A wedding ceremony in village - Page 15 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

A wedding ceremony in village

हवेली में सुबह उठाकर सब नौकर चाकर अपनी नहावा धोई में लग गए थे. भीमा भी कल रात के ज़बरदस्त चुआड़ी के बाद फ्रेश होने के लिए अपनी झोपडी के पीछे बने उसी बाग़ में चला गया जहा वो हर रोज़ फ्रेश होने अत था. वह फ्रेश होने के बाद उसकी नज़र ऊनि झाड़ियों की तरफ चली गई जहा उसने अपने जीवन की पहली चुदाई की थी वो भी एक हॉट शहरी लड़की की. और न जाने क्यों उसके कदम खुद बा खुद उसी तरफ बाद गए. वह वो उन्ही झाड़ियों में घुटनो के बल बैठ गया और वह की दबी हुई झाड़ियों वह पड़े उस खून के धब्बे को ढक कर कल रात के उस कामुक एहसास कल दुबारा महसूस करने लगा. अचानक घास के तिनको को सहलाते सहलाते उसके हाथ किसी चीज़ के टकराए. भीमा ने आँख खोल कर उस चीज़ को हाथ में उठाकर देखा तो वो एक मंगलसूत्र था एक सोने का मनागलसूत्र.

HijRm4PD_o.jpeg


भीमा चौंक गया की ये मंगलसूत्र किसका हो सकता है और वो भी उस जगह पर पड़ा हुआ जहा उसने नेहा को छोड़ा था. क्युकी पहले तो इस तरफ कोई महिला आती नहीं और नेहा शादीशुदा नहीं तो ये मंगलसूत्र उसका हो नहीं सकता फिर ये किसका हो सकता है. इस मंगलसूत्र ने भीमा को सोच में दाल दिया की क्या नेहा कल यहाँ मंगलसूत्र पेहेन कर आई थी पर क्यों या वो नेहा नहीं कोई और थी पर उसके कपडे तो एकदम नेहा जैसे थे और वैसे कपडे तो केवल नेहा पहनती है तो कुआ कोई और कल नेहा जैसे कपडे पेहेन कर आया था पर अगर वो कोई और होता तो इतना सब होने के दौरान वो मुझे एक बार रोकता पर उसने तो मेरा पूरा साथ दिया. शायद मई hi कुछ ज्यादा सोच रहा हु वो नेहा hi होगी ये मंगलसूत्र कल रात में नहीं बल्कि उससे पहले कभी किसी का गिरा होगा यहाँ जो आज मुझे मिला. भीमा ने वो मंगलसूत्र अपने पास रख लिया.

इधर शोभा के कमरे में आशा के जाने के बाद शोभा नहाने चली गई और नहाधो कर जब तैयार होने लगी तब उसका ध्यान अपने मंगलसूत्र पर गया जो गायब था. उसने पूरा कमरा हर दर्ज बिस्तर हर जगह देख लिया पर मंगलसूत्र उसे कही नहीं मिला. वो सोच में डूब गई की कहा जा सकता है मंगलसूत्र. कल रात तक तो वो मेरे पास hi था मई उसे पेहेन कर hi विक्रम से मिलने गई थी. ये ख्याल आते hi उसे समझ आ गया की हो न हो वो मंगलसूत्र कल रात उस आम के बाघ विक्रम के साथ वो सब करते टाइम वही गिर गया होगा. वो मंगलसूत्र तो मेरे सुहाग की निशानी है जबकि हमारी शादीशुदा ज़िन्दगी पहली hi इतनी मुश्किल भरी है ऐसे में वो मंगलसूत्र खोना ठीक नहीं. अगर वो वही गिरा है तो अभी शायद वही पड़ा हो मुझे एक बार वह जाकर देखना चाहिए.

JC1iZ4Py_o.jpeg


शोभा अपने कपडे पेहेन कर हवेली से निकलकर इधर उधर देखते हुए सीधा उस आम के बाग़ की तरफ चलदी. भीमा ने शोभा को उस आम के बाग़ की तरफ जाते देखा और उसके मन ख्याल आया की कही वो मंगलसूत्र वाली औरत शोभा hi तो नहीं. शोभा का ख्याल आते hi उसके ज़हन में उस दिन वाली घटना ताज़ा हो गई जब शोभा ने उसके लिंग पर तिलक करा था. और ये जानते हुए भी की वो अपनी मालकिन इस गांव के सबसे रसूखदार शक्स की बहु के बारे में सोच रहा है फिर भी उसके लुंड में तनाव आ गया. शोभा आम के बाग़ में दाखिल हो गई और भीमा अपनी झोपडी में बैठा सोचता hi रह गया. उसने अपना सर पीटा की वो भी क्या सोच रहा वो एक नै नवेली दुल्हन है जिसकी अभी सुहागरात भी नहीं हुई है ऐसे में वो क्यों आधी रात में यहाँ ऐसे छोटे छोटे कपडे पहनकर एक जमादार से छुड़वाने आएगी. क्या मई कुछ भी सोच रहा हु.

पर फिर भी उसका दिमाग एक बार उसे जाकर देखने को कह रहा था की एक बार जाकर देखना चाहिए की ये नै नवेली दुल्हन यु सुबह सुबह ये आम के बाग़ में क्या करने आई है. और ये सोचते hi उसके कदम खुद बा खुद उस बाग़ की तरफ बाद चले. शायद वो उस तालाब या उस कॉटेज की तरफ गई हो जो तालाब के दूसरी तरफ है. पर बाग़ के अंदर पहुंच कर उसकी आँखे फटी की फटी रह गई क्युकी सामने शोभा कही और न जाकर ठीक उसी जगह ज़मीन पर बैठी कुछ ढून्ढ रही थी जहा कल रात उसने चुदाई की. न चाहते हुए भी उसका दिल ये सोचने को मजबूर हो गया की कही वो औरत जिसे उसने कल रात छोड़ा वो शोभा तो नहीं थी. उसका दिल उसे यही कह रहा था की भला ऐसा कैसे हो सकता है पर जो सामने दिख रहा था उसे भी इग्नोर नहीं किया जा सकता था. पुरे दिन में उसने एक बार भी शोभा को यहाँ आते नहीं देखा फिर शोभा उसी जगह पर क्या ढून्ढ रही है.

उसके लिए ये पता लगाना ज़रूरी हो गया था इसलिए वो भाग कर अपनी झोपडी में गया और वो मंगलसूत्र उठा लाया और आहिस्ता आहिस्ता ज़मीन में यहाँ वह ढूंढ़ती शोभा की तरफ बढ़ने लगा. शोभा के एकदम करीब पहुंच कर उसने खस्ने की आवाज़ निकली जिसपर शोभा ने पीछे पलट कर देखा. शोभा के पीछे देखते hi भीमा ने वो मंगलसूत्र आगे कर दिया. वो मंगलसूत्र देख कर शोभा की आँखे चमक उठी और उसने झट से भीमा के हाथो से वो मंगलसूत्र लपक लिया. मंगलसूत्र तो शोभा को मिल गया पर भीमा पर नज़र पड़ते hi शोभा थोड़ा असहज हो गई. एक तो वो घनी झाड़ियों के बीच एक हट्टे काटते जमादार के सामने अकेली कड़ी थी ऊपर से ये वही शिक्षा जिसके लुंड पर कुछ दिनों पहले पुरे गांव के सामने उसने तिलक करा था तो ऐसे में उसका असहज होना स्वाभाविक था. और उसपर भी जब इंसान के दिल में चोर होता है तो उसे जल्दी जवाब नहीं सूझता और शोभा को भी ये समझ नहीं आ रहा था की ये मंगलसूत्र यहाँ कैसे आया इसका क्या जवाब दे.

D5P6s03F_o.jpeg


शोभा हकलाते हुए: वो वो मई मई कल शाम को इधर तालाब के पास टहलने आई थी तब ये यही कही गिर गया था शुक्रिया ये देने के लिए.

इतना कह कर शोभा वो मंगलसूत्र लेकर वह से चली गई पर भीमा के मन में संदेह के बीज बो गई क्युकी एक तो भीमा जनता था की शोभा झूट बोल रही है वो शाम को इस तरफ टहलने नहीं आई थी फिर उसने झूट क्यों बोलै.

JfgMgPeo_o.jpeg


वो जाती हुई शोभा को पीछे से देख कर उस रात वाली महिला के साथ उसका डील डॉल कपड़े करने की कोशिश कर रहा था. पर ऐसे अनुमान लगाना मुश्किल था अब एक hi शिक्षा था जो सच और झूट से पर्दा हटा सकता था और बता सकता था की उस रात वो महिला कौन थी और वो शिक्षा थी नेहा. भीमा ने फैसला कर लिया की मौका देख कर इस बारे में वो नेहा से hi पूछेगा.

i10Me8Vo_o.jpeg


और इधर नेहा शबाना के बाथरूम में चले जाने के बाद अपने कमरे से निकल कर सीधा विक्रम के कमरे की तरफ चल दी क्युकी विक्रम ने खुद उसे मिलने की इच्छा ज़ाहिर की थी. हलाकि विक्रम के मिलने के मतलब कुछ और था पर पर नेहा को यही लग रहा था की कल रात के बाद विक्रम सुबह सुबह एक बार फिर मूड में है इसीलिए उसे मिलने को बुला रहा है. नेहा ने विक्रम के कमरे में पहुंच कर इधर उधर देखा और जब उसे यकीन हो गया की कोई इस तरफ नहीं देख रहा तो नेहा ने विक्रम के कमरे में हल्का सा नॉक करा और बिचाने दरवाज़ा अंदर से खुला था और नेहा के पुश करते hi दरवाज़ा खुल गया और नेहा फुर्ती से अंदर दाखिल हो गई और उसने दरवाज़ा भिड़ा दिया पर सिटकनी लगाना वो भूल गई.

उसने कमरे में यहाँ वह देखा पर विक्रम कही नहीं दिखा पर बाथरूम से शावर चलने की आवाज़ आ रही थी यानि विक्रम अंदर था.

yKUBTuv1_o.jpeg


नेहा ने अपना टॉप शार्ट और इनरगार्मेंटस उतर कर वही बिस्तर के किनारे फर्श पर दाल दिए और बाथरूम के दरवाज़े पर नॉक नॉक करा.

विक्रम: कौन है मई नाहा रहा हु.

नेहा ने दुबारा नॉक करा.

विक्रम: कौन है बे लालू क्या तू है नाहा रहा हु अभी.

नेहा ने फिर नॉक करा. इस बार झल्लाते हुए विक्रम ने दरवाज़ा को हल्का सा खोलकर सर बहार निकल कर बहार झक कर देखा. और विक्रम के दरवाज़ा खोलकर बहार झाकते hi नेहा दरवाज़े को धक्का देकर सीधा बाथरूम के अंदर दाखिल होकर विक्रम के सामने आ कड़ी हुई.

नेहा को यु अपने सामने अपने कमरे में अपने बाथरूम में मादरजात पूरा नंगा खड़ा देख विक्रम एकदम शॉकेड रह गया. विक्रम भी पूरा नंगा था और उसका बारिश में भीगा बदन नेहा की पहले से बड़ी उत्तेजना को और बड़ा रहा था.

dfz2bI2j_o.jpeg


विक्रम: टी टी टी तू तुम यहाँ इस हालत में तुम यहाँ क्या कर रही हो और ये तुम्हारे कपडे कहा है.

नेहा ने अपनी बहे विक्रम के गले में दाल दी: माय माय क्या बात है आप बिना कपड़ो के नहाते हो मुझे बता देते तो मई कंपनी देने आ जाया करती मुझे भी बिना कपड़ो के नहाना बहुत अच्छा लगता है.

विक्रम: तुम अभी यहाँ कर रही हो.

नेहा: जिज्जाजी आप hi ने तो बुलाया था मुझे बड़ी ुरगेंटली तो मुझे लगा शायद रात की चुदाई का हैंगओवर उतरने के लिए थोड़ा नीबूपानी चाहिए तो मई चली आई.

विक्रम: मैंने सिर्फ बात करने के लिए बुलाया था और कपडे कहा है तुम्हारे.

नेहा: कपडे वो तो बहार बिस्तर के पास पड़े है कोई नंगी थोड़ी न चली आई hi अपने कमरे से यहाँ तक.

नेहा ने विक्रम का लुंड अपने हाथो में भर लिया और उसे आहिस्ता आहिस्ता सहलाने लगी: और बात तो आप मुँह से करोगे और मई अपने कान से सुनुँगी. मेरा मुँह और आपका ये पाइथन तो फ्री रहेगा तब तक मई अपने होठो की गर्माहट से इसका हैंगओवर उतर दूँगी.

नेहा विक्रम के सामने घुटनो के बल बैठ गई. विक्रम सब देखता hi रह गया और उसने नेहा को क्यों बुलाया था वो बात तो किनारे हो गई फिलहाल तो उसके लुंड की नसों पर फिसलती नेहा की उंगलियों में वो एक बार फिर बहकने को मजबूर हो गया. पर विक्रम को इस बात का दर भी था की कही कोई आ न जाए.

विक्रम: सुनो तुम दरवाज़ा बंद करके आई हो न.

नेहा विक्रम के लुंड में फड़कती उसकी नसों घूरते हुए: हम्म

नेहा ने विक्रम को ध्यान से सुना भी नहीं क्युकी उसका ध्यान तो पूरी तरह उसके झटके कहते लुंड पर था. और विक्रम के देखते देखते नेहा ने अपने होंठो को खोलकर उसके लुंड को अपने मुँह के अंदर ले लिया.

pMnXxWrz_o.jpeg


नेहा की सासो की गर्माहट अपने लुंड पर महसूस होते विक्रम को नेहा से क्या कहना था वो सब तो वो पूरी तरह भूल गया और उसके हाथ खुद बा खुद नेहा के बालो पर पहुंच गए और विक्रम ने नेहा की ज़ुल्फो को अपनी मुट्ठी में भींच लिया और जोश में आकर नेहा के सर पर पीछे से दवाव दाल कर अपना लुंड जो सुबह सुबह के जोश और नेहा के कामुक अंदाज़ की वजह से पूरी तरह फूल चूका था उसे नेहा के मुँह में अंदर तक ठूस दिया.

LUzGCwDk_o.gif


नेहा भी विक्रम का उन्माद देख कर थोड़ा उनकंफर्टबले हो गई पर विक्रम के हाथो का दबाव इतना ज्यादा था की वो लुंड अपने मुँह से निकल नहीं पा रही थी. अचानक बहार कमरे में दरवाज़ा खुलने की आवाज़ हुई. कोई बड़ी ज़ोर से दरवाज़ा खोल कर विक्रम के कमरे में दाखिल हुआ था. जब उसने विक्रम का नाम पुकारा तो उस आवाज़ को सुन कर विक्रम का सारा जोश एक पल में काफूर हो गया उसके चेहरे पर हवइया उड़ने लगी क्युकी वो आवाज़ शोभा की थी.

2gCLhG9a_o.jpeg
 
QJqO2coz_o.jpeg


शोभा: विक्रम विक्रम क्या बाथरूम में हो.

विक्रम की पत्नी शोभा बाथरूम के बहार कड़ी उसका नाम पुकार रही थी और बाथरूम के अंदर वो नंगा खड़ा अपनी शादी में शामिल होने आई अपनी बीवी की सहेली नेहा से अपना लुंड चुसवा रहा था. विक्रम के दिल की धड़कने हार्सपावर की स्पीड से चल रही थी और नेहा के सर से भी उसके पकड़ ढीली पद गई. शोभा उसका नाम पुकारे जा रही थी और उसे समझ नहीं आ रहा था वो क्या करे. विक्रम ने एक नज़र नीचे नेहा को देखा जिसे इतनी टेंस सिचुएशन में विक्रम की हालत पर हसी आ रही थी. विक्रम ने नेहा को गुस्से में घूरा तो नेहा ने विक्रम को हाथ से रिलैक्स रहने का इशारा करा और अपनी जीभ निकल कर उसके लुंड को ऊपर से नीचे तक चाट लिया. पर विक्रम में सरे एक्ससिटेमेंट की तो मदर सिस्टर हो गई थी. फाइनली उसने खुद को रिलैक्स करते हुए शोभा को जवाब दिया क्युकी ज्यादा देर वो चुप नहीं रह सकता था.

विक्रम: है है मई बाथरूम में हु अभी थोड़ी देर में अत हु.

qP1b78XO_o.gif


इधर नीचे नेहा ने एक बार फिर विक्रम के लुंड को अपने मुँह में भर लिया अपने ब्लोजॉब की साडी टेक्निक्स यहाँ विक्रम के लुंड पर आजमाने लगी क्युकी बीवी की मौजूदगी में उसके पति के लुंड को चूसने में उसे एक अलग hi फंतासी मिल रही थी. उधर विक्रम को बाथरूम में नहाते देख कर शोभा भी एक्ससिटेड हो गई और बाथरूम के दरवाज़े के एकदम करीब आ गई.

शोभा: आप अंदर है नाहा रहे है क्या मई भी अंदर कंपनी देने.

विक्रम की तो सिटी पित्ती गम हो गई पर नेहा को जैसे कोई फ़र्क़ hi नहीं पद रहा था वो बदस्तूर विक्रम के लुंड को चूसने चाटने में मगन थी.

विक्रम: कैसी बात कर रही हो जान बस आज का hi दिन तो बचा है काट लो. शोभा को विक्रम की बात समझ नहीं आई की इतना सब तो हो गया उनके बीच अब क्या एक दिन काटना है. इधर बाथरूम के अंदर अपने लुंड की नसों पर नेहा की जीभ की सरसराहट ने विक्रम को ब्वाला सा कर दिया था वो बड़ी मुश्किल से अपनी ाहो को मुँह पर हाथ रख कर कण्ट्रोल करे हुए था ऐसे में शोभा को बातो को ठीक से सुन्ना समझना और फिर उनका जवाब देना भी मुश्किल क्युकी उसका ध्यान तो दो तरफ बता हुआ था.

