Fantasy इच्छाधारी देव - Page 21 - SexBaba
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Fantasy इच्छाधारी देव

अपडेट - 137

खतरा – तुम गलत मत बोलो वो हमारे भगवन है वो सबसे शक्तिशाली है. वैसे ये इसके पीछे भी एक कहानी है गलती मेरी और मेरी बीवी की थी.

रूद्र – कैसे?

खतरा बिना किसी संकोच के बोलता चला गया……

……मए और मेरी बीवी एक बार दिन के hi समय सम्भोग में व्यस्त थे. और हमें सम्भोग में कोई 3-4 घंटे हो चुके थे. लेकिन न वो थक रही थी न मए. क्यों के हम 5 साल बाद सम्भोग कर रहे थे तो दोनों hi लगे हुए थे. इस बीच त्रिकाल ने हमें कई आवाज़े दी पर हम में से किसी ने नहीं सुनी. जब हम लोग फुर्सत हुए तो हमारा ध्यान त्रिकाल की क्रोध भरी आवाज़ पे गया और हमें हमारी गलती का अहसास भी हुआ .

तब त्रिकाल ने कहा के उसने यु तो इस तिलिस्म कैद वॉर पे 12 जोड़े पहरेदारी के लिए नियुक्त किये थे. हर महीने की ड्यूटी लगने वाली थी लेकिन अब हमने उसकी बात को नजरअंदाज कर के उसकी बेइज्जती की है इसकी सजा के तौर पे अब हमें तब तक अलग अलग रह के पहरेदारी करनी पड़ेगी जब तक ये तिलिस्म नहीं टूटता.

रूद्र – अरे वाह एक बार की छू…... मेरा मतलब समभग का इतना बुरा परिणाम. बहोत बुरा हुआ तुम्हारे साथ. तभी तो मैने कहा के त्रिकाल ने गलत किया तुम्हारे साथ चलो मन तुमने 5-6 घंटे लगा दिए उसकी आवाज़ नहीं सुनी उस के लिए वो तुम्हे फिर से 5-6 साल की सजा दे देता अब ये क्या के अनिश्चितकाल की सजा दी जाये.

खतरा – मैने कहा न गलत बात मत कहो गलती उनकी नहीं हमारी थी. महँ त्रिकाल की बात अनसुनी कर देना कोई छोटा अपराध नहीं है ये तो उनकी कृपा hi थी के उन्होंने हमें उसी समय म्रत्युदंड नहीं दिया.

रूद्र – अबे ये जीना भी कोई जीना है लल्लू? बीवी के होते तू सेल रंडवे जैसी जिंदगी जी रहा है. समझ कुछ अंधभक्ति बहोत बुरी होती है मुर्ख.

खतरा ने जलती नजरो से रूद्र को देखा जो उसे देख के मुस्करा रहा था.

तभी सामने उन्हें गुफा में hi एक कमरा बना नजर आया. जिस के दरवाजे पे एक बड़ी औरत कड़ी थी हाथ जोड़ के.

खतरा – ये ढिबरी है यहाँ पर इनका घर है ये.

ढिबरी - आओ पूनम, देव सिंह , रूद्र, नीलम तुम साह्रो को देख कर ख़ुशी हुई.

पूनम – तुम हमें जानती हो?

ढिबरी – तिलिस्म नगरी की राजकुमारी को कौन नहीं जानेगा और देव तो नागलोक का राजकुमार है. भला इसे कोई भूल सकता है. और जब आप दोनों का जिक्र हो और कोई रूद्र या नीलम को नजरअंदाज कर दे ऐसा हो hi नहीं सकता. है तुम लोग मुझे नहीं जानते होंगे मए तो तब भी थी तुम्हारी hi नगरी में राजकुमारी, लेकिन हम छोटे लोगो के बारे में तुम नहीं जानती . हम तुम्हरी प्रजा में से hi थे. और आज भी है. मुझे राजकुमारी की सेवा कर के ख़ुशी होगी .

पूनम – है मए नहीं जानती तुम्हे .

ढिबरी - कोई बात नहीं. चलिए पीछे नहाने के कमरे भी बने हुए है ठंडा पानी है नाहा लो फिर आकर खाना खा लो मए लगाती हु तब तक.

फिर चारो अंदर चले गए..

खतरा – और ढिबरी कैसी हो तुम ?

ढिबरी - मेरे बारे में क्या पूछता है जो पूछना है साफ़ साफ़ बोल?

खतरा – अब तुझसे साफ़ साफ़ बोल भी तो नहीं सकता लेकिन इतना जरूर कहुगाके मेरी बीवी की दिला दे बहोत यद् आती है उसकी और बहोत मन भी कर रहा है उसकी लेने का.

ढिबरी – इस लेने के चक्कर ने hi तुझे उससे दूर किया है. उस दिन मैने भी कितना तेरे घर का दरवाजा पीटा था पर तू लेने में hi व्यस्त था.

खतरा – तू मिली है मेरी बीवी से?

ढिबरी - है कल hi मिली थी वो खुश है वह. पर वो भी तुझे यद् करती है.

खतरा – यद् करती है तो खुश कैसे है? कही और दे रही है क्या किसी को?

ढिबरी – उसे भी देनी है तुझे. और उसे पता चल चूका है के देव और पूनम आ चुके है खुश इसीलिए है बेवक़ूफ़. वो किसी और को नहीं देगी ये तू भी जनता है.

