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- Dec 5, 2013
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अपडेट 11
रिकैप---
पिछले अपडेट मई अपने पढ़ा की कुलगुरु जी ने बड़े गुरूजी को बताया की राज के कैसे बहुत सरे दुश्मन ह और जगमाल सिंह क्या चाहते ह और जवाब मई बड़ेगुरू ने बी बताया की राज को 5 साल रखेंगे और उसे खुद तैयार करेंगे वंही राज इन सब बातो से बेखबर ह अपने दोस्त के साथ घूमने मई मस्त था
अब आगे----
मैं आराम से आश्रम घूम रहा था और आश्रम की सुंदरता ढक मेरा दिल और दिमाग दोनों शांत हो गए थे मैं बहुत खुस था फिर हम घूमते हुवे आश्रम के मई वह पंहुच गए जंहा 17 वर्ष की उम्र के बचे और 21 की उम्र के बिच के बचे ट्रेनिंग कर रहे थे मैं उन्हें डायन से ढक रहा था सुनील ने कहा भाई तुजे ाचा लगा ये सब मैंने कहा है ये आश्रम का माहौल और उसके अस्स पास की जगह यंहा का नेचर सब ाचा लगा फिर सामने की और ढक के मैंने कहा ये सब तोह बहुत जायदा मेहनत कर रहे ह तोह सुनील ने कहा यंहा दूर दूर से बड़े बड़े लोग ट्रेनिंग के लिए लड़के लड़किया लाते ह फिर ये लोग यंहा 5 साल हार्ड और स्मार्ट ट्रेनिंग करते ह सिर्फ 100 हे सेलेक्ट होते ह 1000रो मई और ट्रेनिंग के बाद मई ये सब कंही पर्सनल बॉडीगार्ड या किसी मिलिट्री या कंही बी अछि पोस्ट पे चले जाते ह कम्पटीशन देके या अपनी काबिलियत दिखा के और सबसे बड़ी बात इनका बैकग्राउंड बदगुरुजी खुद चेक करवाते ह ताकि कोई गलत इंसान न अजय यंहा .धीरे धीरे सब पता लग जायेगा तुम्हे आज हे सब जान लोगे क्या खैर इन्हे छोड़ो भोजन का समय हो गया ह चलो चलते ह भूक लग गयी मुझे तोह
मैं और सुनील दोनों चल दिए भोजन के लिए शाम के 7 बज रहे थे हमने भोजन किया भोजन बी सबके लिए अलग अलग था ट्रेनिंग और साथ हे पढ़ने वालो का अलग और जो सिर्फ ट्रेनिंग के लिए ए थे उनका अलग वेग और नॉनवेज दोनों हे प्रकार का था क्योकि दोनों हे जरुरी ह सरीर के liye....bhojan के बाद हम चल दिए सोने निचे चटाई बिछी हुवी थी और एक तरफ मटका रखा हुवा था पानी का पिने के लिए....
Main—sunil क्या तुमने वो ट्रेनिंग ली ह.
सुनील--- थोड़ी बहुत ली जायदा गुरूजी लेने नई देते ह कहते ह वक़्त ह ट्रेनिंग के लिए अभी.. मेरी तोह समाज से बहार ह sab....main तोह बस सुभे स्कूल 8 बजे जाता हु और 3 बजे वापस आजाता हु ...और आश्रम के काम करता हु ...
मैं--- स्कूल ...कौनसी स्कूल यंहा तोह कोई स्कूल नई ह ....
सुनील--- यंहा से 7 कम दूर ह और पैदल जाना और पैदल हे आना होता ह गुरूजी कहते इसे सरीर सही रहता ह और लेग मजबूत होते ह पर मुझे तोह कुछ बी नई लगा ऐसा...
मैं—7 कम दूर हे भगवन और आना बी ह मैं तोह मर जाऊंगा ...यार मुझसे नई होगा आना जाना...
सुनील--- राज और कोई रास्ता नई ह सभी ऐसे हे जाते ह जितने बी बचे यंहा ह और वो स्कूल बड़े गुरूजी ने हे बनवायी ह बहुत बड़ी ह गुरुविधाया इंटरनेशनल स्कूल नाम ह पुरे इंडिया मई नाम ह उसका बहुत बड़े बड़े आमिर लोगो के बचे एते ह और हॉस्टल मई हे रहते ह जायदातर bache....decipline इतना ह की गलती की तोह पहली बार सजा और दूसरी बार स्कूल से बहार सौर स्कूल की सिक्योरिटी आश्रम हे ढकता ह..