शोभा: अब बचा hi क्या काटने को.

विक्रम हफ्ते हुए: क्या कह रही हो बस आज के दिन रुक जाओ कल तो वैसे भी हमारी सुहागरात होनी है.

शोभा: अच्छा समझी तुम रात के लिए अपनी एनर्जी बचा कर रखना चाहते हो.

विक्रम हफ्ते हुए: है है यही बात है बिलकुल सही पकड़ा यही बात है कल रात को अपनी सुहागरात के लिए अपनी साडी एनर्जी बचा कर रखना चाहता हु ताकि कल रात को मुझे और तुम्हे ज्यादा मज़ा आए.

नीचे नेहा ने विक्रम के लुंड को चूसते चूसते उसकी बॉल्स को भी अपने मुँह में भर लिया और अपने थूक से उन्हें ऊपर से नीचे तक गीला करने लगी. विक्रम का तो उत्तेजना के मरे बुरा हाल हो रहा था उसकी टाँगे लड़खड़ा रही थी पर वो बाथरूम की दीवारों को थामे किसी तरह खड़ा था.

शोभा: ठीक है चलो माँ ली तुम्हारी बात आज के लिए तुंहारी छूती क्युकी मई कल रात का मक्सा ख़राब नहीं करना चाहती पर इसके बदले में तुम्हे भी मेरी एक बात माननी होगी.

विक्रम का तो उत्तेजना के मरे बुरा उसका मुँह पूरा खुला था नेहा को पता चल गया था की. विक्रम अपने क्लाइमेक्स के करीब उसने अपने होंठो की स्पीड बड़ा दी और तेज़ तेज़ अपने होंठो को उसके लुंड पर आगे पीछे करने लगी.

शोभा: क्या हुआ तुमने जवाब नहीं दिया.

विक्रम हफ्ते हुए: है क्या हुआ.

शोभा: तुम इतना हाफ क्यों रहे हो.

विक्रम: है नहीं तो वो वो पानी ज्यादा ठंडा है न.

शोभा: ू, तो बोलो मेरी एक बात मानोगी.

विक्रम: क्या बात बोलो.

शोभा: वो दरअसल कल रात जब हमने वो सब करा तो मेरा मंगलसूत्र खुलकर वही गिर गया था अच्छा हुआ मिल गया वर्ण बड़ा अपशगुन हो जाता. पर अब मई चाहती हु की तुम अपने हाथो से ये मंगलसूत्र मुझे पहनाओ वो भी अभी बहार आकर.

इसी पल जब शोभा ये बात बोल रही थी विक्रम अपने क्लाइमेक्स पर पहुंच गया उसनर नेहा ने सर अपने लुंड पर कास कर दबा लिया अपने लुंड का पूरा लावा उसके मुँह के अंदर hi खाली करना शुरू कर दिया. अपने चरमसुख के उन्माद में विक्रम ने वो सुना hi नहीं जो शोभा ने उसे कहा वो तो अपने लुंड से निकलते वीर्य की एक एक बूँद बस नेहा के मुँह में खली कर देने को ललित था.

YlRLy3LD_o.gif


शोभा: बोलो पहनाओगे न ये मंगलसूत्र तुम अपने हाथो से.

तब तक विक्रम अपने वीर्य की एक एक बूँद नेहा के मुँह के अंदर खली कर चूका था और नेहा के कंधे का सहारा लिए हुए और गहरी गहरी सासे ले रहा था. और नेहा एक हाई क्लास कॉलगर्ल की तरह उसका सारा वीर्य पी गई और इतना hi नहीं उसका सारा वीर्य पीने के बाद उसके लुंड के इर्दगिर्द लगा सारा वीर्य भी चाट चाट कर साफ़ करने लगी.

3caSsC1R_o.gif


शोभा: बोलो जवाब दो.

विक्रम: है क्या बोलै तुमने.

शोभा: तुम कर क्या रहे हो मुझे सुन नहीं रहे.

विक्रम: ओह वो दरअसल मेरे कान में साबुन लगा था वो साफ़ कर रहा था तुम बोलो क्या कह रही थी.

शोभा: अरे यही की मेरा मंगलसूत्र खुल गया था कल रात तो मई चाहती हु तुम अपने हाथो से इसे मुझे पहनाओ अभी.

विक्रम: बस इतनी सी बात तुम अपने कमरे में चलो मई नाहा कर अत हु फिर पहना दूंगा.

शोभा: नहीं अभी मतलब अभी तुम नाहा लो मई तब तक बिस्तर पर बैठ कर तुम्हारा इंतज़ार करती हु.

अचानक विक्रम को याद आया की नेहा ने अपने कपडे वही बिस्तर के करीब फर्श लार डाले है अगर शोभा ने वो कपडे देख लिए तो कही वो बाथरूम के अंदर आकर न देख ले. विक्रम ने गुस्से में नेहा की तरफ देखते हुए होंठो के इशारे से कपडे बोलै और जल्दी से वही तंगी तौलिया को खींच कर अपनी कमर पर लपेटा और नेहा को वही रुकने का इशारा करके खुद जल्दी से बाथरूम खोलकर बहार आ गया और इससे पहले की शोभा नेहा के कपड़ो तक पहुँचती वो खुद शोभा के सामने आ गया. विक्रम को यु बस एक तौलिया में अपने सामने खड़ा देख शोभा ने बड़े इरोटिक अंदाज़ में अपनी जीभ कल अपने होंठो पर फेर लिया.

शोभा: वाओ क्या बॉडी हज मेरे हुब्बी की मन तो करता है साडी एनर्जी आज hi उसे करवाडु.

विक्रम: जान बस आज भर की बात और है और देखो दीदी जीजाजी लालू कोई भी आ सकता है अच्छा नहीं लगता है वो सोचेंगे यहाँ पापा हमारे लिए इतना सब कर रहे और हम एक दिन का साबरा नहीं रख पा रहे.

शोभा: हम्म ी थिंक ु र राइट पर तुम मुझे मंगलसूत्र तो पहना hi सकते हो.

विक्रम: है है लौ लौ पहना देता हु.

शोभा ने मंगलसूत्र विक्रम के हाथो में थमा दिया और खुद उसके सामने पीठ करके कड़ी हो गई. विक्रम ने वो मंगलसूत्र शोभा के गले में पहना दिया.

विक्रम: ठीक है चलो अभी जाओ मई भी तैयार हो जाऊ.

शोभा: तुम्हे बड़ी जल्दी है अपनी बीवी को भागने की. किसी गर्लफ्रेंड को छुपा रखा है क्या.

विक्रम: कैसी बात कर रही हो बोलने से पहले कुछ सोचा तो करो.

शोभा: अरे मज़ाक कर रही थी बाबा तुम तो बुरा मान गए.

विक्रम: देखो मई इसलिए कह रहा की कोई ये नही की बाप बेटे बहु के लिए इतना सब कर रहा और बेटे बहु को रोमांस से फुर्सत नहीं. मई नहीं चाहता लोग तुम पर सवाल उठाए.

शोभा: सॉरी यार कितना सोचते हो तुम सबके बारे में. Ok चलती हु एंड अब प्रॉमिस कल रात सीधे सुहागसेज पर hi मिलेंगे जब दुल्हन के लिबास में मई तुम्हारा इंतज़ार करुँगी.

U4NHdq0U_o.jpeg


विक्रम ने भी बड़े प्यार से शोभा के माथे को चूम लिया. शोभा भी एक प्यारी सी स्माइल देकर कमरे से बहार निकल गई. शोभा से बहार निकली hi थी की लालू जो विक्रम के कमरे की तरफ hi आ रहा था ने लॉबी से शोभा को कमरे से बहार निकलते देखा.

लालू: ओह भाभी जी विक्रम के कमरे से बेचारी की क्या किस्मत है शादी हुए आज आठ दिन हो गए और अब तक सुहागरात नहीं मन पाई अंदर से मरी जा रही होंगी छोड़ने के लिया. कल अपना भाई इतनी साडी तदाब दूप कर देगा. चलो अपने यात से तो मिल लू.

इधर लालू विक्रम के कमरे की तरफ बड़ा और इधर कमरे में विक्रम ने बाथरूम का दरवाज़ा खोल कर नेहा का हाथ खींच कर उसे बहार निकला. विक्रम बहुत गुस्से में था.

विक्रम: ये क्या बेवकूफी है मई पकड़ सकता था शोभा को सब पता चल जाता तो.

नेहा: सॉरी बेबी मुझे क्या पता था वो अचानक से कमरे में आ जाएगी.

अंदर कमरे में विक्रम और नेहा बात कर रहे थे और लालू उनके कमरे के दरवाज़े तक पहुंच गया पर अंदर से नेहा की आवाज़ सुनकर वो अंदर न जाकर वही दरवाज़े पर hi रुक कर उनकी बाते सुनने लगा.

विक्रम: दिमाग तो घुटने में है तुम्हारा तो सोचती कैसे. और जब वो कमरे में बाथरूम के बहार कड़ी तुम अंदर मेरा लुंड चूस रही थी.

बहार खड़े लालू का मुँह खुला का खुला रह गया: वाह अपना भाई तो सच में शेरदिल है बीवी कमरे में और बाथरूम में गर्लफ्रेंड से लुंड चुसवा लिया क्या बात है.

नेहा: सॉरी जान मई तुम्हारा हथियार देख कर थोड़ा एक्ससिटेड हो गई थी. वैसे तुम ितं गुस्सा हो रहे पर तुम्हारे कोबरा ने तो बड़ा एन्जॉय करा काफी टेस्टी जूस निकला.

विक्रम: अब फिलहाल जाओ यहाँ से.

नेहा: वैसर अब तो तुम्हारी बीवी चली गई है तो हमने जहा छोड़ा वह से कंटिन्यू कर सकते है.

विक्रम: नहीं फिलहाल मुझे कंटिन्यू नहीं करना अभी तुम जाओ यहाँ से हम रात में वही तालाब के किनारे मिलेंगे.

नेहा: Ok

BFa372Cl_o.jpeg


बहार खड़ा लालू: उह मतलब ये चक्कर काफी पहले से चल रहा और भाई ने अपने को बताया भी नहीं बड़े छुपे रुस्तम निकले तुम तो. वैसे मई शबाना के साथ क्या क्या कर रहा बताया तो मैंने भी नहीं. कोई न दोनों यार अपने अपने आइटम पर लगे है सबकी अपनी अपनी पसंद है अपने यार दुबली पतली हिरणी पसंद आई और अपने को दुधारू गाय. चल भाई लगा रह तू बाद में मिलते है.

qt3AQ0LN_o.jpeg


लालू वह से विक्रम से बिना मिले hi चला गया.

विक्रम: पर ध्यान रहे कल रात और आज की इस बात के बारे में भूल से भी शोभा को पता नहीं चलना चाहिए.

नेहा: Ok जिज्जाजी

और लालू के पीछे नेहा भी कमरे से निकल कर अपने कमरे में चली गई. पर विक्रम अभी तनाव में था की नेहा क्या आइटम लड़की है अगर गलती से भी शोभा बाथरूम के अंदर चली आती तो क्या होता क्या कहता मई उसे. विक्रम को यही लग रहा था की उसके और नेहा के बीच जो हुआ वो सिर्फ उसके और नेहा क्र बीच की बात है उसे पता भी नहीं था की अब इस बात के दो राज़दार है एक वो नकाबपोश स्ट्रेंजर और एक उसका अपना दोस्त लालू.

b4EfGVr8_o.jpeg
 
लखन सिंह की कोठी

9J9ZUGsS_o.jpeg


काका को नींद की गोलिया खाने गई गरिमा सीडी उतरने की जल्दी में अपनी कमर और घुटनो में मोच लगवा बैठी. और अब धीमे उसे दर्द का ज्यादा एहसास हो रहा था लेते लेते भी उसे 1 : 30 घंटे हो गए थे और ऐसे लेते रहने से ये दर्द ठीक होने वाला भी नहीं था. अब उसे जीतू की मालिश वाली बात याद आई की जीतू कुछ देर पहले कड़वा तेल लेकर आया था. शायद अगर वो जीतू से तेल से मालिश करवा ले तो दर्द में कुछ आराम मिल जाए. पर जीतू को कमरे में बुलाने से पहले कमरे की हालत ठीक करना भी ज़रूरी था और अपने अधनंगे बदन को ढकना भी. हलाकि जीतू तो मुझे पूरा नंगा भी देख चूका है पर इसका मतलब ये नहीं यही हर वक़्त उसके सामने रंडियो की तरह नंगी घूमती राहु. गरिमा ने हिम्मत करके बिस्तर की चद्दर को बदल दिया जिसपर काका के वीर्य के धब्बे थे यहाँ वह बिखरे कपड़ो को समते कर बाथरूम में फ़ेंक दिया. और हरिया की बीवी के कपड़ो से एक छोटी सी चड्डी और टाइट सा ब्लाउज पहनकर उसके ऊपर से एक सूती धोती पेहेन ली.

कमरे को ठीक थक करके गरिमा लड़खड़ाते हुए अपनी कमर को सहारा देते हुए दरवाज़े तक आई. कमरे से बहार निकलते hi उसे नीचे दिंनिंग हाल में फर्श पर पोछा मरता जीतू नज़र आ गया काका शायद किचन में थे. गरिमा ने ऊपर से hi जीतू को आवाज़ दी.

गरिमा: जीतू

MPmpp09G_o.jpeg


जीतू ऊपर देखते हुए: है दीदी आप उठ गई अब दर्द कैसा है आपका.

गरिमा: अभी आराम नहीं तुम वो कड़वा तेल लेकर आर थे न मालिश के लिए.

जीतू: है अपने सामने पिरवा कर लाया हु उसकी मालिश से आपका सारा दर्द ठीक हो जाएगा.

गरिमा: तो ले आओ वो तेल बहुत दर्द हो रहा.

जीतू: आप लेटो मई दो मिनट में आया.

गरिमा वही बिस्तर पर लेट गई और दो मिनट में जीतू भी वो तेल की शीशी लेकर गैमा के कमरे में आ गया. गरिमा उसके सामने आँखे बंद करे अपने बिस्तर पर लेती थी, गरिमा को यु बिस्तर पर लेता देख जीतू को परसो वो बरसात में गरिमा के साथ बिताया हुआ पल याद आ गया जब गरिमा उसके सामने बिना कपड़ो के थी और गरिमा ने उसके लुंड को अपने हाथ में लेकर झाड़ा भी था. वो पल याद करके hi जीतू का लुंड उसकी पतलून के अंदर झटके खाने लगा. जीतू ऊपर वाले से यही प्रार्थना कर रहा था की आज फिर कुछ ऐसा कर दे और इस गद्रे बदन वाली औरत को उसके सामने पूरा नंगा करदे.

4g2KTbax_o.jpeg


अचानक गरिमा ने आँखे खोली तो सामने गेट पर खड़े जीतू को देखा जो उसे hi घूर रहा था. गरिमा समझ गई की बाप बीटा दोनों ठरकी है और इस कोठी के ठरकी मर्दो ने मिलकर मुझे भी ठरकी बना दिया है.

गरिमा: अरे जीतू वह क्यों खड़े हो.

जीतू: जी वो दीदी मई ये कड़वा तेल लाया था आपकी मालिश के लिए.

गरिमा: तो वही गेट पर खड़े खड़े मालिश कर डोज क्या. इधर आओ मेरे पास और है दरवाज़ा बंद कर देना.

जीतू ने ज्यादा सवाल जवाब न करते हुए चुपचाप दरवाज़ा बंद कर दिया. उसे तो एक बार फिर अपनी किस्मत चमकती नज़र आ रही थी. जीतू दरवाज़ा बंद करके बिस्तर पर गरिमा के बगल में आकर बैठ गया. परसो उस बरसात के बाद उसे आज मौका मिला गरिमा के साथ अकेले में वक़्त बिताने का क्या आज फिर उसकी किस्मत उसका साथ देगी.

जीतू: कहा दर्द हो रहा है दीदी.

गरिमा: क्या बताऊ जीतू सीढ़ियों से फिसल गई दर्द तो पुरे बदन में हो रहा पर कमर और जांघो में कुछ ज्यादा hi दर्द हो रहा और कूल्हों के बल गिरने की वजह से वह भी दर्द हो रहा है.

जीतू: मई मालिश करदु जहा भी दर्द हो रहा हो.

गरिमा: है कार्डो तो शायद कुछ आराम मिले.

YWP9TdJy_o.jpeg


जीतू उसे कहना छह रहा था की वो अपनी साड़ी उतर दे पर कहने में हिचकिचा रहा था उसे समझ नहीं आ रहा था कैसे कहे इसलिए वो वैसे hi चुपचाप बैठा था. गरिमा को भी थोड़ा थोड़ा समझ आ रहा था पर वो जीतू को थोड़ा खुलने का मौका देना चाहती थी.

गरिमा: क्या हुआ जीतू तुम अब रुके क्यों हो तुम तो बड़ी तारीफ करते रहते थे अपनी मालिश की अब जब सही समय आया तो तुम चुपचाप बैठे हो.

जीतू: दीदी वो दरअसल बात ये है की मई वो.

गरिमा: कहो जो केहह है खुलकर कहो अब बारिश में गुज़ारे हुए वक़्त के बाद हम एक दुसरे के साथ इतना तो खुल hi सकते है.

गरिमा ने जानबूझ कर जीतू को उस बारिश में बिताए गए वक़्त का याद दिलाया था ताकि इससे उसके ज़हन में गरिमा के नंगे बदन की यादे ताज़ा हो जाए.

जीतू: जी दीदी वो मई मालिश कैसे करू आपकी साड़ी ख़राब हो जाएगी और बदन पर तेल भी नहीं लग पाएगा.

