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चुनाव के एक दिन पहले
दया संकर मुझसे और भुवन दोनों से hi ठीक से बात नहीं कर रहा था , ऐसा नहीं था की वो हमें इग्नोर कर रहा था, नहीं वो बस जैसे अपने इमोशंस को छुपा रहा हो ..
अपने को जबरदस्ती बिजी करने की या दिखने की कोशिस कर रहा था लेकिन काम में उसका दिल भी नहीं लग रहा था ..
हमने उससे बात करने की और बात को क्लियर करने की भी कोशिस की लेकिन उसने बात को ताल दिया ..
हमने सोच लिया था की चुनाव के बाद hi इस बारे में बात करेंगे ..
इधर चुनाव की गहमा गहमी भी अपने चरम में थी ,मेरे और दया संकर के अलावा हमारी पार्टी के सभी कैंडिडेट अंडरग्राउंड कर दिए गए थे ..
तभी हमें पता चला की खुद मला उससे मिलने आया था ..
दोनों ने के कमरे में अकेले में बात की , ऐसे भी दया संकर टेंशन में था लेकिन मला से मिलने के बाद वो और भी बेचैन दिख रहा था,
“क्या हुआ क्या बोलै उसने “
सभी के मन में एक hi प्रश्न था
“उसने मुझे एक ऑफर दिया है ..”
“कैसा ऑफर ??”
“यही की चुनाव हार जाऊ ..”
“क्या ??”
सभी स्वाभाविक रूप से चौक गए
“और बदले में उसने तुम्हे क्या देनी की बात कही है “
भुवन मनो गुस्से से आग बबूला हो रहा था
“उसकी पार्टी के छात्र संघ के अध्यक्ष की पोस्ट “
तिवारी ने बड़े hi शांति के साथ कहा था ..
सभी की आंखे तिवारी पर hi लगी हुई थी , उसने एक बार मुझे घुरा उसकी आंखे ऐसी थी जैसे वो मुझमे गहराई से झांक रही हो ….
“हम सभी ने इसके लिए बहुत म्हणत की है दया , ये फैसला सिर्फ तुम्हारा नहीं हो सकता .. “
भुवन ने फिर से जोरो से कहा
“है और हम ये चुनाव जित कर रहेंगे .. ऐसे भी मैं जीवन में सभी मोर्चो में एक साथ तो नहीं हार सकता , कही न कही तो अब जितना hi है “
ये कहते हुए उसने मेरे आँखों में देखा था , मैं समझ सकती थी की वो क्या बोलना चाहता है …
शाम हो चली थी और मला तक भी ये बात जा चुकी थी की तिवारी इलेक्शन से नहीं हैट रहा था और उसने अपनी तरफ से धमकिया भी भिजवा दी .. ये सब तो चलता hi रहता था ..
शाम झमाझम बारिश हो होने लगी थी ……
“दया मुझे हॉस्टल तक छोड़ आओ “
उसने मुझे अजीब निगाहो से घुरा
“भुवन को ले जाओ , या किसी को भी ले जाओ पास hi तो है “
“नहीं तुम hi चलोगे “
“देख नहीं रही हो कल इलेक्शन है और इतना काम है “
वो कुछ और भी बोलने वाला था की मैंने उसका हाथ पकड़कर उसे उठा लिया था ..वो बड़े hi असमंजस से मुझे देख रहा था लेकिन मैं जैसे उसे लगभग गहरीतते हुए भहर ले गयी ..
“ये क्या बत्तमीजी है “
वो कुछ बोलता उससे पहले मैंने उसे एक दीवाल से सत्ता दिया , ये बॉय हॉस्टल का एक कोना था जंहा अभी अँधेरा हो गया था बारिश के कारण हमारे शरीर भी भीग गए थे ..
दूर जल रहे एक स्ट्रीट लाइट से छानकर आने वाली रोशनी में उसके चेहरे में उभरते हुए भावो को मैं साफ साफ देख सकती थी , उसके माथे पर पसीना था शायद मेरे माथे पर भी होगा ..
