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Update 052 -
एक ही दिन में रंजीत ने देखते ही देखते मेरे 5 दुशमनों को जान से मार दिया था। जब रंजीत को वहाँ से निकले काफी समय हो गया, तो मैं भी खण्डहर से वाहर निकल गई और बापिस भोपाल आकर अपने होटल में आगे की प्लानिंग करने लगी। जब मैं होटल पहूँची तो रात के 8 बज चुके थे। अभी मैं आगे का प्लान बना ही रही थी कि तभी रंजीत का मेरे पास फोन आया। जैसे ही मैंने फोन रिसीव किया तो वो बोला
रंजीत- 5 आदमियों का काम तमाम हो गया है। बाकी लोगों का मैं कल कर दूँगा। अब आगे क्या करना है।
रंजीत की बात सुनकर मैंने कहा
निशा- पहले प्यादों को ठिकाने लगाओ। फिर बाकी लोगों के लिए मैंने एक अलग प्लान बनाया है। अगर तुम कल ही अपने बचे हुए साथियों का काम तमाम कर देते हो, तो फिर परसों से तुम्हारे बॉस और उसके पटनर्स का नम्बर भी लगना शुरू हो जायेगा।
रंजीत- ठीक है
इतना बोलकर रंजीत ने फोन कट कर दिया। जिसके बाद मैंने भी अपने हाथ में पकडा छोटा सा कीपैड फोन साईड टेबिल पपर रख दिया। असल में जब मैं बिजिनैसमैन धनराज पर नजर रख रही थी, तो उसी दौरान धनराज के एक पर्सनल बॉडीगार्ड का मोबाइल फोन मैंने गायब कर दिया था और उसी मोबाईल फोन से मैंने रंजीत को कॉल करके खण्डहर में बुलाया था। जिस कारण अभी अभी उसी मोबाईल पर रंजीत ने मुझे कॉल किया था। कुछ देर तक अपने आगे के प्लान के बारे में सोचने के बाद मैंने धनराज को उसी फोन से कॉल कर दिया। जैस ही फोन रिसीव हुआ तो मैंने कहा
निशा- हैलो मिस्टर धनराज… कैसे हैं आप….।
अपने पर्सनल बॉडीगार्ड के मोबाईल से किसी लडकी की आवाज सुनकर धनराज बुरी तरह से हैरान होते हुए बोला
धनराज- कौन बात कर रहा है… और मेरे बॉडीगार्ड का मोबाईल आखिर तुम्हारे पास कैसे आया….
निशा- यह फोन तो मैंने तुम्हारे बाडीगार्ड की जेव से आज दोपहर में ही गायब कर दिया था और उसे कुछ पता भी नहीं चला। रही बात कि मैं कौन हूँ तो यह तो तुम्हें तब पता चलेगा। जब हमारी मुलाकात होगी
धनराज- मुझे तुमसे मिलने का कोई शौक नहीं है
निशा- तो फिर ठीक है…. तुम्हारी मर्जी… बैसे तो मैं तुम्हारे ही फायदे की बात करना चाहती थी।
मेरी बात सुनकर धनराज थोडा नॉर्मल होते हुए बोला
धनराज- कैसा फायदा….
