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अपडेट 29
आज फाइनली दोनों के बीच जो एक दीवार बची थी वो भी गिर गयी और आज तरुण ने अपने घर की पहली महिला के साथ शारीरिक सम्बन्ध स्थापित करने में सफलता हासिल कर लिया था ....
अब तो वैसे भी काफी रात गुजर चुकी थी इसलिए उन्होंने सोने में hi अपनी भलाई समझी ....
आगे
सुबह को जब श्रेया की नींद खुलती है तो वो पूर्णतया नग्न अवस्था में अपने सबसे छोटे भाई तरुण की बांहो में लेती हुयी थी ... खुद को ऐसे हाल में अपने भाई के बिस्तर में देख उसको थोड़ी शर्म सो महसूस होती है ...
तभी उसको कोई कठोर सो चीज अपने छूट की दीवार पर महसूस होती है ये कुछ और नहीं तरुण का semi-erect लुंड था ...
श्रेया (मन में) : देखो तो बदमाश की हरकत एक hi रात में इसने मुझे पूरी तरह से अपनी दीवानी बना लिया है ... कितना प्यारा लग रहा है मेरा भाई ... कितनी अछि तरह से इसने रात में मेरी खिदमत की है जैसे मैं इसकी बहन नहीं बल्कि इसकी लुगाई हु .... मेरे पति तो अब तक मुझे माँ नहीं बना पाया है अगर मेरा भाई मुझे माँ बना दे तो हाय मुझे तो सोच कर hi शर्म आ रही है ... कितना क्यूट है मेरा भाई अगर इसके जैसी hi मेरी औलाद हो तो कितना ाचा है .... अब मुझे बस मेरे भाई से कुछ बार और छोड़ना है .... इसकी गाढ़ी मलाई देख hi मुझे एहसास हो रहा है की ये कुछ मीटिंग में hi मुझे माँ बना देगा ...
और फिर श्रेया अपने तपते हुए होंठ तरुण के गालो पर चिपका देती है और फिर उठ कर जल्दी जल्दी अपने कपडे पहन लेती है और फिर तरुण को उठा कर अपने रूम को आ जाती है ....
इवनिंग को ऋचा रोटी हुयी घर आती है और उसके साथ में राहुल भी था .... हॉल में hi ruchika,priyanshi,Shreya और तरुण भी बैठे हुए गप्पे हाँक रहे थे ....
रुचिका : अरे ऋचा दीदी आप रो क्यों रही हो ... किसी ने कुछ कहा है क्या ....
ऋचा (सिसकते हुए) : छोटी आज मैं मार्केटिंग कर के लौट hi रही थी की 3 - 4 आवारा लड़के रोड के किनारे बैठे हर गुजरने वाली लड़कियों पर गंदे गंदे कमैंट्स पास कर रहे थे .... जब मैं राहुल के साथ वह से गुजरी तो उन्होंने मुझ पर भी गंदे कमैंट्स पास करे जो मुझसे बर्दास्त नहीं हुए तो मैंने उनमे से एक के गाल पर मैंने थप्पड़ जड़ दिए ... जिसके रिस्पांस में वो मेरे साथ बदतमीज़ी करने लगे तो मैंने राहुल से हेल्प मांगी तो ये उनसे न उलझने की हिदायत देने लगा ... उन् लड़को ने मेरी ओढ़नी भी फाड़ डाली और न जाने आगे क्या क्या करते .... वो तो भला हो की ुशी वक्त एक पुलिस की गाडी वह से गुजरी जिसके वजह से वो वह से हैट गए ... मौके का फायदा उठाते हुए मैं वह से भाग आयी वर्ण न जाने क्या अनर्थ हो जाता ....
ऋचा की बात सुन तरुण को राहुल और उन् आवारा लड़को पर बहुत गुस्सा आया .... भले hi ऋचा तरुण से कितनी भी नफरत करती हो पर जब बात परिवार की इज्जत की थी तो वो भला चुप कैसे रहता ....
तरुण (गुस्से से) : क्या आप उन्हें पहचान लोगी ...
ऋचा को इस वक्त गुस्से के ऐसे जोन में थी की उसको तरुण की हेल्प लेने से भी कोई दिक्कत नहीं थी वर्ण अगर नार्मल बात होती तो वो शायद hi तरुण से हेल्प लेती ...
ऋचा : हाँ ... वो लड़के मॉल के नुक्कड़ पर hi बैठे रहते हैं हमेसा ...
तरुण : तो चलो मेरे साथ ... अभी इस घर में मर्द ज़िंदा हैं .... ऐसे कोई मेरे घर की इज्जत और मान सम्मान पर हाथ नहीं दाल सकता ....
ऋचा दूसरी ओढ़नी अपने सूट में लगा लेती है और तरुण के पीछे बाइक पर बैठ जाती है और थोड़े hi देर में वो मॉल के सामने थे .... ऋचा रोड के किनारे बैठे कुछ लड़को की तरफ इशारा करती है ... वो टोटल 4 लड़के थे जो हर आने जाने वाली लड़कियों पर भद्दे रमार्क्स दे रहे थे ....
तरुण ऋचा का हाथ पकड़ कर उनके सामने आ जाता है ... ऋचा को देख उनमे से एक लड़का खड़ा हो कर उसकी तरफ बढ़ने लगता है ....
लड़का 1 : साली ... उस वक्त तो तू बच गयी पर किस्मत आज मेरे साथ है आज तुझे नहीं छोडूंगा ...
लड़का 2 : हाँ यार साली ने तेरे ऊपर थप्पड़ उठा कर ठीक नहीं आज तो साली की गए....
अभी उस लड़के ने इतना कहा hi था की एक जबरदस्त पंच उसके थोबड़े पर पड़ता है जिससे उसका पूरा जबड़ा hi हिल जाता है और पल भर के लिए उसकी आँखों के सामने अँधेरा छ जाता है ....
लड़का 3 : सेल तूने मेरे दोस्त को छुआ कैसे आज तेरी सहमत आने वाली है ... आज तू नहीं बचेगा .... तू ये भूल गया है की तू हमारे इलाके में है ....
