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मैं अपने रूम में पोंहचा तो माँ और तीनो तितलियाँ बीएड पर बैठी हुए थी.
माँ:- बोल आया अपनी दीदी को विज्जू बीटा..
विजय:- हाँ माँ मैंने दीदी से बोल दिया है. वो तो ये सुनते hi"aaj nahi'kal" बहुत खुश हो गई थी... वो खुद भी कुछ बेचैन थीं..
प्रिय:- (हस्ते हुए) छूट खुलवाना आसान थोड़ी न है..
प्रिय की बात पारर सबब hi हस्सन लगे.
मई बीएड पर ला जा कर माँ की गॉड में सर्र रख कर लेट गया..
प्रिय मेरे ऊपर आ कर लेट गई. मेरे गालों पर और मेरे होंटो पर किश करने क बाद मेरे आँखों में देखने लगी.. प्रिय कुछ देर ऐसे hi मुझे देखती रही.. पालक तक्क नहीं झपक रही थी.
विजय :- क्या देख रही हो मेरी तितली..
प्रिय:- खुद को देख रही हों तुम्हारी आँखों में..
विजय:- तो फिर देख लिया खुद को मेरी आँखों में ..
प्रिय:- हाँ खुद क साथ सबब को भी तुम्हारी आँखों में देख लिए है मैंने.
जहान्वी:- प्रिय ये तुमने सही बोलै. विज्जु क दिल में हम सबब हाँ, तो हम सबब hi विज्जू की आँखों में दिखेंगे ना..
श्रुति:- मैं भी नज़र आई हों क्या प्रिय.??
प्रिय:- हाँ श्रुति तुम भी मुझे विज्जू की आँखों में नज़र आई हो..
श्रुति:- तो फिर मैं क्या कर रही थी विज्जू की आँखों में..
जहान्वी:- हाँ प्रिय मुझे भी बताओ, मैं विज्जू की आँखों में क्या कर रही थी.
प्रिय:- विज्जू की आँखों से होते हुए मैं विज्जू क दिल में उत्तरी तो मुझे वहां एक प्यार भरी दुन्या दिखी, जहाँ विज्जू क दिल में रहने वाले सभी हस्सी ख़ुशी एक दूसरे के हाथो को थामे हुए मुझे दिख रहे थे.. और हम तीनो माँ क साथ विज्जू से प्यार कर रही हाँ.. और विज्जू सबब को hi पुरे मन से अपना प्यार बाँट रहा था...
माँ:- चुदाई वाला प्यार बाँट रहा था, या ...... माँ नौटंकी करते हुए बोली.
माँ की मसखरी से हम सबब hi हस्सन लगे...
प्रिय:- माँ विज्जू के प्यार का हर रंग hi तो हमारे लिए सकूँ लुटाने वाला होता है... चुदाई वाला प्यार हम कौन सा वासना क लिए करते हाँ.. हमारी छूट की आग भी तो विज्जू के लिए hi है.. विज्जू क बिना इसे भी भड़कने की इजाज़त नहीं है....
माँ:- तुम ठीक बोली प्रिय बेटी.. ये सबब hi विज्जउ बीटा क प्यार क रंग हाँ.. विज्जू अब्ब हमारे पास है तो सभी रंग भी तो हमे अपने विज्जू से चाहिए.. और चुदाई वाला रंग तो फिर भी ाअत्मा मिलान होता है... छूट की आग तो कैसे भी करके बुझ जाती है.. पारर हमारी आत्मा तो बास विज्जू क सुपर्ष के लिए बेचैन रहती है..
माँ एक हाथ से मेरे सर्र क बालों को सहलाने लगी तो दूसरे हाथ से प्रिय क सर्र को..... श्रुति प्रिय के चुत्तड़ को सेहला रही थी. तो जहान्वी प्रिय क हाथ को पकडे सेहला रही थी.. मेरी hi तरह से बाकी सबब भी प्रिय से बहुत ज़यादा लाड किया करती थीं.. मैं सबब के लिए खास था, तो प्रिय भी सबब के लिए ख़ास थी... मेरी गैर मौजूदगी में सभी ने प्रिय को बहुत प्यार दिया था... प्रिय मेरे बाद सबब की लाड़ली थी.. प्रिय मेरी और माँ की hi नहीं जहान्वी और श्रुति की भी लाड़ली बन बाई थी...
विजय:- और आत्मा मिलान क लिए मेरे लुंड को बहुत ख़ुशी होती है..
priya:-wo तो मुझे भी दिख रहा है. अभी से hi खड़ा हो कर मुझे चुभने लगा है..
जहान्वी:- उसे तो आदत रहने लगी है, खड़े रहने की... जैसे हमारी कसार गीली रहा करती थी विज्जू के लिए..
माँ:- विज्जउ बीटा, कोठे से निकलने क बाद का हमे सबब कुछ नहीं पता, तू हमे सबब आज तफ्सील से बता, बड़ा मंत्र है तेरे himmat-wala बनने क सफर को जाने का..
माँ की बात सुन कर तीनो भी बोल पड़ी..
तीनो:- हाँ विज्जू हमे भी सबब जानना है... तुम Hiammat-Wala कैसे बने.
माँ:- (तीनो से) विज्जू बीटा क लिए ये सफर कितना मुश्किल था वो तो हमने जान hi लिया था, वो सबब शॉर्टकट डिटेल थी... पारर था कितना मुश्किल न, जैसे आज हमारा विज्जू बन्न चूका है.. इस मंज़िल तक्क पोहचने क लिए कितनी पीडन झेली होंगी हमारे विज्जू ने ...............माँ बात करते हुए मेरी पीड़ा को खुद में महसूस करते हुए रोने आंसू बहाने लगी..
विजय:- माँ, मेरा आप तक्क पोहचने का रास्ता hi इतना कांटो भरा था, मुझे आप तक्क पोहचने क लिए उन्ही कांटो के ऊपर से गुज़ारना पड़ा, पीड़ा तो फिर मिलनी hi थी... और फिर ऐसे hi तो नहीं हर किसी को अपनी मंज़िल मिल जाती... मेरी मैनिल भी तो इस दुन्या में चाँद गिनी चुनी मुश्किल तरीन मंज़िलो में से एक थी. जिस्सको पा लेना नामुमकिन की हद्द तक्क मुश्किल होता है..... आप सबब मुझसे इतनी दूर थे क आप सबब तक पोहचने क लिए मुझे ये दर्द झेलना hi था...
माँ:- हाँ विज्जू बीटा, हम भी सबब समझते हाँ. पर दिल को भी तो वही दर्द होने लगता है ना, जो तुमने झेले हाँ, हम सबब एक दूसरे से आत्ताच हाँ ना..
तो एक को दर्द होगा तो दूसरे को भी वैसा hi दर्द सहना पड़ेगा..
प्रिय:- विजजूउ भाई, हमे बाओ ना, कैसे तुम स्टेप बी स्टेप Himmat-Wala बने.
विजय:- प्रिय मेरी जान, तुम सबब मेरे दिल में थे, और तुम सबब क लिए मेरे दिल में हर वक़्त बहुत सा दर्द रहने लगा था, तब्ब मुझे पता था क तुम सबब के लिए मैं कुछ नहीं कर सकता, मेरी आगे भी कम् थी, और मुझे कुछ समझ भी नहीं थी, क मैं कैसे इस काबिल बन्न सकता हों. क मैं तुम सबब को कोठे वाली ज़िन्दगी से निकाल सकूं.. और मैं ये भी नहीं जानता था क मुझे इस सब में कितना समय लगने वाला है. और फिर जितना समय मुझे लगने वाला था, डर था मेरे लेट होने से कही कुछ उल्टा सीधा न हो जाए, तुम सबब को कही मुझसे और भी दूर न कर दिया जाए...
इस सबब क चलते हर्र कुछ वक़्त क बाद मेरी दिमागी हालत बिगड़ने लगती थी, मेरे लिए खुद पर काबू पाना मुमकिन नहीं रहता था..... फिर मुझे पूजा दीदी मिलें, जिन्हो ने मुझे आप सबब क जैसा hi प्यार देना शुरू कर दिया.. और मुझे भी पूजा दीदी में आप सबब क चेहरे hi दिखने लगे थे... पहले मैं तुम सबब से दूर था, तो मेरे लिए ये सबब सहन करना मुमकिन नहीं था.... पर फिर मुझे पूजा दीदी में तुम सबब का प्यार और चेहरे दिखने लगे.. पूजा दीदी ने मुझे माँ के जैसे hi संभाला था. वर्ण मैं कभी भी कुछ भी सही से करने लायक नहीं रहता..
पल पीएलए दिमागी हालत बदल जाया करती थी..
उस वक़्त बास मेरे अंदर सिर्फ एक दरदिन्दा बनने की चाह hi रहती थी.. और दरिंदा कभी किसी का नहीं होता..
दरिंदा बनने क बाद पता नै मैं आप सबब को लाने लायक रहता भी नहीं... मुझे नहीं पता.
पूजा दीदी के प्यार ने मुझे इंसान बने रहने में बड़ी मदद दी और फिर उनके प्यार ने मुझे मेरे अंदर से शांत करना शुरू कर दिया.. पूजा दीदी ने मेरे लिए खुद को बदल दिया.. मुझे जिस चीज़ की भी ज़रूरत होती, वो वैसे hi रूप में उभर कर सामने आने लगतीं..
कभी वो मुझसे बहुत ज़यादा प्यार करने लगती, तो कभी मुझसे कई कई महीने ज़रूरत की hi बातें करने लगती थे, और वो भी इतनी होती थी क मेरे लिए कही और ध्यान देने का टाइम hi नहीं बछता था.. मेरी एक एक मूवमेंट पर किसी माँ क जैसे नज़र रहती थी पूजा दीदी की.... जब उहने लगता क मुझे किसी की वजा से डिसरबुराँस हो रही है, तो सभी को लाइन में खड़ा कर दिया करती... कभी 2-2 महीने हम खूब मस्ती किया करते.. पुरे नंगे हो के साड़ी साड़ी रात मस्ती में hi गुज़ार देते थे.. पारर जब्ब उन्हें लगता क अब्ब आगे क स्टेप के लिए कुछ चेंज करना है, तो सिर्फ मस्ती hi बंद नहीं होती थी.. सभी को वारं कर दिया करती थीं पूजा दीदी.. विज्जू के इस हद्द तक hi सबब ने बात करनी है, इससे आगे वो किसी को बात करते हुए देखे ना.. विज्जू का खुद को Himmat-WAla बनने की राह में कोई परेशानी ना ल्याए...
पूजा दीदी का कह देना hi काफी होता tha.sab भी तो मुझे दिल से प्यार करते थे. पर पूजा दीदी का आर्डर भी सबब के लिए पत्थर की लकीर hi होता था..
प्रिय तुम सबब के लिए दिल में प्यार भी था, कुछ कर पाने का जूनून भी था, डेरिंग और ज़िद्दी पत्र भी मुझमे बहुत था.. पर मुझे खुद पर कण्ट्रोल नहीं रहता था. और मेरा मेरे मक़सद क लिए फोकस अक्सर hi टूट जाय करता था..
पूजा दीदी ने मेरे लिए खुद को सर्फ़ कर दिया था. 24 ऑवर hi वो मेरे साथ रहा करती थीं... वो मुझे हर किसम क हालत में टूटने नहीं दिया करती थीं.. जब्ब मैं अपने मक़सद से पीछे हटने लगता था, तो वो स्ट्रिक्ट भी हो जाई करती थी..
मेरे अंदर की हिम्मत को सही सिम्त देने क लिए पूजा दीदी ने एक महा गुरु का रोले ऐडा किया है... वो भी जल्द से जल्द तुम सबब को खुद क पास देखना चाहती थीं..
जब्ब पूजा दीदी आप सबब क लिए इतनी फ़िक्र मंद हो सकती हाँ, तो मेरे लिए तो आप सबब hi ख़ास थे. फिर मैं क्यों पीछे रहता.. करना तो मैं पहले से hi सबब कुछ चाहता था.. पारर पूजा दीदी की आप सबेस प्यार की इंटेंसिव देख कर मुझे और भी ज़यादा हिम्मत मिलने लगती. और मैं जल्द से जल्द तुम सबब को लाने क लिए और भी ज़यादा दर्द झेलने लगा.. हार्ड से हार्ड कसरत करने लगा ......... ........................................................................................ धीरे धीरे हुआ.. पूजा दीदी मेरे साथ थी... तो मैं जल्द से अंदर से भी पूरी तरह से बदलने लगा...........................
मैंने अपनी कहानी सुनाने से पहले अपनी गुरु अपनी पूजा दीदी की डिटेल बताई.. पूजा दीदी ने hi तो विजजू को अंदर से मरने नहीं दिया था, वर्ण जैसे मेरे हालत थे, मैं इक दरिंदा बन्न सकता था.. पूजा दीदी ने मुझे इंसान बनने में बहुत मदद दी थी... इतना हक़ तो पूजा दीदी का ज़रूर बन्नता था.. क वो अक्सर hi मेरी बातों में ज़ेरे बहस आएं... जब्ब भी मेरे हिम्मत वाला बनने की बात हो और पूजा दीदी को डिसकस न किया जाए तो सबब कुछ hi फीका फीका लगता है..
और फिर ये पूजा दीदी के साथ और पूजा दीदी क प्यार के साथ इंसाफ नहीं होता..
फिर मैंने मुंबई से निकल कर राज सर के साथ आउट ऑफ़ स्टेशन ट्रेनिंग पर जाने तक की कहानी डिटेल से बता दी....................
2 घंटा लगा मुझे सबब बताने में.. अभी भी कई जगा मैंने शार्ट में बताया था... मेरी कहानी इतनी लम्बी थी डिटेल में, क पूरी रात hi गुज़र जाती और सूबा हो जाती.. अभी राज सर के साथ ट्रैंनिंग वाली कहानी नहीं बताई थी, उसकी डिटेल भी बहुत लम्बी थी..
माँ और तीनो की ऑंखें मेरी कहानी सुन कर नम्म हो गई थीं.. मेरी कहानी में दर्द hi दर्द था.. कितना दर्द झेला था मैंने. खुद को माँ और बहनो को लाने लायक बनाने क लिए....
मेरी कहानी सुन्नते सुन्नते जहान्वी और श्रुति भी माँ के दोनों घुटनो पर सर्र रख चुकी थी... वो भी आंसू बहा रही थी... प्रिय मेरे दर्द को सुनते सुनते खुद भी दुखी हो गई थी.. उसके भी आंसू बहने लगे थे.. जब्ब मुझे गोली लगी थी. उस बात को सुन कर चरों के hi दिल देहल उठे थे..
पहले ये बात चरों को नहीं पता था.. वो भी आज ये बात जान गयी थी .. इसलिए उन्हें और भी ज़यादा दर्द होने लगा था.. मैंने इसलिए ये सबब बता दिया था.. क अब्ब आगे पता नहीं मेरे साथ क्या कुछ होने वाला है.. अब्ब जब्ब सबब hi मेरे पास the..to सबब को hi सबब पता होने चाहिए था ... अब्ब तो मेरी आगे आने वाली लाइफ hi ऐसी सिचुएशन और हादसात से भरपूर थी..
प्रिय ने मुझे फिरसे चूमना शुरू कर दिया. प्रिय अपने होंटो से मेरे गालो को चाटने लगी.. प्रिय आंसू भी बहा रही थी और मुझे चाट भी रही थी, प्रिय क आंसू मेरे गालों पर गिर रहे थे, मेरे गालो को चाटने से वो प्रिय की जीब ले लग कर प्रिय के पेट में उतरने लगे थे..
माँ, जहान्वी और श्रुति भी प्रिय को देखते हुए मुझसे अपने प्यार का इज़हार करने लगी थी.
माँ:- ऐसे hi तो नहीं उस रात मेरा दिल तड़प रहा था, दिल की धड़कन बैठती जा रही थी, (हलकी आवाज़ में रोना शुरू हो गई) मुझे मेरे विज्जू को देखना था, पारर मैं bad-naseeb किसी से कह भी नहीं सकती थी. उस वक़्त मुझे ऐसा लग रहा था, जैसे कोई मेरे दिल को मुठी में लिए दबा रहा था.. विज्जू बीटा उस दिन मुझे भी बहुत कुछ झेलना पड़ा था. मुझे लग्ग रहा था क मैं तुझे देखे बिना hi कही इस दुन्या से न चली जाओ, ितं दर्द हुआ था मुझे उस रात.. माँ हों ना, तेरी तकलीफ मुझ तक तो पोहनचनि hi थी. तुझे कुछ हो और मेरा दिल शांत रहे ये तो होने से रहा... मैं तो सालों से hi दर्द सेह रही थी, पर मेरी तरह से मेरा विज्जू भी कितना तड़पता रहा है सालों तक........
माँ रट हुए अपने दिल का हाल बयां कर रही थी, माँ क आंसू मेरे चेहरे पर गिरने लगे तो कुछ प्रिय क ऊपर....
माँ रोये तो बच्चो के दिल मचल जाय करते हाँ.. और अंदर hi अंदर जैसी कोई ारी सी चलती हुई महसूस होने लगती है. हम चरों hi माँ क दर्द को समझ रहे थे.... माँ मेरे दर्द को सुन्नते सुन्नते खुद फिरसे दर्द में चली गई थी..
गुज़रे वक़्त में अगर दर्द की इन्तहा मिली हो तो वही दर्द यादें बन कर वापिस ज़रूर लौट आता है..
वो दर्द भरा सालों का भयंकर सफर गुज़र तो चूका था, पर अपने निशाँ इतनी जलती कैसे ख़तम करता... हम चरों hi उठ बैठे और माँ से दुलार करने लगे.. माँ ने हम चरों को hi अपनी बहन में समेत लिया था... और हम माँ को चूम कर शांत करने लगे.. पारर दर्द था hi इतना, जब भी आता था, कुछ टाइम ले hi जाता था...
माँ का मंद डाइवर्ट करना ज़रूरी हो गया था.... मैंने आँखों hi आँखों में तीनो को इशारा किया तो वो मेरा इशारा समझते हुए माँ से मस्ती करने लगीं..
तीनो hi माँ को इधर उधर हाथ लगाने लगीं. कभी माँ की पेट में गुदगुदी करती तो जभी माँ की कमर पर हाथ फेरने लगती. कभी माँ को हलकी चुटकी kaat;ti तो कभी माँ के पैरों के तलवों को अपनी उँगलियों से कुरेदने लगती.
डिनर क बाद रूम में आते hi किसी ने ड्रेस चेंज नहीं किया था, और माँ इस वक़्त साड़ी में थीं. माँ की कमर दिख रही थी. जिसे प्रिय अपनी ॉन्गलियों से टटोलने लगी..
कोठे पर रहते माँ से प्यार तो बहुत किया था सभी ने. पारर मस्ती कभी नहीं की थी. वहां माँ का दिल हर टाइम hi दुखी रहता था. तो माँ के दिल की हालत को समझते हुए सभी माँ से सिर्फ ढेरों प्यार hi किया करती थीं.. मस्ती मज़ाक वहां माँ की ज़िन्दगी में नहीं था..
तब्ब माँ मस्ती सहन करने लायक नहीं हटीं.. माँ क अंदर ज़ख्म hi इतने थे क खुश होने क लिए भी माँ को दर्द के पुलों पार्स गुज़ारना पड़ता.. और कोठे पर माँ से मस्ती के लिए तीनो को hi माँ को फिरसे वही दर्द देना पड़ता....
इसलिए सभी माँ से प्यार करती थीं पर माँ से मस्ती नहीं... अब्ब माँ को नयी खुशियां मिल चुकी थीं. दलदल से रिहाई भी मिल चुकी थी..
