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- Dec 5, 2013
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राजा – आप जाकर स्नान कर लीजिये उस के बाद अपने साथियो के साथ आ जाइएगा हम आपको इस नगरी से बहार निकलने का मार्ग बता देंगे. और बाकि की बाटे भी वही होगी.
अब आगे………
इतना कह कर राजा वह से चला गया और देव अपने उस रूम में आ गया जहा. पूनम, नीलम और रूद्र देव का hi इंतजार कर रहे थे. देव को देखते hi
रूद्र – आओ महारथी आओ बजा दिया बंद महारानी का?
इतना सुनते hi पूनम खुद को रोक नहीं पायी और देव के गले लग के रोने लगी.
देव ने पूनम की पीठ को सहलाया और उसे चुप करने लगा. और जब सब शांत हुए तो देव उनके बीच बैठ गया
रूद्र – अब कुछ बोलेगा भी या हम लोग यु hi बैठे रहे.
देव – बहोत कुछ है तुम सब को बताने के लिए लेकिन ये जगह सही नहीं है अभी हम लोग महाराज के पास जायेगे फिर वो हमें यहाँ से बहार निकल देंगे और फिर मए बताउगा के क्या हुआ कैसे हुआ.
रूद्र – chheeee…cheeeeee हमें नहीं सुन्ना के क्या हुआ और कैसे हुआ , यहाँ कोई बच्चा नहीं है. हम सब जानते है के क्या हुआ और कैसे हुआ इससे हमें कोई मतलब नहीं.
देव – रूद्र मेरे भाई बिना सुने तुम मुझे गलत नहीं ठहरा सकते यहाँ से निकल कर मेरी बात सुन लेना फिर जो जी में आये वो कहना मए तुम तीनो की बात मन लगा अगर मए गलत हुआ तो.
फिर देव नहाने चला गया और ये लोग भी तैयार हो गए. कुछ समय बाद ये लोग महाराज के सामने खड़े थे. जहा सिर्फ महाराज hi थे और उनका एक मंत्री.
राजा – तो देव सिंह वादे के मुताबिक हमने आपकी एक शर्त पूरी की और अब दूसरा वादा भी पूरा करना है आप लोगो को सुरक्षित यहाँ से निकलने का . लेकिन अब हमारी महारानी हमारे साथ नहीं रह सकती उसे भी ये नगरी छोड़ के जाना पड़ेगा. और उनका कहना है के वो आपके साथ hi निकलना चाहती है. बाकि जैसी त्रिकाल की इच्छा. तो इस हिसाब से हमारी महारानी भी आप के साथ जाएगी. आप चाहे तो वो अपना रास्ता बदल लेगी उनेह अपने साथ आप रखे ऐसी कोई शर्त नहीं है हमारी ये आप लोगो की अपनी मर्जी है. लेकिन क्यों की यहाँ से निकलने का रास्ता एक hi है तो आप सब के साथ वो भी निकलेगी अभी.
………. महारानी आप भी आ जाइये चलने का समय हो गया है.
तभो वह रजनी आती है. सिर्फ एक साड़ी में कोई गहने नहीं थे अभी उसके शरीर पे महारानियो वाले.
रजनी को देखते hi पूनम चौंक गयी और कुछ बोलने hi वाली थी के देव ने उसका हाथ दबा दिया. और पूनम चुप हो गयी. रूद्र और नीलम ने भी देव को देखा देव ने उन्हें भी आंख के इशारे से चुप रहने को कहा .
महाराज, मंत्री, देव, पूनम, रूद्र, नीलम और रजनी सभी उस कमरे के एक कोने में खड़े हो गए. राजा अपने सिंघासन पे गया और अपने सिंघासन के बाजु में रखे शेर की गार्डन पकड़ के उलटी दिशा में घुमा दी जिससे उस कमरे की तीन तरफ की दीवारे लोहे की बन गयी. अब कोई और इस कमरे में नहीं देख सकता था. फिर राजा ने उसी शेर की गार्डन को और ज्यादा उल्टा घुअमाया तो जहा वो सब लोग खड़े थे वह एक दरवाजा बन गया.