गरिमा: तो सीधा बोलो न साड़ी उतरनी पड़ेगी इतना सोच विचार क्या कर रहे हो मालिश तो वैसे भी कपडे उतर कर की जाती है मई hi भूल गई थी.

ShrDHfEg_o.jpeg


गरिमा ने बिना देर किये अपनी साड़ी उतर कर वही फर्श पर दाल दी. और एक टाइट सर ब्लाउज जिसमे उसका आधे से ज्यादा क्लीवेज साफ़ नज़र आ रहा था और एक पेटीकोट पहने बिस्तर पर जीतू के सामे पेट के बल लेट गई.

जीतू: मई आपकी कमर से मालिश करना शुरू करू.

गरिमा: हम्म अब किस बात का इंतज़ार शुरू हो जाओ.

जीतू ने अपनी हथेली में थोड़ा सा तेल लिया और अपनी कपकपाती हथेली गरिमा की ब्लाउज के नीचे की पीठ पर रख दी. उस बरसात की शाम के बाद जीतू के प्रति उसके खयालात बदल गए. गरिमा जानती थी की जीतू अब एक बच्चा नहीं बल्कि एक 18 साल बालिग गबरू जवान मर्द है और उसका लुंड भी एक औरत की चुदाई के लिए पूरी तरह तैयार है. जीतू अपनी हथेली का पूरा दबाव गरिमा की कमर पर दाल रहा था ताकि गरिमा का कमर दर्द ठीक हो जाए पर उसकी हथेली की छुअन का कमर से ज्यादा असर गरिमा की जांघो के बीच के हिस्से पर हो रहा था.

d6Y4xQze_o.gif


जीतू अपनी तरफ से बढ़िया मालिश कर रहा था पर गरिमा की अपेक्षाए बाद गई थी वो अब इस मालिश को एक अलग लेवल पर ले जाना चाहती थी. गरिमा के ज़हन वो दिन भी ताज़ा हो गया था जब उसने हरिया की मालिश की थी और पहली बार हैरिया ने उसे छोड़ा था. ये ख्याल एते hi गरिमा को अपनी जगहों के बीच हल्का हल्का गीलापन महसूस होने लगा और वो सोचने लगी की क्या ये मालिश भी उसी मुकाम तक पहुंच सकती है. दो मर्दो से तो छुड़वा चुकी हु एक मौका इस तीसरे सबसे जवान लुंड को भी देना चाहिए.

गरिमा: जीतू बहुत अच्छी मालिश करते हो तुम तो बड़ा अच्छा लग रहा. मन कर रहा पुरे बदन की मालिश करवा लू. जीतू अगर तुम बुरा न मनो तो पूरी पीठ की मालिश कर डोज.

जीतू: जी पर वो...

गरिमा: पर क्या कोई प्रॉब्लम है.

जीतू: जी वो आपका ब्लाउज उसके ऊपर से....

गरिमा: अरे इतनी सी बात चलो मेरे ब्लाउज के हुक खोल दो.

जीतू: जीईएर

गरिमा: है खोल दो

जीतू: ठीक है

जीतू ने ऊपर की तरफ देख कर ऊपर वाले का शुक्रिया करा इस मेहेरबानी के लिए और एक एक करके गरिमा के ब्लाउज में सारे हुक खोल दिए. हुक खुलते hi गरिमा के कैसे ब्लाउज के पैट इधर उधर खुल गर और गरिमा की पीठ ऊपर से नीचे पेटीकोट तक पूरी तरह नंगी हो गई. जीतू का लुंड तो गरिमा की नंगी पीठ को देखकर hi पंत के अंदर झटके खाने लगा. जीतू ने बोतल के ढक्कन में थोड़ा सा तेल लेकर उसे गरिमा की नंगी पीठ पर उड़ेल दिया और अपने अपने गरिमा की नंगी पीठ पर ऊपर से नीचे तक घिसने लगा.

aiNeYpU7_o.jpeg


गरिमा का कमर दर्द तो पूरी तरह गायब हो गया था और थोड़ा बहुत था भी तो एक जवान अपने से आधी उम्र के मर्द के अपनी नंगी पीठ पर स्पर्श के कामुक एहसास ने उसे इग्नोर सा कर दिया था. पीठ से बेहटा तेल रिस कर गरिमा की स्तनों से होता हुआ उसके ब्लाउज तक जा रहा था और उसका ब्लाउज आगे से तेल से काफी भीग गया था. जीतू तो चाहता hi था की गरिमा उसके सामने नंगी हो जाए गरिमा अपनी जिस्मानी आग की वजह अब खुद भी इन कपड़ो से जुड़ा हो जाना चाहती थी और इस बहते तेल ने गरिमा को एक बहाना दे दिया था खुद को इन कपड़ो की कैद से आज़ाद कर लेने का.

गरिमा: जीतू ये तेल बहकर मेरे कपड़ो को गन्दा कर रहा है और वैसे भी मई उलटी लेती हु तो मेरे स्तन तो नीचे छुपे hi है तो क्या मई ये ब्लाउज उतर कर रख दू.

अब भूके को बिन मांगे hi छपन भोग मिले तो वो क्यों मन करेगा.

जीतू: जी ठीक है.

गरिमा ने उल्टा लेते लेते hi अपना ब्लाउज अपने हाथो से निकल कर बिस्तर पर किनारे रख दिया. गरिमा के बगल में बैठे जीतू को उसके बदन के नीचे दबे उसके भरी भरी उभर साफ़ नज़र आ रहे थे पर वो अपना एक्ससिटेमेंट छुपाने की पूरी कोशिश कर रहा था. पर गरिमा सिर्फ ब्लाउज उतरने तक hi नहीं रुकी वो अपने हाथ अपनी कमर के करीब ले गई और अपने पेटीकोट की गाँठ खोलने लगी.

गरिमा: जीतू तुम मेरी घुटनो और कूल्हों की मालिश भी करोगे तब ये पेटीकोट दिक्कत देगा तो अगर तुम कहो तो इसे भी उतर दू.

जीतू: हम्म सही रहेगा.

गरिमा: तुम्हे उनकंफर्टबले तो नहीं लगेगा न. वैसे भी तुम तो मुझे दीदी कहते हो तो मेरे छोटे भाई जैसे हुए तो तुमसे क्या शर्माना.

जीतू: नहीं नहीं मई ठीक हु.

गरिमा ने मन में सोचा सेल तुझे क्यों उनकंफर्टबले लगेगा तेरे तो मन में लड्डू फूट रहे होंगे और तेरा लुंड तो अब तक बम्बू बन गया होगा.

गरिमा: तो मैंने अपने पेटीकोट की गाँठ खोल दी क्या तुम प्लीज इसे खींच कर उतर डोज.

जीतू: हम्म्म
 
जीतू ने एक आज्ञाकारी बच्चे की तरह गरिमा का पेटीकोट उसकी जांघो से खींच कर निकल दिया और वही बिस्तर के किनारे फर्श पर दाल दिया. अब गरिमा का गदराया बदन एक बार फिर उसके सामने लगभग पूरा नंगा था, कपडे के नाम पर गरिमा के बदन पर कुछ बचा था तो बस एक कासी हुई चड्डी जो बमुश्किल उसके भरी भरकम चूतड़ों को छुपा प् रही थी. पर गरिमा केवल अपने कपडे उतरने तक hi नहीं रुकी उसे तो जीतू को भी नंगा करना था. गरिमा के ज़हन में वो दृश्य ताज़ा हो गए जब उसने हरिया के कूल्हों पर बैठकर उसकी मालिश की थी हुए अब वो वही सब जीतू से करवाने वाली थी.

गरिमा: जीतू तुम एक काम करो मेरे कूल्हों पर बैठकर मालिश करो इससे तुम दोनों हाथो से ज़ादा ज़ोर लगा पाओगे.

जीतू: जी ठीक है

जीतू का तो हवस के मरे बुरा हाल था उसने चुपचाप गरिमा की बात मान ली और गरिमा के कूल्हों पर बैठने hi वाला था की गरिमा ने उसे रोक दिया.

गरिमा: अरे ये क्या कर रहे हो.

जीतू: जी दीदी आप hi ने तो कहा आपके कूल्हों पर बैठने को.

गरिमा: है पर अपने कपडे तो उतर लो वर्ण तेल से हैंड हो जाएंगे. एक काम करो अपनी शर्ट और पंत उतर दो मई भी चड्डी में हु तुम भी चड्डी पेहेन कर मेरे ऊपर आ जाओ.

जीतू तो वैसे भी मारा जा रहा था अपने कपडे उतर कर गरिमा के ऊपर आने को. उसने भी बिना देर किये गरिमा की बात मानते हुए अपने कपडे उतर कर वही बिस्तर के किनारे फर्श पर दाल दिए. अब उसका हत्ता कट्टा जवान बदन बस एक सस्ती सी चड्डी में था और वो चड्डी भी उसके लुंड के तनाव को छुपाने में नाकाम सिद्ध हो रही थी.

mhQRYSli_o.jpeg


गरिमा: जीतू ये तुम इस तरह क्यों खड़े हो और अपने हाथो के पीछे क्या छुपा रहे हो.

जीतू झेपते हुए: नहीं कुछ नहीं गरिमा दीदी वो मई कुछ नहीं छुपा रहा.

गरिमा: देखो तुम्हे छुपाने की ज़रूरत नहीं मई समझ सकती हु किसी औरत तो यु इतने कम कपड़ो में देख कर लड़को के शरीर में उत्तेजना आना स्वाभाविक है इतस नार्मल. और वैसे भी ये उत्तेजना मेरे लिए नै नहीं है मई परसो तुम्हे इस हालत में देख चुकी हु तो अब तुम्हे छुपाने की ज़रूरत नहीं है. वैसे भी तुम तो मुझे दीदी कहते हो तो भाई बहनो में इतना चलता है तो हटाओ अपने हाथ.

जीतू ने गरिमा की बात मानते हुए अपने हाथ हटा दिए. हाथ हट्टे hi जीतू के लुंड का तनाव गरिमा के सामने था. जीतू की चड्डी का कपडा लुंड की जगह वाले हिस्से में सावधान की मुद्रा में उठा खड़ा था. चड्डी के ऊपर से जीतू के लुंड के तनाव का अंदाज़ा लगा कर गरिमा की छूट में खुजली मचने लगी. वो जल्द से जल्द इस तनाव को अपने अंदर महसूस कर लेना चाहती थी.

गरिमा बड़ी कामुक आवाज़ में: चलो जीतू अब शर्माना छोडो आ जाओ और अपनी दीदी के बदन का दर्द पूरी तरह मिटा दो.

जीतू: जी दीदी

गरिमा के यु कामुक आवाज़ में खुद को बुलाने भर से जीतू के लुंड ने चड्डी के अंदर से झटका खा दिया जिसे देख गरिमा की हसी निकल गई. पर गरिमा के कहे मुताबिक जीतू दुबारा बिस्तर पर आकर गरिमा के कूल्हों पर पेअर इधर उधर करके बैठ गया. जीतू के यु गरिमा के कूल्हों के बैठने से उसके लुंड का तनाव गरिमा को अपने कूल्हों पर साफ़ महसूस हो रहा था.

abjjpIVZ_o.jpeg


जीतू ने गरिमा की पीठ पर फिर थोड़ा सा तेल डाला और अपने दोनों हाथो से पूरा दबाव डालते हुए गरिमा की नंगी पीठ की ऊपर से नीचे तक अच्छे से मालिश करने लगा. गरिमा की गांड पर आगे पीछे होने से उसका लुंड चड्डी के अंदर से आगे पीछे घिस रहा था जो गरिमा को आँखे बंद करके सिसकारी लेने पर मज़बूर हो रहा था. गरिमा का मन तो कर रहा था की अभी खुद को और जीतू को पूरा नंगा करके चुदाई शुरू करदे पर हौले हौले की गई चुदाई का अपना अलग मज़ा होता है और रात में काका के साथ वो बेहोशी के नाटक की वजह से कुछ मज़ा नहीं कर पाई थी ऐसे में वो जीतू से पूरा मज़ा आहिस्ता आहिस्ता लेना चाहती थी.

lnqSqr7p_o.gif


इधर जीतू का लुंड भी गरिमा की गांड पर रगड़ रगड़ कर पूरी तरह अकड़ कर लुम्बा हो गया था और गरिमा उस लुंड की मोटाई को ज्यादा से ज्यादा अपने अंदर महसूस करना चाहती थी पर बड़ी चालाकी से.

गरिमा: जीतू पीठ की तरफ से तो काफी मालिश करदी अब पेट की तरफ से करोगे.

पर उसके लिए तो गरिमा को पलटना होगा और जीतू तो खुद गरिमा के पलटने का इंतज़ार कर रहा था क्युकी अपना ब्लाउज तो गरिमा पहले hi उतर चुकी थी ऐसे में एक बार फिर जीतू को गरिमा के नंगे दूध का दीदार हो जाता और शायद मालिश के बहाने छूने को भी मिल जाता. पर गरिमा का इरादा तो कुछ और hi था.

जीतू: है दीदी आप घूम जाइये मई पेट की तरफ से भी मालिश कर दूंगा.

SnOrAWPy_o.jpeg


गरिमा: जीतू दरअसल मैंने ऊपर कुछ पहना नहीं है उस दिन बारिश की बात अलग थी अब यु कमरे में बिस्तर पर यु तुम्हे अपने दूध दिखाना अच्छा नहीं लगता.

जीतू: फिर मई आपके पेट की मालिश कैसे करू.

गरिमा: तुम एक काम करो मेरे ऊपर पेट के बल लेट जाओ और पीछे से मुझे अपनी बहो में जकड कर पीछे से hi अपनी हथेली से मेरे पेट की ऊपर से नीचे तक मालिश कार्डो. और नीचे अपनी मोती जांघो से मेरी जाएंगे दबा दबा कर मेरी जांघो की भी मालिश कार्डो इससे ऊपर नीचे की मालिश एक साथ हो जाएगी.

ये कामुक मुद्रा सोच कर hi जीतू का लुंड तेज़ तेज़ झटके खाने लगा. वो अपने हाथो में ढेर सारा तेल चुपड़ कर बिना देर किये की इससे पहल गरिमा का इरादा बदल जाए पेट के बल लेती गरिमा के ऊपर खुद भी पेट के बल लेट गया. और आहिस्ता आहिस्ता अपने हाथो को गरिमा की बगल से निकलता हुआ सरका कर गरिमा के नीचे उसके पेट तक ले आया. अब जीतू के हाथ गरिमा के नंगे पेट पर थे और उसके ऊपर लेते होने की वजह से उसका पूरा का पूरा लुंड दो चडीयो की दीवार होने के बावजूद गरिमा की गांड की दरार में गदा जा रहा था. गरिमा को अपनी गांड पर जीतू के तने हुए लुंड का hi नहीं उसके नीचे लटकते अंडो का एहसास भी साफ़ साफ़ हो रहा था.

EaRP9sei_o.jpg


जीतू के हाथ गरिमा के चिकने मांसल पेट पर यहाँ वह फिसल रहे थे और उसका पेट गरिमा की नंगी पीठ पर रगड़ खा रहा था और नीचे जीतू की हटती कटती जाँघे गरिमा की जांघो पर रगड़ रहा था और जीतू के अपनी टाँगे हिलने के कारन उसका लुंड भी चण्डी के अंदर से गरिमा की चूतड़ों के बीच की दरार में आगे पीछे हो रहा था. पर अब भी जीतू के हाथ गरिमा के स्तनों से दूर थे और इतना खुलने के बावजूद जीतू की हिम्मत नहीं हो रही थी गरिमा के स्तनों को अपने हाथो में भरने की. पर गरिमा का तो उत्तेजना के मरे बुरा हाल हो रहा था उसका मन कर रहा था की अभी पलट कर जीतू के होंठो को अपने होंठो में भर ले. पर वो तेज़ तेज़ आहे भरते हुए भी किसी तरह खुद पर काबू करे हुए थी पर जीतू को आगे बढ़ने की दिशा देना भी ज़रूरी था इसलिए गरिमा खुद अपना हाथ अपने नीचे ले गई और जीतू के हाथो को अपने हाथो में थम लिया और उसके दोनों हाथो को ऊपर सरकते हुए अपने दोनों स्तनों को उसके हाथो में दे दिया.

fO0WdZ85_o.jpg


जीतू का तो मुँह खुला का खुला रह गया की गरिमा ने खुद उसके हाथो को लेजाकर अपने स्तनों पर रख दिया. वो होंठो से गरम गरम सासे ले रहा था और उसकी सासो की गर्माहट गरिमा को अपनी गर्दन पर महसूस हो रही थी और उसका लुंड झटके पे झटके खा रहा था जो गरिमा को अपने पिछवाड़े पर महसूस हो रहे थे. पर अब भी अपने उसने हाथो सर कोई हरकत नहीं की थी शायद सुन्ना चाहता था की गरिमा क्या चाहती थी इसलिए गरिमा ने उसे बता दिया की वो क्या चाहती है.

गरिमा: जीतू यहाँ भी मालिश कार्डो अगर तुम्हे उनकंफर्टबले न लगे वैसे भी तुम तो मेरे भाई जैसे हो तो तुमसे कैसी शर्म. कर डोज मालिश.

जीतू: हम्म्म (जीतू के मुँह से बस यही निकला)

0g2USs4N_o.gif


और जीतू ने गरिमा के स्तनों को अपने हाथो में लेकर मसलना शुरू कर दिया. जीतू अपने हाथो को गरिमा के स्तनों पर गोल गोल घुमा रहा था. उत्तेजना के मरे उसकी आँखे बंद हो गई और उसे पता hi नहीं चला कब उसके होंठ गरिमा की पीठ पर पहुंच गए और गरिमा के स्तनों को मसलते मसलते वो पीछे से उसकी पीठ पर अपने होंठ रगड़ने लगा. गरिमा को भी अपनी पीठ एक नए जवान लड़के की होंठो की गरम सासे मदहोशी सा एहसास दे रही थी. जीतू को तो एहसास भी नहीं था की वो किस तरह उत्तेजना में गरिमा की पीठ को चूम रहा है. वो अपने सेंस में वापस तब आया जब गरिमा ने एक बार फिर उसका नाम पुकारा.
 
