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- Dec 5, 2013
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वो आदमी एक बार नेहा से अलग होकर कही चला गया नेहा को उसके कमरे के एक कोने तक जाने की आहात सुनाई दी और फिर वापस आने की भी आहात सुनाई दी जैसे वो कुछ लेने गया था पर क्या लाया था वो नेहा की छूट की गर्मी को ठंडा करने के लिए, औरत की छूट की गर्मी को तो बस एक hi चीज ठंडा कर सकती मर्द का लुंड पर उसके लिए उसे कही जाने की क्या जरुरत थी वो तो उसके पंत के अंदर hi मौजूद था और अपनी गांड पर छुवन से नेहा ने उसके बड़े आकर को भी महसूस कर लिया था. पर अगर वो चीज लुंड नहीं थी तो क्या थी जो उसकी छूट की गर्मी को ठंडा कर दे.
नेहा ये सोच hi रही थी की नेहा को उस चीज का एहसास अपनी छूट पर हो गया जो वो आदमी लाया था और उस चीज की एक चुवान ने नेहा की छूट को अंदर तक रोमांचित कर दिया. नेहा ने जाने kyaa-kyaa कयास लगा लिए थे पर वो चीज कुछ और नहीं सेक्युबे थे जिसे उस आदमी ने सीधा नेहा की छूट के ऊपर रख दिया. बर्फ की ठंडी चुवान से नेहा को एक झटका सा लगा उसने सोचा भी नहीं था की वो बर्फ के टुकड़ो से उसकी छूट की गर्मी को ठंडा करेगा. वो लगातार उसे नेहा की छूट के ird-gird घुमा रहा था.
नेहा की पंतय बर्फ के पानी से आगे से गीली और ठंडी हो गयी थी. घूमते घूमते वो सेक्युबे पिघल कर छोटा हो गया, नेहा भी थोड़ा रिलैक्स हुई की चलो बर्फ से मुक्ति मिली पर अभी तो ये शुरुआत थी. उस सेक्युबे के पिघलते hi उस आदमी ने दो और क्यूब उठाए और इस बार उन्हें नही की छूट पर पैंट के ऊपर से रगड़ने की बजाए नेहा की पंतय के अंदर हाथ डालकर सीधा नेहा की छूट के मुहाने पर रख दिया.
नेहा को 440 वाल्ट का झटका लगा जिस बर्फ को इंसान 10 सेकंड के लिए हाथ में नहीं पकड़ सकता वो सीधा उसकी छूट के मुँह पर राखी थी. नेहा आगे की ठंडक को बर्दाश्त करने की कोशिश कर hi रही थी की उस आदमी ने दो और बर्फ के टुकड़े उठाकर पीछे से उसकी पंतय में हाथ डालकर उसकी गांड के छेड़ पर रख दिए. नेहा की पंतय aage-peechhe दोनों तरफ से एकदम ठंडी पद गयी थी. नेहा की टांगो के बीच का हिस्सा aage-peechhe दोनों तरफ से सुन्न सा पद गया था.
बर्फ के कुछ टुकड़े इंसान को इस कदर बेबस और बेचैन कर सकते है ये नेहा को भी आज पता चला. नेहा की टाँगे भी सुन्न पद गयी थी उससे अब खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था पर हाथो से बंधे होने की वजह से वो वह तंगी सी कड़ी थी उसके पेअर तो कबका उसका साथ छोड़ गए थे. नीचे बर्फ के चार टुकड़ो ने नेहा की छूट और गांड की तो बंद बजा hi राखी थी अब उस आदमी ने एक बर्फ का टुकड़ा अपने मुँह में भरा और अपना मुँह नेहा के ताने हुआ निपल पर रख दिया.
वो आदमी अपने मुँह में भारी बर्फ को नेहा के निप्पल के ird-gird घूमने लगा. नीचे से नेहा की छूट और गांड तो ठंडी पद hi चुकी थी अब नेहा की चूचिया भी बर्फ से ठंडी पद गयी थी. नेहा को पहली बार एहसास हुआ था की बड़सम क्या होता है. कैसे सेक्स में अपने पार्टनर को तकलीफ देकर भी सेक्स का मजा उठाया जा सकता है. वो आदमी एक चुकी से दूसरी चुकी पर मुँह लेजाकर उसपर बर्फ घिसे जा रहा था. नेहा के मुँह से बस आह की आवाज hi निकल पा रही थी वो भी घुटी घुटी सी.
