Ufff......Ye Kaisi Pyaas...........(A Story Of Housewife) - SexBaba
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Ufff......Ye Kaisi Pyaas...........(A Story Of Housewife)

hotaks

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Dec 5, 2013
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आप सब के कहने पर मैं ये थ्रेड तो शुरू कर रहा हूँ मगर अपडेट वीकली एक या दो hi aayengey.............jab जब मुझे टाइम मिलेगा तब मैं इसपर अपडेट देता rahunga.............aapke वोट के ज़रिये ये कहानी सिचुएशन के अकॉर्डिंग बदलती jayegi............main भी तो देखना चाहता हूँ की रीडर्स आखिर मेरी कहानी में क्या पढ़ना ज़्यादा पसंद करते हैं....
 
उफ्फ्फ...... ये कैसी प्यास ( ा स्टोरी ऑफ़ हाउसवाइफ)

अपडेट-01


Panchmadi..................ek बहुत hi प्यारा और खूबसूरत सा hillstation......................jahan चरों तरफ बस पहाड़ियां, घने जंगल और कई टूरिस्ट स्पॉट के साथ साथ वॉटरफॉल भी देखने को मिलते hain...........prakirtik का वो खूबसूरत और अद्भुत नज़ारा जिसे देखने पर ऐसा लगता हैं मनो धरती का स्वर्ग और कहीं नहीं ...........बस यहीं पर hain..................yahan पर मौसम भी हमेशा खुशनुमा सा रहता हैं............

मैं आसमा khatoon......................zinda दिल ladki.................ya औरत कहेंगे तो ज़्यादा बेहतर rahega..................ladki तो मैं आज से 2 महीने पहले थी जब मेरा निकाह नहीं हुआ tha................nikaah हो जाने के बाद कब मैं लड़की से औरत बन गयी कुछ पता hi नहीं chala..................waise तो मेरी उम्र फ़िलहाल 19 साल की hain..............itni कम उम्र में मेरी इतनी जल्दी shadi.....................thoda हैरान तो ज़रूर करता हैं मगर कुछ घर की मज़बूरियां भी thi............aur कुछ मेरे हुब्बी के घर वालों की भी paristhithiyaan......................shayad इस वजह से मेरे घरवालों को मेरा निकाह जल्दी करवाना पड़ा.............

मेरे हुब्बी sam................unki उम्र 25 saal................gora बदन और fit.......dikhney में smart...............waise वो इस समय मेरे ससुरजी के साथ उनके बुसिनेस्स में उनका हाथ बताते hain.................mere ससुर जी का कपड़ों का बहुत बड़ा फार्म hain........is वजह से मेरे हुब्बी अक्सर एक सेहर से दूसरे सेहर या कभी कभी आउट ऑफ़ कंट्री भी अक्सर जाते रहते hain..............jitni भी बोस्निसेस डीलिंग करनी होती हैं अब मेरे हुब्बी hi देखते hain.........waise मैं बहुत हाई सोसाइटी से बिलोंग करती hoon..............waise तो मेरी शादी अर्रंगे मर्रिज हुई thi.................sabki मर्ज़ी se............aur सबकी पसंद से...........

जब सैम को किसी बात की आपत्ति नहीं हुई तो भला मुझे क्यों होंगे lagi..........................na hi मेरे या ...........फिर उनके घरवालों ko...........aur होती भी kyon............mera ये रूप रंग देखकर तो सैम पहले hi अपना होश हवश गवा बैठा था तो उसे भला इस रिश्ते से अब इंकार क्यों rehta...................waise सैम ने शादी से पहले मेरे घरवालों से ये शर्त राखी थी की लड़की बहुत खूबसूरत और पाक साफ़ होनी चाहिए तभी मैं उससे निकाह karunga...........warna नहीं.............

मगर सैम की जब मुझसे पहली मुलाकात हुई उसके ये ख्यालात भी बदल gaye...........sach कहूं तो मैं इस रिश्ते से बेहद खुस thi..................jo कुछ एक लड़की को चाहिए होता हैं वो सब कुछ मुझे mila...........mere सास ससुर सब लोग ाचे they.............mere हुब्बी एकलौते they.....aur इनकी दो behanain.........ek तो उनसे छोटी thi...............aur दूसरी का निकाह 2 साल पहले हो गया tha...............wo अपने ससुराल में थी............

हम लोग यहाँ नए नए शिफ्ट हुए they.................kyo की इससे पहले मेरे हुब्बी के घरवाले दिल्ली में रहते they..........dense population...........pollution डस्ट wagerah............in सब की वजह से उनलोगों ने वहां का घर बेच दिया और ुशी पैसों से यहाँ एक बड़ा सा बंगलो भी खरीद liya.............aur वे लोग दूसरी जगह किसी बड़े सेहर में शिफ्ट हो gaye............sam की पढ़ाई के बाद दिल्ली में रहने का अब कोई मतलब नहीं tha...............waise ये जगह तो मुझे भी बेहद पसंद thi..........aur सुकून भी बहुत था yahan................charon तरफ बाग़ bagichey.......khula maidan.........sab कुछ था yahan........charon तरफ बस शांति hi शांति.............

मेरे हुब्बी का शौक था या सपना जो भी कहिये की किसी अनजान सेहर में उसका खुद का बंगलो ho..........gaadi ho..........wo सब ऐश आराम हो जो अक्सर बड़े घराने के लोग डेसेर्वे करते hain............aur ऊपर वाले की दवा से मुझे और सैम को वो सब कुछ mila.............hum दोनों यहीं इस सेहर में फिलहाल अकेले रहते they..............mere सास ससुर बीच बीच में कभी एक दो दिन के लिए यहाँ आ जाते............

शादी से पहले मुझे सेक्स के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं thi............aksar मेरी सहेलियां नुदे फोटोज और पिक्स वगैरह दिखती तो मेरे जिस्म में अजीब सी बेचैनी हो jati...........aksar मैं भी सोचा करती की लोग सेक्स को लेकर इतने बेचैन और पागल क्यों रहते hain............kyon की मेरी सभी सहेलियों के दो तीन बॉयफ्रैंड्स तो होते hi they.............siwaye mere............kyon की न hi मेरा मज़हब इस चीज़ की कभी इज़ाज़त देता tha..............aur न मैं इन सब चीज़ों में ज़्यादा इंट्रेस्ट रखती thi..................aksar मेरे घर या स्कूल कॉलेज में लड़के मेरे पीछे पड़े रहते मगर मैं किसी को ज़रा भी भाव नहीं देती thi.......kyon की मैं अपने होने वाले हस्बैंड के लिए पूरी पाक साफ़ रहना चाहती थी.........

सुहागरात के दिन मेरे हुब्बी को ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा जब मेरी कुंवारी छूट से ढेर सारा ब्लड बिस्टेर पर gira.............us दिन के बाद उसका मेरे प्रति प्यार और बढ़ गया tha.....kyon की वो ये बात ाचे से जान गया था की मैं पहले भी पाक साफ़ हूँ और आगे भी rahungi..............waise सेक्स में तो मुझे कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं थी मगर हर रोज़ मेरे हुब्बी मुझे अपने पास सुलाते मेरे बदन से खेलते तो मेरे अंदर भी धीरे धीरे सेक्स की भूख अब बढ़ने लगी थी............

जब मैं पहली बार अपने शौहर का लुंड देखि तो उनका लुंड करीब 5 इंच और 1.5 इंच मोटा hoga................jo की एवरेज और नार्मल मन जाता hain..............magar पोर्न वीडियोस में और नुदे पिक्स में तो मेरे शौहर का लुंड उनके आगे कुछ भी नहीं tha............to क्या सच में मर्दों के इतने बड़े बड़े होते honge............kabhi कभी मेरे जेहन में ये बात मुझे अक्सर परेशां करती मगर झिझक की वजह से ये बात मैं कभी अपने शौहर से पूछ भी नहीं payi..........aur इन सब बाटिओं का मतलब भी क्या tha...............jo ऊपर वाला दिया था वही बेस्ट था...........

मैं aasma...........rang बिलकुल दूध की तरह gora................itna गोरा की मेरे जिस्म पर मेरी हरी और नीली नशें साफ़ नज़र आती thi..............jo बेहद hi दूसरों को आखरषित करती thi...............bal लम्बे और घने थे जो मेरी कमर के नीचे तक आते थे ............आँखें हल्की नीली जो बेहद hi आकर्षक लगती thi..............uspar मेरी लुम्बी naak......jispar एक सोने की राउंडेड रिंग छड़ी हुई थी जो मेरी खूबसूरती को और भी बढ़ा देती thi..............lips बिलकुल रास से भरे hue.....aur उसपर हमेशा डार्क रेड कलर की lipstick...............jo मेरी सुंदरता को और चार चाँद lagate..............kanon में बड़े बड़े jhumkey..........jo अक्सर मेरे गुर्दें और सहुआलदर को छु jate............surahi जैसी गुर्दें...........

और सबसे ज़्यादा मुझमें जो चीज़ ाखर्षक करती थी वो थी मेरी boobs...........jo की साइज में बड़ी तो थी thi........poori राउंडेड शेप में और ऊपर की तरफ हमेशा तने हुए they..............bina दुपाते के अगर कोई मुझे देख ले तो उसकी नियत hi बिगड़ jaye...........meri कमर पतली थी पूरी तरह से slim..............na hi मेरे जिस्म में ज़्यादा चर्बी थी न hi kum..............meri कमर काफी भरी हुई थी जिससे मेरी गांड का वो हिस्सा काफी अट्रैक्टिव लगता tha.....upar से मेरी गांड गोल और राउंडेड शेप में thi......jo थोड़े बहार की तरफ भी निकले हुए थे..............

कुल मीका जुलकर मैं सर से लेकर पवन तक एक सेक्स बम thi.............wo सेक्स बम जिसको पाने के लिए लोग कुछ भी कर jaye.......kisi भी हुड्ड तक गुज़र jaye..............to भला ऐसी बीवी को पाकर सैम अपने आप पर नाज़ नहीं करेगा तो क्या करेगा.........................

तो बे कॉन्टिनोएड.............................................................
 
थैंक अलॉट

थैंक यू

बिलकुल पहचान रहे aapko....mahi जी .....हमने किसी से साथ कोई न इंसाफ़ी नहीं किये hain....Haan हमने थ्रेड ज़रूर बंद किया हैं मगर दो अडुल्टेरी सेक्शन वाले.

और रही बात थ्रिलर कहानी की तो जब हम आये थे तो सबसे पहले उसी पर अपना अपडेट दिए थे ..ए वो थ्रेड बंद नहीं hain...aap चेक कर सकती हैं अपडेट 12 दिए हैं . बस आप सब की कमी महसूस हो रही उस थ्रेड पर ..वीकली उसपर 2उपदटेस तो आएंगे और वो स्टोरी मैं पूरा करूँगा ये मेरा आपसे वादा hain...bus आप उस थ्रेड पर जाकर अपना कीमती रिव्यु दीजिये.. इंतज़ार रहेगा
 
अपडेट-02

कुल मीका जुलकर मैं सर से लेकर पवन तक एक सेक्स बम thi.............wo सेक्स बम जिसको पाने के लिए लोग कुछ भी कर jaye.......kisi भी हुड्ड तक गुज़र jaye..............to भला ऐसी बीवी को पाकर सैम अपने आप पर नाज़ नहीं करेगा तो क्या करेगा.........................

अब आगे...........................................................................

वक़्त गुज़रता गया और देखते hi देखते मेरी शादी को पूरे दो महीने बीत gaye..................waise हमने अभी तक बाचे का कोई प्लान नहीं किया था और न हमें किसी बात की कोई जल्दी भी thi............ghar तो इतना बड़ा था की ऊपर एक हॉल और 4 बड़े बड़े कमरे आत्ताच किचन और bathroom.........aur नीचे भी ठीक कुछ ऐसा hi tha...............poorey घर की साफ़ सफाई अकेले मुझसे नहीं हो पति thi............shuru शुरू में तो मैं थोड़ी बहुत साफ़ सफाई कर भी लेती थी मगर ये सब अकेले मेरे बस का नहीं tha........is लिए मैंने सैम को दो नौकर रखने को कहा था.............

