Ufff......Ye Kaisi Pyaas...........(A Story Of Housewife) - Page 2 - SexBaba
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Ufff......Ye Kaisi Pyaas...........(A Story Of Housewife)

अपडेट- 08 (बी) (मेघा अपडेट)

वैसे तो आसमा ने निकाह से पहले कभी किसी गैर मर्द से शारारिक सम्बन्ध नहीं बनाये थे और अपनी विरगनित्य को भी सैम के हवाले की thi..................uske पीछे भी वजह थी उसकी छोटी behan............zoya....................kyon की उसे पता था अगर समाज में कहीं कोई ऊंच नीच हो गयी तो उसकी बहिन की निकाह रुक jayegi...............aur बदनामी होगी सो अलग se.............is वजह से वो लड़कों से दूर rahi..........halanki उसे सेक्स करना बहुत ज़्यादा पसंद था...................

अकेले जब भी वो वक़्त गुज़रती थी तो अक्सर पोर्न वीडियोस देखा करती thi......aur सोचा करती की काश उसका होने वाला शौहर भी कुछ उसके साथ ऐसा hi kare..............waise आसमा को वाइल्ड और हार्डकोर टाइप की सेक्स बेहद पसंद thi............jismein कोई लड़का लड़की को बड़ी hi बेरहमी से छोड़ता था .......उसकी चीखें निकलवाता tha............aisi hi कुछ फंतासी आसमा की भी thi...................ki कोई उसे बिस्टेर पर इतना रगड़े की उसकी बस चीखें निकलवाता rahe.........................magar अफ़सोस अभी तक आसमा के साथ इन दो महीनों में कहीं कुछ ऐसा नहीं हुआ था..........

सैम का लुंड करीब 4 या 5 इंच का hoga..............upar से 1.5 इंच mota......jo की एवरेज से भी बहुत छोटा tha.......................aur सबसे बड़ी दुःख तो इस बात की थी की सैम बिस्टेर पर मुस्खिल से 5 मिनट से ज़्यादा नहीं टिक पता tha....................aur रात में एक से दो बार उसका खड़ा भी होता तो भी मुस्खिल से बस 5 मिनट के liye...............issey ज़्यादा नहीं.........

इन दो महीनों में आसमा मुस्खिल से एक या दो बार hi सैम से सटिस्फी हो पायी thi..............wajah बहुत सी thi.............ek तो सैम हमेशा उसके बदन को इधर उधर choota.............usey हमेशा गरम करता रहता .................और जब अपनी बरी आती तो सीधा पेंतराते करके 5 मिनट में फिराग हो jata...........bina उसकी परवाह kiye..............na hi वो आसमा के साथ फोरप्ले karta.............na hi ओरल sex...........aur न hi डबल मीनिंग जैसी कुछ baatein...............na कोई roleplay..................jo आसमा को hi नहीं सभी लड़कियों को पसंद tha....................is वजह से आसमा के अंदर भी धीरे धीरे गुस्सा और चिड़चिड़ापन आता जा रहा tha.............is वजह से वो अक्सर अकेले में बहुत सी बातें सोचा karti...............magar ये सब वो किस्से kehti...................is वजह से वो अक्सर अब थोड़ी मायूस सी रहने लगी thi.............magar सैम को उसकी ये मायूसी कहीं नज़र नहीं आती थी..............

वो तो समझता था की दुनिया की सबसे बड़ी खुसीहयान तो बस दौलत hain..................agar दौलत हैं तो सब कुछ hain..............magar कहीं न कहीं ये सैम की बहुत बड़ी भूल भी thi.............is वजह से वो हमेश आसमा को दौलत और शौहरत से तौला karta................magar आसमा को तो जैसे इन सब का शौक न पहले tha..........aur न अब था.......................

" क्या सोचने लगी memsaheb...................main भी आपसे बात करने में लग gayi..........hari प्यास से तड़प रहा hoga.................aap पानी दे dijiye..................main उसे दे आती hoon..............aur बाकि का काम कल सुबह आकर हम करेंगे..............." और शांति बात को बीच में hi ख़तम करती हुई R.O में से पानी भरने लगती हैं वहीँ आसमा बेसुध सी कड़ी अभी भी अपने खेलों में कहीं गम थी............

" चलती हूँ मेमसाहेब.............." और इतना कहती हुई शांति फ़ौरन उस किचन से निकल जाती हैं वहीँ आसमा बस हूउउउउउऊँणणन्न में जवाब देती हुई फिर से सब कुछ सोचने लगती hain.............wo दोनों के जाने के बाद आसमा फिर बाथरूम जाती हैं और जब वो अपनी लग्गी नीचे सरकती हुई जब अपनी पंतय नीचे करती हैं उसकी पंतय पर उसके छूट का रूस लगा हुआ tha......................jo अभी तक गिला tha.....................hairan तो वो खुद थी की आज अचानक कैसे उसकी छूट इस तरह से गीली hui................magar दिल में नया एक्ससिटेमेंट भी तो tha................kuch सोचकर एक बार फिर से उसके चेहरे पर एक प्यारी सी हंसी आ गयी.....................

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सैम मार्किट से आ चूका था और वो अपने कमरे में सू रहा tha..............aasma आज पूरी तरह से बेचैन thi................neend तो क्या उसे तो अब एक पल का चैन भी नहीं आ रहा tha....................wo कभी घडी को तो कभी अपने मोबाइल को देख रही thi..........achahak उसकी सहेली हेमा का कॉल aaya...........jo उसकी कॉलेज फ्रेंड thi....................uska कॉल देखकर आसमा के चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान तैर गयी............

" कैसी हो मेरी jaan"..................udher से उसकी सहेली हेमा की आवाज़ aayi.................aur इधर आसमा जवाब में धीरे से मुस्कुरा पड़ी.............

" मैं तो ठीक हूँ........... तू bata.................shadi करके तू तो खूब एन्जॉय कर रही होगी ...............हैं ना..................." और आसमा धीरे से बोल उठी वहीँ उसकी सहेली उसकी बाटिओं को सुनकर जैसे चहक उठी..............

" तू तो जानती हैं न mujhe................college टाइम पर भी तीन चार मेरे बॉयफ्रैंड्स हुआ करते they...........aur अब शादी के बाद भी दो तीन तो हैं hi......................mera हस्बैंड फॉरेन में रहता हैं और मैं यहाँ akele...................aaish कर रही hoon.................kisi और के साथ................." और हेमा मुस्कुराते हुए धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ आसमा का गाला एक बार फिर से सूखने लगता hain............jin चीज़ों से वो बचना चाहती थी वहीँ उसके साथ बार बार अब हो रहा था...........

" तू na..............kabhi नहीं sudhregi...................waise इस बार तेरा बॉयफ्रेंड कौन हैं..................." और आसमा हेमा से उत्शुकता से पूछती हैं वहीँ हेमा मुस्कुराते हुए धीरे से बोल पड़ती हैं..........

" बॉयफ्रेंड नहीं ..........मेरे घर का नौकर hain...............kya मर्द हैं yaar.................kya batawun.............aise मर्द से तो आज तक मेरा पला hi नहीं pada............itna मज़ा देता हैं की पूछो mutt............meri तो चीख निकलवा देता हैं ...............kambhakht.................jab भी मेरी चुदाई करता हैं मुझे अपनी बुर की सेकई करवानी पड़ती hain...............itna ज़्यादा मुझे रगड़ता हैं की मैं बिस्टेर से उठ भी नहीं pati............kabhi कभी तो वो मेरी मूट भी निकलवा देता हैं yaar.............jo भी कह यार मेरी तो लाइफ मज़े से कुत्त rahi.........aabhi अभी उसने मेरी बुर खूब रगड़कर छोड़ी हैं और उसका सारा छुम मैं अपने अंदर ली हुई hoon...........aaj भी उसने मुझे बहुत रगड़ा हैं की मैं ऐसे hi बिस्टेर पर पूरी नंगी सोई हुई hoon...............mujhe तो अब उठा भी नहीं जा raha....ooooooooooomaaaaaaaaaaaammmmmmmmmmmm.........a" और हेमा की ऐसी बातें आसमा के तन बदन में आग लगाने के लिए बस काफी था................

ऊके जिसमे में एक अजीब सी सेंसेशन hui......jissey उसका रोम रोम खड़ा हो gaya...............tangon के बीच उसकी बुर में गीलापन फिर से बढ़ने लगा .........जैसे तैसे वो अपने सांसों को नार्मल कर रही थी मगर यहाँ तो उसकी सांसें पूरी तरह से बेकाबू होते जा रहे they..............wo अपने हलक में थूक निगलती हुई अपनी सहेली की एक एक बातें सुन रही thi...............usey तो यकीन hi नहीं हो रहा था की उसकी सहेली ऐसी hain........shadi के बाद bhi.......aur शादी से पहले भी...............

" तुझे दुर्र नहीं lagta.....agar तेरा पति जान गया तो.................." और आसमा हौले से अपनी साँसों को संभालती हुई बोल पड़ती हैं वहीँ हेमा फिर से सिसकते हुए बोलती हैं.........

" कुछ नहीं होगा yaar.........zindagi अपनी हैं तो कहे को दूसरे के बारे में इतना सोचने ka....................mera हस्बैंड विदेश गया होगा तो कौन सा दूध का धूल hoga.......wo भी कहीं न कहीं लगा hi hoga............duniya के सरे मर्द एक जैसे होते हैं जहाँ किसी को मौका मिला कोई नहीं chookneywala..............aur बता तू कैसी hain.................teri शादी और सेक्स लाइफ कैसी चल rahi.......tera हुब्बी तुझे खुस तो रखता हैं na............college टाइम तो तुमने एक भी लड़कों को भाव नहीं di.........kya अभी भी पवित्रता की चादर तू ोधी हुई हैं..............." और हेमा जैसे आसमा को समझती हुई बोल पड़ती हैं वहीँ जवाब में आसमा बस खामोश hi रहती हैं................

" तू भी न yaar...............enjoy करना seekh.......kuch नहीं रखा हैं लाइफ mein..............shadi के पहले न sahi...............shadi के बाद तो तू बॉयफ्रैंड्स अब बना hi सकती hain..............khair ये तेरी लाइफ हैं मैं तुझे कुछ नहीं kahungi.............life में मज़े लेना सीख ले मेरी जान............. नहीं तो लाइफ आगे तेरे मज़ा legi................rakhti हूँ चल.......... bye..............apna ख्याल रखना................." और हेमा फ़ोन रख देती हैं मगर आसमा के दिमाग में जैसे बम के धमकी हो रहे they...................wo अपने सर को दोनों हाथों से पकड़कर बैठ जाती हैं और एक एक बाटिओं को शुरू से लेकर आंत तक सब कुछ सोचने लगती हैं...............

वैसे भी उसने लाइफ में सिर्फ दूसरों के खातिर समझौता hi तो किया tha.....................aur बदले में की मिला usey.................do पल की ख़ुशी भी nahin.............shauhrat दौलत की कमी तो वैसे hi पहले उसके पास नहीं थी और अब तो और नहीं thi......magar लाइफ में जो satisfaction.....................jo सुकून चाहिए था वो भी तो नहीं मिला tha.................ek अजीब सी pyaas.......ek अजीब सी tadap.........ek अजीब सी बेचैनी .................ऊके मुन्न में बार बार जो उठ रही थी shayad..................kuch तो कमी रह गयी थी उसकी ज़िन्दगी mein...........kuch अढोरापन था shayad..............kuch कमी सी thi......................magar kya......................shayad इस सवाल का जवाब उसके पास नहीं था मगर अब उसे इन सवालों के जवाब हर हाल में चाहिए था.....................

आसमा बहुत देर तक अपनी बीती हुई ज़िन्दगी के बारे में सब कुछ सोचती rahi...............ek एक घटना किसी फिल्म की तरह ुकि आँखों के सामने घूम रहा tha...........aab उसने भी फैसला कर लिया था चाहे जो ho......................aab वो भी अपनी ज़िन्दगी अपने तरीके से jiyegi..................chahe किसी को बुरा लगता हैं तो lage..................magar अब वो हर वो सुख हासिल करेगी जिसकी उसे चाह hain.............tadap hain................dekhna था की अस्मा की ज़िन्दगी में अब क्या बदलाव आने वाला था...........................