नेहा के स्तनों को बर्फ से गीला करते हुए वो अपना चेहरा ऊपर की तरफ लाने लगा और नेहा के क्लीवेज से होते हुए नेहा की गर्दन पर आकर रुक गया और अपने मुँह में दबी उस बर्फ को नेहा की सुराहीदार पतली गर्दन पर रगड़ने लगा. नेहा अपनी गर्दन को upar-neeche करके बचने का भरसक प्रयास कर रही थी पर वो बेबस थी. नेहा की गर्दन भी ठंडी पद चुकी थी और उसमे से पानी की बूंदे बह कर नीचे उसके स्तनों के बीच की दरार से बहती हुई उसकी कमर की गहरी नाभि तक आ रही थी.
नेहा की गर्दन से भी खेल कर उसे ठंडा करके वो आदमी और ऊपर नेहा के चेहरे के सामने आ गया अभी भी थोड़ी बर्फ उसके मुँह में बची थी. उसने अब उस बर्फ को अपने होंठो में दबाए दबाए नेहा के चेहरे पर घिसना शुरू कर दिया कभी गालो पर कभी माथे पर कभी नाक पर कभी रिबन के ऊपर से नेहा की पलकों पर.
नेहा के चेहरे का हर हिस्सा बर्फ से ठंडा पद गया था और गीला हो गया था. आखिर में उस आदमी ने उस टुकड़े को नेहा के होंठो पर रख दिया और नेहा के होंठो पर घिसने लगा नेहा ने भी जवाब में अपने होंठ खोल दिए और उस आदमी ने वो बचा हुआ बर्फ का टुकड़ा नेहा के मुँह के अंदर धकेल दिया और वो टुकड़ा नेहा के मुँह के अंदर घुल कर उसके अंदर समा गया.
बर्फ तो नेहा के अंदर समा गयी थी पर उनके होंठ अब भी जुड़े थे एक बार फिर वो एक पैशनेट किश में डूब गए थे. नेहा ने आज तक कई मर्दो को किश करा था पर जो बात इस किश में थी वो नेहा को आज तक महसूस नहीं हुई थी. उस आदमी में भूरा जैसी ताकत थी कल्लू जैसी औरत के जिस्म की भूख और छोटू जैसी मासूमियत एक मर्द का परफेक्ट कॉम्बिनेशन था उसमे. नेहा उसे अपनी बाहो में भर लेना चाहती थी पर हाथ बंधे होने के कारण वो ऐसा भी नहीं कर सकती थी. काफी देर तक दोनों यही एक दूसरे में फ्रेंच किश करते हुआ खोए रहे, नेहा की पंतय की बर्फ भी अब पिघल कर paani-paani हो चुकी थी.
उस आदमी ने खुद को नेहा से अलग करा और नेहा के सामने घुटनों के बाल बैठ गया. अब नेहा की बर्फ से पूरी तरह भीग चुकी पंतय उसकी आँखों के सामने थी और गीले कपडे में से नेहा की छूट की फांक भी साफ़ नज़र आ रही थी. उस आदमी ने अपनी उंगलिया नेहा की पंतय में फंसे, नेहा भी दम साध कर तैयार हो गयी अपने जिस्म के आखिरी कपडे के उतर जाने के लिए आज तक वो कई मर्दो के सामने नंगी हुई थी पर कभी किसी ऐसे मर्द के सामने नंगी नहीं हुई जिसकी उसने शकल तक नहीं देखि. उस आदमी ने धीमे धीमे नेहा की पंतय को नीचे सरकना शुरू कर दिया और नेहा की पंतय को उसके पैरो से निकलकर अपने चेहरे से लगा लिया. बर्फ से ठंडी हो चुकी उस पंतय में से आती नही की छूट के रूस की खुशबू किसी को भी मदहोश करदे वो भी उस महक में मदहोश हो गया. कुछ देर पहले दुल्हन के लिबाज़ में सज संवर कर आई नेहा अब हाथ बांधे आँखे में पट्टी बंधे वह एक अनजान जगह पर नंगी कड़ी थी.
