Antarvasna kahani ड्रेगन हार्ट (लव, सेक्स एण्ड क्राईम) - Page 6 - SexBaba
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Antarvasna kahani ड्रेगन हार्ट (लव, सेक्स एण्ड क्राईम)

Update 042 -

अपना सारा जरूरी सामान अपने हैण्डमेड कामचलाऊ बैग में रखने के बाद मैं उस कमरे में लगे मेरे खून के धब्बों को अपने फटे हुए कपडों से अच्छी तरह से घिस घिस कर मिटाने की कोशिश करने लगी। लेकिन मेरा वह खून अब पूरी तरह से सूख चुका था। जिस कारण जब वो कपडे से साफ नहीं हुआ तो मैंने एक पत्थर के टुकडे को फर्स पर अच्छी तरह से घिसकर अपने खून के सारे धब्बों को पूरी तरह से मिटा दिया। उस कमरे से खून के सारे निशान मिटाने के बाद मैंने बाहर आँगन को भी एक बार फिर अच्छी तरह से चैक किया। लेकिन बारिस के कारण आंगन में गिरा मेरा लगभग सारा खून धूल चुका था।

बस अमर शिला के पास जहाँ मेरे सीने में वो लोहे की रॉड घोंपी गई थी, वहाँ पर मेरा कुछ खून अब रह गया था, साथ ही साथ उस रॉड पर भी मेरा खून लगा हुआ था। इसलिए मैंने अपने जरूरत का सामन छोडकर, बाकी सारा समान जिसमें मेरे कटे-फटे कपडे, प्लास्टिक की खाली बॉटल, मेरा टूटा हुआ मोबाईल आदि सामिल थे, उन सबको मैंने उस जगह पर रख दिया जहाँ मेरा खून अब भी लगा हुआ था, इसके बाद मैंने उस सामान में लाईटर से आग लगा दी। साथ ही साथ लोहे की रॉड को भी उस आग में डाल दिया, ताकि जमीन के साथ साथ उस रॉड पर लगा मेरा खून जल जाऐ और मेरे वहाँ आने के सारे सबूत पूरी तरह से नष्ट हो जाऐं।

ये सारा काम खत्म करके में सीक्रेट रूम के अंदर बापिस चली गई। जैसे ही मैने सीक्रेट रूम का दरवाजा बंद किया तो मेरे गले में डला मोती एकबार फिर ग्लो करने लगा। जिस कारण उस रूम में हरे रंग की रोशनी फैल गई। जिसमें मुझे सब कुछ साफ साफ दिखाई दे रहा था। अब उस खण्डहर में मेरा कोई भी निशान बाकी नहीं रह गया था। इसलिए मैंने अपने पास रखे सामान को एक बार फिर से अच्छी तरह से देखा। मेरे पास इस वक्त एक काम चलाऊ हैंडबैग के अलावा एक चाकू, एक लाईटर, कुछ पैसे और मेरे सिम कार्ड एवं मैमोर कार्ड सामिल थे। वो सारा सामान अच्छी तरह से चैक करने के बाद मैंने उन्हें अपने काम चलाऊ हैण्डबैग में संभालकर रख दिया।

जिसके बाद मैं वहीं फर्स पर लेटकर आराम करने लगी। कुछ ही देर बाद ही मैं गहरी नींद में चली गई। मुझे नहीं पता कि मैं कब तक यूँ ही सोती रही, पर जब मेरी आँख खुली तो उस कमरे में एकदम अंधेरा था। यानि मेरे गले में डला मोती फिलहाल ग्लो नहीं कर रहा था। जिसे देखकर मैं पहले तो हैरान हुई पर फिर मैने उसे इग्नोर कर दिया। क्योंकि उस मोती का अचानक ग्लो करना मेरी समझ से बाहर था। इसलिए मैंने सीक्रट रूम का दरवाजा थोडा खोलकर बाहर बाले कमरे में झाँका, तो बाहर भी एकदम अंधेरा था। जिसे देखकर मैं समझ गई कि रात हो चुकी है और अब मेरा यहाँ से निकलने का समय भी हो गया है।

चूंकि अब मैं पहले से काफी अच्छा महसूस कर रही थी और मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मुझे कभी कुछ हुआ ही नहीं था। बस भूख और प्यास जरूर मुझे काफी परेशान कर कर रही थी। लेकिन उसका फिलहाल मेरे पास कोई उपया नहीं था। हाँलाकि मैंने सुबह गांव बालों द्वारा प्रसाद के रूप में चढाऐ गए थोडे से फलों को जरूर खाया था, साथ ही साथ उनके द्वारा छोडा गया पानी भी पिया था। लेकिन वो मेरा पेट भरने और प्यास बुझाने के लिए पर्याप्त नहीं था, लेकिन उनसे मुझे थोडी बहुत एनर्जी जरूर मिली थी। मेरे सीने पर रॉड धंसने से जो घाव हुआ था, उसका दर्द अब पूरी तरह से खत्म हो चुका था।

इसलिए जब मैंने अपने सीने पर बंधी पट्टी को खोलकर लाईटर की रोशनी अपने घाव को अच्छी तरह से चैक किया, तो मुझे पता चला कि मेरा वह घाव अब पूरी तरह से ठीक हो चुका है और मेरे सिर के बाल भी अब मेरे कंधों तक लम्बे यानि पहले जितने बडे हो गए हैं। जिसे देखकर मैं बहुत ज्यादा हैरान थी, साथ ही साथ खुश भी थी। लेकिन फिलहाल मेरे पास ना तो इस सबके बारे में सोचने का समय था और ना ही इन सबका मेरे पास कोई जबाब था। इसलिए मैंने वहाँ रखा अपना काम चालऊ हैण्डबैग अपने कंडे पर डाला और उस सीक्रेट रूम से बाहर निकल गई।

इसके बाद मैंने उस सीक्रेट रूम का दरवाजा अच्छी तरह से बंद कर दिया और लाईटर की रोशनी में उस कमरे से बाहर निकल आई। फिर मैं आंगन में आकर उस जगह को चैक करने लगी, जहाँ मैंने अपने कपडे और बाकी सामान में आग लगाई थी। जो अब जलकर पूरी तरह से राख हो चुका था। मेरे सीने पर बंधी पट्टी अब भी मेरे हाथ में थी। जिसे मैंने उसी राख के ढेर पर डालकर उसमें भी आग लगा दी। ताकि मेरे वहाँ होने और जिंदा बचने का आखिरी सबूत भी नष्ट हो जाऐ। चूँकि चांदनी रात थी, जिस कारण बाहर पर्याप्त रोशनी हो रही थी। इसलिए मैंने अपना लाईटर बंद करके अपने काम चलाऊ बैग में डाल लिया और उस खण्डहर से बाहर निकल गई।

मुझे उस जंगल में चलते चलते काफी देर हो गई थी। लेकिन मैं हाईवे के आस पास भी नहीं पहूँची थी और ना ही मुझे दूर दूर तक वो तालाब दिखाई दे रहा था। जिसे मैंने सुबह खण्डहर के बाहर खडे होकर देखा था। शायद रात के अंधेरे में मैं रास्ता भटक गई थी। चाँदनी रात होने के बाबजूद जंगल में ख़डे पेडों के कारण पर्याप्त रोशनी अंदर तक नहीं आ रही थी। लेकिन मैं अब उस माहौल की आदी हो गई थी। बैसे भी चलते वक्त बीच बीच में मेरे गले में डला मोती अपने आप ही ग्लो करने लगता था। जिस कारण मुझे अपने आस पास के माहौल का अंदाजा हो रहा था। लेकिन फिलहाल मेरे पास समय देखने का कोई उपाय नहीं था।

जंगल से जानवरों की अजीब अजीब आबाजें आ रहीं थी और कहीं कहीं मुझे जानबरों की चमकती हुई आँखे भी दिखाई दे रहीं थी। पर पता नहीं क्यों मुझे फिलहाल उनसे बिल्कुल भी डर नहीं लग रहा था। बैसे भी जो इंशान मौत को इतने नजदीक से देख चुका हो, उसके अंदर से डर अपने आप ही निकल जाता है। लेकिन शर्दियों का मौसम चल रहा था और मैं इस वक्त पूरी तरह से नंगी थी। जिस कारण मुझे अब ठण्ड भी लग रह थी। थोडा और चलने के बाद मुझे दूर कहीं लाईट टिमटमाटी हुई दिखाई दी। इसलिए मैंने तुरंत अपनी रफ्तार बड़ा दी। जब मैं उस लाईट के पास पहूंची तो मैंने देखा की मैं इस वक्त फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के ऑफिस के पास थी।

जहाँ पास में ही कुछ लोगों के रहने के लिए क्वाटर भी बने हुए थे। वो पूरा ऐरिया तार फेंसिंग से घिरा हुआ था। जो शायद जंगली जानबरों को अंदर आने से रोकने के लिए था। लेकिन एक जगह पर दो तारों के बीच इतनी जगह थी। जिसमें से मैं आसानी से अंदर जा सकूँ। इसलिए मैं तुरंत उसमें से अंदर चली गई और छिपकर आस पास देखने लगी। हाँलाकि ऑफिस तो इस वक्त पूरी तरह से बंद था। पर क्वाटर से कुछ लोगों की आवाजें आ रहीं थी। इसलिए मैं वहाँ खडी झाडियों का सहारा लेकर उस तरफ आगे बड गई। अभी मैं कुछ दूर ही गई थी कि तभी अचानक से मेरे सामने जर्मन सेफर्ड नश्ल के दो बडे बडे कुत्ते आकर खडे हो गए, जो मुझे देखकर गुर्रा रहे थे।

इससे पहले वो मुझे काटते या भौंककर शोर मचाते, अचानक से मेरे गले में डला मोती दो-तीन बार ब्लिंक हुआ, जिसे देखकर वो दोनों कुत्ते चुपचाप वहाँ से चले गए। यह देखकर मैं हैरान होने के साथ साथ खुश भी थी। लेकिन अभी इस बारे में सोचने का मेरे पास समय नहीं था। इसलिए मैं बिना देर किए झाडियों के सहारे आगे बड गई, उन क्वाटर्स के पास पहूंच कर, मैं कुछ सोचती या करती, उससे पहले ही मुझे अपने पास बाले क्वाटर से एक लड़की की कामुक आवाजें सुनाई देने लगी। जिसे सुनकर मैं समझ गई कि उस क्वाटर में जरूर चुदाई चल रही है। पर मैंने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया और एक एक करके वहाँ के सभी क्वाटर को चैक करने लगी।

किस्मत से मुझे वहाँ बाहर कोई इंसान या गार्ड नजर नहीं आया था। फिलहार वहाँ बने दो क्वाटर के अंदर गार्ड थे, जो शायद अंदर चुदाई करने में बिजी थे। मुझे पूरा यकीन था कि उन लोगों ने मजे करने के लिए जरूर कॉलगर्लस को वहाँ बुलाया होगा। क्योंकि ऐसे जंगल में कोई भला अपनी फैमिली को तो अपने साथ रखेगा नहीं। खैर जो भी हो मुझे इससे कोई मतलब नहीं था। मैं तो बस अपने लिए कुछ खाने पीने का सामान और कपडे तलाश कर रही थी। वहाँ पर बने दो क्वाटर्स को छोडकर बाकी सभी इस वक्त खाली थे। पर समस्या यह थी कि सभी क्वाटर्स लॉक थे।

लेकिन तभी मेरी नजर सबसे आखिरी क्वाटर के पीछे बाली खिड़की पर पडी जो खुली हुई थी और जिसमें कोई जाली बगैरह भी नहीं थी। इसलिए मैंने एक बार चारों तरफ अच्छी तरह से देखा और फिर उस खिड़की के रास्ते उस क्वाटर के अंदर चली गई। क्वाटर के अंदर जाते ही मैंने उस खिड़की को अंदर से अच्छी तरह बंद कर दिया और स्विच बोर्ड ढूँडकर लाईट ऑन कर दी। इसके बाद मैं उस क्वाटर को अच्छी तरह से चैक करने लगी। शायद वो क्वाटर काफी समय से बंद था। जिस कारण उसमें काफी धूल जमी हुई थी। लेकिन जब मैंने कबर्ड चैक किया, तो उसके अंदर मुझे कुछ कपडे मिल गए।

मैंने उनमें से एक लोवर और टी-शर्ट निकाल ली, साथ ही साथ मुझे उसमें एक जैकेट भी मिल गई थी। इसके अलावा उस कबर्ड में कुछ पैसे भी रखे हुए थे। जो फिलहाल मेरे बहुत काम के थे। कबर्ड से अपने लिए कपडे निकालने के बाद मैं वहाँ कुछ खाने पीने का सामान तलाश करने लगी। किस्मत से मुझे वहाँ कुछ पैक्ड ड्राईफ्रूट और एक भरी हुई बीयर बॉटल भी मिल गई थी। मैं काफी लम्बे समय से भूखी प्यासी थी। इसलिए मैं ड्राय फ्रूट और बीयर की बोतल लेकर सोफे पर बैठ गई। अभी मैंने बीयर के दो शिप लिए ही थे कि तभी अचानक से मेरी नजर मेरे हाथ पर पडी।

जिसकी थोडी सी जली हुई स्किन निकल गई थी। शायद जंगल में किसी झाडी या पेड़ से रगड खाकर वो निकल गई थी। मैंने देखा कि मेरी जली हुई स्किन के अंदर से मेरी क्लीयर स्किन दिखाई दे रही है। जिसे देखकर मैं बहुत ज्यादा खुश हो गई थी। इसलिए मैंने उस बीयर की बॉटल बापिस से टेविल पर रखा और कमरे से अचैट्ड बाथरूम में घुस गई। किस्मत से बाथरूम में अब भी पानी आ रहा था। करीब 1 घंटे बाद जब मैं बाथरूम से बाहर निकली तो मेरी सारी जली हुई स्किन निकल चुकी थी और अब मैं पहले की तरह ही खूबसूरत दिखाई दे रही थी। इसलिए मैं आईने के सामने खडी होकर अपने आप को बडे गौर से निहारने लगी।

मैंने देखा कि मैं अब पहले से भी ज्यादा जवान और खूबसूरत लग रही हूँ। सबसे अजीब बात तो यह थी कि मेरी आँखों का रंग अब पूरी तरह से बदल चुका था। जहाँ पहले मेरी आँखों का रंग काला था, वो अब बदलकर हरा हो गया था। जिस कारण मैं अब पहले से भी ज्यादा सुंदर दिखाई दे रही थी। जब मुझे इस बात पर पूरा यकीन हो गया कि, उस हादशे के बाद भी मेरी सुंदरता में कोई कमी नहीं आई है। तो मैंने कंघी से अपने बाल अच्छी तरह सुलझाने के बाद कवर्ड से निकाले कपडे पहन लिए। किस्मत से वो कपडे मुझे एकदम फिट आए थे। बस इतनी सी कमी थी कि वो लडकों बाले कपडे थे और थोडे से ढीले भी थे।

पर बिना कपडों के नंगे घूमने से कहीं ज्यादा बेहतर था कि मैं उन कपडों पहन लूं। कपडे पहने के बाद मैंने अपने काम चलाऊ हैंड बैग का सारा सामान अपनी जैकेट की पाकेट में रख लिया और कवर्ड से मिले पैसे भी उसमें रख लिए। इसके बाद मैं दोवारा सोफे पर बैठकर बीयर और ड्रायफ्रूट इंज़ॉय करने लगी। अब मैं वहाँ और ज्यादा देर रुकने का रिस्क नहीं लेना चाहती थी। जिस कारण बियर खत्म होते ही मैं उसी रास्ते से वहाँ से बाहर निकल गई और बापिस से जंगल के रास्ते पर जाकर हाईवे कि तरफ आगे बडने लगी। ड्राई फ्रूट खाने और बियर पीने से मुझे काफी इनर्जी मिल गई थी साथ मेरी थकान भी अभ पूरी तरह से खत्म हो गई थी।

कुछ दूर जाने के बाद ही मैं हाईवे पर पहूँच गई। जिसके बाद मैं अंदाजे से ही एक दिशा की तरफ बागे बडने लगी। क्योंकि मैं पहले कभी इस तरफ नहीं आई थी। करीब 1 घंटे चलने के बाद मुझे एक ढावे के पास रखा ट्रक दिखाई दिया। इसलिए मैं जल्दी से उनके पास जा पहूँची। किस्मत से मुझे वहाँ 4 आदमी ढावे के बाहर आग जलाकर हाथ सेंकते हुए मिल गए। जब मैंने उनसे भोपाल का रास्ता पूछा तो मुझे पता चला कि मैं उल्टे रास्ते आगे बड रही थी। यह सुनते ही मेरा पूरा मूढ खराब हो गया। भोपाल उस ढावे से करीब 30 किलोमिटर दूर था। अगर मैं उल्टे रास्ते नहीं आई होती तो इस वक्त मैं भोपाल से करीब 10 किलोमीटर दूर होती।

कहानी जारी है......
 
Update 043 -

मैं अभी उस ढाबे से भोपाल तक जाने के बारे में सोच ही रही थी कि तभी उनमें से एक आदमी ने कहा

आदमी1- आखिर तुम्हें जाना कहाँ है

उस आदमी की आवाज सुनकर मैं अपनी सोच से बाहर आई और बोली

निशा- भोपाल

आदमी1- पर तू है कौन और यहाँ इतनी रात को अकेले क्या कर रही है

उस आदमी का बात सुनकर मैं थोडा डरते हुए बोली

निशा- व वो कुछ लोग मुझे जबरदस्ती यहाँ ले आऐ थे और मुझे जंगल के पास छोड कर भाग गए

मेरी बात सुनकर एक दूसरा आदमी बोला

आदमी2- उस्ताद मुझे तो लगता है कि यह राण्डी है साली। यहाँ चुदवाने आई होगी और अब नाटक कर रही है

उस दूसरे आदमी का बात सुनकर पहले बाला आदमी बोला

आदमी1- मुझे भी यही लगता है। ऐ लड़की नाम क्या है तेरा

उन आदमियों की बात का मुझपर कोई फर्क नहीं पडा। क्योंकि मैं कुछ दिनों से सच मैं ही एक रण्डी बन गई थी। बैसे भी मैंने पिछले 2-3 दिन से चुदाई नहीं करवाई थी। अगर वो लोग मेरे साथ कुछ करते, तो भी मुझे कोई प्राब्लम नहीं थी। मैं बस किसी भी तरह भोपाल पहूँचना चाहती थी। इसलिए मैं बोली

निशा- ज जी सपना

आदमी1- क्या रेट है तेरा

निशा- ज जी मैं सच कह रही हूँ, जैसा आप सोच रहे हैं मैं बैसी लड़की बिल्कुल भी नहीं हूँ। मेरा जल्द से जल्द भोपाल पहूँचना बहुत जरूरी है। अगर आप लोग भोपाल की तरफ जा रहा हो, तो प्लीज मुझे लिफ्ट दे दो। चाहो तो पैसे भी ले लेना

मेरी बात सुनकर पहला आदमी बोला

आदमी1- हाँ हाँ मैं छोड दूँगा तुम्हें भोपाल। लेकिन सुबह चलूँगा

निशा- कोई बात नहीं…. मैं यहीँ आस पास रुककर इंतजार कर लूँगी। बैसे समय कितना हुआ है अभी

मेरी बात सुनकर उस आदमी ने अपने मोबाईल में समय देखते हुए कहा

आदमी1- रात के 2 बज रहे है इस वक्त और हम यहाँ से सुबह 6 बजे निकलेंगे। आजा यहीं हमारे साथ बैठ जा, तुम्हारे साथ साथ हमारा भी टाईम पास हो जाऐगा

उस आदमी की बात सुनकर मैं तुरंत उन लोगों के साथ ही आग के पास बैठ गई। आग की गर्मी से मुझे काफी राहत मिल रही थी। तभी दूसरा आदमी बोला

आदमी2- तू सच में शरीफ लड़की है या हमारे सामने नौटंकी कर रही है। देख अगर तू मान जाऐगी तो हम तुझे पैसे भी देंगे।

निशा- मैं सच कह रही हूँ, मैं एक शरीफ लड़की हूँ। लेकिन आप लोग अगर मेरे साथ कुछ करना चाहते हैं, तो मैं आपको नहीं रूकूँगी और ही किसी से कुछ कहूँगी। बस आप मुझे भोपाल तक छोड देना।

मेरी बात सुनकर वो दूसरा आदमी फिर से बोला

आदमी2- देख लडकी हम किसी की मजबूरी का फायदा नहीं उठाते। अगर अपनी मर्जी से करवाओगी, तो हम सब लोग बहुत कुछ करना चाहेंगे और तुझे पैसे भी देंगे

उस आदमी की बात सुनकर मैं कुछ देर शांत बैठी रही और फिर बोली

निशा- ठीक है कर लो। पर प्लीज आराम से करना, मैंने बस 1-2 बार अपने बॉयफ्रेंड के साथ ही किया है। बहुत दर्द होता है।

मेरी बात सुनकर वो आदमी खुश होते हुए बोला

आदमी2- ऐ हुई ना बात। उस्ताद पहले तुम ही गर्मी ले लो। उसके बाद हम लोग भी मजे ले लेंगे।

आदमी1- अबे पहले पैसे की बात तो कर ले

निशा- आपको जो देना हो वो दे देना। लेकिन प्लीज मुझे भोपाल तक जरूर ले जाना वर्ना आप मेरे साथ सब कुछ करने के बाद मना ना कर दो।

मेरी बात सुनकर वो आदमी कुछ देर सोचते हुए बोला

आदमी1- अरे टेंशन मत ले, अगर तू नहीं भी करवाऐगी तो भी हम तुझे भोपाल तक छोड देंगे। बैसे तो ज्यादातर रण्डियों का एक बार का रेट हजार पाँच सौ ही होता है। लेकिन तू शरीफ लड़की लगती है और इतनी सुन्दर भी है, इसलिए हम लोग मिलकर तुझे पूरे 10 हजार रूपये देंगे। बोल मंजूर है या नहीं।

निशा- जैसा आपको ठीक लगे

आदमी2- और अगर तू मूँह में लेगी तो हम तुझे और भी ज्यादा पैसे देंगे। बोल लेगी क्या अपने मूँह में

उस आदमी की बात सुनकर मैं सोचने का नाटक करते हुए बोली

निशा- हाँ ठीक है… कर कर लेना जो भी करना है। पर प्लीज जोर जबरदस्ती से मत करना… जो भी करना है वो आराम से करना