GeYOMumb_o.jpeg


गरिमा: जीतू जीतू....

गरिमा की अचानक से आई आवाज़ सुन कर जीतू ने उसकी पीठ से अपने होंठ हटा लिए.

जीतू: है है क्या हुआ

गरिमा: जीतू मेरी जांघो के बीच और कूल्हों पर भी तेज़ झटका लगा था वह भी अपने हाथो का जादू चला दो.

जीतू: जी जी क्या करू बताइये.

गरिमा ने जीतू के एक हाथ को दुबारा अपने हाथ में भर लिया और उसे अपने स्तन से नीचे सरकती हुई अपने पेट से होते हुए सीधे अपनी चड्डी की इलास्टिक के किनारो तक ले आई पर गरिमा इतने तक hi नहीं रुकी और उसने जीतू के हाथ की उंगलियों को अपनी चड्डी के अंदर दाखिल कर दिया. जीतू को तो यकीन नहीं हो रहा था की गरिमा सच में उसका हाथ अपनी चड्डी के अंदर दाल रही है. पर जीतू ने गरिमा को रोकने की कोई कोशिश नहीं की क्युकी ऐसा करने की उसकी खुद की भी इच्छा नहीं थी.

गरिमा कामुक आवाज़ में अंगड़िया लेते हुए: जीतू यहाँ भी कार्डो न................. मालिश. ममम

KgALhCNa_o.gif


गरिमा की इस कामुक रिक्वेस्ट को सुनकर जीतू का लुंड एक बार फिर एक तेज़ झटका खाने को मजबूर हो गया. और इस झटके ने गरिमा को भी सिसकारी लेने को मजबूर कर दिया.

गरिमा: ये क्या है जीतू पीछे से इतना सख्त सख्त जो मेरी चड्डी में गदा जा रहा है.

अब जीतू गरिमा को क्या बताए की ये क्या है. फिलहाल तो वो एक हाथ में गरिमा का एक स्तन थामे और दुसरे हाथ की उंगलियों को उसकी चड्डी के मुहाने पर टिकाए चुपचाप निशब्द सा उसके उपाद लेता था. जीतू की तरफ से कोई जवाब न पाकर गरिमा खुद अपना हाथ पीछे अपने और जीतू के बीच ले गई और चड्डी के ऊपर से hi जीतू के लुंड को अपनी मुट्ठी में भर लिया. उसके लुंड की मोटाई को एक बार फिर अपने हाथो में महसूस करके गरिमा अवाक रह गई क्युकी आज उसका लुंड पिछली बार से ज्यादा ेरेक्ट था शायद इस कामुक अवस्था के कारन उस दिन शायद खुला माहौल और बरसात की ठण्ड की वजह से ये अपने भरपूर रूप में नहीं आ पाया था पर आज उसके लुंड की मोटाई देख कर गरिमा को अंदाज़ा हो गया की जीतू उम्र में भले hi 18 का हो पर लुंड के मामले किसी भरपूर मर्द से कम नहीं है.

tX2kuefv_o.gif


इधर अपने लुंड पर गरिमा की उंगलियों को महसूस करके जीतू की उत्तेजना भी उफान पर आ गई और उसकी मुट्ठी की पकड़ गरिमा के स्तन पर कास गई और दुसरे हाथ की उंगलिया खुद बा खुद गरिमा की चड्डी की अंदर सरकती चली गई जब तक की वो अपनी सही जगह गरिमा की छूट तक नहीं पहुंच गई जो पूरी तरह गीली हो चुकी थी.

be6gdRM8_o.gif


ये अंदाज़ा लगाना मुश्किल था की गरिमा इतनी देर में कितनी बार झड़ी थी पर उसकी चड्डी आगे से पूरी तरह गीली हो चुकी थी. अपनी छूट पर जीतू की उंगलियों के स्पर्श ने गरिमा की भी आह निकल दी और एक पल को उसने भी जीतू का लुंड कास कर दबा दिया पर अगले hi पल उसने खुद को काबू कर लिया.

गरिमा गुस्से में: जीती ये क्या है.

गरिमा का गुस्सा देख कर जीतू ने दर के मरे गरिमा की चड्डी से अपने हाथ बहार निकल लिए. जीतू: जी सॉरी मई हैट जाता हु.

गरिमा: नहीं मई हटने को नहीं कह रही. मई तो इसलिए गुस्सा हो रही की तुम इतनी ज्यादा तकलीफ में हो फिर भी मुझे बताया नहीं.

जीतू: जी

गरिमा: और नहीं तो क्या तुम्हारा ये इतनी बुरी तरह तना हुआ है तुम्हारी इस कासी हुई चड्डी में उसे कितनी तकलीफ हो रही होगी. तुम बता नहीं सकते थे मई समझती की ऐसे में उत्तेजित होना नार्मल है पर मुझे नहीं पता था की तुम्हारा ये इतना ज्यादा तना होगा. जब ये इतना ज्यादा ेरेक्ट हो तो ऐसी कासी हुई चड्डी नहीं पहनी चाहिए इससे ये मुद जाता है. तुमने बताया क्यों नहीं इसका मतलब तुम मुझे दिल से अपनी दीदी नहीं मानते.

जीतू: नहीं दीदी ऐसा नहीं है.

गरिमा: फिर क्यों नहीं बताया चलो अपनी चड्डी उतरो पहले फिर आगे मालिश करना.

जीतू चौकते हुए: जी

गरिमा: जी हां या तो तुम पहले अपनी चड्डी उतरो या फिर मई आगे मालिश नहीं करवाउंगी तुमसे. परसो भी तो तुम्हे नंगा देखा था फिर आज क्या दिक्कत है. चलो उतरो अपनी चड्डी जल्दी.

जीतू को भला इसमें क्या दिक्कत थी वो तो खुद नंगा होने और गरिमा को भी नंगा करने के लिए मारा जा रहा था यहाँ तो खुद गरिमा उसे नंगा होने के लिए कह रही थी. इसलिए जीतू ने बिना देर किये अपने दोनों हाथ पीछे लेकर अपनी चड्डी उतर कर नीचे ज़मीन पर दाल दी और दुबारा गरिमा को अपनी बहो में भर लिया.

BKAUFb4v_o.jpeg


अब गरिमा के ऊपर लेता जीतू पूरी तरह नंगा था और उसके ेरेक्ट लुंड और गरिमा की गांड के बीच अगर कोई दीवार थी तो गरिमा की छोटी सी कच्ची जिसमे से गरिमा के आधे से ज्यादा चूतड़ तो वैसे hi बहार थे. और जीतू के नंगे हो जाने से उसका लुंड गरिमा के चूतड़ों के उन खुले हुए हिस्सों में यहाँ वह रगड़ रहा था. गरिमा के ऊपर लेता जीतू आँखे बंद तेज़ तेज़ आहे भर रहा था. जिस उद्देश्य से वो गरिमा के ऊपर आया था यानि मालिश वो काम तो फिलहाल वो भूल hi गया गया था और गरिमा को अपनी बहो में भर्र बस अपने कूल्हों को हिला हिला कर अपने लुंड को गरिमा में खुले हुए चूतड़ों में रगड़ने में hi मशगूल था. गरिमा को भी जीतू की टहना में बड़ा मज़ा आ रहा था. पर वो उसके लुंड के तनाव को और करीब से महसूस करना चाहती थी इसलिए उसने जीतू को एक पल को रुकने को कहा.

गरिमा: जीतू जीतू.

गरिमा की आवाज़ सुन कर जीतू दुबारा अपने सेंस में वापस आया और उसका हिलना रुक गया वो बेसब्र से गरिमा के अगले शब्दों का इंतज़ार कर रहा था की अब गरिमा क्या करवाने वाली है. गरिमा ने बिना कुछ बोले जीतू के दोनों हाथो को अपने हाथो में थम लिया और उन्हें सरकते हुए उनकी पुराणी पोजीशन तक ले आई यानि एक हाथ अपने स्तन पर और दूसरा अपनी चड्डी के अंदर. इस बार जीतू ने भी गरिमा की चड्डी के अंदर अपना हाथ डालने में ज्यादा देर नहीं लगाई और सीधा अपनी हथेलियों को गरिमा की छूट जे बालो पर जाकर रख दिया जहा इतने दिनों में शेविंग न होने के कारन हलके फुल्के बाल निकल आए थे. जीतू आहिस्ता आहिस्ता अपनी उंगलियों को गरिमा की छूट के इर्द गिर्द फिरा रहा था और उत्तेजनापूर्ण फोरप्ले गरिमा को एक अलग hi मज़ा दे रहा था. चुदाई का तो एक मज़ा है पर जो मज़ा फोरप्ले में है उसकी भी अपनी अलग बात है.

0650hOJk_o.jpeg


जीतू के तो दोनों हाथ फिलहाल अपने अपने काम में व्यस्त थे इसलिए गरिमा अपने सिरहाने राखी वो तेल की शीशी उठाई उसमे से ढेर सारा तेल अपने हाथो में चुल्लू में भरा और अपना हाथ पीछे ले जाकर जीतू के उस फूले हुए लुंड को अपने हाथो में भर लिया और अपने हाथो में भरा सारा तेल जीतू के लुंड पर ऊपर से नीचे तक मलना शुरू कर दिया. गरिमा की हाथो से अपने लुंड की ये घिसाई जीतू को बावला सा कर रही थी जिस वजह से उसने गरिमा की चुकी को कास कर भींच दिया और अपनी दो उंगलिया सीधा गरिमा की छूट के अंदर दाखिल करदी. गरिमा की छूट तो अंदर से पूरी तरह पानी पानी हो चुकी थी और जीतू की उंगलिया उसके अंदर कामरुस से सराबोर हो गई थी. जीतू बेसुध सा आँखे बंद किये बस गरिमा के ऊपर लेता था वो यहाँ किस लिए आया था वो वजह तो कही पीछे छूट गई थी. इधर जीतू के लुंड को तेल से सराबोर करने के बाद गरिमा ने अपनी चड्डी को अपने कूल्हों से थोड़ा उचकाया और जीतू का लुंड अपने कूल्हों की तरफ से अपनी चड्डी के अंदर दाखिल कर लिया.

NUDzBWei_o.jpeg


जीतू के मुँह से एक तेज़ सिसकारी छूट गई जिसकी गर्माहट गरिमा को अपनी पीठ पर महसूस हुई. गरिमा जीतू की मनोदशा साफ़ समझ रही थी पर उसने तो उसकी उत्तेजना को मैक्स लेवल तक बढ़ाने का थान लिया ताकि जब वो उससे चोदे तो पुरे जोश से उस पर टूट कर चोदे और दोनों को चुदाई का भरपूर मज़ा आए. और इधर अब जीतू के लुंड और गरिमा के कूल्हों के बीच अब कोई दीवार नहीं थी जहा गरिमा को अपने कूल्हों पर जीतू के लुंड की एक एक नस की फड़कन तक महसूस हो रही थी तो वही जीतू को अपने लुंड की खाल पर गरिमा के कूल्हों की गोलाई उनकी गर्माहट फील हो रही थी. और उस कासी हुई चड्डी की वजह से उसका लुंड गरिमा के चूतड़ों से एकदम चिपक सा गया था और उस लुंड पर चुपड़े तेल की वजह से वो गरिमा की चिकने चूतड़ों पर यहाँ वह फिसल रहा था. पर अब भी जीतू को ये समझ नहीं आ रहा था की गरिमा ने उसके लुंड को अपनी चड्डी के अंदर क्यों लिया है अगर वो छुड़वाना चाहती है तो खुल कर क्यों नहीं कहती और अगर उसकी छुड़वाने की इच्छा न हुई और उसने उसे पलट कर छोड़ दिया तो कही बात लखन सिंह तक न पहुंच जाए. ऐसे में जीतू बस जो हो रहा जिस गति हो रहा था उसका भरपूर मज़ा ले रहा था. पर जल्द hi जीतू को उसके इस सवाल का जवाब भी मिल गया.

गरिमा: जीतू मैंने तुम्हारा वो तेल में चुपड़ कर अपनी चड्डी के अंदर डाला तुम गलत मत समझना.

अब जीतू बेचारा क्या कहता की वो क्या क्या समझ चूका था वो तो अपने खयालो में अपने और गरिमा के बच्चो का नाम तक सोच चूका था.

जीतू: नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं है.

गरिमा: नहीं मई जानती हु ये देखने में गलत लगता है पर दरअसल मेरे कूल्हों में भी दर्द था तो मैंने सोचा की अगर तुम आगे पीछे दोनों तरफ से दबाव डालो तो शायद मुझे आराम मिले और तुम्हारे दोनों हाथ तो पहले hi मेरी मालिश में बिजी और तुम्हारा ये काफी देर मेरी चड्डी के ऊपर से दबाव दाल hi रहा था तो मैंने सोचा की अगर यही दबाव वो चड्डी के अंदर आकर डेल और साथ में तेल की मालिश भी करदे तो एक साथ दो काम hi जाएंगे. पर अगर तुम्हे उनकंफर्टबले लगे तो तुम निकल लो.

जीतू ने मन hi मन सोचा क्या लॉजिक है पर अपने को के अपने लोडे को बिन मांगे जन्नत मिल रही तो मई क्यों मन करू.

जीतू: नहीं नहीं ठीक है रहने दीजिये.

गरिमा भी मन hi मन मुस्कुरा दी क्युकी वो भी समझ गई की छोरा पूरी तरह बोतल में उतर चूका है और छोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है.
 
गरिमा ने दुबारा अपने हाथ नीचे ले जाकर जीतू के हाथो को अपनी चड्डी के ऊपर से अंदर दबा दिया जिससे उसकी उंगलिया गरिमा की छूट में और अंदर उतर गई.

गरिमा: मममम आए ओह जीतू ममम आह तुम बहुत अच्छी मालिश कर रहे हो. मममम आज तक कभी ऐसी मालिश नसीब नहीं हुई. पर अपनी कमर को हिला हिला कर पीछे से मेरे कूल्हों की अच्छे से मालिश कार्डो न.

गरिमा की मादक सिसकारियां जीतू का भी जोश बड़ा रही थी और गरिमा ने अपनी छूट में जीतू की उंगलिया होने के बावजूद किसी तरह की कोई प्रतिक्रिया नहीं दी इससे उसका हौसला भी बाद गया. उसने अपनी कमर हिला कर गरिमा के चड्डी के अंदर अपना लुंड उसके चूतड़ों पर रगड़ना शुरू कर दिया.

IyBODH1a_o.gif


रगड़ते रगड़ते उसका लुंड गरिमा की चूतड़ों के बीच की दरार में जाकर फिट हो गया और वो वही अपना लुंड गरिमा की गांड की दरार में आगे पीछे करने लगा. जीतू का तो उत्तेजना के मरे बुरा हाल हो रहा था वो एक तरफ गरिमा के स्तन को मसल रहा था तो दूसरी ततफ उसकी दो उंगलिया गरिमा की छूट की गहराई नाप रही थी और पीछे से उसके लुंड की मोटाई और गरिमा की गांड की चौड़ाई में कम्पटीशन सा चल रहा था.

faki3cas_o.gif


सिर्फ जीतू का hi नहीं गरिमा का भी उत्तेजना के मरे बुरा हाल था पर जीतू की दो उंगलिया उसके लिए काफी नहीं थी उसे और मोटा एहसास चाहिए था.

गरिमा: ममम जीतू इतस ावोसोमे बहुत अच्छा लग रहा है मममम अह्ह्ह्ह करते रहो ऐसे hi ओह्ह आठ जीतू पीछे से तुम्हारा दबाव बहुत अच्छा लग रहा पर आगे से तुम्हारी दो उनगलिया ज्यादा ज़ोर नहीं लगा प् रही. क्या तुम अपनी चारो उंगलिया मेरे अंदर दाल सकते हो ताकि ज्यादा ज़ोर लगा सको.

जीतू: ठीक है दीदी जैसा आप कहो.

गरिमा: दाल दो मेरे बहिया अपनी चारो उंगलिया दाल दो अंदर.

जीतू ने चुपचाप गरिमा की बात मानते हुए अपनी चारो उंगलिया गरिमा की छूट के अंदर दाल दी.

गरिमा: ाः ममममम और अंदर डालो थोड़ा ताकत से डालो ज़ोर लगाओ ममम प्लीज ममम. तेज़ तेज़ करो और तेज़ मममम यस ाआअह एयर तेज़ करो. ाः बहुत अच्छा लग रहा है.

गरिमा की ये मादक आवाज़े उसकी कामुक रिक्वेस्ट कोई भी मर्द छह कर भी इग्नोर नहीं कर सकता था तो एक 18 साल का नया लौंडा भला कैसे इग्नोर कर देता. गरिमा की कामुक सिसकारियों ने जीतू के लुंड में भी खून का दौडान तेज़ कर दिया था उसकी चारो उंगलिया गरिमा की छूट में काफी अंदर तक जा रही थी और बेहद तेज़ गति से अंदर बहार हो रही थी.

n9kL4ibB_o.gif


उसकी आँखे पूरी तरह बंद थी उसने गरिमा के दूध को अपनी मुट्ठी में इतनी कास कर भींच रखा था पर शायद उत्तेजना के उन्माद में गरिमा को उस दर्द का एहसास hi नहीं हो रहा था और उसका लुंड वो तो गरिमा की गांड की दरार में रगड़ खता हुआ उत्तेजना के चरम बिंदु पर पहुंचने के करीब था. कुछ यही हाल गरिमा का भी था उसकी कामरुस से लबरेज़ छूट इस कदर उत्तेजित हो चुकी थी अब जीतू के हाथो और लुंड को रोकने का उसे बहन hi नहीं था. वो चरमसुख पाने के लिए लालायित थी गरिमा को ये याद hi नहीं रहा था की उसने जीतू से छोड़ने का प्लान बना रखा था और अब वो उसकी उंगलियों के आवेग में hi झड़ने की तरफ अग्रसर है.

