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मई जैसे hi मालिकान की पंतय उतारने लगा.. तो किसी ने दूर नॉक कर दिया..
मई तो नार्मल hi रहा, पर मालिकान एक झटके में hi उठ बैठी..
मालिकान:- विज्जू बीटा कोई आ गया है तू ऐसा कर बाथरूम में जा कर छुप जा..
मैं भी सीधा हो गया.. और मालिकान के होंटो को एक बार फिरसे अपने होंटो में लेकर अच्छे से चूस लिया...
विजय:- कोई दूर पर है तो क्या हुआ, उसे भगा देते हाँ, अभी मज़ा करने दो न..
मालिकान ने मुझे साइड में धक्का दिया..
मालिकान:- तुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा.. पर मुझे तो फर्क पड़ता है न.. अभी मई इस सबब की आदि नहीं हुई हों, कोई मुझसे सवाल करेगा, तो कैसे मई जवाब दे पाऊँगी..
हम दोनों hi धीरे धीरे बात कर रहे the..maine मालिकान ने बूब्स को पकड़ कर दबा दिया..
विजय:- आप यही से पूछ लें बहार कौन है..
मालिकान को मेरी बात भी सही लगी.. इतनी जल्दी तो वो सबब सेट करके दूर ओपन करने से रगीन.. पंतय के इलावा उनके बदन पर था hi क्या, उन्हें कपडे पहने कर दूर खोलने में टाइम लग्न था..
मालिकान:- (ऊंची आवाज़ में) कौन है बहार...
बहार से:- मई हों दीदी पद्मा... साथ में मतली भी है..
विजय:- चलो अब्ब तो आपका काम हो गया, कोई टेंशन नहीं है.. उन दोनों से कैसी शर्म.. सबब hi तो आप दोनों को दिखा चुकी हाँ.. इतना बोलते हुए मैं झट से बीएड से उतरा.. और जा कर दूर खोल दिया.. दूर खोलते hi साइड में हो गया.. बहार कड़ी हुई दोनों की hi नज़र मुझपर नहीं पड़ी थी..
दोनों अंदर आएं तो बीएड पर मालिकान को नंगी हालत में देख क्र शॉकेड कम् और एक्ससिटेड ज़यादा हो गयीं..
मैंने धीरे से दूर बंद करके लॉक कर दिया.. और बिना आवाज़ किये उनके पीछे आने लगा.. मालिकान को नंगा देखकर दोनों ने इस बात कारसे भी धयान हटा दिया था क दूर किसने खोला होगा..
दोनों बीएड के पास पोहंची..
भाभी:- वाह दीदी क्या सन बनाया हुआ है.. और... अर्र्रे ये क्या.??
पद्मा आंटी:- क्या हुआ मल्टी, ऐसा क्या देख लिया तुमने.?
भाभी:- पद्मा दीदी क बूब्स देखो, ऐसे लग रहा है, जैसे किसी ने मोहन में लेकर उन्हें चूसा हो.. देख तो सही अभी भी गीले han.aur उनपर दांतों क निशान भी दिख रहे हाँ... भाभी की बात सुनकर मालिकान का चेहरा मारे शर्म के लाल पड़ने लगा..
उन्हों ने झटसे अपनी टांगों को फोल्ड कर लिया.. पारर हाय रे किस्मत.. जिस चीज़ को वो छुपाना छह रही थी.. अपने पैरों को फोल्ड करने क चक्कर में खुद hi दिखा बैठी.... मालिकान की गीली पंतय दोनों को hi दिख गयी.. इस बार पद्मा आंटी भी शॉकेड हूँ गयी
पद्मा आंटी:- दीदी ये आपकी पंतय क्यों गीली है..
भाभी:- पद्मा तुम भी बुद्धू हो.. दीदी क बूब्स किसी ने चूसे हाँ. तभी तो दीदी की छूट ने पानी छोड़ा है...
पद्मा:- ाररी हैं.. ये तो कमाल हो गया मालती..
मालिकान का बास नहीं चल रहा था.. क बीएड फटे और वो उसमे छुप जाएँ.. उनका सर्र कुछ ज़यादा hi नीचे हो चूका था.. भाभी और पद्मा आंटी मालिकान के कुछ ज़ायदा hi मज़े ले रही थीं..
अब्ब इन दोनों को भी मज़े देने का टाइम आ गया था....
मैं भाबी क पीछे आया और अचानक से hi उन्हें पीछे से अपनी बहन में भर लिया.. इससे पहले hi मैंने अपना लुंड पेण्ट की ज़िप खोल कर बहार निकाल लिया था...
भाभी को पीछे से जकड़ा तो मेरा लुंड सीधा जा कर भाभी की गांड की दरार में जा फंसा...
भाभी:- oiiiiiiiiiii maaaaaaaaaa marrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiiii....
पद्मा आंटी और मालिकान ने मुद कर देखा तो मुझे देख कर पद्मा आंटी की ऑंखें बड़ी हो गए.. और मालिकान को कुछ हौसला मिला.. वर्ण पहले वो बहुत नर्वस हो चुकी थीं..
मैंने अपने लुंड को भाभी की गांड दबाना शुरू कर दिया.. और दोनों हाथों से भाभी क बूब्स को कस क दबाना शुरू कर दिया..
भाभी:- vvvvv....vijjjjjj..vijjuuuuuu tttt..tummmmmmm..
विजय:- हाँ मेरी रानी मैं hi हों.. मेरे लुंड को अपनी गांड पर महसूस करके अंदाज़ा नहीं हुआ क्या.. मैं पद्मा आंटी को देखकर बोलै.. तो पद्मा आंटी जो मुझे hi देख रही थीं.. अब्ब उनके चेहरे की बारी थी लाल होने की..
भाभी:- विज्जू छोडो मुझे..
मैंने अपने हाथ भाभी के बूब्स से हटाए और भाभी को बीएड पर धक्का दे दिया.. भाभी बीएड पर गिर, मैंने पीछे से उनके कमीज को उठा कर उनके चुत्तड़ो से ऊपर कर दिया..
पद्मा आंटी ने साड़ी पहनी हुई थी.. भाही ने शलवार कमीज..
मैंने भाभी के चुत्तड़ पार्स कमीज हटाई और उनकी शलवार को उठा कर चेक करने लगा क उनकी शलवार में डोरी है या इलास्टिक..