खतरा – ओह्ह्ह्ह ऐसा मए समझा कोई और खुश कर रहा है उसे.

ढिबरी - कचरा निकल अपने दिमाग से वो ऐसी नहीं है ये तू भलीभांति जनता है. है तुझे किसी और की चाहिए तो बोल दे मए इंतजाम कर दूगी त्रिकाल इतना भी बुरा नहीं है उसने मुझे कह रखा है के अगर खतरा किसी और की लेना चाहे तो किसी को भी ले औ. वैसे भी खली hi रहता है तू लम्बे समय तक. तो जिसकी चाहे जितनी चाहे लेता रह.

खतरा खुश हो कर – तो ले आ न मेरी बीवी को आज रत.

ढिबरी - तेरी अकाल पे तो पठार पड़े है. तू बात समझा नहीं. मैने कहा कोई और. तेरी बीवी की नहीं मिलनी तुझे. अभी ये तेरी सजा है और उसकी भी. इसीलिए किसी और की लेनी है तो बोल बहोत है तेरे लिए तैयार. आखिर त्रिकाल के खास सेवक की सेवा कौन नहीं करना चाहेगी.

खतरा – फिर रहने दे माल जमा hi होने दे मेरे अंदर जिस दिन अपनी बीवी से मिलुंगा त्रिकाल से छुट्टी ले के एक साल घर पे रहुगा और बीवी की लगा किसी और की नहीं लेनी मुझे. देख वो लोग आ रहे है तू खाना लगा दे.

ढिबरी भी मुस्कराते हुए अपने हाथ हवा में कर के कोई मंत्र पढ़ती है सामने पूरा गरमा गरम खाना सज जाता है.

इतने में सब नाहा के वापस आये तो ढिबरी के कमरे में टेबल पे पूरा खाना लगा हुआ था.

ढिबरी - आइये आपलोग खाना खा लीजिये.

फिर चारो बैठ गए खाना खाने

रूद्र – क्या बात है खतरा तुझे नहीं खाना?

खतरा – नहीं मए तो खता रहता हु तुम खा लो?

रूद्र ने बुरा सा मुँह बना के खतरा को देखा तो वो मुस्करा दिया.

खाना ख़तम करने के बाद. सब चलने लगे तो बहार आ कर

खतरा – मेरी बीवी को मेरा प्यार दे देना तुम hi. और हो सके तो ले आ उसे त्रिकाल से बात कर के क्यों की मुझे नहीं लगता ये लोग इस बार सफल होंगे. फिर हमें लम्बे समय तक इंतजार hi करना है न. अब इनके यहाँ आने और मेरी इनको दी गयी सहायता के एवज में मुझे अपनी बीवी से कुछ दिन मिलने की छूट तो मिलनी hi चाहिए न.

ढिबरी – बात तो सही है तेरी, मए त्रिकाल से बात करुँगी अब जा तू.

सब लोग आगे बढ़ जाते है खाना खा के और नाहा के चारो के अंदर फुर्ती आ गयी थी.

रूद्र – क्या खतरा सेटिंग कर रहे थे अपनी?

खतरा – मए कोई सेटिंग नहीं कर रहा था अपनी बीवी का हल चल पुछा रहा था.

रूद्र ने पीछे मुद के देखा तो अब वह कोई घर नहीं था गुफा दूर तक सुनी थी.

रूद्र – खतरा वो घर कहा गया?

खतरा – वो ढिबरी का घर था वो अपनी मुट्ठी में बंद कर के ले गयी . यहाँ सब मायावी है.

फिर सभी लोग चुप चाप आगे बढ़ने लगते है बीच बीच में रूद्र और खतरा hi बात कर रहे थे लेकिन इतनी देर में पूनम ने एक शब्द भी बात नहीं की थी. कोई दो घंटे चलने के बाद वो गुफा ख़तम हो गयी और खतरा वही दीवार के सहारे टिक के बैठ गया.

ये चारो आँखे फाड् के सामने देख रहे थे.

सामने गुफा के तीन दरवाजे नजर आ रहे थे.

खतरा – मेरा काम ख़तम हुआ तुम आगे जाओ मए यही रहुगा पर यहाँ से तुम्हे hi आगे जाना है?

देव – लेकिन तुम तो हमें रास्ता दिखने आये थे.

खतरा – है तो दिखा दिया न मुझे यही तक रास्ता दिखाना था. अब तुम्हे जाना है आगे. या चाहो तो यही रुक जाओ जब तक तुम लोगो की इच्छा. ढिबरी को बुला के समय समय पे तुम लोगो का खाना पन्ने दिलवाता रहुगा.

रूद्र – अबे सटकले यहाँ रुकने के लिए आये क्या हम लोग बता किस रस्ते जाना है?

खतरा - ...............
 
