Adultery BHABHI MAA - Page 6 - SexBaba
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Adultery BHABHI MAA

अपडेट 50
“इस काम में बहुत खतरा है जीवा भाई एक बार फिर से सोच लीजिये आखिर कोमल आपकी बहन है “

ये तिवारी की आवाज थी जो की मेरे कानो में पड़ी , मैं अभी उसके कमरे में hi जाने वाले थे आज मला के घर में हमला करने का इरादा था सीधे सीधे लड़ाई आर या पार वाली कहानी थी ..

भुवन और मैं वही रुक गए थे ..

“बहन अरे कहा की बहन मेरा बाप मंदिर से उठा कर लाया था उसे ..”

“क्या ..” इधर तिवारी बुरी तरह से चौक गया था वही मेरे कानो को इस बात पर अभी भी विस्वास नहीं हो रहा था ..

“है .. इसके माँ बाप को किसी ने मार दिया था, तो पुजारी ने इसे उठा लिया … मेरे माँ बाप धार्मिक आदमी थे , पुजारी ने उसे कहा था की ये कोई खास लड़की है , बहुत ताकतवर होगी और पता नहीं क्या क्या, इसके साथ एक पुस्तक भी दिया था पुजारी ने मेरे बाप को .. इसलिए मेरा बाप उसे सकती सकती बोलता रहता था .. मुझे भी लगता था की ये कोई खास होगी लेकिन कभी समझ नहीं आया की क्या खास होगा … लेकिन जब इसने उन लावांडो को मारा तब समझ आया की ये तो साली पूरी कातिल hi है … लोगो को ऐसे कटती है जैसे कोई गाजर मूली काट रहा हो , तब अपुन समझ गया था की इसमें क्या खास है और मेरा बाप इसका इतना क्यों ख्याल रखता था ..”

“हे भगवन “

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तिवारी का मुँह खुला का खुला रह गया था ,

“आपके पास वो पुस्तक है, क्या आपने कभी वो पुरस्तक पढ़ी थी “

तिवारी जैसे कुछ सोच कर बोल उठा

“अरे कहा रे , वो तो संस्कृत में थी और हमें कोण सा संस्कृत पढ़ना आता है … ऐसे भी अभी वो कहा है मुझे नहीं पता , कभी ज्यादा ध्यान भी नहीं दिया था … ऐसे मेरा बाप बोलता था की जब सकती को उसका सच्चा प्यार मिल जायेगा तब उसकी शक्ति जागृत हो जायेगी , यही उसका भविष्य है … फिर जब मैंने तुझे देखा तो समझ गया की अब उसके साथ कुछ हो सकता है और देख ………”

तिवारी बस जीवा को आंखे फाडे देख रहा था

“और ऐसे हमें इन सबसे क्या अपना तो काम हो रहा है न , अब मला और करीम को मरकर मैं और तू इस शहर में राज करेंगे , तू बस कोमल को कण्ट्रोल कर उसे प्यार में फंसा कर रख ताकि हम जो भी बोले वो उसे बस चुप चाप करती जाए ..”

जीवा की बात सुनकर मेरे नशो का खून मेरे दिमाग में दौड़ने लगा था , चेहरा ताम तमा कर लाल हो चूका था , तभी भुवन ने मेरे कंडे पर आपने हाथ रखा …

“नहीं कोमल , बिना पूरी जानकारी के कोई भी निर्णय लेना घातक हो सकता है “

उसकी बाटे जैसे तपते हुए मारष्टाहल में पानी गिर गयी हो , मैं शांत होने लगी लेकिन अभी भी मेरे कान उनकी बाटे सुन रही थी , भाई से बिछुड़ने का गम तो था लेकिन अभी अपने प्रेम की बात भी सुनने बाकि थी ….

और तिवारी बोलै

“वो तो ठीक है जीवा भाई लेकिन … मैं सिर्फ मला बनकर नहीं रखना चाहता और अगर ऐसी बात है तो इसका मतलब ये हुआ की कोमल को सिर्फ मैं hi कण्ट्रोल कर सकता हु …..

और मेरे कारण hi उसकी ताकत है .. तब तो धंधे में मेरी हिस्सेदारी और भी बढ़नी चाहिए “

मैं दया की बातो से न सिर्फ स्तब्ध थी बल्कि ऐसा लगा की मेरे साइन में जैसे कोई गहरा झख्म कर दिया गया हो …

मैंने जिस शख्स से प्रेम किया वो मुझे महज इस्तमाल कर रहा है ……

इधर जीवा तिवारी की बात सुनकर हंसाने लगा

“वाह बीटा इतनी जल्दी अपने रंग दिखा दिया .. चल ठीक है लेकिन 2 में से एक hi चीज मिलेगी , या तो पावर ले या पैसा ले … अब तुझे ख़ुर्शी भी चाहिए और पैसा भी ये कैसे हो सकता है .. तू अपने ख़ुर्शी के डैम पर भी तो कमायेगा “

जीवा की बात सुनकर तिवारी थोड़ी देर के लिए चुप हो गया

“एक काम करते है जीवा भाई पहले इस मला और करीम को निपटा देते है फिर आगे की सोचते है “

“है ये सही रहेगा , जा जाकर कोमल को तैययर कर ..”

उनकी ये बात सुनकर मैं जार जार रो रही थी लेकिन भुवन मुझे सम्हालता हुआ मेरे कमरे में ले आया था …

वो न जाने मुझे क्या क्या समझा रहा था , मैंने उसे अपने बांहो में कास लिया था .. वो मेरे बालो को सहलाये जा रहा था मैं बस रोये जा रही थी ……..

“अभी नहीं कोमल अभी नहीं .. इन सबसे जवाब मांगेंगे लेकिन अभी नहीं “

उसने मेरे कानो में कहा और जैसे मैंने उसके बात को मान लिया , मैंने अपने आंसू पोछे ..

“आज सकती का खेल होगा, खुनी खेल “

मैं अपने तलवार निकलते हुए वंहा से निकल गयी थी…………

और फिर खुनी खेल शुरू हुआ , मैंने मला को कई टुकड़ो में काट दिया , जीवा और तिवारी का पूरा गुस्सा मैंने वंहा निकला था , देखने वाले बस देख रहे थे , गोलियों की भौछार हो रही थी और अपने तेज तलवारो से लोगो को मूली की तरह काट रही थी …

मेरे अलावा किसी ने भी कोई हथियार नहीं उठाया है … ना जाने कितनी लाशे मैंने गिरा दी थी ,मैं तो गिनती भी नहीं थी .. बस खून से लिख दिया था दिवलो पर …. सकती ………

**********

तिवारी और जीवा मला के मरने का जश्न मन रहे थे तभी मैं अपने कमरे में नाहा रही थी ….. पुरे जिस्म में खून की छींटे थी , बाथरूम के बहार भुवन बैठा हुआ था किसी सोच में डूबा हुआ था ……..

“कोमल वो पुस्तक वो तो तुम्हारे पास है न “

मैं नाहा कर निकली और भुवन की आंखे बड़ी हो गयी वो बस आंखे फाडे मुझे hi देख रहा था …..

“कोमल तुम “

भुवन इतना hi बोल पाया था , मेरा पूरा जिस्म नंगा था और अभी अभी नहाने के कारण पानी से पूरी तरह से भीगा हुआ था, बालो से पानी की बुँदे टपक रही थी .. मेरे सुडोल और नरम जिस्म में अभी भी नमी बरकरार थी ..

मैं इठलाती हुई आयी और भुवन की गॉड में बैठ गयी ..

भुवन मनो काँप गया हो , वो अभी मेरे बिस्टेर में hi बैठा हुआ था …

“ये क्या कर रही हो “

“गलती हो गयी थी मुझसे ,मैं समझ नहीं पायी की मैं किस्से प्यार करती हु “

मैंने अपनी बांहे भुवन के गले में दाल दी थी , मैंने अपने होठो को उसके होठो पर रख दिया लेकिन भुवन अभी भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा था ..

“हटो कोमल .. तुम अभी परेशां हो .. ये प्यार नहीं है ये बस गुस्सा है ..”

मैंने उसकी आँखों में देखा , मेरी आंखे गुस्से से लाल हो गयी थी , ये शख्स मुझे ठुकरा रहा था … लेकिन भुवन की आँखों में मेरे लिए बस प्यार hi था , कोई दर नहीं ……..

मैंने पास पड़ा तलवार उठा लिया जो अभी भी न जाने कितने लोगो के खून से भीगा हुआ था , मैंने उसे भुवन के गले में रख दिया

“मुझे ना बोलेगा “

मैंने गुस्से में कहा , ऐसा लग रहा था जैसे मैं खुद के काबू में नहीं रह गयी हु ,

लेकिन वो हंसा ..

“तुम मुझे डरा रही हो “ मैं बस गुस्से से उसे देखते रह गयी , मेरे मुँह से कोई भी आवाज नहीं निकल रही थी ..

तभी कमरे का दरवाजा खुल गया ..

सामने तिवारी मुँह फाड़े खा था , उसके हाथो में शराब की एक बोतल थी , वो बहुत hi खुस लग रहा था… लेकिन हमें इस हालत में देखते hi उसके चेहरे की हवइया उड़ गयी …….

मैं नग्न बिस्टेर में भुवन के गॉड में बैठी हुई थी और मेरा तलवार उसके गले से लगा हुआ था …..

हम दोनों ने तिवारी को देखा , जंहा भुवन थोड़ा झेप गया था वही मुझे जैसे कोई फर्क hi नहीं पड़ा…

“ये.. ये क्या कर रही हो कोमल ..”

मनो तिवारी का पूरा नशा hi काफूर हो गया हो , वो हकलाने लगा था ..

“भाग यंहा से मादरचोद वर्ण इसी तलवार से तेरा गाला भी काट दूंगी “

मैं गरजी और असीसा मैं तब गरजती थी जब मैं शिकार करती थी ..

मेरी आवाज सुनकर hi तिवारी काँप गया था , उसके आँखों में दर उतरने लगा था .. उसके कदम पीछे होने लगे थे ..

वो दरवाजा बंद करने लगा ..

“रुक … दरवाजा खोल के रख …दुनिया को भी तो पता चले की यंहा क्या हो रहा है ”

वो कुछ भी नहीं कह पाया … वो बस पीछे हैट गया … मेरा चेहरा गुस्से से तमतमा रहा था ..

लेकिन अभी भी भुवन की आँखों में कोई भी दर नहीं दिख रहा था और यही बात मुझे और भी बेचैन कर रही थी …

उसने मेरे गलो को सहलाया , मेरे बालो में अपनी उंगलिया फेरी ……और … और मेरे होठो में अपने होठो को मिला दिया ……..

मेरे आँखों से एक आंसू गिर गया ऐसा लगा जैसे मैं फिर से होश में आ गयी थी ………

“वो पुस्तक कहा है कोमल …… मेरे पिता जी ने कभी मुझे सकती परंपरा के बारे में बताया था , मुझे लग की वो पागल आदमी कुछ भी बोलता है , लेकिन मेरे पिता जी तुम्हारे और पुराजारी जी के मित्र थे , और अब मुझे भी लगता है की कोई ऐसी बात है जो हमें जानना बहुत hi जरुरी है …..”

मैंने हां में सर हिलाया ..

“पिता जी ने अपने अंतिम समय में मुझे वो पुस्तक दी थी , और कहा था की जब तुम्हे अपना प्यार मिले तो इसे पढ़ना … मैंने आज तक उसे नहीं पढ़ा था शायद आज वो समय आ गया है “



हम दोनों के होठ फिर से मिल गए थे …….
 
अपडेट 51
हमारे सामने एक लाल रंग के कपडे में लिपटी हुई एक किताब थी , कहने को तो ये महज एक क्तिअब थी लेकिन मेरे लिए ये मेरे जीवन का एक अधयाय होने वाला था..

भुवन ने उसे खोला , एक बहुत पुराण डॉक्यूमेंट था जो की पूरी तरह से मैला हो चूका था , कागज पिले पद चुके थे , लेकिन लिखावट अब भी स्पस्ट थी , बस दिक्कत ये था की ये संस्कृत में था, ऐसा नहीं था की हमें संस्कृत नहीं आता , हम संस्कृत जानते थे लेकिन उतना नहीं की पूरा अनुवाद कर सके ..

“इसे किसी संस्कृत के जानकर के पास ले जाना चाहिए “भुवन ने सुझाव दिया ..

“हुम्म्म लेकिन कौन ..”

भुवन ने बस थोड़े देर अपना दिमाग लगाया

“कॉलेज के संस्कृत के प्रोफेसर के पास चलते है , वो अपने टाइम के यूनिवर्सिटी टोपर भी थे “

हमने जयदा देर नहीं की और शास्त्री सर के पास पहुंच गए ..

अब हम भले hi पुरे कॉलेज में बदनाम थे लेकिन फिर भी कॉलेज के कई टीचर्स जानते थे की हम लोग एक सीधे साढ़े से स्टूडेंट hi थे जिन्हे वक्त ने ऐसा बना दिया था ..

उनमे एक शास्त्री सर भी थे ..