एक आकर पूरे रूम की साफ़ सफाई कर देता और दूसरा बहार का काम jaise...........bazar से सब्ज़ी lana.....garden की साफ़ सफाई और गाड़ी साफ़ करना wagerah................magar नयी जगह होने की वजह से हमारी जान पहचान भी उस सेहर में बहुत कम thi.............upar से मैं ज़्यादा घर से बहार नहीं nikalti...............agar काम भी होता तो सैम बहार से राशन या और भी ज़रुरत की सब चीज़ें लेते aate............mujhe कहीं बहार नहीं जाने dete..........shayad नए जगह होने की वजह से...............

दो महीने घर पर बिताने के बाद मेरे ससुर मेरे हुब्बी पर गुस्सा करने lage...................sara बुसिनेस्स अब उन्ही की देख रेख में जो tha...........to इस तरह घर बैठने से क्या hota.............is लिए सैम ने मेरे ससुर की और साडी घर की जिम्मेदारी अपने कन्धों पर लेने का फैसला kiya...............aab उन्हें मेरे ससुर के पास उनसे मिलने जाना था और फिर बुसिनेस्स के सिसिले में हो सके तो कहीं बहार............

" darling..................abbu बहुत नाराज़ हो rahe..................do महीने हो गए मुझे यहाँ इस तरह से घर पर बैठे hue...........mujhe अब उनके काम में उनका हाथ भी तो बताना padega...........mujhe एक दो दिन में आबू से मिलने जाना hoga..............fir बुसिनेस्स के सिलसिले में हो सके तो कहीं बहार भी जाना पढ़ सकता hain.................mujhe लौटने में एक दो महीने भी लग सकते hain..........ya उससे ज़्यादा bhi.........theek से अभी मैं कुछ कह नहीं सकता............." और जैसे सैम ने मुझपर बम फोड़ di............................sam से एक पल की जुदाई अब मुझे बर्दास्त नहीं हो रही thi..............main फ़ौरन उसके सीने से लिपट गयी और उसके सीने पर अपना सर रखकर फुट फुट कर रोने lagi..........wahin सैम बड़े प्यार से मेरे सर पर अपने हाथों को फेर रहा था...............

" रोटी क्यों हो pagli...............main कोई हमेशा हमेशा के लिए थोड़ी न तुमसे दूर जा रहा हूँ......... एक दो महीने की बस बात hain...............fir लौट कर आ hi जावूंगा..............." और सैम मेरे आँखों से बहते हुए आंसूओं को पूछता हुआ मुझे देखकर हौले से मुस्कुरा pada................wahin मैं उसके सीने पर मुक्के मरती हुई उससे लिपटकर फिर से रोने लगी.............

" जब मुझे छोड़ कर जाना hi था तो आपने मुझसे निकाह क्यों kiya...................aise hi रहते न akele...................kaise रहूंगी मैं आपके bagair...............soch सोचकर भी अब घबराहट होने लगती hain.........upar से ये मेरे लिए बिलकुल नयी जगह hain...............koi मुझे यहाँ जनता भी nahi..............aab तो एक एक पल मेरा नहीं कटेगा............." और आसमा शिकत के लहज़े से सैम की बाँहों में लिपटी hui...........uski आँखों में आँखें डेल धीरे से अपनी दिल की बात कहती हैं वहीँ सैम उसके दोनों गलों पर अपने हाथों को रखता हुआ उसका सर ऊपर की तरफ करके बड़े प्यार से उसके लबों को चूम लेता hain......aur फिर से उसे अपने सीने से लगा लेता हैं..........

" यु गुज़र जाएंगे देखना ऐसे ये दो चार mahiney..............haan तुम नौकर रखने की बात कह रही थी न............ मैंने पास के एक शॉप पर एक आदमी से इस बारे में बात की thi...........usney मुझे अभी मिलने को बुलाया hain............dekhkar मैं आता हूँ अगर कहीं से दो नौकरों का इंतेज़ाम हो जायेगा तो मेरी सेहज़ादी को घर का कोई भी काम फिर नहीं करना padega.............hain न........" और सैम धीरे से हँसता हुआ आसमा के खूबसूरत से चेहरे की तरफ देखने लगता हैं वहीँ आसमा न चाहते हुए भी धीरे से हंस पड़ती हैं............

" हाँ हाँ जाओ jawo..............pehle दर्द देते ho............fir मरहूम भी लगते ho....................ye मस्का लगाना तो कोई तुमसे सीखे............." और आसमा थोड़ी इतराते हुए हौले से अपना मुँह बनाते हुए बोल पड़ती हैं वहीँ सैम मुस्कुरता हुआ भर चला जाता hain.......kuch दूर जाने पर जिस आदमी ने उसके लिए नौकरों की बात कही थी वो उसे सामने खड़ा हुआ नज़र आता hain...............wo आदमी सैम को देखता हुआ धीरे से मुस्कुरा देता हैं.......

"आवो miyan.........sab खैरियत तो हैं na............"aur सामने खड़ा वो साक्ष मुँह में पान चबाता हुआ सैम की तरफ देखकर धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ सैम भी जवाब में धीरे से मुस्कुरा देता हैं........

" आपने कल दो नौकर दिलाने की बात कही thi..........bus मैं उसी सिलसिले में आपसे मिलने आया hoon.............."sam जैसे उस आदमी को कुछ याद दिलाते हुए कहता हैं वहीँ वो आदमी मुँह में पान चबाता हुआ हाँ में अपनी गुर्दें हिलने लगता हैं.......

" हमको याद हैं miyaan.............aapko दो नौकर देने की बात कही थी न humne............arey shekhawat.................zara कल्लू को फ़ोन lagana..............uske पास आदमियों की कमी नहीं hain....wo कहीं न कहीं से दो नौकरों का जुगाड़ कर hi dega.............aur सामने खड़ा आदमी फ़ौरन अपने मोबाइल पर एक नंबर डायल करने लगता hain.............jaise hi रिंग जाती हैं वो फ़ोन सामने वाले आदमी को पकड़ा देता hain........do तीन मिनट तक उन दोनों के बीच कुछ बातें होती हैं फिर वो फ़ोन सैम को पकड़ा देता hain......udher से कल्लू नाम का साक्ष सैम से बात कर रहा था..........

"dekho.................janab.................hum कल्लू ठेकेदार बोल रह hain...................naukar तो हम तुमको दो दे denge.................aur काम भी तुम उनसे जितना चाहे जितनी मर्ज़ी करवा लेना वो पीछे नहीं hatengey................poori लगन और म्हणत ईमानदारी से karengey..............magar ससुरा वो का हैं na.................unke अंदर का स्वबचाव किसको पता कैसा hain..........ander से वो चोर हैं या बदमाश कौन जानत hain.............ye हम इस चीज़ की गुरंटी नहीं ले सकत hain...................kyon की हमारे पास जितने भी आदमी आवत हैं सब बहार और दूसरे सेहर से काम की तलाश में आवत hain.............agar मंज़ूर हो तो bolo..............hum तुमको अभी दो नौकर तुम्हारे घर पर भेजता hoon................tum उनसे बात कर lena..........agar पसंद आये तो ठीक नहीं तो कोई और दूसरा देख लेना..............." और उधर से फ़ोन सुत्त जाता हैं..............

सैम कुछ देर तक खड़ा सोचता रहता हैं फिर वो उस ठेकेदार को दो नौकर भेजने को कहता hain...............wo ठेकेदार कल सुबह दो नौकर भेजने को कहकर अपना फ़ोन रख देता hain..........aur सैम उस आदमी को शुक्रिया कहता हुआ वहां से फ़ौरन अपने घर की तरफ चल पड़ता हैं............

" लो जी हमने तो आपकी नौकरों वाली समस्या भी दूर कर di......aur आप हैं की हमारा ज़रा भी ख्याल नहीं रखती............." सैम सोफे पर जाकर बैठ जाता हैं और आसमा की तरफ तिरछी नज़रियों से देखने लगता हैं वहीँ आसमा अपनी आँखें गोल गोल नाचती हुई सैम को बड़े गौर से देखने लगती हैं...........

" मैं नहीं रखती आपका ख्याल तो क्या कोई और रखती hain..............aap तो ऐसे कह रहे जैसे नौकरों का जुगाड़ करके आपने मुझपर कोई बहुत बड़ा एहसान किया hain...................itna तो मैं भी कर सकती हूँ mister................wo तो तुम इस वक़्त घर पर हो नहीं तो मैं खुद hi ढूढ़ लेती कोई नया नौकर................." और सैम तेज़ी से उठता हैं और अस्मा को तेज़ी से दबोचने के लिए पकड़ने लगता hain........wahin आसमा तेज़ी से भगति हुई सीधा अपने बैडरूम में घुस जाती हैं और सैम भी पीछे पीछे चला आता हैं............

"ाचा हुआ तुम खुद hi आ गयी बैडरूम mein..........aab मैं भी देखता हूँ की तुम्हें मुझसे कौन बचता हैं..............." और सैम फ़ौरन आसमा को दबोच लेता हैं और उसे बीएड पर पटक कर खुद hi उसके ऊपर लेट जाता हैं और उसके दोनों गलों ko......uske होंठों ko....uski गुर्दें को धीरे धीरे काटने और चूसने लगता हैं वहीँ आसमा कुछ देर तक तो विरोध करती हैं फिर वो भी स्थिर हो जाती हैं और अपने आपको सैम के हवाले कर देती हैं.............

सैम भला अब ऐसा हसीं मौका कहाँ छोड़ने वाला tha..............wo भी जिसकी बीवी ऐसी चीज़ ho...............wo आसमा के सीने पर अपने हाथों को रखकर उसके चूचियों को धीरे धीरे से मसलने लगता hain...............saath hi साथ उसके गुर्दें और कान के उन हिस्सों पर अपना जीभ फेरता hain.............aasma जो कुछ देर पहले खूब चहक रही थी वो अब सैम की बाँहों में खुद को सौंप चुकी thi.............sam फिर आसमा के एक एक कर सरे कपड़े उतरता हैं और खुद भी नंगा हो जाता हैं और आसमा पर चढ़ जाता hain.............aasma धीरे से अपनी दोनों टांगें पूरा फैला देती हैं और सैम का पूरा पूरा साथ देती हैं.........

ये खेल ज़्यादा देर नहीं चला और करीब 10 मं में सैम हांफता हुआ आसमा के ऊपर ढेर हो गया............. वहीँ आसमा लुम्बी लुम्बी सानें लेती हुई सैम को अपने सीने से लगाए रखती hain...........dono इस वक़्त पसीने से भीग चुके they................sam अपनी बॉडी को नेट एंड क्लीन रखता था वहीँ आसमा को भी साफ़ सफाई पसंद tha....................shaadi के बाद सैम अपना लुंड आसमा से करीब 4 या 5 बार hi चूस्वाया tha..........aksar आसमा लुंड चूसने को मन कर देती मगर जब भी आसमा उसका लुंड चूसती पहले ाचे से वाश करती फिर मुँह में leti....wo भी ज़्यादा देर तक nahin......pata नहीं क्यों उसे ओरल सेक्स ज़्यादा मज़ा नहीं आता tha.............ya आज तक उसने सेक्स को सही मायने में कभी ाचे से एन्जॉय hi नहीं किया था...........

बस इसी तरह इन दोनों की लाइफ ाचे से चल रही thi..................asma और सैम की लाइफ ऐसे hi चलती रहती अगर उनके लाइफ में इन दो नौकरों की अगर एंट्री नहीं हुई hoti..................kisi ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की उनके घर पर आये ये दो नौकर अस्मा की लाइफ को पूरी तरह से बदलकर रख देंगे.................

