अपडेट 47
चुनाव अपने पुरे जोरो पर था, मुझे भी एक पोस्ट के लिए खड़ा करवाया गया था सच पूछो तो सामाजिक काम करने का मजा भी अलग hi होता है , मनो एक नशा सा हो …
मैं रोज hi 100 से जयदा लड़कियों से मिल रही थी बहुतो की समस्या सुन रही थी और उन्हें भरोषा दिला रही थी , अधिकतर लड़कियों की तकलीफ यही थी की गुंडे उन्हें परेशां करते है..
मैंने साफ कह दिया था की अगर मैं जीती और दया संकर तिवारी प्रेजिडेंट बना तो पहला एक्शन इन्ही पर होगा , लड़किया मेरी बात मान भी रही थी क्योकि उन्हें पता था की मैं भी एक गैंगस्टर की बहन हु और छोटे मोठे गुंडों की तो बस मुझे देख कर hi फैट जाती थी ..
इधर दूसरी पार्टी भी पूरा डैम लगा रही थी , महिला कैंडिडेट का ना होने का गम अब उन्हें सत्ता रहा था , क्योकि वो लड़को को फुल दारू पार्टी देते थे और वही लड़के दूसरे दिन पार्टी बदलते हुए देखे जाते थे …
दूसरी तरफ से खुद मला तक अपने बेटे को जितने में लगा हुआ था, ये ना सिर्फ उसका बल्कि करीम की इज्जत का भी सवाल था ..
कभी भी मार पिट शुरू हो जाती थी , मला ने अपना पोलिटिकल रुतबा दिखा कर जीवा के बहुत से लोगो को और दया के बहुत से दोस्तों को भी अंदर करवा दिया था लेकिन फिर खुद जीवा पुलिस स्टेशन जाकर उन्हें छुड़वाता ,,
जैसे जैसे चुनाव पास आ रहा था राजनीती का असली रंग दिखाना शुरू हो रहा था , वो गन्दी से और भी गन्दी होते जा रही थी , कैंडिडेट्स को धमकाने से लेकर किडनेपिंग तक सब चालू था, दया संकर , भुवन और सम्पत हर समय कॉलेज और होस्टल्स में hi पड़े रहते थे ,मेरी सुरक्षा का इंतजाम ऐसे किया गया था जैसे मैं कोई महारानी हु :lol1:
हमें टूटता हुआ न देखकर करीम और मला दोनों hi भड़के हुए थे ,खतरा हर समय बाद रहा था, इलेक्शन में बस दो hi दिन बचा था की……….
“कोमल तुम आज यही रुक जाओ फिर गांव जाओगी और फिर कल वापस आओगी , ऐसे भी काम बहुत है और भुवन भी यही रुकेगा “
रत होने वाली थी और दया संकर मुझे समझा रहा था, अब हम दोनों के बिच अच्छी दोस्ती सी हो गयी थी , ऐसे आकर्षण तो दोनों के मन में था लेकिन काम की अधिकता के कारण कभी हमारी भावनाये बहार नहीं आ प् रही थी ,वही भुवन भी अब कॉलेज में अच्छे से राम गया था उसे भी मजा आ रह था ..
“नहीं यार इतने लड़को के बिच कहा सोऊंगी “
मैंने उसे आंखे दिखते हुआ कहा
“अरे पागल तेरे लिए गर्ल्स हॉस्टल में एक कमरा खली करवा देते है “
“नहीं यार जीवा भाई भी अकेला होगा , क्या भुवन सच में रुक रहा है ??”
तिवारी ने भुवन को देखा ..
और हाथ हिलाया , भुवन भी पास आ चूका था ..
“नहीं मतलब नहीं देख रही है की रत होने वाली है मैं तुझे नहीं जाने दूंगा “
भुवन ने सुनते hi प्रतिकार किया था
“अरे यार कार से जा रही हु और ये लड़के भी तो जा रहे है साथ में “
भुवन ने एक बार उन लड़को को देखा मुझे गांव छोड़ने के लिए तिवारी ने 2 लड़को को नियुक्त किया था
“उउउ नहीं , चल मैं चलता हु साथ “
भुवन की बात सुनकर दया संकर का मुँह थोड़ा उतर गया
“यार भुवन बहुत काम है ..”
