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- Dec 5, 2013
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हम वही खड़े थे जंहा से चले थे , मेरा गांव ..
काजल किसी काम की वजह से हमारे साथ नहीं आयी थी , नेहा , mahima(Neha की माँ ) , भाभी और मैं एक गाड़ी से रातो रत यंहा पहुंच गए थे ..
वही कॉलेज के बहार की छोटी सी चाय की टापरी जो की अभी बंद थी ..
उसे देखकर भाभी एक बार के लिए इमोशनल हो गयी ..
भाभी ने अपने घर का पता बताया , घर क्या था 2 कमरों की छोपडी hi कहिये ..
लेकिन उसमे भी टाला लगा था ,
पड़ोस की महिला ने जैसे hi भाभी को देखा वो उन्हें गाला लगाकर रोने लगी ..
“आरती तू कहा थी , और ये क्या सुनने में आया की तू अपने देवर के साथ भाग गयी .. ऐसा क्यों किया बेटी तूने .. तेरे माँ बाप तो जैसे टूट hi गए ये सब सुनकर “
उस महिला की बात से भाभी पर क्या असर हुआ ये तो मुझे नहीं पता लेकिन है मुझे अपने भाई पर जरूर जोरो का गुस्सा आया , जो गुस्सा उस समय हालत की वजह से मैंने अपने अंदर दबा लिया था .. उसने न सिर्फ हमें हमारे hi घर और जिंदगी से निकाल दिया बल्कि हमारे पवित्र रिश्ते को भी बदनाम किया था ..
“माँ बाबू जी कहा है काकी “
भाभी ने अपने आप को सम्हालता हुए कहा
“क्या पता बेटी जब से वो खबर आयी कुछ दिन तक तो उन्होंने तुम्हारा राष्ट देखा लेकिन फिर अचानक से गायब हो गए किसी को कुछ भी नहीं बताया की कहा जा रहे है कब आएंगे ..”
उनकी बात सुनकर सभी के माथे में बल पद गए थे ..
अब आखिर ये लोग कहा गायब हो गए थे ..
मैंने सबसे दूर हटकर काजल को फ़ोन लगा दिया ..
“ओह्ह सच को सामने लेन के लिए कोमल का मिलना बहुत जरुरी है सोनू , अगर वो नहीं मिली तो … हमारा तो कुछ नहीं जायेगा लेकिन रीडर्स का जरूर भेजा ख़त्म हो जायेगा :हहै:”
(जस्ट जोकिंग)
“है आप सही कह रही हो लेकिन .. लेकिन आखिर वो गयी कहा होगी ..”
“हम्म एक काम करो एक एड्रेस देती हु वंहा चले जाओ , शायद वंहा तुम्हे कोई हेल्प मिल जाए “
काजल ने मुझे मेरे गांव से 20 कम दूर जंगल की तरफ एक आश्रम का पता दिया ..
मैं सभी को लेकर उस आश्रम की तरफ निकल पड़ा..
“हमें कोमल जी को ढूंढना है और तुम ये हमें कहा बाबा बाबा के पास ले जा रहे हो “
नेहा ने मुझे गुस्से से कहा
“यार जब कही से कोई उम्मीद नहीं दिखती न तो एक hi सहारा बचता है… “
मेरी बात सुकर सभी चुप थे ,
“लेकिन ये बाबा है कौन ??“ इस बार महिमा आंटी (मेरी सौ माँ :ब्लश: ) ने कहा था
“क्या पता, सुना है कोई बहुत hi सिद्ध बाबा है , सब कुछ जानते है .. कुछ लोग तो उन्हें देवता की तरह पूजते है .. “
जो जानकारी मैंने आश्रम के बारे में अभी तक जुताई थी उसी आधार पर मैंने कहा था ..
कुछ देर के सफर के बाद hi हम आश्रम के बहार खड़े थे ..
वो आश्रम कोई बहुत hi खास नहीं लग रहा था बस घास फुस की कुछ छपड़िया और बस जंगल का साम्राज्य ..
