपर्णा का दिल दुख सकती थी.. माँ अपर्णा के प्यारा को देखते हुए.. अपर्णा के मासूम चेहरे को देखते हुए अपर्णा से दुलार करने लगती थी.. अपर्णा भी किसी बच्ची की तरह से खिलखिलाने लगती थी.. बाकी सबब हमे देख रही थी. कबि वो शामिल हो जाती तो कबि एक दूसरे बातें करने लगती.. कभी वो भी माँ से छेड़ छड़ करने लगती..
12 के आस पास दूर नॉक हुआ तो सब एक दूसरे को देखने लगे.. इस टाइम कौन आ गया हमें डिस्टर्ब करने...
माँ:- जाओ प्रिय बेटी देखो तो कौन है दूर पर..
प्रिय बीएड पार्स कूदि और जा कर दूर ओपन कर दिए.. दूर पर दोनों नानियाँ कड़ी हुई थी.. प्रिय साइड हट कर कड़ी हो गयी.. दोनों नानियाँ अंदर दाखिल हुए तो प्रिय ने फिरसे कुण्डी लगा दी...
दोनों नानियों को अंदर आते देख मैं बीएड से उतर कर नीचे काढ़ा हो गया.. माँ और बाकी सबब भी बीएड से उतर कर कड़ी हो गईं थी..
ये सम्मान था हमारा उनके लिए.. वो हमारे किसी भी मामले में टांग अदने का हक़ नहीं रखती थी.. लेकिन उनका जो सम्मान था वो हम कभी नहीं भूल सकते थे..
बेसमेंट में उन्हें अकेले छोड़ आना अलग बात थी.. लेकिन इस समय वो दोनों हमारे पास आई थी.. मेरी माँ की माँ और मौसी थी.. ईंटे गुस्ताख़ हम कैसे हो सकते थे..
दोनों सर्र झुकाये हुए आगे बढ़ने लगी... मैंने माँ का हाथ थमा और दोनों नानियों की और बढ़ गया..
मैंने माँ की मौसी को गले से लगा लिया तो माँ ने अपनी माँ को गले से लगा लिया.. दोनों नानियाँ फिरसे रोने लगी. माँ की मौसी मुझसे पहले बार मिल रही थी.. नानी से भी मई अभी सही से नहीं मिला था.. पुणे में भी अफरा तरफी का आलम था.. तो जल्दी सब निपटा कर सबको दिल्ली भिजवा दिए था..
विजय:- नानी आप रोयें मैट.. जो होना था वो हो गया... गुज़रा समय फिरसे वापिस भी तो नहीं लाया जा सकता न.... इसलिए गुज़रे समय को भूल कर अब की नयी मिलने वाली खुशियों को सोचना चाहिए... ग़म माँ को मिले हाँ तो आप सबब भी हमेशा से hi खुशियों क लिए तरसती रही हाँ.. हमारी hi तरह से आप सबब भी तो दर्द भरी लाइफ जीते रहे हाँ..
दोनों नानियाँ माँ और मुझसे अलग हुई..
नानी:- श्वेता बेटी तुम्हारे साथ इतना कुछ हुआ मैं तो सोच भी नहीं सकती थी..
नानी 2:- हाँ श्वेता मेरी जान मुझे भी यकीन नहीं हो रहा क तुम एक नर्ग ने रहती रही हो.. इतना दर्द इतनी तकलीफ, न इज़्ज़त रही न सुकून के दो पल मिले..
नानी;- वो भी अपणु के वजा से .. नानी के आंसू नहीं रुक रहे थे..
माँ;- माँ अब्ब जो हुआ उसे भूल जाओ.. अब्ब तो सबब ठीक है ना...
नानी:- नहीं श्वेता अब्ब भी कुछ ठीक नहीं है.. मैं समझ सकती हों, जैसे ज़िन्दगी तुम्हे मिली है.. शर्म ो हाय सबब ख़तम हो के रह गई है.. पर बेटी विज्जू से तुम्हारा ताल्लुक़ मैं सहन नहीं कर सकती.. तुम विज्जू से वैसे सम्बन्ध ख़तम कर दो..
विजय;- नानी आप ऐसी बात क्यों कर रही हाँ.. ऐसा होना मुमकिन नहीं है.. माँ से मैं शादी कर चूका हों.. माँ अब्ब सिर्फ मेरी माँ नहीं है.. माँ अब्ब मेरे लिए श्वेता मेरी पत्नी है.. मेरे बच्चे की माँ बनने जा रही है..
नानी ने मुझे एक खेंच कर चांटा मार दिया.. आंसू उनके रुक गए थे.. अब्ब वो ग़ुस्से में आ गई थी..
नानी:- जानते हो समाज में एक बीटा अपनी माँ से शादी नहीं कर सकता.. फिर शादी तो तुम कर hi चुके हो. एक patni(puja) है तुम्हारी.. तो अपनी माँ से शादी करने की क्या ज़रूरत थी.. जो कुछ पहले हो चूका उसे भूल कर फिरसे एक नयी लाइफ जी जा सकती थी.. लेकिन तुम दोनों का वैसे रिश्ते में बांधना सही नहीं था.. श्वेता को भी तो रंजीत मिल गया था.. तो वो उससे भी तो शादी कर सकती थी.. तुमसे शादी का क्या मतलब.. मुझे ये सबब मंज़ूर नहीं है..
नानी 2:- हाँ श्वेता अब्ब जो हुआ सो हुआ.. अब से तुम दोनों माँ बीटा बन्न कर रहो और
आगे से शारीरिक सम्बन्ध हमेशा क लिए बंद कार्डो....... ऐसा हमारे खंडन में होना मुमकिन नहीं है... माँ बेटे में शारीरिक सम्बन्ध.. छी chhi.mujhe तो ..
माँ, या कोई और नहीं कुछ भी नहीं बोल रहा था.. यहाँ दोनों नानियों से लड़ाई मक़सद नहीं था.. मटर को इस तरह से सोल्वे करना था.. क कही कोई नरागजी या रंजिश बाकि न रहे.. वर्ण जैसे वो बातें कर रही थी. वो छलनी कर रही थी मुझे भी और माँ समेत बाकी सबब को भी..
नानी 2 आगे कुछ बोलती मैं उनकी बात kaat'ta हुआ बोलै..
विजय;- नानी आपके घर से माँ को धक्के मार कर निकल दिए गया था. जब माँ आपके घर से निकली तो माँ का रिश्ता आप सबब से ख़तम हो गया था... बाद में जो लाइफ माँ को मिली.. मई और प्रिय दुन्या में आये तो फिर वही लाइफ हमे भी मिली..
