अपडेट - 205
उधर ाघरोई इस समय पिशाच राज के सामने बैठा था. और दोनों hi शराब के गिलास थामे हुए थे उसे कनिका ने hi ये सुझाया था के पिशाचराज की सहायता से हमला किया जाये. और देवा की ताक़त को तोडा जाये.
पिशाचराज - कहो अघोरी बहोत दिनों बाद यद् आयी इस मित्र की कैसे हो?
ाघरोई - ऐसी बात नहीं है मित्र, यद् तो तुम को करता hi रहता हु लेकिन इधर बहोत समय से मए भी व्यस्त था और फिर कभी फुर्सत हुआ भी तो ये सोचकर तुम्हे परेशां नहीं किया के तुम भी अपने राज काज में व्यस्त होंगे. और बताओ कैसा चल रहा है तुम्हारा शासन?
पिशाचराज - सब ठीक hi चल रहा है. लेकिन अब समस्या तो हर किसी के साथ लगी hi रहती है उसके बिना किसी का जीवन नहीं होता. बिना समस्याओ के जीवन सिर्फ मुर्दो का होता है. इसीलिए वो सो जाते है. जिसकी आक्न्हे खुली हुई है मतलब वो शक्श समस्या में hi है. ये अपना तजुर्बा कहता है.
अघोरी – हाहाहाहाहा सच कहा मित्र जब तक आंखे खुली है तब तक हर आदमी कही न कही जूझता hi रहता है. पर तुम्हारा राज्य तो बहोत अधिक फ़ैल गया है फिर क्या परेशानी है.
पिशाचराज – कुछ खास नहीं बस जैसे जैसे मेरी प्रजा बढ़ती जाती है उनके लिए ताजे खून की भरपाई करना hi मेरी समस्या रहती है. अब राज्य बढ़ाया है तो राज्य के साथ साथ मेरी प्रजा भी तो बढ़ेगी न फिर सेल जिसे देखो किसी न किसी को पकड़ के पेलता रहता है तो बच्चे भी होते है और यहाँ के बच्चे माँ का दूध नहीं खून पी कर बड़े होते है तुम तो जानते hi हो बस यही सब लगा हुआ है. और इसी के साथ मेरी एक चिंता और भी है. पिशाचराज के माथे पे बल पद गए अपनी बात कहते कहते.
अघोरी - ऐसी क्या बात है जिससे तुम्हारे माथे पे बल पड़े, हम दोस्त है तुम मुझे बताओ अगर हो सका तो अपनी साडी शक्तिया लगा दुगा तुम्हारी चिंता दूर करने में.
पिशाच – धन्यवाद मित्र लेकिन मेरी चिंता इस समय की नहीं है अभी तो मए और मेरा राज सब सही है मुझे चिंता है भविष्य की , मेरा जो राज ज्योत्षी है उसने कहा है के ये जो मेरे राज में चारो तरफ शांति है ये ज्यादा दिन नहीं रहने वाली ये तूफ़ान से पहले की शांति से ज्यादा कुछ नहीं, और मेरा बुरा समय आने hi वाला है. कोई है जो मेरी बानी बनायीं पूरी हस्ती को बराड़ कर देगा. और शायद मुझे भी ख़तम hi केर दे.
अघोरी - क्या ????? ये क्या कह रहे हो तुम किस की इतनी मजाल जो तुम्हारी तरफ टेडी नजर भी कर दे, कौन है वो ?
पिशाच – वही तो पता नहीं चल प् रहा है एरर, और सबसे बड़ी बात मेरी तो किसी से कोई दुश्मनी भी नहीं मेरा कोई दुश्मन है hi नहीं क्यों की मए अपने दुश्मन को अगली सांस लेने का मौका कभी नहीं देता जहा से गुजर जाता हु अपने पैरो के निशान पहले मिटाता हु जिससे के कोई बाद में मुझ पे वार न करे अब ये समझ नहीं आ रहा के ऐसा कौन सा दशमं है मेरा जो मुझे तबाह करने का डैम रखता है बहोत सोचने पर भी मुझे कुछ पता नहीं चल रहा है न hi मेरी शक्तिया उसे धुंध प् रही है.
अघोरी - तो मित्र इसमें समस्या क्या है जब वो साला सामने होगा तब उसे आराम से निपटा लगे भला हम दोनों के सामने किसी की क्या औकात और रही तुम्हारी दूसरी बात तुम्हे तो ताजे गरम खून से मतलब है न किसी नयी नगरी पे कब्ज़ा करो वह के लोगो का गरम खून हाजिर मिलेगा और वह की सुन्दरिया भी तुम्हारे भोगने के लिए मिल जाएगी.