भाभी की शलवार में डोरी थी.. मैं भाभी को सीधा करने के मूड में नहीं था.. मैंने भाभी की शलवार की डोरी में अपनी उँगलियाँ फँसायें और एक झटका दे कर भाभी की शलवार की डोरी को तोड़ दिया.. डोरी टूटी तो साथ hi भाभी की शलवार भी फट गई..
भाभी:- विज्जू ये क्या कर रहे हो.. मेरी शलवार क्यों पहाड़ दी..
विजय:- मेरा मैं हुआ तो मैंने पहाड़ दी.. इतना बोल कर मैंने भाभी की पंतय भी नीचे सरका दी और अपने मोहन नीचे लेट हुए भाभी की गांड पर रख दिया.. मेरे मोहन से मेरी जीब निकली और भाभी की गांड के छेड़ को चाटने लगी...
भाभी:- siiiiiiiiiiii हाय्ययएईएए marrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiii vijuuuuuuuuuu
कितने बेशरम हो तुम, दोनों के सामने hi ये सबब कर रहे हो..
मैं लगा रहा भाभी की गांड को चाटने में.. भाभी की बात का जवाब मालिकान ने बहुत hi अच्छे से दे दिया..
मालिकान:- क्यों पहले हम दोनों से सामने अपनी गांड नहीं चटवाई क्या.. एक hi बार में मुझसे अपनी छूट और पद्मा से अपनी गांड चतवती हो.. अब्ब क्या हुआ करने दो न मज़ा विज्जु को.. जितनी आग तुम्हारी छूट में लगी है, तुम्हारे साथ ऐसा hi होने चाहिए.. विज्जू इसकी गांड पहाड़ दो, बड़ी कुरक है इसे गांड में..
भाभी डर गई..
भाभी:- नहीं विज्जू वहां मैट डालना प्लीज...
मई कौनसा अभी डालने वाला था.. अभी डाला तो 1 घंटा लग जाएगा पानी निकलने में... सबब को hi पता था, क टाइम कम् है तो मालिकान जिसकी मैंने झिझक ख़तम करदी थी, कुछ उनकी आँखों के सामने भाभी की गांड को चाट कर झिझक ख़तम कर दी थी..
भाभी और पद्मा आंटी दोनों hi मालिकान की सेक्स पार्टनर थी.. अब्ब मालिकान को दोनों से कैसे शर्म.. जो कुछ देर पहले उन्हें हो रही थी.. भाभी की गांड क नंगा होते hi साड़ी ख़तम हो गई.. मालिकान ने पद्मा आंटी को पकड़ा और बीएड पर खेंच लिया, उनके ऊपर चढ़ कर उन्हें किश करने लगी और साथ में hi पद्मा आंटी के दोनों बूब्स भी कस कस के दबाने लगीं..
पद्मा आंटी की झिझक कुछ कुछ बाकी थी, पारर उनकी छूट ने भी पानी निकलना शुरू कर दिया था.. वो झिझकती हुई भी मालिकान का साथ देने लगीं..
bhabhi:-(dono को देखती हुई) तो तुम दोनों से भी नहीं रहा गया.... विज्जू वहां से कर कुछ और करलो ना.. बोहत गुदगुदी हो रही है वहां मुझे...
मैंने भाभी की गांड से अपनी जीब हटाई.. भाभी को अच्छे से बीएड पर लिटाया.. फिर उनके ऊपर आ कर उनकी पहात चुकी शलवार से दिख रही छूट पर अपने लुंड को सेट किया, और भाभी क ऊपर छड्ड कर अपने लुंड को भाभी की छूट पर रगड़ने लगा....
भाभी:- अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह्ह विजजूउउ कितनी जल्दी तुमने मेरी छूट से पानी निकाल दिया.. कितनी गीली करदी है तुमने मेरी छूट.. अब्ब छूट को मूड में ला खड़ा कर hi दिया है, तो अब्ब तेज़ तेज़ रगड़ो अपने लुंड को मेरी छूट पर.. कोई भी आ सकता है, उससे पहले hi मुझे ठंडा कर देना प्लीज....
इतना बोल कर भाभी ने अपना हाथ आगे बढ़ा कर पद्मा आंटी की छूट पर रख दिए... मालिकान पद्मा आंटी क ऊपर छड़ी हुई उन्हें किश कर रही थी.. साथ में उनके बूब्स दबा रही थी.. भाभी का हाथ आगे बढ़ा तो उन्हें भाभी क हाथ को पद्मा आंटी की छूट पर रखने क लिए जगा दे दी थी...
टाइम कम् था, तो तीनो की hi छूट का पानी निकाल्न लेना चाहती थी. मेरा तो जल्दी निकलने से रहा.. मई भाभी की छूट को निचोड़ने क लिए अपने लुंड को अच्छे से उनकी छूट पर रगड़ रहा था.. भाभी की छूट पहले hi बहुत अच्छे से खुली हुई थी. तो मेरा लुंड कुछ कुछ भाभी की छूट के लिप्स को खोल कर छूट के छेड़ में भी घुस रहा था.. जिस वजा से भाभी जल्द hi चार्म के करीब पोहचने लगी थीं..
भाभी के दिल में मेरे लुंड को अपनी छूट में लेने की तालाब बहुत बढ़ी हु थी..
भाभी एक्ससिटेड हो कर अपनी गांड को उठा उठा कर मेरे लुंड से सर्विस करवा रही थी.. जितना गरम और मोटा मेरा लुंड था, भाभी को मज़ा तो फिर आना hi था.. भाभी क हाथ पद्मा आंटी की छूट पर कुछ ज़यादा hi चलने लगा था..
मतलब मेरे लुंड ने भाभी की छूट की अच्छे से बंद बजाई हुई थी.. मालिकान के भी आज रंग बदल चुके the..malikan पद्मा आंटी को अपने नीचे दबाये किसी माहिर खिलाडी की तरह से लगी हुई थीं...
उनकी झिझक ख़तम हुई तो वो पद्मा आंटी से पूरा पूरा मज़ा लेने लगीं..
कुछ देर गुज़री तो रूम में तीनो की सिसकियाँ गूंजने lagee...bhabhi ने अपना हाथ पद्मा आंटी की छूट से हटा लिया था.. मालिकान अब पद्मा आंटी को किश नहीं कर रही थीं.. वो पद्मा आंटी क बूब्स को दबाते हुए अपनी छूट को पद्मा आंटी की छूट पर पुरे जोश से रगड़ रही थीं...