और आज माँ मस्ती की हालत में भी आ चुकी थी, माँ भी तीनो की hi मेरी सेक्स पार्टनर बन चुकी थी.. तो तीनो hi तितलियाँ माँ के मज़े लेने का सोचने लगी. मैंने तो माँ के मंद को डाइवर्ट करने का सोचा tha,parr तीनो hi आगे और आगे निकलने लगीं.. माँ के मंद को डाइवर्ट करने के लिए वो माँ से मस्ती करने का सोचने लगी..
प्रिय माँ की कमर पर हाथ चलते हुए माँ की बैक साइड में लेजाने लगी.. जैसे hi माँ की बैकबोन में प्रिय की एक फिंगर घुसी माँ उछाल पड़ी.. माँ के लिए माँ की बैक बहुत सेंसिटिव थी. माँ के चुत्तड़ hi नहीं माँ के चुत्तडों के आस पास का एरिया hi माँ क लिए सेंसिटिव था..
मैं प्रिय को देख रहा था.. माँ ऑंखें बंद किये खुद क आंसू रोकने में लगी हुई थीं.. मैंने जहान्वी और श्रुति को प्रिय की तरफ ध्यान देने का कहा..
दोनों ने जैसे hi प्रिय को देखा तो वो भी सबब समझ गईं.. और प्रिय क साथ मिल कर माँ के मज़े लेने लगीं.. माँ भी अब्ब हमारी hi टीम में शामिल हो चुकी थी.. माँ को जितनी देर में एहसास होता, तब्ब तक्क जहान्वी ने माँ के होंटो को अपने होंटो में ले लिया और श्रुति ने अपने होंठ माँ के क्लीवेज से लगा दिया.. और चाटने लगी..
माँ ने अचानक से अपनी ऑंखें खोली तो तीनो को खुद में समाये देख कर उनकी ऑंखें कुछ बड़ी हो गईं... माँ ने एक आंख से मुझे देखा और आँखों से hi कहने लगी........ विज्जू बीटा इन शैतान की कहलाओ को क्या हुआ है.. आज अपनी माँ के साथ ऐसा क्यों कर रही हाँ...
मैं माँ को देख कर स्माइल देने लगा.. माँ आँखों में आंसू लिए हैरानगी में थीं.. फिर माँ भी सबब समझ गई और जहान्वी क सर्र क बालों को सहलाने लगी.
जहांनी ने माँ को किश करना छोड़ा, जहान्वी सिर्फ माँ की तवज्जो पाने क लिए माँ को किश कर रही थी..
माँ:- जहान्वी बीटा ये सब क्या है..
प्रिय माँ को बोलते सुन कर माँ की कमर को सहलाते हुए बोली..
प्रिय:- माँ अब्ब आप हमारी टीम में शामिल हो गई हाँ ना..
माँ:- क्या मतलब टीम में.? हम तो पहले से hi एक हाँ.. और टीम की ीमसे क्या बात.. हम तो शुरू से hi एक टीम हाँ..
प्रिय:- माँ आप मेरी बात नहीं समझ रही हाँ.......... प्रिय ने माँ के गांड की लकीर में ऊँगली घुसते हुए बोली...
माँ:- वो तो मैं समझ hi लूंगी.. तुम मेरी गांड में ऊँगली क्यों कर रही हो..
पहले ये तो बताओ..
priya:-(naughty स्माइल देते हुए) माँ यही तो समझने की कोशिश कर रही हों..
इतना बोल कर प्रिय ने माँ को बीएड पर लिटाया दिया और माँ क ऊपर चढ़ कर माँ क होंटो को अपने होंटो में लेने लगी... माँ कुछ कुछ प्रिय का मक़सद समझ रही थी... माँ भी अंदर से खुश हुई होगी.. पर बहार से वो शो नहीं करवा रही थी.. अब्ब वो भी मूड में आने लगी थीं...
प्रिय ने माँ क होंटो को अपने होंटो में लिया और चूसने लगी.. माँ प्रिय को कोई
रिस्पांस नहीं दे रही थी.. माँ प्रिय को रोक भी नहीं रही थी. कुछ देर प्रिय पुरे जोश में माँ क होंटो को पीने में लगी रही... फिर प्रिय ने माँ को किश करना छोड़ा और माँ की आँखों में देखने लगी.....
माँ सीरियस होकर प्रिय को देखने लगी.. मैं तो माँ की नौटंकी समझ रहा था. पर प्रिय माँ को ऐसे देख कर कुछ डर सी गई.. कही उसने माँ की मंशा क अगेंस्ट जा कर माँ को ग़ुस्सा तो नहीं दिला दिया.. माँ को प्रिय को घूर कर देखने लगी और प्रिय माँ से नज़रें चुरा कर साइड में देखने लगी...
प्रिय को खुद क गालों पर माँ की नज़रों की तपश फील हो रही थी.. जिस वजा से प्रिय की ऑंखें कुछ कुछ नम्म सी होने लगीं..
प्रिय:- सरररय माँ............
प्रिय क ऐसे बोलते hi मैं और माँ ज़ोर ज़ोर से हस्सन लगे... जहान्वी और श्रुति भी माँ को ऐसे देख कर कुछ डर गई थीं.. क्यों की पहले कभी उन्हों ने माँ के साथ ऐसा नहीं किया था........
तीनो माँ क मज़े लेने लगी थी.. पारर माँ ने तीनो के मज़े ले लिए थे..
हमारे हस्ते hi तीनो भी सबब समझ गईं.. और फिर वो भी हमारे साथ hi हस्सन लगीं..
प्रिय:- माँ मैं तो भूल hi गई थी. विज्जू ने आप की छूट की सैर कर ली है. तो आपको ग़ुस्से करने की क्या ज़रूरत है.. और फिर मैं भी तो आपकी लाड़ली हों.. मैंने ये कैसे सोच लिया क आपको मेरी किसी भी हरकत पर घुसा आएगा..
विजय:- प्रिय मेरी तितली.. तुम सबब नौटंकीबाज़ हो, तो क्या माँ नौटंकी नहीं कर सकती.. तुहे क्या पता प्रिय... माँ कितनी मज़े की चीज़ हाँ.. अभी तो तुमने माँ क असल रंग तो देखे hi नहीं हाँ.. मैंने देखे थे सूबा.. माँ हर बात में लाजवाब हाँ..
जहान्वी:- हाँ विज्जू, हमने भी माँ का ये रंग देख लिया है.. सच में एक बार तो मैं भी डर गाइट hi..
श्रुति:- और मेरी तो गांड से हवा निकालनी बंद हो गई थी.. माँ की नाराज़गी हमसे सहन नहीं हो सकती थी.. इसलिए हम तीनो hi दर गई थीं..
प्रिय:- विज्जू हमने माँ से कभी मस्ती नहीं की है.. और अब तो माँ तुम्हरे लुंड से चुद क हमारी टीम भी शामिल हो चुकी हाँ.. तो हमारा भी पूरा पूरा हक़ है माँ पर.. हम भी माँ क साथ सबब करेंगी... और जैसे विज्जू ने हम तीनो को एक साथ छोड़ा है.. माँ को भी विज्जू हमारे सामने hi छोड़ेगा.. क्यों माँ आपको कोई आपत्ति है इसमें.......
maa:-(smile देते हुए) मुझे क्यों आपत्ति होने लगी.. सबब कुछ तो तुम्हारे सामने खुला हुआ है.. किसी बेगाने से मई तुम्हरी नज़रो के सामने रह कर चुद सकती हों. तो फिर अपने विज्जू का लुंड लेने में कैसी शर्म..
प्रिय:- तो फिर आज आप विजजू क लुंड पर चढ़ कर अपने कमाल दिखाएंगी..
प्रिय बोलते hi कड़ी होकर अपने कपडे उतरने लगी.. जहान्वी श्रुति ने भी अपने कपडे उतारने शुरू कर दिए..
मैं माँ को देखने लगा.. माँ ने मुझे खनेच कर खुद के ऊपर गिरा लिया और मुझे किश करने लगी... सूबा की चुदाई तो बातों की नज़र हो गई थी.. पारर अब्ब माँ के पुरे पुरे मज़े लेने का समय आ गया था.. माँ भी तो पूरी तरह से पूरा प्यार पाने क लिए मचल रही थीं.. आज सूबा एक बार माँ ने मेरे लुंड से ताबड़ तोड़ चुदाई करवा क अपने दर्द को चेक कर लिया था.. अब्ब प्यार से एक एक लम्हे को वो फील करना छह रही थीं..
तीनो तितलियाँ नंगी हुई तो माँ के कपडे खोलने लगीं..
पहले मुझे साइड में हटाया और माँ को बिठा कर तीनो hi बड़े प्यार से एक एक करके माँ की शरीर के सारे hi कपडे उतरने लगीं.. माँ तीनो को देख कर मुस्कुरा रही थीं...
जब्ब माँ पूरी तरह से नंगी हो गई तो..
प्रिय:- विज्जू तेरे कपडे भी हम hi उतारें, या तुम खुद hi उतारोगे..
विजय:- तुम्हारे रहते मुझे क्या ज़रूरत है उतरने की..
तीनो:- हाँ ये भी सही कहा तुमने....
फिर तीनो ने मुझे भी नंगा कर दिया.. मेरा लुंड तो प्रिय की वजा से पहले से hi खड़ा था....
प्रिय:- माँ विज्जू का लुंड तो पुरे मूड में है.. आपकी छूट के काया हाल हाँ..
माँ:- उसका हाल भी सही नहीं है.. देख लो उसपर भी पानी की बूँदें चमक रही हाँ.. सारा दिन hi इसका यही हाल रहा है.. एक हिसाब से मेरा हाल भी तुम जैसा hi है.. मेरी सही से पहली चुदाई सूबा hi हुई है.. जैसे तुम सबब विज्जू से चुद के महसूस कर रही हो, कुछ वैसा hi मैं भी महसूस कर रही हों.. दिल जिससे पूरी तरह से संतुष्ट हो, उसके साथ हुई चुदाई को याद करते रहने से छूट हर वक़्त hi गीली रहने लगती है......... क्यों तुम तीनो की छूट ने सारा दिन पानी नहीं छोड़ा है क्या.???
तीनो माँ की बात पर हस्सन लगी..
तीनो:- माँ आप सही कह रही हाँ.. हमारी छूट भी पानी बहाने से खुद को रोक नहीं पा रही है.. पर माँ छूट में बेचैनी नहीं है. हमारी छूट हमारे दिल की hi तरह से मज़े में है. छूट अंदर से बहुत शांत है.. बास छूट ने विज्जू के लुंड को अच्छे से चुम्म लिया है ना, तो ख़ुशी से आंसू बहा रही है..
मई चरों की hi बातें सुन रहा था, मुझे भी ये सबब बहुत अच्छा लग रहा था.. और मेरे लुंड को भी..
माँ:- बोलो प्रिय बेटी कैसे करना है, आज सब तुम्हारे हिसाब से hi होगा..
प्रिय:- माँ आप विज्जू भाई के ऊपर लेट कर विज्जु को किश करें, और मैं पीछे से आपकी गांड को चाटोगी..
vijay:-(hassta हुआ) प्रिय माँ की गांड तो तुम चाट लोगी.. पर माँ से सहन नहीं होगा.. माँ की गांड का छेड़ माँ के लिए बहुत hi ज़यादा सेंसिटिव है..
माँ:- विज्जू बीटा प्रिय की भी तो माननी पड़ेगी ना.. तुम बीएड पर लेटो मैं तुम्हे किश करती हों..
मैं बीएड पर लेट गया और माँ मेरे ऊपर आ कर मेरे लुंड पर अपनी छूट को रखते हुए मुझे किश करने लगी... प्रिय माँ की गांड क पीछे आ कर अपना मोहन माँ की गांड पर लाने लगी.. मैंने और माँ ने अपने अपने पैरों को कुछ खोल लिया था.. जिस वजा से प्रिय को बैठने के लिए काफी जगा मिल गई.. प्रिय घुटनो पर झुकी माँ के चूतड़ों को चाटने लगी.. माँ ने मुझे किश करना छोड़ा और मेरे मोहन में hi सिसकी लेने लगी.. माँ के लिए अपने चुत्तडों पर प्रिय की जीब सहन करना आसान नहीं था.. माँ ने प्रिय की जीब के सुपर्ष को कुछ देर सहन किया और फिर मेरे होंटो को अपने होंटो में ले कर किश करने लगी....
मैं माँ क होंटो की क्या बात करों. माँ क जैसी होंठ किसी क नहीं थे.. माँ के होंटो की शेप बहुत की कमाल की थी.. कुदरती लालजी लिए हुए, हनी जैसी मिठास खुद में समोए हुए थे.. माँ के होंटो का टास्ते मुझे किसी और hi दुन्या में लेजाने लगा.. माँ को प्रिय की गांड चटाई से बहुत बेचैनी हो हो रही थी. पर माँ खुद पर जबर करते हुए बहुत hi प्रेम से धीरे धीरे करके मेरे होंटो अपने होंटो में लिए किश कर रही थी..
प्रिय ने भी माँ को ज़यादा तंग नहीं किया था. उसने भी माँ के चूतड़ों को नरमे से साइड में खेंच कर माँ की गांड की दरार को खोला था.. और माँ की पूरी hi दरार में अपनी जीब फेरने लग गई थी... मेरी hi तरह प्रिय भी माँ की गांड के छेड़ में गम होने लगी थी.. उसे भी यकीनन माँ की गांड क छेड़ में अपने मतलब सा सबब कुछ मिल रहा था.. माँ थी तो माँ से सबब hi अपने मतलब का hi मिलेगा.... प्रिय से जितना हो सका माँ की गांड के छेड़ को चाट रही थी..
जहान्वी और श्रुति अकेले रह गई थीं. तो दोनों hi प्रिय की चूतड़ों को सहलाना शुरू कर दिया... प्रिय की बहार को निकली हुई गांड दिलकश पोज़ बना रही थी. जिससे जहान्वी और श्रुति अपना मैं बेहला रही थीं..
कुछ देर गुज़री तो माँ की गांड में लगी आग माँ से सहन न हुई और माँ ने मुझे किश करना छोड़ दिया.. माँ गहरी गहरी साँसे लेने लगी.. माँ ने सर घुमा कर प्रिय को देखा. मुझे प्रिय का चेहरा नहीं दिखा, मेरी प्रिय माँ की गांड में मोहन छुपाये लगी हुई थी..
माँ:- hmmmmmmha..siiiiiiiiii..ufffff.. ohhhhhhhh..ahhhhhhh .. हाआआई .. प्रिय क्यों मेरी जान निकलना चाहती है.. बास करदे बीटा.. कही छूट पानी hi न छोड़ दे.. अंदर आग बहुत भड़क चुकी है.. तेरी जीब से के चाटने से मुझसे सहन करना मुश्किल होने लगा.. कही विज्जू क लुंड क बिना hi न पानी निकल जाए.
प्रिय ने सर्र उठा कर माँ को देखा तो प्रिय की ऑंखें लाल हो चुकी थीं..
प्रिय माँ की गांड से मस्त तो हुई hi थी. पारर शूरति और जहान्वी की म्हणत ने भी प्रिय को बहुत हॉट कर दिया था.. शायद जहान्वी और श्रुति ने प्रिय की छूट को भी सेहला दिया था.. जिस वजा से प्रिय की आँखों का रंग बदल गया था.
प्रिय की छूट ने भी पानी की नदियां बहाने शुरू कर दी होंगी...
प्रिय माँ को और मुझे देखते हुए उठ कड़ी हुई.. और साइड में लेट कर गहरी गहरी साँसे लेने लगी.. शूरती और जहान्वी प्रिय से लिपित गईं.. और माँ रहत की सांस लेते हुए मेरे लुंड पर बैठ गई..
मैंने माँ क बूब्स को दोनों हाथो में लिया और उन्हें धीरे धीरे मसलने लगा..
माँ अपनी सांस बहाल करती रही.. और मैं माँ के दूध को हलके हलके दबाता रहा..
2 मिंट में hi माँ थोड़ा सा उठी और मेरे लुंड को पकड़ कर अपनी छूट पर सेट करने लगी.. माँ ने दिन में टाइम निकल कर अपनी छूट को फिरसे टाइट कर लिया था.. माँ को अपनी छूट की केयर करना बहुत अच्छा लगता था.. मेरे लुंड का सूपड़ा माँ की छूट पर लगा तो मुझे पता चल गया था.. माँ ने सच ने hi आज अपनी छूट को टाइट कर लिया था..
माँ की छूट बहुत hi ज़यादा गीली हो गई thi..maa ने कोशिश की और मेरे लुंड को अपनी छूट में लेने लगी.. मेरा लुंड थोड़ा सा hi माँ की छूट क पानी से जेल हुआ था.. ज़ायदा तर खुश्क hi था.. माँ कोशिश करके मेरे लुंड को अपनी छूट में लेने लगी. पर माँ को दर्द होने लगा था.. लुंड कोटा था और माँ की छूट आज कुछ ज़यादा hi टाइट हो गई थी.. अभी मेरे लुंड का सुपडे hi माँ की छूट क लिप्स को खोल कर अंदर घुसा था.. माँ को दर्द हुआ तो माँ ने उठ कर मेरे लुंड को अपनी छूट से बहार निकल लिया और मुझे देखने लगी..
विजय:- क्या हुआ माँ, ऐसे क्या देख रही हो..
माँ:- विज्जू बीटा, तेरा लुंड बोहत मोटा है, अपनी छूट में लेने के लिए इसे हर बार hi गीला करना पड़ेगा...
विजय:- माँ तो फिर सूबा कैसा चला गया था..
माँ:- सूबा भी तो दर्द हुआ था ना. पारर मैं कुछ बोली नहीं थी.. और फिर मैं लेती हुई थी, तो कुछ दर्द देता हुआ आसान से hi अंदर घुस गया था.. पारर अब्ब वो कुछ खुश्क भी है और मैंने आज अपनी छूट को कुछ ज़यादा hi टाइट भी कर लिया है.. जिस वजा से लुंड को घुसने में परेशानी हो रही है..
विजय:- तो आप इसे मोहन में ले कर चूस लें, कुछ गीला हो जाएगा..
माँ:- विज्जू बीटा वही तो करने लगी हों.. ऐसे तो ये मेरी छूट में जाने से रहा..
माँ मेरे लुंड पर झुक गईं और उसे पकड़ कर पहले अच्छे से चाटने लगी.
मैंने तीनो की और देखा तो वो तीनो hi खुद में लगी हुई थीं.. जहान्वी प्रिय के मोहन पर अपनी छूट को रखे उसकी छूट चाट रही थी, तो श्रुति जहान्वी की छूट में मोहन घुसाए हुए thi..teeno ने hi मुझे और माँ को पूरा पूरा टाइम दे दिया था. और खुद की छूट को एक दूसरे की छूट में घुस के शांत करने लगी थें..
मुझे माँ से प्यार करके जल्द hi सो जाना था.. पहले hi बातों में बहुत समय बीत चूका था.. और मेरे लिए जल्द सो कर कल सूबा जल्दी उठना भी ज़रूरी था..
अब्ब गैंग्स से टंका भीड़ चूका था, जो किसी के सावधान होने से पहले hi सभी को उसकी साँसों से मुक्त करना था.. जितनी जल्दी हो सके इस शहर की गंदगी को ख़तम करना था...
मैंने माँ को देखा तो माँ मेरे लुंड को अपने मोहन में लिया चूस रही थी. माँ एक हाथ की मीठी बना कर मेरे बचे हुए लुंड को मसल रही थी.. मेरा 4" लुंड माँ क मोहन में था. एक हाथ से माँ मेरे लुंड को मुठी में लिए मसल रही थी. तो दूसरे हाथ से माँ मेरे लुंड की बॉल्स को हलके हलके से दबा और सेहला रही थी.
माँ मूड में आ चुकी थी, और माँ मेरे लुंड को पूरी तरह से महसूस करते हुए मज़े ले रही थीं. और मुझे मज़ा दे भी रही थीं..
माँ को पूरी मस्ती me,aur पूरी ख़ुशी में देख कर मेरा मैं अंदर से बहुत खुश होने लगा.. माँ मेरे लुंड को अपने मोहन में लिए अपना पूरा हक़ वसूल रही थीं..