कोई घेरा नहीं था , जंहा से पता चलता की आश्रम कहा से शुरू होता है और कहा ख़त्म .
है पास में एक झरने का आभास जरूर हो रहा था, कितनी शांति थी वंहा ..
जंहा तक गाड़ी जा सकती थी हम वंहा तक गाड़ी से गए फिर हमने पगडण्डी पकड़ ली थी ..
थोड़ी hi दूर में हमें लोग मिलने शुरू हो गए वो पेड़ो के निचे ध्यान लगाए बैठे हुए दिख रहे थे ..
हम थोड़ी hi दूर गए थे की
“हे भगवन “
ये आवाज महिमा की थी ,हम सभी ने उस और देखा जंहा वो देख रही थी , सभी का मुँह खुला का खुला hi रह गया था
एक जवान जोड़े पूर्ण तह नंग अवस्था में एक दूसरे से सम्भोग में लिप्त थे .. जैसे दुनिया की कोई भी खबर नहीं हो , एक दूसरे को ऐसे खा रहे थे जैसे कोई फल को चूस रहे हो , इतना सूंदर सम्भोग का दृश्य मैंने कभी नहीं देखा था ..
हम सभी की नज़ारे वंहा ऐसे जैम गयी की हम खुद को hi भूल गए थे .. नेहा ने मेरे हाथो को जोरो से पकड़ लिया था ,,
“अरे ये सब क्या देख रहे हो आगे चलो, न जाने ये कैसी जगह आ गयी मैं अपने जवान बेटी के साथ “
महिमा ने अपना सर झटक दे कहा , उसकी बात से हम सभी को जैसे होश आया , मेरी और नेहा की नज़ारे मिली और वो शर्मा गयी .. वही भाभी के चेहरे में बस एक हलकी सी मुस्कान थी ..
हम थोड़े और आगे गए तो हमें एक विदेशी सी महिला मिल गयी
“नमस्कार आप लोगो का स्वागत है .. क्या आप hi अंकित है “
उसकी हिंदी सुनकर मैं भी थोड़ा दांग था क्योकि वो पूरी विदेशी लग रही थी , लेकिन थोड़ी इंडियन .. जैसे कोई नृ होइ .. भरा हुआ मांसल बदन जो हर जरुरत की जगह से कैसा हुआ था ..
उसे देख कर मेरे मुँह से निकल गया ‘सनी लीओन यंहा’
एक सफ़ेद साड़ी में लिपटी हुई टपकती हुई जवानी का झरना थी वो , बस एक सफ़ेद साड़ी थी उसके जिस्म पर .. बस एक साड़ी ..:विंक:
उसके उभारो को देखकर तो किसी भी मर्द का ईमान दोल जाए तो मैं क्या चीज था ..
नेहा ने एक बार मेरे कमर में जोरो की चिमटी की ..
“खा जाओगे क्या उसे जो ऐसे घर रहे हो “
उसकी आवाज में जलन की बू साफ साफ सुनाई दे रही थी ..
“जी आपको कैसे पता की हम ..”
“काजल कामिनी ने फ़ोन किया था , आइये अंदर आइये “
काजल कामिनी ??? उसने बड़े hi सपाट रूप से कहा था उसके चेहरे में कोई सिकन तक नहीं आयी थी ..
और वो कहा अंदर आने के लिए कह रही थी , साला यंहा तो कोई बाउंड्री hi नहीं था , बस जैसे कोई जंगल हो और जंगल में कुछ जगह को साफ़ कारक छोटा गरदन जैसा बना दिया गया हो ..
हम उसके पीछे चले गए ..
“बाबा जी है न हमें उनसे hi मिलाना है “
मैंने उससे पूछ लिया ..