Main—tuje सब पता ह
Sunil—bhai 7साल से यही रह रहा हु तोह पता तोह होगा हे और गुरूजी का सारा काम छोटा मोटा मैं हे देखता हु इसलिए सुनता रहता हु तोह पता ह पर तू यंहा कैसे आगया तू तोह मेरे जितना हे ह और तू अनाथ बी नई लगता ह फिर कैसे यंहा आगया भाई..
मैंने फिर उसे साडी अपनी जिंदगी के पैन खोल के दिखा दिए उसकी आँखों मई आंसू थे और मुझे एक तक ढक रहा था जैसे कोई उसका अपना भाई मिल गया हो या ु कहे राजदार मिल गया हो जिसे वो अपनी ख़ुशी ढक सब बता कर बाँट सके .....
Sunil---Raj मेरा इस दुनिया मई कोई नई सिवाए गुरूजी के मैं गुरूजी को 4 सस्ल कीनुमार मई रोड के किनारे भूक से बेहोस मिला था तब से गुरूजी ने मुझे पला ह पर हमेसा एक कमी रहती थी जो तेरे आने से ऐसा लगता ह पूरी हो गयी ह. आज से तुजे अपना सच्चा दोस्त और भाई मंटा हु मैं जिंदगी भर तेरी दोस्ती निभाउंगा और तेरे साथ हर कदम पर खड़ा रहूँगा.......
हम दोनों हे एक दूसरे के गले मिले आखिर दोस्त काम भाई जो बन गए फिर हम सो गए मुझे नींद नई आयी थी मैं अपनी बहनो और दादा जी को याद कर रहा था तब सुनील बोलै सजा मुझे पता ह तुजे नींद नई आरही पर सजा कोई की गुरूजी को वो कतई पसंद नई ह जो समय की परवाह न करे ...
अब तोह सोना हे था तोह गिरते पड़ते नींद आ हे गयी
मॉर्निंग टाइम--- 4.ऍम
सुनील ने मुझे उठाया और हम चल दिए फ्रेश होने और नहाने
मैं और सुनील जंगल मई फ्रेश होकर नदी किनारे बैठे और मैंने पानी मई हाथ डाला तोह बहुत ठंडा था मेरी हालत ख़राब हो गयी ..
Sunil—dhekta रहेगा तोह ऐसे हे होगा आंख बंद कर और मेरी तरह कूद जा बानी मई और सुनील कूद गया
Raj—maine थोड़ी दिएर देखा और कहा बीटा राज नहाना तोह होगा हे और फिर राम राम राम बोलता हीमत करके कुढ़ गया ठन्डे पानी मई सब अकड़ गया हाथ पेअर दिमाग पर कुछ दिएर बाद मज़ा aya...aisa लगा जैसा बहुत वजन उतर गया दिमाग पे से...
और नाहा धोके पहुंच गये गुरूजी के पास मैंने और सुनील ने उनके पेअर चुकार परनाम किया
गुरूजी – औ पुत्र
आज आपका प्रथम दिन ह तोह मैं आपको कुछ बाटे बता दू आप यंहा रोज सुभे 5 बजे योग करोगो मेरे साथ 2 ऑवर फिर आप स्कूल जायेंगे स्कूल मई हे आपको भोजन मिलेंगे और 2 बजे आप स्कूल से आश्रम आएंगे पहले एक महीने आपके पास 1 ऑवर मिलेगा आने और 1 ऑवर मिलेगा जाने के लिए अगर लेट हुवे तोह आपको दंड स्वरुप 100 उठक बैठक निकालनी होगी 3 मिनट मई आप ...और उसके बाद 4 बजे आप मेरे पास से शास्त्रों का ज्ञान लेंगे यही सब आपके साथ एक महीने तक चलेगा और फिर इसमे बदलाव होंगे...
Main—ji guruji...jaisi आपकी आगया
क्योकि सुनील साथ मई था तोह गुरूजी को रिपोर्ट मिल हे जनि थी और मेरा पास घडी न थी पर सुनील के पास थी बताओ ये बी कोई बात हुवी बचे की लग गयी बिना कुछ किये हे......
और फिर गुरूजी ने कहा
Guruji—beta राज अब आप चौकड़ी मार कर बैठ जाये और आंखे बंद करले किसी बी विचार को अपने मन मई न आने दे और मन को शांत करे
Raj—main काफी दिएर कोसिस की पर मन शांत न हुवा गुरूजी की अभी की बाटे मेरे मन मई घंटे की तरह बज रही थी ये बी कोई बात हुवी बचे की लगने वाली ह और गुरूजी बोल रहे ह मुस्कराओ राज. जैसे बहुत बड़ा अवार्ड मिला हो मुझे हाफ ऑवर तक ऐसे हे कोसिस करता रहा पर हुवा कुछ नई मुझसे और होता बी कैसे...