तो बे कॉन्टिनोएड.......................................................................
 
अपडेट-09 (ा) (मेघा अपडेट)

आसमा बहुत देर तक अपनी बीती हुई ज़िन्दगी के बारे में सब कुछ सोचती rahi...............ek एक घटना किसी फिल्म की तरह ुकि आँखों के सामने घूम रहा tha...........aab उसने भी फैसला कर लिया था चाहे जो ho......................aab वो भी अपनी ज़िन्दगी अपने तरीके से jiyegi..................chahe किसी को बुरा लगता हैं तो lage..................magar अब वो हर वो सुख हासिल करेगी जिसकी उसे चाह hain.............tadap hain................dekhna था की अस्मा की ज़िन्दगी में अब क्या बदलाव आने वाला था...........................

अब आगे........................................................................

शाम का समय tha....................aasma हॉल में बैठी हुई चाय पी रही thi................sam भी उसी के पास था मगर इस वक़्त उसका सारा ध्यान T.V पर tha.................ander hi अंदर आसमा को न जाने क्यों बहुत गुस्सा भी आ रहा tha...........aur चिढ bhi............magar क्या khudpar..............ya फिर सैम par..........pata nahin.........usey ये नहीं मालूम tha.................kuch देर की चुप्पी के बाद आखिर सैम धीरे से बोल पड़ता हैं..................

" क्या हुआ darling......................tum आज इतनी चुप क्यों ho.................kuch हुआ क्या!!!!!!!!!!................." और सैम आसमा के तरफ देखता हुआ धीरे से मुस्कुरा देता हैं वहीँ आसमा बुरा सा मुँह बनती हुई सामने T.V की तरफ देखने लगती हैं...................

" बोलो न darling..................baat क्या hain..................tumhein कुछ चाहिए क्या!!!!!!!!!! " और सैम आसमा के हसीं से चेहरे की तरफ देखता hua.............apne हाथों को उसके गलों पर टच करता हुआ............... बोल पड़ता हैं वहीँ आसमा टकटकी लगाए बड़े ध्यान से सैम के तरफ देखने लगती हैं...........

" हाँ chahiye................aap दे सकोगे मुझे .............बोलिये................" और आसमा धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ सैम बड़े गौर से आसमा के चेहरे की तरफ देखने लगता हैं............

"आखिर मेरी डार्लिंग को ऐसा क्या चाहिए ज़रा मैं भी तो जानू..............." और सैम इस बार आसमा के दोनों गलों पर अपने दोनों हाथों को हौले से रखता हुआ धीरे से फिर बोल पड़ता हैं वहीँ आसाम बड़े गौर से सैम के चेहरे को बस निहार रही thi.............kuch देर खामोश रहने के बाद आसमा धीरे से अपनी बात कहती हैं.........

"satisfaction....................mujhe सटिस्फैक्शन चाहिए sam...............kya आप दे सकोगे...................." और आसमा बड़े गौर से सैम के चेहरे की तरफ देखने लगती हैं वहीँ सैम अजीब सी नज़रियों से अब आसमा को देख रहा tha.............aaj उसकी बीवी का ऐसा बर्ताव उसे बहुत हैरान कर रहा tha..............issey पहले उसने आसमा का ऐसा रूप कभी नहीं देखा था............

" ये कैसा पागलों जैसा सवाल हैं aasma..................tum होश में तो ho.............tumhein पता भी हैं की तुम क्या कह रही हो............" और सैम अजीब सी नज़रियों से आसमा के चेहरे की तरफ देखने लगता hain.............usey समझ में नहीं आ रहा था की आखिर आज आसमा को हुआ क्या हैं...........

" हाँ पता हैं sam.................bahut ाचे से पता hain.................mujhe ये दौलत शौरत नहीं chahiye...............mujhe बस दो पल का सुकून chahiye.............tum वो सुकून लेकर दे bus...................main तुमसे और कोई शिकवा गिला नहीं karungi..................kuch न कुछ कमी सी रहती हैं मेरी लाइफ mein.................humesha कुछ खालीपन सा लगता hain..............kya तुम उस खली जगह को भर dogey.............bolo न सैम.................." और आसमा की आँखें सुर्ख लाल होने लगती hain............ek अजीब सा खुमार उसपर चाय हुआ tha....................uski आँखें भी नुम हो गयी thi...................wo फ़ौरन अपने सीने पर लगा दुपाता हटा देती हैं और उसे फर्श पर गिरती हुई.................. सैम के गॉड में आकर उसके दोनों पैरों पर अपने दोनों जांघों को रखती hui......................uske सामने फेस करके बैठ जाती hain.............aur अपनी दोनों बाहें सैम के गले में डालकर सैम के चेहरे को बहुत ध्यान से देखने लगती hain............wahin सैम के चेहरे का रंग कुछ फीका सा पढ़ गया था.............

" ऐसे क्या देख रहे हो sam....................mujhe प्यार karo....................aaj मेरी इस प्यास को शांत करो do...................mere इस खालीपन को हमेशा हमेशा के लिए दूर कर दो........... मुझे सुकून चाहिए bus..............................aur कुछ नहीं......................" और आसमा सैम के एक हाथ को पकड़ती हुई सीधा अपने बाये चुकी पर रख देती हैं और उसे कसकर मसलने लगती hain...........wahin वो सैम का दूसरा हाथ अपने दोनों टांगों के बीच नीचे की ओरे ले जाती हुई.................. अपने छूट पर हौले से रख देती हैं और सैम के होंठों को ..............उसकी गुर्दें को बेह्तषा चूमने और चटनी लगती hain.................wahin आज सैम के होश उदय हुए they...............bolti तो आज वैसे भी आसमा ने उसकी बंद कर hi दी thi................aasma का ऐसा रूप न तो उसने इससे पहले कभी देखा tha........................aur न कभी महसूस किया था...........

इस वक़्त आसमा का बदन किसी आग के भाटी के समां टप्प रहा tha.....................uski सांसें पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी thi................lumbi लुम्बी सांस लेने की वजह से उसकी बड़ी बड़ी चूचियां तेज़ी से ऊपर नीचे की तरफ हो रही thi..............wahin सैम का लुंड पूरे परवाने चढ़कर बोल रहा था...............

आसमा फ़ौरन अपने हाथों को हरकत करती हुई.............. सैम के शर्ट के एक एक बटन्स को ओपन करने लगती hain...............fir उसके पेण्ट की बेल्ट को खोलती hui...................uske पेण्ट को नीचे की तरफ सरकने लगती hain...............fir वो उसके बना को निकलती hain.............aur आंत में उसके अंडरवियर के ऊपर से hi उसका लुंड पकड़ लेती हैं और उसे ज़ोरों से हिलने लगती hain.........aasma के नरम और नाजुक हाथों के स्पर्श से hi सैम बायकला सा जाता हैं.................

वहीँ सैम aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh.........oooooooooooooohhhhhhhhhhhhhh करता हुआ ज़ोरों से सिसकने लगता hain............aasma धीरे धीरे पूरी तरह से बेकाबू होती जा रही thi....................aab उसका बस उसपर न tha....................wo आज हुड्ड से गुज़र जाना चाहती thi.....................wahin सैम की आँखें जो खुली हुई अब पलकें झपकना भी भूल गयी thi...............usey तो यकीन नहीं हो रहा था की इस वक़्त जो उसके गॉड में बैठी हैं वो उसकी बीवी हैं.................

आसमा फिर अपने हाथ बढाती हुई पहले अपने सूट के तरफ ले जाती hain.................fir उसे उतरती hui......................apne ब्रा के हुक को भी खोल देती hain.................fir वो अपने हाथ अपने कमर पर रखती हुई तेज़ी से अपने लग्गी और पंतय दोनों को साथ साथ सरकती हुई उसे अपने बदन से अलग कर देती hain........aab आसमा के जिस्म पर बस ब्रा मौजूद तो थी जिसकी डोर भी अब खुली हुई thi..........jo उसके जोबन को बस नाम के लिए मात्रा छुपाये राखी thi..............aur कुछ hi देर में वो उस ब्रा को भी अपने जिस्म से अलग कर देती hain....................aab आसमा सर से लेकर पवन तक पूरी नंगी thi...................kapdey का एक भी टुकड़ा उसके बदन पर मौजूद नहीं था...............

हालाँकि उसे बहुत अजीब लगता था इस तरह पूरा नंगा होकर सेक्स करने mein...............magar आज न तो उसे ज़रा भी शर्म आ रही thi.............aur न hi उसे किसी की परवाह thi.................parwaah थी तो bus..................apne अंदर उठ रहे उस आग ki..............jisey वो हर हाल mein............har कीमत पर बुझाना चाहती thi..................aur आपने आपको सटिस्फी करना चाहती थी..........

इधर सैम का लुंड टैंकर खड़ा था जो इस वक़्त 5 इंच का tha..............aasma कुछ देर तक सैम को ऐसे hi निहारती रहती हैं वहीँ सैम भी आसमा के इस बदले हुए रूप को देखे जा रहा tha..............uske मुँह से एक भी अलफ़ाज़ नहीं निकल रहे they...............shayad दुर्र se............ya फिर आसाम के इस रूप से.............

आसमा फ़ौरन सैम के गॉड से उतरती हैं और नीचे फर्श पर घुटनों के बल बैठती hui.....................sam के लुंड को गप्प से अपने मुँह में पूरा ले लती हैं और उसे बेहताशा चूमने और चटनी लगती hain..............aaj वो पूरी तरह से पागल हो चुकी thi.................sex में pagal.............wahin सैम ज़ोरों से सिसक रहा tha................halanki आसमा को लुंड चूसना पसंद नहीं था मगर आज वो सैम के कहे बिना hi उसके लुंड को अपने मुँह में लेकर चूस रही thi...............chaat रही thi...............wahin सैम की हालत बिगड़ गयी thi..............uska कण्ट्रोल धीरे धीरे अब ख़तम होता जा रहा था...............

और कण्ट्रोल ख़तम भी होता क्यों naa.....................aasma जैसी चीज़ को कपड़ों में देखकर तो मर्दों के वैसे hi खड़े होने लगते हैं to................wo तो सैम के सामने पूरी नंगी thi....................to भला सैम आखिर कब तक बोल्ड होने से खुद को बचा pata................usey भी पता था की वो आज मैदान में ज़्यादा देर तक टिक नहीं payega............aur वैसे भी वो कौन सा हमेशा टिक hi पता था ...................जो आज टिक jayega.................aur परिणाम एहि हुआ bhi.............chand सेकण्ड्स बीते होंगे की सैम इस बार आसमा के सामने क्लीन बोल्ड हो hi गया.....................

अगले hi पल सैम आसमा का सर को अपने लुंड से हटाने लगा मगर आज शायद आसमा सैम का लुंड पूरा निचोड़ लेना चाहती thi..................kuch hi सेकण्ड्स में सैम ज़ोरों से हांफता हुआ अपना सारा छुम अस्मा के गुलाबी होंठ और मुँह के अंदर गिरता चला गया और जब तक उसके लुंड की आखरी बूँद तक आसमा ने नहीं चाट लिया वो उसके लुंड से नहीं hati...........aur न hi ऊके लुंड को chodhi....................aisa पहली बार था की आज आसमा न बल्कि सैम का लुंड चूसी thi..................balki वो उसका छुम भी पहली बार पी रही थी............