“कोमल से जयदा जरुरी क्या काम है “
भुवन की बातो का तो तिवारी के पास कोई भी जवाब नहीं था , भुवन की बात सुनकर मेरे भी होठो में मुस्कान आ गयी थी , ऐसे hi नहीं वो मेरा बेस्ट फ्रेंड था , मेरे भाइयो से ज्यादा ख्याल तो ये मेरा रखता था ..
“यार कोमल रुक जा न बहुत काम है ऐसे भी वंहा जा कर क्या करेगी “ तिवारी ने एक आखरी बार जैसे मुझे रोका …
मैंने भुवन की और देखा
“तेरी मर्जी है मैं कुछ नहीं बोलूंगा , ऐसे सम्पत भी रत को यही आ जायेगा, और जाना है तो बता मैं साथ चलूनागा “
भुवन ने पूरी बात मेरे ऊपर दाल दी थी
“सच पूछो तो इसीलिए नहीं रुकना चाहती , सम्पत भी आएगा फिर तुम लोग तो पि कर हो जाओगे टुन्न और फिर करोगी गली गलौच और मैं पद जाउंगी अकेली “
मैंने मुँह बनाते हुए कहा
“तो गर्ल्स हॉस्टल में रुक जा न “ तिवारी फिर बोल उठा
“वंहा अकेले क्या करुँगी , बोर हो जाउंगी “
“अच्छा ऐसा कर की तू गर्ल्स हॉस्टल में hi रुक जा , मैं काम होने के बाद आ जाऊंगा , बियर लेके साथ बैठकर बियर पिएंगे “
भुवन का प्लान तो मस्त था लेकिन इससे दया के चेहरे पर चिंता के भाव साफ दिखाई दिए ऐसा लगा जैसे इस बात से उसका दिल जल रहा हो , सच बताऊ तो मुझे ये देखने में बहुत मजा आया और मैंने झट से भुवन का ऑफर एक्सेप्ट कर लिया ..
“ठीक है फिर मैं इंतजाम करवा देता हु , और रत में मैं भी वही आ जाऊंगा “
“नहीं तुम मत आना तुम्हे तो बहुत काम होगा न ..”
मैंने दया को और भी जलाते हुए कहा था ,
रत के करीब 12 बज रहे थे जब भुवन वंहा आया , उसके साथ कुछ लड़के और थे , वो बियर की पूरी करीब 10 पति वंहा रखकर चले गए …
“अरे ये सब क्या है “ मैं अपने कमरे में अकेले थी असल में ये मेरा कमरा नहीं था लेकिन मेरे लिए खली करवाया गया था ..
“अरे इसे सुबह हॉस्टल के फ्रीजर में रखवाना है ताकि कल शाम को यंहा की लड़कियों को बियर की पार्टी दिया जाये “
भुवन की बात सुनकर मेरा मुँह खुला का खुला रह गया
“पागल है क्या लड़किया ये पियेंगी …. किसी को पता चला न तो इनके माँ बाप इन्हे कॉलेज से खींचकर घर ले जायेंगे ..”
वो दौर था जब लड़किया जायदा पड़े नहीं करती थी , सिर्फ पढ़े लिखे घर की लड़किया hi कॉलेज जाया करती थी , उस समय लड़कियों का बियर या सिगरेट पीना बहुत बोल्ड कदम मन जाता था , मजेदार बात ये है की कही कही आज भी ऐसा hi मन जाता है …
“अरे फ़िक्र न कर सब पीती है “
हम दोनों hi हॉस्टल के छत पर बैठे तारो को देख रहे थे, आस्मां में टारे चमक रहे थे और हमारे हाथो में बियर की बोतल ..
“भुवन अगर मेरे जीवन में सबसे जयदा कोई अहमियत रखता है तो वो तू है “
मैं हलके नशे में आ चुकी थी और भुवन के लिए मेरा प्यार उमड़ने लगा था ..
भुवन मेरी बात सुनकर बस हलके से मुस्कुराया
“अच्छा और तिवारी “
“तिवारी क्या ??” मैं उसके बात से चौक गई थी
“जिस तरह से तू उसे देखती है तेरी आंखे तो कुछ और hi कहती है “
भुवन की बात सुनकर मैं थोड़ा घबरा गयी थी , मैं जानती थी की वो मुझे प्यार करता है लेकिन कभी कहता नहीं , उसके आवाज की उदासी भी इसका सुबूत थी ..
“देख भुवन अभी मैं..”
