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हवेली में सुबह उठाकर सब नौकर चाकर अपनी नहावा धोई में लग गए थे. भीमा भी कल रात के ज़बरदस्त चुआड़ी के बाद फ्रेश होने के लिए अपनी झोपडी के पीछे बने उसी बाग़ में चला गया जहा वो हर रोज़ फ्रेश होने अत था. वह फ्रेश होने के बाद उसकी नज़र ऊनि झाड़ियों की तरफ चली गई जहा उसने अपने जीवन की पहली चुदाई की थी वो भी एक हॉट शहरी लड़की की. और न जाने क्यों उसके कदम खुद बा खुद उसी तरफ बाद गए. वह वो उन्ही झाड़ियों में घुटनो के बल बैठ गया और वह की दबी हुई झाड़ियों वह पड़े उस खून के धब्बे को ढक कर कल रात के उस कामुक एहसास कल दुबारा महसूस करने लगा. अचानक घास के तिनको को सहलाते सहलाते उसके हाथ किसी चीज़ के टकराए. भीमा ने आँख खोल कर उस चीज़ को हाथ में उठाकर देखा तो वो एक मंगलसूत्र था एक सोने का मनागलसूत्र.
भीमा चौंक गया की ये मंगलसूत्र किसका हो सकता है और वो भी उस जगह पर पड़ा हुआ जहा उसने नेहा को छोड़ा था. क्युकी पहले तो इस तरफ कोई महिला आती नहीं और नेहा शादीशुदा नहीं तो ये मंगलसूत्र उसका हो नहीं सकता फिर ये किसका हो सकता है. इस मंगलसूत्र ने भीमा को सोच में दाल दिया की क्या नेहा कल यहाँ मंगलसूत्र पेहेन कर आई थी पर क्यों या वो नेहा नहीं कोई और थी पर उसके कपडे तो एकदम नेहा जैसे थे और वैसे कपडे तो केवल नेहा पहनती है तो कुआ कोई और कल नेहा जैसे कपडे पेहेन कर आया था पर अगर वो कोई और होता तो इतना सब होने के दौरान वो मुझे एक बार रोकता पर उसने तो मेरा पूरा साथ दिया. शायद मई hi कुछ ज्यादा सोच रहा हु वो नेहा hi होगी ये मंगलसूत्र कल रात में नहीं बल्कि उससे पहले कभी किसी का गिरा होगा यहाँ जो आज मुझे मिला. भीमा ने वो मंगलसूत्र अपने पास रख लिया.
इधर शोभा के कमरे में आशा के जाने के बाद शोभा नहाने चली गई और नहाधो कर जब तैयार होने लगी तब उसका ध्यान अपने मंगलसूत्र पर गया जो गायब था. उसने पूरा कमरा हर दर्ज बिस्तर हर जगह देख लिया पर मंगलसूत्र उसे कही नहीं मिला. वो सोच में डूब गई की कहा जा सकता है मंगलसूत्र. कल रात तक तो वो मेरे पास hi था मई उसे पेहेन कर hi विक्रम से मिलने गई थी. ये ख्याल आते hi उसे समझ आ गया की हो न हो वो मंगलसूत्र कल रात उस आम के बाघ विक्रम के साथ वो सब करते टाइम वही गिर गया होगा. वो मंगलसूत्र तो मेरे सुहाग की निशानी है जबकि हमारी शादीशुदा ज़िन्दगी पहली hi इतनी मुश्किल भरी है ऐसे में वो मंगलसूत्र खोना ठीक नहीं. अगर वो वही गिरा है तो अभी शायद वही पड़ा हो मुझे एक बार वह जाकर देखना चाहिए.
