अडुल्टेरी भाभी माँ (कम्प्लेटेड) - Page 52 - SexBaba
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अडुल्टेरी भाभी माँ (कम्प्लेटेड)

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थैंक यू...

???
 
गजब का अपडेट भाई. तो दोनों की सचाई बहार आ hi गयी. दोनों मतलब कोमल और तिवारी की. कोमल जीवा की बहन नहीं थी एयर वो उसके पिता को मंदिर के पुजारी ने दी थी. और तिवारी के बारे में तो मेने पहले hi बोल दिया था की वो मौका पाराष्ट हे. लेकिन यहाँ ये अच्छी बात हुई की कोमल को उसका असली प्यार मिल गया. अब तो जब ये लोग किताब पढ़ेंगे तब आगे का पता चलेगा.

वेटिंग 4 नेक्स्ट अपडेट
 
अवेसमे अपडेट.

इस कहानी में कितने रंग दिखयेंगे डॉ शाहब .

पहले कुछ काम था जो अब चमत्कार , डैबिय शक्ति जैसा भी जोड़ दिया .

कोमल जीवा की सगी बहन न है और न उसने कभी मन था .

इसीलिए उसने कभी ध्यान न दिया पे और हमेशा अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया .

तिवारी का भी भेद खुल गया यह दुसरो की मदद सब पे राज करना चाहता था .

अब सब भेद खुल गया तो अब क्या करेंगे कोमल .

भुवन के प्रति प्यार भी जाग गया पूरी तरह और दूसरी तरफ उसका उग्र सवभा भी बढ़ रहा है
 
पहले की कहानी में सेक्स ड्रग होता था...............

दीदी और दोस्त, बीवी के कारनामे

फिर आया बदला...............

रंडियों का घर, प्यार और धोखा

फिर आया धोखा................

बीवी के आशिक़, रंडी का आशिक़

अब चमत्कार और पाखंड फैला दिया..............

जादुई लकड़ी, भाभी माँ

यार डॉ साहब...............

कभी कुछ ऐसा भी लिखो जो हमें अपना सा लगे

समथिंग नॉट रियल but..........realistic

यहाँ हम सब फ़न्तासी पढ़ने एते हैं............

लेकिन फ़न्तासी बिलकूप गप्प भी नहीं लगनी चाहिए

मजा hi ख़त्म हो जाता है

...................................................

इस कहानी में अब तक सोनू........... डॉ का रोले कर रहा है................

यानि पूरा चुटिया hai........jise चूचियां देखने के अलावा dabana-chodna भी नहीं आता

और कुछ तो छोडो उसे ये hi नहीं पता होता की उसकी भाभी kahan-kahan मरवाती फिर रही है

आरती...... ये जिसके साथ पहले भागी.... उसने इसे लात मरकर भगा दिया

फिर जिस के साथ bhagi.........sonu....... उसे इसने खुद लात मरकर अपनी पर्सनल लाइफ से बहार कर दिया

क्या करती है और क्या सोचती hai.........ye भी बताना बंद कर दिया

कोमल..........

इसे अपने घर में रह रही बेटी का पता नहीं ....की वो किसके साथ पैर करती है और किसके साथ भाग गयी

बेटी को उसके खसम ने लात मार्के भगा दिया और फिर मारने की भी कोशिश ki....ise नहीं पता

बेटी को पोलिसवाले छोड़ने जा रहे थे और इसके भाई (?) जीवा ने अपने जाल में फांस liya...ise नहीं पता

जीवा सम्पत मिलकर इसकी बेटी को गैंगस्टर बना रहे the......aur खुद शक्ति के नाम पर क़त्ल कर रहे थे

इसे ये भी नहीं पता

इसे पता है तो बस........... बेटी की शक्ल और बेटी के देवर के नाम का फायदा उठाकर अपने दुश्मनों से बदला लेना.......... बेटी और उसके देवर को दुश्मनों और पुलिस के आगे चारा बना देना....

जैसे इसे चारा बनाकर इसके भाई ने फायदा uthaya............apne दुश्मनों को ख़त्म करने में

डॉ साहब अब तक की अपने कहानी में बीवियां छुड़वाई

लकड़ी और लुंड के जूस का एनर्जी ड्रिंक पीकर बहनें भी छोड़ ली

अब क्या शक्ति के चमत्कार के पाखंड से इस भाभी की माँ छुड़वा के ...........