सुबह के 7 बजे they.....................sam नाश्ता कर रहा था तभी उसके घर की दूर बेल्ल baji..................wo उठकर फ़ौरन मैं दूर की तरफ गया और जैसे hi उसने दरवाज़ खोला सामने दो साक्ष खड़े they.......................ye वही नौकर थे जिनको सैम आज काम पर रखने वाला tha...............aur जिन्हें रखते hi न सिर्फ उसकी लाइफ बदलने वाली thi................balki उसकी वाइफ की पूरी ज़िन्दगी भी अब बदल जनि thi..............dekhna था की आगे वक़्त को क्या मंज़ूर था........................

टिल कॉन्टिनोएड..................................................

"
 
अपडेट- 03

सुबह के 7 बजे they.....................sam नाश्ता कर रहा था तभी उसके घर की दूर बेल्ल baji..................wo उठकर फ़ौरन मैं दूर की तरफ गया और जैसे hi उसने दरवाज़ खोला सामने दो साक्ष खड़े they.......................ye वही नौकर थे जिनको सैम आज काम पर रखने वाला tha...............aur जिन्हें रखते hi न सिर्फ उसकी लाइफ बदलने वाली thi................balki उसकी वाइफ की पूरी ज़िन्दगी भी अब बदल जनि thi..............dekhna था की आगे वक़्त को क्या मंज़ूर था........................

अब आगे...................................................................

सैम की नज़र अपने सामने खड़े उन दो साक्ष्यों पर गयी जिन्हें वो बड़ी hi अजीब नज़रियों से घूर रहा tha.............aur घूरता भी क्यों na.........wo दोनों थे hi ऐसे..............

"नमस्ते maalik................main शांति bai.................wo..........kallu ठेकेदार ने हम दोनों को यहाँ आपके पास काम के लिए भेजा हैं..................." और सामने कड़ी एक 35 साल की औरत ............जिसके कपड़े कहीं कहीं हल्के से फाटे हुए से they..................aur उसकी साड़ी मैली कुचली si............jispar कुछ पसीने और धुल मिटटी के दाग भी साफ़ नज़र आ रहे they.........................uske कंधे पर एक कपड़े का थैला लटका हुआ tha.............aur रंग भी उसका सावला सा tha................dikhney में उसकी शकल सूरत कोई ख़ास नहीं थी............ पैरों में चैपाल थे मगर पूरी तरह से घिसे हुए से they...............dekhney से वो बहुत गरीब घर की लग रही thi........aur मज़बूर bhi..............sam अपने सामने कड़ी उस औरत को सर से लेकर पवन तक स्कैन करता रहा फिर अपने दूसरी साइड में खड़े उस साक्ष की तरफ बड़े गौर से देखने लगा.............

जैसे hi सैम की नज़र उस साक्ष पर पड़ी वो अपने दोनों हाथों को जोड़ता हुआ सैम के सामने अपने सर को धीरे से झुकता हुआ....... " नमस्ते मालिक " कहकर चुप हो gaya..........wahin सैम जवाब में अपना सर हिलता हुआ फिर से उस साक्ष की ओरे बड़े ध्यान से देखने लगा............

" ये कौन हैं शांति bai................kya ये तुम्हारा मर्द हैं..........................." और इस बार सैम फिर से शांति के तरफ एक नज़र डालता हुआ धीरे से बोल पड़ा ...........वहीँ शांति धीरे से मुस्कुराते हुए आगे कहने लगी..............

"नहीं saheb...............ye हमारा मरद नहीं hain...................magar हैं तो ये मेरे गाँव का hi .............मैं इसको बहुत ाचे से जानती hoon...............wo क्या हैं न की घर में पैसों की बहुत तंगी चल rahi...........upar से मेरा मरद न तो कुछ कमाता हैं और न कोई काम धंधा करता hain........bus सारा दिन बस जुवा खेलता रहता......... और रोज़ शाम को दारु पीकर घर आता और मुझे मरता पीटता rehta...........uske ये रोज़ रोज़ के नाटक से मैं तंग आ गयी हूँ saheb..................bus इसी वजह से मुझे काम की तलाश में सेहर आना पड़ा.................." और शांति गहरी सांस लेती हुई अपनी बात ख़तम करती हुई टकटकी लगाए शामे के चेहरे की तरफ बड़े गौर से देखने लगी..............

कुछ देर की चुप्पी के बाद सामने खड़ा वो साक्ष धीरे से बोल पड़ा.............

" saheb..................mera नाम हरिया hain...............log मुझे हरी के नाम से बुलाते हैं......................" इतने कहकर वो साक्ष बिलकुल चुप हो जाता हैं वहीँ सैम अब बड़े गौर से अपने सामने खड़े उस साक्ष की तरफ बस देखे जा रहा tha..............aisa नहीं था की सैम कभी किसी इंसान को नहीं देखा था या नहीं मिला tha...............magar ये हरिया नाम का साक्ष जो इस वक़्त उसके ठीक सामने खड़ा था वो दिखने में बहुत अजीब tha..............ajeeb इस लिए था क्यों की उसकी पर्सनालिटी भी नौकर के हिसाब से बिलकुल भी मैच नहीं करती थी...............

Hariya....................urf hari...................uski उम्र एहि कोई 45 साल के आस पास रही hogi.......................sir के बाल कुछ काळा थे तो कहीं कहीं safed....................usney सर पर बहुत सारा सरसो का तेल छिपाद रखा था जिससे उसके सर के बाल आपस में चिपके हुए से they..................upar से उसपर धुल मिटटी भी जमी हुई thi...............jo उसके रूप को और भी बुरा बना रही thi...........rang तो उसका सावला था hi................aankhein किसी आगरे की तरह सुर्ख laal..........aur बड़े bade..............naak थोड़ा बड़ा था और उसपर मूछें भी बड़ी बड़ी.................

वो अपने मुँह में रखकर कुछ चबा रहा tha...............shayad कुछ खा रहा ho...................jissey उसके होंठ तो काळा थे मगर हो न हो पान खाने की वजह से इस वक़्त उसके होंठ थोड़े लाल नज़र आ रहे they.............wo इस वक़्त यकीनन पान hi चबा रहा tha.................dikhney में वो काफी होता काटा tha........jaise पहलवान type..................aur उसकी हाइट भी 6 फ़ीट से ऊपर hi hogi............seenay चौड़े थे और पेट थोड़े बहार की तरफ निकले hue................uske जिस्म और सीने पर काफी बाल थे जो कपड़े कही कही फाटे होने की वजह से साफ़ नज़र आ रहे they............shareer काफी भरी भरकम...............

हालाँकि उसने एक शर्ट टाइप का बना पहन रखा था ऊपर से एक हाफ shirt.............jiske बटन आगे के सरे खुले हुए they.................jissey उसकी बना साफ़ नज़र आ रही thi..............banyaan में कई जगह छोटे छोटे छेद होने की वजह से उसके सीने और पेट पर जो बाल थे वो भी नज़र आ रहे they.............neechay उसने एक नीले रंग की लुंगी पहन राखी थी जो वो भी कई जगह से फटी हुई thi...........uske कपड़ों में धुल मिटटी भी साफ़ नज़र आ रहा tha...............aur कहीं कहीं दाग इतने गहरे थे की वहां का पूरा हिस्सा कला पढ़ गया था.............

नीचे उसने एक स्लीपर पहन रखा tha................uski हालत भी कुछ वैसे hi थी जैसे उसके कपड़ों ki..................pawn में उसके धुल लगे they................uske पीठ पर भी कपड़ों का एक थैला लटका हुआ tha.............aur उसके जिस्म से पसीने की हल्की हल्की सी स्मेल भी आ रही थी ............कुल मिलकर वो आदमी सैम को राति भर भी जमा नहीं tha................is लिए सैम उस साक्ष को अजीब सी नज़रियों से देख रहा tha.................is तरह से देखता हुआ पाकर अगले hi पल शांति धीरे से बोल पड़ती हैं............

"saheb......................aap इसके हुलिए पर मुट्ठ jawo............dikhta ये बस ऐसा हैं मगर काम आप इससे जो चाहे करवा lo........poori ईमानदारी और लगन से ये सब karega.........aapko ज़रा भी शिकायत का कोई मौका नहीं देने dega..................is बात की मैं गुरंटी लेती हूँ saheb.................hum लोग गरीब ज़रूर हैं मगर चोर बेईमान नहीं............." और शांति अपने दोनों हाथों को जोड़ती हुई सैम के सामने धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ सैम कुछ देर तक चुप रहता hain...................issey पहले की वो आगे कुछ कहता आसमा बहार आती हैं और सामने खड़े उन दो नौकरों को बड़े गौर से सर से लेकर पवन तक देकने लगती हैं..............

वो दोनों आसमा को देखते हुए अपने दोनों हाथों को जोड़ लेते हैं............. अब उन्हें ये बताने की ज़रुरत नहीं थी की सामने जो हसीना इस वक़्त कड़ी हैं वो कौन होगी.................

" नमस्ते मालकिन............" मैं शांति bai............kaam की तलाश में हम दोनों यहाँ आये hain............malik से कहकर हमें काम पर रखवा दीजिये न malkin.................bhagwaan आपका भला करेगा................" और शांति इतना कहकर खामोश हो जाती हैं वहीँ आसमा टकटकी लगाए बड़े गौर से कभी शांति के तरफ देख रही थी तो कभी ..................हरिया के taraf..............hariya का रूप रंग देखकर तो उसे बहुत अजीब सा लग रहा tha......................magar वो उनकी बेबसी और लाचारी देखकर फ़ौरन सैम की तरफ देखती हुई धीरे से बोल पड़ती हैं...........

" sam............inko काम पे रख lo..................aur इनसे ये पूछों की ये घर और बहार का कौन कौन सा काम कर सकते hain......................."aur आसमा हौले से शांति की तरफ मुस्कुराते हुए बोल पड़ती हैं वहीँ हरिया एक नज़र अपना सर ऊपर की तरफ उठता हैं और आसमा को सर से लेकर पवन तक अपनी नज़रियों से स्कैन करने लगता hain...............aasma का रूप रंग देखकर भले hi उसके दिल में कोई हलचल हुई या न हुई ho........................magar haan.............tangon के बीच बड़ा सा उसका जो लटक रहा था .......... उसमें ज़रूर हलचल हो गयी thi.................kaam पे रखने की वजह से उसके चेहरे पर अब ख़ुशी के मुस्कान थे...........

" घर का सारा काम जैसे झाड़ू पुछा सब कुछ मैं कर दूँगी malkin................aur साफ़ सफाई बहार के सरे काम हरिया देख देगा.................." और शांति के चेहरे पर भी खुशियां साफ़ झलक पड़ती हैं वहीँ सैम भी जवाब में धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं..........

" काम करने का कितना रूपया लोगी शांति बाई................" और सैम के मुन्न में अगला जो सवाल था वो उसे अपनी जुबान पर लता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं...........

" आप जो हंसी ख़ुशी से दे देंगे maalik...............bus हमें दो वक़्त की रोटी और पहननी को दो जोड़ी kapdey........aur पैसे जो आपका मुन्न करे............." और शांति अपने दिल की बात रखती हुई बोल पड़ती हैं वहीँ सैम आसमा की तरफ एक नज़र डालता hua................usey देखता hua................dheere से मुस्कुरा देता हैं.............

"10,000 महीने के tumko........aur 10,000 महीने के isey..........theek रहेगा na..........ye याद रहे की घर के सरे काम सही से होने chahiye............apni मेमसाहेब को ज़रा सी बात की अगर शिकायत मिली तो उस दिन मैं तुम दोनों को काम से बहार निकल doonga...............waise अब तुम दोनों रहते कहा ho...........aur काम पे कब आवोगे.............." सैम शांति के तरफ तो कभी हरिया के तरफ देखता हुआ उनसे सवाल करता हैं वहीँ इस बार हरिया धीरे से जवाब देता हैं..........

