Zindagi : ek anjana safar - Page 4 - SexBaba
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Zindagi : ek anjana safar

अपडेट 29

आज फाइनली दोनों के बीच जो एक दीवार बची थी वो भी गिर गयी और आज तरुण ने अपने घर की पहली महिला के साथ शारीरिक सम्बन्ध स्थापित करने में सफलता हासिल कर लिया था ....

अब तो वैसे भी काफी रात गुजर चुकी थी इसलिए उन्होंने सोने में hi अपनी भलाई समझी ....

आगे

सुबह को जब श्रेया की नींद खुलती है तो वो पूर्णतया नग्न अवस्था में अपने सबसे छोटे भाई तरुण की बांहो में लेती हुयी थी ... खुद को ऐसे हाल में अपने भाई के बिस्तर में देख उसको थोड़ी शर्म सो महसूस होती है ...

तभी उसको कोई कठोर सो चीज अपने छूट की दीवार पर महसूस होती है ये कुछ और नहीं तरुण का semi-erect लुंड था ...

श्रेया (मन में) : देखो तो बदमाश की हरकत एक hi रात में इसने मुझे पूरी तरह से अपनी दीवानी बना लिया है ... कितना प्यारा लग रहा है मेरा भाई ... कितनी अछि तरह से इसने रात में मेरी खिदमत की है जैसे मैं इसकी बहन नहीं बल्कि इसकी लुगाई हु .... मेरे पति तो अब तक मुझे माँ नहीं बना पाया है अगर मेरा भाई मुझे माँ बना दे तो हाय मुझे तो सोच कर hi शर्म आ रही है ... कितना क्यूट है मेरा भाई अगर इसके जैसी hi मेरी औलाद हो तो कितना ाचा है .... अब मुझे बस मेरे भाई से कुछ बार और छोड़ना है .... इसकी गाढ़ी मलाई देख hi मुझे एहसास हो रहा है की ये कुछ मीटिंग में hi मुझे माँ बना देगा ...

और फिर श्रेया अपने तपते हुए होंठ तरुण के गालो पर चिपका देती है और फिर उठ कर जल्दी जल्दी अपने कपडे पहन लेती है और फिर तरुण को उठा कर अपने रूम को आ जाती है ....

इवनिंग को ऋचा रोटी हुयी घर आती है और उसके साथ में राहुल भी था .... हॉल में hi ruchika,priyanshi,Shreya और तरुण भी बैठे हुए गप्पे हाँक रहे थे ....

रुचिका : अरे ऋचा दीदी आप रो क्यों रही हो ... किसी ने कुछ कहा है क्या ....

ऋचा (सिसकते हुए) : छोटी आज मैं मार्केटिंग कर के लौट hi रही थी की 3 - 4 आवारा लड़के रोड के किनारे बैठे हर गुजरने वाली लड़कियों पर गंदे गंदे कमैंट्स पास कर रहे थे .... जब मैं राहुल के साथ वह से गुजरी तो उन्होंने मुझ पर भी गंदे कमैंट्स पास करे जो मुझसे बर्दास्त नहीं हुए तो मैंने उनमे से एक के गाल पर मैंने थप्पड़ जड़ दिए ... जिसके रिस्पांस में वो मेरे साथ बदतमीज़ी करने लगे तो मैंने राहुल से हेल्प मांगी तो ये उनसे न उलझने की हिदायत देने लगा ... उन् लड़को ने मेरी ओढ़नी भी फाड़ डाली और न जाने आगे क्या क्या करते .... वो तो भला हो की ुशी वक्त एक पुलिस की गाडी वह से गुजरी जिसके वजह से वो वह से हैट गए ... मौके का फायदा उठाते हुए मैं वह से भाग आयी वर्ण न जाने क्या अनर्थ हो जाता ....

ऋचा की बात सुन तरुण को राहुल और उन् आवारा लड़को पर बहुत गुस्सा आया .... भले hi ऋचा तरुण से कितनी भी नफरत करती हो पर जब बात परिवार की इज्जत की थी तो वो भला चुप कैसे रहता ....

तरुण (गुस्से से) : क्या आप उन्हें पहचान लोगी ...

ऋचा को इस वक्त गुस्से के ऐसे जोन में थी की उसको तरुण की हेल्प लेने से भी कोई दिक्कत नहीं थी वर्ण अगर नार्मल बात होती तो वो शायद hi तरुण से हेल्प लेती ...

ऋचा : हाँ ... वो लड़के मॉल के नुक्कड़ पर hi बैठे रहते हैं हमेसा ...

तरुण : तो चलो मेरे साथ ... अभी इस घर में मर्द ज़िंदा हैं .... ऐसे कोई मेरे घर की इज्जत और मान सम्मान पर हाथ नहीं दाल सकता ....

ऋचा दूसरी ओढ़नी अपने सूट में लगा लेती है और तरुण के पीछे बाइक पर बैठ जाती है और थोड़े hi देर में वो मॉल के सामने थे .... ऋचा रोड के किनारे बैठे कुछ लड़को की तरफ इशारा करती है ... वो टोटल 4 लड़के थे जो हर आने जाने वाली लड़कियों पर भद्दे रमार्क्स दे रहे थे ....

तरुण ऋचा का हाथ पकड़ कर उनके सामने आ जाता है ... ऋचा को देख उनमे से एक लड़का खड़ा हो कर उसकी तरफ बढ़ने लगता है ....

लड़का 1 : साली ... उस वक्त तो तू बच गयी पर किस्मत आज मेरे साथ है आज तुझे नहीं छोडूंगा ...

लड़का 2 : हाँ यार साली ने तेरे ऊपर थप्पड़ उठा कर ठीक नहीं आज तो साली की गए....

अभी उस लड़के ने इतना कहा hi था की एक जबरदस्त पंच उसके थोबड़े पर पड़ता है जिससे उसका पूरा जबड़ा hi हिल जाता है और पल भर के लिए उसकी आँखों के सामने अँधेरा छ जाता है ....

लड़का 3 : सेल तूने मेरे दोस्त को छुआ कैसे आज तेरी सहमत आने वाली है ... आज तू नहीं बचेगा .... तू ये भूल गया है की तू हमारे इलाके में है ....

तरुण : इलाका तो कुत्ते और सुअरो का होता है मैं शेर हु जहा जाता हु वह मेरी हुकूमत चलती है ... आजा बीटा बड़ा शौक है न तुझे लड़कियों पर कमेंटबाजी करने का ... आज में बाद तू किसी काम का नहीं रहने वाला है ... ऋचा आज पहली बार तरुण को ऐसे अवतार में देख रही थी उसका तो बड़ा मन कर रहा था की तरुण के डायलाग पर वो सिटी बजाये या उसको गले लगा ले ....

लड़का 1 ऋचा की तरफ बढ़ता है .... पर तरुण बीच में hi उसका हाथ पकड़ लेता है ....

तरुण : इन्ही हाथो से तूने मेरी दीदी की ओढ़नी फाड़ी थी न ... अब तेरा ये हाथ नहीं बचेगा ....

और फिर एक झटके के साथ तरुण ने उसके हाथ को तोड़ डाला जैसे वो पतली सी सुखी लकड़ी हो .... लड़का 1 जमीन पर पड़ा दर्द के मरे कराह रहा था ... बाकि बचे 2 लड़के तरुण के ऊपर एक साथ चाकू से अटैक करते हैं पर तरुण झुक कर उनके वार को नाकाम कर देता है और एक के पिछवाड़े पर एक जबरदस्त किक मरता है जिससे वो ुनबलने होकर एक पेड़ से टकरा कर गिर जाता है ...

अब बचा हुआ एक लड़का तरुण के ऊपर फुर्ती दिखते हुए चाकू चला देता है .... चाकू तरुण के बांह को छूटे हुए निकल जाती है है ... पल भर में hi दर्द के साथ खून बह निकलते हैं ....

वो लड़का फिर से चाकू चलता है पर तरुण इस बार अलर्ट था उसने उसके चाकू वाले हाथ पर एक फ्लाइंग किक लगा दी जिससे उसके हाथ से चाकू छिटक कर दूर जा गिरता है ... अब बाल तरुण की पाली में थी ... तरुण ने मार मार कर उसका थोड़बा सुजा डाला .... अब तरुण अपनी बेल्ट खोल लेता है और ताबड़तोड़ चारो लड़को को मरने लगता है .... बेल्ट की मार से चारो लड़के अधमरे हो जाते हैं और तरुण से अपनी जान की दुहाई मांगने लगते हैं .... तरुण भी उन्हें छोड़ देता है और उन्हें ऋचा से माफ़ी मांगने को कहता है .... वो चारो लड़के ऋचा के पैरो में गिर जाते हैं और माफ़ी मांगने लगते हैं .....

वह से गुजर रही 3 - 4 लड़किया आपस में कानाफूसी कर रही थी ... ये लोग शायद सुरु से सारा तमाशा देख रही थी ....

लड़की 1 : ये है असली मर्द ...

लड़की 2 : काश ऐसा लड़का hi मेरा बर्फ या भाई हो तो कितना ाचा होता ....

लड़की 3 : हाँ यार जो लड़का अपनी बहन के लिए इतना कर सकता है अपनी वो गफ या बीवी के लिए क्या नहीं कर सकता .... काश ये मेरा बर्फ बन जाये तो कितना मज़ा आएगा ...

लड़की 4 : तुम लोग बस सपने देखती रहो ... बूत यार ये कितना हैंडसम है और पावरफुल भी ... इसकी बांह पर चाकू लग गया है शायद कितना खून बाह रहा बिकहरे का ....

वही ऋचा तो अपने छोटे भाई को खुद के लिए स्टैंड लेता देख भावुक हो गयी थी ... वो जिस तरुण से बेइंतेहा नफरत करती आयी थी आज उसने hi उसकी मान और प्रतिष्ठा लौटाई थी और जिस राहुल को वो हमेसा लाड लड़ती आयी थी वो उसके लिए लड़ना तो दूर उसका सपोर्ट करने से भी कटरा रहा था ... तभी उसका धयान तरुण की बांह पर पड़ता है जो खून के वजह से पूरा लाल हो गया था ... वो भगति हुयी तरुण के पास आती है और अपने दुपट्टे को थोड़ा सा फाड़ कर उसको तरुण की बांह पर बांध देती है जिससे तरुण का खून बहना रुक जाता है ... इसी दौरान पता नहीं क्यों ऋचा की आँखों से कुछ आंशू की बूँदें तरुण की बांह पर गिर जाते हैं ....

तरुण : थैंक्स ... चलिए अब घर चलते हैं सभी लोग आपका वेट कर रहे होंगे ...

और फिर तरुण बाइक स्टार्ट करता है और ऋचा उसके पीछे बैठ जाती है ...

ऋचा : भाई ....

कुछ पल बीत जाने के बाद भी तरुण कोई रिस्पांस नहीं देता ...

ऋचा : भाई गाडी रोको न ... प्लीज ... मुझे तुमसे कुछ जरुरी बात करनी है ...

तरुण गाडी रोक देता है .... ऋचा गाडी से उतर जाती है .... किस्मत से वो लोग एक पार्क के आगे रुके थे ....

ऋचा तरुण का हाथ पकड़ कर उसको बाइक दे उतरवा देती है और अपने साथ लेकर पार्क के अंदर आ जाती है ....

तरुण : मैडम आप ये न समझना की मैंने आपको माफ़ कर दिया ... आपके जगह कोई अनजान लड़की भी होती तो मैं एहि करता ... और प्लीज ये भाई लफ्ज़ मेरे लिए उसे मत करना ... आपका और मेरा कोई रिश्ता न तो पहले था न hi अब है ... अब आप अपने रस्ते और मैं अपने रस्ते ....

ऋचा तरुण के घुटनो में बैठ जाती है और रोने लगती है ...

ऋचा : सॉरी न मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी ... तुम्हे पहचानने में मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गयी .... जिस भाई को बहने अपनी पलकों पर बिठा कर रखती हैं मैंने हमेसा उसको नीचे दिखाया है ... मैं जानती हु की मैं बहन कहलाने के लायक नहीं हु पर फिर भी तुमने आज मेरे इज्जत और सम्मान की रक्षा की .... जिसे मैंने हमेसा राखी बंधी की वो मेरी रक्षा करेगा वो तो थोड़ा सा संकट पड़ते hi दम दबा कर भाग गया .... सॉरी न बाबू ... तुम चाहो तो जी भर कर मुझे दांत लो मार लो पर तुम्हे भाई कहने का ये अधिकार मुझसे मत छीनो ... आज मुझे खुद से घिन्न आ रही है ... मैं आज खुद की नजरो में गिर गयी हु ....

तरुण : मैडम जी चलिए घर चलते हैं वर्ण घर वाले बेवजह परेशान होते रहेंगे ... घर पर पहले से hi दुखो का पहाड़ टुटा पड़ा है ....

ऋचा और कोई सवाल जवाब नहीं करती बस तरुण के पीछे बैठ कर घर अस जाती है ....

रुचिका और प्रियांशी जल्दी से फर्स्ट अिध किट लेकर तरुण के बांह की मरहम पट्टी करती है ....

घर वालो के पूछने पर ऋचा ने दिल खोल कर तरुण की तारीफ की जिससे तरुण की मंझली चची और राहुल जल भून उठे ....

इस इंसिडेंट ने ऋचा को पूरी तरह बदल दिया था अब वो भी तरुण के hater's क्लब से निकल कर उसके फैन क्लब में शामिल होने को उत्सुक थी पर तरुण ने बस उसको इग्नोर करना hi सही समझा .... पर ऋचा भी काफी जिद्दी किस्म की लड़की थी वो कोई काम आधा अधूरा में बिस्वास नहीं रखती थी ... वो जिसे चाहती थी उसको टूट कर चाहती थी और अगर नफरत करती थी तो वो भी टूट कर करती थी ...

इधर तरुण ने अपने तरीके से खोजबीन करि राखी थी .... अब तक की जानकारी के अनुसार उसके मंझले चाचा की मौत में शेर सिंह के शामिल होने के पुख्ता सबूत मिल चुके थे पर अब भी वो 💯 परसेंट सूरे नहीं था .... उसने अब शेर सिंह से मुलाकात करने का मन बना लिया .... शेर सिंह पहले से hi खानदानी रईश था उसके पुरखे अंग्रेज़ो के ज़माने में जमींदार हुआ करते थे तो पैसो की तो कोई कमी उसको नहीं थी बस रुतबा 5 सालो के लिए खो गया था जब तरुण के बड़े चाचा ने उसको मुखिया के पद से हटा दिया था पर अब एक बार फिर से बाज़ी शेर सिंह के हाथ में थी .... उसने न सिर्फ मुखिया का पद हासिल किया बल्कि तरुण के परिवार को तबाह करके अपनी दबंगगिरि की जो छाप छोड़ी थी वो ओप्पोसिशन में सर उठाने वालो के लिए एक सीख थी की उससे उलझने से पहले वो हज़ार बार सोच ले ....

तरुण ने ये बात priyanshi,ruchika और श्रेया को hi बताई थी वो लोग तो तरुण को इसमें इन्वॉल्व होने नहीं देना चाहती थी क्यूंकि उन्हें तरुण की फिक्र थी पर तरुण उन्हें किसी तरह समझा बुझा कर राज़ी कर लेता है ....

श्रेया के साथ उसने अब तक 5 - 6 बार जिस्मानी सम्बन्ध बना लिए थे और इस बार श्रेया का मेंस्ट्रुअल फॉल भी नहीं हुआ था जिसके वजह से वो काफी खुस थी ....

तरुण को अपने गाँव के भी ज्यादा लोग नहीं जानते थे तो शेर सिंह तो दूसरे गाँव का था तो उससे उसके बारे में क्या खाक पता होगा फॉर भी तरुण ने रिस्क लेना सही नहीं समझा और अपना गेट उप चेंज करने के लिए वो शहर चला गया .... सबसे पहले उसने अपनी मौसताचे और बियर्ड को हटवाया और फिर फेसिअल और ब्लीचिंग करवाया .... जब उसने खुद को आईने में देखा तो पाया की अब उसका गेट उप काफी हद्द तक चेंज हो गया है ....

अब तरुण मौके की तलाश में रहने लगा की किस तरह शेर सिंह की दुनिया में एंट्री मरी जाये .... उसको ये तो पता था की शेर सिंह की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी लाड़ली बेटी सुहानी सिंह थी पर उसने आज तक न तो उसको देखा था न hi उसकी कोई फोटो उसके हाथ लगी थी ....

काफी जांच पड़ताल के बाद पता चला की दो दिन के बाद सुहानी का बर्थडे आने वाला है और उस दिन वो अपनी माँ और बॉडीगार्ड के साथ कुलदेवी के मंदिर पूजा अर्चना को जाती है .... तरुण को ये सबसे सटीक मौका लगा जिसमे वो शेर सिंह की दुनिया में एंट्री मार सके ....

धीरे धीरे अब वो दिन भी आ पहुंचा जिस दिन सुहानी का बर्थडे था .... आज तरुण सुबह तड़के hi उस मंदिर में पहुँच गया .... उसने पहले से hi कुछ प्रोफेशनल आदमी सेट कर रखे थे जो कही दूर के थे ....

कुछ देर बाद शेर सिंह की गाडी आती है जिससे पहले उसके बॉडीगार्ड उतारते हैं और पीछे का गेट खोलते हैं जिससे शेर सिंह की वाइफ और उसकी बेटी उतरती है और मंदिर के अंदर चली जाती है ..... दोनों बॉडीगार्ड बहार मंदिर के गेट पर खड़े हो जाते हैं .... अभी मंदिर में पुजारी के सिवा और कोई न था ....

चाँद मिनट बाद hi एक और गाडी आ कर रूकती है जिससे कुछ नकाबपोश आदमी उतारते हैं और उतारते के साथ दोनों बॉडीगार्ड के ऊपर फायरिंग करते हैं जिससे दोनों बॉडीगार्ड बेहोश हो जाते हैं ....

अब सरे नकाबपोश आदमी मंदिर के अंदर घुस जाते हैं और सुहानी और उसकी माँ से बदतमीज़ी करने लगते हैं ....

ठीक तभी मौका देख तरुण वह पहुँच जाता है .... एक पल को तो सुहानी को देख उसकी आंखें थम सी जाती हैं क्यूंकि सुहानी की सादगी और उसका चाँद सा मुखड़ा तरुण का चैन करार छीन लेती है और सुहानी को देख उसके दिल में कुछ कुछ होने लगता है .... सच कहा जाये तो उसको सुहानी से पहली नजर में hi प्यार हो जाता है ...

जल्द hi तरुण की चेतना वापस लौट आती है और वो कुछ डायलाग और थोड़ी फाइटिंग करके सुहानी और उसकी माँ को उन् नकाबपोश लोगो से बचा लेता है जो की उसके hi आदमी थे ... थोड़ी मार खा कर वो लोग भाग निकलते हैं ...

शेर सिंह की वाइफ : बीटा तुम कौन हो ... आज तुम न आते तो पता नहीं हमारा क्या होता ....

तरुण : कोई नहीं आंटी जी ये तो मेरा फ़र्ज़ था ... आप लोगो को मुसीबत में देख भला मैं कैसे भाग जाता ....

शेर सिंह की वाइफ : नहीं बीटा .... तुम नहीं जानते तुमने हमारे ऊपर कितना बड़ा उपकार किया है ... आज मेरी बेटी का जन्मदिन है इसलिए hi हम यहाँ पूजा करने आये थे की ये लोग न जाने कहा से टपक पड़े ....

तरुण : आंटी क्या आप इन्हे जानती हैं ....

शेर सिंह की वाइफ : नहीं बीटा हमारी तो किसी के साथ दुश्मनी भी नहीं है ...

सुहानी : मुम्मा मैंने पापा को फ़ोन कर दिया है वो जल्द hi आते होंगे ...

जैसा सुहानी का रूप था वैसी hi मीठी उसकी आवाज़ थी ... तरुण को तो सुहानी की आवाज़ इतनी प्यारी लगी की मनो उसकी आवाज़ में hi मिश्री घुली हुयी हो ....

तरुण : आंटी जी आप लोगो ने पूजा कर लिया क्या ....

शेर सिंह की वाइफ : नहीं बीटा अभी कहा .... पुजारी जी ये लीजिये पूजा की थाली ... आज पूजा मेरी बेटी सुहानी के नाम से करनी है .... आज इसका जन्मदिन है न ...

पुजारी : हाँ क्यों नहीं हर साल इसी दिन तो सुहानी बिटिया के दर्शन हो पते हैं ...

सुहानी (चहकते हुए) : मैं कोई देवी थोड़े हु पुजारी काका जो मेरे दर्शन हो ... मैं तो बस एक आम लड़की हु जिसके पेरेंट्स ने उसको बड़े प्यार से संभल कर रखा है ....

तरुण : ठीक है आंटी जी और सुहानी जी अब मैं चलता हु ... अब वो बदमाश लोग यहाँ नहीं आएंगे ....

सुहानी तरुण का हाथ पकड़ लेती है ....

सुहानी : जी नहीं आप कही नहीं जा रहे .... अपने आज हमारी हिफाज़त की है आप हमारे खास मेहमान हैं .... पूजा होने दीजिये तब तक पापा भी यहाँ पहुँच जायेंगे फिर हम साथ चलेंगे ....

तरुण तो एहि चाहता था .... ऊपर से सुहानी के रूप जाल में वो इस कदर फास चूका था की वो ये तक भूलने लगा था की वो यहाँ बदला लेने के लिए आया हुआ है .....

तरुण वही खड़ा हो जाता है और चोरी छुपे उसकी नजर बार बार सुहानी पर चली जाती थी .... ऊपर वाले ने उसको बड़ी फुर्सत से बनाया था .., उसके एक एक अंग बड़े सलीके से बनाया गया था न कही ज्यादा न कही काम बिलकुल परफेक्ट जस्ट अस ा ड्रीम गर्ल ....

थोड़े देर बाद ढेर साडी गाड़िया आ कर मंदिर के बहार रूकती है ... जिनमे से शेर सिंह अपने आदमियों के साथ उतरता है जिनमे से एक कलुआ भी था ... मंदिर के गेट पर लुढ़के सुहानी के बोडीगार्ड्स पर जब उसकी नजर पड़ती है तो उसका खून खौल उठता है ... उनके सरीर में बेहोशी वाले इंजेक्शन घुसे हुए थे ....

शेर सिंह के आदमियों ने उनके चेहरे पर पानी फिंकवा कर उन्हें होश में लाया .... तब तक शेर सिंह और कलुआ मंदिर में एंटर कर जाते हैं .....

अपने बाप को देख सुहानी दौड़ती हुयी उसके गले लग जाती है और सिसकने लगती है .... और फिर थोड़ा नमक मिर्च लगा कर तरुण की तारीफ करते हुए साडी बात बताती है ....

शेर सिंह और कलुआ चलते हुए तरुण के पास आते हैं .... कलुआ का दानवरूपी सरीर देख एक बार तो तरुण काँप उठता है पर फिर भी वो खुद को सांत रख वही खड़ा रहता है ....

शेर : ए लड़के तुम कौन हो यहाँ के तो नहीं जान पड़ते ....

तरुण : जी नहीं सर ... मेरी लाइफ सहर में अछि चल रही थी की एक दिन मेरे माँ बाप एक एक्सीडेंट में मरे गए .... फिर मुझे एक दिन उनकी एक डायरी मिली जिसमे एक गाँव का जिक्र था .... अब तो एक आस बची थी की गाँव में हमारा कोई रिस्तेदार होगा एहि ाश लिए गाँव आया तो पता चला की जो हमारा रिस्तेदार था वो अपनी साडी सम्पति बेच कर कही दूर चला गया है ... अब मैं इतनी बड़ी दुनिया में उन्हें कहा धुंडु .... अब मैं पूरी तरह से अकेला हु .... इवनिंग को मैंने इस मंदिर के बारे में सुना तो पूजा करने यहाँ आ धमका ... बाकि तो आप जानते hi हो ....

शेर सिंह : बीटा तुम्हारे बारे में सुन कर अफ़सोस हुआ .... तुमने हमारी जान की जान बचायी है .... तुम चाहो तो हमारे साथ रह सकते हो .... हम तुम्हे वो साडी सुख सुविधा देंगे जो जीने के लिए जरुरी हो ....

तरुण : आपकी दरियादिली के लिए शुक्रिया सर पर मैं अपने बलबूते कुछ करना चाहता हु ....

शेर सिंह : तो तुम क्यों नहीं हमारी. बिटिया के बॉडीगार्ड बन जाते हो .... इससे तुम्हारी खुद्दारी भी बानी रहेगी और हमारी बेटी के लिए हमें एक ाचा और होशियार बॉडीगार्ड भी मिल जायेगा ....

कलुआ शेर सिंह को इशारे में पास बुलाता है ....

कलुआ : पर सिंह साहब इतनी जल्दी किसी अजनबी पर इतना भरोषा करना सही नहीं है ...

शेर सिंह : कलुआ ... हमारी बेटी ने इसको चुना है .... और अपनी बेटी की ख़ुशी के लिए तो मैं हज़ारो बार मरना पसंद करूँगा ... पर फिर भी तुम इसके ऊपर नजर रखना ...


उसके बाद सुहानी सभी को प्रसाद देती है और फिर तरुण को सुहानी की गाडी में hi अस ा बॉडीगार्ड बिठाया जाता है ....
 
अपडेट 30

शेर सिंह : कलुआ ... हमारी बेटी ने इसको चुना है .... और अपनी बेटी की ख़ुशी के लिए तो मैं हज़ारो बार मरना पसंद करूँगा ... पर फिर भी तुम इसके ऊपर नजर रखना ...