वो कुछ समझने की कोशिस कर रहा था ..
“तुम ये क्या कर रही हो कोमल ?”
“मैं बस तुम्हे ये बताना चाहती हु की जो तुमने कल देखा वो सही था लेकिन जो तुमने समझा वो गलत था “
उसके चेहरे में बड़े hi निर्जीव भाव आये , जैसे उसे अब कोई मतलब hi नहीं रह गया हो /..
“मुझे सफाई क्यों दे रही हो कोमल , ये तुम्हारी जिंदगी है और तुम जिसके साथ भी चाहो जी सकती हो ..”
“मैं सफाई क्यों दे रही हु ???”
मैंने उसकी आँखों में देख कर कहा था ,
“भुवन मेरा बेस्ट फ्रेंड है दया , क्या मैं अपने दोस्त के बहो में अपना सर भी नहीं रख सकती .. तुम्हें बस ये hi देखा था लेकिन तुमने न जाने क्या समझ लिया “
वो थोड़ी देर तक मेरे चेहरे को देखता रहा
“ये सब मुझे क्यों बता रही हो , मुझे बहुत सरे काम है तुम जाओ यंहा से ..”
उसने मुझे खुद से थोड़ा दूर हटाने की कोशिस की और तभी मैंने जैसे एक फैसला कर लिया था ..
मैंने उसे पूरी ताकत से दिवार में सत्ता दिया , शायद उसका सर भी दिवार से टकरा गया था ..
“आउच ये क्या कर रही हो “
वो थोड़ा भौखलाया लेकिन मैंने उसकी एक भी न सुनी मैंने बस उसके गलो को अपने हाथो से दबा लिया था और उसके होठो पर अपने होठो को भर दिया , उसकी छटपटाहट जैसे एक hi पल में बिलकुल hi शांत हो गयी हो ….
मैं उसके होठो को बस चूसे जा रही थी , मेरी आंखे बंद थी वही हाल शायद उसका भी था , उसके हाथ अपने hi आप मेरी कमर पर आ गए थे वही मैं उसके गले में अपने हाथ फंसा कर कड़ी थी ..
तभी मुझे अहसास हुआ की कोई हमें देख रहा है ..
जब किश टूटी तो मैंने उस और देखा , वो भुवन था ..
दूर खड़े भुवन के चेहरे पर आयी उदासी को मैं वही से खड़े हुए भी महसूस कर सकती थी , तिवारी ने भी उस और देखा , मैं उसके और जाने को मुड़ी hi थी की भुवन खुद hi मुद गया और मुझसे दूर जाने लगा ..
“भुवन … “ मैं हलके से चिल्लाई , मैं जानती थी की अभी वो दुखी है लेकिन मैं ये भी जानती थी की वो मुझे समझ सकता है , वो जनता है की प्यार जबरदस्ती से नहीं किया जाता ..
प्यार बस हो जाता है या फिर नहीं होता , लेकिन अभी … अभी वो दुखी था बहुत दुखी था और अभी शायद उसे मेरी जरुरत थी ..
या फिर बस अकेले hi रहने की जरुरत थी ???
तभी मेरी नज़ारे और कही पड़ी और मैं फिर से चिल्ला पड़ी
“भुवन ..”
इस बार मैंने अपनी पूरी ताकत से चिल्लाया था … लेकिन भुवन ने मनो न सुनने की कसम hi खा ली हो ..
उसके सामने एक जीप आकर कड़ी हो गयी थी , उसमे मला का बीटा और उसके दोस्त थे सभी के हाथो में अलग अलग तरह के हथियार थे , एक लड़के ने बंदूख की नोक सीधे भुवन के ऊपर टिका दी थी लेकिन भुवन था की अपनी hi दुनिया में खोया हुआ उनके hi और चले जा रहा था ..
“भुवन रुको …नहीं ..”
इस बार मेरे साथ साथ तिवारी भी चिल्ला उठा लेकिन तभी
‘धाय…. ‘
गोली की एक आवाज से पूरा माहौल गूंज गया ..