कैसे भी करके मैंने अपने दुम्म में ये नहीं ज़िन्दगी हासिल की है.. नयी ज़िन्दगी की खुशियां हासिल की हाँ.. किसी को भी हम कोई हक़ नहीं देंगे क वो हमारी खुशियों में रुकावट बने.. चाहे वो कोई भी हो... ये हमारी ज़िन्दगी है.. हम अपने हिसाब से जियेंगे.. आर किसी को कोई ऐतराज़ होता है तो वो हमारी ज़िन्दगी से दूर जा सकता है.. माँ और हम सबब पहले भी तो सबब से दूर hi रहे हाँ.. बाद में भी रह लेंगे... पहले भी सालों दर्द सही हाँ.. कुछ और सेह लेंगे.. पारर किसी को भी हमारे मामलात में दखल देने का कोई हक़ नहीं है.. आप को भी नहीं.. आप में से किसी को भी नहीं..
मेरी बात सुनकर दोनों नानियाँ शॉकेड हो गयी, वो फिरसे दुखी हो गयी..
नानी;- मतलब हमे फिरसे दूर जाना पड़ेगा.. अगर हम में से कोई भी तुम सब की ज़िन्दगी में दाखिल दे गए तो तुम उसे खुद से सबसे दूर कर डोज..
विजय;- हाँ नानी ऐसा hi है.. एक बात मैं आपको बता दो.. यहाँ पैलेस पर मौजूद हर एक वियक्ति. चाहे वो लड़की, औरत हो या मर्द वो सबब के सबब बेशरम है.. जैसी लाइफ हमे मिल चुकी है.. उसी हिसाब से शर्म नाम की कोई भी चीज़ हममे नहीं बची है.. माँ सालों तक कोठे पर रह कर चुदती रही है.. (मेरी इस बात पर दोनों नानियों के चेहरे शर्म से लाल हो गए थे) इज़्ज़त गई तो शर्म कहाँ से बचेगी.. शर्म और इज़्ज़त हर रोज़ कभी मेरे सामने तो कभी प्रिय के सामने खतम की जाती रही है.. तो हमे क्या ज़रूरत है, बेशरम होते हुए खुद को शर्म वाला बताते फिरें... जैसी लाइफ हमें मिल चुकी है.. अब्ब सबब में प्यार है.. जिस्म की चाह है.. हवस नहीं है, जिस्म की भूक नहीं.. सब मिलकर अच्छे से रह रहे हाँ.. एक खूबसूरत खुशियों भरी ज़िन्दगी गुज़र रहे हाँ..
तो हम में सिर्फ वही शामिल हो सकता है.. जो बेशरम हो.. हमारे रेहन सहन को हज़म कर सके.. हमसे प्यार करे.. दिल से हमें खुद का माने.. आप सबब क लिए ये सबब नया नया है.. तो आप को ये सबब घालता लगेगा hi.. पारर हमारे लिए, इस पैलेस में रह रहे किसी वियक्ति क लिए भी गलत नहीं है..
आप समाज की क्या बात करती हाँ.. समाज हमे देता hi क्या है.. इज़्ज़त तक्क तो माँ से छीन ली इस समाज ने. इसी समाज के कई ठेकेदार रोज़ कोठों पर जा कर मजबूर, बेबस लड़कियों और औरतों को छोड़ते han..maa को भी ऐसे hi समाजिक वियक्तियों ने हर रत गन्दा kiya.....aur आप कहती हाँ मई हम समाज के साथ चलें... इस समाज के ठेकेदारों ने हमे सिर्फ दर्द hi दर्द दिए हाँ. हमारे लिए कहाँ वो कुछ कर सकते हाँ.. इसलिए हमें समाज से कोई ग़र्ज़ नहीं है.. समाज क लिए तो पहले से hi बहुत कुछ कर रहा हों.. समाज सेवा के मुझे समाज से फिर भी कुछ नहीं मिलने वाला.. समाज खुद की भलाई नहीं कर सकता वो हमारे बारे कुछ अच्छा कैसे सोच सकता है.... इतना बेहिस और लचर है हमारा समाज..
नानी हम आप को नहीं छोड़ना चाहते.. अगर आप सब को यहाँ रहना मुश्किल लगे तो आप सब को कहीं और शिफ्ट भी किया जा सकता है..
नानी:- चल शुष्मा मैं तो ऐसे माहौल में तुझे नहीं रहने डोंगी.. didi(nani) आप यहाँ रहना चाहे तो रह सकती हाँ.. मैं तो कल hi अपने परिवार के साथ यहाँ से चली जाऊँगी.. खुद hi इसने कह दिए है क पूरा पैलेस hi बेशर्मो से भरा पड़ा है तो मैं कैसे अपनी बेटियों को यहाँ रुकने दे सकती हों..
नानी;- हाँ छोटी तू सही बोल रही है. मेरी कई पोतियां तो यहाँ रह कर इनके जैसी हो जाएँगी.. श्वेता बेटी तुम जैसे चाहो अपनी लाइफ जी सकती हो.. पर मैं और मेरी पोतियां यहाँ नहीं रह सकती.. अपनी बहुओं को भी मई यहाँ से ले जाऊँगी..
माँ झिलकिल नाम आँखों से मुझे देखने लगी.. माँ का सपना था क वो बाकी की पूरी लाइफ अपनी माँ के साथ hi बिताना चाहती हाँ.. माँ कैसे एपीआई माँ को यहाँ से जाता हुआ देख सकती थी...
शुष्मा दीदी मुझे देख रोने लगी thee..mujhe लेके तो वो ढेरों सपने भी देख चुकी थी.. कैसे वो मुझसे दूर हो सकती थी.. दीदी की डाइवोर्स बारे अभी नानियाँ या उनके परिवार वाले नहीं जानते थे...
पूजा मुझे इशारा करने लगी क मैं कुछ तो करों.. प्रिय, जहान्वी और श्रुति भी फिरसे नानी को नहीं खोना चाहती थी..
मैं सब को देख रहा था.. सब के अंदर की फीलिंग को जान प् रहा था.. अभी माँ खुद के कण्ट्रोल में थी. अगर दोनों नानियाँ चली जाती तो माँ इस बार पूरी तरह से टूट जाती.. मिलने वाली खुशियां फिरसे दूर हो जाती... शुष्मा दीदी भी तो टूट जाती ...
माँ बोल padi"vijjuu करते क्यों नहीं" नानी और नानी 2 जाने की बात करने क बाद मेरा और सबका रिएक्शन देख रही थी. वो जाना चाहती थी. पारर शायद वो जल्दी नहीं करना चाहती थी. वो चाहती थी क वो मैं या माँ अपना फैसला, अपनी सोच बदल कर उन्हें रुकने क लिए कह देंगे...
लेकिन ऐसा होना मुमकिन नहीं था.. अब्ब एक hi तरिएक था....... मैंने माँ को पकड़ लिया और माँ के होंटो से होंठ जोड़ कर माँ को किश करने लगा.. माँ भी शायद कुछ समझ गई थी.. माँ भी किश में मेरा साथ देने लगी.. माँ अपने पति को कैसे मन कर सकती थी.. मैं और माँ पुरे मूड में आते हुए किश करने लगे.