मालिकान:- आअह्ह्ह्ह मेरी कुत्तिया... तेरी छूट पर अपनी छूट को रगड़ते हुए कितना मज़ा आता है.. अभी पंतय भी नहीं ुआती फिर भी तेरी छूट की गर्मी मेरी छूट को जला रही है...
पद्मा आंटी:- तू भी तो मेरी कुत्तिया है.. कितनी बार तूने मेरी छूट और गांड को छाता है.. अपनी पूरी जीब मेरी गांड में घुसाई है तुमने विज्जू की रंडी.
मई भाभी की छूट पर अपने लुंड को रगड़ते हुए दोनों की बातें सुनकर हैरान रह गया..
vijay:-(bhabhi की छूट से पानी निकलते हुए) भाभी ये दोनों कैसी बातें कर रही हाँ....
भाभी:- अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह विज्जउ और तेज़ मेरी छूट बरसने वाली है.. और तेज़.. ओह्ह्ह्हह अहह उफ्फ्फ्फ़ हाय विजजूउउ.. ये दोनों hi नहीं मैभी ऐसे hi गन्दी गन्दी बातें करती हों.. अभी तुमने हमारे रंग देखे hi कहाँ हाँ.. जब औरतों की छूट सालों से न चूड़े तो वो पागल होने लगती हाँ.. एक बार तुम्हारा लुंड तीनो की छूट में घुस गया ना तो देखना हम तीनो तुमसे ऐसे छुड़ेगी जैसे कोई रंडी चुदती है...... मालिकान की छूट हम तीनो में से सबब से ज़यादा गरम ही.. और पद्मा वो तो पूरी रंडी है साली कुटिये की छूट को एक बार क्या छठा मैंने.. मुझे भी गन्दी गन्दी बातें सीखा दी पद्मा रंडी ने.. हाई उफ्फ्फ्फ़ आह्हः
मेरी छूट पानी छोड़ने वाली है विजजूउउउ थोड़ा सा लुंड दाल कर धक्के मारदे ना प्लीज.....
मैं भाभी की बातें सुनकर हैरान तो था hi.. पर भाभी की बातें सुन कर मेरा लुंड कुछ और भी अकड़ गया था.. और भाभी की छूट पर बहुत जोरसे से रगड़ खा रहा था.. भाभी ने थोड़ा डालने को कहा तो मैंने आखरी झटके कुछ ज़यादा hi देने का मैं बना लिया.. मेरी रंडी बनना चाहती हाँ तीनो.. तो फिर कुछ तो झटका बनता है..
बास एक बार भाभी झाड़ ले.. मैंने थोड़ा सा लुंड भाभी की छूट में डाला और आगे पीछे करने लगा..
पद्मा और मालिकान भी आखरी स्टेज पर थीं.. भाभी भी आखरी स्टेज पर थी.. मैंने अपनी स्पीड कुछ और भी दी.. भाभी की छूट ने पानी छोड़ा तो भाभी एक तेज़ सिसकी लेते हुए ढीली पद गई..
मैं भी रुक गया.. मैंने अपना लुंड अच्छे से भाभी की छूट पर सेट कर दिया.. अंदर नहीं डाला... कुछ देर वेट किया भाभी खुद को रिलैक्स कर रही थी.. मैंने मालिकान और पद्मा आंटी की तरफ देखा तो वो दोनों भी झड़ने के बाद लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी...
मालिकान को मैंने गरम किया था, तो पद्मा आंटी भी कई दिनों से बेचैन थी.. इसलिए... इसलिए दोनों जल्दी hi जहद गयी ..
भाभी कुछ रिलैक्स हुई तो मैंने भाभी के चुत्तड़ो को पकड़ते हुए एक धक्का मार दिया.. मेरा लुंड भाभी की पानी छोड़ चुकी छूट में 4" तक्क घुसता चला गया..
भाभी जो कुछ रिलैक्स हो चुकी थी..
aiiiiiiiiiiiiiiii विजजूउउउउउ marrrrrrrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiiiiii टेरररी
bhaaabhhhiiiiiiiiiiiiiiii.. मेरी छूट को पहाड़ दियाआआ तुममनेई..
भाभी की तेज़ चीख निकल गई.. पहली बार उनकी छूट में मेरा मोटा लुंड घुसा था.. भाभी को दर्द तो होने hi था... मालिकान और पद्मा आंटी हमें देखने लगीं..
मालिकान:- विज्जू बीटा मल्टी चीख क्यों..
विजय:- पता नहीं मालिकान, मैं तो भाभी की छूट पर अपना लुंड hi रगड़ रहा हों..
bhabhi:-(rote हुए मालिकान से) विज्जू ने मेरी छूट में अपना मोटा घोड़े जैसा लुंड डाल दिया है दीदी.. मुझे बताया भी नहीं... कितना ज़ालिम है ना हमारा विज्जू...
मालिकान ने भाभी की बात सुनी तो झट से उठ कर मेरे पास आई और मेरे लुंड को देखने लगी.. जो भाभी की छूट में घुसा हुआ था...
मालिकान:- विज्जू तुमने तो सच में hi दाल दिया है...
विजय:- क्या दाल दिया है मालिकान..
मालिकान:- वही जो है तेरे पास.... मालिकान की छूट ने पानी छोड़ा तो फिरसे शरीफ बन्न गई थीं..
विजय:- कुछ देर पहले पद्मा आंटी से आप क्या कह रही थीं.... मैंने अपना लुंड हिलाया नै था, जितना भाभी की छूट में गया था, उल्टा hi रहने दिया..
मालिकान:- (हैरानगी से) मैं क्या कह रही थी पद्मा से.. कुछ भी तो नहीं कहा मैंने... तुमने क्या सुन लिया विज्जू बीटा............... भाभी अभी भी आंसू बहा रही थी....
मैंने एक हाथ से मालिकान के एक निप्पल को पकड़ कर मरोर दिया..
vijay:-jabb आपकी छूट पानी छोड़ने वाली थी, तो आप कैसे पद्मा आंटी को कुटिया कह रही थीं.. और तीनो जब एक दूसरे की छूट में मोहन घुसती हाँ तो क्या तब्ब आप तीनो मेरी रंडी बनने की बातें करने लगती हाँ.