पिशाचराज - है पर ये तो आखरी विकल्प हुआ न मित्र मए सोच रहा हु इस बार किस नगरी पे कब्ज़ा जम्मू क्यों के मेरी नजर में तिलिस्म नगरी, नाग लोक, जीन लोक और पारी लोक है. पारी लोक तो इस वक़्त बेहद कड़े सुरक्षा घेरे में है, जीन लोक का बादशाह भी इस वक़्त बेहद मजबूत है और भविष्य में और ज्यादा मजबूत होने वाला है तो उससे टकरा कर मए अपनी तबाही को नहीं बुला सकता, नागलोक और तिलिस्म लोक के विषय में सोच रहा हु मए. क्यों की उनका सुरक्षा कवच बहोत ज्यादा पुराण हो चूका है और उसे फ़िलहाल कोई बदल भी नहीं रहा है मेरे सूत्रों से पता चला है के वह अभी कोई ऐसा योद्धा भी नहीं जो दोनों में से किसी भी नगरी को सुरक्षित कर पाए.
अघोरी - वाह मित्र क्या बात कही है तुमने इससे तो हम दोनों की समस्या हल हो जाएगी ( अघोरी मन में- शायद अभी इसे देव के लौट आने की जानकारी नहीं है ….. ाचा है मेरा काम तो बन hi जायेगा फिर चाहे ये जीए या मरे साला माँ छुड़ाए मुझे क्या).
पिशाचराज – वो कैसे?
अघोरी - अरे यार मेरे सर का दर्द भी वही दोनों नगरीय है मेरा क्या मामला हो चूका है ये तो तुम जानते hi हो. अब तक मए उन नागरियो पे कब्ज़ा नहीं जमा पाया लेकिन अगर तुम्हारी सहायता मिले तो हम दोनों का काम पूरा हो सकता है.
पिशाचराज - कैसे मित्र?
अघोरी - देखो नागलोक के जिस देव सिंह को मैने मारा था वो फिर से जनम ले चूका है और अब तक स्वर्ण मणि भी हासिल कर चूका है. यहाँ तक की अपनी ताक़त भी कई गुना बड़ा चूका है और उसके साथ तिलिस्म नगरी की राजकुमारिया भी है इसीलिए इन दोनों नागरियो को तुम या मए अकेले हथिया नहीं सकते लेकिन अगर तुम और मए मिल जाये तो मए एक रास्ता बता सकता हु जिससे हम इन दोनों नागरियो को कब्जे में ले लगे. फिर जो नगरी तुम चाहो रख लेना और दूसरी मुझे दे देना क्यों की मुझे अब नगरी से ज्यादा बदले की इच्छा है उस इच्छाधारी देव से और एक नगरी के साथ बस मुझे वो राजकुमारिया और एक नागिन नीलम चाहिए. बाकि सब तुम्हारा
पिशाचराज की आँखों में खतरनाक चमक उठने लगी.
पिचछराज - लेकिन अगर वो देव दुबारा जनम ले चूका है, स्वर्ण मणि भी हासिल कर चूका है, अपनी शातिया भी बड़ा चूका है तो वही हमारे सामने आ खड़ा होगा, राजकुमारिया उसके पास है मतलब वो उनकी नगरी को भी सुरक्षित करेगा क्यों की छूट चाहे तो लुंड सब करता है ये साला देव भी छूट के चक्कर में हमसे भीड़ जायेगा, अगर हमने तिलिस्म नगरी पे हाथ डाला तो. फिर ऐसे में कैसे होगा एरर,
अघोरी – तुमने सही कहा वो hi है जो हमें रोक सकता है और तुम्हारा ये अनुमान भी सही है के वो राजकुमरियो की छूट के चक्कर में भी है उसी वजह से हम तिलिस्म नगरी पे भी आक्रमण नहीं कर सकते लेकिन इस समस्या का हल मैने सोच लिया है इसीलिए तो तुम्हे बुलाया है मेरे दोस्त.
पिशाचराज – अगर तुमने सोचा है तो कुछ बढ़िया वाला hi सोचा होगा ईसीए मुझे मंजूर है मित्र. मुझे बताओ करना क्या है मुझे.
अघोरी - मित्र यु तो मेरी योजना शुरू हो चुकी है, मए हमला भी कर चुक्का हु और बी आगे की योजना के लिए यानि तुम्हारे लिए मैदान तैयार है बस तुम्हे अब आगे का संभालना है और उसके लिए बस तुमसे बात करने की देर थी अब वो भी हो गयी है अब सुनो तुम्हे करना क्या है, जिससे हम दोनों के सपने साकार हो सके.
उसके बाद अघोरी उसे बहोत धीमी आवाज़ में पूरी प्लानिंग बताने लगा. बात पूरी होने के बाद
पिशाचराज - वाआअह जियो अघोरी क्या बात है इससे तो वो इच्छाधारी सांप भी मर जायेगा लाठी भी नहीं टूटेगी. क्या बात है बहोत खूब मित्र. बस अब तुम देखते जाओ अपने इस मित्र का कमल मए कैसे उन सबको तिगनी का नाच नाचता हु. कोई कुछ नहीं कर पायेगा. सब सेल भूतनी के पगला जायेगे के ये हुआ कैसे और जब तक ये कुछ समझ के कर पाएंगे तब तक तो अपना काम hi हो जायेगा.
