Zindagi : ek anjana safar - Page 3 - SexBaba
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Zindagi : ek anjana safar

अपडेट 20

दिया अपने सीट को अपने पहले के पहने हुए कपडे से साफ़ करती है और फिर दोनों तरुण के सीट पर किसिंग करते हुए आराम से सो जाते हैं ....




आगे

4 बजे के करीब किसी के नॉक करने से तरुण की नींद खुलती है .... तरुण गेट खोलता है तो पता है की एक हॉट सी दिखने वाली लेडी एक लड़की के साथ कड़ी थी ....

लेडी : जी मेरा भी सीट है इसमें दोनों उप्पर बर्थ ....

तरुण : सॉरी वो जरा हम सो गए थे इसलिए गेट लॉक कर लिया था ....

लेडी : कोई नहीं ... हम अभी जस्ट hi आये हैं ...

तरुण उनके लगेज को अंदर करने में मदद कर देता है .... दिया अब भी गहरी नींद में सोई हुयी थी इसलिए तरुण उसके सीट पर बैठ जाता है ....

लेडी : मेरा उप्पेर बर्थ है ... क्या मैं आपके साथ बैठ सकती हु ... अभी मुझे नींद नहीं आ रही .... बेटी तुम चाहो तो ऊपर जाकर सो सकती हो ....

लड़की : हाँ मुम्मा आज मेरी नींद भी पूरी नहीं हुयी है मैं तो चली सोने ....

वो लड़की अपने बर्थ पर चढ़ कर सो जाती है .... वो लेडी तरुण से सात कर बैठ जाती है ... लेडी ने रेड कलर का एक सूट पहनी हुयी थी जिसका गाला थोड़ा डीप कटा हुआ था जिससे उसके क्लीवेज की जो झलक मिल रही थी वो काफी कामुक थी .... बैठते वक्त उसने अपनी चुन्नी भी हटा ली थी जिससे उसके बड़े बड़े बोबे उछाल कर बहार आने को तरस रहे थे .....

तरुण की आँखें भी कभी कभी उस लेडी की तरफ चली जा रही थी जिसे वो भी नोटिस कर रही थी पर वो तरुण के ऐसे खुद के जिस को देखता पाकर और खुस हो रही थी ....

लेडी : वैसे मेरा नाम शहनाज़ है और ये मेरी बेटी आयशा है ... हम एक शादी अटेंड करने जा रहे हैं .... इसके अब्बू को छूती नहीं थी तो बस हम दोनों माँ बेटी hi निकल लिए ....

तरुण : नीस ... मेरा नाम तरुण है और ये बगल की सीट पर जो सोई हुयी है मेरी दीदी है दिया ....

शहनाज़ : आपको पक्का न नींद नहीं आ रही ....

तरुण : नहीं मेरी नींद पूरी हो चुकी है ....

तरुण बात तो शहनाज़ से कर रहा था पर उसका ध्यान बार बार उसके हाहाकारी मम्मो पर चली जा रही थी .... अभी कुछ दिनों पहले से hi उसने औरतो के इस कामुक अंग का नजारा लेना सुरु किया था ... शहनाज़ के मम्मो का साइज उसके तरुण 2.0 अवतार बनने के बाद का सबसे बड़ा मां था इसलिए वो कौतुहल वस् उसके तरफ खिंचा चला जा रहा था ....

शहनाज़ (नॉटी स्माइल के साथ) : अचे हैं न ....

तरुण : जी क्या ...

शहनाज़ : वही जो आप देखने की कोसिस कर रहे हैं .... वैसे मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है .... अगर आप चाहे तो अचे से भी दिखा सकती हु ....

तरुण : सॉरी ... वो गलती से मेरी नजर वह चली गयी ....

शहनाज़ : अरे बाबा घबराने की जरुरत नहीं है .... इसके अब्बू तो अब मुझे भाव नहीं देते ... आज एक क्यूट सा बाँदा मुझे ताड़ रहा है तो मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है ... वैसे भी अब इस उम्र में ये सब नहीं देखोगे तो क्या बुढ़ापे में देखोगे ....

तरुण को एक हॉट सी लेडी का ये खुले ऍम प्रपोजल देने का अंदाज़ बहुत पसंद आता है वैसे भी कहा जाता न है की जब शेर के मुँह खून लग जाता है तो उसकी नजर सिर्फ खून या अपने शिकार पर hi होती है .... वैसे hi तरुण को जब श्रेया और दिया जैसी कमसिन कलियों का स्वाद लग चूका था तो वो एक मातुरे औरत के साथ भी हलकी फुलकी मस्ती कर लेना चाहता था ....

तरुण : पर आप यहाँ कैसे ....

शहनाज़ : यानि की तुम रेडी हो ....

तरुण : जब आप रेडी हो तो मुझे क्या आपत्ति हो सकती है ....

शहनाज़ : चलो ....

वो उठ कर गेट खोलती है और तरुण को अपने पीछे आने का इशारा करती है .... तरुण भी सावधानी से बहार आ कर गेट को बहार से लॉक कर देता है .... शहनाज़ एक वाशरूम में घुस जाती है और तरुण को अपने पीछे आने का इशारा करती है ...

तरुण जैसे hi अंदर घुसता है शहनाज़ गेट को लॉक करती है और किसी भूखी बिल्ली की तरह उसके ऊपर टूट पड़ती है .... पहले तो छोटा सा किश का दौर चलता है उसके बाद शहनाज़ जाली से अपना सूट निकल कर अपने बड़े बड़े चूचियों को आज़ाद कर देती है ... तरुण पहली बार इतनी बड़ी चुकी देख रहा था इसलिए उसके मुँह में पानी आ गया ....

शहनाज़ : अब बस देखते hi रहोगे या अपनी ख्वाहिस भी पूरी करोगे ....

तरुण किसी भूखे बच्चे की तरह उसके चूचियों पर टूट पड़ता है कभी वो उसके चुकियो को मसल रहा था तो कभी चूस ले रहा था ....

शहनाज़ के इरादे तो काफी कुछ करने का था इसलिए उसने जल्दी से अपनी पजामी का नाडा खोल दिया और झुक कर तरुण को पीछे से अपना लुंड डालने को कहा .... तरुण तो था अनादि पर उसने भी काफी पोर्न फिल्मे देख रही थी जो उसके काम आने वाली थी .....

शहनाज़ : रुको हैंडसम मुझे जरा तुम्हारे हलब्बी ुण्ड को प्यार तो कर लेने दो ....

वो अपने मुँह से धृ सारा थूक निकल कर तरुण के लुंड को अचे से गीला कर देती है ....

शहनाज़ : बस आ जाओ मेरे राजा अब न तरसाओ ...

तरुण जल्दी से शहनाज़ के छूट पर लुंड सेट करके एक धक्का मरता है लुंड आराम से सरकता हुआ आधा से ज्यादा अंदर तक घुस जाता है ... दूसरे धक्के में शेनाज की बड़ी सी गहरी छूट उसका पूरा लुंड निगल लेती है हलाकि उसको दूसरे धक्के में काफी तकलीफ हुयी थी पर वो इस मस्ती के आगे अपना वो दर्द भूल जाती है ... अब तरुण ने ताबड़तोड़ धक्के लगाने सुरु कर दिए ....

शहनाज़ की बड़ी बड़ी गांड को थम कर जब वो धक्के लगाए जा रहा था तो अचानक से उसको घर से वापसी की आखिरी रात याद आ जाती है जब उसने घर पर रात को अपने दादा जी को अपनी hi बहु को छोड़ते हुए देखा था .... वो याद कर न जाने क्यों वो और भी जोर जोर से शहनाज़ को छोड़ने लगता है .....

धक्काम पेल का ये सिलसिला करीब 10 -15 मिनट तक चलता है और तरुण शहनाज़ की छूट में hi खली हो जाता है ....

शहनाज़ पहले तो अपनी छूट को अचे से धोती है फिर तरुण के लुंड को चूस कर साफ़ करने के बाद उसको भी अचे से धो देती है ... अब दोनों जल्दी जल्दी अपने कपडे पहन लेते हैं ...

शहनाज़ : वाओ ... यार तुम तो सच्चे मर्द निकले ... तुम्हारे साथ छोड़ने के बाद तबियत मस्त हो गयी ....

तरुण : मेरी लाइफ का ये फर्स्ट सेक्स था .... मुझे भी बहुत ाचा लगा आपके साथ ये सब करके ...

उसके बाद शहनाज़ आखिरी बार तरुण के होंठो पर एक छोटा सा किश देकर वापस अपने कम्पार्टमेंट में आ जाती है थोड़ी देर बाद तरुण भी आ जाता है ....

उसके बाद कुछ खास नहीं होता शहनाज़ दोपहर को अपने स्टेशन पर उतर कर चली जाती है और तरुण का स्टेशन भी आख़िरकार इवनिंग तक आ hi जाता है और दोनों भाई बहन चल देते हैं दिया के घर की तरफ एक यादगार ट्रैन जर्नी की याद अपने दिल में संजोये ....

दिया के मम्मी पापा और कारन तरुण को सही सलामत देख काफी खुस होते हैं ....

उसके बाद तरुण अपने घर की तरफ लौट जाता है और दिया अपने ससुराल आ जाती है एक नयी लाइफ की शुरुआत करने ....

तरुण के चेहरे पर घर लौटने के वक्त मिले जुले भाव थे .... उसने अपने मन में थान लिया था की भी अब ेंट(🧱) का जवाब पत्थर से देगा .... घर आते आते इवनिंग हो चुकी थी ....

वो जब घर में एंटर करता है तो सबसे पहले उसका सामना उसकी भाभी शिवानी से होता है ... शिवानी उससे बड़े प्यार से हाल चल पूछती है जिसका जवाब तरुण उतने hi प्यार से देता है ....

उसको किचन में उसकी माँ और रानी दिखती है जिन्हे इग्नोर करके वो सीढ़ियों से होता हुआ अपने रूम आ जाता है ....

थोड़े hi देर में ruchika,ruby और प्रियांशी उसके रूम में आती है .... जहा रुचिका और रूबी को अपने रूम में देख तरुण का चेहरा फूल की तरह खिल उठता है वही प्रियांशी को देख उसने एक फीकी सी स्माइल पास की .... अब वो तो थी तरुण से बड़ी hi तो तरुण ने तीनो के पाओ छू लिए ....

रुचिका : कैसा है बाबू दिखा तो कहा पर गोली लगी थी तुझे ....

तरुण : पर दीदी अभी कैसे आप लोगो के सामने ...

रूबी उसकी बात समझ जाती है ....

रूबी : अरे पगलू तू हमारा छोटा भाई है अब हमारे सामने hi इतना सरमायेगा तो कैसे चलेगा .... जब से हमने ये सब सुना हमारी तो जान hi निकल गयी ....

तरुण अपनी टी शर्ट खोल कर पीछे मुद जाता है .... तीनो बहने तरुण के पीठ पर गोलियों के दो नीसाण देख काफी घबरा जाती है ...

रुचिका : बाप रे बाप कैसे इतना सह तूने भाई ... मेरी तो ये सब देख के hi बुरी हालत हो गयी ...

तरुण : छोडो न दीदी वो बस बुरा वक्त था गुजर गया ....अब तो आप लोग के सामने सही सलामत खड़ा हु न .... समझो आप लोगो की दुआ की वजह से hi बच पाया हु .... रूचि दीदी प्लीज अगली बार से मेरे रूम में उन लोगो को मत आने देना जो बस झूटी सिम्पथी जताने का बहाना कर के यहाँ आये हो ...

रुचिका समझ जाती है की तरुण प्रियांशी की बात कर रहा है ... प्रियांशी को भी ये समझ आ जाता है की ये शब्द उसके लिए hi कहे थे ....

प्रियांशी की आँखों में आंशू आ जाते हैं और वो तरुण के रूम से रोटी हुयी भाग जाती है ...

रुचिका तरुण को उस रात की साडी बात बताती है जिसमे प्रियांशी ने उसको फुल सपोर्ट किया था और ये भी बताया की कैसे वो हमेसा उसकी फिक्र किया करती थी तरुण के शादी में जाने के बाद से ....

तरुण रिया और रुचिका के सामने तो कुछ नहीं कहता पर उसके दिल में अब भी प्रियांशी को माफ़ करने का ख्याल अभी तो नहीं आया था ....

अभी ये दोनों बहने तरुण के रूम से निक्की hi थी की तरुण की बुआ और उसकी बड़ी चची उसके रूम में आ जाती है और उसका हाल चल पूछने लगती है ... तरुण ने अपने जख्म के नीसाण उन्हें भी दिखा दिए ....

डिनर तक लगभग सभी ने तरुण से उसके बारे में पूछ लिया था सिवाए उसकी म. चची, Richa,Rahul और रानी के ... रीज़न ु आल क्नोव वेल ... तरुण की माँ बस दूर से hi सबको तरुण का हाल चल पूछते हुए देख रही थी पर अपने बेटे के सामने आने की हिम्मत वो नहीं जूता प् रही थी .... पर जैसा वो सोच रही थी उसके उलट तरुण के दिल में उसकी माँ के लिए जो भी रत्ती भर फीलिंग थी वो ख़त्म होने के तरफ तेज़ी से बढ़ रही थी ... उसने एक दो बार अपनी माँ की तिरछी नजर खुद पर महसूस की पर उसका ऐसा करना उसके गुस्से को और बढ़ा रहा था ....

तरुण (मन में) : ये कैसी माँ है ... इसने बचपन से मुझे ढेले भर का भी प्यार नहीं दिया .... बचपन से मुझ पर जुल्म ढाती रही वो अलग ... अभी जब इसको पता चला है की मैं जिंदगी और मौत के बीच लड़ कर आया हु फिर भी एक बार भी मुझे एक hi hello तक नहीं किया ... क्या ये सच में मेरी hi माँ है या मुझे कही फुटपाथ से उठा कर लाया गया है .... मैंने तो सुना है की एक माँ अपने बच्चो के लिए खुद की जान देने से भी हिचकती पर इन्हे तो अगर कोई कहे की मुझे मार दो तो ये रत्ती भर भी इंतजार नहीं करेगी ... उपरवाले मेरी तुझसे सिर्फ एक दुआ है की किसी को ऐसी माँ न देना जिसे माँ शब्द का मतलब तक नहीं मालूम ...

उस दिन और कुछ खास नहीं होता है ... तरुण भी सफर का थका हरा था इसलिए वो जल्दी hi डिनर करके सो गया ...

अगले दिन इवनिंग को तरुण अपने रूम में बैठा बोर हो रहा था की तभी उसके रूम में रुचिका आती है ...

रुचिका : क्या कर रहे हो भाई ....

तरुण : कुछ नहीं दी बस ऐसे hi बोर हो रहा था रूम में बैठा बैठा ....

रुचिका : मैं और प्रियांशी फलो के बगीचे जाने की सोच रहे हैं ... अगर तुम चाहो तो हमें ज्वाइन कर सकते हो .... ऐसे में तुम्हारी बोरियत भी दूर हो जाएगी और बगीचे भी देख लोगे .... तुम्हारे साथ होने से हमें किसी से परमिशन लेने की जरुरत भी नहीं पड़ेगी ...

तरुण : ये ाचा आईडिया है दीदी ... पर हम लोग जायेंगे कैसे ....

रुचिका : एक जीप है उससे hi जायेंगे और क्या ..... बगीचा यहाँ से काफी दूर है... वैसे आज मौसम भी बड़ा ाचा है मज़ा आएगा ...

तरुण : ठीक है दीदी आप लोग भी रेडी हो जाओ ... मैं तैयार हो कर आता हु ...

उसके बाद तीनो भाई बहन निकल पड़ते हैं बगीचे की सैर करने ... तरुण ने अभी एक ट्रॉउज़र और टी - शर्ट डाला हु था जबकि रुचिका और प्रियांशी ने अभी सलवार सूट डाला हुआ था ... वैसे तो तरुण की साडी बहने hi खूबसूरत थी पर प्रियांशी की बात hi कुछ और थी उसके तीखे नैन नक्शा और उसका नटखट स्वाभाव उसको ज्यादा अट्रैक्टिव बनता था .... पर तरुण के साथ टूर पर हुए हादसे के बाद से वो तरुण के सामने बिलकुल शांत सी रहने लगी थी .... आज भी वो दोनों के साथ तो चल रही थी पर कही खोयी खोयी सी थी ....

जीप रुचिका ड्राइव कर रही थी और तरुण उसके बगल वाले सीट पर था ... जबकि प्रियांशी पीछे वाले सीट पर बैठी हुयी थी ....

रुचिका बड़े प्यार से अपने भाई को गाँव के बारे में बताती जा रही थी .... उनका गाँव एक नदी के किनारे बसा हुआ था .... उन्हें बगीचे में जाने के लिए नदी के दूसरे साइड जाना होता था ...

तरुण : दीदी नदी में तो पानी का फ्लो काफी ाचा है यहाँ तो नहाने में काफी मज़ा आएगा ....

रुचिका : हाँ है तो पर क्या फायदा न हमें यहाँ नहाने की परमिशन होती है न hi हमें तैरना आता है ...

थोड़े देर में hi वो लोग फलो के बगीचे में थे .... बगीचे में amrud,aam,kele और भी बहुत सरे फलो के पेड़ लगे हुए थे ... बगीचे की देख भल के लिए उन्होंने एक गार्ड को भी रखा हुआ था ... प्रियांशी और रुचिका को देखते hi वो गार्ड पहचान जाता है क्यूंकि वो पहले भी कभी कभी अपने दादा के साथ भी वह आया करती थी ...

उन्होंने गाडी एक दिसे में लगा कर कीस गार्ड को दे दी ....

रुचिका : मोहन अंकल अभी कौन कौन से फल खाने लायक होंगे अंदर ....

गार्ड : मैडम ... अभी तो आम का टाइम है और लीची भी तैयार है .... अमरुद भी खा सकते हैं आप ... वैसे आपके साथ ये साहब कौन हैं पहले इन्हे कभी नहीं देखा यहाँ ....

रुचिका : मेरा छोटा भाई है सहर गया था पढ़ाई करने कुछ दिन पहले hi यहाँ आया है ....

गार्ड : नमस्ते साहब ...

तरुण : नमस्ते अंकल ... मेरा नाम तरुण है ... आप मुझे नाम से hi बुलाया करो ...

उसके बाद तीनो अंदर जाते हैं ...

रुचिका : क्यों प्रिय तुझे क्या हुआ ये ऐसे maun-vrat क्यों धारण किये हुए है ....

