Ufff......Ye Kaisi Pyaas...........(A Story Of Housewife) - Page 3 - SexBaba
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Ufff......Ye Kaisi Pyaas...........(A Story Of Housewife)

अपडेट-13 (ा) (मेघा अपडेट)

"देख नहीं leti...........memsaheb ने सब देख भी लिया hain...............aur समझ bhi.....................aab तू देख ले ki..............tujhe मेमसाहेब को कैसे संभालना हैं.............." और हरी जैसे शांति पे बम फोड़ देता हैं वहीँ शांति के चेहरे का रंग फीका होता चला जाता हैं..............................

अब आगे........................................................................

शांति के चेहरे पर अभी भी बारह बजे हुए they.......................chudai का नशा जो कुछ देर पहले उसके सर चढ़कर बोल रहा था....................... वो अब उतर चूका था..................... उसेक हाथ पवन दुर्र से फूल गए they..................usey कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो अब क्या करे!!!!!!!!!!!!!

"मेमसाहेब को मैं क्या bolungi.............agar वो पूछेगी तो.............." और शांति बुझे मुन्न से बोल पड़ती हैं .............वो ये सोच सोचकर परेशां हो रही थी की वो अपनी मेमसाहेब का सामना कैसे karegi...........magar सामना तो उसे करना hi tha..............wahin हरी उसे देखकर धीरे से मुस्कुरा पड़ता hain.............ye देख शांति गुस्से से बौखला जाती हैं............

" मेरी जान पे बन आयी हैं और तुझे हंसी सूझ rahi..............sach में तू बड़ा कमीना हैं................." और शांति जैसे गुस्से से हरी के तरफ देखने लगती हैं वहीँ हरी कुछ देर तक हँसता हैं फिर वो चुप होकर शांति से आगे कहना शुरू करता हैं.........

" मैं तुझे बचा तो सकता हूँ मगर बदले में मुझे क्या मिलेगा....................." और हरी धीरे से अपने मुन्न की बात कहता हैं वहीँ शांति कुछ देर तक चुप रहती हैं फिर वो धीरे से बोल पड़ती हैं.........

" जो तू chahe....................meri छूट ले लेना इससे ज़्यादा मैं तुझे और क्या दे सकती हूँ..........." हालाँकि शांति के लिए ऐसे ओपन वर्ड्स उसे करना कोई बड़ी बात नहीं thi..............wo इस माहोल में रहती आयी thi..........wahin हरी उसकी बाटिओं को सुनकर धीरे से हंस पड़ता हैं............

" वैसे मुझे तेरे में कोई ख़ास दिलचस्पी nahin...........................choot....................choot तो चाहिए mujhe...........magar तेरी nahin...............kisi और ki..................tu समझ रही हैं न की मेरा इशारा किसकी तरफ हैं................" और हरी अपने गंदे दांत दिखता हुआ धीरे से हंस पड़ता हैं वहीँ शांति बुरा सा मुँह बना लेती hain..............wo बहुत ाचे से हरी का इशारा समझ रही थी...........

" वो तो तुझे मिलने से rahi.....................memsaheb की छूट तो kya...........tu तो उसकी पवन की जूती भी नहीं बन sakega..................ye दिन में सपने देखना बंद कर de..............tera कुछ नहीं हो सकता................" और शांति जैसे हरी को समझती हुई बोल पड़ती हैं वहीँ हरी जवाब में धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं.............

"milegi.............ek न एक दिन वो मुझे ज़रूर milegi................aur इस काम में तू मेरी अब मदद karegi.................badle में जो तुझे चाहिए वो मैं तुझे देता rahunga............aur haan..........ye बात हमारे बीच hi बस रेहनी chahiye...............wo क्या हैं न की मुझे अपनी मेमसाहेब से मोहबात हो गयी hain...............aab तो मैं उन्हें पूरी शिद्दात से पाना चाहता hoon...............aur तू कह रही हैं न पांव की jooti....................to याद रख मैं उनके गले की हार banunga..............aur क्या कुछ नहीं हैं मेरे paas..................jo मेरे पास हैं वो यहाँ किसी और के पास नहीं................." और हरी इस बार अपने लोअर के ऊपर से अपने लौड़े को सहलाता हुआ धीरे से मुस्कुरा देता हैं वहीँ शांति भी जवाब में हंस देती hain..............sach hi तो कह रहा था हरी...................

तू औरत हैं तो बहुत ाचे से समझती होगी की छूट में जब आग लगती हैं तो क्या होती hain................main धीरे धीरे मेमसाहेब की छूट में आग भरता जावूंगा और इतना आग भर दूंगा की वो humesha.................har पल बेचैन रहने lagegi............har वक़्त परेशां सी rahegi.............uska चैन करार सब कुछ चीन loonga.............wo सिर्फ मेरे लुंड के लिए बस tadpegi...........is लुंड के लिए वो कुछ भी karegi...................aur जिस दिन ऐसा हो गया उस दिन वो सरे शर्म लाज लिहाज़ सब कुछ chodhkar................sirf..............aur सिर्फ मेरे पास चली aayegi....................us दिन मैं उससे जो marzi................jaisi marzi..............wo सब कुछ karwaunga............apni रंडी बनाकर rakhunga..............is दिल में जो भी अरमान दबे हैं सरे एक एक कर मैं पूरा karunga.............aur वो शौक से मेरे हर अरमान को पूरा करने में मेरा बराबर का साथ degi....................yahan तक की वो अपने शौहर को भी छोड़ने को राज़ी हो जाएगी...................

और जिस दिन ऐसा हो गया उस din...................kasam से मेरा सपना सच हो jayega.............aur जो मैं कहता हूँ उसे कैसे भी करके हासिल कर hi लेता hoon................ye सच हैं की मेमसाहेब जैसी खूबसूरत औरत आज तक मैंने कभी देखि भी नहीं................." और एक बाद फिर से कहते हुए हरी की आंखें चमक जाती हैं वहीँ उसके लुंड में एक तेज़्ज़ सनसनाहट होने लगती hain........wahin शांति बुरा सा मुँह बनाये उसके चेहरे को बस देखे जा रही थी............

" बंद कर अपनी ये ख्याली पुलाव banana...................tu भी यहीं हैं और मैं bhi................chal मैं तेरी मदद करने को तैयार hoon............main भी देख लेती हूँ की तू क्या उखाड़ पता hain...........wo सब छोड़ और ये बता की मेमसाहेब से क्या बोलना हैं.............." और शांति हामी भर्ती हुई धीरे से मुस्कुरा देती हैं वहीँ हरी कुछ देर तक खामोश रहता हैं फिर वो शांति को कुछ समझने लगता हैं जिससे सुनकर शांति के चेहरे पर मुस्कान आ जाती हैं.........

" अरे wah..................tu तो बहुत बड़ा खिलाडी हैं re................magar मुझे तेरा लुंड चाहिए अपनी छूट mein............dekh मुझे तेरा लुंड इस दिल में उतर गया hain.............aab जब तक मैं इसे लूंगी नहीं मुझे चैन नहीं milega.................magar जब भी तू डालना बहुत आराम से dalna...................mujhe और औरतों की तरह बेहोश नहीं होना hain...........aab chal...........kaam पे चलते हैं............." और शांति इतना कहकर आगे मुड़ती हैं और जैसे hi वो जाने लगती हैं हरी उसकी गांड पर एक दो कसकर चपाती लगता हैं जिससे शांति की चीख निकल जाती हैं मगर जब वो पीछे मुड़कर देखती हैं तो उसके चेहरे पर भी मुस्कान आ जाती हैं.............

" मैं न कहता था की ये छूट की आग बहुत खतरनाक होती hain.............iske आगे बड़े से बड़ा sanskar...............mazhab............jaat paat...........rishtey नाते ............सब फीके पढ़ जाते हैं............" और हरी हामी भरता हुआ अपनी सफलता की पहली सीढ़ी चढ़ता हुआ अपने मंज़िल की ओरे बढ़ जाता हैं .................उसका दिमाग अब काम करना शुरू कर दिया tha..............wo अब आसमा को हर हाल में हासिल कर लेना चाहता tha.................har कीमत पर..............

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थोड़े देर बाद शांति और हरी अपने अपने काम पे लग gaye................shanti दूसरे रूम की सफाई कर रही थी और हरी दूसरे रूम की ....................जब हरी अंदर आया तो आसमा तिरछी नज़रियों से उसे hi देख रही thi.............wahin हरी अपना सर jhukaye.....................apne दोनों हाथ बंधे खड़ा tha..................kisi गुनेहगार की tarah.................aasma उससे उस वक़्त तो कुछ नहीं बोली मगर उसके दिमाग में बहुत कुछ चल रहे थे................

थोड़े देर बाद आसमा शांति के कमरे में gayi............shanti अंदर के कमरे को साफ़ कर रही thi...............jab शांति की नज़रें आसमा पर पड़ी एक बार तो उसका कलेजा ज़ोरों से धड़क utha......................magar वो फिर से नार्मल होती हुई आसमा के तरफ देखने लगी................

" shanti.................kya चल रहा था ander....................sach सच batawo........................main कोई दूध पीती बाची नहीं हूँ जो इतना भी न समझूँ....................." और आसमा जैसे शांति की तरफ देखती हुई घूरने लगती हैं वहीँ शांति अपना काम छोड़कर आसमा के तरफ पलटती हैं और धीरे से एक लुम्बी सांस लेती हुई आगे कहना शुरू करती हैं...........

" memsaheb......................aap जो समझ रही हैं वो सब सच hain......................magar................ismein न उसका दोष हैं .................और न मेरा......................." और शांति इतना कहकर फिर से चुप हो जाती हैं वहीँ आसमा का दिल ज़ोरों से धड़कने लगता hain.................wo बड़े गौर से शांति के चेहरे को देखे जा रही थी...................

" क्या मतलब हैं tumhara..........................tum कहना क्या चाहती हो................." और आसमा धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ शांति अपना सर नीचे की तरफ झुकाई हुई थी...............

" memsaheb..................aapko ये बात पता नहीं होगा की हरी की बीवी को मरे हुए पूरे 10 साल हो चुके hain...............na hi उसकी कोई औलाद hain.....................uski बीवी को बीमारी हो गयी थी जिसका इलाज़ वो सही समय पर पैसों की वजह से नहीं करा पाया tha.................jissey उसकी मौत हो gayi...........tab हरी ने दूसरी शादी नहीं ki...............usi गाँव में रहकर म्हणत मज़दूरी किया karta............aur जो मिलता खा leta.................haan ये बात सच हैं की उसका पहले कई औरतों से चकार रहा hain..........magar इस वक़्त वो बिलकुल अकेला hain..........aab वो ये सरे काम छोड़ चूका हैं..........." और शांति इतना कहकर फिर से चुप हो जाती हैं वहीँ आसमा बड़े गौर से उसकी एक एक बातें सुन रही थी.............

"तो fir..........tumhein देखकर उसने दुबारा से ये काम फिर से शुरू कर दिया .......हैं ना.................." और आसमा तिरछी बोली बोलती हुई शांति के तरफ घूरती हुई बोल पड़ती हैं वहीँ शांति कुछ देर चुप रहने के बाद फिर से दुबारा बोलना शुरू करती हैं..............
 
Update-13(B) (मेघा अपडेट)

" नहीं memsaheb...................usney शुरू नहीं kiya.................balki.....................behak तो मैं गयी thi...............uska हथियार dekhkar...............aur मैं भी बिन मर्द के इतने सैलून से अकेली रह रही हूँ तो..................." और शांति आज की साडी घटना एक एक कर आसमा को बताती चली जाती हैं वहीँ आसमा का अंदर hi अंदर दिल मचल उठा tha................uski धड़कनें फिर से बेकाबू होने लगी thi........tangon के बीच गीलापन बढ़ता hi जा रहा tha..............dil में उसके भी इच्छा हो रही थी की वो एक बार हरी का लुंड ज़रूर dekhe..............magar ऐसा न तो वो कभी कह सकती thi.........aur न ये बात किसी से ज़ाहिर कर सकती थी..............

वैसे भी शांति ने जो कुछ कहा था हरी के बारे में सच hi कहा tha...............haan अपनी छूट में हरी का लुंड लेने की चाहत में वो हरी की आज तारीफ ज़रूर कर रही thi..............khel की शुरुवात हो चुकी thi............idher शांति अपने फ़िराक़ में thi..................udher हरी आसमा के फ़िराक़ mein................manzil कितना दूर थी और रास्ता कितना कठिन................ ये तो वक़्त hi तय करने वाला था..................

आसमा धड़कते दिल से फ़ौरन अपने कमरे में आती हैं और आकर कमरे का दरवाज़ा ाचे से बंद कर लेती hain.................fir वो अपनी लग्गी और सूट निकलती हैं और फिर लास्ट में अपनी ब्रा और panty.......................poori नंगी होने की वजह से वो बेहद की सेक्सी लग रही thi..........wo आईने के सामने कड़ी होती हैं और बड़े गौर से अपने आपको एक तुक निहारने लगती hain...............isi जिस्म को पाने के लिए न जाने कितने लड़के अब तक पागल हो चुके थे मगर आज तक उसके इस खूबसूरत जिस्म को सैम के अलावा किसी ने हासिल नहीं कर पाया tha.............gora बदन आईने के सामने किसी संगमरमर की तरह झलक रहा था..............

आसमा अपना एक हाथ अपने छूट पर ले जाती हैं तो वहां उसे कुछ गीलापन सा नज़र आ रहा tha.............wo ये सोचकर हैरान थी की निकाह से पहले या बाद तक वो आज से पहले कभी इतनी गरम क्यों नहीं हुई जितनी वो अब हो रही hain.............usey हमेशा बेचैनी क्यों रहती hain..................uska मुन्न बार बार सेक्स की तरफ अब क्यों जा रहा था................ वो कभी इस तरह से नंगी नहीं होती थी .................सैम के साथ सेक्स करने के तुरंत बाद वो फिर से पूरे कपड़े पहन लेती thi............magar आज उसे ऐसे hi रहने का दिल कर रहा tha.................aasma धीरे धीरे अब बदल रही थी.............