नानी;- कैसे बेशरम हो गए हाँ दोनों, हमारे सामने hi किश कर रहे हाँ.. कुछ तो हमे रेस्पेक्ट दे देते. हमारे जाने क बाद जो जी में आये करते रहते.. मैंने अच्छे से माँ को किश करके छोड़ दिए..
विजय:- नानी एक बात तो पक्की है क मेरे रहते आप दोनों पैलेस नहीं छोड़ सकती..
नानी 2:- ऐसे कैसे नहीं छोड़ सकते.. यहाँ रह कर मैं अपनी बेटियों को बेशरम बना नहीं देख सकती..
vijay:-nani उसका भी हॉल है मेरे paas..meri बात पर सब मुझे देखने लगीई
नानी:- ऐसा कौनसा हल है तुम्हारे पास..
विजय:- (सबको देखते हुए) आप दोनों को भी......... (रुक कर फिरसे सब को देखने लगा) आप दोनों को भी....... सबकी सांस अटकने लगी.. दोनों नानियों भी सस्पेंस में जकड़ी गईं थी.. बाकी तो सबब खुश थे क शायद मई कोई सलूशन बताने वाला हों...... सलूशन तो मैंने बताने hi वाला था.. पारर सबब को एक झटका ज़रूर लगने वाला था.. किसी को खुसी का तो किसी परेशानी का ..
नानी:- अब्ब बोल भी दो .. क्या बोलने वाले थे तुम.. एक तो आजकल के लड़के पता नहीं क्यों इतना सस्पेंस बढ़ने लगते हाँ...
मैं सबके सामने माँ के दूध को दबाने लगा.. दोनों नानियाँ फिरसे शर्मा गई.. दोनों ने नज़रें फेर लिए..
माँ:- विज्जू अब्ब बता भी दो.. मुझसे भी सस्पेंस बर्दाश्त नहीं हो रहा है..
विजय:- बता तो दिए है....
सबब:- क्या मतलब.? कब बता दिए है तुमने.
विजय:- अभी तो बताया है.... कोई फिर भी कुछ नहीं समझा..
नानी;- विज्जू तुम बोल के नहीं बता सकते ..
नानी2 :- बताते हो या हम जाएँ
विजय:- नहीं बता के सही से समझ नहीं आएगा... मैं करके दिखा सकता हों..
नानी:- चलो करके दिखाओ.. पर जो भी है, जल्दी करो.. बहुत देर हो गई है हमें जाना बह है.. और कोई faissssssssssssssssssssss............... chirrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrr oiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaaaa
दोनों नानियों के गले के नीचे से कपडे phat'te चले गए.... सब ये देख कर हैरान रह गयी.. दोनों नानियाँ चीख पड़ी.. पूजा के शिव कोई नहीं समझ सका.. पूजा भाभी भाभी आ कर मेरे गले से लग गई.. फिर मेरा मोहन चूमने लगी..
पूजा;- वजूउउउ यू अरे थे बेस्ट.. क्या दिमाग लड़ाया है.. सच में hi इससे ाचा आईडिया कोई हो hi नहीं सकता...
पूजा के बोलते बाकि भी सब समझ गयी.. और दोनों नानियाँ शॉकेड कड़ी खुद को उअप्र से नंगा देख रही थी..
विजय:- प्रिय. दीदी तुम सबब देख क्या रही हो.. पकड़ो दोनों को बीएड पर दाल दो.. आज दोनों की शर्म ख़तम करके दोनों को अपनी टीम में शामिल करते हाँ.. तब hi सारे मसले हल होंगे.. बस फिर क्या था.. दोनों नानियों के रपे की तैयारी शुरू हो गयी.
मेरी तितलियाँ दीदी और पूजा के साथ मिलकर उन्हें नंगा करने लगी.. अपर्णा जो इतनी देर से कड़ी ये सबब देख रही थी.. वो भी पीछे नहीं रही और वो भी दोनों नानियों को नंगा करने में मदद करने लगी.. कुछ देर दोनों नानियाँ नंगी हो गयी... दोनों नानी को बारी बारी सबने उठा कर बीएड पर दाल दिए..
इतना बड़ा शॉक दोनों नानी को अपनी पूरी लाइफ में नहीं मिला था... शुरू में तो वो चीखी चिल्लाई... बाद में आंसू बहाने लगी.. दोनों अपने दूध और अपनी छूट को अपने हाथो से कवर करने की कोशिश में लगी थिई..
माँ:- माँ और मौसी को छोड़ कर खुद की टीम में शामिल करना सही फैसला है. पर अगर ऐसा करने से काम न बना तो.. सब बर्बाद भी हो सकता है..
विजय:- श्वेता डार्लिंग अपने पति पर भरोसा रखो... चलो अपनी बेहेन को साथ मिला कर आप दोनों अपनी अपनी माँ की छूट छतो..
मैंने जहान्वी को पकड़ लिया.. पूजा तुम षुरूति के साथ मज़ा करो और दोनों नानियों को सबब दिखना चहिये.. दोनों बूढ़ियों को आज इतना गरम करना है क छोड़ने क लिए मचल उठें.. और अपर्णा तुम क्या करने चाहती हो.. आज तुम्हारे सामने ये सबब पहली बार हो रहा है.. किसी काम में हिस्सा लोगी या साइड में बैठ कर तमशा देखोगी
अपर्णा:- विज्जउ भाई तमाशा तो कोठे पर रहते बहुत देख लिया.. आज तो मैं भी सबके साथ मिलकर पूरा पूरा मज़ा लुंगी..
षुरूति:- अपर्णा तुम दोनों नानी में से किसी के मोहन पर अपनी छूट रख कर चटवाने की कोशिश करो देखो वो चाट टी हाँ या नहीं..
अपर्णा:- हहहहहए दीदी कहीं नानी मेरी छूट पर काट hi न ले.. देखो कैसे वो ग़ुस्से से देख रही हाँ..
सबने नानी को देखा तो वो दोनों खुनी आँखों से सबको घूर रही थी.. आंसू तो थे hi आँखों में, पारर ग़ुस्सा भी बहुत था.. कोई न कुछ hi देर ग़ुस्सा ख़तम और वो छूट की आग भड़कना शुरू.
सब के सब कुछ hi देर में नंगे हो गए.. रूम में कई और दूध बल्ब भी जल उठे थे.. रूम की रौशनी और भी बढ़ गई थी.. दोनों नानियाँ ऑंखें पहाड़ पहाड़ कर सबको देख रही थेईईई..
माँ और दीदी ने फिर अपनी अपनी माँ की छूट को अपने मोहन में ले लिया, दोनों नानियाँ बुरी तरह से मचल उठी... दोनों बूढ़ियाँ थी तो दोनों की छूट पर शुरू में कुछ म्हणत ज़यादा करनी पड़ेगी थी.. माँ और दीदी अपनी मेहनत को भूल कर दोनों की छूट में आग लगाने का इंतेज़ाम करने लगी..
बाकी के सबब भी अपने अपने काम में लग गए थे.. मैं भी जानवी को किश करते हुए उसके दूध भी दबा रहा था..