राजा -आप सब लोग जा सकते है. लेकिन जाने से पहले मए आपको कुछ देना चाहता हु. देव और पूनम आप दोनों मेरे पास आये.
देव और पूनम राजा के पास जाते है तो राजा अपना हाथ आगे कर के आंखे बंद करता है और कोई मंत्र पढता है. फिर अपनी आंखे खोल कर अपनी हथेली खोलता है उसमे दो बहोत बड़े हेरे चमक रहे थे. नीले रंग के थे दोनों हिरे.
राजा - ये दोनों हेरे आप आप दोनों रख लीजिये.
देव – लेकिन महाराज हमें इसकी क्या जरुरत है?
राजा – देव ये कोई तोहफा नहीं है बल्कि ये आपकी अमानत है जो किसी ने मेरे पास रखवाई थी मए जनता था आप आएंगे एक दिन और मुझे ये आपको देनी है. ये आपके काम आएंगे रखिये और संभल के रखना इन्हे. ये कब कैसे और क्यों आपके काम आएंगे ये आपकी बूढी पे निर्भर करता है.
देव और पूनम वो हेरे ले लेते है. एक हिरा पूनम ले लेती है और अपनी ब्रा में दाल देती है और एक हिरा देव ले कर अपनी जेब में रख लेता है.
राजा – अब यहाँ से निकल कर आप सुरक्षित बहार पहुंच जायेगे. आगे क्या होगा. ये त्रिकाल जाने. लेकिन इस नगरी से आप सुरक्षित निकल सकते है बिना किसी रुकावट के. और रानी मुझे माफ़ कीजियेगा मेरी वजह से आपको रानी के पद से हटाया गया, इसमें मेरी hi गलती थी. मुझे देव की ऐसी शर्त नहीं माननी थी और न hi इनकी रानियों के लिए कुछ उपशब्द कहने थे. फिर कभी मिले तो उम्मीद करता हु आप मुझसे घृणा नहीं करेगी.
रजनी - नहीं महाराज इसमें आपकी गलती है hi नहीं घृणा कैसी ये सब तो त्रिकाल का तिलिस्म है मुझे सब यद् है हम लोग तो यहाँ अपने कर्मो के आधार पे आये हुए है. मेरे कर्मो का सिलसिला यहाँ ख़तम होता है अब मुझे आगे जाना hi है. बस ये घटना तो मेरे जाने का सिर्फ एक मार्ग है. तो घृणा वाली बात सोची भी नहीं जा सकती. त्रिकाल ने चाहा तो हम फिर मिलेंगे कही किसी नए खेल में एक दूजे के सह कलाकार बन कर. और वादा है इस बार मए आपको निराश नहीं होने दूगी. लेकिन वो वक़्त कब आएगा कोई नहीं जनता. शायद part तवो में आ जाये.
राजा – part तवो में मतलब? मए समझा नहीं ?
रजनी - जी कुछ नहीं महाराज ये तो राइटर ने मेरे मुँह से कहलवा दिया जो त्रिकाल से भी बड़ा है इस कहानी के लिए. ख़ैर छोड़िये इन बातो को. आपके साथ बिताया हुआ वक़्त यादगार रहेगा मेरे लिए. अब आप नयी महारानी का चुनाव कीजिये और मुझे इजाजत दीजिये. मेरे नए सफर पे जाने के लिए अब मेरे करम मुझे पता नहीं कहा ले जायेगे.
फिर सभी लोग निकल जाते है. और सब के जाने के बाद राजा ने सब कुछ सामान्य कर दिया.
राजा – चलो कोई तो इस नगरी से निकला मए नहीं रानी hi सही. अब देखते है हमारी नयी रानी कौन बनेगी.