उसके बाद सुहानी सभी को प्रसाद देती है और फिर तरुण को सुहानी की गाडी में hi अस ा बॉडीगार्ड बिठाया जाता है ....

आगे

थोड़े देर में hi उनकी गाडी शेर सिंह के हवेलीनुमा घर में प्रवेश करती है .... कहने को तो शेर सिंह मुखिया था पर उसको shan-o-shaukat किसी राजा महाराजा से काम न थी .... उसके घर के मैं एंट्रेंस पर एक पहलवान जैसा गेटकीपर था ....

उसके घर के चारो तरफ पार्क जैसा बना हुआ था जिसमे तरह तरह के फूल और फल लगे हुए .... बहार से चारो तरफ 10 फ़ीट की ऊँची दीवार थी जिसके ऊपर कंटीले तार लगे हुए थे ....

घर की बात की जाये तो वो दो मंजिल का बना हुआ था .... ग्राउंड फ्लोर पर 6 रूम्स थे जिनमे से एक में शेर सिंह अपनी वाइफ के साथ रहता था तो एक रूम में वो मीटिंग वगैरह किया करता था, कलुआ को भी एक रूम सेपरेट दिया गया था कलुआ में अब तक शादी नहीं की थी, एक रूम को गयम जैसा बनाया गया था, एक स्टोर रूम की तरह उसे होता था तो एक डाइनिंग रूम था .... सभी के रूम्स में अटैच्ड वाशरूम थे ....

फर्स्ट फ्लोर पर 5 बड़े बड़े रूम्स बने हुए थे .... जिनमे से सबसे बड़े रूम में इस घर की राजकुमारी सुहानी रहती थी जिसके रूम में सुख सुविधा की हर चीजें मौजूद थी .... एक रूम सुहानी की स्टडी के लिए था तो एक रूम को वो एक्सरसाइज और योग के लिए उसे करती थी .... एक रूम में सुहानी की दो पर्सनल माइड रहती थी .... जिनमे से एक काम उम्र की थी तो दूसरी अधेड़ उम्र की .... फर्स्ट फ्लोर पर बिना शेर सिंह की अनुमति के किसी और को जाने की इजाजत नहीं थी ....

तरुण को भी ग्राउंड फ्लोर पर hi एक रूम दिया गया ... रूम काफी ाचा था जिसमे एक नार्मल इंसान के सुख सुविधा की हर चीजें मौजूद थी .... सबसे पहले कलुआ उसके रूम आता है और उसको इस घर के कुछ नियम कानून बताता है और चला जाता है .... थोड़े hi देर में एक टेलर आ कर तरुण के कपड़ो की नाप लेता है और शाम तक उसको सिले सिलए 4 - 5 जोड़ी कपडे मिल जाते हैं .... दोपहर का खाना भी उसको उसके रूम में hi मिल गया था ....

आज रात को अपनी बेटी की जन्मदिन की ख़ुशी में शेर सिंह ने एक बहुत बड़े जैसे का आयोजन किया था जिसमे एरिया के बड़े बड़े आला अधिकारी और पूरा गाँव इन्वितेद था ....

तरुण भी अपने नए सिले हुए कपडे पहन कर रेडी हो जाता है .... उसका दूधिया रंग उसके ब्लैक कलर की ड्रेस में काफी जाँच रहा था और रही सही कसार उसके ब्लैक कलर के गॉगल्स ने पूरी कर दी थी .... इस ड्रेस में वो काफी स्मार्ट लग रहा था ...

धीरे धीरे पार्टी में लोगो का आना सुरु हो जाता है .... पार्टी का आयोजन एक बड़े से हॉल में किया गया था .... अब सभी लोग बर्थडे गर्ल का वेट कर रहे थे .... शेर सिंह अपनी वाइफ मीरा के साथ सभी गेस्ट्स का वेलकम कर रहा था ...

थोड़े देर बाद शेर सिंह ने तरुण को सुहानी को लिवाने का इशारा किया .... तरुण सीढ़ियों से होते हुए फर्स्ट फ्लोर पर पहुँचता है जहा सुहानी की माइड उसके रूम के बहार hi कड़ी थी ....

सुहानी की एक माइड का नाम नीलम था जो की 26 साल की एक ुनमर्रिएद लड़की थी .... उसका रंग तो गेंहुवा था पर उसके एसेट्स काफी जबरदस्त थे .... इसका काम सुहानी की केयर करना था जैसे उसके कपडे साफ़ करना उसको तैयार करना ेट्स.

सुहानी की दूसरी माइड एक डिवोर्सी थी जिसका नाम रौशनी था .... वो 45 साल की थी ... इसका काम फर्स्ट फ्लोर की साफ़ सफाई करना था .... इसका रंग सांवला था पर ये काफी तीखे नैन नक्श वाली थी .... इसकी बॉडी का मैं अट्रैक्शन था इसकी बड़ी बड़ी चूचिया और मटके जैसी गांड ....

तरुण : hello ma'am ... मैं सुहानी जी का बॉडीगार्ड हु तरुण .... सिंह साहब ने सुहानी जी को पार्टी के लिए बुलाया है ...

नीलम : ok ... मैं अभी बेबी को बुलाती हु ....

और फिर नीलम सुहानी को थोड़े देर बाद साथ लिए आती है .... तरुण तो सुहानी को देख कर आज दूसरी बार सम्मोहित हो गया था ... अभी सुहानी ने एंजेल का ला ड्रेस पहना हुआ था जिसमे वो किसी एंजेल से काम नहीं लग रही थी .... थोड़े देर पहले hi बेऔतीशंस उसको सजा धजा कर गयी थी ....

तरुण (एक हाथ अपनी छाती पर रख अदब से झुकते हुए) : बिर्थडेज़ अरे ा नई स्टार्ट, ा फ्रेश बिगनिंग एंड ा टाइम तो पुरसुए नई इंडीवोरस विथ नई गोल्स. मूव फॉरवर्ड विथ कॉन्फिडेंस एंड करेज. यू अरे ा वैरी स्पेशल पर्सन. मई टुडे एंड आल ऑफ़ योर डेज बे अमेजिंग! ... हैप्पी बर्थडे प्रिंसेस .... यू अरे लुकिंग तू गॉर्जियस ma'am ...

सुहानी (स्माइल करती हुयी) : थैंक्स ा लोट .... यू अरे लुकिंग गुड तू एंड प्लीज don't तेल्ल में ma'am ...

तरुण सुहानी और नीलम को साथ लिए हुए हॉल तक आता है .... शेर सिंह सुहानी को अपने गेस्ट्स से मिलवाता है ... आज पार्टी में आये सभी लोगो की नजरे सुहानी पर hi तिकी थी .... तरुण तो उसका बॉडीगार्ड था तो वो हमेसा सुहानी के आस पास hi रहता था .... पार्टी में आये बहुत से लड़के तरुण की किस्मत से जल भून उठे ....

फाइनली पार्टी ख़त्म होते hi तरुण सुहानी को उसके रूम तक छोड़ आता है और जैसे hi वो जाने को पलटने लगता है सुहानी उसका हाथ पकड़ लेती है ...

सुहानी : सब लोगो ने तो गिफ्ट दिए .... आपका देय रह गया ...

तरुण : सॉरी .... क्या चाहिए आपको गिफ्ट में ...

सुहानी : जो आपको पसंद हो ... ok ... गुड नाईट ...

तरुण : गुड नाईट प्रिंसेस .... एन्जॉय थे स्पेशल नाईट व्हिच बेलोंगस तो यू ...

और फिर तरुण नीचे आ जाता है .... आज की पहली मुलाकात में hi सुहानी को तरुण बहुत ाचा लगा था ... इसकी वजह ये थी की शेर सिंह ने हमेसा से उसको घर की चारदीवारी में कैद रखा था .... उसकी पढ़ाई भी घर पर hi हो जाती थी ... पहले कभी भी कोई लड़का उसकी जिंदगी में आया hi नहीं था .... उसकी लाइफ में आने वाला पहला लड़का तरुण hi था .... इससे पहले जो उसका बॉडीगार्ड था वो अधेड़ उम्र का था जो की काफी स्ट्रिक्ट था ....

घर से निकले हुए तरुण को आज 6 दिन हो गए थे .... वो किस मकसद से घर से निकला था ये बात उसने सिर्फ प्रियांशी और रुचिका को hi बताई थी .... उन्होंने घर में बता दिया था की तरुण कंपनी के ब्रांच को सेट उप करने में लगा हुआ है और उसके पर्पस से वो करीब एक महीने के लिए घर से बहार hi रहेगा ....

उधर दिया अब अपने ससुराल से मायके आयी हुयी थी ... मायके आ कर उसने रहत की सांस ली थी ....

कुछ दिन तरुण ने बिलकुल hi शांति से गुजरे क्यूंकि वो जनता था की कलुआ जरूर उसके ऊपर नजर लगाए बैठा होगा .., तरुण का ज्यादातर वक्त उसके रूम में hi व्यतीत होता था क्यूंकि सुहानी तो ररली hi कही बहार जाती थी ....

एक रात को तरुण की आँखों से नींद hi गायब थी ... उसने बहुत कोसिस की सोने की पर नींद उसकी आँखों से कोसो दूर थी वो अपने रूम से बहार निकल जाता है और अपना गेट सत्ता कर इधर उधर घूमने लगता है की तभी उसको फर्स्ट फ्लोर पर किसी गेट के खुलने की आहात होती है .... कोई धीमे धीमे चलते हुए सीढ़ियों से नीचे आने लगता है तो तरुण सीढ़ियों के अंदर छुप जाता है ....

ये और कोई नहीं सुहानी की माइड रौशनी थी जो ग्राउंड फ्लोर पर hi कलुआ के रूम में घुस जाती है और फिर उनका गेट लॉक हो जाता है .... तरुण को ये समझते देर नहीं लगती की दो अकेले रहने वाले अपोजिट सेक्स के लोग इतनी रात को एक रूम में गेट बंद करके क्या कर रहे होंगे ....

तरुण (मन में) : तो ये है उस हरामी कलुआ की रखैल .... इससे बच कर hi रहना होगा .... तभी तो सोचु की इस डिवोर्सी आंटी का अगवाड़ा और पिछवाड़ा इतना बड़ा बड़ा क्यों है .... जब मोठे तगड़े हठी से छुड़ेगी तो ये तो होगा hi न ....

तरुण अब दबे पाओ अपने रूम आ जाता है ....

तरुण (मन में ) : शेर सिंह की कमजोरी का फायदा उठा कर इस घर में एंट्री तो ले ली है .... अब दुश्मनो से भरे इस घर को तबाह कैसे कर पाउँगा मैं अकेली नन्ही सो जान ... जान से याद आया मेरी जान क्या कर रही होगी .... मैं भी न पागल हु इतनी रात को और क्या कर रही होगी घोड़े बेच कर सो रही होगी और क्या .... दुश्मनो से भरे इस दनवनगरी में एक वही तो है जिसे देख कर दिल क्या आत्मा तक तृप्त हो जाती है .... न जाने घर में सब कैसे होंगे ... क्या मैंने यहाँ आ कर सही किया ???? पता नहीं ... पर अब जब आगे कदम बढ़ा hi लिया है तो दर कैसा .... कैसे भी करके मुझे इस घर को तोडना होगा वर्ण इस घर को तबाह करना इतना आसान काम नहीं है .... अगर एक चूक भी हुयी तो अगले दिन चौराहे पर मेरा सर टेंगा होगा .... सबसे पहले मुझे इस दानव कलुआ का कुछ करना होगा ..... अगर उसको निपटा डाला तो लाइफ उह्ह्ह ला ... ला ....

इधर कलुआ बड़े मज़े से रौशनी की बड़ी सो गांड को पकड़ कर उसकी छूट में अपना लुंड पेले जा रहा था .... कलुआ दिखने में तो काफी हत्ता कट्टा था पर उसका औज़ार बिलकुल एवरेज था .... 6 फ़ीट 5 इंच के इंसान के लुंड का साइज मात्रा 6 इंच का था ...

थोड़े देर की धक्काम पेल के कार्यक्रम के बाद रौशनी कलुआ की बांहो में hi लेट जाती है ....

कलुआ : तुम बहुत मस्त चीज हो यार .... अगर तुम न होती तो पता नहीं मेरी रातें कैसे गुजरती ....

रौशनी : मुझे भी तुम्हारे साथ बहुत मज़ा आता है .... मेरा पति तो नल्ला था जिंदगी का असली मतलब तो तुमने hi मुझे सिखाया है .... आज काफी दिनों बाद तुम्हारे साथ ये सब करने का मौका मिला है ...

कलुआ : बेबी का ये जो नया बॉडीगार्ड आया है ... क्या नाम है उसका हाँ तरुण ... वो कैसा है ....

रौशनी : कैसा है से क्या मतलब है तुम्हारा ... ाचा है नए उम्र का नौजवान है ... काफी होशियार भी है ....

कलुआ : वो तुम्हे कैसा लगता है ...

रौशनी : कमीने तुम कही मुझे उससे छुड़वाने का तो नहीं सोच रहे .... अगर मैंने डाइवोर्स न लिया होता तो उसके जितना मेरा बीटा होता ....

कलुआ : अरे नहीं रौशनी रानी ... मैं ये जानना चाहता हु की उसका नेचर कैसा है एंड आल ... ाचा एक बात बता तू नीलम को मेरे नीचे कब लेता रही है ....

रौशनी : अब आया न कमीने अपनी औकात पर ... घर की और कई नौकरानियों को तो छोड़ता hi है तू उसको तो बक्श दे .... वैसे भी वो तुझे अपनी छूट का मूट भी न दे तो उसको छोड़ने का ख्वाब छोड़ दे ... वैसे भी वो बेबी के बहुत क्लोज है अगर एक बार भी सिंह साहब को इसकी भनक लगी तो तेरा सर कही नाले में पड़ा मिलेगा ...

कलुआ : मेरे अंदर के मर्द को न जगा ... मैं अपने पर आ गया न तो उस नीलम को छोड़ छोड़ कर उसकी छूट और गांड का ढोल बना दूंगा ... साली कभी दाना तक नहीं डालती मुझ पर .... कल देख रहा था वो उस लौंडे तरुण से है है कर बात कर रही थी .... मेरी तो झांटें hi सुलग गयी ....

रौशनी : अरे वो सब छोड़ मैं कोसिस कर hi रही हु जल्द hi उसको तेरे नीचे लिटाने की ... चल अब मैं चलती हु .... Bye

अब रौशनी जल्दी जल्दी अपने कपडे पहन कर दबे पाऊँ अपने रूम आ जाती है जहा नीलम गहरी नींद में सोई हुयी थी ... नींद में होने की वजह से उसके कपडे थोड़े अस्त व्यस्त थे जिन्हे वो ठीक कर देती है .... इतने दिनों से साथ रहते हुए रौशनी नीलम को अपनी बेटी की तरह मैंने लगी थी .... वो कलुआ को अछि तरह से जानती थी की वो कैसा है .... कलुआ की आग को सांत कर एक तरह से वो नीलम की उस दानव से रक्षा कर रही थी ....
 
अपडेट 31

अब रौशनी जल्दी जल्दी अपने कपडे पहन कर दबे पाऊँ अपने रूम आ जाती है जहा नीलम गहरी नींद में सोई हुयी थी ... नींद में होने की वजह से उसके कपडे थोड़े अस्त व्यस्त थे जिन्हे वो ठीक कर देती है .... इतने दिनों से साथ रहते हुए रौशनी नीलम को अपनी बेटी की तरह मैंने लगी थी .... वो कलुआ को अछि तरह से जानती थी की वो कैसा है .... कलुआ की आग को सांत कर एक तरह से वो नीलम की उस दानव से रक्षा कर रही थी ....




आगे

तरुण का घर :

उस दिन वाले इंसिडेंट के बाद ऋचा काफी हद्द तक बदल चुकी थी .... अब तरुण के यु अचानक से चले जाने के बाद वो उसको बहुत मिस कर रही थी .... कुछ ऐसा hi हाल तरुण की माँ कौशल्या का भी था .... अपने बेटे पर किये हुए हर सितम को याद कर उसकी आँखें नाम हो जाती थी ....

तरुण के बड़े चाचा की ऐसी हालत के बाद तरुण की बड़ी चची ने अपने ससुर के साथ जिस्मानी सम्बन्ध बनाना छोड़ दिया था वो अब अपना सारा वक्त अपने पति की सेवा में बिता रही थी .... वो ये भी जानती थी की अब शायद hi वो कभी ठीक हो सकेंगे ....

इस इलेक्शन ने जिसका सबसे ज्यादा नुकसान किया था वो थी श्रुति ... वो अपने पति के जिन्दा होते हुए भी एक विधवा की जिंदगी की रही थी .... राघव कहने को तो ठीक था पर उसके कमर के नीचे का हिस्सा कोई रिस्पांस hi नहीं करता था .... उसको लैट्रिन टॉयलेट करवाने के लिए एक मेल स्टाफ हिरे कर लिया गया था ....

तरुण की मंझली चची को पति की मौत का रत्ती भर भी अफ़सोस नहीं हुआ था वो पहले की hi तरह अपनी लाइफ बिंदास जी रही थी .... पर पति की मौत के बाद से उसके अपने ससुर के साथ जिस्मानी ताल्लुकात रुक गए थे ....

ऋचा अब भी राहुल से बातें तो किया करती थी पर अब उनकी बात चित में पहले जैसी गर्मी नहीं थी .... पर राहुल तो राहुल था वो अब भी तरुण की तीनो सगी बहनो पर तरय तो जरूर करता था .... जिनमे से दोनों जुड़वाँ बहने तो उसको हर बार रेड सिग्नल दिखा देती थी .... एक ऋचा hi थी जो उसको भाव देती थी .... रानी ने अभी तक राहुल को ओरल तक hi सिमित रखा हुआ था ....

अगले दिन इवनिंग को तरुण अपने रूम में बैठा हुआ आराम कर रहा था की घर की एक माइड तरुण के गेट को नॉक करती है ... तरुण गेट खोलता है ...

माइड : आपको मेमसाहब ने बुलाया है अभी ....

तरुण : जी काकी ...

थोड़े देर में तरुण रेडी हो कर शेर सिंह की बीवी के रूम के बहार पहुँच कर गेट नॉक करता है ....

तरुण : की मेमसाहब अपने मुझे बुलाया था क्या ??

मीरा : हाँ बीटा ... दरअसल बात ये है की मेरे भाई के बेटी की शादी है ... सिंह साहब अपने बिजी सचेडूले की वजह से नहीं जा सकते तो मैंने सोचा तुम्हे hi साथ लेती चालू .... हम वह 3 - 4 दिन रुकने वाले हैं तो तुम अपनी पैकिंग कर लो .... हम थोड़े देर में hi निकलेंगे ...

तरुण : सुहानी ma'am भी जा रही हैं क्या ....

मीरा : हाँ सुहानी भी होगी साथ में .... ड्राइवर हमें वह ड्राप करके वापस यहाँ आ जायेगा ....

तरुण : जी मेमसाहब ... मैं तुरंत hi पैकिंग करके आता हु ...

आधे घंटे में सभी लोग गाडी के सामने थे और तरुण और घर के कुछ नौकर सबका लगेज गाडी की बैक सीट में दाल रहे थे ....

सुहानी ने एक पटियाला सूट पहना था जिसमे वो काफी खिल रही थी वही मीरा ने साड़ी पहनी हुयी थी जिसके ब्लाउज का गाला थोड़ा डीप था जो की पीछे सिर्फ डोरी से बंधी हुयी थी ....

शेर सिंह (तरुण से) : देखो तरुण तुम्हे अपनी वफादारी साबित करने का पहला मौका दिया जाता है ... इस टूर पर कलुआ भी तुम्हारे साथ होगा .... हम जानते हैं की तुम काफी होशियार और अचे फाइटर हो पर हमारे काफी दुश्मन हैं तो कभी भी घाट लगा सकते हैं इसलिए कलुआ भी तुम्हारे साथ जायेगा .... और हमारी जिंदगी की सबसे बहुमूल्य चीजें इस वक्त तुम्हारे हवाले कर रहा हु .... उम्मीद है की तुम हमें नीरस नहीं करोगे ...

तरुण : सर अपने सिर्फ मुझे नयी जिंदगी hi नहीं दी है बल्कि अपने परिवार में शामिल भी किया है .... अब बेफिक्र रहे मैं अपनी जान देकर भी इनकी हिफाज़त करूँगा ... मैं तो कह रहा हु की कलुआ सर को क्यों कास्ट दे रहे हैं .... यहाँ आपकी सुरक्षा के लिए भी तो किसी को होना चाहिए ....

शेर सिंह : कलुआ तुम्हे वह ड्राप करके ड्राइवर के साथ वापस लौट आएगा ....

तरुण : जी सर जैसी आपकी मर्जी ....

सामान रखने के बाद फ्रंट सीट पर कलुआ ड्राइवर के साथ बैठ जाता है .... वैसे कलुआ के हो से तरुण को एक फायदा तो हुआ की उसको पीछे वाली सीट पर शेर सिंह की वाइफ या बेटी के साथ बैठना था ....

सुहानी ने विंडो सीट की प्रेफर किया इसलिए मीरा बीच में बैठ गयी और दूसरी विंडो सीट पर तरुण बैठ गया ....

इन्हे घर से निकलते निकलते hi 9 बज गए थे .... ड्राइवर ने गाडी की हेडलाइट छोड़ कर बाकि साडी लाइट्स बंद कर दी थी ....

जैसे जैसे गाडी आगे बढ़ रही थी सबकी आँखों पर नींद ने अपना कब्ज़ा जमाना सुरु कर दिया था .... सुहानी तो मिरर पर अपना सर टिका कर सो गयी ... कलुआ भी आदत से मजबूर खर्राटे लेते हुए सो रहा था ...

मीरा नींद में तरुण के कंधे पर अपना सर टिका कर सो रही थी .... तरुण और ड्राइवर ये दो शक्श hi थे जो जाग रहे थे .... ड्राइवर तो प्रोफेशनल था और तरुण दिन में खूब सोया था जिसके वजह से उसको नींद नहीं आ रही थी ...

मीरा के बाल हवा में इधर उधर होकर कभी कभी तरुण के चेहरे से टकरा रही थी .... मीरा के बालो से आती भीनी भीनी खुसबू से तरुण मस्त हो रहा था ....

उसका तो मन कर रहा था की मीरा के नींद का फायदा उठा कर उसके साथ कुछ नॉटी कर लिया जाये पर उसकी हिम्मत hi नहीं हो रही थी .... इसी उधेड़बुन में कब तरुण की आँख लग जाती है पता hi नहीं चलता ....

गाडी के जोर से हिलने से तरुण की नींद खुलती है ...

तरुण : क्या हुआ ड्राइवर काका ...

ड्राइवर : वो बीटा आगे एक बड़ा सा ब्रेकर थे जिसके वजह से गाडी हिल गयी ... अब बस हम पहुँचने hi वाले हैं 10 - 15 मिनट के अंदर ....

तरुण अब मीरा की तरफ ध्यान देता है तो वो अब सीढ़ी होकर सीट पर बैठी हुयी सो रही थी जबकि सुहानी अभी अपनी माँ के कंधे पर सर रख कर सो रही थी ...

3 बजे रात को उनकी गाडी एक बड़े से हवेलीनुमा घर के सामने कड़ी थी ...

तरुण (मीरा को हिलाते हुए) : मेमसाहब उठिये हम पहुँच गए ....

मीरा हड़बड़ा कर उठती है और सुहानी को भी उठा देती है .... गाडी में होती हलचल से कलुआ की नींद भी खुल जाती है ....

इंट्रोडक्शन तो सम नई करैक्टर :

शौर्य सिंह : मीरा के बड़े भैया , आगे 45 इयर्स, इनकी वाइफ का देहांत हो गया है

करुणा सिंह : शौर्य सिंह की बेटी, ये मैरिड है, आगे 26 इयर्स

विकास सिंह : शौर्य सिंह का बीटा, आगे 24 इयर्स, ये डॉक्टर है

केतन सिंह : मीरा का छोटा भाई ... आगे 40 इयर्स ... मीरा इसको प्यार से केतु कहती है ....

दिव्या सिंह : केतन की वाइफ ... आगे 39 इयर्स ...

भैरवी सिंह : आगे 21 इयर्स, इसकी hi शादी है, ये स्वाभाव से काफी चुलबुली है

ये मीरा के पुरखो की पुश्तैनी हवेली है ... इसमें hi उसका पूरा बचपन बीता था ... मीरा के दोनों भाई इकट्ठे इसी हवेली में रहते हैं ....

मीरा ने पहले hi फ़ोन करके बता दिया था इसलिए उसके बड़े भैया फ़ोन की पहली रिंग के साथ hi उठ जाते हैं ....

थोड़े hi देर में घर के मैं एंट्रेंस से एक एवरेज आगे का आदमी बहार निकलता है जो की मीरा के बड़ा भाई शौर्य सिंह थे .... मीरा किसी बच्चे की तरह फुदकती हुयी उसके गले लग जाती है ...

कुछ देर के बाद दोनों अलग होते हैं उसके बाद सुहानी उन्हें प्रणाम करती है ....

