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- Dec 5, 2013
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कल अपडेट नई दे पाउँगा इसलिए आज बड़ा अपडेट दिया ह एन्जॉय
रिकैप ....
पिछले अपडेट मई अपने देखा की कैसे राज ने अपने विचारो की नीव की पहल कर्ली ह
अब आगे....
दूर कंही भारत के एक स्टेट मई एक खूबसूरत जगह ह जनगढ़ जो पहाड़ो और नदी से गिरी हुवी ह धरती का स्वर्ग ह वंहा मौसम हर 12 महीने सुहाना रहता ह वंहा....
एक बहुत बड़ी हवेली ह जिसकी सुंदरता बहुत हे भावय हुवा करती थी जिसे पुरे स्टेट मई जाना जाता ह. अब वो स्त्री की सूनी मांग की तरह दिखती ह घर मई काफी लोग ह पर सब डरे हुवे रहते ह बस पल पल अपनी मौत की घडिया गिनते रहते ह... दूसरी तरफ पूरी सिटी और ये स्टेट शांत ह दर के साये मई और वंहा राज करते ह इंसान के रूप मई एक शैतान और उसका परिवार जिन्होंने पुरे स्टेट को गुलाम बना रखा ह और बंद कर रखा ह उस परिवार को घर के अंदर he..jinke मरने के कुछ साल हे बस बाकि ह
कहते ह यंहा 7 साल पहले सब तीख था फिर क्या हुवा पता नई पर आज सब बहुत ढक मई अत्याचार मई जी रहे ह या कहो की पल पल मर रहे ह ये सजा ह उनकी वफादारी की...
अब चलते ह राज की टाफ
सुभे को 5.30 पे उठना जलील होना ये नियम ह मेरा सुभे का वक़्त नास्ता करते वक़्त आराम से निकलना फिर हवेली मई काम करना पानी देना गार्डन मई पानी और साफ़ सफाई करना जो की मेरे लिए बहुत हे दुखदायी था पर हु ...केयर्स....
-ऐसे हे दोपहर हुवी पूरा दिन बड़ी और छोटी चची मुझसे घर की सफाई और घर के काम करवाती रही..
छोटी चची – जा फर्श पर पोछा मर्दे वंहा गन्दा हो गया ह
मैं साफ़ करने गया और निचे बैठ कर साफ़ कर रहा था की पीछे टेबल से पीठ टकरा गयी और वंहा पड़ा पॉट टूट गया और बस फिर क्या .. आप कुढ़ हे ढेकलो क्या होता ह मेरे साथ
छोटी चची – हरामखोर मनहूस कहिके पॉट तोड़ दिया तू खा जा सबको अपने माँ बाप को खा गया यंहा आके मेरे पति को खा गया रूक तुजे मैं बताती हु तड़क तड़क 5 थपड पड़े muje..badi चची और चाचा खुस हो रहे थे दादी ने देखा पर बोली कुछ नई ..
छोटी चची ---आज भूखा रहेगा तोह पता लगेगा और मुझे ग्रसित कर मेरे रूम मई ले गयी और बहार से बंद कर दिया
मैं – अंदर जा के गिरा फर्श पर गिरा और रोने लगा क्योकि मुझे पता ह की एक गलती मुझे मुझपर बहुत भरी पड़ती ह पर हु तोह मैं बी एक इंसान एक बचा हे हु जिस साई गलती हो हे जाती ह.. मैं गले मई पहने लॉकेट को ढक के मेर मु से सब्द आंसुओ के साथ निकले माँ ओह माँ अपने और पापा ने पहनाया था न ये locket..ap मुझे क्यों नई ले गयी साथ मई क्यों छोड़ गयी इस दुनिया मई देखो आपके बेटे के साथ क्या हो रहा ह और इसी तरह मैं लेता हुवा फरसे पर मापापा को याद कर रो रहा था. माँ मैं आपसे कबि बात नई करूँगा आप गन्दी हो अपने मुझे अपने साथ नई लेके गयी क्या आप मुझे प्यार नई करती थी और फिर... मैं लेट गया
थोड़ी ढेर बाद रूम का दरवाजा खुला और ममता आयी
Mamta—bhai.. भैया... जागो न देखो मैं लड्डू लायी हु आपके लिए अपने दोपहर को खाया नई न मैंने मम्मी को उल्लू बना के लायी हु आप खाओ न वो छोटी ह पर उसे बी पता ह लगने पे दर्द होता ह उसके छोटे हाथ जो पीछे छुपे हुवे थे उनमे से लड्डू निकालके मुझे दिए और गले लग गयी मेरे
Main—maine उसकी तरफ प्यार भरी नज़रो से देखा और गाल पे हाथ सहलाया और एक लड्डू लेके खा लिया और कहा किसी को पता लग गया तोह मंटू तुजे मुझसे दूर करेंगे तुजे बी मरेंगे वो जल्दी से अभी चली जाओ वो फिर चुपके से चली गयी.....