" बस हो गया aapka..............pata था mujhe..............aapse कुछ होने वाला nahin..............aab आप मुझे सटिस्फी kijiye..................meri पुसी को चाटिये.............." और आसमा अपने मुँह को पूछती हुई सैम के चेहरे की तरफ देखने लगती हैं वहीँ सैम अपने मुरझाये हुए लुंड को बस देख रहा tha...................aur शायद मुन्न hi मुन्न ये दवा भी कर रहा था की उसका लुंड वापस से खड़ा हो jaye.............magar उसे न तो खड़ा होना tha......so न hua.................is वक़्त सैम का लुंड मुरझकर बस 2 इंच में नज़र आ रहा tha....................jaise किसी छोटे से बाचे की लुल्ली हो.............

" ये मुझसे नहीं होगा aasma.......................tumhein पता हैं न मुझे ओरल सेक्स में बिलकुल भी इंट्रेस्ट नहीं hain................main ये नहीं कर sakta...............tum हो सके तो खुद hi फिंगरिंग कर लो....................." और सैम अपने अंडरवियर को पहनता हुआ एक एक कर अपने सरे कपड़े पहनने लगता हैं वहीँ आसमा जवाब में कुछ नहीं कहती और एक बार फिर उसके चेहरे पर मायूसी चा जाती हैं....................
 
अपडेट-09 (बी) (मेघा अपडेट)

कुछ देर तक वो वैसे hi उसी हाल में फर्श पर बैठी रहती हैं और न जाने क्या क्या सोचती रहती हैं .....................फिर वो एक एक कर अपने सरे कपड़े पहनने लगती hain.......................kuch देर बाद वो सैम से बिना कुछ कहे सीधा अपने बैडरूम में चली जाती हैं और सीधा अपने बिस्टेर पर पेट के बल सोती हुई ...............अपना सर तकिये में chupakar..............fafak फफक कर रू पड़ती hain................na जाने क्यों आज उसके ये आंसूं थमने का नाम नहीं ले रहे they.............wo एक बार फिर से दिल खोलकर रूना चाहती thi.............wahin सैम का मूड जैसे ख़राब था वो फ़ौरन बिना कुछ बताये बहार की तरफ चला जाता हैं.............

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रात के 8 बजे they.............sam बहार से आता हैं और कमरे को लॉक करता हुआ सीधा बैडरूम में चला जाता hain.............jahan आसमा अभी भी तकिये में अपना मुँह छुपाये रोटी हुई सू चुकी thi..............uske ाँसों से सारा पिलो भीग गया tha...............wahin सैम उसके बाजु में आकर सू जाता हैं और उसे अपनी तरफ घूमता hua...............aasma को अपनी तरफ करने लगता hain...........magar आसमा न hi अपना चेहरा उसके तरफ घूमती हैं और न hi कुछ कहती हैं............

" सुबह तुम मेरे लिए खाना बना dena.......mujhe 8 बजे hi निकलना hain.................aab गुस्सा भी छोड़ो jaan.............jo हुआ सो hua............"aur इस बार सैम आसमा को अपनी आगोश में लेता हुआ बड़े प्यार से आसमा के सर पर अपने हाथों को फेरने लगता hain.............wahi आसमा की आँखों में फिर से आंसू आ जाते hain..................magar वो एक शब्द कुछ नहीं kehti............na जाने क्यों आज उसका दिल बहुत रोने को कर रहा tha...............jis सुकून की उसे तलाश थी वो तो उसे कहीं मिली नहीं................

" ीाम सॉरी डार्लिंग..............." और सैम बड़े देर तक आसमा के बालों पर अपना हाथ फेरता रहता हैं और कब आसमा की आँख लग जाती हैं और कब वो सैम की बाँहों में अपना सर रखकर सू जाती हैं उसे कुछ पता hi नहीं चलता................

सुबह आसमा की जब नींद खुलती हैं तो इस वक़्त घडी में 5 बज रहे they.....................sam अभी भी सू रहा tha.............wo उसे सोता हुआ छोड़कर फ़ौरन बाथरूम में जाती हैं और फ्रेश होने के बाद सैम के लिए खाना और नाश्ता तैयार करने लगती hain.........nashta और खाना रेडी होने के बाद वो सैम को जगती हैं तो सैम हमेशा की तरह उसे अपनी बाँहों में खींच लेता हैं वहीँ आसमा के चेहरे पर भी एक प्यारी सी मुस्कान आ जाती हैं..........

" अब ज़्यादा मस्का मुट्ठ lagaiye..........time देखिये 7 बजने वाले hain...............aur 8 बजे आपको निकलना भी hain............aap जल्दी से तैयार हो जाइये मैं नाश्ता निकलती हूँ........" और सैम आसमा को अपनी गिरफ्त में लेता हुआ उसके गलों और होंठों को बेह्तषा चूमने और चटनी लगता हैं वहीँ आसमा इस बार उससे दूर हो जाती hain.........sam मुस्कुरता हुआ अपने बीएड से उठता हैं और फिर रेडी होकर अपना सामान पैक करके फिर आसमा से विदा लेता hain...............wahin इस बार आसमा खुद को नहीं संभल पति और सैम से लिपटकर फुट फुट कर रूनी लगती हैं वहीँ सैम की आँखें भी थोड़ी नुम हो जाती हैं................

वो बड़े प्यार से आसमा को अपने सीने से लगाए हुआ tha.........uske पीठ पर हाथ फेर रहा था...........

" मुझे अब चलना चाहिए jaan...............maine उन दो नौकरों को बोल दिया hain........agar तुम्हें कभी किसी चीज़ की अगर ज़रुरत पड़े तो वो दोनों बाजार से सामान ला dengey...........maine महीने भर का राशन लेकर रख दिया hain...........tumhein किसी चीज़ की तकलीफ नहीं hogi............chalta हूँ अब........" और सैम आसमा को अपने सीने से लगते हुए उससे दूर होने लगता हैं वहीँ ासना की आँखों से आंसूं नहीं थम रहे they..............sam अपने दिल पर पत्थर रखकर फ़ौरन उसके माथे पर किश करता हुआ ..............फ़ौरन उस घर से दूर हो जाता हैं वहीँ आसमा ख़ामोशी सी कड़ी ...................अकेली चुप चाप si.................darwaze के चौखठ par...................sam को अपने से दूर जाता हुआ देख रही थी..................

अब उसका दिल कहीं नहीं लग रहा tha.................ek पल तो उसे लगा की वो जाकर सैम को फ़ौरन रोक le.................magar nahin..............kuch सोचकर वो रुक जाती हैं और आपने आने वाली ज़िन्दगी के बारे में सब कुछ सोचने लगती hain.....................aab उसे जो भी करना था खुद hi करना tha...............aab वो इतने बड़े घर में बिलकुल अकेली thi...............ekdum akeli.........un दो नौकरों के saath.....................jahan उसकी ये ज़िन्दगी अब किस मोड़ पर जाएगी ये उसे खुद नहीं पता था....................

तो बे कॉन्टिनोएड.............................................
 
अपडेट-10 (ा) (मेघा अपडेट)

अब उसका दिल कहीं नहीं लग रहा tha.................ek पल तो उसे लगा की वो जाकर सैम को फ़ौरन रोक le.................magar nahin..............kuch सोचकर वो रुक जाती हैं और आपने आने वाली ज़िन्दगी के बारे में सब कुछ सोचने लगती hain.....................aab उसे जो भी करना था खुद hi करना tha...............aab वो इतने बड़े घर में बिलकुल अकेली thi...............ekdum akeli.........un दो नौकरों के saath.....................jahan उसकी ये ज़िन्दगी अब किस मोड़ पर जाएगी ये उसे खुद नहीं पता था....................

अब आगे.................................................................

सैम के जाने के बाद आसमा मुन्न मरती हुई .................सीधा हॉल में आती हैं और आकर चुप चाप से बैठ जाती hain.........................aur सब कुछ सोचने लगती hain................pehli बार अकेले रहते हुए उसे बहुत अजीब सा लग रहा tha................magar उसे अब इन सब चीज़ों की आदत भी तो डालनी thi..................wahin दूसरी तरफ सैम के जाने से हरी के चेहरे पर जैसे खुशियां लौट आयी thi..............usey ऐसा लग रहा था जैसे उसकी कोई बरसों की अधूरी इच्छा पूरी होने वाली hain............sam के जाने से अब आसमा को पाने की उसकी उमीदें बहुत हुड्ड तक बढ़ गयी thi.............aur वो उस उम्मीद को अब कैसे भी करके क़ायम रखना चाहता tha................chahe उसे उसके लिए जो कुछ भी क्यों न करना pade..............aasma जैसी माल को वो अपने हाथों से इतनी आसानी से जाने देने वालों में से वो नहीं था..............

उस दिन शांति और हरी दोनों जब काम पे गए तो आसमा ने उन्हें काम करने से साफ़ इंकार कर diya..............kyon की उसका थोड़ा भी मूड नहीं tha...................shanti और हरी दोनों अपना मुँह लटकाये सीधा अपने कमरे में आ gaye................wahin आसमा सारा दिन बिस्टेर पर इधर से उधर बस करवटें बदलती rahi..........................uska मुन्न बार बार सैम के तरफ जा रहा tha...............wahin कल की घटना किसी फिल्म की तरह उसकी आँखों के सामने घूम रही thi............kabhi उसके चेहरे पर मायूसी आ जाती ...............तो कभी bechaini.........................sara दिन वो बस एहि सब सोचती रही..........

शाम को शांति उसके पास आयी और आकर उसके बाजु में बैठ gayi...................aur बड़े ध्यान से आसमा के चेहरे की तरफ टकटकी लगाए देखती rahi...............kuch देर की चुप्पी के बाद आखिर शांति धीरे से बोल पड़ी...................

" memsaheb.....................aise कैसे काम chalega......................sara दिन तो आप घर में hi बस अकेली चुप चाप पड़ी rahi...............na आपने सुबह से कुछ खाया और न hi piya....................aise में तो आपकी तबियत भी ख़राब हो jayegi..............mere को dekho...................kya मैं मरद के बिना नहीं rehti......................shuru शुरू में थोड़ी बहुत तकलीफ सबको होती हैं फिर सब कुछ पहले जैसे सही हो जाता hain................aap पहले उठकर मुँह हाथ धो लीजिये मैं आपके लिए खाना लेकर आती हूँ................" और शांति इतना कहकर सीधा किचन में चली जाती हैं वहीँ आसमा धीरे से अपने बीएड से उठती हैं और अपना मुँह हाथ धोकर खाना खाने बैठ जाती hain..............wahin शांति भी उसके बाजु में बैठी बड़े गौर से आसमा के चेहरे को बस देख रही थी..............

" आप फ़िक्र कहे करती हैं memsaheb..........hum लोग हैं na..................hum आपको किसी भी चीज़ की तकलीफ कभी नहीं होने dengey.............."aur शांति हौले से अपना एक हाथ आसमा के कंधे पर रखती हुई............... वहीँ आसमा के चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान आ जाती hain..............wo अब बहुत हुड्ड तक नार्मल हो चुकी थी.............

शाम को वो मार्किट जाती hain............usey दो जोड़ी अपने लिए सूट खरीदना tha.................jaate जाते वो शांति को कल काम पे आने को कह गयी थी वहीँ शांति भी हंसी ख़ुशी अपने काम में लग गयी thi.......................market में आसमा ने दो जोड़ी शांति के लिए साड़ी kharidi.................kyon की शांति का कपडा पुराण भी हो चूका था और बीच बीच में फटा हुआ भी tha...............fir वो हरी के लिए दो जोड़ी t-shirt और 2 जोड़ी लोअर खरीदती हैं...............

" पता नहीं उस सांड में ये साइज होगा भी या nahin...................mere ख्याल से ये साइज हो जनि chahiye.............XXL शर्ट और लोअर XL............kuch सोचकर वो हरी और शांति के लिए दो दो जोड़ी kapdey....................aur अपने लिए दो सेट खरीदती हुई फ़ौरन अपने घर की तरफ चल पड़ती hain.............chal तो वो रही थी मगर उसके दिमाग में इस वक़्त बहुत अजीब अजीब से ख्यालात आ रहे थे................

