नेहा नीतू के कमरे में दुल्हन के लिबास में तैयार हो चुकी थी और बेसब्री से इन्तजार कर रही थी उस मश्ग का जो उसे वो स्ट्रेंजर भेजने वाला था जो दो दिन से उसे अपनी उंगलियों पर नचा रहा था. और अचानक से उसके उस मोबाइल के मेस्सेंजर पर मश्ग आया.
मास्टर- “ इतस टाइम तो के माय स्लेव मिलने की घडी आ गयी मैंने जैसा कहा था तुम उस लिबाज़ में तैयार हो गयी ना. “
नेहा- जी
मास्टर- थें के तो योर दादी. योर दादी इस वेटिंग.
नेहा- पर बहार तो लोग बैठे है शराब पी रहे है उनके सामने कैसे औ और आना कहा है.
मास्टर- उसकी चिंता तुम मत करो बहार का सारा माहौल देखकर hi मश्ग करा है. पार्टी ख़तम हो चुकी है सब उठ गए है. और रही बात उस जगह की जहा तुम्हे आना है तो उसी जगह पर आ जाओ जहा तुमने अपनी पंतय उस पेड़ पर तंगी थी. उस जगह से जब तुम थोड़ा और आगे बडोगी तो तुम्हे एक तालाब दिखेगा जिसके ऊपर एक लकड़ी का छोटा सा पल बना है और दूसरी तरफ एक लकड़ी का कॉटेज बना है उसके अंदर मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हु. के तो में माय स्लेव
नेहा- इतनी रात में उस सुनसान जगह जाने में नेहा को दर भी लग रहा था और उत्तेजना भी उस स्ट्रेंजर से मिलने का, वो उसके साथ kyaa-kyaa करेगा ये रोमांच भी था. नेहा ने बहार झांक कर देखा बहार सन्नाटा देख नेहा कमरे से बाहर आ गयी. अचानक उसे किसी के आने की आहात सुनाई दी कोई लड़खड़ाता हुआ उसी तरफ चला आ रहा था. नेहा ने ध्यान से देखा वो मलखान सिंह थे जो नशे में धुत्त अपने कमरे को ढूंढ़ते हुए चले आ रहे थे. नेहा एक पिलर के पीछे चिप्प गयी इसी वक्त बहार लालू की पहरेदारी कर रहा देव भी पेड़ के पीछे छुपा हुआ था जिस वजह से न नेहा देव को शबाना के कमरे के बाहर खड़ा देख सकीय ना देव नेहा को दुल्हन के लिबाज़ में कमरे से निकलता देख पाई.
मलखान सीढ़ियों को ढूनडता ऊपर की तरफ चला गया और बिना एक भी पल गवाए नेहा वह से निकल गई देव का ध्यान उस वक्त पूरी तरह मलखान सिंह की तरफ था इसलिए वो नेहा को वहां से जाता हुआ देख hi नहीं पाई. नेहा बोनफिरे वाली जगह पर पहुंची जहा बोनफिरे बुझ चुकी थी वहां चल रही दारु पार्टी मलखान सिंह के जाते hi ख़तम हो चुकी थी सब apne-apne कमरे में जा चुके थे. रात बहुत हो जाने के कारण वहां नेहा को फिलहाल देखने वाला कोई भी नहीं था. नेहा के लिए इससे अच्छा क्या हो सकता था की कोई उसे नहीं देख रहा है. नेहा वहां से होती हुई उस जगह पहुंची जहां भीमा की झोपडी थी जिसके पीछे घनी झाडिया थी. भीमा भी झोपडी के बहार चारपाई पर लेता था शायद सो रहा था.
नेहा ने रहत की सांस ली क्युकी उसे सबसे ज्यादा टेंशन भीमा की hi थी क्युकी उसकी झोपडी बीच रास्ते में पड़ती थी. नेहा अंदर झाड़ियों में चली आई जहा उसने कालू से अपनी छूट चटवाई थी और भीमा के सामने अपनी पंतय उतरी थी. इस वक़्त वहां घनघोर अन्धेरा था चाँद तो निकला हुआ था पर पेड़ो की वजह से उसकी रौशनी भी नहीं दिख रही थी. नेहा को halkaa-halkaa दर भी लग रहा था क्युकी जिससे वो मिलने जा रही थी उसे वो जानती तक नहीं थी की वो कौन है उसकी आगे क्या है उसने उसे क्यों बुलाया है वो उसके साथ क्या करने वाला है.
