Adultery मालती का कामुक संसार (Adultery Upanyas) Part #02 Running - Page 10 - SexBaba
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Adultery मालती का कामुक संसार (Adultery Upanyas) Part #02 Running



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सुबह की ठंडी हवा उस पुरे माहौल में एक सुकून भरा सन्नाटा भर रही थी और सविता को अभी ऐसी की जरुरत भी थी, वो धीरे से सत्यम की चारपाई की और बढ़ती है और उसके सावले चेहरे को देख क एक पल को उसकी कामुकता क ऊपर उसकी ममता हावी होनी लगती है.. इस पल वो सत्यम को सिर्फ एक माँ की नज़रों से देखने लगी थी

जहा कुछ पलों पहले तक उसका जिस्म उसे परेशां कर रहा था वही अब वो अपने जवान बेटे को सिर्फ ममता और स्नेह से निहार रही थी वो धीरे से उसकी चारपाई पे उसके पास बैठ जाती है और पियर से अपना हाथ आगे बड़ा क उसके बालों में अपनी उंगलिया चलने लगती है

न जाने एक hi पल में ऐस कोनसा बदलाव आ गया था की सविता की कामुकता पूरी तरह जैसे कही गायब हो हो गयी थी की तभी सीधा लेता हुआ सत्यम अपनी करवट बदलता है और उसका एक हाथ जो पहले से hi रज़ाई क बहार था वो सीधा सविता की नंगी कमर से आके टकराता है.. और उसकी गदराई कमर पे रगड़ता चला जाता है

सविता- Esssshhhhhhhhhhhhhh....

और एक बार फिर से सविता की कामुकता जाग पड़ती है, मानो जैसे उसे याद आ गया हो की वो किया करने वाली थी.. पर एक माँ की ममता तोह थी hi उसमे, अब बस ये ममता अपना असली रूप दिखने वाली थी

सत्यम गहरी नींद में सो रहा था, सविता एक बार को अपने पति की और देखती है और फिर धीरे से सत्यम वाली रज़ाई उठा क उसके अंदर का नज़ारा लेने लगती है जहा उसका जवान बीटा ऐसी ठण्ड में भी हमेशा की तरफ ऊपर से नंगा होक hi सो रहा था.. ये सत्यम की बचपन की आदत थी

अपने जवान बेटे की मज़बूत और हलके बालों से भरी मरदाना छाती यु सुबह सुबह देख क सविता क जिस्म में आग और बढ़ने लगती है.. जो आग कुछ दिएर पहले मोनू और मालती ने लगाई थी वो अब अपना रूप दिखने लगती थी.. जिसका परिणाम किया होगा कोई नहीं जनता

सविता की नज़रें अपने जवान बेटे की मज़बूत मरदाना छाती से नीचे की और बढ़ती है तोह वो पाती है की आज उसके बेटे ने सिर्फ एक लुंगी पेहेन राखी है जो की हमेशा नहीं होता, ककी सत्यम से लुंगी संभालती नहीं वो कहता है की वो बार बार खुलती रहती है वैसे आज भी ऐसा hi हुआ था ककी रज़ाई क नीचे सविता देख प् रही थी की उसके बेटे की लुंगी पूरी तरह खुली हुई थी पर तब भी वो उस खजाने को छुपा रही थी जिसकी जरुरत अभी इस समय सविता को थी

लुंगी भले hi सत्यम क मोठे हतियार को छुपाने में कामयाब हो रही थी पर इसके बाद भी उसकी मोटाई और बड़ा सा उभर साफ़ साफ़ पता चल रहा था और इतना काफी था सविता की आग में घी पड़ने क लिए, वो धीरे से अपने जवान बेटे क चेहरे क ऊपर झुकती चलती जाती है और बिना कोई विलम्ब किये उसके होंठ सत्यम क होंठों से मिल जाते है और वो धीरे से अपने जवान बेटे को चुम लेती है

"Ummmmmmmmmmmmmmm................"

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सुबह का ये पहला चुम्बन ज्यादा लम्बा नहीं होता पर इतना था की सविता की आग को और बड़का दे.. वही सोते हुए सत्यम का जिस्म भी यु नरम होंठों की छुवन को सायद पहचान गया था की ककी उसके लुंड में एक मजबूत हलचल हुई थी, जिसे सविता ने देख लिया था और उस कारन उसकी आँखों में भरी कामुकता कई गुना बाद गयी थी

सविता की साँसे धीरे धीरे और भरी होती जा रही थी वो एक बार फिर से अपने जवान बेटे को अचे से निहारती है और उसकी रज़ाई को वापस से उसके ऊपर दाल देती है, पर इस बार उसका एक हाथ रज़ाई क अन्दर hi था जो धीरे धीरे सत्यम की खुली लुंगी की और बाद रहा था.. और अगले कुछ hi पलों बाद सविता का हाथ एक ऐसी गरम चीज़ को छूटा है को भट्टी जैसी गरम और ऐसी सुबह की ठंडक में रहत देने का दम रखती थी

वही सत्यम अपनी माँ क जिस्म की आग से पूरी तरह अंबिग गहरी नींद में खोया हुआ था, उसे किया पता उसकी माँ क गंदे इरादे कैसे है और वो आज किया करने की सोच रही थी.. मालती धीरे से रज़ाई क अंदर अपने जवान बेटे की लुंगी क ऊपर से उसके मोठे उभर को महसूस करती है और जब उसकी कोमल कोमल उंगलिया उस मजबूत चीज़ पे धीरे से चलती है तोह सविता को ऐसा लगता है जैसे सुबह की ये ठण्ड भी अब उसका कुछ नहीं बिगड़ पायेगी

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सायद अब सुबह क इस मौसम में उतनी ठण्ड नहीं बची थी की वो एक माँ की गर्मी को सेहन कर पाती, वही सत्यम गहरी नींद में खोया हुआ पूरी तरह शांत था.. सविता धीरे से लुंगी को हल्का सा खिसका देती है, और अगला काम करने से पहले वो अपने पति की और देखती है जो अब भी गहरी नींद में सोया हुआ था और फिर मुस्कुराते हुए अपने बेटे को देखती है और उसके जिस्म पे पड़ी रज़ाई क अंदर अपने हाथ को अगला आदेश सा दे देती है

फिर किया था सविता का कोमल हाथ अगले hi पल उसके जवान बेटे क गरम लुंड को महसूस करने लगता है इस खूबसूरत एहसास में न जाने किया था की सिर्फ एक साड़ी में सुबह सुबह ऐसी ठण्ड में घर क बहार बैठी हुई सविता को जरा भी ठण्ड महसूस नहीं हो रही थी.. मानो जैसे उसका जिस्म अब अपने बेटे क लुंड की गर्माहट से गर्मी खींचने लगा था