तरुण : इलाका तो कुत्ते और सुअरो का होता है मैं शेर हु जहा जाता हु वह मेरी हुकूमत चलती है ... आजा बीटा बड़ा शौक है न तुझे लड़कियों पर कमेंटबाजी करने का ... आज में बाद तू किसी काम का नहीं रहने वाला है ... ऋचा आज पहली बार तरुण को ऐसे अवतार में देख रही थी उसका तो बड़ा मन कर रहा था की तरुण के डायलाग पर वो सिटी बजाये या उसको गले लगा ले ....
लड़का 1 ऋचा की तरफ बढ़ता है .... पर तरुण बीच में hi उसका हाथ पकड़ लेता है ....
तरुण : इन्ही हाथो से तूने मेरी दीदी की ओढ़नी फाड़ी थी न ... अब तेरा ये हाथ नहीं बचेगा ....
और फिर एक झटके के साथ तरुण ने उसके हाथ को तोड़ डाला जैसे वो पतली सी सुखी लकड़ी हो .... लड़का 1 जमीन पर पड़ा दर्द के मरे कराह रहा था ... बाकि बचे 2 लड़के तरुण के ऊपर एक साथ चाकू से अटैक करते हैं पर तरुण झुक कर उनके वार को नाकाम कर देता है और एक के पिछवाड़े पर एक जबरदस्त किक मरता है जिससे वो ुनबलने होकर एक पेड़ से टकरा कर गिर जाता है ...
अब बचा हुआ एक लड़का तरुण के ऊपर फुर्ती दिखते हुए चाकू चला देता है .... चाकू तरुण के बांह को छूटे हुए निकल जाती है है ... पल भर में hi दर्द के साथ खून बह निकलते हैं ....
वो लड़का फिर से चाकू चलता है पर तरुण इस बार अलर्ट था उसने उसके चाकू वाले हाथ पर एक फ्लाइंग किक लगा दी जिससे उसके हाथ से चाकू छिटक कर दूर जा गिरता है ... अब बाल तरुण की पाली में थी ... तरुण ने मार मार कर उसका थोड़बा सुजा डाला .... अब तरुण अपनी बेल्ट खोल लेता है और ताबड़तोड़ चारो लड़को को मरने लगता है .... बेल्ट की मार से चारो लड़के अधमरे हो जाते हैं और तरुण से अपनी जान की दुहाई मांगने लगते हैं .... तरुण भी उन्हें छोड़ देता है और उन्हें ऋचा से माफ़ी मांगने को कहता है .... वो चारो लड़के ऋचा के पैरो में गिर जाते हैं और माफ़ी मांगने लगते हैं .....
वह से गुजर रही 3 - 4 लड़किया आपस में कानाफूसी कर रही थी ... ये लोग शायद सुरु से सारा तमाशा देख रही थी ....
लड़की 1 : ये है असली मर्द ...
लड़की 2 : काश ऐसा लड़का hi मेरा बर्फ या भाई हो तो कितना ाचा होता ....
लड़की 3 : हाँ यार जो लड़का अपनी बहन के लिए इतना कर सकता है अपनी वो गफ या बीवी के लिए क्या नहीं कर सकता .... काश ये मेरा बर्फ बन जाये तो कितना मज़ा आएगा ...
लड़की 4 : तुम लोग बस सपने देखती रहो ... बूत यार ये कितना हैंडसम है और पावरफुल भी ... इसकी बांह पर चाकू लग गया है शायद कितना खून बाह रहा बिकहरे का ....
वही ऋचा तो अपने छोटे भाई को खुद के लिए स्टैंड लेता देख भावुक हो गयी थी ... वो जिस तरुण से बेइंतेहा नफरत करती आयी थी आज उसने hi उसकी मान और प्रतिष्ठा लौटाई थी और जिस राहुल को वो हमेसा लाड लड़ती आयी थी वो उसके लिए लड़ना तो दूर उसका सपोर्ट करने से भी कटरा रहा था ... तभी उसका धयान तरुण की बांह पर पड़ता है जो खून के वजह से पूरा लाल हो गया था ... वो भगति हुयी तरुण के पास आती है और अपने दुपट्टे को थोड़ा सा फाड़ कर उसको तरुण की बांह पर बांध देती है जिससे तरुण का खून बहना रुक जाता है ... इसी दौरान पता नहीं क्यों ऋचा की आँखों से कुछ आंशू की बूँदें तरुण की बांह पर गिर जाते हैं ....
तरुण : थैंक्स ... चलिए अब घर चलते हैं सभी लोग आपका वेट कर रहे होंगे ...
और फिर तरुण बाइक स्टार्ट करता है और ऋचा उसके पीछे बैठ जाती है ...
ऋचा : भाई ....
कुछ पल बीत जाने के बाद भी तरुण कोई रिस्पांस नहीं देता ...
ऋचा : भाई गाडी रोको न ... प्लीज ... मुझे तुमसे कुछ जरुरी बात करनी है ...
तरुण गाडी रोक देता है .... ऋचा गाडी से उतर जाती है .... किस्मत से वो लोग एक पार्क के आगे रुके थे ....
ऋचा तरुण का हाथ पकड़ कर उसको बाइक दे उतरवा देती है और अपने साथ लेकर पार्क के अंदर आ जाती है ....
तरुण : मैडम आप ये न समझना की मैंने आपको माफ़ कर दिया ... आपके जगह कोई अनजान लड़की भी होती तो मैं एहि करता ... और प्लीज ये भाई लफ्ज़ मेरे लिए उसे मत करना ... आपका और मेरा कोई रिश्ता न तो पहले था न hi अब है ... अब आप अपने रस्ते और मैं अपने रस्ते ....
ऋचा तरुण के घुटनो में बैठ जाती है और रोने लगती है ...
ऋचा : सॉरी न मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी ... तुम्हे पहचानने में मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गयी .... जिस भाई को बहने अपनी पलकों पर बिठा कर रखती हैं मैंने हमेसा उसको नीचे दिखाया है ... मैं जानती हु की मैं बहन कहलाने के लायक नहीं हु पर फिर भी तुमने आज मेरे इज्जत और सम्मान की रक्षा की .... जिसे मैंने हमेसा राखी बंधी की वो मेरी रक्षा करेगा वो तो थोड़ा सा संकट पड़ते hi दम दबा कर भाग गया .... सॉरी न बाबू ... तुम चाहो तो जी भर कर मुझे दांत लो मार लो पर तुम्हे भाई कहने का ये अधिकार मुझसे मत छीनो ... आज मुझे खुद से घिन्न आ रही है ... मैं आज खुद की नजरो में गिर गयी हु ....
