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वो अब और वह रुकना नहीं चाहता था क्यूंकि उसके पकडे जाने का खतरा था इसलिए वो सावधानी से चलता हुआ पाने रूम में आ कर बीएड पर लेट जाता है ... उसके सांसें काफी तेज़ी से चल रही थी उसको तो अब भी यकीन नहीं हो रहा था की वो अभी थोड़े देर पहले क्या देख कर आ रहा है ... उसको अब भी यकीन नहीं हो रहा था की उसके दादा जी ऐसा कुछ कर सकते हैं ...
आगे
अगली सुबह को तरुण और श्रेया घर से निकल पड़ते हैं ... तरुण की माँ उससे बात तो करना चाहती थी पर ये वो भी अछि तरह से जानती की ये इतना आसान भी नहीं होगा ... इतने सालो की नाराजगी ैनवाय दो इमोशनल बातो से नहीं दूर की जा सकती थी ... और वो खुद भी किसी को फ़िलहाल नहीं जाताना चाहती थी की उसको कुलगुरु ने सच्चाई से अवगत करा दिया है ...
ट्रैन में 5-6 घंटे के सफर के बाद वो लोग फाइनली श्रेय के ससुराल पहुँच hi जाते हैं ... श्रेया ने अपने हस्बैंड को तरुण के बारे में नहीं बताया था .... श्रेया के ससुराल में ज्यादा लोग भी नहीं थे ... बस एक सास और एक बड़ी ननद थी जिसका डाइवोर्स हो चूका था और वो अब अपने मायके में hi रहकर एक स्कूल में टीचिंग किया करती थी .... इनका घर एक 3भक फ्लैट था जैसा की आमतौर पर बड़े सहरो में हुआ करता है .... 3 मैं रूम्स में सभी घर के लोग रहते थे और एक छोटे से स्टोर रूम को उन्होंने गेस्ट रूम बनवाया हुआ था ...
फ्यू नई करैक्टर इन थे स्टोरी ...
ऋषभ : श्रेया का हस्बैंड ... आगे 32 ... अपना इम्पोर्ट एक्सपोर्ट का बिसनेस है और अक्सर कही न कही टूर पर hi होता है ...
काम्य सिंह : श्रेया की ननद ... आगे 34
विमला सिंह : श्रेया की सास
स्टेशन से एक तस्य लेकर दोनों भाई बहन श्रेया के ससुराल पहुँचते हैं ... उस वक्त घर में सिर्फ श्रेया की सास hi मौजूद थी ....
श्रेया : मम्मी जी ... दीदी अभी स्कूल से नै आई हैं क्या ...
विमला : नहीं बहु ... जाओ अपने भाई का सामान गेस्ट रूम में रखवा दो ... ऋषभ तो कल hi बेंगलोरे से लौटेगा ... वैसे तुम्हारे एक और भाई हैं तुमने हमें कभी बताया नहीं था ...
श्रेया : लम्बी कहानी है मम्मी जी फिर कभी फुर्सत में बताउंगी ... फ़िलहाल तो मुझे जोरो की भूक लगी हुयी है ... भाई तुम भी जाओ फ्रेश होकर आओ तब तक मैं कुछ खाने का रेडी करती हु ...
तरुण अपना सामान गेस्ट रूम में शिफ्ट करता है .,.. आमतौर पर ये रूम किसी दूर के रिस्तेदारो या फ्रेंड्स वगैरह के रुकने के लिए उसे होता था ... राघव या राहुल को भी या तो काम्य का रूम मिलता था या ऋषभ के न होने से वो श्रेया के साथ भी रुक लेते थे ...
ये रूम भी ठीक थक hi था बस स्पेसियस काम था ...
लंच के टाइम तक काम्य भी घर आ जाती है ... वो एक दिवोर्सड लेडी थी ... शादी के कुछ महीने बाद hi इसने अपने पति से डिवोर्स ले लिया था वजह दोनों मिया बीवी के अलावा किसी को पता न था ... ऋषभ के घरवालों ने इसको अपनी किस्मत मान कर अपने साथ hi रख लिया .... उसका रंग थोड़ा सांवला था पर उसका जिस्म पूरा भरा हुआ था और वो काफी हॉट दिखती थी ... तरुण से तो आज तक मिली नहीं थी .... राघव के साथ काफी अछि बॉन्डिंग थी उसकी .... अछि खासी वेल एडुकेटेड थी इसलिए उसने अपने तिमेपास के लिए पास के hi एक स्कूल में पढ़ना सुरु कर दिया था ... बोलने में थोड़ी मुँह फैट थी पर दिल की बहुत अछि थी...
पहले वो श्रेया से मिलती है ....
काम्य : अरे भाभी आप कब आयी ... और कैसा रहा आपका ट्रिप .... किसके साथ आयी हो ... कहाँ है राघव जी उनको कहा छुपा रखा है अपने ...
श्रेया (हस्ती हुयी ) : अरे अरे अत्निक सांस तो ले लो ... एक साथ इतने सरे सवाल ... हाँ दीदी आ गयी मैं और मेरा टूर मस्त था .... राघव तो नहीं आया है ...
राघव के न आने की खबर सुन काम्य का मुँह थोड़ा लटक सा जाता है .... श्रेया के अलावा एक वही तो था जिसके साथ वो खुल कर अपने दिल की बात किया करती थी ...
फिर श्रेया तरुण को आवाज़ देती है ... दीदी की आवाज़ सुन तरुण रूम से बहार आता है ...