गुरूजी – राज पहले दिन आसान नई होता ह पर होने लग जायेगा बस अपने मन को चिंताओं से मुक्त करो और खुद पे यकीं करो अब पुत्र योग के ये आसान जो मैं बता रहा हु ये सदैव याद रखना ह इन्हे और अचे से करना ह ये आपके सरीर की साडी जकड़न अकड़न खोलेंगे जो आपके सरीर के विकास मई बहुत उपयोगी होंगे
राज--- मैंने गुरूजी के देखा देखी कोसिस की कई बार तोह उल्टा गिरा तोह कबि टेढ़ गिरा फिर गुरूजी ने सुनील को कहा राज की मदद करो मैं खुस होगया...
पर सच कान्हू यही सबसे बड़ी भूल थी मेरी सुनील ने मेरे सरे सरीर यानि बॉडी पार्ट्स के धागे खोल दिए मुझे खुद नई पता कितने काटके निकले सरीर से पर जब योग ख़त्म हुवा मैं जमीं पे पड़ा हुवा था और सुनील को मन हे मन गालिया दे रहा था ......
गुरूजी - -- उठो पुत्र अभी तोह जीवन सुरु हुवा ह इतने से दर्द से गिर गए अभी तोह पूरी उड़ान बाकि ह अपने दादा जी को निरास करोगे...
राज--- गुरु जी की बात से एक पल मई हे मेरा जीवन घूम गया मेरी आँखों के सामने और मई झट से खड़ा हो गया..
गुरूजी – शाबाश बीटा आज का सबक जब तक सरीर मई प्राण ह कभी हार मत manna.....aur सुनील राज का एडमिशन बी स्कूल मई हो गया ह ये तुम्हरे साथ हे 7तह क्लास मई जायेगा कल से आज इसे आश्रम से स्कूल की यूनिफार्म और जरुरत की साडी चीजे दिलवा दो...
आज के लिए इतना हे .......
साथ बने रहे
रिकैप---
पिछले अपडेट मई अपने पढ़ा की कुलगुरु जी ने बड़े गुरूजी को बताया की राज के कैसे बहुत सरे दुश्मन ह और जगमाल सिंह क्या चाहते ह और जवाब मई बड़ेगुरू ने बी बताया की राज को 5 साल रखेंगे और उसे खुद तैयार करेंगे वंही राज इन सब बातो से बेखबर ह अपने दोस्त के साथ घूमने मई मस्त था
अब आगे----
मैं आराम से आश्रम घूम रहा था और आश्रम की सुंदरता ढक मेरा दिल और दिमाग दोनों शांत हो गए थे मैं बहुत खुस था फिर हम घूमते हुवे आश्रम के मई वह पंहुच गए जंहा 17 वर्ष की उम्र के बचे और 21 की उम्र के बिच के बचे ट्रेनिंग कर रहे थे मैं उन्हें डायन से ढक रहा था सुनील ने कहा भाई तुजे ाचा लगा ये सब मैंने कहा है ये आश्रम का माहौल और उसके अस्स पास की जगह यंहा का नेचर सब ाचा लगा फिर सामने की और ढक के मैंने कहा ये सब तोह बहुत जायदा मेहनत कर रहे ह तोह सुनील ने कहा यंहा दूर दूर से बड़े बड़े लोग ट्रेनिंग के लिए लड़के लड़किया लाते ह फिर ये लोग यंहा 5 साल हार्ड और स्मार्ट ट्रेनिंग करते ह सिर्फ 100 हे सेलेक्ट होते ह 1000रो मई और ट्रेनिंग के बाद मई ये सब कंही पर्सनल बॉडीगार्ड या किसी मिलिट्री या कंही बी अछि पोस्ट पे चले जाते ह कम्पटीशन देके या अपनी काबिलियत दिखा के और सबसे बड़ी बात इनका बैकग्राउंड बदगुरुजी खुद चेक करवाते ह ताकि कोई गलत इंसान न अजय यंहा .धीरे धीरे सब पता लग जायेगा तुम्हे आज हे सब जान लोगे क्या खैर इन्हे छोड़ो भोजन का समय हो गया ह चलो चलते ह भूक लग गयी मुझे तोह
मैं और सुनील दोनों चल दिए भोजन के लिए शाम के 7 बज रहे थे हमने भोजन किया भोजन बी सबके लिए अलग अलग था ट्रेनिंग और साथ हे पढ़ने वालो का अलग और जो सिर्फ ट्रेनिंग के लिए ए थे उनका अलग वेग और नॉनवेज दोनों हे प्रकार का था क्योकि दोनों हे जरुरी ह सरीर के liye....bhojan के बाद हम चल दिए सोने निचे चटाई बिछी हुवी थी और एक तरफ मटका रखा हुवा था पानी का पिने के लिए....