गोरा और सफ़ेद बदन जिसपर एक बल तक मजूद नहीं tha......................uski भरी बड़ी बड़ी चूचियां जो पूरे गोल में और बेहद टाइट ऊपर की तरफ उठी hui..............uski शिकार पर ब्राउन रंग के मटर जिनते दाने बड़े दो छोटे छोटे nipples..................nipples के 1 इंच के घेरे में ब्राउन रंग की सॉफ्ट skin..............left सीने के ऊपरी हिस्से में एक काळा रंग की छोटी सी til..............jo और भी उसे सेक्सी बनती thi................janghon पर भी एक दो जगह टिल they........aur छूट के ऊपरी हिस्से में भी एक छोटा सा टिल tha............................aisa लग रहा था जैसे किसी की नज़र न लगाने के लिए ये टिल को उसी जगह लगाया गया हो.................

नीचे हल्की काली रंग की choot...............jo बिना बालों ki............uski लिप्स पूरी तरह से बंद thi.......jo एक सीढ़ी लाइन दर्शा रही thi..................pet एकदम सपाट और इतना चिकना की पानी डालते hi फिसल jaye...................gand की वो ब्राउन रंग की एकदम छोटी सी ched.................jo इस वक़्त पूरी तरह से बंद thi.................aisa लग रहा था जैसे उसमें कोई चीज़ कभी डाली hi न गयी ho...............bhale hi आसमा सेक्स की थी मगर उसका बदन अब भी बहुत ज़्यादा कैसा हुआ tha....................itni टाइट की मर्द को तो जैसे जन्नत नसीब हो jaye...............kul मिला जुलकर वो सर से लेकर पवन तक एक अप्सरा kahiya..................ya फिर एक सेक्स की मूरत thi...............aisi औरत जिसे मर्द एक बार पा जाये तो वो उसकी जवानी का रूस बार बार हर बार पीटा rahe.............magar उसकी प्यास कभी न bujhe.........balki और बढ़ती जाये.............

कुछ देर तक आसमा ऐसे hi कड़ी कड़ी अपने आपको निहारती रहती हैं फिर उसका मोबाइल बज उठता hain....................phone सैम का tha.............mobile स्क्रीन पर जैसे hi उसकी नज़र पड़ती हैं आसमा के चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान तैर जाती हैं.............

" क्या कर रही हो मेरी जान....................." उधर से सैम की आवाज़ आयी वहीँ आसमा शरारती मुस्कान के साथ नंगी hi बिस्टेर पर जाकर लेट gayi............usey इस तरह से नंगा रहना बहुत अजीब सा महसूस हो रहा tha............saath में शर्म भी बहुत आ रही थी...............

" कुछ nahin............apne कमरे में लेती hoon...........wo भी पूरी नंगी.............." और जैसे आसमा सैम पर बम फोड़ देती हैं वहीँ सैम ख़ुशी से उछाल पड़ता हैं..............

" क्या बात कर रही हो darling...........tum कहो तो मैं इसी वक़्त वीडियो कॉल करूँ..................." और सैम का लुंड सर चढ़कर बोलने लगता हैं वहीँ आसमा जवाब में बस धीरे से मुस्कुरा देती हैं..........

" अरे नहीं नहीं!!!!! मैं बस कपड़े चेंज करने आयी thi..............aur काम कैसा चल रहा............." और आसमा बात को संभालते हुए बोल पड़ती हैं वहीँ सैम उसकी बाटिओं को सुनकर धीरे से मुस्कुरा देता हैं...........

" मैं जनता हूँ की तुम मुझे बहुत मिस कर रही hogi..........aacha एक खुसखबरी देनी थी tumhein..........ek aachi..............aur एक buri............bolo पहले कौन सी सुनावउँ..............." और सैम मुस्कुराता हुआ बोल पड़ता हैं वहीँ आसमा अपने बालों में ऊँगली घूमती हुई ......तो कभी अपने चूचियों पर उँगलियों को फेरती हुई धीरे से बोल पड़ती हैं..........

" पहले ाची hi खबर सुना दो.........." और आसमा धीरे धीरे मदहोश होने लगती hain.............uspar फिर से जवानी का नशा चढ़ता जा रहा था..................

" तो ाची खबर ये हैं की मैं एक दो दिन में अपनी डार्लिंग के पास वापस आ रहा hoon...........aur बुरी खबर ये हैं की मैं दो दिन तुम्हारे पास रखकर फिर से यहना वापस चला आवूंगा................." और सैम अपने लुंड पे हाथ फेरता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ आसमा खुस तो होती हैं मगर अगले hi पल फिर से मायूस हो जाती हैं..........

" कोई बात नहीं दो दिन के लिए hi sahi............aap आवो तो............" और दो चार बातें इधर उधर की होती हैं फिर आसमा फ़ोन रख देती हैं और बिस्टेर पर पड़ी पड़ी बहुत देर तक हरी के लुंड के बारे में तो कभी शांति के बारे में सब कुछ सोचने लगती हैं..............

" ये दोनों क्या सही कर रहे they..............maine देखा था शांति ko.............wo फर्श पर बैठी हुई हांफ रही thi...............hari का प्रेकम भी शायद गिरा हुआ था तीन चार जगहों par...........aur शांति के आँख से निकलते हुए aansoon...............is बात के गवाही दे रहे थे की वो उसका हथियार अपने मुँह में लेकर चूस रही thi..........jab शांति कह रही थी की उसका हथियार इतना बड़ा और मोटा हैं तो वो कैसे उसे अपने मुँह में ली hogi............oh khuda.............kya किसी का इतना बड़ा भी हो सकता hain................mujhe शांति की बाटिओं पर यकीन नहीं हो raha..........kahin ऐसा भी तो हो सकता हैं की वो मुझसे झूट बोल रही हो...............

मगर उसे क्या मिलेगा झूट bolkar..............ye मुझे क्या होता जा raha........aur आसमा के हाथ खुद बा खुद उसकी चोट के तरफ चले जाते हैं और एक हाथ से वो अपनी चूचियों को मसलने लगती hain.............sehlaney लगती hain..............ye साडी बातें सोच सोचकर वो गरम होती जा रही thi.............jaise जैसे वो अपनी उँगलियों को अपने छूट पर हरकत कर रही थी वैसे वैसे उसकी दिलों की धड़कनें भी तेज़्ज़ होती जा रही थी...........

वो हौले हौले से अपने छूट को रगड़ने लगती hain.............apni उँगलियों से मसलने लगती hain........jitna hi वो अपने छूट के दानों को मसल रही थी उतना hi उसे मज़ा आता जा रहा tha............dimag में बस हरी का मोटा कला लुंड बस घूम रहा tha...............wo अपनी आँखें बंद करती हुई एक एक बांटिए सोचने लगती hain...........usney आते वक़्त भी हरी का फूला हुआ लुंड उसके लोअर में साफ़ देखा tha..............jo उअप्र से hi दिखने में बेहद बड़ा नज़र आ रहा था............

आसमा सब कुछ सोचती जा रही थी वहीँ वो अपने निप्पल्स को मसल भी रही थी वहीँ दूसरे हाथ से अपने छूट में ऊँगली भी कर रही thi...............jaise जैसे उसके उँगलियों की रफ़्तार बढ़ती चली गयी वैसे वैसे उसकी सांसें भी तेज़्ज़ होती चली gayi.............kuch पल और गुज़ारे और आसमा का साबरा जवाब दे गया और वो वहीँ बिस्टेर पर ज़ोरों से चीखती हुई aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhaoooooooooooooooooooooooooooooooooooommmmmmmmmmmmmmmmmmmm...........................karti हुई पूरी तरह से निढाल हो गयी............

उसकी छूट से ढेर सारा रूस बेहटा हुआ बिस्टेर पर गिर रहा tha.............saath में उसकी ऊँगली भी उसके छूट रूस से भीग चुकी thi............wo वहीँ ज़ोरों से हांफती हुई अपनी आँखें बंद karke....................lumbi लुम्बी सांस ले रही thi................uske जिस्म से गर्मी निकल चुकी thi...........magar उस प्यास का क्या करे जो गुज़रते वक़्त के साथ साथ अब बढ़ती hi जा रही thi..................aaj से पहले उसने कभी भी फिंगरिंग नहीं की thi......................na शादी से pehle..........................aur न शादी के बाद................

तो बे कॉन्टिनोएड....................................................................
 
अपडेट- 14(ा) (मेघा अपडेट)

उसकी छूट से ढेर सारा रूस बेहटा हुआ बिस्टेर पर गिर रहा tha.............saath में उसकी ऊँगली भी उसके छूट रूस से भीग चुकी thi............wo वहीँ ज़ोरों से हांफती हुई अपनी आँखें बंद karke....................lumbi लुम्बी सांस ले रही thi................uske जिस्म से गर्मी निकल चुकी thi...........magar उस प्यास का क्या करे जो गुज़रते वक़्त के साथ साथ अब बढ़ती hi जा रही thi..................aaj से पहले उसने कभी भी फिंगरिंग नहीं की thi......................na शादी से pehle..........................aur न शादी के बाद................



अब आगे......................................................................


आसमा लुम्बी लुम्बी सांसें लेती हुई साडी बातें सोचती जा रही thi................usey अजीब तो लग रहा था मगर मज़ा भी बहुत आया tha...................wo फ़ौरन बिस्टेर से उठती हैं और बाथरूम जाती हैं फिर अपने सरे कपड़े एक एक कर पहनने लगती hain..............jab वो सरे कपड़े पहन लेती हैं तो वो आईने के सामने आती हैं और बड़े ध्यान से आपने आपको निहारने लगती हैं...........

सामने ड्रावर में से वो मेकउप का सामान निकलती हैं और फिर सजने संवारने लगती hain..............aankhon पर सुरमयी kajal...........maathey पर एक लुम्बी सी गोल्डन कलर की bindiya..............kanon में दो बड़े बड़े jhumkey.............naak में एक छोटी सी गोल्डन ring................aur होंठों पर डार्क चॉकलेट रंग की lipstick.........pawn और हाथों की उँगलियों पे लाल रंग की nailpolish..............bal खुले हुए थे जो कुछ सामने उसके गलों को छु रहे they............maang में sindoor...............halanki आसमा शुरू शुरू में सिन्दूर नहीं लगाती थी मगर उसके आस पड़ोस में कुछ शादीशुदा औरतों को देखने के बाद उसे भी सिन्दूर लगाना ाचा लगता tha..............jissey वो बेहद की खूबसूरत लगती thi...........aur सैम को इससे कोई दिखात नहीं थी.............

वो तो नक़ाब भी नहीं पहनती thi..........chahe घर हो या bahar...............khule विचरों और माहोल में रहने की वजह से ........shayad.....................gale में उसने एक गोल्डन रिंग पहना हुआ tha................haathon में हरी हरी choodiyaan............jo उसके चलने से खनकती thi............ungliyon में एक दो सोने की अंगूठी भी thi.............aur पवन में payal......................kul मिलकर वो बेहद हसीं लग रही thi.............wo अपने आपको निहारती हुई ..........थोड़ा अपने चेहरे पर मुस्कान लती हुई ..................सीधा ऊपर के कमरे की तरफ चल पड़ती हैं जहाँ इस वक़्त हरी काम कर रहा था................

वैसे वो कुछ देर पहले फिराग हो जाने की वजह से थोड़ी बहुत कमज़ोरी सी महसूस कर रही thi...............magar उसे ाचा भी लग रहा tha................wo बहुत हल्का और सुकून महसूस कर रही thi.............jaise hi हरी की नज़रें आसमा पर पड़ी उसका दिल फिर से मचल utha................wo बड़े गौर से आसमा के बदन को एक तुक निहारने laga................uske दिल में तो हलचल हुई hi.............saath में टांगों के बीच भी एक तेज़्ज़ सनसनाहट hui...................wahin आसमा उसकी नज़रियों को नज़रअंदाज़ करते हुए चुप चाप सी वहीँ कड़ी रही...........

" memsaheb......................pyaas लगी hain...............kya आप मेरी प्यास बुझा dengi...............mera मतलब .........मुझे पानी दे देंगी.............." और हरी अपने चेहरे पर एक गन्दी सी मुस्कान लता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ आसमा का कलेजा फिर से धड़क उठता hain...............wo एक नज़र हरी के तरफ देखती हुई .........बिना हरी के सवालों का जवाब diye................seedha नीचे की तरफ चल पड़ती हैं और जाकर नीचे फ्रीज में से एक पानी की बोतल निकलने लगती हैं..............

" कमीना कहीं ka....................main उसकी बाटिओं का मतलब बहुत ाचे से समझती hoon............aaj भी ये इस साफ़ सुथरे पानी को गन्दा कर hi dega.................isey तो टंकी का पानी पिलाना चाहिए............" और आसमा अकेले में बड़बड़ाती हुई ऊपर के तरफ फिर से जाने लगती hain................jaise hi वो हरी के करीब पहुँचती हैं हरी के बदन से उठने वाली वहीँ स्मेल फिर से उसके पागल करने लगती hain................ek बार फिर से आसमा मदहोश होती जा रही thi............wahin हरी अपनी जगह से उठता हैं और आसमा के और करीब आता हुआ .............उसके हाथों को ाचे से छूकर वो उस पानी की बोतल को ले लेता हैं और आसमा के सामने ऐसे hi उस बोतल को मुँह लगाकर पीना लगता hain...............wahin आसमा चुप चाप से हरी को बस देखे जा रही थी..........