श्रेया (हस्ते हुए) : भाई इनसे मिलो ये हैं मेरी प्यारी ननद काम सहेली काम्य दीदी ... और दीदी ये है मेरा सबसे छोटा भाई तरुण ... कुछ दिनों पहले hi पढ़ाई करके लौटा है ... इसको अपने फ्रेंड की बहन की शादी में इधर hi कही जाना था तो आते टाइम साथ लेती आयी ....
तरुण आगे बढ़ कर काम्य के पाओ छूने को झुकता है तो काम्य उसको बीच में hi रोक लेती है और उसको अपने सीने से लगा लेती है ... सीने से लगते hi तरुण को अपनी छाती पर काम्य के दो बड़े बड़े पपीते अचे से फील होते हैं क्यूंकि काम्य ने उसको जोर से भींच लिया था ...
श्रेया : बस बस दीदी बच्चे की जान लोगी क्या ?
काम्य : वैसे भाभी एक बात तो है आपके सरे भाइयो को उपरवाले ने फुर्सत से बनाया है ...
श्रेया : बस बस दीदी अब ये न कहना की राघव की hi तरह ये भी आपको पसंद आ गया ....
काम्य : राघव जी जितना तो नहीं पर आपके ये भाई भी मुझे अचे लगे ...
ऐसे hi थोड़े देर इनका हसी मजाक चलता रहता है .... उसके बाद सभी साथ में लंच करते हैं ...
रात में डिनर के बाद तरुण को कारन का फ़ोन आता है ...
कारन : hello भाई कैसा है और कहा है ....
तरुण : मैं तो ठीक हु भाई ... अभी अपनी बड़ी दीदी के ससुराल आया हुआ हु ...
कारन : ok भाई ... याद है न तुझे 3 दिनों तक यहाँ पहुँच जाना है वर्ण दिया दीदी का तो तू जनता hi है वो फिर तुमसे बात भी नहीं करेंगी ...
तरुण : कोई नहीं भाई मैं 2 - 3 दिनों में वह आ जाऊंगा ... दीदी को मत बताइयो मैं उन्हें सरप्राइज देना चाहता हु ...
कारन : चल ठीक है ... भाई मुम्मा डिनर के लिए बुलाती है ... तुमसे मिलकर बाकि बातचीत होगी ... bye
तरुण : ok bye ...
तरुण को नींद नहीं आ रही थी तो वो रूम में लेता हुआ छत की तरफ टकटकी लगाए हुए देख रहा था ... उसकी आँखों के सामने कल रात का देखा हुआ सारा सन किसी चलचित्र की तरह उभर कर आ रहा था ...
तरुण (मन में) : आखिर दादा जी को इस उम्र में ये सब करते हुए शर्म नहीं आयी क्या ... पता नहीं इस घर में और कौन कौन से राज़ दफ़न हैं ... क्या कोई अपने घर के लोगो के साथ hi ऐसा सम्बन्ध स्थापित कर सकता है ... पर मैंने भी तो श्रेया दीदी के दूध चूसे हैं और एक बार तो दीदी और भाभी दोनों को एक साथ नंगी भी देखा है ... पर मैंने कुछ गलत तो नहीं किया है ... दीदी ने मुझे हमेसा एक माँ सा प्यार दिया है ... उन्होंने मुझे उस वक्त सपोर्ट किया है जब कोई मुझे देखना तक पसंद नहीं करता था ... भले hi पहले वो खुल कर मुझे सपोर्ट नहीं करती थी पर उस वक्त मेरे लिए प्यार और स्नेह की एक बूँद भी किसी अमृत से काम न था ... मैं दीदी के लिए कुछ भी कर सकता हु किसी भी हद्द तक जा सकता हु .... मेरे और दीदी के बीच जो भी हुआ वो प्यार था कोई हवस नहीं ... पर दादा जी के केस में ये साफ़ हवस hi नजर आ रहा था .... कैसे वो अपने पति के होते हुए भी एक बुढ्ढे इंसान के साथ ये सब कर रही थी ....क्या जिस्म की आग एक रिश्ते से बढ़ कर है ....
उधर तरुण के गाँव में चांडाल चौकड़ी फिर से एक रूम में मीटिंग क्र रहे थे .... पहले और आज में फर्क सिर्फ इतना था की प्रियांशी न तो तरुण क सुप्पोर्ट में कुछ बोल रही थी न hi अपोजिट में ... पता नहीं चाहे वजह जो भी हो ....
मॉर्निंग को जल्दी hi तरुण की नींद खुल जाती है पर वो यहाँ कही रनिंग के लिए नहीं जा सकता था इसलिए वो फ्रेश होकर अपने रूम में hi एक ट्रॉउज़र और एक t-shirt में हलके फुल्के एक्सरसाइज किये जा रहा था ....
तभी हाथ में एक ट्रे में चाय लिए हुए काम्य उसके रूम में एंटर करती है .... अभी तरुण का मुँह गेट के दूसरी तरफ था .... इस ड्रेस में उसके मसल्स और बॉडी शेप और भी निखार रहा था .... काम्य तो कुछ पल बस उसको देखती hi रह गयी ....
काम्य : जनाब अगर आपका एक्सरसाइज वगैरह हो जाये तो चाय पि लीजिये वर्ण आपके घर वाले कहेंगे की बहन के ससुराल वाले आपको कुछ खिलते पिलाते नहीं थे क्या .... वैसे देखने से तो नहीं लगता था की काम कपड़ो में आप इतने हैंडसम लगते होंगे .... मेरा तो दिल आ गया है आपके ऊपर .... बच के रहिएगा जनाब कही मैं आपका रपे न कर दू ....