उसने वो पंतय अपने कोटे की जेब में दाल लिया और खुद अपना चेहरा नेहा की छूट के करीब ले आया. नेहा ने भी अपने चेहरे के saath-saath अपनी छूट का भी अच्छे से मेकअप करा था शायद उसे पता था की आज उसके चेहरे की मुँह दिखाई के saath-saath उसकी छूट की छूट चटाई भी होने वाली है इसीलिए बाल का एक कटरा भी छूट पर नहीं था. बर्फ में दबे दबे छूट नार्मल से थोड़ा ज्यादा फूल गयी थी और एकदम गुलाबी और थोड़ी नीली पद गयी थी. कुछ यही हाल पीछे नेहा की गांड का भी था. बाथरूम में भूरा से बिना तेल के गांड मरवा कर नेहा काफी दर गयी थी इसीलिए आज पहले से अपनी गांड में तेल लगाकर आई थी क्या पता वो स्ट्रेंजर नवाबी शौक रखता हो.
नेहा की छूट के करीब अपना मुंह लाकर उसने एक पल के लिए नेहा की छूट की महक को सुंघा और फिर अपने होंठ नेहा की छूट पर रख दिए. उसने नेहा की ठंडी पद चुकी फूली हुई छूट की फांको को अपने होंठो में दबा लिया और उन्हें अपने होंठो में लेकर चूमने लगा. सुन्न पद चुके नेहा के पैरो में एक बार फिर जान आ गयी ठंडी पद चुकी नेहा की छूट उस आदमी के होंठो की गर्मी से गरम होने लगी.
Wo aadmi nehaa ke neeche ke hontho ko apne upar ke hontho me bharkar choos rahaa tha. nehaa apne haatho ko aazad karne ki bharsak koshish kar rahi thi vo is shakshaa ke sir ko apni chut par dabaane ke lie maari jaa rahi thi par laakh koshish ke baad bhi vo aisaa nahi kar paa rahi thi. chut ko chooste chooste usne apni jeebh nehaa ki chut ke andar daakhil kar di. uski jeebh nehaa ke chut ki deewaro se ragadti hui andar tak pahunch gayi.
Uski jeebh kafi lumbi thi jo nehaa ki chut me kafk andar tak jaa rahi thi aur uski halki-halki daadi bhi thi jo nehaa ki chut ke baahar ke hisse me ghis kar use aur uttejit kar rahi thi. nehaa kaa uttejnaa ke maare bura haal thaa wo uttejnaa me uchak kar apne panjo par khadi ho gayi thi. vo aadmi lagaataar apni jeebh se nehaa ki chut ko chhod rahaa tha. nehaa ki saanse tej-tej chal rahi thi khade-khade hi uske pet me aithan si ho rahi thi। uski chut ki phaanko me kapkapi si ho rahi thi. vo aadmi bhi samajh gayaa ki nehaa jhadne ke kareeb hai usne peechhe se nehaa ki gaand ko kaskar tham liyaa aur peechhe se dabaav daalkar nehaa ki chut ko apne muh par kaskar dabaa liya. aur teji se apni jeebh ko nehaa ki chut me gol-gol ghumane laga.
Nehaa bhi jaadaa der tak ks chudaai ko bardaashat naa kar paai aur nehaa ki chut se kaamrus bahar behnaa shuru ho gaya, par bajae nehaa ki chut se apnaa chehraa hataane ke usne apnaa munh aur kaskar nehaa ki chut me dabaa diyaa aur nehaa ki chut se behtaa kaamrus uske muh me samane laga. vo shakshaa to us juice ko aise pi rahaa thaa jaise barso kaa pyaasaa ho aur nehaa ki chut se behtaa paani peekar hi apni pyaas bujhaa rahaa ho. nehaa ke juice kaa katra katra us aadmi ke muh me samaa gayaa tha. aur us aadmi ne chat chat kar nehaa ki chut ko andar aur bahar dono taraf se achhi tarah se saaf kar diyaa tha.