यही सब सवाल नेहा को अंदर hi अंदर बेचैन कर रहे थे पर नेहा के अंदर की फंतासी इतनी ज्यादा प्रबल थी की वो इस दर को भी भुलाकर आगे बाद गयी. नेहा अपनी जिंदगी अपनी शर्तो पर जीने वाली लड़की थी. उसका मन्ना था की अगर किसी काम को करने से पहले हम दस बार सोचेंगे तो हमारा सारा वक्त सोचने में hi चला जाएगा और काम को करने का सही वक्त hi निकल जाएगा इसलिए करो पहले सोचो बाद में जो होगा देखा जाएगा. यही फंदा उसने शबाना के केस में उसे करा बिना सोचे समझे लालू की बातों में आकर शबाना को गलत राह पर ले आई जिस वजह से आज शबाना अपना सब कुछ लुटा चुकी थी और जिंदगी लालू के हाथों बर्बाद होने के कगार पर पहुँच गयी थी. और अब नेहा खुद बिना सोचे समझे एक नए अनुभव की तरफ चली जा रही थी ये जाने बिना की ये अनुभव उसके जीवन में क्या उथल पुथल लाने वाली थी और ना सिर्फ उसकी जिनदगी बल्कि कई और लोगो की जिंदगी भी बदल जाने वाली थी. नेहा चलते हुए उस तालाब के पास पहुंच गयी जिस पर एक लकड़ी का वाकिंग पल बना था तालाब के उस तरफ एक कॉटेज बना था जो शायद शोभा के परिवार का hi था और चाँद की रौशनी में चमक रहा था.
नेहा अपने लंहगे को दोनों हाथो से संभाले हुए सावधानी से पल पर चलती हुई पल पार कर गयी. पल पार करते हुए उसके मन में baar-baar यही सवाल चल रहा था की कौन है वो. इंग्लिश अच्छी बोलता है मतलब पड़ा लिखा है इतना मंहगा लंहगा गिफ्ट करा मतलब पैसे वाला भी है मेस्सेंजर उसे कर लेता है मतलब टेक्नोलॉजी की भी अच्छी जानकारी है कौन हो सकता है वो.
यही सब सोचते हुआ वो पल पार करके कॉटेज के गेट तक आ गयी थी सामने कॉटेज का गेट था जिसके अंदर से कोई रौशनी नहीं आ रही थी. नेहा khade-khade सोच hi रही थी की उसके मोबाइल पर फिर मश्ग आया.
मास्टर- वैरी गुड माय स्लेव आ गयी तुम पर अब ये khade-khade सोच क्या रही अगर मन में कोई भी दुविधा है तो वापस जाने का रास्ता वही है जहा से तुम आई हो और जाते जाते वो मोबाइल उसी तालाब में फ़ेंक देना और अगर हिम्मत है इस डरे को फेस करने की तो कॉटेज की सिडिया चढ़कर अंदर आ जाओ मैं अंदर तुम्हारा इंतजार कर रहा हु.
नेहा ने एक नजर idhar-udhar देखा और फिर गहरी सास लेते हुआ उस कॉटेज की सीढ़ियों पर अपने कदम आगे बड़ा दिए. सीढिया चढ़कर उसने कॉटेज के गेट को हलके से पुश करा हलाकि आवाज़ करता हुआ गाते खुलता चला गया. अंदर पूरी तरह से अन्धेरा था चाँद की रौशनी भी बहुत कम अंदर आ रही थी. सामने एक आराम कुर्सी सी नेहा को दिख रही थी जिसपर किसी के बैठे होने का एहसास नेहा को हो रहा था पर अँधेरे की वजह से उसे ठीक से देखना पॉसिबल नहीं था बस अँधेरे में एक परछाई सी नेहा को दिख रही थी जो आराम कुर्सी पर रिलैक्स मुद्रा में बैठी थी और सिग्रत्ते के काश भर रही थी.