तरुण : क्या दीदी आप भी न ... आइये बैठिये ...
काम्य : लो जी सारा गुड़ गोबर कर दिया न अपने .... कहा तो मैं सोच रही थी की आपको मैं अपना सजना बनाउंगी पर अपने तो मुझे प्यारी बहनिया बना लिया......
तरुण : आप भी न दीदी बहुत मजाक करती हो .... वैसे आप ये एक्सरसाइज या योग वगैरह नहीं करती क्या ...
काम्य (खुद की तरफ देखकर ) : मुझे देख कर आपको लगता है की मैं ये सब करती होउंगी .... अगर करि होती तो इतना फैल थोड़े hi जाती .... वैसे अगर आप शिखाएँगे तो वो भी कर लुंगी .... अपने तो रेड सिग्नल दे hi दिया है बूत don't वोर्री मेरा ओने साइडेड प्यार hi सही ....
तभी वह श्रेया की एंट्री होती है ....
श्रेया : किस्से आपको ओने साइडेड लव हो गया दीदी ...
काम्य : और किस्से आपके भाई साहब से ...
श्रेया : ाचा जी कुछ दिनों पहले तो आप राघव की माला जप्ती थी अब मेरे छोटे भाई पर डोरे दाल रही हैं ... लगता है आपको मेरे घर के मर्द बहुत पसंद आते हैं ...
काम्य : अपने भी मेरे घर के एकलौते मर्द को हथिया लिया है .... तो मैं क्यों छोड़ू ...

श्रेया : दीदी आप चाहो तो अब भी ज्वाइन कर सकती हो वो तो वैसे भी हमेसा आपके बड़े बड़े ....
इतना कहकर श्रेया रुक जाती है क्यूंकि अचानक से उसको ख्याल आ जाता है की अपने छोटे भाई के सामने वो ये सब कैसे बोल सकती है ....
काम्य : रुक क्यों गयी बोलो न ओहो भाई के सामने शर्मा रही हो ... और मेरे भाई के साथ रूम में बंद होकर सिसकारियां लेती हो उसका क्या ... वैसे भी आज वो आ hi रहा है आज रात फिर से नाईट शो चलेगा ... इतने दिनों की साडी तड़प जो निकनि है ... आज तो आपके भाई भी हैं इन्हे भी साथ ले लेना ... ढिंका चिका न सही काम से काम अपनी बहन की साफ़ सफाई तो कर hi सकते हैं ... क्यों तरुण जी क्या ख्याल है ....
अभी वो कुछ और हसी मजाक करती इससे पहले hi श्रेया की सास आवाज़ देती है तो दोनों ननद भाभी तरुण के रूम से निकल जाती है ... तरुण ने भी रहत की सांस ली वर्ण दोनों ननद भाभी तो आज अपने हसी मजाक की हर सीमा से पार हो जाती ... वैसे उनका ये आज का नहीं है जब भी साथ होती हैं तो ऐसे hi एक दूसरे के साथ हसी मजाक करती रहती हैं...
इवनिंग को तरुण के जीजा यानि की ऋषभ भी आ जाते हैं .... काम्य hi दोनों को आपस में इंट्रोडस करवाती है ....
ऋषभ : वैसे श्रेया तुमने मुझे आज तक इनके बारे में कभी नहीं बताया ....
काम्य : अरे भाई इनसे बांड लिखवा लो वर्ण कब कहा से तेरे और सेल साली मिल जाएं क्या पता...

विमला : हे उपरवाले क्या करू मैं इस लड़की का ... कब क्या बोल जाती है इसको पता भी नहीं चलता ... इसकी तरफ से मैं माफ़ी मांगती हु बीटा ...
ऐसे hi हसी मजाक करते हुए सबका डिनर समाप्त होता है और सभी लोग अपने अपने रूम्स में सोने चले जाते हैं .... तरुण को जो रूम मिला था और उसकी बहन के रूम के बीच सिर्फ एक दिवार का hi फैसला था ....
तरुण को आज भी नींद नहीं आ रही थी तो वो अपनी आँखें खोल कर छत की तरफ दरखे जा रहा था ....
ठोस hi देर में उसके कानो में किसी की दबी हुयी सिसकिया सुनाई देने लगी ... उसको समझते देर न लगी की ये किस तरह की आवाज़ें हैं और किधर से आ रही है ....
आज काफी दिनों बाद दोनों मिया बीवी मिले थे तो दोनों एक दूसरे की तड़प मिटने में लगे हुए थे ...
जहा श्रेया अपनी सिसकियों को कण्ट्रोल करने की पूरी कोसिस कर रही थी वही उसका पति अपनी बीवी के भाई को बगल वाले रूम में इमेजिन करके और जो शोर से लगा पड़ा था ... मनो आज उसकी सुहागरात हो और वो सम कुंवारेपन की साडी तड़प अपनी नयी ब्याहता से मिटने की कोसिस कर रहा हो ...
खैर आधे घंटे के धमाचौकड़ी के बाद इनका खेल ख़त्म हो जाता है और फिर से एक बात शांति छ जाती है ...
श्रेया नंगी बीएड पर पड़ी हुयी अपनी छूट को सहलाने लगती है ...
श्रेया (मुस्कुराती हुयी) : क्या बात है जनाब आज कुछ ज्यादा hi जोश में नजर आ रहे थे ... लगता है अपने मुझे इतने दिनोंकाफी मिस किया है ...