और मैं जिस अनहोनी के बारे में सोच रही थी जाइए वही घाट गयी .. गोली सीधे भुवन के कंधे पर जा टकराई …
उसे मनो अचानक hi होश आया हो , इससे पहले की वो कुछ समझ पाटा गाड़ी और पास आती गयी और एक लड़के ने तलवार लहराई और साइड भुवन के छाती पर दे मारा .. भुवन उस वार से मुद गया था मैं उसके hi और भाग रही थी उसका चेहरा मेरे सामने आ गया था वो गिर रहा था जमीं में गिर रहा था , मैं उसके और दौड़ रही थी ..
“नहीं भुवन ..”
लेकिन मनो सुनने वाला कोई नहीं था , गोलियों की आवाज से कुछ लड़के बहार आ गए थे लेकिन अभी इन सबको हुए कुछ hi सेकण्ड्स तो हुए थे अभी तक कोई भी पूरी तरह से समझ नहीं पाया था की वो क्या करे ..
वो लोग तलवार मारकर तिवारी को चिढ़ाने के लिए वही खड़े हो गए थे , मैं भुवन तक पहुंच चुकी थी ..
मेरे बचपन का दोस्त मेरे गॉड में लहू से नहाया हुआ पड़ा था , कंधे में एक गोली लगी थी और छाती में तलवार वार किया गया था..
मैं उसके चेहरे को देखे जा रही थी , उसे जगाने की कोशिस कर रही थी .. तभी ..
“मादरचोदो बोलै था की मुझसे मत टकराओ ..अब तू भी मर “
ये मला का लड़का था जिसने अब बंदूख की नोक दया के तरफ कर दी थी ..
“कमीने ..” मैं चिल्लाई जैसे मेरे अंदर से कुछ फूट गया हो …
मैं कड़ी हो चुकी थी जो लोग अभी तक तिवारी की और देख रहे थे वो अब मेरी और देख रहे थे ..
“नहीं कोमल ..” दया चिल्लाया था लेकिन अभी तो मेरे सर पर खून सवार था और मेरी नजरो में अभी भी भुवन का वो चेहरा झूल रहा था .. मैंने पास hi पड़ा हुआ रोड उठा लिया था ..
वो लोग पास में hi थे और कोई कुछ समझ पता उससे पहले hi मैं उन तक पहुंच गयी थी , उसने अपनी पिस्तौल की नोक मेरे और मोदी hi थी लेकिन उससे पहले ..
“आआह्ह्ह्हह” उसने मुँह से एक चीख निकली थी , मैंने सरिया सीधे उसके चेहरे में घुसा दिया था ………
उसके दोस्त तुरंत hi एक्टिव हो गए थे , उन्होंने मुझपर तलवारो से वार किया लेकिन मैंने झट से उसके hi तलवार को उसके hi पेट में घुसा दिया , ईशर मेरे हाथो में वो पिस्तौल आ गयी जो अभी अभी सरिया घुसाने से मला के बेटे के हाथो से छूट गयी थी , और जैसे मैंने अपना आप खो दिया हो .. मैंने जीवन में पहली बार बंदूख चलाई थी ..
‘धाय धाय धाय धाय धाय …’5 गोलिया लगातार
अब तक पूरा हॉस्टल hi बहहर , तिवारी स्तब्ध सा किसी मूर्ति की तरह खड़ा हुआ बस मुझे hi देख रहता था , गोलियों के शोर के बाद माहौल में बस सन्नाटा था ………..
गोलियों ने 3 सरो के चिथड़े उदा दिए थे , जिसमे से एक मला का बीटा भी था , अभी तक उसके चेहरे पर वो सरिया घुसा हुआ था लेकिन उसकी जीवन लीला अब समाप्त हो चुकी थी , जिसके पेट में तलवार घुसा था वो अभी तक छटपटा रहा था , खून से पूरी जीप hi नाहा चुकी थी ,और 2 लोग कांपते हुए कोने में का दुबके थे जैसे उन्होंने काल को hi तांडव करते देख लिया हो …………
चुनाव के एक दिन पहले
दया संकर मुझसे और भुवन दोनों से hi ठीक से बात नहीं कर रहा था , ऐसा नहीं था की वो हमें इग्नोर कर रहा था, नहीं वो बस जैसे अपने इमोशंस को छुपा रहा हो ..