" maalik..............hum इस सेहर में नए hain..........to हमारा कोई ठिकाना नहीं hain...............agar यहीं आस पास कोई रहने को एक छोटा सा कमरा मिल जाये तो आपकी बड़ी मेहरबानी होगी............." और हरिया इतना कहता हुआ एक नज़र आसमा के तरफ देखता हैं फिर वो अपनी नज़रें नीचे की तरफ झुका लेता hain........wahin सैम कुछ देर तक चुप रहता हैं फिर वो अपने बंगले के सामने जो एक चौकीदार का रूम जो इस वक़्त खली था उन दोनों को दे देता हैं..........

हालाँकि उसमें दो छोटे छोटे कमरे they.............wo दोनों सैम और आसमा का शुक्रिया कहकर फ़ौरन उस छोटे से कमरे की तरफ चल पड़ते hain................wahin सैम और आसमा एक दूसरे को देकते हुए मुस्कुराने लगते hain..............shayad अपनी जीत par..........................ya फिर शायद अपनी बर्बादी par.....................ye तो बस आने वाला वक़्त hi तय करने वाला था..............

तो बे कॉन्टिनोएड.............................
 
अपडेट-04

हालाँकि उसमें दो छोटे छोटे कमरे they.............wo दोनों सैम और आसमा का शुक्रिया कहकर फ़ौरन उस छोटे से कमरे की तरफ चल पड़ते hain................wahin सैम और आसमा एक दूसरे को देखते हुए मुस्कुराने लगते hain..............shayad अपनी जीत par..........................ya फिर शायद अपनी बर्बरी par.....................ye तो बस आने वाला वक़्त hi तय करने वाला था..............

अब आगे.............................................................

उन दोनों को काम पे रखने के बाद सैम वापस मुड़ता हैं तो आसमा उसे hi देखते हुए हौले हौले से मुस्कुरा रही thi......................sam आगे बढ़कर आसमा के गले में अपनी बाहें डालता हुआ उसे अंदर कमरे की तरफ ले जाने लगता हैं वहीँ आसमा अपनी आंखें गोल गोल नाचती हुई एक नज़र सैम के चेहरे की तरफ देखने लगती hain..................fir वो पीछे मुड़कर एक नज़र उन दो नौकरों को भी देखती hain.....................shanti तो अपने धुन में आगे आगे चली जा रही थी magar...................hari उस वक़्त पीछे मुड़कर आसमा को एक नज़र जी भरकर देख रहा था..............

जब आसमा की नज़रें हरी के ललचाये हुए नज़रियों पर जब पड़ती हैं तो उस वक़्त उसकी आँखों में एक अजीब सा खुमार साफ़ नज़र आ रहा था जो उस वक़्त आसमा को बेचैन कर देने के लिए बस काफी tha..............hari की नज़रें आसमा के दिल में हलचल मचाने के लिए बस काफी thi.............aasma शर्माती हुई फ़ौरन अपनी नज़रें हरी के तरफ से हटा लेती हैं मगर उस वक़्त हरी के चेहरे पर एक गन्दी और कुटिल मुस्कान thi.................wahin वो अपनी एआरएम से (केहुनी) सैम को कसकर मरती हैं और उसे आँख दिखती हुई उसके बाँहों को अपने गुर्दें से हटाने लगती hain.............ussey दूर होने लगती hain...............shayad शर्म की वजह se...................wahin सैम उसे देखता हुआ बस मुस्कुराये जा रहा था................

जैसे hi वो अंदर जाती हैं सैम फिर से कमरे का मैं दूर बंद कर लेता हैं और इस बार आसमा का हाथ तेज़ी से अपनी तरफ खींचता हुआ उसे अपनी बाँहों में कसकर जकड लेता hain.............is वक़्त उसके दोनों हाथ आसमा के कमर पर थे जिन्हें वो मज़बूती से अपनी गिरफ्फत में डेल रखा tha.............wahin आसमा थोड़ा बहुत मुशक़्क़त तो करती हैं फिर वो भी सैम के सीने से लिपट जाती हैं और अपने दोनों हाथों से उसके सीने पर कसकर मुक्के मरने लगती हैं.................

" आपको थोड़ी बहुत भी शर्म हैं की nahin....................jaha मौका मिलता हैं आप वहीँ शुरू हो जाते ho....................ye भी नहीं देखे की आस पास कोई देख रहा हैं की nahin.............khud तो बेशरम हो और मुझे भी बेशरम बनाने पर तुले रहते हो..............." और आसमा शिकायत के लहज़े से सैम के चेहरे की तरफ देखती हुई धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ सैम जवाब में फिर धीरे से मुस्कुरा देता हैं..............

" कहे की sharam............aur कैसी sharam..............biwi से अगर शर्म करूँगा तो मैं कहा jawunga..............biwi के पास आने के लिए तो शर्म बेचनी hi पड़ती hain............aur जिसके पास ऐसी मॉल हैं तो उसे तो पक्का पूरा बेशरम hi होना chahiye.............jaise की मैं................." और सैम आसमा के खूबसूरत चेहरे की तरफ एक नज़र देखता hua...........haule से अपना चेहरा उसके गलों के पास ले जाता हैं और इस बार कसकर उसकी गाल को काट लेता हैं वहीँ आसमा इस बार दर्द से चिल्ला पड़ती हैं............

"छोड़िये mujhe................aap सच में बहुत गंदे hain...............aapne मेरे गले में जब बाहें डाली थी तब उस नौकर ने हमें देख लिया tha..............ye काम आप रूम में भी तो आकर कर सकते थे ...........मगर nahin..............main तो बेशरम hoon..................main तो कहीं शुरू हो jawunga................aap कहीं भी शुरू हो सकते हैं मगर............ मैं nahin................meri इज़्ज़त हैं.............." और इस बार आसमा अपनी नाक चढ़ाते hue..........mooh बनाते hue..........sam को चिड़ाहटी हुए हौले से बोल पड़ती हैं वहीँ सैम इस बार आसमा के दूसरे गलों को भी कसकर काट लेता hain.........wahin आसमा दर्द से फिर चिल्ला पड़ती हैं............

" aacha..............tumhari िज़ात hain.............to चलो अब मैं उसे लूटता hoon...............aur ऐसी मॉल को लूटने में बड़ा मज़ा aayega...............fir मैं भी देखता हूँ की तुम्हारी िज़ात ज़्यादा हैं ............या फिर मेरी िज़ात............." और इस बार सैम अपना होंठ आसमा के गुर्दें पर रखकर उसके गुर्दें को हौले हौले से चूमने और चटनी लगता हैं वहीँ आसमा ज़ोरों से सिसक पड़ती हैं............

" aaaaaaahhhhhhhhhhh.................aacha तो अब मैं बीवी से आपकी मॉल बन gayi...........kuch दिन के बाद आप मुझे कुछ और hi कहने lagengey.............aur दूर hatiye...............aapko रोमांस करने में ये नहीं समझ आता की कब सुबह हुई........... कब दिन hain............aur कब raat.......kabhi भी कहीं भी आप शुरू हो जाते hain............hatiye मुझे और भी काम हैं..............." और इस बार आसमा सैम से दूर करते हुए पीछे की तरफ मुड़ती हैं तभी सैम कसकर उसकी गांड पर एक ज़ोर का थप्पड़ मरता हैं जिससे आसमा फिर से शिकायत के लहज़े से सैम की तरफ देखने लगती हैं............

"आप भी na........jee तो कर रहा की मैं अभी आपको काचा चबा जावून................" और आसमा शरारती अंदाज़ में धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ सैम अपनी दोनों बाहें खुद hi उसके सामने फैला देता हैं............

"शौक se.............roka किसने hain...............kaash वो दिन कब आएगा की मेरी बीवी खुद मेरा hi रपे karegi............kasam से बड़ा मज़ा aayega.............bahut खुसनसीब होउंगी main........wo पहला इंसान........." और सैम इस बार ज़ोरों से हंस पड़ता हैं वहीँ आसमा सोफे पर रखा पिलो अपने हाथों में उठती हैं और कसकर सैम की तरफ फेंक मरती हैं...............

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हरी जैसे hi कमरे के अंदर जाता हैं वो सामने पड़ी चारपाई पर जाकर बैठ गया tha..................aur बड़े ध्यान से कुछ सोच रहा tha..............wo अपनी जेब से एक बीड़ी की बंडल निकलता हैं और उसमें से एक सस्ती वाली बीड़ी अपने मुँह में दबाता हुआ............. उसे माचिस से जलाकर एक लुम्बी सी काश लेता हैं जिससे एक पल के लिए मनो उसकी आँखें बंद हो जाती hain............aur जब उसकी आँखें खुलती हैं तो वो इस वक़्त अपने सामने शांति को खड़ा हुआ पता hain.............jo इस वक़्त बड़े गौर से उसके चेहरे की ओरे बस देखे जा रही थी..................

" बात क्या हैं hari................ye तू बीड़ी की लुम्बी लुम्बी काश लेता हुआ कई सोच रहा hain................tujhe कुछ हुआ क्या..............." और इस बार शांति हरी के चेहरे को पढ़ने की कोशिश करने लगती हैं वहीँ हरी कुछ देर तक खामोश रहता हैं और फिर धीरे से आगे कहना शुरू करता हैं.............

"मैं एहि सोच रहा हूँ की किस्मत कितनी कुट्टी चीज़ hain................jab मैं गाँव पे था तो मुझे कोई काम ढंग का नहीं मिलता tha................din भर ट्रक से गिट्टी बालू उतरते चढ़ाते सारा दिन बीत जाता tha..................aur म्हणत के नाम पर मिलता था ..................बस चाँद rupaiye................jissey अपना ठीक से पेट भी नहीं भरता tha......................aur यहाँ dekho...........yahan आकर लगता हैं की अपुन की किस्मत भी अब पलट गयी.................

आराम की naukari.............pehananey को कपड़े ........और रहने को ghar........aur भर पेट khana..................upar से 10,000 रुपैये bhi................aur सबसे ाची baat.............malkin भी मिली तो एक दम zabardast.........bilkul हीरोइन के maafiq................sala एक पल के लिए मेरी नज़रें उसे भूला नहीं पा rahi.............apne मालिक कितने किस्मत वाले हैं न जो उन्हें ऐसी सूंदर बीवी mili..............sir से लेकर पवन तक बस क़यामत हैं ......qayamat.............agar ऐसी बीवी मेरी किस्मत में अगर होती तो मैं....................." और हरी के मुन्न में जो ज़ज़्बात दबे हुए थे वो अब उसके जुबान के रास्ते बहार निकल रहे थे वहीँ शांति बड़े गौर से उसके चेहरे की तरफ बस देख रही थी..............

"वो शेखचिल्ली की aulaad..................khyaali पुलाव बनाना बंद kar...............nahin तो जो नौकरी हाथ लगी हैं na...........wo भी कहीं हाथ से न निकल jaye...............aur मालकिन के सपने देखना बंद kar................us पारी को पाना तेरे जैसे लंगूर के बस में नहीं hain...........wo चिझे कभी नहीं मिलने wali...............aur तू ये bata........aakhir तुझमें हैं ऐसा क्या जो वो तुझे थोड़ा भी भाव degi................ek बात अपने दिल और दिमाग में गाँठ बाँध le.....................malkin को पाना सपने को मुट्ठी में कैद करने बर्बर जितना hain..................ye तेरे बस का नहीं..........

जो तू गांव में कई साडी औरतों को बेहला फुसलाकर उनके साथ जो करम काण्ड करता था na...........aisa यहाँ जो कुछ तू सोच रहा वो बिलकुल नहीं chalega.............ye सब सेहर की लौंडिया hain..........dikhney में जितनी bholi................ander से उतनी hi chalu................aur टेढ़ी.........." और शांति एक hi सांस में अपनी बात ख़तम करती हैं मगर हरी के दिल और दिमाग में तो जैसे एक तूफ़ान सा उठा हुआ tha...................wo इस समुन्दर में उठती हुई ऊँची लहरों को चीरकर उसपर अपनी फ़तेह का झंडा लहराने वाला था............... देखना था की उसका ये सपना सिर्फ सपना बनकर रह जाता hain.......................ya फिर हकीकत......................