सविता का जिस्म धीरे धीरे कामुकता क चलते कांपने लगता है पर ये कंपकपी ठण्ड वाली नहीं था, उसकी बड़ी बड़ी चूचियां जो इतनी भारी और बड़ी थी की उन्हें एक हाथ से दबोच पाना संभव hi नहीं था.. वो अब धीरे धीरे ऊपर नीचे हो रही थी

सविता ने अब अपने जवान बेटे क गरम लुंड को पूरी शख्ती से अपनी मुठी में दबोच लिया था और धीरे धीरे उसपे अपना पियर बरसते हुए उसे सहलाने का काम काने लगी थी, उसके हाथों का कमल जल्दी hi नज़र आने लगा था की ककी सत्यम का सरीर धीरे धीरे हलचल उप्टन करने लाहा था और उसके लुंड में सुबह की शक्ति आने लगी थी जो उसके उसकी माँ क हाथों में नज़र आणि सुरु हो चुकी थी ककी सविता अपने जवान बेटे क लुंड क आकर को बड़ा होता हुए महसूस कर प् रही थी

हाथों क बीच एक लुंड जब अपना आकर बदलता है तोह वो एहसास सबसे खूबसूरत होता है.. और अगर वो हाथ एक माँ क हो तोह बात hi अलग होती ककी उस समय कामुकता क साथ साथ एक रिस्ता भी होता है जो उस पल को और रोमांचित कर देता है

कुछ ऐसा hi हाल इस समय सविता का था.. सायद उसने एक ऐसा खेल सुरु कर दिया था जिसे अब पूरा करे बिना उसका पीछे हटना संभव नहीं होगा



कंटिन्यू... 👇
 


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सविता मुस्कुराते हुए लगातार अपने पति की चारपाई की और hi देख रही थी पर उसके हाथों की हरकत में कमी नहीं आ रही थी, बल्कि उल्टा बाद रही थी ककी जल्दी hi सत्यम का मोटा काला भीमकाय लुंड पूरी तरफ अपना आकर ले चूका था

और अब तोह वो सविता क हाथ में सही से समां भी नहीं प् रहा था.. वही एक माँ अपने जवान बेटे का लुंड रज़ाई क अंदर धीरे धीरे सहलाये जा रही थी और लगातार अपने सोते हुए पति की और देखे जा रही थी की वो उठ न जाये और उसका ये खेल बीच में अधूरा न रह जाये

सुबह की ठंडी ठंडी हवा बार बार सीधा सविता क जिस्म से आकर टकरा रही थी मानो वो सविता को रोकने की कोशिश कर रही हो पर उस हवा में भी इतनी हिम्मत कहा जो एक माँ को रोक सके

सविता का हाथ अब पूरी गति से चलने लगा था.. वो जोर जोर से अपने जवान बेटे क लुंड को ऊपर नीचे कर रही थी जिससे सत्यम की चमड़ी पूरी तरह उसके लुंड से अलग होक उसे पूरी तरह अगले पड़ाव क लिए तैयार कर चुकी थी

सविता की साँसे बहुत तेज़ी से भाग रही थी और रज़ाई क अंदर चलता हुआ उसका हाथ अपना कमल दिखाए जा रहा था वही उसका सीने से उसका पल्लू कबका नीचे सरक चूका था जिससे उसकी बड़ी बड़ी दुधारू मोती चूचियों का ज्यादातर हिस्सा नज़र आने लगा था.. पर ये गहराई देखने वाला तोह अभी सो रहा था और उसे पता भी नहीं था की उसकी माँ उसके लुंड पे कितना सारा स्नेह लुटा रही थी

सविता धीरे से रज़ाई को किनारे कर देती है जिससे उसके जवान बेटे का काला मोटा लुंड सुबह की ठण्ड में गर्माहट भरने का काम करने लगता है.. सविता क लाल होंठ धीरे से फड़फड़ा जाते है और वो अपना थूक निगलते हुए अपने पति की और देखती है जो अब भी उसी प्रकार गहरी नींद में खोया हुआ था और फिर वो एक हाथ से अपने बालों को पीछे करती है जो सुबह की ठंडी हवा क कारन ुध रहे था

सविता एक गहरी सांस लेती है और धीरे से अपने बेटे क लुंड पे झुकते हुए उसपे थूक देती है

"थूऊऊऊ...................."

सविता का सफ़ेद गाड़ा थूक उसके बेटे क मोठे आलू बुखारे जैसे टोपे पे गिरता है और वह से नीचे बहते हुए लुंड को गीला करने लगता है..

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सविता मुस्कुरा पड़ती है और एक बार फिर से अपने पति की और देखती है और फिर धीरे धीरे वापस से पुरे लुंड को अपनी मुठी में भरने की नाकाम कोशिश करते हुए उसपे अपने हाथ फेरने लगती है.. जिस कारन उसका थूक जल्दी hi सत्यम क पुरे लुंड पे फैलने लगता है और सुबह की बढ़ती हलकी रौशनी में उसके लुंड में एक अलग सा निखार आने लगता है, सविता से अब रुका नहीं जा रहा था वो जोर जोर से अपने बेटे क लुंड पे अपने हाथों को आगे पीछे.. ऊपर नीचे करने लगती है जिससे सत्यम क लुंड की चमड़ी की रगड़ उसके पुरे सरीर में गर्माहट भरने लगती है और उसकी नींद का टूटना सुरु हो जाता है

"आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह... hmmmmmmmmmmmmmm... मायआ......."

सत्यम की नींद आखिर टूट hi जाती है, पर अभी वो सही से अपनी आँखों को खोल भी नहीं पाया था की सविता ने जल्दी से अपनी एक ऊँगली उसके होंठों पे रख दी, जिसका सीधा सा मतलब था

'कोई आवाज़ मत करना'

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सत्यम को एक पल क लिए तोह कुछ समझ hi नहीं आता पर फिर जब अपनी माँ की बिना पल्लू वाली बड़ी बड़ी ऊपर नीचे होती हुई चूचियों को देखता तोह उसका लुंड भी सुबह सुबह हुंकार भरने लगत है.. ककी वो समझ चूका था की उसके साथ किया हो रहा था

सत्यम- (अपने लुंड पे गीलापन और अपनी माँ क हाथों की पकड़ को भली भांति जान प् रहा था, वो जल्दी से सबसे पहले अपने पिता जी की चारपाई की तरफ देखता है और फिर धीरे से कहता है) किया कर रही हो माँ.. कही बापू जाग गए तोह हम दोनों की गांड मार लेंगे

सविता हस्ते हुए अपने बेटे क ऊपर झुकती चली जाती है, उसने अब भी उसका मोटा काला भीमकाय लुंड अपनी मुट्ठी में जकड रखा था, जल्दी hi सविता की गरम साँसे सत्यम क चेहरे से टकरा रही थी

"उनसे पहले तू मार ले न...."