मास्टर- आ गयी शाबाश मन गया तुम्हे सच में तू काफी हिम्मती है बिना सोचे समझे बिना मेरे बारे में कुछ भी जाने यहाँ तक चली आई. मन्ना पडेगा तुम्हे कुछ बात तो है तुममे. तू बस शरीर में hi दुबली पतली है हिम्मत के मामले में तू अपनी सभी सहेलियों में सबसे आगे है. और इस शादी के लाल जोड़े में तो तू सच में टंच माल लग रही है क्या कहूं अब तेरी तारीफ़ में.
नेहा ने पहली बार उस आदमी की आवाज़ सुनी थी नेहा उसकी आवाज से उसे पहचानने की कोशिश कर रही थी पर शायद वो अपनी आवाज को कुछ भारी करके बोल रहा था जिस वजह से उसे पहचाना नहीं जा सकता था.
आज की रात इस हवेली में वासना का तूफ़ान आ गया था बच्चे की ख्वाहिश में तड़प रही एक औरत की इज्जत को एक भूके भेड़िये ने तार तार कर दिया था. शराब के नशे और अन्धाघुप्प अँधेरे में एक बाप ने अपनी hi बेटी के कौमार्य को भांग कर उसकी कोख को अपने बीज से भर दिया था और अब एक पड़ी लिखी अच्छे घर की लड़की सिर्फ अपनी बेहूदा फंतासी को पूरा करने की चाहत में खुद को एक ऐसे इंसान की स्लेव बनने आ गयी थी जिसे वो जानती भी नहीं थी.
पता नहीं नेहा को इस तरह यहाँ बुलाकर खुद को अब भी अँधेरे में छुपाए हुए वो शिक्षा कौन था और वो नेहा के साथ kyaa-kyaa करने वाला था.
नेहा उस अजनबी के सामने दुल्हन के लिबाज़ में कड़ी थी और अँधेरे में उसे केवल उस अजनबी की परछाई hi समझ आ रही थी. पर आवाज से काफी रौबीला लग रहा था. नेहा के में दिमाग में alag-alag लोगो के चेहरे आ रहे थे जिसे वो गेस कर रही थी वो ये हो सकता है.
कल्लू- हो सकता है उसे इंग्लिश आती हो और शादी का जोड़ा भी उसकी शादी का हो.
रामु काका- पर लगता नहीं वो इंग्लिश के ऐसे वर्ड उसे कर सकते है.
भूरा- पर वो तो लखन अंकल के साथ गाडी लेकर गया है.
छोटू- वो तो बच्चा है वो ये सब नहीं कर पाएगा.
विक्रम- वो हो सकता है पर क्या शोभा के रहते वो ऐसा रिस्क लेगा अपनी शादी के माहौल में.
लालू- वो तो शकल से hi कमीना लगता है उसके 100 परसेंट चांस है…
लालू के बाकी तीनो साथी- उनकी नजरें भी हम लड़कियों पर hi थी शुरुआत से वो भी हो सकते है.
या फिर बारात में आया कोई और मेहमान कोई परिवार वाला या कोई नौकर होने को कोई भी हो सकता है. सवाल ये है की मैं इस स्ट्रेंजर में किसे देखना चाहती हु. कोई ऐसा हो जो मेरे अंदर की औरत को अपना गुलाम बना ले जिसकी बातों के saath-saath उसके लुंड में भी नशा हो जो मेरे जिस्म का जर्रा जर्रा हिलाकर रख दे.
नेहा अपने खयालो में डूबी हुई थी की उसके कानो में फिर उस स्ट्रेंजर की आवाज गूँज उठी.
मास्टर- क्या सोच रही है साली मेरे बारे में सोच रही है की मैं कौन हु इतनी जल्दी क्या है अभी तो खेल शुरू हुआ है ज़रा इसका मजा तो लेले अच्छे से.