तरुण और कलुआ पीछे से उनके लगेज लेकर अंदर आता है .... मीरा का मायका दो फ्लोर का था ... फर्स्ट फ्लोर पर hi शौर्य सिंह और केतन सिंह का कमरा था .... मीरा को भी ग्राउंड फ्लोर पर hi रुकवाया गया .... फर्स्ट फ्लोर पर घर के सभी बच्चे रहते थे तो सुहानी को भी वही रुकवाया गया .... सेकंड फ्लोर पर 2 रूम्स बनवाया गया था .... उनमे से hi एक रूम तरुण को दिया गया था ...

सुबह होते hi कलुआ और ड्राइवर लौट गए .... अगले दिन से शादी की सभी रश्मि सुरु होने वाली थी इसलिए आज रेस्ट डे था .... तरुण साडी रात जगा हुआ था इसलिए वो काफी देर तक सोता रहा .... मीरा ने भी उसको डिस्टर्ब करना सही नहीं समझा ....

तरुण की नींद रूम में हो रही खत पैट से खुलती है .... वो उठ कर देखता है तो पता है की दो चूहे आपस में लड़ रहे थे मनो वो तरुण का इंटरव्यू लेने आये हो और उसको सोता देख आपस में hi भीड़ लिए ... तरुण ने जब अपने मोबाइल में टाइम देखा तो उसकी चीख निकल गयी क्यूंकि अभी 11:30 ऍम हो रहे थे ...

तरुण (मन में) : OMG आज तो लगता है मैंने कुम्भकर्ण का भी रिकॉर्ड तोड़ डाला ... नया घर है लोग क्या कहेंगे की कैसा बॉडीगार्ड है दोपहर तक सो रहा है ...

वो जल्दी से जाकर फ्रेश होता है सर रेडी हो कर रूम से निकलता है अभी 1 पं हो रहे थे ...

जब वो ग्राउंड फ्लोर पर आता है तो घर के सभी लोग वही मौजूद थे ... सभी लोगो की नजर उसके ऊपर hi टिक गयी जैसे उन्होंने कोई भूत देख लिया हो ... मीरा ने जब सबको यु तरुण को घूरते पाया तो है कर बोलना सुरु किया ....

मीरा : आप लोग उसको ऐसे क्यों घर रहे हो ... वो सुहानी का बॉडीगार्ड है ... उसका नाम तरुण है .... और तरुण ये है मेरी छोटी सी फॅमिली ...

और फिर मीरा एक एक करके सबका इंट्रोडक्शन करवाती है ...

भैरवी जो की सुहानी के साथ सोफे पर बैठी हुयी थी ...

भैरवी (धीरे से) : वह छोटी ... फूफा जी में तेरे लिए ाचा खासा हैंडसम सा बॉडीगार्ड ढूंढ दिया है .... मूवी की तरह कही इसके साथ सेट न हो जइयो ...

सुहानी : चुप करो दीदी ... क्या क्या बक रही हो ... अभी तो इसको ज्वाइन किये कुछ hi दिन हुए हैं ....

मीरा : तो बीटा नींद खुल गयी अचे से या अभी और सोना है ....

तरुण : सॉरी मेमसाहब ... वो रात में काम सोया था तो जोरो की नींद लग गयी ...

मीरा : अरे मैं दांत नहीं रही बस पूछ रही हु ... भूक तो लगी होगी जोर से ... और ये बार बार मुझे मेमसाहब न बोलै करो ... मैं तुम्हे अपना फॅमिली मेंबर मानती हु ... तुम मुझे आंटी कह सकते हो ...

तरुण : जी आंटी ...

मीरा तरुण को एक नौकर के साथ भेज कर खाना खाने के लिए कह देती है ....

इवनिंग को bhairavi,suhani को साथ लेकर मार्किट जाने की प्लानिंग करती है तो मीरा तरुण को भी उनके साथ भेज देती है ...

तरुण ड्राइवर के साथ बैठ जाता है और बाकि दोनों लड़किया पीछे बैठ जाती है ...

भैरवी : यार बुआ तुझे इसके बिना कही जाने नहीं देती क्या .... सोचा था तेरे साथ पार्टी करुँगी और खूब मस्ती करुँगी पर नहीं .... कबाब में हड्डी बनने के लिए इसको भेज दिया ....

सुहानी : दीदी धीरे बोलो वो सुन रहा होगा ....

भैरवी : सुनता है तो सुने मेरी बाला से मैं डर्टी हु क्या उससे ....

सुहानी : दीदी ... बस चुप हो जाओ वर्ण मैं अभी गाडी घर घूमने को कह दूंगी ...

भैरवी : ाचा बाबा नहीं कहती उसको कुछ .... (ड्राइवर से) भैया गाडी ****** मॉल के सामने रोकना ...

ड्राइवर : ok मैडम ...

कुछ देर में hi गाडी मॉल के सामने कड़ी थी ....

तरुण : मैडम आप लोग अंदर जाकर शॉपिंग कर लो मैं एहि बहार रुकता हु ... अगर कोई प्रॉब्लम हो तो कॉल कर लेना मेरा नंबर तो है न आपके पास ...

भैरवी : ठीक है ठीक है .... ये लो 10 रूपीस टॉफ़ी खा लेना .... वैसे तेरी हालत देख कर तो लगता है की पैसे तो होंगे नहीं तेरे पास ....

सुहानी : दीदी ये कुछ ज्यादा नहीं हो रहा है .... कोई आपके घर आया है इसका ये मतलब नहीं की आप उसकी बेइज्जती करो ... वो मेरे वजह से चुप है वर्ण वो भी जवाब दे सकता है ... अपने 10 रूपीस अपने पास रखो ...

भैरवी : तुम उसकी इतनी तरफदारी क्यों कर रही हो ... नौकर hi तो है वो तुम्हारा .... मैं तो अपने घर के नौकरो से ऐसे hi बेहवे करती हु ....

सुहानी : मैं तो ऐसा नहीं मानती ... सब की कोई न कोई मज़बूरी होती है .... आप तरुण के बारे में क्या जानती हो ... वो एक अचे घर का लड़का है .... एक हादसे में उसने अपनी फॅमिली को खो दिया है .... उसको एक फॅमिली की जरुरत थी और मुझे एक दोस्त की जो मेरी हिफाज़त कर सके क्यूंकि मेरे पापा के ढेरो दुश्मन हैं तो वो नहीं चाहते थे की मैं आगे किसी प्रॉब्लम में न फासु .... और सबसे बड़ी बात तो ये है की उसने मेरी और मेरी माँ की जान बचायी है और मैं इतनी खुदगर्ज़ नहीं हु ...

भैरवी को अपनी गलती का एहसास हो जाता है ...

भैरवी : सॉरी छोटी उम्र में तो मैं तुमसे तो बड़ी हु पर तुमने मुझे जिंदगी की सबसे बड़ी सीख दे दी है ... हमारे अंदर इंसानियत होनी चाहिए ....

सुहानी : सॉरी मुझसे नहीं उससे कहो जिसका अपने अपमान किया है ...

भैरवी : सॉरी तरुण ... मैं बहुत बुरी हु मुझे माफ़ कर दो ..... अब मैं किसी से भी ऐसे रूडली बात नहीं करुँगी ...

तरुण को सच में भैरवी पर बहुत गुस्सा अस रहा था पर वो अपने मकसद और सुहानी के लिए चुप था वर्ण वो आज भैरवी को सुधरने के फुल मूड में था .... सुहानी हर एक गुजरने वाले दिन के साथ उसके दिल में अपनी छाप छोड़ रही थी ... उसके पास न सिर्फ बाहरी खूबसूरती थी बल्कि वो दिल की भी बहुत अछि थी उसका एक नमूना आज तरुण ने देख लिया था ....

अब जब भैरवी ने अपनी गलती काबुल कर ली थी तो वो क्या जवाब देता ...

तरुण : कोई बात नहीं ma'am ...

भैरवी : ऐसे नहीं तुम भी हमारे साथ चलो ... अगर नहीं गए तो मुझे लगेगा की तुमने मुझे माफ़ नहीं किया ...

सुहानी : हाँ तरुण चलो न ...

तरुण सुहानी को तो न नहीं कह सकता था इसलिए वो भी उनके साथ मॉल के अंदर आ जाता है ....

ये मॉल सहर के एक पॉश इलाके में बना हुआ था इसलिए काफी अचे तरीके से बनाया गया था ...

तरुण मॉल की खूबसूरती को देखता हुआ आगे बढ़ रहा था की वो किसी से टकरा जाता है ....

....... : उफ़ देख कर नहीं चल सकते क्या .... अरे तरुण तुम यहाँ .... व्हाट ा कोइंसिडेन्स ....



उसको देख तरुण भी थोड़ा शॉक हो जाता है ....
 
अपडेट 32

तरुण मॉल की खूबसूरती को देखता हुआ आगे बढ़ रहा था की वो किसी से टकरा जाता है ....




....... : उफ़ देख कर नहीं चल सकते क्या .... अरे तरुण तुम यहाँ .... व्हाट ा कोइंसिडेन्स ....

उसको देख तरुण भी थोड़ा शॉक हो जाता है ....

आगे

शॉक होने की वजह ये थी की जिससे वो अभी टकराया था वो और कोई नहीं शहनाज़ थी (िफ़ नॉट रेमेम्बेर रीड अपडेट 20) जिसके साथ तरुण ने ट्रैन में मस्ती की थी ....

अब तक सुहानी और भैरवी आगे जा चुकी थी ....

तरुण : व्हाट ा प्लीजेंट सरप्राइज शहनाज़ जी ... It's ा स्माल वर्ल्ड हम फिर से मिल गए ... कैसी हो आप और किसके साथ आयी हो ....

शहनाज़ : तुमसे मिल कर मुझे भी बहुत ख़ुशी हुयी तरुण .... और मैं ठीक हु ... मैं अपनी बेटी के लिए ड्रेसेस लेने आयी थी ...

तरुण : नीस ...

शहनाज़ : सॉरी यार मुझे अब जाना होगा ... आज हमें एक पार्टी में जाना है ... मैं पहले hi काफी लेट हो गयी हु .... ये लो मेरा कार्ड कॉल करना रात में .... फिर कही मिलते हैं आराम से ....

शहनाज़ अपना कार्ड तरुण को थमा कर वह से निकल जाती है ....

उसके जाने के बाद तरुण इधर उधर देखता है तो सुहानी का कोई अत पता नहीं दीखता ... वो इधर उधर सुहानी को ढूंढ hi रहा था की उसका मोबाइल बज उठता है कॉल सुहानी का hi था .... सुहानी उसको फर्स्ट फ्लोर के एक शॉप में बुलाती है ...

तरुण जल्द से hi वह पहुँचता है ...

सुहानी : कहा खो गए थे ... मैं कब से तुम्हे ढूंढ रही थी ...

तरुण : वो पता नहीं चला आप लोग अचानक से कहा गम हो गयी थी ....

भैरवी : ाचा अब बस भी करो ... चलो अंदर चलते हैं ...

सुहानी और भैरवी तरुण को एक कपड़ो के शॉप पर ले जाती है और उसके लिए कुछ ड्रेसेस चूसे करती है .... तरुण तो बहुत न नुकुर करता है पर लड़कियों के सामने किसकी चली है .... आख़िरकार दोनों ने उसके लिए 3 पेअर ड्रेसेस ख़रीदे ....

सुहानी और भैरवी ने भी अपने लिए 2 - 2 ड्रेस लिए ... सारा बिल का पेमेंट भैरवी hi करती है ...

भैरवी : चलो पहले ये बैग्स गाडी में रख आते हैं उसके बाद कुछ खा भी लेंगे ... वैसे भी अब मेरी आज़ादी के कुछ hi दिन बचे हैं ... ये कुछ दिन मैं फुल्ली अपने तरीके से जीना चाहती हु ...

सुहानी : तो मेरे जीजू कौन से सर्कस के रिंगमास्टर होंगे जो अपने इशारो पर आपको नाचते रहेंगे ...

भैरवी : वो तो है पर फिर भी शादी के पहले की लाइफ और बाद की लाइफ में अंतर तो होता hi है न ...

तब तक वो लोग गाडी के पास आ जाते हैं ... तरुण सरे शॉपिंग बैग्स को गाडी की बैक सीट पर रख देता है .... ड्राइवर अभी भी गाडी में बैठा मोबाइल पर लगा हुआ था ...

भैरवी ड्राइवर को गाडी एक रेस्टोरेंट पर रोकने को कहती है ये रेस्टोरेंट वह से कुछ दूर पर था मैं सिटी से दूर .... जिसके वजह से वह पर ज्यादा भीड़ नहीं रहती थी पर वह का खाना बहुत ाचा होता था ...

भैरवी : भैया चलिए साथ में कुछ खा पि लेते हैं फिर आराम से घर जायेंगे ...

ड्राइवर : जी नहीं मेमसाहब .... मैं बहार का खाना नहीं खता मुझे सूट नहीं करता ... आप लोग जाओ ..

वो लोग रेस्टोरेंट में एंटर करते हैं ... कुछ hi देर में उनका आर्डर आ जाता है ... खाना खाने के बाद सुहानी और भैरवी ने आइस क्रीम का आर्डर दिया तो तरुण ने अपने लिए आर्डर करने से मन कर दिया ... वजह थी की उसके मोबाइल पर शेर सिंह का कॉल आ रहा था ...

तरुण : आप लोग आइस क्रीम खाओ तब तक मैं जरा सर से बात कर लेता हु उनका कॉल आ रहा है ...

सुहानी और भैरवी बैठी आपस में बातें कर रही थी की 3 - 4 आवारा लड़के रेस्टोरेंट में घुसते हैं ... सुहानी और भैरवी को अकेले में बैठा देख वो उनके पास आते हैं ...

लड़का 1 : उफ़ क्या लड़किया है यार .... ऐसी लड़की मिल जाये तो जिंदगी hi संवर जाये ...

लड़का 2 : ए लड़की हमारे भाई का दिल तुमलोगो पर आ गया है .... चलो हमारे साथ एक रात का इतना पैसा दूंगा की तुम गिनते गिनते थक जाओगी ...

सुहानी : ये क्या बदतमीज़ी है ... अपने पैसो का रॉब कही और जमाओ ...

लड़का 3 : हाय डार्लिंग यू रियली नैलेड आईटी ... ये सिर्फ खूबसूरत दिखती hi नहीं हैं बल्कि इनकी जुबान भी काफी तेज़ है ... कोई नहीं मुझे तुम्हारी हर अदा पसंद आयी मेरी रानी ....

भैरवी : कमीने सीधे सीधे कहती हु यहाँ से दूर हैट जा वर्ण मैं एक कॉल लगाउंगी तो तुमलोग कही गटर में पड़े मिलोगे ....

लड़का 4 : बस कर पगली हम तो दर गए ...

और फिर लड़का 4 भैरवी के बालो को सहलाने लगता है और उसके गालो पर भी अपनी उंगलिया फिरने लगता है ... भैरवी न तो ॉव देखती है न टो उस लड़के के गाल पर पंजे का नीसाण चिपका देती है .... थप्पड़ इतना झन्नाटेदार था की लड़का 4 का दिमाग hi चाँद लम्हो के लिए सुन्न हो जाता है ...

तब तक रेस्टोरेंट के एक दो स्टाफ उन्हें मन करने के लिए पहुँच जाते हैं पर उन् लड़को की धमकी सुन पीछे हैट जाते हैं ... रेस्टोरेंट में आये हुए लोग भी जल्दी जल्दी खिसक लेते हैं ....

2 लड़के एक साथ भैरवी पर टूट पड़ते हैं ... भैरवी तो थी आखिर के लड़की hi न दो बदमाश लड़को का कब तक सामना कर पति .... दोनों लड़को ने उसके दोनों हाथ पकड़ रखे थे और उन्होंने उसको दीवार से चिपका दिया ....

लड़का 1 : चल भाई जल्दी से आ जा ... आज साली की साडी गर्मी उतर दे .... इसने तुझे थप्पड़ मारा है ... आज एहि पर इसका रपे कर दे ....

लड़का 4 भैरवी की चुनरी को खींच कर हटा देता है ... भैरवी के सूट का गाला थोड़ा डीप था जिसके वजह से चुनरी के हटने के साथ hi उसका क्लीवेज देख सभी लड़को की आँखों में चमक आ जाती है ...

वही सुहानी एक कोने में कड़ी काँप रही थी ... उसके लिए ये सब बिलकुल नया था ....

लड़का 4 पहले तो भैरवी के गालो पर 5 - 6 करारे थप्पड़ लगता है और फिर भैरवी के दूध को दोनों हाथो में पकड़ कर जोर से मसल देता है जिससे वो दर्द के मरे काफी जोर से सिसक उठती है ....

लड़का 4 अब बिलकुल हैवानियत पर उतर आया था .... उसने भैरवी के सूट को पकड़ कर जोर से खींच दिया जिससे वो चर्रर्र ... की आवाज़ के साथ पहात जाती है .... अब भैरवी के सरीर के ऊपरी हिस्से में सिर्फ ब्रा बची थी ... भैरवी छूटने का भरसक प्रयास कर रही थी पर बिचारि लचर थी ....

लड़का 4 अब भैरवी की ब्रा पर हाथ दाल कर उसको खींचने जा रहा था ... रेस्टोरेंट में मौजूद लोगो के मिक्स्ड रिएक्शन थे जहा कुछ लोग ब्रा के नीचे की कलाकृति देखने को उत्सुक थे तो वही सुहानी मन रही थी की कोई चमत्कार हो जाये जिससे भैरवी की इज्जत बच जाये ....

ठीक तभी जैसे ऊपर वाले ने सुहानी की सुन ली हो ... लड़का 4 हवा में उड़ता हुआ पास के बेंच पर गिर जाता है ..... भैरवी के जिस्म पर ब्रा अब भी मौजूद थी .... सुहानी और भैरवी ने जब सामने देखा तो पाया की वह तरुण खड़ा था जो की मुठ्ठिया भींचे गुस्से में उबाल रहा था ...

तरुण : मर्द हो तो मर्द से लड़ो ... यु लड़कियों के सामने क्या मर्दानगी दिखा रहे हो ...

जो लड़के भैरवी को पकडे हुए थे वो तरुण की तरफ बढे ... तरुण पहले से hi रेडी था उसने झुक कर एक लड़के के पेट पर एक जबरदस्त मुक्का मारा जिससे वो दर्द से कराहता हुआ जमीन पर लौटने लगा ... दूसरे लड़के का वार तरुण के झुक जाने से खली चला गया ... अब तरुण ने खड़ा होते हुए एक जोर दर बैककिक मरी जिससे वो लड़का लड़खड़ाते हुए दीवार से टकरा जाता है ...

तरुण जल्दी से अपना शर्ट खोल कर भैरवी के अधनंगे जिस्म को धक् देता है ... ठीक तभी लड़का 2 तरुण को जोर से धक्का दे देता है जिससे तरुण लड़खड़ा कर गिर जाता है ....

भैरवी जल्दी जल्दी तरुण के शर्ट को पहन कर बटन लगाने लगती है ....

तरुण खड़ा होता इससे पहले hi चारो लड़के उसके ऊपर एक साथ टूट पड़ते हैं ....

ठीक तभी सुहानी हिम्मत जूता कर ुमने से एक लड़के के सर पर जोर से डंडा मरती है ...

तरुण ने बरी बरी से उनमे से दो लड़के के पाओ से पकड़ कर उसको धक्का दे दिया जिससे वो दूर जा गिरे ...

अब तरुण झटके से खड़ा हो जाता है और बाकि बचे एक लड़के को लात घूंसो से मार कर बेहोश कर देता है ... अभी चारो लड़के जमीन पर पड़े थे ....

तरुण जल्दी से अपना बेल्ट निकलता है और पागलो की तरह उन् चारो लड़को पर बरसाने लगता है ... बेल्ट की मार से चारो लड़के अधमरे हो जाते हैं ....

तरुण (भैरवी को बेल्ट देते हुए) : मैडम अब आप अपना बदला ले सकती हो ....

भैरवी तो बेल्ट पकड़ कर उन्हें मार मार कर lahu-luhan कर देती है ....

तरुण : अब बस छोड़ दीजिये वर्ण ये मर जायेंगे .... इन्हे इनके किये की सजा मिल गयी है ....

भैरवी तरुण को उसका बेल्ट थमा देती है ... वो तीनो रेस्टोरेंट से बहार जाने लगते हैं की तभी भैरवी वापस आती है और लड़का 4 के पाओ के बीच में एक जोर का किक मरती है जिससे वो बेहोशी की हालत में भी चीखते हुए बैठ जाता है .... किक इतना जोरदार था की शायद उसके अंडे न फुट गए हो ....

तरुण : अब तो आप खुस हो न मैडम ...

भैरवी : बहुत खुस हु ...

तरुण (भैरवी से ) : मैडम आप कोई दूसरा ड्रेस पहन लेना ... घर में अगर किसी को पता चलेगा तो बेकार की बात बढ़ेगी ...

भैरवी तरुण के गाल को हल्का सा चुम लेती है ...

भैरवी (रुंधे गले से ) : मैंने तुम्हारी कितनी बेइज्जती की पर तुमने आज मेरी इज्जत बचा ली ... अगर तुम वक्त पर न आये होते तो मैं किसी को मुँह दिखने के लायक न रहती ...

तरुण : ये तो मेरा फ़र्ज़ था मैडम .... वो तो आपके फूफा जी की वजह से देर हो गयी वर्ण आपको इतनी भी जिल्लत नहीं झेलनी पड़ती .... अब चलते हैं काफी रात हो गयी है घर पर लोग परेशान हो रहे होंगे ...

सुहानी को अभी अपने बॉडीगार्ड पर नाज़ हो रहा था ...

वो लोग गाडी के पास पहुँचते हैं तो पते हैं की ड्राइवर गाडी लॉक करके सरे लाइट्स बंद करके फुल वॉल्यूम में गाने सुन रहा है ...

भैरवी गाडी से एक ड्रेस लेकर रेस्टोरेंट के वाशरूम में जाकर चेंज कर लेती है .... और तरुण को उसका शर्ट लौटा देती है ....

आधे घंटे में वो लोग घर आ जाते हैं .... अभी घर के ज्यादातर मेंबर्स सो गए थे इसलिए उनसे ज्यादा सवाल जवाब नहीं किये जाते हैं .....

भैरवी को आज सपने में भी तरुण hi तरुण नजर आ रहा था उसके लिए फाइटिंग करते हुए ....

रात में तरुण शहनाज़ को कॉल लगता है .... वो तुरंत hi कॉल पिक कर लेती है ...

तरुण : hello शहनाज़ जी मैं तरुण बोल रहा हु ...

शहनाज़ : हाँ तरुण बोलो मैं तुम्हारे कॉल का hi इंतजार कर रही थी ...

तरुण : क्यों मैडम आज आपके सौहार नहीं है क्या पास में जो मुझे मिस कर रही थी ....

शहनाज़ : ऐसी बात नहीं ... लास्ट टाइम तुमसे कांटेक्ट नंबर एक्सचेंज करने का वक्त नहीं मिला था तो इस बार ये मौका मैंने गंवाना सही नहीं समझा ... रही बात मेरे सौहार के होने न होने का तो वो आज यहाँ नहीं हैं ... कैसे हो ....

तरुण : ी ऍम फाइन ... यानि की आप अकेली हो आ जॉन क्या ....

शहनाज़ : that's फनी ..,. वैसे ट्रैन में हमारे बीच जो कुछ भी हुआ था तहत वास् अवेसमे ... उतना मज़ा शायद hi पहले कभी मिला हो ....

तरुण : तहत वास् माय फर्स्ट टाइम ....

शहनाज़ : यानि की मैं पहली फीमेल हु जिसने तुम्हारी विर्जिनिटी ली थी ....

तरुण : की हाँ ...

शहनाज़ : that's अमेजिंग .... तो उसके बाद और कही मज़ा लिए या नहीं ....

तरुण (साद टोन में) : no यार ....

शहनाज़ : तब तो हमें जल्द hi मिलना होगा ... मेरे स्टूडेंट को अभी और भी बहुत कुछ सीखना है मुझे .... Don't वोर्री मैं देखती हु कुछ .... बाकि बातें मिल कर करते हैं .... गुड नाईट स्वीटहार्ट ... ूउम्मम्माह्ह्ह

तरुण : गुड नाईट शहनाज़ जी ...

उसके बाद तरुण भी सो जाता है ....

अगली सुबह को तरुण का गेट नॉक होता है ... वो उठ कर गेट खोलता है तो उसको अपनी आँखों पर भरोषा नहीं होता है ... वह आँखें साफ़ कर फिर से देखता है ....

भैरवी : ऐसे आँखें मिंज कर क्या देख रहे हो .... मैं तुम्हे जगाने आयी हु ... चलो मॉर्निंग वाक पर नहीं चलना क्या ...

तरुण : आप भी मॉर्निंग वाक पर जाती हो क्या .... आज आपके शादी के रश्मि सुरु होने वाली है ....

भैरवी : तो क्या हुआ शादी सुरु होने वाली है तो जीना छोड़ दू .... तुम चल रहे हो या मैं अकेली जॉन ...

तरुण : आपके घरवाले आपको मेरे साथ ऐसे अकेले में देख कर गुस्सा नहीं होंगे क्या ...

भैरवी : जी नहीं ....

तरुण : ठीक है आप वेट करो मैं फ्रेश हो कर अभी आया ...

देर में तरुण रेडी होकर नीचे आता है जहा भैरवी उसका वेट कर रही थी उसने एक टाइट टॉप और टाइट ट्रॉउज़र पहना हुआ था .... ट्रॉउज़र टाइट होने की वजह से उसके पिछवाड़े का जो व्यू दिख रहा था वो काफी इरोटिक था ...