अपर्णा ने कुछ देर वेट किया फिर वो भी नानी के मोहन पर अपनी छूट रख कर बैठ गई.. फोरना hi अपर्णा की चीख भी गूँज गई थी..
विजय;- क्या हुआ
अपर्णा:- भाई नानी ने छूट पर काट लिया था..
विजय:- अब्ब काटे तो अपनी छूट को नानी के मोहन पर दबा कर उसका सांस बंद कर देना.. खुद hi कण्ट्रोल में आ जाएगी..
अपर्णा;- ठीक है भाई..
नानी ने फिरसे अपर्णा की छूट पर नहीं काटा था.. फिरसे काम शुरू हुआ और सबब मिलकर एक दूसरे को गरम करने लगे..
15 मिंट ऐसे hi गुज़र गए थे. सबकी छूट पानी पानी हो चुकी थी.. पारर अभी दोनों नानियों के शिव लुंड किसी के नसीब में नहीं था..
मैंने जहान्वी को किसी के साथ भी मिलकर लेस्बियन के लिए बोल दिए था.. जानवी की छूट की बढ़ी हुई आग मैं नहीं बुझा सकता था.. वो किसे से भी भुजवा सकती थी..
मुझे तो दोनों नानियों को राम करना था.. मैं खड़ा हुआ तो मेरा लुंड पहली दोनों नानियों की आँखों के सामने आ गया था.. अपर्णा भी साइड हट गई थी..
दोनों की ऑंखें मेरे लुंड से हट hi नहीं रही थी. दोनों डर भी गई थी. दोनों ने जब जवान थी तब शायद इतना बड़ा लुंड नहीं लिया था,.. अब तो दोनों बोधियाँ हो गई थी.. उनकी छूट इस आगे में कहाँ इतना बड़ा लुंड ले सकती थी.. वो यही सोच कर डर रही थी...
नानी;- विज्जउ साले कुत्ते कमीने ले जा कही और अपने लुंड को.. खबरदार जो हमारे पास भी आया तो...
दीदी ने अपनी माँ को नहीं छोड़ा था. अभी मेरा लुंड पहले नानी की छूट में जाने वाला था.. उनका नंबर बाद में आना था.. दोनों की छूट ने पानी छोड़ छोड़ कर उनकी छूट को चमका दिए था....
विजय;- नानी आज जितनी मर्ज़ी गलियां दे दो.. मेरा मोटा लुंड आज तो आपकी छूट में जा कर hi रहेगा..
नानी:- देख विज्जू हरामी साले कुत्ते कमीने मैं कहे देती हों, तू मेरे पास मत आना, वर्ण मुझसे बुरा कोई नहीं होगा.. मई नानी के ऊपर आया और नानी के दूध पर आते हुए अपने लुंड को पकड़ कर नानी के मोहन पर मारने लगा..
नानी;- नानी कितना वज़नदार है न मेरा लुंड.. कितना सख्त, कितना मोत, कितना लम्बा भी hai..kabhi लिया है इतना बड़ा लुंड.. कभी खुल की चुदाई भी नहीं की होगी आपने..... आपकी छूट भी कभी पुरे मैं से चूड़ी नहीं होगी.. साला कुत्ता मनजोत सिंह तप अपने मज़े के लिए आपको छोड़ता रहा होगा..
नानी के दोनों कंधो पर मेरे घुटने थे.. वर्ण तो नानी मेरे लुंड को पकड़ कर मरोड़ hi देती..
नानी मुझे क़हर बरसाती नज़रों से देख रही थी..
मैं नीचे हुआ और नानी के पैरों को उठा कर नानी की छूट पर अपने लुंड को रख दिए.. नानी को देखा तो नानी की ऑंखें खुड से फटी पड़ी थी..
मैंने माँ को देखा तो
माँ:- शाबाश विज्जू दे दे मज़ा आज मेरी माँ को भी.. खोल दे आज मेरी माँ की छूट को.. बना दे बेशरम मेरी माँ को.. वर्ण ये मुझे छोड़ कर चली जाएगी..
माँ की बात सुनकर मैंने एक थप्पड़ दीदी की गांड पर दे मारा. जो बड़े मज़े से अपनी माँ की छूट चाट रही थी.. नानी 2 अब छूट छतवई का मज़ा ले रही थी. अभी मेरा लुंड उनकी छूट में नहीं जाने वाला था. तो वो चिंतित नहीं थी..
नानी के डर को साइड में रखते हुए नानी के पैरान को कस के पकड़ते हुए मैंने नानी की आँखों में देखता हुए, एक स्माइल देते हुए एक तगड़ा धक्का मार दिए.........
aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii
नानी की चीख को किसी ने दबाने की कोशिश नहीं की थी.. इस पैलेस में चीखें रूटीन में शामिल थी. डॉन नए रहने वाले आये थे, उनके रूम इतने दूर थे क वो इस चीख को सुन नहीं सकते थे..
मेरा लुंड नानी की छूट में 4" तक उतर गया था.. नानी की चीख तो निकली थी पर नानी की सांस भी उखड गयी थी. नानी इतनी जल्दी नहीं मरने वाली थी.. नानी की सांस को ठीक करने क लिए मैंने एक और धक्का मार दिए.. नानी की सांस ठीक हुई नानी इस बार और भी तड़प उठी.. नानी की छूट भोसड़ा थी... पर बहार से अंदर से तो वो बहुत ज़यादा टाइट थी..
नानी मेरा लुंड अपनी छूट में सहन नहीं कर पाई.. और भयानक अंदाज़ में चीख पड़ी थी... नानी 2 भी दरी दरी अपनी बेहेन को देखने लगी.. वो जानती थी, बाद में उसका नंबर भी लगने वाला है.. बाकी के लुंड को बचा कर क्या करना था मैंने
दाल दिए वो भी नानी की छूट में .......... नानी फिर तड़पती रही और मैं नानी की छूट में लुंड डाले धक्के पर धक्के मारता रहा..
7 मिंट बाद नानी की छूट ने फिरसे गरम होना शुरू कर दिए.. नानी की गरम छूट में मेरा लुंड बिना रुकावट के अंदर बहार होने लगा था. माँ अपनी माँ के दूध पीने में लगी हुई थी.........
जितनी गलियां नानी ने मुझे दी थी.. तौबा नानी तो कही से भी शरीफ औरत नहीं दिख रही थी.. नानी ने वो वो गालियां निकली अपने मोहन से लिखते हुए भी शर्म सी आ जाये..
नानी की छूट रवा हुई तो नानी मज़े में हुई. तब्ब जा के नानी की गलियां ख़तम हुई.. वर्ण तो रूम में नानी की गालियां सुनकर सबके hi कान जलने लगे थे..
मैं किसी पर धयान ने देते हुए नानी को छोड़ने में लगा रहा... नानी की छूट झड़ने वाली हुई तो मैं रुक गया..
नानी मुझे खा जाने वाली नज़रों से देखने लगी..