शोभा अपने कपडे पेहेन कर हवेली से निकलकर इधर उधर देखते हुए सीधा उस आम के बाग़ की तरफ चलदी. भीमा ने शोभा को उस आम के बाग़ की तरफ जाते देखा और उसके मन ख्याल आया की कही वो मंगलसूत्र वाली औरत शोभा hi तो नहीं. शोभा का ख्याल आते hi उसके ज़हन में उस दिन वाली घटना ताज़ा हो गई जब शोभा ने उसके लिंग पर तिलक करा था. और ये जानते हुए भी की वो अपनी मालकिन इस गांव के सबसे रसूखदार शक्स की बहु के बारे में सोच रहा है फिर भी उसके लुंड में तनाव आ गया. शोभा आम के बाग़ में दाखिल हो गई और भीमा अपनी झोपडी में बैठा सोचता hi रह गया. उसने अपना सर पीटा की वो भी क्या सोच रहा वो एक नै नवेली दुल्हन है जिसकी अभी सुहागरात भी नहीं हुई है ऐसे में वो क्यों आधी रात में यहाँ ऐसे छोटे छोटे कपडे पहनकर एक जमादार से छुड़वाने आएगी. क्या मई कुछ भी सोच रहा हु.
पर फिर भी उसका दिमाग एक बार उसे जाकर देखने को कह रहा था की एक बार जाकर देखना चाहिए की ये नै नवेली दुल्हन यु सुबह सुबह ये आम के बाग़ में क्या करने आई है. और ये सोचते hi उसके कदम खुद बा खुद उस बाग़ की तरफ बाद चले. शायद वो उस तालाब या उस कॉटेज की तरफ गई हो जो तालाब के दूसरी तरफ है. पर बाग़ के अंदर पहुंच कर उसकी आँखे फटी की फटी रह गई क्युकी सामने शोभा कही और न जाकर ठीक उसी जगह ज़मीन पर बैठी कुछ ढून्ढ रही थी जहा कल रात उसने चुदाई की. न चाहते हुए भी उसका दिल ये सोचने को मजबूर हो गया की कही वो औरत जिसे उसने कल रात छोड़ा वो शोभा तो नहीं थी. उसका दिल उसे यही कह रहा था की भला ऐसा कैसे हो सकता है पर जो सामने दिख रहा था उसे भी इग्नोर नहीं किया जा सकता था. पुरे दिन में उसने एक बार भी शोभा को यहाँ आते नहीं देखा फिर शोभा उसी जगह पर क्या ढून्ढ रही है.
उसके लिए ये पता लगाना ज़रूरी हो गया था इसलिए वो भाग कर अपनी झोपडी में गया और वो मंगलसूत्र उठा लाया और आहिस्ता आहिस्ता ज़मीन में यहाँ वह ढूंढ़ती शोभा की तरफ बढ़ने लगा. शोभा के एकदम करीब पहुंच कर उसने खस्ने की आवाज़ निकली जिसपर शोभा ने पीछे पलट कर देखा. शोभा के पीछे देखते hi भीमा ने वो मंगलसूत्र आगे कर दिया. वो मंगलसूत्र देख कर शोभा की आँखे चमक उठी और उसने झट से भीमा के हाथो से वो मंगलसूत्र लपक लिया. मंगलसूत्र तो शोभा को मिल गया पर भीमा पर नज़र पड़ते hi शोभा थोड़ा असहज हो गई. एक तो वो घनी झाड़ियों के बीच एक हट्टे काटते जमादार के सामने अकेली कड़ी थी ऊपर से ये वही शिक्षा जिसके लुंड पर कुछ दिनों पहले पुरे गांव के सामने उसने तिलक करा था तो ऐसे में उसका असहज होना स्वाभाविक था. और उसपर भी जब इंसान के दिल में चोर होता है तो उसे जल्दी जवाब नहीं सूझता और शोभा को भी ये समझ नहीं आ रहा था की ये मंगलसूत्र यहाँ कैसे आया इसका क्या जवाब दे.
शोभा हकलाते हुए: वो वो मई मई कल शाम को इधर तालाब के पास टहलने आई थी तब ये यही कही गिर गया था शुक्रिया ये देने के लिए.
इतना कह कर शोभा वो मंगलसूत्र लेकर वह से चली गई पर भीमा के मन में संदेह के बीज बो गई क्युकी एक तो भीमा जनता था की शोभा झूट बोल रही है वो शाम को इस तरफ टहलने नहीं आई थी फिर उसने झूट क्यों बोलै.