मालिकान को एक झटका लगा मेरी बात सुनकर...
malikan:-mmmm.. मई ऐसा बोली क्या..
मैंने पद्मा आंटी को देखा वो मुझे देख रही थीं.. जब मैंने देखा तो अपनी नज़रें फेर लें.. ......... मैंने भाभी की छूट में अपने लुंड को थोड़ा सा पीछे खेंचा और फिरसे एक करारा शॉट मार दिया...
भाभी एक बार फिरसे चीख पड़ी..
भाभी:- विज्जउ मुझे मज़ा दे रहा है या ...
विजय:- भाभी आप सबब का फवौरीते hi तो है मेरा लुंड.. वही तो आपकी छूट में डाला है.. देखो कितनी जल्दी आपका नंबर लगा दिया मैंने.. अब्ब मालिकान और पद्मा आंटी से बोलो जो पहले ये दोनों बोल रही थीं..
bhabhi:-(padma से) रंडी तू hi कुछ बोलदे, वर्ण विज्जू मेरी छूट का हशर करदे गए.....
padma:-(chehra साइड में करते हुए) हाँ विज्जू मल्टी सही बोल रही है.. हमें छूट की गर्मी ने कुछ ज़यादा hi बेचैन किया हुआ है.. हम ऐसे hi गन्दी गन्दी बातें करते हाँ.. पता नहीं तुम्हारे साथ कैसे रहेगी हम तीनो... पर तुमने जो पूछा है वो सबब सच है..
मैंने अपने लुंड को प्यार से बहार निकला और प्यार से hi फिर भाभी की छूट में दाल दिया.. ऐसे hi मैंने अपना लुंड 4" तक्क भाभी की छूट में 8-10 बार किया.. फिर निकाल कर सीधा खड़ा हो गया..
भाभी ने चैन की सांस ली...
विजय:- मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, जैसे आप तीनो के मैं की चाह होगी, मैं वैसे hi तीनो को छोडूंगा....
मैंने पद्मा आंटी को बीएड पार्स उठा कर नीचे खड़ा किया और उनके होंटो को अपने होंटो में लेकर किश करने लगा.. पद्मा आंटी पहले तो मछलीन. फिर खुद पर काबू पाते हुए मेरा किश में साथ देने लगीं.. मैं पद्मा आंटी को किश करते हुए उनके बूब्स भी कस कस के दबाने लगा...
कुछ देर पद्मा आंटी को भी अपना प्यार दिया, फिर बाथरूम में घुस कर अपने लुंड को अच्छे से धोया.. लुंड को फिरसे छुपा कर बहार आ गया..
मैं अब्ब चलता हों, बहुत देर हो गई है.... बाकी का टाइम निकाल कर बहुत प्यार से और अच्छे से करूँगा...
तीनो की hi आँखों का रंग अब्ब बदल चूका था.. तीनो hi सालों से जिस की तमन्ना कर रही थी.. वो उन्हें अब्ब जल्द hi मिलता दिखने लगा था... उनके दिल अंदर से झूमने लगे थे.. जिस वजा से उनके चेहरे चमक रहे थे... मालिकान अपने नंगे दूध लिए मुझे प्यार से देख रही थीं.. और भाभी अपनी फटी हुई शलवार लिए मुझे निहार रही थी.. उनकी छूट में कुछ दर्द हुआ था.. तो उनकी दोनों पेअर कुछ खुले उहे थे..
इसी दर्द के लिए तो वो तड़प रही थीं.. पद्मा आंटी की भी आँखों में आशा की डीप जल उठे थे..... मैं तीनो को bye बोल कर रूम से निकल गया..
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पैलेस के पार्क वाली लाइट्स मैंने बंद करवा दी थीं.. जहाँ मई इस वक़्त लेता हुआ था, वहां अँधेरा था.. दूर से जल रही लाइट्स की मद्धम मद्धम रौशनी इस तरफ आ रही थी..
डिनर का टाइम अभी नहीं हुआ था... पैलेस के पार्क में मैं इस वक़्त माँ क साथ ग्रास पर लेता हुआ था..
हम दोनों hi अपना एक एक बाज़ो को फोल्ड करके अपने सरों को अपनी हथेलियों पर टिकाये हुए एक दूसरे की आँखों में गम थे... यहाँ ए हुए हमें अभी कुछ hi देर हुई थी.. और आते hi हम माँ बीटा ग्रास पर लेते हुए एक दूसरे की आँखों में गुम्म हो गए थे..
प्यार हो, बेशुमार भी हो, तो अँधेरा में भी आँखों की गहराई देखि जा सकती है, हलकी हलकी रौशनी में हम दोनों hi एक दूसरे की आँखों में उतर कर गहराई को नाप रहे थे.. हम दोनों के हाथ एक दूसरे की कमर पर थे.. और हम दोनों hi एक दूसरे की कमर को धीरे धीरे प्यार से सेहला रहे थे....
माँ ने आज साड़ी पहनी हुई थी.. इस वक़्त माँ की कमर मेरे हाथ के नीचे नंगी थी.. माँ की गरम और चमकदार कमर पर मेरा हाथ मज़े से हरकत कर रहा था. माँ की मुलायम कमर मेरे हाथ क नीचे किसी मछली की तरह के जैसे लग रही थी. हाथ गिरते हुए मुझे बहुत मज़ा मिल रहा था... और माँ ने भी मेरी श्रित के अंदर हाथ दाल कर मेरे नंगे बदन पर अपने नमो मुलायम हाथ को फेरा रही थी... माँ की उँगलियाँ मेरी कमर पर चलते हुए मुझे और भी सुरूर दे रही थी..
हम दोनों hi इस वक़्त सुरूर की इन्तहा में पोहचने हुए थे.. एक माँ माँ लम्स. दूसरा मेहबूब के वजूद का लम्स.. सालों की तड़प.. फिर एक दूसरे को पा के लेने के बाद की फीलिंग्स...
ठंडी ठंडी हवा... मौसम जितना बहार से सुहाना था, हमारे अंदर का मौसम बहार के मौसम से हज़ार गुना बढ़कर सुहाना था.. धीरे धीरे हम एक दूसरे
की आँखों में उतारते हुए एक दूसरे के होंटो की और बढ़ने लगे.. और फिर कुछ hi पलों में हमारे होंटो एक दूसरे से जा मिले....
जैसे hi हमारे होंठ आपस में मिले.. चरों और शहनाइयां सी गूँज उठीं..
