Antarvasna kahani ड्रेगन हार्ट (लव, सेक्स एण्ड क्राईम) - Page 7 - SexBaba
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Antarvasna kahani ड्रेगन हार्ट (लव, सेक्स एण्ड क्राईम)

Update 052 -

एक ही दिन में रंजीत ने देखते ही देखते मेरे 5 दुशमनों को जान से मार दिया था। जब रंजीत को वहाँ से निकले काफी समय हो गया, तो मैं भी खण्डहर से वाहर निकल गई और बापिस भोपाल आकर अपने होटल में आगे की प्लानिंग करने लगी। जब मैं होटल पहूँची तो रात के 8 बज चुके थे। अभी मैं आगे का प्लान बना ही रही थी कि तभी रंजीत का मेरे पास फोन आया। जैसे ही मैंने फोन रिसीव किया तो वो बोला

रंजीत- 5 आदमियों का काम तमाम हो गया है। बाकी लोगों का मैं कल कर दूँगा। अब आगे क्या करना है।

रंजीत की बात सुनकर मैंने कहा

निशा- पहले प्यादों को ठिकाने लगाओ। फिर बाकी लोगों के लिए मैंने एक अलग प्लान बनाया है। अगर तुम कल ही अपने बचे हुए साथियों का काम तमाम कर देते हो, तो फिर परसों से तुम्हारे बॉस और उसके पटनर्स का नम्बर भी लगना शुरू हो जायेगा।

रंजीत- ठीक है

इतना बोलकर रंजीत ने फोन कट कर दिया। जिसके बाद मैंने भी अपने हाथ में पकडा छोटा सा कीपैड फोन साईड टेबिल पपर रख दिया। असल में जब मैं बिजिनैसमैन धनराज पर नजर रख रही थी, तो उसी दौरान धनराज के एक पर्सनल बॉडीगार्ड का मोबाइल फोन मैंने गायब कर दिया था और उसी मोबाईल फोन से मैंने रंजीत को कॉल करके खण्डहर में बुलाया था। जिस कारण अभी अभी उसी मोबाईल पर रंजीत ने मुझे कॉल किया था। कुछ देर तक अपने आगे के प्लान के बारे में सोचने के बाद मैंने धनराज को उसी फोन से कॉल कर दिया। जैस ही फोन रिसीव हुआ तो मैंने कहा

निशा- हैलो मिस्टर धनराज… कैसे हैं आप….।

अपने पर्सनल बॉडीगार्ड के मोबाईल से किसी लडकी की आवाज सुनकर धनराज बुरी तरह से हैरान होते हुए बोला

धनराज- कौन बात कर रहा है… और मेरे बॉडीगार्ड का मोबाईल आखिर तुम्हारे पास कैसे आया….

निशा- यह फोन तो मैंने तुम्हारे बाडीगार्ड की जेव से आज दोपहर में ही गायब कर दिया था और उसे कुछ पता भी नहीं चला। रही बात कि मैं कौन हूँ तो यह तो तुम्हें तब पता चलेगा। जब हमारी मुलाकात होगी

धनराज- मुझे तुमसे मिलने का कोई शौक नहीं है

निशा- तो फिर ठीक है…. तुम्हारी मर्जी… बैसे तो मैं तुम्हारे ही फायदे की बात करना चाहती थी।

मेरी बात सुनकर धनराज थोडा नॉर्मल होते हुए बोला

धनराज- कैसा फायदा….

निशा- मुझे तुम लोगों के उस सोने के बारे में बात करनी थी, जो गनपत और जफर के पास रखा हुआ है

धनराज- यह क्या बकवास कर रही हो तुम…..... और इस सबके बारे में तुम आखिर कैसे जानती हो

निशा- मैंने आपसे कुछ देर पहले ही तो कहा है कि मिलकर बताऊँगी। बैसे जानती तो मैं बहुत कुछ हूँ, जैसे गनपत और जफऱ सारा माल लेकर कहाँ गायब होने बाले हैं, माल कहाँ छिपा हुआ था और अब कहाँ है, गनपत और जफऱ मिलकर तुम लोगों के खिलाफ क्या प्लान बना रहे हैं। मैं इन सबके बारे में जानती हूँ।

धनराज- आखिर तुम हो कौन

निशा- फिर गलत सबाल.... क्योंकि तुम जो पूछ रहे हो उसका जबाब तुम पहले से ही जानते हो

धनराज- अच्छा ठीक है….. बताओ कहाँ मिलना है।

निशा- एक घंटे के अंदर होटल रॉयल के कैफे एरिया में आ जाओ और हाँ अकेले आना अपने बॉडीगार्ड बगैरह को अपने साथ लाने की या फिर अपने पाटनर्स को इस बारे में कुछ भी बताने की गलती बिल्कुल भी मत करना। क्योंकि तुम्हारी हर हरकत पर मेरी नजर है। तुम्हारी एक छोटी सी गलती तुम्हारा ही नुकशान करेगी। बैसे भी तुम्हारे और मंत्री जी के खिलाफ तुम्हारे पाटनर्स जो प्लान बना रहे हैं, उसके बारे में तुम कुछ भी नहीं जानते हो।

इतना बोलकर मैंने फोन कट कर दिया और तुरंत अपनी कार से धनराज के घर के बाहर जाकर, उसपर नजर रखने लगी।

करीब 10-15 मिनट इंतजार करने के बाद धनराज अपनी कार से बैठकर होटल रॉयल जाने के लिए निकला। उसकी कार ठीक मेरे पास से होकर ही गुजरी थी, जिसमें धनराज अकेला बैठा हुआ था। इसलिए मैंने भी अपनी कार धनराज के पीछे लगा दी। कुछ ही देर बाद मैं होटल रॉयल के कैफे एरिया में अपने चेहरे पर मास्क लगाकर एक कर्नर बाली टेबिल पर बैठी हुई थी। मुझसे थोडी ही दूर धनराज बैठा मेरा इंतजार कर रहा था। असल में मैं यह कंफर्म करना चाहती थी कि धनराज ने अपने किसी आदमी को तो वहाँ पर नहीं बुलाया है। कुछ देर तक जब धनराज ने किसी को भी कॉल नहीं किया और ना ही वहाँ पर कोई आया, तो मैं उठकर धनराज के सामने जाकर बैठ गई और उससे बोली

निशा- सॉरी मिस्टर धनराज आपको इंतजार करना पडा, मैं बस कंफर्म करना चाहती थी कि आपने किसी और को तो यहां इनबाईट नहीं किया है

मेरी बात पर धनराज ने कोई रिऐक्शन नहीं दिया और सीरियस होकर सबाल किया

धनराज- अब बताओ कौन हो तुम

धनराज की बात सुनकर मैंने अपने चेहरे पर लगा मास्क हटा दिया। जैसे ही धनराज ने मेरा चेहरा देखा तो वो बुरी तरह से हैरान रह गया। इससे पहले वो कुछ कहता मैं बोली

निशा- मैं वहीं हूँ जिसे तुम लोग खण्डहर में मरा हुआ समझ कर छोड गए थे।

मुझे सही सलामत देखकर धनराज की हालत खराब हो गई थी। इसलिए वो डरते हुए बोला

धनराज- त तुम…. यह नहीं हो सकता। तुम आखिर जिंदा कैसे हो सकती हो। मैंने तुम्हें अपनी आंखों से मरते हुए देखा था।

धनराज की ऐसी हालत देखकर मैं मुस्कुराते हुए बोली

निशा- मुझसे डरने की जरूरत नहीं है मिस्टर धनराज। मैं कोई भूत नहीं हूँ और रही बात जिंदा बचने की, तो उस बात को अभी रहने दो, क्योंकि तुम्हें समझ नहीं आऐगी। बस इतना समझ लो कि मैं एकदम सही सलामत और जिंदा तुम्हारे सामने हूँ।

धनराज- तुम आखिर चाहती क्या हो मुझसे…. और मुझे यहाँ क्यों बुलाया है।

निशा- मुझे मेरा हिस्सा चाहिए साथ ही साथ गनपत और जफऱ से अपना बदला भी

मेरी बात सुनकर धनराज हैरान होते हुए बोला

धनराज- केवल गनपत और जफऱ से बदला। लेकिन तुम्हारे साथ गलत तो हम सबने किया था…. और यह हिस्से की बात कहाँ से आ गई।

धनराज के सबाल पर मैं थोडा सीरियस होते हुए बोली

निशा- अब ध्यान से मेरी बात सुनो। असल में उस दिन खण्डहर में जो कुछ भी हुआ था, बो बस एक नाटक था। असल में गनपत और जफर सारा माल अकेले हजम करके विदेश भागना चाहते थे। लेकिन तुम लोगों के चलते यह पॉसीबल नहीं था। ऊपर से गनपत जेल में भी था। जिस कारण उसे जेल से भागने का एक बहाना चाहिए था। इसलिए उसने मुझे अपने प्लान में सामिल किया। असल में अपने बेटे गगन को गनपत ने ही मरवाया है। अपने बेटे की मौत के बहाने वो जेल से भाग गया। उसके बाद माल गायब होने और अपने बेटे की मौत का बदला लेने के बहाने उसने तुम सबको उस खण्डर में बुलाया था।

धनराज- पर क्यों…

निशा- असल में गनपत और जफर ने उस खण्डहर में पहले से ही सीक्रेट कैमरे छिपा रखे थे। उसके बाद गनपत ने मुझे किडनैप करने और मुझे टार्चर करने का नाटक किया। असल में मैं पहले से ही गनपत और जफर के प्लान के बारे में जानती थी। उस वक्त खण्डहर में जो कुछ भी हो रहा था, वो बस एक नाटक था। ताकि गनपत और जफर तुम लोगोें का मुझे टार्चर करके रेप करने और मुझे जान से मारने की कोशिश करने का बीडियो बना सकें और उसकी हेल्प से वो तुम लोगों को ब्लैकमेल कर सकें। मुझे मारने की कोशिश तक तो सब प्लान के हिसाब से हुआ था। पर आखिर में जब उनके पास तुम लोगों के खिलाफ पर्याप्त सबूत इकट्ठा हो गए तो उन दोनों ने मुझे अपने रास्ते से हटाने के लिए सच में मेरी जान लेने की कोशिश की थी।

धनराज- पर तुम आखिर उन दोनों के प्लान में सामिल ही क्योें हुई थी

निशा- असल में वो दोनों मुझे इस काम के पूरे 50 करोड रुपये देने बाले थे।

मेरी बात सुनकर धनराज हैरानी से आँखें फाडकर मुझे देखते हुए बोला

धनराज- 50 करोड रुपये…

निशा- अरे सेठ तुम लोगोें का माल भी तो अरवों रूपयों का है ना। अगर उसमें से 50 करोड खर्च भी हो जायें तो इससे क्या फर्क पडने बाला था। बैसे भी इतनी ज्यादा मार खाने के बाद, 25-30 आदमियों से अपना रेप करवाना और मरने की एक्टिंग करना भी तो बहुत रिस्की काम था। मेरी जगह अगर कोई दूसरी लडकी होती तो वो रेप होने के दौरान ही मर जाती

मेरी बात सुनकर धनराज उस घटना को याद करते हुए बोला

धनराज- हाँ… यह बात तो है

निशा- उस दिन खण्डहर में सब कुछ गनपत और जफर के प्लान के हिसाब से ही हुआ था। लेकिन काम पूरा होने के बाद उन दोनों के मन में लालच आ गया। वो दोनों मेरे हिस्से के पैसे नहीं देना चाहते थे, इसलिए गनपत ने जान बूझकर मुझे जान से मारने की कोशिश की। लेकिन तुम लोगों के जाने के बाद मेरे कुछ बफादार आदमियों ने मेरी जान बचा ली। जब तक मैं ठीक हुई तब तक जफऱ और गनपत अंडरग्राऊंड हो चुके थे। फिर मैंने अपने सोर्स से जानकारी इकट्ठी की तो पता चला की वो दोनों इस वक्त दिल्ली में मंत्री जी के बंगले पर छिपे हुए हैं। मैं सही कह रही हूँ ना

मेेरी बात सुनकर धनराज एक बार फिर हैरान होते हुए बोला

धनराज- हाँ

निशा- आज ही मुझे अपने सोर्स से पता चला है कि गनपत और जफर ने अपने खास आदमियों को जान से मारना शुरू कर दिया है। ताकि उसके खिलाफ कोई सबूत ना बचे।

मेरी बात सुनकर धनराज बुरी तरह से बौखलाता हुआ बोला

धनराज- नहीं नहीं… यह नहीं हो सकता। तुम हम लोगों से अपना बदला लेने के लिए, हमारे बीच दरार डालना चाहती हो।

धनराज की बात सुनकर मैंने मुस्कुराते हुए अपने मोबाईल में खण्डहर में बनाया गया बी़डियो उसे दिखाते हुए कहा

निशा- तो फिर यह क्या है। मिस्टर धनराज

उस बीडियो में रंजीत अपने ही साथियों को छिपकर गोली मार रहा था और उनकी लाशों को ठिकाने लगा रहा था। उस बीडियो को देखते ही धनराज तुरंत रंजीत और मरने बाले लोगों को पहचान गया था। जिस कारण हैरानी और डर की बजह से उसकी हालत खराब हो गई थी। यह देखकर मैं उसे और भी ज्यादा डराते हुए बोली

निशा- फिलहाल तुम लोग उन दोनोें का कुछ भी नहीं बिगाड सकते हो और ना ही उनसे बच सकते हो। सारे प्यादों के मरते ही तुम लोगों का भी नम्बर लगने बाला है। हो सकता है कि कल सुबह सुबह ही तुम्हें अपने किसी साथी के मरने की खबर मिल जाये। अगर किसी तरह तुम लोग गनपत और जफर से बच भी गये, तो भी तुम लोग अपना हिस्सा तो भूल ही जाओ। क्योंकि अपना हिस्सा मांगने पर या तो तुम्हारी बीडियो बायरल होगी या फिर तुम्हें मौत मिलेगी

मेरी बात सुनकर धनराज बूरी तरह से डर गया था और किसी हिस्टीरिया के मरीज की तरह चीखते हुए बोला

धनराज- नहीं नहीं… वो दोनों हमें धोखा नहीं दे सकते हैं। मुझे तुम्हारी बातों पर बिल्कुल भी यकीन नहीं है।

निशा- कोई बात नहीं…. तो फिर तुम यहाँ से जा सकते हो। लेकिन आगे तुम लोगों के साथ जो कुछ भी होगा, उसके जिम्मेदार तुम खुद ही रहोगे।

धनराज- मतलब….. तुम मुझे धमका रही हो

निशा- अरे नहीं मिस्टर धनराज मैं तुम्हारे साथ कुछ भी नहीं करने बाली। अगर करना चाहती तो अब तक तुम कब के मर चुके होते। तुम्हारे साथ तो जो कुछ भी करेंगे वो गनपत और जफर करेंगे। रही बात मेरे हिस्से और मेरे बदले की, तो उसकी मुझे कोई चिंता नहीं है। हाँ लेकिन तुम्हारी हेल्प से मेरा काम थोडा आसान हो जाता

धनराज- मतलब

निशा- मतलब यह मिस्टर धनरज कि मुझे गनपत और जफर की उस सीक्रेट लोकेशन के बारे में पता था, जहाँ उस दोनों ने सारा माल छिपाकर रखा हुआ था। असल में गनपत के बेटे गगन ने मुझे उस लोकेशन के बारे में पहले ही बता दिया था। इसलिए ठीक होने के बाद मैंने सबसे पहले तुम लोगों का माल गायब किया। अब वो अरबों का खजाना मेरे पास है। अगर मैं उसमें से दो तीन सोने के बिस्किट किसी भी बडे गुंडे के सामने डालूँगी, तो वो कुत्ते की तरह दुम हिलाता हुआ मेरी हर बात मानेगा। यानि मैं जब चाहूँ तब गनपत और जफऱ को मरवा सकती हूँ।

धनराज- अगर ऐसा है तो फिर तुम मेरे पास क्यों आई

निशा- असल में वो सारा माल गोल्ड और डायमंड में है। जिसे मैं उतनी आसानी से मार्केट में नहीं बेच सकती। जितनी आसानी से तुम बेच सकते हो। बस इसीलिए मैं चाहती थी कि मेरे और गनपत के बीच जो तय हुआ था, उसके अनुसार तुम मुझे मेरे 50 करोड रुपये और मुझे जान से मारने की कोशिश के बदलेे अलग से 20 करोड रूपये यानि कुल 70 करोड रूपये कैश दे दो साथ ही साथ मंत्री जी ने अभी अभी इंदौर में जो अपना शॉपिंग मॉल बनवाया है, वो भी मुझे दे दो, जिसके बदले में मैं तुम्हें वो सारा माल दे दूँगी। इसमें हम दोनों का ही फायदा है मिस्टर धनराज…

मेरी बात सुनकर धनराज गुस्से से विफरते हुए बोला

धनराज- बेबकूफ लडकी… उस शॉपिंग माल की कीमत पूरे 130 करोड रूपये है।

निशा- मैं यह अच्छी तरह से जानती हूँ। इसी लिए तो वो शॉपिंग मॉल तुमसे माँग रही हूँ। इस तरह से मुझे 70 करोड रूपये कैस और 130 करोड रूपये का शॉपिंग मॉल यानि पूरे 200 करोड रूपये मिल जाऐँगे। जो उस खजाने के सामने कुुछ भी नहीं है।

इतना बोलकर मैंने अपने मोबाईल में उस सोने की खींची गई एक फोटो धनराज को दिखाई। जो मैंने अपने इंदौर बाले सीक्रेट रूम में रखने के बाद खींची थी।

कहानी जारी है.....
 
Update 053 -

इतना सारा सोना देखकर धनराज की आँखे हैरानी में फैल गई थीं। इसलिए वो बडी मुश्किल से अपना थूक निगलता हुआ बोला

धनराज- मुझे तुम्हारी पैसों बाली डील मंजूर है, लेकिन मंत्री जी का शॉपिंग मॉल मैं तुम्हें कैसे दे सकता हूँ।

निशा- मुझसे झूठ बोलने का नाटक मत करो मिस्टर धनराज। मैं अच्छी तरह से जानती हूँ कि तुम मंत्री जी के इशारे के बिना अपनी पलक भी नहीं झपकाते और ना ही मंत्री तुम्हारे बिना कुछ करता है। हमारी इस मीटिंग की जानकारी भी मंत्री को जरूर होगी। रही बात शॉपिंग मॉल की, तो मुझे यह भी पता है कि वो शॉपिंग मॉल मंत्री जी ने असल में तुम्हारे नाजायज बेटे के नाम पर बनवाया है। इसलिए तुम मुझसे कुछ भी झूठ बोलने की कोशिश ना ही करो तो अच्छा है। क्योंकि मैं जैसी दिखती हूँ बैसी हूँ नहीं। वो तो मैंने गनपत और जफर पर भरोसा करके गलती कर दी थी, वर्ना उस दिन खण्डहर में तुम लोग मुझे छू भी नहीं पाते।

मेरी बात सुनकर धनराज आखिरकार अपनी हार मानते हुए बोला

धनराज- अब जब तुम्हें सब कुछ पहले से ही पता है, तो तुम यह भी अच्छी तरह से जानती होगी कि इसका फैसला मैं अकेले नहीं कर सकता हूँ। इसलिए मुझे पहले मंत्री जी से इस बारे में बात करनी होगी

निशा- मुझे इससे कोई प्राब्लम नहीं है। तुम आराम से मंत्री से बात करके अपने बॉडीगार्ड के उसी मोबाईल पर मुझे बाता देना, जिससे मैंने तुम्हें कॉल किया था। और हाँ याद रखना अगर मंत्री के अलवा तुम्हारे किसी दूसरे पार्टनर को हमारी इस मीटिंग के बारे में पता चला, या फिर मेरे जिंदा होने के बारे में तुमने किसी को कुछ भी बताया, या फिर मुझे कुछ भी हुआ तो मेरे साथी उस पूरे खजाने को मीडिया के सामने सरकार को सौंप देंगे। यानि तुम्हें वो पैसा फिर कभी नहीं मिलेगा और तुम लोगों का बीडियो जो गनपत ने रिकार्ड करवाया था। उसकी एक कॉपी भी मेरे साथियों के पास है। वो भी मीडिया में बायरल हो जायेगा। उसके बाद तो तुम जानते ही हो कि तुम लोगों का क्या होगा।

इतना बोलकर मैंने फिर से अपने चेहरे पर मास्क लगाया और वहाँ से बाहर निकल गई। करीब आधे घंटे बाद में अपने होटल रूम में ऱघू के साथ अपने जिस्म की आग बुझाने में लगी हुई थी। अपने 5 दुशमनों की मौत देखकर मेरे अंदर एक अलग ही तरह नशा चढा हुआ था। जिस कारण आज मुझे चुदाई करवाने में कुछ ज्यादा ही मजा आ रहा था। इसलिए मैं पूरे मन से रघू का साथ दे रही थी। करीब एक घंटे तक एक दूसरे को पूरी तरह से निचोडने के बाद, हम दोनों बिना कपडों के ही एक दूसरे की बाहों में सो गए।

अगले दिन रघू के जाने के बाद मैंने रंजीत को कॉल करके जेलर योगेश को मारने का ऑर्डर दे दिया। साथ ही मैंने जेलर को कब और कहाँ मारना है इसके बारे में भी रंजीत को बता दिया था। मैं योगेश की मौत अपनी आँखों से देखना चाहती थी। इसलिए मैं फटाफट तैयार होकर उस लोकेशन पर पहुंच गई, जहाँ रंजीत योगेश को जान से मारने बाला था। वो एक असल में पब्लिक पार्क है जो जेलर योगेश के घर के पास में ही बना हुआ है और वहाँ पर योगेश हर दिन सुबह सुबह टहलने जाता है।