Nehaa ki uttejnaa kaafi had tak shaant pad chuki thi aur uskaa shareer haaphta huaa vahi zanjeer se bandha latkaa huaa tha. vo shakshaa ab bhi nehaa ki chut se muh satae baithaa thaa. chut se nikle kaamrus kaa ek-ek katra usne apne muh me bhar liyaa tha. Iske baad vo ek baar phir nehaa ke saamne khadaa ho gayaa aur apne honth nehaa ke hontho par rakh die nehaa ke gaalo par halkaa saa dabaav daalaa jisse uske honth khud baa khud khul gaye, phir usne apne hontho ko sikodaa aur apne muh me bhara nehaa kaa kaamrus nehaa ke muh ke andar thook diya. neha ne ab tak doosro kaa lund to muh me liyaa thaa par apnaa khud kaa juice kabhi taste nahi karaa tha. kaamrus aur us shaksha ke thook kaa milajula taste nehaa ke muh me bhar gayaa thaa nehaa to waise bhi is tarah kaa dirty sex imagine karke hi aai thi isilie usne apnaa chehraa hataane ki bilkul bhi koshish nahi ki। thook aur apnaa khud kaa juice nehaa ke halak se hotaa huaa uske andar samaa gaya.
Nehaa ke thook gatak lene ke baad us aadmi ne bhi apne honth nehaa se alag kar lie. jhad jaane ke baad barf ki thandak ki wajah se nehaa ko bahut tej toilet lag aai thi. aur ab usse control bhi nahi ho rahaa tha.
nehaa- mujhe bahut kaske toilet lagi hai please mere haath khol do mujhe toilet jaanaa hai please master.
maater- mootne jaanaa hai to yahi moot le khade-khade.
nehaa- yahaa nahi nahi please khol do naa toilet karke phir baandh dena.
master- chal theek hai teri toilet ke lie kuchh aur cheez dimaag me aa rahi hai main tera haath khol rahaa hu par khabardaar apni aankho se blindfold hataaya to.
nehaa- hm nahin haataungi।
Us aadmi ne nehaa ke haath khol die par aankh par patti bandhe bandhe nehaa toilet karne kaise jaa sakti thi.
nehaa- aapne haath to khol die par aankh par patti bandhe hue main toilet karne kaise jaaungi.
master- tu toilet neeche se karti hai yaa aankho se toilet karne ke lie chut khuli honi chaahie aankhe nahi.
nehaa- par toilet karne ki jagah kaise dhundoongi mai.
master- wahaa main tujhe le chaltaa hu par tujhe wahaan is tarah le jaaungaa jo waastav me teri aukaat hai jo sach me tu hai.
नेहा ये सोच hi रही थी की नेहा को उस चीज का एहसास अपनी छूट पर हो गया जो वो आदमी लाया था और उस चीज की एक चुवान ने नेहा की छूट को अंदर तक रोमांचित कर दिया. नेहा ने जाने kyaa-kyaa कयास लगा लिए थे पर वो चीज कुछ और नहीं सेक्युबे थे जिसे उस आदमी ने सीधा नेहा की छूट के ऊपर रख दिया. बर्फ की ठंडी चुवान से नेहा को एक झटका सा लगा उसने सोचा भी नहीं था की वो बर्फ के टुकड़ो से उसकी छूट की गर्मी को ठंडा करेगा. वो लगातार उसे नेहा की छूट के ird-gird घुमा रहा था.
नेहा की पंतय बर्फ के पानी से आगे से गीली और ठंडी हो गयी थी. घूमते घूमते वो सेक्युबे पिघल कर छोटा हो गया, नेहा भी थोड़ा रिलैक्स हुई की चलो बर्फ से मुक्ति मिली पर अभी तो ये शुरुआत थी. उस सेक्युबे के पिघलते hi उस आदमी ने दो और क्यूब उठाए और इस बार उन्हें नही की छूट पर पैंट के ऊपर से रगड़ने की बजाए नेहा की पंतय के अंदर हाथ डालकर सीधा नेहा की छूट के मुहाने पर रख दिया.
