अपडेट.. 57
मैंने आस पास देखा कुछ लोग हममे देख रहे थे.... मैंने उसे अलग करने की कोशिश की लेकिन वह किसी कीमत पर मुझे छोड़ने को तैयार नहीं था...
स्थिति को देख मैंने भी अपने हथियार दाल दिए और किश मई उसका भरपूर साथ देने लगा... उसने मेरे हाथ पकड़ अपनी कमर पर रख दिए मई भी उसकी कमर सहलाते हुए किश में मगन यह की तभी...
बेतु.... तुम...
अब आगे...
जैसे मैंने और उसने यह आवाज सुनी हम दोनों झट्ट से अलग हो उस तरफ देखने लगे.... सामने वाले शख्स को देख हम दोनों hi शॉकेड हो गए...
अननोन... बेतु तुम यह सब कब से चला रहा है...
मई.. ( घबराते हुए ) डैड वो.. मई वो...
डैड... ( गुस्से मई ) क्या वो मई वो मई लगा रखा है.... साफ़ साफ़ बताओ तुम दोनों मई यह सब कब से चालू है...
अब मई क्या बोलता मुझे तोह कुछ समझ hi नहीं आ रहा था... मैंने उसकी तरफ देखा तोह वह शर्मा रही थी... बेंच बहुत आग लगी थी न तुझे... इससे तोह मई बाद मई देख लूंगा... बूत डैड को बताऊ... तभी वह बोली...
वह... ( शरमाते हुए ) वह पापा सब अचानक hi हो गया... इसमें इनकी कोई गलती नहीं है...
उसकी बात सुन मई और शॉकेड हो गया... अभी मई उसे घूर hi रहा था की वह मुझे देख हलकी सी मुस्कुरा दी... मई समझ गया यह सब इसकी चाल है..
डैड... तुम्हारी कोई गलती नहीं है तृषा बेटी.. यह इस नालायक ने किया है मुझे पता है... तुम इसका दोष मत लो मैंने खुद देखा किऐसे यह अपनी... तू घर चल आज... तेरी खबर लेता हूँ...
( जी हम यह और कोई नहीं तृषा hi थी lol... अपने हीरो क लवडे लग गए.. )
तृषा.. ( मस्सों सा चेरा बना क्र ) पापा आप इनको दांतो मत प्लीज...
डैड.. ( नरमी से ) नहीं बेटी मई खा दांत रहा हूँ... ( फिर मुझसे ) तू घर आ मुझे तुझसे बात करनी है..
मई.. ( रूखर स्वर मई ) ok डैड...
इतना सुन डैड ने एक बार तृषा क सर पर हाथ फेरा और मुझे एक नजर गुस्से वाली दाल क्र चले गए....
जैसे hi डैड गए मैंने तृषा की तरफ देखा लेकिन यह क्या... वह तोह गैब हो गई मई उससे इधर उधर ढूंढ़ने लगा की तभी मैंने एक झाडी क पीछे उसे देखा...
मई धीरे धीरे उस तरफ बढ़ने लगा.. तरसिह ने जैसे hi मुझे अपने करीब आते देखा तुरंत उठ क्र भागने लगी यह देख मई भी भागने लगा... हम दोनों एक दूसरे में इतने मशगूल हो गए की आस पास के लोग को नोटिस hi नहीं किया...
भागते भागते अचानक उसके सामने दिवार आ गई उसने एक नजर पलट क्र देखा मुझे देख वह दूसरी दिशा मई भागने लगी लेकिन मई तुरंत उसके सामने खड़ा हो गया.... और आगे बढ़ उसे पकड़ लिया.. वह मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी की तभी मैंने उसका एक हाथ मरोड़ क्र पीछे क्र दिया...
तृषा... ( दर्द मई ) ाऊयचह छोड़ दो मुझे...
मई.. ऐसे कैसे छोड़ दूँ.. अभी तोह पापा क सामने बहुत बोल रही थी...
तृषा... आउउउ दर्द हो रहा है छोड़ दो न...
मई... अभी खा दर्द हुआ है... दर्द तोह अभी होगा...
वह कुछ बोलती उससे पहले मैंने उसके होठ अपने होंठ मई बंद क्र दिए और स्मूच करने लगा.. ढर्रे धीरे वह भी मेरा साथ देने लगी तभी मैंने उसके ऊपरी होठ को अपने दांतो मई ले काट लिया...