“है हमारे सिद्ध महाराज बाबा जी आपने भक्तो को घ्यान दे रहे है “
उसने बड़े hi प्यार से कहा
“क्या वो सच में सिद्ध है “
महिमा के मुँह से अचानक से निकल गया
“है बिलकुल ..मन सालो पहले उनके पास अपने पति से झगड़ा करके आयी थी ताकि वो हम दोनों को मिला दे .. तब से मैं उनके hi पास हु …”
उसने मुस्कुराते हुए कहा
“और आपका पति ..” नेहा ने पूछ लिया
“मुझे क्या पता ..:डेड: “ उसने बेख्याली से कहा
एक पेड़ के निचे तबूतरा जैसा बना था जिसमे एक व्यक्ति बैठा था .. तो ये hi है वो बाबा जी .. सामने कुछ लोग बैठे हुए थे , हम भी उनमे शामिल हो गए ..
“बाबा जी मेरा पति बहुत hi कमजोर हो गया है कुछ भी नहीं कर पता ..”
एक महिला और उसका पति जो की किसी कंकाल की तरह hi दिख रहा था दोनों hi हाथ जोड़कर खड़े हुए ..
“ये कुछ नहीं कर पता तो दूसरे से करवा देता हु पुत्री …”
पास खड़े एक पहलवान की तरफ इशारा करते हुए बाबा जी ने कहा
उसे देखकर महिला तो जैसे उछाल hi पड़ी लेकिन वो इंसान बोल पड़ा
“नहीं नहीं महराज ऐसा अन्याय न करना .. जो करना है मैं hi करूँगा “
“बीटा तूने दारू पि पि कर अपना पूरा मांस तो गाला hi दिया अब कुछ करने जायेगा तो बची खुची हड्डिया भी गाल जाएगी “
“नहीं महराज आप कुछ ऐसा उपाय बताओ की मैं hi कर पाउ ..”
“अच्छा ठीक है तो पुत्री इसे दूध पिलाया करो “
“महराज दूध तो पिलाती हु लेकिन साला पिता काम है और मसलता जायदा है ..”महिला की बात सुनकर बाबा जी मुस्कुरा उठे
“अरे बेटी अपना नहीं कुटिया का दूध पिलाओ इसे तब जाकर कुत्तो जैसे चादहए करेगा तुम्हारे ऊपर “
महराज की बात सुनकर महिला शर्मा गयी थी
“महराज अगर घोड़ी का पुलाव तो ..”
“देखो बीटा जयदा लालच नहीं करते घोड़ी का दूध पीकर अगर ये पड़ोस की घोडियो पर पढ़ने लगा तो फिर तुम्हे hi दुखो होगा ..जाओ कल्याण होगा “
दोनों hi उनका चाहरण स्पर्श करके वंहा से निकल गए ..
तभी दूसरी ायरत कड़ी हुई ..
“बाबा जी पिछले सप्ताह आपको बताया था न की मुझे गर्मी बहुत रहती है .. आपने गाजर और खीरा लेने को कहा था “
“है पुत्री .. तुमने गाजर लिया “
“जी महराज लिया लेकिन फायदा नहीं हुआ ..”
“ओह्ह कैसे लिया ..??”
“दो दिन तो आगे से hi लिया फिर सोचा की पीछे से ले के देखु तो पीछे से लिया , फिर खीरा आगे से और गाजर पीछे से लिया फिर..”
“रुको रुको … बेटी लेने का मतलब ऐसा लेना नहीं उसे मुँह से लेना था “
“महराज मुँह में भी लिया ना”
वो शर्मा गयी थी
“बेटी मुँह में नहीं लेना था .. मुँह से लेना था .. मतलब खाना था “
उसकी बात सुनकर वो थोड़ी उदास हो गयी ..
“ओह्ह खाना था क्या…”
“है अब की बात उसे खाना , लेने के लिए हम दूसरी चीज दे देंगे जो शहर की महिलाओ की असली सहेली होती है .. जिसका नाम दिल से शुरू होता है .. दिल दो… कहा जाता है “ :हहै:
“जय हो महाराज की ..”
वो महिला चिल्ला उठी ..
तभी एक भक्त चिल्लाया
“बोलिये ज्ञानियों से घ्यानी , ध्यानियों से ध्यानी , सिद्ध पुरुष , मन मानव , चुतियो के चुटिया महा चुटिया .. चुटिया डॉ महराज की ..”
जय जय जय ………
ाक्ष में एक घोष होने लगा था …….