अपने को जबरदस्ती बिजी करने की या दिखने की कोशिस कर रहा था लेकिन काम में उसका दिल भी नहीं लग रहा था ..
हमने उससे बात करने की और बात को क्लियर करने की भी कोशिस की लेकिन उसने बात को ताल दिया ..
हमने सोच लिया था की चुनाव के बाद hi इस बारे में बात करेंगे ..
इधर चुनाव की गहमा गहमी भी अपने चरम में थी ,मेरे और दया संकर के अलावा हमारी पार्टी के सभी कैंडिडेट अंडरग्राउंड कर दिए गए थे ..
तभी हमें पता चला की खुद मला उससे मिलने आया था ..
दोनों ने के कमरे में अकेले में बात की , ऐसे भी दया संकर टेंशन में था लेकिन मला से मिलने के बाद वो और भी बेचैन दिख रहा था,
“क्या हुआ क्या बोलै उसने “
सभी के मन में एक hi प्रश्न था
“उसने मुझे एक ऑफर दिया है ..”
“कैसा ऑफर ??”
“यही की चुनाव हार जाऊ ..”
“क्या ??”
सभी स्वाभाविक रूप से चौक गए
“और बदले में उसने तुम्हे क्या देनी की बात कही है “
भुवन मनो गुस्से से आग बबूला हो रहा था
“उसकी पार्टी के छात्र संघ के अध्यक्ष की पोस्ट “
तिवारी ने बड़े hi शांति के साथ कहा था ..
सभी की आंखे तिवारी पर hi लगी हुई थी , उसने एक बार मुझे घुरा उसकी आंखे ऐसी थी जैसे वो मुझमे गहराई से झांक रही हो ….
“हम सभी ने इसके लिए बहुत म्हणत की है दया , ये फैसला सिर्फ तुम्हारा नहीं हो सकता .. “
भुवन ने फिर से जोरो से कहा
“है और हम ये चुनाव जित कर रहेंगे .. ऐसे भी मैं जीवन में सभी मोर्चो में एक साथ तो नहीं हार सकता , कही न कही तो अब जितना hi है “
ये कहते हुए उसने मेरे आँखों में देखा था , मैं समझ सकती थी की वो क्या बोलना चाहता है …
शाम हो चली थी और मला तक भी ये बात जा चुकी थी की तिवारी इलेक्शन से नहीं हैट रहा था और उसने अपनी तरफ से धमकिया भी भिजवा दी .. ये सब तो चलता hi रहता था ..
शाम झमाझम बारिश हो होने लगी थी ……
“दया मुझे हॉस्टल तक छोड़ आओ “
उसने मुझे अजीब निगाहो से घुरा
“भुवन को ले जाओ , या किसी को भी ले जाओ पास hi तो है “
“नहीं तुम hi चलोगे “
“देख नहीं रही हो कल इलेक्शन है और इतना काम है “
वो कुछ और भी बोलने वाला था की मैंने उसका हाथ पकड़कर उसे उठा लिया था ..वो बड़े hi असमंजस से मुझे देख रहा था लेकिन मैं जैसे उसे लगभग गहरीतते हुए भहर ले गयी ..
“ये क्या बत्तमीजी है “
वो कुछ बोलता उससे पहले मैंने उसे एक दीवाल से सत्ता दिया , ये बॉय हॉस्टल का एक कोना था जंहा अभी अँधेरा हो गया था बारिश के कारण हमारे शरीर भी भीग गए थे ..
दूर जल रहे एक स्ट्रीट लाइट से छानकर आने वाली रोशनी में उसके चेहरे में उभरते हुए भावो को मैं साफ साफ देख सकती थी , उसके माथे पर पसीना था शायद मेरे माथे पर भी होगा ..