निशा- मुझे तुम लोगों के उस सोने के बारे में बात करनी थी, जो गनपत और जफर के पास रखा हुआ है
धनराज- यह क्या बकवास कर रही हो तुम…..... और इस सबके बारे में तुम आखिर कैसे जानती हो
निशा- मैंने आपसे कुछ देर पहले ही तो कहा है कि मिलकर बताऊँगी। बैसे जानती तो मैं बहुत कुछ हूँ, जैसे गनपत और जफऱ सारा माल लेकर कहाँ गायब होने बाले हैं, माल कहाँ छिपा हुआ था और अब कहाँ है, गनपत और जफऱ मिलकर तुम लोगों के खिलाफ क्या प्लान बना रहे हैं। मैं इन सबके बारे में जानती हूँ।
धनराज- आखिर तुम हो कौन
निशा- फिर गलत सबाल.... क्योंकि तुम जो पूछ रहे हो उसका जबाब तुम पहले से ही जानते हो
धनराज- अच्छा ठीक है….. बताओ कहाँ मिलना है।
निशा- एक घंटे के अंदर होटल रॉयल के कैफे एरिया में आ जाओ और हाँ अकेले आना अपने बॉडीगार्ड बगैरह को अपने साथ लाने की या फिर अपने पाटनर्स को इस बारे में कुछ भी बताने की गलती बिल्कुल भी मत करना। क्योंकि तुम्हारी हर हरकत पर मेरी नजर है। तुम्हारी एक छोटी सी गलती तुम्हारा ही नुकशान करेगी। बैसे भी तुम्हारे और मंत्री जी के खिलाफ तुम्हारे पाटनर्स जो प्लान बना रहे हैं, उसके बारे में तुम कुछ भी नहीं जानते हो।
इतना बोलकर मैंने फोन कट कर दिया और तुरंत अपनी कार से धनराज के घर के बाहर जाकर, उसपर नजर रखने लगी।
करीब 10-15 मिनट इंतजार करने के बाद धनराज अपनी कार से बैठकर होटल रॉयल जाने के लिए निकला। उसकी कार ठीक मेरे पास से होकर ही गुजरी थी, जिसमें धनराज अकेला बैठा हुआ था। इसलिए मैंने भी अपनी कार धनराज के पीछे लगा दी। कुछ ही देर बाद मैं होटल रॉयल के कैफे एरिया में अपने चेहरे पर मास्क लगाकर एक कर्नर बाली टेबिल पर बैठी हुई थी। मुझसे थोडी ही दूर धनराज बैठा मेरा इंतजार कर रहा था। असल में मैं यह कंफर्म करना चाहती थी कि धनराज ने अपने किसी आदमी को तो वहाँ पर नहीं बुलाया है। कुछ देर तक जब धनराज ने किसी को भी कॉल नहीं किया और ना ही वहाँ पर कोई आया, तो मैं उठकर धनराज के सामने जाकर बैठ गई और उससे बोली
निशा- सॉरी मिस्टर धनराज आपको इंतजार करना पडा, मैं बस कंफर्म करना चाहती थी कि आपने किसी और को तो यहां इनबाईट नहीं किया है
मेरी बात पर धनराज ने कोई रिऐक्शन नहीं दिया और सीरियस होकर सबाल किया
धनराज- अब बताओ कौन हो तुम
धनराज की बात सुनकर मैंने अपने चेहरे पर लगा मास्क हटा दिया। जैसे ही धनराज ने मेरा चेहरा देखा तो वो बुरी तरह से हैरान रह गया। इससे पहले वो कुछ कहता मैं बोली
निशा- मैं वहीं हूँ जिसे तुम लोग खण्डहर में मरा हुआ समझ कर छोड गए थे।
मुझे सही सलामत देखकर धनराज की हालत खराब हो गई थी। इसलिए वो डरते हुए बोला
धनराज- त तुम…. यह नहीं हो सकता। तुम आखिर जिंदा कैसे हो सकती हो। मैंने तुम्हें अपनी आंखों से मरते हुए देखा था।
धनराज की ऐसी हालत देखकर मैं मुस्कुराते हुए बोली
निशा- मुझसे डरने की जरूरत नहीं है मिस्टर धनराज। मैं कोई भूत नहीं हूँ और रही बात जिंदा बचने की, तो उस बात को अभी रहने दो, क्योंकि तुम्हें समझ नहीं आऐगी। बस इतना समझ लो कि मैं एकदम सही सलामत और जिंदा तुम्हारे सामने हूँ।
धनराज- तुम आखिर चाहती क्या हो मुझसे…. और मुझे यहाँ क्यों बुलाया है।
निशा- मुझे मेरा हिस्सा चाहिए साथ ही साथ गनपत और जफऱ से अपना बदला भी
मेरी बात सुनकर धनराज हैरान होते हुए बोला
धनराज- केवल गनपत और जफऱ से बदला। लेकिन तुम्हारे साथ गलत तो हम सबने किया था…. और यह हिस्से की बात कहाँ से आ गई।