तरुण : मैडम जी चलिए घर चलते हैं वर्ण घर वाले बेवजह परेशान होते रहेंगे ... घर पर पहले से hi दुखो का पहाड़ टुटा पड़ा है ....
ऋचा और कोई सवाल जवाब नहीं करती बस तरुण के पीछे बैठ कर घर अस जाती है ....
रुचिका और प्रियांशी जल्दी से फर्स्ट अिध किट लेकर तरुण के बांह की मरहम पट्टी करती है ....
घर वालो के पूछने पर ऋचा ने दिल खोल कर तरुण की तारीफ की जिससे तरुण की मंझली चची और राहुल जल भून उठे ....
इस इंसिडेंट ने ऋचा को पूरी तरह बदल दिया था अब वो भी तरुण के hater's क्लब से निकल कर उसके फैन क्लब में शामिल होने को उत्सुक थी पर तरुण ने बस उसको इग्नोर करना hi सही समझा .... पर ऋचा भी काफी जिद्दी किस्म की लड़की थी वो कोई काम आधा अधूरा में बिस्वास नहीं रखती थी ... वो जिसे चाहती थी उसको टूट कर चाहती थी और अगर नफरत करती थी तो वो भी टूट कर करती थी ...
इधर तरुण ने अपने तरीके से खोजबीन करि राखी थी .... अब तक की जानकारी के अनुसार उसके मंझले चाचा की मौत में शेर सिंह के शामिल होने के पुख्ता सबूत मिल चुके थे पर अब भी वो
परसेंट सूरे नहीं था .... उसने अब शेर सिंह से मुलाकात करने का मन बना लिया .... शेर सिंह पहले से hi खानदानी रईश था उसके पुरखे अंग्रेज़ो के ज़माने में जमींदार हुआ करते थे तो पैसो की तो कोई कमी उसको नहीं थी बस रुतबा 5 सालो के लिए खो गया था जब तरुण के बड़े चाचा ने उसको मुखिया के पद से हटा दिया था पर अब एक बार फिर से बाज़ी शेर सिंह के हाथ में थी .... उसने न सिर्फ मुखिया का पद हासिल किया बल्कि तरुण के परिवार को तबाह करके अपनी दबंगगिरि की जो छाप छोड़ी थी वो ओप्पोसिशन में सर उठाने वालो के लिए एक सीख थी की उससे उलझने से पहले वो हज़ार बार सोच ले ....
तरुण ने ये बात priyanshi,ruchika और श्रेया को hi बताई थी वो लोग तो तरुण को इसमें इन्वॉल्व होने नहीं देना चाहती थी क्यूंकि उन्हें तरुण की फिक्र थी पर तरुण उन्हें किसी तरह समझा बुझा कर राज़ी कर लेता है ....
श्रेया के साथ उसने अब तक 5 - 6 बार जिस्मानी सम्बन्ध बना लिए थे और इस बार श्रेया का मेंस्ट्रुअल फॉल भी नहीं हुआ था जिसके वजह से वो काफी खुस थी ....
तरुण को अपने गाँव के भी ज्यादा लोग नहीं जानते थे तो शेर सिंह तो दूसरे गाँव का था तो उससे उसके बारे में क्या खाक पता होगा फॉर भी तरुण ने रिस्क लेना सही नहीं समझा और अपना गेट उप चेंज करने के लिए वो शहर चला गया .... सबसे पहले उसने अपनी मौसताचे और बियर्ड को हटवाया और फिर फेसिअल और ब्लीचिंग करवाया .... जब उसने खुद को आईने में देखा तो पाया की अब उसका गेट उप काफी हद्द तक चेंज हो गया है ....
अब तरुण मौके की तलाश में रहने लगा की किस तरह शेर सिंह की दुनिया में एंट्री मरी जाये .... उसको ये तो पता था की शेर सिंह की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी लाड़ली बेटी सुहानी सिंह थी पर उसने आज तक न तो उसको देखा था न hi उसकी कोई फोटो उसके हाथ लगी थी ....
काफी जांच पड़ताल के बाद पता चला की दो दिन के बाद सुहानी का बर्थडे आने वाला है और उस दिन वो अपनी माँ और बॉडीगार्ड के साथ कुलदेवी के मंदिर पूजा अर्चना को जाती है .... तरुण को ये सबसे सटीक मौका लगा जिसमे वो शेर सिंह की दुनिया में एंट्री मार सके ....
धीरे धीरे अब वो दिन भी आ पहुंचा जिस दिन सुहानी का बर्थडे था .... आज तरुण सुबह तड़के hi उस मंदिर में पहुँच गया .... उसने पहले से hi कुछ प्रोफेशनल आदमी सेट कर रखे थे जो कही दूर के थे ....
कुछ देर बाद शेर सिंह की गाडी आती है जिससे पहले उसके बॉडीगार्ड उतारते हैं और पीछे का गेट खोलते हैं जिससे शेर सिंह की वाइफ और उसकी बेटी उतरती है और मंदिर के अंदर चली जाती है ..... दोनों बॉडीगार्ड बहार मंदिर के गेट पर खड़े हो जाते हैं .... अभी मंदिर में पुजारी के सिवा और कोई न था ....
चाँद मिनट बाद hi एक और गाडी आ कर रूकती है जिससे कुछ नकाबपोश आदमी उतारते हैं और उतारते के साथ दोनों बॉडीगार्ड के ऊपर फायरिंग करते हैं जिससे दोनों बॉडीगार्ड बेहोश हो जाते हैं ....
अब सरे नकाबपोश आदमी मंदिर के अंदर घुस जाते हैं और सुहानी और उसकी माँ से बदतमीज़ी करने लगते हैं ....
ठीक तभी मौका देख तरुण वह पहुँच जाता है .... एक पल को तो सुहानी को देख उसकी आंखें थम सी जाती हैं क्यूंकि सुहानी की सादगी और उसका चाँद सा मुखड़ा तरुण का चैन करार छीन लेती है और सुहानी को देख उसके दिल में कुछ कुछ होने लगता है .... सच कहा जाये तो उसको सुहानी से पहली नजर में hi प्यार हो जाता है ...
जल्द hi तरुण की चेतना वापस लौट आती है और वो कुछ डायलाग और थोड़ी फाइटिंग करके सुहानी और उसकी माँ को उन् नकाबपोश लोगो से बचा लेता है जो की उसके hi आदमी थे ... थोड़ी मार खा कर वो लोग भाग निकलते हैं ...