वो जाती हुई शोभा को पीछे से देख कर उस रात वाली महिला के साथ उसका डील डॉल कपड़े करने की कोशिश कर रहा था. पर ऐसे अनुमान लगाना मुश्किल था अब एक hi शिक्षा था जो सच और झूट से पर्दा हटा सकता था और बता सकता था की उस रात वो महिला कौन थी और वो शिक्षा थी नेहा. भीमा ने फैसला कर लिया की मौका देख कर इस बारे में वो नेहा से hi पूछेगा.
और इधर नेहा शबाना के बाथरूम में चले जाने के बाद अपने कमरे से निकल कर सीधा विक्रम के कमरे की तरफ चल दी क्युकी विक्रम ने खुद उसे मिलने की इच्छा ज़ाहिर की थी. हलाकि विक्रम के मिलने के मतलब कुछ और था पर पर नेहा को यही लग रहा था की कल रात के बाद विक्रम सुबह सुबह एक बार फिर मूड में है इसीलिए उसे मिलने को बुला रहा है. नेहा ने विक्रम के कमरे में पहुंच कर इधर उधर देखा और जब उसे यकीन हो गया की कोई इस तरफ नहीं देख रहा तो नेहा ने विक्रम के कमरे में हल्का सा नॉक करा और बिचाने दरवाज़ा अंदर से खुला था और नेहा के पुश करते hi दरवाज़ा खुल गया और नेहा फुर्ती से अंदर दाखिल हो गई और उसने दरवाज़ा भिड़ा दिया पर सिटकनी लगाना वो भूल गई.
उसने कमरे में यहाँ वह देखा पर विक्रम कही नहीं दिखा पर बाथरूम से शावर चलने की आवाज़ आ रही थी यानि विक्रम अंदर था.
नेहा ने अपना टॉप शार्ट और इनरगार्मेंटस उतर कर वही बिस्तर के किनारे फर्श पर दाल दिए और बाथरूम के दरवाज़े पर नॉक नॉक करा.
विक्रम: कौन है मई नाहा रहा हु.
नेहा ने दुबारा नॉक करा.
विक्रम: कौन है बे लालू क्या तू है नाहा रहा हु अभी.
नेहा ने फिर नॉक करा. इस बार झल्लाते हुए विक्रम ने दरवाज़ा को हल्का सा खोलकर सर बहार निकल कर बहार झक कर देखा. और विक्रम के दरवाज़ा खोलकर बहार झाकते hi नेहा दरवाज़े को धक्का देकर सीधा बाथरूम के अंदर दाखिल होकर विक्रम के सामने आ कड़ी हुई.
नेहा को यु अपने सामने अपने कमरे में अपने बाथरूम में मादरजात पूरा नंगा खड़ा देख विक्रम एकदम शॉकेड रह गया. विक्रम भी पूरा नंगा था और उसका बारिश में भीगा बदन नेहा की पहले से बड़ी उत्तेजना को और बड़ा रहा था.
विक्रम: टी टी टी तू तुम यहाँ इस हालत में तुम यहाँ क्या कर रही हो और ये तुम्हारे कपडे कहा है.
नेहा ने अपनी बहे विक्रम के गले में दाल दी: माय माय क्या बात है आप बिना कपड़ो के नहाते हो मुझे बता देते तो मई कंपनी देने आ जाया करती मुझे भी बिना कपड़ो के नहाना बहुत अच्छा लगता है.
विक्रम: तुम अभी यहाँ कर रही हो.
नेहा: जिज्जाजी आप hi ने तो बुलाया था मुझे बड़ी ुरगेंटली तो मुझे लगा शायद रात की चुदाई का हैंगओवर उतरने के लिए थोड़ा नीबूपानी चाहिए तो मई चली आई.
विक्रम: मैंने सिर्फ बात करने के लिए बुलाया था और कपडे कहा है तुम्हारे.
नेहा: कपडे वो तो बहार बिस्तर के पास पड़े है कोई नंगी थोड़ी न चली आई hi अपने कमरे से यहाँ तक.