मैंने माँ को साइड में हटाया और नानी के ऊपर झुक कर नानी के होंटो पर किश कर दिए.. नानी मुझे बास घूरती रही..
विजय;- नानी छूट का पानी निकलवाना है या नहीं.. अगर नहीं तो मैं अपना लुंड निकल लोन आपकी छूट से..
नानी;- हरामज़ादे ज़यादा नौटंकी मैट कर.. हरामी साले कुत्ते एक तो मुझसे ये सबब कर रहे हो और ऊपर से मसखरी करते हो..
विजय:- आप मुझे कुछ भी कह सकती हाँ.. पर आपको बताना पड़ेगा.. वर्ण मैं सूबा तक्क hi आपको छोड़ता रहूँगा.. कल फिर आपसे चला नहीं जायेगा तो मैं सब को बता डोंगा क सरती रत मेरा लुंड नानी की छूट में रहा है तो नानी को बहुत दर्द हो रहा है..
nani;-sahi कहा था मैंने तो बहुत बड़ा हरामी है कमीने.. एक बुढ़िया को भी चैन से नहीं रहने दिए तुमने.. इस उम्र में मैं चुदती हुई भला अच्छी लगती हों.. चल हट मेरे ऊपर से अगर और नहीं करना है तो..
विजय;- नानी मुझसे बेशरम बन्न कर बात करें... वर्ण मैं अपना लुंड आपकी छूट से निकल कर आपकी गांड में दाल दूंगा..
मेरी बात सुनकर नानी अचानक से hi हस्सन लगी.. नानी के हस्सन पर सब नानी को देखने लगे...
नानी:- विज्जज्जुऊ बीटा.. मैं अपनी बेटी से दूर नहीं रह सकती.. मुझे मेरी श्वेता इस दुन्या में सबसे बढ़कर पायरी है.. पारर मुझे तुम्हरा और श्वेता का जिस्मानी रिश्ता मंज़ूर नहीं था.. कोई भी माँ ऐसा कैसे सोच सकती है.. पारर अब जब तुमने मुझे भी सबमे शामिल कर hi लिया है.. तो मैं अब्ब अपनी शर्म छोडो या न छोडो.. पारर अब्ब तो मैं शर्म वाली नहीं रही हों.. तुमने मेरी छूट को पहाड़ कर मुझे बेहिसाब दर्द दे दिए है.. तो अब्ब जहाँ मैं करे दाल दो.. दर्द तो होगा hi..
पर जाने क्यों मुझे एक सुकून सा भी महसूस होने लगा hai..(apni बेहेन से) क्यों छोटी मैंने सही बोल रही होंगे.. ये सबब कितना गन्दा है. कभी हमने ये सबब सोचा भी नहीं था.. पारर देखो ये सबब हमारे साथ हो चूका है... पारर कितना सुकून दे रहा है हमे..
नानी 2 जो कुछ नहीं बोल रही थी.. वो चुप चाप सबब सहन कर रही थी. माँ तो वो भी पूरा पूरा हासिल क्र पा रही थी. अपनी बेहेन की बात सुनी तो
नानी 2;- हाँ दीदी ऐसा सबब हो हमारे साथ में, तो उससे पहले hi हम मरजाना पसंद करती.. पारर जैसे ये सबब हमारे साथ कर रही han...wo मुझे भी बहुत मज़ा दे रहा है..
विजय;- नानी आप को पता है क शर्म बचा कर सिर्फ अपनी बेटियों को बर्बाद किया जा सकता है.. नानी 2 आप भी तो अपनी शुशी को बर्बाद कर चुकी हाँ..
दोनों;- क्या मतलब.? शुशी कैसे बर्बाद हो सकती है.. वो तो अपने घर मेबहुत खुश है............. दीदी अपना ज़िक्र सुनकर साद हो गई थी... अपनी माँ की छूट उन्हों ने छोड़ दी.. और चेहरे साइड में करके मोहन घुमा कर बाथ गई..
माँ;- मौसी आप तो कुछ भी नहीं जानती.. मेरे विज्जू ने आपकी शुशी को भी बचा लिया है.. वर्ण तो वो ज़रूर किसी दिन सुसाइड कर लेती.
दोनों:- kyaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa.
माँ;- हाँ मौसी.. आप नहीं जानती, जबसे शुशी की शादी हुई है, शुशी ने कभी अपने पति का प्यार नहीं पाया.. आप को तो ये भी नहीं पता क शुशी का पति नामर्द था.. और शुशी अभी तक्क कुंवारी है..
दोनों;- kyaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa
नानी ने मुझे धक्का दिए मैं नानी के ऊपर से साइड हो गया, मेरा आधा लुंड नानी की छूट से निकल गया तो सिचुएशन देखते हुए बाकी का लुंड भी मैंने नानी की छूट से निकल दिए...........
माँ ने दीदी को लिटा दिए.. दीदी के पेअर खोल कर दीदी की छूट के लिप्स भी खोल कर दोनों नानी को दिखने लगी...
माँ;- आप दोनों को पूरी तजुरजा कार हाँ, छूट देख कर hi बता सकती हाँ क सील लगी हुई है या टूट चुकी है..
नानी 2 अपने सीने पर हाथ मारने lagi.."haaye मेरी फूल सी बच्ची इतनी दुखी है, हाय मेरी फूल सी बच्ची के नसीब में वो नामर्द है"
माँ:- मौसी अब्ब चिंता की कोई बात नहीं है.. शुशी ने विज्जु की मदद से इन नामर्द से डाइवोर्स ले ली है... माँ की बात पर दोनों नानियाँ हैरान भी हुई. फ्री दोनों खुश भी दिखने लगी
पहली बार नानी 2 और नानी 2 मुझसे खुश हुई. मुझे गले से लगा कर चूमने लगी.
प्रिय;- नानी अब्ब आप hi बातें.. विज्जू भाई कभी गलत हो सकते हाँ.. देखो सब में प्यार बाँटने क लिए वो क्या कुछ नहीं कर रहे.. अब्ब भी माँ के लिए दीदी क लिए आप दोनों की नज़रों से गिरने का सोचना छोड़ कर एक चांस ले बैठे और आप दोनों के साथ ज़बरदस्ती चुदाई करके आप दोनों को अपने साथ मिलाना चाहते हाँ.. ये बी एक चांस hi था... वर्ण हो सकता था क चुदाई के बाद आप दोनों ग़ुस्सा हो जाती और हमें छोड़ कर चली जाती तो हमारा कितना नुकसान हो जाता.. हमारी ख़ुशी क लिए विज्जू क्या कुछ नहीं कर रहा है..
नानी 2:- कुछ मैट बोल मेरी बच्ची.. हम नादाँ हाँ न . सबब सही से नहीं समझतें.. जब चोट लगे तो एहसास जागता है.. अच्छा किया विज्जू बीटा तुमने जो इस बात को खोल दिए.. वर्ण सच में hi इस रात के बीत जाने के बाद हम शायद यहाँ से चुप चाप चली जाती..