गरिमा तो शायद फिर किसी तरह खुद को संभल लेती पर एक 18 साल के लड़के की इतनी ज्यादा उत्तेजना को काबू कर पाना मुश्किल था उसके लुंड को छोटी गरिमा की गांड की गर्माहट उसकी उंगलिया में लिसटता गरिमा की छूट से बेहटा रूस और उसकी मुट्ठी में कैद गरिमा के उन्मुक्त स्तन उसे चरमसुख तक पहुंचने को मजबूर कर रहे थे. और इन सभी का परिणाम वही होना था जो हुआ गरिमा की चड्डी जीतू के गाड़े वीर्य से सराबोर हो गई वो वीर्य गरिमा की गांड के बीच की दरार से बेहटा हुआ उसकी जांघो से होकर नीचे बिस्तर तक जा रहा था.

EC8LBYfP_o.jpeg


गरिमा के मोठे मोठे चूतड़ जीतू में लुंड पर लगे तेल हुए उसके वीर्य इस तर बतर हो गए थे. जीतू निढाल सा गरिमा की पीठ पर सर टिकाए लेता हुआ था उत्तेजनापूर्ण स्खलन के बाद उसके मुँह से लार बहती हुई गरिका की पीठ को गीला कर रही थी पर उसकी उंगलिया अब भी गरिमा की छूट को अंदर तक मैथ रही थी.

hQoMRSJw_o.gif


इसी वजह से गरिमा को अब तक जीतू के स्खलन का एहसास hi नहीं हुआ था और जल्द hi गरिमा की तेज़ तेज़ चल रहज सासे मद्धम पद गई जीतू की उंगलियों के आगे उसने भी अपने हथियार दाल दिए. दोनों काफी देर यही पेट के बल लेते रहे और झड़ने के बाद जीतू का लुंड भी सिकुड़ कर गरिमा की चड्डी से बहार आ गया.

MXIAcxTW_o.jpg


शांत होने के बाद जब जीतू को एहसास हुआ की वो गरिमा की चड्डी के अंदर hi झाड़ गया तो उसके दिल की धड़कने और तेज़ हो गई की पता नहीं गरिमा इस पर कैसे रियेक्ट करेगी हलाकि गरिमा ने उसका लुंड अपनी चड्डी में डाला था पर एक 18 साल के लड़के लिए गरिमा के इंटेंसिव को समझना इतना भी आसान नहीं था इसलिए वो तो इसे अपनी hi गलती मान रहा था. और जब गरिमा को अपने चूतड़ों पर चड्डी के अंदर चिपचिपाहट का एहसास हुआ तो वो भी समझ गई की जीतू ज्यादा देर तक इस उत्तेजना को संभल नहीं सका और उसके चूतड़ों पर hi झाड़ गया. जीतू के लुंड से छुड़वाने का उसका प्लान तो फ़ैल हो गया था उसे खुद पर और जीतू दोनों पर hi गुस्सा आ रहा था. जीतू पर इसलिए की क्यों वो इतनी जल्दी झाड़ गया और खुद पर इसलिए की क्यों उसने ये ध्यान नहीं दिया की एक 18 साल का बच्चा जिसके लिए ये सब अनुभव एकदम नए है वो इतनी ज्यादा उत्तेजना का दबाव नहीं झेल पाएगा शायद अगर वो इस बात का ख्याल रखती तो उसे एकदम नए कौडे लुंड से चुदाई का मज़ा मिल जाता. पर जो होना था हो गया अब उस बारे में सोचकर कोई फायदा नहीं न जीतू को ब्लामे देकर कोई फायदा पर इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता था की जीतू ने बिना लुंड अंदर डेल भी जो मज़ा दिया वो अपनेआप में लाइफटाइम एक्सपीरियंस था ऐसी मालिश गरिमा ज़िन्दगी भर नहीं भूलेगी. पर जीतू के सामने ज्यादा एक्ससिटेमेंट शो करना भी ठीक नहीं था ताकि जीतू को एहसास हो की वो उससे छुड़वाना चाहती थी.

इसलिए गरिमा ने अपनी आवाज़ में थोड़ी परेशानी भरा लहज़ा लेट हुए जीतू को अपने ऊपर से हटने को कहा.

गरिमा: जीतू ये क्या करा तुमने मेरी चड्डी के अंदर मूट दिया क्या ये मुझे अपने कूल्हों पर इतना गीला गीला क्या लग रहा.

O2DMILwH_o.jpeg


अब जीतू बेचारा क्या कहे की ये उसका मूट नहीं उसकी जवानी का प्रसाद है जिसका भोग उसने गरिमा के कूल्हों पर अर्पण करा है. वो चुपचाप बिना कुछ बोले गरिमा के ऊपर से हैट कर बिस्तर से उतर से सर झुका कर खड़ा हो गया. उसके हटने के बाद गरिमा ने अपने हाथ पीछे करके अपनी चड्डी के अंदर हाथ डालकर अपने कूल्हों पर लगे जीतू के वीर्य को अपने हाथो से महसूस करा. जीतू गरिमा को ये सब करते देख रहा था और उसकी धड़कन तेज़ तेज़ चल रही थी की कही अब गरिमा गुस्सा न करने लगे. और हुआ भी कुछ ऐसा hi गरिमा ने अपनी उंगलियों को अपनी नाक के पास लेकर सूंघ कर देखा और फिर गर्दन घुमाकर जीतू को गुस्से में घूर कर देखा. जीतू ने चुपचाप अपनी नज़रे झुका ली.

गरिमा: क्या ये तुम्हारा वो है जो मई समझ रही हु. क्या तुम मेरे कूल्हों पर झाड़ गए थे.

जीतू ने बस एक पल को नज़रे उठाकर गरिमा को देखा और हां में सर हिला कर दुबारा नज़रे नीचे कर ली.

गरिमा: अरे जब निकलने वाला था तब निकल नहीं सकते थे मैंने मालिश करने के लिए बुलाया था या ये सब करने के लिए. मई तो तुम्हे छोटा बच्चा समझ कर ये सब कर रही थी तुम मेरे कूल्हों पर झाड़ गए. अभी बताती हु तुम्हारे पापा को तुमने क्या करा.

जीतू: सॉरी दीदी अब दुबारा नहीं होगा वो मई संभल नहीं पाया पहली बार हुआ था न.

2XDeIAUe_o.jpeg


जीतू बेचारा दर के मरे रुआँसा हो आया गरिमा को भी बेचारे पर तरस आ रहा था की कुछ गलती न होते हुए भी उसे सॉरी बोलनी पद रही है पर वो खुद को भी चैरेक्टरलेस नहीं दिखा सकती थी इसलिए थोड़ा ड्रामा करना ज़रूरी था ताकि ये बाप बेटे एक दुसरे के सामने अपना अपना मुँह बंद रखे और वो आज और कल दोनों के साथ इसी तरह मज़ा करती रहे.

गरिमा: अच्छा अच्छा अब रो मत नहीं कहूँगी तुम्हारे पापा से पर ये चीज़ दुबारा नहीं होना चाहिए.

जीतू: जी

गरिमा: चलो जाओ यहाँ से अब और नीचे तुम्हारे पापा पूछे तो उनसे यही कहना की कमर और घुटनो की hi मालिश करि ये कपडे उतरने वाली बात चांदी में झड़ने वाली बात मत कहना मई भी नहीं कहूँगी ठीक है.

जीतू: जी

जीतू चुपचाप कमरे से निकल गया और गरिमा अपनी तेल और वीर्य से सनी चड्डी पहने बाथरूम में घुस गई. और अपने बदन का वो आखिरी कपडा वो वीर्य से सनी चड्डी उतर कर नहाने बैठ गई. नहाने के दौरान भी उसके दिलो दिमाग में बस यही चल रहा था की वो जो ये सब कर रही है क्या वो सही है उसका दिमाग यही कह रहा था की ये सब गलत है पर उसका दिल कह रहा था की वैसे भी यहाँ से जाने के बाद तो उसे अपनी नार्मल बोरिंग लाइफ hi जीनी है अगर यहाँ वो नेहा की तरह थोड़ा एन्जॉयमेंट कर लेगी तो क्या हो जाएगा. मर्द शादी के बाद भी जगह मुँह मारते फिरते है अगर मैंने अपनी लाइफ में थोड़ा रोमांच भरने के लिए ये सब कर लिया तो इसमें क्या गलत है. वैसे भी अब बस आज का और कल का दिन बचा है परसो तो वैसे भी हमे वापस लौटना है तो इस बचे हुए वक़्त का पूरा लुत्फ़ उठाओ जो होगा देखा जाएगा.

mgUxtXqk_o.jpeg


गरिमा ने ये कहकर खुद को जस्टिफाई तो कर लिया था की बस दो दिन की बात है वो बचे हुए दो दिन यहाँ मज़ा करेगी और फिर वापस अपनी बोरिंग लाइफ में लौट जाएगी. पर क्या वाकई ये इतना आसान होने वाला था एक बार सेडक्टिव के दलदल में उतर जाने के बाद क्या वाकई उसमे से निकलना इतना आसान था. एक बार जिन दमित इच्छाओ को गरिमा ने हवा दे दी थी क्या यहाँ से जाने के बाद उन्हें दबा कर रख पाना इतना आसान होने वाला था. क्या लिखा था गरिमा के आने वाले समय में ये तो केवल वो आने वाला समय hi जनता था.
 
खँडहर

YVeC2PyQ_o.jpg


गाँव के उस सुनसान खँडहर में आरती अब भी बेहोश थी पता नहीं क्या करा था अभय ने उसके साथ जो 36 जानते बाद भी आरती को होश नहीं आया था और अभय अब भी उसके सिरहाने उसके बगल में बैठा उसे प्यार से निहार रहा था उसका सर सेहला रहा था पर वह सिर्फ वही दो नहीं थे कोई तीसरा भी था जो अभय के अंदर hi था.

lzFR9c8Z_o.jpg


अभय के अंदर से आती अनजान आवाज़: अभय मई अब भी कह रहा हु इस लड़की के साथ सम्बन्ध बना ले ये बेहोश है अभी इस मौके का फायदा उठाओ.

अभय: प्यार करने वाले अपने प्यार का फायदा नहीं उठाते बस प्यार करते है.

अनजान आवाज़: और जो इस लड़की ने पिछले जनम में तुम्हारे साथ करा उसे क्या कहोगे इसने भी तुम्हारे प्यार का फायदा उठाया था उसके साथ मिलकर और पता नहीं कैसे वो अजय भी उस दुनिया से वापस आ गया है.

अभय: वापस आ भी गया है तो क्या कर लेगा न पहले कुछ कर पाया था न अब कर पाएगा.

अनजान आवाज़: मुझे चिंता उसकी नहीं है उस रुद्राक्ष की है जिसमे वो कैद था वो एक जागृत बजरंगी रुद्राक्ष जो किसी सीधा व्यक्ति के पास hi हो सकता है. हो सकता है इस बार वो अकेला न और शायद हमारा सामना करने के लिया कोई शक्तिशाली मदद ढूंढ़ने में लगा हो.

वो आवाज़ जिसकी भी थी पर उसकी सोच एकदम सही थी क्युकी इस वक़्त अजय वह से कई किलोमीटर दूर असम के जंगलो तक पहुंच गया था.

YzpW73jq_o.jpg


पर यहाँ वो जिस मदद की तलाश में आया था उसे इस घने जंगल में ढूंढ़ना इतना भी आसान नहीं था. भारत का सबसे घाना जंगल काज़ीरंगा जो दुनिया भर में ओने हॉर्न रहिनोसेरोस यानि एक सींग वाले गैंडो के लिए प्रसिद्ध है. अजय वह आ तो गया था पर उसे ये समझ नहीं आ रहा था की वो लोगन को ढूढे कैसे क्युकी दूर दूर तक गैंडो जंगली जानवरो और घने पेड़ो के अलावा कुछ नहीं दिख रहा था. अचानक उसकी नज़र गैंडो के झुण्ड पर पड़ी जो उसकी तरफ hi देख रहे थे जैसे वो उसे hi देख रहे थे

OE11z5JY_o.jpeg


पर वो तो आत्मा था फिर उसे याद आया की जानवरो के पास रहो को देखने की छमता होती है शायद ये जानवर लोगन को ढूंढ़ने में मेरी मदद कर सकते है.

अजय उन गाइडो के झुण्ड की तरफ बाद चला पर जैसे वो उनकी तरफ बाद रहा था उन गाइडो के झुण्ड में हलचल तेज़ होती जाती रही थी. गैंडे वैसे भी स्वाभाव से गुसैल प्रवत्ति के होते है और उन्हें यु अजय का अपनी तरफ आना अच्छा नहीं लग रहा था. वो सब एक स्वर में तेज़ आवाज़ में चीत्कार रहे थे जैसे किसी को पुकार रहे हो. पर जब उनके बार चिल्लाने के बाद भी जब अजय के कदम न रुके उनमे सबसे हत्ता कट्टा गैंडा शायद उस झुण्ड का सरदार तेज़ गति से अजय की तरफ दौड़ पड़ा.

2nvshVCH_o.jpeg


वो बेहद तेज़ गति से अजय की तरफ आ रहा था अजय ने उसे रुकने का इशारा करा पर वो न रुका और अजय के आत्मिक रूप के आर पार होते हुए पीछे खड़े विशाल पेड़ से टकरा कर चोटिल हो गया और उसका जबड़ा लहू लुहान हो गया. अजय इससे पहले कुछ करता या समझ पता पूरा जंगल जानवरो के रुदन से गूँज उठा अजय उन्हें शांत करने की भरसक कोशिश कर रहा था पर वो लगातार चिल्लाए जा रहे थे.

उनका चीत्कार अजय को पागल कर रहा था उसके दिमाग की नसे फटी जा रही थी. वो अपने कानो को ज़ोर से बंद करके धरती पर गिर पड़ा उसकी आँखे बंद हो गई. न जाने क्यों वो दर्द से चिल्ला रहा था ये आवाज़े उससे बर्दाश्त नहीं हो रही थी अचानक उसकी बंद आँखों के सामने कुछ दृश्य घूमने लगे जिसमे वो अपने आप को देख रहा था एक हाथियों के झुण्ड के बीच और वो हाथी भी इन जानवरो की तरह चिंघाड़ रहे थे वह और लोग भी थे पर उनके चेहरे धुंदले थे पर वो भी हाथियों को शांत करने की कोशिश कर रहे थे पर हाथी शांत होने का नाम नहीं ले रहे थे.

Cl1cMDTq_o.jpeg


अचानक अजय ने एक गीत गुनगुनाना शुरू कर दिया और आश्चर्य उसके गीत को सुनकर जंगली हाथियों का उत्पात कम होने लगा वो शांत होने लगे. इधर वर्त्तमान में उन द्र्श्यो को देख अजय को आभास हो रहा था की ऐसी परिस्थिति वो पहले भी देख चुके है और उसके होंठ खुद बा खुद उस गीत के साथ चल उठे और उसने वही गीत गुनगुनाना शुरू कर दिया जो वो उन दृश्यों में गुनगुना रहा था और आश्चर्य ये जंगली जानवर भी शांत होने लगे उनका चीत्कार बंद हो गया वो शांत भाव से अजय के गीतों को सुन रहे थे.

स्थिति नार्मल होने पर अजय ने अपनी आँखे खोली सब जानवर अब भी वही थे सबके नज़रे उसकी तरफ तो थी पर उस पर नहीं. उनकी नज़रो के एंगल से साफ़ थे वो किसी और को देख रह थे जो ठीक अजय के पीछे खड़ा था. अजय ने भी अपना चेहरा पीछे घुमाया और पीछे खड़े उस शिक्षा को देखता hi रह गया हटती कटती पर्सनालिटी चौड़े कंधे चेहरे पर घनी दादी सुर्ख लाल आँखे और वो उस गैंडे के घाव पर मरहम लगा रहा था.

अजय: कौन हो तुम.

आदमी: मुझे लगता है ये सवाल तुमसे पुछा जाना चाहिए.

अजय: मई यहाँ किसीको ढूंढ़ने आया हु.

आदमी: क्या मई उसका नाम जान सकता हु मई यही रहता हु शायद मई तुम्हारी तलाश में कुछ मदद कर सकू.

अजय: लोगन मई यहाँ लोगन की तलाश में आया हु.

लोगन नाम सुनते hi उस अनजान आदमी की भौंए तन गई.

आदमी: इस नाम का कोई शिक्षा यहाँ नहीं रहता.

अजय: पर ओसका ने मुझे यही का पता दिया था.

आदमी: ओसका किस ओसका की बात कर रहे वैसे क्यों ढूंढ़ना चाहते हो तुम लोगन को.

अजय: तुम लोगन के बारे में कुछ जानते हो तो बताओ वर्ण समय बर्बाद करने का वक़्त नहीं मेरे पास.

अजय वह चलने को हुआ पर उस आदमी की आवाज़ ने फिर उसे रुकने को मजबूर कर दिया.

आदमी: सुना है इस जंगल में कोई दिव्या पुरुष रहता है अब ये बात सच है या कहानी कोई क्या जाने हो सकता है तुम्हारा लोगन वही हो.

अजय: क्या तुम उसे ढूंढ़ने में मेरी मदद कर सकते हो.

आदमी: अगर तुम मुझे पूरी बात बताओ तो शायद.