सुबह के समय उस पार्क में बहुत कम भीड-भाड होती है। इसलिए मैंने अपने काम के लिए उस पार्क को चुना था। उस पार्क के पास पहुँचकर मैंने अपनी कार वहां से थोड़ी दूर सडक के किनारे खडी कर दी और पैदल ही इसके बाद मैंने अपने चेहरे मास्क लगाया और पैदल ही उस पार्क की तरफ चल पडी। पार्क के अंदर पहुँचकर मैं योगेश को ढूँडने लगी। चूँकि वो पार्क ज्यादा बडा नहीं था, इसलिए जल्द ही मुझे योगेश नजर आ गया। जो इस वक्त पार्क के चक्कर लगा रहा था। मैं भी उससे थोडी दूरी बनाकर उसके पीछे पीछे चलने लगी।

कुछ दूर चलने के बाद ही मेरी नजर पार्क के एक सुनसान एरिया में खडे रंजीत पर पडी, रंजीत को वहाँ देखते ही मैंने तुरंत अपने मोबाईल का वीडियो रिकार्डर ऑन किया और छिपकर पूरी घटना रिकार्ड करने लगी। जैसे ही योगेश रंजीत के पास पहूँचा तो रंजीत ने अचानक से अपनी पिस्टल निकाली और योगेश के सीने पर एक के बाद एक तीन फायर कर दिए, इसके बाद रंजीत तुरंत ही पार्क की बाऊँड्री से कुदकर भाग गया। गोली की आवाज सुनकर पार्क में घूमने आऐ दूसरे लोगों की नजर भी उस तरफ चली गई थी और उन लोगों ने भी पूरी घटना अपनी आँखों से देख ली थी।

रंजीत ने मेरे बताऐ अनुसार अपने चेहरे को मास्क से ढंक रखा था। ताकि कोई भी उसे पहचान ना सके। जैसे ही रंजत वहाँ से भागा, तो पार्क में मौजूद दूसरे लोग भागकर तुरंत योगेश के पास जा पहूँचें। इस पूरी घटना को रिकार्ड करने के बाद मैंने भी अपनी रिकार्डिंग ऑफ कर दी और भीड के साथ खडी होकर योगेश को देखने लगी। वहाँ मौजूद कुछ लोग योगेश को अच्छी तरह से पहचानते थे। इसलिए जब उन लोगों ने योगेश को चैक किया तो वो मर चुका था।

योगेश के मरने की बात पता चलते ही वहाँ मौजूद किसी व्यक्ति ने तुरंत पुलिस को कॉल कर दिया। मेरा काम हो चुका था, जिस कारण अब मेरा वहाँ रुके रहने का कोई मतलब नहीं रह गया था। इसलिए मैं चुपचाप उस पार्क से बाहर निकल गई और अपनी कार में बैठकर अपने होटल बापिस आ गई। अपने होटल रूम में पहूँचते ही मैंने अपने लिए एक कॉफी और नाश्ता आर्डर कर दिया। इसके बाद मैं टी.बी. ऑन करके लोकल न्यूज देखने लगी।

कुछ ही देर में न्यूज चैनल पर जेलर योगेश के मरने की खबर चलने लगी। जिसके बाद मैंने रंजीत को कॉल करके उसके बाकी साथियों को जल्द से जल्द खत्म करने के लिए बोल दिया। मैं जानती थी कि अब रंजीत इस मामले में इतना ज्यादा फंस चुका है कि वो बापिस नहीं लौट सकता। इसलिए उसके पास मेरे अब ऑर्डर मानने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। रंजीत को आर्डर देने के बाद मैंने धनराज को न्यूज देखने का मैसेज भेज दिया। तब तक मेरी कॉफी और नाश्ता भी आ चुका था। इसलिए मैं न्यूज देखते हुए कॉफी और अपना नाश्ता इंजॉय कर रही थी।

मैं जनती थी कि न्यूज चैनल पर योगेश की मौत की खबर देखते ही धनराज और हरीश अंकल दोनों ही मुझे कॉल करेंगे। धनराज अपनी मौत के डर के कारण मेरी सारी शर्तें मानने के लिए कॉल करेगा और हरीश अंकल को इस मामले में मेरे शामिल होने का शक होगा, इसलिए वो मुझे कॉल करेंगे। जैसा कि मैंने सोचा था, कुछ देर बाद मेरे पास धनराज का कॉल आया, मैंने जैसे ही उसकी कॉल रिशीव की तो वो बोला

धनराज- हमें तुम्हारी हर शर्त मंजूर है। तुम पहले हमें उस माल की लोकेशन बताओ। एक बार सारा माल हमारे हाथ आते ही हम तुम्हें 70 करोड रुपये और इंदौर बाला शॉपिंग मॉल तुम्हें दे देंगे

धनराज की बात सुनकर मैं उसे गुस्से से डाँटते हुए बोली

निशा- ओ मिस्टर धनराज…. आखिर तुमने मुझे समझ क्या रखा है। तुम्हारे दो पाटनर्स पर पहले ही भरोसा करके मैं मरते मरते बची हूँ। अब दूसरी बार मैं तुम लोगों पर भरोसा करने का कोई रिश्क नहीं लेना चाहती। सबसे पहले मेरे पास सारे पैसे और इंदौर बाला शाॉपिंग मॉल आयेगा। उसके बाद मैं तुम्हें खजाने की लोकेशन बताऊंगी। इसलिए बिना मतलब अपना दिमाग लगाने की कोई जरूरत नहीं है। तुम आज ही अपनी नाजायज औलाद को उस शॉपिंग मॉल के आरीजनल डॉक्यूमेंट लेकर इंदौर के रजिस्ट्रार ऑफिस भेज दो। वहाँ तेरे बेटे को मेरे वकील के साथ वो आदमी भी मिल जाऐगा। जिसे मैंने एडवांश में वह शॉपिंग मॉल बेच दिया है। मैं उस शॉपिंग मॉल के रजिस्ट्रेशन ट्रांशफर के सारे डॉक्यूमेंट्स पहले ही तैयार करवा चुकी हूँ। तुम्हारी नाजायज औदाद को बस रजिस्ट्रार ऑफिस में जाकर उन डॉक्यूमेंट्स पर सिग्नेचर करना है और उस शॉपिंग मॉल के ऑरीजनल डॉक्यूमेंट उस आदमी को देना है। जिसने मुझसे वो शॉपिंग मॉल खरीदा है।और हाँ अपने बेटे के साथ ही मेरे 70 करोड रूपये भी भेज देना, जिन्हें वो मेरे बकील के हबाले कर दे देगा।

मेरी बात सुनकर धनराज बुरी तरह से हैरान होते हुए बोला

धनराज- तुमने हमारा वह शॉपिंग मॉल एडवांश में ही किसी दूसरे व्यक्ति को बेच दिया है। आखिर इस सबका क्या मतलब है… क्या तुम उस शॉपिंग मॉल का रजिस्ट्रेशन अपने नाम नहीं करवा रही हो… और तुम हमारा वह शॉपिंग मॉल एडवांश में ही किसी दूसरे व्यक्ति को कैसे बेच सकती हो।

निशा- बेबकूफ आदमी मुझे पहले से ही यकीन था कि तुम्हारे पास मेरी शर्तों को मानने के अलावा कोई दूसका रास्ता नहीं है। इसलिए मैंने पहले ही उस शॉपिंग मॉल को किसी दूसरे व्यक्ति को बेचने का सौदा कर लिया था। क्योंकि मैं उस शॉपिंग मॉल को अपने नाम करवाकर कोई नई मुसीबत नहीं चाहती हूँ। बैसे भी मैं अच्छी तरह से जानती हूँ कि अगर मैंने उस शॉपिंग मॉल अपने पास रखा, तो कभी ना कभी तुम और मंत्री मुझे ठीकाने लगाकर वो शॉपिंग मॉल फिर से हथिया लोगे। इसलिए मैंने अपने पास यह झंझट ही नहीं रखा। जिसे मैंने तुम्हारा वो शॉपिंग मॉल बेचा है, वो इंशान मुझे जानता ही नहीं है। इसलिए अब उस इंशान को ठीकाने लगाने का भी तुम्हारे पास कोई कारण नहीं बचा है। बस एक बार सारा पैसा मेरे हाथ आ जाऐ, तो मैं तुम्हें उस खजाने की लोकेशन बताकर हमेशा हमेशा के लिए कहीं गायब हो जाऊँगी मिस्टर धनराज।

मेरी बात सुनकर धनराज तुरंत बोला

धनराज- मैं तुम्हारी बात समझ गया, लेकिन आय यह सब पॉसीबल नहीं है

निशा- क्यों

धनराज- मैं भला 70 करोड रूपये का इंतजाम इतनी जल्दी कैसे कर सकता हूँ और फिर इतना सारा कैस किसी बैग में तो रखा नहीं जा सकता। उसे तो लाने ले जाने के लिए एक लोडिंग गाडी की जरूरत भी पडेगी और उसकी सुरक्षा के लिए मुझे कुछ सिक्योरिटा गार्ड भी भेजने पडेंगे। इसलिए अगर तुम अपनी अकॉउन्ट डिटेल मेरे पास भेज दो, तो मैं तुम्हें ऑनलाईन पैसे ट्रांशफर कर दूंगा या फिर तुम कहो तो मैं तुम्हारे पास 70 करोड रूपये का चैक भिजवा सकता हूँ।

धनराज की बात सुनकर मैं समझ गई कि वो चैक देने या ऑनलाईन पैसे ट्रांशफर करने के बहाने मेरी असली पहचान जानना चाहता है। अगर मैं उसे अपनी अकाऊंट डिटेल बता देती हूँ या फिर उससे चैक लेने के लिए मान जाती हूँ तो वो आसानी से अपने बैंक की मदद से मेरी पूरी जन्म कुण्डली निकलवा सकता है। लेकिन मैं इस बारे में पहले ही अच्छी तरह से सोच चुकी थी और मेरे पास इसका एक सॉलूशन भी था। इसलिए मैंने धनराज से कहा

निशा- उस सबकी कोई जरूरत मिस्टर धनराज। तुम मेरे पास नेशल बैंक का डिजीटल कैश कार्ड बनवाकर भिजवा दो। मैं उस कार्ड की हेल्प से अपनी जरूरत के हिसाब से ट्रांजेक्शन कर लूँगी।

असल में इण्डियन गर्वमेंट ने कुछ समय पहले ही डिजिटल कैश लॉंच किया किया था। जिसे किसी नॉर्मल कैश की तरह ऑनलाईन ट्रांजेक्शन में यूज किया जा सकता है, या फिर किसी डेबिड कार्ड की तरह ही डिजिटल कैश कार्ड में स्टोरी किया जा सकता है। साथ ही साथ जरूरत पडने पर उस डिजिटल कैश को किसी भी बैंक अकाऊंट में ट्रांशफर भी किया जा सकता है या फिर शॉपिंग की जा सकती है। इसकी सबसे बडी खसीयत यह होती है कि इसके लिए ना तो किसी भी प्रकार के ऑनरशिप डॉक्यूमेंट की जरूरत होती है और ना ही किसी भी बैंक के पास इसका कोई ट्रांजेक्शन रिकार्ड बैंक होता है। यानि धनराज या उसके साथी डिजिटल कैश कार्ड की हेल्प से मेरे बारे में कुछ भी पता नहीं कर सकते हैं। जिस कारण मेरा प्लान जानकर धनराज बुरी तरह से हैरान रह गया। उसे समझ ही नहीं आया वो मुझसे क्या कहे। इसलिए कुछ देर सोचने के बाद उसने कहा

धनराज- तुम मुझे कोई आम लड़की तो नहीं लग रही हो, और जिस तरह से तुमने यह सारा प्लान बनाया है, उस हिसाब से तुम कोई पुलिस बाली भी नहीं हो सकती। तो फिर आखिर तुम हो कौन

निशा- नाम में क्या रखा है मिस्टर धनराज, बस इतना समझ लो कि जुर्म की दुनिया में लोग मुझे ड्रैगन हार्ट के नाम से जानते हैं। अब बोलो क्या तुम्हें मेरी सारी शर्तें मंजूह हैं या नहीं।

मेरी बात सुनकर धनराज ने कुछ देर सोचा और फिर बोला

धनराज- ठीक है…. मुझे मंजूर है…

धनराज की बात सुनकर मैंने उसे वार्निंग देते हुए कहा

निशा- और हाँ मिस्टर धनराज अपनी नाजायज औलाद के साथ अपने किसी पालतू कुत्ते को भेजने की गलती मत करना। क्योंकि अगर मेरे वकील को या फिर जिसने वो शॉपिंग मॉल खरीदा है, उसे कोई प्राब्लम हुई, तो फिर तुम अंदाजा भी नहीं लगा सकते कि मैं तुम लोगों के साथ क्या कर सकती हूँ।

मेरी बात सुनकर धनराज डरते हुए बोला

धनराज- मुझपर यकीन करो…. ऐसा कुछ भी नहीं होगा। बल्कि सब कुछ उसी तरह से होगा जैसा तुमने मुझसे करने के लिए कहा है।

धनराज की बात खत्म होते ही मैंने तुरंत फोन कट कर दिया।

कहानी जारी है......
 
Update 054 -

इतने दिनों तक लगातार इंदौर आने जाने के कारण मेरी पहचान एक अच्छे एडवोकेट से हो गई थी। इसलिए मैंने उससे बोलकर मंत्री के उस शॉपिंग मॉल को अपने नाम ट्रांशफर करवाने की सारी फार्मेलिटी पहले ही पूरी करवा ली थी। बस उस शॉपिंग मॉल के आरीजनल डॉक्यूमेंट और ऑनर के सिग्नेचर की जरूरत थी। मैंने धनराज से उस शॉपिंग मॉल को किसी दूसरे व्यक्ति को बेचने की बात झूठ कही थी। क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि धनराज और मंत्री के किसी जान पहचान बाले और उनके परिवार बालों को यह पता चले कि वो शॉपिंग मॉल मैंने खरीदा है।

ताकि सबको ठिकाने लगाने के बाद मंत्री या धनराज का कोई जन पहचान बाला या उनके परिवार में से कोई उस शॉपिंग मॉल के ऑनर से बदला लेने ना आ जाये। मेरे इस एक झूठ से मेरा उनसे पूरा लिंक हमेशा के लिए खत्म हो गया था। साथ ही साथ धनराज से झूठ बोलने का दूसरा फायदा यह भी था कि वो लोग अच्छी तरह से समझ जायें कि उनका पाला किसी खतरनाक इंसान से पडा है। जिस कारण वो कोई गडबड ना कर सकें। धनराज का फोन कट करने के बाद मैंने इंदौर में अपने वकील को कॉल करके सारी बात समझा दी और रघू को भी कॉल करके अपने होटल में बापिस बुला लिया।

असल में जब से मरे और रघू के बीच पार्टनरशिप की बात हुई थी। तब से मेरी नजर उस शॉपिंग मॉल पर थी। थोडी बहुत मेहनत करने और कुछ पैसे खर्च करने के बाद ही मुझे उस शॉपिंग मॉल के असली ऑनर की पूरी जन्म कुण्डली मिल गई थी। जिसके बाद मैंने अपने बदला लेने बाले प्लान में थोडा चेंज करके धनराज और मंत्री से पैसों के साथ साथ उस शॉपिंग मॉल को हासिल करने का एक नया प्लान बनाया था। ताकि मैं रघू को उस शॉपिंग मॉल में अपना पार्टनर बनाकर उसकी मदद कर सकूँ।

उस शॉपिंग मॉल के बारे में मैं पहले ही रघू से बात कर चुकी थी। हमारी डील के अनुसार रघू मेरे साथ उस शॉपिंग मॉल में 10 परसेंट का पार्टनर होने के साथ साथ मैनेजर भी होगा। जिसकी सैलरी उसे अलग से दी जाऐगी। इसके लिए रघू खूशी खुशी मान गया था। वो अपनी होटल बाली जॉब कुछ दिन पहले ही छोड चुका था। जिस कारण मैंने उसे अपने इंदौर बाले मकान में ही रहने के लिए बोल दिया था। ताकि मेरे उस मकान की देखभाल होती रहे। हाँलाकि मैंने उस मकान में अपना अरबों रूपयों का खजाना छिपा रखा था। जिसके बारे में रघू को कुछ भी नहीं पता था।

असल में मेरे उस खजाने तक मेरी मर्जी के बिना कोई भी नहीं पहुँच सकता था। क्योंकि मैंने उस खजाने को अपने मकान के बेसमेंट में बने सीक्रेट रूप में छिपा कर रखा था। साथ ही साथ मैंने उस सीक्रेट रूम और बेसमेंट में जाने के लिए अलग से करीब 2 इंच मोटे लोहे के दरवाजे भी लगवाऐ थे। जिनमें नॉर्मल लॉक के साथ साथ बायोमैट्रिक लॉक भी लगे हुए थे। इसलिए मुझे उस खजाने के चोरी होने का कोई डर नहीं था। लेकिन 2 दिन पहले ही मैंने रघू को बापिस भोपाल बुला लिया था। ताकि वह मेरे दुश्मनों पर नजर रखने में मेरी हेल्प कर सके।

जिस कारण वह पिछले दो दिनोें से इसी होटल के एक दूसरे रूम में रह रहा था और आज सुबह सुबह ही वो धनराज पर नजर रखने के लिए चला गया था। लेकिन फिलहाल मुझे उसकी जरूरत इंदौर में थी। ताकि मैं उसे धनराज के नाजायज बेटे के सामने शॉपिंग मॉल के नए ऑनर के रूप में भेज सकूँ। बैसे भी मैंने अपने वकील से कहकर पहले ही रघू के नाम पर पॉवर ऑफ अटर्नी बनवा दी थी। ताकि वो मेरे बिहॉफ पर वह शॉपिंग मॉल खरीद सके। अपने वकील और रघू को कॉल करने के बाद मैं भी जल्दी से तैयार होने लगी और करीब 15 मिनट के बाद मैं अपनी कार से रघू के साथ इंदौर के लिए निकल गई।

इंदौर रजिस्ट्रार ऑफिस पहुँचकर मैं सबसे पहले अपने वकील से मिली, रघू मेरे वकील से पहले भी 3-4 बार मिल चुका था। जिस कारण वो दोनों एक दूसरे को अच्छी तरह से पहचानने लगे थे। अपने वकील से कुछ देर बात करने के बाद मैं रजिस्ट्रार ऑफिस से बाहर निकल गई और दूर से ही सारे मामले पर नजर रखने लगी। करीब आधे घंटे के बाद धनराज का बेटा भी वहाँ आ गया था। उसके वहाँ आते ही मेरे बकील ने बिना देर किए उस शॉपिंग मॉल का रजिस्ट्रेशन मेरे नाम करने की प्रॉसेस शुरू कर दी। इस दौरान शॉपिंग मॉल का रजिस्टेशन मेरे नाम ट्रांशफर होने में किसी भी प्रकार की कोई प्राब्लम नहीं हुई।

धनराज का बेटा वहाँ अकेला ही आया था। इसलिए सारा काम खत्म होने के बाद उसने शॉपिंग मॉल के पुराने ऑरीजनल ऑनरशिप डॉक्यूमेंट और 70 करोड रूपये का डिजिटल कैश कार्ड मेरे वकील को दे दिया था। जिसके बाद वो चुपचाप वहाँ से निकल गया। धनराज के बेटे के जाने के बाद मैं रघू और अपने बकील के पास जा पहुँची। मेरे वहां पहुँचते ही मेरे वकील ने सारे डॉक्यूमेंट और डिजिटल कैश कार्ड मुझे दे दिया। जिन्हें मैंने अपने हैण्ड बैग में संभाल कर रख लिया। इसके बाद मैंने अपने वकील को उसकी फीस साथ साथ एक्सट्रा दो लाख रुयये भी बोनस के रूप में दे दिऐ। जिससे वो कुछ ज्यादा ही खुश हो गया था। इसके बाद मैं रघू के साथ वापिस भोपाल के लिए निकल गई।

क्योंकि मुझे भोपाल में हरीश अंकल से मिलना था। असल में जब मैं इंदौर जा रही थी, तो रास्ते में मेरे पास उनका कॉल आया था। जैसा कि मैंने उम्मीद थी, जेलर योगेश के मर्डर में हरीश अंकल ने सबसे पहला शक मुझपर ही किया था। लेकिन मैंने इस मामले में अपना हाथ ना होने की बात उन्हें बता दी और साथ ही साथ इसका सबूत भी उन्हें देने का वादा किया। इसलिए भोपाल पहुँचकर मैंने रघू को होटल के बाहर छोडा और हरीश अंकल से मिलने चली गई। थोडे बहुत सबाल जबाब के बाद मैंने हरीश अंकल को एक पेन ड्राईब दी। जिसमें वही बीडियो सेव था जो मैंने पार्क में रिकार्ड किया था। उस बीडियो को देखने के बाद हरीश अंकल ने मुझसे सबाल किया

हरीश- आखिर यह बीडियो तुम्हारे पास आया कहाँ से…

निशा- मैंने सुबह न्यूज पर जब इस खबर को देखा था, तो मुझे उसी वक्त शक हो गया कि यह काम जरूर गनपत का होगा। लेकिन साथ साथ मुझे यह भी लग रहा था कि आप मुझपर भी शक कर सकते हैं। इसलिए मैं तुरंत उस पार्क में पहूँच गई। थोडी बहुत पूछताछ करने बाद मुझे एक लडके बारे में पता चला, जिसने उस पूरी घटना को अपने मोबाईल में रिकार्ड कर लिया था। जब मैं उसके पास पहुँची तो वो लडका यह बीडियो अपने दोस्तों को दिखा रहा था। इसलिए मैंने थोडे से पैसे देकर उस लडके से यह बीडियो ले लिया और उसके मोबाईल से इस बीडियो को डिलीट भी कर दिया। ताकि वो लडका इस बीडियो को किसी मीडिया बाले को देकर सनसनी ना फैला सके।

मेरी बात सुनकर हरीश अंकल की आंखों में चमक आ गई और वो मुस्कुराते हुए बोले

हरीश- वैरी गुड अमृता…. यह काम तुमने बहुत अच्छा किया। तुम्हारी इसी विशेषता के कारण ही तो मैं तुम्हें पुलिस फोर्स ज्वाईन करवाना चाहता था। हमारे इतने सारे काबिल पुलिस ऑफिसर ने घटना स्थल पर जाकर जाँच की थी। पर किसी के हाथ भी यह वीडियो नहीं लगा। लेकिन तुमने ना केवल इस बीडियो को हासिल कर लिया, बल्कि इसे मीडिया के हाथ लगने से भी बचा लिया।

निशा- लेकिन अंकल मैं आपके कहने पर आई.बी. ज्वाईन करने के लिए तैयार तो हो ही गई हूँ ना।

मेरी बात सुनकर हरीश अंकल मुस्कुराते हुए बोले

हरीश- हाँ वो तो है… बैसे मैंने तुम्हारे डॉक्यूमेंट अपने दोस्त के पास भेज दिए हैं। और जब मैंने उसे बताया कि तुम ही वो फेमस हैकर ड्रैगन हार्ट हो, तो वो तुरंत ही तुम्हें आई.बी. ज्वाईन कराने के लिए मान गया। वो तुमसे मिलना चाहता है। इसलिए जब तुम अपना यहाँ का काम खत्म करके दिल्ली बापिस जाओ, तो एक बार उससे मिल लेना और अपनी ज्वाईनिंग की प्रासेस भी पूरी कर लेना।

हरीश अंकल की बात सुनकर मै मुस्कुराते हुए बोली

निशा- ठीक है अंकल… बैसे अब तो आपको यकीन हो गया होगा कि मेरा जेलर योगेश के मर्डर में कोई हाथ नहीं है।

मेरी बात सुनकर हरीश अंकल थोडा झेंपते हुए बोले

हरीश- अरे अमृता कैसी बात कर रही हो तुम। भला मैं तुमपर शक कैसे कर सकता हूँ। मैंने तो वस नॉर्मली तुमसे सबाल किया था।

हरीश अंकल की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बोली

निशा- कोई बात नहीं अंकल। अब जब मैंने आपको अपनी बेगुनाही का सबूत दे दिया है। तो क्या अब मैं जा सकती हूँ। क्योंकि मुझे अभी कुछ जरूरी काम पूरे करने हैं।

मेरी बात सुनकर हरीश अंकल तुरंत बोले

हरीश- अरे हाँ हाँ क्यों नहीं…..