शाम को बड़ी चची ने दरवाजा खोला उनके साथ सुरेंद्र और बबिता सभी थे जो हंस रहे थे...
बड़ी चची--- याद रखना अगर मु खोला निचे दादा जी के पास तोह ज़हर देकर मार दूंगी समजा
मैं ---दर गया था क्योकि मुझे जीना ह . जीना ह अपने वजूद के लिए मैं चुप रहा और उनकी है मई है मिलता रहा जो उन्होंने कहा वो मैंने वैसा हे किया
शाम का खाना खाया और सो गया अपने कमरे मई आज मैं किसी के पास नई गया सवाल तोह बहुत ह मेरे पास जिनके जवाब बड़ा होक ढूंढ़ने ह मुझे इसीलिए इन सवालो को दफना के मैं नींद की गहराईयो मई चला गया...
सुभे का वक़्त था 5.30 पे उठाना और एक किक के साथ सुरुवात होनी मेरी वही जलील होने थपड खाना ेट्स..
आज दादा जी जल्दी आगये और रूम मई चले गए मैंने उन्हें देखा और उनके पास चला गया और गोदी मई सर रख कर सो गया
दादा जी ---बीटा निर्वाण क्या हुवा
मैं कुछ नई दादा जी बस आप जल्दी आगये तोह आपकी गोदी मई सोने का मन था तोह आगया
दादा जी –मन मई पुत्र मुझे पता ह की तू क्या सोचता ह और क्या होता ह तेरे साथ बस कुछ टाइम और ह अभी तुजे बहुत हिमतवाला बनना ह..
Dadaji—apka आज एडमिशन करवाना ह न आप तैयार हो जाईये ..
मैं--- जी दादा जी कहके ऊपर रूम मई चला गया और तैयार होने लगा मैंने डिंपल टी शर्ट और पंत पहनी थी और आगया निचे जेक मंदिर मई माँ भवानी का आश्रीवाद लिया और पहुंच गया दादा जी के पास.. ददद जी हम तैयार ह चले
दादा जी – ने ध्यान से मेरी तरफ देखा और मन मई बिलकुल सहदेव पे गया ह और समझदारी मई अपनी माँ पे गया ह खास वो दोनों जिन्दा होते तोह ढक पते की आज उनका बचा राजस्थान के सबसे बड़े स्कूल मई पढ़ने जा रहा ह जो बहु विद्या का सपना था
और बोलते ह बीटा राज आप नास्ता करे फिर हम चलेंगे
बबिता और सुरेंद्र तोह जलभुन गए थे और चाचा चची और छोटी चची बी जाल भून गयी थी मन हे मन सब बदुआए दे रहे थे.
मैं-- मन मई मुझे पता ह ये लोग क्या सोच रहे हमैने नास्ता किया और बहार आगये बहार एक रोल्स रोये टाइप की मॉडिफाइड कार कड़ी थी जिसपे आगे लिखा था चेतक जो दादा जी कबि कबि बड़े फंक्शन्स मई लेके जाते थे और ड्राइविंग सीट पे बैठे थे भीम चाचा.. हम बैठ के निकल गए स्कूल
स्कूल बहुत हे शानदार फ्रंट मई प्लेग्राउंड 2 मंजिला बिल्डिंग गजब का था स्कूल.. मुझे तोह पसंद आगया
इन प्रिंसिपल ऑफिस
प्रिंसिपल-- पसीने से भीगा हुवा था था.. कुर साब अप्प्प
दादा जी –आप आराम से बैठ जाईये इनसे मिले ये ह कुंवर राज सिंह निर्वाण सोन ऑफ़ सहदेव एंड विद्या सिंह निर्वाण
इतना इंट्रो सुनते हे प्रिंसिपल रुमाल निकाल के पसीने पूछने लगा उसको अपनी मौत दिखने लगी वो थार थार काँप रहा था जैसे उसने किसी ऐसे के नाम सुन लिए hi जो उसे नई सुनने थे...