अजय: किसीको बचने के लिए मुझे उसकी मदद चाहिए मुझे यहाँ नागा कबीले के सरदार महँ तांत्रिक ओसका ने भेजा है लोगन को लेन के लिए.

आदमी: मई जनता हु ओसका को बरसो पहले मुलाकात हुई थी उनसे. माँ hi हु लोगन बोलो.

TWzOUttv_o.jpeg


अजय: मई समझ गया था की जो शिक्षा मेरे सामने खड़ा है और एक आत्मा से बिना डरे बात कर रहा है वो कोई आम इंसान तो नहीं हो सकता. तुम्हे मेरे साथ चलना होगा.

लोगन: भूल जाओ मई यहाँ से कही नहीं जा सकता लोगो के छोटे मोठे मसले सुलझाना मेरा काम नहीं लौट जाओ यहाँ से.

अजय: पर किसी की ज़िन्दगी मौत का सवाल है और सिर्फ तुम hi उसे बचा सकते हो.

लोगन: आम इंसानो की ज़िन्दगी बचने से ज़ादा ज़रूरी काम है मेरे पास.

अजय: मई जनता हु तुम यहाँ सात चिरंजीवियों में से एक के रक्षक हो.

लोगन: ओसका ने तुम्हे काफी कुछ बता कर भेजा है. तो ये नहीं बताया की ऐसे छोटे मोठे मसले मई नहीं सुलझाता अगर ऐसे हर ैरे गैर को बचने में लग जाओ तो आए दिन कोई न कोई यहाँ मुँह उठाए चला आएगा. तुम्हारे अंदर से एक अजीब से तेज नज़र आ रहा था इसलिए तुम्हारे सामने आ गया.

लोगन: अगर तुम ओसका को जानते हो तो ये जानते होंगे की वो यही किसीको तुम्हारे पास नहीं भेजेंगे जब तक मामला कुछ बड़ा न हो.

अजय की इस बात ने लोगन को सोचने को मजबूर कर दिया. और वो बिना कुछ बोले वही जंगल में ध्यान की मुद्रा में बैठ गया. अजय उसे ध्यान लगाए देख रहा था पर उसे समझ नहीं आ रहा था की वो उसका ध्यान तोड़े या उसके आँखे खोलने का इंतज़ार करे. इधर अजय मानसिक रूप से ओसका से संपर्क स्थापित कर रहा था और जल्द hi ओसका से उसका संपर्क स्थापित हो गया.

sxkWEwhL_o.jpeg


ओसका: प्रणाम वीरभद्र पुत्र लोगन.

लोगन मानसिक रूप से: आपका एक डाकिया यहाँ आसाम के जंगलो में मुझे ढूंढ़ता घूम रहा है कह रहा है आपने भेजा है.

ओसका: जी अगर मई खुद आपसे संपर्क बिठा पता तो आपको खुद बता देता.

लोगन: आप जानते है मई यहाँ से नहीं आ सकता.

ओसका: मई आपको बुलाता भी नहीं अगर ये बात उस एकमुखी रुद्राक्ष से न जुडी होती.

लोगन: एकमुखी रुद्राक्ष क्या कह रहे है आप वो तो कही विलुप्त हो गया था.

ओसका: हम्म पर उस एकमुखी रुद्राक्ष ने दुबारा अपनी उपस्थिति का आभास कराया है इस लड़के की आत्मा की यादो में.

Gi2cE9Ut_o.jpg


और ओसका लोगन अभय रायचंद से जुडी साडी बाते बताता गया.

ओसका: जब मई इस लड़के की यादो को टटोल रहा था और जब उन यादो में मेरा सामना उस अभय रायचंद नाम के शिक्षा से हुआ तो मुझे उसके अंदर से अजीब सी आसुरी ऊर्जा का आभास हुआ और साथ में दिखा वो एकमुखी रुद्राक्ष मुझे कुछ समझ में नहीं आया. पर चुकी मामला आसुरी ऊर्जा से जुड़ा था इसलिए किसी देव गैन को बताना ज़रूरी था और मई सिर्फ आपको जनता था इसलिए आप तक संदेसा पंहुचा दिया अब आप जैसा उचित समझे वैसा करे. पर ये सब कही न कही उस कन्या से जुड़ा है जो इस वक़्त उस अभय के पास है अगर हमे इस रहस्य से पर्दा हटाना है तो उसे आज़ाद करना होगा ताकि उसकी यादो को टटोल कर हम पूरी बात जान सके और ये काम सिर्फ आप hi कर सकते है.

लोगन: अगर आपकी बात सच है तो हमे सच्चाई का पता लगाना hi होगा.

ओसका: उस आत्मा को मैंने मंत्र ताकत से तीव्र गति से उड़ने की छमता प्रदान करि है वो आपको जल्द hi यहाँ ले आएगा.

लोगन: हम्म

लोगन ने आँखे खोल दी.

लोगन: रात गहरी होते hi हम यहाँ से कुछ करेंगे.

अजय: ठीक है.

MSp5IRBi_o.jpeg
 
काकातुआ के जंगल

इधर नीतू के शब्द रुपी बानो ने अघोरी के दिलो दिमाग में अजीब सा द्वन्द पैदा कर दिया था उधर लखन और विनीता पूजा के अपने अपने चरण को पूरा कर रहे थे. जहा लखन उन कन्याओ के साथ धरती पूजा के प्रथम चरण वृक्षारोपण को पूरा करके वापस ा गए थे तो वही विनीता ने घर में रहकर उन कन्याओ को भोजन करने के लिए स्वादिष्ट भोजन तैयार करा था. उसके बाद लखन विनीता ने एक पति पत्नी के सामान hi उन कन्याओ को पंक्ति में बिठा कर बड़े प्रेम और आदर के साथ भोजन कराया और उन कन्याओ से आशीर्वाद लिया की जिन कन्या भ्रूण हत्या का पाप उनके परिवार पर चढ़ा था उससे उन्हें मुक्ति मिले. भोजन करवा कर उन्होंने उन कन्याओ को वह से विदा करा अब समय था धरती पूजा के तीसरे चरण यानि गौ प्रजनन का.

HXaC5Nyp_o.jpeg


वो गई काफी तेज़ आवाज़ निकल रही थी शतड उसके शिशु के बहार आने का समय हो गया था. लखन ने तो इससे पहले भी इस तरह की परिस्थिति का सामना करा था पर विनीता के लिए तो ये एकदम नया था. विनीता के तो हाथ पाँव फूल रहे थे पर लखन सिंह ने धैर्य बंधाया की चिंता की कोई बात नहीं है वो बस वह उपस्थित रहे सारा काम लखन सिंह और वो ग्वाला देख लेंगे. लखन सिंह गई के पेट के पास बैठ गए और वो ग्वाला गई के पीछे आकर बैठ गए. गई काफी रुदन कफ रही थी. लखन सिंह ने विनीता को इशारा करा की वो थोड़ा उसका सर सेहला दे ताकि वो थोड़ा शांत हो जाए. विनीता उस गई का सर अपनी गोड़ में रखकर बैठ और बड़े प्रेम और वात्सल्य से उसका सर सहलाने लगी. लखन जब विनीता को प्रेम से उस गई का सर सहलाते देख रहे थे तो मन hi मन सोच रहे थे की जब भी ये महिला खुद माँ बनेगी बड़ी अच्छी माँ बनेगी भगवान् इन्हे एक अच्छी शादीशुदा ज़िन्दगी प्रदान करे. वही विनीता उस गई का बच्चा पैदा होते देख कर यही सोच रही थी की क्या उसके जीवन में भी ये सुख कभी आएगा क्युकी जो उसका पति है उसे तो उससे प्यार hi नहीं है और जिस शिक्षा से वो इस वक़्त प्यार करती है वो उसका पति नहीं बन सकता.

MjuFfxCT_o.jpeg


लखन विनीता अपने अपने विचारो में खोए थे इधर गई के शिशु बहार आना प्रारम्भ हो गया. लखन ने तो ये पहले भी देखा था पर विनीता जीवन में पहली बार किसी शिशु का जन्म होते देख रही थी बड़ा hi रोमांचक और दिल को छू लेने वाला अनुभव. किस तरह एक मादा एक नए जीवन को दुनिया में लती है कहते है जीवन तो ऊपरवाला देता है और ये जीवन दुनिया में लेन की छमता उसने मादा जाती को hi प्रदान करि है फिर भी कुछ छोटी मानसिकता के लोग स्त्री को पुरुष से कम समझते है. शायद इस पूजा के चरण का उद्देश्य hi स्त्री की वास्तविक शक्ति का सजीव दर्शन करना था. वो बछड़ा पूरी तरह बहार आ चूका था पर उससे खड़ा नहीं हुआ जा रहा था ग्वाले ने उस बच्चे को उठाकर उसकी माता के चेहरे के पास रख दिया और गौ माता ने बड़े प्रेम और वात्सल्य के साथ अपने नवजात शिशु को चाट चाट कर साफ़ करना शुरू कर दिया.

6hHK0SbQ_o.jpeg


कितना प्रेम और ममतामई दृश्य था ये विनीता की आँखे आसुओ से डाब दबा आई पर ये आंसू दुःख या गम के नहीं ख़ुशी के थे एक बच्चे को दुनिया में लेन के महान काम में सहयोग करने की ख़ुशी.

जब तक उस गए ने अपने बछड़े को चाट चाट कर पूरी तरह साफ़ नहीं कर दिया वो तीनो वही खड़े उस शिशु और उसकी माता को निहारते रहे. उसके बाद उस ग्वाले ने उनसे चलने की अनुमति मांगी और लखन के सहयोग से उस गई और बछड़े को एक टंगे में लादकर उन्हें प्रणाम करके वह से प्रस्थान कर गया. उसके जाने के बाद लखन ने विनीता की आसुओ से भरी आँखे देखि.

Q7LDmGWU_o.jpg


लखन: आप रो रही है अब बच्चा होने में इतना दर्द तो होता hi है.

विनीता: ये दर्द तो बड़े नसीबो से मिलता है मई तो एक माँ का अपने बच्चे के लिए प्रेम देखकर इमोशनल हो गई. माँ चाहे इंसान हो या जानवर माँ माँ होती है अपने बच्चे के लिए उसका प्यार सामान होता है.

लखन: सही कहा आपने मुझे अब महसूस होता है की जब मेरे पुरखो ने उन माओ से उनकी नवजात बच्चियों को छीन कर मार दिया होगा तो कितना दर्द हुआ होगा. दिल से बद्दुआ निकली होगी उनके शायद वही बद्दुआ आज हमारे परिवार पर श्राप पर बन गई है. आज मई हाथ जोड़ कर उन सभी माओ से छमा मांगता हु की हो सके तो मेरे उन पुरखो के उन पापो को माफ़ करदे अपनी बद्दुआ हमारे परिवार से वापस ले ले.

विनीता: ऐसा hi होगा आपके परिवार को उस श्राप से मुक्ति ज़रूर मिलेगी वैसे हमे अघोरी बाबा को इस बारे में बता देना चाहिए.

लखन: हम्म आप सही कहती है.

लखन ने अघोरी को फ़ोन मिलाया.

लखन: बाबा पूजा के प्रथम तीन चरण हो गए.

अघोरी: बहुत अच्छे अगले तीन चरण के बारे में उस पत्र में विस्तार से लिखा है अब संध्या हो चुकी है अब आप उस पत्र को पद सकते है. ये चरण थोड़े कठिन है खासकर विनीता जी के लिए आशा करता हु हर बार की तरह उस बात भी आप दोनों सफल होंगे.

विनीता: बाबा अब आगे की पूजा कितनी भी कठिन क्यों न हो इतनी दूर आने के बाद अब वापस नहीं लौटेंगे मई हर कदम में लखन जी का पूरा साथ दूँगी और इस पूजा को संपन्न करा के hi रहूंगी.

अघोरी: आप एक बहुत अच्छी इंसान है मुझे ख़ुशी है की लखन जी के साथ इस पूजा में आप शामिल हुई शायद ऊपर वाले की भी यही मर्ज़ी थी.

अब विनीता क्या कहती की ऊपर वाले की क्या मर्ज़ी थी उसके मन में अपने से दुगनी उम्र के आदमी अपनी hi सहेली के ससुर के प्रति जिस प्रेम का अंकुरण हुआ था क्या वो भी उपरवाले की hi मर्ज़ी थी.

विनीता: जी शायद जो कुछ उपरवाले की मर्ज़ी से hi हुआ.

अघोरी: आप दोनों को पूजा के अगले चरणों के लिए शुभ आशीष.

इतना कह कर दोनों तरफ से फ़ोन रख दिया गया पर अघोरी विनीता के व्यक्तित्व से बिगड़ प्रभावित था जिस तरह उसने किसी और की पत्नी होने के बावजूद पूजा की हर रस्म को बेहद हिम्मत के साथ पूरा करा और आने वाली रस्मो के लिए दर्द संकल्प लिया की वो पीछे नहीं हटेगी वो अतुलनीय है. एक औरत के लिया उसकी इज़्ज़त पुरुष से कही ज़ादा मैने रखती है फिर भी विनीता इतना सब कर रही है सिर्फ इंसानियत के नाते और मई अपना ब्रह्मचर्य बचने के लिए उस कन्या को मन कर रहा हु. क्या वास्तव में मई उस दिन भावबेष में बह गया था और सिर्फ अपने अहम् को सिद्ध करने के लिए अपनी सिद्धियों का प्रदर्शन कर रहा था. खैर जो हो गया वो गया अब उसे वापस नहीं लाया जा सकता अब जो भी हो अगर मैंने उस कन्या को ये रास्ता दिखाया है तो अब उसे इसमें सफल करना भी मेरा hi फ़र्ज़ है और मुझे इसे पूरा करना hi होगा. मुझे खुद को मानसिक रूप से इस पूजा के लिए तैयार करना hi होगा. मुझे उसे बताना होगा की मई इस साधना के लिए तैयार हु और वो खुद को भी इसके लिए तैयार करले.

iDHbUxkh_o.jpg


अघोरी अपनी कुटिया की तरफ चल पड़ा जहा वो नीतू को छोड़ कर आया था. अंदर नीतू बेसब्री से अघोरी के जवाब का इंतज़ार कर रही थी राज के लिए भी और खुद के मन जगी काम इच्छाओ के लिए भी.

अघोरी: मई इस साधना के लिए तैयार हु.

नीतू आश्चर्य और ख़ुशी से: जी

अघोरी: जी हां आपके साथ ये साधना मई संपन्न करूँगा. मई आपका कौमार्य भांग करूँगा और अपना ब्रह्मचर्य उसपर समर्पित करूँगा.

नीतू ख़ुशी से: मुझे विश्वास नहीं हो रहा की आप इस साधना के लिए मान गए है.

अघोरी: जब विनीता जी इस पूजा को संपन्न करने के लिए इतना सब कर सकती है तो मई कैसे मन कर सकता हु. बस मई आपको बताना चाहता हु की मई अफ्रीकन नीग्रो हब्सी नेसल से हु जिनका लिंग उत्तेजना की अवस्था में भारतीय पुरुष के लिंग से कही ज्यादा लुम्बा हो जाता है इसलिए आप खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार कर लीजिये क्युकी एक अफ्रीकन हाशि के साथ शील भांग करने का दर्द सहने के लिए आपको अंदर से काफी मजबूत बनना पड़ेगा.

अघोरी की बात सुनकर नीतू के शरीर में सिहरन सी दौड़ गई की वास्तव में क्या वो ये दर्द सेह पाएगी. पर अब एक बार अघोरी को कन्विंस कर चुकी तो अब सोचने का कोई मतलब नहीं बनता और वैसे भी एक अपने आप में एक लाइफटाइम एक्सपीरियंस है एक हब्शी से सील तुड़वाना जो बिरले hi किसी किसी को नसीब होता है. नीतू को चिंता में देख अघोरी बोल उठा.

अघोरी: चिंता न करे आज आपको अपना शील भांग नहीं करवाना खुद को तैयार करने के लिए आपके पास कल रात तक का वक़्त है शील भांग की क्रिया कल रात होगी पर आज रात को आपको उस लिंग को काफी करीब से महसूस करने का अनुभव प्राप्त होगा जिसे आपको अपने योनि के अंदर लेना है शायद इससे आपको खुद को तैयार करने में कुछ मदद मिले.

नीतू: जी

अघोरी: अब आप विश्राम करे और निश्चिन्त होकर आज रात की साधना का विचार करे आज आपको काफी कुछ करना होगा. मई भी तालाब के पास साधना के लिए जा रहा हु जीवन भर किसी स्त्री को कामुक नज़र से न देखने न स्पर्श करने के कारन मुझे भी खुद को मानसिक रूप से खुद को तैयार करना होगा. आ सीधा साधना के वक़्त लौटूंगा आप खुछ भोजन कर लीजियेगा.

नीतू: जी

HGGnNYvn_o.jpeg


अघोरी वह से साधना के लिए चला गया और नीतू भी खुश थी की फाइनली उसकी म्हणत रंग ले और अघोरी इस साधना के लिए तैयार हो गया. अब राज को भी कुछ नहीं होगा और उसे भी एक लाइफटाइम एक्सपीरियंस अनुभव करने का मौका मिलेगा एक ऐसा अनुभा जैसा कई मर्दो के साथ सेक्स कर चुकने वाली नेहा को भी नहीं मिला था. उसने इंटर्रशियल सेक्स के बारे में सुना और वीडियो में देखा तो बहुत था पर सोचा नहीं था की कभी उसे खुद अपनी लाइफ में इंटर्रशियल सेक्स करने का मौका मिलेगा वो भी अपनी लाइफ के पहल सेक्स एक्सपीरियंस के रूप में. पहला सेक्स किसी भी औरत के लिए बेहद स्पेशल होता है जिसे वो साडी ज़िन्दगी याद रखती है और नीतू के लिए तो ये स्पेशल से भी ज्यादा स्पेशल बनने जा रहा था क्युकी उसका पहला सेक्स एक अफ्रीकन हब्शी के साथ होने वाला था. पर नीतू के मन में एक और सवाल था जो बार बार उसे विचलित कर रहा था की क्या एक बार एक हब्शी के साथ पहला सेक्स एक्सपीरियंस ले लेने के बाद वो राज के साथ अपनी सेक्स लाइफ एन्जॉय कर पाएगी क्या इस सेक्स का असर उसकी आने वाली सेक्स लाइफ पर तो नहीं पड़ेगा. पर नीतू ने फाइनली अपना दिल मजबूत कर लिए की जो होगा देखा जाएगा फिलहाल राज की ज़िन्दगी बचाना किसी भी चीज़ से ज्यादा ज़रूरी है और उसे ये करना hi होगा.