कुछ देर माँ मेरे लुंड को अच्छे से मोहन में लिए चूसती रही. फिर उसे मोहन से निकाल दिया.. और मुझे देखने लगी..
माँ;- विज्जू बीटा, कैसा लगा अपनी माँ का पहला ब्लोजॉब.... सूबा तो बास तेरे लुंड को साफ़ hi किया था.. इसका सवाद तो अब्ब मिला है मुझे..
विजय:- माँ तो फिर कसिए लगा मेरे लुंड का सवाद...
माँ:- जैसा सोचा विज्जू बीटा, बिलकुल वैसे hi सबब मिला है मुझे, सालो तक्क जिस सुरूर क लिए मचल रही थी, वही मिला है आज मुझे..
माँ इतना बोल कर फिरसे मेरे लुंड के ऊपर बैठने लगी.. माँ ने अपने दोनों पेअर मेरी दोनों साइड में कर लिए थे.. मेरा लुंड पूरी तरह से छत को सलामी दे रहा था.. जब्ब माँ की छूट मेरे लुंड से 1" क फासले पर रह गई तो माँ ने मेरे लुंड को पकड़ कर अपनी छूट के लिप्स पर सेट किया... और अपनी गांड को थोड़ा सा हिला कर मेरे लुंड क सुपडे से अपनी छूट के लिप्स खोलने लगी.. जब लुंड माँ की छूट क लिप्स को खोल कर अंदर घुसा तो वो सीधा hi माँ की छूट क छेड़ में जा घुसा..
माँ ने मुझे एक स्माइल दी, और फिर मेरे लुंड पर अपनी छूट का दबाओ बढ़ने लगी. माँ जैसे जैसे नीचे हो रही थी, मेरा लुंड माँ की छूट में ग़ायब होता जा रहा था..
मैं बाबत घोरसे माँ की छूट में अपने लुंड को जाता हुआ देख रहा था... धीरे धीरे करके मेरा लुंड 5" तक्क माँ की छूट में घुस गया. आगे जाने में उसे कुछ दिक्कत होने लगी तो माँ रुक गई.. और मेरे पेट पर एक हाथ रख कर खुद को सँभालने लगीं.. माँ के चेहरे पर कुछ दर्द क आसार दिखने लगे थे.. माँ की छूट अभी भी बहुत टाइट थी और मेरा लुंड बहुत ज़ायदा फस फस कर माँ की छूट में घुस रहा tha....maa ने कुछ देर की रेस्ट ली और फिर से अपनी छूट का दबाओ मेरे लुंड पर बढ़ने लगीं.. इस बार कुछ दिक्कत हुई पारर माँ नहीं रुकी और माँ ने खुद की छूट क दर्द को साइड में रखते हुए कुछ ज़यादा hi ज़ोर लगा कर मेरे लुंड पर बैठने लगी. जिस वजा से माँ को कुछ दर्द होने लगा.. पारर माँ आज मेरे लुंड चुसाई क बाद मेरे लुंड को अपनी छूट में पूरी तरह से उतार के पूरा पूरा मज़ा लेना चाहती थीं..
मैंने और माँ दोनों ने hi अपनी ऑंखें बंद कर ली थीं.. मैं माँ की छूट में अपने लुंड क घुसने का एक एक सेंटीमीटर सवाद ले रहा था.. शायद माँ भी कुछ ऐसे hi मज़े में थी.. लुंड घुसा कर, या छूट में ले कर अंदर बहार करने में, और लेने में भी बहुत मज़ा है, पर बंद आँखों से सबब देखकर और महसूस करके मज़े लेने का भी अपना एक अलग hi चार्म होता है.. और हम दोनों माँ बीटा उस चार्म को पूरी को तरह से महसूस कर रहे थे...
जब्ब मुझे लगा क माँ रुक गई है, तो मैंने ऑंखें खोल कर देखा तो माँ मुझे hi देख कर मुस्कुरा रही थी..
माँ:- क्यों विज्जू बीटा, अपनी माँ की छूट में लुंड को घुसते हुए पूरा मज़ा ले रहे ho..meri hi तरह से एक एक सेकंड को भरपूर एन्जॉय कर रहे हो.......... माँ दर्द भरी नॉटी स्माइल देते हुए बोली..
विजय:- हाँ माँ, अभी तो सही से टाइम मिला है, सबब महसूस करने का.. शान्ति से hi सबब महसूस किया जा सकता है...
प्रिय और वो तीनो किस स्टेज पर थीं मुझे अभी नहीं पता था.. मुझे तो तब्ब पता चला जब्ब प्रिय अचानक से hi आ कर मेरे मोहन पर अपनी छूट रख कर बेथ गई..
प्रिय:- माँ चलो विजू क लुंड पर ऊपर नीचे हो के दिखाओ, मुझे भी आपकी छूट में विज्जू के लुंड को आते जाते हुए देखना है.. सूबा तो आप दोनों ने hi चुप कर चुदाई कर ली थी, अब्ब मेरे सामने करो.. क्यों जहान्वी मैंने सही कहा ना..
jhanvi,shruti:- हाँ प्रिय तुमने एक दुम्म सही बोलै है..
प्रिय माँ की तरफ झुकी, तो माँ प्रिय की मंशा समझते हुए प्रिय के होंटो को अपने होंटो में ले कर किश करने लगी..
मैं प्रिय के चूतड़ों को पके प्रिय की छूट चाटने में लग गया था.. प्रिय की छूट जहान्वी की म्हणत से पानी छोड़ चुकी थी.. मैंने पहले प्रिय की छूट ो अच्छे से देखा था, रात की चुदाई के कारण मेरी प्रिय की छूट अभी भी कुछ कुछ सूजी हुई थी.. मैं बहुत प्यार से अपनी प्रिय की छूट को चाटने लगा..
माँ प्रिय को किश करते हुए धीरे धीरे मेरे लुंड पर ऊपर नीचे भी होने लगीं. हम तीनो में से किसी को भी जल्दी नहीं थी.. सोना तो जल्दी hi था, पर छुड़ाए में जल्दी कैसी...
श्रुति और जहान्वी भी आ गई और दोनों साइड में हो कर माँ और प्रिय के साथ शामिल हो गईं... श्रुति माँ और प्रिय का एक एक दूध पकड़ कर धीरे धीरे करके मसलने लगी, तो जहान्वी माँ की छूट और मेरे लुंड पर हाथ रख कर हलके हलके सहलाने लगी.
हम पांचू hi सुरूर ने जाने लगे. सभी hi एक दूसरे के अंगों में वियस्त थे. और धीरे धीरे इस सबब का आनंद ले रहे थे.. माँ ने अपनी गांड को कुछ और भी उठा लिया था जिस वजा से मेरे लुंड माँ की छूट से कुछ और भी बहार आ गया था. जो जहान्वी के हाथ में सही से आने लगा था. माँ मेरे लुंड को 3" बहार रखते हुए थोड़ा थोड़ा ऊपर नीचे होने लगी थी, और जहान्वी मेरे लुंड को और माँ की छूट को हलके हलके सेहला लिया करती... जहान्वी माँ की छूट से ज़यादा छेड़ छड़ नहीं कर रही थी. कही माँ जल्दी न झाड़ जाए.. वो बास इस सबब का अंदड़ ले रही थी..
मैं प्रिय की पहले से पानी छोड़ चुकी छूट को चाट रहा था. मेरी जीब प्रिय की सूजी hi छूट के लिप्स को खोले अंदर घुसी हुई थी.. प्रिय को कुछ पैन भी हुआ था. मेरी जीब से, या शायद कुछ जलन हुई थी.. पर प्रिय वो सहन कर गई थी.. मैं अच्छे से प्रिय के चूतड़ों को खोले प्रिय की खुल चुकी छूट में अपनी जीब घुसे हुए अंदर बहार करने में लगा हुआ था.. कभी मेरी जीब प्रिय क गांड को भी चायत लेती थी..
कुछ देर बाद प्रिय अपनी छूट मेरी जीब से साफ़ करवा कर उठ गई.. प्रिय को उठते देख कर जहान्वी और श्रुति भी साइड में हो गईं..
माँ:- क्या हुआ प्रिय बेटी, ऐसे साइड में क्यों हो गई हो..
प्रिय:- माँ आप विज्जू भाई से अच्छे से चुद लें. मेरा जितना दिल किया वो मैंने कर लिया.. अब्ब रात भी बहुत हो गई है. तो आप विज्जू भाई के लुंड का पूरा पूरा आनंद ले लें.. ये सबब तो अब्ब चलते hi रहना है.. हम सबब hi तो साथ शामिल हो चुके हाँ.. और वैसे hi अब्ब हम तीनो की hi छूट शांत है. तो आप दोनों भी खुद को शांत करलें, फिर सोते हाँ..
jhanvi,shruti:- हाँ माँ, हम तब्ब तक्क बाथरूम में जा के फ्रेश होती हाँ. आप विज्जू भाई से चुदाई का भरपूर आनंद ले लें..
माँ:- ठीक है बीटा, तुम तीनो को जैसे सही लगे, वर्णा मुझे कोई आपत्ति नहीं है.. मुझे तो सबब के साथ मिलकर भी उतना hi मज़ा आ रहा था.. जितना अकेले में आता है.. अब्ब तो मैं भी तुम तीनो के जैसे hi सिर्फ विज्जू बीटा से छुड़ा करूंगी.. और हम अब्ब पांचू hi एक साथ सोया करेंगी..
प्रिय:- matlab.?..kya आपने पापा के साथ सोना छोड़ दिया है..
माँ:- नहीं बीटा. कभी कभी उनके पास भी चली जाया करोगी.. पर चुदाई सिर्फ अपने विज्जू बेटे से hi करवाया करोनंगी.. रंजीत ने भी ok बोल दिया है.. तो फिर अब्ब मैं अपने दिल की क्यों न मानो..
तीनो hi ख़ुशी से उछाल पड़ीं.
तीनो:- सच में maa.fir तो बहुत मज़ा आया कैरगा.. पांचू hi एक रूम में..
माँ:- हाँ बीटा, अब्ब विज्जू लौट आया है हम सबब की लाइफ में, तो विज्जू से दूर रहने का मैं नहीं होता.. और फिर विज्जू बीटा को जल्द hi तो आगे क सफर पर भी निकलना है... मेरा बदला लेगा न मेरा बीटा विज्जू.. तो विज्जू को जाना पड़ेगा.. तब्ब तक्क विज्जू का प्यार खुद में समां लेना चाहती हों. फिर पता नहीं कितना समय विज्जू के बिना रहना पड़े..
विजय:- माँ मैं बीच बीच में आता रहूँगा ना..
माँ:- नहीं विज्जू बीटा... जल्दी से बदला पूरा करो, और वापिस लौट कर हमेशा के लिए hi हमारे बीचे में रहो.. दुश्मनो को लम्बी सजा देनी है. पारर किसी भी मुआमले को लम्बा नहीं खेंचना है.. जितनी जल्दी हो सके सबब को hi सबक़ सीखा कर लौट आना ...
तीनो:- हाँ विज्जू अब्ब हम हमेशा hi साथ रहना चाहती हाँ. तुम जब्ब जाओ तो सबब जल्दी hi ख़तम करके लौट भी आना..
विजय:- ठीक है, जैसे तुम सबब कहो, वर्ण मेरा तो इरादा था, सकूँ से सभी को तड़पा तड़पा कर मारूंगा. पारर अब सबब कहते हाँ क मुझे सबब जल्द hi ख़तम करना है, तो जल्द hi ख़तम करके लौट आऊँगा..
माँ:- ये पैलेस किश लिए है विज्जू बीटा. पहले जल्दी से सभी को बर्बाद कर देना, जिस को पैसों का घमंड है, जिसको अपनी पावर का घमंड है, वो जल्दी hi चकनाचूर करके सभी को उठवा के यही पैलेस में ले आना, और फिर जैसे मैं करे उनके साथ सलूक करना.. मैं भी सब को मिलने वाली सजा को देखना चाहती हों.. मैं भी सबब की आँखों में ऑंखें दाल कर गुज़रा हुआ वक़्त फिरसे दोहराना चाहती हों.. पारर इस बार वक़्त की लगाम मेरे हाथ में होगी. और बाकी सबब को मैं बताओगी. क जब्ब वो साहिब इ iqtdaar(saarvabhaum) थे. तो कैसे हिटलर बन्न कर मेर ज़िन्दगी का फैसला करने बैठ गए थे..
अब्ब सबब की hi ज़िन्दगी का फैसला मैं करुँगी.. मुझे बहुत बेचैनी है विज्जू बीटा.. जल्द hi सबब को मेरे सामने लाइन हाज़िर करो.. मैं उस तरफ सोचना नहीं चाहती. पारर जैसे hi मेरी सोच उस तरफ जाती है तो मुझसे सहन नहीं होता..
विजय:- माँ आप टेंशन न लें, बास दिल्ली में कुछ काम बाकी है, दोनों गैंग्स को मैंने ख़तम करना शुरू कर दिया है. जल्द hi सभी को ख़तम करके मैं निकलता ुओं आपका बदला लेने क लिए..
तीनो बाथरूम में घुस गईं और माँ मेरे लुंड पर ऊपर नीचे होने लगीं..
4 बार माँ ने मेरे लुंड को सुपडे तक्क बहार निकल कर अपनी छूट में लिया.. मेरा लुंड माँ की छूट क पानी से चमकने लगा था.... जब्ब माँ को कुछ तसल्ली हुई तो माँ मेरे चेहरे पर झुक गई और मेरे होंटो को अपने होंटो में ले कर चूसने लगी.. नीचे मेरे लुंड का भी माँ अपनी छूट में अंदर बहार कर रही थीं..
कुछ देर माँ मुझे किश करते हुए चुदती रही.. मैं माँ की पीठ पर अपने दोनों हाथ फेरते हुए माँ की गांड के छेड़ की और जाने लगा. कभी माँ के चुत्तड़ो को सहलाने लगता. तो कभी माँ की गांड क छेड़ में ऊँगली करने लगता..
माँ ने मुझे किश करना छोड़ा और मेरे लुंड पर पूरी तरह से बैठ गई.. और मेरे सीने पर हाथ रख कर थोड़ा सा झुकी और फिर अपनी गांड को को गोल गोल घूमने लगीं...
माँ के ऐसा करने से मुझे बेहद सुरूर आने लगा.. मेरा लुंड तो पहले से hi बहुत ज़यादा सख्त हो चूका था.. पारर इस बार माँ के ऐसा करने से उसकी अकड़न और भी बढ़ गई थी.. मेरा लुंड माँ की छूट में और भी फसने लगा था.. मेरे अंदर खून ने अपनी रफ़्तार बढ़ानी शुरू कर दी थी.. माँ का ये अंदाज़ बहुत hi ज़यादा मज़े वाला था..
माँ के बूब्स गोल गोल घूमने से उछाल रहे थे.. जो मुझे बहुत hi ज़यादा बेचैन कर रहे थे.. माँ की दूध फूलने लगे थे और माँ के पिंक निप्पल अकड़ने लगे थे.. जो माँ क फूल चुके दूध पर बहुत hi भले लगने लगे थे..
मैंने हाथ बढ़ा कर माँ के डोडो बूब्स पकड़ लिए.. मुझे ऐसा लगा. जैसे टाइट करके भरे गए घुबरी को मैंने अपने हाथ में ले लिया हो. थोड़ा सा दबाओगे तो पहात जायेंगे.. पर सवाद बहुत आने लगा था मुझे.. मेरे हाथ माँ के बूब्स पर गए थे क मेरा लुंड माँ की छूट में झटके खाने लगा...
माँ क गोल गोल घूमने से मेरा लुंड 3" बहार आने लगा था.. और मेरा मैं था क नीचे से एक झटका मारो और मेरा लुंड पूरा hi माँ की छूट में जा समाये.. मुझे माँ क ऐसे करने से इतना मज़ा मिल रहा था...
माँ 7 मिंट तक गोल गोल घूमती रही, फिर रुक गई..
मुझे देख कर मुस्कुराने लगे..
माँ:- क्यों बीटा, करा दी ना जन्नत की सैर..
विजय:- हाँ माँ, सच में hi मुझे पूरी जन्नत दिख गई थी.. माँ क्या धांसू अंदाज़ अपनाया है आपने..
माँ:- विज्जू बीटा मैंने ये पहली बार किया है.. पारर सालों से hi मैं ख़यालू की दुन्या में रहते हुए तेरे लुंड से ऐसी hi चुदाई करती रही हूँ.. और भी मैंने कई अंदाज़ बदल बदल कर चुदाई की है तेरे साथ ख्यालों में...
वहां कोठे पर तो टांगें उठाये या घोड़ी बन कर hi चुदती रही हों.. ये सबब मेरे अपने अंदाज़ हाँ, जो मैं में लिए मैंने अपनी एक अलग hi दुनय बना ली थी..
और तेरे साथ सबब करने का सोचा करती थी..
विजय:- माँ फिर अपना और कोई अंदाज़ दिखाओ ना..
माँ:- सारे अंदाज़ आज hi तो मैंने नहीं दिखने वाली तुझे विज्जू बीटा.. धीरे धीरे करके सबब करोगी ना.. इतने साल दलदल में फेज रह कर गुज़र दिए हाँ.. थोड़ा थोड़ा करके सुरूर loongi..sabb एक hi बार तो मैं नहीं करने वाली.
माँ मेरे ऊपर लेट गई और अपनी गांड उठा कर मेरे लुंड को सुपडे तक बहार कर दिया..
माँ:- विज्जउ बीटा... अब्ब तुम नीचे से धक्के मार कर मेरी छूट में अपना लुंड डालो.. धीरे धीरे करना विज्जू बीटा जल्दी मैट करना.. बास नार्मल स्पीड hi रखना.. जब्ब छूटने लगो तो अपनी स्पीड बढ़ा सकते हो.. उससे पहले नहीं
विजय:- ठीक है माँ. जैसे आप कहें..
फिर मैंने नीचे अपनी गांड उठा कर माँ की छूट में अपना लुंड दाल दिया.. इस अंदाज़ में भी मुझे बहुत मज़ा आने लगा. और मैं माँ की बताई गई स्पीड क हिसाब से माँ को छोड़ने लगा.. माँ मुझे किश करने लगी.. और मई माँ की छूट के मज़े लेने लगा.. माँ की छूट बास प्रिय की छूट से थोड़ा सा hi कम् टाइट थी.. वर्ण माँ की छूट भी किसी कुंवारी लड़की से कम् नहीं थी....
माँ मुझे किश करती रही जब्ब तक्क उनकी सांस नहीं फूल गई..
माँ ने किश तोड़ी तो माँ की छूट भी पानी बहाने वाली हो गई थी..
माँ की सांस तो फूल hi चुकी थी,. माँ का जिस्म भी अकड़ने लगा.. माँ अब्ब झड़ने वाली थी..
माँ के बूब्स मेरे मोहन पर लटक रहे थे.. जिनकी तपश मुझे अपने चेहरे पर फील हो रही थी.
कुछ देर में माँ अंत सीमा पर पोहंची तो माँ भी अपनी गांड को मेरे लुंड पर हिलाते हुए झड़ने लगी. माँ मेरे ऊपर गिर गई थी.. पर मैं माँ की छूट को और भी खोलने में लगा रहा...
जब तक माँ की सांस बहाल हुई मैं माँ की छूट में लुंड दाल कर माँ की छूट ने जो पानी छोड़ा था, उसे लुंड से निकलने लगा..
माँ:- विज्जू बीटा, अब्ब पोजीशन बदलते हाँ ना.. मई थक गई हों..
विजय:- हाँ माँ, मेरा भी मैं है, मैं आपको किसी और पोजीशन में छोड़ों..
माँ:- अच्छा, तो मेरा विज्जू अपनी माँ को किश पोजीशन में छोड़ने का मैं रखता है..