हरीश अंकल की परमीशन लेकर मैं तुरंत वहाँ से निकल गई और अपनी कार के अंदर जाते ही मैंने रंजीत को कॉल कर दिया। तब रंजीत ने मुझे बताया कि आज उसने अपने साभी साथियों को ठिकाने लगा दिया है। उसकी बात सुनकर मैने एक बार कंफर्म करने के बारे सोची। इसलिए मैं हरीश अंकल के ऑफिस से सीधे खण्डहर जा पहूँची। खण्डहर के बाहर मुझे कोई भी बाईक या कार गाडी खडी हुई दिखाई नहीं दी। जिससे मैंने अंदाजा लगाया कि फिलहाल उस खण्डहर के अंदर कोई भी नहीं है। लेकिन फिर भी पूरी साबधानी के साथ उस खण्डहर के अंदर जा पहूँची।

खण्डहर के आंगन में इस वक्त ढेर सारा खून बिखरा हूआ था। इसलिए मैं उस खून से बचते हुए कमरे के अंदर चली गई। मेरे पास एक छोटी सी टार्च थी। जिसे मैंने ऑन कर लिया और सीक्रेट रूम को खोल कर अंदर चली गई। उस सीक्रेट रूम में मुझे 21 आदमियों की लाशें दिखाई दीं। जिन्हें मैंने टार्च की रोशनी में अच्छी तरह से चैक किया। उनके चेहरे देखते ही मैं तुरंत उन सभी लोगों को को पहचान गई। क्योंकि वो लाशें उन लोगों की थीं, जिन्होंने कुछ दिनों पहले ही इसी खण्डहर में मुझे कुतिया बनाकर जबरदस्ती चुदाई की थी और मुझे दर्द से तडपता हुआ देखकर मजे ले रहे थे।

अब बस रंजीत के अलावा गनपत और उसके 4 पाटनर्स ही जिंदा बचे थे। इसलिए मैं उस सीक्रेट रूम से बाहर निकल आई और उस सीक्रेट रूम का दरवाजा अच्छी तरह से बंद करके खण्डहर से बाहर निकल गई। अब जब मेरे पास वहां रुके रहने की कोई बजह नहीं थी। इसलिए मैं अपनी कार में बैठकर बापिस अपने होटल आ गई। अगले दिन सुबह सुबह रघू के मेरे कमरे से बाहर जाते ही धनराज का मेरे पास कॉल आया। तो मैंने उसे खण्डहर के सीक्रेट रूम का रास्ता बता दिया और साथ में सारा माल उसी रूम में होने की बात भी उसे बता दी। मैं जानती थी कि मेरी बात कंफर्म करने के बाद धनराज और मंत्री जी उस खण्डहर में जरूर जाऐंगे।

इसलिए मैंने रंजीत को एस.पी. महेश को योगेश के कातिल की जानकारी देने के बहाने खण्डहर में बुलाने के लिए कहा। रंजीत की कॉल कट करके मैं तुरंत तैयार होकर खण्डहर के लिए निकल गई और उन सबके आने से पहले ही ऐसी जगह जाकर छिप गई जहाँ से कोई मुझे देख ना पाऐ। लेकिन मैं खण्डहर के अंदर और बाहर दोनों जगह एक साथ नजर रख सकूँ। मैंने अपनी कार पहले ही झाडियों में छिपा दी थी। जैसा की मैंने सोचा था। मेरे आने के कुछ ही देर बाद मंत्री और धनराज भी वहाँ आ गए थे। उस खण्डहर के ाआँगन में चारों तरफ खून बिखरा हुआ देखकर वो दोनों बुरी तरह से डर गए थे।

लेकिन पैसों के लालच ने उन्हें इतना अंधा कर दिया था कि वो बिना किसी बात की परवाह किये उस सीक्रेट रूम में चले गए। लेकिन वहाँ इतनी सारी लाशों के ढेर को देखकर उनकी हालत खराब हो गई थी। इससे पहले वो लोग वहाँ से भाग पाते, रंजीत उस खण्डहर में एस.पी. महेश को लेकर आ गया। उस खण्डहर के आँगन में इतना सारा खून बिखरा हुआ देखकर और मंत्री प्रकाश राज के साथ धनराज को वहाँ देखकर एस.पी. महेश को उन दोनों पर शक हो रहा था। ठीक तभी मेरे मोबाईल पर रघू का मैसेज आया। जिसमें लिखा था कि गनपत और जफर वहाँ आ रहे हैं।

असल में आज मैं खण्डहर में आने से पहले रघू को भी अपने साथ लाई थी और उसे मैंने जंगल के रास्ते में एक सुरक्षित जगह पर उतार दिया था। ताकि वो उस रास्ते से आने बाले लोगों पर नजर रख सके और मुझे जानकारी दे सके। आज मैं अपने सभी दुशमनों का किस्सा हमेशा के लिए खत्म करने बाली थी। इसलिए मैंने रात को ही रंजीत से कहकर जफर के पास यह खबह पहुँचा दी थी कि मंत्री प्रकाश राज, धनराज और एस.पी. महेश को उसके खण्डहर बाले सीक्रेट रूम के बारे में सब पता चल गया है औऱ वो लोग आज ही सारा माल खण्डहर से गायब करने बाले हैं।

मैं जानती थी कि यह बात पता चलते ही गनपत और जफर बिना किसी बात की परवाह किए तुरंत यहाँ आ जाऐंगे। जब सुबह धनराज का मेरे पास कॉल आया था, तो उससे पहले ही मुझे रंजीत ने बता दिया था कि जफर और गनपत भोपाल आ चुके हैं। बस इसीलिए मैंने धनराज को खण्डहर का सीक्रेट बता दिया था और रंजीत से कहकर एस.पी. महेश को भी वहाँ बुलवा लिया था। मैं चाहती थी कि वो सभी लोग लगभग एक साथ ही इस खण्डहर में पहूँचें। ताकि इतने सारे आदमियों की मौत का जिम्मेदार वो एक दूसरे को समझें और आपस में ही लडने लगें।

इसी बीच मैं हरीश अंकल को इस खण्डहर की लोकेशन बता पुलिस फोर्स यहाँ बुलवा लूँगी। जिससे इनकाऊंटर में सभी लोग एक साथ मारे जाऐं। इसलिए जैसे ही मेरे पास रघू का मैसेज आया तो मैंने हरीश अंकल को यहाँ खण्डहर में पुलिस फोर्स भेजने के लिए मैसेज कर दिया। साथ ही साथ मैंने गनपत और जफर के यहाँ होने की जानकारी भी उन्हें मैसेज करके दे दी थी, इसके बाद मैंने मीडिया बालों को भी मैसेज करके इसकी जानकारी दे दी थी। फिर मैं अपने मोबाईल में बीडियो रिकार्डर ऑन करके पूरी घटना रिकार्ड करने लगी।

कहानी जारी है ............
 
Update 055 -

धनराज और मंत्री अंदर लाशों का ढेर देखकर कुछ ज्यादा ही डर गए थे। ठीक तभी उन्हें खण्डहर के आंगन में एस.पी. महेश रंजीत के साथ दिखाई दिया। मैंने धनराज को एक बीडीयो दिखाया था। जिसमें रंजीत खण्डहर में कुछ आदमियों को छिपकर जान से मार रहा था। इसलिए रंजीत को एस.पी. महेश के साथ देखकर धनराज को लगा कि एस.पी. महेश ही रंजीत से कहकर सभी लोगों को मरवा रहा है। यानी एस.पी. महेश पहले से ही गनपत और जफर से मिला हुआ है। इस सबके बारे मेंं सोचते ही धनराज ने तुरंत अपनी रिवॉल्वर निकालकर एस.पी. महेश पर तान दी और बोला

धनराज- अच्छा हुआ महेश तू यहां खुद ही आ गया और हमें तेरा असली चेहरा पता चल गया। तू ही है ना जो इस रंजीत से कहकर अपने सभी आदमियों को मरवा रहा है। लगता है तू भी जफर और गनपत से मिला हुआ है।

धनराज की बात सुनकर महेश गुस्से से बिफरता हुआ बोला

महेश- यह क्या वकवास कर रहा है तू धनराज। मैंने किसी को नहीं मरवाया है। लेकिन तुम दोनों यहाँ क्या कर रहे हो और इस खण्डहर में इतना सारा खून क्यों बिखरा हुआ है। सच सच बताओ आखिर तुम लोगों ने क्या किया है यहाँ पर।

धनराज- हमने कुछ भी नहीं किया है। लेकिन तूमने जरूर हमारे साथ गद्दारी की है और रही बात हमारी यहाँ आने की, तो पहले तू बता कि तू यहाँ क्यों आया है।

महेश- मैं तो यहाँ पर योगेश के हत्यारे की तलाश करने आया था। कहीं तुम लोगों ने ही तो योगेश को नहीं मरवाया है।

धनराज- बकवास मत करो महेश। योगेश को हमने नहीं बल्कि तुमने मरवाया है और तेरे साथ जो आदमी है, आज मैं उसे जिंदा नहीं छोडूँगा

इतना बोलकर धनराज ने रंजीत पर गोली चला दी। जो सीधे उसके सिर पर जाकर लगी। रंजीत को कुछ भी सोचने समझने का मौका ही नहीं मिला और वो अपने बाकी साथियों के साथ यमराज के दरवार में हाजरी लगाने जा पहूँचा। रंजीत के मरते ही एस.पी. महेश ने भी अपनी गन निकाल कर मंत्री और धनराज की तरफ तान दी और गुस्से में बोला

महेश- यह तुमने क्या किया धनराज। यह योगेश की मौत का चश्मदीद गवाह था, तूने इसे मार दिया। यानि यह बात तो पक्की है कि तूम लोगों ने ही योगेश को मरवाया है।

एस.पी. महेश की बात सुनकर मंत्री प्रकाश राज बीच बचाव करते हुए बोला

प्रकाश राज- यह सब तुम क्या कर रहे हो महेश। हम तीनों पाटनर्स हैं, इसलिए गन नीचे करो

महेश- नहीं पहले धनराज से कहो कि वो अपनी गन नीचे फेंके

धनराज- नहीं महेश पहले तू अपनी गन फेंको, वर्ना में सच में गोली चला दूँगा

धनराज के इतना बोलते ही महेश ने धनराज पर एक साथ दो गोलियां चला दी, जो धनराज के सीने के आर पार हो गई। गोलियाँ लगते ही धनराज किसी कटे पेड की तरह नीचे जमीन पर जा गिरा। उसके सीने से खून का फब्बारा निकलने लगा था। अचानक से उसका शरीऱ अकडा और फिर वो एकदम ठण्डा पड गया। मंत्री प्रकाश राज यह सब देखकर पूरी तरह से हैरान रह गया। धनराज उसका सबसे करीब दोस्त था। प्रकाश राज उसे अपने छोटे भाई जैसा मानता था। जिसे आज एस.पी. महेश ने उसकी ही आँखों के सामने मार दिया।

मंत्री प्रकाश राज पर यह बरदास्त नहीं हुआ और उसने गुस्से में आकर अपनी गन निकाल ली, इससे पहले एस.पी. महेश मंत्री प्रकाश राज के इरादे समझ पाता, मंत्री प्रकाश राज एक के बाद एक लगातार गोलियाँ एस.पी. महेश पर चालने लगा। वो तब तक गोलियाँ चालाता रहा जब तक कि उसकी सारी गोलियाँ खत्म नहीं हो गई। गोलियाँ खत्म होते ही उसे होश आया कि उसने क्या कर दिया है। इसलिए डर के कारण मंत्री प्रकाश राज के हाथ से गन नीचे गिर गई।

उसने अपने चारों तरफ देखा तो वहाँ कोई भी नहीं था। इसलिए मंत्री प्रकाश राज ने चुपचाप वहाँ से भाग जाना ही ठीक समझा। लेकिन जैसे भी वो खण्डहर से बाहर जाने बाले दरवाजे के पास पहूँचा, ठीक तभी जफर और गनपत भी वहाँ आ गए। इस वक्त उन दोनों के हाथों में गन थी, जो उन्होंने मंत्री प्रकाश राज के ऊपर तान रखी थी। शायद उन दोनों ने खण्डहर के बाहर से ही गोलियाँ चलने की आवाजें सुन ली थी। गनपत और जफर को वहाँ देखकर मंत्री प्रकाश राज की हालत बुरी तरह से खराब हो गई थी।

इससे पहले मंत्री जी कुछ बोल बाते गनपत और जफर की नजर आंगन में डली रंजीत, धनराज और महेश की लाशों पर पडी। जिसेे देखकर उन्हें यह समझते देर नहीं लगी कि अंदर क्या हुआ है। रंजीत उन्का सबसे खास आदमी था और उसी ने उन दोनों को मंत्री और बाकी लोगों की गद्दारी के बारे में बताया था। यानि रंजीत ने जो कुछ कहा था, वो सब सच था। बस यही सोचने ही उन दोनों ने मंत्री के कुछ भी कहने से पहले ही उसपर गोलियाँ चला दीं। जिस कारण मंत्री प्रकाश राज भी अपने साथियों की तरह ही यमपुरी की यात्रा पर निकल पडा।

मंत्री के मरते ही दोनों भागते हुए कमरे के अंदर चले गए। लेकिन अंदर के हालात देखकर तो उनके होश ही उड गए थे। उनका सारा माल वहाँ से गायब हो चुका था और उनके सीक्रेट रूम में लाशों का ढेर लगा हुआ था। जो अब सडने लगीं थी और उनमें से बहुत गंदी बदबू आ रही थी। ठीक तभी मेरे पास रघू का मैसेज आया, जिसमें लिखा था कि पुलिस फोर्स आ चुकी है। उस मैसेज को पढकर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गई। क्योंकि मेरे आखिरी बचे दोनों दुश्मनों का अंत भी बस होने ही बाला था। इसलिए मैंने अपने मोबाईल का रिकार्डर ऑफ कर दिया और चुपचाप वहाँ से निकल गई।

मैं जानती थी कि पुलिस फोर्स को आने में अभी कुछ समय लगेगा। तब तक मैं आसानी से अपनी कार तक पहूँच सकती थी। जब मैं अपनी कार में पहूँची ठीक तभी मुझे रघू का एक और मैसेज आया, जिसमें लिखा था कि मीडिया बालों की गाडियाँ आ रहीं है। तब तक पुलिस बालों ने उस खण्डहर को चारों तरफ से घेर लिया और एक इन्काऊंटर स्पेस्लिस्ट टीम खण्डहर के अंदर जाने की तैयारी करने लगी। ठीक तभी वहाँ पर मीडिया बालों की गाडियाँ भी आ गईं थी। इससे पहले वो लोग कुछ समझ पाते खण्डहर के अंदर से गोलियाँ चलने की आवाजें आने लगी।

गोलियों की आवाज सुनते ही सारे मिडिया बाले लाईव कवरेज करते हुए खण्डहर की तरफ भागे। इसी बीच मैंने मौके का फायदा उठाते हुए झाडियों से अपनी कार बाहर निकाली और जंगल से बाहर जाने बाले रास्ते पर आगे बड गई। कुछ दूर चलते ही मैंने अपनी कार रोक दी। तभी झाडियों के पीछे से रघू बाहर आया और मेरी बगल बाली सीट पर बैठ गया। रघू के बैठते ही मैंने फिर से कार आगे बड़ा दी। जब तक मेरी कार हाईवे पर नहीं पहूँच गई, तब तक मैंने रघू से कोई बात नहीं की।

लेकिन जैसे ही मैं हाईवे पर पहूँची तो मैंने अपनी कार रोड के एक साईड खडी कर दी। इसके बाद धनराज के बॉडीगार्ड का मोबाईल फोन मैंने वहीं झाडियों में फेंक दिया। क्योंकि अब मुझे उसकी कोई जरूरत नहीं थी। इसके बाद मैंने अपने मोबाईल में रिकार्ड किया गया बीडियो हरीश अंकल को सेंड कर दिया। इसके बाद मैंने अपने मोबाईल में न्यूज चैनल ऑन करके अपना मोबाईल सामने डैसबोर्ड पर सेट कर दिया। इसके बाद मैं बापिस से अपनी कार चलाने लगी। लेकिन इसवार मेरी कार की स्पीड काफी कम थी। न्यूज चैनल पर खण्डहर में चल रहे इन्काऊंटर की लाईव कवरेज आ रही थी।

कुछ ही देर बाद न्यूज चैनल पर जफर और गनपत के इन्काऊंटर में मारे जाने की खबर आने लगी। जिसे सुनकर मेरे चेहरे की मुस्कान और भी ज्यादा गहरी हो गई थी। क्योंकि मेरे सारे दुश्मन आखिरकार मारे गए थे। ठीक तभी खण्डहर के आँगन की लाईव फुटेज चलने लगी, जिसमें आंगन के बीचों बीच 4 लाशें पडीं हुईँ थी और दो लाशें खण्डहर के कमरे के दरवाजे पर पडीं हुईँ थीं। जैसे ही आंगन में पडीं लाशों के चेहरे मीडिया बालों ने देखे, तो मंत्री प्राकश राज, बिजिनैसमैन धनराज और एस.पी. महेश के मारे जाने की सनसनी खेज न्यूज चलने लगी। जिसे सुनकर रघू बोला

रघू- अमृता मैडम आखिर यह सब तुमने किया कैसे

निशा- मैंने तो बस उन सभी पाटनर्स के बीच एक दूसरे के लिय़ शक पैदा किया था। बाकि का काम तो उन लोगों ने खुद ही कर दिया। यानि मैंने बिना किसी को सुई चुभाये अपने सारे दुश्मनों से बदला ले लिया है।

मेरी बात सुनकर रघू हैरान होते हुए बोला

रघू- आखिर तुम्हारा दिमाग है या कम्प्यूटर

रघू की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बोली

निशा- मेरे पास तो बस दिमाग है मिस्टर रघू। बैसे भी कम्प्यूटर तो इंशानों ने बानाये हैं। इसलिए वो इंशानों के दिमाग का मुकाबला कैसे कर सकते हैं।

रघू- कुछ भी हो... लेकिन तुम हो बहुत ज्यादा खतरनाक

निशा- यह दुनिया सीधे इंसान को जीने नहीं देती मेरी जान। मैं जानती थी कि मैं बिना किसी को हाथ लगाए अपना बदला ले सकती हूँ। बस इसीलिए मैंने तुम्हें इस मामले में सामिल नहीं किया था।