इधर नीतू और अघोरी खुद को आज रात की साधना के लिए मानसिक रूप से तैयार कर रहे थे उधर लखन और विनीता उस पत्र को पड़ने के लिए तैयार थे जिसमे पृथ्वी के ग्रीक स्वरुप गया के बारे में और उसकी पूजा से जुड़े तीन चरण के बारे में विस्तार से लिखा था. ज्यादातर विनीता लखन की पूजा के सूर्यास्त के पूर्व के चरण लखन की शारीरिक छमताओ की परीक्षा लेने वाले रहे थे जहा तरह तरह से उनकी ताकत और बुद्धि की प्रतीक्षा ली गई कभी दंगल करवा कर तो कभी एक अड़ियल घोड़े को काबू करवा कर कभी दूर किसी मंदिर से एक त्रिशूल मंगवा कर तो कभी बेहद कठिन रथ दौड़ करवा कर . पर हर दिन सूर्यास्त के बाद चरण विनीता के लिए ज्यादा कठिन साबित हुए जहा उनके जज़्बातो की बेहद कठिन परीक्षा ली गई उन्हें बेहद कामुक तरीके से लखन के करीब आने को मजबूर किया गया कभी एक दुसरे को आलिंगन में भर कर पूरी रात बिताने को कह कर तो कभी अधनंगे बदन दिखाऊ कपडे पहना कर कभी उनसे मुखमैथुन करवा कर तो कभी उनके स्तनों को लखन सिंह के होंठो से स्पर्श करवा कर. ऐसी परिस्थितिया उत्पन्न की गई जहा उनके मन में एक दुसरे के प्रति प्रेम उत्पन्न हो और ऐसा हुआ भी.

55RAhda0_o.jpeg


अब देखना ये था की माँ धरती का ये ग्रीक गया स्वरुप उनके सामने क्या नै चुनौती पेश करने वाला था किस कामुक तरीके से उन्हें एक दुसरे के नज़दीक लेन वाला था.
 
गया पूजा की विधिया

BUklLI6r_o.jpeg


लखन विनीता ने वो चिट्ठी खोली जिसमे गया पूजा के तीन चरण लिखे थे. लखन ने तेज़ आवाज़ में पत्र में लिखे शब्दों को पड़ना आरम्भ किया.

गया जिसे हम मदर एअर्थ या प्रकृति अनेको नामो से जानते है वास्तव में हमारे सौरमंडल का आधार है जीवन की जननी है. गया ने स्वयं अपने पुरुष को जन्म दिया अपनी योगमाया से जिसे हम यूरेनस के नाम से जानते है. बाद में यूरेनस और गया के मिलान से क्रोनस यानि जुपिटर का जन्म हुआ. किन्तु यूरेनस का अहम् बहुत बाद गया वो अपनी शक्तियों का दुरूपयोग करने लगा जनमानस पर अत्याचार करने जो प्रकृति यानि गया से बर्दाश्त न हुआ और तब उसने अपने बेटे क्रोनस की मदद से यूरेनस का अंत कर दिया पर जिस वीभत्स तरीके से क्रोनस ने अपने पिता को मारा उससे संपूर्ण . डी सिहर उठा और तब एक आकाशवाणी हुई की जिस तरह से क्रोनस ने आज अपने पिता को मारा उसकी संतान उसका वध करेगी.

ऐसे में क्रोनस ने फैसला करा की वो अपनी किसी संतान को जन्म hi नहीं लेने देगा. तो जब भी क्रोनस का शिशु जन्म लेने वाला होता वो अपने शिशु के पिंड को सशरीर निगल जाता. गया अपने पुत्र का ये विकृत रूप देखकर काफी दुखी थी. क्रोनस अपने पांच शिशुओं को निगल चूका था जब उसके छठे शिशु ज़ीउस के जन्म की घडी नज़दीक आई तो गया ने एक उस शिशु को अपने एक विश्वासपात्र सर्प के माध्यम से कही दूर भेज दिया और एक कपडे में एक पत्थर लपेट कर क्रोनस को दे दिया. क्रोनस उसे hi अपना शिशु समझ कर निगल गया. बाद में जब ज़ीउस जवान हुआ तब उसने अपनी दादी गया की मदद से अपने पिता क्रोनस का पेट पहाड़ कर अपने भाई बहनो को आज़ाद कराया और क्रोनस को सत्ता से हटाकर शाशन की बहदुर अपने हाथो में ली. गया ने शाशन को अपने तीन पौत्रो में बात दिया. ज़ीउस की न्यायप्रियता देखते हुए उसे अनंत आकाश का स्वामी बनाया पोसिडों के जोश और आवेग को देखते हुए उसे समुद्र का स्वामी बनाया और हदीस के अंदर अपने दादा और पिता के जैसे अन्धकार को देखते हुए उसे पटल में राज करने को भेज दिया.

Ye8WGOTp_o.jpeg


गया ने जीवन भर न्याय का साथ दिया और इस संसार को अन्याय से मुक्ति दिलाने और न्याय की स्थापना में एक पत्नी और माँ के रिश्तो को भी बीच में नहीं आने दिया. गया की साधना के बारे में बताने से पहले उसके बारे में बताना जादूरि था.

अब आते है पूजा की प्रक्रिया पर. ***** धर्म में धरती को माता मन जाता है और माता के रूप में hi उसका पूजा की जाती है पर ग्रीक माइथोलॉजी में गया को प्रकृति के वास्तविक स्वरुप में hi पूजा जाता है. जहा प्रकृति के कोई वस्त्र नहीं है उसके पंचतत्व hi उसके आभूषण उसके वस्त्र है इसलिए ये...... (पड़ते पड़ते अचानक लखन कुछ पद कर अटक गया. विनीता भी समझ गई की ज़रूर कोई ऐसी बात आ गई है जो थोड़ी उनकंफर्टबले है इसीलिए लखन उसे पड़ने में हिचक रहे है.)

विनीता: क्या हुआ आप पड़ते पड़ते अचानक से रुक क्यों गए मई जानती हु की हर दिन की तरह आज भी कुछ न कुछ ऐसा ज़रूर होगा जो हमे उनकंफर्टबले करने वाला होगा, पर यकीन मानिये अब मई इसके लिए तैयार हु. अब बिना संकोच किये आगे पढ़िए और अगर आपसे नहीं पड़ा जा रहा तो पत्र मुझे दीजिये मई पड़ती हु.

लखन: नहीं मई hi पड़ता हु.

लखन ने दुबारा पड़ना शुरू किया.

y5J3gGBf_o.jpeg


पंचतत्व hi गया के वस्त्र इसलिए ये पूजा... आपको वस्त्रहीन यानि निर्वस्त्र होकर करनी है.

पत्र में लिखी इस एक लाइन ने लखन विनीता दोनों को थूक गटकने पर विवश कर दिया. कुछ देर वो दोनों यही मौन खड़े रहे फिर विनीता ने hi खुद को संयत करते हुए लखन को आगे पड़ने को कहा.

qBkFSjCJ_o.jpeg


यही आपकी आज की साधना का प्रथम चरण है वस्त्र त्यागम जिसमे आपको खुद नहीं बल्कि एक दुसरे के वस्त्र उतर कर एक दुसरे को पूरी तरह निर्वस्त्र करना है. है पर आप दोनों की असहजता का ध्यान रखते हुए आप एक काम कर सकते है आप चाहे तो इस पूरी के दौरान अपनी आँखों पर पट्टी बाँध कर रख सकते है ताकि आपको एक दुसरे के सामने निर्वस्त्र होने में इतना असहज न लगे. ( ये पढ़कर विनीता लखन को थोड़ी रहत महसूस हुई की अगर आँख पर पट्टी बंधी है तो निर्वस्त्र भी होना पड़ा तो इसमें कुछ उनकंफर्टबले नहीं लगेगा. तब उन्होंने सोचा भी नहीं था की आगे पत्र में उन्हें और क्या क्या करना पड़ेगा.)

पूजा का दूसरा चरण है मृदा लेपन. मृदा अर्थात मिटटी और लेपन मतलब मलना. इस चरण में आपको एक दुसरे के नग्न शरीर par.......(gehri सास लेते हुए) मिटटी का लेप मलना है. और ये लेपन आपको स्वयं अपने ऊपर नहीं करना है आपको एक दुसरे के बदन के हर अंग को स्पर्श करके उस पर लेप मलना है. हर अंग से मतलब........ हर अंग चेरा v....v..vaksha पेट नाभि नितम्ब यहाँ तक की योनि और लिंग भी कोई भी अंग इस लेप से वंचित न रहे. हर अंग को आपको अपने हाथो से छूकर महसूस करना है बेशक आपकी आँखों में पट्टी बंधी होगी पर हाथो के स्पर्श आपको एक दुसरे के बदन के हर अंग को अच्छे से छूकर महसूस करना है वह उस मिटटी को अच्छी तरह से मलना है ताकि आप पूरी तरह संदेहरहित की वह अच्छे लेपन हो गया है.

पड़ते पड़ते hi लखन बेहद उत्तेजित महसूस कर रहे थे और एक एक शब्द को सुनते हुए विनीता का शरीर का रोया रोया खड़ा हो गया था. अपने नग्न शरीर पर लखन सिंह के हाथो के स्पर्श मात्रा के बारे में सोच कर विनीता बेहद उत्तेजनापूर्ण महसूस कर रही थी तो जब ये सब वास्तव में होगा तब उसका क्या हाल होगा. पर अब उसे लखन सिंह के हाथो निर्वस्त्र होकर उनसे अपना नग्न बदन स्पर्श करना गलत कम और कामुक और उत्तेजक ज्यादा लग रहा था. शायद उसके मन में जो लखन सिंह के लिए प्रेम उत्पन्न हुआ था ये उसीका परिणाम था. शायद जब पूजा प्रारम्भ हुई थी तब धरती की पूजा सबसे प्रारम्भ में होती तो शायद तभी ये पूजा शुरू होते hi ख़तम हो जाती और विनीता किसी भी सूरत में इसके लिए तैयार नहीं होतो पर पूजा में ग्रहो का संयोजन भी इस तरह किया था की उनकी असहजता को क्रमबद्ध तरह से ख़तम किया जाए और उन्हें धीमे धीमे एक दुसरे के नज़दीक लाया जाए ताकि पूजा एक अंतिम दिनों की ये रस्मे निभाते हुए उन्हें ज्यादा असहज न लगे वो स्वेक्षा से इन्हे करने के लिए तैयार हो जाए.

पर लखन को अब भी इसमें असहज लग रहा था. बेशक उसके मन में विनीता के लिए प्रेम भाव पर वो विनीता के मन में अपने लिए जन्मे प्रेम भाव से अब भी अनजान था और वो विनीता को ये सब करने के लिए विवश नहीं करना चाहता था.

लखन: नहीं विनीता जी बस बहुत हुआ ये पूजा हर दिन ाको कुछ अनुचित करने के लिए मजबूर कर रही है और आप अपनी अच्छे के कारन ये सब कर रही है पर अब मुझसे पर अब ये बस.

विनीता ने लखन के कंधे पर हाथ रख कर उन्हें धैर्य बंधाया.

विनीता: लखन जी अधीर मत होइए उम्मीद मत छोड़िये पूरा पत्र तो पढ़िए शायद इसमें आगे कुछ ऐसा हो जिससे हमे असहज न लगे.

लखन: इतना सब तो लिखा है अब आगे क्या पदु.

विनीता: मेरी खातिर पढ़िए अगर आपके मन में मेरे लिए ज़रा भी आदर सम्मान है तो पत्र पूरा करिये पढ़िए प्लीज मेरे कहने पर पद दीजिये.

विनीता की इतने प्यार से कही गई बात को भला लखन कैसे मन कर सकता था.

लखन: जी

deyH6g18_o.jpeg


मृदा लेपन के इस चरण के लिए आपके घर के पीछे बना कमरा जो अब तक बंद था विशेष रूप से इसी चरण के लिए तैयार किया गया था. वह एक बड़ा सा गड्ढा बनाकर उस गड्ढे को विशेष रूप से तैयार की गई मिटटी से पूरी तरह भर दिया गया है. आप दोनों को उसी गड्ढे में एक दुसरे के sath......alingandh बैठकर एक दुसरे के शरीर पर उस मिटटी को मलना है. और ये प्रक्रिया छान भर की नहीं है बल्कि एक घंटे की है आपको एक घंटे तक यही एक दुसरे के साथ आलिंगनबद्ध रहकर इस प्रक्रिया को अनवरत करते रहना है संदेह की कोई सम्भावना न रहे कोई अंग शेष न रहे कोई अंग आपके स्पर्श से अछूता न रहे. एक घंटे के समय की जानकारी के लिए उस कमरे में एक अलार्म क्लॉक राखी है जिसमे आप एक घंटे का अलार्म लगाकर समय का पता लगा सकते है.

एक घंटे के मृदा लेपन के बाद अपने शरीर पर लगी मिटटी को साफ़ करने करने के लिए उसी कमरे में उस गड्ढे के समीप hi एक जलकुंड बनाया गया जो स्वक्षा जल से भरा है. उसमे आप दोनों उसी अवस्था में एक साथ स्नान करना है और..... और इस स्नान के दौरान भी आप दोनों आलिंगनबद्ध hi रहना है और अपने बदन की मिटटी साफ़ न करके एक दुसरे के बदन की मिटटी को साफ़ करना है. इस स्नान के लिए समय की कोई सीमा नहीं है पर अपने शरीर पर लगी मिटटी का कटरा कटरा आपको उसकी कुंड में छोड़ जाना है. इसलिए बेहतर होगा आप जल्दबाज़ी न करे और एक दुसरे में बदन को अच्छी तरह से साफ़ करने के बाद पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद hi जलकुंड से बहार आए. इस स्नान के साथ hi आपकी पूजा का द्वितीय चरण पूर्ण हो जाएगा.

अब आते है पूजा के तृतीया और सबसे मुश्किल चरण पर जिसका नाम है. (उस चरण का नाम पड़ते hi लखन की जबान ने साथ छोड़ दिया उनसे आगे पड़ा हो नहीं जा रहा था.)

विनीता: क्या हुआ आप रुक क्यों गए क्या नाम है तीसरे चरण का.

लखन: माफ़ करियेगा मई दिल से आपका बहुत सम्मान करता हु पर अब आगे मुझसे नहीं पड़ा जाएगा. आप चाहे तो खुद पडले.

इतना कह कर लखन ने वो पत्र विनीता की तरफ बड़ा दिया. विनीता ने भी वो पत्र अपने हाथो में थम लिया और पत्र को आगे पड़ना आरम्भ किया.

अब आते है पूजा के तृतीया और सबसे मुश्किल चरण पर जिसके नाम hai......(ladkhadati ज़बान से) जिसका नाम hai......Y....YONI पूजा. (गहरी सास लेकर आगे पड़त हुए) जैसा की नाम से hi ज़ाहिर है ये चरण स्त्री के प्रजनन अंग यानी उसकी योनि की पूजा से सम्बंधित है. ये पूजा भी तीन चरण में होगी बाह्य योनि Puja/Antah योनि पूजा एवं प्रसाद ग्रहण. बाह्य योनि पूजा के अंतर्गत लखन जी को पंचतत्वों के प्रतीक पांच पदार्थो से विनीत जी की योनि का अभिषेक करना है. पांच पदार्थो के रूप में उसी कमरे में जलकुंड के समीप पांच कलश रखे है जिसमे हर तत्त्व के प्रतीक स्वरुप पांच पदार्थ है. अम्बर तत्त्व के रूप में तेल, प्रीति तत्त्व के रूप में दही, अग्नि तत्त्व के रूप में शहद, वायु तत्त्व के रूप में दूध और जल तत्त्व के रूप में जल. ये पांचो पदार्थ उन पांच कलशो में है जिनसे बारी बारी इसी क्रम में लखन जी को विनीता जी की योनि का अभिषेक करना है.

7ABJsmeT_o.jpeg


ये सब पड़ते हुए विनीता को बेहद उत्तेजक महसूस हो रहा था पर फिर भी वो अपनी उत्तेजना लखन सिंह पर ज़ाहिर नहीं कर रही थी. वो बिना रुके लगातार पड़े जा रही थी और एकदम नार्मल बेहवे कर रही थी जैसे सब नार्मल हो. हलाकि बेशक विनीता अपनी योनि पर एक मर्द के स्पर्श का एहसास से अब तक वंचित रही पर ये बेहद कामुक होगा इतना तो उसे पता hi था. पर लखन को ये सब सुनते हुए बेहद उनकंफर्टबले लग रहा था और विनीता उनके भावो को भली भाटी समझ रही थी.

विनीता: लखन मृदा लेपन के दौरान भी आपको हर अंग को स्पर्श करना होगा तो अगर फिर से आपको वह स्पर्श करना पड़ा तो उसमे नया क्या होगा.

लखन: पता नहीं पर मुझे आपके लिए बहुत बुरा लग रहा.

विनीता: आप ज्यादा मत सोचिये अब पत्र का अंतिम पैराग्राफ hi बचा है. वो भी ख़तम कर लेते है.