ऋषभ (उसके निप्पल को अपने मुँह से निकलते हुए) : जान तुम चीज hi ऐसी हो की इतने दिनों बाद तुम्हे वापस प् कर कण्ट्रोल नहीं हुआ ....
श्रेया : ाचा जी ... तो दीदी साथ में hi थी न बुला कर चढ़ जाते उनके ऊपर .... आखिर वो भी तो तड़प रही होंगी ....
ऋषभ : तुम्हे बड़ा पता है उनकी तड़पन का ... इतना hi मन हो तो बगल वाले रूम में तुम्हारा भाई भी सोया हुआ है ... जाकर उससे hi चुद लो ...
श्रेया : छी ये आप कैसी बात कर रहे हो ... मैंने आपको कहा न मैं उसको अपने बेटे के जैसा प्यार करती हु ... उसके बारे में ये सब मैं नहीं सुन्ना चाहती ....
ऋषभ : यानि की राघव या राहुल के साथ करने में तुम्हे कोई प्रॉब्लम नहीं ...
श्रेया : छी आपसे तो बात करना hi बेकार है जब देखो तब ऐसे hi उलटी सीढ़ी बातें करते रहते हो ...

ऋषभ : अरे बाबा सॉरी न मैं तो बस मजाक कर रहा था पर ये सब तो तुमने hi सुरु किया था न और जब बरी खुद की आयी तो गुस्सा हो रही हो ...
श्रेया : बस अब मैं और कुछ नहीं सुन्ना चाहती ... मुझे नींद आ रही है ....
ऋषभ ने और कुछ बोलना सही नहीं समझा और वो दूसरी तरफ करवट करके सो जाता है ... .
अगले सुबह को फिर से आदत के मुताबिक तरुण अपने रूम में एक्सरसाइज कर रहा था की श्रेया उसके रूम में एंटर करती है .....
श्रेया : गुड मॉर्निंग भाई ... ये लो तुम्हारी चाय ...
तरुण : गुड मॉर्निंग दीदी .... दीदी आपके गालो पर ये क्या लगा हुआ है ...
श्रेया मिरर के सामने जा कर देखती है तो वो खुद से शर्मा जाती है ... दरअसल रात को ऋषभ ने चुम्मा छाती में उसके गालो पर दांत लगा दिए थे जिससे हल्का हल्का दाग सा बन गया था ...
तरुण : बोलो न दीदी आपको चोट लगा है क्या ...
श्रेया बस शर्मा कर उसके रूम से भाग जाती है ... ठोस देर में काम्य तरुण के रूम में एक टॉप और ट्रॉउज़र में आती है ...
तरुण काम्य को दो चार एक्सरसाइज की टिप्स देता है और रेगुलर रूटीन बना कर उसको इम्प्लीमेंट करने को कहता है ...
ऐसे hi अब वो दिन भी आ पहुंचा था हिज दिन तरुण को दिया की शादी को अटेंड करने को जाना था ... इस छोटी सी मुलाकात में hi तरुण और काम्य की अछि फ्रेंडशिप हो गयी थी .... ससुराल आने के बाद श्रेया ने तरुण को एक जादू की झप्पी तक नहीं दिया था ...
तरुण अपना बैग लिए हुए गेट के पास खड़ा था और सबसे बरी बरी से विदा ले रहा था ... ऋषभ ने एक कैब मंगवाया हुआ था जो की तरुण को उसके डेस्टिनेशन तक छोड़ने वाला था ...
श्रेया : भाई रिटर्निंग में इधर से hi होते जाना ...
तरुण : नहीं दीदी मौका नहीं मिलेगा ... आपको अपने ससुराल में खुस देख लिया अब और क्या चाहिए एक भाई को ... अपना और सबका ख्याल रखना ... Bye दीदी ...
काम्य गेट के पास कड़ी थी ... तरुण ने इतने दिनों में hi उसके दिल में जगह बना की थी (इमोशनल बॉन्डिंग न की कोई गलत जैसा आप समझ रहे हैं
) ...
तरुण को जाते देख काम्य की भी आँखें नाम हो गयी थी ....
तरुण : काम्य दीदी अपना अचे से ख्याल रखना ... इतने दिन आप लोगो के साथ रहा तो वक्त कब बीता कुछ पता hi न चला ... (धीरे से) हो सके तो कोई ाचा सा लड़का देख शादी कर लेना एक अकेली औरत कितने दिन बिना किसी अपने के साथ के रह सकती है ... पता नहीं अब आगे कभी मुलाकात हो न हो ... Bye ..
काम्य खुद पर कण्ट्रोल नहीं कर पति है और जोर से उसको अपने सीने से लगा लेती है ...
श्रेया (खुद से) : कौन कहता है की ये लड़का मनहूस है ... जो इटंर जल्दी किसी अनजान के साथ इतनी मजबूत बॉन्डिंग बना ले वो किसी का बुरा कैसे कर या सोच सकता है ...
श्रेया ऐसे hi अपनी सोच में hi गम थी की तरुण सबसे विदा लेकर अपने कैब से एक नए सफर पर निकल पड़ता है ... उसके जाने के बाद श्रेया का ध्यान टुटा ... पर तब तक तरुण की गाडी भी कही दूर गम हो चूका था ... श्रेया को ये अफ़सोस जरूर हुआ की वो आखिरी बार तरुण को अपने गले से भी न लगा पायी ...