मेरी बात सुनकर वो आदमी बोला

आदमी2- तो फिर ठीक है, उस्ताद का मूँह में ले ले अभी

उस आदमी की बात सुनकर मैं थोडा चौंकते हुए बोली

निशा- यहाँ सबके सामने

आदमी2- इस रास्ते पर रात में कोई भी नहीं आता। बस हम चार ही हैं और अगर कोई आ भी गया तो तेरे लिए ही अच्छा है। कुछ और पैसे कमा लोगी

उस आदमी की बात पर मैंने कोई जबाब नहीं दिया और पहले पाले आदमी की तरफ देखने लगी। जिसे दूसरा आदमी उस्ताद बोल रहा था। मैंने अंदाजा लगाया कि यह आदमी शायद ट्रक ड्रायवर है और दूसरा आदमी शायद उसका हेल्पर। बाकी दो आदमी शायद इस ढावे पर काम करने बाले होंगे। मुझे यूँ देखते पाकर पहले बाला आदमी मुस्कुराया और फिर उसने घुटनों के बल खडे होकर अपना लण्ड बाहर निकाल दिया। मैंने एक नजर बाकी आदमियों पर डाली जो इस वक्त मुझे ही देख रहे थे। उसके बाद मैं भी कुतिया बनकर खडी हो गई और उस आदमी का लण्ड मूँह में लेकर चूसने लगी। कुछ देर बाद ही वो आदमी मेरी लण्ड चुसाई से खुश होकर बोला

आदमी1- साली तू तो बड़ा मस्त लण्ड चूसती है

उस आदमी की बात सुनकर मैंने उसका लण्ड मूँह से बाहर निकाला और बोली

निशा- मेरे बॉयफ्रेंड को यह बहुत पसंद है, तो बस उसी ने सिख दिया

इतना बोलकर मैं फिर से उसका लण्ड चूसने लगी। कुछ देर यूँ ही लण्ड चूसने के बाद दूसरा आदमी मेरे शरीर को सहलाने लगा। वो कभी मेरे बूब्स को सहलाता और कभी मेरी गाँड को सहलाता। जब बो कुछ ज्यादा ही एक्साईटेड हो गया तो उसने मेरा लोअर नीचे सरका दिया और पीछे से मेरी चूत चाटने लगा। अपनी चूत पर उस आदमी की गर्म गर्म जीभ महसूस होते ही मैं और भी ज्यादा एक्साईटेड हो गई थी। करीब 15 मिनट अपना लण्ड चुसवाने के बाद उस आदमी ने मुझे रोक दिया और मेरी गाँड की तरफ जाकर अपना लण्ड मेरी चूत से सटा दिया।

जिसे देखकर मैं समझ गई कि अब यह मेरी चुदाई करने बाला है। इसलिए मैंने अपनी आंखें बंद कर ली और अपनी चुदाई का इंतजार करने लगी। शायद उस आदमी को चुदाई का अच्छा खासा एक्सपीरियंस था। जिस कारण उसने मेरी पतली कमर को अपने दोनों हाथों से मजबूती से पकडा और धीरे धीरे अपना मूसल जैसा लण्ड मेरी चूत के अंदर घुसाने लगा। हालाँकि मैं चुदने के लिए काफी ज्यादा एक्साईटेड थी, लेकिन जैसे ही उसका लण्ड मेरी चूत के अंदर जाने लगा तो मुझे तेज दर्द एहसास हुआ और मेरे मूँह से हल्की हल्की चीखें निकलने लगी

आआआआहहहहहहहहहह

उउउममममम

इइससससस

उईईईईई माँ

उउउममममम

कुछ ही देर में उस आदमी ने अपना पूरा लण्ड मेरी चूत में घुसा दिया और धीरे धीरे मेरी चुदाई शुरू कर दी। मैं अब भी लगातार दर्द भरी आवाजें निकला रही थी।

आआहहहहह

उउउममममम

उउउममममम

आआआहहहह

तभी दूसरा आदमी जो कुछ देर पहले मेरी चूत चाट रहा था, वो मेरे सामने आकर घुटनों के बल खडा हो गया और अपना लण्ड बाहर निकाल कर मेरे मूँह के सामने कर दिया। जिसे देखकर मैं चुपचाप उसका भी लण्ड अपने मूँह में लेकर चूसने लगी। लण्ड चूसने के कारण मेरे मूंह से अब आवाज निकलनी बंद हो गई। करीब 30 मिनट बाद मेरी चुदाई करने बाले आदमी ने अचानक से अपनी स्पीड बड़ा दी। तो मैं समझ गई कि इसका काम अब होने ही बाला है। पर तभी अचानक से उसने अपना लण्ड मेरी चूत से बाहर निकला लिया दूसरे आदमी से अपनी पोजीशन एक्सचेंज कर ली।

जिसे देखकर मैं समझ गई कि यह आदमी अपना पानी मेरे मूँह में छोडना चाहता है। इसलिए मैंने चुपचाप उसका लण्ड अपने मूँह में लिया और चूसने लगी। तब तक दूसरा आदमी मेरे पीछे जाकर मेरी चुदाई शूरू कर चुका था। कुछ देर तक उसका लण्ड चूसने के बाद ही उस आदमी ने अपना सारा पानी मेरे मूँह में छोड दिया। जिसे मैं सारा निगल गई और उसका लण्ड चाट चाट कर साफ कर दिया। जैसे ही वो आदमी अलग हुआ तो तीसरा आदमी मेरे सामने आ गया। इस तरह बारी बारी से उन चारों आदमियों ने मुझे चोदा और अपना अपना पानी मेरे मूँह में छोड दिया। जिसे मैं बिना कोई नखरे दिखाऐ चुपचाप निगल गई थी।

जब चारों आदमीयों का काम हो गया तो मैं उठकर खडी हुई और ढावे पर बनी एक काम चलाऊ बाथरूम में जाकर मैंने टायलेट की और आपनी चूत को पानी से अच्छे से साफ किया। क्योंकि चूदाई के कारण मेरी चूत काफी गीली और चिपचिपी हो गई थी, ऊपर से मैंने पेंटी भी नहीं पहनी थी। जिस कारण मेरे लोअर भी गंदा हो जता। अपनी चूत को अच्छी तरह से साफ करने और ढावे पर रखे मटके से ढेर सारा पानी पीने के बाद। मैं बापिस उनके पास आकर बैठ गई। मेरे बापिस आने पर उन लोगों ने आपस में कंट्रीव्यूट करके मुझे पैसे दिए। जो मैंने बिना गिने ही अपनी जैकेट की पॉकेट में रख लिए।

इसके बाद मैंने एक बार फिर से उनसे समय पुछा तो सुबह के 4 बजने बाले थे। अभी भी हमारे वहाँ से निकलने में 2 घण्टे का समय था। जिस कारण पहले आदमी ने मुझे ट्रक के अंदर जाकर कुछ देर आराम करने के लिए बोल दिया। इसलिए मैं चुपचाप ट्रक के अंदर जाकर पिछली सीट पर लेट गई। ट्रक के अंदर एक कंबल भी रखा हुआ था जिसे मैंने ओढ लिया था। सुबह करीब 6 बजे जब एक आदमी ने आकर मुझे जगाया। तो मैंने देखा की ड्रायबर और उसका हेल्पर पहले ही नहा धोकर तैयार हो चुके थे। बस चाय नाश्ता तैयार होने का इंतजार कर रहे थे।

इसलिए मैं भी ढावे के पीछे खुले खेत में जाकर फ्रेश हुई और ढावे की काम चलाऊ बाथरूम में सारे कपडे उतार कर नहाया। इसके बाद जब मैं तैयार होकर बाहर आई तब तक ढावे पर काम करने बाले लोगों ने चाय नाश्ता तैयार कर दिया था। चाय नाश्ता करने के बाद हम लोग भोपाल की तरफ ट्रक से निकल गए। मैं ड्रायवर के पास बैठकर सारा रास्ता अच्छे से देख रही थी और उसका नक्शा मन ही मन तैयार कर रही थी। क्योंकि अब मेरा टारगेट उन लोगों से अपना बदला लेना था। जिन्होंने मुझे जान से मारने की कोशिश की थी।

उन लोगों से बदला देने का सबसे आसान तरीका, उन्हें बर्बाद करना था। जिसके लिए मुझे सबसे पहले उनके खजाने को उस खण्डहर से गायब करना था। जो जफऱ और गनपत ने उस खण्डहर के सीक्रेट रूम में छिपा रखा था। करीब 10 किलोमीटर चलने के बाद मुझे वो रास्ता भी मिल गया जहाँ से मैं जंगल से बाहर निकली थी। थोडा और आगे चलने के बाद मुझे फारेस्ट डिपार्टमेंट के क्वाटर भी दिखाई दे गए थे। जहाँ से कल रात मैंने कपडे चोरी किए थे। जिससे मैंने अंदाजा लगाया कि जंगल के अंदर जाने बाला रास्ता फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के ऑफिस से दूर होने के कारण फॉरेस्ट डिपार्टमेंट बालों को जंगल में आने जाने बालों के बारे में पता ही नहीं चलता होगा।

करीब 1 घण्टे के सफर के बाद आखिरकार हम भोपाल पहूँच गए। वो ट्रक भोपाल सिटी के बाहर बाले हिस्से में रुक गया था। क्योंकि वहीं पास से ही उन लोगों को अपने ट्रक में मॉल लोड करना था। लेकिन वहाँ से अंदर जाने के लिए आसानी से ऑटो मिल सकता था। इसलिए मैं ट्रक से उतरकर ऑटो से रेलवे स्टेशन की तरफ निकल गई और रेलवे स्टेशन से पहले अपने होटल के पास बाले रोस्टोरेंट पर उतर गई। जिसके बाद मैंने ऑटो बाले को पैसे दिए और रेस्टोरेंट के अंदर आ गई।

जहाँ मैंने एक कार्नर बाली चेयर पर बैठकर अपने लिए कॉफी आर्डर कर दी। मैं इस वक्त अपने होटल रूप में जाने का कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी। क्योंकि मुझे शक था की जरूर कोई ना कोई वहाँ नजर रख रहा होगा। इसलिए जो बेटर मेरी कॉफी सर्व करने आया, मैंने उसे एक 500 का नोट देकर अपने होटल से रघु को यहाँ बुलाकर लाने के लिए बोल दिया।

कहानी जारी है....
 
Update 044 -

कुछ ही देर बाद रघू मेरे सामने था। उसके मन में इस वक्त कई सबाल चल रहे थे। इसलिए वो बोला

रघु- आप कहाँ थीं इतने दिनों से और आपका फोन भी नहीं लग रहा है। कुछ दिनों पहले गुण्डे टाईप के लोग आये थे होटल में और आपकी इंक्वारी कर रहे थे, इसके अलावा उन लोगों ने अपके कमरे की तलाशी भी ली थी।

रघू के आने से पहले ही मैं अपने लिए खाना और रघू के लिए एक कॉफी आर्डर कर चुकी थी। इसलिए रघू के वहाँ आते ही मैं कॉफी का कप उसकी तरफ खिसकाते हुए बोली

निशा- देखो रघु मैं बाद में तुम्हें सब बता दूँगी, फिल्हाल तुम बस इतना समझ लो कि किसी ने मेरे साथ गद्दारी की थी। जिस कारण मैं दुश्मनों के हाथ लग गई। अब तुम तो सब जानते ही हो कि मेरा काम कैसा है, इसलिए बडी मुश्किल से बच कर आई हूँ। खैर छोडो यह सब, पहले तुम यह बताओ कि होटल में उन्हें मेरे बारे में क्या जानकारी मिली

मेरी बात सुनकर रघु कॉफी शिप करते हुए बोला

रघु- कुछ भी नहीं। आपका हैंण्ड बैग और बाकी के सारे डॉक्यूमेंट तो मेरे ही पास थे। अपके रूम में बस लैपटॉप और कपडे बगैरह ही रखे हुए थे।

निशा- हुम्म… अच्छा किसी से मेरे बारे में कुछ पूछा था क्या

रघू- हाँ काऊंटर पर इंक्वारी की थी। पर आपका रूम किसी कम्पनी के नाम पर बुक है। लेकिन कार के लिए आपने जो फर्जी डाक्यूमेंट दिए थे, उनकी एक कॉपी बो लोग अपने साथ ले गये थे। मतलब आपके बारे में उन्हें होटल से कुछ भी पता नहीं चला है।

रघू की बात सुनकर मैं कुछ सोचते हुए बोली

निशा- चलो यह तो अच्छी बात है। अब सुनो मुझे शक है कि अभी भी कोई ना कोई होटल पर नजर रख रहा होगा। इसलिए मैं अब होटल बापिस नहीं जा सकती। क्या तुम मेरा सामान मुझे लाकर दे सकते हो।

मेरी बात सुनकर रघू तुरंत बोला

रघू- हाँ ले आऊँगा

निशा- तो फिर ठीक है…. पहले तुम मेरा हैण्ड बैग मुझे लाकार दे दो। ताकि मैं किसी दूसरे होटल में अपने लिए रूम बुक कर लूं और मेरा चैकआऊट बिल भी होटल से बनबा देना।

रघू- ठीक है…. आप कुछ देर यहीं इंतजार करो मैं अभी ले आता हूँ। लेकिन मुझे एक बात समझ में नहीं आ रही कि आपको आखिर धोखा दिया किसने।

रघू की बात सुनकर मैं उसे समझाते हुए बोली

निशा- इसमें बहुत बडे बडे लोग शामिल हैं। इसलिए तुम इस सब में मत पडो रघू। हाँ एक आदमी का नाम मैं बता सकती हूँ। क्योंकि वो आदमी कभी भी मेरी जानकारी इकट्ठा करने आ सकता है और तुम्हें उससे सावधान रहना होगा। वो इंसान और कोई नहीं बल्कि यहाँ के एस.पी. महेश वर्मा हैं।

मेरी बात सुनकर रघू बुरी तरह से चौंकते हुए बोला

रघू- क्या….. एस.पी. साहब ने आपके साथ ऐसा किया। पर बो तो आपके ही डिपार्टमेंट के हैं।

निशा- पैसों में सबका ईमान बिक जाता है मेरी जान

मेरी बात सुनकर रघू गुस्से से भडते हुए बोला

रघू- भाड में जाये ऐसा पैसा… जो अपनों को की फंसा दे। मैं किसी से नहीं डरता। मुझे बस सब जानना है।

निशा- पर क्यों

रघू- क्योंकि मैं आपसे प्यार करने लगा हूँ

निशा- मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ। लेकिन तुम तो जानते ही हो कि हमारे रिश्ते का आगे चलकर कोई भविष्य नहीं है। मेरा काम ही कुछ ऐसा है कि मेरे साथ कभी भी कुछ भी हो सकता है। इसलिए मैं तुम्हारी जिंदगी बर्बाद नहीं कर सकती। मैं बस जब तक यहाँ भोपाल में हूँ, तुम्हारे साथ अच्छा समय बिताना चाहती हूँ। ताकि मुझे आगे चलकर कोई पछतावा ना हो। बैसे भी हो सकता है कि मुझे अपने काम के चलते किसी दुसरे मर्द के साथ भी सोना पडे। मैं नहीं चाहती कि मेरे काम के कारण तुम मेरे प्यार पर कभी कोई शक करो और हमारे बीच कभी कोई झगडा हो।

मेरी बात सुनकर रघू थोडा सीरियस होते हुए बोला

रघू- मुझे आपके काम से कोई फर्क नहीं पडता। आगर आपको किसी दूसरे मर्द के साथ सोना भी पडा, तो भी मैं आपसे हमेशा प्यार करता रहूँगा और आपका इंतजार भी करता रहूँगा

रघू की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बोली

निशा- तुम पूरे पागल हो…

मेरे चेहरे की मुस्कान देखकर रघू भी मुस्कुराता हुआ बोला

रघू- अब जैसा भी हूँ आपका ही हूँ और हमेशा रहूँगा…

रघू की बात सुनकर मैं आखिरकार हार मानते हुए बोली

निशा- अच्छा बाबा ठीक है। पहले तुम मेरा हैण्डबैग लाकर मुझे दो। ताकि मैं किसी दूसरे होटल में अपने लिए रूम बुक कर सकूँ। उसके बाद मैं तुम्हें होटल का नाम और अपना रूम नम्बर मैसेज भेजकर बता दूंगी। जहाँ तुम रात के समय मेरा बाकी सामान लेकर आ जाना। उसके बाद मैं तुम्हे तसल्ली से सब कुछ बता दूँगी। अब तो खुश हो ना….

रघू- हाँ यह ठीक है…

निशा- तो मेरे प्यारे रघु अब जल्दी से जाकर मेरा हैण्डबैग और मेरा चैकआऊट बिल बनवाकर ले आयो। ताकि मैं तुम्हें उसका पेमेंट कर सकूँ

मेरी बात सुनकर रघू तुरंत वहाँ से निकल गया। करीब 20 मिनट बाद रघू ने बापिस उसी रेस्टोरेंट में आकर मेरा हैण्डबैग और होटल का चैकआऊट बिल मुझे लाकर दे दिया। मेरे होटल रूम का पेमेंट तो कम्पनी ने पहले ही कर दिया था। जिसमें अभी भी कुछ दिन बचे थे। उनके पैसे काटकर मेरे खाने-पीने, लाऊंड्री और कार का बिल जोडकर जो अमाऊंट बचा था, वो मैने रघू को दे दिया। रघू के जाने के बाद मैं वहाँ से सीधे मॉल पहूँची, जहाँ मैंने सबसे पहले अपने लिए एक अच्छा सा मोबाईल फोन खरीदा। जैसे ही मैंने उसमें अपना सिम कार्ड डालकर उसे ओपन किया, तो मेरे मोबाईल में एक साथ कई सारे नोटिस्फेक्सन आने लगे।

फिलहाल मैंने उन सभी को इग्नोर कर दिया। उसके बाद मैंने अपने लिए कुछ कपडे खरीदे। क्योंकि मेरे कपडे और बाकी सामान शाम को रघू लाने बाला था। जवकि अभी मैंने जो लडकों बाले कपडों पहले हुए थे। उसमें मुझे थोडा अनकंफर्टेबल महसूस हो रहा था। इसलिए मैंने मॉल के ही चेंजिंग रूम में अपने कपडे भी चेंज कर लिए थे, साथ ही साथ जैकेट से सारे पैसे और दूसरा जरूरी सामन निकालकर मैंने अपने हैण्ड बैग में रख लिया था। अपने कपडे चेंज करने के बाद जब मैं मॉल से बाहर निकली तो अपने पुराने कपडे और बाकी सारा सामान मैंने मॉल के ही बाहर रखे डस्टबिन में फेंक दिया था।

हाँलाकि पैसों के अलावा उस खण्डहर में मिला चाकू भी मैंने अपने पास रखा था। क्योंकि काफी सोचने के बाद आखिरकार मुझे याद आ ही गया था कि वो चाकू असल में गनपत का था और जिससे गनपत के साथ साथ जफर ने भी मुझपर पर कई बार हमला किया थ। जिस कारण उसपर मेरा खून भी लगा हुआ था। जिसे मैंन फारेस्ट डिपार्टमेंट के क्वाटर में अच्छी तरह से धोकर साफ कर लिया था। यह चाकू मैंने केवल इसलिए अपने पास रखा था, ताकि मुझे वो दिन और उस दिन की सारी घटना याद रहे। मॉल से बाहर निकलकर मैंने उसी इलाके के एक अच्छे से होटल में अपने लिए रूम बुक किया और अपने रूम में जाकर कंबल ओडकर सो गई।

क्योंकि मैंने रात में केवल 2 घंटे ही रेस्ट किया था। बाकी सारी रात मैं जागती रही थी। इसलिए मुझे बहुत तेज नींद आ रही थी। मैं दोपहर करीब 1 बजे सो कर उठी तो सबसे पहले मैंने अपने होटल का नाम और रूम नम्बर रघू को सेंड किया। उसके बाद में अपने मोबाईल में आये मैसेज चैक करने लगी। भोपाल के मेरे लगभग सभी दोस्तों ने मुझे कॉल करने की कोशिश की थी। जिस कारण उनके नाम से मेरे मोबाईल में कई सारे अलर्ट मैसेज डले हुए थे। मैंने एक एक करके सबको कॉल करने के स्थान पर चैटिंग एप डाऊनलोड किया और एक साथ सबको मैसेज भेज दिया।

“सॉरी फ्रेण्डस…. मैं अर्जेंट काम से भोपाल से बाहर गई हुई थी और मेरा मोबाईल फोन भी टूट गया था। जिस कारण मैं तुम लोगों से कोई कान्टेक्ट नहीं कर पाई और आज सुबह ही मैं बापिस भोपाल आई हूँ।”

अपने दोस्तों को मैसेज करने के बाद मैंने सबसे पहले असलम को कॉल किया, क्योंकि मेरे पास उसके कई सारे मैसेज डले हुए थे। उसे भी मैंने वही बताया जो अपने दोस्तों को बताया था। फिर मैंने कुछ देर रवि और श्रेया से बात करने के बाद डी.जी.पी. सर यानि हरीश अंकल को कॉल किया और उनसे मिलने का समय माँगा। हरीश अंकल को पहले से ही मेरी चिंता हो रही थी। जिस कारण उन्होंने मुझे 1 घंटे बाद अपने ऑफिस में आने के लिए बोल दिया। भोपाल में अपने सभी दोस्तों से बात करने के बाद मैं अपने पर्शनल मोबाईल फोन को चैक करने लगी।

मेरे पर्शनल मोबाईल फोन में भी मेरे पिता और भाई के कुछ मिस्डकॉल के अलावा मेरे ऑफिस के कुछ दोस्तों के मैसेज डले हुए थे। लेकिन मेरे पति अमन का कोई मैसेज या कॉल नहीं थी। जिसे देखकर मुझे बहुत दुख हुआ। बैसे भी हमेशा से मैं ही उसे कॉल करती थी। वो कभी भी खुद से मुझे ना तो कभी कॉल करता था और ना ही मैसेज करता था। अगर उस दिन मैं मर भी जाती, तो शायद किसी को कुछ पता भी नहीं चलता और ना ही किसी को मेरे मरने से कोई फर्क पडता। यह सब सोचते ही मैंने गुस्से में अमन को कॉल कर दिया। जैसे ही अमन ने कॉल रिसीव किया, तो वो बिना मेरी बात सुने बोला

अमन- निशा मुझे अभी 1 महीना और लगेगा बापिस आने में। इसलिए बापिस आने के अलावा कोई और बात करनी हो तो बोलो बर्ना फोन कट कर दो, मैं अभी बहुत बिजी हूँ।

अमन की बात सुनकर मुझे बहुत तेज गुस्सा आ रहा था। इसलिए मैं बोली

निशा- अमन क्या तुम सच में मुझसे कोई रिश्ता रखना भी चाहते हो या बस किसी मजबूरी में यह रिश्ता निभा रहे हो।

मेरी बात सुनकर अमन ने कहा

अमन- क्यों…. अगर मैं कहूँ कि यह रिश्ता मैं मजबूरी में निभा रहा हूँ, तो क्या तुम मुझे छोड दोगी

अमन की बात सुनकर मैंने गुस्से में कहा

निशा- हाँ छोड दूँगी…..