“ये क्या है … कोई बहुत hi पुराणी पुस्तक मालूम होती है “

उन्होंने पहले तो बड़े hi ध्यान से उसे देखा और फिर पढ़ने लगे ..

“ये तो कोई कहानी मालूम होती है , है क्या ये “

अब हम उन्हें क्या बताते ..

“पता नहीं सर बस मेरे पिता को पंडित जी ने दिया था और कहा था की जब मैं मर जाऊ तो किसी ज्ञानी व्यक्ति के पास जाकर इस कहानी को सुन लेना .. अब इसमें क्या है हमें नहीं पता लेकिन मेरे पिता जी की आज्ञा थी तो… क्या आप इसे पढ़ सकते है “

प्रोफेसर साहब को ज्ञानी बोलने की देर थी ,उनका चेहरा hi चमक गया ..

“है बिलकुल , बैठो मैं इसे पढ़ कर सुनाता हु “

और वो उसे पढ़ने लगे ….

सार कुछ ऐसा था …….

“ये पुस्तक उसे पढ़ना या सुन्ना चाहिए जो इसका उत्तराधिकारी हो , सकती की संतान हो .

सकती कोण है ..??

एक श्राप दिया गया था , एक महिला को , एक साधु के द्वारा ..

महिला की भी कोई गलती नहीं की वो तो बस साधु के प्रेम में फंस गयी थी और साधु की साधना में विघ्न डालने की गलती कर दी ..

श्राप दिया गया की तेरे और तेरे सन्तानो के अंदर काली सकती आ जाए ….

तू मानव न रहे बल्कि राक्षस हो जाए , खुद को भी सम्हाल न पाए, जिस प्रेम को पाने के लिए तूने ये सब किया .. जा तू अपने सच्चे प्रेम को भी नहीं पहचान पायेगी ………

महिला कोमल ह्रदय थी वो रोई बहुत माफ़ी मांगी , साधु का दिल नरम हुआ उसे अपनी गलती का अहसास हुआ , लेकिन जो संकल्प ले लिया गया था वो वापस नहीं हो सकता था , इसलिए उन्होंने ये कहा की श्राप वैसा hi रहेगा ..

लेकिन .. ये सकती हर पीढ़ी के साथ साथ काम होते जायेगी ,केवल महिला संतान में hi पायी जायेगी , और तब तक प्रगट नहीं होंगी जब तक सच्चा प्रेम न मिल जाए .. सच्चे प्रेम को तुम तो नहीं धुंध पाओगी लेकिन वो प्रेम तुम्हे ढूंढेगा , और तुमसे मिलान को बेचैन रहेगा.. तुम उसे इंकार करती रहोगी … इधर उधर भटकोगी लेकिन आखिर में पहचान hi लोगी …..

ये सकती एक श्राप है जो पीढ़ी दर पीढ़ी जाती जायेगी , सकती परंपरा में जन्मी हर महिला के अंदर वही ताकत होगी जो उसकी माँ के पास थी , लेकिन जब तक कोई सच्चा प्यार न मिल जाए ये ताकत विकसित नहीं होगा ..

सकती हमेशा अपने सच्चे प्रेम को लेकर उलझन में रह सकती है , लेकिन अपने दिल की सुनने पर उसे सच्चे प्रेम की पहचान होगी , और उसका प्रेमी hi उसकी ताकत को काबू में करने की योग्यता रखेगा ..

दोनों प्रेमियों के मिलान से उत्पन्न महिला संतान के पास hi ये अदम्य सकती पहुंचेगी और इसका जागरण और समापन दोनों hi उसके प्रेमी के द्वारा होगा ..इस तरह धीरे धीरे hi सही लेकिन ये श्राप ख़त्म होते जायेगा … “

इतना बोलते बोलते शास्त्री जी रुक गए …

और नजर उठाकर मुझे देखने लगे ..

“इसमें अंतिम में लिखा है की , ये पुस्तक जानकारी के लिए पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ाते जायेगी …….. मतलब तुम hi …”

मैंने एक गहरी साँस ली

“अरे नहीं , ये पुस्तक तो भुवन के पिता जी ने इसे दी थी … बस इसमें लिखा क्या है ये जानने की बहुत hi उत्सुकता थी ..”

“ok ोकक “

****************

हम दोनों hi एक कमरे में बैठे हुए थे ..

“तो अब तो मान लो की मैं तुम्हारा सच्चा प्यार हु ..”

भुवन ने शरारत से कहा..

मैं भी मुस्कुरा उठी ..

“लेकिन भुवन मेरे माँ बाप को किसने मारा होगा “

भुवन ने एक गहरी साँस ली ,

“जिसके पास ऐसी ताकत हो उसके तो कई दुश्मन हो सकते है कोमल … और ये मत भूलो की ये ताकत कोई वरदान नहीं है , बल्कि एक श्राप है … तुम्हे इससे मुक्त होना होगा .. “

मैंने भी एक गहरी साँस ली

“है लें श्राप या वरदान ये कोण तय करेगा , वो तो इससे hi तय होगा न की इसका इस्तमाल कैसे किया जाता है “

“नहीं कोमल … आज तक इसका उपयोगी सिर्फ लोगो के कतल करने के लिए hi किया गया है , तुमने ना जाने कितने लोगो को ऐसे hi काट दिया .. बिना किसी कारन है … है क्या कारन था उन्हें मरने का .. पावर .. वो भी दुसरो के लिए .. नहीं कोमल तुम्हे बस उसे किया जा रहा है और मैं ये नहीं होने दूंगा “

भुवन ने एक गहरी साँस छोड़ी ………



वही मैं भी इसी सोच में डूबी हुई थी …………..
 
अपडेट 52
फ्लैशबैक ओवर

“तो क्या उसके बाद आपने उन लोगो को छोड़ दिया “

इस बार मैंने प्रश्न किया था , कोमल ने मेरे आँखों में ध्यान से देखा और फिर अपनी बेटी यानि भाभी को बड़े hi प्यार से देखा ..

“है बच्चो , उसके बाद hi मैंने और भुवन ने ये फैसला कर लिया था की हम दोनों इन सबसे दूर चले जायेंगे , मैं और कटले आम नहीं करना चाहती थी , इसलिए हम दोनों ने गांव में आकर बसने का फैसला किया ..

और रातो रत hi वंहा से भाग गए ,और भुवन के साथ रहते रहते मैं शांत होते गयी , ये सकती बड़ी hi अजीब चीज है .. प्रेम से hi जगती है और प्रेमी के साथ शांति से रहने पर धीरे धीरे ये काम होते जाती है और अंत में ख़त्म हो जाती है …. शायद मेरी माँ इसीलिए मारी गयी क्योकि उनकी सकती ख़त्म हो चुकी थी “

हम सभी रात से बैठे थे अभी सुबह के 6 बज चुके थे , चाय आ चुकी थी और चुस्कियों के साथ सभी अपने अपने खयालो में खो गए थे …अभी हमें बहुत कुछ जानना बाकि था लेकिन सबसे बड़ा सवाल जो मेरे दिल में आ रहा था वो ये था की क्या भाभी में भी वो ताकत होगी और आखिर कोण होगा उनका आशिक़ ..??

भैया तो नहीं थे ये बात तो साफ़ थी , अगर वो होते तो अभी तक उनमे ये पावर जाग गयी होती , कहे अनुसार भाभी उस प्रेमी को नहीं पहचान पायेगी लेकिन वो उससे मिलान को बेकरार रहेगा , आखिर कौन है जो उनसे मिलान को बेकरार रहता है …??

मैं सोच में पड़ा था की मेरी नजर भाभी पर गयी , वो मुझे अजीब निगाहो से देख रही थी और मेरे दिल में एक बिजली सी कौंध गयी ………

मैं …………

है मैं ……

मैं hi तो वो आशिक़ हु … मैं hi तो भाभी से मिलान के लिए बेकरार रहता हु , मैं भाभी के लिए वैसा hi हु जैसा कोमल के लिए भुवन था , जिससे भाभी भी बहुत प्यार करती है लेकिन उस प्यार का नाम कुछ अलग था , यही भुवन के साथ भी था , भुवन कोमल को प्यार करता था ,उसे अपना बनाना चाहता था , मजे की बात ये है की कोमल भी उसे प्यार करती थी लेकिन उसके प्यार को कभी पहचान नहीं पायी , जब तक की उसे तिवारी की बेवफाई के बारे में नहीं पता चल गया , और भुवन पर hi हमला होने पर कोमल की सकती बहार आयी थी ………?

यही शामे केस तो मेरे और भाभी के साथ भी था , भाभी को हमेशा hi लगा की वो भैया से प्यार करती है , लेकिन असल में वो मुझसे भाई से भी ज्यादा प्यार करती थी, लेकिन उस प्यार का स्वरुप कुछ अलग hi था … :अप्प्रोवे:

शायद हमारे बिच जो आकर्षण है , वो इसी की और संकेत दे रहा है की हम एक दूसरे के लिए hi है .. लेकिन मैं भाभी के लिए हु तो फिर नेहा ?? नेहा का क्या होगा ..

मेरी नजर नेहा पर पड़ी , वो भी बड़े hi गहरे सोच में डूबी हुई मुझे देख रही थी , ना जाने उसके दिल में क्या चल रहा हो ..

तभी मेरे फ़ोन का रिंग बजा , ये अक्की था …

“अक्की इतने सुबह सुबह कैसे फ़ोन कर रहा है “

मैंने अपने मन में hi कहा

“hello बीआरओ “

“भाई एक अजीब चीज हो गयी “

“क्या ..?”

“यार मुझे किसी ने धमकी दी है, वो खुद को शिवा बताता है , वही जिसने इतने सरे क़त्ल किये है ,वो बोल रहा था की जिस लड़की से मैं जयदा मिल जल रहा हु उससे न मिलु वर्ण मुझे भी वैसे hi मार डालेगा जैसे ** गांव में लोगो को मारा था, वो ये भी बोल रहा है की जिस ायरत गांव में वो लोग पकडे है वो असली शिवा नहीं है असली शिवा तो वो है …….”

अक्की की बात सुनकर मेरे चेहरे का रंग hi उड़ गया था ,

“तूने ये बात और किसी को बताई क्या ??”

“है सस को बताई थी , उसी ने कहा की तुम्हे कॉल करू ..”

“ोकक मैं तुझे एक no. दे रहा हु उससे बात कर ले मेरा नाम बताना और पूरी बात बता देना… और एक चीज बता आज कल क्या तू सस के साथ जयदा घूम रहा है “

“है तू और नेहा जब से यंहा से गए हो तब से सस के साथ hi घूमता हु , उसके साथ hi ट्यूशन जाता हु और आजकल वो मुझे कॉलेज के लिए लेने भी आ रही है “

मैंने एक गहरी साँस ली और उसे न डरने का बोलकर काजल का no. दे दिया ……

“क्या हुआ “

भाभी के पोछने पर मैंने साडी बात बता दी

“क्या ..?? लेकिन शिवा बनकर तो कतल कोमल hi कर रही थी न ..??”

नेहा चिल्ला उठी थी ..

वही कोमल ने नेहा को अजीब निगाहो से देखा

“तुम पागल हो गयी हो क्या , मैंने कब कहा की मैं क़त्ल कर रही थी .. मैंने तो बस ये बताया की मैं hi सकती थी , और है अभी गांव में जो चंचल को फसाय था उसमे मेरा हाथ जरूर था , ये काम मैंने और सोनू ने मिलकर किया था .. लेकिन बाकि के कतल से मेरा कोई लेना देना नहीं है “

उनकी बात सुनकर सभी के चेहरे का रंग उड़ गया था , अभी तक तो सभी उन्हें hi वो कातिल समझ रहे थे जिसने शहर में भी शिवा के नाम से कतल किये थे ..

“अभी भी फ़ोन करने वाला मर्द hi था और सभी कतल तो एक ायरत ने किये है , ऐसा फ़ोन मुझे भी आया था जब मैं सस के साथ ज्यादा घूम रहा था मेरे ख्याल से इसके पीछे सस के भाई सागेर भी हो सकता है क्योकि वो सस के पीछे पागल है “

“उन सबका पता काजल लगा लेगी , तुम लोग अभी थोड़ा आराम कर लो रात भर से जाग रहे हो “

इस बात बोलने वाला डॉ. था …

हम सभी ने हां में सर हिला दिया .. और अपने अपने कमरे में चले गए , अभी भी बहुत साडी बाटे खुलनी बाकि थी , शायद आज की महफ़िल में बाकि की बाटे पता चले ……

दोपहर का वक़्त था हम सभी फिर से एक जगह इकठ्ठे हुए थे अभी बहुत साडी बाटे जननी बची थी …

“तो आप लोगो ने बताया नहीं की कोमल जी आपके साथ कब से थी “

मैंने सबसे पूछा , भाभी और महिमा (नेहा की माँ) ने एक दूसरे को देखा ..

फिर महिमा बोल पड़ी

“शुरुवात तो तुम्हे hi करनी चाहिए अंकित “

मैंने मुस्कुराते हुए कोमल की और देखा उन्होंने भी आँखों के इशारे से मुझे आगे बढ़ने की हामी दे दी ..