सविता ने मुस्कुराते हुए इस एक बात से hi न सिर्फ सत्यम की बात का जवान दे दिया था.. अपितु अपने मन की इस्तिथि भी साफ़ कर दी थी, पर वो इतने पे hi नहीं रूकती वो अपने बेटे पे और झुक जाती है और जल्दी hi दोनों क होंठ एक दूसरे से ऐसे मिल जाते है मानो वो सुरु से यही जुड़े हुए था

"Ummmmmmmmmm.... ummmmmmmmmmmmmm...... uuuuuuuuuuuuummmmmm"

सविता अपने बेटे क निचले होंठों को लेके ऐसे चुस्ती है मानो अपनी आग और अपने सरीर की गर्मी का अंदाज़ा उसे दे रही हो, की उसकी हालत इस समय कैसी है..

वैसे सत्यम भी अपने बाप क वह होते हुए अपनी माँ को चूमने से खुद को रोक नहीं पाटा और न जाने ऐसी इस्थिति में उसे इतना मज़ा क्यू आने लगा था

"ummmmmmmmmmmm......ummmmmmmmmm..... Ummmmmmmmmmmm"

सत्यम अब आगे बढ़ने का काम करता है और अपनी माँ क होंठों से अपना निचला होंठ आज़ाद करके उल्टा उसपे भरी पड़ने लगता है, यानि अब चूसने का काम वो कर रहा था

"Ummmmmmmmmmmm......... ummmmmmmmmmmmmmmm...."

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सविता भी अपने होंठों का रसपान करवाते हुए अपने हाथ से अपने जवान बेटे का लुंड फिर से सहलाना सुरु कर चुकी थी, वो उसकी चमड़ी को नीचे तक खींचती और फिर वापस ऊपर खींच लेती, जिससे सत्यम को एक कामुक करंट सा महसूस होने लगता है

सविता जितनी तेज़ी से अपने बेटे क लुंड को मसल और सेहला रही थी, सत्यम भी उतनी hi जोर से अपनी सगी माँ क होंठों को चूमे जा रहा था.. छप्पर क नीचे माँ बेटे ने पाप का भाखन करना सुरु कर दिया था, की तभी उनके एक खेल में एक छोटी सी अड़चन आ जाती है

होता ये है की महेंद्र अपनी चारपाई पे लेते लेते hi नींद में एक करवट बदलता है जिससे चारपाई और बिस्तर की हलकी सी आवाज़ होती है.. और ऐसी ठण्ड और कंपकपाती हवा क बीच वो हलकी सी ध्वनि भी उन माँ बेटे को बुरी तरह डरा देती है

सविता जल्दी से अपने बेटे क होंठों को चूसना चोर क सीधा बैठा जाती है और अब उन दोनों माँ बेटे की नज़रें सिर्फ उस चारपाई पे hi तिकी हुई थी, की कही महेंद्र उठ न जाये.. देखते hi देखते अगले 10 मं गुजर जाते है पर अब कोई भी हरकत नहीं हो रही थी

पर ये 10 मं दोनों क लिए कई घंटे सामान थे उनका दिल पुरे समय बुरी तरह दर से धक् धक् करता रहा और मन में न जाने कितनी hi विचार आके चले गए

पर सबसे बड़ी बात थी की इस पुरे समय सविता ने एक पल क लिए भी अपने बेटे का तने और काले मोठे लुंड को अपनी पकड़ से आज़ाद नहीं किया था, उल्टा वो पुरे समय अपने पति और उनकी चारपाई को देखते हुए धीरे धीरे अपने बेटे का लुंड सहलाती hi रही थी

इस पुरे समय सत्यम का हाल भी बड़ा hi अजीब था, ककी जहा उसे दर लग रहा था की कही उसके पिताजी उठ गए तोह किया होगा.. वही साथ hi साथ इस पुरे समय उसका लुंड और अकड़ता जा रहा था मानो वो इस्तिथि जितनी डरावनी थी उतनी hi उसे रोमांचित भी कर रही थी

जब दोनों को पूरी तरह विस्वाश हो जाता है की महेंद्र सच में गहरी नींद में है तब सविता वापस से अपने जवान बेटे क लुंड क टोपे पे अपना अगूंठा दबाते हुए कहती है

"हम लोग कही और चलते है.. "

सविता ये बोलते हुए जैसे hi उठने को होती है सत्यम उसका हाथ पकड़ लेता है जिसका साफ़ मतलब था की वो ये खेल यही ऐसी दर क माहौल में खेलना च रहा था

सविता उसकी आँखों में देखते हुए

"पागल है किया.. तेरे बापू की नींद खुल जाएगी, पता नहीं मैं भी अब तक किया सोच रही थी"

सत्यम मुस्कुराते हुए आँख मार क कहता है

"डरो मत माँ.. महेंद्र मस्त सो रहा है"

सविता अपने बेटे क मुंह से अपने पति और उसके बाप का नाम सुनकर धीरे से है पड़ती है

"कुत्ते अपने बाप का नाम लेता है"



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ये कहते हुए वो धीरे से अपने बेटे क लुंड पे अपना हाथ नीचे की और सरकती है और उसके एक ाँद तक अपना हाथ लाके उसे जोर से पकड़ क दबा देती है.. सत्यम को एक तीव्र दर्द महसूस होता है पर वो अपनी चीख नहीं निकलने देता

सविता मुस्कुराते हुए जल्दी hi अपनी पकड़ धीरे कर लेती है, पर सत्यम अपनी हरकत से बाज थोड़ी आता है और उसी प्रकार मुस्कुराते हुए कहता है

"चल महेंद्र की मेहरारू.. जल्दी से लुंड चूस ताकि तेरी छूट को ठंडा कर सकू"

सत्यम अब खुल क खेल में उतर चूका था, वही सविता भी उसके ऐसे सब्द सुनकर अपने अंदर गर्मी का ताप बढ़ता हुआ महसूस करती है और मुस्कुराते हुए धीरे से उसके लुंड पे एक चपत मरती है

"कमीना कही का..."