अमन- तुम जानती भी हो कि तुम क्या कह रही हो। तुम्हारी दो कोडी की नौकरी में तुम दो वक्त की रोटी तो ठीक से खा नहीं पाओगी, फिर तुम्हारे यह ऐसो आराम कैसे पूरे होंगे। इसलिए बकबास करना बंद करो। बैसे भी मेरे पास इन सब फालतू बातों के लिए कोई समय नहीं है।

अमन ने अपनी बातों से मुझे और भी ज्यादा गुस्सा दिला दिया था। इसलिए मैं गुस्से से बिफरते हुए बोली

निशा- लेकिन मेरे पास बहुत समय है मिस्टर अमन। इसलिए आज मैं सारी बातें क्लीयर करना चाहती हूँ। ताकि मैं भी इस रिश्ते से कोई उम्मीद ना रखूँ और रही दो कौडी की नौकरी बाली बात, तो मैं जितना भी कमाती हूँ उससे मैं अपनी सारी जरूरतें आसानी से पूरी करने के साथ साथ एक अच्छी लाईफ भी जी सकती हूँ। इसलिए यह पैसों की धौंस मुझे मत दिखाना। बैसे भी घर खर्च में मैं भी बाराबर पैसे खर्च करती हूँ और मेरे कोई फालतू शौक भी नहीं हैं जिनपर तुम्हें कोई पैसा खर्च करना पडता हो।

मुझे इतने गुस्से में देखकर शायद अमन को अपनी गलती का एहशास हो चुका था। इसलिए वो अपनी अक़ड भरी टोन सुधारते हुए थोडा प्यार से बोला

अमन- निशा आखिर आज तुम्हें हो क्या गया है। तबियत तो ठीक है तुम्हारी

अमन के यूँ गिरगिट की तरह रंग बदलने से मैं बुरी तरह हैरान थी, जिस कारण मेरा गुस्सा कम होने की जगह और भी ज्यादा बड गया था। इसलिए मैं गुस्से में बोली

निशा- उससे तुम्हें क्या मतलब... कभी तुमने अपने मन से मुझे कॉल करके मेरा हालचाल पूछा है। मैंने पिछले 4 दिनों तक तुम्हें फोन नहीं किया, तो तुमने एक बार भी यह जानने की कोशिश नहीं की कि मैं ठीक हूँ या नहीं।

मेरी बात सुनकर अमन एक बार फिर मुझसे चिढते हुए बोला

अमन- कैसे बच्चों जैसी बातें कर रही हो तुम। हम कोई लवर्स नहीं हैं जो मैं हर दिन तुम्हारे हालचाल पूछता फिरूँ।

निशा- अमन मैं आखिरी बार पूछ रही हूँ। सच सच बताओ कि तुम मेरे साथ रहना चाहते हो या नहीं। अगर तुम्हारा किसी और के साथ अफेयर बगैरह है तो मुझे अभी बता दो, मैं चुपचाप तुम्हारे रास्ते से हट जाऊँगी।

अमन- मैं भी तुमसे आखिरी बार बोल रहा हूँ कि तुम अपनी बकवास बंद करो। मेरे बापिस आने पर हम इस मुद्दे पर आराम से बात करेंगे और हाँ तब तक मुझे ऐसी फालतू बातों के लिए कॉल मत करना।

इतना बोलकर अमन ने बिना मेरी बात सुने फोन कट कर दिया। मुझे अमन पर इस वक्त बहुत गुस्सा आ रहा था। हाँलाकि मैं अच्छी तरह से जानती थी कि मुझे अमन से यह सब कहने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि मैंने खुद भी अमन को धोखा दिया है और दूसरे मर्दों के साथ फिजीकल संबंध भी बनाऐ हैं। पर इस सबका कारण भी अमन ही तो है। वो मेरी शारीरिक जरूरतों को कभी पूरी नहीं कर पाया। बैसे भी अब तक मेरा उसे छोडने का कोई इरादा नहीं था। मैं तो यह सब बस यहाँ भोपाल रूकने तक ही कर रही थी। पर आज अमन की बातों से मुझे कुछ ज्यादा ही गुस्सा आ गया था। जिस कारण मैंने मन ही मन अमन को छोडने का पक्का इरादा कर लिया था।

कहानी जारी है ......
 
Update 045 -

अमन से बात करने के बाद मैं काफी देर तक अपनी आगे की प्लानिंग के बारे में सोचती रही। काफी देर सोचने के बाद मैंने तय किया कि पहले अपने दुश्मनों से निपटा जाऐ, उसके बाद अमन को देखूँगी। बैसे भी वो एक महीना और नहीं आने बाला है, तो फिर मैं क्यों फालतू में उसके बारे में सोचूँ। अपने दुश्मनों से बदला लेने के लिए मेरा सबसे पहला कदम उनका पैसा गायब करना था। जिसे गायब करना मेरे लिए कोई बडी बात नहीं थी। पर उसे सुरक्षित जगह पर छिपाकर रखना, इस वक्त मेरे लिए बहुत बडी समस्या थी।

क्योंकि इतना सारा सोना मैं कहाँ रखूँगी, मैं ना तो उसे अपने साथ दिल्ली ले जा सकती थी और ना ही ले जाना चाहती थी। क्योंकि दिल्ली बाला फ्लैट अमन के नाम पर था। अगर अमन से मैं अलग हुई तो फिर इतना सारा सोना किसी दूसरी जगह शिफ्ट करने में बहुत ज्यादा परेशानी होगी और अमन को उसके बारे में पता चलने का रिश्क भी था। साथ ही साथ इतना सारा सोना किसी बैकं के लॉकर में भी नहीं रखा जा सकता है। क्योंकि इतना सोना रखने के लिए मुझे कई सारे लॉकर बुक करने होंगे। जिसमें काफी रिश्क था। यह सब सोचते सोचते मेरे मन में एक ख्याल आया कि

“क्यों ना मैं यहाँ भोपाल के आस पास ही कहीं अपने नाम से एक मकान खरीद लूँ। जिसमें मैं वो सारा सोना सुरक्षित रख सकती हूँ। साथ ही साथ अगर मैं और अमन अलग होते भी हैं तो एक नई जिंदगी शुरू करने के लिए मेरे पास अपना खुद का घऱ भी होगा और मेरे पास इस वक्त एक अच्छा खासा आलीशान घर खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे भी हैं।”

मुझे अपना यह आईडिया बहुत पसंद आया, इसलिए मैंने तय किया कि मैं आज ही रवि से किसी अच्छे प्रापर्टी डीलर की जानकारी ले लूँगी। बैसे भी रवि का फैमिली बिजिनेश भी तो बिल्डींग्स बगैरह बनाने और नई नई कॉलोनी डेबलप्ड करने का है। इसलिए उसे तो पक्का इन सबके बारे में सही सही जानकारी होगी ही। कुछ देर इस बारे में सोचने के बाद मैंने रवि को कॉल कर दिया और उससे मिलने के बारे में पूछा, तो वो तुरंत मान गया। इसलिए मैंने उसे 4 बजे एक रेस्टोरेंट में मिलने के लिए बुला लिया। इसके बाद मैं तैयार होकर हरीश अंकल के ऑफिस के लिए निकल गई। जब मैं वहाँ पहूँची तो वो मेरा पहले से ही इंतजार कर रहे थे। कुछ देर हाल चाल पूछने के बाद वो बोले

हरीश- मेरे ऑफर के बारे में क्या सोचा तुमने

हरीश अंकल की बात सुनकर मैं तुरंत बोली

निशा- अंकल सच कहूँ तो उसके लिए मैं अभी पूरी तरह से तैयार नहीं हूँ। क्योंकि फिलहाल मुझे अपने कुछ फैमिली मैटर और पर्शनल मैटर सुलझाने हैं, जिनमें थोडा समय लगेगा। बैसे भी पुलिस फोर्स ज्वाईन करके मैं किसी बंधन में नहीं बंध सकती और ना ही मैं रेगुलर किसी पुलिस स्टेेशन जाकर अपनी ड्यूटी कर सकती हूँ। मुझे आजाद रहना पसंद और हर काम अपने तरीके से करने की आदत है। जबकि पुलिस फोर्स ज्वाईन करके मुझे अनुशासित तरीके से अपने सीनियर्स के हर ऑर्डर को फॉलो करना पडेगा। हइसलिए मैं अपने सभी पर्शनल और फैमिली मैटर सुलझाने के बाद अपना खुद का विजिनैश शुरू करने के बारे में सोच रही हूँ।

मेरी बात सुनकर हरीश अंकल बोले

हरीश- हुम्म अगर ऐसी बात है तो मैं तुम्हें पुलिस डिपार्टमेंट ज्वाईन करने के लिए फोर्स नहीं करूँगा। लेकिन मेरे पास तुम्हारे लिए एक दूसरा ऑफर भी हो। जिसमें तुम्हारे ऊपर कोई बंधन भी नहीं होगा और तुम अपनी मर्जी से काम भी कर सकती हो, साथ ही साथ ुउस काम के दौरान अगर तुम चाहो तो अपना बिजिनेश भी शुरू कर सकती हो। यानि तुम अपनी मर्जी से एक नार्मल लाईफ जी सकती हो, और अपनी इस नार्मल लाईफ जीने के दौराैन तुम्हें कुछ सीक्रेट टास्क पूरे करने होंगे। जिनके बारे में किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा।

हरीश अंकल की बात सुनकर मैं थोडा कन्फ्यूज होते हुए बोली

निशा- मैं समझी नहीं अंकल आप आखिर कहना क्या चाहते हैं

मेरी बात सुनकर हरीश अंकल थोडा सीरियश होते हुए बोले

हरीश- असल में मेरा एक दोस्त है रजीव ठाकुर, जो नेशनल इंटेलिजेंट व्यूरो यानि आई.बी. में ज्वाईंट कमिश्नर है। इसलिए अगर तुम कहो तो मैं उससे बात करके तुम्हें एक अंडरकबर आई.बी. ऑफिसर बनवा सकता हूँ। जिसमें तुम्हें जो भी काम दिया जाऐगा वह तुम बिना किसी बंदिस के अपने तरीके से करने के लिए पूरी तरह से आजाद रहोगी, और इस दौरान अगर तुम चाहतो तो अपना खुद का बिजिनेश भी शरू कर सकती हो। जो पूरी दुनिया के सामने तुम्हारी असली पहचान छिपाने का काम भी करेगा।

मैंने कुछ पलों के लिए हरीश अंकल के ऑफर के बारे में कुछ पलों तक सोचा, वास्तव में उनका यह ऑफर काफी अच्छा था, इसलिए मैं मुस्कुराते हुए बोली

मेरी बात सुनकर हरीश अंकल मुस्कुराते हुए बोले

हरीश- तो फिर ठीक है, तुम अपने डॉक्यूमेंट मेरे पास जरूर भिजवा देना, ताकि मैं उन्हें राजीव के पास भेज सकूँ और तुम्हारी ज्वानिंग की प्रासेस शुरू करवा सकूँ। जब तुम अपने सारे मैटर सुलझा लोगी तो मुझे इस बारे बता देना, ताकि मैं तुम्हारी प्रॉपर ट्रेनिंग शुरू करवा सकूँ।

निशा- ठीक है अंकल…. मैं एक दो दिन में आपके पास अपने डॉक्यूमेंट भिजवा दूँगी या फिर खुद ही आपको दे जाऊँगी। पर क्या आप सच में श्योर हैं कि मैं आई.बी. में अंडर कबर ऑफिसर बनने के काबिल हूँ।

मेरी बात सुनकर हरीश अंकल बोले

हरीश- देखो सपना मेरी नजर में तुम एक काबिल और अच्छी लड़की हो और तुम्हारा दिल भी एकदम साफ है। तभी तो तुमने अंजान लडकियों जो शायद तुम्हारी दोस्त भी नहीं है उनके लिए इतना कुछ किया है। इसके अलावा तुम एक सार्पमाईँडेट और बहादुर लडकी भी हो, जो एक आई.बी. ऑफिसर के लिए सबसे जरूरी गुण है। साथ ही साथ तुम्हारी खूबसूरती भी तुम्हें अपने अंडरकबर ऑपरेशन को पूरा करने में बहुत मदद कर सकती है, और सबसे बडी बात तुम एक कम्प्यूटर जीनियस यानि द ड्रेगन हार्ट हो। इसीलिए मैंने तुम्हें आई.बी. ज्वाईन करने का ऑफर दिया है।

हरीश अंकल के मूँह से अपनी तारीफ सुनकर मैं थोडा शर्मिंदा होते हुए बोली

निशा- पता नहीं अंकल आपको मेरे अंदर काबीलियत और अच्छाई कैसे नजर आ गई... लेकिन सच बात तो यह है कि मैं उतनी भी अच्छी नहीं हूँ, जितना आप मुझे समझ रहे हैं। क्योंकि मैंने अपने जिंदगी में कुछ गलत काम भी किये हैं, जिनके बारे में शायद मैं कभी किसी को बता भी नहीँ पाऊँगी।

मेरी बात सुनकर हरीश अंकल मुझे समझाते हुए बोले

हरीश- देखो सपना जो हो गया सो हो गया। वो तुम्हारा गुजरा हुआ कल है, और जो कुछ भी तुमने अपने पास्ट में गलत किया है शायद उसमें तुम्हारी कोई मजबूरी रही होगी। इसलिए अब उस सबके बारे में सोचने का कोई फायदा नहीं है। लेकिन तुम्हारे पास अपनी पुरानी गलतियों को सुधारने का एक मौका है। इसलिए अगर तुम चाहो तो एक नये सिरे से अपनी जिंदगी शुरू कर सकती हो।

हरीश अंकल की बात सुनकर मैंने मुस्कुराते हुए कहा

निशा- जी अंकल मैं समझ गई कि आप मुझसे क्या कहना चाहते हैं।

हरीश- बैसे सच सच बताना क्या सपना तुम्हारा असली नाम है… या फिर तुमने अपनी असली पहचान छिपाने के लिए मुझे अपना नाम सपना बताया था।

हरीश अंकल की बात सुनकर मैं बुरी तरह से हैरान रह गई थी। क्योंकि हमारे बीच हुई बातों से उन्होंने यह अंदाजा लगा लिया था कि मैंने उनसे अपनी असली पहचान छिपाई थी। शायद कई सालों तक पुलिस डिपार्टमेंट में काम करने के कारण उनकी आदत हर बात पर शक करने की हो गई थी। खैर कारण जो भी हो पर अब मैं उनसे अपनी असली पहचान ज्यादा दिनों तक छिपा नहीं सकती थी। क्योंकि जब मैं उन्हें अपने असली डॉक्यूमेंट दूँगी तो उन्हें मेरी असली पहचान खुद ही पता चल जाऐगी। लेकिन इस वक्त मैं उनसे अपनी असली पहचान के बारे में डिस्कस करने के बिल्कुल मूढ में नहीं थी। इसलिए मैंने उन्हें टालते हुए कहा

निशा- मुझे नहीं पता अंकल कि आपका क्या रिऐक्शन होगा… लेकिन मैंने अपना नाम छोडकर बाकी सब कुछ आपको सब सच सच बताया है।

मेरी बात सुनकर हरीश अंकल ने गंभीरता पूर्वक मुझे घूरा और बोले

हरीश- हुम्म… मुझे लगा ही था… बैसे मैं समझ सकता हूँ कि जब कोई शरीफ लडकी किसी मजबूरी में कॉलगर्ल का काम करे तो वो अपनी असली पहचान छिपाने की कोशिश जरूर करती है। ताकि आगे चलकर उसका सच दुनिया के सामने ना आऐ। ऊपर से तुम तो एक जानी मानी हैकर हो। इसलिए अपनी असली पहचान छिपाना तो तुम्हारी मजबूरी भी है। खैर मुझे यह जानकर ना तो हैरानी हुई और ना ही बुरा लगा। पर अब जब तुम आई.बी. ज्वाईन करने के लिए मान गई हो, तो फिर अब तो तुम मुझे अपना असली नाम बता ही सकती हो। मुझपर यकीन करो तुम्हारे सारे सीक्रेट्स मेरे पास सुरक्षित हैं।

हरीश अंकल की बात सुनकर मैं थोडा मुस्कुराते हुए बोली

निशा- अगर आप यह बात नहीं भी कहते तो भी मुझे आप पर पूरा यकीन था कि आप मेरे सीक्रेट किसी से नहीं कहेंगे। लेकिन अब जब मैं 1-2 में आपके पास अपने असली डॉक्यूमेंट जमा करने ही बाली हूँ। तो आपको मेरा असली नाम बैसे ही पता चल जाऐगा। तब तक के लिए आप मुझे सपना ही समझ लो।

यह सब कहते वक्त मेरे चेहरे पर एक शरारती मुश्कान थी। जिसे देखकर हरीश अंकल कुछ पलों के लिए सब कुछ भूल गए, लेकिन जल्द ही उन्होंने अपने इमोशंन पर कंट्रोल कर लिया और थोडा सीरियस होते हुए बोले

हरीश- चलो ठीक है यही सही…. बैसे एक बात बताओ कि तुम आखिर इतने दिनों से कहाँ गायब थी और तुम्हारा फोन फी स्विच ऑफ आ रहा था।

हरीश अंकल की बात सुनकर मैं भी थोडा सीरियस होते हुए बोली

निशा- अगर मैं आपसे कहूँ कि गनपत ने मुझे किडनैप कर लिया था, तो क्या आप मेरी बात पर यकीन करेंगे

मेरी बात सुनकर हरीश अंकल बुरी तरह से हैरान होते हुए बोले

हरीश- व्हॉट….. पर कब और कैसे... और तुम आखिर उसके चुंगुल से बची कैसे

हरीश अंकल की बात सुनकर मैंने कहा

निशा- 4 दिन पहले आपने जब मुझे गनपत के बारे में बताने के लिए कॉल किया था। उसके कुछ देर बाद ही उसने मुझे किडनैप कर लिया था। जिसके बाद उसने मुझे काफी ज्यादा टॉर्चर भी किया था।

हरीश- ओह गॉड... वो जरूर तुम्हें अपने बेटे गगन की मौत का जिम्मेदार मान रहा होगा

निशा- सर बात इतनी भी आसान नहीं है। असल में गनपत अकेला नहीं था, उसके कुछ पाटनर्स भी उसके साथ थे। उन सभी लोगों ने गलत धंधा करके जो करोडों रूपये कमाये थे। वो सारे पैसे गनपत के पास थे। उन पैसों के बारे में गनपत और उसके दोस्त जफर के अलावा केवल गगन जानता था। लेकिन गगन के मरने के बाद वो सारे पैसे कहीं गायब हो गए हैं। जिसका ढीकरा गनपत मेरे सिर फोडना चाहता था। मतलब कि सारा पैसा खुद हजम करना और अपने बेटे की मौत का बदला भी लेना।

मेरी बात सुनकर हरीश अंकल एक बार फिर चौंकते हुए बोले

हरीश- जफर.. तुम्हारा मतलब वही जफर जो इंदौर का एक फेमस गुण्डा है

हरीश अंकल की बात सुनकर मैंने अनजान बनने का नाटक करते हुए कहा

निशा- पता नहीं अंकल, मैंने तो बस गनपत के मूँह से उन लोगों के नाम सुने हैं और कुछ लोगो के चेहरे भी देखे हैं।

मेरी बात सुनकर हरीश अंकल थोडा सीरियस होते हुए बोले

हरीश- तो क्या तुम उनमेें से किसी को पहचानती हो

हरीश अंकल का सबाल सुनकर मैं उन्हें टालते हुए बोली

निशा- अब छोडो भी अंकल… आप मेरी बातों पर यकीन नहीं करेंगे

हरीश- क्यों नहीं करूँगा…. तुम बताओ तो सही

हरीश अंकल की बात सुनकर मैं थोडा सीरियस होने के साथ साथ डरने का नाटक करते हुए बोली

निशा- सर मेरे पास उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है। इसलिए अगर आप मुझे गवाही देने के लिए कहना चाहते हैं, तो मेरा जबाब ना है। बैसे भी उन लोगों ने मुझे इतना ज्यादा टार्चर किया था कि मैं पिछले 2 दिन तक बेहोश रही हूँ। शायद मेरे बेहोश होने के बाद उन लोगों ने मुझे मरा हुआ समझ लिया था। इसलिए वो मेरी लाश ठिकाने लगाने के लिए मुझे भोपाल से बाहर किसी सुनसान इलाके में फेंक गए थे। पर किस्मत से मुझे सही समय पर होश आ गया। अगर उन लोगों को पता चल गया कि मैं जिंदा हूँ, तो वो लोग अगली बार मेरे साथ साथ मेरी फैमिली को भी नुकशान पहुँचा सकते हैं।

मेरी बात सुनकर हरीश अंकल मुझे समझाते हुए बोले

हरीश- देखो सपना बेटा, तुम किसी भी बात की चिंता मत करो, मैं तुम्हारी और तुम्हारी फैमिली की सेफ्टी की गारंटी लेता हूँ

निशा- अंकल भूल जाईये ना इस बारे में, बैसे भी वो लोग इतने बडे और ताकतवर लोग हैं कि आप भी सीधे सीधे उनपर हाथ नहीं डाल सकते।

मेरी बात सुनकर हरीश अंकल एक बार फिर मुझे समझाते हुए बोले

हरीश- अच्छा ठीक है बाबा, मैं तुम्हें इस मामले में नहीं घसीटूँगा। लेकिन तुम अगर मुझे गनपत के पाटनर्स के नाम बता दोगी, तो मैं उनपर नजर रखने के लिए अपने कुछ भरोसेमंद ऑफीसर नियुक्त कर दूँगा और जैसे ही हमें उनके खिलाफ कोई सबूत मिलेगा तो हम उन्हें गिरफ्तार कर लेंगे।

हरीश अंकल की बात सुनकर मैं सोचते हुए बोली

निशा- ठीक है अंकल, मुझे इससे कोई प्राब्लम नहीं है। लेकिन मुझे नहीं लगता कि आपके हाथ में कुछ खास लगेगा। क्योंकि गनपत के पाटनर्स के जाने के बाद मैंने गनपत और जफर की बातें सुनीं थी। वो दोनों अपने सारे पाटनर्स को मारकर विदेश भागने की फिराक में हैं। फिर अगर आप कोशिश करना चाहते हैं, तो आपकी मर्जी है।

हरीश- तुम बस उन लोगों के नाम बताओ.... वाकी सब मैं देख लूँगा

निशा- गनपत और जफर के बारे में तो मैं आपके पहले ही बता ही चुकी हूँ। इनके अलावा फेमस विजिनैश मैन धनराज, भोपाल जेल के जेलर योगेश जिन्होंने गनपत को जेल से भागने में मदद भी की थी, एम.पी. के मिनिस्टर प्रकाश राज और आपके ही पुलिस फोर्स के ऑफिसर ए.पी. महेश वर्मा। ये सभी लोग आपस पाटनर्स हैं अंकल।

मेरी बात सुनकर हरीश अंकल के चेहरे का रंग पूरी तरह से उढ चुका था और वो हैरानी से मुझे देख रहे थे।

कहानी जारी है ..........
 