विजय:- माँ मैं आपकी गांड को देखते हुए छोड़ना चाहता हों..
माँ:- मतलब, मैं अपन विज्जू की घोड़ी बन जाऊं..... माँ नॉटी स्माइल देते हुए बोली. माँ की छूट ने पानी छोड़ कर माँ को फ्रेश कर दिया था..
विजय:- हाँ उस तरह से आपकी छूट और गांड का व्यू यकीनन बहुत अच्छे से दिखेगा...
माँ मेरे ऊपर से उठी और साइड में घोड़ी बन्न गई.. मेरी तरफ देखते हुए बोली.
माँ:- लो विज्जू बीटा बन्न गई तुम्हारी माँ तुम्हारी घोड़ी... अब्ब देख लो अच्छे से मेरी छूट और गांड.. तेरे लिए hi इसे मेन्टेन किये रखा है... देख और चेक कर मैंने इसे तेरे लिए सही से संभल रखा है या नहीं..
मैं भी माँ को एक स्माइल देता हुआ माँ की गांड के पीछे चला गया.. बाथरूम से मेरी तितलियों के मस्ती करने की आवाज़ें भी सुनाई दे रही थी. वो तब्ब तक्क नहीं आने वाली थी, जब्ब तक्क माँ और मैं अच्छे से एक दूसरे का प्यार न पा लें.. माँ एक बार मेरे प्यार से अपनी छूट को बेहला चुकी थी... अब्ब मैं दूसरी बार माँ की छूट को बहलाने वाला था.. मेरा फुल अकड़ा हुआ लुंड माँ की गांड के पास hi हवा में झूल रहा था..
और मैं बड़े घोरसे माँ की छूट और गांड को देखने लगा.. इस पोजीशन में मैं माँ को सालों बाद देख रहा था. पहले तब्ब देखा था, जब्ब माँ किसी और के लुंड क लिए घोड़ी बना करती थी............
मैं कुछ देर माँ की छूट और गांड को देखता रहा और अपने दिल को शांत करता रहा... पर मेरा लुंड तो माँ की छूट में घुस क्र hi शांत होने वाला था.. उसे अब्ब बहुत ज़यादा बेचैनी हो रही थी. और मुझे उसकी बेचैनी को अब्ब ख़तम करना था...
मैं थोड़ा सा और आगे हुआ और अपने लुंड को माँ की छूट पर टिका दिया.. मैंने अपनी गांड को आगे किया तो मेरा लुंड माँ की छूट के लिप्स को खोलता हुआ अंदर घुसने लगा.. पीछे से जांघों के दबने की वजा से माँ की छूट क लिप्स बड़े दिखने लगे थे.. माँ अपनी छूट टाइट रखते हुए छोड़ना चाहती थी. वर्ण अपने पेअर खोल कर अपनी छूट को लूसे कर सकती थीं..
मैंने माँ की कमर को पकड़ा और थोड़ा सा ज़ोर लगा कर अपने लुंड को माँ की छूट में पुश करने लगा.. माँ की छूट पानी छोड़ चुकी थी तो लुंड आराम से अंदर जाने लगा.. जैसे जैसे लुंड माँ की छूट में जा रहा था.. माँ की छूट और भी खुलती जा रही थी.. अब्ब मुझे सही से माँ की छूट दिख रही थी.. और मेरा पूरा फोकस माँ की छूट के खुलने पर hi था.. और मैं घोर से माँ की छूट में अपने लुंड को जाते हुए देख रहा था.... कुछ देर में मेरा 5" लुंड माँ की छूट में घुस गया था.. मैं उतना hi लुंड माँ की छूट में अंदर बहार करने लगा.. अगर सारा डालता तो माँ की छूट छुप जाती और मैं अभी ये सबब देखते रहना चाहता था.
5 मिंट तक मैं ऐसे hi माँ की छूट में लुंड को 5" तक अंदर बहार करता रहा.. माँ की छूट एक बार फिर गरम होने लगी थी..
जिस स्पीड से मैं कर रहा था. मैं तो मज़ा की इन्तहा तक पोहंचा हुआ hi था.. पर माँ भी मेरी धीरे से की जानी वाली चुदाई को दिल से महसूस कर लगी थी..
माँ फिरसे ग्राम हुई तो मैंने अब्ब माँ को छोड़ने की स्पीड कुछ बढ़ा दी.. माँ को और भी मज़ा आने लगा.. पहले जो चुड़ते हुए माँ की सिसकियाँ नहीं निकली थें.. इस बार माँ की सिसकियाँ उनके मोहन से निकलने लगीं.
माँ:- ahhhhhhhhhhhh vijjjjjjjuuuuuuuuuu betaaaaaaaaaaaa.. siiiiiiiiiiiiiii
कितना मस्त स्पीड से लगे हुए हो.. बहुत अच्छे बीटा.. ऐसे hi हम्मम्मम्मम्हा
अपनी माँ को छोड़ते रहो... तुम्हारी माँ की छूट फिर से ख़ुशी क मारे रोने लगी है.. उसे इतने प्यार की आदत जो नहीं है.. बहुत अच्छे विज्जू बेताआआआ...
माँ अपनी छूट में मेरे मोटा और 8.7" लुंड को पूरी से रगड़ खा क जाता हुआ महसूस कर रही थी..
मैं माँ की कमर को पकडे अपने बचे हुए लुंड को भी माँ की छूट में उतार कर अंदर बहार करने लगा था.. इस बार मेरी नज़र माँ की पीठ पर थी.. मैं वही से अपनी नज़र को नीचे लाते हुए माँ की गांड तक का सफर करने लगा.. और साथ में माँ की चुदाई भी होती रही.. माँ इस पोजीशन में कोई आस्मां से उत्तरी हुई अप्सरा लग रही थी.. माँ का पूरा बदन hi चमकदार था.. माँ को अंदर से बहुत ज़यादा ग़म लगे थे.. अंदर से माँ बहुत hi ज़यादा ज़ख़्मी हुई थी.. पारर माँ की खूबसूरती बहार से ज़रा भी नहीं डगमगाई थी.. माँ की स्किन अपने आप में एक मिसाल थी...
माँ की चर्बी से पाक स्किन मेरे सामने अपने जलवे दिखा रही थी, और मैं माँ की छूट में घुसा अपने लुंड क जलवे दिखा रहा था...
माँ की छूट ने पानी बहाना तेज़ किया तो मेरे लुंड को माँ की छूट में घुसने के लिए और भी आसानी होने लगी.. अब्ब मेरा लुंड पूरा hi माँ की छूट में घुसने लगा था.. जो घोड़ी बानी माँ की बच्चेदानी को चूम कर बहार आ रहा था..
जब भी मेरा लुंड माँ की बच्चेदानी को चूमता था माँ की सिसकियाँ तेज़ होने लगती थी.. और माँ फुल चार्म में आती जा रही थीं..
माँ एक बार फिरसे झड़ने वाली हुई तो माँ ने इस बार अपनी गांड को ज़ोर से हिला कर मेरा लुंड लेना शुरू कर दिया था..
माँ का जिस्म एक बार फिरसे अकड़ने लगा...
माँ:- विज्जउ बीटा.. मैं एक बार फिरसे झाःदने वाली हूँ.. थोड़ी सी स्पीड बढ़ा दो... siiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaaaaa ........ उफ्फफ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह्हह ओह्ह्ह्हह्ह
हाँ ऐसे hi विज्जू बीटा .. थोड़ा और तेज़ .. थोड़ा और ज़ोर से .. मेरी छूट गई.
माँ सिसकियाँ लेते हुए फिरसे झड़ने लगीं..
अब्ब मेरा लुंड भी अपनी अंतिम सीमा पर tha..to मैंने भी इस बार अपनी स्पीड कुछ और भी बढ़ा दी.. और एक रिधम से माँ की कमर को पकडे माँ को छोड़ने लगा..
माँ भी अब्ब समझ गई थी.. मेरे लुंड अब्ब उनकी छूट में अपना पानी उगलने वाला है.... माँ थक चुकी थी. पारर माँ ने मुझे लगा रहने दिया.. मेरा लुंड जैसे जैसे चार्म क करीब पोहचने वाला था. मेरी स्पीड बढ़ने लगी थी.. माँ को कुछ दर्द होने लगा था.. पर माँ ने मुझे नहीं रोका..
मेरा बदन का सारा hi खून इकठा हो कर मेरे लुंड तक्क आने लगा था.. जिस वजा से वो और भी फूल गया था.. और किसी भी समय वो माँ की छूट में पानी उगलने वाला था..
10 धक्कों के बाद hi मेरे लुंड ने लावा माँ की छूट में छोड़ना शुरू कर दिया.
मेरे लुंड से निकलने वाला वीर्य सीधा माँ की बच्चेदानी में जा कर भरने लगा.. मुझे महसूस हुआ जैसे माँ की बच्चेदानी ने मेरा सारा hi वीर्य खुद में सामना शुरू कर दिया है.. और फिर जब्ब मेरे लुंड का सारा hi पानी निकल गया तो मैं साइड में जा क लेट गया और अपनी साँसों को ठीक करने लगा..
माँ उसी पोजीशन में लेती रही.. तीनो शायद बाथरूम क दूर से जी हमें देख रही तीन.. हमारी चुदाई ख़तम होते hi वो रूम में आ गए.. तीनो hi नंगी थी. और आते hi बीएड पर लेट गयी..
एक कपडा उठा कर प्रिय ने मेरे लुंड को साफ़ किया और उसे रूम की एक साइड में फ़ेंक दिया.
लुंड मोहन में लेके साफ़ इसलिए नहीं किया. क अभी ऐसा आकरके वो ग्राम होने क मूड में नहीं थीं..
माँ को उसी पोजीशन में देख कर प्रिय बोली..
प्रिय:- माँ आप अभी तक ऐसे घोड़ी क्यों बानी हुई हाँ.. बीएड पर लेट जाएँ ना.
माँ;- नहीं प्रिय बेटी, मैं अपने विज्जू के वीर्य को अपनी बच्चेदानी में सोख लेना चाहती हों..
हम चरों hi माँ की बात सुनकर माँ को देखने लगे.. और माँ घोड़ी बानी सर मूड हमे देख कर स्माइल देने लगी..
माँ:- प्रिय बेटी मैंने सोच लिया है.. मैं अपने विज्जू से अपनी मांग भी भरवाओगी. और अपने विज्जू क लुंड क वीर्य से एक और नन्हा विज्जू अपने पेट से जनम दूंगी .. मेरा बास चले तो मैं na-jaane और क्या कुछ कर जाऊं.. इतना मुझे अपने विज्जू पर प्यार आने लगा है...
4 दिन हुए हाँ हमें पैलेस में आये हुए. तो धीरे धीरे करके सभी अरमान याद आने लगे han..officially मैं रंजीत की बीवी बन क रहूगी.. पर सेक्रेटली मैं विज्जू की माँ और वाइफ दोनों hi बने रहना चाहती हों.. क्यों क्या किसी को ऐतराज़ है कोई.
तीनो:- नहीं माँ, ये तो बहुत ख़ुशी की बात है, कुछ ऐसा hi तो हम तीनो ने भी सोचा हुआ है, हम भी अपने विज्जू के विज्जू को जनम देना चाहती हाँ.. जहान्वी तो एक बार विज्जू क वीर्य को अपने अंदर ले चुकी है. अब्ब मेरी ुर श्रुति की बारी है..
मेरी सांस अब्ब तक्क ठीक हो चुकी थी.. और मैं चरों को hi देख कर अपना सर्र खुजाने लगा था.. मुझे हैरत ज़रूर थी, पारर कुछ भी मेरे लिए शॉकिंग नहीं था.. जब्ब चरों hi मिलकर रेगुलर बाकी बची ज़िन्दगी मेरे लुंड से छोड़ने वाली थीं. तो फिर ये सबब तो होना hi था.. पर माँ की बात सबब से अलग थी.. माँ का ऐसा मैं जान कर मुझे जितनी हैरत हुई थी. उस से बढ़ कर मुझे ख़ुशी भी हुई थी.. शायद मेरे अंदर भी कही न कही ऐसा hi कुछ छुपा हुआ था.. अब्ब माँ ने कहा तो मैं अंदर से पूरी तरह से संतुष्ट हो गया था..
जैसे मेरे अंदर से मचल रहे अरमानो को उसके मतलब का सबब मिल गया हो..
माँ:- विज्जू बीटा तुम्हे कोई दिक्कत है मेरी इस खुवाहिश को लेके..
विजय:- नहीं माँ, मैं भी बहुत खुश हुआ हूँ आपके दिल की बात जान कर.. मेरे लिए तो आप सबब से बेस्ट हाँ.. आप कुछ भी सोचें, मेरे लिए उससे बढ़ कर ख़ुशी किसी और बात में कहैं होगी.. मैं तो वो ाहर सूरत hi करूँगा जो आपके दिल में हो..
माँ:- विज्जू बीटा, इस ख़ुशी क मोके पर मैं भी तुझे एक इनाम देना चाहती हूँ..
vijay:-kaisa इनाम माँ.?
तीनो:- माँ कही आप विज्जउ को गांड देने वाले इनाम की बात तो नहीं कर रही.
माँ:- नहीं बीटा.. वो तो है hi विज्जू की, विज्जू स्पेशल है, विज्जू क अंश को खुद की कोख में लेने वाली हों, तो विज्जू क लिए इनाम भी तो स्पेशल hi होना चाहिए ना..
विजय:- माँ अब्ब बोल भी दो ना. कैसा इनाम देने वाली हाँ आप.
माँ वैसे hi घोड़ी बानी अपनी गांड को उठाये हुए थी.. पर माँ ने अपने सर्र को बीएड से टिका दिया था. माँ नहीं चाहती थी क मेरे वीर्ये क एक कटरा भी उनकी छूट से बहार निकले.. माँ तो जैसे एक hi बार में फिरसे माँ बनना चाहती थीं..
माँ जैसे पोज़ में थीं, ऐसे में माँ बात करते हुए कुछ अजीब सी भी लग रही थी, घोड़ी बने हुए सर्र को बीएड से टिकाये हमे अपनी गर्दन मूड देख हमसे बाते कर रही थीं.........
maa:-(ek बार नज़र घुसा कर सबब को देखा) पूजा की शादी विज्जू से करवाने का मैं है मेरा.. मुझसे एक गलती गलती हुई है.. सबब जानते हुए भी मैंने पूजा को उतना टाइम नहीं दिया.. जितना वो डेसेर्वे करती थी.. पूजा न होती तो विज्जू शायद हमे कोठे की दलदल से बचा तो लेता .. पर क्या फिर विज्जू हमारे लिए असली विज्जू रह पाता..
विज्जू के सारे प्यार भरे रंग hi सलामत नहीं हाँ.. पूजा की वजा से विज्जू के प्यार करने रंग और भी ज़यादा गहरे हो गया है.. विज्जू की ऑंखें देख कर मुझे पता चलता है. पूजा ने विज्जू के लिए कितना कुछ किया होगा.. पूजा भी इनाम की मुस्तहिक़ है.... विज्जउ बीटा कल तुम पूजा को छोड़ क रानी और नताशा को को छोड़ लेना...
पूजा बेटी तो हम सबब से भी ज़यादा तेरे प्यार क लायक है.. उसे एक नहीं कई रातें तुझसे अकेले में बिताने का इनाम मिलना चाहिए..
माँ की बात सुनकर हम चरों hi सुन्न रह गए थे... माँ की छूट ने मेरा सारा hi वीर्य सोख लिया था.. एक भी कटरा माँ की छूट से बहार नहीं निकला था.. माँ सीढ़ी हो कर बैठ गई.. और अपनी छूट को ऊँगली लगा कर चेक करने लगी..
माँ हमारे शॉकिंग चेहरों को नज़रर अंदाज़ करते हुए अपनी छूट को देखने में लगी हुई थी.. पर माँ अपना चेहरा अपनी छूट की और किये मंद मंद मुस्कुरा रही थी.
कुछ देर बाद माँ हमे देखने लगी. माँ क होंटो पर अब्ब भी मुस्कराहट थी.. और अब्ब तक्क हमारे चेहरों पार्स शॉकिंग भाव कन्वर्ट होकर जोश से भर गए थे.
हम चरों ने hi माँ पर यलग़र कर दी और माँ को पकड़ लिया.. अच्छा खासा शोर होने लगा था रूम में .. हम चरों hi कुछ न कुछ बोल रहे थे...
कुछ देर बाद सबब शांत हुए तो..
माँ:- मतलब मैंने सही सोचा है..
विजय:- माँ ये तो मेरे दिल की आवाज़ थी.. पर मुझे नहीं पता था, ये सबब इतनी जल्दी होने वाला है..
प्रिय:- माँ आपने बहुत सही और बहुत hi अच्छा सोचा hai..puja दीदी पूरा पूरा का हक़ बनता है इस इनाम क लिए... विज्जू क लिए आगे पता नहीं क्या है.. और विज्जू की लाइफ में पता नहीं कितनो की शादी होना लिखी है.. पर पूजा दीदी को विज्जू की पहली पत्नी होने का हक़ मिलना hi चाहिए था.. जो आप ने खुद hi उन्हें दे दिया है.. मैं तो बहुत खुश हों. विज्जू और पूजा दीदी क लिए..
जहान्वी:- हम तो हाँ hi विज्जउ की और सदा hi विज्जू की लाइफ में रहने वाली हाँ.. पर ऑफिशियली पूजा दीदी को hi विज्जउ की पहली वाइफ होना चाहिए.. जितनी स्ट्रगल पूजा दीदी ने विज्जू क लिए की है.. वो इसी इनाम के लायक हाँ...
श्रुति:- हमे सबब पता था.. पर इन 4 दिनों में हमारी पूरी hi लाइफ बदल गई थी. तो जितना पूजा दीदी डेसेर्वे करती थें.. उतना हम उन्हें थैंक्स भी नहीं बोल सकीं.. यहाँ आते hi कुछ दिन पररर लगा कर उड़द गए.. पर हमने पूजा दीदी को सही से थैंक्स भी नहीं बोलै..
माँ:- हाँ बीटा तुम सबब भी सही हो.. जितना पूजा बेटी ने किया है. उतना उसे टाइम देना चाहिए था.. पर यहाँ ए दिन hi हमें कितने हुए हाँ.... और फिर हालत भी तो रोज़ रोज़ बदल रहे हाँ.. अभी तो हमारी सालों की थकन भी सही से नहीं उत्तरी.. इसलिए हम सबब इस बात पर पूरा ध्यान नहीं दे सकीं.. ये हम चरों की गलती है.. और अब्ब हम विज्जू और पूजा की शादी करके अपनी गलती को सुधरेंगी.. और पूजा को थैंक्स बोल कर उसका हक़ और इनाम उसे देंगे...
विज्जू बीटा पूरी रात hi तुम पूजा बेटी क साथ गुजरोगे तो उसे उसका पूरा हक़ देना.. शरीर मिलान से भी और आत्मा मिलान से भी..
विजय:- हाँ माँ, पूजा दीदी मेरे लिए भी बहुत ख़ास हाँ..
मेरी बात सुन मेरी तीनो तितलियाँ जोरसे हस्सें लगीं..
मैं और माँ तीनो को देख कर अचंभे में आ गए, क ऐसा क्या हुआ है जो अचानक से hi हस्सन लग पड़ीं..
माँ:- अब्ब ऐसे क्यों हस्स रही हो.. खैर तो है ना...
प्रिय:- (हस्ते हुए) माँ विज्जउ की शादी होने जा रही है पूजा दीदी से.. अब्ब तो विज्जू पूजा दीदी को, दीदी कहना छोड़ दे...
तीनो फिरसे हस्सन लगी और माँ भी इस बार तीनो के साथ मिलकर हस्सन लगीं..
और मैं सोचने लगा क दीदी को दीदी कहना छोड़ना मेरे लिए कितना मुश्किल होने वाला था ....