भाई सोच अच्छी है बल्कि तिलिस्म क ध्यान में रख के कुछ देखा या पढ़ा जाये तो इन सब के बगैर तो तिलिस्म बन hi नहीं सकता न. इसीलिए थोड़ा सा वेट करो और आगे आगे देखो क्यों की अभी तो तिलिस्म शुरू हुआ है ये दरवाजा इनका कोई एग्जिट पॉइंट नहीं है बल्कि रियल तिलिस्म का 1सत एंट्री पॉइंट है. और जब ये अंदर जायेगे तो क्या क्या होगा वो शायद आप सब की उम्मीद से ऊपर हो. सो वेट एंड वाच बीआरओ
 
O..O...O...OH...... माय गॉड नैना जी क्या क्या लिख दिया आपने हमने तो बस अपने खुद के टाइम पास के लिए ये सब लिख दिया था जिसे आप स्टोरी कहते है ये सब तो बस हमारे मन में आता गया और हम लिखते गए है. आगे क्या लिखना है इस कहानी में, आगे क्या होगा हम खुद नहीं जानते क्यों की. न तो हम खुद इसका एन्ड इतनी जल्दी चाहते है न hi कहानी हमें इसे बंद करने की इजाजत दे रही है क्यों की हमारी जरा सी सोच अब इतनी ज्यादा बिखर गयी है इस प्लाट पर के इसे अगर हम इसी स्पीड से भी समेटना चाहे तो काम से काम इतने hi अपडेट और लगेंगे लेकिन फ़िलहाल तो इसका ु टर्न भी शायद पॉसिबल नहीं. कहानी तो इस समय ठीक ऐसे उड़ रही है जैसे एक बार म्हणत कर के हम पतंग को आसमान में पंहुचा देते है उस के बाद वो खुद उड़ती है और उसे उड़ने वाला सिर्फ उसे सँभालने का काम hi करता है. लेकिन आपने जो एक्साम्प्ले दिए अपने रिव्यु में इन थे बेगिनिंग (उच्च आकांशा भी है लीड किरदारों मैं के अंदर समाहित हो‌ जिसे देख लगे की जैसे ये एक ऐसा मिला जुला एहसास जो समंदर किनारे झिलमिलाते हीरे के कण हो... आपकी जादुई लेखनी जैसे ठंडी रेट दिमाग और जिश्म पर लपेट पड़े रह जाएंगे और पता hi चले की कब ये मनोरम अपडेट ख़तम भी हो गया...) ये सब तो बहोत ज्यादा हो गया ी ऍम रॉय थैंकफुल तो यू के आपने इतनी गहराई से इस कहानी को महसूस किया और इस कहानी से इतनी hi गहराई से जुडी भी. ये इस कहानी का अब तक का सबसे बेहतरीन और खूबसूरत रिव्यु है. इतस रॉय वंडरफुल एंड अमेजिंग रिव्यु. हम कोशिश करेंगे के अपने रीडर्स को अपनी कहानी से जोड़े रखने में सफल हो. और अपने रीडर्स की उम्मीदों पे खरे भी उतर पाए. क्यों के ये आप सब राडेस का प्यार hi है जो हमारी कहानी को इतनी प्रशंसा मिली है. इसमें हमारी सिर्फ म्हणत है लेकिन इस म्हणत को सफल किया है आप सब रीडर्स ने . उसके लिए हम आपका और अपने सभी रीडर्स का आभार मानते है और धन्यवाद भी देते है. थैंक यू वैरी मच माय एक्टिव एंड साइलेंट रीडर्स.
 
जी है सब ठीक है. नाउ ी ऍम पर्फेक्ट्ली आल राइट नैना जी. थैंक्स फॉर योर कंसर्न. और नेक्स्ट अपडेट भी जल्द HI दे देंगे रेअसरों इसीलिए नहीं दिया अब तक क्यों की कई लोगो को ये सिर्फ बहाना सा लगेगा. बूत अभी हम छह कर भी अपडेट नहीं दे प् रहे है क्यों की हमारे सिस्टम का मोठेर्बोर्ड HI डैमेज हो गया जिस वजह से सिस्टम बनने के लिए दिया है और नेक्स्ट वाला अपडेट पूरा रेडी है उसमे. शायद आज सिस्टम मिल जाये तो हम अपडेट पोस्ट कर पाएंगे. बूत इतस नॉट सूरे. सब कुछ सिस्टम मिलने पर है. सो ी चैंट दो अन्य कमिटमेंट. थिस टाइम. ये रिप्लाई भी हम ऑफिस के सिस्टम से HI दे रहे है. लेकिन यहाँ मेरे पास नई अपडेट है नहीं. सो होप फॉर बटेर.
 
दोस्तों.

इस कहानी के 400 पेज पूरे हुए. इसका पूरा क्रेडिट सिर्फ आप सब रीडर्स को hi जाता है. जिन्होंने मेरी कहानी को इतना पसंद किया और हर अपडेट के बाद मेरी हिम्मत बड़ाई है. इसीलिए बदहि के पात्र आप सब है. दूसरी बात के इस बार अपडेट बहोत, बहोत, बहोत ज्यादा लेट हुआ है. इसका कारन मए बता hi चूका हु. मेरे कंप्यूटर सिस्टम का मोठेर्बोर्ड अब तक ठीक नहीं हुआ है इस वक़्त भी मए ऑफिस के पक से hi आप सब के सामने हु. और कुछ कोशिश के बाद मए उतनी स्टोरी तो अपने पक की हार्ड डिस्क से निकल hi पाया जितनी मए आगे बड़ा चूका था. इसीलिए अपडेट के लिए अब तैयार हो जाइये क्यों की लेटेस्ट अपडेट बस कुछ hi देर में आप सब के सामने होगा. आप सब लोगो ने साबरा से इंतजार किया उस के लिए धन्यवाद. उम्मीद है आप सबको ये ुपड़ते भी पसंद आएगा.
 
अपडेट - 138

खतरा – है तो दिखा दिया न मुझे यही तक रास्ता दिखाना था. अब तुम्हे जाना है आगे. या चाहो तो यही रुक जाओ जब तक तुम लोगो का ी चाहे ढिबरी को बुला के समय समय पेट ुम लोगो का खाना पन्ने दिलवाता रहुगा.