धनराज के सबाल पर मैं थोडा सीरियस होते हुए बोली
निशा- अब ध्यान से मेरी बात सुनो। असल में उस दिन खण्डहर में जो कुछ भी हुआ था, बो बस एक नाटक था। असल में गनपत और जफर सारा माल अकेले हजम करके विदेश भागना चाहते थे। लेकिन तुम लोगों के चलते यह पॉसीबल नहीं था। ऊपर से गनपत जेल में भी था। जिस कारण उसे जेल से भागने का एक बहाना चाहिए था। इसलिए उसने मुझे अपने प्लान में सामिल किया। असल में अपने बेटे गगन को गनपत ने ही मरवाया है। अपने बेटे की मौत के बहाने वो जेल से भाग गया। उसके बाद माल गायब होने और अपने बेटे की मौत का बदला लेने के बहाने उसने तुम सबको उस खण्डर में बुलाया था।
धनराज- पर क्यों…
निशा- असल में गनपत और जफर ने उस खण्डहर में पहले से ही सीक्रेट कैमरे छिपा रखे थे। उसके बाद गनपत ने मुझे किडनैप करने और मुझे टार्चर करने का नाटक किया। असल में मैं पहले से ही गनपत और जफर के प्लान के बारे में जानती थी। उस वक्त खण्डहर में जो कुछ भी हो रहा था, वो बस एक नाटक था। ताकि गनपत और जफर तुम लोगोें का मुझे टार्चर करके रेप करने और मुझे जान से मारने की कोशिश करने का बीडियो बना सकें और उसकी हेल्प से वो तुम लोगों को ब्लैकमेल कर सकें। मुझे मारने की कोशिश तक तो सब प्लान के हिसाब से हुआ था। पर आखिर में जब उनके पास तुम लोगों के खिलाफ पर्याप्त सबूत इकट्ठा हो गए तो उन दोनों ने मुझे अपने रास्ते से हटाने के लिए सच में मेरी जान लेने की कोशिश की थी।
धनराज- पर तुम आखिर उन दोनों के प्लान में सामिल ही क्योें हुई थी
निशा- असल में वो दोनों मुझे इस काम के पूरे 50 करोड रुपये देने बाले थे।
मेरी बात सुनकर धनराज हैरानी से आँखें फाडकर मुझे देखते हुए बोला
धनराज- 50 करोड रुपये…
निशा- अरे सेठ तुम लोगोें का माल भी तो अरवों रूपयों का है ना। अगर उसमें से 50 करोड खर्च भी हो जायें तो इससे क्या फर्क पडने बाला था। बैसे भी इतनी ज्यादा मार खाने के बाद, 25-30 आदमियों से अपना रेप करवाना और मरने की एक्टिंग करना भी तो बहुत रिस्की काम था। मेरी जगह अगर कोई दूसरी लडकी होती तो वो रेप होने के दौरान ही मर जाती
मेरी बात सुनकर धनराज उस घटना को याद करते हुए बोला
धनराज- हाँ… यह बात तो है
निशा- उस दिन खण्डहर में सब कुछ गनपत और जफर के प्लान के हिसाब से ही हुआ था। लेकिन काम पूरा होने के बाद उन दोनों के मन में लालच आ गया। वो दोनों मेरे हिस्से के पैसे नहीं देना चाहते थे, इसलिए गनपत ने जान बूझकर मुझे जान से मारने की कोशिश की। लेकिन तुम लोगों के जाने के बाद मेरे कुछ बफादार आदमियों ने मेरी जान बचा ली। जब तक मैं ठीक हुई तब तक जफऱ और गनपत अंडरग्राऊंड हो चुके थे। फिर मैंने अपने सोर्स से जानकारी इकट्ठी की तो पता चला की वो दोनों इस वक्त दिल्ली में मंत्री जी के बंगले पर छिपे हुए हैं। मैं सही कह रही हूँ ना
मेेरी बात सुनकर धनराज एक बार फिर हैरान होते हुए बोला
धनराज- हाँ
निशा- आज ही मुझे अपने सोर्स से पता चला है कि गनपत और जफर ने अपने खास आदमियों को जान से मारना शुरू कर दिया है। ताकि उसके खिलाफ कोई सबूत ना बचे।
मेरी बात सुनकर धनराज बुरी तरह से बौखलाता हुआ बोला
धनराज- नहीं नहीं… यह नहीं हो सकता। तुम हम लोगों से अपना बदला लेने के लिए, हमारे बीच दरार डालना चाहती हो।
धनराज की बात सुनकर मैंने मुस्कुराते हुए अपने मोबाईल में खण्डहर में बनाया गया बी़डियो उसे दिखाते हुए कहा
निशा- तो फिर यह क्या है। मिस्टर धनराज