हम वही खड़े थे जंहा से चले थे , मेरा गांव ..
काजल किसी काम की वजह से हमारे साथ नहीं आयी थी , नेहा , mahima(Neha की माँ ) , भाभी और मैं एक गाड़ी से रातो रत यंहा पहुंच गए थे ..
वही कॉलेज के बहार की छोटी सी चाय की टापरी जो की अभी बंद थी ..
उसे देखकर भाभी एक बार के लिए इमोशनल हो गयी ..
भाभी ने अपने घर का पता बताया , घर क्या था 2 कमरों की छोपडी hi कहिये ..
लेकिन उसमे भी टाला लगा था ,
पड़ोस की महिला ने जैसे hi भाभी को देखा वो उन्हें गाला लगाकर रोने लगी ..
“आरती तू कहा थी , और ये क्या सुनने में आया की तू अपने देवर के साथ भाग गयी .. ऐसा क्यों किया बेटी तूने .. तेरे माँ बाप तो जैसे टूट hi गए ये सब सुनकर “
उस महिला की बात से भाभी पर क्या असर हुआ ये तो मुझे नहीं पता लेकिन है मुझे अपने भाई पर जरूर जोरो का गुस्सा आया , जो गुस्सा उस समय हालत की वजह से मैंने अपने अंदर दबा लिया था .. उसने न सिर्फ हमें हमारे hi घर और जिंदगी से निकाल दिया बल्कि हमारे पवित्र रिश्ते को भी बदनाम किया था ..
“माँ बाबू जी कहा है काकी “
भाभी ने अपने आप को सम्हालता हुए कहा
“क्या पता बेटी जब से वो खबर आयी कुछ दिन तक तो उन्होंने तुम्हारा राष्ट देखा लेकिन फिर अचानक से गायब हो गए किसी को कुछ भी नहीं बताया की कहा जा रहे है कब आएंगे ..”
उनकी बात सुनकर सभी के माथे में बल पद गए थे ..
अब आखिर ये लोग कहा गायब हो गए थे ..
मैंने सबसे दूर हटकर काजल को फ़ोन लगा दिया ..
“ओह्ह सच को सामने लेन के लिए कोमल का मिलना बहुत जरुरी है सोनू , अगर वो नहीं मिली तो … हमारा तो कुछ नहीं जायेगा लेकिन रीडर्स का जरूर भेजा ख़त्म हो जायेगा :हहै:”
(जस्ट जोकिंग)
“है आप सही कह रही हो लेकिन .. लेकिन आखिर वो गयी कहा होगी ..”
“हम्म एक काम करो एक एड्रेस देती हु वंहा चले जाओ , शायद वंहा तुम्हे कोई हेल्प मिल जाए “
काजल ने मुझे मेरे गांव से 20 कम दूर जंगल की तरफ एक आश्रम का पता दिया ..
मैं सभी को लेकर उस आश्रम की तरफ निकल पड़ा..
“हमें कोमल जी को ढूंढना है और तुम ये हमें कहा बाबा बाबा के पास ले जा रहे हो “
नेहा ने मुझे गुस्से से कहा
“यार जब कही से कोई उम्मीद नहीं दिखती न तो एक hi सहारा बचता है… “
मेरी बात सुकर सभी चुप थे ,
“लेकिन ये बाबा है कौन ??“ इस बार महिमा आंटी (मेरी सौ माँ :ब्लश: ) ने कहा था
“क्या पता, सुना है कोई बहुत hi सिद्ध बाबा है , सब कुछ जानते है .. कुछ लोग तो उन्हें देवता की तरह पूजते है .. “
जो जानकारी मैंने आश्रम के बारे में अभी तक जुताई थी उसी आधार पर मैंने कहा था ..
कुछ देर के सफर के बाद hi हम आश्रम के बहार खड़े थे ..
वो आश्रम कोई बहुत hi खास नहीं लग रहा था बस घास फुस की कुछ छपड़िया और बस जंगल का साम्राज्य ..
कोई घेरा नहीं था , जंहा से पता चलता की आश्रम कहा से शुरू होता है और कहा ख़त्म .