शेर सिंह की वाइफ : बीटा तुम कौन हो ... आज तुम न आते तो पता नहीं हमारा क्या होता ....
तरुण : कोई नहीं आंटी जी ये तो मेरा फ़र्ज़ था ... आप लोगो को मुसीबत में देख भला मैं कैसे भाग जाता ....
शेर सिंह की वाइफ : नहीं बीटा .... तुम नहीं जानते तुमने हमारे ऊपर कितना बड़ा उपकार किया है ... आज मेरी बेटी का जन्मदिन है इसलिए hi हम यहाँ पूजा करने आये थे की ये लोग न जाने कहा से टपक पड़े ....
तरुण : आंटी क्या आप इन्हे जानती हैं ....
शेर सिंह की वाइफ : नहीं बीटा हमारी तो किसी के साथ दुश्मनी भी नहीं है ...
सुहानी : मुम्मा मैंने पापा को फ़ोन कर दिया है वो जल्द hi आते होंगे ...
जैसा सुहानी का रूप था वैसी hi मीठी उसकी आवाज़ थी ... तरुण को तो सुहानी की आवाज़ इतनी प्यारी लगी की मनो उसकी आवाज़ में hi मिश्री घुली हुयी हो ....
तरुण : आंटी जी आप लोगो ने पूजा कर लिया क्या ....
शेर सिंह की वाइफ : नहीं बीटा अभी कहा .... पुजारी जी ये लीजिये पूजा की थाली ... आज पूजा मेरी बेटी सुहानी के नाम से करनी है .... आज इसका जन्मदिन है न ...
पुजारी : हाँ क्यों नहीं हर साल इसी दिन तो सुहानी बिटिया के दर्शन हो पते हैं ...
सुहानी (चहकते हुए) : मैं कोई देवी थोड़े हु पुजारी काका जो मेरे दर्शन हो ... मैं तो बस एक आम लड़की हु जिसके पेरेंट्स ने उसको बड़े प्यार से संभल कर रखा है ....
तरुण : ठीक है आंटी जी और सुहानी जी अब मैं चलता हु ... अब वो बदमाश लोग यहाँ नहीं आएंगे ....
सुहानी तरुण का हाथ पकड़ लेती है ....
सुहानी : जी नहीं आप कही नहीं जा रहे .... अपने आज हमारी हिफाज़त की है आप हमारे खास मेहमान हैं .... पूजा होने दीजिये तब तक पापा भी यहाँ पहुँच जायेंगे फिर हम साथ चलेंगे ....
तरुण तो एहि चाहता था .... ऊपर से सुहानी के रूप जाल में वो इस कदर फास चूका था की वो ये तक भूलने लगा था की वो यहाँ बदला लेने के लिए आया हुआ है .....
तरुण वही खड़ा हो जाता है और चोरी छुपे उसकी नजर बार बार सुहानी पर चली जाती थी .... ऊपर वाले ने उसको बड़ी फुर्सत से बनाया था .., उसके एक एक अंग बड़े सलीके से बनाया गया था न कही ज्यादा न कही काम बिलकुल परफेक्ट जस्ट अस ा ड्रीम गर्ल ....
थोड़े देर बाद ढेर साडी गाड़िया आ कर मंदिर के बहार रूकती है ... जिनमे से शेर सिंह अपने आदमियों के साथ उतरता है जिनमे से एक कलुआ भी था ... मंदिर के गेट पर लुढ़के सुहानी के बोडीगार्ड्स पर जब उसकी नजर पड़ती है तो उसका खून खौल उठता है ... उनके सरीर में बेहोशी वाले इंजेक्शन घुसे हुए थे ....
शेर सिंह के आदमियों ने उनके चेहरे पर पानी फिंकवा कर उन्हें होश में लाया .... तब तक शेर सिंह और कलुआ मंदिर में एंटर कर जाते हैं .....
अपने बाप को देख सुहानी दौड़ती हुयी उसके गले लग जाती है और सिसकने लगती है .... और फिर थोड़ा नमक मिर्च लगा कर तरुण की तारीफ करते हुए साडी बात बताती है ....
शेर सिंह और कलुआ चलते हुए तरुण के पास आते हैं .... कलुआ का दानवरूपी सरीर देख एक बार तो तरुण काँप उठता है पर फिर भी वो खुद को सांत रख वही खड़ा रहता है ....
शेर : ए लड़के तुम कौन हो यहाँ के तो नहीं जान पड़ते ....
तरुण : जी नहीं सर ... मेरी लाइफ सहर में अछि चल रही थी की एक दिन मेरे माँ बाप एक एक्सीडेंट में मरे गए .... फिर मुझे एक दिन उनकी एक डायरी मिली जिसमे एक गाँव का जिक्र था .... अब तो एक आस बची थी की गाँव में हमारा कोई रिस्तेदार होगा एहि ाश लिए गाँव आया तो पता चला की जो हमारा रिस्तेदार था वो अपनी साडी सम्पति बेच कर कही दूर चला गया है ... अब मैं इतनी बड़ी दुनिया में उन्हें कहा धुंडु .... अब मैं पूरी तरह से अकेला हु .... इवनिंग को मैंने इस मंदिर के बारे में सुना तो पूजा करने यहाँ आ धमका ... बाकि तो आप जानते hi हो ....
शेर सिंह : बीटा तुम्हारे बारे में सुन कर अफ़सोस हुआ .... तुमने हमारी जान की जान बचायी है .... तुम चाहो तो हमारे साथ रह सकते हो .... हम तुम्हे वो साडी सुख सुविधा देंगे जो जीने के लिए जरुरी हो ....
तरुण : आपकी दरियादिली के लिए शुक्रिया सर पर मैं अपने बलबूते कुछ करना चाहता हु ....
शेर सिंह : तो तुम क्यों नहीं हमारी. बिटिया के बॉडीगार्ड बन जाते हो .... इससे तुम्हारी खुद्दारी भी बानी रहेगी और हमारी बेटी के लिए हमें एक ाचा और होशियार बॉडीगार्ड भी मिल जायेगा ....
कलुआ शेर सिंह को इशारे में पास बुलाता है ....
कलुआ : पर सिंह साहब इतनी जल्दी किसी अजनबी पर इतना भरोषा करना सही नहीं है ...