जैसे hi पानी आधा ख़तम हुआ वो अपना मुँह पूछता हुआ आसमा के तरफ देखकर धीरे से मुस्कुरा pada..............wahin आसमा दूसरी तरफ देखने lagi...........aab भी उस पानी में हरी के मुँह से निकलने वाले लार और थूक का मिला जुला रूस उसमें साफ़ तैर रहे they.......................jissey वो पानी पहले की तरह न अब साफ़ tha.............aur न hi पीने लायक...........

"memsaheb...............aap पियेंगी ..............." और एक बार फिर हरी उस बोतल को आसमा के तरफ धीरे से बढ़ता हुआ बोल पड़ा वहीँ आसमा जवाब में ना में अपना सर हिलती हुई धीरे से उसे इशारा करती hain................agar हरी इस वक़्त नहीं होता तो वो उस पानी को ज़रूर पी leti.................jaise उसने उस दिन इस पानी को पिया tha...................aasma फिर से बेकाबू होती जा रही thi.............tabhi उसका ध्यान कमरे के do-chaati (बर्ज़ा) पर pada...................uska फूलों का गुलदस्ता हरी ने साफ़ करके ऊपर hi रख दिया tha........ye देखकर आसमा अपने सर पर हाथ रखती हुई उसकी तरफ देखकर धीरे से बोल पड़ी............

" तुम्हें अकाल वकाल हैं या nahin....................ye फूलों का गुलदस्ता क्या इस बर्ज़ा पर रखा जाता hain...............wo भी जहाँ पुराने लगेज के सामान रखे ho..............seedhi इधर lawo..............main इसे अभी उतरती हूँ......................" और आसमा हरी को जैसे आर्डर देती हैं वहीँ हरी चुप चाप सामने राखी सीढ़ी को लता हैं और उस बरजे पर टिका देता हैं.............

" मेरा मुँह क्या देख रहे ho............is सीढ़ी को pakdo.............main चढ़ती हूँ ऊपर............." और आसमा उन सीढ़ियों पर धीरे धीरे चढ़ने लगती हैं वहीँ हरी मुन्न hi मुन्न झूम उठता hain.........wo ऐसा hi कहीं कुछ मौका ढूढ़ रहा tha................jo उसे मिल गया tha..............wo आसमा के करीब सत्कार खड़ा हो जाता हैं और सीढ़ियों को कसकर पकड़ लेता hain.......................aab आसमा के बदन से ुतनहे वाली परफ्यूम की भीनी भीनी खुसबू उसे पागल करती जा रही thi.............wo अंदर hi अंदर बेचैन हो चूका था..........

आसमा उससे सत्कार कड़ी थी और उसकी जांघें हरी के चेहरे के बहुत करीब thi................uska दिल तो किया की वो फ़ौरन आसमा को पकड़कर यहीं दबोच lein...................bahut मुश्किल से वो अपने आपको संभल पा रहा tha..............aisi अप्सरा उसके इतने करीब होकर भी वो कुछ नहीं कर पा रहा tha............ye सब ख्याल आते hi उसने चांस मरने की sochi............aur वो अपना एक हाथ धीरे से बढ़ता हुआ आसमा के पैरों के पास ले गया और उसके नरम और गोर पवन को बड़े आराम से छूने laga..............wahin आसमा सीढ़ियों पर चढ़ी हुई उस गुलदस्ते को उतर रही थी.............

जैसे hi उसने गुलदस्ता को अपने हाथों में liya.................hari फ़ौरन अपना हाथ ऊपर की तरफ बढ़ता हुआ उसके दोनों घुटन पर rakhkar...........fir एक हाथ को वहीँ रखता हुआ अपना दूसरा हाथ आगे की तरफ ऊपर की तरफ ले जाने laga....................uske जांघों की taraf...................issey पहले आसमा कुछ बोल पति या खुद को संभल pati...................wo आसमा के चिकनी गांड और कमर पर अपने हाटों को फेर चूका tha....................usney अपने हाथों को बस फेरा hi नहीं था बल्कि आसमा के गांड को ाचे से मसल भी दिया tha.................ye सब इतनी जल्दी में हुआ की आसमा समझ hi नहीं payi...........hari को तो जैसे जनात नसीब हो गयी......................

इधर हरी के इस तरह से हाथ फेरने से आसमा के हाथों में थमा वो गुलदस्ता एक झटके में उससे चूत गया और नीचे गिरते hi चकनाचूर हो gaya....................aasma गुस्से से जैसे बायकला uthi..............usey हरी से ऐसी उम्मीद बिलकुल भी नहीं thi.............wo फ़ौरन सीढ़ियों से नीचे की तरफ उतरती हैं और हरी को गुस्से से घूरने लगती hain..............issey पहले हरी कुछ kehta..........ya आसमा कुछ उससे poochti........................ek ज़ोर की cchhhhhhhhhhhhhaaaaaatttttaaaakkkkkkkkkkkkkkk.........ki आवाज़ से सारा माहोल गूँज पड़ा.........................

थप्पड़ इतनी ज़ोर की थी की हरी के गलों पर आसमा के उँगलियों के निशान चाप से गए they..................wahin गुलदस्ता गिरने की आहात सुनकर शांति भी उस कमरे में दौड़ी चली आयी और अंदर का नज़ारा देखकर उसके भी जैसे होश उड़द गए.......................

" तुम इस घर के नौकर हो तो नौकर hi raho............aur अपनी हुड्ड में raho.......................main चुप रहती हूँ इसका ये मतलब नहीं की तुम मेरे साथ कुछ भी करते raho......................aur मैं बस तमाशा देखती rahun....................aane दो सैम ko...............main तुम्हारी शिकायत उससे करती hoon..................tab तुम्हें समाजः में आएगा की किसी को चढ़ना क्या होता हैं.............." और आसमा इस बार गुस्से से बायकला जाती hain..............hari के प्रति उसके मुन्न में विचार अब धीरे धीरे बदल रहे they...................wo अब उसके करीब जाना चाहती थी मगर इस हरी ने जल्दीबाज़ी में आकर सब कुछ गड़बड़ कर दिया tha.................wahin शांति अपने सर पर हाथ पीटती हुई अंदर आती हैं और आकर आसमा के पवन पर गिरकर उससे माफ़ी मांगने लगती हैं.............

" memsaheb...............maaf कर दो न isko.....................ye आपको देखकर बहक गया tha...................aagey से ये ऐसा कुछ नहीं karega.....................arey खड़े खड़े मेमसाहेब का मुँह क्या देख raha...............chal आकर माफ़ी मांग मेमसाहेब से......................." और शांति जैसे उसपर बरस पड़ती वहीँ हरी बुझे मुन्न से आकर नीचे बैठ जाता हैं और आसमा के पवन को छूने लगता हैं ये देखकर आसमा उससे दूर हुत्त जाती हैं.................

" ये तुम्हारी पहली गलती हैं इस लिए मैं तुम्हें छोड़ रही hoon..................ye मुट्ठ समझना की मैं तुमपर तरस खाकर ये कर rahi............balki शांति का मुँह देखकर तुमपर तरस खा rahi...............aab यहाँ खड़े क्यों ho..........dafa हो जाओ यहाँ se..................aur मेरे सामने आने की हिम्मत भी मुट्ठ करना..................." और आसमा गुस्से से अपने पवन पटकटकी हुई फ़ौरन बहार निकल जाती हैं वहीँ शांति आँख फाड़े हरी को बस घूरे जा रही थी................

" ये किआ किया tu............................tujhko मालूम हैं न की मेमसाहेब कैसी हैं फिर तूने कहे को उन्हें chuwa.................aab तेरे कर्मों की सजा मुझे भी भुगतनी padegi............chal अपने कमरे mein..........hum डॉन आराम से बैठकर बात करते हैं.............." और हरी का मूड ख़राब हो जाता hain..............aaj उसे अपनी hi गलती पर पछतवावा हो रहा tha................ki उसने ये सब करने में इतनी जल्दीबाज़ी क्यों कर di.....................magar अब कुछ भी नहीं हो सकता था...................

इधर आसमा अपने कमरे में आती हैं और अपना सर पकड़कर बैठ जाती hain.................usey हरी पर बेहद गुस्सा आ रहा tha..................aur आता भी क्यों naa.......................bharosa करके वो ुए अपने पास आने दी थी और मौके का फायदा उठकर वो उसके बदन पर कहीं भी हाथ ferega.................jo भी किया मैंने ाचा hi kiya.................aise लोगों के साथ ऐसा hi होना chahiye...............aaahhhhhhhhhhhhh........mera हाथ..............." थप्पड़ इतनी तेज़्ज़ मरने की वजह से आसमा का हाथ सूझ गया था और वो अब दर्द कर रहा था............

" अगर मेरा बस चलता तो उसे फ़ौरन इस घर से ढ़ाके मरकर निकल deti...................pata नहीं खुद को क्या समझता hain.................aab मैं भी देखती हूँ की वो कैसे मेरे सामने आता hain................aur कैसे मुझसे नज़रें मिलता hain...................kamina कहीं का...................." और आसमा अकेले में हरी को दो चार बातें बोलने लगती हैं..............1 घंटे तक उसका मूड ऑफ रहता हैं फिर वो कुछ नार्मल होती हैं तो जाकर t.v ों करती हैं और मूवी देखने लगती hain.................mood तो उसका t.v देखने का भी नहीं कर रहा tha.............magar कैसे भी वो अपना मुन्न मरती हुई बस t.v स्क्रीन की तरफ देखे जा रही थी.................
 
अपडेट- 14(बी) (मेघा अपडेट)

" गलती उसी की thi..........nahin करना चाहिए था उसे aisa....................aacha नहीं किया हरी ने मेरे saath................main उसपर अब भरोसा करने लगी thi..............janti थी की उसकी नज़र कैसी hain.................aur वो मुझे अजीब नज़रियों से घूरता hi रहता hain...........jaise वो मुझे हर पल नंगा करना चाहता ho...................sach में कितना गन्दा इंसान हैं ye................sochkar भी घिन्न आती हैं उसपर...................

आने दो सैम ko.................uski करतूत बताउंगी ussey..........tab सैम भी उसे धकिय मरकर यहाँ से निकल dega......................aasma बहुत कुछ सोच रही थी उसकी नज़रें t.v स्क्रीन पर ज़रूर थी मगर दिमाग में बहुत से सवाल जवाब चल रहे they......................usney अपने हाथ पर गरम पट्टी बंधा था जिससे उसकी हाथ थोड़ी सूजी हुई thi.............us थप्पड़ की वजह से..........

" शांति की भी बोलती बंद हो gayi...................us कमीने के बदले वो आकर मुझसे माफ़ी मांगने lagi.................pata नहीं ये उसकी क्या लगती hain..........jo हमेशा उसकी तरफदारी hi करती रहती hain..................mil रहा हैं न उसे हरी का हथियार चूसने ko...............aur खाने ko...............tabhi तो वो उसके तरफ से बोल rahi..................aisa लग रहा जैसे वो उसके गाँव का nahin..............balki उसका मर्द hi ho................aab तो शांति को भी मैं यहाँ नहीं rakhungi.................sam से कहकर इन दोनों को यहाँ से हटवा दूँगी................

आसमा के चेहरे पर गुस्सा भी बढ़ता जा रहा tha.......................uske जेहन में बहुत से सवाल उठ रहे they.............wo ठंडा पानी पीती हैं और अपने आपको पूरी तरह से नार्मल करने की कोशिश करती hain...............magar वो नार्मल नहीं हो पा रही thi..............aaj से पहले सैम के अलावा उसे किसी ने भी छूने की हिम्मत तक नहीं की thi.......to फिर इस दो कौड़ी के नौकर की इतनी himmat..............apni स्टेटस का भी उसे एक पल ख्याल नहीं aaya...........ek बार देख तो लेता की वो कैसा हैं और मैं kaisi...............kaha वो कला मोटा सांड की tarah..........aur कहाँ main............main उसे कभी माफ़ नहीं karungi...........kabhi नहीं..............

बहुत देर तक आसमा ये सब सोचती रहती hain.....................ander hi अंदर वो बेचैन भी होती जा रही thi...........is वक़्त उसे कुछ भी ाचा नहीं लग रहा tha...................tabhi उसके मोबाइल पर सैम का कॉल आता हैं और वो हड़बड़ा सी जाती hain.......................usey समझ में नहीं आ रहा था की वो सैम से इस वक़्त बात करे या nahin..........kuch सोचकर वो अपना फ़ोन रइवे करती हैं वहीँ सैम हमेशा की तरह खिलखिलाकर बोल पड़ता हैं...........

" कैसी हो डार्लिंग..............." और सैम धीरे से बोल पड़ा वहीँ आसमा बुझे मुन्न से ठीक हूँ कहकर फिर से खामोश हो gayi..............ek बार तो उसके दिमाग में ये ख्याल आया की वो सैम को साडी बातें बता dein...............magar न जाने क्यों वो कुछ सोचकर चुप हो गयी..........

" क्या हुआ darling.................tum चुप क्यों ho................kisi ने कुछ कहा क्या!!!!! " और सैम आसमा को ऐसे खामोश होता देखकर धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ आसमा जवाब में धीरे से बोल पड़ती हैं..........

" wo..........ghar के naukar.............hain न..........." और आसमा का कलेजा ज़ोरों से धड़क उठता hain..............jitna उसे कहना था वो कह चुकी थी आगे उसकी जुबान अब उसका साथ नहीं दे रही thi.............wo फिर से चुप हो जाती हैं वहीँ सैम आगे बोल पड़ता ऐन...........

" क्या हुआ yaar..........kya ये दोनों नौकर ठीक से काम नहीं कर rahe..............ya तुम्हें इनसे कुछ शिकायत hain........agar हाँ तो मैं आकर इन्हें हटा देता hoon.........koi दूसरा नया नौकर रख loonga................ismein इतना सोचना क्या!!!!!!! और सैम आसमा को जैसे समझाता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ आसमा हड़बड़ा सी जाती हैं............