“हम्म बात तब की है जब भाभी और भैया की शादी हुई , उसके बाद से hi मैं कभी कभी कॉलेज की तरह घूमने जाता तो इनकी चाय की दूकान में जरूर जाता था , वंहा ye(komal ) मुझे प्यार से बिस्कुट, या समोसे खिलाया करती थी ,इसलिए मैं और मेरे दोस्त फ्री की बिस्कुट या समोसे खाने पहुंच जाते थे …और ये क्योकि मेरी भाभी माँ की तरह दिखती थी मुझे इनके पास जाना और भी अच्छा लगता था…

गांव छोड़ने के बाद मुझे कभी कभी इनकी चिंता होते रहती थी की कही भैया इनपर भी अपना गुस्सा न दिखा दे ..

जब उस दिन मैं अपने दोस्तों के पास गांव गया था और वंहा से लौट रहा था तो यंहा आने के बाद मैं फिर से वापस गांव चला गया , मैं उन लोगो को जान से मार देना चाहता था जिन्होंने मेरी भाभी और भाई की ये हालत कर दी थी , मैं वापस जा hi रहा था की मुझे ये मिल गयी .. ये डॉ. के बुलावे पर वापस आ रही थी , मैं बेहद नशे में था और मैंने इन्हे बताया की मैं चंचल का कतल करना चाहता हु , तो इन्होने मेरी मदद की बात की , मुझे लगा की यही शिवा भी है और इसलिए लोगो को मारना इनके लिए कोई बड़ी बात नहीं होगी, तो हम दोनों मिलकर मेरे पुराने घर पहुंच गए… मैं अपने घर के बारे में अच्छे से जनता था इसलिए मुझे जयदा दिक्कत नहीं हुई और जो हुआ वो आप सबके सामने है …….”

सभी ने एक बार कोमल की तरफ देखा जो की हलके हलके मुस्कुरा रही थी ..

“देखो मैंने उस दिन सोनू की मदद इसलिए की क्योकि उन लोगो की वजह से मेरी बेटी को ये दिन देखना पड़ा था, वो तो मैं इस गांव में नहीं थी वर्ण इन लोगो को पहले hi सबक सीखा देती … लेकिन मैं शिवा नहीं हु , बस इस कतल के लिए शिवा का नाम लिया था “

कोमल ने बड़े hi मासूम से अंदाज में कहा , इतने लोगो को गाजर मूली की तरह कटाने वाली मासूम सी कोमल :lol1:

“और आप दोनों .. आपको ये कब मिल गयी थी “

मैंने भाभी और महिमा ( मेरी सास :ब्लश1: ) को देखते हुए कहा ..

दोनों के चेहरे खेल गए थे ..

“तो पहले कौन बताएगा “

भाभी ने महिमा की और देखा …



और महिमा के कहना शुरू किया …………
 
अपडेट 53
महिमा ने कहना शुरू किया ………

फ़्लैश बैक स्टार्ट

वो शाम मेरे जीवन की सबसे भयानक शाम थी , मैं अपने पति और बेटी के साथ एक रेस्टोरेंट खाना खाने गयी थी , तभी मेरे पति {इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश (सत्य ) } का मोबाइल बज उठा , खाना आर्डर किया जा चूका था ……

“जी .. जी सर जी जी .. “

उनका चेहरा पीला हो रहा था , वो कभी मुझे देखते तो कभी बेटी नेहा को ..

अचानक उनके चेहरे का भाव बदलने लगा ..

“नहीं सर , मैं ऐसा नहीं कर सकता , मैं नहीं डरता सर जो गुनहगार है उसे तो सजा मिलनी hi चाहिए , है मेरे पास पर्याप्त सबूत है … ोकक सर , जय हिन्द”

उन्होंने फ़ोन रखा तो उनके चेहरे में एक तेज था ..

“क्या हुआ जी ..”

मैं उनकी इस दशा को देखकर थोड़ी घबरा गयी थी

“कोई बात नहीं मला तिवारी का फ़ोन था , मैंने जो करीम और जीवा के काळा कारनामो के खिलाफ सबूत इकठ्ठा किया है बस उसी के बारे में बोल रहे थे ..”

जीवा और करीम का नाम सुनकर मेरे चेहरे में पसीना आ गया था, ये दोनों तब तक शहर के सबसे ताकतवर गुंडे थे , दोनों के गैंग में आये दिन लड़ाईया होते रहती थी , सकती को गायब हुए लगभग 7-8 साल हो चुके थे , सकती के जान से जीवा गैंग कमजोर तो हुआ था लेकिन तिवारी के चुनाव जिएने से उसे ताकत मिली थी , तिवारी अब मला बन चूका था लेकिन उसे और पावर चाहिए थी , उसे मंत्री बनने का भूत चढ़ा हुआ था , इसलिए वो सीधे सीधे करीम का भी खत्म नहीं कर रहा था, चालबाजी तो तिवारी के खून में थी , जीवा की मदद से मला बनने के बाद भी वो करीम से भी मिला हुआ था, वो जनता था की किसी एक गैंग को पावरफुल बनाने के मतलब है की उसकी ताकत का काम होना ..

इसीलिए उसने प्रदेश के सबसे ईंमानदार लोगो में कुछ को अपने इलाके में इकठ्ठा किया जिनमे मेरे पति भी थे , और उन्हें करीम और जीवा के खिलाफ सबूत इकठ्ठा करने के लिए कहा और सहायता भी प्रदान की , इसका मकसद उस समय मेरे पति को नहीं पता था, वो तो यही सोचते थे की तिवारी अच्छा आदमी है और जीवा और करीम के गैंग को ख़त्म करना चाहता है .. लेकिन असल बात तो ये थी की तिवारी असल में जीवा और करीम गैंग के ऊपर एक नियंत्रण चाहता था और ये उन सबूतों के माध्यम से सम्भव हो सकता था …….

तिवारी की जीवा से खटपट तो चल hi रही थी साथ hi साथ करीम का दर भी उसे लगा hi रहता था इसलिए एक तीर से दोनों शिकार को साधना की सोची थी , लेकिन उसने गलती कर दी , गलती यही हो गयी की सबूत हाथ में आते hi मेरे पति ने उसे अदालत में पेश करना चाहा, वो इन सबूतों को तिवारी को नहीं देना चाहते थे , तिवारी ने फ़ोन करके उन्हें समझाया भी और ये भी चेतावनी दी की इससे उनकी जान को खतरा भी हो सकता है , अगर जीवा या करीम को पता चल गया तो वो उनके लिए खतरा बन सकते है ..

लेकिन मेरे पति तो अपने वसूलो के पक्के थे …….

उन्होंने मुझे न घबराने के लिए कहा और हंसी मजाक करते रहे , लेकिन ना जाने मेरा दिल आज क्यों घबरा रहा था ……….

हम खाना खाकर बहार निकले hi थे की किसी ने हमरे ऊपर हमला कर दिया , मेरे सर पर छोट लगी थी जिससे मेरी आंखे बंद होती गयी …..

जब आंखे खुली तो सामने का नजारा देख कर मेरी रूह hi काँप गयी थी ..

सत्य जी को एक चेयर पर बांध दिया गया था वही नेहा कही भी दिखाई नहीं दे रही थी , मैंने खुद की स्तिथि पर गौर किया तो मैं और भी चौक गयी थी , मैं एक टेबल में झुकी हुई थी , मेरे हाथ सामने की और बंधे हुए थे , सामने मेरे पति को बांध कर रखा गया था मेरा चेहरा उनकी और hi था , उनकी आँखों में आंसू थे और पूरा चेहरा खून से सना हुआ था , मुझे समझते देर नहीं लगी की उनके दुश्मन हमें उठा कर ले आये है …..

“जल्दी से बता दे की वो सबूत तूने कहा छुपाये , क्यों खुद को तकलीफ दे रहा है “

ये जीवा था… उन्होंने सत्य को बहुत hi मारा था लेकिन शायद सत्य ने अभी तक उन्हें उन सबूतों के बारे में नहीं बताया था …

“तुम मेरी जान भी ले लो तो मैं तुझे वो नहीं दूंगा “

मेरे पति चिल्लाये और फिर से एक जोरो का घुसा उनके चेहरे पर जा लगा …

“सेल अपनी नहीं तो अपने बच्चे और बीवी की तो सोच .. देख उसे .. अपनी बीबी को देख बेचारी जवान है , खूबसूरत है , इसके जिस्म से पूरा मांस नोच खाएंगे ये लोग … वो भी तेरे सामने “

उसकी उस शैतानी बात को सुनकर मेरा दिल hi दहल गया था , लेकिन अब भी मेरे पति के चेहरे पर कोई भी दर का भाव नहीं आया था ..

तभी कमरा खुला और कुछ लोग और वंहा आ गए , ये क्या???

वो तो करीम था … करीम आते hi जीवा को आदाब करता है ..

“किस्मत देखो जीवा , अगर ये कोई दूसरी जगह होती तो शायद हम दोनों एक दूसरे के खून के प्यासे होते लेकिन आज .. आज हम दोनों को एक होना पड़ा इस सेल के कारन “

आते hi करीम ने सत्य के मुँह पर एक जोरदार घूंसा मार दिया .. तभी उसकी नजर मुझपर गयी ..

करीम की तो जैसे आंखे hi चमक उठी थी

“यार जीवा तू सच में अभी धंधे में नया hi है , सामने माल पड़ा है और तू इसे हाथो से मार रहा है , वंहा मार जंहा इसके दिल में लगे ..”

वो मेरी और बढ़ने लगा था ..

“नहीं कुत्ते उसे अगर कुछ किया न तो तुझे कुत्ते की मौत मरूंगा “

सत्य चिल्लाये और जीवा की भी आँखों में चमक आ गयी ,

“साला अभी तक इसे इतना टॉर्चर कर रहा था लेकिन अभी तक इतना नहीं बौखलाया था …”

जीवा भी गन्दी हंसी में हंस रहा था , करीम मेरे पास आ गया और मेरी साड़ी को उठाने लगा ..

“नहीं ..” मैं और सत्य दोनों hi जोरो से चिल्लाये थे , लेकिन वंहा मौजूद सभी लोग एक साथ जोरो से हंस पड़े ..

“वाह माल तो बिलकुल मुलायम है , सबूत न भी मिले तो भी इसे खाने में मजा आएगा “

“कुत्ते .. मैं तेरा “

सत्य कुछ और बोलते उससे पहले जीवा ने उनके चेहरे पर एक जोरो का मुक्का मार दिया , उनके मुँह से खून निकल आया था , वही मैं चिल्लाती उससे पहले hi जीवा ने सत्य के गले में एक चाकू रख दिया , मैं बिलकुल hi निर्जीव hi हो गयी थी , मेरी बेटी का भी अभी कोई पता नहीं था, पति की जिंदगी खतरे में थी , इन दोनों के सामने मेरी इज्जत की क्या hi कीमत थी …

करीम ने मेरी साड़ी को मेरे खुल्हो तक उठा दिया था , साथ hi उसने मेरे पेटीकोट को भी उठा दिया था , मेरे पेअर , जंघे नंगे सबके सामने थे, मैं रो रही थी लेकिन मेरा रोना किसी के दिल में कोई भी दर्द नहीं जगा रहा था बल्कि सभी मेरी मजबूरी में बस हंस रहे थे , मेरे अंतःवस्त्र hi बचे थे जो मेरी इज्जत को ढंके हुए थे , लेकिन मैं टेबल में बंधी हुई थी , मेरी छतिया टेबल से लगी हुई थी , मेरा पिछवाड़ा उभर कर करीम के सामने था , उसने एक जोर से तमाचा मेरे नितम्भो में मार दिया ..और वो जोरो से हंसा

“नहीं ..” मजबूरी और जिल्लत से भरी हुई ये आवाज मेरे मुँह से निकल गयी थी ..

मैं और भी जोरो से रोने लगी थी , मेरे पति की आँखों में भी आंसू थे , एक तरह कर्तव्य था जिसको पूरा करने की सपथ उन्होंने उठाई थी और दूसरी तरफ वो सपथ थी जो शादी के फेरे लेते हुए उन्होंने उठाई थी , दोनों hi वचन थे जिसे उन्हें पूरा करना था , वो अपने आँखों के सामने मेरी इज्जत को लुटाता हुआ तो नहीं देख सकते थे , वो सच्चे पुलिस वाले थे जो अपने कर्तव्य के लिए मौत को तो गले लगा सकते थे लेकिन कैसे अपने पत्नी की इज्जत को लुटाता हुआ देखते ..

करीम के हाथ मेरे पंतय में घूमने लगे थे और मेरे योनि के ऊपर आ गए ,उसने उस जगह को जोरो से मसल दिया था , मैं बुरी तरह से चीखी जिससे सत्य को पता चल गया था की मेरे साथ क्या हो रहा है ……

“रुको ……….” सत्य जोरो से चिल्लाये

सभी की नज़ारे उनके ऊपर hi थी , उन्होंने फैसला कर लिया था , फैसला दोनों hi वचनो में से एक को निभाने का ..