दोनों नानी हालत को समझते हुए नए माहौल में खुद को जम्म करने ल लिए मान गई थी..
फिर दोनों नानियों की जम्म कर चुदाई हुई.. उस रात कोई नहीं सोया.. माँ का सारा दर्द अब्ब जा चूका था.. माँ को अपनी माँ की चिंता थी.. माँ को माँ मिल गई थी..
बाकी सबब तो माँ को पहले से hi मिल चुके थे.. अब्ब माँ के होने से माँ अंदर से पूरी तरह से हरी भरी हो गई थी....
पूरी रात नानी 1 और नानी की छूट से कई बार पानी निकला.. अपर्णा ख़ुशी ख़ुशी दोनों नानियों के मोहन पर अपनी छूट रख कर चटवाने लगी थी.. वो बहुत खुस थी..
एक तो वो हमारी टीम में पूरी तरह से शामिल हो गई थी.. दूसरा उसे बह दो दो नानियाँ मिल गई थी... और जिस किसम की टेंशन पैलेस में क्रिएट हो चुकी थी.. अब्ब वो जाती रही थी............................
बाकी सबब को भी दोनों नानियों के सामने खुल कर मैंने छोड़ा था.. बास शुष्मा दीदी और अपर्णा नहीं चूड़ी थी... अपर्णा का नंबर बाद में था.. दीदी की शादी वाली बात भी दोनों के सामने रख दी गई थी.... तो नानी 1-2 ने शादी तक्क शुष्मा को अपनी दोनों सील बचाये रखने को बोल दिए था...........
ऐसे hi हस्सी ख़ुशी रात बीत गई..
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मैं अचानक से hi पुणे छोड़ कर दिल्ली लौट आया था.. नागराज और उसकी फॅमिली मुझे न प् कर बेचैन हो गई थी.. मैंने भी अपना नंबर कुछ दिनों क लिए बंद कर दिए था.. ये मैंने जान बूझ कर किया था..
नानी 1-2 को चोदे 3 दिन गुज़र चुके थे... एक रात छोड़ कर बाकी की 2no रातें भी दोनों को दबा दबा कर छोड़ा था.. वो कभी भी ऐसे नहीं चूड़ी थी... एक तो सबके सामने दूसरा प्यार से, दुमदार तरीके से.......... दोनों बहुत खुश थी.. पहले दिन दोनों की छूट में बोहत दर्द रहा था.. पारर माँ के पास एशिया बहुत कुछ था छूट क लिए... दोनों नानियों की छूट का दर्द भी जल्दी ख़तम हो गया.. और दोनों की छूट भी टाइट हो गई थी....... दोनों माँ से बहुत खुश थी.. दोनों की छूट की आगे 25 साल कम् हो गई थिई...
मैंने नंबर ों किया तो नागराज के 300+ मिस्ड कॉल थी.. संस का तो अंदाज़ा hi नहीं था.. और भी कई नंबर थे.. जिनसे मिस्ड कॉल और संस ए हुए थे....
मैं महक जूली से मिला.. वही बैठ कर प्लान बनाया और नागराज को कॉल करदी.. मेरा नंबर ट्रेस नहीं हो सकता था.. ये सबब जूली का काम था..
नागराज से बात हुई तो वो बहुत ज़यादा बेचैन दिखने लगा था.. मैंने उसे इमरजेंसी बता दी.. क मुझे अचानक से hi पुणे छोड़ना पड़ा था.. मैं इस समय दिल्ली में था.. ेमरफेंसी के चलते नंबर भी बंद था.. और कल से फिर कुछ दिनों क लिए बंद होने वाला था.. मुझे यूरोप जाना पद रहा था 6 मोनथस क लिए.. वहां मेरी कई बिज़नेस मीटिंग्स थी.. मैंने नागराज को दिल्ली आने क लिए नहीं कहा....
उधर से मोबाइल लाउड स्पीकर पर था.. सब hi कुछ न कुछ बोलने लगे... नागराज और उसके बेटे मुझे रिक्वेस्ट करने लगे क मैं उनके लिए कुछ दिन दिल्ली में hi रुक जाओं. वो सबब यहाँ आना छह रहे थे.. मैंने बहुत उन्हें मन किया क मैं जब 6 मोनथस लेटर दिल्ली में वापिस आऊँगा तो फिर एक पार्टी ारंगे करूँगा, जिसमे उन सबब को स्पेशल इन्विते किया जायेगा..
लेकिन वो साले कुत्ते हरामी मादरचोद खुद hi मेरे बिछाए हुए जाल में आने लगे थे.. मैंने भी काफी देर तक्क उन्हें परेशां किया.. फिर बाद में मान गया क वो सबब आ सकते हाँ.. ये खास तुअर पर कहा था.. क मेरे कुछ दोस्त भी बदले में उन सबब को छोड़ेंगे.... ये सिर्फ नगरक को पक्का करने क लिए कहा था... गैंग की hi एक कोठी का एड्रेस नागराज को बता दिए गया था...
और वो आज hi वहां से निकलने वाले थे..
नागराज के खंडन का कोई छोटा हो या कोई बड़ा सबके सबब दिल्ली के लिए तैयार हो चुके थे.. कुछ मेरी मामियों और बहनो को छोड़ना चाहते थे.. तो कोई मेरी ममियों और बहनो को चुड़ते हुए देखना चाहते थे..
जब वो यहाँ पोहंचेंगे.. तब उन्हें आते दाल का भाव पता चलेगा..
काल एन्ड हुई तो जूली और महक मुझे बधाई देने लगीई.. ऐसे भला बधाई का क्या मज़ा आने वाला था.. वहां से तीनो बेसमेंट में जा घुसे और फिर एक थ्रीसम सेक्स शुरू हुआ.. जो 3 घंटे तक्क चला.. महक के लिए ये भी एक एडवेंचर hi था.
जूली जैसी तो कोई एक्सपर्ट थी hi नहीं.. चुदाई में और लेस्बियन सेक्स में... 3 घंटे के इस खेल का तीनो hi भरपूर मज़ा लेते रहे..
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रत के 8 बजे का टाइम था.. और नागराज पूरी फॅमिली समेत गैंग की एक कोठी में मौजूद था... इस कोठी में ऐसा इंतेज़ाम भी था, क अगर नागराज परिवार के किसी मेंबर्स के
पास या किसी के जिस्म में कोई भी डिवाइस इंजेक्ट है तो हम पता चला कर उसे निकल सकते थे....
लेकिन वो सबब दन्न के बाद एक नंबर के चूतिये थे....... बदले के चक्कर में बूढी से फ़ैल हो गए थे.. इतने बड़े गंगतर होकर भी इंसान की पहचान नहीं कर प् रहे थे............. लेकिन इसमें उनकी भी कोई गलती नहीं थी...... सूरत से मैं एक मासूम सिफत लड़का था.. चुदाई में नागराज परिवार का हम पल्ला था.. इस लिए वो शक नहीं कर पाए.. पुणे इ रहते हमने कुछ ऐसा किया भी तो नहीं था.. जिस बिना पर नागराज परिवार को कोई शक्क हो...