नेहा- जी
मास्टर- इस खेल के नियम तो तुझे पता hi है पर सब नियम का बेस यही है की माय आर्डर इस योर कमांड. जो मैं बोलूंगा उसे हर हालत में पूरा करना तेरा फ़र्ज़ होगा मेरी हर बात को तुझे हर हालत में मन्ना hi होगा और अगर तू मेरी बात को मानने में किसी भी तरह से फ़ैल हुई तो जानती है तेरे साथ क्या होगा.
नेहा- नहीं क्या होगा मेरे साथ.
मास्टर- सजा तुझे सजा मिलेगी कड़ी सजा वो कोने में जो लकड़ी की अलमारी राखी है जा उसे खोल और देख उसमे तेरे लिए kyaa-kyaa रखा है.
नेहा उस अलमारी के पास गयी और उसे खोलकर देखा उसे खोलते hi उसकी आँखे फटी की फटी रह गयी उसने सपने में भी नहीं सोचा था की ये खेल इस लेवल तक पहुँच जाएगा उसने यही सोचा था की ये जो भी है बस एक गाँवाला hi तो है ज्यादा से ज्यादा उसे छोड़ लेगा गांड मार लेगा उससे लुंड चुसवा लेगा पर उस अलमारी के अंदर जो था उसने उसे इस खेल के लेवल का एहसास करा दिया था. उस अलमारी में बड़सम की तरह तरह चीजे राखी थी जिन्हे इस तरह के सेक्स में उसे करा जाता है.
गले का पत्ता चमड़े की बेल्ट आर्टिफिशल लुंड हथकडिया नायलोन की रस्सी कैची चाक़ू ब्लैंडफोल्ड मुँह बंद करने वाली बॉल मोमबत्ती क्लोथ्पन और ना जाने kyaa-kyaa था. नेहा को अंदर hi अंदर उत्तेजना भी हुई और दर भी लगा क्युकी ये सब चीजे शायद उसपर hi उसे होने वाली थी. उसने सपने में भी नहीं सोचा था की एक गांव में एक देहाती के पास डोमिनेशन का ऐसा सामान भी हो सकता है. पर अंदर hi अंदर वो अब और भी ज्यादा उत्तेजित थी इस खेल को खेलने के लिए
मास्टर- कैसा लगा अपना तोहफा पसंद आया ये सब तेरे लिए hi है. इन सब चीजों को मैं तुझ पर इस्तेमाल करने वाला हु बोल तुझमे हिम्मत है इन चीजों को झेलने की अभी भी वक़्त है तू चाहे तो पीछे हैट सकती है कोई जबरदस्ती नहीं है.
नेहा- मैं तैयार हु इन्हे इस्तेमाल करने के लिए.
मास्टर- हाहाहा तुझे इस्तेमाल नहीं करना है इस्तेमाल तो मुझे करना है तुझे तो बस सहना है सेह पाएगी ये सब.
नेहा- हम्म्म सेह लुंगी.
मास्टर- शाबाश तू तो मेरी सोच से भी ज्यादा हिम्मती है घबरा मत ये सब तुझे तभी सहना पडेगा अगर तू कुछ गलती करेगी समझी.
नेहा- जी
मास्टर- वो सामने ब्लैंडफोल्ड दिख रहा है.
नेहा- हाँ
मास्टर- उसे उठा और अपनी आँखों में बाँध ले.
नेहा- क्यों क्या मुझे आज भी आपको देखने को नहीं मिलेगा.
मास्टर- मैंने क्या कहा था तुझे की कोई सवाल नहीं लगता है तुझे अच्छे से समझना होगा. चल ब्लैंडफोल्ड पेहेन अपनी आँखों में.
नेहा ने उस ब्लैंडफोल्ड को अपनी आँखों में बाँध लिया.
मास्टर- शाबाश ये हुई ना बात अब मैं तुझे ये खेल अच्छे से समझता हु पर खबरदार जो ये ब्लैंडफोल्ड बिना मेरे कहे हटाया तो.