नेहा को 440 वाल्ट का झटका लगा जिस बर्फ को इंसान 10 सेकंड के लिए हाथ में नहीं पकड़ सकता वो सीधा उसकी छूट के मुँह पर राखी थी. नेहा आगे की ठंडक को बर्दाश्त करने की कोशिश कर hi रही थी की उस आदमी ने दो और बर्फ के टुकड़े उठाकर पीछे से उसकी पंतय में हाथ डालकर उसकी गांड के छेड़ पर रख दिए. नेहा की पंतय aage-peechhe दोनों तरफ से एकदम ठंडी पद गयी थी. नेहा की टांगो के बीच का हिस्सा aage-peechhe दोनों तरफ से सुन्न सा पद गया था.
बर्फ के कुछ टुकड़े इंसान को इस कदर बेबस और बेचैन कर सकते है ये नेहा को भी आज पता चला. नेहा की टाँगे भी सुन्न पद गयी थी उससे अब खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था पर हाथो से बंधे होने की वजह से वो वह तंगी सी कड़ी थी उसके पेअर तो कबका उसका साथ छोड़ गए थे. नीचे बर्फ के चार टुकड़ो ने नेहा की छूट और गांड की तो बंद बजा hi राखी थी अब उस आदमी ने एक बर्फ का टुकड़ा अपने मुँह में भरा और अपना मुँह नेहा के ताने हुआ निपल पर रख दिया.
वो आदमी अपने मुँह में भारी बर्फ को नेहा के निप्पल के ird-gird घूमने लगा. नीचे से नेहा की छूट और गांड तो ठंडी पद hi चुकी थी अब नेहा की चूचिया भी बर्फ से ठंडी पद गयी थी. नेहा को पहली बार एहसास हुआ था की बड़सम क्या होता है. कैसे सेक्स में अपने पार्टनर को तकलीफ देकर भी सेक्स का मजा उठाया जा सकता है. वो आदमी एक चुकी से दूसरी चुकी पर मुँह लेजाकर उसपर बर्फ घिसे जा रहा था. नेहा के मुँह से बस आह की आवाज hi निकल पा रही थी वो भी घुटी घुटी सी.
नेहा के स्तनों को बर्फ से गीला करते हुए वो अपना चेहरा ऊपर की तरफ लाने लगा और नेहा के क्लीवेज से होते हुए नेहा की गर्दन पर आकर रुक गया और अपने मुँह में दबी उस बर्फ को नेहा की सुराहीदार पतली गर्दन पर रगड़ने लगा. नेहा अपनी गर्दन को upar-neeche करके बचने का भरसक प्रयास कर रही थी पर वो बेबस थी. नेहा की गर्दन भी ठंडी पद चुकी थी और उसमे से पानी की बूंदे बह कर नीचे उसके स्तनों के बीच की दरार से बहती हुई उसकी कमर की गहरी नाभि तक आ रही थी.
नेहा की गर्दन से भी खेल कर उसे ठंडा करके वो आदमी और ऊपर नेहा के चेहरे के सामने आ गया अभी भी थोड़ी बर्फ उसके मुँह में बची थी. उसने अब उस बर्फ को अपने होंठो में दबाए दबाए नेहा के चेहरे पर घिसना शुरू कर दिया कभी गालो पर कभी माथे पर कभी नाक पर कभी रिबन के ऊपर से नेहा की पलकों पर.
नेहा के चेहरे का हर हिस्सा बर्फ से ठंडा पद गया था और गीला हो गया था. आखिर में उस आदमी ने उस टुकड़े को नेहा के होंठो पर रख दिया और नेहा के होंठो पर घिसने लगा नेहा ने भी जवाब में अपने होंठ खोल दिए और उस आदमी ने वो बचा हुआ बर्फ का टुकड़ा नेहा के मुँह के अंदर धकेल दिया और वो टुकड़ा नेहा के मुँह के अंदर घुल कर उसके अंदर समा गया.
बर्फ तो नेहा के अंदर समा गयी थी पर उनके होंठ अब भी जुड़े थे एक बार फिर वो एक पैशनेट किश में डूब गए थे. नेहा ने आज तक कई मर्दो को किश करा था पर जो बात इस किश में थी वो नेहा को आज तक महसूस नहीं हुई थी. उस आदमी में भूरा जैसी ताकत थी कल्लू जैसी औरत के जिस्म की भूख और छोटू जैसी मासूमियत एक मर्द का परफेक्ट कॉम्बिनेशन था उसमे. नेहा उसे अपनी बाहो में भर लेना चाहती थी पर हाथ बंधे होने के कारण वो ऐसा भी नहीं कर सकती थी. काफी देर तक दोनों यही एक दूसरे में फ्रेंच किश करते हुआ खोए रहे, नेहा की पंतय की बर्फ भी अब पिघल कर paani-paani हो चुकी थी.