दोनों साथ साथ चलने लगते हैं ... उनके घर से वाकिंग डिस्टेंस पर hi एक पार्क था जहा लोग सुबह और शाम को अपना मन बहलाने के लिए जाया करते थे ...

तरुण : एक बात कहु मैडम बुरा मत मन्ना ...

भैरवी : ok बोलो ...

तरुण : लगता है आज आप इस पार्क में आग लगाने के मूड में आयी हो ... आस पास देखो सब लोग आपको hi घर रहे हैं ....

भैरवी : मैं तो पहले भी आती थी यहाँ वो भी अकेले ... आज तक तो कभी कोई पन्गा नहीं हुआ यहाँ और आज तो मेरा बॉडीगार्ड भी साथ है कोई भीड़ के तो दिखाए ... 😂😂😂

तरुण : चलिए जिस काम के लिए आये हैं वो तो करे ...

भैरवी और तरुण धीरे धीरे जॉगिंग करने लगते हैं और फिर कुछ एक्सरसाइज करके वो वापस घर को लौट जाते हैं ...

वो लोग जब घर में एंटर लेते हैं उस वक्त करुणा वही हॉल में बैठी हुयी थी .... उसको देख तरुण और भैरवी ने उसको मॉर्निंग विश किया .... करुणा शादी के बाद थोड़ी चब्बी टाइप की हो गयी थी उसको मोती कहना तो सही नहीं होगा ....

करुणा : अरे भैरवी आज तेरी शादी की रश्मि सुरु होने वाली है अब तो ये एक्सरसाइज वगैरह छोड़ दे ...

भैरवी : तो क्या हुआ दी .... शादी अपनी जगह है और फिटनेस अपनी जगह ...

तरुण : सही कहा अपने मैडम जो इंसान फिट होता है वही ाचा लगता है ...

तरुण की बात पर करुणा उसको घर कर देखती है .... उसको खुद को यु घूरता पाकर तरुण की सिटी पित्ती गम हो जाती है उसको लगने लगा की पक्का करुणा को लगा होगा की वो उसका मजाक बना रहा है ...

भैरवी तो पहले hi सीढ़ियों चढ़ कर अपने रूम जा चुकी थी ....



करुणा : ए लड़के तुमने क्या कहा फिर से बोलो तो ....
 
अपडेट 33

भैरवी तो पहले hi सीढ़ियों चढ़ कर अपने रूम जा चुकी थी ....


करुणा : ए लड़के तुमने क्या कहा फिर से बोलो तो ....

आगे

तरुण (घबराते हुए) : वो ... मैंने तो कहा की फिट लोग hi ज्यादा अचे होते हैं उन्हें बीमारिया भी काम होती है ... मैंने आपके बारे में नहीं कहा मैडम मैं अस ा जनरल व्यू दे रहा था ...

करुणा : डरो मत मैं तुम्हे दांत नहीं रही ... तुम तो काफी फिट हो क्या तुम मुझे भी फिट रहने के लिए कुछ एक्सरसाइज बता सकते हो ....

तरुण : क्यों नहीं मैडम ... मुझे तो ख़ुशी होगी अगर मैं आपके कुछ काम आ पाया ....

करुणा : अभी तो नहीं इवनिंग से सुरु करना ... शादी के बाद मैं सुहानी के साथ वही आउंगी 10 - 15 दिनों के लिए ... वह अचे से सीखा देना ...

तरुण : जी मैडम ... जैसा आप ठीक समझे ...

उसके बाद कुछ खास नहीं होता ... ब्रेकफास्ट के बाद तरुण विकाश के साथ शादी के कामो में लग जाता है क्यूंकि यंग जनरेशन में मलेस के नाम पर वो hi एकमात्र शक्श था तो मीरा ने तरुण को भी उसके साथ कर दिया ....

रात को घर में मेहँदी का कार्यक्रम होने वाला था तो आज कोई खास काम नहीं था तरुण को ... इवनिंग को करुणा में इशारे से उसको अपने रूम में बुलाया ...

करुणा : तो सुरु करे अपना प्रोग्राम .... आज टीम मुझे ड्रेस और कुछ बेसिक चीजें बता दो .... मॉर्निंग से अचे से स्टार्ट करते हैं ...

तरुण : जी मैडम ....

करुणा : ये तुम मुझे बार बार मैडम मत कहा करो ... तुम चाहो तो मुझे मेरे नाम से बुला सकते हो ...

तरुण : मैं आपका नाम कैसे ले सकता हु आप मुझसे उम्र में बड़ी हो ....

करुणा : ok तुम मुझे दीदी कह कर बुला लेना ....

तरुण : जी मैडम ... ोूपसस दीदी ...

तरुण : सबसे पहले आप मुझे अपना वेट बताओ .... और ये बताओ की आपको कितना वजन काम करना है ....

करुणा : लास्ट टाइम तो मैं 86 कग की थी .... बस मुझे इतना पतला कर दो की मैं फिट लोगो की केटेगरी में आ सकू ....

तरुण : इस कपडे में सही से आपके बॉडी शेप का अंदाज़ा नहीं लगा सकता .... इसलिए आप टॉप और ट्रॉउज़र पहन लो ताकि मैं सही से आपको बता सकू की किस जगह पर आपके ज्यादा फैट हैं और कौन सा एक्सरसाइज आपको ज्यादा सूट करेगा ....

करुणा : अभी तो मेरे पास वैसा ड्रेस नहीं है ... आज hi मैं शॉपिंग कर लुंगी don't वोर्री ...

तरुण : आपके पति अभी तक शादी में नहीं आये हैं क्या ...

करुणा : बिज़नेस मन हैं वो तो टाइम काम मिलता है ... वो डायरेक्ट शादी वाले hi दिन आएंगे .... तुम्हारे बारे में मीरा बुआ ने सब कुछ बताया .... तुम्हारे परिवार के बारे में सुन कर अफ़सोस हुआ ....

तरुण : कोई नहीं दीदी अब मुझे उनके बिना जीने की आदत हो गयी है ...

करुणा थोड़ी इमोशनल टाइप की लड़की थी तो वो तरुण की बातो से थोड़ी इमोशनल हो जाती है और उसको गले लगा लेती .... उसको ये भी ख्याल नहीं रहता की वो उसको अचे से जानती भी नहीं ....

गले लगते hi करुणा के मोठे मोठे चुके तरुण की छाती पर रगड़ खाने लगते हैं जिससे तरुण का मीटर धीरे धीरे बढ़ने लगता है पर जल्द hi तरुण खुद पर कण्ट्रोल प् लेता है ....

करुणा चब्बी थी तो उसके बूब्स का साइज काफी बड़ा था और पिछवाड़ा भी निकला हुआ था पर पेट पर बहुत काम चर्बी चढ़ी हुयी थी .... वो बिलकुल दूध की तरह गोरी थी ... वो अभी भी काफी हॉट लगती थी पर उसके पति को अपनी बीवी का ये चब्बीनेस पसंद नहीं था इसलिए वो उसको काम hi भाव दिया करता था .... करुणा का ये मन्ना था की अगर वो अपना वेट थोड़ा लूसे कर ले तो अपने पति को एम्प्रेस कर पायेगी ....

तरुण : एक बात कहु दीदी बुरा मत मन्ना ... आप ऐसे भी बहुत प्यारी लगती हो ...

करुणा : वो सब मैं नहीं जानती मुझे वेट लूसे करना है तो करना है ...

तरुण : ठीक है दीदी पहले आप वो ड्रेस मंगवा लो ... अब सुबह मिलते हैं नए जोश और उमंग के साथ ......

उसके थोड़े सी बाद hi मेहँदी का फंक्शन सुरु होता है .... विकाश ने दिन में hi तरुण को वो पार्लर दिखा दिया था जहा से मेहँदी करने वाली लड़कियों को लाना था ...

तरुण पारलर से लड़किया ले आता है और फिर मेहँदी का काम सुरु हो जाता है . ... घर की लड़किया और औरतें मेहँदी लगवाने में लग जाती हैं ....

शादी सुदा औरतें अपनी मेहँदी में अपने पति का नाम छुपा कर लिखवा रही थी ....

मीरा ने भी अपनी मेहँदी में स लिखवाया .....

मेहँदी लगते लगते काफी देर हो गयी थी ....

घर के सभी गेट्स ने तो पहले hi खाना खा लिया था ... अब सभी लड़कियों और महिलाओ के दोनों हाथो में तो मेहँदी लगी थी और इतनी जल्दी मेहँदी हटाने से उसके रंग अचे से हाथो पर नहीं आता तो उनके पास दो ऑप्शन थे या तो उन्हें भूखे पेट सोना था नहीं तो कोई उन्हें अपने हाथो से खिला दे ....

वह सिर्फ दिव्या hi एक ऐसी महिला थी जिसके हस्बैंड वह मौजूद थे तो उसको तो कोई दिक्कत नहीं थी पर बाकियो का क्या ....

मीरा : आज मुझे सुहानी के पापा की सबसे ज्यादा कमी महसूस हो रही है ... वो होते तो मुझे खिला देते ... अब मैं क्या करू ... दोपहर को खाना काम खाया था तो भूक भी बड़े जोरो की लगी है मैं क्या करू ....

दिव्या : हेहेहे ... यार मुझे तो कोई दिक्कत नहीं होने वाली मेरे पति तो एहि मौजूद हैं तो मैं तो चली खाना खाने .... पति परमेश्वर जी अपनी इस भूखी अर्धांगिनी के लिए खाना तो लेट आइये न ...

दिव्या की बात पर सब जोर जोर से हसने लगते हैं ...

दिव्या के पति केतन जल्दी से एक प्लेट में खाना ले आते हैं और अपनी बीवी के पास बैठ जाते हैं ... और अपने हाथ से निवाला बना के दिव्या के मुँह में दाल देते हैं ...

मीरा : वह क्या जमाना आ गया है ... बहन यहाँ भूक से मरी जा रही है और भाई है की अपनी बीवी की भूक मिटने पर लगा हुआ है ...

शौर्य सिंह : रुको मीरा तेरा ये भाई अभी जिन्दा है ... मैं लता हु तुम्हारे लिए खाना ...

भैरवी : हाउ स्वीट बड़े पापा .... भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना .... बुआ अब तो खुस हो न ....

करुणा : क्या भाई तुम चुप चाप बैठे हो वह देखो पापा अपनी बहन के लिए खाना ला रहे हैं और तुम मुझे भूखे मरने पर तुले हो ....

विकाश भी भाग कर एक प्लेट में खाना निकलने लगता है ...

विकाश : सुहानी और भैरवी तुम्हारा भी खाना ले आऊं क्या ...

भैरवी : न भैया आप पहले अपनी दीदी को खिला लो उन्हें ज्यादा भूक लग रही ....

तरुण सुहानी की तरफ देख रहा था की वो भी उसको खाना लेन को कह दे तो मज़ा आ जाये ...

भैरवी (तरुण से ) : क्या बॉडीगार्ड हो हीरो तुम ... यहाँ तेरी मैडम भूक से मरी जा रही है और तुम चुप चाप बैठे हो ...

सुहानी : हाँ तरुण मेरा और भैरवी दीदी का खाना साथ में लेते आओ न प्लीज ...

तरुण तो जैसे इसी पल का इंतजार कर रहा था .... वो जल्दी से एक प्लेट में दो लोगो का खाना भरकर ले आया और सुहानी और भैरवी के बीच में बैठ जाता है ...

तरुण खाने का निवाला बना कर पहले सुहानी को खिलता है फिर भैरवी को ... ऐसे hi अल्टेरनेटिवेली वो दोनों को बरी बरी से खिलने लगता है ...

मेहँदी लगाने वाली लड़किया भी वही पास में अपना अपना खाना खा रही थी और इस परिवार में बह रहे प्यार को दिल से महसूस कर रही थी ....

मीरा और शौर्य सिंह एक कोने में बैठे हुए थे .... तभी मीरा के कुछ बाल उसके चेहरे पर आ जाते हैं जिससे उसको खाने में दिक्कत हो रही थी ... शौर्य सिंह अपनी बहन की परेशानी को समझ जाते हैं वो दूसरे हाथ से उसके बालो को बड़े प्यार से उसके कान के पीछे कर देते हैं .... मीरा खाना कहते हुए बस शौर्य सिंह की आँखों में देखती जा रही थी ... उन्हें तो लगा ये सब किसी ने नहीं देखा है पर तरुण की आँखों से वो बच नहीं पाए ... तरुण को दोनों का ये अंदाज़ थोड़ा खटक रहा था ... उसने अब तक के इस टूर में ये महसूस किया था की मीरा अपने बड़े भाई का कुछ ज्यादा hi ख्याल रखती है और शौर्य सिंह भी मीरा का बखूबी ख्याल रखते थे ...

खैर सभी लोगो का खाना ख़त्म हो जाता है ... तरुण साडी लड़कियों को उनके घर छोड़ने के लिए चला जाता है .... तरुण को आने में लेट हो सकता था इसलिए घर के मैं गेट की एक के वो अपने पास रख लेता है ...

वो टोटल 4 लड़किया थी और सभी का घर अलग अलग जगह था तो वो सबको बरी बरी से उनके घर ड्राप करके वापस आता है ... घर आते आते उसको 12 से ऊपर हो गए थे ...

वो गाडी को पार्क करके धीरे धीरे अंदर आ जाता ताकि किसी की नींद न ख़राब हो जाये ...

घर आते hi उसके दिमाग में जासूसी कीड़ा उफान मरने लगता है .... वो पहले मीरा के रूम की तरफ जाता है तो उसका रूम बहार से तो लॉक दिख रहा था पर वो तरुण के छूटे hi अंदर की तरफ खुलने लगता है .... तरुण समझ कटा है की मीरा इस रूम में नहीं है ... पर इतनी रात को वो कहा जा सकती है तब उसको कुछ देर पहले वाला इंसिडेंट याद आता है ...

वो जल्दी से शौर्य सिंह के कमरे की तरफ चल पड़ता है .... गेट तो अंदर से लॉक था .... तरुण अंदर झाँकने की जगह ढूंढ रहा था पर वो तो न मिला पर एक खास बात उसके फवौर में हुआ ... शौर्य सिंह के रूम की एक खिड़की घर के अंदर की तरफ hi खुलती थी ... तरुण ुशी खिड़की के पास अस जाता है और अंदर झाँकने की कोसिस करने लगता है पर उसको निराशा hi हाथ लगती है ....

तभी उसको अंदर से किसी के फुसफुसाने की आवाज़ आती है ....

वो अपने कान खिड़की से चिपका देता है ...

..... : उफ्फ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ्फ़.... स्स्स्सस्छ्हीईईई हाय धीरे दबाओ भैया दर्द कर रहा है .... उउउउम्मम्मम्मह्हह्ह्ह्ह देखो तुम्हारे कहने से तो मैं आ गयी .... अब ये सब मत करो न .... मैं सिर्फ आपकी बात मन कर यहाँ आयी थी ....

ये सिसकिया किसी और की नहीं बल्कि शेर सिंह की बीवी मीरा सिंह की थी और वो अभी इस वक्त अपने बड़े भैया शौर्य सिंह के रूम में थी ...

शौर्य सिंह : बहना आज कण्ट्रोल नहीं हो रहा ... जब से तुम्हे इवनिंग में इस ड्रेस में देखा है मैं तुम्हारे जिस्म को निचोड़ने के लिए मारा जा रहा हु ...

मीरा : नहीं भैया आज तो मैं आपकी कोई मदद नहीं कर सकती .... मेरे हाथो की मेहँदी ख़राब हो जाएगी ....

शौर्य सिंह : हो जाने दो ख़राब आखिर तेरे हाथो मेहँदी भी तो उस कमीने शेर सिंह के लिए hi लगा हुआ है ...

मीरा (हस्ते हुए) : किसने कहा की मेरे हाथो में शेर सिंह के नाम की मेहँदी लगी है ... वो तो आपके नाम की लगी है .... शौर्य सिंह ... मेरे जनम मेरे मेहबूब ....

शौर्य सिंह : यार मेरे दिमाग में ये बात आयी क्यों नहीं ....

मीरा : वो इसलिए मेरी सुहानी के पापा क्यूंकि आप मुझे देखते hi अपने दिमाग से सोचना बंद कर देते हो और अपने लुंड से सोचना सुरु कर देते हो ....

शौर्य सिंह : मेरी जान है hi ऐसी चीज की मैं अपना आप खो देता हु ...

मीरा : अब बस बहुत हुआ अब मुझे मेरे रूम में जाने दीजिये .... कही कोई उठ गया तो हमारा इतने सालो से छुपाया हुआ राज़ खुल जायेगा ...

शौर्य सिंह : don't वोर्री यार मैंने आज खीर में नींद की गोलिया मिला दी थी .... सभी लोग घोड़े बेच कर सो रहे होंगे ...

मीरा : फिर भी मुझे चलना होगा ... अगर नहीं गयी तो मैं खुद पर कण्ट्रोल नहीं रख पाऊँगी ...

शौर्य सिंह : उफ्फ्फ्फ़ सहित आज भी मुझे खली hi सोना पद जायेगा .... तुम्हे याद है हमें सम्बन्ध बनाये 1 साल से ऊपर हो चूका है ....

मीरा : बस 1 दिन और इंतजार कर लो .... कल रात हमारी होगी ....

शौर्य : मैं तुम्हारे साथ ुशी रूम में सेक्स करना चाहता हु जहा हमने फर्स्ट टाइम किया था ...

मीरा : जरूर मेरे राजा ... उस फ्लोर पर तो वैसे भी कोई और नहीं होता है सिवाए तरुण के .... हमारा रूम तो आज भी खली hi है ....

शौर्य सिंह : वो तो है ... वैसे तुमने ये तरुण नाम का नमूना कहा से चुना है ....

मीरा : ाचा लड़का है वो शायद भविस्य में हमारे काम आ जाये ...

शौर्य सिंह : ok जान जैसा तुम ठीक समझो ....

उसके बाद थोड़ी खत पैट होने लगती है तो तरुण जल्दी से दबे पाओ सीढिया चढ़ कर अपने रूम आ जाता है ....

तरुण (मन में) : मैं मीरा सिंह को कितनी भोली और शरीफ समझ रहा था पर ये तो अपने भाई की hi रखैल निकली ... वो शेर सिंह को धोखा क्यों दे रही है .... वो मेरा किस काम में इस्तेमाल करने की सोच रही है ... खैर आज एक बात तो अछि हुयी मुझे इस घर और शेर सिंह के घर का थोड़ा सा राज़ पता चल गया .... सुहानी भी शेर सिंह की नहीं बल्कि शौर्य सिंह की बेटी है .... कुछ तो बहुत बड़ा झोल चल रहा है ... मुझे भी इस बहती गंगा में हाथ धो लेना चाहिए क्या पता मीरा जैसी हसीं औरत के साथ कुछ हसीं पल बिताने का मौका मिल जाये .... सुहानी के दिल तक जाने का रास्ता मीरा की छूट से मिल सकता है ... वो भी अपने पुराने आशिक के साथ कब तक रहेगी एक बार बस एक बार मेरे नीचे आ गयी तो ये बाज़ी मेरे हाथो में होगी और शेर सिंह और कलुआ की गर्दन तक पहुँचने का सबसे सरल रास्ता एहि है .... मैं तो हु hi भौरा कलियों और फूलो को मसलना hi मेरा मकसद है ....

और फिर हसीं सपने बनता हुआ तरुण सो जाता है ....

मॉर्निंग में फिर से तरुण का गेट नॉक होता है पर आज उसको उठाने वाली भैरवी नहीं बल्कि करुणा थी ... करुणा ने अभी एक टॉप और एक ट्रॉउज़र पहना हुआ था ....

तरुण : गुड मॉर्निंग दीदी ...

करुणा : गुड मॉर्निंग के बच्चे .... 5:30 ऍम हो रहे हैं ... जल्दी से सुरु करते हैं ....

तरुण : आज भैरवी मैडम नहीं आएँगी क्या ...

करुणा : नहीं कल इवनिंग को hi आंटी ने उसको कुछ दिन एक्सरसाइज नहीं करने को कहा है ....

तरुण : ok दीदी आप वार्म उप करो .... तब तक मैं फ्रेश हो कर आया .....

करुणा तरुण के रूम का गेट अंदर से लॉक कर देती है और उसके रूम में hi हलके हलके जॉगिंग करने लगती है .... थोड़े देर में hi तरुण वाशरूम से बहार आ जाता है .... वो कुछ देर करुणा को जॉगिंग करते हुए देखता है .... जॉगिंग करने से उसके बड़े बड़े बूब्स एक ले ताल में ऊपर नीचे हो रहे थे वो काफी इरोटिक व्यू पेश कर रहे थे .... उसके चूतड़ में हो रही थिरकन भी जानलेवा थी ....

तरुण : स्टॉप दीदी .... क्या आप अपने टॉप को थोड़ा ऊपर करके मुझे अपने पेट को देखने देंगी ताकि मैं एक रफ़ आईडिया बना सकू ....

भोली भली करुणा फाटक से अपना टॉप अपने पेट से ऊपर करने लगती है .... उसको ये ध्यान hi नहीं रहा की उसने टॉप के अंदर ब्रा नहीं पहनी है .... चाँद लम्हो के लिए hi सही पर करुणा के बड़े बड़े खरबूजों के दीदार तरुण को हो जाते हैं ... याद आते hi करुणा फाटक से अपने टॉप को नीचे कर देती है ... वो अचानक हुए इस हादसे से शर्मा जाती है ...

तरुण (उसको नार्मल करने के लिए) : कोई बात नहीं दीदी आप रिलैक्स हो जाओ ... मैं किसी से कुछ नहीं कहूंगा ... अब टॉप को सिर्फ थोड़ा सा ऊपर उठाओ ...

करुणा अपने टॉप को बस थोड़ा सा ऊपर उठा कर अपना पेट तरुण को दिखती है ...

तरुण : िफ़ यू don't मंद कैन ी टच आईटी ...

करुणा ने सिर्फ हाँ में सर हिलाया ... तरुण किसी प्रोफेशनल की तरह उसके पेट को छू कर देखता है उसमे ज्यादा चर्बी नहीं थी ....

तरुण : दीदी प्लीज मुझसे मत सर्मना ... हो सकता है की जो मैं आपसे आगे पुछु आपको थोड़ा बुरा लग सकता है .... क्या मैं आगे बधु ....

करुणा : तुम कुछ भी करके बस मेरा वजन काम कर दो .... मेरी तरफ से तुम्हे फुल आज़ादी है बस मुझे रिजल्ट चाहिए ...

तरुण : ठीक है दीदी मुझ पर भरोषा रखो ... वैसे दीदी आपके ye(boobs की तरफ इशारा करके) थुलथुले हैं या टाइट ...

करुणा : मैंने कहा न की मैंने तुम्हे फुल आज़ादी दे दी है मुझे बस रिजल्ट से मतलब है ... तुम खुद hi छू कर देख सकते हो ....

तरुण कांपते हाथो से करुणा के बूब्स पर हाथ रखता है ... वो आराम से डाब जा रहे थे उनमे बिलकुल भी कड़ापन नहीं था ....

तरुण : दीदी क्या मैं इन्हे एक बार देख सकता हु ...

करुणा : अबकी बार तुमने पूछा न तो मैं पिटाई कर दूंगी तुम्हारी ....

तरुण करुणा का टॉप ऊपर कर देता है जिससे उसके बड़े बड़े चुके तरुण की आँखों के सामने आ जाते हैं ... तरुण अपने हाथ बढ़ा कर उसके नंगे चूचियों पर रख देता है और हौले हौले सहलाने लगता है ...

तरुण : दीदी आपके दूध काफी ढीले हो चुके हैं और भरी होने की वजह से लटक गए हैं .... इन्हे मस्सगे और एक्सरसाइज दोनों की जरुरत होगी .... एक्सरसाइज तो मैं बता दूंगा और मस्सगे के लिए आयल भी पता करके ला दूंगा ....

करुणा : उससे ये शेप में आ जायेंगे न ...

तरुण : हाँ आ जाने तो चाहिए ...

करुणा (अपने बड़े बड़े चूतड़ों की तरफ इशारा करके) : वो तो ठीक है पर इनका क्या ...

तरुण के मन में करुणा के बड़े बड़े मटके जैसे चूतड़ों को देखने की भी लालसा जाग जाती है ...

तरुण : वो तो देखना पड़ेगा न दीदी अगर आपको ऐतराज़ न हो तो ....

करुणा : मुझे मेरे पति को फिर से अपने तरफ अत्त्रक्ट करना है उसके लिए मैं किसी भी हद्द से गुजर सकती हु .... तुम तो मेरी हेल्प hi कर रहे हो न अस ा ट्रेनर और डॉक्टर .... करुणा को भी अब इस खेल में मजा आने लगा था .... वो पहली बार किसी गैर मर्द को इतनी छूट दे रही थी उसकी एक hi वजह थी की तरुण उसको ाचा लगने लगा था और वो भी तो ये सब उसके भले के लिए hi कर रहा था हाँ पर उसका तरीका थोड़ा ठरकपन भरा था .....

तरुण : आपके भाई भी तो डॉक्टर हैं उनसे क्यों नहीं सलाह ले लेती आप ...

करुणा : वो दांत का डॉक्टर है और उसके सामने मैं ऐसे खुल कर कैसे बात कर सकती हु ....

तरुण : हाँ ये भी तो है ... आप बीएड पर लेट जाइये ....

करुणा तुरंत बीएड पर लेट जाती है ... तरुण करुणा के ट्रॉउज़र की इलास्टिक को पकड़ कर नीचे सरकने लगता है पर गांड बड़ी होने से वो नीचे सरक hi नहीं रही थी ...