उस बीडियो में रंजीत अपने ही साथियों को छिपकर गोली मार रहा था और उनकी लाशों को ठिकाने लगा रहा था। उस बीडियो को देखते ही धनराज तुरंत रंजीत और मरने बाले लोगों को पहचान गया था। जिस कारण हैरानी और डर की बजह से उसकी हालत खराब हो गई थी। यह देखकर मैं उसे और भी ज्यादा डराते हुए बोली
निशा- फिलहाल तुम लोग उन दोनोें का कुछ भी नहीं बिगाड सकते हो और ना ही उनसे बच सकते हो। सारे प्यादों के मरते ही तुम लोगों का भी नम्बर लगने बाला है। हो सकता है कि कल सुबह सुबह ही तुम्हें अपने किसी साथी के मरने की खबर मिल जाये। अगर किसी तरह तुम लोग गनपत और जफर से बच भी गये, तो भी तुम लोग अपना हिस्सा तो भूल ही जाओ। क्योंकि अपना हिस्सा मांगने पर या तो तुम्हारी बीडियो बायरल होगी या फिर तुम्हें मौत मिलेगी
मेरी बात सुनकर धनराज बूरी तरह से डर गया था और किसी हिस्टीरिया के मरीज की तरह चीखते हुए बोला
धनराज- नहीं नहीं… वो दोनों हमें धोखा नहीं दे सकते हैं। मुझे तुम्हारी बातों पर बिल्कुल भी यकीन नहीं है।
निशा- कोई बात नहीं…. तो फिर तुम यहाँ से जा सकते हो। लेकिन आगे तुम लोगों के साथ जो कुछ भी होगा, उसके जिम्मेदार तुम खुद ही रहोगे।
धनराज- मतलब….. तुम मुझे धमका रही हो
निशा- अरे नहीं मिस्टर धनराज मैं तुम्हारे साथ कुछ भी नहीं करने बाली। अगर करना चाहती तो अब तक तुम कब के मर चुके होते। तुम्हारे साथ तो जो कुछ भी करेंगे वो गनपत और जफर करेंगे। रही बात मेरे हिस्से और मेरे बदले की, तो उसकी मुझे कोई चिंता नहीं है। हाँ लेकिन तुम्हारी हेल्प से मेरा काम थोडा आसान हो जाता
धनराज- मतलब
निशा- मतलब यह मिस्टर धनरज कि मुझे गनपत और जफर की उस सीक्रेट लोकेशन के बारे में पता था, जहाँ उस दोनों ने सारा माल छिपाकर रखा हुआ था। असल में गनपत के बेटे गगन ने मुझे उस लोकेशन के बारे में पहले ही बता दिया था। इसलिए ठीक होने के बाद मैंने सबसे पहले तुम लोगों का माल गायब किया। अब वो अरबों का खजाना मेरे पास है। अगर मैं उसमें से दो तीन सोने के बिस्किट किसी भी बडे गुंडे के सामने डालूँगी, तो वो कुत्ते की तरह दुम हिलाता हुआ मेरी हर बात मानेगा। यानि मैं जब चाहूँ तब गनपत और जफऱ को मरवा सकती हूँ।
धनराज- अगर ऐसा है तो फिर तुम मेरे पास क्यों आई
निशा- असल में वो सारा माल गोल्ड और डायमंड में है। जिसे मैं उतनी आसानी से मार्केट में नहीं बेच सकती। जितनी आसानी से तुम बेच सकते हो। बस इसीलिए मैं चाहती थी कि मेरे और गनपत के बीच जो तय हुआ था, उसके अनुसार तुम मुझे मेरे 50 करोड रुपये और मुझे जान से मारने की कोशिश के बदलेे अलग से 20 करोड रूपये यानि कुल 70 करोड रूपये कैश दे दो साथ ही साथ मंत्री जी ने अभी अभी इंदौर में जो अपना शॉपिंग मॉल बनवाया है, वो भी मुझे दे दो, जिसके बदले में मैं तुम्हें वो सारा माल दे दूँगी। इसमें हम दोनों का ही फायदा है मिस्टर धनराज…
मेरी बात सुनकर धनराज गुस्से से विफरते हुए बोला
धनराज- बेबकूफ लडकी… उस शॉपिंग माल की कीमत पूरे 130 करोड रूपये है।
निशा- मैं यह अच्छी तरह से जानती हूँ। इसी लिए तो वो शॉपिंग मॉल तुमसे माँग रही हूँ। इस तरह से मुझे 70 करोड रूपये कैस और 130 करोड रूपये का शॉपिंग मॉल यानि पूरे 200 करोड रूपये मिल जाऐँगे। जो उस खजाने के सामने कुुछ भी नहीं है।
इतना बोलकर मैंने अपने मोबाईल में उस सोने की खींची गई एक फोटो धनराज को दिखाई। जो मैंने अपने इंदौर बाले सीक्रेट रूम में रखने के बाद खींची थी।
कहानी जारी है.....