और फिर एक बार वापस से अपने सोते हुए Pati-Parmeshwar की और देखती है और थोड़ा सा पीछे होक अपने बेटे क काले और भीमकाय लुंड पे झुकती चली जाती है.. और जल्दी hi उसके लाल होंठ उस लुंड को चुम रहे थे जिसे उसने hi पैदा किया था

"Ummmmmmmmmmmmmm... Ummmmmmmmmmmmm"

सविता पियर से अपने बेटे क लुंड को चुम लेती है, जिससे एक दबी दबी सिसकारी फुट पड़ती है सत्यम क मुंह से, जिसे उसने बड़ी मुश्किल से रोक लिया था

सत्यम धीरे से अपना एक हाथ अपनी माँ क सर पे रखते हुए उसे अपने लुंड पे दबाता चला जाता है.. वो ये करते हुए अपने बाप की चारपाई की और hi देख रहा था

"चल साली रंडी चूस... मेरा लोढ़ा"

सत्यम ने ये बोलते हुए अपनी माँ का सर जोर से अपने लुंड पे दबा दिया.. उसने ताक़त सायद कुछ ज्यादा hi लगा दी थी ककी अगले hi पल एक hi बार में उसका पूरा मोटा डरावना लुंड सविता क गले तक घुस गया था

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इस अचानक हमे हमले से सविता बुरी तरह बौखला जाती है और उसके बेटे का लुंड भी ठीक उसके गले क अंदर जेक अटक गया था इसलिए वो ज्यादा hi बुरी तरह झटपटा गयी थी

"Aaaahhhhhhhhhhhh..... उफ्फफ्फ्फ़ रैंड कितना गरम मुंह है तेरा... आअह्ह्ह्हह"

सत्यम को जैसे hi अपने लुंड पे अपनी माँ की गर्मी और गीलेपन का एहसास मिलता है उसकी आँखें बंद होती चली जाती है, पर वो सविता क सर से अपने हाथ का दबाव काम नहीं करता जिससे उसका पूरा लुंड उसकी जनम देने वाली माँ क मुंह की गहराई में घुसा हुआ रहता है

सविता अपने दोनों हाथों से सत्यम की जाँघों को पकड़ क पूरा जोर लगाती है और बड़ी मुश्किल से अपने आप को आज़ाद कर पाती है, जैसे hi सत्यम का लुंड उसके मुख से बहार आता है उसे जोर की खासी आती है पर उसे पता था की उसका पति वही पास में सो रहा है इसलिए वो बड़ी मुश्किल से अपनी आवाज़ को दबा पाती है.. कुछ पलों तक खुद को सँभालने क बाद

सविता- कमीने.. सांस hi नहीं लेने देता

पर अगले hi पल वो खुद hi है पड़ती है, और वापस से अपने बेटे क लुंड पे झुक एक बार फिर से उसके थूक देती है

"thuuuuuuuuuuuuuuuuu.."

एक बार फिर से उसका थूक उसके बेटे क मोठे काले टोपे से बेहटा हुआ नीचे जाने लगता है, पर इस बार वो पहले से तैयार थी.. उसने बिना विलम क वापस से उसके काले लुंड को मुंह में भर लिया और और धीरे धीरे अपने मुंह की जकड अपने जवान बेटे क लुंड पे बनाते हुए ऊपर नीचे करने लगी

यानि अब उसका सर कभी ऊपर आता तोह कबि नीचे.. जिसका मतलब था वो अब अपने hi बेटे क लुंड को ऊपर नीचे तक चूसना सुरु कर देती है, जिससे उस वातावरण में एक मधुर सी पर बहुत hi धीमी आवाज़ गूंजने लगी थी

"सल्ल्ल्लूऊरररपपपपपप.. .सरररररूऊऊऊप्प्प..... ssssssuuuuulllluuuuuuuuuuppppp"

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सत्यम को अब ज्यादा कुछ करने की जरुरत नहीं पद रही थी ककी उस खेल में सविता उससे ज्यादा माहिर खिलाडी थी, यु कह सकते है जितनी सत्यम की उम्र है उससे ज्यादा तोह सविता क काण्ड होंगे 😉

सत्यम मुस्कुराते हुए अपना एक हाथ अपने सर क नीचे रख लेता है ककी अब बाकि का काम तोह सविता खुद hi कर रही थी, वो पूरी म्हणत क साथ अपने जवान बेटे का लुंड चूसना सुरु कर चुकी थी

"सरररलल्लूऊऊप्प्प्पपप्प... गररररररूललललपपपपप.... गगगगललललूऊऊऊऊप्प्प..... ससससललल्लूऊऊऊऊप्प्प्प"

सत्यम अपना दूसरा हाथ उसके सर पे रखके धीरे धीरे अपनी खूबसूरत पक्के रंग वाली माँ क बालों में अपनी उंगलिया चलाते हुए सुबह सुबह अपनी माँ से मिलने वाले मुखमैथुन का आनंद लेने लगता है

"आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.. उफ्फफ्फ्फ़..... किया मस्त रंडी जैसे चुस्ती हो ाआपपपपप.... आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह... ेस्शह्ह्हह्ह्ह्ह... कभी बताया नहीं ये सब सीखा कहा se...Aaaahhhhhh"

सविता लुंड चूसना तोह बंद नहीं करती पर अपने बेटे क इस कामुक सवाल क कारन उसके चेहरे पे एक ख़ुशी और आँखों क आगे एक चेहरे जरूर उतर आया था

पर वो अपने खेल को जारी रखती है और जल्दी hi उसके सर की गति बढ़ने लगती है, यानि वो धीरे धीरे और जोर जोर से अपने जवान बेटे का काला लुंड चूसे जा रही थी

"सससललल्लूऊऊऊऊप्प्प.... सररर्रूऊऊऊप्प्प..... गगगगररऱऊऊऊऊप्प्प.... गललललललूऊऊऊऊप्प्प....."

सत्यम- (अपने माँ क बालों की लत जो उनके चेहरे पे आ गयी थी उसे पीछे करते हुए) आअह्ह्ह्ह... उफ्फफ्फ्फ़.... चूस रंडी... कुटिया कही की.. ऐसे hi चूस... आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह... उफ्फफ्फ्फ़.... उफ्फ्फफ्फ्फ़.... साली हरामजादी आअह्ह्ह्हह.. किया मस्त चुस्ती है तू.... साली महेंद्र की लुगाई चूस... Aaaaahhhhhhhhhh

सत्यम ने जब अपने बाप का नाम लिया तोह वो उनकी चारपाई की और देखने लगा जहा उन्हें सोता हुआ देख क उसके चेहरे पे एक विजेता जैसी मुस्कान खेल गयी थी

"आअह्हह्ह्ह्ह... देख महेंद्र.. तेरी लुगाई मेरा लुंड चूस रही है.... Aaahhhhhhhhhhhhh.... kuttttiiyaaaaaaaaaaaaaaaaaa......"