है पास में एक झरने का आभास जरूर हो रहा था, कितनी शांति थी वंहा ..
जंहा तक गाड़ी जा सकती थी हम वंहा तक गाड़ी से गए फिर हमने पगडण्डी पकड़ ली थी ..
थोड़ी hi दूर में हमें लोग मिलने शुरू हो गए वो पेड़ो के निचे ध्यान लगाए बैठे हुए दिख रहे थे ..
हम थोड़ी hi दूर गए थे की
“हे भगवन “
ये आवाज महिमा की थी ,हम सभी ने उस और देखा जंहा वो देख रही थी , सभी का मुँह खुला का खुला hi रह गया था
एक जवान जोड़े पूर्ण तह नंग अवस्था में एक दूसरे से सम्भोग में लिप्त थे .. जैसे दुनिया की कोई भी खबर नहीं हो , एक दूसरे को ऐसे खा रहे थे जैसे कोई फल को चूस रहे हो , इतना सूंदर सम्भोग का दृश्य मैंने कभी नहीं देखा था ..
हम सभी की नज़ारे वंहा ऐसे जैम गयी की हम खुद को hi भूल गए थे .. नेहा ने मेरे हाथो को जोरो से पकड़ लिया था ,,
“अरे ये सब क्या देख रहे हो आगे चलो, न जाने ये कैसी जगह आ गयी मैं अपने जवान बेटी के साथ “
महिमा ने अपना सर झटक दे कहा , उसकी बात से हम सभी को जैसे होश आया , मेरी और नेहा की नज़ारे मिली और वो शर्मा गयी .. वही भाभी के चेहरे में बस एक हलकी सी मुस्कान थी ..
हम थोड़े और आगे गए तो हमें एक विदेशी सी महिला मिल गयी
“नमस्कार आप लोगो का स्वागत है .. क्या आप hi अंकित है “
उसकी हिंदी सुनकर मैं भी थोड़ा दांग था क्योकि वो पूरी विदेशी लग रही थी , लेकिन थोड़ी इंडियन .. जैसे कोई नृ होइ .. भरा हुआ मांसल बदन जो हर जरुरत की जगह से कैसा हुआ था ..
उसे देख कर मेरे मुँह से निकल गया ‘सनी लीओन यंहा’
एक सफ़ेद साड़ी में लिपटी हुई टपकती हुई जवानी का झरना थी वो , बस एक सफ़ेद साड़ी थी उसके जिस्म पर .. बस एक साड़ी ..:विंक:
उसके उभारो को देखकर तो किसी भी मर्द का ईमान दोल जाए तो मैं क्या चीज था ..
नेहा ने एक बार मेरे कमर में जोरो की चिमटी की ..
“खा जाओगे क्या उसे जो ऐसे घर रहे हो “
उसकी आवाज में जलन की बू साफ साफ सुनाई दे रही थी ..
“जी आपको कैसे पता की हम ..”
“काजल कामिनी ने फ़ोन किया था , आइये अंदर आइये “
काजल कामिनी ??? उसने बड़े hi सपाट रूप से कहा था उसके चेहरे में कोई सिकन तक नहीं आयी थी ..
और वो कहा अंदर आने के लिए कह रही थी , साला यंहा तो कोई बाउंड्री hi नहीं था , बस जैसे कोई जंगल हो और जंगल में कुछ जगह को साफ़ कारक छोटा गरदन जैसा बना दिया गया हो ..
हम उसके पीछे चले गए ..
“बाबा जी है न हमें उनसे hi मिलाना है “
मैंने उससे पूछ लिया ..