..............................कहानी की बिलकुल माँ छोड़ के hi मानोगे


:बंघेड: :बंघेड: :बंघेड: :बंघेड: :बंघेड: :बंघेड: :बंघेड: :बंघेड: :बंघेड:

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वाह डॉ साहब बहुत खूब,,,,,, :क्लाप्स:

जीवा ने तो दया के साथ मिल कर किस्सा hi अलग कर दिया. कोमल को ऐन वक़्त पर असलियत पता चल गयी और उसको समझ भी आ गया की दया शंकर के दिल में उसके लिए कोई प्यार नहीं था बल्कि वो तो जीवा के साथ मिल कर उसे छल रहा था. खैर ये तो अलग किस्सा रहा मगर अब ये क्या घोल दाल दिया आपने पुस्तक वाला.??? :हम्म:

क्या ऐसा सिर्फ हमें लग रहा है की कहानी कही और जा रही है या फिर आप सच मच हम सबको घनचक्कर बनाने पर तुले हुए हैं,,,,, :डेड:

खैर देखते हैं आगे क्या होता है,,,, :वेटिंग:
 
जैसा की भाई ने मुझे सुग्गेस्टिव दिया था की डॉ साहब की स्टोरी बीवी के कारनामे पढू. मगर सच तो ये है की इस स्टोरी को पढ़ कर hi मुझे ऐसा प्रतीत होने लगा है की मेरी शराफत और मासूमियत तेल लेने जाने वाली है. :हहै:

ये डॉ साहब से मेरा लगाव hi था की मैंने उनकी इस स्टोरी को पुरे दिल से padha..bhale hi इसका असर ये हुआ हो की मेरी शराफत और मासूमियत पर संकट के बादल मद्र पड़े. मगर बीवी के कारनामे या दूसरी स्टोरी पढ़ने का कास्ट नहीं करुगा. मैं ये मानता हु की डॉ साहब की लेखनी कमाल hi नहीं बल्कि बहुत hi ज़्यादा कमाल की है किन्तु जैसा की आपने कहा की कुछ ऐसा लिखिए जो रीयलिस्टिक लगे. मुझे पूरी उम्मीद है की वो ऐसा कुछ बहुत hi आसानी से लिखने की काबिलियत रखते हैं. मुझे इस स्टोरी के बाद उनकी ऐसी स्टोरी का इंतज़ार रहेगा,,,,,,, :अप्प्रोवे:

खैर हसी मज़ाक अपनी जगह है. डॉ साहब से निवेदन है की मेरी बातो को अन्यथा न ले. मेरे स्वभाव के बारे में तो वो जानते hi हैं,,,,, :डी
 
:नाना:

भाई और भाई ने इतना बेहतर तरीके से पहले hi उनकी स्टोरीज के बारे में बता दिया है की पढ़ने की ज़रूरत hi नहीं है. अब इतना तो समझदार मैं हु hi की मजमून को बिना पढ़े hi भांफ जाओ और फिर सबसे पहले मैं अपनी शराफत और मासूमियत के बारे में hi सोचु,,,,,, :lol:
 
:सुपर्ब: :गुड: अमेजिंग अपडेट है डॉ साहब,

बेहद hi शानदार और लाजवाब अपडेट है भाई,

ये तो जीवा ने बहोत hi बड़ा झटका दे दिया है कोमल उसकी बहन नहीं है,

और ये सब मिलकर उसका उसे कर रहे थे,

लेकिन अब तो कोमल खून की प्यासी हो गयी है,

और उसे उसका सच्चा प्यार भी मिल गया है,

भुवन ने जिस निर्भीकता से उसके गुस्से को शांत किया है वैसा एक सच्चा प्रेमी hi कर सकता है,

और कोमल को तो जैसे अब किसी से कोई फर्क पड़ता hi नहीं है इसलिए वो तिवारी के सामने hi भुवन की गॉड में नंगी बैठी हुई थी,

अब देखते हैं की ये शक्ति प्रथा क्या होता है,

वेटिंग फॉर नेक्स्ट अपडेट
 
ये आपकी गलत फहमी है की जुटे चप्पल खाने पड़ेगे.

ये कहानी पर अपनी अपनी अभिव्यक्ति होती है, और कहा भी तो उसको जाता है, जिसे अपना समझा जाता है और प्यार से दिया जाता है.

प्यार से दी हुई किसी भी चीज़ को, प्यार से ले लिया जाता है. आपके रिव्यु से लगता है की आप इस कहानी का फैला रायता समेटने में सक्षम है.

आगे जैसा आप समझे.

सॉरी लेहकक महोदय, बुरा लगा हो तो.
 
वैसे कामदेव भइया आपने तो डॉ. साब की डिग्री हे फाड़ दी है .. ऐसे तो बेचारे सड़क पर आ जायेंगे .. किसी का इतनी बुरी तरह भी चीयर हरण नहीं करना चाहिए .. मोदी जी तो सबसे हाथ जोड़ कर आग्रह कर रहे है की डाक्टरों का sam-maan करो और आप हो की डॉ. साब की पतलून हे उतर दी .. आप भी बिलकुल दुशाशन बने हुए हो .. कही ऐसा न हो की द्रौपदी की तरह अपने डॉ. साब अपने खेश में आपका लहू लगाने की जिद्द कर बैठे .. कभी - कभी तो मुज़हे अपने लिए भी डर लगता है .. की कही किसी दिन ज्यादा कीलसाने पर डॉ. साब अपने सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट्स ले कर मेरा हे ऑपरेशन न करने बैठ जाए ... :ः:
 
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