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सत्यम की इस बात को सुनकर सविता अंदर hi अंदर मुस्कुरा पड़ती थी और उसने थोड़ी शरता क साथ अपने बेटे क लुंड पे अपने डाट गदा दिए था, और ऐसी कारन वो चीख पड़ा था पर उसने अपनी आवाज़ को दबाये रखा ताकि उसका बाप न जाग जाये

सत्यम ने मुस्कुराते हुए वापस से अपनी माँ क सर पे दबाव बनाते हुए वापस से उनका सर जोर से अपने लुंड पे दबा दिया था.. जिसका मतलब सविता जैसी अनुभवी औरत अचे से समझती थी इसलिए वो एक बार फिर से अपने खेल में लग जाती है और जोर जोर से अपने जवान बेटे का लुंड चूसने लगती है

"गगगगगलल्लूऊऊररररपपपपपपपप... सससललल्लूऊऊऊऊप्प्प.... सररर्रूऊऊऊप्प्प..... गगगगररऱऊऊऊऊप्प्प.... गललललललूऊऊऊऊप्प्प....."

सविता क मुंह से निकलती लार और थूक से सत्यम का लुंड अब पूरी तरह चमकने लगा था, पर वो लगातार अपने जवान बेटे का लुंड चूसे जा रही थी

"सससससलल्लूऊऊप्प्प..... गर्र्र्ररूऊऊऊप्प्प.............. ggggllllllluuuuuuuuuppppppppppp"

ये खेल अगले 10 मं यही और चलता रहता है, अब तोह सविता जैसी भारीभरकम बैंस का मुंह भी दर्द करने लगा था

इसलिए वो बुरी तरफ हफ्ते हुए अपने जवान बेटे का लुंड अपने मुंह से बहार निकल क लम्बी लम्बी साँसे लेते हुए कभी अपने नंगे लेते हुए बेटे को देखती तोह कभी गहरी नींद में कोई अपने पति को.. और जब दोनों माँ बेटे की नज़रें आपस में टकराती तोह दोनों की मुस्कुरा पड़ते

सत्यम- (अपने हाथ से अपने गीले और अपनी माँ क थूक से साणे हुए लुंड को पकड़ को हिलाते हुए) आ जा मेरी रैंड मा..... चल चढ़ जा अपने बेटे क लुंड पे

सविता अपने जवान बेटे की बात पे मुस्कुराये बिना नहीं रह जाती वो अपनी जगह से उठती और सबसे पहले अपने पति की चारपाई क पास जेक ये पक्का करती है की वो अब भी सो hi रहा है न.. और फिर वापस आके दूर घर क बहार खेतों की और देखती है जहा अब धीरे धीरे कोहरा काम होने लगा था और पहले क मुकाबले थोड़ा ज्यादा दूर तक देखे पड़ने लगा था

सविता अपने नंगे लेते बेटे को देखती है और जल्दी से अपनी साड़ी ऊपर उठता सुरु कर देती है.. और कुछ सी पलों में सत्यम को उसकी माँ की पेंटी नज़र आने लगती है

"आआह्ह्ह्ह.. माआआ ये सब क्यू पहनती हो"

सविता मुस्कुराते हुए अपनी पेंटी उतारते हुए

"है कमीने तेरा बस चले तोह मुझे ये किया.. कुछ न पहनने दे"

अपनी माँ की बात पे सत्यम मुस्कुरा पड़ता है, वैसे भी उसकी बात झूट तोह थी नहीं.. पर सविता जो करने वाली थी वो सत्यम की सोच से थोड़ा आगे hi था

सविता ने जल्दी hi बिना समय व्यर्थ किये अपनी पेंटी को उतर लिया और ऐसा होते hi सत्यम देखता है की उसकी माँ की पेंटी कितनी गीली है मानो जैसे उसे कॉमर्स में डुबोया गया हो

सत्यम- उफ्फ्फ.. माँ ये तोह ऐसे गीली है जैसे मूत मारा हो आपने

सविता- (शर्मा जाती है) चुप कर कमीने, तेरा ये इतना बड़ा लुंड लेना है तोह अपनी चीखों को रोकने का इंतिज़ाम रोह करना होगा न

कंटिन्यू... 👇
 


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सत्यम को अपनी माँ की बात समझ नहीं आती पर अगले hi पल जो देखता है उससे उसका लुंड बुरी तरह अकड़ जाता है और ऐसा लगता है जैसे उसका लुंड कही पहात न पड़े, ककी उसकी खूबसूरत बड़ी बड़ी गोल चूचियों वाली माँ ने उस पेंटी को अपने मुंह में भर लिया था.. वो भी इतनी गहराई तक की बस ये नज़र आ रहा था की सविता क मुंह में कोई चीज़ ठुसी हुई है

सत्यम- (अपने लुंड को जोर जोर से मसलते हुए) आअह्ह्ह्ह.. माआ.. तुम सच में बहुत बड़ी रंडी औरत हो

सविता उसे हाथ दिखा क मरने का इशारे करती है पर उसकी आँखें उसकी ख़ुशी और उसमे हलकी शर्म का मिला हुआ रूप अलग hi बयां कर रही थी

सविता वापस से चारपाई क ऊपर एक पेअर रखती है और धीरे से अपनी साड़ी को पुरे उठा क दूसरी तरफ मुंह करके ठीक अपनी गीली छूट को अपने जवान बेटे क लुंड क निशानी पे लगते हुए उसपे बैठने लगती है पर इससे पहले की वो पूरी तरह अपनी खुली छूट को अपने जवान बेटे क लुंड पे लगा पाती सत्यम की धीमी सी आवाज़ उसके कानो में पड़ती है

"माँ मेरी तरफ मुंह करो न.. मैं भी तोह देखु जब महेंद्र की लुगाई की छूट में मेरा लुंड जायेगा तोह उसके चेहरे पे कैसी खूबसूरती आती है"

सविता उसी प्रकार सुबह की ठण्ड और धीरे धीरे काम होते कोहरे वाले मौसम में अपने बेटे की और मुद क उसे देख क मुस्कुराती है पर वो कुछ बोल नहीं पाती ककी उसके मुंह में तोह उसकी hi पेंटी ठुसी हुई थी जिसमे से उसे अपने hi मूत की खुसबू और स्वाद मिल रहा था.. और ये खुसबू उसके अंदर की गर्मी को और ज्यादा बड़ा रही थी