" शांति तो कह रही थी की उसका हथियार बहुत बड़ा hain.........aur मोटा bhi.........................keh रही थी की लोअर में उसका वो साफ़ नज़र आता hain..................zara मैं भी तो देखूं की शांति कितना सच बोल रही thi.........aisa थोड़ी न होता hain................kisi इंसान का इतना बड़ा कैसे हो सकता hain...............hoga थोड़ा बहुत मोटा और bada.....................wo तो शांति मुझसे बस अपनी बात बढ़ा चढ़कर कह रही hogi...................jab ये सांड इस लोअर को पहनेगा तो hi पता chalega.........ki वो कितने पानी में हैं..............." और आसमा के मुन्न में ये सब ख्याल आते hi उसके चेहरे पर शर्म और लाज की लाली साफ़ नज़र आने लगती hain..............chehrey पर उसके हल्की मुस्कान तो थी मगर अंदर hi अंदर उसे शर्म भी बहुत आ रही थी.........

वो कभी कभी एहि सोच रही थी की कैसे वो ये सब किसी पराये मर्द के बारे में सोचने lagi....................ye सब सोचना भी उसके लिए पाप hain...........haraam hain..............wo अब तक पूरी तरह पाक साफ़ thi....................dimag भले hi तर्क- वितर्क कर रहा था मगर दिल तो बार बार इन्ही सब चीज़ों की तरफ जा रहा tha...................dil में अजीब अजीब से ख्यालात बार बार उठ रहे थे जो मुन्न को विचलित करते जा रहे they.......................thode देर बाद आसमा घर पहुंची और मैं गेट पर hi उसके दोनों नौकर खड़े हुए दिखाई दिए................

हरी की नज़र जब उसपर पड़ी तो हमेशा की तरह उसकी आँखें चमक uthi......................safed रंग की सूट में आसमा बहुत सूंदर लग रही thi...........laggy स्किन से पूरी तरह चिपकी होने की वजह से उसकी गांड और भरी हुई जांघें हरी के जैसे तन बदन में आग लगा रही thi.............wo बड़े गौर से उसके बदन का पूरा पूरा जायज़ा ले रहा tha.....................aasma को अपनी तरफ ऐसे आता हुआ देखकर वो हौले से मुस्कुरा देता hain.........wahin शांति भी आसमा के तरफ देखती हुई धीरे से मुस्कुरा देती हैं..........

" मैं तुम्हारे लिए ये दो जोड़ी कपड़े लायी hoon.................tum दोनों के कपड़े बहुत ज़्यादा गंदे हैं और फाटे हुए bhi................is लिए मैंने सोचा की तुम्हारे लिए नए कपड़े खरीद loon..............mere ख्याल से ये तुम में फिट हो जाएंगे.................." और आसमा धीरे से हरी की तरफ उन कपड़ों को बढाती हुई उसके हाथ में दे देती हैं वहीँ हरी के चेहरे पर खुशियां झलक पड़ती hain............wo कभी उसके उभरी हुई चूचियों को देख रहा था to..................kabhi उसकी बहार की तारा उठी हुई गांड को...............

" शुक्रिया memsaheb...............aap बहुत ाची हैं......................." और हमेशा की तरह इस बार हरी जान बूझकर आसमा के उँगलियों और हाथों को छूटा हुआ धीरे से मुस्कुरा देता हैं मगर आसमा न hi उससे और कुछ कहती हैं और न hi उसके हरकतों का कोई विरोध करती hain..................ek बार फिर से उसके साँसों में फिर वहीँ स्मेल घुलने लगी थी जिससे आसमा फिर से मदहोश हो रही thi..................uska तन बदन में एक अजीब सा सेंसेशन होना शुरू हो गया tha....................humesha की तरह वो एक बार फिर से अपनी आँखें बंद करती हुई एक लुम्बी सी सांस लेती हैं और हरी के बदन से उठने वाली उस स्मेल को अपने अंदर धीरे धीरे उतरने लगती hain............us स्मेल में एक अजीब सा नशा tha........................ajeeb सा खुमार tha............jo आसमा को पागल करती जा रही थी..............

आसमा शांति और हरी को उनके कपड़े देती हुई सीधा अपने कमरे की तरफ निकल पड़ती हैं वहीँ हरी अपने कपड़ों को हाथों में लिए hue...................aasma के बदन को बड़े hi गौर से निहार रहा tha.............jab भी आसमा चलती वो उसकी थिरकती हुई गांड को खा जाने वाली नज़रियों से बस घूरा karta...............aur तब तक हरी उसे ऐसे hi देखता रहा जब तक आसमा उसकी नज़रियों से ओझल नहीं हो gayi...................halanki आसमा को भी ाचे से पता था की हरी की नज़र इस वक़्त कहाँ पर hogi...............aur वो इस वक़्त क्या देख रहा होगा ये भी उसे बहुत ाचे से मालूम tha................wo न hi हरी के तरफ मुड़कर देखती हैं और न hi उसे कुछ कहती हैं..............

" हमारी मेमसाहेब कितनी ाची हैं................" आसमा के जाते hi शांति ख़ुशी से चहक उठती हैं वहीँ हरी के चेहरे पर भी एक अजीब सी मुस्कान आ जाती hain...........wo फिर आसमा के बारे में न जाने क्या क्या सोचने लगता हैं.........
 
अपडेट-10 (बी) (मेघा अपडेट)

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दूसरे दिन सुबह का वक़्त tha.......................aasma फ़ोन पर सैम से बात कर रही thi.................wahin दूसरी तरफ शांति बहार बरामदे में झाड़ू लगा रही thi..................hari आज नहाकर अपने कमरे में बैठा हुआ अपने जिस्म पर सरसो का तेल लगा रहा tha................tel लगाने से पहले वो करीब 200 बार डिप्स मार चूका tha............kasrati बदन होने की वजह से वो हर रोज़ 1/2 घंटे कसरत किया करता tha..................mehanti तो वो शुरू से था hi इस वजह से उसे अब तक कोई बीमारी छु भी नहीं पायी थी..........

वैसे तो हरी हफ्ते में एक बार hi नाहटा tha..............kyon की उसे नहाना ज़्यादा पसंद नहीं tha...............aur आज वो इस लिए नहाया था क्यों की कल उसकी मेमसाहेब ने उसके लिए दो जोड़ी नए कपड़े जो खरीदे they.................upar के हिस्सों में तेल लग जाने से उसने बना और नयी t-shirt अपने बदन पर दाल राखी thi.........jo अब उसके बदन पर फिट आ रही thi...................aur नीचे बस उसने अपना अंडरवियर पहना हुआ tha................wo सरसो का तेल अपने हाथों में लेता हुआ अपने दोनों टांगों पर उस तेल को ाचे से छिपाद रहा था............

जिससे उसका कला बदन उस तेल में और भी ज़्यादा चमक रहा tha..............jab दोनों पैरों में तेल लग गया तो उसने अपने पहने हुए अंडरवियर को नीचे घुटनों तक सरका diya............jissey उसका विशालकाय लौड़ा किसी काले नाग की तरह फनफनाता हुआ बहार की तरह लहराने laga.................mano जैसे किसी बिल में घुसने को बेताब हो रहा ho..................waise देखा जाये तो हरी का लौड़ा सच में बहुत बड़ा tha...................uska लौड़ा जब पूरा खड़ा होता तो करीब 10 इंच तक jata.........................aur मोटा करीब 3.5 इंच या फिर 4.............जो सच में किसी मोठे नाग की तरह नज़र आ रहा था....................

इतना मोटा लुंड तो शायद hi किसी का होता hoga....................hari अपने हाथों में सरसो का तेल लेता हुआ उस शिहि को ऊपर से धीरे धीरे अपने लौड़े पर गिरने लगा जिससे कुछ तेल बेहटा हुआ उसके लुंड के रास्ते उसके दोनों ांडों तक जाने laga...............jab तेल पूरी तरह उसके लौड़े में सं गया तब वो उस तेल की शीशी को साइड में रखता हुआ धीरे धीरे अपने लुंड की मालिश करने laga.....................jaise जैसे वो मालिश करता जा रहा था उसका कला लुंड धीरे धीरे अपना फन फैलता जा रहा tha................kuch hi मिनट में उसका लौड़ा पूरा खड़ा हो गया जो वाकई दिखने में बेहद खतरनाक नज़र आ रहा tha...............jo किसी भी औरत की बुर की धज्जियां उदा देने के लिए बस काफी था.....................

" सो जा मेरे baachey...................aabhi यहाँ तेरी दाल नहीं गलने wali.................jis दिन तेरी यहाँ दाल गाल गयी न उस दिन तेरी किस्मत का सितारा बुलंदियों पर hoga.................kyon की मैं जिस बिल की तलाश में हूँ वो बिल तुझे जानत की सैर karwayegi...........aisa सुख देगी जो तुझे आज तक कभी मिली hi nahin..............halanki उस बिल तक पहुंचना थोड़ा मुश्किल हैं मगर ...............नामुमकिन nahin.................aur वैसे भी मेमसाहेब मुझे ाचे से जानती कहा hain......................ki मेरे अंदर ठरक कितनी ज़्यादा hain................dheere धीरे मैं अपनी मेमसाहेब को ऐसा बस में करूँगा की वो मेरे लिए वो सब कुछ करेगी जो आज भी मेरा एक सिर्फ सपना हैं.................." और हरी की आँखें दुबारा से चमक जाती हैं वहीँ वो पूरे मुन्न से अपने लौड़े पर तेल लगा रहा tha................wo इस वक़्त अपने सोच में इस कदर डूबा हुआ था की उसे ये भी होश नहीं था की सामने का मैं दूर बस सत्ता हुआ hain..............na की बंद हैं............

अगले hi पल वो दरवाज़ा खुलता हैं और शांति जैसे hi अंदर कमरे में आती hain.....................aur जब उसकी नज़रें सामने बैठे हरी के उस मूसल लुंड पर जब पड़ती hain....................uski मुँह से आवाज़ जैसे निकालनी बंद हो जाती hain...............aankhein जैसे फुट कर बहार निकल आयी ho....................ek पल तो शांति को समझ में नहीं आया की वो करे क्या!!!!!!!!!!!!!!!!!

वो वहीँ हुक्की बक्की सी बेसुध कड़ी .......................हरी के उस 10 इंच मोठे लौड़े को अपनी आँखें फाड़े देख रही thi.................sach तो ये था की उसने भी अपनी पूरी ज़िन्दगी में इतना मोटा और बड़ा लुंड इससे पहले कभी नहीं देखा tha..................halanki इससे पहले शांति ने बहुत से लुंड खाये थे मगर इतना बड़ा और mota...........ye उसकी सोच से भी परे tha.................sach hi सुनी थी वो उसके बारे mein..................itna मोटा लुंड लुंड जिस औरत के अंदर जायेगा उसकी बुर की धज्जियां ज़रूर उड़द जाएगी...............

अभी भी वो उस दरवाज़े पर अपनी आँखें kholi.................saath में उसका मुँह भी पूरा खुला hua..............taktaki लगाए हरी के उस काले नाग को देखे जा रही thi.....na तो उसकी नज़रें एक पल के लिए वहां से हुत्त रही thi...........aur न hi उसके मुँह से एक लफ्ज़ निकल रहे they................kuch देर होश में आने के बाद हरी अपने अंडरवियर को ऊपर की ओरे सरकता हैं और चौकी पर पड़ी लोअर को खड़े होकर पहने लगता hain............underwear पहने से उसका लुंड जैसे उस कपड़े को बहार फाड़कर निकल जाने को बेताब हो रहा था...............

"yyyeeeeee........................sssaaaaabbb................kkyaaaaaa haaaiiinnnnnnnnnnnnnnnnn..............." और शांति जैसे अपने मुँह से थूक निगलती हुई धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ उसका कलेजा ज़ोरों से धड़क रहा tha.................aisa लग रहा था जैसे अभी बहार को निकल aayega.................aankhein अभी भी फैली हुई thi...............shanti के तो जैसे आज होश गम हो गए थे.............