रूद्र – अबे सटकले यहाँ रुकने के लिए आये क्या हम लोग बता किस रस्ते जाना है?

अब आगे..............

खतरा – ये तीनो दरवाजे कही न कही तो खुलेंगे hi. पहला दरवाजा तुम्हे यहाँ से बहार ले जायेगा दूसरा तुम्हे आग की नदी में गिरा देगा तीसरा तुम्हे वही छोड़ देगा जहा से तुमने चलना शुरू किया था यानि उसी रेगिस्तान में . तुम्हारी मर्जी जिसमे चाहो जाओ.

रूद्र – मतलब हमें पहले में जाना चाहिए है न?

खतरा - होगा तो वही जो मैने तीनो दरवाजो का बताया लेकिन शायद मए भूल रहा हु. हो सकता है पहला तुम्हे रेगिस्तान में छोड़ दे दूसरा तुम्हे यहाँ से निकले और तीसरा तुम्हे आगे की नदी में गिराए. कुछ कह नहीं सकते. खतरा ने अपना सर खुजाते हुए सोचने वाले अंदाज़ में कहा. जैसे वो खुद कंफ्यूज हो रहा हो.

देव – ये तो उलझन वाली बात है सीधे स्सेधे बताओ न कहा जाना है?

खतरा – मए क्या जणू पर मेरी बात सच है झूठ नहीं. अब सोचना तुम लोगो को है?

और यहाँ राजकुमारी जी की शक्ति काम नहीं करेगी क्यों के है तो ये भी तिलिस्म लेकिन त्रिकाल का. और उन्होंने तिलिस्म नगरी की राजकुमारी को चुना है इस तिलिस्म को भेदने के लिए तो अपना तिलिस्म भी उनके hi स्टार का बनाया होगा न . ऐसे hi राजकुमारी इसे तोड़ दे तो क्या फायदा त्रिकाल की इतनी म्हणत का और हम सब के इतने लम्बे इंतजार का?

अब चारो के चेहरे पे झुंझलाहट साफ़ पता चल रही थी.

रूद्र – एक काम करते है तीसरे में चलते है मुझे लगता है इसने उल्टा hi बोलै होगा.

खतरा – अरे वह रूद्र तू hi समझदार है मेरा भी मन यही कहता है के तुम्हे पहले या तीसरे में जाना चाहिए.

अबे आते की गोनी तू अपना मुँह बंद रख सेल सड़ेले. वार्ना एक पंच में फोड़ डालूगा सेल. रूद्र ने खा जाने वाली नजरो से खतरा को हरते हुए कहा.

देव – तुमने दूसरे दरवाजे का नाम क्यों नहीं लिया खतरा?

खतरा – मेरी मर्जी मैने नहीं लिया

देव पूनम को देखने लगा और पूनम गौर से तीनो दरवाजो को देख रही थी.

पूनम - हमें पहले दरवाजे में जाना चाहिए.

देव – अरे ु सूरे?

पूनम – नॉट सूरे

रूद्र – तो फिर क्या फायदा?

नीलम - मए पूनम से सहमत हु. यहाँ तीन दरवाजे है लेकिन इसने अपनी बात में तीसरे और पहले दरवाजे का नाम लिया यानि दूर तो हमारे काम का है नहीं वो एबीएस उलझने के लिए hi है. यानि गलत है. अब बचा पहला और तीसरा तो साडी बातो का नतीजा हमें पहले की तरफ hi इशारा कर रहा है. और मेरी शक्तिया भी यही पॉजिटिव एनर्जी की विबस कैच कर रही है भले hi वो बहोत लाइट है लेकिन है. क्यों पूनम?

पूनम – एक्साक्ट्ली मए भी यही सब सोच के कह रही हु.

देव गौर से दरवाजो को देख कर, चलो हम पहले से hi जायेगे.

खतरा – मारो मुझे क्या तीसरे से जाते तो बच भी जाते क्या पता पहला दरवाजा तुम्हे आग की नदी में गिरा दे या बचा के यहाँ से निकल दे. पर तुम्हे जहा भी जाना है जाओ लेकिन वो उस बोर में से सोने की मोहरे तो लेते hi जाओ अगर बच गए तो खाने पीने के सामान लेने में सहायता होगी.

देव आगे बड़ा और बोरी को देखा जो सोने की मोहरो से भरी हुई थी.

खातिर – तुम लोग जितनी चाहे ले जा सकते हो मए नहीं रोकूंगा. चाहो तो पूरी बोरी hi ले जाओ इसमें मोहरे और हिरे जवाहरात भी है. या कहो तो तुम चारो की अलग अलग हिरे मोती सोने से भरी बोरिया भी दे सकता हु. सबका अपना पैसा अपनी आजादी होगी. एक दूसरे के मोहताज़ नहीं रहोगे तुम लोग जिंदगी भर. सिर्फ राज करोगे. बोलो लौ और बोरिया?

देव – हमें इनका कोई लालच नहीं खतरा. लेकिन तुमने जरुरत की बात की वो हमें समझ में आती है. इसीलिए मए इसमें से कुछ मोहरे ले लेता हु.

खतरा मए तो पूरी बोरी दे रहा हु बल्कि सबके लिए अलग अलग बोरी भर के दौलत दे रहा हु तुम कुछ मोहरे hi क्यों लेना चाहते हो?