अगर नागराज दिल्ली में आते हुए किसी को बता कर भी आये थे.. तो फिर भी मेरे लिए कोई टेंशन नहीं thiiiiiiiiiiiiiiiiiii... मैं बदले हुए फेस में था... मेरी आइडेंटिटी भी बदली हुई थीइइइइइइइ.. सब पैलेस से दूर थे.. और मेरे इस रूप का पैलेस से कोई कनेक्शन भी नहीं था..
सबको चाय कॉफ़ी पिलाई गई.. डिनर क लिए टाइम था.. तो सबब ने डिनर से पहले चाय या कॉफ़ी लेना पसंद किया था..
चाय कॉफ़ी पीने के 15 मिंट बाद सबब बेहोश हो चुके थे.. मिशन नागराज भी अपने अंजाम की और बढ़ने लगा था...
सबको पहले अचे से नंगा किया गया.. किसी के बदन पर एक सुई भी नहीं छोड़ी गई थीइइइइइ..................
वही से सबको गाड़ियों में भर कर पैलेस लेजाया जाने लगा...
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नेक्स्ट DAY......TIME:09:40:AM
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पैलेस के बेसमेंट में अँधेरा छाया ह्या था.. कोई भी नहीं दिख रहा था.. उसी अँधेरे में दन्न नंगा एक लड़की के तख्ते पर बंधा हुआ था..
दन्न के दोनों पेअर फर्श से 10" ऊपर थे.. दन्न को बेहोशी की हालत में बेसमेंट के एक पोरशन में लाया गया था.. इस पोरशन को स्पेशलय चेंज किया गया था..
इस बार का सिस्टम कुछ हट कर था.. इस बार मैं कुछ और भी हट कर करने की सोच रहा था.. ऐसे कामों में मेरा दिमाग चलता भी बहुत था.......
धीरे धीरे करके दन्न को होश आने लगा.. नाईट विज़न की वजा से मैं महक और जूली दन्न को देख रहे थे...
जैसे hi दन्न को होश आया तो हमने नाईट विज़न उतर दिए.. जूली को बता कर मैं जाने लगा.. मेरे जाने क बाद दन्न वाले पोरशन की लाइट्स को ों कर दिए गया..
महक अपने असली फेस में मौजूद थी. दन्न की नज़र अभी महक पर नहीं पड़ी थी..
जिस तरफ दन्न का चेहरा था.. दन्न के फेस के सामने की पूरी दीवार पर शीशे लगे हुए थे.. दन्न के घर के जिनते मेंबर्स थे.. उल्टे hi छोटे छोटे केबिन बने हुए थे.. और सबको घोड़ी की शेप में 2 फ़ीट ऊंची टेबल पर बढ़ना गया था.. सबब के सबब नंगे hi थे...
दन्न की लेफ्ट साइड में भी केबिन बने हुए थे.. सब केबिन शीशे के थे.. अभी अँधेरा था तो कोई भी नहीं दिख प् रहा था... उन केबिन में दन्न के फ्रेंड्स, पवन एंड पवन फ्रेंड्स और रेखा बाई थी.. रेखा बाई को कुछ अच्छी ट्रीटमेंट दी गई थी.. इतने दिनों में उसकी सेहत भी कुछ बेहतर हो गई थी.. रेखा बाई अब्ब भी बदली हुई thi..us के अंदर का सबब बदल चूका था.. लेकिन उसकी सजा कम् या खतम नहीं होने वाली थी..
जाने कितनी लड़कियां कितने घर आज भी रेखा बाई की वजा से रो रहे थे.. जितनी सजा रेखा बाई क लिए इस दुन्या में लिख दी गई थी.. वो तो उसे मिलकर रेहनी थी.. बाकी ऊपरवाला जाने..
रेखा बाई को अब्ब रपे से कोई ग़र्ज़ नहीं रही थी.. रेखा बाई को एक आदमी चोदे या हज़ारों.. रेखा बाई अंदर से बदल गई थी.. और खुद की सजा क लिए वो तैयार थी.. वो भी नंगी थी... और एक टेबल पर बंधी हुई थी... दन्न एंड पवन फ्रेंड्स भी उन्ही टेबल्स पर बंधे हुए थे...
राइट साइड में भी कुछ केबिन बने हुए थे.. और उन केबिन में मनजोत सिंह और उसके बेटे नंगी हालत में टेबल्स पर बंधे हुए थे..
रपे करने वाला.. इज़्ज़त उतरने वाला .. रपे क लिए हालत को साज़गार बनाने वाला .. इज़्ज़त पामाल करने के लिए किसी को मौका देने वाला भी ऐसी hi सजा कर हक़दार था..
मनजोत सिंह परिवार ने आज तक किसी बहार की औरत की इज़्ज़त नहीं लूटी थी.. पारर अपनी औरतों को तो सालों तक लूटा था.. जबरन छोड़ना भी कोई छोड़ना होता है.. जब मैं बना, लुंड खड़ा किया, औरत की मंशा जाने बिना hi उसकी छूट में उतार दिए..... घर की इज़्ज़तदार औरतें हाँ तो उनके साथ रंडियों जैसा सलूक नहीं करना चाहिए था..
मनजोत सिंह भी आज सजा पाने वळून की लिस्ट में शामिल थे....... पहले मेरा एशिया कोई प्रोग्रम्मे नहीं था.. पारर फिर मुझे लगा क चोट पूरी तरह से लगनी चाहिए..
अंदर पूरी पूरी टूट फूट होनी चाहिए.. असल इज़्ज़त तो औरत की होती है.. माँ की होती है.. बीवी की होती है. बेटी की होती है......... मनजोत सिंह जैसे जो मर्दों के नाम पर एक धब्बा हाँ. ऐसे मर्दों की इज़्ज़त भला कैसे हो सकती थी...
बेसमेंट के hi एक और पोरशन में पैलेस में मुझसे रिलेटेड सबब hi बैठे हुए थे.. सब hi दन्न के बाद नागराज और परिवार के बाकी सबब लोगों के भी मेयर शिकंजे में आ जाने पर बहुत खुश थे.. वो भी दीवार पारर लगी हुई एक बड़ी मल्टीमीडिया स्क्रीन पर सबब देख रहे थे.........
मैं सामने वाले काबिन्स में से एक केबिन में मौजूद था.. नाईट विज़न एक बार फिर मैंने लगा लिए थे.. और मैं जिस केबिन में मौजूद था.. उस केबिन में सुमित्रा मौजूद थी.. काबिन्स में मौजूद सब hi पूरी तरह से होश में थे.. दन्न परिवार, दन्न फ्रेंड्स, रेखा बाई, पवन फ्रेंड्स, मनजोत सिंह और उसके बेटे.. सबके सब होश में थे और दन्न को देख रहे थे.. सब चीख रहे थे.. पर केबिन से बहार किसी की आवाज़ नहीं जा रही थी..