सविता अपने बेटे की और देख क दूर घर क बहार की और इशारा करती है, जैसे उसे समझा रही हो की ऐसी हालत में ये देख सकती हु की कोई आ न जाये.. जल्दी hi ये बात सत्यम भी समझ जाट है और वो मुस्कुराते हुए कहता है

"चल ठीक है मेरी रैंड माँ.. आज ऐसे hi छोड़ लेता हु, देखना एक दिन ऐसी महेंद्र क सामने तुझे कुटिया बना क छोडूंगा"

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सत्यम कमीनेपन क साथ अपनी माँ क लिए ये सब्द अपने सोते हुए बाप को देखते हुए कहता है, जहा सविता को ऐसा लगता है जैसे कही उसकी छूट भरभरा क बहने न लगे, न जाने क्यू उसे ऐसी बातें और ज्यादा गरम और पागल कर रही थी

सविता अब धीरे से घर क बहार की तरफ देखते हुए जहा घाना कोहरा ान धीरे धीरे काम होना सुरु हो चूका था, वो अपनी छूट को धीरे से अपने बेटे क लुंड क मोठे टोपे पे लगाती है तोह उसके पुरे जिस्म में एक गरम सी सनसनाहट सी दौड़ जाती है.. अगर इस समय उसके मुंह में वो गन्दी पेशाब क बदबू वाली पेंटी न होती तोह सायद वो तेज़ी से सिसकारी भर रही होती

सत्यम भी मौका का सही प्रयोग करते हुए अपने दोनों हाथों को अपनी खूबसूरत भरी भरकम जिस्म वाली माँ की कमर को अपने दोनों हाथों से जकड लेता है पर वो कोई म्हणत नहीं करता ककी सविता ये खेल उससे ज्यादा अचे से जानती थी

सविता अपने दोनों पैरों को वही चारपाई पे जमाये हुए धीरे धीरे अपनी कमर को नीचे लाने लगती है जिससे उसके जवान बेटे का मोटा काला भयंकर लुंड धीरे धीरे उसकी छूट का छेद फैलने लगता है.. सविता को भी एक हल्का सा कामुक दर्द अपने जिस्म में होता हुआ महसूस होती है उसकी आँखें कसके बंद हो जाती है और जबड़े मजबूती से भींच जाते है पर वो रूकती नहीं

वो अपनी कमर और अपने जिस्म का पूरा भार अपने जवान बेटे क लुंड पे डालते हुए धीरे धीरे उसके ऊपर लुंड को अपनी छूट में भरते हुए नीचे बैठने लगती है.. और उसके ऐसा करने क कारन सत्यम का वो तगड़ा लुंड उसकी अपनी सगी माँ की उसी छूट में अंदर घुसने लगता है जिससे वो निकला था, और जल्दी hi सविता की छूट में उसके बेटे का लगभग आधा लुंड पूरी तरह अंदर घुस चूका था

दर्द और कामुकता की एक तीव्र लहर उसके पुरे सरीर को हिला क रख दे रही थी वही सामने से आने वाली ठंडी ठंडी हवा क झोंके उसके जिस्म की गर्मी को काम करने की जगह उल्टा और बढ़ाते जा रहे थे.. सविता एक पल क लिए रूकती है और अपने कांपते हुए सरीर क साथ एक बार फिर से अपने पति की और देखती है जो अब भी अपनी पत्नी और अपने बेटे की हरकतों से पूरी तरह अनभिग होक अपनी नींद का आनंद ले रहा था, और यहाँ उसका बीटा उसकी पत्नी की छूट का आनंद लेने जा रहा था

सविता एक पल क लिए रुक क अपने पति को देखती है और एक लम्बी सांस भरने क बाद एक मजबूत इरादा करती है और इस बार वो अपना पूरा भार एक hi बार में अपने जवान बेटे क लुंड पे दाल देती है जिससे उसकी फटी हुई छूट जिसे भोसड़ा कहना ज्यादा सही होगा.. वो उसके जवान बेटे क लुंड को एक hi बार में पूरा का पूरा निगल जाती है

सविता का जिस्म एक तीव्र दर्द से मचल पड़ता है, सायद इसका ज्ञान सत्यम को भी था इसलिए जैसे hi उसे महसूस होता है की उसका मोटा लुंड उसकी माँ की छूट की गहराई में पूरा घुस चूका है वो जल्दी से अपने दोनों हाथों की पकड़ अपनी माँ की कमर पे बड़ा देता है जिससे अगर सविता चाहे भी तोह उठ न पाए

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पर सविता का ऐसा कोई भी इरादा नहीं था.. उसके मुंह से एक घुटी घुटी चीख जरूर निकलती है

"Ummmmmmmmmmmmmmm.....gggggg....................."

इसलिए वो माँ बेटे एक पल क लिए वही रुक जाते है, पर कुछ पलों क बाद जब इस्तिथि थोड़ी शांत होती है तोह सत्यम नीचे से दकके लगाना सुरु कर देता है, वो ऐसा करते हुए अपने पास hi दूसरी तरफ चारपाई पे सोते हुए बाप को देखे जा रहा था और धीरे से कहता है

"चल रंडी.. खेल दिखा"

सविता जिसका मुंह सामने की तरफ और पीट उसके जवान बेटे की तरफ थी वो धीरे से अपनी कमर को उठती है.. इतनी की उसकी छूट का छेद उसके बेटे क मोठे टोपे तक बहार आ जाता है और फिर से अपना पूरा भार वापस उसपे डालते हुए उस मोठे काले लुंड को वापस निगल लेती है.. इस प्रक्रिया में उसे दर्द क साथ साथ इतना आनंद प्राप्त होता है की उसकी आँखें बंद होती चली जाती है

"Ummmmmmmmmmmmmmm.... gggrrruuuuuuuuuuuuuuu...."