वर्ड काउंट: 10413
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मैं अपने रूम में पोंहचा तो माँ और तीनो तितलियाँ बीएड पर बैठी हुए थी.
माँ:- बोल आया अपनी दीदी को विज्जू बीटा..
विजय:- हाँ माँ मैंने दीदी से बोल दिया है. वो तो ये सुनते hi"aaj nahi'kal" बहुत खुश हो गई थी... वो खुद भी कुछ बेचैन थीं..
प्रिय:- (हस्ते हुए) छूट खुलवाना आसान थोड़ी न है..
प्रिय की बात पारर सबब hi हस्सन लगे.
मई बीएड पर ला जा कर माँ की गॉड में सर्र रख कर लेट गया..
प्रिय मेरे ऊपर आ कर लेट गई. मेरे गालों पर और मेरे होंटो पर किश करने क बाद मेरे आँखों में देखने लगी.. प्रिय कुछ देर ऐसे hi मुझे देखती रही.. पालक तक्क नहीं झपक रही थी.
विजय :- क्या देख रही हो मेरी तितली..
प्रिय:- खुद को देख रही हों तुम्हारी आँखों में..
विजय:- तो फिर देख लिया खुद को मेरी आँखों में ..
प्रिय:- हाँ खुद क साथ सबब को भी तुम्हारी आँखों में देख लिए है मैंने.
जहान्वी:- प्रिय ये तुमने सही बोलै. विज्जु क दिल में हम सबब हाँ, तो हम सबब hi विज्जू की आँखों में दिखेंगे ना..
श्रुति:- मैं भी नज़र आई हों क्या प्रिय.??
प्रिय:- हाँ श्रुति तुम भी मुझे विज्जू की आँखों में नज़र आई हो..
श्रुति:- तो फिर मैं क्या कर रही थी विज्जू की आँखों में..
जहान्वी:- हाँ प्रिय मुझे भी बताओ, मैं विज्जू की आँखों में क्या कर रही थी.
प्रिय:- विज्जू की आँखों से होते हुए मैं विज्जू क दिल में उत्तरी तो मुझे वहां एक प्यार भरी दुन्या दिखी, जहाँ विज्जू क दिल में रहने वाले सभी हस्सी ख़ुशी एक दूसरे के हाथो को थामे हुए मुझे दिख रहे थे.. और हम तीनो माँ क साथ विज्जू से प्यार कर रही हाँ.. और विज्जू सबब को hi पुरे मन से अपना प्यार बाँट रहा था...
माँ:- चुदाई वाला प्यार बाँट रहा था, या ...... माँ नौटंकी करते हुए बोली.
माँ की मसखरी से हम सबब hi हस्सन लगे...
प्रिय:- माँ विज्जू के प्यार का हर रंग hi तो हमारे लिए सकूँ लुटाने वाला होता है... चुदाई वाला प्यार हम कौन सा वासना क लिए करते हाँ.. हमारी छूट की आग भी तो विज्जू के लिए hi है.. विज्जू क बिना इसे भी भड़कने की इजाज़त नहीं है....
माँ:- तुम ठीक बोली प्रिय बेटी.. ये सबब hi विज्जउ बीटा क प्यार क रंग हाँ.. विज्जू अब्ब हमारे पास है तो सभी रंग भी तो हमे अपने विज्जू से चाहिए.. और चुदाई वाला रंग तो फिर भी ाअत्मा मिलान होता है... छूट की आग तो कैसे भी करके बुझ जाती है.. पारर हमारी आत्मा तो बास विज्जू क सुपर्ष के लिए बेचैन रहती है..
माँ एक हाथ से मेरे सर्र क बालों को सहलाने लगी तो दूसरे हाथ से प्रिय क सर्र को..... श्रुति प्रिय के चुत्तड़ को सेहला रही थी. तो जहान्वी प्रिय क हाथ को पकडे सेहला रही थी.. मेरी hi तरह से बाकी सबब भी प्रिय से बहुत ज़यादा लाड किया करती थीं.. मैं सबब के लिए खास था, तो प्रिय भी सबब के लिए ख़ास थी... मेरी गैर मौजूदगी में सभी ने प्रिय को बहुत प्यार दिया था... प्रिय मेरे बाद सबब की लाड़ली थी.. प्रिय मेरी और माँ की hi नहीं जहान्वी और श्रुति की भी लाड़ली बन बाई थी...
विजय:- और आत्मा मिलान क लिए मेरे लुंड को बहुत ख़ुशी होती है..
priya:-wo तो मुझे भी दिख रहा है. अभी से hi खड़ा हो कर मुझे चुभने लगा है..
जहान्वी:- उसे तो आदत रहने लगी है, खड़े रहने की... जैसे हमारी कसार गीली रहा करती थी विज्जू के लिए..
माँ:- विज्जउ बीटा, कोठे से निकलने क बाद का हमे सबब कुछ नहीं पता, तू हमे सबब आज तफ्सील से बता, बड़ा मंत्र है तेरे himmat-wala बनने क सफर को जाने का..
माँ की बात सुन कर तीनो भी बोल पड़ी..
तीनो:- हाँ विज्जू हमे भी सबब जानना है... तुम Hiammat-Wala कैसे बने.
माँ:- (तीनो से) विज्जू बीटा क लिए ये सफर कितना मुश्किल था वो तो हमने जान hi लिया था, वो सबब शॉर्टकट डिटेल थी... पारर था कितना मुश्किल न, जैसे आज हमारा विज्जू बन्न चूका है.. इस मंज़िल तक्क पोहचने क लिए कितनी पीडन झेली होंगी हमारे विज्जू ने ...............माँ बात करते हुए मेरी पीड़ा को खुद में महसूस करते हुए रोने आंसू बहाने लगी..
विजय:- माँ, मेरा आप तक्क पोहचने का रास्ता hi इतना कांटो भरा था, मुझे आप तक्क पोहचने क लिए उन्ही कांटो के ऊपर से गुज़ारना पड़ा, पीड़ा तो फिर मिलनी hi थी... और फिर ऐसे hi तो नहीं हर किसी को अपनी मंज़िल मिल जाती... मेरी मैनिल भी तो इस दुन्या में चाँद गिनी चुनी मुश्किल तरीन मंज़िलो में से एक थी. जिस्सको पा लेना नामुमकिन की हद्द तक्क मुश्किल होता है..... आप सबब मुझसे इतनी दूर थे क आप सबब तक पोहचने क लिए मुझे ये दर्द झेलना hi था...
माँ:- हाँ विज्जू बीटा, हम भी सबब समझते हाँ. पर दिल को भी तो वही दर्द होने लगता है ना, जो तुमने झेले हाँ, हम सबब एक दूसरे से आत्ताच हाँ ना..
तो एक को दर्द होगा तो दूसरे को भी वैसा hi दर्द सहना पड़ेगा..
प्रिय:- विजजूउ भाई, हमे बाओ ना, कैसे तुम स्टेप बी स्टेप Himmat-Wala बने.
विजय:- प्रिय मेरी जान, तुम सबब मेरे दिल में थे, और तुम सबब क लिए मेरे दिल में हर वक़्त बहुत सा दर्द रहने लगा था, तब्ब मुझे पता था क तुम सबब के लिए मैं कुछ नहीं कर सकता, मेरी आगे भी कम् थी, और मुझे कुछ समझ भी नहीं थी, क मैं कैसे इस काबिल बन्न सकता हों. क मैं तुम सबब को कोठे वाली ज़िन्दगी से निकाल सकूं.. और मैं ये भी नहीं जानता था क मुझे इस सब में कितना समय लगने वाला है. और फिर जितना समय मुझे लगने वाला था, डर था मेरे लेट होने से कही कुछ उल्टा सीधा न हो जाए, तुम सबब को कही मुझसे और भी दूर न कर दिया जाए...
इस सबब क चलते हर्र कुछ वक़्त क बाद मेरी दिमागी हालत बिगड़ने लगती थी, मेरे लिए खुद पर काबू पाना मुमकिन नहीं रहता था..... फिर मुझे पूजा दीदी मिलें, जिन्हो ने मुझे आप सबब क जैसा hi प्यार देना शुरू कर दिया.. और मुझे भी पूजा दीदी में आप सबब क चेहरे hi दिखने लगे थे... पहले मैं तुम सबब से दूर था, तो मेरे लिए ये सबब सहन करना मुमकिन नहीं था.... पर फिर मुझे पूजा दीदी में तुम सबब का प्यार और चेहरे दिखने लगे.. पूजा दीदी ने मुझे माँ के जैसे hi संभाला था. वर्ण मैं कभी भी कुछ भी सही से करने लायक नहीं रहता..
पल पीएलए दिमागी हालत बदल जाया करती थी..
उस वक़्त बास मेरे अंदर सिर्फ एक दरदिन्दा बनने की चाह hi रहती थी.. और दरिंदा कभी किसी का नहीं होता..
दरिंदा बनने क बाद पता नै मैं आप सबब को लाने लायक रहता भी नहीं... मुझे नहीं पता.
पूजा दीदी के प्यार ने मुझे इंसान बने रहने में बड़ी मदद दी और फिर उनके प्यार ने मुझे मेरे अंदर से शांत करना शुरू कर दिया.. पूजा दीदी ने मेरे लिए खुद को बदल दिया.. मुझे जिस चीज़ की भी ज़रूरत होती, वो वैसे hi रूप में उभर कर सामने आने लगतीं..
कभी वो मुझसे बहुत ज़यादा प्यार करने लगती, तो कभी मुझसे कई कई महीने ज़रूरत की hi बातें करने लगती थे, और वो भी इतनी होती थी क मेरे लिए कही और ध्यान देने का टाइम hi नहीं बछता था.. मेरी एक एक मूवमेंट पर किसी माँ क जैसे नज़र रहती थी पूजा दीदी की.... जब उहने लगता क मुझे किसी की वजा से डिसरबुराँस हो रही है, तो सभी को लाइन में खड़ा कर दिया करती... कभी 2-2 महीने हम खूब मस्ती किया करते.. पुरे नंगे हो के साड़ी साड़ी रात मस्ती में hi गुज़ार देते थे.. पारर जब्ब उन्हें लगता क अब्ब आगे क स्टेप के लिए कुछ चेंज करना है, तो सिर्फ मस्ती hi बंद नहीं होती थी.. सभी को वारं कर दिया करती थीं पूजा दीदी.. विज्जू के इस हद्द तक hi सबब ने बात करनी है, इससे आगे वो किसी को बात करते हुए देखे ना.. विज्जू का खुद को Himmat-WAla बनने की राह में कोई परेशानी ना ल्याए...
पूजा दीदी का कह देना hi काफी होता tha.sab भी तो मुझे दिल से प्यार करते थे. पर पूजा दीदी का आर्डर भी सबब के लिए पत्थर की लकीर hi होता था..
प्रिय तुम सबब के लिए दिल में प्यार भी था, कुछ कर पाने का जूनून भी था, डेरिंग और ज़िद्दी पत्र भी मुझमे बहुत था.. पर मुझे खुद पर कण्ट्रोल नहीं रहता था. और मेरा मेरे मक़सद क लिए फोकस अक्सर hi टूट जाय करता था..
पूजा दीदी ने मेरे लिए खुद को सर्फ़ कर दिया था. 24 ऑवर hi वो मेरे साथ रहा करती थीं... वो मुझे हर किसम क हालत में टूटने नहीं दिया करती थीं.. जब्ब मैं अपने मक़सद से पीछे हटने लगता था, तो वो स्ट्रिक्ट भी हो जाई करती थी..
मेरे अंदर की हिम्मत को सही सिम्त देने क लिए पूजा दीदी ने एक महा गुरु का रोले ऐडा किया है... वो भी जल्द से जल्द तुम सबब को खुद क पास देखना चाहती थीं..
जब्ब पूजा दीदी आप सबब क लिए इतनी फ़िक्र मंद हो सकती हाँ, तो मेरे लिए तो आप सबब hi ख़ास थे. फिर मैं क्यों पीछे रहता.. करना तो मैं पहले से hi सबब कुछ चाहता था.. पारर पूजा दीदी की आप सबेस प्यार की इंटेंसिव देख कर मुझे और भी ज़यादा हिम्मत मिलने लगती. और मैं जल्द से जल्द तुम सबब को लाने क लिए और भी ज़यादा दर्द झेलने लगा.. हार्ड से हार्ड कसरत करने लगा ......... ........................................................................................ धीरे धीरे हुआ.. पूजा दीदी मेरे साथ थी... तो मैं जल्द से अंदर से भी पूरी तरह से बदलने लगा...........................
मैंने अपनी कहानी सुनाने से पहले अपनी गुरु अपनी पूजा दीदी की डिटेल बताई.. पूजा दीदी ने hi तो विजजू को अंदर से मरने नहीं दिया था, वर्ण जैसे मेरे हालत थे, मैं इक दरिंदा बन्न सकता था.. पूजा दीदी ने मुझे इंसान बनने में बहुत मदद दी थी... इतना हक़ तो पूजा दीदी का ज़रूर बन्नता था.. क वो अक्सर hi मेरी बातों में ज़ेरे बहस आएं... जब्ब भी मेरे हिम्मत वाला बनने की बात हो और पूजा दीदी को डिसकस न किया जाए तो सबब कुछ hi फीका फीका लगता है..
और फिर ये पूजा दीदी के साथ और पूजा दीदी क प्यार के साथ इंसाफ नहीं होता..
फिर मैंने मुंबई से निकल कर राज सर के साथ आउट ऑफ़ स्टेशन ट्रेनिंग पर जाने तक की कहानी डिटेल से बता दी....................
2 घंटा लगा मुझे सबब बताने में.. अभी भी कई जगा मैंने शार्ट में बताया था... मेरी कहानी इतनी लम्बी थी डिटेल में, क पूरी रात hi गुज़र जाती और सूबा हो जाती.. अभी राज सर के साथ ट्रैंनिंग वाली कहानी नहीं बताई थी, उसकी डिटेल भी बहुत लम्बी थी..
माँ और तीनो की ऑंखें मेरी कहानी सुन कर नम्म हो गई थीं.. मेरी कहानी में दर्द hi दर्द था.. कितना दर्द झेला था मैंने. खुद को माँ और बहनो को लाने लायक बनाने क लिए....
मेरी कहानी सुन्नते सुन्नते जहान्वी और श्रुति भी माँ के दोनों घुटनो पर सर्र रख चुकी थी... वो भी आंसू बहा रही थी... प्रिय मेरे दर्द को सुनते सुनते खुद भी दुखी हो गई थी.. उसके भी आंसू बहने लगे थे.. जब्ब मुझे गोली लगी थी. उस बात को सुन कर चरों के hi दिल देहल उठे थे..
पहले ये बात चरों को नहीं पता था.. वो भी आज ये बात जान गयी थी .. इसलिए उन्हें और भी ज़यादा दर्द होने लगा था.. मैंने इसलिए ये सबब बता दिया था.. क अब्ब आगे पता नहीं मेरे साथ क्या कुछ होने वाला है.. अब्ब जब्ब सबब hi मेरे पास the..to सबब को hi सबब पता होने चाहिए था ... अब्ब तो मेरी आगे आने वाली लाइफ hi ऐसी सिचुएशन और हादसात से भरपूर थी..
प्रिय ने मुझे फिरसे चूमना शुरू कर दिया. प्रिय अपने होंटो से मेरे गालो को चाटने लगी.. प्रिय आंसू भी बहा रही थी और मुझे चाट भी रही थी, प्रिय क आंसू मेरे गालों पर गिर रहे थे, मेरे गालो को चाटने से वो प्रिय की जीब ले लग कर प्रिय के पेट में उतरने लगे थे..
माँ, जहान्वी और श्रुति भी प्रिय को देखते हुए मुझसे अपने प्यार का इज़हार करने लगी थी.
माँ:- ऐसे hi तो नहीं उस रात मेरा दिल तड़प रहा था, दिल की धड़कन बैठती जा रही थी, (हलकी आवाज़ में रोना शुरू हो गई) मुझे मेरे विज्जू को देखना था, पारर मैं bad-naseeb किसी से कह भी नहीं सकती थी. उस वक़्त मुझे ऐसा लग रहा था, जैसे कोई मेरे दिल को मुठी में लिए दबा रहा था.. विज्जू बीटा उस दिन मुझे भी बहुत कुछ झेलना पड़ा था. मुझे लग्ग रहा था क मैं तुझे देखे बिना hi कही इस दुन्या से न चली जाओ, ितं दर्द हुआ था मुझे उस रात.. माँ हों ना, तेरी तकलीफ मुझ तक तो पोहनचनि hi थी. तुझे कुछ हो और मेरा दिल शांत रहे ये तो होने से रहा... मैं तो सालों से hi दर्द सेह रही थी, पर मेरी तरह से मेरा विज्जू भी कितना तड़पता रहा है सालों तक........
माँ रट हुए अपने दिल का हाल बयां कर रही थी, माँ क आंसू मेरे चेहरे पर गिरने लगे तो कुछ प्रिय क ऊपर....
माँ रोये तो बच्चो के दिल मचल जाय करते हाँ.. और अंदर hi अंदर जैसी कोई ारी सी चलती हुई महसूस होने लगती है. हम चरों hi माँ क दर्द को समझ रहे थे.... माँ मेरे दर्द को सुन्नते सुन्नते खुद फिरसे दर्द में चली गई थी..
गुज़रे वक़्त में अगर दर्द की इन्तहा मिली हो तो वही दर्द यादें बन कर वापिस ज़रूर लौट आता है..
वो दर्द भरा सालों का भयंकर सफर गुज़र तो चूका था, पर अपने निशाँ इतनी जलती कैसे ख़तम करता... हम चरों hi उठ बैठे और माँ से दुलार करने लगे.. माँ ने हम चरों को hi अपनी बहन में समेत लिया था... और हम माँ को चूम कर शांत करने लगे.. पारर दर्द था hi इतना, जब भी आता था, कुछ टाइम ले hi जाता था...
माँ का मंद डाइवर्ट करना ज़रूरी हो गया था.... मैंने आँखों hi आँखों में तीनो को इशारा किया तो वो मेरा इशारा समझते हुए माँ से मस्ती करने लगीं..
तीनो hi माँ को इधर उधर हाथ लगाने लगीं. कभी माँ की पेट में गुदगुदी करती तो जभी माँ की कमर पर हाथ फेरने लगती. कभी माँ को हलकी चुटकी kaat;ti तो कभी माँ के पैरों के तलवों को अपनी उँगलियों से कुरेदने लगती.
डिनर क बाद रूम में आते hi किसी ने ड्रेस चेंज नहीं किया था, और माँ इस वक़्त साड़ी में थीं. माँ की कमर दिख रही थी. जिसे प्रिय अपनी ॉन्गलियों से टटोलने लगी..
कोठे पर रहते माँ से प्यार तो बहुत किया था सभी ने. पारर मस्ती कभी नहीं की थी. वहां माँ का दिल हर टाइम hi दुखी रहता था. तो माँ के दिल की हालत को समझते हुए सभी माँ से सिर्फ ढेरों प्यार hi किया करती थीं.. मस्ती मज़ाक वहां माँ की ज़िन्दगी में नहीं था..
तब्ब माँ मस्ती सहन करने लायक नहीं हटीं.. माँ क अंदर ज़ख्म hi इतने थे क खुश होने क लिए भी माँ को दर्द के पुलों पार्स गुज़ारना पड़ता.. और कोठे पर माँ से मस्ती के लिए तीनो को hi माँ को फिरसे वही दर्द देना पड़ता....
इसलिए सभी माँ से प्यार करती थीं पर माँ से मस्ती नहीं... अब्ब माँ को नयी खुशियां मिल चुकी थीं. दलदल से रिहाई भी मिल चुकी थी..