करुणा : क्या हुआ सारा डैम निकल गया ... हेहेहे ...

करुणा बैठ जाती है और खुद hi अपना ट्रॉउज़र नीचे सरका कर घुटनो तक कर देती है .... ट्रॉउज़र के हटने के साथ hi करुणा की बड़ी बड़ी गोरी गांड उसके आँखों के सामने आ जाती है ... वो बिना पलके झुकाये उसमे खो सा जाता है ...

करुणा : क्या हुआ अब देखो भी जो देखना है ....

करुणा बीएड पर लेटो हुयी थी ... तरुण अपने हाथो से करुणा के बड़े गांड को छू कर देखता है ... वह भी सिर्फ मांस hi मांस थे ... तरुण करुणा के गांड के दोनों पाटो को एक दूसरे से थोड़ा दूर करता है तो उसको करुणा के गांड का वो भूरा छेड़ दिख जाता है जो की बिलकुल सिकुड़ा हुआ था ... यानि की करुणा पीछे से बिलकुल कोरी थी ....

तरुण : हिप के लिए भी एक्सरसाइज और आयल मस्सगे करना होगा दीदी ....

तरुण के ऐसे खुद के प्राइवेट पार्ट्स को टच करवाने से करुणा की छूट ने कुछ बूँदें टपका दी थी जो तरुण का बीएड अब्सॉर्ब कर लेता है ...

करुणा : अब हो गया न अब कपडे पहन लू ....

तरुण : हाँ दीदी आज के लिए काफी है .... अब इवनिंग को मिलते हैं ....

करुणा लेते लेते hi ट्रॉउज़र को ऊपर चढ़ा लेती है ...

तरुण करुणा को बूब्स और हिप्स से रिलेटेड कुछ एक्सरसाइज बताता है ....

करुणा जल्दी से तरुण के वाशरूम में घुस जाती है और थोड़ी देर बाद वो कासुअल ड्रेस में थी जो वो डेली पहना करती थी ...

करुणा के जाने के बाद तरुण वाशरूम घुस जाता है और करुणा की थुलथुली जवानी को याद करके मुठ मरने लगता है .... कुछ देर की म्हणत के बाद तरुण का लुंड ढेर सारा लावा उगल देता है ... वो जल्दी से शावर ले कर नीचे पहुँचता है जहा घर के सरे लोग दिंनिंग टेबल पर बैठे खाना खा रहे थे ...

मीरा : अरे बीटा तुम अभी उठ रहे हो क्या ... आओ बैठो ब्रेकफास्ट कर लो ...

तरुण : जी आंटी ...

तरुण खली पड़े कुर्शी पर बैठ जाता है ... आज संगीत का प्रोग्राम था तो इवनिंग तक साडी तैयारियां हो गयी थी .... अभी प्रोग्राम के लिए भैरवी की कुछ सहेलिया भी आयी हुयी थी ....

प्रोग्राम की शुरुआत में भैरवी की सहेलिया डांस करती हैं .... भैरवी की सहेलिया में से एक लड़की विकाश के पीछे लट्टू थी शायद वो उसकी पर्सनालिटी पर hi उसके ऊपर फ़िदा हो चुकी थी .... विकाश का एक सोलो डांस रखा गया था जो उसने जबरदस्ती से कपल डांस में कन्वर्ट करवा दिया .... घर वाले भी खुस थे क्यूंकि वो एक अचे घर की लड़की थी और खुद भी एक मेडिकल स्टूडेंट थी ....

तरुण ने भी एक सोलो डांस किया .... भैरवी के मम्मी पापा का भी एक कपल डांस हुआ जिसमे खूब तालिया बजी .... लास्ट में तारो का चमकता गहना हो सांग पर भैरवी के लिए तरुण और विकाश ने एक बहुत ाचा डांस पेश किया ....

अब प्रोग्राम एन्ड होने पर सभी लोग खाने के लिए जुट जाते हैं ... आज भैरवी की सहेलिया भी वही रुकने वाली थी इसलिए शौर्य सिंह ने आज का प्रोग्राम कैंसिल करने के इरादे से एक कागज़ में कुछ लिख कर मीरा के तरफ फेंक दिया जिसे तरुण ने देख लिया ... वो कागज़ का टुकड़ा मीरा के पाओ से लग कर छिटक जाता है जिसे शौर्य सिंह नहीं देख पते उन्हें लगा की मीरा वो कागज़ का टुकड़ा पढ़ लेगी ...

मीरा मेरी जान आज मैं नहीं आ पाउँगा रात में हम अपना प्रोग्राम कल या शादी के बाद का रखते हैं ...

शौर्य सिंह को तो लगता है मीरा ने उसके चित कोड को पढ़ लिया है इसलिए उसने मीरा से कोई बात नहीं की ....

सब कुछ शांत होते hi मीरा दबे पाओ अपने आशिक से मिलने टॉप फ्लोर पर जाती है ... जिस रूम में उसने शौर्य सिंह को मिलने बुलाया था वो खली hi था .... वो अँधेरे में hi रूम के स्विच को ढूंढ़ने लगती है .... पर तभी उसको अँधेरे में किसी ने खींच लिया और बीएड पर सुला दिया ... वो कुछ बोलती उससे पहले hi वो शक्श उसके होंठ पर अपने होंठ रख कर जोर जोर से चूसने लगता है ....

मीरा के मुँह से बस दबी हुयी सिसकारी निकल रही थी ... उसके बाद वो उसके ऊपर से उठ जाता है .... ठीक तभी मीरा को उसके बूब्स निघ्त्य के ऊपर से hi दबते हुए महसूस होते हैं ... उसके हर टच से मीरा को एक नयापन फील हो रहा था ....

अब मीरा समझ चुकी थी की इस रूम में जो कोई भी है वो शौर्य सिंह तो बिलकुल भी नहीं है ....


वो झटके से उठ कर स्विच ों करती है ... सामने वाले शक्श को देख वो बुरी तरह से काँप उठती है ...
 
अपडेट 34

अब मीरा समझ चुकी थी की इस रूम में जो कोई भी है वो शौर्य सिंह तो बिलकुल भी नहीं है ....




वो झटके से उठ कर स्विच ों करती है ... सामने वाले शक्श को देख वो बुरी तरह से काँप उठती है ...

आगे

मीरा के घबराने की वजह ये थी की उसके सामने जो शक्श खड़ा था वो शौर्य सिंह नहीं बल्कि उसका बीटा विकाश था ...

मीरा : v.....v..vikash तुम यहाँ कैसे और ये क्या बेहूदगी है ....

विकाश : बुआ वही सवाल तो मैं आपसे पूछ रहा हु की आप इतनी रात को अँधेरे में यहाँ क्या कर रही हो ....

मीरा क्या बोलती उसकी तो जुबान hi जैसे चिपक गए हो ....

विकाश : बोलो बुआ आप चुप क्यों हो ...

मीरा : नहीं बीटा तुम गलत समझ रहे हो ... मैं तो ... मैं तो ...

विकाश : बोलो बुआ तो सच क्या है ... और प्लीज झूट न बोलना आपका एक सबूत मेरे पास है ....

मीरा : सबूत ... मतलब तुम कहना क्या चाहते हो ....

विकाश : एहि की आप इस रात के अँधेरे में अपने किस आशिक़ से यहाँ मिलने आयी थी .... ये देखो ये रहा सबूत ....

विकाश ने एक कागज़ का टुकड़ा मीरा के आगे कर दिया .... टुकड़े में कुछ इस तरह लिखा था ....



मीरा मेरी जान आज रात को यहाँ काफी भीड़ है इसलिए मैं टॉप फ्लोर वाले कमरे में तुमसे मिलने नहीं आ पाउँगा .... सॉरी .... हम अपना प्रोग्राम शादी के बाद का रखते हैं ....



तुम्हारा आशिक




मीरा ने पढ़ते hi वो कागज़ का टुकड़ा फाड़ दिया ....

विकाश (हस्ते हुए) : बुआ आप क्या सोचती हो अपने सबूत मिटा दिए .... अरे वो तो मैंने अपने मोबाइल और लैपटॉप में सेव कर लिया है .... अब बताओ जल्दी सच क्या है वर्ण ये सब मैं पापा और फूफा जी को दिखा दूंगा ....

कुछ देर की शान्ति के बाद मीरा बोलना सुरु करती है ....

मीरा : तुम्हे सुन्ना hi है तो सुनो मैं जिस इंसान का यहाँ वेट कर रही थी वो कोई और नहीं तेरे पापा शौर्य सिंह हैं ...

ये कहने के साथ hi मीरा ने विकाश के ऊपर एक बहुत बड़ा बम फोड़ दिया था ... वो शॉकिंग सा फेस बना कर मीरा को देख रहा था ...

विकाश : मैं नहीं बिस्वास कर सकता की पापा आपके साथ वो सब .... ी मैं वो आपके सेज बड़े भैया हैं तो वो आपके साथ कैसे ....

मीरा : जब जिस्म में आग लगती है तो वो रिश्ते नाते कुछ नहीं देखता .... हमें उस वक्त एहि सही लगा तो हमने इस रिश्ते को hi स्वीकार कर लिया .... इसमें गलती सिर्फ हमारी hi नहीं थी ... इसमें सबसे बड़ी गलती तुम्हारे फूफा शौर्य सिंह की है .... तुम जानना चाहते हो तुम्हारी माँ का कातिल कौन है ...

विकाश : मुझे नहीं पता ....

मीरा : तुम्हारे माँ का कातिल भी वही शेर सिंह है ... उसके वजह से hi आज तेरी माँ इस दुनिया में नहीं है ....

विकाश : क्यों ऐसा क्या हुआ था ...

मीरा : उसके लिए तुम्हे सब कुछ सुरु से सुन्ना होगा .... सुहानी भी शेर सिंह की नहीं बल्कि तुम्हारे पापा शौर्य सिंह की औलाद है ...

मीरा ने विकाश के ऊपर ये दूसरा बम फोड़ा था ....

विकाश : सुहानी ... मेरे पापा की औलाद है ... पर ये कैसे हुआ ....

मीरा : तो ध्यान से सुनो ये सब क्यों और कैसे सुरु हुआ ....

मीरा : जब से मेरी शादी शेर सिंह से हुयी तब से hi मैंने महसूस किया की वो सिर्फ नाम का hi शेर है वो बिस्तर पर तुरंत hi ढेर हो जाता था ... तो मैंने एक बार चुपके से उसके स्पर्म का सैंपल ले लिया और डॉक्टर के पास पहुँच गयी टेस्ट करवाने के लिए तो मुझे पता चला की शेर सिंह कभी बाप नहीं बन सकता .... उसके बाद से मैं काफी उदास रहने लगी ... ऐसे hi एक बार मैं यहाँ आयी हुयी थी मेरी उदासी देख तेरी बड़ी माँ ने मुझसे बहुत पूछा अपनी कसम तक दे डाली तब मैंने सब कुछ उन्हें बता दिया ... मेरी बात सुन उन्हें बहुत बड़ा शॉक लगा ऐसे hi एक दिन उन्होंने ये बात तेरे पापा को बताई तो उन्होंने मुझे दूसरी शादी करने की सलाह दी पर मैं न मणि ....

तेरे पापा ने शेर सिंह को भी एहि बुलवा लिया था ताकि वो उसको सब कुछ बता और समझा सके ... वो होली का टाइम था ... पुरे घर में खुसियो का माहौल था .... दिन भर होली खेलने के बाद सभी लोग साफ़ सफाई में लगे थे .... शेर सिंह को बहार कही किसी ने काफी शराब पीला दी थी जिसके वजह से वो फुल नशे में धुत होकर घर आया .... उस ज़माने में सेपरेट वाशरूम नहीं थी हमारे घर में हम कुवे के पानी से hi सारा काम किया करते थे ...

बदकिस्मती से तेरी माँ उस वक्त कुए पर hi नाहा रही थी ... तेरी ममी के कपडे उस वक्त गीले थे जिसके वजह से शेर सिंह की नियत उनके ऊपर ख़राब हो गयी और दोनों के बीच छेड़खानी होने लगी .... सुरु में तो तेरी माँ को लगा की वो उनसे होली खेलने के लिए ये सब कर रहे हैं पर जब उन्हें उसकी नियत पता चली तो तो खुद को बचने की कोसिस करने लगी .... अब तक शेर सिंह ने उनके जिस्म पर बंधी हुयी एक मात्रा पेटीकोट को भी फाड़ दिया था जिससे वो अब पूर्णतया उसके सामने नंगी हो चुकी थी .... मैं ये सब दूर छत पर से देख रही थी .... अभी मैं वह पहुंची hi थी की मैंने देखा तुम्हारी माँ कुवे में गिरी हुयी थी ... अब वो जान बुझ कर अपनी इज्जत बचने को कुवे में कुड़ी थी या शेर सिंह ने उन्हें धक्का दे दिया ये तो मैं नहीं जानती ....

थोड़े देर बाद हमें तुम्हारी बड़ी ममी की लाश कुए से बरामद हुयी ... सोचो शेर सिंह के वजह से एक हस्ता खेलता परिवार बर्बाद होने के कगार पर आ गया ...

तुम्हारी माँ के जाने के बाद तेरे पापा टूट से गए थे ..... ऐसे hi एक बार मैं यहाँ आयी थी तो तेरे पापा की हालत देख मुझे लगता की इन् सब में मेरा hi हाथ है मेरी hi वजह से तेरी माँ गुजर गयी .. तेरे पापा को सांत्वना देने के क्रम में कब हमारी सहानुभति ने गलत रास्ता अख्तियार कर लिया पता hi नहीं चला ... हम एहि इसी बीएड पर हमबिस्तर हो गए ... अगले दिन मुझे बहुत शर्म आयी तो मैं अपने ससुराल चली गयी वह जाने के काफी दिन बाद पता चला की मेरा गर्भ ठहर गया है ... फिर कुछ महीने बाद मैंने सुहानी को जन्म दिया .... मैं तो बहुत खुस थी की मेरे अँधेरी जिंदगी में खुशियों की एक किरण लौट आयी थी ....

उसके बाद से मैंने और तेरे पापा ने उस काली रात को भुला देने का फैसला किया .... धीरे धीरे हमारी जिंदगी सुधरने लगी ....

ऐसे में hi एक बार मैं सुहानी के साथ यहाँ आयी थी तो सब कुछ तो ठीक थक था पर तुम्हारे पापा को हमेसा की तरह गुमशुम देख मुझे उनके ऊपर तरस आ गया .... मेरी जिंदगी में खुसिया उनके hi वजह से आयी थी .... जवाब में मैंने उन्हें क्या दिया कुछ भी नहीं .... शेर सिंह की वजह से उनकी बीवी भी उनसे छीन गयी थी

... मैंने सोचा गलती चाहे एक बार हुयी हो या बहुत बार हुयी हो गलती तो गलती होती है एहि सब सोच मैंने उन्हें फिर से अपने साथ जिस्मानी सम्बन्ध बनाने को उकसाया ... अब हम साल दो साल में एक अध् बार hi मिलते हैं पर जब भी मिलते हैं एक बार जरूर दो जिस्म एक जान हो जाते .... मैं मानती हु की मैं गलत हु पर मैं उस शेर सिंह से नफरत करती हु जिसके वजह से मेरी दोस्त जैसी भाभी चल बसी .... मैं उस नीच इंसान को उसके किये की सजा देना चाहती हु .... चाहे उसके लिए मुझे अपनी जान hi क्यों न देनी पड़े ....

सुहानी : सॉरी बुआ ... मैंने आपको गलत समझा ....

मीरा : सॉरी तो मुझे कहना चाहिए बीटा ... मेरी वजह से आज तुम्हे खुद से शर्मिंदा होना पद रहा है ...

सुहानी : नहीं बुआ मैं शर्मिंदा नहीं हु ....

मीरा : मैं जानती हु बीटा मैं बहुत गलत कर रही हु पर मुझसे तुम्हारे पापा की तन्हाई नहीं देखि जाती इसलिए उनके जिंदगी में ख़ुशी के दो पल लेन की कोसिस करती हु ....

विकाश : सॉरी बुआ ... आपका ये राज़ मेरे सीने में दफ़न रहेगा और आप चाहो तो पापा के साथ सम्बन्ध जारी रख सकती हो ...

मीरा : थैंक यू बीटा ... गुड नाईट ...

उसके बाद उस रूम का गेट खुलता है और पहले विकाश रूम से बहार निकलता है उसके बाद मीरा अपनी हालत ठीक करके निकलती है ....

उन्हें ये hi नहीं पता चलता की उनके अलावा एक और शक्श वह मौजूद था जिसने सब कुछ लाइव सुना और रिकॉर्ड भी कर लिया था ताकि वो इसका उपयोग भविस्य में कर सके .... ये कोई और नहीं अपना तरुण hi था .....

इधर तरुण के घर में उसकी माँ गहरी नींद में सोई हुयी थी .... वो नींद में hi कुछ बड़बड़ा रही थी उसका पूरा चेहरा पसीने से भरा हुआ था ... की अचानक से वो चीख कर जाग जाती है ....

उसके ऐसे चीखने से उसका पति भी जग जाता है ....

तरुण के पापा : क्या हुआ कौशल्या ऐसे क्यों चीखी कोई बुरा ख्वाब देख लिया क्या ...

कौशल्या (रट हुए) : पता नहीं मेरा बच्चा कहा होगा .... मुझे उसकी चिंता हो रही है ....

टी पापा : अरे यार प्रियांशी ने कहा है न की वो काम के सिलसिले में कही बहार गया हुआ है .... वो काम नहीं करेगा तो तरक्की कैसे करेगा ... अब वो hi तो है जिससे इस घर की साडी उम्मीदें तिकी हुयी है ....

कौशल्या : मैं कुछ नहीं जानती मुझे उसके पास जाना है ...

टी पापा : हाँ हाँ वो तो जैसे तुमसे मिलने को मारा जा रहा है न .... अरे वो तुम्हारी शकल तक से नफरत करता है ... आखिर तुमने करम hi ऐसे किये हैं ... पहले भी मैं तुमसे कहा करता था की दूसरे की बातो में आकर अपने बेटे के साथ ऐसा व्यवहार मत करो पर नहीं तुम्हारे ऊपर तो भूत सवार था उसको और जलील करने का ... तुम खुद तो डूबी hi साथ साथ मुझे भी कसम दे कर उसके अगेंस्ट कर दिया ... वो मुझसे भी बेइंतेहा नफरत करता होगा ...

कौशल्या : अब आप लोगो के भासन सुनने के अलावा कर भी क्या सकती हु मैंने अपने जिगर के टुकड़े को जान बुझ कर खुद से दूर कर दिया ... अब उसको मानाने के लिए मुझे जो भी करना होगा वो करुँगी .... वो चाहे तो मेरी जान hi ले ले पर मैं उसको अपना बना कर रहूंगी ....

उसके कुछ देर बाद तरुण के पापा तो सो जाते हैं पर उसकी माँ रात भर जगती hi रहती है ....

अगली सुबह तड़के hi करुणा तरुण का गेट खुलवाती है और अंदर घुसते hi गेट लॉक कर देती है ....

तरुण : गुड मॉर्निंग दीदी ... आप तब तक वार्म उप करो मैं फ्रेश हो कर आता हु .... इवनिंग से तो वैसे भी टाइम नहीं मिलेगा तो आपको अपने रूम में hi ये सब करना पड़ेगा जब तक शादी न हो जाये ...

थोड़े देर के बाद तरुण रूम आता है ...

करुणा : वो आयल मिला क्या ...

तरुण : हाँ दीदी आज इवनिंग तक वो ले आऊंगा .... आप बस ऐसे hi एक्सरसाइज करती रहो जल्द hi आपको रिजल्ट मिल जायेगा ....

उसके बाद कुछ और खास नहीं होता तरुण उसको एक्सरसाइज में हेल्प करता है जिसके बाद वो अपने रूम आ जाती है ...

ब्रेकफास्ट के लिए तरुण ग्राउंड फ्लोर पर आता है जहा करुणा खुद अपने हाथो से ब्रेकफास्ट निकल कर देती है ... ब्रेकफास्ट के दौरान तरुण एक बार नजर उठा कर मीरा की तरफ देखता है जो आज बिलकुल शांति से अपना खाना थुश रही थी .... उसके चेहरे पर परेशानी के कुछ भाव थे ...

ब्रेकफास्ट करके सब अपने अपने कामो में लग जाते हैं .... तभी मीरा आवाज़ देकर तरुण को अपने पास बुलाती है ....

मीरा : तरुण ... आज तो हल्दी है आज तो घर में कोई काम भी नहीं .... क्या तुम मेरे साथ पारलर चलोगे मुझे थोड़ा काम है ... कल तो काफी बिजी सचेडूले रहेगा तो वक्त नहीं मिल पायेगा ....

तरुण : जी क्यों नहीं .... मैं अभी रेडी हो कर आया ....

मीरा : जल्दी आना मैं अपने रूम में hi होउंगी .... .बुला लेना ....

तरुण : जी जरूर ...

थोड़े hi देर में तरुण ग्राउंड फ्लोर पर आता है उस वक्त वह कोई न था तो वो मीरा के रूम की तरफ बढ़ चला ... मीरा का गेट सताया हुआ था बंद नहीं था ....

वो हल्का सा पुश करता है तो गेट खुल जाता है .... गेट खुलते hi अंदर का नज़ारा देख उसके पुरे जिस्म में बिजली सी कौंध जाती है .... क्यूंकि अंदर का नज़ारा hi कुछ ऐसा था .... अंदर मीरा एक आदमकद आईने के सामने सिर्फ ब्रा और पंतय में कड़ी थी .... उसका जिस्म भरा हुआ था जिसके वजह से उसके एसेट्स ब्रा और पंतय में काफी बड़े बड़े प्रतीत हो रहे थे .... मीरा का गोरा बेदाग जिस्म देख तरुण की आँखें जैम सी गयी थी ....

तभी मीरा को आभास होता है की कोई उसके रूम में घुस रहा है ....

मीरा पीछे मुड़ती है तो तरुण गेट के पास दीखता है अब तक तरुण ने अपना फेस नीचे कर लिया था ....

मीरा जल्दी से एक चादर से खुद को कवर करती है ....

मीरा : अरे तरुण बीटा तुम .... नॉक करके अंदर आना कहहिये था न ....

तरुण : अपने hi अपने रूम बुलाया था इसलिए आ गया .... सॉरी

मीरा : ाचा तुम बहार जाकर वेट करो मैं जल्द hi आती हु ....

थोड़े hi देर में मीरा ब्लैक कलर की एक तरनसपरेंट टाइप की साड़ी पहन कर आती है ....

वो लोग गाडी के अंदर बैठ जाते हैं ... मीरा तरुण के बगल में hi ड्राइविंग सीट में बगल में बैठ जाती है ....

15 मिनट में hi उनका डेस्टिनेशन आ जाता है ...

मीरा तरुण के साथ पारलर में एंटर करती है .... तरुण को एक चेयर पर बिठा कर वो काउंटर पर जाती है जहा एक लेडीज बैठी हुयी थी ...

लेडी रिसेप्शनिस्ट : hello ma'am हाउ कैन ी हेल्प यू ...

मीरा : वो मुझे फुल बॉडी मस्सगे करवाना है ....

लेडी रिसेप्शनिस्ट : ma'am स्पेशलिस्ट मस्सगे चाहिए या नार्मल मस्सगे ...

मीरा : स्पेशलिस्ट वाला hi ाचा है ...

लेडी रिसेप्शनिस्ट : ma'am वो थोड़ा कॉस्टली होगा और हो सकता है आपको 25 - 30 मिनट वेट भी करना पड़ेगा ....

मीरा : कोई नहीं और पैसे की कोई चिंता नहीं कीजिये ....

लेडी रिसेप्शनिस्ट मीरा से पेमेंट करने को कहती है और उसको एक टोकन देती है ...

लेडी रिसेप्शनिस्ट : ok ma'am आप ये टोकन ले कर अंदर जाइये ... आपको हमारी स्टाफ मस्सगे के लिए रेडी कर देंगी ... हैवे ा गुड टाइम ....

मीरा अंदर जाती है तो एक लड़की उसको अंदर लेकर जाती है और एक गाउन देकर बाकि सरे कपडे उतरने को कहती है ....

मीरा चेंजिंग रूम में जाकर पहले अपने पहने हुए सरे कपडे उतरती है ... यहाँ तक की उसके अंडर गारमेंट्स भी उतरने को कहा गया था .... अब वो जल्दी से गाउन पहन कर बहार आ जाती है .... वो लड़की उसके ड्रेस को एक लाकर में रख देती है और उसको साथ लेकर एक रूम में आ जाती है और बीएड पर लेटने का इशारा करती है .... वो रूम फुल्ली एयर कंडिशन्ड था और रूम से आती भीनी भीनी खुसबू उसके तबियत को मस्त कर दे रही थी ....

लड़की : ma'am आप वेट कीजिये हमारे स्पेशलिस्ट मस्सागेर जल्द hi यहाँ होंगे ...

मीरा आज फर्स्ट टाइम इस पारलर में आयी थी .... ये इस सहर में नया नया खुला था और वह के लोगो की पहली पसंद बन चूका था ....

रूम में काफी काम रौशनी की गयी थी और स्लो साउंड में म्यूजिक बज रहा था जो की मस्सगे को एक अलग hi एंगल देता था ....

गाउन के अंदर बिलकुल नंगी होने के वजह से मीरा को एक अलग सी hi फीलिंग आ रही थी ... एक से आती ठंडी हवा जब मीरा के छूट में लगती तो उसको एक अजीब से सुख की प्राप्ति हो रही थी ....