देव – लालच इंसाने की मौत का कारन बन जाता है खतरा. और मेरा इरादा मरने का नहीं. लेकिन जीने के लिए भी इनका पास होना जरुरी है इसीलिए मैने कुछ मोहरे उठायी है.

देव ने मुठी भर मोहरे उठा के अपनी जेब में भर ली और फिर रूद्र को इशारा किया तो उसने भी अपनी पेण्ट की जेब में मुठी भर मोहरे भर ली

देव - चलो हमे पहले दरवाजे से hi जाना है. और फिर एक एक करके चारो उस पहले दरवाजे में चले गए. पीछे खतरा अकेला खड़ा मुस्करा के उन्हें देखता रह गया और अचानक खतरा के साथ साथ वो गुफा भी गायब हो गयी और अब वह वैसा hi जंगल था जिस में इन लोगो ने एंट्री की थी. दूर दूर तक गुफा जैसी कोई चीज नहीं थी अब. न hi कोई दीवार.

चारो ने दरवाजा पर किया तो खुद को एक नगरी में खड़े पाया. सामान्य सी नगरी थी. कुछ विशेष नहीं था. लोग अपने कामो में व्यस्त थे. कही कोई खाने पीने की होटल तो कही कोई दुकान जैसे आम गाँव या कस्बो में होते है ठीक उसी तरह की नगरी थी वो. ये चारो वह की कच्ची सड़क पे खड़े थे जिसके रस्ते चारो तरफ जा रहे थे.

रूद्र – भाई ये क्या अंदर तो कोई आवाज़ नहीं आ रही थी और यहाँ इस बाजार का इतना शोर है हमने तो बस एक दरवाजा hi पर किया है.

देव – रूद्र ये मायावी नगरी है. और तुमने एक दरवाजा पर नहीं किया बल्कि त्रिकाल के तिलिस्म का एक पड़ाव पार कर लिया है. यदि हमने गलत दरवाजा चुन लिया होता तो अब तक हमारी लाशो का भी पता नहीं चलता.

नीलम – कितनी अजीब नगरी है. देखने में सामान्य लेकिन यहाँ के लोग सब इतने व्यस्त नजर आ रहे है. जैसे किसी समारोह की तयारी में हो.

पूनम – कोई समारोह नहीं है यहाँ बल्कि ये इनकी सजा है जो ये भुगत रहे है सब के सब.

देव – सजा ? तुम कहना क्या चाहती हो?

पूनम – तिलिस्म नगरी में वही लगो बसाये जाते है जिन्हे सजा देनी हो. ये सरे त्रिकाल के मुजरिम है जिन्हे त्रिकाल सजा देना चाहे उसे इस नगरी में भेज देगा. और जब तक उसकी सजा चलेगी वो यही रहेगा. साथ hi इस नगरी के कानून का भी पालन करेगा और अगर उसने इस नगरी का कानून तोडा तो यहाँ का राजा उसे सजा देगा वो अलग.

रूद्र – क्या भयानक नाटक है यार?

तभी वह से एक भिखारी निकला और देवा के सामने हाथ फैला दिया.

भिखरी - कुछ दे दो बीटा त्रिकाल भला करेगा तुम्हे इस नगरी से आजाद करेगा. तुम्हे बख्शेगा.

रूद्र – अबे त्रिकाल तेरा सेज वाला है क्या जो तुझे भीख देने से वो हमें इस नगरी से सही सलामत निकलेगा.

भिखारी - कुछ दे दो बीटा

देव ने अपनी जेब में हाथ डाला और सोने की एक मोहर निकल के उसे दे दी. जिसे प् कर वो भिखारी नाचने लगा और चिल्ला के बोलने लगा

भिखारी – मए आज़ाद हो गया त्रिकाल मुझे आज़ाद करो मैने तुम्हारी नगरी में भीख ले के तुम्हारा नियम पूरा किया.

देव एंड पार्टी उसकी ये हरकत देख कर चौंक गए लेकिन तभी वह चार सैनिक आ गए.

सैनिक - क्या हुआ बे चिल्ला क्यों रहा है?

देव पूनम को देखते हुए – व्हाट थे फ़क इस थिस ?

पूनम परेशां होते हुए – फास गए हम खतरा के जाल में इन मोहरो ने मरवा दिया

रूद्र – Khateraaaaaaaaaaaaaaaaa………………
 
नैना जी, ी ऍम ग्रेटफुल तो यू तहत योर ओन ब्यूटीफुल वर्ड्स हैवे बूस्टेड माय स्पिरिट्स. देव एंड थे पार्टी अरे नाउ ट्रैप्ड अस सून अस थे स्टेप ईंटो थे सिटी, यू हैवे के तो क्नोव तहत, एंड नाउ िफ़ थे अरे ट्रैप्ड, थें सम डिफीकल्टी विल के तो थे फोरे, व्हिच इस आल्सो नेसेसरी फॉर थे एंटरटेनमेंट ऑफ़ आल ऑफ़ यू.

यू हैवे आल्सो टोल्ड थे ट्रुथ तहत तेरे इस ा लोट ऑफ़ थॉट फॉर सुच ा स्टोरी, व्हाई, ात व्हाट टाइम थे करैक्टर ऑफ़ थे स्टोरी विल थिंक व्हाट एंड हाउ विल हे आंसर इन हिज लैंग्वेज, वेयर थे लैंग्वेज ऑफ़ देव इस समूहत सीरियस, बूत थे लैंग्वेज ऑफ़ रूद्र इस समूहत डिफरेंट. इस ऑफ़. इन व्हिच तेरे इस आल्सो ा लिटिल जोके.