वो शिक्षा नेहा के एकदम करीब आ गया उसके मुँह से halki-halki दारु की महक भी आ रही थी जिससे नही को अंदाजा हो गया की शायद इसने दारु पि है हो सकता है अभी बहार जो डांस पार्टी हुई ये उसमे मौजूद था. उसने नेहा के हाथ को अपने हाथ में थम लिया. नेहा उसके हाथो के स्पर्श से उसकी आगे का अंदाजा लगा रही थी उसके हाथ एकदम सख्त थे किसी पहलवान की तरह और काफी मजबूत भी थे हथेली काफी रफ़ थी जो नोर्मल्ली हर गाँव वाले की होगी. सिर्फ छुअन से उसकी उम्र का अंदाजा लगाना मुश्किल था.
उस शिक्षा ने अलमारी से हैंडकफ्स निकले और नेहा के हाथ आगे से hi हैंडकफ्स से बांध दिए. फिर वो नेहा को चलता हुआ उस कॉटेज के बीच में ले आया जहा छत से बंधी हुई एक चैन लटक रही थी जिसपर एक हुक लगा था. उसने नेहा के हाथ में बंधे हैंडकफ्स को उस हुक में फंसा दिया.
अब नेहा दुल्हन के लिबाज़ में हथकडियो में जकड़ी आँखों पर पट्टी बंधे बीच कमरे में बेबस सी कड़ी थी. कुछ कुछ उसकी हालत शबाना जैसी hi थी पर शबाना के साथ जो कुछ हुआ वो उसकी मर्जी के खिलाफ हुआ था पर नेहा तो खुद अपनी मर्जी से एक नया अनुभव लेने के लिए यहाँ खुद आई थी.
वो आदमी नेहा के पीछे आकर खड़ा हो गया उसकी garam-garam साँसे नेहा को अपने कानो के पास महसूस हो रही थी. उसने अपने होंठ नेहा की गर्दन पर रख दिए और उसे चूमने लगा.
मास्टर- तैयार हो इस खेल को शुरू करने के लिए.
नेहा- हम्म
मास्टर- अब मैं जो पूछू बिना एक भी पल गवाए उसका जवाब देना.
नेहा- जी
मास्टर- ओर्गास्म क्या होता है.
नेहा- जब एक औरत और मर्द अकेले या आपस में सेक्स के दौरान इतने उत्तेजित हो जाते है की उनके अंदर की उत्तेजना वीर्य के रूप में बाहर आ जाती है उसे ओर्गास्म कहते है.
मास्टर- वैरी गुड बिलकुल सही बताया तुमने अपना पहला ओर्गास्म किस आगे में करा था.
नेहा- 15 साल की आगे में.
मास्टर- 15 साल की उम्र में क्या बात है बड़ी जल्दी जवान हो गयी थी तुम तो.
नेहा- हम्म
मास्टर- खुद करा था या किसी के साथ.
नेहा- खुद करा था फिंगरिंग करके.
मास्टर- ऐसा क्या हो गया था की तुम्हे अपनी छूट में ऊँगली डालनी पड़ी.
नेहा- मैंने अपने चचेरे भाई और भाभी को छुप कर सेक्स करते देखा था जिससे मैं उत्तेजित हो गयी.
मास्टर- क्या बात है क्या तुम्हारी भाभी सुन्दर थी.
नेहा- हम्म
मास्टर- तुम्हारे भैया का लुंड कितना बड़ा था.
नेहा- 7-8 इंच का
मास्टर- सही है असली मर्द का लुंड तो इससे कही लुम्बा होता है खैर पहली बार किसी मर्द का साथ ओर्गास्म कब करा.
नेहा- 16 साल में अपने कॉलेज के चौकीदार के साथ.
मास्टर- कॉलेज के चौकीदार के साथ वो कैसे.
नेहा- छुट्टी के बाद मैं क्लास में अपने बॉयफ्रेंड को किश कर रही थी तभी चौकीदार वह आ गया उसने हमें ब्लैकमेल करा मेरा बॉयफ्रेंड भाग गया पर उस चौकीदार ने मुझे पकड़ लिया और उसने मेरे साथ.
मास्टर- उसने तुम्हारे साथ क्या, क्या करा उसने तुम्हारे साथ, क्या उसने तुम्हे छोड़ दिया.