“मैं बताता हु की सबूत कहा है , इसे और मेरी बेटी को छोड़ दो , चाहे तो मुझे मार देना “

करीम पर जैसे इन बातो का कोई असर नहीं हो रहा था , वो आगे आकर मेरे नितम्भो से अपने कमर को लगा दिया , उसका लिंग तना हुआ था जो की मेरे नितम्भो में चुभ रहा था , उसके पठानी सूट में वो लिंग तना हुआ था , मैं फिर से जोरो से रोई जिसे सुनकर सत्य जोरो से चिल्लाये ……….

“अगर मैंने नहीं बताया तो सबूत आटोमेटिक hi न्यूज़ चैनल्स, केंद्र साकार और राज्य सकरतो तक पहुंच जायेगी …तुम सब बर्बाद हो जाओगे “

“करीम रुको “ इस बार जीवा चिल्लाया था , करीम ने बुरा सा मुँह बनाया और जीवा के साथ जाकर खड़ा हो गया ,

“बताओ ..”

“पहले मेरी बीबी और बेटी को छोड़ दो “

जीवा जोरो से हंस पड़ा था …..

“मुझे चुटिया समझ कर रखा है क्या , इन्हे जाने दिया तो तू हमें कभी नहीं बताएगा “

“और अगर मैंने बता दिया तो क्या गारंटी है की तुम इन्हे जाने दोगो “

सत्य की बात सुनकर करीम भड़क गया

“सेल को यही गोली मारो और इसकी बीबी को मुझे दे दो बात ख़त्म “

लेकिन जीवा अभी भी शांत था

“तो तुम बताओ क्या करना है “ जीवा ने सत्य से कहा

“कोई ऐसा जिसे हम दोनों की चिंता हो वही गारंटी ले सकता है ..”

सत्य की बात सुनकर जीवा थोड़े चिंता में पद गया

“करीम तिवारी को फ़ोन लगाओ … और उसे यंहा बुलवा , वही इसे समझायेगा “

तिवारी का नाम सुनकर मेरे पति और मुझे दोनों को एक बड़ा झटका लगा था ..

मला इन लोगो के साथ मिला हुआ था शायद उसी ने हमारी लोकेशन और जानकारी इन लोगो को दी थी ..

“अरे तिवारी का काम ख़त्म हो गया , उसने हमें जानकारी दी और बदले में हम उसके नेक्स्ट चुआव में फंडिंग करेंगे बात ख़त्म , अब जो भी मामला है उसे हमें hi निपटना होगा “ करीम की नज़ारे मुझ पर hi तिकी हुई थी उसे ये सब सौदेबाजी बिलकुल भी पसंद नहीं आ रही थी उसे तो मेरे जिस्म को नोचना था चाहे उसके लिए वो कोई भी कीमत चुकाए ..

लेकिन जीवा नहीं मन और तिवारी को वंहा बुलाया गया , उसने जब मेरी हालत देखि तो घबरा गया

“ये तुम लोग क्या कर रहे हो , मैंने तुम्हे सिर्फ इंस्पेक्टर के लेन के लिए कहा था तुम उसके परिवार को पकड़ कर ले आये “

दया संकर चीखा ..

“हमें हमारा काम मत समझा अब इस इंस्पेक्टर से डील करवा बात ख़त्म “

करीम ने साफ साफ लब्जो में कहा था ..

“देखो सत्य मैंने तुम्हे पहले भी समझाया था की वो सबूत मुझे दे दो , ऐसे सेंसिटिव चीजों को सम्हालना तुम्हारे बस का नहीं है “

तिवारी की बात सुनकर मेरे पति के चेहरे में एक कातिल सी मुस्कान खिल गयी

“वह मला साहब खुद मुझे इनके पीछे लगाकर इनलोगो से हाथ मिला लिया , आपने अपन ईमान बेचा होगा लेकिन मैं आज भी ईमानदार हु , लेकिन मुझे अपने परिवार की चिंता है मैं उन्हें ऐसे नहीं छोड़ सकता “

सत्य की बात सुनकर तिवारी को थोड़ी शर्मिंदगी तो हुई थी लेकिन आखिर उसने भी अपन ईमान तो बेच hi दिया था

“सत्य ये पॉलिटिक्स है , यंहा कोई दोस्त या दुश्मन नहीं होता, न तुम दोस्त थे न hi ये दशम थे , और न hi अब ये दोस्त है और तुम दुश्मन हो , बा यंहा काम के और बेकार इंसान होते है , जो काम का है वो दोस्त है , और काम बिगड़े वो दुश्मन और जो बेकार है उससे कोई मतलब hi नहीं रखा जाता … तो मुझे नैतिकता का पथ मत पढ़ाओ मैं अपना काम जनता हु .. तुम अपने फॅमिली को बचाओ .. चलो मैं गारंटी देता हु की तुम्हारी बीबी और बेटी की हिफाजत का जिम्मा मेरा होगा , तुम बस वो सब बता दो जो हम तुमसे जानना चाहते है .”

“लेकिन मैं आपके बातो का यकीं कैसे करू “

सत्य की बात सुनकर तिवारी ने मनो एक गहरी साँस ली

“देखो सत्य मैं कमीना जरूर हु लेकिन इतना नहीं की सिर्फ अपने फायदे के लिए किसी ायरत के इज्जत से खेलु ….. और ऐसे भी मुझपर यकीं करने के अलावा तुम्हारे पास कोई चारा भी नहीं है ..”

सत्य ने एक नजर मुझे देखा , वो आज मेरे लिए अपने कर्तव्य की आहुति देने जा रहे थे , उनकी आँखों में आंसू थे वो मुझे आँखों से hi कह रहे थे की मुझे माफ़ करना …

“ठीक है लेकिन मुझे एक आदमी को बुलाना है , मेरी बीबी और बेटी को उसके हवाले होने के बाद hi मैं सबूतों को बताऊंगा , चाहे तो तुम लोग इन लोगो की निगरानी कर लेना लेकिन उस इंसान तक इन्हे पहुँचाओगे “

तिवारी ने कुछ सोचकर हां में सर हिला दिया था ..

थोड़ी देर के बाद मेरे आँखों में पट्टी बंधी गयी थी , मेरे पति ने अंतिम बार मेरे कानो में बस ये कहा था

“मैं तुमसे और नेहा से बहुत प्यार करता हु महिमा, और मैं जिसके पास तुम्हे भेज रहा हु उससे कहना की मुझे माफ़ कर दे मैं टूट गया “

हमें बेहोश कर दिया गया और जब हमारी आंखे खुली तो मैं डॉ. चुटिया के पास थी …….

मेरे पति की तो लाश भी बरामद नहीं हुई , डॉ. ने बताया की सौदे के मुताबिक जब मैं और नेहा उनको मिले तो उन्होंने सत्य से बात की थी और कहा था की हम दोनों उन्हें मिल गए है …

शायद उसके बाद सत्य ने सबूतों के बारे में बता दिया हो…….

फ्लैशबैक एन्ड

पुरे कमरे में सन्नाटा छ गया था , नेहा अपनी माँ के गले से लग कर रो रही थी , डॉ. चुटिया भी मायूस दिख रहे थे ……..

माहौल गमगीन था

“सत्य एक ईमानदार पुलिस वाला था, उसकी मौत जाया नहीं जायेगी ..”



डॉ. के मुँह से बस इतना hi निकल पाया
 
अपडेट 54
थोड़ी देर में माहौल थोड़ा शांत हुआ था

“लेकिन आपने बताया नहीं की आप कोमल से कैसे मिली “

महिमा की बात सुनने के बाद मैंने सवाल किया ..

इस बात का जवाब महिमा ने नहीं बल्कि डॉ. चुटिया ने दिया ..

“अंकित बात असल में ऐसी है की जब भुवन और कोमल ने सब कुछ छोड़ने मन बनाया था तो वो उसी सिलसिले में मुझसे भी मिले थे , मैं भुवन को पहले से जनता था , मेरे hi मदद से ये लोग इस गांव में बेस थे .. उसके बाद जब कोमल अपनी बेटी को ढूंढते हुए मेरे पास आयी तब मैंने कोमल और महिमा को मिलवाया था ….. “

“ओह्ह्ह “

मैंने कोमल की और देखा , फिर भाभी की और आपसे ये कैसे मिली

इससे पहले भाभी कुछ बोले कोमल बोल पड़ी

“मैं तुम दोनों को पुरे शहर में धुंध राइ थी जब मुझे इंस्पेक्टर पाण्ड्य के मर्डर की बात पता चली तो जब मैंने पता किया तो मुझे समझ आने लगा था की जरूर तुम जीवा या सम्पत के हाथ लग चुकी हो…. जीवा अब तिवारी से छुप कर रहता था या ये कहो की दोनों एक दूसरे के आमने सामने आने से बचते है , क्योकि इसी में दोनों की भलाई है , तिवारी ने पठान गैंग को हथियार लिया और करीम की लड़कियों के जिस्म की चाह ने तिवारी का काम और भी आसान कर दिया , उसने गैंग वालो को hi करीम के खिलाफ भड़क के उसका मर्डर करवा दिया .. लेकिन फिर जीवा और उसकी सीधी टक्कर थी , तिवारी ने दिमाग लगाया और लड़ने झगड़ने के बजाय एक मौन समझौता दोनों में हो गया ……

तो मुझे लग hi गया था की जब जीवा ने आरती देखा होगा तो उसके no.1 डॉन बनने की ख्वाहिश बलवती हो गयी होगी और आरती को अपने काबू में लेने की कोशिस करेगा , शायद इमोशनली, मेरे पास अब इतनी ताकत नहीं बची की मैं एक पुरे गैंग से भीड़ जाऊ , ये सकती बड़ी अजीब है जो प्रेम के साथ रहने से hi आती है लेकिन फिर धीरे धीरे गायब होने लगती है , मेरे पास अब बस स्किल्स बचे है जो मैंने सीखी थी लेकिन वो ताकत नहीं रह गयी , इसलिए मैं चाहती थी की अपने दिमाग से काम ताकत लगाए hi आरती तक पहुँचू ..

और मैंने वेट किया पता किया मुझे तुम दोनों के बारे में कई इनफार्मेशन का पता चलता गया , लेकिन अभी आरती के अंदर की ताकत बहार नहीं आयी थी मतलब साफ है की अभी उसे अपना प्यार नहीं मिला है, या उसने उसे अच्छे से पहचाना नहीं है ..

सम्पत और जीवा भी इसी खोज में थे की कैसे आरती के अंदर की ताकत को जगाया जाये , उन्होंने इसका ब्रेन वाश तो कर hi दिया था …

अपने जूठी कहानिया सुना कर ये तो यकीं दिला दिया था की तिवारी गलत है और उसने मेरे साथ बहुत गलत किया है , आरती तिवारी से बदला लेने को आतुर हो गयी थी ..

लेकिन फिर मैं उसे मिली उसे समझाया की तिवारी बुरा इंसासन है लेकिन जीवा और सम्पत भी कोई दूध के धुले नहीं है …

मैं अपनी सकतिया खो चुकी हु इसलिए सीधे लड़ना तो अब मेरे लिए पॉसिबल नहीं था, और न hi आरती को वंहा से भागते hi बना क्योकि कोई न कोई तो उसके साथ होता hi था, अधिकतर वो रानी , और कुछ लोग भी हमेशा इसके साथ रहते थे …

वो इसे इसकी सकती दिलवाने की कोशिस कर रहे थे , इसे कभी कॉलेज में ले जाते तो कभी माल में तो कभी मार्किट ये सोचकर की कोई लड़का इसे पसंद आ जायेगा :lol1:

अब अनपढ़ लोग तो सेल रहेंगे hi बेअकल , लड़ने की ट्रेनिंग दिलवाना और घूमते रहना यही चल रहा था, उन्हें इतना तो पता था की जब किसी लड़के से प्यार में पड़ेगी तो सकती जाग जायेगी , लेकिन इन्होने वो पुस्तक नहीं पढ़ी इसलिए इन्हे ये नहीं पता की उस लड़के जो ढूंढने में इसे किंतनी दिक्कत होनी है , इसे तो खुद भी पता नहीं चेलगा की यही वो है जिससे ये धुंध रही है ……

बहुत मुश्किल होता है समझना, उन लोगो को ये भी शक हुआ की आरती में पावर है भी की नहीं, क्योकि इसका पहला प्यार तो इसका पति hi था फिर भी सकती जागृत नहीं हुई थी ..

अगर सकती न भी होता तो भी इसका चेहरा hi काम में ले आते ये लोग, ये बोलकर की सकती वापस आ गयी है और तिवारी की ऐसे hi फैट जानी थी ……..

इन्ही सभी चीजों की सोचकर मैंने इसे शांत hi रहने को कहा था , मौका देखकर hi कोई काम करने की हिदायत दी थी …. फिर जब पता चला की तिवारी के घर में पार्टी है और तिवारी के घर से hi कोई जीवा के साथ मिलकर तिवारी को रस्ते से हटाना चाहता है तब वो मौका मिल गया , असल में कुछ करने का नहीं बल्कि तुम्हे लेकर वंहा से भागने का ……

सम्पत और जीवा का प्लान था की वो आरती को किसी तरह तिवारी के सामने लेकर खड़ा कर दे ताकि इसे देखकर वो शॉक में चला जाये , मैं नहीं चाहती थी की तिवारी की नजर आरती पर पड़े , इससे तिवारी सतर्क हो जायेगा और हो सकता है की जीवा और सम्पत से फिर से मिल जाए , तिवारी का कोई भरोषा नहीं है वो इसे ख़त्म करने के लिए या इसकी पावर को अपना बनाने के लिए कोई भी चाल चल सकता था ..