वो अब और वह रुकना नहीं चाहता था क्यूंकि उसके पकडे जाने का खतरा था इसलिए वो सावधानी से चलता हुआ पाने रूम में आ कर बीएड पर लेट जाता है ... उसके सांसें काफी तेज़ी से चल रही थी उसको तो अब भी यकीन नहीं हो रहा था की वो अभी थोड़े देर पहले क्या देख कर आ रहा है ... उसको अब भी यकीन नहीं हो रहा था की उसके दादा जी ऐसा कुछ कर सकते हैं ...
आगे
अगली सुबह को तरुण और श्रेया घर से निकल पड़ते हैं ... तरुण की माँ उससे बात तो करना चाहती थी पर ये वो भी अछि तरह से जानती की ये इतना आसान भी नहीं होगा ... इतने सालो की नाराजगी ैनवाय दो इमोशनल बातो से नहीं दूर की जा सकती थी ... और वो खुद भी किसी को फ़िलहाल नहीं जाताना चाहती थी की उसको कुलगुरु ने सच्चाई से अवगत करा दिया है ...
ट्रैन में 5-6 घंटे के सफर के बाद वो लोग फाइनली श्रेय के ससुराल पहुँच hi जाते हैं ... श्रेया ने अपने हस्बैंड को तरुण के बारे में नहीं बताया था .... श्रेया के ससुराल में ज्यादा लोग भी नहीं थे ... बस एक सास और एक बड़ी ननद थी जिसका डाइवोर्स हो चूका था और वो अब अपने मायके में hi रहकर एक स्कूल में टीचिंग किया करती थी .... इनका घर एक 3भक फ्लैट था जैसा की आमतौर पर बड़े सहरो में हुआ करता है .... 3 मैं रूम्स में सभी घर के लोग रहते थे और एक छोटे से स्टोर रूम को उन्होंने गेस्ट रूम बनवाया हुआ था ...
फ्यू नई करैक्टर इन थे स्टोरी ...
ऋषभ : श्रेया का हस्बैंड ... आगे 32 ... अपना इम्पोर्ट एक्सपोर्ट का बिसनेस है और अक्सर कही न कही टूर पर hi होता है ...
काम्य सिंह : श्रेया की ननद ... आगे 34
विमला सिंह : श्रेया की सास
स्टेशन से एक तस्य लेकर दोनों भाई बहन श्रेया के ससुराल पहुँचते हैं ... उस वक्त घर में सिर्फ श्रेया की सास hi मौजूद थी ....
श्रेया : मम्मी जी ... दीदी अभी स्कूल से नै आई हैं क्या ...
विमला : नहीं बहु ... जाओ अपने भाई का सामान गेस्ट रूम में रखवा दो ... ऋषभ तो कल hi बेंगलोरे से लौटेगा ... वैसे तुम्हारे एक और भाई हैं तुमने हमें कभी बताया नहीं था ...
श्रेया : लम्बी कहानी है मम्मी जी फिर कभी फुर्सत में बताउंगी ... फ़िलहाल तो मुझे जोरो की भूक लगी हुयी है ... भाई तुम भी जाओ फ्रेश होकर आओ तब तक मैं कुछ खाने का रेडी करती हु ...
तरुण अपना सामान गेस्ट रूम में शिफ्ट करता है .,.. आमतौर पर ये रूम किसी दूर के रिस्तेदारो या फ्रेंड्स वगैरह के रुकने के लिए उसे होता था ... राघव या राहुल को भी या तो काम्य का रूम मिलता था या ऋषभ के न होने से वो श्रेया के साथ भी रुक लेते थे ...
ये रूम भी ठीक थक hi था बस स्पेसियस काम था ...
लंच के टाइम तक काम्य भी घर आ जाती है ... वो एक दिवोर्सड लेडी थी ... शादी के कुछ महीने बाद hi इसने अपने पति से डिवोर्स ले लिया था वजह दोनों मिया बीवी के अलावा किसी को पता न था ... ऋषभ के घरवालों ने इसको अपनी किस्मत मान कर अपने साथ hi रख लिया .... उसका रंग थोड़ा सांवला था पर उसका जिस्म पूरा भरा हुआ था और वो काफी हॉट दिखती थी ... तरुण से तो आज तक मिली नहीं थी .... राघव के साथ काफी अछि बॉन्डिंग थी उसकी .... अछि खासी वेल एडुकेटेड थी इसलिए उसने अपने तिमेपास के लिए पास के hi एक स्कूल में पढ़ना सुरु कर दिया था ... बोलने में थोड़ी मुँह फैट थी पर दिल की बहुत अछि थी...
पहले वो श्रेया से मिलती है ....
काम्य : अरे भाभी आप कब आयी ... और कैसा रहा आपका ट्रिप .... किसके साथ आयी हो ... कहाँ है राघव जी उनको कहा छुपा रखा है अपने ...
श्रेया (हस्ती हुयी ) : अरे अरे अत्निक सांस तो ले लो ... एक साथ इतने सरे सवाल ... हाँ दीदी आ गयी मैं और मेरा टूर मस्त था .... राघव तो नहीं आया है ...
राघव के न आने की खबर सुन काम्य का मुँह थोड़ा लटक सा जाता है .... श्रेया के अलावा एक वही तो था जिसके साथ वो खुल कर अपने दिल की बात किया करती थी ...
फिर श्रेया तरुण को आवाज़ देती है ... दीदी की आवाज़ सुन तरुण रूम से बहार आता है ...