वो कुछ समझने की कोशिस कर रहा था ..
“तुम ये क्या कर रही हो कोमल ?”
“मैं बस तुम्हे ये बताना चाहती हु की जो तुमने कल देखा वो सही था लेकिन जो तुमने समझा वो गलत था “
उसके चेहरे में बड़े hi निर्जीव भाव आये , जैसे उसे अब कोई मतलब hi नहीं रह गया हो /..
“मुझे सफाई क्यों दे रही हो कोमल , ये तुम्हारी जिंदगी है और तुम जिसके साथ भी चाहो जी सकती हो ..”
“मैं सफाई क्यों दे रही हु ???”
मैंने उसकी आँखों में देख कर कहा था ,
“भुवन मेरा बेस्ट फ्रेंड है दया , क्या मैं अपने दोस्त के बहो में अपना सर भी नहीं रख सकती .. तुम्हें बस ये hi देखा था लेकिन तुमने न जाने क्या समझ लिया “
वो थोड़ी देर तक मेरे चेहरे को देखता रहा
“ये सब मुझे क्यों बता रही हो , मुझे बहुत सरे काम है तुम जाओ यंहा से ..”
उसने मुझे खुद से थोड़ा दूर हटाने की कोशिस की और तभी मैंने जैसे एक फैसला कर लिया था ..
मैंने उसे पूरी ताकत से दिवार में सत्ता दिया , शायद उसका सर भी दिवार से टकरा गया था ..
“आउच ये क्या कर रही हो “
वो थोड़ा भौखलाया लेकिन मैंने उसकी एक भी न सुनी मैंने बस उसके गलो को अपने हाथो से दबा लिया था और उसके होठो पर अपने होठो को भर दिया , उसकी छटपटाहट जैसे एक hi पल में बिलकुल hi शांत हो गयी हो ….
मैं उसके होठो को बस चूसे जा रही थी , मेरी आंखे बंद थी वही हाल शायद उसका भी था , उसके हाथ अपने hi आप मेरी कमर पर आ गए थे वही मैं उसके गले में अपने हाथ फंसा कर कड़ी थी ..
तभी मुझे अहसास हुआ की कोई हमें देख रहा है ..
जब किश टूटी तो मैंने उस और देखा , वो भुवन था ..
दूर खड़े भुवन के चेहरे पर आयी उदासी को मैं वही से खड़े हुए भी महसूस कर सकती थी , तिवारी ने भी उस और देखा , मैं उसके और जाने को मुड़ी hi थी की भुवन खुद hi मुद गया और मुझसे दूर जाने लगा ..
“भुवन … “ मैं हलके से चिल्लाई , मैं जानती थी की अभी वो दुखी है लेकिन मैं ये भी जानती थी की वो मुझे समझ सकता है , वो जनता है की प्यार जबरदस्ती से नहीं किया जाता ..
प्यार बस हो जाता है या फिर नहीं होता , लेकिन अभी … अभी वो दुखी था बहुत दुखी था और अभी शायद उसे मेरी जरुरत थी ..
या फिर बस अकेले hi रहने की जरुरत थी ???
तभी मेरी नज़ारे और कही पड़ी और मैं फिर से चिल्ला पड़ी
“भुवन ..”
इस बार मैंने अपनी पूरी ताकत से चिल्लाया था … लेकिन भुवन ने मनो न सुनने की कसम hi खा ली हो ..
उसके सामने एक जीप आकर कड़ी हो गयी थी , उसमे मला का बीटा और उसके दोस्त थे सभी के हाथो में अलग अलग तरह के हथियार थे , एक लड़के ने बंदूख की नोक सीधे भुवन के ऊपर टिका दी थी लेकिन भुवन था की अपनी hi दुनिया में खोया हुआ उनके hi और चले जा रहा था ..
“भुवन रुको …नहीं ..”
इस बार मेरे साथ साथ तिवारी भी चिल्ला उठा लेकिन तभी
‘धाय…. ‘
गोली की एक आवाज से पूरा माहौल गूंज गया ..