मंत्री - मेर नजर में 1-2 ऐसी लड़किया है जो आपकी महारानी बनने के योग्य भी है और जो आपको पत्नी का सुख भी दे सकती है.
राजा – चलो फिर दरबार बुलवाओ हम आज hi नयी रानी लाएंगे क्यों की ये नगरी बिना महारानी क ीक दिन भी रही तो त्रिकाल का कहर हम पर hi टूटेगा.
उधर बहार आते hi उन्होंने खुद को एक खुली जगह पे पाया. बड़े बड़े पत्थर चारो तरफ फैले हुए थे. थोड़ी थोड़ी दूरी पे पेड़ भी थे.
देव सबको साथ ले के ऐसी जगह पे पंहुचा जहा छाँव काफी थी और वह पठार भी ज्यादा थे.
देव – सब लोग यहाँ बैठो.
सब के बैठने के बाद पूनम hi बोली.
पूनम – ये तो रजनी आंटी है न? मए इनसे मिली हु हमारी सगाई में आयी थी सुन्दर लाल अंकल के साथ आपके बाबू जी के दोस्त.
देव -है भी और न भी.
रूद्र – अबे भांग खायी है kya?ye है न क्या होता है? हमें भी यद् है ये सुन्दर लाल जी की पत्नी है.
देव और रजनी ने एक दूजे को देखा और मुस्करा दिए.
नीलम – तो रजनी आंटी आप हमारे साथ बहार आयी मतलब की रत को आप लोगो ने सम्भोग तो किया . पर आपको क्या जरुरत थी करने की आप मन कर देती न देव को. बेकार में अब आप खतरों में पद गयी वो भी एक रत के मजे के लिए?
रजनी - नहीं नीलम यहाँ बात एक रत के मजे की है hi नहीं ये तो मेरे सेकड़ो सालो के प्लान का नतीजा है. ये सब मैने hi सेट किया था.
राजा – आप जाकर स्नान कर लीजिये उस के बाद अपने साथियो के साथ आ जाइएगा हम आपको इस नगरी से बहार निकलने का मार्ग बता देंगे. और बाकि की बाटे भी वही होगी.
अब आगे………
इतना कह कर राजा वह से चला गया और देव अपने उस रूम में आ गया जहा. पूनम, नीलम और रूद्र देव का hi इंतजार कर रहे थे. देव को देखते hi
रूद्र – आओ महारथी आओ बजा दिया बंद महारानी का?
इतना सुनते hi पूनम खुद को रोक नहीं पायी और देव के गले लग के रोने लगी.
देव ने पूनम की पीठ को सहलाया और उसे चुप करने लगा. और जब सब शांत हुए तो देव उनके बीच बैठ गया
रूद्र – अब कुछ बोलेगा भी या हम लोग यु hi बैठे रहे.
देव – बहोत कुछ है तुम सब को बताने के लिए लेकिन ये जगह सही नहीं है अभी हम लोग महाराज के पास जायेगे फिर वो हमें यहाँ से बहार निकल देंगे और फिर मए बताउगा के क्या हुआ कैसे हुआ.
रूद्र – chheeee…cheeeeee हमें नहीं सुन्ना के क्या हुआ और कैसे हुआ , यहाँ कोई बच्चा नहीं है. हम सब जानते है के क्या हुआ और कैसे हुआ इससे हमें कोई मतलब नहीं.
देव – रूद्र मेरे भाई बिना सुने तुम मुझे गलत नहीं ठहरा सकते यहाँ से निकल कर मेरी बात सुन लेना फिर जो जी में आये वो कहना मए तुम तीनो की बात मन लगा अगर मए गलत हुआ तो.
फिर देव नहाने चला गया और ये लोग भी तैयार हो गए. कुछ समय बाद ये लोग महाराज के सामने खड़े थे. जहा सिर्फ महाराज hi थे और उनका एक मंत्री.