प्रियांशी : कुछ नहीं बस ऐसे hi .... ुम लोग आपस में बात कर hi रहे हो तो मैं क्यों बीच में आऊं ...

तरुण : दीदी इस पेड़ में आहूत अचे फल लगे हैं .... पर मुझे तो पेड़ पर चढ़ना भी नहीं आता ...

रुचिका : पेड़ पर चढ़ना तो मुझे भी नहीं आता और फल भी इतने ऊँचे लगे हैं की शायद hi तेरा हाथ पहुँच पाए ....

तरुण : तब तो दीदी एक hi आईडिया है किसी डंडे के सहारे तोडा जाये या पत्थर मार कर .... पर इतना बड़ा डंडा तो कही दिख नहीं रहा और पत्थर फेंकने से चोट भी तो लग सकती है ...

रुचिका : एक आईडिया है तू मुझे या प्रियांशी को अपने कंधे पर उठा ले .... वैसे उठा तो लेगा न तू हमें ....

तरुण : आप भी क्या बात करती हो दीदी आप तो देखने से hi किसी फूल जैसी हलकी प्रतीत होती हो आपको तो मैं अपने बाये हाथ से hi उठा लूंगा ....

रुचिका : इतनी भी हलकी नहीं हु मैं .... मेरा वजन 58 कग है ....

तरुण : बस इतना hi वजन इतना वजन तो मैं अपने दोनों कंधो पर रख कर एक किलोमीटर तक चल सकता हु और आप बस उठाने की बात करती है ...

रुचिका : मेरे से ाचा तू प्रियांशी को उठा ले वो बस 44 कग की hi है ....

तरुण एक बार प्रियांशी को देखता है तो खुद की तरफ तरुण की नजर प् कर प्रियांशी का चेहरा जो अब तक किसी किसी मुरझाये हुए फूल की तरह दिख रहा था वो ताज़े फूल की तरह खिल उठता है ....

प्रियांशी (मन में) : काश तरुण मुझे उठा ले तो मज़ा आ जाये .... काम से काम इसी बहाने मुझे छू तो लेगा .... कितना प्यारा है मेरा भाई .... ैनवाय hi सब इससे नफरत करते हैं ... इसकी एक एक हसी पर मैं कुर्बान जॉन ... रूचि के साथ ये कितने प्यार से पेश आता है पर गलती भी तो मेरी hi थी कोई ऐसे प्यारे से भाई से नफरत कैसे कर सकता है .... प्लीज प्लीज मुझे उठा ले न ... मैं जल्दी से हमारे बीच आयी हुयी नफरत की ये दिवार गिरा कर तुम्हे प्यार से गले लगा कर एक भाई का वो टच महसूस करना चाहती हु जिससे आज तक मुझे मेरे घरवालों ने मरहूम रखा है ....

रुचिका : अब बस देखता hi रहेगा या रात ढलने का इंतजार करेगा ....

तरुण झुक कर बैठ जाता है ...

तरुण : दीदी अब चढ़ मेरे कंधे पर और जल्दी से कुछ फल तोड़ लो ....

रुचिका भी जल्दी से जल्दी प्रियांशी और तरुण का पैच उप करना चाहती थी क्यूंकि उसने प्रियांशी की आँखों में भी तरुण के लिए वही प्यार और ममता महसूस की थी जो उसकी दिल में तरुण के लिए था ... थी तो दोनों जुड़वाँ बहने hi और वर्षो के साथ ने उन्हें एक दूसरे के दिल का हर हाल जानना सीखा दिया था ....

रुचिका : चलो प्रियांशी चढ़ जाओ घोड़ी पर ....

प्रियांशी : p...pa..par मैं कैसे ...

प्रियांशी की जुबान उसके मन के बिलकुल उलट बोल रहा था जबकि वो जल्द से जल्द इस ओप्पोर्तुनिटी को भुना लेना चाहती थी ...

तरुण प्रियांशी की तरफ देख एक बार सहमति में सर हिला देता है ये देख प्रियांशी को इतनी ख़ुशी मिलती है मनो उसको जन्नत hi मिल गयी हो ...

वो जल्दी से अपने स्लिपर उतर कर तरुण के सर पर हाथ रख कर उसके कंधो पर धीरे धीरे बैठ रही थी मनो वो अपने प्यारे से घोड़े की सैर करने जा रही हो उसको बिना कोई चोट पहुंचाए ... जब वो ठीक से बैठ जाती है तो तरुण उसके दोनों पाओ को पकड़ कर बैलेंस बना कर खड़ा होने लगता है ... तरुण के हाथ को अपने पाओ पर महसूस होते hi प्रियांशी के पुरे जिस्म में एक तेज़ सो सिहरन दौड़ जाती है ...

प्रियांशी ने एक एक करके 7 - 8 आम तोड़ लिए उसके बाद तरुण उसको आराम से उतर देता है ... अब तीनो मिल कर तोड़े हुए आम को खाने लगते हैं ...

तरुण : वाओ दीदी मज़ा आ गया .... ऐसे पैर से पके हुए आम शायद पहली बार खा रहा हु ... कितना मज़ा आ रहा है ...

रुचिका : हम तो अक्सर पेड़ के पके आम hi कहते हैं पर आज के आम में कुछ खास बात है ये बड़े टेस्टी और मीठे हैं .... शायद इसमें तुम्हारे और प्रियांशी के साथ की वजह से स्वाद बढ़ गया है ...

प्रियांशी (साद सा फेस बनाते हुए) : हम अब भी कहा साथ हैं ... वो तो तुम्हारे वजह से तरुण ने मुझे उठाया वर्ण ये तो अब भी मुझसे नाराज है ... पहले घर के बड़ो की वजह से हम अलग रहे ... जब ये वापिस लौटा तब तक हमारे घर वालो में हमारे मन में जितना ज़हर घोला था उसके वजह से हम न मिल पाए और अब ये मुझसे नाराज चल रहा ... अब क्या पता साडी जिंदगी हम ऐसे hi एक दूसरे से दूर रहेंगे ... तू खुसनसीब है रूचि की तुझे अब इसका प्यार और स्नेह तो नसीब हो रहा है ... पता नहीं कब हम दोनों के बीच आयी हुयी ये दूरिया मिटेगी ... ी ऍम रियली वैरी वैरी सॉरी तरुण .... मैंने आज तक जाने अनजाने में तुम्हारे साथ जो भी गलत किया है हो सके तो उसके लिए मुझे माफ़ कर दो ... मैं ये प्रॉमिस करती हु की अगर तुम मुझे माफ़ कर दो तो मैं तुम्हे मेरी तरफ से कभी भी शिकायत का कोई मौका नहीं मिलेगा ....

रुचिका : देखो भाई मैं तुमसे जबरदस्ती तो नहीं कर सकती पर इतना जरूर कहूँगी की तुम्हे एक बार प्रियांशी को एक मौका जरूर देना चाहिए ... अगर वो तुम्हारे टेस्ट में सफल होती है तो तुम्हे एक प्यारी सी बहन और मिल जाएगी जो तुमसे बेइंतेहा प्यार करती हो .... मन की हमारा जिस्म अलग है हमारा नेचर अलग है पर हमारा दिल एक सा hi है ....



अब दोनों बहने तरुण के चेहरे की तरफ बड़े गौर से देख रही थी ... वही तरुण के चेहरे पर तरह तरह के भाव आ रहे थे और चले जा रहे थे वो डीडे नहीं कर प् रहा था की उसको प्रियांशी को माफ़ करना चाहिए या नहीं ...
 
अपडेट 21

अब दोनों बहने तरुण के चेहरे की तरफ बड़े गौर से देख रही थी ... वही तरुण के चेहरे पर तरह तरह के भाव आ रहे थे और चले जा रहे थे वो डीडे नहीं कर प् रहा था की उसको प्रियांशी को माफ़ करना चाहिए या नहीं ...




आगे

काफी सोचने विचरने के बाद तरुण ने कुछ डीडे किया और बोलना सुरु किया ...

तरुण : देखो प्रियांशी दीदी आप सच में बहुत अछि होंगी तब hi तो आप इस फॅमिली में सबकी जान हो और सबकी चाहती भी .... मुझे अपने भी बचपन में बहुत सताया है जब मुझे प्यार और दुलार की सख्त जरुरत थी तो आपलोगो ने मुझे न सिर्फ दुत्कारा बल्कि मेंटली टॉर्चर भी किया ... ये आपलोगो की मेहेरबानी का hi परिणाम है की मैं बीते कई सालो से मेन्टल ट्रामा का शिकार हु ... हमेसा मुझे रात को सपनो में मेरा वो अतीत दिखाई देता था जिसे मैं क्या कोई भी याद करना न चाहे ... मेरा मन तो नहीं चाहता की मैं आपको माफ़ी दू पर क्या करू मेरा ये दिल काफी सॉफ्ट है मैं आप लोगो की तरह पत्थर दिल नहीं .... मैं आपको पूरी तरह से माफ़ तो नहीं कर सकता पर मैं आपको ऐसे उदास भी नहीं देख सकता इसीलिए मैंने एक बीच का रास्ता निकला है .... मैं अपने अनुसार आपको टेस्ट करूँगा और अगर आप मेरी हर कसौटियों पर खरी उतरती हैं तो आपको न सिर्फ माफ़ी मिलेगी बल्कि आप मेरी सबसे प्यारी दोस्त छुम बहन भी बन सकती हु .... जहा अभी सिर्फ दिया Didi,Shreya दीदी और रुचिका दीदी का hi अधिकार है ...

प्रियांशी (खुस हो कर) : क्या सच में .... मैं तुम्हारे हर टेस्ट में पास हो कर दिखा दूंगी की मेरे दिल में तुम्हारे लिए कितना प्यार और रेस्पेक्ट है ... क्या अब मैं अपने प्यारे भाई को अपने सीने से लगा सकती हु ....

तरुण (कुछ देर सोचने का नाटक करते हुए ) : ठीक है .... आ जाओ ...

इतना सुनने भर की देर थी की प्रियांशी चेहेक्ति हुयी किसी मासूम बच्ची के जैसे तरुण के सीने में घुस जाती है ... उसने तरुण को बड़े जोर से जकड लिया था मनो उसको दर हो की कही कोई उसको उसके सबसे प्यारे खिलौने से दूर न कर दे ...

तरुण (खासते हुए) : u...ufff इतनी जोर से ... कही मेरी जान न निकल जाये ...

प्रियांशी तुरंत तरुण को छोड़ देती है ....

प्रियांशी (घबराई आवाज़ में ) : वो सॉरी न भाई वो थोड़ा जोश में थी मैं तुम्हे पाने की ख़ुशी में इसलिए थोड़ा हार्ड हो गया ...

तरुण (खिलखिलाते हुए) : अरे मैं तो मजाक कर रहा था ... आप तो सीरियस हो गयी ... पर याद रहे अभी मैंने आपको पूरी तरह से माफ़ नहीं किया है ...

प्रियांशी : कोई न मुझे अपने आप पर पूरा भरोषा है की मैं एक न एक दिन तुम्हे अपने स्नेह और प्यार से अपना बना लुंगी ... थैंक्स रूचि दीदी फॉर सपोर्टिंग में ... लव ु 😘😘😘

प्रियांशी रूचि को गले लगा लेती है .... प्रियांशी ने रुचिका को दीदी कहा था क्यूंकि वो कुछ मिनट्स से प्रियांशी से बड़ी थी ...

वैसे तो मेल मिलाप से ये तीनो काफी खुस दिखाई दे रहे थे पर ुशी बगीचे में कोई ऐसा भी मौजूद था जो हैरत भरे नजरो से इन्हे देख रहा था ....वो बिना कोई आहात किये अपने जगह से निकल कर बगीचे में hi कही गम हो जाता है ....

थोड़े देर बाद वो लोग जीप पर बैठ कर घर के लिए रवाना हो जाते हैं ....

उधर आज की रात दिया के लिए बेहद खास थी क्यूंकि आज उसका बिलेटेड सुहागरात जो था .... जैसे हर लड़के और लड़कियों के दिल में इस खास रात को लेकर बहुत सरे सपने और उमंग होती है वैसा hi कुछ दिया का भी हाल था आज वो अपने आप को पूरी तरह अपने पति को समर्पित करने वाली थी ... वो आज एक लड़की से पूरी तरह एक औरत जो बनने वाली थी .... आज दोपहर से hi उसके कमरे को तरह तरह के सुगंदगीत फूलो से सजाया जा रहा था ....

थोड़ा दिया के ससुराल का ब्रीफ इंट्रोडक्शन कर लेते हैं ...

दीपक शर्मा : दिया के ससुर ..

कुलवती शर्मा : दिया की सास ...

जितेश शर्मा : दिया का पति ... आगे 28

ज्योति शर्मा : दिया की ननद .... आगे 20 ... दूध की तरह सफ़ेद और चेहरे पर हल्का गुलाबी रंगत का क्या कहना .... देखने वालो की तो नजरे hi उसके ऊपर से नहीं फिसलती थी ....

चार मेंबर्स का ये खुशाल परिवार था जिसकी पांचवी मेंबर कुछ दिनों पहले hi दिया बानी थी ...

पारलर की लड़किया दिया को सजाने सँवारने में लगी हुयी थी .... जबकि जितेश दूर से hi इस चाँद के टुकड़े को निहार कर अपने दिल को सांत्वना दे रहा था की बीआरओ जस्ट फ्यू हॉर्स मोरे उसके बाद ये सिर्फ सुर सिर्फ मेरी hi होगी ....

ज्योति जितेश को ऐसे दीवानो की तरह दिया को घूरते देख उसको चिढ़ाने का कोई भी मौका खली नहीं दे रही थी ... काफी चुलबुली नेचर की थी ज्योति ... वैसे तो उसका जिस्म थोड़ा भरा भरा था पर उसके सरे एसेट काफी छोटे छोटे थे बिलकुल ुँतौचेड पीेछे ... इतनी शर्मीली थी की वाशरूम में भी पुरे कपड़ो में नहाती थी .... कारन को इससे पहली नजर में hi प्यार हो गया था पर ये महारानी थी की उसको ऐसे इग्नोर करती थी जैसे वो इस दुनिया में एक्सिस्ट hi न करता हो ....

रात ढली और अब वो घडी भी नजदीक आ गयी थी जिसका सभी को बेसब्री से इंतजार रहता है ....

दिया को तो रह रह कर नर्वस्नेस महसूस हो रही थी ... उसने कारन या तरुण को कॉल करने का सोचा फिर सोचने लगी की वो आखिरी उनसे बात क्या करेगी ... वैसे कोई और ोक्सासिओं होता तो कुछ भी बात कर लेती पर आज वो बोले समझ hi नहीं अस रहा था ... तब आख़िरकार उसकी उंगलियों बे तरुण का नंबर डायल कर दिया ... तरुण ने फर्स्ट रिंग में hi कॉल रिसीव कर लिया ...

तरुण : hello दीदी आप इस वक्त कॉल ... सब ठीक तो है न ... एक मिनट आज आपकी सुहागरात है न तो एन्जॉय योर life's मोस्ट प्रेसियस मोमेंट ....

दिया (सरमाती हुयी) : पागल मैं यहाँ फुल नर्वस हु और तू मुझे मोमेंट एन्जॉय करने को कहा रहा है ...

तरुण : पर दीदी आपको तो खुस होना चाहिए ... कितनी खुसनसीब हो आप की आपको जीजू जैसा हस्बैंड मिले हैं जो आपको लाइफटाइम सपोर्ट करेंगे ...

दिया : तो तू hi बन जा न खुसनसीब और मन ले उनके साथ सुहागरात ...

तरुण : मैं तो लड़का हु मैं उनके साथ कैसे वो सब कर सकता हु .... कोई न चिल करो और एन्जॉय योर मोमेंट .... टॉक तो यू लेटर गुड नाईट एंड हैप्पी सुहागरात ...

अभी तरुण को कॉल कट किये हुए कुछ देर hi हुए थे की किसी के कदमो की आहात रूम के तरफ आती हुयी प्रतीत होने लगी ... वो घूँघट निकल कर बैठ जाती है ... धीमे धीमे कदम बढ़ता हुआ जितेश रूम में एंटर करता है ... रूम में एंटर करते hi उसने गेट को लॉक कर दिया मनो वो एक लम्हा भी और इंतजार नहीं करना चाहता हो ...

उसने बीएड पर बैठने के बाद एक दो रोमांटिक लाइन्स कही और फिर दिया का घूँघट उठा दिया ... दिया ने शर्म के मरे अपनी पलके झुका दी ... जितेश ने आगे बढ़ते हुए उसकी बंद पलकों को बड़े प्यार से चुम लेता है जिससे दिया का पूरा जिस्म hi कैंप उठता है ....

एक दो रोमांटिक लाइन्स के बोलने के बाद जितेश ने दिया को आंखें खोलने को कहा ... दिया के आँख खोलते hi जितेश ने सोने का चमचमाता हार उसके आँखों के आगे कर दिया .... जितेश के रोमांटिक अंदाज़ से दिया बहुत खुस होती है ... उसने जितेश को hi हार पहनने का इशारा किया ....

गले में हार पहनने के बाद जितेश ने उसके दोनों पहले हुए गालो को बरी बरी से चुम लिए ....

अब जितेश ने सबसे पहले दिया के जिस्म से उसके आभूषणो को उतरना सुरु किया ... एक एक करके सरे आभूषण उतरने के बाद जितेश ने दिया को बीएड पर लिटा कर उसके होंठो को चूमना सुरु किया .... ये फ्रेंच किश या स्मूच तो नहीं था जस्ट नार्मल किश था ....

अब जितेश ने दिया के जिस्म से धीरे धीरे कर के कपड़ो को बताना सुरु किया .... दिया को ब्रा पंतय पर ला कर उसने अपने सरे कपडे उतर फेंके .... दिया ने चोर नजरो से जितेश के प्राइवेट part की तरफ देखा तो उसको वो तरुण के लुंड के मुकाबले काफी छोटा प्रतीत हुआ हलाकि जितेश के लुंड की मोटाई तरुण के लुंड से कुछ hi काम था ... जितेश का लुंड अभी अपने फुल फॉर्म में था क्यूंकि दिया के हुस्न को सिर्फ ब्रा पंतय में देख वो अपने फीलिंग को और कण्ट्रोल नहीं कर पता है .... अभी जितेश का लुंड करीब 6.5 इंच लम्बा लग रहा था ... जितेश इतराते हुए दिया का हाथ अपने लुंड पर रखता है ... दिया ने पहले तो अपने हाथ झटक लिए फिर पतिव्रता नारी का मान रखते हुए वो जितेश के लुंड को सहलाने लगती है ... जितेश को तो इतनी ख़ुशी महसूस होती है की उसका लुंड झटके पर झटके मरने लगता है ...