शेर सिंह : कलुआ ... हमारी बेटी ने इसको चुना है .... और अपनी बेटी की ख़ुशी के लिए तो मैं हज़ारो बार मरना पसंद करूँगा ... पर फिर भी तुम इसके ऊपर नजर रखना ...
उसके बाद सुहानी सभी को प्रसाद देती है और फिर तरुण को सुहानी की गाडी में hi अस ा बॉडीगार्ड बिठाया जाता है ....
आज फाइनली दोनों के बीच जो एक दीवार बची थी वो भी गिर गयी और आज तरुण ने अपने घर की पहली महिला के साथ शारीरिक सम्बन्ध स्थापित करने में सफलता हासिल कर लिया था ....
अब तो वैसे भी काफी रात गुजर चुकी थी इसलिए उन्होंने सोने में hi अपनी भलाई समझी ....
आगे
सुबह को जब श्रेया की नींद खुलती है तो वो पूर्णतया नग्न अवस्था में अपने सबसे छोटे भाई तरुण की बांहो में लेती हुयी थी ... खुद को ऐसे हाल में अपने भाई के बिस्तर में देख उसको थोड़ी शर्म सो महसूस होती है ...
तभी उसको कोई कठोर सो चीज अपने छूट की दीवार पर महसूस होती है ये कुछ और नहीं तरुण का semi-erect लुंड था ...
श्रेया (मन में) : देखो तो बदमाश की हरकत एक hi रात में इसने मुझे पूरी तरह से अपनी दीवानी बना लिया है ... कितना प्यारा लग रहा है मेरा भाई ... कितनी अछि तरह से इसने रात में मेरी खिदमत की है जैसे मैं इसकी बहन नहीं बल्कि इसकी लुगाई हु .... मेरे पति तो अब तक मुझे माँ नहीं बना पाया है अगर मेरा भाई मुझे माँ बना दे तो हाय मुझे तो सोच कर hi शर्म आ रही है ... कितना क्यूट है मेरा भाई अगर इसके जैसी hi मेरी औलाद हो तो कितना ाचा है .... अब मुझे बस मेरे भाई से कुछ बार और छोड़ना है .... इसकी गाढ़ी मलाई देख hi मुझे एहसास हो रहा है की ये कुछ मीटिंग में hi मुझे माँ बना देगा ...
और फिर श्रेया अपने तपते हुए होंठ तरुण के गालो पर चिपका देती है और फिर उठ कर जल्दी जल्दी अपने कपडे पहन लेती है और फिर तरुण को उठा कर अपने रूम को आ जाती है ....
इवनिंग को ऋचा रोटी हुयी घर आती है और उसके साथ में राहुल भी था .... हॉल में hi ruchika,priyanshi,Shreya और तरुण भी बैठे हुए गप्पे हाँक रहे थे ....
रुचिका : अरे ऋचा दीदी आप रो क्यों रही हो ... किसी ने कुछ कहा है क्या ....
ऋचा (सिसकते हुए) : छोटी आज मैं मार्केटिंग कर के लौट hi रही थी की 3 - 4 आवारा लड़के रोड के किनारे बैठे हर गुजरने वाली लड़कियों पर गंदे गंदे कमैंट्स पास कर रहे थे .... जब मैं राहुल के साथ वह से गुजरी तो उन्होंने मुझ पर भी गंदे कमैंट्स पास करे जो मुझसे बर्दास्त नहीं हुए तो मैंने उनमे से एक के गाल पर मैंने थप्पड़ जड़ दिए ... जिसके रिस्पांस में वो मेरे साथ बदतमीज़ी करने लगे तो मैंने राहुल से हेल्प मांगी तो ये उनसे न उलझने की हिदायत देने लगा ... उन् लड़को ने मेरी ओढ़नी भी फाड़ डाली और न जाने आगे क्या क्या करते .... वो तो भला हो की ुशी वक्त एक पुलिस की गाडी वह से गुजरी जिसके वजह से वो वह से हैट गए ... मौके का फायदा उठाते हुए मैं वह से भाग आयी वर्ण न जाने क्या अनर्थ हो जाता ....
ऋचा की बात सुन तरुण को राहुल और उन् आवारा लड़को पर बहुत गुस्सा आया .... भले hi ऋचा तरुण से कितनी भी नफरत करती हो पर जब बात परिवार की इज्जत की थी तो वो भला चुप कैसे रहता ....
तरुण (गुस्से से) : क्या आप उन्हें पहचान लोगी ...
ऋचा को इस वक्त गुस्से के ऐसे जोन में थी की उसको तरुण की हेल्प लेने से भी कोई दिक्कत नहीं थी वर्ण अगर नार्मल बात होती तो वो शायद hi तरुण से हेल्प लेती ...
ऋचा : हाँ ... वो लड़के मॉल के नुक्कड़ पर hi बैठे रहते हैं हमेसा ...
तरुण : तो चलो मेरे साथ ... अभी इस घर में मर्द ज़िंदा हैं .... ऐसे कोई मेरे घर की इज्जत और मान सम्मान पर हाथ नहीं दाल सकता ....
ऋचा दूसरी ओढ़नी अपने सूट में लगा लेती है और तरुण के पीछे बाइक पर बैठ जाती है और थोड़े hi देर में वो मॉल के सामने थे .... ऋचा रोड के किनारे बैठे कुछ लड़को की तरफ इशारा करती है ... वो टोटल 4 लड़के थे जो हर आने जाने वाली लड़कियों पर भद्दे रमार्क्स दे रहे थे ....
तरुण ऋचा का हाथ पकड़ कर उनके सामने आ जाता है ... ऋचा को देख उनमे से एक लड़का खड़ा हो कर उसकी तरफ बढ़ने लगता है ....
लड़का 1 : साली ... उस वक्त तो तू बच गयी पर किस्मत आज मेरे साथ है आज तुझे नहीं छोडूंगा ...
लड़का 2 : हाँ यार साली ने तेरे ऊपर थप्पड़ उठा कर ठीक नहीं आज तो साली की गए....
अभी उस लड़के ने इतना कहा hi था की एक जबरदस्त पंच उसके थोबड़े पर पड़ता है जिससे उसका पूरा जबड़ा hi हिल जाता है और पल भर के लिए उसकी आँखों के सामने अँधेरा छ जाता है ....