खैर थोड़े देर बाद गेट खुलने की आवाज़ आयी तो मीरा ने शर्म के मरे अपनी आँखें बंद कर ली .... ये फुल बॉडी मस्सगे का ये उसका पहला अनुभव था ....

मस्सागेर आ कर टेबल पर पड़े आयल के कटोरे से कुछ आयल अपने हाथो में ले कर उसके तलवे की मालिस करने लगता है और फिर धीरे धीरे ऊपर जाते हुए घुटनो तक

पहुँचता है ... मीरा का गाउन अस्त व्यस्त होने से मीरा की छूट उसकी नजरो के सामने आ जाती है जिससे उसकी हालत ख़राब होने लगती है ... प्रोफेशनल होने के बावजूद उसकी भावनाये जांगने लगी थी ...



मीरा को अब तक हुए मस्सगे से बड़ा सुकून मिल रहा था ... वो मस्सागेर को देखने के लिए अपनी आंखें खोलती है तो उसके मुँह से एक जोर की चीख निकल जाती है ....
 
अपडेट 35

मीरा का गाउन अस्त व्यस्त होने से मीरा की छूट उसकी नजरो के सामने आ जाती है जिससे उसकी हालत ख़राब होने लगती है ... प्रोफेशनल होने के बावजूद उसकी भावनाये जांगने लगी थी ...

मीरा को अब तक हुए मस्सगे से बड़ा सुकून मिल रहा था ... वो मस्सागेर को देखने के लिए अपनी आंखें खोलती है तो उसके मुँह से एक जोर की चीख निकल जाती है ....

आगे

मीरा झटके से बीएड पर बैठ कर अपने जिस्म को ढकने में लग जाती है ....

मीरा की चीख सुन वो लड़की भगति हुयी आती है ...

लड़की : मैडम आप चीखी क्यों .... कुछ प्रॉब्लम है क्या ....

मीरा : ये तुम लोगो ने किसे मस्सगे के लिए भेजा है ...

लड़की : ma'am अपने hi तो स्पेशलिस्ट मस्सागेर की डिमांड की थी ये वही हैं ... इनसे मस्सगे करवाने के लिए लम्बी क़तर लगी रहती है ... वो जरा ऑफ सीजन है इसलिए अभी ये फ्री थे तो जल्दी आपको अपॉइंटमेंट मिल गया ...

मीरा : तुम लोगो में दिमाग नाम की कोई चीज नहीं है क्या एक लेडीज का मस्सगे करने के लिए तुमने एक गेट्स को अप्पोइंट किया हुआ है .... बुलाओ अपने रिसेप्शनिस्ट को ...

वो मस्सागेर दरअसल एक 40 - 45 का मेल था .... वो बस मीरा की बात सुन कर मुस्कुराये जा रहा था ....

थोड़े hi देर में रिसेप्शनिस्ट आती है ...

मीरा : ये तुमने मेल मस्सागेर क्यों भेज दिया .... कोई फीमेल को भेजना था न ...

रिसेप्शनिस्ट : ma'am अपने hi स्पेशलिस्ट मस्सागेर की डिमांड करो थी ये वही हैं ...

मीरा : मुझे नहीं करवाना इससे कोई मस्सगे वस्सागे ...

रिसेप्शनिस्ट : सॉरी ma'am अब आपका पैसा रेतुर्न नहीं हो सकता तो आपको मस्सगे करवाना hi पड़ेगा ....

मीरा : मुझे मस्सगे नहीं करवाना न hi मुझे मेरे पैसे चाहिए ... अगर कोई फीमेल मस्सागेर को भेजना हो तो भेजो वर्ण मैं जा रही और तुम लोगो की शिकायत पुलिस में भी करुँगी की तुम लोग कैसे लोगो को लूट रहे हो ....

रिसेप्शनिस्ट : ok ma'am मैं किसी फीमेल मस्सागेर को भेजती हु ....

और फिर सभी लोग चले जाते हैं .... वो मस्सागेर भी अपने दिल पर पत्थर रख कर चला जाता है .... एक खूबसूरत औरत के नंगे जिस्म को छूने और मसलने का मौका उसके हाथ से निकल चूका था ...

करीब 10 मिनट के बाद एक फीमेल मस्सागेर आती है और मीरा के पुरे जिस्म की अचे से मस्सगे करती है .... मस्सगे के बाद जब वो बहार आती है तो वो और भी खिली खिली महसूस करती है ...

तरुण अभी भी बहार बैठा हुआ था वो अभी जस्ट थोड़े देर पहले hi वह आया था ...

जब मीरा अंदर गयी थी ुशी वक्त तरुण ने शहनाज़ को कॉल किया था .... किस्मत से शहनाज़ का घर भी ुशी इलाके में पड़ता था जिस एरिया में ये ब्यूटी पारलर था ... थोड़े देर में hi वो तरुण को पिक उप करने आ गयी और अपने साथ उसको अपने घर ले गयी ... शहनाज़ का घर भी ाचा खासा बना हुआ था ....

तरुण : आपके घर में कोई दिख नहीं रहा शहनाज़ जी ...

शहनाज़ : मेरे सौहार तो बिसनेस के सिलसिले में आउट ऑफ़ स्टेशन गए हुए हैं .... बेटी तो अभी हॉस्टल में है ... बाकि सास ससुर तो अपने बड़े बेटे के साथ hi गाँव में रहते हैं ...

तरुण : यू मैं आप अभी पूरी तरह अकेली हो ...

शहनाज़ : जी हाँ आज तो मौका भी है और दस्तूर भी क्यों न हम आज फिर से एक हो जाये .... लास्ट टाइम ट्रैन में तो हमने क्विक सेक्स किया था जिसमे मुझे इतना मज़ा आया था की पूछो मत ... क्या कहते हो सुरु किया जाये ...

तरुण तो पहले से hi करुणा और मीरा की वजह एक्ससिटेड हुआ बैठा था और सेक्स के लिए इससे बेस्ट और कुछ हो भी तो नहीं सकता था ...

शहनाज़ तरुण को अपने रूम ले जाती है और चाँद लम्हो में hi दोनों के कपडे उनके जिस्म का साथ छोड़ देते हैं ... तरुण शहनाज़ को बीएड पर लिटा देता है और उसके बड़े बड़े पपीता के साइज के बूब्स को दबाने और चूसने में लग जाता है ....

थोड़े देर उसके जिस्म का मज़ा लेने के बाद तरुण ने अपना लुंड शहनाज़ के मुँह में दाल दिया ... शहनाज़ बहुत hi गरम औरत थी वो खुल कर तरुण का साथ दे रही थी और बड़े मज़े से तरुण के लुंड को आइस क्रीम की तरह चुस्ती जा रही थी ....

अब तरुण ने अपना लुंड शहनाज़ के मुँह से निकला और उसको बीएड पर डोगग्य पोजीशन में झुका कर उसकी छूट में अपना पूरा खूंटा एक hi झटके में थोक देता है ... अब तरुण शहनाज़ की बड़ी सी गांड को पकड़ लेता है और जोर जोर से धक्के लगाने लगता है .... हर धक्के के साथ थप थप की आवाज़ निकल रही थी जो की इस मिलान के लिए एक सुहानी सी धुन कंपोज़ कर रही थी ....

सुपर एक्ससिटेड होने की वजह से 8-10 मिनट में hi वो शहनाज़ की छूट में ढेर हो जाता है ... उसके बाद दोनों बीएड पर लेट जाते हैं ... फिर दोनों नंगे पुंज हालत में hi एक साथ शावर लेते हैं और शावर लेने के दौरान भी उन्होंने एक राउंड सेक्स किया ....

अब तरुण ने जल्दी अपने कपडे पहने क्यूंकि मीरा कभी कभी मस्सगे रूम से बहार आ सकती थी ...

शहनाज़ कपनी गाडी से तरुण को पारलर तक पहुंचा देती ....

शहनाज़ : अब कब मिलोगे ...

तरुण : पता नहीं ...

शहनाज़ : तुम्हारे साथ रहती हु तो वक्त का पता hi नहीं चलता .... बहुत मज़ा आता है तुम्हारे साथ ... काश मैं तुम्हारी ham-umra होती तो तुमसे hi शादी करती चाहे उसके लिए सरे ज़माने से क्यों न लड़ना पड़ता ....

तरुण : कोई बात नहीं ... आप अपने परिवार पर अचे से ध्यान दो ... क्या पता जिंदगी के किसी मोड़ पर फिर मुलाकात हो जाये ...

शहनाज़ : अब तो मेरा नंबर भी है तुम्हारे पास .... जिंदगी में चाहे किसी भी मोड़ पर किसी भी वक्त हमारी जरुरत पड़े तो याद जरूर करना ... भले hi हमारा रिश्ता गलत तरीके से सुरु हुआ हो पर ये प्यार सच्चा है ....

और शहनाज़ की आंखें नाम हो जाती है ... तरुण को शहनाज़ का यु इमोशनल होना समझ नहीं आता पर वो शहनाज़ के इमोशंस की क़द्र करते हुए उसको अपनी बांहो में भर लेता है ...

तरुण : ाचा बाबा कॉल करता रहूँगा .... आफ्टर आल यू अरे वैरी स्पेशल तो में ... Bye ... अब आप घर जाओ एंड टेक केयर ...

तरुण शहनाज़ के आँखों से बह रहे ौन्शू को अपने हाथो से साफ़ करता है ...

शहनाज़ जवाब में तरुण के गाल पर किश करती है .... उसके बाद तरुण शहनाज़ की कार से उतर जाता है और शहनाज़ तरुण को bye करती हुयी अपने घर को चली जाती है और तरुण पारलर के अंदर ....

***********************

थोड़े देर में hi तरुण और मीरा गाडी में थे ...

तरुण : आपको काफी देर हुयी अंदर मैडम ....

मीरा : वो अंदर उनकी मस्सागेर लेट से आयी इसलिए देर हो गया ... सॉरी फॉर थे लेट बीटा ....

तरुण : कोई बात नहीं मैडम ... अभी आप बहुत अछि लग रही हो बिलकुल किसी अप्सरा के जैसी ....

दुनिया की शायद hi कोई ऐसी औरत या लड़की होगी जिसे खुद की तारीफ सुन्ना पसंद न हो .... मीरा भी अपनी तारीफ सुन बहुत खुस हुयी ...

मीरा : झूट मत बोलो मैं तो अब बुद्धि हो गयी हु ... मैं कहा से अब अप्सरा टाइप लगूंगी ...

तरुण : नहीं मैडम सच में ... अगर आपको और सुहानी ma'am को एक साथ खड़ा कर दिया जाये तो आप उनकी बड़ी बहन के जैसी लगोगी .....

मीरा : बस बस बहुत हो गयी झूटी तारीफ .... अब घर चले हम पहले से hi काफी लेट हो गए हैं ....

तरुण चुप - चाप गाडी चलने लगता है ...

मीरा : तरुण एक बात बताओगे ....

तरुण : जी मैडम पूछिए ....

मीरा : क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है ...

तरुण : नहीं तो क्यों ....

मीरा : वैसे hi कह रही थी की इतने अचे खासे हो .... हाइट भी ठीक है .... बॉडी भी ठीक है .... ऐसे लड़के लड़कियों की नजर से कहा बच पते हैं ....

तरुण : मैंने आपकी तारीफ की इसलिए मेरी खिंचाई कर रही हो क्या आप ....

मीरा : नहीं बाबा मैं सच कह रही हु ...

तरुण : ok मैडम थैंक यू फॉर आस्किंग बूत ी ऍम आल अलोन ...

मीरा : तरय करो कोई भी अछि लड़की पैट जाएगी ...

तरुण : थैंक्स मैडम .... लीजिये घर आ गया ...

उसके बाद मीरा गाडी से उतर कर चली जाती है ... तरुण पीछे से उसकी मटकती गांड को देखता रह गया .... मीरा बड़े घर में पाली बढ़ी थी और ससुराल भी उसको बड़ा hi मिला था जिसके वजह से वो हमेसा से बन थान के रही थी तो अछि लग्न तो लाजिमी hi था ...

जब से तरुण को मीरा के अफेयर के बारे में पता चला तब से उसके मन में उसके लिए रेस्पेक्ट काम हो गयी थी .... कल रात को अगर मीरा ने लाइट न जलाई होती तो बुआ भतीजे का कोई सन बन सकता था ....

आज सुबह से hi शौर्य सिंह अपने बेटे से नजरे चुरा रहे थे क्यूंकि मीरा ने उन्हें लास्ट नाईट के बारे में बता दिया था ...

रात होते hi हल्दी वाली रश्म सुरु हो गयी ... भैरवी की सहेलिया भी शादी में आयी हुयी थी जिसके वजह इस घर में जो फ्रेमलेस की तादाद पहले से hi ज्यादा थी वो और भी ज्यादा हो गयी थी ....

रात

अब शादी का दिन भी आ गया था सुबह से hi सभी घरवाले अपने अपने कामो में लगे थे .... तरुण को डेकोरेशन और खाने खिलने वाले काम को देखने का जिम्मा दिया गया था ...

शेर सिंह और बाकि के बचे खुचे गेस्ट्स भी दोपहर तक आ जाते हैं .... तरुण करुणा के हस्बैंड से भी मिला जो की घर में आयी हुयी भैरवी की सहेलियों को ताड़ने में लगा रहता था ....

तरुण (मन में) : लगता है करुणा सच hi कहती है की ये इतनी खुबसुआरत बीवी के होते हुए भी बहार मुँह मरता फिरता है .... कोई न बच्चू तेरी बीवी को पहले मैं hi टास्ते करूँगा उसके बाद जूठन तुझे मिल जाएगी ....

इवनिंग को तरुण अपने रूम में बैठा शादी के लिए तैयार होने की सोच hi रहा था की एक लड़की उसके रूम आती है ...

लड़की : ए लड़के तुम्हारा नाम तरुण hi है न ...

तरुण : जी हाँ मेरा hi नाम तरुण है ...

लड़की : तुम्हे भैरवी ने बुलाया है नीचे ...

तरुण : आप चलिए मैं अभी आया ...

थोड़े देर में तरुण भैरवी के रूम में आता है .... भैरवी उस टाइम रूम में अकेली थी ....

तरुण : भैरवी जी अपने मुझे बुलाया है क्या ...

भैरवी : गेट बंद करके इधर आओ ...

तरुण गेट को लॉक करके अंदर आता है ...

भैरवी : बताओ न मैं कैसी लग रही हु ...

तरुण : बिलकुल चाँद से उतरी किसी अप्सरा की तरह ....

भैरवी तरुण को जोर से गले लगा लेती है ...

तरुण भी भैरवी के माथे पर अपने हाथ से सेहला देता है ...

भैरवी : ये खुशनुमा दिन मैं तुम्हारी वजह से देख रही हु ... अगर उस रात तुम न होते तो पता नहीं क्या अनर्थ हो जाता ....

तरुण : देखो उस बात को कोई बुरा सपना समझ कर भूल जाओ ... अभी आपको अपने प्रेजेंट पर ध्यान देना चाहिए ...

भैरवी : अभी मुझे तुम्हारे गालो को चूमने का बड़ा मन कर रहा है पर मेरी लिपस्टिक ख़राब हो जाएगी .... तो क्या तुम मेरे गाल को चुम सकते हो ...

तरुण : वो क्यों भला आज रात आपकी शादी है ... अब ये सब मत करो ...

भैरवी : तुम भी निरे बुद्धू hi हो ... अरे बाबा तुमने उस रात को मुझे बचा कर एक भाई एक प्रोटेक्टर का फ़र्ज़ निभाया तो अगर एक भाई अपनी बहन के गाल चुम ले तो क्या बुराई है इसमें .... और आज तुम ये वाली ड्रेस पहनोगे ये ड्रेस मैंने खास तुम्हारे लिए hi कह्रिद्वये हैं क्यूंकि मैं नहीं चाहती की मेरा भाई किसी से काम दिखे .... पर सबसे पहले मेरे गाल को चूमो ....

तरुण : अपने जब मुझसे रिश्ता जोड़ hi लिया है तो क्यों नहीं ....

तरुण आगे बढ़ कर भैरवी के दोनों गालो को चुम लेता है ...

भैरवी : अब मेरा श्रृंगार पूरा हुआ .... मेरे भाई ने मुझे अपनी स्वीकृति दे दी आज मैं बहुत खुस हु ...

तरुण : आप बहुत प्यारी हो दीदी .... आपको किसी की नजर न लगे ... आप अब आराम करो मैं रेडी होने जाता हु ... आखिर दुल्हन का भाई हु कोई मजाक थोड़े hi है ...

भैरवी (हस्ती हुयी) : जरूर ... जाओ रेडी हो जाओ और रेडी होने के बाद यहाँ जरूर आना ... मैं तो देखु मेरी पसंद तुम्हारे ऊपर कितना जंचती है ....

तरुण : जी दीदी ...

*********

8 बजे के करीब बारात आ जाती है और फिर जोरो शोरो से शादी के रश्मि सुरु हो जाते हैं ... तरुण ने सेज भाई की तरह भैरवी की शादी में धूम मचाया वो चाहे डांस हो या कोई काम हर जगह तरुण की hi धूम थी ....

शादी के बाद भैरवी एक नए घर के लिए विदा हो गयी पर जाने से पहले वो तरुण से लिपट कर बहुत रोई ... किसी गैर के लिए भैरवी का इतना प्यार देख घर के सभी लोग हैरानी थे .... सिर्फ एक hi शक्श इन्हे ऐसे देख हैरान नहीं थी वो थी सुहानी जो की खुद उस रात की चश्मदीद गवाह थी ....

शेर सिंह शादी के अगले दिन hi अपने घर को लौट गया .... अभी सुहानी और उसकी माँ को कुछ और दिन वही रहने का मन तहत इसलिए वो वही रुक गए और साथ में hi तरुण भी ...

एक बेटी के जाने से जैसे पुरे घर का hi सुख चैन छीन गया था ... सब जहा तहा इमोशनल दिख रहे थे ...

रात में मीरा का गेट नॉक होता है जब वो गेट खोलती है तो बहार विकाश खड़ा था ....

मीरा : अरे बीटा तुम इतनी रात को मेरे रूम में ... क्यों कोई बात है क्या ... आओ अंदर आओ ...

विकाश रूम में घुस कर गेट को अंदर से लॉक कर देता है ...

मीरा : तुमने गेट क्यों लॉक किया ....

विकाश : बुआ जब से मैंने आपकी कहानी सुनी है तब से hi मुझको पापा से जलन सो होने लगी है .... उनके साथ आपको इमेजिन करके hi मैं तड़प जाता हु ....

और विकाश मीरा की तरफ बढ़ने लगता है ....

मीरा : देखो विकाश तुम मुझे गलत समझ रहे हो ..... मेरे और तुम्हारे पापा के बीच जो भी हुआ उसमे प्यार था एक अंडरस्टैंडिंग थी .... हमारी कुछ जरूरते थी ...

विकाश : क्या खाक प्यार था अंडरस्टैंडिंग था ... मुझे बस एक बात पता है की मैं आपको छोड़ना चाहता हु ...

मीरा : ये क्या बेहूदगी है ... बुआ हु मैं तेरी ... रिश्तो का कुछ तो लिहाज़ किया होता बोलने से पहले ...

विकाश : रिश्ता तो आपका भी पापा के साथ था सेज भाई बहन का तो अपने कौन सा रिश्ते का फ़र्ज़ निभाया ....

मीरा : देखो बीटा ये गलत बात है मैं तुम्हारी माँ जैसी हु ...

विकाश : माँ जैसी हो माँ तो नहीं हो ... पापा के साथ इतने बार किया है मेरे साथ कर लोगी तो कौन सी आपकी छूट घिस जनि है ....

मीरा : प्लीज बीटा मेरे सामने ऐसी गन्दी जुबान में बात न किया करो ... वर्ण मैं तुम्हारे पापा से शिकायत कर दूंगी ...

विकाश : उनसे डरता हु क्या मैं .... उलटे मैं तो अब फूफा जी से आपकी शिकायत कर दूंगा आपकी की आप उनके पीठ पीछे अपने सेज भाई का बिस्तर गरम कर रही हो ... सिर्फ गरम hi नहीं कर रही बल्कि एक सेक्सी सी प्रोडक्ट भी लांच कर डाली है अपने .... और तो और आप उन्हें अपना दुश्मन भी मानती हो ....

मीरा : प्लीज ऐसा न कहना विकाश .... पर ऐसे hi मैं तुम्हारे साथ रैंडम्ली तो नहीं कर सकती न मुझसे सोचने के लिए वक्त चाहिए ....

विकाश : 2 दिन में तो मैं यहाँ से चला जाऊंगा तो जो भी करना हो जल्दी करना ... पर आज मुझे अपने इन् amrit-kalaso (चुकी) को छूने का तो मौका दे दो ....

मीरा : बोलै न आज नहीं सोच कर बताउंगी ....

विकाश : मुझे जल्दी से जवाब चाहिए वर्ण मैं क्या कर सकता हु आप जानती hi हो ....

और फिर विकाश मीरा के रूम से निकल जाता है ... वही मीरा जल्दी से गेट लॉक करके बीएड पर आ जाती है और किसी सोच में गम हो जाती है ....
 
अपडेट 36

विकाश : मुझे जल्दी से जवाब चाहिए वर्ण मैं क्या कर सकता हु आप जानती hi हो ....

और फिर विकाश मीरा के रूम से निकल जाता है ... वही मीरा जल्दी से गेट लॉक करके बीएड पर आ जाती है और किसी सोच में गम हो जाती है ....

आगे

मीरा देर रात तक एहि सोचती रह जाती है उसको दूर दूर तक कोई उम्मीद की किरण नजर नहीं आ रही थी जिससे वो विकाश से बच सके ... अगर वो ये बात शौर्य सिंह को बताती तो भी कोई खास फायदा होने वाला नहीं था .... छोटे भाई को बताने से मामला और भी उलझ सकता था इसलिए मीरा को ये काम अपनी फॅमिली से बहार के इंसान से करवाना था .... पर अनजान साक्ष से ये सब शेयर करने में भी उसका hi नुकसान था की वो उसका कोई अलग hi फायदा न उठा ले .... ऊपर से अगर विकाश ने ये बात शेर सिंह के साथ शेयर कर दी तो वो उसको और उसके भाई को कुत्तो से भी बदतर मौत दे सकता है ....

आखिर में हार मान कर मीरा ने खुद के जिस्म को विकाश के हवाले करने का hi फैसला किया और बोझिल मन से सोने जाने लगी ...

अब मीरा सोने में लिए जाने लगी की अचानक से उसके जेहन में तरुण का ख्याल आता है ...

मीरा : क्या तरुण इस सब में मेरी हेल्प करेगा ??? क्या पता विकाश की तरह वो भी मुझे ब्लैकमेल करके कोई फायदा ले ले .... मैं उसको ये सब कैसे बताउंगी .... वो जब ये जानेगा की मैं अपने भाई का hi बिस्तर गरम करती हु तो मेरे बारे में उसके मन में जो रेस्पेक्ट बानी हुयी है क्या वो कायम रह पायेगी .... अभी तो काफी रात हो गयी है इतनी रात को उससे मिलने जाने से कोई नया बखेड़ा न खड़ा हो जाये ... ठीक है उससे सुबह hi बात करती हु क्यूंकि पता नहीं जब ये विकाश अपनी डिमांड पूरी करने आ जाये ....

एहि सब सोच कर मीरा सो जाती है ....

मॉर्निंग को तरुण का गेट नॉक होता है .... बहार अस उसुअल करुणा आयी हुयी थी ...

तरुण ने उसको अंदर लिया ....

तरुण : गुड मॉर्निंग दीदी....

करुणा : गुड मॉर्निंग ..

तरुण : अरे यू रेडी फॉर थे एक्सरसाइज ....

करुणा : हाँ बस अब मुझे जल्दी से फिट कर दो .... अपने पति का और इग्नोरेंस अब बर्दास्त नहीं होता .... तुम तो मिले hi हो उनसे ...

तरुण : हाँ दीदी मैंने नोटिस किया की वो और दूसरी लड़कियों की तरफ ज्यादा अत्त्रक्ट हो रहे थे ....

करुणा : मैं ये सब शादी वाले दिन से hi झेल रही हु ...

तरुण : वो आपके साथ बहुत गलत कर रहे हैं ... ी मैं अगर वो आपको लिखे hi नहीं करते थे तो उन्हें शादी के लिए हाँ करना hi नहीं चाहिए था ... ऐसे बिच मझधार में छोड़ना कहा का इंसाफ है ...

करुणा : मैं तुम्हे एक छोटी सी तकलीफ देना चाहती हु .... िफ़ ु don't मंद ...

तरुण : हाँ बोलो न दीदी ...

करुणा : यार वो मैं आयल से बूब्स पर तो मस्सगे कर लेती हु पर मेरे बैक का हिस्सा मुझसे नहीं हो पता .... तो क्या तुम कुछ दिनों के लिए मेरा ये काम कर डोज .... देखो तुम्हे मैंने अपना भाई मन है और एक बहन का टूट रहा घर अगर तुम बचा डोज तो तुम्हारी बड़ी मेहेरबानी होगी ...

तरुण (कुछ देर सोचने का नाटक करने के बाद ) : ok दीदी ी ऍम रेडी .... पहले आप एक्सरसाइजेज करो उसके बाद मैं आपका मस्सगे कर दूंगा ....