अब जितेश ने खुद hi दिया के हाथो से अपने लुंड को छुड़ाया और दिया के जिस्म से बचे हुए दोनों अन्तः वस्त्र भी उतर फेंका ....

दिया की प्यारी सी छूट देख उसका तो गाला hi सूखने लगता है ... वो दिया को बीएड पर लिटा कर अपने दोनों हाथो से उसके बॉल्स को दबाने लगता है ... उसको ऐसा करने में बहुत मज़ा आ रहा था ... थोड़े देर दिया के चूचियों को दबाने के बाद वो दिया की पानी छोड़ती छूट पर अपना लुंड सेट करता है और एक जोर का धक्का लगता है ... लुंड आधा से ज्यादा अंदर तक घुस जाता है .... दिया को अपनी छूट में असहनीय पीड़ा महसूस होती है और उसकी आँखों से ांशो जोर जोर से बहने लगते हैं ...

जितेश ने दिया के दर्द की परवाह किये बिना एक और जोर का धक्का लगा दिया जिससे दिया की छूट से खून किसी पानी की तरह बहने लगा जो की इस बात का सबूत थी की उसका कौमार्य भांग हो चूका है और वो एक लड़की से औरत बन चुकी है ...

जितेश ने अपनी मर्दानगी साबित करते हुए दिया की छूट में ताबड़तोड़ लुंड पेलना सुरु किया और करीब 8 - 10 मिनट के बाद वो दिया की छूट में hi धरसाई हो जाता है ....

अब वो दिया को थोड़ा साइड करता है ... दिया के गांड के नीचे वाला बेडशीट का हिस्सा उसके छूट से निकले खून से लाल हो चूका था ... जितेश उस खून के बड़े से धब्बे को चुम लेता है और उस खून को किसी लिपस्टिक की तरह अपने होंठो पर लगा लेता है मनो वो उसका विजयी प्रतिक हो ... दिया को जितेश का ये अंदाज़ कुछ अटपटा जरूर लगता है पर वो पहले से hi काफी दर्द में थी इसलिए उसने इसके ऊपर ज्यादा ध्यान नहीं दिया ...

जितेश कुछ देर बाद अपने कपडे पहन कर दिया के बगल में hi लेट जाता है .... उसने दिया का हाल चल पूछने की भी कोसिस नहीं की ....

दिया कुछ देर बाद हिम्मत जूता कर वाशरूम जाती है और गीजर के गरम पानी से अपनी छूट की सिंकाई करती है क्यूंकि वो थोड़ी सूज गयी थी ... ये सब उसकी माँ ने hi उसको बताया था वह जाने से पहले ... अब वो पेनकिलर्स खा कर सो जाती है ... उसके बगल में hi जितेश बेफिक्र सोया हुआ था ... जिसके होंटो पर लगा दिया के छूट का खून अब तक सुख चूका था ....

तो इस तरह से दिया के सुहागरात का समापन हो जाता है ....

उधर आज प्रियांशी बड़ी खुस थी .... काफी दिनों बाद उसको यु चेहेकता देख घर वाले भी खुस हो जाते हैं सिवाए 3 लोगो के ....

रात में सभी लोग अपने कमरों में साइट हुए थे की ठीक तभी तरुण के अंदर छुपा हुआ जासूस अपना सर उठाने लगता है ....

तरुण (अपने मन में ) : लास्ट टाइम मैंने दादा जी को अपनी hi सगी बहु को छोड़ते हुए देखा था ... मुझे पता लगाना होगा की न जाने इस घर की चारदीवारी में और कौन कौन से राज़ दफ़न हैं ....

और फिर तरुण किसी काबिल जासूस की तरह बड़े hi सावधानी से अपने गेट को खोल कर बहार आता है और बिना कोई आहात किये सीढिया उतर कर ग्राउंड फ्लोर पर आता है .... वो फ़िलहाल किचन की तरफ मुड़ना चाहता था पर उसके पाओ अपने आप उसके दादा के रूम की तरफ मुद जाते हैं ... पर आज उस रूम में अँधेरा छाया हुआ था और अंदर से कोई हलचल भी सुनाई नहीं देती है ....

वो करीब 5 - 10 मिनट और वह रुकता है पर आज शायद उसके जासूसी का आगाज़ करने का ाचा दिन नहीं था इसलिए उसको खली हाथ hi लौटना पड़ा ....

अगले दिन तरुण की बुआ ने तरुण को अपने घर डिनर के लिए बुलाया था वो रात में भी वही रुकने वाला था ... आज उसकी बुआ ने उसकी hi पसंद का खाना बनाया था ... अपनी बुआ में तरुण ने हमेसा से अपनी आइडियल माँ की छवि देखि थी ... डिनर के बाद बुआ ने तरुण को ुशी रूम में भेज दिया जहा वो बुआ के घर अक्सर रुकता था ....

रात का काम निपटने के बाद तरुण के रूम में उसकी बुआ की एंट्री होती है ... बुआ ने आज एक खुले गले वाली निघ्त्य पहनी हुयी थी ... गाला डीप होने की वजह से बुआ के क्लीवेज की जो झलक मिल रही थी वो काफी कामुक थी ... तरुण ने मुद कर अपनी बुआ को देखा ...

तरुण : बुआ आप यहाँ इस वक्त .... अब मैं ठीक हु आपको यहाँ नहीं आना चाहिए ... फूफा जी आपसे गुस्सा भी हो सकते हैं इस वजह से ...

टी. बुआ : अरे वो तो पिछले दो रातो से वही डेरी पर hi सो जाते हैं तुम चिंता न करो ....

तरुण : फिर भी बुआ अब मैं कोई बच्चा नहीं रहा अब बड़ा हो गया हु ...

टी. बुआ : वह जी क्या बात है ... मुझे तो नहीं लगता की तुम बड़े हुए हो .... एक बीटा अपनी माँ के लिए हमेसा बच्चा hi रहता है वो चाहे कितना भी बड़ा हो जाये ... चल अब अपने कपडे उतर और मुझे अपना जख्म देखने दे ....

तरुण : पर बुआ ...

टी.. बुआ : कोई पर वॉर नहीं मुझे तेरे जख्म देखने हैं तो देखने हैं ....

तरुण अपने t-shirt को उतर देता है ... तरुण के पीठ पर गोलियों के नीसाण देख दिया तड़प जाती है .... वो तरुण के पीठ के उस हिस्से को चुम लेती है ....

टी. बुआ : कितना दर्द सहा होगा तूने मेरे बच्चे ...

तरुण : क्या बुआ आप भी मर्द को दर्द नहीं होता ....

टी. बुआ : मन तो कर रहा है की तेरी पिटाई लगा दू ... बड़ा आया मर्द बनने वाला ... चल अब चुप चाप बीएड पर लेट जा ... मैं तेरी मालिस कर देती हु ...

तरुण : पर बुआ मेरी मालिस क्यों मैं तो फिट न फाइन आपके सामने खड़ा हु ...

टी. बुआ : जो मैंने कहा है वो सुन ... बचपन से तेरी मालिस करती आयी हु ...

तरुण : पर बुआ बचपन की बात कुछ और थी .... अब मैं बड़ा हो चूका हु ....

टी. बुआ : मुझे कोई बहस नहीं सुन्ना ... चुप चाप बीएड पर लेटो ... मैं आयल लेकर आती हु ...

 
अस ु विश

अभी तक तो मैंने सिर्फ 3 सेक्स सन लिखा है .... जिनमे से 2 हस्बैंड वाइफ का पेअर था तो एक पेअर तरुण के साथ एक रैंडम लेडी का था .. तो यहाँ हर कोई कहा किसी के साथ लगा पड़ा है .. ये स्टोरी अडुल्टेरी प्रीफिक्स के अंदर लिखा गया है न की इन्सेस्ट प्रीफिक्स के अंदर ... स्टोरी एक हीरो के अराउंड है अब और क्या कहु
 
अपडेट 22

तरुण : पर बुआ बचपन की बात कुछ और थी .... अब मैं बड़ा हो चूका हु ....




टी. बुआ : मुझे कोई बहस नहीं सुन्ना ... चुप चाप बीएड पर लेटो ... मैं आयल लेकर आती हु ...

आगे

थोड़ी देर बाद जब उसकी बुआ मालिस के लिए आयल ले कर आती है उस वक्त तरुण बीएड पर पीठ के बल लेता हुआ था ... उसके कमर के ऊपर के हिस्से पर तो कुछ नहीं था पर नीचे उसने एक ट्रॉउज़र डाला हुआ था ...

टी. बुआ : ये ट्रॉउज़र क्यों दाल रखे हैं तूने ... इन्हे भी उतर दे वर्ण इनमे आयल लग जायेगा ...

तरुण : नहीं बुआ ऐसे hi ठीक है ...

टी. बुआ : क्यों अपनी बुआ से शर्म आ रही है क्या ...

तरुण : शर्म की बात नहीं है बुआ ...

टी. बुआ : अरे बचपन में तुझे नंगु पंगु करके मालिस किया करती थी ...

तरुण (झेंपते हुए ) : बुआ वो बचपन की बात थी ... अब मैं जवान हो चूका हु ...

टी. बुआ : अरे तो मैं अभी तुझे कौन सा नंगा कर रही हु बस ट्रॉउज़र उतरने को hi कह रही हु ...

तरुण अपनी बुआ की बात मान कर अपने ट्रॉउज़र को भी उतर देता है और वो सिर्फ अंडरवियर में बीएड पर पीठ के बल लेट जाता है ...

तरुण के सॉलिड बॉडी को देख बुआ को उसके ऊपर नाज़ होने लगा था ...

वो पहले उसको पेट के बल लेटने को कहती है और उसके पीठ की मस्सगे करने लगती है ... पीठ की मस्सगे के बाद वो उसके कमर के ऊपरी हिस्से की मस्सगे के बाद उसके पाओ की तरफ अस जाती है ... उसके पाओ और जांघो की मस्सगे करने के बाद वो उसको पलटने को कहती है पर तरुण पलटने को तैयार नहीं होता क्यूंकि ... बुआ के सॉफ्ट सॉफ्ट हाथो का टच अपने जांघो पर महसूस करके उसका छोटा सिपाही स्टैंड उप की पोजीशन में आ चूका था क्यूंकि उसके जांघ का हिस्सा उसके जिस्म का सबसे सेंसिटिव part में से एक था ...

तरुण की बुआ सोचती है की तरुण मस्सगे न करवाने के लिए बहाना कर रहा है इसलिए नहीं पलट रहा .... वो अपनी कसम दे कर तरुण को फोरस्फुल्ली पलटने पर मजबूर कर देती है ... पर जैसे hi तरुण पलट कर पीठ के बल होता है तो अनायास hi उसकी बुआ की नजर तरुण की अंडरवियर में बने विशाल टेंट पर चली जाती है ... उसका बड़ा सा टेंट देख कुछ लम्हो के लिए तो बुडबका गाला hi सुख जाता है ... पर उसके अंदर की माँ ने उसको बहुत धिक्कारा तो वो नार्मल हो कर तरुण के हाथ और पाओ का मस्सगे करने लगती है ... मस्सगे पूरा होने के बाद वो वाशरूम चली जाती है हाथ धोने के बहाने ...

हाथ धोने के बाद वो टॉयलेट सीट पर जाकर अपनी निघ्त्य को ऊपर उठा कर अपनी पंतय की इलास्टिक पकड़ कर नीचे सरकने को होती है की तभी उसको अपनी पंतय गीली गीली महसूस होती है ... क्यूंकि मस्सगे के दौरान hi तरुण के बड़े से टेंट की वजह से उसकी महारानी ने आंशू बहाने सुरु कर दिए थे जिसका उसको एहसास भी नहीं था ... वो पंतय को नीचे सरका कर देखती है तो पति है की छोटे छोटे झांटो के झुरमुट से छुपी उसकी छूट से बूँद बूँद करके उसका पानी रिस रहा है ....

उसको अत्यंत उत्तेजना का एहसास hi रहा था जिसके वजह से स्वतः hi उसकी एक ऊँगली उसकी छूट में घुस जाती है और वो धीरे धीरे फिंगरिंग करने लग जाती है जिसके परिणामस्वरूप चाँद लम्हो में hi उसकी छूट ने इतना पानी छोड़ा मनो वो मूत रही हो ... आज काफी दिनों से जमा हुआ उसका सारा पानी आज निकल गया था ... उनकी पंतय गीली हो चुकी थी जिसके वजह से उसको उतर कर साफ़ करके वो वही वाशरूम में hi उसको तंग देती है ...

डिस्चार्ज होने के बाद तरुण की बुआ के अंदर ग्लानि के भाव आने सुरु हो गए और वो खुद से hi शर्मसार होने लगी क्यूंकि तरुण को वो अपने सेज बेटे जैसा मानती थी ... काफी देर तक खुद को धिक्कारने के बाद जब वो वापस रूम में एंटर करती है तो तरुण अपने सरे कपडे पहन कर सो चूका था ...

टी. बुआ (खुद से) : लगता है ये नींद में सो चूका है .... चेहरे से hi कितना मासूम लगता है मेरा बच्चा और मैं गन्दी न जाने क्या क्या सोचे जा रही थी ... ये मेरा बीटा hi तो है मेरा प्यारा बीटा ... चलो अब मैं भी सो जाती हु ....

तरुण की बुआ उसके बगल में hi लेट जाती है .... डिस्चार्ज होने की वजह से उसकी थोड़ी थकन सी महसूस हो रही थी जिसके वजह से उसको जल्द hi नींद आ जाती है ...

रात में करीब 2 बजे तरुण की नींद खुलती है क्यूंकि उसको जोरो से टॉयलेट लगा हुआ था ... वो लाइट ों करके जल्दी से वाशरूम घुस जाता है क्यूंकि उसको काफी तेज़ प्रेशर आया हुआ था ...

टंकी खली करके वो रूम में आता है तो जैसे hi उसकी नजर बीएड पर पड़ती है उसकी सैंसें hi थम सी जाती है .... क्यूंकि बीएड का नजारा hi कुछ ऐसा था ... उसकी बुआ बेसुध सी बीएड पर सोई हुयी थी और उसकी निघ्त्य उसके जांघो तक आया हुआ था ...

अपनी बुआ के नंगे गोर गोर केले के तने जैसी जांघ उसको पलके न झपकने पर विवश कर रहे थे ... कुछ देर तक गोरी गोरी जांघो का दीदार करने के बाद उसको अपने हाथो पर कण्ट्रोल करना मुश्किल हो रहा था ... उसने कांपते हाथो से बुआ की निघ्त्य को थोड़ा और ऊपर उठाया तो उसको अपनी बुआ के जिस्म का वो हिस्सा दिखाई देता है जिससे उसकी रूबी दीदी इस दुनिया में आयी थी ... वो जगह हलाकि झांटो के झुरमुट में छुपा हुआ था पर उस जगह को देख तरुण को मनो दस बोतल का नशा छ जाता है ... अभी तरुण की खोज कुछ आगे बढ़ती की उसकी बुआ के जिस्म में हलचल होती है जिससे दर के मरे तरुण उसकी निघ्त्य को छोड़ जल्दी से सो जाता है .... बुआ नींद में hi अपनी निघ्त्य ठीक करके वापस सो जाती है ...

तरुण की तो जान में जान आती है वो खुद को धिक्कारने लगता है की जिस औरत में उसको बचपन से hi एक माँ से भी बढ़ कर प्यार दिया उसके बारे में वो कितना गन्दा न सिर्फ सोच रहा था बल्कि बुआ के नींद में होने का गलत फायदा उठा कर उसको खुद अपने हाथो से नंगी किये जा रहा था ... वो खुद को कोसते हुए न जाने कब सो गया पता hi न चला ....

सुबह को जब तरुण की नींद खुली तो वो अकेले hi बीएड पर सोया हुआ था ... वो रूम से उठ कर बहार आया तो हॉल में टीवी के सामने उसको रूबी बैठी हुयी दिखाई देती है ....

तरुण : गुड मॉर्निंग दीदी ... क्या देख रही हो ...

रूबी : बंधन मूवी देखे रही हु .... और कैसी नींद आयी ...

नींद की बात सुन कर तरुण की आँखों के सामने वो सन आ जाता है जब उसने अपनी बुआ की झांटो के झुरमुट में छुपी छूट को देखा था .... जल्द hi अपना ध्यान हटा कर वो रूबी को जवाब देता है ...

तरुण : अछि hi थी दीदी ... वैसे बुआ नहीं दिख रही ...

रूबी : अरे वो तो सुबह को hi मार्किट चली गयी ....

तरुण : आप नहीं गयी ...

रूबी : मैं क्या करती जा कर वैसे भी 3 दिन बाद रक्षा बंधन है तो आज शाम को हम सभी बहने मार्किट जाने वाली हैं राखी सेलेक्ट करने .... बहुत सालो बाद तुम राखी पर रुक रहे हो न ... पहले तो सिर्फ मैं और श्रेया दीदी hi तुम्हे राखी बांधती थी ... तूने तो आज तक मुझे कोई गिफ्ट तो दिया नहीं पर अबकी बार मैं साडी कसार निकलवा के रहूंगी ... 😂😂

तरुण : हाँ दीदी जरूर ... क्यों नहीं भाई हु आपका तो आपका मुझसे गिफ्ट लेने का पूरा पूरा हक़ है ...

उसके बाद तरुण अपने घर को आ जाता है ...

इवनिंग को तरुण की सभी bahne,bhabhi,m. चची और उसकी बुआ मार्किट चली जाती हैं राखी और कुछ जरुरी सामने की शॉपिंग करने ..

तरुण अपने रूम में बैठा बैठा बोर हो रहा था तो उसने सोचा की छत पर जा कर ताज़ी हवा खा की जाये ... वो जैसे hi रूम से निकला तो उसको उसकी माँ अपने रूम से बहार कड़ी हुयी दिखती है .... वो उसको इग्नोर करके छत पर जाने लगता है की किसी ने पीछे से उसका हाथ पकड़ लिया ... जब तरुण ने मुद कर देखा तो उसका हाथ पकड़ने वाली और कोई नहीं उसकी माँ hi थी ...

कुछ सेकण्ड्स तो दोनों बस एक दूसरे की आँखों में hi देखते रह गए .... आख़िरकार तरुण ने hi इस चुप्पी को तोडा ...