लड़का 3 : सेल तूने मेरे दोस्त को छुआ कैसे आज तेरी सहमत आने वाली है ... आज तू नहीं बचेगा .... तू ये भूल गया है की तू हमारे इलाके में है ....
तरुण : इलाका तो कुत्ते और सुअरो का होता है मैं शेर हु जहा जाता हु वह मेरी हुकूमत चलती है ... आजा बीटा बड़ा शौक है न तुझे लड़कियों पर कमेंटबाजी करने का ... आज में बाद तू किसी काम का नहीं रहने वाला है ... ऋचा आज पहली बार तरुण को ऐसे अवतार में देख रही थी उसका तो बड़ा मन कर रहा था की तरुण के डायलाग पर वो सिटी बजाये या उसको गले लगा ले ....
लड़का 1 ऋचा की तरफ बढ़ता है .... पर तरुण बीच में hi उसका हाथ पकड़ लेता है ....
तरुण : इन्ही हाथो से तूने मेरी दीदी की ओढ़नी फाड़ी थी न ... अब तेरा ये हाथ नहीं बचेगा ....
और फिर एक झटके के साथ तरुण ने उसके हाथ को तोड़ डाला जैसे वो पतली सी सुखी लकड़ी हो .... लड़का 1 जमीन पर पड़ा दर्द के मरे कराह रहा था ... बाकि बचे 2 लड़के तरुण के ऊपर एक साथ चाकू से अटैक करते हैं पर तरुण झुक कर उनके वार को नाकाम कर देता है और एक के पिछवाड़े पर एक जबरदस्त किक मरता है जिससे वो ुनबलने होकर एक पेड़ से टकरा कर गिर जाता है ...
अब बचा हुआ एक लड़का तरुण के ऊपर फुर्ती दिखते हुए चाकू चला देता है .... चाकू तरुण के बांह को छूटे हुए निकल जाती है है ... पल भर में hi दर्द के साथ खून बह निकलते हैं ....
वो लड़का फिर से चाकू चलता है पर तरुण इस बार अलर्ट था उसने उसके चाकू वाले हाथ पर एक फ्लाइंग किक लगा दी जिससे उसके हाथ से चाकू छिटक कर दूर जा गिरता है ... अब बाल तरुण की पाली में थी ... तरुण ने मार मार कर उसका थोड़बा सुजा डाला .... अब तरुण अपनी बेल्ट खोल लेता है और ताबड़तोड़ चारो लड़को को मरने लगता है .... बेल्ट की मार से चारो लड़के अधमरे हो जाते हैं और तरुण से अपनी जान की दुहाई मांगने लगते हैं .... तरुण भी उन्हें छोड़ देता है और उन्हें ऋचा से माफ़ी मांगने को कहता है .... वो चारो लड़के ऋचा के पैरो में गिर जाते हैं और माफ़ी मांगने लगते हैं .....
वह से गुजर रही 3 - 4 लड़किया आपस में कानाफूसी कर रही थी ... ये लोग शायद सुरु से सारा तमाशा देख रही थी ....
लड़की 1 : ये है असली मर्द ...
लड़की 2 : काश ऐसा लड़का hi मेरा बर्फ या भाई हो तो कितना ाचा होता ....
लड़की 3 : हाँ यार जो लड़का अपनी बहन के लिए इतना कर सकता है अपनी वो गफ या बीवी के लिए क्या नहीं कर सकता .... काश ये मेरा बर्फ बन जाये तो कितना मज़ा आएगा ...
लड़की 4 : तुम लोग बस सपने देखती रहो ... बूत यार ये कितना हैंडसम है और पावरफुल भी ... इसकी बांह पर चाकू लग गया है शायद कितना खून बाह रहा बिकहरे का ....
वही ऋचा तो अपने छोटे भाई को खुद के लिए स्टैंड लेता देख भावुक हो गयी थी ... वो जिस तरुण से बेइंतेहा नफरत करती आयी थी आज उसने hi उसकी मान और प्रतिष्ठा लौटाई थी और जिस राहुल को वो हमेसा लाड लड़ती आयी थी वो उसके लिए लड़ना तो दूर उसका सपोर्ट करने से भी कटरा रहा था ... तभी उसका धयान तरुण की बांह पर पड़ता है जो खून के वजह से पूरा लाल हो गया था ... वो भगति हुयी तरुण के पास आती है और अपने दुपट्टे को थोड़ा सा फाड़ कर उसको तरुण की बांह पर बांध देती है जिससे तरुण का खून बहना रुक जाता है ... इसी दौरान पता नहीं क्यों ऋचा की आँखों से कुछ आंशू की बूँदें तरुण की बांह पर गिर जाते हैं ....
तरुण : थैंक्स ... चलिए अब घर चलते हैं सभी लोग आपका वेट कर रहे होंगे ...
और फिर तरुण बाइक स्टार्ट करता है और ऋचा उसके पीछे बैठ जाती है ...
ऋचा : भाई ....
कुछ पल बीत जाने के बाद भी तरुण कोई रिस्पांस नहीं देता ...
ऋचा : भाई गाडी रोको न ... प्लीज ... मुझे तुमसे कुछ जरुरी बात करनी है ...
तरुण गाडी रोक देता है .... ऋचा गाडी से उतर जाती है .... किस्मत से वो लोग एक पार्क के आगे रुके थे ....
ऋचा तरुण का हाथ पकड़ कर उसको बाइक दे उतरवा देती है और अपने साथ लेकर पार्क के अंदर आ जाती है ....
तरुण : मैडम आप ये न समझना की मैंने आपको माफ़ कर दिया ... आपके जगह कोई अनजान लड़की भी होती तो मैं एहि करता ... और प्लीज ये भाई लफ्ज़ मेरे लिए उसे मत करना ... आपका और मेरा कोई रिश्ता न तो पहले था न hi अब है ... अब आप अपने रस्ते और मैं अपने रस्ते ....
ऋचा तरुण के घुटनो में बैठ जाती है और रोने लगती है ...