तो बे कॉन्टिनोएड...........................................
 


अपडेट-05


जो तू गांव में कई साडी औरतों को बेहला फुसलाकर उनके साथ जो करम काण्ड करता था na...........aisa यहाँ जो कुछ तू सोच रहा वो बिलकुल नहीं chalega.............ye सब सेहर की लौंडिया hain..........dikhney में जितनी bholi................ander से उतनी hi chalu................aur टेढ़ी.........." और शांति एक hi सांस में अपनी बात ख़तम करती हैं मगर हरी के दिल और दिमाग में तो जैसे एक तूफ़ान सा उठा हुआ tha...................wo इस समुन्दर में उठती हुई ऊँची लहरों को चीरकर उसपर अपनी फ़तेह का झंडा लहराने वाला था............... देखना था की उसका ये सपना सिर्फ सपना बनकर रह जाता hain.......................ya फिर हकीकत......................

अब आगे.......................................................................

काफी देर तक हरी शांति की कही हुई एक एक बाटिओं पर गौर फरमाता हैं और आखिरकार उसके चेहरे पर फिर से एक कमीनी सी मुस्कान आ hi जाती hain..............jisey देखकर शांति ना में अपना सर हिलती hui...............aur उससे ये कहती हुई.........." की तेरा कुछ नहीं हो sakta"........aur फ़ौरन बहार की तरफ चली जाती hain.................wahin हरी शांति की थिरतकी हुई गांड को बड़े hi ध्यान से देख रहा tha..............aur ये सोच रहा था की agar.................kisi भी चीज़ को पाने की ज़िद्द हो to............der सबीर इंसान उस चीज़ को आखिर हासिल कर hi लेता hain..............bus उस काम को करने में साचे दिल से mehnat.......lagan........aur शिद्दत होनी chahiye.............baki तो सब ऊपर वाला हैं hi.........

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दूसरे दिन

सुबह का वक़्त tha..............aasma सैम के लिए नास्ता तैयार कर रही thi................aur सैम कुछ घर के पुराने पेपर्स को चेक कर रहा tha...............tabhi उसके घर की दुर्बल baji................sam उन पेपर्स को एकाथा करता हुआ एक फाइल में रखने लगा और सीधा मैं दूर की तरफ चल pada....................jaise hi उसने दरवाज़ा खोला सामने शांति अपने एक हाथ में झाड़ू लिए hue...............wahin दूसरे हाथ में वाईपर लिए hue...................aur उसके ठीक पीछे हरी अपने एक हाथ में बकेट और मग और दूसरे हाथ में पुछा का कपडा लिए हुए खड़ा tha..............unhein ऐसे देखकर सैम धीरे से मुस्कुराता हुआ उन्हें अंदर आने को इशारा kiya..............wahin वो दोनों नमस्ते साहेब कहकर सीधा अंदर चले आये.................

" saheb....................bataiye..............saaf सफाई किधर से शुरू करनी हैं..................." शांति अपने हाथ में थमी झाड़ू को धीरे से नाचती हुई बोली वहीँ हरी इधर उधर घर के चरों तरफ बड़े गौर से देख रहा tha..........shayad उस घर की सुंदरता ko.................ya फिर उस घर में रहने वाली उस बाला ko..............jo उसकी पहली hi नज़र में कहीं उसकी आँखों में बस गयी thi...............jo अब तक उसे कहीं नज़र नहीं आयी thi.................magar उसकी ये ललचायी हुई आँखें बस इस वक़्त उसे hi तलाश रही thi.................aur उसकी ये तलाश बहुत जल्द ख़तम होने वाली थी..................

" अब मैं कैसे बता सकता हूँ की घर की साफ़ सफाई कहाँ से और किधर से शुरू करनी hain.................ye तो तुम्हें मेरी होम मिनिस्टर hi बता पायेगी.................." और सैम इतना कहता हुआ हौले से मुस्कुरा देता हैं वहीँ शांति के चेहरे पर भी एक प्यारी सी हंसी आ जाती हैं...............

" एक बात बोलूं saheb.....................aap दोनों की जोड़ी सच में बहुत ाची लगती hain...............jitne ाचे इंसान आप hain...............utni hi ाची memsaheb.............memsaheb जितनी खूबसूरत हैं अंदर से उतनी hi नरम दिल की bhi...............upar वाला आप दोनों की जोड़ी ऐसे hi सलामत रखे................." और शांति अपने दिल की बात सैम से बोल देती वहीँ वहीँ सैम जवाब में धीरे से बस मुस्कुरा पड़ता हैं..............

थोड़े देर में पायलों की छनछनाहट की आवाज़ उस कमरे में गूजन उठती hain....................jissey ये पता चलता हैं की आसमा आ रही hain..............idher हरी के दिल में बेचैनी की एक तेज़्ज़ लहर उठती hain........aur आँखें जिसे अब तक तलाश रही थी उसके आने की आहात सुन के वो और भी ज़्यादा चमक जाती हैं और जिधर से आवाज़ आ रही थी हरी अपने आपको नहीं रोक पता और उसी तरफ अपनी गुर्दें घूमता हुआ टकटकी लगाए बस देखने लगता hain......................aur जैसे hi आसमा अंदर आती हैं हरी की आँखें चमक जाती हैं................

आसमा के हाथों में एक नाश्ते की ट्रे thi............halanki लास्ट मई का महीना चल रहा था तो सुबह से hi गर्मी होनी लाजमी thi.....................upar से किचन में काम करने से इस वक़्त आसमा का जिस्म गर्मी से भीगा हुआ tha............uske गुर्दें और चेहरे पर चाँद बूँदें पसीने के साफ़ नज़र आ रहे they.............is वजह से उसने दुपट्टा भी अपने सीने पर नहीं लगाया हुआ था..................

उसने एक ब्लैक कलर की टाइट सूट और नीचे उसी रंग की लग्गी पहन राखी thi...................jissey उसका बदन उन कपड़ों में पूरी तरह से चिपका हुआ tha...............suit का गाला आगे से थोड़ा बड़ा था जिससे उसकी गुर्दें और सीने का ऊपरी हिस्सा नंगा था जो की इस वक़्त बेहद hi ाखर्षक लग रहा tha...............gurden और सीने की नीली नशें और उसपर पसीने की चाँद boondein.............aur सूट में कासी दो बड़ी बड़ी चूचियां जो की पूरे गोल आकर mein.........tani hui............sudool रूप में ............हेयर जैसे मर्द के लुंड में आग लगा देने के लिए बस काफी थी...............

वो आसमा के बदन के हर एक एंगल को अपने आँखों से बहुत hi बारीकी से स्कैन कर रहा tha..................bhari janghein...........ubhari हुई gand.............patli kamar............badi बड़ी choochiyaan........aur स्लिम body........jo कुछ एक औरत में होनी चाहिए वो सब कुछ आसमा में thi.................shayad इस वजह से हरी इस वक़्त अपनी पालक झपकना भी भूल गया tha...............jab आसमा की नज़रें अपने सामने खड़े उन दो नौकरों पर पड़ती हैं उसके चेहरे पर शर्म और हाय की लखीरें भी साफ़ नज़र आने लगती hain......kyon की उसने ज़रा सा भी एक्सपेक्ट नहीं किया था की कमरे में इस तरह से दो नौकर सैम के पास खड़े हुए होंगे..................

हालाँकि उसने दूर बेल्ल बजाते सुना भी था मगर शायद भूल जाने की वजह से वो अपने सीने पर दुपट्टा डालना भूल गयी thi...........ya शायद गर्मी की वजह से bhi.................wahin हरी के दो टांगों के बीच हलचल होनी शुरू हो गयी thi.....................uski आँखें सुर्ख लाल thi...............agar उसका बस चलता तो वो इसी वक़्त आसमा के ऊपर चढ़ jata................magar आसमा की नज़रें जब हरी पर पड़ती हैं वो फ़ौरन शर्माती हुई अपने सीने पर एक हाथ रख लेती हैं और अपना सर नीचे की तरफ झुकाती hui................shayad वो अपने बड़े बड़े उभारों को उसकी नज़रियों से अब छुपाना चाहती ho...............magar हरी की तो नज़रें जैसे उसकी चूचियों की साइज को नाप भी लिया हो............

" maalik...................aapka घर बहुत hi ज़्यादा सूंदर हैं................." हालाँकि आसमा उसके बाटिओं का मतलब समझ गयी थी की वो कौन सी सुंदरता की बात कर रहा hain..............ye सब ख्याल आते hi आसमा के तन बदन में एक अजीब सा रोमांच उठने लगता हैं जिससे उसकी दिल की धड़कनें भी बढ़ने लगती hain...............wo एक नज़र हरी के चेहरे की तरफ देखती हैं

और हरी आसमा की तरफ अपनी नज़रें गड़ता हुआ धीरे धीरे से मुस्कुरा रहा था वहीँ आसमा बिना कुछ कहे फ़ौरन उस कमरे से बहार निकल जाती हैं..............

मगर हरी की नज़रें तो आसमा पर मनो चिपक सी गयी thi.....................uski नज़रें तो उसकी थिरकती हुई गांड पर थी जिसे वो बड़े ध्यान से खा जाने वाली नज़रियों से बस देख रहा tha..........aasma के इस तरह चलने से उसकी गांड के बीच की जो दरार ......और ubhaar..........jo सूट के ऊपर से साफ़ नज़र आ रही thi...............wahin हरी का दिल अंदर hi अंदर पूरी तरह से मचल उठा tha...........jaise hi आसमा अपने रूम में जाती है वो अपने बीएड पर जाकर बैठ जाती हैं और लुम्बी लुम्बी सांसें लेती हुई अपने आपको पूरी तरह से नार्मल करने की कोशिश करने लगती हैं........

" maalik...............memsaheb तो आयी भी और आकर चली भी gayi...............maine तो ये पुछा hi नहीं की काम कहाँ से शुरू करना hain................na मैंने कुछ पुछा और न उन्होंने कुछ bataya............aap कहो तो मैं जाकर उनसे पूछ लेती हूँ.........." और शांति जैसे सैम से हुकुम मांगती हैं वहीँ सैम जवाब में धीरे से मुस्कुरा देता hain............shanti जैसे hi जाने लगती हैं उसके पीछे पीछे हरी भी जाने लगता हैं ये देखकर शांति उसे वहीँ रोक देती हैं...........

"तू इधर hi thehar..........main जाकर मेमसाहेब से पूछकर आती हूँ..............." और शांति फ़ौरन अंदर के कमरे में चल पड़ती हैं वहीँ मुन्न hi मुन्न हरी शांति को 100 गालियां दे रहा tha..............wo अब कोई ऐसा मौका नहीं छोड़ना चाहता था जिससे वो आसाम के और करीब jaye..................jaise hi शांति कमरे में जाती हैं आसमा बीएड पर बैठी हुई लुम्बी लुम्बी सांसें ले रही thi..............halanki उसने अब सीने पर दुपट्टा दाल रखा tha...............shanti को ऐसे अपने कमरे में आता हुआ देखकर उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान तैर जाती हैं.............

" memsaheb...........main ये पूछ रही थी की काम कहाँ से शुरू करना hain..............agar आप बता देती तो हम लोग अपना काम फिर शुरू करते.............." और शांति हाथों में झाड़ू लिए धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ आसाम मुस्कुराते हुए अपनी जगह से उठती हैं और उसे ऊपर के कमरे की तरफ चलने को इशारा करती हैं..........

" एक बात poochon...............shanti.........wo तुम्हारे साथ में जो नौकर हैं वो कौन हैं................" और आसमा का दिल फिर से ज़ोरों से धड़कने लगता हैं उसके जेहन में जो सवाल था उसने शांति से पूछ तो लिया था मगर शांति उसके इस सवाल का क्या प्रतिक्रिया करेगी ये उसने नहीं सोचा था...............