तरुण : ये क्या बदतमीज़ी है ... और आप हैं कौन मैं आपको नहीं जनता और आइंदा इस तरह मुझे छूने की कोसिस न करना मुझे अनजान लोगो से मिलने या बात करने में कोई इंटरेस्ट नहीं है ...

टी. माँ : बीटा ये कैसे बोल रहे हो मैं तुम्हारी माँ हु ...

तरुण ( जोर जोर से हस्ते हुए) : मैडम आपको शायद कोई ग़लतफहमी हुयी है मैं तो एक अनाथ हु जिसे इस घर वालो ने गॉड लिया है .... मेरा कोई माँ बाप नहीं है ... हाँ दो बहने जरूर हैं जिन्हे मैं अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करता हु ....

टी. माँ : बीटा तुम चाहो तो मुझे मार पीट कर खुद पर हुए हर अन्याय हर सितम का बदला ले ले पर एक बार अपने मुँह से मुझे माँ कह दे .... तुम शायद नहीं जानते मेरे साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है ... मुझे तुमसे अलग करने के लिए बहुत बड़ा षड़यंत्र रचा गया है ...

तरुण : मैडम मुझे माफ़ करो और प्लीज अपने ये मगरमछ के आंशू बचा कर रखिये शायद आपके ये आंशू लादले उस हरामी राहुल के लिए काम आये ...

और फिर अपनी माँ का हाथ झटक कर तरुण सीढ़ियों से होता हुआ छत पर चला जाता है .... वही उसकी माँ बस अपने आँखों में आंशू लिए हुए उसको जाते हुए देखती रही ... वो कर भी क्या सकती थी दोनों के रिश्तो के बीच कांटे उसने hi तो बिछाए थे तो नियमतः चुनना भी तो उसको hi पड़ेगा न ...

तरुण की माँ ने आज वो दर्द वो इग्नोरेंस फील किया था जो उसने आज तक अपने बेटे को फील करवाया था ....

वो वापस अपने रूम लौट आती है और गेट लॉक करके अपना मुँह तकिये में छुपा कर जोर जोर से हिचकिया ले कर रोने लगती है ...

अपनी माँ के सामने जरूर तरुण एक सख्त लौंडा बनने की कोसिस कर रहा था पर छत पर एक कोने में जा कर वो भी फुट फुट कर रोने लगता है ....

आज भी रात को तरुण की नींद जासूसी करने के लिए खुल जाती है ... सीढ़ियों तक जाने के लिए उसको राहुल के रूम के पास से हो कर गुजरना होता था ... पर आज जैसे hi वो राहुल के रूम के पास से गुजर रहा था की उसके कानो में किसी लड़की की मादक सिसकिया सुनाई देती है ... उसके कानो खड़े हो जाते हैं और उत्सुकतावश वो अंदर झाँकने के लिए जगह ढूंढ़ने लगता है ... किस्मत से उसको रूम की विंडो के पास एक ऊँगली भर का छोटा सा छेड़ दिखाई देता है .... वो अपनी आँखों को एडजस्ट करके अंदर झाँकने लगता है तो उसको बीएड पर राहुल एक लड़की के साथ नंगा लेता हुआ था लड़की का चेहरा दूसरी तरफ था ... राहुल बड़े प्यार से उसके चूचियों को बरी बरी से चूस रहा था ... चूचियों से जी भर कर खेलने के बाद वो नीचे सरक कर उसकी छूट को चाटने में लग जाता है ...

तरुण ने अपना अपना मोबाइल निकल कर रिकॉर्डिंग करना चालू कर दिया ... वो रिकॉर्डिंग पर hi अपनी नजरे जमाये खड़ा था ... कुछ देर बाद जब वो लड़की बैठती है तो उसका फेस देख कर तरुण की तो मनो पैरो टेल जमीन hi खिसक गयी ... वो आश्चर्य से कभी मोबाइल स्क्रीन को देख रहा था तो कभी किसी सोच में डूबा जा रहा था ... वो अब तक तो एहि सोच रहा था की राहुल घर की नौकरानी के साथ मस्ती करने में लगा पड़ा है ....

कुछ देर बाद वो जब गेट खुलने की आहात सुनता है तो वह से भाग कर पास hi एक अँधेरे जगह में छुप जाता है ... गेट खुलते hi एक लड़की बहार आती है जिसने कपड़ो से अपना मुँह ढाका हुआ था ... उसके निकलते hi गेट बंद हो जाता है ...

वो लड़की सीढ़ियों से नीचे आने लगती है बिना कोई आहात किये ... तरुण ने पहले hi अपना स्लिपर अपने रूम में उतर दिया था तो वो भी धीरे धीरे धीरे नीचे आने लगता है ... जब वो लड़की सीढिया उतर कर अपने रूम में एंटर होने को होती है तो उसके साथ hi तरुण भी उसके रूम में एंटर हो जाता है और उसको अपनी तरफ घुमा कर उसके मुँह से वो कपडा हटा देता है ...

तरुण : क्यों जानेमन कहा से आ रही हो ...



तरुण को अपने सामने देख एक बार तो वो लड़की घबरा जाती है पर अगले hi पल तरुण को मरने के लिए थप्पड़ उठती है पर तरुण उसके थप्पड़ को हवा में hi रोक कर उसको रूम के अंदर करके उसके गेट को लॉक कर देता है और फैन चालू कर देता है ....
 
अपडेट 23

तरुण को अपने सामने देख एक बार तो वो लड़की घबरा जाती है पर अगले hi पल तरुण को मरने के लिए थप्पड़ उठती है पर तरुण उसके थप्पड़ को हवा में hi रोक कर उसको रूम के अंदर करके उसके गेट को लॉक कर देता है और फैन चालू कर देता है ....




आगे

तरुण : रानी डार्लिंग सिर्फ अपने भाई को hi अपना जूस पिलाओगी क्या ... हम भी तो आपके दीवाने हैं ... दुश्मन hi सही ...

रानी : ये क्या बेहूदा तरीका है अपने बड़ो से बात करने का ... और ये तुम क्या घटिया बात कर रहे हो ...

तरुण : तुम्हारा रूम तो ऊपर वाले फ्लोर पर है तुम यहाँ श्रेया दीदी के रूम में क्या कर रही हो ....

रानी : तुम्हे इससे क्या मतलब ये मेरा घर है मैं कही भी राहु इससे तुम्हे क्या और तुम इतनी रात को यहाँ क्या कर रहे हो ...

तरुण : बस तुम्हारे करतूत देख कर तुम्हारे पीछे आ गया ...

रानी : मतलब तुम कहना क्या चाहते हो ...

तरुण ने कोई जवाब तो नहीं दिया बस अपने मोबाइल में रिकॉर्डिंग चालू करके प्ले कर दिया ... रिकॉर्डिंग को देख रानी की तो पहात के चार हो गयी ...

रानी ने झपट कर तरुण से मोबाइल छीनने की कोसिस की पर तरुण पहले से hi अलर्ट था ...

रानी बहुत hi घबरा जाती है ...

तरुण : अभी टेंशन न लो जानेमन जब ये वीडियो मैं किसी पोर्न वेबसाइट पर डालूंगा तो खूब चलेगी और आप तो रातो रात फेमस हो जाओगी ... क्या मस्त एक्टिंग करि है अपने इस वीडियो में ... हर गली हर चौराहे पर लोग आपकी वीडियो देखा करेंगे उफ़ क्या बदन है आपका ... उपरवाले में लगी फुर्सत में आपको बनाया है ...

वो तरुण की कदमो में गिर जाती है ...

रानी (रट हुए) : देखो तरुण तुम मेरे छोटे भाई हो क्या तुम चाहते हो की तुम्हारे घर की अमानत यु बाज़ार में नीलम हो जाये ... तुम जो कहोगे मैं वो करुँगी बस ये वीडियो डिलीट कर दो ... कुछ महीनो बाद मेरी शादी होने वाली है अगर तुमने ये वीडियो नेट पर दाल दिया तो मेरे पास सुसाइड के सिवा और कोई चारा नहीं होगा ... प्लीज न मेरा राजा भाई मेरा सोना भाई अपनी दीदी की इज्जत बचा ले ...

तरुण : आप जब खुद hi अपने हाथो से अपनी इज्जत नीलम करवाना चाहती हो तो मैं क्या कर सकता हु ... मैं तो बस आपकी हेल्प hi कर रहा हु ... क्या खूब जमेगा रंग जब लोगो को पता चलेगा की दो सेज भाई बहन भी आपस में ये सब कर सकते हैं ...

रानी : मेरा छोटी भाई तुम जो चाहोगे मैं वो सब तुम्हे देने को तैयार हु बस प्लीज ये वीडियो डिलीट कर दो न ...

तरुण : दीदी मैं आप लोगो जैसा नहीं हु मेरी दुश्मनी में भी शराफत है ... आप लोग चाहो मुझसे जितनी भी नफरत कर लो मैं आप लोगो से छह कर भी नफरत नहीं कर सकता लो डिलीट कर लो अपना वीडियो मैं आपको यु तड़पते हुए नहीं देख सकता ...

रानी तरुण का मोबाइल ले कर जल्दी से वीडियो डिलीट कर देती है ... और जोर से उसके चेहरे पर थप्पड़ जड़ देती है ...

रानी : चल निकल बे यहाँ वर्ण चीख चीख कर तुझे इस घर से धक्के मरवा कर निकल दूंगी ... और तेरे निकलने के बाद तेरी तीनो बहनो को अपने भाई से इतना छुडवाउंगी की तू छह कर भी कुछ कर न सकेगा ... दो बहनो को तो तूने अपने तरफ मिला लिया है पर तेरे जाने के बाद वो आखिर मेरे भाई के नीचे लेटने को विवश हो hi जाएँगी ... हाहाहाहा ... चल निकल सेल इससे पहले की मेरा दिमाग घूम जाये ...

तरुण अपने मोबाइल में कुछ बटन्स क्लिक करता है तो वो वीडियो फिर से प्ले होने लगता है और रानी की गांड फिर से पहात जाती है ...

तरुण ने खींच कर रानी के दोनों गालो पर 3 - 4 थप्पड़ लगाए ... थप्पड़ लगते hi रानी की आँखों में आंशू आ जाते हैं ...

तरुण (हस्ते हुए) : डार्लिंग मुझे तो लगा शायद आप सुधर गयी हो पर मेरे सिक्स्थ सेंस ने मुझसे कहा था की ऐसा कुछ हो सकता है इसलिए hi मैंने वीडियो की एक कॉपी क्लाउड स्टोरेज में सेव कर की थी ... अब तो आपको आपके ये घड़ियाली आंशू भी नहीं बचा सकते ....

रानी तो अब झूठा रोने का नाटक भी नहीं कर सकती थी ... रानी अब अपना गर्दन झुकाये चुप चाप कड़ी थी ...

तरुण : घबराओ नहीं जानू मुझे भी वही चाहिए जो आप अपने भाई को मुफ्त में बाँट रही हो ...

तरुण की बात सुन रानी घबरा जाती है ...

रानी : मैं ये सब नहीं कर सकती मैं राहुल के साथ ये सब करती हु की क्यूंकि मैं उसको प्यार करती हु ... मैं तुम्हारे साथ ये सब किसी कीमत पर नहीं करने वाली ...

तरुण : अस यू विश ...

वो मोबाइल में कुछ करता है ....

तरुण : बस एक क्लिक और फिर आप दुनिया के सामने एक पोर्नस्टार बनने वाली हो ...

रानी ने तो सोचा था की तरुण कुछ ऐसा वैसा नहीं करेगा पर अभी तरुण के अंदाज़ से उसको दर लगने लगा ...

रानी : रुक जाओ रुक जाओ मैं तुम्हारे साथ सब कुछ करने को तैयार हु ...

तरुण : अब आया न ऊँट पहाड़ के नीचे ... चलो जल्दी जल्दी अपने कपडे उतरो ....

रानी ने धीरे धीरे करके अपने सरे कपडे उतर दिए और वो पूरी नंगी तरुण के सामने कड़ी थी ... उसके जिस्म पर कपडे का एक रेशा तक न था ... तरुण ने उसके चारो तरफ घूम कर उसके नंगे जिस्म का अचे से अवलोकन किया ...

वाकई में रानी इस घर की सबसे सुन्दर लड़कियों में से एक थी .... खूबसूरती के मामले में प्रियांशी के बाद वो घर की सबसे सुन्दर लड़की थी ....

तरुण उसकी चूचियों को जोर से दबा देता है जिससे रानी दर्द से सिसक उठती है ... चाँद लम्हो में hi रानी की गोरी चूचिया लाल हो जाती है मनो उनमे खून उतर आया हो ....

रानी : कमीने धीरे से कर न मैं मन कहा कर रही ... सब कुछ खोल कर तेरे सामने कड़ी हु ...

तरुण : चलो अब बीएड पर अपनी टांगें फैला कर बैठ जाओ ....

रानी : देखो मैं वर्जिन हु तो प्लीज मेरे साथ सेक्स मत करना ... मैं सबसे पहले ये सब राहुल के साथ करना चाहती ... चाहो तो मेरी गांड मार सकते हो पर छूट नहीं ...

तरुण : मैं तुम लोगो की तरह इतना भी गिरा हुआ नहीं हु ... मुझे आज सिर्फ वही मज़ा चाहिए जो आप राहुल को देती हो और हाँ प्यार से वर्ण ....

रानी : हाँ हाँ बाबा जानती हु .... मुझे तो नंगी कर दिया है तूने अब खुद कपडे क्यों पहना है ...

तरुण ने भी ज्यादा वक्त गंवाना सही नहीं समझा इसलिए जल्दी जल्दी अपने बहरी सरे कपडे उतर कर सिर्फ एक अंडरवियर में बीएड के किनारे खड़ा हो जाता है ... रानी तो पहले से hi तरुण के बॉडी कट्स और मसल्स की दीवानी थी .... तरुण को एक बंद रूम में प् कर उसके भीतर छुपी हुयी सेक्सी रानी उसके ऊपर हावी होने लगी ...

रानी (तरुण के अंडरवियर के तरफ इशारा करके) : अब इसको क्यों पहन रखे हो ...

तरुण : आप hi उतर दो न मेरी रानी जी ...

रानी तो जैसे इसी पल का इंतजार कर रही थी ... वो किसी जंगली बिल्ली की तरह पल भर में hi तरुण के अंडरवियर को उतर फेंकती है पर जैसे hi उसकी नजर तरुण के सेमि ेरेक्ट लुंड पर पड़ती है उसकी छूट ने बिना कोई इंतजार किये hi रिसना सुरु कर दिया ....

रानी : OMG ये क्या है ... क्या ये रियल है ...

तरुण उसके हाथ को अपने लुंड पर रख देता है .... रानी बड़े प्यार से तरुण के लुंड को अपनी उंगलियों से सहलाने लगती है ... अभी रानी अपनी मर्ज़ी से ये सब कर रही थी न की जबरदस्ती ....

तरुण : डार्लिंग जरा इसको अपने मुँह में लो न ....

रानी : हाँ क्यों नहीं ये मेरा सबसे पसंदीदा खिलौना जो है इससे आज जी भर के खेलूंगी ...

रानी बड़े प्यार से तरुण के लुंड को अपने मुँह में लेने लगती है ... वो तरुण के आधे लुंड को hi अचे से मुँह में ले प् रही थी उतने में hi वो उसको ब्लोजॉब देने लगती है .... तरुण के दिमाग में एक शैतानी आईडिया आता है और और वो अपना हाथ रानी के सर के पीछे रख कर जबरदस्ती अपना लुंड उसके मुँह में पेलने लगता है जैसा की उसने बहुत सरे डोमिनेटिंग पोर्न मूवीज में देखा था ....

तरुण के जोर जबरदस्ती से रानी का मुँह दर्द करने लगता है .... उसकी आँखों से आंशू आने लगते हैं .... जब तरुण को महसूस हुआ की कुछ ज्यादा hi हो गया है तो वो अपना हाथ उसके सर से हटा लेता है .... तरुण की पकड़ से छुटकारा मिलते hi रानी अपने मुँह से तरुण का लुंड निकल देती है ....

रानी : कमीने इंसान मेरी जान लेने का इरादा है क्या ...

तरुण : सॉरी डार्लिंग थोड़ा ज्यादा जोर लगा दिया ....

रानी : कोई नहीं जब मैं प्यार से कर hi रही हु तो जबरदस्ती की क्या जरुरत है ...

और फिर रानी खुद से hi तरुण को ब्लोजॉब देने लगती है ... रानी के गरम जीभ और होंठो के जादू से तरुण उसके मुँह में hi अपना पानी छोड़ने लगता है और रानी भी किसी भूखी बिल्ली की तरह तरुण की साडी मलाई चाट कर जाती है ...

रानी : तुम्हारा तो हो गया अब जरा मेरी भी खिदमत कर दो ...

तरुण : जरूर क्यों नहीं .... पर मेरे तरीके थोड़े अलग हैं ... चलो पहले किसी रंडी कुटिया की तरह झुक जाओ ...

रानी बिलकुल किसी आज्ञाकारी कुटिया की तरह झुक कर कड़ी हो जाती है .... तरुण उसके पीछे आता है और उसके गांड के एक पलड़े पर जोर से मरता है जिससे रानी दर्द के मरे उछाल पड़ती है .... फिर से उसको ुशी पोज़ में झुका कर वो उसके गांड के दूसरे साइड भी जोर से एक थप्पड़ जड़ देता है जिससे वो दर्द से तिलमिला जाती है ... ऐसा hi वो 2 - 4 बार बरी बरी से करता है .... रानी के गांड के दोनों पैट लाल हो जाते हैं ....

कुछ देर रिलैक्स करने के बाद तरुण रानी के दोनों हाथ पलंग के सिरहाने बांध देता है और दोनों पाओ भी एक दूसरे से अलग करके बांध देता है ...

अब तरुण ने उसके तलवो से लेकर उसके घुटनो तक चुम्मा सुरु किया ... अब वो अपने जीभ को निकल कर उसके जांघो को बरी बरी से चाटने लगा ...

रानी : हाँ मेरे राजा और जरा सा ऊपर मेरी जांघो के जोड़ पर जो प्यासा कुवा है वह का पानी भी थोड़ा चख लो न ...

पर तरुण के इरादे तो कुछ और hi थे .... वो रानी की छूट को छोड़ उसके नाभि को चूमने चाटने लग जाता है .... रानी के हाथ भी बंधे हुए थे इसलिए वो फिंगरिंग भी नहीं कर सकती थी ... वो तरुण से अपनी छूट को चाट लेने की मिन्नतें करने लगी .... पर तरुण तो आज उसको तड़पा कर अपना बदला लेने की फ़िराक में था ....