“है हमारे सिद्ध महाराज बाबा जी आपने भक्तो को घ्यान दे रहे है “
उसने बड़े hi प्यार से कहा
“क्या वो सच में सिद्ध है “
महिमा के मुँह से अचानक से निकल गया
“है बिलकुल ..मन सालो पहले उनके पास अपने पति से झगड़ा करके आयी थी ताकि वो हम दोनों को मिला दे .. तब से मैं उनके hi पास हु …”
उसने मुस्कुराते हुए कहा
“और आपका पति ..” नेहा ने पूछ लिया
“मुझे क्या पता ..:डेड: “ उसने बेख्याली से कहा
एक पेड़ के निचे तबूतरा जैसा बना था जिसमे एक व्यक्ति बैठा था .. तो ये hi है वो बाबा जी .. सामने कुछ लोग बैठे हुए थे , हम भी उनमे शामिल हो गए ..
“बाबा जी मेरा पति बहुत hi कमजोर हो गया है कुछ भी नहीं कर पता ..”
एक महिला और उसका पति जो की किसी कंकाल की तरह hi दिख रहा था दोनों hi हाथ जोड़कर खड़े हुए ..
“ये कुछ नहीं कर पता तो दूसरे से करवा देता हु पुत्री …”
पास खड़े एक पहलवान की तरफ इशारा करते हुए बाबा जी ने कहा
उसे देखकर महिला तो जैसे उछाल hi पड़ी लेकिन वो इंसान बोल पड़ा
“नहीं नहीं महराज ऐसा अन्याय न करना .. जो करना है मैं hi करूँगा “
“बीटा तूने दारू पि पि कर अपना पूरा मांस तो गाला hi दिया अब कुछ करने जायेगा तो बची खुची हड्डिया भी गाल जाएगी “
“नहीं महराज आप कुछ ऐसा उपाय बताओ की मैं hi कर पाउ ..”
“अच्छा ठीक है तो पुत्री इसे दूध पिलाया करो “
“महराज दूध तो पिलाती हु लेकिन साला पिता काम है और मसलता जायदा है ..”महिला की बात सुनकर बाबा जी मुस्कुरा उठे
“अरे बेटी अपना नहीं कुटिया का दूध पिलाओ इसे तब जाकर कुत्तो जैसे चादहए करेगा तुम्हारे ऊपर “
महराज की बात सुनकर महिला शर्मा गयी थी
“महराज अगर घोड़ी का पुलाव तो ..”
“देखो बीटा जयदा लालच नहीं करते घोड़ी का दूध पीकर अगर ये पड़ोस की घोडियो पर पढ़ने लगा तो फिर तुम्हे hi दुखो होगा ..जाओ कल्याण होगा “
दोनों hi उनका चाहरण स्पर्श करके वंहा से निकल गए ..
तभी दूसरी ायरत कड़ी हुई ..
“बाबा जी पिछले सप्ताह आपको बताया था न की मुझे गर्मी बहुत रहती है .. आपने गाजर और खीरा लेने को कहा था “
“है पुत्री .. तुमने गाजर लिया “
“जी महराज लिया लेकिन फायदा नहीं हुआ ..”
“ओह्ह कैसे लिया ..??”
“दो दिन तो आगे से hi लिया फिर सोचा की पीछे से ले के देखु तो पीछे से लिया , फिर खीरा आगे से और गाजर पीछे से लिया फिर..”
“रुको रुको … बेटी लेने का मतलब ऐसा लेना नहीं उसे मुँह से लेना था “
“महराज मुँह में भी लिया ना”
वो शर्मा गयी थी
“बेटी मुँह में नहीं लेना था .. मुँह से लेना था .. मतलब खाना था “
उसकी बात सुनकर वो थोड़ी उदास हो गयी ..
“ओह्ह खाना था क्या…”
“है अब की बात उसे खाना , लेने के लिए हम दूसरी चीज दे देंगे जो शहर की महिलाओ की असली सहेली होती है .. जिसका नाम दिल से शुरू होता है .. दिल दो… कहा जाता है “ :हहै:
“जय हो महाराज की ..”
वो महिला चिल्ला उठी ..
तभी एक भक्त चिल्लाया
“बोलिये ज्ञानियों से घ्यानी , ध्यानियों से ध्यानी , सिद्ध पुरुष , मन मानव , चुतियो के चुटिया महा चुटिया .. चुटिया डॉ महराज की ..”
जय जय जय ………
ाक्ष में एक घोष होने लगा था …….