Update 046 -

जब मैंने हरीश अंकल को गनपत के साथियों के नाम बताऐ तो वो बुरी तरह से हैरान रह गए और हकलाते हुए बोले

हरीश- ये ये नहीं हो सकता

निशा- ऐसा ही है अंकल... मैंने तो पहले ही आपसे कहा था कि रहने दीजिए, पर आप ही इस सभी के नाम जानना चाहते थे।

मेरी बात सुनकर हरीश अंकल जल्द ही अपने इमोशन्स को कंट्रोल करते हुए बोले

हरीश- वस यही लोग हैं… या और भी पाटनर्स हैं

निशा- पता नहीं अंकल… मैंने तो बस इनको ही देखा था। अगर इन लोगों के अलाबा कुछ और पार्टनर्स भी होंगे, तो उनकी जानकारी भी इन्हीं लोगों के पास होगी। लेकिन इन लोगों लिए काई सारे आदमी काम करते है। जिन्हें मैं नहीं जानती

अब तक हरीश अंकल अपने आप को पूरी तरह से कंट्रोल कर चुके थे। इसलिए वो थोडा सीरियस होते हुए बोले

हरीश- ठीक है सपना… इतना हमारे लिए काफी है, बाकी की जानकारी हम इन्हीं लोगों से ले लेंगे।

निशा- ठीक है अंकल…. तो अब मैं चलती हूँ।

हरीश- हाँ ठीक है.... और हाँ किसी भी बात की टेंशन मत लेना, क्योंकि इसमें तुम्हारा नाम बिल्कुल भी बाहर नहीं आयेगा।

निशा- थैंक्यू सर

इतना बोलकर मैं वहाँ से बाहर निकल गई। अभी मैं अपने होटल बापिस जाने के बारे में सोच ही रही थी कि तभी मुझे याद आया कि मुझे हरीश अंकल को अपने असली डॉक्यूमेंट भी देने हैं। लेकिन मैं अब भी अपनी असली पहचान किसी को नहीं बताना चाहती थी और ना ही अपने ऑरीजनल डॉक्यूमेंट किसी को देना चाहती थी। बैसे भी अब जब मैंने अपनी पहचान बदल कर नई जिंदगी जीने के बारे में तय कर ही लिया था तो मुझे नये नाम और पहचान के लिए अपने नए डॉक्यूमेंटस् की भी जरूरत तो पडेगी ही, इसलिए मैं इस बारे में सोचने लगी कि अब मेरी नई पहचान के लिए दूसरे डॉक्यूमेंट का इंतजाम मैं कहाँ से करूँगी।

मैं अभी इस बारे में सोच ही रही थी कि तभी मुझे याद आया कि रघू ने मेरे पुराने होटल में सपना नाम से मेरे लिए नकली आई.डी. का इंतजाम किया था। इसलिए जिसने मेरे लिए नकली आई.डी. बनाई थी, क्यों ना मैं उससे ही मेरे नए डॉक्यूमेंट बनाने की बात कर ली जाऐ। इतना सोचते ही मैंने तुरंत रघू को कॉल करके उस व्यक्ति का नाम और एड्रेश ले लिया। जिसके बाद मैं ऑटो लेकर रघु के बताऐ ए़ड्रेश पर उस आदमी से मिलने के लिए निकल गई। जो मेरे लिए नए डॉक्यूमेंट का इंतजाम कर सकता था।

करीब आधे घंटे बाद मैं पवन नाम के उस वयक्ति के सामने बैठी हुई थी। जो नकली डॉक्यूमेंट बनाने का काम करता है। पहले तो उसने मुझे यह सब काम करने से बिल्कुल ही मना कर दिया। लेकिन जब मैंने उसकी बनाई अपनी नकली आई.डी. उसके सामने रखी, तो उसे तुरंत यकीन हो गया कि मैं उसकी ही कोई कस्टमर हूँ। इसलिए वो मुद्दे की बात पर आते हुए बोला

पवन- तो आपको कौन कौन से डॉक्यूमेंट बनबाने हैं

निशा- जन्म प्रमाण पत्र से लेकर पढाई लिखाई तक किसी इंसान के जितने भी डॉक्यूमेंट हो सकते हैं। वो सारे के सारे मुझे चाहिए, वो भी असली। किसी के डॉक्यूमेंट की कॉपी करके उसपर नाम बगैरह एडिट करके मुझे नहीं चाहिए। अगर यही करना होता तो मैं खुद ही कर लेती।

मेरी बात सुनकर पवन कुछ देर सोचने के बाद बोला

पवन- लेकिन उन सभी डॉक्यूमेंट की आखिर आपको क्या जरूरत है।

निशा- बस इतना समझ लो कि मुझे हमेशा के लिए अपनी पहचान बदलनी है।

मेरी बात सुनकर पवन बोला

पवन- मैं इंतजाम तो कर सकता हूँ, लेकिन पैसे कुछ ज्यादा लगेंगे

निशा- कितने

पवन- पूरे 2 लाख रूपये

पवन की बात सुनकर मैं बिना कुछ सोचे तुरंत बोली

निशा- ठीक है…. कोई बात नहीं मैं तुम्हें पैसे दे दूँगी। लेकिन मुझे सारे डॉक्यूमेंट असली चाहिए। वो भी मेरी ही एज की किसी लडकी के।

मेरी बात सुनकर पवन खुश होते हुए बोला

पवन- हो जाऐगा मैम। बस एक छोटी प्राब्लम है

पवन की बात सुनकर मैं चिढते हुए बोली

निशा- अब क्या हुआ

पवन- डॉक्यूमेंट मंगवाने में 1 हफ्ते का समय लगेगा और डॉक्यूमेंट एम.पी. के नहीं होंगे

पवन की बात सुनकर मैंने कहा

निशा- इण्डिया में कही के भी हों… चलेंगे। रही बात डॉक्यूमेंट आने में लगने बाले समय की तो उसकी भी कोई प्राब्लम नहीं है। लेकिन तब तक के लिए अगर तुम उनकी सॉफ्ट कॉपी मुझे मंगवा दो तो बेहतर होगा

मेरी बात सुनकर पवन बोला

पवन- हाँ यह हो जाऐगा। मैं डॉक्यूमेंट की स्कैन कॉपी मंगवाकर आपको भेज दूँगा, रही बात ऑरीजनल डॉक्यूमेंट कि तो आप 1 हफ्ते बाद आकर मुझसे ले जाना।

निशा- हाँ यह ठीक रहेगा। बैसे एक बात बताओ, आखिर तुम इन ऑरीजनल डॉक्यूमेंट्स का इंतजाम कहाँ से करोगे

मेरी बात सुनकर पवन मुस्कुराते हुए बोला

पवन- अरे मैडम जी… आप आम खाओ ना, पेढ क्यों गिन रही हो

निशा- अरे भाई परेशान होने की जरूरत नहीं है, मैं तो बस इसलिए पूछ रही हूँ ताकि भविष्य में कभी वो लड़की अगर मेरे सामने आकर खडी हो गई और सबके सामने यह सवित कर दिया कि ऐ सारे डॉक्यूमेंट उसके हैं और मैंने इन डॉक्यूमेंटस् को चुराया है। तो फिर मैं क्या करूँगी

मेरी बात सुनकर पवन समझ गया कि मेरे दिमाग में इस वक्त क्या चल रहा है। इसलिए वो मुझे समझाते हुए बोला

पवन- इस बात के लिए आप पूरी तरह से निश्चिंत रहिए, क्योंकि ऐसा कभी भी नहीं होगा। वो लडकी कभी भी आपके सामने नहीं आऐगी

पवन की बात सुनकर मैं हैरान होते हुए बोली

निशा- अच्छा जी…. आखिर इतने यकीन के साथ बोलने की क्या बजह

मेरी बात सुनकर पवन लगभग अपनी हार मानते हुए बोला

पवन- बैसे तो मैं यह सब किसी को बताता नहीं हूँ। लेकिन आपका डाऊट क्लीयर करना भी जरूरी है। इसलिए आपको बता रहा हूँ। लेकिन पहले वादा करो कि यह बात आप किसी को नहीं बताऐंगी। और एक बार असली डॉक्यूमेंट मिलने के बाद दोबारा इस मैंटर बर कोई बात नहीं करेंगी।

पवन की बात सुनकर मैं बिना कुछ सोचे तुरंत बोली

निशा- मैं वादा करती हूँ कि यह राज केवल मुझ तक ही रहेगा और तुमसे भी उम्मीद करती हूँ कि तुम भी मुझे डॉक्यूमेंट देने के बाद यह भूल जाओगे कि तुमने मुझे कभी किसी दूसरे इंसान के डॉक्यूमेंट दिए हैं। क्योंकि इतना तो तुम समझ ही गए होगे कि अगर मैं अपनी असली पहचान बदलना चाहती हूँ, तो मैं कोई शरीफ लड़की बिल्कुल भी नहीं हो सकती। अगर मुझे कभी यह पता चला कि मेरी इस नई पहचान के बारे में तुमने किसी भी इंशान को कुछ भी बताया है, या फिर तुमने मुझे ब्लैकमेल करने की कोई कोशिश की, तो फिर तुम्हारे साथ जो कुछ भी होगा, उसके लिए तुम खुद ही जिम्मेदार होगे।

मेरी बात सुनकर पवन थोडा परेशान होते हुए बोला

पवन- अरे… आप तो मुझे धमकी दे रहीं है।

पवन की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बोली

निशा- मैं धमकी नहीं दे रही हूँ, बस तुम्हें समझा रही हूँ। बैसे भी तुम मुझे काम के आदमी लगते हो। इसलिए तुम्हारी जरूरत मुझे आगे भी पडती रहेगी और आगे भी तुम्हारी कमाई होती रहेगी। तुम मेरी बात समझ रहे हो ना।

मेरी बात सुनकर पवन भी मुस्कुराते हुए बोला

पवन- समझ गया मैडम जी… आपको डॉक्यूमेंट देने के बाद मैं आपको नहीं जानता और आप मुझे नहीं जानती। रही बात आगे किसी काम की तो उसके लिए मैं आपको एक स्पेशल कार्ड दूँगा। जो मैं अपने ऐसे ही कस्टमर्स को पहचानने के लिए देता हूँ। ताकि अगली बार एक दूसरे को पहचानने में हमें कोई प्राब्लम ना हो।

निशा- ठीक है… तो फिर अब बताओ कि आखिर तुम मेरे लिए डॉक्यूमेंट का इंतजाम कैसे करने बाले हो

मेरी पूरी बात सुनकर पवन बोला

पवन- असल में हमारे देश में हर साल समुद्री तूफान, बाढ और भूकम्प जैसे कई हादसे होते रहते हैं। जिसमें ना केवल कई लोग मारे जाते हैं, बल्कि कई लोगों का तो पूरा परिवार ही एक साथ खत्म हो जाता है और कहीं कहीँ तो पूरा का पूरा गाँव ही उजड जाता हैं। ऐसी दुर्घटनाओं के बाद वहाँ के लोकल माफिया बाले लोग, उन दुर्घटना बाले घरों मेें जाकर उनका सारा का सारा सामान चुराकर बेच देते हैं। ऐसे काम करने बालों की अपनी एक अलग आर्गनाईजेशन है। जो चप्पलों से लेकर घर की ईंट तक बेच देते हैं। तब हम जैसे कुछ लोग उन दुर्घटनाओं में मर चुके लोगों के डॉक्यूमेंट उन माफिया बालों से खरीद लेते हैं।

पवन की बात सुनकर मैं हैरान होते हुए बोली

निशा- लेकिन क्यों… तुम लोग आखिर उन मरे हुए लोगों के डाक्यूमेंट क्यों खरीदते हो

मेरी बात सुनकर पवन मुस्कुराते हुए बोला

पवन- क्या मैंने आपसे पूछा कि आप अपनी पहचान क्यों बदल रहीं है। हर इंशान के अपने अलग अलग कारण होते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग वो होते हैं, जिन्होंने गलत काम किया हो और वो लोग अपनी पहचान बदलकर इस देश से बाहर भागना चाहते हैं। तब हम लोग ऐसे लोगों को वो डॉक्यूमेंट्स बेच देते हैं। बस…………..

पवन की बात सुनकर मैंने सोचते हुए कहा

निशा- तो फिर इसका मतलब है कि तुम मेरे लिए जो डॉक्यूमेंट मंगवाने बाले हो, वो असल में किसी ऐसी लडकी के होंगे जो पहले ही मर चुकी होगी। यानि भविष्य में मेरा राज खुलने का कोई डर नहीं होगा।

पवन- हाँ मैडम जी… बैसे अगर आप चाहें तो उन डाक्यूमेंट्स को क्राश बेरीफाई भी करवा सकती हैं। अगर मेरे दिए वो डॉक्यूमेंट नकली निकले तो मैं आपके सारे पैसे बापिस करने के साथ साथ आपको आपको हर्जाना भी दूँगा

निशा- अगर ऐसा है, तो फिर ठीक है… लेकिन तुम मुझे जिसके भी डॉक्यूमेंट दोगे, अगर उसका डेथ सर्टिफिकेट भी पहले से ही ईश्यू हो गया होगा, तो इससे आगे चलकर कोई प्राब्लम तो नहीं होगी ना।

पवन- अरे मै़डम… डेथ सर्टिफिकेट तो तब ईश्यू होगा, जब कोई उसके लिए कोई एप्लाई करेगा। जब परिवार के सारे लोग पहले ही मार चुके होंगे, तो फिर उसका डेथ सर्टिफिकेट ईश्यू करवाने की किसको पडी है। बैसे भी हर साल होने बाले इन हादसों में वहाँ कि गवर्मेंट्स को काफी ज्यादा मुआवजा बंटना पडता है। इसलिए ऐसे लोग जिनके पूरे परिवार की एक साथ डेथ हो जाती है। तो वहाँ की गवर्मेंट उनका कोई रिकार्ड भी नहीं रखती है। ताकि किसी को कोई मुआवजा ना देना पडे।

निशा- ठीक है पवन…. मैं तुम पर भरोसा कर रही हूँ। लेकिन मुझे उन डॉक्यूमेंट्स की स्कैन कॉपी कब तक मिल जाऐगी।

मेरी बात सुनकर पवन कुछ सोचते हुए बोला

पवन- आज रात तक भेजने की कोशिश करूँगा मैडम, बर्ना कल तो आपको पक्का भेज ही दूँगा।

पवन की बात सुनकर मैंने अपने हैंड बैग से पूरे 1 लाख रुपये निकाल कर उसे देते हुए कहा

निशा- तो फिर ठीक है…. यह एडवांस रखो, बाकी पैसे मैं ऑरीजनल डॉक्यूमेंट मिलने के बाद दे दूँगी।

मुझसे पैसे लेकर पवन उन्हें गिनते हुए बोला

पवन- हाँ मैडम जी एक बात और है…..

पवन की बात सुनकर मैं एक बार फिर से चिढते हुए बोली

निशा- अब क्या रह गया है….

पवन- बस एक छोटी सी प्राब्लम है, असल में मैं जिस किसी लडकी के ऑरीजनल डॉक्यूमेंट आपको दूँगा, उसके आधार कार्ड का बायोमैट्रिक डाटा आपके बायोमैट्रिक डाटा से मैं चेंज नहीं करवा पाऊँगा। इसलिए यह सब आपको खुद ही मैनेज करना होगा।

पवन की बात सुनकर मैंने बिना किसी एक्सप्रेशन के उससे कहा

निशा- कोई बात नहीं… वो सब मैं देख लूँगी। बस तुम मुझे जल्दी से जल्दी उन डॉक्यूमेंट्स की स्कैन कॉपी भेज दो।

इतना बोलकर मैंने उसे अपना नम्बर दिया और फिर वहाँ से निकल गई। रास्ते में जब मैंने मोबाईल में समय देखा तो शाम के 4 बजने बाले थे। इसलिए मैं वहाँ से सीधे उस रेश्टोरेंट में पहूँची, जहाँ मैं रवि से मिलने बाली थी। मेरे वहाँ पहुँचने के कुछ देर बाद रवि भी वहाँ आ गया। जिसके बाद मैंने दोनों के लिए कॉफी और कुछ स्नैक्स आर्डर कर दिया। कुछ देर तक एक दूसके के हाल चाल पूछने और हंसी मजाक करने के बाद मैं मुद्दे की बात पर आते हुए बोली

निशा- अच्छा रवि तुमने बताया था कि तुम्हारे पापा क्ट्रेक्टर हैं और प्रापर्टी बगैरह का काम करते हैं

मेरी बात सुनकर रवि अपनी कॉफी शिप करते हुए बोला

रवि- हाँ.. क्यों कोई प्रापर्टी खरीदने का इरादा है क्या

रवि की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बोली

निशा- हाँ…. ऐसा ही कुछ समझ लो

मेरी बात सुनकर रवि थोडा हैरान होते हुए बोला

रवि- व्हॉट….. आर यू सीरियस…. क्या तुम सच में किसी प्रापर्टी में इंट्रेस्टेड हो….

निशा- हाँ… असल में मैं सोच रही थी कि एम.पी. में ही अपने लिए एक घर खरीद लूँ। ताकि यहाँ आने जाने का मेरे पास एक बहाना हो। अब जब तुम मेरे अच्छे दोस्त हो तो किसी और से बात करने से बेहतर है कि इसमें तुम्हारी हेल्प ली जाऐ।

रवि- पक्का तुम मजाक नहीं कर रही हो

निशा- अरे बाबा मैं सच में सीरियस हूँ

मेरी बात सुनकर रवि मुझे छेडते हुए बोला

रवि- ओके.... तो इसका मतलब है कि मैडम जी ने अपने हाफ बॉयफ्रेंड से मिलने के लिए नहीं, बल्कि बिजिनैश की बात करने के लिए मुझे यहाँ बुलाया है।

मैं रवि के इरादे पहले ही समझ गई थी। इसलिए मुस्कुराकर बोली

निशा- दोनों... अगर किसी का दोस्त ही विजिनैश मैंन हो, तो वो क्या कर सकती है

रवि- ठीक है ठीक है... अच्छा यह बताओ कि तुम्हारा बजट कितना है

निशा- तुम उसकी चिंता मत करो। बस मुझे सबसे सिक्योर ऐरिया में एक सुंदर और आलीशान घऱ चाहिए। जिसमें मुझे कुछ स्पेशल सिक्योरिटी फीचर्स भी एड करनाने हैं।

मेरी बात सुनकर रवि ने सबाल किया

रवि- और लोकेशन क्या चाहिए तुम्हें

रवि की बात सुनकर मैं तुरंत बोली

निशा- अफकोर्स भोपाल

मेरा जबाब सुनकर रवि थोडा सीरियर होते हुए बोला

रवि- भोपाल में….

निशा- हाँ…. बैसे यहाँ भोपाल में कोई प्राब्लम है क्या

रवि- अरे नहीं नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है। मुझे लगा कि तुम यहाँ किसी बिजिनैश पर्पज से या जॉब करने के इरादे से सैटल होने की सोच रही हो।

निशा- हाँ ऐसा भी हो सकता है

रवि- तो फिर मैं तुम्हें भोपाल की जगह इंदौर सजेस्ट करूंगा, क्योंकि इन्दौर भोपाल की तुलना में ज्यादा डेबलप्ड है और वहाँ से पूरे देश में अच्छी खासी कनेक्टिविटी है। इसके अलावा वहाँ की कॉलोनी भी भोपाल की तुलना में काफी ज्यादा सिक्योर हैं।

निशा- अरे यार…. मैं तो इंदौर में किसी को जानती भी नहीं हूँ और तुम सब तो यहाँ भोपाल में ही रहते हो, तो मैंने सोचा कि यहीँ पर ठीक रहेगा

रवि- अरे यार इन्दौर है ही कितनी दूर यहाँ से। बाया रोड अगर कार से जांऐंगे तो 3-4 घंटे में पहुँच जाते हैं। मतलब अगर हम सुबह 6 बजे निकलेंगे तो 10 बजे तक इंदौर में होंगे। कभी हम वहाँ और कभी तुम यहाँ

रवि की बात सुनकर मैं इस बारे में सोचते अच्छी तरह से सोचने लगी।

कहानी जारी है ......
 