" नहीं sam..................aisi बात नहीं hain............wo............upar मैं उन दोनों से साफ़ सफाई करवा रही थी तो .............मेरे हाथों से फूलों का गुलदस्ता छूटकर टूट gaya......bus...." और अस्मा की जुबान जैसे लड़खड़ा जाती हैं वहीँ सैम ज़ोरों से हंस पड़ता हैं...........

" hahahahah.........bus इतनी सी baat............to नया आ जायेगा jaan.............ismein बड़ी बात क्या hain...........................aacha तुम अपना ख्याल रखना मैं कल सुबह तक घर आ jawunga..............rakhta हूँ अब.............." और आसमा आगे कुछ कहती सैम फ़ोन डिसकनेक्ट कर चूका tha.........wahin आसमा के चेहरे पर उदासी साफ़ झलक पड़ती हैं............

" मुझे सैम से बोल देना चाहिए tha.........uski kartoot............tab मज़ा आता.............." और आसमा अकेले में फिर से बहुत सी बातें सोचने लगती हैं................

शाम से रात hui...............jaise hi आसमा बिस्टेर पर गयी नींद उसे नहीं आ रही thi................wo फिर से हरी के बारे में सब सोचने लगी................

" आज जो कुछ भी हुआ क्या वो सही tha...................hari को ऐसा नहीं करना चाहिए tha..................magar हो सकता हैं वो मेरा रंग रूप देखकर पिघल गया hoga......jaise कॉलेज टाइम पर लड़के मुझपर पिघल जाते they.............tab की बात और thi.........aur अब की बात aur..................us वक़्त मैं कुंवारी thi...........aur अब मैं शादीशुदा hoon...............magar वो तो हैंडसम लड़के मेरे पीछे पड़े रहते थे मगर यहाँ तो ये एक naukar...........mere घर में काम करने wala.............jo दिकने में भी ाचा नहीं hain.............aur कितने गंदे तरीके से रहता hain..............jungli कहीं का..................

ऐसा लगता हैं जैसे वो कितने दिनों से नहाया नहीं hain..................nahayega भी kaise........agar बीवी पास में रहती तो न वो ये सब karta...............akela मर्द खुला सांड की तरह होता हैं वो कहीं भी जाकर किसी का खेत चार सकता hain..............uspar जल्दी कोई लगाम नहीं लगा sakta.................hari के साथ भी कुछ ऐसा hi हैं...........

अगर उसकी बीवी आज ज़िंदा होती तो शायद वो आज ऐसी हरकत नहीं karta................akele 10 साल से वो बिना औरत ke................kitna तड़पता होगा वो अंदर hi ander..................aurat की चाहत तो उसे भी पागल कर देती hogi.................shanti जैसे आज कह रही थी की उसे भी मर्द की चाह होती hain...............dusaron का क्या .........आज सैम को गए 4 दिन हो गए और मेरी हालत खुद ख़राब hain................main खुद सेक्स के लिए अंदर hi अंदर तड़प रही hoon.........to वो बेचारा 10 सैलून से अकेला रहता आ रहा hain...............uspar क्या बीतती होगी..............

ये सब जाने सुने बिना hi मैंने उसपर अपना हाथ उठा diya...........jo हुआ ठीक नहीं hua...............mujhe उसके साथ इस तरह का बर्ताव नहीं करना चाहिए tha............aagey से मैं उसे कुछ भी नहीं bolungi............mujhe उसकी मज़बूरी समझनी चाहिए thi.................khair जो हुआ सो hua................shanti से कहलवाकर मैं उसे माफ़ कर doongi...............magar........wo तो अकेला ऐसे hi तड़पता rahega.............main ाचे से जानती हों की उसकी प्यास और चाहत मुझसे hain................nahin तो वो मुझे ऐसे न ghoorta......................magar मैं उसके लिए क्या कर सकती हूँ...................

या khuda......................main तो अब बीच मजधार में फंस gayi....................mujhe तो समझ में नहीं आ रहा की अब मैं क्या karun....................ek काम करती hoon.........sab कुछ नसीब पर छोड़ देती hoon...........jo होगा सो देखा जायेगा......................" और ये ख्याल आते hi आसमा के दिल से एक बहुत बड़ा बोझ उतर जाता हैं और वो नींद के आगोश में डूबती चाय जाती hain....................dekhna था आगे वक़्त को क्या मंज़ूर था...........................

तो बे कॉन्टिनोएड.................................................
 
Update-15(A) (मेघा अपडेट)

या khuda......................main तो अब बीच मजधार में फंस gayi....................mujhe तो समझ में नहीं आ रहा की अब मैं क्या karun....................ek काम करती hoon.........sab कुछ नसीब पर छोड़ देती hoon...........jo होगा सो देखा जायेगा......................" और ये ख्याल आते hi आसमा के दिल से एक बहुत बड़ा बोझ उतर जाता हैं और वो नींद के आगोश में डूबती चाय जाती hain....................dekhna था आगे वक़्त को क्या मंज़ूर था...........................

अब आगे....................................................................

दूसरे din.......................subeh का वक़्त tha.................aasma बाथरूम में नाहा रही thi...................is वक़्त उसके जिस्म पर एक भी कपडा मौजूद नहीं tha..........................shower की बूँदें जब उसके बदन पर पड़ती तो उसका जिस्म सोने की तरह चमक uthatha..................thanda ठंडा पानी उसके गरम जिस्म को ठंडा करने के बजाये और भी भड़का रही thi....................aachey से शावर लेने के बाद वो अपने जिस्म पर बॉडी लोशन क्रीम लगाती हैं और एक बढ़िया सी परफ्यूम अपने जिस्म पर छिड़कने लगती हैं.....................

उसका जिस्म महक उठा tha....................wo टॉवल लपेटकर बहार आती हैं और बैडरूम में जाकर अपने आपको एक तुक आईने के सामने निहारने लगती hain.............wo अपने टॉवल को उतरती हुई अपने नंगे जिस्म को फिर से एक बार बड़े hi ध्यान से देख रही thi................aur कुछ सोचकर उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान आ जाती hain..............wo सामने की ालमिरह को खोलती हैं और उसमें से अपने लिए एक ाचा सा ड्रेस सेलेक्ट करती hain.................aaj उसके लिए स्पेशल दिन tha..................special इस लिए क्यों की आज सैम आने वाला tha.................aur आसमा आज सैम को सरप्राइज देना चाहती thi...............is लिए वो आज कुछ ख़ास करना चाहती thi.............ya फिर शायद कुछ aur.........................ye तो वही जानती थी.................

ालमिरह की रैक में बहुत से सूट के महंगे महंगे कपड़े they..............aur नीचे की रैक में बहुत सी डिज़ाइनर और महंगी वाली saariyaan..............halanki आसमा ज़्यादा साड़ी नहीं पहनती थी क्यों की निकाह के बाद उसे कभी ऐसा कोई मौका नहीं मिला था जिससे वो साड़ी pehney............aur दिन भर जब घर में रहना hi था तो उसे थोड़ा ओड लगता tha................jab पहली बार वो साड़ी पहनी थी तो उस दिन वो किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही thi...............aisa hi कुछ सोचकर वो नीचे की रैक में से साड़ियां निकलती हैं और एक एक कर सेलेक्ट करने लगती hain...................ek वाइट और ग्रीन कलर की डिज़ाइनर साड़ी उसे पसंद आती हैं हालाँकि वो इस साड़ी को इससे पहले कभी नहीं पहनी thi...............wo इस साड़ी को क्या वो एक दो साड़ी को छोड़कर कोई भी साड़ी को कभी नहीं पहनी थी...................

मगर उसे अब ये सब का शौक होता जा रहा tha....................wo ालमिरह में से एक ट्रांसपेरेंट डिज़ाइन वाली काली रंग की ब्रा और पंतय निकलती हैं और उसे पहनने लगती hain.............fir वो उस साड़ी को पहनाए लगती hain............blouse सामने से थोड़ा डीप लौ कट था जिससे उसकी क्लेवराज की झलकियां थोड़ी बहुत दिख रही thi............magar पीछे का हिस्सा काफी हुड्ड तक खुला हुआ tha........yu कहो की बैकलेस tha.................ek 4 इंच की पट्टी उस ब्लाउज को जकड़े हुई thi...............aur ऊपर दो डोर बंधी थी जिसमें दो लटकन लगे हुए they.............jispar घुंघरू बाँदा था जो उसके हिलने डुलने से बार बार खनक रहे थे...........

आसमा की पीठ काफी हुड्ड तक नंगी दिख रही thi...........gora बदन होने की वजह से उसकी पीठ और कमर का हिस्सा बहुत hi ज़्यादा सेक्सी और ाखर्षक नज़र आ रहा tha...........aaj उसने साड़ी को अपनी नाभि से 3 इंच नीचे पहना हुआ था जिससे उसकी गोरी कमर और सपाट पेट बेहद आकर्षक लग रही thi.................wo धीरे धीरे उस साड़ी को पहनती हैं और फाइनल टच देकर अपने चेहरे पर क्रीम पाउडर और लिपस्टिक लगाने लगती hain..............aaj उसे सजने संवारने में एक घंटे का वक़्त लग गया tha.............jab वो पूरी तरह से रेडी हो जाती हैं और जब वो अपने आपको आईने में निहारती हैं तो उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान तैर जाती hain..............wakayi में आसमा आज बेहद खूबसूरत नज़र आ रही thi..............aaj उसने मांग में सिन्दूर भी लगाया हुआ था जिससे देखने के बाद उसे ये कोई नहीं कह सकता था की वो मुस्लिम हैं.................

जैसे जैसे वक़्त गुज़ारा और उसकी धड़कनें बढ़ती चली gayi................jaise hi 8 बजा घर की दूर बेल्ल बजी और आसमा का चेहरा ख़ुशी से खिल utha.............kyon की उसे लगा की सैम शायद आ चूका hain..............wo एक बार फिर से अपने आपको आईने में एक नज़र देखती हुई सीधा मैं गेट की तरफ चल padi...........................uska कलेजा एक्ससिटेमेंट की वजह से तेज़ी से धड़क रहा tha.................jaise hi आसमा दरवाज़ा खोली सामने शांति हाथ में झाड़ू लिए चुप चाप से कड़ी thi......................aaj वो अकेले आयी thi.............hari उसके साथ नहीं tha...................shanti पर जब उसकी नज़रें गयी उसके चेहरे पर थोड़ी सी उदासी आ गयी मगर जब उसे हरी कहीं नज़र नहीं आया उसका मुस्कुराता हुआ चेहरा और भी ज़्यादा मुरझा सा गया................................

शांति की नज़रें जब आसमा पर गयी वो सर से लेकर पवन तक उसे निहारती रही और मुस्कुराते हुए उसकी तारीफ करने लगी..............

" memsaheb....................aap तो सच में पारी लग रही ...................कितनी जांच रही आप पर ये saari...............haathon में ये choodiyan..........maang में sindoor..............koi भी आपको देखेगा तो बस देखता रह jayega..................main तो कहती हूँ की आप भी हमेशा साड़ी hi पहना कीजिये................" और शांति बड़े गौर से आसमा के उस रूप को देखने lagi.............wahin आसमा बनावटी मुस्कान लिए हौले से मुस्कुरा पड़ी..................

" हरी नहीं आया आज काम pe......................kyon!!!!!!!!!!! और आसमा शांति की तरफ देखती हुई हौले से बोल padi...................uske दिमाग में बहुत से सवाल जवाब फिर से चलने lage..........wahin शांति धीरे से बोल पड़ी................

" memsaheb.................aap hi ने तो कल मन किया था की वो आपके सामने नहीं aayega..................ye सोचकर वो आज काम पे नहीं aaya...................aaj से वो बहार का सारा काम dekhega..............aur अंदर का सारा kaam...........main.............." और शांति जैसे हरी के बारे में सफाई देते हुए बोल पड़ती हैं वहीँ आसमा कुछ देर तक चुप रहती हैं फिर वो उसे अजीब नज़रियों से घूरने लगती हैं..........................................

" मैंने कह दिया की वो सामने नहीं आएगा तो क्या सच में नहीं aayega....................usney हरकतें hi कुछ ऐसी की थी तो मैंने गुस्से में आकर उससे कह दिया tha...................wo होता कौन हैं फैसला करने wala................is घर की मालकिन मैं hoon.................wo नहीं...........!!!!!!!!!!!! ........जाओ और जाकर उससे कह दो की अगर काम पे आना हैं तो आये नहीं तो कोई और दूसरा ठिकाना ढूढ़ लें.............................." और आसमा जैसे शांति पर बरस padi...............kuch देर पहले जो उसका चेहरा ख़ुशी से खिला हुआ था वो अब कुछ hi पल में मुरझाया गया tha................aur उस चेहरे पर गुस्सा भी साफ़ नज़र आने लगा था.................

" ठीक हैं memsaheb.........main जाकर उसे अभी बुला लती हूँ............." और शांति बिना आसमा के जवाब सुने सीधा अपने कमरे की तरफ निकल पड़ती हैं वहीँ आसमा कुछ देर तक वहीँ चुप चाप कड़ी रहती हैं और थोड़े देर बाद उसे हरी सामने से आता हुआ दिखाई देता hain...................aaj वो उसका लाया हुआ कपड़े में नहीं था बल्कि आज उसने वही पुराण फटा हुआ कपडा पहना था जो उस दिन पहली बार काम पर जब आया था तो पहना tha............shirt और लुंगी ................ये देखकर आसमा गुस्से से अंदर hi अंदर बायकला जाती हैं.............