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मई जैसे hi मालिकान की पंतय उतारने लगा.. तो किसी ने दूर नॉक कर दिया..
मई तो नार्मल hi रहा, पर मालिकान एक झटके में hi उठ बैठी..
मालिकान:- विज्जू बीटा कोई आ गया है तू ऐसा कर बाथरूम में जा कर छुप जा..
मैं भी सीधा हो गया.. और मालिकान के होंटो को एक बार फिरसे अपने होंटो में लेकर अच्छे से चूस लिया...
विजय:- कोई दूर पर है तो क्या हुआ, उसे भगा देते हाँ, अभी मज़ा करने दो न..
मालिकान ने मुझे साइड में धक्का दिया..
मालिकान:- तुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा.. पर मुझे तो फर्क पड़ता है न.. अभी मई इस सबब की आदि नहीं हुई हों, कोई मुझसे सवाल करेगा, तो कैसे मई जवाब दे पाऊँगी..
हम दोनों hi धीरे धीरे बात कर रहे the..maine मालिकान ने बूब्स को पकड़ कर दबा दिया..
विजय:- आप यही से पूछ लें बहार कौन है..
मालिकान को मेरी बात भी सही लगी.. इतनी जल्दी तो वो सबब सेट करके दूर ओपन करने से रगीन.. पंतय के इलावा उनके बदन पर था hi क्या, उन्हें कपडे पहने कर दूर खोलने में टाइम लग्न था..
मालिकान:- (ऊंची आवाज़ में) कौन है बहार...
बहार से:- मई हों दीदी पद्मा... साथ में मतली भी है..
विजय:- चलो अब्ब तो आपका काम हो गया, कोई टेंशन नहीं है.. उन दोनों से कैसी शर्म.. सबब hi तो आप दोनों को दिखा चुकी हाँ.. इतना बोलते हुए मैं झट से बीएड से उतरा.. और जा कर दूर खोल दिया.. दूर खोलते hi साइड में हो गया.. बहार कड़ी हुई दोनों की hi नज़र मुझपर नहीं पड़ी थी..
दोनों अंदर आएं तो बीएड पर मालिकान को नंगी हालत में देख क्र शॉकेड कम् और एक्ससिटेड ज़यादा हो गयीं..
मैंने धीरे से दूर बंद करके लॉक कर दिया.. और बिना आवाज़ किये उनके पीछे आने लगा.. मालिकान को नंगा देखकर दोनों ने इस बात कारसे भी धयान हटा दिया था क दूर किसने खोला होगा..
दोनों बीएड के पास पोहंची..
भाभी:- वाह दीदी क्या सन बनाया हुआ है.. और... अर्र्रे ये क्या.??
पद्मा आंटी:- क्या हुआ मल्टी, ऐसा क्या देख लिया तुमने.?
भाभी:- पद्मा दीदी क बूब्स देखो, ऐसे लग रहा है, जैसे किसी ने मोहन में लेकर उन्हें चूसा हो.. देख तो सही अभी भी गीले han.aur उनपर दांतों क निशान भी दिख रहे हाँ... भाभी की बात सुनकर मालिकान का चेहरा मारे शर्म के लाल पड़ने लगा..
उन्हों ने झटसे अपनी टांगों को फोल्ड कर लिया.. पारर हाय रे किस्मत.. जिस चीज़ को वो छुपाना छह रही थी.. अपने पैरों को फोल्ड करने क चक्कर में खुद hi दिखा बैठी.... मालिकान की गीली पंतय दोनों को hi दिख गयी.. इस बार पद्मा आंटी भी शॉकेड हूँ गयी
पद्मा आंटी:- दीदी ये आपकी पंतय क्यों गीली है..
भाभी:- पद्मा तुम भी बुद्धू हो.. दीदी क बूब्स किसी ने चूसे हाँ. तभी तो दीदी की छूट ने पानी छोड़ा है...
पद्मा:- ाररी हैं.. ये तो कमाल हो गया मालती..
मालिकान का बास नहीं चल रहा था.. क बीएड फटे और वो उसमे छुप जाएँ.. उनका सर्र कुछ ज़यादा hi नीचे हो चूका था.. भाभी और पद्मा आंटी मालिकान के कुछ ज़ायदा hi मज़े ले रही थीं..
अब्ब इन दोनों को भी मज़े देने का टाइम आ गया था....
मैं भाबी क पीछे आया और अचानक से hi उन्हें पीछे से अपनी बहन में भर लिया.. इससे पहले hi मैंने अपना लुंड पेण्ट की ज़िप खोल कर बहार निकाल लिया था...
भाभी को पीछे से जकड़ा तो मेरा लुंड सीधा जा कर भाभी की गांड की दरार में जा फंसा...
भाभी:- oiiiiiiiiiii maaaaaaaaaa marrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiiii....
पद्मा आंटी और मालिकान ने मुद कर देखा तो मुझे देख कर पद्मा आंटी की ऑंखें बड़ी हो गए.. और मालिकान को कुछ हौसला मिला.. वर्ण पहले वो बहुत नर्वस हो चुकी थीं..
मैंने अपने लुंड को भाभी की गांड दबाना शुरू कर दिया.. और दोनों हाथों से भाभी क बूब्स को कस क दबाना शुरू कर दिया..
भाभी:- vvvvv....vijjjjjj..vijjuuuuuu tttt..tummmmmmm..
विजय:- हाँ मेरी रानी मैं hi हों.. मेरे लुंड को अपनी गांड पर महसूस करके अंदाज़ा नहीं हुआ क्या.. मैं पद्मा आंटी को देखकर बोलै.. तो पद्मा आंटी जो मुझे hi देख रही थीं.. अब्ब उनके चेहरे की बारी थी लाल होने की..
भाभी:- विज्जू छोडो मुझे..
मैंने अपने हाथ भाभी के बूब्स से हटाए और भाभी को बीएड पर धक्का दे दिया.. भाभी बीएड पर गिर, मैंने पीछे से उनके कमीज को उठा कर उनके चुत्तड़ो से ऊपर कर दिया..
पद्मा आंटी ने साड़ी पहनी हुई थी.. भाही ने शलवार कमीज..
मैंने भाभी के चुत्तड़ पार्स कमीज हटाई और उनकी शलवार को उठा कर चेक करने लगा क उनकी शलवार में डोरी है या इलास्टिक..