राजा – तो देव सिंह वादे के मुताबिक हमने आपकी एक शर्त पूरी की और अब दूसरा वादा भी पूरा करना है आप लोगो को सुरक्षित यहाँ से निकलने का . लेकिन अब हमारी महारानी हमारे साथ नहीं रह सकती उसे भी ये नगरी छोड़ के जाना पड़ेगा. और उनका कहना है के वो आपके साथ hi निकलना चाहती है. बाकि जैसी त्रिकाल की इच्छा. तो इस हिसाब से हमारी महारानी भी आप के साथ जाएगी. आप चाहे तो वो अपना रास्ता बदल लेगी उनेह अपने साथ आप रखे ऐसी कोई शर्त नहीं है हमारी ये आप लोगो की अपनी मर्जी है. लेकिन क्यों की यहाँ से निकलने का रास्ता एक hi है तो आप सब के साथ वो भी निकलेगी अभी.
………. महारानी आप भी आ जाइये चलने का समय हो गया है.
तभो वह रजनी आती है. सिर्फ एक साड़ी में कोई गहने नहीं थे अभी उसके शरीर पे महारानियो वाले.
रजनी को देखते hi पूनम चौंक गयी और कुछ बोलने hi वाली थी के देव ने उसका हाथ दबा दिया. और पूनम चुप हो गयी. रूद्र और नीलम ने भी देव को देखा देव ने उन्हें भी आंख के इशारे से चुप रहने को कहा .
महाराज, मंत्री, देव, पूनम, रूद्र, नीलम और रजनी सभी उस कमरे के एक कोने में खड़े हो गए. राजा अपने सिंघासन पे गया और अपने सिंघासन के बाजु में रखे शेर की गार्डन पकड़ के उलटी दिशा में घुमा दी जिससे उस कमरे की तीन तरफ की दीवारे लोहे की बन गयी. अब कोई और इस कमरे में नहीं देख सकता था. फिर राजा ने उसी शेर की गार्डन को और ज्यादा उल्टा घुअमाया तो जहा वो सब लोग खड़े थे वह एक दरवाजा बन गया.
राजा -आप सब लोग जा सकते है. लेकिन जाने से पहले मए आपको कुछ देना चाहता हु. देव और पूनम आप दोनों मेरे पास आये.
देव और पूनम राजा के पास जाते है तो राजा अपना हाथ आगे कर के आंखे बंद करता है और कोई मंत्र पढता है. फिर अपनी आंखे खोल कर अपनी हथेली खोलता है उसमे दो बहोत बड़े हेरे चमक रहे थे. नीले रंग के थे दोनों हिरे.
राजा - ये दोनों हेरे आप आप दोनों रख लीजिये.
देव – लेकिन महाराज हमें इसकी क्या जरुरत है?
राजा – देव ये कोई तोहफा नहीं है बल्कि ये आपकी अमानत है जो किसी ने मेरे पास रखवाई थी मए जनता था आप आएंगे एक दिन और मुझे ये आपको देनी है. ये आपके काम आएंगे रखिये और संभल के रखना इन्हे. ये कब कैसे और क्यों आपके काम आएंगे ये आपकी बूढी पे निर्भर करता है.
देव और पूनम वो हेरे ले लेते है. एक हिरा पूनम ले लेती है और अपनी ब्रा में दाल देती है और एक हिरा देव ले कर अपनी जेब में रख लेता है.
राजा – अब यहाँ से निकल कर आप सुरक्षित बहार पहुंच जायेगे. आगे क्या होगा. ये त्रिकाल जाने. लेकिन इस नगरी से आप सुरक्षित निकल सकते है बिना किसी रुकावट के. और रानी मुझे माफ़ कीजियेगा मेरी वजह से आपको रानी के पद से हटाया गया, इसमें मेरी hi गलती थी. मुझे देव की ऐसी शर्त नहीं माननी थी और न hi इनकी रानियों के लिए कुछ उपशब्द कहने थे. फिर कभी मिले तो उम्मीद करता हु आप मुझसे घृणा नहीं करेगी.
रजनी - नहीं महाराज इसमें आपकी गलती है hi नहीं घृणा कैसी ये सब तो त्रिकाल का तिलिस्म है मुझे सब यद् है हम लोग तो यहाँ अपने कर्मो के आधार पे आये हुए है. मेरे कर्मो का सिलसिला यहाँ ख़तम होता है अब मुझे आगे जाना hi है. बस ये घटना तो मेरे जाने का सिर्फ एक मार्ग है. तो घृणा वाली बात सोची भी नहीं जा सकती. त्रिकाल ने चाहा तो हम फिर मिलेंगे कही किसी नए खेल में एक दूजे के सह कलाकार बन कर. और वादा है इस बार मए आपको निराश नहीं होने दूगी. लेकिन वो वक़्त कब आएगा कोई नहीं जनता. शायद part तवो में आ जाये.
राजा – part तवो में मतलब? मए समझा नहीं ?
रजनी - जी कुछ नहीं महाराज ये तो राइटर ने मेरे मुँह से कहलवा दिया जो त्रिकाल से भी बड़ा है इस कहानी के लिए. ख़ैर छोड़िये इन बातो को. आपके साथ बिताया हुआ वक़्त यादगार रहेगा मेरे लिए. अब आप नयी महारानी का चुनाव कीजिये और मुझे इजाजत दीजिये. मेरे नए सफर पे जाने के लिए अब मेरे करम मुझे पता नहीं कहा ले जायेगे.
फिर सभी लोग निकल जाते है. और सब के जाने के बाद राजा ने सब कुछ सामान्य कर दिया.
राजा – चलो कोई तो इस नगरी से निकला मए नहीं रानी hi सही. अब देखते है हमारी नयी रानी कौन बनेगी.
मंत्री - मेर नजर में 1-2 ऐसी लड़किया है जो आपकी महारानी बनने के योग्य भी है और जो आपको पत्नी का सुख भी दे सकती है.
राजा – चलो फिर दरबार बुलवाओ हम आज hi नयी रानी लाएंगे क्यों की ये नगरी बिना महारानी क ीक दिन भी रही तो त्रिकाल का कहर हम पर hi टूटेगा.
उधर बहार आते hi उन्होंने खुद को एक खुली जगह पे पाया. बड़े बड़े पत्थर चारो तरफ फैले हुए थे. थोड़ी थोड़ी दूरी पे पेड़ भी थे.
देव सबको साथ ले के ऐसी जगह पे पंहुचा जहा छाँव काफी थी और वह पठार भी ज्यादा थे.
देव – सब लोग यहाँ बैठो.
सब के बैठने के बाद पूनम hi बोली.
पूनम – ये तो रजनी आंटी है न? मए इनसे मिली हु हमारी सगाई में आयी थी सुन्दर लाल अंकल के साथ आपके बाबू जी के दोस्त.
देव -है भी और न भी.
रूद्र – अबे भांग खायी है kya?ye है न क्या होता है? हमें भी यद् है ये सुन्दर लाल जी की पत्नी है.
देव और रजनी ने एक दूजे को देखा और मुस्करा दिए.
नीलम – तो रजनी आंटी आप हमारे साथ बहार आयी मतलब की रत को आप लोगो ने सम्भोग तो किया . पर आपको क्या जरुरत थी करने की आप मन कर देती न देव को. बेकार में अब आप खतरों में पद गयी वो भी एक रत के मजे के लिए?
रजनी - नहीं नीलम यहाँ बात एक रत के मजे की है hi नहीं ये तो मेरे सेकड़ो सालो के प्लान का नतीजा है. ये सब मैने hi सेट किया था.