" तुम समझते क्या हो अपने aapko........................jo तुम चाहोगे वही hoga....................jawo ऊपर के कमरे में जाकर ाचे से साफ़ सफाई करो..............." और आसमा बड़े गौर से हरी के चेहरे की ओरे देखने लगती hain.............wahin हरी एक नज़र आसमा को सर से लेकर पवन तक देखता हैं फिर से वो अपनी नज़रें नीचे की तरफ झुका लेता hain.......aur अपना सर..............." जी मेमसाहेब " में हिलता hua..........bina आसमा के तरफ देखे सीधा वो ऊपर के कमरे की तरफ चल पड़ता hain...................halanki आसमा ने उसे एक भी बार अपनी तरफ देखते हुए नहीं पाया था ...........जैसा वो उसे हमेशा देखता tha.......................shayad इस वजह से वो हरी पर और भी ज़्यादा चिढ गयी thi................waise भी वो आज इतनी सज संवर आयी thi............kya पता सैम को दिखने .......या उस मोठे सांड हरी को दिखने..................

जो भी ho.........magar उसे अंदर hi अंदर हरी पर बहुत गुस्सा भी आ रहा tha.......................hari का ये बदला हुआ रूप उसकी समझ से परे tha..................kal तक वो बहुत गंदे कमैंट्स किया करता tha..............jo उसे हमेशा गन्दी नज़रियों से देखा करता tha............aaj वो साक्ष उसे एक भी बार अपना सर उठकर भी उसकी तरफ नहीं देख रहा tha............hari का ऐसा बदला हुआ रूप आसमा को ज़रूर हैरान और परेशां कर रहा था................

" आप क्या सोचने लगी memsaheb.................waise आज इतनी सज संवर किस liye..................koi ख़ास इंसान आने वाला हैं क्या !!!!!!!!!!........" और शांति हौले से आसमा के तरफ देखती हुई बोल padi..................wahin आसमा जवाब में फिर से बनावटी मुस्कान लिए .................अपने चेहरे पर लती हुई धीरे से मुस्कुरा देती हैं..............

" तुम्हारे साहेब आने वाले hain.........unhi के आने का इंतज़ार कर रही hoon...............wo अभी आते hi होंगे...................." और आसमा एक नज़र ऊपर कमरे की ओरे देखती हैं मगर उसे हरी कहीं नज़र नहीं aata...............ye देखकर उसका चेहरा फिर से मुरझा सा जाता hain..................kyon वो उसे लिए अब बेचैन हो रही thi...............ye उसे भी समझ में नहीं आ रहा tha............kuch तो बात थी उसमें.............................

थोड़े देर बाद शांति भी अपने काम पे लग gayi................hari कमरे की साफ़ सफाई करता हुआ सामने ऊपर के हॉल के तरफ अब साफ़ कर रहा tha.................wahan से वो बड़ी आसान से आसमा को देख सकता tha...............wahin आसमा की जब उसपर नज़र गयी वो बड़े गौर से हरी की तरफ देखने lagi....................wo बीच बीच में हरी को देख रही thi..............magar हरी ने एक भी बार उसकी तरफ मुड़कर नहीं देखा tha..........jissey आसमा अंदर hi अंदर चिढ सी गयी..............

थोडेर दे बाद घर का बेल्ल दुबारा से बज utha........aur आसमा अपने सोफे से इतराते हुए हरी की तरफ एक नज़र देखती हुई सीधा मैं गेट की तरफ चल padi...............magar हरी की नज़रें जहाँ जमी थी वहीँ बस जमी हुई thi.................aasma जैसे hi मैं दूर खोली सामने सैम खड़ा tha....................apne हाथों में बैग लिए hue...............jab उसकी नज़रें अपनी अप्सरा जैसी बीवी पर पड़ी और जब उसने देखा की आज आसमा साड़ी पहनी हुई हैं और वो उसमें गज़ब की क़यामत लग रही हैं तो सैम ख़ुशी से झूम utha...................wo फ़ौरन अंदर आया और आसमा को वहीँ सबके सामने अपने सीने से लगता हुआ उसके गलों पर एक हल्का सा किश किया वहीँ आसमा के चेहरे पर शर्म की लखरें साफ़ नज़र आने lagi..............wo अपने दोनों हाथों को सैम के सीने पर मरती हुई अजीब इस नज़रियों से usey............to अपने पीछे काम कर रहे हरी और शांति की तरफ देखने लगी...................

हालाँकि शांति उन्हें देखर हौले हौले से मुस्कुरा रही थी मगर हरी की नज़रें न ऊपर की तरफ uthi.................to फिर दुबारा से न uthi..................wahin आसमा को इस बार अंदर तक ढाका सा laga..................itna सब कुछ होने के बावजूद हरी उसके तरफ एक भी बार नहीं देख रहा tha..................aasma को अपने सामने होते हुए भी वो उसे नज़र अंदाज़ कर रहा tha...............ye आसमा को अंदर hi अंदर तकलीफ दे रही thi.................hari के प्रति उसके अंदर भी थोड़ा बहुत लगाव होने लगा था.................
 
Update-15(B) (मेघा अपडेट)

आसमा एक नज़र ऊपर की तरफ निहारती हुई सैम का हाथ पकड़ते हुए सीधा अपने कमरे में चल पड़ती hain..............shayad हरी को जलाने के मकसद se.................magar हरी को उससे शायद कोई फर्क नहीं पढ़ने वाला tha...............wahin सैम की नज़रें आसमा के खूबसूरत चेहरे पर हटाए नहीं हुत्त रही thi.............jaise hi सैम अंदर जाता हैं वो आसमा पर टूट पड़ता हैं...............

" दूर क्यों कड़ी हो darling..............is लिए मैं तुम्हें साड़ी नहीं पहनने deta..................jab तुम साड़ी पहनती हो न तब मुझे मुन्न करता हैं की मैं यहीं तुम्हारे साथ कहीं भी शुरू हो jawun................mujhe भूख लगी hain.................jaldi से अपने कपड़े utaro..................mujhe तुम्हें अब खाना हैं............." और सैम आसमा के चूचियों पर हाथ रख देता हैं और उसे अपनी तरफ खींचता हुआ आसमा के खुले और नंगे पीठ पर अपनी जुबान रखकर चूसने और चटनी लगता hain.................wahin आसमा की सांसें भरी होने लगती हैं...............

" आप भी na..................ghar में दो दो नौकर काम कर रहे और आपको इस वक़्त ये सब सूझ raha...................pehle ाचे से मुँह हाथ धो lijiye........kuch नाश्ता वास्ता कर लीजिये फिर आराम से मुझे khaiyega..........main कहीं भागी नहीं जा rahi..................aur आप क्या खाएंगे mujhe................apni बस प्यास बुझ जाती हैं और आप मुझे ऐसे तड़पता हुआ हमेशा छोड़ देते hain...............agar आज भी ऐसा hi कुछ करना हैं तो मुझसे ये सब और नहीं होगा...................." और आसमा जैसे सैम को हिदायक देते हुए कहती हैं वहीँ सैम जवाब में धीरे से मुस्कुरा देता हैं..............

वो अपने कमरे का दूर बंद करता हैं और आसमा की साड़ी फ़ौरन ऊपर करता hua......................uski पंतय नीचे घुटन तक सरकता hain......aur ब्लाउज के ऊपर से उसकी दोनों चूचियों को कसकर मसलता hua.............fauran अपने पेण्ट की चैन खोलता हैं और अपना 5 इंच लौड़ा आसमा की छूट में एक hi बार घुसा देता hain.................aasma की छूट थोड़ी बहुत गीली होने की वजह से उसे कोई परेशानी नहीं hoti..........ya शायद छोटे लुंड होने की वजह se..........................aasma बीएड पकड़ी हुई अपनी कमर jhukaye...................peechay से सैम अपने लुंड को घुसाए उसकी छूट को छोड़ रहा था................

सैम कितना ज़्यादा बेचैन था ये उसकी हरकतें साफ़ ज़ाहिर कर रही thi.................wahin आसमा इससे पहले कुछ समझ पति या सैम को रोक पति..............8 या 10 ढाकों में hi सैम का लावा फुट पड़ा और वो चीखते हुए आसमा के दोनों चूचियों को कसकर अपने हाथों में मसलते hue...............apna सारा छुम उसकी छूट की गहराईयों में उतरता चला gaya................wahin आसमा का पहले hi मूड ऑफ tha..........sam की हरकतों को देखकर उसका मूड पूरा ऑफ हो गया tha...............wo ठीक से गरम भी नहीं हो पायी थी और इधर सैम अपना झंडा फेहरा चूका tha....................wo फ़ौरन सैम से दूर होती है और गुस्से से उसके चेहरे की तरफ देखने लगती हैं..........

" बस हो गया aapka...............mujhe पता था ऐसा hi कुछ hoga..................jitna जल्दी जोश जगा उतना hi जल्दी आपका ठंडा भी हो gaya..............har बार की तरह आप मुझे बस गरम करके छोड़ diye..................jab आप मुझे ठंडा नहीं कर सकते तो क्यों बार बार गरम करते हैं..............." और आसमा साड़ी को और पंतय को ऊपर चढ़ती हुई और अपने कपड़ों को सही करती हुई सीधा बाथरूम में चली जाती हैं वहीँ सैम अपना छोटा सा लुल्ली पड़के बस्टर पर लुम्बी लुम्बी सांसें ले रहा था...............

थोड़े देर बाद वो वापस आती हैं तो सैम अभी भी बिस्टेर पर लेता हुआ tha...............uski आँखें अभी तक बंद थी.............

" अगर आपका हो गया हो तो मैं नाश्ता ले आती hoon..............kuch नाश्ता कर lijiye.........door से आये हैं तो थक गए होंगे................" और आसमा थोड़ा सा चिढ़ते हुए बोल पड़ती hain.............wahin सैम अपने मुरझाये लुंड को अपने पेण्ट के अंदर करता हैं और आसमा के चेहरे की तरफ देखता हुआ धीरे से हंस पड़ता हैं.............

" तुम इतनी हॉट हो तो इसमें मेरी क्या गलती हैं darling......................tumhein देखकर तो ाचे ाचों का पानी ऐसे hi निकल jayega..............aab गुस्सा chodho................shaam को हम मार्किट chalengey..........mujhe अपनी डार्लिंग के लिए तीन चार जोड़ी कपड़े भी तो लेने हैं.........." और सैम बात बनता हुआ अपने कपड़े चेंज करता हैं और इधर उधर की बातें करता हैं............

करीब एक घंटे बाद सैम अपने बिस्टेर पर सू जाता हैं तब आसमा ऊपर कमरे की तरफ जाती हैं और शांति को देखकर धीरे से मुस्कुरा देती hain..........wahin शांति भी जवाब में मुस्कुरा देती hain............wo चरों तरफ अपनी नज़रें इधर उधर फेरने लगती हैं मगर उसे कहीं हरी नज़र नहीं aata...........ye देखकर वो थोड़ी परेशां हो जाती hain.........aur शांति से पूछती हैं.................

" हरी कहा गया...................." और आसमा का कलेजा फिर से धड़क utha..................wahin शांति आसमा के तरफ देखती हुई धीरे से बोल पड़ी..........

" वो तो चल gaya...................kaam ख़तम हो जाने पर वो भला यहाँ क्यों रुकेगा...................." और शांति के ऐसे जवाब को सुनकर आसमा के चेहरे का रंग थोड़ा फीका पढ़ जाता hain.............ander hi अंदर उसे हरी पर बहुत गुस्सा भी आ रहा tha............wo कुछ नहीं कहती और थोड़े देर बाद शांति भी अपने कमरे में चली जाती हैं...........

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शांति जैसे hi कमरे में पहुँचती हैं हरी बीड़ी पीटा हुआ गहरे खेलों में डूबा हुआ tha.................shanti को आता हुआ देखकर वो फ़ौरन अपनी नज़रें दूसरी तरफ फेर लेता hain..........wahin शांति उसके बाजु में आकर बैठ जाती हैं और हौले से उसके कंधे पर अपना एक हाथ रखती हैं.............

" तू ऐसा कहे कर रहा hari.....................memsaheb को कहे तकलीफ दे raha..........janta हैं न वो कितनी ाची hain...........kitni भोली और मासूम हैं................." और शांति हौले से बोल पड़ती हैं वहीँ हरी अभी भी अपनी नज़रें नीचे की तरफ झुकाये हुआ था.................

" तो इसमें मैं क्या karun....................jo मेमसाहेब ने बोलै वही तो मैं अब कर रहा hoon.....................aab मैं उन्हें नहीं देख रहा तो भी dikkat..................dekh रहा था तो भी दिक्कत thi................main hi गलत था shanti...............wo मेरे हाथ कभी नहीं आने wali.................issey ाचा की मैं उन्हें हमेशा हमेशा के लिए भूल जावून..............." और हरी बीड़ी की एक काश लेता हुआ धीरे से बोल पड़ता hain...................uske चेहरे पर उदासी के बदल साफ़ चालक रहे थे..................

" hari...................jo कल तुमने किया वो गलत kiya.............thoda तुझे साबरा करना चाहिए tha............memsaheb को थोड़ा वक़्त देना चाहिए tha...........magar तुझे हमेशा हर बात की जल्दी रहती हैं ना................. waise............tujhe मैं एक बात bolun.....................aisa मुझे नहीं lagta...................agar तेरे प्रति मेमसाहेब के मुन्न में अगर कुछ न रहता तो वो बार बार तुझे hi न dekhti..............magar तू एक भी बार उनको नहीं dekha...........is वजह से उन्हें आज तुझपर और गुस्सा aaya...............dekha आज वो कितनी हसीं और प्यारी लग रही thi.................aaj पहली बार उन्होंने साड़ी पहनी थी.............." और शांति जैसे अपने मुन्न की बात बोल देती हैं वहीँ हरी के चेहरे पर थोड़ा सा गुस्सा साफ़ झलक पड़ता हैं............

" उन्होंने साड़ी मेरे लिए nahin.................balki अपने शौहर के लिए पहनी thi................uske आने की ख़ुशी में.............." और हरी फिर से बीड़ी की काश कीचता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ शांति कुछ देर सोचने के बाद दुबारा बोल पड़ती हैं.........