उसके मुह्ह से हलकी सी आठ निकल गई लेकिन मैंने उसे नहीं छोड़ा यही हाल मैंने निचे वाले होठ के साथ भी किया... उसके होंठ से खून निकलने लगा... उसे हल्का सा दर्द होने लगा और उसकी आँख से आंसूं निकल आये...
उसके आंसूं देख मेरे दिल मई दर्द उठ गया और मस्ती छोड़ उसके होंठ चूसने लगा धीरे धीरे दोनों होठ चूस क्र जैसे hi मैंने उसकी तरफ देखा मेरा दिल खिल उठा...
उसने ऐसे नजर से मुझे द्ख हैयय मेरा दिल तोह वही घायल हो गया.. और मैंने उसे छोड़ अपने दिल पर हाथ रख लिया... और वही पीछे की तरफ गिर पड़ा.. मुझे ऐसा करते देख वह खिल खिला क्र हस्स पड़ी... और मेरी बाहों में आ गई.. मैंने भी इसे सीने से लगा लिया... कुछ देर बाद अलग क्र..
मई.. ( उसकी बालों की लत को पीछे करते हुए ) क्यों किया तुमने ऐसा...
तृषा.. तोह क्या करती मई आप hi बताओ... कब तक हम छुपाते सब एक न एक दिन तोह पता चल hi जाना था तोह आज क्यों नहीं... पता ह कल मुझे कितना बुरा लगा...
मई.. मई समझता हूँ त्रिषु... चल छोड़ो जो होगा देखा जायेगा...
अभी मई कुछ और बात करता की तभी माँ का कॉल आ गया और मुझे तुरंत घर बुलाया गया... मैंने भी खुद को आने वाले तूफ़ान क लिए तैयार किया और तृषा को bye बोल घर निकल लिया...
वही दूसरी तरफ...
डैड जैसे hi घर पहुंचे उस वक़्त माँ नास्ता बना रही थी... डैड ने माँ को 2 मं बात करने का बोल रूम में बुलाया...
माँ.. क्या है मेरा बीटा आता hi होगा और अभी तक नास्ता रेडी नहीं है... और आप इतनी जल्दी कैसे...
डैड.. उसी क बारे मई बात करनी है भगवान्.. और एक दिन वह नालायक नास्ता नहीं करेगा तोह कोई केहर नहीं टूट जायेगा..
माँ.. ( गुस्से मई ) ाचा ऐसा है तोह ठीक है आज आपका ब्रेकफास्ट नहीं मिलेगा..
डैड.. ( नरमी से ) अरे मई तोह ंजक क्र रहा था...
माँ.. लेकिन मई नहीं.. अब जल्दी बताओ क्या हुआ मुझे और भी काम है..
डैड... वह मैंने अभी उसे पार्क मई देखा...
माँ.. आपने यह बात बताने क लिए मुझे यह बुलाया है.. ठीक है आपको लंच भी नहीं मिलेगा...
डैड.. मेरी पूरी बात तोह सुनो.. मैंने उसे पार्क में देखा बहु क साथ..
माँ... अब तोह आपको डिनर भी नहीं मिलेगा... ककी अभी मई खुद सोनू को उठा क्र आई हूँ...
डैड... वह नहीं तुम्हारी दूसरी बहु..
माँ... ( शॉकेड ) क्या...
डैड... हाँ...
माँ.. लेकिन आप इतने यकीन से कैसे कह सकते है की वह बहु hi है...
डैड.. कुकी वह दोनों.. फिर डैड ने जोह भी पार्क में देखा वह सब माँ को बता दिया...
माँ... आने दो बेतु को उसको तोह मई देखती हूँ.. क्या सोनू को इस बारे मई पता है...
डैड... यह तोह वह hi बता सकता है...
माँ.. आप रहने दो मई hi उससे बात करती हूँ...
उसके बाद माँ ने मुझे कॉल क्र घर बुला लिया... मई भी धड़कते दिल के साथ घर एंटर हुआ... मैंने हाल में देखा मुझे कोई नहीं दिखा मई धीरे धीरे ऊपर जाने लगा की तभी...
बेतु इधर आ...
तो बे कॉन्टिनोएड...