रघू- सही है... बैसे भी अगर इस तरह से बदला लिया जाऐ, तो भला किसी को हेल्प की जरूरत क्यों पडने लगी।

हम अभी आपस में बातें कर ही रहे थे कि तभी न्यूज चैनल में उस खण्डहर के सीक्रेट रूम के बारे में और उसमें मिली लाशों के बारे में खबर आने लगी। अब यह मामला कुछ ज्यादा ही सनसनी खेज बन गया था। क्योंकि वहाँ पर अब तक कुल 27 लाशें मिल चुकी थीं, जिनमें से 21 लाशें सीक्रेट रूम में सड रहीं थी। उस सीक्रेट रूम में प्लास्टिक के कुछ बॉक्स भी मिले थे। जिसमें बहुत कम मात्रा में ड्रग था। जिसे देखकर पुलिस ने अंदाजा लगाया कि शायद वहाँ पर ड्रग छिपाकर रखी गई होगी।

असल में यह वहीं ड्रग थी, जो मैंने गगन के घर से चुराई थी और जिसे मैंने बाद में जानबूझकर उन खाली बॉक्स के अंदर रख दिया था। ताकि पुलिस को लगे कि यह ड्रग स्मगलिंग का मामला है ना कि गोल्ड और डायमण्ड का। साथ ही साथ उस खण्डहर के पास एक खाई में कई सारी बाईक और दो कार भी मिली थीं। जब ड्रग और उन 21 लाशों की न्यूज देखकर रघू ने हैरानी से मुझे देखा तो मैंने लापरवाही से उससे कहा

निशा- मुझे उन लाशों के बारे में कुछ नहीं पता है, शायद उन पाटनर्स में से किसी ने वहाँ छिपाई होंगी। लेकिन ड्रग की जानकारी मुझे पहले से ही थी। जिसे मैंने कुछ दिनोें पहले ही जला दिया था। पर पता नहीं कैसे कुछ पैकेट्स वहाँ रह गये

मेरी बात सुनकर रघू मुस्कुराता हुआ बोला

रघू- यह तो अच्छा ही हुआ कि वो ड्रग के पैकेट्स वहाँ रह गए। अब पुलिस और मीडिया इस पूरे खून खरावे को ड्रग स्मगलिंग से जोड देगी। जिस कारण किसी का भी शक अब इस बात पर नहीं जायेगा कि आखिर इन पाटनर्स के बीच झगडा क्यों हुआ और इतने ज्यादा खून खराबे के पीछे असल कारण क्या है।

निशा- हाँ शायद तुम ठीक कह रहे हो। खैर अब छोडा यह सब और आज ही इंदौर के लिए निकल जाओ। हमें जल्द से जल्द अपना शॉपिंग मॉल शुरू करना है।

रघू- ठीक है मैं आज शाम की बस से इंदौर के लिए निकल जाऊँगा।

निशा- बस से जाने की कोई जरूरत नहीं है। तुम मेरी कार अपने साथ ले जाना। बैसे भी मुझे एक दो दिनो में दिल्ली के लिए निकलना है।

इतना बोलने के बाद मैंने अपने पर्स में से डिजीटल कैश कार्ड निकाल कर रघू को देते हुए कहा

निशा- इसे अपने पास रखो… इसमें पूरे 70 करोड रूपये हैं, मेरे ख्याल से शॉपिंग मॉल शुरू करने के लिए इतने पैसे काफी हैं, लेकिन अगर और पैसों की जरूरत हो तो मुझे बता देना। मैं तुम्हारे पास पैसे भिजवा दूँगी। और हाँ अपना हुलिया भी बदल लेना, अब तुम किसी होटल में काम करने बाले साधारण इम्प्लॉय नहीं हो, बल्कि मेरे पार्टनर और शॉपिंग मॉल के मैनेजर हो। इसलिए तुम्हें थोडा स्टैण्डर मैनटेन करना होगा।

रघू मुझसे वह कार्ड लेते हुए बोला

रघू- ठीक है अमृता मैडम… इस कार्ड में से जो भी पैसे खर्च होंगे मैं उसका हिसाब किताब आपके पास भेज दूँगा, लेकिन अब आप इंदौर कर आऐँगी

निशा- मुझे अभी अपने कुछ पर्सनल मैटर सुलझाने हैं। जिसमें पता नहीं कितना समय लगे, लेकिन फिर भी मैं जल्द से जल्द वहाँ आने की पूरी कोशिश करूँगी, और अगर मुझे बापिस आने में कुछ ज्यादा ही समय लगा, तो भी मैं अपने शॉपिंग मॉल की ओपनिंग के समय मैं एक दो दिन के लिए जरूर वहाँ आऊँगी। लेकिन तुम किसी भी बात की चिंता मत करना… अगर तुम्हें किसी भी चीज की जरूरत हो तो तुरंत मुझे कॉल कर देना।

रघू- ठीक है….

अब तक हम भोपाल पहुँच चुके थे। चूँकि दोपहर हो चुकी थी और हमने अब तक कुछ भी नहीं खाया था। इसलिए मैंने कहा

निशा- तो फिर चलो किसी अच्छे से रेस्टोरेंट में चलकर कुछ खा लेते हैं, क्योंकि मुझे बहुत जोरों से भूख लगी है और हाँ आज का बिल पेमेंट तुम करोगे। क्योंकि तुम अब एक शॉपिंग मॉल के मैनेजर और मेरे पार्टनर बन चुके हो।

मेरी बात सुनकर रघू थोडा चिढते हुए बोला

रघू- लेकिन मेरे सैलरी तो अब तक मुजे मिली ही नहीं

निशा- अरे बाबा अभी तो मैंने तुम्हें कार्ड दिया है।

रघू- लेकिन वो तो शॉपिंग मॉल की जरूरतों को पूरा करने के लिए है। मैं उसका यूज अपने पर्सनल जरूरतों तो पूरा करने के लिए नहीं कर सकता।

निशा- अरे बाबा कोई बात नहीं है…. उस कार्ड में से तुम जो भी पर्सनल खर्चा करोगे, उसका हिसाब अलग से लिख लेना और बाद में अपनी सैलरी में से वो पैसे काट लेना।

मेरी बात सुनकर रघू कुछ सोचते हुए बोला

रघू- उम्म ठीक है…..

कुछ ही देर वाद मैंने एक रेस्टोरेंट के बाहर अपनी कार पार्क कर दी जिसके बाद हम दोनों रेस्टोरेंट के अंदर खाना खाया और फिर अपने होटल बापिस आ गए। उसी शाम रघू मेरी कार लेकर इंदौर चला गया। मेरे ऑफिस के सारे काम पहले ही खत्म हो गए थे और मैंने अपने दुश्मनों से बदला भी ले लिया था। इसलिए अब मेरे पास भी यहाँ भोपाल में रुके रहने का कोई बहाना नहीं था। अब मुझे अपने पर्सनल मैटर निपटाकर अपनी नई पहचान अपनानी थी। जिसके लिए मुझे दिल्ली जाना जरूरी था।

कहानी जारी है......
 
Update 056 -

रघू के जाने के बाद मैं भी दिल्ली जाने के लिए अपनी पैकिंग करने लगी। सारी पैकिंग होने के बाद मैंने अगले दिन दिल्ली जाने के लिए ट्रेन का टिकिट भी बुक कर लिया था। अब चूँकि मेरे पास करने के लिए कोई काम नहीं था, और अभी रात के सिर्फ 9 बजे थे। इसलिए मैं अपने होटल के पास ही बने बियर बार में चली गई और एक खाली टेविल पर बैठकर बियर पीने लगी। तभी मेरे पास रवि की कॉल आई। मैंने जैसे ही उसका कॉल रिसीव किया तो दूसरी तरफ से आवाज आई

रवि- अमृता आज पूरे दिन से तुम आखिर कहाँ थी… मैं आज सुबह से तुम्हें कितनी बार कॉल कर चुका हूँ। लेकिन तुमने मेरी कॉल रिसीव ही नहीं की।

रवि की बात सुनकर मुझे याद आया कि आज सच में उसने मुझे कई बार कॉल किया था। लेकिन सुबह खण्डहर में अपने दुश्मनों को ठिकाने लगाने और उसके बाद रघू के साथ टाईम स्पेंड करने के कारण मैंने उसकी कॉल रिसीव नहीं की थी। इस बारे में याद आते ही मैंने रवि से कहा

निशा- सॉरी यार…. वो असल में मुझे कल बापिस दिल्ली के लिए निकलना है। जिस कारण जाने से पहले मैं अपने ऑफिस के कुछ जरूरी काम निपटाना था। बस इसलिए मैं पूरे दिन से अपना फोन साईलेंट करके अपने काम में बिजी थी।

रवि- ओह अच्छा…. तो फिर अभी कहाँ हो तुम

निशा- मेरे होटल के पास ही जो बियरवॉर है, उसी में बैठकर बियर पी रही हूँ।

रवि- तो फिर तुम वहीं रुको, मैं बस 5 मिनट में आता हूँ।

इतना बोलकर रवि ने कॉल कट कर दिया। रवि की बात सुनकर मैं समझ गई कि उसे मेरा यूँ अचनाक दिल्ली जाना अच्छा नहीं लग रहा है। पर मुझे कभी ना कभी तो दिल्ली बापिस जाना ही था। लेकिन अब रवि के बारे में सोचकर मेरे दिल में ख्याल आया कि क्यों ना दिल्ली जाने से पहले मैं अपनी एक रात रवि के साथ बिताऊँ। आखिर उसने भोपाल में मेरा काफी साथ भी तो दिया है और वो मेरा एक अच्छा दोस्त भी बन गया है। बैसे भी वो तो पता नहीं कबसे इसी मौके के इंतजार में बैठा हुआ है।

अब जब मैं इतने सारे मर्दों से चुद चुकी हूँ तो अपने अच्छे दोस्त से चुदने में आखिर क्या बुराई है। मेरी इतनी मदद करने के बदले में मैं उसके साथ एक रात तो बिता ही सकती हूँ। मैं अभी इस बारे में सोच ही रही थी कि तभी रवि भी वहीँ आ गया। वो इस वक्त थोडा उदास दिखाई दे रहा था। इसलिए मैंने उसके लिए भी एक बीयर आर्डर कर दी और फिर उससे बात करने लगी। हम दोनों काभी देर तक यूँ ही आपस में ढेर सारी बातें करते रहे। इस बीच हम दोनों ही पर्याप्त नशे में आ चुके थे।

इसलिए हम दोनों वहाँ से बाहर निकल आऐ। बाहर आकर जब मैंने अपने मोबाईल में समय देखा तो रात के करीब 12 बजने बाले थे। इसलिए रवि मुझे मेरे होटल रूम तक छोडने मेरे साथ आया था। ताकि मेरे नशे में होने के कारण कोई मेरे साथ कोई गलत हरकत ना कर पाऐ। मुझे मेरे होटल रूम के बाहर तक छोडने के बाद जैसे ही रवि जाने लगा तो मैंने उसे आज रात मेरे राथ रुकने का ऑफर दिया। मेरी बात सुनकर उसके चेहरे पर चमक आ गई थी। वो तो जैसे इसी पल का इंतजार कर रहा था। तब तक मैं अपना रूम अनलॉक कर चुकी थी।

इसलिए जैसे ही हम दोनों ने रूम के अंदर जाकर दरवाजे को को अंदर से लॉक किया। ठीक तभी हम दोनों एक दूसरे से लिपट गए और एक दूसरे को बेतहाशा चूमने लगे। नशे में होने के साथ साथ हम दोनों काफी एक्साईटेड भी थे। क्योंकि यह हम दोनोें के बीच पहला सेक्स होने बाला था। हम दोनों ही पूरी सिद्दत के साथ एक दूसरे को चूम रहे थे साथ ही साथ एक दूसरे के बदन को सहला भी रहे थे। जिस कारण हमारे अंदर लगातार उत्तेजना बडती जा रही थी। तभी रवि ने मेरे कपडे उतारने शुरू कर दिए। क्योंकि वो मेरे शरीर पर अब कोई भी कपडा बरदास्त नहीं कर पा रहा था।

इसी बीच मैं भी उसके कपडों पर टूट पडी। हमारी वासना अब पूरी तरह से भडक चुकी थी। इसलिए बिस्तर पर जाने से पहले ही हमारे कपडे नीचे जमीन पर बिखर गए थे और जब हम बिस्तर पर पहूँचे तो हमें किसी बात का कोई होश ही नहीं रहा। रवि के प्यार करने का अंदाज औरों से थोडा अलग था। वो सेक्स के दौरान थोडा वाईल्ड हो जाता था। जो मुझे काफी पसंद आया था। यह मेरे लिए एक नऐ प्रकार का अनुभव था। जिस कारण मैं भी प्यार के इस खेल में उसका पूरा साथ दे रही थी।

काफी देर तक एक दूसरे को चूमने और सहालने के बाद आखिरकार रवि ने अपना मूसल जैसा लण्ड मेरी चूत में घूसा ही दिया। रवि का इतना बड़ा और मोटा लण्ड अपनी चूत में लेकर मुझे एक अलग ही मजा आ रहा था। जिस कारण मैं भी अपनी कमर हिला हिला कर उसका पूरा साथ दे रही थी। कुछ देर तक तो रवि मुझ पर पूरी तरह से हावी रहा। लेकिन जैसे ही मुझे महसूस हुआ कि मैं अब झरने बाली हूँ, तो मैंने उसे अपने नीचे कर दिया और खुद उसके ऊपर आकर मजे लेने लगी।

जैसे ही मैं झरी तो रवि दोवारा मुझपर हावी हो गया और उसने मुझे फिर से अपने नीचे कर दिया। हमारे बीच यह सिलसिला काफी देर तक चलता रहा। आखिरकार रवि ने अपना सारा पानी मेरी चूत में छोड दिया और फिर हम दोनों एक दूसरे से लिपट कर सो गए। अगले दिन सुबह सुबह एक बार फिर रवि शूरू हो गया। आज मेरा एम.पी. में आखिरी दिन था। इसलिए मैंने उसे नहीं रोका और उसे मनमानी करने दी। करीब 1 घण्टे बाद जब उसने अपना पानी मेरी चूत में छोड दिया, तो वो मुझसे अलग होने के बाद अपने कपडे पहनकर वहाँ से चला गया।

रवि के जाने के बाद मैं एक बार फिर से सो गई। करीब 11 बजे के आस पास मैं जागी और बाथरूम में फ्रैस होने के लिए चली गई। इसके बाद मैं तैयार होकर अपने सभी दोस्तों से मिलने चली गई। मैंने आज अपना पूरा दिन अपने दोस्तों के साथ ही बिताया था और रात को होटल से चैकआऊट करने के बाद रवि मुझे रेलवे स्टेशन पर छोडने गया था। लेकिन मेरी ट्रेन लेट थी, इसलिए मैंने रवि को बापिस जाने के लिए बोल दिया और अपनी ट्रेन का इंतजार करने लगी। रवि के जाने के कुछ देर बाद ही मेरी ट्रेन कैंसिल होने का अनाऊंसमेंट होने लगा।

जिस कारण एक बार फिर मेरे सामने फिर वही सिचुऐशन थी, जो करीब 2 महिने पहले थी। उस दिन भी मेरी ट्रेन कैंसिल होने के कारण, मुझे भोपाल में रुकना पडा था और फिर मैंने अपनी सारी हदें पार कर दी थी। आज एक बार फिर मेरी ट्रेन कैंसिल हो गई थी, पर आज मैंने दिल्ली बापिस जाने का पक्का इरादा कर लिया था। इसलिए मैंने इंक्वारी पर जाकर पूछताछ की तो मुझे पता चला कि आधे घण्टे बाद दिल्ली के लिए दूसरी ट्रेन आने बाली है। पर उसमें मुझे कोई सीट नहीं मिली थी। जिस कारण मजबूरी में मैंने जनरल बोगी में सफर करने का फैसला कर लिया था।

बैसे भी मेरे पास ज्यादा सामान नहीं था। मैंने यहाँ भोपाल में जो भी शॉपिंग बगैरह की थी, वो सब सामान मैंने अपने इंदौर बाले मकान में ही छोड दिया था। मैं अपने साथ बस वही सामान बापिस लेकर जा रही थी, जो मैं दिल्ली से यहाँ लाई थी। बस मेरा नया मोबाईल फोन और इंदौर बैंक का डेबिड कार्ड जरूर मेरे पास था, साथ ही सात अमृता चौहान के ऑरीजनल डॉक्यूमेंट भी मेरे पास थे। जिनकी जरूरत मुझे आई.बी. ज्वाईन करने के लिए थी।। ट्रेन आने के बाद मैंने जैसे ही जनरल बोगी को देखा तो मेरी साँसे ही अटक गईं, असल में वो जरनल बोगी पूरी तरह से खचाखच भरी हुई थी, जिसे देखकर एक बार तो मेरे मन में अपना दिल्ली जाने का इरादा छोडने का ख्याल आया।

लेकिन मुझे दिल्ली तो जाना ही था, बैसे भी आज 15 दिसम्बर था और 25 दिसम्बर को मुझे इम्पलॉय ऑफ दा ईयर का अवार्ड मिलने वाला था। बैसे तो मैंने पहले ही अपनी जॉब से रिजाईन करने का फैसला कर लिया था। लेकिन अब मैं अपना इम्पलॉय ऑफ दा ईयर का अवार्ड लेने के बाद ही रिजाईन करने बाली थी। इसके अलावा अमन भी बापिस आने बाला था। इसलिए मुझे उससे डायवोर्स लेने की तैयारी भी करनी थी। बस इसीलिए इतनी भीड होने के बाद भी, मैं जैसे तैसे उस जनरल बोगी में चड ही गई।

बोगी के अंदर बैठने बाली सारी सीटें पहले से ही फुल थीं और बाकी जगह में भी आदमी खडे हुए थे। इसलिए मैं गेट के पास ही दोनों टॉयलेट के बीच बाली खाली जगह में जाकर खडी हो गई। फिलहाल वहाँ ज्यादा भीड नहीं थी। हाँलाकि दोनों टॉयलेट से गंदी बदबू आ रही थी। पर फिलहाल मेरे पास इससे अच्छा कोई दूसरा उपाय नहीं था। मैंने सोचा की 4-5 घंटे की बात है। बैसे भी ट्रेन चलने पर बदबू आना बंद हो जाऐगी। मैंने इस वक्त टॉप स्कर्ट के ऊपर एक जैकेट पहनी हुई थी। जिसमें मैं कुछ ज्यादा ही सेक्सी लग रही थी। ऊपर से मैं जहाँ खडी थी, वहाँ कोई भी लेडीज नहीं थी।

जिस कारण वहाँ खडे ज्यादातर आदमी मुझे ही घूर रहे थे। जिसे देखकर मुझे काफी मजा आ रहा था। लेकिन जैसे ही ट्रेन स्टार्ट हुई तो मेरी हालत खराब हो गई। क्योंकि ट्रेन के गेट खुले होने के कारण ठण्डी हवा अंदर आ रही थी। जो मेरे स्कर्ट के अंदर जा रही थी। जिस कारण मुझे अपने पैरों में काफी ज्यादा ठण्ड महसूस हो रही थी। लेकिन अब इतने सारे आदमियों के बीच मैं अपनी स्कर्ट उतारकर जींस पहनने की हिम्मत नहीं कर पा रही थी। इसलिए मैंने सोचा कि क्यों ना टॉयलेट में जाकर चेंज कर लूँ। लेकिन जैसे ही मैंने टॉयलेट ओपन किया तो देखा उसके अंदर भी चादर बिछा कर कुछ लोग बैठे हुए हैं।

जिस कारण मैंने फिर से टॉयलेट बंद कर दिया। लेकिन ट्रेन जैसे ही अगले स्टॉप पर रुकी तो कुछ और आदमी उस बोगी में चड गए। फिलहाल मेरे आस पास काफी जगह थी। जिस कारण ज्यादातर आदमी वहीं मेरे आगे खाली जगह में खडे हो गए थे। मेरे पीछे पहले से ही 4 लडके खडे हुए थे। जिस कारण मैं अब और ज्यादा पीछे नहीं जा सकती थी। लेकिन भीड ज्यादा होने के कारण मुझे मजबूरी में पीछे खिसकना पडा। जिस कारण मैं पीछे खडे एक लडके से जाकर चिपक गई। हाँलाकि मुझे यह सब थोडा अजीब लग रहा था। लेकिन इतनी ज्यादा भीड एक साथ अंदर आने का एक फायदा जरूर हुआ था। असल में उस बोगी में अब पहले से बहुत कम हवा अंदर आ रही थी।

जिस कारण मुझे ठण्ड से थोडी राहत मिल गई। लेकिन एक नई मुसीबत मेरे सामने खडी थी। अब मेरी गाँड मेरे पीछे खडे लडके से टकरा रही थी। जिस कारण कुछ ही देर में उस लडके का लण्ड एक दम कडक हो गया था। जो मैं अपनी गाँड पर महसूस कर सकती थी। मुझे पूरा यकीन था कि अगर कुछ देर तक मैं ऐसे ही खडी रही तो वो लड़का पक्का अपना कंट्रोल खोकर मेरे साथ छेडछाड शुरू कर देगा और मैं इतनी भीड में मैं कुछ कर भी नहीं पाऊंगी। कुछ ही देर बाद जैसा कि मैने सोचा था उस लडके ने अपना लण्ड मेरी गाँड पर रगडना शूरू कर दिया था।

जिस कारण मुझे अपने शरीर में एक अजीब से सनसनाहट महसूस होने लगी थी। इसलिए मैंने उस लडके से थोडा आगे होने की कोशिश की, लेकिन मेरे सामने खडे आदमी से मेरे बूब्स चिपक गए थे। जिस कारण मैंने मन ही मन सोचा की 4-5 घंटे का सफर है, और इतनी भीड में वो लड़का मेरे साथ ज्यादा कुछ कर भी नहीं पायेगा। इसलिए बेमतलब की टेंशन लेने से अच्छा है कि मैं उस लडके को मेरी गाँड से अपना लण्ड रगडकर मजा लेने दूँ। बैसे भी जब मैं इतने लोगों से चुदवा चुकी हूँ। तो फिर एक और लड़का अगर मेरी गाँड से अपना लण्ड रगड भी लेगा तो इससे मेरा क्या बिगड जाऐगा, बल्कि इससे तो मेरी भी थोडा बहुत टाईम पास हो जाऐगा।

यह सब सोचते ही मैं बापिस से थोडा पीछे खिसक गई। मेरे पीछे खिसकते ही उस लडके ने एकबार फिर से अपनी हरकत शूरू कर दी। लेकिन इस बार मैंने उसे रोकने या उससे बचने की कोई कोशिश नहीं की। जिस कारण उस लडके की हिम्मत कुछ ज्यादा ही बड गई थी, जिस कारण उसने मेरी कमर पर अपने दोनों हाथ रख दिए। अब तक मैं भी पूरे मजे लेने के मूड में आ चुकी थी। इसलिए मैं चुपचाप खडी होकर मजे ले रही। मेरी कमर पर हाथ रखकर वो लडका पूरी तरस से मुझसे चिपक गया था, जिसमें मुझे भी काफी ज्यादा मजा आ रहा था।

कहानी जारी है ......
 