भला हो की तुम वंहा मौजूद थे और तुम्हे देखकर आरती को भागने का बहाना मिल गया और साथ hi , और मुझे गोली चलने का “

“क्या , आपको गोली चलने का ??”

मैं चौक गया था

“है असल में वो पठान सूट वाला सम्पत था , उसने जब गोलिया चलनी शुरू की तभी मैंने भी चलनी शुरू कर दी लेकिन रिमोट कण्ट्रोल से … जो दूसरी तरफ से गोलिया चल रही थी वो मैं चला रही थी “

“तो आपने तिवारी को मारा क्यों नहीं “

“उसे मार्कर क्या मिलना था , और ऐसे भी इन लोगो ने इतने पाप किये है की इन्हे इतनी आसान मौत नहीं दे सकती मैं , मुझे तो कोई मतलब भी नहीं था इन लोगो से वो तो मेरी बेटी के कारण मुझे यंहा आना पद गया……..”

मैंने एक नजर भाभी को देखा न जाने क्यों लेकिन उन्होंने नजर निचे कर ली थी …

हम सबने बस हां में सर हिलाया था …..

“भाभी आपको सब के बारे में मुझे बताना था , आपको सब पता होते हुए भी आपने मुझे कुछ नहीं बताया “

मैंने भाभी से शिकायत की

आश्रम से बहहर जंगल के बीचो बिच एक ट्रैन की पटरी पर मैं और भाभी पैदल hi चल रहे थे …

रात का अंदर था और जंगली कीड़ो की आवाजे उस शांति को चिर रही थी ..

हम वही एक जगह बैठ गए थे ..

“मैं क्या करती सोनू , माँ ने जब मुझे इन सबके बारे में बताया था तब से मैं बहुत hi परेशां थी , यही सोचती थी की वो सच्चा प्यार कोण होगा , अगर मुझे मिलेगा तो क्या मैं उसे पहचान पाऊँगी ..”

भाभी मुझे घूरने लगी , अन्धेले में उनकी नजरे मुझे उतनी साफ़ दिखाई तो नहीं दे रही थी लेकिन उनके देखने आभास मुझे जरूर हो रहा था , एक अजीब निगाह थी उनकी

“क्या अपने उसे पहचान लिया ??”

मेरे सवाल से वो थोड़ी चुप हो गयी ……

“तुम्हे क्यों लगता है की वो मेरे सामने भी आया होगा “

मुझे उनकी बात पर हंसी सी आ गयी

“न सिर्फ आपके सामने आया है बल्कि आपके बाजु में बैठा भी है .. “ मैं उनके मुलायम जुल्फों को सरकते हुए अपने हाथ उनके गले तक ले गया ..

मैंने हलके से उनके चेहरे को अपनी और खिंचा था ,

“आह..”

उनकी आंखे बंद हो चुकी थी , होठो से एक हलकी उनकी हलकी सी सिसकी ने मेरे दिल में न जाने इतना तूफ़ान सा मचा दिया था ….

मैं उनके सर को और भी खिचका उनके होठो को अपने होठो के बेहद hi करीब ले आया ..

हमारी सांसे तक आपस में टकरा रही थी

“बोलो न भाभी क्या आपने उसे पहचान लिया , क्या अपने दिल की धड़कने उसके लिए तेजी से धड़कती है “

इस शांत वातावरण में भाभी की दिल की धड़कनो की आवाजे मेरे कानो तक स्पस्ट आ रही थी , उनकी सांसे अप्रत्यासित रूप से तेज हो चुकी थी , मेरे होठो उनके नाजुक होठो से टकरा रहे थे ..

मैं उनके होठो का फड़कना तक महसूस कर सकता था ..

“क्या वो प्यार मैं hi नहीं हु , क्या आपने ये महसूस नहीं किया ..”

मेरी बात के जवाब में वो हलके से रो पड़ी थी ,

“हुम्म्म” उत्तेजना के शीर्ष पर वो भी खुद को सम्हाल नहीं पा रही थी और मैं भी नहीं , वो कुछ बोल hi नहीं प् रही थी और इसी मजबूरी ने उनके मुँह से वो आह निकल दी , वो हलके से रो पड़ी .. कुछ न कह पाने की मजबूरी ने उन्हें जकड लिया था ..

“ी लव यू भाभी “

मैंने उनके जनहो पर अपने हाथ रख दिए थे , ये भाभी की सहन सिमा की परीक्षा थी और बांध टूट गया , उन्होंने मुझे अपने और जोरो से खिंच लिया था और मेरे होठो को अपने होठो में भर लिया ……

प्यार का वो अनकहा सा इजहार था , लेकिन अपने में सम्पूर्ण था , वो भाभी की अभी तक बीते सभी वेदनाओ का निचोड़ था , अभी तक जो उन्होंने खुद को रोका था जा जैसे बांध टूट गया हो , पूरा पानी हमें भिगोने लगा ..

हमारे होठ एक दूसरे के होठो में ऐसे गुल रहे थे जैसे मुँह में सहद गुल रही हो , उस चासनी के सुख ने हमारे जीभ को एक दूसरे में घुसाने पर मजबूर कर दिया था , हमारे लार से हमारे चेहरे सनाने लगे ..

हम दोनों ने hi एक दूसरे को कसकर जकड लिया , और तभी एक तेज प्रकाश हमारे ऊपर पड़ा ..

ट्रैन के हॉर्न की आवाज कानो में गूंज उठी थी और प्रकाश हमारे शरीर को नहला रहा था , लेकिन एक दूसरे से अलग होने का दिल hi नहीं कर रहा था , मैंने उन्हें और उन्होंने मुझे और भी जोरो से जकड लिया , लेकिन वो आवाज और प्रकाश और भी गहरी हो गयी थी , बस वो तरीन मेरे आँखों के सामने आ चूका था और ऐसा लगा जैसे अब बस भाभी के बांहो में समाकर hi ये शरीर छूट जायेगा , जब मरना hi था तो अलग होक कौन मरता और शायद उनका भी वही हाल था उन्होंने मुझे धक्का दिया , मैं पटरी के बीचो बिच गिर गया था और अब वो मेरे ऊपर थी ………..

होठो से होठ मिले थे , एक दूसरे के बालो को हाथ जकड़े हुए थे , जिस्म एक दूसरे में सामने को बेताब था , वो मेरे ऊपर थी मैं पटरी के पतथरो के बिच सीमेंट की पट्टी पर लेया हुआ था, ऐसा लगा जैसे हम दोनों ने hi एक दूसरे को खोज लिया हो, वो खोज जो सदियों की थी आज ख़त्म हो गयी हो ….



तभी ट्रैन की आवाज और भी करीब आती मालूम हुई और ऐसा लगा जैसे अब इसी जन्नत मैं हमेशा के लिए खो जाऊंगा ………..
 
थे ट्रैन पास्ड थ्रू थे साइड ट्रैक एंड ी फेल्ट थे ट्रैन किंग ों थेइर ट्रैक. बोथ हैवे फालेन इन लव सीइंग एच इतर, वाओ! :गिरलकीस: थे सन वास् सो ब्यूटीफुल एंड लवली, :लोवीएड2: ी जस्ट फाउंड थे प्लेस ा बिट वीयर्ड, हु लव्स ों थे ट्रैन ट्रैक्स. :हम्म: फॉर थे फर्स्ट टाइम बोथ अरे क्रासिंग थे बॉर्डर, थे लव फॉर व्हिच बोथ वेरे एअर्निंग है बीन फाउंड टुडे. :heart:You हैवे प्रेसेंटेड थे फीलिंग्स ऑफ़ बोथ इन ा वैरी गुड वे. ी लिकेड थे व्होले अपडेट एंड सोनू आल्सो एंजोयेड आईटी. सडनली, वेयर दीद थे गूंस के फ्रॉम एंड थे फेल सो इन लव तहत थे didn't इवन क्नोव. भाभी इस बीटिंग आल थे गूंस एंड सोनू इस सीइंग थे ब्यूटी ऑफ़ भाभी. :लोटपोट: वाओ अलोंग विथ सेक्स अस वेल अस एक्शन. :applause:I'm सूरे नेहा वास् वाचिंग everything.:shocking:

तेरे वास् ा वैरी सेंसुअल अपडेट. यू अरे राइटिंग वैरी वेल, नाउ let's सी व्हाट हप्पेंस नेक्स्ट, टिल थें वेटिंग फॉर थे नेक्स्ट part ऑफ़ थे स्टोरी.

थैंक यू...

???
 
अपडेट 56


हम दोनों hi अपनी hi दुनिया में मस्त थे , जब हवस का तूफ़ान थमा तब तक सुबह ने भी अपनी रोशनी बिखेरनी शुरू कर दी थी , हलकी हलकी सी लालिमा आकाश में दिखने लगी थी ..

भोर का वक्त था और हम दो प्रेम के पंछी जैसे वक़्त से अनजान से बस अपने hi मस्ती में मस्त थे , हम उसी पेड़ के निचे एक दूसरे के जिस्म में किसी डोर से लपटे हुए बैठ गए थे …

तभी एक सरसराहट से हमारा ध्यान उस और गया , जब नजर पड़ी तो बस जैसे ऐसा लगा की मेरे पेअर से धरती hi खिसक गयी हो ..

वो आंखे मैं भूले नहीं भूल पाव

इतना गुस्सा था उन आँखों में , दर्द था , जैसे विस्वास टुटा हो , कोई सपना किसी ताश के महल सा टूट कर बिखर गया हो ..

वो दर्द लिए वो दो आंखे हमें घर रही थी ..

मैं hi नहीं भाभी भी मनो सदमे में थी…

उन दो नयनो से आंसुओ की धरा बहाने लगी थी,

वो रट हुए भागी लेकिन मैं चिल्ला उठा

“नेहा .. रुक जाओ “

वो नहीं रुकी मैं उसके पीछे भगा था उसके हाथो को पकड़कर अपनी और खींचा

“छोड़ दो मुझे .. तुम इतने गिरे हुए हो सकते हो मैंने ये सोचा hi नहीं था और तुम्हारी भाभी … छी मुझे तो सोचते हुए भी शर्म आ रही है “

“नेहा जैसा तुम सोच रही हो वैसा कुछ भी नहीं है ,मेरी बात सो समझो “

“क्या समझू अंकित , क्या मैं अपनी इन आँखों से जो देखा है वो झूठ है … तुम मुझे क्या इतना मुर्ख समझते हो .. मैं भी कितनी पागल थी अंकित जो तुम्हारे प्यार के झूठे वेड में फंस गयी , जब मैंने तुम्हे सस के साथ देखा था तभी मुझे समझ जाना था .. मैं सच में पागल hi हु , मैं बेवकूफ hi हु “

वो रट हुए जाने को हुई तभी भाभी बोल उठी

“नेहा रुको .. सुनो ये जो कुछ भी तुमने देखा वो आधा सच है .. आधा सच ये है की सोनू तुमसे बहुत प्यार करता है , लेकिन ये हमारा भाग्य है .. हम इसका क्या hi कर सकते है ……

इन लाशो को देखो .. तुम्हे क्या लगता है की कोई आम इंसान इस तरह से विध्वंस फैला सकता है … नहीं .. लेकिन सोनू और मेरा ये मिलान और ये कत्लेआम ये सब हमारे नसीब का hi हिस्सा है नेहा .. हम इसका कुछ नहीं कर सकते “

नेहा ने भाभी को बड़े hi अजीब दृष्टि से देखा ..

“आपके कुछ भी बोलने से गलत सही नहीं हो जायेगा , आप दोनों तो माँ बेटे जैसे रिश्ते में बंधे हुए हो और एक दूसरे के साथ इस तरह से … छी , अगर आपके जगह कोई दूसरा होता तो शायद मैं मान भी जाती लेकिन यंहा तो ……… मैं कैसे समझू की ये सही है ,कैसे मान लू की ये कुदरत का नियम है .. नहीं मैं ये नहीं मान सकती , अगर ऐसा होना था तो मुझसे प्यार का वडा hi क्यों किया, अगर तुम दोनों की किस्मत की लकीरे एक है तो मुझे इसमें क्यों शामिल कर लिया .. तुमने मुझसे धोखा किया है अंकित और मैं तुम्हे कभी भी माफ़ नहीं करुँगी …”

नेहा वंहा से तेजी से निकल गयी , मैं बस उसे जाते हुए देखता रह गया था , मैं उससे कहता भी तो क्या कहता उसने अपनी आँखों से ये सब देखा था ………..