और आज माँ मस्ती की हालत में भी आ चुकी थी, माँ भी तीनो की hi मेरी सेक्स पार्टनर बन चुकी थी.. तो तीनो hi तितलियाँ माँ के मज़े लेने का सोचने लगी. मैंने तो माँ के मंद को डाइवर्ट करने का सोचा tha,parr तीनो hi आगे और आगे निकलने लगीं.. माँ के मंद को डाइवर्ट करने के लिए वो माँ से मस्ती करने का सोचने लगी..
प्रिय माँ की कमर पर हाथ चलते हुए माँ की बैक साइड में लेजाने लगी.. जैसे hi माँ की बैकबोन में प्रिय की एक फिंगर घुसी माँ उछाल पड़ी.. माँ के लिए माँ की बैक बहुत सेंसिटिव थी. माँ के चुत्तड़ hi नहीं माँ के चुत्तडों के आस पास का एरिया hi माँ क लिए सेंसिटिव था..
मैं प्रिय को देख रहा था.. माँ ऑंखें बंद किये खुद क आंसू रोकने में लगी हुई थीं.. मैंने जहान्वी और श्रुति को प्रिय की तरफ ध्यान देने का कहा..
दोनों ने जैसे hi प्रिय को देखा तो वो भी सबब समझ गईं.. और प्रिय क साथ मिल कर माँ के मज़े लेने लगीं.. माँ भी अब्ब हमारी hi टीम में शामिल हो चुकी थी.. माँ को जितनी देर में एहसास होता, तब्ब तक्क जहान्वी ने माँ के होंटो को अपने होंटो में ले लिया और श्रुति ने अपने होंठ माँ के क्लीवेज से लगा दिया.. और चाटने लगी..
माँ ने अचानक से अपनी ऑंखें खोली तो तीनो को खुद में समाये देख कर उनकी ऑंखें कुछ बड़ी हो गईं... माँ ने एक आंख से मुझे देखा और आँखों से hi कहने लगी........ विज्जू बीटा इन शैतान की कहलाओ को क्या हुआ है.. आज अपनी माँ के साथ ऐसा क्यों कर रही हाँ...
मैं माँ को देख कर स्माइल देने लगा.. माँ आँखों में आंसू लिए हैरानगी में थीं.. फिर माँ भी सबब समझ गई और जहान्वी क सर्र क बालों को सहलाने लगी.
जहांनी ने माँ को किश करना छोड़ा, जहान्वी सिर्फ माँ की तवज्जो पाने क लिए माँ को किश कर रही थी..
माँ:- जहान्वी बीटा ये सब क्या है..
प्रिय माँ को बोलते सुन कर माँ की कमर को सहलाते हुए बोली..
प्रिय:- माँ अब्ब आप हमारी टीम में शामिल हो गई हाँ ना..
माँ:- क्या मतलब टीम में.? हम तो पहले से hi एक हाँ.. और टीम की ीमसे क्या बात.. हम तो शुरू से hi एक टीम हाँ..
प्रिय:- माँ आप मेरी बात नहीं समझ रही हाँ.......... प्रिय ने माँ के गांड की लकीर में ऊँगली घुसते हुए बोली...
माँ:- वो तो मैं समझ hi लूंगी.. तुम मेरी गांड में ऊँगली क्यों कर रही हो..
पहले ये तो बताओ..
priya:-(naughty स्माइल देते हुए) माँ यही तो समझने की कोशिश कर रही हों..
इतना बोल कर प्रिय ने माँ को बीएड पर लिटाया दिया और माँ क ऊपर चढ़ कर माँ क होंटो को अपने होंटो में लेने लगी... माँ कुछ कुछ प्रिय का मक़सद समझ रही थी... माँ भी अंदर से खुश हुई होगी.. पर बहार से वो शो नहीं करवा रही थी.. अब्ब वो भी मूड में आने लगी थीं...
प्रिय ने माँ क होंटो को अपने होंटो में लिया और चूसने लगी.. माँ प्रिय को कोई
रिस्पांस नहीं दे रही थी.. माँ प्रिय को रोक भी नहीं रही थी. कुछ देर प्रिय पुरे जोश में माँ क होंटो को पीने में लगी रही... फिर प्रिय ने माँ को किश करना छोड़ा और माँ की आँखों में देखने लगी.....
माँ सीरियस होकर प्रिय को देखने लगी.. मैं तो माँ की नौटंकी समझ रहा था. पर प्रिय माँ को ऐसे देख कर कुछ डर सी गई.. कही उसने माँ की मंशा क अगेंस्ट जा कर माँ को ग़ुस्सा तो नहीं दिला दिया.. माँ को प्रिय को घूर कर देखने लगी और प्रिय माँ से नज़रें चुरा कर साइड में देखने लगी...
प्रिय को खुद क गालों पर माँ की नज़रों की तपश फील हो रही थी.. जिस वजा से प्रिय की ऑंखें कुछ कुछ नम्म सी होने लगीं..
प्रिय:- सरररय माँ............
प्रिय क ऐसे बोलते hi मैं और माँ ज़ोर ज़ोर से हस्सन लगे... जहान्वी और श्रुति भी माँ को ऐसे देख कर कुछ डर गई थीं.. क्यों की पहले कभी उन्हों ने माँ के साथ ऐसा नहीं किया था........
तीनो माँ क मज़े लेने लगी थी.. पारर माँ ने तीनो के मज़े ले लिए थे..
हमारे हस्ते hi तीनो भी सबब समझ गईं.. और फिर वो भी हमारे साथ hi हस्सन लगीं..
प्रिय:- माँ मैं तो भूल hi गई थी. विज्जू ने आप की छूट की सैर कर ली है. तो आपको ग़ुस्से करने की क्या ज़रूरत है.. और फिर मैं भी तो आपकी लाड़ली हों.. मैंने ये कैसे सोच लिया क आपको मेरी किसी भी हरकत पर घुसा आएगा..
विजय:- प्रिय मेरी तितली.. तुम सबब नौटंकीबाज़ हो, तो क्या माँ नौटंकी नहीं कर सकती.. तुहे क्या पता प्रिय... माँ कितनी मज़े की चीज़ हाँ.. अभी तो तुमने माँ क असल रंग तो देखे hi नहीं हाँ.. मैंने देखे थे सूबा.. माँ हर बात में लाजवाब हाँ..
जहान्वी:- हाँ विज्जू, हमने भी माँ का ये रंग देख लिया है.. सच में एक बार तो मैं भी डर गाइट hi..
श्रुति:- और मेरी तो गांड से हवा निकालनी बंद हो गई थी.. माँ की नाराज़गी हमसे सहन नहीं हो सकती थी.. इसलिए हम तीनो hi दर गई थीं..
प्रिय:- विज्जू हमने माँ से कभी मस्ती नहीं की है.. और अब तो माँ तुम्हरे लुंड से चुद क हमारी टीम भी शामिल हो चुकी हाँ.. तो हमारा भी पूरा पूरा हक़ है माँ पर.. हम भी माँ क साथ सबब करेंगी... और जैसे विज्जू ने हम तीनो को एक साथ छोड़ा है.. माँ को भी विज्जू हमारे सामने hi छोड़ेगा.. क्यों माँ आपको कोई आपत्ति है इसमें.......
maa:-(smile देते हुए) मुझे क्यों आपत्ति होने लगी.. सबब कुछ तो तुम्हारे सामने खुला हुआ है.. किसी बेगाने से मई तुम्हरी नज़रो के सामने रह कर चुद सकती हों. तो फिर अपने विज्जू का लुंड लेने में कैसी शर्म..
प्रिय:- तो फिर आज आप विजजू क लुंड पर चढ़ कर अपने कमाल दिखाएंगी..
प्रिय बोलते hi कड़ी होकर अपने कपडे उतरने लगी.. जहान्वी श्रुति ने भी अपने कपडे उतारने शुरू कर दिए..
मैं माँ को देखने लगा.. माँ ने मुझे खनेच कर खुद के ऊपर गिरा लिया और मुझे किश करने लगी... सूबा की चुदाई तो बातों की नज़र हो गई थी.. पारर अब्ब माँ के पुरे पुरे मज़े लेने का समय आ गया था.. माँ भी तो पूरी तरह से पूरा प्यार पाने क लिए मचल रही थीं.. आज सूबा एक बार माँ ने मेरे लुंड से ताबड़ तोड़ चुदाई करवा क अपने दर्द को चेक कर लिया था.. अब्ब प्यार से एक एक लम्हे को वो फील करना छह रही थीं..
तीनो तितलियाँ नंगी हुई तो माँ के कपडे खोलने लगीं..
पहले मुझे साइड में हटाया और माँ को बिठा कर तीनो hi बड़े प्यार से एक एक करके माँ की शरीर के सारे hi कपडे उतरने लगीं.. माँ तीनो को देख कर मुस्कुरा रही थीं...
जब्ब माँ पूरी तरह से नंगी हो गई तो..
प्रिय:- विज्जू तेरे कपडे भी हम hi उतारें, या तुम खुद hi उतारोगे..
विजय:- तुम्हारे रहते मुझे क्या ज़रूरत है उतरने की..
तीनो:- हाँ ये भी सही कहा तुमने....
फिर तीनो ने मुझे भी नंगा कर दिया.. मेरा लुंड तो प्रिय की वजा से पहले से hi खड़ा था....
प्रिय:- माँ विज्जू का लुंड तो पुरे मूड में है.. आपकी छूट के काया हाल हाँ..
माँ:- उसका हाल भी सही नहीं है.. देख लो उसपर भी पानी की बूँदें चमक रही हाँ.. सारा दिन hi इसका यही हाल रहा है.. एक हिसाब से मेरा हाल भी तुम जैसा hi है.. मेरी सही से पहली चुदाई सूबा hi हुई है.. जैसे तुम सबब विज्जू से चुद के महसूस कर रही हो, कुछ वैसा hi मैं भी महसूस कर रही हों.. दिल जिससे पूरी तरह से संतुष्ट हो, उसके साथ हुई चुदाई को याद करते रहने से छूट हर वक़्त hi गीली रहने लगती है......... क्यों तुम तीनो की छूट ने सारा दिन पानी नहीं छोड़ा है क्या.???
तीनो माँ की बात पर हस्सन लगी..
तीनो:- माँ आप सही कह रही हाँ.. हमारी छूट भी पानी बहाने से खुद को रोक नहीं पा रही है.. पर माँ छूट में बेचैनी नहीं है. हमारी छूट हमारे दिल की hi तरह से मज़े में है. छूट अंदर से बहुत शांत है.. बास छूट ने विज्जू के लुंड को अच्छे से चुम्म लिया है ना, तो ख़ुशी से आंसू बहा रही है..
मई चरों की hi बातें सुन रहा था, मुझे भी ये सबब बहुत अच्छा लग रहा था.. और मेरे लुंड को भी..
माँ:- बोलो प्रिय बेटी कैसे करना है, आज सब तुम्हारे हिसाब से hi होगा..
प्रिय:- माँ आप विज्जू भाई के ऊपर लेट कर विज्जु को किश करें, और मैं पीछे से आपकी गांड को चाटोगी..
vijay:-(hassta हुआ) प्रिय माँ की गांड तो तुम चाट लोगी.. पर माँ से सहन नहीं होगा.. माँ की गांड का छेड़ माँ के लिए बहुत hi ज़यादा सेंसिटिव है..
माँ:- विज्जू बीटा प्रिय की भी तो माननी पड़ेगी ना.. तुम बीएड पर लेटो मैं तुम्हे किश करती हों..
मैं बीएड पर लेट गया और माँ मेरे ऊपर आ कर मेरे लुंड पर अपनी छूट को रखते हुए मुझे किश करने लगी... प्रिय माँ की गांड क पीछे आ कर अपना मोहन माँ की गांड पर लाने लगी.. मैंने और माँ ने अपने अपने पैरों को कुछ खोल लिया था.. जिस वजा से प्रिय को बैठने के लिए काफी जगा मिल गई.. प्रिय घुटनो पर झुकी माँ के चूतड़ों को चाटने लगी.. माँ ने मुझे किश करना छोड़ा और मेरे मोहन में hi सिसकी लेने लगी.. माँ के लिए अपने चुत्तडों पर प्रिय की जीब सहन करना आसान नहीं था.. माँ ने प्रिय की जीब के सुपर्ष को कुछ देर सहन किया और फिर मेरे होंटो को अपने होंटो में ले कर किश करने लगी....
मैं माँ क होंटो की क्या बात करों. माँ क जैसी होंठ किसी क नहीं थे.. माँ के होंटो की शेप बहुत की कमाल की थी.. कुदरती लालजी लिए हुए, हनी जैसी मिठास खुद में समोए हुए थे.. माँ के होंटो का टास्ते मुझे किसी और hi दुन्या में लेजाने लगा.. माँ को प्रिय की गांड चटाई से बहुत बेचैनी हो हो रही थी. पर माँ खुद पर जबर करते हुए बहुत hi प्रेम से धीरे धीरे करके मेरे होंटो अपने होंटो में लिए किश कर रही थी..
प्रिय ने भी माँ को ज़यादा तंग नहीं किया था. उसने भी माँ के चूतड़ों को नरमे से साइड में खेंच कर माँ की गांड की दरार को खोला था.. और माँ की पूरी hi दरार में अपनी जीब फेरने लग गई थी... मेरी hi तरह प्रिय भी माँ की गांड के छेड़ में गम होने लगी थी.. उसे भी यकीनन माँ की गांड क छेड़ में अपने मतलब सा सबब कुछ मिल रहा था.. माँ थी तो माँ से सबब hi अपने मतलब का hi मिलेगा.... प्रिय से जितना हो सका माँ की गांड के छेड़ को चाट रही थी..
जहान्वी और श्रुति अकेले रह गई थीं. तो दोनों hi प्रिय की चूतड़ों को सहलाना शुरू कर दिया... प्रिय की बहार को निकली हुई गांड दिलकश पोज़ बना रही थी. जिससे जहान्वी और श्रुति अपना मैं बेहला रही थीं..
कुछ देर गुज़री तो माँ की गांड में लगी आग माँ से सहन न हुई और माँ ने मुझे किश करना छोड़ दिया.. माँ गहरी गहरी साँसे लेने लगी.. माँ ने सर घुमा कर प्रिय को देखा. मुझे प्रिय का चेहरा नहीं दिखा, मेरी प्रिय माँ की गांड में मोहन छुपाये लगी हुई थी..
माँ:- hmmmmmmha..siiiiiiiiii..ufffff.. ohhhhhhhh..ahhhhhhh .. हाआआई .. प्रिय क्यों मेरी जान निकलना चाहती है.. बास करदे बीटा.. कही छूट पानी hi न छोड़ दे.. अंदर आग बहुत भड़क चुकी है.. तेरी जीब से के चाटने से मुझसे सहन करना मुश्किल होने लगा.. कही विज्जू क लुंड क बिना hi न पानी निकल जाए.
प्रिय ने सर्र उठा कर माँ को देखा तो प्रिय की ऑंखें लाल हो चुकी थीं..
प्रिय माँ की गांड से मस्त तो हुई hi थी. पारर शूरति और जहान्वी की म्हणत ने भी प्रिय को बहुत हॉट कर दिया था.. शायद जहान्वी और श्रुति ने प्रिय की छूट को भी सेहला दिया था.. जिस वजा से प्रिय की आँखों का रंग बदल गया था.
प्रिय की छूट ने भी पानी की नदियां बहाने शुरू कर दी होंगी...
प्रिय माँ को और मुझे देखते हुए उठ कड़ी हुई.. और साइड में लेट कर गहरी गहरी साँसे लेने लगी.. शूरती और जहान्वी प्रिय से लिपित गईं.. और माँ रहत की सांस लेते हुए मेरे लुंड पर बैठ गई..
मैंने माँ क बूब्स को दोनों हाथो में लिया और उन्हें धीरे धीरे मसलने लगा..
माँ अपनी सांस बहाल करती रही.. और मैं माँ के दूध को हलके हलके दबाता रहा..
2 मिंट में hi माँ थोड़ा सा उठी और मेरे लुंड को पकड़ कर अपनी छूट पर सेट करने लगी.. माँ ने दिन में टाइम निकल कर अपनी छूट को फिरसे टाइट कर लिया था.. माँ को अपनी छूट की केयर करना बहुत अच्छा लगता था.. मेरे लुंड का सूपड़ा माँ की छूट पर लगा तो मुझे पता चल गया था.. माँ ने सच ने hi आज अपनी छूट को टाइट कर लिया था..
माँ की छूट बहुत hi ज़यादा गीली हो गई thi..maa ने कोशिश की और मेरे लुंड को अपनी छूट में लेने लगी.. मेरा लुंड थोड़ा सा hi माँ की छूट क पानी से जेल हुआ था.. ज़ायदा तर खुश्क hi था.. माँ कोशिश करके मेरे लुंड को अपनी छूट में लेने लगी. पर माँ को दर्द होने लगा था.. लुंड कोटा था और माँ की छूट आज कुछ ज़यादा hi टाइट हो गई थी.. अभी मेरे लुंड का सुपडे hi माँ की छूट क लिप्स को खोल कर अंदर घुसा था.. माँ को दर्द हुआ तो माँ ने उठ कर मेरे लुंड को अपनी छूट से बहार निकल लिया और मुझे देखने लगी..
विजय:- क्या हुआ माँ, ऐसे क्या देख रही हो..
माँ:- विज्जू बीटा, तेरा लुंड बोहत मोटा है, अपनी छूट में लेने के लिए इसे हर बार hi गीला करना पड़ेगा...
विजय:- माँ तो फिर सूबा कैसा चला गया था..
माँ:- सूबा भी तो दर्द हुआ था ना. पारर मैं कुछ बोली नहीं थी.. और फिर मैं लेती हुई थी, तो कुछ दर्द देता हुआ आसान से hi अंदर घुस गया था.. पारर अब्ब वो कुछ खुश्क भी है और मैंने आज अपनी छूट को कुछ ज़यादा hi टाइट भी कर लिया है.. जिस वजा से लुंड को घुसने में परेशानी हो रही है..
विजय:- तो आप इसे मोहन में ले कर चूस लें, कुछ गीला हो जाएगा..
माँ:- विज्जू बीटा वही तो करने लगी हों.. ऐसे तो ये मेरी छूट में जाने से रहा..
माँ मेरे लुंड पर झुक गईं और उसे पकड़ कर पहले अच्छे से चाटने लगी.
मैंने तीनो की और देखा तो वो तीनो hi खुद में लगी हुई थीं.. जहान्वी प्रिय के मोहन पर अपनी छूट को रखे उसकी छूट चाट रही थी, तो श्रुति जहान्वी की छूट में मोहन घुसाए हुए thi..teeno ने hi मुझे और माँ को पूरा पूरा टाइम दे दिया था. और खुद की छूट को एक दूसरे की छूट में घुस के शांत करने लगी थें..
मुझे माँ से प्यार करके जल्द hi सो जाना था.. पहले hi बातों में बहुत समय बीत चूका था.. और मेरे लिए जल्द सो कर कल सूबा जल्दी उठना भी ज़रूरी था..
अब्ब गैंग्स से टंका भीड़ चूका था, जो किसी के सावधान होने से पहले hi सभी को उसकी साँसों से मुक्त करना था.. जितनी जल्दी हो सके इस शहर की गंदगी को ख़तम करना था...
मैंने माँ को देखा तो माँ मेरे लुंड को अपने मोहन में लिया चूस रही थी. माँ एक हाथ की मीठी बना कर मेरे बचे हुए लुंड को मसल रही थी.. मेरा 4" लुंड माँ क मोहन में था. एक हाथ से माँ मेरे लुंड को मुठी में लिए मसल रही थी. तो दूसरे हाथ से माँ मेरे लुंड की बॉल्स को हलके हलके से दबा और सेहला रही थी.
माँ मूड में आ चुकी थी, और माँ मेरे लुंड को पूरी तरह से महसूस करते हुए मज़े ले रही थीं. और मुझे मज़ा दे भी रही थीं..
माँ को पूरी मस्ती me,aur पूरी ख़ुशी में देख कर मेरा मैं अंदर से बहुत खुश होने लगा.. माँ मेरे लुंड को अपने मोहन में लिए अपना पूरा हक़ वसूल रही थीं..