श्रेया (हस्ते हुए) : भाई इनसे मिलो ये हैं मेरी प्यारी ननद काम सहेली काम्य दीदी ... और दीदी ये है मेरा सबसे छोटा भाई तरुण ... कुछ दिनों पहले hi पढ़ाई करके लौटा है ... इसको अपने फ्रेंड की बहन की शादी में इधर hi कही जाना था तो आते टाइम साथ लेती आयी ....
तरुण आगे बढ़ कर काम्य के पाओ छूने को झुकता है तो काम्य उसको बीच में hi रोक लेती है और उसको अपने सीने से लगा लेती है ... सीने से लगते hi तरुण को अपनी छाती पर काम्य के दो बड़े बड़े पपीते अचे से फील होते हैं क्यूंकि काम्य ने उसको जोर से भींच लिया था ...
श्रेया : बस बस दीदी बच्चे की जान लोगी क्या ?
काम्य : वैसे भाभी एक बात तो है आपके सरे भाइयो को उपरवाले ने फुर्सत से बनाया है ...
श्रेया : बस बस दीदी अब ये न कहना की राघव की hi तरह ये भी आपको पसंद आ गया ....
काम्य : राघव जी जितना तो नहीं पर आपके ये भाई भी मुझे अचे लगे ...
ऐसे hi थोड़े देर इनका हसी मजाक चलता रहता है .... उसके बाद सभी साथ में लंच करते हैं ...
रात में डिनर के बाद तरुण को कारन का फ़ोन आता है ...
कारन : hello भाई कैसा है और कहा है ....
तरुण : मैं तो ठीक हु भाई ... अभी अपनी बड़ी दीदी के ससुराल आया हुआ हु ...
कारन : ok भाई ... याद है न तुझे 3 दिनों तक यहाँ पहुँच जाना है वर्ण दिया दीदी का तो तू जनता hi है वो फिर तुमसे बात भी नहीं करेंगी ...
तरुण : कोई नहीं भाई मैं 2 - 3 दिनों में वह आ जाऊंगा ... दीदी को मत बताइयो मैं उन्हें सरप्राइज देना चाहता हु ...
कारन : चल ठीक है ... भाई मुम्मा डिनर के लिए बुलाती है ... तुमसे मिलकर बाकि बातचीत होगी ... bye
तरुण : ok bye ...
तरुण को नींद नहीं आ रही थी तो वो रूम में लेता हुआ छत की तरफ टकटकी लगाए हुए देख रहा था ... उसकी आँखों के सामने कल रात का देखा हुआ सारा सन किसी चलचित्र की तरह उभर कर आ रहा था ...
तरुण (मन में) : आखिर दादा जी को इस उम्र में ये सब करते हुए शर्म नहीं आयी क्या ... पता नहीं इस घर में और कौन कौन से राज़ दफ़न हैं ... क्या कोई अपने घर के लोगो के साथ hi ऐसा सम्बन्ध स्थापित कर सकता है ... पर मैंने भी तो श्रेया दीदी के दूध चूसे हैं और एक बार तो दीदी और भाभी दोनों को एक साथ नंगी भी देखा है ... पर मैंने कुछ गलत तो नहीं किया है ... दीदी ने मुझे हमेसा एक माँ सा प्यार दिया है ... उन्होंने मुझे उस वक्त सपोर्ट किया है जब कोई मुझे देखना तक पसंद नहीं करता था ... भले hi पहले वो खुल कर मुझे सपोर्ट नहीं करती थी पर उस वक्त मेरे लिए प्यार और स्नेह की एक बूँद भी किसी अमृत से काम न था ... मैं दीदी के लिए कुछ भी कर सकता हु किसी भी हद्द तक जा सकता हु .... मेरे और दीदी के बीच जो भी हुआ वो प्यार था कोई हवस नहीं ... पर दादा जी के केस में ये साफ़ हवस hi नजर आ रहा था .... कैसे वो अपने पति के होते हुए भी एक बुढ्ढे इंसान के साथ ये सब कर रही थी ....क्या जिस्म की आग एक रिश्ते से बढ़ कर है ....
उधर तरुण के गाँव में चांडाल चौकड़ी फिर से एक रूम में मीटिंग क्र रहे थे .... पहले और आज में फर्क सिर्फ इतना था की प्रियांशी न तो तरुण क सुप्पोर्ट में कुछ बोल रही थी न hi अपोजिट में ... पता नहीं चाहे वजह जो भी हो ....
मॉर्निंग को जल्दी hi तरुण की नींद खुल जाती है पर वो यहाँ कही रनिंग के लिए नहीं जा सकता था इसलिए वो फ्रेश होकर अपने रूम में hi एक ट्रॉउज़र और एक t-shirt में हलके फुल्के एक्सरसाइज किये जा रहा था ....
तभी हाथ में एक ट्रे में चाय लिए हुए काम्य उसके रूम में एंटर करती है .... अभी तरुण का मुँह गेट के दूसरी तरफ था .... इस ड्रेस में उसके मसल्स और बॉडी शेप और भी निखार रहा था .... काम्य तो कुछ पल बस उसको देखती hi रह गयी ....
काम्य : जनाब अगर आपका एक्सरसाइज वगैरह हो जाये तो चाय पि लीजिये वर्ण आपके घर वाले कहेंगे की बहन के ससुराल वाले आपको कुछ खिलते पिलाते नहीं थे क्या .... वैसे देखने से तो नहीं लगता था की काम कपड़ो में आप इतने हैंडसम लगते होंगे .... मेरा तो दिल आ गया है आपके ऊपर .... बच के रहिएगा जनाब कही मैं आपका रपे न कर दू ....