" जो भी तू कह ले hari...........magar पता नहीं क्यों मुझे तो ऐसा लगता हैं की मेमसाहेब के दिल में तेरे लिए ज़रूर कुछ न कुछ तो hain................tu नहीं समझेगा इस बात ko........kyon की तू मर्द हैं na......................magar ..............मैं एक औरत hoon...................aur औरत के दिल में क्या हैं ये बात एक औरत से बेहतर और कोई नहीं समझ sakta...............aab चिड़िया दाना चुगने को तैयार hain.........bus सही मौके पर जाल फेंकी हैं bus................baki तू खुद समझदार हैं................." और शांति जैसे अपने दिल की बात जुबान पर लेट हुए बोल पड़ती हैं वहीँ हरी उसकी बाटिओं को अनसुना करता हुआ अपने बीड़ी की लात में डूबता चला जाता hain...........dekhna था की आने वाले वक़्त को क्या मज़रूर था...........................

तो बे कॉन्टिनोएड..............................................................
 
अपडेट- 16(ा) (मेघा अपडेट)

" जो भी तू कह ले hari...........magar पता नहीं क्यों मुझे तो ऐसा लगता हैं की मेमसाहेब के दिल में तेरे लिए ज़रूर कुछ न कुछ तो hain................tu नहीं समझेगा इस बात ko........kyon की तू मर्द हैं na......................magar ..............मैं एक औरत hoon...................aur औरत के दिल में क्या हैं ये बात एक औरत से बेहतर और कोई नहीं समझ sakta...............aab चिड़िया दाना चुगने को तैयार hain.........bus सही मौके पर जाल फेंकी हैं bus................baki तू खुद समझदार हैं................." और शांति जैसे अपने दिल की बात जुबान पर लेट हुए बोल पड़ती हैं वहीँ हरी उसकी बाटिओं को अनसुना करता हुआ अपने बीड़ी की लात में डूबता चला जाता hain...........dekhna था की आने वाले वक़्त को क्या मज़रूर था...........................

अब आगे............................................................

शांति का अंदाज़ा बिलकुल सही tha...................aasma अंदर hi अंदर हरी के लिए बेचैन thi................uske जिस्म से निकलने वाली वो खुसबू उसे मदहोश और पागल करती जा रही thi.................ek नशा सा था उस स्मेल में......................

शाम hui....................aur सैम तैयार होकर आसमा के साथ मार्किट जाने के लिए निकल pada..................aasma ने अभी भी वहीँ साड़ी पहनी हुई thi.................jaise hi वो बहार आयी गेट पर उसे कुछ दूर पर हरी खड़ा हुआ दिखाई diya...............magar जब हरी की नज़रें सैम और आसमा पर पड़ी उसकी नज़रें खुद बा खुद नीचे की तरफ झुक gayi................aasma जान बूझकर हरी के एकदम करीब से guzari.............aur जैसे hi वो उसके करीब से गुज़री उसकी सांसों में फिर एक बार वहीँ स्मेल उठी जिसके लिए आसमा न जाने कब से बेचैन थी...............

वो अपनी एक लुम्बी सी सांस लेती हुई जितना हो सके उस खुसबू को अपने अंदर समेत लेना चाहती thi.............ek बार फिर से उसका दिल मचल utha..............uske जिस्म में एक अजीब सी सिरहन फिर से दौड़ gayi....................aankhein जो कुछ पल के लिए बंद हुई तो उसपर एक हल्का सा खुमार चाय हुआ tha............sam जाकर अपनी कार में बैठ गया और पीछे पीछे आसमा भी उसके साथ चल padi..................wo बहुत देर तक चुप thi.................dimag में उसके बहुत से ख्यालात आ रहे थे....................

" क्या हुआ darling....................tum चुप क्यों ho!!!!!!!..........kuch हुआ क्या!!!!!!!! ......" और सैम एक नज़र आसमा के तरफ देखता हुआ धीरे से बोल पड़ा वहीँ आसमा जवाब में बस उसके तरफ देखने लगी................... और फिर धीरे से मुस्कुरा दी..............

" कुछ नहीं sam................bus ऐसे hi................" और आसमा खिड़की की तरफ बहार देखने lagi...........khidki खुली होने से उसकी जुल्फें उसके गलों को बार बार छु रही थी जिससे आसमा अपने उड़द रहे जुल्फों को अपने चेहरे से हटा रही thi..........wahin सैम आसमा की तरफ देखता हुआ धीरे धीरे मुस्कुरा रहा tha.............aasma वाकई इन कपड़ों में बेहद हसीं लग रही thi...................thode देर बाद वे दोनों मार्किट पहुँच gaye..............ek बड़ा सा शॉपिंग काम्प्लेक्स के सामने सैम अपनी कार को पार्क किया और फिर दोनों कुछ दूर पैदल hi उस मॉल के तरफ निकल पड़े.................

आसमा उस साड़ी में बेहद हसीं लग रही thi...............paidal चलने से उसका बदन थिरक रहा था जिससे आस पास के लोगों की जब उसपर नज़र जाती सबके मुँह से बस आआआअह्हह्ह्ह्हह निकल jati.............aasma का रूप रंग देखकर कोई भी आसानी से उसका दीवाना बन jata...............magar आसमा को किसी की परवाह भी नहीं thi...........wo तो अपने में मस्त thi..................kuch दूर जाने पर सड़क के किनारे 3 या 4 आवारा टाइप के लोग खड़े थे और सिग्रत्ती और पैन चबाते हुए आते जाते सभी लड़कियों और औरतों को गंदे गंदे इशारे और भद्दे भाड़े कमैंट्स भी कर रहे थे..............

ये लोग यहाँ के लोकल थे तो कोई भी इनके मुँह नहीं लगता tha................waise भी ये सब बदमाश किसम के they.............chaku, छुरी, kattey........sab इनके जेब में हमेशा rehtey..............ye लोग किसी को भी आसानी से मार dete.................ya कुछ कर dete.............shayad इस वजह से यहाँ लोगों के दिलों में इनका खौफ्फ़ tha.............isi खौफ्फ़ के चलते वे किसी भी लड़की या औरत को कुछ भी बोल dete................kisi भी राह चलती लड़की का हाथ पकड़ lete................aur कोई भी इन्हें रोकने टोकने वाला नहीं tha..............siwaye पुलिस ke.............jaise hi उन सबकी नज़रें आसमा पर padi.............sab लोग उसे सर से लेकर पवन तक गन्दी नज़रियों से घूरने रहे...................

" वो देख be...............samney...............kya माल जा रही hain................munn तो कर रहा की इस साली को यहीं पटक कर अभी छोड़ dun.....................kya फिगर hain.............iske दूध तो dekh.......kitne बड़े बड़े.......... और गांड तो पूछों mutt...........jee तो करता हैं की अभी इसमें लुंड दाल doon.............sali ये हर रोज़ अपने पति से ठुकाई करवाती hogi.................tabhi तो इसके इतने बड़े बड़े हो गए हैं............" उनमें से एक साक्ष ऊँची आवाज़ में बोल पड़ा और सभी उसके साथ में आसमा और सैम की तरफ देखते हुए ज़ोरों से ठहाका लगते हुए हंस pade....................aasma एक नज़र उन सब के तरफ देखती हुई वहीँ रुक गयी और अजीब सी नज़रियों से उन्हें घूरने lagi..............gussey से उसका चेहरा पूरा लाल पढ़ गया tha..............wahin सैम चुप चाप खड़ा था और वो कुछ नहीं बोल रहा tha.............shayad दुर्र की वजह से................

" तुम लोगों को शर्म नहीं आती kya......................tumhare घर में माँ बहिन नहीं हैं जो तुम आये दिन सबके साथ इसी तरह की बढ़तमीज़ी करते ho............sharam तो तुम में हैं nahin........aur तमीज तुमने कभी सीखी नहीं.!!!!!!!!............." और आसमा गुस्से से उन सब की तरफ देखती हुई बोल पड़ी................... वहीँ सब के सब आसमा के करीब आने लगे तो सैम आसमा का हाथ पकड़ता hua.................usey चुप होने का इशारा करता हुआ............. उसे उनसे दूर ले जाने laga..............ye देखकर आसमा गुस्से से जैसे बौखला गयी..................

" sam....................ye लोग तुम्हारे सामने मुझे इतना कुछ कह गए और तुम चुप चाप बस खड़े खड़े तमाशा देख रहे ho..................aur नहीं तो मुझे इनके सामने चुप रहने को बोल rahe...........kaise मर्द हो तुम...................." और आसमा उन चरों की तरफ गुस्से से देखने lagi...............tabhi उनमें से एक आया और आसमा के करीब आकर खड़ा हो गया.............

" बहुत जुबान चलती हैं teri...................aab बोल के dikha................tujhe यहीं बीच सड़क पर नंगा करके न घुमाया तो मेरा नाम भी मुश्ताक़ नहीं............" और उनमें से एक साक्ष आसमा के बालों को कसकर अपनी मुट्ठी में भीचता हुआ बोल पड़ा वहीँ आसमा दर्द से चीख padi..............wahin सभी लोग चुप चाप से बस तमाशा देख रहे they...........na सैम कुछ बोल पाया................. और न बाकि के लोग............

" ये तेरा मरद हैं na...............iski तो हम लोगों को देखते hi फट gayi.................ye क्या बोलेगा.............." और वो आदमी आसमा के बालों को कसकर मुट्ठी में ऐसे hi खींचता हुआ सैम की तरफ गुस्से से घूरने लगा..............

" please............chodh दीजिये न मेरी वाइफ ko.................hum लोग बहुत शरीफ hain...............humein बस यहाँ से जाने दीजिये............." और सैम उनके सामने गिड़गिड़ाता हुआ धीरे से बोल पड़ा वहीँ उनमें से एक सैम पर तरस खता हुआ............. उसके कल्लोर को पकड़ता हुआ ...............उसके मुँह पर सिग्रत्ते का धुवां छोड़ता हुआ................ धीरे से हंस पड़ा.............

" छोड़ dengey..............itni जल्दी भी क्या hain....................waise तेरी बीवी कसम से छोड़ने की चीज़ थोड़ी न hain.............ye तो बिस्टेर पर पूरी रात बजने की चीज़ hain................issey कभी हम सब का मुन्न नहीं भरने wala.............isey ऊपर वाले ने बड़ी hi फुर्सत में बनाया hoga...............bus एक दो किश ले लेते हैं फिर जाने दे देंगे इसे.............." और उनमें से एक साक्ष बोल पड़ा वहीँ सैम की फुट कर हाथ में आ gayi............wo लाचार इंसान की तरह बस चुप चाप से खड़ा वहां बस देखता raha................wo अपनी बीवी को उन बदमाशों से नहीं बचा सकता था..............

एक तो सब के सब छुट्टी काटते they...............upar से उनके पास हथियार they.............unke सामने सैम बाचा सा नज़र आ रहा tha.............sam की औकात उनके सामने दो कौड़ी की thi...............isssey पहले वो आदमी आसमा के लबों को छूटा या किश करता ................तभी पुलिस की सैरयां की आवाज़ सुनकर वे सब के सब पीछे हुत्त गए और सैम फ़ौरन आसमा का हाथ खींचते हुए उनसे दूर ले जाने laga................ye देखकर आसमा गुस्से से सैम का हाथ चुदती हुई.............. उसपर जैसे बौखला सी गयी............
 
Update-16(B) (मेघा अपडेट)

" कैसे मर्द हो तुम sam......................tumhare सामने ये लोग मेरे बारे में इतना कुछ कह गए और tum.................khade खड़े बस तमाशा देखते rahe...............laanat हैं तुम्हारी इस मर्दानगी पर............." और आसमा के आँखों से आंसूं चालक पड़ते hain........wo वापस लौट आती हैं और चुप चाप आकर कार में बैठ जाती hain...................uska दिल पूरी तरह से टूट गया tha...................uske आँखों से आंसूं थमने का नाम नहीं ले रहे they..............wahin सैम भी पीछे पीछे आता हैं और आकर कार के ड्राइविंग सीट पर जाकर बैठ जाता हैं...............

आसमा अभी भी रोये जा रही thi................sam थोड़ी हिम्मत करके उसके कंधे पर अपना एक हाथ रखता हैं वहीँ आसमा अपने आँखों से आंसूं पूछती हैं और सैम के हाथों को अपने कंधे पर से हटा देती hain..............wahin सैम जवाब में कुछ नहीं बोल पता.............

" please...............jaan............chup हो jawo............jo हुआ सो hua...............jane दो इस बात को.................." और सैम धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ आसमा गुस्से से जैसे सैम पर बायकला जाती हैं...........

" जाने दूँ isey....................ye आपको छोटी बात लगती hain.....................ye लोग मुझे बीच सड़क पर नंगा घूमने की बात कर रहे they...............mere साथ ोोूह................ क्या कहूं मैं ...........सोचकर भी शर्म आती hain...............itna कुछ कहने पर भी आप एक लफ्ज़ कुछ नहीं bole.............mana की वे 4 लोग they.......unke पास हथियार they............magar मैं आपको उनसे लड़ने के लिए तो नहीं बोल रही थी naa..............main भी जानती हूँ की आप उन सब से अकेले लुद्द नहीं sakte...........magar उनके बाटिओं का jawab.............jawab तो दे hi सकते थे न.......

और नहीं तो आप उनके आगे दुर्र कर चुप हो gaye............jaise वे लोग गुनेहगार nahin..............balki आप गुनेहगार hain...................jab आप अपनी बीवी की िज़ात नहीं बचा सकते तो आप मेरी रक्षा क्या करेंगे sam..................jo हुआ ाचा नहीं hua...............mujhe आपसे ये उम्मीद नहीं thi...................aapne मेरे तरफ से कुछ बोलना भी ज़रूरी नहीं समझा..............." और आसमा फिर से रू पड़ती हैं वहीँ सैम उसे चुप कराये जा रहा था............