नेहा ने विक्रम का लुंड अपने हाथो में भर लिया और उसे आहिस्ता आहिस्ता सहलाने लगी: और बात तो आप मुँह से करोगे और मई अपने कान से सुनुँगी. मेरा मुँह और आपका ये पाइथन तो फ्री रहेगा तब तक मई अपने होठो की गर्माहट से इसका हैंगओवर उतर दूँगी.
नेहा विक्रम के सामने घुटनो के बल बैठ गई. विक्रम सब देखता hi रह गया और उसने नेहा को क्यों बुलाया था वो बात तो किनारे हो गई फिलहाल तो उसके लुंड की नसों पर फिसलती नेहा की उंगलियों में वो एक बार फिर बहकने को मजबूर हो गया. पर विक्रम को इस बात का दर भी था की कही कोई आ न जाए.
विक्रम: सुनो तुम दरवाज़ा बंद करके आई हो न.
नेहा विक्रम के लुंड में फड़कती उसकी नसों घूरते हुए: हम्म
नेहा ने विक्रम को ध्यान से सुना भी नहीं क्युकी उसका ध्यान तो पूरी तरह उसके झटके कहते लुंड पर था. और विक्रम के देखते देखते नेहा ने अपने होंठो को खोलकर उसके लुंड को अपने मुँह के अंदर ले लिया.
नेहा की सासो की गर्माहट अपने लुंड पर महसूस होते विक्रम को नेहा से क्या कहना था वो सब तो वो पूरी तरह भूल गया और उसके हाथ खुद बा खुद नेहा के बालो पर पहुंच गए और विक्रम ने नेहा की ज़ुल्फो को अपनी मुट्ठी में भींच लिया और जोश में आकर नेहा के सर पर पीछे से दवाव दाल कर अपना लुंड जो सुबह सुबह के जोश और नेहा के कामुक अंदाज़ की वजह से पूरी तरह फूल चूका था उसे नेहा के मुँह में अंदर तक ठूस दिया.
नेहा भी विक्रम का उन्माद देख कर थोड़ा उनकंफर्टबले हो गई पर विक्रम के हाथो का दबाव इतना ज्यादा था की वो लुंड अपने मुँह से निकल नहीं पा रही थी. अचानक बहार कमरे में दरवाज़ा खुलने की आवाज़ हुई. कोई बड़ी ज़ोर से दरवाज़ा खोल कर विक्रम के कमरे में दाखिल हुआ था. जब उसने विक्रम का नाम पुकारा तो उस आवाज़ को सुन कर विक्रम का सारा जोश एक पल में काफूर हो गया उसके चेहरे पर हवइया उड़ने लगी क्युकी वो आवाज़ शोभा की थी.
भीमा चौंक गया की ये मंगलसूत्र किसका हो सकता है और वो भी उस जगह पर पड़ा हुआ जहा उसने नेहा को छोड़ा था. क्युकी पहले तो इस तरफ कोई महिला आती नहीं और नेहा शादीशुदा नहीं तो ये मंगलसूत्र उसका हो नहीं सकता फिर ये किसका हो सकता है. इस मंगलसूत्र ने भीमा को सोच में दाल दिया की क्या नेहा कल यहाँ मंगलसूत्र पेहेन कर आई थी पर क्यों या वो नेहा नहीं कोई और थी पर उसके कपडे तो एकदम नेहा जैसे थे और वैसे कपडे तो केवल नेहा पहनती है तो कुआ कोई और कल नेहा जैसे कपडे पेहेन कर आया था पर अगर वो कोई और होता तो इतना सब होने के दौरान वो मुझे एक बार रोकता पर उसने तो मेरा पूरा साथ दिया. शायद मई hi कुछ ज्यादा सोच रहा हु वो नेहा hi होगी ये मंगलसूत्र कल रात में नहीं बल्कि उससे पहले कभी किसी का गिरा होगा यहाँ जो आज मुझे मिला. भीमा ने वो मंगलसूत्र अपने पास रख लिया.