Update 047 -

रवी की बातों के बारे में अच्छी तरह से सोचने के बाद मैंने कहा

निशा- बात तो तुम्हारी सही है। तो क्या अब मुझे इंदौर के किसी प्रॉपर्टी डीलर से कांटेक्ट करना पडेगा

रवि- जी नहीं मैडम। मेरे पापा के एक पुराने दोस्त इस वक्त इंदौर के एक पॉश और सिक्योर इलाके में कॉलोनी डेबलप कर रहे हैं। जिसमें हर तरह की फैसेलिटी होंगी, वो मुझे भी बहुत अच्छी तरह से जानते हैं, इसलिए मैं उनसे तुम्हें मिलवा दूँगा। उसके बाद तुम अपने हिसाब से मकान या प्लॉट की बात कर लेना।

रवि की बात सुनकर मैं खुश होते हुए बोली

निशा- यह तो बहुत अच्छी बात है। तो फिर तुम मुझे उनसे कब मिलवा रहे हो।

मेरी बात सुनकर रवि कुछ सोचते हुए बोला

रवि- कल मुझे पापा के किसी जरूरी काम से इंदौर जाना है। इसलिए अगर कल तुम फ्री हो तो मेरे साथ चलो, मैं कल ही तुम्हें उनसे मिलवा दूँगा और वापिस आते वक्त तुम्हें अपने साथ भी लेता आऊँगा

रवि की बात सुनकर मैंने कुछ देर सोचने के बाद उससे कहा

निशा- ठीक है…. हम कल ही वहाँ चलते हैं।

मुझे इतना एक्साईटेड देख रवि मुझे छेडते हुए बोला

रवि- बैसे एक बात बताओ कि क्या कोई खजाना हाथ लगा है तुम्हारे। जो ऐसे ही पैसे उडाये जा रही हो।

निशा- अरे नहीं यार, मेरी कुछ सेविंग रखी हुई है, तो मैंने सोचा कि उसे इन्बेस्ट ही कर देती हूँ। बैसे भी बैंक में रखने से टैक्स बगैरह का लफडा रहता है और प्रापर्टी में इनबेस्ट करना मुझे सबसे शेफ लगता है। क्योंकि आज प्रापर्टी के जो रेट हैं, वो कुछ ही सालों बाद डबल हो जाऐंगे।

रवि- अरे वाह… तो मैडम जी का माईंड बिजिनैस में भी चलता है। मैं तो सोच रहा था कि तुम बस कम्प्यूटर से खेलने के लिए ही अपना माईँड यूज करती हो।

रवि के मुझे बार बार छेडने से मैं थोडा चिढते हुए बोली

निशा- ऐसा कुछ नहीं है। बस मेरी परिस्थितियाँ ऐसी रहीं हैं कि मैंने कभी बिजिनैश पर ध्यान ही नहीं दिया, वर्ना मैं अब तक सेल्फ मेड बिजिनैश बूमन होती

रवि- बूमन या गर्ल

निशा- हाँ हाँ जो भी है। तुम समझ गए ना बस... अरे यार फीलिंग समझो ना। बेमतलब में बाल की खाल क्यों निकाल रहे हो।

मेरी बात सुनकर रवि हंस पडा, लेकिन फिर सीरियस होते हुए बोला

रवि- कितने कमाल की बात है ना। जिस उम्र में हम सभी दोस्त पढाई बगैरह के लिए भी अपने माता-पापा पर डिपेंड हैं। तुम उस उम्र में पैसे कमाकर इतनी सेबिंग भी कर चुकी हो कि उन पैसों से अपना खुद का घर खरीद रही हो।

निशा- समय सब कुछ सिखा देता है माय डियर। मुझे पूरा यकीन है कि अपनी पढाई पूरी करने के बाद तुम भी एक बडे बिजिनैश मैन बनोगे और अपने फैमिली बिजिनैस को बहुत आगे तक लेकर जाओगे।

रवि- देखते हैं कि क्या होता है, मैं एक लायक बेटा बनता हूँ या नालायक

निशा- अब छोडो भी यह सब... चलो कहीं घूमने चलते हैं और बाकी लोगों को भी वहीं बुला लेंगे

रवि- चलो ठीक हैं चलते हैं। पर मुझे बदले में कुछ चाहिए

निशा- क्या……….

रवि- किश.... उस दिन होटल में हमारे बीच जो कुछ हुआ था, उसके बाद से आज तक तुमने मुझे टच भी नहीं करने दिया है।

रवि की बात सुनकर मैं थोडा शर्माते हुए बोली

निशा- हाँ ठीक है कर लेना.. अब चलो भी यार

रवि- हाँ ठीक है चलो.... एक मिनट एक मिनट यह मैं क्या देख रहा हूँ.... मैंने पहले इसपर ध्यान क्यों नहीं दिया। ऐ तो हद ही हो गई यार, मैं कब से यही सोच रहा हूँ कि आज तुम मुझे कुछ बदली बदली नजर क्यों आ रही हो। अब जाकर समझ में आया कि आखिर बात क्या है।

मैंने रवि को यूँ हैरान होते देख उससे सबाल किया

निशा- अरे बाबा अब क्या हुआ

रवि- ऐ तुम्हारी आँखें….. इनका रंग…..

रवि की बात पूरी होने से पहले ही मैं समझ गई कि वो क्या कहना चाहता है। इसलिए मैं बोली

निशा- ओह सिट यार….. मैं तो लैंस लगाना भूल ही गई

मेरी बात सुनकर रवि हैरान होते हुए बोला

रवि- व्हॉट…… लैंस….

निशा- हाँ लैंस…. वो असल में मेरी आँखें ऐसी ही हैं। इसलिए मैं अपनी आँखों पर हमेशा काले रंग के लैंस लगाकर रखती हूँ।

रवि- वॉव तुम्हारी आँखें कितनी खूबसूरत हैं। इनमें तो तुम्हारी खूबसूरती और भी ज्यादा बड़ा गई है। फिर तुम बे बजह लैंस क्यों लगाकर रखती हो

निशा- ताकि मेरी इन आँखों को तुम्हारे जैसे किसी लफंगे कि नजर ना लगे... अब चलो भी यार….

इतना बोलकर मैं वहीँ से चलने के लिए रवि को धक्का देने ली तो वो बोला

रवि- हाँ हाँ ठीक है चलो चलते हैं………….

इसके बाद हम लोग वहाँ से निकल गए। रास्ते में मैंने बाकी सभी लोगों को कॉल करके बुला लिया था। जिसके बाद हम सभी दोस्त उस शाम यूँ ही घूमते और मस्ती करते रहे। रात करीब 8 बजे रवि मुझे मेरे नये होटल के बाहर छोडकर चला गया था। मैंने उसे होटल चेंज करने की बात पहले ही बता दी थी। बैसे भी मेरा नया होटल पुराने होटल से ज्यादा दूर नहीं था। रूम पर आकर मैं रेस्ट करने लगी।

खाना हम लोगों ने पहले ही खा लिया था। जिस कारण अब और कुछ खाने का मेरा कोई इरादा नहीं था। रात करीब 9 बजे रघू मेरा सारा सामान लेकर आ गया। सबसे पहले मैंने अपना सारा सामान अच्छी तरह से चैक किया और फिर अपना लैपटॉप भी ऑन करके चैक करने लगी। जो बिल्कुल ठीक ठाक था। जिसके बाद मैंने अपने लैपटॉप पर एक एंटी बायरस और एंटी स्पाई बेयर एप रन करके चैक किया। जब उसमें भी मुझे कोई प्राब्लम नजर नहीं आई तो मैं समझ गई कि उन लोगों ने मेरे लैपटॉप के साथ कोई भी छेडछाड नहीं की थी।

जिसके बाद जब मैंने अपनी ऑफीसियल मेल आई.डी. चैक की तो मुझे पता चला कि इस साल के इम्पलॉय ऑफ द ईयर की लिस्ट में मैं सबसे टॉप पर हूँ। इसके अलावा एक मेल मेरे बॉस की भी आई हुई थी। असल में मैंने इंदौर ब्रांच की जो रिपोर्ट सेंड की थी, उसमें मैंने ब्रांच में चल रही गडबडी के साथ साथ अपने कुछ सुझाव भी दिये थे। जिसे कंपनी ने एक्सेप्ट कर लिया था। इसलिए बॉस ने मुझे कुछ दिन और यहाँ रुककर इंदौर ब्रांच का सारा काम देखने का ऑफर दिया था और इसके लिए कोई टाईम लिमिट भी नहीं था। यानि मैं जब तक चाहूँ यहाँ रुककर इंदौर ब्रांच का काम देख सकती थी। इसलिए मैंने मन ही मन सोचा

“चलो अच्छा है…. बैसे भी अमन को बापिस आने में अभी समय है और मुझे अपने दुश्मनों से बदला भी लेना है तो क्यों ना ये ऑफऱ एक्सेप्ट कर लूँ।”

इसलिए मैं उस ऑफर को तुरंत एक्सेप्ट करके अपने बॉस को रिप्लाई मेल कर दिया। यह सारा काम खत्म करते करते रात के करीब 10 बज चुके थे। जैसे ही मैंने अपना लैपटॉप बंद किया तो मेरी नजर रघू पर गई, जो मेरे पास ही बैठा लगातार वासना भरी नजरों से मुझे देख रहा था। अब जब मेरे पास कोई भी काम नहीं था, तो मैंने अपना लैपटॉप टेबिल पर रखा और मुस्कुराते हुए रघु की गोद में जाकर बैठ गई और उसे किस करने लगी। रघू तो जैसे इसी पल के इंतजार में उतावला बैठा था।

मेरे किस करते ही वो भी मुझ पर टूट पडा। जिसके बाद एक एक करके हम दोनों के कपडे फर्स पर गिरते चले गये और कुछ देर बाद मेरी कामुक आवाजें उस कमरे में गूँजने लगी। करीब 1 घण्टे तक एक दूसरे को बुरी तरह थकाकर और एक दूसरे को पूरी तरह संतुष्ट करके हम अलग हो गए और लम्बी लम्बी सांसे लेने लगे। करीब 4-5 दिन बाद मैंने सेक्स को पूरी तरह से इंजॉय किया था। आज से पहले उस दिन खण्डहर में जो मेरे साथ सेक्स हुआ था वो असल में रेप था। जिसके लिए ना तो मैं मैंटली तैयार थी और ना ही फिजिकली फिट थी।

क्योंकि एक तो उन्होंने मेरे साथ बहुत ज्यादा मार-पीट की थी। जिस कारण मैं पहले से ही बहुत ज्यादा दर्द में थी। ऊपर से मेरे पीरियड भी शुरू हो गए थे। इसलिए खण्डहर में मेंरे साथ जो कुछ भी हुआ था, वो मेरे लिए काफी दर्दनाक था। जिसे मैंने बिल्कुल भी इंजॉय नहीं किया था। उल्टा उस वक्त मुझे अपने आप पर घिन आ रही थी और उन लोगों से नफरत भी हो रही थी। खण्डहर पर हुए रेप के बाद मैंने आज सुबह ढावे पर जो सेक्स किया था। उसे भी मैंने बिल्कुल इंजॉय नहीं किया था।

क्योंकि मैं उस समय भी सेक्स के लिए मैंटली तैयार नहीं थी। लेकिन एक तो मुझे किसी भी तरह यहाँ बापिस आना था और दूसर खण्डहर में हुए हादसे से मैं काफी डरी हुई भी थी। इसलिए मुझे लगा कि अगर मैंने उन लोगों मना किया और उन लोगों ने भी मेरे साथ जबरदस्ती की, तो मेरी हालत फिर से खराब हो जाऐगी। इसलिए बेमन से मैं तैयार हो गई थी। लेकिन उन लोगों ने मेरे साथ कोई भी गलत हरकत नहीं थी। पर रघू के साथ मुझे सेक्स करने में मजा आता था। जिसे मैं पूरी तरहस से इंजॉय भी करती थी। कुछ देर बाद जब मैं नॉर्मल हुई तो मैने रघु से कहा

निशा- बैसे रघू अब तुम्हारा आगे का प्लान क्या है।

मेरी बात सुनकर रघू थोडा हैरान होते हुए बोला

रघु- क्या मतलब… तुम किस प्लान की बात कर रही हो

निशा- अरे बाबा मैं तो बस यह पूछना चाहती थी कि तुम अब आगे क्या करना चाहते हो। या फिर सारी जिंदगी इसी तरह होटल में छोटे मोटे काम करने का इरादा है।

मेरी बात सुनकर रघू तुरंत उठकर बैठ गया और मुझे सीरियस नजरों से देखते हुए बोला

रघू- आप यह सब क्यों जानना चाहती हो....

निशा- असल में मैं अपना खुद का बिजिनेश शुरू करना चाहती हूँ। पर मेरी जॉब की बजह से मैं अपने बिजिनेश को ना तो पूरी तरह से समय दे सकती हूँ और ना ही सही से संभाल सकती हूँ। इसलिए मुझे एक ईमानदार और भरोसेमंद इंसान की जरूरत है। जो मेरे साथ पार्टनरशिप करके मेरा बिजिनेश संभाल सके। तुमने एक बार मुझे बताया था कि तुमने बिजिनेश मैनेज्मेंट की डिग्री की है और तुम एक अच्छे इंशान भी हो। इसलिए मैं सोच रही थी कि क्यों ना मैं तुम्हें ही अपना पार्टनर बना लूँ। हाँलाकि फ्री होेने पर मैं भी बिजिनेश संभालने में तुम्हारी मदद करती रहूँगी।

मेरी बात सुनकर एक पल के लिए रघू की आँखों में चमक आ गई, पर अलगे ही पल वो निराश होते हुए बोला

रघू- पर मेरे पास ना तो बिजिनेश में इन्बेस्ट करने के लिए पैसे हैं और ना ही मेरे अंदर बिजिनेश संभाले का कॉन्फिडेंश है।

निशा- अरे बाबा तुमसे पैसे इन्बेस्ट करने के लिए कौन बोल रहा है। पैसा मैं लगाऊंगी, मुझे बस बिजिनेश संभालने के लिए तुम्हारी जरूरत है। रही बात कान्फिडेंस की तो बिस्तर पर तो तुम पूरे कान्फिडेंश में रहते हो। फिर बिजिनेश करने की बात सुनकर तुम्हारा कान्फिडेंश कहाँ गायब हो गया।

रघू- क्योंकि कभी मैंने इतनी बडी जिम्मेदारी संभाली नहीं है। अगर मेरी किसी गलती की बजह से आपको लॉस हो गया तो।

निशा- तो कोई बात नहीं… बिजिनेश में प्राफिट और लॉस तो लगा रहता है। और बैसे भी जब तक तुम खुद से कुछ करने के बारे में नहीं सोचोगे, तब तक तुम आगे कैसे बडोगे, रही बात कान्फिडेंश की तो जैसे जैसे तुम्हें बिजिनेश का एक्सपीरियंस होता जाऐगा। तुम्हारे अंदर कान्फिडेंश भी अपने आप आता जाऐगा।

मेरी बात सुनकर रघू कुछ देर तक इस बारे में सोचता रहा और फिर बोला

रघू- ठीक है मैं आपके साथ पार्टनरशिप में बिजिनेश करने के लिए तैयार हूँ। लेकिन मेरी एक शर्त है कि हमारे बिजिनेश मेें बॉस आप ही होगी, मैं बस आपका मैनेजर बनकर बिजिनेश को मैनेज करूंगा। लेकिन बिजिनेश से रिलेटेड सभी बडे डिसीजन आपको ही करने होंगे। मैं बस आपके डिसीजन और इंस्ट्रक्शन को फॉलो करूँगा।

रघू की बात सुनकर मैंने कुछ देर इस बारे में सोचने के बाद कहा

निशा- ठीक है… मुझे तुम्हारी शर्त मंजूर है… तो फिर आज से हम दोनों पार्टनर हुए। इसलिए तुम जितनी जल्दी हो सके होटल बाली जॉब से रिजाईन कर दो। तब तक मैं अपने बिजिनेश प्लान को फाईनल करके पैसों का इंतजाम करती हूँ। और हाँ अपने खर्चों की चिंता मत करना। जब तक हमारा बिजिनेश शूरू नहीं हो जाता तब तक तुम्हारे सभी खर्चों की जिम्मेदारी मेरी है। समझ गए ना

रघू- हाँ मैं समझ गया… लेकिन होटल से अपना सैटलमेंट करवाने में मुझे 10-15 दिन का समय लग जाऐगा।

निशा- कोई बात नहीं… जब इतने दिन इंतजार किया तो एक दो दिन और सही।

मेरी बात सुनकर रघू भी मुस्कुरा दिया पर अगले ही पल वो सीरियस होते हुए बोला

रघू- अच्छा अब तो हम पार्टनर भी बन गए हैं। तो अब तो मुझे पूरी बात बताओ

रघू की बात सनकर मैं थोडा कन्फ्यूज होते हुए बोली

निशा- कौन सी

रघू- भूल गई क्या…. आपने आज सुबह ही तो मुझसे वादा किया था कि रात में आप मुझे सारी बात बताओगी कि किसने आपको किडनैप किया था और आप वहाँ से बचकर कैसे बापिस आई।

रघू की बात सुनकर मुझे सुबह उससे रेस्टोरेंट में हुई बातों याद आ गईं। जिसे याद करने के बाद मैंने मुस्कुराते रघू को भी वही स्टोरी रिपीट कर दी जो मैंने हरीश अंकल को बताई थी।

कहानी जारी है .........
 
Update 048 -

मेरे किडनैपिंग की पूरी कहानी जानने के बाद रघू थोडा परेशान होते हुए बोला

रघू- यह तो काफी सीरियस मैटर है

निशा- हाँ यह बात तो है

रघू- तो अब आप आगे क्या करने बाली हो

रघू की बात सुनकर मैं अचानक से चिढते हुए बोली

निशा- अरे यार तुम मुझे आप या मैडम क्यों बोलते हो। नाम लिया करो या तुम कहकर बात किया करो। मुझे अच्छा नहीं लगता जब तुम मुझे आप या मैडम बोलते हो। ऐसा लगता है जैसे मैं तुमसे 10-15 साल बडी हूँ या बूडी हो गई हूँ

मेरी बात सुनकर रघू थोडा झेंपते हुए बोला

रघू- अरे नहीं…. ऐ आप कैसी बातें कर रही हो.... ओह सॉरी तुम... तुम तो बहुत खूबसूरत हो और आज तो कुछ ज्यादा ही खूबसूरत लग रही हो। बिल्कुल किसी 19-20 साल की कमसिन कली की तरह।

निशा- 4-5 दिनों बाद देख रहे हो ना इसलिए

रघू- अरे नहीं मैं सच कह रहा हूँ। आज तुम्हारी उम्र पहले से भी कम लग रही है और तुम्हारी आँखें भी कुछ अलग लग रही हैं।

निशा- ओह सिट यार फिर वहीं आँखे

रघू- क्यों क्या हुआ

निशा- असल में मेरी आँखें ऐसी ही हैं। जिन्हें सब लोग नोटिस करते थे, इसलिए मैं अपनी आँखों पर हमेशा काले लैंस लगाकर रखती हूँ। लेकिन जब मुझे किडनैप करके टार्चर किया गया तो मेरे लैंस निकल कर कहीं गुम हो गए। मैं कल ही दूसरे लेंस खरीद लूँगी। फिर मैं पहले जैसी दिखने लगूँगी

मेरी बात सुनकर रघू मुझे रोकते हुए बोला

रघू- कोई जरूरत नहीं है। तुम ऐसे ही बहुत ज्यादा अच्छी लगती हो

रघू के इंसिस्ट करने पर मैंने कहा

निशा- ठीक है बाबा नहीं लूँगी। अब खुश

रघू- हाँ ठीक है। अब बताओ आगे क्या करना है उन लोगों का

रघू की बात सुनकर मैं तुरंत बोली

निशा- कुछ भी नहीं

रघू- मतलब

निशा- देखो रघू मैं जो भी काम करती हूँ। उसमें यह सब होता रहता है। मैं किस किस से दुशमनी निकालती फिरूँगी। बैसे भी ऑफीशियली तो मैं चाहकर भी कुछ नहीं करती

रघू- एक मिनट मतलब अनऑफीशियली कुछ करने का प्लान तुम्हारे दिमाग में पहले से ही चल रहा है। है ना….