ऋचा : सॉरी न मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी ... तुम्हे पहचानने में मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गयी .... जिस भाई को बहने अपनी पलकों पर बिठा कर रखती हैं मैंने हमेसा उसको नीचे दिखाया है ... मैं जानती हु की मैं बहन कहलाने के लायक नहीं हु पर फिर भी तुमने आज मेरे इज्जत और सम्मान की रक्षा की .... जिसे मैंने हमेसा राखी बंधी की वो मेरी रक्षा करेगा वो तो थोड़ा सा संकट पड़ते hi दम दबा कर भाग गया .... सॉरी न बाबू ... तुम चाहो तो जी भर कर मुझे दांत लो मार लो पर तुम्हे भाई कहने का ये अधिकार मुझसे मत छीनो ... आज मुझे खुद से घिन्न आ रही है ... मैं आज खुद की नजरो में गिर गयी हु ....
तरुण : मैडम जी चलिए घर चलते हैं वर्ण घर वाले बेवजह परेशान होते रहेंगे ... घर पर पहले से hi दुखो का पहाड़ टुटा पड़ा है ....
ऋचा और कोई सवाल जवाब नहीं करती बस तरुण के पीछे बैठ कर घर अस जाती है ....
रुचिका और प्रियांशी जल्दी से फर्स्ट अिध किट लेकर तरुण के बांह की मरहम पट्टी करती है ....
घर वालो के पूछने पर ऋचा ने दिल खोल कर तरुण की तारीफ की जिससे तरुण की मंझली चची और राहुल जल भून उठे ....
इस इंसिडेंट ने ऋचा को पूरी तरह बदल दिया था अब वो भी तरुण के hater's क्लब से निकल कर उसके फैन क्लब में शामिल होने को उत्सुक थी पर तरुण ने बस उसको इग्नोर करना hi सही समझा .... पर ऋचा भी काफी जिद्दी किस्म की लड़की थी वो कोई काम आधा अधूरा में बिस्वास नहीं रखती थी ... वो जिसे चाहती थी उसको टूट कर चाहती थी और अगर नफरत करती थी तो वो भी टूट कर करती थी ...
इधर तरुण ने अपने तरीके से खोजबीन करि राखी थी .... अब तक की जानकारी के अनुसार उसके मंझले चाचा की मौत में शेर सिंह के शामिल होने के पुख्ता सबूत मिल चुके थे पर अब भी वो
तरुण ने ये बात priyanshi,ruchika और श्रेया को hi बताई थी वो लोग तो तरुण को इसमें इन्वॉल्व होने नहीं देना चाहती थी क्यूंकि उन्हें तरुण की फिक्र थी पर तरुण उन्हें किसी तरह समझा बुझा कर राज़ी कर लेता है ....
श्रेया के साथ उसने अब तक 5 - 6 बार जिस्मानी सम्बन्ध बना लिए थे और इस बार श्रेया का मेंस्ट्रुअल फॉल भी नहीं हुआ था जिसके वजह से वो काफी खुस थी ....
तरुण को अपने गाँव के भी ज्यादा लोग नहीं जानते थे तो शेर सिंह तो दूसरे गाँव का था तो उससे उसके बारे में क्या खाक पता होगा फॉर भी तरुण ने रिस्क लेना सही नहीं समझा और अपना गेट उप चेंज करने के लिए वो शहर चला गया .... सबसे पहले उसने अपनी मौसताचे और बियर्ड को हटवाया और फिर फेसिअल और ब्लीचिंग करवाया .... जब उसने खुद को आईने में देखा तो पाया की अब उसका गेट उप काफी हद्द तक चेंज हो गया है ....
अब तरुण मौके की तलाश में रहने लगा की किस तरह शेर सिंह की दुनिया में एंट्री मरी जाये .... उसको ये तो पता था की शेर सिंह की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी लाड़ली बेटी सुहानी सिंह थी पर उसने आज तक न तो उसको देखा था न hi उसकी कोई फोटो उसके हाथ लगी थी ....
काफी जांच पड़ताल के बाद पता चला की दो दिन के बाद सुहानी का बर्थडे आने वाला है और उस दिन वो अपनी माँ और बॉडीगार्ड के साथ कुलदेवी के मंदिर पूजा अर्चना को जाती है .... तरुण को ये सबसे सटीक मौका लगा जिसमे वो शेर सिंह की दुनिया में एंट्री मार सके ....
धीरे धीरे अब वो दिन भी आ पहुंचा जिस दिन सुहानी का बर्थडे था .... आज तरुण सुबह तड़के hi उस मंदिर में पहुँच गया .... उसने पहले से hi कुछ प्रोफेशनल आदमी सेट कर रखे थे जो कही दूर के थे ....
कुछ देर बाद शेर सिंह की गाडी आती है जिससे पहले उसके बॉडीगार्ड उतारते हैं और पीछे का गेट खोलते हैं जिससे शेर सिंह की वाइफ और उसकी बेटी उतरती है और मंदिर के अंदर चली जाती है ..... दोनों बॉडीगार्ड बहार मंदिर के गेट पर खड़े हो जाते हैं .... अभी मंदिर में पुजारी के सिवा और कोई न था ....
चाँद मिनट बाद hi एक और गाडी आ कर रूकती है जिससे कुछ नकाबपोश आदमी उतारते हैं और उतारते के साथ दोनों बॉडीगार्ड के ऊपर फायरिंग करते हैं जिससे दोनों बॉडीगार्ड बेहोश हो जाते हैं ....
अब सरे नकाबपोश आदमी मंदिर के अंदर घुस जाते हैं और सुहानी और उसकी माँ से बदतमीज़ी करने लगते हैं ....
ठीक तभी मौका देख तरुण वह पहुँच जाता है .... एक पल को तो सुहानी को देख उसकी आंखें थम सी जाती हैं क्यूंकि सुहानी की सादगी और उसका चाँद सा मुखड़ा तरुण का चैन करार छीन लेती है और सुहानी को देख उसके दिल में कुछ कुछ होने लगता है .... सच कहा जाये तो उसको सुहानी से पहली नजर में hi प्यार हो जाता है ...
जल्द hi तरुण की चेतना वापस लौट आती है और वो कुछ डायलाग और थोड़ी फाइटिंग करके सुहानी और उसकी माँ को उन् नकाबपोश लोगो से बचा लेता है जो की उसके hi आदमी थे ... थोड़ी मार खा कर वो लोग भाग निकलते हैं ...
शेर सिंह की वाइफ : बीटा तुम कौन हो ... आज तुम न आते तो पता नहीं हमारा क्या होता ....
तरुण : कोई नहीं आंटी जी ये तो मेरा फ़र्ज़ था ... आप लोगो को मुसीबत में देख भला मैं कैसे भाग जाता ....