नाउ अबाउट थे साइज ऑफ़ थे अपडेट, यू अरे राइट, थे बिग्गेर थे अपडेट, थे रीडर विल फील तहत ी विश आईटी वास् बिग्गेर. . Let's सी व्हाट हप्पेंस इन थे फ्यूचर इन थे स्टोरी, सी यू इन थे नेक्स्ट रिव्यु. थैंक यू वन्स अगेन. प्लीज् स्टे तुनेड.
 
बिलाल भाई आपकी जितनी भी तारीफ की जाये काम है. आपके अब तक दिए हुए सरे hi रेविएवस के लिए आपका बहोत बहोत धन्यवाद. आपने हर उपडते को पढ़कर उसका रिव्यु दिया है ये आपकी हमारे लिए की हुई सिर्फ तारीफ hi नहीं बल्कि. आपकी खुद की भी अच्छे है. उम्मीद करते है की आप आगे भी स्टोरी में यु hi साथ बने रहेंगे. और आपको आगे की स्टोरी भी पसंद आएगी. अगला अपडेट जल्द hi मिलेगा भाई
 
भाई परामर्श के लिए बहोत बहोत धन्यवाद . वैसे इस कहानी के मैं किरदार देव और उसकी टीम hi है. और पहले जैसे सब इकट्ठे हुए फिर सब के पार्टनर्स सेट हुए अब धीरे धीरे कहानी अपने उद्देश्य की तरफ बढ़ रही है. तो मैं किरदार के साथ एक्सपेरिमेंट की कोई गुंजाईश hi नहीं है और शायद कोई जरुरत भी नहीं है तो वैसा कुछ नहीं करेंगे हम. ये किरदार अपने इसी फॉर्म में रहेंगे अंत तक. है बस इतना hi हो सकता है के कोई लड़ाई ये अपनी पावर्स के साथ लाडे कोई नार्मल इंसानो की तरह वो उन के दुश्मनो के हिसाब से होगा जो के पहले भी हुआ है (एना वाले केस में) पर नया एक्सपेरिमेंट . No चांस. और हमारा प्रयास भी यही रहेगा के हमारा कोई भी रीडर नाराज न हो.
 
अपडेट – 139

देव पूनम को देखते हुए – व्हाट थे फ़क इस थिस ?

पूनम परेशां होते हुए – फास गए हम खतरा के जाल में इन मोहरो ने मरवा दिया.

रूद्र – Khateraaaaaaaaaaaaaaaaa………………

अब आगे……….

भिखारी सैनिको से – अरे भाई मैने त्रिकाल की शर्त पूरी कर दी है उस हिसब से मए आज़ाद हो गया हु पूछो इनसे इन्होने मुझे भीख में ये सोने की मोहर दी है.

सैनिक – क्या ये सच कह रहा है? तुमने इसे भीख में मोहर दी है?

देव – है दी है तो उसमे ऐसी क्या आफत आ गयी?

सरे सैनिको ने इन चारो को घेर लिया और भले की नोक सामने कर दी.

सैनिक - तुम लोगो ने अपराध किया है चलो हमारे महाराज के पास.

रूद्र – अबे पगला गए हो क्या ? हमने इस भिखारी को मारा नहीं है बल्कि इसे भीख दे कर इसकी सहायता hi की है.

सैनिक – यही तुम्हारी गलती है, तुम्हारा जुर्म है. इस नगरी में भीख देना जुर्म है तुमने ये जुर्म किया है और हमारे सामने कबूल भी किया है. अब चलो हमारे महाराज के पास वार्ना जान से हाथ धो बैठोगे.

रूद्र आगे बढ़ने लगा के देव ने उसे इशारे से रोक दिया.

देव – ठीक है चलो महाराज के पास.

सैनिक - ठीक है सीधे चलते रहो. और सुन बे भिखारी तू भी चल साथ में. तेरे निकलने का रास्ता महराज के महल से hi मिलेगा.

रूद्र देव को देख कर धीरे से - ये सब उस सेल खतरा की चल थी इसीलिए उसने हमें मोहरे पकड़े थी. मिलने दो उसे कही छोड़ूगा नहीं उसे मए. उसकी माँ की……..

ये बात सुन के देव और पूनम की नजरे आपस में मिली और उन्होंने गर्दन हिला के एक साथ इशारा किया.

राजदरबार में वह के महराज बैठे हुए थे.

सैनिक - महाराज ये आपकी नगरी का एक भिखारी है. ये बाजार में भीख मांग रहा था. और अपनी सजा निभा रहा था. के तभी इन चार अजनबियों ने नगरी में गुफा के द्वार से प्रवेश किया और इस भिखारी के मांगने पर इसे एक सोने की मोहर भीख में दी है.

राजा – नवजवान क्या ये बात सच है?

देव – जी है ये सच है.

राजा – तब तो तुम सब सजा के हक़दार हो.

देव – लेकिन ये कैसा कानून है? किसी की मदद करना कोई जुर्म तो नहीं.

राजा – तुम सही कह रहे हो किसी की मदद करना जुर्म नहीं, लेकिन इसे भीख मांगने की सजा त्रिकाल ने दी थी जब तक वो न चाहे इसे भीख मांगते रहना था. वही इसे इस सजा से मुक्त कर सकते थे. और अगर कोई इसे भीख दे देता है तो फिर इसकी सजा उसे मिलेगी और ये आदमी त्रिकाल की सजा से आज़ाद हो जायेगा ऐसा hi कानून है. उस हिसाब से तुम अब सजा भुगतोगे. जो के हम देंगे.