" तुझे दरवाज़ा ठकठकाकर अंदर नहीं आना चाहिए tha..................ismein मेरी क्या गलती हैं............." और हरी लोअर को पहनता हुआ धीरे से बोल पड़ा वहीँ शांति अब उसके लोअर के ऊपर उठे उस उभार को बड़े hi गौर से देखे जा रही thi...........sach hi था उस लोअर में बड़ी hi आसानी से उसके लौड़े का साइज नज़र आ रहा tha................shanti एक पल और वहां नहीं रुकती और फ़ौरन बहार की तरफ भाग जाती hain.................aise लग रहा था जैसे उसके जिस्म में किसी ने कुर्र्रेंट चुवा दिया हो......................

काफी देर तक उधर आसमा शांति और हरी का इंतज़ार करती रही.................. और जब वो दोनों नहीं आते तब वो कुछ सोचकर बहार की तरफ निकल पड़ती hain.................bahar बरामदे में शांति अकेली बैठी हुई न जाने किन ख्यालों में कहीं गम thi..............shanti को ऐसे खोया हुआ देखकर आसमा हौले से उसके कंधे पर अपना हाथ रखती हैं और अजीब सी नज़रियों से शांति के चेहरे की तरफ देखने लगती hain..................apni मेमसाहेब को ऐसे अपने करीब आता हुआ देखकर शांति चुहुक सी पड़ती hain.................wahin उसके माथे पर पसीने की चाँद बूँदें थी..............

" तुम ठीक तो हो न शांति...................9 बज रहे .............तुम दोनों आज काम पर क्यों नहीं आये.................." और आसमा टकटकी लगाए शांति के चेहरे की तरफ बड़े गौर से देखने लगती हैं वहीँ शांति के चेहरे का रंग एक बार फिर से फीका पढ़ चूका tha................hari का लुंड उसकी आँखों से हटाए नहीं हुत्त रहा tha..............wo उस घटना को एक पल के लिए भी भूला नहीं पायी थी...............

" memsaheb.....................mujhe थोड़ी घबराहट सी हो रही हैं.............." और शांति जैसे अपनी बात बीच में ख़तम करती हैं वहीँ आसमा बड़े गौर से अब भी शांति के चेहरे को बस निहार रही थी............

" वो किस liye...............kya तुम्हारी तबियत ठीक नहीं................" और आसमा जैसे अगले hi पल बोल पड़ती हैं वहीँ शांति धीरे से अपनी बात कहती हैं...........

" ऐसी बात नहीं हैं memsaheb................jab मैं सुबह आँगन में झाड़ू लगा रही टी tab................tab.............hari नहाकर अपने बदन की मालिश कर रहा tha........to मैंने उसे मालिश करते हुए आज देख लिया................" और शांति धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ आसमा की हंसी चूत जाती हैं.............

" to..................maalish करते देख लिया तो कौन सा पहाड़ टूट pada................uski बीवी नहीं हैं तो वो खुद hi करता होगा na.............apni मालिश..................." और आसमा धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ शांति के चेहरे पर अब भी बारह बजे हुए थे................

" वो सब तो ठीक हैं मेमसाहेब मगर वो मालिश वहां की कर रहा tha......................apne हथियार की.................." और शांति की आँखें जैसे एक बार फिर से उस घटना को याद करके बड़ी हो जाती हैं वहीँ आसमा का कलेजा एक बार फिर ज़ोरों से धड़क उठता हैं......................

तो बे कॉन्टिनोएड....................................................................
 
भाई मेरी टास्ते बुरा नहीं हैं और न hi मेरी सोच ऐसी hain....Aisa नहीं हैं की मैं कहानी लिखता हूँ तो दिन रात कहानी के बारे में बस सोचता hoon..aisi सोच न मेरी कभी थी और न रहेंगी. मन की एक दो कहानी मेरी इस तरह की हैं मगर लोगों की डिमांड की देखकर मैं ऐसा लिखता हूँ..

वैसे मुझे अडुल्टेरी लिखने का शौक नहीं हैं और न नैन कोई अडुल्टेरी कहानी का राइटर हूँ . मुझे तो रोमांस थ्रिल और हॉरर लिखने में बेहद मज़ा आता हैं मगर यगण लोगों को साफ़ सुथरी कहानियां पसंद नहीं aati...dekh लो मेरी थ्रेड हॉरर में कितने रिप्लाई आ रहे अंदाज़ा लगा लो.. वैसे भी ये मेरी लास्ट कहानी हैं अडुल्टेरी सेक्शन में उसके बाद कभी भी मैं इस टाइप की कहानी नहीं likhunga.agar दिल करे तो पढ़ना भाई नहीं तो कोई बात नहीं
 
अपडेट-11 (ा) (मेघा अपडेट)

" वो सब तो ठीक हैं मेमसाहेब मगर वो मालिश वहां की कर रहा tha......................apne हथियार की.................." और शांति की आँखें जैसे एक बार फिर से उस घटना को याद करके बड़ी हो जाती हैं वहीँ आसमा का कलेजा एक बार फिर ज़ोरों से धड़क उठता हैं......................

अब आगे...............................................................................

शांति की ऐसी बाटिओं को सुनकर आसमा के तन बदन में जैसे एक बार फिर से आग लग गयी thi.....................uski सांसें फिर से तेज़्ज़ चलने लगी थी और दिल पल पल बेकाबू होता जा रहा tha............kuch देर की चुप्पी के बाद शांति दुबारा से बोल पड़ती हैं.................

" memsaheb................aisi बात नहीं हैं की मैंने अब तक किसी भी मर्द का हथियार नहीं देखा hain.................magar..............is हरी के जैसा आज तक नहीं देखा hain................iska तो हथियार देखकर मेरी आँखें फटी की फटी रह gayi................jo मैंने हरी के बारे में अब तक सुना था वो सब सच था मेमसाहेब.................." और शांति अपना थूक गटकते हुए धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ आसमा अंदर hi अंदर बेचैन होती जा रही thi...............uske तन बदन में एक अजीब सी सनसनाहट होने लगी थी................

" बस करो shanti.................uska हथियार बड़ा हैं या छोटा उससे हमें क्या लेना dena..............tum उसे लेकर फ़ौरन ऊपर आवो और कमरे की साफ़ सफाई में लग jawo..............main तुम दोनों का इंतज़ार कर रही हूँ............." और आसमा फ़ौरन शांति की तरफ बिना देखे सीधा अपने कमरे की तरफ चल पड़ती hain..................uske दिमाग में शांति की कही हुई एक एक बात जैसे बम के धमकी की तरह फुट रही thi.............jitna वो खुद को नार्मल करने की कोशिश कर रही थी उतना hi वो अंदर hi अंदर बेचैन होती जा रही thi................jaise hi वो बिस्टेर पर जाती हैं एक लुम्बी सी सांस लेती हुई बिस्टेर पर जाकर लेट जाती हैं और शांति की कही हुई एक एक बातों को दुबारा से सोचने लगती हैं..........

हरी का लुंड उसके दिमाग से निकलने का नाम नहीं ले रहा tha..............wo अंदर hi अंदर अब मचलती जा रही thi.............thoder देर बाद शांति अंदर आयी और उसके पीछे पीछे हरी भी साथ साथ चल रहा tha............jaise hi आसमा की नज़र अपने सामने खड़े हरी पर पड़ी वो उसे सर से लेकर पवन तक..................... ऊपर से लेकर नीचे तक निहारती rahi.................jab उसकी नज़र उसके लोअर पर पड़ी और उस लोअर के अंदर उसका विशाल लौड़ा जो छुपा हुआ tha.........jiska उभार साफ़ उस लोअर में भी नज़र आ रहा tha........uske टांगों के बीच का वो हिस्सा काफी उठा हुआ और फूला हुआ सा दिख रहा था जो आसमा को एक बार फिर से बेचैन कर देने के लिए बस काफी tha............wahi हरी बहुत ध्यान से आसमा को टकटकी लगाए बस देखे जा रहा था........

"तुम लोग ऊपर chalo.................main अभी आती हूँ............." और आसमा अपनी साँसों को एक बार फिर से दुरुस्त करती हुई धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ हरी आसमा की तरफ एक बार धीरे से मुस्कुराता हुआ ऊपर कमरे की तरफ चल पड़ता hain................aasma अब चाह कर भी नार्मल नहीं हो पा रही thi............thode देर बाद वो बिस्टेर से उठती हैं और अपना दुपटा सही करती हुई सीधा ऊपर के कमरे की तरफ चल पड़ती hain............jaise जैसे उसके कदम आगे बढ़ रहे थे वैसे वैसे उसके दिल में बेचैनी भी बढ़ती जा रही thi.............jaise hi वो ऊपर गयी शांति दूसरे कमरे की साफ़ सफाई कर रही थी वहीँ हरी दूसरे कमरे की साफ़ सफाई में लगा हुआ था...............

जब हरी की नज़र आसमा पर पड़ी उसके चेहरे पर एक गन्दी सी हंसी झलक padi....................wahin आसमा एक नज़र उसकी तरफ देखती हुई उसके काम पे ध्यान देने लगी...............

" मैं कैसा लग रहा हूँ memsaheb.................in कपड़ों में................." और हरी ललचायी हुई नज़रियों से आसमा के चेहरे की तरफ एक नज़र देखता हुआ बोल पड़ा............ वहीँ आसमा उसके सवालों का जवाब दिए बगैर कुछ देर तक चुप rahi...............jab हरी को उसके सवालों का कोई जवाब नहीं मिला तो हरी दुबारा से वहीँ सवाल आसमा से करने लगा.............

" तुम यहाँ नुमाईश करने नहीं आये ho.....................kaam करने आये ho.................apne काम से काम रखो................" और आसमा हरी को तिरछी नज़रियों से घूरती हुई बोल पड़ती हैं वहीँ हरी जवाब में धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं............

" हम कोई देखने की चीज़ थोड़ी न हैं memsaheb........................jo कोई हमें dekhega........................dekhney की चीज़ तो आप हैं.............." और हरी आसमा के बदन को सर से लेकर पवन तक अपनी नज़रियों से स्कैन करता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ आसमा बुरा सा मुँह बनती हुई फ़ौरन अपनी नज़रें दूसरी तरफ फेर लेती hain.....................is वक़्त उसके चेहरे पर गुस्सा था.................

"एक बात कहे memsaheb...............aap गुस्से में भी बहुत प्यारी लगती hain..................aap हैं hi इतनी खूबसूरत..................." और हरी आसमा को फिर से चढ़ते हुए धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ आसमा इस बार गुस्से से बहार निकल जाती hain........bina उसके सवालों का जवाब दिए बगैर......................

" पता नहीं खुद को क्या समझता hain.................naukar हैं तो वो नौकर की तरह rahe...............kamina ............देखता तो ऐसे हैं जैसे वो मुझे काचा खा jayega...................lagta हैं आज तक उसने कभी कोई लड़की नहीं dekhi..............jo मर्ज़ी उसे करना हो वो करे मगर वो मुझे कभी हासिल नहीं कर पायेगा..................." और आसमा अपने आप बडबडी हुई सीधा अपने कमरे की तरफ जाने लगती hain..............thode दूर जाने पर उसके कदम खुद बा खुद रुक जाते hain..............kuch ख्याल आते hi वो दुबारा से मुड़ती हैं और फिर से हरी के कमरे की तरफ जाने लगती हैं..............

एक बार फिर से उसका कलेजा ज़ोरों से धड़कने लगा tha....................ek अजीब सी बेचैनी बार बार उसके अंदर उठ रही thi..................jaise hi वो हरी के कमरे में जाती हैं और जब हरी की नज़रें फिर से अपने सामने खड़े अपनी मालकिन पर पड़ती हैं वो फिर से जवाब में धीरे से मुस्कुरा पड़ता hain...........wahin आसमा चुप चाप सी हरी को बस घूरे जा रही थी............