एक ही दिन में रंजीत ने देखते ही देखते मेरे 5 दुशमनों को जान से मार दिया था। जब रंजीत को वहाँ से निकले काफी समय हो गया, तो मैं भी खण्डहर से वाहर निकल गई और बापिस भोपाल आकर अपने होटल में आगे की प्लानिंग करने लगी। जब मैं होटल पहूँची तो रात के 8 बज चुके थे। अभी मैं आगे का प्लान बना ही रही थी कि तभी रंजीत का मेरे पास फोन आया। जैसे ही मैंने फोन रिसीव किया तो वो बोला
रंजीत- 5 आदमियों का काम तमाम हो गया है। बाकी लोगों का मैं कल कर दूँगा। अब आगे क्या करना है।
रंजीत की बात सुनकर मैंने कहा
निशा- पहले प्यादों को ठिकाने लगाओ। फिर बाकी लोगों के लिए मैंने एक अलग प्लान बनाया है। अगर तुम कल ही अपने बचे हुए साथियों का काम तमाम कर देते हो, तो फिर परसों से तुम्हारे बॉस और उसके पटनर्स का नम्बर भी लगना शुरू हो जायेगा।
रंजीत- ठीक है
इतना बोलकर रंजीत ने फोन कट कर दिया। जिसके बाद मैंने भी अपने हाथ में पकडा छोटा सा कीपैड फोन साईड टेबिल पपर रख दिया। असल में जब मैं बिजिनैसमैन धनराज पर नजर रख रही थी, तो उसी दौरान धनराज के एक पर्सनल बॉडीगार्ड का मोबाइल फोन मैंने गायब कर दिया था और उसी मोबाईल फोन से मैंने रंजीत को कॉल करके खण्डहर में बुलाया था। जिस कारण अभी अभी उसी मोबाईल पर रंजीत ने मुझे कॉल किया था। कुछ देर तक अपने आगे के प्लान के बारे में सोचने के बाद मैंने धनराज को उसी फोन से कॉल कर दिया। जैस ही फोन रिसीव हुआ तो मैंने कहा
निशा- हैलो मिस्टर धनराज… कैसे हैं आप….।
अपने पर्सनल बॉडीगार्ड के मोबाईल से किसी लडकी की आवाज सुनकर धनराज बुरी तरह से हैरान होते हुए बोला
धनराज- कौन बात कर रहा है… और मेरे बॉडीगार्ड का मोबाईल आखिर तुम्हारे पास कैसे आया….
निशा- यह फोन तो मैंने तुम्हारे बाडीगार्ड की जेव से आज दोपहर में ही गायब कर दिया था और उसे कुछ पता भी नहीं चला। रही बात कि मैं कौन हूँ तो यह तो तुम्हें तब पता चलेगा। जब हमारी मुलाकात होगी
धनराज- मुझे तुमसे मिलने का कोई शौक नहीं है
निशा- तो फिर ठीक है…. तुम्हारी मर्जी… बैसे तो मैं तुम्हारे ही फायदे की बात करना चाहती थी।
मेरी बात सुनकर धनराज थोडा नॉर्मल होते हुए बोला
धनराज- कैसा फायदा….