बाह्य योनि पूजा के उपरांत अन्तः योनि पूजा के अंतर्गत लखन जी को पांच पदार्थो में अपनी उंगलिया डुबो कर उन दो उंगलिया को विनीता जी की...... (पड़ते पड़ते विनीता भी रुकने को मजबूर हो गई पर एक गहरी सास लेते हुए दुबारा पड़ना आरम्भ किया). उन दो उंगलियों को विनीता जी की योनि के अंदर डालकर अपनी उंगलियों को अंदर बहार करके उसका अंदर से तब तक अभिषेक करना जब तो वो योनि स्खलित होकर अपना प्रसाद न निकल दे.

AjxHPySL_o.gif


शब्दों का प्रयोग भले hi किसी भी तरह किया गया था पर उनका मतलब साफ़ था की लखन सिंह को विनीता की छूट में ऊँगली दाल करा अंदर बहार करके उसे झड़ने पर मजबूर करना था. ये सोच hi विनीता को अपनी जांघो के बीच गीलापन महसूस होने लगा. पर गहरी सास लेते हुए उसने दुबारा पड़ना आरम्भ किया.

योनि पूजा का तीसरा चरण है प्रसाद ग्रहण जो लखन जी सीधा विनीता जी की....... की (थूक गटकते हुए) की...... (आह भरते हुए). सीधा विनीता ज्ज्ज्जी की योनि से ग्रहण करना है. ययय्यनी सीधा अपना मुँह ववववविनीयता जी की यययोनीय पर रखकर वह से उस प्रसाद को ग्रहण करना है.

ttjdtktI_o.jpeg


लखन: क्या बकवास है ये मई नहीं करूँगा.

विनीता: क्या आपको इसमें घिन लगती है.

लखन: बात घिन की नहीं है बात सही गलत की है मई यु आपका वह मुँह कैसे लगा सकता हु आप किसी की पत्नी है.

विनीता: जो शादी बस नाम के लिए है जिसका कोई मतलब नहीं.

लखन: भले hi हो पर आप एक महिला तो है आपका सम्मान तो है न.

विनीता: पर किसी के जीवन से बाद कर नहीं जिस दिन मुझे आपका वो मुँह में लेना पड़ा था उस दिन यही सामान स्थिति थी पर फिर भी मैंने वो सब करा, फिर आज क्यों नहीं. हां अगर आपको इसमें घिन लगती है तो अलग बात है.

लखन: नहीं घिन की कोई बात नहीं. मई तो....

विनीता: अगर घिन की बात नहीं तो इसे भी एक प्रक्रिया की तरह पूरा कर दीजिये मैंने वडा करा है न मई आपका पूरा साथ दूंगी. है अगर आप मेरा वडा तोडना चाहते है तो आपकी जैसी मर्ज़ी.

लखन: नहीं ऐसी बात नहीं है.

विनीता: तो मेरा साथ दीजिये.

लखन: ठीक है मई आपके साथ हु.

C1evna30_o.jpeg


प्रसाद ग्रहण के साथ hi गया पूजा के तीन चरण और पृथ्वी पूजा के 6 चरण भी पूर्ण हो जाएंगे और आज की पूजा संपन्न हो जाएगी. आशा है आप दोनों हर दिन की तरह आज की पूजा में भी सफल होंगे. शुभाशीष
 
Z7YA5pD9_o.jpeg


वो पत्र तो ख़तम हो गया था पर साथ में एक अजीब सी ख़ामोशी पैदा कर गया था. लखन और विनीता दोनों कुछ देर खामोश खड़े रहे क्युकी इस बार की पूजा ने जो अब तक उनके जिस्मो पर कपड़ो का पर्दा था वो भी हटा दिया था और एक दुसरे के सामने पूरी तरह नंगा होने को कह दिया था. और सिर्फ नंगा होने hi नहीं एक दुसरे को छूने को भी मजबूर कर दिया था और तीसरा चरण तो सबसे उत्तेजक था जहा लखन को विनीता की योनि जिसे देसी भाषा में कहे तो छूट चेतना था. कुछ देर दोनों यही खामोश खड़े रहे, लखन से तो वैसे भी पहल करने की उम्मीद करना बेकार था वो भला कैसे विनीता को आगे बढ़ने को कहते ऐसे में विनीता ने hi एक बार पहल की.

rYUlub7K_o.jpeg


विनीता: लखन जी हमे उस कमरे में चल कर देखना चाहिए.

लखन: क्या वाकई आप ये सब करना चाहती है एक बार फिर सोच लीजिये.

विनीता: जब मई साडी रात खुले आसमान के नीच आप के साथ रात गुज़ार सकती हु आपका वो अपने मुँह में ले सकती हु तो ये भी कर सकती हु. चलिए अब हमे चलना चाहिए पूजा शुरू करने का वक़्त हो रहा है.

लखन: मुझे समझ नहीं अत मई किस तरह आपका ये उपकार उतर पाउँगा.

विनीता मन में: (काश आप समझ पाते ये कोई उपकार नहीं आपके प्रति मेरा प्रेम है जो मुझे आपके करीब आने को मजबूर कर रहा है)

विनीता: उपकार छोड़िये हो सकता है आपको भी कभी बदला चुकाने का मौका मिल जाए फिलहाल इस पूजा को तो संपन्न करिये.

लखन: ठीक है चलिए.

लखन विनीता दोनों उस घर के पीछे बने उस कक्षा के सामने जा पहुंचे जो अब तक बंद था और इसी पूजा में लिए तैयार किया गया था. लखन और विनीता दोनों उस कमरे के अंदर दाखिल हुए, कमरे में ठीक सामने एक बड़ा सा गधा बना हुआ था जो पूरी तरह मिटटी से भरा था जो मुल्तानी मिटटी और कई तरह की मिट्टियो के मिश्रण से तैयार की गई थी.

CtSxjNbj_o.jpeg


उस गड्ढे के ऊपर दीवार पर एक नोट लिखा था की मृदा लेपन की प्रक्रिया के दौरान पुरे समय आप दोनों को एक दुसरे की तरफ मुख किये रहना है आप एक दुसरे की तरफ पीठ नहीं कर सकते. उस गाडगे के पास hi एक बड़ी सी सीमेंटेड हौदिया बानी थी जो पानी से भरी थी जहा लखन विनीता को मृदा लेपन की प्रक्रिया के बाद स्नान करना था.

tynjgR3v_o.jpeg


और उस हौदिया के समीप hi पांच कलश रखे थे जो ऊपर से बंद थे निश्चित hi उनमे वो पांच पदार्थ दूध दही शहद तेल और जल थे जिनसे विनीता की योनि का अभिषेक होना था और वो कलश उसी क्रम में रखे थे जिस क्रम में उनसे योनि अभिषेक होना था. और उनके पास एक अलार्म घडी राखी थी जिसमे एक घंटे का अलार्म सेट था बस उसे ों करना था. विनीता आँखों में बांधने के लिए दो पत्तिया अपने साथ लाइ थी जिनमे से एक पट्टी उसने लखन जी की तरफ बड़ा दी और वो अलार्म घडी अपने पैरो के पास रखकर उनके ठीक सामने उनके नज़दीक आकर कड़ी हो गई.

विनीता: ये पट्टी बांध लीजिये ताकि हमे एक दुसरे के सामने शर्मिंदा महसूस न हो.

लखन ने एक गहरी सास लेते हुए वो पट्टी थम ली.

विनीता: हमे एक बार एक दुसरे को अच्छे से देख लेना चाहिए ताकि हमे एक दुसरे के वस्त्र उतरने में कठिनाई न हो.

लखन को बड़ी झिझक महसूस हो रही थी पर फिर भी उसने विनीता की नज़रो से नज़रे मिलते हुए उसे ऊपर से नीचे तक निहारा. यहाँ आने के बाद उसने कई बार विनीता को देखा था पर इतने ध्यान से इतने करीब से उसे आज तक नहीं देखा था. क्या तीखे नैन नक्शा थे उसकी आँखों के रसभरे होंठ सुराहीदार गर्दन उन्नत वक्ष पतली कमर लुम्बी मांसल टाँगे. लखन ने उसे देखना आरम्भ किया तो छान भर को उसके भाव पर सम्मान की जगह प्रेम हावी हो गया और अगर जस प्रेम भाव के साथ वो इस पूजा को करता तो निश्चित hi किसी न किसी पड़ाव पर आकर बहक जाता. और आज कही न कही उसके संयम की भी परीक्षा थी वो उस औरत जिसके लिए उसके मन में प्रेम भाव जाग चूका है के नग्न शरीर के इतना समीप होते हुए भी किस तरह खुद पर काबू रखेगा किस तरह प्रेम को खुद पर हावी होने से रोक पाएगा.

zaCj8RSH_o.jpeg


लखन ने विनीता के वस्त्रो को ऊपर से नीचे तक परख लिया. विनीता ऊपर एक हरी नीली चोली पहने थी जो पीछे एक डोरी से बंधी थी तो नीचे एक धोतीनुमा पेटीकोट जो साडी की तरह तेह करके उसकी कमर में खुसा हुआ था. और चोली के ऊपर स्तनी को उभर को ढकने के लिए एक चुन्नी थी. बस यही वस्त्र थे जिन्हे लखन कक विनीता के जिस्म से अलग करना था क्युकी अन्तः वस्त्र तो यहाँ पहना जाना मन hi था. वही लखन सिंह ऊपर के अंग को एक शॉलनुमा कपडे से ढके थे और नीचे यहाँ हमेशा पहनी जाने वाली धोती पहने थे जो दोनों सिरों को जोड़कर एक गाँठ से उनकी कमर में बंधी थी. एक दुसरे को अच्छे से देखने के बाद विनीता ने उन पत्तियों की तरफ इशारा करा और दोनों ने एक साथ उन पत्तियों को अपनी आँखों में रख कर पीछे से कास कर गाँठ लगा ली. अब वो सिर्फ एक दुसरे को छू कर hi महसूस कर सकते थे.

rOJ1LT5X_o.jpeg


कुछ पल दोनों खड़े रहे और विनीता जानती थी लखन जी खुद उसे वस्त्रहीन करने में झिझक रहे है इसलिए उसने hi पहल करते हुए अपने हाथ लखन सिंह के कंधो पर रख कर उनकी शाल को खींच कर उनके जिस्म से अलग कर दिया और उसे वही ज़मीन पर दाल दिया. उसके बाद लखन के दोनों हाथो को अपने हाथो में थम कर अपने पीछे ले जाकर उन्हें अपनी चोली के गाँठ के ठीक ऊपर रख दिया. पर लखन की हिम्मत नहीं हो रही थी इस गाँठ को खोलने की.

विनीता: लखन जी ये गाँठ खोलिये.

लखन गहरी सास लेते हुए: मुझसे नहीं होगा.

विनेगा: लखन जी उस लड़की को याद करिये जिसे आप बहु बनाकर घर लाए बस उसका शादी के वस्त्रो में सजा चेहरा याद करिये. उसकी मांग का सिन्दूर याद करिये और सब भूल जाइये.

पर लखन के हाथ अब भी काँप रहे थे.

विनीता: लखन जी इस पूजा की विधि को नहीं इसके उद्देश्य को याद रखिये बस शोभा को याद करिये और खोल दीजिये ये गाँठ.

लखन के होंठ सूख रहे थे.

विनीता: लखन जी गाठ खोलिये.

और विनीता के बार बार कहने पर आखिरकार लखन ने उसकी चोली की गाँठ खोल दी.

xko0hB3I_o.jpg


गाँठ खुलते hi विनीता की चोली जो उसके उभारो को ढकने वाला एकमात्र कपडा था पेड़ से टूटे पत्ते की तरह नीचे आ गिरा और विनीता के बदन के सबसे आकर्षक अंगो में से एक उसके उभर पूरी तरह नंगे हो गए. पर लखन को ये एहसास तो था अब विनीता के स्तन पूरी तरह नंगे है पर आँख पर पट्टी बंधी होने की वजह वो उन्हें देख नहीं सकता था. विनीता भी जानती थी को वो जीवन में पहली बार किसी मर्द के सामने ऊपर से नंगी हो चुकी है पर फिलहाल उस मर्द की आँख में पट्टी थी ऐसे में उसे अपने स्तनों की नग्नता की चिंता नहीं थी. गाँठ खोल कर जब लखन ने अपने हाथ पीछे खींच लिए तब विनीता ने दुबारा उनके हाथो को थम कर उसे अपनी कमर में जहा उसकी धोती खुसी थी वह रख दिया. और खुद भी लखन की कमर को टटोलते हुए उनकी लुंगी की गाँठ थम लिया.

विनीता: लखन जी ज्यादा सोचिये मत बस एक झटके में खींच दीजिये. ज्यादा सोचेंगे तो आपको हिचकिचाहट होगी. हम दोनों तीन गिनने पर एक साथ खोलेंगे ठीक है.

लखन: जी

विनीता: एक दो तीन

और इसके साथ उनके जनन अंगो को ढके वे एक मात्रा कपडे भी उनके जिस्म का साथ छोड़कर नीचे फर्श पर जा गिरे. अब एक 54 साल का अधेड़ आदमी और उसकी नै नवेली बहु की अक्षत सुन्दर सहेली उस सुनसान जगह पर एक दुसरे के सामने पूरी रारह निर्वस्त्र खड़े थे.

JOjU1AYD_o.jpeg


ये बात वो दोनों जानते थे पर जो एकमात्र चीज़ उनकी इज़्ज़त को एकदूसरे के सामने बेपर्दा होने से रोके हुए थी वो थी उनकी आँखों में बंधी वो पट्टी. पर जो भी हो मर्यादाओंके दायरे में रहते हुए भी उन्होंने एक दुसरे को पूरी तरह निर्वस्त्र करके गया पूजा के प्रथम चरण वस्त्र त्यागम को पूरा कर दिया था. और अब समय था उस एक घंटे के महाचरण की तरफ बढ़ने जिसका नाम था मृदा लेपन जो उसकी समय सीमा और नियमो को देखते हुए शायद तीसरे चरण से भी कामुक और मुश्किल था.

विनीता और लखन एक दुसरे का हाथ थामे धीमे धीमे आगे बढ़ते उस मिटटी से भरे हुए कुंड में प्रवेश कर गए पर प्रवेश करने से पहले विनीता ने उस अलार्म को ों कर दिया. दोनों के दिल ज़ोरो से धाकड़ रहे थे क्युकी अब तक कपड़ो के ऊपर उन्होंने एक दुसरे को हल्का फुल्का छू कर एक दुसरे एक दुसरे के बदन को ऊपर ऊपर से महसूस करा था पर तब उन छुअन में प्रेम भाव का समावेश नहीं था. पर अब इस स्पर्श में प्रेम के समावेश ने इसे अलग बना दिया ऊपर से वस्त्रो का पर्दा भी हैट गया था जिसने इसे और कामुक बना दिया था. विनीता अंदर जाकर उस गड्ढे में मिटटी में बैठ गई, विनीता को अपने कूल्हों के नीचे उस चिकनी मिटटी के लसलसीपन का एहसास हो रहा था. पर लखन अब भी खड़े थे विनीता ने उनका हाथ खींच कर उन्हें भी अपने बगल में उस चिकनी मिटटी में बिठा लिया. दोनों एक दुसरे के इतना करीब बैठे थे की उनके कंधे आपस में छू रहे थे.

विनीता खिसक कर लखन के एकदम सामने आ गई और उसने अपने दोनों हाथो में उस मिटटी को भरा और अपने मिटटी से भरे हाथ लखन सिंह के चेहरे पर रख दिए उनके दादी मूछो से भरे चेहरे और उनके बालो को पूरी तरह मीठी से मॉल दिया उसके बाद उनकी गर्दन को मलते हुए विनीता ने पाने हाथ उनके कंधो पर रख दिए और लखन सिंह के कंधो बहो गर्दन पर उस मिटटी को मलने लगी. लखन सिंह के कंधे और बहो पर मिटटी मलने के बाद उसने उनके सीने पर भी मिटटी का लेपन आरम्भ कर दिया. विनीता इस क्रिया को पुरे मन से निभा रही थी पर लखन सिंह का मन तो था पर शायद उनकी हिम्मत नहीं हो रही थी एक नंगी स्त्री जो उनकी बहु की सहेली है उसके नग्न शरीर को छूने की इसलिए लखन सिंह ने अपनी मुट्ठी भींच कर मिटटी से भरी ज़मीन में गाड़ दी.

EiWQkEvK_o.jpeg


लखन जी को यु जड़ बैठा महसूस करके विनीता ने उन्हें इस प्रक्रिया में शामिल करने का निश्चय कर लिया.

विनीता: लखन जी अगर आप इस पूजा को नहीं करना चाहते तो साफ़ साफ़ बता दीजिये, अगर आप अपने बेटे बहु की शादीशुदा ज़िन्दगी को नहीं बचाना चाहते तो साफ़ साफ़ बता दीजिये, अगर आपको शोभा की ज़िन्दगी की कोई फिक्र नहीं है तो साफ़ साफ़ बता दीजिये. मई बेवजह अपनी तरफ से अकेले इस पूजा को पूरा करने की कोशिश कर रही हु पर आप अपनी तरफ से कोई सहयोग hi नहीं कर रहे है.

लखन: ऐसा नहीं है मुझे बस थोड़ी सी झिझक हो रही है.

विनीता: या तो आप झिझक कर ले या इस पूजा को संपन्न कर ले दो में से एक काम hi कर सकते है. जितनी देर आप झिझकेंगे उतनी देर हमे इस पूजा को करते रहना होगा. और अगर आप हमारा साथ दे तो हम एक घंटे में इस पूजा को पूरा कर देंगे. प्लीज मेरा साथ दीजिये.

लखन: जी

W7wWjXiz_o.jpeg
 
Back
Top