" main............ladayi झगड़ों से बहुत दूर रहता हूँ aasma..........ye तुम जानती ho...........aur वैसे bhi...........main शरीफ खानदान से हूँ..............." और सैम जैसे आसमा को सफाई देते हुए कहता हैं वहीँ आसमा फिर से जैसे सैम पर भड़क जाती हैं............

"शरीफ khandaan.................agar ये लोग जो बोल रहे थे और अगर ये लोग मेरे साथ कुछ उल्टा सीधा कर भी देते तो ................. आपकी sharafat..............ka क्या hota.................aur तो........... आपके इस शरीफ खानदान का नाम और ऊँचा हो jata.................hain naa.............ghar चलो sam....................mujhe अब इस बारे में आपसे कोई बहस नहीं karni.....................sab समझ में आ गया हैं मुझे.................." और आसमा अपने आँखों से बहते आंसूं पूछती हैं और खिड़की के बहार बस देखने लगती hain................ander hi अंदर वो पूरी तरह से टूट गयी thi..............wahin सैम चुप चाप से अपनी कार स्टार्ट करता हैं और सीधा घर की तरफ चल पड़ता हैं...............

आसमा जैसे hi घर पहुँचती हैं उसका मुरझाया चेहरा और भी उदास हो जाता hain................wo अपना मुँह छुपाते हुए सीधा अपने कमरे में दौड़ती हुई जाती हैं और जाकर बिस्टेर पर फुट फुट कर दुबारा से रू पड़ती hain............wahin शांति आसमा को ऐसे भागते हुए देखि thi................jissey उसके मुन्न में कुछ शक ज़रूर पैदा हो गया tha.................sam मुन्न मरता हुआ हॉल में जाता हैं और t.v देखने लगता hain.............uske पास कहने और समझने को अब कुछ बचा नहीं था...............

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दूसरे din...................sam हॉल में बैठा हुआ नाश्ता कर रहा tha...............aasma निघ्त्य पहनी हुई किचन का काम कर रही thi..............uske बल बिखरे हुए they.............aur चेहरा आज भी उसका पूरा उदास tha...................na hi उस खूबसूरत से चेहरे पर कोई मुस्कान thi.............aur न कोई sringaar...............thode देर बाद सैम नाश्ता करके बहार निकल जाता hain................tabhi शांति और हरी अंदर आते hain...............hari जैसे hi अंदर आता हैं वो एक नज़र आसमा को चोर नज़रियों से देखता हैं फिर वो अपना सर नीचे की तरफ झुककर सीधा अपने काम पर लग जाता hain.............wahin शांति आती हैं और वो भी अपने काम पर लग जाती हैं...............

करीब एक घंटे के बाद जब आसमा दुबारा से ऊपर जाती हैं तो शांति उसे वहीँ काम करती हुई नज़र आती hain................shanti को देखती हुई आसमा फ़ौरन अपनी नज़रें दूसरी तरफ फेर लेती hain.............wahin शांति दुबारा से बोल पड़ती हैं...........

" memsaheb..................baat क्या hain...............kal आप मार्किट से जब से आयी हैं तब से आप ऐसे hi उदास hain.............maalik भी कुछ नहीं कह rahe............kisi ने कुछ कहा हैं क्या आपसे............" और शांति धीरे से अपना एक हाथ बढाकर आसमा के हाथों पर रख देती हैं और बड़े गौर से आसमा के चेहरे की तरफ देखने लगती hain..........wahin आसमा जवाब में उसके कंधे पर अपना सर रखती हुई फुट फुट कर दुबारा से रोने लगती हैं वहीँ शांति के चेहरे पर दुर्र की लखीरें साफ़ झलक पड़ती हैं..................

" memsaheb...............bataiye na.........baat क्या hain................aap ऐसे रू क्यों रही hain..............kuch तो बोलिये..............." और शांति बड़े प्यार से आसमा के बालों और सर पर अपने हाथों को फेरती हुई बोल पड़ती हैं वहीँ हरी भी अपना काम छोड़कर वहां आता हैं और कुछ दूर पर आकर चुप चाप से खड़ा हो जाता hain..............aasma का यु रोना हरी के दिल में कहीं न कहीं चोट कर गयी thi..........uska कलेजा अंदर hi अंदर चलनी हो गया tha................wo बड़े प्यार से आसमा के तरफ देखे जा रहा tha..............paas तो वो उसके जा नहीं सकता था तो दूर से hi बस उसे निहार रहा था..............

आसमा कुछ देर तक अपने दिल का बोझ रू रू कर हल्का करती हैं फिर वो कल की साडी घटना शांति को बताती चली जाती hain................wahin हरी सब कुछ सुन रहा tha....................ander hi अंदर उसका खून खौल उठा tha.................wo पता लगाना चाहता था की कौन थे वे लोग जिन्होंने उसकी मेमसाहेब को छूने की ज़रूरत की thi......................jo भी हो वो उन सब को इतनी आसनी से छोड़ने वालों में से नहीं tha................gussey से उसकी आँखें लाल थी मगर वो कहीं कोई बात आसमा के सामने बिलकुल भी ज़ाहिर नहीं करना चाहता था.................

" ये तो ठीक नहीं हुआ memsaheb................maalik को ऐसा नहीं करना चाहिए tha................ye तो शुक्र हैं की पुलिस की गाडी वहां टाइम पर आ गयी नहीं तो न जाने क्या हो जाता............." और शांति आसमा को दुलारते हुए ...............उसके सर अपर अपना हाथ फेरते हुए धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ आसमा एक नज़र हरी के तरफ देखने लगती हैं वहीँ हरी की नज़रें जब आसमा के चेहरे पर पड़ती हैं वो फिर से अपना सर नीचे की तरफ झुकता हुआ चुप चाप से खड़ा हो जाता hain...............ye देखकर आसमा धीरे से बोल पड़ती हैं..........

" किसी को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला shanti.............ye दुनिया बस ऐसे hi हैं......................." और आसमा बिना किसी के जवाब की परवाह किये बगैर वहां से उठती हैं और फ़ौरन अपने कमरे की तरफ चली जाती हैं ...................वहीँ शांति पीछे मुड़कर बस हरी के झुके हुए चेहरे को बस देख रही thi...................dekhna था की आगे कौन सा तूफान आने वाला था.........................

तो बे कॉन्टिनोएड..........................................................
 
Update-17(A) (मेघा अपडेट)

" किसी को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला shanti.............ye दुनिया बस ऐसे hi हैं......................." और आसमा बिना किसी के जवाब की परवाह किये बगैर वहां से उठती हैं और फ़ौरन अपने कमरे की तरफ चली जाती हैं ...................वहीँ शांति पीछे मुड़कर बस हरी के झुके हुए चेहरे को बस देख रही thi...................dekhna था की आगे कौन सा तूफ़ान आने वाला था.........................

अब आगे.....................................................................

कमरे में गहरी ख़ामोशी thi..............................na शांति कुछ कह रही thi................aur न hi hari...................kuch देर की चुप्पी के बाद शांति उसे अपने कमरे की तरफ चलने का इशारा करती हैं वहीँ हरी बिना कुछ कहे अपना सामान उठता हैं और सीधा अपने कमरे की तरफ जाने लगता hain...............uske पीछे पीछे शांति भी आ जाती हैं...........

" तुझे हुआ क्या हैं hari....................tu तो कहता था की तुझे अपनी मेमसाहेब से प्यार हो गया hain..............gali के कुछ गुंडे तुम्हारी मेमसाहेब के साथ इतना कुछ कर गए और तू हाथ पे हाथ धरे बैठा hain.................tujhe अगर अपनी मेमसाहेब को हासिल करना हैं तो इससे ाचा मौका नहीं milega...............memsaheb के दिल में अपनी जगह बनानी हैं तो कुछ कर hari................waise भी साहेब तो कुछ कर न sake...............agar तू कुछ कर सकेगा तो मैं यकीन से कहती हूँ की मेमसाहेब का दिल तुह्पर ज़रूर आ jayega..................fir वो तेरे लिए अपने दिल के दरवाज़े खोलने के साथ saath......................apne वो दरवाज़े भी खोल देगी जिसकी तुझे kya............sab मर्दों की चाह हैं..................." और शांति जैसे हरी की तरफ देखते हुए धीरे से मुस्कुरा देती हैं वही जवाब में हरी हाँ में अपना सर हिलता हुआ कुछ देर तक सब कुछ सोचने लगता हैं..............

" तो तू क्या चाहती हैं की मैं जाकर उन गुंडों की अकेले पिटाई कर doon..................ussey मेमसाहेब खुस होकर मेरे से प्यार करने lagegi.............hain ना................." और हरी जैसे शांति से शिकायत के लहज़े से बोल पड़ता हैं वहीँ शांति जवाब में धीरे से मुस्कुरा देती hain.............aur उसके करीब आती हुई उसके गॉड में आकर बैठ जाती हैं और उसके बालों पर बड़े प्यार से अपना हाथ फेरने लगती hain...............wahin हरी बड़े गौर से शांति के चेहरे को बस देख रहा tha................shanti के ऐसे करीब बैठने से उसके लुंड में हलचल होनी शुरू हो गयी thi...............wahin वो अपने एक हाथ को उसके कमर पर धीरे धीरे फेर रहा था..............

" दरवाज़ा तो बंद कर ले pehle..................nahin तो उस दिन की तरह memsaheb..........agar...........aa गयी तो.............." और हरी शांति के गांड पर धीरे से अपना एक हाथ रखता हुआ बोल पड़ता हैं वहीँ शांति जवाब में धीरे से मुस्कुरा देती हैं..............

" आ जाने दे hari.........main तो खुद एहि चाहती हूँ की जब तू मेरी ठुकाई करे मेमसाहेब भी तुझे ाचे से dekhey...............jab तक वो तेरा हथियार नहीं देखेगी उसका दिल नहीं मचलने wala..................wo आसानी से नहीं pighlegi...........aisa करने से दो फायदे hongey................ek तो मेमसाहेब ज़रुरत से ज़्यादा हमेशा गरम रहने lagegi...........aur तेरे लुंड की चाहत और बढ़ने lagegi................jissey कभी तू उनके साथ कोई गलत हरकत भी करे तो वो भी तुझे कभी रोकने की कोशिश नहीं karengi...............jissey तेरा काम और आसान हो jayega...............bus तुझे सही मौके का इंतज़ार करना हैं और जब लोहा गरम हो तब तुझे हथोड़ा मर देना hain...........baki मैं संभल लूंगी..............." और शांति हरी के होंठों को चूमते हुए बोल पड़ती हैं वहीँ हरी अपना हाथ धीरे से ऊपर की तरफ बढ़ता हैं और शांति के दोनों चूचियों को बरी बरी से मसलने लगता hain...........wahin शांति aaaaaaahhhhhhhhhhh करती हुई धीरे से सिसक पड़ती हैं..............

" और दूसरा फायदा................" और हरी शांति के दोनों चूचियों को बेरहमी से मसलता हुआ बोल पड़ता हैं वहीँ शांति लुम्बी लुम्बी सांस लेती हुई हरी के तरफ शरती अंदाज़ में मुस्कुरा देती हैं...........

" जैसे की तू नहीं जनता ........................इतना भोला भी मुट्ठ बन................. जैसे तू हमेशा बाकि औरतों से दो ार्थ में (डबल मीनिंग) बातें करता hain...........wahin तुझे मेमसाहेब के साथ भी करना hain............fir चिड़िया तेरी मुट्ठी mein...............maine इशारा कर दिया तुझे .................kab......kaise और................ किस तरह से करना हैं ..............ये तुझे खुद सोचना hoga................aur वैसे भी तू इस खेल में पुराण खिलाडी हैं..............." और शांति हरी का लुंड उसके लुंगी के ऊपर से hi पदक लेती हैं वहीँ हरी शांति के दोनों गांड के सूराख के बीच अपना हाथ डालता हैं और उसे कपड़ों के ऊपर से hi मसलना शुरू कर देता हैं..................

"aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh............... ऐसा लुंड तो कोई भी औरत खाना chahegi.....................kya मस्त मोटा तगड़ा हैं tera....................jab ये मेरी बुर में घुसेगा तो मेरी फाड़ hi डालेगा.............." और शांति अपने कपड़ों को एक एक कर उतरने लगती हैं वहीँ हरी भी जोश में आ चूका tha................wo ब्लाउज के ऊपर से शांति की बड़ी बड़ी चूचियों को मसले जा रहा tha...............uske कपड़ों को उसके बदन से अलग करता जा रहा tha...............bhale hi वो छोड़ शांति को रहा था मगर उसके दिमाग में सिर्फ और सिर्फ आसमा thi...........aab उसकी चाहत आसमा के प्रति और बढ़ गयी थी...................

" ठीक hain..............shanti..............main तेरी चुदाई वहां करूँगा जहाँ से मेमसाहेब सब कुछ अपनी आँखों से dekhegi.............jagah और समय तू तय karegi...............magar..................main ये भी जनता हूँ की वो इतनी आसानी से मेरे नीचे नहीं aayegi..............uske लिए तुझे कुछ इंतेज़ाम और करना hoga..................tujhe मैं जो कहूंगा मेमसाहेब की वो चीज़ लेकर मुझे देनी hogi......................fir काम banega..............main भी तो देखता हूँ की मेमसाहेब कब तक खुद को रोक पति हैं.............." और हरी शांति के एक एक कर सरे कपड़े उतरने लगता हैं ...............पहले ब्लाउज ..........फिर साड़ी और................... फिर peticoat...............aakhiri में वो शांति को पूरा नंगा कर देता hain.......wahin शांति भी कहाँ पीछे रहने वाली थी................

वो भी हरी के शर्ट और लुंगी को निकल देती हैं और उसके अंडरवियर को भी ऊके जिस्म से हटा देती hain...................aab उस कमरे में दोनों सर से लेकर पवन तक पूरे नंगे they...............unhein अब किसी का भी खौफ्फ़ नहीं tha.............na तो अपनी मालकिन ka..............aur न hi अपने मालिक का.............