" अगर काम हो गया हो तो ऊपर टेरेस पर अभी चलना hain...................pani की टंकी का आउटगोइंग पाइप ठीक से सेट नहीं हो raha.........jissey पानी ओवरफ्लो होता हुआ पूरे टेरेस पर फ़ैल raha.............tum चलकर उसे अभी सेट कर दो................." और आसमा जैसे हरी को हुकुम देती हैं वहीँ हरी जवाब में मुस्कुराता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं.............

" जो hukum.........memsaheb...............aap जो आदेश दे और वो मैं न karun...................aisa भला हो सकता hain............aap chaliye...................main देख लेता हूँ.............." और हरी उस काम को छोड़ता हुआ आसमा के पीछे पीछे फिर से चल पड़ता hain.................wahin आसमा धीरे धीरे चलती हुई सीढ़ियों से ऊपर की तरफ जा रही thi.............aagey आगे चलने से हरी की नज़रें तो जैसे आसमा के गांड पर जैम सी गयी thi..........wo उसकी मटकती हुई गांड के हर एक एंगल और व्यू को बहुत hi बारीकी से अपनी नज़रियों से स्कैन कर रहा tha.............wo भी अंदर hi अंदर मचल उठा tha................aasma की लग्गी में चिपकी उसकी टाइट गांड और कातिलाना फिगर उसके मुन्न को बार बार विचलित कर रही thi...............wo hi जनता था की कैसे उसने खुद को काबू किया हुआ था..............

" आपका घर बहुत सूंदर हैं memsaheb..............................bilkul आपकी तरह..............." और हरी एक बार फिर आसमा के गांड को घूरता हुआ धीरे से बोल पड़ा वहीँ आसमा एक नज़र उसकी तरफ देखती हुई .........................सामने अपने हाथों की तरफ इशारा करती हुई ...............बिना उसके बाटिओं का जवाब देती hui.....................dheere से बोल पड़ी.....................

" वो सामने टंकी का ओवरफ्लो पाइप लगा हुआ hain..............magar जब पानी भर जाता हैं तो ये पाइप अपने आप निकलकर इसका सारा पानी टेरेस पर फैलने लगता hain...........tum इसे ठीक कर दो..........." और आसमा लुम्बी सी सांस लेती हुई धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ हरी इस बार उसके करीब जाता हैं और आसमा के सांसों में फिर से वहीँ स्मेल घुलने लगती हैं जिससे आसमा एक बार फिर से बेचैन हो उठती hain.............uski आंखें बंद हो गयी थी और वो एक लुम्बी सांस लेती हुई खुद को संभालने की नाकाम कोशिश करने लगती हैं...........
 
Update-11(B) (मेघा अपडेट)

हरी वहीँ एक फुट की दूर पर फर्श पर जाकर बैठ जाता हैं और उस पाइप को ाचे से जायज़ा लेने लगता hain................achi तरह से देख लेने के बाद उसके चेहरे पर एक कमीनी सी मुस्कान तैर जाती हैं...............

" ये क्या memsaheb...................overflow का लोहे की पाइप जो 1 इंच मोती हैं ................और जो बहार प्लास्टिक की पाइप इससे जुडी हैं वो 1.5 इंच moti..................aap hi बताइये ये इसमें कहाँ फिट baithega....................lickage तो होगा na...............haan अगर ये उल्टा होता तो काम बन jata...............lohe की पाइप 1.5 इंच मोती होती और प्लास्टिक की पाइप अगर एक इंच मोती ..............तो ये इसमें बहुत टाइट और फिर बैठता.........

आप आप hi bataiye...............ye लोहे की पाइप की छेद hain..................aur इसमें अगर इस छेद में छोटा सा चीज़ डालूं तो ये इसमें कैसे फिट baithega.............ye इस छेद में नहीं घुस jayega.................uske लिए तो इस छेद को मोटा करना padega............mota करने के लिए इस छोटे से छेद में कोई मोती सी पाइप घुसनी पड़ेगी ...............तब जाकर काम banega.............agar इससे पतला पाइप हैं तो दीजिये मैं आपको इस छेद में फिट करके दिखता hoon..........fir लीकेज का सवाल hi नहीं उठेगा..................." और हरी बहुत hi गंदे तरीके से अपने हाथों को इशारा करते हुए आसमा को समझने लगता hain..............wahin आसमा के चेहरे का रंग एक दम से गुलाबी पढ़ जाता hain....................sharam से उसकी नज़रें नीचे की तरफ झुक जाती hain....................kaleja एक बार फिर से ज़ोरों से धड़कने लगता hain..............wo बहुत ाचे से हरी के कहे हुए बाटिओं का मतलब समझ रही thi.......ki वो कौन से छेद की बात कर रहा हैं..................

" wo.................waaaahaaannnnnnnnnn प्पआर हैं.............." और आसमा की जुबान जैसे लड़खड़ा जाती हैं उसकी सांस बहुत ज़ोरों से चल रही थी जिससे उसकी बड़ी बड़ी चूचियां तेज़ी से ऊपर नीचे की तरफ हो रही thi...............hari आसमा की हालत देखकर मंद मंद मुस्कुरा रहा tha..............uska दिल तो कर रहा था की वो आसमा की ऊपर नीचे हो रही चूचियों को कसकर पकड़ lein..............aur उन्हें जी भरकर बस मसलता rahe............magar वो इस खेल में बहुत पुराण खिलाडी tha.............wo बहुत ाचे से जनता था की औरत को कैसे काबू में किया जाता हैं................

वो सामने की तरफ जाता हैं और वहां दो तीन साइज की प्लास्टिक की पाइप राखी हुई थी वो उसे लता हैं और उस ओवरफ्लो के पाइप पर लगाकर चेक करने लगता hain...........aur एक 1/2 इंच की प्लास्टिक की पाइप को अपने हाथों में लेता हैं और उसे आसमा की तरफ दिखता हुआ वो उस पाइप को लगाने लगता हैं.......................

" इस पाइप को लगा दें memsaheb.........................dekhiye इसका छेद बहुत छोटा hain.................aur बहुत टाइट bhi.............agar ये इसमें फिट बैठ गया तो लीकेज का सवाल hi नहीं rahega..............uske लिए मुझे इस प्लास्टिक के पाइप की छेद को थोड़ा ढीला और मोटा करना hoga..................agar आप कहे तो मैं कर दूँ isey..................dheela. ......................." और हेयर के चेहरे पर एक बहुत hi गन्दी सी मुस्कान तैर जाती हैं वहीँ आसमा का दिल कर रहा था की वो फ़ौरन यहाँ से कहीं दूर भाग jaye..................wo उसके सरे गंदे इशारे समझ रही थी मगर जो भी हरी उससे कह रहा था ठीक hi तो कह रहा tha...................magar उसके बताने और समझने का तरीका ज़रूर गन्दा था...............

" kkkkaaaarrrrr....................ddoooo..........jjooo tumhein..............theek लागे................" और आसमा की सांस फूलने लगती hain.............uske तन बदन में एक अजीब सी सेंसेशन हो रही thi.............dil और दिमाग दोनों बस में नहीं they...............wo एक बार फिर अंदर hi अंदर मचल उठी थी....................

"वैसे memsaheb.......................mujhe टाइट चीज़ों को ढीला करने में बड़ा hi मज़ा आता hain...........ye इतना टाइट हैं की ये इस लोहे की पाइप में कहाँ आसानी से ghusega..............uske लिए इस पाइप को गरम करना hoga..........jab से ाचे से गरम होगा तब जाकर ये कहीं ढीला hoga........................mujhe आग और जलाने की कुछ चीज़ें chahiye...............maachis तो मेरे पास हैं hi.............." और हरी बात को संभालते हुए धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ टेरेस के एक साइड पर प्लास्टिक के कुछ कबाड़ सामान रखे they..............asasma अपने हाथों से उस तरफ धीरे से इशारा करती hain...............poori लाइफ में कभी किसी ने उसके साथ इस तरह की बात नहीं की thi.................jaisa आज हरी उससे कर रहा tha................jahan हरी की बातें उसे रोमांचित कर रही थी वहीँ उसके बदन में आग भी लगा रही थी..............

हरी सामने से कुछ प्लास्टिक के सामान को िकाथा करता हैं और माचिस से जलाता हुआ उस पाइप को उस आगे के ऊपर गोल गोल घूमने लगता hain.............aur एक लोहे की पाइप उसमें डालकर उसकी छेद को चौड़ा करता जाता hain..............jab पाइप गरम होकर पिघलने लगती हैं तब हरी आसमा के तरफ देखकर फिर से गंदे तरीके से मुस्कुरा देता hain................wahin आसमा बड़े गौर से उसकी एक एक हरकतों को देख रही thi.............magar कह कुछ नहीं रही थी...............

"एक बार जब ये पाइप ाचे से गरम हो गया न तो ये अपने आप वैसे hi ढीला हो jayega.................aur जब ये ढीला हो गया तो कितना भी मोटा छेद क्यों न ho.......ye उस छेद में आसानी से चला जायेगा..............." और एक बार फिर से हरी आसमा के तरफ देखता हुआ बोल पड़ता हैं वहीँ आसमा और भी बेचैन हो उठी thi................aab उसका वहां खड़े रहना भी मुस्खिल होता जा रहा tha.................pipe जैसे hi गरम होती हैं हरी उस पाइप को अपने हाथों से थोड़ा थोड़ा फैलता हैं और थोड़े देर बाद वो उस पाइप को लोहे की पाइप में फिट कर देता hain................thodi मेहनत के बाद वो पाइप आसानी से उस मोठे से पाइप में पूरा फिट हो जाती hain.............ye देखकर आसमा के चेहरे पर न चाहते हुए भी मुस्कान आ जाती हैं............

"देखा अपने memsaheb.................ye कैसे इसमें फिट हो gaya............aab ये कभी लीकेज नहीं karega................agar जहाँ कही भी छेद पलटा हो और उसे मोटा करना हो तो मुझे याद ज़रूर kijiyega................ye कोई ज़रूरी नहीं की ....................कही कही जगहों पर जहाँ लीकेज की समस्या न होने पर भी ...............वहां लीकेज होने लगता हैं................." इस तरह गन्दी गन्दी डबल मीनिंग बाटिओं को सुनकर अस्मा के पूरे जिस्म में जैसे आग लग गयी thi...............uske टांगों के बीच गीलापन साफ़ महसूस हो रही thi..............agar उसे हरी की बातें ाची नहीं लगती तो वो उसे जवाब ज़रोरो देती मगर कहीं न कहीं उसे वो उसकी बातें मुन्न को गुदगुदा रही थी............

काम होते hi आसमा फ़ौरन सीढ़ियों से नीचे की तरफ चल पड़ती हैं वहीँ हरी अब बेफिक्र होकर अपनी नज़रें आसमा के थिरकती हुई गांड पर जमाये हुआ tha.............wo आसमा के व्यहवार और उसके नेचर को अब बहुत ाचे से समझने लगा tha..................aur ये बात वो बहुत ाचे से जान गया था की वो आसमा से चाहे कितने गंदे मज़ाक क्यों न कर le..............aasma कभी उसके बाटिओं का जवाब नहीं देने wali............shayad इस वजह से उसकी हिम्मत भी अब धीरे धीरे बढ़ने लगी thi............jab तक आसमा हरी के साथ रही वो अंदर hi अंदर पूरी तरह से बेचैन rahi...............hari के करीब आते hi उसके बदन से उसका कण्ट्रोल जैसे हुत्त जाता tha...............wo चाह कर भी न उससे दूर जा pati...............aur न उसे किसी बात के लिए इंकार कर pati.............na जाने उसे धीरे धीरे क्या होता जा रहा था...........

जैसे hi वो अपने बैडरूम में आयी लुम्बी लुम्बी सांस लेती हुई खुद को नार्मल करने की कोशिश करने lagi................pani की बोतल अपने हाथ में लेते hi वो उस पानी को धीरे धीरे पीने lagi................magar ये उसकी धड़कन थी की कम होने के बजाये बढ़ती hi जा रही thi.............kuch सोचकर वो अपना एक हाथ लग्गी के अंदर डालती hui.........apne दोनों टांगों के बीच ले गयी और जब वहां उसे कुछ चिपचिपा सा महसूस हुआ उसके चेहरे पर हैरानी के बदल उमड़ पड़े...................