मैं – इन्हे क्या हुवा दादा जी ये कैंप क्यों रहे ह
दादाजी –कुछ नई हुवा इन्हे प्रिंसिपल की डरफ ढक के प्रिंसिपल से कहा ये अब आपकी स्कूल मई पढ़ेंगे
प्रिंसिपल--- हैरानी से जी जी जी
दादा जी – भीमा कुंवर राज को बहार स्कूल दिखाओ
और राज के जाने के बाद
दादा जी – हम आपसे जो कह रहे ह एक बार कहेंगे आप धयान से सुनियेगा हमारे पोते के बारे मई कोई बी जान करि इस स्कूल के बहार गयी तोह तुम्हे पहचानने वाला इस धरती पे नई मिलेगा तुम्हरे सरीर को चील और कुत्तो के लिए छोड़ दूंगा मैं ये बात धयान रखना ये आम बचो की तरह पढ़ेगा कोई स्पेशल ट्रीटमेंट नई
और है ऑलवेज रेमेम्बेर माय वर्ड्स...... ... ठाकुर जगमाल सिंह वर्ड्स...
प्रिंसिपल जो कैम्प रहा था वो और दर गया और इतना हे बोलै जी जी जी... ठाकुर... साब.. याद राखु.. ंगा.. किसी को नई पता लगेगा
अब दादा जी क्यों नई चाहते की किसी को पता लगे मैं कौन हु मेरे माँ बाप कौन ह ये राज का राज ह
नेक्स्ट मॉर्निंग

दादा जी...
5.30 ऍम निर्वाण....
मैं – मैं निचे एते हुवे जी जी दादा जी
दादा जी हमरे साथ औ
मैं -जी दादा जी और मैं उनके साथ चल दिया बहार साधु संत भूखे गरीब सब बैठे थे मैं पहली बार हे आया था आज क्यों की दादा जी ने बचो को मन कर रखा था वंहा आने से जब मैं वंहा पंहुचा तोह सा भोजन कर रहे थे सुभे हमारा रोज का था साधु सन्यासी जल्दी भोजन करते ह िडिलये सुभे जल्दी हे भोजन शुरू हो जाता था जो 9 बजे तक चलता था मैं दादा जी के साथ से आगे चला गया मुझे खुद हे कुछ खिंचाव खींचे जा रहा था मैंने फॉलो की छोटी टोकरी उठायी और साधु संतो के पास जेक उनके थैले मई रखने लगा जो सबके लिए ॉश्चारिये की बात थी
एक साधु को ग्रुप धयान से मुझे ढक रहा था उन्होंने मुझे बुलाया और मेरे सीट पर हाथ रख कुछ पल चुप रहा और फिर उसकी आंखे चमकने lagi...wo बड़े ध्यान से मस्तिष्क की रेखा पढ़ने लगे उन्हें जैसे कुछ मिल गया हो और उनके चेहरे पे मुस्कराहट आगयीईइ...
Sadhu—putra क्या नाम ह आपका
मैं – राज नाम ह बाबा
Sadhu—jor...se राज के ह कई Raj.....putra कभी डरना नई ुअरवाला खुद तेरी तक़दीर बदलेगा .......और जब वो बदलेगा ....तब तू बदलेगा... और बदलेगी तेरी किस्मत .. जो तेरे ह वो तरस रहे ह तेरे इंतज़ार मई... उनके दुखो.. तू उनका मुक्तिधरक बनेगा......
और सरे साधु खड़े हो गए और मुझे आश्रीवाद देने लगे
आज के लिए इतना हे
साथ बने रहिये और अपनी प्रतिक्रियाये देते रहिये
रिकैप ....