रघू की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बोली

निशा- रघू फिलहाल तुम इन सबसे दूर ही रहो और इन सब मैटर्स को फिलहाल मेरे हवाले छोड दो

मेरी बात सुनकर रघू जिद्द करते हुए बोला

रघू- नहीं…. मैं उन कमीनों को ठिकाने लगाने में तुम्हारा साथ दूँगा और यह मेरा फाईनल डिसीजन है। अब इसपर और कोई बहस नहीं होगी

रघू को यूँ जिद्द करते हुए देख मैंने उसे प्यार भरी नजरों से देखते हुए कहा

निशा- मतलब तुम नहीं मानोगे

रघू- बिल्कुल भी नहीं…

निशा- चलो ठीक है... लेकिन मैं जितना कहूँ केवल उतना ही करना है। बाकि अलग से अपना दिमाग लगाने की कोई जरूरत नहीं है। मैं नहीं चाहती की तुम किसी लफडे में फंसो…

रघू- हाँ हाँ ठीक है। मैं समझ गया

निशा- तो फिर चलो अब सो जाओ

रघू- अभी से... एक बार और करते हैं ना प्लीज

निशा- नहीं बिल्कुल भी नहीं। आज मैं बहुत थकी हुई हूँ। मुझे बस अब तुम्हारी बाहों में सोना है। अब जो भी करना है सुबह करेंगे

रघू- पक्का.... सुबह करने दोगी ना

निशा- हाँ बाबा कर लेना।

मेरी बात सुनकर रघू ने खुश होते हुए लाईट ऑफ कर दी और फिर मुझे अपनी बाहों में भरने के बाद कंबल ओडकर लेट गया। जिसके बाद कुछ ही देर में हम दोनों गहरी नींद में चले गए। सुबह करीब 5 बजे जब रघू की आंख खुली तो वो मेरे साथ फिर से छेड छाड करने लगा। जिस कारण मेरी भी आँख खुल गई। अब जब मैंने रात में उससे पहले ही वादा कर चुकी थी, तो अब मैं उसे मना भी नहीं कर सकती थी। ऊपर से उसके छेडछाड करने की बजह से मेरा भी मूढ बन गया था। इसलिए हमने एक बार फिर जोरदार तरीके से सेक्स किया।

जब हम दोनों की प्यास पूरी तरह से बुझ गई तो रघू तैयार होकर वहाँ से चला गया और मैं दोबारा से कंबल ओढकर सो गई। सुबह करीब 8 बजे मोबाईल की रिंगटोन सुनकर जब मेरी आँख खुली। तो मैंने फटाफट अपना मोबाईल चैक किया, जिसमें रवि की कॉल आ रही थी। रवि का नाम अपनी मोबाईल स्क्रीन पर देखकर मुझे याद आया कि आज मुझे उसके साथ इंदौर जाना है। इसलिए मैंने फटफट उसकी कॉल रिसीव कर ली। तभी दूसरी तरफ से रवि आवाज आई

रवि- अगर मैडम जी की नींद पूरी हो गई हो तो जल्दी से तैयार हो जाओ। मैं बस 10 मिनट में तुम्हें लेने आ रहा हूँ।

निशा- हाँ हाँ बाबा ठीक है.. रूम का गेट नॉक मत करना। मैं लॉक ओपन करके बाथरूम में जा रही हूँ।

इतना बोलकर मैं तुरंत बाथरूम में घुस गई। जब मैं बाथरूम से बाहर आई तो देखा रवि अंदर आकर बिस्तर पर आराम से पसरा हुआ था। मैंने उसपर कोई ध्यान नहीं दिया और फटाफट कपडे पहनकर तैयार होने लगी। तब तक रवि ने रूम सर्विस को कॉल करके दो कॉफी ऑर्डर कर दीं थी। इतने दिनों में वो इतना तो समझ ही गया था कि मुझे सुबह सुबह कॉफी चाहिए ही होती है और दिन में भी जब भी मुझे मौका मिले तो मैं कॉपी पर टूट पडती हूँ। इसलिए जब तक मैं तैयार हुई हमारी कॉफी भी आ चुकी थी। इसलिए मैं कॉफी शिप हुए अपना मोबाईल चैक करने लगी।

तभी मेरी नजर पवन के मैसेज पर गई। उसने मुझे एक लड़की के सभी डॉक्यूमेंट सेंड कर दिए थे। जिसे मैं चैक करने लगी। लड़की का नाम अमृता चौहान था। जिसकी उम्र 19 साल थी और वो उत्तराखण्ड के किसी छोटे से गाँव की रहने बाली थी। सबसे अचछी बात तो यह थी कि उस लडकी ने कम्प्यूटर साईंस से अपना ग्रेजुऐशन भी कम्प्लीट कर लिया था। पवन ने उस लडकी के सभी एज्यूकेशनल डॉक्यूमेंट्स के साथ साथ दूसरे जरूरी डॉक्यूमेंट जैसे वर्थ सर्डिफिकेट, आधार कार्ड, पैन कार्ड बगैरह भी मुझे स्कैन करके सेंड कर दिए थे।

सबसे अच्छी बात तो यह थी कि उस लड़की के आधार कार्ड और पैन कार्ड को छोडकर बाकी किसी भी डॉक्यूमेंट में उसकी फोटो क्लीयर नहीं थी और यह बात मेरे लिए बहुत फायदे की थी।क्योंकि उन्हें देखकर कोई भी यह नहीं कह सकता था कि वो डॉक्यूमेंट मेरे नहीं बल्कि किसी और लडकी के हैं। इसलिए वो सभी डॉक्यूमेंट्स मेरी नई पहचान के लिए एकदम परफेक्ट थे। बस एक प्राब्लम थीं और वो थी उस लडक की ऐजे जो मुझे कुछ ज्यादा ही कम लग रही थी। इसलिए मैं इस लडकी के डॉक्यूमेंट कैंसिल करके पवन से किसी दूसरी लडकी के डॉक्यूमेंट मंगवाने के बारे में सोच ही रही थी कि तभी मुझे रवि की आवाज सुनाई दी

रवि- अरे मैडम किन ख्यालों में खो गई… चलो चलना नहीं है क्या

रवि की बात सुनकर मैंने कहा

निशा- अरे कहीं नही यार…. अच्छ तुम चलो मैं बस दो मिनट में अपना सामान सेट करके आई।

मेरी बात सुनकर रवि जैसे ही होटल की कार पार्किंग की तरफ गया तो मैंने तुरंत अपने रूम को अंदर से लॉक किया और पवन को कॉल करके उससे कहा।

निशा- डॉक्यूमेंट तो मुझे ठीक लग रहे हैं लेकिन एक प्राब्लम है

मेरी बात सुनकर पवन तुरंत बोला

पवन- वो क्या मैडम जी

निशा- लड़की की एज मुझे कुछ ज्यादा ही कम लग रही है

मेरी बात सुनकर पवन थोडा हैरान होते हुए बोला

पवन- अरे मैडम क्या बात कर रही हो… आप लगती भी तो 19-20 साल की हो।

पवन की बात सुनकर मैं हंसते हुए बोली

निशा- बस बस ज्यादा मस्का लगाने की जरूरत नहीं है

पवन- अरे माँ कसम मैडम…. मैं सच कह रहा हूँ और आप भी तो कितनी अजीब बात कर रही हो। ज्यादातर लडकियाँ अपनी उम्र कम करने के पीछे पडी रहती हैं, जबकि आपको उम्र कम होने से दिक्कत है।

बात तो पवन की सही थी। ज्यादातर लडकियाँ अपनी सही उम्र किसी को नहीं बताती हैं। अगर उस लड़की की उम्र और मेरी उम्र में 1-2 साल का अंतर होता तो शायद मुझे भी इस बात से कोई दिक्कत नहीं होती। लेकिन मैं पूरे 25 साल की हो चुकी हूँ और वो लड़की अभी 19 की है। यानि मुझसे पूरे 6 साल छोटी, यह अंतर कुछ ज्यादा ही था। जिस कारण मुझे थोडा अजीब लग रहा था। बस इसीलिए मैंने पवन से कहा

निशा- मैं उन लडकियों मैं से नहीं हूँ जो अपनी उम्र छिपाती हैं। इसलिए मुझे तुम बस इतना बताओ कि क्या इस लड़की के अलावा किसी दूसरी लडकी के डॉक्यूमेंट अरेंज्ड हो सकते हैं।

पवन- हो तो जाऐंगे मैडम जी, लेकिन ज्यादातक डॉक्यूमेंट्स 30 साल से ज्यादा उम्र की लडकियों के हैं और जो 20 से 25 साल की लडकियों के डॉक्यूमेंट्स हमारे पास हैं उनके ज्यादातर डॉक्यूमेंट में लडकियों के फोटो एकदम क्लीयर हैं और उनके चेहरे आपसे बिल्कुल भी मिलते जुलते नहीं हैं। बैसे भी मैंने इस लड़की को करीब 200 डॉक्यूमेंट देखने के बाद आपके लिए सिलेक्ट किया है। इसलिए अगर आप आधार कार्ड और पैन कार्ड को मैनेज कर लें तो फिर कोई भी इंसान यह नहीं कह सकता है कि ऐ डॉक्यूमेंट्स आपके नहीं है। और सबसे जरूरी बात इस लडकी के परिवार में अब कोई भी जिंदा नहीं है। यहाँ तक कि उसका कोई नजदीकी रिश्तेदार भी नहीं है। जो बाद में आपको पहचान सके।

पवन की बात सुनकर मैंने उससे सबाल किया

निशा- तुम यह बात इतने यकीन के साथ कैसे कह सकते हो।

मेरा सबाल सुनकर पवन ने कहा

पवन- मैंने सारी जानकारी इकट्ठी करने के बाद ही आपको इस लडकी के डॉक्यूमेंट भेजे हैं। असल में इस लडकी के माता पिता की मौत बचपन में ही हो गई थी। जिस कारण इसकी दादी ने ही इसे पाल पोसकर बडा किया था। इसी साल उत्तराखण्ड में लैण्डस्लाईड होने से इस लडकी का आधे से ज्यादा गाँव पूरी तरह से बर्बाद हो गया है। जिसमें इस लडकी और उसकी दादी की भी मौत हो गई है और गाँव के बचे कुचे लोग किसी दूसरी जगह सिफ्ट हो गए हैं। यानि आप पूरी तरह से सेफ हैं, वस एज ही तो आपको मैनेज करनी है। मैं इस लडकी के ऑरीजनल डॉक्यूमेंट्स के साथ साथ उसके माता पिता के डेथ सार्टिफिकेट भी आपको दे दूँगा।

पवन की बात सुनकर मैं उसे कुछ कहने ही बाली थी कि तभी मुझे याद आया कि खण्डहर में पुजारी जी ने जो कहानी बताई थी उसके अनुसार मेरे गले में डला मोती किसी राजकुमारी अमृता का था, जो कि अब मेरे पास है। इसका एक ही मतलब था कि अब मैं राजकुमारी अमृता की जिंदगी जी रही हूँ। इसलिए मेरे मन में ख्याल आया कि क्यों ना मैं अमृता नाम से ही अपनी नई जिंदगी की शुरूआत करूँ। ताकि मैं अपनी तरफ से राजकुमारी अमृता को श्रदधांजली यानि ट्रिव्यूट दे सकूँ।

बैसे भी आज अगर मैं जिंदा हूँ तो वो सिर्फ राजकुमारी अमृता के शक्ति बीज की बजह से हूँ। बैसे भी हरीश अंकल तो पहले से ही जानते हैं कि मेरा असली नाम कुछ और है, रही बात मेरे दोस्तों की तो उन्हें भी मैं कोई नई कहानी सुना दूँगी। बैसे भी अब तक मैंने उनसे कई सारे झूठ बोले हैं, तो फिर एक झूठ और सही। इस बारे में सोचते ही मैंने पवन से कहा

निशा- ओके कोई नहीं…. तो फिर इसी लडकी को फाईनल करते हैं। तुम बस जल्द से जल्द इस लडकी के सारे ऑरीजनल डॉक्यूमेंटअरेंज्ड करवा दो।

मेरी बात सुनकर पवन खुश होते हुए बोला

पवन- आप बिल्कुल निश्चिंत रहिए मैडम जी, एक हफ्ते के अंदर सारे ऑरीजनल डॉक्यूमेंट आपके पास होंगे। आप बस पैसे तैयार रखना

निशा- तुम पैसों की चिंता बिल्कुल भी मत करो। अगर कहो तो मैं आज ही बाकी पैसे तुम्हारे पास भिजवा दूँगी

मेरी बात सुनकर पवन तुरंत बोला

पवन- अरे नहीं नहीं उसकी कोई जरूरत नहीं है।

इसके बाद मैंने फोन कट कर दिया और अपना हैंडबैग उठाकर रूम को अच्छी तरह से लॉक करने के बाद होटल से बाहर आ गई। जहाँ रवि पहले से ही अपनी कार में मेरा इंतजार कर रहा था। जैसे ही मैं कार में बैठी, तो उसने तुरंत कार आगे बड़ा दी। हमें इंदौर पहूँचने में करीब 4 घंटे का समय लगा। इंदौर पहूँचकर हमने सबसे पहले एक रेस्टोरेंट में खाना खाया उसके बाद रवि ने अपने पिता के दोस्त जगदीश वर्मा से मेरी मुलाकात करवाई और वहाँ आने का करण बताया। सारी बात जानने के बाद जगदीश जी मुझे मकान और उसकी लोकेशन दिखाने के लिए अपनी साईट पर ले गए, जवकि रवि अपने पिता का काम पूरा करने के लिए चला गया था।

साईट पर पहुँचकर मैंने कई सारे मकान देखे, जिनमें से मुझे एक कार्नर बाला मकान पसंद आ गया। वह एक 3BHK मकान था और जिसमें कार पार्क करने के लिए अलग से पोर्च भी बना हुआ था। असल में वो एक डबल स्टोरी मकान था। जिसके ग्राऊँड फ्लोर पर दो बेडरूम, हॉल और किचिन बने हुए थे और ऊपरी मंजिल पर भी एक किंग साईड बेडरूम बना हुआ था। बाकी पूरा टैरिस खाली था। जो शायद टैरिस गार्डन के पर्पज से खाली छोडा गया था। उस मकान की सबसे बडी खासियत यह थी कि उसमें एक बड़ा सा बेसमेंट भी था। जो मेरे काफी ज्यादा काम का था।

इसलिए मैंने जगदीश जी से तुरंत ही उस मकान को मेरे नाम पर बुक करने के लिए बोल दिया और एडवांश पेमेंट के रूप में 10 लाख रूपये भी उन्हें दे दिए। जिसके बाद जगदीश जी ने अपने लॉयर को कॉल करके उस मकान का रजिस्ट्रेशन जल्द से जल्द मेरे नाम ट्रांशफर करने के लिए कह दिया। जिसमें करीब 1 हफ्ते का समय लगने बाला था। इसलिए मैंने सोचा की क्यों ना तब तक उस मकान में अपनी जरूरत के हिसाब से कुछ चेंजिंग भी करवा ली जाऐ। जब मैंने इस बारे में जगदीश जी से बात की, तो उन्होंने अपने भी वहाँ बुलवा लिया ताकि मैं अपनी रिक्वार्मेंट उसे बता सकूँ।

इंजीनियर के वहाँ आने के बाद मैं उसे अपने साथ मकान के बेसमेंट में ले गई और उसे अपनी रिक्वायर्मेंट बताने लगी। असल में उस मकान का बेसमेंट काफी बड़ा था। इसलिए मेरे मन में बेसमेंट के बीचों बीच एक पर्टीशन लगवाकर सीक्रेट रूम बनवाने का आईडिया आया था। ठीक बैसा ही जैसा मैंने खण्डहर में देखा था। उस सीक्रेट रूम में मैं अपने सारे पैसों के साथ साथ गनपत और उसके पाटनर्स का सारा खजाना छिपाना चाहती थी और बेसमेंट के बाकी के एरिया को मैं अपने स्टडी रूम और ऑफिस के रूम में यूज करने बाली थी। ताकि किसी को उस सीक्रेट रूम के बारे में पता ना चले।

उस सीक्रेट रूम का दरवाजा भी मैं दूसरों की नजरों से छिपाना चाहती थी। जिसके बारे में भी मैंने इंजीनियर को बोल दिया था, साथ ही साथ मैंने बेसमेंट में भी एक अटैच्ड लैट बाथ बनाने के लिए भी बोल दिया था। बैसे तो यह काम ज्यादा नहीं था। लेकिन फिऱ भी उसे कम्प्लीट करने में करीब 1 हफ्ते का समय लग सकता था। तब तक उस मकान का रजिस्ट्रेशन भी मेरे नाम ट्रांशफर हो जाऐगा। इसलिए मुझे इससे कोई भी प्राब्लम नहीं थी। मेरी सारी रिक्वार्मेंट अच्छी तरह से समझने के बाद जगदीश जी ने इंजीनियर को आज से ही काम शुरू करने के लिए बोल दिया था।

कहानी जारी है ......
 
Update 049 -

अपने नए मकान का सारा काम खत्म करके मैं ऑटो लेकर अपने ऑफिस के लिए निकल गई। जो कि उस ऐरिया से ज्यादा दूर नहीं था। ऑफिस पहूँचकर वहाँ का सारा काम अच्छी तरह से चैक करने के बाद मैं सभी लोगो को जरूरी इंस्ट्रक्शन देने लगी। तब तक रवि भी अपने काम से फ्री हो गया था। इसलिए जब उसने मुझे कॉल किया, तो मैंने उसे अपने ऑफिस के पास बाले रेस्टोरेंट में आने के लिए बोल दिया। फिर मैं ऑफिस का सारा काम जल्दी से फिनिश करके वहाँ से निकल गई।

रेस्टोरेंट में कॉफी पीने के बाद हम लोग वहां से बापिस भोपाल के लिए निकल आये। हमें भोपाल पहुँचते पहुँचते रात के 8 बज चुके थे। इसलिए रवि मुझे होटल के बाहर छोडकर अपने घर के लिए निकल गया। मुझे इस वक्त बहुत तेज भूख लग रही थी। इसलिए रेस्टोरेंट में खाना खाने के बाद मैं तुरंत अपने रूम में पहुँची। जहाँ मैंने सबसे पहले नहाया और कपडे चेंज करके बिस्तर पर पसर गई। रवि ने आज रास्ते में मेरे साथ काफी ज्यादा छेड छाड की थी। जिस कारण मेरा मन अब चुदने का कर रहा था।

बैसे तो मैं रवि से बहुत पहले ही चुदवा लेती और आज रास्ते में भी कहीं मौका देखकर मजे ले सकती थी। लेकिन जिस दिन से मैंने रवि के पापा के साथ चुदाई की है। उस दिन से मुझे रवि के साथ सेक्स करना कुछ ठीक नहीं लग रहा है। रघू को भी आने में समय लगने बाला था। इसलिए मैंने सोचा कि क्यों ना तब तक अपनी नई पहचान के आधार कार्ड और पैन कार्ड को अपडेट काम फिनिश कर लूँ। यह सब सोचते ही मैंने तुरंत अपना लैपटॉप ऑन किया और आधार कार्ड का सर्वर हैक करने की कोशिश करने लगी। इस काम में मुझे ज्यादा समय नहीं लगा। क्योंकि यह काम मैं पहले भी कर चुकी हूँ।

आधार का सर्वर हैक होते ही मैंने अपने ऑरीजनल आधार कार्ड का बायोमैट्रिक डाटा यानि अपने फिंगर प्रिंट और आईरिस प्रिंट को अमृता चौहान नाम की लड़की के आधार कार्ड के डाटा से एक्सचेंज कर लिया। जिसके बाद मैंने अपना लेटेस्ट फोटो भी उस नए आधार में अपडेट कर दिया। अब अमृता चौहान के आधार कार्ड में मेरा फोटो और मेरा बायोमेट्रिक डाटा था। जवकि मेरे आधार कार्ड में अमृता का बायो मैट्रिक डाटा था। लेकिन फोटो मेरा ही लगा हुआ था। ताकि बाद में जब कोई मुझे अमृता चौहान की जगह निशा गुप्ता सावित करने की कोशिश करे तो मेरा बायोमैट्रिक डाटा निशा के बायोमैट्रिक से मैच ना करे, बस फोटो देखकर ऐसा लगे कि हमारा चेहरा आपस में मिलता जुलता है।

इसके बाद मैंने अपने अमृता नाम के नए आधार कार्ड में अपना इंदौर बाला नया एड्रेश भी अपडेट कर दिया। आधार कार्ड का सारा काम खत्म होते ही मैंने सपना का लेटेस्ट आधार कार्ड भी डाऊनलोड कर लिया। इसके बाद मैंने पैन कार्ड की ऑफीशियल साईट पर जाकर अमृता चौहान के पैन कार्ड का फोटो, सिग्नेचर और एड्रेश अपडेट करने की रिक्वेस्ट डाल दी। इस सारे काम में मुझे ज्यादा समय नहीं लगा। इसलिए अपने नए आधार कार्ड और पैन कार्ड को अपडेट करने के बाद मैंने अमृता चौहान के नाम से ड्रायबिंग लायसेंस और पासपोर्ट के लिए भी एप्लाई कर दिया था।

क्योंकि पवन ने मुझे अमृता के जो भी डॉक्यूमेंट भेजे थे, उनमें अमृता का ड्रायविंग लायसेंस और पासपोर्ट नहीं था। जिसका मतलब था कि अमृता ने अब तक अपने ऐ डॉक्यूमेंट नहीं बनवाऐ थे। यह सारा काम खत्म होते होते रात के करीब 10 बज गए थे। इसलिए मैंने अपना लैपटॉप बंद कर दिया और जैसे ही मैं अपना फोन उठाकर रघू को कॉल करने बाली थी ठीक तभी रघू ने डोर नॉक किया। डोर नॉक होते ही मैं समझ गई कि रघू आ गया है। इसलिए मैंने फटाफट दरवाजा खोल दिया। रघू के अंदर आते ही मैंने तुरंत दरवाजा अंदर से बंद किया और फिर रघू पर टूठ पडी।

रघू भी पहले से ही काफी ज्यादा एक्साईटेड था। जिस कारण कुछ ही देर बाद हम दोनों बिना कपडों के बिस्तर पर एक दूसरे को पूरे मजे दे रहे थे। पहला राऊंड खत्म होते ही। रघू ने अपनी ज्वानिंग की खुशखबरी मुझे दी। जिसके बाद हम दोनों एक दूसरे से काफी देर तक यूँ ही बातें करते रहे। इस दौरान एक बार फिर हमारा मूढ बन गया। इसलिए हम एक बार फिर एक दूसरे को चूमने और सहलाने लगे। जब हम दोनों की बासना शांत हुई तो हम दोनों ही काफी ज्यादा थक गए थे। इसलिए हम एक दूसरे की बाहोँ में कंबल ओढ कर सो गए।

अगले दिन मैंने बैंक जाकर लॉकर में से कुछ सोने के बिस्किट निकाल कर भोपाल के एक बडे ज्वैलर के पास बेच दिए। क्योंकि मुझे इंदौर बाले मकान का पेमेंट करना था। साथ ही साथ अपने लिए एक कार भी खऱीदनी थी। इसलिए सोना बेचने के बाद मैं एक कार के शोरूम में गई और वहां से अपने लिए एक लेटेस्ट मॉडल की कार खऱीदी। उसके बाद बचा हुआ सारा पैसा मैंने अपने होटल रूम में सुरक्षित रख दिया। इसके बाद मैंने रवि और श्रेया के साथ साथ अपने बाकी के दोस्तों को एक रेस्टोरेंट में बुलाया जहाँ मैं नई कार खरीदने की खुशी में उन्हें पार्टी देने बाली थी।

सबके आने के बाद मैंने उन सभी को एक छोटी सी पार्टी दी। जहाँ बातों ही बातों में मैंने उन लोगों को मेरा असली नाम अमृता चौहान बता दिया। जिसे सुनकर सभी लोग बुरी तरह से चौंक गए थे और रवि के चेहरे पर तो गुस्सा साफ साफ दिखाई दे रहा था। जिसे देखकर मैं उन लोगों को समझाते हुए बोली

निशा- सॉरी यार… तुम लोगों को तो मैं पहले ही बता चुकी हूँ कि मैं एक हैकर हूँ, जिस कारण कई सारे लोग मेरे दुश्मन भी बन गए हैं। इसलिए जब भी मैं किसी नई जगह जाती हूँ तो अपनी असली पहचान छिपा लेती हूँ। जब पहली बार मेरी रवि से मुलाकात हुई थी तो मुझे लगा था कि हम दोबारा फिर कभी नहीं मिलेंगे। इसलिए मैंने उसे टालने के लिए अपना नाम सपना बता दिया था। लेकिन मुझे क्या पता था कि हम सभी लोग इतने अच्छे दोस्त बन जाऐंगे। हाँलाकि मैं पहले ही तुम लोगों को मेरा असली नाम बता देना चाहती थी, पर मौका ही नहीं मिला।

मेरी बात सुनकर श्रेया बोली

श्रेया- कोई बात नहीं… हम समझ सकते हैं कि उस वक्त तुम्हारे मन में क्या चल रहा होगा। अब जो हो गया सो हो गया, बैसे भी तुमने अब तो अपना असली नाम हमें बता ही दिया है। इसलिए हमें इस वात से कोई फर्क नहीं पडता कि तुम्हारा नाम सपना है या अमृता। हम सभी लोग तुम्हारी अच्छाई के कारण तुम्हारे दोस्त हैं, ना कि तुम्हारे नाम की बजह से। हाँलाकि हमें कुछ दिनों तक यह कन्फ्यूजन जरूर रहेगा कि तुम्हें अमृता कहकर बुलाऐँ या सपना कहकर।