निशा- मुझे तुम लोगों के उस सोने के बारे में बात करनी थी, जो गनपत और जफर के पास रखा हुआ है
धनराज- यह क्या बकवास कर रही हो तुम…..... और इस सबके बारे में तुम आखिर कैसे जानती हो
निशा- मैंने आपसे कुछ देर पहले ही तो कहा है कि मिलकर बताऊँगी। बैसे जानती तो मैं बहुत कुछ हूँ, जैसे गनपत और जफऱ सारा माल लेकर कहाँ गायब होने बाले हैं, माल कहाँ छिपा हुआ था और अब कहाँ है, गनपत और जफऱ मिलकर तुम लोगों के खिलाफ क्या प्लान बना रहे हैं। मैं इन सबके बारे में जानती हूँ।
धनराज- आखिर तुम हो कौन
निशा- फिर गलत सबाल.... क्योंकि तुम जो पूछ रहे हो उसका जबाब तुम पहले से ही जानते हो
धनराज- अच्छा ठीक है….. बताओ कहाँ मिलना है।
निशा- एक घंटे के अंदर होटल रॉयल के कैफे एरिया में आ जाओ और हाँ अकेले आना अपने बॉडीगार्ड बगैरह को अपने साथ लाने की या फिर अपने पाटनर्स को इस बारे में कुछ भी बताने की गलती बिल्कुल भी मत करना। क्योंकि तुम्हारी हर हरकत पर मेरी नजर है। तुम्हारी एक छोटी सी गलती तुम्हारा ही नुकशान करेगी। बैसे भी तुम्हारे और मंत्री जी के खिलाफ तुम्हारे पाटनर्स जो प्लान बना रहे हैं, उसके बारे में तुम कुछ भी नहीं जानते हो।
इतना बोलकर मैंने फोन कट कर दिया और तुरंत अपनी कार से धनराज के घर के बाहर जाकर, उसपर नजर रखने लगी।
करीब 10-15 मिनट इंतजार करने के बाद धनराज अपनी कार से बैठकर होटल रॉयल जाने के लिए निकला। उसकी कार ठीक मेरे पास से होकर ही गुजरी थी, जिसमें धनराज अकेला बैठा हुआ था। इसलिए मैंने भी अपनी कार धनराज के पीछे लगा दी। कुछ ही देर बाद मैं होटल रॉयल के कैफे एरिया में अपने चेहरे पर मास्क लगाकर एक कर्नर बाली टेबिल पर बैठी हुई थी। मुझसे थोडी ही दूर धनराज बैठा मेरा इंतजार कर रहा था। असल में मैं यह कंफर्म करना चाहती थी कि धनराज ने अपने किसी आदमी को तो वहाँ पर नहीं बुलाया है। कुछ देर तक जब धनराज ने किसी को भी कॉल नहीं किया और ना ही वहाँ पर कोई आया, तो मैं उठकर धनराज के सामने जाकर बैठ गई और उससे बोली
निशा- सॉरी मिस्टर धनराज आपको इंतजार करना पडा, मैं बस कंफर्म करना चाहती थी कि आपने किसी और को तो यहां इनबाईट नहीं किया है
मेरी बात पर धनराज ने कोई रिऐक्शन नहीं दिया और सीरियस होकर सबाल किया
धनराज- अब बताओ कौन हो तुम
धनराज की बात सुनकर मैंने अपने चेहरे पर लगा मास्क हटा दिया। जैसे ही धनराज ने मेरा चेहरा देखा तो वो बुरी तरह से हैरान रह गया। इससे पहले वो कुछ कहता मैं बोली
निशा- मैं वहीं हूँ जिसे तुम लोग खण्डहर में मरा हुआ समझ कर छोड गए थे।
मुझे सही सलामत देखकर धनराज की हालत खराब हो गई थी। इसलिए वो डरते हुए बोला
धनराज- त तुम…. यह नहीं हो सकता। तुम आखिर जिंदा कैसे हो सकती हो। मैंने तुम्हें अपनी आंखों से मरते हुए देखा था।
धनराज की ऐसी हालत देखकर मैं मुस्कुराते हुए बोली
निशा- मुझसे डरने की जरूरत नहीं है मिस्टर धनराज। मैं कोई भूत नहीं हूँ और रही बात जिंदा बचने की, तो उस बात को अभी रहने दो, क्योंकि तुम्हें समझ नहीं आऐगी। बस इतना समझ लो कि मैं एकदम सही सलामत और जिंदा तुम्हारे सामने हूँ।
धनराज- तुम आखिर चाहती क्या हो मुझसे…. और मुझे यहाँ क्यों बुलाया है।
निशा- मुझे मेरा हिस्सा चाहिए साथ ही साथ गनपत और जफऱ से अपना बदला भी
मेरी बात सुनकर धनराज हैरान होते हुए बोला
धनराज- केवल गनपत और जफऱ से बदला। लेकिन तुम्हारे साथ गलत तो हम सबने किया था…. और यह हिस्से की बात कहाँ से आ गई।