पिछले अपडेट मई अपने देखा की कैसे राज ने अपने विचारो की नीव की पहल कर्ली ह
अब आगे....
दूर कंही भारत के एक स्टेट मई एक खूबसूरत जगह ह जनगढ़ जो पहाड़ो और नदी से गिरी हुवी ह धरती का स्वर्ग ह वंहा मौसम हर 12 महीने सुहाना रहता ह वंहा....
एक बहुत बड़ी हवेली ह जिसकी सुंदरता बहुत हे भावय हुवा करती थी जिसे पुरे स्टेट मई जाना जाता ह. अब वो स्त्री की सूनी मांग की तरह दिखती ह घर मई काफी लोग ह पर सब डरे हुवे रहते ह बस पल पल अपनी मौत की घडिया गिनते रहते ह... दूसरी तरफ पूरी सिटी और ये स्टेट शांत ह दर के साये मई और वंहा राज करते ह इंसान के रूप मई एक शैतान और उसका परिवार जिन्होंने पुरे स्टेट को गुलाम बना रखा ह और बंद कर रखा ह उस परिवार को घर के अंदर he..jinke मरने के कुछ साल हे बस बाकि ह
कहते ह यंहा 7 साल पहले सब तीख था फिर क्या हुवा पता नई पर आज सब बहुत ढक मई अत्याचार मई जी रहे ह या कहो की पल पल मर रहे ह ये सजा ह उनकी वफादारी की...
अब चलते ह राज की टाफ
सुभे को 5.30 पे उठना जलील होना ये नियम ह मेरा सुभे का वक़्त नास्ता करते वक़्त आराम से निकलना फिर हवेली मई काम करना पानी देना गार्डन मई पानी और साफ़ सफाई करना जो की मेरे लिए बहुत हे दुखदायी था पर हु ...केयर्स....
-ऐसे हे दोपहर हुवी पूरा दिन बड़ी और छोटी चची मुझसे घर की सफाई और घर के काम करवाती रही..
छोटी चची – जा फर्श पर पोछा मर्दे वंहा गन्दा हो गया ह
मैं साफ़ करने गया और निचे बैठ कर साफ़ कर रहा था की पीछे टेबल से पीठ टकरा गयी और वंहा पड़ा पॉट टूट गया और बस फिर क्या .. आप कुढ़ हे ढेकलो क्या होता ह मेरे साथ
छोटी चची – हरामखोर मनहूस कहिके पॉट तोड़ दिया तू खा जा सबको अपने माँ बाप को खा गया यंहा आके मेरे पति को खा गया रूक तुजे मैं बताती हु तड़क तड़क 5 थपड पड़े muje..badi चची और चाचा खुस हो रहे थे दादी ने देखा पर बोली कुछ नई ..
छोटी चची ---आज भूखा रहेगा तोह पता लगेगा और मुझे ग्रसित कर मेरे रूम मई ले गयी और बहार से बंद कर दिया
मैं – अंदर जा के गिरा फर्श पर गिरा और रोने लगा क्योकि मुझे पता ह की एक गलती मुझे मुझपर बहुत भरी पड़ती ह पर हु तोह मैं बी एक इंसान एक बचा हे हु जिस साई गलती हो हे जाती ह.. मैं गले मई पहने लॉकेट को ढक के मेर मु से सब्द आंसुओ के साथ निकले माँ ओह माँ अपने और पापा ने पहनाया था न ये locket..ap मुझे क्यों नई ले गयी साथ मई क्यों छोड़ गयी इस दुनिया मई देखो आपके बेटे के साथ क्या हो रहा ह और इसी तरह मैं लेता हुवा फरसे पर मापापा को याद कर रो रहा था. माँ मैं आपसे कबि बात नई करूँगा आप गन्दी हो अपने मुझे अपने साथ नई लेके गयी क्या आप मुझे प्यार नई करती थी और फिर... मैं लेट गया
थोड़ी ढेर बाद रूम का दरवाजा खुला और ममता आयी
Mamta—bhai.. भैया... जागो न देखो मैं लड्डू लायी हु आपके लिए अपने दोपहर को खाया नई न मैंने मम्मी को उल्लू बना के लायी हु आप खाओ न वो छोटी ह पर उसे बी पता ह लगने पे दर्द होता ह उसके छोटे हाथ जो पीछे छुपे हुवे थे उनमे से लड्डू निकालके मुझे दिए और गले लग गयी मेरे
Main—maine उसकी तरफ प्यार भरी नज़रो से देखा और गाल पे हाथ सहलाया और एक लड्डू लेके खा लिया और कहा किसी को पता लग गया तोह मंटू तुजे मुझसे दूर करेंगे तुजे बी मरेंगे वो जल्दी से अभी चली जाओ वो फिर चुपके से चली गयी.....