" बोल न hari..........tujhe मेमसाहेब की क्या चीज़ chahiye...............main तुझे रोज़ लेकर दूँगी..................." और शांति हरी का मोटा लुंड अपने हाथों में पकड़ती हुई धीरे से सिसक पड़ती hain...........uski बुर पूरी तरह से पनिया गयी thi.................uski सांसें बेकाबू हो चुकी थी और वो जल्द से जल्द हरी का लुंड अपने छूट में पूरा ले लेना चाहती thi...........magar हरी को जैसे किसी बात की कोई जल्दी नहीं थी..............

" मुझे मेमसाहेब की पंतय और ब्रा हर रोज़ chahiye.....................tu लेकर दे सकेगी मुझे.............." और हरी इस बार शांति के बुर को काकसर अपनी मुट्ठी में पकड़ लेता हैं और एक हाथ से उसकी भरी हुई चूचियों को कसकर मसलने लगता hain............wahin शांति का गदराया जिस्म हरी के सामने पूरी तरह से पिघलने लगता hain.............wo खुद को हरी के हवाले कर देती hain..............aab हरी उसके साथ जो चाहे सो kare.............usey अब किसी चीज़ की परवाह नहीं थी.................

हरी का मूसल लुंड टैंकर पूरा खड़ा tha..............wo शांति को अपने ऊपर आने का इशारा करता हैं वहीँ शांति थोड़ी सी घबराती हुई उसके दोनों टांगों के बीच आती हैं और अपनी दोनों जांघें फैलते हुए अपना छूट के छेद पर हरी का लुंड धीरे से सताती हैं और धीरे धीरे उसके लुंड पर दबाव डालने लगती hain...............choot पूरी तरह से गीली होने की वजह से हरी का मूसल लुंड शांति के छूट में धीरे धीरे उतरने लगता hain......wahin शांति की aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh निकल जाती हैं............

हालाँकि वो इससे पहले कई बार कई मर्दों से अपनी चुदाई करवाई थी मगर इतना बड़ा और मोटा लुंड वो अपने छूट में पहली बार ले रही thi.................jaise hi हरी का मोटा सूपड़ा शांति के छूट के अंदर घुसा................. शांति की ज़ोरों से चीख निकल gayi..............uske बदन में एक तेज़्ज़ दर्द उठा और वो कुछ देर तक लुम्बी लुबी सांसें लेती हुई अपने आपको नार्मल करने की कोशिश करने lagi..............wahin हरी बेरहमी से शांति के दोनों चूचियों को मसल रहा tha...............uske दोनों काळा निप्पल्स को मरोड़ रहा tha...............kheench रहा tha.............kuch देर तक शांति ऐसे hi रुकी रहती हैं फिर वो दुबारा अपने कमर पर ज़ोर डालती हुई नीचे की तरफ बैठने लगती हैं वहीँ हरी का मूसल लुंड शांति के छूट को बेरहमी से चीरता हुआ अंदर की ओरे घुसता जा रहा था........................

जैसे जैसे हरी का लुंड शांति के छूट में उतर रहा था वैसे वैसे शांति की आहें तेज़्ज़ होती जा रही thi..............uski आँखें फैलकर बड़ी हो गयी thi...........aur मुँह पूरा खुल गया tha..............jaise तैसे शांति के छूट में हरी का आधा लुंड घुसा तो शांति दर्द से चीख padi.............uski छूट पूरी तरह से फ़ैल गयी thi...........wahin अब हरी उसके कमर अपने दोनों हाथों में पकड़े अपने लुंड पर दबाव बनता जा रहा tha...............is तरह दबाव बनाने से हरी का लुंड और तेज़ी से शांति के छूट में घुसता जा रहा tha............wahin शांति लुम्बी लुम्बी सानें लेती हुई हरी के उस विशाल लुंड को अपने छूट की गहरायिओं में उतरती जा रही थी..............

" aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh............ hari........mera फुट jayega.................tera लुंड बहुत ज़्यादा मोटा hain.......aur बड़ा bhi..............aaj से पहले कभी मैंने इतना बड़ा लुंड नहीं लिया हैं अपनी बुर mein................ye पक्का मेरी बुर का भोसड़ा बना dega...................aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaoooooooooooooooooomaaaaaaaaaaam............aaram seeeeeeeeeeeee.........." और शांति चीख पड़ती हैं मगर अब हरी कहाँ छोड़ने वाला tha................wo शांति को अपने लुंड पर ऐसे hi दबाव बनाये रखता हैं और कुछ पल बाद आखिर हरी का 10 इंच मोटा लुंड शांति के छूट की गेहरियों में पूरा उतर जाता hain...............shanti की छूट पूरी तरह से फूल भी गयी थी aur.........fail भी गयी थी..............

" tu.................kya करेगा मेमसाहेब की पंतय और ब्रा ka........................bol na.....................aaaahhhhhhhhhhhhh......oooooooooooooommmmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaa.......zara धीरे से छोड़ना हरी................." और शांति सिसकते हुए धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ हरी अब धीरे धीरे धक्कों की स्पीड बढ़ता जा रहा tha.....................jaise जैसे उसके ढाकों की रफ़्तार बढ़ती जा रही थी वैसे वैसे शांति की आहें भी तेज़्ज़ होती जा रही thi...........wo hi जानती थी की इस वक़्त क्या हाल हो रही थी उसकी...............

" मैं कुछ भी karun.........tujhe उससे kya...................waise तू अब मुझसे चुद hi गयी हैं और तू जब मेरी मदद कर hi रही हैं तो मैं तुझे बता hi देता hoon................main तेरी हर रोज़ चुदाई करने के बाद अपना सारा माल मेमसाहेब के पंतय और ब्रा पर nikalunga.................ooooooooohhhhhhhhhhhhh......." और हरी ढाकों की रफ़्तार और तेज़्ज़ कर देता हैं वहीँ शांति की चीख निकल जाती hain...........hari का लुंड उसकी छूट की पूरी गहराईयों में उतर रहा tha.............upar बैठे होने की वजह से उसका लुंड बाछेदनी के मुँह पर चोट कर रहा था जिससे शांति दर्द से तो चिल्ला hi रही thi........magar उसका मुँह पूरा खुला हुआ tha...............aur आँखें बड़ी हो गयी थी.................

मगर उस दर्द में जो मज़ा और सुकून उसे मिल रहा था इसी सुख को पाने के लिए वो न जाने कब से तड़प रही thi.............uski छूट बहुत ज़्यादा पानी छोड़ रही थी जिससे हरी का लुंड और आसानी से अंदर बहार हो रहा tha...........poorey कमरे में फफाजएक्सक्कक्स faaaaaaaachhhhhhhhhh और शांति की आहें उस माहोल को और भी रंगीन बनती जा रही थी...........
 
Update-17(B) (मेघा अपडेट)

" तू बहुत हरामी hain.................theek हैं मैं कल से मेमसाहेब के कपड़े खुद hi सूखने के लिए नीचे ले aawungi..............aur शाम तक वो कपड़े नीचे hi rahengey.............jab तेरा मुन्न करे तू उसपर अपने माल गिरा दिया karna...............aur शाम को फिर वापस मैं hi समेटकर उनको दे दिया karungi...........aab तो तू खुस हैं न मेरे raja......aaaaaaaaaaaaassssssssssssssssssssssssshhhhhhhhhhhhhhhhhh...........aise hi.............chod मुझे...................." और शांति तेज़ी से हरी के लुंड पर कूदने लगती hain...........kareeb 15 मिनट बीत जाने पर शांति के पेअर कांपने लगते हैं और उसका बदन लहराने लगता हैं.................

वहीँ हरी अपनी रफ़्तार और तेज़्ज़ कर देता हैं और कसकर ढ़ाके लगाने लगता hain................do चार ढाकों के बाद शांति के छूट से गरम गरम लावा निकल पड़ता हैं और शांति चीखते हुए झरने लगती hain............uska जिस्म ऐठने लगता hain.............wo लुम्बी लुम्बी सांसें लेती हुई हरी के ऊपर बेजान सी पड़ी रहती hain...........wahin हरी अपनी पोजीशन चेंज करता हैं और शांति को घोड़ी बनाकर उसके पीछे खड़ा होता हैं और फिर से अपना लुंड शांति के छूट में पूरा घुसता hua..............ek hi बार में अपना लुंड अंदर दाल देता हैं वहीँ शांति फिर से चीखते हुए ज़ोरों से सिसकने लगती hain...............aab हरी कहाँ रुकने वाला था.................

"aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhh................tui मेरी पूरा फाड़कर hi manega........................soch hari................main तो इतने बार चूड़ी हूँ तो मुझे इतनी दिक्कत हो रही तेरा लुंड अपने बुर में लेने se.................aur तो तू मेमसाहेब के पीछे पड़ा hain.................wo तो अभी एकदम कमसिन और काची काली hain................wo तो अभी 19 साल hi hain..................jab तू अपना मूसल उनके अंदर डालेगा तो पता नहीं वो झेल भी पायेगी या nahin..........kahin ऐसा न हो की वो भी बाकि औरतों की तरह तुझे छोड़कर भाग न jaye........aur तू उम्र में उसके दो गुना hain..................aaaaaaaaasssssssssssssssssssssss.......zara धीरे se............"aur शांति अपनी चुदाई करते हुए ज़ोरों से सिसकते हुए बोल पड़ती hain.........wo जान बूझकर बार बार आसमा की बातें कर रही थी जिससे हरी का जोश और भी ज़्यादा बढ़ता जा रहा था..................

शांति का तीर सही निशाने पर लगा tha..............is वक़्त हरी भले hi शांति को छोड़ रहा था मगर उसके जेहन में बस आसमा thi.........wo कच्ची काली जिसे वो बुरी तरह से अपने पैरों टेल रौंदने वाला tha...............uski काची जवान का भरपूर मज़े लेने वाला tha................aasma का ख्याल आते hi उसके ढाकों की रफ़्तार और तेज़्ज़ हो गयी और उसका लुंड और भी ज़्यादा सख्त हो gaya.............wahin शांति की मुश्किलें और तकलीफें बढ़ने lagi...............hari का एक एक ढाका उसकी छूट की धाज्जियाँ उडाता जा रहा tha.............wahin शांति की अब हालत बिगड़ने लगी thi............wo एक बार फिर से झरने के बेहद करीब थी...................

"aaaaaaaaaaaaaassssssssshhhhhhhhhhhhhh अगर ऐसे hi तू मेमसाहेब को भी छोड़ेगा na.........to मेमसाहेब कभी तुझे अपनी छूट नहीं degi............ye तू लिख के ले ले.................." और शांति हरी का जोश बढ़ते हुए बोल पड़ती हैं ........चुदाई करीब 45 मिनट हो चुके थे और शांति का जिस्म थकने लगा tha..............wo अब हरी के हर ढाकों को बस बर्दास्त कर रही thi.............do चार ढाकों के बाद शांति फिर से झरने lagi...............uska जिस्म पसीने से बुरी तरह भीग चूका था मगर ये हरी रुकने का नाम नहीं ले रहा था...............

वो आज शांति को आसमा समझकर उसकी छूट को फाड़ रहा tha...............shanti अब पष्ट होती जा रही thi.....................hari उसे सीधा बिस्टेर पर लेटता हैं और खुद उसके ऊपर आता हुआ अपना मूसल लुंड उसके छूट के अंदर डालता हुआ फिर से उसपर चढ़कर तेज़ी से ढ़ाके लगाने लगता hain..............wahin शांति उसके गलों और सीने पर अपना हाथ फेर रही थी............

" तू घबरा मुट्ठ ..........मेमसाहेब तो मेरे निकाय आएगी hi.............aur मैं उसे इतना तड़पाऊंगा की वो मेरे लुंड लेने के लिए हमेशा पागल rahegi............wo इस लुंड के लिए कुछ भी karegi.............kisi हुड्ड तक jayegi....................main बहुत ाचे से जनता हूँ की छूट की आग क्या होती hain...........jab इसमें आग लगती हैं न तो आगे पीछे सही गलत सब कुछ दिखना बंद हो जाता hain............bus मुझे अपनी मेमसाहेब के साथ भी एहि करना hain..........magar धीरे धीरे..........." और हरी के ढाकों की रफ़्तार और तेज़्ज़ हो जाती hain......kamrey में fffffffffffachhhhh फआयआयछ की आवाज़ें फिर से गूँज उठती हैं और उधर शांति की आहें bhi................kareeb 1/2 घंटे और शांति की छूट ाचे से छोड़ने के बाद हरी का जिस्म ऐठने लगता हैं और वो वहीँ ज़ोरों से चीखते हुए aaaaaassssshhhhhhhhhhhhhhh................ करके अपना सारा छुम शांति के छूट की गहरायिओं में उतरता चला जाता हैं..............

हरी पसीने से लथपथ शांति के ऊपर पड़ा हुआ ज़ोरों से हांफ रहा tha...............wahin शांति बड़े प्यार से हरी के सर पर अपने हाथ फेर रही thi..................wakayi में हरी की मर्दानगी देखकर वो भी उसके कायल हो गयी thi..........hari ने उसकी चुदाई 1.30 घंटे लगातार की थी जिससे शांति की छूट की हालत पतली हो गयी thi.......uske छूट से बेहटा छुम धीरे धीरे नीचे की ओरे टपक रहा tha..................jissey शांति औरत होने का सुख आज महसूस कर रही थी...............

भले hi हरी को शांति कोई ख़ास नहीं लगती थी मगर आसमा का ख्याल करते हुए वो आज बहुत सुकून महसूस कर रहा tha...............aab उसकी उमीदें बहुत हुड्ड तक बढ़ गयी थी उसका सपना अब सपना सच होने वाला tha...............dekhna था आगे हरी की ज़िन्दगी में कौन सा मोड़ आने वाला था.........................

तो बे कॉन्टिनोएड...........................................................
 
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