अब तरुण और ऊपर सरक कर उसके निप्पल्स के चारो तरफ जीभ से चाटने लगता है .... कभी कभी वो उसके निप्पल को मुँह में भर कर चूस भी लेता था ... दोनों चूचियों को बरी बरी से चूमने चाटने के बाद तरुण रानी के होंठो पर अपने होंठ रख देता है ... रानी तो जैसे तरुण को किश करने के लिए कब से मरी जा रही थी वो काफी वाइल्ड तरीके से तरुण के होंठो को चूसने लगती है .... करीब 5-6 मिनट की लम्बी किसिंग और स्मूचिंग के बाद तरुण रानी के मुँह खोलने को कह कर उसके मुँह में अपना थूक गिरा देता है जिसे रानी बड़े प्यार से अपने हलक में उड़ेल देती है ...

वो जोर जोर से अपने चूतड़ को बीएड पर पटक कर अपनी कामुकता को बयान कर रही थी .... उसके छूट से बूँद बूँद कर पानी रिस तो रहा था पर उसको अब तक चरमसुख की प्राप्ति नहीं हुयी थी ....

रानी की हालत देख अब तरुण को भी उसके ऊपर दया आने लगी थी ... वो अगर अभी उसकी सील तोड़ने की भी डिमांड करता तो वो शायद hi तरुण को मन कर पति क्यूंकि वो अभी सेक्स की आग में बुरी तरह जल रही थी ...

अब तरुण अपने लुंड को रानी के छूट के मुहाने पर रख देता है और लुंड से hi उसके छूट पर मरने लगता है ... तरुण के ऐसा करने से वो पूरी तरह से छुडवासी होने लगती है ...

रानी : हाँ मेरे राजा घुसा दो अपना मदमस्त लुंड मेरी छूट में ... बना दो मेरी छूट का भोसड़ा ...

तरुण : बोलो की तुम मेरी रंडी हो और मैं जब चाहे अपनी रंडी से मज़े ले सकता हु ....

रानी : हाँ राजा मैं तुम्हारी रंडी हु ... तुम जब चाहो तुम्हारी ये रंडी छूट और गांड खोल कर तुम्हारे सामने लेट जाएगी ...

अब तरुण रानी की ृस्टि हुयी छूट में अपनी मिडिल फिंगर को पेल देता है जिससे रानी सिसक उठती है ....

तरुण अब उसके छूट पर अपना मुँह रख देता है और उसकी चुकनी छूट के चीरे को चाट लेता है ... पाओ फैले होने के कारन उसके छूट का भीतरी लाल हिस्सा दिख रहा था जिसमे तरुण अपनी जीभ को घुसा कर चूसने चाटने लगता है ... तरुण के जीभ के जादू से रानी बड़े जोर से मोअन करती हुयी झड़ने लगती है ... तरुण का पूरा चेहरा रानी के छूट रास से गीला हो चूका था ... जिसे वो खुद रानी से hi चटवा कर साफ़ करवाता है ...

अब तरुण रानी को खोल देता है ...

खुलते hi रानी बड़े जोर से तरुण को अपने से चिपका लेती है ...

रानी : मेरा बाबू ... ी लव यू लव यू लव यू ... आज तुमने मुझे इतना मज़ा दिया है जितना शायद राहुल के साथ इतने दिनों इकट्ठे करके bhi.nahi आया ... तुम तो मास्टर हो ... मुझे बेहद अफ़सोस है की मैंने तुम्हारे साथ इतना बुरा बेहवे किया ...

तरुण : मैं आपको मज़ा नहीं सजा देने के इरादे से आया था पर शायद मेरा सजा भी आपको मज़ा दे गया ...

रानी : मुझे ऐसा डोमिनेटिंग वाला सेक्स बहुत पसंद है ... मुझे तो कोई ऐसा चाहिए जो मेरे जिस्म को तोड़ कर रख दे .... मुझे बड़सम टाइप पोर्न पसंद है आज तुमने मेरे ऊपर एक छोटा सा एक्सपेरिमेंट किया जिसकी वजह से मैं तुम्हारी गुलाम तक बनने को तैयार हु ...

तरुण : ये लो मैंने आपकी वीडियो हर जगह से डिलीट कर दी अब आप आज़ाद हो मेरी तरफ से ...

रानी : नहीं नहीं मुझे तुम्हारी गुलाम बन क्र hi रहना मंजूर है पर मुझसे यु दूर न हो ...

तरुण : नहीं नहीं मुझे नहीं चाहिए कुछ भी ... क्या मेरी बहने भी तुम्हारे और राहुल के साथ ....

रानी : अभी तो नहीं ... राहुल तो तुम्हारी बड़ी बहन ऋचा और प्रियांशी का दीवाना है ..,. तुम्हारी माँ के बारे में उसके ख्याल नेक नहीं है .... मुझे भी उसने ब्लैकमेल करके ये सब करने के लिए उसकसाया है ....

तरुण : वैसे तो मैंने भी तुम्हे ब्लैकमेल hi किया है और दर्द भी दिया है तो मुझे सपोर्ट क्यों कर रही हो ...

रानी : देखो मैं कोई तुमसे कोई पर्सनल दुश्मनी नहीं है ... मैंने तो बस बचपन से hi अपने बड़ो को खास कर अपनी माँ और तुम्हारी माँ से तुम्हारे लिए अप्सब्द hi सुने हैं और दूसरी बात ये है की मैं अपने भाई के लिए काफी पोस्सेस्सिवे हु तो मेरे मन में तुम्हारे लिए नफरत के भाव आ गए ....

तरुण : तुम कितनी भी सफाई दे दो मैं तुम्हे माफ़ नहीं करने वाला ....

रानी : करना भी नहीं चाहिए ... तुम्हारे साथ इस घर में इतना कुछ बुरा हुआ है की तुम्हे किसी के ऊपर इतनी जल्दी बिस्वास होना भी नहीं चाहिए .... कल से तुम एक नयी रानी को देखोगे ....

तरुण : ऐसा क्या ...

रानी : है सच में आज तुमने मुझे बदल दिया है ... अब अपने कपडे पहन कर अपने रूम चले जाओ सुबह होने hi वाली है ...



तरुण भी वक्त की नजाकत को समझ जल्दी जल्दी अपने कपडे पहन कर अपने रूम भाग जाता है और रानी अपने नंगे जिस्म पर एक निघती दाल कर गेट को लॉक करके सो जाती है ....
 
अपडेट 24

तरुण भी वक्त की नजाकत को समझ जल्दी जल्दी अपने कपडे पहन कर अपने रूम भाग जाता है और रानी अपने नंगे जिस्म पर एक निघती दाल कर गेट को लॉक करके सो जाती है ....




आगे

अब राखी का दिन आ पहुंचा था ... इस दिन का इंतजार सभी भाई बहनो को बड़ी बेसब्री से रहता है और ये रक्षा बंधन तो रुचिका और प्रियांशी के लिए और भी खास था क्यूंकि आज पहली बार वो अपने सेज भाई तरुण को राखी बांधने वाली थी ... तरुण को आज तक राखी सिर्फ Shreya,ruby और दिया ने hi बंधा था ....

तरुण आज जैसे hi उठा तो उसको सामने उसकी दोनों सगी बड़ी बहनो का खिला हुआ चेहरा नजर आया .... प्रियांशी और रुचिका नाहा धो कर तैयार हो कर उसके रूम आयी थी ....

तरुण : गुड मॉर्निंग दीदी .... आज आप लोग इतने सज धज कर मेरे रूम में ... कही आज आपका बर्थडे तो नहीं है न ...

रुचिका : गुड मॉर्निंग भाई .... जी नहीं आज हमारा बर्थडे नहीं है बल्कि उससे भी खास दिन है ...

तरुण : अब उससे भी खास दिन ... आप लोग hi बताओ आज क्या है ....

प्रियांशी : अरे यार तुम भी न आज रक्षा बंधन है और आज हम तुम्हे राखी बांधने hi आयी है ...

तरुण की आंखें अतीत के कुछ किस्सों को याद कर थोड़ी नाम हो जाती हैं ... रुचिका तरुण के दिल का हाल समझ जाती है और@ उसको गले लगा कर उसकी भीगी पलकों को चुम लेती है ...

रुचिका : अब बस भी कर पगले तुझे जितना दुःख सहना था वो तूने सह लिए ... अब तेरी दोनों बड़ी बहने तेरी ढल बन चुकी हैं ... अब कोई मेरे भाई का बुरा सोच कर तो देख ले ....

प्रियांशी : रूचि सही कह रही है भाई अब हम बहने हर मोड़ पर तेरे साथ कड़ी रहेंगी ....

तरुण : दीदी ये फेस्टिवल भाई के द्वारा अपनी बहनो की रक्षा करने के लिए बना था .... मुझे बस आपके साथ और प्यार की जरुरत है ... मैं भी जल्दी से रेडी हो कर आता हु ... न जाने कब से मैं इस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहा था ....

उसके बाद तरुण अपने वाशरूम जाकर शावर लेता है और जब वो वाशरूम से बहार निकलता है तो रुचिका उसको एक ड्रेस देती है जो दोनों ने उसके लिए खरीदी थी ...

उसके बाद तरुण रेडी हो कर दोनों से राखी बंधवाता है ....

तरुण : दीदी भाई तो रक्षा बंधन पर अपनी बहनो को कोई न कोई कीमती चीज देते हैं पर मेरे पास आपको देने के लिए कुछ भी नहीं है ...

प्रियांशी : हमें तू वापस मिल गया है इससे बड़ा गिफ्ट हमारे लिए और क्या हो सकता है ... हमें और कुछ नहीं चाहिए ... क्या तुम मुझे एक टाइट हुग दे सकते हो मेरे लिए वही इस राखी का सबसे बड़ा तोहफा होगा ....

तरुण खड़ा होकर प्यार से अपनी बाँहें फैला देता है और प्रियांशी भी तुरंत उसकी बांहो में समां जाती है ... तरुण अपनी इस बहन को खुद से चिपका लेता है .... अपने भाई की बांहो में प्रियांशी को एक अजीब सा सुकून मिलता है जो शायद hi उसको पहले कभी महसूस हुआ हो ....

एहि नहीं तरुण अपनी सबसे खूबसूरत बहन के माथे को भी प्यार से चुम लेता है जिसके जवाब में प्रियांशी की हालत उस बच्ची के जैसी हो जाती है जिसे बिना मांगे hi उसकी फेवरेट फ्लेवर की चॉकलेट या आइस क्रीम मिल गयी हो ....

तरुण (रुचिका) : दीदी आपको क्या चाहिए गिफ्ट में ....

रुचिका : मैं तो चाहती हु की तेरा प्यार हमेसा यु hi हम बहनो को मिलता रहे .... प्रियांशी में सही कहा है की तुम हमें मिल गए हो इससे बड़ा तोहफा हमारे लिए और कुछ भी नहीं है ...

तरुण रुचिका को भी एक टाइट हुग देता है और उसके माथे को चुम लेता है जैसे ेओ उसको आश्वासन देना चाहता हो की जीवन के हर मोड़ पर वो उसकी हिफाजत के लिए साथ खड़ा होगा ...

तरुण : दीदी अपनी आँखें बंद करो न ...

दोनों बहने अपनी आँखें बंद कर लेती है तरुण बरी बरी से अपनी बहनो की बंद पलकों को चूमता है और 2 मिनट बाद उन्हें आँखें खोलने को कहता है ....

प्रियांशी और रुचिका (एक साथ) : ये क्या है और किसके लिए ...

तरुण : ये मेरी प्यारी बहनो के लिए मेरे तरफ से राखी का एक छोटा सा गिफ्ट है ...

प्रियांशी : ये तो बहुत कॉस्टली होगा ये तूने कैसे लिया ... हमें नहीं चाहिए कुछ भी ... हमारे लिए तेरी ख़ुशी से बढ़ कर कुछ भी नहीं है ...

तरुण : दीदी गिफ्ट को न नहीं कहते .... दरअसल मैंने कॉलेज के दिनों में एक प्रोजेक्ट किया था जो की कुछ दिनों पहले एक कंपनी ने ख़रीदा है और उससे मिले पैसे से hi मैंने अपनी प्यारी बहनो के लिए ये ख़रीदा है ...

रुचिका : ये तो बहुत अछि बात है ... हम ये तेरा प्यार समझ कर ले लेती हैं और साथ में मैं ये दुआ करती हु की तुझे जिंदगी में ऊँचा से ऊँचा मुकाम हासिल हो ....

तरुण : सुक्रिया दीदी .... प्रियांशी दीदी आप भी अपना गिफ्ट ले लो ...

प्रियांशी : वो तो लुंगी hi .... काश तुझे जिंदगी में साडी खुसिया नसीब हो ...

उसके बाद दोनों बहने तरुण के रूम से ख़ुशी ख़ुशी चली जाती हैं ... थोड़े देर बाद रूबी अपनी माँ के साथ तरुण के घर आती है .... जहा तरुण की बुआ अपने तीनो भाइयो को राखी बांधती है तो रूबी अपने तीनो भाइयो को ...

ऋचा ने तरुण के अलावा अपने दोनों भाइयो को राखी बंधी थी वही रानी ने तरुण को भी राखी बंधी थी ....

श्रेया आज नहीं आयी थी उसने कूरियर से राखी भिजवा दी थी ....

तरुण के मां भी राखी बंधवाने को आये हुए थे ...

थोड़ा तरुण के नानी घर का एक ब्रीफ इंट्रोडक्शन दे देता हु ..,

उसके नाना और नानी अब इस दुनिया में नहीं हैं तो उनका इंट्रोडक्शन का कोई मतलब नहीं बनता ....

तरुण के नाना के तीन संतान थे ....

1. जय सिंह : आगे 46 इयर्स .. ये तरुण की माँ के बड़े भाई हैं जो की पेशे से वकील हैं ....

माधुरी सिंह : आगे 44 इयर्स ... तरुण की ममी

इनकी सिर्फ एक बेटी है

लावण्या सिंह : आगे 24 इयर्स

2. स्वेता सिंह : आगे 44 इयर्स ... तरुण की माँ की बड़ी बहन ... ये एक पुलिस अफसर है ...

रणधीर सिंह : स्वेता के पति .. कुछ साल पहले hi इनका देहांत हो गया है ...

इन्हे सिर्फ एक बीटा है

समर सिंह : आगे 21 इयर्स ... स्वेता की आँख का तारा ... वो अब इसके लिए hi जी रही है ....

3. सुमित्रा सिंह : तरुण की माँ

सुमित्रा के भैया 4 साल बाद अपनी बहन के यहाँ उससे राखी बंधवाने आये हुए थे इसलिए सुमित्रा ने उनकी खूब आवभगत की ....

जय ने अपनी बहन के चेहरे में छुपी हुयी उदासी को पहचान लिया था ...

जय : सुमि तुम कुछ परेशान नज़र आ रही हो .... कोई प्रॉब्लम हो तो मुझसे शेयर कर सकती हो .... तुम्हारा भाई होने के साथ साथ मैं एक लॉयर भी हु तो मैं तुम्हे कुछ ाचा सुग्गेस्ट तो कर hi सकता हु ...

सुमित्रा : नहीं भैया मैं तो खुस हु ...

जय : बचपन से तेरे साथ रहा हु तुझे अपने हाथो से खेलाया है तो मुझसे तुम कुछ नहीं छुपा सकती ... बताओ प्रॉब्लम क्या है ....

सुमित्रा ने रो - रो कर अपनी साडी कहानी बयां कर दी .... उसकी पूरी बात सुनने के बाद जय ने 2 मिनट का मौन धारण किया फिर बोलना सुरु किया ...

जय : देख सुमि मैंने तुम्हे पहले भी मन किया था की खुद की औलाद के साथ ऐसा बर्ताव करना सही नहीं है ... आ गयी न मेरी बात सामने .... अब पछतावे के सिवा तुम्हारे पास और कोई रास्ता नहीं है .... रिश्ते बनाने में बहुत वक्त लगता है पर रिश्ते तोड़ने में पल भर का वक्त भी नहीं लगता .... पर तुम्हारे केस में तो उल्टा hi है ..... तुमने अपने बेटे पर इतने सितम किये हैं की रिश्ते की डोर तो पता नहीं कब के टूट चुके होंगे ...

सुमित्रा : भैया मुझे सब पता है पर क्या कोई तरीका नहीं है जिससे मैं उसको मन सकू .... मैं उसको अपने सीने से लगाना चाहती हु .... काश मैं वक्त रहते संभल जाती तो मुझे ये दिन देखना नहीं पड़ता .... मैंने उसको इतने दुःख दिए हैं की पता नहीं उसकी कोई माफ़ी भी है या नहीं ...

जय : मैं तो कहूंगा की उसको अपने प्यार और ममता का एहसास दिलाओ ... उसके ऊपर इतना प्यार लुटा दो की उसके मन में तुम्हारे लिए जो बुरी छवि बानी है वो अछि हो जाये ....

सुमित्रा : हाँ भैया मैं अब और अपने बेटे से दूर नहीं रह सकती .... उसको अपना बनाने के लिए अब मैं हर हद्द से गुजर जाउंगी ....

जय : लावण्या तुम्हे और अपनी बहनो को बहुत मिस करती है .... तरुण से तो वो बचपन में hi मिली है ....

सुमित्रा : स्वेता दीदी की क्या खबर है ....

जय : वो ठीक है .... लास्ट मंथ मिली थी ... वो भी तुम्हे बड़ा मिस कर रही थी .... तुम ऐसा क्यों नहीं करती मेरे साथ चलो सबसे मुलाकात भी हो जाएगी ....

सुमित्रा : अभी तो नहीं चल सकती भैया पर जल्द hi आउंगी आप लोगो से मिलने ....

उसके बाद दोनों भाई बहनो में कुछ कासुअल बातें होती हैं और फिर वो सबसे विदा लेकर अपने घर को लौट जाता है ...

इवनिंग को तरुण की माँ ऋचा के रूम में आती है ... उस वक्त वो अपने रूम में लेती हुयी अपने लैपटॉप पर कोई मूवी देख रही थी ....

सुमित्रा : बीटा तुमने अपने भाई को राखी नहीं बंधी क्या ...

ऋचा : हाँ माँ मैंने राहुल और राघव भैया को तो मॉर्निंग में hi राखी बांध दी थी ....

सुमित्रा : मैं तरुण की बात कर रही हु ....