भाभी और मैं दोनों hi इस हादसे के बाद एक अजीब से असमंजस में पद गए थे , एक तो हमारे बिच की साडी दीवारे गिर गयी थी लेकिन वही दूसरी और नेहा की कही बात भी सही थी , समाज के नजरो में तो हम अभी भी भाभी और देवर hi है , एक ऐसा रिश्ता जो maa-bete के सामान होता है , समाज के नजरो में हमने मर्यादा का उल्लंघन hi किया था हम पापी hi थे …

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आश्रम आने से पहले हमने पास hi एक झरने में स्नान किया और अपने कपडे पहन लिए , हम अपने रिश्ते को सभी से छिपा सकते थे लेकिन कुछ ऐसे भी लोग थे जिससे हम इसे नहीं छिपा सकते थे , इसलिए हमने कुछ लोगो को खुलकर बताने की सोची ..

कोमल , भुवन और डॉ. चुटिया को हमने हमारे रिश्ते के बारे में बताया और ये भी की कैसे भाभी ने वंहा पर लाश बिछा दिए है ….

डॉ. ने जल्दी से अपने कुछ लोगो को बोलकर लाशो को ठिकाना लगाने का काम कर दिया …..

“तुम्हारी सकती और तुम्हारा प्यार तुम्हे मिल गया ये तो अच्छी बात है “

कोमल भाभी के बालो पर अपने हाथो को फेर रही थी

“लेकिन माँ क्या समाज हमारे इस रिश्ते को मंजूर करेगा और मैं सोनू की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं कर सकती वो नेहा से प्यार करता है ऐसे में मैं उसके साथ कैसे रह सकती हु “

भाभी रोने लगी थी , कोमल ने उसके कंधे को सहलाया

“बेटी समाज की चिंता करोगी तो फिर जियोगी कैसे और जंहा तक नेहा की बात है वो सब तो किस्मत पर hi छोड़ दे , अभी से कुछ भी कहना सही नहीं है … तुम दोनों hi एक दूसरे को पूर्ण करते हो ऐसे में तुम दोनों अगर एक दूसरे से अलग रहोगे तो जी नहीं पाओगे , न जाने किस्मत क्या खेल दिखायेगा .. “

इन सभी बातो के बिच मेरे फ़ोन की घंटी बज उठी थी

देखा तो काजल का no. था

“hello …”

“hello अंकित जो तुम्हे और आकाश को फ़ोन करके धमकी दे रहा था हमने उसे विकाश की मदद से गिरफ्तार कर लिया है ..

बहुच hi चालक था साला इंटरनेट अलग अलग लोकेशन जेनरेट करके कॉल कर रहा था लेकिन उसने फिर से आकाश को कॉल किया और विकाश ने उसे डार्क वेब के जरिये जाल बिछा कर पकड़ लिया है , तुम जल्दी आ जाओ ,पूर्वी ने उसे अपने कस्टूडी में रखा हुआ है मुझे तो वंहा जाने नहीं देगी अगर तुम आ जाओ तो शायद हम वंहा जा सकते है “

मेरा तो मुँह खुला का खुला रह गया था

जब मैंने ये बात बाकियो को बताई तो वो लोग भी खुश हो गए थे . तभी नेहा और उसकी माँ महिमा भी वंहा पहुंच गए ..

नेहा ने मुझे बिना देखे hi बोलना शुरू किया

“आकाश ने मुझे फ़ोन किया था उसने बताया की जो उसे कॉल करके धमका रहा था वो पकड़ा गया है .. मैं उसके पास जा रही हु ..”

डॉ. ने उसके कंधे पर हाथ रखा

“अब तुम लोगो के वापस जाने का वकत आ गया है लेकिन यद् रखना अभी तुम सबको एक साथ hi रहना होगा “



 
अपडेट 57
पूर्वी के ऑफिस के बहार hi हमें अक्की और काजल मिल गए ..

बाकि लोग डॉ. साहब के साथ सुरक्छित जगह पर थे , केवल मैं और नेहा वंहा आये हुए थे, नेहा सिर्फ इसलिए आयी थी क्योकि मामला अक्की से जुड़ा हुआ था और वो उससे मिलना चाहती थी ..

“तो अंदर चले “काजल ने कहा था

हम अंदर गए पूर्वी ने पहले तो काजल को देखकर नाक सिकोड़ा लेकिन फिर मुझसे बात करने लगी

“तो इसने तुम्हे जानकारी दी की हमें उस कातिल को पकड़ लिया है “

“जी है , ऐसे आप ने तो कहा था की वो बहुत hi शातिर है इंटरनेट से कॉल करता है और लोकेशन हर सेकंड में बढ़ता है फिर उसे कैसे पकड़ लिया , और ये जानकारी आपको हमें देनी थी जो काजल जी ने हमें दी “

मेरी बात सुकर पूर्वी ने एक बार काजल की और देखा जो की बस मुस्कुराते हुए उसे देख राइ थी

“देखो अंकित पहली बात तो इस केस से तुम लोगो का कोई वास्ता नहीं होना चाहिए , तुम क्यों फालतू के झमेलों में फंस रहे हो , तुम लोग स्टूडेंट्स हो अपनी लाइफ को एन्जॉय करो, ऐसे खतरे उठाना तुम लोगो के ठीक नहीं होगा…

विकाश ने उसे ट्रेस कर लिया , हमने तो बहुत hi पूछतज की लेकिन उसने अभी तक मर्डर को लेकर कुछ भी नहीं बोलै है ..

कई तरह से टॉर्चर दिए लेकिन नहीं टुटा , बहुत hi सख्त और शातिर है साला ”

पूर्वी के चेहरे में एक गुस्सा आया , तभी काजल बोल उठी

“पहली बात तो मर्डरर वो नहीं है, सरे मर्डर एक ायरत ने किये है , तो तुम उसे कितना भी मारो वो मुँह नहीं खोलेगा क्योकि शायद उसे कोई बात पता hi न हो ……. तुम अपनी पोलिसगिरि से बाज नहीं आओगी ,बस लोगो के हाथ पेअर तोड़ दो , पहले जान तो लो की वो है कौन , और पहले तो तुम्हे ये पूछना था की उसने अंकित और अक्की को कॉल क्यों किया था, और वो लड़की कौन है जिससे उसने इन्हे बार बार दूर रहने के लिए कहा था …..

मुझे पता है की तुमने उसे ये सब तो पूछा भी नहीं होगा बस उसे मर्डरर मान कर उसको तोड़ना शुरू कर दिया होगा “

काजल की बात से पूर्वी जैसे जल भून hi गयी

“तुम मुझे मत सिखाओ की मुझे कैसे काम करना है , मैं ों ड्यूटी पुलिस अफसर हु वो भी क्रीम ब्रांच की और तुम पुलिस डिपार्टमेंट के कर्तव्यों को छोड़कर भागने वाली एक भगोड़ी ायरत …”

पूर्वी गुस्से से लाल हो गयी थी

“मंद योर लैंग्वेज पूर्वी … वो तुम और वेदांत थे जिनके कारण मुझे ये फाॅर्स छोड़ना पड़ा , अरे विकाश ने तुमसे रिश्ता तोड़ कर मुझसे जोड़ लिया तो इसका मतलब ये नहीं हुआ की मैं गलत हु ..

और यद् रखना की आज भी मेरे नाम पर कारनामे है जो मैंने फाॅर्स में रहते हुए किये है , आज भी पुरे पुलिस फाॅर्स में अब तक के सबसे तेज इन्वेस्टिगेटर मेरा नाम सुमार होता है..”

“उह बड़ी आयी , सब जानती हु मैं अपने मिया मिठ्ठू न बनो ..

मेरे बॉयफ्रेंड को अपने हुस्न के जाल में फंसा कर मुझसे दूर कर दिया था तुमने वर्ण विकाश तो बेचारा दूसरी लड़कियों की तरफ देखता भी नहीं था “

पूर्वी के चेहरे में जंहा दुःख आ गया वही काजल के चेहरे में एक कामिनी सी मुस्कान खिल गयी

“यानि की तुम मान रही हो की मैं तुमसे जयदा खूबसूरत हु “

काजल की बात सुनकर पूर्वी का गुस्सा सातवे आसमान पर चढ़ गया , देखो भाई लड़कियों की सुंदरता और लड़को की मर्दानगी पर सवाल ुतःना मतलब सीधे सीधे उनके सबसे बड़े अहम् को चोट मारना होता है .. पूर्वी बौखला कर फूटने hi वाली थी की विकाश वंहा आ गया और देखते hi सारा माजरा समझ गया ..

“अरे यार तुम दोनों .. ये ऑफिस है लड़ना है तो घर में एक गेट टुगेदर रखवा दूंगा दिन भर अपने दिल की भड़ास निकलते रहना .. अभी चलो जिस काम से आये हो वो तो पूरा कर लो ..”

विकाश के आने से पूर्वी थोड़ी शांत हुई और काजल की तरफ से मुँह मोड़ लिया ..

हम सभी वही खड़े बस उस ड्रामे को देख रहे थे..

अब पूर्वी आगे आगे जा रही थी और हम सभी उसके पीछे थे..

हम एक कमरे में पहुंचे जंहा बड़ा सा कांच लगा हुआ था , सामने एक शख्स को बुरी तरह से मारा गया था , वो अभी भी दर के मरे एक कोने में सिखुदे हुए बैठा था , यही वो शख्स था जिसने मुझे और अक्की को धमकी भरे फ़ोन कॉल्स किये थे, अभी वो बस महज चड्डी पहने बैठा हुआ था ..

“सेल को नंगा करके मारा लेकिन कुछ नहीं बोल रहा है “

पूर्वी गरज कर बोली … वही अक्की कुछ सोचकर जोरो से हंस पड़ा और नेहा की आंखे बड़ी हो गयी और मैंने अपना माथा पिट लिया ..

हमारा रिएक्शन देखकर सभी चकित हो गए थे , मुझे समझ आ गया था की वो आखिर किस लड़की की बात कर रहा था और हमें क्यों कॉल कर रहा था ..

“अच्छा हुआ इस सेल को तो ऐसे hi पीटना चाहिए था..” अक्की चहक कर बोल रहा था ..

वही नेहा का मुँह जो अभी भी खुला हुआ था वो बोल उठी

“पवन सर .. इन्होने तुम लोगो को कॉल किया और धमकी दी लेकिन क्यों “नेहा ने आश्चर्य से कहा

मैंने एक गहरी साँस छोड़ी मुझे माजरा क्लियर हो चूका था

“स्नेहा मैडम के कारण , इसे लगा होगा की हम उन्हें लाइन मरते है.. इसलिए पहले मुझे कॉल किया और फिर मेरे जाने के बाद जब अक्की और सस बस ट्यूशन जाने लगे तो इसका शक अक्की पर आया होगा और फिर अक्की को कॉल किया ..

धमकाने के लिए सोचा होगा की बच्चे है और शहर में क़त्ल के कारण शिवा के नाम का दर है तो वही नाम लेकर डरा दिया जाए , बच्चे दर जायेंगे और मैडम का पीछा छोड़ देंगे ..

अब इस बेचारे को क्या पता था की हम सीधे सीक्रेट सर्विस के सबसे काबिल लोगो के पास चले जायेगे .. समय पुलिस इसे ट्रेस नहीं कर पति इस बात का तो इसे भी कॉन्फिडेंस रहा होगा ..”

मेरी बात सुनकर जंहा काजल जोरो से हंस पड़ी वही पूर्वी का चेहरा देखने के लायक हो गया था ..

काजल की हंसी उसे और भी जयदा चुभ रही थी , वो तेजी से कमरे से बहार चली गयी ……..

तभी काजल विकाश को देखकर बोलने लगी

“इसका और वेदांत का तो दिमाग घुटने में है जिसे देखो तोड़ने में लग जाती है लेकिन तुम्हे तो समझना चाहिए था की जो प्रश्न पहले करना चाहिए वो करो , और इतना भी पता नहीं लगा पाए तुम की ये उसी कॉलेज का प्रोफेसर है जिसमे अक्की और अंकित पढ़ते है “

काजल थोड़ी सीरियस थी

“मुझे पता था यार इसके बारे में सभी बाटे पता लगा ली थी लेकिन पूर्वी को तो जानती है न , उसे तो बस इस केस को सोल्वे कर तुमसे आगे निकलने की होड़ रहती है , मेरी बातो को इग्नोर करके सीधा इसे तोड़ना शुरू कर दिया “

विकाश की बात से सबसे जदया खुस तो अक्की hi हो रहा था , उसके चेहरे में अजीब सी मुस्कान खिल गयी थी

“अबे तू इतना क्यों खुस हो रहा है “

मैंने उससे पूछ hi लिया

“भाई अगर ये लोग इसे नहीं तोड़ते तो मैं इस सेल को मरने hi वाला था , ये मैडम को जबरदस्ती परेशां करता रहता है , जबकि मेरी मैडम इसे बिलकुल भी भाव नहीं देती लेकिन फिर भी कभी रेस्टोरेंट चलो तो कभी सिनेमा चलो ..”

उसकी बात सुनकर मैं और नेहा हंस पड़े

“तेरी मैडम हुम्म्म” नेहा ने उसे छेड़ा तो अक्की के चेहरे पर एक शर्म सी आ गयी ..

“सर एक बार हम सर से मिल सकते है , बस अपना चेहरा उन्हें दिखाना है “

मेरी बात पर विकाश ने हां में सर हिला दिया और हमें उस कमरे में ले गए जिसमे सर को रखा गया था , उनकी ये हालत देखकर मुझे तो उनपर थोड़ी दया आ रही थी , बेचारे को बुरी तरह से तोडा गया था , नदी वाली चड्डी पहने हुए एक कोने में दुबका हुआ था ..