और मैं जिस अनहोनी के बारे में सोच रही थी जाइए वही घाट गयी .. गोली सीधे भुवन के कंधे पर जा टकराई …
उसे मनो अचानक hi होश आया हो , इससे पहले की वो कुछ समझ पाटा गाड़ी और पास आती गयी और एक लड़के ने तलवार लहराई और साइड भुवन के छाती पर दे मारा .. भुवन उस वार से मुद गया था मैं उसके hi और भाग रही थी उसका चेहरा मेरे सामने आ गया था वो गिर रहा था जमीं में गिर रहा था , मैं उसके और दौड़ रही थी ..
“नहीं भुवन ..”
लेकिन मनो सुनने वाला कोई नहीं था , गोलियों की आवाज से कुछ लड़के बहार आ गए थे लेकिन अभी इन सबको हुए कुछ hi सेकण्ड्स तो हुए थे अभी तक कोई भी पूरी तरह से समझ नहीं पाया था की वो क्या करे ..
वो लोग तलवार मारकर तिवारी को चिढ़ाने के लिए वही खड़े हो गए थे , मैं भुवन तक पहुंच चुकी थी ..
मेरे बचपन का दोस्त मेरे गॉड में लहू से नहाया हुआ पड़ा था , कंधे में एक गोली लगी थी और छाती में तलवार वार किया गया था..
मैं उसके चेहरे को देखे जा रही थी , उसे जगाने की कोशिस कर रही थी .. तभी ..
“मादरचोदो बोलै था की मुझसे मत टकराओ ..अब तू भी मर “
ये मला का लड़का था जिसने अब बंदूख की नोक दया के तरफ कर दी थी ..
“कमीने ..” मैं चिल्लाई जैसे मेरे अंदर से कुछ फूट गया हो …
मैं कड़ी हो चुकी थी जो लोग अभी तक तिवारी की और देख रहे थे वो अब मेरी और देख रहे थे ..
“नहीं कोमल ..” दया चिल्लाया था लेकिन अभी तो मेरे सर पर खून सवार था और मेरी नजरो में अभी भी भुवन का वो चेहरा झूल रहा था .. मैंने पास hi पड़ा हुआ रोड उठा लिया था ..
वो लोग पास में hi थे और कोई कुछ समझ पता उससे पहले hi मैं उन तक पहुंच गयी थी , उसने अपनी पिस्तौल की नोक मेरे और मोदी hi थी लेकिन उससे पहले ..
“आआह्ह्ह्हह” उसने मुँह से एक चीख निकली थी , मैंने सरिया सीधे उसके चेहरे में घुसा दिया था ………
उसके दोस्त तुरंत hi एक्टिव हो गए थे , उन्होंने मुझपर तलवारो से वार किया लेकिन मैंने झट से उसके hi तलवार को उसके hi पेट में घुसा दिया , ईशर मेरे हाथो में वो पिस्तौल आ गयी जो अभी अभी सरिया घुसाने से मला के बेटे के हाथो से छूट गयी थी , और जैसे मैंने अपना आप खो दिया हो .. मैंने जीवन में पहली बार बंदूख चलाई थी ..
‘धाय धाय धाय धाय धाय …’5 गोलिया लगातार
अब तक पूरा हॉस्टल hi बहहर , तिवारी स्तब्ध सा किसी मूर्ति की तरह खड़ा हुआ बस मुझे hi देख रहता था , गोलियों के शोर के बाद माहौल में बस सन्नाटा था ………..
गोलियों ने 3 सरो के चिथड़े उदा दिए थे , जिसमे से एक मला का बीटा भी था , अभी तक उसके चेहरे पर वो सरिया घुसा हुआ था लेकिन उसकी जीवन लीला अब समाप्त हो चुकी थी , जिसके पेट में तलवार घुसा था वो अभी तक छटपटा रहा था , खून से पूरी जीप hi नाहा चुकी थी ,और 2 लोग कांपते हुए कोने में का दुबके थे जैसे उन्होंने काल को hi तांडव करते देख लिया हो …………