Update 057 -

कुछ देर बाद उसने अपने हाथों से हरकत करनी शूरू कर दी और अपना एक हाथ मेरे टॉप के अंदर डाल कर मेरे पतले ओर चिकने पेट को सहलाने लगा। मेरे तो पूरे शीरर में सनसनाहट दौड गई। कुछ देर मेरे पेट को सहलाने के बाद उसने अपने हाथ को उपर खिसकाना शूरू कर दिया। आज मैंने अपने टॉप के अंदर ब्रा की जगह मात्र कैमिसोल पहना हुआ था, जिस कारण उसका हाथ बिना किसी प्राप्लम के आसानी से मेरे बूब्स तक पहूँच गया। लेकिन उस लडके ने जैसे ही मेरे बूब्स को छुआ, तो मेरी तो हालत ही खराब हो गई थी। इससे पहले मैं उसे कुछ करने से रोकती, उसने अपना दूसरा हाथ भी मेरे टॉप के अंदर डाल कर मेरे दोनों बूब्स को पकड लिया और उन्हें सहलाने लगा।

उस लडके कि हरकतों से मैं पूरी तरह से उत्तेजित हो गई थी और मेरी सांसें भी अब तेज तेज चलने लगी थी। तभी अचानक से उस लडके ने पीछे से ही मेरी गर्दन को किस करना शुरू कर दिया। जिस कारण मैं अब पूरी तरह से पागल होने लगी थी और खुद ही अपनी गाँड उस लडके के लण्ड पर रगने लगी थी। मेरा बैग जो अब तक मेरे हाथों में था, उसे अब मैंने नीचे फर्स पर एक साईड रख दिया था। क्योंकि उस लडके की हरकतों के कारण मुझे अब वो बैग अपने हाथों में थामे रखना मुश्किल हो रहा था।

कुछ देर तक मेरे यूँ ही मजे लेने के बाद उस लडके ने अपना हाथ फिर से नीचे की तरफ सरकना शूरू कर दिया और कुछ ही देर में उसका एक हाथ मेरी कमर तक आ पहुँचा था। इसके बाद वो लड़का अपनी उंगलियों को मेरी स्कर्ट की इलास्टिक के अंदर घुसाने की कोशिश करने लगा। पहले तो मैंने इसपर कोई ध्यान नहीं दिया था, क्योंकि मैं पहले से ही उस लडके की हरकतों से काफी एक्साईटेड हो चुकी थी। लेकिन जब तक मुझे एहसास हुआ कि वो क्या करने बाला है, तब तक काफी देर हो चुकी थी और मेरे रोकने से पहले ही उस लडके ने अपना पूरा हाथ मेरी स्कर्ट के अंदर घुसा दिया था।

जिस कारण उस लडके का हाथ मेरी पैंटी के ऊपर से होते हुए मेरी चूत तक जा पहूँचा था। उस लडके का हाथ अपनी चूत पर महसूस करते ही अचानक मेरे पूरे शरीर में करंट दौड गया गया और मैंने तुरंत ही अपना एक हाथ उस लडके के हाथ के ऊपर रखकर उसे कुछ की करने से रोक दिया। लेकिन वो अपनी उंगलियों को मेरी चूत के ऊपर धीर धीरे चलाने लगा, जो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था और मुझपर एक अजीब सा नशा छाने लगा था। जिस कारण कुछ ही देर में मेरे हाथ की पकड ढीली हो गई। जिसका फायदा उठाकर उस लडके ने अपना हाथ छुडाकर मेरी पैंटी के अंदर डाल दिया।

अब मैं कुछ भी नहीं कर सकती थी। क्योंकि अब सिचुऐशन पूरी तरह से उसके हाथ में थी। वो लड़का अपने हाथ से काफी देर तक मेरी चूत को सहलाता रहा। जिस कारण मेरी चूत अब गीली होने लगी थी। आखिरकार मैंने भी अपने आप को ढीला छोड दिया और मजे लेने लगी। वो लड़का काफी देर तक मेरे शरीर को यूँ ही सहलाता रहा। इस दौरान कितना समय बीत गया और ट्रेन कितने स्टेशन पर रुकी, इसका मुझे कोई अंदाजा नहीं था। काफी देर तक मेरे भरपूर मजे लेने के बाद वो लड़का भी पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था और अब वो बस किसी भी तरह अपने आप को शांत करता चाहता था।

इसलिए उसने अपने पैंट की जिप खोल कर अपना लण्ड बाहर निकाला और पीछे से मेरा स्कर्ट उठाकर मेरी पैंटी नीचे खिसकाने लगा। उस लडके की इस हरकत को देखकर मैं तुरंत समझ गई कि अब वो लड़का क्या करने बाला है। लेकिन मैं इस चलती ट्रेन में और इतने सारे लोगों के बीच चुदना नहीं चाहती थी। इसलिए मैंने अपने दोनों हाथों से अपनी पैंटी पकड ली और उसे नीचे करने से रोक दिया, मेरी इस हरकत को देखकर वो लड़का मेरे कान के एकदम पास आकर धीरे से फुसफुसाया

लड़का- जब इतनी देर से मजे ले रही हो, तो फिर अब नखरे क्यों दिखा रही हो

उस लडके की बात सुनकर मैं भी धीमी आवाज में फुसफुसाई

निशा- नहीं नहीं…. यह सब मत करो। ऊपर ऊपर से जो मजे लेने हो, बस वही ले लो

लड़का- लेकिन अब मुझपर कंट्रोल नहीं हो रहा है

निशा- पागल हो क्या.... कितने सारे लोग हैं यहाँ। किसी को पता चल गया तो… नहीं नहीं मैं इतने सारे लोगों के सामने यह सब नहीं करने दे सकती

मेरी बात सुनकर वो लडका मुझे समझाने की कोशिश करते हुए बोला

लड़का- अरे किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा। बैसे भी सभी लोंगों का मूंह दूसरी तरफ है और यहाँ अंधेरा भी है।

निशा- नहीं प्लीज अब कुछ भी मत करो, बर्ना मैं शोर मचा दूँगी

मेरी बात सुनकर वो लडका डर के कारण कुछ पलों के शांत खडा रहा, लेकिन कुछ देर बाद वो एकबार फिर धीमे से फुसफुसाया

लड़का- अरे यार इतने नखरे क्यों दिखा रही हो, चाहो तो पैसे ले लो

पैसों की बात सुनते ही अचानक से मेरे अंदर की रण्डी जाग गई। पता नहीं मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा था, लेकिन जबसे मैंने भोपाल में रण्डी बनकर चुदाई करवाई थी, तब से पैसों की बात सुनकर ही मेरे अंदर की रण्डी जाग जाती थी और मेरे सोचने का नजरिया बदल जाता था। आज एक बार फिर मेरे साथ यही हुआ था। जैसे ही उस लडके ने पैसे देने की बात की तो मैंने मन ही मन सोचा,

“जब इतना सब करवा ही लिया है, तो आगे भी इस लडके को कुछ करने से रोकने का कोई मतलब नहीं है।”

बैसे भी मैं उस लडके की हरकतों से काफी उत्तेजित हो गई थी। इसलिए मैं बोली

निशा- ठीक है… लेकिन आराम से करना

मेरी बात सुनकर वो लडका खुश होते हुए बोला

लड़का- तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो…. बस मजे लो

निशा- पहले पैसे

लड़का- हाँ हाँ ये लो

इतना बोलकर उस लडके ने अपने बॉलेट में से 500 रूपये के कुछ नोट निकाल कर मेरे हाथों में थमा दिए। जिन्हें मैंने बिना गिने ही अपनी जैकेट की अंदर बाली पॉकेट में रख लिए। इतनी देर में बो लड़का मेरी पैंटी नीचे खिसका चुका था और अब उसका लण्ड मेरी नंगी गांड के से टकरा रहा था। इसके बाद उस लडके ने अपने एक हाथ से मेरी कमर को मजबूती से पकडा और दूसरे हाथ से अपना लण्ड मेरी चूत पर सेट करने के बाद अपने लण्ड का दबाव मेरी चूत पर लगाना शुरू कर दिया।

खडे होने के कारण मेरी चूत के दोनों लिप्स आपस में जुडे हुए थे। जिस कारण मेरी चूत काफी टाईट हो गई थी। इसलिए उस लडके का लण्ड मेरी चूत के अंदर जाने पर मुझे काफी दर्द हो रहा था, साथ ही साथ मुझे उसका लण्ड काफी मोटा और बड़ा भी महसूस हो रहा था। जब काफी देर तक कोशिश करने के बाद भी उसका लण्ड मेरी चूत में नहीं घूसा तो उसने अपने साथ खडे दो लडकों से इशारों में कुछ कहा। जिसके बाद उस लडके के साथ खडे दो लडके मेरे बगल से होते हुए ठीक मेरे सामने आकर खडे हो गए। अब मेरे पीछे बस दो लडके खडे हुऐ थे, साथ ही साथ वहाँ कुछ जगह खाली भी हो गई थी। जिसके बाद वो लड़का मेरे कान के पास आकर एकबार फिर फुसफुसाया

लड़का- अब पर्याप्त जगह खाली हो गई है। इसलिए अब अगर तुम कुतिया बन जाओगी, तो सब कुछ आराम से हो जायेगा। बैसे भी अब तुम्हारे आगे मेरे ही दोस्त खडे हुए हैं, इसलिए किसी को कुछ पता भी नहीं चलेगा।

मुझे भी उस लडके का यह आईडिया ठीक लग रहा था। इसलिए मैं बिना कुछ कहे चुपचाप खाली जगह में घुटनों के बल बैठ गई। इसके बाद मैंने अपना बैग ठीक अपने सामने खिसका लिया और उसपर अपने दोनों हाथ और सिर को रखकर मैं किसी कुतिया की तरह खडी हो गई। मेरे कुतिया बनते ही वो लड़का भी मेरे पीछे घुटनों के बल बैठ गया। इसके बाद उसने मेरी स्कर्ट दोबारा से मेरी कमर के ऊपर कर दी और मेरी कमर को मजबूती के साथ अपने दोनों हाथों से पकडकर अपना लण्ड मेरी चूत से टिका दिया।

मैं अच्छी तरह से जनती थी कि अब बस मेरी चुदाई शुरू होने ही बाली है और उस लडके के बाकी के दोस्त मेरी लाईव चुदाई देखकर अपनी आँखें सेंकने बाले हैं। इसलिए मैंने शर्म के कारण अपनी आँखें बंद कर ली। कुछ ही देर बाद उस लडके ने एक बार फिर अपना लण्ड धीरे धीरे मेरी चूत में घूसाना सुरू कर दिया। लेकिन इस बार उसका लण्ड आसानी से मेरी चूत के अंदर चला गया था। जैसे ही उसका पूरा लण्ड मेरी चूत में गया, तो ना चाहते हुए भी मेरी एक हल्की सी चीख निकल गई।

निशा- आआआहहहहहह

मेरे यूँ चीखते ही उस लडके ने तुरंत मेरे मूँह पर अपना हाथ रख दिया और धीमी आवाज में फुसफुसाया

लड़का- अरे बेबकूफ लडकी मरवाओगी क्या… चिल्ला क्यों रही हो

इतना बोलकर उस लडके ने जैसे ही मेरे मूंह से अपना हाथ हटाया तो मैंने धीमी आवाज में उसे डाँटते हुए कहा

निशा- दर्द होगा तो क्या करूँगी। तुम थोडा आराम से नहीं कर सकते थे क्या

लड़का- चलो ठीक है जो हो गया सो हो गया। अब आराम से करूँगा। लेकिन अब तुम बिल्कुल भी आबाज मत करना। बर्ना जितने लोग याहँ खडे हैं, तुम उन सबको झेल नहीं पाओगी।

इतना बोलते ही उस लडके ने अपनी कमर हिलाकर मेरी चुदाई शुरू कर दी। हाँलाकि मुझे अभी भी थोडा थोडा दर्द हो रहा था। पर मैं किसी भी तरह से उस दर्द को बरदास्त करते हुए बिल्कुल चुपचाप अपनी चुदाई करवाती रही। करीब 5 मिनट की चुदाई के बाद ही मेरी चुत पानी छोडने लगी, जिस कारण कुछ ही देर बार मेरा दर्द पूरी तरह से गायब हो गया और अब मुझे भी इसमें मजा आने लगा था, इसलिए मैं भी अपनी कमर हिला हिलाकर उसका साथ देने लगी। वो लड़का काफी देर तक यूँ ही मेरी चूदाई करता रहा। इस दौरान मैं 3 बार झर चुकी थी और मेरी चूत से रिस्ता मेरा पानी जाँघों से होता हुआ मेरी पेंटी तक जा रहा था। जो अब पूरी तरह से गीली हो चुकी थी।

आखिरकार उस लडके ने अपनी स्पीड बड़ा दी, जिसे देखकर मैं समझ गई कि अब बो भी झरने बाला है। करीब 5 मिनट और जबरदस्त चुदाई करने के बाद उस लडके ने अपना सारा पानी मेरी चूत अंदर छोड दिया। चलती ट्रेन में इतने सारे लोगों के बीच चुदाई करवाने से मैं मुझे काफी मजा आया था। लेकिन जैसे ही वो लड़का मुझसे अलग हुआ तो उसके पास ही खड़ा दूसरा लड़का मेरे पीछे आ गया और मेरी कमर पकड कर अपना लण्ड मेरी चूत पर टिका दिया। जिसे देखकर मैं बुरी तरह से चौंक गई और तुरंत पलट कर उससे बोली

निशा- नहीं नहीं.... यह तुम क्या कर रहे हो

लडका2- वही जो मेरे दोस्त ने किया है

निशा- पागल हो क्या... जो हो गया सो हो गया। बस अब और नहीं

लडका2- क्यों पालतू में नखरे कर रही हो... इतनी देर से तेरी चुदाई देख देख कर मेरी हालत पहले से ही खराब हो गई है। अब तुम फालतू में नखरे दिखाकर टाईम खराब कर रही हो। फ्री में थोडे ही कर रहा हूँ।

इतना बोलकर उस दूसरे लडके ने भी अपने बॉलेट से कुछ पैसे निकाल कर मुझे थमा दिए, जो मैंने चुपचाप अपने जैकेट की अंदर बाली पॉकेट में ऱख लिए और बोली

निशा- ठीक है कर लेना। लेकिन कुछ देर तो मुझे रेस्ट करने दो

लडका2- रेस्ट बाद में करती रहना। मुझपर अब और कंट्रोल नहीं होगा।

इतना बोलकर उस लडके ने बिना मेरा जबाब सुने अपना लण्ड मेरी चूत में घुसा दिया। अब मैं कुछ नहीं कर सकती थी, इसलिए मैं चुपचाप कुतिया की तरह खडी अपनी चुदाई करवाती रही। उस लडके के हटते ही उनके बाकी के दो दोस्त जो मेरे आगे खडे हुए थे वो मेरे पीछे आ गए और जिन दो लडकों ने अभी अभी मेरी चुदाई की थी, वो मुझसे आगे जाकर खडे हो गए। यह सब देखकर मैं समझ गई कि अब ऐ दो लडके भी मेरी चुदाई किये बिना नहीं मानेंगे। इसलिए मैं चुपचाप पहले की ही तरह कुतिया बनकर खडी रही। जैसा कि मैंने सोचा था, उन लडकों ने भी बारी बारी मेरी चुदाई की और मुझे पैसे भी दिए।

जब बो चारों लडके मेरी चुदाई कर चुके तो मैंने अपनी पैंटी फिर से पहन ली और खडी हो गई। लेकिन तभी मेरे आगे खडे तीन आदमी उन लडकोंं को आगे की तरफ धकेलते हुए मेरे पास आ गए। उन लोगों में वो आदमी भी शामिल था जो पहले मेरे आगे खड़ा हुआ था और जिसकी पीठ से मेरे बूब्स बार बार टकरा रहे थे। मेरे पास आकर वो तीनों आदमी भी मेरे साथ छेडछाड करने लगे। जिस कारण मैं उन्हें रोकने की नाकामा कोशिश करने लगी, तभी एक आदमी धीमी आवाज में बोला

आदमी- अरे मैडम नखरे क्यों दिखा रही हो। हमें पता है कि पीछे क्या चल रहा था। चुपचाप पैसे लो और हमें मजे करने दो।

उस आदमी की बात सुनकर मैं समझ गई कि अब मैं बुरी तरह फंस गई हूँ। अगर मैंने उनकी बात नहीं मानी, तो हो सकता है ऐ लोग वाकी लोगों के सामने मेरी पोल खोल दें। जिससे मेरी बडी बेइज्जती होगी। हालाँकि उनमें से कोई मेरी जान पहचान का नहीं था। पर फिर भी चलती ट्रेन में सबके सामने मैं शर्म के कारण खडी होने लायक भी नहीं रहती, साथ ही साथ पता नहीं कितने और दावेदार मेरी चुदाई करने के लिए खडे हो जाते। क्योंकि मेरी जहाँ तक नजर जा रही थी, वहाँ तक शिर्फ मर्द ही मर्द दिखाई दे रहे थे।

कहानी जारी है......
 