उसके बाद तरुण करुणा को सिस्टेमेटिक ढंग से सरे एक्सरसाइजेज करवाता है .... एक्सरसाइज करने के बाद करुणा को काफी थकन होने लगती है ...

तरुण : अब आप फर्श पर लेट जाओ ... मैं आपका मस्सगे कर देता हु ....

करुणा जल्दी से अपने सरे कपडे खोल कर नीचे फर्श पर बिछे चादर पर लेट जाती है ...

तरुण पहले उसको पीठ के बल लिटाता है और उसके कमर के पोरशन पर एक छोटा सा टॉवल रख देता है जिससे करुणा का बेसकीमती खज़ाना धक् जाता है ... वैसे करुणा बक्सीडे से तो बिलकुल कोरी थी और उसके फ्रंट साइड की भी ज्यादा खुदाई नहीं हुयी थी ....

अब तरुण करुणा के मोठे मोठे बूब्स पर आयल दाल कर हलके हाथो से मस्सगे करने लगता है ... करुणा को इससे बहुत मज़ा आ रहा था .... करुणा के बूब्स तो बड़े बड़े थे पर उसके निप्पल और उसके अरेओला छोटे थे ...

बूब्स के मस्सगे हो जाने के बाद तरुण उसको पेट के बल लेटने को कहता है ... अब करुणा के मटके जैसे चूतड़ तरुण की आँखों के सामने थे ...

तरुण करुणा के बड़े बड़े चूतड़ों पर आयल सकता है और धीरे धीरे उसका मस्सगे करने लगता है ... आज भी करुणा तरुण के द्वारा दिए गए मस्सगे से डिस्चार्ज हो गयी थी ....

मस्सगे के बाद करुणा जल्दी जल्दी अपने कपडे पहन कर चादर को समेत अपने रूम आ जाती है ....

दोपहर के करीब तरुण को उसके मोबाइल पर एक मैसेज आता है ... मैसेज मीरा का था और वो उसको मार्किट चलने को कह रही थी ... तरुण जल्दी से रेडी होकर उसके साथ मार्किट निकल लेता है ....

तरुण : मेमसाब क्या बात है आज आप कुछ साद साद सो दिख रही हो ... जब से आप आयी हो मैंने आपके मुँह से एक वर्ड भी नहीं सुना है ....

मीरा : राइट ले लो .... ******* पार्क में हमें जाना है ....

तरुण : पार्क ... पर अपने तो मैसेज में लिखा था की अपने शॉपिंग करनी है ...

मीरा : सब बताउंगी बाबा पहले चलो तो ...

थोड़े देर में hi वो पार्क के गेट के बहार थे ... ये एक पेड पार्क था और आम तौर पर यहाँ मॉर्निंग और इवनिंग को hi आते थे और इस वक्त ये बिलकुल खली होता था ... ये बात मीरा जानती थी ...

आज भी कुछ ऐसा hi था उन्होंने टिकट किया और पार्क के कार्नर पर एक बड़े से bargad(banyan) की छांव में वो बैठ जाते हैं ... ये बरगद का पेड़ ढेरो पंछियो का बसेरा था ... यहाँ पंछियो की चहचहाट मन मोह लेती थी ...

तरुण : अब बताओ मम आप साद क्यों हैं और अपने मुझे यहाँ क्यों बुलाया ...

मीरा (साद टोन में) : तरुण क्या मैं तुम्हारे ऊपर ट्रस्ट कर सकती हु ...

तरुण : बिलकुल मम आपको मेरी वफादारी पर कोई शक है क्या ...

मीरा : देखो तरुण मैं फ़िलहाल जिस मेन्टल सिचुएशन से गुजर रही हु तो मुझे किसी पर इतनी आसानी से भरोषा नहीं होता ....

तरुण : मम अगर आपको मुझपर भरोषा hi नहीं तो अपने मुझे यहाँ बुलाया hi क्यों ...

मीरा : तुम पहले मुझे प्रॉमिस करो की मैं अभी तुम्हे जो कुछ भी बताने वाली हु वो तुम अपने तक hi सिमित रखोगे ... प्लीज ये मेरी इज्जत और जिंदगी का सवाल है ...

तरुण : ऑफ़ कोर्स मम इतना तो मैं आपको प्रॉमिस कर hi सकता हु ... अब बताओ बात क्या है ...

अब मीरा तरुण को सुरु से वो सब बताती है की कैसे शेर सिंह ने उसकी भाभी को मारा एंड आल जो की तरुण खुद भी जनता था पर वो अनजान होने का नाटक करता हुआ बीच बीच में चौकने का नाटक जरूर करता जाता .... साडी कहानी सुन लेने के बाद वो भी जहां सोच में पद गया ...

तरुण : आपके नाजायज़ सम्बन्ध हैं आपके सेज बड़े भाई के साथ और अपने ये बात अपने भतीजे को बताई तो वो आपको ब्लैकमेल करके आपके साथ जिस्मानी रिश्ता कायम करना चाहते हैं ... तो मम इसमें मैं आपकी क्या सहायता कर सकता हु ... आपका जो मन है वो करो ... अगर आप उसकी बात नहीं मानोगी तो वो सब कुछ आपके पति को बता देगा तो हो सकता है आपके पति आपका सर कलम करवा दे ... अगर इस बात की जरा सर भी भनक सुहानी ma'am को होगी तो उस मासूम के दिल पर क्या बीतेगी इसका अंदाज़ा है आपको ...

मीरा : यार मैं पहले से hi काफी टेंशन में हु अब बात को और न उलझाओ ...

तरुण : अब मैंने क्या किया सब आपका hi किया धरा है ... अपने अपने बड़े भैया से हेल्प नहीं मांगी ...

मीरा : वो तो खुद घबरये हुए हैं .... उन्होंने तो सब मुझ पर hi छोड़ दिया है और कहा है की मैं विकाश की बात मान की .... बंद दरवाज़े के पीछे क्या हो रहा है किसे क्या पता ...

तरुण : ये तो काफी वाहियात लॉजिक है ... क्या आप सच में ऐसे इंसान से प्यार करती हो जो आपको मुसीबत में देख अपना पल्ला झाड़ ले ...

मीरा : मैंने तुम्हे लेक्चर देने के लिए नहीं इससे बचने का कोई तरीका बताने के लिए बुलाया है ...

तरुण : वैसे आपको आपका भतीजा विकाश कैसा लगता है ... क्या वो भरोसे के लायक है ...

मीरा : बिकुल नहीं .... अब जल्दी से कोई प्लान बनाओ ... अगर हो सकता है तो करो वर्ण मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो ....

तरुण : आपके पास वक्त भी तो काम है .... हो सकता है आज रात को वो आपको अपने साथ सोने के लिए विवश करे ... और आज रात की hi आपको टेंशन है न ....

मीरा : हाँ बाबा हाँ ... कल वो यहाँ से चला जायेगा ....

तरुण : एक तरीका तो है मेरे दिमाग में .... सुनो ......

और तरुण मीरा को एक प्लान बताता है प्लान सुनते hi मीरा के चेहरे पर ख़ुशी लौट आती है .... वो इतना एक्ससिटेड हो जाती है की जोर से तरुण को गले लगा लेती है ....

पर तुरंत hi उसको अपनी गलती का एहसास होता है और वो झटके से तरुण से अलग हो जाती है ....

मीरा : तुम्हे पक्का यकीं है न की ये प्लान काम करेगा ...

तरुण : अगर अपने पुरे तरीके से इस प्लान को अप्लाई किया तो जरूर ये काम करेगा .... अब सब कुछ आपके ऊपर है .... जो सामान लेन का है वो मैं ले आऊंगा आप टेंशन न लो .... आप बुरा न मने तो आपसे एक बात पूछनी थी ....

मीरा : पूछो ....

तरुण : क्या आप अब भी अपने बड़े भैया से जिस्मानी रिश्ता कायम रखोगी ....

मीरा सोच में पद जाती है ...

तरुण : क्या हुआ मम जवाब दो ... क्या आप ऐसे शक्श के साथ जिस्मानी रिश्ता कायम रख सकोगी जो मुसीबत में आपका साथ छोड़ दे ... आज उसका बीटा है कल को अगर आपके पति के सामने उन्होंने अपना मुँह खोल दिया तो ....

मीरा : मैं क्या करू बोलो .... मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा तोहफा (सुहानी) उनकी hi दें है ....

तरुण : मैं कहा कुछ कह रहा मैं तो बस आपका व्यू जानना चाहता था ...

मीरा : अभी मुझे पता नहीं ... पहले मेरे सामने जो सबसे बड़ी प्रॉब्लम कड़ी है उससे तो निकल लू .... बाद की बाद में देखूंगी ... अगर मैं इस प्रॉब्लम से अस आईटी इस निकल गयी तो बोलो मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकती हु ...

तरुण : मैं हर काम अपने फायदे के लिए नहीं करता मम .....

मीरा : सो स्वीट ऑफ़ यू .... ठीक है अब घर चलो मुझे काफी कुछ तयारी भी तो करनी है ... तुम बहुत प्यारे हो तरुण ...

तरुण : आपके बेटे की उम्र का हु मम मुझसे तो फ्लिर्टिंग न करो ...

मीरा : मैं तुम्हे नहीं बता सकती की तुमने मेरे सर के ऊपर से कितना बड़ा बोझ उतरा है ... काश ये प्लान सक्सेसफुल हो जाये ...

तरुण : बे पॉजिटिव मम यू विल बे ऑलराइट....

मीरा : मेरे सरे राज़ तो तुम जान चुके हो अब तुमसे कासुअल रह hi सकती हु ... क्या हम दोस्त बन सकते हैं ...

तरुण : बॉडीगार्ड कभी दोस्त नहीं होते मन ...

मीरा : अब प्लीज ये सलमान का सदा हुआ डायलाग छोडो ... क्या तुम मेरे दोस्त बनोगे ...

तरुण : पर क्यों ...

मीरा : तुम आज मेरे काम आ रहे हो .... क्या पता फ्यूचर में मैं तुम्हारे किसी काम आ जॉन ... वैसे भी मेरे बहुत काम दोस्त हैं ....

तरुण : ok मम .. ी ऍम रेडी ....

मीरा : अगर तुम्हारा प्लान सक्सेसफुल रहा तो तुम्हे मेरे तरफ से एक ट्रीट मिलेगी ....

तरुण : ok मम ....

और फिर तरुण मीरा के साथ वापस घर लौट आता है रस्ते में एक मेडिकल स्टोर से तरुण ने कुछ ख़रीदा .... लगे हाथ मीरा ने भी एक शॉपिंग मॉल से सुहानी और अपने लिए एक एक ड्रेस ले लिए थे ताकि उन्हें सभी को बताने के लिए एक बहाना मिल सके ....

जैसे hi मीरा घर आती है तो उसका सामना उसके सुहानी से होता है ...

सुहानी : माँ आप अचानक से कहा चली गयी थी ...

तब तक पीछे से तरुण शॉपिंग बैग्स लिए हुए एंटर करता है ....

मीरा : वो बीटा पता नहीं कब यहाँ से निकलने का प्रोग्राम बन जाये तो इसलिए सोचा की कुछ शॉपिंग कर लिया जाये ...

मीरा सुहानी को उसका बैग थमा देती है तो वो खुस होकर अपने रूम भाग जाती है .... तरुण भी उसके पीछे पीछे अपने रूम को आ जाता है ....

मीरा भी अपने रूम में एंटर करती है ... वो वाशरूम में होती है की तभी उसको अपने रूम के गेट के लॉक होने की आवाज़ आती है ....

मीरा को लगता है की कही उसके रूम में विकाश तो नहीं आ गया .... उसके जिस्म में तो कंपकपी छूटने लगी थी ये सब सोच कर के hi .... तरुण ने उसको प्लान तो बता तो दिया था पर वो रात को hi इम्प्लीमेंट किया जा सकता था ....
 
अपडेट 37

मीरा भी अपने रूम में एंटर करती है ... वो वाशरूम में होती है की तभी उसको अपने रूम के गेट के लॉक होने की आवाज़ आती है ....

मीरा को लगता है की कही उसके रूम में विकाश तो नहीं आ गया .... उसके जिस्म में तो कंपकपी छूटने लगी थी ये सब सोच कर के hi .... तरुण ने उसको प्लान तो बता तो दिया था पर वो रात को hi इम्प्लीमेंट किया जा सकता था ....

आगे

काफी देर बाद मीरा धड़कते दिल के साथ अपने वाशरूम का गेट खोलती है .... तभी उसको बीएड पर उसका बड़ा भाई शौर्य सिंह नजर आता है जिसे देख उसकी जान में जान आती है ....

मीरा : भैया आज आप मेरे रूम में क्या बात है ...

शौर्य : वैसे hi क्यों नहीं आ सकता क्या ... अपने घर में भी कही आने जाने में मुझे किसी की इजाजत की जरुरत पड़ेगी क्या ...

मीरा : मेरे कहने का वो मतलब नहीं था भैया ...

शौर्य : इधर आओ मुझे तुमसे कुछ जरुरी बात करनी है ....

मीरा : हाँ जी बोलो ...

शौर्य : आज तुम कहा गयी थी ...

मीरा : शॉपिंग करने और कहा ...

शौर्य : इतने देर में सिर्फ दो जोड़ी कपडे की hi शॉपिंग करि है मुझे उल्लू समजती हो क्या ....

मीरा : अरे बाबा घर में बैठी बोर हो रही थी तो सोचा घूम फिर लू ...

शौर्य : ये तुम्हारा उस नौकर तरुण के साथ घूमना फिरना कुछ ज्यादा नहीं हो रहा ... पता नहीं कैसे परिवार का है किस जाती कुल का है उसके साथ इतना घूमना फिरना सही नहीं है .... कही कुछ ऊंच नीच हो जाये क्या पता ....

मीरा : भैया प्लीज मैंने कहा था न की आप उसको नौकर नहीं बोलोगे ...

शौर्य : वह क्या बात है एक अनजान लड़के के लिए मुझे अपने भाई छुम हस्बैंड से जुबान लड़ा रही हो ....

मीरा : मैं आपसे जुबान नहीं लड़ा रही सिर्फ कह रही की उसको नौकर न कहो ...

शौर्य : कही तुम्हारा उस लड़के के साथ कोई चक्कर वक्कर तो नहीं चल रहा ... कही वो तेरी रातें तो रंगीन नहीं कर रहा ...

मीरा : वह भैया मान गयी मुझे नहीं पता था की आपकी सोच इतनी घटिया है .... आपके बेटे ने खुलेआम मुझसे सेक्स करने को फाॅर्स कर रहा उसके खिलाफ तो आपकी जुबान से एक शब्द न निकले और एक निर्दोष के खिलाफ आपने अपने मन में क्या क्या भूसा भरा हुआ है ....

शौर्य : देखो मैं तुमसे प्यार करता हु तो मैं नहीं चाहता था की तुम किसी मुसीबत में फासो ...

मीरा : वह क्या प्यार है जब मैंने सुबह को आपके बेटे की करतूत बताई तो अपने मुझे उसके नीचे लेटने को कह दिया था .... एक बार भी नहीं सोचा की मुझ पर क्या बीत रही होगी ....

शौर्य : उसकी बात नहीं मानोगी तो वो तुम्हारे पति को बता देगा उसके आगे का तो तुम जानती hi हो की अगर उसको पता चलेगा तो सबसे पहले वो मेरा सर कलम करेगा उसके बाद तुम्हारा और फिर शायद तुम्हारी बेटी को भी वो न छोड़े ... तुम्हारे एक हामी से इतने लोगो की जान बच सकती है ... जैसे मेरे साथ या अपने पति के साथ सेक्स करती हो वैसे hi करना होगा हाँ शायद एक जवान मर्द होने की वजह से तुम्हे और ज्यादा मज़ा आये ....

मीरा (गुस्से से) : तो ऐसा है तो आप hi क्यों नहीं अपनी गांड मरवा लेते अपने बेटे से ...

शौर्य : देखो मीरा ये कुछ ज्यादा नहीं हो रहा ... मैं तुम्हारी कोई बात का बुरा नहीं मंटा इसका मतलब ये नहीं की तुम जो मन में आये वो बोलो ....

मीरा : आप बात hi ऐसी करती हो ...

शौर्य : ाचा वो सब छोडो मुझे एक प्यारी सी मीठी सी किश दे दो ...

मीरा कोई भी रिएक्शन नहीं देती तो शौर्य सिंह उसको खिंच कर बीएड पर लिटा देता है और उसके ऊपर चढ़ कर उसके होंठो पर अपने होंठ रख कर उसके मुँह का स्वाद लेने लगता है ... मीरा भी बुझे मन से उसका साथ देने लगती है ....

शौर्य सिंह के हाथ अब मीरा के सुडौल चूचियों पर आ गए थे और वो उन्हें बेरहमी से मसलने लगता है ...

मीरा : उफ्फफ्फ्फ़ ऊऊऊऊऊक्कछःह लग रही है .... भला कोई इन्हे इतने जोर से दबाता है क्या ...

शौर्य : हाँ मेरी जान मैं दबाता हु ... चलो न आज एक राउंड हो गए .... वैसे भी बहुत दिन हो गए तेरी छूट मरे हुए ...

मीरा : आपका दिमाग तो ठिकाने पर है अभी दिन है और मैं अभी कुछ नहीं करने दूंगी .... कब कौन आ जाये क्या पता ... अब आप अपने रूम जाओ ... बाद में मौका देख अपना प्रोग्राम सेट करते हैं ...

शौर्य : ाचा काम से काम अपनी छूट hi दिखा दो ....

मीरा : जी नहीं उसको देखने के बाद आप मानेंगे नहीं और मैं नहीं चाहती की और कोई बखेड़ा खड़ा हो ...

शुअरय : ाचा बाबा ठीक है पर जल्द hi कोई प्रोग्राम सेट करो मेरा लुंड तुम्हारी छूट में जाने को बेक़रार है ....

मीरा : ok अब जाओ भी मुझे आराम करना है ....

शौर्य सिंह बुझे मन से मीरा के रूम से चला जाता है और मीरा अपना गेट लॉक करके बीएड पर लेट कर रात के लिए प्लानिंग करने लगती है ....

इवनिंग में करुणा फिर से तरुण के रूम में आती है जहा तरुण उसको एक्सरसाइज वगैरह करवाता है उसके मन में भी रात को मीरा के साथ होने वाले इंसिडेंट के प्रति उत्सुकता थी की मीरा सब कुछ सही से हैंडल कर पायेगी या नहीं ...

डिनर के बाद मीरा सीधे अपने रूम आ जाती है .... जैसा की उसको अंदेशा था वैसे hi रात के करीब 11 बजे उसके रूम का गेट नॉक होता है ....

वो जब गेट खोलती है तो बहार विकाश मौजूद था ... वो चौंकने और घबराने की एक्टिंग करती है जिसके जवाब में विकाश मुस्कुराता हुआ उसके रूम में एंटर करता है और गेट को अंदर से लॉक कर देता है ....

मीरा : ये तुम गेट को क्यों लॉक कर रहे हो ...

विकाश : क्या बुआ आप भी बच्चो जैसी बात करती हो हम जो करने वाले हैं वो बंद कमरों में hi तो किया जाता है ... अगर आपको खुले में करने का शौक है तो ी don't मंद ... तो अपने क्या डीडे किया आप मेरे साथ सेक्स करोगी या मैं आपकी करतूत फूफा की को बताऊँ ...

मीरा (घबराते हुए) : तुमने मुझे बड़े धर्मसंकट में दाल दिया है .... मैं हमारे बिच के रिश्ते को शर्मसार करू या अपने पति के हाथो मरी जॉन ... मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा ...

विकाश (हस्ते हुए) : मेरी बात मान लो बुआ मैं आपको आपके बूढ़े यार से ज्यादा मज़ा दूंगा .... वैसे भी जब एक बार आप अपने पति धोखा दे hi चुकी तो दूसरी बार देने में क्या हर्ज़ है ...

मीरा कुछ देर सोचने का नाटक करती है ...

मीरा (घबराई आवाज़ में ) : अब मेरे सामने और कोई रास्ता बचा hi नहीं है तो क्यों न मैं खुल कर तुम्हारे साथ मज़े करू .... तुम वैसे भी अब काफी डैशिंग हो गए हो अपने पापा से तो ज्यादा अचे जरूर होंगे बिस्तर पर ....

विकाश : ये हुयी न मेरी डार्लिंग बुआ वाली बात ... चलो अब मज़े करते हैं ... आपको नहीं पता की मैं जब से आपका दीवाना रहा हु .... आपको सपनो में बहुतो बार नंगी कर चूका हु ... जब मुझे आपका राज़ पता चला तो मैंने सोचा क्यों न अपने सपनो को साकार किया जाये और देखो तो आज वो हसीं रात आ hi गयी ...

मीरा : वो सब तो ठीक है पर मैं चाहती हु की हम अपने नए रिश्ते की शुरुआत मुँह मीठा करते हुए करे ....

विकाश : अब इतनी रात को हम मिठाई कहा से लाएंगे ...

मीरा : फ्रीजर में पड़ी होगी मैं अभी लती हु ...

विकाश : जल्दी लाना बुआ अब शाबर नहीं होता ...

थोड़े देर में hi मीरा एक प्लेट में कुछ सूखे रसगुल्ले लिए आती है ... ये रसगुल्ले तरुण ने hi इवनिंग को मीरा को लेकर दिए थे ...

रसगुल्ले हमेसा से विकाश के फेवरेट रहे थे ये बात मीरा बखूबी जानती थी ...

अब दोनों बुआ भतीजे बीएड पर बैठे थे और उनके बीच में रसगुल्ले की प्लेट राखी हुयी थी ....

उनमे से एक रसगुल्ला उठा कर मीरा विकाश की तरफ बढाती है .... विकाश को हल्का सा मीरा पर शक था इसलिए वो मीरा के हाथ वाला रसगुल्ला खाने से मन कर देता है ...

विकाश : नहीं बुआ आप मुझसे बड़ी हो तो मैं चाहता हु की ये रसगुल्ला पहले आप hi खाओ ...

मीरा उस रसगुल्ले को खा लेती है ... थोड़े देर बाद कन्फर्म होने पर विकाश जल्दी जल्दी प्लेट में बाकि बचे रसगुल्ले चाट करने लगता है ....

विकाश : लो बुआ और खाओ न ...

मीरा : नहीं मैंने एक खा लिया न डॉक्टर ने मुझे मीठे से दूर रहने को कहा है डायबिटिक पेशेंट हु न ...

उसके बाद विकाश मीरा को और फाॅर्स नहीं करता और सरे रसगुल्ले खुद hi खा लेता है ....

विकाश : चलो बुआ अब मुँह तो मीठा हो hi गया अब अपना कार्यक्रम सुरु करते हैं ....

मीरा : रुको मैं अभी आयी चेंज करके ....

और मीरा एक सेक्सी सी निघ्त्य लेकर वाशरूम में घुस जाती है और करीब 15 मिनट बाद रूम आती है ....

अब विकाश बीएड पर बैठा हुआ जम्हाई ले रहा था क्यूंकि रसगुल्लों में नींद की दवा का असर था और ये बहुत फ़ास्ट असर करती थी .... प्लेट में रखे हुए सरे रसगुल्ले में एहि दवा मिली हुयी थी सिवाए एक के जो की मीरा ने खुद खाये थे ...

विकाश की पलके अब बोझिल होने लगी थी और वो कुछ देर में hi नींद की वादियों में जाने लगता है ....

कुछ देर में hi उसके खर्राटे आने सुरु हो जाते हैं तो मीरा बीएड के नीचे झुक कर तरुण को आवाज़ देती है जो की उसके बीएड के नीचे घुसा हुआ था ....

वो बात ये थी की डिनर के पहले hi तरुण मौका देख मीरा के रूम में घुस कर छुप गया था और डिनर भी करने नहीं गया था ... विकाश के आने के पहले भी वो मीरा को सब कुछ समझा बुझा कर डायलॉग्स रिहर्सल करवा रहा था ...

मीरा : आ जाओ तरुण ये हरामी सो गया ... हमारा प्लान काम कर गया ...

तरुण : अभी कहा मैडम अभी तो प्लान को फाइनल टच देना बाकि है वर्ण उसको लगेगा की अपने उसको धोखा दिया है ....

मीरा : अब क्या करना है .....

तरुण : पहले तो इसके सरे कपडे उतरने हैं क्यूंकि ये आपके अकेले के बस की बात नहीं है ....

तरुण मीरा की हेल्प से विकाश के जिस्म से सरे कपडे उतर देता है और उसको बीएड पर नंगा लिटा देता है ... और मीरा के हाथ में एक डिब्बी देता है ...

तरुण : ये लो इस डिब्बी में मेरे स्पर्म हैं .... अब ये सुबह से पहले नहीं उठेगा तो आप बिंदास इसके साथ नंगी सो सकती हो ... अगर इसको जरा भी शक हुआ तो ये आपको माफ़ नहीं करेगा ...एक बार आप बीएड पर hi फिंगरिंग कर लेना और अपने प्राइवेट part से निकले पानी और इस स्पर्म सैंपल को मिला कर कुछ मिक्सचर आप अपने प्राइवेट part के आस पास लगा लेना और कुछ इसके लुंड पर और हो सके तो अपने प्राइवेट part के पास कुछ रेड कलर लगा लेना ताकि सब कुछ रियल सा लगे .... Ok मैडम अब मेरा काम हो गया ... सुबह को बताना की क्या हुआ था न आल ... Bye गुड नाईट मैडम ...

मीरा : थैंक्स यार पर मुझे इसके साथ सोने में घबराहट सी हो रही है कही ये रात में जाग न जाये और मेरे साथ सच में कुछ कर दे ....