क्यों की इससे पहले वो इस तरह से कभी गीली नहीं हुई thi..............hari की बाटिओं को sunkar......ya फिर शांति की बाटिओं ko..............baat जो भी हो मगर आसमा अब धीरे डेहरे बहकने लगी thi....................ek अजीब सा एहसास जो इससे पहले उसने कभी महसूस नहीं किया tha.......guzarte वक़्त के साथ साथ आसमा भी अब धीरे धीरे बदलती जा रही thi............dekhna था की आगे उसकी ज़िन्दगी में कौन सा मोड़ आने वाला था.................................

तो बे कॉन्टिनोएड................................................................
 
अपडेट-12 (ा) (मेघा अपडेट)

क्यों की इससे पहले वो इस तरह से कभी गीली नहीं हुई thi..............hari की बाटिओं को sunkar......ya फिर शांति की बाटिओं ko..............baat जो भी हो मगर आसमा अब धीरे डेहरे बहकने लगी thi....................ek अजीब सा एहसास जो इससे पहले उसने कभी महसूस नहीं किया tha.......guzarte वक़्त के साथ साथ आसमा भी अब धीरे धीरे बदलती जा रही thi............dekhna था की आगे उसकी ज़िन्दगी में कौन सा मोड़ आने वाला था.................................



अब आगे.................................................................


आसमा निहायती शरीफ और पाक साफ़ thi.........................na hi उसका कभी किसी और लड़कों से कोई चकार रहा tha..............aur न hi वो किसी गैर मर्द के बारे में कभी कुछ सोची thi.................wajah thi........uska parivaar........usey दिए गए sanskaar............aur aadarsh.................aacha बुरा ...............गलत सही ..........सब कुछ उसे बचपन से hi सिखाया गया tha..............wo जिस माहोल में पाली बड़ी थी उसके अंदर ाचाइयाँ कूट कूट कर भरी हुई thi................wo दूसरों की िज़ात भली भाटी करना जानती thi..................halanki पारिवारिक बंधनों की वजह से उसकी निकाह जल्दी हो गयी थी इस वजह से दुनियादारी की समझ उसे ज़्यादा नहीं thi.............aur न hi लोगों को परखने ki.................magar उसे इतना मालूम था की समाज के बनाये गए दायरे और बॉउंडेशन क्या हैं................

सेक्स तो वो सैम के साथ बस की thi...............is लिए उसे सेक्स के बारे में ज़्यादा कुछ आईडिया नहीं tha...............magar इतना वो ज़रूर जानती थी की सेक्स एक ऐसा नशा हैं जो किसी इंसान के सर पर चढ़कर बोले तो वो उसे कुछ भी करवा सकती thi.................waise तो आसमा को नॉनवेज खाना बहुत पसंद tha...................shahi परिवार से होने की वजह से वो हमेशा हफ्ते में कम से कम 4 या 5 दिन तो नॉनवेज खाया hi करती thi.............jis वजह से वो हमेशा गरम भी रहती थी.......................

सैम उसे सेक्स का स्वाद तो चखा दिया था मगर सही मायने में सेक्स कैसे किया जाता हैं और ये एहसास क्या होता हैं ये उसने आसमा को नहीं बताया tha..................wo सेक्स के बारे में इतना जानती थी की एक मर्द औरत के छूट में लुंड डालता हैं और उसे ाचे से छोड़ता हैं और अपना पानी निकल देता hain................bus इससे ज़्यादा और कुछ nahin...................magar जब से हरी उसकी लाइफ में आया था उसकी ये सोच अब धीरे धीरे बदलने लगी thi.............wo अब हर चीज़ को महसूस कर रही थी जो इतने दिनों तक सैम के साथ रहकर भी नहीं कर पायी thi............shayad एहि कुछ कमी रह गयी थी जिसे उसे कुछ अधूरा सा लगता था.........................

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सुबह का वक़्त tha...................aaj भी शांति रोज़ की तरह आंगन में झाड़ू लगा रही thi....................wahin अंदर कमरे में हरी नहाकर अपने बदन पर तेल की मालिश कर रहा tha...............wo पहले अपने सीने और पीठ पर ाचे से सरसो का तेल लगता hain................fir अपने हाथ पवन mein..........aur रोज़ की तरह अपना अंडरवियर निकलकर वो फिर से अपने लौड़े पर ढेर सारा तेल गिरता हुआ उसे तेल में ाचे से भिगो लेता हैं फिर वो अपने हाथों को लेजाकर धीरे धीरे अपने लौड़े की मालिश करना शुरू कर देता hain...............wahin जैसे जैसे वो मालिश करता जा रहा था वैसे वैसे उसका लुंड फिर से अपने आकर में आता जा रहा tha...................kuch hi मिनट में उसका लुंड फिर से पूरी तरह अकड़ गया जो अपने वास्तविक साइज में आने लगा...............

किसी काले नाग की तरह फुंफकारता हुआ वो इधर उधर लहरा रहा tha................tel की मालिश और हरी के हाथ आगे पीछे होने से उसका मोटा सूपड़ा जो की बेहद चौड़ा था वो कभी खुल रहा tha..........to कभी बंद हो रहा tha...............supada खुलने से उसकी अंदर की गुलाबी चमड़ी उस तेल में सनी होने से चमक रही thi.....................hari अपनी आँखें बंद किये आसमा के जिस्म को याद करता हुए धीरे धीरे अपने लौड़े पर तेल की मालिश कर रहा tha..................aisa करने पर उसे बहुत सुकून मिल रहा था..................

तभी अचानक से फिर आज भी उस कमरे का दरवाज़ा khula..................aur कल की तरह आज भी शांति उस कमरे के अंदर aayi................aur अंदर का नज़ारा देखकर फिर से उसके होश उड़द gaye..............aankhein फटी की फटी रह gayi...........jo थूक उसके मुँह में थी वो अब गले के नीचे नहीं उतर रही thi...................wo टकटकी लगाए हरी के उस विशाल लौड़े को बस निहारती rahi.............uski आँखों में खुमार और लालच साफ़ नज़र आ रही thi...............aise शांति को देखता हुआ हरी फिर से उसपर चिल्ला पड़ता हैं..............

" तुझे एक बात समझ में नहीं aati...........bola न दरवाज़ा खटखटा कर अंदर आया kar.................aab इसमें मेरी क्या गलती हैं............." और हरी इस बार अपने हाथों पर तेल लगाए अपने लौड़े को ऐसे hi मालिश करता हैं वहीँ शांति की रही सही बोलती भी बंद हो जाती hain............wo आँख फाड़े अभी भी हरी के लुंड को बस देखे जा रही थी.............

" ऐसे क्या देख रही hain.............tujhe मेरा लुंड पसंद हैं na..................agar मुन्न कर रहा इसे छूने का to.......................tujhe मैं मन नहीं karunga.................tu अगर चाहे तो आकर मेरे लुंड पर तेल से मालिश कर सकती hain.............main ये बात किसी से नहीं kahunga.....................ye बात मेरे और तेरे बीच में hi rahegi.............aakhir तू मेरे दोस्त की बीवी हैं na...............aur मेरे गांव की भी............." और हरी अपनी टांगें और थोड़ा सा फैलता हुआ शांति के सामने अपना लुंड पूरी तरह से खोल देता हैं और अपने हाथ को वहां से हटा लेता हैं वहीँ शांति के माथे पर पसीने की चाँद बूँदें thi..............uska गाला बार बार सूख रहा था...............

" देख क्या रही hain.....................darwaza बंद कर और आ jaa................aisa मौका तुझे फिर दुबारा नहीं milega..................."aur हरी जैसे शांति को इन्विते करता हैं वहीँ शांति उसके आदेश का पालन करती हुई................ अपनी साँसों को संभालती हुई ................धीरे धीरे क़दमों से चलकर हरी के करीब आती हैं और वहीँ उसके सामने आकर कड़ी हो जाती hain..................aur बड़े गौर से हरी के लहराते हुए उस काळा नाग को देखने लगती hain......................aaj से पहले उसने इतना मोटा और लुम्बा लुंड कभी नहीं देखा tha...........hari का लुंड देखकर उसकी छूट पूरी तरह से पनिया गयी थी...............

कुछ देर तक शांति ऐसे hi खामोश कड़ी रहती हैं फिर हरी अपना एक हाथ आगे बढ़ता हुआ हौले से उसके हाथों पर अपना हाथ रख देता हैं और उसे धीरे धीरे खींचता हुआ अपने विशाल लुंड की तरफ ले जाने लगता hain..............aur जैसे hi शांति उसके लौड़े को जब छूती हैं हरी के मुँह से एक aaaaaaaaaaaaaaaaaaasssssssssssssssssssss जैसी मादक आवाज़ निकल पड़ती हैं...........................

वहीँ शांति भी अंदर hi अंदर पूरी तरह से मचल उठी thi...................wo अपना सुध बुध खो चुकी thi................aabhi भी वो अपनी आँख फाड़े हरी के उस विशाल लुंड को देख रही thi........aisa लुंड जो कभी वो सिर्फ कल्पना hi की thi..............aaj जो उसके सामने था.................

" पसंद aayaaaaaaaaaaaaaaaaa..................aur हरी शांति के नरम हाथों के स्पर्श को पाकर मचल utha................wahin शांति अपनी मुट्ठी पूरे बंधे हरी के लुंड को पकड़ी हुई thi............magar अफ़सोस उसकी पूरी मुट्ठी में हरी का विशाल लुंड नहीं समां पा रही थी.............

"ीित्तत्णना बादआआ और mooooottaaaaaaaaaaaaa.........." और शांति की आवाज़ कांपने lagi......................uska गाला सूख चूका tha...............aur आँखें फटी की फटी रह gayi............ye देखकर हरी धीरे से मुस्कुरा पड़ा...........

" बड़ा हैं तो क्या hua..................maza भी तो बहुत देगा न......................." और हरी इस बार अपने हाथों को शांति के गांड पर ले जाता हैं और उसके गांड को धीरे धीरे से सहलाने लगता hain..........wo उसकी साड़ी के ऊपर से उसके कमर से लेकर गांड तक अपने हाथों को फेर रहा था वहीँ शांति पल पल मदहोश होती जा रतहि thi...............hari के इस तरह छूने से उसकी बुर और भी ज़्यादा पनिया गयी thi...............uska दिल पूरी तरह से मचल उठा था..................

"न बाबा naaa...................mujhe नहीं lena...............ye तो किसी गधे जितना बड़ा लगता hain................mujhe नहीं फड़वाने अपना ..................." और शांति बात बनाते हुए धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ हरी अपने हाथों को हरकत कर रहा tha.............kabhi उसकी गांड par......to कभी उसकी कमर par..........to कभी उसकी नैवेल par................aur कभी उसके सपाट पेट पर...............

"अब लौड़ा 2 इंच का हो या 10 इंच ka............jugaad में तो जायेगा उतना hi जितना वो बड़ा hoga..........................ye तो औरत की छूट पर निर्भर करता हैं की वो कितना बड़ा ले लेगी.............." और इस बार हरी शांति के 34 साइज के चूचियों को कसकर मसल देता हैं जिससे उसका लौड़ा और भी टैंकर खड़ा हो जाता hain..............wahin शांति अपने हाथों को तेज़ी से हरकत कर रही thi...........hari का लुंड बेहद hi गरम था ऐसा लग रहा था जैसे वो कोई गरम लोहे की रोड पकड़ी हुई हो..................