Main—sunil क्या तुमने वो ट्रेनिंग ली ह.
सुनील--- थोड़ी बहुत ली जायदा गुरूजी लेने नई देते ह कहते ह वक़्त ह ट्रेनिंग के लिए अभी.. मेरी तोह समाज से बहार ह sab....main तोह बस सुभे स्कूल 8 बजे जाता हु और 3 बजे वापस आजाता हु ...और आश्रम के काम करता हु ...
मैं--- स्कूल ...कौनसी स्कूल यंहा तोह कोई स्कूल नई ह ....
सुनील--- यंहा से 7 कम दूर ह और पैदल जाना और पैदल हे आना होता ह गुरूजी कहते इसे सरीर सही रहता ह और लेग मजबूत होते ह पर मुझे तोह कुछ बी नई लगा ऐसा...
मैं—7 कम दूर हे भगवन और आना बी ह मैं तोह मर जाऊंगा ...यार मुझसे नई होगा आना जाना...
सुनील--- राज और कोई रास्ता नई ह सभी ऐसे हे जाते ह जितने बी बचे यंहा ह और वो स्कूल बड़े गुरूजी ने हे बनवायी ह बहुत बड़ी ह गुरुविधाया इंटरनेशनल स्कूल नाम ह पुरे इंडिया मई नाम ह उसका बहुत बड़े बड़े आमिर लोगो के बचे एते ह और हॉस्टल मई हे रहते ह जायदातर bache....decipline इतना ह की गलती की तोह पहली बार सजा और दूसरी बार स्कूल से बहार सौर स्कूल की सिक्योरिटी आश्रम हे ढकता ह..
Main—tuje सब पता ह
Sunil—bhai 7साल से यही रह रहा हु तोह पता तोह होगा हे और गुरूजी का सारा काम छोटा मोटा मैं हे देखता हु इसलिए सुनता रहता हु तोह पता ह पर तू यंहा कैसे आगया तू तोह मेरे जितना हे ह और तू अनाथ बी नई लगता ह फिर कैसे यंहा आगया भाई..
मैंने फिर उसे साडी अपनी जिंदगी के पैन खोल के दिखा दिए उसकी आँखों मई आंसू थे और मुझे एक तक ढक रहा था जैसे कोई उसका अपना भाई मिल गया हो या ु कहे राजदार मिल गया हो जिसे वो अपनी ख़ुशी ढक सब बता कर बाँट सके .....
Sunil---Raj मेरा इस दुनिया मई कोई नई सिवाए गुरूजी के मैं गुरूजी को 4 सस्ल कीनुमार मई रोड के किनारे भूक से बेहोस मिला था तब से गुरूजी ने मुझे पला ह पर हमेसा एक कमी रहती थी जो तेरे आने से ऐसा लगता ह पूरी हो गयी ह. आज से तुजे अपना सच्चा दोस्त और भाई मंटा हु मैं जिंदगी भर तेरी दोस्ती निभाउंगा और तेरे साथ हर कदम पर खड़ा रहूँगा.......
हम दोनों हे एक दूसरे के गले मिले आखिर दोस्त काम भाई जो बन गए फिर हम सो गए मुझे नींद नई आयी थी मैं अपनी बहनो और दादा जी को याद कर रहा था तब सुनील बोलै सजा मुझे पता ह तुजे नींद नई आरही पर सजा कोई की गुरूजी को वो कतई पसंद नई ह जो समय की परवाह न करे ...
अब तोह सोना हे था तोह गिरते पड़ते नींद आ हे गयी
मॉर्निंग टाइम--- 4.ऍम
सुनील ने मुझे उठाया और हम चल दिए फ्रेश होने और नहाने
मैं और सुनील जंगल मई फ्रेश होकर नदी किनारे बैठे और मैंने पानी मई हाथ डाला तोह बहुत ठंडा था मेरी हालत ख़राब हो गयी ..