सविता कुछ बोलना च रही थी सायद पर उसके मुंह में घुसी वो पेंटी उसे ऐसा करने की इज्जाजत नहीं देती, इसलिए वो अपने खेल पे वापस धियान देती हुई वापस से अपने बेटे क लुंड पे उठती हुई उसे आधे से ज्यादा अपनी छूट से निकल लेती है पर फिर तुरंत वापस से उसे ऐसे अपने अंदर समां लेती जैसे एक माँ अपने बेटे को अपनी खूख में रखती है

सत्यम- (अपनी खूबसूरत मोती माँ की मस्त ब्लाउज से नज़र आती पीट पे अपनी उंगलिया चलते हुए अपनी आवाज़ को धीमी रखते हुए कहता है) आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह... Saaalliiiiiiiiiii रैंड.. कितनी गरम छूट है तेरी... आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह.. उफ्फफ्फ्फ़.... बहनचोद किया आग है तेरे अंदर कुटिया हराम की जनि साली.. आअह्ह्ह्हह.. पता नहीं वो कोण खुशकिस्मत वाला होगा जिसने तेरा कुँवारापन लुटा होगा

अपने सेज बेटे से अपने लिए ऐसी गन्दी गालिया और कुंवारेपन की बात सुनकर एक बार फिर से सविता की आँखों क आगे वही चेहरे घूम जाता है.. पर फिर वो मुस्कुरा पड़ती है, ककी ऐसी बातें सुनकर सविता क जिस्म और कामुकता से भरने लगा था

इसलिए इस बार वो तेजी से अपने जवान बेटे क लुंड पे ऊपर होती और उतनी hi गति से वापस उसका लुंड अपनी छूट में भरते हुए उसपे बैठ जाती.. अब ये खेल गति पकड़ने लगा था

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सत्यम धीरे से अपनी माँ की गांड को थप्पड़ मरते हुए.. चट्टाअक्कककककक...

"आअह्ह्ह्हह Saaalliiiiiiiiiiii... कितनी बड़ी रैंड है तू.. अपने सोते हुए पति क पास hi अपने बेटे का लुंड ले रही है... कुटिया चिनार कही की.. आआह्ह्ह... ईई लिए कुटिया... Aaahhhhhhhhhh"

सत्यम की गालिया सविता क लिए ऊर्जा का काम कर रही थी, और यु अपने hi बेटे से जलील होना उसे और गरम कर रहा था

सत्यम जितनी गन्दी गाली अपनी माँ को देता, सविता उतनी तेज़ी से अपने जवान बेटे क लुंड पे उछलती.. सुबह सुबह का ये कामुक खेल अब अपनी पूरी रफ़्तार पे आ चूका था ककी जल्दी hi सविता पूरी रफ़्तार से अपने hi सेज बेटे क लुंड पे उछलते हुए दूर खेतों और सड़क की और देखते हुए पहरा भी दे रही थी और अपने जवान बेटे का लुंड भी ले रही थी

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सत्यम- (वो भी अब नीचे से जोरदार दकके लगाने लगा था) आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह.. साआल्लीइइइइइइ.. चिनार कुटिया.... आआह्ह्ह्ह.. किया मस्त गांड है तेरी रंडी.. आअह्हह्ह्ह्ह आज तोह तेरी छूट ले रहा हु.. जल्दी hi तेरी गांड भी लूंगा.. आआह्ह्ह्ह... और देखना एक दिन तुझे इस महेंद्र क सामने hi कुटिया बना क तेरी गांड और छूट पहाडुंगा.. आअह्हह्ह्ह्ह... साआल्लीइइइइइइ.. चिनार... रंडी.. मादरचोद... कुटिया कही की... Aaahhhhhhhhhhh

सत्यम अब कभी अपनी माँ की कमर को जोर से मसलता तोह कभी अपनी माँ क ब्लाउज से नज़र आती नंगी पीट क हिस्से पे अपनी उंगलिया चलते हुए जोर जोर से नीचे से दकके मरने लगा था, उसका हर दक्का उसकी माँ को कुछ हद तक हवा में उछाल देता और जब वो वापस उसके लुंड पे नीचे आती तोह सीधा छूट क अंतिम बिंदु तक उसे लुंड की मोटाई महसूस होती.. बहुत hi कामुक दृश्य और उससे ज्यादा कामुक ेशास था

सविता अब पूरी गति क साथ अपने जवान बेटे क लुंड पे उछाल रही थी और उससे ज्यादा गति से नीचे से सत्यम अपनी सगी माँ को उछलते हुए छोड़ रहा था

"Aaaahhhhhhhhhhh... Saaallliiiiiiiiiii...kutiya ये ले... आअह्ह्ह्हह... भोसड़ा बना दूंगा आज तेरी छूट का.. आह्ह्ह्हह.. ये ले... आअह्हह्ह्ह्ह... साली देखना जल्दी hi ऐसे hi उस मालती को भी छोडूंगा.. आअह्हह्ह्ह्ह... उफ्फ्फ... एई ले कुटिया सआईईईई"

सत्यम अपनी माँ को जोर जोर से छोड़ते हुए अपनी खूबसूरत मालती चची को छोड़ने का अपना सपना बता रहा था पर उसे नहीं पता था की आज hi कुछ घंटों बाद उसका ये सपना सच होने वाला है.. हम सब तोह ये जान hi चुके है.. है न😉

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एक माँ आज अपने hi जवान बेटे क लुंड पे पूरी गति से उछाल रही थी, तोह एक बीटा अपनी hi सगी माँ को उसी रफ़्तार से छोड़ रहा था.. और सबसे बड़ी बात उस औरत का पति और उस लड़के का बाप वही पास में सोया हुआ था

कामुकता का ये गन्दा खेल ऐसे hi अपनी पूरी रफ़्तार से चलता रहता है.. जिससे सविता की बड़ी बड़ी चूचियों ऐसे हवा में हिलोरे मार रही थी मानो अपनी खूबसूरती का प्रदर्सह्ण कर रही हो

वही सत्यम भी नीचे से अपनी माँ की गांड को मसलते हुए जोर जोर से उसे गालिया देते हुए बेहरहमी से चोदे जा रहा था

"आअह्ह्ह्हह... रनडीईई.. कुटिया... हराम की जनि.. ये ले.... Aaahhhhhhhhhh.. महेंद्र की लुगाई ये ले.. आअह्ह्ह... मादरचोद साली रैंड.. आज तोह तेरी छूट का गुलदस्ता बना दूंगा. .आअह्ह्ह्ह कुटिया हरमन सालियी"

सत्यम जितनी गन्दी गाली सोच सकता था इस समय अपनी माँ को छोड़ते हुए उसे दे रहा था.. और सविता भी अपने बेटे की गन्दी गालियों को सुनकर पुरे जोश में उसके लुंड पे उछाल रही थी, जिससे उसकी बड़ी बड़ी चूचिया जोरो से हिलोरे मार रही थी

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सविता जब अपने जवान बेटे क लुंड को पूरा अपने अंदर भरते हुए उसके ऊपर बैठती तोह उसकी गांड उसके बेटे की जाँघों से टकराने क कारन एक कामुक पर धीमी थाआपपप.... थाआपपपप.... की मधुर ध्वनि भी उत्पन कर रही थी