इधर शोभा के कमरे में आशा के जाने के बाद शोभा नहाने चली गई और नहाधो कर जब तैयार होने लगी तब उसका ध्यान अपने मंगलसूत्र पर गया जो गायब था. उसने पूरा कमरा हर दर्ज बिस्तर हर जगह देख लिया पर मंगलसूत्र उसे कही नहीं मिला. वो सोच में डूब गई की कहा जा सकता है मंगलसूत्र. कल रात तक तो वो मेरे पास hi था मई उसे पेहेन कर hi विक्रम से मिलने गई थी. ये ख्याल आते hi उसे समझ आ गया की हो न हो वो मंगलसूत्र कल रात उस आम के बाघ विक्रम के साथ वो सब करते टाइम वही गिर गया होगा. वो मंगलसूत्र तो मेरे सुहाग की निशानी है जबकि हमारी शादीशुदा ज़िन्दगी पहली hi इतनी मुश्किल भरी है ऐसे में वो मंगलसूत्र खोना ठीक नहीं. अगर वो वही गिरा है तो अभी शायद वही पड़ा हो मुझे एक बार वह जाकर देखना चाहिए.
शोभा अपने कपडे पेहेन कर हवेली से निकलकर इधर उधर देखते हुए सीधा उस आम के बाग़ की तरफ चलदी. भीमा ने शोभा को उस आम के बाग़ की तरफ जाते देखा और उसके मन ख्याल आया की कही वो मंगलसूत्र वाली औरत शोभा hi तो नहीं. शोभा का ख्याल आते hi उसके ज़हन में उस दिन वाली घटना ताज़ा हो गई जब शोभा ने उसके लिंग पर तिलक करा था. और ये जानते हुए भी की वो अपनी मालकिन इस गांव के सबसे रसूखदार शक्स की बहु के बारे में सोच रहा है फिर भी उसके लुंड में तनाव आ गया. शोभा आम के बाग़ में दाखिल हो गई और भीमा अपनी झोपडी में बैठा सोचता hi रह गया. उसने अपना सर पीटा की वो भी क्या सोच रहा वो एक नै नवेली दुल्हन है जिसकी अभी सुहागरात भी नहीं हुई है ऐसे में वो क्यों आधी रात में यहाँ ऐसे छोटे छोटे कपडे पहनकर एक जमादार से छुड़वाने आएगी. क्या मई कुछ भी सोच रहा हु.
पर फिर भी उसका दिमाग एक बार उसे जाकर देखने को कह रहा था की एक बार जाकर देखना चाहिए की ये नै नवेली दुल्हन यु सुबह सुबह ये आम के बाग़ में क्या करने आई है. और ये सोचते hi उसके कदम खुद बा खुद उस बाग़ की तरफ बाद चले. शायद वो उस तालाब या उस कॉटेज की तरफ गई हो जो तालाब के दूसरी तरफ है. पर बाग़ के अंदर पहुंच कर उसकी आँखे फटी की फटी रह गई क्युकी सामने शोभा कही और न जाकर ठीक उसी जगह ज़मीन पर बैठी कुछ ढून्ढ रही थी जहा कल रात उसने चुदाई की. न चाहते हुए भी उसका दिल ये सोचने को मजबूर हो गया की कही वो औरत जिसे उसने कल रात छोड़ा वो शोभा तो नहीं थी. उसका दिल उसे यही कह रहा था की भला ऐसा कैसे हो सकता है पर जो सामने दिख रहा था उसे भी इग्नोर नहीं किया जा सकता था. पुरे दिन में उसने एक बार भी शोभा को यहाँ आते नहीं देखा फिर शोभा उसी जगह पर क्या ढून्ढ रही है.