" memsaheb.................uska नाम हरिया hain..........log उसे प्यार से हरी बुलाते hain...........waise तो ये बहुत काम का आदमी hain...........ghar से लेकर बहार तक ये सारा काम जनता hain......jo आप इससे करवा lo............ye कभी ना नहीं kahega.................pehle ये गांव में ट्रक से गिट्टी बालू उतरता और चढ़ाता tha............us काम में बहुत म्हणत था और पैसे भी kum...........is वजह से ये मेरे साथ सेहर को आया.............." और शांति एक hi सांस में सब कुछ कहती चली गयी वहीँ आसमा बड़े गौर से उसकी एक एक बातें सुन रही thi..............soch रही thi..........magar कुछ कह नहीं रही थी..............

" आप कहो तो मैं उसे भी ऊपर बुला लून.................." शांति फिर से आसमा के तरफ देखती हुई धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ आसमा अपने ख्यालों में कहीं खोयी हुई सी थी.............

" memsaheb.................aap कहो तो मैं उसे ऊपर बुला लून........." शांति इस बार थोड़ा तेज़्ज़ आवाज़ में बोलती हैं वहीँ आसमा एक नज़र नीचे की तरफ देखती हुई जहाँ सैम सोफे पर बैठा नास्ता कर रहा था वहीँ हरी अपनी नज़रें नीचे की तरफ झुकाये बस खामोश खड़ा tha.................aasam बड़े गौर से हरी को देखती हुई कोई जवाब नहीं deti.................dekhna था की इस वक़्त आसमा के मुन्न में क्या चल रहा tha.............ye तो बस आने वाला वक़्त hi बता सकता था.......................

तो बे कॉन्टिनोएड...............................................................
 
अपडेट-06

" memsaheb.................aap कहो तो मैं उसे ऊपर बुला लून........." शांति इस बार थोड़ा तेज़्ज़ आवाज़ में बोलती हैं वहीँ आसमा एक नज़र नीचे की तरफ देखती हैं जहाँ सैम सोफे पर बैठा नास्ता कर रहा था वहीँ हरी अपनी नज़रें नीचे की तरफ झुकाये बस खड़ा tha.................aasma बड़े गौर से हरी को देखती हुई कोई जवाब नहीं deti.................dekhna था की इस वक़्त आसमा के मुन्न में क्या चल रहा tha.............ye तो बस आने वाला वक़्त hi बता सकता था.......................

अब आगे.................................................................................

आसमा अभी भी अपने ख्यालों में कहीं खोयी हुई सी thi...........wo टकटकी लगाए सामने के तरफ बस देखे जा रही thi.............ya शायद कुछ और hi सोच रही thi............hari के आ जाने से उसकी लाइफ में थोड़ा बहुत असर पड़ना अब शायद शुरू भी हो गया tha.................aakhir कुछ देर की चुप्पी के बाद शांति फिर से दुबारा बोल पड़ती हैं......

" memsaheb.....................kya हुआ aapko..............main हरी को ऊपर bulawon...............ya नहीं............." और इस बार शांति अपने बाटिओं पर ज़ोर डालते हुए थोड़ा तेज़्ज़ आवाज़ में कहती हैं वहीँ इस बार आसमा शांति के तरफ देखती हुई धीरे से हाँ में अपनी गुर्दें हिला देती hain.................haan कहते hi आसमा फ़ौरन उस कमरे की तरफ चल पड़ती हैं जहाँ से अब साफ़ सफाई शुरू करनी thi...............shanti नीचे जाकर हरी को फिर वापस ऊपर बुलाकर लती हैं वहीँ हरी की आँखें फिर से चमक उठी thi.......................wo तो एहि चाहता था की जब वो उस कमरे की साफ़ सफाई करे आसमा भी उसके सामने मौजूद रहे.........

जैसे hi हरी ऊपर आता हैं अपने सामने कड़ी आसमा की तरफ देखता हुआ फिर धीरे से मुस्कुरा देता हैं वहीँ आसमा एक नज़र हरी के तरफ देखती हुई ................दुबारा से अपनी नज़रें दूसरी तरफ फेर लेती hain.............na जाने क्यों उसका दिल फिर से धड़क उठा tha...................jaise hi हरी आसमा के करीब आता हैं उसके बदन से एक अजीब तरह की स्मेल उठने लगती hain...........jo आसमा को और भी बेचैन कर रही थी.................

उसका दिमाग कह रहा था की वो इस वक़्त हरी के पास से फ़ौरन हुत्त jaye................usey अपने पास भी न आने de..........magar दिल शायद कुछ और hi कह रहा tha...............kahan वो पाक saaf..........jahan उसके बदन पर गन्दगी का एक नामोनिशान तक nahin.........wahin उसका बदन किसी संगमरमर की तरह सूंदर और पूरी तरह से पाक साफ़ .........जो हमेशा गुलाबों की तरह महकता tha...............aur हमेशा उसके बदन से एक परफ्यूम की भीनी भीनी सी खुसबू उठाते रहती थी.............. वहीँ उस हरी का जिस्म जो एक दम ganda...............tel उसके सर पर चुपड़ी hue..............daant भी हल्के पीले ऊपर से उसके मुह से हमेशा तम्बाकू और बीड़ी की अजीब सी badboo...........upar से लगता था की वो कई दिनों से ठीक से नहाया भी नहीं hain............kul मिला जुलकर वो सर से लेकर पवन तक सिर्फ और सिर्फ गन्दा था................

" memsaheb.................safayi कहाँ से शुरू करनी हैं..............." और इस बार हरी आसमा को सर से लेकर पवन तक ाचे से स्कैन करता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ आसाम अपने सामने के कमरे की तरफ ......................अपने हाथों को इशारा करते हुए ..............धीरे से बोल पड़ती hain..................aasma ाचे से जानती थी की हरी की नज़र कैसी hain...............wo उसे कैसी नज़रियों से देख रहा hain..............magar न जाने क्यों उसे कुछ भी बुरा नहीं लग रहा tha..............ya फिर वो उसकी नज़रियों को अनदेखा कर रही थी.......

" ठीक हैं memshaeb..............magar.............yahan नीचे बहुत से कार्टून्स और गुट्टे पड़े हुए hain........unhein तो दोचुट्टी (बर्ज़ा) पे रखा hi hoga...........tab जाकर पूरे घर की ाचे से साफ़ सफाई होगी................" और हरी फिर से आसमा के खूबसूरत से बदन को देखता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ आसमा शांति के तरफ देखती हुई फिर से बोल पड़ती हैं.........

" जो समझ में aaye..........jaisa समझ में aaye..........karo..............mujhe बस अपने कमरे साफ़ होने से बस मतलब हैं............." और आसमा हरी के एक बार और करीब जाती हैं वहीँ उसके बदन से फिर से वही अजीब सी बदबू उठने लगती हैं जो एक बार फिर से आसमा को मदहोश बना रही thi...............na जाने क्यों वो उस बदबू को जितना हो सके अपने संसनों के जरिये अपने बदन के अंदर उतरना चाहती thi.............ek अजीब सी मदहोशी थी उस बदबू mein...............jo बार बार आसमा को उसके तरफ खींच रही thi.......shayad एहि वो वजह था जो वो दो बार जब भी हरी के करीब गयी थी दोनों बार लुम्बी लुम्बी सांसें लेती हुई अपनी आँखें बंद करके................. उस बदबू को अपने अंदर उतर रही थी............

" memsaheb....................agar इस प्यासे को पानी मिल जाये तो आपकी बड़ी मेहरबानी होगी................" और इस बार हरी अपने दोनों हाथों को जोड़ता hua...........apne पीले काळा दांत दिखता hua..............aasam के दोनों चूचियों पर अपनी नज़रें गड़ता हुआ................... उसके चेहरे की तरफ देखकर हौले से हंस पड़ता हैं वहीँ आसमा जवाब में अपनी नज़रें नीचे झुकाती हुई फ़ौरन नीचे किट्चें के तरफ चल पड़ती हैं.............

" कमीना कहीं ka...................main ाचे से जानती हूँ की ये किस प्यास की बात कर रहा hain.............jitna गन्दा ये दीखता हैं उतनी hi गन्दी इसकी नियत भी हैं..............." और आसमा हरी के बारे में सोचती हुई नीचे चल पड़ती हैं वहीँ किचन में इस वक़्त सैम भी था जो नाश्ता करके अपने बर्तन को रखने आया tha................aasma को ऐसे अपने करीब आता हुआ देखकर वो फ़ौरन उसे पीछे से कसककर दबोच लेता हैं और उसकी दोनों चूचियों को अपनी मुट्ठी में दबाता हुआ उसके गुर्दें और गलों को बेहतसाहा चूमने लगता hain.......wahin इस बार आसमा चिहुंक सी पड़ती हैं..................

" sam.................aap भी na..............kabhi नहीं sudhrengey................aapko तो ये भी होश नहीं की घर पे इस वक़्त दो नौकर भी hain..............agar वो आ गए या उन्हें हमेश देख लिया तो............" और आसमा सैम का पीछा चुदती hui...............ussey दूर होने लगती हैं वहीँ सैम जवाब में फिर धीरे से हंस पड़ता हैं..........

" कोई क्या कहेगा darling................miya बीवी के बीच क्या होता हैं ये तो सबको पता hain......fir कहे की शर्म............." और सैम इस बार आसमा के गलों को चूमता हु बोल पड़ता हैं वहीँ आसमा जवाब में धीरे से मुस्कुरा पड़ती हैं.........

" इस वक़्त अगर दिन न होता तो मैं आपको batati..............khair जाने dijiye..............raat को मैं पूरा आपसे सब कुछ वसूल karungi............fir मैं भी देखती हूँ की आपको मुझसे कौन बचता हैं............" और आसमा गोल गोल अपनी नज़रें नाचती हुई फ्रीज से पानी की बोतल निकलती हैं वहीँ सैम धीरे से हंस पड़ता हैं...........

" darling....................wo तो वक़्त hi baatega...............waise...........abbu का फ़ोन आया tha....................wo मुझे बुला रहे hain...........kal hi..................ho सके तो मुझे कल सुबह hi निकलना hoga..............tum हो सके तो मेरा सामान पैक कर do.............main मार्किट से ज़रूरी चीज़ें लेता आवूंगा.............." और सैम इतना कहकर आसमा से दूर हो जाता हैं वहीँ आसाम के चेहरे पर आयी खुशियां पल भर में मुरझा जाती hain..............wo टकटकी लगाए बस सैम के तरफ देखे जा रही थी............

" jaiye............aapko रोका किसने hain..........jab जाना hi था तो पता नहीं क्यों आप हमसे निकाह kiye...............jaiye आप अपना काम देखिये और अपने अब्बू को dekhiye............humein नहीं..............." और आसमा उस पानी की बोतल को लेती हुई बिना सैम की परवाह किये सीधा ऊपर के कमरे की तरफ चल पड़ती हैं वहीँ सैम ये सोचकर खुस था की वो आज रात अपनी बीवी को कैसे भी करके मन hi लेगा.......................

जैसे hi आसमा ऊपर जाती हैं इस वक़्त उसका दिल कहीं नहीं लग रहा tha..............shayad सैम के इस तरह अचानक जाने se....................magar वो अब अपनी मायूसी उन सब के सामने नहीं लाना चाहती thi..............is वजह से वो नार्मल होती हुई सीधा उस कमरे की तरफ चल पड़ती हैं......

" memsaheb...................aap बोलो तो मैं ऊपर के मकड़ी के जाली निकल doon.........aur हरी ऊपर के कबाड़ को साफ़ कर dega..........jiisey दोनों काम जल्दी हो जायेगा............." और शांति धीरे से आसमा के तरफ देखती हुई बोल पड़ती हैं वहीँ अस्मा भी हाँ में अपनी गुर्दें हिलती हुई उन्हें इज़ाज़त दे देती हैं...........