भाभी की शलवार में डोरी थी.. मैं भाभी को सीधा करने के मूड में नहीं था.. मैंने भाभी की शलवार की डोरी में अपनी उँगलियाँ फँसायें और एक झटका दे कर भाभी की शलवार की डोरी को तोड़ दिया.. डोरी टूटी तो साथ hi भाभी की शलवार भी फट गई..
भाभी:- विज्जू ये क्या कर रहे हो.. मेरी शलवार क्यों पहाड़ दी..
विजय:- मेरा मैं हुआ तो मैंने पहाड़ दी.. इतना बोल कर मैंने भाभी की पंतय भी नीचे सरका दी और अपने मोहन नीचे लेट हुए भाभी की गांड पर रख दिया.. मेरे मोहन से मेरी जीब निकली और भाभी की गांड के छेड़ को चाटने लगी...
भाभी:- siiiiiiiiiiii हाय्ययएईएए marrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiii vijuuuuuuuuuu
कितने बेशरम हो तुम, दोनों के सामने hi ये सबब कर रहे हो..
मैं लगा रहा भाभी की गांड को चाटने में.. भाभी की बात का जवाब मालिकान ने बहुत hi अच्छे से दे दिया..
मालिकान:- क्यों पहले हम दोनों से सामने अपनी गांड नहीं चटवाई क्या.. एक hi बार में मुझसे अपनी छूट और पद्मा से अपनी गांड चतवती हो.. अब्ब क्या हुआ करने दो न मज़ा विज्जु को.. जितनी आग तुम्हारी छूट में लगी है, तुम्हारे साथ ऐसा hi होने चाहिए.. विज्जू इसकी गांड पहाड़ दो, बड़ी कुरक है इसे गांड में..
भाभी डर गई..
भाभी:- नहीं विज्जू वहां मैट डालना प्लीज...
मई कौनसा अभी डालने वाला था.. अभी डाला तो 1 घंटा लग जाएगा पानी निकलने में... सबब को hi पता था, क टाइम कम् है तो मालिकान जिसकी मैंने झिझक ख़तम करदी थी, कुछ उनकी आँखों के सामने भाभी की गांड को चाट कर झिझक ख़तम कर दी थी..
भाभी और पद्मा आंटी दोनों hi मालिकान की सेक्स पार्टनर थी.. अब्ब मालिकान को दोनों से कैसे शर्म.. जो कुछ देर पहले उन्हें हो रही थी.. भाभी की गांड क नंगा होते hi साड़ी ख़तम हो गई.. मालिकान ने पद्मा आंटी को पकड़ा और बीएड पर खेंच लिया, उनके ऊपर चढ़ कर उन्हें किश करने लगी और साथ में hi पद्मा आंटी के दोनों बूब्स भी कस कस के दबाने लगीं..
पद्मा आंटी की झिझक कुछ कुछ बाकी थी, पारर उनकी छूट ने भी पानी निकलना शुरू कर दिया था.. वो झिझकती हुई भी मालिकान का साथ देने लगीं..
bhabhi:-(dono को देखती हुई) तो तुम दोनों से भी नहीं रहा गया.... विज्जू वहां से कर कुछ और करलो ना.. बोहत गुदगुदी हो रही है वहां मुझे...
मैंने भाभी की गांड से अपनी जीब हटाई.. भाभी को अच्छे से बीएड पर लिटाया.. फिर उनके ऊपर आ कर उनकी पहात चुकी शलवार से दिख रही छूट पर अपने लुंड को सेट किया, और भाभी क ऊपर छड्ड कर अपने लुंड को भाभी की छूट पर रगड़ने लगा....
भाभी:- अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह्ह विजजूउउ कितनी जल्दी तुमने मेरी छूट से पानी निकाल दिया.. कितनी गीली करदी है तुमने मेरी छूट.. अब्ब छूट को मूड में ला खड़ा कर hi दिया है, तो अब्ब तेज़ तेज़ रगड़ो अपने लुंड को मेरी छूट पर.. कोई भी आ सकता है, उससे पहले hi मुझे ठंडा कर देना प्लीज....
इतना बोल कर भाभी ने अपना हाथ आगे बढ़ा कर पद्मा आंटी की छूट पर रख दिए... मालिकान पद्मा आंटी क ऊपर छड़ी हुई उन्हें किश कर रही थी.. साथ में उनके बूब्स दबा रही थी.. भाभी का हाथ आगे बढ़ा तो उन्हें भाभी क हाथ को पद्मा आंटी की छूट पर रखने क लिए जगा दे दी थी...
टाइम कम् था, तो तीनो की hi छूट का पानी निकाल्न लेना चाहती थी. मेरा तो जल्दी निकलने से रहा.. मई भाभी की छूट को निचोड़ने क लिए अपने लुंड को अच्छे से उनकी छूट पर रगड़ रहा था.. भाभी की छूट पहले hi बहुत अच्छे से खुली हुई थी. तो मेरा लुंड कुछ कुछ भाभी की छूट के लिप्स को खोल कर छूट के छेड़ में भी घुस रहा था.. जिस वजा से भाभी जल्द hi चार्म के करीब पोहचने लगी थीं..
भाभी के दिल में मेरे लुंड को अपनी छूट में लेने की तालाब बहुत बढ़ी हु थी..
भाभी एक्ससिटेड हो कर अपनी गांड को उठा उठा कर मेरे लुंड से सर्विस करवा रही थी.. जितना गरम और मोटा मेरा लुंड था, भाभी को मज़ा तो फिर आना hi था.. भाभी क हाथ पद्मा आंटी की छूट पर कुछ ज़यादा hi चलने लगा था..
मतलब मेरे लुंड ने भाभी की छूट की अच्छे से बंद बजाई हुई थी.. मालिकान के भी आज रंग बदल चुके the..malikan पद्मा आंटी को अपने नीचे दबाये किसी माहिर खिलाडी की तरह से लगी हुई थीं...
उनकी झिझक ख़तम हुई तो वो पद्मा आंटी से पूरा पूरा मज़ा लेने लगीं..
कुछ देर गुज़री तो रूम में तीनो की सिसकियाँ गूंजने lagee...bhabhi ने अपना हाथ पद्मा आंटी की छूट से हटा लिया था.. मालिकान अब पद्मा आंटी को किश नहीं कर रही थीं.. वो पद्मा आंटी क बूब्स को दबाते हुए अपनी छूट को पद्मा आंटी की छूट पर पुरे जोश से रगड़ रही थीं...