धनराज के सबाल पर मैं थोडा सीरियस होते हुए बोली
निशा- अब ध्यान से मेरी बात सुनो। असल में उस दिन खण्डहर में जो कुछ भी हुआ था, बो बस एक नाटक था। असल में गनपत और जफर सारा माल अकेले हजम करके विदेश भागना चाहते थे। लेकिन तुम लोगों के चलते यह पॉसीबल नहीं था। ऊपर से गनपत जेल में भी था। जिस कारण उसे जेल से भागने का एक बहाना चाहिए था। इसलिए उसने मुझे अपने प्लान में सामिल किया। असल में अपने बेटे गगन को गनपत ने ही मरवाया है। अपने बेटे की मौत के बहाने वो जेल से भाग गया। उसके बाद माल गायब होने और अपने बेटे की मौत का बदला लेने के बहाने उसने तुम सबको उस खण्डर में बुलाया था।
धनराज- पर क्यों…
निशा- असल में गनपत और जफर ने उस खण्डहर में पहले से ही सीक्रेट कैमरे छिपा रखे थे। उसके बाद गनपत ने मुझे किडनैप करने और मुझे टार्चर करने का नाटक किया। असल में मैं पहले से ही गनपत और जफर के प्लान के बारे में जानती थी। उस वक्त खण्डहर में जो कुछ भी हो रहा था, वो बस एक नाटक था। ताकि गनपत और जफर तुम लोगोें का मुझे टार्चर करके रेप करने और मुझे जान से मारने की कोशिश करने का बीडियो बना सकें और उसकी हेल्प से वो तुम लोगों को ब्लैकमेल कर सकें। मुझे मारने की कोशिश तक तो सब प्लान के हिसाब से हुआ था। पर आखिर में जब उनके पास तुम लोगों के खिलाफ पर्याप्त सबूत इकट्ठा हो गए तो उन दोनों ने मुझे अपने रास्ते से हटाने के लिए सच में मेरी जान लेने की कोशिश की थी।
धनराज- पर तुम आखिर उन दोनों के प्लान में सामिल ही क्योें हुई थी
निशा- असल में वो दोनों मुझे इस काम के पूरे 50 करोड रुपये देने बाले थे।
मेरी बात सुनकर धनराज हैरानी से आँखें फाडकर मुझे देखते हुए बोला
धनराज- 50 करोड रुपये…
निशा- अरे सेठ तुम लोगोें का माल भी तो अरवों रूपयों का है ना। अगर उसमें से 50 करोड खर्च भी हो जायें तो इससे क्या फर्क पडने बाला था। बैसे भी इतनी ज्यादा मार खाने के बाद, 25-30 आदमियों से अपना रेप करवाना और मरने की एक्टिंग करना भी तो बहुत रिस्की काम था। मेरी जगह अगर कोई दूसरी लडकी होती तो वो रेप होने के दौरान ही मर जाती
मेरी बात सुनकर धनराज उस घटना को याद करते हुए बोला
धनराज- हाँ… यह बात तो है
निशा- उस दिन खण्डहर में सब कुछ गनपत और जफर के प्लान के हिसाब से ही हुआ था। लेकिन काम पूरा होने के बाद उन दोनों के मन में लालच आ गया। वो दोनों मेरे हिस्से के पैसे नहीं देना चाहते थे, इसलिए गनपत ने जान बूझकर मुझे जान से मारने की कोशिश की। लेकिन तुम लोगों के जाने के बाद मेरे कुछ बफादार आदमियों ने मेरी जान बचा ली। जब तक मैं ठीक हुई तब तक जफऱ और गनपत अंडरग्राऊंड हो चुके थे। फिर मैंने अपने सोर्स से जानकारी इकट्ठी की तो पता चला की वो दोनों इस वक्त दिल्ली में मंत्री जी के बंगले पर छिपे हुए हैं। मैं सही कह रही हूँ ना
मेेरी बात सुनकर धनराज एक बार फिर हैरान होते हुए बोला
धनराज- हाँ
निशा- आज ही मुझे अपने सोर्स से पता चला है कि गनपत और जफर ने अपने खास आदमियों को जान से मारना शुरू कर दिया है। ताकि उसके खिलाफ कोई सबूत ना बचे।
मेरी बात सुनकर धनराज बुरी तरह से बौखलाता हुआ बोला
धनराज- नहीं नहीं… यह नहीं हो सकता। तुम हम लोगों से अपना बदला लेने के लिए, हमारे बीच दरार डालना चाहती हो।
धनराज की बात सुनकर मैंने मुस्कुराते हुए अपने मोबाईल में खण्डहर में बनाया गया बी़डियो उसे दिखाते हुए कहा
निशा- तो फिर यह क्या है। मिस्टर धनराज