कमरे का दरवाजा खुले hi वो और भी घबरा कर दुबक गया ..

लेकिन हमें देखते hi ऐसे रोया जैसे कोई बिछड़े हुए भाई को देखकर रो पड़े , रट हुए वो मेरे पैरो को पकड़ा लिया ..

“अंकित .. इन्हे समझाओ न की मैंने कुछ नहीं किया है , मैंने कोई मर्डर नहीं किया है , मैंने तो बस तुम दोनों को डरने के लिए कॉल किया था और ये सब बोल दिया .. मुझे बचा लोग अंकित ये लोग मुझे कल से मारे जा रहे है , बहुत मारा मुझे बहुत ..”

उसकी इस हालत को देखकर मुझे बहुत बेकार लगा लेकिन सेल अक्की के चेहरे की मुस्कान तो काम होने का नाम hi नहीं ले रही थी ..

मैंने उनके कंधे को पकड़कर उन्हें उठा लिया ..

“ठीक है सर कोई बात नहीं सब ठीक है , अब ये आपको नहीं मरेंगे और जाने भी देंगे “

मैंने उन्हें सांत्वना दिया

“नहीं अंकित फेक कॉल करके धमकाने के कारण आईटी एक्ट के तहत इसपर कारवाही होगी कोई 6तह मंथ की जेल और जुरमाना दोनों hi हो सकता है .. नौकरी तो जायेगी hi “विकाश ने हमें समझाया

मैंने एक बार पवन का चेहरा देखा , एक अच्छा खासा इंसान अपने चूतियापे में ऐसी हरकत कर जाता है की उसका पूरा जीवन hi बर्बाद हो जाए , कॉलेज का प्रोफेसर था करियर ब्राइट था , इंसान भी कोई बुरा नहीं था लेकिन ……

लेकिन पता नहीं ये खुरापात उसके दिमाग में कहा से आ गयी की ये हरकत कर डाली और गलत लोगो के साथ कर डाली , शायद कोई दूसरा होता तो उसे कोई फर्क भी नहीं पड़ता लेकिन पहली गलती खुद को शिवा बताकर hi कर दी और फिर हमको कॉल करके जो की सेक्रेटे सर्विस वालो के संपर्क में थे ..

“सर हमने अभी तक कोई भी कंप्लेंट नहीं लिखवाई है , इन्हे छोड़ दीजिये इनका पूरा करियर hi ख़त्म हो जायेगा “

मैंने विकाश से रिक्वेस्ट की , उसने एक गहरी साँस ली और हामी में सर हिला दिया ..

“थैंक्स अंकित थैंक्स “ पवन सर को तो मनो जन्नत मिल गयी , लेकिन मेरी बात सुनकर अक्की खुस नहीं दिख रहा था ..

“वो सब ठीक है लेकिन आप आज के बाद स्नेहा मैडम से दूर रहोगे “ अक्की ने कड़ाई के साथ उसे कहा , पवन सर के पास और कोई चारा भी तो नहीं था ..

लेकिन अक्की की बात सुनकर मेरे और नेहा के होठो में मुस्कान आ गयी , हम एक दूसरे को देखते हुए मुस्कुराने लगे ..



लेकिन तभी हमें यद् आया की हमारे रिश्ते अभी कैसे है , नेहा के चेहरे पर आयी हुई मुस्कान गायब हो गयी और उसकी जगह एक गुस्से मिश्रित उदासी ने ले ली .. और उसके चारे के बदलते हुए भाव देखकर मेरे चेहरे का रंग भी उड़ने लगा ………..
 
अपडेट 58
“तो अब हमें क्या करना चाहिए “

ये प्रश्न मेरे दिमाग में बहुत देर से घूम रहा था , हम सभी डॉ. के साथ उनके घर में थे ..

सभी चीजे तो साफ़ थी लेकिन मेरे और भाभी के सामने अभी भी ये साफ नहीं था की हमें अब क्या करना चाइये , जो भी हुआ था उसमे हमारा कुछ भी नहीं गया था, अभी तक हमारे पास ऐसी कोई भी वजह नहीं थी जो हमें जीवा या तिवारी का दुशमन बना देती ……..

“मुझे जीवा और तिवारी से अपने पिता की मौत का बदला लेना है “

नेहा ने एक रूखे हुए स्वर में कहा

“नहीं बेटी , ये तुम्हारा काम नहीं है जो हुआ उसके लिए अब अपना भविष्य दाव पर मत लगाओ .. वो काम तो मैं कर hi लुंगी , और अगर ना भी कर पायी तो भी मुझे कोई दिक्कत नहीं है , सत्य के पराम् की निशानी मेरे पास है और मुझ कुछ नहीं चाहिए “ नेहा की माँ महिमा नेहा की बात से इमोशनल हो गयी थी

“है बेटी, महिमा सही कह रही है , तुम्हारे सामने पूरा जीवन पड़ा हुआ है , तुम्हे अपन करियर पर ध्यान देना चाहिए “

इस बार कोमल बोल उठी

(लोग इतने जयदा हो गए है की अब संवादों को नाटक के फरमाते में hi लिखता हु वरना फिर बोलोगे की समझ नहीं आया की कौन बोल रहा है )

नेहा : “लेकिन मेरे लिए ये जानकर भी की मेरे पिता को किसने और किस हालातो में मारा है , चुप चाप बैठे रहना नामुमकिन है , आप लोग मेरा साथ दो या न दो लेकिन मैं तो ये जंग लड़ूंगी “

नेहा की बात सुनकर सभी के मन में एक खटास सी पैदा हो गयी थी

डॉ. : “बीटा ये कोई जंग नहीं है , और तुम क्या करोगी तिवारी जीवा और सम्पत को मार डौगी ,… यही न .. लेकिन उसके बाद तुम्हारा क्या होगा तुम्हारी जिंदगी का क्या होगा , अब वो समय नहीं है जब कोमल तलवार लहराते हुए जाती थी और लोगो को काट डालती थी और कोई भी कुछ नहीं कर पता था , अब कानून और प्रशाशन बहुत hi स्ट्रिक्ट हो गया है, अब बाहुबलियों और ुंडेरवोर्ड के डांस का समय गया , अब या तो पैसा बोलता है या तो पावर , अब समय दिमाग वालो का है , बाहुबल से कुछ भी नहीं हो सकता , अगर तुम्हे जीवा और तिवारी को ख़त्म करना hi है तो सीधे लड़ने की बजाये कुछ ऐसा करो की वो लोग खुद hi बर्बाद हो जाये , ऐसे भी कोई तो है जो तिवारी के पास है और तिवारी को मरना चाहता है, जीवा तो ख़त्म हो hi चूका है , तिवारी के पास अभी पावर है उसे ख़त्म करने के लिए उस इंसान के बारे में जानना जरुरी हो जाता है जो तिवारी को उसके घर में रहकर hi उसे मरने का सडयंत्र बना रहा है , कोई उसके करीब का hi आदमी है …

और मेरे खेल से अंकित, आरती, कोमल , भुवन तुम दोनों को गांव चले जाना चाहिए , या फिर कही और इन सबसे दूर चले जाओ .. कोई मतलब नहीं है इन सब चोचलो में पड़ने से ..”

डॉ. की बात से वंहा एक सन्नाटा सा छ गया था

मैं : “ लेकिन ये कतल कोण कर रहा होगा “

डॉ. : “क्या फर्क पड़ता है की कौन कतल कर रहा होगा , तुम्हे इससे क्या मतलब हो सकता है … जो भी मार रहा हो जिसे भी मार रहा हो , तुम्हे इन सब में पड़ने की क्या जरुरत है “

आरती : “डॉ. हम तो ये सब छोड़कर यंहा से चले जायेंगे लेकिन क्या वो हमें छोड़ देंगे , जीवा और सम्पत ने हमें ढूंढने के लिए गांव में आदमी भेजे थे, तिवारी भी हमें ढूंढ hi रहा होगा , गांव जाना हमारे लिए सेफ नहीं है और हमारे पास जो कुछ भी अभी है वो गांव में hi तो है , चलो मान लिया की हम वो सब छोड़कर कही चले भी जाये तो क्या हम जीवन भर चैन से जी पाएंगे , क्या वो लोग हमें डूंडाहेंगे नहीं .. मेरे माता पिता को देखिये , जो लोग पढ़ लिख कर एक अच्छी जिंदगी जी सकते थे वो इन सबसे दूर जाने के चक्कर में hi किस तरह का जीवन जी रहे है , महलो का सुख भोगने की काबिलियत रखने के बावजूद एक छोटे से ठेले में काम काके अपनी पूरी जिंदगी निकाल दी इन्होने …”

भाभी का चेहरा उदास हो गया था

कोमल : “बीटा हमने ग़ुरबत में दिन जरूर गुजर लिए लेकिन हम दुखी नहीं है , हमारे पास वो सब है जो हमें चाहिए था , आपस में प्रेम है और तुम भी तो हो … और प्रेम और शांति से बढ़कर जीवन में क्या हो सकता है , बाहरी चीजे तो महज बाहरी सुख hi दे पति है , और बाहरी सुख छनभंगुर hi होता है , थोड़े देर के इन्द्रिय सुख के लिए लोग न जाने क्या क्या कर जाते है ..

लेकिन आंतरिक सुख तो स्थायी है ,और इसका महत्व भी इन्द्रिय सुख से कही ज्यादा है , प्रेम और शांति से बढ़कर कुछ भी नहीं है बेटी…”

कोमल ने बड़े hi प्यार से भाभी के चेहरे पर अपने हाथ फेरे, भाभी के चेहरे में एक मुस्कान आ गयी थी ..

मैं : “तो क्या डीडे किया की क्या करना चाहिए ??”

मेरी बात से भाभी हंस पड़ी

भाभी : “मेरे ख्याल से हमें यही रहना चाहिए और जीवन वैसे hi जीना चाहिए जैसे हम जी रहे थे … “

भाभी की बात सुनकर सभी चौक गए

डॉ. : “ वो लोग तुम्हारे पीछे आएंगे “

भाभी : “अब मैं वो पुराणी आरती नहीं रह गयी हु डॉ. मेरे पास अब ताकत है “

डॉ. : “उसी का तो दर है , अगर तुम अपने ताकत का इस्तमाल करोगी तो तुम कानून के नजरो में गुनहगार हो सकती हो “

भाभी : “किसने कहा की मैं उसका इस्तमाल करुँगी, लेकिन सकती तो कर सकती है न ..”

फिर से एक ख़ामोशी ने सब को जकड लिया था

कोमल : “ये सही नहीं रहेगा आरती फिर से वही सब नहीं , अब नहीं हम कल hi ये शहर छोड़कर दूर कही चले जायेंगे “

अपनी माँ की बात सुनकर भाभी ने भी एक गहरी साँस छोड़ी ..

भाभी : “हुम्म्म ठीक है , लेकिन बहुत देर हो चुकी है काम से काम अब तो सोने चलते ही “

वो बेफिक्री से उठाकर वंहा से चली गयी थी ………….

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रत का समां झूमे चन्द्रमा मन मोरा ऐसे रे जैसे बिजुरिया रत का समां ……………

पास रखे रेडियो पर एक पुराण गण बज रहा था मैं लेता हुआ आपने भविष्य के बारे में सोच रहा था .. जो अंधकार में दिखाई देर रहा था , कुछ समझ नहीं आ रहा था की आगे क्या करना है..

तभी कमरे का दरवाजा खुला , सामने एक पारी कड़ी थी , काळा रंग की झीनी सी निघ्त्य में उसके गोर गदराये जिस्म का हर कटाव खिल कर सामने आ रहा है ..

मैं उस पारी को बस देखता hi रह गया

“रत का समां झूमे कहंदृमा , मन मोरा ऐसे रे जैसे बिजुरिया ..”

वो रेडियो की धून में hi गुनगुनाते हुए मेरे करीब आ रही थी, उनके जिस्म से आती हुई एक मनोहर खुसबू नेरे नथुनों को भरने लगी थी ..

वो आकर मेरे साथ hi सो गयी , मैं लालच में बस लार टपका रहा था , मेरे हाथ उनके जांघो पर चले गए और हलके से ऊपर सार्क कर सीधे उनकी योनि में ,मने योनि को हलके से सहलाया , उन्होंने कोई भी अन्तः वस्त्र नहीं पहने थे ..

“आह भाभी यू अरे सो हॉट , कितनी गीली हो गयी हो “

“पता नहीं रे कल से क्या हो गया है , हर समय बस वही करने का मन करता है , ी ऍम फीलिंग सो हॉर्नी बाबू” उन्होंने मुँह बनते हुए कहा की मैं हंस पड़ा

“सच में बहुत हॉर्नी हो रही हो..” मैंने अपनी एक उंगली को उनके योनि की गहराइयों में घुसाया , वो सच में बहुत hi गीली थी , उनकी गर्म गर्म योनि में हलके हलके से उंगली करना भी मेरे लिए सुखद था , वो मेरे गॉड में आकर बैठ गयी थी

“रत का समां झूमे चन्द्रमा “

उन्होंने हसंते हुए कहा

“है भाभी .. मन मोरा ऐसे रे जैसे बिजुरिया “

मैंने उनके होठो में अपने होठो को घुसा दिया था , हम दोनों hi जिस्म के मजे में खोने लगे थे , एक दूसरे को चूमे जा रहे थे ..