मालिकान:- आअह्ह्ह्ह मेरी कुत्तिया... तेरी छूट पर अपनी छूट को रगड़ते हुए कितना मज़ा आता है.. अभी पंतय भी नहीं ुआती फिर भी तेरी छूट की गर्मी मेरी छूट को जला रही है...
पद्मा आंटी:- तू भी तो मेरी कुत्तिया है.. कितनी बार तूने मेरी छूट और गांड को छाता है.. अपनी पूरी जीब मेरी गांड में घुसाई है तुमने विज्जू की रंडी.
मई भाभी की छूट पर अपने लुंड को रगड़ते हुए दोनों की बातें सुनकर हैरान रह गया..
vijay:-(bhabhi की छूट से पानी निकलते हुए) भाभी ये दोनों कैसी बातें कर रही हाँ....
भाभी:- अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह विज्जउ और तेज़ मेरी छूट बरसने वाली है.. और तेज़.. ओह्ह्ह्हह अहह उफ्फ्फ्फ़ हाय विजजूउउ.. ये दोनों hi नहीं मैभी ऐसे hi गन्दी गन्दी बातें करती हों.. अभी तुमने हमारे रंग देखे hi कहाँ हाँ.. जब औरतों की छूट सालों से न चूड़े तो वो पागल होने लगती हाँ.. एक बार तुम्हारा लुंड तीनो की छूट में घुस गया ना तो देखना हम तीनो तुमसे ऐसे छुड़ेगी जैसे कोई रंडी चुदती है...... मालिकान की छूट हम तीनो में से सबब से ज़यादा गरम ही.. और पद्मा वो तो पूरी रंडी है साली कुटिये की छूट को एक बार क्या छठा मैंने.. मुझे भी गन्दी गन्दी बातें सीखा दी पद्मा रंडी ने.. हाई उफ्फ्फ्फ़ आह्हः
मेरी छूट पानी छोड़ने वाली है विजजूउउउ थोड़ा सा लुंड दाल कर धक्के मारदे ना प्लीज.....
मैं भाभी की बातें सुनकर हैरान तो था hi.. पर भाभी की बातें सुन कर मेरा लुंड कुछ और भी अकड़ गया था.. और भाभी की छूट पर बहुत जोरसे से रगड़ खा रहा था.. भाभी ने थोड़ा डालने को कहा तो मैंने आखरी झटके कुछ ज़यादा hi देने का मैं बना लिया.. मेरी रंडी बनना चाहती हाँ तीनो.. तो फिर कुछ तो झटका बनता है..
बास एक बार भाभी झाड़ ले.. मैंने थोड़ा सा लुंड भाभी की छूट में डाला और आगे पीछे करने लगा..
पद्मा और मालिकान भी आखरी स्टेज पर थीं.. भाभी भी आखरी स्टेज पर थी.. मैंने अपनी स्पीड कुछ और भी दी.. भाभी की छूट ने पानी छोड़ा तो भाभी एक तेज़ सिसकी लेते हुए ढीली पद गई..
मैं भी रुक गया.. मैंने अपना लुंड अच्छे से भाभी की छूट पर सेट कर दिया.. अंदर नहीं डाला... कुछ देर वेट किया भाभी खुद को रिलैक्स कर रही थी.. मैंने मालिकान और पद्मा आंटी की तरफ देखा तो वो दोनों भी झड़ने के बाद लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी...
मालिकान को मैंने गरम किया था, तो पद्मा आंटी भी कई दिनों से बेचैन थी.. इसलिए... इसलिए दोनों जल्दी hi जहद गयी ..
भाभी कुछ रिलैक्स हुई तो मैंने भाभी के चुत्तड़ो को पकड़ते हुए एक धक्का मार दिया.. मेरा लुंड भाभी की पानी छोड़ चुकी छूट में 4" तक्क घुसता चला गया..
भाभी जो कुछ रिलैक्स हो चुकी थी..
aiiiiiiiiiiiiiiii विजजूउउउउउ marrrrrrrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiiiiii टेरररी
bhaaabhhhiiiiiiiiiiiiiiii.. मेरी छूट को पहाड़ दियाआआ तुममनेई..
भाभी की तेज़ चीख निकल गई.. पहली बार उनकी छूट में मेरा मोटा लुंड घुसा था.. भाभी को दर्द तो होने hi था... मालिकान और पद्मा आंटी हमें देखने लगीं..
मालिकान:- विज्जू बीटा मल्टी चीख क्यों..
विजय:- पता नहीं मालिकान, मैं तो भाभी की छूट पर अपना लुंड hi रगड़ रहा हों..
bhabhi:-(rote हुए मालिकान से) विज्जू ने मेरी छूट में अपना मोटा घोड़े जैसा लुंड डाल दिया है दीदी.. मुझे बताया भी नहीं... कितना ज़ालिम है ना हमारा विज्जू...
मालिकान ने भाभी की बात सुनी तो झट से उठ कर मेरे पास आई और मेरे लुंड को देखने लगी.. जो भाभी की छूट में घुसा हुआ था...
मालिकान:- विज्जू तुमने तो सच में hi दाल दिया है...
विजय:- क्या दाल दिया है मालिकान..
मालिकान:- वही जो है तेरे पास.... मालिकान की छूट ने पानी छोड़ा तो फिरसे शरीफ बन्न गई थीं..
विजय:- कुछ देर पहले पद्मा आंटी से आप क्या कह रही थीं.... मैंने अपना लुंड हिलाया नै था, जितना भाभी की छूट में गया था, उल्टा hi रहने दिया..
मालिकान:- (हैरानगी से) मैं क्या कह रही थी पद्मा से.. कुछ भी तो नहीं कहा मैंने... तुमने क्या सुन लिया विज्जू बीटा............... भाभी अभी भी आंसू बहा रही थी....
मैंने एक हाथ से मालिकान के एक निप्पल को पकड़ कर मरोर दिया..
vijay:-jabb आपकी छूट पानी छोड़ने वाली थी, तो आप कैसे पद्मा आंटी को कुटिया कह रही थीं.. और तीनो जब एक दूसरे की छूट में मोहन घुसती हाँ तो क्या तब्ब आप तीनो मेरी रंडी बनने की बातें करने लगती हाँ.