नेहा- नहीं पर उसने मेरे साथ ओरल सेक्स करा.
मास्टर- ओरल सेक्स क्या होता है.
नेहा- उसने मुझे किश करा मेरे छोटे निप्पल छुए मेरी स्कर्ट ऊपर करके मेरी बिना बालो वाली अधखिली छूट को छटा और.
मास्टर- और, और क्या करा मैंने कहा ना बिना रुके जवाब देती जाओ ये baar-baar रुक क्यों जाती हो और क्या करा उसने तुम्हारे साथ.
नेहा- उसने मुझसे ब्लोजॉब करवाया.
मास्टर- हिंदी में बताओ ब्लोजॉब मतलब.
नेहा- इतनी इंग्लिश तो आती है आपको.
नेहा का इतना बोलना था की एक तेज कंटाप उसके गालो पर पड़ा.
मास्टर- ज्यादा जबान चलाने को नहीं बोलै है जितना पूछा है उसका जवाब दो. ब्लोजॉब मतलब.
नेहा- उसने अपना लुंड मेरे मुँह में डालकर मुझसे चुसवाया और चटवाया और अपना माल भी मेरे मुँह में hi निकल दिया और चाट चाट कर मेरी छूट का पानी भी निकल दिया और पूरा पि गया.
मास्टर- उस चौकीदार की उम्र कितनी थी.
नेहा- 40-42 साल का होगा.
मास्टर- मतलब तेरे बाप की उम्र का.
नेहा- हम्म
मास्टर- वाह 16 साल की उम्र में अपने बाप की उम्र के आदमी का लुंड मुँह में लेकर झड़वा दिया कमाल है तू तो. उसने छोड़ा नहीं तुझको.
नेहा- नहीं मेरी सील नहीं टूटी थी और कही मामला खुल जाता तो उसकी नौकरी चली जाती और जेल अलग से होती इसलिए छोड़ा नहीं पर आगे भी वो अकेले में मुझे किश करके अपना लुंड चुसवा कर मेरी चूचियां चूसकर मजा ले लेता था.
मटर- पहली चुदाई कब करि.
नेहा- 18 साल की उम्र में जब मैं अन्तर में थी.
मास्टर- किसके साथ करि.
नेहा- मेरी एक सहेली के डैड के साथ.
मास्टर- अपनी सहेली के बाप के साथ वाह गजब है तू तो. कैसे ये इंसिडेंट कैसे हुआ.
नेहा- मेरी सहेली की माँ होस्पिटलिजे थी वो और उसके दाद हॉस्पिटल में रुकते थे मैं उसकी हेल्प के लिए कभी हॉस्पिटल में कभी घर की सेफ्टी के लिए रात में उसके घर रुक जाती थी. एक रात में घर में रुकी थी पर उस रात अंकल को हेडाचे था इसलिए वो घर लौट आए. मैं उनका हेडाचे दूर करने के लिए उनका सर दबाने लगी और उसी दौरान उत्तेजना में हमारे बीच रिलेशन बन गया.
वो आदमी नेहा के अतीत की इन घटनाओ को निकल निकलकर उसकी उत्तेजना को बड़ा रहा था और नेहा के मुँह से उसके सेक्स जीवन के अनुभव सुनकर कही ना कही खुद भी उत्तेजित हो गया था. अपने मुँह से अपनी सेक्स लाइफ का बायोडाटा बोलकर नेहा को भी अंदर hi अंदर उत्तेजना महसूस हो रही थी. अतीत के वो सारे दृश्य ब्लैंडफोल्ड में जैसे उसकी आँखों के सामने फिर से सजीव हो उठे थे. नेहा ने नहीं सोचा था की केवल अपनी सेक्स लाइफ को याद करके उसे कहकर भी कोई इतनी उत्तेजना महसूस कर सकता है. आज सुबह hi नेहा ने अपनी बातो से hi छोटू को उत्तेजित कर दिया था और अब कुछ कुछ यही उसके साथ हो रहा था. बस अपनी बातो से hi उस आदमी ने को उत्तेजित कर दिया था.