श्रेया की बात सुनकर मैंने मुस्कुराते हुए कहा

निशा- इससे कोई फर्क नहीं पडता है मेरी जान, तुम्हारा जो दिल कहे वो कह सकती हो।

श्रेया- तो फिर ठीक है, आज से हम लोग तुम्हें अमृता बोलने की पूरी कोशिश करेंगे।

रेस्टोरेंट में थोडा बहुत खाने पीने और यूँ ही एक दूसरे से मस्ती मजाक करने के बाद हम लोगों ने पास के ही एक मॉल में मूबी का ईवनिंग शो देखने चले गए। जिसका पूरा पेमेंट मैंने ही किया था। मूवी खत्म होने के बाद सभी लोग अपने अपने घऱ बापिस चले गए और मैं भी अपनी कार लेकर होटल आ गई। आज मुझे असलम के एक क्लाईंट के पास जाना था। इसलिए मैंने रघू को कॉल करके होटल आने से मना कर दिया था। होटल पहुँचकर मैंने अपने कपडे चेंज किये और फिर अपने आज रात बाले कस्टमर के पास चली गई।

हाँलाकि मुझे अब कॉलगर्ल बाला काम करने की कोई जरूरत नहीं थी। क्योंकि ना तो अब मेरे पास पैसों की कोई कमी थी और ना ही चुदाई करने बाले मर्दों की। हाँलाकि मैं अब तक रवि से नहीं चुदी थी। लेकिन मुझे पूरा यकीन था कि मेरे एक इशारे पर वो मुझपर किसी भूखे भेडिए की तरह टूट पडने के लिए पूरी तरह से बेताब है। रवि के अलावा रघू तो मेरे पास था ही, जिसकी चुदाई की तो मैं पूरी तरह से दीवानी हो चुकी थी। लेकिन अब मुझे अलग अलग मर्दों के साथ चुदने में मजा आने लगा था।

इसलिए मैंने तय किया कि जब तक मैं अपनी निशा गुप्ता बाली असली पहचान पूरी तरह से मिटा नहीं देती, तब तक मैं मजे लेने के लिए यह काम करती रहूँगी। अगला एक हफ्ता मेरा भोपाल से इंदौर और इंदौर से भोपाल आने जाने में ही निकल गया। असल में मुझे अपने मकान का पेमेंट करना था और उसके रजिस्ट्रेशन ट्रांशफर की फार्मेलिटी भी पूरी करनी थी। साथ ही साथ मुझे अपने नए पासपोर्ट के बैरीफिकेसन और ड्रायबिंग लायसेंस के लिए भी इंदौर जाना था।

क्योंकि मैंने अमृता के आधार कार्ड में इंदौर का ही नया एड्रेश अपडेट कर दिया था। जिस कारण मेरे नये ड्रायबिंग लायसेंस और पासपोर्ट के सारे काम इंदौर से ही होने थे। लेकिन इसमें मुझे ज्यादा परेशानी नहीं हुई। क्योंकि इंदौर ट्रांशपोर्ट डिपार्टमेंट और अपने मकान के एरिया बाले पुलिस स्टेशन पर मैंने हरीश अंकल से कॉल करवा दिया था। इस बीच मैंने हरीश अंकल और रघू को भी यह बता दिया था कि मेरा असली नाम अमृता चौहान है, साथ ही साथ मैंने अपने नए डॉक्यूमेंट की एक कॉपी भी हरीश अंकल को भी दे दी थी। मेरा नया नाम जानने के बाद भी हरीश अंकल और रघू पर कोई फर्क नहीं पडा था।

भोपाल से इंदौर अपडाउन करते वक्त मैं अपने नए मकान पर भी बिजिट कर रही थी। ताकि वहाँ चल रहे काम की प्रोग्रेश देख सकूँ। एक हफ्ता खत्म होते होते मेरे मकान का सारा काम पूरा हो गया था। जिसके बाद मुझे उस मकान सारी चाबियोँ के साथ साथ मकान का रजिस्ट्रेशन भी मिल गया था। यानि अब मैं उस मकान की ऑफीशियल मालकिन थी। जिसके बाद मैंने इंदौर से ही सारा फर्नीचर, टी.बी., एसी और बाकी सामान खरीदकर मकान में सेट करवा दिया और सारा राशन भी खरीद कर मकान को रहने लायक बना लिया।

ताकि जब भी मैं वहाँ रहने के लिए जाऊँ तो मुझे कोई प्राब्लम ना हो। मकान का पूरा काम खत्म होने के बाद मैंने सबसे पहले भोपाल में खोले गए अपने बैंक अकॉऊंट से सारे पैसे निकला कर उस अंकॉउंट को बंद करवा दिया, क्योंकि मेरा वो अकॉउंट निशा गुप्ता के नाम पर था। इसके अलावा मैंने लॉकर से भी सारा सोना निकाल कर अपने इंदौर बाले मकान बने सीक्रेट रूम में शिफ्ट कर दिया था और उन लॉकर्स को भी बंद करवा दिया था। इसके बाद मैंने इंदौर के ही एक बैंक में अमृता चौहान के नाम से अपना नया बैंक अकॉउंट ओपन करवा कर उसमें सारे पैसे जमा कर दिए।

साथ ही साथ मैंने रघू के नाम से भी उसी बैंक में एक अकॉऊंट खुलवा दिया था और उसमें 10 लाख रूपये भी जमा करवा दिए थे। इसके अलावा मैंने रघू को एक स्पोर्ट बाईक भी दिला दी थी। ताकि उसे कहीं भी आने जाने में कोई प्राब्लम ना हो। इस बीच मेरी अपनी नई पहचान से रिलेटेड सारे काम पूरे होने के बाद मैंने अपने असली प्लान को अंजाम देना शूरू किया। जिसमें मुझे अपने दुश्मनों से बदला लेना था। अपने प्लान के हिसाब से सबसे पहले मुझे खण्डहर में बापिस जाकर गनपत और उसके पाटनर्स का सारा सोना और हीरे वहाँ से गायब करने थे।

इसलिए मैंने उस खण्डहर से धीरे धीरे सारा सोना और हीरे अपने इंदौर बाले मकान में सिफ्ट करना शुरू कर दिया। वहाँ बहुत ज्यादा मात्रा में सोना छिपाकर रखा गया था, इसके अलावा 4 बडे बडे बाक्स में डायमण्ड भी भरे हुए थे। जिन्हें देखकर मैंने अंदाजा लगाया तो वो खजाना अरबों खरबों रूपयों का था। इतने पैसों में तो मैं सारी जिंदगी किसी माहारानी की तरह जी सकती थी। वो सारा खजाना अपने इंदौर बाले मकान में सिफ्ट करने में मुझे करीब एक हफ्ते से ज्यादा का समय लग गया था।

इसी दौरान मैंने पवन से अमृता चौहान के ऑरीजनल डॉक्यूमेंट भी ले लिए थे, इसके अलावा मेरा अमृता के नाम का नया आधार कार्ड और पैन कार्ड भी बाया पोस्ट मेरे इंदौर बाले घर पर आ चुके थे, साथ ही साथ मेरे पासपोर्ट और ड्रायबिंग लायसेंस भी बन कर तैयार हो गए थे। जिसके बाद मैंने इंदौर से ही वोटर कार्ड के लिए भी एप्लाई कर दिया था। जिसके बाद मैं पूरी तरह से अमृता चौहान बनने के लिए तैयार थी। अब मुझे बस अपनी असली यानि निशा गुप्ता की पहचान को पूरी दुनिया की नजरों में हमेशा हमेशा के लिए मिटाना था। जिसके लिए मुझे अपने पति अमन के आने का इंताजार था।

यह सारे काम पूरी करने के साथ साथ मैं असलम के क्लाईंट के साथ भी अपनी रातें रंगीन कर रही थी और जिस दिन मुझे किसी क्लाईंट के पास नहीं जाना होता था, उस दिन मेरा सबसे बड़ा आसिक रघू मेरे साथ अपनी रात रंगीन करता था। बैसे भी मुझे रघू के साथ सेक्स करना काफी पसंद था। लेकिन मुझे हर रात अलग अलग आदमी के साथ चुदाई करनाने का चस्का लग चुका था। क्योंकि हर आदमी चुदाई करने का तरीका अलग होता है। जिस कारण हर रात चुदाई में कुछ नयापन आ जाता है। इसी बीच मैंने असलम से बोलकर अपने लिए एक पिस्टल और कुछ कारतूस का इंतजाम भी कर लिया था।

कहानी जारी है ....
 
Update 050 -

सारे जरूरी काम पूरे होने के बाद मैंने मंत्री प्रकाश राज, बिजिनैस मैन धनराज, जेलर योगेश और एस.पी. महेश पर नजर रखनी शुरू कर दी। क्योंकि इन सभी लोगों ने मुझे मारने की कोशिश की थी और अब मैं इनको जिंदा नहीं रहने देना चाहती थी। इन लोगों के अलावा गनपत और जफऱ जो फिलहाल मंत्री प्राकश राज के दिल्ली बाले बंगले पर छिपे हुए थे, मैंने उनसे दिल्ली जाकर निपटने का प्लान बनाया था। लेकिन उन लोगों के पालतू गुण्डों ने भी तो मुझे उस खण्डहर में किसी कुतिया की तरह चोदा था। इसीलिए मैं उन सभी गुण्ड़ों को यहीं भोपाल में ही निपटाना चाहती थी।

लेकिन ना तो मैं उनमें से किसी को जानती थी और ना ही उन लोगों तक पहूँचने का मेरे पास कोई रास्ता था। पर यहाँ किस्मत ने मेरा एक बार फिर साथ दिया। एक दिन जब मैं बिजिनैशमैन धनराज के घर के बाहर छिपकर उसपर नजर रख रही थी तभी मेरी नजर एक आदमी पर पडी, जो उस दिन खण्डहर पर बाकी लोगों के साथ मौजूद था। जैसे ही वो आदमी धनराज के घर से बाहर निकला तो मैंने उसका पीछा करना शुरू कर दिया और उसके घर का ऐड्रेश पता कर लिया।

उस आदमी के घर के पास ही एक चाय के ठेले बाले आदमी से मैंने उस आदमी का नाम और मोबाईल नम्बर भी पता कर लिया था। असल में उस आदमी का नाम रंजीत था, चाय बाले से रंजीत की पूरी जानकारी लेन बाद मैं वहाँ से चुपचाप बापिस आ गई और अपने आगे के प्लान के लिए कुछ जरूरी सामान का इंतजाम करने लगी। सारा इंतजाम होने के बाद मैं अपने होटल रूम में बापिस आ गई, अपने रुम में आने के बाद मैंने सबसे पहले अपने कपडे चेंज किए उसके बात मैंने सोफे पर पसरते हुए रंजीत को कॉल कर दिया। करीब 3-4 रिंग जाने के बाद रंजीत ने मेरा कॉल रिसीव किया

रंजीत- हैलो कौन

निशा- नाम जानकर क्या करोगे मिस्टर रंजीत। बस इतना समझ लो कि मेरे पास तुम्हारे फायदे का एक ऑफऱ है।

रंजीत- कैसा फायदा

निशा- करोडों का फायदा

रंजीत- क्या काम करना होगा

निशा- मिलकर बताऊँगी

रंजीत- कहाँ मिलना है

निशा- भोपाल से 10-15 कि.मी. दूर जंगल के अंदर जो खण्डहर है, वहीं पर आ जाओ

उस खण्डहर का नाम सुनकर रंजीत बुरी तरह से चौंकते हुए बोला

रंजीत- खण्डहर में क्यों... मैं वहाँ नहीं आ सकता। अगर मिलना है तो यहीं भोपाल में ही मिलो, बर्ना किसी और को देख लो

निशा- ठीक है अगर तुम यह काम नहीं करना चाहते, तो कोई बात नहीं, मैं किसी दूसरे व्यक्ति से यह काम करवा लूँगी। बैसे तुम पहले आदमी हो, जिसने एक लड़की से डरकर करोडों का ऑफर छोड दिया

मेरी बात सुनकर रंजीत गुस्से में बिफरते हुए बोला

रंजीत- यह क्या बकबास कर रही हो तुम। मैं किसी से नहीं डरता

निशा- जो भी हो... मैं उस खण्डहर में 1 घंटे तक तुम्हारा इंतजार करूँगी। अगर करोडों रुपये कमाना चाहते हो तो 1 घंटे के अंदर वहाँ आ जाना। वर्ना मैं किसी दूसरे व्यक्ति से बात कर लूँगी, और हाँ अगर तुमने अपने किसी साथी को इसके बारे में बताया या तुम अपने किसी साथी को वहाँ खण्डहर में लेकर आऐ, तो मैं तुम्हें वहाँ नहीं मिलूँगी, लेकिन उसके बाद तुम्हारे साथ जो कुछ भी होगा, उसके जिम्मेदार तुम खुद ही होगे।

इतना बोलकर मैंने फोन कट कर दिया और अपनी कार लेकर उस खण्डहर की तरफ बड गई। मैं उस खण्डहर में से गनपत और उसके पाटनर्स का माल चुराने के लिए कई बार जा चुकी थी, औरृ इस दौरान मैंने उस इलाके के चप्पे चप्पे को छान मारा था। इसलिए खण्डहर के पास पहुँचकर मैंने अपनी कार को झाडियों के पीछे छिपा दिया ताकि मेरी कार पर किसी की नजर ना पडे, इसके बाद मैं खण्डहर के अंदर जाकर एक जगह छिपकर रास्ते पर नजर रखने लगी।

मुझे ज्यादा इंतजार नहीं करना पडा, क्योंकि कुछ ही देर में रंजीत अपनी बाईक से वहाँ आ गया था। हाँलाकि वो अकेला ही था, लेकिन मैं कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी। इसलिए मैं खण्डर के दरवाजे के पास छिप गई। जैसे ही वो अंदर आया तो मैंने पीछे से उसके सिर पर लोहे की एक रॉड से एक जोरदार बार किया। हमला इतना जोरदार था कि मेरे एक ही बार से रंजीत नीचे जमीन पर जा गिर गया और बेहोश हो गया। रंजीत के बेहोश होते ही मैंने उसके हाथ पैरों को लाईलॉन की एक मजबूत रस्सी से अच्छी तरह बांध दिया और फिर उसे घसीटते हुए कमरे के अंदर ले गई।

रंजीत एक सामान्य कद काठी का आदमी था। ऊपर से मेरे गले में डले शक्ति बीज के कारण जरूरत पडने पर मेरे अंदर अचानक से ताकत बडी जाती है। इसलिए मुझे रंजीत को कमरे के अंदर घसीटकर ले जाने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पडी। रंजीत को कमरे के अंदर ले जाकर, मैं उसके चेहरे पर पानी डालकर उसे होश में लाने की कोशिश करने लगी। जिस कारण कुछ ही देर में बो होश में आ गया और जैसे ही उसकी नजर मुझपर पडी तो वो डर के मारे चीख पडा

रंजीत- त तुम...... नहीं…. ये नहीं हो सकता। व वॉस ने तो कहा था कि तुम मर चुकी हो और तुम्हारी लाश जंगली जानबर खा गए हैं।

रंजीत को यूँ डरते हुए देखकर मैं मुस्कुराते हुए बोली

निशा- तो फिर क्या तुम्हारे सामने कोई भूत खड़ा है।

रंजीत- लेकिन तुम जिंदा कैसे बच गई

निशा- बडी लम्बी कहानी है, फिर किसी दिन बताऊंगी। फिलहाल तो मैंने तुम्हें जिस काम के लिए यहाँ बुलाया है, क्यों ना उसके बारे में बात करें

अब तक रंजीत अपने डर पर काबू पा चुका था। इसलिए मेरी बात सुनकर वो गुस्से में चिढते हुए बोला

रंजीत- बात... कैसी बात….. आखिर यह कौन सा तरीका है बात करने का।

रंजीत की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बोली

निशा- मैं तुमपर बिल्कुल भी भरोसा नहीं कर सकती हूँ। क्योंकि उस दिन तो तुम लोगों ने लगभग मुझे मार ही दिया था। क्या पता मेरी पूरी बात सुने बिना ही एक बार फिर मुझे मारने की कोशिश करने लगते तो

रंजीत- लेकिन तुम मुझसे आखिर चाहती क्या हो

निशा- तुम्हारा साथ

रंजीत- मेरा साथ.... पर किस काम में

निशा- बताती हूँ…. बताती हूँ… पहले यह बताओ कि तुम आखिर काम किसके लिए करते हो। क्योंकि उस दिन यहाँ कुल 6 आदमी थे। उनमें से तुम्हारा बॉस आखिर कौन है

रंजीत- ज जफर

निशा- गुड... अच्छा तो एक बात और बताओ, जफर तुम्हें यह सब काम के आखिर कितने पैसे देता है

मेरे सबाल पर रंजीन ने हैरान होते हुए मुझसे सबाल किया

रंजीत- आखिर यह सब तुम क्यों पूछ रही हो

निशा- मैं तो बस तुम्हारी बफादारी की कीमत जानना चाहती हूँ

मेरी बात सुनकर रंजीत ने कुछ देर सोचा और फिर बोला

रंजीत- काम के हिसाब से पेमेंट होता है। जैसे किसी को धमकाना है तो 10 हजार, मारपीट करनी है तो 20 हजार, किडनैपिंग के 50 हजार और जान से मारने का पूरा 1 लाख मिलता है।

निशा- इस हिसाब से महिने में कुल कितना कमा लेते होगे, 2 लाख 5 लाख या उससे भी ज्यादा

रंजीत- अकेला मेरा हिस्सा थोडे ही होता है, ऊपर से जान से मारने का काम भी रोज रोज कौन देता है। फिर भी तुम मानकर चलो कि महिने का 50 हजार से 1 लाख रूपये तक मिल जाता है।

रंजीत की बात सुनकर मैंने कुछ देर सोचा और बोली

निशा- हुम्म…. तो अगर मैं तुम्हें एक मर्डर के पूरे 2 लाख रूपये दूँ, तो क्या तुम मेरे लिए काम करोगे

मेरी बात सुनकर रंजीत थोडा हैरान होते हुए बोला

रंजीत- द दो लाख रूपये….. आखिर तुम किसको टपकाना चाहती हो

निशा- 1 नहीं पूरे 20 से ज्यादा आदमी हैं। मैं तुम्हें हर एक मर्डर के पूरे 2 लाख रूपये दूँगी। इस हिसाब से तुम एक ही झटके में पूरे 40-50 लाख रूपये एक ही बार में कमा सकते हो

मेरी बात सुनकर रंजीत बुरी तरह से हैरान होते हुए बोला

रंजीत- प प पचास लाख.... इतने रूपयों के लिए तो मैं पूरे भोपाल में ही आग लगा सकता हूँ। लेकिन वो लोग आखिर हैं कौन….. जिन्हें मारने के लिए तुम इतना सारा पैसा खर्च कर रही हो

रंजीत की बात सुनकर मैंने थोडा सीरियस होकर उसकी आँखों में झाँकते हुए कहा

निशा- तुम्हें छोडकर उन सभी लोगों मैं मरवाना चाहती हूँ, जो उस दिन खण्डहर में मौजूद थे।

मेरी बात सुनकर रंजीत बुरी तरह से डर गया और हकलाते हुए बोला

रंजीत- क् क्या बकवास कर रही हो तुम। म मैं अपने साथियों को नहीं मार सकता

रंजीत की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बोली

निशा- कोई बात नहीं…. तो फिर मैं चलती हूँ। तुम नहीं तो तुम्हारा कोई दूसरा साथी यह काम करेगा। 20 आदमियों मैं कोई ना कोई तो ऐसा होगा ही, जो पैसों के लिए बाकी सभी लोगों को धोखा देने के लिए तैयार हो, साथ ही साथ मौका मिलने पर वो तुम्हें भी मार देगा।

फिर मैंने अपने हैण्ड बैग से एक छोटा सा चाकू निकालकर रंजीत के पास ही नीचे जमीन पर डाल दिया और उससे बोली

निशा- इस चाकू से अपनी रस्सियाँ काट कर यहाँ से निकल जाना

इतना बोलकर मैं जैसे ही वहाँ से जाने लगी तो अचानक से रंजीत बोला

रंजीत- र रूको…. मैं तैयार हूँ

रंजीत की बात सुनकर मैं तुरंत रुक गई और बापिस उसके पास आकर मैंने मुस्कुराते हुए वहाँ डला चाकू उठा लिया। मैं जानती थी कि इतने सारे पैसों के लिए वो जरूर मान जाऐगा। लेकिन मैं उसपर पूरी तरह से भरोसा नहीं करना चाहती थी। इसलिए मैंने उसे थोडा और लालच देने की सोची और बोली

निशा- बैरी गुड… तो फिर फटाफट उस दिन जितने भी आदमी यहाँ थे, उनके नाम और पता बताना शुरू करो, बैसे अगर तुम उन 6 आदमियों को भी मेरे लिए मारोगे, तो मैं एक आदमी का पूरा 5 लाख रूपये तुम्हें दूँगी

रंजीत जो एक लाख रूपये के लिए ही किसी की भी जान लेने के लिए मान जाता है, जब उसने एक मर्डर के लिए पूरे पाँच लाख का ऑफर सुना तो उसकी आँखें हैरानी में बाहर निकल आई और वो हकलाते हुए बोला

रंजीत- प प पांच लाख

निशा- हाँ पाँच लाख…. यानी तुम्हारे पास करीब 70- 80 लाख रूपये कमाने का मौका है, इसके अलावा पूरा काम खत्म होने के बाद मैं तुम्हें बोनस के रूप में 5 लाख रूपये अलग से दूँगी। इतने सारे पैसे लेकर अगर तुम चाहो तो किसी दूसरी जगह जाकर आराम की जिंदगी जी सकते हो

रंजीत अब पूरी तरह से पैसों की चकाचौंध में डूब चुका था, इसलिए उसने बिना कुछ सोचे समझे तुरंत कहा

रंजीत- म म मुझे मंजूर है

इतना बोलकर वो एक एक करके अपने सभी साथियों के नाम और पते मुझे बताने लगा। जिन्हें मैंने एक डायरी में नोट कर लिया। इसके बाद रंजीत ने मुझे उन 6 पाटनर्स के नाम भी मुझे बताऐ। हाँलाकि उन लोगों के बारे में मैं पहले से ही जानती थी, लेकिन रंजीत के बातने के बाद मुझे उनके नाम कंफर्म हो गए थे। तभी रंजीत अचानक से बोला