मालिकान को एक झटका लगा मेरी बात सुनकर...
malikan:-mmmm.. मई ऐसा बोली क्या..
मैंने पद्मा आंटी को देखा वो मुझे देख रही थीं.. जब मैंने देखा तो अपनी नज़रें फेर लें.. ......... मैंने भाभी की छूट में अपने लुंड को थोड़ा सा पीछे खेंचा और फिरसे एक करारा शॉट मार दिया...
भाभी एक बार फिरसे चीख पड़ी..
भाभी:- विज्जउ मुझे मज़ा दे रहा है या ...
विजय:- भाभी आप सबब का फवौरीते hi तो है मेरा लुंड.. वही तो आपकी छूट में डाला है.. देखो कितनी जल्दी आपका नंबर लगा दिया मैंने.. अब्ब मालिकान और पद्मा आंटी से बोलो जो पहले ये दोनों बोल रही थीं..
bhabhi:-(padma से) रंडी तू hi कुछ बोलदे, वर्ण विज्जू मेरी छूट का हशर करदे गए.....
padma:-(chehra साइड में करते हुए) हाँ विज्जू मल्टी सही बोल रही है.. हमें छूट की गर्मी ने कुछ ज़यादा hi बेचैन किया हुआ है.. हम ऐसे hi गन्दी गन्दी बातें करते हाँ.. पता नहीं तुम्हारे साथ कैसे रहेगी हम तीनो... पर तुमने जो पूछा है वो सबब सच है..
मैंने अपने लुंड को प्यार से बहार निकला और प्यार से hi फिर भाभी की छूट में दाल दिया.. ऐसे hi मैंने अपना लुंड 4" तक्क भाभी की छूट में 8-10 बार किया.. फिर निकाल कर सीधा खड़ा हो गया..
भाभी ने चैन की सांस ली...
विजय:- मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, जैसे आप तीनो के मैं की चाह होगी, मैं वैसे hi तीनो को छोडूंगा....
मैंने पद्मा आंटी को बीएड पार्स उठा कर नीचे खड़ा किया और उनके होंटो को अपने होंटो में लेकर किश करने लगा.. पद्मा आंटी पहले तो मछलीन. फिर खुद पर काबू पाते हुए मेरा किश में साथ देने लगीं.. मैं पद्मा आंटी को किश करते हुए उनके बूब्स भी कस कस के दबाने लगा...
कुछ देर पद्मा आंटी को भी अपना प्यार दिया, फिर बाथरूम में घुस कर अपने लुंड को अच्छे से धोया.. लुंड को फिरसे छुपा कर बहार आ गया..
मैं अब्ब चलता हों, बहुत देर हो गई है.... बाकी का टाइम निकाल कर बहुत प्यार से और अच्छे से करूँगा...
तीनो की hi आँखों का रंग अब्ब बदल चूका था.. तीनो hi सालों से जिस की तमन्ना कर रही थी.. वो उन्हें अब्ब जल्द hi मिलता दिखने लगा था... उनके दिल अंदर से झूमने लगे थे.. जिस वजा से उनके चेहरे चमक रहे थे... मालिकान अपने नंगे दूध लिए मुझे प्यार से देख रही थीं.. और भाभी अपनी फटी हुई शलवार लिए मुझे निहार रही थी.. उनकी छूट में कुछ दर्द हुआ था.. तो उनकी दोनों पेअर कुछ खुले उहे थे..
इसी दर्द के लिए तो वो तड़प रही थीं.. पद्मा आंटी की भी आँखों में आशा की डीप जल उठे थे..... मैं तीनो को bye बोल कर रूम से निकल गया..
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पैलेस के पार्क वाली लाइट्स मैंने बंद करवा दी थीं.. जहाँ मई इस वक़्त लेता हुआ था, वहां अँधेरा था.. दूर से जल रही लाइट्स की मद्धम मद्धम रौशनी इस तरफ आ रही थी..
डिनर का टाइम अभी नहीं हुआ था... पैलेस के पार्क में मैं इस वक़्त माँ क साथ ग्रास पर लेता हुआ था..
हम दोनों hi अपना एक एक बाज़ो को फोल्ड करके अपने सरों को अपनी हथेलियों पर टिकाये हुए एक दूसरे की आँखों में गम थे... यहाँ ए हुए हमें अभी कुछ hi देर हुई थी.. और आते hi हम माँ बीटा ग्रास पर लेते हुए एक दूसरे की आँखों में गुम्म हो गए थे..
प्यार हो, बेशुमार भी हो, तो अँधेरा में भी आँखों की गहराई देखि जा सकती है, हलकी हलकी रौशनी में हम दोनों hi एक दूसरे की आँखों में उतर कर गहराई को नाप रहे थे.. हम दोनों के हाथ एक दूसरे की कमर पर थे.. और हम दोनों hi एक दूसरे की कमर को धीरे धीरे प्यार से सेहला रहे थे....
माँ ने आज साड़ी पहनी हुई थी.. इस वक़्त माँ की कमर मेरे हाथ के नीचे नंगी थी.. माँ की गरम और चमकदार कमर पर मेरा हाथ मज़े से हरकत कर रहा था. माँ की मुलायम कमर मेरे हाथ क नीचे किसी मछली की तरह के जैसे लग रही थी. हाथ गिरते हुए मुझे बहुत मज़ा मिल रहा था... और माँ ने भी मेरी श्रित के अंदर हाथ दाल कर मेरे नंगे बदन पर अपने नमो मुलायम हाथ को फेरा रही थी... माँ की उँगलियाँ मेरी कमर पर चलते हुए मुझे और भी सुरूर दे रही थी..
हम दोनों hi इस वक़्त सुरूर की इन्तहा में पोहचने हुए थे.. एक माँ माँ लम्स. दूसरा मेहबूब के वजूद का लम्स.. सालों की तड़प.. फिर एक दूसरे को पा के लेने के बाद की फीलिंग्स...
ठंडी ठंडी हवा... मौसम जितना बहार से सुहाना था, हमारे अंदर का मौसम बहार के मौसम से हज़ार गुना बढ़कर सुहाना था.. धीरे धीरे हम एक दूसरे
की आँखों में उतारते हुए एक दूसरे के होंटो की और बढ़ने लगे.. और फिर कुछ hi पलों में हमारे होंटो एक दूसरे से जा मिले....
जैसे hi हमारे होंठ आपस में मिले.. चरों और शहनाइयां सी गूँज उठीं..
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