" memsaheb..............pani.............." और हरी के जिस्म पर पसीने की बूँदें साफ़ नज़र आ रही थी ऊपर से ये कमरा पैक होने की वजह से इसमें गर्मी भी ज़्यादा thi.............wahin हरी का कोयले जैसा बंदन पसीने की वजह से और भी ज़्यादा चमक रहा tha.............is तरह पानी मांगे से आसमा उस पानी के बोतल को हरी के तरफ ले जाने लगती हैं वहीँ हरी इस बार अपने हाथ को बढ़ता हुआ आसमा के नाजुक से हाथों को धीरे से छूटा hua..............ussey पानी की बोतल को ले लेता हैं..........

हाथ गंदे होने की वजह से उस पानी के बोतल पर भी उसके गंदे हाथों के निशान लग गए they............wahin आसमा के हाथों पर भी उसके गन्दगी के निशान लग गए they................jahan एक बार फिर आसमा के सांसों में वही तेज़्ज़ बदबू घुलने लगती हैं जो हरी के जिस्म से कुछ देर पहले उठ रही thi..............magar इस बार ये बदबू काफी तेज़्ज़ thi........shayad हरी के जिस्म से निकलने वाले पसीने की वजह से...............

" शुक्रिया memsaheb...................aap बहुत ाची हैं.................." और हरी उस पानी की बोतल को खोलता हैं और उसपर अपना मुँह लगता हुआ एक hi सांस में उसमें रखा पानी पीने लगता hain............aur करीब 1/2 बोतल ख़तम होने पर hi रुकता hain..................jo पानी अभी कुछ देर पहले चमक रही thi..............jo पुरी तरह से साफ़ thi...............aab उस पानी के अंदर हरी के मुँह से निकलने वाली gandagi.........uske मुँह की पीक और laar................jaisi सब चीज़ें उस पानी के अंदर और ऊपर की तरफ साफ़ तैरते हुए अब नज़र आ रहे they.........jo कुछ छोटे छोटे टुकड़ों में थे ...............देखा जाये तो वो पानी अब थोड़ा सा गन्दा भी नज़र आ रहा tha..............bilkul उसी के रंग का..........

वहीँ आसाम बड़े गौर से उस पानी के बोतल को देखे जा रही thi.......wahin हरी उसकी तरफ मुस्कुराये जा रहा था............

" आप पियेंगी मेमसाहेब....................." और हरी उस बोतल को आसमा के तरफ धीरे से बढ़ता हुआ बोल पड़ता हैं वहीँ आसमा बड़े गौर से हरी के चेहरे की तरफ देखने लगती हैं और एहि सोचती हैं की इसकी हिम्मत की दाद देनी padegi................khud तो ये कितना गन्दा हैं और अपना जत्था पानी पीने के बाद ये उस पानी को अब मुझे पीने को ऑफर कर रहा hain...........sach में ये बहुत अजीब सा इंसान हैं........

"जब घर का काम हो जाये तो मुझे बुला lena...........main नीचे hoon...............shanti............." और आसमा शांति की तरफ देखती हुई नीचे जाने लगती हैं वहीँ हरी टकटकी लगाए बस आसमा के तरफ देखे जा रहा tha............wahin शायद हरी की आँखों में फर्याद भी they...............shayad वो उससे ये कहना चाहता हो की आप यहाँ से कही मुट्ठ जाओ.....................

आसमा को जाना था सो वो वहां से चली गयी और हरी और शांति फिर अपने काम में लग gaye......................bhale hi आसमा वहां से चली तो गयी थी मगर कहीं न कहीं उसके जेहन में कुछ चीज़ें उसे फिर से अब परेशां कर रही thi............wahin उसके दिल की धड़कनें तेज़्ज़ हो गयी थी वहीँ उस दिल में साथ साथ बेचैनी भी बढ़ती जा रही thi.........dekhna था की उसकी ये बेचैनी कब और कहाँ जाकर उसे दो पल का सुकून देती hain....................ye तो बस आने वाला वक़्त hi बता सकता था..............

तो बे कॉन्टिनोएड...................................................
 
अपडेट-07

आसमा को जाना था सो वो वहां से चली गयी और हरी और शांति फिर अपने काम में लग gaye......................bhale hi आसमा वहां से चली तो गयी थी मगर कहीं न कहीं उसके जेहन में कुछ चीज़ें उसे फिर से अब परेशां कर रही thi............wahin उसके दिल की धड़कनें तेज़्ज़ हो गयी थी वहीँ उस दिल में साथ साथ बेचैनी भी बढ़ती जा रही thi.........dekhna था की उसकी ये बेचैनी कब और कहाँ जाकर उसे दो पल का सुकून देती hain....................ye तो बस आने वाला वक़्त hi बता सकता था..............

अब आगे......................................................................

वक़्त गुज़रता जा रहा tha.................aasma को अपने कमरे में आये करीब 1 घंटा हो चूका tha...........sam बहार मार्किट गया हुआ tha...............uske दिमाग में बहुत सी चीज़ें इस वक़्त घूम रही thi.............na जाने क्यों उसके जेहन में हरी का बार बार ख्याल आ रहा tha.................jab वो घडी के तरफ देखि तो उस वक़्त 11.30 बज रहे they...............kaam कितना हुआ हैं ये ख्याल आते hi वो फ़ौरन ऊपर के कमरे के तरफ चल padi...................jaise जैसे वो सीढ़ियां चढ़ रही थी वैसे वैसे उसकी दिल की बेचैनियां भी बढ़ती जा रही थी.................

जैसे hi वो सामने के कमरे की तरफ गयी उसे शांति फर्श पर झाड़ू लगाती हुई नज़र aayi.............wo मुस्कुराते हुए उसके तरफ देखने लगी..............

" memsaheb...................aabhi दो कमरे और बचे hain..................fir झाड़ू भी लगाना hain..........hari अंदर अभी भी कप्बोर्ड को सही कर रहा hoga................aap चाहे तो जाकर अंदर देख सकती हैं................." और शांति इतना कहकर फिर से अपने काम में लग गयी वहीँ आसमा कुछ देर तक खामोश कड़ी rahi..............wo बार बार अपने दोनों उँगलियों को दबा रही thi.........unhein मसल रही थी जिससे ये साफ़ पता चल रहा था की वो अंदर hi अंदर कितनी बेचैन हैं............

कुछ सोचकर उसके कदम खुद बा खुद उस कमरे के तरफ चल पड़ते हैं जहाँ इस वक़्त हरी मौजूद tha..............na जाने क्यों एक बार फिर से उसका दिल ज़ोरों से धड़क उठा tha.............uske जिस्म से निकलने वाली वो अजीब सी स्मेल बार बार उसे मदहोश करती जा रही thi.........bechain करती जा रही thi.................jaise hi वो अंदर आयी हरी सरे कार्टून्स को सही से अर्रंगे भी कर चूका tha..........aur साफ़ सफाई bhi............wakayi वो कमरा बेहद hi साफ़ और सूंदर लग रहा tha..........magar इस वक़्त हरी के जिस्म पर कपड़े तो थे magar..............jitne होने चाहिए थे ...............उतने नहीं..............

उसने अपनी शर्ट निकल दी thi.....saath में अपनी बना bhi.........wajah थी garmi...........neechay उसने बस लुंगी लपेट राखी थी वो भी घुटनों के ऊपर tak.......jissey उसका ब्राउन कलर का अंडरवियर भी कहीं कहीं नज़र आ रहा tha...............kaam करने से उसका जिस्म पसीने से बुरी तरह भीगा हुआ tha............jissey उसका कला रंग पसीने की बूँद में और भी ज़्यादा चमक रहा tha..............jab उसकी नज़र आसमा पर पड़ती हैं उसकी आँखें फिर से चमक उठती hain...............na जाने क्यों उसे खुद पर इतना यकीन था की आसमा ज़रूर aayegi........aur वो आयी भी..........

" memsaheb....................dekhiye मैंने ऊपर का हिस्सा सब साफ़ कर diya............agar आप चाहे तो ऊपर चढ़कर खुद hi देख सकती हैं................." और हरी एक बार फिर से अपने काळा पीले दांत दिखता हुआ आसमा के बदन को अपनी नज़रियों से स्कैन करता hua..........usey एक तुक देखने laga.................usey पूरी उम्मीद तो थी की आसमा उसके काम की तारीफ ज़रूर karegi...........magar शायद नहीं............

"ठीक hain...........chacha.................agar कुछ चाहिए हो तो बता देना मैं बहार hi हूँ..................." और आसमा बड़े गौर से हरी के बदन को एक तुक देखने lagi................sharam से उसका गोरा चेहरा लाल पड़ता जा रहा tha...............issey पहले वो अपने शौहर को इस तरह से देखि thi...................hari का गठीला और कैसा हुआ बदन उसके दिल की बेचैनियों को पल पल बढ़ता जा रहा tha..............wahin जवाब में हरी धीरे से मुस्कुरा देता हैं........

" चाहिए तो मुझे बहुत कुछ था memsaheb................magar मालूम हैं की वो साडी चीज़ें मुझे मिलेगी nahin..................aur आप मुझे चाचा नहीं ..............हरी bulaiye..................mana की मैं उम्र में आपसे बड़ा हूँ मगर चाचा थोड़ा अजीब सा लगता hain..................filhaal तो एक बोतल पानी hi दे दीजिये मैं उसी से अपना काम चला लूँगा...................." और हरी अपने पीले काळा दांत फिर से दिखता हुआ आसाम के खूबसूरत से चेहरे की तरफ देखने लगता हैं वहीँ आसमा का दिल ज़ोरों से धड़क उठता hain................wo उसके कहे हुए बाटिओं का मतलब ाचे से समझ रही थी.............

बोतल लेने के लिए जैसे hi आसमा आगे बढ़ी............... हरी के बदन से एक तेज़्ज़ दुर्गन्ध उसके सांसों में फिर से घुलने लगती hain........jissey उसकी सांसें तेज़्ज़ हो जाती hain............wahin मदहोशी भी चने लगती hain...........na जाने उस स्मेल में ऐसा क्या था जिससे वो पूरी तरह से मदहोश होने लगी thi............humesha की तरह वो एक लुम्बी सी साँस लेती हुई पूरी उस स्मेल को एक बार फिर से अपने बदन के अंदर उतरने लगती hain.........jissey उसकी आँखें फिर से बंद हो जाती hain...............wahin हरी बड़े गौर से आसमा के तरफ देखे जा रहा था.............

बोतल लेते वक़्त उसने फिर से जान बूझकर आसमा के हाथों को छु लिया था जिससे उसके गोर बदन पर हरी के पसीने और मेल दोनों लग गए they..........aur उसके बदन की स्मेल भी.......... आसमा हरी के हाथों से उस पानी के बोतल को लेती हुई फ़ौरन पीछे की तरफ मुड़ती हैं और एक बार फिर से लुम्बी लुम्बी सांस लेती हुई.............. अपने धड़कनों को काबू करने लगती hain...........magar न hi उसके धड़कनें अब काबू में they.............aur न hi saansein............us बोतल में थोड़ा बहुत पानी बचा हुआ था जो बहुत गन्दा सा tha........shayad उसके मुँह से निकलने वाले थूक और पीक की वजह से............

" memsaheb....................ek बात bolun.......................aap सच में बहुत खूबसूरत hain...............maine आपके जैसी खूबसूरत औरत इससे पहले कभी नहीं देखि.............." और हरी इतना कहकर धीरे से मुस्कुरा देता हैं वहीँ आसाम पीछे की तरफ कुछ देर तक खामोश सी कड़ी रहती हैं फिर वो बिना कुछ bole...............bina हरी की तरफ देखे फ़ौरन उस बोतल को लेती हुई नीचे किचन की तरफ निकल जाती hain......................aabhi भी उसका कलेजा ज़ोरों से धड़क रहा tha....................zoron से तो धड़क रहा था .................मगर क्यों.........................!!!!!!!! शायद उसे इस सवाल का जवाब नहीं मालूम था......................