मए अपना जाल कल सुबह से फैलाना शुरू करुगा.
अघोरी - है हमारी इस चाल के आगे उस देव और रूद्र की मिली जुली ताक़त भी कुछ नहीं कर पायेगी. न hi वो उस स्वर्ण मणि का कोई इस्तेमाल कर पायेगा क्यों की हम सामने आकर तो उनसे टकराएंगे नहीं जो वो हम पर स्वर्ण मणि इस्तेमाल कर सके. एक बार हमारी चल सफल हो गयी तो उसका और उसकी उन दोनों नागरियो का सूर्यास्त होने में ज्यादा देर नहीं लगेगी और फिर होगा वह हमारा राज अँधेरे का राज ऐसा भयानक अँधेरा जिसमे सिर्फ चीखे होगी हमारा hi राज होगा. हमारे काळा सयो का राज होगा. बस इतना ध्यान रखना के जब तुम कदम बढ़ाओ तो देव या उसके साथियो को भनक भी नहीं लगनी चाहिए वार्ना तुम्हारा पहला कदम रखते hi वो तुम्हे लप्पेट लगे सेल बड़े खतरनाक है.
पिशाचराज - ऐसा कुछ नहीं होगा वो सब तुम मुझ पर छोड़ दो मए पिशाचराज यु hi नहीं बन गया मित्र. लेकिन अब साबरा नहीं होता, जब से तुमने मुझे अपनी योजना बताई है तभी से मेरे अंदर नाग लोक और तिलिस्मी लोक की सुंदरियों का नंगा बदन नाच रहा है और मए उन्हें रुला रुला के भोगने की अपनी इच्छा को रोक नहीं प् रहा हु.
अघोरी - बस कुछ समय और रोकना होगा तुम्हे अपनी इन इच्छाओ को फिर हम दोनों मिल कर उन खूबसूरत हसीनाओ के बदन से दिन रत खेलेंगे. और राज करेंगे नाग लोक और तिलिस्म लोक पर. तुम्हे अब मेरे संकेत का hi इंतजार करना है मित्र सही समय आने पर मए स्वयं तुम्हे खबर कर दुगा. लेकिन योजना के मुताबिक तुम कल सूर्य की पहली किरण से पहले अपना काम कर देना. अब मुझे इजाजत दो.
पिशाचराज - अरे इतनी भी क्या जल्दी है मित्र जरा अपने इस मित्र को अपनी सेवा करने का मौका तो दो. आज रत मए तुम्हारे लिए एक कुवारी कन्या भेंट करना चाहता हु जिसे तुम अपने फौलादी जिस्म से कुचल कर उसे काली से फूल बनाओ.
अघोरी - अरे इसकी क्या जरुरत है मित्र?
पिशाचराज - जरुरत है मित्र और बहोत सख्त जरुरत है तुमने आज मुझे मेरे सपनो को साकार करने का मार्ग बताया है उस बात का जश्न तो बनता है न. चलो हम दोनों की गर्मी को शांत करने का पूरा इंतजाम है आओ.
फिर पिशाचराज अघोरी को एक खास कमरे में ले जाता है जहा एक बेहद खूबसूरत लड़की बिस्तर पे बेहोश पड़ी थी. उसकी साड़ी घुटनो तक उठी हुई थी और पल्लू चूचियों से ढलका हुआ था उसकी तानी हुई बड़ी बड़ी गोरी चूचिया जो ब्लाउज में से आधी बहार को झांक रही थी. उन्हें देख कर अघोरी का लुंड फुफकारे मरने लगा.
पिशारज - हमने आज hi इसे इसके लगन मंडप से उठवाया है आज इसकी शादी हो रही थी. सोचा था इसके साथ सुहागरात हम नायेगे और इसकी कड़क जवानी का मजा लुटेगे और फिर इसका खून पीकर अपनी प्यास बुझाएगे. लेकिन हमने अब तक इसे छुआ भी नहीं अब ये तुम्हे हमारी तरफ से एक तोहफा है. जाओ ये तुम्हारी हुई. आज की रत इस नयी नवेली दुल्हन के दूल्हे तुम हो जाओ बिस्तर पे तुम्हारी दुल्हन इंतजार कर रही है मनाओ सुहागरात पुरे दिल से, हम सुबह मिलते है.
इतना कह कर पिशाचराज कमरे से बहार निकल जाता है और अघोरी अपनी धोती खोल कर पूरा नंगा हो जाता है उसका कला लुंड इस समय क्रोधित सांप की तरह खड़ा था और अघोरी की आँखों में जहाँ भर की वासना उमड़ रही थी. अघोरी उसकी तरफ बढ़ने लगा.
उधर पिशाचराज भी दूसरे कमरे में गया वह भी एक बेहद खूबसूरत कुवारी लड़की कमरे में बैठी थी. लेकिन वो सम्मोहित थी पिशाचराज धीरे धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगा.