Fantasy इच्छाधारी देव - Page 23 - SexBaba
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Fantasy इच्छाधारी देव

अपडेट- 144

रूद्र – भाई क्या फिल्म दिखा दी मजा आ गया. लेकिन तूने पहले इतनी मार क्यों खायी शौक चढ़ा था क्या?

देव – नहीं रे पागल कोई शौक नहीं था. बल्कि पहले तो मैने उसे बातो में उलझने की कोशिश की लेकिन जब वो उस झांसे में नहीं आया तो मए उसकी आहात पे ध्यान लगाने लगा लेकिन उसने वह भी मुझे धोखा दिया और हर बार मुझ पर वार कर के मुझसे दूर हो जाता . तब मैने ध्यान लगाया और जैसे hi उसने मुझ पे पूरी ताक़त से वार किया तो हवा के वेग से मैने अंदाज़ा लगाया और उसे पकड़ लिया. बस उसके बाद उसे छूटने नहीं दिया लेकिन इस सब में सेल ने कई वार किये मुझ पर लिट्रेली बहोत जोर दर वार थे. उसके अब तक पूरा पेट हिल रहा है पता नहीं सेल को किस जंगल से पकड़ के लाये थे.

रूद्र – चल कोई नहीं इसी बहाने तेरे शरीर की मालिश hi होगयी.

ये सभी इसी तरह हँसते हुए बाटे करने लगे उसके बाद रूद्र ने देव के जख्मो पे मलहम लगा दिया. और देव भी आराम करने लगा 2-3 घंटे बाद hi उन्हें रत के खाने के लिए बुलावा आ गया. अब देव भी पहले से बेहतर फील कर रहा था. और उसके जकजहम भी ठीक हो चुके थे. उसकी हीलिंग पावर की कारन. और पेट में भी फुल आराम था. फिर सबने पेट भर के खाना खाया. और वापस अपने रूम में आ गए वो लोग अभी बैठे hi थेआकर के तभी,

सैनिक - क्षमा कीजिये देव सिंह जी आपको महाराज ने यद् किया है.

सबने देव की तरफ देख के बेस्ट ऑफ़ लक के लिए अंगूठा ऊँचा किया. देव ने सब को गार्डन हिला के थँक्स कहा और पूनम की आँखों में देखा मनो वो कह रही हो रानी की मर्जी के बिना उसे मत छूना. और देव भी समझ गया इसीलिए उसे आँखों से hi तसल्ली दे कर निकल गया. और सैनिक उसे राजा के पास ले गया.

राजा - देव सिंह आपसे हमने वादा किया था. उसे निभाने का वक़्त आ गया है. आइये मेरे साथ मए खुद आपको महारानी के कक्ष में छोड़ के आता हु.

फिर देव और राजा साथ साथ चलने लगे.

राजा – देव सिंह तुम्हे ये जो मौका दिया जा रहा है मैने अपनी इस तिलिस्मी दुनिया में ये पहली बार देखा है ऐसा आज तक नहीं हुआ. शायद ये तुम्हारे कर्मो का परिणाम है जो तुम्हे ऐसा सुनहरी अवसर मिल रहा है के तुम हमारी महारनी को भोगोगे. लेकिन मए तुमसे इन अंतिम क्षणों में फिर से एक बार विनती करता हु के हो सके तो लौट जाओ मेरी महारनी को हाथ मत लगाओ. यही तो मेरी धरोहर है. जो मुझे यहाँ आ कर मिली है मंटा हु के ये सब असली नहीं है लेकिन क्या करू मोह पद गया है अब. और मए इसे hi अपनी असल जिंदगी और महारानी को अपनी धर्मपत्नी समझ कर जी रहा हु मेरा ये भ्रम मत तोड़ो देव.

देव – महाराज आपने कहा के “महारानी को भोगने का सुनहरी awsar”to उस पर मए आप से कहना चाहुगा के स्त्रियों की कमी नहीं है मुझे. एक चाहता हु एक साथ दस मिलती है. मेरी असल जिंदगी आपसे काम रंगीन नहीं है. बल्कि ये कहु की आपसे भी ज्यादा रंगीन है तो कुछ गलत नहीं होगा. इसीलिए मुझे महारनी को छूने या उन्हें भोगने में कोई दिलचस्पी है नहीं. यहाँ मए अपनी मर्जी से चहु तो कोई कुवारी लड़की भी मेरे साथ सम्भोग के लिए तैयार रहती है और मेरा मन न हो तो मए उस कुवारी लड़की को भी छोड़ देता हु. फिर महारानी तो कोई कुवारी कन्या भी नहीं है. जिन में मेरी कोई खास रुचे हो. मए तो उन्हें इसलिए पाना चाहता हु क्यों की आपने मेरी पत्नी पे गन्दी नजर डालने की गलती कर दी है और अब वो गलती आप सुधर नहीं सकते. इसीलिए मए ये करुगा hi. दूसरी बात के. आप इसे असल समझ रहे है तो जितनी जल्दी ये भ्रम टूटे आपके लिए hi अच्छा है. क्यों की ये आप अच्छी तरह जानते है की इस नगरी का असल में कोई वजूद है नहीं. ये बस एक कारागृह hi है. जहा आप सब अपने कर्मो की सजा को भुगतने आये है. कब किस की सजा पूरी हो जाये और वो यहाँ से चला जाये कोई नहीं जनता. तो फिर इस कारागृह में रोने का क्या लाभ? अपनी सजा पे ध्यान दो, उसे जल्द से जल्द पूरा करो और यहाँ से जितनी जल्दी हो सके निकलने की कोशिश करो क्यों की राजा पिंजरा सोने का हो फिर भी पिंजरा hi होता है. अपनी असल जिंदगी में लौट जाओ . मए कोई अय्याशी करने नहीं जा रहा असल में तो मए खुद भी अभी चाहे अनचाहे इस नगरी का हिस्सा बन चूका हु और मए भी सजा hi काट रहा हु न. और मुझे यहाँ बांध कर नहीं रहना, मेरा मकसद बहोत अलग, बहोत hi ऊँचा है. जिस के सामने ऐसी कई रनिया और ऐसे कई तिलिस्म आने है. ये मेरा एक पड़ाव मात्रा है मेरी मंजिल नहीं.

राजा की गार्डन शर्म से झुक गयी साफ पता चल रहा था के उसे अपनी गलती का पष्टवा है. फिर आखिर वो कमरा भी आ गया जहा महारानी बैठी थी.

राजा – ठीक है देव जैसी त्रिकाल की इच्छा तुम जाओ हमारी महारानी तुम्हारा अंदर इंतजार कर रही है. अब सुबह मुळकत होगी .

इतना सुनते hi देव उस कमरे में अंदर चला जाता है. और राजा वापस मुद कर जाने लगता है देव उसे जाता हुआ देखता है और कमरे का दरवाजा बंद कर देता है.

बहतो बड़ा कमरा था, वो कमरा क्या हॉल का भी बाप था सामान्य घरो में जो हॉल होते है वैसे 4-5 हॉल मिला दिया जाये ितं ाबड़ा कमरा था.

उस कमरे में एक तरफ ड्रेसिंग टेबल टाइप का बना था बड़ा सा आदम कद शीशा. उसके सामने एक बड़ी hi खूबसूरत कुर्सी, कमरे के बीचो बीच एक सेण्टर टेबल जिस पर फ्रूट और दूध पड़ा था. एक तरफ कुछ बड़े संदूक रखे थे जिसमे शायद कपडे हो या कुछ और., दीवारों पे जगह जगह क्रॉस की हुई तलवारे ढल के साथ लगी थी. और उस हॉल नुमा कमरे में बीचो बीच एक किंग साइज बीएड रखा था. जो पूरा फूलो से सजा हुआ था. और उसकी महक से पूरा कमरा hi महक उठा था. वो बीएड hi इतना बड़ा था के उस पर आराम से पसर के 6-7 लोग सो सकते थे पलंग के दोनों तरफ छोटी छोटी टेबल राखी थी जिन पर फानूस रखे थे ( जिसमे मोमबत्ती जलाई जाती है और जो गिलास से ढके होते है) और वो फानूस भी जगमगा रहे थे पीली रौशनी से.

उस पलंग पे कोई औरत बैठी थी सुर्ख लाल साड़ी पहने अपना घूँघट निकल के. और अपने पैर मोड़ के जैसे के आज उसकी सुहागरात हो. और वो देव की दुल्हन. देव को ये सब देख कर आश्चर्य हुआ. वो पलंग के करीब गया.

देव – महारानी मेरा नाम देव सिंह है. और आज की रत हम इस कमरे में साथ बिताने वाले है क्या आप जानती है?

रानी – मए सब जानती हु देव, मुझसे कुछ भी छिपा नहीं है. मए तो इस रत का इंतजार कई एनजाइना रातो से कर रही हु.

देव – महारानी???……… आपकी आवाज तो….. आपकी आवाज तो जनि पहचानी लग रही है मुझे?

रानी – ये तो आप hi जाने की आपने मेरी आवाज़ कहा सुनी है मए कैसे बता सकती हु? रानी की आवाज़ में एक छेड़छाड़ वाली खनक थी.

देव – मुझे आपकी आवाज़ सुनी हुई लग रही है. लेकिन मए तो यहाँ किसी को जनता तक नहीं किसी से मेरी बात hi नहीं हुई है फिर ये आवाज़?...... ख़ैर छोड़िये. तो मए ये कह रहा था के आप जानती है मए आपके साथ इस वक़्त क्यों हु?

रानी – मैने कहा न मुझसे कुछ छुपा नहीं है. और जो भी हो रहा है उसमे मेरी पूरी सहमति है. मए इसी रत के लिए यहाँ बरसो से इंतजार कर रही थी. इस जगह की महारानी बन कर. तुम मेरा वो इंतजार हो जो आज पूरा होने वाला है. भला मए क्यों न जाँऊगी.

देव – लेकिन आप कैसे जानती है? क्या महाराज ने आपको सब कुछ बताया है?

रानी – नहीं उनसे तो मेरी कोई बात हुई hi नहीं है. असल में महाराज और हमारे बीच एक सूत्र बंधा हुआ है. वो जब किसी से भी बात करते है तो मुझे सुनाई देता है चाहे मए उनके पास हु या नहीं. वो मुझसे कितनी भी दूर हो मए सब सुन सकती हु. और वो मन hi मन मुझसे बात कर के मेरी रे भी ले सकते है वो भी मुझे सुन सकते है. लेकिन आज वो कुछ नहीं सुन पायेगा. जैसे hi तुम इस कमरे में दाखिल हुए राजा से मेरा संपर्क टूट गया है. जब तक हम दोनों साथ है इस कमरे में तब तक. राजा मुझसे सम्बंधित कोई बात नहीं जान पायेगा. वैसे कल से जो आपकी और महाराज की बाते हुई दरबार में वो सब मुझे पता है और महाराज ने उसी समय मुझसे पूछ कर hi आपको है कहा था.

देव – आश्चर्य है मुझे के आप एक महारानी हो कर मुझ अजनबी के साथ रत बिताने के लिए तैयार कैसे हो गयी?

रानी – अब उसमे मए कुछ नहीं कर सकती. जो है सो है पर अब तुम वह क्या कर रहे हो मए कब से घूँघट निकल के बैठी हु क्या मेरा घूँघट नहीं उठाओगे मेरे राजा? आज की रत तो तुम hi मेरे राजा हो,

देव आगे बढ़ा और पलंग के पास जा के - एक बार फिर से सोच लीजिये मए अपने कदम पीछे नहीं हटाता.

रानी - भला ये बात मए नहीं जानती क्या? ये तो मए बहोत अचे से जानती हु तुम आगे बढ़ो ये मए भी चाहती हु इसमें मेरी मर्जी शामिल है.

देव के होठ बीच गए थे वो अब पीछे नहीं हैट सकता था. वो पलंग पे रानी के समाने बैठ गया और रानी का घूँघट उठा दिया और रानी के मुस्कराते चेहरे पे जैसे hi देव की नजर पड़ी वो ऐसे उछाल के खड़ा हुआ जैसे उसे कई सरे बिछुओ ने एक साथ डांक मारा हो, देव आंखे फाडे सामने बैठी रानी को देख रहा था देव के माथे पे पसीने की बूंदे छलक आयी और उसके हाथ कैंप गए . शरीर के सरे रोम छिद्रो ने एक साथ ढेर सारा पसीना उगल दिया. देव एक डैम शॉकेड हो गया था अपने सामने का नजारा देख कर क्यों की उसके वह होने का तो देव सपना भी नहीं देख सकता था. No..no..no..no.. इतस इम्पॉसियब्ले……
 
थैंक्स फॉर योर वंडरफुल रिव्यु एंड योर पिन पॉण्टस. लिखे ऑलवेज. हमें तब बहोत अच्छा लगता है जब हमारे कोई भी रीडर्स पूरी कहानी में से अपने पसंदीदा पॉइंट्स पे डिस्कस करते है ये किसी खास पॉइंट को स्पेशल ट्रीटमेंट देते है. इससे लगता है के पढ़ने वाले ने उतनी hi दिलचस्पी दिखाई जितनी हमने लिखने में. इतस सो नीस. एंड अमेजिंग फीलिंग. थैंक्स ओनेस अगेन फॉर तहत.

अब महारानी कौन है. जिसकी वजह से देव भी काँप गया ये तो वक़्त hi बताएगा. जहा पिछले अपडेट में आपने ट्रिपल पंच का मजा लिए इस अपडेट ने आपका सस्पेंस बड़ा दिया. ये सब न हो तो कहानी का मजा hi क्या. और महारानी के बारे में हम ज्यादा नहीं खीचेंगे क्यों की खिंच hi नहीं सकते. :डी

इसलिए बस अगले अपडेट में hi पता चल जायेगा. तब तक का इंतजार मिलते है नए अपडेट में.
 
अपडेट – 145

देव एक डैम शॉकेड हो गया था अपने सामने का नजारा देख कर क्यों की उसके वह होने का तो देव सपना भी नहीं देख सकता था. No..no..no..no.. इतस इम्पॉसियब्ले……

देव – तुम ………….. तुम और यहाँ? रानी के रूप में…………?

रानी – क्या हुआ देव चौंक क्यों गए हमें यहाँ देख के? कोई अजूबा देख लिया क्या तुमने?

देव – लेकिन ये कैसे हो सकता है तुम तो ………तुम तो रजनी?

रानी - है देव मए वही रजनी हु तुम्हारे बाबू जी के दोस्त सुन्दर लाल की पत्नी रजनी तुम्हरी रजनी आंटी.

देव को अपनी आँखों पे यकीन नहीं आ रहा था. सामने रजनी आंटी hi बैठी थी लाल जोड़े में दुल्हन बानी हुई. लेकिन जिस रजनी से देव के शारीरिक सम्बन्ध है वो तो ओल्ड आगे है लेकिन ये तो यहाँ कोई 22-23 साल की लड़की थी एक डैम कुंवारी लग रही थी लेकिन रूप रंग सब रजनी का.

देव – ये क्या गोलमाल है रानी?

रानी या रजनी - की गोलमाल नहीं देव वह जो तुमने देखा जिसके साथ सब कुछ किया वो भी सच है और ये भी सच है.

देव – पागल मत बनाओ मुझे सच सच बताओ.

रानी मुस्कराते हुए – अच्छा ठीक है बैठो बताती हु. लेकिन पहले मेरी बात का जवाब दो. तुम यहाँ आये हो तो तुम्हारे बाबू जी और घरवाले तो परेशां हो जायेगे न के हमारा बीटा इतने दिन से कहा गया?

देव – ऐसा कुछ नहीं होगा मए वह अपना क्लोन यानि प्रतिरूप छोड़ आया हु.

रानी – हममममममममम और पूनम, रूद्र, नीलम उनका क्या उनके लिए सवाल नहीं उठेंगे? आखिर दो लड़किया गायब हो जाएगी तो कोई भी सोचेगा न उनके लिए . वह सब परेशां हो जायेगे.

देव – सब के क्लोन सेट है

रानी - फिर भी क्लोन की तो एक सीमा होगी न?

देव – नहीं रानी क्लोन की कोई सीमा नहीं होती बस फरक ये होता है के वो असली नहीं होता लेकिन आम इंसाने उसमे फरक नहीं कर सकता और असली के सामने आते hi क्लोन खुद बी खुद उसमे समां जाता है ये फिर जिसका वो क्लोन है यदि वो चाहे तो किसी भी तरीके से उस क्लोन को नष्ट कर सकता है. उसे मर सकता है दुसरो किन अजर में उसे नार्मल डेथ दे सकता है लेकिन वो खुद यानि ओरिजिनल जिन्दा hi रहता है. यही क्लोन की खासियत होती है . बाकि क्लोन सब कुछ वैसा hi करता है उसकी हर ताक़त, हर खूबी वही होती है जो रियल पर्सन की होती है. और………. एक मिनट यानि के वह तुम नहीं तुम्हारा क्लोन है सुन्दर लाल जी के घर में? ओह्ह्ह्हह माय गॉड………….. इतना बड़ा गेम………. क्यों ?????

रानी - मुस्कराते हुए. बहोत जल्दी समझे राजकुमार देव सिंह? मैने तो सोचा था के तुम उसी दिन मुझे पकड़ लोगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं बल्कि यहाँ मुझे देख कर भी तुम्हे समझने में बहोत देर लग गयी तुम तो बहोत स्लो साबित हुए देव सिंह क्या सिर्फ बिस्तर में hi फुर्ती दिखा सकते हो दिमाग से नहीं? जो कुछ तुमने कहा शामे वही मए भी तो कह रही हु के जो तुमने वह देखा वो भी सच हे और जो यहाँ देख रहे हो वो भी सच है यानि मए असली हु वह शहर में जिसके साथ तुम सोये हो दो बार वो मेरी क्लोन है.

देव – बकवास मत करो यार. और तुम्हे क्लोन की क्या जरुरत और ये तुमने कब किया रानी मेरा मतलब रजनी मेरा मतलब…. अरे यार?.......

रानी - कोई बात नहीं तुम परेशां मत हो मुझे रजनी hi कहो.

तो सच ये है देव के जब त्रिकाल ने ये तिलिस्मी चक्र बनाया तो उसने मुझे यहाँ की रानी बनाने का फैसला किया. क्यों ? क्यों की उसे मुझे भी सजा देनी थी. असल में त्रिकाल जब एक साधारण व्यक्ति था तब वो मुझ पर मरता था. और जैसा के तुम देख hi रहे हो मए अत्यंत सुन्दर तब भी थी और अब भी हु. तो मैने उसे रिजेक्ट किया था. तो जब उसने तिलिस्म का निर्माण किया तो मुझे सजा के टूर पर यहाँ की महारानी बनाने का फैसला किया. ये बात मुझे पता चल गयी तब मैने अपनी रिहाई का रास्ता भी जाना के उसने मेरी रिहाई का रास्ता भी तुमसे hi बंधा है. के यदि तुम मुझे अपने साथ खुद अपनी मर्जी से ले जाना चाहो तो मए आज़ाद हो जोगी. शायद तब त्रिकाल ने भी नहीं सोचा हो गए के ऐसा कुछ होगा क्यों की तुम यहाँ आओगे तो अपने मकसद के लिए आओगे और तुम क्यों यहाँ की महारानी को निकलने में इंट्रेस्ट लोगे. इस हिसाब से मए अनंत कल तक इसी तिलिस्म में बानी नगरी की रानी के रूप में सजा कटती रहूगी तुम बस यहाँ आओगे और यहाँ से गुजर के चले जाओगे. और मेरी सजा , सजा hi बानी रह जाएगी. मैने अपनी शक्तियों से ये पता लगाया के उसने तिलिस्म तुम्हारे और पूनम के नाम का बंधा है. और वो तुम hi हो जो मुझे यहाँ से निकल सकते हो . और अगर तुमने मुझे यहाँ से नहीं निकला तो मए इस तिलिस्म के टूटते hi ख़तम हो जोगी. अब अपनी जान बचने का हक़ तो सबको है hi. बस फिर क्यात है. इस तिलिस्म की महारानी बनने से पहले hi मैने अपनी शक्तियों से ये पता लगाया के तुम कब वापस आओगे और उस हिसाब से मैने अपना क्लोन सेट किया और उसे उसी टाइम पीरियड के हिसाब से एक जंगल में छुपा के रख दिया. और उसकी पूरी डेस्टिनी को सेट कर दिया. उस हिसाब से वो क्लोन अपने टाइम पे एक्टिव हुआ और सुन्दर लाल से मिला फिर तुम्हारे बाबू जी के टच में आ आया. और उसके बाद तो उसमे ये सेटअप था hi के तुम्हारे बड़े होते hi एक दिन तुमसे मिलेगा. और पहचान बनाएगा. ये सब इसीलिए क्यों के मए कही भी तुम्हारी दुश्मन तो थी hi नहीं. लेकिन फिर भी तुम्हे मुझे यहाँ से निकलने के लिए कोई कारन तो चाहिए न. बस उसी कारन को मैने तुम्हारे सामने रख दिया. तुम शहर में मुझसे मिले और मेरे क्लोन के साथ यानि मेरे साथ सम्बन्ध बनाया. हमें सम्भोग किया.

………..अब यहाँ की बात करे तो मैने इतने लम्बे समय में यहाँ के बारे में बहोत सी जानकारिया इकठी कर के राखी है. जो तुम्हे तिलिस्म तोड़ने में काम आएगी. और मुझे तो तुम तभी ले जा सकते हो जब तुम मेरे साथ सम्भोग कर लो क्यों की यहाँ की महारानी के साथ यदि कोई बहरी आदमी सम्भोग कर लेता है तो उसे फिर यहाँ महारानी बने रहने का अधिकार नहीं होता उसे तिलिस्म में भटकना पड़ता है. यही सजा है. मैने अपनी इस सजा को तुम्हारे और अपने लिए वरदान बना दिया अब हमारा मिलान होगा और सजा के मुताबिक मुझे तिलिस्म में भटकना पड़ेगा. लेकिन त्रिकाल के नियमो में कही भी ये नहीं लिखा है ेके मुझे अकेले भटकना है. यानि मए तुम्हरे साथ भी चल सकती हु यदि तुम सहमत होते हो तो. क्यों तुम लोगो को कौन से अहा का सब पता है आखिर तुम लोग भी तो भटक hi रहे हो न तो साथ में भटक लगे. यानि मए तुम्हरे साथ चल पाउगी. और हर तरह से तुम्हारी मदद करुँगी. इसी बहाने मुझे यहाँ से आज़ादी मिल जाएगी और तुम्हे तिलिस्म तोड़ने में आसानी.

देव – wowwwwwwwwwww……….. यु अरे ग्रेट डार्लिंग सिम्पली great.Uuuuuuuuuummmmmmmmaaaaaahhhhhh देव ने रजनी को चुम लिया.

रजनी - सिर्फ गाल क्या चूमते हो देव मए तो पूरी की पूरी तुम्हारी हु अब से.

देव – एक मिनट तुमने कहा के तुम और राजा एक दूजे की बाटे सुन सकते थे लेकिन अब तुमने संपर्क तोड़ दिया है और वो हमारी बाटे नहीं सुन पायेगा लेकिन क्या ये नहीं हो सकता के उसने कोई और रास्ता बना लिया हो यहाँ सब देखने और सुनने का राजा ने तुम्हारा प्लान तो अब तक सुन लिया होगा शायद . वो हमें कही रोक न दे. और राजा न सही लेकिन त्रिकाल तो सब जान hi गया होगा न?

रजनी - तुम चिंता मत करो मए बेवकूफ नहीं हु देव. तुम्हारे इस कमरे में आते hi मैने इस कमरे को सुरक्षित कर लिया था. यहाँ की कोई बात बहार नहीं जा सकती न कोई हमें देख सकता है न सुन सकता है. फिर चाहे वो राजा हो या स्वयं त्रिकाल. लेकिन है सुबह होते hi जब मए राजा के सामने जोगी तो वो अपनी शक्ति से पता लगा लेगा के रत को मैने तुम्हारे साथ सम्भोग किया या नहीं. उसी आधार पे वो आगे फैसला करेगा.

देव – फिर तो ठीक है. लेकिन तुम इतनी जवान कैसे हो? वह तो उम्र ढल रही है तुम्हरी.

रजनी हंस कर – क्यों क्या अब वो रजनी पसंद नहीं या ये पसंद नहीं?

देव - मैने कभी शरीर से प्यार किया hi नहीं किसी को. तो तुम किसी भी रूप में हो मुझे पसंद हो. पर ऐसा हुआ क्यों?
 
भाई हलाकि ये कोई ऐसी बात नहीं जिसे पूरा न किया जा सके लेकिन ये राजा के साथ कुछ ज्यादा hi हो जायेगा, आखिर उसका कसूर भी क्या है वो तो खुद सजा hi भोग रहा है न तिलिस्म में, वो कोई रियल राजा तो है नहीं. और जो मैं डायरेक्टर है यानि त्रिकाल वो ये सब प्रोब्लेम्स क्रीट कर रहा है देव के लिए फिर भी हालत के मुताबिक देव ने राजा की तो बजा hi दी उसी के साथ उसी की बीवी के बैडरूम में जाकर उसकी आँखों के सामने दरवाजा बंद कर देना ये खुद अपने आप में बहोत बड़ा धक्का है. और इसका पता भी चलेगा. के राजा को क्या महसूस हुआ. जब इनका सेक्स सन ख़तम हो जायेगा. वैसे आपके सुझाव के लिए धन्यवाद दोस्त.
 
:मभोई: सही है. आप तो बिग बंग के ज़माने से कह रही थी के ये देव की कोई एक्स गफ है. वैरी स्मार्ट नैना जी.

आपने कहा के रिजेक्ट होने पे त्रिकाल ने रजनी को सजा दे दी इस पर आपको एतराज है. तो नैना जी जरा सोचिये. के लॉजिकल बात भला विलें कभी करता है क्या? नेगेटिव किरदारों का तो काम hi होता है ऐसे काम करना जो गलत हो. जिसमे अन्याय हो, जो किसी की भी नजर में सही न हो, जिससे कहानी के पत्रों को तकलीफ हो. फिर चाहे वो किसी कहानी में हो या फिल्म में. सो डोंट मंद. त्रिकाल एक विलें है और उसी से ऐसे उटपटांग कामो की अपेक्षा की जा सकती है. तभी तो हीरो की नफरत उससे बढ़ेगी न.

आपके रेवो के लिए और तारीफ के लिए भी आपका बहोत बहोत धन्यवाद.
 
फ्रेंड्स एडवेंचर सफर शुरू होने से पहले हमने कहा था के इस ट्रिप में सेक्स नहीं होगा. और अगर हुआ तो वो कहानी की डिमांड के हिसाब से hi होगा जबरदस्ती का सन नहीं क्रिएट किया जायेगा. यानि इस पुरे सफर में आपको स्टोरी hi ज्यादा मिलेगी. अब जैसा की आप लोग देख hi रहे है के कहानी की डिमांड बन गयी है के कुछ सेक्सी और रोमांटिक मूवमेंट ऐड किये जाये. तो लेटस जो विथ थे फ्लो. एन्जॉय थे सेक्स एनकाउंटर ऑफ़ देव & महारानी रजनी.
 
अपडेट - 146

रजनी हंस कर – क्यों क्या अब वो रजनी पसंद नहीं या ये पसंद नहीं?

देव - मैने कभी शरीर से प्यार किया hi नहीं किसी को. तो तुम किसी भी रूप में हो मुझे पसंद हो. पर ऐसा हुआ क्यों?

अब आगे…………

रजनी - अरे वह पृथ्वी लोक पे मए हमेशा जवान कैसे रह सकती हु वह के हिसाब से मेरे क्लोन में चेंज तो आएंगे hi न और यहाँ पे तिलिस्मी चक्र में तो मए आज भी वैसी hi जवान और कुवारी हु जैसी मए तिलिस्मी चक्र बनते समय थी.

देव – कुवारी क्यों ? राजा कुछ नहीं करता क्या?

रजनी - वो मेरा पति नहीं है बस तिलिस्मी चक्र में मए उसकी रानी हु और वो महाराज वार्ना तो वो मेरे आगे कुछ भी नहीं. ये जो राजा है असल में ये त्रिकाल का जिगरी दोस्त था तब. और दोनों में अनबन हो गयी थी. मेरे hi कारन क्यों के ये भी मुझ पर मरता था. ये तिलिस्म बना कर तो त्रिकाल ने सबसे अपना जाती बदला लिया है. क्यों के दोनों hi दोस्त मरते थे मुझ पर तब. लेकिन मेरे दिल में तो दोनों में से किसी के लिए कोई प्यार था hi नहीं कभी. और इसीलिए मैने दोनों को इंकार कर दिया क्यों की मए किसी एक की हो कर दूसरे की नफरत का कारन नहीं बनना चाहती थी. मए नहीं चाहती थी के सिर्फ मेरी वजह से इनकी दोस्ती में दरार आये या कोई दुश्मनी पैदा हो. लेकिन त्रिकाल ने मेरे इंकार की वजह इस राजा को मन और उसे ये सजा दी के वो रहेगा तो हमेशा मेरे hi साथ लेकिन मुझे छू नहीं पायेगा. और अगर छुआ तो हमेशा के लिए त्रिकाल का गुलाम बन जायेगा. अब उसने अपने hi दोस्त को यहाँ का राजा बना दिया और उसे सजा कर दी. और फिर मेरे इंकार की वजह से मुझ पर अपना क्रोध भी उसने निकलना था. इसीलिए मुझे रानी बना कर सजा देने की बात सूझी तो उसका डबल फायदा हुआ . यानि मए उसी के दोस्त की रानी भी बन गयी लेकिन अब उसका दोस्त मुझे छू भी नहीं सकता था. क्यों के यदि वो मेरे साथ सम्भोग कर लेता तो उसका यहाँ से निकलने का मार्ग बंद हो जाता.

है यहाँ सम्भोग की छूट है लेकिन जो भी सम्भोग करेगा फिर उसके यहाँ से निकलने का मार्ग बंद हो जायेगा. और तिलिस्म टूटने के बाद भी वो त्रिकाल का गुलाम रहेगा. लेकिन जो सम्भोग से दूर रहेगा वो वक़्त आने पे परिस्थिति बदलने पे त्रिकाल के नियमो के आधार पे आज़ाद भी हो सकता है. और तिलसिमे टूटने के बाद त्रिकाल की गुलामी भी नहीं रहेगी.

देव लेकिन तुम अभी टेक क रानी हो यानि के अहा के नियम के मुताबिक तो तुम सम्भोग कर hi नहीं सकती. और यदि किया तो त्रिकाल की गुलाम बन जाओगी न?

रानी - नहीं देव ये सम्भोग मए अपने मजे के लिए नहीं कर रही बल्कि उस राजा के आदेश पे कर रही हु. और उसके आदेश के पीछे त्रिकाल का आदेश भी आहे तो अगर त्रिकाल खुद hi मुझे किसी से सम्भोग करने के लिए परोस रहा आहे तो उसके नियम तो वही टूट गए न लेकिन इसका एक असर तो पड़ेगा hi

देव – और वो क्या ?

रानी - ओफ्फो कितनी बाटे करते हो क्या ये रत बाटे करने की है? ये कर्मा ये बिस्तर मैने बाटे करने के लिए सजाया है? जो जानना है कल जान लेना अभी तो मेरे इस हुस्न पर अपने प्यार की मोहर लगा दो .

देव - अच्छा तो चलो फिर आज मेरी बन hi जाओ. और दे दो मुझे अपना ये कुँवारापन और अपने हुस्न का खज़ाना.

रजनी – देव तुम्हे यद् है जब तुमने मेरे साथ पहली बार सम्भोग किया था तो मैने तुम्हे कहा था के मए तुम्हे एक कुवारी योनि दूगी.

देव – योनि का तो यद् नहीं पर है तुमने कहा था के एक कुवारी छूट डौगी.

रजनी देव की छाती में मुक्का मर के – धत्त्त तुम बड़े ख़राब हो. कैसी बाटे करते हो.

देव – अब यार छूट को छूट न कहु तो क्या कहु? ख़ैर फिर?

रजनी - तो वो मैने इसी दिन को सोच के कहा था क्यों के तुम्हे देखते hi मुझे ये अंदाज़ा हो गया था के तुम तिलिस्म में जल्दी hi प्रवेश करने वाले हो. असल में उस दिन ये बात मेरे क्लोन की जबान से मैने hi कही थी तुमसे. अगर तुम थोड़ा सा ध्यान देते तो मेरी आवाज़ की खनक को उसके चहकने को पहचान जाते. पर तुम तो उस वक़्त उसी का बदन के नशे में चूर थे इसीलिए न पहचान पाए. आज मए तुम्हे अपनी कुवारी छूट देने जा रही हु. और मए जानती हु तुम्हरा बहोत बड़ा है तो प्यार से करना आज मए तुम्हारी रजनी आंटी नहीं बल्कि कुवारी रजनी हु.

देव खड़ा हुआ और रजनी को भी नीचे खड़ा कर दिया फिर उसने अपना अंडरवियर छोड़ के सरे कपडे उतर दिए और रजनी के सामने खड़ा हो गया

देवा को देखते hi रजनी ने स्माइल की और पलट कर कड़ी हो गई...

देवा समझ गया की रजनी शर्मा रही है....

देवा आराम से रजनी के पास गया और पीछे से उन्हें अपनी बाहों में कास लिया....

रजनी - aaahhh...dev...

देव- क्या हुआ aunty...hmm..ab शर्मा रही हो...

रजनी - हम्म....

देव – मुझसे मेरी रजनी आंटी ने कुवारी छूट देने की बात की थी इसीलिए आप मुझे बीटा hi कहेगी और मए आपको आंटी hi कहुगा आज की रात. ठीक है

रजनी - ह्ह्ह्हम्म्म……

देव ने अपने हाथ को रजनी की कमर और बूब्स पर फिरना सुरु किया....

देव - साड़ी में क्या कर रही हो ...तब शर्म नहीं आई. . जब दुल्हन बन के मेरा इंतजार कर रही थी अब क्यों शर्मा रही हो?

आंटी - आई थी beta...par पता नहीं कैसे इतनी हिम्मत कर ली...

देव- बहुत मूड बन रहा था आपका to...haa...

आंटी - hmm...mood तो कल से hi बना tha...jab तूने मुझे छोड़ने की बात महाराज से ki...aahhh...

देवा ने धीरे से आंटी के एक बूब्स को दबा दिया...

देव- तो आपने कहा क्यों नहीं...

आंटी - कैसे कहती beta...wo दरबार था और तुझे ये सब बाटे भी बतानी थी वार्ना उसी समय तेरे सामने आ जाती...

देव- hmm..par आपको कंट्रोल करना चाहिए na...hmm...

आंटी - कोशिश कर रही थी और देखो मैने कण्ट्रोल तब कर भी लिया लेकिन अभी …….. पर आज बहुत मन हो रहा है...

देव- तो आज रात आपके मन को खुश कर दू...

आंटी - है beta...aaj जी भर के मज़ा दे दे...

देवा ने देर न करते हुए रजनी आंटी की साड़ी और पेटीकोट निकाल दिया और हर कपडा हटते हुए उनके हर अंग को चूमता भी गया. जिससे रजनी आंटी जरुरत से ज्यादा hi गीली होती चली गयी......... फिर रजनी आंटी एक ब्रा टाइप कपडे में आ गयी क्यों की तिलिस्मी लोक में ब्रा पेंटी तो होती नहीं thi-panty की जगह पे उसने बस कमर पे एक कपडा hi बंधा हुआ था जो लंगोट की तरह था..

देवा ने उसे वही रखे एक सोफे टाइप की चीज़ पे लिटा दिया .

आंटी ने भी देव की चौड़ी छाती को सहलाते हुए किश करना सुरु कर दिया......

देव ने आंटी को सोफे के साइड पर बैठाया और किश करना जारी रखा...

देवा घुटनो पर आकर आंटी की नाभि पर जीभ फिरने लगा....

आंटी ने एक्सिटमेंट में अपनी टाँगे देव के कंधे पर फसा di....aur अपने हाथो के बल पीछे झुक कर मज़ा लेने लगी.....

देव आज आंटी को dheere-dheere मज़ा दे रहा tha...aur आंटी भी तड़पती हुई मज़े के सागर में डूबती जा रही थी..... उसके काळा घने लम्बे बल खुल कर फर्श तक झूल रहे थे. और देव अपने पंजो में आंटी की गोरी गोरी सुडोल चूचियों को भर के हलके हाथ से मसल रहा था और उन्हें सहला भी रहा था. फिर उसने झुक कर आंटी के एक ब्राउन निप्पल को अपने होठो में भर के गहराई से चूसा और झटके से छोड़ा फिर उसे अपने होठो में लिया और अपने होठो में hi खिंच खिंच कर चूसने लगा और दूसरे बूब को सहलाने लगा.

देव- aaahh...aap बहुत टेस्टी हो aunty...uuummm....

आंटी - aaahhh....to चूस लो mujhe....ooohh..beta....uuuumm...

थोड़ी देर तक आंटी की निप्पल को चूस कर देव नीचे आंटी की नाभि पे अपनी जबान फिरने लगा और गहरी नाभि में जबान दाल कर जैसे उसकी गहराई नाप रहा हो. नाभि के मज़े लेने के बाद देव ने उन्हें सोफे पर लिटा दिया और उनके साइड में लेट कर उनके बूब्स को फिर से पकड़ लिया uuumm...ab मज़ा आएगा...

और देव ने आंटी के बूब को मुँह में भर लिया...

आंटी - uumm...chooso beta....chooso...aaaahhh..

देव ने आंटी के बूब्स को बारी-2 चूसना सुरु कर दिया और साथ में एक हाथ से उस लंगोट के ऊपर से उनकी छूट सहलाने लगा....

आंटी - ूउम्म्म.. beta...chooso...aaahhh...joor se....aa आह्ह्ह्ह

थोड़ी देर तक आंटी के बूब्स चूसने के बाद देव ने आंटी के होंटो को चूसना सुरु कर दिया और उनकी छूट पर अपने हाथ की स्पीड बड़ा दी...

आंटी ने भी मस्ती में अपनी टाँगे खोल दी और अपनी छूट को देव के हाथ पर उछलने लगी...

आंटी - uumm..beta...kab तक tadpayga...uuuummm...

देव - तड़प में hi मज़ा है aunty...uuumm...aaj आपकी सील जो तोड़नी है पहले मजे तो ले लू………..

आंटी – है ये तो सच hi कहा मैने तेरे इस मुसल को अपनी क्लोन की छूट में जाते हुए महसूस तो किया था. लेकिन उस दर्द को फील नहीं कर पायी क्यों की उसकी सील तो सुन्दर लाल ने तोड़ी थी न. लेकिन उसे क्या पता वो सिर्फ एक परछाई के साथ जीवन बिता रहा था. असल छूट तो यहाँ तुम्हरे लिए सुरक्षित राखी थी मैने. जिसमे आज मए तुझे फील करुँगी. आंटी देव के होठ चूसते हुए ये सब बोले जा रही थी और देव के हाथो के जादू में बहती जा रही थी.

देव और आंटी एक दूसरे के होंठो को पुरे मज़े से चूस रहे थे और देव ने अपनी ऊँगली को आंटी की छूट में लंगोट के ऊपर से घुसाने लगा....

आंटी - uumm..beta...nikaal de...dekh कैसे पानी छोड़ रही hai...ab और न tadpa...uuummm...

देव - ....aaahhh...aunty...aap मज़ा करो बस ..बाकि मुझ पर छोड़ दो...

थोड़ी देर बाद आंटी पूरी गरम हो gai...unki छूट रास से उनकी लंगोट पूरी गीली हो गई...

फिर देव आंटी के पैरो के पास आ गया और उनकी लंगोट निकाल कर के अपनी जीभ उसकी झांटो से भरी छूट पर फिर दी....

आंटी - ohhh...beta...

देव - umm..aaj तो आप सच में टेस्टी हो gai..hmm......

आंटी -aahhhh….aaise hi…haaa beta…choos डालो...
 
अपडेट - 147

थोड़ी देर बाद देव ने छूट में जीभ घुसा दी और जीभ से उसे छोड़ने लगा...

आंटी - अंदर tak...karo ooohhhhhh……..aaaaa ऐसे hi………

और आंटी की छूट देव की जीभ के हमलो से झड़ने लगी....

देव ने छूट को मुँह में भर लिया और छूट रास पिने लगा...

छूट रास पिने के बाद देव खड़ा हो गया और बोलै....

देव- आंटी ...मज़ा आया...

आंटी - hmm...ab मैं तुम्हे मज़ा कराती हु बीटा...

और आंटी उठी और देव को लुंड से पकड़ कर फूलो की बिस्तर तक ले आयी फिर उस को फूलो से सजे बिस्तर पे लिटा दिया और उसका फ्रेंची अंडरवियर निकालने लगी....

आंटी ने जल्दी से देव को नंगा कर दिया और लुंड को हाथ में थाम लिया....

आंटी - beta...ye तो आज और भी अच्छा लग रहा है...

देव - बस आंटी ...आपके प्यार का असर hai...aap बस ऐसे hi प्यार करते raho...ye और भी अच्छा लगेगा...

आंटी ने एक प्यारी सी स्माइल दी और लुंड के सुपडे को अपनी जीभ से छेड़ने लगी...

देव- ohh..aunty...ab आप भी तड़पने लगी....

आंटी - नहीं beta...main नहीं tadpaugi....mujhe अब ये अंदर chahiye...aaauuuummmm...

और आंटी ने सूपड़ा मुँह में भर liya....aur बड़े प्यार से चूसने लगी...

देव -aaaahhh…aaunty…yeesss...

आंटी ने dheere-dheere आधे से ज्यादा लुंड मुँह में भर लिया....

देव -aaahhhh…..aise hi aunty...thoda aur...…aaahhhh…

देव -आंटी …मज़ा आ gya…aaahhh...

थोड़ी देर की लुंड चुसाई में देवा का लुंड अपनी ायकाट पर आ gaya...ab उसकी नसे एक डैम फूल गयी थी जिससे रजनी किट हुक से चमकता हुआ देवा का लुंड और भी भयानक दिख रहा था.

इधर रजनी की भी छूट ने हाहाकार मचा रखा था. रो रो कर. रजनी जल्दी से देव के पूरे सुपडे पे गोल गोल जबान चलते हुए लुंड को छोड़ कर लेट गयी.

आंटी – देव अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा है कुछ कर न

देवा ने मुस्करा कर आंटी को अपने ऊपर आने का इशारा किया...

आंटी भी गॉड में आ कर अपने हाथ से लुंड को छूट पर सेट कर के बैठने लगी...

आंटी - आअह्ह्ह...

आंटी ने बैठते हुए लुंड का सूपड़ा अपनी गीली छूट में ले liya...unke चेहरे पे इतने से hi पसीना आ गया था और दर्द झलक रहा था. उनके दन्त भींच गए थे

जैसे hi आंटी ने देव की आखो में देखा तो वो थोड़ा सा शर्मा gai...tabhi देव ने नीचे से एक धक्का मार दिया...

आंटी - aaahhhh...maaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

और देवा आंटी की गांड पकड़ के धीरे-2 धक्के मरने सुरु कर दिए....

देवा - खुश हो आंटी ...हम्म..

आंटी -aahh..aahhh..ha beta...bahut khush….ahhh आज मेरी कई सालो की तपस्या का फल मिल रहा है खुश तो होगी hi न मए पर आआआअह्ह्ह बहोत तेज दर्द हो रहा है मेरी छूट में उउउउउउउइइइइइम्म्म्माआआआ…………………

देव – बस थोड़ा सा सह लो फिर सब ठीक होगा और तुम्हे मजा भी आएगा.

आंटी जानती हु बीटा तू मुझे बहोत मजे करवाएगा. अपने इस लुंड से.

देवा ने देखा के आंटी का ध्यान नहीं है उसने आंटी की कमर को मजबूती से पकड़ा और उसे पूरी ताक़त से नीचे दबा दिया और खुद भी नीचे से एक करारा धक्का मर दिया जिससे देवा का 10” लुंड आंटी की बुर को फाड़ता हुआ अंदर तक घुस गया

आंटी - aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhha devvvvvaaaaaaaUuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiimmmmaaaaaaaaa रुक जा jara…….oooohhhhhh फाड् दी तूने मेरी………. उउउउउ उफ्फ्फफ्फ्फ़ फ़फ़फ़फ़फ़ाआआअहिलना….. भी मत रुक जाआआआ…… किसी कुवारी छूट में एक डैम से 10” का लुंड डालते है क्या??? मार दल्लाआआआआ

aahhhhhhhhhhhhhuuuuuuuufffffffffffffffssssssssssseeeeeee

देवा उसी पोज़ में रुक गया और आंटी के बड़े बड़े बूब्स पकड़ के चूसने उसे अपने लुंड पे कुछ गरम तरल बहार को निकलता महसूस हुआ देव समझ गया के ये रजनी के कुंवारेपन के टूटने की निशानी है. यानि उसका कुंवारा लहू.

कोई 5-7 मिनट बाद hi आंटी ने धीरे से अपनी कमर हिलायी जिससे देव को इशारा मिल गया उसने भी नीचे से धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू कर दिया.

आंटी – आआआहहह देवा बहोत दर्द हो रहा hae……aa आह्ह्ह्ह…

देव बिना कुछ कहे आंटी की चूचिया दबाते हुए उन्हें चोदे जा रहा था

और थोड़ी देर के बाद देव ने अपनी स्पीड बड़ा di....aunty भी अब अपनी गांड उछाल कर साथ देने लगी....

आंटी - aaahhh…ab मार ले जी भर ke….aaahh..ahahh...

देव -aahhh..aap तेजी से uchlo…maza आ रहा hai..aahhhh...

आंटी - ये ले beta..aahhh..aahhh…or जोर se..aahhhh...dukh रही है मेरी छूट………..

देव - हआ ऐसे hi ….उछलो …आंटी…...

आंटी -aahhh..ahhh..ahhh..ahhh..ahhoohhh..oohh...

देव -aahh…joor se..aunty…ahhh…joor से….

इनकी चुदाई की स्पीड से पलंग भी आवाज़े निकाल रहा था...

थोड़ी देर बाद आंटी थकने लगी तो देव आंटी को साथ ले कर पलट गया...

अब आंटी नीचे थी और देव uper...dev ने ौंटी की टाँगे हवा में उठाई और उनके सामने घुटनो पी ा के धक्के मरने की स्पीड बड़ा दी...

आंटी -ाःह… आह्हः… hhaa…beta…aise hi karo..aahhh…..aahahh…ahahh.sahhah…jjoorrr..ssee..aahahh…..

ahah..uumm…beta…hhhoooo…aaahh….betaa……aaaiiiseee ही… …jjooorrr…sseee…..esssss…aaahhh…aahhhahh…

ahahh....aahh...beta...aahhhhh......maaarrr....maaarrr...teeejjj...

और इस दमदार चुदाई में आंटी फिर से झड़ने लगी.....

आंटी -aaahhhhh…ah...ahh...ahhh…mmaaiinn…aaaiii….. betaaa....ahh..ahhh. ..एआईईईई..

आंटी झड़ने लगी और चुदाई की आवाज़ कामे में बदलने लगी...

देव- मैं भी आया aunty...yeeehhhh...yesss..

Aaahhh…..aahhhhehh..bbeettaa…oohh…mmaa..aahhh…ttthhhhuuuppp…cchhhhuuppp…..yeeehhhhaaa…aahhhhh…aaahhhh….aunty….yee lee….ooohhh……ffffccchhhhhaaappp….ttttuuupp…aahhhh…aaiiiii..beettaa....

ऐसे hi आवाज़ों के साथ आंटी और देव झाड़ गए और फिर से किश करने लगे....

देव - uummm...aunty...maza आया...

आंटी - hmm..bahot मजा आया आज तुम्हारे साथ अपनी असली सुहागरात मन कर.

देव – अभी कहा मनाई है अभी तो शुरुआत हुई है आपकी सुहागरात की... अभी तो सिर्फ सील तोड़ी है अभी आपकी कमर तोडना तो बाकि है. मए नहीं चाहता महाराज कल अपनी शक्ति से पता लगाए के आप चूड़ी है या नहीं बल्कि आप की चल hi उसे बता दे के आपकी कल रत रगड़ के चुदाई हुई है.

आंटी – धत्त.. बेशरम…….. अच्छा च लैब जल्दी कर beta...warna...subah हो गयी तो फिर हमें पता नहीं कब ऐसा मौका मिलेगा.

उसके बाद देव और रजनी ने उस रत तीन बार और भरपूर चुदाई की और रजनी की सुहागरात सुबह करीब 4 बजे तक चली जिसमे वो कुल मिला कर 4 बार छुड़वा चुकी थी और अनगिनत बार झड़ी थी उसके बाद दोनों नंगे hi लिपट के सो गए . किसी नव विवाहित जोड़े की तरह.

सुबह जब महाराज ने कमरे का दरवाजा खोला तो उन्होंने देखा कमरे में रह गए थे बस बिखरे हुए फूल. और उन दोनों के मिले हुए वीर्य की गंध जो पूरे कमरे को महका रही थी और जाहिर कर रही थी की रत भर उस पलंग पे, उस कमरे के हर एक कोने में रजनी कितना चूड़ी है. जगह जगह फर्श पर वीर्य की बूंदे भी नजर आ रही थी. और पलंग की चादर पर रजनी की कुवारी छूट से निकला हुआ खून .भी

ये सब देख कर राजा की आंखे नाम हो गयी. फिर भी उन्होंने अपनी आंखे साफ की और.

राजा – ुक्खहु ुक्खहु. महारानी उठिये सुबह हो गयी है.

राजा की आवाज़ पे रजनी और देव की नींद खुली दोनों hi नंगे पड़े थे बिस्तर पर. लेकिन न तो देव hi शरमाया और न hi रानी. बल्कि उसने उठते hi राजा के सामने देव के होठो पे अपने होठ रख दिए और देव ने भी रानी की चूचिया दबा के उसके होठो को चूसा. फिर रजनी पलंग से नीचे उत्तरी तो उसकी चीख निकल गयी क्यों की उसकी जांघो में और छूट में बहोत तेज तीस उठी थी जिसे देख के, समझ के राजा को एक धक्का सा लगा फिर से. फिर रजनी ने एक साड़ी अपने बदन पे लपेट कर नहाने के लिए चली गयी. देव ने भी अपने कपडे पहने और तैयार हो गया.

राजा – आप जाकर स्नान कर लीजिये उस के बाद अपने साथियो के साथ आ जाइएगा हम आपको इस नगरी से बहार निकलने का मार्ग बता देंगे. और बाकि की बाटे भी वही होगी.
 
थैंक यू भाई.

राजा को तो धक्का लग्न hi था क्यों की शायद उसे रानी की ठुकाई का गम उतना नहीं है जितना इस बात का गम है के अब रानी उसे हमेशा के लिए छोड़ के चली जाएगी. और वो इस तिलिस्मी नगरी में अकेला रह जायेगा. क्यों की सजा के टूर पे hi सही . आखिर उसे एक साथी तो मिली hi थी न. वो भी ऐसी साथी जिसे वो एक तरफ़ा hi सही लेकिन प्यार करता था कभी. जिसके बिछड़ने का वक़्त आ गया है त्रिकाल के नियमो के हिसाब से. और राजा के रोने का कारन भी यही है. वेल आगे देखना सच में दिलचस्प होने वाला है. थैंक यू वैरी मच फॉर योर रिव्यु भाई
 
नैना जी थैंक यू सो मच फॉर गिविंग में लाइक्स ों माय इतर reply's एंड नाउ थैंक यू वैरी मच फॉर योर रिव्यु ों अपडेट.

आपने राजा की कंडीशन को सही समझा है, और रही बात उसे कुछ हासिल होने की तो उसे हासिल तो पहले भी कुछ नहीं था बस. दीदार से hi पेट भर रहा था और एक साथी के साथ होने में hi खुश था. लेकिन अब वो भी गया. सुबह हो चुकी है और रानी जा रही है और इसी के साथ ह ये "राजा तो गया"
 
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