उस आदमी ने खुद को नेहा से अलग करा और नेहा के सामने घुटनों के बाल बैठ गया. अब नेहा की बर्फ से पूरी तरह भीग चुकी पंतय उसकी आँखों के सामने थी और गीले कपडे में से नेहा की छूट की फांक भी साफ़ नज़र आ रही थी. उस आदमी ने अपनी उंगलिया नेहा की पंतय में फंसे, नेहा भी दम साध कर तैयार हो गयी अपने जिस्म के आखिरी कपडे के उतर जाने के लिए आज तक वो कई मर्दो के सामने नंगी हुई थी पर कभी किसी ऐसे मर्द के सामने नंगी नहीं हुई जिसकी उसने शकल तक नहीं देखि. उस आदमी ने धीमे धीमे नेहा की पंतय को नीचे सरकना शुरू कर दिया और नेहा की पंतय को उसके पैरो से निकलकर अपने चेहरे से लगा लिया. बर्फ से ठंडी हो चुकी उस पंतय में से आती नही की छूट के रूस की खुशबू किसी को भी मदहोश करदे वो भी उस महक में मदहोश हो गया. कुछ देर पहले दुल्हन के लिबाज़ में सज संवर कर आई नेहा अब हाथ बांधे आँखे में पट्टी बंधे वह एक अनजान जगह पर नंगी कड़ी थी.
उसने वो पंतय अपने कोटे की जेब में दाल लिया और खुद अपना चेहरा नेहा की छूट के करीब ले आया. नेहा ने भी अपने चेहरे के saath-saath अपनी छूट का भी अच्छे से मेकअप करा था शायद उसे पता था की आज उसके चेहरे की मुँह दिखाई के saath-saath उसकी छूट की छूट चटाई भी होने वाली है इसीलिए बाल का एक कटरा भी छूट पर नहीं था. बर्फ में दबे दबे छूट नार्मल से थोड़ा ज्यादा फूल गयी थी और एकदम गुलाबी और थोड़ी नीली पद गयी थी. कुछ यही हाल पीछे नेहा की गांड का भी था. बाथरूम में भूरा से बिना तेल के गांड मरवा कर नेहा काफी दर गयी थी इसीलिए आज पहले से अपनी गांड में तेल लगाकर आई थी क्या पता वो स्ट्रेंजर नवाबी शौक रखता हो.
नेहा की छूट के करीब अपना मुंह लाकर उसने एक पल के लिए नेहा की छूट की महक को सुंघा और फिर अपने होंठ नेहा की छूट पर रख दिए. उसने नेहा की ठंडी पद चुकी फूली हुई छूट की फांको को अपने होंठो में दबा लिया और उन्हें अपने होंठो में लेकर चूमने लगा. सुन्न पद चुके नेहा के पैरो में एक बार फिर जान आ गयी ठंडी पद चुकी नेहा की छूट उस आदमी के होंठो की गर्मी से गरम होने लगी.
Wo aadmi nehaa ke neeche ke hontho ko apne upar ke hontho me bharkar choos rahaa tha. nehaa apne haatho ko aazad karne ki bharsak koshish kar rahi thi vo is shakshaa ke sir ko apni chut par dabaane ke lie maari jaa rahi thi par laakh koshish ke baad bhi vo aisaa nahi kar paa rahi thi. chut ko chooste chooste usne apni jeebh nehaa ki chut ke andar daakhil kar di. uski jeebh nehaa ke chut ki deewaro se ragadti hui andar tak pahunch gayi.