शाम को बड़ी चची ने दरवाजा खोला उनके साथ सुरेंद्र और बबिता सभी थे जो हंस रहे थे...
बड़ी चची--- याद रखना अगर मु खोला निचे दादा जी के पास तोह ज़हर देकर मार दूंगी समजा
मैं ---दर गया था क्योकि मुझे जीना ह . जीना ह अपने वजूद के लिए मैं चुप रहा और उनकी है मई है मिलता रहा जो उन्होंने कहा वो मैंने वैसा हे किया
शाम का खाना खाया और सो गया अपने कमरे मई आज मैं किसी के पास नई गया सवाल तोह बहुत ह मेरे पास जिनके जवाब बड़ा होक ढूंढ़ने ह मुझे इसीलिए इन सवालो को दफना के मैं नींद की गहराईयो मई चला गया...
सुभे का वक़्त था 5.30 पे उठाना और एक किक के साथ सुरुवात होनी मेरी वही जलील होने थपड खाना ेट्स..
आज दादा जी जल्दी आगये और रूम मई चले गए मैंने उन्हें देखा और उनके पास चला गया और गोदी मई सर रख कर सो गया
दादा जी ---बीटा निर्वाण क्या हुवा
मैं कुछ नई दादा जी बस आप जल्दी आगये तोह आपकी गोदी मई सोने का मन था तोह आगया
दादा जी –मन मई पुत्र मुझे पता ह की तू क्या सोचता ह और क्या होता ह तेरे साथ बस कुछ टाइम और ह अभी तुजे बहुत हिमतवाला बनना ह..
Dadaji—apka आज एडमिशन करवाना ह न आप तैयार हो जाईये ..
मैं--- जी दादा जी कहके ऊपर रूम मई चला गया और तैयार होने लगा मैंने डिंपल टी शर्ट और पंत पहनी थी और आगया निचे जेक मंदिर मई माँ भवानी का आश्रीवाद लिया और पहुंच गया दादा जी के पास.. ददद जी हम तैयार ह चले
दादा जी – ने ध्यान से मेरी तरफ देखा और मन मई बिलकुल सहदेव पे गया ह और समझदारी मई अपनी माँ पे गया ह खास वो दोनों जिन्दा होते तोह ढक पते की आज उनका बचा राजस्थान के सबसे बड़े स्कूल मई पढ़ने जा रहा ह जो बहु विद्या का सपना था
और बोलते ह बीटा राज आप नास्ता करे फिर हम चलेंगे
बबिता और सुरेंद्र तोह जलभुन गए थे और चाचा चची और छोटी चची बी जाल भून गयी थी मन हे मन सब बदुआए दे रहे थे.
मैं-- मन मई मुझे पता ह ये लोग क्या सोच रहे हमैने नास्ता किया और बहार आगये बहार एक रोल्स रोये टाइप की मॉडिफाइड कार कड़ी थी जिसपे आगे लिखा था चेतक जो दादा जी कबि कबि बड़े फंक्शन्स मई लेके जाते थे और ड्राइविंग सीट पे बैठे थे भीम चाचा.. हम बैठ के निकल गए स्कूल
स्कूल बहुत हे शानदार फ्रंट मई प्लेग्राउंड 2 मंजिला बिल्डिंग गजब का था स्कूल.. मुझे तोह पसंद आगया
इन प्रिंसिपल ऑफिस
प्रिंसिपल-- पसीने से भीगा हुवा था था.. कुर साब अप्प्प
दादा जी –आप आराम से बैठ जाईये इनसे मिले ये ह कुंवर राज सिंह निर्वाण सोन ऑफ़ सहदेव एंड विद्या सिंह निर्वाण
इतना इंट्रो सुनते हे प्रिंसिपल रुमाल निकाल के पसीने पूछने लगा उसको अपनी मौत दिखने लगी वो थार थार काँप रहा था जैसे उसने किसी ऐसे के नाम सुन लिए hi जो उसे नई सुनने थे...