ऋचा: क्या माँ आप भी क्या बोल रही हु ... मैं प्रियांशी या रुचिका की तरह कोई पागल थोड़े hi हु जो उस मनहूस को राखी बांध कर अपनी जिंदगी में मनहूसियत लॉन ....

सुमित्रा : वो तुम्हारा सागा भाई है उसके बारे में तो ऐसा न बोलो ....

ऋचा : जब एक माँ हो कर आप उसके साथ ऐसा बेहवे कर सकती हो तो मैं क्यों उसके बारे में ऐसा बोल भी नहीं सकती ....

सुमित्रा : देख बीटा जरुरी नहीं है की माँ ने जो गलती करि हो बेटी भी वही करे .... तेरा भाई बिलकुल मासूम और निर्दोष है जो कुछ भी पास्ट में हुआ है वो एक सोची समझी साजिस थी जिसका वो शिकार हुआ है ...

ऋचा : मैं उसको अपना भाई नहीं मानती तो भला उसको राखी क्यों बंधू ... रुचिका और प्रियांशी को तो उसने मुझसे छीन hi लिया है ... न जाने उसने उनके ऊपर कौन सा जादू चलाया है की वो बस उसकी hi माला जप्ती रहती हैं ....

सुमित्रा : उसने उनके ऊपर कोई जादू नहीं चलाया है बेटी ... वो उसके सच्चे दिल को पहचान गयी है .... मैं तो अपने किये की सजा भुगत रही हु मैं नहीं चाहती की बाद में तुझे अफ़सोस हो ...

ऋचा : मेरे दिल में उसके लिए भाई वाली कोई फीलिंग hi नहीं है माँ ... बस अब और इस टॉपिक पर कोई बहस मत करना ...

सुमित्रा : जैसी तेरी मर्जी बीटा ....

रात में करीब एक बजे के अराउंड तरुण के मोबाइल पर रिंग होता है ... फ़ोन किसी अननोन नंबर से था .... तरुण ने फ़ोन पिक किया ....

.... : Hello ...

तरुण : hello आप कौन ...

..,... : Hello मैं रानी बोल रही हु .., क्या तुम ग्राउंड फ्लोर पर आ सकते हो ...

तरुण : ग्राउंड फ्लोर .... इतनी रात को वो क्यों भला ....

रानी : कोई सवाल नहीं बस आ जाओ ....

तरुण : ठीक है आता हु ...

तरुण बिना कोई आहात किये ग्राउंड फ्लोर पर आता है जहा बस चाँद की रौशनी के अलावा और कोई लाइट न था ... वो अभी सीढ़ियों से उतरा hi था की किसी ने उसका हाथ पकड़ लिया और अपने मुँह को उसके कान के पास लाया .... ये और कोई नहीं रानी थी ...

रानी (धीरे से तरुण के कान में) : कोई आवाज़ न करना मैं तुम्हे कुछ दिखाना चाहती हु .... मेरे साथ चलो बिना कोई आहात किये .....

तरुण रानी के साथ साथ चलने लगता है .... रानी तरुण को वही ले जाती है जहा से तरुण ने एक बार अपने दादा को खुद की बहु को छोड़ते हुए देखा था ... वही से रानी ने तरुण को अंदर झाँकने को कहा ....

तरुण ने देखा की अंदर उसके दादा जी नंग धडंग एक नंगी औरत की गांड में सत्ता सात लुंड पेले जा रहे थे ... थोड़े देर ये सेक्स का नंगा नाच होने के बाद जब वो औरत घूमती है तो उसका चेहरा देख तरुण को शॉक लगता है क्यूंकि लास्ट टाइम जब उसने देखा था तो उसके दादा अपनी मंझली बहु को मज़े से छोड़ रहे थे पर आज जिसकी चुदाई हो रही थी वो उसकी बड़ी चची थी ....

तरुण कुछ बोलने को हुआ पर रानी ने इशारे से उसको मन कर दिया और उसको साथ लेकर श्रेया के रूम आ जाती है ....

तरुण : यार ये सब इस घर में क्या चल रहा है .... दादा जी को शर्म नहीं आती क्या अपनी खुद की बहु के साथ ये सब गन्दा काम करने में ....

रानी : ये सब तो मैं बहुत लम्बे समय से देखती आ रही हु ... इसके वजह से hi मेरे अंदर ये इन्सेस्ट वाली फीलिंग जगी है ....

तरुण : क्या मेरी माँ भी .... मुझे तो बोलने में भी शर्म आती है ....

रानी : नहीं छोटी चची को तो मैंने ये सब करते नहीं देखा है पर मेरी माँ और बड़ी चची को पता नहीं अपने बुडगे ससुर से क्या मज़ा मिलता है .... जब भी कोई फेस्टिव एनवायरनमेंट होता है तो दोनों में से कोई जरूर उनका बिस्तर गरम करने पहुंचा जाती हैं .., एक बार तो मैंने बुआ को भी छोटे चाचा के साथ राखी वाले दिन ये सब करते देखा है ..,

तरुण : क्या आपके पापा या बड़े चाचा को ये सब पता नहीं है ...

रानी : वो तो मुझे नहीं मालूम भाई ... क्या कहते हो हम भी अपना प्रोग्राम सुरु करे ....

तरुण : मैं अभी आपके साथ रियल सेक्स करने के लिए मेंटली प्रेपरेड़ नहीं हु ....

रानी : अस यू विश .... रियल सेक्स न सही पर एक ओरल तो मेरे साथ कर hi सकते हो .... मैं नहीं चाहती हु की मेरा ये राखी सूखा सूखा निकल जाये....



उसके बाद क्या था तरुण की सहमति मिलते hi दोनों एक दूसरे को नोचने खसोटने में जुट गए और ये खेल तब रुका जब तक दोनों का पानी नहीं निकल जाता ....
 
अपडेट 25

उसके बाद क्या था तरुण की सहमति मिलते hi दोनों एक दूसरे को नोचने खसोटने में जुट गए और ये खेल तब रुका जब तक दोनों का पानी नहीं निकल जाता ....

आगे




उधर दिया अपने ससुराल में थी जहा डेली रात को उसका पति उसका बलात्कार करता था .... इतनी खूबसूरत बीवी मिलने की ख़ुशी उसको हज़म नहीं हो रही थी जिस लिए वो रोज़ रात को दिया के साथ जोर जबरदस्ती किया करता था .... पर दिन होते hi वो एक लोविंग एंड केयरिंग हस्बैंड बन जाता था .... दिया भी इसको hi अपनी नियति मान कर अपना दिन काट रही थी ... आज भी ट्रैन वाले इंसिडेंट को याद कर उसका रोम रोम खिल उठता था ....

श्रेया भी अपने ससुराल में फिर से फिट हो गयी थी जहा उसकी जिंदगी saas,pati और ननद के बीच बड़े मस्त तरीके से चल रही थी .... वो छह कर भी रक्षा बंधन में अपने मायके नहीं आ पायी थी ...

तरुण को उसे की एक कंपनी से एक बड़े प्रोजेक्ट पर काम करने का ऑफर आया हुआ था .... वैसे तो तरुण ये ऑफर ठुकराना चाहता था पर अपनी दोनों बहनो की वजह से वो ये ऑफर एक्सेप्ट कर लेता है .... तरुण को इस प्रोजेक्ट के लिए 6 मंथ उसे में रहना था ....

तरुण की साडी पैकिंग उसकी दोनों बहनो ने hi करि थी और तरुण नाम आँखों के साथ सबसे विदा लेकर उसे के लिए रवाना हो जाता है ....

इधर गाँव में तरुण के बड़े पापा के मुखिया पद पर बने होने का कार्यकाल ख़त्म होने को आ गया था तो अब नए इलेक्शन की धूम उस एरिया में सभी के सर चढ़ कर बोल रहा था .... तरुण के बड़े चाचा के सबसे बड़े प्रतिद्वंदी ने अबकी बार अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी .... उनका प्रतिद्वंदी दूसरे गाँव का था और वो पिछले दो बार से मुखिया पद पर कार्यरत था जिसे तरुण के बड़े चाचा ने लास्ट इलेक्शन में बड़े मार्जिन से हराया था जिसके बाद से वो तरुण के बड़े चाचा पर खर खाये बैठा था और अपनी कुर्शी वापस पाना चाहता था ....

Let's इंट्रोडस सम नई करैक्टर ...

शेर सिंह : आगे 48 इयर्स ... तरुण के बड़े चाचा का सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी ... ये काफी पावरफुल इंसान है ...

कलुआ : आगे 38 इयर्स ... शेर सिंह का बॉडीगार्ड ... लम्बे कद काठी का है और सरीर तो जैसे लोहे का बना हो ... ये किसी जल्लाद से काम नहीं है ...

मीरा सिंह : आगे 42 इयर्स .. शेर सिंह की वाइफ

सुहानी सिंह : आगे 20 इयर्स ... शेर सिंह और मीरा की एकलौती औलाद ... इसको शेर सिंह ने बड़े नाज़ो से पला है ... ये किसी राजकुमारी से काम नहीं लगती ....

तरुण के बड़े चाचा का बीटा ये पॉलिटिक्स वगैरह से दूर hi रहना चाहता था पर अपने पापा के फाॅर्स करने पर वो इलेक्शन के प्रचार प्रसार के काम में जुट गया ....

इसी सिलसिले में राघव ुशी गाँव जा पहुंचा जहा तरुण के चाचा का प्रतिद्वंदी रहता था .... जैसे hi राघव की गाडी उस गाँव में एंटर करती है शेर सिंह के आदमी उनसे बिना किसी मतलब के उलझ पड़ते हैं और फिर क्या था दोनों साइड से लोग आपस में भीड़ जाते हैं ... शेर सिंह के आदमियों ने राघव और पल्टन की तबियत से पिटाई करि .... इस भिड़ंत में राघव का सर पहात गया था और उसको सरीर पर जगह जगह काफी छोटे भी आयी थी ....

जैसे hi ये खबर राघव के पापा को पता चली उन्होंने सबसे पहले तो सभी जख्मी लोगो को हॉस्पिटल भिजवाया .... राघव की हालत काफी क्रिटिकल थी जिसे देख उसकी माँ का रो रो कर बुरा हाल हो गया .... उन्होंने पुरे हॉस्पिटल को सर पर उठा लिया .... किसी तरह समझा बुझा कर उन्हें घर भिजवाया गया ... घर का माहौल काफी गमगीन था .... तरुण के मंझले चाचा और फूफा हॉस्पिटल में hi रुक गए .... तरुण के बड़े चाचा ने अपने कुछ आदमी हॉस्पिटल में hi तैनात कर दिए थे ....

बी. चची : मैं पहले hi कहती थी की ये पॉलिटिक्स हमारे बस का नहीं है .... मेरे बेटे ने भी मन किया पर नहीं आपको तो बस अपने से hi मतलब है ... कोई मरे या जिए आपको क्या ...

बी. चाचा : वो मेरा भी खून है तो भला मुझे कोई फर्क कैसे नहीं पड़ेगा ... मेरा बस चले तो हर एक गोली से उड़ा दू पर इलेक्शन का माहौल है मैं छह कर भी कुछ नहीं कर सकता ...

बी. चची : तो ऐसे hi चुडिया पहन कर बैठे रहो और मेरे बेटे की ऐसी हालत देख कर अफ़सोस जताते रहो ...

बी. चाचा : अरे तो मैं क्या करू ... लड़ाई में हम उनसे जीत भी तो नहीं सकते ....

दादा : पर ऐसे हाथ पर हाथ धरे बैठना भी तो सही नहीं है आज उन्होंने हमारे पोते और आदमियों को मारा है अगर हमने कुछ नहीं किया तो कल को उनका मनोबल और बढ़ जायेगा .... और इससे हमारी इज्जत भी तो घाट जाएगी ...

म. चची : तो क्यों नहीं आप अपने होनहार पोते तरुण को बुलवा कर उसके साथ अपने कुछ आदमियों को भेज उनकी तबियत से कुटाई करवा दो ....

तरुण की मंझली चची ये जानती थी की शेर सिंह और उसके आदमियों का सामना करना इतना आसान नहीं है इसलिए वो तरुण को लड़ाई के लिए भिजवाना चाहती थी ...

उधर शेर सिंह के घर पर ख़ुशी का माहौल था क्यूंकि उसके आदमियों ने राघव की पिटाई कर के ये सबूत दे दिया था की इस एरिया के बाहुबली वो हैं ....

राघव को अभी तक होश नहीं आया था इसलिए उसकी कंडीशन अब तक डॉक्टर्स के लिए एक मिस्ट्री बानी हुयी थी .... श्रुति हर 5 - 10 मिनट पर राहुल को कॉल कर के राघव का अपडेट ले रही थी ....

अगले दिन सुबह को राघव को होश तो आ जाता है पर उसके पेअर रेस्पोंद नहीं कर रहे थे .... श्रुति और बाकि घर की महिलाओं का तो रो रो कर बुरा हाल हो गया था वही तरुण के बड़े चाचा अपने बेटे की ऐसी हालत देख अपना आप खो बैठते हैं घर वालो को बताये बिना अपने कुछ हथियार बंद लोगो के साथ पहुँच जाते हैं शेर सिंह की हवेली पर .... दोनों तरफ से गोली बरी सुरु हो जाती है पर इस भिड़ंत का सबसे ज्यादा नुकसान तरुण के बड़े चाचा को hi उठाना पड़ा शेर सिंह के आदमियों ने उनके सरे आदमियों को मार गिराया था और अब वो अकेले hi सभी का सामना कर रहे थे .... उनकी बन्दुक में अब गोली भी ख़त्म हो गयी थी ....

ठीक तभी शेर सिंह का बॉडीगार्ड कलुआ उन्हें पीछे से जकड लेता है ... वो अब तस से मास भी नहीं हो प् रहे थे .... अब कलुआ तरुण के बड़े चाचा को जमीन पर पटक देता है और लात घूंसो से उनकी पिटाई करने लगता है ....

शेर सिंह : और बताओ मुखिया .... कैसी लगी हमारी खातिरदारी ... अब भी वक्त है मेरे पाओ में नाक रगड़ कर अपनी जिंदगी की भीक मांग ले .... सुना है तेरा बीटा अब अपाहिज बन गया है .... हमसे टकराने का अंजाम देख लिया न ...

बी. चाचा : मैं तुमसे नहीं डरता शेर सिंह .... पिछली बार भी तुम हरे थे और इस बार भी हारोगे .... तुम बस नाम के शेर हो ...

शेर सिंह : बस बस बहुत हो गया ... कलुआ इस हरामी के हाथ पेअर तोड़ कर फेंक दो .... अब इस इलाके में शेर सिंह का राज़ चलेगा ....

कलुआ ने तरुण के बड़े चाचा के दोनों हाथ और दोनों पेअर घुटनो से तोड़ डेल .... दर्द से चीखते चिल्लाते हुए वो बेहोश हो जाते हैं .... उसके बाद कलुआ उन्हें तरुण के गाँव के रोड पर फ़ेंक कर वापस लौट जाता है ....

अभी तरुण के घर वाले राघव के सदमे से उबरे भी नहीं थे की उन्हें तरुण के बड़े चाचा की ऐसी हालत का पता चला .... तरुण की बड़ी माँ तो ये खबर सुन रट रट बेहोश हो गयी ....

तरुण के बड़े चाचा को भी हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया गया ... उन्हें होश तो आ गया पर वो अब एक जिन्दा लाश बन चुके थे ....

पुलिस ने भी एक्शन लिया कलुआ और शेर सिंह के कुछ लोगो को जेल भिजवा दिया गया ..... तरुण के दादा ने तरुण को ये सब बताने से मन किया था इसलिए किसी ने उसको इस बारे में कोई खबर नहीं दी थी ....

इस घटना को 5 एंड हाफ मंथ बीत चुके थे अब उस एरिया में काफी कुछ बदल चूका था ... अब वह का मुखिया शेर सिंह बन चूका था .... तरुण के बड़े चाचा तो बस बीएड पर लेते हुए रहते थे और बस रूम में इधर उधर टकटकी लगाए देखते रहते थे ....

राघव के हाल में भी कोई खास सुधर न था उसके कमर के नीचे के हिस्से ने काम करना बंद कर दिया था ....

आज तरुण के उसे टूर का लास्ट डे था और वो कल को वापस अपने घर को लौटने वाला था ....

उसका प्रोजेक्ट वर्क कम्पलीट हो चूका था और उसके प्रोजेक्ट को काफी तारीफें भी मिली .... कंपनी उसके काम से बहुत खुस थी इसलिए उसने उसको कंपनी में परमानेंट जॉब ऑफर कर दी थी .... वो एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था इसलिए उसको घर पर रह कर hi ऑनलाइन जॉब करना था ....

उसने अपनी दोनों बड़ी जुड़वाँ bahno,Shreya,Shruti,ruby और दिया के लिए कुछ कॉस्टली गिफ्ट्स ख़रीदे थे ....

रात में तरुण सोया तो जरूर था पर उसके मन में एक अलग सी एक्ससिटेमेंट थी ....



नियत टाइम पर फ्लाइट पकड़ कर वो अपने घर के लिए रवाना हो जाता है इस बात से अनजान की घर में एक बहुत बड़ा सरप्राइज उसका इंतजार कर रहा था ....
 
अपडेट 26

नियत टाइम पर फ्लाइट पकड़ कर वो अपने घर के लिए रवाना हो जाता है इस बात से अनजान की घर में एक बहुत बड़ा सरप्राइज उसका इंतजार कर रहा था ....




आगे

मॉर्निंग को hi तरुण की फ्लाइट इंडिया में लैंड करती है .... एयरपोर्ट पर उतर कर एक तस्य से तरुण अपने गाँव के लिए रवाना होता है .... जैसे hi उसकी तस्य उसके गाँव की बॉर्डर के अंदर एंटर करती है उसके मन में एक अजीब से उत्साह का संचार होता है .... घर पहुँच कर वो सबसे पहले अपने लगेस उतरता है और पेमेंट करके अपने घर का दूर बेल्ल बजता है ...

गेट उसकी बड़ी चची ने खोला ... तरुण ने झुक कर उनके पाओ छुए जिसके रिस्पांस में उन्होंने बस उसके माथे को छुवा ... तरुण ने उनके चेहरे पर एक अजीब सा सूनापन महसूस किया ... खैर उसने अपने लगेज को अंदर किया और साथ लेकर अंदर हॉल में पहुंचा .... पहले जहा इस घर में हमेसा कोई न हलचल या हसी ठिठोली हुआ करती थी वही आज फ़िज़ाओं में एक अजीब सा सूनापन था ...

तरुण : चची जी ... कोई नहीं दिख रहा ... सब कहा हैं ...