Update 058 -

कुछ देर तक अपनी स्थिती के बारे में अच्छी तरह से सोचने के बाद मुझे उन तीनों आदमियों की बात चुपचाप मान लेना ही ठीक लग रहा था। इसलिए मैं उनसे बोली

निशा- ठीक है… लेकिन अब और किसी को इस बारे में पता नहीं चलना चाहिए

आदमी- नहीं चलेगा मेरी जान...... अब जल्दी से पहले की तरह कुतिया बन जाओ

उस आदमी का बात मानते हुए मैं फिर से कुतिया बनकर खडी हो गई। मेरे कुतिया बनते ही वो आदमी भी मेरी पीछे जाकर घुटनों के बल बैठ गया। इसके बाद उसने मेरी स्कर्ट कमर के ऊपर करके मेरी पैंटी को भी नीचे सरका दिया दिया और बिना देर किए अपना लण्ड मेरी चूत में एक ही झटके में घुसाकर मेरी चुदाई शुरू कर दी। शायद वो आदमी कुछ ज्यादा ही उत्तेजित था, जिस कारण वो किसी मशीन की तरह लगातार मेरी चूदाई किए जा रहा था। करीब 30-35 मिनट की धुँआधार चुदाई के बाद जैसे ही उसका पानी निकला, तो वो मुझसे अलग हो गया और पैसे देकर मुझसे आगे जाकर खड़ा हो गया।

पहले आदमी के मुझसे अलग होते ही दूसरा आदमी मेरी गाँड के पीछे जाकर घुटनों के बल बैठ गया और बिना देर किए अपना लण्ड मेरी चूत में घुसाकर पूरी ताकत के सात मेरी चुदाई करने लगा। इस तरह चलती ट्रेन में चुदने पर मुझे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे में कोई सडक छाप कुतिया हूँ और कई सारे आवारा कुत्ते मुझे चोदने के लिए मेरे पीछे पडे हुए हैं। हाँलाकि इस तरह चुदने में मुझे काफी मजा आ रहा था, लेकिन इसके साथ साथ डर के कारण मेरी गांड भी फट रही थी। अभी दूसरे आदमी को मेरी चुदाई करते हुए कुछ ही समय हुआ था कि तभी अचानक से ट्रेन के अंदर हलचल बड गई और दरवाजे खिडकियों से काफी ज्यादा रोशनी अंदर आने लगी। जिसे देखकर में समझ गई कि हम दिल्ली पहूंचने बाले है। ठीक तभी पहला आदमी हमारी तरफ मुडकर बोला

आदमी- जल्दी करो स्टेशन आने बाला है।

उस आदमी की बात सुनकर दूसरे बाले आदमी ने अचानक से अपनी स्पीड बड़ा दी। अब मेरी गाँड बहुत बुरी तरह फटने लगी थी। क्योंकि स्टेशन पहुँचने तक अगर उस आदमी का काम नहीं हो पाया और ट्रेन खाली होने के दौरान बाकी लोगों की नजर मुझपर पड गई, तो पता नहीं क्या होगा। शायद यही कुछ मेरी चुदाई करने बाला आदमी भी सोच रहा था। जिस कारण वो अपनी पूरी ताकत से मेरी चुदाई करने में बिजी था। तभी ट्रेन की स्पीड कम होने लगी। जैसे जैसे ट्रेन की स्पीड कम हो रही थी। बैसे बैसे मेरी चुदाई करने बाले आदमी की स्पीड बडती ही जा रही थी, और फिर अचानक से ट्रेन रूक गई।

ठीक तभी मेरी चुदाई करने बाले आदमी का पानी भी मेरी चूत के अंदर गिरने लगा। जिससे मैंने एक राहत की सांस ली। वो आदमी कुछ पलों तक मुझसे यूँ ही चिपका रहा, ताकि उसका सारा पानी मेरी चूत के अंदर समा जाऐ। इस दौरान उस बोगी में भरे आदमी धीरे धीरे स्टेशन पर उतरने लगे थे। इसलिए जैसे ही वो आदमी मुझसे अलग हुआ तो मैंने तुरंत अपनी पैंटी ठीक की और उठकर खडी हो गई। मेरे खडे होते ही दूसरा आदमी मुझे पैसे देकर उस बोगी से बाहर निकल गया। लेकिन अभी भी एक आदमी मुझे चोदे बिना ही रह गया था। पर अब उसका कुछ भी नहीं हो सकता था।

इसलिए मैंने तुरंत पैसे अपनी जैकेट की पॉकेट में रखे और अपना बैग उठाकर बोगी से बाहर निकल गई। इस वक्त मेरी पूरी पैंटी ढेर सारे बीर्य और मेरी चूत से निकले पानी के कारण गीली हो गई थी। साथ ही साथ कुछ पानी मेरी चूत से रिस्ता हुआ मेरी जाँघों तक भी आ गया था। जिस कारण मुझे चलने में काफी दिक्कत हो रही थी। पर फिर भी मैं जैसे तैसे रेलवे स्टेशन से बाहर निकली और अपने घर जाने के लिए ऑटो देखने लगी। मैंने मोबाईल में समय देखा तो इस वक्त रात के 3 बज रहे थे। जिस कारण कोई भी ऑटो बाला मेरे एरिया में जाने के लिए तैयार नहीं था।

बडी मुश्किल से एक ऑटो बाला मेरे साथ चलने के लिए तैयार तो हुआ। लेकिन वो मेरी कॉलोनी के अंदर जाने की जगह कॉलोनी के बाहर बाले चौराहे तक ही जाने के लिए तैयार हुआ था। हाँलाकि उस चौराहे से मेरा फ्लैट ज्यादा दूर नहीं था। इसलिए मैं भी तुरंत ही तैयार हो गई। बैसे भी मेरे पास उसकी बात मानने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था। जैसे ही मैं ऑटो मैं बैठी, ठीक उसी वक्त मेरे साथ साथ एक आदमी भी उस ऑटो में घुस गया। जब मैंने उस आदमी को देखा, तो मैं बुरी तरह से चौंक गई। असल में यह वही तीसरा आदमी था जो ट्रेन में मुझे चोद नहीं पाया था। उस आदमी को अपने साथ ऑटो में बैठता देखकर मैं हैरान होते हुए बोली

निशा- त त तुम.... तुम क्या कर रहे हो मेरे ऑटो में

आदमी3- मेरा काम किये बिना आखिर तुम कैसे जा सकती हो

निशा- देखो मिस्टर… जो कुछ भी होना था वो हो गया। अब कुछ भी नहीं होने बाला

आदमी3- लेकिन जब तक मेरा काम नहीं होता, मैं तुम्हारा पीछा नहीं छोडने बाला

उस आदमी की बात सुनकर मैं गुस्से में चिढते हुए बोली

निशा- तुम पागल तो नहीं हो गए हो... ट्रेन में जो कुछ हुआ, वो बस गलती से हुआ था

आदमी3- मैं कुछ नहीं जानता... मेरा काम करो उसके बाद जहाँ जाना है चली जाना

निशा- अब यहाँ कहाँ पर मैं तुम्हारा काम करूँ

आदमी3- देखते हैं कहीं ना कहीं तो कोई सुनसान जगह मिलेगी ही

निशा- पागल हो क्या.... और यह क्या बकवास कर रहे हो। अगर उस ऑटो बाले को शक हो गया तो

आदमी3- तो क्या वो भी मजे ले लेगा

उस आदमी की बात सुनकर मैं समझ गई कि यह आदमी मुझे चोदे बिना नहीं छोडेगा लेकिन दिल्ली स्टेशन पर ऐसी कोई जगह भी नहीं थी जहाँ मैं उससे चुपचाप चुदवा लूँ। क्योंकि दिल्ली स्टेशन पर काफी ज्यादा भीड भाड रहती है। इसके अलावा मैं उसे अपने घर भी नहीं ले जा सकती थी। तभी मुझे आईडिया आया कि जहाँ ऑटो बाला मुझे ड्रॉप करने बाला है। वहीं पास में ही एक पार्क है। जिसमें मैं अक्शर सुबह सुबह घूमने जाया करती थी। वो पार्क सुबह 6 बजे से पहले ओपन नहीं होता है। लेकिन उस पार्क के पीछे की तरफ बाऊंड्री का एक छोटा सा हिस्सा टूटा हुआ है। जहाँ से आसानी से अंदर जा सकते हैं। इतनी रात को उस पार्क में कोई भी नहीं होगा। तो क्यों ना वहीँ इस ठरकी आदमी को ठण्डा कर दूँ। यही सब सोचकर मैंने उससे कहा

निशा- ठीक है कर लेना… बैसे मेरी नजर में एक जगह है। लेकिन जब तक हम वहाँ पहुँच नहीं जाते तब तक चुपचाप बैठे रहो।

मेरी बात सुनकर बो आदमी चुपचाप बैठ गया। कुछ ही देर में उस ऑटो बाले ने खुद ही उस पार्क के पास अपना ऑटो रोक दिया और बोला

ड्रायबर- यह जगह तुम लोगों के लिए बिल्कुल ठीक रहेगी। इस वक्त पार्क के अंदर कोई भी नहीं होगा

उस ड्रायवर की बात सुनकर मैंने चिढकर उससे कहा

निशा- तुम अपने काम से मतलब रखो

ड्रायवर- वही तो कर रहा हूँ मैडम

उस ड्रायबर की बात सुनकर मैं चौंकते हुए बोली

निशा- मतलब

ड्रायवर- मतलब वस इतना सा है कि ठण्ड का मौसम है। इसलिए अपने दोस्त का काम होने के बाद मुझे भी मौका दे देना

उस ड्रायवर की बात सुनकर मैं चिढते हुए बोली

निशा- बकवास मत करो

ड्रायबर- इसमें बकवास करने बाली कौन सी बात है। तुम्हारी जैसी सैकडों रण्डियों से रोज पाला पडता है मेरा। जो अपने पैसे बडवाने के लिए तुमहारी तरह ही भाव खाती हैं। चुपचाप अपना रेट बताओ। मैं पूरे पैसे दूँगा तुम्हारे

ड्रायबर की बात सुनकर मैंने सोचा जब इतने लोगों से चुदवा ही लिया है तो अब इसे क्यों मना करूँ। बैसे भी अभी काफी रात बाकी है। इन दोनो को तो मैं हैण्डिल कर ही सकती हूँ। यही सोचकर मैंने कहा

निशा- अच्छा ठीक है। लेकिन मैं पूरे 5 हजार लूँगी

ड्रायवर- ठीक है… लेकिन मैं भी पूरे मजे लूँगा

निशा- हाँ हाँ कर लेना जो भी करना है

ड्रायवर- मैं तेरी गाँड भी मारूँगा, मैं वर्ना तुम बाद में नखरे दिखाओ

निशा- अरे बाबा मार लेना… लेकिन मैं तेरे ऑटो का किराया नहीं दूँगी

ड्रायवर- अरे मेरी जाना किराया माँग कौन रहा है तुझसे।

निशा- तो फिर ठीक है… अब जल्दी से पार्क के अंदर चलो तुम दोनों। क्योंकि कुछ ही देर बाद पार्क खुलने के बाद यहाँ अच्छी खासी भीड भाड हो जायेगी।

मेरी बात सुनकर उस ऑटो ड्रायवर ने अपना ऑटो दीवार के उस टूटे हुए हिस्से के एकदम सामने पार्क कर दिया। ताकि किसी की नजर दीवार के उस टूटे हुए हिस्से पर ना पडे। उसके बाद हम तीनो पार्क के अंदर चले गए। पार्क के अंदर एकदम अंधेरा था, इसलिए मेरे साथ आये उन दोनों आदमी ने अपने अपने मोबाईल की फ्लैश लाईट ऑन कर ली थी। जिसकी रोशनी में हम झाडियों के पीछे एक साफ सुथरी जगह पर जा पहूँचे। वहाँ जाकर मैं बिना देर किए नीचे जमीन पर कुतिया बन कर खडी हो गई। जिसके तुरंत बाद ही मेरे साथ आया आदमी भी मेरी गाँड के पीछे घुटनों के बल बैठ गया।

फिर उसने बिना देर किए मेरी स्कर्ट को ऊपर उठाकर मेरी पेंटी नीचे खिसका दी और बिना देर किये अपना लण्ड मेरी चूत में घुसाकर मेरी चुदाई शुरू कर दी। पार्क के अंदर उस खुली जगह पर मुझे काफी ठण्ड लग रही थी। लेकिन चुदाई करने के कारण धीरे ठण्ड लगनी बंद हो गई। वो आदमी फुल स्पीड में मेरी चुदाई कर रहा था। शायद उसे भी वहाँ किसी और के आने का डर था। करीब आधे घंटे तक धुँआधार तरीके से मेरी चूत की धज्जियाँ उडाने के बाद उसने अपना पानी मेरी चूत में छोड दिया। इसके बाद वो मुझसे अलग हुआ और मुझे पैसे देकर तुरंत उस पार्क से बाहर निकल गया।

उस आदमी के बारह जाते ही ड्रायवर भी बिना देर किए किसी आवारा कुत्ते की तरह मेरे ऊपर सबार होकर मेरी चुदाई करने लगा। करीब 15 मिनट तक फुल स्पीड में मेरी चुदाई करने के बाद जैसे ही मेरा पानी निकला तो उस ऑटो ड्राईबर ने अपना लण्ड मेरी चूत से बाहर निकालकर मेरी गाँड में घुसा दिया। इन कुछ दिनों में मैं गाँड इतनी बार मरवा चुकी थी कि अब मुझे चुदने और गाँड मरवाने में कोई फर्क ही महसूस नहीं होता था। इसलिए अब मैं दोनों को ही पूरी तरह से इंजॉय करने लगी थी।

बस गाँड मरवाने में एक ही दिक्कत थी कि गांड मारने से पहले अगर गाँड में और लण्ड में कोई ऑईल बगैरह ना लगाया जाये, तो गाँड मरवाने में बहुत दर्द होता था। अब इस समय पार्क में तो ऑईल मिल नहीं सकता था। शायद इसी बजह से उस ड्रायवर में कुछ देर मेरी चुदाई की थी। ताकि मेरी चुत के पानी से उसका लण्ड चिकना हो जाए। ताकि मुझे गाँड मरवाने में कोई दिक्कत ना हो। शायद उस ऑटो ड्रायवर को पहले से ही इस सबका अच्छा खासा एक्सपीरियंस था। इसलिए उसने बडे आराम से पूरे मजे लेकर मेरी गाँड मारी थी और आखिर में अपना सारा पानी मेरी गाँड में छोडकर मुझसे अलग हो गया। फिर वो भी मुझे पैसे देकर पार्क से बाहर निकल गया।

उस ड्रायवर के जाते ही मैं जैसे ही खडे होने बाली थी कि तभी अचानक किसी आदमी ने मुझे पीछे से पकड लिया और मेरी चूत पर अपना लण्ड रगडने लगा। अचानक हुए इस हमले से मेरी बुरी तरह गाँड फट गई थी। पहले तो मुझे लगा कि शायद पार्क ओपन होने का समय हो गया है और सुबह सुबह पार्क में घूमने आऐ किसी आदमी ने मुझे यहाँ पर चुदाई करवाते हुए देख लिया होगा, जिस कारण अब वो भी मौके का फायदा उठाना चाहता है। बस यही सब सोचकर जैसे ही मैंने पीछे मुड कर देखा तो मैं हैरान रह गई।

असल में मेरे पीछे इस वक्त एक बूडा पागल भिखारी था। जिसे मैंने पहले भी कई बार इस पार्क में देखा है। क्योंकि वो पार्क में ही रहता है और यहाँ आने बाले लोगों से पैसे लेकर कुछ खा लेता है। हमारी कॉलोनी के कुछ लोग कभी कभी उसे अपने पुराने कपडे और खाने पीने का समान भी दे जाते है। इस वक्त उस पागल भीखारी को देखकर मुझे काफी घिन आ रही थी। पर तभी मैंने मन मन सोचा कि इस बेचारे ने अपनी पूरी जिंदगी में शायद कभी चुदाई भी नहीं की होगी। अब जब मैं इतने सारे लोगों से पैसे लेकर चुद ही चुकी हूँ, तो क्यों ना आज इस भीखारी को भी जिंदगी में पहली बार चुदाई करने का सुख दे ही दूँ। शायद इससे मेरे कुछ पाप कम हो जाऐं।

बस यही सोचकर मैं बैसे ही कुतिया बन कर खडी रही। कुछ देर मेरी चुत पर अपना लण्ड रगडने के बाद उस पागल भिखारी ने भी आखिरकार अपना बाडा और मोटा लण्ड मेरी चुत में घुसा दिया और मेरी चुदाई करने लगा। उस भिखारी से खुले पार्क में चुदवाने में मुझे थोडा अजीब लग रहा था। लेकिन मजा भी बहुत आ रहा था। वो पागल भिखारी काफी देर तक मेरी यूँ ही चुदाई करता रहा और फिर अपना पानी मेरी चुत में छोड दिया। जैसे ही उसका पानी निकला मैं तुरंत उससे अलग होकर खडी हो गई।

पार्क में अब तक तीन तीन मर्दो से चुदने के कारण मेरी चूत से अब काफी ज्यादा पानी रिस्कर मेरी जाँगों पर आ गया था और मेरी पैंटी भी अब तक पूरी गंदी हो गई थी। इसलिए खडे होकर मैंने सबसे पहले अपनी पैंटी उतारी और उससे अपनी जाँघों के साथ साथ अपनी चूत और गाँड को अच्छी तरह से पौंछा, उसके बाद मैंने अपनी पैंटी को वहीँ डस्टबिन में फेंक दिया। फिर मैं भी अपना बैग लेकर उस पार्क से निकल गई। वो ऑटो बाला अब तक वहाँ से जा चुका था। इसलिए मैं पैदल ही अपने घर की तरफ चल पडी।

कहानी जारी है ........
 
Update 059 -

मेरा घऱ उस पार्क से ज्यादा दूर नहीं था। जिस कारण कुछ ही देर में मैं अपने घर पहूँच गई। अपने घर के अंदर जाते ही मैंने अपना बैग एक तरफ रखा और सीधे बैडरूम में जाकर कम्बल ओढकर सो गई। सारी रात जागने और चुदाई करवाने के कारण मैं कुछ ज्यादा ही थकी हुई थी। जिस कारण मैं दोपहर 2 बजे तक सोती रही। पिछले काफी दिनों से मैं भोपाल में थी। इसलिए मेरे घर में साफ सफाई ना होने के कारण अच्छी खासी धूल जमा हो गई थी। इसलिए जब दोपहर के समय मैं जागी, तो सबसे पहले अपने लिए कुछ खाने के लिए ऑनलाईन ऑर्डर कर दिया।

उसके बाद मैं घर की साफ साफाई में लगा गई। घऱ की अच्छी तरह से साफ सफाई करने के दौरान मेरा ऑर्डर भी डिलेवर हो गया था। जिसे खाने के बाद मैंने जल्दी जल्दी बाकी के साऱे काम खत्म किए और फिर नहाने के लिए बाथरूम में घुस गई। मुझे इन सारे कामों से फ्री होकर तैयार होने में शाम के करीब 6 बज चुके थे। मेरे घर के पास बाले पार्क में जहाँ आज सुबह सुबह ही मेरी चुदाई हुई थी, वहाँ शाम के समय अक्सर कॉलोनी की लडकियाँ और औरते पहुँच जाती है और आपस में गपसप करती रहती है। इसलिए मैं भी कभी कभार वहाँ जाकर उनकी मंडली में सामिल हो जाया करती हूँ।

आज चूँकि मैं करीब करीब आधा दिन सोती रही और बाकी का समय घर की साफ सफाई में बिता दिया था। इसलिए मैंने सोचा कि क्यों ना पार्क जाकर कुछ टाईम पास कर लूँ। इसलिए तैयार होने के बाद मैं सीधे उसी पार्क मैं जाने के लिए निकल गई। भोपाल के खण्डहर में हुए हादसे के बाद मेरी आँखों का रंग अचानक से बदलकर ब्लैक की जगह ग्रीन हो गया था। पर मैंने भोपाल में अपने सभी दोस्तों को यही बताया था कि मेरी आँखें बचपन से ही ग्रीन है और मैं दूसरों के अट्रैक्शन से बचने के लिए अक्सर अपनी आँखों पर ब्लैक कलर के लैंस लगाकर रखती हूँ।

मेरी इस बात पर वहाँ मेरे सभी दोस्तों ने विश्वास कर लिया था। जिस कारण वहाँ भोपाल में मुझे मेरी आँखों का रंग बदलने के लिए ब्लैक कलर के लैंस की जरूरत नहीं पडी थी। पर यहाँ दिल्ली में मेरे पति अमन और मेरे सभी जान पहचान बालों के सामने मैं यह बहाना नहीं बना सकती थी। क्योंकि वो सभी लोग अच्छी तरह से जानते हैं कि मेरी आँखों का कलर हमेशा से ब्लैक ही था। जिस कारण भोपाल से दिल्ली आने के एक दिन पहले ही मैंने अपने लिे ब्लैक कलर के लैंस खरीद लिए थे। ताकि यहाँ दिल्ली में किसी को भी मेरी आँखों का कलर चेंज होने के बारे में कुछ भी पता ना चले।

इसलिए अच्छी तरह से तैयार होने के बाद मैं वह ब्लैक कलर के लैंस भी अपनी आँखों पर लगा लिए और पार्क की तरफ पैदल ही चल पडी। जब मैं उस पार्क में पहुँची तो वहाँ मुझे अपनी कॉलोनी कि महिला मंडली मिल गई थी। जिनके साथ बैठकर मैं भी उनकी बातों में शामिल हो गई। चूँकि मैं कई दिनों से वहाँ नहीं गई थी। जिस कारण उस मंडली का पूरा अटेंशन इस वक्त मेरी तरफ ही था। इसलिए मैंने सबको इतने दिनों तक ना आने का कारण बताया और फिर उनसे बातें करने लगी।

अभी हमें आपस मेंं बातें करते हुए कुछ ही देर हुई थी कि तभी मेरी नजर हमसे थोडी दूर बैठे उस भिखारी पर पडी। जिसने सुबह सुबह मुझे चोदा था। शायद उस भिखारी के हाथ में कोई कपड़े का टुकड़ा था। जिसे उसने किसी बॉल की तरह अपने होथों में मजबूती के साथ पकडा हुआ था और बार बार उसे अपनी नाक के पास ले जाकर सूँघ रहा था। जब मैंने उस कपडे को ध्यान से देखा, तो मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया। असल में उस भिखारी के हाथों में इस वक्त मेरी वही पैंटी थी, जिसे आज सुबह ही में पार्क के डस्टबिन में फेंक गई थी।

मुझे उस भिखारी की तरफ गौर से देखता पाकर बाकी औरतें भी उस भिखारी को देखने लगीं, लेकिन उन्हें कुछ समझ नहीं आया। तभी अचानक उस भिखारी ने मेरी पैंटी को ठीक किया और उसे अपने सर पर किसी टोपी की तरह पहन लिया। उस भिखारी की इस हरकत से तो मेरा चेहरा शर्म के कारण गुलाबी हो गया था। वहीं दूसरी तरफ दूसरी औरतें उस भिखारी की इस हरकत को देखकर हंस हंस कर लोट पोट हो रहीं थीं। उस पागल भिखारी को अपनी पैंटी से इस तरह खेलते हुए देखकर मैं मन ही मन सोच रही थी कि इतने दिन रण्डी की तरह चुदने के दौरान पता नहीं कितने लोगों ने उसकी ब्रा और पैंटी अपने पास रख लीं थी।

अब जब यह पागल भिखारी मेरी पैंटी के साथ ऐसी हरकतें कर रहा है तो पता नहीं बाकी लोग क्या क्या कर रहे होंगे। लेकिन अब मैं इसमें कुछ भी नहीं कर सकती थी। इसलिए मैंने अपना ध्यान उस भिखारी से हटाते हुए वहाँ बैठी औरतों से बातें करने में लगाया। काफी देर तक उन औरतों से यूँ ही बातें करने के बाद मैं उस पार्क से बाहर निकल गई। मैंने आज सुबह से कॉफी नहीं पी थी। जिस कारण मुझे कॉफी पीने की काफी तेज तलब हो रही थी। इसलिए मैं पार्क से निकल कर पास के ही एक रेस्टोरेंट में जाकर कॉफी शिप करते हुए अपने आगे के प्लान के बारे में सोचने लगी।

