भाभी माँ
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कभी वो मुझे मेरी माँ से लगती थी तो कभी बहन का प्यार देती थी ,वो मेरी सबसे अच्छी दोस्त भी थी जिससे मैं दिल खोलकर अपनी बाटे कर सकता था ,माँ बाप के जाने के बाद वही तो थी जिसने मुझे सम्हाला था ,हर दर्द में साथ थी वो और हर ख़ुशी उससे hi शुरू होती थी ,जिस भाई से मैं इतना डरता था वो उसकी पत्नी थी , लेकिन मुझे अभी उनसे कोई भी दर नहीं लगता ,असल में तो उनके होते मैं ऐसा होता की मुझे कोई भी दर कभी छू भी नहीं सकता ,वो थी मेरी भाभी माँ …
माँ इसलिए क्योकि उन्होंने मुझे माँ वाला प्यार भी दिया था ,मैं अभी अभी तो अपनी जवानी की दहलीज में कदम रख रहा था जब मेरे एकलौते भाई ने अपने पसंद से और घर वालो के विरुद्ध जाकर शादी कर ली थी ,मेरे परिवार ने उन्हें अपने से अलग hi कर दिया था ,मेरी माँ का रो रो कर बुरा हाल कर दिया था, मुझे नहीं पता था की समाज के ये बंधन आखिर क्यों है लेकिन एक लड़की जिसने मेरे भाई को अपनाने के लिए अपने परिवार को छोड़ा था वो मेरे लिए बेहद खास hi थी …
उनकी शादी को एक साल हो चुके थे, मैं उस समय स्कूल में hi था कभी कभी स्कूल से छूटकर तो कभी स्कूल ना जाकर मैं उनके पास पहुंच जाता था, वो बड़े प्यार से मुझे अपने पास बिठाती दुनिया भर की बाटे करती और फिर आखिर में उनकी आंखे hi भर जाती ..
“सोनू काश मम्मी पापा भी मुझे अपना पते जैसे तूने मुझे अपना लिया “
मैं क्या कहता, मैं तो उनके हाथो से बने खाने के लिए वंहा चला जाता था और फिर खाने के बाद मिलने वाली मिठाई के लिए, मैं चुप hi रहता लेकिन जब वो रोने लगती तो उनकी पायरी आँखों में आया आंसू मुझे मेरा दुशमन hi लगता था
“अरे भाभी माँ आप भी क्यों मम्मी पापा की टेंशन ले रहे हो ,वो कुछ भी बोले आपका ये सोनू हमेशा आपके साथ है ..”
मैं बस इतना hi बोलता था और भाभी के चेहरे में ख़ुशी खिल सी जाती जैसे उन्हें कोई जन्नत मिल गई हो ,वो मुझ पर और भी प्यार लुटाती थी ,भाभी पास के hi गांव की थी, भाई के कॉलेज के पास एक छोटा सा दुकान चलती थी ,बेहद hi गरीब घर की थी पता नहीं कैसे लेकिन भाई का उनपर दिल आ गया ,जाट अलग थी तो भाई को भी शादी करने में परेशानी हुई ,भाभी एक गरीब परिवार की थी वही हम थे अपने गांव के पंडित ,दूर दूर तक हमारे परिवार के चर्चे थे ये मेरे बापू मुझे बोलै करते थे..
“तू कही अपने भाई जैसे जाट के बहार की लुगाई ना ले आना “
कभी कभी बोलते हुए उनकी आंखे पता नहीं कहा खो जाती थी
“अरे बापू भाभी बहुत hi अच्छी है आप लोग उन्हें क्यों इतनी नफरत से देखते हो “
मैं बोल उठता था ..
और फिर बापू का लेक्चर हो जाता था चालू, जाट पैट के कई कहानिया शुरू हो जाते थे ..