उन्होंने तत्परता दिखते हुए मेरे कपड़ो को भी मेरे जिस्म से लग कर दिया, वो मेरे निचे अपनी टंगे फैलाये मकहल रही थी ..

‘मेरे पिया गए रंगून वंहा से किया था टेलीफोन ,, तुम्हारी यद् सताती है , जिया में आग लगाती है ‘ रेडियो में गण बदल गया था

“मेरे पिया गए Rangoooon…(maine अपना लिंग सरकारया ) आह सोऊ न्यू मेरे बेटे “

भाभी ने मेरे बालो को कास कर पकड़ लिया था , मेरा लिंग भाभी की योनि की गहराइयों में समां चूका था , आज वो इतनी गीली थी की मुझे उनके अंदर जाने के लिए कोई भी महेनत नहीं करनी पड़ी थी , उनकी योनि जैसे आग की भठ्ठी हो गर्म गर्म ..

“तुम्हारी यद् सताती है ,, जिया में आग लगाती है .. मेरी भाभी जी “

मैंने उनके होठो में अपने होठो को घुसेड़ दिया था , मेरे कमर हलके हलके से चल रहे थे , वो हलके हलके से कसमसा रही थी ..

आग की उस भट्ठी में अपने लिंग को सरकने में जो मजा आ रहा था उस अदंड को मैं बयां भी नहीं कर सकता ..

“मेरे पिया गए .. आह आह आह बीटा .. ाः रंगून … आह बीटा “

उन्होंने मेरे बालो को जोरो से खींच रखा था , और मैं भी जोरो से धक्के मार रहा था

“तुम्हारी यद् .. आह भाभी जी जिया में आग लगती है भाभी आह .. ोूह माय गॉड मजा आ गया “

मैं कुत्तो की तरह करने लगा था .. हांफ रहा था लेकिन मजे में डूबा हुआ था …

“व्हाट था फ़क .. तुम लोग नहीं सुधर सकते “

दरवाजे के खुलने और ये आवाज दोनों hi एक साथ hi आयी थी

हम दोनों hi हड़बड़ा गए थे , सामने जो थी उसे देखकर मेरी फैट के चार हो गयी थी

“नेहा मैं तुम जो सोच रही हो वैसा नहीं है “

मैंने कहा , लेकिन हम दोनों जानते थे की क्या है और क्या नहीं , मेरी कमर एक बार फिर जोरो से चली

“आह बीटा “

भाभी ने आह ली फिर उन्हने और मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ

“डिसगस्टिंग यार , मेरे सामने भी रुक नहीं सकते और बोलते हो की मैं गलत समझ रही हु .. छी और ये तुम्हे अपना बीटा बोलती और और …. छी छी छी कोई सी मनहूस घडी थी जब मैंने तुम जैसे इंसान से प्यार किया था छी.. मैंने तो सोचा था की तुम शे कल चले जाओगे तुमसे मिल लू लेकिन यंहा तो .. छी “

नेहा रट हुए वंहा से जाने लगी , मेरा लिंग अभी भी भाही के योनि में फंसा हुआ था , निकलने का मन भी नहीं कर रहा था लेकिन नेहा को ऐसे जाने भी तो नहीं दे सकता था .. मैंने एक बार भाभी को देखा

“क्या देख रहा है जा उसे मन “



ोकक भाभी मैंने अंतिम बार एक जोर का धक्का मारा और जल्दी से उठाकर नेहा के पीछे भगा ………..
 
अपडेट 59
मैं भागता हुआ नेहा के पास पहुंच गया था

“यंहा क्यों आये हो अंकित चले जाओ , मैं तुम्हारा चेहरा भी नहीं देखना चाहती “

नेहा ने जोरो से कहा

“नेहा ी लव यू “

“नहीं अंकित तुम नहीं करते और अगर करते हो तो तुम अपनी भाभी से करते हो , जाओ उनके पास जाओ उनके साथ hi अपनी जिंदगी बिताओ .. मेरी जिंदगी बर्बाद मत करो “

“नेहा मेरी बात को समझो हम दोनों के बिच कुछ ऐसा है जिसे हम छह कर भी नहीं रोक सकते “

मेरी बात सुकर नेहा जोरो से हंस पड़ी …

“सच में ………????????

तुम मुझे समझते क्या हो , मैं पागल हु , कामकल हु … बहुत हो गया अंकित जाओ यंहा से “

मैं बिलकुल hi थक चूका था मैं अब नेहा को नहीं समझा सकता था ,

“तुम hi बताओ की मैं तुम्हे विस्वास दिलाने के लिए आखिर क्या करू “

मैं बेबसी से चीखा

“अपनी भाभी और उकसी माँ को मार डालो …”

वो आवाज मेरे पीछे से आयी थी , मैं और नेहा दोनों hi आश्चर्य से उस और देखने लगे . वो नेहा की माँ थी …

“आप पागल हो गयी हो ???? ये आप क्या कह रही हो “

मेरी बात सुनकर वो मुस्कुराई

“मैंने जो भी कहा वो सही कहा है अंकित , अगर मेरी बेटी का प्यार चाहते हो तो अपनी भाभी और उसकी माँ को मर डालो , वो दोनों hi शैतान है .. अगर नेहा तुम्हारे साथ जीवन बिताने को मान भी जाये तो मैं उसे ऐसा करने नहीं दूंगी ,

तुम्हारे घर में दो शैतान खले खूम रहे है , जो किसी का भी क़त्ल कर सकते है “

“आप ये क्या बोल रही हो ??? “ मैं बुरी तरह से परेसाहन हो चूका था

“मैं सही बोल रही हु अंकित , उन दोनों के होते हुए ऐसे भी नेहा उस घर की बहु नहीं बन सकती , और अगर बनती भी है तो महज एक नौकरानी से जयदा उसकी कोई ावुकत नहीं रह जायेगी ..

ऐसे भी न hi आरती न hi उसकी माँ कोमल ये चाहती है की नेहा की शादी या प्यार तुमसे रहे , अगर वो ऐसा चाहती तो अभी तुम्हारी जगह पर तुम्हारी भाभी नेहा से माफ़ी मांग रही होती , चलो जो एक बार होता है उसे गलती माना जा सकता है लेकिन बार बार ……. ये तुम नहीं बल्कि तुम्हारी भाभी तुमसे करवा रही है , जैसे सालो पहले कोमल ने भुवन से करवाया था, कोमल तिवारी से भी शादी कर सकती थी लेकिन तिवारी दिमाग वाला था इसलिए उसने भोले भले भुवन को चुन लिया , वर्ण तिवारी भी तो कोमल से प्यार करता था ……..

वैसे hi तुम्हरी भाभी ने तुम्हे चुना है क्योकि तुम एक भोले भले से बेवकूफ हो, और वो किसी दूसरे लड़की को तुम्हारे जीवन में आने नहीं देगी , हो सकता है की वो नेहा को भी मार डेल और तुम महज देखते hi रह जाओगे , अरे इसकी लाश तक नहीं मिलेगी …. क्या बचा पाओगे तुम नेहा उन दोनों से … नहीं अंकित तुम्हारे पास वो ताकत hi नहीं है की तुम उन दोनों से किसी की भी रक्षा कर सको , खुद की भी नहीं …”

महिमा के बोलने के बाद कमरे में बस सन्नाटा hi सन्नाटा फ़ैल गया था ………..

मैं गुस्से से उन्हें घर रहा था लेकिन उनकी कई बाटे अब भी मुझे ये सोचने पर भी मजबूर कर रही थी की अगर ये सच हुई तो फिर क्या ?????

“माँ ये आप क्या बोल रही हो “

जो नेहा अभी तक मुझसे खफा थी वो hi अब अपनी माँ पर गुस्सा होने लगी थी

“सही बोल रही हु बीटा , कोमल ने अपने बारे जो बताया उससे तो ऐसा लगा की वो कोई बहुत hi दूध की धूलि हुई ायरत है , और पूरा दोष केवल तिवारी और जीवा का है लेकिन ऐसा नहीं था, कोमल एक शैतान थी .. मेरे पति उस समय पुलिस में थे , जब कोमल का आतंक था, मैं तो रोज hi सोचती थी की कही मेरे पति कोमल की हैवानियत का शिकार न हो जाये .. जब जब वो घर से निकलते थे दिल में दर बना रहता था … वो आकर कोमल के कई किस्से मुझे सुनाया करते थे .. फिर तिवारी जी मुझे कोमल के बारे में कई ऐसी बाटे बताई जो की कोमल ने हमें नहीं बताई है , तिवारी तो कोमल से सच्चा प्यार करता था लेकिन वो कोमल hi थी जिसने उसे धोखा दिया , तिवारी तो कभी कोमल ी शक्ति को जगाना भी नहीं चाहता था लेकिन वो कोमल hi थी जिसे शक्ति चाहिए था उसे सकती का चसका जो लग गया था …”

महिमा की बात सुनकर मैं और नेहा दोनों hi बिलकुल hi आवक रह गए थे

“आप तिवारी के संपर्क में है “

नेहा ने कांपते हुए आवाज में कहा

“है जब तुम्हरे पिता उन गुंडों के बिच फंस गए थे तो उन्होंने hi हम दोनों को वंहा से बहार निकलवाया था, उन्हें तुम्हरे पिता का हमेशा से दुःख रहा ,और उनके जाने के बाद जबकि मैं पूरी तरह से टूट गयी थी उन्होंने hi मुझे सहारा दिया , डॉ. ने मुझे एक छोड़ी सी जॉब दिलवा दी थी बस , तुमने कभी सोचा है की तुम इतने महँगी स्कूल में कैसे पढ़ती हो उसके पैसे कहा से आते है .. वो तिवारी जी की दया रही है … देखो बेटी मैं ये नहीं कह रही हु की वो गलत इंसान नहीं है है वो है लेकिन …… उतना भी गलत नहीं है जितना hi कोमल ने बताया है और न hi कोमल उतनी सरीफ है जीतनी की वो हमें दिखा रही है .. अंकित अब तुम्हारे पास दो hi ऑप्शन है या तो नेहा को भूल जाओ .. या फिर अपनी भाभी और उसकी माँ से दूर चले जाओ , जो तुम नहीं कर सकते क्योकि अगर तुम ऐसा करोगी भी तो वो तुम दोनों को धुंध कर मार डालेंगे “

“नहीं वो ऐसा नहीं कर सकते , भाभी मुझसे प्यार करती है “

मैं गुस्से से चीखा लेकिन महिमा केवल मुस्कुराई

“वो तुमसे प्यार नहीं करती बल्कि वो अपनी हवस तुमसे शांत करवा रही है .. अगर प्यार करती तो नेहा के लिए तुम्हरी क़ुरबानी दे देती , कोण सी भाभी अपने देवर से ऐसा रिश्ता रखती है , खासकर उससे जिसे वो अपने बेटे की तरह मानती है ,

ये प्रेम नहीं है अंकित ये हवस है , चाहे तुम मनो या न मनो और साथ hi साथ ये भी सुन लो की तो तुम्हे अपने से अलग होने नहीं देगी , जबकि होना ये चाहिए थे की वो खुद hi तुमसे अलग हो जाये , गलती एक बार हो गयी तो हो गयी अब उसे तुमसे अलग हो जाना चाहिए था, या फिर तुम्हे मन करना चाहिए था कहना था की तुम नेहा के साथ जाओ .. उसके साथ रहो लेकिन उसने ऐसा नहीं किया बल्कि मैं तो बार बार ये कहती हु की अगर तुम उससे अलग होने की कोशिस करोगी तो वो नेहा को hi मार डालेंगे , शैतान जो ठहरे ..

तो या तो नेहा को भूल जाओ या फिर उन दोनों को मार डालो …….

तुम्हरे पास ये दो hi ऑप्शन है ………”

मैंने एक बार नेहा को देखा वो अपनी माँ के बातो से अवाक् थी, वही हाल मेरा भी था , मैं महिमा को यही मार डालना चाहता था लेकिन अगर वो सही हुई तो ..??

क्या वो सही हो सकती थी ??

नहीं ऐसा नहीं हो सकता था , लेकिन इस बात को तो मैं भी झुठला नहीं सकता था की भाभी के अंदर की ताकत ऐसी थी जिसे काबू में नहीं किया जा सकता , कहा गया था की मैं उसे काबू में कर सकता हु .. मैंने अभी तक कोशिस भी तो नहीं की थी ..

क्या भाभी सच में नहीं चाहती की मैं नेहा के साथ राहु ??????????

नहीं वो hi तो थी जिन्होंने मुझे नेहा से प्यार का अहसास डीएलए था , या फिर ऐसा तो नहीं की महिमा नहीं महिमा की जगह तिवारी बोल रहा हो ..



महिमा तिवारी के ाहसानो में दबी हुई है , शायद इसलिए वो तिवारी के बोल बोल रही है ..
 
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