दन्न के साथ साथ सब महक को वहां देख कर भी शॉकेड थे.. वो सोच भी नहीं सकते थे. क महक यहाँ हो सकती है.. मुझे भी अभी शायद नागराज और परिवार वाले नहीं जान पाए थे.. मैं सुमित्रा के पीछे था.......
महक चलती हुई दन्न के सामें जा पोहंची.. दन्न का मोहन बंद नहीं था... वो महक को देख कर भूँकने लगा..
दन्न;- साली कुत्तिया हरामज़ादी, मेरी बेटी हो कर मेरे hi दुश्मन से जा मिली है...
महक:- chich....chich... चीच... दन्न साला कुत्ता हरामज़ादा तो तू खुद है.. कुत्तों से भी बदतर ज़िन्दगी जी है तुमने.. thuuuuuuuuuuuuuuu..... महक ने दन्न के मोहन पर थूक दिए........... अब यकीन हुआ क तू सच में hi एक कुत्ता है.. जिस इंसान की बेटी उसके मोहन पर थूक दे.. तो इसके बाद भी वो खुद को इंसान समझे.. हैरत है..
दन्न महक के थूकने पर और भी ग़ुस्से में आने लगा...... वो कुछ बोलता.. मैंने एक कस के थप्पड़ सुमित्रा के चुत्तड़ पर मार दिए...... बंधी हुई होने की बिना पर सुमित्रा एक चुत्तड़ कैसे हुए थे......... एक धमाके डर आवाज़ हुई और
aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii
सुमित्रा चीख पड़ी... सुमित्रा की चीख और थप्पड़ की आवाज़ दन्न ने सुन ली थी..... थप्पड़ मारने से पहले hi मैंने केबिन में मौजूद एक बटन प्रेस कर दिए था...
दन्न चरों और देखने लगा.. पर उसे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था..
hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha
D..........N..........N........kya देख रहे हो D..........N.................N
..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha
अभी तुम्हे कुछ नहीं दिखाया जायेगा ............hahaha..........hahaha.... अभी सिर्फ तुम्हे सबब सुनाया जायेगा... ..........hahaha..........hahaha........ अभी तो बहुत कुछ कुछ है तुम्हारे मनोरंझण क लिए D.........N.........N
सुमित्रा और बाकी सबब की छूट और गांड रात में hi यहाँ लाते हुए टाइट करदी गई थी........ कोई मर्द था, या कोई औरत... कोई लड़की हो, कोई औरत, या बूढी..
सबकी छूट और गांड एक जेल की मदद से टाइट क्र दी गई थी..... सबकी छूट और गांड पहले से hi अच्छे से खुली हुई थीईई...... मुझे छोड़ने में मज़ा नहीं आने वाला था...... और hi बदला लेने में..... इसलिए को एक बार फिरसे सील बंद के हिसाब से कर दिए गया था..
महक:- हाँ तो दन्न तुमने सुनली होगी वो आवाज़.. मुझे बता सकते हो वो चीख किसकी thiiiiiiiiiiiii...... महक ने अपना खंजर निकला और दन्न के लुंड को हिलने लगी.. महक की दरिंग्डी दन्न बहुत अच्छे से जानता था.. महक के खंजर को अपने लुंड पर पाते hi उसके बदन में झुरझारी सी दौड़ गई थी..
dnn:-mmmmmm...mehak बेटी ये तुम क्या करने वाली हों.. दन्न का ग़ुस्सा मेरे kah-kahun से और महक के खंजर ने रफू चक्कर कर दिए था.. वर्ण शायद वो और भी भूँकता.
महक की अंकों की दरिंदगी भला दन्न से कैसे छुप सकती थी... दन्न तो लोगों की ऑंखें पढ़ने में माहिर था.....
महक:- दन्न उर्फ़ मेरे हरामी डैड........ यही तो मेरा काम है.. तुम जैसो के लुंड काटना......... कहा था न मैंने क हरामियों वाले काम छोड़ दो..... देखा न.. आ गया न समय..... बदल गयी न तुम सब की तक़दीर.. भर गया न घड़ा तुम सब के पापों का..... जैसा बोया था.. अब्ब कांटे का समय ाँ पोहंचा है daddddddddddd.
वीजजजजज्जजूउउउउउउउ खेल शुरू करो.......... दन्न को नेक्स्ट दोसे भी दे दी जाये.
मेरा लुंड था hi बहुत स्पेशल .. छूट और गांड की खुशबु सूंघ कर hi खड़ा हो जाता था.. आज तो फिर भी बदला लेना था.. कैसे मेरा साथ न देता.. और फिर आज तो दन्न परिवार की साडी छूटें और गंदे टाइट हुई पड़ी theeeeeeeeee.. मेरा लुंड खुश क्यों न होता...... मूड में क्यों न आता.. आज तो मई एक एक करके सबब की hi पहाड़ देने वाला था... आज तो मेरे पास पूरा पूरा टाइम भी था....... शाम तक्क तो सबकी hi फट्ट्ट्ट जानी थी....... चुदाई से मई थकने वाला तो था नहीं....
फिर भी मैंने आज पहलवान जी की दी हुई वही पुराणी दोसे डबल करके खा ली थी..
लुंड की तिघटनेस भी पहले से बढ़ गई थीईई.. टाइमिंग भी पहले से बढ़ गई थी.. मज़ा भी पहले से कई गुना बढ़ कर आने वाला था... और थकन भी मुझे नहीं होने वाली thiiiiiiiiiiii.......
आज तो खाना पीना भी चुदाई करते हुए hi होना था.... पैलेस वाले जो सबब बेसमेंट के सेकण्ड्स पोरशन में बैठे मल्टीमीडिया स्क्रीन पर सब कुछ देख रहे थे.... वो सब hi आज सबकी पूरी पूरी पहात जाने तक वही बैठने वाले थे.. वही बैठ कर खाने पीने वाले थे... वही बैठ बाकी के सारे काम करने वाले थे..
बास एक बाथरूम की टेंशन थी.... वो भी पास में hi थाआआआ.. और सबब पहले से hi अपनी अपनी टंकी खली करके बैठे हुए थे..........
कोई इंटरवल नहीं था इस शो में रेगुलर hi शो चलने वाला था.. पूरा पूरा मज़ा भी आने वाला था.......
बास एक गड़बड़ होने वाले थीइइइइइइइ....... कइयों के लुंड तो कइयों की छूट पानी छोड़ देने वाले थे....... चुदाई भले hi बदले क लिए हो... देखते हुए खुद पर कण्ट्रोल नहीं रहता........ लुंड भी खड़े होंगे और छूट भी बहेगी.....
मेरे लुंड की परफॉरमेंस तो वाकई में hi देखने लायक थी आज्ज..........
मैं अपने लुंड को हूलते हुए पुरे मूड में सुमित्रा के कैसे हुए चुत्तड़ो पर मारने लगा.......................