Uski jeebh kafi lumbi thi jo nehaa ki chut me kafk andar tak jaa rahi thi aur uski halki-halki daadi bhi thi jo nehaa ki chut ke baahar ke hisse me ghis kar use aur uttejit kar rahi thi. nehaa kaa uttejnaa ke maare bura haal thaa wo uttejnaa me uchak kar apne panjo par khadi ho gayi thi. vo aadmi lagaataar apni jeebh se nehaa ki chut ko chhod rahaa tha. nehaa ki saanse tej-tej chal rahi thi khade-khade hi uske pet me aithan si ho rahi thi। uski chut ki phaanko me kapkapi si ho rahi thi. vo aadmi bhi samajh gayaa ki nehaa jhadne ke kareeb hai usne peechhe se nehaa ki gaand ko kaskar tham liyaa aur peechhe se dabaav daalkar nehaa ki chut ko apne muh par kaskar dabaa liya. aur teji se apni jeebh ko nehaa ki chut me gol-gol ghumane laga.
Nehaa bhi jaadaa der tak ks chudaai ko bardaashat naa kar paai aur nehaa ki chut se kaamrus bahar behnaa shuru ho gaya, par bajae nehaa ki chut se apnaa chehraa hataane ke usne apnaa munh aur kaskar nehaa ki chut me dabaa diyaa aur nehaa ki chut se behtaa kaamrus uske muh me samane laga. vo shakshaa to us juice ko aise pi rahaa thaa jaise barso kaa pyaasaa ho aur nehaa ki chut se behtaa paani peekar hi apni pyaas bujhaa rahaa ho. nehaa ke juice kaa katra katra us aadmi ke muh me samaa gayaa tha. aur us aadmi ne chat chat kar nehaa ki chut ko andar aur bahar dono taraf se achhi tarah se saaf kar diyaa tha.
Nehaa ki uttejnaa kaafi had tak shaant pad chuki thi aur uskaa shareer haaphta huaa vahi zanjeer se bandha latkaa huaa tha. vo shakshaa ab bhi nehaa ki chut se muh satae baithaa thaa. chut se nikle kaamrus kaa ek-ek katra usne apne muh me bhar liyaa tha. Iske baad vo ek baar phir nehaa ke saamne khadaa ho gayaa aur apne honth nehaa ke hontho par rakh die nehaa ke gaalo par halkaa saa dabaav daalaa jisse uske honth khud baa khud khul gaye, phir usne apne hontho ko sikodaa aur apne muh me bhara nehaa kaa kaamrus nehaa ke muh ke andar thook diya. neha ne ab tak doosro kaa lund to muh me liyaa thaa par apnaa khud kaa juice kabhi taste nahi karaa tha. kaamrus aur us shaksha ke thook kaa milajula taste nehaa ke muh me bhar gayaa thaa nehaa to waise bhi is tarah kaa dirty sex imagine karke hi aai thi isilie usne apnaa chehraa hataane ki bilkul bhi koshish nahi ki। thook aur apnaa khud kaa juice nehaa ke halak se hotaa huaa uske andar samaa gaya.
Nehaa ke thook gatak lene ke baad us aadmi ne bhi apne honth nehaa se alag kar lie. jhad jaane ke baad barf ki thandak ki wajah se nehaa ko bahut tej toilet lag aai thi. aur ab usse control bhi nahi ho rahaa tha.
nehaa- mujhe bahut kaske toilet lagi hai please mere haath khol do mujhe toilet jaanaa hai please master.
maater- mootne jaanaa hai to yahi moot le khade-khade.
nehaa- yahaa nahi nahi please khol do naa toilet karke phir baandh dena.
master- chal theek hai teri toilet ke lie kuchh aur cheez dimaag me aa rahi hai main tera haath khol rahaa hu par khabardaar apni aankho se blindfold hataaya to.
nehaa- hm nahin haataungi।
Us aadmi ne nehaa ke haath khol die par aankh par patti bandhe bandhe nehaa toilet karne kaise jaa sakti thi.
nehaa- aapne haath to khol die par aankh par patti bandhe hue main toilet karne kaise jaaungi.
master- tu toilet neeche se karti hai yaa aankho se toilet karne ke lie chut khuli honi chaahie aankhe nahi.
nehaa- par toilet karne ki jagah kaise dhundoongi mai.
master- wahaa main tujhe le chaltaa hu par tujhe wahaan is tarah le jaaungaa jo waastav me teri aukaat hai jo sach me tu hai.