देव – और अगर मए इसका विरोध करू तो?

राजा - तुम ऐसा कुछ नहीं कर सकते.

देव – लेकिन मेरी एक विनती है उसे पहले सुन ले आप.

राजा - कहो क्या कहना चाहते हो?

देव ने पूरे दरबार में नजर घुमाई वह नगरी के बहोत सरे लोग थे. जो दरबार की कार्यवाही देख रहे थे और इस वक़्त सबकी नजर देव पर थी – महाराज जैसे के आपने मुझे यहाँ का कानून बताया, क्या ये कानून यहाँ के सब लोग जानते है?

राजा - बिलकुल जानते है.

देव – क्या आपने ऐसा कोई निर्देश इस नगरी में आने वाले हर नए व्यक्ति तक पहुंचने की व्यवस्था की? कोई ऐसा सुचना पत्र नगरी के किसी प्रवेश द्वार पे टंगवाया, या किसी सैनिक को ऐसी कोई जिम्मेदारी दी, जिससे की नए आने वॉक व्यक्ति को आपके नगरी के कानूनों की जानकारी मिल सके और वो आपके कानून में रह कर इस नगरी में अपना समय बिता सके?

राजा – नहीं हम ऐसी व्यवस्था क्यों करे? ये त्रिकाल का काम है वो जितना जरुरी समझेगा करेगा उसे कोई ादेश्नाही दे सकता. न hi उसे सलाह देने का अधिकार किसी के पास है. वो सबसे ऊपर है.

देव – महाराज ये त्रिकाल का नहीं आपका काम है क्यों की त्रिकाल ने यहाँ की व्यवस्थाओ को बरक़रार रखने के लिए hi आपको यहाँ का राजा बनाया है. अगर त्रिकाल को hi सब संभालना होता तो इस तिलिस्म में किसी राजा की क्या आवश्यकता? और रही बात आपकी तो आप ऐसी व्यवस्था इसलिए करे क्यों की आप इस नगरी में रहने वालो को बता hi चुके है कानून. इसीलिए कोई इसे भीख नहीं देता. यदि आने वाले नए इंसान को भी आप सूचित करने की प्रथा शुरू कर चुके होते तो आज हम इसे भीख न देते. भला कोई जान बूझकर सजा क्यों पाना चाहेगा, आपने ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की है. इसीलिए हम अनजान hi थे और इंसानियत के नाते हमने इसकी मदद कर दी. और अजाने में किये कार्य का आप वही दंड नहीं दे सकते जो की जानबूझकर किये कार्य का दंड आपने बनाया है. इसीलिए अपराधी हम नहीं बल्कि आप है, आपकी व्यवस्था है. क्यों की सजा तो तब hi दे सकते है आप जब कोई जान बुझ कर त्रिकाल का कानून तोड़े. पर यहाँ तो जानकारी दी hi नहीं गयी. हम तो अभी अभी आये है. इसमें त्रुटि आपकी है आपकी व्यवस्था की है हमारी नहीं.

देव की बात सुन के सभा में हड़कंप मच गया, कानाफूसी चालू हो गयी कही न कही देव की बात से सब सहमत थे. की गलती राजा की है. क्यों की त्रिकाल ने राजा से कहा था के सब को बताना उसका फ़र्ज़ है. जानते हुए भी जो इस भिखारी को भीख देगा सजा उसे मिलेगी. और देव ने अनजाने hi भिखारी की मदद की है जान बुझ कर नहीं. उस हिसाब से तो गुनहगार खुद राजा hi बन रहा है. त्रिकाल की नजर में भी, और कानून के हिसाब से नगरी वालो की नजर में भी. अब अगर उसे खुद को बचाना है तो देव की बातो का कोई तोड़ निकलना पड़ेगा वो भी अभी इसी वक़्त वार्ना त्रिकाल से नहीं बच पायेगा .

राजा – हम पर ऊँगली उठाने से तुम्हरा जुर्म काम नहीं हो जायेगा.

देव – जुर्म है hi नहीं तो काम क्या होगा महाराज. है यदि आप हमारा जुर्म सिद्ध कर दे तो हम तैयरा है हर सजा के लिए.

राजा भी सोच में पद gaya.aur बहोत देर की ख़ामोशी के बाद

राजा – इन्हे अभी विश्राम घर में रखो लेकिन इन पे नजर रखना. हम इनका फैसला दो घंटे पश्चात करेंगे.

सैनिक देव के साथ बाकि तीनो को भी विश्राम घर ले गए. और वही उन्हें छोड़ दिया. जबकि भिखारी को अभी नगरी में hi जाने को बोलै और फिर से दरबार लगने पर हाजिर होने को कहा गया.

सैनिक - आप लोग यहाँ आराम कीजिये आपके भोजन का इंतजाम कर के हम अभी आते है.

फिर वो सैनिक भी चला गया लेकिन बहार कुछ सैनिक खड़े थे जिससे के देव एंड पार्टी भाग न पाए. ( हलाकि उन्हें कही भागना तो था hi नहीं).

पूनम – देव क्या सोच रहे हो?