कुछ देर माँ मेरे लुंड को अच्छे से मोहन में लिए चूसती रही. फिर उसे मोहन से निकाल दिया.. और मुझे देखने लगी..
माँ;- विज्जू बीटा, कैसा लगा अपनी माँ का पहला ब्लोजॉब.... सूबा तो बास तेरे लुंड को साफ़ hi किया था.. इसका सवाद तो अब्ब मिला है मुझे..
विजय:- माँ तो फिर कसिए लगा मेरे लुंड का सवाद...
माँ:- जैसा सोचा विज्जू बीटा, बिलकुल वैसे hi सबब मिला है मुझे, सालो तक्क जिस सुरूर क लिए मचल रही थी, वही मिला है आज मुझे..
माँ इतना बोल कर फिरसे मेरे लुंड के ऊपर बैठने लगी.. माँ ने अपने दोनों पेअर मेरी दोनों साइड में कर लिए थे.. मेरा लुंड पूरी तरह से छत को सलामी दे रहा था.. जब्ब माँ की छूट मेरे लुंड से 1" क फासले पर रह गई तो माँ ने मेरे लुंड को पकड़ कर अपनी छूट के लिप्स पर सेट किया... और अपनी गांड को थोड़ा सा हिला कर मेरे लुंड क सुपडे से अपनी छूट के लिप्स खोलने लगी.. जब लुंड माँ की छूट क लिप्स को खोल कर अंदर घुसा तो वो सीधा hi माँ की छूट क छेड़ में जा घुसा..
माँ ने मुझे एक स्माइल दी, और फिर मेरे लुंड पर अपनी छूट का दबाओ बढ़ने लगी. माँ जैसे जैसे नीचे हो रही थी, मेरा लुंड माँ की छूट में ग़ायब होता जा रहा था..
मैं बाबत घोरसे माँ की छूट में अपने लुंड को जाता हुआ देख रहा था... धीरे धीरे करके मेरा लुंड 5" तक्क माँ की छूट में घुस गया. आगे जाने में उसे कुछ दिक्कत होने लगी तो माँ रुक गई.. और मेरे पेट पर एक हाथ रख कर खुद को सँभालने लगीं.. माँ के चेहरे पर कुछ दर्द क आसार दिखने लगे थे.. माँ की छूट अभी भी बहुत टाइट थी और मेरा लुंड बहुत ज़ायदा फस फस कर माँ की छूट में घुस रहा tha....maa ने कुछ देर की रेस्ट ली और फिर से अपनी छूट का दबाओ मेरे लुंड पर बढ़ने लगीं.. इस बार कुछ दिक्कत हुई पारर माँ नहीं रुकी और माँ ने खुद की छूट क दर्द को साइड में रखते हुए कुछ ज़यादा hi ज़ोर लगा कर मेरे लुंड पर बैठने लगी. जिस वजा से माँ को कुछ दर्द होने लगा.. पारर माँ आज मेरे लुंड चुसाई क बाद मेरे लुंड को अपनी छूट में पूरी तरह से उतार के पूरा पूरा मज़ा लेना चाहती थीं..
मैंने और माँ दोनों ने hi अपनी ऑंखें बंद कर ली थीं.. मैं माँ की छूट में अपने लुंड क घुसने का एक एक सेंटीमीटर सवाद ले रहा था.. शायद माँ भी कुछ ऐसे hi मज़े में थी.. लुंड घुसा कर, या छूट में ले कर अंदर बहार करने में, और लेने में भी बहुत मज़ा है, पर बंद आँखों से सबब देखकर और महसूस करके मज़े लेने का भी अपना एक अलग hi चार्म होता है.. और हम दोनों माँ बीटा उस चार्म को पूरी को तरह से महसूस कर रहे थे...
जब्ब मुझे लगा क माँ रुक गई है, तो मैंने ऑंखें खोल कर देखा तो माँ मुझे hi देख कर मुस्कुरा रही थी..
माँ:- क्यों विज्जू बीटा, अपनी माँ की छूट में लुंड को घुसते हुए पूरा मज़ा ले रहे ho..meri hi तरह से एक एक सेकंड को भरपूर एन्जॉय कर रहे हो.......... माँ दर्द भरी नॉटी स्माइल देते हुए बोली..
विजय:- हाँ माँ, अभी तो सही से टाइम मिला है, सबब महसूस करने का.. शान्ति से hi सबब महसूस किया जा सकता है...
प्रिय और वो तीनो किस स्टेज पर थीं मुझे अभी नहीं पता था.. मुझे तो तब्ब पता चला जब्ब प्रिय अचानक से hi आ कर मेरे मोहन पर अपनी छूट रख कर बेथ गई..
प्रिय:- माँ चलो विजू क लुंड पर ऊपर नीचे हो के दिखाओ, मुझे भी आपकी छूट में विज्जू के लुंड को आते जाते हुए देखना है.. सूबा तो आप दोनों ने hi चुप कर चुदाई कर ली थी, अब्ब मेरे सामने करो.. क्यों जहान्वी मैंने सही कहा ना..
jhanvi,shruti:- हाँ प्रिय तुमने एक दुम्म सही बोलै है..
प्रिय माँ की तरफ झुकी, तो माँ प्रिय की मंशा समझते हुए प्रिय के होंटो को अपने होंटो में ले कर किश करने लगी..
मैं प्रिय के चूतड़ों को पके प्रिय की छूट चाटने में लग गया था.. प्रिय की छूट जहान्वी की म्हणत से पानी छोड़ चुकी थी.. मैंने पहले प्रिय की छूट ो अच्छे से देखा था, रात की चुदाई के कारण मेरी प्रिय की छूट अभी भी कुछ कुछ सूजी हुई थी.. मैं बहुत प्यार से अपनी प्रिय की छूट को चाटने लगा..
माँ प्रिय को किश करते हुए धीरे धीरे मेरे लुंड पर ऊपर नीचे भी होने लगीं. हम तीनो में से किसी को भी जल्दी नहीं थी.. सोना तो जल्दी hi था, पर छुड़ाए में जल्दी कैसी...
श्रुति और जहान्वी भी आ गई और दोनों साइड में हो कर माँ और प्रिय के साथ शामिल हो गईं... श्रुति माँ और प्रिय का एक एक दूध पकड़ कर धीरे धीरे करके मसलने लगी, तो जहान्वी माँ की छूट और मेरे लुंड पर हाथ रख कर हलके हलके सहलाने लगी.
हम पांचू hi सुरूर ने जाने लगे. सभी hi एक दूसरे के अंगों में वियस्त थे. और धीरे धीरे इस सबब का आनंद ले रहे थे.. माँ ने अपनी गांड को कुछ और भी उठा लिया था जिस वजा से मेरे लुंड माँ की छूट से कुछ और भी बहार आ गया था. जो जहान्वी के हाथ में सही से आने लगा था. माँ मेरे लुंड को 3" बहार रखते हुए थोड़ा थोड़ा ऊपर नीचे होने लगी थी, और जहान्वी मेरे लुंड को और माँ की छूट को हलके हलके सेहला लिया करती... जहान्वी माँ की छूट से ज़यादा छेड़ छड़ नहीं कर रही थी. कही माँ जल्दी न झाड़ जाए.. वो बास इस सबब का अंदड़ ले रही थी..
मैं प्रिय की पहले से पानी छोड़ चुकी छूट को चाट रहा था. मेरी जीब प्रिय की सूजी hi छूट के लिप्स को खोले अंदर घुसी हुई थी.. प्रिय को कुछ पैन भी हुआ था. मेरी जीब से, या शायद कुछ जलन हुई थी.. पर प्रिय वो सहन कर गई थी.. मैं अच्छे से प्रिय के चूतड़ों को खोले प्रिय की खुल चुकी छूट में अपनी जीब घुसे हुए अंदर बहार करने में लगा हुआ था.. कभी मेरी जीब प्रिय क गांड को भी चायत लेती थी..
कुछ देर बाद प्रिय अपनी छूट मेरी जीब से साफ़ करवा कर उठ गई.. प्रिय को उठते देख कर जहान्वी और श्रुति भी साइड में हो गईं..
माँ:- क्या हुआ प्रिय बेटी, ऐसे साइड में क्यों हो गई हो..
प्रिय:- माँ आप विज्जू भाई से अच्छे से चुद लें. मेरा जितना दिल किया वो मैंने कर लिया.. अब्ब रात भी बहुत हो गई है. तो आप विज्जू भाई के लुंड का पूरा पूरा आनंद ले लें.. ये सबब तो अब्ब चलते hi रहना है.. हम सबब hi तो साथ शामिल हो चुके हाँ.. और वैसे hi अब्ब हम तीनो की hi छूट शांत है. तो आप दोनों भी खुद को शांत करलें, फिर सोते हाँ..
jhanvi,shruti:- हाँ माँ, हम तब्ब तक्क बाथरूम में जा के फ्रेश होती हाँ. आप विज्जू भाई से चुदाई का भरपूर आनंद ले लें..
माँ:- ठीक है बीटा, तुम तीनो को जैसे सही लगे, वर्णा मुझे कोई आपत्ति नहीं है.. मुझे तो सबब के साथ मिलकर भी उतना hi मज़ा आ रहा था.. जितना अकेले में आता है.. अब्ब तो मैं भी तुम तीनो के जैसे hi सिर्फ विज्जू बीटा से छुड़ा करूंगी.. और हम अब्ब पांचू hi एक साथ सोया करेंगी..
प्रिय:- matlab.?..kya आपने पापा के साथ सोना छोड़ दिया है..
माँ:- नहीं बीटा. कभी कभी उनके पास भी चली जाया करोगी.. पर चुदाई सिर्फ अपने विज्जू बेटे से hi करवाया करोनंगी.. रंजीत ने भी ok बोल दिया है.. तो फिर अब्ब मैं अपने दिल की क्यों न मानो..
तीनो hi ख़ुशी से उछाल पड़ीं.
तीनो:- सच में maa.fir तो बहुत मज़ा आया कैरगा.. पांचू hi एक रूम में..
माँ:- हाँ बीटा, अब्ब विज्जू लौट आया है हम सबब की लाइफ में, तो विज्जू से दूर रहने का मैं नहीं होता.. और फिर विज्जू बीटा को जल्द hi तो आगे क सफर पर भी निकलना है... मेरा बदला लेगा न मेरा बीटा विज्जू.. तो विज्जू को जाना पड़ेगा.. तब्ब तक्क विज्जू का प्यार खुद में समां लेना चाहती हों. फिर पता नहीं कितना समय विज्जू के बिना रहना पड़े..
विजय:- माँ मैं बीच बीच में आता रहूँगा ना..
माँ:- नहीं विज्जू बीटा... जल्दी से बदला पूरा करो, और वापिस लौट कर हमेशा के लिए hi हमारे बीचे में रहो.. दुश्मनो को लम्बी सजा देनी है. पारर किसी भी मुआमले को लम्बा नहीं खेंचना है.. जितनी जल्दी हो सके सबब को hi सबक़ सीखा कर लौट आना ...
तीनो:- हाँ विज्जू अब्ब हम हमेशा hi साथ रहना चाहती हाँ. तुम जब्ब जाओ तो सबब जल्दी hi ख़तम करके लौट भी आना..
विजय:- ठीक है, जैसे तुम सबब कहो, वर्ण मेरा तो इरादा था, सकूँ से सभी को तड़पा तड़पा कर मारूंगा. पारर अब सबब कहते हाँ क मुझे सबब जल्द hi ख़तम करना है, तो जल्द hi ख़तम करके लौट आऊँगा..
माँ:- ये पैलेस किश लिए है विज्जू बीटा. पहले जल्दी से सभी को बर्बाद कर देना, जिस को पैसों का घमंड है, जिसको अपनी पावर का घमंड है, वो जल्दी hi चकनाचूर करके सभी को उठवा के यही पैलेस में ले आना, और फिर जैसे मैं करे उनके साथ सलूक करना.. मैं भी सब को मिलने वाली सजा को देखना चाहती हों.. मैं भी सबब की आँखों में ऑंखें दाल कर गुज़रा हुआ वक़्त फिरसे दोहराना चाहती हों.. पारर इस बार वक़्त की लगाम मेरे हाथ में होगी. और बाकी सबब को मैं बताओगी. क जब्ब वो साहिब इ iqtdaar(saarvabhaum) थे. तो कैसे हिटलर बन्न कर मेर ज़िन्दगी का फैसला करने बैठ गए थे..
अब्ब सबब की hi ज़िन्दगी का फैसला मैं करुँगी.. मुझे बहुत बेचैनी है विज्जू बीटा.. जल्द hi सबब को मेरे सामने लाइन हाज़िर करो.. मैं उस तरफ सोचना नहीं चाहती. पारर जैसे hi मेरी सोच उस तरफ जाती है तो मुझसे सहन नहीं होता..
विजय:- माँ आप टेंशन न लें, बास दिल्ली में कुछ काम बाकी है, दोनों गैंग्स को मैंने ख़तम करना शुरू कर दिया है. जल्द hi सभी को ख़तम करके मैं निकलता ुओं आपका बदला लेने क लिए..
तीनो बाथरूम में घुस गईं और माँ मेरे लुंड पर ऊपर नीचे होने लगीं..
4 बार माँ ने मेरे लुंड को सुपडे तक्क बहार निकल कर अपनी छूट में लिया.. मेरा लुंड माँ की छूट क पानी से चमकने लगा था.... जब्ब माँ को कुछ तसल्ली हुई तो माँ मेरे चेहरे पर झुक गई और मेरे होंटो को अपने होंटो में ले कर चूसने लगी.. नीचे मेरे लुंड का भी माँ अपनी छूट में अंदर बहार कर रही थीं..
कुछ देर माँ मुझे किश करते हुए चुदती रही.. मैं माँ की पीठ पर अपने दोनों हाथ फेरते हुए माँ की गांड के छेड़ की और जाने लगा. कभी माँ के चुत्तड़ो को सहलाने लगता. तो कभी माँ की गांड क छेड़ में ऊँगली करने लगता..
माँ ने मुझे किश करना छोड़ा और मेरे लुंड पर पूरी तरह से बैठ गई.. और मेरे सीने पर हाथ रख कर थोड़ा सा झुकी और फिर अपनी गांड को को गोल गोल घूमने लगीं...
माँ के ऐसा करने से मुझे बेहद सुरूर आने लगा.. मेरा लुंड तो पहले से hi बहुत ज़यादा सख्त हो चूका था.. पारर इस बार माँ के ऐसा करने से उसकी अकड़न और भी बढ़ गई थी.. मेरा लुंड माँ की छूट में और भी फसने लगा था.. मेरे अंदर खून ने अपनी रफ़्तार बढ़ानी शुरू कर दी थी.. माँ का ये अंदाज़ बहुत hi ज़यादा मज़े वाला था..
माँ के बूब्स गोल गोल घूमने से उछाल रहे थे.. जो मुझे बहुत hi ज़यादा बेचैन कर रहे थे.. माँ की दूध फूलने लगे थे और माँ के पिंक निप्पल अकड़ने लगे थे.. जो माँ क फूल चुके दूध पर बहुत hi भले लगने लगे थे..
मैंने हाथ बढ़ा कर माँ के डोडो बूब्स पकड़ लिए.. मुझे ऐसा लगा. जैसे टाइट करके भरे गए घुबरी को मैंने अपने हाथ में ले लिया हो. थोड़ा सा दबाओगे तो पहात जायेंगे.. पर सवाद बहुत आने लगा था मुझे.. मेरे हाथ माँ के बूब्स पर गए थे क मेरा लुंड माँ की छूट में झटके खाने लगा...
माँ क गोल गोल घूमने से मेरा लुंड 3" बहार आने लगा था.. और मेरा मैं था क नीचे से एक झटका मारो और मेरा लुंड पूरा hi माँ की छूट में जा समाये.. मुझे माँ क ऐसे करने से इतना मज़ा मिल रहा था...
माँ 7 मिंट तक गोल गोल घूमती रही, फिर रुक गई..
मुझे देख कर मुस्कुराने लगे..
माँ:- क्यों बीटा, करा दी ना जन्नत की सैर..
विजय:- हाँ माँ, सच में hi मुझे पूरी जन्नत दिख गई थी.. माँ क्या धांसू अंदाज़ अपनाया है आपने..
माँ:- विज्जू बीटा मैंने ये पहली बार किया है.. पारर सालों से hi मैं ख़यालू की दुन्या में रहते हुए तेरे लुंड से ऐसी hi चुदाई करती रही हूँ.. और भी मैंने कई अंदाज़ बदल बदल कर चुदाई की है तेरे साथ ख्यालों में...
वहां कोठे पर तो टांगें उठाये या घोड़ी बन कर hi चुदती रही हों.. ये सबब मेरे अपने अंदाज़ हाँ, जो मैं में लिए मैंने अपनी एक अलग hi दुनय बना ली थी..
और तेरे साथ सबब करने का सोचा करती थी..
विजय:- माँ फिर अपना और कोई अंदाज़ दिखाओ ना..
माँ:- सारे अंदाज़ आज hi तो मैंने नहीं दिखने वाली तुझे विज्जू बीटा.. धीरे धीरे करके सबब करोगी ना.. इतने साल दलदल में फेज रह कर गुज़र दिए हाँ.. थोड़ा थोड़ा करके सुरूर loongi..sabb एक hi बार तो मैं नहीं करने वाली.
माँ मेरे ऊपर लेट गई और अपनी गांड उठा कर मेरे लुंड को सुपडे तक बहार कर दिया..
माँ:- विज्जउ बीटा... अब्ब तुम नीचे से धक्के मार कर मेरी छूट में अपना लुंड डालो.. धीरे धीरे करना विज्जू बीटा जल्दी मैट करना.. बास नार्मल स्पीड hi रखना.. जब्ब छूटने लगो तो अपनी स्पीड बढ़ा सकते हो.. उससे पहले नहीं
विजय:- ठीक है माँ. जैसे आप कहें..
फिर मैंने नीचे अपनी गांड उठा कर माँ की छूट में अपना लुंड दाल दिया.. इस अंदाज़ में भी मुझे बहुत मज़ा आने लगा. और मैं माँ की बताई गई स्पीड क हिसाब से माँ को छोड़ने लगा.. माँ मुझे किश करने लगी.. और मई माँ की छूट के मज़े लेने लगा.. माँ की छूट बास प्रिय की छूट से थोड़ा सा hi कम् टाइट थी.. वर्ण माँ की छूट भी किसी कुंवारी लड़की से कम् नहीं थी....
माँ मुझे किश करती रही जब्ब तक्क उनकी सांस नहीं फूल गई..
माँ ने किश तोड़ी तो माँ की छूट भी पानी बहाने वाली हो गई थी..
माँ की सांस तो फूल hi चुकी थी,. माँ का जिस्म भी अकड़ने लगा.. माँ अब्ब झड़ने वाली थी..
माँ के बूब्स मेरे मोहन पर लटक रहे थे.. जिनकी तपश मुझे अपने चेहरे पर फील हो रही थी.
कुछ देर में माँ अंत सीमा पर पोहंची तो माँ भी अपनी गांड को मेरे लुंड पर हिलाते हुए झड़ने लगी. माँ मेरे ऊपर गिर गई थी.. पर मैं माँ की छूट को और भी खोलने में लगा रहा...
जब तक माँ की सांस बहाल हुई मैं माँ की छूट में लुंड दाल कर माँ की छूट ने जो पानी छोड़ा था, उसे लुंड से निकलने लगा..
माँ:- विज्जू बीटा, अब्ब पोजीशन बदलते हाँ ना.. मई थक गई हों..
विजय:- हाँ माँ, मेरा भी मैं है, मैं आपको किसी और पोजीशन में छोड़ों..
माँ:- अच्छा, तो मेरा विज्जू अपनी माँ को किश पोजीशन में छोड़ने का मैं रखता है..