“मैं तो उस रैंड के हाथो से पानी तक ना पीयू “
बापू का इस तरह भाभी के लिए बोलना मुझे कभी सोभा नहीं देता
“बापू वो मेरी भाभी माँ है उन्हें ऐसा कुछ मत कहा करो “
“तेरी इतनी मजाल तू मुझसे जुबान लड़ता है वो भी उस रैंड के लिए ,तेरे भाई को तो खा गई है मादरचोद अब तुझे भी अपने बस में कर लिया है क्या उसने “
बापू की बात से मेरा दिल hi भर जाता, मुझमे समझ hi थी की आखिर मेरी प्यारी सी भाभी ने ऐसा क्या अपराध कर दिया है ,लेकिन मैं उनके लिए लड़ जाता था और बदले में मुझे मिलती थी जोरदार मार …
कभी बापू से तो कभी माँ से ..फिर मैं अपना चेहरा लटकाये हुए पहुंच जाता था अपनी पैरी भाभी के पास …
भाई तो मुझसे 10 साल का बड़ा था उससे कुछ बोलते मेरी हालत hi खास्ती हो जाती थी लेकिन भाभी मुझे समझती थी मेरी एक एक राग का उन्हें पता था ..
“क्या हुआ सोनू फिर से पापा ने तुझे मारा “
मैं दौड़ता हुआ जब गांव से दूर बने उनके घर में जाता वो मेरा चेहरा देख कर hi बता देती थी की मैं आज मार खा कर आया हु ..
“देखो ना पापा आपको रैंड बोल रहे थे ,मुझे अच्छा नहीं लगता अगर आपको कोई कुछ भी बोले “
पता नहीं मेरी मासूमियत थी या मेरा भोलापन लेकिन मुझे रैंड शब्द की असलियत उस समय नहीं पता थी मुझे बस इतना hi पता था की ये एक गाली है ..
वो बेचारी मेरी बात सुनकर थोड़ी उदास सी हो जाती ..
“तू क्यों उनसे बहस करता है, आखिर जनता है ना की उनसे बहस करने से मार खायेगा “
वो धीमी सी आवाज में बोलती थी
“तो क्या आपको वो गली देंगे तो मैं सुनूंगा “
मैं थोड़ा गुस्सा हो जाता
“अरे तो क्या हुआ सुन लिया कर ना “
“कैसे सुनु आप मेरी भाभी माँ हो “
मेरी बात सुनकर वो हंस पड़ती थी, कभी कभी मेरे गलो को खींच लेती ..
“तू इतना प्यार करता है अपनी भाभी माँ से “
वो मुझे अपलक निहारती
“प्यार का तो नहीं पता लेकिन मुझे पसंद नहीं की आपको कोई कुछ भी बोले “
“अच्छा तो अपने भाई से क्यों नहीं कहता जो पापा ने कहा “
भाई की बात सुनकर hi मैं घबरा जाता था..
“उन्हें क्यों बिच में लाती हो “
“अरे क्या हुआ ??”
वो मुस्कुराते हुए कहती थी
“उनसे मुझे दर लगता है “
और वो जोरो से हंस पड़ती, मेरे बालो को प्यार से सहलाती
“भला क्यों ...??”
“पता नहीं बस लगता है “
“अच्छा और मुझसे ??”
वो फिर से मेरे चेहरे को बड़े hi प्यार से देखती थी
“आप तो मेरी भाभी माँ हो, आपसे क्यों डरूंगा “
वो मुझे कभी कभी खींचकर अपने साइन से लगा लेती ,तो कभी सिर्फ मेरे गलो में एक प्यारा सा चुम्मन दे देती
“अच्छा मेरा प्यारा सोनू ..”
मैं खुश हो जाता था ,ऐसा प्यार तो मेरी माँ hi मुझे करती थी ,माँ जैसा प्रेम और बहन जैसी केयर करने वाली ये अद्भुत सी ायरत एक वो hi तो थी मेरी भाभी माँ ………..