सविता अपने पति की और देखती है जो अब भी उसी प्रकार सो रहा था और वो जोर जोर से अपने बेटे क लुंड पे उछलना सुरु कर देती है जिसका सीधा सा मतलब था की उसकी छूट अब इस खेल क अंतिम हिस्से में अपना खेल खेलने वाली है.. यानि उसका कॉमर्स किसी भी पल निकलने वाला था

और सत्यम भी खेल क आखिर तक आ चूका था ककी उसका लुंड भी किसी भी पल अपना बहाव कर सकता था, दोनों पूरी म्हणत करते हुए एक दूसरे को इस खेल में हारने में लग जाते है.. पर ये एक ऐसा खेल है जिसमे कभी कोई न जीता है न हारा है, यहाँ हार जीत एक साथ hi होती है

सत्यम का लुंड अचानक से एक गाड़े और गरम पानी का फौवारा चला देता है जो उसकी माँ की छूट को भरना सुरु कर देता है.. वही जैसे hi मालती को अपनी छूट में उस गाड़े पानी का एहसास मिलता है उसकी छूट ने अपना दम तोड़ दिया था और कामुकता का रास एक दूसरे में मिलने लगता है

"आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह... साललीईई.. आअज्ज्ज तेरी छूट भर दूंगा... आअह्ह्ह्ह... रंडी सआईईई कुटिया..."

वही सविता भी पीछे नहीं थी वो भी अपनी छूट की गहराई में अपने जवान बेटे का रास पाके पूरी तरफ संतुस्ट हो चुकी थी, पर वो धीरे धीरे तब तक उसके लुंड पे उछलती रहती है जब तक उसके बेटे क रास की एक एक बंध उसकी छूट में समां नहीं जाती.. और पूरी तरफ संतोष होक वो अपने जवान बेटे क लुंड से उतर क वही उसके बगल लेत क लम्बी लम्बी साँसे लेने लगती है

सविता हफ्ते हुए अपने मुंह से अपनी पेंटी बहार निकलती है तोह वो पूरी तरह उसके थूक से सनी हुई थी वैसे तोह उसकी छूट भी उसके बेटे क माल से भरी हुई थी.. जो सुबह hi ठंडी हवा क झोंकों को महसूस कर रही थी

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सविता अपने बेटे की और देखते हुए मुस्कुरा क कहती है

"कुत्त्ते तूने तोह सच में अपनी माँ छोड़ दी..."

सविता की इस बात पे दोनों hi माँ बेटे हसने लगते है.. और फिर सविता धीरे से चारपाई से नीचे उतरती है और अपनी साड़ी और अपने कपडे सही करते हुए अपनी पेंटी को उठा क अपने पति को देखती है और मुस्कुरा क घर क अंदर जाने वाले मुख दरवाजे को जिसे उसने बहार से बंद कर दिया था उसे खोल क अंदर चल पड़ती है

वही सत्यम वापस से अपने पुरे जिस्म पे रज़ाई ओढ़ क एक बार अपने बाप की और देखता है और फिर खुद से कहता है

"पता नहीं मालती चची की कब ले पाउँगा.."

पर बेचारे सत्यम को पता नहीं की अगले कुछ hi घंटों में उसकी ये कामना पूरी होने वाली है.. बल्कि हम सबने तोह उस कामना को पूर्ण होते हुए देखा भी है 😉

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ऐसी क साथ अपडेट #17 क सभी चारो Part पूर्ण होते है, आशा है यहाँ तक की यात्रा ने आप सभी का मनोरंजन किया होगा


जल्दी hi आगे की कहानी क साथ वापस मिलूंगा
 
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🕔 तिमेलिने 💫

अपडेट 17 👇


एक नयी सुरुवात - ठण्ड की बारिश का पहला दिन

1) सुबह क 5:30 - मालती वस मोनू- स्नानघर में लुंड चूसै (माँ + बीटा)

2) सुबह क 6:15 - सविता वस सत्यम- बेटे क लुंड पे माँ (माँ + बीटा)

3) सुबह क 8:45 - मालती वस सत्यम- मंदिर की यात्रा (चची + भतीजा)

4) सुबह क 9:10 - मालती वस सत्यम- मालती चुद गयी (चची + भतीजा)


कंटिन्यू... अपडेट 18 👇
 
नई अपडेट ☝️(पेज No. 301-302)

Post in thread 'मालती का कामुक संसार (Adultery Upanyas)'

Danny69 Shetan Mukhtar lundbur123 soumyaranjan Deepaksoni Napster Pandu1990 insotter Dharmendra Kumar Patel Rinkp219 aidenabhishek urc4me Rajizexy zhyny Krishna kumar devi kings Raj9977 mahima_ maurya Vishalji1 fuckre Ravi 23 R_Raj Aryan Raj Vrushali U.and.me ashokdaji Vikashkumar Rajesh karan121 Yashu7979 tigereye zhyny The_Void pankukipriya Nike11 rajeev13 Akash18 lunc Shan.gupta0051 Ashiq Baba the_bull_000 tigereye pussylover1 Musal_sandh fuzzycheek1 kriti009 Praju starlet ✨ mmmmmmmm rajeev13 Rinkp219 fuzzycheek1 kriti009 maurya Musal_sandh Kanika kumari Rajesh sanjaysaroj7790 zhyny Leo Shine True Detective pussylover1 Ravi 23 Thevamp royalroy motalund4554 Pandu1990 Somdavid imdelta shaliniarora Premkumar65 rmj0231 DEMONIC_BULL Goku_09 snehaaa Black_Shadow Gauravv Raja jani shruti vaskale 1 vijay19884verma Dhansu2 pprsprs0 Fuck#123 chud ka bhukha @@अमोल2 pankuk1988 Saand69

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रियली सॉरी

बूत मेरी तबियत सही नहीं है इसलिए न लिख प् रहा हु न hi ऑनलाइन आ रहा हु

शॉप भी 3 दिन से नहीं गया हु 🙏
 
सत्यम का मोटा काला भीमकाय लुंड जो अब भी थोड़ा सख्त hi था और उसपे (meri)Monu की माँ की छूट का रास अब भी लगा हुआ था और उस कारन उसका लुंड आग की उस रौशनी में कुछ ज्यादा hi चमक सा रहा था.. उसके लुंड में में एक नया जोश भरने लगा था ककी नज़ारा hi कुछ ऐसा था

- फ्रॉम नई अपडेट (स्टिल इन राइटिंग)
 
किंग सून.. 🔜

"साली रंडी... बड़ी जल्दी है तुझे लुंड खाने की, अगर कही मेरी जगह तेरा मोनू होता तब भी यही कहती किया ?"

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