उस बीडियो में रंजीत अपने ही साथियों को छिपकर गोली मार रहा था और उनकी लाशों को ठिकाने लगा रहा था। उस बीडियो को देखते ही धनराज तुरंत रंजीत और मरने बाले लोगों को पहचान गया था। जिस कारण हैरानी और डर की बजह से उसकी हालत खराब हो गई थी। यह देखकर मैं उसे और भी ज्यादा डराते हुए बोली
निशा- फिलहाल तुम लोग उन दोनोें का कुछ भी नहीं बिगाड सकते हो और ना ही उनसे बच सकते हो। सारे प्यादों के मरते ही तुम लोगों का भी नम्बर लगने बाला है। हो सकता है कि कल सुबह सुबह ही तुम्हें अपने किसी साथी के मरने की खबर मिल जाये। अगर किसी तरह तुम लोग गनपत और जफर से बच भी गये, तो भी तुम लोग अपना हिस्सा तो भूल ही जाओ। क्योंकि अपना हिस्सा मांगने पर या तो तुम्हारी बीडियो बायरल होगी या फिर तुम्हें मौत मिलेगी
मेरी बात सुनकर धनराज बूरी तरह से डर गया था और किसी हिस्टीरिया के मरीज की तरह चीखते हुए बोला
धनराज- नहीं नहीं… वो दोनों हमें धोखा नहीं दे सकते हैं। मुझे तुम्हारी बातों पर बिल्कुल भी यकीन नहीं है।
निशा- कोई बात नहीं…. तो फिर तुम यहाँ से जा सकते हो। लेकिन आगे तुम लोगों के साथ जो कुछ भी होगा, उसके जिम्मेदार तुम खुद ही रहोगे।
धनराज- मतलब….. तुम मुझे धमका रही हो
निशा- अरे नहीं मिस्टर धनराज मैं तुम्हारे साथ कुछ भी नहीं करने बाली। अगर करना चाहती तो अब तक तुम कब के मर चुके होते। तुम्हारे साथ तो जो कुछ भी करेंगे वो गनपत और जफर करेंगे। रही बात मेरे हिस्से और मेरे बदले की, तो उसकी मुझे कोई चिंता नहीं है। हाँ लेकिन तुम्हारी हेल्प से मेरा काम थोडा आसान हो जाता
धनराज- मतलब
निशा- मतलब यह मिस्टर धनरज कि मुझे गनपत और जफर की उस सीक्रेट लोकेशन के बारे में पता था, जहाँ उस दोनों ने सारा माल छिपाकर रखा हुआ था। असल में गनपत के बेटे गगन ने मुझे उस लोकेशन के बारे में पहले ही बता दिया था। इसलिए ठीक होने के बाद मैंने सबसे पहले तुम लोगों का माल गायब किया। अब वो अरबों का खजाना मेरे पास है। अगर मैं उसमें से दो तीन सोने के बिस्किट किसी भी बडे गुंडे के सामने डालूँगी, तो वो कुत्ते की तरह दुम हिलाता हुआ मेरी हर बात मानेगा। यानि मैं जब चाहूँ तब गनपत और जफऱ को मरवा सकती हूँ।
धनराज- अगर ऐसा है तो फिर तुम मेरे पास क्यों आई
निशा- असल में वो सारा माल गोल्ड और डायमंड में है। जिसे मैं उतनी आसानी से मार्केट में नहीं बेच सकती। जितनी आसानी से तुम बेच सकते हो। बस इसीलिए मैं चाहती थी कि मेरे और गनपत के बीच जो तय हुआ था, उसके अनुसार तुम मुझे मेरे 50 करोड रुपये और मुझे जान से मारने की कोशिश के बदलेे अलग से 20 करोड रूपये यानि कुल 70 करोड रूपये कैश दे दो साथ ही साथ मंत्री जी ने अभी अभी इंदौर में जो अपना शॉपिंग मॉल बनवाया है, वो भी मुझे दे दो, जिसके बदले में मैं तुम्हें वो सारा माल दे दूँगी। इसमें हम दोनों का ही फायदा है मिस्टर धनराज…
मेरी बात सुनकर धनराज गुस्से से विफरते हुए बोला
धनराज- बेबकूफ लडकी… उस शॉपिंग माल की कीमत पूरे 130 करोड रूपये है।
निशा- मैं यह अच्छी तरह से जानती हूँ। इसी लिए तो वो शॉपिंग मॉल तुमसे माँग रही हूँ। इस तरह से मुझे 70 करोड रूपये कैस और 130 करोड रूपये का शॉपिंग मॉल यानि पूरे 200 करोड रूपये मिल जाऐँगे। जो उस खजाने के सामने कुुछ भी नहीं है।
इतना बोलकर मैंने अपने मोबाईल में उस सोने की खींची गई एक फोटो धनराज को दिखाई। जो मैंने अपने इंदौर बाले सीक्रेट रूम में रखने के बाद खींची थी।
कहानी जारी है.....