तरुण : नहीं मैडम ऐसा कुछ नहीं होगा .. ये फुल्ली टेस्टेड मटेरियल है ...

और फिर तरुण बिना कोई आहात किये मीरा के रूम से निकल कर सीढ़ियों से होते हुए ऊपर जाने लगता है और मीरा अपना गेट लॉक करके अपने सरे कपडे उतर कर नंगी हो जाती है और तरुण के कहे अनुसार सरे काम को अंजाम देने लगती है ....

इधर तरुण जैसे hi फर्स्ट फ्लोर पर पहुँचता है की सुहानी के रूम का गेट खुलता है जिससे वो बहार आती है ...

सुहानी : अरे तरुण तुम नीचे से कहा से अस रहे हो ... तुम्हारा रूम तो ऊपर है न ...

तरुण : वो मेरे रूम में पानी की बोतल नहीं थी तो नीचे पानी पीने गया था ... वैसे आप इतनी रात को कहा ...

सुहानी : अरे वो मुझे नींद नहीं आ रही थी तो सोची जरा घूम फिर लू तो शायद नींद आ जाये .... चलो मैं भी छत पर hi जा रही थी ...

तरुण को सुहानी का साथ वैसे भी बहुत पसंद था तो वो इस खास मौके को कैसे छोड़ देता ...

सुहानी : सुना है तुम करुणा दीदी की हेल्प कर रहे हो फिट होने में ...

तरुण : हाँ उन्होंने बताया क्या ...

सुहानी : हाँ वो बता रही थी की वो हमारे साथ hi चल रही हैं वही हम कुछ दिन साथ रहेंगे ...

तरुण : ये तो अछि बात है अगर फिट होने से उनका उजड़ते हुए घर में फिर से खुसिया लौट आये तो क्या बुराई है ....

सुहानी : हाँ दीदी और जीजू के बीच सब कुछ सही नहीं है ... ी वांट तो थैंक यू की तुम मेरे परिवार के लिए इतना कुछ कर थे हो .... पहले मुझे और मेरी माँ को उस दिन बचाया उसके बाद भैरवी दीदी की इज्जत बचायी और फिर करुणा दीदी का घर भी बचने के लिए म्हणत कर रहे ....

तरुण : ये तो मेरा फ़र्ज़ है मैडम अपने hi एक दिन कहा था न की मैं आपका नौकर नहीं आपका फॅमिली मेंबर हु .... वैसे आपको भी फिट होना है क्या ...

सुहानी : न बाबा न मुझसे ये सब सुबह उठना न आल नहीं होगा ... वैसे भी मैं पहले से hi फिट हु ....

तरुण : आप बिलकुल परफेक्ट हो ... वैसे हम कब यहाँ से निकलेंगे ...

सुहानी : 2 या 3 दिन में ... पापा भी वह जल्दी से जल्दी आने को कह रहे .... वैसे मुझे वह से ज्यादा मज़ा यहाँ आता है ... वह एक घुटन सी महसूस होती है यहाँ सब कुछ खुला खुला सा लगता है .... पता नहीं कब मैं इस बंधन से आज़ाद हो पाऊँगी ...

तरुण : बहुत hi जल्द ... ी मैं जब आपकी शादी हो जाएगी ....

सुहानी : ok तरुण गुड नाईट मुझे नींद आ रही है .... मुम्मा में साथ तो बहुत घूम लिए कल हम लोग घूमने जायेंगे ....

तरुण : ok मैडम गुड नाईट ...

उसके बाद दोनों अपने अपने रूम्स में सोने चले जाते हैं ...

सुबह विकाश के उठने से पहले hi मीरा उठ जाती है पर सोने का नाटक करती रहती है ....

विकाश उठता है तो उसकी नजर अपने बगल में सो रही बुआ पर पड़ती है जो की अभी भी पूर्णतया नग्न अवस्था में थी ... उसके छूट और पेट के हिस्से ने स्पर्म के सूखे हुए अवशेस पता चल रेट थे एयर तो और उसके लुंड पर भी वैसे hi मिक्सचर लगा हुआ था ... उसको समझते देर न लगी की रात में उसने लम्बी पारी खेली है ....

विकाश मीरा के होंठो को चुम लेता है ....

विकाश : हाउ वास् थे नाईट मेरी जान बुआ ... आपको मेरे साथ ज्यादा मज़ा आया या मेरे बुढऊ बाप के साथ ...

मीरा : साडी रात मेरी हालत ख़राब करने के बाद ये सब पूछते हो ....

विकाश : सॉरी बुआ लगता है रात में कुछ ज्यादा hi हो गया ... पूरा बदन दर्द कर रहा है ...

मीरा एक निघ्त्य लेकर वाशरूम घुस जाती है ... थोड़े देर में वो निघ्त्य पहन कर वापस रूम आती है ...

मीरा : अब ऐसे hi नंगे पड़े रहोगे या कपडे पहन कर बहार भी जाओगे .... किसी को पता चल गया तो हमारी क्या इज्जत रह जाएगी ...

विकाश : ok बुआ मैं जल्दी से चला जाता हु ... सो बहार देखो तो कोई बहार देखने वाला तो नहीं है न ....

करुणा से निपटने के बाद तरुण के मोबाइल पर मैसेज टोन आता है ... मैसेज मीरा का hi था जिसमे लिखा था मिशन सक्सेसफुल ... ये देख तरुण में चेहरे पर ख़ुशी तैर जाती है ...

ब्रेकफास्ट के बाद वो घूमने के बहाने से एक पार्क में पहुँचता है और अपना सीक्रेट सिम मोबाइल में लगता है .... तो उसके मोबाइल पर 2 - 3 मिनट तक लगातार मेस्सगेस hi आते रहते हैं ... करीब 400 -500 मेस्सगेस थे ... ज्यादातर मेस्सगेस रुचिका और प्रियांशी के hi थे कुछ मैसेज श्रेया और दिया के भी थे ....

तरुण जल्दी से रुचिका को फ़ोन लगता है .... वो तुरंत hi कॉल पिक कर लेती है ...

तरुण : गुड मॉर्निंग दीदी ...

रुचिका : गुड मॉर्निंग मेरा बच्चा कैसा है ....

तरुण : आल फाइन दीदी ... उम्मीद है जल्दी hi मेरा काम पूरा हो जायेगा .....

रुचिका : तू जल्दी से आ जा ... मुझे हर वक्त तेरी hi चिंता होती रहती ... अगर दिक्कत हो रही तो छोड़ दे न ये सब बदले में क्या रखा है हमने पहले hi इस चक्कर में अपने बहुत लोगो को खो दिया है ...

तरुण : नहीं दीदी मैं उसको बर्बाद करके hi आऊंगा ... आप मेरी चिंता न करो मैं सब कुछ बिना सामने आये हुए करूँगा ... किसी को कानो कण खबर नहीं होगी ...

रुचिका : ये ले प्रिय आ गयी ...

प्रियांशी : गुड मॉर्निंग छोटे कैसा है ...

तरुण : गुड मॉर्निंग दीदी ी ऍम फाइन और आप ...

प्रियांशी : मुझे क्या होना है ... बस तेरे बारे में सोच सोच कर मोती होती जा रही हु ...

तरुण : आपका उल्टा केस है सब कोई किसी के बारे में सोच कर पतले होते हैं और आप ... कोई नहीं और घर में सब कैसे हैं ....

प्रियांशी : घर से याद आया अगले हफ्ते रानी दीदी को देखने लड़के वाले आ रहे हैं ...

तरुण : ठीक से रहना कही आपको पसंद कर के न ले जाएं ...

प्रियांशी : अभी मेरे में देर हैं बच्चू इतनी जल्दी तेरा पीछा न छोडूंगी ... मेरा नंबर 3 लोगो के बाद है अभी ...

तरुण : दीदी आप लोगो से मिलने का बहुत मन करता है ...

प्रियांशी : तो आ जा न मेरे बाबू ... अब कुछ भी करने से हमने जो खोया है वो तो वापस नहीं आ सकता न ....

तरुण : ok दीदी अब रखता हु ... काफी सोच समझ कर एक एक कदम रखना पड़ता है ...

रुचिका : ok बाबू अपना ख्याल रखना ... लव यू 😘😘

तरुण : bye दीदी लव ु 2 ...

उसके बाद तरुण श्रेया और दिया से भी हलकी फुलकी बात चित कर लेता है और वापस से वो सिम निकल कर रख लेता है और वापस घर आ जाता है ...
 
अपडेट 38

रुचिका : ok बाबू अपना ख्याल रखना ... लव यू 😘😘


तरुण : bye दीदी लव ु 2 ...

उसके बाद तरुण श्रेया और दिया से भी हलकी फुलकी बात चित कर लेता है और वापस से वो सिम निकल कर रख लेता है और वापस घर आ जाता है ...

आगे

दोपहर को hi विकाश अपने लगेस के साथ रवाना हो जाता है ..... उसके जाते hi मीरा की जान में जान आयी ...

इवनिंग को सुहानी, तरुण को साथ लेके घूमने के लिए निकलने वाली थी की करुणा भी उनके साथ हो ली ....

अब घर में Meera,ketan,Divya और शौर्य सिंह hi बचे थे ....

मीरा : चलो अब सब कुछ सही से निपट गया .... भैरवी बीटा भी अब तक अपने ससुराल में सेटल हो गयी होगी तो मैं सोच रही हु की मैं भी परसो यहाँ से निकल जाती हु ...

मीरा की बात से तो जैसे शौर्य सिंह के सीने पर छुरिया चला दी हो ...

शौर्य : अरे इतनी जल्दी भी क्या है ... अभी कुछ दिन और तो यहाँ रह hi सकती हो ....

दिव्या : हाँ दीदी आप और सुहानी हो यहाँ तो हमारा मन भी लगा रहता है वर्ण हम मैं दिन भर भूत की तरह घूमती रहूंगी ...

मीरा : मुझे वह भी देखना होगा न भाभी वैसे भी यहाँ आये काफी फिन हो गए ...

केतन : अरे दीदी ये भी तो आपका hi घर है न .... यहाँ रहो चाहे वह रहो क्या फरक पड़ता है ...

मीरा : वो तो है केतु ये तो मैं भी जानती हु की ये मेरा घर है पर बेतिया शादी के बाद ससुराल की अमानत हो जाती है ...

केतन : तो परसो नहीं मंडे को चले जाना ... फ्राइडे को भैरवी आ रही है तो मैं सोच रहा हु की क्यों न सैटरडे को हम सब कही घूमने चलते हैं उसके बाद आप चली जाना ...

मीरा : वो सब तो ठीक है केतु पर आज ट्यूसडे है ... यानि की मुझे 6 दिन और रुकना होगा ...

शौर्य सिंह के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है ...

दिव्या : हाँ दीदी हाँ ... रही बात शेर सिंह भाई साहब की तो मैं फ़ोन कर के उन्हें मन लुंगी ... अब तो रेडी हो न आप ...

मीरा : पर सुहानी ...

केतन : अरे दीदी सुहानी बिटिया तो यहाँ और भी ज्यादा खुस रहती है ....

मीरा : ठीक है मैं रेडी हु पर ट्यूसडे से आगे मैं एक दिन भी नहीं रुकूंगी ...

***************

गाडी तरुण ड्राइव कर रहा था और उसके बगल में सुहानी बैठी हुयी थी और करुणा बैक सीट पर ....

तरुण : आज कहा जाने का इरादा है मैडम ...

सुहानी : ये तो करुणा दीदी hi बताएंगी की यहाँ कहा कहा घूमने की जगह है ..

करुणा : वैसे तो दिन में घूमने की बहुत सो जगह है पर अभी घूमने लायक पार्क या तो मॉल hi है ... वैसे यहाँ से थोड़ी दूर पर एक पार्क तो है जहा मैं कॉलेज के दिनों फ्रेंड्स के साथ चिल करने आया करती थी ....

सुहानी : फ्रेंड्स या बॉयफ्रेंड हऊणंन्न ...😂😂

करुणा (शर्माती हुयी 😢) : कामिनी बोलने से पहले जगह तो देख लिया कर ...

सुहानी : ऊऊप्प्प्पलस्स सॉरी दीदी ... 😜

तरुण : दीदी के बॉयफ्रेंड भी थे ....

सुहानी : और नहीं तो क्या मेरी दीदी भी अपने टाइम की माँ... ऊप्स मस्त यानि कॉलेज की सबसे सुन्दर लड़की में से थी ... पहले तो मैं भी सोचती थी काश मैं भी दीदी की तरह दिखती तो लोग मुझे भी अटेंशन देते

.... पर मुझे देखो आज तक बॉयफ्रेंड के नाम पर एक माचिस की तिल्ली तक नहीं है ....

करुणा : तो मैंने कहा था क्या तुम्हे की एक हिटलर के घर पैदा हो ....

सुहानी : अपने मेरे पापा को हिटलर कहा ... अब तो आप गयी मैं अभी फ़ोन करके पापा की बताती हु ...

करुणा : नहीं यार ऐसा गजब न करना फूफा जी मेरी जान ले लेंगे ... अभी मुझे वह 10 - 15 दिन रहना भी है ...

सुहानी : चलो जाओ माफ़ किया आप भी क्या याद करोगी की किस दिलदार बहन से पला पड़ा है ...

करुणा : हम्म्म्म छिपकली कही की ...

तरुण : लो जी मैडम आपका पार्क आ गया ...

तरुण 3 टिकट ले आता है और वो लोग पार्क में एंटर करते हैं ... पार्क अँधेरे में आर्टिफीसियल लाइटिंग की वजह से काफी खूबसूरत लग रहा था हर तरफ रंग बिरंगे फूल खिले थे .... वो लोग जैसे hi और अंदर गए माहौल और भी रंगीन नजर आने लगा क्यूंकि जगह जगह पर भँवरे कलियों और फूलो का रास चूसने में लगे हुए थे ... कोई किसी काली को जकड के बैठा था तो कोई पकड़ के 😂😜😂😜😂😜 .....

सुहानी तो सब लोगो को ऐसे खुलेआम ये सब करते देख बिलकुल शॉक हो गयी थी वही करुणा की तो सांसें hi थमने लगी थी की ये आज कल इस पार्क में हो क्या रहा है ....

तभी दो छुहारे जैसे सूखे लौंडे वह से गुजर रहे थे जो की ैनवाय hi आस पास की हरियाली को देख लार टपकते हुए इधर उधर उड़द रहे थे उन्होंने सुहानी और करुणा को तरुण के साथ देखकर कमेंट पास किया ...

लड़का 1 : ये बड़ी नाइंसाफी है विनोद हम सेल ऐसे hi रांडवो की तरह घूम रहे हैं इसकी किस्मत तो देखो दो दो कंटाप आइटम के साथ घूम रहा ...

तरुण ने गुस्से में घर कर उन्हें देखा तो उनकी सिटी पित्ती गम हो गयी ...

विनोद : अबे माधरचोद क्यों गांड मरवाने पर तुला है देख नहीं रहा उसकी बॉडी सदी सुता के गांड मार लेगा ... भाग माधरचोद जल्दी से ...

वो दोनों मच्छर तुरंत hi भिनभिनाते हुए उड़द लिए ... सुहानी और करुणा ये देख कर जोर जोर से हसी जा रही थी ...

करुणा : यार दुनिया में एक से एक नमूने भरे पड़े हैं ...

सुहानी : दीदी मेरे बॉडीगार्ड का एक हाथ उन्दोनो को पड़ता न तो वो उठते नहीं बल्कि उठ जाते ...

सुहानी की बात सुन तरुण के चेहरे पर भी मुस्कान आ जाती है ... सुहानी को इतना बिंदास वो पहली बार देख रहा था ....

वो लोग थोड़ी देर पार्क में इधर उधर घूमते हैं उसके बाद एक आइस क्रीम पारलर से आइस कहते हुए घर वापस लौट आये ..

अभी घर के सभी बड़े लोग दिंनिंग टेबल पर बैठे गप्पे हाँक रहे थे ...

दिव्या : ये लो आ गयी मेरी गुड़िया रानी ... कहा कहा इंस्पेक्शन किया आज ...

सुहानी : कही नहीं ममी जी वो करुणा दीदी एक पार्क ले गयी थी वही हमने खूब मस्ती करि ...

मीरा : तरुण बीटा तुम खड़े क्यों हो आओ बैठ जाओ तुम भी अब इस फॅमिली के एक मेंबर हो ...


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मीरा

मीरा तरुण का हाथ पकड़ उसको अपने बगल वाली सीट पर बिठा लेती है ... शौर्य सिंह ये देख मन hi मन जल भून उठा ...

थोड़े देर में hi घर के नौकरो ने उनका टेबल सजा दिया ... आज सारा खाना सुहानी की पसंद का बना था इसलिए उसने ख़ुशी से दिव्या का हाथ चुम लिया ...

दिव्या : मैं सोच रही हु की आज मैं अपनी गुड़िया रानी के साथ सो जॉन आपको कोई ऐतराज़ तो नहीं है ...

केतन : अरे मुझे क्या ऐतराज़ हो सकता है तुम्हारे और तुम्हारी लाड़ली के बीच आने वाला मैं कौन होता हु ...

करुणा : बुआ जी आप क्यों अकेली सोयेंगी आज आप मेरे रूम में सो जाना ...

मीरा : जैसी तुम्हारी मर्जी बीटा ....

ये सुनते hi शौर्य सिंह की तो झांटें hi सुलग गयी कहा तो उसने सोचा था की आज अपनी बहन को दबा के छोड़ेगा ... उसके अरमानो पर तो पानी फिर गया ...

शौर्य (मन में) : ये सब इस चुड़ैल दिव्या की वजह से हुआ है न ये सुहानी के साथ सोने को कहती तो करुणा भी नहीं कहती ... दिन भर साली अपने मोठे मोठे चूतड़ मटकती घूमती रहती है .... इसको क्या पता मेरे दिल पर क्या गुजरती है ... मन को कर रहा पटक के साली की गांड मार लू ....

सुहानी (शौर्य सिंह को हिलाते हुए) : क्या हुआ बड़े मां जी किस दुनिया में खो गए ...

शौर्य : कुछ नहीं बीटा ... बस काम के सिलसिले में कुछ सोच रहा था .... अब काफी रात हो चुकी है तो जाओ सो जाओ कल बात करते हैं ....

उसके बाद सब सोने चले जाते हैं ...

तरुण अपने रूम आ जाता है उसका मन नहीं लग रहा था तो उसने अपना वो सीक्रेट सिम निकल कर मोबाइल में लगाया ... उसने सोचा था की अपनी बहनो से बात करके थोड़ा टाइम पास कर लेगा ....

उसने जैसे hi सिम लगाया तो उसके मोबाइल पर नोटिफिकेशन आने लगे जिसमे से एक नया अननोन नंबर से भी hi hello के कुछ मेस्सगेस थे तरुण ने चेक किया तो पता चला की उस नंबर से काफी दिनों से कॉल्स आ रहे थे जो सिम मोबाइल में न लगे होने की वजह से पता नहीं चल रहा था ...

तरुण ने उसे अननोन नंबर पर कॉल लगाया .... कॉल पहली रिंग में hi पिक कर लिया गया ...

तरुण : hello ...

........ : (साइलेंट)

तरुण : hello कौन हो आप ... काफी दिनों से मेरे नंबर पर आप कॉल कर रहे हो बताओ कौन हो आप ....

..... : m....m..... मैं हु ....

तरुण को अपोजिट साइड से आती हुयी फीमेल की ये आवाज़ कुछ जनि पहचानी लगी ....

तरुण : हैल्लो कौन हो आप बताओ तो ...

...... : मैं बोल रही हु तुम्हारी माँ .... तुम बहुत दिनों से नहीं हो तो तुम्हारी चिंता तो रही थी तो फ़ोन किया ....

तरुण : फ़ोन रख कामिनी ... मेरा नंबर तुम्हारे पास कहा से आया .... मुझे तुम्हारी परछाई से भी नफरत है मैं तुमसे बात नहीं करना चाहता .... आइंदा से मुझे कॉल करने की कोसिस की तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा ....

....... : (मेल टोन) बीटा ये क्या तरीका है अपनी माँ से बात करने का .... मन की उसने बहुत बड़ी गलती की पर वो तो तुम्हारी माँ है क्या तुम अपनी माँ को माफ़ नहीं कर सकते ....

तरुण : तू कौन है बे और किस हक़ से तुमने मुझे बीटा कहा .... जब जब मुझे सहौंहुति या प्यार की जरुरत महसूस हुयी उस वक्त तो नहीं दिखे .... जब मुझे सताया गया मारा गया अपने hi घर में जानवरो जैसा सुलूक किया गया उस वक्त तो नहीं दिखी कोई भी सिम्पथी तुम्हारी ... आज तुम्हारी बीवी से जरा सा रौदे हो कर बोल दिया तो बड़ा बुरा लग रहा है .... अरे मैं तुम लोगो से बातें hi क्यों कर रहा मेरा तुम्हारा कोई रिश्ता नहीं .... मर चुके हो तुम लोग मेरे लिए और मैं तुम्हारे लिए ... माफ़ी की बात तो दूर दूर तक नजर नहीं आती .... जितना सितम तुम दोनों मिया बीवी ने मुझ पर किया है उतना तो शायद कोई किसी दुसमन के साथ भी न करे .... मुझे तो लगता है की क्या सच में मैं तुम लोगो की hi औलाद हु या कही मंदिर की सीढ़ियों से उठा क्र लायी थी ....

और तरुण घुटनो के बल बैठ कर रोने लगता है ...

सुमित्रा : देखो ऐसे रोवो मत मेरा कलेजा पहात रहा है काश मैं वक्त को बदल कर पीछे जा सकती तो सबसे पहले मैं तुम्हारे ऊपर किये गए हर जुल्म सितम को बदलकर तुम्हारे लिए प्यार hi प्यार भर देती ... तुम मुझे माँ मनो या न मनो पर तुम्हे बीटा कहने का अधिकार मुझसे नहीं छीन सकते ... बीटा प्लीज मुझे एक मौका दे कर देखो अगर सब कुछ सही न कर दिया तो मेरा नाम बदल देना ...

तरुण (जोर से) : नहीं देना मुझे कोई भी मौका तुम्हे ... नहीं देना मुझे कोई भी मौका तुम्हे .... पहले क्या तुम मुझ पर जुल्म धने से पहले सोचती थी क्या की मुझे भी खुद की बेगुनाही साबित करने क्क एक मौका मिलना चाहिए या नहीं .... पर नहीं तुम तो अपने उस लादले की बातो में आ कर मुझ पर जुल्म ढाती थी .... क्या पता अब तक तो तुम अपने लादले की रखैल भी बन चुकी होगी ..... खैर मुझे इस क्या तेरी जिंदगी है तू जैसे चाहे जी पर आइंदा से मेरे नंबर पर तुम्हारा फ़ोन नहीं आना चाहिए .....

और फिर तरुण फ़ोन काट देता है ... तरुण और उसकी माँ दोनों का बहुत बुरा हाल था दोनों जोर जोर से रोये जा रहे थे .... जहा एक तरफ पछतावे के आंशू थे तो दूसरी तरफ खुद पर हुए मेन्टल टॉर्चर और जुल्म को याद करके बहने वाले आंशू थे .... क्या पता भविस्य में इनके दिल मिलने की संभावनाएं भी है या नहीं ये नहीं पता ...

सुमित्रा (रट हुए) : मैंने अपनी गलती की वजह से अपना बीटा खो दिया है. .... अब मेरा तरुण मुझे कभी भी वापस नहीं मिलेगा .... कितनी बेवकूफ थी मैं जो किसी दूसरे की बातो में आ कर उसके ऊपर जुल्म करती थी ... शायद ऊपर वाला मुझे नरक में भी जगह न दे .... मैं तो माँ कहलाने के लायक hi नहीं हु माँ शब्द के नाम पर कलंक हु ... वो चाहे तो मुझे जान से मार दे बस अब एक hi ख्वाहिस अब बची है की बस एक बार सीने से लगा कर वो मुझे माँ कह दे .... बस एक बार माँ कह दे .... बस एक बार माँ कह दे .. .

और एहि सब बोलते बोलते सुमित्रा बेहोश हो जाती है ....

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तरुण ने अपना वो सीक्रेट सिम अपने मोबाइल से निकल लिया ....

तरुण : अब मैं ये सिम तब तक नहीं डालूंगा जब तक की मेरा काम पूरा न हो जाये .... यहाँ का काम पूरा होने के बाद मैं रुचिका और प्रियांशी दीदी को साथ लेकर उस घर को हमेसा हमेसा के लिए छोड़ दूंगा ... पहले एक मंझले चाचा थे जिनसे मेरा कोई वास्ता भी था अब मेरा वह है hi कौन .... एक माधरचोद दादा है जो की खुद की बहु को छोड़ने में hi मस्त है .... माँ बाप का तो होना न होना एक बराबर है .... भाभी के प्रति सिम्पथी है पर क्या करू अब भैया का कोई इलाज भी तो नहीं है .. बचा मेरा बुआ का परिवार तो उन्हें भी मैं अपने पास hi बुला लूंगा वैसे भी वो लोग इतनी घटिया फॅमिली डेसेर्वे hi नहीं करते .... अपनी दोनों दीदियो की अचे घर में शादी कर दूंगा फिर उसके बाद में कोई अछि सी लड़की देख अपना भी घर बसा लूंगा ... काश ये सुहानी मान जाये तो लाइफ hi सेट हो जाये ....


एहि सब सोचते सोचते तरुण की आँख लग जाती है ...
 
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