विजय:- माँ मैं आपकी गांड को देखते हुए छोड़ना चाहता हों..
माँ:- मतलब, मैं अपन विज्जू की घोड़ी बन जाऊं..... माँ नॉटी स्माइल देते हुए बोली. माँ की छूट ने पानी छोड़ कर माँ को फ्रेश कर दिया था..
विजय:- हाँ उस तरह से आपकी छूट और गांड का व्यू यकीनन बहुत अच्छे से दिखेगा...
माँ मेरे ऊपर से उठी और साइड में घोड़ी बन्न गई.. मेरी तरफ देखते हुए बोली.
माँ:- लो विज्जू बीटा बन्न गई तुम्हारी माँ तुम्हारी घोड़ी... अब्ब देख लो अच्छे से मेरी छूट और गांड.. तेरे लिए hi इसे मेन्टेन किये रखा है... देख और चेक कर मैंने इसे तेरे लिए सही से संभल रखा है या नहीं..
मैं भी माँ को एक स्माइल देता हुआ माँ की गांड के पीछे चला गया.. बाथरूम से मेरी तितलियों के मस्ती करने की आवाज़ें भी सुनाई दे रही थी. वो तब्ब तक्क नहीं आने वाली थी, जब्ब तक्क माँ और मैं अच्छे से एक दूसरे का प्यार न पा लें.. माँ एक बार मेरे प्यार से अपनी छूट को बेहला चुकी थी... अब्ब मैं दूसरी बार माँ की छूट को बहलाने वाला था.. मेरा फुल अकड़ा हुआ लुंड माँ की गांड के पास hi हवा में झूल रहा था..
और मैं बड़े घोरसे माँ की छूट और गांड को देखने लगा.. इस पोजीशन में मैं माँ को सालों बाद देख रहा था. पहले तब्ब देखा था, जब्ब माँ किसी और के लुंड क लिए घोड़ी बना करती थी............
मैं कुछ देर माँ की छूट और गांड को देखता रहा और अपने दिल को शांत करता रहा... पर मेरा लुंड तो माँ की छूट में घुस क्र hi शांत होने वाला था.. उसे अब्ब बहुत ज़यादा बेचैनी हो रही थी. और मुझे उसकी बेचैनी को अब्ब ख़तम करना था...
मैं थोड़ा सा और आगे हुआ और अपने लुंड को माँ की छूट पर टिका दिया.. मैंने अपनी गांड को आगे किया तो मेरा लुंड माँ की छूट के लिप्स को खोलता हुआ अंदर घुसने लगा.. पीछे से जांघों के दबने की वजा से माँ की छूट क लिप्स बड़े दिखने लगे थे.. माँ अपनी छूट टाइट रखते हुए छोड़ना चाहती थी. वर्ण अपने पेअर खोल कर अपनी छूट को लूसे कर सकती थीं..
मैंने माँ की कमर को पकड़ा और थोड़ा सा ज़ोर लगा कर अपने लुंड को माँ की छूट में पुश करने लगा.. माँ की छूट पानी छोड़ चुकी थी तो लुंड आराम से अंदर जाने लगा.. जैसे जैसे लुंड माँ की छूट में जा रहा था.. माँ की छूट और भी खुलती जा रही थी.. अब्ब मुझे सही से माँ की छूट दिख रही थी.. और मेरा पूरा फोकस माँ की छूट के खुलने पर hi था.. और मैं घोर से माँ की छूट में अपने लुंड को जाते हुए देख रहा था.... कुछ देर में मेरा 5" लुंड माँ की छूट में घुस गया था.. मैं उतना hi लुंड माँ की छूट में अंदर बहार करने लगा.. अगर सारा डालता तो माँ की छूट छुप जाती और मैं अभी ये सबब देखते रहना चाहता था.
5 मिंट तक मैं ऐसे hi माँ की छूट में लुंड को 5" तक अंदर बहार करता रहा.. माँ की छूट एक बार फिर गरम होने लगी थी..
जिस स्पीड से मैं कर रहा था. मैं तो मज़ा की इन्तहा तक पोहंचा हुआ hi था.. पर माँ भी मेरी धीरे से की जानी वाली चुदाई को दिल से महसूस कर लगी थी..
माँ फिरसे ग्राम हुई तो मैंने अब्ब माँ को छोड़ने की स्पीड कुछ बढ़ा दी.. माँ को और भी मज़ा आने लगा.. पहले जो चुड़ते हुए माँ की सिसकियाँ नहीं निकली थें.. इस बार माँ की सिसकियाँ उनके मोहन से निकलने लगीं.
माँ:- ahhhhhhhhhhhh vijjjjjjjuuuuuuuuuu betaaaaaaaaaaaa.. siiiiiiiiiiiiiii
कितना मस्त स्पीड से लगे हुए हो.. बहुत अच्छे बीटा.. ऐसे hi हम्मम्मम्मम्हा
अपनी माँ को छोड़ते रहो... तुम्हारी माँ की छूट फिर से ख़ुशी क मारे रोने लगी है.. उसे इतने प्यार की आदत जो नहीं है.. बहुत अच्छे विज्जू बेताआआआ...
माँ अपनी छूट में मेरे मोटा और 8.7" लुंड को पूरी से रगड़ खा क जाता हुआ महसूस कर रही थी..
मैं माँ की कमर को पकडे अपने बचे हुए लुंड को भी माँ की छूट में उतार कर अंदर बहार करने लगा था.. इस बार मेरी नज़र माँ की पीठ पर थी.. मैं वही से अपनी नज़र को नीचे लाते हुए माँ की गांड तक का सफर करने लगा.. और साथ में माँ की चुदाई भी होती रही.. माँ इस पोजीशन में कोई आस्मां से उत्तरी हुई अप्सरा लग रही थी.. माँ का पूरा बदन hi चमकदार था.. माँ को अंदर से बहुत ज़यादा ग़म लगे थे.. अंदर से माँ बहुत hi ज़यादा ज़ख़्मी हुई थी.. पारर माँ की खूबसूरती बहार से ज़रा भी नहीं डगमगाई थी.. माँ की स्किन अपने आप में एक मिसाल थी...
माँ की चर्बी से पाक स्किन मेरे सामने अपने जलवे दिखा रही थी, और मैं माँ की छूट में घुसा अपने लुंड क जलवे दिखा रहा था...
माँ की छूट ने पानी बहाना तेज़ किया तो मेरे लुंड को माँ की छूट में घुसने के लिए और भी आसानी होने लगी.. अब्ब मेरा लुंड पूरा hi माँ की छूट में घुसने लगा था.. जो घोड़ी बानी माँ की बच्चेदानी को चूम कर बहार आ रहा था..
जब भी मेरा लुंड माँ की बच्चेदानी को चूमता था माँ की सिसकियाँ तेज़ होने लगती थी.. और माँ फुल चार्म में आती जा रही थीं..
माँ एक बार फिरसे झड़ने वाली हुई तो माँ ने इस बार अपनी गांड को ज़ोर से हिला कर मेरा लुंड लेना शुरू कर दिया था..
माँ का जिस्म एक बार फिरसे अकड़ने लगा...
माँ:- विज्जउ बीटा.. मैं एक बार फिरसे झाःदने वाली हूँ.. थोड़ी सी स्पीड बढ़ा दो... siiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaaaaa ........ उफ्फफ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह्हह ओह्ह्ह्हह्ह
हाँ ऐसे hi विज्जू बीटा .. थोड़ा और तेज़ .. थोड़ा और ज़ोर से .. मेरी छूट गई.
माँ सिसकियाँ लेते हुए फिरसे झड़ने लगीं..
अब्ब मेरा लुंड भी अपनी अंतिम सीमा पर tha..to मैंने भी इस बार अपनी स्पीड कुछ और भी बढ़ा दी.. और एक रिधम से माँ की कमर को पकडे माँ को छोड़ने लगा..
माँ भी अब्ब समझ गई थी.. मेरे लुंड अब्ब उनकी छूट में अपना पानी उगलने वाला है.... माँ थक चुकी थी. पारर माँ ने मुझे लगा रहने दिया.. मेरा लुंड जैसे जैसे चार्म क करीब पोहचने वाला था. मेरी स्पीड बढ़ने लगी थी.. माँ को कुछ दर्द होने लगा था.. पर माँ ने मुझे नहीं रोका..
मेरा बदन का सारा hi खून इकठा हो कर मेरे लुंड तक्क आने लगा था.. जिस वजा से वो और भी फूल गया था.. और किसी भी समय वो माँ की छूट में पानी उगलने वाला था..
10 धक्कों के बाद hi मेरे लुंड ने लावा माँ की छूट में छोड़ना शुरू कर दिया.
मेरे लुंड से निकलने वाला वीर्य सीधा माँ की बच्चेदानी में जा कर भरने लगा.. मुझे महसूस हुआ जैसे माँ की बच्चेदानी ने मेरा सारा hi वीर्य खुद में सामना शुरू कर दिया है.. और फिर जब्ब मेरे लुंड का सारा hi पानी निकल गया तो मैं साइड में जा क लेट गया और अपनी साँसों को ठीक करने लगा..
माँ उसी पोजीशन में लेती रही.. तीनो शायद बाथरूम क दूर से जी हमें देख रही तीन.. हमारी चुदाई ख़तम होते hi वो रूम में आ गए.. तीनो hi नंगी थी. और आते hi बीएड पर लेट गयी..
एक कपडा उठा कर प्रिय ने मेरे लुंड को साफ़ किया और उसे रूम की एक साइड में फ़ेंक दिया.
लुंड मोहन में लेके साफ़ इसलिए नहीं किया. क अभी ऐसा आकरके वो ग्राम होने क मूड में नहीं थीं..
माँ को उसी पोजीशन में देख कर प्रिय बोली..
प्रिय:- माँ आप अभी तक ऐसे घोड़ी क्यों बानी हुई हाँ.. बीएड पर लेट जाएँ ना.
माँ;- नहीं प्रिय बेटी, मैं अपने विज्जू के वीर्य को अपनी बच्चेदानी में सोख लेना चाहती हों..
हम चरों hi माँ की बात सुनकर माँ को देखने लगे.. और माँ घोड़ी बानी सर मूड हमे देख कर स्माइल देने लगी..
माँ:- प्रिय बेटी मैंने सोच लिया है.. मैं अपने विज्जू से अपनी मांग भी भरवाओगी. और अपने विज्जू क लुंड क वीर्य से एक और नन्हा विज्जू अपने पेट से जनम दूंगी .. मेरा बास चले तो मैं na-jaane और क्या कुछ कर जाऊं.. इतना मुझे अपने विज्जू पर प्यार आने लगा है...
4 दिन हुए हाँ हमें पैलेस में आये हुए. तो धीरे धीरे करके सभी अरमान याद आने लगे han..officially मैं रंजीत की बीवी बन क रहूगी.. पर सेक्रेटली मैं विज्जू की माँ और वाइफ दोनों hi बने रहना चाहती हों.. क्यों क्या किसी को ऐतराज़ है कोई.
तीनो:- नहीं माँ, ये तो बहुत ख़ुशी की बात है, कुछ ऐसा hi तो हम तीनो ने भी सोचा हुआ है, हम भी अपने विज्जू के विज्जू को जनम देना चाहती हाँ.. जहान्वी तो एक बार विज्जू क वीर्य को अपने अंदर ले चुकी है. अब्ब मेरी ुर श्रुति की बारी है..
मेरी सांस अब्ब तक्क ठीक हो चुकी थी.. और मैं चरों को hi देख कर अपना सर्र खुजाने लगा था.. मुझे हैरत ज़रूर थी, पारर कुछ भी मेरे लिए शॉकिंग नहीं था.. जब्ब चरों hi मिलकर रेगुलर बाकी बची ज़िन्दगी मेरे लुंड से छोड़ने वाली थीं. तो फिर ये सबब तो होना hi था.. पर माँ की बात सबब से अलग थी.. माँ का ऐसा मैं जान कर मुझे जितनी हैरत हुई थी. उस से बढ़ कर मुझे ख़ुशी भी हुई थी.. शायद मेरे अंदर भी कही न कही ऐसा hi कुछ छुपा हुआ था.. अब्ब माँ ने कहा तो मैं अंदर से पूरी तरह से संतुष्ट हो गया था..
जैसे मेरे अंदर से मचल रहे अरमानो को उसके मतलब का सबब मिल गया हो..
माँ:- विज्जू बीटा तुम्हे कोई दिक्कत है मेरी इस खुवाहिश को लेके..
विजय:- नहीं माँ, मैं भी बहुत खुश हुआ हूँ आपके दिल की बात जान कर.. मेरे लिए तो आप सबब से बेस्ट हाँ.. आप कुछ भी सोचें, मेरे लिए उससे बढ़ कर ख़ुशी किसी और बात में कहैं होगी.. मैं तो वो ाहर सूरत hi करूँगा जो आपके दिल में हो..
माँ:- विज्जू बीटा, इस ख़ुशी क मोके पर मैं भी तुझे एक इनाम देना चाहती हूँ..
vijay:-kaisa इनाम माँ.?
तीनो:- माँ कही आप विज्जउ को गांड देने वाले इनाम की बात तो नहीं कर रही.
माँ:- नहीं बीटा.. वो तो है hi विज्जू की, विज्जू स्पेशल है, विज्जू क अंश को खुद की कोख में लेने वाली हों, तो विज्जू क लिए इनाम भी तो स्पेशल hi होना चाहिए ना..
विजय:- माँ अब्ब बोल भी दो ना. कैसा इनाम देने वाली हाँ आप.
माँ वैसे hi घोड़ी बानी अपनी गांड को उठाये हुए थी.. पर माँ ने अपने सर्र को बीएड से टिका दिया था. माँ नहीं चाहती थी क मेरे वीर्ये क एक कटरा भी उनकी छूट से बहार निकले.. माँ तो जैसे एक hi बार में फिरसे माँ बनना चाहती थीं..
माँ जैसे पोज़ में थीं, ऐसे में माँ बात करते हुए कुछ अजीब सी भी लग रही थी, घोड़ी बने हुए सर्र को बीएड से टिकाये हमे अपनी गर्दन मूड देख हमसे बाते कर रही थीं.........
maa:-(ek बार नज़र घुसा कर सबब को देखा) पूजा की शादी विज्जू से करवाने का मैं है मेरा.. मुझसे एक गलती गलती हुई है.. सबब जानते हुए भी मैंने पूजा को उतना टाइम नहीं दिया.. जितना वो डेसेर्वे करती थी.. पूजा न होती तो विज्जू शायद हमे कोठे की दलदल से बचा तो लेता .. पर क्या फिर विज्जू हमारे लिए असली विज्जू रह पाता..
विज्जू के सारे प्यार भरे रंग hi सलामत नहीं हाँ.. पूजा की वजा से विज्जू के प्यार करने रंग और भी ज़यादा गहरे हो गया है.. विज्जू की ऑंखें देख कर मुझे पता चलता है. पूजा ने विज्जू के लिए कितना कुछ किया होगा.. पूजा भी इनाम की मुस्तहिक़ है.... विज्जउ बीटा कल तुम पूजा को छोड़ क रानी और नताशा को को छोड़ लेना...
पूजा बेटी तो हम सबब से भी ज़यादा तेरे प्यार क लायक है.. उसे एक नहीं कई रातें तुझसे अकेले में बिताने का इनाम मिलना चाहिए..
माँ की बात सुनकर हम चरों hi सुन्न रह गए थे... माँ की छूट ने मेरा सारा hi वीर्य सोख लिया था.. एक भी कटरा माँ की छूट से बहार नहीं निकला था.. माँ सीढ़ी हो कर बैठ गई.. और अपनी छूट को ऊँगली लगा कर चेक करने लगी..
माँ हमारे शॉकिंग चेहरों को नज़रर अंदाज़ करते हुए अपनी छूट को देखने में लगी हुई थी.. पर माँ अपना चेहरा अपनी छूट की और किये मंद मंद मुस्कुरा रही थी.
कुछ देर बाद माँ हमे देखने लगी. माँ क होंटो पर अब्ब भी मुस्कराहट थी.. और अब्ब तक्क हमारे चेहरों पार्स शॉकिंग भाव कन्वर्ट होकर जोश से भर गए थे.
हम चरों ने hi माँ पर यलग़र कर दी और माँ को पकड़ लिया.. अच्छा खासा शोर होने लगा था रूम में .. हम चरों hi कुछ न कुछ बोल रहे थे...
कुछ देर बाद सबब शांत हुए तो..
माँ:- मतलब मैंने सही सोचा है..
विजय:- माँ ये तो मेरे दिल की आवाज़ थी.. पर मुझे नहीं पता था, ये सबब इतनी जल्दी होने वाला है..
प्रिय:- माँ आपने बहुत सही और बहुत hi अच्छा सोचा hai..puja दीदी पूरा पूरा का हक़ बनता है इस इनाम क लिए... विज्जू क लिए आगे पता नहीं क्या है.. और विज्जू की लाइफ में पता नहीं कितनो की शादी होना लिखी है.. पर पूजा दीदी को विज्जू की पहली पत्नी होने का हक़ मिलना hi चाहिए था.. जो आप ने खुद hi उन्हें दे दिया है.. मैं तो बहुत खुश हों. विज्जू और पूजा दीदी क लिए..
जहान्वी:- हम तो हाँ hi विज्जउ की और सदा hi विज्जू की लाइफ में रहने वाली हाँ.. पर ऑफिशियली पूजा दीदी को hi विज्जउ की पहली वाइफ होना चाहिए.. जितनी स्ट्रगल पूजा दीदी ने विज्जू क लिए की है.. वो इसी इनाम के लायक हाँ...
श्रुति:- हमे सबब पता था.. पर इन 4 दिनों में हमारी पूरी hi लाइफ बदल गई थी. तो जितना पूजा दीदी डेसेर्वे करती थें.. उतना हम उन्हें थैंक्स भी नहीं बोल सकीं.. यहाँ आते hi कुछ दिन पररर लगा कर उड़द गए.. पर हमने पूजा दीदी को सही से थैंक्स भी नहीं बोलै..
माँ:- हाँ बीटा तुम सबब भी सही हो.. जितना पूजा बेटी ने किया है. उतना उसे टाइम देना चाहिए था.. पर यहाँ ए दिन hi हमें कितने हुए हाँ.... और फिर हालत भी तो रोज़ रोज़ बदल रहे हाँ.. अभी तो हमारी सालों की थकन भी सही से नहीं उत्तरी.. इसलिए हम सबब इस बात पर पूरा ध्यान नहीं दे सकीं.. ये हम चरों की गलती है.. और अब्ब हम विज्जू और पूजा की शादी करके अपनी गलती को सुधरेंगी.. और पूजा को थैंक्स बोल कर उसका हक़ और इनाम उसे देंगे...
विज्जू बीटा पूरी रात hi तुम पूजा बेटी क साथ गुजरोगे तो उसे उसका पूरा हक़ देना.. शरीर मिलान से भी और आत्मा मिलान से भी..
विजय:- हाँ माँ, पूजा दीदी मेरे लिए भी बहुत ख़ास हाँ..
मेरी बात सुन मेरी तीनो तितलियाँ जोरसे हस्सें लगीं..
मैं और माँ तीनो को देख कर अचंभे में आ गए, क ऐसा क्या हुआ है जो अचानक से hi हस्सन लग पड़ीं..
माँ:- अब्ब ऐसे क्यों हस्स रही हो.. खैर तो है ना...
प्रिय:- (हस्ते हुए) माँ विज्जउ की शादी होने जा रही है पूजा दीदी से.. अब्ब तो विज्जू पूजा दीदी को, दीदी कहना छोड़ दे...
तीनो फिरसे हस्सन लगी और माँ भी इस बार तीनो के साथ मिलकर हस्सन लगीं..
और मैं सोचने लगा क दीदी को दीदी कहना छोड़ना मेरे लिए कितना मुश्किल होने वाला था ....
वर्ड काउंट: 10413
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