" चूस न saali..............mooh में ले isey.................kha जा मेरे लौड़े को................" और इस बार हरी शांति के सर को नीचे की तरफ धीरे धीरे दबाने लगता हैं वहीँ शांति तो अंदर hi अंदर चाहती थी की वो उसके लुंड को choose...........chate...................magar शर्म और झिझक की वजह से वो ऐसा नहीं कर पा रही ti................shanti एक नज़र हरी की आँखों में देखती हुई धीरे से अपना मुँह पूरा खो दी और हरी के मोठे से सुपाड़ी को जैसे तैसे मुँह में लेकर चूसने lagi...................wahin इस बार हरी की aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh निकल गयी...........

उसकी आँखें मज़े से बंद होने lagi............shanti पूरा मुँह खोले हरी के लौड़े को चूस रही थी मगर वो आधा भी अपने मुँह में नहीं ले पा रही thi..........uska मुँह पूरा खुला होने से अब दर्द करने लगा tha..............wahin हरी उसके सर पर अपने हाथों से धीरे धीरे दबाव डालता जा रहा था...................

" चूस मेरा lauda..............aaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh.........saali.................aur अंदर ले.................." और हरी जैसे मज़े में अब बड़बड़ा रहा tha..............wo अपने हाथों को शांति के गांड के दरों में डालता तो कभी उसके चूचियों को कसकर masalta...................wahin शांति अब उसके किसी भी हरकतों को इंकार नहीं कर रही thi..................balki उसे भी इस खेल में मज़ा आ रहा tha..............is तरह से लुंड चूसने से शांति के मुँह से टपकता हुआ लार उसके बड़े बड़े ांडों पर भी गिर रहा था जो उसे भी भिगो रहा tha....................ghadi में टाइम इस वक़्त सुबह के 8.30 बज रहे they...............aur दोनों को काम पे भी जाना tha...................apni मेमसाहेब के घर पे साफ़ सफाई karne...............udher आसमा उन्दोनो का इंतज़ार भी कर रही थी.................

जैसे जैसे वक़्त बीत रहा था वो फिर से बेचैन होती जा रही thi.............uske दिल और दिमाग में बहुत अजीब अजीब से ख्याल उठ रहे they...............kahin शांति ने आज फिर कुछ ऐसा वैसा तो नहीं देख liya...........ya फिर शायद कुछ aur..................kuch सोचकर वो दुबारा से शांति से मिलने उसके रूम के तरफ चल padi..................aur इधर ये दोनों अपने में मस्त थे...........

हरी के मुँह से आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह जैसी आवाज़ें निकल रही थी वहीँ शांति बस ggggooooooooooooooo gooooooooooooooo करती हुई उसके विशाल लौड़े को अपने मुँह में लेकर किसी लॉलीपॉप की तरह चूस रही thi................lund चूसने से हरी का प्रेकम भी निकल रहा था वहीँ शांति पूरे मज़े से उसका प्रेकम भी चाट रही thi......................halanki शांति पहले से खेली खिलाई औरत thi.............usey लुंड चूसना छुड़वाना गांड मरवाने की सब की कला आती thi................agar चुदाई का एक भी मौका उसे मिलता तो वो अपने हाथ से जाने नहीं देती thi.............magar ऊपर से बनती बहुत शरीफ थी..............
 
अपडेट- 12(बी) (मेघा अपडेट)

जैसे तैसे शांति हरी का लौड़ा आधा hi अपने मुँह में ले payi...............kuch पल के लिए तो उसे ऐसा लगा की उसका जबड़ा पूरा फुट jayega...............aur उसकी सांस अटक jayegi...................mooh पूरा खुला होने से उसके मुँह में गधा गधा थूक और लार अब कुछ बेहटा हुआ हरी के ांडों और नीचे फर्श पर टपक रहा tha..............wahin हरी अपने कमर को धीरे धीरे ऊपर नीचे कर रहा tha.........jaise वो उसका मुँह न होकर ............बुर हो..............

शांति को लुंड चूसते हुए करीब 10 मिनट बीत चुके they........aur ये 10 मिनट कब बीते उसे कुछ पता भी नहीं chala..................uski छूट से जैसे नदी बह रही thi.......saari के अंदर उसकी छूट रूस उसके दोनों टांगों से बेहटा हुआ नीचे की ओरे बह रहा tha..................waise शांति कभी पंतय नहीं पहनती thi...................khel चलता रहा और दोनों मदहोशी के आलम में डूबते चले gaye....................idher हरी का जिस्म अकड़ने लगा और वो शांति के दोनों चूचियों को पूरी ताक़त से मसलने लगा जिससे शांति दर्द से चीख तो नहीं पायी मगर gooooooooooon goooooooooooooooooooo की आवाज़ से वो बुरी तरह मचल उठी..............

इधर आसमा बहार की तरफ गयी जहाँ शांति कल बैठी हुई उसे मिली थी मगर आज वहां कोई नहीं tha................shanti वहां होती भी kaise.................wo तो मज़े से हरी का विशाल लुंड चूस रही thi..................aasma अपने चरों तरफ इधर उधर देखने लगी मगर न hi उसे कहीं शांति नज़र aayi....................aur न कही hari....................jab सामने के रूम की तरफ उसकी नज़र गयी तो सामने का दरवाज़ा बंद tha................usey थोड़ा अजीब लगा मगर कुछ सोचकर वो फ़ौरन उस कमरे की तरफ चल padi.................idher शांति बुरी तरह हांफ रही थी..............

उसका मुँह दुखने लगा tha....................wahin इस बार हरी अपनी जगह से खड़ा हुआ और शांति को फर्श पर घुटनों के बल बैठता हुआ .................उसके सर को अपने दोनों हाथों से मज़बूती से पकड़ता hua....................apna लौड़ा फिर से उसके मुँह में पूरा अंदर तक पेलने laga.................wo चाहता था की अपना लुंड जितना हो सके शांति के हलक़ तक डेल मगर लुंड बहुत मोटा होने की वजह से वो ऐसा नहीं कर पा रहा tha.............shanti ज़ोरों से हांफ रही थी वहीँ उसकी आँखें बड़ी हो चली थी और उसकी आँखों से आंसूं की धरा निकल पड़ी thi...............hari अब अपने चरम सुख के बेहद करीब था.................

न जाने उसे कितने दिनों के बाद ऐसा शुभ अवसर मिला tha..........bhale hi उसकी मालकिन न सही एक नौकरानी hi sahi......magar थी तो वो भी एक औरत hi....................kafi समय के बाद उसके किस्मत में उसे ये सुख मिला tha..................chahe जैसे मिला ho...............hari पूरी तरह से बेकाबू हो गया tha................wo अपने लुंड को तेज़ी से शांति की छूट समझकर छोड़े जा रहा tha...............uspar खुमार पूरी तरह से हावी tha..................na जाने ये खेल और कितना लुम्बा चलता अगर बीच में हरी के दरवाज़े पर वो आहात न हुई होती......................

जैसे hi दरवाज़े पर दस्तक हुई हरी के तन बदन में एक बिजली की लहर दौड़ padi.................shayad आसमा का ख्याल आते hi.....................usey यकीन हो चला था की बहार इस वक़्त आसमा hi कड़ी hogi.....................aur इधर शांति उसके लुंड को निकलना चाही मगर हरी अपने हाथों की गिरफ्फत को और मज़बूत कर चूका tha................wo तीन चार ढाकै कसकर लगता हुआ aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaassssssssssssshhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh करता hua.................zoron से शांति के मुँह में झरने laga............wahin शांति goooooooooooooooonnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnn gooooooooooooooonnnnnnnnnnnn करती हुई दर्द से तड़प उठी........................

हरी का कुछ छुम शांति के मुँह में चला gaya..........kuch छुम उसके साइड के होंठ से बेहटा हुआ नीचे फर्श पर टपकने laga..............waise हरी का छुम गिरा भी बहुत ज़्यादा tha.................jo शांति पूरा उसे अपने मुँह में नहीं ले पायी thi...............tabhi फिर से दरवाज़े पर दस्तक हुई और हरी शांति के सर पर अपनी पकड़ ढीली करता हुआ अपने लुंड को उसके मुँह से निकलता hua................ussey दूर हो gaya..................wahin शांति ज़ोरों से खांस रही thi...................chehra उसका पूरा लाल पढ़ गया tha...................aankhon से आंसूं थमने का नाम नहीं ले रहे they....................wahin उसके लुंड और मुँह में लार की एक तार बानी हुई थी जो उसे जोड़ राखी थी................

शांति फ़ौरन अपने हाथों से अपना मुँह पूछती हुई हरी के तरफ अजीब सी नज़रियों से देखने lagi......fir वो जल्दी से अपने कपड़े सही करती hui................hari को भी कपड़े पहनने को कहने lagi...............hari अंडरवियर चढ़ाता हुआ और लोअर पहनकर सीधा दरवाज़े पर गया और जाकर दरवाज़ा खोल diya.......................hairani तो उसे हुई नहीं क्यों की उसे ाचे से पता था की इस वक़्त बहार आसमा के सिवा और कोई नहीं hoga..................magar.........................aasma को ज़रूर हैरानी हुई.................

" aaappppppppppp........................hari जैसे चुहकता हुआ आसमा के हसीं चेहरे को बड़े गौर से देखता हुआ धीरे से बोल पड़ा वहीँ आसमा बहुत hi अजीब सी नज़रियों से हरी को देख रही thi..............aur देखती भी क्यों ना.............

हरी पसीने से भीगा हुआ tha.........upar से उसकी सांसें भी बहुत तेज़्ज़ चल रही thi...............aur जब उसकी नज़र नीचे फर्श पर बैठी शांति पर पड़ी उसका चेहरा faacckkkkkkkkkkk सा पीला पढ़ gaya...............usey ज़रा भी एहसास नहीं था की दोनों एक कमरे में अकेले क्या कर रहे honge...............upar से दरवाज़ा खुलने में इतना waqt..............aasma कोई दूध पीती बाची नहीं thi.............usey शांति और हरी के बीच कुछ कुछ समझ में आने लगा tha.........wo बड़े ध्यान से कभी हरी को तो कभी शांति को अजीब इस नज़रियों से देख रही थी...........

"shanti.................tum yahan.................ander कमरे बंद करके इसके साथ क्या कर रही thi...........aur तुम इस तरह फर्श पर बैठी क्यों ho..................aur ये तुम्हारे आँखों में aansoon............tum ज़ोर ज़ोर से खांस क्यों रही थी............." और तभी आसमा की नज़र फर्श पर गिरी हरी के लुंड की कुछ छुम की बूँदें जो गाढ़ी गाढ़ी सी कई जगह पर जमी हुई thi..............halanki आसमा को ज़्यादा कुछ समझ में नहीं आया मगर वो टकटकी लगाए बहुत गौर से सब चीज़ निहारती रही..............

"तुम दोनों फ़ौरन काम पे आवो जल्दी...........10 मिनट के ander................main तुम दोनों का इंतज़ार कर रही हूँ....................." और आसमा हरी की तरफ बड़े गौर से देखती hui.......fir शांति की तरफ देखने लगी और बिना किसी के जवाब का इंतज़ार किये बगैर फ़ौरन अपने कमरे की तरफ चल padi.................wahin हरी बड़े गौर से आसमा के थिरकती हुई गांड को बस देखे जा रहा tha...........ek बार फिर आसमा को देखकर उसका मुन्न मचल उठा tha...................aasma के जाने के बाद शांति हरी से बोल पड़ती हैं...........

" तू na..............sach में कमीना hain....................kisi दिन मरवाएगा tu......................agar आज ज़रा सी और देर हो जाती न ................तो.............." और शांति अपना हुलिया सही करते हुए शिकायत के लहज़े से बोल पड़ती hain.............wain जवाब में हरी उसकी तरफ देखता हुआ धीरे से मुस्कुरा देता हैं........

"देख नहीं leti...........memsaheb ने सब देख भी लिया hain...............aur समझ bhi.....................aab तू देख ले ki..............tujhe मेमसाहेब को कैसे संभालना हैं.............." और हरी जैसे शांति पे बम फोड़ देता हैं वहीँ शांति के चेहरे का रंग फीका होता चला जाता हैं..............................

तो बे कॉन्टिनोएड.......................................................................
 
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