देव – मए ये सोच रहा हु के राजा को तो मैने कंफ्यूज कर दिया. और अब वो बात करेगा त्रिकाल से या अपने बड़ो से. अब देखना ये है के वो क्या फैसला लेता है. क्यों की उसे हमें सजा भी देनी hi है वार्ना नगरी में उसकी साख ख़तम हो जाएगी. और मैने उसी नगरी वालो के सामने ये साबित कर दिया है की गलती हमारी है hi नहीं. उस हिसाब से सजा राजा को मिलनी चाहिए अब राजा खुद को तो सजा देगा नहीं क्यों के इसे राजा बनाया है त्रिकाल ने तो ये गुठी सुझाएगा भी वही. देखते है क्या होता है.

रूद्र – देव अगर इन्होने तेरे साथ कोई भी बदतमीजी की न तो तेरी कसम पूरी नगरी जला डालूगा फिर मत कहना मुझे.

देव ने हंस कर रूद्र को देखा - ऐसा कुछ नहीं होगा बे. और यहाँ ताक़त नहीं दिमाग की जुंग चल रही है. अगर हम पर अत्याचार hi करना होता तो राजा हमें यहाँ मेहमान बना कर नहीं रखता काल कोठरी में रखता समझा स्थिति की गहराई को?

रूद्र – वो सब तू देख ले मए तो इंतजार hi करुगा उन्होंने कोई नाटक किया तो उनकी तो मए फाड् डालूगा.

नीलम – कुछ तो सोच समझ के बोलै करो.

रूद्र – मए सोच कर hi बोलै हु. मए वही करुगा जो मैने कहा समझ लो तुम तीनो. रूद्र ने तीनो पे नजर फेरते हुए कहा. और तीनो रूद्र के गुस्से से भरे चेहरे को देख कर मुस्करा रहे थे.

उधर राजा भी परेशां था उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था के क्या किया जाये आखिर कर उसने वही किया जो इस स्थिति में करना बनता था उसने अपने कमरे के दरवाजे बंद किये और संपर्क बनाया त्रिकाल से. दूसरी तरफ से त्रिकाल की भरी आवाज आयी.

त्रिकाल - बोलो क्यों परेशां हो रहे हो ?

राजा – त्रिकाल की जय हो . ………

राजा - त्रिकाल मैने तुम्हे इसीलिए परेशां किया क्यों की एक बहोत बड़ी समस्या आ गयी है.

त्रिकाल - जनता हु और उस समस्या का नाम है देव …… है न?

राजा - तुम तो अंतर्यामी हो त्रिकाल

त्रिकाल - कोई नयी बात बताओ ये सब मए जनता हु. तुम बस ये कहो के देव ने क्या तुम पर कोई हमला किया है?

राजा – नहीं त्रिकाल उसने कोई हमला नहीं किया है.

त्रिकाल - तो फिर क्यों परेशां हो रहे हो?

राजा – वो खतरा के द्वारा उन्हें सोने की मोहरे मिली होगी गुफा से और फिर नगरी में प्रवेश करते hi……………………………..

राजा ने पूरी बात बताई त्रिकाल को

तर्रीकल – हहहहहहहहहहह बहोत अचे. देव...... बहोत अचे. आते hi तुमने मेरा फंदा मेरे hi गले में दाल दिया ?

राजा – मए कुछ समझा नहीं त्रिकाल और ये तुम हांसे क्यों?

त्रिकाल – तुझे समझ में आएगा भी नहीं ये तुम्हारे दिमाग से बहोत ऊपर की बात है. तुझ जैसे अगर देव को संभल ले तो फिर मुझे परेशानी hi क्या होती. देखो गलती तो उसी ने की है लेकिन उसने बड़ी hi चतुराई से अपना फंदा तुम्हारे गले में दाल दिया. वो भी सबके सामने तर्क के साथ. इस भीख वाली बात से परेशां उसे होना चाहिए और तुम्हे अपने महल में आराम करना चाहिए. लेकिन हो क्या रहा है ? वो तुम्हारे hi महल में आराम कर रहा है और परेशां तुम हो रहे हो यानि उसकी गलती का दंड तुम्हे मिलना चालू भी हो गया . और मए इतना मुर्ख नहीं के अपने इतने होशियार दुश्मन की दिल से तारीफ भी न करू.

राजा - बात तो तुम्हारी सही है त्रिकाल लेकिन अब किया क्या जाये. मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है.

त्रिकाल - ये तिलिस्म है और यहाँ की बात कभी सीढ़ी नहीं हो सकती. तो फिर तुम कोई सीधा सा हल क्यों ढूँढना चाहते हो. जैसे उसने तुम्हे उलझाया है वैसे hi तुम उसे उलझाओ बना लो कोई दिमागी तिलिस्म अपना. इतना दिमाग तो तुम्हरे पास भी है hi. उसने तुम्हे बातो से उलझाया तुम उसे उलझा दो अपनी बातो में और फिर कर दो सजा उसको और उसके साथियो को.

राजा - लेकिन कैसे त्रिकाल?

त्रिकाल - सुनो उसे क्या कहोगे………………………..

यहाँ देव, रूद्र, नीलम, पूनम सभी ख़ामोशी से बैठे थे लेकिन सोच सब के दिमाग में चल रही थी. थोड़ी देर के बाद खाना आ गया और उसके बाद इन्होने खाना खा के वही बिछे गड्डो पे लेटकर आराम किया जब फिर से दरबार लगा तो सैनिक इन्हे बुलाने आ गए. और ये चारो फिर दरबार में खड़े थे.
 
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