तरुण : क्या दीदी आप भी न ... आइये बैठिये ...
काम्य : लो जी सारा गुड़ गोबर कर दिया न अपने .... कहा तो मैं सोच रही थी की आपको मैं अपना सजना बनाउंगी पर अपने तो मुझे प्यारी बहनिया बना लिया......
तरुण : आप भी न दीदी बहुत मजाक करती हो .... वैसे आप ये एक्सरसाइज या योग वगैरह नहीं करती क्या ...
काम्य (खुद की तरफ देखकर ) : मुझे देख कर आपको लगता है की मैं ये सब करती होउंगी .... अगर करि होती तो इतना फैल थोड़े hi जाती .... वैसे अगर आप शिखाएँगे तो वो भी कर लुंगी .... अपने तो रेड सिग्नल दे hi दिया है बूत don't वोर्री मेरा ओने साइडेड प्यार hi सही ....
तभी वह श्रेया की एंट्री होती है ....
श्रेया : किस्से आपको ओने साइडेड लव हो गया दीदी ...
काम्य : और किस्से आपके भाई साहब से ...
श्रेया : ाचा जी कुछ दिनों पहले तो आप राघव की माला जप्ती थी अब मेरे छोटे भाई पर डोरे दाल रही हैं ... लगता है आपको मेरे घर के मर्द बहुत पसंद आते हैं ...
काम्य : अपने भी मेरे घर के एकलौते मर्द को हथिया लिया है .... तो मैं क्यों छोड़ू ...
श्रेया : दीदी आप चाहो तो अब भी ज्वाइन कर सकती हो वो तो वैसे भी हमेसा आपके बड़े बड़े ....
इतना कहकर श्रेया रुक जाती है क्यूंकि अचानक से उसको ख्याल आ जाता है की अपने छोटे भाई के सामने वो ये सब कैसे बोल सकती है ....
काम्य : रुक क्यों गयी बोलो न ओहो भाई के सामने शर्मा रही हो ... और मेरे भाई के साथ रूम में बंद होकर सिसकारियां लेती हो उसका क्या ... वैसे भी आज वो आ hi रहा है आज रात फिर से नाईट शो चलेगा ... इतने दिनों की साडी तड़प जो निकनि है ... आज तो आपके भाई भी हैं इन्हे भी साथ ले लेना ... ढिंका चिका न सही काम से काम अपनी बहन की साफ़ सफाई तो कर hi सकते हैं ... क्यों तरुण जी क्या ख्याल है ....
अभी वो कुछ और हसी मजाक करती इससे पहले hi श्रेया की सास आवाज़ देती है तो दोनों ननद भाभी तरुण के रूम से निकल जाती है ... तरुण ने भी रहत की सांस ली वर्ण दोनों ननद भाभी तो आज अपने हसी मजाक की हर सीमा से पार हो जाती ... वैसे उनका ये आज का नहीं है जब भी साथ होती हैं तो ऐसे hi एक दूसरे के साथ हसी मजाक करती रहती हैं...
इवनिंग को तरुण के जीजा यानि की ऋषभ भी आ जाते हैं .... काम्य hi दोनों को आपस में इंट्रोडस करवाती है ....
ऋषभ : वैसे श्रेया तुमने मुझे आज तक इनके बारे में कभी नहीं बताया ....
काम्य : अरे भाई इनसे बांड लिखवा लो वर्ण कब कहा से तेरे और सेल साली मिल जाएं क्या पता...
विमला : हे उपरवाले क्या करू मैं इस लड़की का ... कब क्या बोल जाती है इसको पता भी नहीं चलता ... इसकी तरफ से मैं माफ़ी मांगती हु बीटा ...
ऐसे hi हसी मजाक करते हुए सबका डिनर समाप्त होता है और सभी लोग अपने अपने रूम्स में सोने चले जाते हैं .... तरुण को जो रूम मिला था और उसकी बहन के रूम के बीच सिर्फ एक दिवार का hi फैसला था ....
तरुण को आज भी नींद नहीं आ रही थी तो वो अपनी आँखें खोल कर छत की तरफ दरखे जा रहा था ....
ठोस hi देर में उसके कानो में किसी की दबी हुयी सिसकिया सुनाई देने लगी ... उसको समझते देर न लगी की ये किस तरह की आवाज़ें हैं और किधर से आ रही है ....
आज काफी दिनों बाद दोनों मिया बीवी मिले थे तो दोनों एक दूसरे की तड़प मिटने में लगे हुए थे ...
जहा श्रेया अपनी सिसकियों को कण्ट्रोल करने की पूरी कोसिस कर रही थी वही उसका पति अपनी बीवी के भाई को बगल वाले रूम में इमेजिन करके और जो शोर से लगा पड़ा था ... मनो आज उसकी सुहागरात हो और वो सम कुंवारेपन की साडी तड़प अपनी नयी ब्याहता से मिटने की कोसिस कर रहा हो ...
खैर आधे घंटे के धमाचौकड़ी के बाद इनका खेल ख़त्म हो जाता है और फिर से एक बात शांति छ जाती है ...
श्रेया नंगी बीएड पर पड़ी हुयी अपनी छूट को सहलाने लगती है ...
श्रेया (मुस्कुराती हुयी) : क्या बात है जनाब आज कुछ ज्यादा hi जोश में नजर आ रहे थे ... लगता है अपने मुझे इतने दिनोंकाफी मिस किया है ...