शेर सिंह की वाइफ : नहीं बीटा .... तुम नहीं जानते तुमने हमारे ऊपर कितना बड़ा उपकार किया है ... आज मेरी बेटी का जन्मदिन है इसलिए hi हम यहाँ पूजा करने आये थे की ये लोग न जाने कहा से टपक पड़े ....
तरुण : आंटी क्या आप इन्हे जानती हैं ....
शेर सिंह की वाइफ : नहीं बीटा हमारी तो किसी के साथ दुश्मनी भी नहीं है ...
सुहानी : मुम्मा मैंने पापा को फ़ोन कर दिया है वो जल्द hi आते होंगे ...
जैसा सुहानी का रूप था वैसी hi मीठी उसकी आवाज़ थी ... तरुण को तो सुहानी की आवाज़ इतनी प्यारी लगी की मनो उसकी आवाज़ में hi मिश्री घुली हुयी हो ....
तरुण : आंटी जी आप लोगो ने पूजा कर लिया क्या ....
शेर सिंह की वाइफ : नहीं बीटा अभी कहा .... पुजारी जी ये लीजिये पूजा की थाली ... आज पूजा मेरी बेटी सुहानी के नाम से करनी है .... आज इसका जन्मदिन है न ...
पुजारी : हाँ क्यों नहीं हर साल इसी दिन तो सुहानी बिटिया के दर्शन हो पते हैं ...
सुहानी (चहकते हुए) : मैं कोई देवी थोड़े हु पुजारी काका जो मेरे दर्शन हो ... मैं तो बस एक आम लड़की हु जिसके पेरेंट्स ने उसको बड़े प्यार से संभल कर रखा है ....
तरुण : ठीक है आंटी जी और सुहानी जी अब मैं चलता हु ... अब वो बदमाश लोग यहाँ नहीं आएंगे ....
सुहानी तरुण का हाथ पकड़ लेती है ....
सुहानी : जी नहीं आप कही नहीं जा रहे .... अपने आज हमारी हिफाज़त की है आप हमारे खास मेहमान हैं .... पूजा होने दीजिये तब तक पापा भी यहाँ पहुँच जायेंगे फिर हम साथ चलेंगे ....
तरुण तो एहि चाहता था .... ऊपर से सुहानी के रूप जाल में वो इस कदर फास चूका था की वो ये तक भूलने लगा था की वो यहाँ बदला लेने के लिए आया हुआ है .....
तरुण वही खड़ा हो जाता है और चोरी छुपे उसकी नजर बार बार सुहानी पर चली जाती थी .... ऊपर वाले ने उसको बड़ी फुर्सत से बनाया था .., उसके एक एक अंग बड़े सलीके से बनाया गया था न कही ज्यादा न कही काम बिलकुल परफेक्ट जस्ट अस ा ड्रीम गर्ल ....
थोड़े देर बाद ढेर साडी गाड़िया आ कर मंदिर के बहार रूकती है ... जिनमे से शेर सिंह अपने आदमियों के साथ उतरता है जिनमे से एक कलुआ भी था ... मंदिर के गेट पर लुढ़के सुहानी के बोडीगार्ड्स पर जब उसकी नजर पड़ती है तो उसका खून खौल उठता है ... उनके सरीर में बेहोशी वाले इंजेक्शन घुसे हुए थे ....
शेर सिंह के आदमियों ने उनके चेहरे पर पानी फिंकवा कर उन्हें होश में लाया .... तब तक शेर सिंह और कलुआ मंदिर में एंटर कर जाते हैं .....
अपने बाप को देख सुहानी दौड़ती हुयी उसके गले लग जाती है और सिसकने लगती है .... और फिर थोड़ा नमक मिर्च लगा कर तरुण की तारीफ करते हुए साडी बात बताती है ....
शेर सिंह और कलुआ चलते हुए तरुण के पास आते हैं .... कलुआ का दानवरूपी सरीर देख एक बार तो तरुण काँप उठता है पर फिर भी वो खुद को सांत रख वही खड़ा रहता है ....
शेर : ए लड़के तुम कौन हो यहाँ के तो नहीं जान पड़ते ....
तरुण : जी नहीं सर ... मेरी लाइफ सहर में अछि चल रही थी की एक दिन मेरे माँ बाप एक एक्सीडेंट में मरे गए .... फिर मुझे एक दिन उनकी एक डायरी मिली जिसमे एक गाँव का जिक्र था .... अब तो एक आस बची थी की गाँव में हमारा कोई रिस्तेदार होगा एहि ाश लिए गाँव आया तो पता चला की जो हमारा रिस्तेदार था वो अपनी साडी सम्पति बेच कर कही दूर चला गया है ... अब मैं इतनी बड़ी दुनिया में उन्हें कहा धुंडु .... अब मैं पूरी तरह से अकेला हु .... इवनिंग को मैंने इस मंदिर के बारे में सुना तो पूजा करने यहाँ आ धमका ... बाकि तो आप जानते hi हो ....
शेर सिंह : बीटा तुम्हारे बारे में सुन कर अफ़सोस हुआ .... तुमने हमारी जान की जान बचायी है .... तुम चाहो तो हमारे साथ रह सकते हो .... हम तुम्हे वो साडी सुख सुविधा देंगे जो जीने के लिए जरुरी हो ....
तरुण : आपकी दरियादिली के लिए शुक्रिया सर पर मैं अपने बलबूते कुछ करना चाहता हु ....
शेर सिंह : तो तुम क्यों नहीं हमारी. बिटिया के बॉडीगार्ड बन जाते हो .... इससे तुम्हारी खुद्दारी भी बानी रहेगी और हमारी बेटी के लिए हमें एक ाचा और होशियार बॉडीगार्ड भी मिल जायेगा ....
कलुआ शेर सिंह को इशारे में पास बुलाता है ....
कलुआ : पर सिंह साहब इतनी जल्दी किसी अजनबी पर इतना भरोषा करना सही नहीं है ...
शेर सिंह : कलुआ ... हमारी बेटी ने इसको चुना है .... और अपनी बेटी की ख़ुशी के लिए तो मैं हज़ारो बार मरना पसंद करूँगा ... पर फिर भी तुम इसके ऊपर नजर रखना ...
उसके बाद सुहानी सभी को प्रसाद देती है और फिर तरुण को सुहानी की गाडी में hi अस ा बॉडीगार्ड बिठाया जाता है ....