जैसे hi आसमा किट्चें में आयी वो किचन के रैक पर अपने दोनों हाथों को रखती hui..................saath में उस बोतल को भी स्लैप पर रखकर लुम्बी लुम्बी सांसें लेने lagi...............ek अजीब सी बेचैनी उसके अंदर बार बार उठ रही thi...........lumbi लुम्बी सांसें लेने के बाद वो थोड़ी नार्मल हुई और सामने रखे उस बोतल को बड़े ध्यान से देखने lagi.............kuch सोचकर वो उस बोतल का धकां धीरे से खोली और फिर से टकटकी लगाए अंदर थोड़े बहुत बचे उस पानी को देखती rahi...............fir वो उस पानी के बोतल को अपने नाक के पास ले जाती हुई उसमें से उठ रही वही स्मेल को फिर से सूंघने लगी.............

एक अजीब सा नशा उसके तन बदन में चढ़ता जा रहा tha.................aankhein किसी नशे की वजह से जैसे बंद सी हो रही thi.............wo एक बार ...................दो baar........teen baar..........lagataar............kai बार उस बोतल को ऐसे hi सूंघती रही और हर बार उसकी खुसबू से उसकी आँखें जैसे बन सी हो जाती.............

" कमीना कहीं ka......................pata नहीं खुद को क्या समझता hain....................mujhse उम्र में कम से कम डबल hoga......aur कहता हैं की चाचा मुट्ठ bolo..............hari bolo............my foot.................aur क्या कह रहा था की प्यास लगी हैं तो इस पानी को पी lijiye................pata नहीं ये ठीक से कभी नाहटा भी हैं या nahin...................jism उसका कितना गन्दा और कला tha..............magar सख्त और गठीला भी तो tha................aakhirt ऐसी क्या बात हैं इस पानी में ज़रा मैं भी तो dekhun...................jo वो अनपढ़ जाहिर गंवार मुझे अपना झूठा पानी पीने को ऑफर कर रहा था..............

शकल देखि हैं कभी आईने mein...........dikhney में कोई काला सांड की तरह लगता hain.............aur अकाल बैल (ॉक्स) jitni...................kahan वो और कहाँ main...............waise भी वो मेरी बराबरी कभी नहीं कर sakta...............huuuuuuunnn.........mujhse कह रहा था की आपके जैसी खूबसूरत औरत मैंने पहले कभी देखि nahin............chalo ाचा हैं नहीं देखि तो कौन सा वो मुझे हासिल hi कर lega............wo मुझे बस देखकर सिर्फ तरसता rahega.........bechain rahega................main कभी उसके हाथ नहीं आने wali................ye तो वही कहावत हुई लंगूर के मुँह में अंगूर..................." और ये अब ख्याल आते hi आसमा के खूबसूरत से चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती hain..............wahin उसके हाथ अभी भी उस बोतल पर hi घूम रहे थे...........

काफी देर तक वो उस बोतल को टकटकी लगाए निहारती रहती हैं फिर वो उसे अपने नाक के पास ले जाती हुई फिर से उसकी खुसबू को दुबारा से सूंघने लगती hain..............na जाने क्यों वो खुसबू उसे पल पल मदहोश करती जा रही thi............kuch देर तक वो उस बोतल को देखती रही फिर उसके हाथ खुद बा खुद ऊपर की तरफ बढ़ते हुए उसके लबों तक आ gaye..............aur फिर वो उस बोतल को अपने लबों पर रखती हुई धीरे धीरे हरी के झूठे पानी को अपने हलक में उतरने लगी...........

पानी का टास्ते तो बड़ा hi अजीब सा tha......usmein से तम्बाकू और बीड़ी की बदबू ऊपर से उसके मुँह की गन्दी सी smell..............ye सब उस पानी का टास्ते बहुत अजीब बना रही thi...........aasma फ़ौरन अपनी आँखें बंद कर लेती हैं और उस पानी के एक एक बूँद को अपने हलक में उतरती चली जाती हैं और तब तक नहीं रूकती जब तक उस बोतल का सारा पानी ख़तम नहीं हो जाता...............

एक लुम्बी सांस लेती हुई आसमा अपनी आँखें बंद किये hue................apne बेकाबू हो रहे साँसों को फिर से संभालने लगती hain..............magar न जाने क्यों उसकी ये बेचैनी अब कम होने के बजाइये और भी बढ़ती hi जा रही thi....................dekhna था की आने वाले वक़्त को क्या मंज़ूर था...................

तो बे कॉन्टिनोएड............................................................
 
अपडेट--08 (ा) (मेघा अपडेट)

एक लुम्बी सांस लेती हुई आसमा अपनी आँखें बंद किये hue................apne बेकाबू हो रहे साँसों को फिर से संभालने लगती hain..............magar न जाने क्यों उसकी ये बेचैनी अब कम होने के बजाइये और भी बढ़ती hi जा रही thi....................dekhna था की आने वाले वक़्त को क्या मंज़ूर था...................

अब आगे.....................................................................

आसमा का जिस्म भले hi वहां था मगर उसका मुन्न कहीं और tha..................aabhi भी वो अपने हाथों में थमी उस बोतल को बड़े hi गौर से देखे जा रही thi............kabhi वो उस बोतल को तो................ कभी अपने हाथों पर लगे हरी के मेल के निशान को बस निहार रही thi................seenay में जो उसका दिल था वो भी ज़ोरों से अब धड़क रहा tha.............uske चेहरे पर एक अजीब सी कशिश अब झलक रही थी..................

आसमा को ऐसे खोया हुआ देखकर थोड़े देर बाद शांति नीचे किचन में आती हैं और हौले से उसके कंधे पर अपने एक हाथ को रखती हुई .................आसमा के चेहरे की तरफ बड़े गौर से देखने लगती hain...............wahin शांति के अचानक स्पर्श से आसमा चिहुँक सी पड़ती हैं और उसके चेहरे का रंग बिलकुल फीका सा पढ़ जाता hain............mano ऐसा लग रहा हो जैसे उसकी चोरी पड़की गयी ho...............wahin आसमा शांति को देखती हुई थोड़ी हड़बड़ा सी जाती हैं................

" memshaeb..................aap ठीक तो हैं na...............kya हुआ हैं aapko.............aur आप इस बोतल को ऐसे कहे देख रही............." और शांति बड़े गौर से आसमा के चेहरे को देखने लगती हैं वहीँ आसमा फ़ौरन अपनी नज़रें नीचे की तरफ झुकाती hui.................kuch देर तक खामोश रहती हैं फिर वो लुम्बी लुम्बी सांस लेती हुई धीरे से आगे कहना शुरू करती हैं.........

" कुछ नहीं shanti...............main बस एहि सोच रही थी की कल तुम्हारे साहेब काम के सिलसिले में बहार जाने वाले hain..........to उनके बगैर मैं कैसे rahungi..............itne बड़े घर में मेरा अकेले मुन्न कैसे लगेगा.............." और आसमा बात को संभालती हुई धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ जवाब में शांति बड़े गौर से आसमा के तरफ देखने लगती हैं...........

" इसमें इतना सोचना क्या हैं memsaheb................hum लोग हैं na................jab आपका दिल करे हमको बुला lijiyega.................hum आ जाएंगे........." और शांति हौले से मुस्कराती हुई बोल पड़ती हैं वहीँ आसमा भी जवाब में मुस्कुरा देती हैं...................

" एक बात पूछों shanti..................tum हरी के बारे में क्या जानती ho...............kaisa इंसान हैं ye..............iska ghar.............biwi baachey............wagerah................" और आसमा का दिल एक बार फिर ज़ोरों से धड़क उठता हैं वहीँ शांति पूरी तरह से नार्मल थी..............

" ज़्यादा कुछ तो नहीं जानती मैं उसके बारे में memsaheb...........................magar इतना ज़रूर जानती हूँ की औरत उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी hain.................aur मैंने गांव में लोगों के मुँह से ये कहते भी सुना हैं की ये गाँव की बहुत साडी औरतों को अपने नीचे सुला भी चूका hain...........aur तो जो औरत इसके नीचे aayi..............fir वो इसके नीचे कभी नहीं आयी............" और शांति गहरी सांस छोड़ते हुए धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ आसमा का कलेजा ज़ोरों से धड़क उठता hain.........shanti की ऐसी बाटिओं को सुनकर उसके जिस्म में एक अजीब सी सिरहन दौड़ गयी थी..............

" क्या मतलब hain..............neechay aayi..........fir कभी नीचे नहीं आयी........." और आसमा शांति के चेहरे की तरफ देखती हुई धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ शांति के चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती हैं...........

" आप भी कितनी भोली हैं memsaheb..............itni सी बात नहीं samajhti................arey मैंने ये सुना हैं की इसका हथियार बहुत बड़ा hain.............aur मोटा bhi................jab इसके हथियार के नीचे कोई औरत आती हैं न तो उस औरत की क्या हालत होती होगी इसका आप अंदाज़ा लगा lijiye..............teen चार औरतें तो इसके नीचे आते hi बेहोश भी हो चुकी हैं............" और शांति अपनी आँखें गोल गोल नाचती हुई आसमा के तरफ देखकर धीरे से हंस पड़ती हैं वहीँ आसमा का गाला अब सूखने लगा tha...............usey शांति की बाटिओं पर ज़रा भी यकीन नहीं हो रहा था............

" ऐसा थोड़ी न होता hain...........tu भी कुछ भी बोलती हैं................." और आसमा धीरे से अपनी बात कहती हैं वहीँ शांति अपनी बात मनवाने के लिए फिर दुबारा से बोल पड़ती हैं............

" ाचा आपको यकीन नहीं हैं मेरी इन बाटिओं par...............to ठीक hain...............kisi दिन आप इसे लोअर पहनकर dekhiye.............lungi में क्या ख़ाक नज़र aayega...................jo इसके टांगों के बीच नाग हैं वो कितना बड़ा और मोटा हैं आपको भी अंदाज़ा मिल hi jayega.............maine देखा हैं इसे लोअर mein.............isi लिए मैं ये बात आपसे कह rahi............aap जब भी इसके लिए कपडा ख़रीदियेगा इसके लिए दो जोड़ी लोअर ज़रूर लीजियेगा................" और शांति अपनी बात मनवाते हुए कहती हैं वहीँ आसमा का गाला अब सूखने लगा tha.............wo बड़े मुश्किलों से अपने थूक को अंदर जातक रही थी..........

उसके तन बदन में एक अजीब सा रोमांच उठ रहा tha.................aasma के टांगों के बीच में एक अजीब सा सेंसेशन बार बार उठ रहा tha....................jissey उसके बदन में गर्मी बढ़ती जा रही thi................saansein एक बार फिर से पूरी तरह से बेकाबू होते जा रहे they....................jism के रोएं एक्ससिटेमेंट की वजह से खड़े हो गए they..................aankhein सुर्ख लाल हो गयी थी............ जिससे उसका चेहरा भी लाल पड़ता जा रहा था........................

" तुम तो ऐसे कह रही हो जैसे तुमने हरी का हथियार अपने अंदर लिया hain.................lagta हैं तुम्हें इन सब का बहुत तज़ुर्बा हैं................" और आसमा शांति को चढ़ते हुए धीरे से कहती हैं वहीँ ये सब बातें उसके दिल को गुदगुदाने लगी थी...............

" न बाबा na.........................mujhe अपने सामान से बहुत प्यार hain..........agar मैं जिस दिन हरी के नीचे आ गयी na.................us दिन वो मुझे चलने के लायक भी नहीं chodhega.............jaisa बाकि औरतों का उसने हाल किया tha...................kai औरतों की तो उसने चाल hi ख़राब कर di..............mujhe नहीं करवानी अपनी चाल ख़राब..........." और शांति आसमा के चेहरे की तरफ देखती हुई धीरे से हंस पड़ती हैं वहीँ आसमा के चेहरे का रंग लाल पढ़ चूका tha..................ek अजीब सा khumaar.............nasha .............उसपर छठा जा रहा tha..............wo जैसे पोर्न वीडियोस में देखती आयी थी........ बड़े बड़े lund.........kuch इसी तरह के ख्याल अब उसके मुन्न में भी हरी के प्रति उमड़ रहे they............ye सब सोचकर वो अंदर hi अंदर बेचैन हो उठती हैं...........
 
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