मैं – इन्हे क्या हुवा दादा जी ये कैंप क्यों रहे ह
दादाजी –कुछ नई हुवा इन्हे प्रिंसिपल की डरफ ढक के प्रिंसिपल से कहा ये अब आपकी स्कूल मई पढ़ेंगे
प्रिंसिपल--- हैरानी से जी जी जी
दादा जी – भीमा कुंवर राज को बहार स्कूल दिखाओ
और राज के जाने के बाद
दादा जी – हम आपसे जो कह रहे ह एक बार कहेंगे आप धयान से सुनियेगा हमारे पोते के बारे मई कोई बी जान करि इस स्कूल के बहार गयी तोह तुम्हे पहचानने वाला इस धरती पे नई मिलेगा तुम्हरे सरीर को चील और कुत्तो के लिए छोड़ दूंगा मैं ये बात धयान रखना ये आम बचो की तरह पढ़ेगा कोई स्पेशल ट्रीटमेंट नई
और है ऑलवेज रेमेम्बेर माय वर्ड्स...... ... ठाकुर जगमाल सिंह वर्ड्स...
प्रिंसिपल जो कैम्प रहा था वो और दर गया और इतना हे बोलै जी जी जी... ठाकुर... साब.. याद राखु.. ंगा.. किसी को नई पता लगेगा
अब दादा जी क्यों नई चाहते की किसी को पता लगे मैं कौन हु मेरे माँ बाप कौन ह ये राज का राज ह
नेक्स्ट मॉर्निंग
दादा जी...
5.30 ऍम निर्वाण....
मैं – मैं निचे एते हुवे जी जी दादा जी
दादा जी हमरे साथ औ
मैं -जी दादा जी और मैं उनके साथ चल दिया बहार साधु संत भूखे गरीब सब बैठे थे मैं पहली बार हे आया था आज क्यों की दादा जी ने बचो को मन कर रखा था वंहा आने से जब मैं वंहा पंहुचा तोह सा भोजन कर रहे थे सुभे हमारा रोज का था साधु सन्यासी जल्दी भोजन करते ह िडिलये सुभे जल्दी हे भोजन शुरू हो जाता था जो 9 बजे तक चलता था मैं दादा जी के साथ से आगे चला गया मुझे खुद हे कुछ खिंचाव खींचे जा रहा था मैंने फॉलो की छोटी टोकरी उठायी और साधु संतो के पास जेक उनके थैले मई रखने लगा जो सबके लिए ॉश्चारिये की बात थी
एक साधु को ग्रुप धयान से मुझे ढक रहा था उन्होंने मुझे बुलाया और मेरे सीट पर हाथ रख कुछ पल चुप रहा और फिर उसकी आंखे चमकने lagi...wo बड़े ध्यान से मस्तिष्क की रेखा पढ़ने लगे उन्हें जैसे कुछ मिल गया हो और उनके चेहरे पे मुस्कराहट आगयीईइ...
Sadhu—putra क्या नाम ह आपका
मैं – राज नाम ह बाबा
Sadhu—jor...se राज के ह कई Raj.....putra कभी डरना नई ुअरवाला खुद तेरी तक़दीर बदलेगा .......और जब वो बदलेगा ....तब तू बदलेगा... और बदलेगी तेरी किस्मत .. जो तेरे ह वो तरस रहे ह तेरे इंतज़ार मई... उनके दुखो.. तू उनका मुक्तिधरक बनेगा......
और सरे साधु खड़े हो गए और मुझे आश्रीवाद देने लगे
आज के लिए इतना हे
साथ बने रहिये और अपनी प्रतिक्रियाये देते रहिये