रंजीत- तुम्हें डर नहीं लगता मुझसे। अगर मैंने यहाँ से छूटने के बाद तुम्हारे बारे में अपने साथियों को या जफर भाई को बता दिया तो, या फिर उल्टा तुम्हें धोखा देकर जान से मारने की कोशिश की तो…

रंजीत की बात सुनकर मैं हंसते हुए बोली

निशा- तुम बेबकूफ हो रंजती.... मुझे मारने की कोशिश तो तुम लोग पहले भी कर चुके हो। लेकिन मैं अब भी सही सलामत तुम्हारे सामने जिंदा खडी हूँ। तुम्हें क्या लगता है उस दिन मेरी जो हालत थी। उस हिसाब से क्या मैं इतनी जल्दी पूरी तरह से ठीक होकर यहाँ खडी होने के लायक भी होती।

मेरी बात सुनकर अचानक से रंजीत को मुझसे डर लगने लगा, जिस कारण वो बडी मुश्कुल से बोला

रंजीत- म मतलब क्या है तुम्हारा

निशा- बस इतना समझ लो कि तुम मुझे नहीं मार सकते। अगर चाहो तो एक बार फिर से कोशिश करके देख लेना। लेकिन उसके बाद तुम खुद जिंदा नहीं रहोगे, यह बात तय समझो। बैसे तो मैं तुम्हें मारना नहीं चाहती। लेकिन अगर तुम कोई बेबकूफी करोगे तो मैं तुम्हें जान से मारने में 1 सेकेण्ड भी नहीं सोचूँगी

रंजीत- तो फिर तुमने इस काम के लिए मुझे ही क्यों चुना

रंजीत की बात सुनकर मैं एक कातिलाना मुस्कान के साथ बोली

निशा- ऐसा समझ लो कि तुम मुझे पसंद आ गए हो... बस इसलिए

इतना बोलकर मैं उसके पैंट के ऊपर से ही उसका लण्ड सहलाने लगी। मेरी इस हरकत से रंजीत पूरी तरह से हैरान रह गया। इससे पहले वो कुछ कहता मैं फिर से बोली

निशा- इतना हैरान होने की जरूरत नहीं है। उस दिन तो तुम बडे मर्द बनकर मेरे पूरे मजे ले रहे थे। पर शायद तुम्हें यह पता नहीं है कि लडकियों को भी यह सब करना अच्छा लगता है। लेकिन मर्जी से, ना कि जबरदस्ती। अगर उस दिन तुम लोगों ने मेरे साथ जबरदस्ती ना की होती और मुझे जान से मारने की कोशिश नहीं की होती, तो आज मैं तुम्हारे साथियों के साथ यह सब नहीं करती।

रंजीत- म म मैं समझ गया... लेकिन तुम्हारे पास आखिर इतने सारे पैसे आये कहाँ से। तुम्हारे होटल रूम में तो हमें कोई पैसा नहीं मिला था

निशा- तुम बेबकूफ आदमी हो क्या... इतने सारे पैसे होटल रूम में भला कौन रखता है।

रंजीत- लेकिन तुम तो पुलिस बाली हो ना। तुम खुद ही क्यों नहीं मार देती सबको। मुझे पैसे देने की क्या जरूरत

निशा- पुलिस बाली हूँ। इसीलिए तो कानून अपने हाथ में नहीं ले सकती। बैसे भी मेरे हाथ तुम्हारे बॉस का खजाना लग चुका है। अब करोडों रूपये कहीं ना कहीं तो खर्च करने ही पडेंगे

रंजीत- मतलब

निशा- मतलब यह कि इस खण्डहर में तुम्हारे बास ने करोडों का माल छिपा रखा था। जो अब मेरे पास है। अब अगर तुमने पूरी इमानदारी से मेरा काम किया और उन सब लोगों को मारकर मुझे खुश किया, तो मैं तुम्हारे काम का पैसा तो तुम्हें दूँगी ही। साथ ही साथ अगर तुम चाहोगे तो मैं तुम्हें भी अपने साथ विदेश भी ले जा सकती हूँ। ताकि हम बिना किसी डर के पूरे ऐशो आराम से अपनी जिंदगी बिता सकें। आखिर मुझे भी तो किसी ना किसी मर्द की जरूरत पडेगी ही।

मेरी बात सुनकर रंजीत खुश होते हुए बोला

रंजीत- सच... क्या तुम सच में मुझे अपने साथ विदेश ले जाओगी

निशा- अरे हाँ मेरी जान.. अभी अभी तो मैंने कहा था कि तुम मुझे पसंद आ गए हो। इसीलिए तो मैंने इस काम के लिए तुम्हें चुना है।

मेरी बात सुनकर रंजीत की आँखों में चमक आ गई थी। जो मैंने साफ साफ देख ली थी।

कहानी जारी है ....
 
Update 051 -

रंजीत की आँखों में आई चमक को देखकर मैं समझ गई कि इतने सारे पैसों के लालच में वो अब कुछ भी कर सकता है। लेकिन फिर भी मैं उसे थोडा बहुत डराना चाहती थी। ताकि वो मुझे धोखा देने के बारे में सपने में भी ना सोचे, इसलिए मैंने उससे कहा

निशा- और हाँ अगर मुझे धोखा दोगे या मेरे बारे में अपने बॉस को बताओगे, तो ज्यादा से ज्यादा यही होगा कि तुम लोग एक बार फिर मुझे पकडकर टर्चर करोगे और मुझे जान से मारने की कोशिश करोगे। लेकिन मैं फिर से बच ही जाऊँगी, कैसे यह सोचने की जरूरत नहीं है। लेकिन यह बात तो पक्की है कि मेरे पकडे जाने के बाद मैं तुम्हारे बॉस से कहूँगी कि यह पूरा प्लान हम दोनों का था और उस दिन खण्डहर में सबके जाने के बाद तुम यहाँ बापिस आऐ थे और मुझे बचा कर ले गए थे। इसीलिए मैं अब तक जिंदा हूँ। साथ ही साथ उनका सारा माल तुमने कहीं छिपा दिया है। उसके बाद तो तुम खुद ही ंअंदाजा लगा सकते हो कि वो तुम्हारे साथ क्या करेगा।

मेरी बातों का रंजीत पर तुरंत असर हुआ और वो बुरी तरह से डरते हुए बोला

रंजीत- ल ल लेकिन यह सब झूठ है।

निशा- हाँ लेकिन यह बात केवल हम दोनों जानते हैं, इसलिए तुम्हारी बात पर भला कौन यकीन करेगा, तेरा बॉस और उसके साथी केवल पैसों के भूखे हैं, उन्हें ना तो अपने दोस्तों से कोई मतलब है और ना अपने बफादार आदमियों की कोई फिक्र है।

रंजीत- लेकिन तुम यह सब क्यों कर रही हो। मैं तो पहले ही तुम्हारा साथ देने के लिए मान गया हूँ ना,

निशा- अरे बाबा…. मैं कहाँ कुछ कर रही हूँ। मैं तो बस तुम्हें इतना बता रही हूँ कि यदि तुमने मुझे धोखा देने के बारे में सोचा भी तो उसका परिणाम क्या हो सकता। इसलिए अगर अभी भी तुम्हारे मन में कुछ उल्टा पुल्टा चल रहा हो, तो अभी बोल दो। मैं तुम्हें यहाँ से जाने दूँगी। तुम चाहो तो यहाँ से कहीं दूर भागकर अपनी नईं जिंदगी की शुरूआत कर सकते हो। मैं अपना काम किसी दूसरे व्यक्ति से करवा लूँगी।

मेरी बात सुनकर एक पल के लिए रंजीत के मन में यहाँ से कहीं दूर भागने का ख्याल आया तो था, पर फिर पैसों की चमक ने उसे एक बार फिर अंधा कर दिया, इसलिए उसने कहा

रंजीत- नहीं नहीं… मुझे कहीं भी नहीं जाना है। बैसे भी इतना अच्छा ऑफर छोडने बाला कोई मूर्ख ही होगा। लेकिन मुझे तुमसे एक बात पूछनी थी

निशा- चल्दी से बको

रंजीत- वो वो वो तुम बोल रही थी ना कि तुम मुझे विदेश ले चलोगी

निशा- हाँ…. तो….

रंजीत- तो क्या हम लोग वहां एक साथ रहेंगे

निशा- हाँ

रंजीत- मतलब हम बो सब भी करेंगे

निशा- क्या….

रंजीत- वो जो उस दिन किया था

निशा- तुम्हारा मतलब है सेक्स…..

रंजीत- हाँ हाँ वही

निशा- हाँ हाँ क्यों नहीं करेंगे, लेकिन मेरी मर्जी से…. तुम मेसे साथ जबरदस्ती कुछ भी नहीं करोगे……

मेरी बात सुनकर रंजीत तुरंत बोला

रंजीत- हाँ हाँ बिल्कुल…. हम बो सब बस तुम्हारी मर्जी से ही करेंगे। मैं तो बस ऐसे ही पूछ रहा था

रंजीत की बात सुनकर मैंने उसकी आँखों में झाँका और अपनी एक आईब्रो ऊपर करते हुए उससे सबाल किया

निशा- क्या हुआ मिस्टर रंजीत… क्या इस वक्त तुम्हारा मन मेरे साथ वो सब करने का हो रहा है।

मेरी बात को सुनकर और मेरे एक्सप्रेशन को देखकर रंजीत झिझकते हुए बोला

रंजीत- वो वो

निशा- अरे यार तुम तो लडकियों की तरह शर्मा रहे हो। उस दिन तो तुमने इतने सारे लोगों के सामने भी बिल्कुल भी शर्म नहीं की थी। लेकिन अब अकेले में मुझसे यह सब कहने में तुम्हें शर्म आ रही है।

रंजीत- नहीं नहीं… वो तो उस दिन माहौल ही कुछ था ना

रंजीत की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बोली

निशा- चलो कोई बात नहीं। लेकिन जब तक मेरा काम पूरा नहीं हो जाता, तब तक मैं तुम्हें वो सब करने नहीं दूँगी। लेकिन अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हें थोडा बहुत मजा अभी दे सकती हूँ।

मेरी बात सुनकर रंजीत की आंखों में एक बार फिर चमक आ गई थी, इसलिए वो बिना देर किए तुरंत बोला

रंजीत- मजा व वो कैसे

निशा- तुमने कभी किसी लड़की से अपना लण्ड चुसबाया है क्या

रंजीत- न नहीं तो... मेरा मन तो बहुत होता है। लेकिन कोई तैयार ही नहीं होती है

निशा- तो फिर ठीक है… आज मैं तुम्हें यह मजा दे सकती हूँ

मेरी बात सुनकर रंजीत हैरानी से आँखें फाड फाड कर मुझे देखते हुए बोला

रंजीत- क्या स सच मैं…

निशा- हाँ मेरी जान.... लेकिन इसी हाल में, मैं तुम्हारे हाथ पैर नहीं खोलूँगी। बोलो मंजूर है या नहीं

रंजीत- म मंजूर है

रंजती की बात सुनकर मैंने एक कातिलाना मुस्कान के साथ उसे देखा और उसके पैंट की जिप खोलकर उसका लण्ड बाहर निकाल लिया, जो हमारी बातों के कारण पहले से ही पूरी तरह से कडक हो गया था। मैंने कुछ देर तक अपने हाथों से उसके लण्ड को सहलाया और फिर उसके लण्ड पर झूक कर उसे चूसने लगी। मेरी हरकतों से तो रंजीत पूरी तरह से पागल ही हो गया था। उसे इतना मजा पहले कभी नहीं आया था। जिस बजह से मुझे ज्यादा मेहनत नहीं करनी पडी और कुछ ज्यादा ही उत्तेजित होने के कारण रंजीत ने 10 मिनट में ही अपना पानी छोड दिया। जिसके बाद मैंने उससे पूछा

निशा- मजा आया…..

मेरा सबाल सुनकर रंजीत तुरंत बोला

रंजीत- माँ कसम जन्नत मिल गई। इतना मजा तो जिंदगी में पहले कभी नहीं आया है

निशा- ऐसा मजा तो तुम्हें सारी जिंदगी मिल सकता है। अभी तो यह बस ट्रेलर था। जरा सोचो मैं किस किस तरह से तुम्हें और कितना मजा दे सकती हूँ। लेकिन उसके लिए तुम्हें जल्द से जल्द मेरा काम खत्म करना होगा। उसके बाद हम दोनों सब कुछ छोड कर विदेश भाग जाऐंगे।

मेरी बात सुनकर रंजती एक्साईटेड होते हुए बोला

रंजीत- अगर ऐसा है तो मैं आज ही सबको ठिकाने लाग दूँगा

निशा- यह तो बहुत अच्छी बात है। लेकिन यह सब तुम आखिर करोगे कैसे

रंजीत- करना क्या है। यहाँ से मैं सीधा उनके अड्डे पर जाकर सबको एकसाथ गोलियों से भून दूँगा

रंजीत की बत सुनकर मैं उसका मजाक उडाते हुए बोली

निशा- अरे वाह… बहुत अच्छा प्लान बनाया है तुमने… तुम सोच रहे हो कि तुम अकेले ही उन 20 से ज्यादा आदमियों को गोली मार दोगे और वो लोग तुम्हारे साथ कुछ नहीं करेंगे। जैसे वो लोग इसी इंतजार में बैठे हैं कि कब तुम आकर उन्हें गोली मारो। बेबकूफ आदमी अगर उनमें से किसी ने तुम्हें गोली मार दी, तो फिर तुम्हारा भी राम नाम सत्य हो जायेगा, और अगर किसी तरह बच भी गए, तो बाकी लोगों को तुम्हारे बारे में पता चल जाऐगा, जिसके बाद वो तुम्हारा पीछा नहीं छोडेंगे, ऊपर से पुलिस अलग तुम्हारे पीछे पड जाऐगी। इसलिए बेबकूफी बाली बातें मत करो।

मेरी बात सुनकर रंजीत को अपनी गलती का एहशास हो चुका था। इसलिए उसके मूँह से एक भी शब्द नहीं निकला। जिस कारण हमारे बीच कुछ देर खामोशी छाई रही। आखिरकार मैंने इस खामोश को तोडते हुए कहा

निशा- देखो रंजीत तुम मुझे पसंद हो, जिस बजह से मैं तुम्हें किसी मुशीबत में नहीं डालना चाहती हूँ। इसलिए जो भी करना है, वो पूरी प्लानिंग के साथ करना पडेगा

रंजीत- कैसा प्लान

रंजीत की बात सुनकर मैंने मुस्कुराते हुए उससे कहा

निशा- क्या तुम्हें पता है कि तुम्हारे बॉस ने अपना करोडों का माल कहाँ छिपाया था

रंजीत- नहीं

निशा- यहीं इसी खण्डहर में बिल्कुल हमारे सामने

मेरी बात सुनकर रंजीत हैरान होते हुए बोला

रंजीत- नहीं नहीं…. यह हो ही नहीं सकता। अगर बॉस ने यहाँ माल छिपाया होता, तो मुझे जरूर पता होता। मैंने इस खण्डहर का चप्पा चप्पा देखा है। यहाँ पर माल छिपाने लायक कोई भी जगह नहीं है।

रंजीत की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए खडी हो गई और सीक्रेट रूम के पास जाकर पत्थर की मूर्ती को घुमा दिया। मूर्ती को घुमाते ही सीक्रेट रूम के अंदर जाने का रास्ता खुल गया, जिसे देखकर रंजीत बुरी तरह से हैरान रह गया। रंजीत की ऐसी हालत देखकर मैं उसका मजाक उडाते हुए बोली

निशा- तो फिर यह क्या है मेरी जान

रंजीत- नहीं नहीं… यह कैसे हो सकता। यहाँ इस खण्डहर में कोई गुप्त रास्ता भी है, जिसके बारे में किसी को कुछ पता भी नहीं है….

मैं रंजीत को करैक्ट करते हुए बोली

निशा- सिवाय मेरे और तुम्हारे बॉस के…… इस सीक्रेट दरवाजे के दूसरी तरफ जो कमरा है। उसी में तुम्हारे बॉस ने अपना सारा माल छिपा कर रखा हुआ था।

इतना बोलकर मैंने एक बार फिर से मूर्ती को उल्टी दिशा में घुमाकर दरवाजा बंद कर दिया और रंजीत के पास आकर बोली

निशा- तुम दो-दो, तीन-तीन के ग्रुप में अपने साथियों को इस खण्डहर में बुलाओ और जब वो लोग यहाँ आऐं, तो तुम छिपकर उन्हें गोली मार देना, जिससे उनका काम तमाम हो जाऐगा। उसके बाद तुम उन्की लाशें इसी कमरे में छिपा देना। यहाँ इस सुनसान खण्डहर में वो सब देखने बाला कोई भी नहीं होगा। ऊपर से वो लोग यहाँ 2-2, 3-3 के ग्रुप में आयेंगे, जिस कारण तुम बडी आसानी से उन्हें गोली मार कर खत्म कर सकते हो और उनकी लाशें यहाँ सीक्रेट रूम में सडती रहेंगी। दुनिया समझेगी कि वो सभी लोग अचानक से कहीं गायब हो गए हैं। क्योंकि इस सीक्रेट रूम के बारे में किसी को कुछ भी पता नहीं है। और जब लाश ही नहीं मिलेगी, तो मर्डर का इल्जाम किस पर लगेगा। इस तरह से हमारा काम भी हो जाऐगा और तुम भी पूरी तरह से सुरक्षित रहोगे।

मेरी बात सुनकर रंजीत की आंखें हैरानी से फैल गई और बो कुछ देर यूँ ही मेरे प्लान के बारे में सोचता रहा, उसके बाद वो बोला

रंजीत- तुम्हारा दिमाग बाकई में बहुत खतरनाक है और तुम्हारा यह प्लान भी बहुत शानदार है।

रंजीत की बात सुनकर मैंने उसके हाथ में बंधीं रस्सी काट दी और चाकू उसके एक हाथ में थमाते हुए बोली

निशा- तो फिर ठीक है…. मैं अब चलती हूँ। तुम्हें जब ठीक लगे अपने प्लान पर काम करना शुरू कर देना।

इतना बोलकर मैं उस खण्डहर से बाहर निकल गई। लेकिन अपनी कार में बैठकर वहाँ से जाने के स्थान पर मैं उसी खण्डहर के पीछे की तरफ ऐसी जगह जाकर छिप गई, जहाँ से खण्डहर का आंगन और बाहर जाने का रास्ता साफ साफ दिखाई देता था। मेरे वहां छिपने के करीब 5 मिनट बाद रंजीत कमरे से बाहर आकर एक पत्थर पर बैठ गया। थोडी देर वहीं बैठकर कुछ सोचने के बाद उसने अपना मोबाईल निकाला और किसी को फोन लगा दिया। हालाँकि वो मुझसे थोडा दूर था। इसलिए मुझे उसकी आवाज साफ सुनाई नहीं दे रही थी।

लेकिन फोन कट करने के बाद वो अपनी पिस्टल को चैक करने लगा था। जो उसने अपनी कमर में छिपा रखी थी। हालाँकि रंजीत को बेहोस करने के बाद मैंने उसके पास यह पिस्टल देख ली थी। लेकिन उसके हाथ पैर बाँधने के बाद मुझे उससे कोई डर नहीं रह गया था। रंजीत काफी देर तक वहीँ आंगन में बैठा किसी के आने का इंतजार करता रहा। जब मैंने अपने मोबाईल में समय देखा तो शाम 5 बजने बाले थे। तभी मुझे किई बाईक की आवाज सुनाई दी।

जब मैंने रास्ते की तरफ देखा, जहाँ एक बाईक पर तीन आदमी खण्डहर की तरफ आ रहे हैं। उन्हें देखकर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गई। क्योंकि रंजीत ने आज से ही काम शुरू कर दिया था। शायद रंजीत ने भी बाईक की आवाज सुन ली थी। इसलिए वो आंगन में ही एक दीवार की दूसरी तरफ जाकर छिप गया। जिसे देखकर मैं समझ गई कि वो अब पक्का अपने इन तीनों साथियों को मारने बाला है। इसलिए मैंने अपने मोबाईल में तुरंत ही बीडियो रिकार्डिंग ऑन कर दी और खण्डहर के दरवाजे पर फोकस करके रिकार्ड करने लगी।

जैसे ही बो तीनों आदमी अंदर आये, तो मैं उन्हें देखते ही पहचान गई। ऐ तीनों आदमी भी उस दिन खण्डहर में मौजूद थे। इससे पहले वो तीनों रंजीत को आवाज लगाते, एक एक करके तीन फायर हुए और वो तीनों आदमी नीचे जमीन पर अपनी आखरी सांसे गिनने लगे। बेचारों को तो यह भी पता नहीं चला था कि आखिर यह सब उनके साथ क्या और क्यों हुआ है। जैसे ही वो दीनों नीचे गिरे, तो रंजीत तुरंत ही दीवार की दूसरी तरफ से बाहर निकल आया और फिर उसने दोवारा से किसी को कॉल कर दिया।

रंजीत की इस हरकत से मैं भी हैरान रह गई थी। मैंने इस बात की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि वो इस काम को खत्म करने के लिए इतना उतावला होगा। फोन कट करने के बाद रंजीत एक एक करके उन तीनों लाशों को कमरे के अंदर ले गया। जिसे देखकर मैं समझ गई की वो इन लाशों को मेरे बताये अनुशार उसी सीक्रेट कमरे में छिपाने बाला है। उन तीनों लाशों को ठिकाने लगाने के बाद रंजीत एक बार फिरसे दूसरे लोगों के आने का इंतजार करने लगा।

करीब आधे घंटे बाद जब एक और बाईक पर 2 आदमी वहाँ आये, तो इस बार भी उन्का वही अंजाम हुआ, जो उनसे पहले आये तीन आदमियों का हुआ था। मैंने यह सब अपने मोबाईल फोन में रिकार्ड कर लिया था। क्योंकि मैं जानती थी कि यह सब मेरे बहुत काम आने बाला है। उन दोनों आदमियों की लाशों को भी सीक्रेट रूम में ठीकाने लगाने के बाद, रंजीत ने उनकी बाईकों को भी खण्डहर के अंदर ही छिपा दिया और फिर अपनी बाईक लेकर वहाँ से चला गया।

कहानी जारी है.....
 
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