ऋषभ (उसके निप्पल को अपने मुँह से निकलते हुए) : जान तुम चीज hi ऐसी हो की इतने दिनों बाद तुम्हे वापस प् कर कण्ट्रोल नहीं हुआ ....
श्रेया : ाचा जी ... तो दीदी साथ में hi थी न बुला कर चढ़ जाते उनके ऊपर .... आखिर वो भी तो तड़प रही होंगी ....
ऋषभ : तुम्हे बड़ा पता है उनकी तड़पन का ... इतना hi मन हो तो बगल वाले रूम में तुम्हारा भाई भी सोया हुआ है ... जाकर उससे hi चुद लो ...
श्रेया : छी ये आप कैसी बात कर रहे हो ... मैंने आपको कहा न मैं उसको अपने बेटे के जैसा प्यार करती हु ... उसके बारे में ये सब मैं नहीं सुन्ना चाहती ....
ऋषभ : यानि की राघव या राहुल के साथ करने में तुम्हे कोई प्रॉब्लम नहीं ...
श्रेया : छी आपसे तो बात करना hi बेकार है जब देखो तब ऐसे hi उलटी सीढ़ी बातें करते रहते हो ...
ऋषभ : अरे बाबा सॉरी न मैं तो बस मजाक कर रहा था पर ये सब तो तुमने hi सुरु किया था न और जब बरी खुद की आयी तो गुस्सा हो रही हो ...
श्रेया : बस अब मैं और कुछ नहीं सुन्ना चाहती ... मुझे नींद आ रही है ....
ऋषभ ने और कुछ बोलना सही नहीं समझा और वो दूसरी तरफ करवट करके सो जाता है ... .
अगले सुबह को फिर से आदत के मुताबिक तरुण अपने रूम में एक्सरसाइज कर रहा था की श्रेया उसके रूम में एंटर करती है .....
श्रेया : गुड मॉर्निंग भाई ... ये लो तुम्हारी चाय ...
तरुण : गुड मॉर्निंग दीदी .... दीदी आपके गालो पर ये क्या लगा हुआ है ...
श्रेया मिरर के सामने जा कर देखती है तो वो खुद से शर्मा जाती है ... दरअसल रात को ऋषभ ने चुम्मा छाती में उसके गालो पर दांत लगा दिए थे जिससे हल्का हल्का दाग सा बन गया था ...
तरुण : बोलो न दीदी आपको चोट लगा है क्या ...
श्रेया बस शर्मा कर उसके रूम से भाग जाती है ... ठोस देर में काम्य तरुण के रूम में एक टॉप और ट्रॉउज़र में आती है ...
तरुण काम्य को दो चार एक्सरसाइज की टिप्स देता है और रेगुलर रूटीन बना कर उसको इम्प्लीमेंट करने को कहता है ...
ऐसे hi अब वो दिन भी आ पहुंचा था हिज दिन तरुण को दिया की शादी को अटेंड करने को जाना था ... इस छोटी सी मुलाकात में hi तरुण और काम्य की अछि फ्रेंडशिप हो गयी थी .... ससुराल आने के बाद श्रेया ने तरुण को एक जादू की झप्पी तक नहीं दिया था ...
तरुण अपना बैग लिए हुए गेट के पास खड़ा था और सबसे बरी बरी से विदा ले रहा था ... ऋषभ ने एक कैब मंगवाया हुआ था जो की तरुण को उसके डेस्टिनेशन तक छोड़ने वाला था ...
श्रेया : भाई रिटर्निंग में इधर से hi होते जाना ...
तरुण : नहीं दीदी मौका नहीं मिलेगा ... आपको अपने ससुराल में खुस देख लिया अब और क्या चाहिए एक भाई को ... अपना और सबका ख्याल रखना ... Bye दीदी ...
काम्य गेट के पास कड़ी थी ... तरुण ने इतने दिनों में hi उसके दिल में जगह बना की थी (इमोशनल बॉन्डिंग न की कोई गलत जैसा आप समझ रहे हैं
तरुण को जाते देख काम्य की भी आँखें नाम हो गयी थी ....
तरुण : काम्य दीदी अपना अचे से ख्याल रखना ... इतने दिन आप लोगो के साथ रहा तो वक्त कब बीता कुछ पता hi न चला ... (धीरे से) हो सके तो कोई ाचा सा लड़का देख शादी कर लेना एक अकेली औरत कितने दिन बिना किसी अपने के साथ के रह सकती है ... पता नहीं अब आगे कभी मुलाकात हो न हो ... Bye ..
काम्य खुद पर कण्ट्रोल नहीं कर पति है और जोर से उसको अपने सीने से लगा लेती है ...
श्रेया (खुद से) : कौन कहता है की ये लड़का मनहूस है ... जो इटंर जल्दी किसी अनजान के साथ इतनी मजबूत बॉन्डिंग बना ले वो किसी का बुरा कैसे कर या सोच सकता है ...
श्रेया ऐसे hi अपनी सोच में hi गम थी की तरुण सबसे विदा लेकर अपने कैब से एक नए सफर पर निकल पड़ता है ... उसके जाने के बाद श्रेया का ध्यान टुटा ... पर तब तक तरुण की गाडी भी कही दूर गम हो चूका था ... श्रेया को ये अफ़सोस जरूर हुआ की वो आखिरी बार तरुण को अपने गले से भी न लगा पायी ...