Sunil—dhekta रहेगा तोह ऐसे हे होगा आंख बंद कर और मेरी तरह कूद जा बानी मई और सुनील कूद गया
Raj—maine थोड़ी दिएर देखा और कहा बीटा राज नहाना तोह होगा हे और फिर राम राम राम बोलता हीमत करके कुढ़ गया ठन्डे पानी मई सब अकड़ गया हाथ पेअर दिमाग पर कुछ दिएर बाद मज़ा aya...aisa लगा जैसा बहुत वजन उतर गया दिमाग पे से...
और नाहा धोके पहुंच गये गुरूजी के पास मैंने और सुनील ने उनके पेअर चुकार परनाम किया
गुरूजी – औ पुत्र
आज आपका प्रथम दिन ह तोह मैं आपको कुछ बाटे बता दू आप यंहा रोज सुभे 5 बजे योग करोगो मेरे साथ 2 ऑवर फिर आप स्कूल जायेंगे स्कूल मई हे आपको भोजन मिलेंगे और 2 बजे आप स्कूल से आश्रम आएंगे पहले एक महीने आपके पास 1 ऑवर मिलेगा आने और 1 ऑवर मिलेगा जाने के लिए अगर लेट हुवे तोह आपको दंड स्वरुप 100 उठक बैठक निकालनी होगी 3 मिनट मई आप ...और उसके बाद 4 बजे आप मेरे पास से शास्त्रों का ज्ञान लेंगे यही सब आपके साथ एक महीने तक चलेगा और फिर इसमे बदलाव होंगे...
Main—ji guruji...jaisi आपकी आगया
क्योकि सुनील साथ मई था तोह गुरूजी को रिपोर्ट मिल हे जनि थी और मेरा पास घडी न थी पर सुनील के पास थी बताओ ये बी कोई बात हुवी बचे की लग गयी बिना कुछ किये हे......
और फिर गुरूजी ने कहा
Guruji—beta राज अब आप चौकड़ी मार कर बैठ जाये और आंखे बंद करले किसी बी विचार को अपने मन मई न आने दे और मन को शांत करे
Raj—main काफी दिएर कोसिस की पर मन शांत न हुवा गुरूजी की अभी की बाटे मेरे मन मई घंटे की तरह बज रही थी ये बी कोई बात हुवी बचे की लगने वाली ह और गुरूजी बोल रहे ह मुस्कराओ राज. जैसे बहुत बड़ा अवार्ड मिला हो मुझे हाफ ऑवर तक ऐसे हे कोसिस करता रहा पर हुवा कुछ नई मुझसे और होता बी कैसे...
गुरूजी – राज पहले दिन आसान नई होता ह पर होने लग जायेगा बस अपने मन को चिंताओं से मुक्त करो और खुद पे यकीं करो अब पुत्र योग के ये आसान जो मैं बता रहा हु ये सदैव याद रखना ह इन्हे और अचे से करना ह ये आपके सरीर की साडी जकड़न अकड़न खोलेंगे जो आपके सरीर के विकास मई बहुत उपयोगी होंगे
राज--- मैंने गुरूजी के देखा देखी कोसिस की कई बार तोह उल्टा गिरा तोह कबि टेढ़ गिरा फिर गुरूजी ने सुनील को कहा राज की मदद करो मैं खुस होगया...
पर सच कान्हू यही सबसे बड़ी भूल थी मेरी सुनील ने मेरे सरे सरीर यानि बॉडी पार्ट्स के धागे खोल दिए मुझे खुद नई पता कितने काटके निकले सरीर से पर जब योग ख़त्म हुवा मैं जमीं पे पड़ा हुवा था और सुनील को मन हे मन गालिया दे रहा था ......
गुरूजी - -- उठो पुत्र अभी तोह जीवन सुरु हुवा ह इतने से दर्द से गिर गए अभी तोह पूरी उड़ान बाकि ह अपने दादा जी को निरास करोगे...
राज--- गुरु जी की बात से एक पल मई हे मेरा जीवन घूम गया मेरी आँखों के सामने और मई झट से खड़ा हो गया..
गुरूजी – शाबाश बीटा आज का सबक जब तक सरीर मई प्राण ह कभी हार मत manna.....aur सुनील राज का एडमिशन बी स्कूल मई हो गया ह ये तुम्हरे साथ हे 7तह क्लास मई जायेगा कल से आज इसे आश्रम से स्कूल की यूनिफार्म और जरुरत की साडी चीजे दिलवा दो...
आज के लिए इतना हे .......
साथ बने रहे