तभी मेरे मन मैं ख्याल आया कि अमन को आने में तो अभी 2-4 दिन बाकी हैं। तब तक रात में मजे लेने के लिए मुझे कोई ना कोई जुगाड तो करना ही पडेगा। हाँलाकि इतने दिनों तक भोपाल में एक रण्डी की जिंदगी जीने के बाद और एक ही रात में कई कई मर्दों के साथ चुदने के बाद मेरे अंदर से चुदाई का बुखार अब पूरी तरह से उतर चुका था। बैसे तो मेरा मन अब भी चुदने का करता है। लेकिन अब लगातार पूरी पूरी रात चुदने या फिर कई कई मर्दों के साथ एक साथ चुदने में मुुझे ज्यादा मजा नहीं आता था। खासकर जबसे भोपाल के जंगलों में बने खण्डहर में मेरे साथ जबरदस्ती की गई थी। तब से मेरे अंदर से चुदाई की हबस मिट चुकी थी।

इसलिए अब अगर कोई व्यक्ति मेरे साथ थोडा जेंटली और प्यार के साथ सेक्स करता है, तो मैं पूरी तरह से संतुष्ट हो जाती हूँ। हाँलाकि शुरू शुरू में जब भोपाल में मैंने यह रण्डियों बाला काम किया था, तब जाकर मुझे यह पता चला था कि मेरे पति अमन का स्टैमिना काभी ज्यादा कम है। क्योंकि भोपाल में दूसरे मर्दोंं ने मुझे काफी ज्यादा देर तक चोदा था। जिस कारण तब मुझे उस तरह चुदने में बहुत मजा आ रहा था। लेकिन जब रघू ने मेरे साथ सेक्स किया तब मुझे पता चला था कि असली सेक्स होता क्या है। क्योंकि जब मैं रण्डी बनकर किसी क्लाईंट के पास जाती थी तो वो केवल अपने मजे के बारे में सोचता था। उसे मेरे मजे और मुझे होने बाले दर्द की कोई चिंता नहीं होती थी।

पर रघू जब मेरे साथ सेक्स करता था, तो वो मेरा पूरा ध्यान रखता था, जिस कारण रघू के साथ सेक्स करने के दौरान ना केवल मैं इंजॉय करती थी, बल्कि मैं पूरी तरह से संतुष्ट भी हो जाती थी, ठीक इसी तरह रवि ने भी मेरे साथ पूरे पैसिनेट तरीके से और मुझे पूरा मजा देकर सेक्स किया था। बस इसी लिए पिछले कुछ दिनों से मैं मन ही मन अब यह रण्डियों बाला काम पूरी तरह से छोडने और अमन से डायवोर्स लेने के बाद किसी अच्छे लडके से शादी करने के बारे में सोच रही थी। ताकि मुझे अपनी वासना को शांत करने के लिए अलग अलग मर्दों का सहारा ना लेना पडे।

अब जब मैंने अपनी पहचान बदलकर नए सिरे से जिंदगी जीने के बारे में फैसला कर ही लिया था तो फिर मुझे अपने लिए एक अच्छे जीवन साथी की जरूरत तो पडेगी ही। लेकिन अगर मैं ऐसे ही रण्डियों बाला काम करती रही और एक साथ कई कई मर्दों से चुदती रही, तो फिर अपनी नई जिंदगी में मैं अपने जीवनसाथी के साथ पूरी तरह से ईमानदार नहीं रह पाऊँगी, साथ ही साथ मुझे हमेशा अपना राज खुलने का डर भी बना रहेगा। बैसे भी मैं यह रण्डियों बाला काम केवल अपने मजे और सैटिस्फेक्सन के लिए करती थी। ना कि पैसे कमाने के लिए। जिसकी फिलहाल मेरे पास कोई कमी नहीं थी।

इस बारे में सोचकर और कुछ देर पहले पार्क में उस पागल भिखारी को अपनी पेंटी के साथ खेलता हुआ देखकर मुझे कल रात ट्रेन में हुई अपनी चुदाई और फिर पार्क में चुदने की सारी घटना याद आ गई थी। जिसे सोचकर मैं इस वक्त थोडा उत्तेजित हो गई थी, साथ ही साथ अब मेरा मन एक बार फिरसे चुदने का कर रहा था। लेकिन अब मैं कॉलगर्ल या रण्डी बनकर यह सब बिल्कुल भी नहीं करना चाहती थी। कुछ देर इस बारे में सोचने के बाद मेरे मन में एक ख्याल आया कि क्यों ना आज रात को मैं किसी पव या क्लब में जाकर देखूँ। अगर वहाँ कोई मुझे अच्छा लडका मिला तो मैं आज रात उसके साथ हुकअप कर लूँगी, बर्ना चुपचाप घर पर आकर सो जाऊंगी।

यह प्लान मन में आते ही मैंने जल्दी से अपनी कॉफी खत्म की और फिर अपने घर की तरफ चल पडी। हाँलाकि मैं कुछ देर पहले ही अपने घर से पूरी तरह से तैयार होकर आई थी और इस वक्त रात भी हो चुकी थी। जो किसी पव या क्लब में जाने के लिए परफेक्ट टाईम था। लेकिन मैंने इस वक्त जो कपडे पहने हुए थे, वो ऐसी किसी जगह जाने के लिए बिल्कुल भी सूटेवल नहीं थे, क्योंकि मैंने इस वक्त सलवार कुर्ती पहनी हुई थी, जो कि मैं आमतौर पर पहनती हूँ। पर ऐसे कपडों में मुझे किसी पव बगैरह में जाना बिल्कुल भी ठीक नहीं लग रहा था। इसलिए मैं उस रेस्टोरेंट से सबसे पहले घर जाकर कपडे चेंज करना चाहती थी।

मुझे उस रेस्टोरेंट से अपने घर तक पहुँचने में ज्यादा समय नहीं लगा था और घऱ आते ही मैं अपने कवर्ड में कपडे तलाश करने लगी। कुछ देर तक अपने कवर्ड मेें रखे कपडे इधऱ उधर करने के बाद आखिरकार मुझे वो कपडे मिल ही गए, जिन्हें पहनकर मैं पव जाने बाली थी। असल में आमतौर पर मैं साडी या सरवार कुर्ती ही पहनती हूँ। लेकिन कुछ सालों पहले अमन को सरप्राईज देने के लिए मैंने कुछ शॉर्ट ड्रेस खरींदी थी। पर अमन को वो बिल्कुल भी पसंद नहीं आईं थी। जिस कारण मैंने आज तक उन्हें यूज ही नहीं किया था और वो मेरे कवर्ड में यूँ ही पडी हुईँ थी। पर आज मेरे पास उन्हें पहनने का पूरा मौका था।

मैंने उनमें से एक वनपीस शार्ट ड्रेस सिलेक्ट की और फटाफट उसे पहन लिया। इसके बाद मैंने उस शार्ट ड्रेस के ऊपर फिर से अपनी सरवार कुर्ती पहन ली। ताकि मेरी कॉलोनी में किसी को यह पता ना चले कि मैं शार्ट ड्रेस पहनकर रात के समय घर से बाहर गई थी। कपडे पहनने के बाद मैंने अपने मेकअप को थोडा सा टचअप दिया और फिर अपने घऱ को अच्छी तरह से लॉक करने के बाद पार्किंग ऐरिया में जा पहुँची। जहाँ अमन की कार पहले से ही खडी हुई थी।

आमतौर पर अमन मुझे अपनी कार से कभी भी हाथ नहीं लगाने देता है। लेकिन जब भी अमन आऊट ऑफ सिटी या ऑउट ऑफ इण्डिया जाता है, तो मैं अक्सर उसकी कार अपने साथ ले जाती हूँ। पार्किग में पहुँचकर मैंने फटाफट कार को अनलॉक किया और बिना देर किए कार में बैठ गई। इसके बाद मैं अपनी बिल्डिंग से बाहर निकल गई। अपनी कॉलोनी से कुछ दूर जाने के बाद मैंने एक सुनसान जगह पर कार रोकी और जल्दी से अपनी सलवार कुर्ती निकालकर कार की पिछली सीट पर रख दी। इसके बाद मैंने अपने बाल ठीक किए और कार आगे बडा दी।

करीब एक घंटे की ड्राईब के बाद मैंने अपने ऐरिया से काफी दूर एक पव की पार्किग में अपनी कार खडी कर की और उस पव के अंदर जा पहुँची। जहाँ कई सारे नई उम्र के लडके लडकियाँ एक दूसरे की बाहों में बाहें डालकर लाऊड म्यूजिक पर डाँस कर रहे थे। मैंने उन लोगों पर कोई ध्यान नहीं दिया और सीधे बार काऊंटर की तरफ बड गई। जहाँ मैंने अपने लिए एक बियर और कुछ स्नैक्स लिए और एक कार्नर बाली चेयर पर जाकर बैठ गई। इसके बाद मैं बडे आराम से बियर शिप करते हुए डाँस फ्लोर पर थिरकते लडके लडकियोें को देखने लगी।

कहानी जारी है ........
 
Update 060 -

कुछ देर बाद जब मेरी बियर खत्म हो गई तो मैं अपने लिए दूसरी बियर लेन जाने ही बाली थी, लेकिन तभी अचानक से एक लडका मेरे सामने बियर की एक कैन रखते हुए मेरे ठीक सामने बाली चेयर पर बैठ गया। उस लडके की इस हरकत पर मैं उसे मना करने ही बाली थी कि तभी मेरी नजर उसके चेहरे पर पडी। जिसे देखकर मैं बुरी तरह से हैरान रह गई। वो लडका असल में मेरा जूनियर पंकज श्रीवास्तव था, जो मेरी एब्सेंस में मेरी टीम को लीड करता था। इससे पहले मै पंकज को वहाँ देखकर कुछ कहती, वो मुस्कुराते हुए बोला

पंकज- मैंने इस बात की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं की थी कि यहाँ पर मेरी मुलाकात निशा मैम से होगी

पंकज को वहाँ देखकर मैं थोडा रिलेक्स होते हुए बोली

निशा- अरे यार पंकज तुम हो…. मैं तो डर ही गई थी…. बैसे तुम यहाँ क्या कर रहे हो

पंकज- बस थोडा सा इंजॉय करने चला आया… जब से आप वर्क टूर पर गई हो… काम का सारा प्रेशर मेरे सिर पर ही आ गया है। इसलिए ऑफिस से फ्री होकर कभी कभी इंजॉय करने यहाँ आ जाता हूँ। ताकि रात में अच्छी नींद आ सके। बैसे आप टूर से बापिस कब आई।

निशा- बस आज सुबह सुबह ही बापिस आई हूँ।

पंकज- तो इसका मतलब है कि कल से आप ऑफिस ज्वाईन करने बाली हो

निशा- हाँ

मेरी हाँ सुनकर पंकज ने अपने सीने पर हाथ रखा और एक लम्बी साँस छोडते हुए बोला

पंकज- थैंक्स गॉड मैं बच गया… अगर आप कुछ दिन और लेट आती तो पक्का मेरा राम नाम सत्य हो जाता

पंकज की बात सुनकर मैंने मुस्कुराते हुए अपने सामने रखी बीयर की कैन खोली और उसे शिप करते हुए बोली

निशा- पर तुम्हें तो प्रमोशन चाहिए था ना…. अब जब तुम्हें टीम लीडर बनने का मौका मिल ही गया है तो फिर इंजॉय करो…

मेरी बात सुनकर पंकज चिढते हुए बोल

पंकज- अरे भाड में जाऐ ऐसा प्रमोशन.. सब लोगों ने खून पी रखा है मेरा… मैं तो आपके अंडर काम करके ही खुश हूँ… पता नहीं आप कैसे इतना सारा प्रेशर हैंडिल करने के बाद भी हमेशा कूल बनी रहती हो।

निशा- और अगर किसी दिन मैं यह जॉब छोड दूँ तब क्या करोगे

पंकज- तो मैं भी जॉब छोडकर आपके पीछे पीछे दूसरी कम्पनी ज्वाईन कर लूँगा

इतना बोलने के बाद पंकज एक पुराना गाना गुनगुनाने लगा

“तेरा पीछा ना… तेरा पीछा ना…. मैं छोड़ूँगा सोनिये, पीछा ना मैं छोड़ूँगा सोनिये…”

इससे पहले पंकज गाना आगे गुनगुनाता मैं हंसते हुए उससे बोली

निशा- शटअप पंकज…..

पंकज- लो जी… नहीं गाता गाना… बैसे आप यहाँ क्या कर रही हो.. आपको तो इस तरह पव बगैरह में जाकर पार्टी करना बिल्कुल भी पसंद नही है..

निशा- नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है.. वो तो बस मेरे पति अमन को मेरा किसी पव बगैरह में जाना पसंद नहीं है। बस इसीलिए मैं भी ऐसी किसी जगह जाना अबॉईड करती हूँ। लेकिन पिछले कुछ दिनों से अमन आऊट ऑऱ इण्डिया है और आज पूरा दिन मैं घर पर बोर होती रही। इसलिए अपना माईंड फ्रेस करने के लिए यहाँ आ गई।

मेरी बात सुनकर पंकज अपनी बियर शिप करते हुए लापरवाही से बोला

पंकज- हुम्म अच्छा है… मतलब अपने पति के एब्सेंस का सही से फायदा उठाया जा रहा है। बैसे इन कपडों में आप बहुत सुंदर लग रही हो… हाँलाकि मैंने कभी आपको ऐसे कपडे पहने नहीं देखा है। लेकिन अगर आप किसी दिन ऐसे कपडे पहनकर ऑफिस आ गई, तो पक्का पूरा ऑफिस आपका दीवाना हो जाऐगा।

पंकज की बात सुनकर मेरा चेहरा शर्म से गुलाबी हो गया था। इसलिए मैं उससे चिढते हुए बोली

निशा- शटअप पंकज…. कुछ भी….. मैं इतनी भी सुंदर नहीं हूँ। जितना तुम बोल रहे हो

पंकज- माँ कसम निशा मैम आज तो आप पूरी बबाल लग रही हो…. यहाँ पव में जितने भी सिंगल लडके हैं, वो सभी बस आपको ही घूर रहे हैं।

निशा- हाँ हाँ ठीक है बाबा…. मैं समझ गई… अब तुम आराम से बैठकर यहाँ इंजॉय करो… मैं तो चली यहाँ से….

इतना बोलकर मैं जैसे ही उठने लगी तो पंकज मुझे रोकते हुए बोला

पंकज- अरे यार इतनी भी क्या जल्दी… अभी तो नशा ठीक से चढा भी नहीं है

निशा- मेरी इतनी ही लिमिट है। अगर इस्से ज्यादा मैंने बियर पी तो पक्का अपने होश खो दूँगी

पंकज- तो फिर मैं हूँ ना आपको संभालने के लिए.. बस एक बियर और….

निशा- नहीं…

पंकज- प्लीज बस एक बियर

निशा- नहीं ना…

पकंज- अच्छा तो कम से कम कुछ देर मेरे साथ डॉस तो कर ही सकती हो… क्या पता आज के बाद फिर कभी आपके साथ डॉस करने का मौका मिले ना मिले… बैसे भी आज आप कुछ ज्यादा ही सेक्सी लग रही हो…

पंकज की बात सुनकर मैंने उसे तीखी नजरों से घूरा और गुस्से में चिढते हुए बोली

निशा- बिल्कुल भी नहीं…

लेकिन पकंज जिद पर अड चुका था और वो मुझे मनाने की कोशिश करते हुए बोला

पंकज- प्लीज प्लीज प्लीज… बस कुछ देर के लिए…. आपको मेरे साथ डॉस करते हुए देखकर यहाँ मौजूद सारे सिंगल लडके जल भुनकर राख हो जाऐंगे।

पंकज की बात सुनकर मैंने मन ही मन सोचा

“अब जब मैं इतने मर्दों से चुद चुकी हूँ तो फिर भला इसके साथ डॉस करने में क्या प्राब्लम है। बैसे भी तो मैं यहाँ किसी भी अनजान आदमी के साथ हुकअप करने आई थी। इसलिए अगर डॉस करते वक्त पंकज ने मुझपर ट्राई किया, तो आज रात इसी के साथ हुकअप कर लूँगी। बैसे भी जब कुछ दिनों बाद मैं अपनी पहचान हमेशा हमेशा के लिए बदले ही बाली हूँ, तो फिर इससे क्या फर्क पडता है कि मैं किसी अजनबी के साथ हुकअप करूं या फिर किसी जान पहचान बाले के साथ।”

यह सब सोचते ही मैंने मुस्कुराते हुए कहा

निशा- ठीक है…. लेकिन बस कुछ देर के लिए… उसके बाद मैं यहाँ से चली जाऊँगी, और हाँ यह सब केवल हम दोनों के बीच सीक्रेट रहेगा। ऑफिस में किसी को भी इस बारे में पता नहीं चलना चाहिए।

मेरी बात सुनकर पंकज तुरंत बोला

पंकज- माँ कसम निशा मैम…. मैं किसी से कुछ भी नहीं कहूँगा

निशा- तो फिर ठीक है चलो चलते हैं

इतना बोलकर मैं उठ खडी हुई, मेरे खडे होते ही पंकज भी तुरंत खडा हो गया और मेरा हाथ पकडकर मुझे डाँस फ्लोर पे ले गया जहाँ हम एक दूसरे की बाहों में बाहें डालकर डाँस करने लगे। कुछ देर तक तो सब कुछ नॉर्मल था पर फिर धीरे धीरे पंकज डाँस करते वक्त मेरी बॉडी को अलग अलग जगह पर टच करने लगा। कभी वो मेरी कमर पर हाथ रखने के बहाने मेरी गाँड को सहलाने लगता और कभी डाँस मूव के दौरान मेरे बूब्स पर हाथ रख देता।

जब मैंने उसकी इन हरकतों पर कोई रियेक्ट नहीं किया तो धीरे धीरे उसकी हिम्मत और भी ज्यादा बडने लगी। जिसके बाद उसने बिना किसी झिझक के मेरी गाँड के साथ साथ मेरे बूब्स को भी सबके सामने ही सहलाना शुरू कर दिया था। जब वो कुछ ज्यादा ही एक्साईटेड होने लगा तो मैंने उसके कान के पास अपना मूँह करके उससे धीरे से कहा

निशा- मौके का फायदा उठा रहे हो क्या

मेरी बात सुनकर पंकज बूरी तरह से चौंक गया और तुरंत बोला

पंकज- न नहीं तो…

पंकज की बात सुनकर मैंने अपने एक हाथ से पंकज के लण्ड को हल्का सा सहलाया, जो अब तक पूरी तरह कडक हो चुका था और फिर उससे बोली

निशा- तो फिर तुम्हारे अरमान क्यों खडे हो रहे हैं….

मेरी इस हरकत से पंकज भी समझ चुका था कि मुझे उसकी इन हरकतों का बिल्कुल भी बुरा नहीं लगा है। इसलिए वो मुस्कुराते हुए बोला

पंकज- सच कहूँ तो आप बहुत ज्यादा सुंदर हो, और अब जब आपका यह सेक्सी फिगर मेरी बाहों में है, तो मुझपर कंट्रोल ही नहीं हो रहा है।

निशा- तो फिर ठीक है मैं चली जाती हूँ यहाँ से…

पंकज- पर क्यों… क्या तुम्हें यह सब अच्छा नहीं लग रहा है

निशा- मुझे नहीं पता… लेकिन तुम्हारी ऐसी हरकतें मुझे बहकने पर मजबूर कर रहीं हैं….

पंकज- तो फिर बहक जाओ ना मेरे प्यार मेंं…… सच कहूँ तो मैं आपको बहुत पसंद करता हूँ….