बी. चची : बीटा जब से तुम इस घर से गए हो यहाँ एक अजीब सी मनहूसियत फैल गयी और हमारा सब कुछ तबाह हो गया ...

तरुण : मतलब मैं कुछ समझा नहीं चची जी ....

बी. चची ने तरुण को सब कुछ डिटेल में बताया की उसके जाने के बाद यहाँ क्या क्या हुआ ... जैसे जैसे तरुण कहानी सुनता जा रहा था उसके मन में शेर सिंह के लिए गुस्सा बढ़ता जा रहा था .... वो इस नाम को पहली बार सुन रहा था ....

तरुण (गुस्से में) : यहाँ इतना कुछ हो गया और आप लोगो ने मुझे कुछ बताया भी नहीं ... क्यों बड़ी चची क्यों क्यालोग मुझे इतना गैर समझते हो .... क्या मैं इस घर का एक मेंबर नहीं हु ...

बी. चची ने तरुण को अपने गले से लगा लिया ...

बी. चची : नहीं मेरे लाल ऐसा कुछ नहीं ... मेरे मन में तुम्हारे लिए कोई बैर नहीं ... वो तो तेरे दादा जी ने तुम्हे बताने से मन किया था ताकि तुम्हे वह कोई डिस्टर्बेंस न हो ...

तरुण : ok चची जी ... चाचा जी कहा हैं ...

उसके बाद बी. चची पहले उसको पहले उसके दादा जी के रूम लिए जाती है जो की अपने रूम में सोये हुए थे ... बी. चची ने आवाज़ देकर उन्हें जगाया ....

तरुण को सामने देख उनकी आँखों में एक चमक सी आ जाती है ... जब से तरुण कॉलेज से आया था वो उसमे hi अपनी झलक देखते थे ....

थोड़े देर बाद तरुण अपने बी. चाचा के रूम जा पहुँचता है ... चाचा अभी बीएड पर लेते हुए थे .... तरुण को देख उनकी आँखों से आंशू बह निकले ... उनके हाथ पाओ तो टूट चुके थे ... उनके जिस्म का अगर कोई हिस्सा सही से काम करता था तो वो था बस उनका सर ....

बी. चाचा से मिलने के बाद वो राघव के रूम जा पहुँचता है जहा श्रुति दिखती है जो की काफी साद थी .... तरुण राघव को गले से लगा लेता है और जोर जोर से रोने लगता है ....

तरुण सबसे मिलता है सिवाए अपनी MAA,Richa, म. चची और राहुल के .... रुचिका और प्रियांशी उसके साथ उसके रूम पहुँचती है ....

तरुण को यु उदास देख दोनों बहने उसको गले लगा कर सांत्वना देती है ...

तरुण : दीदी आप लोगो ने भी मुझे ये सब बतलाना जरुरी नहीं समझा ... आपसे तो हमेसा मेरी बात होती रहती थी ...

रुचिका : भाई हमें लगा की तुम्हे अगर ये सब पता चलता तो तुम वह पुरे मन से अपना काम नहीं करते जो की तुम्हारे करियर के लिए ठीक नहीं था इसलिए hi हमने तुम्हे कुछ नहीं बताया ...

तरुण : ये शेर सिंह कौन है ... जिसने हमारे घर को ऐसे तबाह किया है मैं उसको नहीं छोडूंगा ...

प्रियांशी : वो यहाँ का मुखिया है भाई .. उसका एक बॉडीगार्ड है जो बहुत पावरफुल है ... वो तो फ़िलहाल जेल में है पर सुना है की वो जल्द hi जेल से निकलने वाला है ... वो सब छोडो और बताओ तुम्हारा उसे का काम कैसा रहा ...

तरुण : ठीक hi था दीदी .... अब कुछ दिनों बाद हमारे सहर में hi कंपनी का एक ब्रांच खुलने वाला है और ये सारा काम मुझे hi देखना है .... जरा सा मेरा ट्राली बैग लाना .... (बैग खोल कर ) ये लो दीदी ये मैंने आप लोगो के लिए ख़रीदा था ...

तरुण ने दोनों बहनो के लिए ख़रीदे हुए kapde,purse और जेवेलरी को उन्हें दे दिया ....

प्रियांशी : वाओ भाई ... ये सब बहुत अचे हैं ...

रुचिका (तरुण के दोनों गलो को चुम कर) : ऊपर वाला तुम्हे ऐसे hi कामयाब बनाये ....

प्रियांशी : क्या मैं भी तुम्हारे गालो को चुम सकती हु ...

तरुण : हाँ दीदी क्यों नहीं ...

प्रियांशी ने तरुण से ग्रीन सिग्नल मिलते hi तरुण के दोनों गाल को बड़े प्यार से चुम लिया ...

दोपहर को तरुण की माँ उसको खाने को बुलाने के बहाने उसके रूम आती है ....

तरुण की माँ : बीटा चलो खाना खाने के लिए मैं तुम्हे बुलाने आती हु ...

तरुण ने सुन कर भी अनसुना कर दिया और अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया ....

तरुण की माँ : बीटा मैं तुम्हे hi बोल रही हु ... चलो खाना रेडी है ...

तरुण ने फिर से अनसुना कर दिया ....

तरुण की माँ ने उसके कंधे पर हाथ रखा तो तरुण ने उसका हाथ अपने कंधे से झटक दिया ....

तरुण (गुस्से से) : कौन हो आप और अपने बिना मेरी परमिशन के मुझे छुआ कैसे ... मैं आपको नहीं जनता ...

तरुण की माँ तरुण के ऐसे रिएक्शन से बहुत आहात होती है और उसकी आँखें थोड़ी नाम हो जाती हैं ...

तरुण की माँ : बीटा तुम सबसे तो अचे से बेहवे करते हो पर मेरे साथ ऐसे क्यों बेहवे करते हो माँ हु मैं तुम्हारी ....

तरुण : वो कब हुआ मैडम ... यु जबरदस्ती मुझसे रिश्ता जोड़ने की कोसिस न करो ... मेरी कोई माँ या बाप नहीं है ... मेरी सिर्फ दो बहने हैं ....

तरुण की माँ : बीटा ऐसे न कहो ... चाहो तो मुझे मार लो पर मुझे ऐसे इग्नोर न करो ... अब तू hi मेरा और इस घर का सहारा है ....

तरुण : आपके ये आंशू भी आपकी तरह hi फेक हैं ....

तरुण की माँ : नहीं बीटा मैं सच कह रही हु मैं बदल गयी हु ... पहले मेरे मन में तुम्हारे लिए जो भी गलत चीजें भरी गयी थी उसके वजह से hi मैं तुम्हारे साथ जानवरो जैसा बर्ताव किया करती थी ... मैं जानती हु की मैंने तुम्हारे साथ बहुत गलत किया है जो की शायद hi किसी माँ ने अपने बच्चे के साथ किया हो ... पर मैं तुम्हे ये भरोषा दिलाती हु की मैं सब कुछ ठीक कर दूंगी ....

तरुण : क्या आप मेरे बचपन में वो खुसिया लौटा सकती हो जो हर पल आपके बिना मैंने गुजरे हैं ... माँ बाप भाई बहन सब के होते हुए भी मैंने एक अनाथ की जिंदगी बितायी है ... क्या आप वो दूध लौटा सकती हो जिसे अपने मुझे न पीला कर आपने अपने लादले भतीजे को पिलाया था ... जी नहीं आप कुछ भी नहीं ठीक कर सकती आप माँ के नाम पर एक कलंक हो .... इससे पहले की मैं कुछ उल्टा सीधा कर बैठु आप प्लीज मेरे रूम से जल्दी से निकल जाइये ... मैं आपको देखना तक पसंद नहीं करता .... अगर आप सोचती हो की मैं सब कुछ भूल कर मैं आपको माफ़ कर दूंगा तो ये आपकी सबसे बड़ी भूल है ....

तरुण की माँ अब भी हार नहीं मानती और उसके पैरो में गिर जाती है ....

तरुण की माँ (जोर जोर से रट हुए) : प्लीज बीटा ऐसा न कहो ... मैं जानती हु की एक माँ को अपने बेटे के साथ ऐसा बेहवे नहीं करना चाहिए था .... पर साडी गलती मेरी hi नहीं है तेरी म. चची हमेसा मुझे तुम्हारे खिलाफ भड़कती रहती थी जिसके कारन मैं तुम्हारे साथ ऐसा बेहवे करती थी ... तुम जो भी कहोगे मैं वो करने को तैयार हु पर एक बार मुझे माँ कहकर सीने से तो लगा ले ....

तरुण : आपके ये घड़ियाली आंशू से मुझ पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला .... अब आप यहाँ से जा सकती हैं ...

तरुण की माँ मायूस हो कर वह से चली जाती है .... तरुण को अपनी माँ के साथ ऐसे बेहवे करके ाचा तो नहीं लगता पर उसके साथ उसकी माँ ने जितना बुरा बर्ताव किया था उसके मुकाबले तो ये कुछ भी नहीं था ....

तरुण के आने के बाद सभी लोग धीरे धीरे ट्रैक पर आने लगे थे पर अभी इस घर में कुछ और बुरा होना बाकि था ....

एक दिन की बात है दोपहर को सभी घर वाले अपने अपने रूम्स में आराम कर रहे थे की तरुण के दादा का मोबाइल जोर जोर से बजने लगा ... उन्होंने कॉल पिक किया तो अपोजिट साइड से किसी ने कुछ कहा जिसे सुन उनके पैरो टेल जमीन hi खिसक गयी ....

वो भाग कर अपनी बड़ी बहु के रूम जाते हैं और उन्हें कुछ बतलाने के बाद ड्राइवर के साथ कही निकल जाते हैं ....

तरुण की बड़ी चची भगति हुयी उसके रूम आती है और जो कुछ भी उन्होंने तरुण को बताया उसको सुन उसका दिमाग hi घूम गया ....

अब ये कौन सो नयी आफत आयी है इस घर पर ये जानने के लिए साथ बने रहे ....



फ्रेंड्स अभी कुछ पर्सनल प्रोब्लेम्स की वजह से अपडेट आने में देरी हो रही है ... सॉरी फॉर थे इनकन्वेनियंसेस ...
 
अपडेट 27

तरुण की बड़ी चची भगति हुयी उसके रूम आती है और जो कुछ भी उन्होंने तरुण को बताया उसको सुन उसका दिमाग hi घूम गया ....


आगे

तरुण के दादा जी भागते हुए जब ******* हॉस्पिटल पहुंचे .... हॉस्पिटल में पहुँच कर जब वो इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे तब उन्हें पता चला की उनका मंझला बीटा इस दुनिया को छोड़ कर जा चूका है .... बेटे की लाश को अपने सामने देख एक बाप के दिल पर क्या गुजरती है उसको शब्दों में बया करना बहुत मुश्किल है .... वो वही जमीन पर बैठ फुट फुट कर रोने लगे ... ठीक तभी उनके कंधे पर किसी ने हाथ रखा ये कोई और नहीं बल्कि तरुण hi था जो अपने मंझले चाचा के एक्सीडेंट का सुन भागता हुआ हॉस्पिटल पहुंचा था .... उसकी लाइफ में उसके मंझले चाचा का बहुत बड़ा योगदान था ... वही थे जिन्होंने न सिर्फ उसको सपोर्ट किया बल्कि उसको घर के नरक वाली जिंदगी से निकल एक नयी जिंदगी दी .... दुनिया का सामना करने के लायक बनाया ....

अपने मंझले चाचा का पार्थिव शरीर देख तरुण की आँखों से आंशू की बारिस होने लगी .... वो अपने चाचा के पैरो को पकड़ कर उन्हें अपने आंशू से धोने लगता है ....

पुलिस वह पहले से hi मौजूद थी ... उन्होंने तरुण के दादा जी और तरुण से कुछ सवाल जवाब करने के बाद तरुण के मंझले चाचा का पार्थिव शरीर उन्हें सौंप दिया ....

डेड बॉडी को साथ ले कर वो घर की तरफ निकल पड़े .... पहले राघव फिर उसके पापा की हालत से वैसे hi इस परिवार पर दुखो का पहाड़ टूट रहा था और अब मंझले चाचा के मौत की खबर ने तो जैसे इस घर की ईंट से ईंट बजा डाली थी ....

तरुण के मंझले चाचा का पार्थिव शरीर देख घर की महिलाये जोर जोर से रोने लगी .... तरुण भी अपनी दोनों बड़ी जुड़वाँ बहनो के गले लग कर रोये जा रहा था क्यूंकि उसको उसके मंझले चाचा ने तब सपोर्ट किया था जब उसको किसी के सहारे की बेहद जरुरत थी ...

राहुल ने hi अपने पिता का अंतिम संस्कार किया .... तरुण भी मंझले चाचा की मौत के बाद गुमशुम सा रहने लगा था ....

पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार ये बतलाया गया था की तरुण के मंझले चाचा की गाडी का एक्सीडेंट हुआ था पर तरुण को कही न कही ये लगता था की जैसे ये किसी की सोची समझी साजिस थी .... अब इस बात का पता घर में बैठ कर तो लगाया नहीं जा सकता इस लिए तरुण ने अब घर से बहार निकल इस मामले की तहकीकात करना सही समझा क्यूंकि हॉस्पिटल में hi अपने मंझले चाचा की एक छोटी सी झलक तरुण ने देखि थी जिसमे उनके गले पर कुछ नीसाण दिखे थे वैसे नीसाण तो तभी बनते हैं जब किसी रस्सी से किसी का गाला घोंटा गया हो ...

तरुण ने आस पास के एरिया में घूम कर पता लगाने को सोचा पर कुछ खास उसके हाथ नहीं लग पाया तो हतास हो कर वो वापस अपने घर को लौट आया ...

पति की मौत के बाद भी मंझली चची के हाव् भाव में कोई खास फरक नहीं पड़ा था ... वो आज भी पहले की hi तरह जिंदगी की रही थी जैसे कुछ हुआ hi न हो ...

वही रानी के ऊपर इसका बहुत असर हुआ था क्यूंकि वो अपने पापा के बहुत क्लोज थी ... अब वो अपने रूम में hi पड़ी रहती थी ... वो सबके साथ खाना भी नहीं कहती थी या यो कहे की उसने खाना से रिस्ता hi तोड़ दिया था ... वो बस अपने रूम में बैठी आंशू बहाया करती थी ....

श्रेया भी अपने चाचा की मौत के बाद अपने मायके आयी हुयी थी ... उसके भाई और पापा की तो हालत पहले से hi अछि नहीं थी और अब मंझले चाचा के भी न होने से तो जैसे उसको पूरा घर hi बदला बदला सा नजर आने लगा ....

श्रेया ने बड़ी बहन का फ़र्ज़ निभाते हुए रानी को उसके इमोशनल ट्रामा से निकलने का काम किया .... उसने रानी को बहुत अछि तरह से समझाया बुझाया तब जा के वो थोड़ी नार्मल हुयी ...

वही दूसरी तरफ तरुण की तलाश अब भी जारी थी .... वो एक शाम को गाँव में hi घूम रहा था की उसने एक चाय की टापरी पर अपने मंझले चाचा के बारे में कुछ बातें सुनी .... अब उसको तो गाँव में ज्यादा लोग जानते भी नहीं थे तो उनलोगो को उसके आने से कोई फर्क नहीं पड़ा ....

आदमी 1 : यार बहुत गलत हुआ शैलेन्द्र के साथ ....

आदमी 2 : हाँ सुना है की उसका एक्सीडेंट तो बस एक दिखावा है असली बात तो कुछ और है ....

आदमी 3 : अरे धीरे बोलो कही किसी ने सुन लिया तो बेकार के कोर्ट कचहरी का चक्कर लगाना पड़ेगा ...

आदमी 1 : मुझे तो उस जालिम शेर सिंह पर शक है .... हो न हो ये उसका hi काम हो सकता है ...

आदमी 2 : छोडो अब ये सब बात हमें इससे क्या कोई मरे या कोई जिए पर सिर्फ एक बात का दुःख है की शैलेन्द्र आदमी बहुत ाचा था ...

इसके बाद वो लोग किसी दूसरे टॉपिक पर बात करने लगते हैं अब तक तरुण की चाय भी ख़त्म हो जाती है तो वो उठ कर वह से निकल जाता है ....

तरुण ने ये डीडे कर लिया था की वो अब शेर सिंह नाम की इस बाला से जरूर मिलेगा ... उसने उसके बारे में बहुत सुन रखा था .... वो भी देखना चाहता था की जिस इंसान ने उसके हस्ते खेलते परिवार को तबाह किया है उसकी स्ट्रेंथ और वीकनेस क्या है ....

5 - 6 दिन की कड़ी मसक्कत के बाद भी शेर सिंह के दर्शन तो नहीं हो पाए थे पर उसके बारे में जरूर पता चला था ... उसकी सबसे बड़ी कमजोरी उसकी बेटी सुहानी थी .... सुहानी .... जैसा इसका नाम था उतनी hi खूबसूरत ये थी भी .... बिलकुल किसी सांचे में ढला उसके बदन का हर एक हिस्सा बिलकुल परफेक्ट था .... शेर सिंह ने अपनी बेटी को उसने बड़े नाज़ो से पला था .... उसके लिए वो दुनिया की हर दौलत सोहरत से बढ़ कर थी ...

उसके लिए बड़े बड़े घरो से रिस्ता आया हुआ था पर शेर सिंह अभी अपनी बेटी को घर से विदा करने के मूड में नहीं था एकलौती बेटी जो ठहरी ....

श्रेया का पूरा दिन Rani,Rahul,raghav,Shruti या अपनी माँ के साथ hi गुजर रहा था ... जब से वो आयी थी एक बार भी तरुण के साथ बैठ कर फुर्सत से उसने बात तक नहीं की थी क्यूंकि दिन में तो तरुण घर पर होता hi नहीं था ... इवनिंग को जब वो घर आता था उसके बाद डिनर करके सब सोने चले जाते थे ....

एक रात को तरुण के गेट पर नॉक होने से उसकी नींद खुलती है .... जब वो गेट खोलता है तो बहार उसकी माँ सुमित्रा कड़ी थी ... अपनी माँ को गेट पर खड़ा देख उसका पारा चढ़ जाता है .... सुमित्रा ने अभी एक ब्लैक कलर की निघती डाली हुयी थी जिसमे वो बाला की खूबसूरत लग रही थी .....

तरुण : इतनी रात को मुझे डिस्टर्ब करने का क्या मतलब है ...

तरुण की माँ : मुझे तुमसे बात करनी है ....