उसके लिए ये पता लगाना ज़रूरी हो गया था इसलिए वो भाग कर अपनी झोपडी में गया और वो मंगलसूत्र उठा लाया और आहिस्ता आहिस्ता ज़मीन में यहाँ वह ढूंढ़ती शोभा की तरफ बढ़ने लगा. शोभा के एकदम करीब पहुंच कर उसने खस्ने की आवाज़ निकली जिसपर शोभा ने पीछे पलट कर देखा. शोभा के पीछे देखते hi भीमा ने वो मंगलसूत्र आगे कर दिया. वो मंगलसूत्र देख कर शोभा की आँखे चमक उठी और उसने झट से भीमा के हाथो से वो मंगलसूत्र लपक लिया. मंगलसूत्र तो शोभा को मिल गया पर भीमा पर नज़र पड़ते hi शोभा थोड़ा असहज हो गई. एक तो वो घनी झाड़ियों के बीच एक हट्टे काटते जमादार के सामने अकेली कड़ी थी ऊपर से ये वही शिक्षा जिसके लुंड पर कुछ दिनों पहले पुरे गांव के सामने उसने तिलक करा था तो ऐसे में उसका असहज होना स्वाभाविक था. और उसपर भी जब इंसान के दिल में चोर होता है तो उसे जल्दी जवाब नहीं सूझता और शोभा को भी ये समझ नहीं आ रहा था की ये मंगलसूत्र यहाँ कैसे आया इसका क्या जवाब दे.
शोभा हकलाते हुए: वो वो मई मई कल शाम को इधर तालाब के पास टहलने आई थी तब ये यही कही गिर गया था शुक्रिया ये देने के लिए.
इतना कह कर शोभा वो मंगलसूत्र लेकर वह से चली गई पर भीमा के मन में संदेह के बीज बो गई क्युकी एक तो भीमा जनता था की शोभा झूट बोल रही है वो शाम को इस तरफ टहलने नहीं आई थी फिर उसने झूट क्यों बोलै.
वो जाती हुई शोभा को पीछे से देख कर उस रात वाली महिला के साथ उसका डील डॉल कपड़े करने की कोशिश कर रहा था. पर ऐसे अनुमान लगाना मुश्किल था अब एक hi शिक्षा था जो सच और झूट से पर्दा हटा सकता था और बता सकता था की उस रात वो महिला कौन थी और वो शिक्षा थी नेहा. भीमा ने फैसला कर लिया की मौका देख कर इस बारे में वो नेहा से hi पूछेगा.
और इधर नेहा शबाना के बाथरूम में चले जाने के बाद अपने कमरे से निकल कर सीधा विक्रम के कमरे की तरफ चल दी क्युकी विक्रम ने खुद उसे मिलने की इच्छा ज़ाहिर की थी. हलाकि विक्रम के मिलने के मतलब कुछ और था पर पर नेहा को यही लग रहा था की कल रात के बाद विक्रम सुबह सुबह एक बार फिर मूड में है इसीलिए उसे मिलने को बुला रहा है. नेहा ने विक्रम के कमरे में पहुंच कर इधर उधर देखा और जब उसे यकीन हो गया की कोई इस तरफ नहीं देख रहा तो नेहा ने विक्रम के कमरे में हल्का सा नॉक करा और बिचाने दरवाज़ा अंदर से खुला था और नेहा के पुश करते hi दरवाज़ा खुल गया और नेहा फुर्ती से अंदर दाखिल हो गई और उसने दरवाज़ा भिड़ा दिया पर सिटकनी लगाना वो भूल गई.
उसने कमरे में यहाँ वह देखा पर विक्रम कही नहीं दिखा पर बाथरूम से शावर चलने की आवाज़ आ रही थी यानि विक्रम अंदर था.
नेहा ने अपना टॉप शार्ट और इनरगार्मेंटस उतर कर वही बिस्तर के किनारे फर्श पर दाल दिए और बाथरूम के दरवाज़े पर नॉक नॉक करा.
विक्रम: कौन है मई नाहा रहा हु.
नेहा ने दुबारा नॉक करा.
विक्रम: कौन है बे लालू क्या तू है नाहा रहा हु अभी.
नेहा ने फिर नॉक करा. इस बार झल्लाते हुए विक्रम ने दरवाज़ा को हल्का सा खोलकर सर बहार निकल कर बहार झक कर देखा. और विक्रम के दरवाज़ा खोलकर बहार झाकते hi नेहा दरवाज़े को धक्का देकर सीधा बाथरूम के अंदर दाखिल होकर विक्रम के सामने आ कड़ी हुई.