“कोमल मैं तुझसे प्यार करता हु “ भुवन ने एक hi साँस में कह दिया था .. मैं स्तब्ध hi उसे देख रही थी मुझे समझ hi नहीं आ रहा था की मैं उसका क्या जवाब दू, वो मेरा बेस्ट फ्रेंड था , बचपन से उसने मेरे खुद के भाइयो से जयदा मेरी हिफाजत की थी, मैं उसका दिल नहीं दुखाना चाहती थी ..
“मैं जनता हु कोमल की तुम भी ये जानती हो , और ये भी जनता हु की तुम मुझे प्यार नहीं करती … और मैं शायद ये कभी तुमसे न कहता लेकिन ……. “
मैंने उसके कंधे पर अपना हाथ रखा ..
“तू मेरे जीवन का एक बहुत hi अहम् हिस्सा है भुवन और हमेशा रहेंगे .. तू ऐसे दुखी न होना , मैं किसी की भी राहु लेकिन दोस्त मैं हमेशा तेरी hi रहूंगी ..”
भुवन के चेहरे में हलकी सी मुस्कुराहट आयी उसने मेरे गलो को थाम लिया और हलके से एक चुम्मन मेरे माथे में कर दिया ..
“दया संकर मुझे सही लड़का नहीं लगता कोमल, मैं जनता हु की तू उसे पसंद करती है लेकिन वो अलग hi तरह का कमीना है , अपने फायदे के लिए कुछ भी कर सकता है “
भुवन ने पहली बार दया संकर के बारे में मुझसे कोई बात की थी
“शायद है वो कमीना है लेकिन क्या मेरे लिए भी , मतलब मुझे तो लगता है की वो मुझसे प्यार करता है ..”
“हो सकता है लेकिन कोई भी फैसला बहुत hi सोच समझ कर लेना कोमल , मैं तुम्हे दुखी नहीं देख सकता “
भुवन की इस बात से मैं उसके साइन से लग गयी , अब ये शराब का नशा था की हमारे बिच का दोस्ताना की मैं अपना दिल खोल कर उससे प्यार जाताना चाहती थी ..वो अपनत्व जाताना चाहती थी जो एक दोस्त में होता है ..
वो भी मेरे बालो को सहला रहा था ,
“फ़िक्र मत करो तुम तो हो न मुझे हर मुसीबत से बचने वाले “
मैंने मुस्कुरा कर उसे देखा
“है मैं तो तुम्हारे साथ हमेशा hi खड़ा रहूँगा लेकिन … लेकिन कोमल मैं नहीं चाहता की तुम्हारा दिल टूटे क्योकि दिल टूटने पर कोई किसी के काम नहीं आता , वो दर्द उसे भी भोगना पड़ता है जिसका दिल टुटा हो ..”
उसकी बात भी सही थी लेकिन प्यार भी तो ऐसी चीज है की करने वाला भी करने के लिए छटपटाता रहता है , और जब हो जाए तो फिर उस बेचैनी में दर्द भरी आहे भरता है , जब अपने प्रेमी से मिलता है तो उसकी खुसी में खुस होता है और फिर बिछुड़ने पर उस दर्द से दुखी होता है..
अजीब सा मामला है प्यार का , लेकिन अभी मेरे लिए ऐसा नहीं था ,मेरे पास सोचने समझने के लिए समय था , मेरे साथ भुवन था जो मुझे सही सलाह दे सकता था ..
लेकिन दिक्कत ये थी की क्या मैं उसके सलाह को मानती ???
और यही दर भुवन के मन में भी था ………
इसी सोच में दुबे हुए मैं भुवन के बांहो के घेरे में दबी हुई थी की ..
“दया संकर ..”
भुवन ने ऐसे कहा जैसे उसने तिवारी को देखा हो , मैं उससे अलग हुई तो छत के निचे खड़ा हुआ दया संकर हमें दिखाई दिया वो हमें hi घर रहा था ..
रत के अंधियारे में न जाने उसने क्या देखा था लेकिन ये बात तो साफ थी की उसने हमें पहचान जरूर लिया था , और बस वही स्तब्ध सा खड़ा था ….
भुवन ने चिल्लाकर उसे बुलाया लेकिन वो बिना कुछ बोले hi वंहा से निकल गया …………
मैं और भुवन दोनों hi समझ गए थे की तिवारी ने हमारे बारे में क्या सोचा लिया है ……….