निशा- बस पसंद करते हो…

पंकज- नहीं नहीं मेरा मतलब है कि प्यार भी करता हूँ…. मैं चाहता हूँ कि आप अपने पति को डायवोर्स देकर मुझसे शादी कर लो… मैं कसम खाता हूँ कि आपको बहुत खुश रखूँगा और कभी भी आपको शिकायत का कोई मौका नहीं दूँगा।

पंकज की बात सुनकर मैं उसकी बाहों से अलग हो गई और डाँस फ्लोर से नीचे उतरकर बापिस अपनी चेयर पर जाकर बैठ गई। मेरे वहां से जाते ही पंकज भी डॉस फ्लोर से नीचे उतर आया और हम दोनों के लिए एक एक बियर कैन लेकर मेरे सामने बैठते हुए बोला

पंकज- क्यों क्या हुआ… आप यूँ अचनाक वहां से बापिस क्यों आ गई

पंकज का सबाल सुनकर मैंने अपने सामने रखी बियर कैन उठाई और उसे उसे शिप करते हुए बोली

निशा- देखो पंकज मुझे पहले से ही पता है कि तुम मुझे पसंद करते हो… लेकिन मैं ऐसा कुछ भी नहीं कर सकती… क्योंकि मैं अपने पति अमन से बहुत प्यार करती हूँ और कभी भी उसे धोखा नहीं दे सकती। इसलिए हम दोनों केवल अच्छे दोस्त बन सकते हैं। उससे ज्याद कुछ भी नहीं।

पंकज- पर अमन आपको धोखा दे रहा है। उसका किसी दूसरी लडकी से अफेयर चल रहा है।

पंकज की बात सुनकर मैं उसे गुस्से में घूरते हुए बोली

निशा- यह तुम क्या बकवास कर रहे हो

पंकज- मेरा यकीन करो निशा मैम मैं सच कह रहा हूँ। मैंने कई बार अमन को किसी दूसरी लडकी के साथ देखा है। अच्छा एक बात बताओ… आपके हिसाब से अमन आउट ऑफ इण्डिया है ना… लेकिन मैंने उसे कुछ दिनों पहले ही एक पव में किसी दूसरी लडकी के साथ देखा था।

पंकज की बातों पर मुझे बिल्कुल भी यकीन नहीं हो रहा था। इसलिए मैं तुरंत बोली

निशा- मुझे तुम्हारी बातोंं पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है.. शायद तुम मेरे और अमन के बीच झगडा करवाना चाहते हो, इसलिए मुझसे झूठ बोल रहे हो ना

पंकज- नहीं निशा मैम ऐसा कुछ भी नहीं है…. आप चाहो तो मैं आपको इसका सबूत भी दे सकता हूँ

पंकज की बात सुनकर मैं थोडा हैरान होते हुए बोली

निशा- सबूत… कैसा सबूत

पंकज- कुछ दिनों पहले जब मैंने अमन को एक पव में किसी दूसरी लडकी के साथ देखा था। तो मैंने चुपके से उन दोनों के कुछ फोटो खींच लिए थे। जो अब भी मेरे मोबाईल में हैं।

इतना बोलकर पंकंज अपने मोबाईल में खीचें गए फोटो मुझे दिखाने लगा। उन फोटो में वास्तव में मेरे पति अमन किसी दूसरी लडकी के साथ था। उन दोनों ने एक दूसरे को कुछ इस तरह से थामा हुआ था, जिसे देखकर कोई भी कह सकता था कि उनके बीच जरूर कोई अफेयर चल रहा है। मैं एक एक करके वो सारे फोटो स्वैप करके देखने लगी। कुछ फोटो उन दोनों के किस करने की भी थी।

उन सभी फोटो को देखकर मेरे चेहरे का रंग सफेद पड गया था। क्योंकि अमन के साथ जो लडकी थी, वो कोई और नहीं बल्कि मेरी सबसे अच्छी दोस्त और मेरी जूनियर रचना थी। जिसकी मैंने कई बार हेल्प की थी और मेरी रिक्वेस्ट पर ही उसे मेरी कम्पनी में जॉब मिली थी। पर उसने मेरी अच्छाई का मुझे क्या सिला दिया। मेरे ही पति के साथ सीक्रेट अफेयर करके मुझे धोखा देती रही। इस बारे में सोचते ही मेरा चेहरा गुस्से से एकदम कठोर हो गया और मेरी आँखों में खून उतर आया, इसलिए मैं उसी गुस्से की हातल में बडबडाई

निशा- मैं इन दोनों कमीनों को जिंदा नहीं छोडूँगी…

मेरे गुस्से को देखते हुए पंकज मुझे समझाते हुए बोला

पंकज- देखो निशा मैं समझ सकता हूँ कि इस वक्त तुम पर क्या बीत रही है। पर जान लेना किसी भी प्राब्लम का सॉलूशन नहीं है। अगर तुमने ऐसा कुछ किया तो तुम्हें भी जेल जाना पडेगा।

मैंने इस बात पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया था कि पंकज कब आप से तुम पर आ गया था और अब डायरेक्ट मेरा नाम लेकर मुझसे बात कर रहा था। पर वो सही था, किसी की जान लेना, प्राब्लम का सॉलूशन नहीं हो सकता, और सच कहूँ तो मेरा ऐसा कुछ करने का इरादा भी नहीं था। हाँलाकि शुरूआत में जब मैंने वो फोटो देखे तो मुझे वाकई में उन दोनों पर बहुत गुस्सा आ रहा था। पर जब मुझे भोपाल में किए गए अपने कारनामे याद आऐ तो मेरा गुस्सा तुरंत खत्म हो गया था। क्योंकि मैं खुद भी तो कई मर्दों से साथ रात बिताकर अमन को धोखा दे चुकी थी और आज भी किसी दूसरे मर्द के साथ हुकअप करने के लिए ही इस पव में आई थी।

इसलिए मेरा अमन और रचना पर गुस्सा करने का कोई मतलब नहीं था। बैसे भी मैं अमन को डॉयवोर्स देने का फैसला पहले ही कर चुकी थी। पंकज के यह फोटो मुझे उससे छुटकारा दिलाने में काफी ज्यादा हेल्प कर सकते थे। लेकिन मेरा यहाँ आने का उद्देश अभी भी पूरा नहीं हुआ था। मुझे आज रात अपनी वासना मिटाने के लिए एक मर्द की जरूरत थी, जिसके लिए मैंने पंकज को चुना था, साथ ही साथ पंकज मुझे अमन और रचना से हमेशा के लिए छुटकारा दिलाने में मदद भी कर सकता था। क्योंकि वो पूरी तरह से मुझपर लट्टू था। इसलिए मैं उसके सामने एक अबला नारी होने का नाटक कर रही थी और ऐसा दिखा रही थी, जैसे इस बारे में जानकर मेरे दिल को धक्का पहुँचा है और मैं उन दोनों पर बहुत गुस्सा हूँ।

कहानी जारी है .......
 
Update 061 -

मेरे नाटक का असर पंकज पर हो चुका था। पर मैं अभी पंकज को पूरी तरह से शीशे में उतारना चाहती थी, इसलिए पंकज की बात सुनकर मैंने अपने दोनों हाथों से अपने चेहरे ढंक लिया और रोने का नाटक करते हुए बोली

निशा- तो फिर मैं क्या करूँ पंकज.. मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है… इन दोनों ने मुझे धोखा देकर मेरे दिल को ठेस पहुँचाई है…. मैं इन दोनों को कभी माफ नहीं कर सकती।

मेरी बात सुनकर पंकज तुरंत उठकर मेरे बगल में आकर बैठ गया और मेरी पीठ को सहलाते हुए मुझे दिलासा देने लगा। कुछ देर मुझे दिलासा देने के बाद उसने कहा

पंकज- तुम अमन को डॉयवोर्स दे दो…..

निशा- नहीं दे सकती… क्योंकि वो कभी भी मुझे डॉयवोर्स देने के लिए तैयार नहीं होगा।

पंकज- तो हम कोर्ट का सहारा लेंगे। बैसे भी मेरे पास अमन के धोखे के पर्याप्त सबूत हैं

निशा- पर यह सबूत काफी नहीं है।

पंकज- तो हम कुछ और सबूत इकट्ठा कर लेंगे।

निशा- पर…

पंकज- पर क्या निशा…

निशा- पर डॉयवोर्स लेने के बाद मैं कहाँ जाऊँगी… मेरे पिता और भाई की आर्थिक स्थिती पहले से ही खराब है… ऊपर से डायवोर्स लेने के बाद पता नहीं दुनिया बाले मेरे बारे में कैसी कैसी बातें करेंगे

पंकज- कोई कुछ नहीं कहेगा…. तुमने कुछ भी गलत थोडे ही किया है… गलत तो अमन और रचना कर रहे हैं। रही बात रहने की, तो तुम्हें कहीं भी जाने की जरूरत नहीं है। मैं हूँ ना…. तुम मेरे साथ रहोगी… मैंने अभी अभी तो तुमसे कहा था कि मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। अमन से डॉयवोर्स लेने के बाद हम दोनों शादी कर लेंगे। मुझपर यकीन करो, मैं तुम्हारा बहुत अच्छे से ध्यान रखूँगा और तुम्हें कभी भी धोखा नहीं दूँगा।

पंकज की बात सुनकर मैं उम्मीद भरी नजरों से उसे देखते हुए बोली

निशा- क्या तुम सच कह रहे हो पंकज… क्या तुम हमेशा मेरा साथ दोगे….

पंकज- हाँ मेरी जान.. मैं आखिरी सांस तक तुम्हारा साथ दूँगा

पंकज की बात सुनकर मैंने तुरंत उसे गले से लगाते हुए कहा

निशा- थैंक्स पंकज…. तुम सच में बहुत अच्चे हो… अब मुझे एहसास हो रहा है कि मैं अब तक ऐसे इंसान के साथ रहती रही, जो मेरे प्यार के काबिल ही नहीं था। पर आज से मेरा पूरा प्यार सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे लिए होगा पंकज।

पंकज- तो फिर चलो… हम डॉस फ्लोर पर अपने सारे गुम भुला दें और अपने प्यार की इस पहली रात को हमेशा हमेशा के लिए यादगार बना दें।

पंकज की बात सुनकर मैंने मुस्कुराते हुए उसे देखा और जल्दी से अपनी बियर खत्म करके उसके साथ एकबार फिर से डाँस फ्लोर पर जा पहुँची। जहाँ हम काफी देर तक एक दूसरे के साथ इंटीमेट डाँस करते रहे। इस दौरान पंकज बिना किसी हिचक के मेरे बदन को सहला रहा था और मैं भी उसका पूरा साथ दे रही थी। बियर के तीन कैन पीने के बाद मैं पहले से ही अच्छे खासे नशे में थी, ऊपर से पंकज की हरकतें मुझे कुछ ज्यादा ही उत्तेजित कर रहीं थीं। जिस कारण मेरा पूरा बदन वासना की आग में जल रहा था। इसी दौरान डाँस करते करते पंकज ने मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया था। इतने सारे लोगों के बीच किस करने से मुझे बहुत शर्म आ रही थी। इसलिए जैसे ही पंकज ने मेरे होंठों को छोडा तो मैंने उससे कहा

निशा- यहाँ नहीं पंकज… यहाँ बहुत सारे लोग हैं और तुम्हारे इस तरह किस करने से मुझे बहुत शर्म भी आ रही हैं। चलो कहीं और चलते हैं….

मेरी बात सुनकर पंकज खुशी से पागल ही हो गया था। वो तो कब से इसी मौके के इंतजार में था। इसलिए वो तुरंत मेरा हाथ पकडकर डाँस फ्लोर से नीचे उतर आया। इसके बाद पंकज ने बिल पेमेंट किया और मेरे साथ उस पव से बाहर आ गया। असल में वो पव पंकज के घर से ज्यादा दूर नहीं था, जिस बजह वो पैदल ही वहां आया था। पर अब चूँकि मेरे पास अमन की कार थी। इसलिए हम दोनों उसी कार से पंकज के घर जा पहुँचे। पंकज की अभी तक शादी नहीं हुई थी और उसके माता पिता भी गाँव में रहते थे। जिस कारण हमें रोकने टोकने बाला उसके घर पर कोई नहीं था।

घर के अंदर जाते ही हम दोनों एक दूसरे पर टूट पडे और बेतहाश एक दूसरे को किस करने लगे। मुझे यह तो याद नहीं है कि शुरूआत किसने की थी, लेकिन पंकज के बेडरूम तक पहुँचने से पहले ही हम दोनों के कपडे पंकज के घर पर इधर उधर बिखरे हुए थे। बेडरूम के अंदर जाते ही पंकज ने मुझे अपनी गोद में उठाकर बिस्तर पर पटक दिया और फिर मेरे पूरे बदन को चूमने और सहलाने लगा। मैं पहले से ही बहुत ज्यादा उत्तेजित थी, ऊपर से पंकज बिना रुके मुझे लगातार चूम रहा था। इस कारण मैं किसी जल बिन मछली की तरह बिस्तर पर तडप रही थी।

जबकि पंकज मेरे संगमरमर की तरह गोरे बदन को पागलों की तरह चूम रहा था। शायद इतने सालों तक मुझे दूर से ही निहारने की कसक आज बो पूरा करना चाहता था। मेरे होंठों और मेरे बूब्स को अच्छी तरह से चूमने और सहलाने के बाद, वो मेरी कमर से होते हुऐ मेरी चूत तक पहुँच गया था और अब वो बिना रुके मेरी चूत को किसी कुत्ते की तरह चाट रहा था। जिस कारण मैं ज्यादा देर तक यह सब बरदास्त नहीं कर पाई और झर गई, लेकिन वो नहीं रुका। उसकी इस हरकत से ऐसा लग रहा था जैसे कई दिनों से भूखे किसी इंशान को छप्पन भोग मिल गए हों।

एक बार झरने के बाद मैं अब पूरी तरह से रिलेक्स हो गई थी। जिस कारण अब मैं भी पंकज का पूरा साथ देते हुए सेक्स को इंजॉय कर रही थी। हाँलाकि झऱने के बाद एक बार मेरे मन में आया कि क्यों ना मैं भी पंकज को ब्लोजॉब दूँ, ताकि उसे भी अच्छा लगे। पर अगले ही पल मैंने इस ख्याल को अपने मन से निकाल दिया। क्योंकि मैं अब किसी भी बंधन में नहीं थी और ना ही पंकज ने मेरे साथ सेक्स करने के लिए मुझे पैसे दिए थे। हमारे बीच जो कुछ भी हो रहा था वो एक दूसरे की मर्जी से हो रहा था। इसलिए मुझे पंकज को अलग से खुश करने की कोई जरूरत नहीं थी।

अब सब कुछ पंकज के हाथ में था कि वो मेरे साथ कितने मजे कर सकता है और मुझे कितना मजा दे सकता है। पंकज ने भी मुझे निराश नहीं किया था। वो लगातार मुझे पूरे दिल से प्यार कर रहा था और मुझे खुश करने की पूरी कोशिश कर रहा था। जिस कारण जल्द ही मैं फिरसे गर्म हो गई थी और अब मैं अपने हाथों से पंकज के सिर को सहलाने लगी थी, साथ ही साथ मेरे मूँह से कामुक सिसकियाँ भी निकले लगी थीं। तब कहीं जाकर पंकज मेरी चूत से अलग हुआ। मुझसे अलग होने के बाद पंकज ने एक पिल्लो उठाकर मेरी कमर के नीचे रख दिया और मेरे दोनों पैरों को फैला दिया। जिस कारण मेरी चूत थोडी ऊपर की तरफ होकर अलग से उभर आई।

मेरी चिकनी चूत को देखकर पंकज कुछ ज्यादा ही एक्साईटेड हो रहा था। इसलिए उसने बिना देर किए अपना लण्ड मेरी चूत पर टिका दिया और धीरे धीरे उसे मेरी चूत के अंदर घुसाने लगा। वो यह सब इतने प्यार से कर रहा था कि मुझे दर्द का जरा भी एहसास नहीं हुआ। जब उसका पूरा लण्ड मेरी चूत में समा गया तो वो धीरे धीरे अपना लण्ड मेरी चूत के अंदर बाहर करते हुए मुझे चोदने लगा। मुझे पंकज का यह चुदाई करने का अंदाज बहुत पसंद आ रहा था। इतने दिनों के बाद आज जाकर मुझे यह एहसास हुआ था कि असली सेक्स क्या होता है। हाँलाकि पंकज के लण्ड का साईज नॉर्मल ही था। लेकिन उसके साथ चुदाई करते वक्त मुझे उतना ही मजा आ रहा था जितना मजा मुझे रवि और रघू के बडे बडे और मोटे लण्डों से चुदकर आया था।

कुछ देर तक उसी पॉजीशन में चोदने के बाद रवि मेरे ऊपर लेट गया और मेरे होंठोें को चूमते हुए वो बडे प्यार से मुझे चोद रहा था। साथ ही साथ वो अपने दोनों हाथों से मेरे बूब्स भी सहला रहा था। जिस कारण मै मजे के सातवें आसमान में पहुँच चुकी थी और मैं खुद भी अपनी कमर हिलाकर उसका पूरा साथ देने लगी थी। साथ ही साथ मैं अपने दोनों हाथोें से पंकज की पीठ और सिर को भी सहला रही थी। करीब एक घंटे तक चली चुदाई के बाद आखिरकार पंकज ने अपना पानी मेरी चूत में छोड दिया और मेरे सीने पर अपना सिर रखकर लम्बी लम्बी सांसें लेने लगा। मैं अब पूरी तरह से संतुष्ट हो चुकी थी। जब पंकज के बीर्य की आखिरी बूंद भी मेरी चूत में समा गई तो वो मेरे बगल में लेट गया और मुझे अपनी बाहों में भर लिया।

इतनी देर तक चली चुदाई और बियर के नशे के कारण हम दोनों कुछ ही देर में गहरी नींद में चले गए। अगले दिन सुबह करीब 8 बजे जब मेरी आँख खुली। तो मैंने देखा की पंकज पहले ही जाग चुका है और उसने घर में इधऱ उधर बिखऱे मेरे कपडों को समेटकर बिस्तर के पास बाली टेबिल पर रख दिया है। पंकज का यह जेश्चर देखकर मेरे चेहरे पर मुश्कान आ गई थी। अगले ही पल मैं बिस्तर से उठी और फ्रैस होने के लिए बाथरूम में घुस गई। जब मैं नहाकर बाथरूम से बाहर निकली तो पंकज मेरे सामने दो कप कॉफी पकडे हुए खडा है। मैंने इस वक्त मात्र एक टॉबल लपेट रखा था। जिस कारण मैं कुछ ज्यादा ही हॉट लग रही थी। इसलिए पंकज अपनी आँखे फाड फाडकर बस मुझे ही देख रहा था। उसकी ऐसी हालत देखकर मैं मुस्कुराकर बोली

निशा- ऐसे क्या देख रहे हो… मैं वही हूँ जो कल रात बिना कपडों के तुम्हारे साथ थी। तुम पहले ही मेरे पूरे बदन को अच्छी तरह से देख चुके हो। इसलिए अब मेरे पास तुम्हें दिखाने के लिए कुछ भी नहीं बचा है।

मेरी बात सुनकर पंकज तुरंत होश में आया और मुस्कुराते हुए बोला

पंकज- नहीं बो बात नहीं है। पर मैं जब भी तुम्हें देखता हूँ, तो तुम पहले से भी ज्यादा खूबसूरत दिखाई देती हो और अभी इस रूप में तुम किसी अपसरा से कम नहीं लग रही हो।

पंकज की बात सुनकर मैंने मुस्कुराते हुए कहा

निशा- एक बार मेरा अमन से डॉयवोर्स हो जाऐ, तो फिर तुम्हें यह नजारा हर दिन देखने के लिए मिल सकता है।

पंकज- बस उसी दिन का तो इंतजार है मुझे… अच्छा चलो अब जल्दी से कॉफी पीते हैं, बर्ना यह ठण्डी हो जाऐगी। इसके बाद जब तक तुम कपडे पहनकर तैयार होगी, तब तक मैं नाश्ता भी तैयार कर दूँगा

इतना बोलकर पंकज ने कॉफी का एक कप मेरी तरफ बडा दिया। जिसे लेकर मैं ऐसे ही बिस्तर के एक कार्नर पर बैठकर कॉफी शिप करने लगी। जवकी पंकज ठीक मेरे सामने सोफे पर जाकर बैठ गया और कॉफी शिप करते हुए मुझे देखने लगा। कॉफी खत्म होने के बाद मैंन खाली कप साईड टेबिल पर रख दिया और एक नजर अपने कपडों पर डाली, जो मैंने रात में पहने हुए थे। मेरे उन कपडोें में मेरी ब्रा और पेंटी के अलावा बस एक वनपीस शार्ट ड्रेस थी। जिन्हें पहनकर मैं अपने घर नहीं जा सकती थी। इसलिए मैंने अपने हैण्ड बैग से अपनी कार की चाबी निकाली और पंकज को देते हुए बोली

निशा- पंकज प्लीज मेरा एक छोटा सा काम कर दो… मेरी कार की पिछली सीट पर मेरे दूसरे कपडे रखे हुऐ हैं। क्या तुम उन्हें ला सकते हो… क्योंकि मैं अपने रात बाले कपडे पहनकर घर बापिस नहीं जा सकती।

मेरी बात सुनकर पंकज ने चुपचाप मुझसे कार की चाबी ले ली और बेडरूम से बाहर निकल गया। करीब 5 मिनट बाद वो एक पॉलीथिन बैग लेकर कमरे में बापिस आया जिसमें मेरी वही सलवार कुर्ती रखी हुई थी। जो मैं कल रात को अपने घर से पहनकर निकली थी और जिसे मैंने पव जाने से पहले ही अपनी कार में उतार कर रख दिया था। पंकज जब तक उस पॉलीथिन को लेकर आया था, तब तक मैं अपनी ब्रा और पेंटी पहन चुकी थी। इसलिए पंकज के आते ही मैंने उससे अपने कपडे लिए और बिना किसी झिझक के उसके सामने ही अपने कपडे पहनने लगी। पंकज कुछ देर तक तो वासना भरी नजर से मुझे कपडे पहनते हुए देखता रहा और फिर वो बिना कुछ कहे कमरे से बाहर निकल गया।

करीब 15 मिनट बाद जब मैं तैयार होकर बाहर आई, तब तक पंकज हम दोनों के लिए नाश्ता तैयार कर चुका था। इसलिए पंकज के साथ नाश्ता करने के बाद मैं कार लेकर अपने घर के लिए निकल गई। हाँलाकि मैं पहले ही नहाकर तैयार हो चुकी थी और डायरेक्ट ऑफिस जा सकती थी। लेकिन मेरा लैपटॉप और भोपाल में किए गए मेरे कामों की सारी रिपोर्ट फाईल, मेरे घऱ पर ही रखी हुईँ थी। जिन्हें मुझे आज बॉस के पास जमा करना था। इसलिए घर पहुँचकर मैं जल्दी से अपना जरूरी सामान लिया और तुरंत ऑफिस के लिए निकल गई।

कहानी जारी है ......
 
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