तरुण : पर मुझे आपसे कोई बात नहीं करनी ... आप जा सकती हो ....

तरुण की माँ : मुझे तुमसे कुछ जरुरी बात करनी है ....

तरुण : मैंने कहा न की मुझे फालतू लोगो से बात करने का कोई शौख नहीं है ....

तरुण की माँ : मैं जानती हु की तुम अपने मंझले चाचा को कितना पसंद करते हो और उनकी मौत से तुम्हे बहुत बड़ा सदमा लगा है .... अभी तुम दिन भर उनके बारे में hi जानकारी इकठ्ठा करने में जुटे हो ... मैं तुम्हे जो बताना चाहती हु वो ऐसे नहीं बता सकती ... तो प्लीज मुझे अपने रूम में आने दो .... मैं तुमसे जबरदस्ती रिश्ता नहीं जोड़ूँगी ....

तरुण (कुछ देर सोचने के बाद) : ठीक है पर अगर आपकी दी हुयी जानकारी गलत निकली तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा ....

तरुण की माँ : मुझे मंजूर है ....

उसके बाद तरुण ने अपनी माँ को रूम के अंदर कर के गेट को लॉक कर दिया ...

तरुण : अब बोलो क्या बोलना है ...

तरुण की माँ : मुझे तुम्हारी मंझली चची पर शक है की ये सब उनका hi किया धराया है ...

तरुण : वो तो आप भी कर सकती हो ... तो मैं आपके ऊपर शक क्यों न करू .....

तरुण की माँ : मैंने उन्हें फ़ोन पर उस दिन सुबह को किसी से बात करते हुए सुना था ... वो गुस्से में तुम्हारे म. चाचा को मरवाने की बात कर रही थी पर मैंने अब तक ये बात घर में किसी को नहीं बताया है .... एहि नहीं हॉस्पिटल से जब तुम्हारे बड़े चाचा शेर सिंह के पास गुस्से में अपने आदमियों के साथ गए थे तो वो कुछ देर के लिए हमसे कही दूर चली गयी थी ... बाद में जब मैंने उनकी कॉल हिस्ट्री चेक किया तो किसी अननोन नंबर पर करीब 4-5 मिनट की उनकी बात हुयी थी ....

तरुण : आप इतने कन्फर्म हो कर कैसे कह सकती हो ... ये इत्तेफ़ाक़ भी तो हो सकता है ....

तरुण की माँ : तुम्हारे चाचा और चची के बीच कुछ भी सही नहीं था ... उन्हें और तेरी चची को एक रूम में सोये वर्षो बीत गए हैं .... और ये राहुल भी तेरे मंझले चाचा की अपनी औलाद नहीं है और इस बात का शक उन्हें बहुत पहले hi हो गया था जिसके वजह से उन्होंने राहुल का डीएनए टेस्ट भी करवाया और जब रिपोर्ट आयी तो दोनों के बीच बहुत कहा सुनी हुयी .... मामला तलाक तक पहुँच गया पर तुम्हारे दादा जी ने किसी तरह समझा बुझा कर इस मामले को कुछ हद्द तक संभाला पर वो दोनों को एक दूसरे के साथ सोने या रहने को तो फाॅर्स नहीं कर सकते थे .... तुम्हारे चाचा राहुल को बचपन में बहुत हेट करते थे ... शायद hi उन्होंने कभी उसको गॉड लिया हो .... उसके कुछ साल बाद तुम पैदा हुए ... तुम्हारे पैदा होने के बाद से hi तुम्हारी मंझली चची तुम्हारे ऊपर खर खायी बैठी थी क्यूंकि तुम्हारे मंझले चाचा का झुकाव बचपन से hi तुम्हारे तरफ था ... वो तुझमे hi अपने बेटे का अंश देखते थे ....

फिर पता नहीं तुम्हारी मंझली चची पर कौन सा भूत सवार हो गया की वो तुम्हारे मंझले चाचा का सारा गुस्सा तुझ पर hi उतरने लगी ... एहि नहीं वो हमेसा मेरे और तुम्हारे पापा के सामने तुम्हारी बुराई करने लगी ... अब मैं भी तो एक इंसान hi थी मुझे क्या पता था की वो ये सब अपने मन की भड़ास निकलने को किया करती थी .,... उन्होंने हमारे कुलगुरु से कह कर तुम्हारा एक जाली जन्म कुंडली बनवाया जिसके अनुसार तुम्हारे ऊपर बहुत सरे grah-dosh हैं और तुम इस परिवार के लिए बहुत सरे संकट लेकर आओगे ...

उनकी बातो ने मेरे मन में तुम्हारे लिए इतनी नफरत पैदा करवा दी की जिसका कोई अंत न था ...

फिर एक शाम वो हुआ जिसने तुम्हे मुझसे हमेसा हमेसा के लिए दूर कर दिया .... वो तुम्हारा पहला जन्मदिन था .... तुम्हारी दादी तुम्हे लिवाने के लिए सीढिया चढ़ रही थी की फिसल कर गिर पड़ी और काफी खून बह जाने से उनकी मौत हो गयी ... तब से hi तुम्हे मनहूस और इस घर के लिए कलंक साबित कर दिया गया .... और उसके बाद मेरे मन में तुम्हारे लिए इतना ज़हर भर दिया गया की मैं तुम्हे जान से भी मारने से नहीं हिचकती ... पुरे घर के लिए तुम बस एक नफरत का पत्र बन कर रह गए .... हम नफरत में इतने अंधे हो चुके थे की हमें किसी की साजिस का पता तक न चला ... तुम्हे बस नफरत मिलती थी वही इससे राहुल की इमेज काफी अछि हो चुकी थी वो सबकी आँखों का तारा बन चूका था ..... वो तो तेरे मंझले चाचा ने तुम्हे हॉस्टल भिजवा कर तुम्हे हमारे नफरत की आग से बचा लिया .... उसके आगे का तो तुम जानते hi हो ...

अपने अतीत की एक छोटी सी झलक की दास्ताँ सुन तरुण की आँखें नाम हो जाती हैं .... वो फुट फुट कर रोने लगा ...

तरुण : मेरे चाचा ने मेरे लिए इतना कुछ किया और मैं उन्हें एक चमच पानी तक न पीला सका ... मुझसे बड़ा अभागा और कौन हो सकता है .... पर अब नहीं मैं उनके मौत का गईं गईं कर बदला लूंगा .. चाहे वो कोई भी हो मैं किसी को नहीं छोडूंगा ...

और गुस्से में तरुण अपनी माँ का गाला पकड़ कर जोर जोर से दबाने लगता है ... सुमित्रा की तो सांस hi थम गयी थी ... पल भर में hi उसको अपनी मौत का मंजर नजर आने लगता है .... वो मरने के बेहद करीब थी की किसी के जोर जोर से गेट पीटने से उसकी तन्द्रा टूटी और उसने सुमित्रा का गाला छोड़ दिया ... तरुण की पकड़ से छूटने के बाद वो जमीन पर लेट जोर जोर से सांस लेते हुए हाफने लगती है ...

तरुण को तो कुछ समझ hi नहीं आया की कुछ लम्हो पहले क्या हुआ था ... वो कभी अपनी माँ को देखता तो कभी गेट पर हो रही दस्तक पर उसका ध्यान जाता ... वो जल्दी से गेट खोलता है ... बहार और कोई नहीं श्रेया थी जो की उससे बात करने आयी थी ... तरुण के रूम में सुमित्रा को देख वो थोड़ा शॉक हो जाती है और जब वो उसको जोर जोर से हफ्ते हुए देखती है तो और भी कंफ्यूज हो जाती है .... अभी भी सुमित्रा को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी और तरुण के जबरदस्त पकड़ की वजह से उसके गले में असहनीय पीड़ा महसूस हो रही थी ...

श्रेया : भाई चची यहाँ और इतनी जोर से हांफ क्यों रही है ...

तरुण : मुझे नहीं पता दीदी ....

श्रेया : चची जी ठीक तो हो न आप ....

सुमित्रा : बेटी ... बस म.. .ुझे म ...e...r..e रूम में छोड़ दे ...

तरुण को भी थोड़ा ख़राब लग रहा था की वो अपनी माँ की जान लेने के बस सेकंड भर दूर था ...

श्रेया के कहने पर तरुण ने सुमित्रा को गॉड में उठा कर उनके रूम में पहुंचा दिया .... उसके पापा बीएड पर एक कोने में पड़े खर्राटे भर रहे थे ....

श्रेया : अब आप ठीक हो न चची ...

जवाब में सुमित्रा ने सिर्फ हाँ में सर हिला दिया ,...

सुमित्रा (मन में) : अगर मेरे बच्चे का साथ मुझे इस तरह से hi मिले तो मैं हर पल ऐसे मरना चाहूंगी .... काम से काम इसी बहाने मैं अपने बेटे के करीब तो रह सकुंगी ....

उसके बाद तरुण के पीछे पीछे श्रेया भी उसके रूम आ जाती है ....

तरुण : दीदी आप इस वक्त मेरे रूम में क्या करने आयी थी ...

श्रेया : कुछ नहीं बहुत दिनों से तुझसे ठीक से बात नहीं किया तो आज आ गयी ... अगर तुझे नींद आ रही हो तो कोई बात नहीं हम बाद में बात कर लेंगे ....

तरुण : नहीं दीदी ऐसी कोई बात नहीं .... आओ आराम से बीएड पर लेट कर बात करते हैं ....

श्रेया : रुक पहले गेट तो लॉक कर लू ....


गेट लॉक कर श्रेया वापस बीएड पर आती है .....
 
अपडेट 28

तरुण : नहीं दीदी ऐसी कोई बात नहीं .... आओ आराम से बीएड पर लेट कर बात करते हैं ....




श्रेया : रुक पहले गेट तो लॉक कर लू ....

गेट लॉक कर श्रेया वापस बीएड पर आती है .....

आगे

तरुण : दीदी क्या आपको पता है इस घर में क्या क्या हो रहा है ...

श्रेया : मतलब मैं समझी नहीं तुम कहना क्या चाहते हो ....

तरुण : दादा जी और बड़ी चची और मंझली चची के बारे में ...

श्रेया (कुछ झिझकते हुए अंदाज़ में) : सब ठीक हैं ...

तरुण : उनके बीच जिस्मानी ताल्लुकात हैं ....

श्रेया ( हैरानी के अंदाज़ में ) : तुमसे ये सब किसने कहा ...

तरुण : मैंने खुद अपनी आँखों से देखा है और रानी दीदी ने भी ....

श्रेया : मैंने भी एक दो बार उन्हें दादा जी के रूम से निकलते हुए देखा है पर सेक्स वगैरह मैंने नहीं देखा है ... अब ये उनकी लाइफ है उन्हें जैसा ठीक लगे करते होंगे ....

तरुण : पर दादा जी को शर्म नहीं आती क्या ... अपनी खुद की बहु के साथ ऐसा छियई .... मुझे तो सोच कर भी ख़राब लगता है ....

श्रेया : अब उनके बीच ऐसे सम्बन्ध कैसे बने ये तो मैं नहीं जानती पर वो बड़े हैं हम उनके पर्सनल मटर में इंटरफेरे तो नहीं कर सकते न ...

तरुण : तो क्या आप भी किसी के साथ ...

श्रेया : पागल है क्या ... मैं तेरे साथ थोड़ी फ्रैंक क्या हुयी तू तो मेरे करैक्टर के ऊपर hi सवाल उठाने लगा ... नहीं रे पागल मैं तेरे जीजू के प्रति वफादार हु ... हाँ तुम्हारे साथ थोड़ी मस्ती जरूर की थी टूर पर क्यूंकि मैं तुम्हे तेनसेद नहीं देखना चाहती थी .... वह तूने मुझे भाभी के साथ भी देखा था वो भी बस हसी मजाक से हो गया था ोथेरविसे ी ऍम पुरे पतिव्रता नारी ...

तरुण : सॉरी दीदी ... मेरे कहने का वो मतलब नहीं था .... Ok गुड नाईट ... अब मुझे नींद आ रही है .... Bye

श्रेया : अरे तू तो बुरा मान गया ... रुक मैं तेरा मूड बनती हु ... जब इस घर में इतना कुछ गलत हो hi रहा है तो थोड़ा और भी सही ....

तरुण ( थोड़े गुस्से में ) : मुझे कुछ नहीं करना ... आप बस मेरे रूम से जाओ .... मुझे नींद आ रही है ....

श्रेया : ओहो इतना गुस्सा ...

तरुण : मैं गुस्सा नहीं हु दीदी ... मुझे ख़ुशी है की आप एक पतिव्रता नारी हो ....

श्रेया : मैं यहाँ तेरे साथ hi सोने को आयी हु .... मैं कही नहीं जाने वाली ....

तरुण : तो सो जाओ न ....

श्रेया : काम्य दीदी तुझे बहुत याद करती हैं ....

तरुण : तो करने दीजिये ... अब मैं कभी आपके ससुराल जाऊंगा hi नहीं ...

श्रेया : ाचा तो मेरा बाबू अब तक नाराज़ है .... लगता है मुझे दुधु पिलाना hi पड़ेगा ....

और फिर श्रेया अपनी पहनी हुयी निघती उतर देती है और फिर अपनी ब्रा का हुक खोल कर अपनी चूचियों को आज़ाद कर देती है और अपना एक निप्पल तरुण के मुँह में थुश देती है ...

श्रेया : लो पि लो .... पति के साथ साथ तो मेरे बाबू का भी तो हक़ बनता है मुझ पर ....

और फिर वो तरुण का मुँह चुम लेती है और फिर से अपना निप्पल उसके मुँह में थुश देती है ... तरुण भी अब धीरे धीरे श्रेया के निप्पल को चूसने लगता है .... श्रेया भी बड़े प्यार से उसके बालो में उंगलिया फिरने लगती है .... अब तरुण भी बारी बारी से श्रेया के निप्पल को चूसने लगता है ...

श्रेया : अब सिर्फ दूध hi चुस्त रहेगा क्या ... अब आगे बढ़ने की बारी है .... चल जल्दी से खड़ा हो जा ....

तरुण बीएड से उतर कर खड़ा हो जाता है और श्रेया उसके घुटनो में बैठ जाती है उसके जिस्म पर सिर्फ एक पिंक कलर की पंतय थी जो आगे से गीली होकर उसके छूट पर चिपक सी गयी थी ....

ऊपर के कपडे तो तरुण ने खुद उतर दिए थे और ट्रॉउज़र को अंडरवियर समेत नीचे सरका कर श्रेया ने तरुण को पूरी तरह से नंगा कर दिया ....

अंडरवियर के हटने के साथ hi तरुण का semi-erect लुंड खुली हवा में सांस लेने लगता है .... श्रेया पहले अपने हलके हाथो से उसको पकड़ कर इधर उधर करके देखती है फिर अपने जीभ को निकल कर उसके सुपडे को चाट लेती है .... श्रेया के जीभ का स्पर्श अपने सुपडे पर होते hi तरुण के पुरे जिस्म में सनसनी सी दौड़ जाती है ....

अब श्रेया धीरे धीरे करके तरुण के पुरे लुंड को चाटने लगती है जिससे तरुण का semi-erect लुंड अब पूरी तरह से अपना सर उठाने लगता है ... अब श्रेया बड़े मज़े से तरुण के लुंड को चूसने लगती है ...

श्रेया : वाओ यार तुम्हारा लुंड तो किसी सोफ्टी आइसक्रीम की तरह जायकेदार लग रहा है ....

तरुण : अब बस भी करो दीदी वर्ण मेरा पानी निकल जायेगा आपके मुँह में hi ....

श्रेया : नहीं नहीं आज मुझे तुम्हारा ये हलब्बी लुंड मेरे छूट में चाहिए ...

तरुण : पर इससे आपका पतिव्रता धर्म भांग नहीं होगा क्या ....

श्रेया : ी don't केयर ... क्या तुम अपनी बहन के लिए इतना नहीं कर सकते ...

तरुण : मुझे कोई आपत्ति नहीं ... जब आपके साथ इतना आगे बढ़ hi चूका हु तो थोड़ा और आगे बढ़ने से क्या फर्क पड़ेगा ... जब बड़े लोग पहले से hi कर रहे हैं तो हम क्यों रुके भला ...

तरुण ने श्रेया को खड़ा किया और उसके होंठो पर टूट पड़ा .... दोनों फुल जोश में आ चुके थे ... वो जोर - जोर से एक दूसरे के होंठो को चूस रहे थे ....

अब तरुण श्रेया को बीएड पर लिटा देता है और उसकी पंतय को इलास्टिक को पकड़ कर नीचे सरकने लगता है जिसमे श्रेया भी उसका साथ देती है .... पल भर में hi श्रेया की क्लीन शवेद छूट तरुण की आँखों के सामने थी जिसमे से बूँद बूँद करके उसका छूट रास टपक रहा था ....

तरुण झुक कर उसकी छूट पर अपनी जीभ फिरा देता है और मज़े से चाटने लगता है .... तरुण के छूट चाटने के अंदाज़ से श्रेया उसकी दीवानी हो जाती है ... 3 - 4 मिनट की छूट चुदाई में hi श्रेया डिस्चार्ज हो जाती है .... उसका सारा पानी तरुण के मुँह पर लग जाता है जिसे वो खुद hi चाट कर साफ़ कर देती है ...

अब वो श्रेया को बीएड के किनारे ले आता है और अपने लुंड को उसकी छूट पर सेट करके एक करारा धक्का लगता है जिससे उसका सूपड़ा श्रेया की छूट में घुस जाता है .... सुरु में तो श्रेया को थोड़ा पैन जरूर हुआ पर जल्द hi वो उससे उबार गयी ....

श्रेया हल्का हल्का मोअन करके तरुण का हौसला अफ़ज़ाई कर रही थी ... तरुण भी पुरे जोश में धक्के पर धक्का लगाए जा रहा था ....

10 - 15 मिनट तक चले घमासान के बाद तरुण अपनी बड़ी बहन की छूट में hi झाड़ जाता हैं .... तरुण का गधा और गरम वीर्य अपनी छूट की गहरायी में महसूस करते hi श्रेया एक और बार झाड़ जाती है ....

आज फाइनली दोनों के बीच जो एक दीवार बची थी वो भी गिर गयी और आज तरुण ने अपने घर की पहली महिला के साथ शारीरिक सम्बन्ध स्थापित करने में सफलता हासिल कर लिया था ....



अब तो वैसे भी काफी रात गुजर चुकी थी इसलिए उन्होंने सोने में hi अपनी भलाई समझी ....
 
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