नेहा को यु अपने सामने अपने कमरे में अपने बाथरूम में मादरजात पूरा नंगा खड़ा देख विक्रम एकदम शॉकेड रह गया. विक्रम भी पूरा नंगा था और उसका बारिश में भीगा बदन नेहा की पहले से बड़ी उत्तेजना को और बड़ा रहा था.
विक्रम: टी टी टी तू तुम यहाँ इस हालत में तुम यहाँ क्या कर रही हो और ये तुम्हारे कपडे कहा है.
नेहा ने अपनी बहे विक्रम के गले में दाल दी: माय माय क्या बात है आप बिना कपड़ो के नहाते हो मुझे बता देते तो मई कंपनी देने आ जाया करती मुझे भी बिना कपड़ो के नहाना बहुत अच्छा लगता है.
विक्रम: तुम अभी यहाँ कर रही हो.
नेहा: जिज्जाजी आप hi ने तो बुलाया था मुझे बड़ी ुरगेंटली तो मुझे लगा शायद रात की चुदाई का हैंगओवर उतरने के लिए थोड़ा नीबूपानी चाहिए तो मई चली आई.
विक्रम: मैंने सिर्फ बात करने के लिए बुलाया था और कपडे कहा है तुम्हारे.
नेहा: कपडे वो तो बहार बिस्तर के पास पड़े है कोई नंगी थोड़ी न चली आई hi अपने कमरे से यहाँ तक.
नेहा ने विक्रम का लुंड अपने हाथो में भर लिया और उसे आहिस्ता आहिस्ता सहलाने लगी: और बात तो आप मुँह से करोगे और मई अपने कान से सुनुँगी. मेरा मुँह और आपका ये पाइथन तो फ्री रहेगा तब तक मई अपने होठो की गर्माहट से इसका हैंगओवर उतर दूँगी.
नेहा विक्रम के सामने घुटनो के बल बैठ गई. विक्रम सब देखता hi रह गया और उसने नेहा को क्यों बुलाया था वो बात तो किनारे हो गई फिलहाल तो उसके लुंड की नसों पर फिसलती नेहा की उंगलियों में वो एक बार फिर बहकने को मजबूर हो गया. पर विक्रम को इस बात का दर भी था की कही कोई आ न जाए.
विक्रम: सुनो तुम दरवाज़ा बंद करके आई हो न.
नेहा विक्रम के लुंड में फड़कती उसकी नसों घूरते हुए: हम्म
नेहा ने विक्रम को ध्यान से सुना भी नहीं क्युकी उसका ध्यान तो पूरी तरह उसके झटके कहते लुंड पर था. और विक्रम के देखते देखते नेहा ने अपने होंठो को खोलकर उसके लुंड को अपने मुँह के अंदर ले लिया.
नेहा की सासो की गर्माहट अपने लुंड पर महसूस होते विक्रम को नेहा से क्या कहना था वो सब तो वो पूरी तरह भूल गया और उसके हाथ खुद बा खुद नेहा के बालो पर पहुंच गए और विक्रम ने नेहा की ज़ुल्फो को अपनी मुट्ठी में भींच लिया और जोश में आकर नेहा के सर पर पीछे से दवाव दाल कर अपना लुंड जो सुबह सुबह के जोश और नेहा के कामुक अंदाज़ की वजह से पूरी तरह फूल चूका था उसे नेहा के मुँह में अंदर तक ठूस दिया.
नेहा भी विक्रम का उन्माद देख कर थोड़ा उनकंफर्टबले हो गई पर विक्रम के हाथो का दबाव इतना ज्यादा था की वो लुंड अपने मुँह से निकल नहीं पा रही थी. अचानक बहार कमरे में दरवाज़ा खुलने की आवाज़ हुई. कोई बड़ी ज़ोर से दरवाज़ा खोल कर विक्रम के कमरे में दाखिल हुआ था. जब उसने विक्रम का नाम पुकारा तो उस आवाज़ को सुन कर विक्रम का सारा जोश एक पल में काफूर हो गया उसके चेहरे पर हवइया उड़ने लगी क्युकी वो आवाज़ शोभा की थी.